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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १३२/२
जी..हां.. आप सही सोच रहे हे.. ये ओरत कोइ ओर नही गांवके पंचायतके सदस्य सामतकी बीवी जया थी.. जो सहेरमे कीसी रीस्तेदारकी खबर पुछनेके बहानेसे रमेशको मीलने आगइ थी.. ओर ये दोनो आज अैसे पहेली बार नही मील रहेथे.. रमेश ओर जया.. अैसे चारसे पांच बार सहेरमे इसी होटेलमे मीले हे.. तब रेमश वायग्रा खाकर जयाकी खुब चुदाइ करता.. फीर दोनोही अलग अलग अकेले गाव चले जाते हे..
तभी रमेश जयाको गोदमे उठाकर बेडकी ओर चला गया.. ओर देखतेही देखते दोनोही नीवस्त्र होगये.. तबतक गोलीनेभी अपना असर दीखाना सुरु करदीया.. तब रमेशसे कंट्रोल करना मुस्कील हो गया.. ओर रमेश जयाके उपर चड गया तब जयाने उनका लंड पकडकर चुतके उपर सहेलाया ओर अपनी चुतपे सेट करदीया तब रमेशने अेकही जटकेमे अपना लंड जयाकी चुतमे घुसा दीया तो जयाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ..
ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. जयाभी अपनी कमर उछाल उछालके रमेशके साथ मजेसे चुदवाने लगी.. वायग्राकी वजहसे काफी देरतक रमेश जयाको चोदता रहा.. ओर इसी बीच जयाभी अेक बार जड चुकीथी.. ओर आखीर रमेश अकडने लगा तब जयाने रमेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनोने अपने होंठ लीपलोक करलीये तब रमेश अपना माल जयाकी चुतमे उडेलने लगा.. ओर जया भी साथमे जडते रमेशकी पीठको सहेलाती रही.. ओर रमेश जयाके सीनेपे ढेर होगया..
जया : (सरमाते हसते) रमेश.. क्या बात हे.. आजतो बाफी देरतक करते रहे..? कुछ खाया हे क्या..?
रमेश : (हसते) हंम.. तुजेतो पता हे.. मे तुजे वो गोली खाकरही चोदता हु.. तुजे चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. क्या सामतभाइ तुजे ठीकसे नही चोदते..?
जया : (सरमाते हसते) वो अगर ठीसे चोदपाते तो मे आपसे चुदवाने थोडीना आती..? अब वो कहा कर पाते हे.. कीतने बुढे होगये हे.. अबतो उनका खडाभी नही होता.. तभीतो आपसे चुदवा रही हु.. हमे घरपे बहुत कम मौके मीलते हे.. मेरी जागृती ओर मेरी ननंद सांती घरपे ही होती हे..
रमेश : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. तु अब उनका ब्याह क्यु नही करदेती.. कीतनी बडी होगइ हे.. कोइ अच्छासा लडका ढुंढकर उनकी सादी करदे.. तेरा लडकाभी तो बडा होगया हे..
जया : (गाल सहेलाते) तुम मेरे बच्चोकी कीतनी चीन्ता करते हो.. बस तेरे भाइकोतो कोइ चीन्ताही नही.. कुछ ध्यानही नही देते.. की चलो लडका लडकी अब जवानहो गये हे.. कही उच नीच हो गइनां.. तब उसे पता चलेगा.. सारा दीन ना जाने कहा घुमते रहेते हे.. ओर उपरसे मेरी ननंद बेचारी छोटी उमरमे विधवा होकर आइ हे..
तो मे क्या करु..? जागृती ओर बंसीको सादीके लीये पुछती हुतो दोनो ना ना करते रहेते हे.. ओर सांतीभी बेचारी क्या करे.. यहा कुआरे लडके लडकीकी सादी नही हो रहीतो बेचारी विधवासे कौन सादी करेगा..? आपकी दनाके लीयेभी तो कोइ लडका नही मीलता..
रमेश : हां सही कहा तुमने.. मेरी वंदनाके लीयेभी यही प्रोबलेम हे.. उनके लीयेभी कोइ पढालीखा लडका चाहीये.. ओर भाभी तुमतो जानती हो गांवमे अैसे लडके मीलना कीतना मुस्कील हे..
जया : (हसते) रमेश.. अगर मेरा बंसी पढालीखा होतातो वंदनाको मेही लेजाती.. लेकीन तुमतो खामखा इधर उधर भटक रहे हो.. हमारे ठाकुरसाब तो तुम्हारे बहुत अच्छे दोस्त हे.. उमरमेभी तुमसे बहुत छोटे हे.. बस वंदनासे पांच छे सालही बडे होगे..
रमेश : (अेक नजरसे देखते) भाभी.. तुम कहेना क्या चाहती हो..
जया : (हसते) देवरजी.. बुरा मत मानना.. उनके खानदानमेतो बहुतसी सादीया कर सकते हे.. तो फीर आपकी वंदनाके लीये वही बात चलाओ.. आपका दोस्त हे. तो हो सकता हे आपकी बात नही टालेगे..
रमेश : (कुछ सोचते) भाभी.. बाततो तेरी सही हे.. मेभी चाहता हु वंदनाको देवु अपनाले.. लेकीन वो मेरा दोस्त हे.. तो मे कीस मुहसे उनसे बात करु..? ओर लखनभैयातो वंदनासेभी छोटे हे वरना उनके साथही मे देवुसे बात करता..
जया : पता नही अब भगवानही कोइ रास्ता नीकाले.. चलो.. अब सुरु होजाओ.. आजतो अभीभी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे.. आपने कोनसी गोली खाइ हे..? हें..हें..हें..
रमेश : (हसते) क्यु मजा आया..? उस दुकानवालेने आज कोइ इम्पोर्टेड गोली दी हे.. आजतो थकानभी महेसुस नही होती.. भाभी.. देखना आजतो तुजे साम तक चोदता रहुगा.. हें..हें..हें..
जया : (सरमाते हसते) देवरजी तो ये गोली कभी हमारी देवरानीके लीयेभी लेजाओ.. हें..हें..हें..
रमेश : (हसते) अरे वो.. मुजेतो गोली खानेही नही देती.. ओर उनका स्वभावतो आपको पताही हे.. कीतनी गालीया देती हे.. पता नही वंदना कैसे पैदा होगइ.. वरना हमारा रीलेशन अैसेही थोडीना होता.. कमीनी हाथभी नही लगाने देती..
जया : (सरमाते हसते) हंम.. देखना बाबा हमे टाइमपे घरभी जाना हे.. हमारे पास चार बजे तक का वक्त हे.. आपको मुजे जीतना चोदना हो चोदलो.. फीर चार बजे मुजे बस स्टेन्ड छोड देना मे चली जाउगी..
रमेश : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. आज मेरे साथ मोटर साइकलपे चलना.. हम दोनो साथमे चले जायेगे.. कोइ पुछेगातो केह दुगाकी भाभी मुजे सहेरमे मील गइ तो लेकर आगया..
