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- Dec 5, 2013
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तो दुसरी ओर लखन ओर सृती दोनो ही कारमे अकेले थे तब सृती लखनके साथ वाली सीटपे ही बैठी थी.. लखन ओर सृती आज दोनोही खुलकर अेक दुसरेकी मस्तीया करते जा रहेथे.. तब बीच बीचमे लखन सृतीके साथ फ्लर्ट भी कर लेता था.. तब सृती बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगती थी.. आज दोनो बीन्दास्त बाते करते सहेरकी ओर जा रहेथे.. तो आज लखनने खुलकर अपनी लाइफके बारेमे सृतीको बता दीया.. की उनके सभी दोस्तो आपसमे कीस तराह अपनी बाते सेयर करते हे..
तो सृतीको भी लखनकी बातोमे इन्ट्रेस होने लगा.. ओर उनको पता चल गया.. की उनका देवर भी अपने बडे भाइकी तराह बहुतही रंगीन मीजाजका हे.. तो वो सरमाके हसने लगी.. ओर उतेजीत होने लगती.. फीर बातोही बातोमे लखनने साहीलके चाचाकी लडकी सबानाके बारेमे बताया.. जो अेक सृतीकी तराह गायनेक डोक्टर बनना चाहती थी.. तो सृती लखनकी सभी बाते गौरसे सुनती रही..
सृती : (मनमे खुस होते) लखन भैया.. अभी वो आपके दोस्तकी बहेन क्या कर रही हे..?
लखन : (कार चलाते) भाभी.. साहील केह रहाथा अभी उनकी मेडीकल कोलेज खतम होगी.. ओर अब बेंगलोरमे मेडीकलमे फाइनलके लीये पढने जा रही हे.. अैसा कुछ साहील केह रहा था.. भाभी.. उनकी आर्थीक हालत इतनी अच्छी नही हे.. तो साहील उनकी फीसके पैसे दे रहा हे..
सृती : (सामने देखकर) अच्छा.. बेंगलोरमे..? तो फीर उनके पीताजी क्या काम कर रहे हे..?
लखन : भाभी.. वो अेक प्राइवेट फेक्टरीमे काम कर रहे हे.. घरमे अेक बडा लडका दो लडकी ओर साहीलके चाचा चाची हे.. हालही मे उनका बडा लडका अेन्जीनीयर होगया.. ओर जोबपे लग गया.. तो बेचारे चाचा चाचीको लगाकी अब उनके अच्छे दिन आयेगे.. ओर उनमेसे सबानाको पढायेगे.. लेकीन अेक हप्ते पहेलेही उनका बडा लडका उनकी बडी वाली लडकी यानीकी उनकी बहेनको लेकर भाग गया.. दोनोने तीन साल पहेलेही नीकाह करलीया था..
सृती : (जोरोसे हसते) हे भगवान.. कमीने सबलोग उनकी बहेनके पीछे ही पडे हे.. हें..हें..हें.. फीर..?
लखन : (हसते) क्या भाभी.. आप नही समजोगी.. क्युकी बहेनके प्रती अेक अलगही चाहत होती हे.. खैर.. छोडो ये सब.. जब ये दोनो भाग गये तब उनका घर टुट ही गया.. ओर सबानाकी पढाइ रुकनेकी कगारपे आगइ.. साहील भी उनका ही छोटा लडका हे..
लेकीन बचपनसे ही उनकी बडी अम्माने उनको गोद लेलीया था.. सबलोग हमारे ही गांवके हे.. ओर वही रहेते थे.. लेकीन हमारे पुराने सरपंचकी वजहसे उनकी बहुत सारी जमीन चली गइ थी.. जो हालही मे भाइने उनको वापस करदी.. ओर आपने ही अपने हाथोसे उनको सोपी हे..
सृती : (खुस होते) अच्छा.. मेने दीहे..? छोडीये सब.. अब मे जो केह रही हु उसे ध्यानसे सुनो.. मेने भी बेगलोरसे गायनेककी डीग्री ली हे.. वहा सबलोग पहेचान वाले हे.. तो सबानाको कहेना अेक बार आकर मुजसे मीले.. वैसे भी हमे आगे उनकी जरुरत पडेगी.. क्युकी अब आपके भाइ जो वहा अेक बडी होस्पीटल बनवा रहे हे.. तो सबानाको अेक डोक्टरके तौरपे वही जोब मील जायेगी.. आप उनको मीलो तो ये सब कहेना..
