Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 128 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

तू अच्छी है कि यह औरत अच्छी है,, जो इस समय मजा लूट रही है और तो अपने परिवार की जरूरत पूरी करते-करते अपनी उम्र भी को दे रही है इस उम्र में तो तुझे भी एक मर्द की जरूरत है जो तुझे जी भर कर प्यार करे तेरी जरूरत को पूरा कर सके लेकिन तू है कि अपनी जरूरत को एक तरफ रख कर मर्यादा और संस्कार में गिरकर बस अपने जीवन को घसीट रही हैं जी नहीं रही है। तू भ्रम में जी रही है और यह औरत सच्चाई में जी रही है उसकी जरूरत है एक मर्द और वह अपनी जरूरत पूरी करने के लिए उम्र भी नहीं देख रही है अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ मजा लूट रही है तू ही जरा सोच जीवन का असली मजा तो यह लूट रही है,,, तुझे भी यही करना चाहिए और अगर तो यह सब करने भी लगेगी तो जरूरी नहीं है कि किसी को पता चल अब देख ले तेरी आंखों के सामने यह दोनों घर से बहाना करके इतनी दूर आ गए हैं और मजा लूट रहे हैं घर पर भी यह दोनों मजा लूटते थे और अभी तक किसी को पता भी नहीं है असली चुदाई किसे कहते हैं यह जवान लड़का इस औरत को अच्छी तरह से महसूस करवा रहा है। और यह जरूरी भी है इस उम्र में औरत की जरूरत और भी ज्यादा बढ़ जाती है औरत की जवानी और भी ज्यादा निकल जाती है शायद इस उम्र में जाकर उसका पति उसे तरह का प्यार बिल्कुल भी नहीं दे सकता जितना कि यह जवान लड़का उसे दे रहा है। तभी तो इस समय बिस्तर पर घमासान मचा हुआ है,,, अपने मन की इस तरह की बात सुनकर बिंदिया धीरे से अपनी आंखों को खोलकर सामने का नजारा देखने लगी सामने सुगंधा अपने बेटे के लैंड को पकड़ कर मुठिया रही थी और अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर दबा रहा था यह नजारा देख कर भी दिया अपने मन में सोचने लगी की सुगंधा की जगह वह होती तो कितना मजा आता है एक जवान लड़का कितना सुख दे सकता है इसका एहसास ही उसके बदन में गुदगुदी कर रहा था। बिंदिया अभी यह सब सोच ही रही थी कि तभी उसे जो सुनाई दिया उसे सुनकर वह एकदम से सन्न रह गई सुगंधा की बात उसके कानों में पड़ी वह अपने बेटे से बोल रही थी।



आज मैं तेरा लंड चूस चूस कर इसका रस निकाल दूंगी,,,, देखना आज मैं तुझे इतना मस्त कर दूंगी कि तू मेरे इशारे पर नाचने लगेगा।

मैं तो पहले से ही तुम्हारे इशारे पर नाच रहा हूं तभी तो तुम्हारे साथ यहां आ गया अपना परिवार छोड़कर तुम जितना मजा मुझे दोगी उससे दुगना मजा में तुम्हें दूंगा।

यह बात है अब देख में क्या करती हूं,,,।

(लंड चूसने वाली बात सुनकर बिंदिया के तन बदन में सिहरन से उठने लगी थी। क्योंकि आज तो कुछ नहीं कभी इस बारे में सोची ही नहीं थी और ना ही कभी इस क्रिया को की थी इसलिए यह सब उसे बेहद अद्भुत लग रहा था वह धीरे से अपनी आंखों को खोलकर सामने का नजारा देख रही थी लालटेन की पीली रोशनी में उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था सुगंध भी यह सब उसे दिखाना चाहती थी इसलिए वह बिंदिया की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रही थी। और अगले ही पल वह धीरे से नीचे झुकी और अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड पर अपनी जीभ गिरने लगी लालटेन की पीली रोशनी में अंकित के मोटे तगडे लंड का मोटा सुपड़ा एकदम तमतमा रहा था,,, जिस पर सुगंधा अपनी जीभ फिरा रही थी यह नजारा देख कर बिंदिया के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी जी बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं थी आज उसकी आंखों के सामने वह दृश्य दिखाई दे रहा था कभी सोच भी नहीं सकती थी कि एक औरत मर्द का लंड मुंह में लेकर चुस्ती भी है। देखते ही देखते सुगंधा अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी, बिंदिया की हालत खराब हो रही थी,,,, उत्तेजना के मारे उसकी बुर कचोरी की तरह फूल गई थी इतनी मदहोशी और उत्तेजना उसे पहले कभी महसूस नहीं हुई थी बाहर बारिश का जोर बराबर का बना हुआ था तेज हवा ही रह रहकर ताड़पत्री को हिला दे रही थी लेकिन तख्ते पर मां बेटे का हौसला बिल्कुल भी पसंद नहीं हो रहा था एक मर्द को एक खूबसूरत औरत का साथ ऐसे मौसम में अगर ना हो तो यह मौसम बेहद डरावना हो जाता है लेकिन इस समय मां बेटे दोनों कोई दूसरे का साथ था दोनों जवानी का मजा लूट रहे थे इसलिए यह मौसम उनके लिए किसी वरदान से काम नहीं था क्योंकि यहां आने से पहले वह कभी सोच भी नहीं थे कि यहां पर उन्हें इस तरह के माहौल का सामना करना पड़ेगा जो की बेहद मदहोशी से भरा हुआ था।



सहहहहह आहहहहह मेरी रानी तुम कितना मस्त चुस्ती हो,,,,ऊममममम ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं,,,,(अपनी मां के सर पर हाथ रखकर वह हल्के हल्के से उसे पर दबाव बनाता हुआ मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,,, जिसे सुनकर बिंदिया के होश उड़े जा रहे थे क्योंकि उम्र में अंकित सुगंधा के बेटे के जैसा था बिंदिया के नजरिया से और बिंदिया यही सब देखकर हैरान थी क्योंकि वह अपनी मन में सोच रही थी कि अपनी मां की उम्र की औरत को यह लड़का कितनी आराम से रानी के घर संबोधन कर रहा है जबकि जब उसके और उसके पति के बीच रिश्ता अच्छा था तब भी उसके पति ने इस तरह से प्यार से उसे नहीं बुलाया था बल्कि इस तरह से प्यार भी नहीं किया था बस अपनी जरूरत पूरी होने पर बिस्तर से खिसक लेता था। इसलिए इस समय अंकित की रसभरी बातें बिंदिया को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी। बिंदिया को साफ तौर पर दिख रहा था की सुगंधा की हरकत की वजह से अंकित के चेहरे के भाव जिस तरह से बदल रहे थे उसे यकीन हो चला था की क्रिया को करवाने मैं मर्द को बहुत मजा आता है, बिंदिया कि सांसे एकदम गरम हो चली थी,, सुगंधा के मुंह से मोटा तगड़ा लंड गले तक ले लेने की वजह से,गगगगगग,,,,,गगगगगग,,,, जैसी आवाजें निकल रही थी,,, अौर सुगंधा बड़ी मस्ती के साथ अपने बेटे के लंड को चुस भी रही थी। अपनी आंखों के सामने यह सब होता हुआ देख कर बिंदिया हैरान परेशान हुए जा रही थी वह कभी सोची भी नहीं थी की मर्द औरत से इस तरह से भी सुख प्राप्त करता है और औरत को भी यह सब करने में मजा आता है। कुछ देर तक इसी तरह से सुगंधा अपने बेटे के लंज को चुसती रही,,, बिंदिया के लिए यहां हैरानी का सबब इसलिए भी था कि अभी तक उसका पानी नहीं छुटा था जबकि उसे अच्छी तरह से याद था कि बहुत परेशान हुआ था जब वह अपने पति के साथ थोड़ा बहुत मजा लेती थी तो बिना डाले ही उसका पानी निकल जाता था,,, लेकिन अंकित का पानी अभी तक नहीं निकला था इस बात से वह काफी हैरान थी क्योंकि वह बहुत देर से उसके लंड को टनटनाए हुए देख रही थी।



सुगंधा अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल देते और गहरी गहरी सांस ले रही थी,,, अंकित अपनी मां को देखकर मुस्कुरा रहा था सुगंधा भी अंकित की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी,,, तभी अंकित अपनी मां से बोला।

अब उतार दो अपने कपड़े को अब इसकी कोई जरूरत नहीं है,,, नंगी हो जाओ मेरी रानी तुम बिस्तर पर नंगी ही अच्छी लगती हो,,,,,

अरे धीरे बोल कही यह सुन लेगी तो गजब हो जाएगा,,,।

कुछ गजब नहीं होगा देख नहीं रही हो घोड़ा बेचकर सो रही है,,,, और अगर जाग भी गई तो क्या हो जाएगा मेरा मोटा सा बड़ा लंड देखकर इसकी बुर खुद पानी छोड़ रही होगी, मैं तो कहता हूं अगर यह जाग जाए तो इसे भी खेल में शामिल कर लेते हैं काफी दिनों से इसे भी शायद लंड नहीं मिला है,,, और अगर आज की रात जमकर इसकी चुदाई कर दुं तो इससे बड़ा यहां रुकने का इसके लिए मुआवजा क्या हो सकता है इसे वह मजा दूंगा की यह जिंदगी भर याद रखेगी,,,,।



मुझे नहीं लगता कि यह तैयार होगी,,,,।

तैयार तो हो जाएगी बस एक बार नींद इसकी खुल जाए और हम दोनों को देख ले तो इसकी बुर खुद ही तड़प उठेगी लंड लेने के लिए,,,,।

( अंकित और उसकी मां जानबुझ कर ईस तरह की बातें कर रहे थे ताकि बिंदिया उन दोनों की बातों को सुन सके न जाने क्यों इस समय सुगंधा को भी लगने लगा था कि अगर बिंदिया खेल में शामिल हो जाए तो मजा आ जाए,,, वाकई में यह सब सुनकर बिंदिया के भी अरमान मचलने लगे थे कुछ पल के लिए वह भी कल्पना करने लगी थी कि अगर सच में ऐसा हो जाए तो इस जवान लड़के का लंड उसकी बुर में जाएगा तो कितना मजा आएगा यह सब सोच कर उसके तन बदन में हलचल सी होने लगी थी,,,,, वह अपनी आंखों को धीरे से खोल ले रही थी वैसे जिस जगह पर वह सोई हुई थी वहां पर थोड़ा सा अंधेरा था इसका फायदा उसे बराबर मिल रहा था और जहां पर वह दोनों मजा ले रहे थे वहां लालटेन की पूरी रोशनी बनी हुई थी। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपनी साड़ी को अपनी कमर से खोलने लगी अंकित तो पहले से ही नंगा था,,, देखते-देखते सुगंधा अपने बदन से साड़ी को खोलकर एक तरफ रखनी और पेटिकोट की डोरी को खोलने लगी और अगले ही पल पेटिकोट की डोरी खोलते ही उसका पेटिकोट उसकी कमर पर ढीली पडने लगा,,,, जिसे बैठे-बैठे ही सुगंधा अपने हाथों के सहारे से उसे अपनी कमर के नीचे सरकाने लगी बिंदिया यह सब देख रही थी। सुगंधा की यह अदा उसे बेहद उत्तेजित कर देने वाली लगी थी जब वह पेटीकोट को सरकाने के लिए अपनी भारी भरकम गांड को तख्ते से थोड़ा ऊपर उठा ली थी। और देखते ही देखते वह अपनी पेटीकोट को उतार कर पुरी नंगी हो गई थी। यह सब देखकर बिंदिया के तन बदन में भी चुदास की लहर उठ रही थी, उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था कि एक औरत अपने बेटे की उम्र के लड़के के सामने बेझिझक अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी कैसे हो सकती है जबकि आज तक उसने कभी अपने हाथों से यह काम नहीं की थी वैसे तो वह अपने जीवन में बिस्तर पर कम ही बार निर्वस्त्र हुई थी और जितनी बार हुई थी उसके पति ने हीं अपने हाथों से किया था वह खुद से अपने कपड़े कभी नहीं उतारी थी।



सुगंधा पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी मां बेटे दोनों निर्वस्त्र थे इस बात को लेकर बिंदिया काफी हैरान थी कि इन दोनों को इस बात का एहसास नहीं है कि वह दोनों किसी गैर औरत के सामने इस तरह की हरकत कर रहे हैं उन्हें ईस बात से बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता कि अगर वह जाग गई तो क्या होगा। फिर भी जो कुछ भी हो रहा था वह बिंदिया के लिए काफी उत्तेजित कर देने वाला था,, संपूर्ण रूप से अपनी मां को नग्न अवस्था में देखकर अंकित उसे अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी चिकनी पीठ पर अपनी हथेलियां फिराने लगा फिर धीरे से उसे तख्ते पर पीठ के बल लेटा दिया,, और उसकी दोनों टांगों को अपने हाथों से खोलकर नजर भर कर उसके गुलाबी क्षेत्र को देखने लगा,, बिंदिया को सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,, उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी बुर को देखकर वह कितना प्रसन्न और उत्तेजित नजर आ रहा है। अभी वह इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी अंकित बिंदिया को सुगंधा की दोनों टांगों के बीच झुकते हुए नजर आ रहा था और अगले ही पर जो नजर उसने अपनी आंखों से देखी उसे देखते ही उसके बदन में सुरसुराहट सी होने लगी, पल भर के लिए उसे समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है। इस बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं थी एक मर्द भला एक औरत के उस अंग को क्यों मुंह लगाएगा जिसमें से पेशाब की धार निकलती है। लेकिन यह तो सिर्फ उसकी सोच थी उसकी आंखों के सामने तो इसके विपरीत हो रहा था और पल भर में ही बिंदिया को एहसास होने लगा कि, इस क्रिया को करने में जितना मजा अंकित को आ रहा था उससे ज्यादा मजा सुगंधा को भी आ रहा था,,, बिंदिया को साफ दिखाई दे रहा था कि, अपनी बुर चटवाते हुए सुगंधा तख्ते पर कसमसा रही थी तड़प रही थी मदहोश हो रही थी,,, लेकिन ठीक उसके सामने बिंदिया की भी हालत सुगंधा जैसी ही थी भले ही उसकी बुर की चटाई नहीं हो रही थी लेकिन तड़प उतनी ही थी जितना की सुगंधा के तन बदन में मदहोशी छाई हुई थी वह सोचने पर मजबूर हो चुकी थी की औरत के लिए असली सुख क्या है। उसे खुद को कैसा सुख मिल रहा है क्या हुआ सुखी है क्या एक औरत को जिस तरह की संतुष्टि मिलनी चाहिए क्या उसे मिल रही है सीधी-सादी संस्कारी बने रहने में कौन सा आनंद उसे मिल जा रहा है जबकि उसकी आंखों के सामने एक समाज की उच्च पदवी पर विराजमान औरत बनकर जिंदगी के सारे सुख भोग रही है एक औरत होने का सुख भोग रही है। बिंदिया अपने आप से ही सवाल कर रही थी पूछ रही थी क्या उसे भी दूसरी औरतों की तरह बन जाना चाहिए संस्कारी सीधी शादी औरत बने रहने में अब तक उसे कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ था एक औरत का जो असली सुख होता है वह भी उससे कोसों दूर जा चुका था धन दौलत ना सही लेकिन अपनी खुशी के लिए तो वह जी ही सकती है,,,,,



अपने मन में चल रहे इस तरह के द्वंद से वह हैरान परेशान हुए जा रही थी उसे लगने लगा था कि वह जो जिंदगी की रही है वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है परिवार के गुजर बसर के लिए तो ठीक लेकिन उसके खुद के लिए यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था की जवानी के जी दहलीज पर वह पहुंच चुकी थी वहां पर उसे मर्द का साथ भरपूर चाहिए था। ऐसा प्यार जो उसके अरमानों को पंख दे खुली हवा में उड़ने के लिए जैसा की यह औरत एक जवान लड़के का साथ प्रकार इस समय बिस्तर पर मजे लूट रही थी बिल्कुल इसी तरह से काफी सोच विचार करने के बाद बिंदिया अपने मन में सोचने लगी कि उसे भी इस औरत की तरह जिंदगी जीनी चाहिए आज की रात अगर वह इसके साथ हम बिस्तर हो भी जाती है तो किसी को कानों कान खबर तक नहीं पड़ेगी की रात उसके साथ क्या हुआ एक ही रात में हुआ जीवन का अद्भुत सुख प्राप्त कर लेगी जो सुख उसे आज तक वैवाहिक जीवन में नहीं मिला आज की रात वह उन सारे सुख विकल्पों को पूरा कर लेगी अपने जीवन में आए रिक्त स्थान की पूर्ति कर लेगी। अब बिंदिया भी मन बना ली थी और अपनी आंखों को खोलकर सामने के घमासान युद्ध को देख रही थी जो की और भी ज्यादा रोमांचक और मादकता से भरता चला जा रहा था। उसे साफ दिखाई दे रहा था कि अंकित सुगंधा की बुर को स्वाद ले लेकर चाट रहा था वह पागलों की तरह सुगंधा की टांगों के बीच टूट पड़ा था और सुगंधा मदहोशी के चरम पर पहुंच चुकी थी,,, हालात बिल्कुल खराब होते जा रहे थे सुगंधा के बदन में कंपन हो रहा था वह अपनी टांगों को खोलकर जी भरकर अपने बेटे को माया दे रही थी उसकी मोटी मोटी केले के समान चिकनी जांघें लालटेन की पीली रोशनी में चमक रही थी जिसे देखकर बिंदिया का ईमान डोल रहा था। बिंदिया को एहसास हो रहा था कि यह औरत वस्त्र में जितनी खूबसूरत लग रही थी उससे भी ज्यादा खूबसूरत और उत्तेजक बिना वस्त्र के लग रही है वाकई में निर्वस्त्र अवस्था में और औरत की खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है।



ऊममममम आहहहहहह मेरे राजा तू तो मुझे पागल कर दिया है,,,,,,सहहहहह आबहहहहह पूरी जीभ डालकर चाट आहहहहह,,,,,,ऊमममममममम,,,(अपने बेटे के बालों को पकड़कर सुगंधा कसमसा रही थी उसके मुंह से लगातार सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,, जो की बारिश की तेज आवाज में दब के रह जा रही थी लेकिन उसकी शिसकारी की आवाज बिंदिया के कानों तक जरूर पहुंच रही थी जिसे सुनकर बिंदिया के भी अरमान मचलने लगे थे) ऊममममम जल्दी-जल्दी चाट मेरे राजा मैं पागल हुई जा रही हूं बुर चटवाने में सच में बहुत मजा आता है और तू बड़े अच्छे से चाटता भी है,,,आहहहहह आहहहहहहहह ,,,,,,ऊममममम,,,,, मुझे कुछ हो रहा है,,,,,,आहहहहहहहह मेरा पानी निकलने वाला है मैं झड़ रही हूं मेरे राजा,,,,,,।

(इतना सुनते ही बिंदिया की हालत एकदम से खराब हो गई अपने आप ही उसकी हथेली साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर आ गई और वह साड़ी के ऊपर से अपनी बुर को मसलने लगी,,,,, अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी एकदम से पागल हो गया और अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को दोनों हाथों से पकड़ कर पागलों की तरह लप सब करके चाटना शुरू कर दिया मां बेटे दोनों जानते थे की बिंदिया उन दोनों की हरकत को देख रही है, इसलिए दोनों उसके सामने और भी ज्यादा आक्रामक रवैया अपना रहे थे और बिंदिया के भी सब्र का बांध टुटता नजर आ रहा था वह भी साड़ी के ऊपर से ही अपनी कचोरी जैसी खुली हुई बुर को जोर-जोर से मसल रही थी और अपनी आंखों से सामने के नजारे का आनंद ले रही थी,,,,,, तभी सुगंधा के मुख से जोरदार की चीख की आवाज निकली)



