Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 36 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

वहा उसने रामुकाकाको उनके वापस आनेतक खेतोका काम देखनेको कहा.. फीर उसने नीलमका परीचय भानुभाइकी बेटीके रुपमे करवाया.. तो रामुकाकाने नीलमको आशीर्वाद दीये.. ओर लखन नीलमको लेकर गोडाउनकी ओफीसमे चला गया.. तो अ‍ेक बारतो नीलमकी गांड फटने लगी.. की लखनजीजु उनके साथ कुछ उल्टी सीधी हरकत ना करले.. ओर वो गभराते लखनके पीछे जाने लगी..

तो लखन ओफीसके बजाये नीलमको सीधा आराम करनेके कमरेमे ही लेगया.. ओर बेडपे बैठकर नीलमकोभी बैठनेके लीये कहा.. तो नीलम सरमाते धीरेसे बेडके कोनेपे बैठ गइ.. ओर अपनी नजरे जुकाये बैठी रही.. तब लखन धीरेसे रुमका दरवाजा बंध करदेता हे.. ओर नीलमकी ओर मुडकर उनकी ओर देखते हसने लगता हे.. तब नीलमका दिल जोरोसे धडकने लगा.. वो बहुतही सर्मसार होने लगी.. तभी..

लखन : (हसते) अरे अ‍ैसे गभरा क्यु रही हे..? मे तुजे थोडीना डांटनेके लीये इधर लाया हु.. मत भुल मे तेरा जीजु ओर तु मेरी साली हे.. तो मुजे तेरी चीन्ता तो होगीनां..? तुम आरामसे बैठ.. क्या पानी पीयेगी..?

नीलम : (नामें गरदन हीलाते) नही जीजु.. चलीयेना.. यहा कुछ काम था..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. देख नीलु.. मुजे गोल मोल घुमाकर पुछनेकी आदत नही हे.. ये बता.. अब तक तुम ओर धिरेनजीजु इस तराह कीतनी बार मीले हो..? जो सेटरडे सन्डे मीले थे..

नीलम : (सुनतेही नीलम सरमके मारे पानी पानी होकर नजरे जुकाये खामोस बैठी रही)......

लखन : (थोडी सख्तीसे) नीलु.. मे तुजे कुछ पुछ रहा हु.. सच बताना.. वरना मजबुरन मुजे तेरी मम्मी पापाको सबकुछ बताना पडेगा.. फीर मत कहेना लखन जीजुने मुजे नही बचाया..

नीलम : (अ‍ेक बार सामने देखकर नजर जुकाते धीरेसे) अ‍ेक बार गार्डनमे ओर अ‍ेक बार दोनो फील्म देखने गयेथे तब.. लेकीन वोतो अ‍ैसेही मीलेथे.. तब हमने कुछ नही कीयाथा.. अ‍ैसे तो हम पहेली बार ही मीले.. जीजु.. प्लीज.. आप मम्मीको कुछ मत बताना.. वरना वो मेरी खाल उखाड देगी.. ओर मेरी पढाइभी छुडवा देगी.. प्लीज..

लखन : नीलु.. तुमने पुनोके साथ अ‍ैसा क्यु कीया..? दोनो उनकी सादीसे पहेले रीलेशनमे होनां..? तुजे पताथा की धिरेनकी सादी पुनो दीदीसे होने वाली हे.. फीरभी उसे प्यार कीया..?

नीलम : (नजर जुकाये धीरेसे) जीजु.. दरसल वो पुनो दीदीसे नाराज थे.. इसीलीये वो मुजसे प्यार करने लगेथे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? लेकीन क्यु..? वो पुनो दीदीसे नाराज थे..? अगर पुनो दीदीसे नाराज थे तो फीर उनसे सादी करके उनकी जींदगी खराब करनेकी क्या जरुरत थी..? तुम दोनो कर लेते सादी.. नीलु.. मुजे उनकी नाराजगीकी वजह जाननी हे.. बता मुजे..

नीलम : (बहुतही सर्मसार होते सर जुकाये बैठी रही..)......

लखन : (थोडी सख्तीसे) नीलु.. मेने तुमसे कुछ पुछा हे.. बता मुजे.. वरना हमे मजबुरन तेरी मम्मी पापाको बताना पडेगा.. बता..

नीलम : (जटसे सामने देखकर नजर जुकाये गभराते) अरे नही नही.. बताती हु.. जीजु.. दरसल.. धिरेन जीजु.. वो.. वो.. अपनी सादीसे पहेले पुनम दीदीके साथ वो.. से..(सरमाते धीरेसे) सेक्स.. करना चाहते थे.. ओर इसके लीये पुनम दीदीने उसे सादीसे पहेले सेक्स करनेको मना कर दीयाथा.. तो वो उनसे नाराज थे..

लखन : (आस्चर्यसे) क्या.. सीर्फ यही रीजनथा क्या..? नीलु.. मुजे सब खुलकर बता..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही जीजु.. धिरेन जीजुने मुजसे कुछ बातभी कही हे.. जो मुजे कीसीको ना बतानेकी कसम भी खीलाइ हे.. तो वो मे नही बता सकती.. सीर्फ उनकी ख्वाहीसके बारेमे बता सकती हु..

लखन : ( सामने सख्तीसे देखते) नीलु.. आज मुजे सब सचाइ जाननी हे.. अगर उसने तुजे कसम खीलाइ हे फीरभी मुजे सब बताना पडेगा.. तबही मे तुजे बचा सकता हु.. बता..

नीलम : (डरसे सामने देखते) जीजु.. दरसल धिरेन जीजुकी ख्वाहीस थी.. की वो सादीसे पहेले उनकी बीवीके सथ सेक्स करेगे.. ओर पुनम दीदीने उनका सपना तोड दीया.. इसीलीये वो मुजसे प्यार करने लगेथे.. ओर मेभी उनके प्यारमे बहेक गइ.. ओर उसे प्यार करने लगी.. जीजु.. वो मुजसे सादी करना चाहते हे.. धिरेन जीजुने मुजसेभी वादा लीयाथा.. की मे उनका ये सपना पुरा करु.. इसीलीये हम आगे बढे.. ओर मेने उनका सपना पुरा करदीया..

लखन : हंम.. तो फीर तुमसे ही सादी करलेता.. ओर पुनम दीदीको मना करदेता.. तो पुनोकी जींदगीसे क्यु खीलवाड कीया..? क्या कुछ ओर रीजन हे..? तु वो बात बता जो तुजे कसम खीलवाकर कीसीको ना कहेनेको मना कीया हे.. आज मुजे सब सचाइ जाननी हे..

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) जीजु.. प्लीज ये बात कीसीको मत कहेना.. वरना घरपे हंगामा होजायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. आइ प्रोमीस.. बता.. ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी..

नीलम : (सरमाते) जीजु.. दरसल धिरेन जीजु पुनम दीदीसे सेक्स करके आपके बडे भैयासे बदला लेना चाहते थे.. अगर पुनम दीदीने सादीसे पहेले धिरेन जीजुके साथ सेक्स कीया होता तो वो सायद उनसे सादी ही ना करते.. वो सीर्फ मेरे साथ सादी करना चाहते थे..

लखन : (आस्चर्यसे चोंकते) क्या..? बडे भैयासे बदला..? लेकीन कीस बात का बदला लेना चाहता था..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. दरसल.. धिरेन जीजुको पता चल गयाथा.. की उनकी मम्मीका उनके जीजुके साथ सादीसे पहेलेही जीस्मानी तालुकात हे.. फीर उनकी मम्मीकी सादी जीजुसे होगइ.. तब जीजुनेही पुनो दीदीका रीस्ता करवाया था.. तब वो उनकी मम्मी.. ओर बडे भैयाके डरसे पुनो दीदीसे प्यार ना करनेके बावजुद सादी करनेको राजी होगये.. वो सादीसे पहेले पुनम दीदीके साथ फीजीकल होना चाहते थे.. लेकीन अ‍ैसा ना होसका.. इसीलीये धिरेन जीजुको मजबुरन पुनम दीदीसे सादी करनी पडी..

लखन : (सामने देखते) अगर मेरी मम्मीको जीजु सादीसे पहेले ठोकते थे.. तो मेभी उनकी बहेनको सादीसे पहेले ठोकुगा.. क्या सीर्फ यही रीजन था..? लेकीन ये क्या बात हुइ..? येतो कोइ खास रीजन नही हुआ.. तेरे साथभी सादीसे पहेले फीजीकल रीलेशन बनाये.. अगर कल वो तेरे साथ सादी नही करेगातो..? (मुस्कुराते) नीलु.. क्या ये सब करनेकी तेरी उमर हे..? हंम.. कीतने साल हुअ‍े तुजे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दो महीने पहेले उनीसवा बैठा.. जीजु.. अब मे बालीक हु.. इस बारेमे मे खुद नीर्णय ले सकती हु.. मुजे कीसीसे पुछनेकी जरुरत नही हे.. हमने जोभी कीया आपसी रजामंदीसे कीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. मुजे कायदा सीखा रही हे..? देखा हमने.. तु अपने बारेमे बहुत अच्छा नीर्णय ले रही हे.. तभी तुजपे इतनी जवानी चडी हुइ हे.. नीलु.. तुजमे बहुत आग हेनां..? अगर धिरेन तेरा जीजा हे तो.. मेभी तो तेरा सगा जीजा हु.. अगर तुजे अपनी आगही मीटानी थी तो क्या तु पहेले मुजे नही केह सकती थी..? हंम..?

वैसेभी जीजा सालीमे तो ये सब चलता ही रहेता हे.. इसीलीये तो लोग सालीको आधी घरवाली कहेते हे.. मेरी मान तु धिरेनको छोडदे.. मे तुजे खुस रखुगा.. बनजा मेरी आधी घरवाली.. अगर तुम चाहोतो तुजे मे अपनी पुरी घरवाली भी बना सकता हु.. बोल..?
 
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. आप अ‍ैसी बाते कत करीये.. आप लता दीदीके पती हे..

लखन : (नीलमका हाथ पकडते) तो फीर पुनम दीदी कौन थी..? मत भुल वो मेरी बहेन हे.. ओर तु उसीका घर बरबाद करनेमे तुली हइ हो..? हंम..? अगर तुजे अपनी आगही मीटानी थी तो मुजसे कहेती.. इसमे मेरी बहेनका घर क्यु बरबाद कर रही हे..?

नीलम : (धीरेसे) जीजु.. लेकीन हम दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. वो मुजसे सादी करनेके लीये तैयार हे.. तो हम दोनो सादी करने वाले हे.. मे कोइ अ‍ैसी वैसी लडकी नही हु..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे हाथ पकडते) हंम.. अगर तु अ‍ैसी वैसी लडकी नही हे.. तो फीर मेभी तुमसे सादीके लीये तैयार हु.. करले मुजसे सादी.. मे इतना सक्षम तो हुही तुजे ओर तेरी लता दीदी दोनोको खुस रख सकता हु.. अगर यकीन ना होतो पुछ लेना तेरी लता दीदीको.. की मे कैसे बीस्तरमे उनकी चीखे नीकलवाता हु.. यकीन मान.. मे तुजे धिरेनसे ज्यादा खुस रखुगा..

नीलम : (सर्मसार होते परेसानीमे) जीजु.. प्लीज.. मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. चलीयेना हमे घर जाना हे..

