तू अच्छी है कि यह औरत अच्छी है,, जो इस समय मजा लूट रही है और तो अपने परिवार की जरूरत पूरी करते-करते अपनी उम्र भी को दे रही है इस उम्र में तो तुझे भी एक मर्द की जरूरत है जो तुझे जी भर कर प्यार करे तेरी जरूरत को पूरा कर सके लेकिन तू है कि अपनी जरूरत को एक तरफ रख कर मर्यादा और संस्कार में गिरकर बस अपने जीवन को घसीट रही हैं जी नहीं रही है। तू भ्रम में जी रही है और यह औरत सच्चाई में जी रही है उसकी जरूरत है एक मर्द और वह अपनी जरूरत पूरी करने के लिए उम्र भी नहीं देख रही है अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ मजा लूट रही है तू ही जरा सोच जीवन का असली मजा तो यह लूट रही है,,, तुझे भी यही करना चाहिए और अगर तो यह सब करने भी लगेगी तो जरूरी नहीं है कि किसी को पता चल अब देख ले तेरी आंखों के सामने यह दोनों घर से बहाना करके इतनी दूर आ गए हैं और मजा लूट रहे हैं घर पर भी यह दोनों मजा लूटते थे और अभी तक किसी को पता भी नहीं है असली चुदाई किसे कहते हैं यह जवान लड़का इस औरत को अच्छी तरह से महसूस करवा रहा है। और यह जरूरी भी है इस उम्र में औरत की जरूरत और भी ज्यादा बढ़ जाती है औरत की जवानी और भी ज्यादा निकल जाती है शायद इस उम्र में जाकर उसका पति उसे तरह का प्यार बिल्कुल भी नहीं दे सकता जितना कि यह जवान लड़का उसे दे रहा है। तभी तो इस समय बिस्तर पर घमासान मचा हुआ है,,, अपने मन की इस तरह की बात सुनकर बिंदिया धीरे से अपनी आंखों को खोलकर सामने का नजारा देखने लगी सामने सुगंधा अपने बेटे के लैंड को पकड़ कर मुठिया रही थी और अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर दबा रहा था यह नजारा देख कर भी दिया अपने मन में सोचने लगी की सुगंधा की जगह वह होती तो कितना मजा आता है एक जवान लड़का कितना सुख दे सकता है इसका एहसास ही उसके बदन में गुदगुदी कर रहा था। बिंदिया अभी यह सब सोच ही रही थी कि तभी उसे जो सुनाई दिया उसे सुनकर वह एकदम से सन्न रह गई सुगंधा की बात उसके कानों में पड़ी वह अपने बेटे से बोल रही थी।
आज मैं तेरा लंड चूस चूस कर इसका रस निकाल दूंगी,,,, देखना आज मैं तुझे इतना मस्त कर दूंगी कि तू मेरे इशारे पर नाचने लगेगा।
मैं तो पहले से ही तुम्हारे इशारे पर नाच रहा हूं तभी तो तुम्हारे साथ यहां आ गया अपना परिवार छोड़कर तुम जितना मजा मुझे दोगी उससे दुगना मजा में तुम्हें दूंगा।
यह बात है अब देख में क्या करती हूं,,,।
(लंड चूसने वाली बात सुनकर बिंदिया के तन बदन में सिहरन से उठने लगी थी। क्योंकि आज तो कुछ नहीं कभी इस बारे में सोची ही नहीं थी और ना ही कभी इस क्रिया को की थी इसलिए यह सब उसे बेहद अद्भुत लग रहा था वह धीरे से अपनी आंखों को खोलकर सामने का नजारा देख रही थी लालटेन की पीली रोशनी में उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था सुगंध भी यह सब उसे दिखाना चाहती थी इसलिए वह बिंदिया की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रही थी। और अगले ही पल वह धीरे से नीचे झुकी और अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड पर अपनी जीभ गिरने लगी लालटेन की पीली रोशनी में अंकित के मोटे तगडे लंड का मोटा सुपड़ा एकदम तमतमा रहा था,,, जिस पर सुगंधा अपनी जीभ फिरा रही थी यह नजारा देख कर बिंदिया के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी जी बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं थी आज उसकी आंखों के सामने वह दृश्य दिखाई दे रहा था कभी सोच भी नहीं सकती थी कि एक औरत मर्द का लंड मुंह में लेकर चुस्ती भी है। देखते ही देखते सुगंधा अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी, बिंदिया की हालत खराब हो रही थी,,,, उत्तेजना के मारे उसकी बुर कचोरी की तरह फूल गई थी इतनी मदहोशी और उत्तेजना उसे पहले कभी महसूस नहीं हुई थी बाहर बारिश का जोर बराबर का बना हुआ था तेज हवा ही रह रहकर ताड़पत्री को हिला दे रही थी लेकिन तख्ते पर मां बेटे का हौसला बिल्कुल भी पसंद नहीं हो रहा था एक मर्द को एक खूबसूरत औरत का साथ ऐसे मौसम में अगर ना हो तो यह मौसम बेहद डरावना हो जाता है लेकिन इस समय मां बेटे दोनों कोई दूसरे का साथ था दोनों जवानी का मजा लूट रहे थे इसलिए यह मौसम उनके लिए किसी वरदान से काम नहीं था क्योंकि यहां आने से पहले वह कभी सोच भी नहीं थे कि यहां पर उन्हें इस तरह के माहौल का सामना करना पड़ेगा जो की बेहद मदहोशी से भरा हुआ था।
सहहहहह आहहहहह मेरी रानी तुम कितना मस्त चुस्ती हो,,,,ऊममममम ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं,,,,(अपनी मां के सर पर हाथ रखकर वह हल्के हल्के से उसे पर दबाव बनाता हुआ मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,,, जिसे सुनकर बिंदिया के होश उड़े जा रहे थे क्योंकि उम्र में अंकित सुगंधा के बेटे के जैसा था बिंदिया के नजरिया से और बिंदिया यही सब देखकर हैरान थी क्योंकि वह अपनी मन में सोच रही थी कि अपनी मां की उम्र की औरत को यह लड़का कितनी आराम से रानी के घर संबोधन कर रहा है जबकि जब उसके और उसके पति के बीच रिश्ता अच्छा था तब भी उसके पति ने इस तरह से प्यार से उसे नहीं बुलाया था बल्कि इस तरह से प्यार भी नहीं किया था बस अपनी जरूरत पूरी होने पर बिस्तर से खिसक लेता था। इसलिए इस समय अंकित की रसभरी बातें बिंदिया को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी। बिंदिया को साफ तौर पर दिख रहा था की सुगंधा की हरकत की वजह से अंकित के चेहरे के भाव जिस तरह से बदल रहे थे उसे यकीन हो चला था की क्रिया को करवाने मैं मर्द को बहुत मजा आता है, बिंदिया कि सांसे एकदम गरम हो चली थी,, सुगंधा के मुंह से मोटा तगड़ा लंड गले तक ले लेने की वजह से,गगगगगग,,,,,गगगगगग,,,, जैसी आवाजें निकल रही थी,,, अौर सुगंधा बड़ी मस्ती के साथ अपने बेटे के लंड को चुस भी रही थी। अपनी आंखों के सामने यह सब होता हुआ देख कर बिंदिया हैरान परेशान हुए जा रही थी वह कभी सोची भी नहीं थी की मर्द औरत से इस तरह से भी सुख प्राप्त करता है और औरत को भी यह सब करने में मजा आता है। कुछ देर तक इसी तरह से सुगंधा अपने बेटे के लंज को चुसती रही,,, बिंदिया के लिए यहां हैरानी का सबब इसलिए भी था कि अभी तक उसका पानी नहीं छुटा था जबकि उसे अच्छी तरह से याद था कि बहुत परेशान हुआ था जब वह अपने पति के साथ थोड़ा बहुत मजा लेती थी तो बिना डाले ही उसका पानी निकल जाता था,,, लेकिन अंकित का पानी अभी तक नहीं निकला था इस बात से वह काफी हैरान थी क्योंकि वह बहुत देर से उसके लंड को टनटनाए हुए देख रही थी।
