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रात में सुनैना बेकाबू होकर न करने को कर बैठी थी,,, और कसम खा ली थी कि आइंदा ऐसी गलती नहीं करेगी क्योंकि इस बात को वह भी भली भांति जानते थे की मां बेटे के बीच के संबंध को गंदा करना पाप है,,,,। लेकिन इस बात से भी वह इनकार नहीं कर पा रही थी कि अपने बेटे की कल्पना करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी जिसके बारे में वह बयान नहीं कर सकती थी,,, लेकिन जो कुछ भी हुआ था उसमें वह अपनी ही गलती मानती थी क्योंकि वह अपने बेटे के बारे में कुछ ज्यादा ही सोचने लगी थी,,,।

जैसे तैसे करके फिर से दिन गुजरने लगे और सुनैना अपने आप को पूरी तरह से काबू में रखने की कोशिश करती थी और वह सफल भी रहती थी क्योंकि वह अपने बेटे से अब थोड़ी दूरी बनाकर रहने लगी थी क्योंकि अब न जाने क्यों जब भी उसका बेटा उसके करीब होता था तो उसे ऐसा महसूस होता था कि कोई तगड़ा मर्द उसके करीब है जो उसे अपनी बाहों में लेने के लिए मचल रहा है,,,, उसे तगड़े मर्द के पास एक तगड़ा लंड है जो उसकी बुर में जाने के लिए बेकाबु है,,,। जब भी उसका बेटा उसके करीब होता था तो न जाने क्यों उसके मन में अपने बेटे को लेकर बेटे वाला एहसास आता ही नहीं था न जाने क्यों अपने बेटे को मर्द के नजरिया से देखने लगी थी,,, और अपने मन में आए इस तरह के बदलाव को देखकर उसे इस बात का डर था कि कहीं वह अपने बेटे के साथ बहक ना जाए,,, इसलिए वह जानबूझकर अपने बेटे से दूरी बनाकर रखती थी,,, लेकिन एक ही घर में रहने से कोई कितनी दूरी बना कर रह सकता है।

सूरज को मुखिया की बीवी की बहुत याद आ रही थी उसके साथ गुजरी गई कई रातों के बारे में सोच कर उसका लंड खड़ा हो जाता था उसकी आंखों के सामने मुखिया की बीवी का नंगा बदन नाचने लगता था उसकी बड़ी-बड़ी चूची गोल-गोल गांव और रसमलाई से भरी हुई उसकी बुर इन सबको याद करके उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगती थी,,, या यूं कह लो की सूरज चुदवासा हुआ जा रहा था,,, वैसे भी चुदाई का नशा दूसरे नसों से बिल्कुल भी काम नहीं होता बल्कि दूसरे नसों से कहीं ज्यादा नशा चुदाई का होता है रोज ना सही दो-तीन दिन के अंतराल के बाद ये नशा पूरी तरह से बादल में छाने लगता है और लंड बुर खोजने लगती है,,, और यही नशा सूरज के तन बदन पर दिलों दिमाग पर पूरी तरह से छा चुका था वह जानता था की मुखिया की बीवी उसके बदन की प्यास को बुझा सकती है,,,।

लेकिन उसके पास जाने का उसके पास कोई कारण नहीं था बिना कारण के वह कैसे मुखिया के घर पहुंच जाए कुछ तो कारण होना चाहिए सूरज घर के आंगन में बैठा हुआ यही सोच रहा था कि तभी उसकी मां पानी की बाल्टी हाथ में लिए हुए आंगन में दाखिल हुई और सूरज से बोली,,,।
सुरज बहुत दिन हो गए मुखिया की बीवी किसी काम के लिए तुझे बुलाई नहीं,,,।
हां मां मैं भी यही सोच रहा हूं,,,।
तु एक काम क्यों नहीं करता,,,!
,, क्या,,,?

अरे तू खुद मुखिया के घर चला जा पर पूछ ले कोई काम हो तो,,,, तुझे कुछ काम करने को मिल जाता तो कुछ पैसे आ जाते बाजार से कुछ सामान खरीदना है तू तो जानता ही है तेरे बापू तो अब घर पर बहुत कम रहने लगे हैं,,,।
हां मां मैं जानता हूं मैं भी यही सोच रहा था,,,,।(अपनी मां की बात सुनकर उसकी आंखों में चमक आ गई थी क्योंकि वह खुद किसी बहाने से मुखिया के घर जाना चाहता था,,,, लेकिन उसे कोई बहाना नहीं मिल रहा था लेकिन उसकी मां ने खुद उसे वहां जाने का बहाना बता देती अगर कोई काम ना भी मिला तो वह यह तो बता सकता है कि काम ढूंढने के लिए ही वहां पर आया था इस तरह से वह मुखिया की बीवी से भी मिलेगा और अगर मौका मिला तो मुखिया की बीवी की बुर भी मिल जाएगी,,, और अगर यह भी मुमकिन नहीं हुआ तो शालू और नीलू से मुलाकात हो जाएगी वैसे भी शालू और नीलू के खूबसूरत बेश कीमती अंगों को तो अपनी आंखों से देख ही चुका है,,, और वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानता है की मां के साथ-साथ अगर बेटी भी चोदने को मिल गई तो सोने की सुहागा हो जाएगा,,,।
सुरज और मुखिया की बीवी

ठीक है मैं अभी जाता हूं अगर कोई काम मिल गया तो अच्छा ही है,,,,(इतना कह कर कहा खटिया पर से उठकर खड़ा हो गया और मुखिया की बीवी के घर की तरफ चल दिया,,,,,, पहले वह इतना घूमता नहीं था लेकिन जब से मुखिया की बीवी का साथ पाया था उसकी बुर का स्वाद चख पाया था तब से वह इसी तरह से इधर-उधर घूमता ही रहता था गांव में कहां मौका मिल जाए बस इसी की तलाश में रहता था,,, तभी उसे रास्ते में,,, सोनू मिल गया सोनू को देखते ही वह जोर से आवाज लगता है उसे अपने पास बुलाया,,,)
सोनू कहां जा रहा है इधर तो आ,,,।
(सोनू सूरज की आवाज सुनकर रुक गया और चलता हुआ सूरज के पास आया उसके हाथ में घास से भरी हुई टोकरी थी यह देखकर सूरज बोला ,,)
सुरज और मुखिया की बीवी