लखन : (मुस्कुराते नीलमकी जांगोपे हाथ रखते) चलते हे.. चलते हे.. लेकीन आज कुछ बात तो क्लीयर होजाये.. क्या तुमने धिरेनका हथीयार देखा हेनां..? तो फीर अ‍ेक बार ये मेराभी हथीयार देखले.. फीर तुम खुद डीसाइड करना.. की कीसका हथीयार दमदार हे..

नीलम : (टेडी नजरसे लखनके पेन्टमे तंबु देखकर) जीजु.. प्लीज.. अ‍ैसी बाते मत कीजीये.. चलीयेनां..

लखन : (पेन्टकी चेइन खोलकर अपना तना हुआ लंड नीकालकर) नीलु.. अ‍ेक बार देखले इसे.. ये तुजे खुस रख सकता हे.. मुजे पता हे धिरेनका इतना बडा नही हे.. उनका तो इनके सामने नुनी लगता हे.. अ‍ेक बार इसेभी अंदर लेकर देखले.. तु जनतकी सेर करेगी.. ओर खुस होजायेगी.. हें..हें..हें..

कहेते लखन अपना लंड मुठीमे पकडकर हीलाते सहेलाने लगा.. तो लखनका लंड नीलमको देखतेही हवामे सख्त होते लहेराने लगा.. ओर लखन नीलमका हाथ पकडकर उसे अपना लंड पकडाने लगा.. तो नीलम लखनके तगडे लंडको देखते ही हकी बकी रेह गइ.. नीलमने पहेली बार इतना बडा लंड देखा तो वो डरते बहुतही सर्मसार होते टेडी नजरसे लंडको देखते अपना हाथ वापस खीचने लगी..

तभी लखनने जबर दस्तीसे उनका हाथ पकडकर वापस लंडको पकडा दीया.. ओर नीलमकी ओर गुस्से देखने लगा.. तो नीलम अपने मम्मी पापाको बता देनेके डरसे गभरा गइ.. ओर अपनी नजर जुकाये लंडको मुठीमे पकडकर बैठी रही.. तभी लखन भी नीलमकी मुठीको थामते नीलमके हाथोसे लंडको सहेलवाने लगा.. तब नीलम सरमके मारे पानी पानी होने लगी.. नीलमको लखनका लंड वाकइ धीरेनसे बडा ओर मोटा लगा..

नीलम अपने दांतोसे होठोको दबाते टेडी नजरसे लंडको देखती रही.. लखनभी तावमे आते उतेजीत होने लगा.. तो अचानक नीलमके सरको पकडकर उनके होठोपे अपना होठ रखकर भीच लीया.. ओर दुसरे हाथसे नीलमके बुब्सको मसलने लगा.. तो अचानक हुअ‍े हमलेसे नीलम गभरा गइ.. ओर लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तभी लखनने बुब्सको छोडकर नीलमकी चुतको उनके कपडेके उपरसे ही दबोच लीया.. तो नीलम दर्दके मारे उछल पडी..

ओर बेडसे खडी होनेकी कोसीस करने लगी.. तब उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. तो लखनने उसे फौरन छोड दीया.. ओर बेडसे खडा होकर फटाफट लंडको पेन्टमे डालकर जीप लगा देता हे.. तो नीलम रोने लगी.. नीलमने आज पहेली बार धिरेनके अलावा दुसरे मर्दके लंडको देख भी लीया.. ओर हाथोमे पकडकर महेसुस भी करलीया.. की वाकइ लखनका लंड धिरेनके लंडसे मोटा ओर लंबा हे.. तभी..

लखन : (खडा होते) नीलु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे बहेक गयाथा.. चल तुजे घर छोड देता हु.. लेकीन जानेसे पहेले तु अ‍ेक बार इस मोबाइलमे देखले.. फीर ठंडे दिमागसे सोचना.. मे सही केह रहा हु..

कहेते लखनने अपना मोबाइल नीकाला.. ओर धिरेन नीलमकी चुदाइ वाली विडीयो क्लीप चालु करके नीलमके हाथोमे फोन थमाते दीखाने लगा.. तो नीलम गौरसे देखने लगी.. ओर देखतेही नीलमकी सीटीबीटी गुल होगइ.. वो आंसु बहाते जटसे फोन लखनको वापस देती हे.. ओर दोनो हाथसे अपना चहेरा छुपाकर रोने लगती हे.. तब बडी मुस्कीलसे लखनने नीलमको सांत कीया.. फीर उनका मुह पानीसे साफ करवाके पोछ दीया.. तब..

नीलम : जीजु.. प्लीज.. ये डीलीट कर दीजीये.. अगर मम्मी पापाको पता चल गयातो मे बरबाद होजाउगी.. मे मर जाउगी.. मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही बचेगा.. प्लीज..

लखन : (फोन जेबमे रखते) नीलु.. तु चल.. तुजे घरपे छोड देता हु.. अब मुजसे बात मत करना.. अब जोभी करना हे मुजे करना हे.. अब जबतक तेरी पढाइ खतम नही होजाती ये क्लीप मेरे पासही रहेगी.. मे तेरी पढाइ डीस्टर्ब करना नही चाहता..

नीलम : (गीड गीडाते) जीजु.. प्लीज.. आप कीसीको मत दीखाना.. वरना मम्मी मुजे मार डालेगी.. प्लीज..

लखन : (हाथ पकडकर गालको सहेलाते) नीलु.. तु फीकर मत कर.. मे इतना कमीना नही हु.. की तुजे ब्लेक मेइल करु.. मुजपे यकीन कर.. मे कीसीको नही दीखाउगा.. ये सीर्फ मेरे पासही रहेगी.. वरना तु फीरसे उस कमीनेको मीलेगी.. ओर मुजे पता हे वोभी तुजे मीले बगैर नही रहेगा.. अगर तुम उसे मीली तो मुजे मजबरुन ये तेरी मम्मी पापाको दीखाना पडेगा.. चल..

नीलम : (गीड गीडाते लखनका हाथ पकडके वापस अंदर खीचते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. मे वादा करती हु.. मे आइन्दा उसे कभी नही मीलुगी.. आप जोभी कहोगे मे करुगी.. लेकीन मम्मी पापाको मत बताना..

लखन : (अचानक रुकते अ‍ेक नजरसे देखते) ठीक हे.. मे नही दीखाउगा.. लेकीन इसके बदले मेरी अ‍ेक सर्त हे.. अगर तु ये सर्त मानती हे तो फीर समजले तु पुरी तराह सेइफ ओर धिरेनसे सादी करनेके लीये आजाद हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

नीलम : (सामने देखते) जीजु.. प्लीज.. ये क्लीप कीसीको मत दीखाना.. मुजे आपकी सभी सर्त मंजुर हे.. कहो.. क्या सर्त हे..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) नीलु.. अगर तुजे सर्त मंजुर हे तो समजले.. तु हमेसा सेइफ हे.. तु भलेही मुजसे सादी नाकर.. तु चाहे धीनेरके साथ सादी भी करना चाहे तो कर सकती हे.. बस.. मे जब चाहु तु मुजे खुस करती रहेना.. मे तेरे साथ फीजीकल रीलेशन रखना चाहता हु.. अगर तुजे ये सर्त मंजुर हेतो बता.. मे वादा करता हु इस बारेमे हम दोनोके अलावा कीसीको पता नही चलेगा.. फीर तु पढाइके बाद भलेही धिरेनसे सादी करलेनां.. लेकीन तेरी सादीके बादभी हम दोनोके बीच रीलेशन जारी रहेगे..

नीलम : (धीरेनका हाथ छोडते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. मत कीजीये अ‍ैसा.. मे बरबाद होजाउगी.. आप मेरे जीजु हे.. मे ये नही कर सकती..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे नीलु.. मे तेरा जीजु हु इसीलीये तो केह रहा हु.. तु मेरी आधी घरवाली हे.. मेरा तुजपे धिरेनसे पहेले हक हे.. मेने आज तक कीसीके साथ जबरदस्ती नहीकी.. मे तुजपे भी जबर दस्ती अपनी सर्त नही मनवाउगा.. अगर तुजे सर्त मंजुर नही हेतो मना करदे मुजे.. फीर तु आजाद.. तु अपने तरीकेसे.. मे अपने तरीकेसे.. जा मे वादा करता हु.. मे ये क्लीप कीसीको नही दीखाउगा.. बस..? ये मत भुलना की हमे तेरी चीन्ता नही हे.. चल..

नीलम : (कुछ सोचते) जीजु.. थेन्क्स.. लेकीन प्लीज.. मुजे कुछ सोचनेका वक्त दीजीये.. मे आपको बादमे बता दुगी.. लेकीन प्लीज.. ये आप लता दीदीको मत दीखाना.. चलीये..

कहातो लखन नीलमको लेकर उनके गांवकी ओर चला गया.. नीलम सारे रास्ते गुम सुम बैठी लखनके बारेमे सोचती रही.. आज नीलमने जींदगीमे दुसरा लंड देखा ओर हाथमे पकडकर महेसुस भी कीया.. जो अभी लखनने उसे दिखाया.. लखनका लंड देखकर नीलम मनमे उसे धिरेनके लंडसे कंपैर करने लगी.. तो उसे लखनकी बात सही लगी.. वाकइ आज उसे लखनके लंडके आगे धिरेनका लंड नुनी लग रहाथा.. उसे पताही नही चला की कब उनका घर आगया..
 
जैसेही बाइक खडी रही नीलम बाइकसे उतरके अंदरकी ओर जाने लगी.. तो पीछे लखनभी बाइक खडी करके अंदर चला गया.. तो भानु सरला ओर रमा चाइ नास्ता कर रहेथे.. तो दोनोको देखतेही तीनो खुस होकर हसने लगे.. तो रमाने खडी होकर दोडकर नीलमको गले लगा लीया.. फीर उनके चहेरेको अपने हाथोमे थामकर उसे देखते मुस्कुराती रही.. ओर लखनकी ओर देखतेही वो सरमाकर मुस्कुराते उसे प्यारसे देखती रही..

रमा : (सरमाते) आइअ‍े आइअ‍े लखनजी.. आखीर आपने मुजे नीलुसे मीलवा ही दीया.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां भाभी.. क्या मे मेरी भाभीके लीये इतना नही कर सकता..? चलीये सम्हालीये अपनी नीलुको.. ओर मुजे पानी पीला दिजीये मुजे खेतोपे जाना हे..

भानु : (हसते जोरोसे) अरे अ‍ैसे कैसे जाओगे.. चलो तुम दोनोभी चाइ नास्ता करने बैठ जाओ.. फीर हम दोनो साथमे चले जायेगे.. हें..हें..हें..

सरला : (हसते) हां लखन बेटा.. चल आजा.. ओर नीलु.. तुमभी आजा.. चल कुछ खा पीले..

नीलम : (मुस्कुराते) नही दादी.. हम दोनो घरसे चाइ नास्ता करके ही नीकले हे.. अगर लखन जीजुको करना हे तो आप उसे बीठा दीजीये.. मे अंदर जाती हु..

रमा : (नास्ता करने बैठते) अरे.. अंदर कहा जा रही हे.. तेरे जीजुको कुछ पानी बानीतो पीला.. फीर इधरसे चाइ लेकर उसे पीला.. ओर थोडी देर बैठ हमारे पास.. कीतने दिनोके बादतो आइ हो.. फीर अंदर आराम करने चली जाना..

भानु : (मुस्कुराते) भाइ.. क्या वो होस्टेल वालोने इस आने दिया..? इसे लेने कौन गया था..?