सुगंधा अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल देते और गहरी गहरी सांस ले रही थी,,, अंकित अपनी मां को देखकर मुस्कुरा रहा था सुगंधा भी अंकित की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी,,, तभी अंकित अपनी मां से बोला।
अब उतार दो अपने कपड़े को अब इसकी कोई जरूरत नहीं है,,, नंगी हो जाओ मेरी रानी तुम बिस्तर पर नंगी ही अच्छी लगती हो,,,,,
अरे धीरे बोल कही यह सुन लेगी तो गजब हो जाएगा,,,।
कुछ गजब नहीं होगा देख नहीं रही हो घोड़ा बेचकर सो रही है,,,, और अगर जाग भी गई तो क्या हो जाएगा मेरा मोटा सा बड़ा लंड देखकर इसकी बुर खुद पानी छोड़ रही होगी, मैं तो कहता हूं अगर यह जाग जाए तो इसे भी खेल में शामिल कर लेते हैं काफी दिनों से इसे भी शायद लंड नहीं मिला है,,, और अगर आज की रात जमकर इसकी चुदाई कर दुं तो इससे बड़ा यहां रुकने का इसके लिए मुआवजा क्या हो सकता है इसे वह मजा दूंगा की यह जिंदगी भर याद रखेगी,,,,।
मुझे नहीं लगता कि यह तैयार होगी,,,,।
तैयार तो हो जाएगी बस एक बार नींद इसकी खुल जाए और हम दोनों को देख ले तो इसकी बुर खुद ही तड़प उठेगी लंड लेने के लिए,,,,।
( अंकित और उसकी मां जानबुझ कर ईस तरह की बातें कर रहे थे ताकि बिंदिया उन दोनों की बातों को सुन सके न जाने क्यों इस समय सुगंधा को भी लगने लगा था कि अगर बिंदिया खेल में शामिल हो जाए तो मजा आ जाए,,, वाकई में यह सब सुनकर बिंदिया के भी अरमान मचलने लगे थे कुछ पल के लिए वह भी कल्पना करने लगी थी कि अगर सच में ऐसा हो जाए तो इस जवान लड़के का लंड उसकी बुर में जाएगा तो कितना मजा आएगा यह सब सोच कर उसके तन बदन में हलचल सी होने लगी थी,,,,, वह अपनी आंखों को धीरे से खोल ले रही थी वैसे जिस जगह पर वह सोई हुई थी वहां पर थोड़ा सा अंधेरा था इसका फायदा उसे बराबर मिल रहा था और जहां पर वह दोनों मजा ले रहे थे वहां लालटेन की पूरी रोशनी बनी हुई थी। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपनी साड़ी को अपनी कमर से खोलने लगी अंकित तो पहले से ही नंगा था,,, देखते-देखते सुगंधा अपने बदन से साड़ी को खोलकर एक तरफ रखनी और पेटिकोट की डोरी को खोलने लगी और अगले ही पल पेटिकोट की डोरी खोलते ही उसका पेटिकोट उसकी कमर पर ढीली पडने लगा,,,, जिसे बैठे-बैठे ही सुगंधा अपने हाथों के सहारे से उसे अपनी कमर के नीचे सरकाने लगी बिंदिया यह सब देख रही थी। सुगंधा की यह अदा उसे बेहद उत्तेजित कर देने वाली लगी थी जब वह पेटीकोट को सरकाने के लिए अपनी भारी भरकम गांड को तख्ते से थोड़ा ऊपर उठा ली थी। और देखते ही देखते वह अपनी पेटीकोट को उतार कर पुरी नंगी हो गई थी। यह सब देखकर बिंदिया के तन बदन में भी चुदास की लहर उठ रही थी, उसे बड़ा ताज्जुब हो रहा था कि एक औरत अपने बेटे की उम्र के लड़के के सामने बेझिझक अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी कैसे हो सकती है जबकि आज तक उसने कभी अपने हाथों से यह काम नहीं की थी वैसे तो वह अपने जीवन में बिस्तर पर कम ही बार निर्वस्त्र हुई थी और जितनी बार हुई थी उसके पति ने हीं अपने हाथों से किया था वह खुद से अपने कपड़े कभी नहीं उतारी थी।
सुगंधा पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी मां बेटे दोनों निर्वस्त्र थे इस बात को लेकर बिंदिया काफी हैरान थी कि इन दोनों को इस बात का एहसास नहीं है कि वह दोनों किसी गैर औरत के सामने इस तरह की हरकत कर रहे हैं उन्हें ईस बात से बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता कि अगर वह जाग गई तो क्या होगा। फिर भी जो कुछ भी हो रहा था वह बिंदिया के लिए काफी उत्तेजित कर देने वाला था,, संपूर्ण रूप से अपनी मां को नग्न अवस्था में देखकर अंकित उसे अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी चिकनी पीठ पर अपनी हथेलियां फिराने लगा फिर धीरे से उसे तख्ते पर पीठ के बल लेटा दिया,, और उसकी दोनों टांगों को अपने हाथों से खोलकर नजर भर कर उसके गुलाबी क्षेत्र को देखने लगा,, बिंदिया को सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,, उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी बुर को देखकर वह कितना प्रसन्न और उत्तेजित नजर आ रहा है। अभी वह इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी अंकित बिंदिया को सुगंधा की दोनों टांगों के बीच झुकते हुए नजर आ रहा था और अगले ही पर जो नजर उसने अपनी आंखों से देखी उसे देखते ही उसके बदन में सुरसुराहट सी होने लगी, पल भर के लिए उसे समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है। इस बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं थी एक मर्द भला एक औरत के उस अंग को क्यों मुंह लगाएगा जिसमें से पेशाब की धार निकलती है। लेकिन यह तो सिर्फ उसकी सोच थी उसकी आंखों के सामने तो इसके विपरीत हो रहा था और पल भर में ही बिंदिया को एहसास होने लगा कि, इस क्रिया को करने में जितना मजा अंकित को आ रहा था उससे ज्यादा मजा सुगंधा को भी आ रहा था,,, बिंदिया को साफ दिखाई दे रहा था कि, अपनी बुर चटवाते हुए सुगंधा तख्ते पर कसमसा रही थी तड़प रही थी मदहोश हो रही थी,,, लेकिन ठीक उसके सामने बिंदिया की भी हालत सुगंधा जैसी ही थी भले ही उसकी बुर की चटाई नहीं हो रही थी लेकिन तड़प उतनी ही थी जितना की सुगंधा के तन बदन में मदहोशी छाई हुई थी वह सोचने पर मजबूर हो चुकी थी की औरत के लिए असली सुख क्या है। उसे खुद को कैसा सुख मिल रहा है क्या हुआ सुखी है क्या एक औरत को जिस तरह की संतुष्टि मिलनी चाहिए क्या उसे मिल रही है सीधी-सादी संस्कारी बने रहने में कौन सा आनंद उसे मिल जा रहा है जबकि उसकी आंखों के सामने एक समाज की उच्च पदवी पर विराजमान औरत बनकर जिंदगी के सारे सुख भोग रही है एक औरत होने का सुख भोग रही है। बिंदिया अपने आप से ही सवाल कर रही थी पूछ रही थी क्या उसे भी दूसरी औरतों की तरह बन जाना चाहिए संस्कारी सीधी शादी औरत बने रहने में अब तक उसे कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ था एक औरत का जो असली सुख होता है वह भी उससे कोसों दूर जा चुका था धन दौलत ना सही लेकिन अपनी खुशी के लिए तो वह जी ही सकती है,,,,,
