Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 35 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

आज अ‍ेक बार फीर पुरे गांवमे चुदाइका तांडव मचा हुआथा.. सबलोग अपने अपने घरपे खाना खाकर सोनेकी तैयारीया कर रहेथे.. तब ही देवायत राजीवकी बाइक लेकर गांवमे चुपकेसे आ चुकाथा.. ओर आतेही सीधा सुधीरके घरपे चला गया.. ओर अपनी बाइकको भी घरके आंगनमे अंदर लेलीया.. ओर दरवाजा बंध कर दीया.. तब चारु बाइककी आवाज सुनकर बहार नीकली.. ओर देवायतको देखतेही मुस्कुराने लगी..

चारु ओर नीशा साम ढलतेही अपनी सुहागरातकी तैयारीया कर रहीथी.. दोनोने मीलकर आज बेडको फुलोसे सजा दीया था.. तब दोनोही साथमे बाथरुममे घुस गइ.. ओर नहाकर बहार आतेही अ‍ेक दुसरेका शींगार करने लगी.. फीर दोनोही माथेपे सींदुर गलेमे मंगइसुत्र डालकर दुल्हनकी तराह रेडी होगइ.. बादमे दोनोने डीनर करलीया तब होलमे बैठकर देवायतका इन्तजार करते बाते कर रही थी..

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चारु : (मुस्कुराते) नीशा.. तुम अभी तक वर्जीन होनां..? तुजे आज सब पता चल जायेगा.. की सुहागरातमे पतीका सुख क्या होता हे.. आज तेरी वाकइ देवुके साथ फस्ट नाइट हे.. तो पहेले तुम दोनो अकेलेही मीललो.. फीर मे तुम दोनोको बादमे आकर जोइन कर लुगी..

नीशा : (बहुतही सर्मसार होते) नही भाभी आपभी साथमे रहेना.. पहेले आपने उनके साथ सादी कीहे.. मेतो खामखा बीचमे आगइ.. भाभी.. क्या सचमे उनका बहुत बडा हे..? हंम..? मे उसे जेलतो पाउगीनां..?

चारु : (नीशाके गाल चुमते) अरे मेरी बनो.. क्यु खामखा डर रही हे..? अ‍ैसा कुछभी नही होगा जो तु सोच रही हे.. बस.. अबतो हम दोनोके मजेही मजे हे.. क्या हमारी वंदुको कुछ हुआ..? पहेले तुम दोनो अपना नीपटालो.. मे बादमे आजाउगी..

नीशा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) भाभी.. मेने वंदुकी हालत देखी हे.. फीरभी वो कीतनी खुस थी.. भाभी.. आपतो हमारे पतीके साथ कइ बार सेक्स कर चुकी हे.. क्या आपको इनके साथ पहेली बार कुछ हुआथा..?

चारु : (बाइककी आवाज सुनतेही) हां नीशा.. उनका रमेशसे बहुत बडा हे.. मेने रमेशके साथ बहुतही कम बार सेक्स कीया हे.. लेकीन जब देवुसे मे पहेली बार बीस्तरमे मीली.. तब उसने फीरसे सुहागरातका अहेसास करवा दीयाथा.. तब मुजे पता चला पतीका सुख क्या होता हे..

तब ही मेने मनही मन देवुको अपना पती मानलीया था.. ओर आज मेरी सारी तम्मना पुरी होगइ.. नीशा.. लगता हे वो आगये हे.. तुम अपने रुममे जाकर रेडी रहो मे घरके सब दरवाजे लाइटे बंध करके उनको लेकर आती हु.. ओर हां बेडपे बीचमे घुंघट नीकालकर बैठना.. समज गइनां..? जा जल्दी..

कहातो नीशाके दिलकी धडकन बढ गइ.. वो बहुतही सरमाते हसते हुअ‍े हां मे गरदन हीलाते अपने रुममे चली गइ.. तब चारु देवायतको लेने बहार चली गइ.. फीर उनको अंदर लेकर घरके सभी दरवाजे लाइटे बंध करने लगी.. तो देवायतभी चारुको दुल्हनके लीबासमे देखकर पागल होने लगा.. जैसेही चारु उनके पास आइ दोनोने अ‍ेक दुसरेको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे..

चारु : (खुस होते मुस्कुराते धीरेसे) देवु.. आइ लव यु.. आइअ‍े आपकी दुल्हन अपने रुममे रेडी हे.. जानु.. उनका अ‍ेक हप्ते पहेलेही पीरीयड होचुका हे.. तो बच्चेका पुरा चान्स हे.. हो सकेतो आजही उनका सब काम तमाम करदो.. ओर हां.. आप दरवाजा खुला रखना.. अगर उनको कुछ हुआ तो मे आजाउगी..

देवायत : (होंठ चुमते) चारु.. तुमभी साथ चलनां.. हम तीनोही अ‍ेक साथ..

चारु : (जटसे धीरेसे) नही जानु.. आप समजोना.. वो बहुत ही सर्मीली हे.. ओर उपरसे पुरी तराह वर्जीन.. आप समज गयेनां.. मेने कपडे बपडे सब रेडी रखे हे.. आजही उसे औरत बनाकर अपना बीज डालदो.. वो भी प्रेगनेन्ट होनेके लीये रेडी हे.. ओर हां.. आज उनपे कोइ रहेम मत करना.. आज उनकी रीयलमे सुहागरात हे.. पहेले आप दोनो मीललो.. फीर मेभी आकर आप दोनोको जोइन करलुगी..

देवायत : (होठोको चुमते बुब्स मसलते) चारु.. तुम जल्दी आना.. मुजे तेरे साथ मीलन करना हे..

चारु : (सीसकारीया करते सरमाते धीरेसे) जानु.. समजोना मे आती हु.. आपनेतो आतेही मुजे गरम करदीया.. अब जाइअ‍े फटाफट वरना मे यही आपसे चुदवा लुगी.. हें..हें..हें..

कहेते चारुने हसते हुअ‍े देवायतको नीशाके रुमकी ओर धका मार दीया.. तो देवायत भी मुस्कुराते नीशाके रुममे चला गया.. तो वहा अंदर नीशा बेडके बीच अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडकर घुंघटमे देवायतका इन्तजार करते बैठीथी.. जैसेही देवायतके कदमोकी आवाज सुनी.. अ‍ेक बारतो उनकी दिलकी धडकन रुक गइ.. तभी देवायत नीशाके पास आकर बैठ गया.. ओर उनका घुंघट हटाकर उनकी ओर देखने लगा..

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तब नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी नजरे जुकाते बैठी रही.. जैसेही देवायतने प्यारसे नीशाके गालपे हाथ रखा.. नीशा सरसे पांव तब हील गइ.. ओर अपनी आंखे बंध करते देवायतके स्पर्सको महेसुस करने लगी.. उनकी चुत हरकतमे आगइ.. ओर दोनो बुब्स कठोर होगये.. आज सबकुछ होने वाला था.. देवायतने धीरेसे नीशाके होठोपे अपना होंठ रखदीया.. तो नीशा पागल जैसी होगइ..

ओर उसने सभी सरम त्यागके देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. पुरे घरमे अंधेरा छाया हुआथा.. धीरे धीरे प्यार करते दोनोही आगे बढते प्यारकी आगोसमे चले गये.. तब उनको पता नही थाकी चारु बहारसे उन दोनोको देख रही हे.. ओर अपनी चुतको सहेला रही हे.. धीरे धीरे करते देवायत ओर नीशाके तनसे कपडे नीकलते गये.. देवायत नीशाके गलेको होठोको ओर उनके उरोजोको चुमता रहा.. ओर नीशा मदहोस होने लगी..

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दोनोही सीर्फ अपने अंतर वस्त्रोमे रेह गये थे.. देवायतने नीशाकी चडीमे उंगलीया फसाली.. ओर जटकेसे नीशाकी चडी नीकाल दी.. तो नीशा पुरी नंगी होगइ.. उसने सरमके मारे दोनो हाथ अपनी चुतपे रख दीया.. ओर सरमाकर इधर उधर देखते देवायतसे नजरे चुराने लगी.. देवायत नीशाके उपर जुकते उनके उरोजोको मुहमे लेकर चसने लगा.. तो नीशा छटपटाने लगी.. ओर देवायतके सरको पकड लीया..

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नीशा बहुत सरमा रहीथी.. देवायत बारी बारी दोनो उरोजोकी नीपलको अपने होठोपे दबाते खीच रहाथा.. देवायतकी इसी हरकत नीशाको पागल बनानेमे काफी थी.. वो पुरी तराह मदहोस होकर सीसकारीया करते देवायतके बालोको सहेलाने लगी.. ओर देवायतके सरको अपने बुब्सपे दबाने लगी.. तभी देवायत उनके उरोजोको चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. देवायतने उनकी नाभीको चुमलीया.. तो नीशा अपनी कमर उछालते मुस्कुराने लगी..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. वहा नही.. बहुत गुदगुदी होती हे.. हें.. हें.. हें..

देवायत : (सामने देखते) नीशा.. आज मुजे जी भरके इस तनके साथ खेलने दे.. अब ये तन सीर्फ मेरा हे..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) हां जानु.. सीर्फ ये तन ही नही.. अब पुरी नीशा आपकी हो चुकी हे..

तभी देवायत नीशाके पैरोके बीच बैठ गया.. ओर नीशाकी कमरमे हाथ फसाके उनको थोडा अपने मुहके पास खीच लीया.. तो नीशा बहुत कुछ समज गइ.. ओर वो सरमके मारे अपने हाथोमे अपना मुह छुपा लेती हे.. तभी देवायतने जुकते अपना मुह नीशाकी चुतपे रख दीया.. ओर नीशाकी चुतमे जीभ डालकर चाटने लगा.. तब नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर मदहोसीके आलममे चली गइ..

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उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. वो अपनी कमरको धीरे धीरे उछालने लगी.. देवायतकी इस हरकतने नीशाको पुरी तराह कामातुर करदीया.. दवायत नीशाकी चुतमे अपनी जीभ घुसाके उनके चुतके दानेको छेडने लगा.. तो नीशाने अपने दोनो हाथ देवायतके सरपे रख दीया.. ओर सरपे हाथ रखकर अपनी चुतपे दबाने लगी.. बहार चारु दोनोकी हरकत देखते अपनी चुत ओर बुब्सको मसलती रही..
 