यह क्या कर रहा है सोनू तू,,,?
अरे यार क्या बताऊं सूरज चाचा तो जीना हराम करके रखी है सुबह से लेकर शाम तक खेत में काम कराती रहती है,,,।
अरे पागल हो गया क्या सुबह से शाम तक अगर तुझे अपने साथ लेकर काम करा रही है तो तुझे तो खुश होना चाहिए,,,।
इसमें कौन सा खुश होना चाहिए,,,?(निराश होते हुए सोनू बोला)
अरे बुद्धू अगर तू अपनी चाची के साथ रहेगा तो एक न एक दिन जरूर तेरी चाची तुझे चोदने के लिए देगी,,,,।
सुरज और मुखिया की बीवी

चाची और मुझे चोदने के लिए देगी,,,, चल बातें मत बना एक तो न जाने क्यों चाचा मुझ पर गुस्सा करने लगी है बार-बार मुझे भी मरियल कह कर बुलाती है,,,, मुझे लगता नहीं है कि चाची मुझे कुछ देगी,,, महीनो की मेहनत मेरी सारी बेकार हो गई,,,।
(सोनू की बातें सुनकर सूरज मन ही मन खुश हो रहा था क्योंकि वह भी जानता था कि सोनू की चाची भारी भरकम शरीर वाली है और गदराए बदन को मरियल से लड़के को चोदने के लिए नहीं देगी,,, उसे तो जवान मर्द चाहिए बिल्कुलअपने मेरी तरह,,, और यही सोचकर वह मन ही मन खुश हो रहा था और उत्साहित होता हुआ बोला,,,)
देख सोनू इसी तरह से अपनी चाची का हाथ बंटा तेरी चाची जरूर तुझे देगी,,,,।
चल रहने दे,,,,(और इतना कहकर गुस्सा दिखाते हुए सोनू वहां से चलता बना तो सूरज भी वहां से चल दिया,,,,।
चारों तरफ पहाड़ी पहाड़ होने की वजह से गांव का मौसम हमेशा सुहाना ही रहता था ठंडी ठंडी हवा चल रही थी किसी का मन ना हो तो भी मन हो जाए चोदने को ऐसा वातावरण ही था पहाड़ों का,,,, लोग अपने अपने खेतों में काम कर रहे थे,, ज्यादातर खेत मुखिया के ही थे और मजदूर लगे हुए थे खेतों में और उन लोगों को देखकर सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर खेतों में भी काम मिल जाए तो भी पैसों का बंदोबस्त हो जाए,,,,,और यही सोचता हुआ वह धीरे-धीरे,, मुखिया के घर पहुंच गया,,,,।
सुबह का समय था मुखिया के घर के आंगन में फूल पौधे लगे हुए थे और फूल पौधों की देखरेख करने के लिए भी मजदूर लगे हुए थे दो मजदूर काम कर रहे थे कुछ देर तक सूरज नहीं खड़ा रहा,,,वह यह देख रहा था कि घर में से कोई बाहर निकलता है कि नहीं,,, लेकिन कुछ देर खड़े रहने पर उसे कोई नजर नहीं आया तो वह मजबूरन,,, एक मजदूर से बोला,,,।
मालकिन घर पर नहीं है क्या,,,?
मालकिन तो घर पर ही हैं अंदर है कुछ काम है क्या,,,?
हां काम के सिलसिले में बात करना है,,,,।
तुम तो भोला के लड़के हो ना,,,।
हां,,,,
जो जो अंदर मालकिन मिलेंगी खाना बना रही होगी,,,।
(मजदूर की बात सुनते ही सूरज के चेहरे पर चमक आ गई उसे यकीन हो गया कि इस समय मुखिया की बीवी घर पर ही होगी,,,, काम का तो सिर्फ बहाना था वह मुखिया की बीवी से ही मिलना चाहता था बहुत दिन हो गए थे मुखिया की बीवी के दर्शन किए,,,, सुबह धीरे-धीरे मुखिया के हवेली जैसे घर में प्रवेश किया दरवाजा खुला हुआ था लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था,,,,, कुछ देर तक सूरज वहीं खड़ा होकर इधर-उधर देखता रह गया इसी तरह से वह उस दिन भी मुखिया की हवेली में प्रवेश किया था,,, और अनजाने में मुखिया की बड़ी-बड़ी लड़की के खूबसूरत नंगे बदन के दर्शन करने को मिल गए थे वह अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उसे दिन जैसा आज भी उसके किस्मत साथ दे तो मजा आ जाए,,,,।
सुरज ओर मुखिया की बीवी

सूरज दो-तीन बार मालकिन मालकिन का कर पुकारा भी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कहां जाए लेकिन तभी वह सोचा कि उसे दिन जहां गया था उसी जगह पर चला जाए कोई ना सही तो मुखिया की लड़की ही देखने को मिल जाएगी और आज भी किस्मत तेज रही तो उसके नंगे बदन के दर्शन भी हो जाएंगे,,,, और यह सोचकर सूरज इस दिशा में कदम उठाया ही था कि आगे वाली जगह पर कुछ कूटने की आवाज आ रही थी और हल्का-हल्का धुआं भी नजर आ रहा था सूरज को समझती देर नहीं लगी की मुखिया की बीवी वहीं पर है खाना बना रही है और वहां उसे आवाज का पीछा करते हुए धीरे-धीरे उसे जगह पर पहुंच गया जहां पर वाकई में मुखिया की बीवी खाना ही बना रही थी,,,।
यह घर के पीछे वाला हिस्सा था जहां पर खाना बनाया जाता था और यहीं पर छोटा सा गुसलखाना भी बना हुआ था,,,, जैसे ही वह उसे जगह पर पहुंचा तो मुखिया की बीवी को देखकर वह एकदम से प्रसन्न हो गया और खुश होते हुए बोला,,,,।
मालकिन,,,,,

