Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 12 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 103

पारस

भूरिया उठ क जाने लगती है और पास में लगी एक परदे क पीछे औरतो क खेमे में जिसमे काम से काम 100 राणीअ थी हराम की जिसे मेरे वाहिद ने अपने शारीरिक सुख पाने क लये रखा था .मेरे वाहिद की तीनो बीवीए और दोनों बेश्या राजगदद्दी पर बैठी थी भूरिया को देखते हे सब सलाम करने लगे और गले मिल कर हाल पूछने लगी

Naaz:Mallika जहाँ आये बैठे अब तो अपना पर्दा हटा दीजिये यहाँ तो सिर्फ औरते है

भूरिया धीरे से अपने चेहरे से निक़ाब हटती है



Razia:Wah मल्लिका इ जहाँ अआप तो चाँद क टुकड़े लग रहे हो

Muskan:theek कहा तुमने रज़िया

Naaz:tum दोनों ने तो भूरिया बाजी की जवानी देखि हे नहीं बहुत देर इस महल में आई मुझसे पूछो

razia:batao आप क्या आप भी न

Muskan:Han हमे भी सुन न है

Naaz:Inke चेहरे से निक़ाब हैट ते हे मर्द अपना आप खो बैठ ते थे

भूरिया अपने सौतनों को देखती है और शर्माती है और तभी उसकी नज़र नाज़ की बेटी समां और रज़िया की बेटी महनूर पर जाती है

Hooriya:Naaz बेग़ैरत हमारे पास हे बेतिया बैठी है समां और महनूर सुन न ले

Naaz:meri बेटी समां अब बची नहीं रही आखिर वो भी तो सुने अपने बड़ी अम्मी क क़िस्से और रही बात रज़िया की बेटी की..

Razia:wo अभी बची है भूरिया आप

Naaz:Gustakhi मुआफ हो भूरिया आप अगर आपको बुरा लगा हो तो..

नाज़ अपने सौतन भूरिया का गुस्से से लाल चेहरे को देख दर क बोलती है

Hooriya:Naaz नहीं मेरी बहिन तुम्हारी बात का बुरा क्यू मानूंगी तुम तीनो तो मेरी छूती बहाने हो वो तो बस बचो क सामने

Naaz:acha तो ये बात है

Razia:to बताओ न क्या होता था

Naaz:jab शुरू शुरू में शमशेर पैदा हे हुआ था तब भूरिया आप अछि सेहतमंद हो गयी थी और जब भी बिना निक़ाब क सूट में कैसे हुए काफटाण में जाती तो

Razia:to क्या बाजी

Naaz:to क़तल ये आम हो जाता ..बहुत से पहरेदार आँख उठा कर आप को ताड़ते और बेवजह मारे जाते

muskan:kya ! क्या उनको फांसी हो जाती

naaz:nahi सुल्तान मेरे वाहिद अपने तलवार भूरिया आप क कहते हे उसका सर काट देते

Razia:par सुल्तान तो हमेशा नहीं होते थे न पहले जुंग की वजह से

Naaz:tab हमारे ससुर सुल्तान दास्ताँ अपने बेटी भूरिया पर गन्दी निगाह डालने वाले का सर कलम करते बिना फैसला सुनाये

Hooriya:naaz तुमने सही कहा अब्बा मुझे बहु नहीं अपने बेटी की तरह प्यार दया

Muskan:hooriya आप ने बहुत क़तल इ आम करवा चुके

Naaz:Han यही वजह है क अब अपनी खूबसूरती मर्दो से क्या औरतो से भी छुपाती है

ये सुन कर सब है पड़ते है

Hooriya:ek ज़माने में मई पुरे दुन्या में मशहूर थी में इतनी खूबसूरत थी और पुरे दुन्या क राजा मुझे शादी करना चाहते थे

Naaz:aaapa अआप आज भी उतनी हे खूबसूरत हो

Hooriya:Nahi अब 45 साल उम्र हुई अब कहा पहले वाली बात अब तो बुढ़ापे में कदम रख दी हु

Muskan:aapko तो देख क नहीं लगता दिखने में तो आप हम सब से सेहतमंद ho,budhi तो कही से नहीं हो आप

ये सुन कर सब है पड़ते है

सुल्तान दास्ताँ अपने छोटे बेटे गुल शाह और पोते शान क साथ बैठे बातचीत कर रहे थे थोड़ी देर बाद ऐलान करते है

सुल्तान dastan:Bhaio और बहनो में चाहता हु पूरा पारस हमारे बेटे सुल्तान मेरे वाहिद क लये दवा करे क वो जल्द गहतराष्ट्रा और कुबेरी फ़तेह कर क आये और मुझे पूरी उम्मीद है हर बार की तरह हम अपने बहादुर लश्कर और हमारी बेटी हूर इ जहाँ की दुवाओ से हम जीत जायेंगे

ये कह कर सुल्तान दास्ताँ उठ कर जाने लगते है और उनके पीछे गुल शाह और शान भी चलने लगते है

इधर भूरिया अपने सौतनों क साथ बैठी सब सुन रही थी

Naaz:ab जाए इबादत में लग जाये और दवा करते रहे खाना हम पहुँचवा दिया करेंगे वक़्त पर आपके हुजरे में

Hooriya:theek है मई चलती हु

(मन me:Na जाने किस हाल में होंगे मेरे शौहर मेरे जान सुल्तान और मेरे जिगर का टुकड़ा बीटा शमशेर)

कुबेरी

कुबेरी पर आधी रात में हे अपना झंडा देवराज और सुल्तान मेरे वाहिद मिल कर गाड़ देते है और राजा रतन सिंह मारा जाता है और शाहज़ेब अपनी सेना ले क भाग जाता है पर घायल मेरे वाहिद की हालत ठीक नहीं थी

Devraj:sainiko लाशो को ले जा क कर्यक्रम कार्डो

Devraj:aap दोनों अंदर जाइये बहार का दृश्य इस से भी ज़्यादा बुरा है

रुक्मणि सुखमनी दोनों हाथ कटे हुए मारा हुआ रतन को देख हिल जाती है और दोनों अंदर जा कर रट हुए अपना दरवाज़ा बंद कर लेती है

कुछ देर में सैनिक जड़ी बूटी लेट है और सुल्तान का उपचार शुरू होता है

Devraj:Or कुछ चाहिए हकीम जी

Hakeem,devraj जी अब सुल्तान खतरे से बहार है पर इन्हे कुछ दिनों तक निगरानी में रखा जायेगा

Devraj:sainiko कुबेरी की सीमा पर तैनाती बढ़ाओ और महल को चारो ओरे से घेर लो हम एक दो दिन रुक कर जायेगे जैसे हे सुल्तान ठीक होते है

अब आगे ( रीड अपडेट 88 )

देवराज सुल्तान मेरे वाहिद क साथ बैठा था और हकीम उनका उपचार कर रहे थे

Devraj:Hum आज हे गहतराष्ट्रा चले जाते और हमारे सैनिको क साथ मिल कर इस विजय का खूब जश्न मानते

Hakeem:Maharaj आप तो जानते हे है मेरे वाहिद जी अभी अपनी घाव से उतनी तेज़ी से लड़ नहीं प् रहे इसलिए सफर में परेशानी हो सकती है

यु हे बात करते करते सुबह हो जाती है दिन भर देवराज अपने बहिन और अपने भांजे की प्रेम की और उन्दोनो को कैसे अपनाएँ यही सोच रहा था इस बात से अनजान क उधर दिन में उसकी बहिन देवरानी उसके भांजे से ब्याह की तैयारी कर रही है

Devraj:kya करू अभी गहतराष्ट्रा जा भी नहीं सकता कही देवरानी और बलदेव कोई गलत क़दम न उठा ले कही कोई पाप न कर बैठे

गहतराष्ट्रा में 4 बजे शाम विवाह होता है और सुहागरात का आरम्भ हो जाता है और देवराज अब भी हकीम और सैनिको क साथ सुल्तान मेरे वाहिद को ठीक करने में लगे थे

रात 8 बजे उधर गहतराष्ट्रा में घमाशान चुदाई हो रही थी इधर सुल्तान मेरे वाहिद का घाव का दर्द काम होता है

सुल्तान मेरे वाहिद अपना हाथ उठा ते है

हकीम दौड़ता हुआ आता है

"पानी "

हकीम पानी देता है और सामने बैठा देवराज भी हकीम को भागता देख अंदर आता है

Devraj:sultan आप ठीक तो है न

सुल्तान पानी पी कर

Sultan,devraj जी हम ठीक है

खासते हुए

देवराज सुल्तान क हाथ पकड़ते हुए

Sultan.devraj रहने दो में ठीक हु

Hakeem:Jahan पनाह गुस्ताखी मुआफ हो पर जब से जुंग ख़त्म हुई है तब से महाराज देवराज सोये नहीं आपकी सेवा में लगे है

Sultan:mujhe पता है हकीम साहब

Hakeem:aapko कैसे पता आप तो पुरे होश में थे नहीं

Sultan:me पुरे दुन्या पे राज करता हु हकीम मेरी बंद आखे भी बता देती है कौन किधर है

Hakeem:gustakhi मुआफ जहाँ पनाह

sultan:ab तुम बहार जाओ मुझे देवराज जी से कुछ बात करनी है

हकीम कक्षा से बहार जाता है

devraj:Boliye सुल्तान

Sultan,devraj जी आप मेरे सबसे करीबी है और आपने हमारा ज़िन्दगी भर साथ डाई

Devraj:aapne भी हमारे रक्षा मंगोलो से किया

sultan:devraj जी मुझे लग रहा है क मेरा आखिरी वक़्त आगया है

devraj:aap ये क्या कह रहे ह सुल्तान

Sultan:sahi मौत सबको आणि है में इस से बच नहीं सकता मुझे कुछ कहना है

Devraj:kahiye सुल्तान

Sultan:aap अगर मेरा तोहफा कबूल करे तो में कुछ देना चाहता हु और आप से भी कुछ वायदे करवाना चाहता हु

Devraj:ji कहिये सुल्तान

देवराज क आखो में ासु था

Sultan,devraj जी में आपको तोहफे में ये कुबेरी का महल देता हु ..अआप यहाँ देवगढ़ से ज़्यादा सुखी रहेंगे

Devraj:kya आप इस लये मुझे कुबेरी में बसना चाहते है क हमारे जाती समुदाय क लोग पारस में देवगढ़ में काम है

Sultan:Ye बात भी सही hai..par आप इस बड़े महल में रहेंगे और आप अपनी बहिन क करीब रह सकेंगे गहतराष्ट्रा क करीब

Devraj:Hmm आपका तोहफा क़ुबूल है

Sultan:abhi पूरा नहीं हुआ हम ये भी चाहते है क अब आप विवाह कर ले और राजा रतन की दोनों बीवियों को अपना ले

Devraj:Sultan आपके विवाह करने की बात तो में स्वीकार सकता हु पर राजा रतन को मैंने मौत क घाट उतर दया क्या रुक्मणि और सुखमनी मुझसे विवाह कर लेगी?

Sultan:raja रतन क बिना उनकी ज़िन्दगी भी आसान नहीं होगी आप सिर्फ हाँ कह दो वो दोनों मान जायेंगे..

Devraj:par दो विवाह करना उचित नहीं..

Sultan:aaj कल सब उचित है अनुचित कुछ नहीं

Devraj:wah आप तो हिंदी अछि बोलते है

Sultan:bass आपके साथ रह kar..Devraj जी एक गुज़ारिश भी है

Devraj:kahiye सुल्तान

Sultan:bas आप बुरा न मने तो

देवराज मुस्कुरा कर" कहिये सुल्तान आपका हुक्म सर आखो पैर"

sultan,devraj जी में चाहता हु की आपकी बहिन देवरानी को आप अपना ले और उसकी ज़िद्द क मुताबिक़ उसकी शादी अपने भांजे से करवा दे

देवराज ये सुन्नते हे चुप हो जाता है

Sultan:devraj जी आप चुप है आप जानते है वो दोनों एक दूसरे से मुहब्बत करते है मेरे हिसाब से अभी तक शमशेर मेरे बेटे ने क़िले को फ़तेह कर लय होगा

Devraj:aap समझते नहीं महाराज

Sultan:devraj जी उनको कौन रोक सकता जब वो दोनों माँ बेटे इस प्यार को सही मानते है हो सकता है अभी भी एक दूसरे क बहो में हो

Devraj:nahi ये नहीं सुल्तान

Sultan:dekhiye देवराज जी आप चाहे या न चाहे वो लोग एक दूसरे को नहीं छोर सकते और आपका आपकी बहिन क सिवा अपना कोई नहीं और आप मेरे छोटे भाई जैसे है इसलिए में चाहता हु आप अपनी बहिन को अपना ले और आपका विवाह हो जाये बस ये मेरी चाहत है मरने से पहले

देवराज क आखो में ासु आजाते है

Devraj:maharaj आप मरने की बात न करे और रही बात देवरानी की तो में देवरानी की ज़िद्द मान लूंगा और उसका विवाह बलदेव से करवा दूंगा और विदाई पारस से कर देंगे जब वो दोनों मेरी बात मानेगे हे नहीं तो यही sahi..ek बार तो हम राजा राजपाल से उसका विवाह कर क पछताए अब प्राश्चित क समय है

Sultan:theek है देवराज जी अब मुझे अपने महल जाना है पारस जाना है और अपनों क साथ ये जीत का जश्न मन न है

Devraj:par महाराज आपका घाव

Sultan:bass अब मेरे दिन ख़त्म पर तुम ये बात किसी को मत बताना कल सुबह हे हम गहतराष्ट्रा होते हुए पारस चलेंगे ,

Devraj:sultan आपका सपना था दिल्ली फ़तेह करना हम दिल्ली जीत सकते है शाहज़ेब को हरा सकते है

Sultan:Koi बात नहीं देवराज दिल्ली में जीत नहीं पाया तो क्या हुआ मेरा बीटा शमशेर जीत लेगा नहीं तो मेरा पोता जीतेगा पर जीतेंगे ज़रूर.

Devraj:Aap ने पूरी दुन्या जीत लय सुल्तान और आज आपने मेरे लये इतना कुछ कर क मेरा हृदय भी

Sultan:bass अब तुम शादी करो और महल पहुंच कर शमशेर की भी शादी की तैयारी करनी है ,,तुम दोनों क बचे मिल कर हमारे लये दिल्ली फ़तेह करेंगे

Devraj:Ji अवश्य आपका स्वप्न पूरा होगा

Sultan:mere बेटे को बाप का प्यार देना मेरे पोते को ज़रूर अपने दादा क सपने का बताना

Devraj:ab आप आराम कीजिये सुबह होते हे तैयारी करेंगे जाने की कुबेरी से

Sultan:Han सुबह में हमे यहाँ क खजाने का दीदार करना है और उसका सही बटवारा दुपहर 12 बजे हम निकल जायेंगे गहतराष्ट्रा की ओरे

Devraj:jo आज्ञा सुल्तान

देवराज रात में सुल्तान को आराम करता छोर सुल्तान क कहने पर सोने चला जाता है और सोने से पहले सोचता है क्या सच में इतनी रात गए बलदेव और देवरानी अकेले में वो सब कर रहे होंगे जो प्रेमी प्रेमिका करते है देवराज इस बात से अनजान था क बलदेव और देवरानी इस समाये काम क्रीड़ा में लिप्त है

कुबेरी में सुबह होती है और देवराज जा कर सुल्तान को ले कर खजाना दिखने ले जाता है जिसे देख कर सुल्तान ख़ुशी से फुले नहीं समता

Sultan:mere आखो पे यक़ीन नहीं होता मैंने कुबेरी क ख़ज़ाने को प् liya...isme से आधा खज़ाना हम पारस ले जाना चाहते है और आधा आपको मेरी तरफ से तोहफा

Devraj:bura न मने तो मई अपने हिस्से में से कुबेरी की प्रजा में कुछ बंटवाना चाहता हु राजा रतन सिंह ने इस राष्ट्र की प्रजा को बहुत सताया है

Sultan:aap जो चाहे करे अपने हिस्से से

Sultan:muhaafiz

एक सैनिक आ खड़ा होता है

sainik:ji सुल्तान

Sultan:jao रानी रुक्मणि और सुखमनी क पास और कह दो मैंने उन दोनों को महाराज देवराज से रिश्ता तय कर दया है ..उन्हें मंज़ूर है ये खबर ले कर आना

Sultan:devraj जी हम 12 बजे निकल जायेंगे यहाँ से

Devraj:ji सुल्तान हम 3 बजे तक गहतराष्ट्रा पहुंच जायेंगे

सैनिक उधर जा कर रुक्मणि सुखमनी को ये सन्देश देता है

Rukmani:chale जाओ यहाँ से हमारे पति को मर कर हम से हे विवाह करना चाहता है देवराज

sukhmani:nikal जाओ और कह दो हम नहीं कर सकते

उधर 12 बजे दुपहर को बलदेव और देवरानी अपना सुहाग रत ख़त्म करते है इधर घोड़ो हाथीओ और राठो पैर सैनिक सवार हो रहे थे सुल्तान को भी एक रथ में लेता दया जाता हैं

Devraj:aap की आज्ञा हो तो हम गहतराष्ट्रा क लये रवाना हो

Sultan:han चलो 12 बज गए

तभी सैनिक आता है

sainik:gustakhi मुआफ हो हुज़ूर मैंने रानी रुक्मणि और सुखमनी से बात की पर वो दोनों शादी से इंकार कर रही है

sultan:abhi घाव हरा है उनको थोड़ा वक़्त दो ध्यान रहे कही भाग न पाए ..चलो देवराज हम चले

देवराज अपने सैनिको समझा बुझा कर कुबेरी क महल की घेरा बंदी कर क अपने कुछ सैनिको हकीम क साथ सुल्तान को ले कर गहतराष्ट्रा की ओरे चल पड़ता है..

गहतराष्ट्रा

दुपहर क 12:30

Baldev:shamshera जी अपने डिल को सम्भालो क्यू क आपकी अम्मी हूर इ जहाँ कोई आम स्त्री नहीं मल्लिका जहाँ है और उनके नाख़ून तक आज तक किसी ने नहीं देखा

Shamshera:mujhe पता है मेरा बाप मीर वाहिद जो अफ़ग़ान से लेकर अरब और मिश्रा से लेकर फ्रांस तक राज करता है उनकी बीवी को पाना आसान नहीं

Baldev:or ऊपर से वो तुम्हारी खुद की अम्मी है ,मई तो यही कहूंगा क धैर्य रखो मेरी तरह तुम्हे भी अपना प्यार मिलेगा

Shamshera:par कब .? पता नहीं कीस हाल में होगी मेरी अम्मी जाएं मेरे डिल की रानी

Baldev:bass धैर्य रखो युवराज शमशेर अब में जाता हु सोने

Shamshera:ab रात भर मौज कए हो खला क साथ जाओ सो जाओ

बलदेव मुस्कुराता है और सोने क लये निचे अपने माँ क कक्षा में जाने लगता है

Shamshera:jao दूल्हे राजा 18 घंटे की सुहागरात की म्हणत की थकन है

बलदेव मुस्कुराते हुए अपने माँ क कक्षा में घुस जाता है

बलदेव मन me:ab माँ मेरे कक्षा में ऊपर सो रही है अपनी सूजी हुई छूट ले कर और उनके छूट से अपने छिले हुए लौड़े को उनके बिस्तर पर दबाये सो जाता हु

बलदेव क बिस्तर पर लेट ते हे नींद आजाती है..


तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 104

पारस में मल्लिका इ जहाँ भूरिया अपने पति मेरे वाहिद और बेटे शमशेर का इंतज़ार कर रही थी ,साथ हे सुल्तान दास्ताँ अपने बेटे का इंतज़ार कर रहे थे अपने छोटे बेटे गुल शाह क साथ

नाज़ जो सुल्तान मेरे वाहिद की दूसरी बीवी थी वो भी अपने शौहर मेरे वाहिद का इंतज़ार कर रही थी अपने सौतने रज़िया और मुस्कान क साथ

शमशेर क सौतेले भाई शान और सौतेली बहिन समा जो नाज़ क बेटे बेटी थी और महनूर जो रज़िया की बेटी थी वो भी अपने सौतेले भाई का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे

सुल्तान मेरे वाहिद की माँ सुल्ताना अफसाना भी अपने बेटे क लये फिकरमंद थी

इधर देवराज जी और सुल्तान मेरे वाहिद कुबेरी राज्य से वह क खजाने क साथ मेरे वाहिद क कहने अनुसार गहतराष्ट्रा की ओरे बढ़ रहे थे

गहतराष्ट्रा

गहतराष्ट्रा क महल में ऊपर बलदेव क कक्षा में देवरानी थकी हुई सो रही थी लगातार 18 घंटे की सुहागरात ने महारानी देवरानी का जिस्म तोड़ कर रख दया tha.devrani का नया पति बलदेव निचे सो रहा tha.Mahal में शमशेर क साथ kamla,shurushti और षुरूश्ती की दासी राधा सुबह से महल क बहार कतार में खड़े गहतराष्ट्रा वासिओ को उपहार बाँट रहे थे

Shuruhsti:Kamla ,राधा ध्यान रहे एक गरीब भी खली हाथ नहीं जाये

Kamla:Rani षुरूश्ती जी अवश्य हमारे नए महाराज और महारानी का विवाह हुआ है पुरे गहतराष्ट्रा में हर एक व्यक्ति को पता चलना चाहिए

Shurushti:Sahi कहा गहतराष्ट्रा में अब कोई भूका नहीं सोयेगा

Kamla:ji रानी षुरूश्ती अब हमारे गहतराष्ट्रा क एकलौते चिराग महाराज बलदेव थे उनके विवाह क बाद पूरा गहतराष्ट्रा आस लगाए बैठा है क गहतराष्ट्रा का वारिस कब होगा जो महाराज बलदेव क बाद गहतराष्ट्रा पर राज करेगा

Shurushti:Sabki मनो कामना पूरी होगी और महाराज बलदेव मेरा बीटा गहतराष्ट्रा क राज वंश को ज़रूर आगे बढ़ाएगा

Kamla:ab पता नहीं कब होगा हमारा युवराज हमारे महाराज बलदेव और महारानी देवरानी का पुत्र

Shurushti:bhut जल्द होगा चिंता मत करो तुमको हे नहीं पुरे गहतराष्ट्रा वाले बलदेव और देवरानी से यही उम्मीद रखे है

Kamla:hmm वो बास महारानी देवरानी मान जाये तो महाराज तो अनगिनत पैदा कर लेंगे

पर उनकी पत्नी उनकी माँ माने तब तो

Shurushti:badtameez तुमने महाराज महारानी क लये ऐसा कैसे कह दया उनकी मर्ज़ी वो जब पैदा करे और भगवन जब देगा तो होगा हे

kamla:man में) अब कैसे बताऊ इस षुरूश्ती को क देवरानी ने तो वो जड़ी बूटी खा ली जिस से बचा नहीं ठहरेगा चाहे जितना बलदेव थोक ले अपनी माँ को कल रात की तो म्हणत हे ख़राब हो गयी बलदेव की

Radha:kamla और वस्त्र लाओ

कमला बोर में से वस्त्र निकल कर देने लगती है और राधा आगे जा कर क़तर में खड़े लोगो को बाँट रही थी

ये सब सुन रही जीविका कड़ी थी और उसके आखो में ासु आगये थे

Jeevika:man me)Hey भगवन कैसे दिन आगये आज एक बीटा अपने माँ की चुदाई कर रहा है और पूरा गहतराष्ट्रा चाहता है क बीटा अपने माँ का कोख भर क गहतराष्ट्रा क राज परिवार का वंश आगे बढ़ाये

तभी सामने से शमशेर महल मुख्या द्वार पर आता है और उसके नज़र षुरूश्ती से मिलती है

Shamshera:Maine और फल और कपडे का इंतेज़ाम कर लय रानी षुरूश्ती कोई कमी हो तो बताये

शमशेर क ऐसे खा जाने वाली नज़र को अपने शरीर पर प् कर षुरूश्ती लज्जा जाती है और निचे से वस्त्र उठा कर कमला को देते हुए

shurushti:nahi आज संध्या तक क लये सामान हमारे पास है काम नहीं पड़ेगा

षुरूश्ती आखे चुरा कर शमशेर से बात कर रही थी जिसे कमला ताड़ लेती है

Kamla:man me)Raat की चुदाई दिन में शरमाई बड़ी आई महारानी

Shamshera:kamla वैध जी और सेनापति सोमनाथ का भोजन भेजवा दया ?

