Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 19 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 172

भूरिया एक हलके मुस्कराहट और उत्तेजना क साथ अपने बेटे को देखती है जो अपने बाप का नाम ले कर पुकार रहा था और अपने हे अम्मी से कह रहा था क उसके बाप को लात मार कर पलंग से निचे गिरा दे ताके वो अपने अम्मी को छोड़ सके

"शमशेर मई कैसे लात मार सकती हु कही वो गिरे तो .."

"अम्मी जहां वो गिर क मर्डर जाये पर आपको अपने पुराने शौहर को लात मारनी होगी अगर मेरा लौड़ा लेना है छूट में"

भूरिया की छूट इस वक़्त अपने लैब खोले अपने बेटे का लौड़ा लेने क लये बेकरार थी शमशेर एक टाक अपने अम्मी क आखो में देख रहा था जो सोच रही थी भूरिया को देख शमशेर को वो दिन याद आता है जब शमशेर ने भूरिया को अपने अम्मी को जो हर वक़्त अपने नाख़ून तक निक़ाब में ढकी रहती थी बिना बुरखे क अपने बेटे क सामने भी नहीं आती थी शमशेर भी अपने अम्मी से ुचि आवाज़ में बात करने पर कतराता था क्यू क उसकी अम्मी पारस की सुल्ताना थी शमशेर ने अपने अम्मी को अपने डिल की हकीकत बयां क्या तो वो बोली

"********"

Hooriya:Badbakht मुझे पता था तुम एक निहायत हे घटिये इंसान हो शमशेर आज हे नहीं तुम कई दिनों से मुझे घूरते हो मेरे आगे से पीछे से हर तरफ से ,तुमने मुझे नए लिबास बनवाया ताके तुम अपने गन्दी निगाह मेरे जिस्म को अचे से देख सके, क्या मेरी यही तरबियत थी तुमको बोलो शैतान जब इतना जवानी का जोश चढ़ा है तो शादी क्यू नहीं करते क्यू मन करते हो शादी करने से ..तुम इतने नीच होंगे मैंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था बोलो अब भी नामर्द शमशेर क तुम मुझे नहीं घूरते मुझपर गन्दी नज़र नहीं डालते मैंने अपना बीटा खो dya..Shamshera मई तुम्हारे कोठे की वैश्य नहीं जो तुम मुझे घूरो ..नामर्द जुर्म कर क क़ुबूल नहीं करते

"****"

शमशेर अपने गाल पर हाथ रखता है और उस दिन को याद करता है जब उसके गाल उसकी अम्मी क थप्पड़ो से लाल हो गए थे

"अम्मी जान आप अब्बा जान को लात मार कर पलंग से निचे फेकती हो या नहीं"

Hooriya:man me)Sultan आज अगर तुमने मेरी जवानी का ख्याल रखा होता तो आज मेरा बीटा तुम्हारा अपना बीटा मेरे छूट पर लैंड रगड़ नहीं रहा होता तुमने जो दुःख दया है सुल्तान इ जहाँ उसका बदला मई अपने बेटे से चुद कर लुंगी

Shamshera:abbaa को लात मार कर मुझे अपना लो अम्मी जान मुझे हुक्म दो अपने लैंड से आपकी छूट की खिदमत करने का

भूरिया अपने बेटे क तरफ देखती है और फिर अपने पेअर क ठीक पीछे लेते हुए सुल्तान को बेहोशी में नींद खींच रहा था अपनने पेअर को आगे बढ़ा कर गुस्से से देखते हुए "सुल्तान मेरे वाहिद मेरी नयी ज़िन्दगी शुरू हुई यहाँ कुत्ते कमीने हरामज़ादे मेरी जवानी का मज़ाक बना कर रख दिया था अब तेरे हुजरे में तेरे हे बेटे क साथ तेरी बीवी अपने जवानी का नशा उतारेगी कम्बख्त मेरे wahid,mai बूढी और मोती नहीं मेरे वाहिद तू नामर्द है जो मेरी जवानी की आग ठंडी नहीं कर paya"ek ज़ोर दार लात भूरिया मारती है और सुल्तान मेरे वाहिद गेंद की तरह निचे टप्पा कहते हुए गिरते है

शमशेर अपने अम्मी को देख मुस्कुराता है और कहता है

"अम्मी जाएं आप क इन भरे हुए जांघो में जितने जान है उतने इस सुल्तान क अंदर नहीं ..मुबारक हो नयी ज़िन्दगी अम्मी जान"



"शुकरिअ बीटा आआह दाल दीजिये न ाब्ब्ब अब सेहन नहीं होता "

शमशेर को वो रूप याद आता है भूरिया का जब वो एक ढेले से निक़ाब में अपने सर से पेअर तक ढकी होती थी और हाथो में दस्ताना पहनी होती आज वही भूरिया अपने छूट को खोल अपने बेटे से लौड़ा डालने क लये मिन्नत कर रही थी

शमशेर अपना लैंड आगे पीछे करते हुए भूरिया की छूट पर रगड़ता है "अम्मी जाएं अपने नए शौहर से sharmaaogi..ab आप ये हथियार और शर्मगाह ..हमबिस्तर जैसे लफ्ज़ भूल जाओ ,मुझसे इल्तिज़ा कीजिये पारस की मल्लिका अम्मी जान मुझसे कहिये "मेरे बेटे मेरे नए शौहर अपना लौड़ा मेरे छूट में दाल कर छोड़िये मुझे"

Hooriya:ufff बीटा इन गंदे अल्फाज़ो से हम्म आआह जल्दी दाल दीजिये ना ाः उठ मेरा बदन जल रहा है मेरी प्यास बुझाइये ना

शमशेर फिर से अपना लौड़ा भूरिया क छूट क डेन पर रख रगड़ता है "अम्मी जान अब आप मेरी बीवी है खुल कर मज़ा लीजिये मिन्नत ढंग से कीजिये मेरी भूरिया बेगम और छूट क दरवाज़े को अपने हाथ से खोलिये"

भूरिया अपने आखे बंद करते हुए शर्म क मारे अपने बेटे क कहे हुए बातो से उसके हाथ पेअर अकड़ने लगते है और वो कुछ सोचते हुए

"उफ्फ्फ ाः हम्म तो सुनिए आप मुझे गन्दी बना हे दिए बीटा शहज़ादे शमशेर daaaaaaaaaaal दीजीईईई न अपनाआ ला ला लउड़ड़द्दआ मेरे छुछुटट में चूडड़ड दीजिये न मेरे बीटा उर्फ़ मेरे शौहर ाआअह मई मर्डर जाओ लीजिये ख़ोलद दी आपके सबसे पसंदीदा जगह मेरी छूट"



"उफ़ अम्मी जान इस पल क लये तो मई बरसो से इंतज़ार क्या हु मेरी बेगम मेरी शहज़ादी मेरी जान अआप्को छोड़ने का हक़ है मेरा मेरी बीवी"

शमशेर अपना लाऊड छूट क छेड़ क ऊपर कर क भूरिया भारी वजूद को घूरते हुए अपने अम्मी जान क ऊपर लेट जाता है भूरिया अपने बाहो में अपने बेटे को कस लेती hai"ufff शमशेर कितने भारी हो मेरा जिस्म टूट सा गया दाल दीजिये न andar"hooriya अपने छूट को लैंड पर रगड़ते हुए कहती है शमशेर अपने अम्मी क भारी दूध को दबाते हुए अपने अम्मी क पीठ पर हाथ फेरते हुए बिस्तर पर पलट जाता है और भूरिया भी अपने बेटे से चिपकते हुए पलटी खा कर अपने बेटे क ऊपर आजाती है और अपना छूट लैंड से रगड़ते हुए इस बार भूरिया अपने बेटे को बाहो में कस कर चूमते हुए पलटी है "ुहममम आआह पेल दीजिये नाआ मेरे सुल्तान अपने ग़ुलाम को मत tadpaiye"ab शमशेर अपने अम्मी क ऊपर आजाता है और अपने हाथो से कभी दूध तो कभी मोती गांड को दबाते हुए लैंड को खींचते है "अम्मी मेरी जाएं मेरी बेगम अहह ये लीजिये मेरा लौड़ा मेरी तरफ देखिये मई आपके आखो में देखना चाहता हु"



भूरिया अपने बेटे को बेसब्री की तरह देख रही थी और शमशेर अपने लौड़ा को छूट क छेड़ पर लगता है और अंदर धकेलता है "Khachhhhh"se लौड़ा घुसता है भूरिया क मुँह से "aaaaaaaaaaaah"nikalti है वो शमशेर की तरफ देखती है शमशेर अपने अम्मी क छूट में लैंड पेल कर रुक गया था शमशेर क लैंड पे भूरिया की छूट की गर्मी लगते हे सख्त और ज़्यादा होजाता है शमशेर लम्बी साँसे लेते हुए अपने अम्मी क लाल आखो में देखता है जो अपने छूट को फैलाये अपने बेटे क लैंड का टोपा आसानी से अंदर ले ली thi,hooriya का छूट आज पहली बार इतना फैला था भूरिया अपने बेटे को इशारे से धक्के मारने को कहती है ,शमशेर जोश में आकर इस बार करारा धक्का मारता है और लौड़ा आधे से ज़्यादा भूरिया की छूट में फिसल कर चला जाता है "aaaaaaaaahaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahaa उफ्फ्फफ्फ्फ़ मई मर्डरर गयी आआह बेताआआआ कितना कड़ा है कितना बड़ाआआ है aaaaah"hooriya की आखे बंद हो जाती है शमशेर भी अपने आखे एक पल क लये बंद कर एक ठण्डी आह भरता है और देखता है छूट में आधा लैंड फसे भूरिया अपने आखे भींच कर सिसक रही है "अम्मी जाआआं ये लीजिये मेरा लौड़ा अपने बेटे का लौड़ा aaaaaaaaaah"phalkkkkkkkkkk से एक करारा धक्का माआरता है और हूकरिया एक चींईख मारती है "aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhh aaaaaaaaaaaaaaaaaah naheeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee मरररररर गयी मई "भूरिया आखे खोल कर चिल्लाते हुए अपने बेटे को देखती है शमशेर क रोंगटे भी खड़े हो जाते है उसका 9 इंच का हुल्लाबी लौड़ा जड़ तक अपने अम्मी क छूट में धस्स गया था और भूरिया अपने पेअर को ऊपर उठाये काँप रही थी उसके दोनों पैरो क कंपन से पता चल रहा था क भूरिया इस वक़्त कितना दर्द सेह रही है शमशेर भी हल्का हफ्ते हुए अपने मोठे लम्बे लौड़ा को आगे पीछे करने लगता है



"अम्मी जाआआं बसससससस थोड़ी देर बर्दाश्त कर लीजिये दर्र्द ख़त्म हो जायेगा आआह आपकी मखमली छूट अंदर से उतनी हे चिकनी और गरम है"

शमशेर की जानवर की तरह धक्के मारता है जिस से भूरिया तिलमिला जाती है

"उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ नाहीये ाआअह उठ आआआआह उठ नाहीये मई मर्डरर जाउंगी ाआअह"

भूरिया अपने बेटे क चुंगल से बचने क लये पीछे होने लगती है पर शमशेर अपने मजबूत बाहो में अपने अम्मी क कांपते हुए पैरो को जकड लेता hai"ufff chhhhhoooooooooooooooor दोओओओ शमशीीीेराआआआ मुझससीईई सेहान नहीं ाआअह धीरे बेटे मर्डर गएइइइइइइ उफ्फफ्फ्फ़ ाआअह"

भूरिया अपने सर को तकिये पर कभी दाए पटक रही थी कही बाए और अपने सर को और ऊपरी हिस्से से भागने की कोशिश कर रही थी पर शमशेर जैसे ठान लिया था चाहे उसकी अम्मी बेहोश क्यू न हो जाये पेलते रहना है "घप्प घपपप घप्प पहछह पहछह "की आवाज़े गूंज रही थी पुरे हुजरे में और साथ में भूरिया क चिल्लाने से पूरा हज़रा चुडैमै हो जाता है शमशेर काफी देर से अपने ताक़त से अपने अम्मी को पकडे छोड़ रहा था और उसे भागने का मौक़ा नहीं दे रहा था ,शमशेर क माथे से पसीने की बुँदे निचे टपक रही थी वही भूरिया का तो बुरा हाल था और पूरा बदन पसीने में तरबतर हो गया था शमशेर बिना बोले हुमच हुमच क धक्के मार रहा था और भूरिया क आखो में ासु बहने शुरू हो जाते है "aaaaaaaaaai उफ्फफ्फ्फ़ माआआआआ दयाआआ रे हाआए रुक जाआआआ न ाआअह उह्ह्ह रुकक्क जाएआईए न मेरे सरताज आआआह उफ्फ्फ्फ़"

"अहम ाआअह ये लो मेरी जहां अम्मी जहां अआप्के छूट क परखच्चे छुरा दूंगा आहाज आआह ये लो"



तीर से तेज़ शमशेर अपने हुल्लाबी लौड़े को अपने अम्मी क छूट में पेल रहा था घापा है भूरिया अपने बेटे क लैंड को पूरा खा जाती अपने छूट में पर अपने दर्द को भी बहुत बर्दाश्त कर रही थी शमशेर अपने अम्मी क आखो से बहते ासु को झुक कर अपने हाथो से पोछता है "ाआअह अम्मी जाएं ये लो मेरा लौड़ा आआआह अआप का दर्द्द अब कुछ हे देर में ख़त्म हो जायेगा भागिए मैट "भूरिया अपने छूट क डेन को हाथ लगा कर मलने लगती है मरे उत्तेजना क

शमशेर फिर धक्काम पेली शुरू कर देता है और फिर से पुरे हुजरे में खछः पछहः की आवाज़े गूंजने लगती है अब धीरे धीरे भूरिया का दर्द काम होता है और सकरी हुई छूट में आसानी से लैंड फिसल कर जाने लगता है पर भूरिया को हल्का दर्द अभी भी हो रहा tha"ammmi जाहां ाःह अआप्के छूट में तो मखान जैसे मेरा लौड़ा फिसल रहा है ाः उठ ये ले मेरा लौड़ा"

"ह्म्म्मम्म aaaaaaaaaah उम्मम्मम ऐसे हे आआआआह ुहममम बहुत अछाअअअअअ मेरे सरताज आआह ऐसा लग रहा है पहली बार कर रही हुआआआह"



"साआली अभी तो कह रही थी निकालने क लये अब कहती है डालिये उफ्फ्फ्फ़ आआह ये ले मेरा लौड़ा अम्मी जाआआं ाः"

शमशेर समझ जाता है क भूरिया अब दर्द सह प् रही है और अब उसे मज़ा आने लगा है वो भूरिया बड़े दूध को हाथ में ले कर दबाने लगता है और ज़ोर ज़ोर से अपने अम्मी क छूट में लैंड को बच्चेदानी तक पेलने लगता है

"ुह्ह्ह्ह आआआह उफ्फ्फफ्फ्फ़ मई बीवी हु आआप्की साली नहीं ाआअह अआप गालीअ बहुत देते हो गंदे ाआअह उह्ह्ह मर्डर गयी धीरे धीरे मेरे सरताज"

"सअअअअअअअली ये ले मेरा लौड़ा अपने छूट में मई साली कहु या बीवी तुझे भूरिया तू मेरी बेगम है ाआअह ये ले मेरा लैंड"

"उफ्फ्फ्फ़ आआआआआह अपने बेगम को आआआआह भला उह्ह्ह ऐसे कौन गालीअ देता हाई आआआह कल भी अआप मुझे गंदे अल्फ़ाज़ से पुकारा मई सुन ली थी "

शमशेर करारे झटके मारते हुए अपने अम्मी क गोआल गांड को पकड़ कर छाते मारने लगता है और वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाते हुए सिसकने लगती है

"अम्मी जहां आआआआप्को मैंने क्या कहा मुझे तो याद नहीं बताअओ ाः"

"उफ्फ्फ ाआअह धीरे तुमने ऐसा गन्दा लफ्ज़ कहा मई अपने मुँह से नहीं कह सकती अपने बीवी की इज़्ज़त करो बेताआआ आआह हम्म ाः उह्ह्ह मेरे पेट में घुस जाएगा हूउउ नाआआअह"

शमशेर अपने माँ क छूट में घाछे मारते हुए जड़ तक रगड़ रहा जिसकी चोट की गूँज बहार तक आरही अब भला वो कैसे न दर्दसे चिक्ति चिल्लाती "अम्मी जाएं कहिये अपने मुँह मैंने आपको कौन सी गाली di"shamshera कल की बात याद करते हुए जब शमशेर ने अपने अम्मी को रांड कहा था धीरे से और भूरिया ने सुन्न li,hooriya अब अपने छूट को लैंड पर धकेलने लगती है और मज़े से आहे भरने लगती है "आआह तुमन्ने आआआह मुझे रा राआं रआआआंड कहा कमीने शमशेराआह धीरी पेलो बेताआए ाः ह्म्म्मम्म मज़ा आगया आआह"

"अम्मी जहां जब कोई बादशाह बिना शादी कए हुए अपने महल में एक औरत को रखता है और उसे छोड़ता है तो ऐसी औरत को क्या कहते है"

"उह्ह्ह ाआअह धीरे से पेलो ाः ऐसी औरत रखैल होती है जैसे सुलतान ने राखी है आआह ुहम्म्म्म"

"अम्मी जहां उफ़ मेरी मासुम अम्मी अआप भी मेरे शादी कए बिना मेरे लैंड को अपने छूट में लये चुद रही हो तो आप क्या हुई"

शमशेर ये कह कर ज़ोरदार धक्के मारता है और अपने भारी अम्मी का पूरा वजूद हिला कर रख देता है

"उह्ह्ह आआआह रखैल ाआअह धीरे से"

"अम्मी जहां आआह आपने भी क़ुबूल कर लिया रखैल और रखैल और रांड एक हे बात है मेरी भूरिया जान"

"उठ ाआअह चालू जासुस मुझे तुमने जाल में फसा कर हाँ बुलवा लय मई रखैल नहीं हु आआआह"

"आआप मेरी रांड हो सिर्फ मेरी राँद भूरिया बेगम दुन्या क लये भले हे आप सुल्ताना मल्लिका हो क्यू क आप भी तो बिना मुझसे शादी कए चुद रही हो"

ये सुन कर भूरिया अपने गलती और शमशेर की बातो शर्मा से जाती है और अपने आप सोचती है क्या वो वाक़ई एक रखैल रांड हो गई है और शर्म से मुस्कुराते हुए अपने मुँह को अपने सर क हिजाब से धक् कर अपने बेटे से मुँह छुपाने लगती है

"आय हाय मेरी अम्मी अपने बेटे से चुद रही है लौड़ा छूट में ले कर शर्मा रही वाह अम्मी आप जैसी ख्वातून भरी वजूद की मल्लिका को छोड़ने का मज़ा हे जुड़ा है "

शमशेर अपने कमर को हिलाते हुए करारी धक्के अपने अम्मी क छूट में दाल रहा था और वो मुस्कुराते हुए अपने बेटे का धक्का का मज़ा लये जा रही थी शमशेर अब पूरा भूरिया क ऊपर लेट जाता है और अपने अम्मी क होठो को चूमने लगता है "अम्मी जाआआआं अब आआप आइये मेरी गॉड में बैठा क छोड़ू अआप्को"

"नाहीईई मैर गिर जाऔंगी ाआअह ऐसे हे करो आआह ुहममम"

"अम्मी जाएं अपने बेटे पर भरोसा रखो मई अब्बा जान की तरह बूढ़ा कमज़ोर नहीं जो आपके वज़न को संभाल नहीं पाओ मेरी जाएं"

शमशेर ये कह कर अपने अम्मी क कान को चाटते हुए चुस्त है भूरिया अपने आखे बंद क्या हुए अपने बेटे को अपने गले क हार को पहना देता है और उसके नंगे सीने से अपने भरी दूध को दबाने लगती है शमशेर अपने लैंड को अब धीरे पर छूट क आखिरी दीवार तक पेल रहा था और भूरिया क कान क पास अपने होठ रख "अम्मी जान कैसा लगा मेरा land..abbaaa क muqaaablee"hooriya ज़ोर से अपने नए शौहर को भींच लेती है और हर झटके पर अपने बेटे को रगड़ते हुए अपने दांत को पीसते हुए अपने बेटे क कंधे को चूसने लगती है "आआआह हम्म्म आआआह मई बहुत खुष हु मेरे सरताआआअज आआप्का हथियार तो इतना बड़ा है क मेरे बच्चेदानी तक थोक रहा है आपके अब्बा का एक ऊँगली क बराबर होगा आपका पूरा हाथ क बराबर आआह"

" अम्मी जाएं चलिए आइये मेरी गॉड में बैठ कर अपने बेटे क लौड़े पर कूदिये मेरी जाहां "

शमशेर खच से भूरिया क छूट से अपना तलवार जैसा लैंड बहार निकलता है और भूरिया एक लम्बी सांस लेती है शमशेर अब लेट जाता है और भूरिया को अपने लैंड पर बैठने क लये कहता है भूरिया भी अब जोश में थी और लैंड को देखते हुए "उफ्फ्फ कितना भयानक लग रहा है ये हुल्लाहाबी लौड़ा किसी गधे का लग रहा hai"shamshera अपने अम्मी को मुस्कुराते हुए देखता है और कहता है

"अम्मी जाएं ये शेर का लैंड है जो आप जैसी शेरनी को छोड़ने क लये है हिरनिओ की बास की बात नहीं मेरे लौड़े क धक्को को बर्दाश्त कर le"hooriya मुस्कुराते हुए अपने बेटे क लैंड को पकड़ कर बैठने लगती है और धीरे धीरे अपने छूट को अपने हाथ से खोले हुए लैंड को अपने छूट में समां लेती है



"उफ्फ्फ ऐसे बहुत दर्द होरहा है बेताआए जाआआं"

भूरिया का चेहरा सर क हिजाब गिरने से धक् जाता है और उसका वज़नी बदन पूरा का पूरा अपने बेटे क ऊपर सवार था

"अम्मी जाएं अआप वाक़ई भारी वजूद की वज़नी खातून हो अआप क भारी गांड दूध आपको दुन्या की सबसे खूबसूरत और लज़्ज़तदार कहावतों बना देती है आप पीछे घूमिये और दोनों पेअर दोनों तरफ रखिये"

भूरिया बात मानते हुए अपने बेटे की अपने मुँह को अपने बेटे क चेहरे की तरफ कर क दोनों पेअर को शमशेर क कमर क दर्मिया रख कर अपने बेटे क लौड़े पर धीरे धीरे बैठने लगती है शमशेर अपने आँख बंद कए अपने अम्मी क गरम और रसदार छूट क लज़्ज़त से आसमान में उड़ रहा था भूरिया पूरा लौड़ा अपने छूट में ले कर "अब क्याआ हम्म्म ाः"

"अम्मी जाहां अब अपने बेटे क लौड़े की सवारी करो ाआअह कूदो और छोड़ो अपने छूट को मेरे लौड़े से प्यास बुझाओ अपनी"

भूरिया जोश मी आती है और अपने बेटे को देखते हुए अपने हाथ पीछे ले जाकर अपने बेटे क पेअर को पकड़ते हुए कूदने लगती है फिर से पहछह फच्च की आवाज़े गूंजने लगती है



"आआआह अम्मी jaaaaaaaaaan ाआअह ुहममम आआप्के छूट कितनी गरम है अम्मी जहां ाआअह "

"उफ्फ्फ्फ़ हाँ बीटा ये सिर्फ आपके लये है आआह मेरे सरताआज अआप्का लैंड वाक़ई बहुत बड़ा मोटा है आआआआह मई बहुत खुशनसीब हु जो मुझे ऐसा शौहर मिलाआ ाआअह "

शमशेर अपने अम्मी क भारी गांड पर हाथ रख कर निचे से करारे धक्के मार रहा था और भूरिया अब चीखने चिल्लाने लगती है

"अह्हह्ह्ह्ह aaaaaaaaaah मेरे शरररर aaaaaaaaaaah उफ्फ्फ अब में फ़ारिग़ हो जाआआउंगी ाआअह ज़ोर सीए आआह मेरे सरताज बीटा aaaaaaaaaaaaaah ुहहममम अआप क लैंड और आपके अब्बा क लैंड में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है ाआअह और ज़ोर से कीजिये ना बेताआआ"



भूरिया की छूट में सटासट लैंड अंदर बहार हो रहा था पुरे हुजरे में फच्च फच्च की आवाज़े हो रही थी अगर आअज सुलन की कनीज़ दरवाज़े पर कड़ी होती तो पक्का इनकी आवाज़े सुन लेती पर भूरिया ने अपना दिमाग लगा कर कनीज़ों को छुट्टी दे दी थी ताके वो अपने बेटे से खुल कर चुद paaye,kuch देर ऐसे हे अपने गॉड में बिठाये छोड़ने क बाद शमशेर अपने अम्मी को उठता है और खुद करवट लेट जाता है "इधर आआहारिया अब अपने छूट खोल बेगम हम्म्म्म ाः तुझ जैसी गरम माल कोई नै"



भूरिया अपने तान फैलाये अपने बेटे की बात मानते हुए अपने छूट खोल देती है और शमशेर भूरिया क पीछे लेते हुए अपने अम्मी क छूट में लैंड फ़साने लगता है और खछःह से अंदर पेल देता है

"उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ aaaaaaaaaaaah अअअअअअअअअअअअअ से बीटा ाआअह एक बहार में मत दाहालो दर्द होता है"

"साली दर्द तो अब तुझे दूंगा हुरियाआ बेगम बहुत तडपाइ तुम मुझे क्या कही थी जब मुझे थप्पड़ मारी थी क में नामर्द हु ये ले मेरा लौड़ा खच्हहहह ाः ले मेरा लौड़ा "

भूरिया क छूट को शमशेर अपने मोठे लौड़े से धपधप पेलने लगता है और भूरिया "ुह्ह्ह्ह aaaaaaaaah"zor से चीकने चिल्लाने लगती है और दर्द क मारे उसका बुरा हाल था जैसे अब रो देगी "उह्ह्ह आआआआह अब मई गई aaaaaaaaaaah ुह्ह्ह्ह में फ़ारिग़ यह"



शमशेर अब अपने अम्मी को अपने बाहो में ले कर ज़ोरदार धक्के पेलता है "आआआआआह ुह्ह्ह्ह नाहीये ाआअह धीरे से बेटा उफ्फ्फ मई gaeeeeeeeeeeeeeeeee aaaaaaaaaaaaaah मई गईईईई आआआह uhmmmmmmmmmmmmm aaaaaaaaaaah हम्मम्मम्मम्म"

भूरिया लगातार झड़ने लगी थी और अपने छूट को शमशेर क लैंड को ज़ोर से दबोच ली थी पर शमशेर एक ताक़तवर मर्द था और अपने बेशुमार ताक़त का इश्तेमाल कए हुमच हुमच कर अपने अम्मी को पेल रहा tha"uffff ाआअह मेरे पेअर दुःख गए आआह hmmm"shamshera खच से अपने लैंड बहार खींचता है और अपने अम्मी को पलट कर अपने तरफ करता है और उनकी टांगो को उठा कर अपने पथ से लगा देता है और एक ज़ोरदार धक्का मारता है भूरिया की छूट से पानी रिस रहा था और लैंड सररररर से छूट क आखिर तक पहुंच जाता है और फिर से शमशेर अपने लैंड से भूरिया क छूट में धनधन कुटाई शुरू करता है

"उह्ह्ह ाआअह ाः उह्ह्ह ाआअह बीटा ाः ह्म्मम्म्म्म हम्म्म्म aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah "



शमशेर अपने ताक़त से भूरिया को पेल रहा था और भूरिया अपने तंग को उठाये अपने बेटे से लेते हुए चुद रही थी भूरिया अपने जांघ को अपने हाथ से पकडे उठाये थी और अपने बेटे को अपने छूट में धक्का देने क लये अपने छूट को खोली थी धप्प्प धप्प्प शमशेर अपने अम्मी को छोड़ रहा था जिसका ख्वाब उसने हमेशा देखा आज वही अम्मी चुदाई में साथ दे रही थी जो कभी सीधे मुँह शमशेर से बात नहीं की शमशेर अपने अम्मी को अपने आखे बंद कए अब पेले जा रहा था और भूरिया अब शमशेर क छाती को सहला रही थी वो समझ जाती है क शमशेर अब फ़ारिग़ होने वाला है शमशेर अचानक से उठता है और अपने अम्मी को पकड़ कर घोड़ी बनाते हुए "झुक जाआइये अम्मी जाएं अब मई आपकी सवारी करूंगा मेरी जाहां ाः"

भूरिया समझ नहीं पाती है और शमशेर जल्दबाज़ी में भूरिया को झुका कर अपना लैंड पेल देता है छूट में

"अम्मी jaaaaaaaaaaan ाआअह ये लो मेरा लैंड खछ. आआप कहती थी न क आपका खवाब देखना भी गलत है तो देखिये आअज आपको झुकाये आपके छूट तहस नहस कर रहा हु आआआह मेरी मुहब्बत का रंग देख लय आपने आपको भी झुका दया मेरे पर्देदार अम्मी जहां मेरी पारस की सुल्ताना"



शमशेर अपने अम्मी क कमर पर हाथ रखे झुका कर अपने अम्मी को पेल रहा था भूरिया अपने चेहरे को बिस्तर पर रख तड़प रही थी

"Aaaaaaaaaah उठ आआआआह उठ आआआआआ आआआआउच ाआअह बेताआए ाआअह नाही अअअअअअअ आओ आआआआआउच मेरे बीटाआ ाः"

शमशेर अपना लैंड की रफ़्तार बेशुमार तेज़ क्र देता है और अपने आखे बंद कए हुए "आआआआआह aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah मेरी ाममममी jaaaaaaaaaaaaaaaan आआआह मेरी जाहां मेरी बेगम सुल्ताना मेरे लैंड का मणि अपने छूट में ले लीजिये ाआअह"

शमशेर अपने आँख बंद कए झड़ने लगता है और भूरिया अपने बेटे का वीर्य अपने बच्चेदानी में गिरता हुआ महसूस कर रही थी

"Aaaaaaaaaaaaah हम्मम्मम्मम्मम्ह ाआअह कितना गरम पानी है आपके लौड़ा का मेरे शहज़ादे बीटा पारस क नए सुल्तान ाआअह अआप्के बीज से भर्र दीजिये मेरी छूट आआआआह मई बेशरम हो गयी अब पर्देदार कहा रही आआह कितना गरम है आपका लैंड शमशेर "

शमशेर क लौड़े से तेज़ धार वीर्य का निकल रहा था और भूरिया की बच्चेदानी में समां जा रहा था दोनों माँ बेटे दुन्या से बेखबर अपने चुदाई क खेल में मशरूफ थे पारस की सुल्ताना आज अपने हे शहज़ादे बेटे क लैंड को निगल रही थी पारसी महल क खूबसूरत हुजरे में चिराग और मोमबत्तिओं की रौशनी में दोनों माँ बेटे आज ऐसा रिश्ता कायम कर लिए थे जो इनके तक़दीर बदल देने वाले थे

भूरिया अपने बेटे क लैंड से निकला हर बून्द को अपने अंदर जाते हुए महसूस करती है और उस पल को याद करती है जब वो अपने शौहर सुल्तान मेरे वाहिद से मिन्नतें करती ज़ोरदार चुदाई की पर वो पांच मिंट में फ़ारिग़ हो jate,shamshera का लैंड ढीला पड़ता है और वो उसे पकककक की आवाज़ से खींचता है भूरिया बदहवास बिस्तर पर गिर जाती है और हांफने लग जाती जय शमशेर भी अपने सानो को रोकते हुए अपने अम्मी क साथ पहली चुदाई क सुख को अनुभव कर अपने आप पर फ़खक महसूस कर रहा tha,kuch देर बाद भूरिया पलट कर शमशेर को करवट बदल कर देखने लगती है शमशेर का लोहे जैसा बदन का आकर साफ़ मालूम पद रहा था जिस से पैसिइने की बुँदे टपक रही थी भूरिया भी पसीने से लटपट थी और बड़े प्यार से अपने बेटे को देखती है और भूरिया को भी शमशेर देखता है दोनों एक दूसरे को देखते देखते कब करीब आते है पता नहीं चलता और दोनों एक दूसरे क बहो में समां जाते है "शुकरिअ शमशेर आअज से पहले इतनी देर तक कभी नहीं चूड़ी"

"अम्मी जान अआप शुक्र अभी क्यू कर रही हो अभी तो आपकी ठुकाई बाकी है वैसे मुझे भी बहुत मज़ा आया आपकी छूट थोक कर मिश्रा की माल की इतनी प्यारी छूट होगी पता न था"

"अच्छा जी इतनी अच्छी लगी मेरी बुर "

"क्यू अम्मी जान आपको नहीं ाचा लगा मेरा लौड़ा क्या कहती हो खिदमत कैसी हुई आपकी मेरी अम्मी जान"

"बहुत अच्छी बीटा जाआनी अआपने मेरा डिल खुश कर दया ऐसा लग रहा है पहली बार चूड़ी हु"

भूरिया क चिपकने से और बातो से फिर शमशेर का लैंड अपना सर उठाने लगता है जिसे देख भूरिया "उफ्फ्फ ये तो आपका फिर से खड़ा हो गया मेरे सरताज पिछले आधा घंटा से तो मेरी हालत ख़राब क्र दया "

"अम्मी जाएं आपके छूट का कुकुम्बर बना कर हे ये मानेगा असली मर्द से सामना आज हुआ है आपका पकड़ो मेरे लैंड को"

भूरिया बिना देरी कए शमशेर क लैंड को हाथ में ले कर आगे पीछे करनी लगती hai"waqayi में असली मर्द का लौड़ा क्या होता है आज पता चला बीटा शुकरिअ अपने अम्मी की ज़िन्दगी सवारने क लये"

"तो झुक जाइये अम्मी जान मेरी राँद आपका बीटा आज आपको कुटिया बना क छोड़ेगा मेरी छिनाल"

भूरिया फ़ौरन झुक जाती है शरमाते हुए "आपका जुबां न बहुत ख़राब हो गया है अनाप सनाप बोलते है"

"मेरी राहाण्ड अम्मी जहां ऐसी बातो से हे तो चुदाई का असली का मज़ा दुगुना हो जाता hai"khachh से लैंड पेल देता है और ज़ोरदार भूरिया क भारी गांड पर तमाचा जड़ देता है



"Aaaaaaaaaaaaaah ोुक्क्सछहहहहहह मेरे सरताआआज कितने थप्पड मारोगे मेरे चुतर पर आआह उफ्फ्फ"

"अम्मी जहां आपके इस गांड को देख मई पागल हो जाता था जब आप बुरखे में हिला कर चलती थी आपकी गांड मारूंगा ये लो "

शमशेर हुमच क जड़ तक अपना लौड़ा पेल देता है और भूरिया चीखने लग जाती है "उफ्फ्फफ्फ्फ़ आआआआआह बीटा क्यू मेरी छूट पसंद नहीं आऐ जो जानवरो की तरह सोच रहे हो ाआअह"



"क्यू अम्मी जाएं जब इतनी मोती ज़ालिम गांड लिए फिर रही हो तो गांड नहीं पेलू तो मेरी जवानी किस काम की आपके गांड का हे तो दीवाना हु मई"

"शमशेर उफ्फ्फ मैंने कितनी बार कहा ाः वह कोई नहीं करता ये गलत है पीछे से मई नहीं दूंगी"

शमशेर ये सुन कर ज़ोर से थप्पड़ गांड पर मारता है

"मई तो गांड मार कर हे रहूँगा आपकी अम्मी जाएं "

"ाचा तो ख्वाब में कर लेना ये काम असलियत में तो मई करने नहीं दूंगी हहै"

भूरिया मुस्कुराती है जिसे देख शमशेर गुस्सा हो जाता है और ज़ोर ज़ोर से अपने अम्मी को झुकाये उनके कमर पर हाथ रख पेलने लगता है "अम्मी जाएं आआप तो पहले ये कहती थी क आप मेरे हाथ नहीं आओगी आज देखो झुक कर मेरा लौड़ा लये चुद रही हो चीख रही वैसे हे मई आपकी गांड मारूंगा एक दिन ाः ये ले तेरी छूट की खुजली मिटा दू"

धना धन शमशेर बिना रुके पेले जा रहा था और भूरिया की चीखे फिर फ़िज़ा में गूँज रही थी वो तो महल इतना बड़ा था क मोती दीवारे भूरिया बेगम की आवाज़े चीखे रोक ली थी नहीं तो पूरा पारस सुन लेता कैसे पारस सल्तनत की मल्लिका इ जहाँ अपने हे बेटे की बीवी बन कर थूक रही hai,shamshera लगातार घाचे अपने अम्मी की छूट में जड़ तक मार रहा था भूरिया की नज़र सामने अलमारी क आईने पे जाती है



भूरिया क दोनों बड़े चुके हवा में लहराते हुए हिल रहे रहे और उसका बीटा धापा धप चुद में अपना लैंड पेले जा रहा था भूरिया अपनी हालत आईएनए में देख शर्मा जाती है और अपने नज़रे अपने आप से चुरा लेती है और दूसरी तरफ देख कर मुस्कुराती है और सोचती hai"aaaakhir इस कमीने शमशेर ने मेरे न चाहते हुए भी मुझे अपने लौड़े क निचे ले आया आज कुटिया की तरह छोड़ रहा है"

"आआह अम्मी जाएं ये लो मेरा लौड़ा आआह हम्म्म आपकी छूट की हर प्यास बुझा दूंगा अम्मी जाएं आपको अब्बा से ज़्यादा प्यार करूँगा अम्मी जान "

"बीटा आआह उफ़ छोड़ लो अपने अम्मी को बना तो लय तुमने मुझे अपनी बीवी आआह ऐसा छोड़ते हो जैसे मेरी साँसे रुक जाए आआआह कितना दम्म है तुम्हारे लैंड में ाआअह तुम्हारे अब्बा तो पांच धक्को में फ़ारिग़ हो जाते थे ाआअह मज़ा आयग्या और छोड़ो बीटा"