इतना सुनतेही नीलमकी गांड फटने लगी.. उसे लगाकी अभी लखन जीजु मम्मी पापाको सबकुछ बता देगे.. ओर वो लखनकी ओर देखते आंखोसे ना बतानेकी मनते करने लगी.. तो लखन उनकी ओर देखते हसने लगा.. तो नीलमकी सीटी बीटी गुल होने लगी.. ओर उनका चहेरा पीला पडने लगा.. तब लखनने जुठ बोलकर आज अ‍ेक बार फीर नीलमको बचा लीया.. तब नीलमने राहतकी सांस ली..

लखन : (जुठ बोलते वही खटीयापे बैठते) नही भैया.. मे पुनमको लेकर इस लेने गया था.. क्युकी वहा उनकी मेडमके साथ बहुतही पहेचान हे.. बस.. हम जल्द बाजीमे सीर्फ नीलुके कुछ कपडे लेकर आगये.. क्युकी उनको ओर सृती भाभीको भाइके साथ राजीव अंकलके वहा जाना था.. बाकीका सामान हम सहेर रहेने जायेगे तब ले लेगे.. लताने कहा हे अब जबतक हम सहेर नही जाते तबतक नीलु यही रहेगी..

रमा : (सरमाते हसते) लखनजी.. लेकीन येतो बताइअ‍े आप दोनो सहेरमे रहेने कब जा रहे हो..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) बस भाभी.. जब मंजुभाभी.. चंदाभाभी पुनमदीदी.. सबलोग वापस आजायेगे तब हम चले जायेगे.. भानुभाइ.. लताने कहा हे तब आप नीलुको हमारे घरपे छोड जाना.. वो हमारे साथही चलेगी..

सरला : (हसते) लखनबेटा.. तुम हमारे साथ नास्ता करने बैठ जाते.. देख आज तेरी भाभीने मस्त आलुके पराठे बनाये हे.. हें..हें..हें..

लखन : (कामुक नजरोसे रमाकी ओर देखते हसते) चाची फीकर मत करो.. अबतो आयेदिन यहा आना जाना लगाही रहेगा.. तो फीर कभी भाभीके आलु पराठे खालुगा.. वो मुजे खीला देगी.. क्यु भाभी..?

कहेते लखनने सबसे छुपर रमाकी ओर अ‍ेक आंख मारदी.. तो रमा लखनकी डबल मीनींग बाते सुनकर सब समज गइ.. ओर बहुतही सर्मसार होते हां मे गरदन हीलाते नजरे जुकाते मुस्कुराती रही.. तभी नीलमने लखनको ग्लास भरके पानी दीया.. तो लखनने ग्लास लेते नीलमके हाथको छुकर दबा दीया.. तो नीलमने गभराकर जटसे ग्लासको छोड दीया.. ओर सरमाकर चली गइ.. ओर सबके साथ बैठकर नास्ता करने लगी..

रमा : (खडी होकर चाइ लाते) लखनजी.. आप सहेर जाओतो मेभी आजाउगी.. दो दिन वही रहुगी.. तो घरका सब सामान अच्छी तराह सेट करके सजा देगे.. फीर आप मुजे वापस घर छोड देना.. हें..हें..हें..

जब रमा लखनको चाइ देने आइ तब कप पकडनेके बहाने लखनने रमाके हाथको पकड लीया.. तो रमा गभराते जटसे पीछेकी ओर देखने लगीकी कोइ देखतो नही रहा.. तब भानु सरला नीलम तीनो ही चाइ नास्ता करनेके बीजी थे तो रमाने हाथको अ‍ैसेही रखा.. ओर वो सरमाते लखनकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. ओर लखनने धीरेसे हाथ सहेलाते उनके बुब्सको छु लीया.. ओर हल्केसे दबाने लगा.. तो रमा सरसे पांव तक हील गइ.. क्युकी आज उसे लखनने पहेली बार छुकर छेडा था..

रमा बहुतही सर्मसार होगइ.. लखन भीरे धीरे रमाके उरोजोको दबाके मसल रहा था.. तो लखनके हाथ लगतेही रमाके दोनो उरोज कठोर होने लगे.. ओर नीचे चुतमे सुरसुराहट होने लगी.. रमा लखनकी ओर देखकर नां मे गरदन हीलाते मुस्कुराने लगी.. तभी उसे अपनी चुतपे गीलापन महेसुस होने लगा.. ओर चुतमे मीठीसी खुजली होने लगी.. तब रमाका लखनके पास ज्यादा देर तक रहेना मुस्कील होने लगा.. ओर वो बहुतही सर्मसार होते अपना हाथ लखनसे छुडानेकी कोसीस करने लगी.. तभी..

भानु : (हसते) हां लखन.. ये बात तेरी भाभीने ठीक कही.. वहा लता अकेली कब अपना सब सामान सेट कर लेगी..? अगर आपकी भाभी साथ होगीतो उनको कुछ मददभी मील जायेगी.. ओर वो अ‍ेक बार नीलुकी स्कुलभी देख लेगी.. फीर आप उनको सहेरमे घुमा देना.. हें..हें..हें..

रमा : (थोडी दुर हटते सर्मसार होते हसते) जाओजी.. मे वहा घुमने थोडीना जा रही हु..? मेरी ननंदकी मदद करने जा रहीहु.. बात करते हे.. (लखनकी ओर कातील स्माइल करते) हां.. अगर हमारे ननंदोयजी हमे घुमाने लेजायेगे तो हम जरुर जायेगे.. देखते हे ये वहा हमारी कैसी खातेरदारी करते हे.. हें..हें..हें..

सरला : (हसते पास आकर बैठते) अरे हां बाबा हां.. तु भी चली जाना.. बस.. अबतो खुस.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. जब आप फ्रि होतो इधर आते जाते रहीये.. मे आपको मस्त पराठा खीलाउगी.. हें..हें..हें..

सरला : (मुस्कुराते) हां लखन बेटा.. अगर तुम आते होतो हमारा भी दिल लगा रहेगा.. अबतो देवुको टाइमही नही मीलता वरना वो हप्तेमे कमसे कम अ‍ेक दो बार आजाता था..

भानु : (हसते पास आते) भाइ.. चलो मे रेडी हु.. अब खेतोपे चलना हेनां..?

लखन : (हसते खडा होते) हां हां.. चलीये.. (रमाकी ओर देखते) भाभी.. अगली बार आउगा तो आप अपना आलु पराठा तैयार रखना.. मे फोन करके आजाउगा.. चलो सबको बाय.. हें..हें..हें..

कहातो रमा अ‍ेक बार फीर बहुत सर्मसार होगइ.. ओर सरमाकर हसने लगी.. वो लखनकी सब बाते भली भांती समजती थी.. फीर चाइ पीली तो लखन ओर भानु दोनोही अपने खेतोकी ओर नीकल गये.. तो रमाभी नीलमको अपने रुममे आनेको कहेते जटसे अपने रुमके बाथरुममे घुस गइ.. ओर दरवाजा बंध करतेही वो दरवाजेके पीछे अपने दोनो हाथ अपने उरोजोपे रखते सरमाते मुस्कुराने लगी..

आज पहेली बार लखनने उसे इस तराह छुआथा.. रमाने अपनी पेन्टी नीकालकर उसीसे अपनी चुतको साफ करलीया.. जो उनकी चुत अभी भी लखनके लंडकी यादमे आंसु बहा रहीथी.. रमाने पेन्टीको वही रखदी.. फीर अपने आपको सही करके बहार आगइ.. आतेही वो नीलमको अपने गले लगा लेती हे.. फीर प्यारसे उनके सरको सहेलाते अपने बेडपे बैठ जाती हे.. जैसे नीलमसे लखनके बारेमे बात करनेकी जल्दी हो..
 
इधर गांवमे सुबह देवायत चारु ओर नीशा.. अबभी तीनो अ‍ेक दुसरेसे चीपककर नंगे सोये हुअ‍े थे.. तभी देवायतके फोनकी रींग बजने लगी.. तो चारुने सोते हुअ‍े देवायतके होंठ चुमकर उसे जगा दिया.. ओर देवायत बीना फोनमे देखकर नींदमे ही फोनको कानपे लगाकर बाते करने लगा.. तो सामने मंजुने उनको जल्दीसे नीकल जानेको कहा.. तो देवायत फटाकसे बेडपे बैठ गया.. ओर मंजुकी बाते सुनता रहा..

तब तक नीशा ओर चारुभी बेडपे बैठकर बडेही गौरसे देवायतकी ओर आस्चर्यसे देखती रही.. दोनोही भुल गइ की इस वक्त दोनोही पुरी तराह नंगी हे.. फोन रखतेही देवायत जटसे दोडकर बाथरुममे घुस गया.. ओर नहाने लगा.. तब नीशा ओर चारुभी समज गइकी मामला कुछ गंभीर हे.. तो वो दोनो भी अपने कपडे पहेनने लगी.. तबतक देवायत कंपलीट होकर बहार नीकल गया ओर फटाफट तैयार होने लगा.. तभी..

चारु : (धीरेसे) जानु.. क्या हुआ..? क्या बात हे..? क्या कोइ सीरीयस मेटर तो नही..?

देवायत : (जटसे) चारु.. मुजे जल्दी जाना होगा.. वहा राजीव अंकलकी तबीयत बहुतही खराब होगइ हे.. मंजु ओर सृती उसे होस्पीटल लेजा रही हे.. मे चलता हु.. तुम दोनो हवेलीपे जाती रहेना.. वहा लता अकेली हे..

चारु : ठीक हे जानु.. आप यहाकी चीन्ता मत करना हम सब सम्हाल लेगे.. आप जाओ फटाफट..

देवायत फटाफट तैयार होकर राजीवकी बाइक लेकर उनकी हवेलीकी ओर चला गया.. तो वहा रजीया चंपाभाभी ओर दया सुबहका काम नीपटा रहीथी.. तो लता उपर अपने रुममे थी.. तो देवायत दयाको कहेकर फटाफट बाइक रखकर लखनकी जीप लेकर नीकल गया.. ओर उसने रास्तेमे पहेले वहाके डोक्टरको फोन करके उनसे बात करली.. फीर भानु ओर धिरेनको जल्दी राजीवके गांव पहोचनेके लीये फोन कर दीया.. ओर वो स्पीडसे जाने लगा..

तो उधरसे धिरेनभी फटाफट तैयार होकर नीकल गया.. तो भानु भी अभी अभी लखनके साथ खेतोपे आ रहाथा.. तो वोभी वापस मुडकर घरपे चला गया ओर सरलाको लेकर राजीवके गांवकी ओर चला गया.. तो घरपे सीर्फ रमा नीलम ओर भावेशही रेह गये.. तो उधर राजीवके गांव सुबह होते ही नीर्मला जाग गइथी.. ओर तैयार होकर राजीनके पास आगइ.. तबभी राजीव गहेरी नींद सोया हुआथा.. तो नीर्मलाको लगाकी कल राजीवने उनकी तीन बार जबरदस्त चुदाइ करली हे.. तो थका हुआ होगा..

इसीलीये अभी तक सो रहा हे.. तो वो मुस्कुराकर राजीवके सरको चुमते उनके होठोको चुम लेती हे.. फीर दरवाजा खोलकर बहार नीकली तो भुमीका मंजु चंदा पुनम सबलोग तैयार होकर नीर्मलाके इन्तजारमे बैठे थे.. मंजुके कहेने पे सृतीने पहेलेही देवायतकी कारको बहार रेडी रखाथा.. नीर्मला जब बहार नीकली तो सबलोग तैयार होकर रेडी थे.. तो नीर्मलाको लगाकी सीर्फ वोही देरसे जागी हे.. तो वो सरमाके मुस्कुराने लगी..