आहहहहह आहहहहहह ऊईईईई मां,,,आहहहहहहहह(वह दोनों हाथों से अपने बेटे का कर पकड़ कर अपनी बुर पर दबा दी थी और झड़ना शुरू कर दी थी सुगंधा के मुंह से निकलने वाली चीख की आवाज को सुनकर बिंदिया एकदम से सन्न रह गई थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में सुगंधा को अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था वरना इस तरह से सीखने की आवाज तो आज तक उसके मुंह से भी कभी नहीं निकली थी,,,,,, बिंदिया यह देखकर और भी ज्यादा हैरान थी कि झड़ने के बाद भी अंकित उसके बुर से निकलने वाले नमकीन पानी का आनंद ले रहा था उसे चाट चाट कर अपने गले के भीतर उतार रहा था। बिंदिया यह देखकर और भी ज्यादा मदहोश हुए जा रही थी कि, एक बेटे की उम्र का लड़का अपनी मां की उम्र की औरत को केवल चाट कर ही झाड़ दिया था,,, कुछ देर तक अपनी मां की बुर में भिड़े रहने के बाद उसकी सारी मलाई चाटने के बाद वह धीरे से अपना मुंह ऊपर की तरफ उठाया उसके होठों से उसकी मां की बुर से निकलने वाले मदन रस का लार टपक रहा था जिसे देखकर बिंदिया पानी पानी हो रही थी। अंकित के चेहरे पर संतुष्टि के भाव साफ नजर आ रहे थे वह मुस्कुरा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने जग जीत लिया हो और वाकई में इस उम्र के लड़के के लिए यह जग जीतने वाली ही बात थी क्योंकि उसके साथ उसका हम बिस्तर एक खूबसूरत औरत थी जो दो बच्चों की मां थी ऐसी औरत को काबू में कर पाना एक जवान लड़के के लिए बहुत बड़ी बात होती है और इस खेल में जवान लडका भारी पड़ रहा था। जवान लड़के के साथ सुख भोगने के अरमान बिंदिया के मन में भी मचलने लगे थे,,,, गांव के अंदर इस उम्र के लड़के को बिंदिया बेटा कह कर ही बुलाती थी लेकिन इस समय इस तूफानी बारिश में बेटे की उम्र के लड़के में एक जवान मर्द उसे नजर आ रहा था जो उसकी इच्छाओं की पूर्ति कर सकता था उसे संतुष्ट कर सकता था। वह भी इस खेल में शामिल होना चाहती थी लेकिन कैसे यह उसे समझ में नहीं आ रहा था वह अपने मन में यह सब सो रही थी कि कब तक अंकित ताकते के नीचे उतरकर खड़ा हो चुका था उसका लंड अभी भी टांडा आया हुआ था इस बात की हैरानी बिंदिया के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि अभी तक उसका लंड बरकरार था उसका पानी नहीं छूटा था और एक औरत के लिए इससे भला हैरत अंगेज क्या बात हो सकती है।



बिंदिया अपनी नजरों को फिर से सामने स्थिर कर दी थी,,,,, माहौल पल पल मदहोश होता चला जा रहा था बाहर बारिश का शोर और बारिश का जोर रुकने का नाम नहीं ले रहा था बिंदिया भी अपने मन में सोच रही थी कि अगर वह इन दोनों को आसरा ना देती तो इन दोनों का क्या होता अगर वह सच में इन दोनों को आसरा ना देती तो इसमें उसका ही घाटा होता वह अपनी आंखों से एक उम्र दराज औरत और एक जवान लड़के का काम कल नहीं देख पाती दोनों की प्रेम लीला को अपनी आंखों से देखा नहीं पाती और यह ना देख पाती की एक मर्द औरत के बीच उम्र की खाई कोई मायने नहीं रखती,,,,, शायद यह बात इस समय सच ही साबित हो रही थी की कमर के नीचे उम्र की कोई सीमा नहीं होती। क्योंकि मर्द और औरत के बीच का असली प्रेम कमर के नीचे से ही शुरू होता है और खत्म होता है। अपने लंड को हिलाते हुए अंकित अपनी मां से बोला,,,।

ओहहह मेरी रानी आज तुम्हारी ऐसी है चुदाई करूंगा कि तुम लंगड़ा कर चलोगी,,,,।





ना बाबा ना ऐसा बिल्कुल भी मत करना क्योंकि अभी हमें पहाड़ी से नीचे भी उतरना है कहीं ऐसा ना हो कि मुझे गोद में उठा कर तुझे नीचे उतरना पड़े।

कोई बात नहीं जानेमन तुम्हें तुम्हें गोद में लेकर चाहे जहां घूम सकता हूं तुम्हारे जैसे खूबसूरत औरत इतना मजा दे रही है तो इतना तो मै कर ही सकता हूं,,,,।

तो क्या तू सिर्फ मेरे साथ मजा लेने के लिए है।

अरे नहीं नहीं रानी मैं तो तुमसे प्यार करता हूं और प्यार में मजा भी तो जरूरी है,,,,, देखो ना कितनी देर से मेरा लंड खड़ा है,,,,,।

वह तो मैं देख ही रही हूं कैसे दिखा दिखा कर बिंदिया को मुत रहा था,,,।

बात तो तुम सही कह रही हो बिंदीया देख भी रही थी और सच कहूं तो बिंदिया को चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,,।

(अंकित के मुंह से इतना सुनते ही बिंदिया अपने मन में बोली हाय दैया यह तो मेरी चुदाई के लिए तड़प रहा है,,,, मेरी बुर पानी छोड़ रही है मुझे ही कुछ करना होगा वरना हाथ में आया हुआ इतना सुनहरा मौका जाता रहेगा और आज की रात उसके जीवन में फिर कभी नहीं आने वाली। यही सोच कर बिंदिया परेशान हो रही थी की सुगंधा बोली।)

तुझे क्या लगता है बिंदिया तुझसे चुदवाएगी वह गांव की औरत है,,, मुझे नहीं लगता कि तेरे सामने वह अपनी दोनों टांगे खोलेगी।



क्यों नहीं खोलेगी मेरी रानी मेरा मोटा तगड़ा लंड देखकर कोई भी औरत अपनी टांगे खोलने पर भी बस हो जाती है,,,, मैं भी बिंदिया की आंखों में साफ देखा था उसने आज तक मेरे जैसा लंड कभी सपने में भी नहीं देखी थी।

(अंकित की आवाज सुनकर बिंदिया हैरान थी वह सच में पड़ गई थी कि इस उम्र का नौजवान लड़का एक औरत के मामले में इतना चालाक कैसे हो सकता है वाकई में उसके मन में यही चल रहा था लंड को देखकर और यह बात सच ही है कि आज तक उसने ऐसा लंड अपने सपने में भी नहीं देखी थी अब तो अंकित की बातों को सुनकर उत्तेजना के मारे बिंदिया की बुर फूलने पिचकने लगी थी। अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

तुम देखना मेरी रानी अगर बिंदिया एक बार इसे अपनी बुर में ले लेगी ना तो मेरी दीवानी बन जाएगी मेरी गुलाम बन जाएगी मेरे सामने अपने आप ही दोनों टांगें खोल देंगी। मैं तो खुद ही तड़प रहा हूं ईसकि मुलायम बुर में अपने लंड को डालकर ककड़ी की तरह चीरने के लिए,,,आहहहहह काश ऐसी तूफानी बारिश में मुझे मिल जाती तो इसकी ऐसी की तैसी कर देता,,,,,।



चल ये सपने देखना बंद कर,,, अभी तो मेरी प्यास बुझा तेरा लंड देखकर मेरी बुर फिर से पनियाने लगी है,,,,ऊमममममममम,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी हथेली अपनी बुर पर रखकर मसलने लगी,,,,, मां बेटे दोनों इस तरह की बातें जानबूझकर कर रहे थे क्योंकि वह लोग जानते थे की बिंदिया जाग रही है अंकित उसके तन बदन में भी चुदास की लहर भरना चाहता था और उसकी यह युक्ति काम कर रही थी मां बेटे दोनों की कामुक हरकतें और अंकित कि ईस तरह की बातें बिंदिया की बुर में भी हलचल मचा रही थी वह भी बेकरार हो रही थी इस खेल में शामिल होने के लिए बस कोई बहाना नहीं मिल रहा था,,,,,, अंकित भी अपनी मां की कामुक बातों को सुनकर उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसकी आधी गांड तख्ते के किनारे करके उसकी टांगों को अपनी कमर पर लपेट लिया और अपने लंड को उसकी बुर पर जोर-जोर से पटकने लगा जैसे-जैसे वह पटक रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के मुंह से कामुक आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर बिंदिया के तन बदन में उतेजना की चिंगारी फूट रही थी । क्योंकि अब उसे मालूम था कि क्या होने वाला है वह यह देखने के लिए मचल रही थी कितना मोटा तगड़ा लंड इस औरत की बुर में आराम से चला जाता है या मस्सकत करनी पड़ेगी,,,,, और देखते ही देखते बिंदिया की आंखों के सामने ही राहुल अपनी मां के बुर में अपना मोटा तगड़ा लंड डालने लगा वैसे तो सुगंधा अपने बेटे के लंड को बड़े आराम से अपनी बुर के अंदर ले लेती थी लेकिन इस समय बिंदिया के सामने वह जानबूझकर नाटक करते हुए दर्द भरी कराहने की आवाज निकाल रही थी,।



आहहहहह ,,,ओहहहहह मां आराम से रे आहहहहहह तेरा बहुत मोटा है ऐसा लगता है जैसे गधे का लंड है धीरे-धीरे अंदर डाल एक साथ मत डाल दिया कर मुझे दर्द होता है,,,,,आहहहहहह,,,,।

(अंकित भी अपनी मां के इस नाटक में साथ देते हुए बोला)

चिंता मत करो मेरी रानी एकदम मक्खन की तरह अंदर जाएगा देखो कैसे अंदर की तरफ जा रहा है धीरे-धीरे सरक रहा है तुम्हारी बुर का पानी मेरा काम आसान कर देता है,,,,,ऊमममममम बहुत गर्म है जानेमन बुर नहीं है भट्टी है,,, मेरी जगह कोई और होता तो तुम्हारी भट्टी में कब का पिघल कर ढेर हो जाता।

यह बात तो माननी पड़ेगी मेरे राजा तू असली मर्द है सच में तेरी जगह कोई और होता तो मेरे पकड़ने से ही पानी फेंक देता,,, लेकिन तू घोड़े की तरह डंटा रहता है,,,

तभी तो तुम्हारे साथ हूं वरना मेरी जगह किसी और को ले आती,,,



तेरी जगह ले सके ऐसा कोई मर्द ही नहीं है,,,,,,आहहहहह आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है,,,,ऊमममममममम,(वह अपनी बात पूरी कर पाते उससे पहले ही अंकित अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और वह एकदम से मतवाली होने लगी थी उन दोनों की बातें सुनकर बिंदिया की बुर पिघल रही थी,,,, वह मदहोश हो रही थी वह जोर-जोर से साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल रही थी लेकिन अब इससे भी उसका काम नहीं चल रहा था,,,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि अंकित की कमर हौले हौले से आगे पीछे हिल रही थी वह सुगंधा को चोद रहा था,,,महीनो गुजर गए थे बिंदिया को अपनी बुर में लंड लिए लंड भी किया था हाथ के अंगूठे जितना इसलिए इस समय दोनों की चुदाई देखकर बिंदिया के तन बदन में आग लगी हुई थी उससे रहा नहीं जा रहा था,,, सुगंधा की मदहोशी उसके अरमानों को पंख दे रही थी वह भी सुगंधा की तरह मस्त होना चाहती थी मजा लेना चाहती थी,,,, अपनी जवानी की गर्मी बर्दाश्त ना कर सकने की वजह से बिंदिया अपना हाथ अपनी साड़ी के अंदर डाल दी थी और अपनी नंगी बुर पर अपनी हथेली रखकर उसे मसलना शुरू कर दीजिए जो की पूरी तरह से पानी से चिपचिपी हो गई थी। अपनी कमर हिलाते हुए अंकित बिंदिया की तरफ देख ले रहा था और जब जब वह बिंदिया की तरफ देखता बिंदिया अपनी आंखों को बंद कर ले रही थी,,,, लेकिन अंकित जानता था कि वह सब कुछ देख रही है उसकी तेज चलती सांस उसकी साड़ी के अंदर घुसा हुआ उसका हाथ उसकी कहानी को साफ बयां कर रहा था और बिंदिया की हालत को देखकर अंकित मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,,, वैसे भी अंकित ने बातों ही बातों में बिंदीया को चोदने की अपनी मंसा को साफ जाहिर कर दिया था।



कई औरतों की संगत में आकर अंकित इतना तो जान ही चुका था कि एक मोटे तगड़े लंड के दर्शन करने के बाद औरत की स्थिति क्या होती है। अंकित समझ गया था की बिंदिया अपनी बुर में भी उसके लंड को लेना चाहती है चुदवाना चाहती हैं बस शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही है। उसकी इसी तड़प को उसकी हवास को और ज्यादा बढ़ाते हुए अंकित अपने दोनों हाथों को आगे बढ़कर अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम लिया था जो की पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर लोट रहे थे। अपनी मां की चूचियों को दबाता हुआ अंकित के धक्के तेज हो गए थे,,,,, बर और लंड का मिलन एक अद्भुत संगीत को पैदा कर रहा था जो की झुगी के अंदर मदहोशी के वातावरण में गूंज रहा था और यह मदहोश कर देने वाली आवाज बिंदिया के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी। सुगंधा के मदहोशी भरी शिसकारी की आवाज को सुनकर बिंदीया को इस बात का एहसास हो रहा था कि छुड़वाने में सुगंधा को कितना आनंद आ रहा था। उम्र के ईस पड़ाव पर पहुंचकर बिंदिया को लगता था कि अब उसके जीवन से यह सुख दूर हो चुका है लेकिन आज अपनी आंखों से देख कर उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि औरत के अंदर से यह सुख प्राप्त करने की इच्छा कभी नहीं जाती बस वह अपनी मजबूरियों के कारण अपनी इच्छा को अपने अंदर दबा ली जाती है क्योंकि वह जानती थी कि बिस्तर पर मजा ले रही सुगंध उस उम्र में 8-10 साल बड़ी थी जब वह उम्र के ईस पड़ाव पर पहुंचकर खुलकर एक जवान लड़के से मजा ले सकती है तो वह तो अभी भी पूरी तरह से जवानी के दहलीज पर ही है तो वह क्यों नहीं मजा ले सकती यह सोचते हुए वह अपनी एक उंगली को अपनी बर के अंदर डालकर अंदर बाहर करना शुरू कर दी थी और अपनी आंखों से सुगंधा की चुदाई को देख रही थी अंकित के धक्के बहुत जबरदस्त है उसके हर धक्के के साथ तख्ते पर लेटी हुई सुगंधा हचमचा जा रही थी,,, अगर अंकित अपने हाथों से उसकी चूचियों को आजाद कर देता तो वह पानी भरे गुब्बारे की तरह उसके हर एक धक्के के साथ लहरा उठती लेकिन अंकित अपनी मां की चूचियों को पकड़कर एक आधार बनाया हुआ था जिसकी वजह से जोर-जोर से धक्का लगाने में उसे आसानी हो रही थी।



फच्च फच्च की आवाज से पूरी झुग्गी गूंज रही थी, इस तरह की आवाज बिंदिया को और भी ज्यादा मदहोश बना रही थी,,, माहौल पूरी तरह से मदहोशी के साए में पल रहा था,,,, मां बेटे दोनों को किसी गैर के सामने चुदाई करने में कुछ ज्यादा ही मजा आने लगा था। दोनों के लिए शर्म की कोई सीमा नहीं थी। उनके लिए सर्वोच्च केवल आनंद ही था संभोग में मिल रहा सुख ही उनके लिए प्राथमिकता थी यह मायने नहीं रखता था कि वह दोनों किसके सामने चुदाई का सुख भोग रहे हैं बस उन्हें मजा आना चाहिए । और ऐसा हो भी रहा था मां बेटे दोनों जानते थे कि एक जवान औरत उन्हें चुदाई करते हुए देख रही है और यही एहसास उन दोनों की उत्तेजना को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था कुछ देर तक अंकित इसी अवस्था में अपनी मां की चुदाई करता रहा यह सब बिंदिया के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि अभी तक अंकित का पानी नहीं निकला था और सुगंधा की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी।

तकरीबन 3 घंटे का समय गुजर चुका था लेकिन इस बीच बरसात बिल्कुल भी काम नहीं हुई थी तेज हवाएं तेज बारिश ऐसा लग रहा था कि दोनों को यही रोकने के लिए ही माहौल बिगड़ा था। बिंदिया से बर्दाश्त नहीं हो रहा था अंकित का हर एक धक्का उसके अरमानों को मदहोश कर रहा था। इस अवस्था में चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला और अपनी मां से बोला।



बस मेरी जान अब घोड़ी बन जाओ पीछे से तुम्हारी लेना चाहता हूं,,,, पीछे से तुम्हारी लेने का मजा ही कुछ हो रहा है तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड आंखों के सामने देखकर मेरा जोश और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

तु मुझे उलट पलट कर मेरी हालत खराब कर देता है,,,,,(धीरे से अपनी स्थिति को बदलते हुए सुगंधा बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) सच कहूं तो तेरा इस तरह से मेरा हालत खराब कर देना ही मुझे अच्छा लगता है,,,,,, ले बन गई घोड़ी अब बन जा तू मेरा घोड़ा,,,,,(सुगंधा घोड़ी बनते हुए बोली और अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर एकदम से मत हो गया और दो चार चपत लगाते हुए बिंदिया की भी उत्तेजना को बढ़ाते हुए वह बोला)



आहहहहह अब लग रही है ना मेरी छिनार,,,,(छिनार सब सुनते ही बिंदिया की बर फुदकने लगी,,, यह शब्द एकदम देहाती था लेकिन इस शब्द में इतनी मदहोशी थी कि इसे सुनने के बाद औरत एकदम मस्त हो जाती थी और खास करके चुदाई करवाते समय और यही हाल शायद इस समय सुगंधा के भी हो रहा था क्योंकि उसके चेहरे पर उत्तेजना साहब झलक रही थी और वह अपने बेटे की बात सुनकर बोली,,,)

मैं तो पहले से ही तेरी छिनार बन चुकी हूं अब जमकर ले अपनी छिनार की मेरी बुर का भोसड़ा बना दे डाल दे अपने गधे जैसे लंड को मेरी बुर में।

ओहहह मेरी रंडी मेरी भोसड़ा चोदी तेरी इस तरह की बातें यह तो मुझे पागल बना देती है तभी तो तेरे पीछे पागल बना फिर रहा हूं अब देख मेरा कमाल तेरी बुर का भोसड़ा बना देता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर दूसरे हाथ को अपनी मां की गांड पर रखकर उसके गुलाबी छेद में डाल दिया और पहले ही धक्के में पूरा का पूरा अंदर घुसेड़ दिया हल्का सा सुगंधा के मुंह से चिकनी की आवाज निकली थी और फिर सब कुछ बराबर हो गया था,,,,, अंकित जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया था और सुगंधा भी अपने मुंह से जोर-जोर से आवाजें निकल रही थी क्योंकि यहां पर किसी के सुने जाने का बिल्कुल भी डर नहीं था बिंदिया को छोड़कर और वैसे भी बिंदिया को वह जानबूझकर इस तरह की आवाजें सुना रही थी। बिंदिया के तन बदन में हलचल सी मची हुई थी इस तरह की आवाज सुनकर उसकी खुद की उंगली उसकी बुर में बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रही थी,,,, बिंदिया इस बात से भी हैरान थी की सुगंधा की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी थी लेकिन फिर भी पीछे से अंकित का लंड बड़े आराम से उसकी बुर की गहराई तक पहुंच रहा था जिसका कारण साफ था अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिसके कारण बड़े आराम से वह बुर की गहराई तक घुस जा रहा था।



अंकित पूरा जोर लगा दिया था अपनी मां को चोदने में क्योंकि यहां पर वह किसी गैर औरत के सामने अपनी मर्दाना ताकत का प्रदर्शन कर रहा था वह बिंदिया को दिखाना चाहता था की असली चुदाई किसे कहते हैं ताकि वह मदहोश होकर खुद अपनी टांगें खोल दे और वाकई में अंकित का जोश और उसकी चुदाई देखकर बिंदिया के तन बदन में अजीब सी हलचल सी मच रही थी वह अपने मन में सोचने लगी थी कि अगर अंकित का लंड उसकी बुर में जाएगा तब तो वह उसकी बुर के सारे धागे खोल देगा और सवाल यह भी था कि क्या उसका लंड आराम से उसकी बुर में घुस पाएगा नहीं सोचते हुए वह मस्त हो रही थी और अपनी दूसरी उंगली को भी अपनी बुर में प्रवेश करा दी थी,,,,, अंकित की कमर बड़ी रफ्तार से आगे पीछे हो रही थी उसको अंदर की हालत खराब हो रही थी ऐसे ठंडा मौसम में भी उसके माथे से पसीना टपक रहा था और यही हाल अंकित का भी था दोनों की स्थिति को देखकर बिंदिया को इस बात का एहसास हो रहा था कि वह दोनों कितनी मेहनत कर रहे थे। एक बार फिर से सुगंधा झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी उसका बदन अकड़ रहा था अंकित भी ज्यादा दूर नहीं था झड़ने में अपनी मां का अकडता हुआ बदन देखकर अंकित एकदम से उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया था,, और तेज धक्के लगाते हुए मां बेटे दोनों झड़ने लगी थी दोनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे दोनों को झड़ता हुआ देखकर बिंदिया से भी रहा नहीं किया और उसकी बुर से भी मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा,,,, बिंदिया के लिए पहली बार था जब वह कई सालों बाद अपनी उंगली का सहारा लेकर अपनी जवानी की गर्मी को शांत कर रही थी और इस खेल में उसे ज्यादा मजा आया था लेकिन वह जानती थी की असली खेल वह नहीं बल्कि सुगंधा खेल रही थी तख्ते पर। वह अपनी संतुष्टि के लिए यह सब कुछ कर रही थी लेकिन उसे देखकर जो हरकत में कर रही थी उसे उसे संतुष्टि नहीं बल्कि उसकी जवानी की आग और भी ज्यादा भड़कने वाली थी।



अपनी मां की चुदाई करके अंकित धीरे से उससे अलग हुआ और कुछ देर वहीं बैठकर गहरी गहरी सांस लेने लगा वह बिंदिया को इस खेल में कैसे शामिल किया जाए इसी बारे में सोच रहा था। और धीरे से उठकर इस जगह पर खड़ा होकर पेशाब करने लगा बिंदिया के लिए हैरानी की बात यह थी कि झड़ने के बावजूद भी उसका लंड ज्यों का क्यों खड़ा था,,,। क्योंकि बिंदिया जानती थी कि झड़ने के बाद उसने अपने पति के लंड को खड़ा होते हुए नहीं देखी थी इसलिए वह हैरान थी और वह जिस तरह से उसे पकड़ कर पेशाब कर रहा था बिंदिया का धैर्य एकदम से टूट गया था लेकिन वह कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं थी वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी ना तो इस खेल में शामिल हो पा रही थी पेशाब करने के बाद वह फिर से अपनी मां के पास आए और लेट गया और फिर से उसकी चूचियों को दबाकर मजा लेने लगा उसकी मां बोली।

क्यों फिर से तेरा मन कर रहा है क्या,,,?