Kamla:ji युवराज भेजवा दया आपने क्या भोजन

शमशेर षुरूश्ती को देख मुस्कुराते हुए

shamshera:ab कमला रात से खाने का डिल हे नहीं कर रहा

kamla:aisa क्या खा लय था रात में जो हजम नहीं हुआ

ये सुनते हे षुरूश्ती की आखे बड़ी होगयी

शमशेर मुस्कुराते हुए

Shamshera:Nahi बास ऐसे हे मैं नहीं करता खाने का

Kamla:aap भी विवाह कर लो महाराज बलदेव की तरह फिर आपका मन भी ठीक रहेगा

Shamshera:bhut शैतान हो गयी कमला वैसे हमारे दूल्हे राजा कहा है

Kamla,dulha और दुल्हन दोनों सो रहे है रात भर्र क जगे हुए थे न वैसे आपने मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दिए युवराज

Shamshera:Shadi की बात ?

Kamla:ji हाँ

shamshera:ab डिल का दर्द किसे कहे जो मेरे सपनो की रानी है वो किसी और की है मेरी कभी नहीं हो सकती

Kamla:aap अपना प्रेम काम न होने देना सब मिल जायेगा

तभी कमला की नज़र राज माता जीविका पर पड़ती है और वो उठ कर

kamla:raaj माता आप कड़ी क्यू है बैठ जाए न

jeevika:tum बैठो और अपना काम करो में ठीक हु

Shurushti:ary माँ जी आइए आप भी बाँट दीजिये गरीबो में उपहार

Jeevika:nahi ठीक है मई अपने कक्षा में जा रही हु मेरा मन ठीक नहीं

ये कह कर जीविका अपने कक्षा में चली जाती है

Kamla:man me)ab अपने बहु और पोते की चुदाई की मिठाई बाँट ने में शर्म आरही ये क्यू नहीं कहती राजमाता .मज़ा तो उस दिन आएगा जब बलदेव और देवरानी क बेटे की मिठाई बांटेगी राजमाता जीविका

इतने में सेनापति सोमनाथ आजाता है

shamshera:Kaho सेनापति

सोमनाथ षुरूश्ती को घूरते हुए

somnath:yuvraj वो महाराज बलदेव क मित्र बद्री और श्याम आये है

Shurushti:jao उन्हें इज़्ज़त क साथ अंदर ले आओ

सोमनाथ जाता है दो घोड़ो पे सवार मेवाड़ क युवराज श्याम और उज्जैन क युवराज बद्री अपने मित्र बलदेव क विवाह की खबर सुनते हे भागे चले आये

Somnath:aap दोनों का स्वागत है गहतराष्ट्रा में युवराज

Badri:dhanywad सेनापति

somanath:aap दोनों आये हमारे साथ

बद्री और श्याम को ले कर महल में आता है सोमनाथ

Shamshera:khushaamdid

Somnath:yuvraj बद्री ये सुल्तान मेरे वाहिद क सुपुत्र है

Badri:hume ज्ञात है सेनापति

shyam:ab युवराज शमशेर को पूरी दुन्या जानती है इनके पिता क बाद

shamshera:shukria

Badri:waise मेरा मित्र बलदेव कहा है

Shamshera:somnath इनके नाश्ता पानी का इंतेज़ाम करवाओ

somnath:ji युवराज

Shamshera:han तो आप ने क्या पूछा

Badri:lagta है शहज़ादे का कान कमज़ोर है मैंने पूछा युवराज बलदेव कहा है

shamshera:aapne गलत पूछा युवराज अब बलदेव युवराज नहीं महाराज हो गए है महारानी देवरानी से विवाह क बाद

ये सुन का बद्री और श्याम का मुँह खुला का खुला था

Badri:matlab हमने आने में देरी कर दी

Shamshera:ji हाँ

Shyam:par आपने ये नहीं बताया बलदेव कहा है

shamshera:wo सो रहे है

Shyam,or रानी माँ देवरानी

Shamshera:Maharani देवरानी भी सो रही है

Badri:ab तो 3 बजने वाले है अब तक सो रहे है

Shamshera,dono 12 बजे हे सोये है ..सुहागरात दोनों माँ बेटे का लम्बा चला

Badri:Shahzade तमीज से अब वो पति पत्नी है

शमशेर हस्ते हुए

Shamshera:mazak कर रहा था mai..tum लोग चाहो तो बलदेव को उठा सकते हो उस कमरे में सो रहा hai..mai जाता हु मुझे बहुत काम है

shyam:kaha जा रहे हो शहज़ादे

Shamshera:wo अब शादी तो दूल्हा दुल्हन कए गधा मज़दूरी हमारी लग गई पुरे गहतराष्ट में खाना और कपडा बांटना है

ये कह कर शमशेर उठ कर चला जाता है कुछ देर में दसिया बद्री और श्याम क खाना लाती है और बद्री और श्याम खाना खा लेते है

Badri:yaar श्याम ये बलदेव ने मेरा फिर डिल तोड़ दया

Shyam:ab क्या हुआ बद्री

Badri:Hum बचपन से जवानी तक साथ रहे और आज हमारे अनुपस्थिति में बलदेव ने विवाह कर लय

Shyam:ho सकता है उसकी मज़बूरी हो

Badri:kya मज़बूरी बलदेव अगर हमे अपना मंटा तो हमे सूचित करता विवाह से पहले

Shyam:majburi हो सकती है मई बलदेव को जनता हु वो हम दोनों को अपना भाई मंटा है ,हो सकता है देवरानी मौसी क कहने पर उसने जल्दबाज़ी कर दी

Badri:han सही कहा तुमने कोई भी औरत आये वो दोस्त को विवाह क बाद छीन लेती है चाहे वो माँ हे क्यू न हो

shyam:mausi ऐसी नहीं है बहुत सुलझी हुई है वो कभी बलदेव को हमसे अलग नहीं करेगी

badri:ho सकता है देवरानी मौसी को लगा हो क बलदेव हम दोनों को मंटा है और उनको लगता हो क बलदेव सिर्फ उनको हे प्यार करे किसी और को नहीं आखिर देवरानी मौसी भी एक स्त्री है

shyam:bass करो बद्री इस लये मेरी तुमसे लड़ाई होती है तुम इतना मत सोचो

Badri:ab क्या सोचना देवरानी मौसी अपने बेटे से विवाह कर हमसे हमारा मित्र छीन ली

shyam:chalo फिर हम बलदेव से बात करेंगे मई पूछता हु

Badri:kya पूछोगे .

श्याम उठ कर बलदेव जिस कक्षा में सो रहा था उस तरफ जाता है और बद्री उसके पीछे आता है

श्याम दरवाज़ा पर हाथ लगता है वैसे हे वो दरवाज़ा खुल जाता है

Shyam:Baldev...Baldev..

Badri:ary तुम भी श्याम बचे हे रहोगे अंदर चलो सीधा कौन सा वो देवरानी मौसी क साथ सो रहा है

Shyam:han मेरे ध्यान में नहीं था

badri:shamshera ने तो कहा था न मौसी ऊपर सो रही है तुम बचे हे रहोगे श्याम

बद्री श्याम को धक्का देता है दोनों एक साथ अंदर घुसते है जिसकी आवाज़ सुन कर बलदेव जो गहरी नींद में सो रहा tha.wo फाटक से उठ कर अपने पास राखी तलवार उठा लेता है

Baldev:kaun

श्याम और बद्री बलदेव को नींद में नंगी तलवार लिए देख एक दूसरे को पकड़ लेते है

Badri:Baldev हम है ..बद्री और ये श्याम

बलदेव की आखे भी पूरी नहीं खोल रही थी धीरे से वो अपने आखे फाड़ते हुए देखता है तो उसके होठो पर मुस्कराहट फ़ैल जाती है

और तलवार बगल में फेकता है

Baldev:ary तुम दोनों ..ने तो डरा हे दया था ऐसे भी भला शोर कर क आता है कोई

Shyam:ye सब बद्री क वजह से हुआ धक्का दे कर मुझे अंदर भेजा

बलदेव उठ कर खड़ा होता है

Baldev:aao मेरे भइओ

श्याम और बद्री बलदेव से जा कर लिपट जाते है

श्याम और बद्री एक साथ कहते है "विवाहित जीवन की हार्दिक शुभकाममनाये आपको मेरे मित्र बलदेव"

Baldev:dhanyawad ..आओ बैठे पलंग पर

Badri:humne तुम्हे जगा कर परेशां तो नहीं क्या न

Baldev:aisa क्यू कह रहे हो और तुम दोनों झगड़ा करते हुए क्यू आये

shyam:Baldev इस बद्री का दिमाग ख़राब है सोचता है विवाह क बाद तुम मौसी क हो जाओगे और मौसी तुम्हे हम दोनों से दूर कर देगी

बलदेव मुस्कुराते हुए कहता है

"भइओ तुम्हारी भाबी देवरानी ऐसी नहीं है"

Badri:to फिर विवाह में हमे क्यू नहीं सम्मलित क्या

ये बात सुन कर बलदेव उठ कर खड़ा होजाता है और बद्री और श्याम क तरफ अपना पीठ कर

Baldev:Tum दोनों जानते हो ये विवाह जो मेरी और देवरानी की हुई वो आम विवाह नहीं है हमने समाज क विरुद्धा जा कर एक दूसरे से नाता जोड़ा है

Badri:par बलदेव अगर तुम एक दिन और रुक जाते तो हम भी देख लेते तुम्हे दूल्हा बनते हुए

Baldev:Badri तुम्हे ज्ञात नहीं है मैंने किस तरह गहतराष्ट्रा क मुख्या गैन को इस विवाह की अनुमति ली और बदले में गहतराष्ट्रा को बादशाह शाहज़ेब की चुंगल से छेना है

फिर बलदेव पूरी कहानी बता देता है कैसे उसने झट पैट में सात फेरे ले लय अपने माँ क साथ

Shyam:Koi बात नहीं बलदेव वैसे एक रात भी रुक जाते तो हम पहुंच जाते

Badri:Tumhe जल्दी सन्देश देना चाहिए था जब तुम्हारे मन में ऐसे हे विवाह करना था बिना सेज सम्बन्धिओंको बुलाये

Baldev:Tum दोनों जानते हो मेरे मां देवराज ने मुझे थप्पड़ मार दया था जब में देवरानी का हाथ उनसे मांगने गया था वो कभी भी अर्चन बन सकते थे इसलिए उनके जा रहते हुए मैंने विवाह कर लय

shyam:par मौसी क भाई उनके पिता सम्मान है उनके आज्ञा क बिना सात फेरा लेना उचित नहीं होता

Baldev:bhagwan ने ाचा हुआ किन्ही वजह से कुबेरी में रोक लय अगर वो कल आते तो शायद आज में और देवरानी पति पत्नी नहीं होते

Badri:bhut चतुर हो बलदेव अपने मां को धोका देकर उनके बहिन से ब्याह रचा लय

Baldev:ye धोका नहीं प्रेम है बद्री

और तीनो है पड़ते है

Shyam:waise अब तक सो रहे हो बहुत थके हुए भी लग रहे हो बलदेव आज से पहले कभी इतना थका हुआ तुम्हे नहीं देखा

Badri:shyam तुम बचे हे रहोगे आज से पहले सुहागरात भी तो नहीं मनाया था बलदेव ने

बलदेव चुप चाप शर्मा कर मुस्कुरा रहा था

Baldev:man me)aaj क पहले ऐसी घोड़ी भी तो नहीं मिली थी चढ़ने देवरानी जैसी

Shyam:jab तुम्हारा हाल ये है तो ऊपर मौसी का क्या हाल होगा

Baldev:bass इसमें कोई गलती मेरी नहीं सब देवरानी की है सोने नहीं di..ye कह कर बलदेव अपने मित्र क सामने अपने पत्नी की शिकायत कर रहा था

Badri:Hum तुम्हे अचे से जानते है कितने शरीफ हो तुम बलदेव मौसी नहीं सोने दी या तुमने हे नहीं सोने दया

Baldev:tum दोनों मुर्ख हो क्या ..ये मौसी मौसी की क्या रत लगा राखी है अब वो तुम दोनों की भाबी है महारानी देवरानी

Badri:bhai अब हमारे जीभा पर ये बैठ गया है मौसी हे निकलता है

Baldev:Badri तुम तो खुद बचे हो श्याम को कहते हो जब तुम्हे पता है अब वो मेरी पत्नी है तो भाबी कहो तुम भाबी माँ कहने की बात हुई थी

बद्री अपने आप को बचे कहने पर चिढ जाता है और उठ खड़ा होता है और कक्षा से बहार जाते हुए

Badri:ab बलदेव हमने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा क तुम अपनी माँ को अपनी दुल्हन बना लोगे..

ये कह कर भागने लगता है और बलदेव गुस्से से उठ खड़ा होता है बद्री को पकड़ने क लये

Baldev:teri तो बद्री क बच्चे

Shyam:jane दो बलदेव बद्री बुद्धू है खुद को तेज़ समझता है

Baldev:theek है अब वो मेरी पत्नी है देवरानी तुम दोनों की भाबी माँ है उनकी इज़्ज़त करोगे तो में तुम दोनों को अपना मित्र मानूंगा

Shyam:Baldev तुम हमारे परम मित्र हो भाबी माँ भी ये बात जानती है और मुझे पता है वो हम तीनो की दोस्ती खूब बढ़ाएगी और अपने देवर को मानेगी

बलदेव मुस्कुरा देता है

Baldev:Theek है मई स्नान कर क तैयार हो जाता हु फिर तुम दोनों को तुम्हारी भाबी माँ से भी मिलवाता हु और सेवा भी करवाता हु

Shyam:theek है में देखु ये बुद्धू बद्री कहा गया

श्याम बहार निकल कर बद्री को खोजने लगता है

बहार कमला अब भी लोगो को कपडे और खाना बाँट रही थी

तभी षुरूश्ती अपने कक्षा से निकल कर आती है

shurushti:ary कमला तुम अब तक कर रही हो शमशेर कहा है

Kamla:wo युवराज शमशेर बहार भोज बाँट रहे है कई पंडित आये है भोजन करने

Shurushti:tumne देवरानी को कुछ खिलाया की नहीं

Kamla:nahi

shurushti:tu भी न कमला मेरी बहु रात भर की चूसी छाती है कुछ खिला दो पीला दो आज रात में कुछ हिम्मत कर पायेगी नहीं तो वो कमज़ोर हो जाएगी

Kamla:ab में सोचो नींद भी तो ज़रूरी है इसलिए नहीं उठाया

षुरूश्ती:4 बजने वाले है जाओ तुम ये सब मुझ पे छोर दो राधा ो राधा

राधा भाग क आती है

Shurushti:kuch देश को इस काम में लगाओ राधा

Kamla:theek है में उठती हु महारानी देवरानी को

कमला सीढिआँ चढ़ती हुई ऊपर जाती है तो सबसे पहले सीडीओ क सामने वाले कक्षा में बंधे हुए राजा राजपाल क ऊपर नज़र पड़ती है कमला देखती है राजपाल का मुँह कपडे से बंधा है और अपने आखे बंद कए वो सो रहा है कुर्सी पर बंधा हुआ

Kamla:Namardo का यही हाल होता है

कमला बगल वाले कक्षा में जो बलदेव का कक्षा था उसके दरवाज़े पे खटखटाई

"महारानी देवरानी ...महारानी देवरानी"

गहरी नींद में सो रही देवरानी क कानो में आवाज़ गूंजने लगी पर देवरानी को इतने मीठी नींद आज 18 साल बाद नसीब हुआ था और वो आँख खोलना नहीं छह रही थी

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कुछ देर बाद देवरानी धीरे से अपनी आखे खोलती है तो उसके अंग अंग में दर्द होरहा था देवरानी अपने हाथ को उठाना छह रही थी पर उठ ता नहीं पेअर को उठाना छह रही थी पर दर्द से वो भी नहीं उठ प् रहा था

Kamla:Maharani उठ जाए कुछ खा कर फिर सो जाइये नहीं तो आप कमज़ोर हो जाओगे

Devrani:man me)Kamla की बची यहाँ मेरे हाथ पेअर काम नहीं कर रहे उफ़ aaah..ye बलदेव भी न चूर चूर कर दिया हड्डिया



देवरानी पूरी ताक़त से उठ कर बैठती है और अपने साड़ी ठीक कर क दरवाज़ा खोलने उठ टी है क उसका एक पेअर मुद जाता है और वो फिर से बैठ जाती है बिस्तर पर अपने पेअर को खींच कर सीधा कर क फिर उठ थी है

Devrani:aaah उफ़

कराहते हुए उठ कर कड़ी होती है और अपने एक पेअर को दबा कर धीरे धीरे चलने लगती hai.jaise जैसे देवरानी कदम बढाती उसके जोड़ो में और योनि में एक भयंकर दर्द उठ ता कुछ देर में वो दरवाज़े तक पहुंच कर वो दरवाज़ा खोलती है

कमला महारानी क आखो की लाली और बदन की खुमारी देख कर समझ जाती है देवरानी की छूट का बहुत बलदेव ने उतार दया है

Kamla:Maharani कब से उठा रही हो आप खोल हे नहीं रही अभी तो नहीं है महाराज अंदर तो फिर इतना देर क्यू

ये कह कर कमला अपना जीभ अपने होठ से चाट टी है

Devrani:kamla की बची तुझे हर ाः मजाक सूझता है देवरानी धीरे से चल कर अंदर आती है

Kamla:Maharani कैसी रही आपकी सुहागरात आपके आगे का कुवा और पीछे की खाई में तो बढ़ आगयी होगी बलदेव क पानी से

Devrani:harami..agar तुझे में अपनी बहिन नहीं मानती तो तेरा गाला घोट देती अगर कोई और दासी होती तो ..यहाँ मेरी जान निकल रही है और तुम..

Kamla,oh हो अब कोई दासी ऐसी नहीं होती जो आपके जीवन में सुख क लये अपने जान दाव पर लगा कर आपका साथ देती अपने हे बेटे से प्रेम मिलान क लये आपका

Devrani:han अगर तुम साथ नहीं देती तो शायद में इस दर्द को अपने जीवन के कभी महसूस नहीं कर पति धन्यवाद् कमला

ये कह कर देवरानी अपने बहे फैलाती है और कमला अपने महारानी का ये रूप देख बास्ते हुए गले लग जाती है

Kamla:Maharani देवरानी मैंने सपने में नहीं सोचा था आप मेरे जैसी टुच्चा दासी को गले लगा लोगी

Devrani:tum मेरी बहिन हो तुमने मेरा जीवन बना दया आज मेरे पास एक ाचा प्यार करने वाला पति है जो मेरे बिस्तर रोज़ गरम रखेगा और साथ हे मई गहतराष्ट्रा की महारानी बन गयी मेरा हर सपना पूरा होगया

देवरानी क आखो से ासु टपक पड़ते है

Kamla:bass बास एक रात अपने प्रेमी बलदेव से गुलछर्रे क्या उड़ाई आप को लगता है सपने पुरे हो गए अभी तो आपको महाराज खूब तड़पवायेंगे आपकी खाई और समुन्दर दोनों को भर देंगे ..जैसे रात में कए

कमला अलग होती है

devrani:kamini बास आगे का पीछे का मुझे पसंद नहीं था

Kamla.,aap ये सपने पुरे होने की बात कर रही हो आपका एक और सपना है आपको एक बेटी चाहिए थी na..or पीछे से करने में क्या बुराई है?

Devrani:ab तुम मेरी बहिन जैसी हो तो सुनो मैंने आज तक वह नहीं क्या और रात में तुम्हारे जीजा बलदेव ने मेरी आगे से हे खटिआ कड़ी कर दी की पीछे से करने की हिम्मत नहीं हुई

Kamla,oh हो तो महारानी चाहती थी पर थकने क वजह पीछे क समुन्दर में गोते नहीं लगाने दिए महाराज को

Devrani:nahi रे कमला मई नहीं चाहती वो तो तुम्हारे जीजा जी ज़िद्द कए हुए थे

Kamla:Maine तो आपके पिछवाड़े में उनकी बहुत गहरी नज़र देखि है बच क कुँवारापन तोड़ न दे जीजा जी

देवरानी बचे की तरह नखरे से मुँह फूला कर कहती है

"मई नहीं दूंगी उसे पीछे से"

Kamla:bhut नखरे है महारानी नहीं डौगी तो मेरे जीजू जबरदस्ती मार लेंगे पिछवाड़ा

Devrani:chal भाग अब मई नाहा कर तैयार हो जाऊ

कमला देवरानी क डांटने पर भागने लगती है और दरवाज़े पे खड़े हो कर

Kamla:q महारानी अपने बेटे का हथियार याद कर क पनिया गयी हो तो भेज दू महाराज बलदेव को अपने रानी माँ क पास

Devrani:abhi बताती हु कमला की बची

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देवरानी अपने साड़ी ठीक कर क कमला क तरफ आने लगती है

kamla:dekhiye कैसे आपका यौवन हिल कर "हाँ" कह क मेरा उत्तर दे रहे है पूरा शरीर खिल उठा है आपका

Devrani:tum मेरी बुराई कर रही हो क ..

Kamla:Maharani एक बात और करनी थी आप कहो तो अभी कहु या बाद में

Devrani:jab कहना है तो कहो

कमला क पास आयकर चौखट पर देवरानी कड़ी थी

Kamla:aap तो रात में बहुत चीखी होंगी,

Devrani:Han

Kamla:bhut ज़ोर चिल्लाई होगी

Devrani:han चीखी भी चिल्लाई भी बलदेव को तो तुम जानती हे हो

Kamla:royi भी होगी ासु से

devrani:han बाबा रोई भी ासु से और गिरगिरा क भीक भी मांगी बलदेव से झटके धीरे करने क lye..muaafi भी मांगी ...और बलदेव को खूब ज़ोर ज़ोर से अपने माँ की छूट चाटने क लये भी कही और बुर पेलने क लये भी अब खुश

Kamla:theek है तो आप वचन दीजिये आप महाराज को नहीं कहेंगे कोई बात कहुगी तो

Devrani:tum पहले मेरी बहिन हो बाद में साली हो बलदेव की बोलो डरो मत में तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगी

कमला देवरानी का हाथ पकड़ कर बहार लती है और बगल क कक्षा क खिड़की क परदे को हटा कर अंदर देखने को कहती है

Devrani:kya है अंदर

Kamla:aapki हर चीखे ..ासु से रोना ..गिरगिराना ..मुआफी माँगना ..महाराज को ज़ोर से करने क लये उकसाना ये सब ये सुन रहे थे

देवरानी तुरंत कमला को पीछे कर खिड़की क परदे को हाथ में पकड़ लेती है

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देवरानी क पेअर क नीचे से ज़मीन खिसक जाती है क्यू क अंदर उसका पहला पति राजा राजपाल बंधा था और गहरी नींद पर कुर्सी पैर सो रहा था

देवरानी का शरीर सिहर उठ ता है और कंपनी लगती hai,devrani को वो हर बात याद आती है जब वो बलदेव से चुड़ते समय बोली थी

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Devrani:man me)hey भगवन इन्होने पूरा सुन लय इन्होने मेरे रोने चिल्लाने और गिडगिराने क साथ बलदेव से में इतना लैंड मांगी एक भिखारी की तरह वो भी यहाँ तक मेरे छूट में अंदर जाते बलदेव क लैंड की ठप्प ठप्प और पछ पछ की आवाज़ भी आरही थी बहुत ..ये कैसे होगया

Kamla:kya हुआ महारानी

Devrani:kamla मुझे समझ नहीं आरहा है क ये कैसे हो गया राजपाल ने सब सुन लय अब में राजपाल का सामना कैसे करुँगी

Kamla:Maharani आप उसी तरह सामना करो जब राजा राजपाल आपको छोर कर क षुरूश्ती क साथ मज़े करते थे और आप अकेली तड़पती थी

Devrani:nahi अब वो नीच है इसका मतलब मई भी हो jau..kaun बांध दया था इसे हे bhagwan..or वैसे भी मेरे और बलदेव क बीच का प्रेम सच्चा है और मई नहीं चाहती कोई ओरे हम दोनों की प्रेम क्रीड़ा को सुने भी

Kamla:maharani अआप चिंता मत कीजिये आपको मैंने खून क ासु रट देखा है आज रात भर रोया है राजपाल में जब खाना नाश्ता देने आई तो इसे तड़प तड़प क रट हुए देखा है

Devrani:wo सब तो ठीक है बदले की भावना अलग है पर कमला मुझे इस घर में रहना है में महारानी हु अब यहाँ की और बलदेव क पिता है ये मेरे ससुर हुए न..