लखन : (खुस होते हसते) जी भाभी.. सायद कल ही मे साहील ओर उनकी अम्मा उनके चाचाको मीलने जा रहे हे.. फीर वापसीमे हमारे साथही वापस आजायेगे.. क्या कहेती हो..? चलेगाना..?
सृती : (हसते) ठीक हे.. मीललेना.. ओर सुनो.. वो सबकी टीकीट बुक करनी हे.. भुल मत जाना..
लखन : (हसते) ठीक हे भाभी.. आपको ड्रोप करके वही जा रहा हु.. अब जब भी वापस जाना हो मुजे फोन करदेना.. मे आजाउगा.. ओर मेरे खानेकी चीन्ता मत करना.. ओर आप भी टाइमपे खा लेना..
सृती : (मुस्कुराते प्यारसे गाल सहेलाते) लखन भैया.. भाभीकी इतनी चीन्ता करते हो..? थेन्क्स..
लखन : (मुस्कुराते) अरे.. आप ओर पुनो दीदी मेरी अेक लौती प्यारीसी भाभी हो.. चीन्ता तो होगीनां..?
सृती : (सरमाते मुस्कुराते) लखनभैया.. क्या अब आप पुनो दीदीको भाभी कहोगे..?
लखन : (सरमाते सामने देखकर धीरेसे) हां भाभी.. हम दोनोने तैय कीया हे.. जब हम दोनो अकेले होगे तब ही मे उनको भाभी कहुगा.. लेकीन अब आपको तो सब पता हे.. तो मे आपकी हाजरीमे भी उनको भाभी कहुगा.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर मुका मारते) आप बहुतही कमीने देवर हो.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. जोभी कहेना हो कहेना..
कहेते लखन सहेर पहोचक सृतीको उनकी क्लीनीकपे ड्रोप करके नीकल जाता हे.. ओर सीधा ही ट्रावेल्सकी ओफीसमे चला गया.. जहासे वो हनीमुनके लीये गया था.. तो वहा उनको छे दिनका खाने.. रहेने.. ओर घुमनेका पेकेज ही मील गया.. तो देवायतसे बात करके उन्होने चार टीकीटी बुक करली.. तभी उसे कुछ याद आया.. तो चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर उसने फोन नीकालक पुनमको लगा दीया..
तो हवेलीपे गांवकी बहुत सारी औरते नीर्मलाके पास बैठनेके लीये आइ थी.. तो पुनम भी मंजु चंदा भावना रश्मी वंदना सबके साथ बैठी थी.. तभी लखनका फोन आया.. जो उसने वाइब्रेट मोडपे रखा था.. तो पुनमने फोन देखते ही कट कर दीया.. ओर खडी होकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके बेडपे बैठकर वापस मुस्कुराते लखनको फोन लगा दीया..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. फोन क्यु काट दीया..? क्या वहा कोइ ओरभी था..?
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. मे वहा सबके साथ बैठी थी.. वहा बहुत सारी ओरत नीर्मला आंटीके पास बैठनेके लीये आइ हे.. तो मे मेरे रुममे आगइ.. यहा कोइ नही हे.. कहो.. सृती भाभीको छोड दीया..? वहा कोइ ओरतो नही..? आप अकेले होनां..?
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब अभी आप अकेली हो.. हें..हें..हें.. तबतो मे आपको भाभी केह सकता हु.. भाभी.. फीकर मत करो.. इधर भी कोइ नही हे.. कहो आपने फोन करनेको कहा था तो करदीया..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन भैया.. जब आप मुजे भाभी कहेते होनां.. तो मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. क्युकी मेरी भी अेक फेन्टासी थी.. की कोइ मेरा भी देवर हो.. ओर मे उनके साथ ढेर सारी मस्तीया करु.. भाइ.. आपने मेरी कमी पुरी करदी.. थेन्क्स..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आप बहुत खुसनसीब हो.. क्युकी सबकी फेन्टासी पुरी हो जाती हे.. बस.. सीर्फ मेरी फेन्टासी ही पुरी नही होती.. इस मामलेमे सीर्फ मे ही बाकात रेह जाता हु.. सब सपना ही रेह जाता हे.. खैर.. छोडीये.. अब मे आपको भाभी ही कहुगा..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) हां लखन.. अकेलेमे मुजे भाभी ही कहेना मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. अब मे आपको अकेलेमे भाइ नही कहुगी.. आप मेरे प्यारे ओर चहीते देवर हो.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. देखना.. अब आप मेरी भाभी हो गइ हो.. मे आपकी ढेर सारी मस्तीया करुगा.. ओर आपको तो पता हे देवर भाभीके बीच कैसी मस्तीया होती हे.. तो अब तैयार रहीयेगा.. हें..हें..हें.. भाभी.. कहीये.. क्या कुछ जरुरी बात करनी थी..? जो आपने मुजे फोन करनेको कहा था..
