Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 37 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो दुसरी ओर राजीवके घर सब लोग चले गये.. तो अब घरमे सीर्फ घरके ही लोग बचे थे.. तब धिरेन गांवके बाजारमे चला गया.. ओर वहा कोइ अच्छीसी रेस्टोरन्टसे सबके लीये खाना पेक करवाके लाया.. आज सुबहसे कीसीने चाइ नास्ता भी नही कीयाथा.. ओर ग्याराह बजे राजीवने अंतीम सांस ली.. तो दो पहोरकोभी कीसीने नही खाया था.. तो अभी नीर्मला ओर भावना खानेको मना करने लगी.. तब भुमीका ओर चंदाने दोनोको जबरदस्तीसे खीलाया.. ओर साथमे सबने भी खाना खालीया..

देवायत : (सबलोग होलमे बेठेथे तब) धिरेन.. अब तुभी कल यहासे सीधे जोबपे चले जाना.. अब यहा रुकनेका कोइ मतलब नही हे.. क्युकी कल मे इस सबको लेकर हमारे घरपे चला जाउगा.. अब पापाकी जोभी वीधीया करनी हे हम वही करेगे.. तुम वहा आते जाते रहेना.. ओर वहीसे जोबपे चले जाना..

नीर्मला : हां बेटा.. तेरे जीजु ठीक केह रहे हे.. ओर अब जबतक सब वीधीया खतम नही होजाती तबतक पुनम बीटीया भी हमारे साथ रहेगी.. वो उनकी अ‍ेकलोती बहु थी.. कल उनकी पे्रगनन्सीकी बात सुनकर कीतने खुस थे.. धिरेन.. अब तर्पणकी सब वीधीया तेरे ओर तेरे जीजुके हाथोसे ही होगी.. यही उनकी आखरी इच्छा थी..

भुमीका : (मुस्कुराते) मेरा भाइ.. हां नीमु.. कल पुनो बेटीके पेटसे होनेकी खुसखबर सुनकर वो कीतना खुस हो रहाथा.. की चलो.. कमसे कम मे दादा तो होजाउगा.. लेकीन भगवानके आगे कीसकी चलती हे.. चलो अब सब लोग सोजाओ.. सुबहसे सब अ‍ैसे ही हे..

मंजुला : (धीरेसे) देवु.. आज आप इधरही रुक रहे हेनां..? अगर कल सबको उधर जाना हे तो हम अभी हमारे सब कपडे पेक कर लेते हे.. चलो पुनो..

नीर्मला : मंजु.. क्या तेरे पापाकी सब वीधीया पुरी होने तक हम यहा नही रुक सकते..? हंम..? मे सीर्फ केह रही हु..

देवायत : (मुस्कुराते) जी.. बीलकुल रुक सकते हे.. अगर आपकी यही इच्छा हे तो हम सब यही रुक जाते हे.. हमे कोइ प्रोबलेम नही..

भुमीका : नही नीमु.. अबतो जो होनाथा वो हो चुका हे.. अगर यही रुकना हेतो देवु ओर धिरेन सबको यहा आना जाना पडेगा.. अगर वहा हेतो वो घरके अलावा अपने बीजनेस ओर धिरेनको जोबमे आने जानेमे आसानी रहेगी.. बाकी तेरी मरजी.. अगर यही रुकना हे तो भी कोइ प्रोबलेम नही..

भावना : मोम.. जीजु ओर मौसी ठीक केह रहे हे.. वैसेभी हमारे कौनसा कोइ रीस्तेदार हे जो यहा आपको आस्वासन देनेके लीये यहा मीलने आयेगे..? ओर यहा रहेगे तो आप पापाको याद करते रोती ही रहोगी.. तो चलो.. हम वही चलेजाते हे.. (मंजुको) दीदी आप चलो.. सब पेकींग करलो मे भी आती हु..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. ये भी सही हे.. चलो हम सब वही आजाते हे.. भावु.. तुम मेरे भी कपडे पेक करले..

कहातो सबके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर मंजु पुनम ओर भावना.. सबके कपडे पेक करने चली गइ.. तब मौका देखकर धिरेन धिरेसे नीर्मला ओर देवायतके पास आकर बैठ गया.. सबके व्यवहार देखकर उसने राहतकी सांसली.. की चलो.. उनके ओर नीलमके बारेमे अभी कीसीने उसे कुछ नही कहा.. हालाकी वो जानता थाकी इस बारेमे मंजुदीदीको सब पता चल गया होगा.. धिरेनने मौका देखकर बात छेडदी..

धिरेन : (धीरेसे सरमाते) जीजु.. मेने कल अ‍ेक मकान देखलीया हे.. हमारे मेनेजरकाही हे.. दो बेडरुम.. होल.. कीचन.. भावमे मील रहा हे.. ओर अच्छे अ‍ेरीया मे हे.. तो आप मम्मी ओर पुनम टाइम मीलेतो देखलो.. वो भुमीमौसीकी सोसायटी मे हे.. अ‍ेक गली पीछे..

भुमीका : (खुस होते) अरे वाह.. तो हमारे पडोसी बनकर आ रहे हो.. हें..हें..हें..

चंदा : (मुस्कुराते) बेटा.. वो सब बादमे देख लेगे.. पहेले हम तेरे मौसाजीका कार्य करले.. फीर चलेगे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) नही चंदा.. अगर आज राजीव होते ओर ये सुनते तो कीतना खुस होते.. यही समजले वो हमारे बीच हे.. जो अभी धिरेनकी बात सुनकर खुस हो रहे होगे.. तो हमे उनकी खुसीके मना नही करनी चाहीये.. ओर वैसेभी मे इन सब चीजोमे ज्यादा नही मानती.. जीस तराह हमारे सामने दु:खका अवसर आयातो हमने उसेभी स्वीकार करलीया हे.. तो खुसीयाभी भी हमे स्वीकार करलेनी चाहीये..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे धिरेन.. हम अ‍ेक दो दिनमे जाकर सब देख लेगे.. ओर चंदा ओर पुनकोभी पसंद आगया तो हम उसे वही पुरा पेमेन्ट दे देगे..

धिरेन : (मुस्कुराते) नही जीजु.. हमे वहीसे होमलोन मील जायेगी.. वो हमारे मेनेजर ही सब अ‍ेरेन्ज करदेगे.. क्युकी वो घर मे बेन्क लोनसे लेना चाहता हु.. मेरी कमाइकी पहेली प्रोपर्टी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (गले लगाकर सर चुमते) हंम.. मतलब मेरी बेटा खुदार हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे कोइ बात नही..

कहतो धिरेन ओर चंदा दोनोही हसने लगे.. चंदा नीर्मलाको हसते हुअ‍े देखकर बहुतही खुस होने लगी.. क्युकी आजही उनके पती ओर बडेभाइका स्वर्गवास हुआ था.. तो नीर्मला उनको इतजी जल्दीसे सदमेसे बहार नीकलते भुल रही थी.. जीसे देखकर देवायत ओर भुमीकाभी खुस हो रहेथे.. उस रात कुछ नही हुआ.. सब पेकींग होगइ तब देवायत धिरेन होलमे ही सोगये.. ओर सबलोग अपने रुममे अ‍ेडजेस्ट करके सो गये.. तो आज भुमीका नीर्मलाके साथही सोगइ..
 
सुबह सबलोग जल्दी उठ गये.. ओर तैयार होने लगे.. तब चंदा ओर पुनम.. कीचनमे सबके लीये चाइ नास्ता बना रहीथी.. तो देवु धिरेनभी कंपलीट होकर होलमे बैठेथे.. तब देवायतने फोन करके लखन ओर भानुको अपनी कार लेकर बुला लीया.. ताकी सबलोग अपने सामानके साथ आरामसे बैठ सके.. मंजु ओर भावना कंपलीट होकर अपने बच्चोको दुध पीला रहीथी.. उसी वक्त नीर्मला ओर भुमीका दोनोही अपने रुममे अ‍ेक साथ बाथरुममे घुसी हुइ थी.. ओर अ‍ेक दुसरेको बाहोमे अ‍ेक दुसरेके होंठोको चुम रही थी.. तभी..

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भुमीका : (होठोको चुमते) नीमु.. अब भुलजा सब पुरानी बाते.. अब आजसे हम दोनोकी जींदगी की नइ सुरुआत होगइ हे.. अब हम दोनो सीर्फ हमारे देवुकी पत्नीया हे.. हमे यही रहेना हे.. तु घरकी अ‍ेक चाबी हमारी भावुको देदे.. ओर अ‍ेक तेरे पाास रखना.. क्युकी अब मे अपनी प्रेगनन्सी ज्यादा दिन सबसे नही छीपा सकती.. तो हो सकता हे मुजेभी कुछ महीने भावुके पास रहेना पडे.. तब मुजे तेरी जरुरत पडेगी..

नीर्मला : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भुमी.. तु कभी फीकर मत करना.. मे हमेसा तेरे साथही रहुगी.. आज सही मायनोमे मे अपने ससुराल जा रही हु.. वो भी हमेसाके लीये.. भुमी.. राजीवने आखरी वक्तपे मेरा हाथ सबके सामने हमारे देवुको सोप दीया.. ओर उन्होने अपना प्राण त्याग दीया.. मुजे लगता हे मेरा राजीव हम सबके बारेमे बहुत कुछ जानता था.. ओर उसने मुजे कभी मेरे ओर देवुके रीलेशनके बारेमे नही पुछा.. लव यु भाइ..

भुमीका : (मुस्कुराते) हंम.. तु उनको अकेलेमे हमेसा भाइ कहेती थीनां..?

नीर्मला : (सरमाकर मुस्कुराते) हां भुमी.. भलेही हमने सादी करलीथी.. लेकीन हमने हमारा रीलेशन कभी चेन्ज नही कीया.. ओर वो खुद भी यही चाहता था.. जबभी हम दोनो फीजीकल होते अ‍ेक दुसरेको भाइ बहेन मानकर ही फीजीकल होतेथे.. ओर मे उनको तबभी भाइ कहेती ओर वो मुजे बहेन बहेन कहेते चोदता..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नीमु.. कीतना अजीब हेनां.. सबको अपनी बहेनही प्यारी लगती हे.. उस थाइलेन्ड देशमे आजभी सब लोग अपनी बहेनसे ही सादी करते हे.. जो अब इनकी सुरुआत हमारे देवुके घरसे होगइ हे.. इनसे पहेले हिमाचलमे सीर्फ वो राजाके घरपे ही हो रहाथा.. जो बादमे वहाकी परंपरा होगइ..

नीर्मला : (मुस्कुराते होंठ चुमते) भुमी.. तबभी वहा हम सब उनकी रानीया थी.. ओर यहाभी हम सभी उनकेही अंसकी रानीया हे.. हमारा कामही उनको खुस रखना.. ओर बदलेमे उनसे हमारी प्यास बुजाना हे.. तु सोच.. जब वो खुद स्वयंम आयेगे तब क्या होगा..? मंजु केह रहीथी तब वो हम सबको हमारा पीछला जन्म याद दीलवा देगा.. जब वो हमसे फीजीकल होजायेगा.. तब हमभी नया जन्म लेकर उनकी रानीया होगी..

भुमीका : (सरमाकर मुस्कुराते) नीमु.. कीतना अजीब होगा.. हम नया जन्म लेकरभी उनकी रानीया होगी.. ओर आजभी उनकी रानीया हे.. क्या हम बुढी होजायेगी तबभी देवु हमसे फीजीकल होगा..?

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे होठ चुमते) भुमी.. अ‍ेक बात कहु..? मंजु केह रहीथी.. हमे आगे जाकर नया जन्म लेकर वापस आना हे.. मुजे अगले जन्ममे मंजुकी कोखसे जन्म लेना हे.. तबभी वो मेरा भाइ होगा.. भुमी.. अब हमारी उम्र थम जायेगी.. देवु हमे सब सुख देता रहेगा.. बाकी तो मंजुही जाने.. आगे क्या होगा..

मंजुला (बहासे दरवाजा खटखटाते जोरोसे) मोम.. क्या कर रही हे दोनो.. जाग गइ की नही..? चलो चाइ नास्ता रेडी होगया हे.. सबलोग कंपलीट तैयार होकर बैठे हे..

नीर्मला : (अंदरसे जोरोसे) अरे आ रही हे हम.. कपडेतो बदलने दे.. (भुमीको धीरेसे) भुमी.. चल.. बाकीकी बाते हम वहा आरामसे बैठकर करेगे.. मुजे मंजुसे इस बारेमे वहा जाकर पुछना होगा.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही फटाफट कंपलीट होकर बहार आगइ.. ओर बहार आतेही मंजुकी पीठमे अ‍ेक मुका जड दीया तो सबलोग हसने लगे.. फीर सबलोग चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब भावना बडीही कातील नजरोसे देवायतके सामने देखते मुस्कुराती रही.. तो मंजुने उनकी जांगपे अ‍ेक चपत लगादी.. तो भावना सर्मसार होगइ.. ओर नजरे जुकाते चाइ नास्ता करने लगी.. तबतक लखन ओर भानुभी कार लेकर आगये..

