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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १८३
दोनोही बाते कर रही थी.. तभी घरमे सामत ओर रमेश आजाते हे.. दोनोकी आवाज सुनते ही जया खुस होते अपने रुमसे बहार नीकल जाती हे.. ओर रमेशकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगती हे.. फीर उनको बैठनेके लीये कहेते उनके लीये पानी लेने कीचनमे चली गइ.. तब सांती ओर जागृती भी उनकी आवाज सुनकर चौकनी होजाती हे.. ओर अेक दुसरेके सामने देखते जटसे खडी होकर अपने अपने कपडे फटाफट पहेनकर बहार नीकल जाती हे.. तभी....अब आगे
जया : (पानी देते मुस्कुराते) कहो देवरजी.. हो गया दोनोके मकानका रजीस्ट्रेशन.. हें..हें..हें..
रमेश : (पानी लेते) हां भाभी.. रजीस्ट्रेशनका काम भी हो गया ओर हमे होस्पीटलके लीये हमे जमीन भी मील गइ.. अब कुछ ही दिनोमे स्कुलके साथ होस्पीटलका काम भी सुरु होजायेगा..
सामत : (हसते) जया हम दोनोके लीये मस्त चाइ बनादे.. ओर ये ले मीठाइ.. मेने मकान सांती ओर मेरी जागुके नाम करदीया हे.. ओर हमे उनकी चाबी भी मील गइ हे.. अब यहा छोटा मोटा काम करवा लेगे तो सब कंपलीट हो जायेगा..
जया : (मीठाइआ लेते रमेशके मुह मे देते) लीजीये देवरजी पहेले आप ही मुह मीठा कीजीये.. मे सांती बहुको कहेती हु चाइ बनादेगी..
रमेश : (मुस्कुराते मुह खोलते) वाह भाभी आपके हाथकी मीठाइ.. हें..हें..हें.. (अपनी मीठाइ नीकालते) लीजीये मेने भी ली हे आप भी मुह मीठा कीजीये.. हें..हें..हें..
जया : (कामुक नजरोसे मुह खोलते) अरे हां बाबा दीजीये.. आपकी मीठाइमे बात ही कुछ ओर हे.. (पीछे मुडतेही सांतीको देखते) अरे बेटी.. इधर ही हे.. जा जरा दो कप चाइ बनादे..
सांती : (सरमाते) जी भाभी.. (धीरेसे) चल जागु मेरे साथ..
जागृती : (अंदर कीचनमे जातेही धीरेसे) आगया कमीना.. देखो.. कैसे अेक दुसरेको मीठाइ खीला रहे हे.. ओर ये मेडम भी उनके साथ कैसे हस हसके बाते कर रही हे.. ठरकी कहीकी.. जीतो चाहता हे अभी इसे चाइमे जहेर मीलाकर देदु.. कमीना कहीका.., यहा सीर्फ मम्मीको मीलनेके लीये ही आता हे.. ओर पापा भी इतने भोले हे.. दोनोकी डबल मीनींग बात भी नही समजते ओर इनके साथ घुमते रहेते हे.. इनको तो पताही नही होगा.. की इनकी बीवीको ये कमीना ठोकता हे.. ओर उसे पेटसे भी करदीया हे..
सांती : (चाइ बनाते धीरेसे) जागु.. क्या तुम इन दोनोको रोक सकती हे..? नहीनां.. तो फीर क्यु खामखा दिमाग खराब कर रही हे.. तुम बस.. सादी तक रुकजा.. सभी रास्ता अपने आपही नीकल आयेगा..
जया : (पास चीपककर बैठकर मुस्कुराते) देवरजी.. अच्छा हुआ मकान लेलीया.. देखना अबतो हम बंसी ओर सांतीकी सादी करके वही कुछ दिन रहेने चले जायेगे.. हें..हें..हें..
रमेश : (कामुक मुस्कुराते) हां भाभी.. आपने सही सोचा हे.. सामतभाइ का हवा पानी भी बदल जायेगा.. ध्यान रखीयेगा इनकी तबीयत कुछ ठीक नही हे.. रास्तेमे थोडा उल्टी जैसा हुआ था..
सामत : (रमेशकी ओर आंख बडी करते) रमेश.. क्यु सबको बता रहा हे.. सबलोग खामखा चीन्ता करेगे.. गरमीकी वजहसे कुछ उल्टी हो गइ होगी.. अब सब ठीक हे..
जया : (जुठ मुठ चीन्ता करते) क्युजी.. क्या हुआ आपको..? तो वहा डोक्टरको दीखाना चाहीयेनां..