"अम्मी जाहां ाआआप जैसी माल को छोर कर कही और मुँह माड़ने वाला गधा सुल्तान मेरे वाहिद हे हो सकता है भले हे सुल्तान तलवारबाज़ी और सियासत में बहुत ज़हन रखता हो पर औरत क मामले में कच्चा है मेरा बाप "

"हाँ बीटा और पेलो ...उसका हे खामियाज़ा आज भुगत रहा है सुल्तान जो आज वो फर्श पर लेता है और उसका बीटा उसकी बीवी को झुकाये छोड़ रहा है इस से अछि सजा क्या हो सकती है खून क प्यासे सुल्तान की आआआह और ज़ोर से छोड़ो बता दो आज अपने अब्बा को क असल चुदाई क्या होती है आआआआआह ये सुल्तान मुझे बूढी और मोती कहता था आआह और छोड़ो दिखा दो सुल्तान को क मई जवान हु"

"अम्मी. जाआआआं सुल्तान गधा है बहुत बड़ा ाः ये लो मेरा लौड़ा ाआअह सुल्तान उस हीरे को कोयला समझ रहा था पर देखना मई तुम्हे हिस्स्स क अपने लौड़े से हीरे जैसा चमका दूंगा मेरी अम्मी जाहां "

"मई भी तो यही चाहती हु ाआअह मेरे मरद मेरे शौहर मेरे सरताज आआप मुझे चाहे वैसे पेले बस्स्स इस हीरे को घिसने का हक़ सिर्फ आपको हक़ है मेरे सरताज"

शमशेर भूरिया क छूट से कांड सत्तत्त से खींचता है और भूरिया को गॉड में उठाने लगता है

"बीटा गिरररर जायआ जाऔंगी संभाल क क्या कार रहे हो"

शमशेर अपने अम्मी को गॉड में भर कर ऊपर उठाते हुए

"अम्मी जाएं मई आपका पिछले सौहार सुल्तान मेरे वाहिद नहीं जो आपके वज़न को संभल नहीं आजाओ तुम्हे खड़े खड़े पेलू अम्मी जान"

हूरीया अपने बेटे की मर्दानगी देख खुश हो क्र मुस्कुराने लगती है और अपने आप शमशेर क कंधो को पकड़ते हुए शमशेर क गॉड में बैठ जाती है शमशेर लैंड ठीक भूरिया क छूट क निचे हुंकार मर रहा था शमशेर भूरिया को अपने लैंड पर बिठाये चलने लगता है और भूरिया अपने बेटे की ताक़त देख दांग रह जाती है

"अम्मी जान तुम्हे क्या लगा क तुम्हारे इस गराये भरी वजूद को मई उठा नहीं पाऊंगा मई मर्द हु आपका शमशेर "

"अच्छा जी मुझे क्या पता था मेरे बेटे में इतना दम्म है नहीं तो इतना देर न करती"

भूरिया मुस्कुराते हुए जवाब देती है

शमशेर अपना लौड़ा निचे हाथ लगा कर छूट पर लगता है और भूरिया को दोनों बहो से उठा कर लुंड पर बैठता है खच्हहहह से लौड़ा अंदर घुसता चला जाता है और भूरिया aaaaaaaaaah उफ्फ्फ करती है शमशेर चलता हुआ अलमारी क पास आता है और आईने में देखता है भूरिया अपने सर पर हिजाब बंधी थी पूरा भारी जिस्म शमशेर ने अपने बहो में उठा रखा था निचे बड़े भरी भरकम गांड क बीच क जड़ में शमशेर का लौड़ा छूट क अंदर घुसा tha,shamshera एक धक्का मारता है और छूट क जड़ तक लौड़ा घुस जाता है "aaaaaaaaaaah उईईईईई बीटा ऊपर उठा कर कौन ऐसे करता hai"shamshera मुस्कुराते हुए "अम्मी जान पीछे मुद कर आईएनए में देखो कैसे मेरे लैंड को छूट में लिए बैठी हो मेरी गॉड में "

शमशेर क कहते हे उसकी अम्मी पीछे मुड़ती है और देखते हे आखे बहार आजाती है शरमाते हुए मुस्कुराती है और "धत्तत्त बेशरम शमशेर beta"kah कर अपने बेटे क कंधे पर मुँह रख देती है भूरिया देखती है क उसके छूट में 9 इंच का हुल्लाबी लौड़ा गायब हो गया था और उसका भरी वजूद को शमशेर ने किसी बचे की तरह गॉड में उठाया tha,hooriya अपने बेटे क मजबूत कंधे को चूमती है "शहज़ादे शमशेर आअज अआपने अपनी अम्मी क दूध का क़र्ज़ उतार दया मेरा खिलाना पिलाना क म्हणत ने रंग लाइ"

"अम्मी जाएं आआप्का बीटा दूध का क़र्ज़ ऐडा कर देगा अभी ये तो कुछ नहीं है मेरी jaaan"khachh से फिर से भूरिया को पेलने लग्गा है खड़े खड़े कुछ देर ऐसे हे धक्के मारता है भूरिया क दोनों पैरो को पकडे शमशेर हवा में धक्के मार रहा था भूरिया क छूट में शमशेर अब भूरिया क कहने पर निचे उतर देता है और दीवार क सहारे लगा कर झुका देता है "उफ्फ्फ बेटा ये सब तरीके होते है चुदाई का अंदाज़ा नहीं था"

"अम्मी जाएं अआप्को पता है हिन्द में कामसूत्र होता है जिसमे कई तरीके से चुदाई करने की किताबे होती है"

भूरिया को झुका कर शमशेर घपपप घपपप पछ कर अपने लौड़े को पेल रहा था



"Aaaaaaaaaaaaaaaah ुह्ह्हह्ज ाआऊच धीरे से aaaaaaaaaah उफ्फ्फ मर्डर गई तो तुम गन्दी किताबे भी पढ़ते थे बदमाश"

"ाः नहीं आजमी जाआआं मैंने सिर्फ देखे थे मुझे संस्कृत या हिंदी पढ़ना कहा आता "

"तो कहा देख लिए तुमने ऐसी किताब आआह और यहाँ वो मुझ पर आज़मा रहे हो"

"ाः ये लो मेरा लौड़ा ..अम्मी जाएं मई आपका बता दू पर ये बात खुद तक रखना "



शमशेर भूरिया को और झुका देता है और घलप्प घलप्प लैंड पेलने लगता

"aaaaaaaaaaaaah उफ्फ्फ हाआआआआ अब तो मई आआप्की बीवी हु तो भी भरोसा नहीं शातिर शमशेराआआआह"

"अम्मी जाएं बात ये है क जब महारानी देवरानी आए थी यहाँ तो मैं उनके हुजरे में एक दिन उनके गैबने में ये किताब देखा था "

भूरिया मुस्कुरा देती है क्यू क उसे पता था देवरानी ऐसी किताबे पढ़ती है अपने पति बलदेव को खुश रखने क लये

"ाः ाः उफ्फ्फ मेरे सरताज वैसे मुझे ये बात पता है ाआअह महारानी देवरानी महाराज बलदेव को खुश रखने क लये हे ये किताबे पढ़ती थी"

"ाचा तो मेरी रांड माँ ऊपर से निक़ाब में अंदर से गन्दी बाते करती थी देवरानी खला से अआप्को अपनी पूरी रान्दीपना दिखाना है आपको खुल कर रहना है अब "

"डर्टी हु शमशेर ..कही तुम सच में मुझे रांड न समझ लो और मुझे छोर दो किसी और क हो जाओ तब तो मई कही की नहीं रहूंगी मई आपसे सच्ची मुहब्बत करने लगी हु बीटा आआआआह उहहहहजह आआआआह में gayeeeeeeeeeeeeeeeeee आआआआआह ज़ोर से छोड़ो आआआआह मेरे सरताआआअआज आआह"

भूरिया फिर से झड़ने लगती है और शमशेर ज़ोर ज़ोर से पेलने लगता है

थोड़ी देर तक भूरिया क हाथ पेअर अकड़ रहे थे वो आँख बंद कए अपने बेटे से लज़्ज़त भरी चुदाई का मज़ा ले रही थी और अपने छूट से पानी छोर रही थी शमशेर धीरे धीरे अपना लैंड अंदर बहार कर रहा था

"बीटा में थक्क गयी झुकी झुकी आधा घंटा से कर रहे हो थोड़ा रुक जाओ न"

"आपका तो हो गया मेरा क्या होगा मेरी जान "

ये कहते हुए पक्क्क की आवाज़ से लौड़ा खींचता है और भूरिया को निचे करते हुए "इसका पानी निकाल दो अम्मी जाएं मेरे शेर को सम्भालो अम्मी जान एहि आपका असल ख़िदमतदार है"

शमशेर अपना लौड़ा ले कर भूरिया क मुँह में दाल देता है



शमशेर अपने अम्मी क मुँह में लैंड दाल क उसके होठो को फाड़ते हुए गाल में पेलने लगता है और ऊपर से अपने अम्मी क गाल पर हलके थपकी मारता है भूरिया थक क छोर थी उसका बदन टूट रहा था और इस बार भूरिया थक कर कमज़ोर पड़ते हुए गिर जाती hai"aaaaah बीटा मेरे अंदर जाएं नहीं बची अब"

शमशेर अपने अम्मी को अनसुना करते हुए अपने अम्मी क ऊपर आता है और अपना लैंड फिर से अपने अम्मी क छोटे से मुँह में डालता है



इस बार सीधा हलक तक लैंड दाल कर पेलता है भूरिया भी मरती क्या न करती अपने बेटे क लैंड को चूसने लगती है चाटने लगती है शमशेर क लैंड का पानी पुरे मुँह पर गिर रहा था भूरिया क ऐसे हे कुछ देर अपने अम्मी क मुँह पेलते हुए "अम्मी जहां उठ क बैठो मई फ़ारिग़ होने वाला हु hmm"hooriya उठने की कोशिश करती है पर उठ नहीं पाती उसके बदन में दर्द होरहा था छूट और गांड का हिस्सा दर्द से नस नस दुःख रहा था भूरिया का हाथ शमशेर पकड़ा कर उठता है भूरिया बैठ jati,shamsheraaa अपने हाथ में लैंड लिए हिलने लगता है भूरिया अपने आखे बंद कए अपने बेटे क वीर्य गिरने का इंतज़ार कर रही थी "अम्मी जाएं एक डैम रांड लग रही हो"

"बीटा शहज़ादे मेरा छूट और पीछे का हिस्सा काफी दर्द कर रहा है बैठने में भी परेशानी हो रही है जल्दी करो न"

शमशेर अपना लौड़ा हिलाते हुए अपने भोली चेहरे की माँ को देखता है जिसका अपने हे बेटे से चुद कर बुरा हाल था



शमशेर अपना लैंड हिलाते हुए ज़ोर ज़ोर से आहे भरने लगता है और वीर्य की चहेरे सीधे भूरिया क होठो पर जा कर गिरने लगी भूरिया अपनी आखे बंद कए अपने बेटे का वीर्य अपने कोमल चेहरे पर ले रही थी भूरिया अपने चेहरे पर गरम गरम वीर्य अहसास कर रही थी और उसके तन बदन में आग लग जाती है और आखे बंद कए शमशेर से मुहब्बत क आगाज़ क दिनों को याद करती है जब शमशेर उसे पता रहा था

"अम्मी जाहां ाअखे खोलो मेरी राँद"



भूरिया अपने आखे खोलते हुए नींद से जगती है और देखती है उसके होठो क रस्ते से वीर्य उसके मुँह में जा रहा था वो अपने जुबां बहार लती है और शमशेर क आखो में देखते हुए चाटने लगती है और एक रंडी वाली मुस्कराहट क साथ कहती है "हाँ हु मई रांड ..पर सिर्फ आपकी मेरे बेटे "

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 173

भूरिया अपने आखे खोलते हुए नींद से जगती है और देखती है उसके होठो क रस्ते से वीर्य उसके मुँह में जा रहा था वो अपने जुबां बहार लती है और शमशेर क आखो में देखते हुए चाटने लगती है और एक रंडी वाली मुस्कराहट क साथ कहती है "हाँ हु मई रांड ..पर सिर्फ आपकी मेरे बेटे "

शमशेर अपने अम्मी की बात सुनते हे रोंगटे खड़े हो जाते है कैसे उसकी अम्मी अपने जुबां से कह रही है क वो अपने बेटे की रांड है शमशेर मुस्कुराते हुए अपने अम्मी क भारी जिस्म को घूरता है और कहता है "अम्मी जान कैसा लगा मेरा मणि पूरा जातक गई kya..zara मुँह तो खोलो मेरी राआआआंड अम्मी "



भूरिया अपने बेटे क तरफ देखते हुए अपने मुँह खोल कर अपने मुँह में भरे उसके वीर्य को दिखती है और फिर एक रांड की तरह मुस्कुराते हुए जातक जाती है शमशेर का लैंड फिर से अपना सर उठा झटका मरता है और भूरिया बदहवास अपने बिस्तर पर गिर जाती है और उसके मुँह से कहने की आवाज़ने आणि लगती है "आआआह आआआह उफ्फ्फ्फ़ बहुत दर्र्द कर रहा है aaaah"shamshera अपने अम्मी क बगल में जा कर लेट जाता है और अपने प्यारी अम्मी जान क खूबसूरत हाथो को पकड़ते हुए "क्या हुआ भूरिया बताओ न मेरी जान तुम ठीक तो हो न "

"उफ्फ्फ बीटा आआआह मेरे बदन टूट रहा है इतनी देर से मुझे लगातार चोदे जा रहे हो उफ्फ्फ मेरे घुटने हाआए तुमने अम्मी की जान हे ले ली शमशेर "

भूरिया का नस नस दर्द कर रहा था ज़िन्दगी में पहली बार ऐसी चुदाई जो की थी बेचारी वो भी अपने बेटे क साथ भूरिया अपने मुँह दर्द भरी कराह निकालते हुए बिस्तर पर अपने गांड को ऊपर कए हुए लेट जाती है और शमशेर मुस्कुराता हुआ अपने अम्मी क पास अत है



"क्या हुआ अम्मी जाएं ऐसे कैसे थक्क गई मेरी शेरनी अभी तो डिल भर्र क प्यार भी नहीं क्या आपके बेटे ने"

भूरिया आधी बेहोशी क आलम में थी उसके मुँह कराह निकल रहा था

"खामोश हो जाओ शमशेर ऐसा लग रहा है मेरे अंदर जान हे नै अंग अंग टूट रहा है बीटा ाः कैसा दर्द दे दिया रे मेरे पिया ाः"

"क्या हुआ अम्मी जाएं आप बताओ तो आप ठीक तो है ना मेरी तरफ तो देखो भूरिया ..सुनो न जान क्यू मुँह छुपा रही हो"

भूरिया जो अपने पेट क बल लेती थी घूमती है और भूरिया अपने बेटे को देखती है और अपने आप को पूर्ण रूप से नंगा प् कर शर्म से बुरा हाल हो जाता है और अपने सर का हिजाब से मुँह धक् लेती है

"अम्मी जान आपके छूट से तो अब भी पानी रिस रहा है"



शमशेर अपने अम्मी को अपने बाहो में भरते हुए एक कपडे से अपने अम्मी की छूट साफ़ करने लगता है और भूरिया चिल्लाने लगती है जैसे हे शमशेर छूट पर हाथ लगता है "उफ्फ्फ्फ़ नहीं बीटा वह मत छुओ ऐसा लग रहा है छील गई मेरी बुर बहुत जलन सी होरही है आआह nahe"shamshera अपने अम्मी क छूट क फांको को देखते हुए हैरान था क्यू क उसके अम्मी क छूट सूज गई थी चुदाई की वजह से "अम्मी जान आप इतनी कमज़ोर शेरनी निकली अभी से छूट सूज gai"hooriya निचे अपने छूट पर देखते हुए हक्की बक्की रह जाती है और शमशेर क छाती पर हाथ मारते हुए बचे की अंदाज़ में कहती hai"kamine मेरी छूट मार मार क सुजा दया और ऊपर से कह रहा है मई कमज़ोर हुहुहु कितने बेदर्द हो तुम बीटा में कोई वैश्य नहीं huhuhu"shamshera अपने अम्मी को पुचकारते हुए अपने बाहो में कास लेता है "अच्छा मेरी बीवी की छूट में जलन हो रही है अब खुजली तो नहीं हो रही मेरी अम्मी जान को "भूरिया नाराज़गी से पहले अपना मुँह फुला लेती है और कहती है "हाँ बीवी हु तो छोड़ छोड़ क जान हे निकल डोज पहले हे दिन हहह जैसे अब ज़िन्दगी आज हे ख़त्म होजायेगी"

"अम्मी जान आप को अभी पता नहीं चुदाई करने वाले तो रात रात भर चुदाई का मज़ा लेते है आप को मई धीरे धीरे पक्का कर दूंगा "

"मई सब समझ रही हु तुम्हारा इशारा शहज़ादे शमशेर मई अब और नहीं कर सकती बिलकुल हिम्मत नहीं है मेरे घुटनो में दर्द हो रहा है इतने देर से झुकी चुद रही थी उफ़ मेरे घुटने "

"भूरिया बेगम आइये मई आपकी मालिश कर दू तेल से फिर आपको सुकून आजायेगा"

"नहीं नहीं फिर तुम मुझे छोड़ोगे शमशेर अब मेरा बदन हिला नहीं जा रहा"

"भूरिया बेगम बास एक मौक़ा दे दीजिये मेरी अम्मी जान आप मेरे हाथो का जादू देखिये "

शमशेर ये कहते हुए अपने हाथो में जैतून क तेल की शीशी से तेल निकलने लगता है और भूरिया अपने आखो से हामी भरते हुए सीधा लेट जाती hai,shamshera अपने दोनों हाथो में तेल ले कर भूरिया की बड़े गोआल चर्बीदार बड़े गांड पर मलने लगता है फिर उसके मोती जानदार पहलु पे मॉल कर मालिश करने लगता है भूरिया अपने आखे बंद किते सिसकने लगती hai,shamshera खूब जैम क अपने अम्मी क बड़े गांड को तेल से गिला कर अब अपने अम्मी को सीधा लिटा देता है और घुटनो क पास बैठ दोनों हाथो से घुटनो की मालिश करने लगता है "हम्म्म्म आआह बहुत दर्द्द हो रहा है आपकी अम्मी को मेरे शहज़ादे आपने मल्लिका जहाँ को घायल कर दया ाह्ममममम"

शमशेर अपने उंगलिओ से खूब अचे से अपने अम्मी भूरिया बेगम का मालिश कर रहा था हुजरे में हर तरफ दोनों क प्यार की खुसबू फ़िज़ा में फ़ैल गई थी पुरे बिस्तर पर दोनों माँ बेटे क प्रेम रस फैले हुए थे दोनों क कपडे पुरे हुजरे में इधर उधर बिखरे थे कोई पागल भी बता सकता था आअज की रात सल्तनत पारस की सुल्ताना भूरिया की जैम की चुदाई हो रही hai,shamshera अपने अम्मी क घुटनो की लगातार मालिश करते हुए छूट पर आता है और अपने उंगलिओ से छूट क लैब को खोल कर उसको धीरे धीरे से मलने लगता है "आआआह बीटा धीरे तुम छू रहे तो भी दर्द हो रहा है आआह "

"अम्मी जाएं अभी कुछ देर में दर्द काम हो जायेगा घबराये नहीं असली मर्द से जब एक ख्वातून का पला पड़ता है तो उसकी छूट सूजती हे है "

"आह हाँ मेरे मरद आखिर तुमने दिखा हे दया क तुम मुझे किस हद्द तक प्यार करना चाहते थे बरसो की तमन्ना तुम एक दिन में हे मुझे राउंड कर ले लोगे लगता है"

"अम्मी जाएं आप से बदला क्यू लूंगा मई आप हे तो मेरी दुन्या में सबसे अज़ीज़ है मेरी मिश्रा की माल अरबी माल अआप से तो मई मुजरे करवाऊंगा और मिश्री रक्ष भी मेरी लौंडिया"

शमशेर का लैंड फिर से सर उठाने लगा था जिसे भूरिया भाप जाती है क हो न हो शमशेर कभी भी अपने लैंड को छूट में दाल देगा

"शमशेर मेरे अच्छे बेटे आपको अब तो मेरी रोज़ हे लेनी है आपके इस प्यार क लये तो मई भी तरसी हु पर आज पहली बार इतना मोटा और लम्बा लौड़ा ली हु न तो मेरे से बर्दाश्त नहीं हो रहा ऐसा लगता है फैट न जाये अभी डाले फिर से तो "

"चुप करो भूरिया मई आपकी छूट को फिर से पेल साड़ी जलन दूर कर दूंगा मेरी जान आज रात को मई यादगार बना दूंगा अम्मी जाआआं"

शमशेर अब धीरे से अपनी एक ऊँगली छूट में दाल कर अंदर बहार करने लगता है और तेल से सनी हुई ऊँगली आराम से अंदर बहार होरही थी अब भले से भूरिया का जिस्म जवाब दे दया था पर छूट तो बरसो बाद रोई थी ख़ुशी से वो भले कैसे अपने दिलदार लैंड को लेने क लये मन करती और फिर से गरम हो जाती है

"अऔच ऐसा करेंगे मेरे शौहर अपने बीवी की बात नहीं मानेगे "

"चाहे जो हो आज चुदाई नहीं रुकेगी तुम मेरी बीवी हो अपना हक़ ले लो मुझसे भूरिया और चुदाई न करने की बात मई आपकी कभी नहीं मानूंगा हर बात मान लूंगा "

"उफ्फ्फ अआप समझते नहीं मेरे मजनू बेटे मई तो खुद खुश हु आज बरसो बाद सच्ची चुदाई प् कर आपके लोहे जैसा लैंड की दीवानी हो गई पर अब मई नहीं कर सकती बिलकुल ताक़त नहीं बची"

"आपके घुटने का दर्द कैसा है अब अम्मी जाएं और हाँ जब आप मेरे लैंड को अपने छूट में ले लोगी न तो सब दर्द भूल जाओगी पता है आप कितनी बड़ी रांड है "

"हाँ तोड़ दो मेरे बदन की हड्डी कल जवाब क्या दूंगी मई आपके अब्बा जान को और महल में लोग पूछेंगे कैसे हुआ तो बीमार पद गई तो किसीको भी शक हो जायेगा आपको पता हे है आपके अब्बा कितने शातिर है बीटा अब न छोड़ो मुझे रेहम करो"

शमशेर का लैंड अब अकड़ने लगा था और वो उठ कर अपने अम्मी क नंगे बदन को देखता है और किसी हवसी शेर की तरह झपटा जिसे देख भूरिया पीछे खिसकते हुए बैठ जाती है और अपने दोनों हाथ जोड़

"रेहम करें मुझ पर मेरे सरताज अब ये आपकी अम्मी आपके लैंड की मार अपने छूट में और बर्दाश्त नहीं कर सकती मुझे बक्श दीजिये मेरे shauhar,,,ammmi समझ कर हे छोर दीजिये मुआफ कर दीजिये न बीटा आप चाहे तो कल कर लीजिये जितनी चुदाई करनी है उतनी"

शमशेर ये सुनते हुए अपने अम्मी को अपने बाहो क घेरे में ले रहा था और उसकी अम्मी अपने हाथ जोड़े अपने बेटे से फरियाद कर रही थी "अम्मी जाएं आपका शौहर आज आपके छूट क परखचे उदा देगा इधर aao"shamshera अपने अम्मी को बाहो में भर्र कर लिटा देता है भूरिया बेचारी कसमसाती हुई अपने बेटे क निचे पइसस रही थी भूरिया गदरायी माल थी पर शमशेर भी एक साढ़े 6 फ़ीट का लगभग हत्ता कट्टा नौजवान मर्द था अपने बेटे क वजन को भूरिया बहुत मुश्किल से संभल प् रही थी

"अम्मी जाएं आप डर्टी क्यू हो आपको अपने शौहर को और खुश करना है और मई भी आपके छूट क लये इस दिन को यादगार बना दूंगा मेरी जाएं"

शमशेर अपने अम्मी से चिपक जाता है और उसका बड़ा लौड़ा उसके अम्मी क छूट से चिपकते हे झटका मारता है भूरिया अपने बेटे क लौड़े क दहशत से डर सी जाती है और डिल ज़ोरो से धड़क उठा वो शमशेर क आखो में रउवाँसी हो कर अपने आखो में ासु लये बोलती है "तो नहीं मानेंगे आप न ..आज आप मुझे जान से हे मारने क इरादे से आये ho"hooriya का मासूम चेहरा देखता है और मुस्कुराते हुए शमशेर कहता है "अम्मी जाएं हम तो मर मिटने को तैयार है आप की जान में मेरी जान बस्ती है भला मई अपनी जान क्यू लेना चाहूंगा मोहतरमा हूरजहाँ begum"hooriya क गालो को चूमते हुए शमशेर अपने पैरो को भूरिया गदराये पैरो से मसलते हुए अपना लौड़ा भूरिया क छूट पर रगड़ता है "आआह अऔच बीटा jaaani..nahi ाः दर्द्द देना तो अआप्को पसंद है न शहज़ादे shamshera"hooriya अपने बेटे को अपने तरीके से मानाने की कोशिश करती है "अम्मी जाएं जो दर्द मई आपको देने जा रहा हु उस दर्द को पूरी दुन्या की औरत लेना चाहती है पर सब खुशनसीब नहीं होती आपकी trah..aap मुझसे मुहब्बत करती हो या नहीं अम्मी jaa?"hooriya अपने बेटे क आखो में देखते hue"maanti हु मेरे मजनू बिना मुहब्बत क आप क साथ एक पर्देदार परहेज़गार औरत नंगी आपके साथ सोइ है kya"hooriya की ये बात सुनते हे शमशेर भूरिया को अपने ताक़त से पकड़ कर अपने ऊपर ले लेता है "तो अम्मी जान अपने बेटे उर्फ़ शौहर पर भरोसा रखें आपकी ज़िन्दगी में आपको ये रात याद रहेगी आइये आपके छूट को चाट लू सारा दर्द पी जाओ आपके"

शमशेर अपने अम्मी को खींचते हुए अपने मुँह क तरफ लता है भूरिया समझते हुए अपने छूट को खोलते हुए अपने बेटे क ऊपर बैठ जाती है और शमशेर क मुँह में अब भूरिया का चूर था "slurrrrrrrrpppppppppp आआआआआह अम्मम्मि कितनी खुसबूदार चुटी है गलप्प्प गलपपपपप गलपपपप आआआआह आआआआह बीटा तुम कितने ज़िद्दी हो आआआआह मर्डर गई"



"आआआआह अम्मी जाआआं आपकी छूट तो पहले से खुल गई है पहले सकरी थी गलप्प्प गलपपपप गलप्प सलरपपपपप ह्म्म्मम्म आआआआह बेताआए सकरी थी न आआआआह आज तो तुमने फैला कर रख दिया छूट का चद्र बना दिया आआआह हम्म्म आआआआह बेताआए जहां"

"अम्मी जाआआआआ अआप्के छूट तो गरम हो गई ाआअह आप कह रही थी अब छोड़ना नहीं है पर छूट तो कह रही है और छोड़ना है गलपपपप गलपपपपपपप गलपपपपप हम्म्म्म सलरपपपपपपप "

"तुम ने क्या सीखा पढ़ा दिया मेरी मासूम सी छूट को जो अब तुम्हारी बात मन रही है जैसे आज से तुम्हे हे मालिकाना हक़ दे दिया हु हम्म्म आआह"

"अब इस छूट की खिदमत मई करूँगा तो मालिक भी मई हे रहूँगा न अम्मी आपके छूट की वैसे असली मालिक तो मेरा लौड़ा है "

शमशेर उठ कर भूरिया को निचे बैठाया है और भूरिया अपना मुँह खोल अपने बीटा लैंड पछ से अपने मुँह में भर लेती है और अपने हाथ से मुठियाते हुए लौड़ा चूसने लगती है



"गलप्प्प गलप्प्प गलप्प्प सलरपपपप हममममममहहहह हम्म्म ाआअह हम्मम्मम्मम्म आआआआह ammmmmmeeeeeeeeee जाआआआआ ऐसे हे चुसो हम्म्म "फककक से लौड़ा बहार निकलती है भूरिया और अपने बेटे क आखो में देखते हुए "बीटा लैंड चूस देती हु और ठंडा कर देती hu"shamshera गलपपपपप कर क लौड़ा फिर से अपने अम्मी क मुँह में पेल देता है "आआआआह अमेटी जाहां मेरा लौड़ा घुल जाता है आपके छूट में आआआह आप क्या समझ रही है आपके ऐसे मुठियाने से मेरा लौड़ा शांत आआह हो जायेगा अआप्की छूट का चूरमा बनाये ये रुकने वाला नही हम्म्म दांत से मत काटो मेरा लौड़ा अम्मी जहां"

घुटने क बल बैठी भूरिया बेगम अपने बेटे का लौड़ा शिद्दत से मुठिया कर पानी निकलने की कोषिष कर रही थी



"गलललपपप गलप्प्प ह्म्मम्म्म्म ह्म्म्मम्म मममममः गलपपपपपपप सलूरर्पपपपपप मममममः aaaaaaaaaaaaah अम्मी जाआआं आआप तो दो दिन में सीख गई लौड़ा चूसने आआआह hmmmmmmmmmmmm गलपपपपपपपप गलपपपपप आआआआह ाअम्मम्मि अआप तो किसी राहाण्ड की त्राः चुस्ती हो लौड़ा"

भूरिया किसी रंडी से काम नहीं लग रही थी इस वक़्त अपने सर पे पर्दा कए और अपने मोठे नंगे दूध को हिलाते हुए अपने बेटे क लैंड को खूब चूस रही थी और उसके थान हिलने पर और हिल रहे the,shamshera सलरपप से अपना लौड़ा खींचता है और भूरिया को देख "अब आपकी छूट की कुटाई करूँगा अपने मुसल से मेरी अम्मी jaaan"land अभी विक्राल रूप लय हुआ था और भूरिया क थूक से गीला था भूरिया का मन तो था अपने बेटे से छोड़ने का फिर से पर उसका भरी बदन थक्क कर टूट चूका था और भूरिया डर रही थी जैसे हे शमशेर अपने अम्मी को पकड़ने क लये आता है अपना लैंड डालने अपने अम्मी क छूट में



भूरिया देखती है उसका बीटा उसे फिर से झुका कर अपना लैंड पेलने आरहा है और वो भागने लगती है पर शमशेर क चुंगल से बच नहीं पति शमशेर भूरिया को खींचते हुए अपने अम्मी क बड़े गोआल गांड पर थप्पड़ जड़ देता है फिर झुका कर अपना लौड़ा छूट पर निशाना लगते हुए "khachhhhh"se अपना आधा लौड़ा अंदर डाल देता है भूरिया की तो मानव जान हे निकल गई थी और वो ज़ोर से दर्द्द में चिल्ला देती है

"Aaaaaaaaaaaaaaaah aaaaaaaaaah maaaaaaaaaaar दया रे aaaaaaaaaaaah हाआआए zaaaaaaaaaaalim"

भूरिया अपने दर्द को बर्दाश्त कर रही थी और अब शमशेर घापा है अपने अम्मी को झुकाये पेले जा रहा था



"अम्मम्मि jaaaaaaaaaaan घोड़ी बना कर पेल रहा हु आआआआप्को ाआअह

घपपपपप घपपपप घपपप पाछह पाछह पछ घपपपप घपपप ाआअह बेताआआआ नहीं हाआए जाएआलिम ुहम्म्म्म मई मर्डर गई सच में मेरी छूट क चिथड़े चिथड़े कर गया आआआह हाए zaaaaaaaaaalim धीरे तेरी अम्मी हु मई सगी आआआआह जाएं से मार dega"ghapppp घपपप पछ पांच "अम्मी जाआआआआ सगी अम्मी हो और एक गदरायी माल भी हो ाः अम्मी जाहां आपके गरम जिस्म का दीवाना हु आआआआप्के छूट का दीवाना हु आपके बड़े गांड का दीवाना हु अआप्को इसलिए तो पटाया ताके आपके छूट को कूट सकू और आपका रसससस निकाल दू छूट से ाआअह ये ले रंडी साआली मेरा लौड़ा घपपपप घप्प घपपप"

शमशेर अब अपने अम्मी को अपने गॉड में लेते हुए खुद निचे लेट जाता है और अपने अम्मी को अपने लौड़े पर बिठाये निचे से पेलता है "आआह बीटा उफ्फ्फ aaaaah"shamshera अपने भरी वजूद की अम्मी को अपने गॉड में आसानी से उठाये छोड़ रहा था जिसे देख भूरिया भी आश्चर्य कर रही थी भूरिया सोच रही थी " सुल्तान है जो मेरे मोटापे का मज़ाक बनाते है और एक ये शमशेर है जो किसी बचे की तरह मुझे उठाये छोड़ रहा है इतनी काम उम्र इतनी ताक़त हाय मैंने सही मर्द चुनी hu"hooriya अपने सोच पर मुस्कुरा पड़ती है तभी शमशेर कहता है "अम्मी जाएं अआप करो सवारी मेरे लौड़े की"



भूरिया अपना दोनों हाथो को दये बाये रखते हुए अपने बेटे क आखो में देखती है और सारे दर्द को भूलते हुए अपने बेटे क लौड़े को जड़ तक छूट में छापा चाप लेने लगती है छूट तेल से भीगा था और अब लैंड पर लगने से चुदाई की रफ़्तार तेज़ हो जाती है

"ाआअह ाआजाओ अमम्मीये जहां घुम्म जोआओ ाः घछहः कर क लौड़ा घुस जाता है भूरिया अब अपना पीठ अपने बेटे क तरफ कए अपने बेटे क लौड़े पर उठ बैठ कर रही थी

घलपपपप घलपपपप घलपपप पछहः पाछह पछहः घपपप घप्प



"आआआह अम्मी जहां तेल लगाने से आपकी छूट और चिकनी हो गई सटासट लौड़ा घुस रहा है ाआअह मज़ा आज्ञा मेरी अममीएइ जाआआं आप क इस वज़नी जिस्म को अपने लौड़े पर बैठा क छोड़ते हुए मज़ा ाअरहा है aaaaah"shamshera अपने अम्मी को हुमच कर छोड़ रहा था और भूरिया भी अपने सर पर हिजाब बांधे किसी रांड की तरह अपने बेटे से चुद रही थी तभी भूरिया क पेअर कांपने लगते है और छूट से रस क फव्वारे गिरने लगते है और शमशेर अपने तेज़ी से अपने अम्मी की छूट पेलते जा रहा था.