जया : (सरमाते हसते) ना बाबा ना.. कीसीने देखलीया तो हमारी फजीहत हो जायेगी.. मुजे आपके साथ नही आना..
रमेश : (होंठ चुमते) अरे चलना.. देखलीया तो क्या होगया.. सबको पता हे हम देवर भोजाइ हे.. ओ सहेरमे तो ये आम बात हे.. ओर गांवमेभी देवर भोजाइ साथमे जाते हे.. तो क्या दीकत..? हम हर बार थोडीना जाते हे..
जया : (सरमाते हसते) ठीक हे.. आज चलती हु.. लेकीन हर बार तुम्हारे साथ नही आउगी.. वरना कीसीको हम दोनोपे सक होजायेगा.. तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी..
रमेश : (खुस होते हसते) हंम.. थेन्कयु डार्लींग.. हें..हें..हें.. भाभी.. ये बता.. तुम्हारी उमर ओर सामतभाइकी उमरमे इतना बडा फर्क क्यु हे..? तुम आजभी इतनी जवान.. ओर कहा सामत भाइ..
जया : (सरमाते हसते) हंम.. मेरे बा बापुने मेरी छोटी उमरमेही इनसे सादी करदीथी..तब हमारे घरकी स्थीती अच्छी नहीथी.. ओर तब आपके भाइ रइस कहेलातेथे.. ओर उपरसे तब वो हमारे गांवके सरपंच थे.. तो मेरी सादी होगइ.. ओर छोटी उमरमेही उन्होने मुजे दो दो बच्चे देदीये.. लेकीन अब वो बुढे हो चुके हे.. उइ..मां.. रमेश.. अब जोभी करना हे करलो.. कबतक अैसे रहोगे.. फीर हमे जानभी हे..
फीर रमेश अेक बार फीरसे जयाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगता हे.. तब जयाभी उनका साथ देने लगी.. ओर दोनो साम चार बजे तब चुदाइ करते रहे.. रमेशने जयाकी जमकर तीन बार चुदाइ करली तब दोनोही थकके चकनाचुर हो चुके थे.. फीर दोनोने नहालीया ओर अपने कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. तब रमेशने जयाको अेक आइपीलकी गोली देदी.. तो जयाने खाली..
फीर रमेशने होटेलका कीराया देदीया ओर दोनोही होटेलसे बहार आगये.. तब रमेशने अपनी बाइक लेली तो जया दुपटेसे अपना चहेरा ढकके रमेशके पीछे बैठ गइ ओर दोनो गांवकी ओर चले गये.. तब इधर आश्रममे भी सब साम होतेही नीकलने लगे.. देवायत ओर सृतीने मीलकर बाबाको दक्षीणा देदी फीर सब उनके पांव छुकर वहासे नीकलने लगे.. ओर सबने यहासे सीधेही धिरेनके घर जानेका फैसला करलीया..
मंजुने सृतीकी कारको धिरेनको चलाने देदी.. ओर सृतीको देवायतके साथ बीठा दीया तो भानु ओर लखननेभी अपनी कार लेली ओर सबलोग चारो कारमे अेडजेस्ट होगये.. ओर आश्रमसे नीकल गये.. जंगलसे गुजरते सहेरके रोडकी ओर आगये.. ओर सब लोग गांवकी ओर बढने लगे तब बीचमेही धिरेनका गांव आने वाला था तो सब लोगोको वही जाना था.. तब रमेशको नही पताथाकी ये लोग रास्तेमे उनको मील जायेगे..
चारो कार अपनी मंजीलकी ओर दोड रहीथी तब देवायतको आगेकी ओर अेक मोटरसाइकील दीखा जीनमे अेक ओरत पीछे बैठीथी.. तब देवायतको बाइक को पहेचानने मे जरासीभी देर नही लगीकी ये मोटर साइकील रमेशकी हे.. ओर उनके पीछे ओरतको देखते वो सारा माजरा समज गया.. वो कुछ ओर सोचे उनसे पहेलेही सब कारे उन बाइकको ओवरटेक करके आगे नीकल गइ.. लेकीन हायरे रमेशकी किस्मत..
कारमे पीछे बैठी चारु ओर रश्मी मंजुने उन दोनोको देख लीया.. तो मंजु रश्मी चारुकी ओर देखकर हसने लगी.. तो चारुका पारा सातवे आसमानपे चला गया.. ओर उनका चहेरा गुस्सेसे भर गया.. लेकीन सबकी हाजरीकी वजहसे कुछ अन देखा करते बैठी रही.. तबभी रश्मी ओर मंजु चारुकी ओर देखके मंद मंद मुस्करा रही थी.. ओर सबलोग धिरेनके गांव आगये.. सब कारसे उतर गये तभी चंदाने धिरेन ओर पुनमको बहारही रोक दीया ओर वही दरवाजेपे खडे रहेने कहा..
फीर नीर्मला ओर चंदा दोनोही घरका ताला खोलकर अंदर चली गइ ओर अेक चावलका कलश ओर अेक पानीका कलश लेकर आगइ.. फीर नीर्मलाने चावलका कलश दरवाजेके बीच नीचे रख दीया ओर पानीका कलश दोनोके उपर घुमाने लगी.. फीर पुनमको कलशको पैर मारके अंदर आनेको कहा.. तो दोनोही अंदर आगये उनके साथ सब लोगभी अंदर आगये.. तब दया रजीयाने उनका सामन भी अंदर लेलीया..
मंजुला : (हसते) लोजी.. भैया.. अबतो आप अपने घर आगये.. देखले पुनो अब यही तेरा ससुराल हे..
धिरेन : (हसते) अरे आप सब लोग बैठो मे अभी गांवमे दुध लेकर आता हु.. चलो लखनभैया..
चंदा : (थोडा जोरोसे) धिरेन.. सुन.. कुछ मीठाइभी लेलेना ओर दुधभी थोडा ज्यादा लेना..
तो धिरेन हां कहेते लखनको लेकर पासकी दुकानकी ओर चला गया.. तब राजीव नीर्मला ओर भुमीका घरके अंदर सब देखते घुमने लगे.. तो भावना ओर मंजु दोनोही अपने बच्चेको लेकर नीचेके रुममे चली गइ.. ओर अपने बच्चोको ब्लाउस उचा करके दुध पीलाने लगी.. तब पुनम लता वंदना नीशा रश्मी रमा ओर चारु सब उपरकी मंजीलपे चली गइ.. ओर पुनम सबको सीधेही अपने बेडरुममे लेगइ.. तब..
नीशा : (हसते) पुनोदीदी.. सादीके बाद तो आप इधर पहेली बार आइनां..? फीर भी लगता हे ये बेडरुम आपके जाना पहेचाना हे हें..हें..हें.. यहा कुछ महेनत बहेनत की हेकी नही..?
