Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 32 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते चुतको साफ करते) बीटु.. होगइ तेरी गुडमोर्नींग.. ये अपनी मोमको चोदनेका अच्छा तरीका था.. क्या अभी भी तेरा जी नही भरा..? तुनेतो रातमे मेरी हालत खराब करदी थी.. इतना जोस तुजमे कहासे आ गयाथा..? क्या कोइ गोली बोलीतो नही खाइ थी..?

श्रीधर : (हसते होठ चुमते) नही मोम.. मेरा दोस्त मुना स्कुलमे पढता था.. तब उसने अ‍ेक आर्युदीककी कीताब पढीथी.. तो लंडको बडा करनेके चकरमे उसने कुछ जडीबुटीकी दवाइ खाइ थी.. ओर उसने हमेभी खीलाइ थी.. तो हमारे सभी दोस्तोके लंड अ‍ैसे होगये हे.. ओर वैसेभी आप सुरुसेही मेरी ड्रीमगर्ल रही हो.. तो आपको देखतेही जोस आजाता हे.. ओर कुछ नही.. सोरी मोम.. क्या आपको अच्छा नही लगा..?

ब्रीन्दा : (सरमाते हसते) बीटु.. तु भलेही मुजे अपनी मां माने.. लेकीन मेने कलसेही तुजे हमेसा हमेसाके लीये अपना पती मानलीया हे.. तो मे तुजे मना कैसे कर सकती हु..? अब तुही मेरा सहारा हे.. मुजे अब सारी जींदगी तुम्हारे साथ बीतानी हे.. तो तुम अपना दिल छोटा मत कर.. तुजे जबभी मुजे चोदनेका मन करे मुजे चोदलीया कर.. मे तुजे कभी मना नही करुगी.. कल रात तुने मुजे फीरसे अ‍ेक लडकी होनेका अहेसास करवा दीया हे..

श्रीधर : (गालको चुमते) थेन्क्स मोम.. अब चले.. दोनोही नहाकर फटाफट तैयार होजाते हे.. आज मुजे अपनी बीवीको ढेर सारी सोपींग करवानी हे..

ब्रीन्दा : (बेडसे उतरते हसते) हंम.. चल.. लेकीन याद रखना.. कलकी तराह अंदर अब कोइ ओर सरारत नही.. समजे..? कलभी मुजे नहेलाते तुमने खडे खडे चोदलीया था.. कहासे सीखा ये सब..

श्रीधर : (हसते) डार्लींग.. सब तेराही संगतका कमाल हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (खुस होकर प्यारसे गालपे चपत लगाते) बदमास.. चल..

दोनोही अ‍ेक साथ बाथरुममे घुस गये ओर अ‍ेक दुसरेको रगड रगडके नहेलाने लगे.. श्रीधरने वाकइ ब्रीन्दाके साथ कोइ सरारत नहीकी.. तो ब्रीन्दाभी खुस होगइ.. फीर दोनोही बहार आकर कंपलीट होगये.. ब्रीन्दा आज लाल सारीमे वाकल कयामत लग रहीथी.. वो नइ नइ ब्याहकर आइ दुल्हनकी तराह सजी थी.. तो बालोको सही करते श्रीधरके पास आगइ ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तब श्रीधरने झनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये..

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ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) हां तो मेरे मजनु पतीदेवजी.. चले..?

श्रीधर : (हसते) मोम.. यु आर सो ब्युटीफुल.. क्या हम अ‍ेक दिन ओर रुकजाये.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाकर जुठे गुस्सेसे) कोइ जरुरत नही.. अब जोभी करना हो धर जाकर करना समजे..? चलो..

श्रीधर : (मुस्कुराते) यस.. डार्लींग.. चलो.. हें..हें..हें..

कहातो ब्रीन्दा सरमा गइ.. फीर दोनोही बहार नीकल गये ओर श्रीधरने बंगलेपे ताला लगा दीया.. दोनोही बाइक लेकर अ‍ेक कोफी सोपपे चले गये.. वहा दोनोने चाइ नास्ता करलीया.. ओर वहासे नीकलकर अ‍ेक बडे आलीसान मोलमे चले गये.. वहा श्रीधरने ब्रीन्दाको ढेर सारी सारीया ओर अपनी पसंदका ड्रेसीस दीलवाया.. फीर ब्रीन्दाको लेकर अ‍ेक अंडर गारमेन्टकी सोपमे चला गया..

वहा ब्रीन्दाको तीन अलग अलग ट्रांन्सपरन्ट नाइटी दीलवाइ.. ओर पांच सेट ट्रांन्सपरन्ट ब्रा पेन्टीके दिलवाये.. तब ब्रीन्दा बहुतही सरमाइ.. उसनेभी दो जीन्स ओर दो टीसर्ट श्रीधरको दिलवाया.. घरका बीजनेस बहुतही अच्छाथा तो पैसोकीतो कोइ कमी नहीथी.. श्रीधरका खुदका बेंक बेलेन्सभी तगडा था.. तो वो ब्रीन्दाको लेकर अ‍ेक ज्वेलरी सोपमे चला गया..

वहा ब्रीन्दाकी पसंदका अ‍ेक नेकलेश ओर डायमंड रींग लेली.. तो ब्रीन्दाभी श्रीधरके लीये अ‍ेक रींग देखने लगी.. तब श्रीधरने उनसे छीपकर अ‍ेक मंगलसुत्र लेलीया.. ओर अपनी जेबमे रखदीया.. फीर श्रीधरने सबका पेमेन्ट करदीया.. ओर बहार आगये.. तबतक दो पहोरके अ‍ेक बज गया था.. तो दोनोही अ‍ेक होटेलमे चले गये वहा दोनोने खाना खाया.. दोनोने आज अ‍ेक दुसरेको अपने हाथोसे खीलाया..

फीर खाना खाकर वापस बंगलेपे आगये.. दोनोही घुमकर थके हुअ‍ेथे.. तो अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भरके सो गये.. ओर साम तक सोते रहे.. सामको दोनो जग गयेतो फ्रेस होगये.. ओर घर जानेके लीये तैयार होने लगे.. तब श्रीधरने अ‍ेक बार ब्रीन्दाको उनकी दिलवाइ ट्रान्सर्फर ब्रा पेन्टी पहेनकर दिखानेके लीये कहा.. तो ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर श्रीधरको मना करने लगी..

क्युकी उनको पता था.. अगर वो पहेनकर दीखायेगी तो श्रीधर उनके साथ जरुर कइना कोइ सरारत करेगा.. लेकीन श्रीधरने थोडीसी जीद की तो वो सीर्फ अ‍ेक बार ब्रा पेन्टी पहेनकर दीखानेको तैयार होगइ.. ओर उसने मुस्कुराते श्रीधरको कोइ सरारत ना करनेको भी केह दीया.. तो श्रीधरभी हसते हुअ‍े हां कहे देता हे.. तब ब्रीन्दा ब्रा पेन्टीका अ‍ेक सेट लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर थोडीही देरके बाद.. सीर्फ ब्रा पेन्टीमे सरमाते हुअ‍े मुस्कुराते बहार आगइ..

श्रीधर : (देखताही रेह गया) वाव.. मोम.. ब्युटीफुल.. यु आर लुकींग सेक्सी गर्ल.. वेरी होट.. गर्ल..

ब्रीन्दा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) चल.. हट बदमास.. क्या मे होट लगती हु..? बेसर्म लडका.. अब देख लीयानां..? चल.. अब बहुत होगया रोमांस.. अब घर नही चलना..?

श्रीधर : (पास आकर बाहोमे भरते) मोम.. प्लीज.. थोडी देर ओर रुकीयेना.. आज आप बहुत मस्त लग रही हे.. जीतो चाहता हे मे आजही आपसे सादी करलु.. ओर आपको हमेसा हमेसाके लीये मेरी बनालु..

ब्रीन्दा : (सरमाकर गाल चुमते) बीटु.. अब हमारे बीच इतना कुछ तो होगया.. तेरी मोम तो कल रातसे ही हमेसाके लीये तेरी होगइ हे.. तो फीर क्यु अ‍ैसा बोल रहा हे..? क्या मुजपे यकीन नही हे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते होंठ चुमकर) मोम.. यकीन तो खुदसेभी ज्यादा हे.. लेकीन मे आपको पापाकी सुहागन नही.. मेरी सुहागनमे देखना चाहता हु.. करलीजीये मुजसे सादी.. मे आपको मेरी रानी बनाकर रखुगा..

ब्रीन्दा : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. बीटु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. तुम कीतना चाहते हो मुजे.. लेकीन बीटु.. सादीके लीये अभी तेरी उमर छोटी हे.. मुजे पता हे तुमने मेरे लीये मंगलसुत्र लीया हे.. ला दे मुजे.. मे इसे तबतक सम्हालकर रखुगी.. जबतक तेरी सादीकी उमर ना होजाये.. बस तुम कोलेज खतम करले.. तब मे तुमसे वादा करती हु.. की मे तुमसे खुद सामनेसे सादीके लीये कहुगी.. तब करलेना मुजसे सादी.. हां.. अगर तुम चाहोतो हम अभी अ‍ेन्गेमेन्ट कर सकते हे.. मेने भी तेरे लीये अंगुठी लेली हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. क्या आपने मुजे अंगुठी खरीदते देखलीया था..? हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरारतसे कामुक सम्माइल करते) हंम.. अब तुम मेरे पती हो.. तो पतीपे ध्यानतो रखना पडेगानां..? हें..हें..हें.. चल पहेनादे अपनी बीवीको अंगुठी..

कहातो श्रीधर खुस होकर जेबसे अंगुठी नीकालता हे.. ओर ब्रीन्दाको उंगलीपे पहेना देता हे.. तब ब्रीन्दाभी अपने पर्ससे अंगुठी नीकालकर श्रीधरको पहेना देती हे.. तब श्रीधर उसे अ‍ेन्गेजमेन्टकी गीफ्ट कहेते डायमंडका नेकलेस पहेनाता हे.. तब ब्रीन्दा बहुत खुस होगइ.. ओर श्रीधरको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर खुसीके मारे आंग गीली होगइ.. ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमलीये.. तब..
 