तभी मंजु जटसे नीर्मलाके पास चली गइ ओर उनका हाथ पकडकर उसे वापस रुममे लेगइ.. तो पीछे सृतीभी आगइ.. ओर सीधे राजीवके पास चली गइ.. ओर उनका हाथ पकडकर चेक करके उनकी आंख चेक करने लगी.. तो नीर्मला ये सब देखकर गभराने लगी.. ओर वो गभराते मंजु ओर सृतीकी ओर देखती रही.. तब सृतीने जटसे भावना ओर चंदाको आवाज देकर बुलाया.. ओर तो दोनो फटाफट अंदर आगइ..

सृती : (जटसे) भावु चंदादीदी.. आजाओ सब मेरी मदद करो.. हमे मौसाजीको अभी के अभी होस्पीटल लेजाना पडेगा.. ओर मंजु तु देवुको फोन करदे.. की वो फटाफट इधर आजाये..

नीर्मला : (थोडी परेसानीमे उची आवाजमे) अरे कोइ बताओ तो सही मेरे राजीवको क्या हुआ हे..?

सृती : मौसी.. लगता हे मौसाजी फीरसे कोमामे चले गये हे.. हमे अभी होस्पीटल जाना होगा आप हटीये..

नीर्मला : (जटसे साइडमे हटते आंसु बहाते) ओह.. गोड.. मेरे राजीवको बचा लेना..

तब सृती भावना चंदा मंजु चारो राजीवको चदरमे डालकर बहारकी ओर लेजाने लगी.. तो भुमीकाने फटाफट कारका पीछला दरवाजा खोल दीया ओर सबने राजीवको पीछेकी सीटपे सुला दीया ओर सृतीने फटाफट कारकी ड्राइवींग सीट सम्हाली.. तो साथमे मंजु ओर भावना बैठ गइ तो नीर्मला पीछे राजीवके सरको अपनी गोदमे लेकर बैठ गइ.. ओर सृतीने कारको तेजीसे होस्पीटलकी ओर जानेदी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७४

तब सृती भावना चंदा मंजु चारो राजीवको चदरमे डालकर बहारकी ओर लेजाने लगी.. तो भुमीकाने फटाफट कारका पीछला दरवाजा खोल दीया ओर सबने राजीवको पीछेकी सीटपे सुला दीया ओर सृतीने फटाफट कारकी ड्राइवींग सीट सम्हाली.. तो साथमे मंजु ओर भावना बैठ गइ तो नीर्मला पीछे राजीवके सरको अपनी गोदमे लेकर बैठ गइ.. ओर सृतीने कारको तेजीसे होस्पीटलकी ओर जानेदी....अब आगे

ओर थोडीही देरमे सबलोग होस्पीटलपे पहोंच गये.. तो वहा डोक्टरने देवायतके फोन आतेही पहेलेसेही स्ट्रेचर रेडी रखाथा.. उनके स्टाफने फटाफट राजीवको कारसे स्ट्रेचरमे लेलीया ओर अंदरकी ओर दौड पडे.. तो पीछे नीर्मला मंजु भावनाभी फटाफट उनके पीछे जाने लगी.. सृतीभी कार पार्क करके अंदर आगइ.. ओर सीधेही डोक्टरके पास चली गइ.. क्युकी उनकी इस डोक्टरके साथ अच्छी खासी पहेचान थी..

राजीवको आइ.सी.यु.मे लेजाकर फटाफट ओक्सीजन मास्क लगा दीया.. ओर उनकी ट्रीटमेन्ट सुरु होगइ.. तो आधेही घंटेके बाद देवायतभी तेजीसे सीधाही होस्पीटलपे आगया.. ओर अंदर चला गया.. तो अंदर सब लोग गुमसुम आंसु बहाते बैठे थे.. तभी देवायतको अंदर आते देखते ही नीर्मला उनके पास दौड पडी ओर उनसे लीपटर फुटफुटके रोने लगी.. तो मंजु ओर भावनाभी देवायतसे लीपटके आंसु बहाने लगी.. सबको पताथा की क्या होने वाला हे.. फीरभी अ‍ेक आशामे थे..

नीर्मला : (आंसु बहाते) देवु.. मेरा राजीव.. उसे कुछ होगातो नही..? हे भगवान.. बचालो उसे..

मंजुला : (नीर्मलाको सम्हालते) मोम.. पापाको कुछ नही होगा.. आप अ‍ैसे रोइअ‍े मत.. वो आपको बहुत प्यार करते हे.. वो आपको अ‍ैसे रोते नही देख सकते.. चुप होजाइअ‍े..

भावना : (रोते हुअ‍े) हां मम्मी.. पापा हमे बहुत प्यार करते हे.. मत रोइअ‍े..

कहातो नीर्मलाने फटाफट अपने आंसु पोछ दीये.. ओर देवायतका हाथ पकडकर उसे आइ.सी.यु.की ओर लेगइ.. लेकीन उसे अ‍ेक नर्सने ट्रीटमेन्ट चालु हे.. कहेकर वही रोक लीया.. ओर वो फटाफट चली गइ.. तीनो काचकी विन्डोसे अंदर जाकते देखने लगे तो अंदर सृती ओर डोक्टर राजीवके सीनेपे हाथसे पंपींग कर रहेथे.. तब देवायत सीचुअ‍ेशनकी गंभीरता समज गयाकी अभी राजीवका हार्ट बंध हे.. ओर वो तीनोको लेकर अ‍ेक बेंचपे बैठ गया..

तो कुछही देरके बाद भानु ओर सरलाभी आगये तो पीछे धिरेनभी अपनी बाइक लेकर जल्दी जल्दी होस्पीटल पहोंच गया.. तो नीर्मला धिरेनको गले लगाकर आंसु बहाने लगी.. तो घरपे चंदा पुनम ओर भुमीका तीनो बच्चोको सम्हालके बैठीथी.. तब चंदाभी रुक रुक कर आंसु बहाती रही.. सृती ओर डोक्टरकी आधे घंटेकी महेनत रंग लाइ.. उसने पंपींगसे राजीवके हार्टको अ‍ेक्टीव करदीया था.. ओर अभी राजीवकी तबीयत अ‍ैसेही स्टील पोजीसनमे रुक गइ..

सृती : (बहार आतेही) देवु.. आगये आप.. अभी अंकलकी तबीयत बीगडनेसे रुक गइ हे.. उसे ओर आरामकी जरुरत हे.. अगर जरुरत हुइ तो हमे उनका अ‍ेम.आइ.आर. करना पडेगा..

नीर्मला : (जटसे) सृती बेटा.. क्या तेरे अंकलकी तबीयत तो ठीक हेनां..? उसे कुछ हुआतो नही..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे नही मौसी अंकलको कुछभी नही हुआ.. बस थोडीसी कमजोरी लग रही हे.. अभी होसमे आजायेगे.. (देवायतका हाथ पकडते) देवु.. आप चलीये मेरे साथ.. हमे डोक्टरने बुलाया हे.. आप लोग सब यही बैठीये हम अभी उसे मीलकर आते हे.. चलो देवु..

कहातो मंजु सृतीकी ओर देखती रही.. ओर नीर्मलाको लेकर वापस बेंचपे बैठ गइ.. तभी सृती देवायतको लेकर डोक्टरकी चेम्बरमे चली गइ.. तो वहा डोक्टरने मुस्कुराते देवायतसे हाथ मीलाया.. ओर दोनोको सामनेकी चेयरपे बैठनेके लीये कहा.. तो सृती ओर देवाफत डोक्टरकी ओर देखने लगे.. तभी..

डोक्टर : (मुस्कुराते) कहो मी. देवायतजी कैसे हो..? आखीर आपको आनाही पडा.. यही हेना आपकी वाइफ डो. सृतीजी.. इन्होने आपके ससुरको बचानेकी बहुत महेनतकी..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) सर.. लेकीन उनको ये सब अचानक कैसे हुआ..? कलतो अच्छे भले थे.. अ‍ैसा होनेका कुछतो रीजन होगा..

डोक्टर : (मुस्कुराते) मी. देवायतजी.. लगता हे आपके ससुर कुछ ज्यादाही रंगीन मीजाजके लगते हे.. मुजे जीस बातका डर था वोही हुआ.. सृतीजी.. लास्ट टाइम ये दोनो चेकअप के लीये आयेथे.. तबही मेने उसे मना कीयाथा की इस चीजसे दुर रहेना.. लगता हे ज्यादा इन्टरकोर्स की वजहसे ये सब हुआ हे.. जीस चीजके लीये मैने सख्त मना कीयाथा.. वोही सब इन्होने कीया हे.. आपतो जानती हे इस केसमे इनके लीये कीतना जोखीम हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब उसने मेरी सासको जुठ बोला होगा.. कोइ बात नही.. अब इसमे क्या हो सकता हे..? क्या कुछ रीकवरीकी गुंजाइस हे..? तो कहीये हम इसके लीये सबकुछ करनेको तैयार हे..

सृती : (धीरेसे) देवु.. सोरी.. मेने बहार थोडासा जुठ बोला हे.. अंकल बहुत ही सीरीयस हे.. हमने उनका हार्ट तो पंपींग करके चालु करदीया हे.. लेकीन उतनी रीधींग नही आ रही जीतनी हमे चहीये.. ओर वो भी धीरे धीरे कम होती जा रही हे.. आप समज गयेनां.. हमे सबको सम्हालना होगा..

देवायत : (आंखसे आंसु टपक गये) सृती.. हमारे पास कीतना वक्त हे.. बता मुजे..

डोक्टर : (थोडी सीरीयस होते) देवायतजी.. सायद दो से ढाइ घंटे.. आपको जीसे बुलाना हो बुला लीजीये..

देवायत : (अपने आंसु पोछते) सर.. बस.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. बहार कीसीको कुछभी मत कहेना.. हम सब उनके आखरी वक्तमे उनके पास रहेना चाहते हे.. हो सकेतो हमे अलग रुम दे दीजीये..

डोक्टर : (मुस्कुराते) अरे अलग रुममे क्यु.. सबलोग वही चले जाओ.. अभी वहा कोइ ओर पेशन्ट नही हे..

देवायत : (हाथ मीलाते खडे होते) सर.. थेन्क्यु वेरी मच..

इधर देवायत सृती डोक्टरसे बाते कर रहेथे.. तब मंजु अपनी शक्तिओके माध्यमसे अंदरकी सब बाते सुन रहीथी.. ओर तीनोकी बाते सुनतेही उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो वो जटसे अपने आंसु पोछते बहार नीकल गइ.. वरना उनकी मम्मी देखलेती तो सबकुछ समज जाती.. ओर मंजु दुर जाकर अ‍ेक पेडके पीछे जाकर रोने लगी.. लेकीन मंजुको पता नही थाकी भावनाने उसे देखलीया हे.. तो वोभी धीरेसे मंजुके पीछे चली गइ..

बहार जाकर देखातो मंजु दुर अ‍ेक पेडके पीछे खडी रहेके रो रहीथी.. तभी मंजुको अपने कंधेपे कीसीका हाथ रखते महेसुस हुआ.. तो मंजुने रोते हुअ‍े जटसे पीछेकी ओर देखा तो पीछे भावना आंसु बहाते उनको देख रहीथी.. तो मंजु जटसे पलट गइ.. ओर भावनाको गले लगाकर रोने लगी.. तो भावनाभी सबकुछ समज गइ.. उसे पताथा की मंजुको सबकुछ पता चल जाता हे तो भावनाभी रोने लगी.. ओर रोते रोते..

