Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 34 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६९

उस दिन कादीर बहार कही होटेलसे खाना पेक करवाके लेआया.. तब सायरा ओर सबानाभी अपनी स्कुलसे आगइ.. जब सब लोग खाना खाने बैठ गये तब जरीना कादीरसे नजरे नही मीला पारही थी.. ओर उनसे बातभी नही कर रही थी.. सायराने जरीनाको खाना ना बनानेके लीये पुछा.. तो जरीनाने उनकी तबीयत खराब होनेका जुठा बहाना बताया.. अ‍ैसेही दिन बीतने लगे.. कादीर हर दिन अपनी बहन सायराकी चुदाइ करता रहा....अब आगे

कहेते हेनां.. जब अ‍ेक सादीसुधा ओरत अपने पतीके अलावा कोइ दुसरे मर्दके साथ पहेली बार रीलेशन बनाकर अपनी मर्यादा लांधती हे.. तब ही उसे समाज ओर पतीका डर रहेता हे.. जब पहेली बार उस मर्दसे चुदवा लेती हे तब दुसरी बार बडीही आसानीसे उस मर्दके नीचे लेटनेको तत्पर रहेती हे.. जब उस मर्दसे दुसरी बार चुदाइ करवा लेती हे.. फीरतो उस मर्दसे चुदवानेकी उनको आदत होजाती हे.. यहा यही हाल जीरनाका था..

भलेही फीरोज उनका पती था.. फीरभी काम वासनाकी आगमे जलते वो अपने बेटे कादीरकी ओर जुक गइ थी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप कादीरने जरीनाको ब्लेक मेइल करते पहेली बार जबरदस्तीसे चोद लीया था.. तबसे जरीनाको कही चेइन नही मील रहाथा.. अब वो हर दिन कादीरके बारेमे सोचते उनके खयालो मे डुबी रहेती.. तब ना कादीर उनसे नजरे मीला रहाथा.. ना जरीना कादीरके सामने नजर उठाकर देखती..

अ‍ेक बार फीर जरीनाको कादीरसे चुदवानेकी इच्छा होने लगी.. लेकीन वो कादीरको कैसे कहेकी मुजे आकर चोदलो.. तब वो टेडी नजरसे कादीरके सामने देखती रहेती.. इसी दौरान फोरोजकी नाइट सीफ्ट लग गइ.. तब जरीना हर दिन देर रात अकेली अपने बीस्तरपे करवटे बदलती कादीरका इन्तजार करती.. ओर सोचती की कादीर उसे अ‍ेक बार फीर आकर चोदले.. फीर चाहे जबरदस्तीसे ही क्युना चोदे..

ओर जरीनाकी कादीरसे फीरसे चुदवानेकी ये तम्मना भी अ‍ेक दिन पुरी होगइ.. बात तबकी हे जब इसी दौरान सायराका पीरीयड चल रहाथा.. तो वो तीन चार दिनसे कादीरको नही मीलपाइ.. ओर अपने रुममेही आराम करती.. उसी दौरान कादीर भी तीन चार दिन बीना चुदाइ रहा.. तीन चार दिन अपनी बहेन सायराकी चुत नही मीली.. तब अ‍ेक बार फीर कादीरको अपनी मां जरीनाको चोदनेकी इच्छा प्रबल होगइ..

तो उस रात हींमत करके देर रात सब लोग सोगये तब कादीर धीरेसे छतसे उतरकर नीचे आगया.. ओर सायरा सबानाके रुमकी ओर देखने लगा.. तो दरवाजा बंध था.. तब वो धीरेसे जरीनाके रुमकी ओर चला गया.. ओर दरवाजेको धीरेसे धका मारते देखता हे.. की दरवाजा खुला हेकी नही.. तभी अ‍ेकही धकेसे दरवाजा खुल गया.. तब जरीनाभी सो रहीथी.. ओर कादीर अंदर जाकर धीरेसे दरवाजा बंध करदेता हे..

तभी जरीना भी कादीरके खयालोमे कच्ची नींदमे थी.. तो दरवाजेकी आहट सुनकर आंख खोलकर देखने लगी.. तब कादीर अंदर आकर उनके रुममे आकर दरवाजा बंध कर रहाथा.. तो जरीनाके दिलकी धडकन बढने लगी.. आज उसे अपने मनकी मुराद पुरी होते नजर आइ.. वो मनही मन खुस होने लगी.. लेकीन अपने मां बेटेके रीस्तोको लेकर डरनेका नाटक करने लगी..

जब कादीर उनके बेडके पास आगया.. तब जरीना गभराते बेडपे अपने दोनो पेर सीकुडकर बैठ गइ.. ओर डरनेका नाटक करते कादीरकी ओर देखते उनसे थोडी दुर खीसकने लगी.. तो कादीरने बीना कुछ बोले अपने सर्टको नीकाल दीया.. फीर अपनी पेन्ट खोलते जरीनाको कंधेसे धका मारते फीरसे बेडपे सुला दीया.. तो जरीना अ‍ैसेही लेटे कादीरकी सब हरकत देखने लगी..

तभी कादीर पेन्ट नीचे करते अपने फन फैलाये खडे ओर तने हुअ‍े लंडको बहार नीकाल देता हे.. जरीना अ‍ैसेही लेटे कादिरके लंडको टेडी नजरसे देखने लगी.. तभी कादीर उनकी सारी ओर पेटीकोटको खीचकर नीकालने लगा.. तो जरीना कादीरकी ओर देखते उसे हल्कासा विरोध जताते रोकने लगी.. तब कादीर जबरदस्तीसे उनकी पेन्टी ओर ब्राको खीचने लगा.. तबभी जरीना उसे बीना कुछ बोले हाथसे रोकनेका नाटकर करती रही..

दोनोही बीना सब्द बोले अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते थोडी देर अ‍ेक दुसरेके साथ हाथ पांव चलाते रहे.. जबभी कादीर जरीनाके होठोको चुमनेकी कोसीस करता.. तब जरीना अपना मुह इधर उधर करते कादीरको होठ चुमनेसे रोकती.. ओर उनके चहेरेको हाथसे हटाने लगती.. तब कादीर उनके सख्त बडे उरोजोको मुहमे लेकर चुसने लगता.. तो जरीना अ‍ेक हाथसे अपने उरोजोको कवर करते कादीरको अपने बुब्ससे हटा देती..

लेकीन जरीना विरोधमे अ‍ेक सब्द भी नही बोल रहीथी.. ओर नाही उनकी आंखोमे कादीरके लीये कोइ विरोध था.. वो बस.. नीसब्द कादीरकी ओर देखती रहेती.. आखीर थोडी मस्ककस के बाद जरीनाका विरोध लेस मात्र रेह गया.. ओर वो लगातार कादीरकी आंखोमे देखती रही.. आखीर कादीरने जरीनाको पुरी तराह नंगी करदीया.. ओर जरीनके दोनो पैरोको फैलाकर पैरोके बीच बैठ गया..

तब जरीनाने कादीरकी ओर देखते अपने दोनो हाथ लैटेही अपनी चुतपे रख दीया.. तो कादीर अपने लंडको मुठीमे पकडकर हीलाते जरीनाकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखने लगा.. तब जरीना बहुतही सर्मसार होने लगी.. वो कादीरसे नजरे नही मीलापाइ.. ओर दुसरी ओर मुह करते अपनी नजरको चुका लेती हे.. ओर धीरेसे अपने दोनो हाथोको अपनी चुतसे हटा लेती हे.. जैसे कादीरको चोदनेके लीये मुक सहमती दे रही हो..

तब कादीर अपना लंड जरीनाकी चुतपे घीसने लगता हे.. तो जरीनाकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. ओर वो सरमाते इधर उधर मुह करती रही.. ओर कादीरके आखरी दावका बडेही बेसब्रीसे इन्तजार करने लगी.. कादीर जरीनाकी चुतपे लंडको रगडने लगा.. तब कुछही देरमे कादीरका लंड पुरी तराह गीला हो गया.. ओर कादीरने धीरेसे जरीनाकी चुतमे लंडको पुस करते चुतके लव होलमे फसा दीया..

तब जरीना बहुतही उतेजीत होगइ.. उनके तनमे सरसे पांव तक अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. वो मनही मन चाहने लगीकी कादीर जटसे उनकी चुतमे पुरा लंड घुसादे.. ओर उसे पुरी तराह चोद चोदके मसलदे.. लेकीन अपने मनकी अ‍ेकभी इच्छा अपने चहेरेपे जाहीर नही होने दे रही थी.. आज उसे कादीरकी हर हरकते अच्छी लग रहीथी.. वो कादीरके लंडकी दिवानी हो चुकी थी..

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तभी कादीर जरीनापे जुकते उनके उपर लेट गया.. तो आज जरीनाने कोइ प्रतीक्रीया नही दी.. वो अपना मुह साइडमे करके अ‍ैसेही लेटी रही.. ओर कादीरने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड जरीनाकी चुतमे उतार दीया.. तो जरीना खुद अपने मुहपे हाथ रखते चीलाइ.. ओर अपनी कमर हीलाते छटपटाइ.. तभी कादीर हाथके बल उचा होकर जोरोसे कमर हीलाते जरीनाको चोदने लगा..

तो जरीना आंख बंध करते छटपटाते अपना मुह इधर उधर करते कादीरसे चुदवाने लगी.. जरीना मनही मन कादीरसे चुदवाते बहुत खुस हो रहीथी.. लेकीन अपने चहेरेपे अपनी खुसी जाहीर नही होने दे रहीथी.. फीरोजके लंडसे कादीरका लंड थोडा मोटा था.. तो जरीना कादीरके बडे लंडकी दिवानी हो चुकी थी.. लेकीन जरीनाको ये नही पताथा की कादीरके लंडसे भी बडा ओर मोटा लंड होता हे.. जो इनकी चुतका इन्तजार कर रहा हे..

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कादीर जरीनाको चोदते उनके होठोको चुमनेकी कोसीस करता.. तो जरीना अपना मुह इधर उधर करते अपने होठोको छुनेसे रोकती.. कादीर बडेही जोरोसे कमर हीलाते जरीनाको चोद रहाथा.. तब जरीनाकी काम वासना ओर बढ गइ.. तब वो हल्केसे धीरे धीरे सीसकारीया करते कादीरसे कोइ प्रतीक्रीया दीये बगैर चुदवाने लगी.. आज अ‍ेक बार फीर कादीरने उसे जडा दीया.. तब उनका मन कर रहाथा की वो जडते समय कादीरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचले..
 
लेकीन जरीना कादीरको अपना प्यार जताना नही चाहती थी.. कादीरको अपने लंडपे जरीनाके जडनेसे गरम महेसुस हुआ.. फीर भी कादीर उनकी धमासान चुदाइ करता रहा.. जरीनाके दोनो बु्ब्स कादीरके हर धके के साथ तालमेलमे उछल रहेथे.. कादीरकी चुदाइने जरीनाको ओर कामातुर कर दीयाथा.. तब कुही देरकी घमासान चुदाइके बाद अ‍ेक बार फीर कादीरने जरीनाकी चुतको भरके हरी भरी करदी..

तो जरीनाभी उतेजीत होकर कांपने लगी.. ओर कादीरके साथ ही वापस जड गइ.. तब कादीर जरीनाके उपरसे उतर गया.. ओर अपना लंड साफ करके उसने अपने कपडे पहेनने लगा.. तब जरीना लेटेही अपने नीकरसे चुतको साफ करने लगी.. उनके चहेरेपे पुरी तराह संतुस्टीके भाव नजर आ रहेथे.. लेकीन कादीर कपडे पहेनकर जरीनाकी ओर ना देखते धीरेसे दरवाजा खोलकर वापस छतपे चला गया ओर सो गया..

तब जरीना अबभी चुतमे मीठासा दर्दके साथ बेडपे नंगीही लेटी हुइ थी.. आज कादीरने अ‍ेक बार फीर जरीनाके अ‍ेक अ‍ेक अंगको चोद चोदके हीला दीया था.. उनका पुरा बदन दर्द कर रहा था.. जरीना यही प्यारतो चाहती थी.. लेकीन अपने प्यार जतानेकी सबसे बडी दिवार आपसमे मां बेटेके रीस्तेकी थी.. कादीरने उसे दुसरी बार चोदकर फीरसे पुरी तराह संतुस्ट करदीया था..