अपने मन में चल रहे इस तरह के द्वंद से वह हैरान परेशान हुए जा रही थी उसे लगने लगा था कि वह जो जिंदगी की रही है वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है परिवार के गुजर बसर के लिए तो ठीक लेकिन उसके खुद के लिए यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था की जवानी के जी दहलीज पर वह पहुंच चुकी थी वहां पर उसे मर्द का साथ भरपूर चाहिए था। ऐसा प्यार जो उसके अरमानों को पंख दे खुली हवा में उड़ने के लिए जैसा की यह औरत एक जवान लड़के का साथ प्रकार इस समय बिस्तर पर मजे लूट रही थी बिल्कुल इसी तरह से काफी सोच विचार करने के बाद बिंदिया अपने मन में सोचने लगी कि उसे भी इस औरत की तरह जिंदगी जीनी चाहिए आज की रात अगर वह इसके साथ हम बिस्तर हो भी जाती है तो किसी को कानों कान खबर तक नहीं पड़ेगी की रात उसके साथ क्या हुआ एक ही रात में हुआ जीवन का अद्भुत सुख प्राप्त कर लेगी जो सुख उसे आज तक वैवाहिक जीवन में नहीं मिला आज की रात वह उन सारे सुख विकल्पों को पूरा कर लेगी अपने जीवन में आए रिक्त स्थान की पूर्ति कर लेगी। अब बिंदिया भी मन बना ली थी और अपनी आंखों को खोलकर सामने के घमासान युद्ध को देख रही थी जो की और भी ज्यादा रोमांचक और मादकता से भरता चला जा रहा था। उसे साफ दिखाई दे रहा था कि अंकित सुगंधा की बुर को स्वाद ले लेकर चाट रहा था वह पागलों की तरह सुगंधा की टांगों के बीच टूट पड़ा था और सुगंधा मदहोशी के चरम पर पहुंच चुकी थी,,, हालात बिल्कुल खराब होते जा रहे थे सुगंधा के बदन में कंपन हो रहा था वह अपनी टांगों को खोलकर जी भरकर अपने बेटे को माया दे रही थी उसकी मोटी मोटी केले के समान चिकनी जांघें लालटेन की पीली रोशनी में चमक रही थी जिसे देखकर बिंदिया का ईमान डोल रहा था। बिंदिया को एहसास हो रहा था कि यह औरत वस्त्र में जितनी खूबसूरत लग रही थी उससे भी ज्यादा खूबसूरत और उत्तेजक बिना वस्त्र के लग रही है वाकई में निर्वस्त्र अवस्था में और औरत की खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है।
ऊममममम आहहहहहह मेरे राजा तू तो मुझे पागल कर दिया है,,,,,,सहहहहह आबहहहहह पूरी जीभ डालकर चाट आहहहहह,,,,,,ऊमममममममम,,,(अपने बेटे के बालों को पकड़कर सुगंधा कसमसा रही थी उसके मुंह से लगातार सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,, जो की बारिश की तेज आवाज में दब के रह जा रही थी लेकिन उसकी शिसकारी की आवाज बिंदिया के कानों तक जरूर पहुंच रही थी जिसे सुनकर बिंदिया के भी अरमान मचलने लगे थे) ऊममममम जल्दी-जल्दी चाट मेरे राजा मैं पागल हुई जा रही हूं बुर चटवाने में सच में बहुत मजा आता है और तू बड़े अच्छे से चाटता भी है,,,आहहहहह आहहहहहहहह ,,,,,,ऊममममम,,,,, मुझे कुछ हो रहा है,,,,,,आहहहहहहहह मेरा पानी निकलने वाला है मैं झड़ रही हूं मेरे राजा,,,,,,।
(इतना सुनते ही बिंदिया की हालत एकदम से खराब हो गई अपने आप ही उसकी हथेली साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर आ गई और वह साड़ी के ऊपर से अपनी बुर को मसलने लगी,,,,, अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी एकदम से पागल हो गया और अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को दोनों हाथों से पकड़ कर पागलों की तरह लप सब करके चाटना शुरू कर दिया मां बेटे दोनों जानते थे की बिंदिया उन दोनों की हरकत को देख रही है, इसलिए दोनों उसके सामने और भी ज्यादा आक्रामक रवैया अपना रहे थे और बिंदिया के भी सब्र का बांध टुटता नजर आ रहा था वह भी साड़ी के ऊपर से ही अपनी कचोरी जैसी खुली हुई बुर को जोर-जोर से मसल रही थी और अपनी आंखों से सामने के नजारे का आनंद ले रही थी,,,,,, तभी सुगंधा के मुख से जोरदार की चीख की आवाज निकली)
आहहहहह आहहहहहह ऊईईईई मां,,,आहहहहहहहह(वह दोनों हाथों से अपने बेटे का कर पकड़ कर अपनी बुर पर दबा दी थी और झड़ना शुरू कर दी थी सुगंधा के मुंह से निकलने वाली चीख की आवाज को सुनकर बिंदिया एकदम से सन्न रह गई थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में सुगंधा को अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था वरना इस तरह से सीखने की आवाज तो आज तक उसके मुंह से भी कभी नहीं निकली थी,,,,,, बिंदिया यह देखकर और भी ज्यादा हैरान थी कि झड़ने के बाद भी अंकित उसके बुर से निकलने वाले नमकीन पानी का आनंद ले रहा था उसे चाट चाट कर अपने गले के भीतर उतार रहा था। बिंदिया यह देखकर और भी ज्यादा मदहोश हुए जा रही थी कि, एक बेटे की उम्र का लड़का अपनी मां की उम्र की औरत को केवल चाट कर ही झाड़ दिया था,,, कुछ देर तक अपनी मां की बुर में भिड़े रहने के बाद उसकी सारी मलाई चाटने के बाद वह धीरे से अपना मुंह ऊपर की तरफ उठाया उसके होठों से उसकी मां की बुर से निकलने वाले मदन रस का लार टपक रहा था जिसे देखकर बिंदिया पानी पानी हो रही थी। अंकित के चेहरे पर संतुष्टि के भाव साफ नजर आ रहे थे वह मुस्कुरा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने जग जीत लिया हो और वाकई में इस उम्र के लड़के के लिए यह जग जीतने वाली ही बात थी क्योंकि उसके साथ उसका हम बिस्तर एक खूबसूरत औरत थी जो दो बच्चों की मां थी ऐसी औरत को काबू में कर पाना एक जवान लड़के के लिए बहुत बड़ी बात होती है और इस खेल में जवान लडका भारी पड़ रहा था। जवान लड़के के साथ सुख भोगने के अरमान बिंदिया के मन में भी मचलने लगे थे,,,, गांव के अंदर इस उम्र के लड़के को बिंदिया बेटा कह कर ही बुलाती थी लेकिन इस समय इस तूफानी बारिश में बेटे की उम्र के लड़के में एक जवान मर्द उसे नजर आ रहा था जो उसकी इच्छाओं की पूर्ति कर सकता था उसे संतुष्ट कर सकता था। वह भी इस खेल में शामिल होना चाहती थी लेकिन कैसे यह उसे समझ में नहीं आ रहा था वह अपने मन में यह सब सो रही थी कि कब तक अंकित ताकते के नीचे उतरकर खड़ा हो चुका था उसका लंड अभी भी टांडा आया हुआ था इस बात की हैरानी बिंदिया के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि अभी तक उसका लंड बरकरार था उसका पानी नहीं छूटा था और एक औरत के लिए इससे भला हैरत अंगेज क्या बात हो सकती है।