पुनम : (सर्मसार होते हसते) हां देवरजी.. सुनो.. अब मे आपको कैसे कहु.. मुजेतो बडी सरम आ रही हे.. क्युकी इस तराह की बात सीर्फ अपनी बीवी ही बता सकती हे.. ओर आज आपको दी हुइ जडीबुटीके बारेमे अभी हम लता भाभीको भी बताना नही चाहते.. वरना वोही आपको सबकुछ बता देती.. हे भगवान.. कहा फसादी मुजे..? देवरजी.. मुजे इस बारेमे बात करनेके बहुत सरम आती हे.. लेकीन क्या करु मुजे ही सब बताना पडेगा..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. हमने पहेले भी इस तरहकी बाते खुलकर की हे.. जब आप मेरी बहेन थी.. तो फीर अब काहेकी सरम..? सायद कुछ बात अैसी होगी.. जो आप मेरी बहेन होकर नही बता पाती.. लेकीन अबतो हम दोनो देवर भाभी हे.. तो आप ओल रेडी फस चुकी हे.. हें..हें..हें.. जोभी कहेना हो बीन्दास्त कहेदो.. आप मेरी सबसे चहीती भाभी हो.. ओर मे आपका चहीता देवर हु.. हें..हें..हें..
पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. फीर सुरु होगये..? लगता हे मुजे ही सब बताना पडेगा.. सुनो देवरजी.. आज आपको जो जडी बुटी दी हेनां.. उस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. इनका असर होते ही दो दिनमे सब ठीक होजायेगा.. तो ये दो दीन आपको वो.. वो.. नही करना.. समज गयेनां..?
ओर अब आपको कोइ भी गोलीया खानेकी जरुरत नही हे.. आपका वो भी हे.. उनसे थोडा बडा ओर मोटा होजायेगा.. अगर आपको थोडासा दर्द जैसा लगे तो आप गभराना नही.. दो दिनमे सब ठीक होजायेगा.. आप समज गयेनां..?
लखन : (सरारतसे धीरेसे) भाभी.. मे कुछ ठीकसे समजा नही.. मुजे वो दो दिन क्या नही करना..? ओर क्या बडा होजायेगा..? हें..हें..हें..
पुनम : (बहुतही सर्मसार होते थोडे गुस्सेमे) देखा.. आप वाकइ बहुतही कमीने हो.. कुते कहीके.. करदीना देवर वाली हरकत.. इसीलीये मे आपसे बात नही करती थी.. मुजे पता हे मेरे कहेनेका मतलब आप समज गये हे.. फीर भी आप जान बुजकर अन्जान बन रहे हो.. ये सब बाते आपको अपनी बीवीको बतानी चाहीये.. लेकीन इस बारेमे हम उसे अभी बताना नही चाहते.. इसीलीये मुजे बजबुरन आपसे बात करनी पडी.. देवरजी.. आप वाकइ कमीने हो.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) हें..हें..हें.. सोरी सोरी भाभी.. क्या हेनां.. मेरे दिलमे आपके लीये अेक अलग ही फीलींग्स हे.. तो आपके साथ मस्ती करनेमे बहुत मजा आता हे.. कहीये..
पुनम : (सर्मसार होते हसते) देवरजी.. आपकी सभी फीलींग्सके बारेमे पता हे मुजे.. लगता हे अबतो ये बात मुजे बेसरम होके आपको कहेनी पडेगी.. वो नही करना मतलब सेक्स नही करना.. समजे..? ओर वोका मतलब आपके पेनीससे था.. आपतो मुजेभी बेसर्म बना रहे हो.. कमीने कहीके.. अेक बार घरपे आओ फीर आपकी खबर लेती हु.. अबतो आपको भाभीकी तराह खुब पीटुगी.. बात करते हे.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) हाये.. भाभी.. मेतो कबसे आपसे पीटनेके लीये तैयार हु.. जब हम दोनो स्कुलमे थे.. कब पीटोगी मुजे..? हें.. हें.. हें.. सोरी.. सोरी.. भाभी.. मेतो मजाक कर रहा था.. क्या हेना आपके साथ ओर सृतीभाभीके साथ मस्ती करनेमे बहुत मजा आता हे.. उनके साथ भी पुरे रास्ते खुब मस्तीया की.. हें..हें..हें.. लव यु भाभी.. थेन्क्स.. मेरा खयाल रखनेके लीये.. हें..हें..हें..
