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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १२४
कहेते दोनोही जड गये.. तब देवायतके मुहसे हसी नीकल गइ.. ओर वो चुपचाप वहासे हवेलीकी ओर चलने लगा.. आज उसे बाबाकी अेक अेक बाते याद आने लगी.. वो सोचता घरकी ओर बढ गया की ना जाने गांवमे अैसे कीतने रीस्ते पल रहे होगे.. हमे सबको सम्हालना होगा.. ओर गांव वालोको अैसे रीस्तोको अपनानेके लीये समजाना पडेगा.. बहुतही मुस्कील काम था.. यही सब सोचते वो हवेलीमे आगया....अब आगे
तो सबभी लोग सो चुके थे.. तब वो होलमे आगया ओर जैसेही अपने कमरेकी ओर बढने लगा तो उसे सामनेके कमरेके दरवाजेपे भावना खडी नजर आइ.. जब दोनोकी नजर मीली तो भावनाने इसारलसे देवायतको बुलाया ओर दरवाजेसे थोडी हट गइ.. हटके देवायतको अंदर आनेका रास्ता दे दीया.. तब देवायत समज गया.. ओर चुपचाप भावनाके कमरेमे चला गया तो भावनाने धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तब उनके दिलकी धडकन तेज हो गइ.. ओर वो पलट गइ..
तो देवायत उनसे थोडी दुर खडाथा.. तो भावना दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो नाजाने कब दोनोके होंठ मील गये.. भावना अचानक देवायतके चहेरेको थामते पागलोकी तराह चुमने लगी.. तो देवायतभी उनका साथ देने लगा ओर भावनाके चहेरेको वो भी चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. ओर भावना कदहोसत होते उतेजीत होगइ.. ओर उनकी सांसे उखडने लगी..
भावना : (मदहोसीमे) जी..जु.. मुजे.. प्यार कजीये.. मे आपको बहुत प्यार करती हु.. मुजे मसल डालीये.. आज अच्छा मौका हे..
देवायत : (भारी आवाजमे) भावु.. प्यारतो मे भी तुजे करना चाहता हु.. लेकीन अभी नही.. तुजे सीर्फ दो महीनाही हुआ हे.. फीर तुजे जीभरके प्यार करुगा.. तेरी सारी कशर पुरी करदुगा.. तेरे अपने घरमे..
भावना : (उनके होंठ चुमते) जीजु.. प्लीज.. बस थोडासा उपर उपरसे ही प्यार करलो.. मे आपके बीना नही रेह सकती.. अब मुजे सीर्फ आपसेही मतलब हे.. आजसे ये तनपे सीर्फ आपका अधीकार हे.. बस अेक बार मुजे प्यार करलो.. मे कबसे हमारे मीलनके लीये तरस रही हु.. सीर्फ अेक बार..
देवायत : भावु.. मेभी तुम्हारे साथ जल्दसे जल्द मीलन करना चाहता हु.. बस कुछ दिन ठहेर जाओ.. जबतक सृती तुजे ये सब करनेकी परमीशन नही देगी.. तबतक हमारा मीलन बहुत मुस्कील हे.. बस थोडा सबर करले.. फीर हम अपनी सुहागरात मनायेगे.. मे तुजे पुरी रात प्यार करुगा..
भावना : (जोरोसे भाहोमे भीचते) बस जीजु.. मुजे उसी दिन का इन्तजार हे.. आप मुजसेभी सादी करलो.. मे आपकी बीवी होना चाहती हु.. (सरमाते) जीजु.. मुजे आपकी नीशानी चाहीये.. हम दोनोकी नीशानी.. मेरे गर्भमे.. फीर भलेही मुजे अलगसे रहेना पडे.. मे मम्मीके घर आपकी बीवी बनके रहुगी..
देवायत : (गोदमे उठाते बेडकी ओर जाते) हां भावु.. तुभी मेरी सीक्रेट वाइफ होगी.. हमारे बच्चे भी होगे.. लेकीन अभी सही समय नही हे.. फीर तु जो कहेगी उतने बच्चे तुजे देदुगा..
भावना : (सरमाते लडखडाती आवाजमे) हां जानु.. मे आपके ढेर सारे बच्चे पैदा करुगी.. बस मुजे प्यार करलो.. मे आपके बीना नही रेह सकती.. आपने मुजे बहुत इन्तजार करवाया.. बस अेक बार आपका बडा हथीयार मुजे नीचे टच करवादो.. मुजे बहुत इच्छा हो रही हे..
कहातो देवायतने भावनाको वही बेडपे लीडा दीया तो भावना फोरन बेठ गइ ओर देवायतके सामने वासना भरी नजरोसे देखते उनके कपडे नीकालने लगी.. ओर खुदभी अपने कपडे नीकालके नंगी होयइ.. तब देवायतका विकराल लंड भावनाकी चुत देखतेही हवामे लहेराते जटके मारने लगा.. ओर वो भावनाके पास बैठते उनको कंधेसे पकडकर लीटा देता हे.. ओर खुदभी उनके बुब्सको मसलते उनके चहेरे पे जुकते होंठ चुमने लगता हे..
तब भावना देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीजते उसे अपने उपर खीच लेती हे.. ओर देवायतके होंठ चुमने लगती हे.. तब कुछही देरमे दोनो मुह खोलते अेक दुसरेके मुहके रसको पीते जीभको चुस रहेथे.. ओर देवायतने धीरेसे अेक हाथ नीचे लेजाते भावनाकी चुतपे रख दीया.. तब भावना सरसे पांव तक कांपने लगी.. ओर उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते अपने तनसे चीपका लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. आज भावनाके तनमे पुरी तराह वासना हावी हो चुकी थी..
भावना : (मदहोसीमे लडखडाती आवाजमे) जी..जु.. मुजे अभी.. चोदलो.. मे नही रेह सकती.. आपके लीये कीतनी तडपी हु.. बस अेक बार इसे अंदर डालदो.. मुजे आज बहुत मन कर रहा हे.. फीर जोभी होगा देखा जायेगा.. मे इसे अंदर लेना चाहती हु.. चोदलो मुजे..
देवायत : (मदहोसीमे होंठ चुमते) नही भावु.. बस डार्लींग थोडासा कंट्रोल करले.. वरना तेरी हालत खराब होजायेगी.. इस हालतमे करना ठीक नही हे.. मे तुम दोनो बहेनोको साथमे चोदुगा.. वरना अभी कुछ हो गया तो चंदा.. ओर तेरे मम्मी पापाको जवाब देना मुस्कील हो जायेगा..
भावना : (कामुक आवाजमे) ठीक हे जानु.. पहेले हम दोनो अपनी सुहागरात मनायेगे.. ओर वोभी सीर्फ हम दोनो अकेले.. फीर चाहे आप बादमे हम दोनो बहेनको साथमे चोद लेना.. बस अभी थोडा प्यार करलो..
तब देवायत भावनाके उपरसे उठ जाता हे.. ओर सीक्ष नाइन पोजीसनमे हो जाता हे.. तब भावना समज गइ.. ओर देवायतकी कमर पकडते उनके बडे लंडको देखतेही मुहमे पानी आगया.. ओर लंडको जटसे मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगी.. फीर धीरेसे लंडको मुहमे लेलीया ओर उसे अंदर बहार करने लगी.. तो दुसरी ओर देवायत भी भावनाकी चुतमे जीभ डालके उनके चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगा.. तब भावना बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर अपनी कमर उछालने लगी..
फीर जोरोसे लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. दोनोके उपर काम वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. भावना आज पहेली बार देवायतके साथ अेकही बीस्तरमे उनसे खुलके मील रहीथी.. आखीर उसे अपना मन चाहा प्यार जो मील गया.. जो अभी उनकी चुतको बडेही बेहरेहमीसे खरोद रहाथा.. तब भावना ओर बरदास्त नही कर पाइ.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. ओर देवायतका मुह भर गया..
तो देवायतभी आज नइ चुतके साथ खेलते कांपते हुअे जल्दी जडने लगा.. ओर उसने अपना पुरा माल भावनाके मुहमे उडेल दीया तो भावनाका पुरा मुह भर गया.. तो बहुत सारा पानी भावनाके हलकमे उतर गया ओर भावना लंडको मुहसे नीकालते खांसने लगी.. तब देवायत जटसे बेडसे उतर गया ओर भावनाको गोदमे उठाकर बाथरुममे चला गया.. वहा दोनोने अपने अपने मुहको साफ कीया ओर सही होगये.. फीर दोनोही बहार आगये.. तब..
भावना : (सरमाते देवायतकी बाहोमे समाते) जीजु.. आज बहुत मजा आया.. बस मुजे अैसेही प्यार करते रहेना.. आजसे आपकी ये साली आपकी अमानत होगइ हे.. बस अब मुजे आधीसे पुरी घरवाली बनादो..
देवायत : (हसते सरको चुमते) बस भावु.. अेकबार तु सही होजा.. फीर तुजे इतना प्यार दुगाकी तुने अपने पतीकी कमी महेसुस नही होगी.. बस अेकही बीनंती हे.. तुम भानुको मत छोडना..
भावना : (हसते) हा जीजु.. मेरी इस बारेमे दीदीसे बात होगइ हे.. आप फीकर मत करो.. अब मे उनको नही छोडुगी.. ओर उनके साथ अच्छा रीलेशन रखते उनके साथ भी रहुगी.. मुजे दीदीने सारा प्लान समजा दीया हे.. लेकीन अब सही मायनोमे मेरे पती आपही होगे.. आप मुजे प्रोमीस करो..
देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे.. आइ प्रोमीस.. अब तुम सीर्फ मेरी ही बीवी कहेलायेगी.. बस.. चल अब सोजा.. काफी देर होगइ हे.. मेभी सो जाता हु..
भावना : (हसते बाहोमे भीचते होंठ चुमते) जीजु.. बस अैसे मौका देखकर आते रहेना.. मे इन्तजार करुगी..
कहेते देवायतको अपनी बाहोसे आजाद करदीया तो देवायत उनके होठ चुमते वहासे नीकल गया.. तो भावनाने खुस होते हसते अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर अपने बेडपे जाकर सोगइ.. तो देवायतभी अपने रुममे आगया ओर चेन्ज करके अपनी दोनो बीवीओके बीच जाकर लेट गया तो मंजुने आंख खोलके देखलीया ओर हसती हुइ करवट लेके देवायतके सीनेपे सर रखते उनकी बाहोमे समा गइ..
मंजुला : (धीरेसे) मेरी बहेनको प्यार करके आगये..? चलो अब सो जाओ.. अब कुछभी नही मीलेगा..
देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे.. लेकीन तेरी बहेनने मुजे लुटलीया.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सीनेको सहेलाते) अभी कहा लुटा हे.. बस अेक बार कमीनी आपका हथीयार अंदर लेगीनां तब उसे पता चलेगा.. की मेरे पतीको लुटना इतना आसान नही हे.. कमीनी बहुतही कामी हे.. अपनी मां पे गइ हे हें..हें..हें..
देवायत : मंजु.. आज मे सुधीरके घरपे गया था.. वहा मुजे अेक बात पता चली.. ओर आते वक्त अेक ओर रीस्ता मेरी नजरमे आया.. वो हमारे सामतके घरपे.. आने वाले दिनोमे हमे कीतने लोगोको समजाना पडेगा..
मंजुला : हां.. सामतभाइकी विधवा बहेन ओर उनके लडकेकी बात कर रहे होनां..? जानु.. उनकी बीवीभी कुछ कम नही हे.. उनकाभी रीस्ता हमारे रमेशभाइके साथ हे.. इस बारेमे कीसीको कुछभी नही पता.. लेकीन जल्दही सबको पता चल जायेगा.. वो सब हम देख लेगे.. बस अेक बार हम दोनोको बाबाको मीलने जाना होगा.. तब वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. अभी सोजाओ मुजे बहुत नींद आ रही हे..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? हमारा रमेश.. लेकीन वोतो बहुत सीधा हे.. साला अपनी बीवीकोभी ठीकसे नही चोद पाता.. ओर सामतकी बीवीके साथ..? वो जयाभाभीनां..?
मंवुला : (हसते) हां.. जानु.. सबको यहीतो चाहीये.. उनको पता हे अपनी बीवीतो घरका खाना हे.. कभीभी मील सकती हे.. बस सबको बहारका नास्ता करना अच्छा लगता हे.. ओर ये बात सीर्फ मर्दोपे नही ओरतोपे भी लागु होती हे.. चारुभाभी भीतो कम नही हे.. वोभी आपसे मजे करती हे.. कमीनी ये आगही अैसी हे.. अब सोभी जाओ हम कल बाते करेगे.. मुजे बहोत नींद आ रही हे..
फीर दोनोही अेक दुसरेकी बाहोमे नींदकी आगोसमे चले गये.. तो दुसरी ओर गांवसे बहुत दुर गौवामे दोनो कपलने घुमकर बहुत अेन्जोय कीया.. जब लता लखन ओर पुनम अेक राइडमे बेठे तब धिरेनने चकर आनेका बहाना बनालीया.. ओर वो नही बैठा.. तब उसी मौकेका फायदा उठाकर वो थोडा दुर चला गया.. ओर अपना फोन नीकालकर फटाफट नीलमको फोन कर दीया.. जब नीलमने फोन उठाया तब वो बात करने लगा..
नीलम : (सरमाते हसते) हां धिरेन.. आप लोग पहोंच गये गौवामे..? कैसेहो..?
धिरेन : (हसते) हां.. नीलु.. बस मजेमे.. आज दो पहोरकोही पहोचे.. ये छोड पहेले ये बता.. तेरे रुममे कोइ हेतो नही..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही धिरेन.. यहा डरनेकी कोइ जरुरत नही.. अभी सीर्फ मे अकेली हु.. मेरे रुममे सीर्फ अेकही पार्टनर हे अभी वो ट्युसनपे गइ हे.. कहो क्या कहेना चाहते हो.. आपकी बहोत याद आती हे..
धिरेन : नीलु.. आइ लव यु.. सोरी उस दिन मेरी वजहसे तुजे दीदीकी डांट खानी पडी.. आइ अेम सोरी..
नीलम : हंम.. जानु.. आपके लीये मे कुछभी सहेन करनेको तैयार हु.. बस मुजे छोडना नही.. मेभी आपसे बहोत प्यार करती हु.. आप अपना खयाल रखना.. क्या अभी आप अकेले हो..? मेरी सौतन कहा हे.. हें..हें..हें..
धिरेन : (हसते) नीलु वो तीनो राइडमे बैठे हे.. तो तुमसे बात करनेका मौका मील गया.. कहो..
नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. आप इधर सहेरमे कब आओगे.. मुजे आपको मीलना हे..
धिरेन : ( बस नीलु.. बहुत जल्द आउगा वहा.. अभीतो हम चारो इधर आयेहे.. पहेले तेरी सौतनको तो अच्छेसे मीललु.. फीरतो हम दोनो तो हेही..
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. क्या अपनी सुहागरातमे उनके साथ कुछ कीया कीया..? मतलब.. आप समज गयेनां..? हें..हें..हें..
धिरेन : (जुठ बोलते) हां नीलु.. समज गया.. मेने पुरी रात उनकी बजाइ.. नीलु.. मेने पुनोको चार बार चोद लीया.. उनकी चीखे नीकलवादी.. बस अब तेरी बारी हे.. हें..हे..हें.. देखना जब हमारी सुहागरात होगी तो मे तुजेभी इसी तराह चोदुगा.. हें..हें..हें..
नीलम : (अेकदम सर्मसार होते हसते धीरेसे) क्या..? छी.. गंदे कहीके.. जानु.. कोइ अपनी बीवीके साथ अैसा करता हे..? क्या उसे दर्द नही हो रहा था..? मेनेतो सुनाहे पहेली बारमे दर्द होता हे..
धिरेन : नही नीलु.. बस पहेली बार डालते हे तब मामुली थोडी देरके लीये दर्द होता हे लेकीन बादमे बहुत मजा आता हे.. पुनोको भी बहुत मजा आया.. अबतो मुजे बार बार चोदनेके लीये केह रही हे.. देखना तुजेभी बहुत मजा आयेगा.. मानो हम जनतकी सेर कर रहेहो..
नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. क्या आप मुजे उनको करते हुअे दीखा सकते हो.. आप फोनमे वीडीयोकोल चालु रखना मुजे देखना हे.. की कैसे करते हे.. क्या दिखाओगे..?
धिरेन : हां.. आज रातमे देख लेना मे फोन लगाके छुपाकर रखुगा.. तुम देख लेना.. लेकीन तुम कोइ आवाज मत करना.. चल अब रखता हु.. सायद वो लोग आ रहे हे..
कहेते धिरेनने फोन काट दीया ओर फटाफट अपनी जेबमे रखते तीनोके पास चला गया.. ओर वहा सबने बहुत मजे कीये ओर घुमते सामको वापस होटेलपे आगये.. ओर वापस आकर लंच करलीया.. फीर सभी लोग अपने अपने कमरेमे घुस गये.. ओर होटेलमे हनीमुन कपलके बीच चुदाइका दौर चल पडा.. तब लखनको आजभी लताने वायग्रा नही खानेदी.. लखन ओर लता दोनोही चुदाइमे मसगुल थे..
तो इधर पुनम चेन्ज करने बाथरुममे घुस गइतो धिरेनने फटाफट नीलमको विडीया कोल करके फोनको अेक कोनेमे छुपा दीया.. जहासे पुरा बेड दिख सके.. तभी पुनम बहार आगइ.. तो धिरेन हडबडा गया.. ओर वो भी जटसे बाथरुममे चला गया.. लेकीन येतो पुनम थी.. उसे सब पता चल गया.. ओर वो फोनकी ओर देखते कातील मुस्कान करते अपने बेडपे आगइ.. क्युकी वोभी चाहतीथी की जीतनी जल्दी हो सके नीलम ओर धिरेन मील जाये..
ताकी अपने लीये देवायतको मीलनेका रास्ता साफ हो सके.. तब धिरेनभी आगया.. तो पुनमने उसे रुमकी लाइट बंध करनेको कहा.. लेकीन धिरेनने उसे केह दियाकी वो आज उनको अैसेही लाइटमे देखते चोदना चाहता हे.. तब पुनम सब कुछ समज गइ.. ओर कुछही देरमे दोनो प्यारकी आगोसमे चले गये.. अब धिरेन पुनमकी मददके बीनाही अपना लंड उनकी चुतमे डालने लगा.. ओर वो कामयाबभी हो गया..
