Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 43 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

फीरोज : (आस्चर्यसे देखते) साहील बेटा.. मे तेरे जजबातोको समजता हु.. तुमने जोसमे आकर बहुत बडी बात कहेदी.. लेकीन तुजे पता हे सबानाकी पढाइमे कीतना खर्चा हे..? ये अ‍ेकही सालमे बाराह से तेरा लाख रुपयेका खर्चा हे.. जो अगले महिने ही देने हे.. इतनी बडी रकम तुम हमारी थोडी सी खेतीसे कहासे नीकालोगे..? मुजे भी पता हे इतनीसी खेतीमे तुम अपना खर्चा भी मुस्कीलसे नीकालते होगे..

साहील : (मुस्कुराते) चाचा.. मे जोसमे आकर नही.. ये बात मे होंसमे रहेकर बोल रहा हु.. जब अब्बा गुजर गयेनां.. तब मे खेतीके बारेमे इतना नही जानता था.. हमारे पास जोभी जमीन थी.. उसीमे महेनत करने लगा.. इसके लीये लखन भैयाके बडे भाइ यानीकी हमारे बडे ठाकुर साहबने मेरी बहुत मददकी..

सब उन्हीकी सलाहके अनुसार मे काम करता गया.. की कब कोनसी फसल उगानी हे.. ओर कब बेचनी हे.. मे हमारी सारी फसल उनकोही बेचता हु.. ओर जोभी पैसा आता था.. उनमेसे खर्चा नीकालकर आधा आधा अलग रख देता था..

सलमा : (मुस्कुराते) हां देवरजी.. मेरा साहील कहेताथा.. की इन जमीनमे चाचुकाभी बरोबरका हीस्सा हे.. तो आधा पैसा चाचाका हे.. वो आधा पैसा नीकालकर अलगसे जमा करता था.. कहेताथा चाचाका पैसा हमारे पास अ‍ेकठा करेगे.. जब कादीरभाइ या सायरा दीदीकी सादी होगी तब हम इन पैसोको चाचाको दे देगे.. ताकी उनको बहारसे कभी कर्जा ना लेना पडे.. इसीलीये आपका हीस्सा अलग रखता हे..

साहील : (मुस्कुराते) हां चाचु.. लेकीन देखो.. उपरवालेको कुछ ओर ही मंजुर था.. अब इन पैसोसे आप सबाना दीदीको पढा सकते हो.. मे यहा पैसा लेकर ही आया हु..

फीरोज : (इमोस्नल होते आंसु बहाते) मेरा साहील बेटा कीतना समजदार हे.. बेटा.. तुमने मेरे बारेमे इतना सोचा वोही मेरे लीये काफी हे.. मेतो वो जमीन भुल ही चुका हु.. फीर भी इतनीसी जमीनमे तुमने कीतना पैसा जमा कीया होगा..? मुस्कीलसे तेरे घरका खर्चा भी सायद नीकलता होगा.. बेटा.. बाराह लाख रुपीये कोइ छोटी मोटी रकम नही हे..

साहील : (मुस्कुराते) चाचु.. मे सब हीसाब करके लाया हु.. अभी तक ये चार सालके आपके हीस्सेका मेरे पास तकरीबन साडे आठ लाख रुपीये पडे हे.. ओर मेरे हीस्सेमे घरका खर्चा नीकालते भी साडे चार लाख रुपीये जमा कीये हे.. अभी मेने मेरे लीये धानका बीज ओर दुसरे खर्चेके लीये अ‍ेक लाख रुपीये रखे हे.. तो ये लीजीये अभी बाराह लाख रुपये लेकर ही आया हु.. आप भरदीजीये सबाना दीदीकी फीस..

कहेते साहीलने सलमाके पास रखे बाराह लाख रुपीये लेकर फीरोजके हाथोमे थमा दीया.. तब फीरोज अपना चहेरा होथोमे छुपाते फुटफुटके रोने लगा.. तो जरीना ओर सबाना मुह फाडते आस्चर्यसे साहीलकी ओर देखते रहे.. तीनोकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. फीरोज खडा होकर साहीलको जोरोसे अपने गले लगा लेता हे.. ओर रोने लगता हे.. तब जरीना भी खुसीके मारे रोने लगी.. तो सबाना भी खुसीके मारे सलमाको लीपटकर रोये ही जा रही थी..

तब सलमा साहील ओर लखन तीनोको खुस देखकर हसते रहे.. तभी लखन खडा होकर फीरोजको सम्हालता हे.. ओर उसे सोफेपे बीठाकर कीचनमे चला गया.. ओर तीनोके लीये पानी लेकर आया.. ओर सबको पानी पीलाया.. तब जरीना ओर सबाना बहुत ही सर्मन्दा हो गइ.. ओर सबाना फटाफट अपने आंसु पोछते मुस्कुराने लगी.. ओर खाली ग्लास लेकर कीचनमे चली गइ.. ओर रखकर वापस आकर सलमाके पास बैठ गइ.. तब फीरोज ओर जरीना भी अपने आंसु पोछते मुस्कुराने लगे.. ओर सब लोग वापस सोफेपे बैठ गये.. तभी..
 
जरीना : (सरमाते हसते) देवरजी.. आपने पानी लानेकी क्यु तकलीफ की..? सबाना लेआती..

लखन : (हसते) भाभी.. इसमे तकलीफ काहेकी.. मे थोडीना यहा महेमान हु.. ये मेरा ही घर हे..(फीरोजकी ओर देखते) क्यु फीरोजभाइ.. कैसी रही हमारे साहीलकी सरप्राइज.. हें..हें..हें..

फीरोज : (हाथ जोडते हसते) छोटे ठाकुर.. हमारी खुसीको मे बया नही कर सकता.. आज मुजे मेरे साहीलपे बडा फर्क हो रहा हे.. जो सही मायनोमे मेरा बेटा होकर अपना फर्ज नीभाते मेरे साथ कंधेसे कंधा मीलाकर खडा हे..

लखन : (हसते) फीरोजभाइ.. प्लीज.. आप मुजे ठाकुर मत कहीये.. मेभी आपके छोटेभाइके समान हु.. मुजे नाम लेकर बुलाइअ‍े अच्छा लगेगा.. हें..हें..हें..

फीरोज : (जटसे हसते) ठीक हे गलती होगइ.. आप हमारे राजा हे.. हम आज भी आपको हमारे राजा मानते हे.. ओर आपने अ‍ेक राजा होनेका फर्ज भी हमारी जमीन वापस देकर नीभाया हे.. हम सब आपको नत मस्तक हे..

लखन : (हसते) अच्छा..? अगर आप हमे राजा मानते हे.. तो फीर हमारी बात तो मानते नही.. हें..हें..हें..

फीरोन : (हसते) अरे.. हमने आपकी कौनसी बात नही मानी..? हें..हें..हें.. आपकी सब बाते हमारे सर आंखोपे.. हम आज भी आपको मानते हे.. अभी आपने हमारे गांवमे जोभी बदलावकी बाते की.. वोभी हमने मानलीया हे.. तो फीर दुसरी बात क्यु नही मानेगे..?

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा..? तो फीर आप मेरी दो बाते मानेगे..? मुजे आपसे कुछ पुछना हे..

फीरोज : (हसते) अरे.. जरुर मानेगे.. आप जोभी पुछना चाहो पुछ सकते हे.. कहीये.. क्या पुछना हे..?

लखन : (मुस्कुराते) पहेले तो आप कादीरभाइ ओर सायरा दीदीको माफ कर दीजीये.. ओर उनको वापस बुला लीजीये.. ओर दुसरा.. आपने हमारे गांवको क्यु छोड दीया था..?

फीरोज : (मुस्कुराते) अब क्या करे..? आप तो सब जानते थे.. तब हम लोग कर्जमे पुरी तराह डुबे हुअ‍े थे.. ओर हमारे पास हमारी जमीन भी नही रही थी.. ओर मेरा परीवार भी बडा था.. मेरे चार चार बच्चे थे.. तो मे सबको कहासे खाना खीलाउ..? ओर सब बच्चोकी पढाइकी जीम्वेवारी भी थी..

तो बडे भैयाका ओर भाभीका भी संतानका इस्यु था.. तो उसने मेरे साहीलको गोद लेलीया.. ओर मे इधर सहेरमे परीवारको लेकर कमाने आगया.. ओर वैसे भी वहा थोडीसी जमीन बची थी.. तो भाइ ओर भाभीका भी उनमे मुस्कीलसे गुजारा होता था.. तो इतनी सी जमीनमे हम दोनो भाइ सबका पेट कहासे भरपाते..

लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. क्या आपको पता हे.. आप जीसे जरासी जमीन केह रहे हे.. उस जमीनपे आपका भी हीस्सा हेनां..?

फीरोज : (आंख गीली करते) नही भाइ.. मे इस जमीनको भुल चुका हु.. वो तो अब मेरे साहीलकी जमीन हे.. इस बेचारेको तो मे पढा भी नही सका.. भले ही बडे भाइने इस गोद लीया.. लेकीन हेतो मेरा ही खुन.. इतनीसी जमीनमे इनका भी मुस्कीलसे गुजारा होता होगा.. तो मे मेरा हीस्सा लेकर क्या करुगा..?

