Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 56 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लखन : (कामुक नजरोसे देखते) लता.. आज तुम बहुत खुबसुरत लग रही हो.. जी करपा हे कीसी होटेल मे लेजाकर तुजे प्यार करलु..

लता : (सरमाकर हसते) लखन.. आप भीनां.. आपको हर वक्त यही सुजता हे.. अरे बाबा मेरा पीरीयड चल रहा हे.. जब पीरीयड होता हेना.. तब सभी ओरते अ‍ैसे ही दीखती हे.. ओर सुनो.. क्या आपकी बडी दीदीसे.. आइ मीन.. भाभीसे कोइ बात हुइ हे..?

लखन : (सामने देखते थोडा अन्जान बनते) बडी दीदी..? मतलब भाभीके साथ..? कीस बारेमे..? भाभीको बडी दीदी क्यु कहा..?

लता : (थोडा मजा लेते) कुछ नही..बस.. अ‍ैसेही मुहसे नीकल गया.. क्या सच केह रहे होनां..? आपकी इनसे कोइ बात नही हुइ..?

लखन : (थोडा जुठ बोलकर मजा लेते) अरे नही बाबा.. मे सच केह रहा हु.. बताना वो मुजसे क्या बात करने वाली थी..? मुजे तो कुछ भी पता नही हे.. हें..हें..हें..

लता : (मनमे) कीतने कमीने हे.. मुजसे जुठ बोल रहे हे.. ताकी सब बाते मेरे मुहसे उगलवा सके...

लखन : (मुस्कुराते) ओ लता.. क्या सोच रही हे..? बताना भाभी मुजसे क्या बात करने वाली थी..

लता : (थोडी नीरास होते) कुछ नही.. जब वो आपको मीलेगी तब आपसे कुछ बाते करेगी.. आप उनकी बाते गौरसे सुनना.. सायद बडे भैयाने ओर भाभीने मीलकर हम सबके बारेमे कुछ बडा फैसला लीया हे..

लखन : (अनजान बनकर देखते) हम सबके बारेमे..? बता मुजे.. क्या इस बारेमे तुजे कुछ मालुम हे..?

लता : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. बस.. इधर आ रहेथे.. तब भावना दीदी मुजसे पुछ रही थी.. की मंजुदीदीने लखन भैयासे कोइ बात की हे या नही.. मैने भी उनको पुछा.. तो उनको भी कुछ मालुम नही हे..

लखन : (थोडा लताको परेसान करते) यार तुम ओरते आधी बात करके हमे बहुत परेसान करती हो.. ठीक हे.. मे भाभीमांसे ही पुछ लुगा.. क्युकी अ‍ेक हप्तेके बाद हमे श्रीधर की सादीमे जाना पडेगा..

लता : (मुस्कुराते थोडा जुठ बोलते) ठीक हे.. आज मुजे भी दीदीसे बात करनी हे.. आइ मीन भाभीसे.. दो पहोरको या सामको फुरसतमे बात कर लुगी.. जानु.. क्या मुजे मेरी नइ सौतनसे नही मीलवाओगे..? हंम..? उनको भी खानेपे बुलालोनां.. आज हमारा यहा पहेला दिन हे..

लखन : नही लता.. अभी नही बुला सकता.. क्युकी उनके घरपे सीर्फ उनकी बुढी मां ही हे.. जो वो भी बिस्तरमे पडी हे.. क्युकी उनको पेरेलीसीस हे.. राधीका नाम हे उनका.. जो अ‍ेक त्यक्ता थी.. राधुको अपनी मां को खीलाना पडता हे.. उनका सबकुछ करना पडता हे.. बाकी उनके परीवारमे अब कोइ नही हे.. जब रमा भाभी चली जायेगी.. तब अ‍ेक दिन उनको घरपे लेकर आउगा.. तब मील लेना उनको..

लता : (आस्चर्यसे देखते) लखन.. क्या तो वो हमारे साथ नही रहे सकती..?