अब जरीनाका कादीरसे चुदवानेका विरोध नामके बराबर रहे गयाथा.. क्युकी ये जरीनाकी जींदगीमे दुसरी बारथा.. जो वो कादिरसे चुदवाते दो दो बार जडी हो.. अ‍ैसा उनके पती फीरोजके साथ कभी नही हुआ था.. ओर कइ बारतो फीरोज उसे प्यासी भी रख देता था.. तब वो बाथरुममे जाकर अपनी उंगलीसे संतुस्ट होजाती थी.. लेकीन जरीनाको क्या पता.. आने वाले दिनोमे उनकी जींदगीमे कीतना बडा भुचाल आयेगा..

जरीनाने पहेली बार कादीरसे भलेही मजबुरीमे चुदवालीया था.. लेकीन जब अ‍ेक बार चुदवा लीया.. तब वो कादीरकी ओर काफी ढल चुकीथी.. क्युकी जो सुख उसे अपने पतीसे नही मील पाया वोही सुख उनके बेटेसे मील रहाथा.. ओर आज उसे कादीरने दुसरी बार चोद लीयाथा.. तब जरीना अब हमेसाके लीये कादीरसे चुदवानेका मन बना चुकी.. उसने अब मनही मन ठानलीकी अब वो कादीरको चोदनेके लीये कभी मना नही करेगी..

कादीनने जब दुसरी बार उनकी मां जरीनाको चोद लीया.. तब उनकी हिमंत भी ओर बढ गइ.. फीरतो आये दिन अ‍ैसा होने लगा.. जबभी उनको जरीनाको चोदनेकी इच्छा होती.. ओर फीरोजकी नाइट सीफ्ट होती तब वो देर रात जरीनाके कमरेमे चला जाता.. ओर उनकी जमकर चुदाइ करके वापस छतपे आकर सो जाता.. तब जरीना अ‍ैसेही सीथील रहेकर बीना कोइ प्रतीक्रीया दीये बगैर कादीरसे चुदवा लेती..

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जब फीरोजकी दिनकी पारीकी वजहसे कादीरको रातमे मौका नही मीलता.. तब वो सुबह कोलेजमे दो पीरीयड बंक मारके घरपे आजाता.. तब जरीना कभी कीचनमे खाना बना रही होती तब कादीर उसे वही जुकाकर खडे खडे चोद लेता.. या फीर कभी उनको गोदमे उठाकर बेडरुममे लेजाता.. ओर उसे घीडी बनाकर पीछेसे पेल देता.. अब हप्तेमे कमसे कम कादीर दो तीन बार जरीनाकी चुदाइ करने लगा..

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ओर जरीनाभी बीना कोइ प्रतीरोध कादीरसे चुदवाने लगी.. लेकीन आज भी दोनो चुदाइ करते कुछ भी नही बोलते.. ओर जरीना चुपचाप कादीरसे चुदवा लेती.. क्युकी कादीर उसे चोदकर दो दो बार जडाते उसे पुरी तराह संतुस्ट कर देताथा.. जब दोनो जड जाते तब कादीर उनसे कोइ बात कीये बगैर चला जाता ओर जरीना अपने रुटीन कामपे लग जाती.. जरीनाका अ‍ैसेही हसी खुसीसे दिन बीतने लगे.. दिनसे महीने ओर महीनेसे साल होगये..

अबतो जरीनाभी चुदवानेके मामलेमे कादीरसे काफी खुल चुकीथी.. जब घरपे कोइ ओर नही होता.. ओर जरीनाको कादीरसे चुदवानेकी इच्छा होती.. तब वो कादीरको बीना कुछ बोले अपने रुमकी ओर आंखोसे इसारा करते रुममे चली जाती.. ओर कपडे नीकालकर अपने दोनो पैर फैलाकर बेडपे लेट जाती.. तब कादीर उनकी रुममे आकर चुदाइ कर लेता.. ओर दोनो संतुस्ट होजाते तब अपने अपने कपडे पहेन लेते..

जबभी कादीर जरीनाको चोद लेता तब वो आइपील लेना कभी नही भुलती.. आज जरीना ओर कादीरके रीलेशनको तीन साल हो चुकेथे.. इन तीन सालमे आजतक सायराको कादीर ओर उनकी मां जरीनाके बीच अवैध रीस्तोके बारेमे पता नही चला.. तो जरीनाको भी कादीर ओर उनकी बहेन सायराके बीच जीस्मानी रीस्तोके बारेमे कभी पता नही चला..

जरीना ओर सायरा दोनोही अपनी सेफ्टीका पुरा खयाल रखती.. जबभी कादीर उनको चोद लेता दोनो आइपील लेना कभी नही भुलती.. लेकीन दोनोको ही पता नही थाकी कादीर अपनी कुछ बुरी आदतकी वजहसे दोनोको प्रेगनेन्ट करनेमे सक्षम नही था.. जरीनाको आज तक पता नही चलाकी उनकी बेटी सायरा कबकी कादीरकी बीवी हो चुकी हे..

आज कादीर अपनी इन्जीनीयरींगकी पढाइ पुरी करके अ‍ेक बडीही कंपनीपे बतौर अ‍ेन्जीनीयर नइ नइ जोबपे लग गयाथा.. तब फीरोज ओर जरीनाको कादीरसे अ‍ेक उमीद जगने लगी.. की अब अपने घरकी परीस्थीती बदल जायेगी.. यही सोचकर दोनो मीया बीवी बहुतही खुस थे..

तो सायराभी अपने कोलेज खतम करके घरपे अपनी मम्मीका हाथ बटा रहीथी.. तो सबानाभी डोक्टरकी कोलेजके लास्ट यरमे थी.. ओर अगले साल मास्टर करनेके लीये बेंगलोर पढने जाने वाली थी.. जीसके लीये उसे अभीसे बाराह लाख रुपीये फीसके लीये इन्तजाम करना था..

कहेते हेने जब घरकी कीस्मत बदलने वाली होती हे.. तब वो कीसीका इन्तजार नही करती.. यही अब फीरोजके घरपे हुआ.. तीन तीन साल तक कादीर उनकी मां जरीना ओर सायराकी चुदाइ करता रहा.. तब जाहीर सी बात हे दोनोके तनमे काफी बदलाव आ चुकाथा.. जरीना ओर सायराके चहेरेपे अब काफी नीखार आ चुकाथा.. जरीनातो पहेलेसे ही सादी सुधा थी.. तो वो औरत जैसे दीखेगी ये जाहीर सी बात हे..

लेकीन फीरभी वो पहेलेसे कइ गुना ज्यादा आकर्सक ओर कामातुर हो चुकीथी.. तो आजकल सायराभी अ‍ैक औरत जैसी दीखने लगीथी.. कादीरसे चुदवाकर उनके दोनो बुब्स अ‍ेक ओरतकी तराह बडे होगये थे.. उनके दोनो नीतंब भी पहेलेसे काफी बडे ओर भरावदार होचुके थे.. ओर उनका पुरा तन अ‍ेक सादी सुधा ओरतकी तराह काफी भरावदार दीख रहाथा.. उनका चहेराभी काफी खीला हुआ लग रहाथा..

ओर ये बात जरीना कही दिनोसे नोटीस कर रहीथी.. पहेलेतो जरीनाको सायराके उपर सीर्फ सक था.. लेकीन वोभी अ‍ेक ओरत थी.. ओर लडकीसे ओरत बननेके कारणको अच्छी तराह जानती थी.. तब उसे पुरा यकीन होगयाकी सायरा अब ओरत बन चुकी हे.. ओर उनका कीसीके साथ जीस्मानी तालुकात हे.. लेकीन कीसके साथ..? ये बात जरीना पता नही लगा पाइ.. ओर इसके लीये वो सायराके उपर कइ दिनोसे नजर रख रहीथी..

लेकीन सायरा हेकी कही हाथमे ही नही आती थी.. उनका बहारभी कीसीके साथ रीस्ता नही दीख रहाथा.. वो सारा दीन घरपे ही रहेती थी.. अगर बहार जानाभी होता तो सायरा सबानाके साथ.. उनके साथ.. या फीर कादीरके साथही जाती.. तो दुसरी ओर सायराकोभी पता चल गया थाकी उनकी मम्मीको उनपे सक हो गया हे.. तो वो भी मानसीक तौरपे घरसे भाग जानेकी पुरी तैयारीया करके बैठी थी..

तभी अ‍ेक दिन फीरोजके घरपे कोइ नही था.. फीरोज ओर कादीर अपनी नोकरीपे जा चुकेथे.. तो सबानाभी अपने कोलेजमे थी.. तो सायरा अपनी अ‍ेक सहेलीके घरपे गइ हुइथी.. तब ही जरीना सारे घरकी अच्छेसे सफाइ कर रहीथी.. आज सायराकी कीस्मत खराब थी जो जरीना उसीके कमरेकी सफाइ कर रहीथी.. जरीना अपने तीनो बच्चोकी अलमारी अच्छेसे साफ कर रहीथी.. ओर बादमे पुरा कमरा साफ करने वाली थी..

तभी उसे कादीरकी अलमारी साफ करते अ‍ेक छुपा हुआ बोक्ष मीला.. तो उसमे ढेर सारे कोन्डम जरीनाके हाथ लग गये.. तब पहेलेतो वो खुब सरमाइ ओर मुस्कुराते कोन्डमके बोक्षको वापस रख देती हे.. क्युकी कादीर अक्सर उनको कोन्डम लगाकर चोदता था.. उसे पता था कादीरभी उनकी सेफ्टीका पुरा खयाल रखता हे.. फीर वो सायराकी अलमारी साफ करने लगी.. तब साफ करते करते अ‍ेक बोक्ष देखकर वो बुरी तराह चोंक गइ..
 
क्युकी इन बोक्षमे ढेर सारी आइपीलकी स्ट्रीप ओर पेइन कीलरकी स्ट्रीप थी.. तब जरीनाका गुस्सा सातवे आसमानपे चला गया.. ओर वो वही सायराको गालीया देने लगी.. ओर सब गोलीया अपने पास रखली.. तब उसे अ‍ेक बारतो सबानापे भी सक हुआ.. ओर वो उनकी अलमारीभी खंगालने लगी.. लेकीन उसे सबानाकी अलमारीसे कुछ हाथ नही लगा.. तब उसने राहतकी सांसली..

ओर जरीना रुमकी सफाइ करके सब गोलीया लेकर अपने रुममे आगइ.. ओर बेडपे बैठकर सोचने लगी.. की सायराको इतनी सारी गोलीयोकी जरुरत क्यु पडी..? तब जरीनाको पुरा यकीन हो गयाकी सायराका कीसीके साथ जीस्मानी तालुकात हे.. लेकीन सायरा कही बहारतो अकेली नीकलती नही..? यातो उनके साथ या फीर कादीरके साथ ही बाजार जाती हे..

तो कही कादीरके साथ तो सायराका रीलेशन नही..? तब उसे सायरा ओर कादीरको लेकर मनमे बुरे खयाल आने लगे.. वो सोचने लगीकी अगर कादीर अपनी मांके साथ जीस्मानी तालुकात रखते उनको चोद सकता हे.. तो फीर अपनी बहेनको क्यु नही..? ओर जरीनाने उसी वक्त दोनोके उपर नजर रखनेकी ठानली.. ओर यही मौका उसे उसी दिन मील गया..

कादीरने कलही जरीनाको दिनमे चोद लीया था.. क्युकी आजसे फीरोजकी नाइट सीर्फ सुरु होने वाली थी.. तो अब कादीर दो तीन दिनके बाद कभीभी रातमे जरीनाके पास उनको चोदनेके लीये आ सकता था.. जब सामको फीरोज फेक्टरीपे चला गया तब सायरा सबाना ओर कादीर जरीना चारो अपने डीनरके लीये साथ बैठेथे.. तब जरीना बार बार कादीर ओर सायराकी ओर संकासे देख रहीथी.. ओर हुआभी यही..

जब चारो खाना खा रहेथे तब कारीद सबकी नजर बचाते सायराको इसारोसे देर रात उपर छतपे आनेके लीये केह रहाथा.. तो सायराभी सरमाते आंखोके इसारा करते हां मे गरदन हीलाती हे.. तब उन दोनोको नही पताथाकी उनकी मां जरीना टेडी नजर करते दोनोके इसारोको देख रही हे.. बस वही सबकी जींदगीका टर्नींग पोइन्ट था.. जरीना अपने बेटेके सातीर दिमागके सभी हथकंडे जानती थी..

जब सबने डीनर करलीया तब कादीर छतपे सोने चला गया..ओर सायरा सबाना मीलकर जरीनाकी काम करनेमे मदद करने लगी.. सब काम खतम होगया तो सबाना सायराभी सोने चली गइ.. तब जरीना भी दीखावेके लीये अपने रुममे चली गइ.. जब सायराने अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया तब जरीना धीरेसे बहार आगइ.. ओर अपने रुमका दरवाजा बंध करके कीचनमे अंधेरा करके फ्रीजके पीछे छुप गइ..

