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पारस
भूरिया उठ क जाने लगती है और पास में लगी एक परदे क पीछे औरतो क खेमे में जिसमे काम से काम 100 राणीअ थी हराम की जिसे मेरे वाहिद ने अपने शारीरिक सुख पाने क लये रखा था .मेरे वाहिद की तीनो बीवीए और दोनों बेश्या राजगदद्दी पर बैठी थी भूरिया को देखते हे सब सलाम करने लगे और गले मिल कर हाल पूछने लगी
Naaz:Mallika जहाँ आये बैठे अब तो अपना पर्दा हटा दीजिये यहाँ तो सिर्फ औरते है
भूरिया धीरे से अपने चेहरे से निक़ाब हटती है
Razia:Wah मल्लिका इ जहाँ अआप तो चाँद क टुकड़े लग रहे हो
Muskan:theek कहा तुमने रज़िया
Naaz:tum दोनों ने तो भूरिया बाजी की जवानी देखि हे नहीं बहुत देर इस महल में आई मुझसे पूछो
razia:batao आप क्या आप भी न
Muskan:Han हमे भी सुन न है
Naaz:Inke चेहरे से निक़ाब हैट ते हे मर्द अपना आप खो बैठ ते थे
भूरिया अपने सौतनों को देखती है और शर्माती है और तभी उसकी नज़र नाज़ की बेटी समां और रज़िया की बेटी महनूर पर जाती है
Hooriya:Naaz बेग़ैरत हमारे पास हे बेतिया बैठी है समां और महनूर सुन न ले
Naaz:meri बेटी समां अब बची नहीं रही आखिर वो भी तो सुने अपने बड़ी अम्मी क क़िस्से और रही बात रज़िया की बेटी की..
Razia:wo अभी बची है भूरिया आप
Naaz:Gustakhi मुआफ हो भूरिया आप अगर आपको बुरा लगा हो तो..
नाज़ अपने सौतन भूरिया का गुस्से से लाल चेहरे को देख दर क बोलती है
Hooriya:Naaz नहीं मेरी बहिन तुम्हारी बात का बुरा क्यू मानूंगी तुम तीनो तो मेरी छूती बहाने हो वो तो बस बचो क सामने
Naaz:acha तो ये बात है
Razia:to बताओ न क्या होता था
Naaz:jab शुरू शुरू में शमशेर पैदा हे हुआ था तब भूरिया आप अछि सेहतमंद हो गयी थी और जब भी बिना निक़ाब क सूट में कैसे हुए काफटाण में जाती तो
Razia:to क्या बाजी
Naaz:to क़तल ये आम हो जाता ..बहुत से पहरेदार आँख उठा कर आप को ताड़ते और बेवजह मारे जाते
muskan:kya ! क्या उनको फांसी हो जाती
naaz:nahi सुल्तान मेरे वाहिद अपने तलवार भूरिया आप क कहते हे उसका सर काट देते
Razia
ar सुल्तान तो हमेशा नहीं होते थे न पहले जुंग की वजह से
Naaz:tab हमारे ससुर सुल्तान दास्ताँ अपने बेटी भूरिया पर गन्दी निगाह डालने वाले का सर कलम करते बिना फैसला सुनाये
Hooriya:naaz तुमने सही कहा अब्बा मुझे बहु नहीं अपने बेटी की तरह प्यार दया
Muskan:hooriya आप ने बहुत क़तल इ आम करवा चुके
Naaz:Han यही वजह है क अब अपनी खूबसूरती मर्दो से क्या औरतो से भी छुपाती है
ये सुन कर सब है पड़ते है
Hooriya:ek ज़माने में मई पुरे दुन्या में मशहूर थी में इतनी खूबसूरत थी और पुरे दुन्या क राजा मुझे शादी करना चाहते थे
Naaz:aaapa अआप आज भी उतनी हे खूबसूरत हो
Hooriya:Nahi अब 45 साल उम्र हुई अब कहा पहले वाली बात अब तो बुढ़ापे में कदम रख दी हु
Muskan:aapko तो देख क नहीं लगता दिखने में तो आप हम सब से सेहतमंद ho,budhi तो कही से नहीं हो आप
ये सुन कर सब है पड़ते है
सुल्तान दास्ताँ अपने छोटे बेटे गुल शाह और पोते शान क साथ बैठे बातचीत कर रहे थे थोड़ी देर बाद ऐलान करते है
सुल्तान dastan:Bhaio और बहनो में चाहता हु पूरा पारस हमारे बेटे सुल्तान मेरे वाहिद क लये दवा करे क वो जल्द गहतराष्ट्रा और कुबेरी फ़तेह कर क आये और मुझे पूरी उम्मीद है हर बार की तरह हम अपने बहादुर लश्कर और हमारी बेटी हूर इ जहाँ की दुवाओ से हम जीत जायेंगे
ये कह कर सुल्तान दास्ताँ उठ कर जाने लगते है और उनके पीछे गुल शाह और शान भी चलने लगते है
इधर भूरिया अपने सौतनों क साथ बैठी सब सुन रही थी
Naaz:ab जाए इबादत में लग जाये और दवा करते रहे खाना हम पहुँचवा दिया करेंगे वक़्त पर आपके हुजरे में
Hooriya:theek है मई चलती हु
(मन me:Na जाने किस हाल में होंगे मेरे शौहर मेरे जान सुल्तान और मेरे जिगर का टुकड़ा बीटा शमशेर)
कुबेरी