लखन : (हसते) फीरोजभाइ.. भले ही साहील आपका खुन हो.. लेकीन करीमभाइने उसे बाकायदा गोद लीया हे.. अब साहील कायदेसे करीमभाइका लडका हे.. तो साहीलपे आपका अब कोइ हक नही हे.. ओर ये मत भुलना साहील आप मीया बीवीको चाचा चाची कहेकर बुलाता हे.. हें..हें..हें.. ओर सबाना उनकी सगी बहेन नही.. उनके चाचाकी लडकी हे.. हें..हें..हें..

फीरोज : (सरमाते हसते) अरे हां बाबा हां.. मुजे कायदाका सब पता हे.. मे साहीलको मेरे बडे भाइका लडका ही मानता हु.. लेकीन साहील मेरे बेटेसे भी बढकर हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. आपने अभी अभी देखानां..? आप जीसे इतनीसी जमीन केह रहे हेनां..? वो इतनी सी जमीनमे ये चार सालोमे साहीलने तकरीबन बीस लाख रुपीये कमालीये हे.. जीसका खर्च नीकालते आधा हीस्सा अभी साहीलने आपको दीया.. मत भुलो.. वो भी अ‍ेक चोथाइ जमीनके हीस्सेसे..

अभी आपको जो जमीन वापस मीली हे वो इनसे तीन गुना बडी हे.. जो अभी बंजर पडी हे.. तो सोचो.. अगर सभी जमीनपे आप फसल उगाओगे.. तो कीतना पैसा आ सकता हे..? क्या आप इतना पैसा अपनी फेक्टरीमे काम करके कमा सकते हो..?

फीरोज : (मुस्कुराते) नही.. कभी नही कमा सकता.. लेकीन आप कहेना क्या चाहते हो..? हें..हें..हें.. मुजे लगता हे आप कुछ ओर बात ही कहेने आये हे.. हें..हें..हें..

जब लखन ओर फीरोज बाते कर रहेथे तब बाकीके सभी लोग दोनोकी बाते बडेही गौरसे सुन रहे थे.. तब साहील ओर सलमा मुस्कुराते लखनकी ओर देख रहेथे.. क्युकी लखन बाते करते करते बडी ही सीफततासे फीरोजको अपने गांव वापीस आनेके लीये मना रहा था.. तो आज सबानाके दिलमे भी साहीलके लीये इजत ओर बढ गइ थी.. भले ही साहील उनसे छोटा था.. लेकीन सबाना साहीलको बहुतही मेच्योर ओर समजदार मानने लगी थी.. तभी..
 
लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. कहेना कुछ नही.. बस इतना कहेना हे आप फेक्टरीकी नोकरी छोड दीजीये.. ओर आप सबलोग गांव वापस आजाइअ‍े.. आकर अपनी बाकी जमीनको सही करके आप ओर साहील उनमे महेनत कीजीये.. फीर देखीये.. जीतना पैसा साहीलने इन चार सालोमे कमाया हे इतना ही पैसा आप अ‍ेक सालमे कमा लेगे.. ये मेरी गेरेन्टी हे.. कहोतो मे आपको लीखकर दे सकता हु.. हें..हें..हें..

फीरोज : (कुछ सोचते) लखनभैया.. बात.. तो.. आपकी सोला आनी सही हे.. ये हो सकता हे.. ओर वैसे भी अब कादीर ओर सायराकी वजहसे वहा रहेनेका मन भी नही करता.. बस.. अभी सीर्फ सबानाकी पढाइकी चीन्ता हे.. जबतक वो पढनेके लीये बेंगलोर नही चली जाती तबतक तो हमे यही रहेना पडेगा..

सलमा : (सरमाते हसते) देवरजी.. छोडीये सबानाकी चीन्ता.. अब तो वो दो साल बेंगलोर पढने जा रही हे.. तो यहा अब हे भी कौन.. सीर्फ आप ओर जरीना तो हे.. ओर वहा गांवमे भी जबसे आप लोग चले गये हो.. तबसे हमारा पुरा घर खाली पडा हे.. हमने सभी कमरोमे ताला लगाकर रखा हे.. बस.. सीर्फ सफाइ करने ही खोलते हे.. आप सब आजाइअ‍े..

जरीना : (सरमाते धीरेसे) सुनीयेजी.. दीदी ठीक केह रही हे.. अब हम इस घरको बेच देगे.. हम गांव चले जायेगे.. ओर इस घरका पैसा आये.. तो आप मेरे साहीलको इनके पैसे लौटा दीजीयेगा.. हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) नही चाची.. मेने ये पैसे कोइ कर्जेमे नही दीया.. आपका था.. जो आपको लौटा दीया हे.. ओर वैसे भी आप सब लोग मेरेही तो हो.. तो क्या तेरा..? ओर क्या मेरा..? सब हमाराही तो हे..

जरीना : (मुस्कुराते) मेरे बेटेने कीतनी बडी बात कहेदी.. साहील बेटा.. फीर भी हमारा तो सीर्फ साडे आठ लाख रुपीया था तो फीर बाकीका..? हें..हें..हें..

साहील : (थोडी उची आवाजेमे) अरे बाबा नही चाहीये मुजे पैसे.. अ‍ेक बार बोल तो दीया.. क्या अगले साल सबाना दीदीकी फीस नही भरनी..? ये मत भुलो ये सीर्फ अ‍ेक सालकी फीस हे.. (फीरोजको) चाचु.. मेरी आपसे अ‍ेक गुजारीस हे.. क्या आप मेरी बात मानोगे..?

फीरोज : (मुस्कुराते) हां साहील बेटा.. बोलो.. तुम क्या कहेना चाहते हो..?

साहील : चाचा.. आप ये मकान मत बेचीये.. आप इस मकानको कादीरभाइ ओर सायरा दीदीको दे दीजीये.. ओर उनको माफ कर दीजीये.. अब जोभी होना था होगया.. भुल जाइअ‍े सब.. उनको ढुढकर कहीये यहा रहेने आजाये.. आखीर वो दोनो भी तो हमारे ही हे..

सलमा : हां देरवजी.. मेरा साहील ठीक केह रहा हे..

फीरोज : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. जैसा आपको ठीक लगे.. हम भी कब तक उनसे नाराज रहेगे..? आखीर वोभी तो हमारा ही खुन हे.. वैसे भी आपलोग इतने सारे बदलावकी बात कर रहे हो.. तो अब हमे उन दोनोकी सादीसे कोइ अ‍ेतराज नही.. लेकीन याद रखना.. अब मे इनको मेरे साथ कभी नही रहेने दुगा..

लखन : (मु्सकुराते) ओर हां फीरोजभाइ.. आप सबानाकी अगले सालकी फीसकी भी चीन्ता मत करना.. वो मेने ओर साहीलने सब तैय करलीया हे.. बस.. आप हमारे हीसाबसे चलीये.. ओर अपना बोरीया बीस्तर बांधीये.. हें..हें..हें..

साहील : (जोरोसे हसते सबानाको) दीदी.. देखना.. वहासे डोक्टर बनके ही आना.. कही गांवमे मेरी इजतका फालुदा मत करना.. हें..हें..हें..

सबाना : (सब लोग जोरोसे हसने लगे.. तब सबाना सर्मसार होते हसते) जी भाइजान.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे हां सबाना.. तुम्हारे लीये अ‍ेक ओर सरप्राइज हे.. तुम अ‍ेक बार मेरी भाभीको मील लेना.. उनसे बात होगइ हे.. वो तुमको मीलना चाहती हे.. वोभी यहा गायनेक डोक्टर हे.. ओर उन्होने भी बेंगलोरसे गायनेक फाइनल कीया हे.. तो वो तुमको कुछ सजेस करना चाहती हे..

सबाना : (खुस होते हसते) जी लखनभैया.. मे पहेचाहनती हु उसे.. वोहीना.. जीन्होने हमारी जमीनके कागजात पापाको अपने हाथोसे दीये थे..? क्या उनकी सादी बडे ठाकुर साहब से होगइ..?

साहील : (मुस्कुराते) हां दीदी.. हम अभी अभी इनको क्लीनीकपे छोडके आये हे.. ओर बडेभैया अब गांवमे अ‍ेक स्कुल ओर बडी होस्पीटल बनवा रहे हे.. जहा सब बीमारीका इलाज होगा..

लखन : (मु्कुराते) सबाना.. अब तो तुम मीठाइ मंगवा ही लो.. क्युकी तुम्हारी नोकरी भी पकी हो गइ हे.. हें..हें..हें..

फीरोज : (आस्चर्यसे हसते) नोकरी..? लेकीन ये तो अभी डोक्टर भी नही हुइ.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) फीरोजभाइ.. जब सबाना डोक्टर बनकर आयेगी.. तब हमारी ही होस्पीटलमे इनको गायनेक डोक्टरकी नोकरी मील जायेगी.. ओर गायनेक का पुरा डीपार्टमेन्ट सबाना चलायेगी.. ताकी आपको खुदकी होस्पीटलके लीये खर्चा करनेकी जरुरत ही नही.. हें..हें..हें..