देवरानी अपने हाथ से पर्दा छोरती है और अपने कक्षा की ओरे बढ़ते हुए

Kamla:Pure घर में क्या पुरे राज्य में सबको पता है क कल रात आपका आपके बेटे क साथ सुहागरात था और सब जानते है क सुहागरात में चुदाई हे होती है ..क्या आप घर में अपने पुराणी सास राज माता जीविका को मुँह नहीं दिखाओगी जिसकी पहले बहु थी आप उनको भी तो पता है उनकी बहु अब बहु नहीं रही अब किसी और क साथ गुलछर्रे उदा रही है विवाह कर वो भी अपने बेटे और उनके पोते क साथ

Devrani:kamla पहले वो मेरी सास थी तो अब भी मेरी सास हे है ..पहले बहु थी उनकी और अब पॉट बहु हु ..मुझे इस गहतराष्ट्रा पर राज करना है और अपने घर को स्वर्ग से सुन्दर बनाना है आपसे मतभेद पैदा होंगे इस से

Kamla:ye तो आप अपने बेटे बलदेव से पूछिए उन्होंने इन्हे यहाँ बंधवाया

Devrani:uff अब में क्या samjhau..Me नहीं चाहती अब हमारा कोई शत्रु बने कमला ..और वैसे भी अगर ये राजपाल कारावास में होता तो हमे कौन रोक पता इसे पता चलता हे क देवरानी बलदेव विवाह कर क साथ सोते है ..पर इस तरह नहीं..

Kamla:ab क्या कर सकते है महारानी जो हुआ सो हुआ बास आप ये समझो क आपका बदला पूरा हुआ

Devrani:mujhe घर को बांधना है तोडना नहीं आखिर बलदेव और में हे इस राज परिवार की उम्मीद है और वंश को आगे बढ़ाना हमारी ज़िम्मेदारी है

Kamla:han तो बढ़ाइए न महारानी आपने तो वो जड़ी बूटी खा कर बलदेव की पूरी म्हणत पर पानी फेर दी ..जब बलदेव को पता चलेगा क अआप बचा नहीं चाहती हो तो क्या असर होगा ?

Devrani:Me जानती हु कमला मेरे बलदेव को बहुत बुरा लगेगा पर मई उन्हें मन लुंगी क्यू क मई बिना राज माता जीविका और अपने ससुर राज पाल क आशीर्वाद और उनके अनुमति क बिना गर्भवती नहीं होउंगी

Kamla:hey भगवन बहिन समझो बलदेव टूट जायेगा ये सुन कर और क्या लगता है इतनी आसानी से राजपाल और बलदेव को आप मिलवा लोगी? और राजपाल इतनी आसानी से अपने बेटे को अनुमति दे देगा अपनी पहली पत्नी को गर्भवती करने का? क्या राजपाल कभी कह पायेगा क जाओ बीटा अपने मा को बिस्तर पर सुलाओ और हमारे राज वंश की बीज बो दो हमे वारिस दे दो?

Devrani:kahega सब मुमकिन है..

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Devrani,or में इस बात से भयभीत नहीं हु क क राजा राजपाल में मेरी चीखे सुन ली पर इस नामर्द राजपाल मेरे प्रेम और आनंद में निकले आहे मेरे बिस्तर से निकली गरम सिसकिर्या सुन ली जिसे सुन ने का इस नामर्द को कोई हक़ नहीं

Kamla:aapko पता है न कैसे आपके भाई देवराज जी ने आपके बेटे को थप्पड़ मारा था जब वो आपका हाथ माँगा था आपसे विवाह करने की इच्छा बताया तो क्या राजपाल मन जायेगा

Devrani:han इस बात का डर तो है कही मेरे भाई देवराज को ये बात पता चली क कल हमने विवाह कर लय बेटे बलदेव से तो वो कही गुस्से में आकर युधा न छेड़ दे

kamla:fir क्या होगा महारानी

Devrani:kamla अब मई दूध पीती बची नहीं और न पहले की तरह कमज़ोर हु अब में अपने सुहाग क लये युधा का बदला युधा से दूंगी और बलदेव को एक खरोच भी आये तो दुन्या में आग लगा दूंगी पर अपने पति बलदेव को छोड़ूंगी नहीं ..अगर भूरिया दीदी ने समझाया होगा देवराज को और वो समझ क मुझे अपना ले और बलदेव को अपना जीजू मान ले तो मई समझूंगी क देवराज मेरा भाई अन्यथा में भूल जाउंगी और मान लुंगी मेरा भाई मर्डर गया और कोई भाई नहीं मेरा

Kamla:dekhte है आप तो चिंता मत कीजिये महारानी सब ठीक होगा देखते है क्या होता है सुल्तान और देवराज जी कब आते है कुबेरी se..waise बहुत तड़पा है राजपाल

कभी ऐसा हाल नहीं देखा उसका

कमला है देती है

Devrani:Is नामर्द राजपाल को मेरी चीखे और काम कला में आरही हम दोनों क शरीर से निकलती ध्वनियों को सुन पता चल गया होगा क एक मर्द स्त्री को बिस्तर में कैसे खुश रखता है

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देवरानी मुस्कुरा कर पलटती है कमला उसे मुस्कुराते हुए देख अपने मुँह पर हाथ रख लेती है

Devrani:Baldev ने इस नामर्द को अपनी मर्दानगी का अहसास करवा दया साथ हे मेरी उत्तेजना और मेरी वासना सिर्फ बलदेव शांत कर दया ये भी बता दया

Kamla:kya बात है महारानी देवरानी ये हुई न बात एक शेरनी की जैसी

Devrani:Theek है तुम जाओ मई स्नान कर भोजन करने निचे आती हु

Kamla:jo आज्ञा महारानी

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 105

Devrani:Is नामर्द राजपाल को मेरी चीखे और काम कला में आरही हम दोनों क शरीर से निकलती ध्वनियों को सुन पता चल गया होगा क एक मर्द स्त्री को बिस्तर में कैसे खुश रखता है

देवरानी मुस्कुरा कर पलटती है कमला उसे मुस्कुराते हुए देख अपने मुँह पर हाथ रख लेती है

Devrani:Baldev ने इस नामर्द को अपनी मर्दानगी का अहसास करवा दया साथ हे मेरी उत्तेजना और मेरी वासना सिर्फ बलदेव शांत कर दया ये भी बता दया

Kamla:kya बात है महारानी देवरानी ये हुई न बात एक शेरनी की जैसी

Devrani:Theek है तुम जाओ मई स्नान कर भोजन करने निचे आती हु

Kamla:jo आज्ञा महारानी

Devrani:Ary एक बात तो भूल हे गयी ..कमला बिस्तर क चादर धो देना और नया चादर बिछा देना

Kamla:theek है अभी ले जाती हु

कमला कक्षा में अंदर आती है उसके पीछे देवरानी धीरे धीरे चल कर आरही thi.kamla का नज़र बिस्तर पर और पास रखे चादर पर पड़ते हे आखे चौड़ी हो जाती है

Kamla:hey भगवन ये तो पूरा लाल लाल हो रखा है

देवरानी ये सुन कर लज्जा कर अपना सर निचे कर लेती है

Devrani:le जाओ अब बाते मत बनाओ

Kamla:han ले जाउंगी धो दूंगी सब रंग रसिया करे और में सब क कामलीला क बिस्तर धो

Devrani:sab से मतलब ..तुम भी तो वैध जी पर चढ़ी रहती हो

Kamla:Sab से मतलब ये रात शमशेर ने भी रानी षुरूश्ती क जवानी लूट ली

देवरानी ये सुन कर आश्चर्यचकित होते हुए

Devrani:Kya !

Kamla:Han महारानी रानी षुरूश्ती तो इधर उधर मुँह मारती रहती है आप वो भी बेचारी क्या करे उनके पास आपकी तरह मुस्टंडा बीटा तो नहीं है जिस से प्यास बुझवा ले

ये सुन कर देवरानी को अपने बेटे बलदेव पर बहुत गर्व महसूस होता है

Devrani:ja अब बाते मत बना

Kamla:han जाती हु और दूसरे रात क लये चादर बिछा देती हु ताके फिर से दोनों खून की होली खेलो बाप रे इतना खून

देवरानी तो शर्म से पानी पानी हो जाती है

कमला सब खून क धब्बे वाले वस्त्र और चादर उठा लेती है और जाने लगती है

Kamla:or महारनी अपने गले पर जो ये प्यार क निशानी है उसको छुपाना कही आपके सास षुरूश्ती न देख ले हेठी

देवरानी हस्ते हुए

"चल भाग यहाँ से कामिनी"

कमला सब कपडे ले कर निचे आजाती है और देवरानी ऊपर नहाने चली जाती है

इधर बलदेव स्नान कर क बहार आता है जहा बद्री और श्याम बैठे थे

Baldev:kya बाते हो रही है

Badri:pure गहतराष्ट्रा में तो आप क और आपकी माँ क ब्याह की बाते हो रही है

ये कह कर बद्री हसने लगता है और श्याम और बलदेव भी है पड़ते है

Baldev:baate करने वाले को करने दो हमने प्यार क्या है चोरी नहीं ki..chalo बहार टहलते है

बद्री और श्याम उठ कर बलदेव क पीछे चलने लगते है

shyam:ye बात मुझे अछि लगी क तुम गहतराष्ट्रा वासिओ को वस्त्र और भोजन करवा रहे हो

Badri:han भाई अब माँ बेटे क जोड़ी को स्वीकार कए है इस राज्य क लोग उसके बदले में तो ये कुछ नहीं

Baldev:Apne प्रजा का आशीर्वाद हमेशा लेते रहना चाहिए इस से राज्य की उन्नति होती है

Badri:chalo उद्यान क तरफ घूमते है

Baldev:chalo फिर उद्यान में हे

Badri:Baldev एक बात कहु ये शमशेर मुझे कुछ ठीक नहीं लगता

Baldev:aisa क्यू

Badri:bass वो मुझे थोड़ा ठरकी लगता है महल में स्त्रीओ को घूरते देखा है

baldev:hahaha वो ठरकी तो है पर वो भी किसी क प्यार में पागल है

Badri:kiske प्यार में

Baldev:man me)ab कैसे बताऊ क शमशेर अपने माँ मल्लिका इ जहाँ भूरिया क प्यार में पागल है

Baldev:bass समय आने पर हे वो पता चलेगा

Shyam:tum हमेशा घुमा क बात करते हो बलदेव

Badri:ary वो देखो रथ

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Baldev:lagta है सुल्तान मेरे वाहिद आगये

Shyam:Mujhe भी मिलना है सुल्तान से उनके बहुत चर्चे सुने है

Badri:shyam तुम बचे नहीं हो युवराज हो मेवाड़ क थोड़ा सोच समझ क बोलो

Baldev:chup रहो तुम दोनों हम महल की ओरे चलते है

Badri:chalo भाई अब तुम्हारे मां देवराज जी भी तो आये होंगे

Shyam:ab मां कहा वो तो साला हो गया बलदेव का

तीनो है पड़ते है और महल की ओरे जाने लगते है

Baldev:aaram से चलो उन्हें हमारी प्रतीक्षा करने दो अब हम युवराज नहीं गहतराष्ट्रा क महाराज है

महल क पास सुल्तान मेरे वाहिद और देवराज का काफिला आकर रुक जाता है और कुछ सैनिक घोड़ो से उतर कर अपने तलवारे निकले कर खड़े हो जाते है तभी एक रथ में से महाराज देवराज सिंह जी बहार निकलते है जिसे देख कर गहतराष्ट्रा क सैनिक सोमनाथ को खबर देते है है और कुछ देर में सोमनाथ आजाता है

Somnath:aap सबका स्वागत है महाराज देवराज सिंह जी

Devraj:Dhanywad सेनापति सोमनाथ

Somnath:humne गहतराष्ट्रा से शाहज़ेब क सैनिको मार भगाया

Devraj:or मैंने और सुल्तान ने शाहज़ेब को दिल्ली का रास्ता दिखा दया अब कुबेरी हमारा है

Somnath:wah ये तो बहुत ख़ुशी की बात hai,aayiye महाराज महल में चले

तभी सामने से शमशेर जल्दबाज़ी में अपने लम्बे कदम बढ़ाते हुए

Shamshera:khushamdid महाराज देवराज सिंह जी

devraj:dhanyawad शहज़ादे शमशेर

shamshera:aap सबको बधाई हो गहतराष्ट्रा फ़तेह की

devraj:aapko भी कुबेरी फ़तेह की

shamshera:aap लोग खड़े क्यू है अंदर चलिए विश्राम कीजिये और अब्बा जान कहा है

देवराज अब मायूस हो जाता है

devraj:shahzade वो सुल्तान घायल हो गए राजा रतन सिंह दुवारा पीछे से वॉर करने से

Shamshera:kya ..अब उनकी ताब्यात कैसी है

Devraj:Ab वो ठीक है उनकी इच्छा है क वो पारस जाये इसलिए हम यहाँ रुक नहीं सकते

देवराज तभी अपने बगल में महल की नाली में बहते पानी को देखता है जो लाल था



Devraj:Shahzade ये नाली का रास्ता कहा से आता है

Shamshera:Ye तो स्नानघर से अत है जो निचे है जहा पर राज परिवार का वस्त्र धोया जाता है

Devraj:somnath अभी कौन वस्त्र धो रहा है उसे भेजो

Shamshera:or हाँ कुछ खाने पीने का इंतेज़ाम करो सेनापति

Somnath:jo आज्ञा महाराज

Devraj:ye खून का रंग है क्या शमशेर

Shamshera:maharaj नहीं हो सकता है कच्चे कपडे का रंग का छूट रहा हो

तभी वह पर बलदेव क साथ बद्री पहुंच जाते है

Baldev:namaskar आईये आईये

बलदेव मुस्कुराते हुए अपने मां देवराज का स्वागत करता है

Devraj:Baldev मेरी बहिन देवरानी कहा है

Baldev:andar चलिए उनसे भी मिल लीजिये

Devraj:nahi सुल्तान मेरे वाहिद की हालत ठीक नहीं है देवरानी को बुलवाओ

Baldev:sipahio देश से कह कर देवरानी को बुला लो कह दो उनके भैया आये है

Devraj:ye क्या बदतमीज़ी है ..बलदेव

तभी कमला आजाती है

Kamla:maharaj देवराज आपने याद क्या

Devraj:ye तुम किसके वस्त्र धो रही थी जो इतने रक्त नाली में बह रहे है

कमला एक बार बलदेव को देखते हुए

Kamla:wo ..ो महारानी देवरानी क

Shamshera:sipahio कुर्सी लाओ हमसब क बैठने क लये और सोमनाथ से कहो जल्दी से नाश्ता लगवाए

Devraj:shahzade शमशेर मुझे कुछ बात करनी है बलदेव से अकेले में

Shamshera:theek है देवराज जी आओ बद्री और श्याम इस तरफ

बलदेव अपने मां देवराज क पास जाता है

Baldev:Kahiye क्या बात करनी है

देवराज हलके से कांपते हुए होठो से

Devraj:wo बात ये है क बलदेव

Baldev:kya बात है

Devraj:maine ये निर्णय क्या है क तुम्हारी और तुम्हारी माँ देवरानी का विवाह हो जाये

बलदेव ये सुनते हे ज़ोर से हसने लगता है ठहाको की ाआवाज़ से दूर खड़े शमशेर बद्री और श्याम भी बलदेव को देखने लगते है

बलदेव मुस्कुराते हुए अपने मां देवराज क पास जाता है और धीरे से

Baldev:Mama जी आपने आने में देर कर दी मैंने आपकी बहिन से कल हे सात फेरे ले लय



देवराज क हाथ पेअर सुन हो जाते है और उसके आखे लाल होजाती है गुस्से से जिसे देख बलदेव मुस्कुरा रहा था

तभी दोनों को सामने से महारानी देवरानी धीरे धीरे चल कर आते हुए दिखती है जो अपने पेअर को दबा दबा कर कदम रख रही थी



देवरानी भाई को और अपने बेटे बलदेव की ओरे चल कर आरही थी क अचानक उसके जांघ क नस में दर्द उठ ता है जो उसके छूट तक होने लगता है और देवरानी का एक पेअर मुड़ता है और वो गिरने वाली होती है क कमला आकर हाथ पकड़ कर सहारा देती है

Devraj:devraaaaani

Baldev:devraaaaaaani ..

दूर होने क वजह से बलदेव और देवराज सिर्फ चिल्लाते तब तक कमला अपना काम कर लेती है और देवरानी को गिरने से बचा लेती है

देवराज देवरानी को ऊपर से निचे तक देखता है और उसके आखो क निचे काळा घेरे गले पर काट क निशान पूरा जिस्म ऐसा था जैसे खेतो में काम कर क आयी है

Devraj:Devrani ये क्या हालत बना राखी हो ताब्यात तो ठीक है तुम्हारी

देवरानी कुछ बोलती उस से पहले कमला बोल पड़ी

kamla:ab महाराज 18 घंटे तक किसी भी स्त्री को घर में बंद रखेगा मर्द तो अधमरी हालत तो होनी हे है

ये सुन कर शमशेर और बद्री श्याम शर्म क मरे मुँह दूसरी तरफ फेर लेते है

Devraj:dasi तेरी इतनी हिमत भाग यहाँ से

कमला वह से भाग जाती है

बलदेव की ओरे गुस्से से देखते हुए

Devraj.:maine शायद गलत निर्णय ले लय था

तो बे कतनीउएड.
 
अपडेट 106

देवरानी कुछ बोलती उस से पहले कमला बोल पड़ी

kamla:ab महाराज 18 घंटे तक किसी भी स्त्री को घर में बंद रखेगा मर्द तो अधमरी हालत तो होनी हे है

ये सुन कर देवरानी लज्जा कर मुस्कुरा देती है

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ये सुन कर शमशेर और बद्री श्याम शर्म क मरे मुँह दूसरी तरफ फेर लेते है

Devraj:dasi तेरी इतनी हिमत भाग यहाँ से

कमला वह से भाग जाती है

बलदेव की ओरे गुस्से से देखते हुए

Devraj.:maine शायद गलत निर्णय ले लय था

Baldev:Saale साहब आपकी बहिन पीछे 18 घंटे मेरे साथ बिस्तर में थी और वो उस नाले में बेहटा लाल पानी हमारी रंगीन रात की निशानी है



देवराज ये सुन कर आग बबूला हो जाता है

Devraj:teri इतनी हिम्मत

देवराज अपने पुरे ताक़त से बलदेव को धक्का दे कर पीछे धकेलता है

Baldev:Aap अगर मेरे साला नहीं होते मां जी नहीं तो आज आपको बलदेव की ताक़त का अंदाज़ा हो जाता

Devraj:tum अभी बचे हो baldev..tumne मेरे अनुमति क बिना विवाह कैसे कर लय



देवराज बलदेव का गाला पकड़ लेता है

Baldev:uh यह मां जी मेरी मर्दानगी क बारे में जान न है तो अपनी बहिन देवरानी से पूछ लीजियेगा

देवरानी अपने बेटे और भाई में इस झड़प को देख जल्दी से उनके पास आजाती है

Devrani:chhoriye भैया ये आप क्या कर रहे है इनके साथ

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Devrani:ye मेरे पति है इनको आंच भी नहीं आने दूंगी मई भी एक राजपूतनी हु

देवराज बल्दवे का गाला छोरता है

Baldev:Mama जी मुझे भी इतना हे क्रोध आया था जब मैंने देवरानी का हाथ आपसे मांगने गया था और आपने मुझे थप्पड़ मारा था आज आपकी बहिन मेरी पत्नी है और हम कल रात भर सुहागरात मनाये अब बदला पूरा हुआ मैंने कहा था थप्पड़ का बदला लूंगा में

Devraj:devrani मैंने तो सुल्तान क समझने पर तुम दोनों क ब्याह का सोच लय था तुमने कैसे बिना अनुमति क सात फेरे ले ली

Devrani:bhaia मई क्या करती जहा जिस से मदद मांगी सब ने हमे नकार दया हमारे पास कोई दूसरा चारा नहीं था

Devraj:tum ये भूल गयी क पिता जी क जगह पर में हु बिना मेरे कन्यादान क तुमने सात फेरे ले लये

Devrani:wah भैया ! पिछले 18 साल से आपकी बहिन ज़िन्दी है या मर्डर गयी आपने कभी पूछने नहीं आये ..ऐसे अय्याश राजपाल से ब्याह करवा दी क में घुट घुट क जीती रही न तो मेरा भाई था न बाप जिसे में अपना दुःख batati..or आज में जब खुशीअ अपने बेटे क साथ ढूंढ ली तो आपसे आज्ञा ले कर करू

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देवराज ये सुन कर रो पड़ता है

Devraj:meri बहना मुझे पता है मैंने कभी तुम्हे पूछा नहीं पिता जी की मृत्यु क बाद मुझे तुम्हारा हाल खबर लेना चाहिए था परन्तु में क्या करता मई अंदर से दुखी था अपने पिता क मृत्यु क बाद अपने पिता क हथियार को मरना हे मेरे जीवन का लक्ष्य था आक्रोश में मैंने अपने दुखियारी बहिन को भूल गया मुझे क्षमा कर दो

अपने भाई को इस तरह रोटा गिरगिरता देख देवरानी से रहा नहीं जाता है और वो आगे बढ़ कर देवराज का हाथ पकड़ कर

Devrani:Bhaiya रोये nahi..ye समझ लीजिये क अब में बलदेव क बिना अब नहीं रह सकती

Devraj:meri बची देवरानी तुम्हारी ख़ुशी में हे मेरी ख़ुशी है और मई कुबेरी से यहाँ आया इसलिए क तुम दोनों को आशीर्वाद दे सकू पर यहाँ तो

Devrani:ab क्या कर सकते है जो हो गया सो होगया

Devraj:Mujh पर एक उपकार कर दो देवरानी

Devraj:Mai तुम्हारे बाप सम्मान हु मेरी इच्छा है क पारसी रिवाज़ से तुम्हारी शादी हो और हम और सुल्तान यही चाहते है ..मुझे अपने पापो का प्राश्चित करने दो देवरानी

Devrani:par भैया

devraj:maine तुम्हारी पहली शादी ऐसे से करवा दी जिस से तुम्हारे जीवन दुःख से भर गए इस बार तुम्हारी मन पसंद वर से ब्याह करवा क में धन्य हो जाऊंगा और तुम तो जानती हो हमारे पारसी रिवाज़ से हे ब्याह करना उत्तम माना जाता है

Baldev:ye क्या बात हुई अब ये मेरी पत्नी है

Devraj:Bhut बड़े मर्द बनते हो तो पारस आओ और हमारे रीती रिवाज़ क अनुसार वह क पहलवान को हरा कर देवरानी को अपनी बना लो मर्द की तरह ,छुप छुपा क मर्द ब्याह नहीं करते है

Baldev:meri मर्दानगी को मत ललकारो इसका खामियाज़ा भुगतना पद सकता है साले साहब

Devrani:Baldev जी रहने दीजिये न अब आपके मां की ीचा है मेरी और आपके सात फेरे देखने की तो

Devraj:Haha दर गया तुम्हारा पति देवरानी

Devrani:nahi भैया ये डरपोक नहीं मुझे पूरा विश्वास है क ये बड़े से बड़े पहल वैन को चित कर क मुझे अपनी दुल्हन बना कर ले आएंगे

Baldev:Devrani जब तुम्हारी यही चाहत है तो मेर भी एक शर्त है

देवरानी और देवराज क साथ अब shamshera,badri,shyam भी बलदेव की ओरे देखने लगते है

Baldev:me अगर पारस क पहलवान को हरा कर देवरानी को जीत गया तो सुहागरात का बिस्तर देवराज जी खुद बिछाएंगे खुद सेज लगाएंगे अपने बहिन और बहनोई क लये

ये सुन कर बद्री श्याम और शमशेर की हसी छूट जाती है और देवरानी का शर्म से बुरा हाल हो जाता है

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Devrani:dhatt ये भी न

धीरे से बलदेव की बात पर शरमाते हुए कहती है

देवराज को कुछ समझ नहीं आया क वो क्या कहे

Devrani:ab बोलिये भैया इनके प्रश्न का उत्तर

Devraj:ha है सजा दूंगा में खुद कक्षा और बिस्तर भी

ये सुन कर वह पर सबकी हसी छूट जाती है

Devraj:shahzade शमशेर अब हमे निकलना चाहिए पारस

Baldev:Mama जी थोड़ा विश्राम कर क जाते

Devraj:nahi हमारे पास समय काम है सुल्तान मेरे वाहिद का उपचार करना है पारस में ,देवरानी तुम अपने सामान बँधवाओ और चलो

Baldev:to मां जी बरात हम कब लाये दुल्हन को लेन क लये

Devraj:jab तुम चाहो दो दिन बाद ..