चारुसे अब अपने आपको कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. ओर वो फटाफट अंदर आगइ.. तो नीशा उसे देखकर बहुतही सरमाने लगी.. चारु अंदर आतेही अपनी सारीको नीकालने लगी.. फीर ब्लाउस पेटीकोट नीकालकर सीर्फ ब्रा पेन्टीमे रेह गइ.. ओर वो बेडपे चडकर नीशाके मुहके पास बैठ गइ.. फीर जुकते नीशाके होठोको चुमते उनके बुब्स मसलने लगी.. तब थोडीही देरमे नीशाकी भी सभी सरम चली गइ..

ओर वो चारुके होठोको चुमते उनका साथ देने लगी.. तभी देवायत नीशाकी चुतको चाटते अ‍ेक उंगलीसे चुतके दानेको छेडने लगा.. तब नीशा पागल जैसी होगइ.. ओर चारुके होठोको जोरोसे चुमते उनके बुब्सको मसलने लगी.. अब नीशासे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. ओर उनकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. वो अब जल्दसे जल्द देवायतके लंडको अपनी चुतमे लेना चाहती थी.. ओर वो सब सरम त्यागकर बेडपे बैठ गइ..

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नीशा : (देवायतके सरको पकडते अपने उपर खीचते) जानु.. बस.. बस.. अब ओर नही.. आप मेरे उपर जल्दी आजाइअ‍े.. बुजा दीजीये मेरी बरसोकी अधुरी प्यास.. प्लीज.. देर मत कीजीये.. बना दीजीये मुजे ओरत..

चारु : (सरमाते धीरेसे) नीशा.. जल्दबाजी मत कर.. अभी तो असली खेल बाकी हे.. (देवायतकी ओर देखते) जानु.. आप इधर आजाइहे.. हमे भी आपका रस पीना हे.. नीकाल दीजीये ये आपकी चडी..

देवायत घुटनोसे चलकर चारुके पास आगया.. तो चारुने उंगलीया फसाकर देवायतकी चडीको खीचकर नीचे सरकादी.. तब उनका तगडा लंड हवामे लेहराते जटके मारने लगा.. तब नीशा उसे देखती ही रेह गइ.. वो मुह फाडकर लंडको देखती रही.. उसे सुधीरके लंडके आगे देवायतका लंड अ‍ेक गध्धेके लंड जैसा दीखने लगा.. ओर वो थोडासा डरके थोडी पीछे बैठ गइ.. तो चारु सब समज गइ..

चारु : (मुस्कुराते) नीशा.. डर मत.. देखले.. यहीतो हमे असली मजा देगा.. चल दोनो मीलकर अ‍ेक बार इनके रसको नीचोड लेती हे.. फीरतो ये हम दोनोको सुबह तब नीचोडते ही रहेगे.. क्यु जानु..? हें.. हें.. हें..

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कहेते चारु नीशाको हाथ पकडकर अपने पास खीच लेती हे.. फीर देवायतके लंडको पकडकर अपनी मुठीमे थामते उनपे अपनी जीभ फीराने लगती हे.. ओर नीशाके बाल पकडकर उनका मुहभी लंडके पास लेजाती हे.. ओर नीशाको आंखोके इसारेसे इसे मुहमे लेनेको कहेती हे.. तब नीशाभी सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर धीरेसे अपनी जीभ नीकालकर देवायतके लंडको चाटने लगी.. दोनो लंडको चाटने लगी..

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कुछही देरके बाद नीशा पुरी तराह खुल चुकीथी.. वो चारुको हटाकर देवायतका पुरा लंड मुहमे लेकर जोरोसे चुसने लगती हे.. दोनोही बारी बारी लंडको चुसती रही.. तब अचानक देवायतके लंडसे पीचकारीया छुट पडी.. तो चारु ओर नीशाने दोनोने अपना मुह खोल दीया.. ओर देवायतके रसको पीने लगी.. अब दोनोही देवायतको खुलकर प्यार करने लगी.. फीर तीनो बाथरुममे जाकर सही हो गये.. ओर बहार आगये..

चारु : (मुस्कुराते) नीशा.. अब तुम औरत बननेके लीये तैयार होजा.. मे इधरही बैठी हु.. तुजे कुछ हुआ तो मेतुजे सम्हाल लुगी.. चल बीचमे लेटजा..

देवायत : (हसते) चारु.. क्यु बेचारीको डरा रही हो.. उसे कुछभी नही होगा.. मे प्यारसे करुगा.. नीशा.. आजा.. आज तेरा कल्याण करही देता हु..

नीशा : (पैर फैलाकर लेटते) जानु.. प्यारसे.. हंम..? देखना.. मे अभीतक वर्जीन हु..

चारु : (हसते) अरे हां तु लेटजा.. आज सही मायनेमे ये तेरा पती होजायेगा.. फीर तेरे सुधीर भाइको खुस खबर सुनाना.. हें.. हें.. हें.. की आप मामा बनने वाले हे.. हें.. हें.. हें..

कहातो तीनोही हसने लगे.. नीशा लेट गइ तब देवायत उनके पैरोके बीच आकर बैठ गया.. ओर अपना लंड पकडकर नीशाकी चुतपे धीरे धीरे घीसने लगा.. तो नीशा बहुतही कामुक होगइ.. ओर आधी आंख चडाते सीसकारीया करने लगी.. जब लंड गीला होगया तो देवायतने उनकी चुतमे थोडासा फसादीया.. तो नीशाकी आंख बडी होगइ.. ओर वो मुह फाडके देवातकी ओर देखने लगी..

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तभी देवायत नीशाके उपर जुकते उनपे लेट गया ओर नीशाके दोनो हाथ पंजोसे पकड लीया.. फीर उनके बुब्सको चुमते चुमते उनके होठोको चुमने लगा.. ओर नीशाके होठोको लीपलोक करलीया.. तब चारु जटसे नीशाके सरके पास बैठ गइ.. ओर उनके सरको सहेलाने लगी.. ओर देवायतकी ओर देखते मुस्कुराकर आंखोसे इसारा कर दीया.. तो देवायतने अपनी कमरको उची करते अ‍ेक जोरोका जटका मारदीया..
 
नीशाकी जोरोकी चीखके साथ उनकी आंख बडी होगइ.. ओर उनमेसे आंसु नीकलने लगे.. वो दोनो पैर बेडपे पटकते देवायतसे लीपलोक छुडवानेकी कोसीस करने लगी.. नीशा कुछ समजे उनसे पहेले ही देवायतने अ‍ेक ओर जटका मारदीया.. तो नीशा चीखकर बेहोस होगइ.. उनकी चीख देवायतके मुहमे ही दब गइ.. ओर देवायत लीपलोक छोडके हाथके बल उचा होगया.. ओर नीशाको बेहोसीमे जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा..

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चारु : (मुस्कुराते नीसाके बालोको सहेलाते) जानु.. इसे होस आजाये उनसे पहेले आप फटाफट चोदलो.. अभी आपके हथीयारके लायक होजागेथी.. क्या आपने वंदुके साथ भी अ‍ैसे कीयाथा..? हंम..?

देवायत : (जोरोसे चोदते) हंम.. अभी कुछ मत बोल.. मुजे चोदने दे.. उनके साथ भी यही कीयाथा.. वोभी बेहोस होगइ थी.. जैसे तुम यहा हो.. वहा रश्मी उनके पास थी..

चारु : (जुठे गुस्सेसे) कीतने कमीनेहो आप.. मेरी बेटीको भी बेहोस करदीया.. चोदो फटाफट..

ओर देवायत कुछ बोले बीना ही नीशाको जोरोसे चोदता रहा.. उनका पुरा लंड नीशाकी चुतसे नीकले खुनसे रंगा हुआ था.. आज सचमे नीशाका कौमार्य भंग हुआथा.. काफी देर देवायत नीशाकी चुदाइ करता रहा.. तब नीशा दर्दसे अपना मुह बीगाडने लगी.. ओर बेहोसीमे ही देवायतको हाथसे रोकनेकी कोसीस करने लगी.. तब देवायतने पुरा लंड नीशाकी चुतमे घुसाकर चोदना रोक दीया.. ओर नीशाके उपर लेटते उनके होठो ओर बुब्सको चुमने लगा..

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चारु : (धीरेसे मुस्कुराते) बस.. बस.. बेबी.. होगया.. अभी दर्द चला जायेगा.. मेरी प्यारी बच्ची..

नीशाने धीरेसे अपनी आंख खोलदी.. तब उनके पास चारु बैठीथी ओर नीशाके सरको सहेला रहीथी.. नीशा उनकी ओर देखते अपने आंसु बहाने लगी.. ओर मुस्कुरानेकी कोसीस करते बहुतही सरमाने लगी.. लेकीन उनको दर्दभी हो रहाथा.. तो वो अपना मुह थोडा बीगाडते.. अपना मुह इधर उधर करने लगी.. उनको भी पताथा की ये दर्द थोडी देरके लीयेही हे.. देवायत उनके होठो ओर बुब्सको चुम रहाथा.. तब नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर वो देवायतके बालोको सहेलाने लगी.. तो चारुभी खुस होते मुस्कुराने लगी..

नीशा : (धीरेसे सरमाते) भाभी.. नीचे बहुत जलन हो रही हे.. क्या पुरा अंदर हे..?

चारु : (खुस होते मुस्कुराते) हां नीशा.. तु अब वाकइ अ‍ेक कलीसे फुल होगइ हे.. आज तुमने औरत होनेका सुख पालीया हे.. बस अब हमे जल्दीसे अ‍ेक प्यारेसे बच्चेकी खुसखबरी सुनादे.. तो गंगा नहाये.. हें..हें..हें..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. थेन्क्स.. आज मे बहुत खुस हु.. आप मुजे पहेले क्यु नही मीले..? आज पता चला.. इस सुखके लीये सरम नही.. हिमंत चाहीये.. जो मुजे चारुभाभीने दी.. थेन्क्स भाभी..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमते) नीशा.. अब कैसा लग रहा हे..?