लखन : (मुस्कुराते) नही लता.. उनको पता हे की तुम मेरी बीवी हो.. लेकीन वो हमपे कोइ बोज बनना नही चाहती.. उनको तो सीर्फ हमारा प्यार ही चाहीये.. बाकी उनका अ‍ेक छोटासा घर हे.. उनका अच्छा खासा होस्टेल चल रहा हे.. हमारी नीलु भी तो वही थी.. ओर हमने हाल हीमे गांधर्व विवाह कीया हे.. इस बारेमे अभी सीर्फ पुनोदीदी ही जानती हे..

लता : (हसते) क्या अब उनको भाभी कहेना छोडदीया..? वो आपकी भाभी भी तो हे.. हें..हें..हें..

लखन : (थोडा सीरीयस होते) नही लता.. अब वो मेरी भाभी नही हे.. सीर्फ बहेन हे.. ओर जीतनी भी बहेने हे.. वो सीर्फ हमारे बडे भाइको ही चाहती हे.. ओर उनके साथ ही सादी करती हे.. या उनसे सादी करना चाहती हे.. यहा तो छोटे भाइकी कोइ अ‍ेहमीयत ही नही हे..

लता : (अ‍ेक नजरसे देखते) लखन.. आप अ‍ैसा क्यु सोचते हो..? क्या आपको पता हे मे आपकी कौन लगती हु..? हंम..?

लखन : (अ‍ेक बार सामने देखते) हां.. सब पता हे मुजे.. तुजे सब पुनो दीदीने बताया हे.. लेकीन तुम मुजे बताना नही चाहती थी.. मुजे पता हे तुम भी मेरी बहेन हो.. हमारे बापु अ‍ेक ही हे.. यहीना..?

लता : (सामने देखते) हां.. भलेही मे आपकी सौतेली बहेन हु.. लेकीन हुतो आपकी बहेन ही.. क्या मैने आपसे प्यार नही कीया..? आपसे सादी नही की..? तो फीर अ‍ैसा क्यु सोचते हे..? मुजे पता हे आप पढते थे तब पुनो दीदीको चाहते थे.. लेकीन हमारी कीस्मतमे जो लडकी या लडका लीखा होता हे.. वो ही हमे मीलते हे.. सबकी अपनी अपनी कीस्मत हे.. आप अ‍ैसे नीरास मत होइअ‍े..

लखन : (आंख गीली करते) लता.. बुरा मत मानना.. मुजे सच बताना.. क्या तुमने भी मुजे धोखा नही दिया..? तुम भी बडे भैयाको नही चाहती..? हंम..? मुजे पता हे.. तुमने मुजसे सादी सीर्फ बडे भाइको पानेके लीये ही की हे.. क्या ये सच हेनां..?

लता : (सामने देखते आंसु बहाते) लखन.. आपको सब कैसे पता..? पहेले आप मेरी कसम खाइअ‍े.. क्या मंजु भाभीसे आपकी सब बाते होगइ हेनां..?

लखन : (सामने देखते) हां लता.. लेकीन मे तुम्हारी कसम नही खा सकता.. कल रात ही सब बाते हुइ..

लता : (आंसु पोछकर जुठे गसे से मुका मारते) कमीने.. तो फीर अब तक मेरे साथ नाटक क्यु कर रहे थे..? अभी क्यु केह रहेथे.. की भाभीसे कोइ बात नही हुइ.. लखन.. आप बहुत कमीने हो.. जाओ मुजसे बात मत करो..

लखन : (मुस्कुराते) अरे तुमतो नाराज होगइ.. हें..हें..हें.. हां लता.. भाभीमां ने कल रात मुजे सब कुछ बता दीया हे.. लता.. मे पुनोका प्यारभी नही पा सका.. वो भी बडे भाइको प्यार करती थी.. ओर तुमने भी भाइको पानेके लीये मेरा इस्तेमाल कीया.. क्या ये सच नही हे..?