कुबेरी पर आधी रात में हे अपना झंडा देवराज और सुल्तान मेरे वाहिद मिल कर गाड़ देते है और राजा रतन सिंह मारा जाता है और शाहज़ेब अपनी सेना ले क भाग जाता है पर घायल मेरे वाहिद की हालत ठीक नहीं थी
Devraj:sainiko लाशो को ले जा क कर्यक्रम कार्डो
Devraj:aap दोनों अंदर जाइये बहार का दृश्य इस से भी ज़्यादा बुरा है
रुक्मणि सुखमनी दोनों हाथ कटे हुए मारा हुआ रतन को देख हिल जाती है और दोनों अंदर जा कर रट हुए अपना दरवाज़ा बंद कर लेती है
कुछ देर में सैनिक जड़ी बूटी लेट है और सुल्तान का उपचार शुरू होता है
Devraj:Or कुछ चाहिए हकीम जी
Hakeem,devraj जी अब सुल्तान खतरे से बहार है पर इन्हे कुछ दिनों तक निगरानी में रखा जायेगा
Devraj:sainiko कुबेरी की सीमा पर तैनाती बढ़ाओ और महल को चारो ओरे से घेर लो हम एक दो दिन रुक कर जायेगे जैसे हे सुल्तान ठीक होते है
अब आगे ( रीड अपडेट 88 )
देवराज सुल्तान मेरे वाहिद क साथ बैठा था और हकीम उनका उपचार कर रहे थे
Devraj:Hum आज हे गहतराष्ट्रा चले जाते और हमारे सैनिको क साथ मिल कर इस विजय का खूब जश्न मानते
Hakeem:Maharaj आप तो जानते हे है मेरे वाहिद जी अभी अपनी घाव से उतनी तेज़ी से लड़ नहीं प् रहे इसलिए सफर में परेशानी हो सकती है
यु हे बात करते करते सुबह हो जाती है दिन भर देवराज अपने बहिन और अपने भांजे की प्रेम की और उन्दोनो को कैसे अपनाएँ यही सोच रहा था इस बात से अनजान क उधर दिन में उसकी बहिन देवरानी उसके भांजे से ब्याह की तैयारी कर रही है
Devraj:kya करू अभी गहतराष्ट्रा जा भी नहीं सकता कही देवरानी और बलदेव कोई गलत क़दम न उठा ले कही कोई पाप न कर बैठे
गहतराष्ट्रा में 4 बजे शाम विवाह होता है और सुहागरात का आरम्भ हो जाता है और देवराज अब भी हकीम और सैनिको क साथ सुल्तान मेरे वाहिद को ठीक करने में लगे थे
रात 8 बजे उधर गहतराष्ट्रा में घमाशान चुदाई हो रही थी इधर सुल्तान मेरे वाहिद का घाव का दर्द काम होता है
सुल्तान मेरे वाहिद अपना हाथ उठा ते है
हकीम दौड़ता हुआ आता है
"पानी "
हकीम पानी देता है और सामने बैठा देवराज भी हकीम को भागता देख अंदर आता है
Devraj:sultan आप ठीक तो है न
सुल्तान पानी पी कर
Sultan,devraj जी हम ठीक है
खासते हुए
देवराज सुल्तान क हाथ पकड़ते हुए
Sultan.devraj रहने दो में ठीक हु
Hakeem:Jahan पनाह गुस्ताखी मुआफ हो पर जब से जुंग ख़त्म हुई है तब से महाराज देवराज सोये नहीं आपकी सेवा में लगे है
Sultan:mujhe पता है हकीम साहब
Hakeem:aapko कैसे पता आप तो पुरे होश में थे नहीं
Sultan:me पुरे दुन्या पे राज करता हु हकीम मेरी बंद आखे भी बता देती है कौन किधर है
Hakeem:gustakhi मुआफ जहाँ पनाह
sultan:ab तुम बहार जाओ मुझे देवराज जी से कुछ बात करनी है
हकीम कक्षा से बहार जाता है
devraj:Boliye सुल्तान
Sultan,devraj जी आप मेरे सबसे करीबी है और आपने हमारा ज़िन्दगी भर साथ डाई
Devraj:aapne भी हमारे रक्षा मंगोलो से किया
sultan:devraj जी मुझे लग रहा है क मेरा आखिरी वक़्त आगया है
devraj:aap ये क्या कह रहे ह सुल्तान
Sultan:sahi मौत सबको आणि है में इस से बच नहीं सकता मुझे कुछ कहना है
Devraj:kahiye सुल्तान
Sultan:aap अगर मेरा तोहफा कबूल करे तो में कुछ देना चाहता हु और आप से भी कुछ वायदे करवाना चाहता हु
Devraj:ji कहिये सुल्तान
देवराज क आखो में ासु था
Sultan,devraj जी में आपको तोहफे में ये कुबेरी का महल देता हु ..अआप यहाँ देवगढ़ से ज़्यादा सुखी रहेंगे
Devraj:kya आप इस लये मुझे कुबेरी में बसना चाहते है क हमारे जाती समुदाय क लोग पारस में देवगढ़ में काम है
Sultan:Ye बात भी सही hai..par आप इस बड़े महल में रहेंगे और आप अपनी बहिन क करीब रह सकेंगे गहतराष्ट्रा क करीब
Devraj:Hmm आपका तोहफा क़ुबूल है
Sultan:abhi पूरा नहीं हुआ हम ये भी चाहते है क अब आप विवाह कर ले और राजा रतन की दोनों बीवियों को अपना ले
Devraj:Sultan आपके विवाह करने की बात तो में स्वीकार सकता हु पर राजा रतन को मैंने मौत क घाट उतर दया क्या रुक्मणि और सुखमनी मुझसे विवाह कर लेगी?
