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- Dec 5, 2013
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इधर लखनके सभी दोस्तो मीलकर श्रीधर ओर जयश्रीकी बाते कर रहेथे.. तो आज मुना ओर बरखाने भी सादी करली थी.. तो सभी दोस्तो आज उनकी सुहागरातके बारेमे बाते करते मुनाकी टांग खीचाइ कर रहेथे.. तो मुना बहुतही सरमा रहाथा.. तभी बातोही बातोमे लखनने बंसी ओर जागृतीकी सेटींगके बारेमे बता दीया.. तो सभी दोस्तो खुस होकर बंसीको बधाइआ देने लगे.. तो बंसीभी सरमाते मुस्कुराने लगा..
श्रीधर : (हसते) अरे कमीने सरमा क्यु रहा हे.. तु अकेला थोडीना हे जो तेरी बहेनको प्यार करता हे.. हम सब करते हे.. बंसी.. तु इस मामलेमे आगे बढ.. क्युकी बहेनको चोदनेमे जो अेक अलग मजा हे.. वाह.. क्या बात कहु तुजे.. साली बहुत मजा देती हे.. तु यकीन मान.. जब तक मे जयश्रीको दो बार ना चोदलु.. कमीनी मुजे सोनेही नही देती.. यकीन ना होतो पुछलो मुनाको.. हें..हें..हें..
मुना : (सरमाते हसते) कमीने मेरा नाम क्यु लेता हे..? हें..हें..हें.. इनकी बुआभी कम नही हे.. वोभी उनकी बहेनसे बढकर हे.. हां अगर साथमे उनकी बहेनभी आजाती हे.. तो बंसी.. तेरी तो लोटरी ही लग गइ.. दो दो बीवीया मील जायेगी तुजे.. अगल बगलमे सुलाके अैस करना.. हें..हें..हें..
बंसी : (सरमाते धीरेसे) सालो.. पहेले बात तो आगे बढने दो.. ओर तुम दोनोको आज जाना नही हे..? कमीनो.. आज तुम दोनोकी सुहागरात हे.. जाओ जल्दी..
लखन : (जोरोसे हसते) ये कमीना श्रीधरतो कबसे सुहागरात ही मना रहा हे.. सालेने वहा उनकी बहेनको चोद चोदके मेरा बेड बीगाड दीया.. हें..हें..हें..
बंसी : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. पता नही.. लेकीन मुजे लगता हे आगे जाकर मुजेभी आपके बंगलेकी जरुरत पडेगी.. अब सांतीबुआ सादीकी बहुत जीद कर रही हे.. अगर घरके लोग नही मानेतो मुजेभी उनको लेकर भाग जाना पडेगा..
लखन : (मुस्कुराते) कमीने अभी कोइ जल्दबाजी मत करना.. जबतक तेरी बहेन तेरे साथ अच्छेसे सेट नही होजाती तबतक तु कही नही जायेगा.. समजे..
बंसी : (सरमाते हसते) ठीक हे भाइ.. मे अैसाही करुगा.. लेकीन भाइ.. आज श्रीधर ओर मुनाकी सुहागरात हे.. तो आप उसे कोइ टीप्स नही दोगे..? हें..हें..हें..
लखन : (जेबसे दो गोलीया नीकालते) साला.. दोनो के दोनो अपनी बहेनको चोद चोदके मास्टर हो गये हे.. मे इसे क्या टीप्स दुगा.. मुनातो इस बारेमे बहुत कुछ जानता हे.. हां लेकीन आज इनको मेरी तरफसे ये अेक अेक गोली देता हु.. अभी दोनोही इसे खालो.. ओर फुटो यहासे.. फीर कल देखता हु दोनो अपनी बहेनको कीतनी बार चोदते हे..
कहेते लखनने मुना ओर श्रीधरको अेक अेक गोली देदी.. तो दोनोने वही पानीके साथ खाली.. फीर सभी दोस्तो गांवकी बाते करते रहे.. फीर श्रीधर ओर मुनाको सबने अपने घर भेज दीया.. तो उनके साथ उनके दो तीन ओर दोस्तभी चले गये.. तब लखन बंसी ओर उनके अेक दोस्त जो साहील नामथा.. वो तीनोही थोडी देर बैठे रहे.. आज साहील कुछ परेसान था तो बंसीने उसे लखनसे बात करनेके लीये रोक लीया..
दोस्तो आइअे अेक ओर फेमीलीका परीचय करवा देता हु.. करीम ओर फीरोज दोनोही सगे भाइ थे.. इसी गांवमे जोइन्ट फेमीलीमे रहेते हे.. दोनोकी उमरमे सीर्फ दो सालका फर्क था.. करीम फीरोजसे सीर्फ दो साल बडाथा.. दोनोकी साथमे ही सादीया हुइ थी.. करीमकी सादी अपने चाचाकी लडकी सलमा से हुइ थी.. तो फीरोजकी सादी अपनी बुआकी लडकी जरीना से हुइ थी.. सादीको छे साल बीत चुकेथे..