(यह आवाज सुनते ही मुखिया की बीवी तुरंत पीछे मुड़कर देखी तो पीछे दरवाजे पर सूरज खड़ा था,, सूरज को देखते ही वह एकदम से प्रसन्न हो गई क्योंकि उसे यकीन नहीं था कि सूरज यहां तक पहुंच जाएगा और उसे देखते ही वह बोली,,,,)
अरे सूरज तू यहां कैसे,,,,?
क्या करूं मालकिन बहुत दिन हो गए थे तुमसे मुलाकात कीए,,, सच कहूं तो तुम्हारी बहुत याद आ रही थी,,,,।
(सूरज की बात सुनते ही मुखिया की बीवी का दिल गद गद हो गया,,,, और वह एकदम से अपनी मादक अदा बिखेरते हुए,,, गूंथा हुआ आटा लगा हाथ अपनी कमर पर रख दी और मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ देखने लगी उसकी यह अदा इतनी मादकता भरी हुई थी कि सूरज के लंड में हरकत होने लगी,, वह एकदम से मदहोश होने लगा और मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए बोली,,)
मेरी याद आ रही थी या फिर,,,,,,(अपनी उंगली का इशारा अपनी दोनों टांगों के बीच करते हुए) मेरी बुर की,,,,.।
(मुखिया की बीवी की यह अदा और उसकी बात सुनकर सूरज का लंड एकदम से बेकाबु हो गया,,, और ना चाहते हुए भी उसका हाथ अपने आप ही अपने लंड पर आ गया जिसे पजामे के उपर से ही वह हल्के से दबा दिया। सूरज की हरकत को देखकर मुखिया की बीवी भी मस्त हो गई,,, उसके मन में तुरंत कोई युक्ति सुझने लगी,,, मुखिया की बीवी की रसभरी बात को सुनकर सूरज कुछ बोल नहीं पाया लेकिन अपने लंड पर हाथ रखकर उसने अपना इरादा जता दिया था,,, सूरज की खामोशी को देखकर मुखिया की बीवी गुसलखाने की तरफ देखी और फिर धीरे से बोली,,,,)

कुछ करने की इरादे से आया है ना,,,,,।
(इतना कहते हुए बार-बार मुखिया की बीवी गुशल खाने की तरफ देख रही थी क्योंकि रसोई घर से 3 मीटर की दूरी पर ही बना हुआ था,,,,, इस बार भी सूरज कुछ बोल नहीं पाया बस जोर से अपने लंड को दबा दिया,,,,,, मुखिया की बीवी के बदन में आग लग गई थी,,,, वह मदहोश हुए जा रही थी,,,, उसे भी इस बात का एहसास हो रहा था कि अपनी बुर में सूरज का लंड के लिए काफी दिन हो गया था,,,, इसलिए वह बिना कुछ बोले सूरज का हाथ आगे बढ़कर थाम ली और उसे अपनी तरफ खींच ली सूरज एकदम से उसके बदन से जाकर चिपक गया पर दोनों इतना करीब आ गए कि दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगी सूरज कुछ बोल पाता इससे पहले ही धीरे से मुखिया की बीवी बोली,,,,।)
सुरज और मुखिया की बीवी