तुम्हें क्या लगता है कि मेरा मन भर जाएगा माहौल देख रही हो वातावरण देख रही हो कितना मदहोश कर देने वाला वातावरण है ऐसे में अगर मैं सो गया तो मेरी मर्दानगी पर धिक्कार है।

(अंकित की यह बात सुनकर बिंदिया गदगद हो गई,,, क्योंकि एक औरत का हौसला बढ़ाने के लिए इसी तरह की मर्दानगी की जरूरत होती है और अंकित की है बात सीधा उसके दिल में उतर गई थी वह अपने मन में ही बोल रही थी कि इसे कहते हैं असली मर्द जो औरत को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकता है। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध मुस्कुराते हुए बोली)

अरे वह बड़ा आया मर्द,,,, सिर्फ मेरी चुदाई करके तु अपने आप को मर्द समझ रहा है। एक साथ दो औरतों की चुदाई करके दोनों को बराबर का मजा दे तब तु असली मर्द कहलाएगा,,,,।



यह बात है लेकिन दूसरी औरत लाऊं कहां से,,,, यहां दूसरी औरत तो है लेकिन घोड़े बेचकर सो रही है। इसकी जगह अगर शहर की औरत होती तो अब तक हम दोनों के साथ मजा ले रही होती।

हां रे तू सच कह रहा है हाय रे इसकी किस्मत,,, इसके घर में एक जवान मर्द आया है जो इसकी जवान को निचोड़ कर पानी पानी कर सकता था और यह है कि घोड़े बेचकर सो रही है जाने दो हमें क्या,,,, आजा मैं ही तेरे लिए दो औरतों से कम नहीं हूं,,,,।

ओहहहहह मेरी जानेमन तू तो मेरे लिए पूरी दुनिया हो,,,(ऐसा कहते हुए अंकित लेते हुए की अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और उसके खूबसूरत चेहरे पर चुंबनों की बारिश करने लगा मां बेटे दोनों जानबूझकर इस तरह की बातें करके बिंदिया को उकसा रहे थे कि वह भी इस खेल में शामिल हो जाए इसमें सुगंधा भी न जाने क्यों अपने बेटे को दूसरी औरत से बांटना चाहती थी वह भी इसका सुख और अनुभव प्राप्त करना चाहती थी और यही अंकित के लिए भी सुनहरा मौका था दो औरतों को एक साथ चोदने का। मां बेटे दोनों की बातों को सुनकर बिंदिया के तन-बदन में उत्तेजना के लहर उठ रही थी वह भी अपने आप को ही खुश रही थी कि इतनी हिम्मत नहीं दिखा पा रही है कि वह भी उन दोनों के पास पहुंच जाए और सीधा अंकित के लंड को पकड़ के बस इससे ज्यादा कुछ कहने और करने की जरूरत थी नहीं उसे अंकित खुद ही समझ जाता कि उसे क्या चाहिए। बिंदिया अपनी आंखों के सामने फिर से दोनों को आपस में मदहोश होते हुए देख रही थी,,, अंकित अपनी हथेली को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे अपनी तरफ खींच रहा था अपने लंड से सता रहा था वह फिर से पागल हुआ जा रहा था और यह देखकर बिंदिया हैरान भी थी कि अभी-अभी वह अपनी मां की चुदाई करके चढ़ा था और फिर से उसे छोड़ने के लिए तैयार हो गया था,,, अभी तक तो वह केवल दोनों को प्रेमी प्रेमिका ही समझ रही थी इस बात से वह बिल्कुल अनजान थी कि उसकी आंखों के सामने प्रेमी प्रेमिका नहीं बल्कि मां बेटे काम लीला कर रहे थे अगर इस बात को पहचान ली थी तो शायद सुनते ही उसकी बुर से पानी फेंक देता।



लेकिन अब बिंदिया के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था,,, वह एक प्यासी औरत थी और उसकी आंखों के सामने कुआं था जो उसकी प्यास बुझा सकता था लेकिन अपनी प्यास बुझाने के लिए उसे कुएं के पास जाना जरूरी था। वह गहरी सांस लेकर आगे के बारे में सोच रही थी धीरे-धीरे 4 घंटे का समय गुजर चुका था,,, समय उसके पास भी काम था वह जी भर कर आज की रात जवान लड़के से मजा ले लेना चाहती थी को क्यों जानती थी कि ऐसी रात अब उसके जीवन में शायद ना भी आए,,, और वह इस बात से निश्चित तिथि की वह दोनों इधर के रहने वाले बिल्कुल भी नहीं थी और आज रात को जो कुछ भी होगा वह किसी को पता भी नहीं चलने वाला,,,, ऐसा मौका भला कब मिलने वाला था अगर वह इस तरह की हरकत गांव कहीं किसी लड़के से करती तो शायद आज नहीं तो कल बात खुल जाती और फिर बदनामी हो जाती लेकिन यह दोनों गैर थे पर आए थे दूसरे शहर से आए थे और खुद मजा लूट रहे थे इसलिए यह राज, राज ही रहने वाला था काफी सोच विचार करने के बाद बिंदिया से रहा नहीं गया और वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई,,,,, मां बेटे दोनों बिंदिया को देख रहे थे लेकिन उसकी तरफ बिल्कुल भी ध्यान न देने का नाटक कर रहे थे बिंदिया चलते हुए सुगंधा के पास आई और सुगंधा की तरफ देखने लगी,,,, सुगंधा भी बिंदिया की तरफ देखते हुएबोली,,,।



क्या हुआ,,,,,,, जाकर सो जाओ,,,,,(ऐसा जानबूझकर बोल रही थी वह जानती थी कि वह अपने बेटे के साथ किस अवस्था में है दोनों संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में थे ऐसे में कोई जवान औरत इस तरह का नजारा देखकर भला कैसे चैन की नहीं सो पाती सुगंधा की बात सुनकर वह बोली कुछ नहीं बस उसके पास तख्ते के ऊपर बैठ गई और उन दोनों को देखने लगी,,,,, अंकित मदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी युक्ति कम कर गई थी वह उसकी मदहोशी को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और बिंदिया की तरफ देख भी रहा था लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, यह खूबसूरत नजारा देखकर बिंदिया की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और उसकी सांसों की गति के साथ उसकी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जो की ब्लाउज में एकदम साफ दिखाई दे रही थी सुगंधा भी समझ गई थी कि अब उन दोनों का काम हो चुका है,,, इसलिए सुगंधा को न जाने क्या सुझा और वह अपना हाथ बिंदिया की तरफ आगे बढ़कर ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाना शुरू कर दी,,, सुगंधा कि ईस तरह की हरकत से बिंदिया एकदम से मदहोश हो गई,,,, और अपनी मां की हरकत देखकर अंकित भी हैरान था क्योंकि उसे मालूम था कि एक औरत के साथ उसका यह पहली बार का इस तरह की हरकत हो रही थी और इसे देखकर वह और भी ज्यादा उत्तेजित होकर अपनी मां की चूची को जोर जोर से पीना शुरू कर दिया था उसका एक हाथ अभी भी उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर टिका हुआ था और सुगंध ब्लाउज के ऊपर से ही बिंदिया की चूची को दबा दबा कर उसे मस्त कर रही थी।



बिंदिया का भी यह पहला मौका था जब वह किसी औरत के साथ मजा ले रही थी वरना वह कभी सोची कि नहीं थी की औरत के साथ भी ऐसा कर सकते हैं हालांकि अभी तो केवल शुरुआत पर थी लेकिन जैसे ही सुगंधा का हाथ उसे अपनी चूची पर महसूस हुई थी वह एकदम से मदहोश हो गई थी बिंदिया की चूची दबाने में सुगंधा को भी मजा आ रहा था,,,,, सुगंधा बिंदिया के चेहरे पर बदलते भाव को देख रही थी उसे एहसास हो रहा था की बिंदिया को मजा आ रहा था इसलिए वह बिंदिया से बोली।

कैसा लग रहा है बिंदिया,,,,?

वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पाई बस अपनी आंखों को बंद करके इस एहसास में डूबने लगी दूसरी तरफ अंकित एक साथ दोनों औरतों का मजा लेने के लिए तैयार हो चुका था इसलिए अपनी मां की गांड पर से अपना हाथ हटाकर वह बिंदिया की दूसरी चूची को थाम लिया था,,, ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने में अंकित को मजा आ रहा था उसकी चूचियां पूरी तरह से तो हथेली में नहीं आ रही थी लेकिन फिर भी अंकित को अंदाजा हो गया था की बिंदिया की चूचियां उसकी मां की तरह बड़ी-बड़ी नहीं थी ,संतरे की तरह गोल-गोल थी जिसे अपनी हथेली में लेकर दबाने में मजा आ रहा था,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुगंधा भी उत्तेजित हो रही थी वह खुद हैरान थी की वह कैसे अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को दूसरी औरत के साथ मजा लेते हुए देख रही है। वरना ऐसा वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी, कुछ देर तक दोनों मां बेटे इसी तरह से मजा लेते रहे और बीवी अपनी आंखों को बंद करके मदहोशी के सागर में डूबने के लिए तैयार हो चुकी थी सुगंधा चुची को दबाते हुए धीरे से बोली,,,)



अगर मजा लेना है तो इसे उतार दो नंगी हो जाओ हम दोनों की तरह,,,,, तभी ईस खेल का मजा ले पाओगी।

(सुगंधा और अंकित की हरकत से बिंदिया मदहोशी में डूबती चली जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी। अच्छी तरह से जानती थी की सुगंधा की बात मानना यहां पर उचित था बिना कपड़े उतारे इस खेल का मजा लेना जायज बिल्कुल भी नहीं था,,,,, इसलिए वह बिना कुछ बोले अपने आप को तैयार कर चुकी थी निर्वस्त्र होने के लिए अपनी आंखों को बंद करके गहरी गहरी सांस ले रही थी अभी भी उसके कंधे पर साड़ी का पल्लू था जिसे अंकित अपने हाथ से नीचे गिरा दिया था साड़ी का पल्लू छाती से हटते ही उसकी भरपूर जवानी से भरी हुई ब्लाउज में कैद चूचियां दिखाई देने लगी थी अंकित की आंखों की चमक बढ़ती जा रही थी क्योंकि आज उसके लिए भी यह सुनहरा मौका था अपनी मां की आंखों के सामने किसी गैर औरत की जवानी का मजा लेने का वह देखना चाहता था कि उसकी हरकतों का उसकी मां पर कैसा प्रभाव पड़ता है। इसलिए वह खुद ही धीरे से उठ कर बैठ गया और अपने हाथों से बिंदिया के ब्लाउज का बटन खोलने लगा विद्या कोई एहसास पूरी तरह से मत कर दे रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी चूचियां कुछ ज्यादा ही उछलना शुरू कर दी थी उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल होता जा रहा था। सुगंधा लगातार एक हाथ से ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची दबा रही थी,,,, धीरे-धीरे करके अंकित बिंदिया के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया,,,, और जैसे ही ब्लाउज के दोनों पट अलग हुए अंकित की आंखों में चमक बढने लगी भले ही उसकी चूचियां आकार में खरबूजे जैसी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी एकदम गोलाकार संतरे की तरह तनी हुई थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आने लगा। अंकित से रहा नहीं किया और अपने दोनों हाथों को उसकी दोनों चूचियों पर रखकर अपनी हथेली में दबाने लगा और मदहोश होता हुआ बोला।)



बाप रे कितनी खूबसूरत चुचीया है तुम्हारी,,, देखो मम्,,,,(इतना कहकर वह एकदम से खामोश हो गया क्योंकि उसके मुंह से अनजाने में मम्मी शब्द निकलने वाला था और इस बात पर सुगंधा भी गौर की थी और उसे आंख निकाल कर देखने लगी थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि किसी भी रूप में उन दोनों का रिश्ता बिंदिया के सामने जाहिर हो लेकिन अंकित अपने शब्दों को संभाल लिया था और आगे अपनी बात को बढ़ाते हुए बोला।) मेरी जानेमन इतनी खूबसूरत चुचिया देखो तो सही मैं तो पागल हुऐ जा रहा हूं इन्हें मुंह में लेने के लिए,,,,,,आहहहहहहहह ,,,,,(बिंदिया खामोशी निशब्द उसके पास कहने के लिए बिल्कुल भी शब्द नहीं थे मां बेटे दोनों की हरकतों में वह पूरी तरह से खो चुकी थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके जीवन में यह पल आएगा कि वह इस तरह से मजा लुटेगी,, उत्तेजना के मारे उसकी सांस उखड़ रही थी और अंकित उसे और भी ज्यादा उत्तेजित करते हुए धीरे से बोला।)

बोलो बिंदिया क्या मैं तुम्हारी चुची को मुंह में लेकर पी सकता हूं बहुत खूबसूरत चुचिया है तुम्हारी,,,,सहहहहह हमममममममम(इस तरह की बातें करते हुए उससे इजाजत मांग कर अंकित उसे पूरी तरह से लज्जित और उत्तेजित कर देना चाहता था वह अपने मुंह से इजाजत देने में समर्थ बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी,,,,, लेकिन जो उसके होंठ नहीं बोल पा रहे थे उसका खूबसूरत चेहरा बोल रहा था वह पूरी तरह से इजाजत दे रहा था अंकित को आगे बढ़ाने के लिए इसलिए अंकित धीरे से अपने प्यासे हो तो को आगे बढ़ाया और अगले ही पल विद्या की चूची पर रखकर उसे हल्के से अपने होठों के बीच उसके खजूर को दबा दिया वह एकदम से सिहर उठी उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज फुट पड़ी। यह नजारा बेहद अद्भुत था खास करके सुगंधा के लिए क्योंकि उसका बेटा उसकी आंखों के सामने ही गैर औरत की चूची को मुंह में लेकर पी रहा था एक औरत होने के नाते सुगंधा यह सब बर्दाश्त नहीं करती लेकिन इस समय के हालात कुछ और ही थे। क्योंकि उसके बदन में भी एक अजीब सी हलचल मची हुई थी किसी गैर औरत के साथ मजा लेने के लिए यह उसका पहला मौका था जब वह किसी औरत के अंगों से खेल रही थी इस समय सुगंधा का भी हाथ बिंदिया की चूची पर थी जिसे वह हल्के हल्के दबा रही थी। बिंदिया की सांसे गहरी चलने लगी थी आंखों को बंद किए हुए वह इस पल में पूरी तरह से खोने लगी थी। और अंकित अपनी कामकला से दोनों औरतों को प्रभावित कर रहा था अंकित धीरे-धीरे उसकी चूची के खूबसूरत खजूर को मुंह में लेकर चूस रहा था उत्तेजना के मारे बिंदिया के चूची के निप्पल पूरी तरह से कड़क हो चुके थे जिसे चूसने में अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।



बिंदिया की बुर मदन रस से डूबने लगी थी, अंकित पूरी तरह से उसकी जवानी पर छाया हुआ था,,,, तीनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था झुग्गी में खामोशी छाई हुई थी सिर्फ तेज बारिश और तेज हवाओं का ही शोर सुनाई दे रहा था कुछ देर तक अंकित इसी तरह से बिंदिया की चुची को पीता रहा और बिंदिया के चेहरे पर बदलते भाव को देखता रहा,,,, अंकित इस खेल को और भी ज्यादा रोमांचक बना देना चाहता था इसलिए वह धीरे से बिंदिया की चूची को अपने मुंह में से बाहर निकाल दिया हालांकि सुगंधा के हाथ अभी भी उसकी दूसरी चूची ची पर टिके हुए थे,,,, अंकित तख्ते पर से नीचे उतर गया था,,, और बिंदिया के पास जाकर खड़ा हो गया वह अभी भी अपनी आंखों को बंद किए हुए थे। वह धीरे से बिंदिया को बोला।
 
आंखों को खोलो बिंंदिया आंखें बंद करके पूरा मजा नहीं ले पाओगी,,,,

अंकित सही कह रहा है पूरा मजा लेना है तो थोड़ा बेशर्म बनना पड़ेगा बेशर्म बनने के बाद ही इस खेल में ज्यादा मजा आता है,,,,(सुगंधा बिंदिया की चूची को दबाते हुए बोली,,,, तो वह शरमाते हुए धीरे-धीरे अपनी आंखों को खोली ठीक अपने पास में अंकित को खड़ा देखकर वह एकदम से शर्म से पानी पानी होने लगी क्योंकि वह पूरी तरह से निर्वस्त्र रहा और आंख खोलते ही उसकी नजर सीट है अंकित के मोटे तगड़े लंड पर चली गई थी जो कि टनटनाया हुआ था। उसे शरमाता देखकर अंकित समझ गया था इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोला।)