तभी बद्री और श्याम बलदेव क पास आकर

Badri:lo भाई ाचा हुआ हम दोनों आगये है इस बार हमे भइआ और भाबी की सात फेरे देखेंगे

Baldev:to करो बाजा बाराती की पारस से लाएंगे दुल्हनिया

Devraj:Behan देवरानी आप जा कर रथ में बैठे अपना सामान हम रखवा देंगे

तभी महल से जीविका और षुरूश्ती कमला और राधा आजाती है और बलदेव उनके पास जा कर हर बात बता देता है

देवरानी दूर कड़ी हो कर सबको प्रणाम करते हुए विदा लेती है

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देवरानी मुद कर रथ की ओरे जाने लगती है सोमनाथ महल से शमशेर और देवरानी क सामान उठवा कर घोड़ो पर लाड रहा था

और देवरानी रथ की ओरे अपने लचकते हुए गांड जो एक ऐडा से सुर में ऊपर निचे हो रहे थे

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बलदेव अपने नज़र एक पल क लये भी अपनी माँ क गांड से हटाने का नाम नहीं ले रहा था

Baldev:man me)Chudai क बाद तो गांड में और लचक हो गयी है माँ क इस बार सुहागरात में तो गांड क गुलछर्रे उदा दूंगा मेरी जान

कमला बलदेव को ताड़ लेती है देवरानी को घूरते हुए

kamla:man me)abhi चुदाई क्या है तो देवरानी चल नहीं प् रही है गांड मारने पर निशाना लगा रहा है कही गांड पेल दया तो मर न जाये देवरानी



तभी देवरानी पलट टी है और बलदेव क आखो में देख समझ जाती है

Devrani:Intezar करुँगी राजा

धीरे से कहती है

जिसे बलदेव सुन लेता है और मुस्कुराता है और आँख मारता है

Devrani:man me)pata नहीं क्या हल होगा मेरा जब ये मेरे पिछवाड़ा पलेगा

देवरानी जा कर रथ में बैठ जाती है

Shamshera:somnath सब सामान रखवा दया न

Somnath:ji युवराज

Baldev:apna ख्याल रखना शहज़ादे शमशेर और सुल्तान का उपचार करवाना भगवन करे सुल्तान जल्दी ठीक हो जाये

शमशेर अपने घोड़े पर सवार हो जाता है और देवराज अपने रथ में जा कर बैठ जाता है और सैनिको क साथ करवा आगे बढ़ने लगता है

देवरानी रथ में बैठे पीछे रत कए गए अपने बेटे द्वारा प्यार को याद कर रही थी और उसके आखो में ासु आजाता है अपने नए नवेले पति से बिछड़ने का

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देवरानी से रहा नहीं जाता और अपने रथ का पर्दा हटा कर बलदेव को देखती है तो बलदेव मुस्कुराते हुए आश्वासन देता है सब ठीक है

थोड़ी देर में हे शमशेर देवराज क साथ देवरानी आखो से ओझल हो जाती है

Baldev:ab चलो भाई में थोड़ा आराम कर लू

Badri:han भाई हम भी थके है

Baldev:somnath बद्री और श्याम क खाने और रहने का इंतेज़ाम करो

Somnath:jo आज्ञा महाराज

Baldev:ye वैध जी नहीं दिख रहे है सोमनाथ

Somnath:wo सुबह जंगल गए थे जड़ी बूटी लेने

Baldev:acha

Somnath:unka क्या महाराज जो ऊपर बंधे है

सोमनाथ बलदेव को राजपाल का याद दिलाता है

Baldev:ary ाचा हुआ याद दिला दया

somnath:kya करना है

Baldev:jo काम था वो हो गया उन्हें वापस महल से निकल कर कारावास में दाल दो

Somnath:jo आगया महाराज

बलदेव बद्री और श्याम क साथ महल में आजाता है और अपने कक्षा में बैठ कर बाते करने लगते है थोड़ी देर बाद सोमनाथ सीडीओ से चढ़ कर ऊपर आता है और बलदेव क बगल क कक्षा क ताला को खोलता है तो पता है राजा राजपाल नींद से सो रहा है

Somnath:raja राजपाल उठ जाओ

पर राजपाल उठने का नाम नहीं लेता सोमनाथ पास रखे पानी क बाल्टी को उठा कर उसके मुँह पर मारता है और राजपाल नींद से जाग उठ ता है

Rajpal:ah ोाः ये क्या बदतमीज़ी है सोमनाथ

Somnath:ab आपको कारावास में डालने को कहा है महाराज बलदेव ने

Rajpal:ye सब पापो का प्राश्चित करना होगा तुम सब को

somnath:muh का पट्टी खोलते हे बाद बाद करने लगे

सोमनाथ धीरे धीरे रस्सी खोलता है और सिर्फ हाथ बंधे हुए राजा राजपाल को खींचते हुए सीडीओ से निचे ले जाने लगता है

Rajpal:chhoro मुझे..

राजपाल की आवाज़ सुन कर बलदेव बद्री और श्याम कक्षा से बहार निकल कर निचे देखने लगते है

तभी षुरूश्ती और जीविका भी कमला और राधा क साथ बहार आजाती है

Rajpal:maa इसे कहो मुझे छोर दे

जीविका अपने बेटे राजपाल को इस हाल में देख रोने लग जाती है

बलदेव मुस्कुराते हुए सोमनाथ को इशारा करता है और सोमनाथ राजपाल को खींचते हुए बहार ले जाता है

जीविका रट हुए अपने वैशाखी से सीडीओ पद चढ़ने लगती है

Jeevika:baldev मेरे पोते

आखो में ासु लिए हुए अपने आँचल को उठा कर

jeevika:baldev भगवन क लये मेरे बेटे को क्षमा कर दे उसे छोर दो मेरे पोते

बलदेव सीडीओ से उतर कर निचे आता है और अपने दादी का हाथ पकड़ कर

Baldev:dadi आपको उस अय्याश राजपाल क लये भीक मांगने की ज़रूरत नहीं आपको शायद उसके कारनामे नहीं पता

Jeevika:beta जो भी हो वो मेरा बीटा है मई उसे तड़पते हुए नहीं देख सकती

जीविका रोटी बिलखती हुई कहती है

Baldev:Dadi क्या मई इस लिए आपके बेटे को छोर दू क वो मेरे और देवरानी क बीच में आये ? हम से दुश्मनी करे? हम पर हमला करे?

Jeevika:uski सजा मुआफ कर दे बीटा बलदेव मई वादा करती हु वो तुम दोनों क बीच कभी कोई अर्चन नहीं डालेगा

Baldev:dekhiye दादी मेरा मन तो इस अयाश राजपाल जो मेरी देवरानी को इतना सताया बरसो तक मुआफ करने का मन nahi..par आपकी पॉट बहु आपके पोते की पत्नी चाहती है क परिवार एक साथ रहे

Jeevika:to फिर छोर दो न मेरे बेटे को मई उसे समझा दूंगी

Baldev:sirf एक शर्त पर

jeevika:mujhe हर शर्त मंज़ूर है

baldev:Shart ये है क हम दो दिन बाद पारस निकलेंगे देवरानी से पारसी रिवाज़ से ब्याह कर क लेन और में चाहता हु क आपका बीटा अपनी भलाई चाहता है तो मुझे अपना बीटा और देवरानी को अपनी बहु स्वीकार कर ले

Jeevika:theek है मई उसे समझाना चाहती हु

Baldev:dadi ठीक nahi..Use तुम्हारे सर पर हाथ रख कर वचन लेना होगा और अपने बेटे और बहु को अपनाना होगा फिर मई उसे इस घर में एक बाप क रूप में रख सकता हु

Jeevika:mujhe थोड़ा समय दो मई मन लुंगी

Baldev:theek है आप जब चाहे कारावास में जाकर अपने बेटे से मिल सकती है..

Baldev:chalo बद्री और श्याम हम आराम करते है

तभी षुरूश्ती आती है और जीविका को ले जाती है ासु पोछते हुए और बलदेव ऊपर अपने मित्रो क साथ ऊपर कक्षा में चला जाता है..

पारस

पारस में सुल्तान मेरे वाहिद क चारो रानिया अपने पति का इंतज़ार कर रही थी

Naaz:baaji भूरिया बाजार गए पारस क बहुत दिन हो गए आज घूम आये

Hooriya:theek है इतने दिनों बाद तुम सब आये हो पारस चलो घूम लेते है में आती हु तैयार हो कर अपने हुजरे से

naaz:ji बाजी मई भी तैयार हो लू

भूरिया जैसी हे अपने हुजरे में कदम रखती है वो दर जाती है

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Hooriya:ary गुल शाह तुम

गुल shah:ji भाबी क्यू मई आनहि सकता आपसे मिलने

Hooriya:nahi वो अचानक से

गुल shah:bhabi बास आपकी यादे खींची ले आयी

भूरिया पास में रखे सोफे पर बैठ ते हुए

Hooriya:ab आप शादी कर भी लीजिये उम्र 50 होने वाली है आपको भी याद करने वाली हो जाएगी

गुल shah:Bhabi बास अब साल भर जुंग में होते है शादी कर भी लू तो वो परेशां हो कर भाग जनि है

Hooriya:aisa नहीं है आपके भाई मेरे वाहिद भी तो महिनी जुंग पैर बहार होते है हम कहा ऐसा सोचते कभी

गुल शाह उठ खड़ा होता है और भूरिया क कदमो क पास बैठ

Gulshah:wah भाबी जान बहुत अछि इतर लगाया है आपने

hooriya:nahi तो इतर तो नहीं लगाया

Gulshah:aap है हे इतनी खूबसूरत आपको इतर की ज़रूरत हे नहीं फिर भी आप

hooriya:aap अपने देवर से भी पर्दा करती है काम से काम हमे अपना नूरी चेहरा तो दिखाए

ये सुन कर भूरिया है देती है

अपने ऊपर का कला निक़ाब निकल देती है



Gulshah:wah भाबी जान इतने खूबसूरत क चाँद भी आपको देख रक्ष करे

Hooriya:itne गौर से मत घूरिए में आपके भाई की अमानत हु आपको गुनाह होगा

Gulshah:man me)bass उस बन्दर क नसीब में हे सब ाचा लिखा है मेरी तो नसीब हे फूटी है

Hooriya:kya कहा

Gulshah:bhabi जान में ये कह रहा था क देवर का इतना तो हक़ बनता हे है

गुल शाह तुरंत भूरिया का हाथ थाम लेता है और अपने होठ रख कर चुम लेता है

Hooriya:ye क्या बदतमीज़ी है

भूरिया सकपका क रह जाती है और अपना हाथ पीछे खींचती है

Gulshah:bhabi जान बस आप से दुवाओ की मांग कर रहा हु सुना है आपके दवा बहुत जल्दी लगती है

Hooriya:man me)mujhe पूरी तरह पता है तुम्हारे डिल में मेरे लये क्या है पर मुझे पाने की ख्वाइश कभी नहीं पूरी होगी गुलशाह

Gulshah:duwa देंगे न मेरे लये क मेरी हर ख्वाइश पूरी हो जाये

Hooriya:niyat दुरुस्त रखे खुदा तुम्हारी भी सुनेगा गुलशाह भाई

भाई लफ्ज़ सुनते हे गुलशाह उठ खड़ा होता है

Hooriya:acha गुलशाह मई और नाज़ बाजार जारहे तो इंतेज़ाम कर देना

Gulshah:jo हुकम भाबी जान

Gulshah:man me)Jiske लिए पूरी ज़िन्दगी कुंवारा रहा वो भाई कहे मेरे दिल क कितने टुकड़े हुए तुम्हे क्या बताऊ मेरी जान भूरिया

थोड़े देर में भूरिया और नाज़ दोनों तैयार हो कर महल से बहार निकलते है और एक रथ पर सवार हो कर बाजार की ओरे जाने लगते है

पारस बाजार में डंका बजा कर

"सुनो सुनो सुनो मल्लिका इ जहाँ हूर इ जहाँ बाजार तसरीफ ला रही है सब बाअज़र को खली कर दो"

पारस क बड़े बाजार को खली करवा दया जाता है रथ से उतर कर भूरिया और नाज़ बाजार में घूमने लगते है और जो चीज़ पसंद आता सिर्फ उसके ओरे इशारा कर देते और दुकान दर वो चीज़ रथ पर ले जा कर सैनिको को देता

थोड़े दूर पर हे चिडया की दूकान थी जहा पर तोता को देख भूरिया उस तरफ जाती है दूकान पर दुकान दर क अलावा एक शक्श था जो दीवार से सात कर खड़ा था और ऐलान सुन ने क बाद भी बाजार से बहार नहीं निकल पाया था

भूरिया :नाज़ ये तोता देखो कितना प्यारा है

naaz:han बाजी

dukaandar:aap कहे तो ये रखवा दू मल्लिका इ जहाँ

dukandar:man में) आर्य ये व्यापारी यही रुक गया मरवाएगा कही मल्लिका ने देख लय तो

व्यापारी जो लगातार भूरिया को निहारे जा रहा था और दुकान दर की नज़र उसके तरफ हे थी क कही भूरिया ने उसे देख लय तो दोनों मारे जायेंगे

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व्यापारी भूरिया को देख कर

मन में "आह क्या माल है निक़ाब क ऊपर से इतनी मोठे दूध और गांड तो अंदर से आह"

अचानक उसके हाथ अपने लैंड पर चले जाते है और वो सेहला देता है

भूरिया अपने आप को ताड़े जाने पर पलट टी है और देखती है क वो शक्श अपने लौड़े को हिला रहा है उसे देख कर

Hooriya:badzaat कौन है ये

dukandar:mai इसे नहीं जनता ये व्यापारी है जंगल से चिड़िया पकड़ कर लता है बेचने

Hooriya:theek है

भूरिया चलते हुए उस व्यापारी क पास जाती है

भूरिया जब चलते हुए आरही थी तो उसके भरी मम्मी और गांड को हिलते देख उस व्यापारी का लौड़ा और तन जाता है

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Hooriya:tum कौन हो बद्ज़ात तुम्हारे घर में बहिन बीवी नहीं

व्यापारी का लैंड खड़ा हो जाता है और दिमाग काम करना बंद हो जाता है

vyapari:Mallika मेरा नाम आशिक़ है और मेरे घर में मेरी बीवी भी है और बहिन भी पर आप जैसी नहीं

Hooriya:badzat गुनहगार तुम्हे पता नहीं तुमने मौत को दावत दी है

Hooriya:muhaafizo

सैनिक आजाते है

hooriya:pakad लो इस बद्ज़ात को बंदी बना कर ले चलो

Naaz:le जाओ इसे

Naaz:man me)aaj एक और सर कलम होगा भूरिया बाजी क जवानी क नाम

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 107

vyapari:Mallika मेरा नाम आशिक़ है और मेरे घर में मेरी बीवी भी है और बहिन भी पर आप जैसी नहीं

Hooriya:badzat गुनहगार तुम्हे पता नहीं तुमने मौत को दावत दी है

Hooriya:muhaafizo

सैनिक आजाते है

hooriya:pakad लो इस बद्ज़ात को बंदी बना कर ले चलो

Naaz:le जाओ इसे

Naaz:man me)aaj एक और सर कलम होगा भूरिया बाजी क जवानी क नाम

भूरिया और नाज़ वापस अपने रथ पर बैठ कर महल आजाते है और सैनिक आशिके को पकड़ कर राज दरबाद में ले आता है

महल पहुंच कर रथ से भूरिया और नाज़ उतरती है

Hooriya:aajka दिन ख़राब हो गया

Naaz:baaji अब आप बाजार निकले और आप को देख मर्द न बहके ऐसा हो सकता है

Hooriya:par में क्या करू नाज़ अब दिन रात अपने हुजरे में पड़ी तो नहीं रह सकती अपने आपको इतना निक़ाब से छुपा कर चलती हु फिर भी

ये कह कर भूरिया दुखी हो जाती है

Naaz:baaji आप को शायद पता नहीं आपका हुस्न निक़ाब से भी छुपाते नहीं छुपता और आप मल्लिका इ जहाँ है पुरे दुन्या पर आपकी हुकुमुकत है सुल्तान क बाद

Hooriya:han नाज़ कभी कभी लगता है काश में एक आम औरत होती

Naaz:ab लोगो की नियत ख़राब होती है तो इसमें आपका कोई कसूर नहीं आप अपने तरफ से तो पूरी कोशिश करती हो ढकने का

Hooriya:Han उस आशिके क बचे को भी आज हे बाजार में आना था मेरे वजह से उसकी जान चली जाएगी

Naaz:Mallika अब ये पहली बार तो नहीं जब भी आपको कोई बुरे नियत से देखता है मरता हे है चलिए अब

तभी सामने से सुल्तान दास्ताँ आते है

Dastan:Betio आगयी बाजार से

Naaz:ji अब्बा हुज़ूर

दास्ताँ भूरिया को देखता है

Dastan:hooriya बेटी आप सर झुकाये क्यू कड़ी हो

Naaz:wo अब्ब्बा जान भूरिया बाजी को किसी ने बुरे नज़र से देखा आज बाजार में

दास्ताँ ये सुनते हे आग बबूले हो जाते है

Dastan:Kya ! किसकी इतनी हिम्मत जो मेरी पाकीज़ा भूरिया को गन्दी नज़र से देखा उसके आखे निकल लूंगा में

भूरिया ये सुनते हे आखो से ासु बहाने लगती है

Hooriya:abba उस बद्ज़ात ने मुझे गन्दी नज़र से देखा उसे हमने पकड़वा दया है

Naaz:baaji आप न रोये आपकी गलती नहीं

Dastan:beti रोये मत मई अभी उस बद्ज़ात का सर कलम करवाता हु आप दोनों आये मेरे साथ

दास्ताँ भरी सभा में जा कर बैठ जाता है और साथ में सुल्तान की गद्दी पर भूरिया जा कर बैठ जाती है

Dastan:qaidi को पेश क्या जाये जिसने मल्लिका जहाँ भूरिया को गन्दी नज़र से देखा

दो सैनिक क़ैदी को पकड़ कर लाते है

Qaidi:Sultan हमे मुआफ कर दे अंजनी में हमसे गलती हो गयी

dastan:Qaidi तुम्हारा नाम क्या है और क्या तुम अपना जुर्म क़ुबूल करते हो

Qaidi:sultan मेरा नाम आशिके है और मई एक ताज़िर हु चिडियो को जंगल से लेकर बाजार में बेचता हु

Dastan:kya तुम्हे पता नहीं सुल्ताना भूरिया पुरे दुन्या पर हुकूमत कररहे सुल्तान मेरे वाहिद की बीवी है ,क्या तुमने उनपर बुरी नज़र डाली?

Qaidi:sultan बक्श दे सुल्तान..

Dastan:Han या न में जवाब तो क़ैदी

क्या तुमने बुरे नियत से सुल्ताना की ओरे देखा?

Qaiidi:ji हाँ पर मुझे पता नहीं था क वो..

Dastan:Tumhari सजा मौत है ..गुल शाह इसका सर कलम कर दया जाये ..

qaidii:sultan मुझे बक्श दीजिये

दो सैनिक उसे पकड़ कर ले जाते है

भूरिया तख़्त पर बैठे गुस्से से लाल थी

सैनिक क़ैदी को उठा कर बहार ले जाता है और धीरे धीरे लोग इकठे हो जाते है

क़ैदी को हाथ बाँध कर बैठाया जाता है और एक सैनिक गुलशाह को तेज़ तलवार देता है

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Gulshah:ya अअअअअअअ

खच्हहहहहहह की आवाज़ से क़ैदी का सर धार से अलग हो जाता है

Gulshah:chand ये लो तलवार

चाँद पारस का सीपा सालार था और गुलशाह का खास चेला

Chand:Ji उस्ताद

Gulshah:laash को दफ़न करवा देना

chand:Jo हुकम उस्ताद

इधर भूरिया सभा से उठ कर अपने हुजरे में आजाती है और अपने पति मेरे वाहिद और बेटे शमशेर क सलामती की दवा करने लगती है

तभी दरवाज़े पर किसी की दस्तख होती है

Naaz:Hoorya बाजी ..