कुछ बोलना नहीं शालू नहा रही है,,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपने पैसे होठों को सूरज के होठों पर रख दी और चूसने लगी,,, और मुखिया की बीवी की हरकत से सूरज भी पूरी तरह से गर्म हो गया और वह पूरी तरह से मुखिया की बीवी को बाहों में लेकर उसके नितंबों को साड़ी को ऊपर से ही जोर-जोर से मसलने लगा पागलों की तरह उसके गर्दन पर चुंबनों की बौछार करने लगा,,,,, औरत के बदन से कैसे खेला जाता है यह सब मुखिया की बीवी ने आम की रखवाली करते हुए रात में सब कुछ सिखा दी थी,,, इसलिए वह अच्छी तरह से जानता था कि औरत की प्यास कैसे बुझाई जाती है और खुद कैसे संतुष्ट हुआ जाता है,,,,।)
बिल्कुल भी शोर मत करना वर्ना सारा मजा किर किरा हो जाएगा अगर शालू ने सुन ली तो,,,, अभी कुछ हो नहीं पाएगा बस दबाकर और सहला कर ही मजा ले ले दोपहर में समय मिलेगा तो बताऊंगी,,,,।
(उसका इतना कहना था कि तभी गुसलखाने में से आवाज आई)
मां सब्जी थोड़ी तीखी रखना,,,,,।
(गुसल खाने से आई आवाज को सुनकर मुखिया की बीवी और सूरज दोनों गुसलखाने की तरफ देखने लगे और मुखिया की बीवी बोली)
हां,,,, तेरे पसंद की ही सब्जी बना रही हूं तो चिंता मत कर आराम से नहा ले,,,,।
(और इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से मुखिया की बीवी उसके होंठों का रस चूसने लगी और सूरज पागलों की तरफ से बाहों में कस कर उसकी पीठ पर तो कभी उसके नितंबों पर जोर-जोर से अपनी हथेली को रगड़ने लगा यहां तक कि वह साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड को जोर-जोर से अपनी हथेली में दबोचने लगा,,,,, सूरज की हरकत से मुखिया की बीवी पूरी तरह से गर्म हो रही थी,,,। अच्छी तरह से जानती थी कि इस समय कुछ भी करना उचित नहीं है इसलिए वह इसी तरह से मजा ले रही थी और मजा दे रही थी लेकिन सूरज के मन में कुछ और था क्योंकि उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था वह बार-बार साड़ी को कमर तक उठा दे रहा था और उसकी नंगी गांड को सहला दे रहा था,,,, लेकिन बार-बार मुखिया की बीवी अपनी साड़ी को नीचे कर दे रही थी और धीरे से बोल भीरही थी,,,।)
पागल मत बन सिर्फ ऊपर ऊपर से मजा ले ले दोपहर में समय मिलेगा तो सब कुछ दूंगी,,,,।।
(लेकिन सूरज से रहा नहीं जा रहा था काफी दिनों बाद वह मुखिया की बीवी को एक बार फिर से अपनी बाहों में जो लिया था वह तुरंत अपने हाथ को मुखिया की बीवी के ब्लाउज पर रखकर जोर-जोर से उसके खरगोश को दबाना शुरू कर दिया सूरज की हरकत से मुखिया की बीवी भी बदहवास हुए जा रही थी अपना काबू खो रही थी,, और इसी बीच सूरज अपने हाथों की उंगलियों को हरकत देते हुए मुखिया की बीवी के ब्लाउज का बटन खोलने लगा मुखिया की बीवी उसे रोती रहेगी लेकिन वहां जल्दबाजी में ब्लाउज का बटन खोलने के चक्कर में उसे ब्लाउज का दोनों जोर-जोर से खींचा गया और उसके नीचे के दोनों बटन टूट गए सूरज की जल्दबाजी देखकर जहां एक तरफ उसे गुस्सा आ रहा था वही वह पूरी तरह से मस्त हो गई थी सूरज की उत्तेजना और उसकी मदहोशी देखकर उसका उतावलापन देखकर,,,, मुखिया की बीवी की नंगी चूची को अपनी आंखों के सामने देख कर सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने प्यासे होठों को उसकी चूची पर रखकर पीना शुरू कर दिया लेकिन तुरंत मुखिया की बीवी सूरज के सर के बालों को पड़कर उसे दूर करते हुए थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
मादरचोद पागल हुआ है,,,, शालू देख ली तो,,,,।
(लेकिन गहरी सांस लेते हुए सूरज मुखिया की बीवी के खूबसूरत चेहरे को देखने लगा सूरज को देखकर ऐसा लगता ही नहीं था कि वह मुखिया की बीवी की बात को गंभीरता से ले रहा है उसे तो बस मुखिया की बीवी चाहिए थी किसी भी कीमत पर उसकी बुर चाहिए थी चोदने के लिए भले ही शालू पास मे हीं थी उसे कोई चिंता नहीं थी,,,, वह एक नजर फिर से मुखिया की बीवी की चूची पर डाला और फिर तुरंत उसकी तरफ लपक कर एक बार फिर से उसके दोनों छुआरों को मुंह में बारी-बारी से लेकर पीना शुरू कर दिया,,,,
मुखिया की बीवी भी सूरज की हिम्मत देखकर मस्त हो गई और फिर अपनी आंखों को बंद करके उसके सर पर अपना हाथ रख दी और अपनी गरमा गरम शिसकारी को अपने होठों के अंदर ही दबाने की पूरी कोशिश करने लगी,,, लेकिन फिर भी उसके मुंह से शिकारी की आवाज निकाल ही जा रही थी,,,।
सूरज के हाथों में तो जैसे खजाना लग गया हो वह पागलों की तरह उसे लूट रहा था और इसी बीच हुआ तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने पजामे को नीचे कर दिया और अपने खड़े लंड को बाहर निकाल दिया,,, और धीरे से मुखिया की बीवी का हाथ पकड़ कर उसे अपने लंड पर रख दिया,,, मुखिया की बीवी के हथेली में जैसे ही गर्माहट भरा लंड आया,,, उत्तेजना के मारे उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर पानी छोड़ने लगी,,,, औरतेजना के दबाव में वह अपनी हथेली में सूरज के लंड को जोर से दबा ली और मदहोशी भरी आवाज में बोली ,,।
सूरज अगर हम पकड़े गए तो गजब हो जाएगा,,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मालकिन,,,,,(और सूरज तुरंत मुखिया की बीवी के कंधों को पकड़कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया उसकी पीठ सूरज की तरफ थी,,, और एक झटके से उसकी साड़ी कमर तक उठा दिया उसकी नंगी गांड सूरज की आंखों के सामने चमकने लगी,,,, मुखिया की बीवी समझ गई थी कि सांड जैसी ताकत रखने वाला सूरज अब रुकने वाला नहीं है इसलिए वह डर के मारा बार-बार गुशल खाने की तरफ देख रही थी,,,, वह भी सूरज के लंड को अपनी बर के अंदर रगड़ हुआ महसूस करना चाहती थी लेकिन उसे शालू का डर था कि कहीं शालू गुसलखाने से बाहर ना निकल जाए,,, गुसलखाने में पानी गिरने की आवाज आ रही थी वह नहा रही थी और सूरज इसी बीच मुखिया की बीवी की कमर को पकड़ कर हल्का सा और नीचे करते हुए उसे झुकने का इशारा किया,,।
मुखिया की बीवी भी तड़प रही थी इसलिए वह भी जो होगा देखा जाएगा ऐसा सोचकर थोडा सा नीचे झुक गई और अपनी भारी भरकम गांड को हवा में तोप की तरह लहरा दी,,,, सूरज तुरंत पीछे से अपने लंड को उसकी बुर के गुलाबी छेद में डाल दिया और फिर उसकी कमर पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया,,,,।
मुखिया की बीवी एकदम से मस्त हो गई चारों खाने चित हो गई कई दिनों के बाद उसकी बुर सूरज के लंड से भर चुकी थी,,, सूरज शुरू से ही तेज धक्के लगाकर मुखिया की बीवी की चुदाई कर रहा था और यह रिकॉर्ड यह तड़प मुखिया की बीवी को मदहोश किया जा रहा था मुखिया की बीवी बड़े अच्छे से चुदवा रही थी और सूरज,, कभी उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लेता तो कभी दोनों हाथों को आगे बढ़कर उसकी चूची को दबा देता कुल मिलाकर वह मुखिया की बीवी को मदहोशी के सागर में लिए डूबता चला जा रहा था,,,।

आखिरकार सूरज के तेज धक्के ने रंग लाया और मुखिया की बीवी जोर-जोर से गहरी सांस लेते हुए झड़ना शुरू कर दी उसका पानी निकल रहा था और सूरज भी अपना घोड़ा बड़ी तेजी से चिकनी मैदान में दौड़ाता हुआ अपनी मंजिल की तरफ पहुंच रहा था,,, और देखते ही देखते सूरज का घोड़ा भी हांफने लगा,,, लेकिन मंजिल पर पहुंचकर,,, सूरज के साथ-साथ मुखिया की बीवी का भी काम हो गया था सूरज ने जिस तरह की जल्दबाजी दिखाकर अपनी मर्दाना अंदाज में उसकी चुदाई किया था और वह भी खड़े-खड़े मुखिया की बीवी पूरी तरह से उसकी मर्दानगी की कायल हो चुकी थी,,,,।
जल्दी-जल्दी वह अपने कपड़ों को दूर करने लगी लेकिन ब्लाउज का बटन बंद करते हुए उसे एहसास हुआ की नीचे के दो बटन टूट चुके हैं और झूठ-मूठ का गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,।
यह क्या कर दिया सूरज तूने तो मेरे ब्लाउज के बटन को तोड़ दिया वह तो अच्छा हुआ की बटन टूट है अगर फाड़ दिया होता तो क्या होता,,,,।
क्या करूं मालकिन तुम्हारी जवानी देखकर मदहोश हो गया था मुझ पर काबू नहीं हो रहा था,,,।
बस कर अब रहने दे,,,, अब जल्दी से यहां से जा,,,,।
मालकिन अगर थोड़ा काम मिल जाता तो थोड़े पैसे का बंदोबस्त हो जाता ,,।
अरे बुद्धू यह काम कोई कम है क्या,,,,ले ,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह छोटा सा डब्बा ढुंढकर निकाली और उसमें से दो रुपए निकालकर सूरज के हाथों में रखी सूरज खुश हो गया क्योंकि अगर जो काम करने के लिए आया था अगर उसे पैसे ना भी मिलते तो फिर उसे कोई गम ना होता लेकिन यहां पर सोने पर सुहागा हो गया था,,, पैसे लेकर वह मुस्कुराता हुआ वहां से चल दिया और मुखिया की बीवी साड़ी के पल्लू से अपने ब्लाउज के टूटे हुए बटन को ढक कर वापस खाना बनाने लगी,,,,।

