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- Dec 5, 2013
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दादी से बात क्र क बलदेव सीधा अपने माँ क कक्षा की ओरे जाता है और जैसे हे अंदर जाता है सामने से कमला आ रही होती hai,baldev को देख कमला हाथ जोड़ क्र साइड में कड़ी हो जाती है और कहती है "yuvraj"paas में कड़ी माँ को एक सफ़ेद आभूषण में देख वही ठहर जाता है
Baldev:waah कितनी सुन्दर हो तम (मन में)
ये सब कमला देख क्र अपने निचले होठ दबा क्र मुस्कुराती hai,tabhi देवरानी भी मुद क्र बलदेव को देखती है
Devrani:man me)kitna सुन्दर है इसे देखते हे मेरा डिल शांत हो गया.
बलदेव अपने हाथो से इशारा करता है कमला को जाने का और कमला शर्म और ख़ुशी क मरे जल्दी से कक्षा से बहार निकल जाती है पर उसका डिल नहीं मंटा और दरवाज़े पर कड़ी हुई परदे क पीछे छुप जाती है और देखने लगती है
Baldev:dheer धीरे माँ क आखो में देखते हुए माँ क करीब जाता है और उसको अपने आलिंगन में बंद लेता है पीछे से
हे
Baldev:Maa..
Devrani:beta..kitni देर लगा दी तूने
Baldev:kahi नहीं
Devrani:jhuta
Baldev:tmhare डिल में तमने खोजै नहीं maa,nahi तो में मिल जाता
देवरानी ये बात सुन क्र मुड़ती है और बलदेव को ज़ोर से जकड लेती है
Devrani:betaa
देवरानी क बड़े दूध बलदेव क कठोर छाती से चिपक जाती है और दोनों को बेहिसाब गरमी का अहसास होता है
वही दूर कड़ी कमला "महरानी और युवराज तो प्रेम में पागल हॉवे जा रहे है ऐसे हे लापरवाही करेंगे तो इनका प्रेम शुरू होने से पहले ख़त्म क्र दया जायेगा महाराज duwara,kuch करना पड़ेगा" और वो अपने घर जाने क लये महल से बहार आ जाती है.
देवरानी और बलदेव एक दूसरे को बहो में लये बाते करते रहते है और बलदेव अपनी पूरी दिन चर्या बता ता है क्यू उसे इतनी देरी हुई
devrani:tjhe मेरी तो चिंता हे नहीं है
सब से आखिर में मेरे पास आया
Baldev:chinta है इसलिए तो तम मेरी बाहो में हो और यही मेरा असली स्थान है चाहे में पूरा संसार घूम लू आखिर में मझे तो यही आकर सुकून मिलना है
बलदेव की बात सुन क्र वो अपना सर उसके कंधे पर रख क्र शरमाते हर मुस्कुराती है
devrani:ab खाना कहते है
Baldev:han खाना कहते है
devrani:to चलो
baldev:han
devrani:beta
baldev:ji माँ
Devrani:tu मुझे छोड़ेगा तभी हम खा सकते है न
ये सुन क्र बलदेव झट से अपनी माँ को बंधन से मुक्त क्र क मुस्कुरा देता है और देवरानी बलदेव की बेवकूफी पर हसने लगती hai,devrani को हस्ता देख बलदेव भी हसने लगता है ,फिर दोनों साथ खाना खा क्र अपने अपने कक्षा में सोने चले जाते है.
नै सुबह बलदेव कोयल की कोको से उठ ता है और अपने दादी की कही हुई बात और अपना हाल को मिलते हुए समझने की कोशिश करता है क क्या यही प्यार है और अंत में मान लेता है क वो अपने माँ को एक स्त्री क रूप में देखने लगा hai,fir वो इस प्रेम से आने वाले तूफ़ान का सोचता है क्या वो उन सब से मुक़ाबला क्र payega?ant में उसे दादी की बात यद् आती है और वो निर्णय करता है क वो अपने डिल की सुनेगा और अपने प्रेम को पा कर हे रहेगा
baldev:man में"" दुन्या क सरे नियम प्रेम से बढ़ क्र नहीं हमारी ख़ुशी से बढ़ कर नहीं"
और बलदेव प्रतिज्ञा लेता है त्रीव हो क्र कहता है" में यानि क महाराजा बलदेव सिंह अपना प्रेम हासिल करेगा और प्रेमिका यानि क रानी देवरानी को महारानी देवरानी बनाएगा और मेरी हर बात पत्थर की lakeer"or बलदेव क आखो क नस लाल पद जाते है.