जागृती : (चाय लाते रमेशकी ओर घुरते) पापा.. क्यु गरमीमे घुम रहे हो..? ओर ज्यादा तबीयत खराब होजाती तो..? (चाइ देते) रमेश अंकल.. अब सादी तक पापाको कही मत लेजाना.. कुछ तो आप ही उनकी घुमा घुमा कर तबीयत बीगाड रहे हो..
सामत : (थोडी सख्तीसे) जागु बेटा.. क्या बोल रही हो..? इसमे बेचारे रमेशकी क्या गलती हे..? क्या बडोसे इस तराह बात करते हे..?
जागृती : (रमेशकी ओर घुरते) सोरी अंकल..
रमेश : (कमीनी मुस्कानसे चाइ पीते) कोइ बात नही बेटा.. सामतभाइ.. बोलने दीजीये इसे.. डांटीये मत.. बेटी हेनां..? अेक बेटीको बापकी चीन्ता नही होगी तो कीसको होगी.. ओर वैसे भी अब सादी तक कोइ खास काम नही हे.. तो आप आराम कीजीये.. मे चला.. हें..हें..हें..
चाइ खतम होते ही रमेश जागृतीकी ओर देखते फटाफट वहासे नीकल गया.. जीस तराह जागृती उनके सामने देखकर घुर रही थी.. तब रमेशको भी यहीन हो गया.. की उनके ओर जयाके बारेमे जागृतीको सब पता चल गया हे.. आगे कीसी ओरको पता चले इनसे पहेलेही रमेशने इस मामलेको नीपटानेकी ठानली.. बस.. उसे अब बंसी ओर सांतीकी सादी तक इन्तजार करना था.. वो इस बारेमे जल्दसे जल्द जयाको मीलकर बात करलेना चाहता था..
तो दुसरी ओर रमेशके जाते ही जया भी गुस्सेसे जागृतीकी ओर घुरने लगी.. तो जागृती भी बीना डर जयाको खा जाने वाली नजरोसे घुरती रही.. तब जयाको भी यकीन हो गयाकी जागृतीको उनके ओर रमेशके बारेमे सब पता चल गया हे.. ओर वो उठकर अपने रुममे चली गइ.. तो सामतभाइ भी खडे होकर अकेले देवायतके पास मीलने उनके खेतपे चले गये.. तब जागृती भी सब चाइके खाली बर्तन लेकर कीचनमे चली गइ.. तो सांती उजकी ओर देखती रही.. ओर धीरेसे कहा..
सांती : जागु.. क्यु खामखा पंगा ले रही हे..? हंम..? तुजे कुछ भी बोलनेको मना कीयाथानां..? क्या मेरा भी भरोसा तोडेगी..?
जागुती : (हग करते) भाभी.. आइ अेम सोरी.. क्या हेना पापाकी बात सुनकर थोडा गुस्स आ गया..
सांती : (सरारतसे मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. चल कोइ बात नही.. अब आगे ध्यान रखना.. अभी इस गुस्सेको तेरे भाइके लीये सम्हालके रख.. उनके साथ बीस्तमे नीकालनां.. हें..हें..हें..
जागृती : (सर्मसार होकर अेक मुका पीठमे मारते मुस्कुराते धीरेस) भाभी.. आप बहुत कमीनी हो.. अेक मारुगीनां आपको.. कुछ तो सरम करो.. कोइ भाभी ननंदके साथ अैसी मस्तीया करते हे..? हें..हें..हें..
सांती : (हसते धीरेसे) हां जागु.. अब तुम सीर्फ मेरी ननंद ही नही मेरी छोटी बहेन भी हो.. मेने तो अभीसे तुजे मेरी सौतनके रुपमे अेक्सेप्ट करलीया हे..
जागृती : (अेक दम सर्मसार होकर गले मीलते) भाभी.. प्लीज.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. मत कीजीये अैसी बाते.. अभी तो आपकी भी सादी नही हुइ..
दोनो ननंद भाभी अेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. तो दुसरी ओर सहेरमे लखन भी साम तक अपनी नइ बीवी यानीकी राधीकाके बातोके साथ मस्ती मजाक करते टाइम नीकालता रहा.. साम तक लखन अपने ओर पुनमके साथ साथ घरके सभी सदस्योके बारेमे ओर नीलम धिरेनके बारेमे राधीकाको सबकुछ बता दीया.. स्कुल छुटनेको लेकर अपनी सादी फीर मंजु पुनमको मीली सब शक्तिओके बारेमे बात करता रहा.. जीसे सुनकर राधीका भी दंग रेह गइ..