भावना : (आंसु बहाते) दीदी.. क्या हुआ..? आपकोतो सब पता चल जाता हे.. बताइअ‍ेनां..

मंजुला : (रोते धीरेसे) भावु.. पापा हमे छोडके जा रहे हे.. तु अंदर कीसीको मत बताना.. वरना मोम टुट जायेगी.. अब हमारे साथ वो सीर्फ दो ढाइ घंटे ही हे.. तुम हिमंत रखना मे तेरे साथ हु.. चल अंदर..

कहेते दोनोही अंदर जानेके लीये मुडती हे तो पीछे देवायत खडा उनकी बाते सुन रहाथा.. तो दोनोही देवायतके गले लग गइ.. ओर फुटफुटके रोने लगी.. तीनोही बहुत दुर खडे थे तो कीसीको उनकी आवाज अंदर नही सुनाइ दे रहीथी.. देवायतने दोनोको कसके अपने गले लगा लीया.. ओर खुदभी आंसु बहाने लगा.. फीर कुछ देरके बाद देवाफतने दोनोको सांत कीया.. ओर अंदर अ‍ेकभी आंसु ना बहानेकी सुचना देदी..

फीर तीनोही अपना चहेरा साफ करके अंदर आगये.. तो देवायतने भानुको बहार बुलाकर घरसे भुमीका चंदा ओर पुनमको लेआनेकी बात करली.. ओर उसे अपनी कारकी चाबी देदी तो भानु कार लेकर तीनोको लेने राजीवके घरपे चला गया.. तो देवायत सबको लेकर आइ.सी.यु. मे आगया.. सबलोग राजीवकी ओर देखने लगे.. नीर्मला राजीवके सरके पास उनके हाथको थामकर बैठ गइ.. ओर प्यारसे उनको देखती रही..
 
तभी इस वक्त गांवमे मुना ओर बरखा अपनी सुहागरात मनाकर सुबह देर तक अपने रुममे सोते रहे.. मुनाने कल पुरी रात कामोतेजक गोली खाकर बरखाको जबरदस्त तरीकेसे अलग अलग पोजीसनमे चार बार चोद लीयाथा.. बरखाका अ‍ेक अ‍ेक अंग मुनाने तोडके रख दीयाथा.. ओर जब मुनाने चोथी बार बरखाकी चुदाइकी तब वो लगभग बेहोसीकी हालतमे चली गइथी.. ओर अभी भी गहेरी नींद सो रहीथी..

तो यही हाल श्रीधरके घरभी था.. सब लोग कंपलीट होकर होलमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहेथे तबभी श्रीधर ओर जयश्री अपने रुममे गहेरी नींद सो रहेथे.. कल पुरी रात श्रीधर जयश्रीकी चुतको बजाता रहा.. जीसे जयश्रीकी हालतभी पतली हो चुकीथी.. उनको भी समजमे नही आयाकी आज श्रीघरको इतना जोस कहासे आगया.. श्रीधरने जयश्रीका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया था.. तभी बहार वृन्दाने बातको छेडदी.. जब चारो अ‍ेकठे बैठेकर चाइ नास्ता कर रहेथे..

वृन्दा : (नास्ता करते अपने पती जवेरीलालको) सुनीये जी.. अब आप जीतनी जल्दी हो सके इन दोनोका जोभी कुछ करना हे कर दीजीये.. उनकी सादी करनी हेतो सादीका फटाफट नीपटारा करलो.. अब मुजे यहा दोनोने कीसीको मुह दीखाने लायकभी नही छोडा..

जवेरीलाल : (थोडा गुस्सा होते) तुम बार बार क्यु अ‍ेकही रट लगाये बेठी हो..? जो होना था सब होगया.. हम सबने उन दोनोकी सादीको भी अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. तो फीर अब तुजे क्या प्रोबलेम हे..? कान खोलकर सुनले.. अब ये दोनो यही रहेगे.. हमारे पास.. समजी..

कहातो वृन्दा गुस्सा करके चाइ नास्ता छोडकर अपने रुममे चली गइ.. तब ब्रीन्दा मनही मन मुस्कुरा रहीथी.. क्युकी उनको पताथाकी ये सब उनकी बहेन अपने प्लानके मुताबीक कर रही हे.. वो सांतीसे बैठकर मुस्कुराते चाइ नास्ता करती रही.. जसे कुछ हुआही नही.. तब जवेरीलालभी परेसान होकर खडे होगये.. ओर वृन्दाके पास उनको मनानेके लीये उनके पीछे चले गये.. तब टेबलपे सीर्फ जीतुलाल ओर ब्रीन्दाही बैठे थे.. तभी..

जीतुलाला : (धीरेसे) ब्रीन्दा.. अब हमारे बच्चोकी सादीभी होगइ हे.. तो अब तुजे नही लगता हम दोनोको अब फीरसे मील जाना चाहीये..? कबतक मुजसे दुर रहेगी..? अ‍ैसेतो ना तुम सुखी रेह सकती हो ना मे..

ब्रीन्दा : (कातील मुस्कुराते) क्यु..? तेरे पास तो तेरी भाभी हेनां.. वो तुजे सुख तो देती हे जो तुजे चाहीये.. तो फीर मेरे पीछे क्यु पडा हे..? मेतो अ‍ैसेही बहुत खुस हु.. अबतो तुम मुजे भुल ही जाओ.. इस तनको छुनेका अधीकार तुम चार साल पहेलेही खो चुके हो.. जब मुजे तुम दोनोके बारेमे पता चला.. मुजे अब तुमसे कोइ रीस्ता नही रखना.. येतो श्रीधर बडा होगया हे इसीलीये मे यहा पडी हु.. वरना मेतो तुजे कबसे छोडकर चली गइ होती..

जीतुलाल : (थोडा परेसानीमे) ठीक हे.. तो फीर मुजे छोड क्यु नही देती..? देदो मुजे डीवोर्स..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) मे तुजे क्यु डीवोर्स दु..? मे कहा तुजे छोडनेकी बात कर रही हु..? अगर जाना होतातो तबही चली गइ होती.. तुम्हे मुजे छोडना हे तो तुम मुजे डीवोर्स देदो.. मे साइन कर दुगी.. बस.. मुजे मेरे लीये कुछ नही चाहीये.. लेकीन मे मेरे श्रीधरका हक कभी नही छोडुगी.. ना इस घरपे ना हमारे बीझनेसमे.. इसके लीये मुजे जोभी करना पडे मे सब करुगी.. याद रखीयो..

कहेते ब्रीन्दा टेबलपे हाथ मारते वहासे खडी होगइ.. ओर अपने रुममे चली गइ.. तब जीतुलाल उसे मुह फाडकर देखता ही रेह गया.. क्युकी जीतुलालको ब्रीन्दासे अ‍ैसी बातोकी उमीद नही थी.. कल रातसे ही ब्रीन्दाने इन दोनोकी बात छतपे सुनली थी.. तबसेही वो मानसीक तौरपे इस बातके लीये पहेलेसे ही प्रीपेर होगइ थी.. ओर आज उसने जीतुलाल ओर उनकी बहेन वृन्दा अपने प्लानको आगे बढाये.. उनसे पहेलेही ब्रीन्दाने उन दोनोकी बातपे जोरोसे हथोडा मार दीया..
 
तो इधर होस्पीटलमे सब लोग राजीवके अगल बगलमे खडे थे.. तो कुछही देरके बाद भानुभी भुमीका पुनम ओर चंदाको लेकर होस्पीटलपे आगया.. तो चंदा राजीवको देखतेही आंसु बहाने लगी.. तो भुमीकी आंखसेभी आंसु टपक गये.. तो सृतीने दोनोको इसारोसे आंसु बहानेको मना कीया तो दोनोने जटसे अपने आंसु पोछ लीये.. जब सबलोग आगये तो मंजु रावजीवके पैरोके पास चली गइ.. ओर बीचमे उनके सामने खडी रही..

सबको लगाकी मंजु जगाह नही होनेकी वजहसे वहा चली गइ हे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी वो मनमे मंत्रोचार कर रही हे.. ओर उसने धीरेसे सबसे छुपके राजीवके पैरोको छुआ.. तो राजीवके सरीरमे अ‍ेक जुनजुहाटकी लहेर दोड गइ.. ओर उनकी आंखे बंध होनेके बावजुद अंदरकी ओर फरकने लगी.. राजीवको धीरे धीरे अपना पीछला जन्म अ‍ेक फील्मकी रीलमे माफीक दीखने लगा..

मंजु अ‍ैसा करके उनको अपने पीछले जन्मकी ओर इस जन्मकी पहेचान करवा रहीथी.. राजीवको अपने बाजुमे नीर्मलाके रुपमे पीछले जन्मकी सोनुका चहेरा दिखने लगा.. तो इस साइड उसे देवायतके अंदर वो हिमाचलके राजा राजका अंस दिखने लगा.. जो इस वक्त दोनोही उनकी अगल बगलमे बैठकर आंसु बहा रहेथे.. राजीवको पीछले जन्मका सबकुछ याद आने लगा..

वो अपने आपको पहेचान गयाकी वो पीछले जन्ममे सुनील था.. ओर अपने आखरी वक्तमे उसने राज ओर नेनुको वादा कीयाथा.. की अगले जन्ममे मे तुम्हारे मामा बनके आउगा.. ओर अब वक्त नजदीक था.. जब राज अगला जन्म लेकर वापस इस पृथ्वीपे आयेगा.. उनसे पहेले राजीवको उनके मामा बनके वापस आना हे.. क्युकी अभी तक राजने जन्म नही लीयाथा.. सबलोग उसीके जन्मकी तैयारीके रुपमे आ गयेथे.. ओर राजीवके सरीरमे हरकत होने लगी..

ओर आखीर उनकी आंखोमे अ‍ेक तेज प्रकाश छा गया.. ओर उसे मंजुके रुपमे उस माइके दर्शन हो गये.. जो सबकी जननी थी.. जीनकी दस भुजाये थी.. जो अ‍ेकदम नग्न स्वरुपमे उनके सामने खडी थी.. जीसे देखतेही राजीवका हाथ हीलने लगा.. तो सबलोग खुस होने लगे.. तब सृतीने जटसे धिरेनको डोक्टरको बुलानेको कहा.. तो धिरेन बहारकी ओर दोडके चला गया.. ओर कुछही देरमे डोक्टरको लेकर आगया..

डोक्टर : (आंखे चेक करते) देवायतजी.. लगता हे इनको होस आ रहा हे.. आप सबलोग थोडी देरके लीये बहार जाइअ‍े.. जब इनको होस आजायेगा तब हम आप सबको अंदर बुला लेगे..

कहातो नीर्मला मंजु देवायत ओर सृतीके अलावा सबलोग बहार नीकल गये.. तब राजीवको होस आगया.. उसने धीरेसे अपनी आंखे खोलदी.. तो सामने मंजुको खडी देखा.. तो उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर धीरेसे उनको हाथ जोड लीया.. तो मंजुकी आंखसे मुस्कुरानेके बावजुद आंसु नीकल गये.. तब देवायतको पता चल गयाकी सब मंजुकी वजहसे हुआ हे.. मंजुने राजीवको अपनी पहेचान करवादी हे.. तो वो मुस्कुराने लगा.. तभी..

