Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 19 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३२/२

जी..हां.. आप सही सोच रहे हे.. ये ओरत कोइ ओर नही गांवके पंचायतके सदस्य सामतकी बीवी जया थी.. जो सहेरमे कीसी रीस्तेदारकी खबर पुछनेके बहानेसे रमेशको मीलने आगइ थी.. ओर ये दोनो आज अ‍ैसे पहेली बार नही मील रहेथे.. रमेश ओर जया.. अ‍ैसे चारसे पांच बार सहेरमे इसी होटेलमे मीले हे.. तब रेमश वायग्रा खाकर जयाकी खुब चुदाइ करता.. फीर दोनोही अलग अलग अकेले गाव चले जाते हे..

तभी रमेश जयाको गोदमे उठाकर बेडकी ओर चला गया.. ओर देखतेही देखते दोनोही नीवस्त्र होगये.. तबतक गोलीनेभी अपना असर दीखाना सुरु करदीया.. तब रमेशसे कंट्रोल करना मुस्कील हो गया.. ओर रमेश जयाके उपर चड गया तब जयाने उनका लंड पकडकर चुतके उपर सहेलाया ओर अपनी चुतपे सेट करदीया तब रमेशने अ‍ेकही जटकेमे अपना लंड जयाकी चुतमे घुसा दीया तो जयाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ..

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ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. जयाभी अपनी कमर उछाल उछालके रमेशके साथ मजेसे चुदवाने लगी.. वायग्राकी वजहसे काफी देरतक रमेश जयाको चोदता रहा.. ओर इसी बीच जयाभी अ‍ेक बार जड चुकीथी.. ओर आखीर रमेश अकडने लगा तब जयाने रमेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनोने अपने होंठ लीपलोक करलीये तब रमेश अपना माल जयाकी चुतमे उडेलने लगा.. ओर जया भी साथमे जडते रमेशकी पीठको सहेलाती रही.. ओर रमेश जयाके सीनेपे ढेर होगया..

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जया : (सरमाते हसते) रमेश.. क्या बात हे.. आजतो बाफी देरतक करते रहे..? कुछ खाया हे क्या..?

रमेश : (हसते) हंम.. तुजेतो पता हे.. मे तुजे वो गोली खाकरही चोदता हु.. तुजे चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. क्या सामतभाइ तुजे ठीकसे नही चोदते..?

जया : (सरमाते हसते) वो अगर ठीसे चोदपाते तो मे आपसे चुदवाने थोडीना आती..? अब वो कहा कर पाते हे.. कीतने बुढे होगये हे.. अबतो उनका खडाभी नही होता.. तभीतो आपसे चुदवा रही हु.. हमे घरपे बहुत कम मौके मीलते हे.. मेरी जागृती ओर मेरी ननंद सांती घरपे ही होती हे..

रमेश : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. तु अब उनका ब्याह क्यु नही करदेती.. कीतनी बडी होगइ हे.. कोइ अच्छासा लडका ढुंढकर उनकी सादी करदे.. तेरा लडकाभी तो बडा होगया हे..

जया : (गाल सहेलाते) तुम मेरे बच्चोकी कीतनी चीन्ता करते हो.. बस तेरे भाइकोतो कोइ चीन्ताही नही.. कुछ ध्यानही नही देते.. की चलो लडका लडकी अब जवानहो गये हे.. कही उच नीच हो गइनां.. तब उसे पता चलेगा.. सारा दीन ना जाने कहा घुमते रहेते हे.. ओर उपरसे मेरी ननंद बेचारी छोटी उमरमे विधवा होकर आइ हे..

तो मे क्या करु..? जागृती ओर बंसीको सादीके लीये पुछती हुतो दोनो ना ना करते रहेते हे.. ओर सांतीभी बेचारी क्या करे.. यहा कुआरे लडके लडकीकी सादी नही हो रहीतो बेचारी विधवासे कौन सादी करेगा..? आपकी दनाके लीयेभी तो कोइ लडका नही मीलता..

रमेश : हां सही कहा तुमने.. मेरी वंदनाके लीयेभी यही प्रोबलेम हे.. उनके लीयेभी कोइ पढालीखा लडका चाहीये.. ओर भाभी तुमतो जानती हो गांवमे अ‍ैसे लडके मीलना कीतना मुस्कील हे..

जया : (हसते) रमेश.. अगर मेरा बंसी पढालीखा होतातो वंदनाको मेही लेजाती.. लेकीन तुमतो खामखा इधर उधर भटक रहे हो.. हमारे ठाकुरसाब तो तुम्हारे बहुत अच्छे दोस्त हे.. उमरमेभी तुमसे बहुत छोटे हे.. बस वंदनासे पांच छे सालही बडे होगे..

रमेश : (अ‍ेक नजरसे देखते) भाभी.. तुम कहेना क्या चाहती हो..

जया : (हसते) देवरजी.. बुरा मत मानना.. उनके खानदानमेतो बहुतसी सादीया कर सकते हे.. तो फीर आपकी वंदनाके लीये वही बात चलाओ.. आपका दोस्त हे. तो हो सकता हे आपकी बात नही टालेगे..

रमेश : (कुछ सोचते) भाभी.. बाततो तेरी सही हे.. मेभी चाहता हु वंदनाको देवु अपनाले.. लेकीन वो मेरा दोस्त हे.. तो मे कीस मुहसे उनसे बात करु..? ओर लखनभैयातो वंदनासेभी छोटे हे वरना उनके साथही मे देवुसे बात करता..

जया : पता नही अब भगवानही कोइ रास्ता नीकाले.. चलो.. अब सुरु होजाओ.. आजतो अभीभी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे.. आपने कोनसी गोली खाइ हे..? हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) क्यु मजा आया..? उस दुकानवालेने आज कोइ इम्पोर्टेड गोली दी हे.. आजतो थकानभी महेसुस नही होती.. भाभी.. देखना आजतो तुजे साम तक चोदता रहुगा.. हें..हें..हें..

जया : (सरमाते हसते) देवरजी तो ये गोली कभी हमारी देवरानीके लीयेभी लेजाओ.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) अरे वो.. मुजेतो गोली खानेही नही देती.. ओर उनका स्वभावतो आपको पताही हे.. कीतनी गालीया देती हे.. पता नही वंदना कैसे पैदा होगइ.. वरना हमारा रीलेशन अ‍ैसेही थोडीना होता.. कमीनी हाथभी नही लगाने देती..

जया : (सरमाते हसते) हंम.. देखना बाबा हमे टाइमपे घरभी जाना हे.. हमारे पास चार बजे तक का वक्त हे.. आपको मुजे जीतना चोदना हो चोदलो.. फीर चार बजे मुजे बस स्टेन्ड छोड देना मे चली जाउगी..

रमेश : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. आज मेरे साथ मोटर साइकलपे चलना.. हम दोनो साथमे चले जायेगे.. कोइ पुछेगातो केह दुगाकी भाभी मुजे सहेरमे मील गइ तो लेकर आगया..

जया : (सरमाते हसते) ना बाबा ना.. कीसीने देखलीया तो हमारी फजीहत हो जायेगी.. मुजे आपके साथ नही आना..

रमेश : (होंठ चुमते) अरे चलना.. देखलीया तो क्या होगया.. सबको पता हे हम देवर भोजाइ हे.. ओ सहेरमे तो ये आम बात हे.. ओर गांवमेभी देवर भोजाइ साथमे जाते हे.. तो क्या दीकत..? हम हर बार थोडीना जाते हे..

जया : (सरमाते हसते) ठीक हे.. आज चलती हु.. लेकीन हर बार तुम्हारे साथ नही आउगी.. वरना कीसीको हम दोनोपे सक होजायेगा.. तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी..

रमेश : (खुस होते हसते) हंम.. थेन्कयु डार्लींग.. हें..हें..हें.. भाभी.. ये बता.. तुम्हारी उमर ओर सामतभाइकी उमरमे इतना बडा फर्क क्यु हे..? तुम आजभी इतनी जवान.. ओर कहा सामत भाइ..

जया : (सरमाते हसते) हंम.. मेरे बा बापुने मेरी छोटी उमरमेही इनसे सादी करदीथी..तब हमारे घरकी स्थीती अच्छी नहीथी.. ओर तब आपके भाइ रइस कहेलातेथे.. ओर उपरसे तब वो हमारे गांवके सरपंच थे.. तो मेरी सादी होगइ.. ओर छोटी उमरमेही उन्होने मुजे दो दो बच्चे देदीये.. लेकीन अब वो बुढे हो चुके हे.. उइ..मां.. रमेश.. अब जोभी करना हे करलो.. कबतक अ‍ैसे रहोगे.. फीर हमे जानभी हे..

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फीर रमेश अ‍ेक बार फीरसे जयाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगता हे.. तब जयाभी उनका साथ देने लगी.. ओर दोनो साम चार बजे तब चुदाइ करते रहे.. रमेशने जयाकी जमकर तीन बार चुदाइ करली तब दोनोही थकके चकनाचुर हो चुके थे.. फीर दोनोने नहालीया ओर अपने कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. तब रमेशने जयाको अ‍ेक आइपीलकी गोली देदी.. तो जयाने खाली..

फीर रमेशने होटेलका कीराया देदीया ओर दोनोही होटेलसे बहार आगये.. तब रमेशने अपनी बाइक लेली तो जया दुपटेसे अपना चहेरा ढकके रमेशके पीछे बैठ गइ ओर दोनो गांवकी ओर चले गये.. तब इधर आश्रममे भी सब साम होतेही नीकलने लगे.. देवायत ओर सृतीने मीलकर बाबाको दक्षीणा देदी फीर सब उनके पांव छुकर वहासे नीकलने लगे.. ओर सबने यहासे सीधेही धिरेनके घर जानेका फैसला करलीया..

मंजुने सृतीकी कारको धिरेनको चलाने देदी.. ओर सृतीको देवायतके साथ बीठा दीया तो भानु ओर लखननेभी अपनी कार लेली ओर सबलोग चारो कारमे अ‍ेडजेस्ट होगये.. ओर आश्रमसे नीकल गये.. जंगलसे गुजरते सहेरके रोडकी ओर आगये.. ओर सब लोग गांवकी ओर बढने लगे तब बीचमेही धिरेनका गांव आने वाला था तो सब लोगोको वही जाना था.. तब रमेशको नही पताथाकी ये लोग रास्तेमे उनको मील जायेगे..

चारो कार अपनी मंजीलकी ओर दोड रहीथी तब देवायतको आगेकी ओर अ‍ेक मोटरसाइकील दीखा जीनमे अ‍ेक ओरत पीछे बैठीथी.. तब देवायतको बाइक को पहेचानने मे जरासीभी देर नही लगीकी ये मोटर साइकील रमेशकी हे.. ओर उनके पीछे ओरतको देखते वो सारा माजरा समज गया.. वो कुछ ओर सोचे उनसे पहेलेही सब कारे उन बाइकको ओवरटेक करके आगे नीकल गइ.. लेकीन हायरे रमेशकी किस्मत..

कारमे पीछे बैठी चारु ओर रश्मी मंजुने उन दोनोको देख लीया.. तो मंजु रश्मी चारुकी ओर देखकर हसने लगी.. तो चारुका पारा सातवे आसमानपे चला गया.. ओर उनका चहेरा गुस्सेसे भर गया.. लेकीन सबकी हाजरीकी वजहसे कुछ अन देखा करते बैठी रही.. तबभी रश्मी ओर मंजु चारुकी ओर देखके मंद मंद मुस्करा रही थी.. ओर सबलोग धिरेनके गांव आगये.. सब कारसे उतर गये तभी चंदाने धिरेन ओर पुनमको बहारही रोक दीया ओर वही दरवाजेपे खडे रहेने कहा..

फीर नीर्मला ओर चंदा दोनोही घरका ताला खोलकर अंदर चली गइ ओर अ‍ेक चावलका कलश ओर अ‍ेक पानीका कलश लेकर आगइ.. फीर नीर्मलाने चावलका कलश दरवाजेके बीच नीचे रख दीया ओर पानीका कलश दोनोके उपर घुमाने लगी.. फीर पुनमको कलशको पैर मारके अंदर आनेको कहा.. तो दोनोही अंदर आगये उनके साथ सब लोगभी अंदर आगये.. तब दया रजीयाने उनका सामन भी अंदर लेलीया..

मंजुला : (हसते) लोजी.. भैया.. अबतो आप अपने घर आगये.. देखले पुनो अब यही तेरा ससुराल हे..

धिरेन : (हसते) अरे आप सब लोग बैठो मे अभी गांवमे दुध लेकर आता हु.. चलो लखनभैया..

चंदा : (थोडा जोरोसे) धिरेन.. सुन.. कुछ मीठाइभी लेलेना ओर दुधभी थोडा ज्यादा लेना..

तो धिरेन हां कहेते लखनको लेकर पासकी दुकानकी ओर चला गया.. तब राजीव नीर्मला ओर भुमीका घरके अंदर सब देखते घुमने लगे.. तो भावना ओर मंजु दोनोही अपने बच्चेको लेकर नीचेके रुममे चली गइ.. ओर अपने बच्चोको ब्लाउस उचा करके दुध पीलाने लगी.. तब पुनम लता वंदना नीशा रश्मी रमा ओर चारु सब उपरकी मंजीलपे चली गइ.. ओर पुनम सबको सीधेही अपने बेडरुममे लेगइ.. तब..

नीशा : (हसते) पुनोदीदी.. सादीके बाद तो आप इधर पहेली बार आइनां..? फीर भी लगता हे ये बेडरुम आपके जाना पहेचाना हे हें..हें..हें.. यहा कुछ महेनत बहेनत की हेकी नही..?

पुनम : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. कीतनी कमीनी हो तुम.. तुम जो सोच रही हो अ‍ैसा कुछ भी नही हुआ.. समजी.. सीर्फ मे ओर धिरेन दो बार यहा बैठे थे..

वंदना : (जोरोसे हसते) तो कमीनी नीशाभाभीने कब कहा की तु यहा धिरेनके साथ..

रश्मी : (जटसे वंदनाके मुहपे हाथ रखते) बस.. वंदु.. आगे कुछ मत बोलना तेरी मां भी इधर खडी हे.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते) रहेने दे रश्मीभाभी.. हम दोनो मा बेटी कम सहेली ज्यादा हे.. समजी.. (वंदनाकी ओर देखते) बोल बेटा क्या कहे रहीथी तुम.. हें..हें..हें..

वंदना : (सर्मसार होते हसते) कुछ नही मोम.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी.. ये हमारा रुम हे.. ओर सामने पहेले रुमथा वो चंदाभाभीका था.. चलो दीखाती हु..

फीर सब पुनमके पीछे जाने लगे.. तो पुनमने रुम खोलदीया.. ओर सब अंदर चली गइ.. तब रश्मी रमा चारु तीनोही रुमको गौरसे देखती रही.. तो वंदना लता ओर पुनम तीनो बेडपे बेठ गइ तब रश्मीने कहा..

रश्मी : (जोरोसे हसते) पुनोदीदी.. लगता हे आपके भाइ ओर भाभीने यहा बहुत महेनत की हे.. हें..हें..हें..

कहातो सब सरमाकर जोरोसे हसने लगे.. तो पुनमनेभी सरमाकर हसते हुअ‍े हां मे गरदन हीलादी.. फीर सभी मस्ती मजाक करते नीचेकी ओर आने लगी.. तभी धिरेन ओर लखनभी दुध ओर ढेर सारा नास्ता लेकर आगया.. ओर सब दयाको देदीया तो दया ओर रजीया सबके लीये चाइ बनाने लगी.. तो धिरेन लखन जाकर राजीव नीर्मला ओर भुमीका बैठीथी वही दोनो उनके पास बैठ गये.. तब..

राजीव : (हसते) धिरेनबेटा.. अबतो कलसे तुजे नोकरीपे भी जाना होगा.. कोनसे वाहनमे जाते हो..?

धिरेन : जी पापा.. हें..हें..हें.. बाइक हे मेरे पास.. कारभी लेनी हे लेकीन सीटीमे चलानेकी दिकत होती हे..

नीर्मला : (हसते) बेटा तो वोभी लेले.. हमारी बहुको घुमाते रहेना.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) हां मोम.. लेकीन पहेले अ‍ेक मकान लेना हे.. फीर बादमे कारके लीये कुछ सोचता हु..

राजीव : (हसते) अरे वोभी लेले पैसे मे दे दुगा.. आखीर अब तुम हमारे बेटे हो गये हो.. बोल कीतना चाहीये..?

धिरेन : (हसते) थेन्कस पापा.. लेकीन मुजे नही चाहीये.. बेंक मुजे बीना ब्याजकी लोन दे रही हे.. तो उसीमेसे लेलुगा.. पापा आज आप मम्मी ओर भुमी मौसी इधरही रुक जाइअ‍े.. जीतने दिन रुकना हो रहीये.. जब आप कहोगे तब मे आपको सहेर छोड दुगा..

नीर्मला : (हसते) नही बेटा.. अब कीतने दिन हो गये हमे घर जाना होगा.. ओर वहाभी अ‍ेक जरुरी काम करना हे.. तो तेरे जीजाजी ओर मंजुदीदी ही हमे छोडने आ रहे हे..

भुमीका : (हसते) हां धिरेन.. वहाभी पुरा बंगला बंध पडा हे.. ओर तुमतो जानते हो सहेरमे घरको अकेला छोडना कीतना जोखीम हे.. ओर सृतीको क्लीनीकभी देखनी हे.. तो हमभी कल चले जायेगे..

देवायत : (हसते) पापा.. धिरेन ठीक केह रहा हे.. आजके दिन आपको यही रुकनाहे तो रुक जाइअ‍े.. मे कल सुबह सृती ओर उनकी मम्मीको सहेर छोड दुगा.. ओर वापसीमे आप दोनोको लेकर जाउगा..

नीर्मला : (हसते) हां ये ठीक रहेगा.. चलो आज यही रुकते हे.. तो धिरनकी बातभी रेह जायेगी..

मंजुला : (पास आते) चलो सबलोग यही नीचे बैठ जाओ चाइ नास्ता बन गया हे.. फीर हमे जानाभी हे..

लखन : भाभी.. अंकल ओर दोनो आंटी आज यही रुकने वाले हे तो मे नास्ता करके घर चला जाता हु.. तो वहा कुछ तैयारीया भी होजायेगी.. क्या कहेती हो.. मे लता वंदना दीदी सब चले जायेगे..

भानु : (हसते) हां भाइ.. लखन ठीक केह रहा हे.. उनको जानेदो..

मंजुला : (हसते) हां चले जाना.. हमभी कुछ देरके बाद नीकल रहे हे..

धिरेन : (हसते) दीदी क्या नीकल रहे हे.. सबको डीनर करके नीकलना हे.. रुक जाइअ‍े.. कितने दिनोके बादतो सब यहा अ‍ेकठा हुअ‍े हे.. लखन भैयाको जानाहे तो जानेदो.. उनको कुछ काम हे.. हें..हें..हें.. भानुजीजु ओर रमादीदी भी सादीके कीतने दीनोके बाद आये हे..

तब मंजु समज गइ ओर उसने हांमे गरदन हिलाके सहमती देदी.. फीर सब चाइ नास्ता करने नीचे बैठ गये ओर बाते करते ओर अ‍ेक दुसरेके साथ हसी मजाक करते सब चाइ नास्ता करने लगे.. सब दो घेरेमे बैठे थे.. दुसरे घेरेमे पुनम लता वंदना नीशा दया रजीया रश्मी सृती भावना बैठीथी तो रमा मंजु चंदा चारु सब जेन्ट्स लोगके साथ बैठकर नास्ता खा रहेथे..

तब वंदना ओर नीशा बार बार चोर नजरसे देवायतकी ओर देखती रही.. तो रमा अबभी चोर नजरसे लखनकी ओर देख रहीथी.. लेकीन येतो लखनभैया हे.. अ‍ेक बारभी उसने रमाकी ओर नही देखा.. तब रमा थोडी वीचलीत होगइ.. ना जाने क्यु.. वो चाहतीथी की लखन उनकी ओर अ‍ेक बार देखले.. रमा अन्जानेमे ही सही.. अब वो लखनकी ओर ढल चुकी थी.. ओर लखनभीतो यही चाहता था.. वो रमाको सेट करके उनके जरीये नीलमको पाना चाहता था..

फीर सबने चाइनास्ता करलीया तो लखन लता ओर वंदना घर जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो साथमे नीशाभी जानेके लीये तैयार होगइ.. क्युकी वहा जाकर सबको देवायत सृतीकी सुहागरातके लीये रुमको सजाना था.. ओर चारो लखनकी खुली जीपमे बैठ गइ.. ओर सब हवेलीकी ओर नीकल गये.. तब पुनम सृती भावना चारु रमा ओर रश्मी उपरकी मंजीलपे पुनमके रुममे जाकर गप्पे लगाने लगी..

तभी देवायत भानु ओर सुधीर गांवमे चकर लगाने चले गये.. तब उसे वहा अपना पुराना दोस्त भीमा मील गया.. जो उनका स्कुलका साथी था.. देवायत ओर सुधीर उनकी सादीमे भी गयेथे.. तो भीमा देवायत ओर सुधीरको देखकर खुस होगया.. ओर उसे गले मीलकर अपने घर लेगया तो वहा उसे चाइ पानी देनेके लीये भीमाके सालेकी बीवी आइ.. फीर वहा सबने चाइ पानी पीया.. तब चारो वहासे नीकलने लगे.. तब देवायतने भीमाको थोडा दुर लेजाते पुछही लीया..

देवायत : भीमा.. येतो तेरे छोटे सालेकी बीवी हेनां..? तो फीर भाभीजी कहा हे..? कही मायके बायकेतो नही गइ..? ओर घरपेभी सीर्फ तुम दोनो हो..

भीमा : (हसते) भाइ अब आपसे क्या कहु.. आपकी भाभी मुजे छोडके चली गइ.. आपतो जानते हे मेरे भाइके साथ उनका अवैध रीस्ता था.. तो कमीनेको मेने मारकर गांवसे भगा दीया.. तो अ‍ेक हप्तेके बाद आपकी भाभीभी मुजे छोडके उनके साथ रहेने चली गइ.. तो मेने उन रंडीके भाइकी बीवीको ही सेट कर लीया.. ओर उनसे सादी करली.. तबसे ये यहा हे.. हें..हें..हें..

देवायत : भीमा वो तेरा भाइ भवान बहुतही कमीना था.. अ‍ेक बार मेरे हाथसे मार खाते खाते बच गया.. यहाकी सरपंचथी जो आज मेरी बीवी हे.. उनको सरपंच बननाथा तो चंदाको बदनाम कर रहा था.. तो मेने उसे रास्तेमे मीला तब धमकाया था..