आज बलदेव देरी से उठा था और वैध जी सवेरे हे अपने कलाकारी दिखा क्र महरानी जीविका को एक वैशाखी ला क्र दे देता है जिसे ले क्र वो ख़ुशी नहीं समाती और कहती hai"me सबसे पहले इस वैशाखी से चल क्र अपने पोते से मिलने जाउंगी जिसके वजह से आज में चल सकती हु कई वर्षो bad"or जैसे हे बलदेव क कक्षा क पास पहुँचती है तो उसके कान में बलदेव की प्रतिज्ञा सुनाई देती hai.pote क मुख से उसके बहु को अपनी महरानी बनाने की बात सुन क्र उसे ऐसा लगता है जैसे आसमान पहात गया हो और वो चुपके से अपने कक्षा में आ जाती है.
उधर देवरानी अपने बिस्तर पर उठ टी उसके बदन की खुमारी में पलट क्र तकिये को अपने सीने से लगाए फिर सोचने लगती है
Devrani:man में) अगर कमला की बात मणि जाये तो प्रेम की शुरुवात मेरे बेटे से मेरी हो गयी है और उसे में छह क्र भी नहीं रोक प् रही hu.pr ऐसा कुछ राज दरबार में बात पहुंच गयी तो यहाँ क नियम क हिसाब से मझे और मेरे पुत्र को मौत क घाट उतर दया jayega,pr में क्या करू में उसे भूल भी नहीं सकती पहली बार तो मझे प्रेम हुआ hai,to क्या दोनों क जान को खतरे में डालना सही hai?agar सिर्फ मेरी जान जाती इस प्रेम से तो में अपने युवराज से जी भर क प्रेम क्र हस्ते हस्ते इस दुन्या से अपने जान त्याग देती पर इसमें तो बलदेव की जान को भी खतरा hai,me ऐसा नहीं होने दे skti,agar वासना की भूक ने इस प्रेम को जन्म दया है तो में किसी न किसी से सम्बन्ध बना lungi,ho सकता है मेरे हृदय से ये प्रेम निकल jaye,mjhe कमला से बात करनी चाइये
आज राज परिवार कुश्ती का खेल देखने जा रहा था सब तैयार हो क्र देवरानी का इंतज़ार क्र रहे थे तभी राजपाल कहते है
राजा rajpal:Kamla जाओ देवरानी को बुलाओ
Kamla:ji महाराज
कमला जैसे हे देवरानी क कक्षा में जाती है उसे सामने से तैयार हो क्र एक हरे रंग की सदी में आती दिखती है वो सदी ऐसा था क उसके छाती तो छुपे थे पर उसके दोनों गांड क पैट साफ हिल रहे थे
Kamla:ary आ गयी महारानी
Devrani:kamla हाँ और एक बात करनी थी तमसे
Kamla:boliye महरानी
Devrani:mjhe लगता है तम सही कहती हो मझे कोई ऐसा ढूंढ लेना चाहिए जो मेरी इच्छा पूरी करे और टम्पे में सबसे ज़्यादा भरोषा करती हो तम ढूंढ सको तो ढूंढ लो ??और मुस्कुराती है
Kamla:Man me)Kamini प्यार का खेल किसी और से और इच्छा किसी और से पूरी करवाने का सोच रही है पर में युवराज क आखो में सच्चा प्यार देखा है)
Devrani:kuch कहा तमने
Kamla:nahi तो ..में पक्का एक कॅशे ढूंढ़ती हो जो आपके बूटी बूटी को खा जाये और हसने लगती
Devrani:dekh लो पर मझे पसंद आना चाहिए
Kamla:aapko पसंद आएगा
कमला बोल तो देती है पर मन हे मन कोसती है अपने आप को क ये करमजली है जो युवराज का प्यार छोर किसी और को देख रही है पर में युवराज क साथ ऐसा धोका होने नहीं दूंगी
सब महल से निकल क्र बरी बरी से रथ में बैठने लगते hai,jab देवरानी की बैठने की बरी आती है तो बलदेव आगे बढ़ क्र दोनों हाथो से पाकर क्र देवरानी को ऊपर खींचता है और वो भी रथ में बैठ जाती hai.ye सब कमला और खासकर क बलदेव की दादी देख रही थी और उसके चेहरे का रंग भी उदा था.
रस्ते भर बलदेव और देवरानी एक दूसरे से चिपकने की कोशिश करते रहते है और आखिर कर एक बड़े मैदान क पास रथ रोका जाता है जहा पर चारो ओरे से लोग इकठे होते है और तरफ कुर्सियां राखी होती है जा राज परिवार जा क्र बैठ ता है इस बार भी देवरानी क बगल में बलदेव जा क्र बैठ ता और उसका बाये हथेली पर अपना दया हाथ रख क्र सहलाते हुए कुश्ती का मज़ा लेने लगता hai.insb हारकर पैनी नज़र बलदेव की दादी की होती hai,kushti ख़त्म होती है और विजेता को उपहार देकर सब राज महल वापस लौट आते है.