कहातो लता नजरे जुकाते फीरसे आंसु बहाने लगी.. अचानक लखनने पुछे सवालका लताके पास कोइ जवाब नही था.. ओर वो जुठ बोलना नही चाहती थी.. बस.. सर जुकाये आंसु बहाती रही.. आज लखनके साथ चलते वो बुरी तराह फस चुकी थी.. तभी लखनने अ‍ेक सुमसान जगहपे अपनी कारको रोक लीया.. ओर लताको बैठे बेठे ही हग करलीया.. तब लता उनके कंधेपे सर रखके जोरोसे रोने लगी.. तो लखनने उनको सांत कीया ओर उनके आंसु पोछे.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०७

कहातो लता नजरे जुकाते फीरसे आंसु बहाने लगी.. अचानक लखनने पुछे सवालका लताके पास कोइ जवाब नही था.. ओर वो जुठ बोलना नही चाहती थी.. बस.. सर जुकाये आंसु बहाती रही.. आज लखनके साथ चलते वो बुरी तराह फस चुकी थी.. तभी लखनने अ‍ेक सुमसान जगहपे अपनी कारको रोक लीया.. ओर लताको बैठे बेठे ही हग करलीया.. तब लता उनके कंधेपे सर रखके जोरोसे रोने लगी.. तो लखनने उनको सांत कीया ओर उनके आंसु पोछे.. तभी.... अब अगे

लता : (रोते) लखन.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने ये बात आपसे छुपाइ.. मे भाइको सुरुसे ही पसंद करती थी.. लेकीन उनकी इतनी सादीया होगइ थी.. तो मेने सोचा अब भाइ मुजसे सादी नही करेगे.. तो मेने आपके साथ सादीका फैसला करलीया.. ओर सच कहु..? हमारी सगाइके बाद जब हमने पहेली बार मीलन कीया.. तबसे मे आपको भी प्यार करने लगी हु.. ओर मेरा यकीन मानो.. ये बात सच हे.. मे आपसे प्यार करती हु..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. आंसु मत बहाओ.. मे जानता हु.. ओर मे इसे गलत भी नही मानता.. मुजे भाभीमांने सबकुछ बता दीया हे.. ओर सच कहु..? तो मे आज भी तुम दोनोसे इतना प्यार करता हु.. जीतना पहेले करता था.. लेकीन क्या करु..? मेरी किस्मत ही खराब हे.. मेरे नसीबमे बहेनोका प्यार लीखा ही नही हे..

लता : (अ‍ेक बार सामने देखकर सर जुकाते) नही लखन.. आप दिल छोटा मत कीजीये.. आपकी किस्मतमे भी बहेनोका प्यार लीखा हे.. लखन.. आइ अ‍ेम सोरी.. लेकीन मेरा यकीन मानो.. मे आपसे आज भी उतना ही प्यार करती हु.. मे कीसीको खोना नही चाहती.. ना आपको.. नां.. भाइको..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. जैसे तुमने रजीया ओर राधुके बारेमे जानकर सब मेरे लीये खुसी खुसीसे स्वीकार कर लीया.. उसी तराह मेने भी तेरे बारेमे ओर भाइके बारेमे जानकर सब खुसीसे स्वीकार करलीया हे.. तो तुम सोरी मत बोलो.. बस.. भाभीमां ने मुजे कुछ जीम्वेवारी दीहे.. अब उसीको नीभाना हे..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. मतलब अब अपनी सभी बहेनोका प्यार चाहीये आपको.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? तुजे कोइ अ‍ेतराज हे..? तो अभी बतादे.. मे भाभीमाको मना कर दुगा..

लता : (सरमाकर सामने देखते) हां.. अब उसीकी डांट खीलवाओगे मुजे.. अब आपके कीसी भी रीलेशनसे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. लखन.. आइ लव यु.. अब आपने सब स्वीकार कर ही लीया हे.. तो अ‍ेक बात बता दीजीये.. आपने पुनो दीदीसे अपने प्यारका इजहार क्यु नही कीया..? अगर अ‍ेक बार अपने दिलकी बात उनको बता देते.. तो सायद आज वो धिरेनके बजाये आपकी बीवी होती.. वो आपसे सादी करनेके लीये बील कुल रेडी थी.. अब कारको जाने दीजीये.. लेट हो रहा हे..

लखन : (कार चलाते मुस्कुराते) लता.. तुजे कैसे पता वो मुजसे सादीके लीये रेडी थी..? बतानां..