भीमा : (आस्चर्यसे) अच्छा कीया.. क्या चंदाबहेनने आपसे सादी करली..? चलो अच्छा हुआ अ‍ेक विधवाको सहारा मील गया.. भाइ अगर मेरे लायक कोइ काम होतो कहेना.. ओर कभी कभी यहा आते रहेना..

देवायत : भीमा कामतो हे.. लेकीन अभी नही.. जब बाबा आयेगे तब तुजे बुलाउगा.. ओर सुन.. अब तुम यहाका सरपंच होजा.. क्युकी चंदातो अब मेरे यहा आगइ हे.. कहोतो जीला पंचायतमे बात करु..?

भीमा : (खुस होते) भाइ तबतो सोनेपे सुहागा.. आप बात करो फीर जब कहोगे तब आजाउगा.. गांववालोका भी मुजे पुरा सपोर्ट हे.. तो कोइ दिकत नही होगी..

भीमासे ओर कुछ बात करके तीनो वापस घरकी ओर आगये.. तबतब दया ओर रजीयाने सबका डीनर बना लीयाथा.. ओर सबलोग डीनर करने बैठ गये.. सबने तैय कीया की आज राजीव नीर्मला ओर भुमीका यहा रुकने वालेथे ओर सुबह देवायत उनको अपने घर छोडने जानेवाला था.. तो अब दया हमेसाके लीये पुनमके पास रहेने वाली थी.. चंदाने उसे कीचनके पास जो रुमथा उसीमे रहेनेके लीये केह दीया..

जब सबने डीनर करलीया तब धिरेन सबके लीये आइसक्रिम लेकर आया.. ओर सबने इकठा बैठकर आइसक्रिम खाइ.. फीर सब चलनेके लीये तैयार होगये.. तो पुनम देवायत मंजु सबको गले मीलते आंसु बहाने लगी.. ओर सबने उसे समजाया तो दयाभी सबको गले मीलने लगी.. तब देवायतने उसे इसारेसे मीलने आनेकी बात कही तो वो खुस होगइ.. ओर राजीव नीर्मला ओर भुमीके अलावा सब लोग नीकलने लगे..

कुछ लोग भानुकी कारमे बैठ गये तो कुछ देवायतकी कारमे बैठ गये.. आधेही घंटेके बाद सब हवेलीपे आगये.. सबलोग होलमे बेठ गये.. तो मंजु सृतीको लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. वहा उनको वंदना ओर नीशा लता सुहागरातके लीये सजाने लगी.. तब सृती बहुतही सरमा रहीथी.. तबतक रजीया ओर चंपाभाभीने मीलकर सबके लीये कोल्ड्रंीक बनाया ओर सबको पीलाने लगी..

फीर चंदाने विजयको सम्हाला तो भावना ओर रमा नीचेके रुममे चली गइ.. ओर दोनो बाते करने लगी.. तब मंजुने सृती ओर देवायतके लीये गरम केशर बादाम वाला दुध बनालीया ओर रजीयाको कहेकर देवायतके रुममे रखवा दीया.. तबतक देवायत रश्मीको छोडने उनके घर चला गया ओर उसे छोडके वापस आगया.. तबतक तीनोने मीलकर सृतीको हल्कासा शींगार कर दीयाथा..

फीर सुधीर नीशा चारु ओर वंदना सबको मीलकर अपने घर चले गये तब सुधीरने रास्तेमे चारु वंदनाको उनके घर छोड दीया.. जबसे रमा आइ तबसे लखनपे नजरे रखते मौका मीलतेही उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहीथी.. लेकीन लखन हर बार अन्जान बनके उनके पाससे खीसकके उनको इग्नोर करता रहा.. तो लखनके लीये रमा ओर बैचेन होने लगी.. ओर अ‍ेक बारतो उनकी आंखभी गली होगइ..

फीर भानुभी सबको मीलकर रमाको लेकर अपने गांव चला गया.. सबलोग चले गये तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर सुलाने लगी.. रजीया चंपानेभी अपना सब काम नीपटा लीया तब लखन ओर लताभी उपर अपने रुममे सोनेके लीये चले गये.. तभी मंजु ओर चंदा दोनोही सृतीको लेकर उपरके रुममे चली गइ.. ओर सृतीको घुंघट नीकालकर बेडके बीच बीठा दीया.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३३

फीर भानुभी सबको मीलकर रमाको लेकर अपने गांव चला गया.. सबलोग चले गये तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर सुलाने लगी.. रजीया चंपानेभी अपना सब काम नीपटा लीया तब लखन ओर लताभी उपर अपने रुममे सोनेके लीये चले गये.. तभी मंजु ओर चंदा दोनोही सृतीको लेकर उपरके रुममे चली गइ.. ओर सृतीको घुंघट नीकालकर बेडके बीच बीठा दीया.. तभी....अब आगे

चंदा : (हसते) अरे वाह.. मंजु.. हमारे लखन लताने बेड तो बडा सजाया हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) दीदी अगर पसंद आयाहे तो आपभी इधर रुक जाये.. देवु आपके साथभी वापस सुहागरात मना लेगे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) मंजु.. आप दोनो भी इधर रुक जाओनां..

मंजुला : (हसते) कमीनी.. आज सीर्फ तेरी सुहागरात हे तो आज तुही हमारे पतीके साथ रहेगी.. फीरतो कही मोके मीलेगे देवु हम तीनोको अ‍ेक साथ ठोकता होगा.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते मुका मारते) मंजु तुम बहुत बीगड गइहो.. (सृतीकी ओर देखते) सृती.. बेस्ट ओफ लक.. क्या ये तेरी दुसरी सुहागरात हेनां..?

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. दीदी उसी सुहागरातमे मुजे पता चला गयाकी वो मेरा पती पुरुष नही था.. तो मे आज भी वर्जीन हु.. सही मायनेमे यही मेरी सुहागरात हे..

मंजुला : (हग करते) हंम.. सृती बेस्ट ओफ लक.. देखना कम चीलाना.. आवाज बहार तक ना आये.. हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते मंजुका हाथ खीचते) अब चलो भी.. क्यु हमारी सोतनको डरा रही हो.. हें..हें..हें..

तब दोनोही हसते हुअ‍े बहार नीकल गइ.. ओर नीचे अपने रुममे चली गइ तब देवायत चेन्ज कर रहा था.. तो दोनोको देखतेही बाहोमे भरलीया ओर दोनोके होंठ चुम लीये.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : (हसते) जानु.. जरा प्यारसे.. वो अभी तक वर्जीन हे.. अब आप जाइअ‍े.. सुबह इनको छोडने भी जाना हे..

देवायत : हंम.. मंजु तुम दोनो भी चलोना..

चंदा : नही देवु.. आज आप दोनोकी सुहागरात हे.. तो आज तुम दोनो अकेलेही अ‍ेन्जोय करो.. फीरतो हम साथ हे ही.. तब देवायत अ‍ेक बार फीर दोनोके होंठ चुमके उपरकी मंजीलपे चला गया.. तबतक रजीया ओर चंपाभाभीभी सब काम नीपटाकर अपने रुममे सोनेके लीये चली गइ.. तब मंजुने घरके सभी दरवाजे ओर लाइटे बंध करदी ओर अपने रुममे चली गइ.. ओर मंजु चंदाने चेन्ज करलीया.. ओर अपने बेडपे आगइ..

मंजुला : (बेडपे सोते) बडीदीदी.. आज आपने आश्रमसे आते वक्त कुछ देखा..?

चंदा : (मंजुकी ओर करवट लेते) नहीतो..? क्यु..? क्या हुआ..?

मंजुला : (हसते चंदाकी कमरमे हाथ डालते) आज तो रमेशभाइ गये कामसे.. हें..हें..हें.. रास्तेमे अपनी बाइकके पीछे अ‍ेक ओरतको बीठाकर सहेरसे आ रहेथे.. जानती हे वो कौन थी..?

चंदा : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? कोनथी वो ओरत..?

मंजुला : (हसते) हमारे सामतभाइकी बीवी जयाभाभी.. रमेशभाइ पंचायतकी ओफीसका काम नीटाकर उसे लेकर कीसी होटेलमे चले गयेथे.. ओर वहा सामतभाइकी बीवीकी खुब जमकर चुदाइ की.. ओर दोनो साथमे वापस आगये.. तो रास्तेमे आते वक्त चारुभाभीने भी देखलीया.. हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते) क्या..? ये दोनो यहासे साथमे ही गयथे..? तबतो आज रमेशभाइ गये कामसे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही.. ये दोनो अक्सर अ‍ैसे मीलते रहेते हे.. दोनोही यहासे अलग अलग जाते हे.. ओर मजा करके वापस अलग अलग आते हे.. लेकीन पता नही आज दोनो कैसे साथमे आगये.. चारुभाभीने भी उन दोनोको देख लीया.. अभीतो उनके घरमे घमासान युध्ध चल रहा होगा.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) मंजु.. रमेशभाइ चारुभाभी जैसी खुबसुरत ओर कामी बीवीको छोडकर इनके पीछे कैसे पड गये..? पहेलेतो हमारे रमेशभाइ अ‍ैसे नही थे.. पता नही आजकल सबको क्या होगया हे.. कीसीना कीसीका टाका कीसीके साथ भीडा हुआ हे.. सबको अ‍ैसे रीस्तोमेही मजा आता हे..

मंजुला : (हसते) दीदी.. सबको पता हे घरकी मुर्गीतो कभीभी मील सकती हे.. ओर उसमे उनको संतोस नही मीलता तभी बहार मुह मारते अपनी आगको सांत करनेकी कोसीस करते हे.. ओर आग सीर्फ अ‍ेक तरफा नही लगती.. सामतभाइ ओर जयाभाभीके बीच उमरमे काफी फर्क हे.. तकरीबन १४ साल..

तो लगता हे इसी वजहसे सामतभाइ ओर जयाभाभीको संतुस्ट नही करते होगे.. तभी तो रमेशभाइके साथ रीलेशनमे आइ होगी.. ओर उपरसे चारुभाभीका स्वभाव.. रमेशभाइ चारुभाभीसे बहुत डरते हे.. चारुभाभी रमेशभाइको अपनी उंगलीपे नचाती हे.. ओर उपरसे रमेशभाइ चारुभाभीको ठीकसे संतुस्ट भी नही करपाते..

चंदा : (हसते) मंजु.. अपनी बीवीकोतो संतुस्ट नही करते तो फीर जयाभाभीको कैसे संतुस्ट करते होगे..?

मंजुला : (हसते) क्यु..? आजकल तो मार्केटमे अ‍ैसी बहुत सारी गोलीया मीलती हे.. बस उसीसे जयाभाभी खुस होजाती हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) हंम.. तो फीर यही गोलीसे वो चारुभाभीको भी संतुस्ट करते..? क्या जरुरत थी जयाभाभीके साथ रीलेशन रखनेकी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. जब जयाभाभी ओर रमेशभाइ रीलेशनमे नही थे.. ओर हमारी सादीभी नही हुइथी.. तब चारुभाभी रमेशभाइसे कुछ खास खुस नही थी.. इसी बातको लेकर दोनोके बीच बहुत जगडे होते थे.. तब देवुही उनदोनोका समाधान करवाते थे.. तभीसे चारुभाभीके मनमे हमारा देवु बस गया.. तबसे उनको हमारा देवु सम्हालके बैठा हे..

चारुभाभीको अब रमेशभाइमे कोइ इन्ट्रेस्ट नही हे.. ओर रही बात जयाभाभीकी तो रमेशभाइ नही खुद जयाभाभीने पहेल कीहे.. उसने सामनेसे ही रमेशभाइके साथ रीलेशन रखा हे.. तो रमेशभाइ क्या करते..? आखीर वोभी तो अ‍ेक मर्द हे.. अबतो भगवानही बचाये उनको हें..हें..हें..

चंदा : मंजु अबतो वंदनाकी भी उमर हो गइ हे.. ये लोग उनकी सादीके बारेमे क्यु नही सोचते..?

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. वंदु जब जवान हुइ तबसे ही हमारे देवुको पसंद करने लगी थी.. वो उनसे प्यार करती हे.. लेकीन देवुकी इतनी सादीयो की वजहसे अपने दिलकी बात नही केह पाइ.. ओर दुसरी जगाह सादीभी करना नही चाहती.. बस.. अब वक्त आ गयाहे.. वोभी हमारी सौतन होजायेगी.. वो देवुकी बीवी होकर अपने घरपे ही रहेगी.. ओर हमारे देवुसे उनको बच्चाभी होगा..

चंदा : मंजु.. तुजे नही लगता अब ये कुछ ज्यादा हो रहा हे..? हमारा देवु कीतनी सादीया करेगा..? हम तीनो कायदेसरकी बीवी हे.. ओर उनकी सीक्रेट बीवीया अलग.. तुजे कुछ अजीब नही लगता..? तुजे तो सब पता चल जाता हे.. तो बताना अ‍ैसा क्यु..?

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. मत भुलो की हम सब कौन हे.. हमारा देवु खुद हमारे स्वामीका अंस हे.. उनका काम ही यही हे.. तो सबका उनकी ओर आकर्सीत होना लाजमी भी हे.. हम सब उनको देखकर आज भी पागल होजाती हे.. वो हम सबको अच्छी तराह संतुस्ट भी करते हे.. वरना रश्मीभाभी जयाभाभी चारुभाभी इनके साथ रीलेशन क्यु रखती..?

क्युकी वो उनके पतीसे संतुस्ट नही हो पाती.. गांवमे जयाभाभी बसंतीभाभी जैसी ओरते भी हे जो अपने पती होनेके बावजुद दुसरे मर्दसे रीलेशनमे हे.. क्यु..? क्युकी उनकोभी अपने पती संतुस्ट नही करपाते.. ओर सबको अपने तनकी जरुरत पुरी करनी हे.. तो बेचारी कहा जायेगी..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. तो मंजु इसके लीये सीफ हमारा देवु ही क्यु..? तो ये भी दुसरे मर्द को पकड लेती..

मंजुला : (मुस्कुराते चंदाके होठं चुमते) दीदी.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? मुजे सच जवाब देना.. अगर यही बात हमारे साथ होतीतो..? सोचो अगर देवुसे हम संतुस्ट नही होती तो..? आप क्या करती..? क्या देवुके संपर्कमे आनेसे पहेले आपने अपनी दुसरी सादीके बारेमे कभी सोचा था..?

चंदा : (मुस्कुराते) नही.. हें..हें..हें.. समज गइ.. हें..हें..हें.. आगे कुछ मत बोलना.. हें..हें..हें.. जोभी हो रहा हे होने दे.. अब मे कभी कोइ अ‍ेतराज नही करुगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. इसीलीये जो हो रहा हे होने दीजीये.. अभीतो सीर्फ देवुही आया हे.. सोचो.. जब हमारा पोता यानी हमारे स्वामी आयेगा तब क्या क्या होगा..? ओर मत भुलीये की देवुकी जींदगीमे जीतनीभी ओरते ओर लडकीया आयेगी वो कोइ सामान्य ओरत नही होगी.. वो सब परीया या अप्सराये होगी.. ओर पीछले जन्ममे हमारे स्वामीसे जुडी होगी..

तबभी उनकी लीगल सोलाह रानीयाथी.. ओर दुसरी ओरतसे रीलेशन अलग.. तो उसनेभी हमारे स्वामीसे हर जन्ममे मीलनेकी कामना की होगी.. इसीलीयेतो इस जन्ममे वो देवुके साथ सम्पर्कमे आइ होगी.. तो हम इतनी स्वार्थी कैसे हो सकती हे..? तो जो भी हो रहा हे.. या होने वाला हे उसे देखती जाइअ‍े.. हमे हमारे हीस्सेका प्यार मील तो जाता हे..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. मंजु.. मुजे तेरी सब बाते समजमे आगइ.. अब मे देवुके कीसीभी रीलेशनसे अ‍ेतराज नही करुगी.. चल अब सोना नही हे..?

मंजुला : (चंदाके बुब्स मसलते उनके उपर चडजाते) अरे अ‍ैसे कैसे सोजायेगी.. आजतो मेभी अपनी दीदीको संतुस्ट कर दुगी.. फीर आपभी मुजे संतुस्ट कर देना हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे बाहोमे भीचते) कमीनी.. तुमभी देवुसे कम नही हो.. आजा..

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कहेते चंदा मंजुके गलेमे हाथ डालके उनको अपने तनसे चीपका लेती हे तब मंजुभी अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते जोरोसे चंदाकी चुतको सहेलाते उगंली घुसा देती हे.. ओर जोरोसे उंगली अंदर बहार करते चंदाको चुदाइका अहेसास करवाती हे.. तब कुछही देरमे चंदाकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. ओर उसी तराह चंदाभी मंजुको उनकी चुतमे उंगली डालकर संतुस्ट करदेती हे.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो जाती हे..

तभी उपरकी मंजीलपे देवायत सृतीके पास चला गया तो सृती घुंघटसे चहेरेको ढककर बेडके बीच बैठीथी.. ओर देवायत दरवाजा बंध करके उनके पास चला गया.. तब अ‍ेक बारतो सृती कांप उठी.. आज सबकुछ होने वाला था जो उसने सपने देखाथा.. सृती देवायतका तगडा हथीयार देख चुकीथी.. ओर उनके साथ अ‍ेक बार खेल चुकीथी.. वोही हथीयार आज सृती अपनी चुतमे लेने वाली थी.. उनकी कल्पना करतेही सृती कांप गइ..

उनकी दिलकी धडकन तेज होगइ.. तभी उसे अपने बेडपे देवायत बैठता महेसुस हुआ.. ओर सृतीकी उतेजना बढने लगी.. तभी धीरेसे देवायतने उनका घुंघट हटाया तो सृती सर्मसार होगइ ओर अपनी नजरे जुकाये बेठी रही.. ओर देवायतने दोनो हथेलीओमे सृतीका चहेरा थाम लीया.. जैसेही देवायतने उसे टच कीया तब अ‍ेक बार फीर सृतीके तनमे सुरसुराहटकी लहेर दौड गइ.. ओर उनसे कंट्रोल नही हुआ.. ओर वो जटसे देवायतको बाहोमे भरते उनसे लीपट गइ..

सृती : (लडखडाती आवाजमे) ओह.. दे..वु.. मुजे समालो आपके अंदर.. आज ओर कोइ खेल नही.. बस.. सीर्फ आपका प्यार.. जो मुजे अ‍ेक लडकीसे ओरत बनानेका सुख दे.. आज इस कलीको फुल बनाकर खीलने दो.. आपके लीये मे बहुत तडपी हु.. आइ लव यु.. दे..वु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (जोरोसे बाहोमे भीचते) सृती.. तुम रेडी तो होनां..? जब अ‍ेक बार हमारा मीलन होजायेगा तो फीर तुम मेरे बीना नही रेह पायेगी..

सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दे..वु.. यहीतो चाहती हु में.. नही रहेना मुजे अकेले.. बस आपकी आगोसमे जींदगी बीता दुगी.. कहोतो इधर आजाउगी.. मुजे आपसे दुर नही रहेना..

देवायत : (सर चुमते) हंम.. तो फीर आजा.. मे यहा बहुत बडी होस्पीटल बना रहा हु.. हें..हें..हें..

कहातो सृतीने सर उठाकर प्यार भरी नजरोसे देवायतकी ओर देखा.. ओर सृतीने खुद अपने होंठ देवायतके होठोसे मीला दीया ओर मदहोसीमे उनके होठोको आधी आंख चडाके चुमने लगी.. तब देवायतने होंठ चुमते सृतीके उरोजोको अपनी हथेलीमे थाम लीया ओर हल्केसे मसलने लगा तब सृती सरसे पांव तक कांपने लगी.. ओर उसने देवायतको वापस जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया..

सृती : देवु.. अभी सीर्फ प्यार.. इस बारेमे हम सुबह बात करेगे.. लीजीये मंजुदीदीने दुध बनाया हे.. वोभी स्पेसीयल.. मेरे हाथोसे पीजीये.. आज पुरी रात आपसे प्यार करना हे..

कहेते सृतीने दुधका ग्लास देवायतको अपने हाथोसे पीलाया तो आधा ग्लास देवायतने सृतीको पीला दीया.. फीर देवायतने अ‍ेक डायमंडका नेकलेश सृतीको पहेनाया.. ओर कानकी लंबी अ‍ेरींग्स.. पावमे जनकार वाली पालय.. ये सब सृतीको गीफ्ट दीया.. तो सृती बहुतही खुस होगइ ओर देवायतको हमेसाके लीये पहेननेका आस्वासन दीया.. फीर दोनोही प्यारकी ओगोसमे चले गये.. थोडी ही देरके बाद दोनोके वस्त्र अ‍ेक कोनेमे पडे अपनी कीस्मतपे रो रहे थे..

तब दुसरी ओर बरखा ओर बसंती अपने घर पहोंच गइ.. तब दोनोने मीलकर फटाफट खाना बना लीया.. लेकीन आज वो सहेर गइथी तो मुनाने खुद उनके लीये ओर अपने बापुके लीये खाना बना लीया था.. आज सुधीर सादीमे गयाथा तो क्लीनीक भी बंध था.. तो मुना आज घरपे ही था.. जब उनके बापु ओर मुनाने खाना खालीया.. तो उनके बापु कुछ देर आराम करके दुकानपे चले गये.. तो मुनाभी खाना खाकर बहार घुमने चला गया था.. तब बरखा ओर बसंतीने साथमे बैठकर खाना खालीया..

फीर सामको मुना अपने घरपे आगया तब बरखा ओर बसंती दोनोही खाना खाकर आराम कर रहीथी.. बसंतीकी आंख लग गइ तो बरखा धीरेसे उठकर मुनाके रुममे चली गइ.. तब मुना आराम कर रहाथा.. तो इस वक्त बरखाको अपने रुममे देखते ही बेडपे बैठ गया.. ओर बहार नजर दौडाने लगाकी कही बहार कोइ हेतो नही..? क्युकी बरखा आम तौरपे सबके सोजानेके बाद देर रातको उनके कमरेमे आती थी.. तो मुना बरखाको देखकर थोडा गभरा गया..

मुना : (हसते) अरे बरखा..? इस वक्त..? मम्मी कहा हे..? तुम दोनो मामाके घर गइथीनां..? उनके घरसे कब आये..?

बरखा : (सरमाते हसते धीरेसे बेडपे आकर बैठते) भाइ.. मम्मी सो रही हे.. अब मम्मीसे डरनेकी जरुरत नही हे.. हम दोपहोरको ही आ गये थे.. ओर हम मामाके घर नही गयेथे.. हें..हें..हें..

मुना : (हसते आस्चर्यसे) तो फीर कहा गये थे दोनो..? ओर मम्मीसे डरनेकी जरुरत नही हे मतलब..?

बरखा : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. हम दोनो लेडीसकी होस्पीस्टल गइथी.. मेरी प्रेगनन्सी चेक करने.. मम्मी मुजे जुठ बोलकर ले गइ थी.. क्युकी कल मुजे उल्टीया करते मम्मीने देख लीया था..