Sultan:raja रतन क बिना उनकी ज़िन्दगी भी आसान नहीं होगी आप सिर्फ हाँ कह दो वो दोनों मान जायेंगे..
Devraj
ar दो विवाह करना उचित नहीं..
Sultan:aaj कल सब उचित है अनुचित कुछ नहीं
Devraj:wah आप तो हिंदी अछि बोलते है
Sultan:bass आपके साथ रह kar..Devraj जी एक गुज़ारिश भी है
Devraj:kahiye सुल्तान
Sultan:bas आप बुरा न मने तो
देवराज मुस्कुरा कर" कहिये सुल्तान आपका हुक्म सर आखो पैर"
sultan,devraj जी में चाहता हु की आपकी बहिन देवरानी को आप अपना ले और उसकी ज़िद्द क मुताबिक़ उसकी शादी अपने भांजे से करवा दे
देवराज ये सुन्नते हे चुप हो जाता है
Sultan:devraj जी आप चुप है आप जानते है वो दोनों एक दूसरे से मुहब्बत करते है मेरे हिसाब से अभी तक शमशेर मेरे बेटे ने क़िले को फ़तेह कर लय होगा
Devraj:aap समझते नहीं महाराज
Sultan:devraj जी उनको कौन रोक सकता जब वो दोनों माँ बेटे इस प्यार को सही मानते है हो सकता है अभी भी एक दूसरे क बहो में हो
Devraj:nahi ये नहीं सुल्तान
Sultan:dekhiye देवराज जी आप चाहे या न चाहे वो लोग एक दूसरे को नहीं छोर सकते और आपका आपकी बहिन क सिवा अपना कोई नहीं और आप मेरे छोटे भाई जैसे है इसलिए में चाहता हु आप अपनी बहिन को अपना ले और आपका विवाह हो जाये बस ये मेरी चाहत है मरने से पहले
देवराज क आखो में ासु आजाते है
Devraj:maharaj आप मरने की बात न करे और रही बात देवरानी की तो में देवरानी की ज़िद्द मान लूंगा और उसका विवाह बलदेव से करवा दूंगा और विदाई पारस से कर देंगे जब वो दोनों मेरी बात मानेगे हे नहीं तो यही sahi..ek बार तो हम राजा राजपाल से उसका विवाह कर क पछताए अब प्राश्चित क समय है
Sultan:theek है देवराज जी अब मुझे अपने महल जाना है पारस जाना है और अपनों क साथ ये जीत का जश्न मन न है
Devraj
ar महाराज आपका घाव
Sultan:bass अब मेरे दिन ख़त्म पर तुम ये बात किसी को मत बताना कल सुबह हे हम गहतराष्ट्रा होते हुए पारस चलेंगे ,
Devraj:sultan आपका सपना था दिल्ली फ़तेह करना हम दिल्ली जीत सकते है शाहज़ेब को हरा सकते है
Sultan:Koi बात नहीं देवराज दिल्ली में जीत नहीं पाया तो क्या हुआ मेरा बीटा शमशेर जीत लेगा नहीं तो मेरा पोता जीतेगा पर जीतेंगे ज़रूर.