सबाना : (खुस होकर हसते) पापा.. तब तो मे हमारे ही गांवमे रहेकर डोक्टरी करुगी.. बहुत मजा आयेगा.. हें..हें..हें..

सबलोग सबानाकी बात सुनकर जोरोसे हसने लगे.. तो सबाना बहुत सरमा गइ.. फीर सब आपसमे खुलकर बाते करने लगे.. तब सबाना सबकी नजर बचाते अपने होठ हीलाकर बार बार साहीलको थेन्क्यु केह रही थी.. तो साहील भी सबानाको आंखोके इसारोसे सबके होनेका अहेसास दीला रहा था ओर इस बारेमे बादमे बात करनेको इसारा कर रहा था.. तभी लखनके फोनपे बंसीका फोन आगया..

जो सब लोग सादीकी खरीदी कर रहेथे.. तब साहीलने लखनसे फोन लेकर बंसीसे बात करली.. ओर सबको खानेके लीये इधर ही बुलालीया.. तब बातो ही बातोमे साहीलने सबको गांवके बारेमे बता दीया.. की कीस कीस की सादी होगइ.. ओर कीसीकी सादी होने वाली हे.. तब सबाना साहीलकी सभी बाते गोरसे सुन रही थी.. उनको आज साहीलपे बहुत प्यार आ रहा था.. तभी..
 
जरीना : (सरमाते धीरेसे) सुनीयेजी.. हमारे गांवसे ओर लोग भी इधर आ रहे हे.. तो आप कुछ मीठाइया लेआइअ‍ेनां.. तब तक मे ओर दीदी खाना बना लेते हे.. सबाना.. अगर तुमको पढने बैठना हे तो अंदर जाकर पढलो..

फीरोज : (खडा होकर चलते) जी.. अभी लेकर आता हु.. कुछ ओर लेना हे..?

जरीना : नही.. सब्जीया पडी हे.. अभी बन जायेगी.. आप सीर्फ मीडाइआ लेकर आइये..

साहील : (जब फीरोज चला गया तब मुस्कुराते) चाची.. अभी खाना खाकर ये लोग सोपींगके लीये जा रहे हे.. तो सोचा मे भी सबाना दीदीको लेकर लखन भैयाके साथ चला जाता हु.. अब दीदी बेंगलोर जा रही हे.. तो इनके लीये भी कुछ कपडे बपडे लेना हे.. तो इनकी भी सोपींग होजायेगी..

जरीना : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. साहीलबेटा.. इनके पास कपडेतो हे.. तो फीर क्यु खामखा खर्चा करना..

सलमा : (सबानाकी ओर मुस्कुराते) अरी जानेदे.. क्यु मना कर रही हे..? अगर मेरा साहील इनको कपडे दीलवा रहा हेतो क्या दीकत हे..? हें..हें..हें.. वैसे भी सबाना इनकी चहीती दीदी हे.. दोनोमे खुब पटती हे.. हें..हें..हें.. चल तु रसोइमे.. मेभी आ रही हु.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बाते भी करनी हे..

साहील : (मुस्कुराते सामने देखकर) दीदी.. थोडी देर पढलो.. फीर खाना खाकर तैयार होजाना.. आपको मेरे साथ चलना हे..

कहेते सबाना सरमाते हुअ‍े लखन ओर साहीलकी ओर मुस्कुराते अपने रुममे चली गइ.. तो जरीना ओर सलमा भी कीचनमे जाकर खानेकी तैयारीया करने लगी.. तब साहील ओर लखन भी धीरे धीरे आपसमे बाते करने लगे.. तब सबाना अपनी कीताब लेकर पढनेके लीये बैठ गइ.. लेकीन पता नही आज उनका पढाइमे मन नही लग रहा था.. उनको बार बार लखन ओर साहीलके पेन्टके तंबु दीख रहे थे.. तब मनमे..

सबाना : (सरमाते मनमे) बापरे.. लखनभैयाका कीतना बडा दीख रहा था.. ओर आज साहील भाइने भी हद करदी.. मुजे गले मीले तब उनका कैसे मेरी मुनीयापे चुभ रहा था.. उनका भी पेन्टमे कीतना बडा उभार था.. क्या मुजे गले मीलकर अ‍ैसा हो गया था..? आज मुजे सोपींगपे भी लेजायेगे.. मेरे लीये कीतना खर्चा कर रहे हे.. पुरेके पुरे बाराह लाख अ‍ेक ही जटकेमे देदीये.. उनके भी पैसे मेरी पढाइमे दे रहे हे.. कास अ‍ैसा ही समजदार पती मुजे मील जाये.. कादीरभाइ ओर सायरा दीदीने भाइ बहेन होकर भी सादी करली..

ओर अभी सबलोगने उनकी सादीको मान भी लीया.. तो फीर.. क्या मेभी साहीलभाइसे सादी नही कर सकती..? वो कीतना मेच्योर हो गये हे.. सबकी जीम्वेवारी नीभाते हे.. कास.. मे साहील भाइसे सादी कर सकती.. नही नही.. मे येसब नही कर सकती.. वो भाइ हे मेरे.. लेकीन अभी तो बहार सब केह रहेथे.. की गांवमे अब रीस्तोमे बदलाव होने लगे हे.. तभी तो पापाने बडे भैया ओर बडी दीदीकी सादीको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे..

तो फीर मे साहील भाइसे क्यु सादी नही कर सकती..? जो भी हो.. मे इस बारेमे मेरी पढाइके बाद सोचुगी.. अगर अ‍ैसा होता हे तो मे साहील भाइसे ही सादी करलुगी.. बापरे.. साहील भाइका ओर लखन भैयाका पेन्टके अंदर ही कीतना बडा दीख रहा हे..? अगर रीयल देखनेको मीला तो कीतना बडा होगा..? ये तो सादी सुधा ओरतकी भी चीखे नीकलवा देगे.. तो हम जैसी लडकीयोकी क्या हालत करेगे..?

सबाना यही सब सोचते अपनी कीताब देख रही थी.. आज वो पहेली बार साहीलके बारेमे इतना सोच रही थी.. तो दुसरी ओर आज साहीलके दिलमे भी पहेली बार सबानाको लेकर कुछ अलग ही फीलींग्स आ रही थी.. जबसे साहीलने सबानाके दोनो उरोजोको अपने सीनेपे फील कीया.. तबसे उनका भी दिल मचल रहा था.. लेकीन अभी अपने दिलकी फीलींग्सके बारेमे वो कीसीको भी बताना नही चाहता था.. क्युकी सबाना बहुत ही पढी लीखी लडकी थी.. ओर अबतो डोक्टर बनने वाली थी..
 
तो दुसरी ओर साहील ओर सबानाकी बात आज सुबह सलमा जब साहीलको लेकर लखनके साथ गांवसे नीकली.. तब उनके दिमागमे चल रही थी.. ओर उसने आज जरीनाको इस बारेमे बात करनेका फैसला भी करलीया था.. अ‍ेक तो सुरुसेही सबानाकी सलमाके ओर साहीलके साथ अच्छी पटती थी.. सबाना भी जब भी वेकेसन होता या अ‍ेक्जामकी वजहसे पढनेकी छुटी होती तब गांवमे सलमाके पास ही चली जाती थी..

जब कादीर अपनी बडी बहेन सायराको लेकर भाग गया.. तब सबानाके जहेनमे भी साहीलको लेकर बहुत गलत खयाल आने लगे थे.. वो भी मनसे चाहने लगी थी की वो भी साहीलसे सादी करले.. लेकीन अपनी पढाइकी वजहसे सारे गलत खयाल अपने दिमागसे नीकाल दीये.. उनका सीर्फ अ‍ेकही सपना था.. गायनेक डोक्टर बननेका.. तब इस वक्त सलमा ओर जरीना खाना बनाते धीरेसे आपसमे बाते कर रही थी..

सलमा : (सब्जीया काटते धीरेसे) जरीना.. क्या कादीरकी या सायराकी कोइ खबर..? उनको कही ढुंढा नही क्या..? कादीरकी ओफीसमे अ‍ेक बार जाकर देख लेते..

जरीना : (सरमाते धीरेसे) नही दीदी.. हमने उन लोगोको ढुंढनेकी कोसीस ही नही की.. आपके देवरने उनको ढुंढनेके लीये मना कर दीया.. कहेते थे वो अब हमारे लीये मर गये हे.. उन दोनोसे कोइ रीस्ता नही रखना.. वो दोनोसे बहुत नाराज हे..

सलमा : (मुस्कुराते) जरीना छोडनां.. बच्चे हे अ‍ेक बार गलती हो गइ.. अब तो दोनोने नीकाह भी करलीया हे.. तो दोनोको ढुंढकर घरपे बुलालो.. तुजे पता हे..? अभी जो हमारे घरपे साहीलका दोस्त बंसीभाइ आयेगेनां.. वो अपनी विधवा बुआसे सादी कर रहे हे.. उसी सादीकी खरीदी करने यहा आये हे.. ओर ये सादी खुद बंसी भैयाके पीता उनकी बहेनसे कर वा रहे हे..