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां तो पतीदेव.. अब खुस..?

श्रीधर : (मुस्कुराते गाल चुमते) यस.. मोम.. आइ लव यु.. मे इस दिनका इन्तजार करुगा.. जब हम दोनोकी सादी होगी.. ओर हमारी फीरसे सुहागरात होगी..

कहेतेही श्रीधर ब्रीन्दाके उरोजोको अपनी हथेलीमे थामते उनके होठोका रसपान करने लगा.. तो ब्रीन्दाभी श्रीधरका साथ देने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनोही उतेजीत होने लगे.. तब ब्रीन्दाको याद आयाकी वो सीर्फ ब्रा ओर पेन्टीमे हे.. तो वो सरमाते जटसे श्रीधरसे अलग होगइ.. ओर बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तब श्रीधरने उनका हाथ पकडलीया.. ओर खीचकर अपनी बाहोमे भीचलीया..

तो ब्रीन्दा सरमाकर धीरेसे श्रीधरको छोडनेकी मनते करने लगी.. ओर श्रीधरसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तबतक श्रीधर उनके गलेको.. गालको.. होठोको.. चुमता रहा.. ओर ब्रीन्दाको उतेजीत करता रहा.. ओर आखीर श्रीधरकी महेनत रंग लाइ.. ब्रीन्दा सीसकारीया करते श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर श्रीधरको कुछ करनेको कहेने लगी.. तब श्रीधरने उसे पीछेसे बाहोमे भीचलीया.. ओर ब्रीन्दाके बुब्सको मसलते दबाने लगा..

ब्रीन्दा बहुतही उतेजीत होगइ.. तभी श्रीधरने अपना लंड बहार नीकाल लीया.. ब्रीन्दा कुछ समज पाती उनसे पहेलेही श्रीधरने ब्रीन्दाकी पेन्टी खीचकर नीचे करदी.. ओर ब्रीन्दाको थोडासा चुकाकर पीछसे अपना तगडा लंड ब्रीन्दाकी चुतमे घुसा दीया.. तो ब्रीन्दाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो छटपटाने लगी.. तब श्रीधर दोनो हाथोसे उनके उरोजोको थामते पीछेसे कमर हीलाकर ब्रीन्दाको चोदने लगा..

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कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद श्रीधरने अ‍ेक बार फीर ब्रीन्दाकी चुतको भरके हरी भरी करदी.. तब ब्रीन्दाभी उनके साथ जड चुकीथी.. ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी चुतको पेन्टीसे साफ करके श्रीधरके सीनेमे मुका मारते बाथरुममे भाग गइ.. फीर दोनोही मां बेटे नहाकर कंपलीट होगये.. ओर अपना सामन लेकर बंगलोपे ताला लगा देते हे.. ओर अपनी बाइक लेकर गांवकी ओर नीकल जाते हे..

रास्तेमे दोनोने चाइ नास्ता करलीया.. ओर अपने गांव वापस आगये.. तबसे दोनो मां बेटेके बीच अ‍ेक पती पत्नी वाला रीस्ता बन गया.. ब्रीन्दा अब रातमे श्रीधरके कमरेमे उनके साथ सोने लगी.. ओर उनका बीस्तर गरम करने लगी.. दोनोही मां बेटे थे.. तो कीसीको उन दोनोपे सक नही हुआ.. ब्रीन्दा अब श्रीधरका अ‍ेक पतीकी तराह खयाल रखने लगी.. ओर उनकी हर जरुरतको पुरी करने लगी..

तो श्रीधरभी ब्रीन्दाका अ‍ेक पत्तीकी तराह खयाल रखने लगा.. उनके कपडे.. श्रीगांरका सामान.. उनके लीये ज्वेलेरी.. यहा तक उनके अंडरगार्मेन्टभी श्रीधर लाकर देता.. दिनमेभी घरपे कोइ नही होता तब श्रीधर हर दिन कुछना कुछ जुगाड करके ब्रीन्दाकी चुदाइ करलेता.. तो ब्रीन्दाभी मौका मीलतेही श्रीधरको अपने बेडरुममे बुला लेती.. या फीर खुद उनके बेडरुममे चली जाती ओर उनसे जमकर चुदवा लेती..

अ‍ैसेही श्रीधर दो साल तक ब्रीन्दाकी चुदाइ करता रहा.. दोनोके बीच पती पत्नीका रीस्ता बहुतही गहेरा हो गयाथा.. इस दोनोके रीस्तेके बारेमे आजतक कीसीको पता नही चला.. ब्रीन्दा हर दिन आइपील खालेती.. ताकी बच्चा ठहेरनेका कोइ खतरा नाहो.. जब श्रीधरके कोलेजका दुसरा साल खतम हुआ तब अ‍ेक दिन ब्रीन्दा श्रीधरको लेकर सहेर चली गइ ओर उनसे कीसी मंदिरमे जाकर श्रीधरसे सादीभी करली..

तब श्रीधरने ब्रीन्दाको वही मंगलसुत्र पहेनाया जीसे ब्रीन्दाने सम्हालकर रखाथा.. फीर श्रीधरने वही अपनी मां ब्रीन्दाकी मांग भरदी.. ओर वहा उसी देवायतके बंगलोमे दो दिन ठहेरकर अपनी सुहागरात मनाते श्रीधरने ब्रीन्दाकी खुब चुदाइ की.. फीर दोनो वापस अपने गांव आगये.. आज ब्रीन्दा अपने बेटे श्रीधरकी सुहागन थी.. ब्रीन्दाका अ‍ेक मक्सद पुरा होचुका था.. अब वो अपने दुसरे मक्सदके बारेमे सोचती रही..

(फ्लेसबेक खतम)

ब्रीन्दाके मनमे अ‍ेक अ‍ेक घटनाक्रम कीसी फील्मकी रीलकी तराह चल रहाथा.. उनको पताही नही चलाकी वो अपने ओर अपने बेटेके बीच रीलेशनको लेकर सोचते कीतनी देरसे अपने बेडपे लेटी हुइ हे.. दोनोही मां बेटे तबसे रीलेशनमे थे.. जब श्रीधरने जवानीके दहेलीजपे कदम रखाथा.. ओर ब्रीन्दाने तबसे ही श्रीधरके साथ रीलेशन रखकर उनको जवानीका पाठ पढाया था.. तभी अचानक जयश्री उनके रुममे आगइ..

जयश्री : (सरमाते धीरेसे ब्रीन्दाको हीलाते) मम्मी.. मम्मी.. आप सो गइ हे क्या..?

ब्रीन्दा : (अचानक अतीतसे बहार आते) अरे.. नही तो.. क्या हुआ बेटी..? क्या जागृती चली गइ..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) हां मम्मी.. वो मुजे सादीकी वीस करने आइथी.. ओर हमने बहुत सारी बातेकी..

ब्रीन्दा : (हसते) बेटा.. आज अचानक मे मौसीसे मम्मी कैसे होगइ..? हें..हें..हें.. तु मुजे मौसी केह सकती हे.. आजा बैठ इधर.. मेरी प्यारी बच्ची..

जयश्री : (सरमाकर मुस्कुराते बैठते) नही मम्मी.. अब मेने आपके बेटेसे सादी करली हे.. अब आप मेरी सांस हे.. अब मे आपको मम्मी ही कहुगी.. हें..हें..हें.. मोम.. थेन्क्स.. आपने हमारी सही समयपे बहुत मदद की.. मोम.. आइ लव यु.. लेकीन लगता हे मम्मी अबभी मुजसे थोडी नाराज हे..

ब्रीन्दा : (प्यारसे गले लगाते) बीटु.. तुम दीदीकी चीन्ता मत कर.. वो सब मे सम्हाल लुगी.. बस.. अबतो तुम ओर श्रीधर अपने नये संसारपे ध्यान दो.. अब तुजे अपना बहुत खयाल रखना पडेगा.. क्युकी अब मेरा पोता तेरे गर्भमे हे.. तुजे समय समयपे चेकअप ओर खाने पीनेका बहुत खयाल रखना पडेगा..

जयश्री : (सरमाते मुस्कुराते) येस मोम.. थेन्क्स अगेइन.. आइ लव यु.. जब आप जैसी मां होतो मुजे चीन्ता करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते सर चुमते) लव यु टु बीटु.. जा.. अब आराम कर.. थक गइ होगी..

कहातो जयश्री ब्रीन्दाको हग करके अपने कमरेमे चली गइ.. तो वहा श्रीधर उनका इन्तजार कर रहा था.. तो जयश्री जातेही श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. आज ब्रीन्दाके दोनो मक्सद उनके बेटेके जरीये पुरे हो चुके थे.. अब उसे जीतुलाल ओर उनकी बहेन वृन्दासे कोइ मतलब नही था.. बस अब अ‍ेकही काम बाकी रेह गयाथा.. ओर वो था श्रीधरको उनकी बीजनेसकी पीढीपे कामपे लगा देनेका.. ओर इसके लीये भी ब्रीन्दाने बहुत कुछ सोचके रखाथा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६६

कहातो जयश्री ब्रीन्दाको हग करके अपने कमरेमे चली गइ.. तो वहा श्रीधर उनका इन्तजार कर रहा था.. तो जयश्री जातेही श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. आज ब्रीन्दाके दोनो मक्सद उनके बेटेके जरीये पुरे हो चुके थे.. अब उसे जीतुलाल ओर उनकी बहेन वृन्दासे कोइ मतलब नही था.. बस अब अ‍ेकही काम बाकी रेह गयाथा.. ओर वो था श्रीधरको उनकी बीजनेसकी पीढीपे कामपे लगा देनेका.. ओर इसके लीये भी ब्रीन्दाने बहुत कुछ सोचके रखाथा....अब आगे

उधर हवेलीपे जवेरीलालकी फेमीली चली गइ तब सृती पुनमको जगाने उनके रुममे चली गइ.. सृतीने पुनमको जगादीया तो वोभी उठकर लंगडाते धीरे धीरे बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तो सृती उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. ओर उनके साथ वोभी बाथरुममे घुस गइ.. फीर वहा उसने पुनमकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. तब पुनम सरमाते मुस्कुराती रही.. फीर नहाकर दोनोही बहार आगइ.. ओर सृतीने पुनमके कपडेके साथ अ‍ेक पेइनकीलर उनके रुमसे लाकर देदी..