Hooriya:aajao नाज़

नाज़ अंदर दाखिल होती है और हूर्य को इबादत करता पति है

Naaz:Mallika जी आपको गन्दी निगाह से देखने वाला का सर कलम हो गया

Hooriya:khuda उसके गुनाहो को मुआफ करे

Naaz:waise क्या लगता है आपको क सुल्तान मेरे वाहिद गहतराष्ट्रा और कुबेरी से दिल्ली क शाहज़ेब को भगा डाई होंगे

hooriya:Naaz बेगम बादशाह शाहज़ेब ने दिल्ली में कहर बरपा रखा है वो निहायत हे घटिया बादशाह है में चाहती हु क दिल्ली पर हमारी हुकूमत हो

Naaz:par मल्लिआ अब सुल्तान की हमारे शौहर की उम्र लगभग 60 की हुई अब दिल्ली फ़तेह करना आसान नहीं

Hooriya:han पर सुल्तान का कहना है क फ़तेह वो करेंगे हे या तो शमशेर करे या तो शमशेर का बीटा पर एक दिन हमारा कब्ज़ा होगा दिल्ली पैर

naaz:aapki दवा रही मल्लिका इ जहाँ तो ज़रूर होगा वैसे आप शुरू से महीनो तक सुल्तान से दूर रहती है जब वो जुंग में होते है

Hooriya:ab क्या कर सकते है राणिओ को तो इन सब की आदत होती है

Naaz:baaji अगर में आपका शौहर होती तो आपको छोर कर कभी जुंग पर नहीं जाती

ये बात हस्ते हुए नाज़ कहती है

Hooriya:dhatt पगली ऐसा भी कभी हुआ है दुन्या में राजा तो जुंग लड़ते हे है और सालो साल दूर रहते है

Naaz:baaji पर में कभी कभी सोचती हु क हम राणीअ ाआधी ज़िन्दगी तो तन्हाई और राजा क इंतज़ार में गुज़ात देती है प्यार कहा मिलता है

Hooriya:jo मिलता है शुक्र करो

Naaz:wo बात तो ठीक है पर ये राजा बादशाह इतनी शादीअ करते है ये सोचते भी नहीं की उनके पहली बीवी को तकलीफ होती होगी क नहीं

Hooriya:hmm ये तो है

भूरिया थोड़ा मायूस होते हुए

naaz:kya आपको दुःख हुआ था जब सुल्तान ने आपके बाद दूसरी शादी मुझसे कर लिया था

Hooriya:naaz मई एक औरत हु मुझे कुछ दिन तक बहुत अहसास हुआ इतना क में खाना पानी पीना बंद कर दी फिर हालत से समझौता कर ली

Naaz:sultan भले से दरिया डिल हो हमारे शहहर हो पर उन्होंने 100 लौंडिया हराम में राखी है जिनसे वो जिन्सी लज़्ज़त पते है

Hooriya:ab हर बादशाह अपने सुख क लये हराम में लौंडिया रखते है और अपने हर रात एक नयी औरत क साथ बिताते है

Naaz:bhale हे हम यहाँ अपने जिस्म की आगे में तड़पे पर हमारी बारी आती है 4 दिन या 5 दिन बाद

Hooriya:naaz कभी अपने शौहर की नाफरमानी न करो काम से काम 4 .5 दिन में तो हमारे साथ सुल्तान सोते है कितने बादशाह तो महीने दो महीने तक भी अपने बीइओ से मिलाप नहीं करते और लौन्डिओ में लगे रहते है

ऐसे हे दोनों सौतने आपस में बात करती रहती है और उधर रज़िया और मुस्कान भी आपस में बात चीत करती है महल क बहार अब चिराग जलने शुरू हो गए थे और अँधेरे में गुलशाह और चाँद पाशा महल से बहार जा रहे थे

Gulshah:yaaar आज मदिरा पीना है

Chand:ustaad आपको मैखाने ले क चालू या आप यही रुकेंगे मई मैखाने से ले औ

Gulshah:Nahi में मैखाने नहीं जा सकता अब्बा क रहते हुए तुम ऐसा करो ले आओ में झील किनारे इंतज़ार करता हु

गुलशाह झील किनारे बैठ जाता है और चाँद मैखाने से शराब लेने चला जाता है

Gulshah:man me)Ye भूरिया तो मुझे भाव बे नहीं देती उस बूढ़े मेरे वाहिद में क्या है उस से तो ढंग से पिलाई भी नहीं होती होगी ..भाबी जान अगर एक बार मिल जाये तो बता दूंगा कितना चाहता हु मई उनको उफ्फ्फ उनके उभरे भरी गांड मोठे लटकते दूध और प्यारा शकल ..मिल जाये तो इस उम्र में भी उनको छोड़ क पेट से कर दू उस साली क वजह से मई आज तक शादी नहीं kya..kya करू कैसे पाउ उसे

तभी चाँद आजाता है

Chand:ye लीजिये उस्ताद मदीररा

गुलशाह चाँद से मदिरा चीन क पीने लगा और वो जल्द हे नशे में चूर हो गया

Gulshah:aed छासंद सुन्नू

Chand:ustaad आप होश में तो हो

Gulshah:nahi में होश में हु

Chand:aapne ज़्यादा पी ली

Gulshah:abhi कहा रे अभी और पी ूनागा

Chand:aapko ऐसा क्या गम है जो आप हमेशा मदिरा से अपना ग़म छुपाते है

Gulshah:dill का ग़म चाँद तुम नहीं समझोगे

Chand:ab आप मुझ पर यक़ीन नहीं करते तो में कैसे मदद कर सकता हु आज 10 साल हुए हमारी दोस्ती को

Gulshah:oye चाँद ऐसा नहीं है मेरे लाल

Chand:bass आप मुझे अपना नौकर समझते हो

Gulshah:chupp और सुन्न तुझे आज बता हे देता हु

Chand:han बताये उस्ताद मुझसे आपका ये ग़म देखा नहीं जाता

Gulshah:han बताता हु

Chand:batAye उस्ताद

Gulshah:tum जान न चाहते हो न क्यू मैंने अब तक शादी नहीं की क्यू क मई किसी से प्यार करता हु किसी क लये जान भी दे सकता हु

chand:ji उस्ताद बताये

Gulshah:to लाओ मदिरा और

गुलशाह और मदिरा अपने अंदर उतरने लगता है

Gulshah:to सुनो चाँद पाशा मेरे डिल की रानी कोई और नहीं मल्लिका इ जहाँ है सुल्ताना भूरिया है

ये सुनते हे चाँद क हाथ पेअर कांपने लगते है

chand:ustaad आप ये क्या कह रहे है अगर किसी को भनक भी लग गयी और सुल्तान दास्ताँ तक ये बात चलो गयी तो हम दोनों कल का सूरज नहीं देख पाएंगे

Gulshah:bass यही डर है चाँद क मई अपनी दिलरुबा को अपनी नहीं बना सकता हु

Chand:meri माने तो ये सपना एक से एक पारसी औरत आपको मिल जाएगी

Gulshah:chup कर हरामज़ादे मैं मल्लिका इ जहाँ से बेइंतेहा मोहब्बत करता हु एक न एक दिन वो ज़रुरु मिलेगी मुझे

Chand:ustaad मुझे उनमे कुछ ऐसी खास चीज़ तो नज़र नहीं आती बास भरी भरकम है और हमेशा अपने आप को निक़ाब से धक् कर रखती है

Gulshah:heere की कीमत एक जौहरी जनता है वो ऐसी माल है जिसका कोई सांई नहीं तुमने तो उसका चेहरा भी नहीं देखा

Chand:mujhe तो नहीं लगता वो आपकी हो सकती है

Gulshah:ho सकती है रिवाज़ क हिसाब से अगर सुल्तान मेरे वाहिद की मौत हो जाये तो मैं अब्बा जान की इजाज़त से उस से निकाह कर सकता हु

Chand:par सुल्तान तो इस उम्र में भी अपने तलवार से अचे ाचो को धूल छठा देता है मुमकिन है अगर आप खुद अपने भाई मेरे वाहिद की जान ले लो

Gulshah:hharamzade

Chand:muaf कीजिये उस्ताद जो मन में आया कह दया

Gulshah:wo मेरे भाई है मेरे वाहिद उनकी जान लेने की में सोच भी नहीं सकता

और ऐसे हे चाँद पाशा और गुलशाह रात भर गुफ्तुगू करते रहे

गहतराष्ट्रा

रात का समय था देवराज और सुल्तान और शमशेर क साथ देवरानी रथ में बैठी अपने पिया बलदेव और अपने पिछले रात की चुदाई की रात को याद करते हुए पारस की ओरे बढ़ रही थी

इधर गहतराष्ट्रा महल में बलदेव बद्री और श्याम भोजन कर क आराम कर रहे थे

षुरूश्ती जीविका क कक्षा की ओरे जा रही थी और कक्षा क बहार कड़ी हो कर

Shuruhsti:Raj माता

जीविका जो अपने बिस्तर पर लेती थी उठ कर बैठ ते हुए

Jeevika:aao बहु रानी

षुरूश्ती अंदर आती है

shurushti:Maa जी अपनने खाना खाया

jeevika:nahi बहु जिसका बीटा कारावास में बंद हो भूका प्यासा हो वो कैसे चैन से खा पी सकती है

shurushti:maa जी ऐसे तो आप बीमार हो जाओगी

jeevika:mujhe किसी भी तरह अपने बेटे राजपाल को कारावास से छुड़ाना है

Shurushhti:Maa जी यदि बलदेव क कहे अनुसार राजपाल जी बलदेव और देवरानी को अपना लेते है और देवरानी को अपना बहु मन ले तो मुझे पक्का यक़ीन है राजपाल को भी ससुर मान लेगी महारानी देवरानी

jeevika:bahu तुम समझती नहीं हु एक पति क लये अपनी पत्नी को अपने बेटे को सौंप देना अपनी पत्नी को बहु बना लेना आसान नहीं

Shurushti:par महाराज बलदेव तो बहुत गुस्से में है और कभी भी उनको फांसी दे सकते है मई तो कहूँगी की आप राजपाल जी को कैसे भी मन ले क्यू क जान बचे तो लाख उपाए

Jeevika:shayad तुम ठीक कह रही हो एक पत्नी हे हाथ से निकल गयी तुम तो हो हे मेरे बेटे राजपाल क लये

Shurushti:ji माँ जी

मुस्कुराते हुए

Shurushti:man me)ab माँ जी को क्या कहु क मेरी छूट अब राजपाल से खुश नहीं और इधर उधर क लौड़े लेने लगी है

Jeevika:to मई राजपाल से बात करना चाहूंगी षुरूश्ती

shurushti:abhi ?

jeevika:han अभी बात करना चाहती हु तुम सोमनाथ से कह कर मेरे मिलने का इंतेज़ाम करवाओ

shurushti:somnath..Maa जी दिनन में मिल लीजिये न अपने बेटे से

Jeevika:beti मेरे बेटे को कब फ़ासी दे दे बलदेव कोई ठीक नहीं मई अभी मिलने जाउंगी उसके जान बचने क खातिर उसे वो हर बात मन न पड़ेगा जो बलदेव चाहता है

Shurushti:theek है माजी मई सेनापति को सन्देश पहुँचती हु

ये कह कर षुरूश्ती जीविका क कक्षा से ाजत्ती है

गहतराष्ट्रा

Jeevika:beti मेरे बेटे को कब फ़ासी दे दे बलदेव कोई ठीक नहीं मई अभी मिलने जाउंगी उसके जान बचने क खातिर उसे वो हर बात मन न पड़ेगा जो बलदेव चाहता है

Shurushti:theek है माजी मई सेनापति को सन्देश पहुँचती हु

ये कह कर षुरूश्ती जीविका क कक्षा से ाजत्ती है

षुरूश्ती अपने दिमाग में मंथन कर रही थी क वो सोमनाथ को बुलाये या नहीं फिर सोचते सोचते निर्णय लेती है क वो महल क दुवार पर हे सोमनाथ से मिलेगी और वो महल क दुवार पर जाने लगती है

षुरूश्ती मन में ) इस सोमनाथ ने तो मेरा जीना हराम कर दया है इतनी रात में कही कोई उच्च नीच हरकत न कर दे

षुरूश्ती जैसे हे मुख्या दुवार पैर पहुँचती है दोनों पहरेदार

Sainik:Rani जी कोई समम्स्या इतनी रात गए

Shurushti:koi समस्या नहीं तुम दोनों में से एक जाओ और सेनापति को बुला लाओ

sainik:aap अपने कक्षा में जाये हम सेनापति को भेज देते है

shurushti:man me)ab क्या करू ये कमीना सोमनाथ तो मुझे अकेले कक्षा में प् कर उच्च नीच हरकत ज़रूर करेगा मेरे इज़्ज़त से खेलेगा धमका क मैंने देवरानी को जान से मरने की कोशिश की थी ये रास बास जनता है

Shurushti:theek है तुम भेज दो सेनापति को मेरे काकक्ष में

षुरूश्ती ये कह कर वापस आजाती है अपने कक्षा में और अपने मन में सोचने लगती है क्या करे

थोड़ी देर में हे दरवाज़े पैर सेनापति सोमनाथ की दस्तकः होती है

Somnath:Maharani..

ये सुनते हे षुरूश्ती क रोम रोम काँप जाते है और पेअर जमीन पर थम जाते है

Shurushti:aajao सेनापति

Senapati:aapne इतनी रात गए इस नीच लोहार को याद क्या कोई अतिआवश्यक काम पद गया क्या

और एक बड़ी मुस्कान देता है

Shurushti:Mujhe कोई आवश्यकता नहीं

Senapati:wahi तो भला तुम राजपूतनी को मेरे जैसे लोहार सेनापति को क्या ज़रूरत वैसे आज बहुत दमक रही थी तुम किसी ने निचोड़ लय क्या रात में

Shurushti:senapati..apni हद्द मत भूलो

गुस्से में षुरूश्ती लाल हो जाती है

Senapati:ishh महारानी षुरूश्ती ज़ोर से नहीं ..कोई सुन्न लेगा तो बदनामी आपकी हे होगी और मेरे और आपके रिश्ते की खबर सबको हो जाएगी

Shurushti:apni जीभा को काम चलाओ सोमनाथ कभी भी कटवा सकती हो

Somnath:is जीभा ने कही ये बक दया क इस लोहार ने राजपूती षुरूश्ती को हुमच हुमच क पेला है तो क्या होगा तब क्या होगा सोचा है

Shurushti:baaat मत बढ़ाओ काम की बात करो

Somnath:baat आप हे बढ़ा रही हो महारानी

Shurushti:to सुनो राजमाता जीविका मिलना चाहती है राजपाल से ..राजा राजपाल कहा है

Somnath:aapke पति कारावास में बंद है मई तो उनसे मिलवा दूंगा राजमाता को

Somnath:man me)kisi ने तो खूब ताब्यात से छोड़ा है तुमको इस बात का पता तो लगा क रहूँगा

Shurushti:man में) अब तुम्हे कैसे बताऊ कल रात मई इतना बड़ा लैंड खाई जितना बड़ा लैंड मैंने कभी सपने में सोचा नहीं था क अभी तक छूट दुःख रहा है

Shurushti:ab खड़े हे रहोगे या अपना काम करोगे

Somnath:aap कहो तो आपका काम भी कर दू

Shurushti:hadd में रहो सेनापति निकलो यहाँ से

ये सुनते हे सेनापति षुरूश्ती क कक्षा से बहार आता है और जीविका क कक्षा में जाता है

Senapati:rajmata

Jeevika:aaao सेनापति सोमनाथ

senapati:rajpata आप राजा राजपाल से मिलना चाहती हो

Jeevika:han सेनापति और इसी समय

senapati:par महाराज बलदेव क आज्ञा क बिना

Jeevika:smaran रहे सेनापति मई इस महल क राजमाता हु

Senapati:kshama करे राजमाता जीविका आप चलिए मई आपको राजा राजपाल से भेट करवा देता हु

सेनापति आगे आगे और जीविका पीछे पीछे चलते हुए महल क मुख्या दुवार से बहार निकलते है और आगे जा कर सेनगृह क बगल से कारावास में प्रवेश करते है थोड़े देर चलने क बाद वो घर अत है जिसमे राजा राजपाल क़ैद था और इतनी रात में भी वो चहल कदमी करते हुए नज़र अत है जीविका उसके देखते हे दौड़ कर अपने बेटे से गले लग्न चाहती थी पर लोहे क सलाखों क आएगी रुक जाती है

jeevika:beta ..मेरा राजपाल

आखो से ासु मानव झरना क तरह फुट पड़ते है

राजपाल भी अपने माँ क तरफ बढ़ते हुए

rajpal:maa

Jeevika:senapati मेरे बेटे को इस पिंजरे से बहार निकालो

Senapati:kshama करे राजमाता महाराज बलदेव ने राजा राजपाल को क़ैद रखने क लये कहा है मई किसी भी कीमत पर इन्हे बहार नहीं निकल सकता

Jeevika:senapati तुम जाओ मुझे कुछ अकेले में अपने बेटे से बायत करनी है

सेनापति वह से चला जाता है

Jeevika:ye क्या हो गए बीटा राजपाल

Rajpal:maa नियति को कौन ताल सकता है मेरे भाग्य में यही लिखा था

jeevika:ye सब उस पापिन देवरानी क वजह से हुआ है उसे ब्याह करना हे था बलदेव से तो कर लेती पर तुम्हे मौत दे कर उसे क्या मिलेगा

Rajpal:maa चिंता मत करो अगर बलदेव मुझे मारना चाहता है तो मुझे मार दे ऐसे जीवन से ाचा मई मर जाना पसंद करूँगा

jeevika:mai समझ सकती हु बीटा जो राजा अपने हे महल में अपने बेटे दुवारा क़ैद कर लय जाये और उसके पत्नी अपने हे बेटे से विवाह कर ले सम्बन्ध बना कर उसपे क्या पहाड़ टूट रहा होगा

ये सुनते हे राजा राजपाल क आखो से आसुओ क धरा बहने लगते है

jeevika:ro मत मेरे लाल

Rajpal:maa ये सब मेरे पापो का प्राश्चित हो रहे है है

रट हुए राजपाल कहता है

Jeevika:beta मैं तुमसे कुछ महत्वपूर्ण बात करने आई हु

Rajpal:bolo माँ

Jeevika:pahle वचन लो अपने माँ क सर की क तुम मेरी बात मानोगे और जो कहूँगी वो स्वीकार करोगे

Rajpal:maa अब मेरे जीवन में बचा क्या राज पार बीवी बचे सब तो साथ छोर डाई अब तो मेरी मृत्यु दंड समीप है

jeevika:bhagwan क लये मृत्यु शब्द अपने जीभा से न कहो मेरे लाल

rajpal:kaho माता क्या चाहती हो आप मई वचन लेता हु आपकी हर आज्ञा का पालन करूँगा

jeevik:MAi चाहती हु तुम देवरानी को अपनी बहु स्वीकार लो

ये सुनते हे एक बिजली कड़कती है और राजपाल एक पुतले की तरह आँख फाड़े खड़ा रहता है

Jeevika:mai चाहती हु तुम अपने बेटे और बहु को राजवंशी मान लो और हमारे वंश बढ़ने की जिम्मेदारी भी उन दोनों पर छोर दो

ये सुनते हे खुले आखो से राजपाल क ासु तप तप बहने लगते है

Rajpal:maa ये तुमने क्या कह dya..is से ाचा तो मर जाना पसंद करूँगा

Jeevika:tumne सही सुना बीटा बलदेव और देवरानी बहुत दिनों से पति पत्नी की तरह जी रहे है है तुम अपने बेटे और पत्नी को अपने बीटा और बहु क रूप में स्वीकार लो

Rajpal:maaa

जीविका अपने बेटे को रट देख खूब ज़ोर से रोने लगती है

jeevika:beta मई तुम्हे खोना नहीं चाहती मई अपने जीवन में तुम्हारी फांसी तुम्हारी मृत्यु नहीं देख सकती बलदेव तुम्हे कभी भी मृत्यु दंड दे सकता है मेरी बात मानो ..

Rajpal:Maa आप ..हुहुहु

रट हुए

Jeevika,dekho दो दिन बाद बरात जाएगी देवरानी को लेन पारस से और बलदेव वह क पहलवान से कुश्ती जीत कर देवरानी को उसके भाई क कहे अनुसार जीत कर अपनी पत्नी बना लाएगा मई चाहती हु तुम बरात में अपने बेटे बलदेव क साथ अपने बहु को laao..or इसके बदले बलदेव ने वचन दया है वो तुम्हहि क्षमा कर देगा..

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 107

गहतराष्ट्रा

Jeevika:beti मेरे बेटे को कब फ़ासी दे दे बलदेव कोई ठीक नहीं मई अभी मिलने जाउंगी उसके जान बचने क खातिर उसे वो हर बात मन न पड़ेगा जो बलदेव चाहता है

Shurushti:theek है माजी मई सेनापति को सन्देश पहुँचती हु

ये कह कर षुरूश्ती जीविका क कक्षा से ाजत्ती है

षुरूश्ती अपने दिमाग में मंथन कर रही थी क वो सोमनाथ को बुलाये या नहीं फिर सोचते सोचते निर्णय लेती है क वो महल क दुवार पर हे सोमनाथ से मिलेगी और वो महल क दुवार पर जाने लगती है

षुरूश्ती मन में ) इस सोमनाथ ने तो मेरा जीना हराम कर दया है इतनी रात में कही कोई उच्च नीच हरकत न कर दे

षुरूश्ती जैसे हे मुख्या दुवार पैर पहुँचती है दोनों पहरेदार

Sainik:Rani जी कोई समम्स्या इतनी रात गए

Shurushti:koi समस्या नहीं तुम दोनों में से एक जाओ और सेनापति को बुला लाओ

sainik:aap अपने कक्षा में जाये हम सेनापति को भेज देते है

shurushti:man me)ab क्या करू ये कमीना सोमनाथ तो मुझे अकेले कक्षा में प् कर उच्च नीच हरकत ज़रूर करेगा मेरे इज़्ज़त से खेलेगा धमका क मैंने देवरानी को जान से मरने की कोशिश की थी ये रास बास जनता है

Shurushti:theek है तुम भेज दो सेनापति को मेरे काकक्ष में

षुरूश्ती ये कह कर वापस आजाती है अपने कक्षा में और अपने मन में सोचने लगती है क्या करे

थोड़ी देर में हे दरवाज़े पैर सेनापति सोमनाथ की दस्तकः होती है

Somnath:Maharani..