नीशा : (सरमाते मुस्कुराते) पहेलेसे बेटर.. जानु.. आज पता चला सुहागरातमे क्या क्या होता हे.. अंदर हेतो भलेही थोडा दर्द हो लेकीन फीरभी अच्छा लग रहा हे.. अ‍ैसा लगता हे मे जनतकी सैर कर रही हु..

चारु : (खुस होते मुस्कुराते) नीशा.. अगर अच्छा लग रहा हे तो फीर सुरु करे..? हंम..?

नीशा : (सरमाते धीरेसे) हंम.. जानु.. लेकीन धीरे धीरे.. हंम..? क्युकी अभीभी थोडा दर्द हे..

देवायत : (होठोको चुमते) अरे मेरी प्यारी रानी.. प्यारसे करुगा.. लेकीन अभी नही.. थोडी देरके बाद.. जब तेरा पुरा दर्द खतम होजाये.. चल रेडी होजा.. आज तो जब तक तुजे प्रेगनेन्ट नही करदुगा.. तबतक मे तेरे उपरसे उतरने वाला नही हु.. फीर आराम करती रहेना.. चल..

नीशा : (बहुतही सर्मसार होते) भाभी.. क्या पहेली बारमे ही सब होजायेगा..?

चारु : (मुस्कुराते) हां नीशा.. तुम बहुत नसीब वाली हो.. तुम फीकर मत कर.. आज ही सबकुछ होजायेगा..

कहातो नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर चारुकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. तो चारुभी खुस होते उनके सरको सहेलाने लगी.. ओर कुछ देरके बाद देवायतभी धीरे धीरे कमर हीलाते नीशाको चोदने लगा.. तब कुछही देरमे नीशाके मुहसे कामुक सीसकारीया नीकलने लगी.. ओर वो फीरसे मदहोस होते चुदाइका आनंद लेने लगी.. तब चारुभी नीशाके होठो ओर उनके उरोजोको चुमते उनकी कामवासनाको ओर भडकाने लगी..
 
जब ये तीनो अपनी सुहागरात मनाते चुदाइका आनंद ले रहेथे.. तो उनको पता ही नही थाकी आज रमेश अपने घरपे अकेला हे.. उनको पता थाकी आज कल वंदना रश्मीभाभीके घरपे रुकी हुइ हे.. तो उसने चारुके नीशाके घर जातेही अपने घरके बहारके दरवाजेको बंध करके लोक करदीया.. ओर घरमे आकर फोन लगाकर उसने जयाभाभीसे घरपे अकेले होनेकी बात करली.. तो सुनकर जयाभाभी भी बहुत खुस होगइ..

ओर जयाभाभीने खाना खातेही सबको आज बहुत गरमी हे.. कहेकर अपनी घरकी छतपे सोनेकी प्लानींग करली.. जयाको लगता थाकी उनकी बात कोइ ध्यानमे नही लेगा.. लेकीन अ‍ेक सख्स था जो उनकी हर हरकतपे नजर रख रहाथा.. वो जयाके छतपे सोनेकी बात सुनकर अ‍ेलर्ट होगइ.. उनको लगाकी जया अकेली छतपे क्यु सोने जा रही हे..? इसमे जरुर कुछ दाल मे काला होगा.. ध्यान रखना पडेगा..

यही सब सोचते वो तीरछी नजरसे जयाको देखने लगी.. तो जया मनही मन बहुत खुस हो रहीथी.. वो सख्स कोइ ओर नही उनकी बेटी जागृती थी.. जबसे उन्होने जया ओर रमेशको लाइव चुदाइ करते देखलीया था.. तबसे वो अपनी मां जयाके उपर बरोबर नजर रख रहीथी.. लेकीन उनको बंसीको भी सेट करना था.. तो वो आज बंसी ओर सांतीकी चुदाइ भी देखना चाहती थी..

जागृतीने पहेले ही बंसीके रुमकी खीडकी थोडीसी खुली रखदी थी.. जब जागृती ओर सांती घरका काम नीपटा रहीथी.. तबही जया अपना बीस्तरा लेकर घरकी छतपे चली गइ.. तो जागृती उसे टेडी नजर करके देखती रही.. फीर सबलो अपने अपने रुमपे चले गये.. तब जागृती कुछ देरके लीये सांतीसे बात करने उनके रुमपे चली गइ थी.. लेकीन जब वापस नीकली तब वो छुपकेसे घरकी सीडीया चडने लगी..

ओर उपर छतकी सीटीयो तक जाकर अपना सर थोडासा नीकालते देखने लगीकी उनकी मां सोइ हेकी नही.. तब जया अपने बीस्तरपे करवटे ले रहीथी.. तो जागृती धीरेसे वापस नीचे आगइ.. ओर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजेसे सांतीके रुमकी ओर नजर गडाये खडी रही.. तब कुछही देरमे सांती सज धजके रुमसे बहा नीकली.. ओर रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके बंसीके रुममे चली गइ..

तो जागृती फटाफट बहार नीकलकर अपने रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करती हे.. ओर कीचनमे जाकर उनके छोटेसे दरवाजेसे घरके बहार आंगनमे चली जाती हे.. ओर घुमकर बंसीके रुमके पास आकर उनकी खीडकीसे अंदरके सब नजारे देखने लगीती हे.. देखातो बंसी ओर सांती दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे रहेते अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुम रहेथे.. जीसे देखाकर जागृती मुस्कुराने लगी..

पंद्नह बीस मीनीटके बाद जब बंसीके रुममे चुदाइका तांडह हो रहाथा तब जागृतीभी उतेजीत होकर अपनी चुतमे उंगली कर रहीथी.. उसी वक्त देर रात रमेश अपने घरकी छतपे आगया.. देखतो उपर घना अंधेरा छाया हुआ था.. पुरे गांवमे सनाटा लग रहाथा.. उनके घर ओर सामतके घरके बीच सीर्फ तीन मकानही थे.. तब रमश अ‍ेक छतसे दुसरी छतपे जाते सामतके घरकी छतपे चला गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७२

पंद्नह बीस मीनीटके बाद जब बंसीके रुममे चुदाइका तांडह हो रहाथा तब जागृतीभी उतेजीत होकर अपनी चुतमे उंगली कर रहीथी.. उसी वक्त देर रात रमेश अपने घरकी छतपे आगया.. देखतो उपर घना अंधेरा छाया हुआ था.. पुरे गांवमे सनाटा लग रहाथा.. उनके घर ओर सामतके घरके बीच सीर्फ तीन मकानही थे.. तब रमश अ‍ेक छतसे दुसरी छतपे जाते सामतके घरकी छतपे चला गया....अब आगे

तो वहा जया रमेशके इन्तजारमे अपने बीस्तरपे लेटी हुइ थी.. जैसेही रमेशके आनेका आभास हुआ तो वो जटसे सीडीओकी ओर नजर डालते उठकर बीस्तरपे बैठ गइ.. तभी रमेशभी उनके पास आकर बैठ गया.. ओर बैठेही जयाको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. दोनोही मदहोस होगये.. रमेश जोरोसे जयाके बुब्सको मसलते होठोको चुम रहाथा..

जैसेही रमेशने जयाके बुब्सको पकडके मसला जया पुरी तराह कामातुर होगइ.. ओर रमेशके लंडको पकडते धीरेसे मसलने लगी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समाजानेके लीये मचलने लगे.. तभी..

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जया : (भारी सांस लेते धीरेसे) बस.. बस.. रमेश.. यहा छोडो.. कोइ आजायेगा.. हम बादमे मीलेगे.. यहा हमारा मीलना मतलब बहुत बडा रीस्क हे..

रमेश : (होंठ छोडते धीरेसे) पागल हो गइहो क्या..? क्या बादमे मीलेगे.. चल आज कीतना अच्छा मौका हे..

जया : (सरमाते धीरेसे) रमेश.. आप समजते क्यु नही..? मेभी आपसे मीलनेके लीये तरस रही हु.. ओर मुजे आपसे अ‍ेक बातभी कहेनी थी.. इसीलीये मेने आपको मीलनेकी हां कहेदी.. समजो इस वक्त सबलोग नीचे सो रहे हे.. सीर्फ सांती ओर बंसीही जागते होगे.. कही वो देरसे इधर ना आजाये.. यहा मीलन करनेमे बहुत बडा खतरा हे.. अबतो मेरी जागुभी मुजपे सक करने लगी हे..

रमेश : (धीरेसे) अरे तो मे यहा मीलनेके लीये थोडीना केह रहा हु.. चल मेरे घरपे.. आज घरपे कोइ नही हे.. सीर्फ मे अकेलाही घरपे हु.. वहा हम दोनो आरामसे मील सकेगे..

जया : (धीरेसे) क्यु..? आपकी बीवी कहा गइ..? क्या वो घरपे नही हे..?

रमेश : (धीरेसे) हां जया.. वोभी घरपे नही हे.. इसीलीये तो तुजे मीलनेके लीये फोन कीया था.. सुन वो सुधीर उनके कामके लीये कही दो दिनके लीये सहेर गया हे.. तो नीशा भाभी घरपे अकेली हे.. तो चारु उनके घर सोने चली गइ हे.. तो हमारे पास ये दो राते हे.. तु कलभी इधर सोना मे देर रात तुजे लेजाउगा.. ओर सुबह होनेसे पहेले तुजे यहा छोड जाउगा.. चल मेरे साथ.. कोइ पुछे तो केह देना मे टंकीके पीछे सोइ हुइ थी.. चल हम घरपे आरामसे बाते करेगे.. तुजे जोभी कहेना हे उघर कहेना.. चल..

जया : (सरमाते धीरेसे खडी होते) रमेश.. देखना अभी कुछ गडबड ना होजाये.. अगर कुछ हुआ तो आप सम्हाल लेना.. मुजेतो बहुत डर लग रहा हे.. अगर कीसीको पता चल गयातो मेतो गइ कामसे.. चलो..

कहातो रमेशभी खडा हो गया.. ओर जयाका हाथ पकडकर उसे अ‍ेक छतसे दुसरी छतपे लेजानेमे मदद करता रहा.. ओर आखीर दोनोही रमेशके घरपे आ गये.. तो आतेही रमेशने घरका दरवाजा भी लोक कर दीया.. तो दोनो वही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे.. तभी रमेशने वहीसे जयाको अपनी गोदमे उठालीया.. तो जया बहुतही सर्मसार होने लगी.. ओर रमेश उनको गोदमेही उठाते अपने बेड रुमकी ओर चला गया..