"Aaaaaaaaaaaahaa haaaaaaaaaaaaayeeeeeeeeeeeee मई gayeeeeeeeeeeeee उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah मई झाड़ड़ड़ रही हु betaaaaaaaaaa आआआह"

भूरिया झड़ते हुए अपने बेटे क ऊपर लेट जाती है "अम्मी जाआआआं मज़ा आया क नहीं अपने बेटे से छोड़ने में "भूरिया का हॉसो हवस गायब था वो हाँफते हुए अपने बेटे क चौड़े सीने में अपना सर छुपाते हुए लेट जाती है और मुस्कुराते हुए "बहुत मज़ा आया मेरे सरताज बहुत गर्मी लग रही है अब तो सर का हिजाब खोल दीजिये "शमशेर समझ जाता है क छूट क गर्मी में भूरिया जल रही है और वो हाथ आगे बढ़ा कर "ये लीजिये आपके छूट को खोल कर आपके छूट में लैंड डाले हुए आपका बीटा आपके छूट क रस में भीगे हुए लौड़ा आपकी जवानी का ग़ुलाम आपके सर क हिजाब खोलता hu"hooriya क सुनहरे काले बाले हिजाब खुलते हे शमशेर क चेहरे पर ागिरते है और भूरिया मुस्कुराती हुई अब्बी भी अपने बेटे क ऊपर लेती थी और उसके छूट में शशिरा का लौड़ा था "अम्मी जाहां ाआय हाय आपके इस खूबसूरत रेशमी ज़ुल्फो की महक हम्म्म्म आआह "भूरिया मुस्कुराते हुए "शहज़ादे शमशेर हूरजहाँ क इस ज़ुल्फो को सिर्फ सुल्तान ने फिर उसके बाद तुमने देखा है यहाँ तक क मई अपने वालिद क सामने भी अपना ज़ुल्फ़ खुला न राखी कभी बिना हिजाब का"

"आआह अम्मी जाएं तब तो मई बहुत खुशनसीब हु मेरी वालिदा ने सिर्फ मेरे खातिर अपने इज़्ज़त दाव पर लगा दी बास एक कमी रह गई आप ने मिश्री रक्ष नहीं क्या और न हे मुजरा अपने बेटे क लये आह "शमशेर निचे से लौड़ा अपने अम्मी क छूट में मारते हुए कहता है

"आआआआह उफ्फफ्फ्फ़ ुओई मई तुम्हारे सामने naachu?Raqsh करू और मुजरा करू मई कोई वैश्य नहीं शहज़ादे शमशेर मई सुल्ताना हु मल्लिका इ जहाँ हु पारस की आधी दुन्या पर मेरी हुकूमत है"

"अम्मी जहां पर तुम अब मेरे लैंड की ग़ुलाम हो और आपको अपने बेटे को नाच कर दिखाना होगा मेरे सामने किसी तवायफ की तरह अपने गांड हिला कर मिश्रा का नाच दिखाना होगा समझी मेरी राहाण्ड मुजरा करना होगा नहीं तो आपका नया शौहर मेरा लैंड रूठ जायेगा आपसे"

"शमशेर ची तुम अपने अम्मी को क्या बाज़ारू औरत समझते हो ये सब करवाहाओगे आआआह"

शमशेर अपने अम्मी को पेलने लगता हज और गॉड में उठा कर पलंग से उतर जाता है "अम्मी जाआआं अआप को गॉड में उठा कर पेलता हु मई मेरी राँद ाः"

"आआआह ये क्या तरीक़ा है तुम तो मुझे थका थका क मार डालोगे ाः बीटा "

"ाआअह अम्मी अब मेरी गॉड में ऊपर से निचे आओ मेरे लौड़े पे "शमशेर अपने अम्मी क भारी जांघो को पकड़ अपने लैंड पर निशाना लगते हुए निचे करता है और फिर से अपने अम्मी क छूट में अपना मुसल पेल देता है भूरिया भी चीखते हुए लौड़ा अंदर लेने लगती है

"आआआआआह मेरे jaaaaaaaaaaan आआआआह मेरे मजनूओ कितने ाआसानी से मुझे गॉड में उठा लये आआहा मेरे ताक़तवर बीटा ाआअह हम्म्म घपपप घपपप घप्प पछ पछ ाआअह शमशेराआआआआ"



भूरिया अपने बेटे क गर्दन को जकड ली थी और शमशेर फिर से अपने वज़नी अम्मी को अपने लौड़े पर बिठाता है और पुरे भूरिया की जिस्म को अपनी ताक़त से उठा कर पेलने लगता है "आआआह अम्मी जाआआं अआप्का बीटा अआप्को चाहे तो दिन रात उठाए क पेल सकता है ाआअह घपपप घपपप घपपपप पाछह पाछह ुहममममम अम्मी जाहां ाः"

"आआह ुहममम आआआआह बीटा क्या मई मोती हु आआआह आह आआआह ुह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ मई मरररररर गयी ाआअह "

"अम्मी जाआआआं आआप्के मोती जाआआंघिये मोटा गोहाल चुतर बड़े बड़े लटके हुए थान अआप्के पेट पर गद्देदार चर्बी अआप्को मोटा नहीं आपको ऐसी माल बना देता जिसका आपका बीटा दीवाना है ऐसी तंदरुस्त माल को पेलने में मज़ा है ाआअह"

शमशेर भूरिया को पेलते हुए दीवार क तरफ बढ़ रहा था पुरे हुजरे में शमशेर और उसके अम्मी की चीखे और सिसकी गूंज रही थी वही शमशेर का बाप फर्श पर बेहोशी क आलम में सोया था उसे क्या खबर उसकी बीवी अपने बेटे से हे अपनी छूट फड़वा रही है

भूरिया बेगम की छूट की छितरे उड़ाते हुए शमशेर अपने अम्मी को दीवार से लगा कर अपने वज़नी अम्मी को छोड़ रहा था तभी भूरिया का एक पेअर निचे आजाता है



शमशेर फ़ौरन अपने अम्मी क पेअर को उठा कर फिर से उन्हें अपने गॉड में उठा लेता है और घपपपपप से अपना लौड़ा अपने अम्मी क छूट में पेल देता है

"घलपपपपप घलपपपपप पछ्ह्पछह aaaaaaaaaaaaaaah बीटा आआह कितना छोड़ेगा आआआह मई रो दूंगी आआआआह बहुत दुःख रहा है आआआआह मई मर्डर गयी उफ्फफ्फ्फ़"

शमशेर अपने अम्मी क होठ को अपने होठो से लगा कर चूसने लगता है और अपने अम्मी को हर तगड़े झटके से अपने अम्मी क बच्चेदानी तक को फैला रहा था

शमशेर काफी देर से अपने अम्मी को गॉड में बैठाये खड़े खड़े पेल रहा था उसके बाजुओं में दर्द महसूस होने लगती है और शमशेर फिर से अपने अम्मी को ले कर बिस्तर पर गिरता है और इस बार पलंग से ज़ोर से आवाज़ आयति है

"उफ्फ्फ्फ़ शमशेराआआ ढीरे आराम से आवाज़ कही बाहर गई तू "

शमशेर अपने अम्मी को अपने ऊपर लेते हुए "अम्मी जहां सब यही समझेंगे क अब्बाए अआप को छोड़ रहे है "शमशेर भूरिया क बड़े दूध को अपने मुँह में भर्र चूसने लगता है



"गलप्प्प गलप्प्प गलप्प्प गलप्प्प हम्म्म्म उह्ह्ह ाआअह अम्मी कितने बड़े मोठे दूध है आआह हम्म्म आआआआह मेरे शररर पीए लो अपने अम्मी क मोठे दूध हम्म्म्म आआआआह"

"ाआअह अम्मी अब जल्दी अपने पेअर फैलाओ ाः मेरी रांड अम्मी आपके छूट हम्म्म आआआह घलपपपप से अपने अम्मी क छूट में लौड़ा पेल देता है



शमशेर अपने अम्मी क भरी गदराये हुए जांघ को फैलते हुए एक पेअर को हवा में खड़ा कर देता है और लैंड को दर्दनाक गति से अपने अम्मी क छूट में अंदर बहार करता hai,hooriya क बड़े बड़े दूध एक सुर्र में हिल रहे थे साथ हे उसके थुलथुले हलके पेट क उभार भी हिल शमशेर क लौड़े को और ताव दे रहे the,shamshera अपने अम्मी जान क थुलथुले पेट पर हाथ फिरते हुए सहलाता है फिर दबाते हुए "अम्मी जाएं आपके मोठे थान और ये पेट आपके ख़ूबसूरती में चार चाँद लगा देते है मेरी वज़नी वालिदा"

शमशेर अपने हाथ बढ़ा कर अपने अम्मी क बड़े पपीता जैसे लटके हुए बड़े थान को अपने हाथ से दबाने लगता है भूरिया अपने हाथ से अपने भरी जांघ को उठाये अपने बेटे को जगह दे रही थी छूट ठुकवाने की और शमशेर भी घापा है थोक रहा था अपने अम्मी की छूट



शमशेर कभी अपने अम्मी क भारी दूध तो कब्बी गांड को मसल रहा था और भूरिया क गांड पर बीच बीच में अपने भरी हाथ से छाते जड़ देता जिस से भूरिया ज़ोर से चीख deti,Shehzade शमशेर अपने अम्मी को छोड़ते हुए आहे भर्र रहे थे पुरे हुजरे में माँ बेटे की चुदाई की खुशबु फैली थी आज पारस का राज महल अपनी सुल्ताना और उसके बेटे क धुवादर चुदाई की साक्षी बानी थी अगर आज महल क इन् ुचि दीवारों में ज़ुबान होती तो चीख चीख कर कह देते क देखो दो पागल प्रेमी माँ बेटे एक दूसरे की प्यास बुझा रहे है सुल्तान की मौजूदगी में सुल्ताना भूरिया अपने बेटे से अपना छूट कुतवा रही है पर ऐसा होना मुमकिन न था

"अम्मी jaaaaaaaaaaan अब मेरे लौड़े पर बैठो आआह"

शमशेर अब कुर्सी बन बैठ जाता है और भूरिया अपना वज़नी जिस्म निचे करते हुए अपने बेटे क लौड़े पर बैठती है शमशेर अपना लैंड हाथ में पकड़ छूट पर निशाना लगता है और "khachhh"se छूट में अपना लौड़ा पेल देता है "aaaaaaaaaaaah अम्म्मीईई jaaaaaaaaaaan"hooriya क मुँह से भी चीख फुट जाती है और जोश में अपने बेटे क ऊपर कूदते हुए अपने बेटे का लैंड अपने छूट में लेने लगती है



भूरिया अपने भरी जिस्म को अपने बेटे क गॉड में बैठते हुए ऊपर निचे हो रही थी और उसके भारी मम्मी एक सुर से एक दूसरे से टकरा जाते "आआआआह ाआअह ाआअह बेताआए हम्म्म्म आआआआह मेरा मजनूओ आआआह तुमने मुझे अपने रांड बना हे दया हआ आआआह"

"अम्मी जाआआं अआप मेरी बीवी भी हो आआह और तेज़ी से ऊपर निचे करो दिखाओ मेरी जाएं शेरनी की ताक़त ाः आपके छूट में मेरा लौड़ा कितना खुश है ाआअह काश मई सबको बता पता क मैंने अपने ज़िन्दगी की साथी का चुनाव कर लय है और मेरे शरीक इ हयात तुम हो अम्मी ाआअह"

"घपपप घपपप घपपप पाछह पाछह आआआह लोगो को कैसे समझाओगे क जिसे तुम अपने ज़िन्दगी का हिस्सा बना रहे हो वो तुम्हारी अम्मी है कैसे कोई मानेगा इस रिश्ते को हम्म"

"ाआअह अम्मी जाआआं मेरी तरफ घूम क बैठो मेरे लौड़े पैर आआह "

शमशेर सोच हे रहा था लौड़ा बहार खीचने का पर भूरिया मुस्कुराते हुए अपने छूट से लैंड बहार नहीं निकलने देती और घूम कर अपने बेटे क तरफ मुँह कर लेती है ऐसे घूमने से छूट में किल्ले जैसा लौड़ा गोल घूमता है और भूरिया जैसी भारी गांड और जिस्म की भी अपने ताक़त से लौड़ा संभल लेता है और भूरिया अपने दोनों पेअर फैलाये अपने बेटे क आखो में देखते हुए कूदने लगते है "अम्मी जाआआं काश मई अपने प्यारी बहिन शहज़ादी समां को बता पाटा क उसकी भाबी कोई और नहीं तुम हो अम्मी ,काश उसे बता पता क उसकी बड़ी अम्मी हे मेरी बीवी है और उसकी भाबी है वो हमेशा पूछती है मुझे शादी क्यू नहीं करते "

भूरिया अपने बेटे की बात सुन कर जोश में ाआजाति है और अपने बेटे क आखो में देखते हुए "ाआअह तो तुम समां बेटी को बताना चाहते हो क उसकी भाबी मई हु यानी मई तुम्हारी बीवी हु ,क्या समां इस बात को क़ुबूल करेगी क उसके भाई और अम्मी लैला मजनू की जोड़ी है ाः"



भूरिया अपने जोश क उफान पर थी और अपना लाल हुआ बड़े मोठे गोआल गांड को तेज़ी से ऊपर करती और ठीक निशाने पर अपने बेटे क लौड़े पर मारते हुए चुद रही थी "aaaaaaaaaah ाआअह हम्म्म्म आआआआह ऐसा आआआआआह छोड़ लो अपनी अम्मी को अआपने लैला को मेरे मजनू पर समां कभी हमारे प्यार को नहीं मानेगी वो कैसे अपने भाई और अपने बड़ी अम्मी क प्यार को क़ुबूल कर लेगी आआह घछहः घच्ह्ह पाछह पछ आआआआह बीटा भूल से भी ये बात किसी को महल में पता नहीं चले नहीं तो हमारा रिश्ता टूट जाइएगा मेरे मजनू आआआह हम्म्म"

शमशेर फिर से अपने अम्मी को अपने गॉड में उठा लेता है इस बार ज़ोरदार घाछे मारते है "aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah मई अब फाआआअआरीघ होने वाली हु आआआआह और जूऊऊऊर से आआआह हुई आआह और छोड़ो"

भूरिया को अपने गॉड में उठाये शमशेर धुवादर घाछे मार रहा था भूरिया क मुँह से रोने की आवाज़े आयने लगती है जिस से शमशेर और जोश में आजाता है "अह्ह्ह्हह आआ हु हूहू मारररररर गयी में आआआआह और छोड़िये मेरे सरताआआअज आआह पहली बार इतनी बार झड़ी हु मई aaaaaaaaaaaaah मई gayeeeeeeeeeeee"



भूरिया एक ज़ोरदार चीख मारती है इस बार पक्का ये ाआवाज़ महल क बहार तक चला गया होगा भूरिया अपने ाअखे बंद क्या झाड़ड़ड़ रही थी उसके छूट से रसससस फुट कर गिर रहा था शमशेर का लैंड पूरा अपने अम्मी क छूट क रस से सं जाता है और छूट का रस भूरिया का निचे फर्श पर गिर रहा था भूरिया अपने बेटे क गर्दन को चूमते हुए अपने बेटे क गर्दन पर दांत गदा देती है और अपने चीख को रोकने की कोशिश कर रही थी ज़िन्दगी में पहली बार भूरिया बेगम क छूट ने इतना पानी छोरा था "आआआआह अम्मी जाहां आपके छूट तो बाआरिश कर रही है ाआअह"

कुछ देर झड़ने क बाद भूरिया हाँफते हुए अपने बेटे क लैंड पर उछलना बंद करती है "ाआय मार दया रे ज़ाआआलिमा आआआआह जाएं ले हे लिया अपने अम्मी की "

शमशेर अपने अम्मी को बिस्तर पर पटकता है और घाचे मारते हुए फिर से भूरिया पर सवार हो जाता है "आआह मेरी अम्मी जाआआं आप तो फ़ारिग़ हो जाती हो मुझे अधूरा छोर देती हो ाः ये ले मेरा लौड़ा ाआअह हम्म्म"

"आआआह हम्म्म्म आआआह तुम हो हे जानवर इतना छोड़ते हो फिर भी नहीं झड़ते आआआह हम्म्म ाः अपने गधे का लैंड से मेरी छूट की चटनी बना डाई आआआह हम्म्म"

"अम्मी जाएं और खाओ अपने बेटे का मोटा लम्बा लौड़ा ाः क्या आपको अब्बा ऐसे चोदे कभी छ्हम्म ये ले लौड़ा साली"



"घपपप घपपप घपपपप आआआह aaaaaaaaaah बेताऑ जाआआअणि ाआअह अआप्के अब्बा अगर ऐसा छोड़ते तो मई क्यू मजबूर होती आपसे इश्क़ करने पे ये जिस्म की आग ने मुझे कितनी बड़ी गुनाहगार बना दया आआह ाः आआह"

भूरिया अपने दोनों हाथ से अपने भारी दूध पकडे अपने बेटे क भीषण चुदाई का मज़ा से लज्जत से किसी हूर पारी की तरह आसमान में उड़ रही थी

"गलप्प्प गलप्प्प घपपप घपपप घप्प आआआआह ाअम्मम्मीीे जाआआं मेरी राआआआंड मेरी बीवी मेरी मशूऊऊका aaaaaaaaaaaaah खा मेरा लौड़ा अपने छूट में आआआह घपपप घपपप घपपप घपपप aaaaaaaaaaah बेताआए शहज़ादे शमशेर पारस सल्तनत क होने वाले सुल्तान ाआपने अपनी अम्मी की छूट तहस नहस कर दया एक रात में ाआअह जितना मज़ा आआआज आया उतना मज़ा तो ज़िन्दगी भर की चुदाई मिला कर नहीं आया आआआह आआआआप हे मेरे मर्द बन ने लायक थे ाआअह बेटे घपपप घपपप घपपप घप्प पछ पाछह aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah ammmmeeeeeeeeeeeeeee jaaaaaaaaaaaan मेरी परहेज़गाहार हीजाआआबि ामीजाआन मेरी पर्देदार अमेटी jaaaaaaaaaaan मई अब फआआरीघ होने वाला हु ाआअह मेरी बीवी मेरी अम्मी आआआआ घप्प घप्प घपपप पाछह पछ"

शमशेर किसी घोड़े की रफ़्तार से अपने अम्मी क छूट में अपना लौड़ा दौड़ाये जा रहा था दोनों की सिसकियों और चीख क साथ ठप्प ठप्प पांच पांच छूट और लैंड मिलान का मधुर स्वर पुरे पारस महल क सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे में गूंज रहा था तभी भूरिया क हाथ पेअर अकड़ने लगता है और शमशेर का बदन भी पूरा सख्त हो जाता है और जैसे पुरे बदन से वीर्य निकल रहा हो

"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah ameeeeeeeeeeeeeeeee jaaaaaaaaaaan सुल्ताना भूरिया aaaaaaaaaaaaah मेरा बीएईज आआ आपके कोख में गिर रहा है मेरी पर्देदार अमीबीएए जहां aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh"

"आआआआह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ मई मररररर गयीईइ मई फिर से झाड़ड़ड़ड़ड़ड़ रही हु ाआअह हम और ज़ोर से ठोको मेरी जैसी कुटिया को ऐसे हे बेरहमी से छोड़ना चाइये आआआआआह और ज़ोर से aaaaaaaaaaaah मेरी chuoooooooooooot आआआह मई भी गइईईईईई उफ़ मेरे बेटे शेह्ज़ादेईईई शमशेराआआआ ाआअह"

शमशेर का लौड़ा गहरा गरम पानी अपने अम्मी क छूट से होते हुए कोख के उढेल रहा था और भूरिया अपने ायकः बंद कए हुए अपने टांगो को फैलाये अपने बेटे क वीर्य का हर बून्द अपने कोख में जाते हुए महसूस करती है

शमशेर धीरे धीरे पूरा भूरिया पर लेट जाता है और अपने आखे बंद कर हांफने लगता है और भूरिया अपने बेटे को अपने ऊपर आलिंगन करते हुए अपने आखे बंद कए इस पल का आनंद लेने लगती है भूरिया को झड़ने क बाद अहसास होता है क उसके छूट में और कमर में घुटनो में कितनी तेज़ दर्द है और वो उस दर्द को बर्दाश्त करती है पर उसके आखो से ासु गिरने लग जाते है भूरिया अपनी आखे बंद कए दर्द क ासु को पी रही थी

Hooriya:man me)Jis प्यार क लये ज़िन्दगी भर तरसी वो सुख मेरा बीटा देगा ये सोची भी नहीं थी कभी इस डिल को आराम दया है आपने मेरे सरताज शमशेर अपना घुलम बना लय आपने

शमशेर को देखते हुए भूरिया अपनी आखे बंद करती है और उसके दुःख और सुख क मिश्रण का ासु की धार आखो से निकल कर गाल से होते निचे जाने लगती है वही शमशेर भी अपने अम्मी की खिदमत कर क थक्क चूका था आखिर भूरिया कोई हलकी माल तो थी नहीं भूरिया जैसी भरी माल को बिस्तर में पास्ट कर देना सबके बास की बात नहीं थी पर शमशेर ने अपने ताक़त क बदौलत अपने अम्मी क जिस्म पैर अपना ठप्पा लगा दया था

Shamshera:man me)aaah आह आज पहली बार मेरे पसीने छूट गए चुदाई करने में आज तक कितनो को छोड़ा पर जो थकावट आज अम्मी जान को छोड़ क हुई वो कभी नहीं हुई अब होती भी क्यू न ऐसी भरी भरकम माल जो है अम्मी आह इतना मज़ा भी तो कभी नहीं आया किसी को छोड़ क वाक़ई अम्मी की छूट का नशा हे अलग है

भूरिया अपने ासु की घुट पीते हुए अपने साढ़े 6 फूटे बेटे को देखती है जो उसके बड़े बड़े थान को दबाये उसके ऊपर लेता था और हांफ रहा था भूरिया को इस दर्द में भी अपने बेटे क ऊपर प्यार आजाता है

Hooriya:man me)bhut म्हणत क्या आज मेरे बेटे ने थक्क कर चूर हो गया है

तभी भूरिया की छूट में शमशेर का लैंड आखिरी झटका मरता है और भूरिया ताजुब कर रही थी क लैंड अब भी कैसे इतना सख्त महसूस हो रहा है भूरिया मुस्कुराते हुए अपने बेटे क सर पर हाथ फेरते हुए

"अब खुश है मेरे बेटे मेरे सरताज"

शमशेर ऊपर देखता है अपने अम्मी को मुस्कुराता हुआ देख अपने अम्मी को बहो में रगड़ते हुए पेसानी पे चूमता है "बहुत खुश हु अम्मी जाएं आपने आज मेरा डिल जीत लिया बताये अम्मी जान इसके बदले में क्या तोहफा चाहिए आपको"

"बीटा जानी बास जो तोहफा आज दिए हो अपने अम्मी जान को वो तोहफा देना कभी बंद मत करना"

शमशेर ये सुन कर अम्मी को देखते हुए मुस्कुराता है और भूरिया को देख

"साली छिनाल सब गर्मी झाड़ दूंगा आपकी फ़िक़र नहीं करो अम्मी जानी"

शमशेर ये कहते हुए अपने अम्मी को बहो में लेते हुए पलट देता है और भूरिया हसने लगती है और अब शमशेर क ऊपर अपने बड़ी गांड को हवा में उठाये लेती थी

"हहहहाहा छोड़िये न जी क्या कर रहे आप जनाब लगता है अआप को अंदाज़ा नहीं क्या वक़्त हो गया है"

भूरिया की हसी और ऐसी ख़ुशी शमशेर ने शायद हे पहले कभी देखि थी जितनी डिल से आज भूरिया खुश थी अब होती भी क्यू न अब 4 बज गए पिछले 4 घंटो से धुवादर शमशेर ने भूरिया क छूट में लैंड डाले पेला जो था अब एक औरत जिसका शौहर हफ्ते में एक बार छोड़ता था वो भी कुछ लम्हे में झाड़ जाता था उस औरत क लये तो सबसे बड़ी कमाई थी ये चुदाई इसलिए भूरिया का चेहरा दर्द में भी मुस्कुरा रहा था

"अम्मी जाहां अआप ऐसे हे हस्ते रहिये आप हस्ती हुई बाला की खूबसूरत लगती हो "

"ाचा जी मेरे आशिके को मेरी हसी इतनी पसंद है तो ठीक है आप मुझसे वादा कीजिये आप कभी किसी गैर औरत क साथ कोई रिश्ता नहीं रखेंगे मेरे अलावा किसी को अपना डिल नहीं देंगे"

"मई वादा करता हु भूरिया बेगम मई आपके सिवा किसी की चुदाई तो दूर देखूंगा नहीं बुरी नज़र से बस्सस"

"बास नहीं अभी और है हाहाहा आपको मई शराब पीने नहीं दूंगी नहीं वैश्यों क पास जाने दूंगी आपको मेरी हर बात माननी होगी आप गुस्सा नहीं करेंगे मुझपर और हमेशा प्यार से रखेंगे "

"उफ्फ्फ होऊ भूरिया अभी एक हे बार छोड़ा हु आपको आप तो फरमाइश बढ़ाते हे जा रही है आप जो कहेंगी मई वो हे करूँगा मई बीवी का गुलाम मई अब से अपने अम्मी का घुलम बन क रहूँगा बास और रही बात गुस्से की तो मेरी फूल सी अम्मी पर गुस्सा क्यू होऊंगा"

"मुझे पता है शमशेर जी आप कितने गुस्से वाले है अगर मई आपको नहीं रोकती तो आप सुल्तान को अपने तलवार से अपना शिकार बना लये होते अपने आप पे काबू रखना सीखिए"

"अम्मी जाएं जब सुल्तान मेरी मेहबूबा को छूने की कोशिश करेगा उसके साथ रात बिताने की बात करेगा तो मई कैसे शांत रह सकता हु"

"अच्छा जी तो मेरे बेटे को अब ये बर्दाश्त नहीं क उसके अब्बा उसके अम्मी को देखे भी"

"बिलकुल नहीं "

"ाचा ठीक है पर वो सुल्तान है उनसे होशियार रहना होगा उनके शातिर आखे हमेशा मेरे हर कदम पर रहती है"

"अम्मी जाएं मेरे अब्बा सुल्तान ज़िन्दगी भर मुझे अपना ढाल बना कर इश्तेमाल कए साल भर्र मुझे जुंग में रखे और वो खुद ऐयाशी करते थे लौंडियो क साथ अब मेरी एक हे मुहब्बत हो आप आपको भी मई उन्हें हे सौंप दू कभी नहीं"

"बीटा जाआनी अआप्का इश्तेमाल क्या सुल्तान ने मेरा भी उन्होंने इश्तेमाल क्या ताके उनकी रियासत आगे बढे पर डिल से कभी मुझे अपनी बीवी नहीं माने बास ज़िम्मेदारी सौंप कर अपना काम निकलवाया मतलबी इंसान"

शमशेर अपने पलंग क निचे खर्राटे ले कर सो रहे पिता पर जाती है जो नीचें सो रहा था फर्श पर क्यू क भूरिया ने अपने लातो से धाक्केल कर गिरा दी थी बिस्तर पर से अपने बेटे क कहने पर और रात में जैम कर अपने हे शौहर क बिस्तर पर अपने बेटे से चूड़ी

"अम्मी जहां सुल्तान क मतलबी होने का पर्दाफाश हो गया है और इसका बदला भी मैंने आज ले लिया उन्होंने हमेशा मेरा इश्तेमाल क्या आज सुल्तान की बीवी का इश्तेमाल मई कर रहा हु सुल्तान की इज़्ज़त सुल्तान जिस मल्लिका इ जहाँ पर फख्र करते है वो आज मेरे लैंड लिए हुए मेरे ऊपर लेती है"

भूरिया तो अपने शौहर को एक टाक देखती है फिर अपने बेटे को देखते हे अपने मुँह को शर्म क मारे अपने बेटे क सीने में छुपा लेती है

"अम्मी जाएं सुल्तान ने हम दोनों का इश्तेमाल क्या उसकी सजा इसे मिल रही है सुल्तान की सबसे क़ीमती चीज़ हूरजहाँ को मई छीन लिया सुल्तान से"

"हाँ मेरे सरताज सुलतान क लाखो सिपाही है हज़ारो सिपाही महल बहार पहरा दे रहे है पर फिर भी तुमने आख़िरकार पारस क सबसे इज़्ज़तदार ख्वातून की इज़्ज़त लूट हे लय ..क्या फायदा सुल्तान क इतने इन्तेज़ामात का जो उसकी बीवी अपने बेटे से हे इश्क़ लड़ा बैठी"

"अच्छा जी सिर्फ इज़्ज़त लूटी आपकी या मैंने अपने लैंड से आपकी छूट कूट दी सुल्तान क मौजूदगी में"

भूरिया शर्मा जाती है और एक हाथ शमशेर क छाती पर मारते हुए

"शातिर बदमाश अपने हे अब्बा क ख़ज़ाने को लुट लिया आज तुमने आज इस सुल्तान मेरे वाहिद क जितना कोई गरीब नहीं ..सुल्तान लानत है तुमपर तुम दुन्या पैर हुकूमत करते रहे और तुम्हारी सबसे क़ीमती चीज़ को तुमने खो दया अपने इज़्ज़त को खो दिया"

"अब अब्बा जान ने आपके क़ीमत नहीं समझी और मई आपके खज़ाना की क़ीमत समझ कर आपको थोक दिया इसमें मेरी क्या गलती अब्बा जान की बदक़िस्मती है"

"अच्छा जी अब तो छोड़िये क्या अब ऐसे हे रहना बिना कपडे क"

"अम्मी जान आप कहे तो आपके छूट में ऐसे हे लैंड डेल ज़िन्दगी भर राहु"

शमशेर ये कहते हुए भूरिया को बिस्तर पर पलट कर अपने अम्मी को ऊँगली से इशारा करता है और छूट से अपना लैंड खींचता है "pukkk"ki आवाज़ से लैंड बहार निकलता है जो दोनों माँ बेटे क प्रेम मिश्रण से सना हुआ था लैंड छूट क मुक़ाबले इतना मोटा और लम्बा था क भूरिया का छूट भरा हुआ था पर जैसे हे लौड़ा बहार निकलता है भूरिया देख आखे फाड़

"उफ्फ्फ क्या भयानक है ये इसने हे तबाही मचाई है गधा का लग रहा है"

भूरिया पास से एक कपडा उठा कर अपने छूट को साफ़ करने लगती है और फिर उठ कर अपने भरी बदन को उठाने की कोशिश करती है क उसके कमर में दर्द्द होने लगता है

"क्या हुआ अम्मी आप ठीक तो है"

"मई ठीक हु बीटा दर्द्द कर रहा है बहुत बदन खासकर कमर और घुटना इधर आइये मई आपका हथियार साफ़ कर दू"

शमशेर मुस्कुराता हुआ अपने अम्मी क पास जाता है और भूरिया अपने बेटे क लैंड को देखते हुए उसे साफ कर रही थी तभी चिडिओ की आवाज़ दोनों क कानो में पड़ती है

"लगता है सुबह होने वाली है शहज़ादे महल में लोग जाग जायेंगे और कही कनीज़ आगे तो"

"वैसे आपने ाचा क्या रात में कनीज़ों को दरबानी से हटा नहीं तो आपकी चीखे सुन कर उनको शक हो जाता "

"हाँ मुझे पता था तुम..."

"क्या पता था जो इंतेज़ाम कर लये थे आप"

"भूरिया चुप करो कपडे पहन जाओ जल्दी नहीं तो किसी को कानो कण खबर हो गई क रात भर तुम यह थे तो हमारा साथ ज़्यादा दिनों का नहीं रह पायेगा"

"अम्मी जाएं पर मेरा डिल नहीं कर रहा आपको छोर जाने का"

भूरिया अपने सर पर फिर से हिजाब बांधते हुए अपने निक़ाब और काफटाण ढूंढ़ने लगती है हर कपडे कही से फैट कही से खेच गए थे

"उधर से मेरे ब्राज़िएर फेको बीटा मुझे तो उठा भी नहीं जा रहा"

शमशेर अपने अम्मी क ब्राज़िएर देखता है जो हद्द से ज़्यादा बड़ी थी उसके दूध क हिसाब से वो भूरिया को फेक कर देता है और भूरिया अपने हिजाब और ब्राज़िएर पहनने लगती है शमशेर अपने अम्मी क छूट पर नज़र तिकी थी जिसकी दोनों फांके सूज कर पावरोटी जैसी हो गयी थी

"उफ्फ्फ अपने कपडे पहने शहज़ादे शमशेर ये क्या आपका मन अब भी नहीं भरा"



भूरिया अपने पेअर को मोड़ लेती है और अपने बेटे से अपने छूट को छुपा लेती है जिस पर शमशेर कहता है

"अम्मी जान अलविदा कहने से पहले काम से काम छूट मरने नहीं डौगी देख तो लेने दो इस प्यारी सी छूट को "

भूरिया अपने बेटे क इश्क़ पर इठलाते हुए अपने दोनों पैरो को खोलती है

"सुधरोगे नहीं शहज़ादे "



छूट गीली थी और पूरा छूट लाल हो गयी थी शमशेर अपने अम्मी को गौर से देखते हुए

"अम्मी जान ये तो सुर्ख लाल हो गयी है"

"तुमने सिर्फ इसे नहीं मेरे जिस्म को नोच नोच क पूरा लाल कर दया है देखो मेरे छाती पर गर्दन पर पीठ पर हर जगह काट क निशान है"

शमशेर पीछे मुड़ता है और भूरिया को अपनी पीठ दिखता है भूरिया का हाथ अपने मुँह पर चला जाता है

"आपने तो किसी जंगली बिल्ली की तरह नोच लय है मुझे ये देखिये गर्दन पर काट लिया है "

"उफ़ अब किसी ने देख लय तो क्या होगा "

"क्या होगा आपके निशान देख लये तो समझेंगे क आपको अब्बा जान ने क्या है रात भर्र to..par मेरा तो यही समझेंगे क मई किसी कोठे पर वैश्य क साथ रात गुज़ारा हु"

"हम्म तुम इसे छुपा लो नहीं तो वैश्य समझने वाले मुझे हे वैश्य समझेंगे क्यू क तुम्हारे साथ तो मई हे सोई हु पर सुल्तान ने जागने क बाद देख लय तो"

"अम्मी जान डरना मैट आखो में आखे दाल कह देना उन्होंने हे क्या है "

"ठीक है अब जाली कपडे पहनो और सुल्तान को बिस्तर पर रखो निचे से उठा क"

"अम्मी जाएं मई अकेले राखु आप मदद कर दो"

"नहीं मेरे से उठा भी नहीं जा रहा तुम अकेले रख दो"

"ाचा लात मार कर गिरे ऊपर से आप और मई अकेले रख दू"

"रात भर्र मर्दानगी दिखाया है आपने शमशेर मेरे जिस्म क साथ खेला है आपने और आपके कहने पर हे मैंने सुल्तान को लात मार कर गिराया था निचे अब दिखाए मर्दानगी उठा कर रखो इस नामाकूल सुल्तान को ऊपर"

"ठीक है जब तुम अपना मरद मुझे समझती हो तो मई कर देता हु"

शमशेर अपने हाथो में सुल्तान को पकड़ कर उठा लेता है और बिस्तर पर रखते हुए "ये बूढ़ा भी न "और भूरिया अपने बेटे को देख मुस्कुरा रही थी

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Mitro,Ye कहानी में खुद चाहता हु जल्द से जल्द कम्पलीट करू पर आप सब जानते है हमारा देश आज कोरोना क वजह से किस हाल में है और हम सब कई प्रोब्लेम्स झेल रहे है हेल्थ एंड इकनोमिक सो आप सबको यही कहना चाहता हु क किसी न किसी वजह से है मैंने स्टोरी पर ब्रेक लगाया हु और स्टोरी लेट हो गई है पर हम तो एंटरटेनमेंट क लये हे आते है यहाँ तो हमे वरिटेरस क प्रोब्लेम्स को भी सोचना chahiye,mai कभी भी अपडेट बिना सूटेबल गिफ्स और पिक्स क बिना नहीं दया क्यू क आप सब ने हे रिक्वेस्ट क्या था पिछ गिफ्स ऐड करने क लये और आप जानते है क बड़ा अपडेट टाइप करना और पिछ गिफ्स सूटेबल निकलना टाइम कोन्सुमिंग है.

स्टोरी अपने आखिरी पर्व पर है मई चाहूंगा क आप सब कमैंट्स कर क मेरा मनोबल बढ़ाये और मई एक अछि एन्ड दे सकू इस स्टोरी को

धन्यवाद्
 
भाई अगर रीडर्स का रुझान दिखा स्टोरी पे तो एक्सटेंड करूँगा और एक अचे एन्ड क तरफ बढ़ाऊंगा जैसा मैंने सोचा है और नेक्स्ट स्टोरी का भी सोच सकता हु क्यू क इस स्टोरी में बहुत सी चीज़ो का ख्याल रखना पड़ता है व्हिले राइटिंग जिससे रीडर्स को लगे राजा महाराजा क समय की कहानी hai,yaar फर्स्ट स्टोरी है बहुत कुछ सीखा हु शायद सेकंड स्टोरी में और ाचा एंटरटेन कर सकू
 
अपडेट 174

पारस

"ाचा लात मार कर गिरे ऊपर से आप और मई अकेले रख दू"

"रात भर्र मर्दानगी दिखाया है आपने शमशेर मेरे जिस्म क साथ खेला है आपने और आपके कहने पर हे मैंने सुल्तान को लात मार कर गिराया था निचे अब दिखाए मर्दानगी उठा कर रखो इस नामाकूल सुल्तान को ऊपर"

"ठीक है जब तुम अपना मरद मुझे समझती हो तो मई कर देता हु"

शमशेर अपने हाथो में सुल्तान को पकड़ कर उठा लेता है और बिस्तर पर रखते हुए "ये बूढ़ा भी न "और भूरिया अपने बेटे को देख मुस्कुरा रही थी

"अम्मी जाएं आप ठीक कहती थी क मई एक दिन बीवी का गुलाम बनूँगा आज देखो आपके इशारे पे नाचने लगा हु"

शमशेर ये कहते हुए अपने बाप को अपने बाजुओं में उठा कर बिस्तर पर लिटा देता है भूरिया बास अपने बेटे क बात पर मुस्कुराती है और अपने भारी गांड में जांघिए फसाये ऊपर खींचती है जिसे देख शमशेर का लैंड में झटका लगता है और भूरिया अपने मोठे बड़े चर्बीदार चुतर में अपने मोठे कूल्हों से ताक़त लगते हुए अपने गांड में फसती है

"बीटा शमशेर एक बीवी का प्यार ऐसे हे नहीं मिल जाता म्हणत करनी होती है"

हुरिअ अपने एक ब्राज़िएर को उठा कर अपने दूध में फसा लेती है और शमशेर अपने अम्मी क भरी मम्मो को कस्ते हुए देख रहा था "उफ्फ्फ ये लग नहीं रहे वह खड़े मुँह क्या देख रहे है आइये मेरी मदद kare"shamshera अपने अम्मी क पीछे खड़ा होते हुए अपने हाथ से ब्राज़िएर की हुक को लगा देता है

"अम्मी जाएं इतने भरी गेंदों को कस कर रखती हो ऐसा लग रहा है इनको सजा दे रही हो आप काश ऐसा होता क आप इन्हे ऐसे हे खोल कर रखे"

भूरिया अपने बेटे की ओरे देख मुस्कुराती है



"अब तुम क्या चाहते हो क मई नंगी हे राहु दिन रात बदमाश कही क एक तुमने मेरे जांघिए तक फाड् दिया दूसरा पहन रही हु"

"अआप इस जोड़े में कमल की माल लग रही हो अम्मी जाएं "

"बस्स्स करो मेरे मजनू सुबह होने वाली है पकडे जाओगे तो मारे जाओगे भूरिया सुल्ताना क जिस्म देखने की कोशिश करने क जुर्म में फांसी भी हो सकती है "

"जब देखने की सजा है फांसी हम ने तो भूरिया सुल्ताना को रगड़ क छोड़ा है तो बताये क्या सजा करवा सकते है आप"

भूरिया झेप जाती है अपने हे बेटे की बात पर ठीक तो कह रहा था शमशेर भूरिया क हुस्न ने लाखो क़तल करवा चुके थे पर आज तो खुद अपने बेटे क ताक़त क आगे अपने टैंगो को खोल दी थी

"अम्मी जान आप संभल तो लोगी सुल्तान को शक न हो "

"फ़िक़र मत करो आज तक तुम्हारे अब्बा मुझसे चालशजी कए अब चल कैसे चली जाती है हूरजहाँ उसे बताएगी"

शमशेर और भूरिया अपने अपने कपडे पहन कर तैयार हो रहे थे और कुछ देर में दोनों ने कपडे पहन लिए

"अब जल्दी जाओ शमशेर "

"भागने की बहुत जल्दी है आपको"

शमशेर अपने अम्मी क आखो में आखे दाल कहता है और भूरिया को अपने बेटे पे प्यार आजाता हद्द से ज़्यादा प्यार जो करने लगी थी अपने बेटे को

"बीटा अभी तो पूरी ज़िन्दगी है हमारे पास मज़े करने क बास हमे एहतियात बरतना है ऐसा न क ज़िन्दगी हम से रूठ जाये और हम दोनों को सुल्तान..."