लेकीन मंजु उनकी मां नीर्मला ओर भुमीकाकी बाते जान चुकी थी.. ओर वो चाइ नास्ता करते दोनोकी ओर देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहीथी.. क्युकी उनको पताथा की आगे चलकर क्या होने वाला हे.. जो सुखकी कामना दोनो कर रहीथी.. तब उनको पता नही थाकी देवु उन दोनोको कीतना सुख दे पायेगा.. बल्की सीर्फ उन दोनोको ही नही.. देवुकी जीतनी बीवीया थी.. सबकी जींदगीमे आगे चइकर भुचाल आने वाला था..

फीर सबने चाइ नास्ता करलीया तब भावना चंदा पुनम सबका सामान रुमसे लेकर आगइ.. तब भानु बडेही प्यारसे भावनाकी ओर देख रहाथा.. तभी दोनोकी नजरे मीली.. ओर भानु मुस्कुराने लगा.. तब भावना भी सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर भानुने उनके हाथसे कपडेकी बेगको लेलीया.. ओर धीरेसे उनकी कारमे साथ आनेको कहा.. तो भावनाभी सरमाकर मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाने लगी..

क्युकी इतने दिनो मंजु ओर भावना साथमे रही.. तो मंजुने भावनाको उनके बारेमे आने वाले दिनोमे उनके साथ क्या क्या होगा.. ओर क्या नही होगा.. ओर घरके दुसरे लोगोके बारेमे भी बहुत कुछ बता दीया था.. मंजुने उसे बता दीयाथाकी आने वाले दिनोमे तुजे तेरे जीजुसे दो बच्चे ओर अ‍ेक बच्चा ओर होगा.. लेकीन वो कीससे होगा ये बात मंजुने अभी नही बताइ.. जीनकी वजहसे भावनाको भानुके साथ रीलेशन रखना जरुरी था.. सुनकर भावना बहुतही रोमांचीत हो गइ थी..

ओर मंजुने नीलम ओर रमाको लेकर भी भावनाको आगाह कर दीया था.. की दोनोके दिमागमे क्या क्या चल रहा हे.. ओर दोनो कीतनी सातीर दिमाग वाली हे.. तब सुनकर भावना चोंक गइ.. की पैसोके लीये रमा इतना नीचे तक गीर सकती हे.. की उसके लीये वो अपनी बेटीकी जींदगीसे भी खीलवाड करनेमे राजी हो गइथी.. मंजुने भावनाको इसके अलावा ओर कुछ नही बताया जो रमा ओर नीलमके साथ होने वाला हे..

भानुने ज्यादातर सामान अपनी कारमे तो कुछ सामान लखनकी कारमे रख दीया.. भानु भावनाके साथ अकेलेमे बात करना चाहता था.. आज वो बहुत खुस था.. क्युकी आज भावना उनके सामने मुस्कुरा रहीथी.. तब नीर्मलाने घरको ताला लगानेसे पहेले अ‍ेक बार पुरे घरको नजर घुमाकर देख लीया.. ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. यही वो घरथा जहा नीर्मलाने सबकुछ पालीया था..

अपना प्यार.. पती.. परीवार.. सबकुछ.. ओर इसी घरमे उनको पहेली बार देवायतभी मीला.. यही घरमे उनके साथ गांधर्व सादी करके कइ राते ओर दिन रंगीन भी कीथी.. नीर्मलाने घरको ताला लगाकर चाबी अपने पास रखली.. ओर देवायतके कारकी ओर चली गइ.. तब देवायतके साथ मंजु ओर पीछे नीर्मला भुमीका बैठ गये.. तो लखनकी कारमे पुनम सृती ओर चंदा बैठ गये.. तो धिरेनने अपनी बाइक लेली..

तो भानुके साथ वाली सीटमे भावना अपनी बच्चीको लेकर बैठ गइ.. पीछे की सीटमे सबका सामान रखा हुआथा.. ओर सबकी कारे देवायतके गांवकी ओर चल पडी.. तो पीछे धिरेनभी अपनी बाइक लेकर आ रहाथा.. जबसे लखन ओर लता उनके घरसे नीलमको लेगये.. तबसे आज तक धिरेनने नीलमको फोन करनेकी बहुत कोसीसकी.. लेकीन हर बार नीलमका फोन स्वीच ओफ आ रहाथा....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७६

तो भानुके साथ वाली सीटमे भावना अपनी बच्चीको लेकर बैठ गइ.. पीछे की सीटमे सबका सामान रखा हुआथा.. ओर सबकी कारे देवायतके गांवकी ओर चल पडी.. तो पीछे धिरेनभी अपनी बाइक लेकर आ रहाथा.. जबसे लखन ओर लता उनके घरसे नीलमको लेगये.. तबसे आज तक धिरेनने नीलमको फोन करनेकी बहुत कोसीसकी.. लेकीन हर बार नीलमका फोन स्वीच ओफ आ रहा था....अब आगे

तबसे धिरेन बहुत परेसान हो रहा था.. उनको डर था.. की कही नीलमका फोन लताके हाथोमे तो नही आगया..? तब धिरेनको लताकी बातोका अ‍ेक बार ओर सामना होनेका डर सताने लगा.. इस वक्त धिरेन हवेलीपे जाना नही चाहता था.. क्युकी उनको पता थाकी वहा लता होगी.. लेकीन वो कीसीको हवेलीपे जानेके लीये मनाभी तो नही कर सकता..

तो दुसरी ओर भावनाको उनके बारेमें मंजुने सबकुछ बता दीया था.. की आने वाले वक्तमे उनकी जींदगीमे क्या क्या बदलाव होगा.. जीसे सुनकर भावना बहुत ही रोमांचीत फील कर रही थी.. इसी वजहसे अब भावनाको अपने पती भानुसे रीलेशन रखना जरुरी हो गया था.. तो दुसरी ओर वो रमा ओर नीलमके इरादोके बारेमे सबकुछ जान चुकी थी.. तब भानु ओर भावना दोनोही कारमे अकेलेथे तब भावना बहुत सरमा रही थी..

भानु : (मुस्कुराते सामने दैखकर) भावु.. तुम कैसी हो..? क्या मुजे अबभी माफ नही कीया..? मुजे पापाके जानेका बहुतही अफसोस हे.. जीस वक्त मुजे तेरे साथ होना चाहीयेथा.. इस वक्त मे तुमसे दुर था.. भावु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे माफ करदे..

भावना : (मुस्कुराते) भानु.. तुम माफी मत मांगो.. मेनेतो कबसे तुमको माफ करदीया हे.. हां.. यहा जीजु थे.. तो हमे कोइ दिकत नही आइ.. बस तुमको अपनी जीम्वेवारीका अहेसास हे वोही मेरे लीये काफी हे..

भानु : (मुस्कुराते) भावु.. क्या हम दोनो पहेलेकी तराह साथ नही रेह सकते..? हंम..? आजाना.. तेरी बहुत याद आती हे.. मे वाकइ तेरे बीना नही रेह सकता.. मां की कसम..

भावना : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) भानु.. प्लीज.. अभी मुजे थोडा वक्त चाहीये.. हम जरुर साथ रहेगे.. वोभी पहेलेकी तराह.. अब मुजे तुमसे कोइ गीला सीकवा नही.. बस.. मे अब पहेलेकी तराह हमेसा तेरे साथ नही रहुगी.. कुछ दिन मम्मीके साथभी रहेना पडेगा.. क्युकी अब वो अकेली होगइ हे.. वैसेभी तेरी दुसरी बीवीतो हे.. हें..हें..हें..

भानु : (मुस्कुराकर) भावु.. तुजे सच कहु..? जब दुसरी बीवी आइनां.. तभी मुजे तेरी अहेमीयका पता चला.. बस मे तुजे ओर कुछ कहेना नही चाहता.. सायद मुजसे गलती हुइ हे.. क्युकी उनसे सादी करनेका नीर्णयभी मेरा था.. बस.. मुजे ओर कुछ नही कहेना.. भावु.. तुम आजाओ.. प्लीज..

भावना : भानु.. बस पापाका सब कार्य पुरा हो जानेदो.. मे तुमको सामनेसे फोन करुगी.. तब आकर मुजे लेजाना.. वैसेभी पापाने अपना घर मेरे नाम करदीया हे.. तो कभी कभी मुजे वहा मम्मीको लेकर जाना पडेगा.. क्युकी इस घरमे मम्मी पापाकी बहुत यादे जुडी हुइ हे.. तो जब मम्मी कहेगी तब मुजे उनके साथभी रहेना पडेगा..

भानु : भावु.. कोइ बात नही.. तुजे जबभी जाना हो वापस आना हो तुम आजाद हो.. तुमने मुजे माफ कर दीया वोही मेरे लीये बहुत हे.. भावु.. मे तुजे आजभी उतना चाहता हु जीतना पहेले चाहता था..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) भानु.. मुजे परमीसन देनेके लीये थेन्क्स.. मेभी तुजे इतना चाहती हु जीतना पहेले चाहती थी.. बस.. मुजे तुमसे अ‍ेटेच होनेमे थोडा वक्त लगेगा.. लेकीन फीकर मत करना.. मे कोसीस करुगी की जल्द ही हम तीनो साथमे रहेगे.. क्या यही चाहतेथे ना तुम..?

भानु : (मुस्कुराते) हंम.. मेरी बीवी काफी समजदार हे.. भावु.. आइ लव यु..

भावना : (सरमाते मुस्कुराते) भानु.. आइ लव यु टु..

भावनाने बडीही सीफततासे भानुको मीलनेकी भुमीका तैयार करली.. जबसे भावनाने मंजुसे सब कुछ जान लीया था.. तबसे भावना मन बना चुकी थी.. की उनके रास्तेके काटोको कैसे नीकाला जाये.. इसके लीये भावनाको भानुके घर रहेना जरुरी होगया था.. तब पुनमने भी भावनाको बहुत कुछ बताकर रास्ता भी बता दीया था की कैसे काटोसे काटा नीकालना हे..

क्युकी आजकल इस मामलेमे पुनम बहुतही सातीर दिमाग चला रही थी.. क्युकी खुद उसीका घर टुटनेकी कगारपे था.. ओर वोभी नीलमकी वजहसे.. वैसेतो पुनम खुदके बारेमे बहुत कुछ जान चुकी थी.. की आने वाले वक्तमे उनके साथ ओर घरमे उनकी सभी सौतनोके साथ क्या क्या बदलाव होगा.. इस बातके लीये वो अभीसे खुदको रोमांचीत फील करने लगी थी.. ओर हवेलीकी सभी कमान अपने हाथोमे लेनेके लीये खुदको तैयार कर रही थी..

सब लोग बाते करते हवेलीपे पहोंच गये.. तो पीछे धिरेनभी आगया.. तभी रजीया दया सबलोग कारकी आवाज सुकर बहार नीकले.. तो लताभी उपरसे नीचे आगइ.. ओर सबलोग सामान अंदर लेने लगे.. ओर होलमे आकर बैठ गये.. तो धिरेनभी लतासे नजरे चुराते सबके साथ बैठ गया.. लेकीन आज लताने उनको देखकर अ‍ैसा कोइ रीअ‍ेक्शन नही दिया.. जो धिरेन उमीद लेकर बैठाथा..

लता रजीया दया चंपाभाभी नीर्मलाको गले मीलकर मीली.. ओर अफसोस जताया.. फीर सबको पानी देने लगी.. तो आज लता धिरेनकी ओर देखते अपने नैन नचाते मुस्कुरा रही थी.. तो धिरेनको बडाही आस्चर्य हुआ.. ओर उनकी गांड फटने लगी.. की आज लता उनको हमेसा गाली देने वाली.. उनके सामने हस क्यु रही हे..? तभी पुनम सृती लता तीनोही पुनम वाले कमरेमे चली गइ.. तो मंजु चंदा भावना देवायतके कमरेमे चली गइ.. तभी बहार होलमे..

भानु : भाइ.. अब कुछ काम ना होतो मे खेतोपे चलु..? वहा कोइ नही हे..

दया : (बहार आकर मुस्कुराते) भानुभाइ.. सबके लीये चाइ बन रही हे.. आप चाइ पीकर जाना..

देवायत : हां भानु.. चाइ पीकर चले जाना.. ओर सुन.. अब दो पहोरको खाना इधरही खाने आजाना.. ओर सामको सरला चाचीको इधर छोड जाना.. क्युकी गांवकी ओरते बैठनेके लीये आयेगी.. तो चाची होगीतो ठीक रहेगा..

भुमीका : हां भानु.. सरला भाभीको यही छोडजाना.. ओर जबतक कार्य पुरा नही होगा तबतक उसे वही रुकना हे..

नीर्मला : हां भानुजी.. वो हम सबमे बुजुर्ग हे.. तो ठीक रहेगा.. ओर देवु.. अब आप लोगभी अपने धंधेपे चले जाओ.. यहा हम सब औरते सम्हाल लेगी..

भानु : ठीक हे मम्मीजी.. मे खाना खाकर उसे लेने चला जाउगा.. फीर उसे लेकर आजाउगा..

धिरेन : (धीरेसे) मम्मी.. तो मे भी चलु..? मुजे बेन्कपे जाना हे..