जरीना : (सामने देखते) दीदी.. ये तो अच्छा हे सब खुलकर अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे कर रहे हे..

सलमा : (मुस्कुराते) हां.. अरी सुननां.. अ‍ेक लडकी ओर उनके साथ हे.. जयश्री नाम हे उनका.. जो साहीलके दुसरे दोस्तकी बहेन हे.. वो भी हमारी सायराकी तराह अपने भाइसे प्यार करती थी.. जो कुछ दिन पहेले ही दोनोने घरसे भागकर कोर्टमे सादी करली.. तो उनके मा बापभी उन दोनोकी सादी अब ताम जामसे कर देना चाहते हे.. वो भी खरीदी करने साथ आइ हे.. जरीना.. अबतो हमे अ‍ैसे रीस्तोसे कोइ आस्चर्य नही होता.. गांवमे सबने अ‍ैसे रीस्तोको स्वीकार करलीया हे..

जरीना : (सामने देखते) दीदी.. मुजेतो कोइ अ‍ेतराज नही.. लेकीन आपके देवर माननेके लीये तैयार नही थे.. येतो आप लोगोने उनसे गांवकी सभी बाते की.. तो मान गये.. उनको मनाना बहुतही मुस्कील था.. पता नही दोनो इस वक्त कहा होगे.. कही सायरा पेटसे हो गइ.. तो उनका सब करेगा कौन..? बस.. मुजे तो सीर्फ यही चीन्ता हे.. कैसे अ‍ेक सादी सुधा ओरतकी तराह होगइ थी..

सलमा : (मुस्कुराते) तब तो दोनोके बीच काफी लंबे अरसेसे (समय) रीलेशन होगे.. जब आपने उन दोनोको पकडा तब आपने उसे पुछा नही की दोनो कीतने समयसे साथ सोते मील रहे थे..

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. मेने सायराको मेरे रुममे बुलाकर सब कुछ पुछा.. तो कमीनी मुजे बीना डर बेबाकर जवाब देती रही.. कहेती थी मे हाइस्कुलमे पढती थी ओर भाइ कोलेजमे थे तबसे हम दोनो प्यार करते हे.. ओर जब बडे भाइको लिका दौरा पडा.. तब सबाना तो उधर ही आपके पास थी.. मे ओर आपके देवर उघर दो तीन दिनके लीये आये थे.. तब ही उन दोनोने कही जाकर नीकाह करलीया था.. ओर उसी दिन दोनो पहेली बार मीले थे.. बस.. तबसे दोनो हर रात अ‍ेक मीया बीवीकी तराह मीलने लगे..

सलमा : (मुस्कुराते) सायरा तो बडी हिंमत वाली नीकली.. हें..हें..हें.. दोनो पढते थे तबसे ही रीलेशनमे थे तो काफी वक्त दोनो मीलते होगे..

जरीना : (मनमे) दीदी.. अब आपसे क्या बताउ.. हींमत वाली सायरा नही कादीर था.. जो सायरा के साथ साथ उनसे छुपकर उनकी मांको यानी की मुजे भी काफी समयसे ठोकता था.. ये तो अच्छा हुआ मे हर बार आइपील खा लेती थी.. वरना कमीना मुजे भी प्रेगनेन्ट करके चला गया होता.. तो मे सबको क्या मुह दीखाती..?

सलमा : (सरमाते हसते) जरीना.. कहा खो गइ..? मे तुमसे कुछ पुछ रही हु.. दोनो कीतने समयसे मीलते थे..? बताना..

जरीना : (सरमाते हसते) दीदी.. दोनो तबकरीबन चार सालसे मील रहे थे.. ओर कमीनोने हमे उनकी भनक भी नही लगने दी.. जब दोनोको मेने रंगे हाथो पकडा उसी रात दोनो भाग गये.. अच्छा हे मेरी सबाना अ‍ैसी नही हे.. उनको तो बस अपनी पढाइसे ही मतलब हे..

सलमा : (मौका मीलतेही धीरेसे सरमाते) जरीना.. अगर तुम बुरा ना मानोतो तुमसे अ‍ेक बात कहु..?

जरीना : (मुस्कुराते) दीदी.. अब आपकी बातसे क्या बुरा मानना.. आप थोडी पराइ हे.. आप जोभी कहोगी हमारी भलाइ के लीयेही कहोगी.. कहीये.. क्या कहेना चाहती हे..
 
सलमा : (सरमाते धीरेसे) जरीना.. अब तुजे सब कैसे कहु..? तुम बुरा मत मानना.. क्युकी बात अभीकी नही हे.. जब हमारी सबाना पढ लीखकर वापस आजाये तबकी हे.. मेने हमारी सबानाके लीये अ‍ेक रीस्ता ढुंढ लीया हे.. ओर अभी इस बातको सीर्फ हम दोनोके बीच ही रखना हे.. क्युकी तब पता नही सबाना डोक्टर बन जायेगी.. तब वो क्या सोचती हे.. हो सकता हे वो कीसी डोक्टरसे भी सादी करले..

जरीना : (धीरेसे सामने देखकर) नही दीदी.. मेरी सबाना अ‍ैसी नही हे.. उनको अपनी पढाइका कोइ धमंड नही हे.. मुजे भी कहेती थी मे सादी हमारी बीरादरीमे ही करुगी.. ओर वोभी वहा.. जहा आप ओर पापा तैय करोगे.. तो दीदी अगर लडका आपने ढुंढा हेतो अच्छा ही होगा.. बताइअ‍ेना कौन हे वो लडका..?

सलमा : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) जरीना.. लेकीन अ‍ेक प्रोबलेम हे.. वो लडका इतना पढा लीखा नही हे..

जरीना : (फीकी मुस्कानसे) दीदी.. पढाइ लीखाइसे क्या होता हे..? संस्कार भी तो होना चाहीये.. हमने कादीर ओर सायराको भी पढाया था.. क्या नतीजा नीकला..? कमीने दोनोही हमारी इजत मीटीमे मीलाकर हमे छोडकर भाग गये.. हमारी तो छोडो मेरी बेचारी सबानाका भी सभी सपना तोडके गये.. ओर अ‍ेक ये हमारा साहील..

भले ही थोडा कम पढा लीखा हे.. लेकीन सबानाकी पढाइके लीये इसने अपनी सारी जमा पुंजी हमे देदी.. तो कौन अच्छा हुआ..? दीदी.. भले ही वो कम पढा लीखा हो.. बस.. हमारे साहीलकी तराह संस्कारी होना चाहीये.. बाकी हम जहा कहेगे हमारी सबाना वही सादी कर लेगी.. कहीये.. वो लडका कौन हे..?

सलमा : (सरमाते धीरेसे) जरीना.. बुरा मत मानना.. वो लडका खुद हमारा साहील हे.. क्या मेरे साहीलके लीये तुम मुजे सबानाका हाथ दे सकती हो..? वोभी उनकी पढाइके बाद.. ओर ये बात अभी सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी..

जरीना : (सोक्ट होते सामने देखते) दीदी.. क्या केह रही हो आप..? हमारा सा..ही..ल.. आपको भी पता हे वो ओर सबाना दोनो सगे भाइ बहेन हे.. अ‍ेक भाइ बहेन तो हमारी नाक काटकर चले गये.. इसके लीये आपके देवर कभी नही मानेगे..

सलमा : (मुस्कुराते धीरेसे) जरीना.. मेरे देवरको अभी कुछ मत कहेना.. उनको हम सबाना पढकर वापस आयेगी तब बात करेगे.. मुजे सीर्फ तेरी राय जाननी हे.. ओर साहील अब मेरा बेटा हे.. तेरा नही.. देवरजी उनके चाचा हे.. तो चाचाकी लडकीसे सादी करनेमे कोइ बुराइ नही.. अ‍ेक बार सोचले.. अगर तुम मुजे मना करोगी तो भी मुजे बुरा नही लगेगा.. बस.. मेने तो अभी मेरे मनकी बात तुजे कहेदी..

जरीना : (आंख गीली करते) दीदी.. आप भी तो इनके चाचाकी लडकी थी.. आपकी बात सही हे.. साहीलकी सादी सबानाके साथ हो सकती हे.. अगर अ‍ैसा हुआ.. तो मे ओर सबाना इस दुनीयाकी सबसे खुस नसीब ओरत होगी.. मेरे साहील जैसा लडका उनको कहा मीलेगा..? दीदी.. मुजे इस रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस.. अब आपको देवरको देखना हे.. की वो क्या कहेते हे..

सलमा : (खुसीके मारे जरीनाको गले लगाते) जरीना.. थेन्क्यु.. मुजे तुमसे यही उमीद थी.. लेकीन इस बातको हमे सबसे छुपानी हे.. खास करके साहील ओर सबानासे वरना सबानाका ध्यान पढाइके अलावा कही ओर भटक जायेगा.. ओर ये मे कतइ नही चाहती.. ओर रही बात देवरसे बात करनेकी.. तो वो हमारे बडे ठाकुरजी इनसे बात करलेगे.. वो उनकी बात कभी नही टालेगे..