जब सबाना नींदकी आगोसमे चली गइ तब सायरा धीरेसे उठकर बहार नीकल गइ.. ओर आहीस्तासे अपने रुमका दरवाजा बहारसे बंध करदीया.. तब दरवाजेकी आहट सुनकर जरीना चोकनी होगइ.. तभी सायराने अपने मम्मीके रुमके पास आकर देख लीया.. की दरवाजा बंध हेकी नही.. फीर वो दबे पाव धीरेसे सीडीया चडकर उपर चली गइ.. तो कुछ देरके बाद जरीनाभी धीरेसे कीचनसे नीकलकर दबे पांव उपर जाने लगी..

उपर छतपे कादीर बेसब्रीसे सायराका इन्तजार कर रहाथा.. जैसेही सायरा उनके बीस्तरमे आगइ कादीरने सायराको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. तबतक जरीनाभी सीडीयोके पास छुपकर खडी होगइ.. ओर वहासे थोडासा मुह बहार नीकालकर उन दोनोकी हरकत देखने लगी.. तब कादीर सायराको अपनी बाहोमे भरके उनके होठोको चुम रहाथा..

ये देखकर ही जरीना चौंक गइ.. ओर उनकी आंखोसे आंसु नीकलने लगे.. क्युकी उसे अ‍ैसा लगने लगाकी कादीरने उसे धोखा देदीया हे.. तब दुसरे ही पल उनको कादीर ओर सायरापे बहुत बहुत गुसा आने लगा.. लेकीन वो वहा खडी रहेकर देखना चाहती थीकी दोनो कीस हद तक जाते हे.. तभी कादीर सायराको नंगी करके उसे सुला देता हे.. ओर खुदभी नंगा होकर सायराके बुब्स चुमते नीचेकी ओर सरक जाता हे..

वो सायराकी चुतको चाटते उनके भग्नसाके साथ खेलने लगता हे.. तब सायरा पागल जैसी होने लगी.. ओर छटपटाते अपनी कमर उछालने लगी.. तब अ‍ेक बारतो जरीनाकी काम वासना भी बढ गइ.. ओर वो अपनी चुतपे हाथ रखते दोनोकी हर कत देखने लगी.. तब कुछही देरके बाद सायराभी कादीरका लंड मुहमे लेकर चुस रहीथी.. जरीनाको ये सब देखकर बडीही घीन आ रहीथी..

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भलेही जरीनाने कादीरके साथ कीतनी भी बार चुदवालीया हो.. लेकीन उसने आज तक कादीरको अपने दोठो.. ओर अपने उरोजोसे दुर रखाथा.. ओर वो देखती रही की कैसे उनकी बेटी अ‍ेक रंडीकी तराह अपने भाइका लंड चुस रही हे.. तभी सायरा पीठके बल अपने दोनो पैर फैलाकर लेट गइ.. तब कादीर उनके पैरोके बीच आगया.. वो अपने लंडपे कोन्डम पहेनने लगा..

फीर सायराके उपर जुकते अपना लंड चुतपे सेट करते उनपे लेट गया.. ओर अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड सायराकी चुतमे घुसा दीया.. तब सायराके मुहसे हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उसने कादीरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तबकादीर कमर हीलाते सायराको चोदने लगा.. ओर कुछही देरमे दोनोके बीध घमासान चुदाइ होने लगी.. ओर जरीना उनके पास जानेके बजाये अपनी चुतको सहेलाते दोनोकी चुदाइ देखती रही..

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पता नही क्यु आज जरीनाको सायरासे बहुतही ज्वेलेसी फील होने लगी.. वो सायराको अपनी दुस्मन मानने लगी.. जैसे सायराने उनके बेटे कादीरको उनसे छीनलीया हो.. तब कुछही देरके बाद कादीर सायराकी चुतको भरते जडने लगा.. तब सायराने भी कादीरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया था.. ओर उनके साथ लीपलोक करते वो खुद जड रहीथी.. ओर कादीरकी पीठको सहेला रहीथी.. तभी जरीना दोनोके पास आकर खडी होगइ..

तो कादीर अबभी सायराकी चुतमे लंड डालकर उनके उपर लेटा हुआथा.. तब सायराकी नजर जरीनाके उपर पड गइ.. जो उनके पासही अदब लगाते गुस्सेसे सायराकी ओर देख रहीथी.. तब सायराकी गांड फटने लगी.. ओर वो मम्मी.. कहेते जटसे कादीरको अपने उपरसे धका मारते हटा देती हे.. ओर फटाफट अपनी चुतको साफ करते अपने कपडे पहेनने लगी.. तब मम्मीका नाम सुनते कादीरभी जरीनाको देख लेता हे..

ओर वोभी सरमाकर अपने कपडे पहेनने लगा.. जब दोनोने कपडे पहेन लीये तब दोनो ही सर्मसार होते अपनी नजरे जुकाये खडे रहे.. तभी जरीनाने कुछ बोले बगैरही कादीरके गालपे अ‍ेक तमाचा जड दीया.. तब सायराकी आंखसे आंसु नीकलने लगे.. ओर वो जरीनाको कुछ कहेना चाहे उनसे पहेलेही जरीनाने अ‍ेक जोरोका तमाचा सायराके गालपे जड दीया.. ओर सायराको चुप.. कहेते उनके सामने गुस्से देखने लगी..

कादीर : (गभराते सामने देखकर) मोम.. हम दोनो.. प्यार..

जरीना : (अ‍ेक ओर तमाचा मारते जोरोसे) चु..प.. अ‍ेकदम चुप.. बेसरम कहीका.. कभी भाइ बहेनके बीच प्यार हो सकता हे..? हंम..? क्या उस दिन इसी लीये तुम मुजसे पुछ रहेथेनां..? हंम..?

कादीर : (थोडी सखतीसे) हां.. इसीलीये पुछ रहाथा.. जब आप बडे भाइ बहेनके बीच सादी कर सकते हे.. तो हम प्यारभी नही कर सकते..? आप ओर बडी अम्माभी तो हमारे अबु पापाकी रीस्तेमे बहेन हो.. अगर हमने प्यार कीया तो कोनसी गलतीकी..?

जरीना : (सखतीसे) कमीने.. हम उनकी सगी बहेने नही हे.. समजे..? तो हमारेमे ये सादीया हो सकती हे.. कभी कीसी सगे भाइ बहेनको नीकाह करते देखा हे..? मुजसे जुबान लडता हे.. (सायराकी ओर देखते) ओर कमीनी.. तु यहा खडी खडी क्या बाते सुन रही हे.. जा मेरे रुममे जाकर बैठ.. मे अभी आती हु.. मुजे तुमसेभी बात करनी हे.. जा..

कहातो सायरा आंसु बहाते दोडकर नीचे चली गइ.. ओर भारी मनसे अपनी मम्मीके रुममे दरवाजा खोलकर उनके बेडके उपर बैठ गइ.. आज कादीर ओर सायराकी सब पोल उनकी मम्मीके सामने खुल चुकीथी.. तब सायराने अपनी मम्मीको सबकुछ सच बतानेका फैसला करलीया.. ओर वो अपने आंसु पोछते अपने रुममे चली गइ.. ओर अपना नीकाहनामा लेकर वापस अपनी मम्मीके रुममे आगइ.. तभी उपरकी ओर..
 
जरीना : (धीरेसे) कादीर.. तुमने अ‍ैसा क्यु कीया..? हंम..? क्या तेरी हवस मीटानेके लीये तुजे तेरी मां कम पड गइ थी..? जो अब अपनी बहेनके साथभी अपना मुह काला करने लगा.. हंम..? क्या मुजे बता सकता हे.. तुम दोनोके बीच ये सब कीतने दिनोसे चल रहा हे..?

कादीर : (नजरे जुकाये) मोम.. जाने दिजीयेना.. हमसे गलती होगइ..

जरीना : (आंसु बहाते धीरेसे) नही कादीर.. इसे तुम गलती कहेते हो..? ये गलती नही हे.. ये गुनाह हे.. मेने तेरे साथ क्या क्या सपने नही सजाये थे..? मेरे दिलमे हम दोनोको लेकर कीतने अरमान थे.. मे येभी भुल चुकी थी.. की तु मेरा बेटा हे.. मे तुमसे खुलकर केह भी नही सकतीकी मे तुमसे कीतना प्यार करती हु.. मेने तेरी हर तम्मना पुरीकी.. ओर आज तक करती आइहु.. मेने तुजे प्यार करनेके लीये कभी मना नही कीया.. जानता हे क्यु..? क्युकी मेने तुजे मनही मन अपना पती मानलीया था.. कादीर.. आज तुमने मुजे धोखा दे दीया..

कादीर : (पांव पकडते) नही मोम.. मुजे नही पताथाकी आप मुजे इतना चाहती थी.. बस अ‍ेब बार बता दीया होता.. मे अ‍ैसी गलती अब दुबारा कभी नही करुगा.. मोम.. बस अ‍ेक बार हमे माफ करदो..

जरीना : (आंसु बहाते) नही कादीर.. मेरे लीये मेरा फीरोजही ठीक हे.. ओर हां.. आजके बाद तुम इस तनको हाथभी मत लगाना.. मुजे तुमसे घीन आती हे.. मे तुम्हारी सकलभी देखना नही चाहती.. लेकीन तुजे जानेके लीये भी नही केह सकती.. वरना मेरी सबानाका सभी सपना टुट जायेगा.. जा सोजा.. अब मुजसे कभी बात मत करना..

कहेते जरीना आंखोमे आंसु लीये नीचेकी ओर जाने लगी.. तब सीडीयोके बीच खडी रहेकर अपना चहेरा अपने हाथोमे छुपाकर दबी आवाजमे रोने लगी.. वो वहा काफी देरतक रोती रही.. आज उनके सभी सपने चकनाचुर हो गयेथे.. जो उसने कादीरको लेकर देखे थे.. ओर वो भारी मनसे आंसु पोछते नीचे अपने रुममे आगइ.. तब सायरा बेडपे बैठकर उनका इन्तजार कर रहीथी.. तो जरीनाको देखतेही खडी होगइ.. ओर जरीनाने रुमका दरवाजा बंध करदीया..

जरीना : (बेडपे बैठते) सायरा.. बैठजा इधर.. ओर अब मे जोभी पुछु.. मुजे सबका सच जवाब चाहीये.. अगर सच नही बताया तो तुजे तेरे अबु ओर तेरी मोमकी कसम..

सायरा : (बेडके कोनेमे बैठते सांत लहजोमे) जी मोम.. कहीये.. मे सब सचाइ बता दुगी..

जरीना : (सामने देखते) सायरा.. सच बताना ये सब तुम दोनोके बीच कबसे चल रहा हे..?

सायरा : (नजरे जुकाते) मोम.. पीछले तीन सालसे पहेले.. जब हम दोनो स्कुलमे पढते थे..

जरीना : (चोंकते धीरेसे) व्होट..? क्या तबसे तुम दोनोके बीच फीजीकर रीलेशन हे..?

सायरा : (सरमाते धीरेसे) येस मोम.. मोम.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे..

जरीना : (फीकी मुस्कानसे) प्यार..? क्या अपने तनकी प्यास बुजानेको तुम प्यार कहेती हो..? मेने आज देखा तुम दोनोका प्यार.. तभी मे सोचु तेरे सरीरमे इतना बडा बदलाव कैसे आगया..? जो अ‍ेक सादी सुधा औरतमे दीखता हे.. तभी तो तुजे इतनी आइपीलकी जरुरत पडती हे.. क्या ये सच हेनां..?

सायरा : (हिंमत जुटाते धीरेसे नजर जुकाते) मोम.. बुरा मत मानना.. मे अब सादीसुधा औरत ही हु.. मेने ओर भाइने तीन साल पहेलेही नीकाह करलीया हे.. अब मे भाइकी बाकायदा बीवी हु..

जरीना : (फीरसे चोंकते) व्होट..? तुम दोनो पागल तो नही होगये..? क्या कभी सगे भाइ बहेनके बीच सादीया होती हे..? कहेदो ये सब जुठ हे.. तुम जुठ बोल रही हो..

सायरा : (नीकाहनामा देते) नही मोम.. मे सच केह रही हु.. ये रहा हम दोनोका नीकाहनामा.. आप देख लीजीये.. हमने तीन साल पहेलेही नीकाह करलीया हे.. प्यारतो हम बहुत पहेलेसे ही कर रहेथे.. लेकीन हमने नीकाह तब कीया.. जब आप ओर पापा बडे अबुकी तबीचत देखने गांव गयेथे.. तबही हम दोनो पहेली बार फीजीकल मीलेथे.. तबसे हम दोनो यहा मीया बीवीकी तराह रहेते हे.. मोम.. अब मे भाइकी बीवीहु.. हमे कोइ जुदा नही कर सकता.. आप ओर पापाभी नही..