बिंदिया अपनी नजरों को फिर से सामने स्थिर कर दी थी,,,,, माहौल पल पल मदहोश होता चला जा रहा था बाहर बारिश का शोर और बारिश का जोर रुकने का नाम नहीं ले रहा था बिंदिया भी अपने मन में सोच रही थी कि अगर वह इन दोनों को आसरा ना देती तो इन दोनों का क्या होता अगर वह सच में इन दोनों को आसरा ना देती तो इसमें उसका ही घाटा होता वह अपनी आंखों से एक उम्र दराज औरत और एक जवान लड़के का काम कल नहीं देख पाती दोनों की प्रेम लीला को अपनी आंखों से देखा नहीं पाती और यह ना देख पाती की एक मर्द औरत के बीच उम्र की खाई कोई मायने नहीं रखती,,,,, शायद यह बात इस समय सच ही साबित हो रही थी की कमर के नीचे उम्र की कोई सीमा नहीं होती। क्योंकि मर्द और औरत के बीच का असली प्रेम कमर के नीचे से ही शुरू होता है और खत्म होता है। अपने लंड को हिलाते हुए अंकित अपनी मां से बोला,,,।
ओहहह मेरी रानी आज तुम्हारी ऐसी है चुदाई करूंगा कि तुम लंगड़ा कर चलोगी,,,,।
ना बाबा ना ऐसा बिल्कुल भी मत करना क्योंकि अभी हमें पहाड़ी से नीचे भी उतरना है कहीं ऐसा ना हो कि मुझे गोद में उठा कर तुझे नीचे उतरना पड़े।
कोई बात नहीं जानेमन तुम्हें तुम्हें गोद में लेकर चाहे जहां घूम सकता हूं तुम्हारे जैसे खूबसूरत औरत इतना मजा दे रही है तो इतना तो मै कर ही सकता हूं,,,,।
तो क्या तू सिर्फ मेरे साथ मजा लेने के लिए है।
अरे नहीं नहीं रानी मैं तो तुमसे प्यार करता हूं और प्यार में मजा भी तो जरूरी है,,,,, देखो ना कितनी देर से मेरा लंड खड़ा है,,,,,।
वह तो मैं देख ही रही हूं कैसे दिखा दिखा कर बिंदिया को मुत रहा था,,,।
बात तो तुम सही कह रही हो बिंदीया देख भी रही थी और सच कहूं तो बिंदिया को चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,,।
(अंकित के मुंह से इतना सुनते ही बिंदिया अपने मन में बोली हाय दैया यह तो मेरी चुदाई के लिए तड़प रहा है,,,, मेरी बुर पानी छोड़ रही है मुझे ही कुछ करना होगा वरना हाथ में आया हुआ इतना सुनहरा मौका जाता रहेगा और आज की रात उसके जीवन में फिर कभी नहीं आने वाली। यही सोच कर बिंदिया परेशान हो रही थी की सुगंधा बोली।)
तुझे क्या लगता है बिंदिया तुझसे चुदवाएगी वह गांव की औरत है,,, मुझे नहीं लगता कि तेरे सामने वह अपनी दोनों टांगे खोलेगी।
क्यों नहीं खोलेगी मेरी रानी मेरा मोटा तगड़ा लंड देखकर कोई भी औरत अपनी टांगे खोलने पर भी बस हो जाती है,,,, मैं भी बिंदिया की आंखों में साफ देखा था उसने आज तक मेरे जैसा लंड कभी सपने में भी नहीं देखी थी।
(अंकित की आवाज सुनकर बिंदिया हैरान थी वह सच में पड़ गई थी कि इस उम्र का नौजवान लड़का एक औरत के मामले में इतना चालाक कैसे हो सकता है वाकई में उसके मन में यही चल रहा था लंड को देखकर और यह बात सच ही है कि आज तक उसने ऐसा लंड अपने सपने में भी नहीं देखी थी अब तो अंकित की बातों को सुनकर उत्तेजना के मारे बिंदिया की बुर फूलने पिचकने लगी थी। अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)
तुम देखना मेरी रानी अगर बिंदिया एक बार इसे अपनी बुर में ले लेगी ना तो मेरी दीवानी बन जाएगी मेरी गुलाम बन जाएगी मेरे सामने अपने आप ही दोनों टांगें खोल देंगी। मैं तो खुद ही तड़प रहा हूं ईसकि मुलायम बुर में अपने लंड को डालकर ककड़ी की तरह चीरने के लिए,,,आहहहहह काश ऐसी तूफानी बारिश में मुझे मिल जाती तो इसकी ऐसी की तैसी कर देता,,,,,।
चल ये सपने देखना बंद कर,,, अभी तो मेरी प्यास बुझा तेरा लंड देखकर मेरी बुर फिर से पनियाने लगी है,,,,ऊमममममममम,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी हथेली अपनी बुर पर रखकर मसलने लगी,,,,, मां बेटे दोनों इस तरह की बातें जानबूझकर कर रहे थे क्योंकि वह लोग जानते थे की बिंदिया जाग रही है अंकित उसके तन बदन में भी चुदास की लहर भरना चाहता था और उसकी यह युक्ति काम कर रही थी मां बेटे दोनों की कामुक हरकतें और अंकित कि ईस तरह की बातें बिंदिया की बुर में भी हलचल मचा रही थी वह भी बेकरार हो रही थी इस खेल में शामिल होने के लिए बस कोई बहाना नहीं मिल रहा था,,,,,, अंकित भी अपनी मां की कामुक बातों को सुनकर उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसकी आधी गांड तख्ते के किनारे करके उसकी टांगों को अपनी कमर पर लपेट लिया और अपने लंड को उसकी बुर पर जोर-जोर से पटकने लगा जैसे-जैसे वह पटक रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के मुंह से कामुक आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर बिंदिया के तन बदन में उतेजना की चिंगारी फूट रही थी । क्योंकि अब उसे मालूम था कि क्या होने वाला है वह यह देखने के लिए मचल रही थी कितना मोटा तगड़ा लंड इस औरत की बुर में आराम से चला जाता है या मस्सकत करनी पड़ेगी,,,,, और देखते ही देखते बिंदिया की आंखों के सामने ही राहुल अपनी मां के बुर में अपना मोटा तगड़ा लंड डालने लगा वैसे तो सुगंधा अपने बेटे के लंड को बड़े आराम से अपनी बुर के अंदर ले लेती थी लेकिन इस समय बिंदिया के सामने वह जानबूझकर नाटक करते हुए दर्द भरी कराहने की आवाज निकाल रही थी,।
आहहहहह ,,,ओहहहहह मां आराम से रे आहहहहहह तेरा बहुत मोटा है ऐसा लगता है जैसे गधे का लंड है धीरे-धीरे अंदर डाल एक साथ मत डाल दिया कर मुझे दर्द होता है,,,,,आहहहहहह,,,,।