शर्माओ मत बिंदिया तुमने शायद अपने आप पर गौर नहीं की हो तुम बहुत खूबसूरत हो।(औरत को लाइन पर लाने का हुनर अंकित अच्छी तरह से जानता था वह जानता था कि किसी भी औरत की खूबसूरती की तारीफ करो तो वह एकदम से पिघल जाती है और इस समय यही हो रहा था एक जवान लड़के के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह पानी पानी हो रही थी,,, वह कुछ बोल पाती या कोई प्रतिक्रिया दे पाती इससे पहले ही अंकित धीरे से अपने प्यासे होठों को उसकी तरफ आगे बढ़ाने लगा उसका चेहरा शर्म से और ज्यादा लाल होने लगा और देखते ही देखते अंकित उसके लाल-लाल होठों पर अपने हॉट रख दिया वह एकदम से मचल उठी उसकी बुर से पानी का फव्वारा फूट पड़ा वह साड़ी के अंदर झड़ने लगी थी। क्योंकि किसी गैर मर्द के द्वारा उसके होठों का चुंबन चुदाई से काम नहीं था,,, इस तरह से प्यार भरा चुंबन उसके पति ने भी कभी नहीं लिया था और ना ही कभी उसने इस तरह का अनुभव की थी इसलिए तो वह झड़ रही थी उसके बदन में कंपन हो रहा था और अंकित उसकी उत्तेजना का फायदा उठाते हुए, एकदम से उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित फूलों का रस चूस रहा हो उसे बिंदिया के होठों का चुंबन उसकी चुसाई बेहद मदहोश कर देने वाली लग रही थी। यह चुंबन अंकित को बेहद उत्तेजित कर रही थी जिसके चलते उसके होठों का रस पीते हुए अंकित उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया था बिंदिया के तो होश उड़े जा रहे थे आनंद की कोई सीमा नहीं थी वह अधिक आनंद का अनुभव कर रही थी। अंकित ने उसकी चूचियों को दबा दबा कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार बिंदिया को उसकी चूची दबाने वाला मिला हो। क्योंकि इस तरह से तो उसके पति ने भी उसकी चूची को दबा दबा कर लाल नहीं किया था ऐसा लग रहा था कि आज की रात अंकित उसकी जवानी का सारा रस निचोड़ डालेगा।

Bindiya ki lajawab chuchiya



बिंदिया शर्मा रही थी उसकी तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी लेकिन सुगंधा के हाथों का मजा हुआ पूरा ले रही थी सुगंधा की हरकत सेवा हैरान भी थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि एक औरत औरत के अंगों से मजा लेती होगी क्योंकि सुगंध उसकी एक चूची को बराबर लेकर दबा रही थी लेकिन तभी सुगंधा भी अपने प्यास होठों को उसकी एक चूची पर रख दी और उसकी निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी यह बिंदिया के लिए और भी ज्यादा हैरतअंगेज था वह एकदम से मस्त हो गई सुगंधा का यह पहला अनुभव था जब वह किसी औरत की चूची को मुंह में लेकर पी रही थी,,,, सुगंधा आनंदित हो रही थी बिंदिया का दिमाग काम करना बंद कर दिया था क्योंकि होठों पर अंकित भिड़ा हुआ था और चूची पर उसकी मां,,,, तभी बिंदिया को अपनी साड़ी के अंदर हथेली सरकती हुई महसूस हुई उसका मुलायम एहसास बिंदिया को और भी ज्यादा मदहोश कर रहा था क्योंकि उसे समझते देर नहीं लगी थी कि जो हाथ उसकी साड़ी के अंदर जा रहा था वह अंकित का नहीं बल्कि सुगंधा का था और एक औरत को इस तरह से मजा लेता देखकर बिंदिया मस्त हुए जा रही थी,,,, देखते ही देखते सुगंध अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाल चुकी थी और सीधा उसकी हथेली उसके गुलाबी बुर पर पहुंच चुकी थी सुगंधा को इस बात की हैरानी बिल्कुल भी नहीं हुई थी कि बिंदिया की बुर मदन रस की चिपचिपाहट से भरी हुई थी‌। अपनी हथेली पर मदन रस की चिपचिपाहट महसूस करते ही सुगंधा बोली।





बाप रे बिंदिया तुम तो बहुत ज्यादा पानी बहा रही हो।

लगता है आज लंड को पूरा निगल जाओगी,,,।

(इतना सुनकर बिंदिया एकदम से शर्मा गई और बोली)

क्या दीदी तुम भी !

और नहीं तो क्या,,,,क्या मुझे नहीं मालूम है कि औरत की बुर कब पानी छोड़ती है आज तो तुम्हारी खैर नहीं है,,,,,(अपनी हथेली को जोर-जोर से उसकी बुर पर रगड़ते हुए बोली सुगंधा के स्पर्श और उसकी हथेली के रगड़ से बिंदिया और भी ज्यादा मदहोश हो रही थी बार-बार बिंदिया की नजर अंकित के टनडनाए लंड पर चली जा रही थी वह उसे छूना चाहती थी पकड़ना चाहती थी उसकी गरमाहट को महसूस करना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि मोटे-मोड लंड को पकड़ने से कैसा एहसास होता है बार-बार उसकी आंखों के सिधान को देख कर अंकित मस्त हुआ जा रहा था और उसके होठों के रस को बड़ी तेजी से चूस रहा था,,, और उसकी इच्छा की पूर्ति के लिए वह अपना हाथ बढ़ाकर उसके हाथ को पकड़ लिया और सीधा उसे अपने लंड पर रख दिया,,, बिंदिया की हथेली जैसे ही उसके लंड पर पड़ी उसकी गर्माहट और मोटाई का अहसास होते ही वह एकदम से गनगना गई और डर के मारा अपना हाथ पीछे खींच ली,,, उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी एक तरह से उसे झटका सा लगा था क्योंकि उसने अपने जीवन में आज पहली बार इतना मोटा और लंबा लंड देख रही थी उसे हाथ में लेकर तो हुआ एकदम से मस्त हो गई थीं। उसकी तेज चलती सांसों को देखकर अंकित समझ गया था कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह अपने होठों को उसके होठों से अलग किया और मुस्कुराते हुए बोला।



क्या हुआ बिंदिया ऐसा पहली बार देख रही हो क्या,,,?

(उसकी बात सुनकर बिंदिया कुछ बोल नहीं पाई बस आश्चर्य से कभी उसकी तरफ तो कभी उसके लंड की तरफ देख रही थी,,,,, यह देखकर मुस्कुराता हुआ अंकित फिर से अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपने लंड पर रखते हुए बोला,,)

घबराओ मत यह तुम्हें काट नहीं खाएगा बल्कि तुम्हें इतना मजा देगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित उसकी हथेली को अपने लंड पर रख दिया और उसकी हथेली पर अपनी हथेली रखकर उसे पर अपना कसाव बढ़ाने लगा उत्तेजना के मारे बिंदिया गनगना रही थी लेकिन अब वह कुछ कर भी नहीं सकती थी और अंकित बड़ी चालाकी से अपनी हथेली को उसकी हथेली पर रखे हुए अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया,,,,, अंकित की हरकत से बिंदिया मदहोश हुए जा रही थी और उसकी उत्तेजना बिल्कुल भी कम नहीं हो रही थी क्योंकि सुगंधा लगातार उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को अपनी हथेली से रगड़ रही थी उसे गर्माहट दे रही थी मां बेटे दोनों उसे पूरी तरह से मस्त किए हुए थे। अंकित औरत के मन को पढ़ना अच्छी तरह से जानता था वह उनके मन में घुसकर उनकी मां की बात को उगलवा लेता था यहां पर भी अंकित कुछ देर तक बिंदिया की हथेली पर अपना हाथ रखकर अपने लंड को मुठीयाते हुए उसका हौसला बढ़ा रहा था। जब अंकित को एहसास होने लगा कि उसकी हथेली अपने आप चलने लगी है तो धीरे से अपना हाथ बिंदिया के हाथ के ऊपर से हटा लिया और मुस्कुराता हुआ बिंदिया की तरफ देखकर बोला,,,)



तुम इतना डर क्यों रही हो,,,,! तुम तो औरत हो यह तो तुम्हारा पसंदीदा खिलौना है तुम्हें तो जी भर कर खेलना चाहिए था लेकिन तुम घबरा रही हो ।

बहुत मोटा और लंबा है,,,,,(बस इतना ही बिंदिया के मुंह से निकाला और वह शर्मा कर अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली,,,,, बिंदिया की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,,)

लेकिन हम औरतों को लंबा और मोटा ही पसंद है शायद तुम्हारे जीवन में तुमने ऐसा कभी देखी नहीं हो इसलिए तुम घबरा रही हो तुम्हारे पति का भी ऐसा नहीं है ना,,,(लगातार बिंदिया की बुर को मसलते हुए सुगंधा उसे मदहोश करते हुए बोली तो उसकी बात सुनकर बिंदिया धीरे से बोली)

नहीं मेरे पति का ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तभी तो मैं घबरा गई ऐसा देखकर।

इससे पहले तुम्हें क्या लग रहा था लंड छोटा होता है।

बिल्कुल दीदी मैं तो यही सोचती थी लेकिन आज पहली बार ऐसा देखकर मेरी सोच एकदम से बदल गई।

तुम्हारी सोच क्या मेरी खुद की बदल गई थी मैं तो कुछ देर तक देखते ही रह गई थी कि वाकई में असली है या नकली मेरे पति का भी छोटा और पतला है मैं तो पहली बार इसका देख कर पागल ही हो गई थी,,,,,, देखो तुम्हारे हाथ में कितना अच्छा लग रहा है तुम ठीक से पकड़ भी नहीं पा रही हो इतना मोटा और लंबा है,,,।

(सुगंधा की बात सुनकर बिंदिया फिर से शर्मा गई,,,, क्योंकि वह बड़े आराम से अब अंकित के लंड को मुठिया रही थी अंकित मत हुआ जा रहा था और अपना एक हाथ उसकी चूची पर रखकर उसे मसल रहा था सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)



असली मजा तो तब मिलेगा जब तुम इसे मुंह में लेकर चुसोगी,,,, एकदम मस्त हो जाओगी,,,,,।

(अपनी मां के मुंह से यह बात सुनकर अंकित एकदम से मस्त हो गया क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी मां किसी गैर औरत को अपने बेटे का लंड चुसने के लिए उकसाएगी। लेकिन बिंदिया सुगंधा की बात सुनकर उसे सवालिया नजरों से देख रही थी हालांकि इस दौरान वह लगातार अंकित के लंड को मुठिया रही थी अंकित ऐसे ही हवा में उड़ रहा था। उसके मन में उठ रहे सवाल को शायद सुगंधा समझ गई थी इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

तुम देखी नहीं मुझको कि मैं इसके लंड से कैसे मजा ली सच कहूं तो बहुत मजा आता है। मैं तुम्हारी भावना को समझ सकती हूं क्योंकि तुम गांव की हो शायद यह सब करना तुम्हें पसंद नहीं होगा लेकिन शहर में औरतें इसी तरह से मजा लेती है और इसमें मजा भी बहुत आता है,,, औरत अपनी इस कला से मर्द को दीवाना बना देती है। तुमने कभी अपने पति के साथ ऐसा नहीं की होगी ना।

(अंकित की बात सुनकर बिंदिया केवल ना मे सिर हीला दी उसकी ना सुनकर पल भर का भी विलंब किए बिना अंकित अपने लंड को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से बिंदिया के हाथ को हटाते हुए एकदम से उसकी तरफ सुपाडे को उठाता हुआ बोला,,,)

लो अब यह कर लो जिंदगी का असली सुख ईसी में है,,,,,,,।

(अंकित की हरकत को देखकर बिंदिया का गला उत्तेजना से सूखने लगा वह अपने सूखने गले को अपने थूक से गीला करने की कोशिश करते हुए कभी अंकित के लंड की तरफ तो कभी सुगंधा की तरफ देख रही थी,,, सुगंधा जानती थी कि शुरू-शुरू में एक मर्यादा सील और संस्कारी औरत के मन में हिचकीचाहट होती है,,, इसलिए सुगंधा उसके मन से हिचकीचाहट को दूर करते हुए बोली।)



डरो मत बिंदिया,,, तुम्हें आज ऐसा मजा मिलेगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी शायद इसीलिए हम दोनों का इधर आना हुआ है,,,, और तुम्हारा यहां रुकना हुआ है,,, डरो मत शरमाओ मत ले लो इसका मुंह में और आंख बंद करके चूसना शुरू कर दो और सोचो जैसे तुम्हारे मुंह में आइसक्रीम का कोन है,,,,,।

(सुगंधा की बात सुनकर बिंदिया कोई प्रतिक्रिया दे पाती इससे पहले ही अंकित उसके सर पर हाथ रखकर और अपनी कमर को थोड़ा ऊपर की तरफ उचका कर बिंदिया के मुख नीचे की तरफ करने की कोशिश करने लगा बिंदीया अपने आप को रोक नहीं पाई क्योंकि वह खुद अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी क्योंकि उसने सुगंधा को देखी थी इस क्रिया को करते हुए तभी से उसके मन में लंड चूसने की लालच जाग रही थी लेकिन वह शर्म के मारे अपने मुंह से कुछ बोल नहीं पा रही थी पर उसका काम मां बेटे दोनों ने आसान कर दिया था,,,,, अगले ही पर वह खुद अपने लाल-लाल होठों को हल्का सा खोल दी थी यह देखकर अंकित के चेहरे पर सुकून भरी मुस्कराहट आ गई थी और अंकित ने अपने सुपाड़े को उसके लाल-लाल होठों से छुआ दिया एक बार फिर से लंड के सुपाड़े के स्पर्श से बिंदिया गनगना गई। लेकिन अपने होंठ को नहीं हटाई और देखते ही देखते उसके काम को आसान करते हुए अंकित खुदाई अपने लंड को धीरे-धीरे उसके लाल लाल होठों के बीच से अंदर की तरफ गुजारने लगा,,, कुछ ही पल में अंकित का मोटा सुपाड़ा उसके मुंह के अंदर था और वह धीरे-धीरे अपनी जीभ को उस पर घूमाना शुरू कर दी थी,,, उसकी हरकत से अंकित के तन बदन में मदहोशी का नशा घुलने लगा, वह अपनी आंखों को बंद करके एक नई दुनिया में प्रवेश करते हुए बोला।



आहहहहह आहहहा बहुत मजा आ रहा है,,,,,ऊमममममम लाजवाब बिंदिया,,,,,ओहहहहह तुम तो बहुत मस्त चुस रही हो,,,,,आहहहहहह आहहहहहहहह ऐसे ही जीभ घूमाकर,,,,ऊमममममममम।

(अंकित की बात सुनकर बिंदिया की हिम्मत बढ़ रही थी क्योंकि यह वह पहली बार कर रही थी और यह सबसे गंदा अपनी आंखों से देखकर मस्त हो रही थी पहली बार वह अपने बेटे को अपनी आंखों के सामने किसी दूसरी औरत के साथ मजा लेते हुए देख रही थी वह कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि इस पल का मजा ले रही थी शायद इसलिए क्योंकि बिंदिया उनके खास पहचान की नहीं थी उन दोनों का रिश्ता दूर-दूर तक कहीं से भी अपना नहीं था दोनों अनजान थे इसलिए शायद सुगंधा अपने बेटे को बिंदिया के साथ मजा लेने दे रही थी और खुद भी ले रही थी वरना एक औरत होने के नाते कोई भी औरत अपने साथी मर्द को किसी गैर औरत के साथ नहीं बांटती। सुगंधा भी अपनी आंख से पहली बार देख रही थी कि एक औरत लंड कैसे चुसती है हालांकि इस क्रिया को वह अपने बेटे के साथ कई बार कर चुकी थी लेकिन यह पहला मौका था जब अपनी आंखों से यह सब देख रही थी। लेकिन अभी तक वह सिर्फ सुपाडे को अपने मुंह में गोल-गोल घूमा रही थी,,,,, सुगंधा का भी मन चूसने को कर रहा था और वह अपनी चुसाई से बिंदिया का हौसला बढ़ाना चाहती थी,,,, इसलिए वह धीरे से उठकर बैठ गई और तख्ते के किनारे झुक गई और बिंदिया के गाल पर चुंबन करने लगी बिंदिया की मदहोशी और ज्यादा बढ़ने लगी,,,,, यह देख कर अंकित की हालत खराब होने लगी,, क्योंकि उसके लिए भी है पहला मौका था जब उसके साथ दो औरतें थी इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। एक बार वह अपनी मां की चुदाई कर चुका था इसलिए वह जानता था कि इस बार उसका लंड और ज्यादा देर तक टिका रहेगा और जब औरत दो और बिस्तर एक तब मर्द का ज्यादा देर तक टिके रहना है उसकी मर्दानगी की असली निशानी है और अंकित को अपनी मर्दानगी पर पूरा भरोसा था।



सुगंधा गहरी गहरी सांस लेते हुए बिंदिया के गाल पर चुंबनों की बौछार लगा दी थी और अंकित धीरे से अपने लंड को बिंदिया के मुंह में से बाहर निकाला और अपनी मां के लाल-लाल होठों पर रगड़ने लगा मौका देखकर सुगंधा भी अपने होंठ को खोल दी और धीरे-धीरे पूरा लंड गपक गई,,,, सुगंधा अपने बेटे के लंड को गले तक ले कर चुस रही थी। और बिंदीया गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,, कुछ देर चूसने के बाद सुगंधा अपने मुंह से लंड निकाल कर बिंदिया की तरफ आगे बढ़ा दी फिर भी दिया उसे धीरे से अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और इस बार भाभी सुगंधा की तरह अपने गले तक जितना हो सकता था अंदर लेकर चूस रही थी और सुगंधा उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दी थी। खेल पूरी तरह से मदहोशी के चरम पर पहुंच चुका था दोनों औरतें अंकित के लंड को बारी बारी से चूस रही थी अंकित भी अपना लंड बाहर निकाल कर दोनों के गाल पर होंठ पर जी भरकर रगड़ रहा था दोनों औरतें मस्त हो चुकी थी,,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला चलता रहा अंकित मानो जैसे किसी रियासत का राजा हो और उसकी दोनों रानियां उसे खुश करने में लगी थी।



अंकित धीरे से बिंदिया की बांह पकड़कर उसे तख्ते पर से खड़ी किया, और एकदम से उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रखकर फिर से उसके होठों का रसपान करने लगा इस दौरान वह अपने दोनों हाथों को उसकी भारी भरकम नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था,,,, बिंदिया मदहोश हुए जा रही थी,, सुगंधा भी अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई थी और बिंदिया के हाथ को पकड़ कर उसे अपनी चूची पर रखती थी दबाने के लिए बिंदिया भी सुगंध का इशारा समझ चुकी थी इसलिए वह भी सुगंधा की चूची को दबाना शुरू करती थी उसे एहसास हो रहा था की सुगंध की चूची उसकी चूची से कहीं ज्यादा बड़ी और गोलाकार थी और उसे दबाने में मजा भी आ रहा था बिंदिया का भी है पहला मौका था जब वह किसी औरत की चूची से खेल रही थी। साड़ी के ऊपर से ही बिंदिया की गांड को जोर-जोर से दबाते हुए अंकित धीरे-धीरे उसकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया था यह एहसास होते ही बिंदिया का बदन कम आने लगा क्योंकि वह जानती थी कि थोड़ी देर में अंकित उसे नंगी कर देगा,,,, और ऐसा ही हुआ अंकित बिंदिया की साड़ी खोलकर साड़ी को नीचे गिरा दिया था और वह सिर्फ केवल पेटीकोट में थी,,,, अंकित की बाहों में बिंदिया मचल रही थी कसमसा रही थी अपनी जवानी की गर्मी को पिघला रही थी देखते ही देखते अंकित ने पेटिकोट की डोरी को अपने हाथ से पकड़ा और उसे खींच दिया पेटिकोट की डोरी कमर से एकदम ढीली पड़ चुकी थी लेकिन नितंबों के उभार के आधार पर टीकी हुई थी। जिसे अंकित अपने हाथों की उंगलियों के सहारे से नीचे की तरफ सरकाने लगा वह बिंदिया को नंगी कर रहा था अपनी मां की आंखों के सामने,,, इसका एहसास उसे भी था इसलिए उसके बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी और देखते ही देखते वह अपनी मां की आंखों के सामने ही उसकी पेटीकोट को उसके कदमों में गिरा दिया और वहां उसकी बाहों में एकदम से नंगी हो गई। पेटिकोट के उसके कदमों में गिरते ही सुगंधा की नजर एकदम से उसके नितंबों के ऊभार पर गई जो की बेहद आकर्षक लग रही थी वैसे तो बिंदिया किसी भी सूरते हाल में सुगंधा जैसी खूबसूरत और आकर्षक बदन वाली नहीं थी लेकिन फिर भी एक औरत को दूसरी औरत ही अच्छी लगती है यहां पर भी सुगंधा बिंदिया की खूबसूरती पर आकर्षित हुए जा रही थी,,,,



