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फीरोज : (आस्चर्यसे देखते) साहील बेटा.. मे तेरे जजबातोको समजता हु.. तुमने जोसमे आकर बहुत बडी बात कहेदी.. लेकीन तुजे पता हे सबानाकी पढाइमे कीतना खर्चा हे..? ये अेकही सालमे बाराह से तेरा लाख रुपयेका खर्चा हे.. जो अगले महिने ही देने हे.. इतनी बडी रकम तुम हमारी थोडी सी खेतीसे कहासे नीकालोगे..? मुजे भी पता हे इतनीसी खेतीमे तुम अपना खर्चा भी मुस्कीलसे नीकालते होगे..
साहील : (मुस्कुराते) चाचा.. मे जोसमे आकर नही.. ये बात मे होंसमे रहेकर बोल रहा हु.. जब अब्बा गुजर गयेनां.. तब मे खेतीके बारेमे इतना नही जानता था.. हमारे पास जोभी जमीन थी.. उसीमे महेनत करने लगा.. इसके लीये लखन भैयाके बडे भाइ यानीकी हमारे बडे ठाकुर साहबने मेरी बहुत मददकी..
सब उन्हीकी सलाहके अनुसार मे काम करता गया.. की कब कोनसी फसल उगानी हे.. ओर कब बेचनी हे.. मे हमारी सारी फसल उनकोही बेचता हु.. ओर जोभी पैसा आता था.. उनमेसे खर्चा नीकालकर आधा आधा अलग रख देता था..
सलमा : (मुस्कुराते) हां देवरजी.. मेरा साहील कहेताथा.. की इन जमीनमे चाचुकाभी बरोबरका हीस्सा हे.. तो आधा पैसा चाचाका हे.. वो आधा पैसा नीकालकर अलगसे जमा करता था.. कहेताथा चाचाका पैसा हमारे पास अेकठा करेगे.. जब कादीरभाइ या सायरा दीदीकी सादी होगी तब हम इन पैसोको चाचाको दे देगे.. ताकी उनको बहारसे कभी कर्जा ना लेना पडे.. इसीलीये आपका हीस्सा अलग रखता हे..
साहील : (मुस्कुराते) हां चाचु.. लेकीन देखो.. उपरवालेको कुछ ओर ही मंजुर था.. अब इन पैसोसे आप सबाना दीदीको पढा सकते हो.. मे यहा पैसा लेकर ही आया हु..
फीरोज : (इमोस्नल होते आंसु बहाते) मेरा साहील बेटा कीतना समजदार हे.. बेटा.. तुमने मेरे बारेमे इतना सोचा वोही मेरे लीये काफी हे.. मेतो वो जमीन भुल ही चुका हु.. फीर भी इतनीसी जमीनमे तुमने कीतना पैसा जमा कीया होगा..? मुस्कीलसे तेरे घरका खर्चा भी सायद नीकलता होगा.. बेटा.. बाराह लाख रुपीये कोइ छोटी मोटी रकम नही हे..
साहील : (मुस्कुराते) चाचु.. मे सब हीसाब करके लाया हु.. अभी तक ये चार सालके आपके हीस्सेका मेरे पास तकरीबन साडे आठ लाख रुपीये पडे हे.. ओर मेरे हीस्सेमे घरका खर्चा नीकालते भी साडे चार लाख रुपीये जमा कीये हे.. अभी मेने मेरे लीये धानका बीज ओर दुसरे खर्चेके लीये अेक लाख रुपीये रखे हे.. तो ये लीजीये अभी बाराह लाख रुपये लेकर ही आया हु.. आप भरदीजीये सबाना दीदीकी फीस..
कहेते साहीलने सलमाके पास रखे बाराह लाख रुपीये लेकर फीरोजके हाथोमे थमा दीया.. तब फीरोज अपना चहेरा होथोमे छुपाते फुटफुटके रोने लगा.. तो जरीना ओर सबाना मुह फाडते आस्चर्यसे साहीलकी ओर देखते रहे.. तीनोकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. फीरोज खडा होकर साहीलको जोरोसे अपने गले लगा लेता हे.. ओर रोने लगता हे.. तब जरीना भी खुसीके मारे रोने लगी.. तो सबाना भी खुसीके मारे सलमाको लीपटकर रोये ही जा रही थी..
तब सलमा साहील ओर लखन तीनोको खुस देखकर हसते रहे.. तभी लखन खडा होकर फीरोजको सम्हालता हे.. ओर उसे सोफेपे बीठाकर कीचनमे चला गया.. ओर तीनोके लीये पानी लेकर आया.. ओर सबको पानी पीलाया.. तब जरीना ओर सबाना बहुत ही सर्मन्दा हो गइ.. ओर सबाना फटाफट अपने आंसु पोछते मुस्कुराने लगी.. ओर खाली ग्लास लेकर कीचनमे चली गइ.. ओर रखकर वापस आकर सलमाके पास बैठ गइ.. तब फीरोज ओर जरीना भी अपने आंसु पोछते मुस्कुराने लगे.. ओर सब लोग वापस सोफेपे बैठ गये.. तभी..