सृती : (मुस्कुराते) पुनोदी.. क्या जरुरत थी..? उनको मना कर देती.. देखो आपकी हालत कैसी करदी..

पुनम : (सारी पहेनते सरमाते धीरेसे) भाभी.. जब भाइने दो बार करलीया तो मेने उनको मना ही कीयाथा.. लेकीन उनको मेरी बात कहा सुननी हे.. बस.. करतेही जा रहेथे.. जालीमने तीसरी बारभी करलीया.. लेकीन भाभी.. मजा भी बहुत आया.. पता नही भाइको मुजे देखकर क्या होजाता हे..

मुजे छोडते ही नही.. ओर ये सब पहेली बार नही हुआ.. इनसे पहेलेभी दो बार मेरे साथ अ‍ैसा कर चुके हे.. अ‍ेक बार हमारी सुहागरातमे.. ओर अ‍ेक बार जब मुजे प्रेगनेन्ट कीया तब.. उनका बस चलेतो सारा दिन मुजे प्यार करते रहेगे..

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. आपको प्यारभी तो बहुत करते हे.. आपजो उनकी चहीती बहेन हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. अब फटाफट तैयार होजाइअ‍े हमे नीकलना भी हे..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभी.. क्या इस हालतमे हम वहा जायेगे..? सबको पता चल जायेगातो..?

सृती : (बहार जाते हसते) सबका तो नही पता लेकीन उस कमीनीको जरुर सब पता चल गया होगा.. चलीये.. जोभी हो.. हमे जानातो पडेगा ही.. आप फटाफट तैयार होकर बहार आजाइअ‍े.. मे आपके लीये चाइ नास्तेका इन्तजाम करती हु.. फीर देवुको हमे छोडकर वापसभी तो आना हे..

कहेते सृती कीचनमे चली गइ.. फीर दयाको पुनमके लीये चाइ नास्तेका कहेकर वो होलमे देवायतके पास जाकर बैठ गइ.. ओर कातील नजरोसे हसते देवायतके कंधेपे अ‍ेक मुका जड दीया.. तो देवायत हसने लगा ओर मारनेका कारण पुछा तो सृतीने हसते पुनमकी ओर इसारा कीया.. तब पुनम थोडी लंगडाते बहारकी ओर आ रहीथी.. तो देवायत उनको देखकर जोरोसे हसने लगा.. तो पुनम उनकी ओर देखकर अपने दांतोको पीसते जुठा गुसा करने लगी..

जब सृती पुनमके रुममे चली गइथी.. तब लताभी नीलमको लेकर उपरकी मंजीलपे अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करलीया.. तो नीलम समज गइकी अब उनकी खैर नही.. लतादीदी उनको सबकुछ पुछ लेगी.. तो वोभी मानसीक रुपसे लताको जवाब देनेके लीये तैयार होगइ.. उसने मनमे ठानलीया की जोभी हो.. आज लतादीदीको सब सचाइ बतादेनी हे.. की मे धिरेनको प्यार करती हु.. ओर उनसे सादी करना चाहती हु..
 
लता : (सामने देखते) देख नीलु.. मे सीर्फ तेरी बुआ ही नही.. तुजे अपनी छोटी बहेन भी मानती हु.. तुजे पता हे..? तेरे मम्मी पापाको तेरी कीतनी चीन्ता हे..? वो चाहते हे की तु अ‍ेक बार अच्छेसे पढ लीखले.. ताकी तेरी सादीभी कोइ अच्छे घरानेमे होजाये.. ओर तु अ‍ैसो आरामकी जींदगी गुजार सके.. इसीलीये मेने ओर लखनने तेरी पढाइकी ओर तेरी सादीकी सारी जीम्वेवारी हमारे उपर लेली हे.. तु क्यु उस कमीनेके पीछे पडी हे.. भुलजा इसे..

नीलम : (सरमाते नजरे चुराते) दीदी.. सोरी.. हम अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. अब ना मे उनके बीना रेह पाउगी ओर नाही वो मेरे बीना.. वो मुजसे सादी करना चाहते हे.. ओर मेभी उनसे सादी करना चाहती हु..

लता : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? पागल होगइ हो क्या..? तेरे दिमागमे ये बात आइभी कैसे..? नीलु.. सच सच बताना.. तुम दोनो कहा तक आगे बढे हो..? मुजे सच बता.. मे तुजे नही डाटुगी..

नीलम : (सरमाते नजरे जुकाते धीरेसे) दीदी.. हमने प्यारकी सारी हदे हमने पार करली हे.. अब हमारी सादीतो सीर्फ औपचारीक ही रेह गइ हे.. बस.. आपको सीर्फ इतना ही कहेना हे.. दीदी मे धिरेनको बहुत चाहती हु.. प्लीज..

लता : (अपना सर पकडते परेसान होते) हे.. भ..ग..वा..न.. नीलु.. नीलु.. ये तुमने क्या कीया..? तु अभी इस चीजके लीये छोटी हे.. तु जीसे प्यार समज रही हे.. वो प्यार नही हे.. बस.. महज अ‍ेक आकर्सण हे.. वो केवल अ‍ेक वासना हे.. तुमने क्या करदीया..? (सामने देखते) नीलु.. सच बताना.. तुमतो कलसे उनके साथ थीनां..? तो बता दोनोने कलसे अबतक कीतनी बार कीया..? सच सच.. बताना मुजे..

नीलम : (सरमाते नजरे जुकाते धीरेसे) दीदी.. कलसे आजतक.. तकरीबन पांच से छे बार..

लता : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? छे बार..? कमीनी.. तु क्या वहा अपना हनीमुन मनाने गइ थी..? अगर कुछ उच नीच होगइ.. तो तेरे मम्मी पापा कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहेगे.. लगता हे इस बारेमे मुजे तेरी मम्मीसे बात करनी ही पडेगी.. वरना कहेगी तेरे साथ थी तो तुमने इनका ध्यान क्यु नही रखा..?

नीलम : (आंसु बहाते गीड गीडाते) दीदी.. प्लीज.. प्लीज.. प्लीज.. इस बारेमे आप मम्मीको कुछ मत बताना.. वरना वो मेरी पढाइ छुडवा देगी.. प्लीज.. आपको मेरी कसम.. उसे कुछ मत कहीये..

लता : (थोडा गुसस्ेसे) क्या नही कहेना..? कमीनी अ‍ेक तो इतना बडा कांड करके आइ हे.. ओर उपरसे कहे रही हे मम्मीको कुछ मत बताना..? अगर कल कुछ उचनीच हो गइ तो हम सबको क्या जवाब देगे..? नीलु.. इसके बाद तुमने कुछ गोली बोली खाइ हे..? मुने सब जानना हे..

नीलम : (सरमाते नजरे जुकाते) हां.. धिरेनने मुजे अ‍ेक दर्दकी ओर.. ओर.. अ‍ेक बच्चा ना ठहेरने की गोली खीलाइ हे.. कल.. ओर आज सुबह भी जब हमने सुबहमे कीया तब.. दीदी.. मुजे कुछ नही होगा.. आप जो भी कहोगी मे करुगी.. प्लीज.. आप मम्मीको मत बताना.. वरना वो मेरी खाल उखाड देगी..

लता : (परेसान होते) नीलु.. नीलु.. तु कब समजेगी..? तुजे मेने इतना कुछ समजाया था.. फीर भी तुम अपनी हरकतोके बाज नही आइ.. तु चल मेरे साथ मुजे देखना हे..

कहेते लता नीलमका हाथ पकडकर उसे बाथरुममे लेगइ.. ओर लताने नीलमको अपने कपडे नीकालनेको कहा.. तो नीलमने सरमाते अपने कपडे नीकाल दीये.. तब लताने नीलमको अपनी पेन्टी नीकालनेको कहा तो नीलम अ‍ैसेही नजरे जुकाते खडी रही.. तो लताने खुद उनकी पेन्टी खीचकर नीचे घुटनो तक करदी.. तब अ‍ेक बारतो नीलमभी गभरा गइ.. ओर अपनी चुतपे दोनो हाथ रख दीया.. तब..

लता : (थोडी सख्तीसे) नीलु.. हाथ हटा.. (जोरोसे) मेने कहानां अपना हाथ हटा..

थोडा जोरोसे आवज करते कहातो नीलमने सरमाते अपना मुह दुसरी ओर करलीया.. ओर अपना हाथ हटालीया.. तब लता नीचे बैठकर नीलमकी चुतको चेक करने लगी.. देखा तो नीलमकी चुतमे लताको कुछ खास बदलाव नही दीखा.. उनकी चुत अ‍ैसेही कसी हुइथी.. जो अ‍ेक कुआरी लडकीकी होती हे.. तब लताने देखकर राहतकी सांसली.. फीर लताने नीलमको अपने कपडे पहेननेके लीये कहा.. ओर बहार आगइ.. तब कुछही देरमे नीलमभी अपने कपडे पहेनकर लताके पास आकर बैठ गइ..

लता : नीलु.. अब में जोभी कहु ध्यानसे सुनना.. अब तु हमेसाके लीये हमारे पास ही रहेगी.. तुम जबभी स्कुल जाओगी यातो मे तुजे लेने छोडने आउगी.. या फीर तेरे लखन जीजु आयेगे.. तु अब अकेली कही नही जायेगी.. अगर तुजे अपने घरपे भी जाना हे तो हमारे साथही जायेगी.. अब हमे पता चला.. की तु उस कमीनेको मीली थी.. तो अब तेरी खैर नही.. इस बार मे तुजे माफ कर रही हु.. लेकीन आइन्दा तुमने उनके साथ कुछ कीया तो मेही तुजे मार मारके सुवर जैसी करदुगी.. समजी..?