तो सृतीको भी लखनकी बातोमे इन्ट्रेस होने लगा.. ओर उनको पता चल गया.. की उनका देवर भी अपने बडे भाइकी तराह बहुतही रंगीन मीजाजका हे.. तो वो सरमाके हसने लगी.. ओर उतेजीत होने लगती.. फीर बातोही बातोमे लखनने साहीलके चाचाकी लडकी सबानाके बारेमे बताया.. जो अेक सृतीकी तराह गायनेक डोक्टर बनना चाहती थी.. तो सृती लखनकी सभी बाते गौरसे सुनती रही..
सृती : (मनमे खुस होते) लखन भैया.. अभी वो आपके दोस्तकी बहेन क्या कर रही हे..?
लखन : (कार चलाते) भाभी.. साहील केह रहाथा अभी उनकी मेडीकल कोलेज खतम होगी.. ओर अब बेंगलोरमे मेडीकलमे फाइनलके लीये पढने जा रही हे.. अैसा कुछ साहील केह रहा था.. भाभी.. उनकी आर्थीक हालत इतनी अच्छी नही हे.. तो साहील उनकी फीसके पैसे दे रहा हे..
सृती : (सामने देखकर) अच्छा.. बेंगलोरमे..? तो फीर उनके पीताजी क्या काम कर रहे हे..?
लखन : भाभी.. वो अेक प्राइवेट फेक्टरीमे काम कर रहे हे.. घरमे अेक बडा लडका दो लडकी ओर साहीलके चाचा चाची हे.. हालही मे उनका बडा लडका अेन्जीनीयर होगया.. ओर जोबपे लग गया.. तो बेचारे चाचा चाचीको लगाकी अब उनके अच्छे दिन आयेगे.. ओर उनमेसे सबानाको पढायेगे.. लेकीन अेक हप्ते पहेलेही उनका बडा लडका उनकी बडी वाली लडकी यानीकी उनकी बहेनको लेकर भाग गया.. दोनोने तीन साल पहेलेही नीकाह करलीया था..
सृती : (जोरोसे हसते) हे भगवान.. कमीने सबलोग उनकी बहेनके पीछे ही पडे हे.. हें..हें..हें.. फीर..?
लखन : (हसते) क्या भाभी.. आप नही समजोगी.. क्युकी बहेनके प्रती अेक अलगही चाहत होती हे.. खैर.. छोडो ये सब.. जब ये दोनो भाग गये तब उनका घर टुट ही गया.. ओर सबानाकी पढाइ रुकनेकी कगारपे आगइ.. साहील भी उनका ही छोटा लडका हे..
लेकीन बचपनसे ही उनकी बडी अम्माने उनको गोद लेलीया था.. सबलोग हमारे ही गांवके हे.. ओर वही रहेते थे.. लेकीन हमारे पुराने सरपंचकी वजहसे उनकी बहुत सारी जमीन चली गइ थी.. जो हालही मे भाइने उनको वापस करदी.. ओर आपने ही अपने हाथोसे उनको सोपी हे..
सृती : (खुस होते) अच्छा.. मेने दीहे..? छोडीये सब.. अब मे जो केह रही हु उसे ध्यानसे सुनो.. मेने भी बेगलोरसे गायनेककी डीग्री ली हे.. वहा सबलोग पहेचान वाले हे.. तो सबानाको कहेना अेक बार आकर मुजसे मीले.. वैसे भी हमे आगे उनकी जरुरत पडेगी.. क्युकी अब आपके भाइ जो वहा अेक बडी होस्पीटल बनवा रहे हे.. तो सबानाको अेक डोक्टरके तौरपे वही जोब मील जायेगी.. आप उनको मीलो तो ये सब कहेना..
लखन : (खुस होते हसते) जी भाभी.. सायद कल ही मे साहील ओर उनकी अम्मा उनके चाचाको मीलने जा रहे हे.. फीर वापसीमे हमारे साथही वापस आजायेगे.. क्या कहेती हो..? चलेगाना..?
सृती : (हसते) ठीक हे.. मीललेना.. ओर सुनो.. वो सबकी टीकीट बुक करनी हे.. भुल मत जाना..