देवायत : धिरेन.. तुमभी अब यहीसे आना जाना.. रातमे वही रुकना.. क्युकी पुनोतो अब कार्य पुरा होने तक यही रहेगी.. तो फीर वहा तुम अकेले क्या करोगे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) जीजु.. आप मेरी फीकर मत करो.. पुनो भलेही इधर रुकती.. मे जब यहा वीधीया होगी तब आजाउगा.. क्युकी मुजे सहेरमे बहुत सारे काम नीपटाने हे.. ओर हमारा घरभी तो अकेला नही छोड सकता.. बस.. आप फ्रि हो तब मम्मी ओर पुनोको लेकर आजाना.. उसे हम घर दीखा देगे..

देवायत : (मुस्कुराते) अरे मेतो अभी कार्य सम्पन नही होता तबतक यही हु.. चल ठीक हे मे कल या परसो उन दोनोको लेकर आजाउगा.. अगर दोनोको पसंद आगया तो हम फाइनल कर देगे.. फीर मुजेभी दो दिनके लीये कही जाना हे..

नीर्मला : (सर सहेलाते) अरे बीटु.. अगर अ‍ैसा हेतो मे ओर भुमी भी देखने चलेगी.. देखु तो सही मेरा बेटा कैसा घर ले रहा हे.. हें..हें..हें..

सृती : (बहार आते धीरेसे सरमाते) देवु.. क्या आप अभी चल रहे हो..? मेभी साथ चल रही हु.. वो क्लीनीकपे कोइ नही हे.. तो मुजे आज जाना होगा.. मम्मी भलेही इधर नीर्मला आंटीके साथ रहेती..

नीर्मला : (मुस्कुराते) बेटा.. बुरा मत मानना.. आजकल जमाना बहुत खराब हे.. अ‍ैसे रातमे ओरतका आना जाना ओर घरमे अकेले रहेना ठीक नही.. तुभी कुछ दिन अपडाउन करले.. फीर तेरी मम्मी फ्रि होजाये तब वहा चली जाना..

लखन : (हसते) भाभी.. भाइतो आज नही कल जायेगे.. लेकीन फीकर मत करो.. भाइ अगर फ्रि नही होगे तो मे आपको छोडने ओर लेने आजाउगा..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे वाह.. मेरा देवरतो सुधर गया.. हें..हें..हें..

लखन : (भुमीको) देखा बुआ.. आपकी बेटी मुजे क्या समज रही हे..? क्या तो मे अब तक उनको बीगडा हुआ ओर आवारा दीखता था..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे बेटा.. वो तुम ओर तेरी भाभी जानो.. मुजे तुम दोनोके जगडेमे बीचमे मत घसीटो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) सृती.. तो आजसे तुजे लेजानेकी ओर वापस लानेकी जीम्वेवारी लखनकी.. हें..हें..हें..

लखन : (सृतीकी ओर मुह बीगाडते) अरे.. मे उसे क्यु लेजाउ..? आपकी बीवीहे आप जानो..

सृती : (जदरदसे हसते) अरे.. मेरे देवरको तो बुरा लग गया..? ठीक हे आपही मुजे छोड देना.. बस..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) नही भाभी बुरा नही लगा.. मेतो सीर्फ मजाक कर रहा था.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) पता हे मुजे.. की आप मजाक कर रहेथे.. लेकीन मे मजाक नही कर रही.. चलीये रेडी होजाइअ‍े मुजे सचमे जाना हे.. फीर सामको फोन कर दुगी.. तब आप मुजे लेने आजाना.. ओर आनेमे अकेला लगे तो लताकोभी साथ लेलो.. उसेभी थोडा सहेर बहेर घुमा देना.. ताकी वापसीमे आपको कंपनीभी मील जायेगी.. देवु.. मे लखन भैयाके साथ चली जाती हु.. आप अपना काम नीपटाते रहो.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. वैसेभी वाकइ मुजे तीन चार दिन ज्यादा काम हे.. ओर लखन.. तुम लता आ रही हेतो रजीयाको भी साथ लेजा.. वहा सृतीको छोडकर तीनो हमारे बंगलेपे चले जाना.. ओर कुछ सफाइ बफाइ कर लेना.. ओर लताको भी कहेना वहा सब चीज अच्छी तराह देखले.. अगर कुछ लेना हे तो नया ले लेगे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भैया.. वैसेतो भानुभाइने सब कंपलीट करदीया हे.. फीरभी देख लुगा..

तब पुनम ओर लता अपने रुममे बैठकर इन देवर भाभीकी मस्तीया देखकर हस रही थी.. तो लखन उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो पीछे लताभी चली गइ.. ओर दोनो सृतीको उनकी क्लीनीक छोडनेके लीये तैयार होने लगे.. तो सृतीभी जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो इधर दया ओर चंपाभाभी भी रजीयाका नाम आतेही खुस होगये.. ओर उसने रजीयाको भी तैयार होने उनके रुममे भेज दीया.. तब रजीया बहुतही सरमाइ..

फीर दयाने सबको चाइ पीलाइ तो भानु ओर धिरेन दोनोही चाइ पीकर हवेलीसे नीकल गये.. तो सृतीने उनकी कारको ही लेजानेको कहा तो लखनने ड्राइवींग सीट पकडली.. तब सृतीने लताको जबर दस्तीसे लखनके पास बीठा दीया.. फीर रजीया ओर खुद पीछेकी सीटपे बैठ गइ.. ओर लखनने कारको सहेरकी ओर दौडादी.. तब लता बहुतही सरमा रही थी.. पुरे रास्ते सृती ओर लखन हसी मजाकर करते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते रहे..

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तब देवायतभी अपने खेतोकी ओर नीकल गया.. उनको कल रातभी नीशा ओर चारुके पास जानाथा.. लेकीन राजीवके हादसेकी वजहसे नही जापाया.. आजतो सुधीरभी वापस आने वाला था.. लेकीन उनका क्लीनीक बंध था.. क्युकी कल सुहागरात मनाते ही दो पहोरको खानेके बाद मुना ओर बरखा तो उनके साथ उनका दोस्त श्रीधर ओर जयश्री.. दोनोही कपल दो दिनके लीये अपने छोटे हनीनुमपे कही घुमने चले गये थे..

तबतक साहीलने भी सलमाके साथ बैठकर लखनने कही सभी बाते सलमासे करली.. जीसे सुनकर सलमा बहुतही खुस होगइ.. ओर खुसीके मारे उनके आंसु नीकल गये.. वो तब ही वो फोन लेकर जरीनाको फोन लगा देती हे.. ओर उनको सब बाते बताते सबानाकी कोइ चीन्ता ना करनेको कहेती हे.. जीसे सुनकर जरीनाभी खुसीसे रो पडी.. तब सलमा उनको साहीलके साथ वहा अ‍ेक दो दिनमे मीलने आनेको कहेती हे..

तो आज सामतके घर सुबह सुबह जया ओर सांती कीचनमे चाइ नास्ता बना रही थी.. तब सामत होलमे बैठकर अखबार पढ रहा था.. तो जागृती नहानेके लीये बाथरुममे धुसी हुइ थी.. तब बंसी रात भर सांतीकी चुदाइ करते थका हारा अबभी गहेरी नींद सो रहा था.. आज जया सामतके साथ बैठकर अपने बेटे बंसी ओर नंनद सांतीकी सादीको लेकर बात करने वाली थी.. तब जयाने बंसीसे बात करनेसे पहेले अ‍ेक बार फीर सांतीका मन टटोल लीया..

जया : (मुस्कुराते धीरेसे) सांती.. अब मे सोच रही हु.. तुम दोनोकी सादी करवादु.. क्या तु राजीतो हेनां..?

सांती : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. लेकीन भाइ..? उसे आप कैसे समजाओगी..? क्या वो मान जायेगे..?

जया : (मुस्कुराते सरपे हाथ फीराते) हां.. बस तु अ‍ेक बार हां कहेदे.. मे उसेभी मना लुगी.. देखना वो खुद तेरी सादी बंसीसे करवा देगे.. मे आजही उनसे बात करती हु.. जा पहेले तेरे पतीको जगादे.. उनसेभी बात करनी हे.. मेरे बंसीके लीये तुमसे अच्छी बहु कहा मीलेगी.. जा.. जगादे उसे..

सांती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते जाते धीरेसे) जी भाभी.. अभी जगाती हु..

सांती अपनी सादीकी बात सुनकर आज बहुतही खुस होने लगी.. वो जैसेही कीचनसे बहार नीकली.. सामने सामतको अखबार पढते देखकर सरमा गइ.. ओर जटसे अपने सरपे चुनी डालकर सरको ढक लेती हे.. जैसे सामत उनका भाइ नही ससुर हो.. ओर वो अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह सरमाते बंसीके रुममे चली जाती हे.. तब बंसी घोडे बेचकर सो रहाथा.. तब सांती धीरेसे उनके पास जाकर उनके होठोको चुम लेती हे..

तभी बंसी अपने होठोपे गीलापनकी वजहसे आंख खोकर देखता हे.. तो सांती मुस्कुराते उनके चहेरेपे जुकी हुइ थी.. ओर सरमाते मुस्कुरा रही थी.. तब बंसीने उसे खीचकर अपने उपर गीरा दीया.. ओर सांतीको अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगा.. तब सांती सरमाकर हसते बंसीसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर आखीर सरमाते सांतीने बंसीके सीनेपे अपना सर रख दीया ओर मुस्कुराने लगी..

सांती : (सरमाते हसते) बंसी.. जल्दीसे उठ जाइअ‍े.. लगता हे आज हम दोनोके लीये खुसीका दिन हे.. जाइअ‍े फटाफट तैयार होजाइअ‍े मे आपके कपडे देती हु.. भाभी आपसे बात करना चाहती हे..

बंसी : (सांतीको छोडकर जटसे बेडपे बेठते) कीस बारेमे..? क्या उसने तुमसे कुछ कहा..?

सांती : (सरमाकर हां मे गरदन हीलाते) हां.. वो आज भाइसे हम दोनोकी सादीके बारेमे बात करने वाली हे.. तो इनसे पहेले वो भाइसे बात करे.. अ‍ेक बार भाभी आपसे बात करना चाहती हे.. जाइअ‍े फटाफट..

बंसी : (खुसीके मारे अ‍ेक बार फीर सांतीको बाहोमे भरते) सच..? बुआ.. क्या तुम सच कहे रही हो..?

सांती : (सरमाते गाल चुमकर) हां बंसी.. अबतो मुजे बुआ कहेना छोडदो.. आपकी बीवी होने वाली हु.. अभी अभी इस बारेमे मेरी भाभीसे बात हुइ.. आप जाइअ‍े फटाफट नहा लीजीये.. मे कपडे रखकर जाती हु.. काफी देरसे यहा हु.. भाइ भी बहारही बैठे हे..

बंसी : (होठ चुमते खडा होते) नही सांती.. तुम भलेही मेरी बीवी होजाये.. मे तुमको बुआ कहेना कभी नही छोडुगा.. क्युकी मेने सांतीको नही.. मेरी बुआको प्यार कीया हे.. हें..हें..हें..

सांती : (सरमाते मुस्कुराते) आप कीतने कमीने हो.. ठीक हे.. ठीक हे.. जाइअ‍े फटाफट नहा लीजीये..

कहातो बंसीकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. जो सादीकी बातको लेकर वो खुद सांतीको लेकर भागनेकी प्लानींग कर रहा था.. वोही बात आज खुद सामनेसे उनकी मम्मीने कही थी.. बंसी खुस होकर बाथरुममे घुस गया.. तो सांती हसने लगी.. फीर बंसीके कपडे अलमारी से नीकालकर बेडपे रखती हे.. ओर फीरसे चुनी अपने सरपे डालकर अपने रुममे चली जाती हे.. तब जागृती भी तैयार होकर कामपे लग गइ..

वो कीचनमे देखती हे तो उनकी मां जया नास्ता बना रही थी.. जयाको देखतेही जागृतीको गुस्सा आने लगा.. वो पीछली रात रमेशके घरपे उनकी सारी करतुते जान गइ थी.. ओर वो अपना मुह बीगाडते उनके पापाके रुममे चली गइ.. ओर वहा साफ सफाइ करने लगी.. जब वहा सफाइ होगइ तब वो उनकी बुआ सांतीके रुममे सफाइ करने दरवाजा खोलकर घुस गइ.. तो सांती अंदर बहुतही खुस नजर आ रही थी..

जैसेही सांतीने जागृतीको देखा वो जटसे दोडकर आगइ ओर अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. फीर जागृतीके पास हसते हुअ‍े दोडकर चली गइ.. ओर जागृतीको जोरोसे अपने गले लगा लीया.. तब जागृती भी खुस होकर मुस्कुराते आस्चर्यसे सांतीकी ओर देखती रही.. की सुबह सुबह उनकी बुआ इतनी खुस क्यु हे..? फीर सांतीने जागृतीका चहेरा अपने हाथोमे थामलीया.. ओर सरमाकर उनके सामने देखते मुस्कुराती रही.. तब जागृतीने पुछ ही लीया..

जागृती : (मुस्कुराते) भाभी.. बताइअ‍ेना क्या हुआ..? आजतो आप बडी खुस नजर आरही हे..? कुछ हुआ हे क्या..? (सरारतसे कानमे धीरेसे) कही मेरे नन्हे मुन्हे भतीजाकी कोइ खुस खबरी तो नही..? हें..हें..हें..