Devraj:Aap ने पूरी दुन्या जीत लय सुल्तान और आज आपने मेरे लये इतना कुछ कर क मेरा हृदय भी
Sultan:bass अब तुम शादी करो और महल पहुंच कर शमशेर की भी शादी की तैयारी करनी है ,,तुम दोनों क बचे मिल कर हमारे लये दिल्ली फ़तेह करेंगे
Devraj:Ji अवश्य आपका स्वप्न पूरा होगा
Sultan:mere बेटे को बाप का प्यार देना मेरे पोते को ज़रूर अपने दादा क सपने का बताना
Devraj:ab आप आराम कीजिये सुबह होते हे तैयारी करेंगे जाने की कुबेरी से
Sultan:Han सुबह में हमे यहाँ क खजाने का दीदार करना है और उसका सही बटवारा दुपहर 12 बजे हम निकल जायेंगे गहतराष्ट्रा की ओरे
Devraj:jo आज्ञा सुल्तान
देवराज रात में सुल्तान को आराम करता छोर सुल्तान क कहने पर सोने चला जाता है और सोने से पहले सोचता है क्या सच में इतनी रात गए बलदेव और देवरानी अकेले में वो सब कर रहे होंगे जो प्रेमी प्रेमिका करते है देवराज इस बात से अनजान था क बलदेव और देवरानी इस समाये काम क्रीड़ा में लिप्त है
कुबेरी में सुबह होती है और देवराज जा कर सुल्तान को ले कर खजाना दिखने ले जाता है जिसे देख कर सुल्तान ख़ुशी से फुले नहीं समता
Sultan:mere आखो पे यक़ीन नहीं होता मैंने कुबेरी क ख़ज़ाने को प् liya...isme से आधा खज़ाना हम पारस ले जाना चाहते है और आधा आपको मेरी तरफ से तोहफा
Devraj:bura न मने तो मई अपने हिस्से में से कुबेरी की प्रजा में कुछ बंटवाना चाहता हु राजा रतन सिंह ने इस राष्ट्र की प्रजा को बहुत सताया है
Sultan:aap जो चाहे करे अपने हिस्से से
Sultan:muhaafiz
एक सैनिक आ खड़ा होता है
sainik:ji सुल्तान
Sultan:jao रानी रुक्मणि और सुखमनी क पास और कह दो मैंने उन दोनों को महाराज देवराज से रिश्ता तय कर दया है ..उन्हें मंज़ूर है ये खबर ले कर आना
Sultan:devraj जी हम 12 बजे निकल जायेंगे यहाँ से
Devraj:ji सुल्तान हम 3 बजे तक गहतराष्ट्रा पहुंच जायेंगे
सैनिक उधर जा कर रुक्मणि सुखमनी को ये सन्देश देता है
Rukmani:chale जाओ यहाँ से हमारे पति को मर कर हम से हे विवाह करना चाहता है देवराज
sukhmani:nikal जाओ और कह दो हम नहीं कर सकते
उधर 12 बजे दुपहर को बलदेव और देवरानी अपना सुहाग रत ख़त्म करते है इधर घोड़ो हाथीओ और राठो पैर सैनिक सवार हो रहे थे सुल्तान को भी एक रथ में लेता दया जाता हैं
Devraj:aap की आज्ञा हो तो हम गहतराष्ट्रा क लये रवाना हो
Sultan:han चलो 12 बज गए
तभी सैनिक आता है
sainik:gustakhi मुआफ हो हुज़ूर मैंने रानी रुक्मणि और सुखमनी से बात की पर वो दोनों शादी से इंकार कर रही है
sultan:abhi घाव हरा है उनको थोड़ा वक़्त दो ध्यान रहे कही भाग न पाए ..चलो देवराज हम चले
देवराज अपने सैनिको समझा बुझा कर कुबेरी क महल की घेरा बंदी कर क अपने कुछ सैनिको हकीम क साथ सुल्तान को ले कर गहतराष्ट्रा की ओरे चल पड़ता है..
गहतराष्ट्रा
दुपहर क 12:30
Baldev:shamshera जी अपने डिल को सम्भालो क्यू क आपकी अम्मी हूर इ जहाँ कोई आम स्त्री नहीं मल्लिका जहाँ है और उनके नाख़ून तक आज तक किसी ने नहीं देखा
Shamshera:mujhe पता है मेरा बाप मीर वाहिद जो अफ़ग़ान से लेकर अरब और मिश्रा से लेकर फ्रांस तक राज करता है उनकी बीवी को पाना आसान नहीं
Baldev
r ऊपर से वो तुम्हारी खुद की अम्मी है ,मई तो यही कहूंगा क धैर्य रखो मेरी तरह तुम्हे भी अपना प्यार मिलेगा
Shamshera
ar कब .? पता नहीं कीस हाल में होगी मेरी अम्मी जाएं मेरे डिल की रानी
Baldev:bass धैर्य रखो युवराज शमशेर अब में जाता हु सोने
Shamshera:ab रात भर मौज कए हो खला क साथ जाओ सो जाओ
बलदेव मुस्कुराता है और सोने क लये निचे अपने माँ क कक्षा में जाने लगता है
Shamshera:jao दूल्हे राजा 18 घंटे की सुहागरात की म्हणत की थकन है
बलदेव मुस्कुराते हुए अपने माँ क कक्षा में घुस जाता है
बलदेव मन me:ab माँ मेरे कक्षा में ऊपर सो रही है अपनी सूजी हुई छूट ले कर और उनके छूट से अपने छिले हुए लौड़े को उनके बिस्तर पर दबाये सो जाता हु
बलदेव क बिस्तर पर लेट ते हे नींद आजाती है..