"सुष्ठ अम्मी जान मई ऐसा कभी नहीं होने दूंगा आओ मेरे paas"shamshera अपने अम्मी से गले लग जाता है और दोनों किसी पागल प्रेमी की तरह एक दूसरे क बाहो में पिघल रहे थे इश्क़ की आग में दोनों जल रहे थे और एक दूसरे को छोरना नहीं चाहते थे

"बीटा मई खुद नहीं चाहती हु तुम से जुड़ा होना अब कैसे बताऊ आज जो आपने दर्द दिया है उस दर्द क लये बरसो तदपि हु आअज एक औरत होना मुझे पूरी तरह क्या होता है समझ आया"

"अम्मी जाएं मई आपको हमेशा अपने डिल क पास रखूँगा आप बेझिजक रहे आप यही चाहती थी न क मई सारे गंदे काम छोर दू आवारगी छोर du..lo छोर दया आज क बाद महल में मई अपनी खोयी हुई इज़्ज़त वापस पाउँगा"

"हाँ मेरे शेर शराब से तुम्हारे जिगर ख़राब हो जायेंगे अगर रोकी नहीं और मई नहीं चाहती क मेरे ज़िन्दगी का एक हे सहारा मुझसे छीन जाये अगर तुम्हे कुछ हो गया तो मई अपनी जान दे दूंगी शमशेर मई तुम्हे अपने डिल से अपना शौहर मानती हु और रही बात शबाब की तो वैश्यों क पास जाने की तुम्हे अब ज़रूरत नहीं जो चाहिए मुझसे मानगो मई आपके जेन्सी ख्वाहिस पूरी करुँगी"

"अम्मी जान मई भी आपको अपनी बीवी मानता हु और आपके उम्मीदों पर खड़ा उतरने की पूरी कोशिश करूँगा वैसे ये बुरी आदते आसानी से लग जाती है पर इसे छोरना मुश्किल होता है वैसे वैश्यों क पास न जाऊ अआप क पास क्या आप कोई वैश्य हो "

"चुप कर बड़ा आया चूर्ण वाला"

"क्या आप वो सब कुछ डौगी जो एक वैश्य तवायफ मुझे कोठे पैर देती थी"

"हाँ दूंगी पर तुम्हे कोठे पैर नहीं जाने दूंगी अब जाओ "

"ठीक है मई जाता हु पर सुल्तान से होशियार रहना और बिस्तर ख़राब हो गए है और फर्श पर भी .."

"अआप उसकी फ़िक़र न करे सरताज मई इस सुल्तान क ऊपर थोप दूंगी ये सब "

"अम्मी जाएं तो आप अभी यही रहोगी सुल्तान क हुजरे में अपने हुजरे में नहीं जाओगी"

"हाँ तो क्या हुआ मई सो जाती हु फिर उठ क चली जाउंगी "

"पर अम्मी जान मुझे डर लग रहा है कही अब्बा जान आपके जिस्म को हाथ लगाए तो"

"ऐसा नहीं होगा बीटा मेरे जिस्म पैर सिर्फ आपका हक़ है भरोसा नहीं अपने अम्मी पैर?"

"ठीक है संभल क अगर सुल्तान ने हाथ भी लगाया आपको तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा "

"मई वादा करती हु मेरे सरताज इस जिस्म पर सिर्फ आपका हक़ है मई सिर्फ सुल्तान क बिस्तर पर सोऊंगी ताके उसे शक न हो क मई रात उसके साथ नहीं थी"

"ठीक है अम्मी जान थोड़ा दूरी बनाये रखना अब्बा जान से अब मई चलता हु मेरा बदन भी दर्द कर रहा है"

"हाँ जाइये और सो जाइये मई दिन में आपके पेअर दबा दूंगी मेरे मजनू आखिर आप मेरी हे खिदमत कर क थके न"

"अम्मी जाएं वो नशे की दवा कहा है जिसे पी कर सुल्तान अब तक सोया है"

"अब वो मेरे पास रहेगा मई उसे संभल क रखूंगी अब पता नहीं कब मुझे उसका इश्तेमाल करना पद जाये"

भूरिया ये कहते हुए शर्मा जाती है वो जानती है क वो अपने हे शौहर को बेहोश कर अपने बेटे से छोड़ने की बात कर रही है

"मई आपका इंतज़ार करूँगा आप भी सो जाये अपने बदन को आराम दे"

दोनों माँ बेटे ने फिर से एक दूसरे को अपने बाहो के कस लिया अब तक शमशेर और भूरिया चलते हुए धीरे धीरे दरवाज़े क पास आजाते है ,5 बजने वाले थे शमशेर अपनी अम्मी को ऊपर से निचे तक देखता है और "शब्बा खैर अम्मी jaan"kah क मुस्कुराते हुए अपने लम्बे चौड़े बदन को झटकते हुए पर्दा को हटा कर बहार जाने लगता है भूरिया चुप चाप अपने बेटे को जाते हुए देख रही थी शमशेर किसी सांड की तरह लम्बा चौड़ा था और चुदाई में तो वो अपने बाप का भी बाप था भूरिया दरवाज़ा बंद कर देती है और हुजरे क अंदर आते हे उस बड़े से कक्षा में पहुँचती है जहा पर पलंग क एक कोने में सुल्तान मेरे वाहिद सो रहा था भूरिया अपने बड़े चुतर को पलंग पर टिकती है और उसके मुँह से कराह निकल जाती है "उफ्फ्फ ाः ये शमशेर ने तो मुझे बैठने लायक न chhora"hooriya का अंग अंग टूट रहा था सुल्तान को देखते हुए वो अपने दर्द को बर्दाश्त करते हुए लेट जाती है उसकी नज़र साथ लेते सुल्तान पर जाती है जो बेखबर सो रहा था

"सुलतान अब से आप इसी तरह बेखबर रहोगे और आपकी बीवी अपने आशिके बेटे क साथ अपने हर वो काम अनजान देगी जिसकी उसे बरसो की तमन्ना थी कमज़र्फ मेरे वाहिद सोते रहो"

भूरिया अपने पति सुल्तान मेरे वाहिद को कोसते हुए अपने आखे बंद करती है उसके आखो क सामने रात भर शमशेर की चुदाई का दृश्य दिखाई पड़ता है और उसके छूट के खलबली होती है और वो एक पतला सा चादर ले कर अपने भरी जिस्म को ढकते हुए

"शमशेर ठीक कहता है मुझे इस सुल्तान से अपने जिस्म को बचाना है ये चादर से सब ढाका रहेगा तो ये उठ भी गया तो कुछ गलत नहीं सोचेगा ये मेरी मज़बूरी है सुल्तान क तुम्हे शक न हो नहीं तो एक बिस्तर पर सोना मेरे लये गुनाह है"

भूरिया का बदन बुरी तरह थका था और वो थोड़ी हे देर में गहरी नींद में चली जाती है उधर शमशेर भी अपने हुजरे में पहुँचता है और अपना दरवाज़ा बंद कर अपने कपडे उतरने लगता है और नंगा हो कर अपने सोये हुए लौड़े को देखता है जो अभी कुछ देर पहले तक अपने अम्मी की छूट में घुसा था

"वह बीटा कितना शरीफ बन रहा है अम्मी की छूट की ऐसी कुटाई की क सच में अम्मी जान अब तुम्हारी गुलाम हो गई है ये जीत मेरी नहीं तेरी है जो इतनी भरी माल को पष्ट कर उसे अपना गुलाम बना लय शाबह मेरे शेर"

शमशेर अपने लैंड पर हाथ रखते हुए सहलाता है और पलंग पर पीठ क बल गिरता है शमशेर का लौड़ा कूदता है जिसे देख शमशेर मुस्कुराते हुए अपने आप पर फख्र महसूस कर रहा था

"उफ्फ्फ ाआज मुझे चैन की नींद आएगी भूरिया सुल्ताना की जवानी ने मेरी नींद हराम कर राखी thi"shamshera अपने अम्मी को छोड़ते हुए अपने पालो को याद करते हुए नींद क आग़ोश में चला जाता है

सुबह होती है पारस में और चारो तरफ सुल्तान क अगले हमले की तैयारी चल रही थी हिन्द पर वही सुल्तान क सिपाही लूटेरा शुंग को ढूंढ़ने में लग जाते है सुबह 9 बजे सुल्तान अपने बिस्तर पर लेते हुए अपने ायकः धीरे से खोलते है सुल्तान को पूरा हज़रा धुंदला धुंदला दिख रहा था धीरे धीरे सुल्तान मेरे वाहिद अपनी आखे खोलते है देखते है उनकी बीवी उनके बगल में हे चादर ओढ़े लेती है ,सुल्तान चारो ओरे देखता है और उसके सर में एक ज़ोरदार झटका सा लगता है और वो दर्द से चिल्ला उठता है जिसे सुन कर भूरिया की आखे खुल जाती है

"क्या हुआ जहाँपनाह आप ठीक तो है न"

भूरिया अपने शौहर को चीखते हुए देख करवट लेते हुए बोलती है

hooriya:man me)Raat भर चूड़ी हु मई चीख सुल्तान रहा है बेवक़ूफ़ अब तुम्हारे चीखने चिल्लाने से हे क्या जब शमशेर ने इज़्ज़त लूट हे ली मेरी

Sultan:Mujhe धुंदला धुंदला दिख रहा है ऐसा लग रहा है जैसे कोई नशा सा हो गया है

Hooriya:man me)kahi ये सुल्तान समझ न जाये मैंने इसे नींद की दवा खिला दी थी अपने बेटे से छोड़ने क लये क्या कहु

Hooriya:Mere जहाँपनाह आपको पानी देती हु लगता है रात की खुमारी अब तक नहीं उत्तरी आपकी

भूरिया उठ कर मुस्कुराते हुए अपने चादर हटती है और अपने भरी जिस्म को मुश्किल से लड़खड़ा क चलते हुए गिलास में पानी ढाल कर सुल्तान को देती है जो सुल्तान का सर दर्द से फटा जा रहा था वो अपने सर पर हाथ रखे भूरिया क भरी जिस्म को देखता है और उसके मादक जिस्म को देख जैसे उसका सर दर्द ख़त्म हो गया हो

"शुकरिअ भूरिया बेगम वैसे आप क़यामत लग रही है गुलाब सा खिल रहा है आपका जिस्म"

"तारीफ करने क लये शुकरिअ आपका दर्द अब कैसा है जहाँपनाह"

Hooriya:man me)Is गुलाब को खिलने वाला और कोई नहीं आपका बीटा है सुल्तान मेरे वाहिद शायद मैंने उसे अपना ज़िन्दगी का सबसे ाचा फैसला क्या

Sultan:dard ठीक है और आपके गले पर खरोंचे काट क निशान और आप लड़खड़ा क भी चल रही है

भूरिया एक क़ातिल मुस्कान से अपने शौहर को चुटिया बनाते हुए कहती है

"मेरे सुल्तान मेरे सनम अब आपको शराब क खुमारी में ये भी याद नहीं रहा पिछले 6 महीने का बदला रात हे आपने मेरे जिस्म को नोच कर खलिया "

भूरिया अपने लैब को काटते हुए अपने शौहर को दिन दहाड़े बेवक़ूफ़ बना रही थी

Sultan:kya सच में मैंने ये सब ...?

Hooriya:sushhh सुल्तान इ आज़म आप नहीं तो कौन ..किसके अंदर इतनी हिम्मत जो हूरजहाँ सुल्ताना को आँख उठा कर देखे

Sultan:Han पर मुझे कुछ याद क्यू नहीं रात की बात

सुल्तान अपने चेहरे पर अपने एक ऊँगली रख कर अपने दाढ़ी को सहलाते हुए सोचता है और भूरिया भाप जाती है सुल्तान अपना शातिर दिमाग लगा रहा है

Hooriya:hehehe सुल्तान अआपने तो नशे क आलम में इतनी चीखे निकाल दी मेरी जितनी ज़िन्दगी भर मैंने नहीं निकली बेकार मई आपसे कहती थी क बिना शराब पये हमबिस्तरी करने क लये असली मज़ा तो शराबी क साथ रात गुजरने का है

भूरिया ये कहते हुए अपने शौहर को हस्ते हुए अपने कोहनी से पेट पर मारती है भूरिया ने सफाई से अपनी आखिरी देव चल दी थी और हुआ भी यही सुल्तान मेरे वाहिद अपने बीवी की बायतो को मान कर हसने लगता है

"आअज मई बहुत खुश हु मेरी भूरिया बेगम आज हमने आपको जिस्मानी ख़ुशी दे पाया आज मुझे खुद पर फख्र महसूस हो रहा है"

"जहाँपनाह आप तो जानते है हमारा और आपका रिश्ता सिर्फ जिस्म का नहीं है हम दोनों एक दूसरे से बेपनाह मुहब्बत भी करते है"

Sultan:ji हाँ सुल्ताना भूरिया

Hooriya:man me)aap मुझे कितनी मुहब्बत करते थे ये बात मुझे बहुत पहले पता चल गई है मेरे बेवक़ूफ़ सुल्तान अब मेरे लये मेरा नया शौहर सिर्फ मेरा बीटा शमशेर है जो मेरे मर्द बनने क क़ाबिल है

Sultan:par तुम मेरे सामने अपने जिस्म पर चादर ओढ़ कर क्यू सो रही हो

Hooriya:jahanapanah आप तो मुझे सोने नहीं दे रहे थे और मेरे जिस्म को देखते रहते तो आप सोते हे नहीं

Sultan:ha है ये बात भी सही है पर मुझे फिर से नींद सी आरही है

Hooriya:to सो जाइये न सुल्तान आप लगभग 60 साल क है और इतनी म्हणत कए थकावट तो होगी हे सो जाइये मई भी जाती हु अपने हुजरे में

Sultan:q मेरे साथ और नहीं सो सकती मेरी बीवी जानम

Hooriya:nahi सुल्तान ऐसी बात नहीं है आप तो जानते है ज़्यादा देर से गई तो वो नाज़ बेगम मज़ाक उड़ाएगी क अब तक सुल्तान से चिपकी थी तो..

Sultan:aay हाय मेरी शर्मीली पाकीज़ा बीवी आज तक तुम उतनी हे शर्मीली हो जितनी पहले दिन थी जाओ आज क बाद जब भी डिल करे मेरे पास आजाना मई आपके जिस्म की आग ठंडा कर दूंगा

Hooriya:ji ज़रूर सुल्तान

Hooriya:man me)sultan तेरे लैंड में वो ताक़त नहीं जो तू सुल्ताना भूरिया की जवानी की आग को बुझा दे ये काम सिर्फ शमशेर कर सकता है

Sultan:kya सोच रहे हो हुरिये बेगम

Hooriya:ijazat दीजिये सुल्तान और शुकरिअ रात भर्र मेरी प्यास बुझाने क लये

Sultan:shukria किस बात का आपको खुश मई नहीं रखूँगा तो कौन रखेगा आप जाइये आराम कीजिये

भूरिया अपना निक़ाब उठा कर पहन लेती है और हुजरे से बहार निकल कर अपने हुजरे में जाती है और सबसे पहले अपने दूध क बीच छुपाई नींद की दवा की शीशी को अपने अलमारी में छुपा देती है फिर अपने गुसल खाने में घुस कर अपने आप को मॉल मॉल कर नाहा कर अपने बिस्तर पर आकर एक झीनी से कपडे में आकर लेट जाती है

Hooriya:man me)kya करिश्माई रात थी शमशेर ने साबित कर दया क वो मुझसे कितनी मुहब्बत करता है बास यही दवा है मेरी क शमशेर और मेरी जोड़ी तौमर सलामत रहे.

ये सोचते हुए भूरिया का रोअम रोअम खिल जाता है और शर्म से गोरा चेहरा लाल हो जाता है होता भी क्यू न एक माँ क लये अपने बेटे को ज़िन्दगी भर बना क रहने की तमन्ना किसी क भी डिल में खलबली पैदा कर दें और ये तो वही माँ है जो रात भर अपने उसी बेटे से चूड़ी hai,hooriya अपने यादो में गम कब सो जाती है उसे पता नहीं चलता

गहतराष्ट्रा

गहतराष्ट्रा में दिन दुगनी रात चौगनी तरक़्क़ी हो रही थी जब से नए महाराज बलदेव सिंह और महारानी देवरानी सिंह ने कार्यभार संभाला tha,Ghatrashtra क खेतो में उपज पहले क मुक़ाबले बढ़ गयी thi,maharani देवरानी निरंतर अपने प्रयासों से गहतराष्ट्रा की उज्जवल भश्विष्य का नीव दाल दी थी ,गहतराष्ट्रा की हर स्त्री महारानी देवरानी क शरण में जाती और महारानी उसका भला कर देती थी आज पुरे गहतराष्ट्रा में केवल महारानी देवरानी का लोग गुणगान कर रहे रहे

सुबह का समय था महारानी देवरानी क दरबार में सैकड़ो स्त्री उपस्थित थी और सबके नाम पर सिर्फ महारानी देवरानी का चर्चा था सब बेसब्री से इंतज़ार का रहे थे महारानी देवरानी की वही पर सामने एक बड़ा सिंहासन था जहा पर महारानी देवरानी बैठती thi,Kamla जो महारानी देवरानी की सबसे ख़ास दासी थी वो वही पर कड़ी थी और कुछ देश से वह की साफ़ सफाई कर रही थी

Kamla:ary अच्छे से साफ़ करना हमारी महरानी बैठेंगी

तभी वह पर एक औरत आती है और कमला से पूछते हुए

औरत :क्षमा करना कमा बहिन क्या आप बता सकती है क महारानी देवरानी को कितना विलम्ब होगा आने में

Kamla:Kaa बात है रे बड़ी जल्दी में लग रही हो महारानी देवरानी कोई मामूली स्त्री नहीं जो सिर्फ यही तुम्हारे लिए बैठे उनको और भी राज पात का काम होता है समझी

Aurat:Ji कमला बहिन हम तो उनके लिए जीवन भर प्रतीक्षा कर सकते है देवी है वो हमारे राज्य की जब से महारानी बानी है हमारा हर दुःख सुख में बदल गया है वैसे में पास क गांव से आई हु सभा में पहली बार आई हु इसलिए मुज..

Kamla:thek ठीक है निश्चिंत रहो महारानी देवरानी आजायेगी अब जाओ अपने जगह पर हमे अपना काम कारन डॉ

स्त्री कमला क बात सुन कर पीछे हैट जाती है और दूसरी स्त्री को देखते हुए धीरे से

स्त्री1: आर्य ये नकचढ़ी तो ऐसे बात क्र रही है जैसे महारानी एहि हो

Stree2:ab छोरो बहिन लगता है महारानी देवरानी जी की खास है

Stree1:han छोरो वैसे तुम यहाँ आती रहती हो

Stree2:han बहिन मई तो आती रहती हु किसी न किसी कारन महारानी देवरानी से इसी बहाने भेट भी कर लेती हु

Stree1:mai तो कभी नहीं देखु हु महारानी देवरानी को कैसी है वो चर्चा तो सुनी हु बहुत

Stree2:ab इतना समझ लो क महारानी देवरानी जैसी पुरे संसार में कोई नहीं है वो दुखिया की सुनती है प्रजा को अपना परिवार मानती है उनके हृदय में केवल स्नेहा है प्रेम है और रही बात दिखने में तो वो किसी स्वर्ग की अप्सरा लगती है और उनका शरीर तो इतना चमकता है और अब तो विवाह क बाद उनका शरीर और मांसल हो गया है

Stree1:tum तो प्रसंसा कए नहीं थक रही हो विवाह भी तो महारानी देवरानी ने अपने हे पुत्र से कर लिया है जब मई सुनी थी ये तो मेरे कानो पैर विश्वास नहीं हुआ

Stree2:behan नियति को कौन ताल सका है अब महारानी देवरानी ने महाराज राजपाल से कभी ख़ुशी नहीं पाया केवल दुःख k..suno ये बातो कानो कण किसी को न कहना ..सुना है महारानी देवरानी क सुंदरता और उनके मादक शरीर क प्रेम में महाराज बलदेव पद गए थे और उन्होंने अपने माता से विवाह कर लय उन्हें पता क

Stree1:par एक माँ अपने हे पुत्र क प्रेम जाल में कैसे फास सकती है

Stree2:behan अब दुखियारी थी और अब राज राज क प्रेम मिल रहा है उनके नए पति दुवारा सुना है ये दोनों गहतराष्ट्रा क भविष्य क लये बच्चा भी करना चाहते है

Stree1:tumhara मतलब अब गहतराष्ट्रा क भविष्य पे जो राज करेगा वो इन माँ बेटो की संतान होगी

Stree2:aur नहीं तो क्या राज परिवार का वंश तो महाराज बलदेव और महारानी देवरानी हे देगी हम सब भी यही चाहते है क हमारे गहतराष्ट्रा क भविष्य का महाराज हो जाये ,हम सब ने महाराज बलदेव और महारानी देवरानी क प्रेम को स्वीकार कर लये और बास हम और अपने राज्य में और राखत बहता नहीं देखना चाहते जब ये दोनों माँ बेटे हे एक दूसरे को पति पत्नी मान चुके है है तो हमारे विद्रोह करने से क्या होगा

Stree1:tum ठीक कहती हो बहिन अब हमारा कल्याण तो महाराज बलदेव और महारानी देवरानी हे करेगी भगवन दोनों को सद्बुद्धि दे

Stree2:Maharani देवरानी जी क लये मई हमेशा प्राथना करती हु भगवन उनकी कोख जल्दी भर्र दे जिनका वो हर पल सोचती है

Stree1:lagta है महारानी से बहुत लगाव है आपको

Stree2:behan मेरे छोटे छोटे बचे है पति की मृत्यु हो गई और महारानी देवरानी ने मुझे और मेरे बचे की हर तरह पालन पोषण क्या है जब वो हम सब की ख़ुशी क लये इतना सब कुछ कर सकती है तो क्या हम अपने महारानी क लये भगवन से प्राथना भी नहीं कर सकते क उनकी हर इच्छा पूरी ho..ary हमारी महारानी देवरानी ऐसी है क किसी पुरुष क सामने बिना घुंगट कए नहीं जाती उनके ऊपर लालचन लगाने वाले खुद अपने आपको देखे ..महारानी ने प्रेम क्या है अपने बेटे से वो और उनका मन पवित्र है

Stree1:tum सही कहती हो बहिन

तभी वह पर एक हाहाकार मच जाता है और सब लोग जो बाते क्र रहे थे एक दूसरे से वो महारानी की आगमन से खिल उठते है और अपने महारानी का स्वागत करते हुए "महारानी देवरानी की ..जय ho..maharani देवरानी की जय hoo"pure सभा में सब स्त्रीया कड़ी थी और महारानी देवरानी धीरे कदमो क साथ अपने सिंहासन की ओरे बढ़ रही थी वह कड़ी कुछ दसिआ फूल क पत्तो को उनके ऊपर फेक रही थी कमला भीड़ को हटते हुए अपने महारानी को सही सलामत उनके सिंहासन पर ले जाती है



महारानी देवरानी अपने सुन्दर शरीर पर एक सुन्दर नीले रंग का वस्त्र पहने थी उनका शरीर गहनों से भरा था उनके मादक शरीर की चाल देख कर कोई नहीं कह सकता था क वो 37 वर्षीया महिला है वो किसी नयी नवेली दुल्हन सी चमक रही थी ,देवरानी अपने बड़े गांड को सिंहासन पर टिकते हुए बैठ जाती है और सभा में जितनी स्त्रीया थी सब बास महारानी की सुंदरता में खो जाते है कई लोग जो पहली बार देख रहे थे वो महारानी को देख सोचते है क "आखिर कोई ऐसी सुन्दर स्त्री से प्रेम में कैसे न पागल हो और महारानी देवरानी तो पारसी है"

महारानी devrani:aaaaj का सभा शुरू क्या जाए ..

महारानी कमला की ओरे देखते हुए बोलती है जो उसके पास में हे कड़ी थी

Kamla:aab आप सब से अनुरोध है क एक एक कर क आगे आये और अपने समस्या महारानी क समक्ष रखे हमारे पास केवल 2 घंटे है तो अपनी बात काम से काम शब्दों में कह दे ..आयग्य दीजिये महारानी

महारानी देवरानी अपना हाथ उठा कर एक मधुर स्वर पर एक रौबदार आवाज़ में कहती है

"आज्ञा है"

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 175

गहतराष्ट्रा राज्य

महारानी devrani:aaaaj का सभा शुरू क्या जाए ..

महारानी कमला की ओरे देखते हुए बोलती है जो उसके पास में हे कड़ी थी

Kamla:aab आप सब से अनुरोध है क एक एक कर क आगे आये और अपने समस्या महारानी क समक्ष रखे हमारे पास केवल 2 घंटे है तो अपनी बात काम से काम शब्दों में कह दे ..आयग्य दीजिये महारानी

महारानी देवरानी अपना हाथ उठा कर एक मधुर स्वर पर एक रौबदार आवाज़ में कहती है

"आज्ञा है"

कमला मुस्कुराते हुए अपने महारानी का चमचमाता हुआ मुखर देख रही थी और उसे अपने आप में एक संतुष्टि होती है

Kamla:man me)Kitni खिल गई है देवरानी जब से अपने बेटे से ब्याह की है नहीं तो पहले तो हर वक़त बिचारि क आखो क निचे छाई रहती थी ,अब कमला ने ऐसा चक्कर चलाया क अपने महारानी का ब्याह हे करवा दया वैसे भी महारानी दिया टेल अँधेरे में बैठी थी मैंने सिर्फ उनको बता दया क महाराज बलदेव हे वो दिया है जिसके उज्यारे से आपका संसार फिर जगमगाने लगेगा हुआ भी यही

कमला को सोचते हुए देख महारानी देवरानी थोड़ा गुस्सा हो जाती है और कमला की ओरे देख कर

Devrani:Kamla..apne स्वप्न से बहार आओ और सबको बुलाओ

कमला नींद से जागते हुए देवरानी को देखते हुए थोड़ी सेहमी सी बोलती है

Kamla:Jo आज्ञा महारानी

Devrani:Samay व्यर्थ नहीं करो

देवरानी एक बार गुस्से से देखते हुए अपने सामने कड़ी भीड़ की तरफ देखती है और कमला अपने ऊपर करने पैर अपने मुँह को टेढ़ा कर

Kamla:man me)Han तुम तो चाहती हो महारानी कब यहाँ से जाओ और अपने बेटे क लौड़े पे बैठ जाओ

Kamla:Suno सुनो आज का सभा आरम्भ क्या जाता है सब बरी बरी से आकर अपना दुःख अपनी राय जो बात करना चाहे हमारी गहतराष्ट्रा की नै महारानी देवरानी से आयकर कर सकते है

कमला क कहते हे भीड़ में से एक एक स्त्री आने लगती है और सब अपने महारानी से मदद मांगने लगती है और महारानी देवरानी भी अब राज्य को अपना परिवार समझ कर उनका मदद करने लगी thi,tabhi एक स्त्री आती है और अपना नाम और अपने गाओ का नाम बताते हुए कहती है

Stree:Maharani देवरानी आपकी प्रसंसा बहुत सुनी हु और इसलिए आपसे एक बात कहनी थी

Kamla:Suno ये बात करने का समय नहीं है अभी देखो टाटा लगा हुआ है काम क्या है बताओ

महारानी देवरानी अपना हाथ उठा कर कमला को चुप रहने का इशारा करती है और कमला चुप हो जाती है

Devrani:Kaho तुम्हे क्या कहना है

Stree:Maharani देवरानी जी आप को विवाह की हार्दिक बधाई हो ..

Kamla:Ye क्या बोले जा रही है मुर्ख

Devrani:tumhara कहने का तात्पर्य क्या है

Stree:Maharani जब आपका विवाह हुआ था मई मइके थी और सुना है आपने सबको उपहार दया था पर मुझे मिला नहीं उसके बदले में कुछ चाहिए मुझे

ये सुन कर स्त्री की मूर्खता पर वह पर साडी औरते हसने लगती है और देवरानी भी चुपचाप उसे समझने की कोशिश कर रही थी

Devrani:Sabse पहले तो बधाई देने क लये धन्यवाद कोई बात नहीं अगर तुमने ये कहने में विलम्ब कर दया परन्तु तुम्हे उपहार में क्या चाहिए ये तुमने नहीं बताया

Kamla:Maharani आप कहे तो इसे धक्के मार क भगा दू अनाप शनाप बोले जा रही है

Maharani:Katai नै कमला ऐसी मूर्खता कभी भूल कर भी नहीं करना ,हमारे राज्य में जितने भी स्त्रीया आती है वो हमारे गहतराष्ट्रा परिवार का अंग है

Stree:Maharani देवरानी की jai..Maharani आपके विचार महँ है ,मेरे मइके में इतना दूर कुवा नहीं था यहाँ कोसो दूर कुवा है और नदी भी दूर है महारानी आप से विनती करती हु हमारे लये एक कुवा खुदवा दीजिये

हाथ जोड़ कर कड़ी महारानी देवरानी क सामने कड़ी वो स्त्री विनती कर रही थी

Kamla:Maharani इसने जो गांव का नाम बताया वह से कुछ दूरी पर कुवा है और गांव में तालाब भी है

Stree:Nahi nahi..maharani तालाब का पानी गन्दा है कितने लोगो ने वो पानी पी कर अपने प्राण दे दिए कृपा करे हम पर महारानी बड़े आशा क साथ आपके यहाँ पर आई हु

महारानी देवरानी कुछ सोचते हुए कमला की तरफ देखती है और उस स्त्री क आखो में दर्द देखते हुए

Devrani:Suno स्त्री मई भी एक स्त्री हु और पीरा मई नहीं समझूंगी तो कोई और कैसे समझ सकता है ..कमला मेरा ये निर्णय है इनके गांव में शीघ्र अति शीघ्र कुवा का काम आरम्भ हो

Kamla:ji महारानी

स्त्री क आखो में आजाते है और वो भागते हुए महारानी देवरानी क सिंहासन क निचे बैठ जाती है और महारानी देवरानी क पेअर छू लेती है

Stree:sach मच देवी हो आप महारानी भगवन करे आपके और महाराज बलदेव सिंह जी क दर्ज़नो बच्चे हो

ये सुन कर सब हसने लग जाते है और भूरिया मुस्कुराते हुए उसे अपने पैरो से उठती है

Devrani:Hum कोई देवी नहीं पर हमारा धर्म है अपने राज्य और अपने प्रजा क हिट में काम करना

Stree:aashirwaad दीजिये महारानी

Devrani:khush रहो

Stree:aapka सर पे हाथ रहेगा तो गधा भी खुश रहेगा

Kamla:ye क्या बक्क रही हो मुर्ख अपने बात तौल कर करो

Maharani:Kamla..ise जाने दो ऐसे लोग हृदय से साफ़ होते है छल कपट नहीं होता ..ये नटखट है थोड़ी बास अब दुसरो को बुलाओ

Kamla:ji महारानी

ऐसे हे घंटो तक सभा चलता है और गहतराष्ट्रा राज्य से आई हु साड़ी स्त्री अपने अपने दुःख को अपने महारानी देवरानी से साझा करती है और महारानी भी अपने प्रजा की हर दुःख दर्द को अपना समझते हुए उसका निवारण करती hai,sambha की समाप्ति पर देवरानी उठ कर आने लगती है और सब महारानी देवरानी की जय जय कर करने लगते hai,Maharani वह से निकल कर अपने घूँघट से अपने मुँह को ढकती है और अपने मुख्या महल की ओरे चलने लगती है

महारानी देवरानी अपना घूँघट कए चली जा रही थी जब से वो बलदेव सिंह से ब्याह रचाई थी तब से अपने ससुर राजा राजपाल और सास रानी षुरूश्ती से घूँघट करने लगी thi,Raaj माता जीविका तो पहले हे देवरानी की सास थी जब वो राजपाल को पत्नी हुआ करती थी पर अब वो दादी सास हो गई thi,Devrani 5.10 की लम्बी छरहरे बदन जो पीछे से मटके की तरह गोआल गांड और आगे बड़े तर्जबूज़ों से दूध को हिलने से और डोलने से अपने पैरो को दबा कर चलते हुए जा रही थी थोड़ी थकी थी पर अब ये रोज़ की बात थी दुपहर होने वाला था वो अपने महल क मुख्या द्वार में घुसती है और चलते हुए उसके दिमाग में अपने बारे में सोच चलती है और वो बात ध्यान करती है जब एक स्त्री ने उसे कहा क "आपके दर्ज़नो बच्चे हो"

Devrani:man me)sab तो यही चाहते है पर पता नहीं कब मई गर्भ से होउंगी कब गहतराष्ट्रा का वंश दूंगी ,क्या वैध जी से कह क जड़ी बूटी मंगवा लू कोई जिस से क मई जल्दी गर्भवती हो जाऊ उफ़ अगर ऐसा की तो कही सब मेरे बेटे उफ़ मेरे पति महाराज बलदेव जी क मर्दानगी पर संदेह kare,ab बलदेव भी तो मुझसे हे आस लगाए हुए है

ये सब सोच कर देवरानी का चेहरा उतर जाता है और उसके सुन्दर चेहरे पर चिंता क भाव आजाते है वो सोच में इस प्रकार खोयी थी क क उसे आभास हे नहीं हुआ उसके पीछे कोई चल कर आरहा है...

हाँ bhai..aur कौन अपने माँ का छोड़ू बीटा श्रीमती महारानी देवरानी का पूर्व पुत्र और वर्त्तमान पतिदेव श्री बलदेव सिंह अपने माता श्री क मटकते गांड को घूरते हुए चल रहे थे और प्रतीक्षा कर रहे थे कब उसकी नयी नवेली दुल्हन माँ अपने गांड पिट्ठू बेटे को देखे पर ऐसा होता नहीं है तंग आ कर बलदेव अपने हाथ को आगे बढ़ता है और अपने हाथ में अपने माँ क सर का पल्लू ले कर खींच देता है जैसे हे महारानी देवरानी को ाबहस होता है क उसके पीछे कोई है तो वो अपने पल्लू को छोर अपने कमर क पास लगे खंजर को निकलती है और गुस्से से "आआआआअइह किसकी इतनी हिम्ममाअत "देवरानी अपना खंजर को मरने वाली हे थी क उसे अपना बीटा दीखता है "ओह्ह देवरानी क्या कर रही हो ये aryy"devrani की आखे फटी की फटी रह जाती है और वो अपने हाथ को निचे करते हुए

"अआप ...वो ..wo..mai समझी कोई और होगा"

"रानी माँ आज तो चूक हो जाती तो अपने हाथो से आप मुझे मार कर खुद विधवा हो जाती"

शमशेर मुस्कुराते हुए अपने माँ की घबराहट को काम करता है ,देवरानी अपने बेटे की बात सुनते हे उसका डिल ज़ोर से धड़कता है

"महाराज आप ऐसा बोल भी कैसे दिए मई आपका प्राण कैसे ले सकती हु आपके मृत्यु से पहले मेरी मृत्यु हो jaye..kaun ाअभागि होगी जो अपने पति को मार विधवा बनेगी"

देवरानी क आखो में ासु आजाते है और वो खंजर को फिर से अंदर रख लेती है

"महारानी आपको क्या लगा इस महल में या पुरे गहतराष्ट्रा किसी की सहस है जो मेरे पत्नी रानी माँ का पल्लू खींच दे"

"एक है जो इतना हे सहस रखता है क मेरे पल्लू और को मेरे चेहरे से खींच दे"

"कौन है वो"

बलदेव क्रोधित होते हुए पूछता है जिसे देख देवरानी मुस्कुराती है

"बुद्धू सैय्यन वो आप हे है किसी और ने ऐसा सोचा भी तो उसके रक्त अपने तलवार से रंग dungi,waise ऐसे खुले में आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था में दर गई थी"

"आये हाय इतना प्रेम करती हो मेरी मीट वैसे मई आज पहली बार हे तो खींचा हु मैंने देखा कोई नहीं है तो बास आपके मादक शरीर क पीछे क कुत्ते की तरह सूंघता आज्ञा माँ"

देवरानी अपने बेटे की इस बात पर मुस्कुराते हुए मुस्कुरा देती है और अपने हसी रोकते हुए "चलिए महाराज ऊपर चल कर बाते karenge..aur आप तो पहली बार हे kheeche..roz तो मेरी चोली ,ghagra,peticot ,साड़ी खेचते हो भोले बन रहे अब भी पति जी महाराज"

महारानी देवरानी चलने लगती है और बलदेव पीछे से चलते हुए

"महारानी आपको देख कर तो जी चाहता है यही नग्न अवस्था में खड़े खड़े महल क बीच में हे छोड़ू"

महारानी देवरानी पलट कर अपने बेटे को देख अपने मुँह पर हाथ रखे

"आप क्या अब सब क सामने मेरे साथ.."