(अंकित भी अपनी मां के इस नाटक में साथ देते हुए बोला)
चिंता मत करो मेरी रानी एकदम मक्खन की तरह अंदर जाएगा देखो कैसे अंदर की तरफ जा रहा है धीरे-धीरे सरक रहा है तुम्हारी बुर का पानी मेरा काम आसान कर देता है,,,,,ऊमममममम बहुत गर्म है जानेमन बुर नहीं है भट्टी है,,, मेरी जगह कोई और होता तो तुम्हारी भट्टी में कब का पिघल कर ढेर हो जाता।
यह बात तो माननी पड़ेगी मेरे राजा तू असली मर्द है सच में तेरी जगह कोई और होता तो मेरे पकड़ने से ही पानी फेंक देता,,, लेकिन तू घोड़े की तरह डंटा रहता है,,,
तभी तो तुम्हारे साथ हूं वरना मेरी जगह किसी और को ले आती,,,
तेरी जगह ले सके ऐसा कोई मर्द ही नहीं है,,,,,,आहहहहह आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है,,,,ऊमममममममम,(वह अपनी बात पूरी कर पाते उससे पहले ही अंकित अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और वह एकदम से मतवाली होने लगी थी उन दोनों की बातें सुनकर बिंदिया की बुर पिघल रही थी,,,, वह मदहोश हो रही थी वह जोर-जोर से साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल रही थी लेकिन अब इससे भी उसका काम नहीं चल रहा था,,,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि अंकित की कमर हौले हौले से आगे पीछे हिल रही थी वह सुगंधा को चोद रहा था,,,महीनो गुजर गए थे बिंदिया को अपनी बुर में लंड लिए लंड भी किया था हाथ के अंगूठे जितना इसलिए इस समय दोनों की चुदाई देखकर बिंदिया के तन बदन में आग लगी हुई थी उससे रहा नहीं जा रहा था,,, सुगंधा की मदहोशी उसके अरमानों को पंख दे रही थी वह भी सुगंधा की तरह मस्त होना चाहती थी मजा लेना चाहती थी,,,, अपनी जवानी की गर्मी बर्दाश्त ना कर सकने की वजह से बिंदिया अपना हाथ अपनी साड़ी के अंदर डाल दी थी और अपनी नंगी बुर पर अपनी हथेली रखकर उसे मसलना शुरू कर दीजिए जो की पूरी तरह से पानी से चिपचिपी हो गई थी। अपनी कमर हिलाते हुए अंकित बिंदिया की तरफ देख ले रहा था और जब जब वह बिंदिया की तरफ देखता बिंदिया अपनी आंखों को बंद कर ले रही थी,,,, लेकिन अंकित जानता था कि वह सब कुछ देख रही है उसकी तेज चलती सांस उसकी साड़ी के अंदर घुसा हुआ उसका हाथ उसकी कहानी को साफ बयां कर रहा था और बिंदिया की हालत को देखकर अंकित मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,,, वैसे भी अंकित ने बातों ही बातों में बिंदीया को चोदने की अपनी मंसा को साफ जाहिर कर दिया था।
कई औरतों की संगत में आकर अंकित इतना तो जान ही चुका था कि एक मोटे तगड़े लंड के दर्शन करने के बाद औरत की स्थिति क्या होती है। अंकित समझ गया था की बिंदिया अपनी बुर में भी उसके लंड को लेना चाहती है चुदवाना चाहती हैं बस शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही है। उसकी इसी तड़प को उसकी हवास को और ज्यादा बढ़ाते हुए अंकित अपने दोनों हाथों को आगे बढ़कर अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम लिया था जो की पानी भरे गुब्बारे की तरह छाती पर लोट रहे थे। अपनी मां की चूचियों को दबाता हुआ अंकित के धक्के तेज हो गए थे,,,,, बर और लंड का मिलन एक अद्भुत संगीत को पैदा कर रहा था जो की झुगी के अंदर मदहोशी के वातावरण में गूंज रहा था और यह मदहोश कर देने वाली आवाज बिंदिया के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी। सुगंधा के मदहोशी भरी शिसकारी की आवाज को सुनकर बिंदीया को इस बात का एहसास हो रहा था कि छुड़वाने में सुगंधा को कितना आनंद आ रहा था। उम्र के ईस पड़ाव पर पहुंचकर बिंदिया को लगता था कि अब उसके जीवन से यह सुख दूर हो चुका है लेकिन आज अपनी आंखों से देख कर उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि औरत के अंदर से यह सुख प्राप्त करने की इच्छा कभी नहीं जाती बस वह अपनी मजबूरियों के कारण अपनी इच्छा को अपने अंदर दबा ली जाती है क्योंकि वह जानती थी कि बिस्तर पर मजा ले रही सुगंध उस उम्र में 8-10 साल बड़ी थी जब वह उम्र के ईस पड़ाव पर पहुंचकर खुलकर एक जवान लड़के से मजा ले सकती है तो वह तो अभी भी पूरी तरह से जवानी के दहलीज पर ही है तो वह क्यों नहीं मजा ले सकती यह सोचते हुए वह अपनी एक उंगली को अपनी बर के अंदर डालकर अंदर बाहर करना शुरू कर दी थी और अपनी आंखों से सुगंधा की चुदाई को देख रही थी अंकित के धक्के बहुत जबरदस्त है उसके हर धक्के के साथ तख्ते पर लेटी हुई सुगंधा हचमचा जा रही थी,,, अगर अंकित अपने हाथों से उसकी चूचियों को आजाद कर देता तो वह पानी भरे गुब्बारे की तरह उसके हर एक धक्के के साथ लहरा उठती लेकिन अंकित अपनी मां की चूचियों को पकड़कर एक आधार बनाया हुआ था जिसकी वजह से जोर-जोर से धक्का लगाने में उसे आसानी हो रही थी।
फच्च फच्च की आवाज से पूरी झुग्गी गूंज रही थी, इस तरह की आवाज बिंदिया को और भी ज्यादा मदहोश बना रही थी,,, माहौल पूरी तरह से मदहोशी के साए में पल रहा था,,,, मां बेटे दोनों को किसी गैर के सामने चुदाई करने में कुछ ज्यादा ही मजा आने लगा था। दोनों के लिए शर्म की कोई सीमा नहीं थी। उनके लिए सर्वोच्च केवल आनंद ही था संभोग में मिल रहा सुख ही उनके लिए प्राथमिकता थी यह मायने नहीं रखता था कि वह दोनों किसके सामने चुदाई का सुख भोग रहे हैं बस उन्हें मजा आना चाहिए । और ऐसा हो भी रहा था मां बेटे दोनों जानते थे कि एक जवान औरत उन्हें चुदाई करते हुए देख रही है और यही एहसास उन दोनों की उत्तेजना को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था कुछ देर तक अंकित इसी अवस्था में अपनी मां की चुदाई करता रहा यह सब बिंदिया के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि अभी तक अंकित का पानी नहीं निकला था और सुगंधा की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी।