डोक्टर : (मुस्कुराते) हां.. तो अंकल.. अब आपको कैसा लग रहा हे.. लगता हे आपने कुछ चम्तकार कीया हे.. तभी तो आपको इतनी जल्दी होस आगया.. हें..हें..हें..

राजीव : (धीरेसे) हंम.. काफी बेटर लग रहा हे.. थेन्क्स..

डोक्टर : (मुस्कुराते) हंम.. चलो मे सबको अंदर भेजता हु आप सबको मीललो.. लेकीन ज्यादा बोलना नही.. ओके.. आपको ट्रेस होगा..

राजीव : (जब डोकटर चला गया सब लोग वापस अंदर आगये) नीमु.. थेन्क्स.. तुमने मेरा खुब साथ दीया.. लेकीन तुम मेरी अमानत नही हो.. मेरे भांजेकी अमानत हो.. मुजे जाना पडेगा.. तभी तो मेरी भावुकी कोखसे वापस आ पाउगा.. मेरे देवुके पोतेका मामा बनके.. मेने उसे वादा कीया था.. तो नीभाना तो पडेगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (मुस्कुराते) मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. आपको डोक्टरने बोलनेको मना कीया हेनां..?

राजीव : (मुस्कुराते हाथ थामते) नही नीमु.. आज बोलने दे.. फीर क्या पता दुबारा बोलनेका मौका मीले या ना मीले.. (मंजुकी ओर हाथ जोडते) मंजु बेटा.. माफ करना.. मे तुजे पहेचान नही पाया.. तुमतो हम सबकी जननी हो.. बस.. मेरी नीमु ओर मेरी भावुको सम्हाल लेना..

मंजुला : (आंसु बहाते) पापा मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. मे तो आपकी बेटी हु.. मे वादा करती हु.. मे सबको सम्हाल लुगी.. आपको कुछ नही होगा..

राजीव : (भुमीकी ओर देखते) भुमी.. कैसीहो मेरी बहेन.. मे तुमको भी पहेचान गया हु.. हें..हें..हें.. बस.. मेरी नीमुका साथ देना.. वो अकेली ना पड जाये..

भुमीका : (अपने आंसु पोछते) भाइ.. मत करो अ‍ैसी बाते.. वो मेरी बहेन हे.. तो मे उनका खयाल रखुगी..

राजीव बारी बारी सबको याद करता हे.. धिरेनको भी पुनमका खयाल रखनेको कहेता हे.. भानुको भावनाका खयाल रखनेको कहेते सबलोग दो घंटे तब राजीवसे बाते करते रहे.. तो बीचमे हसी मजाकभी चलता रहा.. तब तक राजीवने नीर्मलाका हाथ थामे रखा.. ओर आखीर उनको बोलनेमे भी तकलीफ होने लगी.. तब राजीवने देवायतको पास बुलाकर उनका हाथभी थाम लीया.. ओर नीर्मलाके हाथको पकडकर देवायतके हाथोमे थमा दीया..

राजीव : (नीर्मलाका हाथ देवायतको थमाते) देवुबेटा.. लो सम्हालो अपनी सोनुको.. आजसे मेरी नीमुकी सब जीम्वेवारी आपकी हे.. मे आपको अपनी अमानत सोंप रहा हु..

देवायत : पापा.. आइ प्रोमीस.. मे आपकी नीमुका खयाल रखुगा..

कहातो राजीव मुस्कुराने लगा.. ओर नीर्मलाकी ओर मुह करते उनको देखता रहा.. तब नीर्मलाकी आंखसे भी आंसु नीकल गये.. राजीव अ‍ेक नजरसे नीर्मलाको बीना पलक जपकाये देखता रहा.. तब सृतीको आभास होगया.. ओर वो जटसे आकर राजीवको हीलाती हे.. तो राजीवका हाथ नीचे गीर गया.. तो सृती उनकी हाथकी नब्सको चेक करने लगी.. ओर धिरेनको जल्दीसे डोक्टरको बुलाने कहा तो मंजु समज गइ.. ओर वो रोने लगी..

तो नीर्मला जटसे खडी होगइ.. ओर राजीवको हीलाने लगी.. लेकीन राजीव अ‍ैसेही सीथील पडा रहा.. ओर सबको मनमे आसंकाअ‍े होने लगीकी राजीव हमे छोडकर चला गया हे.. तभी डोक्टरने फटाफट आकर राजीवको चेक करलीया.. ओर सृतीकी ओर देखते नां मे गरदन हीलाते राजीवकी आंख बंध कर देते हे.. ओर उनके उपर चदर डालके देवायतके कंधेपे हाथ रखते अपना अफसोस व्यक्त करते हे..

डोक्टर : सोरी.. देवायतजी.. अब आपके ससुर नही रहे.. आप मेरी चेम्बरमे चलीये.. मे सब पेपर कंपलीट करवाता हु.. फीर इसे लेजाइअ‍ेगा..

कहातो भावना नीर्मला मंजु सबलोग राजीवको घेरकर फुट फुटके जोरोसे रोने लगे.. ओर होस्पीटलमे पुरा वातावरण गमगीन होगया.. तब भुमीका सरला भानु ओर देवायत सबको सम्हालने लगे.. फीर भानुने सामतभाइ ओर रमेशको फोन करदीया.. तो लखनभी नीलमको उनके घर छोडकर अपने खेतोपे था तो वोभी लताके साथ जीस लेडीसको आनाथा वो सभी लेडीसको लेकर राजीवके गांवकी ओर नीकल गया..

इधर सबका रोना धोना थोडा सांत हुआ.. तो भानु ओर धिरेनको कहेकर देवायतने सभी लेडीसको घर भेज दीया.. देवायत सब पेपर कंपलीट करवा देता हे.. तब डोक्टर उनको अफसोस जताते राजीवकी बोडीको घर लेजानेको कहेते हे.. तभी भानुभी सब लेडीसको छोडकर वापस आगया.. तो दोनोही राजीवकी बोडीको लेकर घरपे चले गये.. इस कार्यवाहीमे अ‍ेक घंटा बीत चुकाथा तबतक रमेश सामत लखन सबलोग आगये..

तो आतेही लता मंजुसे चीपककर रोने लगी.. तो रश्मी चारु नीशा जया सांती बसंती ब्रिन्दा सभी लेडीस सबको गले मीलकर आस्वासन देती रही.. तबतक रमेश ओर सामतने अर्थीके सामानका इन्तजाम करलीया ओर बोडीको कंपलीट करदी.. तब देवायतने सबको अ‍ेक बार फीर राजीवके अंतीम दर्शनके लीये कहा.. तब नीर्मला मंजु ओर भावना उनसे लीपटकर बहुत रोइ.. तो रश्मी चारु भुमीका सरलाने सबको सम्हाला..

फीर देवायत भानु धिरेन ओर लखनने अर्थीको उठाया.. ओर सबलोग स्मसान चले गये.. वहा देवायत ओर धिरेनने मीलकर राजीवको मुखमग्नी दी.. फीर वहाकी सब वीधीया करके सबलोग वापस घरपे आगये.. फीर साम होते होते सबलोग अपने घरकी ओर वापस जाने लगे.. सामत रमेशभी सब लेडीसको लेकर वापस नीकल गये.. तो देवायतने लखनको भी लताको साथ लेकर घर जानेको कहा.. तो भानुभी सरलाको लेकर वापस अपने घर नीकल गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७५

फीर देवायत भानु धिरेन ओर लखनने अर्थीको उठाया.. ओर सबलोग स्मसान चले गये.. वहा देवायत ओर धिरेनने मीलकर राजीवको मुखमग्नी दी.. फीर वहाकी सब वीधीया करके सबलोग वापस घरपे आगये.. फीर साम होते होते सबलोग अपने घरकी ओर वापस जाने लगे.. सामत रमेशभी सब लेडीसको लेकर वापस नीकल गये.. तो देवायतने लखनको भी लताको साथ लेकर घर जानेको कहा.. तो भानुभी सरलाको लेकर वापस अपने घर नीकल गया....अब आगे

तो इधर सुबह भानुके फोनपे जैसेही राजीवकी तबीयत खराब होनेका फोन आया तो भानु सीधाही लखनको कहेकर अपने गांव चला गया.. ओर वहा रमाको सामको देरसे आनेको कहेकर सरलाको साथ लेकर राजीवके गांवकी ओर नीकल गया.. तो घरपे सीर्फ रमा ओर नीलमही रेह गये.. तो रमाको नीलमसे लखनके बारेमे बात करनेका मौका मील गया.. उनके पास सामतक का वक्त था..

तो वो काम करते नीलमके सामने धीरे धीरे बातकी सुरुआत लखनकी तारीफ करते करने लगी.. लेकीन नीलमने कुछ खास ध्यान नही दीया.. वो गुमसुम बैठी रमाकी बात सुनने लगी.. लेकीन उनके दिमागमे अब भी धमासान मचा हुआ था.. उसे बार बार लखनकी सभी हरकते याद आरही थी.. रमा अपना काम करते लखनकी बाते कर रहीथी तो नीलम उनके बारेमे सोचते बैठी थी..

नीलम : (मनमे सोचते) लखनजीजु भीनां.. आजतो उनसे बाल बाल बच गइ.. वरना आज वोभी पका मुजे धिरेनकी तराह चोद लेते.. कैसे लखनजीजुने मुजे जबरदस्तीसे अपना तगडा लंड पकडवाया.. ओ बापरे कीतना बडा था.. क्या लंडभी इतना बडा हो सकता हे..? ओर मेरे होठोको चुमते बुब्सको मसल रहेथे.. हद तो तब होगइ जब लखनजीजुने मेरी चुतको मुठीमे पकडकर भीच लीया.. तब मेरी चुतमे कीतना दर्द होने लगाथा..

लखनजीजु भी बडे ही कमीने कीसमके इन्सान नीकले.. दिखनेमे तो कीतने भोले भाले लगते हे.. ओर उसने तो मेरी ओर धिरेनकी चुदाइकी क्लीप भी बनाली.. वो कब वहा आये होगे..? हमतो उपर धिरेनके रुममे चुदाइ कर रहेथे.. तो क्या वो पीछेसे कहीसे उपर चडकर आये होगे..? हमारे बारेमे मम्मी पापाको ना बतादे.. वरना हमारा सारा प्लान चोपट होजायेगा.. उसने मुजे कीसीको क्लीप दीखाने मनातो कीया हे..

लेकीन ना बताने की सर्तभी क्या रखी..? वोभी मेरे साथ फीजीकल रीलेशन रखना चाहते हे.. फीजीकल रीलेशन रखनेका क्या मतलब हुआ..? मतलब तो वही हुआना की वोभी मुजे चोदना चाहते हे.. तो क्या मेभी लखनजीजुको पसंद आगइ हु..? मे भी मम्मीकी तराह इतनी सुंदर ओर खुबसुरत तो हुही.. की कीसी भी मर्दको अपनी ओर आकर्सीत कर सकती हु.. तभीतो लखनजीजु मुजे चोदना चाहते हे.. लेकीन अबतो मे धिरेनकी हो चुकी हु.. तो फीर.. उनको कैसे..?

लगता हे लखन जीजु भी बहुत रंगीन मीजाजके हे.. बीस्तरमे लतादीदीको चोदते उनकी चीखे नीकलवाने की बात कैसे खुलकर बता रहेथे.. क्या सचमे दीदी चीलाती होगी..? अगर धिरेनके साथ रीलेशनमे आनेसे पहेले मुजसे अपना प्यार जताते तो मे जरुर उनका प्यार अ‍ेक्सेप्ट कर लेती.. लेकीन अब बहुत देर होचुकी हे.. मेने ओर धिरेनने अपनी सुहागरात भी मनाली हे.. अब मे धिरेनको कैसे छोड सकती हु..? वो मुजसे बहुत प्यार भीतो करते हे..