लखन : (हसते) ठीक हे भाभी.. आपको ड्रोप करके वही जा रहा हु.. अब जब भी वापस जाना हो मुजे फोन करदेना.. मे आजाउगा.. ओर मेरे खानेकी चीन्ता मत करना.. ओर आप भी टाइमपे खा लेना..
सृती : (मुस्कुराते प्यारसे गाल सहेलाते) लखन भैया.. भाभीकी इतनी चीन्ता करते हो..? थेन्क्स..
लखन : (मुस्कुराते) अरे.. आप ओर पुनो दीदी मेरी अेक लौती प्यारीसी भाभी हो.. चीन्ता तो होगीनां..?
सृती : (सरमाते मुस्कुराते) लखनभैया.. क्या अब आप पुनो दीदीको भाभी कहोगे..?
लखन : (सरमाते सामने देखकर धीरेसे) हां भाभी.. हम दोनोने तैय कीया हे.. जब हम दोनो अकेले होगे तब ही मे उनको भाभी कहुगा.. लेकीन अब आपको तो सब पता हे.. तो मे आपकी हाजरीमे भी उनको भाभी कहुगा.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर मुका मारते) आप बहुतही कमीने देवर हो.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. जोभी कहेना हो कहेना..
कहेते लखन सहेर पहोचक सृतीको उनकी क्लीनीकपे ड्रोप करके नीकल जाता हे.. ओर सीधा ही ट्रावेल्सकी ओफीसमे चला गया.. जहासे वो हनीमुनके लीये गया था.. तो वहा उनको छे दिनका खाने.. रहेने.. ओर घुमनेका पेकेज ही मील गया.. तो देवायतसे बात करके उन्होने चार टीकीटी बुक करली.. तभी उसे कुछ याद आया.. तो चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर उसने फोन नीकालक पुनमको लगा दीया..
तो हवेलीपे गांवकी बहुत सारी औरते नीर्मलाके पास बैठनेके लीये आइ थी.. तो पुनम भी मंजु चंदा भावना रश्मी वंदना सबके साथ बैठी थी.. तभी लखनका फोन आया.. जो उसने वाइब्रेट मोडपे रखा था.. तो पुनमने फोन देखते ही कट कर दीया.. ओर खडी होकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके बेडपे बैठकर वापस मुस्कुराते लखनको फोन लगा दीया..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. फोन क्यु काट दीया..? क्या वहा कोइ ओरभी था..?
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. मे वहा सबके साथ बैठी थी.. वहा बहुत सारी ओरत नीर्मला आंटीके पास बैठनेके लीये आइ हे.. तो मे मेरे रुममे आगइ.. यहा कोइ नही हे.. कहो.. सृती भाभीको छोड दीया..? वहा कोइ ओरतो नही..? आप अकेले होनां..?
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब अभी आप अकेली हो.. हें..हें..हें.. तबतो मे आपको भाभी केह सकता हु.. भाभी.. फीकर मत करो.. इधर भी कोइ नही हे.. कहो आपने फोन करनेको कहा था तो करदीया..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन भैया.. जब आप मुजे भाभी कहेते होनां.. तो मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. क्युकी मेरी भी अेक फेन्टासी थी.. की कोइ मेरा भी देवर हो.. ओर मे उनके साथ ढेर सारी मस्तीया करु.. भाइ.. आपने मेरी कमी पुरी करदी.. थेन्क्स..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आप बहुत खुसनसीब हो.. क्युकी सबकी फेन्टासी पुरी हो जाती हे.. बस.. सीर्फ मेरी फेन्टासी ही पुरी नही होती.. इस मामलेमे सीर्फ मे ही बाकात रेह जाता हु.. सब सपना ही रेह जाता हे.. खैर.. छोडीये.. अब मे आपको भाभी ही कहुगा..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) हां लखन.. अकेलेमे मुजे भाभी ही कहेना मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. अब मे आपको अकेलेमे भाइ नही कहुगी.. आप मेरे प्यारे ओर चहीते देवर हो.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. देखना.. अब आप मेरी भाभी हो गइ हो.. मे आपकी ढेर सारी मस्तीया करुगा.. ओर आपको तो पता हे देवर भाभीके बीच कैसी मस्तीया होती हे.. तो अब तैयार रहीयेगा.. हें..हें..हें.. भाभी.. कहीये.. क्या कुछ जरुरी बात करनी थी..? जो आपने मुजे फोन करनेको कहा था..
