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तो वहा सृती ओर देवायत कंपलीट होकर होलमे बैठे थे.. तो पुनम अबभी देवायतके रुममे सो रहीथी.. आज वाकल देवायतने उनकी हालत खराब करदी थी.. सृतीभी थोडा लंगडाते चल रहीथी.. तो पुनमकी क्या हालत हुइ होगी..? तभी लखन लता ओर नीलमभी आराम करके कंपलीट तैयार होकर नीचे आगये थे.. ओर देवायत सृतीके पास बैठकर बंसीका इन्तजार कर रहेथा.. तभी बंसी दोनोको लेकर आगया.. तब..
देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. इनके मम्मी पापाको फोन करके इधर बुलाले..
लखन : (मुस्कुराते) जी भैया..
कहेतेही लखन फोन लेकर थोडी दुर चला गया.. ओर श्रीधरकी मम्मीके साथ मुस्कुराते हुअे धीरेसे बाते करने लगा.. तब बंसी जयश्री ओर श्रीधर अंदर आगये.. तो आतेही श्रीधर ओर जयश्री सरमाते देवायत ओर सृतीके पांव छुने लगे.. तब सृतीने दोनोको आशीर्वाद दीया ओर जयश्रीको अपने पासही बीठा दीया.. फीर सृती ओर लता.. उनके साथ धीमी आवाजमे हस हसके बाते करते सब जानकारीया लेने लगी..
तो बंसी ओर श्रीधरभी लखनके पास बैठ गये.. तो दयाने सबको पानी पीलाया.. उधर लखनके साथ बात होतेही श्रीधरकी मम्मी ब्रीन्दाने उनकी बडी बहेन कम जेठानी वृन्दाको बता दियाकी दोनो आगये हे.. तब वृन्दा जयश्रीको मीलनेके लीये तलपापड होने लगी.. ओर दोडते हुअे जाकर उनके पतीको कहा.. तब ब्रीन्दा उनकी मीलनेकी बेकरारी देखकर कातील मुस्कान करने लगी.. ओर चारो हवेलीकी ओर नीकल गये..
तबतक हवेलीपे देवायतने श्रीधर ओर जयश्रीको बता दीयाकी उनके मम्मी पापाके साथ क्या बात करनी हे.. खास करके वृन्दाके साथ.. क्युकी सीर्फ वोही अेक थी.. जो जयश्रीको इमोस्नल ब्लेकमेइल करते इस रीस्तोको तोडनेकी बात केह सकती थी.. तब कुछही देरमे जयश्रीके माता पीता जवेरीलाल वृन्दा ओर श्रीधरके माता पीता जीतुलाल ब्रीन्दा अपनी कारमे आगये.. आतेही वृन्दाने दोडकर जयश्रीको अपने गले लगा लीया.. ओर फुटफुटके रोने लगी..
तो थोडी देर सब लोग उनको देखतेही रहे.. फीर जवेरीलाल जयश्रीको गले मीले.. तब वो जयश्रीकी मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखकर सब कुछ समज गये.. फीर जयश्रीने सरपे चुनी डालके जीतुलाल ओर ब्रीन्दाके अेक बहु की तराह पांव छुअे.. तब जीतुलालको ना चाहते हुअे भी उनको आशीर्वाद देने पडे.. क्युकी अभी सीर्फ वो ओर जयश्रीकी मम्मी वृन्दाही जानते थेकी जयश्री उन दोनोकी लडकी हे.. ओर ब्रीन्दा दोनो हाथोसे अदब लगाते चोर नजरोसे श्रीधरकी ओर देखते मुस्कुराती रही..
वृन्दा : (रोते हुअे) बेटी.. तुमने अैसा क्यु कीया..? तुमने तो हमारी इजत मीटीमे मीलाकर हमारी नाक कटवादी.. क्या तुजे पता नही थाकी ये तेरा भाइ हे..? तुजे जरासी भी सरम नही आइ..?
देवायत : (मुस्कुराते) देखो भाभीजी.. हमारी क्या बात हुइथी..? की आप इस दोनोको कुछभी नही कहोगे..
वृन्दा : (अपने आंसु पोछते) अरे सोरी सोरी.. गलती होगइ देवरजी.. अब इनको कुछ नही कहुगी..
जयश्री : (सरमाते धीरेसे) मम्मी.. अब हम दोनोने सादी करली हे.. ओर ये देखो हमारा मेरेज सर्टीफीकेट.. हम यहा इसीलीये आये हे.. हमे बडे ठाकुरसाहने कहाहे की आप लोगोने हमारा रीस्ता अेक्सेप्ट करलीया हे.. ओर इस बारेमे आप हमे कोइ सवाल नही पुजेगे.. इसी सर्तपे हम आये हे..
श्रीधर : हां मौसी.. अगर आपको अभीभी हमारी सादीसे अेतराज हेतो हम दोनो वापस सहेरमे चले जायेगे.. मे वहा कोइ जोब कर लुगा.. हम दोनो हमारा संसार वही चलायेगे..