जैसे तैसे करके फिर से दिन गुजरने लगे और सुनैना अपने आप को पूरी तरह से काबू में रखने की कोशिश करती थी और वह सफल भी रहती थी क्योंकि वह अपने बेटे से अब थोड़ी दूरी बनाकर रहने लगी थी क्योंकि अब न जाने क्यों जब भी उसका बेटा उसके करीब होता था तो उसे ऐसा महसूस होता था कि कोई तगड़ा मर्द उसके करीब है जो उसे अपनी बाहों में लेने के लिए मचल रहा है,,,, उसे तगड़े मर्द के पास एक तगड़ा लंड है जो उसकी बुर में जाने के लिए बेकाबु है,,,। जब भी उसका बेटा उसके करीब होता था तो न जाने क्यों उसके मन में अपने बेटे को लेकर बेटे वाला एहसास आता ही नहीं था न जाने क्यों अपने बेटे को मर्द के नजरिया से देखने लगी थी,,, और अपने मन में आए इस तरह के बदलाव को देखकर उसे इस बात का डर था कि कहीं वह अपने बेटे के साथ बहक ना जाए,,, इसलिए वह जानबूझकर अपने बेटे से दूरी बनाकर रखती थी,,, लेकिन एक ही घर में रहने से कोई कितनी दूरी बना कर रह सकता है।

सूरज को मुखिया की बीवी की बहुत याद आ रही थी उसके साथ गुजरी गई कई रातों के बारे में सोच कर उसका लंड खड़ा हो जाता था उसकी आंखों के सामने मुखिया की बीवी का नंगा बदन नाचने लगता था उसकी बड़ी-बड़ी चूची गोल-गोल गांव और रसमलाई से भरी हुई उसकी बुर इन सबको याद करके उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगती थी,,, या यूं कह लो की सूरज चुदवासा हुआ जा रहा था,,, वैसे भी चुदाई का नशा दूसरे नसों से बिल्कुल भी काम नहीं होता बल्कि दूसरे नसों से कहीं ज्यादा नशा चुदाई का होता है रोज ना सही दो-तीन दिन के अंतराल के बाद ये नशा पूरी तरह से बादल में छाने लगता है और लंड बुर खोजने लगती है,,, और यही नशा सूरज के तन बदन पर दिलों दिमाग पर पूरी तरह से छा चुका था वह जानता था की मुखिया की बीवी उसके बदन की प्यास को बुझा सकती है,,,।

लेकिन उसके पास जाने का उसके पास कोई कारण नहीं था बिना कारण के वह कैसे मुखिया के घर पहुंच जाए कुछ तो कारण होना चाहिए सूरज घर के आंगन में बैठा हुआ यही सोच रहा था कि तभी उसकी मां पानी की बाल्टी हाथ में लिए हुए आंगन में दाखिल हुई और सूरज से बोली,,,।
सुरज बहुत दिन हो गए मुखिया की बीवी किसी काम के लिए तुझे बुलाई नहीं,,,।
हां मां मैं भी यही सोच रहा हूं,,,।
तु एक काम क्यों नहीं करता,,,!
,, क्या,,,?

अरे तू खुद मुखिया के घर चला जा पर पूछ ले कोई काम हो तो,,,, तुझे कुछ काम करने को मिल जाता तो कुछ पैसे आ जाते बाजार से कुछ सामान खरीदना है तू तो जानता ही है तेरे बापू तो अब घर पर बहुत कम रहने लगे हैं,,,।
हां मां मैं जानता हूं मैं भी यही सोच रहा था,,,,।(अपनी मां की बात सुनकर उसकी आंखों में चमक आ गई थी क्योंकि वह खुद किसी बहाने से मुखिया के घर जाना चाहता था,,,, लेकिन उसे कोई बहाना नहीं मिल रहा था लेकिन उसकी मां ने खुद उसे वहां जाने का बहाना बता देती अगर कोई काम ना भी मिला तो वह यह तो बता सकता है कि काम ढूंढने के लिए ही वहां पर आया था इस तरह से वह मुखिया की बीवी से भी मिलेगा और अगर मौका मिला तो मुखिया की बीवी की बुर भी मिल जाएगी,,, और अगर यह भी मुमकिन नहीं हुआ तो शालू और नीलू से मुलाकात हो जाएगी वैसे भी शालू और नीलू के खूबसूरत बेश कीमती अंगों को तो अपनी आंखों से देख ही चुका है,,, और वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानता है की मां के साथ-साथ अगर बेटी भी चोदने को मिल गई तो सोने की सुहागा हो जाएगा,,,।
सुरज और मुखिया की बीवी

ठीक है मैं अभी जाता हूं अगर कोई काम मिल गया तो अच्छा ही है,,,,(इतना कह कर कहा खटिया पर से उठकर खड़ा हो गया और मुखिया की बीवी के घर की तरफ चल दिया,,,,,, पहले वह इतना घूमता नहीं था लेकिन जब से मुखिया की बीवी का साथ पाया था उसकी बुर का स्वाद चख पाया था तब से वह इसी तरह से इधर-उधर घूमता ही रहता था गांव में कहां मौका मिल जाए बस इसी की तलाश में रहता था,,, तभी उसे रास्ते में,,, सोनू मिल गया सोनू को देखते ही वह जोर से आवाज लगता है उसे अपने पास बुलाया,,,)
सोनू कहां जा रहा है इधर तो आ,,,।
(सोनू सूरज की आवाज सुनकर रुक गया और चलता हुआ सूरज के पास आया उसके हाथ में घास से भरी हुई टोकरी थी यह देखकर सूरज बोला ,,)
सुरज और मुखिया की बीवी

यह क्या कर रहा है सोनू तू,,,?
अरे यार क्या बताऊं सूरज चाचा तो जीना हराम करके रखी है सुबह से लेकर शाम तक खेत में काम कराती रहती है,,,।
अरे पागल हो गया क्या सुबह से शाम तक अगर तुझे अपने साथ लेकर काम करा रही है तो तुझे तो खुश होना चाहिए,,,।
इसमें कौन सा खुश होना चाहिए,,,?(निराश होते हुए सोनू बोला)
अरे बुद्धू अगर तू अपनी चाची के साथ रहेगा तो एक न एक दिन जरूर तेरी चाची तुझे चोदने के लिए देगी,,,,।
सुरज और मुखिया की बीवी