देवरानी तुनक कर चलने लगती है जिस से उसके भरी शरीर मटकने लगता है बलदेव को तो मानव अपने माँ का गमकता महकता शरीर देख भोगने को व्याकुल हो जाता है और अपने माँ का हाथ खींच कर पकड़ लेता है

"महाराज क्या कर रहे है अपने कक्षा में चलिए न "

"मेरी पत्नी की सुंदरता देख किसी बूढ़े का मन फिसल जाये सच में तुम काम की देवी हो माँ क्या जवानी है तेरी पी जाऊँगा"

बलदेव अपने माँ क तरफ लपकता है पर वो अपने बड़े गांड को मटकते हुए महल क दीवार क पायो को पीछे चली जाती है छुपते हुए

"उफ्फ्फ मेरे नटखट सैय्यन कोई देख लेगा न तो क्या सोचेगा ये भरी दुपहर में महल क बीच में प्रेम प्रसंग कर रहे है"

देवरानी अपने बेटे क उमड़ते प्रेम को देख मुस्कुराते हुए कहती है और देवरानी इधर उधर देखते हुए भगति हु छुपने की कोशिश करते हुए दीवार क पीछे चली जाती है बलदेव भी



तेज़ कदमो से अपनी माँ क पीछे जाता है और देवरानी हस्ते हुए खिलखिलाते हुए अपने नए पति से नैन मटक्का करती है बलदेव अपने माँ क पीठ पर अपनी उंगलिओ से ऐसा करता है जैसे वो अपने माँ क मखमली पीठ पर चल रहा हो देवरानी ऐसा अपने बेटे दुवारा छूने से अपने ाअखे बंद कए "aaaaaah"karti है बलदेव भी अपने का क सुन्दर मुखड़े को पकड़ कर सीधा कर देता है

"रानी मा इस महल में सबको पता है क आप मेरी पत्नी हो और हम आपसे मस्ती नहीं करेंगे महारानी तो किस से करेंगे"

"िसष्ठ साईयाँ जी किसी और से आप करेंगे उस से पहले आप को अपनी पत्नी को मारा हुआ पाएंगे"

देवरानी अब चिंतित होते हुए अपने बेटे से कहती है और बलदेव समझ जाता है क देवरानी को डर है क कही वो उसका साथ न छोर दे बलदेव मुस्कुराते हुए अपने माता रानी क घने बाल को अपने उंगलिओ से सहलाते हुए

"देवरानी मेरी अर्धांग्नी क्या आप को हम पर संदेह है अपने पति पर ?क्या मई उन सात फेरो के लिए हुए सात वचनो को भूल सकता हु ..कटाई नहीं"

"निःसंदेह आप हम से सच्चा प्रेम करते है किन्तु पुरुष जाती हे ऐसी है जिसका मन एक स्त्री से नहीं भरता और जो भ जाये उसके लये सबकुछ भूल जाता है"

"Devrani..meri आखो में dekho..suno अआप का स्थान मेरे हृदय में है स्वर्ग से अप्सरा भी चाहे तो मेरा मन मोह नहीं सकती "

"बलदेव जी सच्ची"

"मुचि मेरी माँ"

बलदेव अपने हाथो से देवरानी क हाथो को ऊपर कर दीवार से लगा देता है और देवरानी क आखो में देखते हुए अपने होठ अपने माँ क गुलाब क पंखुरिओ जैसे होठ को छूने क लये बढ़ रहे रहे तभी दोनों क कान में किसी क जुटे की आवाज़ की आहात सुनाई देती है देवरानी बिना देर गवाए अपने बेटे को धकेल देती है और बलदेव भी जैसे अचानक से डर सा जाता है दोनों गरम हो गए थे ध्यान हे नहीं रहा क वो महल क अंदर है

सामने से राजा राजपाल चलते हुए आरहा था और जैसे हे उसकी नज़र सामने पड़ती है देवरानी को अपने बेटे को धक्का देते हुए पता hai,raja राजपाल की नज़र तब पड़ती है जब देवरानी धक्का देती है इसलिए वो समझ नहीं पता क दोनों प्यार का खेल खेल रहे थे

राजा rajpal:man me)kya हुआ लगता है कोई ान बन हो गई है क्या दोनों क बीच पूछ कर देखता हु

दोनों माँ बेटे मूरत बने खड़े थे उनको लग रहा था क राजा राजपाल अपने बेटे को उसके पत्नी क साथ देख नज़र निचे कर क चले जायेंगे पर ये तो उल्टा उन दोनों क पास हे आरहे थे

Baldev:man me)Ohhh ये तो पिता जी इस ओरे हे चले आरहे है मुझे लगा था हमे साथ देख कर नहीं aayenge,pata नहीं क्या सोच रहे होंगे ,कही उन्होंने मुझे देवरानी को रगड़ते हुए देख तो नहीं लय

Devrani:man me)ufff ये राजपाल कही देख तो नहीं लिया haay,,is बूढ़े ने देख लिया फिर भी क्यू अपने बेटे और बहु क तरफ आ रहा है ..उफ्फ्फ मई भी न उसे हो सकता दुःख हुआ हो कभी मई राजपाल की पत्नी जो thi,,waise इस बूढ़े राजपाल को पता चल गया होगा क एक प्रेमी जोड़ा कैसे प्रेम करते है haaay..mai भी कितनी बिगड़ गई hu..pata नहीं क्यू आरहा है बुद्धा राजपाल पता नहीं क्या कहेगा



देवरानी अपने ससुर राजपाल को आता देख अपना पल्लू कर लेती है और अपने सुन्दर चेहरे को छुपा लेती है ,राजा राजपाल जैसे आता है वैसे हे बलदेव अपने दोनों हाथ जोड़ कर "परमं पिता ji"raja राजपाल भी अपने बहु को न देख कर अपने बेटे को देख मुस्कुराते हुए "प्रणाम बीटा" तभी भूरिया अपना घुंघट कए हुए अपने ससुर जो कुछ दिनों पहले तक पति था उसके ओरे अपने घूँघट कए हुए चेहरे को घूमती है और "परनाम पिता जी आशीर्वाद dijijiye"ye सुनते हे बलदेव और राजा राजपाल दोनों हे देवरानी की तरफ देखते है और देवरानी फिर से अपने ससुर और पति बलदेव की ओरे पीठ कर क कड़ी हो जाती है और प्रतीक्षा करने लगती है उत्तर का

राजा राजपाल क सर से पसीने की बुँदे टपक कर कण से होते हुए निचे गिरती है उसका डिल ज़ोर से धड़कता है

राजा rajpal:man me)hey ईश्वर ये कैसी परीक्षा है जो कल तक मेरी पत्नी थी वो आज घूँघट कर रही है ससुर समझ कर

राजा rajpal:Khush रहो बहु रानी..

ये कहते हुए राजा राजपाल का डिल टुकड़ा टुकड़ा हो जाता है

Baldev:pita जी कहिये कोई विशेष बात

Rajpal:nahi मई तो देखा तुम दोनों लड़ रहे रहे तो सोचा पूछ लू

Devrani:man me)baal बाल बची राजा राजपाल ने हमे नैन मटक्का करते हुए नहीं देखा

बलदेव: नहीं पिता जी ऐसा नहीं है वो तो हम बास ऐसे हे..

ये कहते हुए बलदेव दो कदम आगे बढ़ता है अपने पिता की ओरे और उसके धोती में छुपा लैंड जो देवरानी को छूने से खड़ा हो गया था वो अब तक पूरा नहीं बैठा था और बलदेव क चलने पर ज़ोर से धोती में हिल रहा था ये सब राजपाल तो आँख फाड़े देख हे रहा था वही कड़ी कनखियों से महारानी देवरानी भी अपने बेटे क हिलते लौड़े को देख अपने मुँह पर हाथ रख लेती है

Devrani:man me)ufff फस्स गई ..कही ससुर जी ने इनके हिलते हुए लौड़े को देख लये तो समझ जायेंगे क हम महल क बीच क्या कर रहे थे उफ्फ्फ ये भी न ध्यान नहीं देते अपने ऊपर अब दे भी कैसे अभी 18 वर्षीया हे तो है बलदेव जी

राजा राजपाल अपने बेटे क हिलते हुए खड़े लैंड को देख आस्चर्य कर रहा था

Rajpal:man me)Ye दोनों माँ बीटा लड़ नहीं रहे थे तो पक्का रंगरलिया मन रहे थे इसी लिए बलदेव का लिंग खड़ा है ये बुद्धू है इतना बड़ा लिंग ये आयु में ..असंभव

बलदेव चलते हुए अपने पिता जी क पास आकर खड़े हो कर मुस्कुरा रहा था वो अनजान था क उसके पिता ने क्या देख लय है और वो खुश था क उसके माँ को राजपाल ने बहु कहा था

Baldev:pita जी क्या सोचने लगे क्या कह रहे थे आप

Rajpal:kuch nanahe..wo बास कुछ नहीं मई जाता hu..Dupahar क भोजन पर मिलेंगे

राजपाल हड़बड़ा कर अपने बेटे क लौड़े को धोती क ऊपर से देखते हुए जाने लगता है और बलदेव को समझ नहीं अत

"पिता ji"raja राजपाल अपने कदम तेज़ करते हुए अपने कक्षा की ओरे जाने लगता है

Rajpal:man me)hey भगवन ये क्या देख लय उफ्फ्फ मेरा पुत्र का लिंग ऊपर से इतना बड़ा है तो ,ये तो अपनी माँ की योनि फाड़ देता hoga..dono रगड़ा रगड़ी खेल रहे होंगे ..अब खेलेंगे हे दोनों अब पति पत्नी जो hai..par मुझे क्यू बुरा लगेगा सब मेरी हे लापरवाही क कारन हुआ है आज मेरी पत्नी अपने हे बेटे se..chhi छी

राजा राजपाल तो अपने आप को कोसते हुए उन दिनों को याद करते हुए चला जाता है जब देवरानी को राजपाल पूछता भी नहीं था और केवल षुरूश्ती को पत्नी का सम्मान देता था इधर देवरानी अपने पूरा पति को जाता देख अपने घूँघट फिर खोलती है और बलदेव क पास मुस्कुराते हुए आरही थी

Devrani:Baldev जी क्या हुआ

बलदेव सिंह पीछे मुद कर फिर से अपने गदराई माँ को देखता है

Baldev:kya हुआ माँ कुछ भी तो नहीं आप मुस्कुरा क्यू रही है

devrani:mere भोले सैय्या आपको ज्ञात नहीं क राजा राजपाल ऐसे क्यू भगा

देवरानी ये कहते हुए शर्म से लाल हो जाती है

Baldev:aap हे बता दीजिये देवरानी

बलदेव अपने माँ की समीप आते हुए अपने माँ की सुंदरता में खो जाता है देवरानी अपने बेटे क हिलते हुए लौड़े को देख

Devrani:wo देखिये और आप खुद समझ जाइये पतिदेव जी

देवरानी अपने ऊँगली से बलदेव क लौड़े पर इशारा करते हुए बोलती hai,baldev अपने निचे देखता है उसे एक झटका लगता है और उसका मुँह खुल जाता है वही देवरानी अपने आखे निचे कए मुस्कुराती है और लज्जा कर पानी पानी हो जाती है

Baldev:Ohh माँ मैंने तो ये ध्यान हे नहीं दिया पिता जी ने ..

Devrani:ji हाँ मेरे भोले पति देव आपको अपने शरीर क अंग का हे अत पता नहीं होता किस अवस्था में hai,aapke पिता जी को समझ आज्ञा क हम दोनों उनके आने से पहले क्या कर रहे थे वो केवल आपके कारन

Baldev:nahi देवरानी ये दोष आपके सुन्दर गदराये शरीर का है जिसे देखते हे मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है मेरी रानी माँ

Devrani:uff काम से काम खुले में तो ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करें आप दिन प्रति दिन बिगड़ते जा रहे है

Baldev:tum तो कक्षा में इसी लौड़े को हाथ में लेती हो मुँह में लेती हो और चिल्ला चिल्ला कर मांगती हो "लौड़ा दे do"abhi देखो घूंघट कए सटी सावित्री बन रही हो

Devrani:huhh मई जा रही हु जब मई सटी सावित्री नहीं..

देवरानी हल्का गुस्सा दिखते हुए तुनक कर महल क सीडीओ से चढ़ते हुए अपने कक्षा की ओरे जा रही थी जिसे देख बलदेव मुस्कुराता है

Baldev:man me)Randi देवरानी

देवरानी अपने गांड को मटकाये ऊपर चढ़ जाती है और बलदेव भी पीछे से ऊपर जाता है जैसे हे ऊपर पहुँचता है देखता है कक्षा का दरवाज़ा बंद था

Baldev:Saali दरवाज़ा लगा ली इसे पता था मई आऊंगा इसके गांड क पीछे

बलदेव अपने हाथ से दरवाज़ा पीटते हुए आवाज़ लगता है "देवरानी खोलो "

Devrani:Kaun है बहार ?

Baldev:q नाटक कर रही हो खोलो देवरानी

देवरानी अंदर अपने पति क मासूमियत पर मुस्कुरा रही थी और उसे ाचा लग रहा था अपने पति को ु सतना

Baldev:koi नहीं लगता हु न तो जाओ न ?सोच लो देवरानी फिर कभी नहीं aaunga?devrani मई आज से दूसरे कक्षा में सोऊंगा.

देवरानी ये सुनते हे अपने गदराये जांघ और अपने छरहरे केले जैसे टांग को उठाये दौड़ी आकर दरवाज़ा खोलती है देवरानी का हताश चेहरा देख बलदेव मुस्कुराता है और अंदर आता है

Baldev:Rani माँ आपको क्या लगा मई सच कह रहा हु मई तो मज़ाक कर रहा था

देवरानी क दोनों रस्सगुल्ले जैसे गाल फूल जाते है गुस्से से लाल होकर

Devrani:Ye कैसा मज़ाक है बलदेव जी मेरे प्राण सुख गए थे

Baldev:pran क्यू सुख गए मेरी रानी माँ क हाँ

बलदेव अपने माँ क बड़ी और नशीली आखो में देखते हुए अपने माँ क पास आते हुए कहता है

Devrani:bhole बन रहे है आपको जैसे पता हे नहीं आपने क्या धमकी दी

Baldev:acha तो आपको लगा क मई सचमुच रात में कही और सोऊंगा आपके साथ नहीं

Devrani:hmmm

Baldev:mazak था मेरी छमिया माँ भला आपको अपने बाहो में लिए बिना नींद आएगी मुझे

देवरानी ये सुन कर अपने नाज़ुक हाथ का मुक्का बना कर बलदेव क ठोस छाती पर मरती है

"आज क बाद ऐसा मज़ाक नहीं करना "

ये कहते हुए देवरानी क आखो में ासु आजाते है

बलदेव पीछे मुद कर दरवाज़ा बंद कर देता है खटक से कुण्डी लगा देता है

Devrani:ab कुण्डी क्यू लगा रहे है भरी दुपहरी खोलिये हाँ

देवरानी रुआँसी हो कर कहती है और बलदेव से दूर भागते हुए पलंग पर लेट जाती है और उसके बड़े गांड ऊपर की ओरे निकले थे

Baldev:q मेरी पत्नी को जब चाहे अपने कक्षा में बंद कर दू ,ये कोई गलत बात नहीं

बलदेव चलते हुए अपने रूठी माँ को मानाने क लये आता है और देवरानी पीछे मुद कर देखती है वैसे हे बलदेव अपना कुरता उतार कर फेक देता है बलदेव अपने माँ क जिस्म को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था

Devrani:Mera मन नहीं है अभी मुझे अकेला छोर दो

Baldev:mai मन बना दूंगा रानी माँ

बलदेव कूद कर अपने माँ महारानी देवरानी क बगल में कूद कर लेट जाता है

"देवरानी ाजी सुनती हो ..देवरानी मेरी jaaan..mere meet..meri पत्नी ो मेरे नखरेवाली पत्नी"

"क्या है"

देवरानी बहुत बुलाने पर बोलती है उखड़ते हुए बलदेव मुस्कुराते हुए

"मेरी रानी आपका राजा कभी आपको छोर कर दूसरे कक्षा में सोये ये असंभव है आप क इस गदराये शरीर की पूजा न कर लू तो नींद हे नहीं आती अहंम हाय"

बलदेव अपन पेअर को देवरानी क पेअर पर रख रगड़ते हुए कहता है पर देवरानी लेते हुए अपना मुँह दूसरी ओरे फेर लेती है बलदेव अपने हाथो से अपने माँ क कंधो को अपनी ओरे खेचते हुए

"रूस गई है रानी क्या लौड़ा खायेगी "

"नहीं मुझे नहीं चाहिए "

देवरानी बलदेव को देख हे नहीं रही थी क्यू क उसको पता था क वो अगर अपने बेटे क आखो में देखि तो उसके प्रेम में पिघल जाएगी

"आप न खाये लौड़ा माता श्री मेरा केला हे खा लीजिये ऐसा केला स्वाभाग्यवति महिला को हे मिलता है"

"मुझे नहीं खाना आपका लौड़ा या केला आप तो बात बात में मुझसे दूर जाने की बात करते हो"

"रानी माँ आपसे दूर

रह क एक क्षण नहीं जी पाउँगा"

बलदेव झुक कर अपने माँ से सात कर अपने माँ क सुराही दर गर्दन में अपना मुँह लगता है और देवरानी की जिस्म की खुशबु सूंघ मदहोश होने लगता है

"उम् छोड़िये न आप "

"अच्छा तो मेरा मज़ाक बुरा लग गया आप तो जानती है न आप क बिना चैन नहीं मिलता फिर आप ने दरवाज़ा लगा दिया और मुझसे हे पूछ रही थी क मई कौन हु"

ये कहते हुए अपने माँ क मटके जैसे गांड पर ज़ोरदार थप्पड़ मार देता है

"Aaaaahouchhh"chhoriye न"

"अब पता चला मेरी प्रेमिका पत्नी को की मई कौन हु मई आपका पति देव हु"

"मई तो बस्स्स मज़ाक की आप की तरह अशुभ नहीं कहा क हम अलग हो जायेंगे"

"अच्छा मेरी माँ आप हे जीती मुझे क्षमा कर दीजिये मुझे ऐसे अशुभ बात नहीं कहना चाहिए था"

ये सुनते हे देवरानी अपने बेटे क बात पर मुस्कुरा देती है

"महारानी जी इसी ख़ुशी में एक बार आपकी छूट छोड़ लू ुहम्म मेरी पत्नी"

बलदेव अपने माँ को अपने बाहो के कस्ते हुए उसके गले में अपना मुँह भर का चूमते हुए कहता है जिस से देवरानी भी गरम हो जाती है पर फिर भी नखरा करते हुए

"ये कोई छूट मारने का समय है महाराज"

"आपकी छूट जब मारु तब समय ठीक हो जाता है जब से विवाह कर क आई हो पूरा गहतराष्ट्रा में मेरा मान सम्मान बढ़ गया है हम्म्म यह"

बलदेव अपने माँ क कानो क निचे चूमते हुए चाटने लगता है

"आआह ुहममम ाः परन्तु ये उचित समय नहीं है दुपहर का भोजन"

"महारानी अपने गांड मटका कर तो आपने हे न्योता दिया था और मई आपके पीछे पीछे आया तो अब नाटक कर रही हो"

देवरानी ये सुन कर मुस्कुराते हुए अपने हसी रोक लेती है क्यू क उसे भी ये ज्ञात था क उसने हे बलदेव क लैंड को खड़ा कर आमंत्रित की थी अपने पास आने क लये और हुआ भी ऐसा हे बलदेव अपना खड़ा लैंड लिए हुए दौड़ा चला आया

"मैंने कब कहा आपको आने क लये"

ये कह कर देवरानी लज्जा जाती है

"माँ आपके आखो की लज्जा बता रही है क आपके मुझे अपने शरीर सुंघा कर किसी कुत्ते की तरह मुझे अपने पीछे ले आई और अब जब आपको ये कुत्ता कुत्तिया बना कर छोड़ना चाहता है तो आप छूट सूंघने नहीं दे रही हो"

"अच्छा तो अपने लैंड पर नियंत्रण रखे पति जी महाराज"

"आओ इस लैंड को अपने छूट से नियंत्रण कर लो मेरी रानी माँ आपके छूट में जाने क लये व्याकुल है मेरा लौड़ा"

देवरानी अपने बेटे की बातो से पूरी तरह गरम हो गई थी और अपने गांड पे चुभते लौड़े को देख उसके छूट में चीटियन रेंगने लगती है

देवरानी अपने बेटे क आखो में देखते हुए अपने भरी जिस्म को अपने बेटे क ऊपर डालते हुए अपने बेटे क ऊपर चढ़ते हुए कामुक अंदाज़ में कहती है



"आपका लौड़ा नहीं हुलआबि लौड़ा है जो कुछ सोचे समझे बिना खड़ा हो जाता है"

बलदेव अपने माँ को देख रहा था और अपने माँ को अपने बहो में भरा हुआ था देवरानी अपने छूट की जलन मिटने क लये अपने छूट को अपने बेटे क लैंड पर रख रगड़ती है "उफ्फ्फ्फ़ आआआआह राआजाए बेटा ये सदैव अकड़ा रहता hai"devrani क पायल की छमक और चूड़ी की खनक फ़ैल जाती है और पूरा कक्षा चुडैमै होरहा था

"राआणि माआ आप की छूट भी तो पानी छोड़ने लगी है देखिये कैसे मेरे लौड़े को दबा रही ाः मेरी रांड माँ मेरी पत्नी देवराणीआह"

"ाचा ाआअह तो इस बार हमने आपको क्षमा कर दिया पति देव नई अगली बार कभी भूले से भी नहीं सोचना मुझे छोड़ने का"

देवरानी अपने छूट को अपने बेटे क लैंड पर रगड़ना बंद कर देती है बलदेव देवरानी को अपने बाहो में भर्र कर

"देवरानी आपको कैसे छोर सकता हु अभी तो आपके कोख में अपना बीज दाल कर तुम्हे गर्भवती करना है मेरी रांड"



बलदेव देवरानी को पलट देता है और उसके गाल और गर्दन को चूमने लगता hai"ufff ाआअह राँद हु सिर्फ आपकी महाराज महोदय ाह्मम मुझे पेट से कर दो यह राजा"

दोनों माँ बेटे एक दूसरे क शरीर को रगड़ रहे थे तभी बहार से आवाज़ आई

"क्षमा करे महाराज पर निचे आप दोनों का प्रतीक्षा क्या जा रहा है भोजन का समय हो गया है"

बलदेव समझ जाता है क कमला उसे खाने क लये बुलाने आई है और वो झट से उठ कर अपने माँ क जिस्म से खड़ा हो जाता है

Devrani:rukiye न ..कहा जा रहे है हम भोजन बाद में कर लेंगे आएये न छोड़िये न मेरी छूट पानी छोर दी बलदेव जी

बलदेव खड़ा मुस्कुराता है

Baldev:devrani चलो निचे सब प्रतीक्षा कर रहे है नहीं जाने पर राज परिवार बुरा मान जायेंगे

देवरानी अपने छूट पर हाथ रख सहलाते हुए

"ऐसा मत कीजिये न बलदेव जी मेरे अचे पति देव. इस कमला की बच्ची का खून कर दूंगी"

बलदेव मुस्कुराता हुआ अपना कुरता पहनता है और निचे जाने लगता है तभी देवरानी कहती है

"पति देव जी अआप जाइये और अपने बड़े लौड़े को संभल क देखिये कही सब न देख के बदनामी तो मेरी हे होगी क मई हर समय आपको पल्लू से बंधे रहती हु"

"आप मेरी पत्नी हो बदनामी हो जाने do..hahah मई ध्यान रखूँगा अपने लौड़े का कोई नहीं देखेगा "

बलदेव मुस्कुराते हुए बहार जाने लगता है देवरानी उठ कर कड़ी होती है उसका वस्त्र अस्त व्यस्त हो गया तह

Devrani:jaaaaiye महाराज मई आती हु उफ्फ्फ शरीर दुखने लगा अब जब तक कस क छोडूंगी नहीं आराम नहीं मिलेगा

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 176

गहतराष्ट्रा

देवरानी अपने छूट पर हाथ रख सहलाते हुए

"ऐसा मत कीजिये न बलदेव जी मेरे अचे पति देव. इस कमला की बच्ची का खून कर दूंगी"

बलदेव मुस्कुराता हुआ अपना कुरता पहनता है और निचे जाने लगता है तभी देवरानी कहती है

"पति देव जी अआप जाइये और अपने बड़े लौड़े को संभल क देखिये कही सब न देख के बदनामी तो मेरी हे होगी क मई हर समय आपको पल्लू से बंधे रहती हु"

"आप मेरी पत्नी हो बदनामी हो जाने do..hahah मई ध्यान रखूँगा अपने लौड़े का कोई नहीं देखेगा "

बलदेव मुस्कुराते हुए बहार जाने लगता है देवरानी उठ कर कड़ी होती है उसका वस्त्र अस्त व्यस्त हो गया तह

Devrani:jaaaaiye महाराज मई आती हु उफ्फ्फ शरीर दुखने लगा अब जब तक कस क छोडूंगी नहीं आराम नहीं मिलेगा

देवरानी अपने छूट सहलाते हुए कहती है और अपने होठ अपने दांत से दबा कर काट लेती है और फिर अपने छूट पर एक बार हाथ फेरती है तभी देवरानी की गांड क छेड़ में हलकी खुजली होती है और वो अपने हाथ पीछे ले जा कर एक ऊँगली से अपने गांड क छेड़ पर खुजाती है और फिर अपने आप को तैयार करने लगती है निचे जाने क लये देवरानी जैसे हे अपने कक्षा से बहार निकल रही होती है उसे फिर से गांड क छेड़ क चारो ओरे एक चिति काटने जैसी जलन होती है और उसका बदन तिलमिला जाता है जैसे किसी बिच्छू ने देवरानी क गांड में डांक मार दया हो

Devrani:uff योनि में खुजली होती थी अब ये गुदा में कैसी जलन है हे भगवन

देवरानी अपने एक ऊँगली को गांड क छेड़ में खूब कस क रगड़ते हुए आखे बंद करती है उसका जी छह रहा था क गांड क अंदर पूरी ऊँगली घुसा दे पर वस्त्र क ऊपर से ये मुमकिन नहीं था ,देवरानी अपने गांड की खुजली करते हुए चैन की सांस लेती है और एक आह भर्ती है और फिर अपने मटको जैसे गांड में फसा घागरा को अपने हाथ से खेचते हुए निचे जाने लगती है देवरानी का सब इंतज़ार कर रहे थे उसके आते हे कमला मुस्कुराते हुए खाना लगाने लगती है

Kamla:man me)lagta है दोनों माँ बेटे फिर रासलीला कर रहे थे इसलिए बलदेव पहले और ये इतना देरी से सवार कर आई

Baldev:aaaiye देवरानी हमारे साथ भोजन कीजिये हम सब आपकी हे प्रतीक्षा कर रहे थे

राजपाल अपने पुत्र की बात सुन कर शर्मा जाता है और निचे देखने लगता

Devrani:nahi नहीं महाराज आप लोग खाये मई बाद में खा लुंगी

षुरूश्ती खाना पड़ोसते हुए देवरानी को एक टाक देखती है फिर बलदेव को देखते हुए

Shurushti:lagta है मेरे बेटे बलदेव ने महारानी देवरानी को ऊपर कक्षा में हे खिला दिया है इसलिए भूक नहीं

षुरूश्ती ये कहते हुए मुस्कुरा कर देवरानी को देखती है और देवरानी लज्जा कर पानी पानी हो जाती है फिर भी स्थिति को सँभालते हुए

Devrani:nahi nahi..abhi कुछ नहीं खाये हम सासु माँ मई तो इसलिए कह रही थी क मई आप लोगो की मदद कर दू

Shurushti:bahu रानी आप राज्य की महारानी हो आपको ये शोभा नहीं देता ये सब करने क लये दसिआ है न

Devrani:Ek महारानी से पहले मई एक स्त्री हु जिसका धर्म होता है अपने पति की सेवा करना और एक पतिव्रता पत्नी तो अपने पति को खिला कर हे कहती है

राजमाता जीविका अपने पोते बलदेव की पत्नी की ऐसी बात सुन कर ख़ुशी से फूले नहीं समाती है और साथ बैठे बलदेव क कंधे पर हाथ रख थप तपते हुए

Jeevika:Bhut भाग्यशाली है मेरा पोता जो इतनी पतिव्रता पत्नी मिली है

Shurushti:aao बैठो बहु रानी मई भोजन लगवा देती हु

षुरूश्ती देवरानी का हाथ पकड़ा कर बैठा देती है देवरानी नहीं नहीं कहते हुए बलदेव क बगल में बैठ जाती है और उनके ठीक सामने राजा राजपाल बैठा था

Jeevika:Bahu देवरानी अब आप हमे कब हमारे परपोते की खुशीअ देंगी मेरे नैन तरस रहे है बलदेव क पुत्र को देखने क लये

देवरानी को समझ नहीं आता वो क्या बोले इसलिए वो चुप कर क अपने सर को निचे झुका लेती है उधर षुरूश्ती आती है और अपने सास की बात सुनते हुए

Shurushti:Raaj माता हमारी बहु देवरानी को अभी ब्याह कए समय हे कितना हुआ है

Jeevika:Bahu मई चाहती हु क शीघ्र हे गहतराष्ट्रा वासिओ को इस राज्य का उत्तराधिकारी और भविष्य में यहाँ राज करने वाला इन संसार में आजाये यदि किसी कारन देवरानी गर्भवती नहीं हो पति है तो हम समाज को क्या कहेंगे हमारा राज परिवार का अंत हो जायेगा

Baldev,dadi माँ आप देवरानी को समय dijiye,hum अपने तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ेंगे आपके और गहतराष्ट्रा वासिओ को हम अवश्य वंश देंगे

देवरानी को बुरा भी लग रहा था क राजमाता जीविका अपने वंश को आगे बढ़ने क लये देवरानी को ताने मार रही थी पर एक तरफ से देवरानी को ख़ुशी भी हो रही थी क राज परिवार अब उसे अपने बहु स्वीकार लये थे और सब चाहते है क उसकी गॉड जल्दी भर jaye,wahi राजा राजपाल अपने सर को निचे कए अपने भोजन कर रहा था और अपने कान को बहरा कर चुपचाप था

Shurushti:Ye सब बाते छोड़िये राधा पनीर ले aaao,,Waise होली आने वाली है उसकी तैयारी कीजिये आप सब और खासकर आप महारानी देवरानी क्यू क विवाह क बाद ये आपकी पहली होली है तो अपने पति संग खेलने क लये तैयार rahiye..Holi

षुरूश्ती देवरानी को देख एक क़ातिल मुस्कराहट क साथ देखती है और देवरानी भी कोई बची नहीं थी समझ जाती है क षुरूश्ती किस खेल की बात कर रही है और वो मुस्कुराते हुए अपना चेहरा निचे कर लेती है

Baldev,..khana शुरू karo..chinta करने की आवश्यकता नहीं सब ठीक होगा

बलदेव अपने सर को हिला कर आश्वासन देता है और देवरानी भी हाँ में गर्दन हिला कर अपने बेटे की बात मान कर खाने लगती है पर उसे अंदर हे अंदर ये बात खाये जा रही थी क कही वो बलदेव को बचे का सुख नहीं दे पाई तो क्या होगा

Devrani:man me)Agar मई गर्भवती नहीं हुई और इस राजपरिवार क वंश को आगे न बढ़ा पाई तो क्या बलदेव का दूसरा विवाह कर देंगे ये log..nahi नहीं मई ऐसा नहीं होने दूंगी

देवरानी क हाथ रुक जाते है और वो खाना छोर अपने हाथ वही पर रखे एक कटोरे में डूबा कर हाथ धो लेती है और जैसे हे उठती है

Baldev:kya हुआ देवरानी इतनी jaldi..tum खाये भी नहीं

Devrani:bass पेट भर्र गया..

बलदेव साफ़ देवरानी क चेहरे पर चिंता देख लिया था और समझ जाता है क देवरानी को दादी की बात बुरी लगी है

Shurushti:Aap बैठ जाए महारानी कमला और राधा कर लेगी

षुरूश्ती भी अब बैठ कर अपना भोजन करने लगती है पर देवरानी उठ कर रसोई में जाती है और अपने सौतन बानी सास का बात अनसुना कर देती है

रसोई में कमला और राधा गरम गरम रोटियां सेक रही थी देवरानी अंदर जा कर

Devrani:Radha तुम बहार जाओ और पानी पिलाओ महाराज बलदेव को मई रोटियां लती हु

Radha:Maharani आप रहने दीजिये हम कर लेंगे

Devrani:jo कहा वो सुनो..

राधा डरते हुए बहार चली जाती है और लोटा में मटके से पानी भर कर ले जा कर रखने लगती है और उधर सब बैठे खा रहे थे

Kamla:kya हुआ महारानी लगता है आप गुस्सा हो गई

Devrani:chup करो और अपने काम पे ध्यान दो

Kamla:Maharani अब राजमाता की बातो को दिमाग पे मत lijiye,budhi है

देवरानी एक लम्बा सांस छोड़ते हुए

Devrani:Kamla क्या एक बहु का बास यही एक कर्त्तव्य है क वो बच्चे janme,rajmata ये नहीं देखती मई गहतराष्ट्रा वासिओ क लये कितना काम की हु और उनसब का विश्वास जीता है ,

Kamla:Hume पता है महारानी आप ने हे इस राज्य को टूटने से बचाया है नहीं तो युधा क बाद तो यहाँ क लोगो का विश्वास हे उठ गया था राजपरिवार का

Devrani:yudha में जो दिल्ली क बादशाह शाहज़ेब ने जो अत्याचार क्या और हमारे लोगो को मौत क घाट उतार दिया यहाँ तक क हमारे राज्य क महिलाओ क साथ दुर्व्यवहार क्या ,तुम्हे पता है ये हार से शाहज़ेब बौखला गया होगा न तो उसके हाथ कुबेरी राज्य आया न हे गहतराष्ट्रा ,वो तो मेरे पति बलदेव की बूढी और सहस ने शाहज़ेब को खदेड़ दया नहीं तो आज गहतराष्ट्रा पर शाहज़ेब का राज होता

Kamla:Han महारानी ये बात अब हर गहतराष्ट्रवासी जनता है क आज जो जीवित है वो आप क और महाराज बलदेव क karan..aap क्रोधित नहीं हो महारानी भगवन ने चाहा तो आपकी हर मनोकामना पूरी होगी

Devrani:pata नहीं कमला मुझे माँ बन न कब नसीब होता है

देवरानी ये कहते हुए एक बार फिर से अपने गांड क बीच एक ऊँगली ले जाती है और नोखिले नाख़ून से घास देती है ये तीसरी बार देवरानी ने की थी और कमला सोचने लगती है

Kamla:man me)ye देवरानी बार बार गांड क्यू खुजली कर रही hai..pata करती हु

Kamla:Maharani आप से महाराज बलदेव आज कल खूब प्रेम कर रहे है लगता है

Devrani:bhakk पागल तुम नहीं सुधरेगी

Kamla:Nahi करते क्या

Devrani:tumko मई अचे से समझती हु तुम क्या जानना चाहती हो बोलो

Kamla:Maharani लगता है महाराज बलदेव आपके पीछे की गुफा की खुदाई अच्छे से कर रहे है

Devrani:hatt पागल वह से करना इतना आसान नहीं वो भी बलदेव जैसे जवान का

देवरानी फिर से एक बार अपने गांड में ऊँगली कर रगड़ देती है

Kamla:lagta है बहुत दिन हो गए महारानी जब महाराज ने आपके पीछे से लिया हो

देवरानी शर्म से लाल हो जाती है और अपना हाथ कमला को मारते हुए दिखा कर

"कमला अगर मई तुझे बहिन नहीं मानती तो तेरे इस प्रश्न पर मरती तुम पागल हो जब से विवाह हुआ है दो तीन बार हे कए है तुम तो जानती हो न कितने दिन तक मई चल नहीं पाई थी"

"झूट न कहो महारानी क्या आप पहली बार क बाद में नहीं लये पीछे से मई विश्वास हे नहीं करती कोई पति अपने पत्नी की इतनी भरी भरकम पिछवाड़ा को छोर दे"

"धत्त पागल पहली बार क बाद बहुत दिनों तक तो बलदेव को छूने भी नहीं दी फिर एक बार हे क्या आराम से पर मेरे मरने जैसी हाल हो जाती है जब वो अंदर डालते है गुदा में सांस रुक जाती है"

"तो आपका मन नहीं करता क्या महारानी पीछे से "

"हट अपने जैसी रांड समझी हो मेरे बलदेव मुझे खुश रखते है जो चाहिए मुझे मिल जाता है"

"आय है मेरी महारानी जो चाहिए वो मिल जाता है तो आप बार बार अपने पिछवाड़े को ऊँगली से खोद क्यू रही हो"

Kamla:man me)Mujhe सब पता है देवरानी तेरी गांड में में बलदेव का हुल्लाबी लौड़ा जायेगा हे अब गांड को ठुकाई चाहिए

Devrani:ary वो तो पसीने क कारन होता है तू भी न

Kamla:Maharani आप काम से काम 10 बार अपने पिछवाड़ा अपने ऊँगली से घास दी मेरे सामने इसका अर्थ समझती हो

Devrani:man me)Han जब से ऊपर बलदेव ने अपना लौड़ा रगड़ा है तब से खुजली हो रही है क्या कमला सही कह रही है

Kamla:maharani क्या सोच में पद गई कमला को सब ज्ञान है ऐसी खुजली तभी होती है जब अंदर वो लेना चाहती है अब आप समझ जाये क्यू तरस रही है

Devrani:kya अर्थ है इस बात का

Kamla:saaf है ..आपके ऊँगली से ये खुजली नहीं मिटने वाली आपके गुफा में पूरा शेर घुसेगा तो हे खुजली मिटेगी अब उसकी मांग बढ़ गई है महारानी जी

देवरानी अपने आँख फाड़े कमला जिसे वो दासी से बढ़ कर मानती थी उसे देख सोचने लगती है और उसका लज्जा से बुरा हाल था जो देवरानी कल तक गांड मरने क नाम से भगति थी आज उसके गांड खुजली कर रही थी और लौड़ा अंदर लेने क लये परेशां थी

Devrani:man me)Lagta है कमला सही कह रही है बहुत दिनों से बलदेव ने पीछे डाला भी नहीं है और वो बोलता भी तो नहीं है अब क पीछे से करना है

Devrani:chhoro कमला..

Kamla:maharani आप बहुत सोचती ho..ye समय छोड़ने का नहीं आपको अपनी जवानी को जीने का है और महाराज क जवानी का मज़ा चखने का hai,aapke पास प्रेम करने वाला पति है ,,जाइये जी लीजिये

Devrani:nahi nahi..wo चाहेंगे तो करेंगे मई कैसे बोल सकती हु वो भी ये बात जिस बात क लये मैंने हमेशा बलदेव को डांटा है

Kamla:tab आपको पता नहीं था क एक बार जो पीछे से मज़ा ले ली वो बिना पीछे लये जी नहीं sakti,aap आगे से करवाने क लये बोलती हो या वो भी नहीं ?

Devrani:q नहीं मेरे पति है जब मेरा डिल होता है उनसे सम्बन्ध बनाने का तो उनको कहती हु पर वो बात सामान्य है कमला परन्तु पीछे से करने क लये बोलूंगी तो बलदेव हसेंगे मुझ पर

देवरानी थोड़ा उदास होते हुए कहती है जिसे कमला देखती है उसे बहुत तरस आता है देवरानी पर जो पहली बार गांड मरवाने का मज़ा चखी थी पर अब जब उसका डिल छह रहा था और उसकी गांड लैंड मांग रही थी तो उसके अंदर अपने बेटे से ये कहने की हिम्मत नहीं थी

Kamla:maharani आप सोचिये mat..aap का डिल है न अपने पीछे की गुफा की खुजली मिटने का?