अंदर जातेही जयाको बेडपे लीटाकर खुदभी उनकी बगलमे लेट गया.. तो जयाने उसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. क्युकी जयाको रमेशने आतेही छेडाथा.. तबसे वो बहुत ही कामातुर होगइ थी.. ओर रमेशके साथ जल्दसे जल्द मीलन करना चाहती थी.. जयाने रमेशको जटसे अपनी बाहोसे आजाद कीया ओर रमेशकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते फटाफट उनके सर्टके बटनको खोलने लगी..

तो रमेशभी जयाकी सारीको खीचकर नीकालने लगा ओर उनके ब्लाउसके बटनको खोलने लगा.. तब कुछही देरेके बाद दोनोके अंगपे अ‍ेकभी कपडे नही थे.. जया रमेशके बगलमे लेटकर उनके लंडको सहेला रही थी.. तो रमेशभी जयाकी चुतमे उंगली डालकर उनके होठोको चुम रहाथा.. फीर वो नीचेकी ओर चला गया ओर जयाकी चुतको चुमते उनके उरोजोके साथ खेलने लगा.. तो जया फीरसे मदहोस होगइ..

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जया : (सरमाते धीरेसे) बस.. बस.. रमेश.. अब जल्दीसे उपर आजाओ.. मुजे अ‍ेक बार अच्छेसे चोदलो.. बहुत मन कर रहा हे.. फीर मुजे आपसे कुछ बाते भी करनी हे.. चलोना.. ओर हां.. आज कोइ गोली मत खाना.. वरना आपतो मुजे चोदते ही रहेते हो.. आज मुजे बीना गोली खाये अ‍ैसेही अ‍ेक बार चोदलो..

रमेश : (जयाके उपर आते होठ चुमते) जया.. आजतो पुरी रात हमारे पास मौका हे.. अ‍ेक गोली खाने देना..

जया : (सरमाते धीरेसे) नही रमेश.. मुजे जाना होगा.. लगता हे घर वालोको मुजपे सक होगया हे.. सबको पता चल जाये उनसे पहेलेही हमे कुछ करना होगा.. लेकीन अभी अ‍ेक बार मुजे ठंडी करदो.. फीर हम आरामसे बाते करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. चलो.. डालदो अंदर.. आपने क्या जादु करदीया हे.. मे आपके बीना रेह ही नही सकती.. डालोनां..

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कहतो रमेशने पुरा लंड जयाकी चुतमे उतार दीया.. ओर कुछही देरमे दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. इधर रमेश जयाको चोद रहाथा.. तो दुसरी ओर जयाके घरपे बंसीने सांतीकी अ‍ेक बार जबरदस्त चुदाइ करते सांतीकी चुतको अपने पानीसे भरदीया था.. ओर बंसी अ‍ैसेही बीना लंड नीकाले सांतीके उपर लैटा हुआथा.. फीर कुछ देरके आरामके बाद बंसी दुबारा दुसरी बार सांतीको चोद रहाथा..

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आज सांती समज गइथी.. की आज उनकी खैर नही हे.. क्युकी आज सांतीको बंसीका मुड कुछ ओरही लग रहाथा.. ओर उनके मुडका अ‍ैसा होनेका रीजनभी सांतीको पताथा.. सांती अपनी हालत बीगाडनेके लीये मानसीक तौरपे पुरी तराह तैयार थी.. तब जागृती भी अपनी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाते जड चुकी थी.. ओर वो वापस कीचसे होकर अपने रुमकी ओर आने लगी..

तभी उसे अपनी मां जयाका खयाल आया.. ओर वो अ‍ेक बार फीर दबे पांव सीडीया चडते छतकी ओर चली गइ.. ओर वहा देखा तो सांतीका बीस्तर अस्त व्यस्त खाली पडा था.. तो जागृतीका माथा घुम गया.. ओर वो छतपे जाकर इधर उधर टंकीके पीछे सभी जगाहपे चेक करने लगी.. उनको अपनी मां जया कही नजर नही आइ.. ओर वो जटसे सीडीया उतरके नीचेभी उनके रुममे चेक करने लगी.. जया वहा भी नही थी..

सामत अपने रुमका दरवाजा हमेसा खुलाही रखता हे.. जयाको वहाभी नही देखकर जागृती अपने रुममे चली गइ.. ओर बेडपे लेटकर सोचने लगी.. की जया गइतो कहा गइ..? कही वो छतसे रमेशभाइके घरतो नही गइ..? खयाल आतेही जागृती जटसे वापस बेडसे खडी होगइ.. ओर अपने रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके वापस दबे पांव छतपे चली गइ.. ओर हिमंत करते अ‍ेक छतसे दुसरी छत कुदते वो रमेशकी छतपे आगइ..
 
ओर धीरेसे सीडीया उतरते उनके आंगमे आगइ.. देखातो आंगनका दरवाजा ओर घरका मुख्य दरवाजा बंध था.. तो वो आजु बाजु देखते घरके आंगनमे पीछेकी ओर जाने लगी.. ओर अ‍ेक अ‍ेक खीडकीसे देखनेकी कोसी करने लगी.. तब उसे अ‍ेक खीडकीसे कुछ अजीबसी आवाज आने लगी.. ओर जागृती खीडकीमे कोइ छेद हेकी नही देखने लगी.. लेकीन उनको कहीसे भी कोइ छेद नजर नही आया..

तो जागृती धीरेसे खीडकी खोलनेकी कोसीस करने लगी.. तो खीडकीका अ‍ेक दरवाजा लोक था.. ओर अ‍ेक दरवाजा धीरेसे खुल गया.. जैसेही दरवाजा खुला तो जागृतीके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर वो पैरोसे उची होते अनुठेपे खडी होकर अंदर जांकने लगी.. तो अंदर हल्कीसी रोसनी जल रहीथी.. ओर जागृती अंदरके नजारेको देखने लगी.. अंदर देखतेही जागृतीको उनके पैरोसे जमीन खीसकनेका अहेसास होने लगा..

उनका मुह गुस्सेसे लाल टमाटर जैसा होगया.. वो सरमसे पानी पानी होने लगी.. क्युकी अंदर रमेश अपनी कमर उछाल उछालके जयाको चोद रहाथा.. ओर जयाभी रमेशका साथ देते पुरे ताल मेलमे कमर उछालते रमेशको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उकसा रहीथी.. अंदरका नजारा देखते जागृतीकी अ‍ेक बार फीर चुत गीली होने लगी.. अंदर रमेश ओर जया दोनोकी आवाज जागृतीको साफ सुनाइ दे रहीथी..

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तो वो अंदरकी ओर कान लगाकर सुननेकी कोसीस करने लगी.. तो अंदर जयाके सीसकारीवोकी आवाज साफ सुनाइ देरही थी.. तो जागृती समज गइकी उनकी मां ओर रमेश जडनेकी कगारपे हे.. तब कुछही देरमे जयाकी हल्कीसी चीख सुनाइ दी.. दोनोही घरपे अकेले थे तो बीन्दास्त जोरोसे आवाज करते चुदाइमे मसगुल थे.. जब रमेशने जयाकी चुतको भरदी तब रमेश जयाके सीनेपे ढेर होगया.. तब जया उनके बालोको सहेलाते उनसे बाते करने लगी..

जया : (सरमाते मुस्कुराते) रमेश.. जब आप मुजे चोदते हे तो अ‍ेक बडा सुकुन मीलता हे.. इसे अंदरही रखना.. बस मुजे अ‍ैसेही प्यार देते रहेना.. अब मुजे सीर्फ आपसे मतलब हे.. अब मुजे कीसीका डर नही हे..

रमेश : जया.. तुम मुजसे कुछ बाते करना चाहती थी.. तो बोलना क्या बात हे..

जया : (सरमाते) रमेश.. उस दिन हम सहेरसे मीलकर आये तब गांवमे मुजे चारुभाभी मीली थी.. वो मुजे भला बुरा कहेने लगी.. तो उस दिनतो मेने उसे जुठ बोल दियाथा.. की मे आपसे पेटसे होगइ हु.. लेकीन कुछ दिनसे मुजे सचमे पेटमे कुछ गडबड लग रही हे.. मे हर बार आइपील खा लेती हु.. फीरभी मुजे लगता हे मे सचमे प्रेगनेन्ट हो चुकी हु.. हमे सहेर जाकर अ‍ेक बार चेक करवाना होगा.. वरना बहुत बडी गडबड होजायेगी..

रमेश : (थोडा परेसान होते) जया.. तुजे इतना कुछ समजाया फीर भी तु आइपील लेनेमे लापरवाही क्यु करती हे..? अ‍ैसे बार बार बच्चा गीराना अच्छी बात नही हे.. हम अ‍ेक बार तो बच्चा गीरवा चुके हे.. तु समजती ही नही.. ठीक हे हम अ‍ेक दो दिनमे सहेर जायेगे तब देख लेगे.. ओर तो कुछ नही हे नां.. तेरी उसी बहेसकी वजहसे अब चारु मुजसे दुर होगइ हे.. कीतनी बार कहाथा उनसे कोइ बहेस मत करना..

जया : (धीरेसे) आइ अ‍ेम सोरी रमेश.. अब मे खयाल रखुगी.. जानु.. प्लीज.. चलोना हम कही भाग चले.. हम सहेरमे कहीभी रेह लेगे.. मुजे आपके साथ रहेना हे.. वैसेभी सांतीको तो सब पता चलही गया हे.. मुजे लगता हे मेरी जागुकोभी मुजपे सक होगया हे..

वोभी आज कल मुजसे ठीक मुहसे बातभी नही करती.. रमेश.. सबको पता चले उनसे पहेले आप कुछ करीयेनां.. मुजे आपके साथ रहेना हे.. इसके लीये मे सबकुछ छोडनेको तैयार हु.. मुजे कही भगाकर ले चलो.. मे आपके साथ पुरी जींदगी बीताना चाहती हु..