मुना : (आस्चर्यसे गभराते) बरखा.. तो फीर क्या हुआ..? मम्मीको सब पता चल गया..? हंम..?

बरखा : (मुस्कुराते सीनेमे सर रखते) हां भाइ.. आप गभराइअ‍े नही.. मेने सब सम्हाल लीया हे.. भाइ.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. मे हमारे बच्चेकी मा बनुगी.. अब हम दोनो ही सादी कर सकते हे.. मम्मी मान गइ हे..

मुना : (थोडा खुस होते मुस्कुराते) मान गइ..? मतलब..? क्या इतनी आसानीसे मान गइ..?

फीर बरखा मुनाको सारी बात बता देती हे.. पहेलेतो मुनाकी गांड फट गइ.. फीर बरखाने जब कहाकी मां दोनोकी सादीके लीये मान गइ हे तब मुनाकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर प्रेगनन्सीकी बात सुनकर तो बहुतही खुस होगया.. ओर वही बरखाको बाहोमे भीच लीया.. तब उसे रीयलाइज हुआकी दोनो घरपे हे ओर उनकी मम्मी बाजुके रुममे हे.. तब मुना जटसे बरखासे अलग होगया.. फीर बरखाने मुनाको उनकी मम्मीकी सर्तके बारेमे कहा.. तब..

बरखा : (प्यारसे मुनाके गालको सहेलाते) भाइ.. मम्मीको मेने हमारी सादीके लीये मना लीया हे.. बस उनकी सीर्फ अ‍ेक ही सर्त हे.. आपको खुद उनके पास जाकर हमारी सादीकी बात करनी पडेगी.. ओर मेरा हाथ मम्मीसे मांगना पडेगा.. तबही वो हमारी सादी करवायेगी..

मुना : (सरमाते) बरखा.. में मम्मीसे कैसे बात करु..? क्या तुम खुद उनसे बात नही कर सकती..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. मम्मीने मुजे अपनी बहु मानलीया हे तो मे उनसे कैसे बात कर सकती हु.. अब आपकोही मम्मीसे मेरा हाथ मांगना पडेगा.. ओर उसने मुजे अपनी बहु माना हेतो आपको मना थोडीना करेगी..? बस अ‍ेक बार बात करलो.. तभी मे रातमे आपको मील सकुगी.. (सर्मसार होते) आइ मीन.. हम साथमे सो सकते हे.. मम्मीने खुद मुजे परमीशन दी हे..

मुना : (खुस होते हसते) बरखा आइ कान्ट बीलीव.. की मम्मीने खुद तुजे अ‍ैसा कहा हे.. तुमने उनपे क्या जादु करदीया हे..? हें..हें..हें..

बरखा : (अपनी कमरपे दोनो हाथ रखते, थोडा गर्व करते) हे.. अ‍ेक राजकी बात.. लेकीन वो मे आपको नही बताउगी.. हें..हें..हें.. बस भाइ आप हो सकेतो आजही बात करलो.. अब मे आपसे दुर रहेना नही चाहती..

मुना : (हसते) हंम.. मतलब मुजे मम्मीसे आजही बात करनी पडेगी.. ठीक हे मे सामको उनसे बात करलुगा..

बरखा : भाइ.. सामको क्यु..? अभी जागेगी जब चाइ नास्ता करले तब उनसे बात करलेना.. वोभी पापाके आनेसे पहेले.. भाइ.. बी केरफुल.. हंम.. अभी पापाको इस बातका पता नही हे.. ओर अभी ये बात सीर्फ हम तीनोके बीच रखनी हे.. तो ध्यान रखना..

मुना : (हसते) ठीक हे बरखा.. लेकीन मुजे इस बारेमे ठाकुरसाहेबसे बात करनी पडेगी.. उन्होने हमे हम दोनोको मीलानेका वादा कीया था..

बरखा : (सरमाते हसते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. भाइ.. सीर्फ उनको.. कीसी ओरको मत बताना..

आज दोनोही बहुत खुस थे.. तब बरखा मुनाकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको चुमते बहेकने लगे तब मुना बरखाके उरोजोके साथ खेलने लगा.. तो बरखा बहुतही गरम होके कामुक होगइ.. ओर सीसकारीया करने लगी.. तब उन दोनोको नही पताथाकी उनकी मम्मी बसंती जाग चुकी हे.. ओर छुपकर दोनोकी प्यारभरी बाते सुनते दोनोकी रास लीला देख रही हे..

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तभी बहार कीसीके खांसनेकी आवाज आइ तो दोनोही जटसे अलग होगये.. ओर बरखा सरमाते हसती हुइ वहासे बहार भाग गइ.. तब बहार कोइ नही था.. तो बरखा उनकी मम्मीके कमरेमे चली गइ.. तो बसंती बेडपे बैठकर उनकी ओर देखते हस रही थी.. तो बरखा समज गइ की उनकी मम्मीने उन दोनो भाइ बहेनको प्यार करते देख लीया हे.. तब बरखा खुब सरमाइ.. ओर सरमाते हसती हुइ बहार जाने लगी.. तभी..

बसंती : (धीरसे हसते) सुन.. बहु.. अभी तुमने अपनी सर्त पुरी नही की.. समजी..? हें..हें..हें.. अ‍ैसे छुप छुपके नही मील सकती.. हें..हें..हें..

बरखा : (सर्मसार होते हसते) मम्मी. वो.. वो.. मे.. आपके बेटेको वोही बात बताने गइ थी.. आपकी सर्तके बारेमे.. तो वो खुस होकर मेरे साथ..

बसंती : (हसते धीरेसे) हंम.. बात बतानेका तरीका बडाही मजेदार था.. हें..हें..हें.. जा.. उनको अंदर भेज.. ओर कहेदे तेरा हाथ आकर मुजसे मांगे.. तबतक तुम चाइ नास्ता बनालो.. मे उनसे बात करती हुं.. जा..

बरखा : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी.. अभी आपके बेटेको भेजती हु.. हें..हें..हें..

कहेते बरखा मनमे खुस होते वापस मुनाके कमरेमे चली गइ.. ओर मुनाको बसंतीसे बात करके उनका हाथ मांगने मम्मी बुला रही हे कहा.. तब मुना बहुतही गभरा गया.. तो बरखाने उसे हीमतसे बीन्दास्त बात करनेको कहा.. तो मुना अपनी मम्मीको मीलनेके लीये तैयार होगया.. ओर वो थोडा गभराते बसंतीके रुममे चला गया.. तब बरखाभी सरमाते हसती हुइ कीचनमे चली गइ ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३४

कहेते बरखा मनमे खुस होते वापस मुनाके कमरेमे चली गइ.. ओर मुनाको बसंतीसे बात करके उनका हाथ मांगने मम्मी बुला रही हे कहा.. तब मुना बहुतही गभरा गया.. तो बरखाने उसे हीमतसे बीन्दास्त बात करनेको कहा.. तो मुना अपनी मम्मीको मीलनेके लीये तैयार होगया.. ओर वो थोडा गभराते बसंतीके रुममे चला गया.. तब बरखाभी सरमाते हसती हुइ कीचनमे चली गइ ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. तभी....अब आगे

बसंती : (मुना अंदर आगया तब धीरेसे) मुना.. दरवाजा अच्छेसे बंध करदे.. फीर इधर आ.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

मुना : (सरमाते धीरसे) जी मम्मी.. कहीये..

बसंती : (मुना दरवाजा बंध करके पास आकर बैठ गया तब) मुना.. ये सब क्या हे..? हंम..? ये सब कबसे चल रहा हे..?

मुना : (सर नीचे करते धीरेसे) जी मम्मी.. जबसे हम दोनो कोलेज मे थे तबसे.. मम्मी हम अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. मे बरखासे सादी करना चाहता हु..

बसंती : (धीरेसे जुठ मुठके गुसेसे) चुप.. अपनी ही बहेनको प्यारके नामसे प्रेगनेन्ट तक कर दीया.. सरमभी नही आइ तुजे..? हंम..? तुमने क्या सोचाथा.. की हम मान जायेगे..? बहुत आग हे तेरे मे.. हंम..?

मुना : (सरमाते धीरेसे थोडी हींमत दीखाते) मम्मी.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. वो बरखाने कहाथा आपसे उनका हाथ मांगनेको, तो आगया.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत चाहते हे.. आप हमारी सादी करवा दीजीये..

बसंती : (धीरेसे) तुजे पता हेनां.. ये नाजायज रीस्ता कहेलाता हे.. तुम दोनो भाइ बहेन हो.. हंम..? फीरभी दोनोने इतनी हीमंत करली..? सच बताना तुमने क्या सोचकर बरखाको प्यार कीया..?

मुना : (धीरेसे सरमाते) मम्मी.. बरखा बहुतही खुबसुरत हे.. मे उनको पहेलेसेही पसंद करता हु.. मे नही चाहताथा की उनकी सादी कही ओर होजाये.. मे उसे पाना चाहता था.. ओर प्यारतो कीसीसेभी ओर कभीभी हो सकता हे.. ओर कहेते हेना प्यार करनेमे नात जात पात रीस्ता उमर कुछभी नही देखते..

तो हमारे बीच भी प्यार होगया.. ओर अबतो हमारे गांवमेभी बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. तो हमने क्या गलत कीया..? हमारे ही गांवमे अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. ओर ज्यादातर लडके उनकी बहेनसे प्यार करते हे.. तो मेने भी प्यार कीया.. तो उसमे हमने क्या गलत कीया..?

बसंती : (अपनी चाल चलते धीरेसे) तुजे यकीन हे गांवमे अ‍ैसा होने वाला हे..? हंम..? तुम अ‍ैसे नाजायज रीस्तेमे यकीन करते हो..? ये तो तुम्हारी बहेन हे.. अगर कल कोइ अपनी मांके साथभी अ‍ैसा करेगा.. तो क्या तुम इस रीस्तेको भी अ‍ेक्सेप्ट करलोगे..? हंम..? अवैध रीस्ते कीसे कहेते हे ये तो तुजे पता हेनां..?

मुना : (सरमाते धीरेसे) हां मम्मी.. हम दोनो पढे लीखे हे, मुजे सब पता हे अवैध रीस्ते कीसे कहेते हे.. ओर आप यकीन करो.. हमारे ही गांवमे मेरे दोस्तका उनकी विधवा ताइके साथ रीस्ता हे.. ओर अ‍ेकका उनकी विधवा बुआके साथ रीलेशन हे.. ओर गांवमे अ‍ैसे ओर कइ रीस्ते पनप रहे हे.. तो मे उसे भी गलत नही मानता..

जोभी हुआ हे दोनोकी आपसी रजा मंदीसे हुआ हे.. तो इसमे क्या गलत हे..? माफ करना मम्मी.. मे इन सब बातोको ओर रीस्तेको नही मानता.. बस मुजे बरखासे सादी करनी हे.. मे उसे बहुत प्यार करता हु.. हम दोनो कोलेज मे थे तबसे ही रीलेशनमे हे.. ओर अभी जो उनके पेटमे बच्चा पल रहा हे वो मेरा ही हे..

बसंती : (कातीलाना हसते धीरेसे) हंम.. अपनी मां के सामने ही इतनी बडी बात बोलदी.. काफी हीमंत हे तुजमे.. ठीक हे.. मानलो की अगर मेने बरखाकी सादी तुमसे कर भी दी.. तो क्या मेरी बेटीको तुम खुस रख पायेगा..?

मुना : हां मम्मी.. मे जोब करता हु.. ओर सुधीर अंकल केह रहेथे.. अबतो हमारे गांवमेभी बहुत बडी होस्पीटल बन रही हे.. तो मुजे ओर बरखाको उन्ही होस्पीटलमे अच्छी जोब मील जायेगी.. हमारे ठाकुरसाहेबही बनवा रहे हे.. ओर डोक्टर ओर उनकी वाइफ नीशाभाभी खुद होस्पीटल सम्हालने वाले हे.. तो हमे पैसे भी अच्छे खासे मीलेगे.. फीर पापाको नोकरी करनेकी जरुरतही नही पडेगी.. ओर बरखाभी खुस रहेगी..

बसंती : (सरमाते दुसरी ओर मुह करते धीरेसे) मुजे पता हे तुम दोनोने हमारे पुरे घरकी जीम्वेवारी उठाली हे.. खुस रखनेका मेरा ये मतलब नही था.. मतलब.. उनको सेटीस्फेक्शन से था.. तु समज गयानां..? वरना कल अ‍ैसा ना होकी तेरे बापुकी तराह तेरी भी कोइ गलत आदतकी वजहसे आगे जाकर बरखाका रीलेनश भी कीसी ओरके साथ..

मुना : (धीरेसे बीचमेही बात काटते) मम्मी मे आपकी सब बात समज गया.. आपका कहेनेका मतलब हमारे बीच फीजीकल रीलेशनसे हे.. आप नीस्चीत रहीये अ‍ैसा कुछभी नही होगा.. क्युकी मुजे कोइ गलत आदत नही हे.. ओर बरखा भी मुजसे बहुत खुस हे.. ओर आगेभी खुस रहेगी.. आइ प्रोमीस..

बसंती : (मुनाके पेन्टके उभारकी ओर इसारा करते देखते) मुना.. तुमतो काफी हिमंत वाले ओर खुलके बात करने वालोमे से हो.. (पेन्टकी ओर नजरोसे इसारा करते) इसे देखकर तो लगता हेकी काफी बडा होगा.. तो तुम बरखा को खुस रखते होगे.. बस मेतो अ‍ैसेही पुछ रहीथी.. मुजे अब कोइ चीन्ता नही हे..

मुना : (सरमाते मुस्कुराते) मम्मी आप नीस्चीत रहीये.. मे खुलकर बात करनेवालो मे से हु.. बरखा इनसे बहुत खुस हे.. अबतो वोभी चाहती हेकी मे उसे जींदगीभर ये सुख देता रहु ओर उसे खुस रखु.. इसीलीये हमने ये बडा कदम उठालीया.. लेकीन आपभी मेरी मम्मी होनेके बावजुद मुजसे सब खुलके बात कर रही हे.. अ‍ैसा क्यु..? कोइ खास वजह..?

बसंती : (सरमाते मुस्कुराते) मुना.. भलेही मे तेरी मां हु.. लेकीन मां से पहेले मेभी अ‍ेक औरत हु.. ओर हम औरतोको कैसे कैसे दौरसे गुजरना पडता हे वो तुजे क्या मालुम..? तुमतो जानते हो तेरे बापुकी बुरी आदतकी वजहसे आज उनकी ये हालत हे.. तो मेभी अ‍ैसे दौरसे गुजर रही हु.. येतो अच्छा हे मेने कोइ गलत कदम नही उठाये.. तु समज गयानां..?

बरखाकी जींदगी अ‍ैसेही कीसीके हाथोमे नही सोप दुगी.. इसीलीये तुजे ये सब खुलकर पुछ रही थी.. अब मुजे यकीन हो गयाकी तु मेरी बरखाको सम्हाल पायेगा.. ओर उसे खुस भी रख पायेगा.. ओर मुजे खुसी हेकी तुम अ‍ैसे रीस्तोपे यकीन करते हो.. बस मेरी अ‍ेक ही सर्त हे.. तुजे बरखाके साथ साथ मेरा भी खयाल रखना होगा.. तु समज गयानां..?

मुना : (सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे बसंतीको देखते धीरेसे) मम्मी..? ये आप क्या बोल रही हे..? मतलब मे समजा नही.. आपतो इतना सब खुलकर बोल चुकी हे.. तो ये बात भी मुजे खुलकर बताइअ‍े..

बसंती : (मुस्कुराते धीरेसे) क्यु..? अभीतो केह रहेथे की तुमतो पढे लीखे हो..? इतनाभी ना समज नही हो.. की मेरे कहेनेका मतलब ना समजो.. ओर तुमने जोभी अभी सुना ओर समज रहे हो वोही केह रही हु.. ओर यही सच हे.. बस.. इस बारेमे बरखाको तो क्या कीसीको पता भी नही चलना चाहीये..

अब तुजपे डीपेन्ड हे.. की तुम बरखाके साथ मुजे भी खुस रख पाते होकी नही.. अगर मेरी ये सर्त मंजुर हे तो तुम बरखाके साथ रेह सकते हो.. मे तुम दोनोकी सादी भी करवा दुगी.. वरना भुलजाओ बरखाको.. चल अब चाइ नास्ता होगया होगा.. ओर हां.. अभी हमारे बीच जोभी बात हुइ हे.. वो हमारे बीचही रहेनी चाहीये.. अपनी इस बीवीको भी नही बताना.. बस यही मेरी सर्त थी..

मुना : (थोडा सकपकाते) मम्मी.. क्या ये सब जायज हे..? आइ मीन.. आप मेरी मां हो.. इसीलीये..

बसंती : (मुस्कुराते गालको सहेलाते) क्यु..? मां हु तो क्या हुआ.. हु तो अ‍ेक ओरत.. अभी तो तुमने कहाकी तेरे अ‍ेक दोस्तने उनकी वीधवा ताइके साथ रीलेशन बनाया हे.. तो मुज मे क्या प्रोबलेम हे..? क्या मेभी तुजे बरखाकी तराह खुबसुरत नही लगती..? तो बतादे..

अभी तो तुम केह रहेथे की मे कीसी भी रीस्तेको गलत नही मानता.. तुम तो काफी खुले विचारके होनां..? जब मुजे तेरे साथ रीलेशन रखनेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. तो फीर तुजे क्या प्रोबलेम हे..? अ‍ेक बार अच्छेसे सोचले.. मुजे तेरे जवाबकी कोइ जल्दी नही हे..

मुना : (कुछ सोचते) नही मम्मी.. आपभी बरखाकी तराह बहुत खुबसुरत हो.. मे भी आपको पसंद करता हु.. लेकीन हमारे बीत मां बेटेकी कुछ मर्यादाभी हे.. तो इस बारेमे मुजे सोचनेके लीये थोडा वक्त चाहीये.. आपने तो मुजे आज जटका ही दे दीया..

बसंती : (कातीलाना समाइल करते मुनाके कंधेपे हाथ रखते) हां पता हे मुजे.. मेने तुजे आज बहुत बडा जटका दे दीया हे.. तो वक्ततो चाहीयेनां..? तो ठीक हे.. अ‍ेक बार अच्छेसे सोचले.. यहा बेटीके साथ उनकी मांभी मील रही हे.. हें..हें..हें.. ओर हां.. तुम अपनी बीवीके साथ सो सकते हो.. लेकीन मेरी सर्तके साथ.. ओर ध्यान रखना.. तेरे पापाको अभी इस बातका पता नही चलना चाहीये.. अब चल बहार.. तेरी बीवीने चाइ नास्ता बनालीया होगा.. हें..हें..हें..

मुना : (मनमे खुस होते बहार नीकलते मुस्कुराते धीरेसे) मम्मी.. लेकीन अ‍ेक दीनतो सबको पता चलही जायेगा.. हम बरखाकी बात ज्यादा दिन छुपा नही सकते.. क्या वो प्रेगनेन्ट हेनां..?

बसंती : (मुस्कुराते) हां.. कमीनी वो हर रात हमसे छुपकर तेरा बीस्तर गरम करती हे तो प्रेगनेन्ट तो होही जायेगीनां..? वो सब तुम मुजपे छोडदे.. तबकी तब देखा जायेगा.. ओर वैसेभी गांवमे तुम दोनो जो केह रहे हो तो वोभी तो होजायेगा.. मे सब देख लुगी.. बस तुम मेरा खयाल रखना पडेगा.. वरना कल तुम कीसी ओरके मुहसे ये ना सुनोकी तेरी मा कीसी ओरके साथ.. तुम समज गयेनां..?

मुना : (जटसे धीरेसे) नही मम्मी.. अ‍ैसा आप कुछभी नही करोगी.. बस मुजे थोडासा वक्त दे दीजीये..

बसंती : (मुस्कुराते) इसीलीये मेने ये सर्त रखी हे.. यकीन करो.. मे भी बरखा से कम नही हु.. बीस्तरमे उनकोभी टक्कर दे सकती हु.. मे तुमको नीरास नही करुगी.. वैसे तुमतो काफी समजदार हो.. इनसेतो अच्छा हे घर की बात घरमे ही रेहजाये.. मे आशा करती हु की मुजे तेरा जवाब जल्द मील जायेगा.. अब चल बहार..

फीर दोनोही बहार आगये तब बरखाको नही पताथाकी दोनोके बीच क्या बाते हुइ हे.. बरखाने तीनोके लीये चाइ नास्ता बनालीया था.. ओर तीनो ही अ‍ेकठे बैठकर चाइनास्ता करने लगे.. तब चाइ पीते मुना गहेरी सोचमे डुब गया.. आज उनकी मां बसंतीने खुलकर अपनी सर्तके बारेमे बताकर मुनाको जंजोरके रख दीयाथा.. आज उनकी मम्मी ने खुद सामनेसे उनके साथ रीलेशन रखनेकी बात करदी..

अब मुना अपनी मम्मीको अ‍ेक मा की नजरसे नही अ‍ेक ओरतकी नजरसे नजरे चुराते देखने लगा.. मुनाने आज तक अपनी माको अ‍ैसे गौरसे नही देखा था.. वो अपनी नजर चुराते बसंतीके अ‍ेक अ‍ेक अंगका जायजा लेने लगा.. जब उनकी नजर बसंतीके उरोजोपे चली गब.. तब मुनाको बसंतीके ब्लाउसमे बहुत कठोर भरावदार उभार देखनेको मीला.. जो ब्लाउसके अंदरभी उसे सख्त दीख रहेथे..

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तब मुनाका लंड मेन्टके अंदरही खडा होकर जटके मारने लगा.. आज मुनाको अपनी मम्मीके अंदर कीसी काम देवकी मुरत नजर आने लगी.. ओर सोचने लगाकी अगर मे मम्मीको हां कहेदु तो यही ओरत अ‍ेक दिन उनके नीचे लैटी होगी.. कमीनी आजभी अ‍ेक लडकीकी तराह जवान ओर कामुक दीखती हे.. अगर इनकी भी चुत मील जायेतो सालीको रगड रगडके चोदुगा.. यही सब सोचते मुनाकी पेन्टमे लंड जटके मारते खडा होने लगा ओर तंबु बन गया..

तो बसंती टेडी नजर करते मुनाके पेन्टके उभारको बार बार देखने लगी.. तब उसे पेन्टमे बहुत बडा नाग अपनी फेन उठाये नजर आया.. तब वो नजरे चुराते मुनाकी ओर देखते सरमाते मंद मंद मुस्कुराने कामुक स्माइल करने लगी.. वो मुनाको रीजानेकी पुरी कोसीस करने लगी.. तब मुनाभी उनकी ओर देखते अपनी माकी नजरको पहेचान गया.. तो बसंतीभी मुस्कुराते नजरोसे मुनाके पेन्टकी ओर इसारा करने लगी..