देवरानी समझ गई थी क ये खुजली कोई आम खुजली नहीं थी जो एक बार खुजला लेने से ठीक हो जाये ये लैंड अंदर लेने का संकेत था जो गुदा देवरानी को दे रहा था

Devrani:Han मई चाहती hu..par वो माने तब तो वो तो आज कल बास मेरी गलती गिनने में लगे रहते है मेरे पीछे वाले हिस्से पे ध्यान हे नहीं देते होंगे तभी तो इतने दिन से वह..

Kamla:aap महारानी देवरानी है आपके जैसा शरीर और कामुक पिछवाड़ा जो पहाड़ जैसा है पुरे गहतराष्ट्रा में नहीं अपने जवानी क जलवे दिखाइए और अपने पीछे क पिंजड़े में महाराज बलदेव क शेर को क़ैद कर लीजिये..

देवरानी ये सुन कर लज्जा जाती है और ये सोच कर हे क वो अपने बेटे से अपनी गांड मारने का निवेदन करेगी

कमला अपने हाथो में बर्तन उठा कर बहार आती है और बहार कड़ी राधा को दे कर अंदर आती है बहार बैठे सब भोजन कर रहे होते है

Kamla:Soch लिया क्या करना है महारानी जी

Devrani:dhanyawad कमला मेरी बहिन तू हर मोड़ पर मेरे साथ कड़ी रहती है और हर समस्या का समाधान चुटकिओ में निकल देती है

Kamla:nam कमला है मेरा जैसे कमल कीचड में खिलता है न वैसे हे ये विधवा भी खिली रहती है

Devrani:tumko खिलने वाले तो वैध जी है

Kamla:ab वैध जी हे सही काम से काम अपने जवानी बर्बाद तो नहीं कर रही हु रानी षुरूश्ती की तरह

Devrani:chhoro जाने दो षुरूश्ती ने जो मेरे साथ क्या तो वो भोग रही है और दिन रत अपने जवानी क आग में जल रही है

Kamla:han आपको हर दुःख का बदला लेना है और आप को इनसब से मुँह लगाने की आवश्यकता नहीं आप जैसे हे अपने सुन्दर बच्चो को जन्म देने lagogi,aapke शत्रु जलन से मर्डर जाएंगे

Devrani:tum ठीक कहती हो कमला

उधर रसोई क बहार पहले राजपाल और षुरूश्ती उठ कर अपने कक्षा में विश्राम करने चले जाते है और फिर राधा राजमाता जीविका को उनके कक्षा में छोड़ने चली जाती hai,rasoi में कमला बर्तन धोने क साथ साथ महारानी देवरानी से बाते कर रही थी

Kamla:Maharani देवरानी तो क्या सोचा है आपने

Devrani:pagal रात होगी तो बात करुँगी बलदेव से

Kamla:q अभी क्यू नहीं ..कल करे सो आज कर आज करे सो अब ..ये कहवत न सुनी हो

Devrani:par सब क सामने महल क बीचो बीच ये बात कैसे..

Kamla:Maharani सब जा चुके है आपका लाडला बीटा बलदेव अब भी खा रहा है घोड़े की तरह

Devrani:Aisa मत कहो मेरे बच्चे क खाने में नज़र लग जाएगी अब इतने लम्बे चौड़े शरीर का मालिक है खुराक तो होगी हे

Kamla:aay हाय क्या प्यार है माँ बेटे क बीच मुझे वो दिन याद आते है जब मई आपसे कहती थी क बलदेव को फसा लो तो आप गुस्सा हो जाती थी और वैसे भी बलदेव घोड़े जैसा खायेगा तभी तो आपकी भरपूर सेवा कर पायेगा

Devrani:dhatt पागल मई जाती हु

देवरानी चलते हुए रसोई क दरवाज़े पर आती है और धीरे से कमला को देख लज्जते हुए पर कामुक अंदाज़ में कहती है

"मेरा घोडा है मेरा सेवा नहीं करेगा तो किसका करेगा और अब वो मेरा पतिदेव है बीटा नहीं"

ये कहते हुए देवरानी मुस्कुरा उठती है और अपने मादक शरीर को झटकते हुए जाने लगती है

Kamla:man me)Mujhe तो पता था देवरानी तुम अंदर से छिनाल हो पक्की बास खुलने की देरी थी ..कर लो मज़े अपने बेटे संग ,कमला ने आखिर आपने जीवन से दुःख हटा दया भगवन की दया से

कमला अपने काम में लग जाती है और देवरानी अपने चाल में लचक लेट हुए अपने बड़े वक्षो और नितम्बो को हिलाते हुए अपने बेटे क पास पहुँचती है जो भोजन कर रहा था और आस पास कोई नहीं था देवरानी धीमे कदमो से बलदेव क सामने जा कर कड़ी हो जाती है पर बलदेव देखता नहीं और अपने खाने में लगा था

Devrani:Ahha ाहः ..

देवरानी अपने बेटे को अपनी आगमन का अहसास दिलाने क लये हलकी करती है और बलदेव भी सीधा हो कर अपने माँ को देखता है जो अपने हाथो से अपने बाल क लातो को सुलझा रही थी और दये बाये हिल रही थी जिस से उसके भर्री मम्मी आपस में टकरा रहे the,devrani भरपूर कोशिश कर रही थी अपने बेटे को रिझाने या गरम करने क लये

Baldev,devrani तुम आओ बैठो

Devrani:Mai नहीं तो और kaun..jab से कड़ी हु पर तुम तो किसी घोड़े की तरह अपने खाने में लगे हो ,आज कल ध्यान हे नहीं मुझपर आपका

देवरानी रुआँसी हो कर बोलती है जिसे देख बलदेव मुस्कुराता है

Baldev:Aap पर ध्यान नहीं होता तो रोज़ सुबह बिस्तर का चादर क्यू बदली करती कमला

Devrani:Mere कहने का अर्थ ये था क आप पति की तरह तो रखते है पर एक प्रेमी की तरह नहीं

देवरानी ये कहते हुए बलदेव क आखो में देखती है और अपने सर से घूँघट हटा कर अपने चोली को अपने वक्ष से हल्का खिसका देती है



देवरानी का बड़े नारियल से आकर क दूध बलदेव क आखो क सामने अपना सर उठाये थे और देवरानी क वक्ष का ऊपरी हिस्सा झलकने लगता है

Devrani:kaisa लगा महाराज

Baldev:ati sundar..aap ठीक है न आप महल क बीचो बीच है रानी माँ

Devrani:to मई कौन सा गलत काम कर रही हो

Baldev:man me)ye माँ को क्या हो गया है साली क मन में पक्का कुछ चल रहा है रात भर्र तो छोड़ा हे था फिर क्यू

Baldev:baith जाए मेरी निर्दार पत्नी

Devrani:theek है जैसी आपकी आज्ञा महाराज परन्तु आपको भी अपने अंदर क प्रेमी को मरने नहीं चाहिए



देवरानी सीधा न बैठ कर अपने बड़े गांड को अपने घागरा में क़ैद बड़े तरबूज़ों जैसे गोल गांड को अपने बेटे क तरफ करते हुए अपने दुपट्टे को अलग रख देती है

Devrani:kuch समझे maharaj..vivah क पहले तो आप मेरे पीछे पड़े रहते थे

Baldev:man me)To ये बात है देवरानी की गांड में अब खुजली हो हे गई और अपने गांड दिखा कर मुझे रिझा कर अपने गांड कुटवाने चाहती है रंडी

बलदेव ये सोच कर मुस्कुराता है

Baldev:Aap क्या कह रही हो मुझे समझ नहीं आरहा माता श्री

Devrani:chup कीजिये मई आपकी पत्नी hu..dekhiye मेरे शरीर को आपको कौन सा अंग मेरा सबसे अधिक उत्तेजित करता है

Baldev:Mujhe तो पूरी की पूरी देवरानी काम की देवी लगती है गहतराष्ट्रा वासिओ क लये भले हे उद्धार की देवी हो पर मेरे लये एक आग हो जिसे मेरे पानी से प्रति दिन बुझाना होता है

Devrani:huhh. अआप नहीं समझ रहे है या फिर समझ कर बुद्धू बन रहे है सैय्यन जी देखिये मेरे शरीर को बताइये ..

Baldev:Paani ले आओ रानी माँ भोजन होगया मेरा

देवरानी अपना मुँह टेढ़ा कर उठती है जैसे वो विफल हो गई हो अपने बेटे को रिझाने में

Devrani:huhh लाती हु

देवरानी उठ कर अपने दुअपप्ते को उठाने हे वाली थी क उसके लैब पे एक क़ातिल मुस्कान फ़ैल जाती है और वो दुप्पट्टा न ले कर सीधा कड़ी होती है पर अपने गांड क दरार में घागरा को दबा लेती है और उठ कर कड़ी होने क बाद भी अपने गांड में दबाये thi,baldev देवरानी क दो मटको जैसे बड़े गांड को देख कर खो जाता है और तभी देवरानी हिलती है और उसके दोनों गांड आपस में टकराते है बलदेव का लौड़ा खड़ा होजाता है देवरानी एक ऐडा से चलते हुए

Devrani:man me)nahi पता है न अब पता चलेगा बीटा बलदेव क तुम्हारी माँ क गांड को अनदेखा करना आसान नहीं

देवरानी एक डैम धीरे अपने गांड क दरार में घागरा फसाये अपने कदमो को धीरे से बढाती है और उसके बड़े गांड आपस में टकराने लगते है



देवरानी अपने कमर पर दोनों हाथ रख अपने गांड से कपडे को निकलने नहीं देती जिस से गांड क कटाव घागरे क ऊपर से साफ़ दिखाई पड़ते है और एक मस्तानी माल मस्ती में अपने बड़े गांड से अपने बेटे को घायल कर रही थी या अपने बेटे को सजा दे रही थी गांड को अनदेखा करने ka,baldev से रहा नहीं जाता और अपने हाथ जल्दी से धोता है और सीधा अपने लैंड को पकड़ लेता है और सहलाने लगता है जब तक उसकी माँ अंदर रसोई में नहीं घुस जाती इस से ये होता है क बलदेव क लैंड क जगह पर पानी लग जाता hai,rasoi में घुसते हे कमला को देवरानी देख

Devrani:kamla की बच्ची वो तो मेरे नितम्ब पर ध्यान हे नहीं दे रहा है

कमला बर्तन धो रही थी वो देखती है देवरानी बिना दुपट्टे क अपने बेटे को रिझा कर आरही है

Kamla:Kya आपने कहा अपने बेटे से क आपको क्या चाहिए

Devrani:ufff वो तो देख भी नहीं रहा मेरे पिछवाड़े पे

Kamla:aisa हो हे नहीं सकता महारानी जब आपके बेटे ने आपसे प्रेम करना शुरू क्या था तब भी मैंने आपके नितम्बो को घूरते हे देखा tha..aap ने उन्हें बताया अपने डिल की बात?

Devrani:Nahi..wo पानी लेने क लये भेज दिया

Kamla:aap क्यू लज्जा रही हो आप तो रोज़ अपने बेटे बने पति क साथ हे रात गुज़रती हो कौन सा वो आपको बुरा भला कहेगा ,

Devrani:theek है मई बात करती हु पर तुम मत aana..paani दो

देवरानी पानी ले कर बहार आजाती है उधर कमला कड़ी कड़ी

Kamla:man me)Randipana तो देखो अपने शरीर को कैसे खोल कर अपने बेटे को रिझा रही है

देवरानी पानी ले कर आती है और बलदेव क पास रखते हुए झुक जाती है और अपने गांड को निकले अपने बेटे को देख मुस्कुराती है

Devrani:wo बलदेव जी ..वो कुछ कहना था आपसे

Baldev:baith जाओ देवरानी

बलदेव घाट घाट पानी पी लेता है और देवरानी लज्जा क मारे बैठ जाती है

Devrani:wo सुबह से कुछ खुजली सी हो रही थी

Baldev:hmm

Devrani:wo कमला कह रही थी ऐसा एक स्त्री क साथ होता है तो उसका पति उसकी सहायता करता है

Baldev:kahiye कहा पर खुजली हो रही है

बलदेव अपने माँ जो वासना की आग में जल रही थी उसके आखो में देखते हुए उसके करीब जाता है और उसके आखे पढ़ने लगता है

Baldev:man me)kah दो माँ अपने मुँह से क गांड मारवणी है तुमको

Devrani:wo पीछे उस जगह पर .

बलदेव से अब रहा नहीं जाता है और वो अपने माँ क आखो को लाल होते हुए देख रहा था

Baldev:Maa कहा आपके पिछवाड़े में गांड में?

Devrani:Han...

देवरानी ये कह कर अपना चेहरा मरे शर्म क निचे कर लेती है बलदेव मुस्कुराता हुआ

"माँ साफ़ साफ़ कहो न क्या चाहिए क्या आपको छोड़ना hai"baldev बात फेकते हुए अपना पैसा फेकता है अपने माँ को फसते हुए देवरानी फिर से अपना सर ऊपर करती है और बलदेव क आखो में देखते हुए अपने लरजते होठो से

"Baldev...Ga गांड मार लीजिये न"

बलदेव अपने हाथ को अपने माँ क गाल पर रखता है जो तप रहा था

"रानी माँ ये क्या कह रही हो "

देवरानी क गांड में खुजली शुरू हो जाती है और वो पहले अपने हाथ निचे ले जा कर अपने गांड क छिद्र को रगड़ती है

और अपने बेटे को देखते हुए "मेरे बालम मेरे पति देव सुबह से खुजली हो रही है मेरे पिछवाड़े में मेरी खुजली मिटा दीजिये न मेरी गांड मार क वो कमला कह रही थी की ये खुजली ऊँगली से ठीक नहीं होती"

बलदेव का लैंड धोती फाड़ कर बहार आने को होता है वो अपने माँ क हाथो को अपने हाथ में लिए खड़ा होता है और अपने भरी भरकम गदरायी माँ को अपने से चिपका लेता है "माँ आप का बीटा आपको निराश नहीं होने देगा आप डर रही है इतनी छोटी सी बात करने क lye"Devrani बलदेव से सात जाती है और बलदेव अपना हाथ देवरानी क मटको जैसे गांड को पकड़ लेता hai"aaah नहीं राजा बीटा बास संकोच था क आप क्या सोचेंगे आज रात अपनी पत्नी की गुफा को अपने शेर से नाप दीजिये "बलदेव ये सुनते हे अपने लैंड को ज़ोर से छूट पर रगड़ता है "आप का बीटा नहीं हु अब मई पति हु जो चाहिए बिना संकोच क आदेश कीजिये और रात तक आप रोक पाओगी अपने aapko"devrani मुस्कुराते हुए अपने बेटे क सर पर हाथ रख खुश होजाती है क्यू क उसका बीटा गांड मारने का इशारा हाँ में कर दया था

"अब उसमे पीरा बहुत होती है न राजा जी दिन में काम भी तो है फिर संध्या में सभा में जाना hai"baldev देवरानी को बहो में लिए ऊपर उठता है और उसकी चूड़ी खनकती है और देवरानी की हसी छूट जाती है "उफ़ छोड़िये न महल क बीचो बीच ऐसे कर रहे है कोई देख lega"devrani की हसी सुन कमला से रहा नहीं जाता है और वो रसोई क खिड़की से देखने लगती है कमला देखती है बलदेव अपने भरी माँ को अपने गॉड में उठाये खड़ा था

"निचे उतरिये न राजा जी ाः छ्होरिये na"devrani अपने बेटे से आग्रह करती है पर बलदेव देवरानी को अपनी ताक़त लगते हुए और ऊपर उठता है "रानी माँ आप की गांड खुजली अभी कर रही है और आप गांड रात में मरवाओगी ये तो अन्याय hai"devrani चौकते हुए "हम्म नहीं अभी nahi"baldev मुस्कुराते हुए अपने माँ को उठा कर अबे अपने पेट पर बिठा देता है और उसके आखो में देखते हु

"माँ जब गांड में खुजली अभी हो रही है और लौड़ा अभी चाहिए तो मई आप को रात तक तड़पने नहीं दे सकता गांड भी अभी मरूंगा आपकी मेरी devrani"devrani नखरा दिखाए हुए अपने मुक्के से बलदेव क कंधो पर मरती है "नहीं छोड़िये na"baldev देवरानी को उठा कर सीडीओ क तरफ जाने लगता है "रानी माँ यदि किसी को बुखार आज हो और दवा कल दिया जाये तो क्या उसकी जान बचेगी वैसे हे आपकी हर इच्छा पूर्ति का उत्तरदायित्व मेरा है मैंने आपसे से सात फेरे लिए है maa"ye कह कर बलदेव तेज़ी से आगे बढ़ता है "मेरी चुनरी यही निचे रह gai"baldev कुछ नहीं सुनता और अपने माँ को दबोचे सीडीओ पर चढ़ने लगता है देवरानी अपने बेटे को बाहो में भर्र क अपना सर उसके मजबूत कंधे पर रख लेती है बलदेव क गॉड में बैठी देवरानी अपने दुपट्टा को देख रही थी जो इस समय फर्श पर पड़ा था ये वही दुपट्टा था जिस से देवरानी हर समय घूँघट करती थी ये वही दुपट्टा था जिस से वो अपने बड़े वक्ष को अपने बेटे की नज़रो से छुपाती thi,ye वही दुपट्टा है जिस से देवरानी अपने बेटे बलदेव को दूध पिलाते हुए ढकती थी आज वही दुपट्टा को बलदेव ने छोर दया था और अपने माँ की गांड मरने क लये ऊपर अपने कक्षा में ले जा रहा tha,jaise हे कमला देखती है बलदेव ऊपर चढ़ गया वो बहार आती है और चुपके देवरानी का दुप्पट्टा उठा कर अपने हाथ में ले लेती है

Kamla:man me)Dono डरपोक माँ बेटे अब इतने निर्दार हो गए क खुले में बिना परिवार क डर क रासलीला का खेल खेल रहे है और बलदेव तो अपने माँ को उठा क ले गया कोई देखता तो ये दृश्य देख क हे स्खलित हो जाता ,खूब मरवाओ गांड देवरानी अपने बेटे से

कमला वह से चली जाती है और देवरानी क दुपट्टे को रख देती है

बलदेव देवरानी को अपने गॉड में उठाये ऊपर चढ़ गया था अब धीरे से चलते हुए अपने कक्षा की ओरे जा रहा था

"देवरानी पहले से बहुत भारी हो गयी हो"

"आप भी तो पाहे से मोठे हो गए हो "

"मई तो व्यायाम करता हु मोटा होने का प्रश्न हे नहीं"

"मई भी तो प्रतिदिन योग करती हु"

"रानी माँ आपके गांड और चुके दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है इसलिए लगता है भरी लग रही हो"

"और आपका लिंग जो इतना मोटा और लम्बा होता जा रहा है उसका क्या"

तभी कक्षा आजाता है और बलदेव एक लात मार कर दरवाज़ा खोलता है और देवरानी को गॉड में हे उठाये अंदर आकर

"रानी माँ दरवाज़ा बंद करो"

देवरानी अपने बेटे क गॉड में बैठी हाथ बढ़ा कर दरवाज़ा बंद करती है और बलदेव फिर से देवरानी को और ऊपर चढ़ा कर

"आज आपकी गांड तीतत भीतर कर दूंगा मार क "

"भरी दुपहरी मरोगे कुछ उच्च नीच हो गया तो "

"क्या मारोगे "?

"हट गएआंद मरोगे और क्या"

"ः ऐसे खुले शब्दों में कहो मेरी रांड माँ"

"ाचा मेरे सैय्यां जी आपको पसंद है तो सुनिए गांड आपको आराम से मारनी है"

बलदेव बिस्तर पर पटक देता है अपने माँ को और अपने कुरता को उतार कर फेकते हुए देवरानी क ऊपर कोड जाता है

"उह्ह्ह ाआअह राआजाए जी"

बलदेव देवरानी क ऊपर अपना गठीला शरीर लये अपने माँ क गदराये जिस्म को पीसने लगता है और दोनों हाथो को पकड़ कर अपने मा को चूमने चाटने लगता है "ाआअह रआआआई मा आआप तो काम देवी हो आप लज्जा छोर दो आपकी हर इच्छा पूरी करेगा ये आपका पति आह"

बलदेव अपने माँ क होठो को अपने होठ में रख "गलप्प्प गलप्प हम्म्म्म ाहहमममम आआआआह मममममहह गलप्प गलपपपप गलप्प्प गलपपपप मममहहह गलप्प गलप्प गलप्प्प गलललप gallp"baldev अब देवरानी क दोनों पेअर फैला देता बाई और अपने लौड़े को छूट पर सताए अपने माँ क दोनों मम्मो को दोनों हाथ में भर्र कर इतना ज़ोर से दबाता है क देवरानी दर्द से "aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah"cheekh उठती है बलदेव निचे झुक कर देवरानी क होठ अपने होठ में भर लेता है फिर से अपने दोनों हाथो को चोली क ऊपर से हे बड़े वक्षो को हथेली में लिए अपने पूरी ताक़त से ऐसा दबाता hai,devrani क आखे फटी रह जाती है और दर्द से चिल्लाने क लिए अपना मुँह खोलती पर बलदेव अपने माँ क होठो को अपने मुँह में भर्र कर पान की तरह चबाने लगता hai,baldev फिर से अपने दोनों हाथो से खूब कस क तरबूज़े जैसे दूध को दबाता hai,Baldev ऐसे दबा रहा था जितनी ताक़त लगा रहा था उतने ताक़त में वो एक नारियल को अपने कठोर हथेली में रख फोड़ देता था आज उतने हे दम्म से अपने माँ क दूध को दबा रहा था

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 177

गहतराष्ट्रा

दोनों पेअर फैला देता बाई और अपने लौड़े को छूट पर सताए अपने माँ क दोनों मम्मो को दोनों हाथ में भर्र कर इतना ज़ोर से दबाता है क देवरानी दर्द से "aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah"cheekh उठती है बलदेव निचे झुक कर देवरानी क होठ अपने होठ में भर लेता है फिर से अपने दोनों हाथो को चोली क ऊपर से हे बड़े वक्षो को हथेली में लिए अपने पूरी ताक़त से ऐसा दबाता hai,devrani क आखे फटी रह जाती है और दर्द से चिल्लाने क लिए अपना मुँह खोलती पर बलदेव अपने माँ क होठो को अपने मुँह में भर्र कर पान की तरह चबाने लगता hai,baldev फिर से अपने दोनों हाथो से खूब कस क तरबूज़े जैसे दूध को दबाता hai,Baldev ऐसे दबा रहा था जितनी ताक़त लगा रहा था उतने ताक़त में वो एक नारियल को अपने कठोर हथेली में रख फोड़ देता था आज उतने हे दम्म से अपने माँ क दूध को दबा रहा था

बलदेव क दोनों हाथो में उसके अपने सगी माँ क उन्नत और कठोर वक्ष था यदि नारियल होता तो इतने ज़ोर से दबाने से अब तक टूट कर कई टुकड़े में बिखर जाता पर देवरानी अपने दांत को दांत पर बिठाये अपने बेटे द्वारा वक्षो पर बल प्रयोग को सह रही थी

"माँ ये वक्षो में तो नारियल से भी अधिक कठोरता है aaaah"baldev अपनी ताक़त से अपने बड़े पंजो में दोनों दूध दबोचते हुए फिर से दबाता है और देवरानी की आखे बंद हो कर फिर से एक चीख निकलती है

"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah मेरी रआआआअजाआआअ माआआर दया reeee"devrani क होठ पर फिर से बलदेव अपने होठ रख कर चूसने लगता है और अपना लौड़ा देवरानी क छूट पर घस्ने लगता hai,devrani क मुँह से "हम्म्म्म घू hummmaaaah"ki आवाज़े निकल रही थी देवरानी अपने हाथ को बलदेव क बलिष्ट कंधे पर रख अपने बेटे को थपथपाते हुए अपने ऊपर से उठने का इशारा करती है बलदेव भी अपने माँ की बात समझते हुए ऊपर उठता है देवरानी "ाआअह aaaaah"kar रही थी और हाँफते हुए उसके उन्नत उरूज हवा में ऊपर निचे होरहे थे चोली से आधे उरूज झाकने लगे थे जिसे देख बलदेव मुस्कुराते हुए फिर से अपने हाथो को दूध पर रख दबाते hue"aaaah रानी मा इनमे दूध कब bharenge"devrani फिर से अपने आखे बंद कर अपने बेटे दुवारा दूध मसलवाने से एक अद्बभुत आनंद की प्राप्ति करती है और फिर अपनी नशीले आखो को खोलते हुए बलदेव को देखती है "बीटा चोली तो उतार दो छील जायेगा दूध

mera"baldev अपने माँ क नशीले आखो में देखता है जिसके नशे लाल हो चुकी थी और छुडासी माल लग रही थी "रानी माँ स्मरण रहे ये आपके भरी दूध अब आपके नहीं मेरे है मेरी chhamiya"ye सुनते हे देवरानी अपने बेटे को अपने बाहो में भर्र लेती है और उसे ले कर बिस्तर पर पलट जाती है "हेहेहे कब से मेरे शरीर पर चढ़े हो संध की तरह आओ अब मेरे निचे मेरे rajaa"devrani ये कहते हुए बलदेव क ऊपर चढ़ जाती है और बलदेव क तरफ झुक कर अपने होठो से अपने बेटे क छाती को चूमने लगती hai,baldev अपने माँ क भरी लटके हुए मम्मी देख अपने एक हाथ को निचे ले जाता है और अपने धोती की बंधन को खींचता है और उसकी धोती खुल जाती hai,devrani ये देखती है और मुस्कुराते हुए अपना हाथ से धोती को खींच देती है और बलदेव का लौड़ा फनफनाता हुआ किसी नाग की तरह हवा में झूलने लगता है देवरानी "नटखट सैय्या का नटखट lauda"devrani अपना घागरा ऊपर कर अपने छूट को अपने बेटे क लैंड पर रख बैठ जाती है और इस बार बलदेव अपने माँ क गरम छूट को छू जाने सिहर उठता है और उसका लैंड ज़ोर ज़ोर से झटका मारने लगता है "देवरानी जल्दी नंगी हो जा तेरी गांड मार दू बहुत खुजली हो रही है न मेरी रानी माँ क गांड me"devrani हस्ती हुए अपने चोली क फीते को पीछे हाथ ले जा कर खींचती है और गाँठ खुलते हे देवरानी क बड़े चुचो पर लटक जाता है बलदेव बिना सोचे समझे चोली को खींचता है और अपने पीछे फेक देता है देवरानी क दूनो दूध हवा में लहराते हुए कोड़ने लगते है बलदेव अपने थप्पड़ बना कर अपने हाथो से कभी दये कभी बाये अपने माँ क वक्षो पर मारने लगता hai"aaah उफ्फ्फ राहाजा बेटे बेदर्दी सैय्याहा आआह"

"देवरानी जल्दी से अपना घागरा khol"devrani सुनते हे अपने कमर क पास हाथ रख अपने घागरा ढीले करते हुए उठ जाती है और अपने हाथो में घागरा लिए हुए लेते हुए बलदेव क दोनों तरफ अपने पेअर खड़े कए हुए सिर्फ जांघिए में कड़ी थी तभी देवरानी क गांड क छेड़ में इतनी ज़ोर से चिति काटने की पीड़ा होती है क देवरानी अपने बेटे क सामने हे अपने हाथ को पीछे ले जा कर अपने गांड क दरार में दाल कर अपने आँख बंद kye"aaaah थोड़ा धैर्य रख तेरी कुटाई होगी पेले होगी मेरी guda"baldev अपने माँ को यु देख उठता है और अपने माँ को बाहो में भरता है दोनों उन्नत चुचिअ बलदेव क चौड़े छाती से चिपक कर मर्दन होने लगती है बलदेव अपने माँ को निचे लेता कर खुद ऊपर चढ़ जाता है "रानी माँ ये खुजली ऊँगली से नहीं मेरे लौड़े से मिटेगी एक बार बस मेरा लौड़ा अपने गांड में घुस जाने दो फिर कैसे प्यास बुझेगी आपके गुदा की मेरी रंगीली maa"baldev अपने माँ क जांघिए को अपने दोनों हाथ में लिए हुए निचे करने लगता है और घुटनो तक कर देता है देवरानी अपने लम्बे केले क थान जैसी चिकनी जांघ को उठा अपने बेटे क साथ देती है और जैसे हे देवरानी क घुटनो से निचे गिरता है देवरानी अपने पेअर को झटकते हुए पहले एक पेअर को जांघिए से निकलती है फिर उसी पेअर से दूसरे पेअर में लटकी जांघिए को खींच कर दूर अपने जांघिए को फेकती है

"ाआअह जाआ राजा मेरे गांड माहार दीजिये मेरे धर्म पति परमेश्वर मई कभी सोची नहीं थी गांड की खुजली ऐसी होती है ाः ाआजाओ ना"

बलदेव देवरानी को खींचते हुए दबोचता है और देवरानी क दूध को दबाते हुए चूमता चेतना शुरू कर देता है और वही एक हाथ से निचे छूट पर अपने उंगलिओ से सहलाने लगता hai"aaaaaaah रआआआजाएआ ाआआप्के उंगलिओ में जाआडु है aaaaaah"baldev अब अपने माँ क मटके जैसे गांड को दबोचते हुए थप्पड़ मरने लगता है "आआह राणिमा जब आप जैसी रंडी मेरी पत्नी हो तो कोई सामान्य मनुष्य भी जादूगर हो jaaye"devrani क छूट में पानी क फौवारे छूटने लगता है और वो बलदेव से चिपट जाती है और अपने बेटे क साथ पलंग पर पलटने लगती है बलदेव भी गुथम गुठी कर अपने लौड़े को अपने माँ क पनियाये छूट पर लगा कर अपने माँ को चूमते हुए ालती पलटी मार रहा था "हम्म्म आआह माआ तेरी जाआएंड मार मार क लाआल कर दूंगा ाआज आआह"

"ाआअह राहाजा मुझे नहीं पता था क आपको जैसे हे बोलूगी तभी आप तैयार हो जायेंगे मेरी गांड मारने क लये आआह आप जैसा मर्द प् कर निहाल हो गई मई ाः"

"चुप कर रंडी अभी तेरी गांड में खुजली हो रही है तो क्या मई तेरे गांड को रात तक तरसने देता जब तू कहेगी तब तुझे पेलुँगा चाहे छूट हो या गांड या फिर तेरा मुँह जब इच्छा हो मांगो मई अपने रानी माँ की सेवा क लये हर काम छोर कर आजाऊंगा"

"आआह इतना प्रेम करते है हमसे क मेरी ख़ुशी क लये हर काम छोर कर आजायेंगे जब इच्छा करुँगी"

"माँ तुम्हे पत्नी इसलिए बनाया क तुम तड़पती रहो पति का काम यही होता है क पत्नी को इतना प्रेम दे क वो किसी दूसरे पुरुष का सोचे भी नहीं ,मेरे लये राज पात और गहतराष्ट्रा क सिंहासन से महत्वपूर्ण आपकी जवानी है राणिमा जिसे मई व्यर्थ कटाई नहीं जाने दूंगा आपके जवानी का रसपान करना मेरे जीवन की प्राथमिकता है"

"अब मेरी गांड मार लो बीटा मिटा दो मेरी खुजली ाआअह मेरे भोले सैंया दाल दीजिये न अपने पत्नी क योनि में अपना मुसल"

बलदेव देवरानी क गांड को दोनों हाथो से दबोच पूरी ताक़त लगा कर भीचते हुए दबाये रहता है देवरानी की आखे फैट कर बहार होने को थी और बलदेव अपने माँ क गांड को दबाये था और देवरानी अपने बेटे दुवारा नितम्बो पर ऐसा महसूस करती है जैसे बलदेव सिंह अपने बड़े पंजो से देवरानी क चुतरो को नोच लेंगे "aaaaaaaaaaaaah रआआआआजआआआआ उफ्फ्फफ्फ्फ़ मर्डरर गयी जाआएंड में डालिये ना"

"रानी मा कहता था न एक बार मेरा लैंड गांड में ले लोगी तो खुद गांड मरवाने आओगी देखो आज तुम्हारी गांड की खुजली ने तुम्हे झुका हे दया"

"आआह हाँ मई झुक गई बास कृपा कर क अपने मुसल से मेरी गुदा की जड़ तक दाल दो और इसके अंदर रेंगती हुई चीटियन को मार दो"

"धैर्य रखे माँ इसके पहले मई आपकी गांड मारु अपने दोनों मटको जैसे गांड की थपकी तो सुना दीजिये आप जब चलती है तो हलकी सुनाई देती है पर मुझे आअज ज़ोर से सुन न है"

"राजा जी आप भी न दिन प्रति दिन. इच्छाओ में बढ़ोतरी कए जा रहे हो ..ठीक है तो सुनिए फिर अपने रानी माँ की गांड की ताली की ध्वनि"

देवरानी अपने बेटे से थोड़े दूर जा कर अपने बड़े गांड को पीछे कए दोनों पतों को बहार निकल कर



तेज़ी से अपने दोनों गांड आपस में टकराती है और "phatt""phat"ki आवाज़ गूंजने लगती है देवरानी अपने आँख बंद कए अपने बेटे को अपने गांड क पतों को टकराते हुए थपकी सुना रही थी बलदेव क कानो में मानव मिश्री घुल गई हो उसके मुख से "हाआए कितनी प्यारी ध्वनि है माता shree"ye सुन कर देवरानी और जोश में आजाती है और ज़ोर से थपकी लगाने लगती है बलदेव अपने लौड़े को पकड़ अपने माँ क पास अत है "मा तेरी गांड में लौड़ा दाल दू झुक jaa"baldev अपने लौड़े को मुठियाते हुए कहता है जिसे सुन देवरानी की धड़कने तेज़ हो जाती है वैसे पहले भी उसने बलदेव से गांड ठुकवै थी पर ये कई दिनों बाद था और अब तक बलदेव धीरे धीरे हे अपने माँ की गांड मारा था "राआजा बीटा तेल लगा लीजिये सूखा मत डालिये कृपा क्र k"devrani दौड़ कर दराज़ से तेल निकल लेती है और बलदेव अपने माँ क बड़े गांड को मटकते हुए देख रहा था "राजा ये सांडे का तेल है इसे लगा लीजिये न इस से लिंग आसानी से गुदा में प्रवेश कर जायेगा "

बलदेव अपने माँ क हाथ से तेल की शीशी चहेते हुए फेक देता है और अपने माँ को भींच कर पकड़ लेता है "मा अब से कोई तेल नहीं सूखा गांड मारूंगा तेरी वैसे भी तेरे गांड में असली दर्द आज दूंगा मई"

"नहीं मई मर जाउंगी जब तेल लगा कर डालते हो जान चली जाती है सूखा मत डालिये पति महोदय आप से विनती करती hu"baldev मुस्कुराते हुड अपने माँ क छूट में अपने दो ऊँगली खच से पेल देता है और देवरानी क मुँह से आउच निकल जाता है "माँ तेरे छूट से मदिरा बह रही है तुम चाहो तो इसका सहारा ले सकती हो पर तेल कटाई nahi"devrani मुस्कुराते हुए अपने बेटे क सामने झुक जट्टी है और अपना एक हाथ पीछे ले जा कर अपने बेटे क लैंड को मुठियाते hue"aaaiye महाराज भिगो लीजिये अपने मुसल को नहीं तो सूखा ये मेरी गुदा से रक्त की नदी बहा dega"baldev भी अपने माँ की चुतराई देख रहा था वो आगे बढ़ता है और देवरानी क छूट पर भिड़ा लौड़ा को एक बार कस क अंदर पेलता है "pachhh"se पनियाई छूट में जड़ तक लौड़ा अंदर गड जाता है "आआआआह राजा एक बार में हे जड़ तक पेल दिए ुह्ह्ह्ह "

"रानी माँ अब अपने गांड मरवाने क लये लौड़ा को खुद भीगा "देवरानी समझते हुए अपने आसान में सुधर करते हुए पूरी कुटिया बन जाती है और अपने बेटे क लौड़े पर अपने भरी गांड को पीछे करते हुए "फट पछहः "से अपने बेटे क लैंड को छूट में अंदर बहार लेने लगती है



"ाः ाः आआ राजा बीटा आआह आपका लौड़ा लोहे की तरह कड़ा है हाय ाआअह उह्ह्ह ाआअह अपने रानी क गांड क छेड़ क चारो ओरे देखिये मुझे ऐसा प्रतीत होरहा है चीटियन काट रही है आह uhh"baldev अपने माँ की गांड क छेड़ को ललचाई नज़रो से देखता है और उसे अहसास होता है क देवरानी क गांड का छेड़ कितना छोटा है पर फिर वो सोचता है क पहले भी इसी गांड में लैंड पेल चूका है तो देवरानी आज की गांड ठुकाई सह लेगी देवरानी क छूट से झड़ने बह रहे थे जो अपने बेटे क नौ इंच लम्बे तीन इंच मुसल लौड़े को भिगो डाई थे

"ाआअह राहाजा जी अब दाल दीजिये गांड में अपने पत्नी क ाआअह मिटा दीजिये मेरी गांड की खुजली मेरे सैंया आआह कृपा कर क मेरी इच्छा पूरी कर दीजिये "बलदेव सलरपपपपपप से अपने लैंड को खींचता है और छूट क पानी में सना हु खौफनाक लौड़ा बहार आता है जिसे देख कर बलदेव भी दांग रह जाता है क उसका लौड़ा दिन बा दिन और बड़ा मोटा और भयंकर लगने लगा था जब से उसने अपने माँ की चुदाई शुरू क्या था

"अब गांड मार लू रानी माँ देवरानी पर आप चीखना मत दुपहर का समय है महल में गूंज जाएगी आपकी चीख"

"आह राजा डाल दीजिये अब और मत तड़पाइए अब इतना बड़ा मुसल मेरी छोटी से गुदा में दाल कर पेलिए तो चीखूंगी नहीं तो क्या करुँगी "

बलदेव देवरानी को धकेलता है पलंग पर और तकिया उठा कर "रंडी तू चिल्लायेगी हे और इस समय यदि गहतराष्ट्रा वासी सुने तो तुझे रंडी से काम नहीं samjhenge"baldev तकिया कमर क निचे लगता है और देवरानी का ओढ़नी ढूंढ़ते हुए ले अत है