जवेरीलाल : (थोडा परेसान होते) अरे नही नही बेटा.. ये तुम क्या केह रहे हो..? हमे तुम दोनोका रीस्ता मंजुर हे.. (वृन्दाकी ओर देखते थोडा नाराज होते) भाग्यवान.. तुम चुप नही रेह सकती..? तुजे यहा आनेसे पहेले कुछभी बोलनेको मना कीयाथानां..?
वृन्दा : (अपने आंसु पोछते) सोरी.. गलती होगइ जी.. बेटे अब तुम दोनो घर चलो.. जो होनाथा होगया.. अब हम आपकी सादी धुमधामसे करवा देगे.. हमे कोइ अेतराज नही.. चलो..
देवायत : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने कहाथानां अब गांवमे आपको अैसे कइ रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. तो क्यु फीकर करती हो..? कोइ आपको पुछेगाभी नही.. क्युकी सबके घरपे अैसे रीस्ते चल रहे हे.. ओर आनेवाले दिनोमे अेसे कइ लडके लडकीया सादी करलेगे.. तो फीर क्या दिकत..? येतो बहुतही अच्छा हे लडकी घरमे आपके सामने ही रहेगी.. लडका कैसा होगा.. ससुराल कैसा होगा.. इनकी कोइ चीन्था ही नही..
जवेरीलाल : ठीक कहा आपने ठाकुरजी.. अब जोभी हो.. इनको हमारे साथ ही रखेगे..
लखन : (मुस्कुराते) जीतु अंकल.. ब्रीन्दाभाभी.. आप दोनो कुछ नही बोलेगे..? हें..हें..हें..
जीतुलाल : (मुस्कुराते वृन्दाकी ओर देखते) हें..हें..हें.. अब मे क्या बोलु.. बडेभैया ओर भाभी जो कहेगे वोही करना हे.. क्यु ब्रीन्दा..?
ब्रीन्दा : (लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराते) देवरजी.. मेनेतो बडे देवरजीने कहा.. तबसे ही जयश्रीको मेने अपनी बहुके रुपमे स्वीकार करलीया हे.. मुजे इन दोनोकी सादीसे कोइ अेतराज नही.. हें..हें..हें..
तभी रजीया ओर दया सबके लीये कोल्ड्रीन्क्स लेकर आइ.. तो सबने ठंडा पीया.. तब जयश्री ब्रीन्दाके पास चली गइे ओर उनके साथ धीमी आवाजमे हस हसके बाते करने लगी.. तो वृन्दा ब्रीन्दाकी ओर सककी नजरोसे देखने लगी.. फीर सबने ठंडा पीलीया तो सबलोग खडे होगये.. तब अेक बार फीर जयश्री ओर श्रीधरने देवायत ओर सृतीके पैर छुअे.. ओर सब लोग वहासे नीकलने लगे..
देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. इनके मम्मी पापाको फोन करके इधर बुलाले..
लखन : (मुस्कुराते) जी भैया..
कहेतेही लखन फोन लेकर थोडी दुर चला गया.. ओर श्रीधरकी मम्मीके साथ मुस्कुराते हुअे धीरेसे बाते करने लगा.. तब बंसी जयश्री ओर श्रीधर अंदर आगये.. तो आतेही श्रीधर ओर जयश्री सरमाते देवायत ओर सृतीके पांव छुने लगे.. तब सृतीने दोनोको आशीर्वाद दीया ओर जयश्रीको अपने पासही बीठा दीया.. फीर सृती ओर लता.. उनके साथ धीमी आवाजमे हस हसके बाते करते सब जानकारीया लेने लगी..
तो बंसी ओर श्रीधरभी लखनके पास बैठ गये.. तो दयाने सबको पानी पीलाया.. उधर लखनके साथ बात होतेही श्रीधरकी मम्मी ब्रीन्दाने उनकी बडी बहेन कम जेठानी वृन्दाको बता दियाकी दोनो आगये हे.. तब वृन्दा जयश्रीको मीलनेके लीये तलपापड होने लगी.. ओर दोडते हुअे जाकर उनके पतीको कहा.. तब ब्रीन्दा उनकी मीलनेकी बेकरारी देखकर कातील मुस्कान करने लगी.. ओर चारो हवेलीकी ओर नीकल गये..
तबतक हवेलीपे देवायतने श्रीधर ओर जयश्रीको बता दीयाकी उनके मम्मी पापाके साथ क्या बात करनी हे.. खास करके वृन्दाके साथ.. क्युकी सीर्फ वोही अेक थी.. जो जयश्रीको इमोस्नल ब्लेकमेइल करते इस रीस्तोको तोडनेकी बात केह सकती थी.. तब कुछही देरमे जयश्रीके माता पीता जवेरीलाल वृन्दा ओर श्रीधरके माता पीता जीतुलाल ब्रीन्दा अपनी कारमे आगये.. आतेही वृन्दाने दोडकर जयश्रीको अपने गले लगा लीया.. ओर फुटफुटके रोने लगी..