तो बे कॉन्टिनोएड
पारस
भूरिया उठ क जाने लगती है और पास में लगी एक परदे क पीछे औरतो क खेमे में जिसमे काम से काम 100 राणीअ थी हराम की जिसे मेरे वाहिद ने अपने शारीरिक सुख पाने क लये रखा था .मेरे वाहिद की तीनो बीवीए और दोनों बेश्या राजगदद्दी पर बैठी थी भूरिया को देखते हे सब सलाम करने लगे और गले मिल कर हाल पूछने लगी
Naaz:Mallika जहाँ आये बैठे अब तो अपना पर्दा हटा दीजिये यहाँ तो सिर्फ औरते है
भूरिया धीरे से अपने चेहरे से निक़ाब हटती है
Razia:Wah मल्लिका इ जहाँ अआप तो चाँद क टुकड़े लग रहे हो
Muskan:theek कहा तुमने रज़िया
Naaz:tum दोनों ने तो भूरिया बाजी की जवानी देखि हे नहीं बहुत देर इस महल में आई मुझसे पूछो
razia:batao आप क्या आप भी न
Muskan:Han हमे भी सुन न है
Naaz:Inke चेहरे से निक़ाब हैट ते हे मर्द अपना आप खो बैठ ते थे
भूरिया अपने सौतनों को देखती है और शर्माती है और तभी उसकी नज़र नाज़ की बेटी समां और रज़िया की बेटी महनूर पर जाती है
Hooriya:Naaz बेग़ैरत हमारे पास हे बेतिया बैठी है समां और महनूर सुन न ले
Naaz:meri बेटी समां अब बची नहीं रही आखिर वो भी तो सुने अपने बड़ी अम्मी क क़िस्से और रही बात रज़िया की बेटी की..
Razia:wo अभी बची है भूरिया आप
Naaz:Gustakhi मुआफ हो भूरिया आप अगर आपको बुरा लगा हो तो..
नाज़ अपने सौतन भूरिया का गुस्से से लाल चेहरे को देख दर क बोलती है
Hooriya:Naaz नहीं मेरी बहिन तुम्हारी बात का बुरा क्यू मानूंगी तुम तीनो तो मेरी छूती बहाने हो वो तो बस बचो क सामने
Naaz:acha तो ये बात है
Razia:to बताओ न क्या होता था
Naaz:jab शुरू शुरू में शमशेर पैदा हे हुआ था तब भूरिया आप अछि सेहतमंद हो गयी थी और जब भी बिना निक़ाब क सूट में कैसे हुए काफटाण में जाती तो
Razia:to क्या बाजी
Naaz:to क़तल ये आम हो जाता ..बहुत से पहरेदार आँख उठा कर आप को ताड़ते और बेवजह मारे जाते
muskan:kya ! क्या उनको फांसी हो जाती
naaz:nahi सुल्तान मेरे वाहिद अपने तलवार भूरिया आप क कहते हे उसका सर काट देते
Razia
Naaz:tab हमारे ससुर सुल्तान दास्ताँ अपने बेटी भूरिया पर गन्दी निगाह डालने वाले का सर कलम करते बिना फैसला सुनाये
Hooriya:naaz तुमने सही कहा अब्बा मुझे बहु नहीं अपने बेटी की तरह प्यार दया
Muskan:hooriya आप ने बहुत क़तल इ आम करवा चुके
Naaz:Han यही वजह है क अब अपनी खूबसूरती मर्दो से क्या औरतो से भी छुपाती है
ये सुन कर सब है पड़ते है
Hooriya:ek ज़माने में मई पुरे दुन्या में मशहूर थी में इतनी खूबसूरत थी और पुरे दुन्या क राजा मुझे शादी करना चाहते थे
Naaz:aaapa अआप आज भी उतनी हे खूबसूरत हो
Hooriya:Nahi अब 45 साल उम्र हुई अब कहा पहले वाली बात अब तो बुढ़ापे में कदम रख दी हु
Muskan:aapko तो देख क नहीं लगता दिखने में तो आप हम सब से सेहतमंद ho,budhi तो कही से नहीं हो आप
ये सुन कर सब है पड़ते है
सुल्तान दास्ताँ अपने छोटे बेटे गुल शाह और पोते शान क साथ बैठे बातचीत कर रहे थे थोड़ी देर बाद ऐलान करते है
सुल्तान dastan:Bhaio और बहनो में चाहता हु पूरा पारस हमारे बेटे सुल्तान मेरे वाहिद क लये दवा करे क वो जल्द गहतराष्ट्रा और कुबेरी फ़तेह कर क आये और मुझे पूरी उम्मीद है हर बार की तरह हम अपने बहादुर लश्कर और हमारी बेटी हूर इ जहाँ की दुवाओ से हम जीत जायेंगे
ये कह कर सुल्तान दास्ताँ उठ कर जाने लगते है और उनके पीछे गुल शाह और शान भी चलने लगते है
इधर भूरिया अपने सौतनों क साथ बैठी सब सुन रही थी
Naaz:ab जाए इबादत में लग जाये और दवा करते रहे खाना हम पहुँचवा दिया करेंगे वक़्त पर आपके हुजरे में
Hooriya:theek है मई चलती हु
(मन me:Na जाने किस हाल में होंगे मेरे शौहर मेरे जान सुल्तान और मेरे जिगर का टुकड़ा बीटा शमशेर)
कुबेरी
कुबेरी पर आधी रात में हे अपना झंडा देवराज और सुल्तान मेरे वाहिद मिल कर गाड़ देते है और राजा रतन सिंह मारा जाता है और शाहज़ेब अपनी सेना ले क भाग जाता है पर घायल मेरे वाहिद की हालत ठीक नहीं थी