पुनम : (सरमाते हसते अेक मुका मारते) भाभी.. कीतनी कमीनी हो तुम.. तुम जो सोच रही हो अैसा कुछ भी नही हुआ.. समजी.. सीर्फ मे ओर धिरेन दो बार यहा बैठे थे..
वंदना : (जोरोसे हसते) तो कमीनी नीशाभाभीने कब कहा की तु यहा धिरेनके साथ..
रश्मी : (जटसे वंदनाके मुहपे हाथ रखते) बस.. वंदु.. आगे कुछ मत बोलना तेरी मां भी इधर खडी हे.. हें..हें..हें..
चारु : (हसते) रहेने दे रश्मीभाभी.. हम दोनो मा बेटी कम सहेली ज्यादा हे.. समजी.. (वंदनाकी ओर देखते) बोल बेटा क्या कहे रहीथी तुम.. हें..हें..हें..
वंदना : (सर्मसार होते हसते) कुछ नही मोम.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते) भाभी.. ये हमारा रुम हे.. ओर सामने पहेले रुमथा वो चंदाभाभीका था.. चलो दीखाती हु..
फीर सब पुनमके पीछे जाने लगे.. तो पुनमने रुम खोलदीया.. ओर सब अंदर चली गइ.. तब रश्मी रमा चारु तीनोही रुमको गौरसे देखती रही.. तो वंदना लता ओर पुनम तीनो बेडपे बेठ गइ तब रश्मीने कहा..
रश्मी : (जोरोसे हसते) पुनोदीदी.. लगता हे आपके भाइ ओर भाभीने यहा बहुत महेनत की हे.. हें..हें..हें..
कहातो सब सरमाकर जोरोसे हसने लगे.. तो पुनमनेभी सरमाकर हसते हुअे हां मे गरदन हीलादी.. फीर सभी मस्ती मजाक करते नीचेकी ओर आने लगी.. तभी धिरेन ओर लखनभी दुध ओर ढेर सारा नास्ता लेकर आगया.. ओर सब दयाको देदीया तो दया ओर रजीया सबके लीये चाइ बनाने लगी.. तो धिरेन लखन जाकर राजीव नीर्मला ओर भुमीका बैठीथी वही दोनो उनके पास बैठ गये.. तब..
राजीव : (हसते) धिरेनबेटा.. अबतो कलसे तुजे नोकरीपे भी जाना होगा.. कोनसे वाहनमे जाते हो..?
धिरेन : जी पापा.. हें..हें..हें.. बाइक हे मेरे पास.. कारभी लेनी हे लेकीन सीटीमे चलानेकी दिकत होती हे..
नीर्मला : (हसते) बेटा तो वोभी लेले.. हमारी बहुको घुमाते रहेना.. हें..हें..हें..
धिरेन : (सरमाते हसते) हां मोम.. लेकीन पहेले अेक मकान लेना हे.. फीर बादमे कारके लीये कुछ सोचता हु..
राजीव : (हसते) अरे वोभी लेले पैसे मे दे दुगा.. आखीर अब तुम हमारे बेटे हो गये हो.. बोल कीतना चाहीये..?
धिरेन : (हसते) थेन्कस पापा.. लेकीन मुजे नही चाहीये.. बेंक मुजे बीना ब्याजकी लोन दे रही हे.. तो उसीमेसे लेलुगा.. पापा आज आप मम्मी ओर भुमी मौसी इधरही रुक जाइअे.. जीतने दिन रुकना हो रहीये.. जब आप कहोगे तब मे आपको सहेर छोड दुगा..
नीर्मला : (हसते) नही बेटा.. अब कीतने दिन हो गये हमे घर जाना होगा.. ओर वहाभी अेक जरुरी काम करना हे.. तो तेरे जीजाजी ओर मंजुदीदी ही हमे छोडने आ रहे हे..
भुमीका : (हसते) हां धिरेन.. वहाभी पुरा बंगला बंध पडा हे.. ओर तुमतो जानते हो सहेरमे घरको अकेला छोडना कीतना जोखीम हे.. ओर सृतीको क्लीनीकभी देखनी हे.. तो हमभी कल चले जायेगे..
देवायत : (हसते) पापा.. धिरेन ठीक केह रहा हे.. आजके दिन आपको यही रुकनाहे तो रुक जाइअे.. मे कल सुबह सृती ओर उनकी मम्मीको सहेर छोड दुगा.. ओर वापसीमे आप दोनोको लेकर जाउगा..
नीर्मला : (हसते) हां ये ठीक रहेगा.. चलो आज यही रुकते हे.. तो धिरनकी बातभी रेह जायेगी..
मंजुला : (पास आते) चलो सबलोग यही नीचे बैठ जाओ चाइ नास्ता बन गया हे.. फीर हमे जानाभी हे..
लखन : भाभी.. अंकल ओर दोनो आंटी आज यही रुकने वाले हे तो मे नास्ता करके घर चला जाता हु.. तो वहा कुछ तैयारीया भी होजायेगी.. क्या कहेती हो.. मे लता वंदना दीदी सब चले जायेगे..
भानु : (हसते) हां भाइ.. लखन ठीक केह रहा हे.. उनको जानेदो..
मंजुला : (हसते) हां चले जाना.. हमभी कुछ देरके बाद नीकल रहे हे..
धिरेन : (हसते) दीदी क्या नीकल रहे हे.. सबको डीनर करके नीकलना हे.. रुक जाइअे.. कितने दिनोके बादतो सब यहा अेकठा हुअे हे.. लखन भैयाको जानाहे तो जानेदो.. उनको कुछ काम हे.. हें..हें..हें.. भानुजीजु ओर रमादीदी भी सादीके कीतने दीनोके बाद आये हे..
तब मंजु समज गइ ओर उसने हांमे गरदन हिलाके सहमती देदी.. फीर सब चाइ नास्ता करने नीचे बैठ गये ओर बाते करते ओर अेक दुसरेके साथ हसी मजाक करते सब चाइ नास्ता करने लगे.. सब दो घेरेमे बैठे थे.. दुसरे घेरेमे पुनम लता वंदना नीशा दया रजीया रश्मी सृती भावना बैठीथी तो रमा मंजु चंदा चारु सब जेन्ट्स लोगके साथ बैठकर नास्ता खा रहेथे..
तब वंदना ओर नीशा बार बार चोर नजरसे देवायतकी ओर देखती रही.. तो रमा अबभी चोर नजरसे लखनकी ओर देख रहीथी.. लेकीन येतो लखनभैया हे.. अेक बारभी उसने रमाकी ओर नही देखा.. तब रमा थोडी वीचलीत होगइ.. ना जाने क्यु.. वो चाहतीथी की लखन उनकी ओर अेक बार देखले.. रमा अन्जानेमे ही सही.. अब वो लखनकी ओर ढल चुकी थी.. ओर लखनभीतो यही चाहता था.. वो रमाको सेट करके उनके जरीये नीलमको पाना चाहता था..