सुगंधा धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाकर बिंदिया की सुडौल गांड पर हाथ रखकर उसे सहलाने लगी बिंदिया को भी सुगंधा की हरकत अच्छी लग रही थी,,,,, पूरी तरह से नंगी करने के बाद उत्तेजना में अंकित फिर से उसे अपनी बाहों में कस लिया था और उसकी गांड पर दोनों हाथ रखकर जोर-जोर से दबा रहा था हालांकि उसकी गांड पर सुगंधा का भी हाथ था वह भी मजे ले रही थी और बिंदिया थी कि पानी पानी हुए जा रही थी,,,,, सुगंधा उसकी गांड को सहलाते हुए बोली।

वैसे तो तुम भी बहुत खूबसूरत हो बिंदिया तुम्हारी गांड की खूबसूरती देखकर तो मेरे मुंह में पानी आ रहा है। सच में तुम भी दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी अपने बदन को एकदम कसा हुआ बनाकर रखी हो,,,।

(एक औरत के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर बिंदिया के तन बदन में हलचल सी मच रही थी उसे अच्छा लग रहा था और गर्व महसूस हो रहा था जो कि आज तक उसे ऐसा महसूस नहीं हुआ था,,, क्योंकि जिंदगी की भागदौड़ में अपने परिवार को संभालने की प्राथमिकता में वह अपने आप पर बिल्कुल भी ध्यान ही नहीं देती थी वह यह बात भी भूल चुकी थी कि वह भी एक औरत है खूबसूरत है जवानी से भरी हुई है लेकिन इस बात का एहसास उसे अब हो रहा था,,,,,, अंकित पागलों की तरह उसकी गर्दन पर उसके गाल पर उसके होठों पर चुंबनों की बारिश कर दे रहा था वह भी कभी सपने में नहीं सोची थी की बेटे की उम्र का लड़का उसकी खूबसूरती पर इस तरह से पागल हो जाएगा। धीरे से उसे बाहों में नहीं होगी अंकित अपने हाथ को उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर रखकर मसलने लगा बिंदिया कसम सनी लगी उसके मुंह से अजीब अजीब सी आवाज निकलने लगी।



ऊममममम,आहहहहहहहह,,,ऊमममममममम ओहहहहह,,,,,सहहहहहहहह आहहहहहआहहहहह,,,,(और अंकित था किस तरह की आवाज सुनकर और भी ज्यादा जोश से भर जा रहा था,,,,, उसे अपनी मां की तरफ से पूरी छूट मिल चुकी थी इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था इसलिए वह इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता था वह एकदम से दीदी आपकी कमर पकड़ कर उसे अपनी गोद में उठा दिया और धीरे से तख्ते पर लाकर लेटा दिया उसकी मर्दाना ताकत को देखकर बिंदिया भी पानी पानी हो गई उसे उम्मीद नहीं थी कि वह उसे इतनी आसानी से उठा लेगा,,,, वह तख्ते पर लेटी हुई थी अपनी दोनों टांगों को आपस में सताए अपनी जवानी को छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही थी दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसकी बुर केवल पतली दरार के रूप में दिखाई दे रही थी और हल्के हल्के बाल उगे हुए थे,,,,,, उसको इस तरह से शर्माते हुई देखकर अंकित बोला)



शर्माने से कोई फायदा नहीं है,,, मजा लेने के लिए तुम्हें भी छिनार बनना पड़ेगा तभी तुम खुलकर मजा ले पाओगी,,,।

(अपने लिए अंकित के मुंह से छिनार शब्द सुनकर वह शर्म से पानी पानी हो गई और अपनी आंखों को बंद कर ली उसकी यह अदा अंकित को उसका दीवाना बना रही थी अंकित धीरे से उसकी टांगों को खोलने लगा वह शर्माने लगी देखते-देखते अंकित उसकी दोनों टांगों को फैला दिया था उसकी गुलाबी बुर एकदम साफ दिखाई दे रही थी बिंदिया की गुलाबी बुर देखकर अंकित की आंखों में चमक साफ दिखाई दे रही थी,,,, बरसात अपने जोर पर था,,, ऐसा लग रहा था कि सुबह तक बारिश रुकने वाली नहीं है,,, और यही तो तीनों चाहते भी थे बारिश में चुदाई का मजा ही कुछ और होता है,,,, अंकित धीरे से उसकी दोनों टांगों के बीच तख्ते पर अपना घुटना रखकर तख्ते के ऊपर चढ़ गया और धीरे-धीरे उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा बिंदिया अपनी आंखों को खोल चुकी थी उसे लग रहा था कि अब अंकित अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालेगा सुगंधा तख्ते के नीचे खड़ी होकर मुस्कुराते हुए यह सब देख रही थी लालटेन के पीली रोशनी में सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था। देखते ही देखते अंकित अपने हाथ को आगे बढ़कर बिंदिया की बुर को अपनी उंगली से हल्के से खोलने लगा उसमें से मादक खुशबू उठ रही थी और उसे मादक खुशबू को अंकित धीरे से अपनी नाक उसे पर रखकर जोर से खींचने लगा मादक खुशबू उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा भर रही थी,,,, अंकित बुर की मादकता भरे नशे मैं डूबने लगा था और अपने ही पर अपने प्यास होठों को वह बिंदिया की बुर पर रख दिया वह इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी उसका बदन एकदम से अकड़ गया और अगले ही पल वह अपनी गांड को ऊपर की तरफ हवा में उठा ली वह उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुकी थी अंकित बिल्कुल भी देर ना करते हुए उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और उसे फिर से तख्ते पर दबाते हुए उसके गुलाबी बुर को पागलों की तरह चाटना शुरू कर दिया।



बिंदिया कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि कोई जवान लड़का उसकी बुर को चाटेगा प्यार करेगा उसे अद्भुत आनंद देगा यह सब बिंदिया के लिए सपने से कम नहीं था,,,,,, अंकित बिंदिया के ऊपर छा चुका था। वह उसकी मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर उसे काबू में किए हुए उसकी बुर की चटाई कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि बिंदिया यह सब पहली बार करवा रही थी जिससे वह अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पा रही थी और तख्ते पर छटपटा रही थी। और यही अंकित कौर भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था बिंदिया की छटपटाहट देखकर सुगंधा से भी रहा नहीं जा रहा था, वह खड़े-खड़े ही अपनी हथेली से अपनी बुर को मसल रही थी,,,,, लेकिन सुगंधा ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाई वह भी धीरे से तख्ते के ऊपर चढ़ गई,,,,, और अगले ही पल उसने वह हरकत की जिसके बारे में अंकीत ने कभी सोचा नहीं था,,, सुगंधा की पीठ अंकित की तरफ थी और सुगंधा अपने घुटनों को बिंदिया के कंधों के ईर्द-गिर्द रखकर उसके मुंह के ऊपर अपनी गांड किए हुए थी अभी तक बिंदिया को भी समझ में नहीं आ रहा था की सुगंध क्या कर रही है लेकिन अंकित समझ गया था कि उसकी मां क्या करने वाली और उसकी यह सजा उसे और ज्यादा उत्तेजित कर दी थी और वह बिंदिया की बुर को चाट रहा था,,,, देखते ही देखते सुगंधा तख्ते के आगे की तरफ झुक गई और घुटनों के बाल हो गई लेकिन इस दौरान वह अपनी बुर को बिंदिया के चेहरे पर रगड़ने लगी,,,, बिंदिया की हालत खराब होने लगी क्योंकि उसके बुर से निकलने वाला मदन रस उसके चेहरे को भिगो रहा था पहले तो थोड़ा अजीब लगा लेकिन बार-बार सुगंधा अपनी बुर की पतली दरार को उसके होठों पर रगड़ रही थी और अपने आप ही बिंदिया के होंठ खुल गए और वह सुगंधा की जवानी के आकर्षण में खोते हुए अपने आप ही उसकी बुर को चाटना शुरू कर दी,,,,।



बुर से निकलने वाले मदन रस का स्वाद बिंदीया के लिए एकदम नया था हल्का कसैला खारापन लिया हुआ मदन रस धीरे-धीरे उसे अच्छा लगने लगा और वह अपने दोनों हथेलियों को सुगंधा की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसकी बुर को चाटना शुरू कर दी यह देखकर अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह बिंदिया की बुर में एक साथ अपनी दो उंगली डालकर अंदर का मुआयना करने लगा कि उसका लंड आराम से जा पाएगा कि नहीं जल्द ही अंकित को एहसास होने लगा कि वाकई में उसकी बुर में बहुत दिनों से लंड नहीं घुसा था क्योंकि बुर एकदम कसा हुआ था। उसका कसाव बरकरार था,, आज उसे फिर से कस३ हुई बुर चोदने के लिए मिलने वाली थी इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। देखते ही देखते झुग्गी के अंदर सुगंधा की सिसकारी की आवाज गुंजने लगी थी सुगंधा अपनी बड़ी-बड़ी भारी भरकम गोल-गोल गांड को गोल-गोल घूमाते हुए बिंदीया के चेहरे पर रगड़ रही थी। बिंदिया को सुगंधा की हरकत देखकर ताज्जुब भी लग रहा था कि एक औरत औरत के साथ इतना मजा कैसे ले सकती है लेकिन इस बात को इनकार भी नहीं कर पा रही थी कि वाकई में औरत के साथ भी ज्यादा मजा आता है। बिंदिया को भी एहसास होने लगा था कि वाकई में बेशर्म बनने में ही ज्यादा मजा है। कुछ देर तक अंकित अपनी उंगली को गोल-गोल घूमता हुआ बिंदिया की बुर में अपने लंड के लिए जगह बना रहा था। फिर धीरे से उठकर खड़ा हो गया क्योंकि उसकी कमर थोड़ा दर्द करने लगी थी वह अपना हाथ इधर-उधर घूम कर अपने आप को व्यवस्थित करने लगा और फिर जब उसे आराम महसूस हुआ तो हुआ फिर से घुटनों के बल बिंदिया की टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा,,,,, अंकित जानता था कि अब समय आ गया था वीडियो की चुदाई का वह बिंदिया की तरफ देख रहा था बिंदिया उसकी मां की गांड और बुर चाटने में व्यस्त थी वह अपनी मां की बेशर्मी को भी देख रहा था। छिनार बनने के बाद उसकी मां और भी ज्यादा खूबसूरत लगती थी।



वह धीरे से बिंदिया की गांड के नीचे अपने दोनों हाथ को ले जाकर के उसे थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठाया और अपनी जांघों पर रख दिया बिंदिया का बदन कमसाने लगा क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि अब अंकित क्या करने वाला है और अगले ही पर बिटिया को अपनी बुर पर अंकित के मोटे तगड़े लंड की धमक सुनाई देने लगी अंकित अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर पर पटक रहा था जिससे बिंदीया की हालत खराब हुए जा रही थी,,,,,,, अंकित ढेर सारा तोक अपने लंड की सुपाड़े के साथ-साथ उसकी बुर पर भी गिराया ताकि चिकनाहट बरकरार रहे,,, और अगले ही पल अपने मोटे तगड़े सुपाड़े को बिंदिया की गुलाबी छेद पर रखकर उसे अंदर की तरफ ठेलने लगा। बिंदिया खुशी से भावुक हुए जा रही थी क्योंकि वह कभी सोची भी नहीं थी कि अब उसे किसी मर्द के द्वारा शरीर सुख मिलेगा वह इस उम्मीद को छोड़ ही चुकी थी लेकिन आज की रात उसके जीवन में बदलाव लेकर आया था और वह अंदर ही अंदर बहुत खुश नजर आ रही थी मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को अपनी बुर के मुहाने पर महसूस करके ही गदगद हुए जा रही थी। धीरे-धीरे अंकित अपने सुपाड़े को अंदर की तरफ सरका रहा था। बिंदिया की सांस ऊपर नीचे हो रही थी। लेकिन इसके बावजूद भी वह सुगंधा की खूबसूरत रसीली बुर को चाटने की लालच को रोक नहीं पा रही थी और लगातार जीभ से चाट भी रही थी। बिंदिया को भी एहसास हो रहा था कि वाकई में अंकीत लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिसे अंदर लेने में उसे भी तकलीफ हो रही थी।



फिर भी बुर की अंदरूनी चिकनाहट पाकर अंकित का मोटा तगड़ा लंड भी धीरे-धीरे अंदर की तरफ प्रवेश कर रहा था और जैसे-जैसे अंदर की तरफ घुस रहा था वैसे-वैसे खुद अंकित के चेहरे का हाव-भाव बदल रहा था उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,, काफी मशक्कत करने के बाद अंकित का लंड का सुपाड़ा बिंदिया की गुलाबी बुर के अंदर प्रवेश कर चुका था यह अंकित के लिए किसी फतेह से कम नहीं था। जैसे-जैसे अंकित आगे की तरफ बढ़ रहा था वैसे-वैसे भी दिया की हथेली का कसाव सुगंधा की भारी भरकम गांड पर बढ़ता जा रहा था। बारिश के ठंडा मौसम के बावजूद भी अंकित के माथे पर पसीना टपक रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसे कितनी मेहनत लग रही थी लेकिन उसकी मेहनत रंग भी ला रही थी। देखते देखते अंकित का आधा लंड बिंदिया की बुर में प्रवेश कर चुका था काश यह नजारा बिंदिया अपनी आंखों से देखी तो और भी ज्यादा मस्त हो जाती लेकिन फिर भी उसकी मदहोशी चरम पर थी क्योंकि वह सुगंधा की खूबसूरत बुर की चटाई कर रही थी जिस पर आज तक केवल अंकित ही विजय प्राप्त कर पाया था। माहौल पूरी तरह से मदहोश हो चुका था तेज झोंका के साथ ताड़पत्री अंदर की तरफ उड़ कर आ जा रही थी लेकिन फिर भी तेज तूफानी बारिश में यह ताड़ पत्री किसी महल से कम नहीं था। अंकित का आधा लंड घुस चुका था, बस आधा घुसाना बाकी था,, अंकित दोनों हाथों से बिंदिया की कमर को थाम लिया था,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर वह उत्तेजित वह जा रहा था चार बोतलों का नशा उसकी आंखों में साफ दिखाई दे रहा था बिना शराब पिए ही वह नशे में धुत्त हो चुका था क्योंकि यह शराब नशा नहीं था बल्कि दो दो जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरतों का नशा जिसके नशे के आगे दुनिया का हर नशा फीका पड़ जाता है।



अगले प्रहार के लिए अंकित पूरी तरह से तैयार हो चुका था और कचकचा कर जोरदार प्रहार किया इस बार बाकी बचा लंड बुर के अंदरूनी भाग में सारी अड़चनो को दूर करता हुआ सीधा चलकर उसके बच्चेदानी से टकरा गया और सुगंधा की बुर चाटने के बावजूद भी उसके मुंह से चीख निकल पड़ी।

हाय दइया मर गई रे,,, आहहहहहह क्या घुसा दिया तूने मेरी बुर में,,,,आहहहहहहहह,,,.

(उसकी चीख सुनकर सुगंधा समझ गई थी कि उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुस चुका है और वह पीछे की तरफ नजर घूमर अंकित की तरफ देख रही थी अंकित ने धीरे से अपनी आंख दबाकर उसे आंख मार और सुगंधा उसका हौसला बढ़ाते हुए बोली)

बस बस हो गया पूरा घुस चुका है अब देखना कितना मजा आएगा मेरी रानी बस तुम मेरी बर चाटो,,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी गांड को उसके चेहरे पर रगड़ने लगी और पटकने लगी हालांकि वह दर्द से बिलबिला गई थी लेकिन सुगंधा के सूझबूझ से थोड़ी ही देर में उसका दर्द एकदम से गायब हो गया और वह आनंद के सागर में गोते लगाने लगी और अंकित उसकी कमर पकड़ कर धीरे-धीरे उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया वाकई में बिंदिया को चोदने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, सुगंधा अपने हाथ से अपनी चूची को दबाते हुए लगातार अपनी गांड को बिंदिया के चेहरे पर पटक रही थी। इस क्रिया को करने में सुगंधा को भी बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी पहली बार वह किसी औरत के साथ मजा रोक रही थी पहली बार वह किसी औरत को अपनी बुर बर चटवा रही थी। और पल भर के लिए भी उसे ऐसा नहीं लगा था कि उसे औरत के साथ मजा नहीं आ रहा है बल्कि उसे और ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि वह बिंदिया के साथ मनमानी कर रही थी बिंदिया का चेहरा पूरी तरह से उसके मदन रस में सन चुका था। बिंदिया को भी मजा लेता देखकर सुगंधा उसके ऊपर से धीरे से उठकर वहीं पास में ही बैठ गई और बिंदिया की चुदाई देखने लगी,,,, उसकी चूची को धीरे-धीरे दबाते हुए वह बोली।



मुझे तो लग रहा था मेरी रानी अपनी बुर में नहीं ले पाएगी लेकिन देखो तो सही कितने आराम से अंदर बाहर हो रहा है,,,,,।

(उत्तेजना और चेहरे से बिंदिया का मुंह खुला हुआ था और गहरी गहरी सांस ले रही थी और सुगंधा की बात सुनकर वह अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर वह अपनी दोनों टांगों के बीच देखने लगी वाकई में उसे आश्चर्य हो रहा था कि अंकित का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसकी बुर की गहराई तक घुस रहा था और हर एक धक्का उसके बच्चेदानी पर ठोकर लगा रहा था जहां तक आज तक उसने कभी लंड को महसूस नहीं कर पाई थी। बिंदिया खुलकर मजा ले रही थी उसके मुंह से हल्के हल्के शिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,,, बिंदिया को मजा लेता देखकर सुगंधा से भी रहा नहीं गया और सुगंधा बिंदिया के ऊपर चढ़कर अपनी गांड को अपने बेटे की तरफ करके वह बिंदिया के ऊपर झुक गई और अपने बेटे से बोली,,,,,)



मुझे भी पेल मेरे राजा,,,, मेरी बुर में भी अपना लंड भर दे मेरे बच्चे,,,,,आहहहह मुझे रहा नहीं जा रहा मेरे राजा,,,,,,(ऐसा कहकर वह अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को अंकित की आंखों के सामने नचाने लगी,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर हम किसी रानी के और वह धीरे से अपने लंड को बिंदिया की बुर में से बाहर निकाला और अपनी मां की बुर में डाल दिया,,,,,, अपनी मां की कमर पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया दूसरी तरफ बिंदीया के मुंह पर सुगंधा की बड़ी-बड़ी चूचियां दशहरी आम की तरह लटक रही थी जिसे देखकर बिंदिया से रहा नहीं गया और वहां सुगंधा की दोनों चूचियों को पकड़कर बारी-बारी से अपने मुंह में डालकर चूसना शुरू कर दी,,,, सुगंधा को दोनों तरफ से मजा मिल रहा था पीछे से अंकित मजा दे रहा था और आगे से बिंदिया,,,, कुछ धक्के अपनी मां की बुर में लगाने के बाद वह अपनी मां की बुर में से लंड को बाहर निकाला और वापस बिंदिया के बुर में डाल दिया ऐसा करके वह बार-बार बारी-बारी से अपनी मां और बिंदिया दोनों की चुदाई कर रहा था। सुगंधा तो नहीं लेकिन बिंदिया पूरी तरह से हैरान थी उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था कि एक जवान लड़का दो उम्र में बड़ी औरतों को कैसे आराम से चोद रहा है,, वाकई में इसे ही असली मर्द कहते हैं। दोनों औरतों को बराबर मजा मिल रहा था। दोनों औरतों के मुंह से सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,,, लेकिन बिंदीया अपने चरम पर पहुंचने वाली थी उसका बदन अकड़ रहा था इसका एहसास अंकित को हो गया था इसलिए वह बिंदीया पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देते हुए उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने लंड को बड़ी तेजी से अंदर बाहर कर रहा था और उसका हर एक धक्का बिंदिया को संतुष्टि का एहसास दिला रहा था बिंदीया कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह से की चुदाई होती है इतनी जबरदस्त और धमाकेदार चुदाई उसने आज तक नहीं करवाई थी इसलिए तो वह पानी पानी हुई जा रही थी हर एक धक्के पर वह हवा में जैसे उड़ रही हो।

