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तो दुसरी ओर राजीवके घर सब लोग चले गये.. तो अब घरमे सीर्फ घरके ही लोग बचे थे.. तब धिरेन गांवके बाजारमे चला गया.. ओर वहा कोइ अच्छीसी रेस्टोरन्टसे सबके लीये खाना पेक करवाके लाया.. आज सुबहसे कीसीने चाइ नास्ता भी नही कीयाथा.. ओर ग्याराह बजे राजीवने अंतीम सांस ली.. तो दो पहोरकोभी कीसीने नही खाया था.. तो अभी नीर्मला ओर भावना खानेको मना करने लगी.. तब भुमीका ओर चंदाने दोनोको जबरदस्तीसे खीलाया.. ओर साथमे सबने भी खाना खालीया..
देवायत : (सबलोग होलमे बेठेथे तब) धिरेन.. अब तुभी कल यहासे सीधे जोबपे चले जाना.. अब यहा रुकनेका कोइ मतलब नही हे.. क्युकी कल मे इस सबको लेकर हमारे घरपे चला जाउगा.. अब पापाकी जोभी वीधीया करनी हे हम वही करेगे.. तुम वहा आते जाते रहेना.. ओर वहीसे जोबपे चले जाना..
नीर्मला : हां बेटा.. तेरे जीजु ठीक केह रहे हे.. ओर अब जबतक सब वीधीया खतम नही होजाती तबतक पुनम बीटीया भी हमारे साथ रहेगी.. वो उनकी अेकलोती बहु थी.. कल उनकी पे्रगनन्सीकी बात सुनकर कीतने खुस थे.. धिरेन.. अब तर्पणकी सब वीधीया तेरे ओर तेरे जीजुके हाथोसे ही होगी.. यही उनकी आखरी इच्छा थी..
भुमीका : (मुस्कुराते) मेरा भाइ.. हां नीमु.. कल पुनो बेटीके पेटसे होनेकी खुसखबर सुनकर वो कीतना खुस हो रहाथा.. की चलो.. कमसे कम मे दादा तो होजाउगा.. लेकीन भगवानके आगे कीसकी चलती हे.. चलो अब सब लोग सोजाओ.. सुबहसे सब अैसे ही हे..
मंजुला : (धीरेसे) देवु.. आज आप इधरही रुक रहे हेनां..? अगर कल सबको उधर जाना हे तो हम अभी हमारे सब कपडे पेक कर लेते हे.. चलो पुनो..
नीर्मला : मंजु.. क्या तेरे पापाकी सब वीधीया पुरी होने तक हम यहा नही रुक सकते..? हंम..? मे सीर्फ केह रही हु..
देवायत : (मुस्कुराते) जी.. बीलकुल रुक सकते हे.. अगर आपकी यही इच्छा हे तो हम सब यही रुक जाते हे.. हमे कोइ प्रोबलेम नही..
भुमीका : नही नीमु.. अबतो जो होनाथा वो हो चुका हे.. अगर यही रुकना हेतो देवु ओर धिरेन सबको यहा आना जाना पडेगा.. अगर वहा हेतो वो घरके अलावा अपने बीजनेस ओर धिरेनको जोबमे आने जानेमे आसानी रहेगी.. बाकी तेरी मरजी.. अगर यही रुकना हे तो भी कोइ प्रोबलेम नही..
भावना : मोम.. जीजु ओर मौसी ठीक केह रहे हे.. वैसेभी हमारे कौनसा कोइ रीस्तेदार हे जो यहा आपको आस्वासन देनेके लीये यहा मीलने आयेगे..? ओर यहा रहेगे तो आप पापाको याद करते रोती ही रहोगी.. तो चलो.. हम वही चलेजाते हे.. (मंजुको) दीदी आप चलो.. सब पेकींग करलो मे भी आती हु..
नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. ये भी सही हे.. चलो हम सब वही आजाते हे.. भावु.. तुम मेरे भी कपडे पेक करले..
कहातो सबके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर मंजु पुनम ओर भावना.. सबके कपडे पेक करने चली गइ.. तब मौका देखकर धिरेन धिरेसे नीर्मला ओर देवायतके पास आकर बैठ गया.. सबके व्यवहार देखकर उसने राहतकी सांसली.. की चलो.. उनके ओर नीलमके बारेमे अभी कीसीने उसे कुछ नही कहा.. हालाकी वो जानता थाकी इस बारेमे मंजुदीदीको सब पता चल गया होगा.. धिरेनने मौका देखकर बात छेडदी..