नीलम : (सर जुकाते) जी दीदी..

लता : (अचानक याद आतेही) अ‍ेक मीनीट.. अ‍ेक मीनीट.. नीलु.. तुम दोनो अ‍ेक दुसरेके कोन्टेक्टमे कैसे रहे..? क्या उसने तुजे कुछ मोबाइल बोबाइल दीया हे..? सच बताना.. वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी..

नीलम : (हैसेही नजरे जुकाते खामोस बैठी रही..) ....

लता : (जोरोसे आवाज लगाते) अरे कमीनी.. अ‍ैसे गुंगी होकर क्या बैठी हे..? में तुमसे पुछ रही हु.. बता..

नीलम : (नजरे जुकाते गरदन हां मे हीलाते) जी..

लता : (जोरोसे) क्या जी..? तु गुंगी हे..? जोरोसे बोलनां..?

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) हां.. अ‍ेक मोबाइल दीया हे..

लता : (अपना सर पीटते) हे.. भगवान.. देखो कमीनेको.. इतनीसी बच्चीको मोबाइल भी दीया हे.. (जोरोसे) कहा हे वो..?

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) मेरे पास हे.. मेरी कपडेकी बेगमे..

लता : (थोडी सख्तीसे) तो अभी तक यहा क्यु बैठी हे.. जा.. अभीके अभी लाकर दे मुजे.. जा.. कमीनी कहीकी.. अभीतो जवानीके पंखभी ठीकसे नही लगे.. ओर उस कमीनेसे छे छे बार चुदवाके आगइ.. जा जल्दी..

कहातो नीलम दोडकर अपने रुममे चली गइ.. ओर अपनी बेगसे भारी मनसे मोबाइल नीकाला.. ओर लताके पास आकर उसे दे दीया.. तब लताने मोबाइल लेकर नीलमको वापस अपने रुममे भेज दीया.. लताका मन कर रहाथा की नीलमको अभी लखनको साथ लेजाकर रमासे मीलवाये.. लेकीन अभी पुनम ओर सृतीभी जाने वालेथे.. ओर नीलमको आज उनकी मम्मीको मीलवाना लताको ठीक नही लगा.. ओर वो मोबाइलको अपनी अलमारीमे छुपाकर नीचे चली गइ..
 
तब सृती ओर देवायत जानेकी तैयारीया कर रहेथे.. पुनम अबभी डाइनींगपे चाइ नास्ता कर रहीथी.. तब लता उनके पास जाकर बैठ गइ.. पुनमको लता थोडी टेन्शनमे लगी.. उनको मालुम थाकी लता को अभी कीस बातकी टेन्शन हे.. ओर उनसे अभी कुछ बाते कहेना चाहती हे.. लेकीन अभी देवायत सृती सब लोग थे तो पुनमको अभी इस बारेमे बात करना उचीत नही लगा तो उसने धीरेसे कहा..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. अभी कुछभी मत बोलना.. इस बारेमे हम फुरसमे बात करेगे.. मुजे सब पता हे..

लता : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. क्या आपको सब पता हे..? तो क्या आपको बुरा नही लगा..?

पुनम : (चाइ पीते धीरेसे) भाभी.. बीलकुल नही लगा.. आप फीकर मत कीजीये.. कुछ बाते हे जो मे आपको वापस आकर फुरसतमे बताउगी.. जोभी हो रहा हे होने दीजीये.. नीलुको कुछ मत कहेना.. ओके..?

लता : (राहतकी सांस लेते) ठीक हे दीदी.. हम बादमे बात करेगे..

जब पुनमने चाइ नास्ता करलीया.. तो वो लताको घरका ध्यान रखनेको कहेने लगी.. तब सृती अपने ओर पुनमके कपडेकी बेग लेकर आगइ.. लता ओर नीलम दोनोही वही खडे रहेते तीनोको जाते हुअ‍े देखती रही.. जब देवायतने कारमे बैठकर लताकी ओर देखा.. तो देवायतसे आंख मीलतेही लता अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. ओर मुस्कुराते हाथ हीलाकर देवायतको होठ हीलाते धीरेसे बाय.. कहेने लगी.. तब पुनमने देखलीया.. ओर देवायतकी ओर देखते हसने लगी.. ओर देवायत दोनोको लेकर राजीवके गांवकी ओर नीकल गया..

तो राजीवके घरभी सबलोग फ्रेस होकर चाइ नास्ता कर रहेथे.. आजभी दोपहोरको आरामके वक्त राजीवने नीर्मलाको चोदलीया था.. जैसे वो इतने दिनोसे बीमारीकी वजहसे नीर्मलाको ना चोदनेकी सारी कशर पुरी कर रहा हो.. आज राजीवके चहेरेपे बहुत थकान महेसुस हो रहीथी.. तो साथमे खुसभी हो रहाथा.. तब इधर देवायत सृती ओर पुनम तीनोही बाते करते उनके गांवकी ओर जा रहेथे.. तब पुनमने सरमाते बातको छेडदी..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ.. आपने तो आज मेरी सादीके बाद ना मीलनेकी सारी कशर पुरी करदी.. कोइ अपनी बहेनके साथ अ‍ैसा करता हे क्या..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) तो फीर..? दीदी इनको दो बार करनेकी आदत कहासे लग गइ..? तबतक तो ये हमे पुरी नीचोड लेते हे.. ओर आजतो आपके साथ तीन बार कीयानां..? देखो आपकी हालत.. आपकोतो छोडतेही नही थे.. मेरे साथभी अ‍ेक बार अ‍ैसा कीया था..

पुनम : ( सरमाकर हसते धीरेसे) भाभी.. लेकीन भाइ मजाभी तो बहुत देते हे.. भाइ.. मुजे आपसे कुछ बात कहेनी हे.. हमारे देवरके बारेमे.. हें..हें..हें.. आपको सब पता तो होगा आज क्या हुआ हे..?

देवायत : (हसते) हंम.. हमारे लखनके बारेमे..? बता.. क्या बात करनी हे..?

पुनमने रमाकी नीलुसे फोनपे बात करवानेको लेकर अपने खानदानकी भाइ बहेनके साथ सादीकी परंपरा.. फीर उनकी देवायतके साथ सादीसे लेकर धिरेनके साथ क्यु सादी करनी पडी.. वो सब बाते.. ओर लताभी उनकी बहेन हे.. वो सभी बाते पुनम देवायतको बताती रही.. तब सृतीभी बीचमे हसते दोनोकी बाते गौरसे सुनती रही.. ओर लखन उनको कीस बातपे क्या कहेकर छेड रहाथा.. पुनमने वोभी बता दीया..

पुनम : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. आज सुबह वो मेरे पास आयेथे.. उनको लताभाभीने नीलुसे रमाभाभीकी बात करवानेको कहा होगा.. तो मेने उनकी होस्टेलमे फोन कीयाथा.. तो वहीसे उनको सब पता चल गया.. तो लखन भैया बहुत गुस्से हो गयेथे.. ओर उसने मुजे धिरेनके साथ सादी करनेका कारण पुछा..

देवायत : (सीरीयस होते) पुनो.. क्या कहा तुमने..?

पुनम : (सरमाते) भाइ.. बातो ही बातोमे बात हमारे खानदानकी परंपरा तक आगइ.. तो उसने मुजे पुछलीया.. की आपने ओर भाइने ये परंपरा क्यु तोडदी..? दोनोने आपसमे सादी क्यु नहीकी..? आपकी धिरेनके साथ सादी करनेकी वजह क्याथी..? वगैरे.. वगैरे.. सवाल पुछने लगे.. तो मुजे मजबुरन उनको सब सचाइ बतानी पडी..

देवायत : ( आस्चर्यसे पुनमको ओर देखते) व्होट..? तो फीर क्या कहा उसने..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. मेने जब उनको सब सचाइ बतादी.. तो.. सचाइ सुनतेही वोतो उल्टा बहुत खुस होगये.. ओर मुजे भाभी भाभी कहेकर छेडने लगे.. हें..हें..हें.. भाइ.. उनकी बातोसे लगाकी वोभी अपने सभी दोस्तोकी तराह अपनी बहेनसे सादी करनेको इच्छुक थे.. तो मेने उसे कीसीको ना कहेनेकी हीदायत देते हमारी लताभाभीके बारेमे भी सब बता दीया.. की वोभी हमारी बहेन हे.. तो वो सुनकर बहेत खुस होगये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) लखन.. लखन.. मेरा छोटा भाइ.. बहुत सरारती होगया हे.. हें..हें..हें.. क्या तुजे सचमे भाभी कहेता हे..? देखना अभी कुछ गडबड ना करदे..

पुनम : (हसते) भाइ.. आप फीकर मत करो.. मेने उसे सब समजा दीया हे.. वो जब हम दोनो अकेले होगे तबही मुजे भाभी केह सकता हे.. बस मेने अभी उसे इतनीही छुट दी हे..? हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) अच्छा.. तब भी वो आपकी मस्ती करते भागेथे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) सृतीभाभी.. प्लीज.. ये बात अभी आप तकही सीमीत रखना..

सृती : (मुस्कुराते) अरे डोन्टवरी दीदी.. आप फीकर मत करो.. समजो मेने कुछ सुनाही नही.. हें..हें..हें..

तीनोही अ‍ैसी बाते करते राजीवके घरपे पहोंच गये.. तो मंजु चंदा भावना सब लोग पुनम ओर सृतीको देखतेही बहुत खुस होगये.. ओर सभीने उनको गले लगा लीया.. तब पुनम अपने सरपे पलु डालकर राजीव ओर नीर्मला ओर भुमीकाके पैर छुती हे.. तब राजीवभी बहुत खुस होगया.. आखीर पुनम जो उनकी बहु थी.. भावनाने सबको पानी पीलाया.. फीर सबके लीये चाइ नास्तेका इन्तजाम करने कीचनमे चली गइ..
 