चाची और मुझे चोदने के लिए देगी,,,, चल बातें मत बना एक तो न जाने क्यों चाचा मुझ पर गुस्सा करने लगी है बार-बार मुझे भी मरियल कह कर बुलाती है,,,, मुझे लगता नहीं है कि चाची मुझे कुछ देगी,,, महीनो की मेहनत मेरी सारी बेकार हो गई,,,।
(सोनू की बातें सुनकर सूरज मन ही मन खुश हो रहा था क्योंकि वह भी जानता था कि सोनू की चाची भारी भरकम शरीर वाली है और गदराए बदन को मरियल से लड़के को चोदने के लिए नहीं देगी,,, उसे तो जवान मर्द चाहिए बिल्कुलअपने मेरी तरह,,, और यही सोचकर वह मन ही मन खुश हो रहा था और उत्साहित होता हुआ बोला,,,)
देख सोनू इसी तरह से अपनी चाची का हाथ बंटा तेरी चाची जरूर तुझे देगी,,,,।
चल रहने दे,,,,(और इतना कहकर गुस्सा दिखाते हुए सोनू वहां से चलता बना तो सूरज भी वहां से चल दिया,,,,।
चारों तरफ पहाड़ी पहाड़ होने की वजह से गांव का मौसम हमेशा सुहाना ही रहता था ठंडी ठंडी हवा चल रही थी किसी का मन ना हो तो भी मन हो जाए चोदने को ऐसा वातावरण ही था पहाड़ों का,,,, लोग अपने अपने खेतों में काम कर रहे थे,, ज्यादातर खेत मुखिया के ही थे और मजदूर लगे हुए थे खेतों में और उन लोगों को देखकर सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर खेतों में भी काम मिल जाए तो भी पैसों का बंदोबस्त हो जाए,,,,,और यही सोचता हुआ वह धीरे-धीरे,, मुखिया के घर पहुंच गया,,,,।
सुबह का समय था मुखिया के घर के आंगन में फूल पौधे लगे हुए थे और फूल पौधों की देखरेख करने के लिए भी मजदूर लगे हुए थे दो मजदूर काम कर रहे थे कुछ देर तक सूरज नहीं खड़ा रहा,,,वह यह देख रहा था कि घर में से कोई बाहर निकलता है कि नहीं,,, लेकिन कुछ देर खड़े रहने पर उसे कोई नजर नहीं आया तो वह मजबूरन,,, एक मजदूर से बोला,,,।
मालकिन घर पर नहीं है क्या,,,?
मालकिन तो घर पर ही हैं अंदर है कुछ काम है क्या,,,?
हां काम के सिलसिले में बात करना है,,,,।
तुम तो भोला के लड़के हो ना,,,।
हां,,,,
जो जो अंदर मालकिन मिलेंगी खाना बना रही होगी,,,।
(मजदूर की बात सुनते ही सूरज के चेहरे पर चमक आ गई उसे यकीन हो गया कि इस समय मुखिया की बीवी घर पर ही होगी,,,, काम का तो सिर्फ बहाना था वह मुखिया की बीवी से ही मिलना चाहता था बहुत दिन हो गए थे मुखिया की बीवी के दर्शन किए,,,, सुबह धीरे-धीरे मुखिया के हवेली जैसे घर में प्रवेश किया दरवाजा खुला हुआ था लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था,,,,, कुछ देर तक सूरज वहीं खड़ा होकर इधर-उधर देखता रह गया इसी तरह से वह उस दिन भी मुखिया की हवेली में प्रवेश किया था,,, और अनजाने में मुखिया की बड़ी-बड़ी लड़की के खूबसूरत नंगे बदन के दर्शन करने को मिल गए थे वह अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उसे दिन जैसा आज भी उसके किस्मत साथ दे तो मजा आ जाए,,,,।
सुरज ओर मुखिया की बीवी

सूरज दो-तीन बार मालकिन मालकिन का कर पुकारा भी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कहां जाए लेकिन तभी वह सोचा कि उसे दिन जहां गया था उसी जगह पर चला जाए कोई ना सही तो मुखिया की लड़की ही देखने को मिल जाएगी और आज भी किस्मत तेज रही तो उसके नंगे बदन के दर्शन भी हो जाएंगे,,,, और यह सोचकर सूरज इस दिशा में कदम उठाया ही था कि आगे वाली जगह पर कुछ कूटने की आवाज आ रही थी और हल्का-हल्का धुआं भी नजर आ रहा था सूरज को समझती देर नहीं लगी की मुखिया की बीवी वहीं पर है खाना बना रही है और वहां उसे आवाज का पीछा करते हुए धीरे-धीरे उसे जगह पर पहुंच गया जहां पर वाकई में मुखिया की बीवी खाना ही बना रही थी,,,।
यह घर के पीछे वाला हिस्सा था जहां पर खाना बनाया जाता था और यहीं पर छोटा सा गुसलखाना भी बना हुआ था,,,, जैसे ही वह उसे जगह पर पहुंचा तो मुखिया की बीवी को देखकर वह एकदम से प्रसन्न हो गया और खुश होते हुए बोला,,,,।
मालकिन,,,,,

(यह आवाज सुनते ही मुखिया की बीवी तुरंत पीछे मुड़कर देखी तो पीछे दरवाजे पर सूरज खड़ा था,, सूरज को देखते ही वह एकदम से प्रसन्न हो गई क्योंकि उसे यकीन नहीं था कि सूरज यहां तक पहुंच जाएगा और उसे देखते ही वह बोली,,,,)
अरे सूरज तू यहां कैसे,,,,?
क्या करूं मालकिन बहुत दिन हो गए थे तुमसे मुलाकात कीए,,, सच कहूं तो तुम्हारी बहुत याद आ रही थी,,,,।
(सूरज की बात सुनते ही मुखिया की बीवी का दिल गद गद हो गया,,,, और वह एकदम से अपनी मादक अदा बिखेरते हुए,,, गूंथा हुआ आटा लगा हाथ अपनी कमर पर रख दी और मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ देखने लगी उसकी यह अदा इतनी मादकता भरी हुई थी कि सूरज के लंड में हरकत होने लगी,, वह एकदम से मदहोश होने लगा और मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए बोली,,)
मेरी याद आ रही थी या फिर,,,,,,(अपनी उंगली का इशारा अपनी दोनों टांगों के बीच करते हुए) मेरी बुर की,,,,.।
(मुखिया की बीवी की यह अदा और उसकी बात सुनकर सूरज का लंड एकदम से बेकाबु हो गया,,, और ना चाहते हुए भी उसका हाथ अपने आप ही अपने लंड पर आ गया जिसे पजामे के उपर से ही वह हल्के से दबा दिया। सूरज की हरकत को देखकर मुखिया की बीवी भी मस्त हो गई,,, उसके मन में तुरंत कोई युक्ति सुझने लगी,,, मुखिया की बीवी की रसभरी बात को सुनकर सूरज कुछ बोल नहीं पाया लेकिन अपने लंड पर हाथ रखकर उसने अपना इरादा जता दिया था,,, सूरज की खामोशी को देखकर मुखिया की बीवी गुसलखाने की तरफ देखी और फिर धीरे से बोली,,,,)