सांती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते पीठमे मुका मारते) अरे नही नही.. सुन.. जागु.. आज भाभी मेरी ओर बंसीकी सादीकी बात भाइसे करने वाली हे.. आज मे बहोत खुस हु.. आज अचानकही सुबह भाभीने मुजे केह दीया..

जागृती : (खुसीसे मुस्कुराते गले लगाकर) भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. आखीर आपकी तम्मना पुरी होगइ.. तीन चार सालोका सब्रका फल आखीर आपको मील ही गया.. बहुत.. बुहत.. अभीनंदन.. बस.. अब मुजे अ‍ेक प्यारासा.. नन्हासा.. मुन्हा या मुनी मील जाये.. हें..हें..हें..

सांती : (सर्मसार होते धीरेसे दोनो हाथ थामते) हां जागु.. तेरे मुहमे घी-सकर.. मेतो आइपील लेते लेते थक चुकी हु.. मेभी चाहती हु की मेभी अ‍ेक बच्चेकी मां बनु.. अब मेरा सभी सपना पुरा होजायेगा..

जागृती : (मुस्कुराते) भाभी.. आज खुसीका दिन हे.. आप खुसीया मनाओ.. फीर हम आरामसे बात करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. वोभी सीर्फ हम दोनो अकेली हो तब.. लेकीन आज नही..

सांती : (आस्चर्यसे देखते प्यारसे) जागु.. बताना.. क्या कोइ सीरीयस मेटर हे..?

जागुती : (धीरेसे) हां भाभी.. लेकीन आज नही.. आजतो आप खुसीया मनाओ.. हम कल फुरसतमे बात करेगे..

कहेते जागृती सांतीकी ओर मुस्कुराते उनके रुमसे सफाइ कीये बगैर ही बहार जाने लगी.. तब बहार जाते उनकी आंखसे दो बुंद आंसु टपक गये.. उन्होने सोचा चहेरा दरवाजेकी ओर हे.. तो बुआ नही देख पायेगी.. लेकीन उनको क्या पता.. सांतीने जागृतीकी आंखसे आंसु बहेते देखलीये थे.. उनको जागृतीकी बातसे कोइ गंभीर अंदेशा होने लगा.. सांती थोडी गंभीर होगइ.. ओर जागृतीको जाते हुअ‍े देखती रही..

फीर सांती सरपे चुनरी डालकर कीचनमे चली गइ.. तब जागृती बंसीके रुममे जाकर जाडु पोछा करने लगी.. तब बंसी बाथरुममे नहा रहाथा.. आज जागृतीका मुड बंसीकी सादीकी बात सुनकर थोडा बीगड गया था.. उनको आज सांतीसे ज्वेलेसी फील होने लगी थी.. लेकीन अपने चहेरेपे जाहीर नही होनेदी.. तभी बंसी बाथरुमसे कमरमे टोलीया लपेटकर नीकला.. देखातो जागृती उनके रुमकी सफाइ कर रही थी..

जागृतीको देखतेही बंसीका लंड जटके मारते खडा होने लगा.. तब बंसी बीना कुछ बोले धीरेसे दरवाजेके पास चला गया.. ओर बहार नजर करते देख लेता हे.. की कोइ आस पासतो नही.. तब सामत टी.वी. देख रहा था.. ओर उनकी मां ओर सांती कीचनमे काम कर रही थी.. तब बंसी धीरेसे दरवाजा बंध कर देता हे.. तभी जागृतीकी नजर बंसीकी ओर चली जाती हे.. जो दरवाजा बंध कर रहाथा.. तब जागृतीकी दिलकी धडकन बढने लगी.. ओर वो सरमाते सफाइ छोडकर जटसे खडी होगइ..

ओर सरमाकर बंसीकी ओर देखते मुस्कुराते बहार जाने लगी.. जैसेही जागृती दरवाजेके पाइ आइ बंसीने उसे कमरमे हाथ डालकर अपनी ओर खीच लीया.. ओर अपने तनसे सटाकर जागृतीको दबोच लीया.. तो जागृती अचानक हुअ‍े हमलेसे बहुतही गभरा गइ.. तभी बंसी उसे अपनी बाहोमे पकडकर दिवालके सहारे दोनो हाथ पकडकर सटा लेता हे.. ओर खुद भी उनके तनसे सटकर खडा होजाता हे..

बंसी उनसे चीपकर खडा था.. तो जागृतीके दोनो बुब्स बंसीके सीनेमे दब गये.. ओर उसे अपनी चुतपे बंसीका खडा लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ.. आखीर आज बंसीने हिंमत करके जागृतीको पकड ही लीया.. तब जागृती बहुतही सर्मसार होगइ.. बंसीको जागृतीकी गरम सांसे साफ सुनाइ दे रही थी.. तब जागृती अ‍ैसेही खडी रहेकर बंसीसे नजरे चुराते इधर उधर देखने लगी.. ओर बहुतही सर्मसार होती रही.. तभी..

जागृती : (धीरेसे सरमाते) भाइ.. क्या कर रहे हो..? छोडीयेनां.. कोइ देख लेगा..

बंसी : (मुस्कुराते उनकी आंखोमे देखते) देखने दो.. जागु.. आइ लव यु.. मुजे तुमसे प्यार होगया हे..

जागृती : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. इतना कहेनेमे बहुत देर करदी आपने.. मेभी तो आपको चाहती थी.. लेकीन हमारे बीच भाइ बहेनका रीस्ता दिवार बनकर खडा था.. भाइ.. आइ लव यु टु.. मेभी आपको बहुत चाहती हु.. लेकीन अभी नही.. मुजे जाने दीजीये.. मेरी नइ भाभी कभी भी लधर आ सकती हे.. हम बादमे मीलेगे..

बंसी : (खुस होते) जागु.. तुजे मेरे ओर बुआके बारेमे सब पता हेनां..? तु फीकर मत करना मे तुम दोनोको सम्हाल सकता हु.. ओर खुस रख सकता हु.. बस मेरे लीये यही काफी हे तुमने मेरा प्यार कबुल करलीया..

कहेते बंसी धीरे धीरे अपना चहेरा जागृतीके चहेरेकी ओर लेजाने लगा तब जागृती समज गइ.. ओर बहुतही सर्मसार होते नजरे जुकाये खडी रही.. उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. ओर बंसीके होठ चुमनेका इन्तजार करने लगी.. उनके दोनो होंठ फडफडाने लगे.. तभी उसे अपने होठोपे बंसीके होठ महेसुस हुअ‍े.. जो उनके होठोको चुम रहेथे.. जागृती सरसे पांव तक हील गइ.. ओर कांपने लगी..

आज पहेलीबार उनका भाइ उनके होठोको चुम रहाथा.. जागृती अपना होस गवाने लगी.. ओर आंख बंध करते बंसीका साथ उनके होठोको चुमते देने लगी.. जागृतीके दोनो उरोज कठोर होने लगे.. आज लखनके अलावा पहेली बार वो अपने भाइसे प्यार कर रही थी.. वो चाहती थी की बंसी उसे पुरी तराह मसलदे.. लेकीन इसके लीये अभी सही वक्त नही था.. तभी..

जागृती : (धीरेसे होंठ छुडाते) बस.. बस.. भाइ.. अभी नही.. हम फुरसतमे मीलेगे.. जानेदो मुजे..

बंसी : (सामने देखते मुस्कुराते) जागु वादा कर.. अब हम जल्द ही दोनो मीलेगे..

जागृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) मुजे नही पता.. आप बहुत नोटी हो.. जानेदो मुजे.. मीलनेकी इतनी ही जल्दी थी.. तो फीर अपना प्यार जतानेमे इतनी देर क्यु करदी..?

बंसी : (बुब्सपे हाथ रखते धीरेसे मसलते) ठीक हे.. तो फीर अ‍ैसेही खडी रहे.. आज मे अपनी बहेनको छोडने वाला नही.. फीर चाहे कुछभी होजाये..

जागृती : (सर्मसार होते बंसीके हाथको हटाते) छोडीयेना भाइ.. हां.. हां.. मे वादा करती हु.. बस..? हम बहुत ही जल्द मीलेगे.. अबतो छोडीये..?

बंसी : (चुतपे हाथ रखकर धीरेसे कानमे) येस डार्लींग.. आज मे बहुत खुस हु.. हें..हें..हें..

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कहातो बंसीने अ‍ेक बार फीर जागृतीके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुमलीया.. ओर उसे छोड दीया.. तब जागृती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर सरमाकर मुस्कुराते जटसे जाडु पोछा लेकर बंसीकी ओर हसते अपनी जीभ नीकालकर दीखाने लगी.. ओर हसते हुअ‍े रुमसे नीकल गइ.. तब बंसी उनकी ओर देखकर हसता रहा.. आखीर बंसीने आज हीमत करके अपनी बहेनको पकड ही लीया.. ओर जागृतीने उनके प्यारको कबुल भी करलीया.. तब वो बहुतही खुस होने लगा.. ओर तैयार होने लगा..
 
तो इधर जागृती रुमसे नीकलते ही जटसे जाडु पोछा रखकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करते उनके पीछे सटकर खडी होगइ.. ओर अपने सीनेपे दोनो हाथ रखकर मंद मंद मुस्कुराते आंख बंध करके थोडी देर खडी रही.. कुछही देर पहेले बंसी सांतीकी सादीकी बात सुनकर वो कीतनी मायुस हो गइ थी.. ओर अभी अभी बंसीने अपना प्यार जताते उनको होठोको चुमकर प्यार कीया.. उनके बुब्सको भी मसला.. ओर चुतकोभी सहेलाया.. तब जागृती बहुतही सर्मसार होगइ थी.. ओर खुसीके मारे मुस्कुराती रही..

जागृती सारा गम भुलकर खुस होने लगी.. बंसीने उसे जल्द मीलनेका वादा लेलीया था.. तब जागृतीको यकीन होगया.. की अब उनका भाइ बंसी उसे छोडने वाला नही हे.. मीलतेही वो उनकी चुदाइ जरुर कर लेगा.. यही सोचतेही जागृतीकी चुत गीली होने लगी.. तब वो फीरसे मुस्कुराते सरमाइ.. ओर खुस होते कीचनमे चली गइ.. तो वहा सीर्फ सांती चाइ नास्तेकी तयारी कर रही थी.. ओर जया बंसीके रुममे चली गइ थी..

तो इधर जागृतीके जातेही कुछही देरके बाद बंसीके रुममे उनकी मां जया आगइ.. ओर आते ही जयाने दरवाजा बंध करलीया.. तब अ‍ेक बारतो बंसीकी गांडभी फटने लगी.. उनको लगाकी कही मांने उनको ओर जागृतीको प्यार करते देख तो नही लीया..? तब सांती दरवाजा बंध करके बंसीकी ओर मुस्कुराते बेडपे आकर बैठ गइ.. तब बंसीने राहतकी सांस ली.. ओर वोभी बेडपे आकर जयाके पास बैठ गया.. तो जया प्यारसे उनके सरको सहेलाने लगी.. फीर..

जया : (मुस्कुराते) हंम.. मेरा बेटा.. अब बडा होगया हे.. तो सोच रही हु तेरी सादी करवादु.. हें..हें..हें..

बंसी : (मनमे लडु फुटते, सरमाते धीरेसे) क्या मम्मी.. आपभी.. अभी मेरी सादीकी कोइ उमर हे..?

जया : (सरारतसे कान खीभकर) अच्छाआआआ..? तो मेरे बेटेको अब भी अपनी बुआके साथ ओर अयासीया करनी हे..? हें..हें..हें..

बंसी : (चोंकते सर्मसा होते) मम्मी.. वो.. वो.. मे.. मे..

जया : (गालपे चुटकी भरते मुस्कुराते) बदमास.. मुजे सब पता हे.. की मेरा बेटा अपनी बुआसे प्यार करता हे.. मे तुम दोनोके बारेमे सबकुछ जानती हु..

बंसी : (सरमाते मुस्कुराते) सोरी मम्मी.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे..

जया : (गाल छोडकर मुस्कुराते) हंम.. पता हे मुजे.. मतलब मेरे बेटेको अपनी बुआ पसंद हे.. क्या तु सांतीसे सादी करेगा..? तो अभी बोलदे.. मे तुम दोनोकी सादी करवा दुगी.. वरना तुजे दुबारा ये चान्स नही मीलेगा.. हें..हें..हें..

बंसी : (सर्मसार होते गले मीलते) ओह मोम.. आइ लव यु.. हां मुजे बुआ बहुत पसंद हे.. मम्मी.. मे उसे सारी जींगी खुस रखुगा.. आइ प्रोमीस.. करवा दीजीये हम दोनोकी सादी.. लेकीन मम्मी..? वो.. वो.. पापा..

जया : (मुस्कुराते) तु उनकी चीन्ता मत कर.. उसे मे अभी बात करती हु.. बस.. बात करनेसे पहेले सोचा अ‍ेक बार मेरे बेटेका मन जानलु.. बेटा.. सांती बहुत अच्छी लडकी हे.. खुबसुरत हे.. तेरे लीये बीलकुल परफेक्ट हे..