Devraj:sainiko लाशो को ले जा क कर्यक्रम कार्डो
Devraj:aap दोनों अंदर जाइये बहार का दृश्य इस से भी ज़्यादा बुरा है
रुक्मणि सुखमनी दोनों हाथ कटे हुए मारा हुआ रतन को देख हिल जाती है और दोनों अंदर जा कर रट हुए अपना दरवाज़ा बंद कर लेती है
कुछ देर में सैनिक जड़ी बूटी लेट है और सुल्तान का उपचार शुरू होता है
Devraj:Or कुछ चाहिए हकीम जी
Hakeem,devraj जी अब सुल्तान खतरे से बहार है पर इन्हे कुछ दिनों तक निगरानी में रखा जायेगा
Devraj:sainiko कुबेरी की सीमा पर तैनाती बढ़ाओ और महल को चारो ओरे से घेर लो हम एक दो दिन रुक कर जायेगे जैसे हे सुल्तान ठीक होते है
अब आगे ( रीड अपडेट 88 )
देवराज सुल्तान मेरे वाहिद क साथ बैठा था और हकीम उनका उपचार कर रहे थे
Devraj:Hum आज हे गहतराष्ट्रा चले जाते और हमारे सैनिको क साथ मिल कर इस विजय का खूब जश्न मानते
Hakeem:Maharaj आप तो जानते हे है मेरे वाहिद जी अभी अपनी घाव से उतनी तेज़ी से लड़ नहीं प् रहे इसलिए सफर में परेशानी हो सकती है
यु हे बात करते करते सुबह हो जाती है दिन भर देवराज अपने बहिन और अपने भांजे की प्रेम की और उन्दोनो को कैसे अपनाएँ यही सोच रहा था इस बात से अनजान क उधर दिन में उसकी बहिन देवरानी उसके भांजे से ब्याह की तैयारी कर रही है
Devraj:kya करू अभी गहतराष्ट्रा जा भी नहीं सकता कही देवरानी और बलदेव कोई गलत क़दम न उठा ले कही कोई पाप न कर बैठे
गहतराष्ट्रा में 4 बजे शाम विवाह होता है और सुहागरात का आरम्भ हो जाता है और देवराज अब भी हकीम और सैनिको क साथ सुल्तान मेरे वाहिद को ठीक करने में लगे थे
रात 8 बजे उधर गहतराष्ट्रा में घमाशान चुदाई हो रही थी इधर सुल्तान मेरे वाहिद का घाव का दर्द काम होता है
सुल्तान मेरे वाहिद अपना हाथ उठा ते है
हकीम दौड़ता हुआ आता है
"पानी "
हकीम पानी देता है और सामने बैठा देवराज भी हकीम को भागता देख अंदर आता है
Devraj:sultan आप ठीक तो है न
सुल्तान पानी पी कर
Sultan,devraj जी हम ठीक है
खासते हुए
देवराज सुल्तान क हाथ पकड़ते हुए
Sultan.devraj रहने दो में ठीक हु
Hakeem:Jahan पनाह गुस्ताखी मुआफ हो पर जब से जुंग ख़त्म हुई है तब से महाराज देवराज सोये नहीं आपकी सेवा में लगे है
Sultan:mujhe पता है हकीम साहब
Hakeem:aapko कैसे पता आप तो पुरे होश में थे नहीं
Sultan:me पुरे दुन्या पे राज करता हु हकीम मेरी बंद आखे भी बता देती है कौन किधर है
Hakeem:gustakhi मुआफ जहाँ पनाह
sultan:ab तुम बहार जाओ मुझे देवराज जी से कुछ बात करनी है
हकीम कक्षा से बहार जाता है
devraj:Boliye सुल्तान
Sultan,devraj जी आप मेरे सबसे करीबी है और आपने हमारा ज़िन्दगी भर साथ डाई
Devraj:aapne भी हमारे रक्षा मंगोलो से किया
sultan:devraj जी मुझे लग रहा है क मेरा आखिरी वक़्त आगया है
devraj:aap ये क्या कह रहे ह सुल्तान
Sultan:sahi मौत सबको आणि है में इस से बच नहीं सकता मुझे कुछ कहना है
Devraj:kahiye सुल्तान
Sultan:aap अगर मेरा तोहफा कबूल करे तो में कुछ देना चाहता हु और आप से भी कुछ वायदे करवाना चाहता हु
Devraj:ji कहिये सुल्तान
देवराज क आखो में ासु था
Sultan,devraj जी में आपको तोहफे में ये कुबेरी का महल देता हु ..अआप यहाँ देवगढ़ से ज़्यादा सुखी रहेंगे
Devraj:kya आप इस लये मुझे कुबेरी में बसना चाहते है क हमारे जाती समुदाय क लोग पारस में देवगढ़ में काम है
Sultan:Ye बात भी सही hai..par आप इस बड़े महल में रहेंगे और आप अपनी बहिन क करीब रह सकेंगे गहतराष्ट्रा क करीब
Devraj:Hmm आपका तोहफा क़ुबूल है
Sultan:abhi पूरा नहीं हुआ हम ये भी चाहते है क अब आप विवाह कर ले और राजा रतन की दोनों बीवियों को अपना ले
Devraj:Sultan आपके विवाह करने की बात तो में स्वीकार सकता हु पर राजा रतन को मैंने मौत क घाट उतर दया क्या रुक्मणि और सुखमनी मुझसे विवाह कर लेगी?