फीर सबने चाइनास्ता करलीया तो लखन लता ओर वंदना घर जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो साथमे नीशाभी जानेके लीये तैयार होगइ.. क्युकी वहा जाकर सबको देवायत सृतीकी सुहागरातके लीये रुमको सजाना था.. ओर चारो लखनकी खुली जीपमे बैठ गइ.. ओर सब हवेलीकी ओर नीकल गये.. तब पुनम सृती भावना चारु रमा ओर रश्मी उपरकी मंजीलपे पुनमके रुममे जाकर गप्पे लगाने लगी..
तभी देवायत भानु ओर सुधीर गांवमे चकर लगाने चले गये.. तब उसे वहा अपना पुराना दोस्त भीमा मील गया.. जो उनका स्कुलका साथी था.. देवायत ओर सुधीर उनकी सादीमे भी गयेथे.. तो भीमा देवायत ओर सुधीरको देखकर खुस होगया.. ओर उसे गले मीलकर अपने घर लेगया तो वहा उसे चाइ पानी देनेके लीये भीमाके सालेकी बीवी आइ.. फीर वहा सबने चाइ पानी पीया.. तब चारो वहासे नीकलने लगे.. तब देवायतने भीमाको थोडा दुर लेजाते पुछही लीया..
देवायत : भीमा.. येतो तेरे छोटे सालेकी बीवी हेनां..? तो फीर भाभीजी कहा हे..? कही मायके बायकेतो नही गइ..? ओर घरपेभी सीर्फ तुम दोनो हो..
भीमा : (हसते) भाइ अब आपसे क्या कहु.. आपकी भाभी मुजे छोडके चली गइ.. आपतो जानते हे मेरे भाइके साथ उनका अवैध रीस्ता था.. तो कमीनेको मेने मारकर गांवसे भगा दीया.. तो अेक हप्तेके बाद आपकी भाभीभी मुजे छोडके उनके साथ रहेने चली गइ.. तो मेने उन रंडीके भाइकी बीवीको ही सेट कर लीया.. ओर उनसे सादी करली.. तबसे ये यहा हे.. हें..हें..हें..
देवायत : भीमा वो तेरा भाइ भवान बहुतही कमीना था.. अेक बार मेरे हाथसे मार खाते खाते बच गया.. यहाकी सरपंचथी जो आज मेरी बीवी हे.. उनको सरपंच बननाथा तो चंदाको बदनाम कर रहा था.. तो मेने उसे रास्तेमे मीला तब धमकाया था..
भीमा : (आस्चर्यसे) अच्छा कीया.. क्या चंदाबहेनने आपसे सादी करली..? चलो अच्छा हुआ अेक विधवाको सहारा मील गया.. भाइ अगर मेरे लायक कोइ काम होतो कहेना.. ओर कभी कभी यहा आते रहेना..
देवायत : भीमा कामतो हे.. लेकीन अभी नही.. जब बाबा आयेगे तब तुजे बुलाउगा.. ओर सुन.. अब तुम यहाका सरपंच होजा.. क्युकी चंदातो अब मेरे यहा आगइ हे.. कहोतो जीला पंचायतमे बात करु..?
भीमा : (खुस होते) भाइ तबतो सोनेपे सुहागा.. आप बात करो फीर जब कहोगे तब आजाउगा.. गांववालोका भी मुजे पुरा सपोर्ट हे.. तो कोइ दिकत नही होगी..
भीमासे ओर कुछ बात करके तीनो वापस घरकी ओर आगये.. तबतब दया ओर रजीयाने सबका डीनर बना लीयाथा.. ओर सबलोग डीनर करने बैठ गये.. सबने तैय कीया की आज राजीव नीर्मला ओर भुमीका यहा रुकने वालेथे ओर सुबह देवायत उनको अपने घर छोडने जानेवाला था.. तो अब दया हमेसाके लीये पुनमके पास रहेने वाली थी.. चंदाने उसे कीचनके पास जो रुमथा उसीमे रहेनेके लीये केह दीया..
जब सबने डीनर करलीया तब धिरेन सबके लीये आइसक्रिम लेकर आया.. ओर सबने इकठा बैठकर आइसक्रिम खाइ.. फीर सब चलनेके लीये तैयार होगये.. तो पुनम देवायत मंजु सबको गले मीलते आंसु बहाने लगी.. ओर सबने उसे समजाया तो दयाभी सबको गले मीलने लगी.. तब देवायतने उसे इसारेसे मीलने आनेकी बात कही तो वो खुस होगइ.. ओर राजीव नीर्मला ओर भुमीके अलावा सब लोग नीकलने लगे..
कुछ लोग भानुकी कारमे बैठ गये तो कुछ देवायतकी कारमे बैठ गये.. आधेही घंटेके बाद सब हवेलीपे आगये.. सबलोग होलमे बेठ गये.. तो मंजु सृतीको लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. वहा उनको वंदना ओर नीशा लता सुहागरातके लीये सजाने लगी.. तब सृती बहुतही सरमा रहीथी.. तबतक रजीया ओर चंपाभाभीने मीलकर सबके लीये कोल्ड्रंीक बनाया ओर सबको पीलाने लगी..
फीर चंदाने विजयको सम्हाला तो भावना ओर रमा नीचेके रुममे चली गइ.. ओर दोनो बाते करने लगी.. तब मंजुने सृती ओर देवायतके लीये गरम केशर बादाम वाला दुध बनालीया ओर रजीयाको कहेकर देवायतके रुममे रखवा दीया.. तबतक देवायत रश्मीको छोडने उनके घर चला गया ओर उसे छोडके वापस आगया.. तबतक तीनोने मीलकर सृतीको हल्कासा शींगार कर दीयाथा..
फीर सुधीर नीशा चारु ओर वंदना सबको मीलकर अपने घर चले गये तब सुधीरने रास्तेमे चारु वंदनाको उनके घर छोड दीया.. जबसे रमा आइ तबसे लखनपे नजरे रखते मौका मीलतेही उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहीथी.. लेकीन लखन हर बार अन्जान बनके उनके पाससे खीसकके उनको इग्नोर करता रहा.. तो लखनके लीये रमा ओर बैचेन होने लगी.. ओर अेक बारतो उनकी आंखभी गली होगइ..
फीर भानुभी सबको मीलकर रमाको लेकर अपने गांव चला गया.. सबलोग चले गये तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर सुलाने लगी.. रजीया चंपानेभी अपना सब काम नीपटा लीया तब लखन ओर लताभी उपर अपने रुममे सोनेके लीये चले गये.. तभी मंजु ओर चंदा दोनोही सृतीको लेकर उपरके रुममे चली गइ.. ओर सृतीको घुंघट नीकालकर बेडके बीच बीठा दीया.. तभी....