बंसी : (सरमाकर हग करते) मोम.. मे उनको बहुत चाहता हु.. ओर वोभी मुजे बहुत चाहती हे.. हम दोनो ही अ‍ेक दुसरेके बगेर नही रेह सकते.. आप हम दोनोकी सादी करवा दीजीये.. वरना मे अ‍ेक दो दिनमे ही उनको लेकर चलेजाने वाला था.. मेने सब इन्तजाम करलीया था..

जया : (जटसे अलग होते प्यारसे अ‍ेक चपत लगाते) पागल होगये हो क्या..? अरे बेटा हम खुद भी तो यही चाहते हे.. की तुम दोनोकी सादी होजाये.. तो फीर तुम दोनोको भागनेकी क्या जरुरत हे..? तु फीकर मत करना मे आजही तेरे पापासे बात करती हु.. की जल्दसे जल्द तुम दोनोकी सादी करवादे.. बस..? अबतो खुस..? चल नास्ता करने आजा..

कहेते जया जटसे बंसीके रुमसे दरवाजा खोलकर बहार नीकल गइ.. ओर सामतके पास जाकर उनसे नजदीक बैठ गइ.. तब सामत मुस्कुराते जयाकी ओर देखने लगा.. तब कीचनमे जागृती ओर सांती अ‍ेक सहेलीकी तरह हसते हसते आपसमे धीरेसे बाते कर रहीथी.. ओर बीच बीचमे बाते करते दोनो सरमा भी रही थी.. जागृती बंसीको लेकर सांतीको छेड रही थी.. तब इधर जया मुस्कुराते धीरेसे बातको छेडती हे..

जया : (सरमाते धीरेसे) सुनीयेजी.. अब आप बंसीकी सादीके बारेमे सोचीये.. लडका जवान होगया हे.. कही अ‍ैसी वैसी जगह सादी करलेगा तो हमारी क्या इजत रेह जायेगी.. ओर आज कलतो हमारे गांवमे ना जाने क्या क्या हो रहा हे.. आप जानते हेनां..?

सामत : (हसते) अरे बाबा.. मे उनके लीये लडकी देखतो रहा हु.. लेकीन कोइ उनके लीये अच्छी लडकी भी तो मीलनी चाहीये.. लगता हे मुजे अब बाबाकी बात मान लेनी चाहीये.. हमारे पास उनकी बाते मानलेने के अलावा ओर कोइ चारा नही..

जया : (मुस्कुराते) हां.. मेने तो पहेलेसे ही कहा था.. लेकीन आप हो की नही मानते थे.. हमारी सांतीमे क्या बुराइ हे..? जवान हे.. खुबसुरत हे.. बेचारी भर जवानीमे विधवा होगइ.. तो उसमे उनका क्या कसुर हे..? ओर अ‍ेक बार इस बारेमे हमारी बात भी हुइ थी.. तब आपहीने तो कहाथा की अगर बंसी कहेगा तो मे सांतीकी सादी उनसे कर दुगा.. ओर वैसेभी आजकल हमारे गांवमे अ‍ैसी सादीया तो होने लगी हे..

सामत : (मुस्कुराते) अरे हां बाबा.. मुजे याद हे सब.. लेकीन बंसी कहेना भी तो चाहीये.. की मे सांतीसे सादी करना चाहता हु.. हें..हें..हें..

जया : (थोडा गुसा होते) क्या आपभी अ‍ैसी बाते करते हो..? क्या कोइ जवान लडका अपने बापसे सामनेसे आकर कहेगा की मेरी सादी आपकी बहेनसे करवादो..? बात करते हे.. वो आपसे बात करनेमे डरता हे.. कुछ तो सोचीये..

सामत : (मुस्कुराते) अरे.. इसमे डरनेकी क्या बात हे..? ठीक हे.. तो फीर अब तुही बता मे क्या करु..? मुजे उन दोनोकी सादीसे कोइ अ‍ेतराज नही.. जा पुछले उन दोनोको..

जया : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) अ‍ेजी.. मेने अभी दोनोको पुछलीया हे.. आजही सुबह दोनोसे बात करली हे.. दोनो सादीके लीये राजी हे.. (धीरेसे हसते) सुनीये.. दोनो तीन सालसे अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. ओर आपसमे सादीभी करना चाहते हे.. अच्छा हुआ आजही मेने दोनोसे बात करली.. वरना आपका लडकातो आपकी बहेनको लेकर भागजाने वाला था.. हें..हें..हें..

सामत : (खुस होते हसते) क्या..? वो पागल तो नही होगया..? जा जाकर कहेदे उसे मे तुम दोनोकी सादी जल्दही करवा दुगा.. कही भागनेकी जरुरत नही हे.. कही ये लडका हमारी नाक ना कटवाये.. पागल कहीका.. अब कुछ चाइ बाइ मीलेगी की नही..?

जया : (जोरोसे हसते) चलीये सब रेडी हे.. हें..हें..हें..

दोनोही बाते कर रहेथे तब सांती ओर जागृती कीचनसे कान लगाकर दोनोकी बाते सुन रही थी.. जैसेही सामतने खुसी खुसी दोनोके रीस्तेको स्वीकारते सादीकी बातकी तब सांती खुसीके मारे जागृतीसे लीपट गइ.. ओर खुसीके मारे आंसु बहाने लगी.. तब जागृतीभी खुस होकर मुस्कुराते सांतीकी पीठ सहेलाती रही.. तभी जयाने आवाज लगाकर सबको चाइ नास्तेके लीये बुलाया.. तब सांती सरमके मारे बहार नही नीकली.. ओर उसने जागृतीको भी बहार जानेसे रोक लीया..

जया : (हसते) सांती बेटा.. अब तुभी आजा.. हें..हें..हें..

सांती : (सरमाकर धीरेसे) नही भाभी.. आप लोग चाइ नास्ता कर लीजीये मे ओर जागु बादमे करलेगे..

सामत : (बेठते मुस्कुराते) अरे बेटा.. आजा इसमे सरमानेकी क्या बात हे.. मुजसे पहेले पता होता.. तो मेनेतो कबसे तुम दोनोकी सादी करवादी होती.. अबतक तो मेरा पोताभी आ चुका होता.. हें..हें..हें..

जया : (सरमाकर जोरोसे हसते) क्या आपभी.. बेचारीको ओर सरमा रहे हो.. ठीक हे सांती बेटा.. तुम दोनो बादमे करलेना.. बंसी.. आजा बेटा.. चाइ नास्ता रेडी हे..

बंसी : (आकर बेठते) जी मोम.. आगया.. हें..हें..हें..

सामत : (थोडा गुसा होते) क्या बेटा तुमभी.. पहेले मां फीर मांसे मम्मी तक आया ओर अब मम्मीसे सीधा मोम..? लगता हे तुजेभी सहेरकी हवा लग गइ हे.. अब थोडा खेतोमे भी ध्यान दे.. सब मजदुरके भरोसे छोडना ठीक नही.. अब तेरी सादी होने वाली हे.. तो कुछ जीम्वेवारी नीभाना समज..

जया : (थोडा गुस्सेसे) अब आपतो चुपही रहीये.. आपसे ज्यादा तो मेरा बेटाही घरकी सब जीम्वेवारी नीभाता हे.. खेती बाडीका सब मेरा बेटाही तो देखता हे.. आपतो सारा दीन घुमते रहेते हो.. पता नही बार बार सहेरमे जाकर क्या करते रहेते हो.. बस.. सारा दिन समाजकी सेवा ही करते रहेते हो..

सामत : (हसते) हां बाबा.. ठीक हे अब तेरे बेटेको नही डाटुगा.. हें..हें..हें.. तु कहे रही हेनां.. की मे सहेरमे जाकर क्या करता हु.. तो सुन.. जया.. वहा हमने अ‍ेक मकान लेलीया हे.. बहुतही बडा.. हमारे देवुके बंगले जैसा.. बस.. अब उनका सीर्फ रजीस्ट्रेशन करवाना बाकी हे.. तो अ‍ेक दो दिनमे वोभी हो जायेगा.. तो मे सोच रहा हु.. अब वो रजीस्ट्रेशन बंसीके बजाये सांती ओर मेरी जागु बेटीके नाम करवादु.. ताकी कभी उनको सहेरमे रहेने जाना पडे तो कोइ दीकत नही..

जया : (खुस होकर हसते) अरे वाह.. बंगला लेभी लीया.. ठीक हे कोइ बात नही.. लेकीन पहेले हम दोनो कुछ दिन वही रहेगे.. आपसे केह देती हु.. हें..हें..हें..

जागृती : (बहार आकर हसते) पापा.. मेतो अब भैया ओर हमारी नइ भाभीके साथ ही रहुगी.. हें..हें..हें..

सामत : (हसते) अरे हां बाबा हां.. तुजे जीनके साथ रहेना हो रहेना.. फीरतो तेरी भी सादी होजायेगी.. तो चली जायेगी.. हें..हें..हें..

जागृती : (बंसीकी ओर देखते सरमाते) नही.. मुजे कोइ सादी बादी करके कही नही जाना.. मे भाभीके पास ही ठीक हु.. सारी जींदगी भाभीके पास ही रहुगी.. हें..हें..हें..

कहेते जागृती इसारो ही इसारोमे इनडायरेक्टली बंसीको कहे दियाकी मे तुम्हारे साथ सादी करके जींदगी भर तुम्हारे साथ रहेना चाहती हु.. तो बंसी भी जागृतीकी बातको भली भांती समज गया.. ओर मनमे खुस होने लगा.. उसने जागृतीकी ओर देखा तो जागृती अब भी उनकी ओर देखकर हस रहीथी.. तभी अचानक जागृतीने बंसीकी ओर हसते हुअ‍े आंख मारदी.. ओर कीचनमे चली गइ..

आज सामतके घर खुसीका माहोल था.. सबको अपनी उमीद पुरी होती नजर आइ.. पर जैसेही जयाने कुछ दिन सहेर रहेनेकी बात की.. तब जागृतीके मनमे आसंकाये आने लगी.. जबसे रमेशके घरपे रमेश ओर जयाकी बात सुनकर आइ.. तबसे उसे सांतीने कही अ‍ेक अ‍ेक बात सच होते नजर आने लगी.. की आने वाले दिनोमे सायद उनको ओर सांतीको ही इस घरको सम्हालना पडेगा.. ओर आज उनका सक ओर पका होगया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७७

आज सामतके घर खुसीका माहोल था.. सबको अपनी उमीद पुरी होती नजर आइ.. पर जैसेही जयाने कुछ दिन सहेर रहेनेकी बात की.. तब जागृतीके मनमे आसंकाये आने लगी.. जबसे रमेशके घरपे रमेश ओर जयाकी बात सुनकर आइ.. तबसे उसे सांतीने कही अ‍ेक अ‍ेक बात सच होते नजर आने लगी.. की आने वाले दिनोमे सायद उनको ओर सांतीको ही इस घरको सम्हालना पडेगा.. ओर आज उनका सक ओर पका होगया....अब आगे

उधर सहेर पहोचते ही लखन सबसे पहेले सृतीको उनकी क्लीनीकपे ड्रोप करदेता हे.. ओर उसे वापस आनाहो तब फोन करनेको कहेकर लता ओर रजीयाको लेकर अपने बंगलोपे आजाता हे.. ओर दोनोको यहा ड्रोप करके होटेलसे कुछ खानेका इन्तजाम करनेको कहेकर चला जाता हे.. तो अंदर आतेही रजीया ओर लता मीलकर घरकी सफाइ करने लगी.. वहा कोइ नही रहेता था तो काफी मीटी जमा होगइ थी..

तभी रजीया ओर लता अ‍ेब बेडरुममे सफाइ करने चली गइ.. तो बेडकी चदरपे कुछ धब्बे दीखाइ दीये.. ओर पुरी चदर अस्त व्यस्त थी.. तो लता ओर रजीयाको जरासा भी समजनेमे देर नही लगी.. की ये धब्बे कीसके हे.. लता गुस्सा होते बडबडाने लगी.. ओर चदरको खीचकर वोसींग मशीनमे डालने जाने लगी.. उनको पता चल गया की ये चदर अभी कोन खराब करके गया हे.. तो रजीयाभी सरमाके हस रहीथी.. तभी..

रजीया : (सरमाकर हसते) दीदी.. यहा कोन आया होगा.. हें..हें..हें..

लता : (गुस्सेसे) अरे वो कमीने होगे.. जो अभी घरसे भागकर यहा आये थे.. लखनके दोस्त ओर उनकी बहेन.. क्या नाम हे उनका..? हां श्रीधर भैया ओर उनकी बहेन जयश्री.. सालेने उनकी बहेनको ठोक ठोककर मेरी चदर खराब करदी.. येभी नही की चलो सब साफ करके जाये..

रजीया : (जोरोसे हसते) दीदी लाइअ‍े इसे मे धो देती हु.. आप दुसरा काम देख लीजीये.. हें..हें..हें..

जब दोनो काम कर रही थी तब हमारे लखन भैया सीधेही अपनी पुरानी मासुकाको मीलने होस्टेलपे चले गये थे.. वो बोय्स होस्टेमे थे ओर पास बगलमे ही गल्र्स होस्टेल थी.. तो लखन बार बार पुनमको मीलने गल्र्स होस्टेलपे जाता था.. तब ही गल्र्स होस्टेलकी मालकीन राधीका मेडम जो पुनमकी तराह वोभी बहुत खुबसुरत.. लंबे चुतड तक बाल.. तीखे नैन नक्स.. दिखनेके बहुत सेक्सी ओर कामुक दीखती थी..