ये सुनते हे षुरूश्ती क रोम रोम काँप जाते है और पेअर जमीन पर थम जाते है

Shurushti:aajao सेनापति

Senapati:aapne इतनी रात गए इस नीच लोहार को याद क्या कोई अतिआवश्यक काम पद गया क्या

और एक बड़ी मुस्कान देता है

Shurushti:Mujhe कोई आवश्यकता नहीं

Senapati:wahi तो भला तुम राजपूतनी को मेरे जैसे लोहार सेनापति को क्या ज़रूरत वैसे आज बहुत दमक रही थी तुम किसी ने निचोड़ लय क्या रात में

Shurushti:senapati..apni हद्द मत भूलो

गुस्से में षुरूश्ती लाल हो जाती है

Senapati:ishh महारानी षुरूश्ती ज़ोर से नहीं ..कोई सुन्न लेगा तो बदनामी आपकी हे होगी और मेरे और आपके रिश्ते की खबर सबको हो जाएगी

Shurushti:apni जीभा को काम चलाओ सोमनाथ कभी भी कटवा सकती हो

Somnath:is जीभा ने कही ये बक दया क इस लोहार ने राजपूती षुरूश्ती को हुमच हुमच क पेला है तो क्या होगा तब क्या होगा सोचा है

Shurushti:baaat मत बढ़ाओ काम की बात करो

Somnath:baat आप हे बढ़ा रही हो महारानी

Shurushti:to सुनो राजमाता जीविका मिलना चाहती है राजपाल से ..राजा राजपाल कहा है

Somnath:aapke पति कारावास में बंद है मई तो उनसे मिलवा दूंगा राजमाता को

Somnath:man me)kisi ने तो खूब ताब्यात से छोड़ा है तुमको इस बात का पता तो लगा क रहूँगा

Shurushti:man में) अब तुम्हे कैसे बताऊ कल रात मई इतना बड़ा लैंड खाई जितना बड़ा लैंड मैंने कभी सपने में सोचा नहीं था क अभी तक छूट दुःख रहा है

Shurushti:ab खड़े हे रहोगे या अपना काम करोगे

Somnath:aap कहो तो आपका काम भी कर दू

Shurushti:hadd में रहो सेनापति निकलो यहाँ से

ये सुनते हे सेनापति षुरूश्ती क कक्षा से बहार आता है और जीविका क कक्षा में जाता है

Senapati:rajmata

Jeevika:aaao सेनापति सोमनाथ

senapati:rajpata आप राजा राजपाल से मिलना चाहती हो

Jeevika:han सेनापति और इसी समय

senapati:par महाराज बलदेव क आज्ञा क बिना

Jeevika:smaran रहे सेनापति मई इस महल क राजमाता हु

Senapati:kshama करे राजमाता जीविका आप चलिए मई आपको राजा राजपाल से भेट करवा देता हु

सेनापति आगे आगे और जीविका पीछे पीछे चलते हुए महल क मुख्या दुवार से बहार निकलते है और आगे जा कर सेनगृह क बगल से कारावास में प्रवेश करते है थोड़े देर चलने क बाद वो घर अत है जिसमे राजा राजपाल क़ैद था और इतनी रात में भी वो चहल कदमी करते हुए नज़र अत है जीविका उसके देखते हे दौड़ कर अपने बेटे से गले लग्न चाहती थी पर लोहे क सलाखों क आएगी रुक जाती है

jeevika:beta ..मेरा राजपाल

आखो से ासु मानव झरना क तरह फुट पड़ते है

राजपाल भी अपने माँ क तरफ बढ़ते हुए

rajpal:maa

Jeevika:senapati मेरे बेटे को इस पिंजरे से बहार निकालो

Senapati:kshama करे राजमाता महाराज बलदेव ने राजा राजपाल को क़ैद रखने क लये कहा है मई किसी भी कीमत पर इन्हे बहार नहीं निकल सकता

Jeevika:senapati तुम जाओ मुझे कुछ अकेले में अपने बेटे से बायत करनी है

सेनापति वह से चला जाता है

Jeevika:ye क्या हो गए बीटा राजपाल

Rajpal:maa नियति को कौन ताल सकता है मेरे भाग्य में यही लिखा था

jeevika:ye सब उस पापिन देवरानी क वजह से हुआ है उसे ब्याह करना हे था बलदेव से तो कर लेती पर तुम्हे मौत दे कर उसे क्या मिलेगा

Rajpal:maa चिंता मत करो अगर बलदेव मुझे मारना चाहता है तो मुझे मार दे ऐसे जीवन से ाचा मई मर जाना पसंद करूँगा

jeevika:mai समझ सकती हु बीटा जो राजा अपने हे महल में अपने बेटे दुवारा क़ैद कर लय जाये और उसके पत्नी अपने हे बेटे से विवाह कर ले सम्बन्ध बना कर उसपे क्या पहाड़ टूट रहा होगा

ये सुनते हे राजा राजपाल क आखो से आसुओ क धरा बहने लगते है

jeevika:ro मत मेरे लाल

Rajpal:maa ये सब मेरे पापो का प्राश्चित हो रहे है है

रट हुए राजपाल कहता है

Jeevika:beta मैं तुमसे कुछ महत्वपूर्ण बात करने आई हु

Rajpal:bolo माँ

Jeevika:pahle वचन लो अपने माँ क सर की क तुम मेरी बात मानोगे और जो कहूँगी वो स्वीकार करोगे

Rajpal:maa अब मेरे जीवन में बचा क्या राज पार बीवी बचे सब तो साथ छोर डाई अब तो मेरी मृत्यु दंड समीप है

jeevika:bhagwan क लये मृत्यु शब्द अपने जीभा से न कहो मेरे लाल

rajpal:kaho माता क्या चाहती हो आप मई वचन लेता हु आपकी हर आज्ञा का पालन करूँगा

jeevik:MAi चाहती हु तुम देवरानी को अपनी बहु स्वीकार लो

ये सुनते हे एक बिजली कड़कती है और राजपाल एक पुतले की तरह आँख फाड़े खड़ा रहता है

Jeevika:mai चाहती हु तुम अपने बेटे और बहु को राजवंशी मान लो और हमारे वंश बढ़ने की जिम्मेदारी भी उन दोनों पर छोर दो

ये सुनते हे खुले आखो से राजपाल क ासु तप तप बहने लगते है

Rajpal:maa ये तुमने क्या कह dya..is से ाचा तो मर जाना पसंद करूँगा

Jeevika:tumne सही सुना बीटा बलदेव और देवरानी बहुत दिनों से पति पत्नी की तरह जी रहे है है तुम अपने बेटे और पत्नी को अपने बीटा और बहु क रूप में स्वीकार लो

Rajpal:maaa

जीविका अपने बेटे को रट देख खूब ज़ोर से रोने लगती है

jeevika:beta मई तुम्हे खोना नहीं चाहती मई अपने जीवन में तुम्हारी फांसी तुम्हारी मृत्यु नहीं देख सकती बलदेव तुम्हे कभी भी मृत्यु दंड दे सकता है मेरी बात मानो ..

Rajpal:Maa आप ..हुहुहु

रट हुए

Jeevika,dekho दो दिन बाद बरात जाएगी देवरानी को लेन पारस से और बलदेव वह क पहलवान से कुश्ती जीत कर देवरानी को उसके भाई क कहे अनुसार जीत कर अपनी पत्नी बना लाएगा मई चाहती हु तुम बरात में अपने बेटे बलदेव क साथ अपने बहु को laao..or इसके बदले बलदेव ने वचन दया है वो तुम्हहि क्षमा कर देगा..

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 108

Rajpal:Maa आप ..हुहुहु

रट हुए

Jeevika,dekho दो दिन बाद बरात जाएगी देवरानी को लेन पारस से और बलदेव वह क पहलवान से कुश्ती जीत कर देवरानी को उसके भाई क कहे अनुसार जीत कर अपनी पत्नी बना लाएगा मई चाहती हु तुम बरात में अपने बेटे बलदेव क साथ अपने बहु को laao..or इसके बदले बलदेव ने वचन दया है वो तुम्हहि क्षमा कर देगा

Rajpal:Maa यदि मई देवरानी को बहु मान भी लू तो क्या बलदेव मेरी फांसी रोक देगा कही ये उसकी कोई चाल तो नहीं

Jeevika:Beta बलदेव ने मुझे वचन दया है क अगर तुम अपने बेटे और बहु देवरानी को अपना लेते हो तो हम एक परिवार की तरह रह सकेंगे ,मई समझ सकती हु मेरे बेटे क एक आँगन में अपनी पत्नी किसी और क बहो में लोटे और अपनी पत्नी अपने हे पुत्र क बिस्तर पर सोये तो एक व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ना अनिवार्य है परन्तु इसके अलावा मेरे पास तुम्हारे जान बचने का कोई चारा नहीं

Rajpal:maa देवरानी मेरी पत्नी थी अब वो लिए मर चुकी है उस दिन हे मर्डर गयी जिस दिन वो अपने बेटे क साथ रेंज हाथ पकड़ी गयी थी और आज उन दोनों क सुहागरात क बाद से अब वो मेरे लये कोई नहीं है

Jeevika:beta मई समझ सकती हु तुम्हारा दुःख पर अब देवरानी कोई नहीं अब देवरानी हे वो स्त्री है जो मेरे वंश को आगे बढ़ा सकती है

ये सुनते हे राजपाल क आखो से ासु तप तप बहने लगते है

Rajpal:ye क्या कह रही हो माँ

Jeevika:satya कह रही हु पुत्र अब बलदेव हे हमारा एकलौता चिराग है और बलदेव दूसरा विवाह अपने माँ देवरानी क रहते हुए कभी नहीं करेगा इसलिए ..

ये कह कर आत्मा ग्लानि से भरी ाआवाज़ से जीविका अपने सीने पर पठार रख कर कहते हुए रुक जाती है

rajpal:islye क्या माँ

Jeevika:islye हमे बलदेव और देवरानी से कहना होगा क हमे गहतराष्ट्रा का वरिष्ठ दे राजपरिवार का वंश आगे बढ़ाये और देवरानी बलदेव से पुत्र अवं पुत्री जनमे यही रास्ता है नहीं तो हमारा वंश यही रुक जायेगा

ये सुनते हे रट हुए राजा राजपाल फुट कर रट हुए कारगर की लोहे को पकड़ कर निचे बैठने लगता है

Rajpal:Maa मेरे जीवन में हे ये सब होना था..

Jeevika:mere लाल मत रो उनके पाप उनके सर

Rajpal:Theek है माँ जब तुम यही चाहती हो तो मई आज से देवरानी को बहु मानता हु

और फफक कर रोने लगता है

Jeevika:Beta इसमें हे हम सब की और गहतराष्ट्रा की भलाई है वर्ण गहतराष्ट्रा का उत्तरधिकारी नहीं मिलेगा हमे जो राज्य की सेवा कर सके

Rajpal:theek है माँ तुम बलदेव से बात कर लो मुझे स्वीकार है उसकी हर बात

जीविका ये सुनते हे मुस्कुरा उठ टी है

jeevika:mujhe पता था मेरा बीटा मेरी बात नहीं टालेगा वैसे भी तुम्हारी पत्नी षुरूश्ती तो है हे तुम्हारी सेवा क लये

Rajpal:ab मेरे जीवन क दिन हे कितने बचे

jeevika:aisa कभी न कहना बीटा मई कल सुबह हे बलदेव से कह कर तुम्हे क़ैद से छुटवाती हु

ये कह कर जीविका वापस महल में आजाती है और सो जाती है

गहतराष्ट्रा में फिर से एक नयी सुबह होती है और ये सुबह हर सुबह से अलग थी जहा पर बाआप अपने बेटे को अपनी पत्नी मुफ्त में सोने क लये दे रहा था

सवेरे हे बलदेव उठ जाता है और साथ हे बद्री और श्याम भी उठ कर महल क बहार उद्यान में टहलने लगते है कुछ देरर टहलने क बाद तीनो मिल कर कुस्ती मैदान में आकर पहले योग करते है फिर कुस्ती की तैयारी में जुट जाते है

Shyam:Baldev तुम्हारे शरीर क नस तो इतने दिखाई नहीं देते थे एक रात में देवरानी भाबी ने क्या खिला दया जो सारे नस उजागर हो गए

Badri:bhai देवरानी भाबी माँ जैसी स्त्री पर सुहागरात पैर म्हणत करने का असर है

ये सुनते हे बलदेव गुस्से से श्याम और बद्री क तरफ झपट ता है

तभी एक सैनिक आए कर

Sainik:Maharaj

बलदेव सैनिक की ओरे देखते हुए

Baldev:Kaho क्या बायत है

Sainik:Maharaj आपको राजमाता याद की है

बलदेव अपने लंगोट क ऊपर धोती पहनते हुए

Baldev:keh दो क हम अभी आये

Baldev:tum दोनों कुश्ती खेलो हम अभी दादी से मिल कर आते है

Badri:bhai कुश्ती जीत कर अपने पत्नी तुम्हे बनाना है महारानी देवरानी को हम अभ्यास क्यों करे

Baldev:theek है तो मई अत हु तो साथ में करते है

शरमाते हुए बलदेव कहता है

Shyam:Badri भाबी माँ क लये तो बलदेव किसी पहाड़ को भी तोड़ दे पर उन्हें अपनी बना ले

बलदेव अपना वस्त्र पहन कर पहले जा कर स्नान करता है फिर बहार आते हे उसे रानी षुरूश्ती पूजा की थाली लये कड़ी रहती है

Baldev:ary बड़ी माँ आप सुबह सुबह पूजा कर रही थी

Shurushti:ab मेरे बेटे को अपने प्रेमिका को जीत कर लाना है पारस से प्राथना तो करुँगी हे न

Baldev:aapka बीटा इतनी हिम्मत रखता है क पारस क किसी भी पहलवान को हरा दे माँ देवरानी क लये

Shurushti:mujhe पता है मेरे बीटा पर देवरानी क न रहते हुए पूजा पाठ क बिना घर अधूरा लगता है इसलिए देवरानी जब तक नहीं आजाती तब तक में हे संस्कारी बहु बन जाती हु देवरानी आ जाये तो मेरी बहु से सुबह शाम पूजा पथ करवाउंगी

बलदेव मुस्कुराते हुए

Baldev:han करवा लेना अपने बहु से पूजा पथ अभी प्रसाद लाओ

बलदेव प्रसाद ले कर जीविका क कक्षा में जाता है

Baldev:pranam दादी

Jeevika:jeete रहो बीटा

Baldev:aap ने याद क्या

Jeevika:han पोता बलदेव

baldev:ji कहिये क्या बात है

Jeevika:beta वो मैंने राजपाल को मन लय है

ये सुनते हे बलदेव का चेहरा खिल उठ ता है

Baldev:kya कहा उन्होंने

कहते हुए बलदेव जीविका क पेअर को पकड़ कर बैठ जाता है

jeevika:wo तुम्हारी पत्नी देवरानी और माँ को अपनी बहु मान ने क लये तैयार है तुम बरात की तैयारी करो

baldev:Dadi माँ आपको तो पता है माँ और मई एक दूसरे क बिना नहीं रह सकते पिता जी क पास तो षुरूश्ती माँ है हे तो क्या मई और देवरानी गहतराष्ट्रा का उत्तरधिकारी नहीं दे सकते

Jeevika:mere पुत्र में सब समझती हु तुम्हारा अपने माँ क प्रति प्रेम और देवरानी ने जितना दुःख उठायी है

baldev:par आप फिर भी हमारे विवाह से दुखी क्यू थी

Jeevika:putra में चाहती थी तुम दोनों प्रेमी एक हो जाओ पर में अपने बेटे राजपाल क बंदी बना लेने से दुखी थी में चाहती थी क राजपाल तुम्हारे माँ और तुमको स्वीकार ले

Baldev:dadi माँ अब तो आप खुश है न ..मई पिता जी को आज़ाद कर दूंगा और वो अब सम्मान क साथ महल में रहेंगे

Jeevika:mai बहुत खुश हु मेरे पोता

बलदेव झुक कर अपने दादी जीविका क पेअर छू लेता है



Jeevika:sada खुश रहो बीटा

बलदेव उठ कर ख़ुशी से झूमते हुए बहार आता है

"बद्री श्याम"

बद्री और श्याम अपने कक्षा से निकलते है

Baldev:Bhaio बाराती की तैयारी करो हम कल हे पारस जायेंगे अपनी पत्नी देवरानी को लाने

Baldev:Senapati को बुलाओ

Shurushti:kya बात है क्यों शोर मचा रहे है बलदेव महाराज

Baldev:maa षुरूश्ती आज से पिता जी हमारे साथ महल में रहेंगे उन्होंने मुझे और देवरानी माँ को स्वीकार कर लय है

उधर से कमला आरही थी

kamla:Aakhir छीन हे लय महारानी देवरानी को राजा राजपाल से आपने महाराज

Baldev:kamla बाप से छीन लय माँ को अब देवरानी को उसके भाई क घर से उठा लाऊंगा

ये सुन कर सब है पड़ते है इतने में सेनापति सोमनाथ आजाता है

Senapati:aapne याद क्या महाराज

Baldev:senapati पिता जी को सम्मान क साथ कारगर से महल में ले आओ हमने उन्हें क्षमा कर दया अब उन्हें कोई सजा नहीं होगी

Somnath:jo आज्ञा महाराज

सोमनाथ कारगर में जा कर राजा राजपाल क हाथ पेअर खोल कर सम्मान क साथ महल में आने को कहता है राजा राजपाल जैसे जे महल में आते है बलदेव आकर अपने पिता क पेअर छूटा है

Baldev:pranam पिता जी

Rajpal:Sada सुखी रहो

Baldev:mujhe क्षमा कर दे पिता जी में कभी नहीं चाहा क हमारा परिवार टूटे पर में मजबूर था अपने प्रेम में

Rajpal:mai समझ सकता हु बेटे अगर तुम्हारी और तुम्हारी माँ की यही चाहत है यही सही मुझे स्वीकार है तुम दोनों का रिश्ता

ये सुनते हे बलदेव अपने पिता क गले लग जाता है

Baldev:dhanyawad पिता जी में वो सब भूल गया जो आपने हम दोनों क साथ क्या आपने हमे स्वीकार कर लया इस से बड़ी बात कोई हो हे नहीं सकती

Rajpal:mai हर बात समझ सकता हु मेरा पुत्र कभी मेरे विरुद्धा नहीं जा सकता परन्तु तुम अपने प्रेमिका अपने माँ क वजह से मेरे विरुद्धा gaye..beta गहतराष्ट्रा क वंश की ज़िम्मेदारी तुम पर है ..मई हे नहीं पूरा गहतराष्ट्रा तुम्हारे ओरे बड़े उम्मीद से देखता है

बलदेव एक बहार फिर ज़ोर से अपने बाप को गले लगा लेता है और झूम उठ ता है

Baldev:pita जी हम बरात कल हे ले कर जायेंगे पारस आप तैयारी kijiye..Suno बद्री और श्याम कल बलदेव की बरात जाएगी..

महल में सब बलदेव की बाराती की तैयारी करने लगते है

पारस

Naaz:Beti समां तुम्हारी बड़ी अम्मी अभी तक नहीं उठी उठा दो

Sama:ji अम्मी में जाती हु

समां जा कर भूरिया क हुजरे क सामने पहुँचती है हुजरे क दरवाज़े पे दो दसिया कड़ी थी

Kaneez:Shehzadi आपका अंदर जाना मन है पहले आप मल्लिका इ जहाँ से इजाज़त ले लें

Sama:Kaneez में कोई मर्द नहीं जो में बिना इजाज़त क अंदर नहीं जा सकती और मल्लिक इ जहाँ मेरी बड़ी अम्मी है हटो मेरे रस्ते से

समां सीधा हुजरे में घुसती है ो होइया को देख आखे बड़ी कर लेती है



भूरिया आहात सुन क्र पलट टी है और अपने सौतेली बेटी समां को देख मुस्कुराती है

Sama:man me)Haye क्या भरे चौड़े गांड है और क्या मोठे पपीते जैसे दूध है बड़ी अम्मी की

भूरिया :क्या हुआ समां क्या मसला है



भूरिया क 42 क दूध सिल्क क कपडे से साफ़ गोलाई लिए सर उठाये थे

sama:man me)Khuda रेहम करे भूरिया अम्मी निक़ाब में जाती है तो लोग इनको देख पागल हो जाते है और कितने क़तल हो जाते है अगर ऐसे बहार निकल गयी तो क्या आलम होगा

Hooriya:kya हुआ बेटी

Sama:gustakhi मुआफ बड़ी अम्मी आपके इजाज़त क बगैर

Hooriya:koi बात नहीं बेटी तुम कौन से मर्द हो अगर मर्द होते मेरे बेटे भी होते तो अभी तुम्हारे गाल पर थप्पड़ रशीद कर दी होती

sama:ji आप को उठाने क लये अम्मी भेजी थी

समां डरते हुए कहती है

Hooriya:theek है तुम जाओ में तैयार हो कर आती हु

समां

बहार चली जाती है और और भूरिया तैयार होने लगती है



कुछ देर में तैयार हो कर भूरिया अपने हुजरे से निकल कर नाज़ क पास जाने लगती है..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 109

भूरिया तैयार होती है और अपना निक़ाब पहन कर अपने चेहरे को अछि तरह से धक् कर अपने हुजरे से बहार निकल कर नाज़ क हुजरे की तरफ जाने लगती है तभी वह से उसे नाज़ अति हु दिखहि देती है

Naaz:Salam मल्लिका इ हुस्न मल्लिका जहाँ

Hooriya:salam नाज़ बेगम आज बहुत खुश लग रही हो



भूरिया अपने सौतन क नज़दीक जाते हुए कहती है

Naaz:baaji अब आप जैसे हुस्न की मल्लिका को देख कर हर कोई खुश हो जाता है कल तो एक बेचारा क़त्ल हे हो गया इस हुस्न क वजह से

Horiya:ab तुम हे बताओ नाज़ उसमे मेरी क्या गलती थी उसकी बेहूदगी की सजा तो सिर्फ मौत थी जो उसे मिल गयी

Naaz:baaji आप भले से मेरे सौतन हो पर मेरी बड़ी बहिन जैसी हो सच कहु तो आप का हुस्न देख कर मर्द का डिल क्या मेरा भी मन फिसल जाता है जी तो चाहता है

Hooriya:Naaz में ऊपर से निचे तक पूरी ढकी तो होती हु

Naaz:khoobsurati को चाहे आप दीवारों में चुनवा दे फिर भी झलक जाती है और ये क्या बाजी कड़ी कड़ी बात करोगे आजाओ आपको एक ख़ुशहाबरी सुननी है

नाज़ क साथ होरिया नाज़ क हुजरे में दाखिल होती है

Naaz:baith जाये बाजी और ये अपना चेहरा मुझ से तो न छुपाये में कौन सा आपके हुस्न का जाम पी लुंगी ायखो से

hooriya:tu भी न

हस्ते हुए अपने चेहरे से अपना निक़ाब हटा देती है



Naaz:khuda ने फुर्सत से बनाया होगा आपको बाजी आपके आशिक़ तो बहुत होंगे शादी से पहले

Hooriya:Nahi नाज़ मेरे अब्बा मिश्रा क सुल्तान थे और भला किसकी हिम्मत क मिश्रा क शहज़ादी को आँख उठा कर देखे

Naaz:baaji ायकः उठा कर तो आपको लोग यहाँ पारस में भी नहीं देखने की हिम्मत है किसी की अब तो आप पुरे आलम क सुल्तान मेरे वाहिद की पहली बेगम हो आप को सुल्ताना का दर्जा हासिल है

Hooriya:Sultan ने बहुत मुशक़्क़त से दुन्या पर अपनी सल्तनत काबिज़ क्या है अब बास हिंदुस्तान पर हमारी हुकूमत होनी बाकि है

Naaz:Baaji आपकी दवा रही तो हम बादशाह शाहज़ेब का ताख पलट कर दिल्ली जीत लेंगे

Hooriya:khuda हमारी दुआ क़ुबूल करे

Naaz:waise आज बहुत देरी तक सोई खुमारी उतरी नहीं क्या

Hooriya:kya मतलब

naaz:baaji आप को कही सुल्तान की कमी तो नहीं खाल रही

Hooriya:man में) कमी तो उस दिन हे महसूस हो गयी थी जिस दिन सुल्तान दूसरी शादी तुमसे की थी नाज़ बेगम

Naaz:kya सोच रही है बाजी

hooriya:Kuch नहीं अगर में सुल्तान की बीवी हो कर सुल्तान की फ़िक़र में पड़ी रही तो सल्तनत को कौन चलाएगा उनके नहीं रहते हुए तो मेरी ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है

naaz:baaji में अगर सुल्तान क जगह होती तो आपको छोर कर नहीं जाती कभी दिन रात आपको प्यार करती

Hooriya:tauba नाज़ हम राणिओ को ये सहना पड़ता है हमारे सुल्तान अगर जुंग पर नहीं जायेंगे तो कहा जायेंगे

Naaz:Par इतने दिनों तक तो मुझसे सेः नहीं जाता एक औरत की भी जिन्सी ख्वाहिशात होती है

hooriya:sabr करो

Naaz:aap कर लें सबर मुझसे तो नहीं होता सुल्तान तो यहाँ रहते भी है तो मुझे काम हे वक़्त देते है

hooriya:sabr karo,sultan क पास काम वक़्त होता है

Naaz:baaji आप छुपाये नहीं सुल्तान क पास 4 रानिया है और हराम में 100 लौंडिया आप भी जानती है जब से रज़िया और मुस्कान से शादी हुई है सुल्तान मुझसे दो हफ्ते में भी मुश्किल से एक बार मिल पते है

Hooriya:aise शिकायत नहीं करते नाज़ बेगम

Naaz:ab में कहु तो किस से कहु ससुर सुल्तान दास्ताँ से कही तो वो ज़िंदा दीवार में चुनवा देंगे अब आप भी न सुने मेरी बात

ये कह कर अपने चेहरे पर शिकन लेट हुए नाज़ अपने दुःख का इज़हार करते हुए कहती है

Naaz:aap से भी तो सुल्तान अब मुश्किल से एक हफ्ते में मिलते है क्यू क आप उनकी पहली बीवी हो और वो आप को ज़्यादा चाहते है

Hooriya:man me)wo तो मेरा डिल जनता है क कैसे मई अपने ख़ुशी को क़ुर्बान करती आरही हु जब से सुल्तान ने दूसरी शादी की तब से

Hooriya:Naaz बेगम सुल्तान मेरे वाहिद की तो सिर्फ 4 बीवीए है कितने सुल्तान 10 ..20 शादीअ करते है

Naaz:Or हराम में जो अपने से आधे उम्र क लड़कीओ क साथ ऐश करते है वो भी पूरी 100 लड़कीअ ,

Hooriya:Bibi नाज़ कितने सुल्तान अपने हराम में हज़ारो क तादाद में औरते रखते है लौन्डिए रखते है जिनसे वो जिन्सी तालुकात रखते hai..or वो भी तो औरते है भले से हराम की लड़कीओ का बीवी का दर्ज़ा नहीं मिलता पर उनके भी तो खवाहिशे होती है

Naaz:baaji आप एक औरत नहीं सुल्तान की पहली बीवी सुलताना की तरह बात कर रही हो

hooriya:do हफ्ते में तो तुम से सुल्तान मिलाप कर लेते है क्यू क तुम बीवी हो पर जो हराम की औरते है उनकी बरी तो 6 महीने में एक बार आती है आखिर वो भी तो औरते हे है

ये सुनते हे नाज़ बेगम दुःख क मरे अपने आखो से ासु टपकने लगती है भूरिया आगे हो कर आखो को पोछती है

Naaz:aapka क्या आपको तो सुल्तान एक हफ्ते में एक बार खुश कर हे देते है

ये सुन कर भूरिया गहरी सोच में डूब जाती

Hooriya:man me)ab तुम्हे क्या बताऊ नाज़ अब क में कैसे रोज़ सुल्तान की याद में बिस्तर पर करवट बदलती हु

Naaz:boliye बाजी क्या ये गलत नहीं

Hooriya:chup करो नाज़

naaz:baaji क्या आपका डिल नहीं करता आपका शौहर हर रात आप क साथ बिताये

भूरिया क कान पर ये बात पड़ते हे उसका बदन काँप सा जाता है क्यू क नाज़ ने दुखते नस पे हाथ रख दया था

Hooriya:man me)Ye तमन्ना ले कर मिश्रा से पारस आई थी क निकाह क बाद हर रात बहार की होगी par..sultan ने कुछ महीने बाद हे तुमसे शादी कर मेरे हर तमनाओ पर पानी फेर दया अगर नाज़ से शादी किये न होते सुल्तान तो आज मेरे बेटे बेटी भी होती और बेटी की ख्वाइश तो जैसे मैंने मार हे दी ..