Sultan:raja रतन क बिना उनकी ज़िन्दगी भी आसान नहीं होगी आप सिर्फ हाँ कह दो वो दोनों मान जायेंगे..
Devraj
Sultan:aaj कल सब उचित है अनुचित कुछ नहीं
Devraj:wah आप तो हिंदी अछि बोलते है
Sultan:bass आपके साथ रह kar..Devraj जी एक गुज़ारिश भी है
Devraj:kahiye सुल्तान
Sultan:bas आप बुरा न मने तो
देवराज मुस्कुरा कर" कहिये सुल्तान आपका हुक्म सर आखो पैर"
sultan,devraj जी में चाहता हु की आपकी बहिन देवरानी को आप अपना ले और उसकी ज़िद्द क मुताबिक़ उसकी शादी अपने भांजे से करवा दे
देवराज ये सुन्नते हे चुप हो जाता है
Sultan:devraj जी आप चुप है आप जानते है वो दोनों एक दूसरे से मुहब्बत करते है मेरे हिसाब से अभी तक शमशेर मेरे बेटे ने क़िले को फ़तेह कर लय होगा
Devraj:aap समझते नहीं महाराज
Sultan:devraj जी उनको कौन रोक सकता जब वो दोनों माँ बेटे इस प्यार को सही मानते है हो सकता है अभी भी एक दूसरे क बहो में हो
Devraj:nahi ये नहीं सुल्तान
Sultan:dekhiye देवराज जी आप चाहे या न चाहे वो लोग एक दूसरे को नहीं छोर सकते और आपका आपकी बहिन क सिवा अपना कोई नहीं और आप मेरे छोटे भाई जैसे है इसलिए में चाहता हु आप अपनी बहिन को अपना ले और आपका विवाह हो जाये बस ये मेरी चाहत है मरने से पहले
देवराज क आखो में ासु आजाते है
Devraj:maharaj आप मरने की बात न करे और रही बात देवरानी की तो में देवरानी की ज़िद्द मान लूंगा और उसका विवाह बलदेव से करवा दूंगा और विदाई पारस से कर देंगे जब वो दोनों मेरी बात मानेगे हे नहीं तो यही sahi..ek बार तो हम राजा राजपाल से उसका विवाह कर क पछताए अब प्राश्चित क समय है
Sultan:theek है देवराज जी अब मुझे अपने महल जाना है पारस जाना है और अपनों क साथ ये जीत का जश्न मन न है
Devraj
Sultan:bass अब मेरे दिन ख़त्म पर तुम ये बात किसी को मत बताना कल सुबह हे हम गहतराष्ट्रा होते हुए पारस चलेंगे ,
Devraj:sultan आपका सपना था दिल्ली फ़तेह करना हम दिल्ली जीत सकते है शाहज़ेब को हरा सकते है
Sultan:Koi बात नहीं देवराज दिल्ली में जीत नहीं पाया तो क्या हुआ मेरा बीटा शमशेर जीत लेगा नहीं तो मेरा पोता जीतेगा पर जीतेंगे ज़रूर.