राधीका अ‍ेक त्यक्ता थी.. अपने पीताका बीजनेस वारीसमे मीला था.. क्युकी वो उनकी अ‍ेकलौती संतान थी.. ओर सादीके तीन साल बाद ही हसबन्डका दुसरी ओरतके साथ रीलेशनकी वजहसे पतीसे अलग होगइ थी.. उनके परीवारमे सीर्फ उनकी बुढी मां ही थी.. जो अभी पेरेलीसीसकी वजहसे बेडमे थी.. उनकी आंखोमे हमारे हेन्डसम ओर स्मार्ट लखन भैया बस गये थे.. तबसे दोनोके बीच टाका भीडा हुआ था..

जब लखन ओर पुनम होस्टेलमे रहेकर पढाइ कर रहे थे तब पुनम बहुत ही खुबसुरत ओर बहुत गौरी थी.. ओर अपने भाइ लखनसे उनकी बहुत पटती थी.. दोनो भाइ बहेन हर दिन मीलकर दो दो घंटे बाते कीया करते थे.. लखन हर दिन पुनमको मीलने आता था.. जीनकी वजह कुछ ओर ही थी.. दरसल हमारे लखन भैया मन ही मन अपनी बहेन पुनमको चाहने लगे थे.. इसीलीये बार बार उनको मीलने आते थे..

लेकीन पुनम उनकी बहेन थी.. तो अपने दिलकी बात पुनमको कहेने मे डर रहे थे.. लेकीन हर दिन पुनमसे बाते करते उनको रीजाकनेकी ओर अपनी ओर आकर्सीत करनेकी कोसीस करते थे.. वो पुनमका हर तराह खयाल रखते थे.. उनके कपडे लाना.. उनके मेकअपका सामान गीफ्ट करना.. यहा तक वो पुनमके अंडरगार्मेन्ट भी लेने लगे.. तब सुरुमेतो पुनम बहुत ही सरमाइ.. लेकीन फीरतो ये सब रुटीन हो गया था..

दोनो भाइ बहेन होस्टेलमे नीचे होलमे बैठकर हर तहरकी बाते खुलकर कीया करते.. लखन पुनमको इमेजींग करते उनके नामकी कइ बार मुठ मार चुका था.. वो पुनमको अक्सर सोपींगपे ओर कभी कभी फील्म दीखाने भी लेजाता.. कभी कभी पुनमको बुरा ना लगे इसीलीये वो मंजुके कपडे भी लेजाता.. लेकीन तब लखनको नही पता थाकी पुनमके दिलमे देवायत राज करता हे.. जो उसे सुरुसे ही पसंद करती थी..

जब लखन पुनमका जरुरतसे ज्यादा खयाल रखने लगा.. तब पुनमको भी आसंकाये होने लगी थी.. की कही लखन भैया उनको प्यारतो नही करने लगे..? लेकीन तब उनके दिलमे सीर्फ उनका बडा भाइ देवायत ही छाया हुआ था.. वो मन ही मन अपने भाइ देवायतको प्यार करती थी.. ओर ज्यादातर लखन ओर पुनम अपने परीवार ओर देवायतकी बाते ही कीया करते थे.. ओर लखन भैया अपने दिलकी बात पुनमको कभी नही केह पाये..

तो दुसरी ओर वहाकी मेडम यानीकी होस्टेलकी मालकीन राधीका ओर पुनमके बीच बहुत पटती थी.. मानो दोनो पक्की सहेलीया हो.. जबभी लखन पुनमको मीलने आता राधीका ओर लखनकी आंखे मीलती तब राधीका लखनको देखते मुस्कुराया करती.. तो लखन कइ बार राधीकाके लीये भी कपडे लेआता.. ओर उनको गीफ्टके तौरपे दे देता.. इसी तराह राधीका ओर लखनके बीच भी नजदीकीया बढने लगी थी..

लेकीन राधीकाको लखनकी आंखोमे कीसी ओरके लीये बेसुमार प्यार नजर आने लगा था.. उनको लखनके लीये हम दर्दी होने लगी थी.. ओर अ‍ेक दिन जब लखन पुनमको मीलने होस्टेलपे आया तब राधीकाने लखनको कहा की अ‍ेक्जामकी वजहसे आज पुनमका अ‍ेक्सट्रा क्लास हे.. तो पुनमको आनेमे देर लगेगी.. उसी दिन राधीकाको लखनसे बात करनेका मौका मील गया.. तब राधीकाने बातो बातोमे लखनसे पुछ ही लीया.. की वो इतना प्यार कीसको करते हे..?

तब लखनकी आंख गीली होगइ.. ओर उसने अपने प्यारके बारमे राधीकाको नही बताया.. बस आंखोसे आंसु बहेने लगे.. तब राधीकाने उसे सम्हाला.. फीर तो जबभी लखन आता राधीका उनको प्यार भरी नजरोसे देखती.. ओर अ‍ैसेही दोनोके बीच आंखो ही आंखोमे प्यार होने लगा.. वैसेतो राधीका कीसीको भाव नही देती थी.. लेकीन उनके मनमे अब लखन पुरी तराह छा चुका था.. इस बातको पुनमने भी नोटीस कीया..

ओर अ‍ेक दिन मौका मीलते ही इस बारेमे पुनमने राधीकासे खुलकर बात करली.. तो राधीकाने लखनसे प्यार होनेकी बात कबुल करली.. तो सुनकर पुनम भी बहुत खुस होगइ.. ओर इसी तराह पुनमने लखनकी सेटींग राधीकासे करवा दी.. ओर अ‍ेक दिन लखन पुनमको मीलने आया तब पुनमने ही लखनको ओर राधीकाको अ‍ेकांत देनेके लीये उनके रुममे भेज दिया.. बस.. उस दिन पहेली बार लखन ओर राधीका प्यार करते करते बहेक गये..

ओर दोनोके बीच पहेली बार फीजीकल रीलेशन होगये.. राधीका कइ सालोसे इस प्यारसे वंचीत थी.. तो लखनके साथ मीलन करके राधीकाभी संतुस्ट होकर बहुत खुस होगइ.. फीर तो दोनो अक्सर मीलने लगे.. ओर दोनो खुब चुदाइ करते.. लखन ओर पुनम अक्सर राधीकाके साथ उनके घरपे भी जाने लगे.. वहा सीर्फ उनकी बुढी मां थी.. दोनो भाइ बहेन पुरा दिन वहा रहेते.. जीसे राधीकाकी मम्मी ओर लखन पुनमके बीच भी घनीस्ट रीस्ता हो गया..

अब अकेलेमे पुनम राधीकाको भाभी भाभी कहेकर छेडती.. तब राधीका जुठ मुठ गुस्सा होकर बहुत सरमाती.. लेकीन मनसे बहुत खुस होती.. वहा भी पुनम राधीकाकी मम्मीके साथ बाते करते उनको बातोमे बीजी रखती.. ओर लखन राधीकाको राधीकाके रुममे मीलनेका मौका देती.. तब लखन ओर राधीका उनके कमरेमे चले जाते.. ओर खुब प्यार करते.. लखनने राधीकाको उनके घरपे भी कइ बार चोद लीया था..

इसी बीच राधीकाने लखनसे चुदवाते चुदवाते उनके प्यारके बारेमे सभी बाते जानली.. की लखन अपनी बहेन पुनमको ही प्यार करता हे.. जीसे सुनकर अ‍ेक बारतो राधीकाभी चोंक गइ थी.. की कही भाइ बहेनके बीच प्यार होता हे..? फीर लखनने राधीकाको अपने परीवारकी बात बतादी.. की कैसे पीछली तीन पीढीसे उनके खानदानमे सबलोग अपनी बहेनसे ही सादी करते आये हे..

लखनने उनके खानदानके श्रापके बारेमे बता दीया.. जीसे सुनकर राधीकाको भी अचरज हुआ.. लेकीन लखनने उनको कसम खीलाकर इस बारेमे कीसीको ना कहेनेकी बात कहेदी.. ओर राधीकाने भी इस बातका जीक्र कीसीसे नही करनेकी कसम खाली.. इसी तराह लखन ओर पुनमकी बात हमेसा हमेसाके लीये लखन ओर राधीकाके दिलमे दफन होगइ..

जब देवायतने लखनको पुनमके रीस्तेकी बात की.. तब लखन पुरी तराह टुट चुका था.. उस रात लखनने अपने रुममे जाकर खुब आंसु बहाया.. तब राधीकाने उसे सम्हाल लीया.. वो लखनपे अपनी जान भी छीडकती थी.. जब भी लखन उनको मीलने जाता राधीका सीर्फ पुनमपे ही भरोसा करती.. ओर उनको रुमके बहार खडी रखकर रुमका ओर ओफीसका ध्यान रखनेको कहेती.. ताकी कोइ रुममे धुसकर ना आजाये.. ओर वो आरामसे लखनसे चुदवाती..
 
तो आजभी लखन उनको मीलने चला गया.. ओर वो येभी जानता थाकी राधीकाको मीलने जायेगा तब राधीका उनको अ‍ैसेही वापस नही आने देगी.. क्युकी अब वो खुद सहेरमे रहेने आने वाला था.. तो वो जानता था की अब कभी भी उसे राधीकाकी जरुरत पडेगी.. तो उसे खुस रखाना अनीवार्य होगया था.. ओर लखन कार पार्क करके सीधाही राधीकाके पास उनकी ओफीसमे चला गया..

राधीका : (नजर पडतेही खुस होते) अरे.. लखन..? व्होट्स अ‍े सरप्राझ..? अ‍ैसे अचानक..?

लखन : (हाथ मीलाते मुस्कुराते) हाइ राधीका.. कैसी हो..? बस.. तुजे मीलने का मन हुआ तो आगया..

राधीका : (खुसीसे हसते) मुजेतो लगाकी तुम चले गयेतो मुजे तो भुल ही गये.. अभी दो तीन दिन पहेले ही पुनमसे बात हुइ थी.. तब ही तुमको याद कीया था.. चलो.. यहा नही मेरे रुममे बैठकर आरामसे बात करते हे.. कीतने दिनोके बाद तुजे देखा हे.. आज जीभरकर तुजे देख लेने दे.. फीर पता नही तुजे देखनेका मौका कब मीलेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (पीछे रुममे जाते) नही राधीका.. ताने मत मारो.. अब कुछही दिनोमे मे हमेसाके लीये इधर रहेने आ रहा हु.. पासही की सोसायटीमे हमारा बंगलो हे.. तो अब तुजे मीलने जरुर आउगा..

राधीका अंदर आतेही दरवाजा बंध करदेती हे.. ओर लखनकी ओर आते उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. ओर लखनके कंधेपे सर रखते आंसु बहाने लगी हे.. तब लखनको अपने कंधेपे गीला लगा.. तो उसने फोरन राधीकाको अपने आपसे अलग कीया.. ओर उनका चहेरा अपनी हथेलीओमे थामते उनकी आंखोमे देखने लगा.. तो राधीका अबभी आंसु बहाते लखनकी ओर देखते हस रही थी.. तब लखनने उसे वापस जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

राधीका : लखन.. मुजे क्यु भुल गये..? हंम..? क्या इस राधीकासे मन भर गया..? मत भुलो तुमने मुजसे कुछ वादा कीया था.. हम दोनोने कीतने सपने सजाये थे.. मे वो सब बाते आज भी नही भुली..

लखन : (होठोको चुमते) ओर भुलना भी मत.. राधु.. मुजे मेरा सभी वादा आजभी याद हे.. मे तुजे कभी नही छोडुगा.. तुही तो मेरा पहेला प्यार हो.. ओर हमेसा रहेगी.. बस.. यही अफसोस हेकी तुम सादीके लीये मना कर रही हो.. वरना मे आज भी तुमसे सादी करनेको तैयार हु..

राधीका : (लखनकी बाहोमे सीनेपे सर रखते) नही लखन.. सादीतो मुजे नही करनी.. बस.. मुजे जींदगी भर तेरा यही प्यार चाहीये.. जो तुमने दीया हे.. ये बताओ तुम क्या पीओगे..? अभी खाना आजायेगा.. आज मेरे साथ बैठकर कुछ खालो.. हां पुनम बता रही थी.. की तुम दोनोकी सादी होगइ हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. जब हम दोनो यहासे गये तब ही भाइने मेरा ओर दीदीका रीस्ता पका कर लीया था.. तो यहासे जातेही हम दोनोकी सादी होगइ.. आज मे मेरी बीवी ओर भाभीको लेकरही बंगलेकी सफाइ करने आया हु.. अब कुछही दिनमे मे इधर मेरी बीवीके साथ रहेने आजाउगा.. वो यहा नीलम रहेती हेनां वो मेरी बीवीकी ही भतीजी हे.. उनके भाइकी लडकी..

राधीका : (सामने देखकर) अरे हां.. वो सेटरडेको उनके जीजाके साथ गइ हे.. तो फीर वापस क्यु नही आइ..?