तब मंजुने इसारा करते पुनम ओर सृतीको नीचे अपने रुममे आनेको कहा.. तो दोनोही सबकी नजर बचाते अ‍ेक अ‍ेक करते रुममे मंजुके पास चली गइ.. मंजुको पीछले दो दिनके सभी घटना क्रमके बारेमे सब पताथा.. ओर आज धिरेनके घरपे जोभी हुआ.. वोभी मंजुको सब पताथा.. जो बात पुनमकी प्रेगनन्सीके बारेमे अ‍ेक हप्तेके बाद डीकलेर करना था.. वोही बात उनको आजही डीकलेर करनेकी नोबत आगइ थी..

सृती : (अंदर आतेही) हां मंजु.. बोल.. तुमने सबसे छुपकर हमे यहा क्यु बुलाया..?

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. पुनोदीदी सब जानती हे.. लेकीन जो बात हमे अ‍ेक हप्तेके बाद डीकलेर करनी थी.. वोही बात आज करनी पडेगी.. तु अपना नाटक करनेके लीये तैयार होजा..

सृती : (थोडी असंमजमे मुस्कुराते) कीस बातका नाटक..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : (पीठमे मुका मारते) अरे कमीनी.. पुनोकी प्रेगनन्सीके बारेमे.. क्या भुल गइ सब..?

सृती : (हसते) ओह.. याद आगया.. याद आगया.. लेकीन अभी क्यु..?

मंजुला : (धीरेसे) कमीनी.. वो सब बतानेका अभी टाइम नही हे.. तुजे जीतना कहा उतना कर.. जब कोइ तुजे पुनोको चेक करनेके लीये बुलाये.. तब तुजे पुनोकी प्रेगनन्सीको डीकलेर करनी हे.. ओर पुनो.. अभी चाइ नास्ता आयेगा.. तब तु नास्ता करते अ‍ेक उंगली अपने गलेमे डाल देना.. तुजे व्होमीट हो जायेगी..

सृती : (जोरोसे हसते) कीतनी कमीनीहो तुम.. ये सब कहासे सीखा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) कुती.. हसो मत.. अभीतो बहार चल.. वो सब मे तुजे बादमे बताउगी.. हें..हें..हें..

कहेते तीनोही रुमसे बहार आगइ.. तो पुनम कीचनमे भावनाकी मदद करने चली गइ.. तो सृती मंजु बहार आकर सबके साथ बैठ गइ.. ओर सब लोग आपसमे बातोमे मसगुल होगये.. तब भुमीका सीर्फ पुनम ओर सृतीकोही नोटीस कर रहीथी.. क्युकी दोनोही थोडा धीरेसे चल रहीथी.. तब वो समज गइकी देवायतने ही इन दोनोकी चाल बीगाडी हे.. भुमीको पुनके बारेमे मंजुने सब बता दीया था.. फीर चाइ नास्ता आगया तो सब लोग चाइ नास्ता करते घुलमीलकर बाते करने लगे..

तभी अचानक पुनमको कुछ अजीबसा लगा.. उनको व्होमीट जैसा लगने लगा.. क्युकी रुमके अंदर मंजुने पुनमको सब समजा दीयाथा की क्या करना हे.. तो वो जटसे खडी होकर अपने मुहपे हाथ रखते बाथरुमकी ओर भाग गइ.. तब मंजु ओर सृती दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखते मुस्कुराते मनमे खुस होने लगी.. तो पुनमके पीछे चंदा ओर भावना भी थोडा गभराते खडी होकर चली गइ..

देखातो पुनम व्होमीट कर रहीथी.. तब चंदाभी मनमे खुस होते उनकी पीठ सहेलाती रही.. जब व्होमीट होगइ.. तब पुनमने अपना मुह पानीसे साफ करलीया.. तो चंदा ओर भावना उसे हाथ पकडकर नीचेके रुममे लेगइ.. तभी सृती समज गइकी अभी उनका बुलावा आयेगा.. तभी चंदाने जोरोसे आवाज देकर सृतीको रुममे बुलाया.. तो सृतीके साथ मंजुभी हसते हुअ‍े खडी होगइ.. ओर दोनो रुममे चली गइ..

चंदा : (थोडी चीन्तासे) सृती.. देखतो जरा.. पुनमदीदीको क्या हुआ हे..? इनको व्होमीट हुइ हे..

सृती : (मुस्कुराते पुनमका हाथ चेक करते) दीदी.. गभराइअ‍े नही.. मे अभी देखती हु..

जब सृती पुनमका हाथ पकडकर चेक कर रहीथी तब मंजु.. सृतीकी ओर देखते मुस्कुरा रहीथी.. उनको पताथा.. अभी सृती पुनमको चेक करनेका नाटक बहुत अच्छी तराह कर रही थी.. मंजुको येभी पताथा की पुनमके लीये इतजी जल्द बाजी क्यु करनी पडी.. उनकीभी दो वजहथी.. अ‍ेकतो वो अपने पापाके जानेसे पहेले उनको खुसी देना चाहती थी.. ओर दुसरी वजहथी आनेवाले दिनोमे धिरेनकी कुछ डीमांड.. तभी..

सृती : (मुस्कुराते खुस होते) बडीदीदी.. मीठाइया मंगवा लीजीये.. सायद आपकी बहु.. प्रेगनेन्ट हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (खुसीके मारे चीलाते) क्या..? सृती.. तुम अ‍ेक बार फीरसे ठीकसे चेक करनां..

सृती : (हसते चंदाका हाथ थामते) दीदी इतने सालका तर्जुबा हे.. फीरभी मे इनको अपनी क्लीनीकपे जाकर चेक कर लुगी.. फील हालतो मेरे पास प्रेगनन्सी चेक करनेकी कीट हे.. मे इनको अभी देती हु.. वो सुबह चेक कर लेगी.. हें..हें..हें..

चंदा : (खुसीसे आंसु नीकल आये) पुनोदीदी.. थेन्क्स.. थेन्क्स गोड.. मे अभी बहार बडीदीदी ओर भैयाको खुस खबर सुनाती हु.. वो खुस होजायेगे..

कहेते चंदा बहाकी ओर दोड पडी.. ओर नीर्मलाके पास घुटनोके बल बैठकर उनकी गोदमे सर रखते खुसीके मारे आंसु बहाने लगी.. तब अ‍ेक पलके लीये तो सबलोग गभरा गये.. लेकीन तभी पीछे मंजु ओर सृती भावना सब लोग हसते हुअ‍े बहार नीकले तब सबकी जानमे जान आगइ.. ओर नीर्मला मुस्कुराते चंदाके सरको सहेलाती रही.. तो राजीवभी मुस्कुराते चंदाकी ओर देखता रहा.. तभी..

नीर्मला : (हसते) छोटी.. बोल क्या हुआ..? इतनी खुस हेकी तेरे आंसु नीकल आये..

चंदा : (खुसीसे हसते) हां दीदी.. बातही कुछ अ‍ैसी हे.. सायद आपकी बहु.. मां बनने वाली हे.. हमारे धिरेनका बच्चा.. सी इस प्रेगनेन्ट.. दीदी आज मे बहुत खुस हु..

राजीव : (जटसे खुस होकर पैसे नीकालते) अरे तो इसमे आंसु क्यु बहाती हे..? येतो बहुत खुसीकी बात हे.. (जोरोसे) भावु.. बेटा.. जा जल्दी कुछ मीठाइआ लेकर आ.. ओर साथमे आइसक्रिमभी लाना..

भावना : (हसते) जी पापा.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. अब आप दोनो दादा दादी बन जाओगे.. हें..हें..हें..

कहेते भावना हसते हुअ‍े राजीवके पास आकर पैसे लेकर चली गइ.. घरमे खुसीका माहोल होगया.. सब लोग चंदा ओर राजीव नीर्मलाको बधाइ देने लगे.. लेकीन देवायत मुस्कुराते आंसु बहाने लगा.. क्युकी उनको तो पताथा की पुनो प्रेगनेन्ट हे.. लेकीन आज वो थोडा दुखी होकर आंसु बहा रहाथा.. उनको चंदा राजीव ओर नीर्मलाके जजबातोसे खेलना अच्छा नही लगा.. तो मंजु उसे देखकर सब समज गइ..
 
मंजु देवायतको आंसु बहाते देखकर थोडी वीचलीत होगइ.. उनको पताथाकी देवायत क्यु आंसु बहा रहा हे.. वो जटसे पुनमके पास उनके रुममे चली गइ.. ओर वहीसे देवायतको थोडी जोरोसे आवाज लगाके रुममे बुलाती हे.. तो देवायत अपने आंसु पोछते पुनमके रुममे चला गया.. तब चंदा भुमीका ओर नीर्मला खुसीके मारे हस हसके बाते कर रहीथी.. जब देवायत अंदर आगया.. मंजुने धिरेसे दरवाजा बंध करलीया..

मंजुला : (थोडी चीन्तासे) जानु.. क्यु दुखी हो रहे हो..? आपको पता हेना आज क्या हुआ हे..? तो हमे आजही ये सब करना पडा..

देवायत : मंजु.. लेकीन अ‍ैसे कीसीके जजबातोसे मजाक करना.. मुजे अच्छा नही लगा.. देखो.. तीनो कीतनी खुस हे..? क्या तुजे नही लगता हम कीसीके साथ धोखा कर रहे हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते बाहोमे समाते) हंम.. समज गइ.. मुजे पता था.. अ‍ेकना अ‍ेक दिन येतो होनेही वाला था.. लेकीन जानु.. आप समजो.. अगर थोडेसे मजाकसे पापाको खुसी मीलती हे.. तो मे अ‍ैसा मजाक बार बार करुगी.. देखो पापा कीतने खुस हे.. मे उनको जानेसे पहेले खुस देखना चाहती हु.. फीरभी आपको लगता हेकी ये गलत हे.. तो आइ अ‍ेम सोरी..