कन्टीन्यु
अध्याय - १३२/२
जी..हां.. आप सही सोच रहे हे.. ये ओरत कोइ ओर नही गांवके पंचायतके सदस्य सामतकी बीवी जया थी.. जो सहेरमे कीसी रीस्तेदारकी खबर पुछनेके बहानेसे रमेशको मीलने आगइ थी.. ओर ये दोनो आज अैसे पहेली बार नही मील रहेथे.. रमेश ओर जया.. अैसे चारसे पांच बार सहेरमे इसी होटेलमे मीले हे.. तब रेमश वायग्रा खाकर जयाकी खुब चुदाइ करता.. फीर दोनोही अलग अलग अकेले गाव चले जाते हे..
तभी रमेश जयाको गोदमे उठाकर बेडकी ओर चला गया.. ओर देखतेही देखते दोनोही नीवस्त्र होगये.. तबतक गोलीनेभी अपना असर दीखाना सुरु करदीया.. तब रमेशसे कंट्रोल करना मुस्कील हो गया.. ओर रमेश जयाके उपर चड गया तब जयाने उनका लंड पकडकर चुतके उपर सहेलाया ओर अपनी चुतपे सेट करदीया तब रमेशने अेकही जटकेमे अपना लंड जयाकी चुतमे घुसा दीया तो जयाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ..
ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. जयाभी अपनी कमर उछाल उछालके रमेशके साथ मजेसे चुदवाने लगी.. वायग्राकी वजहसे काफी देरतक रमेश जयाको चोदता रहा.. ओर इसी बीच जयाभी अेक बार जड चुकीथी.. ओर आखीर रमेश अकडने लगा तब जयाने रमेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनोने अपने होंठ लीपलोक करलीये तब रमेश अपना माल जयाकी चुतमे उडेलने लगा.. ओर जया भी साथमे जडते रमेशकी पीठको सहेलाती रही.. ओर रमेश जयाके सीनेपे ढेर होगया..
जया : (सरमाते हसते) रमेश.. क्या बात हे.. आजतो बाफी देरतक करते रहे..? कुछ खाया हे क्या..?
रमेश : (हसते) हंम.. तुजेतो पता हे.. मे तुजे वो गोली खाकरही चोदता हु.. तुजे चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. क्या सामतभाइ तुजे ठीकसे नही चोदते..?
जया : (सरमाते हसते) वो अगर ठीसे चोदपाते तो मे आपसे चुदवाने थोडीना आती..? अब वो कहा कर पाते हे.. कीतने बुढे होगये हे.. अबतो उनका खडाभी नही होता.. तभीतो आपसे चुदवा रही हु.. हमे घरपे बहुत कम मौके मीलते हे.. मेरी जागृती ओर मेरी ननंद सांती घरपे ही होती हे..
रमेश : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. तु अब उनका ब्याह क्यु नही करदेती.. कीतनी बडी होगइ हे.. कोइ अच्छासा लडका ढुंढकर उनकी सादी करदे.. तेरा लडकाभी तो बडा होगया हे..
जया : (गाल सहेलाते) तुम मेरे बच्चोकी कीतनी चीन्ता करते हो.. बस तेरे भाइकोतो कोइ चीन्ताही नही.. कुछ ध्यानही नही देते.. की चलो लडका लडकी अब जवानहो गये हे.. कही उच नीच हो गइनां.. तब उसे पता चलेगा.. सारा दीन ना जाने कहा घुमते रहेते हे.. ओर उपरसे मेरी ननंद बेचारी छोटी उमरमे विधवा होकर आइ हे..
तो मे क्या करु..? जागृती ओर बंसीको सादीके लीये पुछती हुतो दोनो ना ना करते रहेते हे.. ओर सांतीभी बेचारी क्या करे.. यहा कुआरे लडके लडकीकी सादी नही हो रहीतो बेचारी विधवासे कौन सादी करेगा..? आपकी दनाके लीयेभी तो कोइ लडका नही मीलता..
रमेश : हां सही कहा तुमने.. मेरी वंदनाके लीयेभी यही प्रोबलेम हे.. उनके लीयेभी कोइ पढालीखा लडका चाहीये.. ओर भाभी तुमतो जानती हो गांवमे अैसे लडके मीलना कीतना मुस्कील हे..
जया : (हसते) रमेश.. अगर मेरा बंसी पढालीखा होतातो वंदनाको मेही लेजाती.. लेकीन तुमतो खामखा इधर उधर भटक रहे हो.. हमारे ठाकुरसाब तो तुम्हारे बहुत अच्छे दोस्त हे.. उमरमेभी तुमसे बहुत छोटे हे.. बस वंदनासे पांच छे सालही बडे होगे..
रमेश : (अेक नजरसे देखते) भाभी.. तुम कहेना क्या चाहती हो..
जया : (हसते) देवरजी.. बुरा मत मानना.. उनके खानदानमेतो बहुतसी सादीया कर सकते हे.. तो फीर आपकी वंदनाके लीये वही बात चलाओ.. आपका दोस्त हे. तो हो सकता हे आपकी बात नही टालेगे..
रमेश : (कुछ सोचते) भाभी.. बाततो तेरी सही हे.. मेभी चाहता हु वंदनाको देवु अपनाले.. लेकीन वो मेरा दोस्त हे.. तो मे कीस मुहसे उनसे बात करु..? ओर लखनभैयातो वंदनासेभी छोटे हे वरना उनके साथही मे देवुसे बात करता..
जया : पता नही अब भगवानही कोइ रास्ता नीकाले.. चलो.. अब सुरु होजाओ.. आजतो अभीभी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे.. आपने कोनसी गोली खाइ हे..? हें..हें..हें..
रमेश : (हसते) क्यु मजा आया..? उस दुकानवालेने आज कोइ इम्पोर्टेड गोली दी हे.. आजतो थकानभी महेसुस नही होती.. भाभी.. देखना आजतो तुजे साम तक चोदता रहुगा.. हें..हें..हें..
जया : (सरमाते हसते) देवरजी तो ये गोली कभी हमारी देवरानीके लीयेभी लेजाओ.. हें..हें..हें..
रमेश : (हसते) अरे वो.. मुजेतो गोली खानेही नही देती.. ओर उनका स्वभावतो आपको पताही हे.. कीतनी गालीया देती हे.. पता नही वंदना कैसे पैदा होगइ.. वरना हमारा रीलेशन अैसेही थोडीना होता.. कमीनी हाथभी नही लगाने देती..
जया : (सरमाते हसते) हंम.. देखना बाबा हमे टाइमपे घरभी जाना हे.. हमारे पास चार बजे तक का वक्त हे.. आपको मुजे जीतना चोदना हो चोदलो.. फीर चार बजे मुजे बस स्टेन्ड छोड देना मे चली जाउगी..
रमेश : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. आज मेरे साथ मोटर साइकलपे चलना.. हम दोनो साथमे चले जायेगे.. कोइ पुछेगातो केह दुगाकी भाभी मुजे सहेरमे मील गइ तो लेकर आगया..