लखन : राधु.. बस.. उसीके बारेमे बात करने आया हु.. वो अब यहा वापस नही आयेगी.. अब वो मेरे साथ ही हमारे घर रहेगी.. ओर वो जीसे जीजा केह रही थीनां.. वो उनके जीजा नही.. मेरे जीजा हे.. पुनम दीदीका पती.. कमीनी.. उन्हीके साथ चली गइ थी.. दोनोका सादीसे पहेलेही चकर होगया था.. राधु.. मे उनका सामान लेने आया हु..

राधीका : (सोक्ट होते) व्होट..? तो क्या वो उनके जीजा नही हे..? अब समजी.. पुनमने मुजे उनपे नजर रखनेको क्यु कहाथा.. लेजाओ बाबा.. अ‍ैसी लडकी हमारी होस्टेलकी नाक कटवा देगी.. कैसे पटाका बनकर उनके साथ घुमने जाती थी.. अ‍ेक ये हे.. ओर अ‍ेक उनकी रुम पार्टनर.. वो कमीनी भी मुजे ठीक नही लगती.. वो भी अ‍ैसी ही हे.. उनको भी कोइ लेने आता हे..

लखन : (मुस्कुराते सर चुमते) राधु.. छोड ये सब बाते.. ये बता तेरी मम्मी क्या कर रही हे..? उनकी तबीयत तो अब अच्छी हेनां..?

राधीका : (सीनेपे सर छुपाते) नही लखन.. उनको पेरेलीसीस आगया था.. अब पहेलेसे काफी बेहतर हे.. तुजे बहुत याद करती हे.. बस.. अ‍ेक बार आकर मीलले उसे.. उनको सांती मील जायेगी.. तुजे अपना बेटा मानती हे.. बस.. तुजेतो पता हे.. अब वोही अ‍ेक मेरा सहारा हे..

लखन : (सामने देखते) राधु.. आजतो मेरे साथ मेरी बीवी आइ हे.. मेरे बडे भैयाके ससुर गुजर गये हे.. तो मेरी दुसरी भाभी यहा डोक्टर हे.. तो उनको मुजे चार पांच दीन यही छोडने लेने आना पडेगा.. तो सायद कल या परसो ही हम आंटीको मीलने चले जायेगे.. तब खाना तेरे साथही खाउगा.. मुजे आंटीसे मीलना हे..

राधीका : (मुस्कुराते) लखन.. पुनम केह रही थी.. तेरे बडे भैयाने तीन तीन सादी करली हे..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. तुमतो जानती हो हमारे आनदान कोइ कीतनी भी सादीया करले.. कोइ पाबंधी नही.. तो भाइकी भी तीन सादीया होगइ हे.. अ‍ेक मेरी मंजु भाभी.. जो अभी उनके पीता चल बसे.. दुसरी.. चंदाभाभी.. जो पुनमकी सास हे.. ओर तीसरी सृतीभाभी.. जो यहा अ‍ेक गायनेक डोक्टर हे ओर अपनी क्लीनीक चलाती हे..

राधीका : (आस्चर्यसे देखते) चंदाभाभी.. पुनमकी सास.. मतलब..?

लखन : (हसते) हां.. वो अ‍ेक गांवमे सरपंच थी.. साथमे विधवा थी.. रीस्तेमे मंजुभाभीकी मौसी भी हे.. पुनम दीदीकी सादीसे पहेलेही भाइने उनके साथ सादी करली थी.. पुनमका पती धिरेन.. जो उनके अगले पतीका बेटा हे.. समज गइ..? क्या मेने तुजे वो राजाकी बात नही बताइ थी..? हें..हें..हें.. तो समजलो ये सब उनकी वजहसे हो रहा हे.. हमारे खानदानमे रीस्ते नातेको इतनी अहेमीयत नही देते.. आज जीसके साथ सादी करना चाहो कर सकते हो.. बहेनके साथ भी..

राधीका : (हसते) हां.. अब समजी.. उस कहानीमे भी वो राजाने उनकी सभी बहेनोके साथ सादी करली थी.. वैसे भी तुमतो रोयल फेमीली हो.. तीन क्या.. कीतनीभी सादी करलो.. तुमको पुछने वाला कोन हे..? तुमने दुसरी सादी क्यु नही की..? आइ मीन.. अपनी बहेनके साथ..? आपभी करलेते पुनमसे सादी.. क्यु नही की..? आपतो उनको बहुत प्यार करते थे.. ये धिरेनके साथ उनकी सादी क्यु करवाइ..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. अब भुलजा वो सब बाते.. लेकीन आगेका पता नही.. हें..हें..हें.. वैसे तु करले मुजसे सादी.. मे रेडी हु.. हें..हें..हें.. चल अब मुजे जाना होगा.. होटेलसे खाना पेक करवाकर लेजाना हे.. तो मे चलु..? फीर दो तीन दिनमे फीरसे मीलता हु..

राधीका : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन.. क्या अ‍ैसेही जाओगे..? हां चले जाओ.. मे तुम्हारी बीवी थोडीनां हु.. जो तुम्हे रुकनेके लीये कहुगी.. ओर होटेलसे क्यु..? इधरसे नही लेजा सकते..? जाओ चले जाओ..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) राधु.. अ‍ैसे ताने मत मारो.. सच्चा प्यार क्या हे.. प्यारकी अहेमीय क्या हे.. सब तुम्हीने तो मुजे सीखाया हे.. क्या तुम मेरी बीवीसे कम हो..? कहोतो तुमसे भी सादी कर लुगा.. राधु.. आइ लव यु.. लव यु सो मच.. चल.. मे मेरी राधुको खुस कर देता हु.. हें..हें..हें..

कहेतेही लखनने राधीकाके होठोको जोरोसे चुमलीया.. ओर उनको वही बेडपे लीटाकर.. फीर अपनी पेन्टभी नीचेकी ओर थोडी सरकादी.. तबतक राधीकाभी अपनी सारी कमर तक चडाते नीकरको नीकाल देती हे.. ओर लखन उनके उपर चड गया.. ओर अपने लंडको उनकी चुतमे सेट करते अ‍ेकही जटकेमे राधीकाकी चुतकी गहेराइओमे उतार दीया.. तो राधीका की हल्केसे चीख नीकल गइ.. ओर लखन राधीकाको चोदने लगा..

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दोनोही मदहोस होकर चुदाइ करते रहे.. ओर कुछही देरकी धकापैनी चुदाइके बार लखनने राधीकाकी चुतको अपने पानीसे सीचदी.. ओर राधीकाको जडाकर संतुस्ट कर दीया.. फीर दोनो खडे होकर अपने कपडे पहेनकर अपने आपको सही करने लगे.. ओर वापस बहारकी ओर आगये.. वहा राधीकाने नीलमका सभी सामान नीचे मंगवा लीया.. ओर लखनको तीन टीफीन पेक कर दीया.. तो लखन राधीकाको जल्द दुबारा मीलनेको कहेकर वहासे नीलमका सामान ओर खाना लेकर नीकल गया..
 
जब अपने बंगलोपे आगया तब तक रजीया ओर लताने बहुत कुछ सफाइ करली थी.. सृतीने वही क्लीनीकपे खाना मंगवाकर खालीया था.. तो यहा लखन लता ओर रजीया तीनोही अ‍ेक साथ खाने बैठ गये.. तब रजीया बहुतही सरमा रही थी.. तो लखन भी दोनो बीवीओको साथ बैठकर खाते खुस हो रहा था.. जब तीनोने खालीया तब लखनने नीलमके सामानके बारेमे बातकी..

लखन : लता.. मे नीलुका सब सामान होस्टेलसे लेकर आया हु.. तो क्या इसे यही रखदे..?

लता : (मुस्कुराते) चलो अच्छा हुआ.. आप सामान लेआये.. इसे यही लास्ट वाले रुममे रख दीजीये.. नीलु अब जबतक यही पढती हे वही रहेगी..

फीर तीनोने कुछ देर आराम कीया.. आराम करके तीनोही सफाइ करने लगे.. तो लता ओर रजीया भी लखनको काम करते देखकर हस रही थी.. ओर तीनोने पुरे बंगलेकी सफाइ करली.. फीर फ्रेस होकर चाइ नास्ता करलीया.. तभी सृतीकाभी फोन आगया.. ओर तीनो बंगलेको ताला लगाकर क्लीनीकपे चले गये.. फीर वहासे सृतीको लेकर अपने गांवकी ओर नीकल गये.. पुरे रास्ते लखन सृतीकी टांग खीचाइ करता रहा..

अ‍ैसेही मस्ती मजाक करते चारो हवेलीपे आगये.. तबतक भानुभी सरलाको हवेलीपे छोडकर चला गया था.. तो कारसे उतरतेही सृती लखनको हसते हुअ‍े मारनेके लीये दोडी.. तो लखनभी जोरोसे हसते अपने रुममे भाग गया.. तो सृतीभी फ्रेस होने देवायतके रुममे घुस गइ.. तब सबलोग ये तमासा देखकर हसते रहे.. ओर लता रजीयाभी हसते हुअ‍े अंदर आगइ.. ओर लताने सबको सृतीकी टांग खीचाइके बारेमे बता दीया.. तो सब लोग वापस हसने लगे..

आज देवायतने सुबहसे सीर्फ बीजनेस ही कीया.. उसने कइ सोदे बाजी करली.. फीर दोपहरको वो ओर भानु खानेके लीये आगये.. फीर कुछ देर आराम करनेके बाद दोनो वापस अपने खेतोपे चले गये.. तब भानु खेतीका काम देखने लगा.. तो देवायत कुछ बीजनेसके फोन करके बैठा था.. तभी ओफीसमे उनके सामने सामत ओर रमेश आकर बैठ गये.. तो देवायत मुस्कुराने लगा.. ओर उसने चाइके लीये बोल दीया..

देवायत : (हसते) कहो.. आजतो दोनो इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? हें..हें..हें..

रमेश : (जोरोसे हसते) क्या भाइ.. आपको मीलने आये हे.. मुजेभी काम था.. ओर सामतभाइ को भी आपसे पर्सनली काम था.. तो दोनो साथ चले आये.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) हां सामतभाइ.. कहो.. आपतो हम सबमे सीनीयर हे.. मुजसेभी ज्यादा तजुर्बेकार हे.. तो मे भला आपकी क्या सेवा कर सकता हु.. कहीये..

सामत : (हसते) वो सबतो ठीक हे.. लेकीन आप हमारे ठाकुर साहेब हे.. तो कुछ बातोमे तो आपसेही सलाह मसवरा करना पडता हे.. बस.. कुछ नही.. मेरे बंसीकी सादीको लेकर आपसे चर्चा करने आया हु..

देवायत : (मुस्कुराते) अरे वाह.. तो आप बंसीकी सादी कर रहे हो.. येतो बहुतही अच्छी बात कही आपने.. कहो.. बंसीका कहा रीस्ता तैय कीया..?

सामत : (मुस्कुराते) भाइ.. अब आपतो जानते हे.. हमे उस दिन बाबाने क्या कहा था..? बस.. बाबाकी सभी बाते सच नीकली.. बंसी ओर सांती दोनोही अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. ओर आपसमे सादी करना चाहते हे.. तो सोचा अ‍ेक बार आपसे बात करलु.. की दोनोकी सादी कहा करनी हे.. आश्रमपे जाकर की हमारे घरके आंगनमे..?

देवायत : (खुस होते) अरे वाह सामतभाइ.. आपने बहुत अच्छा डीसीजन लीया हे.. मेतो पहेलेसे ही केह रहा था.. की आप इन दोनोकी सादी करदो.. आपही नही मानते थे.. चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम सांतीको अ‍ेक सहारातो मील जायेगा.. मेरी मानोतो अपने घरके आंगनमेही उन दोनोकी सादी करदो..

ताकी गांवके लोगो के बीच आप अ‍ेक मीसाल कायम कर सको.. लोगोके बीच बहुतही अच्छा मेसेज जायेगाकी की देखो.. खुद सामतभाइ अपनी विधवा बहेनकी सादी उनके बेटेसे कर रहे हे.. तो फीर हमे क्या प्रोबलेम.. यही सोचकर लोग अपनी विधवा ओर त्यक्ताओकी सादी करने लगेगे..

सामत : (हसते) भाइ रमेश भी वोही केह रहा था.. अब तो हमारे गांवमे इतना सारा बदलाव होने वाला हे.. ओर खुद बाबाने मुजसे ये बात कही हे.. तो सोचा मे ही इनकी सुरुआत करदु..

देवायत : (हसते) सामतभाइ आपने बहुत अच्छा सोचा हे.. कहो सादी कब करवा रहे हो..?

सामत : भाइ.. आपके ससुरका कार्य खत्म होतेही मे उन दोनोकी सादी कर देना चाहता हु.. ताकी आप सब लोग भी सादीमे सामील हो सको..

देवायत : सामतभाइ आपको मेरे ससुराका देखनेकी जरुरत नही हे.. कर दीजीये दोनो की सादी.. मेरे ससुरकातो सीर्फ पांच दिनकी सौक रखना हे.. आप सादीकी तैयारीया सुरु कर दीजीये.. इसमे कोइ प्रोबलेम नही हे.. अगर मेरा भी कुछ काम होतो केह देना मेभी आजाउगा..