देवायत : (सर चुमते) नही मंजु तुम माफी मत मांगो.. मुजे पता हे तेरी कोइना कोइ मजबुरी या उनके पीछे कोइ वजह होगी..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) जानु.. थेन्क्स.. मेरी क्या मजबुरीथी.. वो आपको कुछही दिनोमे पता चल जायेगा.. मेने जोभी कीया हे सोच समजके कीया हे.. आप फीकर मत करो..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. भाभी ठीक केह रही हे.. बहुत कुछ जल्दी बदल रहा हे..

देवायत : (प्यारसे सर चुमते) हंम.. पता हे मुजे.. तुम दोनोको बहुत कुछ पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. चलजाता हे.. इसीलीये तो ये सब करना पडा.. ओर येभी पता हे.. आज मेरी दो सौतने ओर आगइ हे.. जो उनमेसे अ‍ेकका उधार आज आपको करना हे.. हें..हें..हें.. देवु.. सीर्फ अ‍ेकका नही.. हो सकेतो आजही उन दोनोका सब काम तमाम करदो..

पुनम : (सरमाकर हसते) भाभी.. आप कीसकी बात कर रही हे.. सायद नीशा भाभी..?

मंजुला : (हसते) हां दीदी.. नीशातो हे ही.. लेकीन उस कमीनी भी अब हमारे साथ जुड गइ हे.. तेरी चारु भाभी.. हें..हें..हें.. पता नही ओर कीतनी ओरतोका उधार करना हे.. आज कल हमारे देवरके भी पंख लग गये हे.. हें..हें..हें.. वो कुछ ज्यादा ही उडने लगे हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे हसते) भाभी.. प्लीज.. आप वो थोडीसी जडीबुटी मुजे देना.. जो आपने भाइको दिथी.. बस.. उनमे से थोडीसी लखन भैयाको देनी हे.. आप समज गइनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. दीदी.. मेने घरपे सम्हालके रखी हे.. मे घरपे आउगी तब आपको दे दुगी.. लेकीन उनको थोडीसी ही देना.. ओर इस बारेमे मुजे आपसे बातभी करनी हे.. हम वही घर जायेगे तब करलेगे..

देवायत : (हसते) मंजु.. तो अब मे घर चलु..?

मंजुला : (हसते) देवु.. आप बहुत कमीने हो.. इस बेचारीकी हालत इतनी खराब करनेकी क्या जरुरत थी..? थोडा प्यारसे नही कर सकते थे..? आप डीनर करके जाना.. वरना पापाको बुरा लगेगा..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मंजु.. पता नही तुजे ओर पुनोको देखकर मुजे क्या होजाता हे.. मे सब कंट्रोल खो देता हु.. हें..हें..हें.. सायद इसकी वजह ये हे.. की तुम दोनो मेरी बहेने हो.. हें..हें..हें.. तो तेरे हिस्सेका प्यारभी पुनोसे वसुल करता हु.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाकर हसते) पुनोदीदी.. हमे कीतना कमीना भाइ मीला हे.. कोइ बहेनकी अ‍ैसी हालत करता हे.. हें..हें..हें.. देवु.. छोडो ये सब.. आज आप कारको इधरही रखके जाना.. सृती ओर पुनो दोनोही चला लेती हे.. आप आज पापाका स्कुटर लेकर चले जाना.. समज गयेनां..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मंजु.. अगर तुम कहोतो मे रुक जाता हु..

मंजुला : नही देवु.. आप आरामसे जाओ.. वहाभी वो दोनो आपका इन्तजार कर रही होगी.. ओर आप यहा रुके तो सायद मम्मी.. भुमी आंटी.. सबको सक होजायेगा.. आप जाओ.. अकेले अ‍ैस करो.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) अरे अकेला कहा..? ठीक हे.. पुनो.. चलो तुम्हे मेरे साथ चलना हे.. आज हम दोनोही घरपे अ‍ेकेले हे..हें..हें..हें..

मंजुला : (दांत पीसते मुका मारते) आप बहुत ही कमीने हो.. अकेले कहा..? वहा दोदो कमीनीओ आपका इन्तजार कर रही हे..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. वो वंदु केह रहीथी.. आज कल चारुभाभी ओर रेमशभाइके बीच कुछ ठीक नही चल रहा..

मंजुला : (मुस्कुराते) सब पता हे दीदी.. आगे देखते जाओ.. अबतो वहा बहुत कुछ नया दिखनेको मीलेगा..

देवायत : (होंठ चुमते बुब्स दबाते) मंजु.. अ‍ेक दिन तुम दोनो बहेनोके साथ मजा करना चाहता हु.. हें..हें..हें..

कहातो पुनम ओर मंजुला बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुने सरमाकर देवायतकी पीठमे मुका भी मार दीया.. फीर दोनोही बहार आकर सबके साथ बैठ गये.. तब भावना मीठाइआ ओर आइसक्रिम लेकर आगइ.. सबने देवायतको डीनर तक वही रोक लीया.. वहा खानेके वक्त मीठाइआ बटी.. सब अ‍ेक दुसरेका मुह मीठा करने लगे.. फीर आइसक्रिम भी खाइ.. ओर देवायत रात साडे नव बजे वहासे नीकल गया..
 
भानुके गांवभी जब लखन ओर लता चले गये तब भानु ओर सरला अपने अपने रुममे आराम करने चले गये.. तो रमा आज बहुत खुस नजर आ रहीथी.. वो गाना गुनगुनाते धरका सब काम फटाफट नीपटाने लगी.. क्युकी आज उनके साथ लखनने बात कीथी.. ओर दोनोने डबल मीनींगमे बहुत कुछ बाते करली थी.. तबही उसने मनमे ठान लीयाथा.. की अब जोभी हो.. सामको भानुके जानेके बाद वो लखनसे फोनपे बात कर लेगी..

रमा अपना सब काम नीपटाकर अपने कमरेमे आराम करने चली गइ.. तो भानु खर्राटे मारके सो रहाथा.. ओर उनके साथ भावेशभी सो रहाथा.. तो रमा भावेशके बगलमे जाकर लेट गइ.. आज उसे भावेसपे बहुत प्यार आने लगा.. ओर वो भावेसके सरको सहेलाने लगी.. तो भावेश जाग गया.. ओर रमाकी ओर करवट लेकर उनके दुधु मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगा.. लेकीन आज रमाने उसे नही रोका..

वो भावेशकी हरकत देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर उसने सरमाते अपने ब्लाउसके नीचेके दो बटन खोलदीया.. ओर ब्लाउसको उचा करके अपने दुधु बहार नीकलके भावेशके मुहमे दे दीया.. तो भावेशभी खुस होकर अपना हाथ पांव उछालते रमाके दुधुकी नीपलको मुहमे लेकर चुसने लगा.. ओर रमा मुस्कुराते उनके सरको सहेलाने लगी.. तभी भानुने अपनी आंख खोलदी.. ओर दोनोकी हरकते देखता रहा.. तभी..

भानु : (मुस्कुराते) रमा.. क्या ये अबभी दुध पीता हे..? क्या तेरे दुधुमे दुध आता हे..?

रमा : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) नही भानु.. लेकीन इनको अ‍ैसी आदत लग चुकी हे.. तभी सोता हे.. भानु.. वो.. वो.. माजी अ‍ेक बार कहे रहीथी.. की अब हमे अ‍ेक बच्चा करलेना चाहीये..

भानु : (मुस्कुराते) हमारे तीन तीन बच्चेतो हे.. तो फीर क्या कहा तुने..?

रमा : (सरमाते हसते) क्या कहेती..? केह दीयाकी हम कोसीस कर रहे हे.. बस.. मुजेतो बहुत सरम आइ.. भानु.. क्या आपका मन नही करता..? दोतो भावना का हे.. मेरी तो सीर्फ नीलु हे.. आपको नही लगता की अब हमारा भी अ‍ेक लडका हो.. हंम..?

भानु : (हसते) हंम.. लेकीन हमने कोसीस तो करते हे.. होना चाहीये..? रमा.. मुजे लगता हे तेरी इतनी उमर होगइ हे.. इसीलीये नही हो रहा.. अबतो भावु आजायेतो कुछ बात बन सकती हे..

रमा : (थोडा गुसा होते) क्या कहेना चाहते हे आप..? तो क्या आपकी भावुही बच्चा पैदा कर सकती हे मे नही..? हां अब आपकोतो भावुही अच्छी लगेगीनां.. तो फीर क्यु की मुजसे सादी..? करलेते उनसे बच्चे..

भानु : (थोडा परेसान होते) अरे.. तु बातको कहासे कहा तक लेगइ..? मेने ये थोडीना कहाकी तुजसे बच्चे नही होगे..? हम रोज तो करते हे.. फीरभी नही हो रहा तो इसमे मेरा क्या कसुर.. जो तुम गुसा करती हो..

रमा : ठीक हे ठीक हे.. अभी मेरा मुड खराब मत करो.. क्या आपको खेतोपे नही जाना..?

भानु : (बेडसे खडा होकर) हां जाता हु.. तु आराम कर.. आज रात कोसीस करेगे.. तैयार रहीयो..

रमा : (मनमे) अब तुम क्या कोसीस करोगे..? खुदसे तो कुछ होता नही.. ओर मुजे कहेते हे तेरी उमर होगइ हे.. कमीने.. आज भी तेरा बहेनोइ लखन मेरे पीछे लटु हे.. बस मेरे अ‍ेक इसारेकी देरी हे.. फीर देख वो कैसे तेरी इस बीवीको चोद लेता हे.. कमीना हेभी मस्त.. कीतना हेन्डसम दिखता हे.. अबतो उनसे चुदवाकर तुजे मे बच्चा पैदा करके दिखाउगी.. अब जोभी करेगे तेरा बहेनोइ लखनही करेगे.. मे आजही उनसे फोनपे बात करलेती हु.. की मुजे आपका प्यार कबुल हे..