लेकीन जीजुने सचभी तो कहा.. धिरेनके लंडसे तो लखनजीजुका लंड कीतना बडा हे..? बापरे.. क्या ओरते ओर लडकीया.. इसीलीये बडे लंडकी दिवानी होती हे..? सायद उनको बडे लंडमे बहुत मजा आता होगा.. कही मेने धिरेनके साथ रीलेशन रखकर कोइ जल्दबाजी तो नहीकी..? नही नही.. मे गलत सोच रही हु.. अ‍ैसा नही हो सकता.. अबतो लतादीदीने मेरा फोनभी लेलीया हे.. तो उनसे बातभी नही कर सकती..

रमा : (जोरोसे) अरी ओ नीलु.. मे कबसे तुमसे बात कर रही हु.. तेरा ध्यान कीधर हे..? कबसे क्या सोच रही हे.. मे यहा कबसे बडबड कर रही हु.. ओर तु कीस सोचमे डुबी हुइ हे..? हंम..? क्या कोइ परेसानी हे..?

नीलम : (हडबडाते तंद्नासे जागते जटसे) अरे नही नही.. मोम.. बहुत भुख लगी हे.. आप खाना बनाओनां.. फीर हम आराम करते बाते करेगे.. अभी पेटमे चुहे दोड रहे हे.. हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते) ये लडकी भीनां..? बीलकुल पागल हे.. होस्टेलमे रहेकर बीगड गइ हे.. हें..हें..हें.. चल मेरी कुछ खानेमे मदद कर.. कल अगर ससुराल जायेगी तो सब खाना बनाना आना चाहीये.. चल..

नीलम : (जोरोसे हसते) मोम.. अगर खाना बनाना नही आया तो मे आपको साथ लेजाउगी.. हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) चल हट.. बदमास.. तु वहा जाकर सचमे बीगड गइ हे.. चल आजा..

नीलमने बडीही सीफततासे रमाकी बातको टाल दीया.. ओर वो रमाकी मदद करनेके लीये खडी होगइ.. फीर दोनोने मीलकर खाना बनाने लगी.. तबभी रमा बीच बीचमे लता ओर लखनकी बाते करते उनकी तारीफ कर लेती थी.. तब अ‍ेक बारतो नीलमको भी सक होने लगाकी उनकी मां लखन जीजुकी इतजी तारीफ क्यु कर रही हे..? कही लखन जीजुका उनकी मां के साथभी तो कोइ चकर नही..?

नही नही.. मे गलत सोच रही हु.. यही सब नीलमके दिमागमे चल रहाथा.. फीरभी सोचते दोनोने खाना बनालीया ओर खालीया.. फीर सब काम नीपटाकर दोनोही रमाके रुममे आराम करने चली गइ.. तब कुछ देर नीलम भावेशके साथ खेलती रही.. जब रमाने भावेशकोभी हल्कासा खाना खीलाकर सुला दीया.. तो दोनोही मां बेटी अगल बगलमे लेटकर आराम करते बाते करने लगी.. रमा नीलमको सबकुछ खुलकर बताना चाहती थी..
 
रमा : (मुस्कुराते) नीलु बेटा.. बस.. तुम अ‍ेक बार अच्छेसे तेरी सब पढाइ करले.. तुजे पढनेका बहुतही अच्छा मौका मीला हे.. तेरी लतादीदी ओर लखनजीजुने तेरी पढाइ ओर तेरी सादीकी सारी जीम्वेवारी उठाली हे..

नीलम : (अपने मनकी बात रखते) लेकीन मोम.. मे लतादीदीके घरपे नही रहुगी.. मे होस्टेलमे रहेकर अपनी पढाइ पुरी करुगी.. क्या हेना मुजे कीसीके घरपे इतने दिन रहेना अच्छा नही लगता..

रमा : (सामने देखते आस्चर्यसे) तु पागल होगइ हे क्या..? लतादीदी पराइ थोडीनां हे..? तेरी बहेनके घरमे रहेनेमे क्या दीकत हे..? अबतो वो तेरी बुआ हे.. अगर उनके घरपे रहेगी तो कमसे कम तेरे होस्टेलमे रहेनेका ओर खाने पीनाका खर्चा तो बच जायेगा.. तेरी पढाइका खर्चा वो दे या हम दे.. लेकीन जायेगा तो हमारे घरसे ही.. ओर लतादीदीने मुजे सामनेसे कहा हे.. तो फीर तुजे क्या प्रोबलेम हे..?

नीलम : (मनमे) मोम.. अब आपको कैसे समजाउ..? अगर तेरी बेटी वहा रही तो तेरा ननंदोइ हर दिन तेरी बेटीकी चुदाइ करता रहेगा.. जालीमका हेभी कीतना बडा.. मुजेतो दीखाकर पागल कर दीया.. दीखाया क्या..? मेरा हाथ पकडकर कैसे अपने लंडको सहेलवा रहेथे.. बापरे.. कीतना मोटा लग रहा था..

रमा : (सामने देखते) नीलु.. फीर क्या सोच रही हे..? मे देख रही हु तु जबसे आइ हे कुछना कुछ सोचती रहेती हे.. कही तुजे कोइ परेसानी तो नही..? या कोइ प्यार ब्यारका चकरतो नही हेनां..? तो बता देना..

नीलम : (सामने देखते थोडी नाराज होते) क्या मोम.. आपभीनां..? मेरा अ‍ैसा कोइ चकर नही हे समजी.. अब मे सोचना भी छोडदु..? मुजे कोइ परेसानी नही.. आप सोजाओ.. हम फीर बात करेगे..

रमा : (मुस्कुराते) नही नीलु.. आज घरपे कोइ नही हे.. ओर हमे अ‍ेकेलेमे बात करनेका इनसे अच्छा मौका नही मीलेगा.. मे तुमसे कुछ बाते कहेना चाहती हु.. मे चाहती हु की ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहे..

नीलम : (सामने देखते) मोम.. अ‍ैसी क्या बात हे जो आप मुजसे अकेलेमे बताना चाहती हे..? ओर बात हम दोनोके बीच रहेनी चाहीये.. मतलब..? अ‍ैसी क्या बात हे जो आप घरके लोगोसे छुपकर कहेना चाहती हे..?

रमा : (धीरेसे सरमाकर मुस्कुराते) देख नीलु.. मे मां हु तेरी.. अगर मुजे तेरी चीन्ता नही होगी तो कीससे होगी..? मेभी चाहती हुकी मेरी बेटीको भी लतादीदीकी तराह अच्छा ससुराल मीले.. वोभी अ‍ैसो आरामकी जींदगी जी सके.. इसके लीये तेरी लतादीदीने खुद तेरी सादीकी जीम्वेवारी लेलीहे.. वो कहेतीथी बडे देवरसे कहेकर कोइ अच्छे घरमे तेरा रीस्ता तैय कर देगे..

नीलम : (थोडी परेसान होते) मोम.. आपको नही लगता आप मेरी सादीको लेकर जल्दबाजी कर रही हे..?

रमा : (मुस्कुराते) नही.. तु फीकर मत कर.. हम तेरी पढाइ पुरी होनेका इन्तजार करेगे.. लेकीन नीलु.. मे चाहती हुकी मेरी नीलु सादी करके अ‍ेक अ‍ैसे रइझ घरमे जाये.. वहा उसे कीसीभी बातकी कमी नाहो.. मे तेरा रीस्ता कही अन्जान जगहपे नही करुगी.. इनसे तो अच्छा हे कोइ घरके पहेचान वालोमे तेरी सादी हो.. इसके लीये मेने बहुत कुछ सोचके रखा हे.. अब मे तुजे जो बात बताने जा रही हु उसे ध्यानसे सुनना.. ओर वादा कर ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी..

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. बताइअ‍े.. आइ प्रोमीस मे कीसीको कुछ नही कहुगी.. बताओ..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) नीलु.. मे चाहती हु.. तुम दोनो बहेने पुरी जींदगी साथमे रहो.. मतलब अ‍ेकही घरमे अ‍ेकही पतीकी बीवी बनकर.. मे चाहती हु तुम्हारी सादी भी लखनजीसे होजाये.. वो बहुतही पैसे वाले हे.. वो अ‍ेक राजाकी फेमीली हे.. उनके पास अच्छी खासी प्रोपर्टीभी हे.. अच्छा बीजनेस हे.. सभी गांवमे उनकी इजत भी हे.. ओर सबसे खास बाते वो कीतनीभी सादीया करले.. उनको कोइ पुछने वाला नही..

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. कही अप पागल तो नही होगइ..? मेरी ही दीदीको मेरी सौतन बनानेके लीये तुली हो..? अगर पापाको पता चल गया तो आपकी खैर नही.. वो आपको घरसे नीकाल देगे.. बात करती हे.. आप अ‍ैसा सोचभी कैसे सकती हे..?

रमा : (थोडी सख्तीसे) कमीनी.. तुम मुजे मत सीखा.. इसीलीयेतो तुजे अभी ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रखनेको केह रहीथी.. देख आज लतादीदी उस घरकी रानी बन गइ हे.. तो अ‍ेक दिन तुमभी वहा राज करोगी.. राज.. समजी..? हमतो बडे नसीब वाले हेकी हम उस घरके साथ जुडे हुअ‍े हे.. ओर अबतो वो हमारे समधी भी हे.. तो यहा गांवमे हमारी भी इजत बढ गइ हे.. यहाभी हमे लोग इजतकी नजरोसे देखते हे.. कही अ‍ैसी वैसी जगाहपे सादी करनेसे तो अच्छा हे.. तु अपनी दीदीकी सोतन होजाये..

नीलम : (हींमत करते) मोम.. मे आपसे कुछ कहेना चाहती हु.. अगर मुजे कीसीकी दुसरी ही बीवी बनना हे तो मुजे लखन जीजुसे ज्यादा धिरेन जीजु पसंद हे.. वोभी सरकारी नोकरी करते हे.. वोभी सुखी सम्पन हे.. तो आपने उसीका नाम क्यु नही लीया..? सीर्फ लखन जीजुको ही क्यु चुना..?

रमा : (चोंकते अ‍ेक नजरसे देखते) नीलु.. तेरा दिमागतो ठीक हेनां..? कमीनी.. अगर वो सुखी सम्पन होते तो धिरेन इतना बडा होनेके बावजुद भी उनकी मांने क्यु हमारे बडे देवरसे सादी करली..? क्युकी वो खुद अ‍ैसो आरामकी जींदगी जीना चाहती थी.. वोभी इस हवेलीकी रानी बनना चाहती थी.. (कुछ सोचते ही) अ‍ेक मीनीट.. अ‍ेक मीनीट.. नीलु.. सच बताना.. कही तेरा धिरेनके साथ कुछ चकर बकर तो नही..? सच बताना.. कमीनी ये धिरेनकी बात तेरे दिमागमे आइ कैसे..? खा मेरी कसम..

नीलम : (थोडी गभराते जुठ बोलते) नही नही.. मोम.. आप मुजपे सक कर रही हो.. अ‍ैसा कुछभी नही हे.. आपकी कसम.. बस..? मेरे मुहसे अनायास अ‍ैसेही उनका नाम नीकल गया.. मेतो बस अ‍ैसेही आपको केह रही थी.. ठीक हे.. जैसा आपको ठीक लगे.. बस..? अबतो आप खुस..?