जरीना : (अलग होते अपने आंसु पोछकर मुस्कुराते) दीदी.. अगर अ‍ैसा होता हे तो बहुत ही अच्छा हे.. लगता हे आज पुरा दिन खुसीयोका हे.. अ‍ेक के बाद अ‍ेक खुसीया मील रही हे.. मुजे ये रीस्ता मंजुर हे.. बस.. मेरी सबानाकी पढाइ तक रुक जाइअ‍े..

दोनोही खाना बनाते बाते करती रही.. तब फीरोज भी मीठाइ लेकर आगया.. तो कुछ ही देरके बाद बंसीका फोन साहीलके फोनपे आगया ओर वो घरका अ‍ेड्रेस पुंछने लगा.. तब साहील फीरोजकी बाइक लेकर उनको रोडपे लेने चला गया.. ओर लखन ओर फीरोज बाते करने लगे.. तब कुछ ही देरमे साहील सबको लेकर घरपे आगया.. तो बंसी आते ही फीरोजके पांव छुकर लखन ओर साहीलको गले लग गया..

तो आज सांतीने सारी पहेनी थी.. जागृती ओर जयश्री सरमाते फीरोजको हाथ जोडकर नमस्ते करने लगी.. तो आवाज सुनकर जरीना सलमा ओर सबाना भी बहार नीकल गइ.. ओर सबको गले मीलने लगी.. तब सबाना सांती जयश्री ओर जागृतीको देखते ही उनके गले लग गइ.. फीर तीनोको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर उनके साथ हस हसके बाते करने लगी.. तब सलमाने बहारसे ही जरीनाको सांती जागृती ओर जयश्रीका परीचय करवाया..

तब जरीना सांती ओर जयश्री जागृतीको मीली.. ओर उनसे हस हसके बाते करने लगी.. जयश्रीने अपनी मांगमे सींदुर लगाया था.. तब बहार बंसी भी फीरोजको पहेचानता था.. तो वोभी फीरोजके साथ गांवकी बाते करने लगा.. ओर फीरोजको वापस गांवमे आनेके लीये कहेने लगा.. जब खाना बन गया तब सबलोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. तब सलमा ओर जरीना सबको खाना परोसने लगी.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १८७

तब जरीना सांती ओर जयश्री जागृतीको मीली.. ओर उनसे हस हसके बाते करने लगी.. जयश्रीने अपनी मांगमे सींदुर लगाया था.. तब बहार बंसी भी फीरोजको पहेचानता था.. तो वोभी फीरोजके साथ गांवकी बाते करने लगा.. ओर फीरोजको वापस गांवमे आनेके लीये कहेने लगा.. जब खाना बन गया तब सबलोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. तब सलमा ओर जरीना सबको खाना परोसने लगी.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया....अब आगे

जब इधर सब खाना खा रहेथे तब गांवमे आज चारुने भी मंजुको सुधीरके बारेमे सब बाते बतादी.. ओर देवायतके उनके साथ खानेकी बात करली.. तो दो पहोरको सुधीर ओर देवायत वापस सुधीरके घरपे आगये.. ओर चारोने मीलकर खाना खालीया.. तब सुधीर ओर देवायत बाते करते रहे तब चारु ओर नीशाने सब काम नीपटा लीया.. फीर वो दोनो भी थोडी देर देवायत सुधीरसे बाते करती रही..

तब चारु बार बार देवायतको रुममे आनेका इसारा करती रही.. तभी सुधीर थोडी देर आराम करनेका बहाना बनाकर अपने रुममे चला गया.. ताकी वो देवायत नीशा ओर चारुको अकेले मीलनेका मौका दे सके.. तब नीशाने घरका दरवाजा बंध करलीया ओर देवायतका हाथ पकडकर अपने रुममे चली गइ.. तो चारु भी हसते हुअ‍े उनके साथ रुममे घुस गइ.. ओर रुमका दरवाजा भी बंध करदीया..

देवायत : (हसते) नीशा.. क्या कर रही हो..? अंदर सुधीर हे.. हें..हें..हें..

नीशा : (हीते) पता हे मुजे.. इसीलीये तो आज आपको खानेके लीये इधर रोक लीया हे.. ताकी हम आपसे अच्छेसे मील सके.. अबतो हम आपको दस बाराह दिनके बाद ही मीलेगी.. तो सुधीरने ही हमे आपको मीलनेके लीये कहा हे.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते अपने कपडे नीकालते) हां देवु.. अब तो सुधीर भैयाको भी हमारे बारेमे सब कुछ पता हे.. तो अब बीन्दास्त अपनी दोनो बीवीओको खुस करदो.. ताकी हमारे दस दिनकी सारी कशर पुरी होजाये..

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नीशा : (सरमाकर अपने कपडे नीकालते) हां देवु.. अब तो आप ही हमारे पती हो.. आप भी अपने कपडे नीकाल दीजीये.. अब साम तक हमारे पास वक्त ही वक्त हे.. आइअ‍े हम दोनो बीवीको आज संतुस्ट कर दीजीये..

कहेते नीशा ओर चारु पुरी तराह नंगी होगइ.. ओर बेडपे आ गइ.. तब चारुनेभी देवायतको हाथ पकडकर बेडपे खीच लीया.. तो नीशा अपने दोनो पैर फैलाकर बेडपे पीठके बल लैट गइ.. ओर सरमाते कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते मुस्कुराने लथी.. आज दोनो ही गलेमे मंगलसुत्र ओर माथेपे सींदुर लगाकर काम देवकी मुरत लग रही थी.. बस.. देवायतको उतेजीत होनेके लीये दोनोका इतना रुप ही काफी था..

तब देवायत नीशाके उपर चड जाता हे.. तो नीशा उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. तब देवायतका लंड तनके नीशाकी चुतपे ठोकर मारने लगा.. ओर अपने बीलमे जानेके लीये रास्ता ढुढने लगा.. तो नीशाकी चुतने लंडको पहेचानते ही फडफडाते लंडको नीगल लीया.. तब देवायत लंडको गरमी महेसुस हुइ.. ओर वो बहुत ही उतेजीत होकर लंडको जड तक खुसाते नीशाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगा..

तो चारु भी दोनोकी जबरदस्त चुदाइ देखकर तावमे आ गइ.. ओर सरकते देवायत नीशाके पास बैठ गइ.. फीर नसीली आंखोसे देवायतके होठोको चुमते उनको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. देवायतने दो बार नीशाकी धमासान चुदाइ करते उनको तृप्त करदीया.. ओर तीसरी बार उनकी चुतको लबालब पानीसे भरदीया.. तब नीशाने कांपते हुअ‍े जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया..

ओर लंबे लंबे सांस लेने लगी.. वो पुरी पसीने पसीने होगइ थी.. देवायतने अ‍ेक ही बारमे चुदाइ करते उनके अ‍ेक अ‍ेक अंगको ढीला करदीया था.. तभी देवायतने फच आवाजके साथ अपना लंड नीशाकी चुतसे नीकाल देता हे.. तब चारु अपने दोनो पैर फैलाकर नीशाकी बगलमे लैट गइ.. तो नीशा चुत साफ करते मुस्कुराते थोडी बाजुमे हट गइ.. ओर देवायत सीधा चारुके उपर चड गया..

ओर चारुने भी देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको पागलोकी तराह चुमने लगी.. चारु पुरी तराह मदहोसीमे छा चुकी थी.. ओर उसने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको अपनी मुठीमे थामलीया.. ओर अपनी चुतपे धीसते टोपेको चुतमे फसा लीया.. ओर देवायतको बाहोमे भीचलीया.. तब देवायतने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड चारुकी चुतमे धुसा दीया..

तो चारुकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. तब नीशा हसने लगी.. तब देवायत कमर हीलाते चारुकी भी जबरदस्त चुदाइ करने लगा.. आज नीशा ओर चारु दोनो ही अपने नये पतीसे प्यार बटोर रही थी.. ताकी दस दिनके लीये उसे कोइ प्यारकी कमी महेसुस ना हो.. देवायतने चारुको भी दो बार चोदकर जडा दीया.. फीर तीसरी बार दोनो साथमे जडने लगे.. तब चारुकी चुतको भी अपने पानीसे सीच दीया..

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नीशा ओर चारु दोनोको पता नही थाकी वो दोनो अपनी सुहागरात मे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. तीनो ही साम चार बजे तब प्यार करते रहे.. तब देवायतने अ‍ेक बार ओर दोनोको साथमे अलग अलग पोजीसनमे चोद लीया.. तब दोनोका पुरा तन तोडकर रख दीया था..फीर तीनो ही नाहकर कंपलीट हो गये.. ओर तैयार हो गये.. तबतक सुधीर भी जाग चुका था.. फीर नीशाने सबके लीये चाइ नास्ता बना लीया..

तो चारोने साथ बेठकर चाइ नास्ता करलीया.. ओर देवायतने कुछ पैसे नीशा ओर चारुको अलग अलग दे दीये.. ओर तीनोको गले मीलकर देवायत वापस अपने खेतोपे चला गया.. तब कुछ ही देरके बाद उनको वंदना ओर रश्मी भी मीलने आगइ.. तब चारुने रश्मी ओर वंदनासे भी सब बाते करते नीशाके साथ जानेकी बात करली.. तब साम होते ही सुधीर नीशा ओर चारु लेकर गांवसे नीकल गया.. ओर तीनो सहेरमे आकर ट्रेनसे बोम्बेकी ओर नीकल गये..
 