अपने बेटे के लंड पर कुदती हुई सुगंधा



देखते ही देखते बिंदिया के मुंह से निकलने वाली शिसकारी की आवाज तेज हो गई।

सहहहहह आहहहहह मैं झढ़ने वाली हूं दीदी,,,,आहहहह आहहहहह मुझे कुछ हो रहा है,,,,ऊमममममममम आहहहहहहहह और जोर से चोदो मुझे आहहहहहह।

चिंता मत कर मेरी छिनार तुम दोनों छिनार को आज पानी पानी कर दूंगा,,,,आहहहहहह बहुत कसी हुई बुर है तेरी आज तुझे चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा है और तुझे पूरी तरह से छिनार बना दूंगा,,, मेरी भोसड़ा चोदी,,,आहहहहहह आहहहहहल कितनी गम बुर है तेरी,,,,,,ऊमममममममम,,,(अंकित लगातार गंदी गालियां देते हुए बिंदिया की चुदाई कर रहा था लेकिन बिंदिया को उसकी गाली का बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा था बल्कि अंकित के मुंह से निकलने वाली गाली सुनकर उसका जोश और भी ज्यादा बढ़ जा रहा था उसका आनंद बढ़ रहा था उसे ज्यादा मजा आ रहा था। देखते ही देखते हैं वह सुगंधा की चूचियों को दोनों हाथों से कस के पकड़ ली क्योंकि वह झड़ने के एकदम कगार पर थी,,,,, अंकित भी जोर-जोर से धक्के लगा रहा था अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर के अंदरूनी दीवारों पर रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था जिससे दोनों का मजा दुगना हो जा रहा था। और फिर अगले ही पल बिंदिया भल भला कर झड़ने लगी,,,,,, झड़ते समय उसका पूरा बदन एकदम कड़क हो गया था शायद बरसों बाद वह इस तरह का सुख प्राप्त कर रही थी अंकित भी एक पल के लिए भी अपनी रफ्तार कम किए बिना ही उसकी चुदाई कर रहा था वह तब तक उसकी चुदाई करता रहा जब तक कि वह एकदम शांत नहीं हो गई। लेकिन अब बारी थी सुगंधा की सुगंध पूरी जोश से भरी हुई थी अपने बेटे को बिंदिया की चुदाई करते हुए देखकर कर वह मदहोश हो चुकी थी। वह फिर से अपनी गांड को हिलाना शुरू कर दी क्योंकि अभी भी उसके बेटे का लंड अभी भी बिंदिया की बुर में घुसा हुआ था,,,,,, उससे रहा नहीं जा रहा था और वह मदहोश होते हुए अपने बेटे से बोली।



आप क्या घुसेड के बेठा है मेरे राजा,,,, इस छिनार की बुर में,,,, अभी छिनार की बुर में से अपने लंड को निकाल कर अपनी इस छिनार की बुर में डाल दे,,,, डाल दे मेरे बेटे अपने लंड को अपनी मां की बुर में,,,, चोद मुझे फाड दे अपनी मां की बुर,,,,।

(सुगंधा की बात सुनकर अंकित एकदम से हैरान हो गया क्योंकि वह खुद ही अपने मुंह से उन दोनों के रिश्ते को बिंदीया के सामने उजागर कर रही थी बिंदीया भी सुगंधा की बात सुनकर एकदम हैरान हो गई थी,,,,, उसे तो अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था कि यह वह क्या बोल रही है लेकिन अपनी मां की बात सुनकर अंकित की पूरी तरह से जोश में आ गया था और अपनी मां के सुर में सुर मिलाते हुए वह भी बोला,,,)

चिंता मत कर मेरी रंडी मां,,,, मेरी छिनार आज तेरा बेटा तेरी बुर का कैसे भोसड़ा बनाता है देखना,,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित अपने लंड को बिंदिया के बुर में से निकाल कर सीधा अपनी मां की बुर में डाल दिया जिससे सुगंधा की चीख निकल गई और उसकी चीकू की आवाज सुनकर अंकित खुश होता हुआ बोला।)

अंकीत के पास जाती हुई बिंदिया



ले भोसड़ा चोदी बहुत चुदवाने का मन है ना तेरा ले अपनी मां के भोसड़े में कैसे लंड डाला जाता है देख मैं तुझे दिखा रहा हूं,,, मेरी रंडी छिनार।

(दोनों की बातें सुनकर बिंदिया हैरान हो गई थी। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था दोनों एक दूसरे को प्रेमी प्रेमिका बताते थे लेकिन अब एक दूसरे को मां बेटा कहकर संबोधन कर रहे हैं गंदी गंदी गालियां दे रहे हैं इन दोनों के बीच रिश्ता क्या है कैसा रिश्ता है यह सब भी दिया को समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जिस तरह से दोनों एक दूसरे को मां बेटे के रिश्ते में संबोधन करके चुदाई का मजा लूट रहे थे वह बिंदिया के तन बदन में भी आग लग रहा था। अंकित तब तक अपनी मां को चोदता रहा जब तक की दोनों झड़ नहीं गए। झड़ने के बाद अंकित कुछ देर तक अपनी मां के ऊपर पसर गया था और अभी भी बिंदिया सुगंधा के नीचे ही थी और उसकी दोनों चूचियों को हाथों से पकड़ कर दबा रही थी। तीनों झड़ चुके थे तीनों की जवानी की गर्मी शांत हो चुकी थी धीरे से अंकित अपनी मां की बुर में से लंड को बाहर निकाल लिया, कुछ देर वह इस तख्ते पर बैठा रह गया दोनों औरतें पीठ के बल लेट कर गहरी गहरी सांस ले रही थी अंकित में जो मजा उन्हें दिया था वह दोनों कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी सुगंधा तो हालांकि रोज ही इस तरह का मजा लूट रही थी लेकिन बिंदिया के लिए यह नया था उसकी सोच से परे था। तीनों एक दूसरे की तरफ देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे बिंदिया भी मुस्कुरा रही थी लेकिन उसके मन में तूफान मचा हुआ था वह दोनों के रिश्ते के बारे में पूछना चाहती थी लेकिन पूछने की हिम्मत नहीं हो रही थी थोड़ी देर बाद सुगंधा धीरे से उठकर दरवाजे की तरफ जाने लगी क्योंकि उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी उसे देखकर बिंदिया भी उठकर खड़ी हो गई और उसकी तरफ जाकर वह भी उसके साथ ही बैठ गई पेशाब करने के लिए बारिश अभी भी हो रही थी लेकिन अब थोड़ा कम हो गई थी,,,, दोनों को पेशाब करता हुआ देखकर अंकित से भी रहा नहीं गया और वह भी जाकर दोनों के पास खड़ा होकर पेशाब करने लगा,,,,, मां बेटे तो इस तरह से कई बार पेशाब कर चुके थे साथ में मिलकर लेकिन किसी तीसरी औरत के साथ दोनों मां बेटे का यह पहला अनुभव था चुदाई का भी और पेशाब करने का भी तीनों संपूर्ण रूप से नग्न वस्था में ही थे। बिंदिया को पेशाब करता हुआ देखकर,,, अंकित फिर से उत्तेजित होने लगा था दो बार झड़ चुका था लेकिन किसी गैर औरत को पेशाब करते हुए देखकर वह फिर से मदहोश हो रहा था बिंदिया पेशाब कर चुकी थी इसलिए उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ी कर दिया बिंदिया कुछ समझ पाती इससे पहले ही वह फिर से उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों का रसपान करने लगा। यह देखकर सुगंध मुस्कुराते हुए बोली।



देखिए मेरे बेटे की ताकत को दो बार पानी निकल चुका है लेकिन फिर भी तुम्हारी जवानी देखकर इसका लंड खड़ा हो गया इसे कहते हैं असली मर्द,,,(सुगंधा साफ तौर पर बिंदिया को बता रही थी कि अंकित मेरा लड़का है और यह सुनकर बिंदिया भी सकपका जा रही थी लेकिन अपने मुंह से पूछने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी और अंकित उसकी जवानी से फिर से खेलना शुरू कर दिया था देखते देखते वह बिंदीया को अपनी गोद में उठा लिया था उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर में लपेटकर वह अपने लंड को उसकी बुर में डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन जिस तरह से वह अपनी गोद में उठाया था बिंदिया डर रही थी इसलिए वह बोली।

मुझे नीचे उतारो मुझे डर लग रहा है कहीं गिर गई तो।

चिंता मत कर बिंदिया रानी यह मेरा बेटा है तेरा वजन तो मेरे से कम है मेरा बेटा मुझे भी अपनी गोद में लेकर चुदाई करता है,,,,(ऐसा कहते हुए वह खुद ही अपने बेटे के लंड को पकड़ कर बिंदिया की बुर के मुहाने पर रखकर अपने बेटे को रास्ता दिखा रही थी अंकित ठीक तरह से उसे गोद में उठाए हुए अपनी कमर को ऊपर की तरफ उसका कर अपने लंड को दुनिया की बुर में डाल दिया उसे गोद में उठाए हुए चोदना शुरू कर दिया बिंदिया हैरान थी उसके दिमाग में ढेर सारे सवाल चल रहे थे और जिस तरह से उनकी तो उसकी चुदाई कर रहा था उसकी मर्दाना ताकत को देखकर वह आश्चर्य में पड़ गई थी,,,, क्योंकि कुछ भी हो उसका वजन कम बिल्कुल भी नहीं था लेकिन बड़े आराम से अंकित उसे गोद में उठाकर उसकी चुदाई कर रहा था,,,,, बिंदिया की बड़ी-बड़ी गांड उसकी गोद में उछल रही थी यह देखकर सुगंध से रहा नहीं गया और वह बिंदिया के पीछे जाकर वह भी उसके नितंबों के नीचे हाथ रखकर उसकी गोलाकार गांड पर अपनी बुर को रगड़ने लगी बिंदीया हैरान परेशान होकर चुदाई का मजा ले रही थी। उन दोनों के बीच के रिश्ते का सवाल तो उसके दिमाग में घूम ही रहा था लेकिन जिस तरह का सुख अंकित उसे दे रहा था वह पूरी तरह से भूल चुकी थी और इस पल में अपने आप को खो दी थी। बिंदिया एकदम मस्त होकर अपनी बाहों का हार अंकित के गले में डाल दी थी।

गोद में बिंदिया को उठाकर चुदाई करता हुआ अंकीत



अरे आराम से अंकित का लंड उसकी बुर मे फचर फीचर करके अंदर बाहर हो रहा था जिससे बिंदिया को भी मजा आ रहा था वह कभी सोचा नहीं थी कि उसे इस तरह का सुख एक ही रात में मिल जाएगा एक ही रात में आज अंकित ने उसे औरत होने का सुख प्रदान किया था एक औरत होने का गर्व का एहसास दिलाया था। अंकित तब तक अपनी कमर हिलता रहा जब तक कि वह बिंदिया को संतुष्ट करके खुद नहीं झड़ गया,,,, इसके बाद तीनों एक ही तख्ते पर एक दूसरे की बाहों में सो गए लेकिन अभी-अभी बिंदिया के मन में उन दोनों के रिश्ते को लेकर सवाल घूम रहा था,,,,।

बरसात बंद हो चुकी थी। पंछियों की आवाज के साथ ही तीनों की नींद खुलने लगी,,, वासना का तूफान शांत होने के बाद बिंदिया अपनी हालत पर गौर की तो शर्म से पानी पानी हो गई और जल्दी से अपने कपड़े पहन कर अपने नंगे बदन को छुपाने की कोशिश करने लगी सुगंध मुस्कुरा रही थी उसके कपड़े भी सूख चुके थे इसलिए वह अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गई थी अंकित अभी भी नंगा था और दोनों औरतों को देखकर मुस्कुरा रहा था बड़ी हिम्मत करके बिंदिया अंकित के लंड की तरफ देखते हुए बोली।

दीदी कल रात से ही मेरे मन में एक सवाल घूम रहा है अगर इजाजत हो तो पूछुं,,,।



हां पूछो,,,,।

तुम दोनों के बीच रिश्ता क्या है पहले तो तुम दोनों कह रहे थे कि प्रेमी प्रेमिका हो तुम दोनों की उम्र देखकर लगता नहीं है लेकिन रात को चुदाई करवाते समय तुम बेटा बोल रही थी और यह तुम्हें मम्मी कह रहा था मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूं।

,(बिंदीया की बात सुनकर मां बेटे दोनों मुस्कुराने लगे और बड़े इत्मीनान से सुगंधा जवाब देते हुए बोली)

देखो इस शहर में हम दोनों को कोई नहीं जानता कि हम दोनों कौन हैं कहां से आए हैं अगर कोई जानता भी होगा तो प्रेमी प्रेमिका के रूप में लेकिन तुम एकदम खास बन चुकी हो इसलिए तुम्हें मैं बता रही हूं कि हम दोनों के बीच क्या रिश्ता है यह मेरा बड़ा बेटा है और मैं इसकी मां हूं,,,,।

क्या,,?(इतना सुनते ही बिंदीया के होश उड़ गए,, उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था इसलिए वह फिर से बोली,,,)

मुझे यकीन नहीं हो रहा है सच-सच बताओ ना दीदी,,,,।

(इस बार अपने लंड को हिलाते हुए अंकित मुस्कुराते हुए बिंदिया से बोला)

हम दोनों सच कह रहे हैं मेरी छिनार यह मेरी मां है और मैं इसका बेटा और मेरे से बड़ी एक बहन है जो नानी के वहां गई है हम दोनों घर पर अकेले थे इसलिए मजा करने के लिए इधर आ गए,,,,।

बाप रे तुम दोनों मां बेटे हो मुझे तो अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा है,,,,,।

बिंदिया की चुदाई करता हुआ



मैं सच कह रहा हूं मेरी जान,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित बिंदिया कहां पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया वह अभी भी पूरी तरह से नंगा था और इस तरह की बात करते हुए उसका लंड खड़ा हो गया था और सही मायने में मां बेटे दोनों के बीच के रिश्ते को जानकर खुद भी दिया की बुर में पानी का उबाल उठ रहा था और जल्दी अंकित बिना देर किए उसे घोड़ी बना दिया और उसकी साड़ी को उसकी कमर तक उठते हुए पीछे से उसकी बुर में लंड डाल दिया वह कुछ बोल पाती समझ पाती इससे पहले अंकित अपने लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया था और वह भी अपनी मां की आंखों के सामने,,,, बिंदिया भी एकदम से उत्तेजित हो गई थी वह कभी सपने में नहीं सोची थी की मां बेटे के बीच में इस तरह का रिश्ता हो सकता है और आज सोचने का तो दूर वह अपनी आंखों से देख ली थी की मां बेटे के बीच भी शारीरिक संबंध स्थापित हो सकता है बस दोनों के बीच समझदारी होना चाहिए जरूरत होना चाहिए,,,, यहां से जाते-जाते अंकित उसे एक बार फिर से चुदाई का सुख प्रदान कर रहा था ब्लाउज के ऊपर से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाता हुआ अपने धक्के को तेज कर दिया था और ना चाहते हुए भी बिंदिया को अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं हो पा रहा था और उसके मुंह से शिकारी की आवाज निकल रही थी यह देखकर सुगंधा भी खुश हो रही थी सुगंध से भी रहा नहीं गया और वह ठीक बिंदिया की आंखों के सामने खड़ी होकर अपनी साड़ी कमर तक उठा दी थी लेकिन इस बार बिंदिया ही अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर सुगंधा की कमर पड़कर उसे अपनी तरफ खींच ली और अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रखकर से चाटना शुरू कर दी मां बेटे के साथ-साथ बिंदिया भी मदहोश हो रही थी बिंदिया को तो डबल सुख मिल रहा था आगे से भी और पीछे से भी बिंदिया पागलों की तरह सुगंधा की बुर को चाट रही थी और अंकित मस्त होकर बिंदिया की चुदाई कर रहा था और सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक के तीनों झड़ नहीं गए।



जाते-जाते सुगंधा बिंदिया को पैसे देने लगी तो इंकार करने लगी लेकिन जबरदस्ती सुगंधा ने उसे ₹500 दे दिए क्योंकि सुगंधा जानती थी कि उसकी माली हालत ठीक नहीं थी और जो रात को उसने आसरा दी थी उसके लिए वह रकम भी कम थी। और एक अद्भुत अनुभव भी प्रदान की जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल सकती थी जाते-जाते बिंदिया की आंखें नम थी सुगंधा भी भावुक हो गई थी लेकिन जाना भी जरूरी था,,,,, कुछ दूरी तक बिंदिया उन दोनों को छोड़ने भी आई थी क्योंकि बीच रास्ते से ही होकर उसे गांव जाना था।
 
सुगंधा और उसका बेटा एक अद्भुत अनुभव के साथ पहाड़ी से नीचे उतर चुके थे पहाड़ी पर चढ़ने से पहले उन्हें इस बात का अहसास तक नहीं था की पहाड़ी के ऊपर दोनों के साथ क्या होने वाला है लेकिन यह पूरा अनुभव उन दोनों की जिंदगी का यादगार अनुभव बनकर रह गया था अंकित की तो किस्मत बहुत तेज थी और रोज उसे एक नहीं औरत मिल रही थी जो उसके साथ हम बिस्तर हो जाती थी तेज तो पानी बारिश तेज हवाएं इन सब के बीच सर छुपाने का आसरा और उसे झुग्गी के अंदर एक खूबसूरत औरत,,, जो मां बेटे की कामवासना को देखकर खुद कामवासना में तड़पने लगी थी और दोनों के साथ खुद भी चुदाई का अद्भुत आनंद प्राप्त की थी।



धीरे-धीरे सुगंधा को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि वह अपने बेटे की संगत में पूरी तरह से छिनार बन चुकी थी,,, वह कभी अब सपने में भी नहीं सोची थी कि वह अपने बेटे को किसी और औरत के साथ साझा करेगी लेकिन हालात के आगे वह मजबूर हो चुकी थी वह खुद इस अवसर का पूरा लाभ ले लेना चाहती थी एक औरत के साथ आनंद लेने का यह उसका पहला अनुभव था जो की पूरी तरह से यादगार बन कर रह गया था अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को किसी गैर औरत को चोदते हुए देखना वाकई में बेहद बेशर्मी भरा था। लेकिन इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि बेशर्म बनने के बाद ही जीवन का असली मजा मिलता है लेकिन फिर भी वासना का तूफान शांत होने के बाद इस बारे में वह सोच रही थी कि ऐसा करना ठीक नहीं था वरना ऐसे तो उसके बेटे की आदत बन जाएगी और वह कुछ कर नहीं पाएगी। इसलिए पहाड़ी से नीचे उतरते समय वह अपने बेटे को बोली।

देख अंकित आज रात जो कुछ भी होगा ऐसा अब दोबारा नहीं होना चाहिए।

(अपनी मां के कहने का मतलब को अंकिता अच्छी तरह से समझ रहा था फिर भी नादान बनने का नाटक करते हुए बोला)

मैं कुछ समझा नहीं तुम क्या कहना चाह रही हो,,,?