तकरीबन 3 घंटे का समय गुजर चुका था लेकिन इस बीच बरसात बिल्कुल भी काम नहीं हुई थी तेज हवाएं तेज बारिश ऐसा लग रहा था कि दोनों को यही रोकने के लिए ही माहौल बिगड़ा था। बिंदिया से बर्दाश्त नहीं हो रहा था अंकित का हर एक धक्का उसके अरमानों को मदहोश कर रहा था। इस अवस्था में चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला और अपनी मां से बोला।
बस मेरी जान अब घोड़ी बन जाओ पीछे से तुम्हारी लेना चाहता हूं,,,, पीछे से तुम्हारी लेने का मजा ही कुछ हो रहा है तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड आंखों के सामने देखकर मेरा जोश और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
तु मुझे उलट पलट कर मेरी हालत खराब कर देता है,,,,,(धीरे से अपनी स्थिति को बदलते हुए सुगंधा बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) सच कहूं तो तेरा इस तरह से मेरा हालत खराब कर देना ही मुझे अच्छा लगता है,,,,,, ले बन गई घोड़ी अब बन जा तू मेरा घोड़ा,,,,,(सुगंधा घोड़ी बनते हुए बोली और अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर एकदम से मत हो गया और दो चार चपत लगाते हुए बिंदिया की भी उत्तेजना को बढ़ाते हुए वह बोला)
आहहहहह अब लग रही है ना मेरी छिनार,,,,(छिनार सब सुनते ही बिंदिया की बर फुदकने लगी,,, यह शब्द एकदम देहाती था लेकिन इस शब्द में इतनी मदहोशी थी कि इसे सुनने के बाद औरत एकदम मस्त हो जाती थी और खास करके चुदाई करवाते समय और यही हाल शायद इस समय सुगंधा के भी हो रहा था क्योंकि उसके चेहरे पर उत्तेजना साहब झलक रही थी और वह अपने बेटे की बात सुनकर बोली,,,)
मैं तो पहले से ही तेरी छिनार बन चुकी हूं अब जमकर ले अपनी छिनार की मेरी बुर का भोसड़ा बना दे डाल दे अपने गधे जैसे लंड को मेरी बुर में।
ओहहह मेरी रंडी मेरी भोसड़ा चोदी तेरी इस तरह की बातें यह तो मुझे पागल बना देती है तभी तो तेरे पीछे पागल बना फिर रहा हूं अब देख मेरा कमाल तेरी बुर का भोसड़ा बना देता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर दूसरे हाथ को अपनी मां की गांड पर रखकर उसके गुलाबी छेद में डाल दिया और पहले ही धक्के में पूरा का पूरा अंदर घुसेड़ दिया हल्का सा सुगंधा के मुंह से चिकनी की आवाज निकली थी और फिर सब कुछ बराबर हो गया था,,,,, अंकित जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया था और सुगंधा भी अपने मुंह से जोर-जोर से आवाजें निकल रही थी क्योंकि यहां पर किसी के सुने जाने का बिल्कुल भी डर नहीं था बिंदिया को छोड़कर और वैसे भी बिंदिया को वह जानबूझकर इस तरह की आवाजें सुना रही थी। बिंदिया के तन बदन में हलचल सी मची हुई थी इस तरह की आवाज सुनकर उसकी खुद की उंगली उसकी बुर में बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रही थी,,,, बिंदिया इस बात से भी हैरान थी की सुगंधा की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी थी लेकिन फिर भी पीछे से अंकित का लंड बड़े आराम से उसकी बुर की गहराई तक पहुंच रहा था जिसका कारण साफ था अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिसके कारण बड़े आराम से वह बुर की गहराई तक घुस जा रहा था।
अंकित पूरा जोर लगा दिया था अपनी मां को चोदने में क्योंकि यहां पर वह किसी गैर औरत के सामने अपनी मर्दाना ताकत का प्रदर्शन कर रहा था वह बिंदिया को दिखाना चाहता था की असली चुदाई किसे कहते हैं ताकि वह मदहोश होकर खुद अपनी टांगें खोल दे और वाकई में अंकित का जोश और उसकी चुदाई देखकर बिंदिया के तन बदन में अजीब सी हलचल सी मच रही थी वह अपने मन में सोचने लगी थी कि अगर अंकित का लंड उसकी बुर में जाएगा तब तो वह उसकी बुर के सारे धागे खोल देगा और सवाल यह भी था कि क्या उसका लंड आराम से उसकी बुर में घुस पाएगा नहीं सोचते हुए वह मस्त हो रही थी और अपनी दूसरी उंगली को भी अपनी बुर में प्रवेश करा दी थी,,,,, अंकित की कमर बड़ी रफ्तार से आगे पीछे हो रही थी उसको अंदर की हालत खराब हो रही थी ऐसे ठंडा मौसम में भी उसके माथे से पसीना टपक रहा था और यही हाल अंकित का भी था दोनों की स्थिति को देखकर बिंदिया को इस बात का एहसास हो रहा था कि वह दोनों कितनी मेहनत कर रहे थे। एक बार फिर से सुगंधा झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी उसका बदन अकड़ रहा था अंकित भी ज्यादा दूर नहीं था झड़ने में अपनी मां का अकडता हुआ बदन देखकर अंकित एकदम से उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया था,, और तेज धक्के लगाते हुए मां बेटे दोनों झड़ने लगी थी दोनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे दोनों को झड़ता हुआ देखकर बिंदिया से भी रहा नहीं किया और उसकी बुर से भी मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा,,,, बिंदिया के लिए पहली बार था जब वह कई सालों बाद अपनी उंगली का सहारा लेकर अपनी जवानी की गर्मी को शांत कर रही थी और इस खेल में उसे ज्यादा मजा आया था लेकिन वह जानती थी की असली खेल वह नहीं बल्कि सुगंधा खेल रही थी तख्ते पर। वह अपनी संतुष्टि के लिए यह सब कुछ कर रही थी लेकिन उसे देखकर जो हरकत में कर रही थी उसे उसे संतुष्टि नहीं बल्कि उसकी जवानी की आग और भी ज्यादा भड़कने वाली थी।
अपनी मां की चुदाई करके अंकित धीरे से उससे अलग हुआ और कुछ देर वहीं बैठकर गहरी गहरी सांस लेने लगा वह बिंदिया को इस खेल में कैसे शामिल किया जाए इसी बारे में सोच रहा था। और धीरे से उठकर इस जगह पर खड़ा होकर पेशाब करने लगा बिंदिया के लिए हैरानी की बात यह थी कि झड़ने के बावजूद भी उसका लंड ज्यों का क्यों खड़ा था,,,। क्योंकि बिंदिया जानती थी कि झड़ने के बाद उसने अपने पति के लंड को खड़ा होते हुए नहीं देखी थी इसलिए वह हैरान थी और वह जिस तरह से उसे पकड़ कर पेशाब कर रहा था बिंदिया का धैर्य एकदम से टूट गया था लेकिन वह कुछ कर सकते की स्थिति में नहीं थी वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी ना तो इस खेल में शामिल हो पा रही थी पेशाब करने के बाद वह फिर से अपनी मां के पास आए और लेट गया और फिर से उसकी चूचियों को दबाकर मजा लेने लगा उसकी मां बोली।
क्यों फिर से तेरा मन कर रहा है क्या,,,?