इसी छे सालमे उनके माता पीता चल बसे.. तो फीरोजने इन छे सालोमे चार बच्चे पैदा करलीये.. बडा लडका कादीर फीर दुसरी लडकी सायरा.. तीसरी लडकी सबाना ओर फीर अेक लडका साहील हुआ.. लेकीन करीम ओर उनकी बीवी सलमाको कोइभी संतान नही हुइ.. दोनोने बहुत कोसीस की.. हकीम.. वैद.. डोक्टर.. फकीर कीसीको नही छोडा.. फीर दोनोने खुदाकी मर्जी मानकर कोसीस छोडदी..
ओर बादमे करीम ओर सलमाने उनके छोटेभाइ फीरोजके सबसे छोटे लडके साहीलको बाकायदा गोद ले लीया.. दोनो भाइ ओर दोनोकी पत्नीयोके बीच बहुत बनती थी.. दोनो परीवारके बीच पुर्खोकी बहुत सारी जमीन थी.. अभी फोरोजके हीस्सेकी जमीनभी करीम देखता था.. दोनोके पास अच्छी खासी जमीन जायदाद होनेके बावजुद भी हमारे सरपंच राघवके यहा कर्जमे डुबे हुअे थे.. जीनकी वजहसे राघवने उनकी बहुत सारी जमीन अपने नाम करली थी.. अब सीर्फ अेक चोथाइ हीस्सा ही जमीन बचीथी..
जीस वजहसे उनको घर चलानेमे भी लाले पड गये थे.. इसीलीये करीमका छोटा भाइ फीरोज अपने बीवी बच्चोको लेकर सहेरमे कमाने चला गया.. ओर वहा अेक फेक्टरीमे काम करने लगा.. तो करीम यहा गांवमे अपनी बीवी साथ रहेकर अपनी बची कुची खेतीबाडी सम्हालने लगा.. करीमने साहीलको अपने पासही रखा.. जबसे साहीलको करीमने गोद लीया तबसे साहील सलमाको अम्मा.. ओर करीमको अबु कहेने लगा..
वो फीरोज ओर जरीनाको चाचा चाची करेकर बुलाता.. ओर उनकी पढाइभी गांवमे ही होने लगी.. जैसे जैसे समय बीतने लगा तो अब साहीलने १२ कक्षा खतम करके सहेरमे कोलेजमे दाखीला लेलीया था.. जब साहील कोलेजमे जाने लगा.. तब अेक दिन अचानक करीम को दिलका दैरा पडा.. फीर बीमार रहेते छे महिनेमे चल बसा.. ओर घरमे सीर्फ साहील ओर उनकी बडी अम्मा सलमा रेह गये.. तो साहीलने घरकी जीम्वेवारी लेते पढाइ बीच मे छोडदी.. ओर अपनी खेतीबाडी देखने लगा..
तब साहीलकी उमर महज १८ सालकी थी.. तो उनके बडेभाइ बहेनभी डेढ डेढ साल बडे थे.. तो सलमा ओर जरीना भी तकरीबन ३८ सालकी होगी.. क्युकी सलमा ओर जरीनाकी सादी छोटी उमरमे ही साथमे करदी गइथी जब उनकी सादी करनेकी उमर भी नहीथी.. अभी साहीलके पास उनबे पुर्खोकी जमीनका सीर्फ अेक चोथाइ हीस्साही था.. जो वो देवायतकी सलाहके अनुसार फसल उगाकर उन्हीको बेच देता.. ओर जैसे तैसे घर चलाकर कुछ पैसा अपना ओर अपने चाचाका हीस्सा बचाकर रखता..
अैसेही साहीलने चार साल महेनत करके बहुत सारे पैसे बेन्कमे जमा कर लीयेथे.. तब हालही मे देवायतने सब जमीन उनको वापस दीलवादी.. जो राघवके पास थी.. तो सबलोग बहुत खुस होगये थे.. उस दिन फीरोजभी अपने पुरे परीवारके साथ गांवमे आयाथा.. लेकीन साहील अकेले इतनी सारी जमीनको जोत नही सकता था.. तो वो जमीन अैसेही बंजर पडी थी.. इसके बारेमे साहील सोचता ही रहेता.. ओर प्लानींग करता रहेता..
फीरोज सभी जमीन साहीलको सोंपकर वापस सहेरपे चला गयाथा.. क्युकी वहा वो बहुतही बडी फेक्टरीमे कामपे लग गयाथा.. तो उनका बडा लडका कादीरभी इन्जीयर होकर जोबपे लग गयाथा.. तब सायरा भी अपनी पढाइ पुरी करके घरपेही उनकी मम्मीका हाथ बटा रहीथी.. तो सबाना कोलेज जा रही थी.. सबाना कोलेजमे गायनेक डोक्टर बननेकी तैयारीया कर रहीथी.. तब घरमे कीसीको पता नही थाकी कादीर ओर उनकी बहेन सायराके बीच जीस्मानी तालुकात थे..