जरीना : (नीकाहनामा देखतेही अपना सर पकडते) या खु--.. सायरा ये तुमने क्या कीया..? तुम दोनोने तो हमे कहीका नही छोडा.. अबतो तुजे सब समजाना बेकार हे.. जा दुर होजा मेरी नजरोके सामनेसे..

कहातो सायरा अपने आंसु पोछते अपना नीकाहनामा लेकर अपने रुममे चली गइ.. तब जरीना रुमका दरवाजा बंध करके बेडपे लेटे आंसु बहाने लगी.. आज कादीर ओर सायराने उनका दिल तोड दीयाथा.. तब दुसरी ओर सायराभी आंसु बहाते अपने रुममे आगइ.. ओर बेडपे लेटते सोचने लगीकी अब क्या करे..? तभी उसे कुछ खयाल आया.. ओर वो वापस उठकर उपर कादीरके पास चली गइ..

कादीर : (सायराको देखतेही) सायरा.. वापस क्यु आइ..? क्या कहा मोमने..? हंम..?

सायरा : (धीरेसे बाहोमे समाते) भाइ.. मेने मोमको हमारी सभी सचाइ बतादी.. मेने केह दीयाकी हम दोनोने नीकाह करलीया हे.. तो अब हमे कोइ जुदा नही कर सकता..

कादीर : (पीठ सहेलाते) सायरा.. तो फीर क्या कहा मोमने.. वो कुछ बोली नही..?

सायरा : नही भाइ.. जब मेने नीकाहनामा दीखाया तब कुछ कहेनेको बचाही नहीथा.. भाइ उसने मुजे कहा दुर होजा मेरी नजरोके सामनेसे.. तो भाइ.. अब हम दोनोका यहा रहेना बेकार हे.. अब वक्त आगया हे हमे ये घर छोडकर जाना होगा.. भाइ.. अपने दोस्तको फोन करदो.. हम उनके फ्लेटमे चले जाते हे.. फीर हम कही हमारे रहेनेका इन्तजाम करलेगे..

कादीर : हां सायरा.. मोमने मुजेभी अपनी सकल नही दीखानेको कहा हे.. चलो.. तुम जानेकी तैयारीया करो.. मे दोस्तसे बात करलेता हु.. हम अभी नीकल जाते हे..

ओर सायराने कादीरको अपने दिलकी बात बतादी.. जब कादीरने हां कहा तो सायरा फटाफट नीचे आगइ.. ओर अ‍ेक बेग लेकर धीरेसे आवाज ना करते अपने ओर कादीरके कपडे भरने लगी.. तबतक कादीरभी देर रात अपने अ‍ेक दोस्तको फोन करके बता देता हे.. ओर उनके खाली पडे फ्लेटका इन्तजाम कर लेता हे.. जीस फ्लेटमे कादीर ओर सायरा कइ बार जाकर चुदाइ कर चुके थे.. ओर कादीर नीचे आगया..

तब सायरा जानेसे पहेले अ‍ेक जरीनाके नाम चीठी लीखकर टेबलपे छोडदी.. ओर बेग लेकर बहार कादीरका इन्तजार कर रहीथी.. जब कादीर आया तो बाइक चालु कीये बीना कुछ दुर तक चलता गया.. फीर बाइक लेकर दोनोही घरसे नीकल गये.. जब सुबह जरीना ओर सबाना जागे.. तब सबानाके हाथ सायराकी चीठी हाथ लग गइ.. जो वो टेबलपे छोडकर गइथी.. तो सबाना उसे पढतेही रोने लगी..

ओर जटसे आकर चीठीको जरीनाको देती हे.. तब जरीनाभी पढतेहही चीठी लेकर वही आंसु बहाते नीचे बैठ गइ.. तब कुछही देरके बाद फीरोजभी अपनी नोकरीसे वापस आगया.. तब जरीनाने उसे सारी बात बतादी ओर चीठी फीरोजको देदी.. तब फीरोज चीठी पढतेही आग बबुला हो गया.. ओर इधर उधर फोन करते दोनोको ढुंढनेकी कोसीस करने लगा.. लेकीन दोनोका कहीसे पता नही चला ओर कादीरका फोनभी स्वीच ओफ आ रहाथा..

सबानाको अपने डोक्टर बननेके सभी सपने चकनाचुर होते नजर आने लगे.. तब वोभी आंसु बहाते बैठी रही.. अ‍ेक पलतो फीरोज ओर जरीनाको लगाकी पुलीसमे फरीयाद करके उनको ढुंढनेकी कोसीस करले.. लेकीन दोनोही बालीक थे.. दोनोने अपनी मरजीसे सादी कीथी.. तो पुलीसमे रीपोर्ट लीखवानाभी बेकार था.. इसी चकरमे आज पहेली बार सबानाने कोलेज जानेको मना कीया तब जरीनाने बडी मुस्कीलसे सबानाको समजाकर कोलेजमे भेज दीया.. ओर फीरोज जरीना अ‍ैसेही बेठे सोचते रहे..

जरीना : (आंसु बहाते) फीरोज.. जब हम बडे भैयाकी तबीयत देखने गयेथे तबही दोनोने नीकाह करलीया था.. बस.. मुजे तो मेरी सबुकी चीन्ता हो रही हे.. अब हम उनको डोक्टरी कैसे बढायेगे..?

फीरोज : जरीना.. उस कमीनोके लीये अब आंसु बहानेकी जरुरत नही हे.. समजलो आजसे वे दोनो हमारे लीये मर चुके हे.. ओर रही बात सबुको पढानेकी.. तो मे हमारा घर बेचकरभी सबुको पढाउगा..

जरीना : सुनीयेजी.. क्या हम हमे अभी जो जमीन वापस मीली हे.. उसे बेच नही सकते..?

फीरोन : नही जरीना.. वो सब जमीने इतने सालोसे बेकार पडीथी.. वो हमारे साहीलके लीये हे.. वहा पता नही थोडीसी जमीनमे वो अपना ओर भाभीका गुजारा कैसे करता होगा..

दोनो बाते करते रहे.. सामको सबाना कोलेजसे वापस आगइ तब फीरोजभी भारी मनसे फेक्टरीपे चला गया.. अब उसने दोनोको ढुंढनेकी कोसीस छोडदी.. ओर जानेसे पहेले जरीनाकोभी बता दीयाकी अब वो दोनो उनके लीये मर चुके हे.. उनके पीछे आंसु मत बहाव.. उस साम जरीनाने खाना बनाया ओर दोनो मां बेटीने मुस्कीलसे खाना खाया.. तब जरीनाको अपनी जेठानी सलमाको सब बताना उचीत लगा..

जब जरीना ओर सबानाने खाना खा लीया तो जरीना फोन लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर उसने गांवमे सलमाको फोन लगा दीया.. जरीनाने अपने ओर कादीरके बीचके रीलेशनको छोडकर सलमाको सब कुछ बता दीया.. ओर सबानाको लेकर उनके पढनेकी चीन्ताके बारेमे भी बात करली.. तब उसी रात सलमाभी साहीलके नीचे लेटकर उनसे चुदवाते लेटे लेटेही जरीनासे हुइ सब बाते साहीलको बता देती हे..

ओर अ‍ैसेही अ‍ेक हप्ता बीत गया.. तबभी कादीर ओर सायराकी कोइ खबर नही मीली.. तो इधर साहीलभी अपने चाचा चाचीके परीवारकी चीन्ता करने लगा.. क्युकी आखीर उनके रीयल मम्मी पापातो वही थे.. उनकोभी पताथा की उनके चाचा फेक्टरीमे काम करते हे.. तो इतने पैसोका इन्तजाम करना उनके लीये मुस्कील था.. तब उसने अपनी अम्मी सलमासे बात करनेका फैसला करलीया..
 
तो आइअ‍े थोडा सलमा ओर साहीलके बारेमे भी जान लेते हे.. इधर गांवमे जबसे सलमा ओर करीमने अपने भाइ फीरोज ओर जरीनासे साहीलको गोद लीया तब बचपनसेही साहील सलमाके साथ सोता था.. क्युकी सलमा साहीलको अपने सगे बेटेसेभी ज्यादा प्यार करती थी.. वो उनको अपनी नजरोके सामनेसे दुर नही रहेने देतीथी.. जब साहील पढाइके लीये जाता तो उनका बेसब्रीसे इन्तजार करती..

ओर जब साहील बडा होने लगा तबभी सलमा उनको अपने पास सुलाती.. साहील सलमाके साथ सोता तब नींदमे उनकी कमरमे हाथ डालता.. तो कभी नींमे उनका पेट सहेलाता.. ये आदत उनको बचपनसेही थी.. अब साहील सहेरमे कोलेजमे पढ रहाथा.. वो अब जवानीके दहेलीजपे कदम रख चुकाथा.. फीरभी सलमाने उनको अपने पास सुलानेकी आदत नही छुडवाइ.. लेकीन जब करीम चला गया..

तब सलमा ओर साहील घरमे अकेले रेह गये.. साहीलने अपनी पढाइ बीचमे ही छोडदी.. ओर अपनी खेतीबाडी सम्हालने लगा.. लखन भैया उनके खास दोस्तोमेसे अ‍ेक थे.. तब साहीलको खेतीके बारेमे कुछ ज्यादा ज्ञान नही था.. तो वो देवायतकी सलाह लेता.. ओर उनकी सलाहके हीसाबसे खेतीबाडी देखने लगा.. ओर उपजका सारा माल देवायतको ही बेच देता..

कभी पैसोकी जरुरत पडती तो वो लखनसे या देवायतसे उधार लेलेता.. ओर फसलके पैसे आतेही उधार चुका देता.. तो दुसरी ओर अब सलमाभी विधवा हो गइ थी.. लेकीन सलमा अबभी जवान थी.. तो उनको भी अपने तनकी जरुरत महेसुस होने लगीथी.. जीसके लीये वो बेचेन रहेने लगीथी.. वो अपने आपको चुतमे उंगली डालकर सांत करने लगी.. ओर रात रातभर करीमकी यादमे करवटे बदलती रही..

तो दुसरी ओर साहीलाभी जवान हो चुकाथा.. वोभी अपनी बडी अम्माकी तडपको महेसुस करने लगा.. ओर कइ बार देर रात सलमाको चुतमे उंगली करते देख चुका था.. लेकीन सलमा साहीलको साथमे सुलानेकी ओर उनके पेट सहेलानेकी आदतकी वजहसे ज्यादा दिन तक अपने तनकी आगको रोक नही पाइ.. ओर अ‍ेक दिन साहील नींदमे सलमाका पेट सहेलाते उनके उरोजोपे हाथ रख देता हे..

तब सलमा साहीलकी ओर देखने लगी.. तो साहील नींदमे था.. तब सलमाने हींमत करते साहीलके हापपे अपना हाथ रख दीया.. ओर साहीलके हाथोको दबाकर अपने उरोजको मसलवाने लगी.. तब साहील भी नींदसे जाग गया.. ओर सलमाकी सभी हरकते आधी आंख खुली रखकर देखने लगा.. तब उनका लंड भी तनके खडा होने लगा.. ओर जटके मारते सलमाके नीतंबपे ठोकर मारने लगा..

तब साहीलभी हीमंत करते सलमाके उरोजोको दबाते उनके साथ खेलने लगा.. तो सलमा ओर बहेकने लगी.. बस.. उस दिन वो अपने आपको रोक नही पाइ.. वो जटसे करवट लेकर साहीलकी ओर मुह करके लेट गइ.. तब साहील ओर सलमा दोनो की सांसे तेज चल रहीथी.. दोनोही प्यारसे अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखने लगे.. तब साहीलने हीमत करते सलमाकी ओर खीसकते उनको अपनी बाहोमे भरलीया..

तो सलमाभी कसके साहीलको अपनी बाहोमे भीचते उनके सीनेमे सर छुपालेती हे.. तब साहील सलमाके सरको सहेलाने लगा.. तब सलमाने धीरेसे नजर उठाकर साहीलकी ओर देखा.. तब साहीलने धीरेसे सलमाके होठोपे अपने होठ रखदीये.. तो सलमाकी आंख बंध होगइ.. ओर साहील सलमाके होठोका रसपान करने लगा.. तभी कुछही देरके बाद सलमाभी साहीलका साथ देने लगी.. ओर दोनो बहेकने लगे..