यही की किसी गैर औरत के साथ आज के बाद कभी संबंध मत बनाना मैं यह सब बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।

(अंकित को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में एक औरत के लिए उसका साथी मर्द कितना मायने रखता है अगर उसकी जानकारी में वह मत किसी और और के साथ संबंध बनाने लगे तो यह रिश्ता उसे औरत को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता और यहां पर उसकी मां को भी यही एहसास हो रहा था अपनी मां की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोला)

क्या बात कर रही हो मम्मी तुम्हारे होते हुए भला कोई और औरत के साथ में कैसे संबंध बन सकता हूं वह तो एक ही झुग्गी में उसे औरत के सामने मजा लेने के चक्कर में उसे भी चुदाई का सुख दे दिया देख नहीं रही थी कैसे तड़प रही थी हम दोनों को देखकर।

हां वह तो देख ही रही थी हम दोनों जब मजे ले रहे थे तब साड़ी के ऊपर से ही वह अपनी बुर मसल रही थी।

सच में मम्मी वह नजारा देखकर तो मैं एकदम से हैरान हो गया था,,,, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हर एक औरत में वजन की प्यास हर पल मौजूद रहती है बस उसे प्यास को जगाने वाला चाहिए।

तू सच कह रहा है अब मुझे ही देख ले मुझे देखकर लगता है कि मैं इस हद तक चली जाऊंगी।

बिल्कुल भी नहीं मम्मी मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि एक दिन मैं तुम्हें चोदूंगा और तुम बड़े आराम से मेरा ले लोगी,,,, जब यह सब हम दोनों के बीच शुरू नहीं था तब तुम्हें देखा था तो मुझे कुछ ऐसा महसूसी नहीं होता था कि तुम एक औरत हो मैं एक मरता हूं मुझे तुम्हारे साथ यह सब करना चाहिए लेकिन धीरे-धीरे ना जाने यह सब कैसे बढ़ने लगा मुझे पता नहीं चला।



मुझे भी,,, शायद यह सब तब से शुरू होगा जब मेरी तबीयत खराब होने पर तो मुझे दवा खाना ले गया था।

हां हां तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो वहां पर जिस तरह की स्थिति बनी हुई थी धीरे-धीरे मन में तुम्हारे प्रति एक अजीब सा आकर्षक होने लगा था जब मैं तुम्हारे पेशाब का टेस्ट कराने के लिए तुम्हें बाथरूम में लेकर गया अपने हाथ से तुम्हारी साड़ी कमर तक उठाया तुम्हारी चड्डी उतारा और जब उस परखनली को पेशाब का नमूना लेने के लिए तुम्हारी बुर पर लगाया तो उसे समय मेरे बदन में कंपकंपी छा गई थी।

पहली बार देखा था ना,,, (सुगंधा मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफदेख कर बोली)

पहली बार मैं तो पागल ही हो गया था तुम्हारा वह अंग देखकर,,,, क्योंकि मुझे पहले इसका अंदाजा भी नहीं था कि औरत की बुर कैसी दिखाई देती होगी।

उस समय खड़ा हुआ था,,, (फिर से चुटकी लेते हुए सुगंधा बोली)

एकदम से बिल्कुल भी समय नहीं लगा था मेरे लिए तो वह पल सच में बेहद यादगार था।



छुवा था तूने हाथ लगाकर,,,,

परखनली को तुम्हारी बुर के छेंद से सटाते हुए मेरी उंगली हल्के से तुम्हारी फुली हुई बुर पर स्पर्श हो रही थी,,,, मैं तो पागल हुआ जा रहा था अगर सच में घर में ऐसा कुछ हुआ होता तो इस समय में तुम्हारी बुर में लंड डाल दिया होता लेकिन गनीमत था कि उस समय दवा खाने में थी।

ओहहह मतलब तब से तो मुझे चोदने के लिए जुगाड़ लगा रहा था।

बिल्कुल उसे दिन से तुम मेरी नजर में एकदम से बदल गई तुम्हारे अंदर में एक औरत को देखता था।

बहुत हरामी है तू,,

तुम्हारी जैसी खूबसूरत मा जिसकी होगी उस बेटे को हरामी बनने से कोई नहीं रोक पाएगा ,,,।(अंकित मुस्कुराते हुए बोला उसकी मां भी हंस रही थी दोनों धीरे-धीरे पहाड़ी उतर चुके थे मिट्टी गीली होने की वजह से दोनों संभाल कर पर रख रहे थे,,, सुबह का मौसम और पहाड़ी इलाका कुल मिलाकर बहुत ही खूबसूरत वातावरण बना हुआ था ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी भीनी भीनी खुशबू आ रही थी और पहाड़ी पर चढ़ने वाले अभी कोई नजर नहीं आ रहे थे,,, वैसे भी आज यहां पर आखिरी दिन था अब उन्हें वापस लौटना था,,, पहाड़ी से नीचे उतर कर मां बेटे चाय की दुकान पर गए और गरमा गरम चाय की चुस्की लेने लगी उसे चाय वाले के पहले ग्राहक ही वह दोनों मां बेटे थे क्योंकि अभी-अभी वह चाय की दुकान खोला ही था,,,, इतनी सुबह-सुबह उन दोनों को पहाड़ी से उतरता हुआ देखकर वह खुद हैरान था इसलिए वह उन लोगों से पूछ भी लिया।



अभी तो पहाड़ी पर कोई चढ़ेगा नहीं और तुम दोनों ऊपर से उतर रहे हो मैं कुछ समझा नहीं।

अरे चाचा जी कल रात को उतरते समय हम दोनों तेज बारिश में फंस गए थे,,,, चारों तरफ अंधेरा इतनी तेज बारिश तेज हवा नीचे उतरना मुश्किल था तो ऊपर जो दुकान लगती है ना चाय की वहां पर कोई नहीं था तो हम दोनों उसी में रात भर रुके रह गए।

ओहहह तब तो तुम दोनों अच्छा कीए कि वहीं रुक गए अगर नीचे उतरने की कोशिश करते तो पैर फिसल जाता और लेने के देने पड़ जाते,,,।

वह तो है चाचा जी ,,, अच्छा यह बताइए कि हमें हमारे होटल तक जाना है वहां के लिए गाड़ी कहां से मिलेगी।

बस 5 मिनट का रास्ता है आगे चले जाइए चौराहा पर तुम्हें गाड़ी मिल जाएगी।

बहुत-बहुत धन्यवाद,,,(इतना कहकर मां बेटे दोनों कुर्सी पर से उठकर खड़े हो गए और पैसे देकर चलते बने अंकित जाते-जाते नजर घुमा कर चाय वाले को देखने लगा और वही हुआ जो अपने मन में सोच रहा था उसे चाय वाले की नजर उसकी मां की मटकती हुई गांड पर ही टिकी हुई थी और वह मुस्कुराते हुए अपनी मां से बोला,,,)

साला यहां कोई भी ऐसा मर्द नहीं है जो औरत को चोदने की नजर से ना देखता हो,,,।

क्या मतलब मैं कुछ समझी नहीं,,,,।



अभी चाय वाला बात करने में कितना सीधा लग रहा है लेकिन तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड को ही घुर रहा था सच में अगर तुम्हें अकेले पास आए तो यह लोग तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना देंगे।

धत् हरामी मैं किसी को हाथ न लगाने दुं,,,,।

वह तो तुम नहीं लगते दोगी ना लेकिन सामने वाला तुम्हारी थोड़ी ना सुनने वाला है वह तो तुम्हें गोद में उठा कर ले जाएगा और पटक कर चोद देगा अभी देख लो कल ही तुम पेशाब करने के लिए पान की दुकान के पीछे गई थी और पान की दुकान वाला क्या कर रहा था प्यासी नजरों से तुम्हें पेशाब करता हुआ देख रहा था,,,।

यह तो हम औरतों की खूबसूरती का ही कमाल है कि हमें हर एक क्रिया करते हुए मर्दों को देखना अच्छा लगता है भले ही हम लोग नंगी होकर नहा रहे हो मुत रहे हो या कुछ भी कर रहे हो हर हाल में हम लोगों को देखना मर्द की फितरत रहती है।

हां तभी खड़ा कर देती हो सबका सालों के पास जुगाड़ नहीं रहता तो हाथ से हिला कर ही काम चला लेते हैं,,,,।

अब देखना यह चाय वाला भी पीछे जाकर दिला कर ही आएगा,,,।

इतना देखने के लिए हम लोगों के पास समय नहीं है चलो जल्दी से गाड़ी पकड़ कर हमें होटल भी जाना है आज घर के लिए वापस भी लौटना है।



हां रे अंकित मैं तो भूल ही गई कि आज यहां पर आखिरी दिन है सच में बहुत मजा आया तीन-चार दिनों में तो ऐसा लग रहा है कि तीन-चार साल यहां पर रुक गए। और यह सब तेरी वजह से हो रहा है मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि मैं यहां पर कभी घूमने आऊंगी इतना मजा करूंगी और वो भी इस उम्र में,,,।

उम्र का क्या रखा है मम्मी,,,, किसी के सामने टांग खोल दोगी तो तुम्हें पाने के लिए किसी भी उम्र के मर्द हद तक गुजरने को तैयार हो जाएंगे।

बातें बनाना तो कोई तुझसे सीखे,,,, चल वह देख सामने एक कार खड़ी है,,,,।

(दोनों कार के पास आकर होटल का नाम बताएं और कर में बैठ गए थोड़ी देर में वह कार वाला उन्हें होटल के सामने उतार दिया,,, वह दोनों होटल में जाने लगे तो सामने से वही वैटर आता हुआ दिखाई दिया जैसे सुगंध अपनी जवानी का जलवा दिखाइए और अनजाने में ही उसे देखकर वह मुस्कुरा दी,,, वह वेटर सुगंधा को अपनी तरफ देखकर मुस्कुराता हुआ पाकर अंदर से उसके अरमान मचलने लगे,,,, उसका दिन बन गया था,,, और जब से सुगंधा होटल में आई थी और जब से वह वैटर सुगंधा की नंगी जवान को अपनी आंखों से देखा था तब से रोज उसका नाम लेकर दो बार मुठ मारता था,,,,।

मां बेटे दोनों अपने कमरे में पहुंच चुके थे बेहद थक चुके थे इसलिए कुछ देर तक आराम करना चाहते थे। शाम को 5:00 बजे तक दोनों को होटल में रुकना था उसके बाद यहां से निकल जाना था आराम करते-करते 12:00 बज चुके थे। नहाने से पहले वह दोनों खाना खा लेना चाहते थे इसलिए दोनों फ्रेश होकर नीचे आए और खाना खाने लगे,,,, खाना खाने के बाद दोनों वापस अपने कमरे में चले गए और फिर से आराम करने लगे,,,, देखते ही देखते चार बज चुके थे अंकित बाथरूम में नहाने के लिए चला गया था सुगंध का नहाना बाकी था वहां बिस्तर पर बैठी हुई थी और यहां पर जो कुछ भी उन दोनों के साथ हुआ था जो पल उन दोनों ने साथ में गुजारा था उसके बारे में सोच कर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, की तभी डोर बेल बजने लगी सुगंधा धीरे से बिस्तर पर से उठकर खड़ी हो गई और दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ गई,,,,, दरवाजा खोली तो सामने वही बैटर था जो सुगंधा की जवानी के दर्शन कर चुका था सुगंधा को देखकर वह मुस्कुराया,,, सुगंधा भी उसे देखकर औपचारिकता दिखाते हुए मुस्कुराने लगी सुगंधा की मुस्कुराहट को हरी बत्ती का सिग्नल समझ कर वह एकदम से कमरे में दाखिल हो गया उसके इस व्यवहार पर सुगंधा हैरान होते हुए बोली,,,)

कार में बैठती हुई सुगंधा





पर हमने तो कोई ओर्डर नहीं किया,,,।

(वह वैटर जानता था कि 5:00 बजे यह दोनों होटल का कमरा खाली कर देंगे। और अंकित ने मजाक मजाक में उससे वादा भी किया था कि जाने से पहले वह सुगंधा को एक रात के लिए उसे सौंप देगा बस उसे एक रात का चार्ज उसे दे देना है, क्योंकि वह बेटा सुगंधा को धंधे वाली औरत समझता था और अंकित ने भी उसे अपनी मां को धंधे वाली बात कर ही उससे वादा किया था,इसीलिए वह यहां पर आया भी था,,,, सुगंधा की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए धीरे से दरवाजा बंद करते हुए बोला।)

मैं जानता हूं कि आपने कुछ भी आर्डर नहीं किया है लेकिन मैं आपके लिए आया हूं,,,

(उसका व्यवहार देखकर सुगंधा को घबराहट होने लगी और डरने लगी)

मेरे लिए,, मैं कुछ समझी नहीं,,,,

वह तुम्हारे साथ जो साहब थे ना उन्होंने ही मुझे बोला था कि जाने से पहले वह तुम्हें मेरे हाथों सौंप देंगे एक रात के लिए मैं पैसे भी लाया हूं,,,,।

(इतना सुनते ही सुगंधा के होश उड़ गए सुगंधा जानती थी कि उसका बेटा उसे धंधे वाली बताया था और यह भी बताया था कि वह एक रात के लिए उसके साथ मजे लेना चाहता है जिसके एवज में वह पैसे भी देगा,, लेकिन यह सब मजाक ही था जिसे वेटर सीरियसली ले लिया था। और इस समय उसे अपनी आंखों के सामने अपनी कमरे में देखकर सुगंधा के होश उड़ गए थे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कह क्या करें इस समय अंकित बाथरूम में था उसे तो मालूम भी नहीं था वह नहाने में मगन था,,,,,, उसकी बात सुनकर बड़ी नम्रता से सुगंधा बोली,,)



देखो तुम्हें गलतफहमी हो गई है,,,।

कोई गलतफहमी नहीं हुई है मैं पैसे भी लाया हूं,,, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं मेरी जान,,,(इतना कहने के साथ ही वह आगे बढ़कर एकदम से सुगंधा को अपनी बाहों में कस लिया और उसके होठों पर चुंबन करने की कोशिश करने लगा लेकिन सुगंधा अपने आप को बचाने लगी,,,,, अपनी बाहों में कस के पकड़े हुए वह तुरंत अपने दोनों हाथों को सुगंधा की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर दबाते हुए उसके होठों को चूमने की कोशिश कर रहा था और सुगंधा बचने की कोशिश कर रही थी,,,,)

छोड़ मुझे हरामजादे,,, मैं कोई धंधे वाली नहीं हूं,,,,।

मैं पैसे लाया हूं मेरी,,, जान,,,,, तुम ऐसा क्यों कर रही हो मुझे भी मजा दिखा दो जैसा उसे लड़के को तीन दिन से मजे दे रही हो,,,,,ओहहह मेरी रानी,,,,,(ऐसा कहते हुए वह लगातार सुगंधा के लाल लाल होठों को अपने होठों से स्पर्श करना चाहता था,,, लेकिन सुगंधा उसे ऐसा करने नहीं दे रही थी लेकिन इस दौरान सुगंधा को महसूस हो रहा था कि वह पूरी तरह से उत्तेजित अवस्था में था उसका लंड खड़ा हो चुका था जो की साड़ी के ऊपर से उसे अपनी बुर पर ठोकर लगता हुआ महसूस हो रहा था,,,, वह शोर मचा कर अपना मजाक बनाना नहीं चाहती थी लेकिन अब बात उसकी इज्जत पर आ चुकी थी इसलिए वह अपने बेटे को आवाज लगाते हुए बोली,,,)





अंकित मुझे बचा,,,,,, अंकीत,,,,,।

(अब सुगंधा थोड़ा जोर से बोली थी और उसकी आवाज अंकित के कानों तक पहुंच चुकी थी क्योंकि सावर चालू होने की वजह से उसके शोर में कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था लेकिन सुगंधा के जोर से बोलने पर वह अपनी मां की आवाज सुन लिया था और उसे एहसास हो गया था कि जरूर कोई बात है उसके पास कपड़े पहनने का भी समय नहीं था क्योंकि वह नंगा नहा रहा था,, बिना कपड़े पहने वह एकदम से बाथरूम से बाहर आ गया और बाहर आकर देखा तो उसकी मां उसे वेटर की बाहों में थी जो उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था और उसकी मां अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी यह देखकर तो अंकित का दिमाग एकदम से खराब हो गया,,,, और वह जोर से चिल्लाया,,,।

हरामजादे तेरी यह हिम्मत,,,(और इतना कहने के साथ ही वह आगे बढ़कर उस वेटर का कोलर पकड़ कर एकदम से खींच लिया,, वह वेटर अंकित का रवैया देख कर एकदम से घबरा गया वह कुछ कर पाता समझ पाता इससे पहले ही अंकित दो चार मुक्का उसके पेट पर लगा चुका था वह एकदम से गस्त खाकर गिर गया था,,,, अंकित के दो-चार मुक्के में ही वह ढेर हो गया था अंकित गुस्से से उसे और करने जा रहा था तब तक उसकी मां उसे रोकते हुए बोली।



रहने दे बेटा कहीं कुछ हो गया तो खामखा लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,,,।

(वह दर्द से कराह रहा था,,, लेकिन सुगंधा के मुंह से बेटा सबसे सुनकर वह हैरान हो गया था वह हैरानी से नीचे पड़ा ऊपर नजर घूमाकर सुगंधा की तरफ और अंकित की तरफ देख रहा था यह देखकर अंकित समझ गया था कि उसके मन में क्या चल रहा है,,,, वह उसके मन में उठ रहे शंका को दूर करते हुए बोला।)

देख क्या रहा है हरामजादे यह मेरी मां है और मैं इसका बेटा हूं कुछ समझ में आया मैंने तुझे मजाक में कहा था क्योंकि तू मेरी मां को धंधे वाली समझ रहा था।

(अंकित की बात सुनकर उस वेटर के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अंकित की बात का उसे बिल्कुल भी भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि पहले दिन ही जो नजर उसने कमरे के अंदर देखा था वहां पर अंकित भी मौजूद था भला एक मां अपने बेटे की मौजूदगी में पूरी तरह से नंगी कैसे हो जाएगी,,,, इसलिए वह अपनी शंका का समाधान चाहता था इसलिए दर्द से कराहते हुए बोला)

मुझे तुम्हारी बात पर भरोसा नहीं हो रहा है उस दिन कमरे के अंदर यह मेम साहब मेरे सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी तो भी तो वहीं मौजूद थे भला एक मां अपनी बेटी के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी कैसे हो सकती है।



मैं जानता हूं मेरे बच्चे तेरे मन में यही सब चल रहा था और मैं तो मजा लेने के लिए कह दिया था कि धंधे वाली मैं इसके साथ यहां मजा लेने के लिए आया हूं लेकिन मैं तुझे आज सच-सच बता देता हूं कि यह मेरी मां है और यहां पर हम दोनों मजा लेने के लिए आए हैं।

मां बेटे होकर मजा लेने के लिए मैं अभी भी कुछ समझ नहीं पा रहा हूं यार तुम लोग मुझे पागल कर दोगे,,,,।

(उसकी हालत देखकर सुगंधा के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी और वह सहज होते हुए मुस्कुरा कर बोली)

यह सही कह रहा है मैं इसकी मां हूं ना कि एक धंधे वाली,,,, तुझे तो मजाक मजाक में इसने कह दिया था कि मैं धंधे वाली हूं क्योंकि तू मुझे यही समझ ही रहा था,,,,

लेकिन एक मां अपने बेटे के साथ और एक बेटा अपनी मां के साथ यह सब कैसे कर सकता है,,,,।

ऐसे ,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित एकदम से अपनी मां के गरदन में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचा और उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,, यह देख कर वह वेटर एकदम से दंग रह गया,,,, तभी उसकी नजर अंकित के लंड पर पड़ी जो की पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,,, वह देखता ही रह गया क्योंकि उसका खुद का अंकित से आधा भी नहीं था,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी इतना मोटा और लंबा लंड वह जिंदगी में पहली बार देख रहा था अचानक ही उसके मुंह से निकल गया।)



बाप रे इतना मोटा और लंबा,,,,।

(उसकी आवाज सुनकर अंकित अपनी मां के होठों को अपने मुंह से आजाद किया और उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला)

यही वजह है जो मेरी मां मेरे से मजा लेती है। अब कुछ समझ में आया,,,,,।

समझ गया तेरा हथियार देखकर ही मैं समझ गया,,,,, बाप रे इतना बड़ा,,,,,, तब तो तेरी मां के लिए तू ही बराबर है मेरे से यह संतुष्ट होने वाली भी नहीं है,,,,।

क्यों तेरा ऐसा नहीं। है क्या,,,?

अब जाने दे यह सब बात कर कोई फायदा नहीं है मैं तो तुम दोनों को कुछ और ही समझ रहा था।

अब यह सब जाकर बाहर मत बताना वरना मैं मैनेजर को बता दूंगा कि तू मेरी रानी के साथ बदतमीजी कर रहा था फिर तेरी नौकरी चली जाएगी।

नहीं ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,(एकदम से वहां अंकित के पैर पकड़ लिया और ऐसा करने में अंकित का लंड उसके गाल पर रगड़ खा गया जिससे वह मदहोश हो गया,,, यह देखकर अंकित बोला,,)

मुंह में लेने का विचार है क्या,,,?