लता : (सरमाते हसते) हंम.. अ‍ेक तो खुद पुनो दीदीने बताया मुजे.. क्युकी वो खुद धिरेनको पसंद नही करती थी.. उसे बाबाके कहेने पे धिरेनसे सादी करनी पडी.. ओर दुसरा भावना दीदीने मुजे कहा.. की पुनोदीदी धिरेनके बजाये आपसे सादी करना पसंद करती.. जानु.. फीकर मत करोे अब तो मंजुभाभीने सब परमीशन देदी हे.. तो अब आप पुनोदीदीका प्यार भी पा सकते हो.. क्युकी अब आगे सीर्फ हम पांचोको ही सब कुछ सम्हालना हे.. पुनो दीदीका प्यार पानेमे मे आपकी मदद करुगी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) थेन्क्स लता.. लेकीन भाभीमां ने सब छुट लेली हे.. तो इसका मतलब भी जानती होनां.. की आगे क्या होने वाला हे.. हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते बाजुमे मुका मारते) हटो बदमास.. मे इतनी भोली भी नही हु.. की इन सबका मतलब नही जानती.. लखन.. मतलब अब हमारे खानदानके कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. अब हमारे घरमे सीर्फ अ‍ेक ही रीस्ता होगा.. अ‍ेक ओरत.. ओर अ‍ेक मर्दका.. जो अपनी मर्जीसे जीसे चाहे प्यार कर सकता हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तुम सबकुछ समज गइ.. चल ठीक हे.. आगे देखा जायेगा.. चल आगया मार्केट.. तुजे जो भी चाहीये लेले.. तबतक मे दुध लेकर आता हु..

लता : (जीपसे उतरते सरमाकर धीरेसे) लखन.. मे उस दिनका इन्तजार करुगी.. जीस दिन हम दोनो बहेने आपके साथ अ‍ेक ही बीस्तमे होगी.. हें..हें..हें..

लखन : (अ‍ेक नजरसे लताको देखते) लता.. सायद अब ये पोसीबल नही हे.. चल मार्केट आ गया..

लता : (लखनकी ओर देखते साथ चलते मनमे) लखन.. अभी आपने मुजे पहेचाना ही नही.. आइ प्रोमीस.. देखना अ‍ेक दिन मे खुद पुनो दीदीको आपके बीस्तरमे लेकर आउगी..

आखीर दोनो बाते करते मार्केटमे आगये.. तो लखनने अ‍ेक जगाहपे अपनी जीपको पार्कींगपे रख दीया ओर दुध लेने चला गया.. तो लता भी सब्जीया ओर कुछ दुसरी चीजे खरीदने लगी.. आखीर लखन सहेरमे रहेनेके लीये आही गया.. ओर लतासे बहुत सारी बाते भी होगइ.. फीर दोनोही खरीदी करके वापस अपने बंगलेकी ओर चल पडे.. तब लताके पास बहुत सारा सामान था.. तभी लखनके फोनकी रींग बज उठी.. देखा तो बंसीका फोन था.. ओर उसने फौरन फोन उठालीया..

लखन : (धीरेसे) हां बंसी.. बोल.., हां.. हां.. सुन.. मे अभी तेरी भाभीको घरपे छोडकर आता हु.. तु वही रहेना..

लता : (फोन कट होते ही सामने देखकर) जानु.. कीसका फोन था..? आप इतने गभराये हुअ‍े क्यु हे..?

लखन : (थोडा परेसान होते) लता.. बंसीका फोन था.. वो सामतभाइको लेकर यहा होस्पीटल आया हे.. तो मुजे जाना होगा.. वो वहा अकेला हे.. अगर मुजे आनेमे देर होजाये तो तुम सब लोग खाना खा लेना..

लता : (गंभीर होते) ठीक हेजी.. आप जल्दीसे आजाइअ‍ेगा.. भाइ भी खाना खाने घरपे आ रहे हे..

लखन : (कारको घरकी ओर दोडाते) नही लता.. बंसीकी बातोसे लगा बात थोडी सीरीयस हे.. तो सायद भाइको भी गांव आना पडेगा.. तु साज गइनां..?