वो ओर पुनम धीरे धीरे करते चुदाइमे मसगुल होगये.. तो सहेरकी होस्टेलमे नीलम अपना फोन लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर कमोडपे बेठकर धिरेन ओर पुनमकी चुदाइ देखने लगी.. ओर कुुछही देरमे वोभी गरम होने लगी.. तब अेक हाथसे फोन पकडते दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर सीसकारीया करने लगी.. तभी उसने फोनको साइडमे रख दीया ओर अपना लोअर नीचे करते अपनी पेन्टीभी नीचे करदी..
ओर अपनी चुतमे धीरेसे उंगली घुसाते फोनमे धिरेन पुनमकी चुदाइ देखते उंगलीको अंदर बहार करने लगी.. नीलम पुरी तराह मदहोसीमे छा गइ.. ओर कुछही देरमे उनकी चुतसे अेक तेज फवारेकी धार नीकल गइ.. तब नीलम आंख बंध करते सातवे आसमानपे चली गइ.. कीतना प्यारा अहेसास था वो.. ओर उसने मनही मन जल्दसे जल्द धिरेनसे चुदवानेका मन बना लीया.. बस.. यहीतो पुनम चाहती थी..
लखन लताकी दो बार जबरदस्त चुदाइ कर लेता हे.. तब लताभी थकके चकना चुर हो चुकीथी.. फीर दोनो अैसेही नंगे अेक दुसरेकी बाहोमे चीपककर सो जाते हे.. तब धिरेनभी अेक बार पुनमकी चुतमे अपना माल उडेलके उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब पुनम अेक बार फीर प्यासी रेह गइ.. ओर उसने धीरेसे धिरेनको साइडमे सुला दीया तो धिरेनभी नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर पुनम अपने आपको बाथरुममे जाकर सांत करती हे.. ओर वोभी धिरेनके साथ आकर लेटके सो जाती हे..
दुसरे दिन सुबह गौवामे सभी कपल रुटीन टाइमपे उठ गये.. ओर अपनी टुरके तैय कार्यक्रमपे चले गये.. तो इधर गांवमेभी देवायत चंदा मंजु सब उठके कंपलीट होगये.. तो सबने चाइनास्ता करलीया.. लेकीन आज राजीव घरपेही रहा.. क्युकी उसे गांवमे लटार मारने जाना था.. तो खेतोपे सीर्फ देवायत अकेलाही चला गया.. ओर जातेही गोडाउनकी ओफीस मे बेठकर फोन घुमाने लगा.. ओर अपने बीजनेसके लीये मार्केटकी पुरी जानकारीया लेने लगा..
तबतक भानुभी आगया ओर वोभी खेतोका काम देखकर देवायतके पास ओफीसमे आगया.. दोनोही बीजनेसकी बाते करते मालकी सोदे बाजी करने लगे.. पीछले कुछ दिनोसे काम काजकी वजहसे बीजनेस नही होपाया.. तो देवायतने कइ जगाहपे बाते करते कइ सौदे करलीये.. तभी रीटा चाइ लेकर आगइ.. ओर दोनो अपने कामको देखते हुअे चाइ पीने लगे.. तब भानु खडे होकर बात करने लगा.. तो रीटा वही खडी रही.. वो देवायतकी हाजरीकी वजहसे रीटाके सामने देखता भी नही हे..
भानु : भाइ.. लखन नही हे तो मे छोटुको लेकर सहेर चला जाता हु.. वही माल अपने सहेरके गोडाउनमे रखके वापस आजात हु.. अगर कुछ ओर काम होतो बोलो..?
देवायत : नही भानु.. ओर कुछतो नही लेकीन अब लखन आजाये तो तुमभी उसे सहेरका वहीवट समजादो.. तुम कबतक सहेरका चकर लगाते रहोगे.. क्युकी अब लखन ओर लताको मे वही सहेरमे सेट कर रहा हु.. बस हमारा वो मकान ओर ओफीस हे.. उनको अच्छेसे साफ सफाइ करवा देना.. दोनो आयेगे तब उसे वहा रहेने भेज देगे..
भानु : भाइ.. क्या लखनके लीये ये थोडी जल्द बाजी नही हे.. क्यु अभीसे उनपे इतनी जीम्वेवारी डालते हो..? मे सब देख लुगानां..
देवायत : भानु.. अगर उनपे जीम्वेवारी नही डालेगे तो वो कब सीखेगा..? बस तुम उनके साथ रहेना..
भानु : (हसते) तो फीर ठीक हे.. तो वहीसे सीधा बंगलेपे चला जाउगा.. ओफीस हम बादमे देख लेगे.. छोटु साथ हेतो.. सामकोही सब काम नीपटाकर आयेगे.. चलो मे चलता हु..
कहेते भानु चला गया.. तब रीटाभी खाली कप लेकर फटाफट चली गइ.. तो देवायत फीरसे फोनपे बाते करते बीजनेसका वहीवट देखता रहा.. तब भानु छोटुको लेकर कारमे सहेरकी ओर चला गया.. तो कुछही देरमे रीटा वापस आगइ.. ओर सरमाते देवायतकी ओर कामुक ओर प्यासी नजरोसे देखते वही खडी रही..
उनको समजमे नही आ रहाथा की वो देवायतसे कैसे बात करे.. क्युकी कुछ दिनोसे उनके पुरे दिलो दिमागमे सीर्फ देवायतही छाया हुआ था.. ओर उसे आज सही मौका मील गयाथा.. तभी
देवायत कुछ कामसे फ्री हुआ तभी उसे खयाल आयाकी कोइ यहा खडा हे.. तभी
देवायत : (हसते) अरे रीटा तुम..? बोल कुछ काम था क्या..? कुछ कहेना हे..?
रीटा : (सरमाते हसते) मालीक.. वो हरीयाभाइ ओर मालती गांवमे चले गये हे.. ओर अभी भानुभाइ भी मेरे पतीको लेकर सहेरमे गये हे.. तो मालतीने मुजे आपका खयाल रखनेको कहा हे.. अगर आपको कीसीभी चीजकी जरुरत होतो मुजे आवाज देकर बुला लीजीयेगा.. मे आजाउगी.. बस अेक बार मेरे हाथोका खाना खा लीजीये.. आप मालतीको भुल जायेगे.. बस मे यही कहेने आइ थी.. (सर्मसार होते धीरेसे) क्या अभी आपको भुख नही हे..? अगर खानेका मन कर रहा हे तो कहीये.. आज अच्छा मौका हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते रीटाके कहेनेका मतलब समज गया) जी.. रीटा.. लेकीन क्या तु मुजे अच्छेसे खीला पायेगी..? फीर सोचले.. मुजे खाना खालाके तेरी हालत बीगड जायेगी.. हें..हें..हें..
रीटा : (सरमाते पैरोके अनुठेसे जमीन खरोदते) जी.. मालीक.. सोचलीया हे.. वो छोटु ओर भानुभाइतो सामको आयेगे.. तो मे आराम करलुगी.. बस अेक बार.. जबसे आपको देखा हे.. तबसे बहुत मन कर रहा हे..
देवायत : (अपने नीजी कमरेकी ओर इसारा करते हसते) ठीक हे रीटा.. जा अंदर जाकर खाना परोस.. मे आता हु..
कहातो रीटा बहुत खुस होगइ.. ओर सरमाते हसते हुअे देवायतके ओफीसके कमरेमे चली गइ.. जहा देवायत मालती ओर जमीलाकी कइ बार जमकर चुदाइ कर चुकाथा.. ओर आज रीटाभी सामनेसे आइ.. वो कइ दिनोसे देवायतके साथ चुदाइ करवाना चाहती थी.. ओर आज उसे मौका मील गया.. वो अंदर जाते बेडपे बैठ गइ तब देवायत ओफीसका दरवाजा बंध करके अपने रुममे चला गया तो रीटा उसे देखते ही बहुतही सरमाइ..
ओर फोरन खडी होके चलकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतने भी जोरोसे रीटाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उसे गोदमे उठाकर बेडपे पीठके बल सुला दीया तब रीटा बहुतही सर्मसार होगइ ओर सरमाते मुस्कुराती रही.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे साफ मंडराते दीखाइ देने लगे.. वो नाजाने कबसे इस मीलनकी धडीके इन्तजारमे थी.. जैसेही देवायत उनपे जुक गया.. रीटाने उसे फोरन अपनी बाहोमे भरलीया..
रीटा : (धीरेसे सरमाते) मालीक.. आज मुजपे कोइ रहेम मत करना.. जबसे मालतीके मुहसे आपकी तारीफ सुनी.. तबसे मे हमारे मीलनके लीये तरस रही थी.. मे आपको हर तराहका सुख दुगी.. बस अभी मुजे ठंडी करदीजीये.. आपसे चुदवानका बहुत मन कर रहाथा.. तो आज मुजे चोद डालीये.. मे रेडी हु..
देवायत : (होंठ चुमते) अच्छा इसीलीये तुम कबसे मुजे खानेके लीये केह रहीथी.. चल आजतो तुजेही खाता हु.. देखुतो सही तेरा स्वाद कैसा हे.. अब तक कीतनेको अपना स्वाद चखा चुकी हे..