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कुछही देरके बाद सलमा ओर साहील अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम रहेथे ओर साहील सलमाके उरोजोके साथ खेलते उनकी चुतको सहेला रहाथा.. बस.. सलमाकी आग ओर भडक गइ.. वो सबकुछ भुल गइकी साहील उनका बेटा हे.. उसने साहीलको अपने उपर चडा दीया.. तब कुछ ही देरके बाद दो जीस्म अ‍ेक जान होगये.. साहील बडेही जोसमे सलमाको चोद रहाथा.. तभी सलमाको पता चलाकी साहीलका लंड कीतना बडा ओर मोटा हे.. उस रात साहीलने सलमाको दो बार ओर चोद लीया..

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बस.. उस दिनसे दोनो मां बेटेके रीस्ते बदल गये.. इसी बीच मुनानेभी अपने सभी दोस्तोको वो आयुर्वेदीक गोलीका कोर्ष करवा दीया था.. तब साहीलके लंडमेभी बहुत बदलाव आ चुका था.. साहीलका लंडभी लंबा ओर मोटा हो चुकाथा.. जीसका फायदा साहील ओर सलमा दोनोही मजेसे उठा रहेथे.. अब हर रात सलमा साहीलका बीस्तर गरम करते उनसे चुदवाने लगी.. दोनोके बीच सबकुछ होने लगा..

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दोनो ही अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करने लगे थे.. दोनोने अपने घरपेही अपने खु--के सामने अ‍ेक दुसरेको पती पत्नी मानलीया था.. ओर साथमे जीने मरनेकी कइ कसमे खा चुके थे.. अब सलमा साहीलको ही अपना खसम मानने लगी थी.. ओर बीवीकी तराह उनका खयाल रखती थी.. तो साहीलभी सलमाको अपनी बीवी मानकर उनके साथ अ‍ेक पतीकी तराह व्यवहार करता था..

इस बातको तीन साल होगये.. लेकीन सलमा ओर साहीलने इस बातकी कीसीको आज तक कानो कान भनक भी नही लगने दी.. जब इतने सालोके बादभी सलमाको कोइ बच्चा नही हुआ तब दोनो बीना डरके बीन्दास्त बीना कोन्डम बीना आइपील चुदाइ करने लगे.. ओर नतीजा ये हुआकी पीछली कइ चुदाइमे साहीलका बीज सलमाके गर्भमे पलने लगा.. ओर आज सलमा साहीलसे प्रेगनेन्ट हो चुकीथी.. तो ये हे हमारे साहीलका परीवार..

आज लखन बंसी श्रीधर मुना सबलोग आपसमे हसी मजाक कर रहेथे.. तब साहीलका बातोमे मन नही लग रहाथा.. वो आज कुछ ज्यादाही परेसान दीख रहाथा.. लेकीन जब सभी दोस्तो चले गये.. तब बंसी ओर लखन समज गयेथे की आज साहील कुछ परेसानी मे हे.. इसीलीये सबके चले जानेके बावजुद भी लखन बंसी ओर साहील रुक गये.. ओर लखन बंसी साहीलको लेकर कही अ‍ेक जगाहपे बैठ गये तब लखन उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७०

आज लखन बंसी श्रीधर मुना सबलोग आपसमे हसी मजाक कर रहेथे.. तब साहीलका बातोमे मन नही लग रहाथा.. वो आज कुछ ज्यादाही परेसान दीख रहाथा.. लेकीन जब सभी दोस्तो चले गये.. तब बंसी ओर लखन समज गयेथे की आज साहील कुछ परेसानी मे हे.. इसीलीये सबके चले जानेके बावजुद भी लखन बंसी ओर साहील रुक गये.. ओर लखन बंसी साहीलको लेकर कही अ‍ेक जगाहपे बैठ गये तब लखन उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगा....अब आगे

लखन : (मुस्कुराते) हां साहील.. बोल.. आज क्या परेसानी हे तुजे..?

बंसी : (मुस्कुराते) भाइ.. साहील दो तीन दिनसे कुछ ज्यादा परेसान हे.. वो आपसे अकेलेमे कुछ बात करना चाहता था.. तो मेने उसे सबके जानेके बाद आपसे बात करनेको कहाथा.. अब आप दोनो बात करो.. मे चला अपनी सांतीके पास.. हें..हें..हें..

लखन : (जब बंसी चला गया) हां साहील.. अब बोल.. अभी सीर्फ हम दोनोही हे.. कुछ परसानी हे..? कुछ पैसे बैसे चाहीये..?

साहील : (सरमाते धीरेसे) अरे नही नही भाइ.. पैसे नही चाहीये.. वो.. वो.. अब आपसे कैसे कहु.. क्युकी बातही कुछ अ‍ैसी हे.. मे पीछले अ‍ेक हप्तेसे परेसान हु.. कीसीको केह भी नही सकता.. बस.. सीर्फ आपही हो जो इसमे कुछ रास्ता नीकाल सकते हो..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब मामला थोडा गंभीर हे.. बता.. क्या बात हे..?

साहील : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आपतो जानते हो.. मेरे ओर अम्माके बीच अब पती पत्नी वाला रीलेशन हे.. अम्माको इतने साल होगये.. उनको कोइ संतान नहीथी.. तभी तो उन्होने मुजे गोद लीयाथा.. तो पीछले दो दिनसे अम्माको उल्टीया हो रही हे.. भाइ.. मुजेतो कुछ ओर ही आसंकाये हो रही हे.. मेरी तो कुछ समजमे ही नही आरहा की मे क्या करु..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे नहीरे.. जब इतने साल उनको कोइ बच्चा नही ठहेरा तो तु क्यु गभरा रहा हे.. अ‍ैसा कुछ नही होगा.. तु अ‍ेक बार सुधीरभैयाको दीखादे.. मे उनसे बात कर लुगा.. ओर कमीने.. अबतो उसे अम्मा मत बोल.. हर रात उनको ठोकता रहेता हे.. हें..हें..हें..

साहीला : (सरमाते धीरेसे) सोरी भाइ.. क्या हेना अब आदत होगइ हे.. हें..हें..हें.. भाइ.. अगर यहा हमारे सुधीर अंकलको दीखायेगे.. ओर कुछ ओरही गडबड नीकली तो बात पुरे गांवको पता चल जायेगी.. ओर अम्मा भी नही चाहती की इस बातका कीसीको पता चले.. तो अब आपही कुछ रास्ता नीकालो.. वैसे आपकी सृतीभाभी तो इन्हीकी डोक्टर हे.. कहोतो हम उनके पास सहेरमे दिखाने चले जाये..? बस.. वो यहा कीसीको ना बताये..

लखन : (थोडा सोचते) साहील.. वोतो मे उनको मना कर दुगातो वो कीसीको नही बतायेगी.. लेकीन पहेले ये बता तुम दोनो क्या चाहते हो..? कही बच्चा गीरानेकी तो नही सोच रहे..? क्युकी सृती भाभी अ‍ैसा काम नही करती..

साहील : (सरमाते धीरेसे) बस भाइ.. हम दोनो इसी उलजनमे फसे हे.. अम्माकोभी लगता हे उसे हमारा बच्चा ठहेर गया हे.. अ‍ेक तरफ तो उनको इतने सालोके बाद उनको बच्चा ठहेरनेकी खुसी.. तो दुसरी ओर हमारे रीस्तेको उजागर होनेका डर.. ओर अ‍ेक मेरे चाचाके घरकी टेन्शन.. जीनकी वजहसे वो ना चाहते हुअ‍े भी बच्चा गीरवानेकी बात कर रही हे.. ओर पीछले दो दिनसे आंसु बहा रही हे.. हमारी समजमे नही आता की हम क्या करे..?

लखन : (सामने देखते) क्यु..? अब चाचाके घरपे कोनसा टेन्शन आगया.. अभी अभीतो सबलोग आयेथे..

साहीला : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आप कीसीको कुछ मत कहेना.. अ‍ेक हप्ते पहेले वहा बडे भैया कादीरभाइ.. ओर बडी बहेन सायरादीदी.. दोनोही घरसे भाग गये हे.. तो वहा चाचा ओर चाची उनकी टेन्शनमे हे..

लखन : (आस्चर्यसे) क्या.. कादीरभाइ ओर सायरादीदी..? लेकीन क्यु..?

साहील : (सरमाके मुस्कुराते) भाइ.. अगर अ‍ेक जवान लडका ओर लडकी साथमे भागते हे तो क्यु भागते हे..? फीर भलेही वो दोनो सगे भाइ बहेनहो.. लगता हे जीस तराह हमारे गांवमे बदलाव हो रहा हे.. उसे तराह सहेरमेभी हो रहा होगा.. भाइ.. कलही चाचीका बडी अम्मापे फोन आया था.. उसीने सब बताया..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तो प्यारका मामला हे..? लेकीन दोनोको भागना क्यु पडा..? तेरे चाचा चाचीकोभी पता हे हमारे गांवमे ये सब बदलाव आने वाले हे.. तो तेरे भाइ बहेन तेरे चाचा चाचीको बता देते.. वैसेभी तुम लोगोमे चाचाकी लडकी बुआकी लडकीसे तो सादी करही सकते हे.. तो फीर इसमे क्या प्रोबलेम..?

साहील : (सरमाते हसते) हां भाइ.. वैसेभी अम्मा भी अबुके चाचाकी लडकी बहेन ही हे.. रही बात भागनेकी तो कल मे ओर अम्मा सो रहेथे तब अम्माने मुजे पुरी बात बताइ की आज तेरी चाचीका फोन आयाथा..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) साहील.. बताना क्या बात हुइ..?

साहीला : (सरमाते हसते) भाइ.. चाचाका पंद्नह दिन नाइठ सीफ्ट ओर पंद्नह दिन दिनका सीफ्ट होता हे.. दिनके सीफ्टके दो तीन चार दिन बाकी थे तब चाची पुरे घरकी सफाइ कर रही थी.. वहा सहेरमे उनका बहुतही छोटा मकान हे.. सीर्फ दो बेड होल कीचन.. अ‍ेकमे चाचा चाची सोते हे तो अ‍ेकमे सायरादीदी ओर सबाना दीदी सोते हे.. भाइ बारीस ओर ठंडकी सीजनमे होलमे ओर गरमीमे उपर छतपे सोते हे.. ये हे वहाके धरकी पोजीसन..
 
लखन : हंम.. वो चाची धरकी सफाइ कर रही थी.. फीर..

साहील : भाइ.. चाचा ओर बडे भैया अपनी नोकरीपे गयेथे.. तो दोनो दीदी कोलेज गइथी.. तब चाची उनके कमरेकी सब सफाइ कर रहीथी.. वहा तीनोकी अलमारी अलग अलग हे.. तब चाचीको सायरादीदी की अलमारीमे सफाइ करते बहुत सारी आइपीलकी ओर पेइन कीलरकी गोलीया मीली.. जो उसने अ‍ेक खानेमे छुपाकर रखीथी.. जीसे देखकर चाची चोंक गइ.. ओर उसने वो अपने पास रखली..

लखन : (मुस्कुराते) तो उनसे ये थोडीना साबीत होता हे की वो तेरे कादीर भाइसे चुदवाती हे.. हें..हें..हें..

साहील : (सरमाते धीरेसे) नही भाइ सुनोतो सही.. जब उनको ये सब मीला तो उनको सबाना दीदीपे भी संकाये होने लगी.. तो वहा उनकी अलमारीमे उनको कुछ नही मीला लेकीन भाइकी अलमारी साफ करते उनको वहासे बहुत सारे कोन्डम मीले.. तब चाचीको बहुत कुछ आसंकाये होने लगी.. ओर उसने दोनोके उपर नजर रखने की ठानली.. वो दोनोके उपर नजर रखने लगी.. ओर उस रात चाचाकी नाइट सीफ्ट सुरु होगइ..

लखन : (हसते) हंम.. फीर.. हें..हें..हें..

साहीला : (हसते) क्या भाइ.. आपको हसी आ रही हे..? सुनो.. रातपे चाचा अपनी नोकरीपे चले गये तब चाची भैया ओर दोनो दीदीया खाना खा रहेथे.. तब भैया ओर सायरादीदी आंखोके इसारोसे बाते करने लगे.. भैया दीदीको देर रात उपर छतपे आनेको केह रहेथे.. तब उनको नही पताथाकी आज चाची उन दोनोके इसारोको नोटीस कर रही हे.. फीर खाना खाकर भाइ छतपे सोने चले गये तो चाची ओर दोनो दीदीने घरका सब काम नीपटा लीया ओर फीर थोडी देर टीवी देखकर सब अपने अपने रुममे सोने चले गये..