Devraj:Aap ने पूरी दुन्या जीत लय सुल्तान और आज आपने मेरे लये इतना कुछ कर क मेरा हृदय भी
Sultan:bass अब तुम शादी करो और महल पहुंच कर शमशेर की भी शादी की तैयारी करनी है ,,तुम दोनों क बचे मिल कर हमारे लये दिल्ली फ़तेह करेंगे
Devraj:Ji अवश्य आपका स्वप्न पूरा होगा
Sultan:mere बेटे को बाप का प्यार देना मेरे पोते को ज़रूर अपने दादा क सपने का बताना
Devraj:ab आप आराम कीजिये सुबह होते हे तैयारी करेंगे जाने की कुबेरी से
Sultan:Han सुबह में हमे यहाँ क खजाने का दीदार करना है और उसका सही बटवारा दुपहर 12 बजे हम निकल जायेंगे गहतराष्ट्रा की ओरे
Devraj:jo आज्ञा सुल्तान
देवराज रात में सुल्तान को आराम करता छोर सुल्तान क कहने पर सोने चला जाता है और सोने से पहले सोचता है क्या सच में इतनी रात गए बलदेव और देवरानी अकेले में वो सब कर रहे होंगे जो प्रेमी प्रेमिका करते है देवराज इस बात से अनजान था क बलदेव और देवरानी इस समाये काम क्रीड़ा में लिप्त है
कुबेरी में सुबह होती है और देवराज जा कर सुल्तान को ले कर खजाना दिखने ले जाता है जिसे देख कर सुल्तान ख़ुशी से फुले नहीं समता
Sultan:mere आखो पे यक़ीन नहीं होता मैंने कुबेरी क ख़ज़ाने को प् liya...isme से आधा खज़ाना हम पारस ले जाना चाहते है और आधा आपको मेरी तरफ से तोहफा
Devraj:bura न मने तो मई अपने हिस्से में से कुबेरी की प्रजा में कुछ बंटवाना चाहता हु राजा रतन सिंह ने इस राष्ट्र की प्रजा को बहुत सताया है
Sultan:aap जो चाहे करे अपने हिस्से से
Sultan:muhaafiz
एक सैनिक आ खड़ा होता है
sainik:ji सुल्तान
Sultan:jao रानी रुक्मणि और सुखमनी क पास और कह दो मैंने उन दोनों को महाराज देवराज से रिश्ता तय कर दया है ..उन्हें मंज़ूर है ये खबर ले कर आना
Sultan:devraj जी हम 12 बजे निकल जायेंगे यहाँ से
Devraj:ji सुल्तान हम 3 बजे तक गहतराष्ट्रा पहुंच जायेंगे
सैनिक उधर जा कर रुक्मणि सुखमनी को ये सन्देश देता है
Rukmani:chale जाओ यहाँ से हमारे पति को मर कर हम से हे विवाह करना चाहता है देवराज
sukhmani:nikal जाओ और कह दो हम नहीं कर सकते
उधर 12 बजे दुपहर को बलदेव और देवरानी अपना सुहाग रत ख़त्म करते है इधर घोड़ो हाथीओ और राठो पैर सैनिक सवार हो रहे थे सुल्तान को भी एक रथ में लेता दया जाता हैं
Devraj:aap की आज्ञा हो तो हम गहतराष्ट्रा क लये रवाना हो
Sultan:han चलो 12 बज गए
तभी सैनिक आता है
sainik:gustakhi मुआफ हो हुज़ूर मैंने रानी रुक्मणि और सुखमनी से बात की पर वो दोनों शादी से इंकार कर रही है
sultan:abhi घाव हरा है उनको थोड़ा वक़्त दो ध्यान रहे कही भाग न पाए ..चलो देवराज हम चले
देवराज अपने सैनिको समझा बुझा कर कुबेरी क महल की घेरा बंदी कर क अपने कुछ सैनिको हकीम क साथ सुल्तान को ले कर गहतराष्ट्रा की ओरे चल पड़ता है..
गहतराष्ट्रा
दुपहर क 12:30
Baldev:shamshera जी अपने डिल को सम्भालो क्यू क आपकी अम्मी हूर इ जहाँ कोई आम स्त्री नहीं मल्लिका जहाँ है और उनके नाख़ून तक आज तक किसी ने नहीं देखा
Shamshera:mujhe पता है मेरा बाप मीर वाहिद जो अफ़ग़ान से लेकर अरब और मिश्रा से लेकर फ्रांस तक राज करता है उनकी बीवी को पाना आसान नहीं
Baldev
Shamshera
Baldev:bass धैर्य रखो युवराज शमशेर अब में जाता हु सोने
Shamshera:ab रात भर मौज कए हो खला क साथ जाओ सो जाओ
बलदेव मुस्कुराता है और सोने क लये निचे अपने माँ क कक्षा में जाने लगता है
Shamshera:jao दूल्हे राजा 18 घंटे की सुहागरात की म्हणत की थकन है
बलदेव मुस्कुराते हुए अपने माँ क कक्षा में घुस जाता है
बलदेव मन me:ab माँ मेरे कक्षा में ऊपर सो रही है अपनी सूजी हुई छूट ले कर और उनके छूट से अपने छिले हुए लौड़े को उनके बिस्तर पर दबाये सो जाता हु
बलदेव क बिस्तर पर लेट ते हे नींद आजाती है..
तो बे कॉन्टिनोएड