नहीं नहीं,,,,, लेकिन इसे पकड़ कर देखना जरूर जाऊंगा क्या मैं इसे,,,,।

हां हां बिल्कुल,,,,,।



(अंकित की इजाजत बातें ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ लिया वाकई में उसे एहसास हो रहा था कि सही मायने में लंड किसे कहा जाता है उसकी हथेली पूरी गर्म हो चुकी थी,,,, लेकिन फिर वह जल्दी से उसे छोड़ दिया और कमरे से बाहर निकल गया यह देखकर सुगंधा जोर-जोर से हंसने लगी.. अपनी मां को हंसता हुआ देखकर अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला।)

अभी मैं नहीं होता तो तुम्हारी चुदाई कर दिया होता।

वह तो कर ही दिया होता तूने धंधे वाली जो बता दिया था,,,, साला बोल रहा था कि पैसे लेकर आया हूं।

(इतना सुनते ही अंकित भी जोर-जोर से ऐसे ही लगा थोड़ी देर में दोनों नहा कर तैयार हो चुके थे अपना कपड़ा पैक करके बैग लेकर वह दोनों होटल से निकल चुके थे बस अड्डे पर जहां से वह लोग बस पकड़ कर अपने शहर के लिए रवाना हो चुके थे)
 
उसे वेटर को मजा चखाकर अंकित अपनी मां को लेकर बस में बैठ गया था अपने बेटे की हिम्मत और मर्दाना ताकत के बारे में सोचकर सुगंधा गर्व महसूस कर रही थी,, क्योंकि जिस तरह से होटल के अंदर स्थिति को अपने नियंत्रण में अंकित ने लिया था वह काबिले तारीफ थी और इस बारे में सोचकर गर्व से उसकी छाती फूल रही थी,, उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि अगर होटल के अंदर सही समय पर उसका बेटा ना होता तो वह वेटर उसके साथ जबरदस्ती कर लेता,,, वह अपने मन में यह भी सोच रही थी कि भले ही उसका बेटा उसे दूसरों के सामने गंदी औरत या रंडी कहकर बुलाए लेकिन फिर भी वह थी तो एक सीधी शादी औरत बस अपने बेटे की संगत में थोड़ी छिनार बन गई थी लेकिन ऐसा छिनार नहीं की किसी के साथ भी सो जाए वह अपने बेटे को छोड़कर किसी और के बारे में कभी सोच भी नहीं सकती थी।



लेकिन किसी गैर के सामने मजा लेने का नशा जिस तरह से अंकित में उसे लगाया था वह काफी हद तक उसे मदहोश कर देता था लेकिन इस बात से वह अनजान बिल्कुल भी नहीं थी कि कभी-कभी यह है मजा उसके लिए आफत बन सकता है जो की होटल के कमरे में बन भी चुका था। वह महसूस कर रही थी की पहली बार वह किसी गैर मर्द की बाहों में थी और वह भी जबरदस्ती उसके हाथ को अपने ऊपर महसूस करके वह अजीब सा महसूस कर रही थी उसे साफ एहसास हो रहा था कि उस अनजान मर्द का स्पर्श उसे बिल्कुल भी रोमांचित नहीं किया था। बल्कि वह उसके स्पर्श से डर महसूस कर रही थी घबराहट महसूस कर रही थी लेकिन उसे अच्छी तरह से याद था कि वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था अपनी बाहों में भरकर वह जिस तरह से उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था उसके लंड की चुभनों से अपनी बर के ऊपर साफ महसूस हुई थी जिससे वह अंदाजा लगा ली थी कि वह कितना ज्यादा उतावला और उत्तेजित है। लेकिन इन सबके बावजूद भी सुगंधा कभी भी किसी भी गैर मर्द के बारे में ना तो सोचती थी और नहीं उसके साथ कोई संबंध बनाने के बारे में इच्छा रखती थी।



बार-बार उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ जा रही थी अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित बोला।

क्या हुआ मुस्कुरा क्यों रही हो,,,?

मुस्कुराने की तो बात है,,,, हम औरतें तो तेरे लंड की दीवानी है ही लेकिन वहां मर्द भी तेरे लंड का दीवाना हो गया था।

समय नहीं था नहीं तो सच में पूरा लंड उसके मुंह में डालकर कस हुआ था और फिर उसकी गांड भी मार लेता,,,।

छी,,,,,, तू सच में ऐसा करता।

फिर क्या देख नहीं रही थी उसकी आंखों की चमक वह पूरा का पूरा अपने मुंह में लेना चाहता था। मुझे पूरा विश्वास था कि अगर समय होता तो अगर मैं उसकी तुम्हारे सामने गांड भी करने को कहता तो वह मरवाने के लिए तैयार हो जाता है।

धत् औरतों की गांड तक तो ठीक मर्दों की गांड मारने में क्या मजा,,,,।

यह तो वही जाने जो मरवाते हैं मारने वाले को तो सिर्फ पानी निकालने से मतलब,,,,।

चाहे वह मर्द ही क्यों ना हो ‌।

अब जिसके पास जुगाड़ नहीं है उसे तो मर्दों से ही काम चलाना पड़ता होगा और अगर मर्द नहीं मिले तो फिर हाथ से हिला कर काम चलाना पड़ता है बस पानी निकलने से मतलब और हां जिसके पास जुगाड़ है उसकी तो हर रात सुहागरात होती है जैसे कि तुम मेरी जान।



तू बहुत हरामी है,,, मेरी भी गांड मार कर हालत खराब कर दिया था तुने।(ऐसा कहते हुए उसे समय का दर्द का एहसास दिलाते हुए सुगंधा का हाथ अपने आप ही उसकी कमर पर पहुंच गया था,,,)

मजा भी तो बहुत दिया था वह तो मैं हूं कि तुम्हारी गांड की गहराई तक लंड पहुंच गया था मेरी जगह कोई और मर्द होता तो तुम्हारी गांड के छेद के ऊपर ही ढेर हो जाता पानी निकाल के,,,,,।

ऐसा क्यों जैसे तू करता है वैसा दूसरे भी करते उनका भी चला जाता,,,।

बिल्कुल भी नहीं जाता मेरी जान तुम्हारा छेद एकदम छल्ले की तरह है एकदम कसा हुआ,, तुम्हारे छल्ले को भेदने के लिए असली मर्द चाहिए बिल्कुल मेरी तरह जो मेहनत करके तुम्हारी गांड की गहराई तक पहुंचे और एहसास दिलाए की लंड क्या चीज है,,, याद है ना 2 दिन तक कमर पर हाथ रख कर चल रही थी।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोली कुछ नहीं बस मुस्कुरा दी,,, यह देखकर अंकित भी चुटकी लेते हुए बोला)

सब याद रहता है तुम्हें बस याद दिलाने की जरूरत पड़ती है।

क्यों नहीं आखिरकार तेरे साथ बिताया हुआ है कि कल मेरे लिए यादगार है। अब कल से वही सब शुरू हो जाएगा।



कोई बात नहीं सारे काम के बीच में मजा भी तो है मैं और तुम,,,,।

(अपने बेटे के कहने के मतलब को समझ कर सुगंधा के चेहरे पर शर्म की लाली छा गई लेकिन फिर अगले ही पल उसके चेहरे पर फैली हुई शर्म की लाली ओझल होने लगी और वह चिंतित स्वर में बोली)

अब तो कुछ ही दिनों में, तृप्ति भी आ जाएगी तब हम दोनों को समय कहां मिल पाएगा।

समय मिलता नहीं है निकालना पड़ता है और देखना मिल ही जाएगा समय हम दोनों को जब तृप्ति घर के बाहर जाएगी तो हम दोनों घर के अंदर मजा करेंगे,,,।

और कभी उसे इस बात का पता चल गया तो मैं तो कहीं की नहीं रह जाऊंगी,,,।

ऐसा कभी नहीं होगा,,,।

यह तो कह रहा है ना अगर हो गया तब क्या करेगा। कैसे हम दोनों उससे नज़रें मिला पाएंगे,,,,।

बात तो सही है,,, लेकिन ऐसा भी तो हो सकता है कि हम दोनों को मजा लेते देखकर उसके मन में भी उमंगे जागने लगे।

धत्,,,, ऐसा बोलना भी नहीं,,,।

अरे मैं सही में नहीं कह रहा हूं लेकिन एक बात कह रहा हूं कि ऐसा भी तो हो सकता है वह गुस्सा भी हो सकती है और हम दोनों को देखकर खुद आनंदित भी हो सकती है और कहीं वह भी खेल में शामिल होने की सोचने लगे तब।

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता,,,, वह बहुत सीधी-सादी है इस खेल में उसे शामिल करना ठीक नहीं है।



सीधी शादी तो तुम भी थी संस्कारी मर्यादा वाली तुम्हें देखकर कोई का भी नहीं सकता कि बंद कमरे के अंदर तुम अपने ही बेटे से मजा लेती हो, बोलो कोई कह सकता है, कोई बता सकता है कि हम दोनों के बीच मां बेटे के अलावा और कौन सा रिश्ता है। कोई नहीं बता सकता ना।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा सोच में पड़ गई थी,,, वह कुछ बोल पाती से पहले अंकित फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

मम्मी कोई किसी के मन में बैठा नहीं है कोई किसी के मन की बात जान नहीं सकता और यह मन भी समय-समय पर बदलते रहता है भले ही तृप्ति एकदम सीधी-सादी भोली भाली लेकिन उम्र के साथ यह भोलापन बदलते रहता है उसका मन भी बदलता ही होगा,,,,,, इसीलिए कह रहा हूं अगर सोचो उसके मन में भी मजा लेने की बात आ गई तब क्या करोगी।

मैं उसे समझाऊंगी कि यह सब गलत है,,,।

हां और वह समझ जाएगी पागल हो गई हो तुम वह यह नहीं रहेगी की मां बेटे हो करके तुम दोनों आपस में मजा ले रहे हो तो मुझे कैसे कह रहे हो कि यह सब गलत है जरूर इसमें मजा आता होगा तभी तो तुम दोनों आपस के मां बेटे के रिश्ते को भूलकर औरत और मर्द बनाकर मजा लूट रहे हो।

(अंकित की बात सुनकर सुगंधा फिर से सोच में पड़ गई थी क्योंकि वह जानती थी कि अंकित का कहना गलत नहीं है वह जो कह रहा है वह भी मुमकिन है अगर सच में ऐसा हो गया तब तो गजब हो जाएगा,,,,, इसलिए वह अपने बेटे से बोली।)

नहीं मैं नहीं चाहती कि ऐसा कुछ भी हो और ऐसा नहीं होगा देख लेना हम दोनों सलामती के साथ यह सब करेंगे जब वह घर पर नहीं होगी तभी यह सब करेंगे अगर वह घर पर होगी तो हम दोनों के बीच मां बेटे का ही रिश्ता होगा मर्द और औरत का नहीं तु मुझसे 10 कदम दूर ही रहना,,,,।

अंकीत की कल्पना



अरे यार तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करती मम्मी मैं यह नहीं कह रहा हूं की तृप्ति को यह खेल में शामिल हो जाना चाहिए मैं भी जानता हूं कि यह सब गलत है यह तो हम दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी कर रहे हैं मेरी भी यही जरूरत है और तुम्हारी भी यही जरूरत है अगर हम दोनों एक दूसरे से जरूर पूरी न करें तो हम दोनों के कदम बैठ सकते हैं मेरा किसी और के साथ रिश्ता हो सकता है और तुम्हारा किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात हो सकता है लेकिन उसमें कितनी बदनामी है,, तुम्हारा पद देखते हुए क्या तुम्हें लगता है कि अगर तुम्हारा किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात हो जाए और वह तुम्हें बदनाम करने लगे थे तुम घर के बाहर निकाल पाओगी किसी को अपना मुंह दिखा पाओगी।

बिल्कुल भी नहीं,,,,।



बस यही तो मैं तुम्हें समझाने की कोशिश कर रहा हूं,,, तुम उसे समय घर से इसलिए बाहर नहीं निकलना चाहेगी कि कोई तुम्हें भला बुरा ना कह दे तुम्हारे चरित्र पर उंगली ना उठा दे,,,, और इसीलिए मैं तुम्हें समझा रहा हूं कि अगर तर्प्ति ने हम दोनों को मजे लेते हुए देख ली तो वह कैसे शांत रह सकती है कैसे उसका मुंह बंद किया जा सकता है क्या उसे समझाया जा सकता है कि हम दोनों जो कर रहे हैं वह ठीक है या गलत है हम दोनों को ऐसा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए यह तो पूरी दुनिया जानती है की मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता बिल्कुल भी जायज नहीं है लेकिन घर की बंद चार दिवारी के अंदर यह सब होता ही रहता है जब तक दूसरों को पता नहीं चलता तब तक सब कुछ ठीक है,,,, तृप्ति भी बड़ी है मुझसे बड़ी है जवान है उसकी भी सहेलियां होगी जो इस तरह से मजा लेती होगी उसे इस बारे में बताती होगी तो क्या उसका मन बहकता नहीं होगा और अपनी आंख के सामने ही जब वह देखेगी कि उसकी मां और उसका छोटा भाई आपस में मजे ले रहे हैं तो वह कैसे अपने आप को रोक पाएगी उसे तो खुली छूट मिल जाएगी,,,, कि घर में ही वह मजा ले सकती है बदनाम होने का डर नहीं है जैसा कि हम दोनों ले रहे हैं।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को एहसास हो रहा था कि उसकी बात में सच्चाई है लेकिन वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि इस खेल में उसकी बेटी भी शामिल हो इसलिए वह अपने बेटे से बोली,,)



अगर सच में कहीं ऐसा हो गया तो क्या तू अपनी बड़ी बहन के ऊपर चढ़ जाएगा।

उसकी मर्जी जैसा कि तुम्हारे ऊपर चढ़ गया था अगर वह जाएगी तो जरूर ऐसा करूंगा क्योंकि मैं नहीं चाहता कि वह बाहर जाकर इस तरह का मजा ले हम दोनों को देखने के बाद जहां पर बदनामी का डर हो ऐसा भी हो सकता है कि जिसके साथ वह जिस्मानी संबंध बनाए वह उसे बहला फुसला कर दूसरों के साथ भी मजा लेने के लिए मजबूर कर दे,,,,,।

तू सच कह रहा है आजकल ऐसा ही होता है लेकिन फिर भी मैं चाहूंगी कि उसे इस बारे में बिल्कुल भी पता ना चले हम दोनों को अब संभल कर रहना होगा खास करके तू अपनी हरकतों पर लगाम लगा लेना जहां भी देखता है गांड पर हाथ रख देता है।

अब क्या करूं तुम्हारी गांड है ही इतनी खूबसूरत कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाता।

रोक नहीं पाता,,,(मुंह बनाते हुए सुगंधा अपने बेटे की बात को दोहराते हुए बोली और यह देखकर अंकित हंसने लग जाते समय भी वह दोनों बस में केबिन बुक किए थे ताकि दोनों को कोई डिस्टर्ब ना कर सके,,,, शाम ढलने लगी थी ठंडी ठंडी हवा चल रही थी और इस तरह की बातों ने सुगंधा के तन बदन में फिर से आग लगा दिया था इसलिए सुगंधा बोली कुछ नहीं बस केबिन के अंदर धीरे से उठकर बैठ गई और अपनी साड़ी को धीरे-धीरे कमर तक उठाने लगी,,,,, यह देख कर अंकित समझ गया कि उसकी मां क्या चाहती है इसलिए वह भी धीरे से अपनी पेंट की बटन खोलकर पेट को घुटनों तक की नीचे खींच दिया इस तरह की बातों से वह भी उत्तेजित हो गया था जिसका एहसास उसे उत्तेजित कर रहा था और उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा था सुगंधा देखते ही देखते हुए अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को भी धीरे से अपने बदन से अलग कर दी,,, और फिर वह अपने बेटे के कमर के इर्द-गिर्द घुटना रखकर बैठ गई, अंकित को कुछ भी करने की जरूरत नहीं थी सुगंधा खुद ही अपनी लपलपाती हुई बुर पर अपने बेटे का लंड पकड़ कर उसका सुपाड़ा सटा दी और अपनी भारी भरकम गांड का वजन उस पर बढ़ाने लगी देखते ही देखते अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में छुप गया डूब गया और फिर अपने बेटे के कंधे को पड़कर वह अपनी कमर को जोर-जोर से पटकने लगी।



चलती हुई बस में इस तरह का मजा लेने का आनंद ही कुछ और था जिसका एहसास मां बेटे दोनों को अच्छी तरह से हो गया था इसलिए अंकित भी देर ना करते हुए अपने हाथ को आगे बढ़कर अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया और बटन खोलने में से ज्यादा समय नहीं लगा,,,, और अपनी मां की ब्रा को नीचे से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ खींच दिया जिससे उसके दोनों कबूतर आजाद हो गए और अगले ही पल अंकित उसे अपनी दोनों मुट्ठी में भरकर उसकी आजादी को छीन लिया,,,,,।

अंकित को मजा आ रहा था अंकित अपनी मां की चूची में व्यस्त था और सुगंधा अपने बेटे के लंड पर अपनी गांड जोर-जोर से पटक रही थी,,,, सुगंधा अत्यधिक उत्तेजित हो चुकी थी ना चाहते हुए भी उसके मन में ख्याल आ रहा था कि अगर इस खेल में उसकी बेटी भी शामिल हो गई तो नजर किस तरह का होगा वह अपनी आंखों को बंद करके कल्पना कर रही थी,,,, वह इस समय कल्पना कर रही थी कि मां बेटी के साथ उसकी बेटी भी पूरी तरह से नंगी बिस्तर पर है और इसी तरह से वह अपने बेटे के लंड पर कुद है और उसकी बेटी अपनी गुलाबी बुर को अपने भाई के मुंह पर रखकर उस पर अपनी बुर रगड़ रही है और अंकित भी पूरी तरह से मस्त होकर अपनी बहन की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी बुर को मलाई की तरह चाट रहा है,,,,, इस तरह की कल्पना सुगंधा को मदहोश कर रही थी,,, बस में खिड़की से आ रही ठंडी हवा भी उसकी जवानी की गर्मी को शांत करने में नाकाम साबित हो रही थी। अपनी बेटी के बारे में सोच कर वह जोर-जोर से अपनी गांड को पटक रही थी,,,, और अंकित भी कुछ काम नहीं था वह भी अपनी आंखों को बंद करके अपनी मां की चूची को जोर-जोर से दबाते हुए अपनी बड़ी बहन के बारे में सोच रहा था।





उसकी कल्पनाओं का घोड़ा भी बड़ी तेजी से दौड़ रहा था वह अपनी मन में यह सोच रहा था कि उसके लंड के ऊपर उसकी मां नहीं बल्कि उसकी बड़ी बहन बैठी हुई है और उसका मोटा तगड़ा बड़ा लंड उसकी बहन की बुर की गहराई में घुसा हुआ है,,, उसे दर्द महसूस हो रहा है लेकिन वह नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल छल कर अपनी बहन की चुदाई कर रहा है,,, और लगातार उसके दोनों संतरे को अपने हथेली में लेकर दबा रहा है,,,,, मां बेटे दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे वातावरण की ठंडी हवा दोनों के ऊपर बेसर थी क्योंकि दोनों के ऊपर वासना का भूत जो सवार हो चुका था वासना की गर्मी वातावरण की ठंडक से शांत होने वाली नहीं थी वासना की गर्मी केवल सुगंधा की गर्म जवानी ही शांत कर सकती थी और इस समय सुगंधा पूरी कोशिश में लगी हुई थी अपनी और अपने बेटे की गर्मी उतारने में।

तकरीबन 25 मिनट तक अपने बेटे के लंड पर गांड पटकने के बाद दोनों का बदन अकडने लगा,,,, सुगंधा नीचे झुककर अपने बेटे को अपनी बाहों में भर ली जिसकी वजह से नीचे झुकने के कारण उसकी बड़ी-बड़ी गांड थोड़ी सी ऊपर उठ गई थी और यही मौका देखकर अंकित चढ़ाने से पहले अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे से जोर-जोर से धक्के पर धक्का लगने लगा और तब तक लगाता रहा जब तक की दोनों का पानी निकल नहीं गया।



दूसरे दिन सुबह वह लोग अपने शहर पहुंच चुके थे ,,, अपने शहर के बस स्टैंड पर उतरकर रिक्शा पकड़ कर वह दोनों अपने घर पहुंच चुके थे। काफी थके होने की वजह से वह लोग आराम करने लगे।
 
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