श्रीधर : (हसते) अरे कमीने सरमा क्यु रहा हे.. तु अकेला थोडीना हे जो तेरी बहेनको प्यार करता हे.. हम सब करते हे.. बंसी.. तु इस मामलेमे आगे बढ.. क्युकी बहेनको चोदनेमे जो अेक अलग मजा हे.. वाह.. क्या बात कहु तुजे.. साली बहुत मजा देती हे.. तु यकीन मान.. जब तक मे जयश्रीको दो बार ना चोदलु.. कमीनी मुजे सोनेही नही देती.. यकीन ना होतो पुछलो मुनाको.. हें..हें..हें..
मुना : (सरमाते हसते) कमीने मेरा नाम क्यु लेता हे..? हें..हें..हें.. इनकी बुआभी कम नही हे.. वोभी उनकी बहेनसे बढकर हे.. हां अगर साथमे उनकी बहेनभी आजाती हे.. तो बंसी.. तेरी तो लोटरी ही लग गइ.. दो दो बीवीया मील जायेगी तुजे.. अगल बगलमे सुलाके अैस करना.. हें..हें..हें..
बंसी : (सरमाते धीरेसे) सालो.. पहेले बात तो आगे बढने दो.. ओर तुम दोनोको आज जाना नही हे..? कमीनो.. आज तुम दोनोकी सुहागरात हे.. जाओ जल्दी..
लखन : (जोरोसे हसते) ये कमीना श्रीधरतो कबसे सुहागरात ही मना रहा हे.. सालेने वहा उनकी बहेनको चोद चोदके मेरा बेड बीगाड दीया.. हें..हें..हें..
बंसी : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. पता नही.. लेकीन मुजे लगता हे आगे जाकर मुजेभी आपके बंगलेकी जरुरत पडेगी.. अब सांतीबुआ सादीकी बहुत जीद कर रही हे.. अगर घरके लोग नही मानेतो मुजेभी उनको लेकर भाग जाना पडेगा..
लखन : (मुस्कुराते) कमीने अभी कोइ जल्दबाजी मत करना.. जबतक तेरी बहेन तेरे साथ अच्छेसे सेट नही होजाती तबतक तु कही नही जायेगा.. समजे..
बंसी : (सरमाते हसते) ठीक हे भाइ.. मे अैसाही करुगा.. लेकीन भाइ.. आज श्रीधर ओर मुनाकी सुहागरात हे.. तो आप उसे कोइ टीप्स नही दोगे..? हें..हें..हें..
लखन : (जेबसे दो गोलीया नीकालते) साला.. दोनो के दोनो अपनी बहेनको चोद चोदके मास्टर हो गये हे.. मे इसे क्या टीप्स दुगा.. मुनातो इस बारेमे बहुत कुछ जानता हे.. हां लेकीन आज इनको मेरी तरफसे ये अेक अेक गोली देता हु.. अभी दोनोही इसे खालो.. ओर फुटो यहासे.. फीर कल देखता हु दोनो अपनी बहेनको कीतनी बार चोदते हे..
कहेते लखनने मुना ओर श्रीधरको अेक अेक गोली देदी.. तो दोनोने वही पानीके साथ खाली.. फीर सभी दोस्तो गांवकी बाते करते रहे.. फीर श्रीधर ओर मुनाको सबने अपने घर भेज दीया.. तो उनके साथ उनके दो तीन ओर दोस्तभी चले गये.. तब लखन बंसी ओर उनके अेक दोस्त जो साहील नामथा.. वो तीनोही थोडी देर बैठे रहे.. आज साहील कुछ परेसान था तो बंसीने उसे लखनसे बात करनेके लीये रोक लीया..
दोस्तो आइअे अेक ओर फेमीलीका परीचय करवा देता हु.. करीम ओर फीरोज दोनोही सगे भाइ थे.. इसी गांवमे जोइन्ट फेमीलीमे रहेते हे.. दोनोकी उमरमे सीर्फ दो सालका फर्क था.. करीम फीरोजसे सीर्फ दो साल बडाथा.. दोनोकी साथमे ही सादीया हुइ थी.. करीमकी सादी अपने चाचाकी लडकी सलमा से हुइ थी.. तो फीरोजकी सादी अपनी बुआकी लडकी जरीना से हुइ थी.. सादीको छे साल बीत चुकेथे..