तुम्हें क्या लगता है कि मेरा मन भर जाएगा माहौल देख रही हो वातावरण देख रही हो कितना मदहोश कर देने वाला वातावरण है ऐसे में अगर मैं सो गया तो मेरी मर्दानगी पर धिक्कार है।
(अंकित की यह बात सुनकर बिंदिया गदगद हो गई,,, क्योंकि एक औरत का हौसला बढ़ाने के लिए इसी तरह की मर्दानगी की जरूरत होती है और अंकित की है बात सीधा उसके दिल में उतर गई थी वह अपने मन में ही बोल रही थी कि इसे कहते हैं असली मर्द जो औरत को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकता है। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंध मुस्कुराते हुए बोली)
अरे वह बड़ा आया मर्द,,,, सिर्फ मेरी चुदाई करके तु अपने आप को मर्द समझ रहा है। एक साथ दो औरतों की चुदाई करके दोनों को बराबर का मजा दे तब तु असली मर्द कहलाएगा,,,,।
यह बात है लेकिन दूसरी औरत लाऊं कहां से,,,, यहां दूसरी औरत तो है लेकिन घोड़े बेचकर सो रही है। इसकी जगह अगर शहर की औरत होती तो अब तक हम दोनों के साथ मजा ले रही होती।
हां रे तू सच कह रहा है हाय रे इसकी किस्मत,,, इसके घर में एक जवान मर्द आया है जो इसकी जवान को निचोड़ कर पानी पानी कर सकता था और यह है कि घोड़े बेचकर सो रही है जाने दो हमें क्या,,,, आजा मैं ही तेरे लिए दो औरतों से कम नहीं हूं,,,,।
ओहहहहह मेरी जानेमन तू तो मेरे लिए पूरी दुनिया हो,,,(ऐसा कहते हुए अंकित लेते हुए की अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और उसके खूबसूरत चेहरे पर चुंबनों की बारिश करने लगा मां बेटे दोनों जानबूझकर इस तरह की बातें करके बिंदिया को उकसा रहे थे कि वह भी इस खेल में शामिल हो जाए इसमें सुगंधा भी न जाने क्यों अपने बेटे को दूसरी औरत से बांटना चाहती थी वह भी इसका सुख और अनुभव प्राप्त करना चाहती थी और यही अंकित के लिए भी सुनहरा मौका था दो औरतों को एक साथ चोदने का। मां बेटे दोनों की बातों को सुनकर बिंदिया के तन-बदन में उत्तेजना के लहर उठ रही थी वह भी अपने आप को ही खुश रही थी कि इतनी हिम्मत नहीं दिखा पा रही है कि वह भी उन दोनों के पास पहुंच जाए और सीधा अंकित के लंड को पकड़ के बस इससे ज्यादा कुछ कहने और करने की जरूरत थी नहीं उसे अंकित खुद ही समझ जाता कि उसे क्या चाहिए। बिंदिया अपनी आंखों के सामने फिर से दोनों को आपस में मदहोश होते हुए देख रही थी,,, अंकित अपनी हथेली को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे अपनी तरफ खींच रहा था अपने लंड से सता रहा था वह फिर से पागल हुआ जा रहा था और यह देखकर बिंदिया हैरान भी थी कि अभी-अभी वह अपनी मां की चुदाई करके चढ़ा था और फिर से उसे छोड़ने के लिए तैयार हो गया था,,, अभी तक तो वह केवल दोनों को प्रेमी प्रेमिका ही समझ रही थी इस बात से वह बिल्कुल अनजान थी कि उसकी आंखों के सामने प्रेमी प्रेमिका नहीं बल्कि मां बेटे काम लीला कर रहे थे अगर इस बात को पहचान ली थी तो शायद सुनते ही उसकी बुर से पानी फेंक देता।
लेकिन अब बिंदिया के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था,,, वह एक प्यासी औरत थी और उसकी आंखों के सामने कुआं था जो उसकी प्यास बुझा सकता था लेकिन अपनी प्यास बुझाने के लिए उसे कुएं के पास जाना जरूरी था। वह गहरी सांस लेकर आगे के बारे में सोच रही थी धीरे-धीरे 4 घंटे का समय गुजर चुका था,,, समय उसके पास भी काम था वह जी भर कर आज की रात जवान लड़के से मजा ले लेना चाहती थी को क्यों जानती थी कि ऐसी रात अब उसके जीवन में शायद ना भी आए,,, और वह इस बात से निश्चित तिथि की वह दोनों इधर के रहने वाले बिल्कुल भी नहीं थी और आज रात को जो कुछ भी होगा वह किसी को पता भी नहीं चलने वाला,,,, ऐसा मौका भला कब मिलने वाला था अगर वह इस तरह की हरकत गांव कहीं किसी लड़के से करती तो शायद आज नहीं तो कल बात खुल जाती और फिर बदनामी हो जाती लेकिन यह दोनों गैर थे पर आए थे दूसरे शहर से आए थे और खुद मजा लूट रहे थे इसलिए यह राज, राज ही रहने वाला था काफी सोच विचार करने के बाद बिंदिया से रहा नहीं गया और वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई,,,,, मां बेटे दोनों बिंदिया को देख रहे थे लेकिन उसकी तरफ बिल्कुल भी ध्यान न देने का नाटक कर रहे थे बिंदिया चलते हुए सुगंधा के पास आई और सुगंधा की तरफ देखने लगी,,,, सुगंधा भी बिंदिया की तरफ देखते हुएबोली,,,।
क्या हुआ,,,,,,, जाकर सो जाओ,,,,,(ऐसा जानबूझकर बोल रही थी वह जानती थी कि वह अपने बेटे के साथ किस अवस्था में है दोनों संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में थे ऐसे में कोई जवान औरत इस तरह का नजारा देखकर भला कैसे चैन की नहीं सो पाती सुगंधा की बात सुनकर वह बोली कुछ नहीं बस उसके पास तख्ते के ऊपर बैठ गई और उन दोनों को देखने लगी,,,,, अंकित मदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी युक्ति कम कर गई थी वह उसकी मदहोशी को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और बिंदिया की तरफ देख भी रहा था लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, यह खूबसूरत नजारा देखकर बिंदिया की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और उसकी सांसों की गति के साथ उसकी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जो की ब्लाउज में एकदम साफ दिखाई दे रही थी सुगंधा भी समझ गई थी कि अब उन दोनों का काम हो चुका है,,, इसलिए सुगंधा को न जाने क्या सुझा और वह अपना हाथ बिंदिया की तरफ आगे बढ़कर ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाना शुरू कर दी,,, सुगंधा कि ईस तरह की हरकत से बिंदिया एकदम से मदहोश हो गई,,,, और अपनी मां की हरकत देखकर अंकित भी हैरान था क्योंकि उसे मालूम था कि एक औरत के साथ उसका यह पहली बार का इस तरह की हरकत हो रही थी और इसे देखकर वह और भी ज्यादा उत्तेजित होकर अपनी मां की चूची को जोर जोर से पीना शुरू कर दिया था उसका एक हाथ अभी भी उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर टिका हुआ था और सुगंध ब्लाउज के ऊपर से ही बिंदिया की चूची को दबा दबा कर उसे मस्त कर रही थी।
बिंदिया का भी यह पहला मौका था जब वह किसी औरत के साथ मजा ले रही थी वरना वह कभी सोची कि नहीं थी की औरत के साथ भी ऐसा कर सकते हैं हालांकि अभी तो केवल शुरुआत पर थी लेकिन जैसे ही सुगंधा का हाथ उसे अपनी चूची पर महसूस हुई थी वह एकदम से मदहोश हो गई थी बिंदिया की चूची दबाने में सुगंधा को भी मजा आ रहा था,,,,, सुगंधा बिंदिया के चेहरे पर बदलते भाव को देख रही थी उसे एहसास हो रहा था की बिंदिया को मजा आ रहा था इसलिए वह बिंदिया से बोली।
कैसा लग रहा है बिंदिया,,,,?
वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पाई बस अपनी आंखों को बंद करके इस एहसास में डूबने लगी दूसरी तरफ अंकित एक साथ दोनों औरतों का मजा लेने के लिए तैयार हो चुका था इसलिए अपनी मां की गांड पर से अपना हाथ हटाकर वह बिंदिया की दूसरी चूची को थाम लिया था,,, ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने में अंकित को मजा आ रहा था उसकी चूचियां पूरी तरह से तो हथेली में नहीं आ रही थी लेकिन फिर भी अंकित को अंदाजा हो गया था की बिंदिया की चूचियां उसकी मां की तरह बड़ी-बड़ी नहीं थी ,संतरे की तरह गोल-गोल थी जिसे अपनी हथेली में लेकर दबाने में मजा आ रहा था,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुगंधा भी उत्तेजित हो रही थी वह खुद हैरान थी की वह कैसे अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को दूसरी औरत के साथ मजा लेते हुए देख रही है। वरना ऐसा वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी, कुछ देर तक दोनों मां बेटे इसी तरह से मजा लेते रहे और बीवी अपनी आंखों को बंद करके मदहोशी के सागर में डूबने के लिए तैयार हो चुकी थी सुगंधा चुची को दबाते हुए धीरे से बोली,,,)
अगर मजा लेना है तो इसे उतार दो नंगी हो जाओ हम दोनों की तरह,,,,, तभी ईस खेल का मजा ले पाओगी।
(सुगंधा और अंकित की हरकत से बिंदिया मदहोशी में डूबती चली जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी। अच्छी तरह से जानती थी की सुगंधा की बात मानना यहां पर उचित था बिना कपड़े उतारे इस खेल का मजा लेना जायज बिल्कुल भी नहीं था,,,,, इसलिए वह बिना कुछ बोले अपने आप को तैयार कर चुकी थी निर्वस्त्र होने के लिए अपनी आंखों को बंद करके गहरी गहरी सांस ले रही थी अभी भी उसके कंधे पर साड़ी का पल्लू था जिसे अंकित अपने हाथ से नीचे गिरा दिया था साड़ी का पल्लू छाती से हटते ही उसकी भरपूर जवानी से भरी हुई ब्लाउज में कैद चूचियां दिखाई देने लगी थी अंकित की आंखों की चमक बढ़ती जा रही थी क्योंकि आज उसके लिए भी यह सुनहरा मौका था अपनी मां की आंखों के सामने किसी गैर औरत की जवानी का मजा लेने का वह देखना चाहता था कि उसकी हरकतों का उसकी मां पर कैसा प्रभाव पड़ता है। इसलिए वह खुद ही धीरे से उठ कर बैठ गया और अपने हाथों से बिंदिया के ब्लाउज का बटन खोलने लगा विद्या कोई एहसास पूरी तरह से मत कर दे रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी चूचियां कुछ ज्यादा ही उछलना शुरू कर दी थी उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल होता जा रहा था। सुगंधा लगातार एक हाथ से ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची दबा रही थी,,,, धीरे-धीरे करके अंकित बिंदिया के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया,,,, और जैसे ही ब्लाउज के दोनों पट अलग हुए अंकित की आंखों में चमक बढने लगी भले ही उसकी चूचियां आकार में खरबूजे जैसी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी एकदम गोलाकार संतरे की तरह तनी हुई थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आने लगा। अंकित से रहा नहीं किया और अपने दोनों हाथों को उसकी दोनों चूचियों पर रखकर अपनी हथेली में दबाने लगा और मदहोश होता हुआ बोला।)
बाप रे कितनी खूबसूरत चुचीया है तुम्हारी,,, देखो मम्,,,,(इतना कहकर वह एकदम से खामोश हो गया क्योंकि उसके मुंह से अनजाने में मम्मी शब्द निकलने वाला था और इस बात पर सुगंधा भी गौर की थी और उसे आंख निकाल कर देखने लगी थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि किसी भी रूप में उन दोनों का रिश्ता बिंदिया के सामने जाहिर हो लेकिन अंकित अपने शब्दों को संभाल लिया था और आगे अपनी बात को बढ़ाते हुए बोला।) मेरी जानेमन इतनी खूबसूरत चुचिया देखो तो सही मैं तो पागल हुऐ जा रहा हूं इन्हें मुंह में लेने के लिए,,,,,,आहहहहहहहह ,,,,,(बिंदिया खामोशी निशब्द उसके पास कहने के लिए बिल्कुल भी शब्द नहीं थे मां बेटे दोनों की हरकतों में वह पूरी तरह से खो चुकी थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके जीवन में यह पल आएगा कि वह इस तरह से मजा लुटेगी,, उत्तेजना के मारे उसकी सांस उखड़ रही थी और अंकित उसे और भी ज्यादा उत्तेजित करते हुए धीरे से बोला।)
बोलो बिंदिया क्या मैं तुम्हारी चुची को मुंह में लेकर पी सकता हूं बहुत खूबसूरत चुचिया है तुम्हारी,,,,सहहहहह हमममममममम(इस तरह की बातें करते हुए उससे इजाजत मांग कर अंकित उसे पूरी तरह से लज्जित और उत्तेजित कर देना चाहता था वह अपने मुंह से इजाजत देने में समर्थ बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी,,,,, लेकिन जो उसके होंठ नहीं बोल पा रहे थे उसका खूबसूरत चेहरा बोल रहा था वह पूरी तरह से इजाजत दे रहा था अंकित को आगे बढ़ाने के लिए इसलिए अंकित धीरे से अपने प्यासे हो तो को आगे बढ़ाया और अगले ही पल विद्या की चूची पर रखकर उसे हल्के से अपने होठों के बीच उसके खजूर को दबा दिया वह एकदम से सिहर उठी उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज फुट पड़ी। यह नजारा बेहद अद्भुत था खास करके सुगंधा के लिए क्योंकि उसका बेटा उसकी आंखों के सामने ही गैर औरत की चूची को मुंह में लेकर पी रहा था एक औरत होने के नाते सुगंधा यह सब बर्दाश्त नहीं करती लेकिन इस समय के हालात कुछ और ही थे। क्योंकि उसके बदन में भी एक अजीब सी हलचल मची हुई थी किसी गैर औरत के साथ मजा लेने के लिए यह उसका पहला मौका था जब वह किसी औरत के अंगों से खेल रही थी इस समय सुगंधा का भी हाथ बिंदिया की चूची पर थी जिसे वह हल्के हल्के दबा रही थी। बिंदिया की सांसे गहरी चलने लगी थी आंखों को बंद किए हुए वह इस पल में पूरी तरह से खोने लगी थी। और अंकित अपनी कामकला से दोनों औरतों को प्रभावित कर रहा था अंकित धीरे-धीरे उसकी चूची के खूबसूरत खजूर को मुंह में लेकर चूस रहा था उत्तेजना के मारे बिंदिया के चूची के निप्पल पूरी तरह से कड़क हो चुके थे जिसे चूसने में अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।
बिंदिया की बुर मदन रस से डूबने लगी थी, अंकित पूरी तरह से उसकी जवानी पर छाया हुआ था,,,, तीनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था झुग्गी में खामोशी छाई हुई थी सिर्फ तेज बारिश और तेज हवाओं का ही शोर सुनाई दे रहा था कुछ देर तक अंकित इसी तरह से बिंदिया की चुची को पीता रहा और बिंदिया के चेहरे पर बदलते भाव को देखता रहा,,,, अंकित इस खेल को और भी ज्यादा रोमांचक बना देना चाहता था इसलिए वह धीरे से बिंदिया की चूची को अपने मुंह में से बाहर निकाल दिया हालांकि सुगंधा के हाथ अभी भी उसकी दूसरी चूची ची पर टिके हुए थे,,,, अंकित तख्ते पर से नीचे उतर गया था,,, और बिंदिया के पास जाकर खड़ा हो गया वह अभी भी अपनी आंखों को बंद किए हुए थे। वह धीरे से बिंदिया को बोला।