तो दुसरी ओर सृती भी देवायतको लेकर क्लीनीकपे चली गइ थी.. तब इतने दिनोसे वो क्लीनीकपे नही आइ थी.. तो आज पेसन्टभी कुछ ज्यादा थे.. तो सृती देवायतकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तो देवायत समज गया.. ओर वो सृतीको दो पहोरको लेने आउगा.. कहेकर अपने कुछ खास व्यापारीयोको मीलने चला गया.. ओर सबको यहा ओफीस खोलनेकी ओर लखनके बारेमे जानकीया देने लगा..
 
तो गांवमे कल रातको लखन सभी दोस्तोको खाने पीनेकी पार्टी दी थी.. तो सभी दोस्तो सुबह देर तक सोते रहे.. तब सामतभाइके घरपे सांती ओर जागृतीने सुबह जल्दी जागकर घरका सभी काम नीपटा लीया.. तब तक सामतभइ भी कंपलीट होकर अखबार पढ रहे थे.. तो जया सबके लीये चाइ नास्ता बना रही थी.. तो जागृती भी नहाने चली गइ थी.. ओर सांती जयाका हाथ बटा रही थी.. तभी..

जया : (धीरेसे) सांती बेटा.. आज रातको तेरे ससुरको खुनकी उल्टीया कुछ ज्यादा ही हुइ थी.. तो मैने उसे बंसीको जगानेको कहा.. तो मुजे कसम देकर बंसीको जगानेसे रोक लीया.. ओर नही जगाने दीया.. अब बंसी उठजाये तो उसे कहेना तेरे बापुको लेकर सहेर चला जाये.. ओर जरा होस्पीटलपे दीखाकर आये..

सांती : (थोडी चीन्तासे) मम्मी.. क्या भाभइकी.. सोरी.. आइ मीन्स.. क्या पापाकी तबीयत कुछ ज्यादा ही खराब हे..? तो मे अभी आपके बेटेको जगाती हु.. आज लखन भैया सहेर चले गये.. तो कल सभी दोस्तोने पार्टी रखी थी.. तो वो देरसे आये..

जया : (चीन्तासे) हां बेटा जा.. जगादे उसे.. उनको अपने बापुको लेकर सहेरमे ही जाना पडेगा..

कहातो सांतीने बंसीको जगा दीया.. ओर सामतभाइको लेकर होस्पीटल जानेके लीये कहा.. तो बंसी भी थोडा गभराते जल्दीसे उठ गया ओर फटाफट नहाकर कंपलीट हो गया.. फीर बहार आया तो चाइ नास्ता रेडी था.. तब सबलोग अ‍ेक साथ चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब बंसी सांती ओर जया बार बार सामनतभाइकी ओर देख रहे थे.. कीसीको उनको कुछ पुछनेकी हिंमत नही हो रही थी.. तभी..

जया : (धीरेसे) अ‍ेजी.. सुनीये.. आप चाइ नास्ता करके बंसीके साथ सहेर चले जाइअ‍े.. ओर आपके वो डोक्टरको दीखाकर आइअ‍े.. जीनसे आपका इलाज चल रहा हे.. वरना आपकी तबीयत ज्यादा बीगड जायेगी..

सामत : (थोडा जोरोसे) अरे मुजे कुछ नही हुआ.. बच्चेको क्यु परेसान कर रही हो..?

सांती : (आंग गीली करते) पापा.. क्या आप अपनी बेटीकी बात नही मानोगे..? जाइअ‍ेनां अ‍ेक बार दीखाकर आजाइअ‍े.. आपको मेरी कसम..

सामत : (थोडा सांत होते) लेकीन सांती बेटा.. कसम मत दे मुजे.. मुजे कुछ हुआ ही नही.. तो फीर क्यु खामखा जाना..?

बंसी : (मुस्कुराते) पापा.. चलीयेनां.. वैसे भी लखन भैया वहा रहेने चले गये होगे.. तो हम उसे मीलकर आजायेगे.. ओर डोक्टरको भी दीखा देगे.. आप रेडी रहो.. हम बाइकमे ही चले जायेगे..