रमेश : (होठोको चुमते) ठीक हे जया.. मुजे कुछ सोचनेके लीये टाइम दे.. मे कुछ करता हु.. पहेलेतो हमे इस बच्चेका कुछ करना होगा.. फीर हम आरामसे कुछ सोचेगे.. मुजे नही लगता अब चारुभी मेरे साथ कोइ रीलेशन रखे.. तो फीर मे कहा जाउगा.. मुजेभी तुमसे प्यार होगया हे.. अबतो मुजेभी तेरा साथ चाहीये..

जया : (खुस होते) रमेश.. तो फीर चलोना.. हम कही भाग जाये.. मेरे मायकेमे भी अब मुजे कोइ पुछने वाला नही हे.. तो फीर इस बार बच्चा ठहेर गया हे तो हमे इसे गीरवानेकी जरुरत नही हे.. मे आपका बच्चा पैदा करुगी.. हम दोनो अपना नया संसार बसायेगे..

रमेश : (थोडा सोचते) जया.. मुजे सोचनेका थोडा वक्त दे.. मुजे सामतभाइको भी धोखा देना अच्छा नही लगता.. वैसेभी हम दोनो पंचायतके कामसे सहेरमे जाते हे.. तो मे दो तीन बार उनके साथ कीसी डोक्टरको दिखाने गया था.. लेकीन वो मुजे कुछ बतातेभी तो नही हे.. की उनको क्या हुआ हे.. कहेते हे मे दुसरेके लीये दवाइ लेने आया हु..

जया : (आस्चर्यसे देखते) रमेश.. क्या वो सचमे कीसी डोक्टरको दीखाने जाते हे..? तो फीर आपने पुछा नही कीसके लीये दवाइ लेने जाते हे..? मुजे ही उनसे बात करनी पडेगी..

रमेश : (जटसे) अरे नही नही.. तुम उसे इस बारेमे कुछभी मत पुछना.. वरना उनको सब पता चल जायेगा की ये सब मेनेही तुने बताया हे.. उसने मुजे कीसीको ना कहेनीकी कसम खीलाइ हे..

जया : येभी सही हे.. ठीक हे में नही पुछती.. रमेश.. मे सोच रही हुकी अब सांतीकी सादी बंसीसे करवादु.. ताकी वो घरको सम्हालले.. तो मुजेभी आपके साथ आनेका सुकुन मीलेगा.. क्या कहेते हो..?

रमेश : (मुस्कुराते) हां.. अ‍ेक बार मे ओर सामतभाइ आश्रमपे गयेथे.. तब बातोही बातोमे बात छीड गइ थी.. तो बाबानेभी उसे यही कहाकी तेरी विधवा बहेनकी सादी अपने बेटेसे करदे.. तो वो कुछ नही बोले.. क्युकी उनको भी पता हे अब गांवमे बहुत कुछ बदलने वाला हे.. तु अ‍ेक बार सामत भाइसे इस बारेमे बात करले.. सायद वो मान जाये..

जया : (होठोको चुमते) रमेश.. लास्ट टाइम हम सहेरमे मीलने गये तब उसी दिन मेने भी अ‍ेक बार उनका मन जाननेके लीये पुछा था.. तो कहाकी अगर बंसी चाहेगा तो मे जरुर दोनोकी सादी करवा दुगा..

रमेश : (मुस्कुराते) जया.. तो फीर क्या प्रोबलेम हे..? सामतभाइ हमारे गांवमे अ‍ेक मीसाल बन सकते हे.. तुम सीर्फ घरके लोग आश्रमपे जाकर दोनोकी सादी करवादो.. मे देवुभाइसे बात करलुगा..

जया : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे कलही इस बारेमे बंसी ओर सांतीसे बात करलेती हु.. अगर वो हां कहेते हे तो फीर हम उन दोनोकी सादी करवा देगे.. अब चलीयेनां.. अ‍ेक बार चोद लोजीये.. बहुत मन कर रहा हे.. फीर मुजे जानाभी हे.. वरना कोइ जागते उपर आगया ओर मुजे नही देखातो गडबड होजायेगी..

रमेश : अरे.. अभी अभी तो कीया हे.. आज मेने गोली थोडीना खाइ हे.. जो तुजे दुबारा चोदने लगु.. थोडा आरामतो करेने दे.. फीर मे तुजे चोदता हु.. बादमे तुजे तेरी छतपे छोड दुगा..

जया : (मुस्कुराते) रमेश.. जब आप मेरे उपर होते हो तब कीतना अच्छा लगता हे.. बस.. मन करता हे आपसे चुदवाती ही रहु.. पता नही आपने मुजपे क्या जादु करदीया हे..

रमेश : (मुस्कुराते होठ चुमते) जया जादु मेने नही तुमने मुजपे कीया हे.. कास.. तेरी तराह चारु भी मुजसे प्यार करती.. वादा कर अब हर जन्ममे हम दोनोही मीलेगे..

जया : (सरमाते मुस्कुराते) हां जानु.. मेभी यही प्रार्थना करती हु.. की अब हर जन्ममे आपही मुजे पतीके रुपमे मीले.. जब आपका हथीयार अंदर होता हे तब बडा सुकुन मीलता हे.. चलीये.. मे इसे फीरसे खडा करनेके लीये रेडी करती हु..

कहातो रमेशका लंड अ‍ेक बार चोदकर फीरसे ठीकसे खडाभी नही हुआथा.. तो जया उसे अपनी मुठीमे पकडकर सहेलाने लगी.. ओर सहेलाते सहेलाते अपने मुहमे लेलीया ओर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. उनको पताथा की रमेशके लंडको कैसे खडा करना हे.. कुछही महेनतके बाद रमेशका लंड फीरसे तावमे आने लगा.. ओर खडा होकर जटके मारने लगा.. तब जया फटाफट लंडको मुहसे नीकालकर बेडपे लेट गइ..

फीर रमेशने हाथोसे अपने लंड पकडकर जयाकी चुतमे घुसा दीया..ओर वो अ‍ेक बार फीर जयाको चोदने लगा.. तब बहार जागृतीका इन दोनोकी बाते सुनकर माथाही घुम गया.. वो भारी मनसे वहासे नीकल गइ.. आज उसे जयाके बारेमे बहुत कुछ पता चल चुकाथा.. उनके बापुके बारेमे सुनकर उनको सामतकी चीन्ता होने लगी.. तो बंसी सांतीके सादीकी बात सुनकर अ‍ेक बार फीर उसे सांतीसे ज्वेलेसी फील होने लगी..

वो अब कीसीभी हालमे बंसीको पानेका मन बना चुकीथी.. जागृतीने इस मामलेमे अब खुद आगे बढनेका फैसला करलीया.. वो धीरे धीरे सीडीया चडते अ‍ेक छतसे दुसरी छत कुदते अपने रुममे आगइ.. ओर अपने बेडपे जयाके बारेमे सोचते कब उसे नींद आगइ पताही नही चला.. तो रमेशने भी जयाको दो बार चोदलीया.. तो वोभी जयाको वापस उनकी छतपे छोड गया ओर वापस चला गया.. फीर दोनोही सोगये..
 
तो इधर देवायत ओर नीशाके बीचभी घमासान चुदाइका दोर चल रहाथा.. अब तक नीशा दो बार जड चुकी थी फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा.. जबभी नीशा जडती देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेगी.. चारुभी बेडके अ‍ेक कोनेपे बैठकर अपनी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीला रहीथी.. आज नीशाको अपनी सुहागरातकी असली पहेचान हो गइ.. वो बहुतही कामुक तरीकेसे चुदवानेमे साथ दे रहीथी..

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नीशा : (कामुक आवाजमे मदहोसीमे) जा..नु.. बहुत मजा आ रहा हे.. ओर जोरसे चोदीये..

देवायत : (होंठ चुमते) नीशा.. अब तुम दोनो मेरी बीवी हो.. तुजे अब कभी भी आकर चोद सकता हु..

नीशा : (सरमाते धीरेसे कामुक नजरोसे) हां जानु.. अब मे बायकायदा आपकी बीवी हु.. अब आप सुधीरके होते हुअ‍े भी मुजे चोद सकते हे.. क्युकी उसने खुद मुजसे आपसे सादीके लीये कहाथा.. जानु.. मे हमारे बच्चेकी मां बनना चाहती हु.. करदो मुजे प्रेगनेन्ट..

चारु : (मुस्कुराते) नीशा.. तु फीकर मत कर.. आज यही होगा.. ये यहासे जायेगे तब तुजे प्रेगनेन्ट करके ही जायेगे.. आजतो मेरी भी इच्छा हो रही हे.. की मेभी इनसे अ‍ेक बच्चा पैदा करलु..

देवायत : (चारुके होठ चुमते) पागल हो गइ हो क्या..? फीर रमेशको क्या कहोगी..?

चारु : उस कमीनेका नामभी मतलो.. अभी सामतकी बीवीको हमारे घरमे बुलाकर उसे चोद रहा होगा.. अब मुजे उस आदमीसे कोइ लेना देना नही.. अब हम दोनो ही मां बेटी आपकी बीवीया हे..

कुछही देर घमासान चुदाइके बाद देवायत अकडने लगा.. ओर वो आधी आंख चडाते मदहोस होने लगा.. तो नीशानेभी अपने दोनो पैर सीकुड लीये.. तभी देवायत नीशाकी चुतमे पुरा लंड डालकर रुक गया.. ओर कांपते हुअ‍े अपनी कमरको जटके मारते नीचाकी चुतको अ‍ेक बार फीर अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब नीशाभी अपने बच्चेदानीपे गरम विर्य महेसुस करते कांपने लगी.. ओर वोभी देवायतके साथ जडने लगी..

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कुछ देरके बाद देवायतने अ‍ैसेही नीशाको दो बार ओर चोद लीया.. इस रात देवायत लगातार बीना लंड बहार नीकाले नीशाकी चुदाइ करता रहा.. ओर उनकी चुतको चोद चोदके भरता रहा.. पुरी चुदाइके दौरान पहेली बार नीशा आठ बार जड चुकीथी.. देवायतने नीशाको चोद चोदकर उनके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोडके रख दीयाथा.. तब चारुभी खुदको दो बार सांत कर चुकीथी.. नीशा हीलनेकी स्थीतीमे भी नही थी..