अध्याय - १८३
दोनोही बाते कर रही थी.. तभी घरमे सामत ओर रमेश आजाते हे.. दोनोकी आवाज सुनते ही जया खुस होते अपने रुमसे बहार नीकल जाती हे.. ओर रमेशकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगती हे.. फीर उनको बैठनेके लीये कहेते उनके लीये पानी लेने कीचनमे चली गइ.. तब सांती ओर जागृती भी उनकी आवाज सुनकर चौकनी होजाती हे.. ओर अेक दुसरेके सामने देखते जटसे खडी होकर अपने अपने कपडे फटाफट पहेनकर बहार नीकल जाती हे.. तभी....अब आगे
जया : (पानी देते मुस्कुराते) कहो देवरजी.. हो गया दोनोके मकानका रजीस्ट्रेशन.. हें..हें..हें..
रमेश : (पानी लेते) हां भाभी.. रजीस्ट्रेशनका काम भी हो गया ओर हमे होस्पीटलके लीये हमे जमीन भी मील गइ.. अब कुछ ही दिनोमे स्कुलके साथ होस्पीटलका काम भी सुरु होजायेगा..
सामत : (हसते) जया हम दोनोके लीये मस्त चाइ बनादे.. ओर ये ले मीठाइ.. मेने मकान सांती ओर मेरी जागुके नाम करदीया हे.. ओर हमे उनकी चाबी भी मील गइ हे.. अब यहा छोटा मोटा काम करवा लेगे तो सब कंपलीट हो जायेगा..
जया : (मीठाइआ लेते रमेशके मुह मे देते) लीजीये देवरजी पहेले आप ही मुह मीठा कीजीये.. मे सांती बहुको कहेती हु चाइ बनादेगी..
रमेश : (मुस्कुराते मुह खोलते) वाह भाभी आपके हाथकी मीठाइ.. हें..हें..हें.. (अपनी मीठाइ नीकालते) लीजीये मेने भी ली हे आप भी मुह मीठा कीजीये.. हें..हें..हें..
जया : (कामुक नजरोसे मुह खोलते) अरे हां बाबा दीजीये.. आपकी मीठाइमे बात ही कुछ ओर हे.. (पीछे मुडतेही सांतीको देखते) अरे बेटी.. इधर ही हे.. जा जरा दो कप चाइ बनादे..
सांती : (सरमाते) जी भाभी.. (धीरेसे) चल जागु मेरे साथ..
जागृती : (अंदर कीचनमे जातेही धीरेसे) आगया कमीना.. देखो.. कैसे अेक दुसरेको मीठाइ खीला रहे हे.. ओर ये मेडम भी उनके साथ कैसे हस हसके बाते कर रही हे.. ठरकी कहीकी.. जीतो चाहता हे अभी इसे चाइमे जहेर मीलाकर देदु.. कमीना कहीका.., यहा सीर्फ मम्मीको मीलनेके लीये ही आता हे.. ओर पापा भी इतने भोले हे.. दोनोकी डबल मीनींग बात भी नही समजते ओर इनके साथ घुमते रहेते हे.. इनको तो पताही नही होगा.. की इनकी बीवीको ये कमीना ठोकता हे.. ओर उसे पेटसे भी करदीया हे..
सांती : (चाइ बनाते धीरेसे) जागु.. क्या तुम इन दोनोको रोक सकती हे..? नहीनां.. तो फीर क्यु खामखा दिमाग खराब कर रही हे.. तुम बस.. सादी तक रुकजा.. सभी रास्ता अपने आपही नीकल आयेगा..
जया : (पास चीपककर बैठकर मुस्कुराते) देवरजी.. अच्छा हुआ मकान लेलीया.. देखना अबतो हम बंसी ओर सांतीकी सादी करके वही कुछ दिन रहेने चले जायेगे.. हें..हें..हें..
रमेश : (कामुक मुस्कुराते) हां भाभी.. आपने सही सोचा हे.. सामतभाइ का हवा पानी भी बदल जायेगा.. ध्यान रखीयेगा इनकी तबीयत कुछ ठीक नही हे.. रास्तेमे थोडा उल्टी जैसा हुआ था..
सामत : (रमेशकी ओर आंख बडी करते) रमेश.. क्यु सबको बता रहा हे.. सबलोग खामखा चीन्ता करेगे.. गरमीकी वजहसे कुछ उल्टी हो गइ होगी.. अब सब ठीक हे..
जया : (जुठ मुठ चीन्ता करते) क्युजी.. क्या हुआ आपको..? तो वहा डोक्टरको दीखाना चाहीयेनां..