तो थोडी देर सब लोग उनको देखतेही रहे.. फीर जवेरीलाल जयश्रीको गले मीले.. तब वो जयश्रीकी मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखकर सब कुछ समज गये.. फीर जयश्रीने सरपे चुनी डालके जीतुलाल ओर ब्रीन्दाके अेक बहु की तराह पांव छुअे.. तब जीतुलालको ना चाहते हुअे भी उनको आशीर्वाद देने पडे.. क्युकी अभी सीर्फ वो ओर जयश्रीकी मम्मी वृन्दाही जानते थेकी जयश्री उन दोनोकी लडकी हे.. ओर ब्रीन्दा दोनो हाथोसे अदब लगाते चोर नजरोसे श्रीधरकी ओर देखते मुस्कुराती रही..
वृन्दा : (रोते हुअे) बेटी.. तुमने अैसा क्यु कीया..? तुमने तो हमारी इजत मीटीमे मीलाकर हमारी नाक कटवादी.. क्या तुजे पता नही थाकी ये तेरा भाइ हे..? तुजे जरासी भी सरम नही आइ..?
देवायत : (मुस्कुराते) देखो भाभीजी.. हमारी क्या बात हुइथी..? की आप इस दोनोको कुछभी नही कहोगे..
वृन्दा : (अपने आंसु पोछते) अरे सोरी सोरी.. गलती होगइ देवरजी.. अब इनको कुछ नही कहुगी..
जयश्री : (सरमाते धीरेसे) मम्मी.. अब हम दोनोने सादी करली हे.. ओर ये देखो हमारा मेरेज सर्टीफीकेट.. हम यहा इसीलीये आये हे.. हमे बडे ठाकुरसाहने कहाहे की आप लोगोने हमारा रीस्ता अेक्सेप्ट करलीया हे.. ओर इस बारेमे आप हमे कोइ सवाल नही पुजेगे.. इसी सर्तपे हम आये हे..
श्रीधर : हां मौसी.. अगर आपको अभीभी हमारी सादीसे अेतराज हेतो हम दोनो वापस सहेरमे चले जायेगे.. मे वहा कोइ जोब कर लुगा.. हम दोनो हमारा संसार वही चलायेगे..
जवेरीलाल : (थोडा परेसान होते) अरे नही नही बेटा.. ये तुम क्या केह रहे हो..? हमे तुम दोनोका रीस्ता मंजुर हे.. (वृन्दाकी ओर देखते थोडा नाराज होते) भाग्यवान.. तुम चुप नही रेह सकती..? तुजे यहा आनेसे पहेले कुछभी बोलनेको मना कीयाथानां..?
वृन्दा : (अपने आंसु पोछते) सोरी.. गलती होगइ जी.. बेटे अब तुम दोनो घर चलो.. जो होनाथा होगया.. अब हम आपकी सादी धुमधामसे करवा देगे.. हमे कोइ अेतराज नही.. चलो..
देवायत : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने कहाथानां अब गांवमे आपको अैसे कइ रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. तो क्यु फीकर करती हो..? कोइ आपको पुछेगाभी नही.. क्युकी सबके घरपे अैसे रीस्ते चल रहे हे.. ओर आनेवाले दिनोमे अेसे कइ लडके लडकीया सादी करलेगे.. तो फीर क्या दिकत..? येतो बहुतही अच्छा हे लडकी घरमे आपके सामने ही रहेगी.. लडका कैसा होगा.. ससुराल कैसा होगा.. इनकी कोइ चीन्था ही नही..
जवेरीलाल : ठीक कहा आपने ठाकुरजी.. अब जोभी हो.. इनको हमारे साथ ही रखेगे..
लखन : (मुस्कुराते) जीतु अंकल.. ब्रीन्दाभाभी.. आप दोनो कुछ नही बोलेगे..? हें..हें..हें..
जीतुलाल : (मुस्कुराते वृन्दाकी ओर देखते) हें..हें..हें.. अब मे क्या बोलु.. बडेभैया ओर भाभी जो कहेगे वोही करना हे.. क्यु ब्रीन्दा..?
ब्रीन्दा : (लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराते) देवरजी.. मेनेतो बडे देवरजीने कहा.. तबसे ही जयश्रीको मेने अपनी बहुके रुपमे स्वीकार करलीया हे.. मुजे इन दोनोकी सादीसे कोइ अेतराज नही.. हें..हें..हें..
तभी रजीया ओर दया सबके लीये कोल्ड्रीन्क्स लेकर आइ.. तो सबने ठंडा पीया.. तब जयश्री ब्रीन्दाके पास चली गइे ओर उनके साथ धीमी आवाजमे हस हसके बाते करने लगी.. तो वृन्दा ब्रीन्दाकी ओर सककी नजरोसे देखने लगी.. फीर सबने ठंडा पीलीया तो सबलोग खडे होगये.. तब अेक बार फीर जयश्री ओर श्रीधरने देवायत ओर सृतीके पैर छुअे.. ओर सब लोग वहासे नीकलने लगे..