कुछ करने की इरादे से आया है ना,,,,,।
(इतना कहते हुए बार-बार मुखिया की बीवी गुशल खाने की तरफ देख रही थी क्योंकि रसोई घर से 3 मीटर की दूरी पर ही बना हुआ था,,,,, इस बार भी सूरज कुछ बोल नहीं पाया बस जोर से अपने लंड को दबा दिया,,,,,, मुखिया की बीवी के बदन में आग लग गई थी,,,, वह मदहोश हुए जा रही थी,,,, उसे भी इस बात का एहसास हो रहा था कि अपनी बुर में सूरज का लंड के लिए काफी दिन हो गया था,,,, इसलिए वह बिना कुछ बोले सूरज का हाथ आगे बढ़कर थाम ली और उसे अपनी तरफ खींच ली सूरज एकदम से उसके बदन से जाकर चिपक गया पर दोनों इतना करीब आ गए कि दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगी सूरज कुछ बोल पाता इससे पहले ही धीरे से मुखिया की बीवी बोली,,,,।)
सुरज और मुखिया की बीवी

कुछ बोलना नहीं शालू नहा रही है,,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपने पैसे होठों को सूरज के होठों पर रख दी और चूसने लगी,,, और मुखिया की बीवी की हरकत से सूरज भी पूरी तरह से गर्म हो गया और वह पूरी तरह से मुखिया की बीवी को बाहों में लेकर उसके नितंबों को साड़ी को ऊपर से ही जोर-जोर से मसलने लगा पागलों की तरह उसके गर्दन पर चुंबनों की बौछार करने लगा,,,,, औरत के बदन से कैसे खेला जाता है यह सब मुखिया की बीवी ने आम की रखवाली करते हुए रात में सब कुछ सिखा दी थी,,, इसलिए वह अच्छी तरह से जानता था कि औरत की प्यास कैसे बुझाई जाती है और खुद कैसे संतुष्ट हुआ जाता है,,,,।)
बिल्कुल भी शोर मत करना वर्ना सारा मजा किर किरा हो जाएगा अगर शालू ने सुन ली तो,,,, अभी कुछ हो नहीं पाएगा बस दबाकर और सहला कर ही मजा ले ले दोपहर में समय मिलेगा तो बताऊंगी,,,,।
(उसका इतना कहना था कि तभी गुसलखाने में से आवाज आई)
मां सब्जी थोड़ी तीखी रखना,,,,,।
(गुसल खाने से आई आवाज को सुनकर मुखिया की बीवी और सूरज दोनों गुसलखाने की तरफ देखने लगे और मुखिया की बीवी बोली)
हां,,,, तेरे पसंद की ही सब्जी बना रही हूं तो चिंता मत कर आराम से नहा ले,,,,।
(और इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से मुखिया की बीवी उसके होंठों का रस चूसने लगी और सूरज पागलों की तरफ से बाहों में कस कर उसकी पीठ पर तो कभी उसके नितंबों पर जोर-जोर से अपनी हथेली को रगड़ने लगा यहां तक कि वह साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड को जोर-जोर से अपनी हथेली में दबोचने लगा,,,,, सूरज की हरकत से मुखिया की बीवी पूरी तरह से गर्म हो रही थी,,,। अच्छी तरह से जानती थी कि इस समय कुछ भी करना उचित नहीं है इसलिए वह इसी तरह से मजा ले रही थी और मजा दे रही थी लेकिन सूरज के मन में कुछ और था क्योंकि उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था वह बार-बार साड़ी को कमर तक उठा दे रहा था और उसकी नंगी गांड को सहला दे रहा था,,,, लेकिन बार-बार मुखिया की बीवी अपनी साड़ी को नीचे कर दे रही थी और धीरे से बोल भीरही थी,,,।)
पागल मत बन सिर्फ ऊपर ऊपर से मजा ले ले दोपहर में समय मिलेगा तो सब कुछ दूंगी,,,,।।
(लेकिन सूरज से रहा नहीं जा रहा था काफी दिनों बाद वह मुखिया की बीवी को एक बार फिर से अपनी बाहों में जो लिया था वह तुरंत अपने हाथ को मुखिया की बीवी के ब्लाउज पर रखकर जोर-जोर से उसके खरगोश को दबाना शुरू कर दिया सूरज की हरकत से मुखिया की बीवी भी बदहवास हुए जा रही थी अपना काबू खो रही थी,, और इसी बीच सूरज अपने हाथों की उंगलियों को हरकत देते हुए मुखिया की बीवी के ब्लाउज का बटन खोलने लगा मुखिया की बीवी उसे रोती रहेगी लेकिन वहां जल्दबाजी में ब्लाउज का बटन खोलने के चक्कर में उसे ब्लाउज का दोनों जोर-जोर से खींचा गया और उसके नीचे के दोनों बटन टूट गए सूरज की जल्दबाजी देखकर जहां एक तरफ उसे गुस्सा आ रहा था वही वह पूरी तरह से मस्त हो गई थी सूरज की उत्तेजना और उसकी मदहोशी देखकर उसका उतावलापन देखकर,,,, मुखिया की बीवी की नंगी चूची को अपनी आंखों के सामने देख कर सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने प्यासे होठों को उसकी चूची पर रखकर पीना शुरू कर दिया लेकिन तुरंत मुखिया की बीवी सूरज के सर के बालों को पड़कर उसे दूर करते हुए थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
मादरचोद पागल हुआ है,,,, शालू देख ली तो,,,,।
(लेकिन गहरी सांस लेते हुए सूरज मुखिया की बीवी के खूबसूरत चेहरे को देखने लगा सूरज को देखकर ऐसा लगता ही नहीं था कि वह मुखिया की बीवी की बात को गंभीरता से ले रहा है उसे तो बस मुखिया की बीवी चाहिए थी किसी भी कीमत पर उसकी बुर चाहिए थी चोदने के लिए भले ही शालू पास मे हीं थी उसे कोई चिंता नहीं थी,,,, वह एक नजर फिर से मुखिया की बीवी की चूची पर डाला और फिर तुरंत उसकी तरफ लपक कर एक बार फिर से उसके दोनों छुआरों को मुंह में बारी-बारी से लेकर पीना शुरू कर दिया,,,,
मुखिया की बीवी भी सूरज की हिम्मत देखकर मस्त हो गई और फिर अपनी आंखों को बंद करके उसके सर पर अपना हाथ रख दी और अपनी गरमा गरम शिसकारी को अपने होठों के अंदर ही दबाने की पूरी कोशिश करने लगी,,, लेकिन फिर भी उसके मुंह से शिकारी की आवाज निकाल ही जा रही थी,,,।
सूरज के हाथों में तो जैसे खजाना लग गया हो वह पागलों की तरह उसे लूट रहा था और इसी बीच हुआ तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने पजामे को नीचे कर दिया और अपने खड़े लंड को बाहर निकाल दिया,,, और धीरे से मुखिया की बीवी का हाथ पकड़ कर उसे अपने लंड पर रख दिया,,, मुखिया की बीवी के हथेली में जैसे ही गर्माहट भरा लंड आया,,, उत्तेजना के मारे उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर पानी छोड़ने लगी,,,, औरतेजना के दबाव में वह अपनी हथेली में सूरज के लंड को जोर से दबा ली और मदहोशी भरी आवाज में बोली ,,।
सूरज अगर हम पकड़े गए तो गजब हो जाएगा,,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मालकिन,,,,,(और सूरज तुरंत मुखिया की बीवी के कंधों को पकड़कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया उसकी पीठ सूरज की तरफ थी,,, और एक झटके से उसकी साड़ी कमर तक उठा दिया उसकी नंगी गांड सूरज की आंखों के सामने चमकने लगी,,,, मुखिया की बीवी समझ गई थी कि सांड जैसी ताकत रखने वाला सूरज अब रुकने वाला नहीं है इसलिए वह डर के मारा बार-बार गुशल खाने की तरफ देख रही थी,,,, वह भी सूरज के लंड को अपनी बर के अंदर रगड़ हुआ महसूस करना चाहती थी लेकिन उसे शालू का डर था कि कहीं शालू गुसलखाने से बाहर ना निकल जाए,,, गुसलखाने में पानी गिरने की आवाज आ रही थी वह नहा रही थी और सूरज इसी बीच मुखिया की बीवी की कमर को पकड़ कर हल्का सा और नीचे करते हुए उसे झुकने का इशारा किया,,।
मुखिया की बीवी भी तड़प रही थी इसलिए वह भी जो होगा देखा जाएगा ऐसा सोचकर थोडा सा नीचे झुक गई और अपनी भारी भरकम गांड को हवा में तोप की तरह लहरा दी,,,, सूरज तुरंत पीछे से अपने लंड को उसकी बुर के गुलाबी छेद में डाल दिया और फिर उसकी कमर पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया,,,,।
मुखिया की बीवी एकदम से मस्त हो गई चारों खाने चित हो गई कई दिनों के बाद उसकी बुर सूरज के लंड से भर चुकी थी,,, सूरज शुरू से ही तेज धक्के लगाकर मुखिया की बीवी की चुदाई कर रहा था और यह रिकॉर्ड यह तड़प मुखिया की बीवी को मदहोश किया जा रहा था मुखिया की बीवी बड़े अच्छे से चुदवा रही थी और सूरज,, कभी उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लेता तो कभी दोनों हाथों को आगे बढ़कर उसकी चूची को दबा देता कुल मिलाकर वह मुखिया की बीवी को मदहोशी के सागर में लिए डूबता चला जा रहा था,,,।