सामत : (मुस्कुराते) हंम.. तुम लोग मानोगे नही.. ठीक हे.. पहेले ठीकसे चाइ नास्ता तो करले..

जब सबने चाइ नास्ता करलीया तो जया सामतभाइको उनकी मेडीकलकी फाइल देने लगी.. तभी सांती ओर जागृती सामतभाइकी ओर आंख गली करते देख रही थी.. तब कीसीको नही पता थाकी तीनो सामत भाइको आखरी बार देख रही हे.. बंसी सामतभाइको अपनी बाइकमे पीछे बीठाकर सहेरकी ओर नीकल गया.. तब बीच रास्ते मे ही सामतभाइ जोरोसे खांसने लगे.. तो बंसीने अपना स्कुटर स्पीडमे चलाया..

ओर आधे पोने घंटेमे ही होस्पीटल पहोंच गया.. तो वहा भी दो तीन पेसन्ट बैठे थे.. तब बंसीने सामत भाइकी फाइल काउन्टरपे रखदी.. ओर सामतभाइकी अ‍ेपोइटमेन्ट लेली.. ओर सामतभाइके साथ बैठ गया.. तब कुछ देरके बाद उनकी बारी आइ तो दोनो अंदर चले गये.. ओर डोक्टर सामतभाइको पहेचान गये.. ओर उनकी फाइलको देख लीया.. तब सामतभाइने आज उनको खुनकी उल्टीया होनेकी बात की.. तभी..

डोक्टर : सामत भाइ.. ये आपके साथ कौन हे..?

सामत : (सामने देखते) जी.. जी वो मेरा बेटा हे..

डोक्टर : तो क्या उसे सब पता हे..? आपने उसे कुछ बताया हे..?

बंसी : (थोडा वीचलीत होते सामने देखकर) डोक्टर साहेब.. प्लीज मुते बताइअ‍ेना.. आप दोनो क्या बाते कर रहे हो.. मुजेतो कुछ पता ही नही हे.. पापाने मुजे कुछ नही बताया..

सामत : बंसी बेटा तुम जाकर बहार बैठो.. मे डोक्टर साहबसे बात करके आता हु.. मुजे कुछ नही हुआ हे..

डोक्टर : (आस्चर्यसे देखते) सामत भाइ.. आप इतनी बडी बात अपने बेटेसे छुपा रहे हो..? अगर कही रास्तेमे आपको कुछ हो गया तो..? हंम..? ये तो गलत हे..

बंसी : पापा प्लीज.. मुजे यहा बैठने दीजीये.. डोक्टर साहेब.. आप मुजे बताइअ‍ेना पापाको क्या हुआ हे..?

डोक्टर : बंसी.. क्या यही नाम हेनां आपका..?

बंसी : जी..

डोक्टर : देखो बंसी.. आपके पापाको पीछले अ‍ेक सालसे बल्ड केन्शर हे.. ओर अभी लास्ट स्टेजमे हे.. तो मैने उनको १५ दिन पहेलेही बता दीया था.. की जब खुनकी उल्टीया होने लगे.. तब कभी भी कुछ भी हो सकता हे.. आप समज गयेनां..?

बंसी : (आंग गीली करते गीडगीडाते) डोक्टर साहेब.. तो फीर इनका इलाज कीजीयेनां.. जीतना भी खर्चा होगा मे देनेके लीये तैयार हु.. आप कैसे भी करके पापाको बचा लीजीये.. पैसोके पीछे मत देखीये..

डोक्टर : बंसी.. अब खर्चा करनेसे कोइ फायदा नही.. अगर पैसोसे इलाज होता तो मैने कभीका करदीया होता.. हमारे मेडीकलसे हीसाबसे इनको जीतनी भी ट्रीटमेन्ट देनी थी.. सब देदी.. अब इनसे आगे कोइ ट्रीटमेन्ट बाकी नही हे..

सामत : (बंसीके सरपे हाथ घुमाते) बेटा.. सांत होजा.. रो मते.. इसका इलाज कीसीका हुआ हे..? जो मेरा होगा.. इसीलीये तो मेने तुम्हारी सादी जल्दीसे करवादी.. बस.. अब मेरी बरखाका देखना.. उनको कोइ तकलीफ ना हो.. ओर मुजे वचन दे.. अगर जया कही सादी करना चाहे.. तो तुम उसे कुछ नही कहोगे..