दादी से बात क्र क बलदेव सीधा अपने माँ क कक्षा की ओरे जाता है और जैसे हे अंदर जाता है सामने से कमला आ रही होती hai,baldev को देख कमला हाथ जोड़ क्र साइड में कड़ी हो जाती है और कहती है "yuvraj"paas में कड़ी माँ को एक सफ़ेद आभूषण में देख वही ठहर जाता है
Baldev:waah कितनी सुन्दर हो तम (मन में)
ये सब कमला देख क्र अपने निचले होठ दबा क्र मुस्कुराती hai,tabhi देवरानी भी मुद क्र बलदेव को देखती है
Devrani:man me)kitna सुन्दर है इसे देखते हे मेरा डिल शांत हो गया.
बलदेव अपने हाथो से इशारा करता है कमला को जाने का और कमला शर्म और ख़ुशी क मरे जल्दी से कक्षा से बहार निकल जाती है पर उसका डिल नहीं मंटा और दरवाज़े पर कड़ी हुई परदे क पीछे छुप जाती है और देखने लगती है
Baldev:dheer धीरे माँ क आखो में देखते हुए माँ क करीब जाता है और उसको अपने आलिंगन में बंद लेता है पीछे से
हे
Baldev:Maa..
Devrani:beta..kitni देर लगा दी तूने
Baldev:kahi नहीं
Devrani:jhuta
Baldev:tmhare डिल में तमने खोजै नहीं maa,nahi तो में मिल जाता
देवरानी ये बात सुन क्र मुड़ती है और बलदेव को ज़ोर से जकड लेती है
Devrani:betaa
देवरानी क बड़े दूध बलदेव क कठोर छाती से चिपक जाती है और दोनों को बेहिसाब गरमी का अहसास होता है
वही दूर कड़ी कमला "महरानी और युवराज तो प्रेम में पागल हॉवे जा रहे है ऐसे हे लापरवाही करेंगे तो इनका प्रेम शुरू होने से पहले ख़त्म क्र दया जायेगा महाराज duwara,kuch करना पड़ेगा" और वो अपने घर जाने क लये महल से बहार आ जाती है.
देवरानी और बलदेव एक दूसरे को बहो में लये बाते करते रहते है और बलदेव अपनी पूरी दिन चर्या बता ता है क्यू उसे इतनी देरी हुई
devrani:tjhe मेरी तो चिंता हे नहीं है
सब से आखिर में मेरे पास आया
Baldev:chinta है इसलिए तो तम मेरी बाहो में हो और यही मेरा असली स्थान है चाहे में पूरा संसार घूम लू आखिर में मझे तो यही आकर सुकून मिलना है
बलदेव की बात सुन क्र वो अपना सर उसके कंधे पर रख क्र शरमाते हर मुस्कुराती है
devrani:ab खाना कहते है
Baldev:han खाना कहते है
devrani:to चलो
baldev:han
devrani:beta
baldev:ji माँ
Devrani:tu मुझे छोड़ेगा तभी हम खा सकते है न
ये सुन क्र बलदेव झट से अपनी माँ को बंधन से मुक्त क्र क मुस्कुरा देता है और देवरानी बलदेव की बेवकूफी पर हसने लगती hai,devrani को हस्ता देख बलदेव भी हसने लगता है ,फिर दोनों साथ खाना खा क्र अपने अपने कक्षा में सोने चले जाते है.
नै सुबह बलदेव कोयल की कोको से उठ ता है और अपने दादी की कही हुई बात और अपना हाल को मिलते हुए समझने की कोशिश करता है क क्या यही प्यार है और अंत में मान लेता है क वो अपने माँ को एक स्त्री क रूप में देखने लगा hai,fir वो इस प्रेम से आने वाले तूफ़ान का सोचता है क्या वो उन सब से मुक़ाबला क्र payega?ant में उसे दादी की बात यद् आती है और वो निर्णय करता है क वो अपने डिल की सुनेगा और अपने प्रेम को पा कर हे रहेगा
baldev:man में"" दुन्या क सरे नियम प्रेम से बढ़ क्र नहीं हमारी ख़ुशी से बढ़ कर नहीं"
और बलदेव प्रतिज्ञा लेता है त्रीव हो क्र कहता है" में यानि क महाराजा बलदेव सिंह अपना प्रेम हासिल करेगा और प्रेमिका यानि क रानी देवरानी को महारानी देवरानी बनाएगा और मेरी हर बात पत्थर की lakeer"or बलदेव क आखो क नस लाल पद जाते है.