"महाराज ये किस लिए "बलदेव मुस्कुराते हुए आता है और देवरानी का मुँह बांधने लगता hai,"Maharaj क्या कर रहे है नहीं छोड़िये न"

"साली तू चीखेगी बहुत आज तेरी गांड को खोद दूंगा अपने लौड़े से"

"महाराज सुनिए तो ऐसा कीजिये ये कपडा दे द्जिये मई मुँह में रख लेती हु आवाज़ डाब जाएगी ,मई कोई भेद बकरी हु जो मेरे मुँह को बांध रहे है "

"ठीक है जल्दी कर रंडी ले इसे अपने मुँह में भर ले जल्दी लेट"

देवरानी ओढ़नी फाड़ क कपडे का टुकड़ा अपने मुँह में भर्र लेती hai,ab देवरानी बोल तो सकती थी पर धीरे धीरे और उसके मुँह से साफ़ आवाज़ नहीं निकलती

"महाराज पहले गुदा क बहरी मुँह को भीगा दीजिये अपने लिंग की घुंडी से "

"तू लेती रह छिनाल तेरी गांड को मार मार क फैला दूंगा आज तेरी भरी भरकम गांड ने हे मुझे तुमसे प्रेम करने पर विवश क्या था रानी माँ"

बलदेव अपने लौड़े को गांड क छेड़ पर निशाना लगते हुए "आपके गांड क छेड़ पर भी चितन रेंगती है रानी माँ"

"ाः है मेरे राजाआआ डाल दीजिये"

बलदेव अपने लौड़ा को गांड क छेड़ पर ले जा कर हल्का धक्का देता है और अपने लौड़े का टोपा गांड में घुसा देता है और झटके से बहार खीचता है "आआआह राआजाए उसी किनारे पैर खुजली हो रही है aaah"baldev फिर से अपने लौड़ा को देवरानी क गांड क छेड़ में हल्का अपना घुंडी घुसा क



वापस खींच रहा था और देवरानी की सिसकी निकल रही थी जब भी बलदेव का लौड़ा का टोपा देवरानी क गांड में घुसता देवरानी अपने आखे बंद कए सुकून का सांस लेती जो गांड की खुजली सुबह से नाक में डैम कर दिया था महारानी देवरानी क वो थोड़ी शांत होती दिखी देवरानी को एक आस हुआ क अब ये अंदर घुस कर अंदरूनी खुजली भी मिटा देगा

"राजा अंदर तक खुजली हो रही है आआह दाल दीजिये धीरे से"

"रानी माँ अब भी आपकी गांड की कसावट उतनी हे है "

बलदेव अपने लौड़े को हाथ में पकड़ कर देवरानी क छूट पर निशाना लगता है और अपने लैंड को अंदर कर रहा था वही देवरानी अपने दांतो को पीसती है और उसके मुँह में कपडा भरा हुआ tha,baldev अपने मोठे लम्बे मुसल लैंड को अपने माँ क गांड में अंदर तक डालने लगता है



"ाआअह माआआ अआप्की गएआंद आआआह मेरे लैंड को पीस दी आह"

देवरानी अपने आखे बंद कए सिसकती है और उसके मुँह से चीख फुट पड़ती है "आआआआह आआआआह bassssssssss betaaaaaaah"devrani क आखो से ासु छलक जाते है और वो पूरा बदन ैठने लगती hai,baldev समझ जाता है क अभी धक्के लगाना उचित नहीं है और वो अपने माँ क आखो में देख "रानी माँ आप कहे तो निकल लू लैंड "

देवरानी अपने पलके झपकते हुए अपने आखो क ासु को निचे कर देती है जो धरा बनते हुए गालो से बहते हुए निचे जाने लगती है और अपना सर ना में हिलती है

बलदेव अपने माँ क गांड में जड़ तक लौड़ा डाले रुका था और उसकी माँ पीरा बर्दाश्त करने में लगी थी ,बलदेव अपने माँ क गांड में लौड़े को धसाये हुए लेट जाता है और देवरानी क आखो को चूमते हुए अपने लैंड को हल्का अंदर घुसता है और देवरानी इस बार अपने दांत पीसते हुए "उठ आआह ना राजा ाभ्ही naa"baldev समझ जाता है और अपने माँ क पीछे लेते हुए अपना लैंड गांड क अंदर हल्का हल्का धाक्केल रहा था



"माँ अब आराम मिला खुजली से "

बलदेव अपने माँ क गानन्द में लैंड डेल हुए अपने माँ क मम्मो को पकड़ दबाते हुए पुचकारते हुए पूछता है देवरानी क आखो में ासु थे पर अब उसकी गांड में रहत महसूस हो रही थी वो हल्का मुस्कुराती है अपने दर्द को छुपाते हुए "ाः राजा आपके लौड़े में जादू है जो काम मेरी ऊँगली घंटो में नहीं कर पाई वो आपने चुटकी में कर दया "

"रानी माँ आपके गांड की खुजली ऊँगली से मिट जाएगी तो मेरा लौड़ा किस काम का आपके गांड को तो मुसल लौड़ा चाहिए मेरे जैसा जो आपके भरी भरकम गांड को जड़ तक निचोड़ ले"

"उठ आआह आआह बहुत मज़ा अअअअअ रहा है aaaaah"devrani अपने आखे उन्माद से भरी आहे निकलते हुए कहती है बलदेव समझ जाता है क देवरानी की पीरा कुछ काम हुई है और वो अपने माँ को अपने ऊपर खींचता है खुद पीठ क बल लेट जाता है ,देवरानी अब भी अपने मुँह में कपडा दांतो से पकड़ी थी वो समझ जाती है क बलदेव अब आक्रमण की तैयारी कर रहा है वो डर भी रही थी पर अपने गांड चुदाई का मज़ा भी भरपूर ले रही थी "ाः राजा धक्के ज़ोर से नहीं मारना मेरे अच्छे पति"

बलदेव अपने माँ की गांड को अपने लौड़े पर निशाना लगते हुए "खछ "से लौड़ा अंदर गुदा में पेल देता hai"aaaaaaaaaaauh हे भग्वाआं मर्डर gaiiii"devrani अपने बेटे क सीने पर हाथ मरते हुए अपने दन्त को कंधे से गदा देती है



देवरानी क गांड में जड़ तक लौड़ा घुस जाता है और जो आयसु रुक गए थे वो फिर बहने लग जाते है "साली रंडी देवरानी अब मिटी तेरी खुजली आआह ये ले"

"ाः देवराआणि हम्म ये ले घच्हहहह पहछह "देवरानी क कमर पकड़ कर हुमच क



बलदेव अपना लौड़ा अपनी माँ क गांड में अंदर बहार पेलने लगता hai"aaaah आआआआह हम्म्म्म महह्ह्ह्ह ाआअह राआजाएआ माआर दया रे बालमाआआ ाआअह हर चींटी मर्डर गई रे aaah"devrani की गांड में घुसते हुए एक मधुर ध्वनि छोर रही थी साथ में देवरानी क पायल और चुडिओ की खनक सुन बलदेव और जोश में बढ़ जाता और अपनी पूरी ताक़त लगा कर लैंड पेलता " ाः मा अआप्की गएआंद कासी हुई है ाः अआपने मुझसे विवाह कर क जो ख़ुशी दी हो मई सदैव याद रखूँगा आह"

देवरानी अब जोश में आकर अपने बेटे क लैंड पर कूदते हुए अपने गांड में लैंड लेने लगती है

"आआह उह्ह्ह ाः रआआआज़ा आप को भी पति क रूप में पाकर निहाल हो गई आह उठ ाः"



देवरानी अपने हाथ से अपने एक गांड की पैट को पकड़ते हुए गांड क दरार में घुसे मुसल को आसानी से कूदते हुए अंदर तक ले रही थी और बलदेव बिना रुके गांड में घापा घप्प धक्के मार रहा था

"आआह राआजा मेरी कमर दुखने लगी ाः"

बलदेव अपने माँ को खींच कर लिटा देता है और अपने माँ क भरी वक्षो को मुँह में भर्र लेता है



देवरानी क गांड और पीठ पर हाथ जमाये कस क अपनी माँ क गांड मारने लगता है "आआह रआआआज़ाअ गाआआआंड माआरने क लये कही थी ाआअह जाआएंड फ़ायद दिया रे आआह रे मर्डर गयी"

"साली देवरानी अभी कहा तेरी गांड फायदा हु अभी तेरी गांड परखच्चे उदा देता हु"

बलदेव देवरानी क गांड में लैंड घुसाए हुए खड़ा हो जाता है और दोनों गांड क निचे हाथ लगाए देवरानी क लम्बी टांगो को सीधा कर देता है "ाआअह ताआग क्यू फ़ायद रहे है raja"baldev बिना बोले देवरानी क गांड में धक्के मरने लगता है



"आआह राजा धीरे आआह आआह ाः ाः ऐसा लग रहा है मेरे दोनों टांगो अपनी तलवार जैसे लैंड से काट कर दो भाग कर डोज ाः दया कीजिये बलदेव जी छोड़िये न"

"आह ये ले साली तुझसे विवाह क्या छोड़ने क लये नहीं ये ले साली अब तेरी प्यास बुझी आआह"

बलदेव ज़ोरदार झटको से अपने माँ क पुरे शरीर का नस खोल दया था और गांड की हर परत को चीरता हुआ लैंड तेज़ गति से गांड क परखच्चे उदा रहा था देवरानी क मुँह में जो कपडा फसा था वो निकल जाता है बलदेव क ताक़त वॉर धक्के से और देवरानी अब अपना मुँह फाड़े चिल्लाने लगती है "aaaaaaaaaah आहाहा माआर दया रे ाआअह मई मर्डर गई उफ्फ्फ aaaaaaaaaah utaaaaaaaaaaaaro niche"devrani अपने हाथ से बलदेव क दोनों कंधो पद छाती पर मारने लगती hai,devrani को उठाये हुए गांड मारते हुए बलदेव थक जाता है क्यू क देवरानी खूब गदराई माल thi,baldev देवरानी क गांड में लैंड फसाये हे बिस्तर पर झुका देता है और घुटनो को मोदी देवरानी चिल्ला रही थी चीख रही थी "देवराआणि चिल्लाओ मत दुपहर का समय है "देवरानी इस बात को समझते हुए मुँह पर हाथ रखती है और अपने चेख़ो को दबाने की कोशिश करती है देवरानी को शांत देख बलदेव अपना लैंड फिर पूरा बहार खींचता है "ghacch"se फिर पूरा लैंड अंदर गांड क जड़ो तक पेलने लगता है



"घछहः पछहः पछहः फट्ट्ट्ट घछहः पछहः आआआह राजा ाआअह गांड का भरता बना दया आआह" बलदेव अपने दोनों हाथो से अपने माँ क बड़े गांड को पकडे बिजली की रफ़्तार से लैंड पेल रहा था "ाः मा आआआह मेरी प्रेमिकाआ मेरी पत्नी मेरी रांड ाः ये ले तेरी पूरी खुजली मिटा दूंगा ाआअह ये ले घप्प घप्प लैंड अंदर जा रहा था छ्ह छान देवरानी की हाथो की चुड़िआ बज रही थी खान खान देवरानी क पैरो क पायल पुरे कक्षा में माँ बेटे अपने जवानी क खुसबू बिखेर रहे थे ,देवरानी अपने आखे बंद कए अपने बेटे क हर झटके को अपने गांड में महसूस कर रही थी और धीरे धीरे अब बलदेव क गहरे धक्के को भी सह जाती और अपने चीख को अपने अंदर समेटे झुकी हुई अपने बेटे को गांड दे रही थी

"ुह्ह्हह्ह ाआअह राजायआ बीटा aaaaaaaaaa ुह्ह्ह्ह ाआअह ज़ोर से पेलो आआह और ज़ोर से आआह में स्खलित होने वाली हु आआआह में गई आआआह और ज़ोर से पुरे अंदर ताकि की खुजली मिटा दया ाः मेरे राजा जी आआआह और ज़ोर से आआआह मेरी गुदा को अपने लिंग से भेद दीजिये आआह मेरे पेट तक धक्का लग रहा है आआह उहहहमाए गयी"



"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah मई gayeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee उह्ह्ह आआआआआह मेरे राजायआ झाड़ड़ड़ गयी मेरी छूट आआआह"

देवरानी अपने आखे बंद कए थे और चीखते हुए झड़ने लगती है उसके छूट का पानी इतना निकलता है क वो छूट से टपकने लगता है

"ाः ये ले रंडी मेरा लौड़ा अपनी गांड आआह ये के बोल मिट गई खुजली तेरे मटको जैसी गांड की "

देवरानी झड़ते हुए सिसक रही थी और अपने गांड को अपने बेटे क लैंड पर धकेलते हुए "आआह राजा गुदा की जड़ तक की खुजली मिट गई आआह बहुत सुकून मिल रहा hai"baldev ये सुनते हे जोश में आ कर अपने माँ क कमर को पकड़ ज़ोर ज़ोर से धक्का मारता है और देवरानी का पूरा शरीर हर घाछे से सरक जाता है "ाआअह राआजाए अब छुर्रिये ना ाः ाः नही आआह ाः नाआआ"

"साली राँद तेरे गांड की खुजली मिट गई और झाड़ गई तो क्या मई भी छोर दू ले साआली मेरा लौड़ा रंडी महारानी देवरानी "

बलदेव अब देवरानी क गांड में धक्के मारते हुए देवरानी क कमर को पकड़ लेता है



बलदेव पूरी म्हणत से अपने माँ की गांड मार रहा था और इस बार बलदेव क लैंड से गुदा अंतिम परत छील जाती है और लहरने लगती है जिस से देवरानी क मुँह से "aaaauch"nikalti है और उसके आखो से ासु बाह जाते है

"आआआह राजाआआ बहुत दुःख रहा है छोड़िये ना ाः लगता है छह गया कृपा कर छोर दीजिये महाराज "

बलदेव अपने माँ क आखो में फिर से आये ासु देख अपने लैंड को धीरे धीरे अंदर बहार करने लगता है "महारानी देवरानी भरी दुपहर अपने बेटे का लैंड अपने गांड में ले रही हो कुटिआ बन क पुरे राज्य में तो घूँघट कए सटी सावित्री बनती फिरती हो "

"ाः राजा मई एक पतिव्रता महिला आज भी हु आप अब मेरे पुत्र नहीं पति हो महाराज आपके लौड़े क निचे नहीं रहूंगी तो पतिव्रता कैसे कहलाउंगी आपके चरणों की धूल है महारानी देवरानी आपने हे तो इस दुखिया को खिला दया किसी फूल की तरह"

"मई तुमसे बहुत प्रेम करता हु रानी माँ पुरे गहतराष्ट्रा में आप जैसी पारसी माल जिसके थान और गांड पुरे गहतराष्ट्रा में कोई नै आपको प् कर मेरा जीवन सफल हो गया देवरानी ाः "



"ाः राजा ाआपने तो मेरे गांड की चमड़ी उधेड़ कर रख दया आआह मेरे राजा बीटा मेरे भोले पति आआआआह"

बलदेव धीरे धीरे अपने माँ को झुकाये जड़ तक अपना लैंड पेल रहा था और वो सिसकते हुए अपने बेटे क लैंड को बर्दाश्त कर रही थी

"रानी माँ अब तो तुम पूरा लैंड अपने गांड में आसानी से ले लेती हो फिर भी इतना चीखती हो अगली बार से पूरा मुँह बांड कर गांड मरूंगा तेरी"

"आआह ाः आपने जगह बना लय अपने लैंड क लये मेरी गांड में नहीं तो इतने से छोटे छेड़ में आपका एक हाथ का लैंड जाना असंभव था आह बहुत पीरा हो रही है महाराज लगता है अंदर खून बह रहा है छीलने क कारन "

"हाँ तेरा हो गया राँद तो मई छोर दू मुझे झड़ने दे "

"तो अति शीघ्र झाड़ दीजिये ाः बहुत जलन होने लगी अंदर "

"जब तक कस क पेलुँगा नहीं तुमको पता है देवरानी मेरा लैंड का वीर्य बहार नहीं आएगा"

देवरानी एक लम्बा सांस लेती है और अपने बेटे क खातिर हिम्मत करते हुए "अआप पेल लीजिये मेरी गांड चाहे रक्त की नदी बह जाये झाड़ लीजिये जल्दी कीजिये ज़ोर ज़ोर से पेलिए aaah"devrani अपने बेटे को खुला छूट देते हुए उकसाती है और अपने हाथ से बिस्तर क चादर को पकड़ लेती है

"ाः रानी तेरी गांड थोक कर भरता बना दूंगा आआह ाः ये ले साली गांड वाली रानी माँ"

बलदेव देवरानी को झुकाये बेतहाशा घाछे मारते हुए गांड पिलाई करने लगता है देवरानी क गांड में जलन हो रही थी पेरू क भाग में दर्द हो रहा था पर मरती क्या न करती एक पतिव्रता पत्नी थी अपना पत्नी धर्म निभा रही थी

"ाआअह उह्ह्ह आआआआह राहाजाजा आआआह उह्ह्ह ाआअह पेल दोऊ ाः मार्लो मेरी गएआंद राआजा बेटा"



"आआह रआआआआआई ये ले अपने पति महाराज बलदेव सिंह का लौड़ा अपने गांड में ाः ये ले साली आआह यह ाः ये ले "

बलदेव अपने माँ को झुकाये लैंड अंदर तक पेलते हुए अब देवरानी क गर्दन पर हाथ रखता है और ज़ोर ज़ोर से पुरे शरीर की शक्ति झोकते हुए अपने माँ क पुरे गांड क जड़ तक अपना हुल्लाबी लौड़ा पेल रहा था

"आआह ाः उठ आआह राजा ाः आआह जल्दी छोर दीजिये न पानी अपना वीर्य ाः नहीं आआआआह माआआर दाहाला रे राआजा बीटा आआआह मर्डर गयी माई आआआह उठ"



बलदेव अब अपने बाये हाथ से देवरानी क पतले सुराही दर गर्दन को जकड लेता है और दये हाथ से अपने माँ क बाह पकडे खूब कास क गांड पेलने लगता है "aaaaaaaaaaaah रआआआआअजायआ चुऊरीए बससससस आआआआह छोर दीजिये "बलदेव जोश में आ जाता है और अपने माँ क गर्दन को अपने बड़े पंजो से पूरा जकड कर दबा देता है जिस से देवरानी की आखे फैट कर बाहर आने को होती है "ुरहहहह ुर्घह्ह्ह आआआआह गुर्र्ररर uhhhhhhh"baldev पीछे से धापा धप गांड पेले जा रहा था देवरानी बोलने में भी असमर्थ थी "आआह राआणि मायआ आआह ये ले साली ाः ये ले उफ़ तेरी गांड में कितनी गर्मी है महारानी देवरानी ाः किसी घोड़ी की तरह तू गांड मरवाती है आआह मज़ा आएगया तेरे कैसे हुए गांड को तीतर भीतर कर ाआअह धज्जिया उदा दया तेरी कासी हुई मटको जैसी गांड जिसे मटका कर तू पहले अपने हे बेटे को तरसती थी आआआआह उह्ह्ह ये ले ाआअह मई गया ाआअह ले मेरा वीर्या तेरी गएआंद में आआह अपने गांड पीछे कर साली आआआआह मई झड़ने वाला हु राआणि माँ"

बलदेव जो झड़ने क करीब था वो अपने माँ की गांड क गुदाज़ की गरम अहसास को अब सह नहीं पता है और बिस्तर पर गिर जाता है देवरानी देखती है उसका बीटा थक कर गिर गया वो फ़ौरन अपने बेटे क लौड़े को अपने गांड में घुसाए ऊपर से अपने बेटे क लैंड पर ऊपर निचे होने लगती है



"आह राहाजाआ मेरा थक्क गया आआह मई झाड़ दूंगी अपने गांड में आपका लैंड दबा क आआह मेरे घोड़े ाआअह"

"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah raaaaaaaaaani माआआआ मई gayaaaaaaaaaaaa आहाहा uffffffff"baldev जैसे हे झड़ने लगता है देवरानी "phakk"kar क उठती है और बलदेव का लौड़ा उसके गांड से वीर्य छोरता हुआ बहार आता है

"राजा बीटा मुझे अपना वीर्य चखाओ आअज पीनी है मुझे पूरी रांड बना दो "

बलदेव भी जोश में आता है और खड़ा हो जाता है अपने लैंड को मुठियाते हुए अपने बैठी हुई माँ क खुले मुँह में अपने लौड़े का वीर्य डालने लगता है



Devrani:mmmmmmhhhh आआआआआह उफ़ ाःह ममममः कितना गरममम है ाआअह पिलाओ मुझे

बलदेव अपने आँख बंद कए हुए अपने लौड़े का वीर्य देवरानी क मुँह में झाड़ रहा था और देवरानी अपने बेटे का वीर्य बड़े चौ से जातक रही थी

"अहम्म्म्म ाआअह कितना नमकीन है ाः सच में अब मुझे आपका वीर्य स्वादिष्ट लगने लगा है महाराज आह मममममः"



"ाआअह महाराज कितना वीर्य है ाआअह मममममः मुँह में दीजिये राजा. बीटा बहार गिर रहा है मंम्ह आआह "देवरानी अपने जीभ से जो होठो क ऊपर गिर रहा था उसे छत्ते हुए जातक रही थी बलदेव अब जा कर अपने आखे खोलता है उसके हांफने की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रहा tha,baldev अपने माँ को घुटनो क बल निचे बैठी वीर्य पीते हुए देख मुस्का बैठता है

"धन्यवाद् महाराज मेरी इच्छा पूरी करने क लये अआप थक गए लगता है"

"महारानी देवरानी आप चाहो कुछ क्षणों में फिर से मेरा लौड़ा तैयार हो जायेगा आपकी सेवा करने क लये ,आपके धन्यवाद का पत्र तो ये लैंड महाराज है इन्हे धन्यवाद करो श्रीमती जी"

"ये तो है हमारे सेवा क लये लैंड महाराज की तो जितनी प्रसंशा की जाये काम है इतनी छोटी आयु में आपने इसे इतना शक्तिशाली बना दया है क मेरे जैसी अधेड़ आयु की महिला भी इस घोड़े क आगे पानी भर्ती है"



"बहुत बहुत धन्यवाद मेरे प्रिय हुल्लाबी लौड़ा आपने सदैव मेरी इच्छाओ का सम्मान क्या है ummha"devrani अपने बेटे को एक टाक देखते हुए अपने बेटे क लैंड को चूमती है "लैंड महाराज बास आप मुझे गर्भवती कर दीजिये आपकी आरती उतरूंगी मई"

बलदेव अपने शरीर क पसीने को पोछते हुए बिस्तर पर जा कर बैठता है "माँ मई स्नान कर लेता hu"baldev स्नान घर में घुस जाता है और थोड़ी देर में हे स्नान कर अपने वस्त्र पहनता है पर देवरानी अब भी बैठी थी और अपने बेटे को निहारे जा रही थी सोच रही थी क उसका जीवन कैसे बदल गया और आज वो कितनी खुश है

Devrani:man me)Baldev बीटा तेरी इस अभागन माँ क भाग्य खोल डाई तूने कल तक जिस देवरानी को कोई पूछता नहीं था आज वो महारानी बन गई गहतराष्ट्रा की और तुम जैसा पति पाकर इतना प्रेम मिल रहा है ,भगवन ने मेरी सुन ली मैंने ऐसे हे जीवन की कामना की थी भगवन ने दे दया

Baldev:kya हुआ देवरानी क्या सोच रही हो जाओ और स्नान करो देखो कैसी लग रही हो



Devrani:q मई इतनी बुरी लगती हु जब आपका काम किर्या हो जाता है

देवरानी का शरीर पसीने से भेजा था बाल उलझे थे और पुरे चेहरे से ले कर वक्षो तक वीर्य से भीगा हुआ था

Baldev:Devrani तुम बुरी तो नहीं लग रही हो इतनी प्यारी लग रही हो क जी चाहता है फिर पेल du,tum तो एक रांड सी लग रही ..बिलकुल छुडासी रांड



देवरानी अपने बाल को सवारते हुए मुस्कुरा देती है अपने बेटे क बात पर

Devrani:to इस रांड को ऐसा रूप किसी और ने नहीं आपने हे दया है बलदेव सिंह जी अपनी पति सजी सॉरी सबको पसंद है किन्तु थुकि ठुकाई थकी इस रूप में नहीं पसंद किसी भी मर्द को आपने तो छोड़ क पेल क अपने पत्नी का बुरा हाल कर दया और अब वो कैसे पसंद आएगी

बलदेव बात को समझते हुए देवरानी क पास आता है और उसके आखो में देखते हुए

"देवरानी अआप अब भी उतनी हे सुन्दर लग रही हो जितनी सुन्दर सजी सॉरी लगती हो मेरी आत्मा तो अब भी कह रही है क ऐसे छुडासी माँ जो काम की देवी है उसे छोर न जाओ ..देवरानी मई आपसे प्रेम करता हु सिर्फ काम वासना क लये नहीं आपसे विवाह kya..vishwas नहीं अपने पति पर?"

बलदेव देवरानी को विश्वास जताते हुए कहता है देवरानी शर्मा कर छुई मुई सी हो जाती है

"हाँ है वैसे आप कहा chale"devrani एक हाथ से अपने बेटे का हाथ पकड़ लेती है

"रानी मा अभी सैनिको को युधा अभ्यास करवाना hai"devrani उदास हो कर अपने हाथ से बलदेव क हाथ को ज़ोर से पकड़ते हुए "मत जाइये न मेरा डिल नहीं कर रहा आपको जाने देने का"

"देवरानी मई समझ सकता हु प्रिये परन्तु गहतराष्ट्रा की सुरक्षा क लये जो करना है उससे पीछे नहीं हो सकता ये बताओ पीछे गुदा में अधिक तो नहीं छिला"

"महाराज ये देखिये पूरी गुदा लाल हो गई है अंदर की दीवारे छीलने क कारन हल्का खून निकल आया और जलन सी हो रही hai"devrani पीछे घूम अपने बेटे को अपने गांड का हाल दिखती है

"देवरानी मुझे क्षमा कर दो मेरे कारन तुम्हे ..."

"चुप kijiye..is दर्द क लये तो मई बरसो तदपि हु आप का लिंग यदि इतना शक्तिशाली है तो इसमें आपका क्या दोष ..अब जाइये अब मुझे सोना है मेरा कमर टूट रहा है आह"

देवरानी अपने कमर पर हाथ रखे बोलती है

"देवरानी तुम कहो तो रुक जाओ तुम ठीक तो हो न"

"हाँ अब इतने शक्तिशाली मर्द का मुसल लेने क बाद यही होता है आप जाइये वैसे रात में आपकी प्रतिसखा करुँगी"

देवरानी ये कह कर एक कामुक मुस्कान देती है

"क्यू मेरी रानी माँ को और गांड मारवणी है"

"अब कुछ दिन तक पिछवाड़े पे हाथ भी मत लगाना हाँ पर तब तक मेरी योनि आपके सेवा क लये उपस्थित रहेगी मेरे बालम"

ये कह कर देवरानी लज्जा कर अपना सर निचे झुका लेती है

"ठीक है मई संध्या तक आऊंगा होली की तैयारी भी करनी है वैसे आज रात में छूट की कुटाई करवानी है तो तैयार रहना एक रांड की तरह सज सवार कर"

"ठीक है आपकी पत्नी आपके लये सज्ज सवार कर रहेगी .."

बलदेव मुस्कुराते हुए बहार जाने लगता है और रुक कर पीछे मुड़ता है उसकी माँ पूरी नग्न कड़ी थी उसके बड़े दूध हवा में हिल रहे थे उसके होठो पर दूध पर गर्दन पर बलदेव क वीर्य से भरा था

"रानी माँ इस अवस्था में किसी क सामने मत जाना नहीं तो लोग रांड samjhege"baldev ये कह कर आगे बढ़ता है और देवरानी घूम कर अपने चेहरे को दोनों हाथो से धक् लेती है तभी उसके मुँह से निकलता है

"बलदेव जी..."

बलदेव अभी चौखट क पास पंहुचा था क सुन कर रुक जाता है

Devrani:pratiksha करुँगी रात में

देवरानी अपने बेटे क आखो में देखते हुए एक आस से मुस्कुराते हुए कहती है जिसे देख बलदेव मुस्कुराते हुए अपने सर को हाँ में हिला कर अपने बड़े कदमो से बहार चला जाता है देवरानी धीरे से चलते हुए दरवाज़ा बंद करती है और अपने बिस्तर का चादर बदल कर स्नान करती है और नए वस्त्र पहन कर बिस्तर पर लेट जाती है



Devrani:man me)aaaj संध्या में सभा में गहतराष्ट्रा की जनता से नहीं मिल पाऊँगी है पूरा शरीर टूट रहा hai..baldev ने तो मेरी पिछवाड़े का नस नस खोल दया ,,

देवरानी अपने बेटे की मर्दानगी और उसके वीरता और बुद्धि का सोचते हुए खुश हो रही थी क उसके बेटे में इतने गन है और कब उसे नींद आजाती है उसे पता भी नहीं चलता .

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 178

पारस

मल्लिकाईजहान भूरिया अपने हुजरे में सोई थी रात भर्र छोड़ने का असर था क भूरिया क बदन का नस नस दर्द कर रहा था अपने बेटे शमशेर ने भी तो जैम कर अपने अम्मी जान को भूके शेर की तरह पेला था

दुपहर क 12 बजे भूरिया की आखे खोलती है और भूरिया को पुरे बदन में एक चुभन अहसास होता है और वो अपने दोनों हाथ को ऊपर कर क अंगड़ाई लेती है और अपने दोनों पेअर को भी तान लेती है पर तभी उसके छूट में एक ज़ोर का दर्द उठता है और वो अपना हाथ सीधे अपने छूट क मुहाने पर रख "है रे ज़ालिम उफ्फ्फ ऐसा मुहर मारा मेरी छूट पर ाः शमशेर तूने जान हे लेली अपने अम्मी की "भूरिया समझ जाती है क बदन को ैठने से छूट में दर्द बढ़ जा रहा है वो कहते हुए सिसकते हुए उठती है और आईने क सामने कड़ी होकर अपने आप को देखती है भूरिया क आखो क निचे की गहराई बता रही थी क वो रात भर जाएगी है और उसके चेहरे की खिली हुई चमक बता रही थी क वो सिर्फ जगी नहीं रात भर तबियत से चूड़ी है उसका वो जिस्म जो जार वक़्त बुरखा में क़ैद रहता था उसे शमशेर ने चूस कर निचोड़ लिया था आज भूरिया का जिस्म का हर हिस्सा ख़ुशी में झूम रहा था तभी समां की आवाज़ आई

"बड़ी अम्मी क्या अआप जग रही है "

"हाँ आजाओ शहज़ादी समां"

भूरिया को ध्यान अत है वो तो दरवाज़ा खोली हे नहीं वो जल्दी से आगे बढ़ कर दरवाज़ा खोलती है और सामने मुस्कुराते हुई अंदर आती है

sama:badi अम्मी अभी तक सो रही है आप आज दरबार में भी नहीं आई

hooriya:han बेटी वो सुल्तान से देर रात तक गुफ्तुगू होती रही

sama:badi अम्मी अब पूरी रात तो शौहर बीवी सिर्फ गुफ्तुगू नहीं करते मई इतनी भी बची नहीं हु

hooriya:chup कर ..बहुत जुबां लगाने लगी है

भूरिया घूम कर जाने लगती है और समां की निगाह मल्लिकाईजहान भूरिया क ऊपरी पीट और गर्दन क हिस्से पर जाता है जहा पर कई निशान थे और साफ़ पता चल रहा था क वो किसी मर्द क दिए हुए निशान है

sama:man me)Badi अम्मी क साथ अब्बा जान इतनी दरिंदगी से तो पेश नहीं आये होंगे क्यू क आज क पहले मैंने कभी बड़ी अम्मी क बदन को इतना टूटा हुआ नहीं पाई

hooriya:kya हुआ समां आप जाओ और अपने पढाई पर ध्यान दो

sama:badi अम्मी आज आप बहुत ज़्यादा थकी हुई नज़र आरही है इतनी थकी हुई तो कभी नहीं दिखी

hooriya:khamosh रहो समां और जाओ यहाँ से सबको पता है रात मई सुल्तान क साथ थी क्या तुमको नहीं पता

sama:muaaf कर दीजिये बड़ी अम्मी वो तो मई

hooriya:apna दिमाग काम लगाओ हर जगह ज़ेहन इश्तेमाल करना गलत है

sama:theek है बड़ी अम्मी तब तक मई शमशेर भाईजान का हाल भी ले लू क्यू क सुल्तान ने कहा है आप दोनों आज दरबार नहीं आये

होइया का डिल अंदर से दहल जाता है उसे लगता है क कही किसी को भनक न लग जाये क पिछले रात सुल्तान बेहोश थे और शमशेर अपने अम्मी क साथ रंगरलिया मन रहा था अपने अब्बा जान क हे पलंग पर

hooriya:tum शमशेर को छोर दो वो सो रहा होगा मई बात कर लुंगी उस से

sama:ji जैसा आप ठीक समझे अम्मी

sama:man me)badi अम्मी आप और शमशेर भाई नदी पर मिले इस बात को आपने सुल्तान से छुपाया इस बात क पीछे ज़रूर कोई बड़ी वजह है

समां अपने बड़ी अम्मी को देखते हुए बहार चली जाती है भूरिया समां क जाते हे अपने आखे बंद कर एक रहत की सांस लेती है और नहाने क लये चली जाती है उधर समां अपने मन में सोचते हुए जा रही थी

sama:man me)badi अम्मी मुझे क्यू शमशेर भाईजान क पास जाने क लये रोकी आज से पहले तो कभी मन नहीं की और आज मेरे हसी मज़ाक की बातो पर भी वो गुस्सा हो रही thi,mujhe शमशेर भाईजान क पास जाना चाइये कही कोई सुराग मिल जाये

समां सोचते हुए अपना मन बना लेती है और शमशेर क हुजरे क तरफ जाने लगती है और पहुंच कर अपने भाई को आवाज़ देती hai,shamshera सिर्फ पायजामे में सोया था उसने ऊपर कुछ नहीं पहना था तभी उसके कानो में आवाज़ आती है "भाईजान उठ जाइये दुपहर हो गया है उठ jaiye"shamshera अपने आखे खोल झटक देता है उसका बदन भी आज टूट रहा था अपने वज़नी अम्मी को उठा उठा क रात भर छोड़ा जो था शहज़ादे शमशेर ने "उफ़ हाँ समां क्या हुआ आता हु uhh"shamshera उठता है और अपने आखे आधी बंद कए हे दरवाज़ा खोलता है और समां की नज़र अपने भाई पर पड़ते हे आखे फटी की फटी रह जाती है ,शमशेर क छाती गर्दन और कंधो पर लाल लकीरे और दांत क निशान थे

shamshera:Kya हुआ समां ऐसे बूट बने क्यू कड़ी हो अंदर आओ

sama:man me)Ya खुदा जो मई सोच रही हु वो सच नहीं हो ,कल रात में मई शमशेर भाई क हुजरे में आई तो वो नहीं थे ,रात क खाने तक तो शमशेर भाईजान महल में हे थे तो बहार जाने का सवाल हे नहीं होता अगर वो हमबिस्तरी कए और ये निशानात किसी औरत क नाखुनो क है तो वो औरत इसी महल में hai,aur मेरा शक अब और गहरा हो गया हो न हो बड़ी अम्मी भूरिया और शमशेर भाईजान छी मई क्या सोच रही हु

shamshera:sama क्या हुआ पगली अंदर आओ

sama:ji भाईजान

shamshera:kaho क्या बात है

शमशेर देखता है क उसकी सौतेली बहिन की नज़र उसके सीने पर है तब उसे ख्याल अत है क समां को कही शक न हो जाये और वो फ़ौरन अपने कपडे पहनने लगता है

sama:bhaijaan सच बताइये आपके पुरे जिस्म में ये निशान कैसे आगये

शमशेर तो जैसे हड़बड़ा सा जाता है और समां को देखते हुए

"समां मेरी बहिन तुम जासूसी का काम मुझपर छोर दो ये जो निशान है वो घोड़े से गिरने पर आये है"

sama:par मैंने तो पहले नहीं देखे

shamshera:bharosha नहीं है अपने भाई पर

sama:bharosa है और आपको तो मई अपने सेज भाई से भी ज़्यादा मानती हु

shamshera:to बोलो कोई बात है

sama:nahi भाईजान वो अब्बा जान ने कहा था देखु आप कहा है तो आगे वैसे अब्बा जान आप क लये रिश्ता ढूंढ रहे है

shamshera:kya???

sama:han bhaijaan..par क्यू आप खुश नहीं लगते कही वो शहज़ादी क लये आप पागल तो नहीं हो गए

shamshera:kis शहज़ादी?

sama:bhaijaan.apne हे कहा था न आप किसी हुस्न की मल्लिका से इश्क़ करते है पर वो आपसे नहीं करती

shamshera:han..han वो

sama:to बता दीजिये भाईजान अब्बा जान से आप किसी को चाहते है तो आप की शादी उसी से होगी

shamshera:han.na हां वो..

shamshera:man me)Pagal समां तुम तो पीछे हे पद गई अब मई अब्बा जान को कैसे बोलुंग क मुझे अम्मी से शादी करनी है

sama:kya हाँ न ..आप चाहे तो सुल्तान की ताक़त का इश्तेमाल कर मन सकते है मेरी भाबी को

shamshera:han वो तो ठीक है पर शायद वो नहीं मने तो प्यार में जबरदस्ती क्या करना

sama:man me)ya ये कहिये भाई क वो मान गई आपके मेहबूबा मई चाहती हु क मेरा भाई इतना बड़ा गुनहगार न हो और मेरी सोच गलत निकले ..एक पर्देदार इज़्ज़तदार पाकीज़ा माँ जिसे पुरे पारस में इज़्ज़त देते है लोग वो कैसे अपने हे बेटे से इश्क़ कर सकती है हमबिस्तरी कर सकती है..