जया : (सरमाते हसते) ना बाबा ना.. कीसीने देखलीया तो हमारी फजीहत हो जायेगी.. मुजे आपके साथ नही आना..
रमेश : (होंठ चुमते) अरे चलना.. देखलीया तो क्या होगया.. सबको पता हे हम देवर भोजाइ हे.. ओ सहेरमे तो ये आम बात हे.. ओर गांवमेभी देवर भोजाइ साथमे जाते हे.. तो क्या दीकत..? हम हर बार थोडीना जाते हे..
जया : (सरमाते हसते) ठीक हे.. आज चलती हु.. लेकीन हर बार तुम्हारे साथ नही आउगी.. वरना कीसीको हम दोनोपे सक होजायेगा.. तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी..
रमेश : (खुस होते हसते) हंम.. थेन्कयु डार्लींग.. हें..हें..हें.. भाभी.. ये बता.. तुम्हारी उमर ओर सामतभाइकी उमरमे इतना बडा फर्क क्यु हे..? तुम आजभी इतनी जवान.. ओर कहा सामत भाइ..
जया : (सरमाते हसते) हंम.. मेरे बा बापुने मेरी छोटी उमरमेही इनसे सादी करदीथी..तब हमारे घरकी स्थीती अच्छी नहीथी.. ओर तब आपके भाइ रइस कहेलातेथे.. ओर उपरसे तब वो हमारे गांवके सरपंच थे.. तो मेरी सादी होगइ.. ओर छोटी उमरमेही उन्होने मुजे दो दो बच्चे देदीये.. लेकीन अब वो बुढे हो चुके हे.. उइ..मां.. रमेश.. अब जोभी करना हे करलो.. कबतक अैसे रहोगे.. फीर हमे जानभी हे..
फीर रमेश अेक बार फीरसे जयाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगता हे.. तब जयाभी उनका साथ देने लगी.. ओर दोनो साम चार बजे तब चुदाइ करते रहे.. रमेशने जयाकी जमकर तीन बार चुदाइ करली तब दोनोही थकके चकनाचुर हो चुके थे.. फीर दोनोने नहालीया ओर अपने कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. तब रमेशने जयाको अेक आइपीलकी गोली देदी.. तो जयाने खाली..
फीर रमेशने होटेलका कीराया देदीया ओर दोनोही होटेलसे बहार आगये.. तब रमेशने अपनी बाइक लेली तो जया दुपटेसे अपना चहेरा ढकके रमेशके पीछे बैठ गइ ओर दोनो गांवकी ओर चले गये.. तब इधर आश्रममे भी सब साम होतेही नीकलने लगे.. देवायत ओर सृतीने मीलकर बाबाको दक्षीणा देदी फीर सब उनके पांव छुकर वहासे नीकलने लगे.. ओर सबने यहासे सीधेही धिरेनके घर जानेका फैसला करलीया..
मंजुने सृतीकी कारको धिरेनको चलाने देदी.. ओर सृतीको देवायतके साथ बीठा दीया तो भानु ओर लखननेभी अपनी कार लेली ओर सबलोग चारो कारमे अेडजेस्ट होगये.. ओर आश्रमसे नीकल गये.. जंगलसे गुजरते सहेरके रोडकी ओर आगये.. ओर सब लोग गांवकी ओर बढने लगे तब बीचमेही धिरेनका गांव आने वाला था तो सब लोगोको वही जाना था.. तब रमेशको नही पताथाकी ये लोग रास्तेमे उनको मील जायेगे..
चारो कार अपनी मंजीलकी ओर दोड रहीथी तब देवायतको आगेकी ओर अेक मोटरसाइकील दीखा जीनमे अेक ओरत पीछे बैठीथी.. तब देवायतको बाइक को पहेचानने मे जरासीभी देर नही लगीकी ये मोटर साइकील रमेशकी हे.. ओर उनके पीछे ओरतको देखते वो सारा माजरा समज गया.. वो कुछ ओर सोचे उनसे पहेलेही सब कारे उन बाइकको ओवरटेक करके आगे नीकल गइ.. लेकीन हायरे रमेशकी किस्मत..
कारमे पीछे बैठी चारु ओर रश्मी मंजुने उन दोनोको देख लीया.. तो मंजु रश्मी चारुकी ओर देखकर हसने लगी.. तो चारुका पारा सातवे आसमानपे चला गया.. ओर उनका चहेरा गुस्सेसे भर गया.. लेकीन सबकी हाजरीकी वजहसे कुछ अन देखा करते बैठी रही.. तबभी रश्मी ओर मंजु चारुकी ओर देखके मंद मंद मुस्करा रही थी.. ओर सबलोग धिरेनके गांव आगये.. सब कारसे उतर गये तभी चंदाने धिरेन ओर पुनमको बहारही रोक दीया ओर वही दरवाजेपे खडे रहेने कहा..
फीर नीर्मला ओर चंदा दोनोही घरका ताला खोलकर अंदर चली गइ ओर अेक चावलका कलश ओर अेक पानीका कलश लेकर आगइ.. फीर नीर्मलाने चावलका कलश दरवाजेके बीच नीचे रख दीया ओर पानीका कलश दोनोके उपर घुमाने लगी.. फीर पुनमको कलशको पैर मारके अंदर आनेको कहा.. तो दोनोही अंदर आगये उनके साथ सब लोगभी अंदर आगये.. तब दया रजीयाने उनका सामन भी अंदर लेलीया..
मंजुला : (हसते) लोजी.. भैया.. अबतो आप अपने घर आगये.. देखले पुनो अब यही तेरा ससुराल हे..
धिरेन : (हसते) अरे आप सब लोग बैठो मे अभी गांवमे दुध लेकर आता हु.. चलो लखनभैया..
चंदा : (थोडा जोरोसे) धिरेन.. सुन.. कुछ मीठाइभी लेलेना ओर दुधभी थोडा ज्यादा लेना..
तो धिरेन हां कहेते लखनको लेकर पासकी दुकानकी ओर चला गया.. तब राजीव नीर्मला ओर भुमीका घरके अंदर सब देखते घुमने लगे.. तो भावना ओर मंजु दोनोही अपने बच्चेको लेकर नीचेके रुममे चली गइ.. ओर अपने बच्चोको ब्लाउस उचा करके दुध पीलाने लगी.. तब पुनम लता वंदना नीशा रश्मी रमा ओर चारु सब उपरकी मंजीलपे चली गइ.. ओर पुनम सबको सीधेही अपने बेडरुममे लेगइ.. तब..
नीशा : (हसते) पुनोदीदी.. सादीके बाद तो आप इधर पहेली बार आइनां..? फीर भी लगता हे ये बेडरुम आपके जाना पहेचाना हे हें..हें..हें.. यहा कुछ महेनत बहेनत की हेकी नही..?