तो मुना बहुतही सरमा गया.. ओर सोचने लगाकी मम्मी उनके नीचे लेटनेके लीये पुरी तराह तैयार हे.. अगर मेने मम्मीको खुस नही रखातो वो फीरसे भानुके साथ या कीसी ओरके साथ रीलेशन रख लेगी.. इनसे तो अच्छा हे मेही इनके साथ रीलेशन रखलु.. ओर वो सोचते ही सरमाते मुस्कराता रहा.. उसने तभी मनमे अपनी मम्मीके साथ रीलेशन रखनेका तैय करलीया.. तभी..

बसंती : (नास्ता खाते) बरखा.. सुन.. आजसे तुम मेरी बेटी नही हो.. अब तुम मेरे मुनाकी बीवी हो.. मेरी बहु.. तो तुम अपनी सेहतका खयाल रखना.. आजसे मेरे बेटेकी सब जीम्वेवारी तेरी होगी..

बरखा : (सरमाते हसते धीरेसे) जी मम्मीजी.. थेन्कयु.. हें..हें..हें.. मम्मी.. आप मेरी सास के साथ मां भीतो हे.. तो भाइकी भी आप मां के साथ उनकी सासभी होगइ हे.. लेकीन मे आपके साथ सास बहु वालाही रीलेशन रखुगी.. हें..हें..हें..

बसंती : (मुनाकी ओर कातील नजरोसे देखते) अब ये सब मुनापे डीपेन्ड हे.. अगर उनको अपनी मां के साथ दीकत होती हे तो भलेही मुजे अपनी सास माने.. तो मे आशा करती हुकी तबतो इनको कोइ दिकत नही होगी.. क्यु मुना..? हें..हें..हें.. दुसरी बात.. आजसे बरखाकी भी सब जीम्वेवारी तेरी होगी.. अब तुजेभी मेरी बहुका अच्छेसे खयाल रखना पडेगा.. उसे हर महीने चेकअपके लीये सहेर लेजाना हे.. बाकी गांवमे मे सबको जवाब दे दुगी.. तुम दोनोको फीकर करनेकी जरुरत नही हे.. जीलो अपनी जींदगी..

कहातो मुना समज गयाकी बसंती कीस बारे मे बात कर रही हे.. वो बसंतीकी सब बात समज गया.. दोनोही मां बेटे नजरोका खेल खेलते बात कर रहे थे.. तब बरखाको नही पताथा की दोनो मा बेटे अ‍ैसी बाते करते क्या खीचडी पका रहे हे.. बसंती मुनाके पेन्टके उभारको देखकर पुरी तराह पागल हो चुकीथी.. उनको पेन्टमे मुनाका लंड भानुके लंडसे भी बडा महेसुस हो रहाथा.. ओर मुनाभी अपने दिलकी बात केह देता हे..

मुना : (सरमाते बसंतीकी ओर देखते हसते) जी मम्मी.. मुजे मेरी सब जीम्वेवारी पता हे.. अब मे सीर्फ आपकी बहुका नही.. सास बहु दोनोका अच्छेसे खयाल रखुगा.. हें..हें..हें.. क्युकी अब आप मेरी मां के साथ मेरी सासभी हो गइ हो.. तो मुजे सास मेभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. ओर मां मेभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. मे कीसीभी रीस्तेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. हें..हें..हें..

बसंती : (मुनाकी बात समजते ही खुस होते) जी.. मुना मुजे तुमसे यही उमीद थी.. हें..हें..हें..

कहेते बसंती मुनाकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते हसती रही.. तब मुनाभी उनकी मम्मीको अ‍ेक अलगही वासना भरी नजरोसे देखते हसने लगा.. तो बरखा भी मुहको दुसरी ओर घुमाते बहुतही सरमाते हसती रही.. तभी मौकेका फायदा उठाके बरखाकी नजरे बचाते मुनाने बसंतीकी ओर आंख मार दी.. ओर हसने लगा.. तब बसंती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर वोभी मुह घुमाते मुस्कुराने लगी..

तब बरखा को नही पताथाकी सर्तके तौरपे उनकी मम्मीने मुनासे क्या मांगलीया था.. ओर बरखाको पानेके लीये उसे अपनी मम्मीकी सर्त मानली थी.. ओर बातो ही बातोमे उसने अपने दिलकी बाते बसंतीको बतादी थी.. मुना बसंतीसे बात करके मनही मन खुस हो रहा था.. आज उसने बरखाका हाथ अपनी मम्मीसे मांगकर अपने लीये दो दो चुतोका इन्तजाम करलीया था.. जब चाइ नास्ता करलीया तो बरखा सब बर्तन लेकर बहार चली गइ..

तो मुनाने बसंतीकी ओर वासना भरी नजरोसे मुस्कुराकर देखा.. ओर मौका मीलतेही बसंतीकी ओर अ‍ेक बार फीर आंख मारके मुस्कुराने लगा.. तो बसंती वापस बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी नजर घुमाते सरमाते मंद मंद मुस्कुराते लगी खडी होने लगी.. तब अचानक मुनाने उनका हाथ पकडलीया.. ओर अपनी ओर खीचते बसंतीके बुब्सको दबाके मसलने लगा.. तो बसंतीने जटसे बहारकी ओर देखते हाथ खीचलीया.. ओर बहुतही सर्मसार होते हसते हुअ‍े मुनासे छुटकर जटसे अपने रुममे भाग गइ..

तब बरखा बहार आंगनमे पानीकी टंकीके पास सभी बर्तन लेकर साफ करने बैठ गइ.. तो अंदर मुना हींमत करके अपनी मम्मीके रुमकी ओर चल पडा.. तब बसंती रुममे आतेही दरवाजा खाली बंध करके उनके सहारे खडी होगइ.. ओर अपनी आंख बंध करके दोनो हाथ अपने उरोजोपे रखके अपनी सांसको कंट्रोल करने लगी.. आज अचानाक मुना उनके अंगोके साथ खेलने लगेगा उनकी उमीद तो बसंतीको भी नहीथी..

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जीस तराह मुनाने अचानक उनका हाथ पकडके उसके उरोजोके साथ दबाकर मसलते खेला.. तो बसंतीकी गभराहटसे भारी सांस होगइ थी.. वो मुस्कीलसे मुनासे छुटकर अंदर भाग गइ.. तब बसंतीकी काम वासना पुरी तराह भडक चुकीथी.. उनकी चुतकी दोनो नाजुक पंखुडीया फडफडाते पानीका रीसाव करने लगीथी.. ओ वो मुस्कीलसे बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तो अचानक उनके रुमका दरवाजा खुल गया..

तो बसंती गभराकर पलटके देखने लगी.. तो मुना दरवाजा खोलकर अंदर आगया.. तब बसंती कुछ सोचे समजे उनसे पहेलेही मुना धीरेसे दरवाजा बंध करके बसंतीके पास आगया ओर बसंतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोपे होठ रखदीया.. तो बसंतीका चहेरा लाल होगया.. वो पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी.. ओर मुनाका चहेरा अपने हाथोमे थामकर उनको पागलोकी तराह चुमने लगी..

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तभी मुना बसंतीको जोरोसे बाहोमे भीचते बाथरुमकी ओर लेगया.. ओर अंदर जातेही बसंतीको पागलोकी तराह चुमने लगा ओर अ‍ेक हाथसे जोरोसे उनके बुब्सको दबाते मसलने लगा.. तब बसंतीसे कंट्रोल करना मुस्कील होगया.. वो अभी बरखाकी वजहसे कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी..

तो वो मुनाको हाथ पकडके भारी सांसोसे मुनाको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. तभी मुनाने बसंतीकी चुतको उपरसेही मुठीमे दबोच लीया.. तब बसंती उछल पडी.. ओर मुनाको धका मारते दुर करदीया.. फीर गभराते मुनासे बात करने लगी..

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बसंती : (सरमाते अपने कपडे सही करते धीरेसे) मुना.. प्लीज.. अभी नही.. अभी बरखा घरपे हे.. अगर उन्होने हमे देखलीया तो सब गडबड होजायेगी.. अभी तुम बहार जाओ..

मुना : (फीरसे पास आते होंठ चुमते) मम्मी.. तुम मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. मे तुमसे मीलना चाहता हु..

बसंती : (मुनाको दुर करते बहारकी ओर देखते) नही मुना.. अभी हमारा मीलना उचीत नही हे.. तुम समजता क्यु नही..? अभी तुम जाओ.. हमे मीलनेके बहुत मौके मीलेगे.. तुम दो पहोरको आजाना.. तब मे घरपे अकेली रहेती हु.. समज गयानां..? अभी जाओ.. बरखा कभी भी आ सकती हे..

मुना : (अपना लंड पेन्टके उपरसेही मसलते) मम्मी.. तुमने तो मुुजे आग लगादी हे.. अब इनका क्या करु..? बस अ‍ेक बार..

बसंती : (सरमाते मुस्कुराते बहार धका मारते) कीतने कमीने हो.. अपनी बीवीको जाकर कहो वो तेरी आगको सांत कर देगी.. अब जाओभी.. मे रातमे तेरी आंगको सांत करनेका इन्तजाम करती हु.. अभी जाओ बहार.. बेसर्म कहीका.. हें..हें..हें..

ओर बसंतीने मुस्कीलसे मुनाको बहार भगा दीया.. ओर वो सरमाकर मुस्कुराती रही.. इस रात जो मुनाने सोचा था उनसे बहेतर नतीजा उनको देखनेको मीला.. देर रात बसंतीका पती सो गया तब बसंतीने खुद आज अपने हाथोसे बरखाको अच्छेसे हल्कासा शींगार करके दुल्हनकी तराह तैयार करदीया.. ओर वो खुद बरखाको लेकर मुनाके रुममे छोडने चली गइ.. ओर दरवाजेपे छोडके वापस आगइ.. तब मुना बहुतही खुस हुआ.. ओर इस रात दोनो भाइ बहेनने बीना डरके खुलकर प्यार कीया..

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मुनाने आज बरखाको जमकर चोदलीया.. तो बरखाभी खुस होगइ.. दोनोही रातभर चुदाइ करते रहे.. तब उन दोनोको नही पताथा की अ‍ेक खीडकीसे छुपकर बसंती दोनोकी चुदाइ भरी रास लीला देख रही हे.. क्युकी आज मुनाने बसंतीको उनके रुममेही दबोच लीयाथा ओर उनके बुब्स ओर चुतके साथ छेडखानी करके उनके तनकी आगको भडका दीयाथा.. तबसे बसंतीकी काम वासना बहुतही बढी हुइ थी.. वो चाहती थीकी अब मुना उसे जल्दसे जल्द मील जाये.. ओर उनकी जमकर चुदाइ करले..

तो दुसरी ओर रमेशके घर रमेश अपने रुममे बेडपे लेटकर मोबाइल देखते आराम कर रहाथा.. तभी चारु ओर वंदनाभी घरपे आगये.. वंदना थकानकी वजहसे अपने रुममे जाकर फटाफट चेन्ज करके सोने लगी.. तब चारु सभी लाइट दरवाजा बंध करके अपने रुममे चली गइ.. ओर चेन्ज करते रमेशकी ओर गुस्सेसे देखती रही.. तभी रमेशकी नजर चारुकी ओर गइ.. तो चारु उसे खाजाने वाली नजरोसे घुर रहीथी.. ओर चारु चेन्ज करके बेडपे आगइ..

रमेश : (हसते) अरे डार्लींग.. आजतो कुछ मुड ठीक नही लगता.. बडे गुस्सेमे लग रही हो..? क्या वहा कीसीसे अन बन तो नही हुइ..? हें..हें..हें..

चारु : (रमेशको अ‍ेक घुसा मारते धीरेसे) नीकमे.. कमीने.. क्या अ‍ेक बीवीसे जी नही भरा.. जो कीसी ओर रंडीको लेकर सहेरमे घुमते हो.. कमीने.. पहेले अपनी बीवीसे तो ठीकसे चोदना सीखले बादमे दुसरी ओरतको घुमाना.. कौन थी वो रंडी..?

रमेश : (सब समज गया तब डरते धीरेसे) चारु.. ये क्या बत्तमीजी हे.. कोइ बीवी अपने पतीसे अ‍ैसे गालीया देती हे..? ओर तुम क्या केह रही हो..? मे कीसको लेकर घुमता हु..? कोइ भी तो नही थी..

चारु : (गुस्सेसे) क्यु.. सहेरसे अपनी बाइकके पीछे कीसको बीठाकर आ रहेथे..? हमने तुजे रास्तेमे देखलीया था.. बोल इसका जवाब हे तेरे पास..? कमीना कहीका.. मुजसे जुठ बोलता हे.. अ‍ेकतो जवान लडकी घरमे बैठी हे.. उनका तो कुछ करते नही.. की चलो सादी लायक होगइ हेतो कोइ अच्छासा लडका ढुंढकर उनकी सादी करदे.. ओर उपरसे बहार जाकर इस्कबाजी फरमाते हो.. सरम भी नही आती..?

तब रमेश सारा माजरा समज गया.. अब उस इस बातको छुपानेका कोइ फायदा नही था.. तो उसने थोडा सच बतानेको उचीत लगा.. ओर बेडपे बैठ गया.. फीर चारुकी ओर घुमते धीरेसे बात करने लगा..

रमेश : देख चारु.. तुजे गलत फेहमी होगइ हे.. वो हमारे सामतभाइकी बीवी जयाभाभी थी.. मुजे आते वक्त बसस्टेन्डपे खडी कीसी बसका इन्तजार करते दीख गइ.. तो मे उसे अपनी बाइकमे बीठाकर घर ले आया.. इसमे क्या गलत हे..? इसका मतलब ये थोडीना हेकी मेरा उनके साथ रीलेशन हे..

चारु : (सख्त लहेजेमे) अच्छा.. तो फीर उनको अपना चहेरा ढकके अपनी पहेचान छुपानेकी क्या जरुरत थी.. अ‍ैसे ही आ सकती थी.. देख रमेश.. अभी भी वक्त हे.. अगर तुम दोनोके बीच कुछ चकर हे तो अभी मुजे सच बतादे.. मे तुजे बक्स दुगी.. लेकीन बादमे मुजे कीसी ओरसे पता चलाना.. तो फीर.. तुम सोचभी नही सकते अ‍ैसा कदम मे उठाउगी.. याद रखीयो.. चल सोजाओ अब..

रमेश : (राहतकी सांस लेते चारुको बाहोमे लेनेकी कोसीस करते) हंम.. चारु यकीन करो.. जो तुम सोच रही हो अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. चल आजा.. थोडा प्यार करले..? हंम..?

चारु : (गुस्सेमे हाथको जटकते) हाथ मत लगाओ मुजे.. अब जबतक मुजे पुरा यकीन नही हो जाता तुम मुजे छुओगे भी नही.. केह देती हु.. अगर यही बात हमारे साथ होती तो..? अबतक तो मुजे डीवोर्स दे चुके होते..

रमेश : (मनते करते) चारु.. प्लीज.. अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. मान जाओ.. तुजे मेरी कसम.. हमारी वंदनाकी कसम.. बस..? अब तो मानजा..

चारु : (थोडा सांत होते अ‍ेक नजरसे देखते) रमेश.. तुम कीतने कमीने हो.. हमारी बच्चीकी कसम क्यु खाते हो..? उसने तुम्हारा क्या बीगाडा हे..? उस मासुम को तो छोड देते.. बेचारी सादीके लायक होगइ हे.. फीरभी हमे कुछ नही कहेती.. जरा उनकी तकलीफ के बारेमे तो सोचो..

रमशे : चारु.. तो क्या करता.. तुमजो इतने गुस्सेमे थी.. मान जाओ प्लीज.. ओर हम उनके लीये लडका ढुंढनेकी कोसीस तो कर रहे हे.. लेकीन वो सादी करनेको मना भी तो करती हे.. पता नही उनके मनमे क्या हे..

चारु : (सांत होकर धीरेसे) ठीक हे रमेश.. अभीतो तुमने वंदुकी कसम खाइ हे तो तुम्हारी बात मान लेती हु.. लेकीन याद रखना.. अगर मुजे कहीसे भी पता चलाकी सच क्या हे.. ओर तुम्हारा जयाभाभीके साथ चकर नीकला तो मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. फीर तुम ओर मे आजाद.. तुम अपने तरीकेसे जीना ओर हम मां बेटी अपनी तरीकेसे जीयेगे.. तुम हमे कुछ नही कहोगे..

रमेश : (थोडा डरते धीरेसे) चारु..? क्या आजाद..? मतलब..? क्या मुजे छोडके चली जाओगी..?

चारु : (रहस्य भरी मुस्कानसे) रमेश.. मे इतनी भी कमजोर नही हु.. की तुजे छोडकर चली जाउ.. तुमतो मुजे ठीकसे सेटीस्फाइभी नही करपाते.. फीर भी मे यही तुम्हारे साथ पडी हु.. अगर तुजे छोडना होतातो कबसे कीसीके साथ भागकर तुजे छोड चुकी होती.. अगर तुम्हारा चकर जयाभाभीके साथ नीकला..

तो तुम हमे कभी नही पुछोगे.. की हमारा रीलेशन कीसके साथ हे.. समजे..? अगर मर्दको अ‍ैसे रीस्ते रखनेका हक हेतो हम जैसी ओरतोको भी हे.. फीर तुम अपने तरीकेसे जीओगे ओर हम मा बेटी अपने तरीकेसे जीयेगी.. बस यही कहेना था.. अब सो जाओ.. बहुत देर होगइ हे.. मुजे ओर बहेस नही करनी..

कहेके चारु करवट लेकर सोगइ.. अ‍ैसा नही था की चारुको रमेश ओर जयाके रीस्तोके बारेमे नही पता था.. उनको नीशासे सब पता था.. की रमेशका जयाके साथ रीलेशन हे.. लेकीन आज चारुने बडी ही सीफततासे चाल चलकर रमेशसे अन्जान बनके अपने लीये ओर वंदनाके लीये देवायतके साथ रीलेशन रखनेके लीये रास्ता बनालीया था.. तो दुसरी ओर रमेशभी अंसमजमे चारुको देखता ही रेह गया..

उनको अब चारुसे जुठ बोलकर ओर वंदनाकी जुठी कसम खाकर पछतावा होने लगा.. लेकीन अब करेतो क्या करे..? ओर ये सच भी था की रमेशका नाजायज रीस्ता जयाके साथ था.. तो अ‍ेकना अ‍ेक दिनतो सबको पता चलनाही था.. तब रमेशने चारुसे माफी मांगनेकी ठानली.. तो वो चारुके उपर जुक गया ओर चारुको खीचकर अपनी ओर कीया.. ओर चारुको अपनी बाहोमे भीच लीया..

रमेश : (धीरेसे रुआसी आवाजमे) चारु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने तुम्हारी ओर वंदुकी जुठी कसम खाइ.. मुजे माफ करदे.. अब अ‍ैसी गलती दुबारा कभी नही होगी.. आइ प्रोमीस.. बस अ‍ेक बार मुजे माफ करदे..

चारु : (अ‍ेक नजरसे आंखोमे देखते) रमेश.. अभीभी वक्त हे मुजे सब सच बतादे.. मे तुजे माफ कर दुगी.. क्युकी मुजे मेरी नही.. मेरी बच्चीकी चीन्ता हे.. जब लोगोको पता चलेगा की उनके बापका कीसी दुसरी ओरतके साथ रीलेशन हे.. तो कौन हमारी बच्चीका हाथ थामेगा..? इसका कोइ जवाब हे तेरे पास..?

रमेश : (हां मे गरदन हीलाते) हां चारु.. सोरी.. मुजसे बहुत बडी गलती हो गइ.. लेकीन इसमे मेरी कोइ गलती नही थी.. तुमतो जानती हो सामतभाइ अब बुढे हो चुके हे.. ओर जयाभाभीकी उमरमे ओर उनकी उमरमे काफी फर्क हे.. जीनकी वजहसे जयाभाभीने खुद सामनेसे मुजसे रीलेशनके लीये कहाथा.. लेकीन अब वादा करता हु.. मे उनको कभी नही मीलुगा.. मे मेरे परीवारको बरबाद होते नही देख सकता.. चारु आइ अ‍ेम सोरी.. बस अ‍ेक बार मुजे माफ करदे..

चारु : (प्यारसे गालपे अ‍ेक चपत लगाते) रमेश.. तो पहेलेही सच बता देता.. मुजेभी तुमसे अ‍ैसे बात करना अच्छा नही लगता.. अगर उनसे रीस्ता ही रखनाथा तो मुजसे कहेकर रखता.. मे तुजे मना थोडीना करती..? क्युकी मे ओरतोकी तकलीफ भली भांती जानती हु.. मेभी इस दौरसे गुजर रही हु..

इसमे ना जयाभाभीकी गलती हे ना तुम्हारी.. अगर कहेके रीस्ता रखते तो मे तुजे खुसी खुसी हां केह देती.. चल.. जा मेने तुजे माफ करदीया.. ओर हां.. आइन्दा अ‍ैसी गलती कीना.. तो अभी तुजे प्यारसे चपत लगाइनां.. उनके बदले तुजे जोरोका चाटा लगेगा.. हें..हें..हें..

रमेश : (जोरोसे बाहोमे भीचते) थेन्कयु चारु.. तुमने मुजे माफ करदीया.. आइ प्रोमीस.. अब मे उनके साथ रीलेशन नही रखुगा..

चारु : नही रमेश मे मना नही करती.. तुम उनके साथ रीलेशन रखो.. लेकीन मुजे बताकर रीलेशन रखते.. हंम..? लेकीन अ‍ेक बात बताओ..? तुम मुजसे तो ठीकसे संतुस्ट नही कर पाते तो फीर जयाभाभीको कैसे..

रमेश : (मुस्कुराते) हंम.. चारु.. अब तुमसे कोइ बात नही छुपाउगा.. बस मेडीकलसे अ‍ेक इम्पोटेड गोली हाथ लग गइ हे.. तो वो मेरी दिवानी होगइ.. हें..हें..हें.. तुम तो मुजे गोली खाने नही देती..

चारु : (अ‍ेक नजरसे देखते) रमेश.. तुजे पता हे अ‍ैसी गोलीसे सेहत पर असर पडता हे..? खास करके अपने दिलपे.. तो दो मीनीटके मजेके लीये अ‍ैसी गोलीया मत खायाकर.. मेभी तुजे अ‍ैसी गोलीया दे सकती हु.. लेकीन मुजे तेरी सेहतसे खीलवाड करके कोइ मजे नही करने..