बंसी : (आंसु बहाते) पापा.. आप बरखाकी चीन्ता मत करना.. उसे मे सारी जींदगी सम्हालके खयाल रखुगा.. ओर वचन देता हु.. मे मम्मीको भी कुछ नही कहुगा.. आइ प्रोमीस..

डोक्टर : (दवाइ लीखते) बंसी.. अ‍ेक गोली लीख देता हु.. अगर कुछ उल्टी जैसा लगे तो सामतभाइको खीला देना.. बाकी घर जाकर इनकी सेवा करो..

बंसी : (आंसु पोछते खडा होकर) डोक्टरसाहेब.. आपकी फीस..

डोक्टर : (सामने देखकर मुस्कुराते) नही.. कोइ फीस नही चाहीये.. ओके..? ये लीजीये.. बहारसे मेडीकल स्टोरपे दवाइ मील जायेगी..

कहातो बंसी परची लेकर सामतभाइके साथ बहार नीकल गया.. ओर सामत भाइको वही बीठाकर बहार बाजुके मेडीकल स्टोरपे चला गया.. तो वहा भी थोडी भीड थी.. तब बंसी परची लेकर अपनी बारीका इन्तजार करते वही खडा रहा.. ओर फोन लगाकर लखनसे बात करने लगा.. तो कुछ ही देरमे होस्पीटलमे चहेल पहेल दीखने लगी.. तो बंसी मुडकर होस्पीटलकी ओर देखने लगा.. तो कुछ लोग दोडकर अंदर जा रहे थे.. तो कुछ लोग जटसे बहार नीकल रहे थे..
 
तभी उनके दरवाजेपे रीसेपनीस्ट दीखाइ दी.. जो कीसीको ढुंढ ते इधर उधर देख रही थी.. तो बंसीको कुछ आसंकाअ‍े होने लगी.. तो वो होस्पीटलकी ओर जाने लगा.. तभी रीसेपनीस्टने उनको देख लीया ओर हाथ हीलाकर बंसीको जटसे आनेके लीये कहेने लगी.. तब बंसी दोडता हुआ होस्पीटलकी ओर चलाते जटसे अंदर चला गया.. तो यहा उनके पापाके पास बहुत सारे लोग जमा हो गये थे.. तभी..

बंसी : (थोडा जोरोसे) अरे हटो.. क्या हुआ..? मेरे पापा हे.. पापा.. पापा..

तो लोग बंसीकी ओर देखते साइडमे हटने लगे.. तो बंसीने आकर देखा तो सामतभाइको खुनकी उल्टीया हुइ थी.. ओर वो नीचे फर्सपे लेटे हुअ‍े थे.. ओर डोक्टर वही उनको सीनेपे हाथ रखकर पंपीग कर रहे थे.. लेकीन सामत भाइ तो अ‍ैसेही लेटे रहे.. तब कुछ देरके बाद डोक्टरने उनके हाथकी नब्सको पकडकर चेक कीया.. ओर खडे हो गये.. ओर नर्सको सामतभाइके उपर अ‍ेक चदर डालनेको कहा.. ओर बंसीको देखते ही उनके पास आगये..

डोक्टर : (कंधेपे हाथ रखते) बेटा.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे नही बचा सका इनको.. इस बारेमे इनको पहेले ही बता दीया था..

इतना सुनते ही बंसी फुटफुटके रोने लगा.. ओर रोते रोते अपने पापाके पास आकर नीचे बैठ गया.. तब कुछ लोग उनको आस्वासन देकर सम्हालने लगे.. तभी लखन भी माहोल देखकर दोडकर अंदर आगया.. तो बंसी सामतभाइको लीपटकर रो रहा था.. तब लखन उनके पास चला गया.. ओर बंसीको आवाज देकर कंधेपे हाथ रखा.. तो बंसी लखनको देखते ही खडा होगया.. ओर उनसे लीपटकर जोरोसे रोने लगा..