जागृती : (चाय लाते रमेशकी ओर घुरते) पापा.. क्यु गरमीमे घुम रहे हो..? ओर ज्यादा तबीयत खराब होजाती तो..? (चाइ देते) रमेश अंकल.. अब सादी तक पापाको कही मत लेजाना.. कुछ तो आप ही उनकी घुमा घुमा कर तबीयत बीगाड रहे हो..
सामत : (थोडी सख्तीसे) जागु बेटा.. क्या बोल रही हो..? इसमे बेचारे रमेशकी क्या गलती हे..? क्या बडोसे इस तराह बात करते हे..?
जागृती : (रमेशकी ओर घुरते) सोरी अंकल..
रमेश : (कमीनी मुस्कानसे चाइ पीते) कोइ बात नही बेटा.. सामतभाइ.. बोलने दीजीये इसे.. डांटीये मत.. बेटी हेनां..? अेक बेटीको बापकी चीन्ता नही होगी तो कीसको होगी.. ओर वैसे भी अब सादी तक कोइ खास काम नही हे.. तो आप आराम कीजीये.. मे चला.. हें..हें..हें..
चाइ खतम होते ही रमेश जागृतीकी ओर देखते फटाफट वहासे नीकल गया.. जीस तराह जागृती उनके सामने देखकर घुर रही थी.. तब रमेशको भी यहीन हो गया.. की उनके ओर जयाके बारेमे जागृतीको सब पता चल गया हे.. आगे कीसी ओरको पता चले इनसे पहेलेही रमेशने इस मामलेको नीपटानेकी ठानली.. बस.. उसे अब बंसी ओर सांतीकी सादी तक इन्तजार करना था.. वो इस बारेमे जल्दसे जल्द जयाको मीलकर बात करलेना चाहता था..
तो दुसरी ओर रमेशके जाते ही जया भी गुस्सेसे जागृतीकी ओर घुरने लगी.. तो जागृती भी बीना डर जयाको खा जाने वाली नजरोसे घुरती रही.. तब जयाको भी यकीन हो गयाकी जागृतीको उनके ओर रमेशके बारेमे सब पता चल गया हे.. ओर वो उठकर अपने रुममे चली गइ.. तो सामतभाइ भी खडे होकर अकेले देवायतके पास मीलने उनके खेतपे चले गये.. तब जागृती भी सब चाइके खाली बर्तन लेकर कीचनमे चली गइ.. तो सांती उजकी ओर देखती रही.. ओर धीरेसे कहा..
सांती : जागु.. क्यु खामखा पंगा ले रही हे..? हंम..? तुजे कुछ भी बोलनेको मना कीयाथानां..? क्या मेरा भी भरोसा तोडेगी..?
जागुती : (हग करते) भाभी.. आइ अेम सोरी.. क्या हेना पापाकी बात सुनकर थोडा गुस्स आ गया..
सांती : (सरारतसे मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. चल कोइ बात नही.. अब आगे ध्यान रखना.. अभी इस गुस्सेको तेरे भाइके लीये सम्हालके रख.. उनके साथ बीस्तमे नीकालनां.. हें..हें..हें..
जागृती : (सर्मसार होकर अेक मुका पीठमे मारते मुस्कुराते धीरेस) भाभी.. आप बहुत कमीनी हो.. अेक मारुगीनां आपको.. कुछ तो सरम करो.. कोइ भाभी ननंदके साथ अैसी मस्तीया करते हे..? हें..हें..हें..
सांती : (हसते धीरेसे) हां जागु.. अब तुम सीर्फ मेरी ननंद ही नही मेरी छोटी बहेन भी हो.. मेने तो अभीसे तुजे मेरी सौतनके रुपमे अेक्सेप्ट करलीया हे..
जागृती : (अेक दम सर्मसार होकर गले मीलते) भाभी.. प्लीज.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. मत कीजीये अैसी बाते.. अभी तो आपकी भी सादी नही हुइ..
दोनो ननंद भाभी अेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. तो दुसरी ओर सहेरमे लखन भी साम तक अपनी नइ बीवी यानीकी राधीकाके बातोके साथ मस्ती मजाक करते टाइम नीकालता रहा.. साम तक लखन अपने ओर पुनमके साथ साथ घरके सभी सदस्योके बारेमे ओर नीलम धिरेनके बारेमे राधीकाको सबकुछ बता दीया.. स्कुल छुटनेको लेकर अपनी सादी फीर मंजु पुनमको मीली सब शक्तिओके बारेमे बात करता रहा.. जीसे सुनकर राधीका भी दंग रेह गइ..