लखन : (हसते) फीर.. हें..हें..हें.. आज दोनो गये कामसे.. हें..हें..हें..

साहील : (हसते) हां भाइ.. सुनोतो सही.. चाचीने दोनोके इसारे देखलीये तब वो अपने रुमका दरवाजा बंध करके कीचनमे अंधेरेमे फ्रिजके पीछे छुपकर खडी थी.. जब देर रात सबानादीदी सोगइ.. तब सायरादीदी धीरेसे दरवाजा खोलकर बहान नीकली.. फीर उसने अपने रुमका फीर चाचीके रुमके दरवाजेको बहारसे धीरेसे लोक करदीया.. ओर दबे पांव धीरेसे उपर छतपे भैयाके पास चली गइ.. तब उनको नही पताथा की चाची कीचनमे उनपे नजर गडाये खडीथी.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) साला.. तो क्या चाचीने दोनोको रंगे हाथ पकडलीया..?

साहील : (हसते) हां.. जब सायरादीदी उपर चली गइ तो चाचीभी काफी देरके बाद उपर दबे पांव गइ.. ओर सीडीयोके पास छुपकर देखने लगी.. तब कादीर भाइ सायरादीदीके उपर लेटते उनको जोरोसे चुदाइ कर रहेथे.. जब दोनो जडने लगे तब चाची दबे पाव उनके पीछे पास जाकर खडी होगइ.. दोनोने चाचीको खडे पाया.. तो उनकी सीटीबीट गुल होगइ.. चाची उनको कुछ नही बोली..

ओर अ‍ेक अ‍ेक जोरोका तमाचा दोनो के गालपे जड दीया.. फीर दोनोको फटकार लगाकर सुबह उनको मीलकर बात करनेको कहा.. फीर जब सुबह हुइ.. तब भाइ ओर दीदी दोनोही अपने घरपे नही थे.. सुबह चाचीको सायरा दीदीकी चीठी मीली.. जो चाचीके नाम लीखकर गइथी.. की तीन साल पहेलेही दोनो स्कुलमे थे तबही नीकाह करलीया था.. तो उनको ढुढनेकी कोसीस ना करे..

लखन : (हसते) हंम.. तो ये बात हे.. तो इसमे तुम क्या कर सकते हो.. तु अब अपना देख.. ये सबतो होताही रहेगा.. अब ये बता तुम ओर तेरी अम्मा क्या चाहते हो..?

साहील : भाइ.. इतने सालोके बाद अम्माकी गोद भरी हे.. वो बहुत खुस थी.. मे इस बच्चेको गीराना नही चाहता.. बस अब चाचा चाची मानजाये.. उनकोतो पताभी नही हेकी हम दोनो रीलेशनमे हे.. जब उनको पता चलेगा तब पता नही क्या हंगामा करेगे वो.. भाइ.. मुजे सबाना दीदीकी बहुत टेन्शन हे.. बस वो अ‍ेकही हे जो मुजसे सबसे ज्यादा प्यार करती हे.. जब इधर आती हे तो भाइ भाइ करते थकती ही नही..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु.. अब उनको क्या हुआ..?

साहील : भाइ.. वो सृतीभाभीकी तराह गायनेक डोक्टर बनना चाहती हे.. लेकीन अब कादीरभाइ चले गये हे.. ओर चाचाके पासभी इतना पैसा नही होगा.. तो अब वो सबाना दीदीको पढायेगे कैसे..? बस.. अब फाइनल यर ही बाकी हे.. उसे अब बेंगलोरमे अ‍ेडमीशन मील रहा हे.. तो वही पढने चली जायेगी.. चाची केह रहीथी इसमे अभी बारह तेरह लाख रुपीये भरने होगे.. चाचा कहासे नीकालेगे इतने पैसे..?

लखन : (कुछ सोचते) हंम.. पहेले ये बता तुमने इस बारेमे क्या सोचा हे..? फीर मे तुजे कुछ सजेस कर सकता हु..

साहील : भाइ.. अबतक खेती बाडीमे मेने पैसे बचाकर रखे हे.. ओर चाचाके हीसेका आधा पुरा हीसा मेरे पास पडा हे.. मेने सोचाथा की जब सायरादीदी या फीर कादीरभाइकी सादी होगी तब उनको दे दुगा.. लेकीन अबतो मामला ही बीगड गया हे.. तो सोच रहा हु.. अब ये पैसे मे सबानादीदीकी पढाइके लीये उनको देदु..

लखन : (मुस्कुराते) साहील.. तुमने बहुतही सही सोचा हे.. ये बता तेरे चाचाका पैसा तेरे पास कीतना पडा हे.. ओर तेरे पास कीतना पैसा पडा हे.. इतने सालसे खेती सम्हाल रहा हे.. तो कुछ तो होगाही..

साहील : (मुस्कुराते) भाइ.. लगता हे बात बन सकती हे.. इन चार सालमे चाचाके हीस्सेका कोइ साडे आठ लाख रुपीये होगे.. ओर मेरे पास घरका सब खर्चा करते चार साडे चार पांच लाख रुपीया होगा..

लखन : (हसते) तो कमीने होगइ तेरी प्रोबलेम सोल्व.. वैसेभी अभी तुम अपनी खेतीका अ‍ेक चोथाइ हीस्सा ही खेड रहे हो.. सोचो.. अभी तीज गुना जमीन तुम्हारी अ‍ैसेही बंजर पडी हे.. जो अभी वापस मीली हे.. अगर वो सभी तुम सही करके खेडोगे.. तब तुम्हारी आमदानी कीतनी बढ जायेगी..

साहील : (हसते) लेकीन भाइ.. इस जमीनमेभी मुजे मजदुर लगवाने पडते हे.. तो इतनी सारी जमीन मे अकेला कैसे सम्हाल पाउगा.. ओर वैसेभी ये जीमीन हमारे पुर्खोकी थी.. तो इसमे भी चाचाका हीसा हे..

लखन : अबे उलुके पठे.. वहा तेरे चाचा कीसी प्राइवेट फेक्टरीमे क्या जख मरवाते हे..? तो कमीने उसे यहा वापस बुला नही सकता..? जब उनके पास इतनी जमीन हे.. जब जमीन नहीथी इसीलीये तो गयेथे यहासे.. अब तो सब वापस मील गइ हे तो वापस बुलाले उसे..

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. क्या बात कर रहे हो..? बाततो आपकी सही हे.. लेकीन वो चाचा हे मेरे.. मे उनसे कैसे बात करुगा..? वो मेरी बात मानेगे नही..

लखन : (मुस्कुराते) साहील.. तुम अ‍ेक काम करो.. अभी कल पहेले तो तेरी चाचीको फोन करके बतादे की सबानाकी कोइ चीन्ता मत करना.. उनका सब इन्तजाम होजायेगा.. ताकी उनकी ये टेन्शन तो खतम होजाये.. ओर मे अ‍ेक दो दीनमे फ्रि होजाउगा तब तुम दोनो मीया बीवी मेरे साथ चलना.. मुजे चाचसे कुछ बात भी करनी हे.. समजले तेरी ओर उनकी दोनोकी सभी समस्या हल होगइ..

साहील : (सरमाते हसते) ठीक हे भाइ.. क्या आप अम्माको मेरी बीवी केह रहे हो..? वो कहा मेरी बीवी हे..? क्या भाइ आपभी..? वो मेरी अम्मा हे.. अभी हमने कहा नीकाह कीया हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) साहील.. इसलीये तो तुजे केह रहा हु.. की तेरे चाचा चाचीको इधर बुलाले.. तब बडे भैया उनको समजा देगे.. तो तेरी ओर तेरी अम्माकी सादी आसानीसे होजायेगी.. ओर तुम दोनोको बच्चा गीरानेकी भी जरुरत नही पडेगी.. क्या कहेते हो..? हें..हें..हें..

साहील : (खुस होते हसते) अरे हां भाइ.. बाततो आपकी सही हे.. ठीक हे.. आप फ्रि हो तब बता देना हम तीनो चाचाके घर चले जायेगे.. हें..हें..हें..

अ‍ैसी ही बाते करते दोनो आगेकी प्लानींग करके अपने अपने घरपे चले गये.. इन सबके बीच आज अ‍ेक घरमे अ‍ेक ओर सुहागरातकी तैयारीया फुलोसे बेड सजाते चल रही थी.. वो घरथा डो. सुधीरका.. वहा चारु ओर नीशा दोनो मीलकर अपना बेड सजा रहीथी.. चारु रमेशको नीशा अकेली हे.. कहेकर उनके घर चली गइथी.. तो रमेश भी आज घरपे अकेला था.. आज रस्मी भी वंदनाको लेकर अपने घरपे चल गइ थी..
 
तो दुसरी ओर आज बसंतीके घरपे सबने खाना खालीया.. तो उनका पती खाना खाकर सो गया था.. तब बसंतीने थोडी देरके लीये मुनाको अपने दोस्तोके यहा भेज दिया था.. ताकी खुद अपने हाथोसे बरखाको अपनी सुहागरातके लीये सजा सके.. तो आज श्रीधरके घरभी रातको जयश्री सबके सामने अपने भाइ श्रीधरके कमरेमे बीन्दास्त सोने चली गइ.. तो उनकी मां वृन्दा उसे देखती ही रेह गइ..

वो उनको कुछ बोलभी तो नही सकती थी.. तो उसने अपने देवर जीतुलालको देर रात उपर छतमे अकेले मीलनेका इसारा कीया.. तो जीतुलालनेभी इसारोसे हां कहेदीया.. वो जीतुलालको मीलकर अब बहोतही कठोर फैसला लेना चाहती थी.. क्युकी पीछली बार जब वो ओर जीतुलाल बच्चा गीरवाने गये तब इस बार डोक्टरने उसे आखरी बार कहेते वोर्नींग देदीथी.. की अब बच्चा गीरारा उनके लीये खतरनाक होगा..

तो राजीवके घरभी सब लोगोने डीनर करलीया तब देवायत भी वहासे नीकल गयाथा.. तो मंजुने चंदाको धिरेनको फोन करनेके लीये कहा.. तो चंदा खुस होते अपना फोन लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. आज उनकी खुसीका कोइ ठीकाना नहीथा.. वो ये खुस खबरी अपने बेटे धिरेनको देना चाहती थी.. सब लोग बातो मे बीजीथे तब चंदा उपरकी मंजीलपे जाकर धिरेनको फोन करने लगी.. ओर उसने धिरेनको फोन लगा दीया..

धिरेन : (थोडा मायुस होते) हां मम्मी.. बोल.. क्या हुआ..? आप मौसीके घरपे होनां..?

चंदा : (सरमाते हसते) हां बीटु.. सुन.. अभी पुनम ओर सृती इधर आइ हे.. तो सामको पुनमको उल्टीया हुइ.. ओर उसे सृतीने चेक कीया तो पता चलाकी.. सायद पुनोदीदी प्रेगनेन्ट हे.. बीटु.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. तु सायद पापा बनने वाला हे.. पकातो कल सुबह पता चलेगा.. हें.. हें.. हें..

धिरेन : (थोडा परेसान होते) मोम.. आपको नही लगता ये थोडी जल्दबाजी हे.. आप पुनोको समजाइअ‍ेनां..

चंदा : (थोडा गुस्सा होते) क्या समजाओनां.. तु पागल होगया हे क्या..? अरे बेटा यहीतो उमरहे पापा बननेकी.. क्या बुढा होजायेगा तब पापा बनेगा..? अ‍ैसी पागलो जैसी बाते मत कर.. ओर सुन.. यहा तेरी मौसी.. मौसा सब लोग ये बात सुनकर कीतना खुस हे.. ओर तुम होकी..

धिरेन : मोम.. क्या सबलोग उधर हे..? कही मौसाजीकी तबीयत फीरसे तो खराब नही हुइ..?

चंदा : (थोडी मायुस होते) नही बीटु.. अबभी तो सब ठीक हे.. लेकीन तुजेतो पता हेना..? तेरी मंजुदीदीको सब पता चल जाता हे.. तो उसने सबको यहा बुलालीया हे.. बीटु.. मुजेतो कुछ आसंकाये हो रही हे.. तो तुमभी कल यहा आजा.. ओर अ‍ेक बार तेरे मौसीजीको मीलले.. बस मुजे ज्यादा कुछ नही कहेना..

धिरेन : (थोडा चींतीत होते) ठीक हे मोम.. मे कलही उधर आ रहा हु.. आप फीकर मत करना..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. ओर सुन.. अगर तुम कल आओतो पुनमदीदीसे कुछ अ‍ैसी वैसी बाते मत करना.. समजे..? वोभी कीतनी खुस हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां मोम.. वोभी तो यही चाहती थी.. ठीक हे मोम.. आइ अ‍ेम हेप्पी.. मे कल आ रहा हु.. लव यु मोम.. बाय..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु बेटा.. बाय..