पुनम : (सरमाते हसते अेक मुका मारते) भाभी.. कीतनी कमीनी हो तुम.. तुम जो सोच रही हो अैसा कुछ भी नही हुआ.. समजी.. सीर्फ मे ओर धिरेन दो बार यहा बैठे थे..
वंदना : (जोरोसे हसते) तो कमीनी नीशाभाभीने कब कहा की तु यहा धिरेनके साथ..
रश्मी : (जटसे वंदनाके मुहपे हाथ रखते) बस.. वंदु.. आगे कुछ मत बोलना तेरी मां भी इधर खडी हे.. हें..हें..हें..
चारु : (हसते) रहेने दे रश्मीभाभी.. हम दोनो मा बेटी कम सहेली ज्यादा हे.. समजी.. (वंदनाकी ओर देखते) बोल बेटा क्या कहे रहीथी तुम.. हें..हें..हें..
वंदना : (सर्मसार होते हसते) कुछ नही मोम.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते) भाभी.. ये हमारा रुम हे.. ओर सामने पहेले रुमथा वो चंदाभाभीका था.. चलो दीखाती हु..
फीर सब पुनमके पीछे जाने लगे.. तो पुनमने रुम खोलदीया.. ओर सब अंदर चली गइ.. तब रश्मी रमा चारु तीनोही रुमको गौरसे देखती रही.. तो वंदना लता ओर पुनम तीनो बेडपे बेठ गइ तब रश्मीने कहा..
रश्मी : (जोरोसे हसते) पुनोदीदी.. लगता हे आपके भाइ ओर भाभीने यहा बहुत महेनत की हे.. हें..हें..हें..
कहातो सब सरमाकर जोरोसे हसने लगे.. तो पुनमनेभी सरमाकर हसते हुअे हां मे गरदन हीलादी.. फीर सभी मस्ती मजाक करते नीचेकी ओर आने लगी.. तभी धिरेन ओर लखनभी दुध ओर ढेर सारा नास्ता लेकर आगया.. ओर सब दयाको देदीया तो दया ओर रजीया सबके लीये चाइ बनाने लगी.. तो धिरेन लखन जाकर राजीव नीर्मला ओर भुमीका बैठीथी वही दोनो उनके पास बैठ गये.. तब..
राजीव : (हसते) धिरेनबेटा.. अबतो कलसे तुजे नोकरीपे भी जाना होगा.. कोनसे वाहनमे जाते हो..?
धिरेन : जी पापा.. हें..हें..हें.. बाइक हे मेरे पास.. कारभी लेनी हे लेकीन सीटीमे चलानेकी दिकत होती हे..
नीर्मला : (हसते) बेटा तो वोभी लेले.. हमारी बहुको घुमाते रहेना.. हें..हें..हें..
धिरेन : (सरमाते हसते) हां मोम.. लेकीन पहेले अेक मकान लेना हे.. फीर बादमे कारके लीये कुछ सोचता हु..
राजीव : (हसते) अरे वोभी लेले पैसे मे दे दुगा.. आखीर अब तुम हमारे बेटे हो गये हो.. बोल कीतना चाहीये..?
धिरेन : (हसते) थेन्कस पापा.. लेकीन मुजे नही चाहीये.. बेंक मुजे बीना ब्याजकी लोन दे रही हे.. तो उसीमेसे लेलुगा.. पापा आज आप मम्मी ओर भुमी मौसी इधरही रुक जाइअे.. जीतने दिन रुकना हो रहीये.. जब आप कहोगे तब मे आपको सहेर छोड दुगा..
नीर्मला : (हसते) नही बेटा.. अब कीतने दिन हो गये हमे घर जाना होगा.. ओर वहाभी अेक जरुरी काम करना हे.. तो तेरे जीजाजी ओर मंजुदीदी ही हमे छोडने आ रहे हे..
भुमीका : (हसते) हां धिरेन.. वहाभी पुरा बंगला बंध पडा हे.. ओर तुमतो जानते हो सहेरमे घरको अकेला छोडना कीतना जोखीम हे.. ओर सृतीको क्लीनीकभी देखनी हे.. तो हमभी कल चले जायेगे..
देवायत : (हसते) पापा.. धिरेन ठीक केह रहा हे.. आजके दिन आपको यही रुकनाहे तो रुक जाइअे.. मे कल सुबह सृती ओर उनकी मम्मीको सहेर छोड दुगा.. ओर वापसीमे आप दोनोको लेकर जाउगा..
नीर्मला : (हसते) हां ये ठीक रहेगा.. चलो आज यही रुकते हे.. तो धिरनकी बातभी रेह जायेगी..
मंजुला : (पास आते) चलो सबलोग यही नीचे बैठ जाओ चाइ नास्ता बन गया हे.. फीर हमे जानाभी हे..
लखन : भाभी.. अंकल ओर दोनो आंटी आज यही रुकने वाले हे तो मे नास्ता करके घर चला जाता हु.. तो वहा कुछ तैयारीया भी होजायेगी.. क्या कहेती हो.. मे लता वंदना दीदी सब चले जायेगे..
भानु : (हसते) हां भाइ.. लखन ठीक केह रहा हे.. उनको जानेदो..
मंजुला : (हसते) हां चले जाना.. हमभी कुछ देरके बाद नीकल रहे हे..
धिरेन : (हसते) दीदी क्या नीकल रहे हे.. सबको डीनर करके नीकलना हे.. रुक जाइअे.. कितने दिनोके बादतो सब यहा अेकठा हुअे हे.. लखन भैयाको जानाहे तो जानेदो.. उनको कुछ काम हे.. हें..हें..हें.. भानुजीजु ओर रमादीदी भी सादीके कीतने दीनोके बाद आये हे..
तब मंजु समज गइ ओर उसने हांमे गरदन हिलाके सहमती देदी.. फीर सब चाइ नास्ता करने नीचे बैठ गये ओर बाते करते ओर अेक दुसरेके साथ हसी मजाक करते सब चाइ नास्ता करने लगे.. सब दो घेरेमे बैठे थे.. दुसरे घेरेमे पुनम लता वंदना नीशा दया रजीया रश्मी सृती भावना बैठीथी तो रमा मंजु चंदा चारु सब जेन्ट्स लोगके साथ बैठकर नास्ता खा रहेथे..
तब वंदना ओर नीशा बार बार चोर नजरसे देवायतकी ओर देखती रही.. तो रमा अबभी चोर नजरसे लखनकी ओर देख रहीथी.. लेकीन येतो लखनभैया हे.. अेक बारभी उसने रमाकी ओर नही देखा.. तब रमा थोडी वीचलीत होगइ.. ना जाने क्यु.. वो चाहतीथी की लखन उनकी ओर अेक बार देखले.. रमा अन्जानेमे ही सही.. अब वो लखनकी ओर ढल चुकी थी.. ओर लखनभीतो यही चाहता था.. वो रमाको सेट करके उनके जरीये नीलमको पाना चाहता था..