रीटा : (सरमाते हसते) मालीक बादमे सब बता दुगी.. बस अभीतो मुजे पहेले अेक बार ठंडी करदो.. आपके हथीयारकी बहुत तारीफ सुनी हे.. तबसे मेरा मन आपसे मीलन करनेके लीये तरस रहा हे.. वैसेतो मे अैसी ओरत नही हु.. बस मुजे इन सब चीजोका बहुत सौक हे.. लेकीन अभी नही.. बादमे सब बता दुगी..
कहेके देवायतको अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. रीटा बहुतही कामुक तरीकेसे अपना मुह खोलते देवायतके मुहके रसको पीने लगी.. तब उसे अपने बुब्सपे देवायतका हाथ उनके बुब्सको मसलते महेसुस हुआ.. तो रीटा बहुतही उतेजीत होते सीसकारीया करते देवायतके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. उनकी आंखे लाल होने लगी.. उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. मानो रीटा पहेलेसेही इस खेलमे माहीर हो..
वो चाहतीथी की जल्दसे जल्द देवायतका लंड उनकी चुतमे घुस जाये.. तब वो फौरन बेडपे बैठ गइ ओर देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तब कुछही देरमे देवायतको नंगा करदीया.. ओर खुदके कपडे नीकालके नंगी होगइ.. तब देवायतका लंड देखतेही अेक बारतो वो थोडा डरके गभरा गइ.. ओर उसे देवायतसे चुदवानेकी अपनी जल्दबाजी पे पछतावा होने लगा..
देवायत : (हसते) क्यु..? क्या हुआ..? तुजे चुदवानेकी बहुत जल्दी थीनां..?
रीटा : (थोडा गभराते) मालीक.. येतो वाकइ बहुत बडा हे.. अगर मेरी चुत फट गइतो..?
देवायत : (हसते) आज तकतो कीसीकी नही फटी.. ओर वैसेभी तुमतो इस खेरमे काफी खेली खीलाइ लगती हो.. बस सीर्फ दीखनेमे ही भोली लगती हो..
रीटा : (सर्मसार होते हसते) मालीक अब आपसे क्या कहे..? बस साली ये तनकी आगही अैसी हे.. जबसे जवानीमे कदम रखा हे तबसे अेक चस्का लग गया हे.. बस इनकी अेक आदतसी होगइ हे.. अब देर मत कीजीये.. इसे देखकर तो लगता हे मुजे आज आराम भी करना पडेगा.. सही मायनेके मुजे आज बसली लंड मील गया हे.. आइअे.. चोद लीजीये मुजे..
कहेते रीटा वापस बीठके बल लेटते देवायतको अपने उपर खीच लेती हे.. ओर पलटते देवायतको पीठके बल सुलाते अेक हाथ नीचेकी ओर लेजाते उनके होठ चुमते देवायतके लंडको पकड लेती हे.. ओर मुठीमे पकडते धीरे धीरे सहेलाने लगती हे.. तब देवायतको पुरा यकीन होगयाकी रीटा इस मामलेमे पुरी तराह अनुभवी हे.. ओर रीटा लंड सहेलाते उनके सीनेको चुमते नीचेकी ओर सरक के उनके पैरके बीच बैठ जाती हे..
ओर धीरेसे लंडपे जुकते लंडपे अपनी जीभ फीराते लंडको भीगोने लगी.. जब लंड गीला होगया तो पुरा लंडको मुहमे लेकर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. ओर मदहोस होने लगी.. तब देवायतभी धीरे धीरे मदहोसीके आलममे चला गया.. रीटा नजर उठाते देवायतकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते उनके लंडको चुस रहीथी.. तब देवायतके मुहसे सीसकारीया नीकलने लगी.. ओर उनके मनमे वासना पुरी तराह हावी होगइ.. उनको यकीन हो गयाकी आज उसे रीटा पुरा मजा देगी..
देवायत : (कामुक आवाजमे) बस..सी.. आह..आह.. री..टा.. क्या मस्त चुसती हे तु.. मजा आगया..
रीटा : (मुहसे लंड नीकालते कामुक आवाजमे) मालीक.. इस चीजका अच्छा खासा अेक्सीपीरीन्स हे.. मुजे ये सब करना बहुत अच्छा लगता हे..
देवायत : (हसते आस्चर्यसे) अेक्सीपीरीयन्स..? अरे वाह.. कहा तक पढी हो..?
रीटा : (हसते) जी.. बारवी तक पढाइ की हे मेने.. कोलेजभी जाना चाहती थी.. लेकीन घरवालोने पढने नही दीया.. मुजे बीचमेही कोलेज छुडवादी ओर इस छोटृुसे सादी करदी.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) बडी दीलचस्प कहानी लगती हे तेरी.. चल बादमे सुन लुगा अब आकर लेटजा..
तब रीटा सरमाते हसती हुइ आकर पीठके बल लेट गइ.. तो देवायत उनके पैरके बीच बैठ गया ओर अपना लंड रीटाकी चुतपे घीसने लगा तब रीटा आंख बंध करके मदहोसीमे सीसकारीया करने लगी.. ओर आने वाले हसीन पलका इन्तजार करने लगी.. तभी देवायतने लंडको घीसते धीसने उनके टोपेको रीटाकी चुतके लव होलमे डालके थोडा फसा दीया.. ओर रीटापे जुकते उनपे छा गया..
ओर रीटाके दोनोहाथ पंजेसे कपडकर रीटाको लीपलोक करलीया.. रीटा कुछ समज पाये उनसे पहेलेही देवायतने रीटाकी चुतपे दबाव बनाते कमरको अेक जोरोका जटका दे दीया.. तो पुरा लंड रीटाकी चुतमे घुस गया.. तब रीटाकी चीख देवायतके मुहमे ही दब गइ ओर उनकी आंख बडी होगइ.. वो छटपटाते अपने होंठ छुडानेकी कोसीस करते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. ओर उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. जब देवायतने लोपलोक छुडालीया.. तब..
रीटा : (दर्दसे मुहको इधर उधर करते) मालीक... बस.. बस.. नीकाल लीजीये.. मुजे नही चुदवाना प्लीज.. बहुत दर्द हो रहा हे.. कीतना बडा ओर मोटा हे आपका मे सहेन नही करपाउगी.. नीकाल लीजीये..
देवायत : (कामुक आवाजमे) रीटा.. उनपे ध्यान मतदे.. बस मुजे चुमती रहे अभी दर्द चला जायेगा..
कहेते देवायत रीटाके बुब्सको ओर उनके होठोको बारी बारी चुमने लगा.. तब कुछ देरके बाद दर्द कम होने लगा ओर रीटा छटपटाते सांत होगइ.. आखीर देवायतका तगडा लंड अपनी चुतमे ले ही लीया.. अभी वो लंडको अपनी चुतमे लेकर देवायतके नीचे लेटीथी..
ओर सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराते इधर उधर मुह कर रहीथी.. तब देवायत रीटाको धीरे धीरे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब कुछही देरमे रीटाकी दर्द भरी आवाजे सीसकारीयोमे तबदील होगइ.. ओर वोभी कमर हीलाते देवायतका चुदवानेमे साथ देने लगी..
ओर कुछही देरमे देवायत ओर रीटाके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. रीटा देवायतकी पीठ सहेलाते अपनी कमर उछाल उछालके देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. तब कुछही देरके बाद वो अकडने लगी.. तब उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके साथ लीपलोक करतेही जडने लगी.. फीरभी देवायतने उनको चोदना जारी रखा.. तब देवायत हाथके बल उचा होकर रीटाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा..
रीटा : (कामुक आवाजमे) मालीक.. बस.. बस.. थोडा धीरे.. आप क्या मस्त चोदते हे.. मेतो आपकी दिवानी होगइ.. बस अबतो में आपसेही चुदवाउगी.. जबभी आपका चोदनेका मन करे मुजेही बुला लीजीयेगा.. मे कोइ बहाना करके आजाउगी.. क्या आपको आज मुजे चोदनेमे मजा आरहा हे..की नही..?
देवायत : (होंठ चुमते) हां रीटा.. तुभी मस्त तरीकेसे चुदवाती हे.. बीलकुल मालतीकी तराह..
रीटा : (हसते) मालीक.. अेक बार हम दोनोको साथमे चोदीयेगा.. वोभी आपकी दिवानी हे.. मेरी पकी सहेली होगइ हे..
तभी देवायत रीटाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा तो रीटाकी हालत पतली होने लगी.. ओर हल्कासा चीखने लगी.. ओर देवायत उनपे जुकते छागया.. तो रीटाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर दोनोके होठ लीपलोक होगये.. ओर देवायतने रीटाकी चुतमे जडतक लंड घुसा दीया.. फीर रुक रुक कर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी रीटाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उसे अपने बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ.. तब वोभी उतेजीत होकर साथमे जडने लगी..
आज रीटाके चहेरेपे संतुस्टीके भाव थे.. कुछही देरमे दोनो सांत होगये ओर अपनी सांसेको दुरस्त करते अैसेही सांत पडे रहे तबतक रीटा देवायतकी पीठको प्यारसे सहेलाते रही.. देवायतका लंड अबभी रीटाकी चुतमे सख्त होकर घुसा हुआथा.. तब रीटाकोभी थोडा अजीब लगा.. ओर मनही मन खुस होते दुसरी बार देवायतसे चुदवानेकी मनमे कामना करने लगी.. तभी देवायतने प्यारसे गालको सहेलाते रीटाको पुछही लीया....