आज बलदेव देरी से उठा था और वैध जी सवेरे हे अपने कलाकारी दिखा क्र महरानी जीविका को एक वैशाखी ला क्र दे देता है जिसे ले क्र वो ख़ुशी नहीं समाती और कहती hai"me सबसे पहले इस वैशाखी से चल क्र अपने पोते से मिलने जाउंगी जिसके वजह से आज में चल सकती हु कई वर्षो bad"or जैसे हे बलदेव क कक्षा क पास पहुँचती है तो उसके कान में बलदेव की प्रतिज्ञा सुनाई देती hai.pote क मुख से उसके बहु को अपनी महरानी बनाने की बात सुन क्र उसे ऐसा लगता है जैसे आसमान पहात गया हो और वो चुपके से अपने कक्षा में आ जाती है.
उधर देवरानी अपने बिस्तर पर उठ टी उसके बदन की खुमारी में पलट क्र तकिये को अपने सीने से लगाए फिर सोचने लगती है
Devrani:man में) अगर कमला की बात मणि जाये तो प्रेम की शुरुवात मेरे बेटे से मेरी हो गयी है और उसे में छह क्र भी नहीं रोक प् रही hu.pr ऐसा कुछ राज दरबार में बात पहुंच गयी तो यहाँ क नियम क हिसाब से मझे और मेरे पुत्र को मौत क घाट उतर दया jayega,pr में क्या करू में उसे भूल भी नहीं सकती पहली बार तो मझे प्रेम हुआ hai,to क्या दोनों क जान को खतरे में डालना सही hai?agar सिर्फ मेरी जान जाती इस प्रेम से तो में अपने युवराज से जी भर क प्रेम क्र हस्ते हस्ते इस दुन्या से अपने जान त्याग देती पर इसमें तो बलदेव की जान को भी खतरा hai,me ऐसा नहीं होने दे skti,agar वासना की भूक ने इस प्रेम को जन्म दया है तो में किसी न किसी से सम्बन्ध बना lungi,ho सकता है मेरे हृदय से ये प्रेम निकल jaye,mjhe कमला से बात करनी चाइये
आज राज परिवार कुश्ती का खेल देखने जा रहा था सब तैयार हो क्र देवरानी का इंतज़ार क्र रहे थे तभी राजपाल कहते है
राजा rajpal:Kamla जाओ देवरानी को बुलाओ
Kamla:ji महाराज
कमला जैसे हे देवरानी क कक्षा में जाती है उसे सामने से तैयार हो क्र एक हरे रंग की सदी में आती दिखती है वो सदी ऐसा था क उसके छाती तो छुपे थे पर उसके दोनों गांड क पैट साफ हिल रहे थे
Kamla:ary आ गयी महारानी
Devrani:kamla हाँ और एक बात करनी थी तमसे
Kamla:boliye महरानी
Devrani:mjhe लगता है तम सही कहती हो मझे कोई ऐसा ढूंढ लेना चाहिए जो मेरी इच्छा पूरी करे और टम्पे में सबसे ज़्यादा भरोषा करती हो तम ढूंढ सको तो ढूंढ लो ??और मुस्कुराती है
Kamla:Man me)Kamini प्यार का खेल किसी और से और इच्छा किसी और से पूरी करवाने का सोच रही है पर में युवराज क आखो में सच्चा प्यार देखा है)
Devrani:kuch कहा तमने
Kamla:nahi तो ..में पक्का एक कॅशे ढूंढ़ती हो जो आपके बूटी बूटी को खा जाये और हसने लगती
Devrani:dekh लो पर मझे पसंद आना चाहिए
Kamla:aapko पसंद आएगा
कमला बोल तो देती है पर मन हे मन कोसती है अपने आप को क ये करमजली है जो युवराज का प्यार छोर किसी और को देख रही है पर में युवराज क साथ ऐसा धोका होने नहीं दूंगी
सब महल से निकल क्र बरी बरी से रथ में बैठने लगते hai,jab देवरानी की बैठने की बरी आती है तो बलदेव आगे बढ़ क्र दोनों हाथो से पाकर क्र देवरानी को ऊपर खींचता है और वो भी रथ में बैठ जाती hai.ye सब कमला और खासकर क बलदेव की दादी देख रही थी और उसके चेहरे का रंग भी उदा था.
रस्ते भर बलदेव और देवरानी एक दूसरे से चिपकने की कोशिश करते रहते है और आखिर कर एक बड़े मैदान क पास रथ रोका जाता है जहा पर चारो ओरे से लोग इकठे होते है और तरफ कुर्सियां राखी होती है जा राज परिवार जा क्र बैठ ता है इस बार भी देवरानी क बगल में बलदेव जा क्र बैठ ता और उसका बाये हथेली पर अपना दया हाथ रख क्र सहलाते हुए कुश्ती का मज़ा लेने लगता hai.insb हारकर पैनी नज़र बलदेव की दादी की होती hai,kushti ख़त्म होती है और विजेता को उपहार देकर सब राज महल वापस लौट आते है.