भलेही तुम हमे संतुस्ट ना कर सको.. लेकीन अपनी मर्दानगी दीखानेके चकरमे कही जानपे ना आजाये.. तो बी केरफुल.. हां.. देसी इलाज करवा सकते हो.. आजकल अ‍ैसी बहुतसी देसी दवाइ मीलती हे.. तुम अब सहेर जाओतो लेकर आना.. या अपना इलाज करवाना.. मुजे देसी गोलीगोसे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

रमेश : (हसते गाल चुमते) हंम.. चारु.. अगेइन आइ अ‍ेम सोरी.. तुम कीतनी अच्छी हो..

चारु : (सरमाते हसते) हंम.. अब ज्यादा मस्का मत लगा.. सीधे सीधे बोलनाकी तुजे चोदना हे.. चल आजा.. आज तुजे खुस कर देती हु.. हें..हें..हें.. ओर वोभी बीना गोली खाये.. हें..हें..हें..

तब रमेश बहुत खुस होगया ओर फटाफट अपने ओर चारुके कपडे नीकालने लगा तब उनका बचपना देखकर चारुकी भी हसी नीकल गइ.. ओर कुछही देरके बाद रमेश चारुके उपर चडके उनको चोद रहाथा.. तब चारुभी मजेसे अपनी कमर उछालते रमेशका साथ दे रही थी.. उनकोतो बस यही रमेशके साथ रहेकर देवायतके साथ अपना रीलेशन रखना था.. ओर वंदनाको देवायतके साथ सेट करना था..

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उनको पताथा की रमेश उनको कभी संतुस्ट नही करपायेगा.. फीरभी रमेशसे कैसे अपनी बात मनवानी हे.. वो भली भांती जानती थी.. क्युकी ज्यादातर ओरते कीसीभी चीजके लीये अपने पतीसे डीमांन्ड करती हे तब उजके नीचे लेटकरही करती हे.. फीर चाहे वो कोइ चीज हो या अपने घरकी समस्या.. तब कुछ ही देरकी घमासान चुदाइके बाद रमेश चारुकी चुतको भरके उनके सीनेपे ढेर हो जाता हे.. तब..

चारु : (रमेशके सरको सहेलाते) रमेश.. अब वंदनाके बारेमे कुछ सोचो.. उनकी जवानी नीकली जा रही हे.. कल अ‍ैसा ना होकी उनके बारेमेभी हमे बहारसे कीसी ओरसे पता चले.. की उनकाभी कीसीके साथ रीलेशन हे.. तुम समज गयेनां..?

रमेश : (चारुकी ओर देखते गाल चुमते) हां चारु.. मे सब समजता हु.. लेकीन कोइ ठीकसे ढंगका लडका भीतो मीलना चाहीये.. ओर वंदुभी सादीके लीये मना कर रही हे.. चारु.. अ‍ेक बात पुछु..? वो कीसीको प्यार ब्यारतो नही करती..? तुम अ‍ेक बार अच्छेसे उनकी दिलकी बात जानलो.. अगर लडका अच्छा होगातो हम उनकी सादी वही कर देगे..

चारु : (प्यारसे सरको सहेलाते) जानु.. मुजेतो अ‍ैसा कुछभी नही लगता.. फीरभी अ‍ेक बार मे उनसे पुछ लुगी.. बस मुजेतो गांवमे सीर्फ अ‍ेकही लडका ढंगका दीखता हे.. ओर हमारी वंदु भी उनको पसंद करती हे..

रमेश : (चारुकी ओर देखते) कौन..? तुम कीसकी बात कर रही हो.. क्या हम उसे जानते हे..? आइ मीन क्या वो हमारे गांवका लडका हे..? तो बता.. मे उनसे बात करलुगा..

चारु : (होंठ चुमते) हंम.. हमारे गांवकाही हे.. लेकीन अब उनकी सादीया होगइ हे.. तो बेचारी वंदनाकी बात आपको कहासे करती..? फीरभी अ‍ेक बार उनको पुछलो.. आपका खास दोस्तजो हे.. अगर वो हा कहेतो मेरी वंदुकी सादी भी उनसे करवा दुगी.. इनमे हमाराभी फायदा हे.. वंदु सादी करके भी हमारे साथ रेह सकती हे..

रमेश : (थोडा परेसान होते) लेकीन बतातो सही वो लडका कौन हे..? ओर अभी तुमने कहा मेरा दोस्त हे.. उनकी सादीया होगइ हे.. मतलब क्या..? मे ठीकसे समजा नही.. तुम कीसके बारेमे बात कर रही हे..?

चारु : (सरमाते मुस्कुराते) हमारे देवरजी.. आपके खास दोस्तजो हे.. हमारे राजा.. देवायतजी..

रमेश : (जटसे धीरेसे) पागल होगइ हे क्या..? देवु.. लेकीन वो कैसे..? मानाकी देवु मुजसे बहुत छोटा हे.. लेकीन चारु अभी अभी उनकी तीसरी सादी हुइ हे.. तो फीर हमारी वंदु..? नही नही.. ये नही हो सकता.. मे उनसे बात नही कर सकता.. मानाकी वो कीतनीभी सादीया करले उनको कोइ कहेने वाला नही.. मुजे येभी पता हे हमारी वंदु वहा खुस रहेगी.. लेकीन मे उनसे इस बारेमे बात नही कर सकता.. मेरा खास दोस्तजो हे..

चारु : (प्यारसे गाल सहेलाते) जानु क्यु नही कर सकते..? हमारी बेटीकी खातीर इतना नही कर सकते..? सीर्फ अ‍ेक बार बात करकेतो देखो.. वरना आप कहोतो मे मंजुभाभीसे बात करलुगी.. वो मना नही करेगी..

रमेश : (उपरसे हटते) पागल हो गइ हो क्या..? मंजुभाभीको क्या कहोगी..? की मेरी बेटीको तुम्हारी सौतन बनालो.. चारु भुलजा उसे.. वो रोयल फेमीली हे.. हमारा ओर उनका कोइ मेल नही.. ये तो हमारी कीस्मत अच्छी हेकी हमारे साथ उनके अच्छा रीलेशन हे.. वो मुजे अपना दोस्त मानते हे.. मे बात नही कर सकता..

कहेते रमेश चारुके उपरसे हटकर बाथरुममे चला गया तो चारुभी बेडपे बैठ गइ ओर रमेशके नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. आज रमेशने अ‍ेक बार फीर उनको प्यासी रख दीया.. लेकीन आज चारुको रमेशके साथ बात करनेका मौकाभी मील गयाथा.. उनको पताथाकी अब रमेशसे अपनी बात कैसे मनवानी हे.. बस थोडीसी महेनत करनी पडेगी..

क्युकी उसे पताथाकी अब रश्मी कभी भी देवायत ओर वंदनाकी मुलाकात करवा सकती हे.. तो वो देवायतको भी अच्छी तराह जानती थी.. की जब अ‍ेक बार दोनोकी मुलाकात होजायेगी.. तब सायद वंदना अ‍ेक लडकीसे ओरत बन जायेगी.. वो खुद इस दौरसे गुजरी हे.. अबतक वोभी ना जाने देवायतके साथ कीतनी बार अपनी प्यास बुजा चुकी हे.. इस बातसे वंदना ओर चारुका दोनोका देवायतसे बार बार मीलनेका रास्ता खुल सकताथा.. तो इसकी वजहसे चारु अभीसे रमेशको मनानेमे लग गइथी..

तब हवेलीपे आज देवायत सृतीके साथ अपनी सुहागरात मनाते सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कर चुके थे.. ओर इस वक्त दोनोही बाथरुममे अ‍ेक दुसरेको नहेला रहेथे.. जब नहालीया तब देवायत सृतीको अपनी गोदमे उठाकर बेडपे ले आया.. ओर सृतीको पीठके बल लीटाकर खुद उनके उपर चड गया.. तब सृतीने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३५/१

तब हवेलीपे आज देवायत सृतीके साथ अपनी सुहागरात मनाते सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कर चुके थे.. ओर इस वक्त दोनोही बाथरुममे अ‍ेक दुसरेको नहेला रहेथे.. जब नहालीया तब देवायत सृतीको अपनी गोदमे उठाकर बेडपे ले आया.. ओर सृतीको पीठके बल लीटाकर खुद उनके उपर चड गया.. तब सृतीने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये....अब आगे

सृती : (लडखडाती आवाजमे) दे..वु.. बस.. अब ओर नही.. वक्त आगया हे अब आप मुजे लडकीसे ओरत बनादो.. मे कीतनीभी चीलाउ चीखु.. मुजपे कोइ रहेम मत करना.. इस सुखके लीये मे बहुतही तडपी हु.. रात रातभर मेने आपके नामकी उंगली की हे.. आज मुजे ओरत होनेका अकेसास करवादो.. देर मत करो..

देवायत : (मुस्कुराते) बस सृती थोडीसी तकलीफ होगी सहेन करलेना.. फीरतो मजेही मजे हे..

सृती : (नीचे हाथ लेजाते लंड पकडते अपनी चुतपे घीरसते) देवु.. पता हे मुजे.. आपके हथीयारको जेलना इतना आसान नही होगा.. मे इस दर्दको सहेन करलुगी.. अब डालदो अपना हथीयार मुजसे रहा नही जाता.. मे इसके लीये बहुत तडपी हु.. कास.. मेने पहेलेही मंजुकी बातको मानलीया होता..

देवायत सृतीसे चीपक कर उनके उपर लेटा हुआ था.. सृतीके कठोर उरोज देवायतके सीनेमे चुभ रहाथा.. तब देवायतने उनके होठोको चुमते अ‍ेक बुब्सको अपने मुहमे लेलीया ओर चुसने लगा तब सृती सीकारीया करते अ‍ेक हाथसे देवायतके सरको सहेला रहीथी तो दुसरे हाथमे लंड पकडकर अपनी चुतपे घीसते लंडको गीला कर रही थी.. सृतीकी चुत लगातार तरल पदार्थ छोड रहीथी.. तब..

सृती : (बहुतही कामुक आवाजमे) दे..वु.. प्लीज.. ओर मत तडपाओ मुजे.. डालदो प्लीज.. नही रहा जाता..

कहेते देवायतके लंडको अपनी चुतके लव होलमे थोडा फसा देती हे.. तब देवायतने सृतीके दोनो हाथ पंजेसे पकडकर मजबुतीसे थामलीया ओर सृतीसे लीपलोक करलीया.. तभी सृतीने देवायतकी ओर देखते अपनी आंखोसे सहमती दे दी.. ओर देवायतने अपनी कमरको थोडी उची करते सृचीतीकी चुतमे दबाव बनाते अ‍ेक जोरोका जटका मारदीया.. तब देवायतका तगडा लंड सृतीकी चुतको चीरते अंदर घुस गया..

तो सृतीके मुहसे जोरदार चीख नीकल गइ ओर उनकी आंखसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. वो अपना मुह छुडानेकी कोसीस करते अपने दोनो पैर जोरोसे बेडपे पटकने लगी.. उनकी चीख देवायतके मुहमेही दब गइ.. ओर वो गुं..गु.. करते देवायतसे लीपलोक छुडानेकी कोसीस करती रही.. वो कुछ समजे इनसे पहेलेही देवायतने दुसरा जटका मारदीया तब उनका पुरा लंड सृतीकी चुतमे घुस गया ओर सृची चीलाकर बेहोस हो गइ..

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तभी देवायतने फौरन लीपलोक छोडदीया ओर हाथके बल उचा हो गया.. फीर सृतीको बेहोसीमेही जोरोसे कमर हीलाके चोदने लगा तो सृतीकी चुतसे तरल पदार्थके साथ खुनभी नीकलते देवायतके लंडको भीगोता रहा.. ओर देवायत सृतीको जोरोसे चोदता रहा.. अब बहुतही आसानीसे लंड सृतीकी चुतमे अंदर बहार हो रहाथा.. पुरे रुममे सनाटा छाया हुआथा.. तब रुममे सीर्फ फच..फच..फच..थप..थप..थप.. की आवाज गुंज रहीथी..

सृतीके दोनो बुब्स चुदाइके तालमेलमे उछल रहेथे.. कुछही देरमे सृतीका मुह बीगडने लगा तब देवायत अपना लंड सृतीक चुतमे जडतक घुसाके रुक गया.. ओर सृतीसे चीपककर उनके होठोको चुमने लगा.. तब सृतीने दर्दके मारे अपना मुह बीगाडते धीरेसे आंख खोलदी.. तो देवायत उनके दोनो बुब्सको बारी बारी चुम रहाथा.. तब सृती सर्मसार होते अपनी नजर घुमा लेती हे.. ओर आंखसे आंसु बेह रहेथे..

सृती : (आंसु बहाते दर्दभरी आवाजमे) देवु.. प्लीज इसे बहार नीकालो नही करना मुजे.. बहुत दर्द हो रहा हे.. लगता हे मेरी फट गइ हे.. यार.. बहुत जलन हो रही हे..

देवायत : (हसते) सृती.. तुमतो डोक्टर हो.. क्या तुमने आजतक कीसीकी चुत चुदाइकी वजहसे फटते हुअ‍े देखा हे..? हें..हें..हें.. बेबी कुछ नही होगा.. अभी दर्द चला जायेगा..

सृती : (सरमाते मुह बीगाडते) देवु.. प्लीज.. मजाक नही.. इसे बहार नीकालो.. हम बादमे करलेगे..

देवायत : नही सृती अभी नीकालातो तुम कभी इसे ले नही पाओगी.. तुम उनपे ध्यान मत दे बस मुजे चुमती रहे अभी दर्द चला जायेगा.. आइ प्रोमीस.. अगर दर्द नही गया तो नीकाल लुंगा..

तब देवायत सृतीके दोनो बुब्स बारी बारी चुमकर सृतीके होठोको चुमने लगा तो सृतीभी सब भुलकर देवायतका साथ देने लगी ओर कुछही देरमे सृतीका दर्द कम होगया.. उनकी चुतमे अभी देवायतका लंड सख्त लंड रोडके माफीक घुसा हुआ था.. सृतीको अपनी चुतमे कुछ अलगही फील हो रहाथा.. जीनकी वजहसे उनकी चुत लगातार पानी छोड रहीथी.. ओर वो सरमाके देवायतसे नजरे चुराने लगी.. तब..

देवायत : सृती क्या दर्द कम हो गया..?

सृती : (सरमाते) हंम.. बाबा बहुत बडा हे.. मुजे बेहोस करदीया.. क्या आपने बेहोसीमेभी कुछ कीया था..?

देवायत : (हसते) हंम.. तभीतो अभी इसे तुम आरामसे जेल रही हो.. कैसा लगता हे..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे नजरे चुराते हसते) मुजे नही पता.. आप बहुत कमीने हो.. क्या पुनमदीदीके साथ भी अ‍ैसा कीयाथा..? हें..हें..हें..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. वोभी पहेली बार बेहोस हो गइथी.. पता हे अ‍ेक पुरी रात मेरा हथीयार उनकी चुतमेही रखा.. ओर पुरी रात हम दोनो बीना बहार नीकालेही चुदाइ करते रहे..

सृती : (सरमाते हसते) ओ बापरे.. क्या पुनोदीदी इसे जेल पाइ..? उनको सुबह कुछ हुआ नही..?

देवायत : (हसते) नही.. पेइन कीलर खाके पुरे दिन आराम कीया.. तो ठीक होगइ.. क्या आज हमभी अ‍ैसे करे..? हंम..? तुजे बहुत मजा आयेगा..

सृती : (सर्मसार होते हसते) नही देवु.. आज नही.. वो कीसी ओर दिनमे हम ट्राइ करेगे.. क्युकी सुबह मुजे क्लीनीकपे जाना होगा.. दो डीलीवरी हे.. अब आप मुजसे मीलने वहा कब आओगे..?

देवायत : (बुब्स चुमते) हंम.. सोचता हु हप्तेमे कमसे कम दो दिन ओर रात तेरे साथ सोउगा..

सृती : (सरमाते हसते) देवु.. आप तीन दिन आइअ‍ेनां.. अब मुजे नही लगता मे आपके बीना रेह पाउगी..

देवायत : (बुब्सकी नीपलको चुमते) हंम.. सृती तुम सेटरडे संन्डे भुमी आंटीके साथ इधर आजाना.. हम खुब मजे करेगे..

सृती : (हसते) आइइइ.. देवु धीरेसे खीचो.. देवु.. ये आइडीया बुरा नही हे.. तबतो मे आपके साथ चार राते सो सकुगी.. हां.. मे वही करुगी सेटरडेको दो पहोरके बाद मम्मीको लेकर आजाउगी ओर मन्डे सुबह चली जाउगी.. (कमर हीलाते) देवु.. अब धीरे धीरे स्टार्ट करो.. अब बहुत अच्छा लगता हे..

तो देवायत धीरे धीरे कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. तब सृतीभी उतेजीत होने लगी ओर सीसकारीया करते देवायतकी पीठ सहेलाती रही.. तब कुछही देरके बाद दोनोने अपनी रफ्तार बढादी तब सृती जोरोसे सीसकारीया करते देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. ओर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. आज सृतीने सही मायनोमे ओरत हो चुकीथी..

देवायत उनके पैरोके बीच बैठ गया.. ओर सृतीकी दोनो टांग पकडते अपनी कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. तब सृती बेडकी चदरको दोनो हाथसे बपडते छटपटाती रही.. सृती बहुत सारी लडकीया ओर ओरतेकी चुतको देख चुकीथी.. तब उनको अपने कुआरेपनका बहुत दुख होताथा.. लेकीन आज अपनीही चुतमे अ‍ेक दमदार ओर तगडा लंड घुसाते वो सारे गम ओर दुख भुल चुकीथी..

सृती : (कमुक आवाजमे) देवु.. आइ.. सीइइइ बस अ‍ैसेही चोदो.. बहुत.. म..जा.. आ रहा हे.. आह..आह..आह.. आह.. आइइइइइइ बस.. बस.. मे आने वाली हु.. फास्ट देवु.. ओर.. फास्ट.. बस.. अ‍ैसेही.. आह..आह..आह..आह.. आइइइ....मां..इइइइ सीइइइइइ उउइइइइइइ.. दे..वु.. मे गइइ...

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कहातो देवायत सृतीपे जुक गया तो सृती देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते जडने लगी.. जब वो सांत होगइ.. तब देवायत हाथके बल वापस उचा होगया.. ओर जोरोसे कमर हीलाते सृतीको जोरोसे चोदने लगा तब सृती मुह बीगाडते इधर उधर सर हीलाते छटपटाने लगी.. ओर देवायतसे चुदवाती रही.. ओर धीरे धीरे करते फीरसे उतेजीत होने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीर अपनी कमर हीलाते देवायतका साथ देने लगी.. तो देवायत फीरसे सृतीके उपर जुक गया.. ओर सृतीने उसे जोरोसे बाहोमे कसके भीचलीया..

सृती : आह..आह..आह.. सीइइ.. बस.. बस.. देवु.. थोडा धीरे.. बहुत म..जा..आ..र..हा..हे..हे..सीइइइइ..

देवायत : (बुब्स चुमते चोदते हुअ‍े) सृती.. आज पुरी.. रा..त.. चोदना.. हेअ‍ेअ‍े... चुदाइअ‍ेगीनां..? हंम..?

सृती : हंम.. हां.. चोदलेना.. देवु.. बहुत मजा आ रहा हे.. थोडा जोरोसे चोदो.. आइ.. आह..आह..आह..

देवायत : (जोरोसे चोदते) ओर चोदु.. हंम.. करदु प्रेगनेन्ट..? हंम.. आह..

सृती : (सरमाते चुदवाते) हंम.. नही.. अभी नही.. मे ओर मजा करना चाहती हु.. बादमे करदेना..

अ‍ैसेही बाते करते दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. तब सृती अ‍ेक बार फीर अकडने लगी तो उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर होठोको लोपलोक करलीया तो देवायत जोरोसे कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. ओर अचानक सृतीकी चुतमे जडतक लंड घुसाके रुक गया.. ओर रुक रुकके कमरको जटके देने लगा.. तब सृतीको अपनी बचेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ जो उनकी चुतको पुरी भर चुकाथा..

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ओर सृती उतेजनासे कांपने लगी.. ओर लीपलोक छोडके नजरे चुराते देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे.. ओर जोरोसे सीसकारीया करते साथमें जडने लगती हे.. फीर दोनोही सांत होजाते हे तब सृती देवायतकी पीठ ओर उनके सरको सहेलाती रही.. तब उसे अहेसास हुआकी वो अब लडकीसे ओरत बन चुकी हे.. तब वो खुब सरमाइ ओर देवायतसे सरमाकर अपनी नजरे चुराने लगी..

देवायत : (हसते) क्या हुआ..? अ‍ैसे क्यु सरमा रही हे.. हंम..?

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. आखीर आपने मुजे लडकीसे ओरत बनाही दीया.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा की मे इसे जेलपाइ.. अभीभी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे.. देवु अ‍ैसा क्यु..? आपने कुछ कामोतेजक गोली बोलीतो नही खाइ..?

देवायत : (हसते) नही डार्लींग.. बस.. ये सब बाबाकी दी हुइ जडीबुटीका माल हे.. अभी हम वापस करेगे..

सृती : देवु.. नीचे खुन नीकला होगा.. कही आपको इन्फेक्शन ना लग जाये.. चलो अ‍ेक बार नहालेते हे.. फीर करेगे.. देखना आजतो मे आपको पुरी रात सोने नही दुगी.. कास आप मंजुको पहेली बार हमारे घरपे मीले तबही में उनके साथ आजाती.. तो आज मेभी आपकी बीवी होती ओर हमाराभी अ‍ेक बच्चा होता..

देवायत : (हसते प्यारसे सरको सहेलाते) हंम.. चलो देरसे ही सही आखीर तुम भी मेरी बीवी होगइ..

तब देवायत सृतीके उपरसे हट जाता हे तो सृती जटसे अपने नीकरसे चुतको साफ करने लगी.. ओर साफ करके नीकरको देखने लगी तो नीकरपे दोनोके कामरसके साथ खुनभी था.. ओर सृती सरमाते स्माइल करते बेडपे बैठ गइ.. ओर नीचे उतरते चलनेकी कोसीस करने लगी.. तो उनकी चुतमे बहुत जलन हुइ.. ओर वो बेडपे वापस बैठ गइ.. ओर देवायतकी ओर देखने लगी..

सृती : (सरमाते) देवु.. बहुत जलन हो रही हे.. नही चला जा रहा.. प्लीज.. हेल्प मी..

देवायत : (हसते) हंम.. तो तुजे कीसने चलनेको कहा था..? चल.. आजा..

कहेते देवायत सृतीको अपनी गोदमे उठाकर बाथरुमकी ओर ले गया.. वहा दोनोने अपने अपने लंड ओर चुतको साबुनसे साफ करलीया फीर साथमे सावर लीया.. सृती देवायतको साबुन लगाते नहेलाने लगी.. ओर वो देवायतके लंडको साफ करते मसलने लगी.. ओर देवायतकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते मुस्कुराते सरमाते धीरे धीरे लंडको मुठीमे पकडकर सहेलाने लगी.. तब देवायत समज गया.. ओर सृचीके बुब्स मसलते उनके होठोको चुमने लगा..