कन्टीन्यु
अध्याय - १२४
कहेते दोनोही जड गये.. तब देवायतके मुहसे हसी नीकल गइ.. ओर वो चुपचाप वहासे हवेलीकी ओर चलने लगा.. आज उसे बाबाकी अेक अेक बाते याद आने लगी.. वो सोचता घरकी ओर बढ गया की ना जाने गांवमे अैसे कीतने रीस्ते पल रहे होगे.. हमे सबको सम्हालना होगा.. ओर गांव वालोको अैसे रीस्तोको अपनानेके लीये समजाना पडेगा.. बहुतही मुस्कील काम था.. यही सब सोचते वो हवेलीमे आगया....अब आगे
तो सबभी लोग सो चुके थे.. तब वो होलमे आगया ओर जैसेही अपने कमरेकी ओर बढने लगा तो उसे सामनेके कमरेके दरवाजेपे भावना खडी नजर आइ.. जब दोनोकी नजर मीली तो भावनाने इसारलसे देवायतको बुलाया ओर दरवाजेसे थोडी हट गइ.. हटके देवायतको अंदर आनेका रास्ता दे दीया.. तब देवायत समज गया.. ओर चुपचाप भावनाके कमरेमे चला गया तो भावनाने धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तब उनके दिलकी धडकन तेज हो गइ.. ओर वो पलट गइ..
तो देवायत उनसे थोडी दुर खडाथा.. तो भावना दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो नाजाने कब दोनोके होंठ मील गये.. भावना अचानक देवायतके चहेरेको थामते पागलोकी तराह चुमने लगी.. तो देवायतभी उनका साथ देने लगा ओर भावनाके चहेरेको वो भी चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. ओर भावना कदहोसत होते उतेजीत होगइ.. ओर उनकी सांसे उखडने लगी..
भावना : (मदहोसीमे) जी..जु.. मुजे.. प्यार कजीये.. मे आपको बहुत प्यार करती हु.. मुजे मसल डालीये.. आज अच्छा मौका हे..
देवायत : (भारी आवाजमे) भावु.. प्यारतो मे भी तुजे करना चाहता हु.. लेकीन अभी नही.. तुजे सीर्फ दो महीनाही हुआ हे.. फीर तुजे जीभरके प्यार करुगा.. तेरी सारी कशर पुरी करदुगा.. तेरे अपने घरमे..
भावना : (उनके होंठ चुमते) जीजु.. प्लीज.. बस थोडासा उपर उपरसे ही प्यार करलो.. मे आपके बीना नही रेह सकती.. अब मुजे सीर्फ आपसेही मतलब हे.. आजसे ये तनपे सीर्फ आपका अधीकार हे.. बस अेक बार मुजे प्यार करलो.. मे कबसे हमारे मीलनके लीये तरस रही हु.. सीर्फ अेक बार..
देवायत : भावु.. मेभी तुम्हारे साथ जल्दसे जल्द मीलन करना चाहता हु.. बस कुछ दिन ठहेर जाओ.. जबतक सृती तुजे ये सब करनेकी परमीशन नही देगी.. तबतक हमारा मीलन बहुत मुस्कील हे.. बस थोडा सबर करले.. फीर हम अपनी सुहागरात मनायेगे.. मे तुजे पुरी रात प्यार करुगा..
भावना : (जोरोसे भाहोमे भीचते) बस जीजु.. मुजे उसी दिन का इन्तजार हे.. आप मुजसेभी सादी करलो.. मे आपकी बीवी होना चाहती हु.. (सरमाते) जीजु.. मुजे आपकी नीशानी चाहीये.. हम दोनोकी नीशानी.. मेरे गर्भमे.. फीर भलेही मुजे अलगसे रहेना पडे.. मे मम्मीके घर आपकी बीवी बनके रहुगी..
देवायत : (गोदमे उठाते बेडकी ओर जाते) हां भावु.. तुभी मेरी सीक्रेट वाइफ होगी.. हमारे बच्चे भी होगे.. लेकीन अभी सही समय नही हे.. फीर तु जो कहेगी उतने बच्चे तुजे देदुगा..
भावना : (सरमाते लडखडाती आवाजमे) हां जानु.. मे आपके ढेर सारे बच्चे पैदा करुगी.. बस मुजे प्यार करलो.. मे आपके बीना नही रेह सकती.. आपने मुजे बहुत इन्तजार करवाया.. बस अेक बार आपका बडा हथीयार मुजे नीचे टच करवादो.. मुजे बहुत इच्छा हो रही हे..
कहातो देवायतने भावनाको वही बेडपे लीडा दीया तो भावना फोरन बेठ गइ ओर देवायतके सामने वासना भरी नजरोसे देखते उनके कपडे नीकालने लगी.. ओर खुदभी अपने कपडे नीकालके नंगी होयइ.. तब देवायतका विकराल लंड भावनाकी चुत देखतेही हवामे लहेराते जटके मारने लगा.. ओर वो भावनाके पास बैठते उनको कंधेसे पकडकर लीटा देता हे.. ओर खुदभी उनके बुब्सको मसलते उनके चहेरे पे जुकते होंठ चुमने लगता हे..
तब भावना देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीजते उसे अपने उपर खीच लेती हे.. ओर देवायतके होंठ चुमने लगती हे.. तब कुछही देरमे दोनो मुह खोलते अेक दुसरेके मुहके रसको पीते जीभको चुस रहेथे.. ओर देवायतने धीरेसे अेक हाथ नीचे लेजाते भावनाकी चुतपे रख दीया.. तब भावना सरसे पांव तक कांपने लगी.. ओर उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते अपने तनसे चीपका लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. आज भावनाके तनमे पुरी तराह वासना हावी हो चुकी थी..
भावना : (मदहोसीमे लडखडाती आवाजमे) जी..जु.. मुजे अभी.. चोदलो.. मे नही रेह सकती.. आपके लीये कीतनी तडपी हु.. बस अेक बार इसे अंदर डालदो.. मुजे आज बहुत मन कर रहा हे.. फीर जोभी होगा देखा जायेगा.. मे इसे अंदर लेना चाहती हु.. चोदलो मुजे..
देवायत : (मदहोसीमे होंठ चुमते) नही भावु.. बस डार्लींग थोडासा कंट्रोल करले.. वरना तेरी हालत खराब होजायेगी.. इस हालतमे करना ठीक नही हे.. मे तुम दोनो बहेनोको साथमे चोदुगा.. वरना अभी कुछ हो गया तो चंदा.. ओर तेरे मम्मी पापाको जवाब देना मुस्कील हो जायेगा..
भावना : (कामुक आवाजमे) ठीक हे जानु.. पहेले हम दोनो अपनी सुहागरात मनायेगे.. ओर वोभी सीर्फ हम दोनो अकेले.. फीर चाहे आप बादमे हम दोनो बहेनको साथमे चोद लेना.. बस अभी थोडा प्यार करलो..
तब देवायत भावनाके उपरसे उठ जाता हे.. ओर सीक्ष नाइन पोजीसनमे हो जाता हे.. तब भावना समज गइ.. ओर देवायतकी कमर पकडते उनके बडे लंडको देखतेही मुहमे पानी आगया.. ओर लंडको जटसे मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगी.. फीर धीरेसे लंडको मुहमे लेलीया ओर उसे अंदर बहार करने लगी.. तो दुसरी ओर देवायत भी भावनाकी चुतमे जीभ डालके उनके चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगा.. तब भावना बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर अपनी कमर उछालने लगी..
फीर जोरोसे लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. दोनोके उपर काम वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. भावना आज पहेली बार देवायतके साथ अेकही बीस्तरमे उनसे खुलके मील रहीथी.. आखीर उसे अपना मन चाहा प्यार जो मील गया.. जो अभी उनकी चुतको बडेही बेहरेहमीसे खरोद रहाथा.. तब भावना ओर बरदास्त नही कर पाइ.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. ओर देवायतका मुह भर गया..
तो देवायतभी आज नइ चुतके साथ खेलते कांपते हुअे जल्दी जडने लगा.. ओर उसने अपना पुरा माल भावनाके मुहमे उडेल दीया तो भावनाका पुरा मुह भर गया.. तो बहुत सारा पानी भावनाके हलकमे उतर गया ओर भावना लंडको मुहसे नीकालते खांसने लगी.. तब देवायत जटसे बेडसे उतर गया ओर भावनाको गोदमे उठाकर बाथरुममे चला गया.. वहा दोनोने अपने अपने मुहको साफ कीया ओर सही होगये.. फीर दोनोही बहार आगये.. तब..
भावना : (सरमाते देवायतकी बाहोमे समाते) जीजु.. आज बहुत मजा आया.. बस मुजे अैसेही प्यार करते रहेना.. आजसे आपकी ये साली आपकी अमानत होगइ हे.. बस अब मुजे आधीसे पुरी घरवाली बनादो..
देवायत : (हसते सरको चुमते) बस भावु.. अेकबार तु सही होजा.. फीर तुजे इतना प्यार दुगाकी तुने अपने पतीकी कमी महेसुस नही होगी.. बस अेकही बीनंती हे.. तुम भानुको मत छोडना..
भावना : (हसते) हा जीजु.. मेरी इस बारेमे दीदीसे बात होगइ हे.. आप फीकर मत करो.. अब मे उनको नही छोडुगी.. ओर उनके साथ अच्छा रीलेशन रखते उनके साथ भी रहुगी.. मुजे दीदीने सारा प्लान समजा दीया हे.. लेकीन अब सही मायनोमे मेरे पती आपही होगे.. आप मुजे प्रोमीस करो..
देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे.. आइ प्रोमीस.. अब तुम सीर्फ मेरी ही बीवी कहेलायेगी.. बस.. चल अब सोजा.. काफी देर होगइ हे.. मेभी सो जाता हु..
भावना : (हसते बाहोमे भीचते होंठ चुमते) जीजु.. बस अैसे मौका देखकर आते रहेना.. मे इन्तजार करुगी..
कहेते देवायतको अपनी बाहोसे आजाद करदीया तो देवायत उनके होठ चुमते वहासे नीकल गया.. तो भावनाने खुस होते हसते अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर अपने बेडपे जाकर सोगइ.. तो देवायतभी अपने रुममे आगया ओर चेन्ज करके अपनी दोनो बीवीओके बीच जाकर लेट गया तो मंजुने आंख खोलके देखलीया ओर हसती हुइ करवट लेके देवायतके सीनेपे सर रखते उनकी बाहोमे समा गइ..
मंजुला : (धीरेसे) मेरी बहेनको प्यार करके आगये..? चलो अब सो जाओ.. अब कुछभी नही मीलेगा..
देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे.. लेकीन तेरी बहेनने मुजे लुटलीया.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सीनेको सहेलाते) अभी कहा लुटा हे.. बस अेक बार कमीनी आपका हथीयार अंदर लेगीनां तब उसे पता चलेगा.. की मेरे पतीको लुटना इतना आसान नही हे.. कमीनी बहुतही कामी हे.. अपनी मां पे गइ हे हें..हें..हें..
देवायत : मंजु.. आज मे सुधीरके घरपे गया था.. वहा मुजे अेक बात पता चली.. ओर आते वक्त अेक ओर रीस्ता मेरी नजरमे आया.. वो हमारे सामतके घरपे.. आने वाले दिनोमे हमे कीतने लोगोको समजाना पडेगा..
मंजुला : हां.. सामतभाइकी विधवा बहेन ओर उनके लडकेकी बात कर रहे होनां..? जानु.. उनकी बीवीभी कुछ कम नही हे.. उनकाभी रीस्ता हमारे रमेशभाइके साथ हे.. इस बारेमे कीसीको कुछभी नही पता.. लेकीन जल्दही सबको पता चल जायेगा.. वो सब हम देख लेगे.. बस अेक बार हम दोनोको बाबाको मीलने जाना होगा.. तब वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. अभी सोजाओ मुजे बहुत नींद आ रही हे..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? हमारा रमेश.. लेकीन वोतो बहुत सीधा हे.. साला अपनी बीवीकोभी ठीकसे नही चोद पाता.. ओर सामतकी बीवीके साथ..? वो जयाभाभीनां..?
मंवुला : (हसते) हां.. जानु.. सबको यहीतो चाहीये.. उनको पता हे अपनी बीवीतो घरका खाना हे.. कभीभी मील सकती हे.. बस सबको बहारका नास्ता करना अच्छा लगता हे.. ओर ये बात सीर्फ मर्दोपे नही ओरतोपे भी लागु होती हे.. चारुभाभी भीतो कम नही हे.. वोभी आपसे मजे करती हे.. कमीनी ये आगही अैसी हे.. अब सोभी जाओ हम कल बाते करेगे.. मुजे बहोत नींद आ रही हे..
फीर दोनोही अेक दुसरेकी बाहोमे नींदकी आगोसमे चले गये.. तो दुसरी ओर गांवसे बहुत दुर गौवामे दोनो कपलने घुमकर बहुत अेन्जोय कीया.. जब लता लखन ओर पुनम अेक राइडमे बेठे तब धिरेनने चकर आनेका बहाना बनालीया.. ओर वो नही बैठा.. तब उसी मौकेका फायदा उठाकर वो थोडा दुर चला गया.. ओर अपना फोन नीकालकर फटाफट नीलमको फोन कर दीया.. जब नीलमने फोन उठाया तब वो बात करने लगा..
नीलम : (सरमाते हसते) हां धिरेन.. आप लोग पहोंच गये गौवामे..? कैसेहो..?
धिरेन : (हसते) हां.. नीलु.. बस मजेमे.. आज दो पहोरकोही पहोचे.. ये छोड पहेले ये बता.. तेरे रुममे कोइ हेतो नही..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही धिरेन.. यहा डरनेकी कोइ जरुरत नही.. अभी सीर्फ मे अकेली हु.. मेरे रुममे सीर्फ अेकही पार्टनर हे अभी वो ट्युसनपे गइ हे.. कहो क्या कहेना चाहते हो.. आपकी बहोत याद आती हे..
धिरेन : नीलु.. आइ लव यु.. सोरी उस दिन मेरी वजहसे तुजे दीदीकी डांट खानी पडी.. आइ अेम सोरी..
नीलम : हंम.. जानु.. आपके लीये मे कुछभी सहेन करनेको तैयार हु.. बस मुजे छोडना नही.. मेभी आपसे बहोत प्यार करती हु.. आप अपना खयाल रखना.. क्या अभी आप अकेले हो..? मेरी सौतन कहा हे.. हें..हें..हें..
धिरेन : (हसते) नीलु वो तीनो राइडमे बैठे हे.. तो तुमसे बात करनेका मौका मील गया.. कहो..
नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. आप इधर सहेरमे कब आओगे.. मुजे आपको मीलना हे..
धिरेन : ( बस नीलु.. बहुत जल्द आउगा वहा.. अभीतो हम चारो इधर आयेहे.. पहेले तेरी सौतनको तो अच्छेसे मीललु.. फीरतो हम दोनो तो हेही..
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. क्या अपनी सुहागरातमे उनके साथ कुछ कीया कीया..? मतलब.. आप समज गयेनां..? हें..हें..हें..
धिरेन : (जुठ बोलते) हां नीलु.. समज गया.. मेने पुरी रात उनकी बजाइ.. नीलु.. मेने पुनोको चार बार चोद लीया.. उनकी चीखे नीकलवादी.. बस अब तेरी बारी हे.. हें..हे..हें.. देखना जब हमारी सुहागरात होगी तो मे तुजेभी इसी तराह चोदुगा.. हें..हें..हें..
नीलम : (अेकदम सर्मसार होते हसते धीरेसे) क्या..? छी.. गंदे कहीके.. जानु.. कोइ अपनी बीवीके साथ अैसा करता हे..? क्या उसे दर्द नही हो रहा था..? मेनेतो सुनाहे पहेली बारमे दर्द होता हे..
धिरेन : नही नीलु.. बस पहेली बार डालते हे तब मामुली थोडी देरके लीये दर्द होता हे लेकीन बादमे बहुत मजा आता हे.. पुनोको भी बहुत मजा आया.. अबतो मुजे बार बार चोदनेके लीये केह रही हे.. देखना तुजेभी बहुत मजा आयेगा.. मानो हम जनतकी सेर कर रहेहो..
नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. क्या आप मुजे उनको करते हुअे दीखा सकते हो.. आप फोनमे वीडीयोकोल चालु रखना मुजे देखना हे.. की कैसे करते हे.. क्या दिखाओगे..?
धिरेन : हां.. आज रातमे देख लेना मे फोन लगाके छुपाकर रखुगा.. तुम देख लेना.. लेकीन तुम कोइ आवाज मत करना.. चल अब रखता हु.. सायद वो लोग आ रहे हे..
कहेते धिरेनने फोन काट दीया ओर फटाफट अपनी जेबमे रखते तीनोके पास चला गया.. ओर वहा सबने बहुत मजे कीये ओर घुमते सामको वापस होटेलपे आगये.. ओर वापस आकर लंच करलीया.. फीर सभी लोग अपने अपने कमरेमे घुस गये.. ओर होटेलमे हनीमुन कपलके बीच चुदाइका दौर चल पडा.. तब लखनको आजभी लताने वायग्रा नही खानेदी.. लखन ओर लता दोनोही चुदाइमे मसगुल थे..
तो इधर पुनम चेन्ज करने बाथरुममे घुस गइतो धिरेनने फटाफट नीलमको विडीया कोल करके फोनको अेक कोनेमे छुपा दीया.. जहासे पुरा बेड दिख सके.. तभी पुनम बहार आगइ.. तो धिरेन हडबडा गया.. ओर वो भी जटसे बाथरुममे चला गया.. लेकीन येतो पुनम थी.. उसे सब पता चल गया.. ओर वो फोनकी ओर देखते कातील मुस्कान करते अपने बेडपे आगइ.. क्युकी वोभी चाहतीथी की जीतनी जल्दी हो सके नीलम ओर धिरेन मील जाये..
ताकी अपने लीये देवायतको मीलनेका रास्ता साफ हो सके.. तब धिरेनभी आगया.. तो पुनमने उसे रुमकी लाइट बंध करनेको कहा.. लेकीन धिरेनने उसे केह दियाकी वो आज उनको अैसेही लाइटमे देखते चोदना चाहता हे.. तब पुनम सब कुछ समज गइ.. ओर कुछही देरमे दोनो प्यारकी आगोसमे चले गये.. अब धिरेन पुनमकी मददके बीनाही अपना लंड उनकी चुतमे डालने लगा.. ओर वो कामयाबभी हो गया..