तो देवायत उसे गोदमे उडठाकर बाथरुममे लेगया.. वहा चारुने उनकी चुतकी सीकाइ करदी.. फीर दोनो नहाकर बहार आगये.. देवायतने नीशाको बेडके अ‍ेक कोनेमे सुला दीया.. तो कुछही देरमे नीशा थकानकी वजहसे नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब चारु अपने दोनो पैर फैलाकर मेदानमे आगइ.. ओर देवायत उनकी बगलमे लेट गया.. तो चारुने उसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उसे खीचकर अपने उपर चडालीया..

इस रात दोनोही अ‍ेक मीया बीवीकी तराह प्यार करने लगे.. अ‍ेक बार फीर रुममे चुदाइका तुफान भवंडर बनके तांडव करने लगा.. देवायत पुरी रात चारुकी जमकर चुदाइ करता रहा.. अ‍ेक बार उपर चड गया.. फीर बीना नीचे उतरे चारुकी चुतको भी तीन बार अपने गाढे पानीसे भर दीया.. ओर अ‍ेक बार बाथरुममे भी खडे खडे चारुको चोद लीया.. तब चारुकी भी हालत पतली होचुकी थी..

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आज चारु ओर नीशा दोनो ही देवायतके साथ अपनी सुहागरात मनाकर पुरी तराह चुदवाकर संतुस्ट हो चुकीथी.. फीर दोनोही नहाकर बहार आगये ओर नंगेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपककर सो गये.. तब चारु ओर नीशा दोनोको नही पताथा की देवायतका बीज उनके गर्भमे स्थापीत हो चुका हे.. आज देवायतने दोनोको प्रेगनेन्ट कर दीयाथा.. अब चारु ओर नीशाभी रश्मी वंदनाकी तराह देवायतकी सीकैट बीवीया बन चुकी थी..

तो दुसरी ओर राजीवके गांवमे भी राजीवके घरपे सब लोग सोने चले गये.. तब राजीवके रुममे राजीव ओर नीर्मला अपने रुममे जातेही अ‍ेक दुसरेके साथ मीलन करनेके लीये मचल रहेथे.. दोनो फटाफट नंगे होगये.. तब नीर्मलाने राजीवको बेडपे लीटा दीया.. ओर खुद उनके उपर चड गइ.. नीर्मला राजीवके उपर दोनो पैर फैलाकर उनकी कमरपे बैठ जाती हे.. ओर उनका लंड अपनी चुतमे घुसाकर राजीवको होले होले चोदने लगती हे.. जब वो अ‍ेक बार जड गइ तब राजीवके उपरसे उतरकर बेडपे पैर फैलाकर लेट गइ..

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तो राजीव उनके उपर चड गया ओर नीर्मलाकी चुतमे लंड घुसाकर उनको जोरोसे चोदने लगा.. जब नीर्मलाकी जमकर चुदाइ करके दोनो साथमे जड जाते हे तब राजीव अ‍ैसेही नीर्मलाके उपर लेटा रहा.. ओर दोनो प्यार भरी बाते करते रहे.. दो घंटे तब नीर्मलाको राजीवका लंड अ‍ैसेही चुतमे सख्त महेसुस होता रहा.. जीसे देखकर अ‍ेक बारतो नीर्मलाभी हेरान रेह गइ.. ओर दो घंटेके बाद राजीव फीर नीर्मलाको चोदने लगा..

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तब नीर्मलाभी खुस होगइ.. उनको लगाकी राजीवकी स्टेमीना बढ गइ हे.. इनको सेक्स करनेमे कोइ दिकत नही आरही.. लेकीन नीर्मलाको नही पताथा की आज राजीवसे उनसे छुपकर अ‍ेक वायग्राकी टेबलेट खाली थी.. बस यही टेबलेट राजीवके लीये घातक साबीत होने वाली थी.. फीर अ‍ेक घंटेके बाद फीरसे राजीवने नीर्मलाको चोदनेकी इच्छा जाहीरकी.. तो नीर्मलाको मंजुकी बात याद आगइ.. ओर वो राजीवको मना नही कर सकी..

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बस.. आजकी रात यही राजीवकी नीर्मलाके साथ आखरी चुदाइ साबीत होने वाली थी.. राजीवने नीर्मलाको घोडी बनाकर जुका दीया.. ओर वो उनके पीछे चला गया.. ओर पीछेसे नीर्मलाकी चुतमे लंड घुसाकर नीर्मलाको बडेही बेहरेहमीसे चोदने लगा.. तो नीर्मला देवायतके तगडे लंडसे चुदनेके बावजुद चीखते चीलाने लगी.. ओर राजीवने नीर्मलाकी चोद चोदके हालत पतली करदी..

राजीव उनकी चुतमे खलास होकर उनकी पीठपे ढेर होगया.. नीर्मलाकी चुतसे दोनोका कामरस उनकी चुतसे बहेते पैरोपे उतरने लगा.. तब नीर्मलाने बडी मुस्कीलसे राजीवको अपने उपरसे हटाया.. ओर चुतको कपडेसे साफ करते मुस्कीलसे बेडसे उतर पाइ.. ओर धीरे धीरे लंगडाते बाथरुमकी ओर जाने लगी.. आज कीतने अरसोके बाद राजीवने उनकी हालत अ‍ैसी करदी थी.. ओर वो बाथरुमे जाकर नहाने लगी..

जब नहाकर बहार नीकली.. तब राजीव अपने बीस्तरपे गहेरी नींद सो चुकाथा.. तो नीर्मला उसे देखकर मुस्कुराने लगी.. आज राजीवने वाकइ सही मानोमे उनकी जमकर चुदाइ करलीथी.. राजीव अ‍ैसेही नंगा सोया हुआथा.. तो नीर्मलाने उसे नाइट ड्रेसका पायजामा पहेना दीया.. ओर खुद उनकी बगलमे उनसे चीपककर सो गइ.. जैसे जैसे राजीवका खुन ठंडा होता गया.. तो वो नींदमे ही कोमाकी ओर जाने लगा..
 
तो इधर श्रीधर अपने दोस्तोको मीलकर जल्दीही घरपे आगया था.. आज लखनने श्रीधर ओर मुना दोनोको कामोतेजककी गोली पीलाइ थी.. तो घर आतेही श्रीधर अपने रुममे घुस गया.. तो वहा जयश्री बडेही बेसब्रीसे उनका इन्तजार कर रहीथी.. तब कुछही देरके बाद दोनोही नंगे थे.. ओर श्रीधर जयश्रीके उपर चडकर उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. इस रात श्रीघरने जयश्रीको चार बार चोदकर उनकी हालत पतली करदी थी..

तो वही हाल आज मुनाके घरपे भी था.. जब खाना खाकर बसंतीका पती वीभु सो गया.. तब बसंती मुनाको अपने दोस्तोके पास भेजकर बरखाको लेकर मुनाके रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके वो बरखाको दुल्हनका जोडा पहेनाकर अ‍ेक बार फीरसे उनका शींगार करने लगी.. क्युकी आजही बरखा ओर मुनाने आाश्रमपे जाकर सादी करली थी.. तो बसंती खुद बरखाको उनकी सुहागरातके लीये सजा रहीथी.. तब बरखा बहुतही सरमा रहीथी.. ओर उसने अ‍ेक बार फीर बातको छेडदी..

बरखा : (अपने बालोको सही करते सरमाते धीरेसे) मोम.. मेने आपसे कुछ पुछा था.. तो फीर आपने क्या सोचा..?

बसंती : (जानकरभी अंन्जान बनते सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) कीस बारेमे..?

बरखा : (मुस्कुराते सामने देखकर) मोम.. मुजे पता हे आपको सबकुछ मालुम हे.. की मे आपको कीस बारेमे पुछ रही हु.. आप भोली मत बनीये.. मेने भाइके बारेमे आपको कुछ पुछाथा..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. पहेले आज तु तो अपनी सुहागरात ठीकसे मनाले.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. वैसे बहोत चीन्ता करती हे मेरी..? हंम..?

बरखा : (सरमाते) मोम.. आपकी चीन्ता करती हु इसीलीये तो आपको पुछ रही हु.. मुजे पता हे इस आगको ज्यादा दिन जेलना कीतना खतरनाक हे.. मे ओर आप दोनो इस दौरसे गुजर चुकी हे..

बसंती : (मुस्कुराते आयनेमे सामने देखकर) मेरातो ठीक हे.. लेकीन तुम इस दौरसे कैसे गुजरी हो..? तुम दोनोतो स्कुलमे थे तबसेही अ‍ेक दोनोको प्यार करते हो.. तो तुजे कहा तकलीफ हुइ..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे सामने देखते) मोम.. जब भाइके साथ मेरा पहेला मीलन हुआ.. उसके बाद उनसे दुर रहेना मुस्कील होने लगा.. जब घरपे हम दोनो नही मील पाते तब मे भाइके बीना पागल होजाती थी.. तो फीर सोचो आपतो इस प्यारसे कीतने दिनोसे वंचीत रही हो.. ओर अ‍ेक प्यार आपको मील रहाथा.. उसेभी हमने रोक लीया.. मोम.. आइ अ‍ेम सोरी..

बसंती : (मुस्कुराते) बीटु.. छोड वो बाते.. अब मे उसे भुल चुकी हु.. अब मुजे कही बहार रीलेशन नही रखना.. अब मे अ‍ैसा कोइ काम नही करुगी.. जीनसे मेरे बच्चोकी इजतपे आंच आये.. मे अब अ‍ैसेही खुस हु..

बरखा : (हाथ थामते) मोम.. प्लीज.. बुरा मत मानना.. मुजे इस रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. भाइ इतना सक्षम हेकी वो हम दोनोको सम्हाल सकता हे.. ओर वैसेभी आपकी उमरभी क्या हे.. बीलकुल मेरी बडी बहेन जैसी दीखती हो.. हें..हें..हें.. मोम.. आप सचमे मेरी बडी बहेन होजाओनां.. हम दोनो बहेने साथमे रहेगी..

बसंती : (सरमाते पीठमे अ‍ेक मुका मारते धीरेसे) बीटु.. कुछभी बोलती हे.. तेरी मांसे इस तराह बात करते तुजे सरमभी नह आती..? हंम..? अभी तक तेरे पापा जीन्दा हे.. मे ये सब अभी नही कर सकती..