Naaz:Pata नहीं कैसा नसीब है मेरा

Horiya:Tumhari बहुत ाची नसीब है नाज़ तुम्हारे पास दो खूबसूरत औलाद है बीटा शान और बेटी समा

Naaz:baaji वो तो है अब आएगी की ज़िन्दगी क सहारे वही है ,आप दुखी न होये अआप का बीटा शहज़ादे शमशेर तो 10 क बराबर है और सुल्तान मेरे वाहिद क बाद वो हे सुल्तान बने ऐसा उम्मीद करती हु

hooriya:shukria नाज़ मेरे और मेरे बचे क लये ाचा सोचने क लये

Naaz:kya बाजी हमारे बचे बाटे हुई है क्या सब तो एक बाप क हे औलाद है

Hooriya:ab रोना धोना बंद करो और बताओ तुम कुछ खुशखबरी बताने वाली थी

Naaz:ji बाजी वो हमारे शौहर सुल्तान मेरे वाहिद ने हिन्द क दो किलो पर जीत हासिल कर लिए गहतराष्ट्रा और कुबेरी

Hooriya:khuda का शुक्र है तुम्हे किसने बताया

Naaz:wo सीपा सालार ने बेटे शान को बताई ये बात और वो लोग किसी भी वक़्त पारस पहुंच सकते है

ये सुनते हे भूरिया जो महीनो से सपने पति से नहीं मिली थी ख़ुशी क मरे झूम उठ टी है

Naaz:Ji बाजी पारस में उनके खैरमखदम की तैयारी शुरू हो चुकी है

Hooriya:me भी जाती हु और खाने और सुल्तान और शमशेर क हुजरे की सफाई करवा देती हु और सुल्तान का खैरमकदम करने क लये सजती सवारती हु

मुस्कुराते हुए भूरिया कहती है

Naaz:aap जाये मुझे नहीं सजना सवर्ण उसके लये जो सौ औरतो क साथ हमबिस्तरी करता है

Hooriya:gussa थूको और सब्र करो और चलो मेरे साथ हम तैयारी करते है

ये दोनों बाते हे कर रहे थे क ऐलान होता है ढोल पीट कर

"सुनो सुनो सुनो सुल्तान हिन्द क किलो को फ़तेह कर क वापस आ रहे है

बा होशियार सब को मिल कर हम अपने बहादुर फौज का खैरमखदम करेंगे"

ये सुन कर हूर्य और नाज़ दोनों उठ कर खिड़की से नज़ारा देखने लगते है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 110

पारस

Hooriya:gussa थूको और सब्र करो और चलो मेरे साथ हम तैयारी करते है

ये दोनों बाते हे कर रहे थे क ऐलान होता है ढोल पीट कर

"सुनो सुनो सुनो सुल्तान हिन्द क किलो को फ़तेह कर क वापस आ रहे है

बा होशियार सब को मिल कर हम अपने बहादुर फौज का खैरमखदम करेंगे"

ये सुन कर हूर्य और नाज़ दोनों उठ कर खिड़की से नज़ारा देखने लगते है

लोगो की भीड़ लगी थी और सब सुल्तान क नाम ले कर अपने सैनिको को बधाई देने लगते है और पुरे पारस क बाजार में अपने सगी सम्बन्धी सैनिको की आगमन की तैयारी ज़ोरो शोरो से शुरू हो जाती hai.hooriya अपने पति और अपने बेटे क आने क ख़ुशी में तरह तरह क पकवान बनवाती है और राह देखने लगती है अपने शौहर मेरे वाहिद सुल्तान का

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टहलते हुए अपने समय को किसी भी तरह निकल रही थी उसकी बेसब्री धीरे धीरे बढ़ते हे जा रही थी

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Hooriya:man me)na जाने अब कितनी देर और लेंगे सुल्तान आने में

अपने साजन क आने क ख़ुशी में भूरिया सुर्ख चेहरा और लाल पद गया था

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आगे पीछे करते हुए भूरिया क भरी चुतर और गोल बड़े पपीता जैसे मम्मी छुपाने से नहीं छुप रहे थे यही वजह थी क भूरिया क ऊपर बुरी नज़र डालने वाले हज़ारो दीवाने गुस्ताखी कर क भूरिया को देखना गवारा समझा अपने जान से बढ़कर और क़त्ल कर दिए गए यही वजह थी भूरिया अपने जवानी को ज़्यादा से ज़्यादा छुपा कर रखती थी इस बात से अनजान क उसका खुद का बीटा शमशेर उसे नंगी चुड़ते हुए देख चूका है और शमशेर अपना डिल दे बैठा है जिसका इज़हार बलदेव और देवरानी से भी कर चूका है क वो अपने अम्मी जान मल्लिका हूर इ जहाँ से कितनी मुहब्बत करता है

Hooriya:Dekhti हु अंदर जा कर सब इंतेज़ाम ठीक से हुए क नहीं

भूरिया अंदर आती है पूरा महल ख़ुशी में सजाया गया था हर तरफ लोग सुल्तान क आने की ख़ुशी के तैयारी कर रहे थे भूरिया अपने ज़िम्मेदारी सँभालते हुए पकवान का इंतेज़ाम कर रही थी

भूरिया अंदर आकर नाज़ से

Hooriya:ary नाज़ खाने की तैयारी कितनी हुई कुछ पता चला

Naaz:ji बाजी बेटी समां है वह रसोई में वो बनवा लेगी

hooriya:dhyan रहे जितने कुछ कहे है बन जाये

naaz:aap फिक्र न करे सब तैयार होजायेगा

और मुस्कुरा कर जाने लगती है

Hooriya:suno न

नाज़ जाते हुए रुक जाती है और पलट कर

Naaz:ji बाजी

Hooriya:wo मई कैसी लग रही हु

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Naaz:baaji ठीक लग रही हो आप हे की बरी पहले आएगी सुल्तान क पास जाने की

ये कह कर नाज़ है देती है

Hooriya:hatt पगली बता न

Naaz:sach कहु तो आपको देख क बूढ़ा भी अपने जवानी को याद करने लगे पर आज क दिन आप कुछ रंगीन पहन लेते तो बेहतर होता

Hooriya:theek है में अपना नया निक़ाब पहन लेती हु और आपने फूल मंगवा लिए मेरे लिए नाज़ बेगम

Naaz:ji आपि फूलो क साथ आप मिलोगे सुल्तान से तो फिर वो नौजवान छोटी बीवी मुस्कान बेगम को छोर आअज की रात आप के हे रंगीन कर देंगे

Hooriya:ab 44 क ऊपर उम्र हुई अब मुझमे वो बात कहा जो मुस्कान बेगम जो अभी जवान है उसका मुक़ाबला karu,ab तो मोती हो गयी हु

Naaz:Baaji आप पहले से और खूबसूरत हो गयी हो मोटापा आप पर कही से पता नहीं चलता ,आप भरी भरकम ज़रूर लगती हो और रही बात मुस्कान बेगम भले से चारो बीइओ में छोटी है पर क़त्ल तो आपकी हे जवानी करवाती है

ये कह कर नाज़ पिछले दिन मल्लिका भूरिया को घूरने वाले शख्स को मिली मौत की सजा पर चुटकी लेते हुए कहती है और हसने लगती है

Hooriya:tum भी न नाज़ बेशरम कही की जाओ मेरे हुजरे में मेरे लिए फूल भेजवा दे

Naaz:jaayiye और तैयार हो जाइये अपने सुल्तान क लये सुल्ताना मुझे तो कोई शौक़ नहीं

ये कह कर नाज़ आगे निकल जाती है और भूरिया अपने हुजरे में आयकर अपना निक़ाब उतरती है और दूसरा निक़ाब पहन कर इतर लगाती है कुछ देर में हे एक दासी फूल ले कर आती है और भूरिया को देती है भूरिया एक रंगीन निक़ाब पहन कर आईने क सामने कड़ी हो जाती है

Hooriya:man me)Ye रंग तो मुझपे फैब रहा है सुल्तान मुझे देखते हे घायल हो जायेंगे और महीनो बाद आज की रात उनसे में सोहबत कर paungi..Naaz सही कहती है मुस्कान बेगम मेरे सामने कुछ नहीं थोड़ी मोती हो गयी तो क्या हुआ

भूरिया अपने डिल में अरमान सजाये सज्ज सवार कर बहार आती है अपने हुजरे से उतने में महल में शोर गूंज उठ था है और लोग महल से बहार आने लगते है



भीड़ को चीरते हुए घोड़े और रथ आने लगते है दोनों तरफ से सैनिको क ऊपर से फूलो की बारिश हो रही थी और हर सैनिक अपने घोड़े को धीमी गति से चलते हुए अपने परिजन क पास रुक कर उनसे गले लग जाते धीरे धीरे सैनिक अपने परिवार से मिल कर जाने लगते है और बीच में से दो तीन रथ महल की मुख्या दुवार की ओरे आने लगते है

हर सैनिक अब लोगो क साथ मिल कर सुल्तान की जय जय कार कर रहे थे और अपनी जीत की ख़ुशी मन रहे थे ये सब शोर गुल सुन कर भूरिया महल से बहार निकल कर महल क दरवाज़े पे कड़ी हो जाती है अपने हाथो में फूलो का गुलदस्ता लये

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Hooriya:man me)aagaye मेरे सुल्तान मेरे जान में शौहर जो मुझे सब से ज़्यादा चाहते है

रथ आकर रुकता है और सबसे पहले देवराज उतारते है और देवरानी को रथ से बहार आने को कहते है देवरानी बहार उतरती है जिसे देख भूरिया चौक जाती है

Hooriya:ary devrani..wo भी अपने भाई क साथ..

Devraj:jao देवरानी मल्लिका क साथ अंदर

देवरानी जैसे घूमती है भूरिया को देख मुस्कुरा देती है

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भूरिया को निक़ाब में ढाका देख देवरानी भी अपना पल्लू ओढ़े अपने मुँह को ढके भूरिया क आखो को देखती है और अंदाज़ा लगा लेती है भूरिया भी मुस्कुरा रही है

देवरानी धीरे से कदमो से चल कर

Devrani:Namaskar दीदी

hooriya:Salamat रहो मेरी बहिन आओ ..कनीज़ों रानी देवरानी को मुसाफिर खाने में ले जाओ

Devrani:Rani नहीं देवरानी कहिये दीदी

और चुटकी लेते हुए हस्ती है

Hooriya:wo कैसे देवरानी

Devrani:Bass आपके नटखट बलदेव ने मुझे अपने पत्नी बना लय और खुद महाराज बन कर मुझे महारानी की उपाधि दे दी

भूरिया ये सुन कर फूली नहीं समाती है

Hooriya:To तुमने अपना बदला ले हे लिया और षुरूश्ती को महारानी की गद्दी से उतार dya..to क्या सुहागरात भी हुआ महाराजा बलदेव और महारानी देवरानी का या सिर्फ

Devrani:Sab हो गया deedi..suhagrat भी..

ये कह कर मुस्कुरा कर अपना सर शर्म से निचे कर लेती है

Hooriya:Chalo अब शर्माओ मत मुझे सब कुछ जान न है कैसे क्या हुआ ..सुहागरात का भी

Devrani:aap भी न दीदी ..आपको बताउंगी जो बता सकती हु पर बाद में

Hooriya:sultan कहा है

devrani:wo तो घायल हो गए थे युधा में उनको सहारा दे कर लाना होगा

ये सुनते हे भूरिया चौंक जाती है और अपने शौहर जिसे वो अपने डिल ो जान से चाहती है

Hooriya:kya

और सीडीओ से निचे उतर कर रथ की ओरे जाने लगती है

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भूरिया निचे उतर कर रथ की ओरे जाने लगती है

Devrani:man me)sach के भूरिया दीदी कितना चाहती है अपने सुल्तान को

ये कह कर देवरानी महल में दासिओं क साथ चली जाती है और भूरिया चल कर बेसब्री से रथ की ओरे जाने लगती है तभी उसे सामने से शमशेर आता हुआ दिखाई देता है

Shamshera:Salam अम्मी जान

Hooriya:salam बेटे ..तुम्हारे अब्बू जान को क्या हुआ कहा है वो

भूरिया देखती है रथ से उतर कर सुल्तान मेरे वाहिद को उतर कर अपने सहारे से चला कर ला रहे है

भूरिया अपने शौहर आज पहली बार इतना बेबस देखि थी उसके ख़ुशी ग़म में तब्दील हो जाते है और उसके आखो से ासु गिर जाती है और वो आगे जाती है जहा से देवराज और मेरे वाहिद आरहे थे

shamshera:man me)Ammi जान आपको अपने बेटे से मिलना भी गवारा नहीं समझा और आगे अपने शौहर से मिलने भाग गयी



Shamshera:man me)nahi नहीं मुझे अम्मी पर गुस्सा नहीं होना चाहिए मेरी मुहब्बत है वो उनकी हर गलती में सह सख्त हु

भूरिया सुल्तान क पास जाती है

Devraj:Namaskar मल्लिका इ जहाँ

hooriya:salam देवराज ji..Salam मेरे सुल्तान मेरे सुल्तान ये आपको क्या हो गया

भूरिया जा कर अपने सुल्तान का हाथ दूसरे तरफ से पकड़ लेती है

Sultan:Salam मेरी सुल्ताना ..मेरी मल्लिका हूर इ जहाँ आपने जहमत क्यू की बहार आने की ..आह

सुल्तान धीरे धीरे चलते हुए

Sultan:or ये आपने गुलदस्ता मेरे लिए ले उसके लिए शुकरिअ.

ये सुन कर

Hooriya:sultan आपने ये क्या हाल बना लय आपने ाः हु

उसके आखो से ासु टपकने लगे

Sultan:Bass करें सुल्ताना आप मल्लिका इ जहाँ है मेरी गैर मौजूदगी में आपने पूरी सल्तनत को संभाली आप रोये नहीं

Hooriya:kaise रौ नहीं सुल्तान आप ठीक तो है न

Sultan:Sultana साहिबा आपका सुल्तान अभी इतना कमज़ोर नहीं हुआ आप रहने दे में देवराज जी क मदद से चल कर चला जाऊंगा

भूरिया अपने बेटे को देखती है जो गौर से ये सब देखते हुए सोच रहा था

Hooriya:soch क्या रहे हो शमशेर अपने अब्बा जान को ले चलो

शमशेर अपने से ज़्यादा अपने बाप का ख्याल करती हुई भूरिया को देख जल जाता है पर फिर भी अपने माँ की बात मानते हुए सुल्तान को महल क अंदर ले कर आने लगते है देवराज क साथ

पुरे महल क चारो ओरे पारस वासी ज़ोर ज़ोर से सुल्तान की नाम की जय जय कार कर रहे थे

Sultan:Baaki लोग कहा है ,

Hooriya:sab आपका इंतज़ार आपके तख़्त पर कर रहे है

सुल्तान मेरे वाहिद का पिता सुल्तान दास्ताँ राज सभा में अपने मंत्रीओ और अपने छोटे बेटे

गुल शाह और छोटे पोते शहज़ादे शान क साथ बैठे इंतज़ार कर रहे थे

इतने में सभा में इंतज़ार कर रहे हर किसी क इंतज़ार को ख़तम करते हुए सुल्तान मेरे वाहिद को दोनों तरफ से पकडे देवराज और शमशेर ले कर आने लगते है और पूरी सभा कड़ी हो जाती है

भूरिया उन्हें छोर कर सब से पहले दासी को कह कर देवरानी से सभा में आने को कहती है मर्दो क सभा क ठीक बगल में परदे क पीछे औरतो की सभा थे जहा राणीअ बैठी थी भूरिया जा कर औरतो क बीच में बैठ जाती है उसे गम शुभ देख कर भूरिया की सासु माँ सुल्ताना अफसाना पूछ बैठ थी

Afsana:Kya हुआ हूर इ जहाँ आप मायूस क्यू है

Hooriya:Bass वो सुल्तान इस तरह घायल देख कर मेरा मन घबरा रहा है

Afsana:Jakhm एक सुल्तान की शान होती है हमे इस जीत का जश्न मन न चाहिए

Hooriya:man me)kaisi माँ हो अपने बेटे क जख्म क दर्द को महसूस भी नहीं कर सकती

उधर तख़्त क नज़दीक सुल्तान पहुंचते हे सब से पहले सुल्तान मेरे वाहिद क भाई गुल शाह

गुल shah:mubarak हो भाईजान जीत मुब्बाराक हो

गुलशाह अपने भाई सुल्तान से गले लग जाता है

Sultan:shukria मेरे छोटे भाई

तभी शान आता है

Shaan:Salam भाई जान शमशेर

अपने सौतेले भाई से गले लग कर बधाई देता है

Shamshera:shukria मेरे छोटे bhai,abba जान से मिल लो

शान आगे बढ़ कर

Shaan:abba जाएं

शान अपने बाप सुल्तान मेरे वाहिद से गले लग जाता है

Shaan:abba जाएं आप ठीक तो है

Sultan:bilkul ठीक बीटा

शान क पीछे से सुल्तान दास्ताँ आते है और अपने बेटे को ऊपर से निचे तक देखते है और गले लगा लेते है

Dastan:aakhir तुमने हिन्द पे पहली जीत दर्ज़ कर ली

मेरे wahid:Ji अब्बा जान मेरा सपना पूरा होगा

Dastan:apne तख़्त पर बैठो ये तख़्त तुम्हारे जैसे बहादुर को हे शोभा देती है

पुरे मंत्री और सभा सुल्तान का जय जय कर कर रही थी उधर दासी मेहमान खाने से देवरानी को बुला लती है

देवरानी दासी क साथ औरतो क हुजूम में बैठ जाती है जिसमे सबसे ऊपर तख़्त पर एक बहुत बूढी औरत को बैठा पति है उसके बगल में सुल्ताना भूरिया बैठी होती है

भूरिया देवरानी को आते देख मुस्कुराते हुए कड़ी हो जाती है और आगे बढ़ कर

Hooriya:aaiye महारानी देवरानी आपको में अपने खंडन से मिलवाती हु

पूरी राणीअ देवरानी क पहनावे और सज सिंगर को देख दांग रह जाती है

देवरानी मुस्कुरा रही थी अपने आपको महारानी सुन कर भूरिया क मुँह से जो वो खूब समझती थी क अब वो उसे महारानी क्यू बोल रही है

Hooriya:inse मिलो ये है महारानी देवरानी ..हमारे सुल्तान क मित्र देवराज जी की अपनी बहिन

Hooriya:Devrani ये है मेरी सासु माँ सुल्ताना अफसाना

देवरानी झुक कर नमस्कार करती है

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Hooriya:ye है सुल्तान की दूसरी बीवी नाज़

सुल्तान की तीसरी बीवी रज़िया

सुल्तान की चौथी बीवी मुस्कान

ये है नाज़ की बेटी शहज़ादी समां

ये है रज़िया की बेटी शहज़ादी महनूर

और वो जो सामने शमशेर क साथ खड़ा है वो शहज़ादे शान है नाज़ क बीटा

उधर तालिओं क गरगराहट क साथ सुल्तान मेरे वाहिद अपने तख़्त पर बैठ जाते है और इधर देवरानी भी औरतो क हुजूम में बैठ जाती है

Devrani:aap सब से मिल कर प्रसन्नता हुई

Naaz:hume भी महारानी देवरानी

Devrani:ji मई पहले भी पारस आ चुकी हु पर तब आप सब नहीं थे

Razia:ji वो हम सब मिश्रा थे तब

Naaz:chalo कोई बात नहीं तब नहीं मिले थे क्यू क हमारा आधा खंडन पारस में नहीं था अब तो मिल गए महारानी जी

देवरानी मुस्कुरा देती है और तभी सुल्तान मेरे वाहिद क बैठ ते हे सब बैठ जाते है और सुल्तान मेरे वाहिद बोलना शुरू करते है

Sultan:Paras को में ये बड़े शान क साथ कहना चाहता हु क हमने हिन्द क दो किलो पर फ़तेह की और हमारा कुबेरी लूटने का सपना साकार हुआ

ये बात सुनते हे सब सुल्तान की जय जय कार करने लगते है

Sultan:Paras क हर आदमी में ये माल जो हम कुबेरी से लाये है वो बायता जायेगा

इस बात पर हर एक मंत्री सभा का खुश हो जाता है

कुछ देर अपनी भासन देने क बाद

Sultan:ek और ज़रूरी ऐलान

सुल्तान देवराज की ओरे देखते हुए

Sultan:Hum पारस में महाराज देवराज जी की बहिन महारानी देवरानी जी जो हमारी भी बहिन हुई उनकी शादी करवाने का फैसला क्या है

सब ख़ुशी क मारे तलिए बजाते है और देवराज अपना सर झुकाये बैठा था

इधर औरतो में बैठी

Hooriya:Devrani ये क्या माज़रा है..

देवरांनी वो मुस्कुरा कर लज्जा कर सर झुका लेती है

सुल्तान मेरे वाहिद से तभी एक मंत्री सवाल करता है

"सुल्तान पर देवराज जी की बहिन की शादी किस से है"

सुल्तान इधर उधर देखते है पूरी सभा शांत थी फिर सुल्तान देवराज जी की ओरे देखते है तो उनकी आखे बंद पाते है

Sultan:Maharani देवरानी की शादी महाराजा बलदेव से होगी

मंत्री में से कुछ लोग जो जानते थे क बादेव देवरानी का पुत्र है उनमे वो बाटे करने लगते है तभी एक मंत्री

"सुल्तान ये तो गलत है महारानी देवरानी का बीटा है महाराज बलदेव ये कैसे मुमकिन है"

Sultan:Maine कह दया सो ...कह दया ..