वो ओर पुनम धीरे धीरे करते चुदाइमे मसगुल होगये.. तो सहेरकी होस्टेलमे नीलम अपना फोन लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर कमोडपे बेठकर धिरेन ओर पुनमकी चुदाइ देखने लगी.. ओर कुुछही देरमे वोभी गरम होने लगी.. तब अेक हाथसे फोन पकडते दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर सीसकारीया करने लगी.. तभी उसने फोनको साइडमे रख दीया ओर अपना लोअर नीचे करते अपनी पेन्टीभी नीचे करदी..
ओर अपनी चुतमे धीरेसे उंगली घुसाते फोनमे धिरेन पुनमकी चुदाइ देखते उंगलीको अंदर बहार करने लगी.. नीलम पुरी तराह मदहोसीमे छा गइ.. ओर कुछही देरमे उनकी चुतसे अेक तेज फवारेकी धार नीकल गइ.. तब नीलम आंख बंध करते सातवे आसमानपे चली गइ.. कीतना प्यारा अहेसास था वो.. ओर उसने मनही मन जल्दसे जल्द धिरेनसे चुदवानेका मन बना लीया.. बस.. यहीतो पुनम चाहती थी..
लखन लताकी दो बार जबरदस्त चुदाइ कर लेता हे.. तब लताभी थकके चकना चुर हो चुकीथी.. फीर दोनो अैसेही नंगे अेक दुसरेकी बाहोमे चीपककर सो जाते हे.. तब धिरेनभी अेक बार पुनमकी चुतमे अपना माल उडेलके उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब पुनम अेक बार फीर प्यासी रेह गइ.. ओर उसने धीरेसे धिरेनको साइडमे सुला दीया तो धिरेनभी नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर पुनम अपने आपको बाथरुममे जाकर सांत करती हे.. ओर वोभी धिरेनके साथ आकर लेटके सो जाती हे..
दुसरे दिन सुबह गौवामे सभी कपल रुटीन टाइमपे उठ गये.. ओर अपनी टुरके तैय कार्यक्रमपे चले गये.. तो इधर गांवमेभी देवायत चंदा मंजु सब उठके कंपलीट होगये.. तो सबने चाइनास्ता करलीया.. लेकीन आज राजीव घरपेही रहा.. क्युकी उसे गांवमे लटार मारने जाना था.. तो खेतोपे सीर्फ देवायत अकेलाही चला गया.. ओर जातेही गोडाउनकी ओफीस मे बेठकर फोन घुमाने लगा.. ओर अपने बीजनेसके लीये मार्केटकी पुरी जानकारीया लेने लगा..
तबतक भानुभी आगया ओर वोभी खेतोका काम देखकर देवायतके पास ओफीसमे आगया.. दोनोही बीजनेसकी बाते करते मालकी सोदे बाजी करने लगे.. पीछले कुछ दिनोसे काम काजकी वजहसे बीजनेस नही होपाया.. तो देवायतने कइ जगाहपे बाते करते कइ सौदे करलीये.. तभी रीटा चाइ लेकर आगइ.. ओर दोनो अपने कामको देखते हुअे चाइ पीने लगे.. तब भानु खडे होकर बात करने लगा.. तो रीटा वही खडी रही.. वो देवायतकी हाजरीकी वजहसे रीटाके सामने देखता भी नही हे..
भानु : भाइ.. लखन नही हे तो मे छोटुको लेकर सहेर चला जाता हु.. वही माल अपने सहेरके गोडाउनमे रखके वापस आजात हु.. अगर कुछ ओर काम होतो बोलो..?
देवायत : नही भानु.. ओर कुछतो नही लेकीन अब लखन आजाये तो तुमभी उसे सहेरका वहीवट समजादो.. तुम कबतक सहेरका चकर लगाते रहोगे.. क्युकी अब लखन ओर लताको मे वही सहेरमे सेट कर रहा हु.. बस हमारा वो मकान ओर ओफीस हे.. उनको अच्छेसे साफ सफाइ करवा देना.. दोनो आयेगे तब उसे वहा रहेने भेज देगे..
भानु : भाइ.. क्या लखनके लीये ये थोडी जल्द बाजी नही हे.. क्यु अभीसे उनपे इतनी जीम्वेवारी डालते हो..? मे सब देख लुगानां..
देवायत : भानु.. अगर उनपे जीम्वेवारी नही डालेगे तो वो कब सीखेगा..? बस तुम उनके साथ रहेना..
भानु : (हसते) तो फीर ठीक हे.. तो वहीसे सीधा बंगलेपे चला जाउगा.. ओफीस हम बादमे देख लेगे.. छोटु साथ हेतो.. सामकोही सब काम नीपटाकर आयेगे.. चलो मे चलता हु..
कहेते भानु चला गया.. तब रीटाभी खाली कप लेकर फटाफट चली गइ.. तो देवायत फीरसे फोनपे बाते करते बीजनेसका वहीवट देखता रहा.. तब भानु छोटुको लेकर कारमे सहेरकी ओर चला गया.. तो कुछही देरमे रीटा वापस आगइ.. ओर सरमाते देवायतकी ओर कामुक ओर प्यासी नजरोसे देखते वही खडी रही..
उनको समजमे नही आ रहाथा की वो देवायतसे कैसे बात करे.. क्युकी कुछ दिनोसे उनके पुरे दिलो दिमागमे सीर्फ देवायतही छाया हुआ था.. ओर उसे आज सही मौका मील गयाथा.. तभी
देवायत कुछ कामसे फ्री हुआ तभी उसे खयाल आयाकी कोइ यहा खडा हे.. तभी
देवायत : (हसते) अरे रीटा तुम..? बोल कुछ काम था क्या..? कुछ कहेना हे..?
रीटा : (सरमाते हसते) मालीक.. वो हरीयाभाइ ओर मालती गांवमे चले गये हे.. ओर अभी भानुभाइ भी मेरे पतीको लेकर सहेरमे गये हे.. तो मालतीने मुजे आपका खयाल रखनेको कहा हे.. अगर आपको कीसीभी चीजकी जरुरत होतो मुजे आवाज देकर बुला लीजीयेगा.. मे आजाउगी.. बस अेक बार मेरे हाथोका खाना खा लीजीये.. आप मालतीको भुल जायेगे.. बस मे यही कहेने आइ थी.. (सर्मसार होते धीरेसे) क्या अभी आपको भुख नही हे..? अगर खानेका मन कर रहा हे तो कहीये.. आज अच्छा मौका हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते रीटाके कहेनेका मतलब समज गया) जी.. रीटा.. लेकीन क्या तु मुजे अच्छेसे खीला पायेगी..? फीर सोचले.. मुजे खाना खालाके तेरी हालत बीगड जायेगी.. हें..हें..हें..
रीटा : (सरमाते पैरोके अनुठेसे जमीन खरोदते) जी.. मालीक.. सोचलीया हे.. वो छोटु ओर भानुभाइतो सामको आयेगे.. तो मे आराम करलुगी.. बस अेक बार.. जबसे आपको देखा हे.. तबसे बहुत मन कर रहा हे..
देवायत : (अपने नीजी कमरेकी ओर इसारा करते हसते) ठीक हे रीटा.. जा अंदर जाकर खाना परोस.. मे आता हु..
कहातो रीटा बहुत खुस होगइ.. ओर सरमाते हसते हुअे देवायतके ओफीसके कमरेमे चली गइ.. जहा देवायत मालती ओर जमीलाकी कइ बार जमकर चुदाइ कर चुकाथा.. ओर आज रीटाभी सामनेसे आइ.. वो कइ दिनोसे देवायतके साथ चुदाइ करवाना चाहती थी.. ओर आज उसे मौका मील गया.. वो अंदर जाते बेडपे बैठ गइ तब देवायत ओफीसका दरवाजा बंध करके अपने रुममे चला गया तो रीटा उसे देखते ही बहुतही सरमाइ..
ओर फोरन खडी होके चलकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतने भी जोरोसे रीटाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उसे गोदमे उठाकर बेडपे पीठके बल सुला दीया तब रीटा बहुतही सर्मसार होगइ ओर सरमाते मुस्कुराती रही.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे साफ मंडराते दीखाइ देने लगे.. वो नाजाने कबसे इस मीलनकी धडीके इन्तजारमे थी.. जैसेही देवायत उनपे जुक गया.. रीटाने उसे फोरन अपनी बाहोमे भरलीया..
रीटा : (धीरेसे सरमाते) मालीक.. आज मुजपे कोइ रहेम मत करना.. जबसे मालतीके मुहसे आपकी तारीफ सुनी.. तबसे मे हमारे मीलनके लीये तरस रही थी.. मे आपको हर तराहका सुख दुगी.. बस अभी मुजे ठंडी करदीजीये.. आपसे चुदवानका बहुत मन कर रहाथा.. तो आज मुजे चोद डालीये.. मे रेडी हु..
देवायत : (होंठ चुमते) अच्छा इसीलीये तुम कबसे मुजे खानेके लीये केह रहीथी.. चल आजतो तुजेही खाता हु.. देखुतो सही तेरा स्वाद कैसा हे.. अब तक कीतनेको अपना स्वाद चखा चुकी हे..