धिरेन : (धीरेसे सरमाते) जीजु.. मेने कल अेक मकान देखलीया हे.. हमारे मेनेजरकाही हे.. दो बेडरुम.. होल.. कीचन.. भावमे मील रहा हे.. ओर अच्छे अेरीया मे हे.. तो आप मम्मी ओर पुनम टाइम मीलेतो देखलो.. वो भुमीमौसीकी सोसायटी मे हे.. अेक गली पीछे..
भुमीका : (खुस होते) अरे वाह.. तो हमारे पडोसी बनकर आ रहे हो.. हें..हें..हें..
चंदा : (मुस्कुराते) बेटा.. वो सब बादमे देख लेगे.. पहेले हम तेरे मौसाजीका कार्य करले.. फीर चलेगे..
नीर्मला : (मुस्कुराते) नही चंदा.. अगर आज राजीव होते ओर ये सुनते तो कीतना खुस होते.. यही समजले वो हमारे बीच हे.. जो अभी धिरेनकी बात सुनकर खुस हो रहे होगे.. तो हमे उनकी खुसीके मना नही करनी चाहीये.. ओर वैसेभी मे इन सब चीजोमे ज्यादा नही मानती.. जीस तराह हमारे सामने दु:खका अवसर आयातो हमने उसेभी स्वीकार करलीया हे.. तो खुसीयाभी भी हमे स्वीकार करलेनी चाहीये..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे धिरेन.. हम अेक दो दिनमे जाकर सब देख लेगे.. ओर चंदा ओर पुनकोभी पसंद आगया तो हम उसे वही पुरा पेमेन्ट दे देगे..
धिरेन : (मुस्कुराते) नही जीजु.. हमे वहीसे होमलोन मील जायेगी.. वो हमारे मेनेजर ही सब अेरेन्ज करदेगे.. क्युकी वो घर मे बेन्क लोनसे लेना चाहता हु.. मेरी कमाइकी पहेली प्रोपर्टी.. हें..हें..हें..
नीर्मला : (गले लगाकर सर चुमते) हंम.. मतलब मेरी बेटा खुदार हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे कोइ बात नही..
कहतो धिरेन ओर चंदा दोनोही हसने लगे.. चंदा नीर्मलाको हसते हुअे देखकर बहुतही खुस होने लगी.. क्युकी आजही उनके पती ओर बडेभाइका स्वर्गवास हुआ था.. तो नीर्मला उनको इतजी जल्दीसे सदमेसे बहार नीकलते भुल रही थी.. जीसे देखकर देवायत ओर भुमीकाभी खुस हो रहेथे.. उस रात कुछ नही हुआ.. सब पेकींग होगइ तब देवायत धिरेन होलमे ही सोगये.. ओर सबलोग अपने रुममे अेडजेस्ट करके सो गये.. तो आज भुमीका नीर्मलाके साथही सोगइ..
देवायत : (सबलोग होलमे बेठेथे तब) धिरेन.. अब तुभी कल यहासे सीधे जोबपे चले जाना.. अब यहा रुकनेका कोइ मतलब नही हे.. क्युकी कल मे इस सबको लेकर हमारे घरपे चला जाउगा.. अब पापाकी जोभी वीधीया करनी हे हम वही करेगे.. तुम वहा आते जाते रहेना.. ओर वहीसे जोबपे चले जाना..
नीर्मला : हां बेटा.. तेरे जीजु ठीक केह रहे हे.. ओर अब जबतक सब वीधीया खतम नही होजाती तबतक पुनम बीटीया भी हमारे साथ रहेगी.. वो उनकी अेकलोती बहु थी.. कल उनकी पे्रगनन्सीकी बात सुनकर कीतने खुस थे.. धिरेन.. अब तर्पणकी सब वीधीया तेरे ओर तेरे जीजुके हाथोसे ही होगी.. यही उनकी आखरी इच्छा थी..
भुमीका : (मुस्कुराते) मेरा भाइ.. हां नीमु.. कल पुनो बेटीके पेटसे होनेकी खुसखबर सुनकर वो कीतना खुस हो रहाथा.. की चलो.. कमसे कम मे दादा तो होजाउगा.. लेकीन भगवानके आगे कीसकी चलती हे.. चलो अब सब लोग सोजाओ.. सुबहसे सब अैसे ही हे..
मंजुला : (धीरेसे) देवु.. आज आप इधरही रुक रहे हेनां..? अगर कल सबको उधर जाना हे तो हम अभी हमारे सब कपडे पेक कर लेते हे.. चलो पुनो..
नीर्मला : मंजु.. क्या तेरे पापाकी सब वीधीया पुरी होने तक हम यहा नही रुक सकते..? हंम..? मे सीर्फ केह रही हु..