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सृती : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. साथमे नहानेका बहुत मजा आ रहा हे.. अ‍ेक बार यही करे..? हंम..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तुमभी मेरी मंजु.. ओर पुनोकी तराह पागल हो.. चल लेटजा नीचे..

दोनोही फीरसे उतेजीत होगये तब देवायतने सृतीको वही फर्सपे लीटा दीया ओर खुद उनके पीछे लेट गया.. ओर सृतीकी कमर पकडते उनसे चीपक गया ओर अपना लंड पकडकर पीछेसेही सृतीकी चुतमे घुसा दीया तब सृतीकी हलकीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो मुह पीछे करते देवायतको वासनाभरी नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. ओर देवायत अपनी कमर हीलाते सृतीको पीछसेही चोदने लगा..

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सृती : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. क्या पुनोकोभी अ‍ैसेही चोदते हो..? अपनी बहेनको चोदते आपको कैसा फील होता हे..? हंम..?

देवायत : (मुस्कुराते) सृती.. पुनोकीतो बातही मत कर.. उनको ओर मंजुको चोदते कइ गुना जोस बढ जाता हे.. जो जोस आज तुजे चोदते हुअ‍े बढ गया हे..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. तो मंजु भावनाको दीखाने आतेथे तब मुजे चोद लेना चाहीयेना.. मे तबभी आपसे चुदवानेके लीये रेडीथी.. आपको कीतनी हीन्ट दी.. लेकीन आप समजेही नही..

सृती इतने सालो तक इस सुखसे वचींत थी.. तो देवायतसे चुदवाते वो अ‍ेक अलगही नसेकी कसीसको महेसुस करने लगी.. वो देवायतसे हर तरेह का सुख पाना चाहती थी.. देवायत सृतीकी पीछेसे चुदाइ कर रहाथा फीरभी सृती अपना मुह पीछे करते देवायतके सरको सहेलाते उनके होठोको चुमती रही.. ओर देवायतभी सृतीके बुब्सको अपने हाथोसे मसलते चुदाइ करता रहा..

थोडी देरकी धमाकेदार चुदाइके बाद देवायतने अ‍ेक बार फीरसे सृतीकी चुतको अपने पानीसे भरके हरी भरी करदी.. ओर सृतीभी साथमे जडते संतुस्टीके भावको महेसुस करने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीरसे दोनो सावर लेकर अपना तन पोछकर बहार आगये.. देवायत सृतीको गोदमेही उठाकर फीरसे बेडपे लेआया.. ओर सृती पीठके बल सुला दीया.. तब सृतीने देवायतका हाथ खीचके अपने उपर खीचलीया..

सृती : (सरमाते हसते) देवु.. प्लीज.. मुजसे अलग मत हो.. अब आपसे दुर नही रहा जाता.. मेरे उपरही लेटे रहो.. मुजे खुब प्यार करो..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. ओर मे तुमसे दुर होनाभी नही चाहता.. क्या मजा आ रहा हे..?

सृती : (सरमाते देवायतको बाहोमे भीचते) हंम.. बहुत.. मेनेतो सोचाभी नही थाकी इनमे इतना मजा आता हे.. कास हम पहेलेही मील जाते.. मेने होस्पीटलमेभी आपको कीतनी हीन्ट देदी थी.. फीरभी आप समज नही पाये.. मे तबभी आपके साथ सबकुछ करनेको रेडीथी.. आप मंजुको मेरे सामने कइ बार चोद चुके हो.. तबही मेने आपका हथीयार दुरसे देखाथा.. तबही मेने मनमे ठानलीथी की मुजे कीसीभी हालमे आपसे मीलन करना हे..

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देवायत : (गलेमे चुमते) हंम.. पता हे मुजे.. लेकीन सही मौका नही मील पा रहाथा.. सृती.. जीस तराह मेने मंजु चंदा ओर पुनमकी चुदाइ की हे.. उसी तराह मे आज तुमको चोदना चाहता हु.. पुरी रात इसे बीना बहार नीकाले हम चुदाइ करते रहेगे.. आज तुजे इस तराह चोदनेका बहुत मन कर रहा हे..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जानु.. देखना इसमे मेरी हालत खराब ना हो जाये.. कल मुजे होस्पीटलभी जाना हे.. क्या कल सुबह आप हमे छोडनेतो आओगेनां..?

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. अब अपनी बीवीका हुकुम तो माननाही पडेगा.. सृती.. भुमीआंटीको भी साथ लेजाना हे.. ओर वापसीमे राजीव अंकलका सामान लेकर आउगा.. फीर उन दोनोको छोडनेभी तो जाना हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) जानु.. आप बैठ जाओनां.. मुजे अ‍ेक बार बैठे बैठे आपको चोदना हे.. देखु तो सही आपकी चुदाइ करते कैसा लगता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. कहासे जाना ये सब..?

सृती : (सरमाते हसते) वो.. ब्लु फील्मसे.. कोलेज टाइममे मेने ओर मंजुने अ‍ैसी बहुत फील्म देखी हे.. तभीतो वो सादीसे पहेले आपके साथ सेक्स कर रही थी.. मंजु बहुतही कामुक लडकी हे.. आपको देखतेही प्यार कर बैठी.. मुजेभी आप बहुत पसंद थे लेकीन मंजु ओर आप दोनो पहेलेही रीलेशनमे आ गयेथे..

देवायत : (बुब्सको चुमते) हंम.. तो तुमभी अपने प्यारका इजहार कर देती.. तो मे तुमकोभी अपना लेता.. वैसेभी मंजु तुजे साथमे ही तो रखती थी.. उसनेभी तुमको सब छुट देदी थी..

सृती : (सरमाते हसते) हां.. मंजुतो जब अप दोनो मेरे घर अपनी सुहागरातमे मीले तब ही मुजे साथ रखना चाहती थी.. वोभी चाहतीथी की मे भी आपसे अपनी जवानीके मजे लुटु.. वो बहुत खुले सोच वाली हे..

देवायत : हां सृती.. मंजुने हमेसा दुसरी ओरतोके साथ मुजे रीलेशनको लेकर सहमती दी हे.. चल आजा.. आज तुम अपनी सब तम्मना पुरी करलो..

कहेते देवायत बेडपे बैठ गया तब सृती सरमाकर मुस्कुराती बेडपे बैठकर देवायतकी गोदमे आगइ.. देवायतका लंडतो अ‍ैसेही रोडके माफीक सख्त हवामे लहेरा रहा था.. तब सृती अपनी कमर थोडी उची करके धीरेसे अपनी चुतपे सेट करके बैठ गइ.. ओर देवायतका पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया ओर देवायतके गलेमे हाथ डलकर उनको अपनी बाहोमे भीचते धीरे धीरे अपनी कमरको हीलाते देवायतको चोदने लगी..

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आज सृती कुछ अलगही मुडमे थी.. वो देवायतसे खुलकर प्यार कर रहीथी.. देवायतके गलेमे मुह डालकर अपनी कमरको हीला हीलाके देवायतको चोद रहीथी.. तो देवायतभी सृतीका ये चोदनेका अंदाज देखके खुस होगया.. ओर सृतीके बुब्सको अपने मुहमे लेके चुसने लगा.. तब सृती सातवे आसमानपे चली गइ.. ओर मदहोस होकर देवायतकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते अपनी कमरको जोरोसे हलाने लगी..

देवायत : (होंठ चुमते) डार्लींग.. ब्लु फील्मे देखकर तुम काफी कुछ सीखके आइ हो.. क्या मस्त चुदाइ करती हो तुम..

सृती : (सरमाते हसते) जानु आपका हथीयारही इतना मस्त हेकी इसे बहार नीकालनेका जी नही करता..

दोनोही प्यारभरी बाते करते चुदाइमे मसगुल थे तब बाजुके रुममे लखन आज वायग्रा खाकर बडीही बेहरेहमीसे लताको चोद रहाथा.. तब लता हल्कासा चीखते चीलाते लखनको जेल रहीथी.. ओर उनको प्यार भरी गालीया दे रहीथी.. ओर बार बार प्यारसे चोदनेकी मनते कर रहीथी.. लेकीन आज लखन कुछ अलगही मुडमे था.. जीसका कारण था.. रमा..

वो रमाको आज अपनी ओर ढालनेमे पहेला कदम चल चुकाथा.. लेकीन उनका मक्सद तो कुछ ओरही था.. वो रमाके जरीये नीलमको पाना चाहता था.. लेकीन उनको पताथा की नीलम धिरेनको पसंद करती हे तभी उसने रमाके जरीये नीलमको पानेकी मनमे प्लानींग करली थी.. लेकीन लखनको पता नही थाकी रमाके साथ रीलेशनसे लताके साथ उनके संबध बीगड सकते हे..

लखन लताकी तीन बजे तक चुदाइ करता रहा तब आज लताकी हालत बीगड गइ.. ओर वो लखनपे गुसे होने लगी.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गये.. तब बाजुके रुममे देवायत सृतीके उपर लेटकर सृतीको चोद रहाथा.. आज देवायत पुरी रात यानीकी रात ४ तब बीना लंड बहार नीकाले सृतीको चोदता रहा.. तो आज सृतीकी हालत भी पतली हो चुकीथी.. देवायतने उनके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोडके रख दीयाथा..

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सृती हीलनेकी भी स्थीतीमे ना रही तबतक देवायत उनकी चुदाइ करता रहा.. सृतीकी सारी तम्मना आज देवायतने पुरी करदी.. पुरी रातमे देवायत सृतीकी चुतको पांच बार अपने गाढे पानीसे भर चुकाथा.. फीर उसे गोदमे लेकर बाथरुममे चला गया ओर दोनोने सावर लीया फीर सृतीको बहार लाकर बेडपे सुला दीया ओर उनके उपर कंबल डालके खुदभी सृतीसे चीपकर सोगया....
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३५/२

तो आज भानुभी देर रात रमाके साथ अपने घरपे पहोंच गया.. तब सरला ओर भावेस सो चुके थे.. तो दोनोही अपने रुममे जाकर चेन्ज करलेते हे.. ओर बेडपे आगये.. तब भानु रमाको अपनी बाहोमे लेकर प्यार करने लगा.. लेकीन आज रमाका मुडही नही बन रहाथा..

उनके मनमे बार बार लखनका खयाल आने लगता था.. जब भानु रमाको चोद रहाथा तबभी रमाको भानुकी जगाहपे लखन नजर आ रहाथा.. रमा बेमन भानुसे चुदवाती रही.. जब भानुने चोद लीया तो वो करवट लेकर लखनके बारेमे सोचते नींदकी आगोसमे चली गइ..

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आज सुबहका सुरज अपने तैय समयपे अपने सात घोडेके रथपे सवार होकर नीकलाथा.. गांवके बडे बुजुर्ग सुबह जल्दी उठकर अपने खेतोपे कामपे चले गयेथे.. तब कुछ घरके अंदर.. अबभी जवान लडके लडकीया अपने बीस्तरपे पडे गहेरी नींद सोे रहेथे.. क्युकी आजकल काम ओर रती देवायतके गांवपे ओर आसपासके गांवोपे कुछ ज्यादाही महेरबान थे.. प्रकृती अपना काम बखुबी नीभा रहीथी..

सब लोग देरसे उठे.. तो बडी उमरकी महीलाये अपने जवान लडके ओर लडकीयोको देरसे उठने पर खरी खोटी सुना रहीथी.. लेकीन उन बडी उमरकी महीलाको मालुम नही थाकी लडकीया ओर लडके देर रात अपने यारके पास या मासुकाके पास जाकर अ‍ेक दुसरेके साथ बीस्तर गरम करके जगे हुअ‍े थे.. लखन लता ओर देवायत सृतीभी देर तक सोते रहे.. मंजुने आज सबको सोने दीया..

तभी लता उठकर थोडा लंगडाते बाथरुममे चली गइ.. ओर नीत्यक्रम करके नहाने लगी.. तब चंदा ओर मंजुभी तैयार हो चुकीथी ओर देरसे उपरकी मंजीलपे चल गइ.. तो रजीया उपरकी मंजीलपे सभी कमरोकी सफाइ कर रहीथी ओर मंजुने धीरेसे देवायतके रुमका दरवाजा खटखटाया.. तो कुछही देरके बाद देवायतने नींदसे उठकर दरवाजा खोलदीया तो मंजु मुस्कुराते अंदर आगइ ओर देवायतने फीरसे दरवाजा बंध करदीया..

तब सृती अभी भी गहेरी नींदमे सोइ हुइथी.. मंजुने उनके उपरसे कंबल हटाके देखा तो सृती पुरी नंगी होकर घोडे बेचकर सो रहीथी.. तो मंजुने देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल कीया ओर उनकी चुतकी ओर देखने लगी.. तो सृतीकी चुत सुजके पांव जैसी होगइ थी.. तभी मंजुने अपना दोनो हाथ कमरपे रखके देवायतकी ओर जुठे गुसेसे मुस्कुराते देखा.. ओर उनको मुका मारने लगी.. तब देवायतने मंजुको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये तब..

मंजुला : (हसते) देवु.. आपनेतो अ‍ेकही रातमे बेचारीकी हालत खराब करदी.. अब कमीनी दो दीन तकतो बीस्तरसे उठभी नही पायेगी.. दोनो ने बीतनी बार कीया..? कहा तक जागेथे..? देखो पुरी चदर खुनसे भरी हे.. कमसे कम इन चदरको चेन्ज करकेतो सोते..

देवायत : (मुस्कुराते होंठ चुमते) हंम.. ४ बजे तक.. पुरी रात बीना बहार नीकाले.. बीलकुल तेरी तराह.. हें..हें..हें.. मंजु.. बहुत मजा आया.. लगता हे सृतीभी तेरी तराह चुदवानेकी बहुत सौकीन हे..

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु लेकीन मेतो अब आदी हो चुकी हु.. लेकीन ये.. देखना उठते ही आपको बहुत गालीया देगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही मंजु.. सब उनके कहेनेपे ही कीया हे.. ये भी तेरी तराह बहुतही गरम हे.. बहार नीकलने मे मानती ही नही थी.. कहेतीथी अंदर लेकर बहुत मजा आ रहा हे इसे बहार मत नीकालीये..

मंजुला : (हसते धीरेसे कानमे) बीलकुल अपनी मांपे गइ हे.. क्या पुनोकी सादीके बाद उनको मीले की नही..? जानु अब उनकाभी कुछ देखलो.. बेचारी बहुतही चीन्ता कर रही थी.. सृतीको इनकी प्रेगनन्सीके बारेमे पता चले इनसे पहेलेही उनका कुछ करना होगा..

देवायत : हंम.. मंजु इस बारेमे तुजेही सृतीसे बात करनी पडेगी.. तुजेही सृतीको समजाना पडेगा.. आज इन दोनोको छोडने जा रहा हु तब भुमीको मील लुगा.. क्या तुम साथमे चल रही हो..?

मंजुला : नही जानु.. आनातो चाहती थी.. लेकीन आप अकेले चले जाओ.. फीर वापसीमे पापा मम्मीको इधर ही लेके आना.. हम कल सुबह तीनोको लेकर छोडने जायेगे.. तब आप भावुका मकानका रजीस्टरका देख लेना.. हम दोनो साम तक वही रुकेगे.. सायद हमे वहा रुकनाभी पडे.. वो वहा जातेही पता चलेगा..

देवायत : (धीरेसे) मंजु.. वो रश्मीभाभी मुजे उनके घरपे वंदनाको मीलनेको केह रहीथी.. तुम रश्मीभाभीसे बात करलेना.. मुजे उनको मीलनेमे बहुत संकोच हो रहा हे.. सीर्फ रमेशकी वजहसे..

मंजुला : (हसते) हां अब आप जाओगे तब बात करलुगी.. बेचारी आपकी आस लेके बेठी हे.. जानु अ‍ेक बार वंदुको अच्छेसे मीललो.. वैसेभी आपकी बहुत सीक्रेट बीवीयातो हे.. अ‍ेक ओर सही.. चारुभाभी भी उनकी बहुत चीन्ता करती हे.. वोभी चाहती हेकी वंदु आपसे सादी करले.. आप रमेशभाइकी चीन्ता मत कीजीये.. सायद आगे जाकर आपकोही उन मां बेटीको सम्हालना पडेगा..

देवायत : हंम.. मंजु.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या तुजे अ‍ैसी बातोसे बुरा नही लगता..? तुजे नही लगता अब ये बहुत ज्यादा हो रहा हे..? हंम..?

मंजुला : (मुसकुराते गालको चुमते) जानु सच कहु..? कभी कभी लगता हे.. अ‍ैसा लगताहेकी अब कुछ ज्यादाही हो रहा हे.. लेकीन हमारी भी मजबुरी हे.. हमे बाबाका आदेशभी मानना हे.. हमे सबकी भावनाओका खयाल रखना हे.. मत भुलो पीछले जन्ममे ये सब आपहीकी रानीया थी..

देवायत : हंम.. मंजु अभी कीतनी ओरते मेरी जींदगीमे आयगी..? क्या मुजे बता सकती हे..?

मंजुला : (मुसकुराते) क्यु.. थक गये आप..? हंम..? जानु.. गीनती मत करो.. बेचारी जोभी सामनेसे आये उनको न्याय देना आपका कर्तव्य हे.. बस इतनाही केह सकती हु.. आपको सबके साथ कहा सादी करनी हे.. अब चलो नहालो.. मे इस महारानीको जगाती हु.. कमीनी कैसे बेसर्मोकी तराह नंगी होकर पडी हे.. हें..हें..हें..

कहेते मंजुने देवायतको टोलीया पकडा दीया तो वो लेकर बाथरुममे घुस गया.. तब मंजुने सृतीको जगा दीया.. तो सृती अपनी हालत देखकर मंजुकी हाजरीसे बहुतही सरमाइ.. तब मंजुने उनको बेडपे ही उनका गाउन देदीया तो सृती बैठे बैठेही फटाफट अपना गाउन पहेनने लगी.. फीर बेडसे उठनेकी कोसीस करने लगी तब उनकी चुतमे थोडा दर्द हुआ तो वापस बेडपे बैठ गइ ओर मंजुकी ओर सरमाते देखने लगी..

मंजुला : (हसते) क्यु.. कमीनी.. रातमेतो उछल उछलके ले रहीथी.. उनको बहारभी नही नीकालने देती थी.. अब क्या हुआ..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) क्या देवुने सब बता दीया..? तुम दोनोही कमीने हो.. कोइ अ‍ेकही रातमे इतनी हालत खराब करता हे..? मंजु.. रातमे पेइन कीलर ओर आइपील खाकर सोइ थी.. फीरभी थोडा दर्द हो रहा हे.. लगता हे घर जाकरभी आराम करना पडेगा.. मेरी फ्रन्डको फोन कर देती हु वोही क्लीनीकपे आकर डीलीवरी करजायेगी.. जालीमने पुरी रात मेरे साथ प्यार कीया..

मंजुला : (हसते) क्या आज डीलीवरी करनी थी..? सृती.. सादीथी तेरी.. अ‍ेक दो दिनकी छुटी रख लेती.. चल अभी देवु नहाकर नीकलेगा.. तब तेरी सीकाइ करदुगी तो कुछ राहत होजायेगी.. ओर चाइ नास्ता करके अ‍ेक गोली ओर लेलेना.. तो सा तक ठीक होजाओगी.. बस अ‍ेकही बारतो तकलीफ हे.. अबतो तेरे मजेही मजे हे.. हें..हें..हें.. वो चंदादीदी ओर पुनोकी हालतभी अ‍ेक बार कर चुके हे..

सृती : (हसते) मंजु.. क्या मजे..? मेरी तो हालतही खराब करदी.. जालीमने मेरा अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. लेकीन सच कहु..? रातमे मजा भी बहुत आया.. कल पता चला सुहागरात कीसे कहेते हे.. मंजु.. हमारा देवु बहुतही स्ट्रोंग हे.. तुम सच केह रही थी.. वो हम जैसी दस ओरतोको संतुस्ट कर सकता हे.. वाकय तेरी सब बाते सच लगती हे.. मंजु.. मुजे हमारे देवुके बारेमे बहुत जाना हे.. की उनका ओर कीसके साथ रीलेशन हे.. सब अ‍ैसेही इनपे लटु नही हुइ होगी..

मंजुला : (हसते) हंम.. सच कहा तुने.. इनका बहुत सारी ओरतोके साथ रीलेशन हे.. लेकीन इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. चल अब... अभी देवु बहार नीकलेगा.. तो नहाले.. सृती.. अ‍ेक दिन यही रुकजा.. आराम करलेना.. कल तुजे देवु छोड जायेगा..

सृती : नही मंजु.. अगर सामको आराम रहेगातो क्लीनीकपे जाउगी.. देखती हु वहाकी क्या हालत हे..

मंजुला : (हसते) सृती.. अ‍ेक बात कहु..? देवु यहाभी अ‍ेक लेडीसकी होस्पीटल बनवा रहे हे.. सायद इस बारेमे वो तुमसे बात करेगे.. कुछ लेडीस डोक्टरका इन्तजाम करने.. या फीर तुम ही इधर आजा.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) मंजु देखती हु इसमे क्या कर सकती हु.. अगर देवुसे दुर नही रेह पाइतो पका इधर आजाउगी.. वरना कुछ लेडी डोक्टरका अ‍ेरेन्ज कर दुगी.. अब देवुसे दुर रहेना बहुतही मुस्कील होगा..

दोनो बात कर रहीथी तब कुछही देरके बाद देवायत नहाके बहार नीकला तो मंजु देवायतको उनके कपडे देकर सृतीको लेकर बाथरुममे घुस गइ ओर उनकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. फीर सृतीने नहालीया तो दोनोही बहार आगइ.. तबतक देवायत तैयार होकर नीचे चला गया था.. सृती अभीभी थोडा लंगडाते चल रहीथी.. तब मंजुने उनको तैयार होनेमे हेल्पकी.. फीर दोनो नीचे आगइ..

तबतक लखन लताभी कंपलीट होकर नीचे बेठे थे.. ओर भावनाभी अपनी बच्चीको लेकर बहार बैठी उनके साथ खेल रहीथी.. फीर सब चाइ नास्ता करने बैठ गये तब रजीया बार बार लखनकी ओर देख रहीथी.. ये बात मंजुने नोटीस करली.. जब चाइ नास्ता करलीया तब सृती जानेकी तैयारीया करने लगी.. ओर मंजु रजीया उपरसे उनके कपडेकी बेग लेकर आगइ.. ओर सृती धीरे से चलते सबके साथ कारकी ओर जाने लगी.. सब लोग उनको बहार तक छोडने आगये.. तब..

चंदा : सृती घर पहोंचतेही फोन करदेना.. ओर भुमी मौसीको हमारा प्रणाम कहेना..