पुनम : (सर्मसार होते हसते) हां देवरजी.. सुनो.. अब मे आपको कैसे कहु.. मुजेतो बडी सरम आ रही हे.. क्युकी इस तराह की बात सीर्फ अपनी बीवी ही बता सकती हे.. ओर आज आपको दी हुइ जडीबुटीके बारेमे अभी हम लता भाभीको भी बताना नही चाहते.. वरना वोही आपको सबकुछ बता देती.. हे भगवान.. कहा फसादी मुजे..? देवरजी.. मुजे इस बारेमे बात करनेके बहुत सरम आती हे.. लेकीन क्या करु मुजे ही सब बताना पडेगा..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. हमने पहेले भी इस तरहकी बाते खुलकर की हे.. जब आप मेरी बहेन थी.. तो फीर अब काहेकी सरम..? सायद कुछ बात अैसी होगी.. जो आप मेरी बहेन होकर नही बता पाती.. लेकीन अबतो हम दोनो देवर भाभी हे.. तो आप ओल रेडी फस चुकी हे.. हें..हें..हें.. जोभी कहेना हो बीन्दास्त कहेदो.. आप मेरी सबसे चहीती भाभी हो.. ओर मे आपका चहीता देवर हु.. हें..हें..हें..
पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. फीर सुरु होगये..? लगता हे मुजे ही सब बताना पडेगा.. सुनो देवरजी.. आज आपको जो जडी बुटी दी हेनां.. उस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. इनका असर होते ही दो दिनमे सब ठीक होजायेगा.. तो ये दो दीन आपको वो.. वो.. नही करना.. समज गयेनां..?
ओर अब आपको कोइ भी गोलीया खानेकी जरुरत नही हे.. आपका वो भी हे.. उनसे थोडा बडा ओर मोटा होजायेगा.. अगर आपको थोडासा दर्द जैसा लगे तो आप गभराना नही.. दो दिनमे सब ठीक होजायेगा.. आप समज गयेनां..?
लखन : (सरारतसे धीरेसे) भाभी.. मे कुछ ठीकसे समजा नही.. मुजे वो दो दिन क्या नही करना..? ओर क्या बडा होजायेगा..? हें..हें..हें..
पुनम : (बहुतही सर्मसार होते थोडे गुस्सेमे) देखा.. आप वाकइ बहुतही कमीने हो.. कुते कहीके.. करदीना देवर वाली हरकत.. इसीलीये मे आपसे बात नही करती थी.. मुजे पता हे मेरे कहेनेका मतलब आप समज गये हे.. फीर भी आप जान बुजकर अन्जान बन रहे हो.. ये सब बाते आपको अपनी बीवीको बतानी चाहीये.. लेकीन इस बारेमे हम उसे अभी बताना नही चाहते.. इसीलीये मुजे बजबुरन आपसे बात करनी पडी.. देवरजी.. आप वाकइ कमीने हो.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) हें..हें..हें.. सोरी सोरी भाभी.. क्या हेनां.. मेरे दिलमे आपके लीये अेक अलग ही फीलींग्स हे.. तो आपके साथ मस्ती करनेमे बहुत मजा आता हे.. कहीये..
पुनम : (सर्मसार होते हसते) देवरजी.. आपकी सभी फीलींग्सके बारेमे पता हे मुजे.. लगता हे अबतो ये बात मुजे बेसरम होके आपको कहेनी पडेगी.. वो नही करना मतलब सेक्स नही करना.. समजे..? ओर वोका मतलब आपके पेनीससे था.. आपतो मुजेभी बेसर्म बना रहे हो.. कमीने कहीके.. अेक बार घरपे आओ फीर आपकी खबर लेती हु.. अबतो आपको भाभीकी तराह खुब पीटुगी.. बात करते हे.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) हाये.. भाभी.. मेतो कबसे आपसे पीटनेके लीये तैयार हु.. जब हम दोनो स्कुलमे थे.. कब पीटोगी मुजे..? हें.. हें.. हें.. सोरी.. सोरी.. भाभी.. मेतो मजाक कर रहा था.. क्या हेना आपके साथ ओर सृतीभाभीके साथ मस्ती करनेमे बहुत मजा आता हे.. उनके साथ भी पुरे रास्ते खुब मस्तीया की.. हें..हें..हें.. लव यु भाभी.. थेन्क्स.. मेरा खयाल रखनेके लीये.. हें..हें..हें..