रीटा : (सरमाते हसते) मालीक बादमे सब बता दुगी.. बस अभीतो मुजे पहेले अेक बार ठंडी करदो.. आपके हथीयारकी बहुत तारीफ सुनी हे.. तबसे मेरा मन आपसे मीलन करनेके लीये तरस रहा हे.. वैसेतो मे अैसी ओरत नही हु.. बस मुजे इन सब चीजोका बहुत सौक हे.. लेकीन अभी नही.. बादमे सब बता दुगी..
कहेके देवायतको अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. रीटा बहुतही कामुक तरीकेसे अपना मुह खोलते देवायतके मुहके रसको पीने लगी.. तब उसे अपने बुब्सपे देवायतका हाथ उनके बुब्सको मसलते महेसुस हुआ.. तो रीटा बहुतही उतेजीत होते सीसकारीया करते देवायतके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. उनकी आंखे लाल होने लगी.. उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. मानो रीटा पहेलेसेही इस खेलमे माहीर हो..
वो चाहतीथी की जल्दसे जल्द देवायतका लंड उनकी चुतमे घुस जाये.. तब वो फौरन बेडपे बैठ गइ ओर देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तब कुछही देरमे देवायतको नंगा करदीया.. ओर खुदके कपडे नीकालके नंगी होगइ.. तब देवायतका लंड देखतेही अेक बारतो वो थोडा डरके गभरा गइ.. ओर उसे देवायतसे चुदवानेकी अपनी जल्दबाजी पे पछतावा होने लगा..
देवायत : (हसते) क्यु..? क्या हुआ..? तुजे चुदवानेकी बहुत जल्दी थीनां..?
रीटा : (थोडा गभराते) मालीक.. येतो वाकइ बहुत बडा हे.. अगर मेरी चुत फट गइतो..?
देवायत : (हसते) आज तकतो कीसीकी नही फटी.. ओर वैसेभी तुमतो इस खेरमे काफी खेली खीलाइ लगती हो.. बस सीर्फ दीखनेमे ही भोली लगती हो..
रीटा : (सर्मसार होते हसते) मालीक अब आपसे क्या कहे..? बस साली ये तनकी आगही अैसी हे.. जबसे जवानीमे कदम रखा हे तबसे अेक चस्का लग गया हे.. बस इनकी अेक आदतसी होगइ हे.. अब देर मत कीजीये.. इसे देखकर तो लगता हे मुजे आज आराम भी करना पडेगा.. सही मायनेके मुजे आज बसली लंड मील गया हे.. आइअे.. चोद लीजीये मुजे..
कहेते रीटा वापस बीठके बल लेटते देवायतको अपने उपर खीच लेती हे.. ओर पलटते देवायतको पीठके बल सुलाते अेक हाथ नीचेकी ओर लेजाते उनके होठ चुमते देवायतके लंडको पकड लेती हे.. ओर मुठीमे पकडते धीरे धीरे सहेलाने लगती हे.. तब देवायतको पुरा यकीन होगयाकी रीटा इस मामलेमे पुरी तराह अनुभवी हे.. ओर रीटा लंड सहेलाते उनके सीनेको चुमते नीचेकी ओर सरक के उनके पैरके बीच बैठ जाती हे..
ओर धीरेसे लंडपे जुकते लंडपे अपनी जीभ फीराते लंडको भीगोने लगी.. जब लंड गीला होगया तो पुरा लंडको मुहमे लेकर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. ओर मदहोस होने लगी.. तब देवायतभी धीरे धीरे मदहोसीके आलममे चला गया.. रीटा नजर उठाते देवायतकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते उनके लंडको चुस रहीथी.. तब देवायतके मुहसे सीसकारीया नीकलने लगी.. ओर उनके मनमे वासना पुरी तराह हावी होगइ.. उनको यकीन हो गयाकी आज उसे रीटा पुरा मजा देगी..
देवायत : (कामुक आवाजमे) बस..सी.. आह..आह.. री..टा.. क्या मस्त चुसती हे तु.. मजा आगया..
रीटा : (मुहसे लंड नीकालते कामुक आवाजमे) मालीक.. इस चीजका अच्छा खासा अेक्सीपीरीन्स हे.. मुजे ये सब करना बहुत अच्छा लगता हे..
देवायत : (हसते आस्चर्यसे) अेक्सीपीरीयन्स..? अरे वाह.. कहा तक पढी हो..?
रीटा : (हसते) जी.. बारवी तक पढाइ की हे मेने.. कोलेजभी जाना चाहती थी.. लेकीन घरवालोने पढने नही दीया.. मुजे बीचमेही कोलेज छुडवादी ओर इस छोटृुसे सादी करदी.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) बडी दीलचस्प कहानी लगती हे तेरी.. चल बादमे सुन लुगा अब आकर लेटजा..
तब रीटा सरमाते हसती हुइ आकर पीठके बल लेट गइ.. तो देवायत उनके पैरके बीच बैठ गया ओर अपना लंड रीटाकी चुतपे घीसने लगा तब रीटा आंख बंध करके मदहोसीमे सीसकारीया करने लगी.. ओर आने वाले हसीन पलका इन्तजार करने लगी.. तभी देवायतने लंडको घीसते धीसने उनके टोपेको रीटाकी चुतके लव होलमे डालके थोडा फसा दीया.. ओर रीटापे जुकते उनपे छा गया..
ओर रीटाके दोनोहाथ पंजेसे कपडकर रीटाको लीपलोक करलीया.. रीटा कुछ समज पाये उनसे पहेलेही देवायतने रीटाकी चुतपे दबाव बनाते कमरको अेक जोरोका जटका दे दीया.. तो पुरा लंड रीटाकी चुतमे घुस गया.. तब रीटाकी चीख देवायतके मुहमे ही दब गइ ओर उनकी आंख बडी होगइ.. वो छटपटाते अपने होंठ छुडानेकी कोसीस करते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. ओर उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. जब देवायतने लोपलोक छुडालीया.. तब..
रीटा : (दर्दसे मुहको इधर उधर करते) मालीक... बस.. बस.. नीकाल लीजीये.. मुजे नही चुदवाना प्लीज.. बहुत दर्द हो रहा हे.. कीतना बडा ओर मोटा हे आपका मे सहेन नही करपाउगी.. नीकाल लीजीये..
देवायत : (कामुक आवाजमे) रीटा.. उनपे ध्यान मतदे.. बस मुजे चुमती रहे अभी दर्द चला जायेगा..
कहेते देवायत रीटाके बुब्सको ओर उनके होठोको बारी बारी चुमने लगा.. तब कुछ देरके बाद दर्द कम होने लगा ओर रीटा छटपटाते सांत होगइ.. आखीर देवायतका तगडा लंड अपनी चुतमे ले ही लीया.. अभी वो लंडको अपनी चुतमे लेकर देवायतके नीचे लेटीथी..
ओर सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराते इधर उधर मुह कर रहीथी.. तब देवायत रीटाको धीरे धीरे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब कुछही देरमे रीटाकी दर्द भरी आवाजे सीसकारीयोमे तबदील होगइ.. ओर वोभी कमर हीलाते देवायतका चुदवानेमे साथ देने लगी..
ओर कुछही देरमे देवायत ओर रीटाके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. रीटा देवायतकी पीठ सहेलाते अपनी कमर उछाल उछालके देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. तब कुछही देरके बाद वो अकडने लगी.. तब उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके साथ लीपलोक करतेही जडने लगी.. फीरभी देवायतने उनको चोदना जारी रखा.. तब देवायत हाथके बल उचा होकर रीटाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा..
रीटा : (कामुक आवाजमे) मालीक.. बस.. बस.. थोडा धीरे.. आप क्या मस्त चोदते हे.. मेतो आपकी दिवानी होगइ.. बस अबतो में आपसेही चुदवाउगी.. जबभी आपका चोदनेका मन करे मुजेही बुला लीजीयेगा.. मे कोइ बहाना करके आजाउगी.. क्या आपको आज मुजे चोदनेमे मजा आरहा हे..की नही..?
देवायत : (होंठ चुमते) हां रीटा.. तुभी मस्त तरीकेसे चुदवाती हे.. बीलकुल मालतीकी तराह..
रीटा : (हसते) मालीक.. अेक बार हम दोनोको साथमे चोदीयेगा.. वोभी आपकी दिवानी हे.. मेरी पकी सहेली होगइ हे..
तभी देवायत रीटाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा तो रीटाकी हालत पतली होने लगी.. ओर हल्कासा चीखने लगी.. ओर देवायत उनपे जुकते छागया.. तो रीटाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर दोनोके होठ लीपलोक होगये.. ओर देवायतने रीटाकी चुतमे जडतक लंड घुसा दीया.. फीर रुक रुक कर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी रीटाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उसे अपने बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ.. तब वोभी उतेजीत होकर साथमे जडने लगी..
आज रीटाके चहेरेपे संतुस्टीके भाव थे.. कुछही देरमे दोनो सांत होगये ओर अपनी सांसेको दुरस्त करते अैसेही सांत पडे रहे तबतक रीटा देवायतकी पीठको प्यारसे सहेलाते रही.. देवायतका लंड अबभी रीटाकी चुतमे सख्त होकर घुसा हुआथा.. तब रीटाकोभी थोडा अजीब लगा.. ओर मनही मन खुस होते दुसरी बार देवायतसे चुदवानेकी मनमे कामना करने लगी.. तभी देवायतने प्यारसे गालको सहेलाते रीटाको पुछही लीया....
कन्टीन्यु