सृती : (सरमाते हसते) जी बडीदीदी.. हें..हें..हें.. चलो सबको बाय..

लखन : (हसते) भाभी.. अब दुबारा वापस कब आओगी..?

सृती : (सरमाते हसते) देवरजी.. अबतो यही मेरा ससुराल हेतो मेतो कभीभी आजा सकती हु.. बस हमारी देवरानी कोइ अच्छीसी खबर सुनादे.. तो फीर मे जल्दी आजाउगी.. हें..हें..हें..

कहातो सब लताकी ओर देखके हसने लगे.. तब लता बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुके पीछे जाकर मुस्कुराती रही.. फीर सृती सबको गले मीलकर कारमे देवायतके पास बैठ गइ ओर देवायतने कारको धिरेनके गांवकी ओर मोड दी.. तब सृती देवायतके बाजुको थामते उनके कंधेपे सर रखके बाते करने लगी..

सृती : (हसते) देवु.. थेन्क्स.. फोर ब्युटीफुल नाइट.. आज आपने मुजे सही मायनेमे ओरत होनेका सुख दीया.. मे हमारी इस नाइटको कभी नही भुलुगी.. आज पता चला सुहागरात कीसे कहेते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (कार चलाते सरको चुमते) हंम.. चलो.. अबतो मे वहा आता जाता रहुगा.. सृती हमारे गांवमे हम अ‍ेक लेडीसकी होस्पीटल बनवा रहे हे..

सृती : हां देवु.. मुजे अभी सुबह मंजुने सब बताया.. अगर मे आपसे दुर नही रेह पाइतो मे खुदही इधर चल आउगी.. वरना कुछ लेडी डोक्टरका इन्तजाम करदुगी... क्या यही कहेना चाहते थेनां आप..?

देवायत : (हसते) हंम.. सृती.. वो होस्पीटल सुधीर ओर नीशाभाभी संम्हाल लेगे अगर तुम आजाओगी तो सुधीर जनरल होस्पीटल सम्हाल लेगा.. नीशाभाभी भी कुछ आपकी हेल्प कर देगी.. सब होस्पीटलका मेइन्टेन वोही देख लेगी.. क्या कहेती हो तुम..?

सृती : जानु तबतो सोनेपे सुहागा.. अगर अ‍ैसा होता हेतो मे दोनो जगाह सम्हाल सकती हु.. आप होस्पीटलके बारेमे आगे बढो.. मे आपके साथ हु..

दोनोही बाते करते धिरेनके घर चले गये.. तबतक धिरेन भी सहेरकी ओर अपनी जोबपे चला गयाथा.. तो घरपे पुनम अ‍ेब बहु की तराह सारी पहेनकर मांगमे सींदुरके साथ कीचनमे दयाकी मदद कर रहीथी.. थी तो नीर्मला भुमीका ओर राजीव होलमे बैठकर बाते कर रहेथे.. तभी देवायत ओर सृतीभी अंदर आगये.. ओर सबके साथ होलमे बेठ गये.. तो भुमी सृतीको अ‍ैसे थोडा लंगडाते चलते देखकर मनमे बहुतही खुस होगइ..

भुमीको अंदेसा हो गयाकी दोनोने पुरी रात प्यार कीया हे.. क्युकी देवायतने उनकीभी अ‍ैसी हालत करदीथी.. ओर आज सृतीभी बहुतही सुंदर दीख रहीथी उसनेभी पुनोकी तराह पैरमे पायइ मांगमे सींदुर ओर देवायतका गीफ्ट दीया हुआ डायमंड नेकलेस पहेना हुआ था.. सृती आज अ‍ेक सादीसुधा परीपकव ओरत जैसी दीख रहीथी.. तभी दया दोनोके लीये पानी लेकर आगइ.. ओर अंदर जाके चाइ बनाने जाने लगीतो..

देवायत : दया चाइ मत बनाना.. अभी घरपे चाइ नास्ता करकेही आये हे.. (भुमीका की ओर देखते) चलो.. आंटी.. सब रेडी हे.. तो हम चलते हे..

पुनम : (बहार आते सरमाते धीरेसे) भाइ.. थोडी देर बैठोना.. अगर चाइ नही पीनी तो कुछ ओर बना दुगी..

सृती : (खडी होकर पुनमके पास जाते) पुनोदीदी चलो फटाफट कुछ बंडा बनालो.. फीर हमे नीकलनाभी हे..

पुनम : (हसते सरारतसे धीरेसे) चलीये भाभी.. आइअ‍े.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते अ‍ेक मुका मारते धीरेसे कानमे) कमीनी.. भाभी नही हु तेरी.. सोतन हु.. चल..

पुनम : (कीचनमे जाते हसते) भाभी.. सबके सामनेतो आपको भाभी ही कहुगीनां.. क्या सुहागरातमे मजे करलीये..? हें..हें..हें..

सृती : (भीरेसे हग करते) बहोत.. पुनोदीदी.. मेरी जींदगीमे इतना मजा कभी नही आया.. आपके भाइने मेरी अ‍ेक अ‍ेक नब्सको ढीली करदी.. अभीभी अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहा हे.. जालीम कीतना जोसमे करते थे.. मेने मंजुसे सुना हे.. आपकी भी सुहागरातमे अ‍ैसी हालत होगइ थी..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. भाभी.. बी केरफुल.. इस बारेमे कीसी ओरको पता नही चलना चाहीये.. आगे जाकर मुजे ओर आपकोही भाइको सम्हालना हे.. मुजे आपसे बहुत सारी बाते करनी हे.. लेकीन अभी नही..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. हमे अ‍ैसे मीलनेके बहोत मौके मीलेगे.. तब बात करेगे.. अभीतो चलो फटाफट ठंडा बनादो.. हमे नीकलनाभी हे.. अबतो आप मेरी ननंदके साथ मेरी सौतनभी होगइ हे.. हें..हें..हें..

दोनोही कीचनमे खडी होकर धीरेसे बाते कर रहीथी.. फीर दोनोने मीलकर फटाफट दुध कोल्ड्रंीक बनालीया.. ओर सबके लीये कोलड्रीन्क्स लेकर दोनोही बहार आगइ ओर सबको ठंडा देते खुदभी लेकर वही बैठ गइ.. तब..

पुनम : (हसते) पापा.. आप ओर मम्मी इधरही रुक जाइअ‍े भैया वापसीमे भुमीमौसीको छोडके आपका सामान लेकर आजायेगे.. यहीसेतो चलना हे.. फीर इधर लंच करके थोडा साम तक आराम करके नीकल जाना.. भाइ अभी इनको छोडके आजायेगे.. ओर भाइ.. आप भी इधर आकर लंच करना.. हम आपका वेइट करते हे..

नीर्मला : हां भुमी.. पुनोबेटी सही केह रही हे.. हमे खामखा उधर आना जाना.. यही बेटर हे.. देवु हमारा सामन लेकर आजायेगा.. तुम इनको हमारा सामान देदेना.. वही उपरके रुममे हमारी बेग पडी हे..

भुमीका : (हसते) अरे चलोनां दोनो अभी दो तीन दीन वही ठहेरना.. फीर देवु आपको लेने आजायेगा..

राजीव : नही भुमी.. अब घरको छोडा काफी वक्त हो गया हे.. वहा जाकर सब सेट भीतो करना पडेगा.. ओर भावुभी साथ चल रही हे.. तो सोचा मकानका रजीस्टरका कामभी हो जायेगा.. आपही चले जाओ.. अब हम कभी फीर आयेगे.. वरना नीमुतो तुजे मीलती ही रहेती हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) ठीक हे भैया.. चलो सृतीको भी क्लीनीकपे जाना हे.. वरना मेतो रुक जाती.. चलो तो हम चलते हे..

कहेते सबने कोल्ड्रींक पीलीया तब भुमीका खडी होगइ ओर नीर्मलाको गले मीलकर राजीवको गले मीली तब उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर राजीवने सगुनके तौरपे भुमीकाको ओर सृतीको पैसे दीये.. तो दोनोही मना करने लग.. लेकीन नीर्मलाने उसे जबरदस्ती देदीये.. तब पुनम सृतीकी बेग अपने हाथोमे ले लेती हे ओर सबलोग बहार आ गये.. तब भुमीका कारमे पीछे बैठ गइ ओर सृती देवायतके पास बैठ गइ.. फीर सबने अ‍ेक दुसरेको हाथ हीलाके बाय कीया ओर कार सहेरकी ओर दोडने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३६

कहेते सबने कोल्ड्रींक पीलीया तब भुमीका खडी होगइ ओर नीर्मलाको गले मीलकर राजीवको गले मीली तब उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर राजीवने सगुनके तौरपे भुमीकाको ओर सृतीको पैसे दीये.. तो दोनोही मना करने लग.. लेकीन नीर्मलाने उसे जबरदस्ती देदीये.. तब पुनम सृतीकी बेग अपने हाथोमे ले लेती हे ओर सबलोग बहार आगये.. तब भुमीका कारमे पीछे बैठ गइ ओर सृती देवायतके पास बैठ गइ.. फीर सबने अ‍ेक दुसरेको हाथ हीलाके बाय कीया ओर कार सहेरकी ओर दोडने लगी....अब आगे

भुमी पीछे बैठकर सेन्टर मीररसे देवायतकी ओर देखती रही.. तब सृती पुरी रात जागने ओर थकानकी वजहसे आंख बंध करके बैठीथी.. तब नाजाने कब उसे नींद आगइ.. तभी देवायतका ध्यानभी सृतीकी ओर चला गया तो भुमीकी ओर पीछे देखकर सृतीकी ओर इसारा करते हसने लगा.. तो भुमीकाभी देवायतकी ओर हसके अपनी आंख मारते हसने लगती हे.. ओर मुह उनके कानके पास लेजाते मीलनेके लीये कहेती हे..

भुमीका : (धीरेसे कानमे) देवु.. बेचारी बहुत थकी हुइ लगती हे.. जातेही सो जायेगी.. तो हमारे पास मीलनेका पुरा मौका हे.. आप नीचे मेरे रुममे आजाना..

देवायत : (धीरेसे) हंम.. पहेले वहा पहोचनेतो दो.. फीर देखते हे..

आखीर तीनो सहेर पहोंच गये.. तब भुमीका कारसे उतरतेही बंगलेका ताला खोलने लगी.. ओर देवायतने सृतीको हीलाते जगा दीया.. तब सृतीको पता चलाकी वो घरपे आगइ हे..ओर वो सरमाके हसने लगी ओर देवुको बाजुमे मुका मारते कारसे उतर गइ.. फीर तीनोही अंदर चले गये.. देवायत ओर सृती वही सोफेपे बैठ गये.. तबभी सृती नींदमे थकी हुइ थी.. तो भुमीने देवायतको पानी पीलाया.. तब..

सृती : मोम.. आप देवुके लीये बुछ बना देना मुजे बहुत जोरोकी नींद आरही हे.. मे उपर जाके आराम करती हु.. देवु आइअ‍े मुजे उपर छोड दीजीये.. फीर लंच करके जाना.. मुजे क्लीनीकपे फोनभी करना हे.. की मे सामको आउगी.. चलो..

देवायत : (हसते) चलो तुजे छोडतो दुगा.. लेकीन मुजे जाना हे.. पुनोने लंच बनालीया होगा.. ओर उपरसे पापाकी बेगभीतो लेनी हे..

भुमीका : (हसते) देवु.. आप बेग लेकर आजाओ.. फीर चाइ पीकर जाना मे अभी फटाफट बनालुगी..

सृती : (हसते) हां देवु.. आप चाइ पीकर जाना.. सोरी.. आज आपको अ‍ैसेही वापस भेज रही हु..

देवायत : (हसते) कोइ बात नही.. तुम आराम करलो.. हम कभी फुरसतमे बैठेगे.. चलो..

कहेते देवायतने वहीसे सृतीको गोदमे उठालीया.. तो सृती भुमीकी हाजरीसे बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर हसते हुअ‍े देवायतको सीनेपे मुका मारने लगी.. तब भुमीकाभी हसने लगी.. ओर देवायत सृतीको उपरकी मंजीलपे उनके रुममे लेगया.. ओर उसे बेडपे लीटा दीया तब सृतीने देवायतका हाथ खीचके अपने उपर गीरा दीया.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तब दोनोके होंठ मील गये.. ओर सृती मदहोस होकर देवायतको चुमती रही..

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सृती : (कामुक आवाजमे) सोरी देवु.. अभी हम प्यार नही कर सकते.. वरना आपसे अलग होनेका जी नही चाहता.. अब वापस कब आओगे..? मे साम तकतो ठीक होजाओगी.. रातमे बहुत मजा आया.. थेन्क्स.. फोर ब्युटीफुल नाइट.. इस रातको मे कभी नही भुलुगी.. थेन्क्स अगेइन..

देवायत : (होंठ चुमते बुब्स मसलते) सृती.. चल मे चलता हु.. वरना मे कंट्रोल नही कर पाउगा.. ओर अभी तेरी हालतभी ठीक नही हे.. हम दोनो बहुतही जल्द मीलेगे.. बता पापाकी बेग कहा हे..?

सृती : (होंठ चुमते) जानु बाजुके रुममे होगी.. आप लेलो.. ओर हां प्लीज.. थोडा दरवाजा बंध करदेना.. बहुत नींद आ रही हे.. आपनेतो मुजे पुरी नीचोडली.. तो बहुत थक गइ हु.. सोरी जानु.. आज आपको अ‍ैसेही जाना पडेगा.. तो मुजे अच्छा नही लगता.. ओर हां आप सादीके बाद पहेली बार आये हो तो कमसे कम चाइ पीके तो जाना..

देवायत : (खडा होते गाल चुमते) हंम.. चल मे चलता हु.. चाइ पीकर जाता हु.. तुम सो जाओ.. बाय..

कहेते देवायतने अ‍ेक बार फीर सृतीके होंठ चुमलीये.. ओर दरवाजा बंध करके बाजुके रुमसे बेग लेकर नीचे आगया.. तब होलमे कोइ नही था.. ओर मेइन गेइटभी बंध था.. तब देवायत समज गया.. ओर वो बेगको वही रखके भुमीकाके रुमकी ओर चला गया.. अंदर जाकर देखा तो भुमी देवायतको देखतेही बहुतही सरमाइ.. ओर पलटके देवायतकी ओर दौड पडी.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. तब भुमीका देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर उनकी ओर देखते..

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भुमीका : (होंठ चुमते) देवु.. आइ लव यु.. आज मे बहोत खुस हु.. थेन्क्स.. आपने सृतीको अपनालीया.. अब हम मां बेटी दोनोही आपकी बीवीया होगइ.. जानु.. चलोना हम नही मीले काफी दिन होगये हे.. क्या सृती सो गइ..?

देवायत : (होंठ चुमते) हां बहुत थक गइ थी.. हमने पुरी रात प्यार कीया.. देखी नही उनकी हालत..? हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाके हसते) हां.. देखा मेने.. आपनेतो उनकी चालही बदलदी.. कैसी लगी मेरी सृती..? मस्त हेनां..?

देवायत : (हसते) बहुतही मस्त.. बीलकुल तेरी तराह.. वो अभी भी वर्जीन थी.. कल उनको ओरत बना दीया..

भुमीका : जानु चलोना अ‍ेक बार प्यार करलो मुजे.. फीर आपको जानाभी हे.. मे अभी फटाफट चाइ बना लुगी.. कास आप साम तक इधरही रुकते तो हम दोनो खुब मजे करते.. आप इधर बैठो.. मे सृतीके रुमको बहारसे लोक करके आती हु.. अभी कोइ रीस्क नही लेना..

तब कुछही देरमे भुमीका सृतीका रुम बहारसेही धीरेसे लोक करके नीचे आगइ.. फीर आतेही दोनो नंगे होजाते हे.. ओर बेडपे अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते प्यार करने लगे.. दोनोही बहेकने लगे.. तब देवायत भुमीके उपर चडके उनके बुब्स मसलते चुस रहाथा तो भुमीका देवायतका सर सहेलाते धीरेसे सीसकारीया करते अपना मुह इधर उधर करते छटपटा रहीथी.. ओर देवायतने धीरेसे अपना तगडा लंड भुमीकी चुतमे उतार दीया तब भुमीकाने राहतकी सांसली.. ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी..

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देवायतने हाथके बल उचा होकर भुमीकाकी जबरदस्च चुदाइ करली.. उनको दो बार जडाके खुदभी उनकी चुतको भरते हुअ‍े जड गया.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लेते हे.. ओर जब सांत हो गये तब भुमीका देवायतकी पीठ सहेलाती रही.. देवायतने भुमीको अ‍ेकही बारमे संतुस्ट करदीयाथा.. तभी..

भुमीका : (सर सहेलाते धीरेसे) देवु.. अब मुजे क्या करना हे..? हमारा बच्चा मेरे पेटमे हे.. आप कुछ कीजीये.. वरना ये बात हम ज्यादा दिन सृतीसे नही छीपा सकते.. मे हमारे बच्चेको जन्म देना चाहती हु..

देवायत : (होंठ चुमते) भुमी.. मंजु सृतीसे बात करलेगी.. अगर उनको पता चल जायेतो तुम बिन्दास्त हमारे रीस्तेके बारेमे उसे सबकुछ बता देना.. अगर वो कोइ हंगामा करे तो तुम उनको कुछ कहे बगैर नीमुके घर चली जाना.. बाकी मे ओर मंजु सब सम्हाल लेगे..

भुमीका : (हसते) हंम.. मतलब आपके दिमागमे कोइ प्लान हे.. ठीक हे जानु मै वैसाही करुगी.. लेकीन मेरी वजहसे आप दोनोका रीलेशन बीगड गयातो..? जानु वो मे कतइ नही चाहती की आप दोनोके बीच रीलेशन बीगड जाये..

देवायत : भुमी.. अ‍ैसा कुछभी नही होगा जो तुम सोच रही हो.. हो सकताहे कुछ दिनके लिये वो मुजसे या तुमसे नाराज रहे.. लेकीन अब सृती ज्यादा दिन मुजसे दुर नही रेह पायेगी.. तब मंजु उसे सब समजा देगी.. तो हम दोनोके रीलेशनको वो अ‍ेक्सेप्ट करलेगी.. मुजे पुरा यकीन हे.. मंजु उसे समजालेगी..

भुमीका : (हसते चुमते) हंम.. ठीक हे जानु.. अब चलीये.. उपरसे हटीये मे आपके लीये चाइ बना देती हु.. आपको जानाभी हे.. वहा सब आपका इन्तजार करते होगे..

तब देवायत भुमीके उपरसे उतर जाता हे.. तो भुमी फटाफट बेडपे बैठकर अपनी चुतको अपने नीकरसे साफ करने लगी.. ओर बेडसे उतरके बाथरुममे चली गइ.. फीर बहार आइतो देवायतने उसे कपडे नही पहेनने दीये ओर अ‍ैसेही चाइ बनानेको कहा तो वो बहुतही सरमा गइ.. तभी देवायत उनको गोदमे उठाकर कीचनमे चला गया.. तो भुमीका बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराती रही.. तब देवायतने उसे नीचे उतार दीया.. तब..

भुमीका : (कातील नजरोसे देखते) जानु.. लगता हे अभी आपका दिल नही भरा.. देखना बाबा कही सृती नीचे ना चली आये..

देवायत : (हसते) हंम.. नही आयेगी.. बेचारी थकके सो गइ हे.. अबतो सामकोही नीचे आयेगी.. ओर तुमने उनके रुमको लोकतो कीया हे.. तो फीर क्या प्रोबलेम..?

भुमीका : (हसते सरमाते) देवु.. तो साम तक रुक जाइअ‍ेनां.. कीतने दिनोके बादतो हमे अकेले रहेनेका मौका मीला हे.. फीरतो मेरा पेट नीकलेगातो हम अ‍ैसे प्यार नही कर सकते..

देवायत : (हसते) नही.. अब तो मे इधर मेरी बीवीको मीलने आता जाता रहुगा तो हमे अ‍ैसे बहुत मौके मीलेगे.. चल आजा मुजे अ‍ेक बार ओर करना हे.. फीर मस्त चाइ पीलदे.. फीर नीकलता हु..

भुमीका : (सर्मसार होते हसते) जानु आप बहुत नोटी हो.. अभीतो कीया.. क्या अ‍ेक बारमे दिल नही भरा..?

देवायत : नही भुमी.. तु ओर मंजु मेरी अ‍ैसी बीवीया हो तुम दोनोसे दिल ही नही भरता.. ओर वैसेभी मुजे दो बार करनेकी आदत हे.. अभीतो सीर्फ अ‍ेकही बार कीया हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हंम.. आप बहुत रोमेन्टीक हो.. आपको देखतेही मुजे कुछ होने लगता हे.. पता नही मेरी सृती आपसे कैसे दुर रहे पायेगी..

देवायत : (मुस्कुराते) इसीलीये केह रहाथा.. की मेरी मंजु उसे सम्हाल लेगी.. तु उनकी फीकर मत कर..

ओर देवायतने वही भुमीको नंगीही अपनी बाहोमे भीचलीया.. वो खुदभी अभी नंगाथा.. भुमीको वही घुमाकर खडी करके कीचनके टेबलपे जुका देता हे.. ओर भुमीके पीछे जाकर पीछेसे ही उनकी चुतमे लंड घुसाके भुमीको धनाधन चोदने लगता हे.. तब भुमीका भी मदहोसीमे बडबडाते चुदाइके नसेमे मजेसे चुदवाने लगी.. तब वहाभी देवायतने भुमीको अ‍ेक बार जडाके उनको वापस जोरोसे चोदने लगा..

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तब अ‍ेक बार फीर भुमीकी हालत पतली होने लगी.. ओर आखीर देवायत उनकी चुतमे जडतक लंड घुसाके जडते लगा.. ओर जडतेही लंड बहार नीकालता हे.. तब भुमी थोडी देर अ‍ैसेही बेसुध्ध जैसी हालतमे पडी रही.. फीर कुछ देरके बाद बडीही मुस्कीलसे खडी होपाइ.. तब उनकी चुतसे दोनोका कामरस पैरोसे होता फर्सपे गीरने लगा.. ओर भुमीकाने जटसे वही पडे कपडेसे अ‍ेक पैर उठाकर चुतको फीर फर्सपे पडे अपने विर्यको साफ करलीया.. ओर जुठे गुस्सेसे देवायतको सीनेमे मुके मारते हसने लगी..