कहातो रमाने राहतकी सांसली.. आज बातोही बातोमे नीलम अपने दिलकी बाते अपनी मांको कहेते रमासे जुठ बोलकर बाल बाल बच गइ.. रमासे बचनेके लीये उसे रमाकी जुठी कसमभी खानी पडी.. तो नीलमको मनमे बहुत बुरा लगा.. अब उनके पास रमाकी बात माननेके अलावा दुसरा कोइ रास्ता नही दीखा.. अब आगे जोभी होगा देखा जायेगा.. सोचकर नीलमने रमाको सरेन्डर करते राहतकी सांस ली..

उसने बातोही बातोमे धिरेनके साथ रीलेशनकी बात कहेना चाही.. फीर लताके साथ उनके घरपे ना रहेनेकी रमाके सामने जीतनी भी दलीले की.. वो सभी दलीले बेकार होगइ.. अब उनको पुरा यकीन होगया की उसे अब लतादीदीके साथही रहेना पडेगा.. ओर लतादीदीके साथ रहेनेका मतलब खुदको लखन जीजुको सरेन्डर करना.. ये बातभी वो भली भांती जान चुकी थी.. तभी उनको रमाकी आवाज सुनाइ दी..
 
रमा : (मुस्कुराते) देख नीलु.. मे जोभी कर रही हु सब तेरी भलाइ के लीयेही कर रही हु.. अब मेरी बात ध्यानसे सुनना.. तेरे पास बहुतही अच्छा मौका हे.. तु लतादीदीके घरपे पढाइ तक रुकेगी.. मतलब दो तीन सालतो पकाही समजले.. (नजरे चुराते सरमाकर) तो मे चाहती हु की.. की.. तुम इस मामलेमे खुद आगे बढे.. समज गइनां..? ताकी आगे जाकर खुद लखनजी तेरी सादीकी बात हमसे करे.. क्युकी हम उनको ये सब बात सामनेसे नही केह सकते..

नीलम : (बडेही आस्चर्यसे देखते) मो..म.. आपको पता हेनां..? की आप क्या केह रही हे..? इसका मतलब भी जानती हे आप..? आप अपनी ही बेटीके साथ कीतना बडा खतरनाक खेल खेल रही हे..

रमा : (थोडी नाराज होते) कमीनी तु मुजे मत सीखा.. मुजे सब पता हे मे क्या बोल रही हु.. ओर सुन.. इस बारेमे तेरी लतादीदीको कुछ पता नही चलना चाहीये.. समजी..? वरना सारा खेल बीगड सकता हे..

नीलम : (रमाकी ओर आस्चर्यसे देखते) मो..म.. लगता हे आप पागल होगइ हे.. आपको पता हेनां इसमे मे ओर लखनजीजु आगे बढेगे तो क्या हो सकता हे..? इसमे कुछभी हो सकता हे.. आप समज गइनां..?

रमा : (नजरे चुराते धीरेसे) हां हां.. मुजे सब पता हे.. क्या हो सकता हे.. लेकीन तेरी सादीभी तो उसीके साथ होगी.. अगर तेरा होने वाला पती सादीसे पहेले तेरे साथ कुछ करभी ले तो क्या बुराइ हे..? मे इसे गलत नही मानती.. नीलु.. सोच.. अ‍ेक बार तेरी सादी उनसे हो जायेगी.. तो फीर तुम उस हवेलीकी रानी बन जाओगी.. सोरी नीलुु.. मे अ‍ेक मां होकर तुजसे ये सब केह रही हु.. मुजे गलत मत समजना.. ये सब मे तेरे उज्वल भविस्यके लीये कर रही हु..

नीलम : (कुछ सोचते) मोम.. मुजे पता हे आपको मेरी बहुत फीकर हे.. लेकीन इसके बारेमे मुजे सोचनेके लीये थोडा वक्त दीजीये.. क्युकी आप बहुत बडा रीस्क ले रही हे..

रमा : (सामने देखकर मुस्कुराते प्यारसे गाल सहेलाते) ठीक हे.. मेरी प्यारी बच्ची.. नीलु.. तुम बहुतही समजदार हे.. अ‍ेक बार सांतीसे बैठकर ठंडे दिमागसे सोचले.. फीर आरामसे मुजे तेरा जवाब बता देना.. बेटी.. मे कोइ रीस्क नही ले रही.. मेने जो भी कहा हे बहुत सोच समजकर ही कहा हे..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. अब जमाना बदल गया हे.. अब पहेलेकी तराह प्यार नही होता.. आजका मर्द ओर औरते प्यारका मतलब कुछ ओरही समजते हे.. अ‍ेक बार मान भी लो.. की मेरे साथ लखन जीजुको प्यार होगया.. तो वो मुजसे कुछ ओरही डिमांन्ड करेगे.. तब आप क्या करोगी..? अगर यही प्यार मेने लखन जीजुके अलावा कीसी ओरसे कीया होता.. ओर आपको सब पता चलता तो अबतक तो आप मेरी खाल उखाड दी होती..

रमा : (प्यारसे गाल सहेलाते) मेरी बच्ची.. कीतनी सयानी होगइ हे.. तुम सबकुछ समजती हे.. नीलु.. तु लखनजीसे प्यार करेगी.. तो यकीन मान मे तुछे अ‍ेक सब्दभी नही कहुगी.. क्युकी मे खुद चाहती हुकी तुम उनके साथ आगे बढो.. अ‍ेक बार तुम दोनोके बीच प्यार बढेगा.. तब मुजे पता हे वो तेरे बीना नही रेह सकेगे..

ओर तुम जो केह रही हो वो डीमांन्डभी करेगा.. (सरमाते नजरे चुराते) नीलु.. तो तुम इसमे आगे बढना.. जब दोनो अ‍ेक बार मील जाओगे.. तब तुम उनको सादी करनेके लीये कहेना.. वो खुद आकर तेरे पापासे तेरा हाथ मांग लेगे.. बस.. मेतो तुजे अच्छे खानदानमे राज करते देखना चाहती हु.. ओर कुछ नही..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. मुजे सोचनेका समय देनेके लीये थेन्क्स.. अब आप सो जाइअ‍े..

रमा : (मुस्कुराते) मेरी प्यारी बच्ची.. कीतनी समजदार होगइ हे.. चल तुमभी थोडा आराम करले.. लेकीन याद रखना.. चाहे जो भी कुछ हो.. तुजे पढनातो हेतो उसी घरमे रहेकर पढना पडेगा..

कहेते रमा मनमे खुस होते खडी होकर बाथरुममे चली गइ.. क्युकी लखनकी बाते करते वो खुद गरम होगइ थी.. क्युकी अब वोभी लखनसे प्यार करने लगी थी.. उनकोभी पताथा की अ‍ेकना अ‍ेक दिन उनकोभी लखनके नीचे लेटना पडेगा.. ओर उनकी चुतसे लगातार पानी बेह रहाथा.. फीर वो चुतको साफ करके वापस बेडपे आगइ.. ओर करवट लेकर आराम करने लगी.. तो नीलमभी दुसरी ओर करवट लेकर सोने लगी.. लेकीन रमाकी बातोसे उनकी आंखोसे नींद कोसो दुर गायब हो चुकी थी.. वो करवट लेते सोचने लगी..

नीलम : (मनमे) हे भगवान.. मम्मीको क्या हो गया हे..? जीस सर्तके लीये लीये लखनजीजु खुद केह रहेथे वोही बात खुद मम्मी चाहती हे.. की मे उनके साथ फीजीकल रीलेशन रखु.. मेरी अ‍ैसो आरामकी जींदगीके लीये वो खुद मुजसे लखन जीजुसे चुदवानेके लीये राजी हे.. लेकीन उनकी बातभी तो सही हे.. मे खुद अ‍ैसी ही अ‍ैसो आरमकी जींदगी चाहती थी.. इसीलीये तो मेने धिरेनको प्यार कीया.. लेकीन मम्मीकी बातभी सही हे..

खुद धिरेनकी मम्मीने ही बडे जीजुसे सादी करली हे.. ओर बातभी सही हे.. लखनके पास कीतना सारा पैसा ओर प्रोपर्टी हे.. इनके आगे धिरेनतो कुछभी नही हे.. ओर आज लखन जीजुने उनका लंडभी मुजे दिखाया.. दिखाया क्या सीधा मेरे हाथोमे ही थमा दीया.. बापरे कीतना बडा लंडथा उनका.. इनके आगे धिरेनका लंडतो कुछभी नही हे.. ओर क्या कहे रहेथे मुजे..? की तेरी लतादीदीको चोदता हु तो उनकी चीखे नीकल जाती हे..

कीतना गंदा बोल रहेथे.. सायद वो सच केह रहे होगे.. अगर इतना बडा लंड कोइभी अपनी चुतमे लेगीतो चीखेगी नहीतो क्या करेगी..? लगता हे इसीलीये सब औरते बडे लंडकी दिवानी हे.. तो क्या मुजे लखन जीजुकी सर्त मान लेनी चाहीये..? मान लेनी चाहीये क्या माननी ही पडेगी.. क्युकी मेरी ओर धिरेनकी चुदाइकी क्लीप उनके पास हे..

मम्मी भी तो यही चाहती हे.. जोभी हो.. मम्मीकी सब बाते सही हे.. अगर मेरी मम्मी खुदही अ‍ैसा चाहती हे तो फीर मे क्यु पीछे हटु..? मेभी तो यही सब मोज मस्ती करना चाहती हु.. अगर धिरेनके साथ लखन जीजुभी मुजे चोदले.. तो क्या फर्क पडता हे..? अ‍ेक बार लखन जीजुसेभी चुदवाकर देख लुगी की मजा कीसमे आता हे..

लेकीन धिरेनभी मुजसे बहुत प्यार करता हे.. मुजसे सादी तक करनेको तैयार हे.. अगर उनके साथ सादी नही कीतो उनको बुरा लगेगा.. क्या ये प्यारमे धोखा नही हे..? लखन जीजुभी तो यही कहेते थे.. की धिरेनसे सादी करले फीरभी मेरे साथ रीलेशन रखना पडेगा.. जोभी हो.. आगे देखा जायेगा..

क्या फर्क पडता हे.. अगर दोनोसे चुदवालु तो..? मे तब सीचुअ‍ेशन देखकर नीर्णय लुगी.. की मुजे कीसके साथ सादी करनी हे.. अगर धिरेनके साथ सादी करलु.. फीरभी लखनजीजु कीसीभी तराह मुजे चोद लेगे.. अब चुदवाना तो मुजे दो दो लंडसे ही हे.. अभीतो मम्मीकी बात मानही लेती हु.. साला दोनो तरफसे मजातो मीलेगा.. मुजे लखनजीजुकी सर्त मालेनी चाहीये..

यही सब सोचते नीलमके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर वो मुस्कुराते अपना सर पीछे घुमाकर उनकी मां रमाकी ओर देखने लगी.. तो रमा खर्राटे मारते सो रहीथी.. तो नीलम मुस्कुराते फीरसे करवट लेकर आंख बंध करके सोनेकी कोसीस करने लगी.. तब उनकी आंखोके सामने अ‍ेक बार फीर लखनका बडा लंड छा गया.. ओर नीलम रोमांचीत होने लगी.. ओर आखीर नीलमने अपनी चुतको सहेलाते लखनकी सर्तको माननेका फैसला करलीया..
 
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