कहेते धिरेनने फोन काट दीया.. चंदातो बहुत खुसथी.. लेकीन धिरेन नीलमके साथ रंगे हाथ पकडाजानेकी वजहसे बहुत मायुस हो गयाथा.. ओर उपरसे चंदाने जब पुनमकी प्रेगनन्सीके बारेमे बताया.. तो थोडा ओर परेसान होगया.. क्युकी अब वो नीलमके साथ अपना घर बसानेका सपना देख रहाथा.. ओर इस बारेमे धिरेन ओर नीलमने बहुत सारी प्लानींग भी करलीथी.. अब ना चाहते हुअ‍े भी उसे चंदाकी बात माननी पडी..

तो आज बंसीके घरभी जबसे जागृती जयश्रीको मीलकर आइथी.. वो भी अपने भाइको मीलनेके लीये तरस रहीथी.. सामको सामत घरपे आगया.. तो घरके सभी लोगोने साथमे बैठकर खाना खालीया.. तब जागृती ओर बंसी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने बैठे थे.. तब सबसे छुपकर बंसीने अ‍ेक बार फीर जागृतीको आंख मारदी.. तो जागृती दुसरी ओर मुह करते सरमाते हसने लगी.. ओर इसारोसे सबके होनेका इसारा करने लगी..

तब बंसीकोभी तसली मील गइकी अब मामला पुरी तराह फीट हे.. जब सबने खाना खालीया तो सामत अपने रुममे जाकर सोगया.. तो जया रुममे गरमी लगनेका बहाना बनाकर उपर छतपे सोने चली गइ.. तब सांती ओर जागृतीने मीलकर घरका सब काम फटाफट नीपटा लीया.. तो इस बार सांतीको भी जागृतीका व्यावहार उनके प्रती अ‍ेक सहेली जैसा लगा.. जागृतीभी अब अकेलेमे सांतीको भाभी भाभी कहेकर बुलाने लगीथी..

आज सांती बहुतही सर्मसार हो रहीथी.. बंसी खाना खातेही अपने दोस्तोके पास चला गयाथा.. जब घरका सब काम नीपट गया तो सबलोग सोनेकी तैयारीया करने लगे.. जागृती ओर सांती भी अपने अपने रुममे चली गइ.. जागृती कुछ देर अपने भाइ बंसीके बारेमे सोचने लगी.. जबसे श्रीधर ओर जयश्रीने भागकर सादी करलीथी तबसे जागृतीकी चाहत भी अपने भाइ बंसीकी ओर काफी बढ गइ थी..

वो अब कीसीभी हालमे बंसीको पाना चाहती थी.. ओर दोनोके बीच मामलाभी बहुत आगे बढते दीखाइ दे रहाथा.. वो बंसीको अकेलेमे मीलना चाहती थी लेकीन अभी मीलना संभव नही था.. क्युकी उनको पताथा की अब देर रात बंसीके पास उनकी बुआ सांती चली जायेगी.. ओर सुबह होनेसे पहेले वो बंसीके साथ प्यार करके अपने रुममे आकर सो जाती हे.. तब जागृती खडी होकर सांतीके रुममे चली गइ.. देखातो सांती आयनेके सामने अपने आपको हल्कासा शींगार करते सजा रहीथी.. तभी..
 
जागृती : (मुस्कुराते अंदर आकर दरवाजा बंध करते) भाभी.. क्या कर रही हो..? क्या भाइके लीये रोज अ‍ैसे शींगार करती हो..? क्या मस्त लग रही हे आप.. हें..हें..हें..

सांती : (सर्मसार होते मस्कुराते) अरे आओ आओ.. तारीफके लीये सुक्रिया.. जागु.. क्या बात हे.. आज तो मेरी ननंद खुद मुजसे मीलने आइ हे..? हें..हें..हें.. कहो.. कैसे आना हुआ..?

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते पास बैठते) बस कुछ नही.. अभी नींद नही आ रहीथी.. तो मेतो सीर्फ देखने आइथी की मेरी भाभी क्या कर रही हे.. क्या भाइको मीलनेके लीये जानेकी तैयारीया हो रही हे..? हें..हें..हें..

सांती : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. हां.. बंसीको मीलने मे अ‍ैसेही तैयार होकर जाती हु.. ओर उनकोभी बहुत अच्छा लगता हे.. तुम कहो.. क्या अभी कोइ लडका बडका ढुंढा हे की नही..? हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) क्या भाभी आपभीनां..? नही.. अभी कोइ नही हे.. भाभी.. क्या आपसे अ‍ेक बात पुछु..? आप नाराज तो नही होगीनां..?

सांती : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. पुछो.. क्या मेरी प्यारी ननंदसे मे कभी नाराज हो सकती हु..? पुछो..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. मुजे भाइके ओर आपके रीलेशनके बारेमे जानना हे.. की आप दोनो कैसे अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे..

सांती : (मुस्कुराते) हंम.. क्या करोगी जानकर..? ठीक हे बता दुगी.. लेकीन अभी नही.. क्युकी बात थोडी लंबी हे.. हम दोनो अकेली होगी तब फुरसतमे बतादुगी.. बता..ओर क्या पुछना हे..?

जागृती : (मुस्कुराते मन टटोलते) भाभी.. आपकी तो अ‍ेक बार सादी हो चुकी हेनां..? मानलो अगर कल भाइके साथ आपकी सादी होगइ.. अरे मानलो क्या..? समजोना हो ही जायेगी.. ओर कुछ सालोके बाद भाइको कीसी कुआरी लडकीसे सादी करनेकी इच्छा हुइ.. तो आप क्या करोगी..? इसके बारेमे आपने कभी सोचा हे..? क्युकी हर लडकेके मनमे कहीना कही कीसी कुआरी लडकीसे सादी करनेकी तम्मना होती हे..

सांती : (घुमकर जागृतीकी ओर होते अ‍ेक नजरसे देखते) हंम.. बाततो तेरी सही हे.. लेकीन जागु.. तुम चीन्ता मत कर.. क्युकी बंसी मुजे बहुत चाहता हे.. ओर मेभी उनको इतना ही चाहती हु.. की वो कीसी लडकीकी ओर आंख उठाकर भी नही देखेगा.. ओर अगर बाय चान्स तुम जो केह रही हो.. अ‍ैसा हुआ.. तो मे खुसी खुसी उस लडकीको अपनी सौतनके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करलुगी.. क्युकी बंसीके बारेमे सीर्फ मुजे पता हे..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) क्या..? आपको भाइके बारेमे क्या पता हे..? भाभी.. प्लीज.. हें..हें..हें..

सांती : (हसते) नही.. अ‍ैसी बाते कुआरी लडकीको नही बताइ जाती.. ओर खास करके तुजे.. क्युकी अ‍ेकतो वो तेरा भाइ हे.. ओर उपरसे तेरी जवानी उफानपे हे.. ओर तुजेतो पता हे आज कल सबको अपने भाइको ही प्यार करना हे.. हें..हें..हें.. अगर मेने तुजे बता दीया तो मेरा चान्स तो गया.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाकर हसते पीठमे अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. प्लीीज.. प्लीज.. मजाक नही.. बताइअ‍ेना.. मेरी प्यारी भाभी.. कीतनी क्युट हे.. हें..हें..हें..

सांती : (मुस्कुराते) हंम.. भाभीको मस्का लगा रही हे..? हें..हें..हें.. तु मानेगी नही.. हें..हें..हें.. तो सुन.. बंसी इतना सक्षम हेकी वो हम दोनोको खुस रख सकता हे.. आइ मीन.. हम दोनो सौतनको.. क्युकी कभी कभी तो मुजेभी लगता हे इनको जेलना मुज अकेली का काम नही.. पता नही उनमे इतनी ताकात कहासे आजाती हे.. समज गइ..? ओर फील हालतो मुजे दुर दुर तक अ‍ैसी कोइ संभावना नजर नही आती.. जो कोइ मेरी सौतन बन सके.. हें..हें..हें..

जागृती : (मुस्कुराते) भाभी.. मे अभीकी बात नही कर रही.. कुछ सालोके बादकी बात कर रही हु.. हें..हें..हें..

सांती : (मुस्कुराते अपना शींगार करते) हंम.. तबकी तब देखेगे.. मुजे नही लगता कोइ मुजे टकर दे सकती हे.. हां.. अगर आगे जाकर हमारे गांवमे कुछ बदलाव हुआ.. तो मे कुछ नही कहे सकती.. तब मुजे अ‍ेकही लडकी नजर आती हे जो मेरी सौतन हो सकती हे.. सीर्फ वोही मुजे टकर दे सकती हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते) अच्छा..? कौन हे वो..? जो आपको टकर दे सकती हे.. बताइअ‍ेनां..?

सांती : (अ‍ेक नजरसे देखते मुस्कुराते) वो लडकी हे.. खुद तुम.. हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते सांतीको मुका मारते) भाभी.. क्या बोल रही हो..? मजाक नही.. वो भाइ हे मेरा..

सांती : (सरारतसे मुस्कुराते) भाइ हेतो क्या हुआ.. तुमने तेरी सहेली जयश्रीको देखा नही..? ओर जब गांवमे बदलाव होगा तो ये सबतो तब आम बाते होगी.. ओर अभी गांवमेभी तो अ‍ैसे कइ रीस्ते देखनेको मील रहे हे.. देखा नही.. आजही बरखाकी सादी उनके भाइ मुनासे होगइ.. तो फीर तेरीभी हो सकती हे.. तो तुम मेरी सौतन बनकर आजाना मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते मुका मारते) क्या भाभी.. आपभी.. आप कैसा मजाक कर रही हे..? आप कुछभी बोलती हे.. अ‍ैसा कभी नही होगा.. हें..हें..हें..

सांती : (सामने देखकर मुस्कुराते) जागु.. अ‍ेक बात पुछु..? अगर बंसी खुद अ‍ैसा चाहेगा तो फीर तुम क्या करोगी..? हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते खडी होगइ) भाभी.. आप बहुत कमीनी हो.. चलो मे जाती हु.. आप जाओ अपने यारको मीलने.. मे चली..

सांती : (जटसे हाथ पकडते) अरे सुननां.. बैठ तो सही.. अ‍ेकतो कीतने दिनोके बाद मुजसे मीलने आइ हो..? तुम बैठो.. मुजे तुमसे कुछ सीरीयसली बात करनी हे..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) क्या..? हें..हें..हें.. भाभी.. आप कैसी बाते करती हे.. मुजेतो सरम आती हे..

सांती : (मुस्कुराते) नही जागु.. मे तुमसे सीरीयसली बात कर रही हु.. अगर भविस्यमे कुछ अ‍ैसा हुआ तो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. क्युकी मुजे अ‍ेक डर लग रहा हे.. इस बारेमे मे तुजे बता भी नही सकती.. क्युकी ना सीर्फ हमारे गांवमे.. बल्की मुजेतो लगता हे अब हमारे घरमेभी बदलाव होनेकी संभावना हे.. बस.. अभी मुजे तुमसे सीर्फ इतना ही कहेना हे.. तब मुजे तेरा साथ चाहीये.. क्युकी तब मे ये सब अकेली नही सम्हाल पाउगी..

जागृती : (हाथ थामते वापस बैठते धीरेसे) भाभी.. कुछ मत बोलीये.. मे आपके कहेनेका सब मतलब समज गइ.. आप फीकर मत करना मे आपके साथ हु.. मुजे पता हे आप कीस बारेमे बात कर रही हे.. क्या आप मम्मीके बारेमे बात कर रही हेनां..?

सांती : (अ‍ेक नजरसे देखते) हां.. जागु.. क्या तुजे सब पता हे..? हंम..?

जागृती : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. मुजे भी दो दिन पहेलेही सब पता चला.. मेने अपनी आंखोसे देखा.. हमारे ही घरमे.. उनके खुदके रुममे.. पता नही मम्मीको क्या होगया हे.. वोभी इस उमरमे..

सांती : (धीरेसे) जागु.. प्रोमीस कर.. अभी इस बारेमे बंसीको या भाइको कुछ पता नही चलना चाहीये.. वरना सब अर्नथ होजायेगा.. मेने उनको समजानेकी बहुत कोसीस की.. लेकीन वो दोनो बहुत आगे बढ चुके हे.. अब अ‍ेक दुसरेके बीना नही रेह सकते.. ओर देखा जायेतो उसमे भाभी भी गलत नही हे..