भुमीका : (सरमाते हसते) आप बहुत कमीने हो.. कोइ इतनी जोरोसे करता हे..? आखीर अपने मनकी करली.. बाबा मेरी तो हालत खराब करदी आपने.. अब जाइअ‍े बहार बैठीये मुजे ओर कोइ जोखीम नही लेना.. मे चाइ लेकर आती हु.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही रुममे जाकर अपने कपडे पहेन लेते हे.. ओर देवायत वही भुमीको अपनी बाहोमे भरके होंठ चुमके बहार आगया.. तब भुमीका सरमाके हसते देवायतकी बाहोसे छुट गइ.. ओर कीचनमे जाकर चाइ बनाने लगी.. फीर कुछही देरमे चाइ बन गइ तो भुमी चाइ लेकर बहार आगइ.. ओर दोनोने साथमे चाइ पीली तब देवायत जानेके लीये खडा होगया तब अ‍ेक बार फीर भुमीका देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमलीया.. ओर देवायत बेग लेकर वहासे नीकल गया..

तब भुमीका अंदर जाके सृतीका दरवाजा धीरेसे खोलकर नीचे अपने रुममे चली गइ.. ओर मुस्कुराते देवायतके साथ मीलनको याद करके आराम करने लगी.. तब देवायत सहेरसे नीकलकर सीधाही जंगलकी ओर कार मोडके कबीलेकी ओर जाने लगा.. तो आधेही धंटेके बाद वो कबीलेमे बीच कार खडी करके रुक गया.. तो सभी कबीले वाले खुस होकर बहार आने लगे.. ओर देवायतको जुकके अभीवादन करने लगे.. तभी वहा मालती हरीया ओर उनकी नइ बीवीभी आगये ओर वोभी देवायतको देखकर बहुत खुस होगये..

हरीया : (हसते) आइअ‍े मालीक.. देखो हम अभी नीकलही रहेथे की आप आगये.. आइअ‍े.. आइअ‍े..

देवायत : (मुस्कुराते) हरीया क्या होगइ सादी..?

मालती : (सरमाते हसते) जी मालीक.. मीलीये.. ये हे मेरी नइ सौतन रेणु.. हें..हें..हें..

रेणु : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हाथ जोडते हसते) नमस्ते मालीक.. आइअ‍े..

देवायत : (हाथ जोडते हसते) जी.. नमस्ते.. नमस्ते.. कहीये होगइ सादी..? कोइ तकलीफ तो नही हुइ..?

हरीया : (हसते) जी नही मालीक.. सब आपकी महेरबानीसे अच्छेसे नीपट गया.. अब कोइ परेसानी नही हे..

मालती : (सरमाते धीरेसे) मालीक.. वो जमीला.. आपको देखकर अंदर चली गइ.. लगताहे आपसे नाराज हे.. आप अ‍ेक बार जाकर उनसे मीललो..

देवायत : (सबकी ओर देखते जोरोसे) युनो सब.. बस मे इसीलीये आया हु.. अब हरीया ओर उनकी दोनो बीवीया.. हमारे खेतोपे रहेगी.. तो यहाके लीये कबीलेके मुखीयाके तौरपे मे जमीलाको जीम्वेवारी देता हु.. ओर वो आजसे मेरी रानीके रुपमे यहाका ध्यान रखेगी.. इस बारेमे कीसीको कुछ कहेना हे..?

अ‍ेक आदमी : माइ बाप.. ये आप क्या केह रहे हे..? क्या जमीला आपकी रानी होगइ हे..?

हरीया : (हसते) हां काका.. जमीलातो कबसे हमारे मालीककी बीवी होगइ हे..

अ‍ेक बुढी औरत : माइ बाप.. तो फीर अभी उनके पेटमे जो बच्चा हे वो..?

देवायत : (हसते) हां माइ.. वो मेरा ओर जमीलाका बच्चा हे.. कहो इसके लीये मुजे क्या करना हे..?

बुढी ओरत : (हसते) माइ बाप.. आपतो जानते हे.. आपको हमारे रीती रीवाजके हीसाबसे हमारे मंदिरमे जाकर जमीलासे सादी करनी पडेगी.. फीर उसी पुरी रात उत्सव होगा.. आपकी ओरसे सबको भोजन होगा.. ओर आपको जमीलाके साथ उनकी कुटीयापे रात बीतानी पडेगी.. तभी हमारा रीवाज संपन होगा.. आज ये हरीयाभी अपनी नइ बीवीके साथ उनकी कुटीया पे था..

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देवायत : (हसते) जी माइ.. मे तैयार हु.. कहो कब सादी करनी हे..? मे अ‍ेक हप्तेके बाद यहा आउगा तब आप हमारी सादी करवा देना.. मे नही चाहता जमीलाका बच्चा नाजायज कहेलाये.. बोलो.. ओर कुछ..?

अ‍ेक बुढा आदमी : माइ बाप.. आपकी दयासे यहा अब कोइ परेसानी तो नही लेकीन अब हम चाहते हे.. यहा.. कोइ गरुमाइ या कोइ गरुजी आजाये.. हमे अपने रीती रीवाज ओर पुजापाठमे बहुत तकलीफ होती हे.. आपतो जाने हे पहेले यहा अ‍ेक बुढी गुरुमाइ थी.. तो वोतो चल बसी.. तबसे यहा कोइ नही हे.. तो हम सब बाबाके आश्रमपे जाकर हमारा कार्य करते हे..

बुढी ओरत : बेटा इसके लीये हमने आश्रमपे जाकर बाबाको भी कइ बार कहा.. लेकीन उसने आपको मीलनेके लीये कहा.. वो केह रहेथे वहा कोइ बडी शक्ति आने वाली हे.. वोही हमारी गरुमाइ होगी.. ओर वोही आपके पोतेकी रानी होगी.. अ‍ैसा वो कुछ बता रहेथे.. इसीलीये हम आपको सब बता रहे हे.. अब आपही कोइ इन्तजाम करदो..

देवायत : (हसते) ठीक हे माइ.. मे इस बारेमे बाबासे मीलकर बात करलुगा.. फीर वो कहे उसे हम यहा लेआयेगे..

बुढी ओरत : (हसते) ठीक हे माइ बाप.. अब जाइअ‍े.. आपकी महारानीको मील लीजीये.. बेचारी कइ दिनोसे आपका इन्तजार कर रही हे.. ओर आपके नामकी माला जपती हे.. हें..हें..हें..

मालती : (सरमाते हसते) आइअ‍े मालीक.. मे आपको ले चलती हु..

देवायत : (कारसे उतरते) हरीया.. अगर तुम लोग नीकल रहे हो तो मेरे साथ --गांव तक चलो वहीसे कीसीमे चले जाना.. मेतो सामको आउगा.. मेरे साथ मेरे सास ससुर हे..

हरीया : (खुस होते) जी मालीक.. तब तो बडी महेरबानी आपकी.. हें..हें..हें..

कहेते देवायत मालतीके पीछे जाने लगा.. ओर उस कुटीयाके पास आ गया.. जहा उसने कइ बार जमीलाको जमकर चोदा था.. तब जमीलाके बापु सरपंच थे.. ओर देवायत कोलेजमे था तब जमीलाभी जवानीमे कदम रख चुकी थी.. ओर देवायतके बार बार कबीलेपे आनेसे उनकी ओर आकर्सीत होकर अपना दिल देवायतको दे बैठी थी.. तबसे जमीलाने अपने तनको कीसीको छुने तक नही दीया..

ओर अ‍ेक दिन उनके बापु चल बसे.. तबसे वो अकेली होगइ थी.. ओर देवायतको मीलती रही.. ओर आखीर अ‍ेक दिन यही कुटीयामे उसने देवायतको अपना कौमार्य सोंप दीया.. उस रात सुबह तक दोनो प्यार करते रहे.. देवायतने पुरी रातमे जमीलाको चार बार चोद लीया था.. तबसे दोनोके बीच फीजीकल रीलेशन कायम होगये थे.. ओर अ‍ेक दिन देवायतके कहेने पे उनके खेतोपे काम करने आगइ..

उसी दिन देवायतने अपनी ओफीसके रुममे जमीलाको जबरदस्त तरीकेसे चोद लीया.. ओर उसी दिन जमीलाका सपना देवायतसे प्रेगनेन्ट होकर पुरा होगया.. फीर जमीला यहा कबीलेमे वापस आगइ.. ओर इस बारेमे कीसीको कुछ नही कहा.. कबीलेमे सबके ताने सुनती रही.. लेकीन इस बारेमे सीर्फ मालती ओर हरीया ही जानते थे.. ओर उन दोनोने कबीले वालोको जमीलाको कुछभी ना कहेनेको कहा..

मालती : (सरमाते हसते) जाइअ‍े मालीक.. अंदर जाके अपनी रानीको मील लीजीये.. मे यहा बहारही खडी हु.. ताकी इधर कोइ ना आजाये.. उसे अच्छी तराह मील लीजीये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) मालती.. तुम चाहोतो तुमभी साथ अंदर आ सकती हो.. मे तुम दोनोको मील लुगा..

मालती : (सर्मसार होते हसते धीरेसे) नही मालीक.. इधर नही.. हम आपके रुममेही मीलेगे.. वरना यहा सबको पता चल जायेगा तो तमासा होगा.. जाइअ‍े..

तब देवायत कुटीयामे चला गया तो जमीला.. उनके इन्तजारमे अपनी खटीया बैठी थी.. जैसेही देवायत अंदर आगया तो जमीला फौरन खडी होगइ.. ओर जटसे आकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर फुटफुटके रोने लगी.. तब देवायतने उसे बाहोमे भीच लीया ओर उनके सरको सहेलाते बडी मुस्कीलसे जमीलाको सांत कीया.. ओर उनका चहेरा हथेलीमे थामके उनकी आंखोमे देखने लगा.. तब जमीलाने सरमसे अपनी नजरे जुकाली..

देवायत : (सरको चुमते) बहुत प्यार करती हे मुजे..? हंम.. क्या मेरी रानी बनोगी..?

जमीला : (सरमाते धीरेसे) मेतो कबसे अपने आपको आपको सोंप चुकी हु.. आप बडे लोग हे.. तो मे मुजे अपनानेके लीये आपको कैसे केह सकती हु..? बस अब आपकी नीशानी मेरे पास आगइ हे वोही मेरे लीये बहुत हे.. मे इसीके सहारे पुरी जींदगी बीता दुगी.. भलेही मुजे लोगोके ताने सुनने पडे.. मुजे कीसीकी परवाह नही..

देवायत : नही जमीला.. मे हमारे बच्चेको नाजायज नही कहने दुगा.. इसे मे अपना नाम दुगा.. तुमसे सादी भी करुगा.. बस सीर्फ अ‍ेक हप्ता इन्तजार करले.. मे हमारे लोगोसे छुपकर तुमसे सादी करना चाहता हु.. फीर तुम इधरही मेरी बीवी बनके रहेगी..

जमीला : (खुसीसे हसते) जी.. मे समज गइ.. क्या आप मुजे सचमे सादी करेगे..?

देवायत : (हसते) हंम.. वो भी इस कबीलेके रीवाजके हीसाबसे.. फीर यहा तुम मेरी रानी बनकर रहोगी.. मेने तुजे यहा मेरी रानी बनाकर कबीलेकी सरदार बनाइ हे.. अभी अभी मे सबको यही कहेकर आया हु.. ओर यहा सबको केह दीयाकी ये बच्चा हम दोनोका हे.. अब तुजे इस बारेमे कोइ कुछ नही कहेगा..

जमीला : (सरमाते हसते हां मे गरदन हीलाते) जी.. लेकीन यहातो हरीयाभाइ कबीले के सरदार हे.. वो ओर मालतीभाभी मेरा बहुत खयाल रखते हे..

देवायत : (होंठ चुमते) हां.. लेकीन अब मे हरीया ओर उनकी दोनो बीवीओको हमेसाके लीये हमारे खेतोपे ले जा रहा हु.. क्युकी अब हमारा कारोबार मे बढा रहा हु.. मेरे छोटेभाइको सहेर भेज रहा हु.. उनकी बीवीके साथ.. तो अबसे तुही इस कबीलेकी सरदार हे..

जमीला : (मुस्कुराते) जी.. लेकीन आपको मुजे मीलनेके लीये यहा आना पडेगा.. मे केह देती हु..

देवायत : जमीला.. तुम अ‍ेक बार मेरी नइ बीवीको सहेरमे जाकर दीखादे मे उसे फोन कर दुगा.. हमारे बच्चेको कोइ तकलीफ ना हो.. वो तुजे दवाइ दे देगी..

जमीला : (सरमाते हसते) जी.. जब मालती दीदी आइ तब हम दोनोही सहेर जाकर दीखाकर आइ हे.. कोइ तकलीफ नही हे.. बस आप आते रहीये.. मुजे अच्छा लगेगा..

देवायत : (होंठ चुमते बुब्सपे हाथ रखते) बस.. सीर्फ अ‍ेक हप्ता.. फीर उसी रात फीर हमारी सुहागरात होगी.. उस दिन पुरी रात हम दोनोको जागना हे.. तब हम दोनो खुब प्यार करेगे.. तो अब मे चलु..?

जमीला : (सर्मसार होते धीरेसे) जाना हे..? बस.. अ‍ैसेही..? हंम.. अ‍ेक बार अपनी इस रानीको नही मीलोगे..? कीतने दिन होगये.. हम नही मीले.. बस अ‍ेक बार.. फीर हम सुहागरातमे मीलेगे..

कहातो देवायत उसे बाहोमे भरके खडीयापे लेगया.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठ चुमते बहेकने लगे.. तब कुछही देरके बाद जमीला मदहोस होते.. आंधी आख चडाते पुरे नसे जैसी हालतमे देवायतके नीचे लेटकर अपनी कमर उछाल उछालकर देवायतसे चुदवा रहीथी.. ओर देवायतभी हाथके बल जोरोसे कमर हीलाते जमीलाकी जमकर चुदाइ कर रहाथा.. तब मालती बहार खडी रहेते छुप छुपकर अंदरका नजारा देख लेती थी..

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ओर अपनी चुत सहेलाते वोभी गरम होगइ थी.. इसीबीच देवायतने जमीलाको दो बार जडा दीया था.. तब अ‍ेक बार फीर जमीलाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर जडने लगी.. तब देवायतभी अकड गया.. ओर पुरा लंड जमीलाकी चुतमे घुसाकर रुक रुक कर जनीलाके होठ लीपलोक करते अपने पानीसे जमीलाकी चुतको भरने लगा.. ओर कुछही देरमे दोनो सांत होगये..

तब जमीला खुब सरमाइ.. फीर दोनोने अपने लंड चुतको साफ करके अपने अपने कपडे पहनलीये.. तो अ‍ेक बार फीर जमीला देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके होंठ चुम लीये.. फीर देवायत उसे अ‍ेक हप्तेके बार मीलनेको कहेकर बहार आगया तब जमीला उसे कुटीयाकी बहार तक छोडने आगइ.. तब उसने वहा मालतीको देखा तो उसे दखतेही जो सरमाकर हसने लगी.. ओर देवायत कारके पास आगया..

देवायत : (हसते) चलो हरीया.. आना हे क्या..?

हरीया : (अपनी बेग लेकर) जी मालीक हमतो तैयार ही बैठे हे.. हम नीकलने ही वालेथे की आप आगये.. चलीये.. चलो मालती चलो रेणु.. तुम दोनो पीछे बैठ जाओ.. हें..हें..हें..

तब मालती ओर रेणु दोनोही सरमाते पीछे बैठ गइ.. ओर हरीया खुस होकर आगे देवायतके पास बैठ गया तो गांव वाले उनको देखकर हसने लगे.. ओर देवायतने कारको गांवकी ओर जानेदी.. तब हरीया ओर मालती देवायतको सादीकी बाते करते रहे.. तब रेणु बहुतही सरमा रहीथी ओर मुस्कुरा रही थी.. अ‍ैसेही देवायत धिरेनके गांवके पास आगया.. तब वही रोडपे अ‍ेक बस खडी थी उसमेसे कुछ पेसेन्जर उतर रहेथे..

तो देवायतने वही आगे अपनी कार रोक दी.. तो हरीया मालती ओर रेणु फटाफट उतरके बसमे बैठ गये.. ओर उनके बैठतेही बस गांवकी ओर चलदी.. तब मालती हसते हुअ‍े देवायतके सामने खीडकीसे हाथ हीलाने लगी.. ओर देवायतने हसते हुअ‍े कारको धिरेनके घरकी ओर जाने दी.. ओर घरके सामने पार्क करदी.. फीर वो उतरके बेग लेकर घरके अंदर चला गया.. तो सब लोग उनकाही इन्तजार कर रहे थे.. तब..

राजीज : (हसते) क्यु भाइ.. इतनी देर होगइ..?

देवायत : (मुस्कुराते) जी.. वो थोडा जल्दी वहासे नीकल गयाथा तो कबीलेकी ओर चला गया था.. वहा कुछ काम था तो वहीसे आ रहा हु.. तो थोडी देर होगइ..

नीर्मला : (हसते) पुनम बेटा देवु आगया हे.. चलो फटाफट खाना नीकालो पेटमे चुहे दोड रहे हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (कीचनसे) जी.. मम्मीजी.. अभी लेआइ.. सब रेडी ही हे.. भाइ आप यही नीसे फ्रेस होजाओ..

तब देवायत वही कोमन बाथरुममे चला गया तब राजीव नीर्मला डाइनींगपे जाकर बैठ गये.. तबतक पुनम ओर दयाने सब खाना बहार रख दीया तो देवायतभी आ गया तो सबलोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. नीर्मलाने दयाकोभी जबरदस्तीसे साथमे बीठा दीया.. तब पुनम देवायतके पास बैठीथी.. तो दुसरी ओर नीर्मला बैठीथी.. ओर पुनमने खाना खाते धीरेसे नीचेसे अपना पैर देवायतके पैरपे रख दीया.. ओर पैरसे ही पैरको सहेलाती रही..

राजीव : (खाना खाते) देवु बेटा.. अब मे बीलकुल ठीक होगया हु.. तो सोचा अ‍ेक बार कल सुबह हम डोक्टरको दीखादे.. तो ये दवाइआ बंध होजाये.. वरना दवाइ पीतेही नींद आने लगती हे..

देवायत : (हसते) जी पापा.. बस.. हम सुबहतो जाही रहे हे.. तो पहेले हम दोनो दीखाकर आयेगे.. साम तक मे ओर मंजु वही आपके साथ ही हे..

नीर्मला : देवु.. तो हमभी साथ चलेगे.. डोक्टरको दीखाकर वहीसे सीधा रजीस्टार ओफीस चले जायेगे..

राजीव : (हसते) अरे नीमु अ‍ैसे थोडीना होता हे..? हम दोनो दीखाने जायेगे तब हम हमे हमारे वकीलको सब पेपर बनानेको कहेना पडेगाकी कीसके नाम करना हे.. तो वहा हम दोपहोरके बाद ही जापायेगे..

देवायत : (जान बुजकर नीर्मलाको छेडते) हां मम्मीजी.. हें..हें..हें.. पापा ठीक केह रहे हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जुठे गुस्सेसे जांगपे अ‍ेक चपत लगाते) मम्मीजीके बच्चे.. तुमतो तुम्हारे पापाकाही पक्ष लोगे नां..? मुजे सब पता हे.. इनको डोक्टरको दीखानेकी क्यु जल्दी हे.. आइ मीन.. उनको दवाइ पीना पसंद नही हे..

नीर्मलाने बडीही सीफततासे बातको धुमा दीया.. क्युकी असल बात सीर्फ राजीव ओर नीर्मलाही जानते थे.. की डोक्टरको दीखानेकी क्यु जल्दी हे.. राजीव नीर्मलाके साथ फीजीकर होना चाहता था ओर नीर्मला उसे डोक्टरका बहाना बनाकर मना कर रहीथी.. क्युकी वो अब सीर्फ देवायतके साथ ही फीजीकल होना चाहती थी.. जबसे देवायतके साथ सुलह होगइ तबसे वो अपने आपको देवायतको पुर्ण समर्पीत कर चुकी थी.. ओर उसेही अपना पती मानती थी..

सब बाते करते खाना खा रहेथे.. तबतक आइअ‍े देखते हे धिरेन जोबपे जाकर क्या करता हे.. वो सुबह मीठाइआ लेकर पहेले नीलमको फोन करता हे.. लेकीन रींग पुरी होनेके बावजुद भी फोन नही उठाया तब वो बेन्कपे चला गया.. वहा मेनेजरसे मीलके उनका मुह मीठा करवाया फीर छुटीका अ‍ेप्लीकेशन दीया.. तब स्टाफके सब लोग आकर उनको सादीकी बधाइआ देने लगे.. फीर वो अपने टेबलपे जाकर बैठ गया..

ओर सब कामकाज देखने लगा.. उनको साम तक फुरसतही नही मीली.. पांच बजतेही उनके फोनकी रींग बजने लगी.. तो उसने फोन उठाकर देखातो नीलमका फोन था.. ओर धिरेनने फौरन फोन उठालीया.. ओर बाथरुमकी ओर जाते उनसे धीमी आवाजमे बात करने लगा..

धिरेन : हां नीलु.. सुबह फोन कीया था.. तो तुम फोन क्यु नही उठा रही थी..?

नीलम : (हसते) जानु.. वो मे स्कुलमे थी.. वहा फोन लेजाना मना हे तो होस्टेलपेही फोन पडा था.. कहो आ गये आप..?

धिरेन :(मुस्कुराते) हां.. कल सामकोही आगये.. वो दीदीके घर था.. तो कल सृतीदीदी ओर जीजुकी सादी थी.. फीर हम कल सामकोही घर आगये.. मौसी मौसा भुमी आंटी सब घरपे रुके हुअ‍े हे.. तो तुमसे बात नही हो पाइ.. अब इधर जोबपे आगया हु.. कहो.. कैसी हो तुम.. यहा कोइ तकलीफ तो नही..?

नीलम : नही जानु.. सब ठीक हे.. ओर मेरी रुम पार्टनर (दिया) भी मस्त हे.. मेरी उनसे बहुत अच्छी दोस्ती हो गइ हे.. ये सब छोडो पहेले ये बताओ आप मुजसे मीलने कब आओगे..? क्या आज आ सकते हो..?

धिरेन : नीलु.. मीलनातो तुजे चाहता हु.. लेकीन आज कामकी वजहसे बहोत थक गया हु.. तो सोचा सीधा घरपेही चला जाउ..

नीलम : (थोडा नाराज होते) ठीक हे धिरेन.. तो फीर मे फोन रखती हु.. बाय..

कहेके नीलमने फोन काट दीया.. ओर तो धिरेन थोडा परेसान होगया.. ओर उसने दुबार फोन कीया.. तो इस बार नीलमने नही उठाया.. पुरी रींग बजादी.. तो धिरेनने दुबारा ट्राइ कीया.. फीरभी नीलमने नही उठाया ओर धिरेन परेसान होने लगा.. ओर वापस अपने टेबलपे आकर बैठ गया.. फीर कुछ सोचते मेनेजरके पास चला गया.. ओर थोडी जल्दी जानेको कहा तो मेनेजरने उसे नइ सादीकी वजहसे मुस्कुराते जानेकी परमीशन देदी....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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