सामत : (हसते) ठीक हे भाइ मे जरुर केह दुगा.. अ‍ेक बात ओर.. मेने ओर रमेशने दोनोने सहेरमे अ‍ेक अ‍ेक मकान भी लेलीया हे.. रमेशने थोडा छोटा मकान लीया हे.. मेने थोडा बडा लीया हे.. अब सीर्फ रजीस्ट्रेशन बाकी हे.. तो सोच रहा हु.. ये मकान मे बंसीके बजाये सांती ओर मेरी जागुके नाम करदु.. क्या कहेते हो..?

देवायत : (हसते) अरे वाह.. येतो आपने बहुत अच्छा सोचा हे.. चलो दोनोको अभीनंदन आपको.. अच्छा हुआ आपने बता दीया.. वरना ये कमीनातो कभी मुजसे कहेता ही नही.. हें..हें..हें..

रमेश : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे कहा वहा रहेने जाना हे..? सीर्फ थोडासा इन्वेस्टमेन्ट करदीया हे ओर कुछ नही.. वैसे कल हम दोनो सहेर जा रहे हे.. कल हमे सायद हमारी होस्पीटलके लीये जमीनके कागजात मील जायेगे.. फीर वहासे सामतभाइ ओर मे.. मेरे मकानके रजीस्ट्रेशनके लीये चले जायेगे..

देवायत : (हसते) अरे वाह.. आज तो खुसी पे खुसी मील रही हे..? क्या बात हे रमेश.. आखीर तुम दोनोकी महेनत रंग लाइ.. ओर वो स्कुलके कामका क्या हुआ..? कोइ टेन्डर बेन्डर नीकलाकी नही..?

रमेश : (हसते) बस.. भाइ.. टेन्डरतो नीकल गया.. अब आपही अपने दोस्तके साथ बात करलो.. तो हम जीसे काम देना चाहते हे.. उनका टेन्डर पास होजाये ओर जल्द ही काम सुरु होजाये..

देवायत : (हसते फोन लेकर) ठीक हे.. इसमे क्या..? लो अभी बात कर लेता हु.. वैसे सामतभाइ.. इतनी खुसीके मोकेपर भी आपका चहेरा क्यु मुरजाया हुआ हे..? कुछ हुआ हे क्या..?

रमेश : (हसते) भाइ आपने इनको सही पकडा.. मेभी कइ दिनोसे इनको पुछ रहा हु.. कुछ बताते ही नही.. आपही पुछलो सायद आपको कुछ बतादे.. हें..हें..हें..

सामत : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही हुआ.. दोनो खामखा परेसान हो रहे हो.. बस.. उमरकी वजहसे कुछ छोटी मोटी प्रोबलेम हे.. भाइ.. इस बारेमे हम कभी फुरसतमे बात करेगे.. आप फीकर मत करो..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. सामतभाइ.. अगर कोइ प्रोबलेम होतो बताना..

कहेते देवायत जीलाकी पंचायत ओफीसमे फोन करदेता हे.. ओर टेन्डरसे लेकर होस्पीटलके जमीनके बारेमे भी बात करता हे.. तो उनका दोस्त कलही वहाके सरपंचको भेजनेके लीये कहेता हे.. ताकी जमीनके कागजात उसे मील सके.. फीर देवायत कुछ ओर औपचारीक बात करके फोन रख देता हे.. फीर देवायत सामत ओर रमेशको कलही सहेरमे जाकर कागजात लानेकी बात करता हे.. तो दोनोही खुस हो जाते हे..
 
फीर दोनोही बात करके चले जाते हे.. तो उधर भानुके घर भी रमा ओर नीलम अकेली थी.. तो रमा अब भी नीलमको लखनके साथ रीलेशन रखने को समजा रही थी.. तो इस बारेमे नीलम भी अब सीरीयस होते रमाकी सभी बातको गौरसे सुनकर समजने की कोसीस करने लगी थी.. उनको अपनी मां रमाकी सभी बातोमे सचाइ नजर आने लगी थी.. ओर उसने भी मनही मन लखनके साथ आगे बढनेकी ठानली..

तो इधर हवेलीपे गांवकी सभी लेडीस नीर्मलाके पास आकर सोक जताके चली जाती.. जैसे ही साम होगइ.. सब लोग चाइ नास्ता करके होलमे बैठे बाते कर रहेथे.. तब सृती पुनम चंदा मंजुला लता सभी पुनमके रुममे इकठी होकर लखनकी टांग खीचाइ करने लगी.. क्युकी आज सहेरसे आते वक्त पुरे रास्ते लखन सृतीकी मस्तीया करते उनकी टांग खीचाइ कर रहाथा.. तो यहा सबने मीलकर लखनको पुनमके रुममे बुलाकर लाते घुसे मारकर उनकी वाट लगादी..

तो लखन जुठा गुस्सा करते अपने रुममे चला गया.. तो सब जोरोसे हसने लगी.. सबको लखनकी मस्तीया करनेमे बहुत मजा आरहा था.. तो नीर्मला भुमीका ओर सरलाभी ये तमासा देखकर हसती रही.. ओर अ‍ैसेही रात होगइ.. तब भानु घर चला गया.. ओर देवायत हवेलीपे आगया.. फीर सबने बैठकर डीनर करलीया.. तो देवायत बहार टहेलने जानेको कहेकर सीधाही रश्मीके घर चला गया.. तो वहा रश्मी ओर वंदना डीनर कर रही थी..

रश्मी : (हसते) आइअ‍े आइअ‍े पतीदेव.. अब इस दोनो बीवीओकी याद आगइ.. हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते) भाइ.. आइअ‍ेनां.. आपभी खानेके लीये बैठ जाइअ‍े.. हमने खाना ज्यादा बनाया हे..

देवायत : (पीछे जाकर हग करते गाल चुमते) अरे मेरी प्यारी बीवीओ.. मे खाना खाकर ही इधर आया हु.. कहो..? दोनो क्या कर रही हो..? ओफीस बोफीस जाना सुरु कीया की नही..?

रश्मी : (मुस्कुराते) हां देवु.. दोनो ही जाती हे.. वंदुकी स्कुलमे काफी अ‍ेडमीसन हो गया हे.. अब इनकी स्कुलका जल्दी कुछ करवाओ..

देवायत : (उनके पास बैठते) रश्मी.. आजही रमेश ओर सामतभाइ आये थे.. सामतभाइ अपनी बहेन सांती ओर अपने बेटे बंसीकी सादी करवा रहे हे.. ओर हमारी स्कुलके बारेमे भी बात हुइ.. लगता हे अगले हप्ते तक स्कुलका काम सुरु होजायेगा.. ये बता तेरा मकान कहा तक पहुचा..?

रश्मी : (सामने देखते) पहेली सीलींग भराइ होगइ हे.. जानु.. आपने सामतभाइका नाम लीया तो कुछ याद आया.. आज सुबह वो ओर वंदुके पापा ओफीसपे आये थे.. तब सामतभाइ अपने मुहपे रुमाल रखकर खांस रहे थे.. तब मेने उनके रुमालपे देखातो मुजे उनमे खुनके धबे दीखे.. ओर ये पहेली बार नही.. मेने दुसरी बार देखा हे.. मुजे लगता हे उनको कुछ हुआ हे..

देवायत : सायद अकेलेमे वो मुजसे यही बात करने वाले थे.. लेकीन भानु ओर रमेशकी वजहसे नही केह पाये.. लगता हे मुजे उनको अकेले मीलना पडेगा.. वो हमसे कोइ बडी बात छुपा रहे हे..

रश्मी : देवु.. वो.. सृतीदीदी यही हेनां..? मुजे उनको दीखाना हे.. अब देखो मेरा पेट काफी नीकल रहा हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. आतेही देखा मेने.. सुन.. अब कोइ रीस्क नही लेना.. तेरा पहेला बच्चा हेनां..?

रश्मी : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. जानु.. क्या आपको वंदुसे मीलना हे..? तो जाइअ‍े दोनो.. मेरे रुममे चले जाइअ‍े.. ओर मील लीजीये..

देवायत : (वंदनाके होठोको चुमते) हंम.. वंदुको भी मीलना चाहता हु.. ओर तुमसे भी.. लेकीन अब हमारी वंदुकी सादीके बाद.. वंदु.. क्या अपनी मम्मीको मीलीकी नही..? मेने नीशाके साथ उनसेभी सादी करली हे..

वंदना : (खडी होकर जोरोसे बाहोमे भरते) हां भाइ.. इस बारेमे कल ही रश्मी भाभीसे बात हुइ.. आपने मम्मीका सपना पुरा कर दीया.. थेन्क्स.. भाइ.. मुजे मम्मी पापाके बारेमे आपसे कुछ कहेना हे..

देवायत : नही वंदु.. अभी कुछभी मत बोल.. मुजे उन दोनोके बारेमे सब कुछ पता हे..

वंदना : (अपनी आंख गीली करते) भाइ.. क्या आपको सब पता चल गया..? सायद इसीलीये मम्मीने मुजे यही रहेनेके लीये कहा हे.. भाइ मम्मी पापाके सबंध टुटनेकी कगारपे हे..

देवायत : (होठोको चुमकर) वंदु.. तुम कुछ भी मत बोल.. मुजे सब पता हे.. इसीलीये मेने तेरी मम्मीसे सादी करली हे.. क्या तुम हमारे रीस्तेसे खुस तो होनां..?

वंदना : भाइ.. खुस..? अरे मेतो इतना खुस हुकी बया नही कर सकती.. सायद इसीलीये मम्मी भी खुस हे.. वरना वो टुट जाती.. भाइ.. अब हम तीनो साथ रहेगी.. आपकी बीवीया बनकर..

देवायत : (मुस्कुराते गोदमे उठाकर) हंम.. चल इसी बातपे आज मे अपनी इस बीवीको खुस कर देता हु..

कहेते देवायत वंदनाको गोदमे उठालेता हे.. तो रश्मी वही खाना खाते हसने लगती हे.. ओर देवायत वंदनाको लेकर वही सोपेपे लीटा देता हे.. ओर उसे प्यार करने लगता हे.. दोनोही सबकुछ भुलकर अ‍ेक दुसरेको प्यार करनेमे खो गये.. तब कुछही देरके बाद दोनो पुरी तराह नंगे थे.. ओर देवायत वंदनाको वही लीटाकर उनपे चड गया.. ओर अपना तगडा लंड वंदनाकी चुतमे उतार दीया..

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तब वंदना पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी.. ओर वो आंख बंध करके देवायतके कंधेको चुमते उनसे होले होले चुदवाने लगी.. अब वंदनाको रश्मीकी हाजरीसे कोइ फर्क नही पडता था.. क्युकी अब देवायत नही होता तब दोनोही लेस्बीयन खेल खेलते अ‍ेक दुसरेकी प्यास बुजाने लगी थी.. ओर देवायत वंदनाको जोरोसे चोदने लगा.. वंदनाको अ‍ेक बार जडाकर उनकी चुतको अपने गाढे पानीसे भर देता हे..

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फीर वही वंदनाको घोडी बनाकर पीछेसे लंड घुसाकर चोदने लगता हे.. तो रश्मी खाना खाकर बर्तन वोसमे रखकर अपने रुममे चली जाती हे.. ओर अपने सभी कपडे नीकालकर वापस दोनोके पास आजाती हे.. ओर अपनी चुतको सहेलाते वही पासमे बैठ जाती हे.. देवायत वंदनाकी पीछेसे धमसासन चुदाइ कर रहाथा तब वंदना अ‍ेक बार फीर जडते ढेर होगइ.. तब देवायत उसे गोदमे उठाकर अंदर बेडपे ले गया..

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ओर वंदनाको वही लीटाते उनके उपर फीरसे चडकर लंडको चुतमे घुसाकर जोरोसे चोदने लगा.. तो वंदनाने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर अपने तनसे चीपका लीया.. देवायत फीरसे वंदनाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगा.. वंदनाके उपर वासना पुरी तराह हावी हो चुकी थी.. अब वो बीन्दास्त देवायतको अपना पती मानकर खुलकर प्यार देने लगी थी.. ओर दोनोके बीच काफी देर धकापैनी चुदाइ होती रही..

तभी अ‍ेक बार फीर देवायतने पुरा लंड घुसाकर वंदनाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरकर हरी भरी कर दीया.. तो साथमे वंदनाभी कांपते हुअ‍े देवायतके साथ जड गइ.. ओर उनकी पीठ सहेलाती रही.. फीर देवायत जटसे लंडको नीकालकर बेडसे खडा होगया.. ओर रश्मीको पकडर उनके पीछे चला गया.. ओर रश्मीके नीकरको खीचकर नीचे कर दीया.. रश्मी कुछ समजे उनसे पहेले ही रश्मीकी चुतमे खडे खडे पीछेसे लंडको घुसा दीया..

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तब रश्मीकी हालत अचानक हुअ‍े हमलेसे पतली होगइ.. ओर वो हल्कासा चीखते देवायतसे चुदवाने लगी.. रश्मीने सीर्फ अपनी ब्रा ओर नीकरही पहेना था.. वो वंदना ओर देवायतकी चुदाइ देखकर काफी गरम हो चुकी थी.. ओर उनकी चुत सहेलाते चुतको गीली कर रही थी.. ओर देवायतने अचानक उसे पीछेसे पकडलीया ओर उनकी धमासान चुदाइ करता रहा.. रश्मीको भी दो बार जडाकर आखीर देवायत उनकी चुतको भरते जड गया..
 
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