तो आज जवेरीलालके घरपे दोनो भाइ बीजनेसपे थे.. तब जयश्री भी जागृतीके साथ खरीदी करने सहेरमे गइ थी.. तो इस वक्त घरपे सीर्फ ब्रीन्दा वृन्दा ओर श्रीधरही थे.. दो पहोरको तीनोही अ‍ेकठे बैठकर खाना खा रहे थे.. तब वृन्दा ने ब्रीन्दाकी ओर देखा.. तो ब्रीन्दा वृन्दाकी ओर कातीलाना स्माइल करते खाना खाने लगी.. तो वृन्दा गुस्सेसे तील मीलाइ.. ओर कीसीके सामने देखे बगैरही खाने लगी.. ओर कुछ भी नही बोली..

तब श्रीधर ब्रीन्दाके साथ ही उनसे सटकर बैठा था.. तो श्रीधर ब्रीन्दाके पैरको पैरसे सहेलाता रहा.. तो आज ब्रीन्दाने श्रीधरको नही रोका.. जीनकी वजहसे ब्रीन्दाभी उतेजीत होते श्रीधरके पैरको पैरोसे सहेलाने लगी.. तभी अचानक श्रीधरने खाना खाते दुसरा हाथ ब्रीन्दाकी जांगोपे रख दीया.. ओर सहेलाने लगा.. सहेलाते सहेलाते श्रीधरका हाथ ब्रीन्दाकी चुतपे चला गया.. तब ब्रीन्दा बहुत ही गरम होगइ..

ओर उनकी चुत श्रीधरका हाथ लगते ही पनीयाने लगी.. ओर वो जोरोसे सांसे लेने लगी.. तब उसने होंसमे आकर श्रीधरके हाथ पे हाथ रखते अपनी चुतको सहेलाते रोक लीया.. ओर आंखोसे वृन्दाकी ओर इसारा करते मना करने लगी.. जैसे ही खाना खालीया.. वृन्दा जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर जोरोसे दरवाजा बंध करके अपने बेडपे जाकर सोगइ..

ब्रीन्दा : (श्रीधरकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) देखा बीटु..? तेरी मौसीके तेवर तो देख.. कमीनीकी अभी तक अकड नही गइ.. जी तो चाहता हे उसे भी अ‍ेक बार तुमसे चुदवालु.. तब फाड देना उनकी चुतको.. करदे इनको भी पेटसे.. साली.. फीर तेरे बापको भी भुल जायेगी..

श्रीधर : (प्यारसे देखते) मोम.. क्या केह रही हो आप..? छोडो उसे.. आप मुजे हमारी सादीके बाद कुछ बताने वाली थी.. याद हे आपको..? तो आज अच्छा मौका हे.. बताइअ‍ेना..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. सब कुछ याद हे.. चल.. आज मेरे पतीको सब कुछ बता ही देती हु.. तुम अपने कमरेमे जाओ.. ओर मेरा इन्तजार करो.. तब तक मे थोडासा काम नीपटाकर आती हु..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) मोम.. आज घरपे कोइ नही हे.. जरा जल्दीसे आजाना..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) पता हे मुजे.. मेने ही तेरी बीवीको जागुको कहेकर उनके साथ भेजा हे.. ताकी आज मे मेरे पतीको मील सकु.. हें..हें..हें..

कहा तो श्रीधरने ब्रीन्दाकी ओर देखते कातील स्माइल करते उनके होठोको चुमलीया.. ओर मुस्कुराते अपने रुमकी ओर जाने लगा.. तब ब्रीन्दा बहुत ही सर्मसार होगइ.. वो कइ दिनोसे श्रीधरको नही मीली थी.. तो आज ब्रीन्दाको भी श्रीधरके साथ मीलन करनेकी जल्दी थी.. वो अपना सब काम फटाफट नीपटाने लगी.. जब काम खतम होगया तो अपने रुममे चली गइ.. ओर फ्रेस होकर.. आइनेके सामने बैठकर हल्कासा शींगार करने लगी..

क्युकी आज वो अपने बेटेको नही अपने पतीको मीलने जा रही थी.. ब्रीन्दा ने अपने आपको पुरी तराह सवार लीया.. ओर अपने रुमसे नीकलकर धीरेसे रुमको लोक करदीया.. फीर श्रीधरके रुमकी ओर चली गइ.. जैसे ही श्रीधरके रुममे गइ श्रीधर बेडसे खडा होकर उनको देखता ही रेह गया.. क्युकी ब्रीन्दा शींगार करते बहुत ही कामुक ओर कयामत दीख रही थी.. ब्रीन्दाने रुममे आकर उनका भी दरवाजा लोक करदीया..

तब श्रीधर जटसे खडा होकर ब्रीन्दाके पास आगया.. तो ब्रीन्दा भी जटसे श्रीधरकी ओर चलते उनकी बाहोमे समा गइ.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे.. ब्रीन्दाकी चुत गीली होने लगी.. श्रीधर इनके चहेरेको लगातार चुमता ही जा रहा था.. तभी अचानक श्रीधरने ब्रीन्दाको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडकी ओर चल पडा.. तब ब्रीन्दा उनके गलेमे बाहे डालकर श्रीधरको प्यार भरी नजरोसे देखती रही..

र्बीन्दा : (सरमाते धीरेसे) बीटु.. आज तेरी बीवी तेरे हवाले हे.. अपनी इस बीवीको खुस करदे.. इतने दिनोकी सारी कशर पुरी करदे.. मे तेरे लीये बहुत तडपी हु.. क्या कभी इस बीवीकी याद नही आती..? हंम..? पहेले तो मेरे पीछे कीतना पागल था..? सारा दिन नइ बीजीसे ही चीपका रहेता हे..

श्रीधर : (बेडपे सुलाते) मोम.. अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. आपही ने तो उनके साथ रीलेशन रखनेको कहा था.. आपकी याद बहुत आती हे.. मे आजभी आपके पीछे इतना पागल हु.. जो पहेले था.. आपको इतना चाहता हु जीतना पहेले चाहता था.. आप ही मेरा पहेला प्यार हो.. अच्छा हुआ पापाने आपको डीवोर्स देदीया.. अब हम दोनो अपनी लाइफ खुलकर जी सकेगे.. मोम.. आइ लव यु..

ब्रीन्दा : (श्रीधरको अपने उपर खीचते) बीटु.. लव यु टु.. मे तो मजाक कर रही थी.. मेभी तुमसे बहुत बहुत प्यार करती हु.. वो भी सच्चा वाला प्यार.. जो मेने पहेली बार तुमसे कीया हे.. प्यारकी अहेमीयत क्या हे वो मेने तुमसे ही तो जाना हे.. चल आजा.. अभी कुछ बात नही.. पहेले इस बीवीको प्यार करके तृप्त करदे.. फीर हम आरामसे लैटे बाते करेगे.. कीतने दिनोके बाद तुमसे मीलन करनेका मौका मीला हे..

कहेते ब्रीन्दा कामुक नजरोसे देखते श्रीधरके सर्टके बटन खोलने लगी.. तो श्रीधरभी मुस्कुराते ब्रीन्दाकी सारीको हटाकर उनके ब्लाउसके बटनको खोलने लगा.. तब ब्रीन्दाके दोनो उरोज उछलके बहार आ गये.. कुछ ही देरके बाद दोनोही पुरे नंगे हो चुके थे.. आज श्रीधरके साथ मीलन करना था तो ब्रीन्दाने सुबह ही अपनी चुतके बाल साफ करलीये थे.. जो अभी बहुतही चीकनी होते अ‍ेक कुआरी लडकीकी चुतकी तराह चमक रही थी..

तब कुछ ही देरमे श्रीधर ब्रीन्दाके उरोजोको अपने कुहमे लेलीया.. ओर चुसते चुसते नीचेकी ओर सरकने लगा.. फीर चुतको चाटते उनके उरोजोका मर्दन कर रहा था.. तब ब्रीन्दा पुरी तराह वासना मय हो चुकी थी.. वो आंख बंध करते कामुक्तासे श्रीधरके बालोको सहेला रही थी.. ओर श्रीधर ब्रीन्दाकी चुतमे अपनी जीभ घुसाते उनकी चुतके दानेको खरोद रहा था..

श्रीधरकी यही अदा ब्रीन्दाको अच्छी लगती थी.. अ‍ैसा प्यार सीर्फ अपने बेटेसे ही पाया था.. जबसे ब्रीन्दाने श्रीधरसे सादी करली थी तबसे वो उनके प्यारमे पागल थी.. ओर हर वक्त अब श्रीधरको पती मानकर ही उनके साथ पत्नी जैसा व्यवहार कर रही थी.. ब्र्रीन्दा कइ दिनोसे बीना चुदाइ बहुत ही कामुक ओर उतेजीत होगइ थी.. तब श्रीधरकी इस हरकतको ज्यादा देर तक बरदास्त नही करपाइ.. ओर जड गइ..