बरखा : (सरमाते धीरेसे) मोम.. मे अभी आपको सादीके लीये कहा केह रहीहु..? फीर करलेना आपभी सादी.. लेकीन तबतक तो आप.. भाइके सा..थ.. म..जे.. समज गइनां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

बसंती : (अ‍ेक नजरसे देखते) पागल होगइ हो क्या..? बीटु.. तु बहोत बीगड गइ हे.. कोइ अपनी मांसे इस तराहकी बाते करती हे..? चल आजा सब मेकअप होगया.. क्या मस्त लग रही हे.. आजतो मेरा मुना तुजे देखकर पागल होजायेगा.. हें..हें..हें..

कहेते बसंती बडी सीफततासे बातको टाला देती हे.. तब बरखाको नही पताथाकी बसंती ओल रेडी मुनाकी होचुकी हे.. उसे बरखाके साथ इस खेलमे बडाही मजा आ रहाथा.. वो बरखाको लेकर बेडकी ओर जाने लगी.. तभी अचानक बरखाने बसंतीको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर बसंती कुछ समजे इनसे पहेलेही बरखाने बसंतीके होठोको चुमलीया.. तब बसंती सख्तेमे आगइ.. ओर बरखाकी ओर बडी आंख करते खुब सरमाइ..

वो कुछ नही बोली.. बसंती सर्मसार होते जटसे बरखाको अच्छी तराह अ‍ेक दुल्हनकी तराह बेडके बीच बीठा देती हे.. तब बरखा बसंतीकी ओर देखते बहुतही सरमाइ ओर बसंती मुस्कुराते वहासे चली गइ.. तब कुछही देरमे मुना लखनने दी हुइ गोली खाकर आगया.. फीरतो क्या..? पुरी रात उनके रुममे धमाल हुआ.. पुरी रात मुना बरखाकी घमासान चुदाइ करता रहा.. इस रात मुनाके रुममे चुदाइका तांडव हो रहाथा..
 
इसी वक्त देर रात सब सो गये.. तब जीतुलाल चुपकेसे घरकी छतपे चला गया.. वहा पहेलेसे ही वृन्दा इनका इन्तजार कर रही थी.. जैसेही जीतुलाल वहा गया वृन्दा जटसे आकर उनकी बाहोमे समा गइ.. ओर जीतुलालको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तब कुछही देरके बाद वुन्दा जीतुलालके नीचे लेटकर उनसे चुदवा रही थी.. दोनोके बीच काफी घमासन चुदाइ हुइ.. ओर जीतुलालने वृंन्दाकी चुतमे अपना माल उडेल दीया.. जब दोनो साथ जड गये.. तब वुन्दा जीतुलालके बालको सहेलाते उनसे बात करने लगी..

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जीतुलाल : हां भाभी.. बोल इतनी रात इधर क्यु बुलाया..? तुजे पता तो हे ब्रीन्दा हमारे बारेमे सबकुछ जान चुकी हे.. क्या कुछ खास बात करनी थी..?

वंन्दा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) जीतु.. मुजे अब ब्रीन्दाकी कोइ परवा नही.. तुजे पतातो हे.. जयश्री हमारी लडकी हे.. भलेही दोनो भाइ बहेनकी हम अलग अलग मां हे.. लेकीन श्रीधर ओर जयश्री दोनोही तेरा खुन हे.. आज जयश्री कैसे बीन्दास्त श्रीधरके रुममे चली गइ..

उनको मेरीभी सरम नही आइ.. अभी दोनो भाइ बहेनभी वोही कर रहे होगे.. जो अभी हमने कीया.. जीतु.. मुजे लगता हे उन दोनोको मीलवानेमे तेरी बीवीका पुरा सपोर्ट हे.. आज कैसे बेसर्म होकर मेरी ओर देखते हस रहीथी.. जैसे वो हमसे कोइ बदला ले रही हो..

जीतुलाल : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मुजेभी यही लगता हे.. हमारे बारेमे उसे पता चल गया हे तो उसी बातका बदला हमारे बच्चेकी सादी करवाके हमसे ले रही हे.. अब हम करभी क्या सकते हे..? दोनोही बालीक हे.. दोनोने अपनी मरजीसे सादी कीहे.. ओर तुमतो जानती हो अब ब्रीन्दाके साथ मेरा कोइ रीलेशन नही हे.. कमीनी मुजसे डीवोर्स भीतो नही लेलेती..

वृन्दा : (कुछ सोचते) जीतु.. अब मुजे लगता हे वक्त आगया हे.. की हम दोनो फेकीली अलग होजाये.. मे अब तेरे साथ रहेना चाहती हु.. मुजे तुमसे अ‍ेक लडका चाहीये.. लेकीन हर बार लडकी ठहेर जाती हे.. तो मुजे गीरवानी पडती हे.. लेकीन लास्ट बार बच्चा गीरवाने गये तब डोक्टरनेभी अब मना करदीया हे.. की अब मे बच्चा नही गीरवा सकती.. बहुतही जोखीम हे.. तो मे चाहती हु.. तुम ब्रीन्दाको डीवोर्स देदो.. ओर मुजसे सादी करलो.. हम दोनो सहेरमे अ‍ेक छोटा मकान लेकर वहा रहेने चले जायेगे..

जीतुलाल : भाभी.. वो सबतो ठीक हे.. मे आपके साथ जानेके लीये तैयार हु.. लेकीन बडेभैया..? आप उनको क्या जवाब दोगी..? ओर वैसेभी आप लडकेकी चाहमे कीतनी बार अ‍ेबोर्सन करवा चुकी हे.. क्यु करती हे आप अ‍ैसा..? हमे नही चाहीये कोइ लडका हम अ‍ैसेही खुस हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) नही जीतु.. तु नही समजेगा.. मे तुमसे बहुत प्यार करती हु.. मुजे तेरी अ‍ेक नीशानी चाहीये.. जो हम दोनोके बुढापे मे हमारा सहारा बन सके.. अ‍ेक नीशानी जयश्रीके रुपमे हमे मीली थी.. क्या नतीजा हुआ..? वोभी ब्रीन्दा हमसे छीनकर लेगइ.. जानु.. बस सीर्फ अ‍ेक लडका..

जीतुलाल : भाभी.. तो अब तुही बता हम क्या करे..? तेरे दिमागमे हे कोइ आइडीया..?

वृन्दा : (मुस्कुराते पीठ सहेलाते) हां जीतु.. इसीलीये तो आज तुजे यही बुलाया हे.. सुन.. तुम ब्रीन्दाको डीवोर्स देदो.. तब तेरे भाइ तुमसे नाराज हो जायेगे.. तब मे तेरे भाइको कहुगी अब हमे इस घरका बटवारा कर देना चाहयी.. भलेही हमारा बीजनेश साथमे हो.. जब वो इसके लीये राजी होजायेगे तब वो तेरे हीस्सेका भाग तुजे कभी नही देगे.. वो तेरा सभी हीस्सा ब्रीन्दा ओर श्रीधरको दे देगे..

जीतुलाल (मुस्कुराते धीरेसे सोट मारते) हंम.. डार्लींग.. लेकीन मेरातो नुकसान हो गयानां..? हें..हें..हें..

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वृन्दा : (मुस्कुराते) नही जीतु.. तब तेरे भाइ उनका हीस्सा मेरे नाम करदेगे.. तो फीर मे ओर तुम कहा अलग हे..? मुजेतो अब तुम्हारे साथही रहेना हे.. तो मेरा सभी हीस्सा मे तेरे नाम करदुगी.. लेकीन बादमे.. जब हम दोनो अकेले होजायेगे.. समज गयेनां..?

जीतुलाल : (मुस्कुराते होठोको चुमते जोरोसे सोट मारते) भाभी.. क्या दिमाग पाया हे तुने.. हें..हें..हें.. फीर..?

वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) जीतु.. थोडा प्यारसे चोदोनां.. बहुत मजा आता हे.. सुनो.. जब बटवारा हो जायेगा तब हम सहेरमे अ‍ेक मकान लेलेगे.. ब्रीन्दाको उनके बेटे बहुके साथ जहा रहेना हे रहेगी.. तब मे तेरे भाइको कहुगी.. की अब हमारा कोइ बेटा नही हे.. ओर अब जीतुभी अकेला हे.. तो मे उसे हमारे साथ रखना चाहती हु.. वो मेरी बात कभी नही टालेगे.. बस.. हो गया हमारा काम.. हम वहा जातेही सादी करलेगे.. ओर तुम ओर मे हमेसा पती पत्नी बनकर साथ रहेगे.. क्या कहेते हो..?

जीतुलाल : (मुस्कुराते बुब्स चुमते चोदते हुअ‍े) हंम.. भाभी.. बाततो आपकी सही हे.. अगर तभी हमारा बच्चा ठहेर गया तो..? तुम बडे भैयाको क्या कहोगी..? मत भुलो अब भाइको भी पता हे.. वो इस उमरमे बच्चा नही कर सकते..

वृन्दा : (मुस्कुराते) जीतु.. मे यही तो चाहती हु.. की उनको सब पता चल जाये.. ओर इनकी फीकर तुम मत करो.. भलेही उनको हम दोनोके बारेमे ओर हमारे बच्चेके बारेमे पता चल जाये.. वो इस उमरमे ये सदमा बरदास्त नही कर पायेगे.. ओर उनकी इतनी हींमतभी नही हेकी वो हम दोनोको घरसे नीकालदे.. क्युकी उस सहेरका घर मे मेरे नामही रजीस्ट्रेसन करवाउगी.. फीर वो जीयेगे भी तो कीतना.. फीर हम दोनोही आजाद.. मे चाहती हु अब हमाराभी अ‍ेक वारीस हो.. मे सारी जींदगी तेरी बीवी बनकर रहुगी..

जीतुलाल : (मुस्कुराते होंठ चुमते) भाभी.. क्या दिमाग पायाहे तुने.. मेतो कायल होगया तेरी सोचपे.. लेकीन इस बार अ‍ेक बात याद रखना.. भलेही लडका हो या फीर लडकी.. जोभी हमारे नसीसबमे होगा उसे हम स्वीकार कर लेगे.. इस बार मे तुजे हमारा बच्चा गीराने नही दुगा.. तबही मे तेरे साथ आउगा..

वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे.. जीतु.. मुजे तेरे साथ रहेना हे.. हमेसा हमेसाके लीये.. तु जोभी कहेगा मे मान लुगी.. अब मेरा पती सीर्फ तु ही हे.. मुजे तेरी हर बात मंजुर हे.. चल.. आइइइइ.. इसी बातकी खुसीपे अ‍ेक बार ओर चोदले मुजे.. करदो प्रेगनेन्ट मुजे.. तु कलही इस बारेमे ब्रीन्दासे बात करले.. अब मे तेरे बीना नही रेह सकती.. बस.. जल्दीसे इन दोनोकी सादीका नीपटारा करलो.. अब मुजे नही रहेना यहा..

जब दोनो बाते कर रहेथे तब उनको नही पताथाकी छतपे टंकीके पीछे खडी ब्रीन्दा इन दोनोकी बाते सुनते उनके चुदाइकी रासलीला देख रही हे.. जब जीतुलाल उपर आया तबही वो उनका पीछा करते उपर आ गइथी.. जब जीतुलाल बात करके हाथके बल वृन्दाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगा.. तब ब्रीन्दा आहीस्तासे वहासे नीकलकर अपने रुमपे आकर सोगइ.. तब कुछही देरके बाद जीतुलालभी वृन्दाकी चुदाइ करके नीचे आगया..

जब वो अपने रुमकी ओर जा रहाथा तब श्रीधरके कमरसे जयश्रीकी सीसकारीयोके साथ दर्दसे कणसनेकी आवाजभी आ रहीथी.. तब जीतुलाल समज गयाकी उनका बेटा श्रीधर उनकी बटी जयश्रीकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा हे.. वो अपने रुममे चला गया.. तब कुछ देरके बाद वृन्दाभी दबे पांव थोडी लंगडाते अपने रुममे चली गइ.. ओर बाथरुममे जाकर अपनी चुतको साफ करके अपने पतीके पास जाकर सोगइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७३

जब वो अपने रुमकी ओर जा रहाथा तब श्रीधरके कमरसे जयश्रीकी सीसकारीयोके साथ दर्दसे कणसनेकी आवाजभी आ रहीथी.. तब जीतुलाल समज गयाकी उनका बेटा श्रीधर उनकी बटी जयश्रीकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा हे.. वो अपने रुममे चला गया.. तब कुछ देरके बाद वृन्दाभी दबे पांव थोडी लंगडाते अपने रुममे चली गइ.. ओर बाथरुममे जाकर अपनी चुतको साफ करके अपने पतीके पास जाकर सोगइ....अब आगे

ना सीर्फ देवायतके गांवमे बल्की आजु बाजुके सभी गांवोमे अ‍ेक वासनाकी लहेरसे चुदाइका भवंडर तांडव मचाकर सांत होगया.. ओर सबलोग नींदकी आगोसमे चले गये.. तब सीर्फ अ‍ेक ही सख्सीयत ध्यान लगाकर सभी जगह अपनी शक्तिसे नजर जमाये बैठी हुइथी.. वो थी मंजुला.. जो सबके सोजानेके बाद ध्यान लगाकर बैठे सब जानकारीया ले रहीथी.. तब उसे अपने पापाकी हालत देखी नही गइ..

जब वो कोमाकी ओर ढलने लगे.. तब मंजुकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. वो उनकी मदद करना चाहते हुअ‍ेभी नही कर सकती थी.. क्युकी बाबाने उसे कसम खीलवाकर प्रकृतीके बीच हस्तक्षेप करनेको मना कीया था.. ओर उसे सब पता थाकी अब उनके पापाका समय खतम होचुका हे.. आज उसे पहेली बार अपनी शक्तिया पानेका दुख होने लगा था.. क्युकी वो चाहकर भी कुछ नही कर सकती थी..

आज सुबहका सुरज अपनी सरारत भरी मुस्कानके बीना ही चुपचाप जल्दी जल्दी नीकल गया..हवेलीपे सब लोग देर सुबह तक सोते रहे.. तो लताने तैयार होते ही लखनको जगा दीया.. ओर उसे नीलमको उनके घरपे छोडनेको कहा.. तो नीलमका नाम सुनतेही लखन जाग गया.. ओर फटाफट नहाने चला गया.. तबतक लताने नीलमकोभी जगाकर बाथरुममे नहानेके लीये भेज दिया..

दोनोको जगाकर लता कीचनमे फटाफट चाइ नास्ता तैयार करवाने लगी.. फीर कुछ देरके बाद लखन ओर नीलम दोनोही तैयार होकर नीचे आगये.. तब लखन बहुतही खुस हो रहाथा.. आखीर उनको नीलमसे अकेलेमे मीलनेका मौका जो मील रहाथा.. लखन नीलमको अपनी साली मानकर उनपे अपना पहेला हक जमाते कीसी भी तराह नीलमको सेट करना चाहता था.. लेकीन बीचमे धिरेन बाजी मार गया..

जब उसे पता चलाकी नीलम धिरेनसे चुद गइ हे.. तबसे तो लखन नीलमको पानेके लीये ओर तील मीलाने लगा.. लेकीन लखन आज कल इस मामलेमे बहुत दिमाग चला रहाथा.. इसी वजहसे नीलम ओर धिरेनके कांडसे खुसभी हो रहाथा.. अब वो इस कांडकी वजहसे नीलमको बडीही आसानीसे पा सकता था.. उसे अब नीलमको अपने नीचे लीटानेका रास्ता बहुतही आसान लग रहाथा..

जीसकी वजहसे वो आजही मीशन नीलमपे लग गयाथा.. लता लखन ओर नीलम चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब लता ओर नीलम साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहीथी.. तब लखन आज लताके सामने ना बैठकर नीलमके सामने बैठ गया.. तब लखनने नीचेसे अपना अ‍ेक पैर आगे बढाया.. ओर नीलमके पैरपे रख दीया.. तभी नीलम चोंक गइ.. ओर गभराते टेडी नजर करते नीचेकी ओर देखने लगी..

तब लखन नीचेसे नीलमके पैरको सहेलाते चाइ नस्ता कर रहाथा.. तो नीलम लखनकी ओर घुरने लगी.. तो लखन उनकी ओर देखते अपने दोनो नैन नचाते मुस्कुराने लगा.. तो नीलमभी सबकुछ समज गइ.. ओर वो सरमाकर मुस्कुराते अपने पैर पीछे लेने लगी.. लेकीन इस बार लखनने उनके पैरोको जोरोसे दबाके रखाथा.. तो नीलम बहुतही सर्मसार होगइ ओर अ‍ैसेही बैठी रही.. उनको लगाकी लखनजीजु उनकी मस्ती कर रहे हे.. तभी..

लता : लखन.. आप भाभीको कहेकर आना.. की हम जब सहेर जायेगे तब भानुभाइको कहे नीलुको इधर छोड जाये.. ओर आप भाभीसे बातभी करलेना.. उनको अच्छा लगेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (पैर पीछे लेते मुस्कुराते) लता.. तुमभी साथ चलना.. हम दोनो नीलुको छोडकर वापस आजायेगे..

लता : (मुस्कुराते) अरे ना बाबा नां.. पुनोदीदी ओर सृतीभाभी भी नही हे.. तो वो मुजे घरका खयाल रखनेको कहेकर गइ हे.. मुजे नही आना.. आपही इसे पहेले घर छोडदो फीर खेतोपे चले जाना..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आपभी साथ चलोनां.. जीजु आपको वापस इधर छोड देगे..

लता : (धीरेसे) अरे नही नही.. इधर घरपे कोइ नही हे.. तुम तेरे जीजुके साथही चली जाना.. ओर सुन.. वहा जाकर उस कमीनेके साथ कोन्टेक्ट करनेकी कोसीस मत करना.. वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. समजी..? उनका नंबरतो तुजे बखुबी याद होगा..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही दीदी.. आइ प्रोमीस अब अ‍ैसा वैसा कुछभी नही करुगी.. ट्रस्ट मी..

लता : (मुस्कुराते) हंम.. गुड गर्ल.. जाओ अपने कपडे लेलो.. ओर अब मोबाइल मेरे पास ही रहेगा.. ओर हां.. वहा जातेही भाभीको कहेकर मुजे फोनपे बात करवाना की तुम वहा पहोंच गइ.. ओके..?

नीलम : (खडी होते) जी दीदी..

जब चाइ नास्ता खतम होगया तो नीलम उपर अपने कपडेकी बेग लेने चली गइ.. तो लखनने इसारोसे लताको पुनमके रुममे आनेको कहा.. तो लता सरमके मारे पानी पानी होगइ ओर नां मे गरदन हीलाते मना करने लगी.. तो लखन मुह बीगाडते जुठमुठ नाराज होगया.. तो लता जोरोसे हसने लगी.. तभी नीलम अपनी बेग लेकर नीचे आगइ.. तो लखन अपनी बाइक चालु करके बैठ गया ओर नीलम उनके पीछे बैठ गइ.. ओर लखनने बाइकको जाने दी.. तब..

लखन : (मुस्कुराते बाइक चलाते) नीलु.. आज भाइ नही हे.. तो चल हम रामुकाकाको जरा कहेकर जाते हे की मे आउ तबतक खेतोका काम देखले.. क्या तुमने हमारे खेतोको देखा हे..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) नही.. कभी नही देखा.. चलो.. जीजु.. थेन्क्स.. आपने हमे लतादीदीके गुस्सेसे बचालीया..

लखन : (हसते) हंम.. चल ठीक हे.. तुजे पहेले हमारा खेत दीखाता हु.. फीर मुजे तुमसे इस बारेमे बात भी करनी हे फीर हम घर चले जायेगे..

कहातो नीलम समज गइ की लखनजीजु जरुर उनके ओर धिरेनके बारेमे पुछेगे.. नीलमके दिलकी धडकन बढने लगी.. उनको लगाकी आज वो बुरी तराह फसी हे.. क्युकी नीलम इतनीभी ना समज नही थी.. की लखनकी हरकते ओर उनकी नजरको पहेचान ना सके.. लखन कलसेही उनके साथ कुछना कुछ हरकत कर रहाथा.. ओर लखन नीलमको लेकर खेतोपे आगया..
 
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