आखिरकार सूरज के तेज धक्के ने रंग लाया और मुखिया की बीवी जोर-जोर से गहरी सांस लेते हुए झड़ना शुरू कर दी उसका पानी निकल रहा था और सूरज भी अपना घोड़ा बड़ी तेजी से चिकनी मैदान में दौड़ाता हुआ अपनी मंजिल की तरफ पहुंच रहा था,,, और देखते ही देखते सूरज का घोड़ा भी हांफने लगा,,, लेकिन मंजिल पर पहुंचकर,,, सूरज के साथ-साथ मुखिया की बीवी का भी काम हो गया था सूरज ने जिस तरह की जल्दबाजी दिखाकर अपनी मर्दाना अंदाज में उसकी चुदाई किया था और वह भी खड़े-खड़े मुखिया की बीवी पूरी तरह से उसकी मर्दानगी की कायल हो चुकी थी,,,,।
जल्दी-जल्दी वह अपने कपड़ों को दूर करने लगी लेकिन ब्लाउज का बटन बंद करते हुए उसे एहसास हुआ की नीचे के दो बटन टूट चुके हैं और झूठ-मूठ का गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,।
यह क्या कर दिया सूरज तूने तो मेरे ब्लाउज के बटन को तोड़ दिया वह तो अच्छा हुआ की बटन टूट है अगर फाड़ दिया होता तो क्या होता,,,,।
क्या करूं मालकिन तुम्हारी जवानी देखकर मदहोश हो गया था मुझ पर काबू नहीं हो रहा था,,,।
बस कर अब रहने दे,,,, अब जल्दी से यहां से जा,,,,।
मालकिन अगर थोड़ा काम मिल जाता तो थोड़े पैसे का बंदोबस्त हो जाता ,,।
अरे बुद्धू यह काम कोई कम है क्या,,,,ले ,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह छोटा सा डब्बा ढुंढकर निकाली और उसमें से दो रुपए निकालकर सूरज के हाथों में रखी सूरज खुश हो गया क्योंकि अगर जो काम करने के लिए आया था अगर उसे पैसे ना भी मिलते तो फिर उसे कोई गम ना होता लेकिन यहां पर सोने पर सुहागा हो गया था,,, पैसे लेकर वह मुस्कुराता हुआ वहां से चल दिया और मुखिया की बीवी साड़ी के पल्लू से अपने ब्लाउज के टूटे हुए बटन को ढक कर वापस खाना बनाने लगी,,,,।



















































