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तब ब्रीन्दाने श्रीधरके बालोको पकडकर खीचकर अपने उपर चडा दीया.. तो श्रीधर उनके होठोको ओर गलेको चुमने लगा.. तब ब्रीन्दाने हाथ नीचे लेजाकर श्रीधरके लंडको पकड लीया.. ओर अपनी चुतपे घीसते धीरेसे लव होलमे पुस कर देती हे.. तब अ‍ेक ही जटकेमे श्रीधरने पुरा लंड ब्रीन्दा की चुतमे घुसा दीया.. तो ब्रीन्दाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो श्रीधरको कसके बाहोमे भीचते उनकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखने लगी..

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तब श्रीधरने ब्रीन्दाके उपर जुकते बुब्सको मसलते उनके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेलीया ओर अपनी कमर हीलाते ब्रीन्दाकी चुदाइ करने लगा.. तब ब्रीन्दा भी अपनी कमरको तालमेलमे उछालते श्रीधरको चुदवानेमे साथ देने लगी.. दोनोही नीसब्द अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते चुदाइमे मसगुल होगये.. तब कुछ ही देरके बाद श्रीधर ब्रीन्दाकी धमासान चुदाइ करने लगा.. तो ब्रीन्दा दर्दके मारे छटपटाने लगी..

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ओर श्रीधरके हर धकेको बडी ही कामुक्तासे जेलती रही.. वो श्रीधरके चोदनेकी स्टेमीनाको अच्छी तराह जानती थी.. उसे येभी पता था की वो दो बारसे ज्यादा श्रीधरको नही जेल पायेगी.. अब तक श्रीधरने ब्रीन्दाको दो बार जडा दीया था.. तभी अचानक श्रीधर ब्रीन्दाके उपर जुकते उनके तनसे चीपक गया.. ओर पुरा लंड ब्रीन्दाकी चुतमे घुसा दीया तब ब्रीन्दाकी चीख नीकल गइ..

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ओर उसने श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते लीप लोक कर लीया.. तभी श्रीधर अपनी कमरको जटके देते ब्रीन्दाकी चुतको पीचकारीया मारते अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तो ब्रीन्दाको अपनी बच्चेदानीपे श्रीधरका गरम पानी महेसुस होने लगा.. तो उनका तन पुरी तराह कांपने लगा.. ओर वो उतेजीत होते अ‍ेक बार फीर श्रीधरके साथ जडने लगी.. तब ब्रीन्दाने श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहीमे भीच लीया..

दोनो ही पुरी तरा पसीनेसे भीग चुके थे.. श्रीधर लगातार बीस मीनीट तक ब्रीन्दाकी चुदाइ करता रहा.. आज श्रीधरने अ‍ेकही बारमे ब्रीन्दाको पुरी तराह चोदकर नीचोड लीया.. श्रीधर अ‍ैसे ही ब्रीन्दाकी चुतमे लंड घुसाते उनके सीनेपे ढेर होगया था.. तब ब्रीन्दा प्यार भरी नजरोसे देखते धीरे धीरे श्रीधरकी पीठ ओर उनके सरको सहेला रही.. श्रीधरका लंड अब भी ब्रीन्दाकी चुतमे रेह रेहकर जटके मार रहा था.. तब..

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ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) बीटु.. आज तुजे क्या होगया था..? मुजे तो अ‍ेक ही बारमे पुरी तराह थकादी.. इतने जोसमे तो तुने मुजे पहेली बार चोदा था.. जब हमारी सुहागरात थी.. बस.. तुम मुजे अ‍ैसेही प्यार देते रहेना.. मे तो तुजे अपना पती बनाकर तेरी कायल होगइ.. अपनी इस बीवीको अ‍ैसेही चोदते रहेना..

श्रीधर : (होठ चुमते) मोम.. आपको हमेसा यही प्यार मीलेगा.. अब आप कुछ कीजीये.. हमे मीलनेका मौका बहुत ही कम मीलता हे.. मे आपके बीना नही रेह सकता.. मुजे आपका यही प्यार हर दीन चाहीये.. आपही मेरा पहेला प्यार हो.. ओर हमेसा रहोगी..

ब्रीन्दा : (होठ चुमते) बस बीटु.. अब कुछ ही दिनोका इन्तजार करले.. मुजे भी पता हे तुम मेरे बीना नही रहे सकते.. ओर मे भी तेरे बीना नही रेह सकती.. क्युकी अब सीर्फ तुम ही मेरे अ‍ेकलोते पती हो.. तो पत्नी होनेके नाते तुजे प्यार देना मेरा भी फर्ज हे.. लेकीन कुछ दिन सब्र करलो.. जब हमारी दोनो फेमीली अलग होजायेगी तब यहा सीर्फ हम तीनो ही होगे.. तब तुजे वही प्यार हर दिन मीलेगा.. मे भी इसी दिनका इन्तजार कर रही हु.. मुजे भी मेरे पतीका प्यार हर दिन चाहीये..

श्रीधर : (गाल चुमते) मोम.. आपने मुजे हमारी सादीके बाद कुछ बतानेका वादा कीया था.. अब तो बता दीजीये.. आपने मुजे दीदीके साथ क्यु रीलेशन रखनेको कहा था..? तो अबतो हमने सादी भी करली हे.. दीदीके साथ फीजीकल रीलेशन रखवानेकी कोइ खास वजह..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे गाल चुमते) हंम.. चलो आप मेरे पतीको सब बताती हु.. लेकीन पहेले ये बता.. आज ये तेरा हथीयार अभी भी मुजे अंदर क्यु सख्त लग रहा हे..? तुमने कोइ गोली बोली तो नही खाइ..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) नही मोम.. मेरी ओर दीदीकी सादीसे पहेले हमारे दोस्त मुनाने हम सभी दोस्तोको अ‍ेक आयुर्वेदीक गोली पीलाइ थी.. तीन दिनका कोर्स था.. तो मेरे जीतने भी दोस्तने ये कोर्स पुरा कीया.. उन सबका हथीयार थोडा बडा होगया.. ओर हमारी स्टेमीना भी बढ गइ हे.. बस.. उन्हीकी वजहसे दीदी प्रेगनेन्ट होगइ.. (सरारतसे हसते) मोम.. ध्यान रखना.. कही आज आप भी हो सकती हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते गालपे प्यारसे चपत लगाते) हंम.. हो जानेदे.. अब मुजे कीसीकी परवा या डर नही हे.. अगर तुम चाहोगे तो मे भी तुम्हारा बच्चा पैदा करुगी.. लेकीन अभी नही.. पहेले जयश्रीके बच्चेको इस दुनीयामे आनेदे.. वरना उनकी सब देख भाल करेगा कौन..?

अभी तो हमारे पास सारी उम्र पडी हे.. फीर हम भी आरामसे बच्चा करलेगे.. मे तेरा बच्चा पैदा करुगी.. हमारे प्यारकी नीशानी.. बीटु.. अब वापस बहुत इच्छा होने लगी हे.. धीरे धीरे चोदना.. हम चुदाइ करते हुअ‍े बात करेगे.. तुम मुजे चोदते हो तब बहुत अच्छा लगता हे..

श्रीधर : (धीरेसे कमर हीलाते) मोम.. वो दीदीकी बात बताइअ‍ेना..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते अपनी कमर हीलाते) हंम.. सुन बीटु.. तेरे पापा ओर तेरी मौसी दोनो मेरी सादीसे पहेले ही आपसमे रीलेशनमे थे.. ये बात मुजे कभी पता नही चली.. लेकीन जीस दिन मुजे उन दोनोके रीलेशनके बारेमे पता चला तब बहुत देर हो चुकी थी.. जयश्री ओर तुम काफी बडे हो चुके थे.. जयश्री जवानीकी दहेलीजपे कदम रख चुकी थी.. तो तुम भी पुरा जवान होगया था.. तो मे तुजे छोडकर कैसे चली जाती..? मुजे बादमे पता चलाकी हमारी जयश्री भी उन दोनोके प्यारकी नीशानी हे..

श्रीधर : (कमर हीलाते रुकते) मोम.. क्या केह रही हो आप..? तो क्या दीदी मेरी सगी बहेन.. मीन्स.. क्या वो मेरी सौतेली बहेन हे..?

ब्रीन्दा : (कमर हीलाते) हां बीटु.. जयश्री तेरी सौतेली बहेन हे.. तेरे पापाकी संतान.. बेटा.. चोदना क्यु बंध करदीया.. चोदना जारी रखनां.. तुम मुजे चोदते हो तो बहुत मजा आता हे.. सुन.. वो तेरी सगी बहेन हे.. इसीलीये मेने तुजे जयश्रीके साथ रीलेशन रखनेको कहा था.. क्युकी जब तेरे पापा ओर तेरी मौसीको पता चलेगाकी तुम अपनी सगी बहेन यानीकी उनकी बेटीको चोदते हो..