देवायत : (मुस्कुराते) जी.. बीलकुल रुक सकते हे.. अगर आपकी यही इच्छा हे तो हम सब यही रुक जाते हे.. हमे कोइ प्रोबलेम नही..
भुमीका : नही नीमु.. अबतो जो होनाथा वो हो चुका हे.. अगर यही रुकना हेतो देवु ओर धिरेन सबको यहा आना जाना पडेगा.. अगर वहा हेतो वो घरके अलावा अपने बीजनेस ओर धिरेनको जोबमे आने जानेमे आसानी रहेगी.. बाकी तेरी मरजी.. अगर यही रुकना हे तो भी कोइ प्रोबलेम नही..
भावना : मोम.. जीजु ओर मौसी ठीक केह रहे हे.. वैसेभी हमारे कौनसा कोइ रीस्तेदार हे जो यहा आपको आस्वासन देनेके लीये यहा मीलने आयेगे..? ओर यहा रहेगे तो आप पापाको याद करते रोती ही रहोगी.. तो चलो.. हम वही चलेजाते हे.. (मंजुको) दीदी आप चलो.. सब पेकींग करलो मे भी आती हु..
नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. ये भी सही हे.. चलो हम सब वही आजाते हे.. भावु.. तुम मेरे भी कपडे पेक करले..
कहातो सबके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर मंजु पुनम ओर भावना.. सबके कपडे पेक करने चली गइ.. तब मौका देखकर धिरेन धिरेसे नीर्मला ओर देवायतके पास आकर बैठ गया.. सबके व्यवहार देखकर उसने राहतकी सांसली.. की चलो.. उनके ओर नीलमके बारेमे अभी कीसीने उसे कुछ नही कहा.. हालाकी वो जानता थाकी इस बारेमे मंजुदीदीको सब पता चल गया होगा.. धिरेनने मौका देखकर बात छेडदी..
धिरेन : (धीरेसे सरमाते) जीजु.. मेने कल अेक मकान देखलीया हे.. हमारे मेनेजरकाही हे.. दो बेडरुम.. होल.. कीचन.. भावमे मील रहा हे.. ओर अच्छे अेरीया मे हे.. तो आप मम्मी ओर पुनम टाइम मीलेतो देखलो.. वो भुमीमौसीकी सोसायटी मे हे.. अेक गली पीछे..
भुमीका : (खुस होते) अरे वाह.. तो हमारे पडोसी बनकर आ रहे हो.. हें..हें..हें..
चंदा : (मुस्कुराते) बेटा.. वो सब बादमे देख लेगे.. पहेले हम तेरे मौसाजीका कार्य करले.. फीर चलेगे..
नीर्मला : (मुस्कुराते) नही चंदा.. अगर आज राजीव होते ओर ये सुनते तो कीतना खुस होते.. यही समजले वो हमारे बीच हे.. जो अभी धिरेनकी बात सुनकर खुस हो रहे होगे.. तो हमे उनकी खुसीके मना नही करनी चाहीये.. ओर वैसेभी मे इन सब चीजोमे ज्यादा नही मानती.. जीस तराह हमारे सामने दु:खका अवसर आयातो हमने उसेभी स्वीकार करलीया हे.. तो खुसीयाभी भी हमे स्वीकार करलेनी चाहीये..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे धिरेन.. हम अेक दो दिनमे जाकर सब देख लेगे.. ओर चंदा ओर पुनकोभी पसंद आगया तो हम उसे वही पुरा पेमेन्ट दे देगे..
धिरेन : (मुस्कुराते) नही जीजु.. हमे वहीसे होमलोन मील जायेगी.. वो हमारे मेनेजर ही सब अेरेन्ज करदेगे.. क्युकी वो घर मे बेन्क लोनसे लेना चाहता हु.. मेरी कमाइकी पहेली प्रोपर्टी.. हें..हें..हें..
नीर्मला : (गले लगाकर सर चुमते) हंम.. मतलब मेरी बेटा खुदार हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे कोइ बात नही..
कहतो धिरेन ओर चंदा दोनोही हसने लगे.. चंदा नीर्मलाको हसते हुअे देखकर बहुतही खुस होने लगी.. क्युकी आजही उनके पती ओर बडेभाइका स्वर्गवास हुआ था.. तो नीर्मला उनको इतजी जल्दीसे सदमेसे बहार नीकलते भुल रही थी.. जीसे देखकर देवायत ओर भुमीकाभी खुस हो रहेथे.. उस रात कुछ नही हुआ.. सब पेकींग होगइ तब देवायत धिरेन होलमे ही सोगये.. ओर सबलोग अपने रुममे अेडजेस्ट करके सो गये.. तो आज भुमीका नीर्मलाके साथही सोगइ..