सुल्तान घर कर देखते है उन मंत्रीओ को

Sultan:Baraat दो दिनों क अंदर aaajayegi..mantri जी तैयारी करें

mantri:Par

Sultan:Maine कहा न ..तो होगा हे..

सुल्तान क बाप दास्ताँ बीटा शन्न सुल्तान की बीवीए और सुल्तान की माँ ये सब सुन कर हैरत में थे

Sultan:Barkhasth..devraj जी चलिए

सभा ख़त्म कर दी जाती है और सरे मंत्री आपस में फुफुसाते हुए बहार जाने लगते है पर सुल्तान का बाप सुल्तान दास्ताँ और गुलशाह और शान वही बैठे रह जाते है

इधर देवरानी को साडी हरम की राणीअ देखने लगती है...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 111

Sultan:Baraat दो दिनों क अंदर aaajayegi..mantri जी तैयारी करें

mantri:Par

Sultan:Maine कहा न ..तो होगा हे..

सुल्तान क बाप दास्ताँ बीटा शन्न सुल्तान की बीवीए और सुल्तान की माँ ये सब सुन कर हैरत में थे

Sultan:Barkhasth..devraj जी चलिए

सभा ख़त्म कर दी जाती है और सरे मंत्री आपस में फुफुसाते हुए बहार जाने लगते है पर सुल्तान का बाप सुल्तान दास्ताँ और गुलशाह और शान वही बैठे रह जाते है

इधर देवरानी को साडी हरम की राणीअ देखने लगती है

Hooriya;,devrani ये क्या माज़रा है

naaz:Ye कैसे ी हो सकता है एक माँ अपने बेटे से शादी कर ले

Devrani;,Aap सब इतने आश्चर्य चकित न हो हम दोनों माँ बेटे की शादी पहले हे हो चुकी है ये तो मेरे भाई देवराज की ज़िद्द ने मुझे पारस ले आई क्यू क वो चाहते है पारसी रिवाज़ से मेरे भाई क सामने मई सात फेरे लू

Hooriya;,Devrani तुम चलो अभी बहस करने का सही वक़्त नहीं है और आप सब देवरानी से क्यू सवाल कर रहे है ये सुल्तान से कीजिये

Afsana:par ये कितना बड़ा गुनाह है मल्लिका भूरिया

Hooriya:ammi जान बेशक पर हमे सवाल सुल्तान से करनी चाहिए

ये बात से सब सहमत होते हुए भूरिया को देवरानी क साथ जाने देते है और देवरानी को ले कर भूरिया मेहमान खाने क हुजरे में ले आती है

उधर सुल्तान मेरे वाहिद क पिता सुल्तान दास्ताँ गुस्से से अपने बेटे को देखते हुए सवाल करते है

Dastan:Bete तुम पुरे दुन्या क सुल्तान हो तुमने ये फैसला लेने से पहले सोचा की नहीं अलबत्ता तुमने तो सोचा हे होगा ..क्या सोचा उसकी तफ्सील दो

मेरे wahid:Baba जानी अआप मेरे बाप है आप की हर हुक्म मेरे सर आखो पे है पर ये मामला हमारा नहीं देवराज जी का है

Dastan:kahna क्या चाहते हो मेरे वाहिद

मेरे wahid:Baba जानी देवरानी देवराज जी की बहिन है और वो इस रिश्ते से खुश है

ये सुन कर वह पर खड़े शान और गुलशाह क तोते उड़ जाते है

Gulshah:Bhai जान पर ये तो बहुत बड़ा गुनाह है

मेरे वाहिद : तुम चुप करो तुम कितने गुनाहो से बचे हुए हो मुझे मत सिखलाओ

मेरे वाहिद अपने छोटे भाई पर गरजते हुए कहता है

Dastan:Meer वाहिद अपने छोटे भाई की बात को दबा कर तुम अपनी बात सच नहीं साबित कर सकते

Gulshah:man me)Meri इज़्ज़त हे कब की तुमने मेरे वाहिद एक दिन मेरा भी वक़्त आएगा जिस दिन में सुल्तान बनूँगा

तभी इन सब क बीच बहस में देवराज आते है और बात सँभालते हुए

Devraj:Sultan दास्ताँ इसमें सुल्तान की कोई गलती नहीं वो तो मैंने हे अपनी बहिन को एक बार फिर से शादी करवाने पारस ले आया

मेरे wahid:Han बाबा जानी देवरानी और बलदेव ने तो पहले हे शादी कर चुके है

ये बात सुनते हे सब चौंक जाते है

Gulshah:man me)ab सुल्तान मेरे वाहिद हमे माँ बेटे की चुदाई भी दिखायेगा यही बाकि रह गया था

Shaan:man me)Ye कैसे मुमकिन है क माँ बीटा शादी कर ले

Devraj:me आप सब विनती करता हु क ये विवाह हो जाने दीजिये

Dastan:Par महाराज देवराज देवगढ़ वासिओ को अगर ये बात की खबर होगी तो आपकी क्या इज़्ज़त बचेगी

मेरे wahid:baba जानी आप उसकी फिक्र न करे हम कुछ न कुछ उपाय निकल लेंगे

Devraj:Sultan दास्तान जब बलदेव और देवरानी ने विवाह कर हे लय है अब मेरे चाहने नहीं चाहने से कुछ बदल नहीं जायेगा बास में अपना फ़र्ज़ पूरा कर देना चाहता हु

Dastan:kaisa फ़र्ज़ महाराज देवराज

Devraj:Varsho पहले मेरे पिता जी ने राजा रतन क कहने पर मेरे बहिन देवरानी से पूछे बिना अधेड़ उम्र क आदमी संग उसका ब्याह रचा दया था और राजपाल बहुत बड़ा अय्याश निकला

मेरे wahid:Han उसकी अय्याशी से परेशां हो कर देवरानी ने अपने बीटा को अपना शौहर बना लय और जबरदस्ती तो नहीं कर रहा है कोई उन दोनों की ख़ुशी मर्ज़ी से दोनों एक हुए है

Gulshah:man me)Bhai मेरे वाहिद तुम खुद अपने बेटी की उम्र क औरतो क साथ हमबिस्तरी करते हो और अपने बेटी जैसी लड़की मुस्कान बेगम क साथ शादी कर lye,ayyash कही का

गुलशाह मेरे वाहिद की ओरे देख कर सोचते हुए अपने मन में बात चीत कर रहा था

मेरे wahid:Gulshah तुमने कुछ कहा

Gulshah:man me)kahunga नहीं ..पर तुम्हारी पहली बीवी भूरिया मेरे दिलो जान पे छै है उसे छोड़ कर बताऊंगा तुम्हे

मेरे wahid:Kuch बोलोगे भी गुल शाह

Gulshah:wo भाई ..में ये कह रहा था क हमारे शहीद हुए सिपाहीओं की घरवालों से मुलाक़ात करनी थी

मेरे wahid:to ऐसा कहो न तुम्हे कही जाना है तुम जा सकते हो गुलशाह

Gulshah:Gustakhi मुआफ हो सुल्तान

सुल्तान अपना हाथ उठा कर अपने उंगलिओ क इशारे से दूर हो जाने को कहता है जिसे देख कर वह पर खड़े शान और सुल्तान दास्ताँ को भी बुरा लगता है

Dastan:man me)Meer वाहिद अपने भाई की इज़्ज़त नहीं करना तुम्हे आज न कल नुकसान पंहुचा देगी

Devraj:Sultan दास्ताँ आप मेरी चिंता मत कीजिये आप लोग बास मेरी बहिन को यही से विदा कर लेने दीजिये में आप सब का आभारी रहूँगा

देवराज खड़ा हो कर अपने दोनों हाथ जोड़ लेता है जिसे देख कर सुल्तान दास्ताँ पिघल जाता है

सुल्तान दास्ताँ आगे जा कर देवराज क हाथो को पकड़ क

Dastan:Maharaj देवराज आप हमारे साथ बरसो से जंगो में हमारी मदद कर रहे है आपको हाथ जोड़ने की ज़रूरत नहीं अगर आप चाहते है तो शादी हो जाएगी

ये सुन कर देवराज खुश हो जाता है और सुल्तान दास्ताँ क गले लग जाता है

Devraj:hume आप से यही उम्मीद थी सुल्तान

Dastan:aap जाये और शादी की तैयारी करे

Devraj:Ji sultan,ek पहलवान का इंतेज़ाम करे जो मेरे भांजे को पानी पीला सके मैदान में

Dastan:wo क्यू

Devraj:hamare समाज में अपने बहिन बेटी हम बिना स्पर्धा कराये हुए नहीं देते बलदेव को मेरी बहिन देवरानी जितनी होगी

दास्ताँ ये सुन कर मुस्कुराते हुए कहते है

Dastan:aap फिक्र न करे पारस का सबसे बड़ा ताक़तवर पहलवान हम बलदेव क सामने लाएंगे

Devraj:hmm धन्यवाद सुल्तान

Dastan:ary इसमें शुकरिअ ऐडा करने की क्या बात hai..or कही बलदेव हार गया तो

Devraj:..,devraj की बहिन को ब्याह लेना हर मर्द क बास की बात नहीं बलदेव को ये परीक्षा में सफल होना होगा अन्यथा वो देवरानी को भूल जाये

Dastan:agar वो नहीं माने तो

Devraj:Baldev इस बात को स्वीकार लय है क वो पहलवान को हरा कर हे ब्याह करेगा

Dastan:theek है देवराज जी अआप आराम कीजिये

देवराज भी अपने हुजरे में चला जाता है

अब वह पर शान क साथ सुल्तान दास्ताँ और सुल्तान मेरे वाहिद मौजूद थे

Shaan:Abba जान अगर आपको भी आराम करना हो तो में छोर दू आपको

मेरे wahid:nahi बीटा आप जाओ आराम करो

Shaan:jaisi आपकी मर्ज़ी अब्बा जान

अब वह पर सिर्फ सुल्तान दास्ताँ और सुल्तान मेरे वाहिद बच गए थे

Dastan:Bhut प्यारा बचा है शहज़ादे शान

मेरे wahid:baba जानी आखिर बीटा तो मेरा है

Dastan:Han तलवारबाज़ी में भी इसका कोई शानि नहीं मेरी मनो तो अगला सुल्तान शान को बन न चाहिए

मेरे wahid:Aap को ऐसा क्यू लगता है बाबा जानी

Dastan:Shehzade शान बहुत दरया दिल इंसान है गरीबो मज़बूरो की मदद क लये हमेशा खड़ा रहता है और उसके अंदर दिलेरी भी hai,talwari बाज़ी से ले कर हर कला जानता है

मेरे wahid:baba जानी शायद आपको नहीं पता सल्तनत तलवार में बेदर्दी लेन से बनती है लोगो से हम दर्दी कर क हम कोई जुंग नहीं जीत सकते

Dastan:Jeet तो खुदा क हाथो में है हम तो कोशिश करते है

मेरे wahid:baba जानी ज़माना बदल गया है अब किसी खित्ते को फ़तेह करना उतना आसान नहीं जितना पहले tha,waise भी अगला सुल्तान कौन होगा उसका फैसला मई करूँगा आप नहीं

Dastan:man me)maine बरसो पहले शायद गलती कर दी थी तुम्हे सुल्तान बना कर गुलशाह क साथ मैंने नाइंसाफी क्या इस बार वो नहीं होने दूंगा में

मेरे wahid:waise बाबा जानी शमशेर क बारे में आपका क्या ख्याल है

Dastan:Beta मेरे सामने शान और शमशेर दोनों मेरे पोते है पर शमशेर की बुरी आदते शायद शमशेर को शान क सामने कमज़ोर कर देता है

मेरे wahid:khair वो सब में देख lunga,aap मेरा खाना मेरे हुजरे में भेजव दे

Dastan:man me)Me इस बार एक कोठे पर जाने वाले अय्याश और शराबी को सल्तनत का सुल्तान नहीं बन ने dunga..puri दुन्या को चलने क लये हमे एक पाक सुल्तान चाहिए

Dastan:chalo बीटा में तुम्हे तुम्हारे हुजरे तक छोर देता हु तुम घायल हो

मेरे वाहिद ताली बजता है और दो गुलाम उसके सामने खड़े हो जाते है

मेरे wahid:hume हमारे हुजरे तक ले चलो

Dastan:Beta चलो में सहारा दे देता हु

मेरे wahid:baba जानी आप जा कर आराम करे में इन गुलामो क सहारे चला जाऊंगा

Dastan:jaisa आपकी मर्ज़ी बीटा जानी

दास्ताँ ये कह कर चला जाता है और सुल्तान मेरे वाहिद अपने गुलामो क सहारे से अपने हुजरे में जाने लगते है

इधर देवरानी को ले कर भूरिया मेहमान खाने में आजाती है

Hooriya:Ab बताओ बहिन क्या है ये सब

Devrani:Deedi आप को तो मैंने बताया हे मैंने और बलदेव ने शादी कर ली ये दर से क कही मेरा भाई देवराज अर्चन न बन जाये पर हुआ ये क सुल्तान क समझने पर भैया मान गए पर वो इस बात से नाराज़ हो गए क मैंने बिना उनके अनुमति क ब्याह कर ली

Hooriya:Jab शादी सुहागरात मन ली तो फिर शादी क्यू

Devrani:,Deedi ये बात सब पता है भैया को फिर भी वो चाहते है बलदेव हमारे रिवाज़ क अनुसार मुझे पहलवान को हराकर जीते

Hooriya:kahi इसमें कोई चाल तो nahi,tum नहीं जानती सुल्तान तुम दोनों की शादी तो करवा देंगे पर हमारी बदनामी यहाँ से ले कर मिश्रा तक हो जाएगी

Devrani:mujhe कुछ नहीं पता अब सुल्तान और देवराज भैया समझे

hooriya:uhh हो तुम तो रूठ गयी बहना में गुस्सा नहीं हो रही हो मुझे तुम्हारे और बलदेव क रिश्ते से कोई परेशानी नहीं पर तुम शायद पर्सिओ से वाक़िफ़ नहीं हो

devrani:Behna में खुद पारस में पैदा हुई हो में सब जानती हु

भूरिया ये सुन कर है देती है

Hooriya:ary है मई तो भूल हे गयी तुम तो पारसी हे हो उल्टा में मिश्रा की hu..par जब से सल्तनत पारस में काबिज़ हुआ है तब से यहाँ उलझने बढ़ गयी है

Devrani:aap है न मेरी बड़ी बहिन उलझन सुलझाने क लये वैसे में किसी से नहीं डर्टी जो होगा सो होगा

Hooriya:theek है ..जो होगा सो hoga..or बताओ क्या खाओगी तुम

Devrani:Aap तो जानती हो में शाकाहारी हे खाउंगी

Hooriya:mujhe पता है इसलिए मैंने तुम्हारे और देवराज जी क लये खास शाकाहारी खाना बनवाया है

भूरिया ताली मरती है और दो दसिआ सामने आकर कड़ी हो जाती है

"हुकम मल्लिका इ जहाँ"

Hooriya:Maharani देवरानी क लये खाना लगवाया जाये

दसिआ अपने मल्लिका की बात सुन कर चली जाती है

Hooriya:or सुनाओ देवरानी

Devrani:aap तो जानती हे है हम कैसी उलझनों में घिर गए थे

Hooriya:to बताओ बहना कैसे कैसे क्या हुआ

देवरानी पुरे युधा की कहानी सुना देती है कैसे बलदेव और देवरानी संघर्ष कर क एक हुए

Devrani:aap ने भी सही समय पर यहाँ से सेना भेज कर हमारी मदद की आपका अहसान मई नहीं भूलूंगी

Hooriya:ary तुम मेरी छोटी बहिन जैसी हो मैंने बहुत समझाया तुम्हारे भाई देवराज जी को क अपने बहिन की जान बचाये

Devrani:ye तो आपका बड़प्पन है मल्लिका इ जहाँ जी

Hooriya:tum मुझे दीदी हे बोलो..

devrani:acha दीदी

ये कह कर देवरानी है देती है

Hooriya:waise सुहागरात मन कर बेटे क साथ बहुत खिल गयी हो

देवरानी शर्मा जाती है और अपना सर निचे कर लेती है

Devrani:ji दीदी बलदेव की दें है

Hooriya:acha तो इस फूल को खिलने वाला बलदेव है

Hooriya:aaj रात तो आप को भी खिला देंगे सुल्तान

भूरिया ये सुन कर शर्मा कर

"धत्त पगली"

Hooriya:Ab मेरी उम्र ख़त्म हुई पहले वाली बात नहीं रही

devrani:Kaha आप तो क़यामत लगती हो निक़ाब में भी

Hooriya:nahi अब तो में मोती हो गयी हु तुम्हरे तरह सुडौल तो नहीं कहा तुम 36 साल की और मेरी उम्र भी अब 44 होने वाली है

devrani:par लगती तो नहीं हु उतनी उम्र की और हल्का मोटापा आप पर फबता है आप भरी भरकम तो हो तो बास छाती से और पीछे से

Hooriya:pet पर भी तो चर्बी छा गए

Devrani:mera पेट भी कहा पूरा सपाट है पर आपकी थोड़ी सी ज़्यादा चर्बी है

Hooriya:ab उम्र हुई इतनी भरी हो गयी हु

Devrani:aaap ऐसे नहीं मानोगे ..आप क मोठे चर्बीदार चुतर और पेट भरे लटके हुए दूध क़यामत ढाते है निक़ाब में भी

hooriya:tauba क्या बक रही हो

devrani:waise भी आप मुझसे से लम्बाई में थोड़ी छोटी हो इसलिए बड़ा ज़्यादा भरी लगता है

Hooriya:tumhari कितनी लम्बाई है

Devrani:me 6 फ़ीट में तीन दो इंच काम हु

Hooriya:me 6 फ़ीट में दो इंच काम हु मतलब में एक इंच छोटी हु

Devrani:chhoti हो पर सब मोठे मोठे है

Hooriya:kamini

devrani:aapko तो सुल्तान खूब गॉड में पहले उठा क खिलते होंगे जब आप पतली थी

Hooriya:Han शादी क कुछ दिनों बाद हे मेरा बदन भरी हो गया और शमशेर होने क बाद तो और भरी हो गया..

Devrani:aapne मेरे बात का जवाब नहीं दी दीदी

Hooriya:Kya

Devrani:kya सुल्तान आपको पहले गॉड में उठा कर प्यार करते थे

Hooriya:besharm क्या बलदेव तुझे गॉड में उठा क प्यार क्या सुहागरात में

Devrani:ji हाँ दीदी वो मुझे अपने गॉड में किसी बचे की तरह उठा लेता है

Hooriya;devrani..Jab नयी नयी शादी थी तब सुल्तान उठा लेते थे उसके बाद तो कभी नहीं

Devrani:q क आप उसके बाद भरी हो गयी और सुल्तान क पास इतना डैम नहीं भरी माल पटक दे

hooriya:devrani जैसी भी है मेरे शौहर है उनकी बुराई मत करो

Devrani;,deedi मेरे पति भी सामान्य कद काठी क थे और उनकी आयु आज 55 क ऊपर है और में सिर्फ 36 की

Hooriya:han सुल्तान की भी उम्र 55 क ऊपर हो गयी पर में भी तो कोई काम उम्र की नहीं हमारे में उम्र का फैसला इतना नहीं जितना तुम्हारे और राजपाल में था

Devrani:wo तो भगवन का कृपा है मुझे ाचा समझने वाला बलदेव मिल गया है जो समझदार क साथ साथ शक्ति शैली है और मुझे अपने पत्नी से बढ़कर कर मंटा है

Hooriya:uski लम्बाई कितनी होगी

devrani:jitne आपके सुपुत्र शहज़ादे शमशेर की है 6 फ़ीट 3 इंच

Hooriya:han ये दोनों तो काफी ज़्यादा लम्बे है इनके सामने हमें सर ऊपर कर क बात करना होता है

Devrani:me तो ुचि संदल पहनती हु आप चप्पल छोड़िये ुचि संदल पहनिए

Hooriya:devrani मुझे चलने में नहीं बनेगा

Devrani:aap ऐसे निक़ाब से ढकी होती है कोई साज श्रीनगर भी नहीं करती

Hooriya:bass वो वक़्त हे नहीं मिलता

Devrani:man me)Mujhe पता है दीदी मैं जब पिछली बार आई थी तो आपको खुद अपने ऊँगली से शांत कर रही थी और में सुन ली थी आपकी siski.sultan मेरे वाहिद आपके इच्छाओ को मार रहे है आपको अधूरा छोर देते है अब उनमे डैम नहीं आपको सुखी रह सके

Hooriya:Har चीज़ की उम्र और वक़्त होता है बहिन

Devrani:Sahi समय लाना पड़ता है

तभी दरवाज़े पे कोई दस्तखत देता है

"भाबी जान क्या आप अभी जगी है"

Hooriya:Kaun गुलशाह

Gulshah:ji भाबी जान क्या मई अंदर आजौ

Hooriya:ji आजाये गुलशाह

गुलशाह अंदर आता है तो देखता है भूरिया और देवरानी साथ बैठे है

Gulshah:man me)Ye देवरानी की जवानी भी काम नहीं साड़ी में इसके गांड और इसके बड़े दूध गज़ब ध रहे है

Hooriya:aao गुलशाह क्या काम था

Gulshah:man me)Ary में क्या सोच रहा हु मेरे सपनो की रानी तो मेरी होने वाले बीवी हूर इ जहाँ है

गुलशाह ऊपर से ले कर निचे तक भूरिया को निहारता है और निक़ाब में ढकी भूरिया को तैरता है

Gulshah:wo भाबी जान बास अब रात हो गयी है तो सोने जा रहा था तो सोचा आपसे मिलता चालू

Hooriya:Baithein गुलशाह

गुलशाह पास रखे सोफे पर बैठ जाता है और सामने देवरानी और हूरीय पलंग पर बैठी थी

Gulshah:aapne खाना खा लिया भाबी जान

Hooriya:ji नहीं gulshah..kam से काम हमारे मेहमान से भी पूछ लेते

gulshah:Gustakhi मुआफ महारानी devrani..Han आपने खाना खाया क नहीं महारानी देवरानी

Devrani:Koi बात नहीं गुलशाह जी आप अपने भाबी की परवाह करने में मग्न थे ..होता है ऐसा कभी कभी

Gulshah:Bhabi जान आप मिश्रा कब जाओगे

Hooriya:Abhi फ़िलहाल तो नहीं

Gulshah:jab भी जाना होगा आप मुझे कहना मई आपको मिश्रा घुमा दूंगा

hooriya;,dewar जी आप भूल रहे है क आपके बड़े भाई है जो इस बात का ख्याल रख सकते है

गुलशाह अपने पास फेक कर खुद शर्मिंदा हो जाता है

तभी दासी आजाती है

Dasi:Mallika इ जहाँ मेहमान महारानी देवरानी का दस्तरखान तैयार है

Gulshah:Theek है भाबी जान कोई काम पड़े तो याद कर लीजियेगा इस नाचीज़ को



Hooriya:Ji ज़रूर गुलशाह

गुलशाह वह से चला जाता है

Hooriya:Aap जाइये महारानी देवरानी अपना खाना खाये

Devrani:deedi आप भी चलिए खाना खा लीजिये

Hooriya:nahi देवरानी मई सुल्तान को खिला कर खाउंगी

Devrani;,oho इतना pyar,kahi सुल्तान को कुछ और खिलने का तो नहीं सोच रही है आप

Hooriya:chup कर ..जाओ आप खाना खाओ में तैयार हो जाती हु

Hooriya:han अचे से तैयार होना क पहले से घायल सुल्तान फिर से घायल हो जाये

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
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