साहील : (मुस्कुराते) चाचा.. मे जोसमे आकर नही.. ये बात मे होंसमे रहेकर बोल रहा हु.. जब अब्बा गुजर गयेनां.. तब मे खेतीके बारेमे इतना नही जानता था.. हमारे पास जोभी जमीन थी.. उसीमे महेनत करने लगा.. इसके लीये लखन भैयाके बडे भाइ यानीकी हमारे बडे ठाकुर साहबने मेरी बहुत मददकी..
सब उन्हीकी सलाहके अनुसार मे काम करता गया.. की कब कोनसी फसल उगानी हे.. ओर कब बेचनी हे.. मे हमारी सारी फसल उनकोही बेचता हु.. ओर जोभी पैसा आता था.. उनमेसे खर्चा नीकालकर आधा आधा अलग रख देता था..
सलमा : (मुस्कुराते) हां देवरजी.. मेरा साहील कहेताथा.. की इन जमीनमे चाचुकाभी बरोबरका हीस्सा हे.. तो आधा पैसा चाचाका हे.. वो आधा पैसा नीकालकर अलगसे जमा करता था.. कहेताथा चाचाका पैसा हमारे पास अेकठा करेगे.. जब कादीरभाइ या सायरा दीदीकी सादी होगी तब हम इन पैसोको चाचाको दे देगे.. ताकी उनको बहारसे कभी कर्जा ना लेना पडे.. इसीलीये आपका हीस्सा अलग रखता हे..
साहील : (मुस्कुराते) हां चाचु.. लेकीन देखो.. उपरवालेको कुछ ओर ही मंजुर था.. अब इन पैसोसे आप सबाना दीदीको पढा सकते हो.. मे यहा पैसा लेकर ही आया हु..
फीरोज : (इमोस्नल होते आंसु बहाते) मेरा साहील बेटा कीतना समजदार हे.. बेटा.. तुमने मेरे बारेमे इतना सोचा वोही मेरे लीये काफी हे.. मेतो वो जमीन भुल ही चुका हु.. फीर भी इतनीसी जमीनमे तुमने कीतना पैसा जमा कीया होगा..? मुस्कीलसे तेरे घरका खर्चा भी सायद नीकलता होगा.. बेटा.. बाराह लाख रुपीये कोइ छोटी मोटी रकम नही हे..
साहील : (मुस्कुराते) चाचु.. मे सब हीसाब करके लाया हु.. अभी तक ये चार सालके आपके हीस्सेका मेरे पास तकरीबन साडे आठ लाख रुपीये पडे हे.. ओर मेरे हीस्सेमे घरका खर्चा नीकालते भी साडे चार लाख रुपीये जमा कीये हे.. अभी मेने मेरे लीये धानका बीज ओर दुसरे खर्चेके लीये अेक लाख रुपीये रखे हे.. तो ये लीजीये अभी बाराह लाख रुपये लेकर ही आया हु.. आप भरदीजीये सबाना दीदीकी फीस..
कहेते साहीलने सलमाके पास रखे बाराह लाख रुपीये लेकर फीरोजके हाथोमे थमा दीया.. तब फीरोज अपना चहेरा होथोमे छुपाते फुटफुटके रोने लगा.. तो जरीना ओर सबाना मुह फाडते आस्चर्यसे साहीलकी ओर देखते रहे.. तीनोकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. फीरोज खडा होकर साहीलको जोरोसे अपने गले लगा लेता हे.. ओर रोने लगता हे.. तब जरीना भी खुसीके मारे रोने लगी.. तो सबाना भी खुसीके मारे सलमाको लीपटकर रोये ही जा रही थी..
तब सलमा साहील ओर लखन तीनोको खुस देखकर हसते रहे.. तभी लखन खडा होकर फीरोजको सम्हालता हे.. ओर उसे सोफेपे बीठाकर कीचनमे चला गया.. ओर तीनोके लीये पानी लेकर आया.. ओर सबको पानी पीलाया.. तब जरीना ओर सबाना बहुत ही सर्मन्दा हो गइ.. ओर सबाना फटाफट अपने आंसु पोछते मुस्कुराने लगी.. ओर खाली ग्लास लेकर कीचनमे चली गइ.. ओर रखकर वापस आकर सलमाके पास बैठ गइ.. तब फीरोज ओर जरीना भी अपने आंसु पोछते मुस्कुराने लगे.. ओर सब लोग वापस सोफेपे बैठ गये.. तभी..