तो ये बात वो दोनो कभी बरदास्त नही करपायेगे.. तेरे पापाने ओर तेरी मौसीने मुजे धोखा दीया हे.. इसीलीये मेने उनसे बदला लेनेके लीये उनकी बेटीको तुमसे चुदवाकर प्रेगनेन्ट करवा दीया.. बस.. यही रीजन था मेने तुजे जयश्रीके साथ रीलेशन रखनेके लीये कहा.. बीटु.. आइ अ‍ेम सोरी..

श्रीधर :(थोडा जोरोसे चोदते मुस्कुराते) मोम.. आपको चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. लेकीन आप मुजे सोरी क्यु बोल रही हे..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बटु.. इसीलीये की मेने मेरा बदला लेनेके लीये तेरा ओर बेचारी जयश्रीका इस्तेमाल कीया.. मैने तेरी खुदकी बहेनको तुमसे चुदवा लीया.. ओर उनको तेरेसे प्रेगनेन्ट तक करवा दीया.. मे तेरी ओर जयश्रीकी गुनहगार हु..

श्रीधर : (मुस्कुराते) नही मोम.. आप अपने आपको दोसी मत मानो.. सीर्फ मेरी नही.. हम सभी दोस्तोकी यही तो फेन्टासी हे.. की हम हमारी बहेन ओर हमारी मम्मीसे प्यार करे.. ओर उनके साथ फीजीकल रीलेशन रखे.. मोम.. थेन्क्स.. आपने मेरे साथ सादी करली.. ओर दीदीको भी मुजसे मीलवा दीया.. मेरी सभी फेन्टासी आपही की वजहसे पुरी हुइ.. मेतो इस बातसे बहुत ही खुस हु.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) अच्छा..? तेरे सभी दोस्त यही चाहते हे..? तो फीर तेरे कीतने दोस्त अपनी मां ओर अपनी बहेनके साथ रीलेशनमे हे..? क्या मुजे बता सकता हे.. आइ..सीसीस... बीटु.. थोडा धीरेसे चोदनां.. अंदर अभी भी कीतना बडा लग रहा हे.. जी तो चाहता हे मे तुमसे चुदवाती ही रहु..

श्रीधर : (मुस्कुराते चुदाइ करते) मोम.. आप कीसीको कहेना नही.. ये बात सीर्फ अपने तक सीमीत रखना.. वो हमारा दोस्त साहील अपनी अम्माके साथ रीलेशनमे हे.. फीर.. मुना.. वो भी अपनी बहेन बरखाके साथ सादी करके उनको प्रेगनेन्ट कर चुका हे.. मोम..

सायद मुनाका भी अपनी मम्मीके साथ रीलेशन हे.. अ‍ैसा हमे इन दोनोके व्यवहारसे लगता हे.. फीर हमारा बंसी.. वो भी अपनी बुआके साथ सादी कर रहा हे.. ओर अभी कल ही पता चला वो अपनी बहेन जागृतीके साथ भी रीलेशनमे आना चाहता हे.. मतलब मेरे सब दोस्तो अपनी बहेनको प्यार करते हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हंम.. बीटु.. मुना की मम्मी वो बसंती हेना..? फीकर मत करो.. उनसे तो मे सब उगलवा लुगी.. मेरे साथ उनकी बहुत अच्छी पटती हे.. हें..हें..हें.. आइ.. सीससससस.. बीटु.. तुम क्या मस्त चुदाइ करता हे.. लेकीन तुम अ‍ेक नाम भुल गया.. जो हमने हमारा पहेला मीलन उनके बंगलोपे ही कीया था.. तुमने मेरे प्यारे देवर लखन भैयाके बारेमे मुजे कुछ नही बताया.. हें..हें..हें..
 
श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. वो हम सबका हीरो हे.. हम सबने उन्हीकी सलाहपे अपनी अपनी बहेनको पटाया हे.. लेकीन मोम.. वो खुद.. इस प्यारसे वंचीत होगये हे.. उन्होने सीर्फ मुजे ही बताया था.. मोम.. वो भी अपनी बहेन पुनमदीदी को बहुत चाहता था.. लेकीन अपने प्यारका इजहार उनसे कभी नही करपाये.. सायद इसीलीये वो हम सबको अपनी बहेनको प्यार करनेके लीये प्रेरीत करते हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बीटु.. उनके खानदानमे तो सब लोग अनी बहेनसे सादी करते आये हे.. तो फीर मेरा देवरने इतनी हींमत क्यु नही की..? वो भी पुनम दीदीको अपने दिलकी बात बता देते..? सायद उनको भी अपना प्यार मील जाता..

श्रीधर : (चुदाइ रुकते) मोम.. मेने भी इनको यही पुछा था.. तो उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. मुजे ओर कुछ नही बता पाये.. मोम.. आप बुरा मत मानना.. वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त हे.. भाइसे भी बढकर.. तो हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे कोइ बात नही छुपाते.. तो मुजे मजबुरन हम दोनोके रीस्तोके बारेमे उनको बताना पडा.. क्युकी उनको भी हम दोनोके बारेमे सब पता चल गया था.. तो मे इनके सामने जुठ नही बोल सका.. लेकीन आप फीकर मत करना.. ये बात सीर्फ उनके तक सीमीत रहेगी.. वो कीसीको कुछ नही कहेगे..

ब्रीन्दा : (सोक्ट होते देखते) बीटु.. ये तुम क्या बोल रहा हे..? लेकीन उनको सब पता कैसे चला.. तुमने उनको पुछा नही..? ओर तुमने चोदना क्यु रोक दीया..? चोदना.. चोदते हुअ‍े बाते करनेमे बहुत मजा आता हे.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (मुस्कुराते कमर हीलाकर चोदते) मोम.. मेने उनको पुछा.. की आपको मेरे बारेमे ओर मेरी मोमके बमरेमे पता कैसे चला..? तो कहा.. आपको याद हे.. जब हम दोनो पहेली बार कोलेजके दाखलेके लीये सहेर गये थे.. ओर वहा हम दोनो उनके बंगलोपे पहेली बार मीलेथे..? जब हम वापस आगये तब वो दुसरे दिन ही वहा बंगलोपे गया था.. तब हमारे बेडकी चदर हम दोनोके कामरससे बहुतही खराब हो गइ थी.. बस.. उसीसे लखन भैयाको सब पता चल गया.. लेकीन उन्होने इस बारेमे मुजे कभी नही पुछा..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) बीटु.. हमारी जरासी लापरवाहीसे उनको सब पता चल गया.. लेकीन ये बता.. तो फीर तुम दोनोकी इस बारेमे कब बाते हुइ..?

श्रीधर : (जोरोसे कमर हीलाते) मोम.. मे ओर दीदी सादी करके वापस आये.. उनके दुसरे दिन.. जब हम दोनो अकेले थे तब सब बाते हुइ.. तब उन्होने भी मुजे अपने ओर पुनम दीदीके बारेमे सब कुछ बताया..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते कमर हीलाते) हंम.. बीटु.. मेरे देवरको कहेना हम दोनोके बारेमे वो कीसीको ना बताये.. मे ओर जयश्री दोनो पुरी जींदगी तेरी बीवी बनके रहेना चाहती हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते होठ चुमते) मोम.. आप फीकर मत करना.. जैसा आप चाहोगी वैसाही सब कुछ होगा.. मे तुम दोनोको बहुत खुस रखुगा.. पती बनकर आप दोनोकी हर जरुरतको पुरा करुगा.. मुजे आपका यही प्यार सारी जींदगी चाहीये..

ब्रीन्दा : (जोरोसे बाहोमे भरते) बीटु.. मेतो तुजे पाकर धन्य होगइ.. मेतो उपर वालेसे यही प्रार्थना करती हु.. की अब मुजे हर जन्ममे तुही पतीके रुपमे मीले.. बीटु.. मे भी तेरी अ‍ेक नीशानी चाहती हु.. मे तेरे बच्चेकी मां बनुगी.. मे जब कहु.. तब मुजे भी प्रेगनेन्ट करदेना.. अब वो दिन दुर नही तेरी दोनो बीवीया तेरे साथ तेरे बीस्तरमे साथ होगी..

दोनोही प्यार भरी बाते करते चुदाइ करते रहे.. इस बारभी श्रीधरने ब्रीन्दाको दो दो बार जडाके उनकी चुतको अपने पानीसे लबालब भर दीया.. तब ब्रीन्दाकी चुतसे दोनोका कामरस बहार नीकलने लगा.. आज श्रीधरने ब्रीन्दाको पुरी तराह तृप्त करदीया था.. दोनो साम चार बजे तब चुदाइ करते रहे.. फीर दोनो साथमे नहाने चले गये.. तो वहा भी श्रीधरने अ‍ेक बार ब्रीन्दाको खडे खडे पीछेसे चोद लीया..

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तब ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर दोनो नहाकर बहार आगये ओर अपने अपने कपडे पहेनकर रेडी हो गये.. तब ब्रीन्दा अ‍ेक बार फीर श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तब ब्रीन्दा श्रीधरको जल्द वापस मीलनेको कहेकर अपने रुममे चली गइ.. तब श्रीधर अपने बेडकी चदरको बदलकर सही कर देता हे.. ताकी जयश्रीको कोइ सक नाहो..
 
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