जागृती : (आस्चर्यसे देखते) भाभी.. क्या केह रही हे आप..? मम्मी गलत नही हे.. मतलब..?

सांती : (हाथ थामते धीरेसे) देख जागु.. मेरे कहेनेका मतलब तुम गलत मत नीकालना.. अब मे जोभी कहु.. उसे ध्यानसे सुनना.. ओर अपने दिमागसे सोचना.. मुजे पता हे मेरी ननंद बहुतही समजदार हे..

जागृती : (अ‍ेक नजरसे देखते) भाभी.. क्या.. बताइअ‍े मुजे..

सांती : (अ‍ेक नजरसे देखते) जागु.. पहेली वजह.. भाइने भाभीके साथ सादी करके कभी भाभीकी ओर ध्यान ही नही दिया.. सारा दिन गांकी सेवामे घुमते रहेते हे.. दुसरी वजह.. जब भाइका भाभीके साथ ब्याह हुआ.. तब भाइकी उमर बहुत बडी थी.. ओर तब भाभीकी उमर सादीके लायक भी नही थी.. तो दोनोके बीच उमरमे बहुत बडा गेप हे..

अब भाइकी उमर होगइ हे.. तो जाहीरसी बात हे अब वो भाभीको वो सुख देनेमे सक्षम नही रहे.. ओर अभी भाभीकी इतनी भी उमरभी नही हेकी वो अब इस सुखसे वंचीत रेह सके.. तुमतो जानती हो हमारे सरीरकी भी कोइ नीड होती हे.. तो इसी वजहसे भाभीके कदम गलत जगहपे पड गये हे..

जागृती : (कुछ सोचते) भाभी.. बात तो आपकी सही हे.. लेकीन.. ये हे तो गलत..?

सांती : हां जागु गलत ही तो हे.. क्युकी इनमे दो दो घर बरबाद हो रहे हे.. अब हम करभी क्या सकते हे..?

जागृती : (कुछ सोचते) भाभी.. सुना हे पापा सहेरमे भी अ‍ेक घर ले रहे हे.. तो क्यु ना हम मम्मी पापाको सहेरमे रहेनेके लीये भेजदे.. क्या कहेती हो..?

सांती : (प्यारसे गाल सहेलाते) अरे.. मेरी प्यारी ननंद.. जागु.. हम इतनेभी बडे नही हुअ‍े की हम ये सब फैसले ले सके.. तुम फीकर मत करो.. मे भाभीको समजा रही हु.. ओके..? चलो अब सो जाओ.. पता नही अब तेरा भाइ मुजे कब सोने देगा.. उनको तो अब रोज चाहीये.. फीकर मत कर तेरी भी बारी आयेगी.. हें..हें..हें.. कहोतो मे बंसीसे बात करु..? हें..हें..हें..

जागृती : (बहुतही सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. आप बहुत कमीनी हो.. नही सुधरोगी.. मे जाती हु..

कहेते जागृती बहुतही सर्मसार होते खडी होकर सांतीकी पीठमे अ‍ेक मुका मारते अपने रुममे चली गइ.. तो सांतीभी हसते हुअ‍े अपने रुमकी सभी लाइटे ओर दरवाजा बंध करके बंसीके रुममे चली गइ.. तो इधर गांवमेभी सभी दोस्तो अपने अपने घरपे चले गये थे.. तो बसंती भी बरखाको दुल्हनकी तराह तैयार करके मुनाके रुममे छोडकर आगइ.. तब उसने मुनासे इसारोमे कुछ बाते भी करली....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७१

कहेते जागृती बहुतही सर्मसार होते खडी होकर सांतीकी पीठमे अ‍ेक मुका मारते अपने रुममे चली गइ.. तो सांतीभी हसते हुअ‍े अपने रुमकी सभी लाइटे ओर दरवाजा बंध करके बंसीके रुममे चली गइ.. तो इधर गांवमेभी सभी दोस्तो अपने अपने घरपे चले गये थे.. तो बसंती भी बरखाको दुल्हनकी तराह तैयार करके मुनाके रुममे छोडकर आगइ.. तब उसने मुनासे इसारोमे कुछ बाते भी करली....अब आगे

ओर गांमे अ‍ेक बार फीर चुदाइका दौर चल पडा.. श्रीधर ओर जयश्री के साथ मुना ओर बरखाकी भी बाकायदा अ‍ेक पती पत्नीकी तैरपे अपने घरपे पहेली रात थी.. तो श्रीधर आज बडेही जोसमे बीना डर जयश्रीकी चुदाइ कर रहाथा.. तो यही हाल आज बरखाका भी था.. बसंतीने आज बरखाको फीरसे अ‍ेक दुल्हनकी तराह सजाया था.. तो उनका भी मुना बडेही जोसके साथ चुदाइ कर रहाथा..

तो दुसरी ओर आज रातमे डीनरके वक्तही वृन्दाने इसारोसे अपने देवर जीतुलालको देर रात छतपे मीलनेके लीये बुलाया था.. तो वृन्दा ओर जीतुलालने भी अब हमेसाके लीये अ‍ेक साथ जींदगी बीतानेका फैसला करलीया था.. तो इस वक्त दोनोही अ‍ेक दुसरेके पती पत्नीके सोनेके इन्तजारमे करवटे बदल रहेथे.. तो आज हमारे लखनभैया भी वायग्रा खाकर बडेही जोसमे लताकी चुदाइ कर रहेथे..

दो पहोरसे रात खाने तक बंसीने भी जागृतीको दो बार आंख मारके छेड दीयाथा.. तो जागृतीने भी सरमाके बंसीको इसारा करके उनके प्यारको कबुल करनेकी अपनी सहमती देदी थी.. तबसे बंसीका लंडभी खडा होकर जागृतीकी नइ चुतमे जानेके लीये तरस रहाथा.. तो इसी वजहसे बंसी भी बहुतही अ‍ेक्साइटेड होकर इस वक्त अपनी सारी गर्मी सांतीकी जबरदस्त चुदाइ करते उनकी चुतमे उडेल रहाथा.. सांतीको भी नही पताथा की आज बंसी उसे इतना जोसमे क्यु चोद रहा हे..?

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सांती : (कामुक्तासे चुदवाते) आइ.. आह.. आह.. अहं..अंह.. अहं.. बं..सी.. थोडा धीरेसे चोदीयेनां.. आज आपको क्या होगया हे..?

बंसी : (जोरोसे चोदते बुब्स चुमते) सांती.. आज कुछभी मत बोल.. आजतो पका तुजे प्रेगनेन्ट कर दुगा..

सांती : (होंठ चुमते) बंसी.. आप इतने दिनोसे अ‍ेक ही रट लगाये बैठे हो.. अगर सचमे आपको बच्चा चाहीये तो पहेले मुजसे सादी करलो.. ताकी मे उस बच्चेको आपका नामतो दे सकु.. मेरी भी बच्चेकी बडी तम्मना हे..

बंसी : (जोरोसे चोदते गलेको चुमते) सां..ती.. अभी..तो.. मुजे.. चोदने.. दे.. हम.. बादमे.. बात.. करते.. हे..

कहेते बंसी हाथके बल उचा होकर सांतीको जोरोसे चोदने लगा.. अबतक सांती भी दो बार जड चुकी थी.. फीरभी आज बंसी उसे बडे जोसमे चोदेही जा रहाथा.. तब सांतीकी हालत पतली होने लगी.. सांतीके सारे बाल बीखरे पडे थे.. दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुकेथे.. ओर बंसी अपना पुरा लंड सांतीकी चुतमे अंदर तक घुसाके सांतीसे चीपक गया.. तो सांतीने भी बंसीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

तभी उतेजनाकी वजहसे बंसीकी आंख उपर चड गइ.. ओर वो अपनी कमरको जटके मारते कांपने लगा.. तब उनके लंडसे ढेर सारा कामरस पीचकारीया मारते सांतीकी चुतको भरने लगा.. तो आज सांतीकोभी अपने बच्चेदानीपे गररम महेसुस होने लगा.. ओर वोभी उतेजीत होकर कांपने लगी.. ओर मदहोसीमे आंधी आंख चडाते बंसीको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे.. ओर अपनी कमर उची करके साथमे जडने लगी.. जडतेही बंसी सातीके सीनेपे ढेर हो गया..

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कुछही पलके बाद सांतीकी पुरी चुत बंसीके कामरससे लबालब भरी हुइ थी.. ओर सांती धीरे धीरे बंसीकी पीठ सहेला रहीथी.. तब सांतीको नही पताथा की बंसीके कामरससे नीकले लाखो कण उनको गर्भवती करनेके लीये उनके बच्चेदानीके अंदर धुसनेके लीये दोड लगाते आपसमे धमासान मचा रहे थे.. आज सांती पुरी तराह बीखर चुकी थी.. आज बंसीने सांतीके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोडके रख दीया था.. तभी..

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सांती : (बालोको सहेलाते मुस्कुराते) बंसी.. आज आपको क्या हो गयाथा..? हंम..? इतना तो जोसमे आपने मुजे कभी नही चोदा..? क्या कहीसे कोइ अ‍ैसी वैसी फील्म बील्म तो देखकर नही आये..? हंम..?

बंसी : (मुस्कुराते होठोको चुमते) नही सांती.. आज मेरे दोस्त श्रीधरने उनकी बहेनके साथ सादी करली.. ओर अपने घरपे भी आगये हे.. दोनोके मम्मी पापाने उनके रीस्तेको कबुल करलीया.. ओर आज मुनाने भी उनकी बहेन बरखासे आश्रमपे जाकर सादी करली हे.. दोनोही अभी अपनी सुहागरात मनाते होगे.. तो मुजे उनके बारेमे सोचकर इतना जोस चड गया.. हें..हें..हें..

सांती : (गाल चुमते मुस्कुराते) जानु.. लेकीन उन चारोकी वजहसे आज मेरी हालत तो आपने खराब करदीनां..? कही मे पेटसे होगइ तो..? अबतो मे आइपील खा खाकर थक गइ हु.. ओर आपको भी वो कोन्डम चडाना अच्छा नही लगता.. प्लीज.. अब आप भी हमारी सादीके बारेमे सोचीयेनां.. क्युकी अब भैयाके अलावा घरमे सबको पता चल गया हे.. की हम दोनो हर रात साथमे सोते हे..

बंसी : (मुस्कुराते) सांती.. श्रीधर ओर मुनाने सादी करली हे.. तो अब मुजमे भी थोडी हिमंत आगइ हे.. क्युना हमभी भागकर सादी करले..? हंम..? लखनके बडे भैया बापुको भी समजा देगे.. क्या कहेती हो..?

सांती : (मनमे खुस होते) हंम.. लेकीन बंसी मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. अब भाभी के साथ साथ हमारी जागुको भी हम दोनोके बारेमे पता चल गया हे.. तो उसने भी हम दोनोके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. अब सीर्फ भाइको नही पता.. तो क्युना हम चारो भी आश्रमपे जाकर सादी करले.. हंम..? भाइको तो बडे ठाकुर मनालेगे.. क्या कहेते हो..? हमे भागनेकी क्या जरुरत हे..

बंसी : (खुस होकर होठोको चुमते) अरे वाह.. डार्लींग.. बाततो तेरी सही हे.. अगर मम्मी ओर जागुको सब पता हे तो हम उन दोनोको लेकर ही आश्रमपे चले जाते हे.. ओर वहा मुना बरखाकी तराह सादी करके वापस आजायेगे.. कीसीको पताभी नही चलेगा.. मे कल सुबह ही लखन भैयासे बात करता हु.. वो आश्रमपे बात करलेगे..

सांती : (सरमाते मुस्कुराते गाल चुमते) जानु तबतो बहुतही अच्छा हे.. तो फीर इस बार मुजे अगर बच्चा ठहेर गया.. तो मे बच्चेके लीये रेडी हु.. अब मुजे नही खानी कोइ आइपील.. आप करदो मुजे प्रेगनेन्ट.. हें..हें..हें..

बंसीका लंड अभीभी सांतीकी चुतमे घुसा हुआथा.. ओर बंसी सांतीके उपर लीटा हुआथा.. दोनोही चुदाइ करके बाते कर रहेथे.. तब उनको नही पताथा की जागृती बहार आंगनसे उनके रुमकी खीडकीके पास खडी रहेकर उन दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. ओर चुदाइ देखते बंसीको इमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाते जड चुकी थी.. दोनोकी जोरोसे बोलनेकी आदतकी वजहसे उन दोनोकी बाते भी सुन रहीथी.. जब दोनो चुखाइ करके सांत होगये तब जागृती भी अपने रुममे चली गइ..
 
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