shamshera:Sama अभी मई शादी नहीं कर सकता क्यू क जिस से मई इश्क़ करता हु वो नहीं कर पायेगी शादी मुझसे

sama:aap कोशिश कीजिये कही सुल्तान अब्बा जान इसका रास्ता निकल दे

shamshera:theek है मई सोचता हु इस बारे में तुम जाओ सुबह सुबह दिमाग ख़राब करने आजाती हो

sama:aap गुस्सा क्यू हो गए भाईजान

shamshera:gussa नहीं आप जाए मई आ कर सबसे इस पर बात करूँगा

sama:theek है भाईजान

समां एक क़ातिल मुस्कान देती है और हुजरे से चली जाती है शमशेर खड़ा सोचता है और उसे गुस्सा आने लगता है "यह समां का मुँह कैसे बंद करू इसे शक तो हो हे गया है अगर ये किसी को कह दी तो अम्मी जान से बात करता हु"

शमशेर अपने नहाने धोने में लग जाता है उधर सुल्तान मेरे वाहिद अपने दरबार से हुजरे में पहुंचते है उनके ज़ेहन में यही बात बैठी थी क आखिर दोनों माँ बेटे क्यू नहीं आये दरबार आज वो अपने हुजरे में पहुंचते है और जैसे हे अंदर घुसते उन्हें पलंग क निचे कोई चीज़ पड़ी हुई दिखती hai,sultan उस चीज़ क पास जाते हुए बैठ जाते है और अपने हाथ में उठा कर "बहुत खूब भूरिया ये तुमने मेरी दी हुई अंगूठी को यहाँ छोरा है आखिर उसके ऊँगली की अंगूठी यहाँ कैसे आई भूरिया ने क्यू निकला होगा इसे "

सुल्तान मेरे वाहिद अपने सोच में गम थे उन्हें पता नहीं था क रात भूरिया बेगम ने अपने हाथ से अंगूठी निकल दी थी सुल्तान की अपने बेटे क कहने par,sultan अपने हाथो को उठा ताली मरता है और कनीज़ अंदर आती है

kaneez:Hukam जहाँपनाह

sultan:Jaao और भूरिया बेगम को भेजो

kaneez:Jo हुकम जहाँपनाह

इधर शमशेर जल्दी से तैयार होता है और अपने अम्मी क हुजरे की तरफ चल पड़ता है उसे दर सत्ता रहा था क कही समां को सब पता न चल जाये उधर समां भी सोचती रहती है और उसे पता नहीं क्या सूझता है वो वापस अपने सौतेली बड़ी अम्मी भूरिया क हुजरे में जाती है तभी भूरिया अपने कपडे पहन कर निकलती है

hooriya:ary समां तुम

sama:aap तो मुझे डांटती रहती हो बड़ी अम्मी क्या मई अपने बड़ी अम्मी क पास नहीं रह सकती

समां नाटक करते हुए अपना मुँह फुला लेती है जिसे देख भूरिया मुस्कुरा देती है आखिर भूरिया भी तो समां को अपनी बेटी समझ कर हे परवरिश की थी

hooriya:nahi पगली तेरी ुत पतंग बातो से गुस्सा अत है बैठ

hooriya:man me)is से मुहब्बत से हे काम निकलना होगा नहीं तो सर दर्द बन जाएगी ये मेरे और शमशेर क प्यार क बीच

ये सोच कर भूरिया सिहर जाती है क्यू क वो अपने हे बेटे से प्यार करने लगी थी और नहीं चाहती थी क महल में किसी को ये पता चला ,समां और भूरिया बैठ कर बाते करने लगती है तभी शमशेर की आवाज़ आती है

"अम्मी जान क्या मई अंदर आ सकता hu"hooriya का डिल ज़ोर से धड़कने लगता है और वो उस पल को याद करती है जब रात क अँधेरे में उसका बीटा अपना मुसल लैंड उसके छूट में डेल हांफ रहा tha,hooriya की छूट में चीटियन रेंगने लगी थी आखिर छूट को भी उसके चटोरे आशिक़ का अहसास हो गया था

hooriya:aa ाआजाओ शहज़ादे

भूरिया अपने लरजते होठो से कहती है जिसे समां बखूबी समझ रही थी वो तो इसी सुराग में आई थी क शमशेर और भूरिया मिलते है क नहीं इस बात को समझ कर क उसका शक गहरा हो गया hai,shamshera अपने लम्बे कदमो से अंदर आता है और झुक कर सलाम करता hai,shamshera की नज़र एक टाक भूरिया बेगम क मखमली गद्देदार चर्बीदार बड़े गांड पर थी जो वो निकल कर बैठी थी ,समां देख रही थी क शमशेर लगातार अपने माँ क जिस्म को घूरते हुए गांड को खा जाने वाली नज़र से देख रहा है ,

shamshera:aap ने याद क्या था अम्मी जान

sama:man me)Badi अम्मी तो सुबह से कोई खबर नहीं भेजी भाईजान क लये फिर क्यू झूट बोल रहे है

भूरिया का शर्म से बुरा हाल था आज पहली बार समां क सामने शमशेर इतनी बुरी तरह से घर रहा था शमशेर को वो पल यद् अत है जब रत में अपने अम्मी क बड़े को दबोच क थप्पड़ मरते हुए छोड़ा था

भूरिया अब न चाहते हुए भी अपने बेटे क फेके हुए पैसा को पकड़ते हुए" हां आओ शमशेर कुछ बात करनी थी खड़े क्यू हो"



भूरिया अपने गांड को इस तरह घूरे जाने से और अपने आशिक़ बेटे की दीवानगी देख मुस्कुरा देती है शमशेर भूरिया क निक़ाब में कैसे बहार को निकले हुए गद्देदार गांड को देखते हुए बैठ जाता है

sama:bhaijaan आप ठीक तो है कहा खो गए

shamshera:kahi नहीं

शमशेर अपने नयी नवेली दुल्हन से नज़रे नहीं हटा प् रहा था भला कैसे हटाए उसकी अम्मी जो रात में उसके लैंड को अपने छूट में ले कर उछाल रही थी और शमशेर को अपना शौहर मणि थी दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और रात की दृश्य दोनों क दिमाग में घूम रहा था भूरिया अपने बेटे को इस अंदाज़ में देख शर्म से पानी पानी हो कर अपने नज़रे निचे झुका लेती है

sama:uhha उठाए कहा खो गया आप दोनों

shamshera:aaah मेरा सर ाः कोई मेरे लिए फलो का रस ला देगा

sama:kya हुआ भाईजान

shamshera:Behan कमज़ोरी महसूस हो रही है फलो का शरबत ले आओ न

sama:man me)bahane भी बनाने लगे उफ़ सचमुच ये दोनों माँ बेटे प्यार में है

sama:mai लाती हु भाईजान

समां उठ कर जाती है और शमशेर अपने अम्मी को देख मुस्कुराते हुए

shamshera:ammi जान अआप बेहद खूबसूरत लग रही हो आप का चेहरा चाँद सा चमक रहा है बरखुरदार डिल करता है अभी लिटा क छोड़ दू आपको

भूरिया अपने बेटे की बात सुन कर छू मुई सी शर्मा जाती है पर अब उनके बीच की दीवार तो गिर गई थी और दोनों एक हो गए थे इसलिए वो हिम्मत करते हुए कहती है

"आप क इश्क़ में हे खिली हु जनाब मेरे हुस्न को चमकाने क असली हक़दार तो आप है वैसे शुकरिअ मेरी तारीफ करने क लये"

"अम्मी जान अपना गांड दिखाइए न बहुत बड़े लग रहे है इस लिबास में कसम से डिल चाहता है गांड में अपना लौड़ा दाल क पेल दू"

"आपको तो हर वक़्त बास मुझे लिटाना हे है इतना हे इश्क़ है आपसे "

"इधर मेरी आखो में देखो भूरिया तुमने रात में अपना जिस्म मुझे सौंप कर इस दरिंदे को आवारा को हवसी को इंसान बना दया है अब मेरी ज़िन्दगी सिर्फ तुम पे न्योछावर है मेरी जान जल्दी से उठाओ न निक़ाब "

"अच्छा जब इतनी मुहब्बत करते है तो दिखा देती है उधर देखिये कही समां न आजाये "



भूरिया बेगम अपने काफटाण को निचे से उठा देती है अंदर एक काळा रंग की जांघिए में बड़े गांड को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी शमशेर तो गांड क बेपर्दा होते हे लार टपकते हुए अपने लैंड को मसल रहा था भूरिया मुस्कुराते हुए अपना काफटाण छोर देती है

"अम्मी जान ये क्या इतने मसालेदार मालदार गांड को धक् दिए इसके तो अपने लैंड से थोक थोक क साडी चर्बी ढीली कर दूंगा"

"चुप करो मई कभी नहीं दूंगी पीछे से "

हुरिये हस्ते हुए अपना अंगूठा दिखती है

shamshera:man me)gaand तो तेरी मारूंगा हे भूरिया बेगम बास देखता हु कब तक तू अपने गांड क छेड़ को छुपाती है शमशेर se,ek दिन गांड में किल्ली थोक धज्जिया नहीं उदा दी तो मेरा नाम शमशेर नहीं

shamshera:ammi जान रात कैसी गुज़री आपकी मज़ा आया क नहीं अपने बेटे क साथ रात गुज़र क

भूरिया अपने पलके झुका लेती है और मुस्कुराते हुए निचे झुका लेती है क्यू क दिन दहाड़े अपने मुँह से अपने बेटे को वो कैसे कहती क हाँ उसके छूट की छल्ली कर दिया है उसने ,शमशेर समझ जाता है क उसकी अम्मी अब भी शर्मा रही है

shamshera:idhar आइये अम्मी जान मेरी बाहो में आइये अपने नए शौहर क पास आइये आपके जिसमे को दबा क देखु कितना रस भरा है

भूरिया अपने आखे निचे कए हुए अपने बेटे क पास जाने लगती है उसे अब दर नहीं था क समां कभी भी आ सकती है

"बीटा जानी आपने रात मेरी हर ख्वाइश पूरी कर दी आपका कैसे शुकरिअ करू मेरे सनम"

भूरिया अपने गांड मटकते हुए अपने बेटे क बाहो क घेरे में चली जाती है और शमशेर अपने



अम्मी को बहो में ले कर खूब ज़ोर से भींच लेता है "अम्मी जान आप जैसी अरबी माल को थोक क मई निहाल हो गया बस अब आपको ठोकना बाकि है बास एक बार आप को मई पीछे से थोक लू तो मेरी दिली तमन्ना पूरी हो जाएगी"

"शहज़ादे मई मिश्रा की हु पर हाँ मेरी नस्ल अरबी है ,,और पीछे से ठोकना गलत है ऐसा कोई नहीं करता "

"अम्मी जान मिश्रा से अब्बा ने आपको यहाँ नहीं लाया होता तो शायद मई कभी आप जैसी माल छोड़ नहीं पता गजब की चुड़क्कड़ माल हो आप"

शमशेर अपने माँ को ज़ोर से भीचते हुए चल रहा था और सोफे से लगते हुए वो अपने अम्मी जान को सोफे पर धीरे धीरे गिराने लगता है



शमशेर अपना लौड़ा अपने अम्मी क छूट पर रगड़ते हुए अपने अम्मी को आधा सोफे क कोने पर लिटा देता है "अम्मी जान अब कब छोड़ने डौगी जल्दी बोलो मेरे इस इंतज़ार नहीं होता मुझे आपको जैम क छोड़ना है "

"शमशेर अपने आप पर काबू रखो बीटा चाहती तो मई भी हु पर दिन में करना खतरे से खली नहीं और समां भी हमे शक की निगाह से देखती है"

"शक की निगाह से नहीं अम्मी जान उसे अब यक़ीन हो गया है क उसकी भाबी कोई और नहीं तुम हो "

"वो कैसे शमशेर..?"

"अम्मी जान मई सिर्फ पाजामे में सो रहा था वो आगे और आपके कटे हुए निशान देख सोचने लगी"

भूरिया ये सुन कर सन्न रह जाती है और शमशेर को एक धक्का दे कर दूर करती है

"तुम कितने आराम से कह रहे हो ये बात तुम्हे पता है क्या होगा अब हम दोनों का सर कलम कर दया जायेगा अगर सुल्तान को बता दी समां "

"अम्मी जान आप घबरा जाती हो आपका आशिक़ इतना ाआसानी से सुल्तान तक ये बात नहीं जाने देगा "

"मुझे पता था वो कोई चल चल रही है मैंने उसे मन क्या था तुम्हारे हुजरे में जाने से फिर भी वो गई उसे पक्का यक़ीन हो गया है क हम दोनों क बीच प्यार है शमशेर कुछ करो नहीं तो हमारा प्यार सिर्फ एक दिन का रहेगा "

"अम्मी जान शमशेर जासूस है और होने वाला सुल्तान भी बेबुनियादी बाते और शक क बिना पर समां इलज़ाम लगाएगी ?"

"वो तो ठीक है पर सुल्तान शैतानी दिमाग रखता है"

"अम्मी जान आप जैसी पाकीज़ा औरत पर वो बिना सुबूत क ये इलज़ाम लगाएगी क हूरजहाँ बेगम जो कभी किसी को अपना नाख़ून नहीं दिखती वो गैर मर्द से नहीं अपने हे बेटे क साथ सोती है ?"

"शमशेर एवं मुझ पर भरोषा करती है"

"हाँ अम्मी जान कोई पागल भी समां की इस बात को नहीं मानेगा क आप का और मेरा रिश्ता है"

तभी किसी की आवाज़ दोनों क कानो में गूंजती है

"मल्लिका इ जहाँ आपको सुल्तान याद कए है "

hooriya:theek है मई आती हु

भूरिया शमशेर को देख रही थी अब दोनों सोचते है क आखिर क्यू सुल्तान ने बुलाया है

hooriya:kahi इस समां की बची ने जा कर राज़ तो नहीं खोल दिए

shamshera:ammi आप घबराये नहीं मई देखता हु

तभी समां अंदर आती है और वो कनीज़ क साथ आई थी जिसके हाथ में शरबत था

sama:kaneez भाईजान को शरबत दो

shamshera:shukria मेरी बहिन

शमशेर शरबत का गिलास उठा कर पीने लगता है और कनीज़ बहार जाने लगती है

sama:bhaijaan आप मुझे अपने बहिन मानते है तो क्या मई आपको शरबत भी नहीं पीला सकती मैंने ताज़ा फलो क बनवा कर लाये है

shamshera:mujhe पता है तुम इस भाई को कभी अकेला नहीं छोड़ोगी

sama:aap का और हक़ का साथ नहीं छोर सकती

shamshera:waise आज से मई मैखाने क तरफ देखना भी बंद कर दूंगा

sama:aap सच कह रहे है भाईजान ऐसा क्या हुआ अचानक से

शमशेर अपने अम्मी को देखते हुए

"क्यू क अब किसी को मेरी ज़िन्दगी अपने ज़िन्दगी से ज़्यादा ज़रूरी है"

sama:ye सुन कर तो पुरे महल क लोग खुश हो जायेंगे पर देखते है आप कब तक अपने आप को मैखाने से दूर रखते है

shamshera:dekh लेना बास अब मुझे शराब की और शबाब की ज़रूरत नहीं

शमशेर अपने अम्मी क भरी गांड और फिर मोठे दूध को देखते हुए अपने अम्मी क होठ फिर उनकी गहरी सुरमे से भरी आखो में देखते हुए कहता है

hooriya:man me)tumhari जान अब मेरे लिए अब अपनी जान से भी क़ीमती है शमशेर मई तुम्हारी हर गलत आदत को छुरा दूंगी जिस से तुम्हारे जान को खतरा हो

भूरिया अपने मेहबूब अपने बेटे क प्यार को महसूस कर मुस्कुराती है जिसे समां तिरछी नज़र से देख रही थी

sama:theek है अम्मी जान तो अब मई चली हु कुछ पढ़ लिख लेती हु

hooriya:jaao बेटी इल्म सबसे क़ीमती है दुन्या में मई भी जाउंगी सुल्तान क पास

समां वह से चली जाती है सोचते हुए अपने हुजरे में

sama:man me)aap जैस पाकीज़ा औरत इतनी नीच हरकत कैसे कर सकती है अपने हे बेटे क साथ कैसे सो सकती है बड़ी अम्मी ,पारस की सुल्ताना जिसे देखने क लये लोग तरसते है हम सब का भरोसा तोड़ दया है आपने मल्लिका इ जहाँ हूरजहाँ ये बात का सुबूत नहीं मेरे पास पर ये बात पक्की है क पर्देदार माँ अपने हे बेटे से जिस्मानी तालुकात बना रही है ,,ठु है आप पर बड़ी अम्मी आप तो दुन्या को बताती थी परदे में रहने क लये और मुझे भी कहती थी क किसी मर्द क सामने अपने नाख़ून तक धक् क जाओ ताके उसकी नज़र नहीं पड़े

इधर भूरिया अपने कदम बढ़ाते हुए सुल्तान हुजरे क तरफ जा रही थी साथ में शमशेर भी ज़िद्द कर जाने लगता है

"बीटा मुझे डर लग रहा है कही उन्हें पता न चल जाये और सुल्तान मुझे उसी जगह जान से मार दे तुम भाग जाओ शमशेर"

"अम्मी जान मुहब्बत हम दोनों ने क्या है तो सजा सिर्फ आपको क्यू जिस दिन मौत आएगी हम दोनों साथ मरेंगे और वैसे भी मुझे नहीं लगता समां ने अपना मुँह खोला होगा "

भूरिया अपने बेटे क साथ धीरे कदमो क सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे क तरफ बढ़ रही थी सुल्तान अंदर हुजरे में बैठा अपने बेगम को दिए हुए अंगूठी को हाथ में लिए सोच रहा था क आखिर ये अंगूठी कैसे फर्श पर आई

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 179

पारस

भूरिया अपने बेटे क साथ धीरे कदमो क सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे क तरफ बढ़ रही थी सुल्तान अंदर हुजरे में बैठा अपने बेगम को दिए हुए अंगूठी को हाथ में लिए सोच रहा था क आखिर ये अंगूठी कैसे फर्श पर आई

मल्लिका इ जहाँ भूरिया अपने बेटे शमशेर क साथ सुल्तान मेरे वाहिद क हुजरे पहुंचते hai,darwaze पर दो कनीजी बैठी थी वो उनको रोकते हुए

kaneez:Sultan का हुक्म है अंदर कोई नहीं जाये वो अपने बीवी नाज़ बेगम क साथ है

hooriya:man me)naaz तुम तो कहती हो क तुम्हे सुल्तान से नफरत है फिर भी सुल्तान क हुजरे में उनके साथ अभी क्या कर रही हो मेरी सौतन नाज़

hooriya:kaneez सुल्तान से कहो मल्लिका इ जहाँ भूरिया आई है

हुरिये अपने चेहरे पर इस वक़्त निक़ाब डाली थी वो महल में कही भी अपने चेहरे को ढके बिना बहुत काम निकलती thi,shamshera खड़ा हो कर सोच रहा था क आगे क्या किया जाये जिस से से समां उसका साथ दे कैसे मनाये वो अपने सौतेली बहिन को तभी कनीज़ सुल्तान से पूछते हुए इजाज़त लेती है और सुल्तान अंदर से भूरिया को आने क लये कहते hai,hooriya कनीज़ को हल्का घमंड से घूरते हुए देखती है और अंदर चलने लगती है शमशेर अपने अम्मी की ऐडा देख किसी मजनू की तरह आखे सेक रहा था भूरिया अंदर जाती है पीछे से शमशेर अपने अम्मी क लटके झटकते गांड को देखते हुए अपने आखे सकते हुए अंदर अत है भूरिया को भी पता था उसका बीटा उसके गांड पर नज़र गड़ाए है और वो ज़ोर से अपने गांड हिला कर चल रही थी

भूरिया अंदर आ कर सुल्तान इ जहाँ को अदब से सलाम करती है देखती है क नाज़ बेगम वही बैठी है हाल देख कर लग जाता है क सुल्तान भूरिया की सौतन नाज़ बेगम क साथ जिस्मानी खेल खेल रहे थे

hooriya:aapne याद क्या था सुल्तान इ जहाँ

तभी शमशेर पीछे से आ कर अपने अब्बा को सलाम करता है

shamshera:salam अब्बा जान

shamshera:man me)aap का शुकरिअ अब्बा जान आपने मेरी अम्मी पर ध्यान नहीं देने क लये और अपने दूसरी बीइओ पर देने क लये ,ये नहीं होता तो अम्मी जान कभी मेरे निचे नहीं सोती

sultan:aaaiye भूरिया बेगम ..बैठो शमशेर .हम अभी बास आपकी हे बाटे कर रहे थे

hooriya:man me)Makkar सुल्तान हमे पता है तुम यहाँ अपने नाज़ बेगम क साथ ऐश कर रहे हो तुमने मेरी फ़िक़र की हे कब

naaz:aaiye न भूरिया बाजी कैसी है आप आज दरबार में भी नहीं आई

hooriya:mai ठीक हु

भूरिया का चेहरा मलिन होजाता है क सुल्तान किसी और बीवी क साथ है तभी शमशेर अपने अम्मी क आखो में देखता है



सुल्तान की नज़र भूरिया क ऊँगली में फांसी नै अंगूठी पर थी जिसे शमशेर ने पहनाया था

शमशेर अपने आखो क पलके झपकते हुए इशारा करता है जैसे कह रहा हो "दुखी न हो मई हु na"aur शमशेर मुस्कुरा देता है भूरिया से भी रहा नहीं जाता उसके आखो क सामने रात की चुदाई का दृश्य आजाता है और वो अपने नए शौहर को देख मुस्कुरा देती है चेहरे पर निक़ाब का ये फायदा हुआ था क भूरिया की मुस्कराहट जो एक चूड़ाकड रांड सी थी जो चुदाई की ख़ुशी मिलने क बाद देती है वैसी थी उसे सुल्तान और नाज़ बेगम देख नहीं पते

hooriya:man me)chalo चेहरा पर निक़ाब करने का कुछ तो फायदा hua,hooriya ये कहते हुए भूरिया अपने चेहरे पर लटक रहा निक़ाब को ऊपर फेक देती है और उसका चमकता हुआ खूबसूरत चेहरा उजागर हो जाता है

भूरिया और शमशेर अब नाज़ और सुल्तान क सामने बैठ जाते है सुल्तान को इस बात की इल्म नहीं थी क कुछ पल पहले हे भूरिया अपने बेटे शमशेर क बाहो में झूम रही थी और अपने बेटे क लौड़े को अपने छूट से रगड़ रही थी

shamshera:kya बाते चल रही थी नाज़ अम्मी

naaz:beta अब इस महल में सिर्फ दो हे बाते है एक तुम्हारी शादी कब होगी दूसरी सुल्तान कब बनोगे तुम शमशेर

sultan:naaz बेगम अब इस शमशेर को क्या समझौ 25 साल की उम्र हो गई अब तक शादी नहीं करना चाहता भूरिया बेगम इसे समझाए

भूरिया अपने आशिक़ बेटे की शादी का सुनते हे उसके गले में ठसका लगता है

hooriya:ahha ाहहए जी सुल्तान मई भी चाहती हु मेरी नस्ल आगे बढे

भूरिया अपने सीने पर पठार रख अपने भाव को छुपाते हुए कहती है जिसे शमशेर समझ जाता है और अपना हाथ धीरे से बढ़ा कर अपने बगल में बैठी अम्मी क हाथ पर रख हल्का सहलाता है भूरिया अचानक से पलटी तो शमशेर हल्का मुस्कुरा देता है

shamshera:abba जान मई शादी करूँगा मई खुद चाहता हु मेरी नस्ले बढे पर

sultan:par कब शमशेर ?हमारा ख्वाब है सबसे पहले दिल्ली जीतना फिर पुरे दुन्या पैर हुकूमत करना है

hooriya:man me)Tum इस लालच में कब अपना हे घर बर्बाद कर लये सुल्तान तुम्हे अंदाज़ा नहीं वैसे शुकरिअ तुम्हारा शमशेर जैसा मर्द अब मेरी जवानी की आग बुझा रहा है

naaz:ab शमशेर ऐसा न करो देखो अब तुम्हारी अम्मी भी चाहती है क वो अपने बहु को देख लें है न भूरिया बाजी

hooriya:hummm नाज़

भूरिया एक झूठा मुस्कान अपने चेहरे पर लिए कहती है अंदर से उसका डिल दहल उठा जैसे कोई क़ीमती चीज़ उस से चीन ने की बात होरही हो

shamshera:man me)Naaz बेगम को क्या पता मैंने अम्मी की बहु अम्मी को हे चुना है और वो अपने आप को देख हे चुकी है

shamshera:mujhe कुछ वक़्त दीजिये

sultan:nahi..tumhare सुधरने का एक हे इलाज है तुम्हारी शादी मई बहुत जल्द कोई शहज़ादी देख कर तुम्हारी शादी कर dunga.hooriya बेगम आप हे समझाए अपने साहबज़ादे को कब तक ैय्याशिए करेंगे ये अब ये उम्र नहीं खेलने कूदने की

shamshera:abba जान मैंने सब कुछ छोर दिया अब आपको शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगा

सुल्तान अपने बेटे को देख चौकते हुए पूछता है

sultan:kahi मई ख्वाब तो नहीं देख रहा हु

shamshera:abba जान आप सही सुने

sultan:agar ऐसा हो जायेगा तो मेरी मानो तुम्हे दुन्या का सबसे ताक़तवर सुल्तान बनने से कोई रोक नहीं सकता

shamshera:Ji अब्बा जान

sultan:Hooriya बेगम क्या खिला दिया आपने अपने बेटे को इतना बदलाव जो कल तक पारस छोर कर जाने की बात कर रहा था वो आज..

hooriya:Shehzade ज़िद्दी तो है पर एक माँ अपने बेटे को कैसे मानती है पता है मुझे

भूरिया अपने बेटे को देख इस बार मुस्कुरा देती है सुल्तान और नाज़ को ये आम माँ बेटे का एक दूसरे को देखना लगता है पर अब तो ये दोनों आशिक़ हो गए थे

hooriya:ji सुल्तान तो आपने इस लये हमे बुलाया था

sultan:nahi भूरिया बेगम ये देखिये

सुल्तान अपने बटुवे में से अंगूठी निकलता है और उसे देखते हे दोनों माँ बेटे का होश उड़ जाता है

sultan:ye अंगूठी जो हमारे शादी की है उसे आपने फर्श पर फेक दया भूरिया बेगम ? बताइये क्यू ?

Hooriya:woo सुलतान

shamshera:man me)ye क्या ये तो मैंने हे अम्मी से निकलवा दया था

sultan:Hooriya बेगम आपने हमारी शादी की निशानी फेक दी और आपने ये अपने हाथो में कौन सी अंगूठी पहनी हो

hooriya:Sultan आप सुनिए फिर गुस्सा हो लीजियेगा ये अंगूठी तो रात हे निकली हु मई क्यू क ये बहुत कासी हुई थी पुराणी जो हो गई hai..ab मोटापा बढ़ गया है तो इसलिए निकल दी नहीं तो बाद में परेशानी हो जाती

sultan:aur आपने ये कैसी अंगूठी पहनी ho?agar आपको निकलना हे था तो आपको इसे संभल क रखना था

hooriya:Sultan आपने हे तो कहा था क दूसरी अंगूठी पहन लेने क लये क्या सुल्तान आप रात की बाटे भी भूल गए और आपके दिए हुए हमारी शादी की निशानी को क्या मई फेक सकती hu?...mai इसे सुबह में बहुत धुंडी मैंने तो उतर क राखी दी थी ऊपर

sultan:ye मुझे निचे पलंग क पाए क पास मिली है

hooriya:ab आप रात नशे में थे तो आप तो जानते हे है..

sultan:hmm ठीक है हुरिये बेगम

सुल्तान शरमाते हुए सोच रहा था क रात में उसने नशे में भूरिया को छोड़ा है पर उसे हकीकत का अंदाज़ा भी नहीं था

hooriya:ab इजाज़त दीजिये सुल्तान

भूरिया अपना हाथ पीछे ले जा कर अपने चेहरे को फिर से निक़ाब से धक् लेती है तभी नाज़ की नज़र भूरिया क गर्दन पर जाती है जहा पर काट क निशान थे

naaz:hooriya बाजी ये आपके गर्दन पर कैसे निशान है

hooriya:mujhse क्या पूछ रही है सुल्तान से पूछिए नशे में ये अंधे हो जाते है

shamshera:man me)Sultan को ये नहीं पता क रात में भूरिया की चुदाई मई क्या हु वो नहीं अम्मी भी झूट ाचा बोलने लगी है.

शमशेर अपने अम्मी की तरफ देखता है



भूरिया अपने बाए आँख शमशेर को देख आँख मरती है

shamshera:man me)saali आँख मार रही है बदल गई है एक डैम कल तक जो औरत झूट बोलने का सोच भी नहीं सकती थी आज वो झूट बोल कर सुल्तान को हे चुटिया बना दी ,भूरिया बेगम कमल की औरत है

भूरिया अपने बेटे को आँख मारते हुए उठ जाती है सुल्तान और नाज़ भूरिया को देख नहीं पते है पर नाज़ सोच में पद जाती है

naaz:man me)kya बात है जो शमशेर अब नशा और कोठा पर ऐयाशिए करना छोर रहा है

sultan:aap जाइये और आराम कीजिये सुल्ताना भूरिया थक गई होंगी आप

hooriya:ji सुल्तान

भूरिया उठ कर जाने लगती है और शमशेर भी उठ खड़ा होता है

shamshera:abba जान मुझे भी इजाज़त दीजिये

सुल्तान अपने हाथ क इशारे से जाने क लये कहता है और शमशेर क जाते हे नाज़ बेगम को पकड़ लेता है

naaz:aaah छोड़िये न रात भर्र भूरिया बेगम क साथ मज़े कए

sultan:ab क्या करू मज़बूरी है भूरिया बेगम को भी वक़्त देना पड़ता है

उधर भूरिया आगे आगे जा रही थी शमशेर पीछे पीछे चल रहा था

shamshera:ammi जान रुकिए तो

hooriya:bass करो घूरना तो बंद करो कोई देख लेगा

भूरिया रुक कर पीछे घूमते हुए कहती है शमशेर पास आजाता है और भूरिया क आखो में देखते हुए अपने हाथ कमर में लगा कर खींचता है

"अम्मी जान आप जैसी खूबसूरत हुस्न पारी क लये जान भी दे दू"

"कोई ज़रूरत नहीं जाओ और आराम करो"

"अम्मी जान चलो फिर मेरे हुजरे में आराम दे दो मेरे इसको"

शमशेर अपने अम्मी क हाथ को पकड़ अपने लैंड पर रख देता है भूरिया इधर उधर देखते हुए हाथ पीछे खींच लेती है

"बस्स्स करो शमशेर "

"अम्मी जान अब आप की छूट

को कब में चपड़ चपड़ अपने ज़ुबान से चाट पाउँगा आज रात में ?"

"नहीं शमशेर.."

"क्यू नहीं अम्मी जान मई आपके बिना नहीं रह सकता हु मुझे आप हर रोज़ अपने बिस्तर में चैहिये"

भूरिया अपने बेटे से दूर हट्टे हुए "पर शहज़ादे समां मेरे साथ रहती है और रात में सोने आजाती है मेरे पास अगर उसने देख लिए तो"

"मई नहीं जनता मुझे छोड़ना है आपको किसी भी हाल में"

"उफ़ समझो शमशेर रात में हम सुल्तान क हुजरे में रात रंगीन कर लिए आज रात मुश्किल है"

"अम्मी जान मुझे कुछ नहीं पता आप को जो बहाना बनाना हो बनाओ पर मेरे हुजरे में आजाना अपनी छूट कुटवाने"

"शहज़ादे तुम पकड़ लोगे तो सुबह तक छोड़ते रहोगे मई नहीं आसक्ति"

"अम्मी जान जल्दी फ़ारिग़ कर दूंगा किसी को शक भी नहीं होगा मेहेरबानी कीजिये अपने आशिक़ पर"

भूरिया शमशेर की बात सुन हस्स देती है फिर सोचते हुए

"ठीक है मई आजाऊंगा पर एक बार हे करने दूंगी"

"चलेगा मेरी जान और हाँ आज निक़ाब क निचे कुछ पहन कर मत आना मेरी जान नंगी आना"

"पर बीटा ये कैसे मुमकिन है महल में कोई भी समझ गया तो"

"अम्मी आप आधी रात को आना पर निक़ाब क निचे बिलकुल नंगी आना अपने बेटे क पास "

भूरिया अपने बेटे क आखो में देख रही थी अपने बेटे क फरमाइश पर वो हैरान थी उसके मुँह से सिर्फ इतना निकल पता है "शैतान कही ka"itna कह कर जाने लगती है शमशेर अपने डिल पर हाथ रख कर

"आये हाय क्या ऐडा है मेरी जान रात का इंतज़ार रहेगा"

गहतराष्ट्रा राज्य

संध्या क 4 बज रहे थे महाराज बलदेव सिंह अपने सैनिको को युधा अभ्यास करवा रहे थे राज महल में महारानी देवरानी अपने बेटे से भरी दुपहर में गांड मरवा क चैन की नींद सो रही thi,ye समय था महारानी देवरानी क सभा में जाने का जहा वो गरीब वंचित प्रजा की मदद करती थी केवल महिलाये उनके पास आती और अपने दुविधा महारानी से kahti.Kamla रसोई में काम कर रही थी तभी रानी षुरूश्ती आती है

shurushti:Kamla ..महारानी कहा है

kamla:Wo ऊपर होंगी लगता है

shurushti:Q सभा में नहीं जाना बहार गहतराष्ट्रा की महिलाओं का टाटा लगा है

kamla:ab पता नहीं रानी षुरूश्ती वो आज जाएँगी या नहीं

kamla:man me)Gaand कुतवा क देवरानी सो रही होगी अपने बेटे से सुबह से तो खुजली कर रही थी

shurushti:kya हुआ तुम तो महारानी देवरानी की दासी हो तुम्हे पता नहीं

kamla:Rani षुरूश्ती वो लगता है महाराज बलदेव भी कक्षा में है महारानी देवरानी संग इसलिए

shurushti:Oh ये बात है

षुरूश्ती हस्ते हुए कहती है

kamla:ji महारानी कैसे जाओ ऊपर उनको उठाने पता नहीं किस अवस्था में हो अभी नया विवाह हुआ है

shurushti:tum बहुत भोली बनती हो पर हो nahi..Baldev ऊपर नहीं है वो सैनिको क साथ अभ्यास कर रहा है जाओ और महारानी से पूछ लो

kamla:jo आज्ञा रानी षुरूश्ती

कमला अपना काम छोर सीडीओ से देवरानी क कक्षा की ओरे बढ़ती है और षुरूश्ती वापस अपने कक्षा में चली जाती है ,देवरानी अंदर अपने पलंग पर सो रही थी तभी उसके कानो में आवाज़ गुंजी "महारानी देवरानी ो महारानी उठ जाइये 4 बज gaye"devrani की आँख धीरे धीरे खुलती है और उसके कमर में ज़ोरो का दर्द हो रहा था "aaah"sisakte हुए देवरानी उठती है "आआए kamla"devrani धीरे कदमो से उठ कर दरवाज़ा खोलती है और उसे अंदर लेते हुए

"कहो कमला क्या बात है "

"महारानी आप भूल गए सभा में जाना नहीं आपको आज "

"उफ्फ्फ नहीं आज तो मेरी हिम्मत नहीं कमर दुःख रहा है बहुत"

"महारानी जब ज़ोर का झटका नहीं सह पति हो तो मन क्यू नहीं कर देती अपने प्रेमी बेटे को "

"चुप कर कामिनी क्यू मन करू मई ये हमारे पति पत्नी की बात है"

"अच्छा तो महारानी आप दर्द्द कहती हो पर ठुकवाना तो ज़ोर से हे है "

"कामिनी अब मरद मेरा बलदेव है वो जैसे ठोके तुम्हे उस से क्या"

"वो मरद भी तो आपके लिए मई हे चुनी हु मुझे पता था बलदेव महाराज आपके हर नस ढीली कर देंगे "

"तो क्या तू मुझसे बदला ले रही हो "

"महारानी मई आपकी बहिन जैसी हो शत्रु नहीं"

"हम्म कमला तुम सचमुच मेरी बड़ी बहिन जैसी हो दासी नहीं"

"वो सब छोड़िये आज आप सभा में जाओगे या नहीं महारानी"

"नहीं आज तो रहने दे कमला मेरा अंग अंग टूट रहा है "

"लगता है महारानी पीछे का कुवा महाराज बलदेव ने अचे से खोदा आपकी खुजली मिटा दिया या नहीं"

"कुट्टी कामिनी मेरा पति है बलदेव अब वो मेरी गांड की खुजली नहीं मिटाएगा तो कौन मिटाएगा"

देवरानी गुस्से में आकर कमला क सामने गांड शब्द का प्रयोग कर लेती है पर जैसे हे उसे अहसास होता है उसका मुँह खुला रह जाता है

"महारानी आप को क्या हुआ आप मेरे सामने ऐसे शब्द का प्रयोग भी कर लिए तो कोई बात नहीं पर अपने सासु माँ षुरूश्ती और राज माता क सामने मत कीजियेगा"

"चुप कर कामिनी तू हे मुझे क्रोधित कर दी अन्यथा ऐसे गंदे शब्द का प्रयोग कभी नहीं की"

"पता है महारानी जी ऐसे शब्द का प्रयोग नहीं सिर्फ ऐसे शब्द की चीज़ का प्रयोग महाराज बलदेव जी करते है जो आपके पास है"

"धत्त्त कामिनी ..वैसे मई आज बहुत खुश हु वो मेरे बास एक बार कहने पर मुझे यहाँ गॉड में ले आये उठा क और डिल से प्यार क्या"

"केवल डिल से महारानी या किसी और चीज़ से भी वैसे मई बोली थी नाह आपके पीछे की खुजली बास मोटा लम्बा हथियार मिटा सकता है ऊँगली नहीं"

"चुप कर जा मई सो जाती हु "

"हाँ सो जाइये महारानी फिर रात में तो जागोगी हे बेटे क साथ"

"बीटा नहीं पति अब जा कमला"

कमला अपना मुँह बना कर "huhh"aur बहार जाने लगती है देवरानी अपने बिस्तर पर लेटते हुए एक लम्बी सांस लेती है और फिर सोने लगती है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
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