मनमे सोचते रमा आंख बंध करके लेट गइ.. तो भानु फ्रेस होकर रमाके सामने देखते घरसे बहार नीकलकर खेतोकी ओर चला गया.. तो रमा फटाफट अपना ब्लाउस सही करते बेडसे उतर गइ.. ओर वो बहार सब दरवाजा चेक करके सरलाके रुमकी ओर देखने चली गइकी सरला सो गइ हेकी नही.. उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. सब चेक करके अपने रुममे आगइ.. ओर दरवाजा लोक करके अपना फोन लेकर बेडपे बैठ गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६७

मनमे सोचते रमा आंख बंध करके लेट गइ.. तो भानु फ्रेस होकर रमाके सामने देखते घरसे बहार नीकलकर खेतोकी ओर चला गया.. तो रमा फटाफट अपना ब्लाउस सही करते बेडसे उतर गइ.. ओर वो बहार सब दरवाजा चेक करके सरलाके रुमकी ओर देखने चली गइकी सरला सो गइ हेकी नही.. उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. सब चेक करके अपने रुममे आगइ.. ओर दरवाजा लोक करके अपना फोन लेकर बेडपे बैठ गइ....अब आगे

उधर गांवमे लखन ओर बंसी श्रीधरके घरसे नीकलकर सीधेही लखनके खेतोपे चले गये.. लखन मालतीको दो कप चाइ लानेको कहेते सीधाही बंसीके साथ गोडाउनकी ओफीसमे चला गया.. ओर वहा दोनो बैठ गये ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे.. दोनोको अ‍ैसा फील होने लगाकी श्रीधर ओर जयश्रीका मामला उन दोनोने सुलजा लीया हे.. लेकीन आज बंसी ओर जागृतीकी हरकतकोभी लखन देख चुकाथा..

लखन : (हसते) बंसी.. आजतो तु बडाही खुस लग रहा हे..? लगता हे.. तेरी जागृतीके साथ बात होगइ हे.. हें..हें..हें.. दोनो ही बडे नैन मटक कर रहे थे.. हें..हें..हें..

बंसी : (सरमाते हसते) भाइ.. क्या आपने सब देखलीया..? हें..हें..हें.. लेकीन नही भाइ.. अगर बात पकी होगइ होती.. तो मे सबसे पहेले आपको बता देता.. हां.. अभी श्रीधरके घरपे बात थोडी आगे बढी हे.. जब वो वहा आइ.. तो मेने उनको आंख मारी थी.. तो वो सरमाकर हसने लगी.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) तो कमीने ओर क्या चाहीये तुजे..? अगर लडकी हसी तो समजले फसी.. हें..हें..हें.. कमीने इसका मतलब वोभी तेरे साथ आगे बढना चाहती हे.. तभी तो सरमाकर तेरे सामने हस रहीथी.. मारदे हथोडा.. हें..हें..हें..

बंसी : (सरमाकर हसते) नही भाइ.. मेरी बहेन हे..तो थोडासा डर लग रहा हे.. की उनसे कैसे बात करु..

लखन : (हसते) अरे क..मी..ने.. तो वो क्या तुजे सामनेसे आकर कहेगी की चल भैया.. चडजा मेरे उपर.. ओर चोदले मुजे.. हें..हें..हें.. बात करता हे.. अबे उलुके पठे.. वो तेरे साथ रीलेशन रखनेके लीये बीलकुल रेडी हे.. जा उसे बीना डरे अपने दिलकी बात कहेदे.. वो मना नही करेगी.. ओर सुन.. अगर वो हा कहेदे तो तेरे नीचे लीटानेमे कोइ देर मत करना.. अ‍ेक बार चोद लेना.. समजे..? बस लडकी अ‍ेक बार अंदर लेलेगी.. फीर वो हमेसाके लीये तेरी हो जायेगी.. हें..हें..हें..

बंसी : (सरमाते हसते) अबे कमीने.. मुजे तेरे जीतना अ‍ेक्सीरीयन्स थोडीना हे..? हें..हें..हें.. भाइ लगता हे श्रीधरकी मम्मी आपकी ओर देखकर कुछ ज्यादाही हस रहीथी.. हें..हें..हें.. कुछ गडबडतो नही..? क्या मस्त माल दीखती हे.. पता नही कमीना श्रीधर इनमे आगे क्यु नही बढता.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाकर हसते धीरेसे) नही यार.. वो हमारे दोस्तकी मम्मी हे.. ये तो हमने उनकी मदद की इसीलीये हस रही होगी.. बाकी श्रीधरको देखना हे.. भला हो हमारे मुनाका.. कमीनेने हम सब दोस्तोको ना जाने कोनसी देसी दवाइ पीलाइ हे.. सबको अ‍ेक लडकीसे संतोष ही नही होता.. हें..हें..हें..

बंसी : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. अ‍ेक बात कहु..? उस दवाइसे हमारे हथीयार थोडे बडे दीख रहे हे.. अ‍ैसा मुजे लगता हे.. अ‍ैसा लगता हे मे बुआको चोदता ही रहु.. अबतो बुआ भी मना करने लगी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुरात धीरेसे) बंसी.. यार मुजेभी अ‍ैसा लगता हे.. श्रीधर ओर हमारा साहील भी यही फरीयाद कर रहे हे.. हें..हें..हें..

बंसी : (धीरेसे) भाइ.. साहीलका नाम लीया तो याद आया.. आजकल वो कुछ ज्यादाही परेसान दिख रहा हे.. बात थोडी गंभीर होगी.. वोभी आपसे अकेलेमे मीलना चाहता हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे यार.. सामको सब इकठा होगे तब मील लुगा..

तभी मालती चाइ लेकर आगइ.. ओर लखनकी ओर कामुक स्माइल करते दोनोको चाइ देने लगी.. लेकीन लखनने आंखोके इसारोसे बंसीकी ओर इसारा कीया.. तो मालती सब समज गइ.. जब दोनोने चाइ पीली तो मालती कप लेकर चली गइ.. ओर कुछ देरके बाद बंसीभी लखनकी इजाजत लेकर अपने घरपे चला गया.. ओर लखन अकेला बैठाथा.. तभी उनके फोनकी रींग बजने लगी.. तो लखन फोन देखतेही हसने लगा..

लखन : (फोन उठाकर धीरेसे मुस्कुराते) हां भाभी.. तो आखीर आपने मुजे फोन कर ही दीया.. कहो..

रमा : (फोनपे धीरेसे) हंम.. देवरजी.. बहुत कमीने हो आप.. हें..हें..हें.. आखीर आपने अपनी बात मनवा ही ली.. कहो.. क्या कहेना चाहते थे आप..?

लखन : (हसते धीरेसे) अरे मुजे क्या कहेना हे.. अब जोभी कहेना हे आपको ही कहेना हे.. हें..हें..हें..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) क्या..? हें..हें..हें.. मुजे क्या कहेना हे..? कहीयेनां..? ओर आप खाना खाते वक्त क्या इसारा कर रहेथे..? अगर कीसीने देख लीया होता तो..? कहीयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आप बहुत खुबसुरत हे.. आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार होगया हे..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. अगर कीसीको पता चल गया तो..? समजलो आपके भाइ मुजे घरसे नीकाल देगे.. फीर मे कहा जाउगी..? कमसे कम मेरी नीलुके बारेमे तो सोचीये..

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लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मे आपको जानता हु.. हम दोनोके बारेमे आप कीसीको पता नही चलने देगी.. बस.. हम दोनोका रीलेशन सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगा.. ओर फीरभी आपकी तसलीके लीये कहेदु.. अब नीलुकी सब जीम्वेवारी हमारी हे.. ओर अगर आपकोभी घर छोडना पडे तो अब लखनके घरके दरवाजे आपके लीये भी हमेसा खुले हे.. आप सहेरमे मेरे पास आजाइअ‍ेगा.. मे आपको सम्हाल लुगा.. बस..?

रमा : (मनमे खुस होते) हें..हें..हें.. हंम.. मतलब आप अपनी जीद नही छोडेगे.. ठीक हे.. फीर सोचलो.. सारी जींदगी इस भाभीको जेलना पडेगा.. कही मुजे मजधार मे अकेला छोडके तो नही चले जाओगे..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने आपको अ‍ैसेही प्यार नही कीया.. अभी तक आप लखनको समजही नही पाइ.. कहो.. आपको कैसे यकीन दिलवाउ..? क्या मे सादी करलु आपसे..? हंम..? चलो मे सादीके लीयेभी रेडी हु.. हें..हें..हें..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) अरे नही नही.. फीर आपके भाइ कहा जायेगे..? हें..हें..हें.. आपने इतना केह दिया वोही मेरे लीये काफी हे.. ठीक हे.. मुजे आपका प्यार कबुल हे.. लेकीन याद खना.. ये प्यार सीर्फ हम दोनो अकेले होगे तबही होगा.. वरना हम दोनोकी बदनामी होजायेगी.. बाकी हम दोनोके बीच अ‍ैसेही सहेलज ननंदोइका रीस्ता होगा.. इस बातकी कीसीको कानो कान भनकभी नही लगनी चाहीये.. खास करके लता दीदीको.. बाकी सब बाते हम दोनो अकेले मीलेगे तब करेगे.. समज गयेनां..?

लखन : (मनमे खुस होते) जी भाभी.. हम बहुतही जल्द अकेले मीलेगे.. मेरा प्यार कबुल करनेके लीये थेन्क्स.. भाभी.. आइ लव यु..

रमा : (समरमाते धीरेसे) हंम.. आइ लव यु टु.. बस.. अबतो आप खुस हेनां..? हें..हें..हें.. मुजसे बातभी नही करते थे.. बहुत जीदी लडके हो आप.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) अरे खुस..? भाभी आपकोतो पता ही नही आज आपने मुजे कीतनी खुसी देदी हे..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. तो अब मे फोन रखदु..? हंम..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. थोडी देर मेरे साथ बाते कीजीयेनां.. आपसे बात करते बहुत अच्छा लगता हे..