इसी छे सालमे उनके माता पीता चल बसे.. तो फीरोजने इन छे सालोमे चार बच्चे पैदा करलीये.. बडा लडका कादीर फीर दुसरी लडकी सायरा.. तीसरी लडकी सबाना ओर फीर अेक लडका साहील हुआ.. लेकीन करीम ओर उनकी बीवी सलमाको कोइभी संतान नही हुइ.. दोनोने बहुत कोसीस की.. हकीम.. वैद.. डोक्टर.. फकीर कीसीको नही छोडा.. फीर दोनोने खुदाकी मर्जी मानकर कोसीस छोडदी..
ओर बादमे करीम ओर सलमाने उनके छोटेभाइ फीरोजके सबसे छोटे लडके साहीलको बाकायदा गोद ले लीया.. दोनो भाइ ओर दोनोकी पत्नीयोके बीच बहुत बनती थी.. दोनो परीवारके बीच पुर्खोकी बहुत सारी जमीन थी.. अभी फोरोजके हीस्सेकी जमीनभी करीम देखता था.. दोनोके पास अच्छी खासी जमीन जायदाद होनेके बावजुद भी हमारे सरपंच राघवके यहा कर्जमे डुबे हुअे थे.. जीनकी वजहसे राघवने उनकी बहुत सारी जमीन अपने नाम करली थी.. अब सीर्फ अेक चोथाइ हीस्सा ही जमीन बचीथी..
जीस वजहसे उनको घर चलानेमे भी लाले पड गये थे.. इसीलीये करीमका छोटा भाइ फीरोज अपने बीवी बच्चोको लेकर सहेरमे कमाने चला गया.. ओर वहा अेक फेक्टरीमे काम करने लगा.. तो करीम यहा गांवमे अपनी बीवी साथ रहेकर अपनी बची कुची खेतीबाडी सम्हालने लगा.. करीमने साहीलको अपने पासही रखा.. जबसे साहीलको करीमने गोद लीया तबसे साहील सलमाको अम्मा.. ओर करीमको अबु कहेने लगा..
वो फीरोज ओर जरीनाको चाचा चाची करेकर बुलाता.. ओर उनकी पढाइभी गांवमे ही होने लगी.. जैसे जैसे समय बीतने लगा तो अब साहीलने १२ कक्षा खतम करके सहेरमे कोलेजमे दाखीला लेलीया था.. जब साहील कोलेजमे जाने लगा.. तब अेक दिन अचानक करीम को दिलका दैरा पडा.. फीर बीमार रहेते छे महिनेमे चल बसा.. ओर घरमे सीर्फ साहील ओर उनकी बडी अम्मा सलमा रेह गये.. तो साहीलने घरकी जीम्वेवारी लेते पढाइ बीच मे छोडदी.. ओर अपनी खेतीबाडी देखने लगा..
तब साहीलकी उमर महज १८ सालकी थी.. तो उनके बडेभाइ बहेनभी डेढ डेढ साल बडे थे.. तो सलमा ओर जरीना भी तकरीबन ३८ सालकी होगी.. क्युकी सलमा ओर जरीनाकी सादी छोटी उमरमे ही साथमे करदी गइथी जब उनकी सादी करनेकी उमर भी नहीथी.. अभी साहीलके पास उनबे पुर्खोकी जमीनका सीर्फ अेक चोथाइ हीस्साही था.. जो वो देवायतकी सलाहके अनुसार फसल उगाकर उन्हीको बेच देता.. ओर जैसे तैसे घर चलाकर कुछ पैसा अपना ओर अपने चाचाका हीस्सा बचाकर रखता..
अैसेही साहीलने चार साल महेनत करके बहुत सारे पैसे बेन्कमे जमा कर लीयेथे.. तब हालही मे देवायतने सब जमीन उनको वापस दीलवादी.. जो राघवके पास थी.. तो सबलोग बहुत खुस होगये थे.. उस दिन फीरोजभी अपने पुरे परीवारके साथ गांवमे आयाथा.. लेकीन साहील अकेले इतनी सारी जमीनको जोत नही सकता था.. तो वो जमीन अैसेही बंजर पडी थी.. इसके बारेमे साहील सोचता ही रहेता.. ओर प्लानींग करता रहेता..
फीरोज सभी जमीन साहीलको सोंपकर वापस सहेरपे चला गयाथा.. क्युकी वहा वो बहुतही बडी फेक्टरीमे कामपे लग गयाथा.. तो उनका बडा लडका कादीरभी इन्जीयर होकर जोबपे लग गयाथा.. तब सायरा भी अपनी पढाइ पुरी करके घरपेही उनकी मम्मीका हाथ बटा रहीथी.. तो सबाना कोलेज जा रही थी.. सबाना कोलेजमे गायनेक डोक्टर बननेकी तैयारीया कर रहीथी.. तब घरमे कीसीको पता नही थाकी कादीर ओर उनकी बहेन सायराके बीच जीस्मानी तालुकात थे..