फीर सबने चाइनास्ता करलीया तो लखन लता ओर वंदना घर जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो साथमे नीशाभी जानेके लीये तैयार होगइ.. क्युकी वहा जाकर सबको देवायत सृतीकी सुहागरातके लीये रुमको सजाना था.. ओर चारो लखनकी खुली जीपमे बैठ गइ.. ओर सब हवेलीकी ओर नीकल गये.. तब पुनम सृती भावना चारु रमा ओर रश्मी उपरकी मंजीलपे पुनमके रुममे जाकर गप्पे लगाने लगी..
तभी देवायत भानु ओर सुधीर गांवमे चकर लगाने चले गये.. तब उसे वहा अपना पुराना दोस्त भीमा मील गया.. जो उनका स्कुलका साथी था.. देवायत ओर सुधीर उनकी सादीमे भी गयेथे.. तो भीमा देवायत ओर सुधीरको देखकर खुस होगया.. ओर उसे गले मीलकर अपने घर लेगया तो वहा उसे चाइ पानी देनेके लीये भीमाके सालेकी बीवी आइ.. फीर वहा सबने चाइ पानी पीया.. तब चारो वहासे नीकलने लगे.. तब देवायतने भीमाको थोडा दुर लेजाते पुछही लीया..
देवायत : भीमा.. येतो तेरे छोटे सालेकी बीवी हेनां..? तो फीर भाभीजी कहा हे..? कही मायके बायकेतो नही गइ..? ओर घरपेभी सीर्फ तुम दोनो हो..
भीमा : (हसते) भाइ अब आपसे क्या कहु.. आपकी भाभी मुजे छोडके चली गइ.. आपतो जानते हे मेरे भाइके साथ उनका अवैध रीस्ता था.. तो कमीनेको मेने मारकर गांवसे भगा दीया.. तो अेक हप्तेके बाद आपकी भाभीभी मुजे छोडके उनके साथ रहेने चली गइ.. तो मेने उन रंडीके भाइकी बीवीको ही सेट कर लीया.. ओर उनसे सादी करली.. तबसे ये यहा हे.. हें..हें..हें..
देवायत : भीमा वो तेरा भाइ भवान बहुतही कमीना था.. अेक बार मेरे हाथसे मार खाते खाते बच गया.. यहाकी सरपंचथी जो आज मेरी बीवी हे.. उनको सरपंच बननाथा तो चंदाको बदनाम कर रहा था.. तो मेने उसे रास्तेमे मीला तब धमकाया था..
भीमा : (आस्चर्यसे) अच्छा कीया.. क्या चंदाबहेनने आपसे सादी करली..? चलो अच्छा हुआ अेक विधवाको सहारा मील गया.. भाइ अगर मेरे लायक कोइ काम होतो कहेना.. ओर कभी कभी यहा आते रहेना..
देवायत : भीमा कामतो हे.. लेकीन अभी नही.. जब बाबा आयेगे तब तुजे बुलाउगा.. ओर सुन.. अब तुम यहाका सरपंच होजा.. क्युकी चंदातो अब मेरे यहा आगइ हे.. कहोतो जीला पंचायतमे बात करु..?
भीमा : (खुस होते) भाइ तबतो सोनेपे सुहागा.. आप बात करो फीर जब कहोगे तब आजाउगा.. गांववालोका भी मुजे पुरा सपोर्ट हे.. तो कोइ दिकत नही होगी..
भीमासे ओर कुछ बात करके तीनो वापस घरकी ओर आगये.. तबतब दया ओर रजीयाने सबका डीनर बना लीयाथा.. ओर सबलोग डीनर करने बैठ गये.. सबने तैय कीया की आज राजीव नीर्मला ओर भुमीका यहा रुकने वालेथे ओर सुबह देवायत उनको अपने घर छोडने जानेवाला था.. तो अब दया हमेसाके लीये पुनमके पास रहेने वाली थी.. चंदाने उसे कीचनके पास जो रुमथा उसीमे रहेनेके लीये केह दीया..
जब सबने डीनर करलीया तब धिरेन सबके लीये आइसक्रिम लेकर आया.. ओर सबने इकठा बैठकर आइसक्रिम खाइ.. फीर सब चलनेके लीये तैयार होगये.. तो पुनम देवायत मंजु सबको गले मीलते आंसु बहाने लगी.. ओर सबने उसे समजाया तो दयाभी सबको गले मीलने लगी.. तब देवायतने उसे इसारेसे मीलने आनेकी बात कही तो वो खुस होगइ.. ओर राजीव नीर्मला ओर भुमीके अलावा सब लोग नीकलने लगे..
कुछ लोग भानुकी कारमे बैठ गये तो कुछ देवायतकी कारमे बैठ गये.. आधेही घंटेके बाद सब हवेलीपे आगये.. सबलोग होलमे बेठ गये.. तो मंजु सृतीको लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. वहा उनको वंदना ओर नीशा लता सुहागरातके लीये सजाने लगी.. तब सृती बहुतही सरमा रहीथी.. तबतक रजीया ओर चंपाभाभीने मीलकर सबके लीये कोल्ड्रंीक बनाया ओर सबको पीलाने लगी..
फीर चंदाने विजयको सम्हाला तो भावना ओर रमा नीचेके रुममे चली गइ.. ओर दोनो बाते करने लगी.. तब मंजुने सृती ओर देवायतके लीये गरम केशर बादाम वाला दुध बनालीया ओर रजीयाको कहेकर देवायतके रुममे रखवा दीया.. तबतक देवायत रश्मीको छोडने उनके घर चला गया ओर उसे छोडके वापस आगया.. तबतक तीनोने मीलकर सृतीको हल्कासा शींगार कर दीयाथा..
फीर सुधीर नीशा चारु ओर वंदना सबको मीलकर अपने घर चले गये तब सुधीरने रास्तेमे चारु वंदनाको उनके घर छोड दीया.. जबसे रमा आइ तबसे लखनपे नजरे रखते मौका मीलतेही उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहीथी.. लेकीन लखन हर बार अन्जान बनके उनके पाससे खीसकके उनको इग्नोर करता रहा.. तो लखनके लीये रमा ओर बैचेन होने लगी.. ओर अेक बारतो उनकी आंखभी गली होगइ..
फीर भानुभी सबको मीलकर रमाको लेकर अपने गांव चला गया.. सबलोग चले गये तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर सुलाने लगी.. रजीया चंपानेभी अपना सब काम नीपटा लीया तब लखन ओर लताभी उपर अपने रुममे सोनेके लीये चले गये.. तभी मंजु ओर चंदा दोनोही सृतीको लेकर उपरके रुममे चली गइ.. ओर सृतीको घुंघट नीकालकर बेडके बीच बीठा दीया.. तभी....
कन्टीन्यु