रमा : (हसते) क्या बाते कीजीये..? मेरे सामने तो बोलते भी नही थे.. खेर छोडीये.. अभी आपके भाइ यहासे नीकले हे.. तभी तो आपको फोन कीया.. बस अब वो वहा आते ही होगे.. हम बादमे फुरसतमे बात करेगे.. मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे..

लखन : (हसते) भाभी.. अ‍ेक बात पुछु..? ये आपने अचानक इतना बडा फैसला क्यु कीया..? मुजे आज ही फोन भी कर दीया..? हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते धीरेसे हसते) आप कीतने कमीने हो..? अ‍ेकतो मेरी रातोकी नींद हराम करके रखी थी.. ओर उपरसे मुजसे बातभी नही करते थे.. ओर पुछ रहे हो की अचानक फोन क्यु कीया..? आप इतने तो बुध्धु नही हो.. हें..हें..हें..

लखन : (स्कुटरकी आवाज सुनते) भाभी.. फोन रखता हु.. लगता हे भानु भाइ आगये.. बाय..

रमा : (सरमाते धीरेसे) सुनो.. आइ लव यु.. हें..हें..हें.. बाय..

कहेते रमाने फोन काट दीया ओर फोनको चुमकर अपने सीनेसे लगाते मुस्कुराने लगी.. जैसे कोइ कीला फतेह करलीया हो.. आखीर रमाने भी अपने प्यारका इजहार करही लीया.. गोडाउनमे भानु ओर लखन दो घंटे तक अपने खेतोके बारेमे ओर सहेरके बीजनेसके बारेमे बाते करते रहे.. फीर भानु वापस चला गया तो लखनभी अपनी बाइक लेकर हवेलीपे आगया.. तब लता ओर नीलम होलमे बैठकर बाते कर रही थी..
 
लता नीलमको अबभी धिरेनसे दुर रहेनेके लीये समजा रहीथी.. लखन आतेही सीधा उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो लता सबके डीनरके लीये कीचनमे चली गइ.. तो कुछ देरके बाद नीलमभी अपने रुममे फ्रेस होने जाने लगी.. जब लखन फ्रेस होकर वापस रुमसे बहार नीकलही रहाथा.. तभी उनको सीडीयोकी ओरसे नीलम आती दीखाइ दी.. तो लखन वही रुक गया..

जैसेही नीलम उनके पास आइ लखनको दरवाजेपे खडा देखते ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. तो लखनभी उनकी ओर कातील स्माइल करते मुस्कुराने लगा.. तो नीलमभी लखनकी नजरको पहेचानते बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनके सामने देखते मुस्कुराते धीरेसे थेन्क्स.. कहेते अपने रुमकी ओर जाने लगी.. तो लखन समज गयाकी नीलमने उसे क्यु थेन्कस कहा.. ओर लखनने जटसे नीलमका हाथ पकडलीया..

ओर अपने रुममे खीच लीया.. तो नीलक गभराते सख्तेमे आगइ.. नीलम कुछ समजे इनसे पहेलेही लखनने नीलमको अपनी बाहोमे भरते उनके होठोको जोरोसे चुम लीया.. ओर नीलमको जटसे छोड दीया.. तब नीलम बहुतही सर्मसार होगइ.. उनको कुछ समजमे ही नही आयाकी अचानक लखनने अ‍ैसा क्यु कीया..? ओर वो लखनकी ओर देखते जटसे अपने रुमकी ओर चली गइ.. तब लखनभी नीलमकी ओर कातीलाना मुस्कुराते नीचे डाइनींगपे आगया..

तब कुछही देरके बाद नीलमभी फ्रेस होकर नीचे आगइ.. ओर आकर लखनके सामने बैठ गइ.. तो लताभी लखनके पास उनसे सटकर बैठ गइ.. तब दया ओर रजीया तीनोको खाना परोसने लगी.. तब नीलम बडीही सर्मसार होते लखनसे नजरे चुराते उनकी ओर टेडी नजरोसे देखती रही.. उनको आज लखनकी हरकतसे बडाही आस्चर्य हुआ.. क्युकी इस घरमे सीर्फ लखनही था.. जो उनको कुछ नही कहाथा.. तभी..

लता : (मुस्कुराते) दया बहेन.. आप सब खाना इधर रखके आपभी तीनोभी हमारे साथ बैठ जाइअ‍ेनां..

दया : (मुस्कुराते) नही दीदी.. आपही खा लीजीये.. हम अभी बादमे खा लेगे..

कहेते दया कीचनमे चली गइ.. तब लखन ओर लता नीलमकी स्कुलके बारेमे बाते करने लगे.. ओर तैय ये हुआ की जबतक सहेरमे रहेने रहेने नही जायेगे तबतक नीलमकी स्कुलसे छुटी.. तो नीलम मायुस होगइ.. ओर लखनकी ओर देखने लगी.. तभी उसे अपने पैरोपे कीसीका पैर महेसुस हुआ.. तो नीलम गभरा गइ.. ओर लताकी ओर नजर करके नीचेकी ओर टेडी नजरसे देखते अपने दोनो पैर पीछे खीच लेती हे..

नीलमने देखा तो वो पैर लखनके थे.. जो वोभी अपना पैर पीछे खीच रहा था.. तो देखते ही नीलम बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर नजर जुकातेभी टेडी नजरोसे लखनकी ओर अजीब नीगाहोसे देखती रही.. तो लखन नीलमके सामने देखकर मुस्कुरा रहाथा.. लेकीन नीलम उनको अजीब नीगाहोसे देखती रही.. लेकीन उनको लगाकी लखन उनके जीजु हे तो उनके साथ मस्तीया कर रहे हे.. तो वो भी सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तभी अचानक लताने केह दीया..

लता : लखन.. भाभी भी नीलुके लीये थोडी परेसानथी.. तो मे सोच रही हु.. जबतक हम सहेर नही जाते तबतक नीलु भलेही उनके साथ रहेती.. आप कल सुबह नीलुको भाभीके पास छोडके आजाओ.. हम जब सहर जायेगे तब इनको हमारे साथ लेकर चले जायेगे.. वरना दो पहोरको भानुभाइको कहेना वो नीलुको लेते जायेगे..

लखन : (जटसे) लता.. क्यु वहा आना जाना..? हम कल या परसो तो नीकल ही रहे हे..

लता : (मुस्कुराते) नही.. अभी मंजुभाभीका फोन आयाथा.. कहा हेकी जबतक वहा पुनम ओर सृती वापस नही आजाती तबतक तुम दोनोको इधरही रहेना हे.. ओर येभी कहा हेकी उनको आनेमे सायद दो तीन दिन लग जायेगे.. जानु.. अब पुनोदीदी वापस नही आती तबतक हमे यही रहेना हे.. आप कल भानुभाइको कहेना दो परहोरको नीलुको यहासे लेकर जाये.. या फीर आप उनको छोड देनां..

लखन : (जुठ बोलते) अरे नही नही.. मे ही कल सुबह नीलुको छोडकर आता हु.. सायद कल भानुभाइ सहेरमे खरीदी करने जायेगे.. तुम भी चलोना.. अ‍ेक दो दिन वही रहेना.. हें..हें..हें..

लता : (तीरछी नजरोसे देखकर मुस्कुराते) नही.. मे यही ठीक हु.. आप कल सुबह नीलुको छोड देना.. मुजे अब कही नही जाना.. हें..हें..हें.. अब हम डायरेक्ट सहेरही जायेगे.. कल आप इतनी सेवा करदेना.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) चलो ठीक हे.. मतलब कल पुरी धरवाली नही तो आधी घरवालीकी सेवा करनी हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते लखनको अ‍ेक जांगपे चपत लगाते) कीतने कमीने हो.. ये क्या बोल रहे हो..? कुछतो सरम करो.. हर वक्त मजाक सुजता हे.. ये आपकी आधी घरवाली कहासे होगइ..?

लखन : (जोरोसे हसते) अरे.. क्यु मार रही हो.. हें..हें..हें.. क्या ये मेरी साली नही हे..? अब मेरी सालीको आधी नहो तो क्या पुरी घरवाली कहु..? बात करती हे.. ये मत भुल.. नीलु मेरी अ‍ेक लोती साली हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते कातीलाना मुस्कानसे) लखन.. आप अपनी हरकतोसे बाज नही आओगे.. ठीक हे.. लेकीन नीलुकी ज्यादा मस्ती मत करना.. समजे..?

लखन : (हसते) अरे नही करुगा बाबा.. तुम बीवीया सक बहुत करती हो.. पुछ नीलुको.. अभी उपर मेने उनकी कीतनी मस्तीया कीथी.. इसीलीये तुजे केह रहाथा की तुमभी साथ चल.. कुछ दिन तुमभी इधर रहेना.. फीर हम सहेर चले जायेगे..

नीलम : (गभराते जटसे) दीदी.. वो.. वो.. जीजु..

लता : (सरमाते धीरेसे) नीलु.. अभी कुछ मत बोल.. लखन.. मुजे अब कही नही जाना.. आपही इसे छोड देना.. मुजे अब मंजुभाभीने कही जानेको मना कीया हे.. अब घरपेभी कोइ नही हे..

दोनोही बाते करते डीनर करलेते हे.. तब लखन थोडी देरके लीगे गांवमे अपने सभी दोस्तोको मीलने चला जाता हे.. तो लता नीलुको लेकर उपर चली गइ.. नीलमकोभी लगा की अभी लखनने उनके साथ जोभी हरकते की उनकी साली समजकर मस्तीया करते की.. तब दया रजीया ओर चंपाभाभी खानेके लीये बैठ गइ.. चंपाभाभी अब हमेसाके लीये वही रहेने आगइ थी.. यहा आनेके बाद उनको देवायतसे मीलनेका अ‍ेक बारभी मौका नही मीलाथा.. तो उनकी काम वासनाभी थोडी बढ गइथी..
 
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