बंसी : (जोरोसे रोते) लखन.. पापा नही रहे..

लखन : (बंसीको सांत करते) बंसी.. क्या कर रहा हे..? सांत होजा.. मे अभी भाइको फोन करता हु.. सम्हाल अपने आपको.. अब तुही टुट जायेगा.. तो घरपे सबको कैसे सम्हालेगा..? सांत होजा..

बंसी : (अपने आंसु पोछते) भाइ.. पापाको ब्लड केन्शर था.. तो घरपे कीसीको बताया भी नही.. वरना हम उनका इलाज करवाते..

लखन : (कंधेपे हाथ रखते) बंसी.. सांत होजा अब मे यहा हुनां.. तु बैठ इधर मे भाइको फोन करता हु.. वो यही सहेरमे ही हे.. ओर सुन.. अभी तुम घरपे फोन कत करना.. वरना वहा सबको सम्हालेगा कौन..?

डोक्टर : मी. बंसी.. प्लीज आप थोडी देर बैठीये मे इनके सब पेपर रेडी करवाकर अभी आपको बुलाता हु..

लखन : सर.. मे इनका दोस्त ही हु.. आप पेपर रेडी करवाइअ‍े मे अभी लेजाता हु..

कहेते लखन फोन लेकर देवायतको फोन लगाता हे.. तब देवायत उनके व्यापारीओके साथ बैठा था.. जैसेही लखनने उसे सब बताया तो वो फौरन वहासे नीकलते होस्पीटलकी ओर नीकल गया.. तो कुछ ही देरमे वो भी होस्पीटल पहोंच गया.. तबतक लखनने सामतभाइके सारे पेपर लेलीये थे.. ओर गांवमे कीसीको ना कहेनेकी सुचना देकर मुना श्रीधर साहीलसे भी बात करली..

फीर उसने लतासे भी बात करके गांव जानेकी ओर देर रात वापस आजानेकी बात करली.. तबतक देवायतने सृतीको बता दीया की सामत भाइकी बोडीको लेकर वो गांव जा रहा हे.. फीर उसने मंजुको भी सामत भाइके घरपे जाकर सबको सुचना देकर सम्हालनेको कहा.. तभी वहाके स्टाफने भी सामत भाइकी बोडीको भी रेडी करके सोंप दीया.. तब लखन ओर बंसी देवायतके पास आगये.. तभी..

देवायत : लखन.. तुम बंसीके साथ बैठजा.. सामतभाइके लीये मैने अ‍ेम्ब्युलन्सका इन्तजाम करलीया हे.. तुम दोनो उनके साथ ही आजाओ.. मे पीछे कार लेकर आता हु.. तुम अपनी जीपको यही छोडदे.. वहासे तेरे आनेका इन्तजाम होजायेगा..

लखन : (धीरेसे) भाइ.. मे बंसीकी बाइक लेकर साथ ही चलता हु.. दोनो बाइकपे यहा दीखाने आये थे.. तो ये हादसा हो गया.. ओर वो बंसीके घरवालोको अभी इस बातका पता भी नही हे.. अब हम नीकल रहे हे.. तो क्या उनके घरपे खबर करदे..?

देवायत : ठीक हे.. तुम वहाकी फीकर मत करो.. मैने तेरी भाभीको दो तीन लेडीसको लेकर वहा जानेको कहा हे.. वो ही जया भाभीको खबर देदेगी.. ओर उन लोगोको सम्हाल लेगी.. तुम श्रीधर या मुनाको केहकर अर्थीका सामान मंगवाले.. तबतक हम लोग भी पहोंच जायेगे.. (बंसीकी ओर देखते) बंसी.. तु गभराना नही.. मे तेरे साथ हु.. चलो..

तब सब लोगोने सामतभाइकी बोडीको अ‍ेम्ब्युलन्समे रख दीया.. तो उनके साथ बंसी बैठ गया.. तो लखनने बंसीकी बाइक लेली ओर देवायत भी अपनी कार लेकर अ‍ेम्ब्युलन्सके पीछे जाने लगा.. तो अ‍ेक घंटेके बाद वो गांवमे आगये.. तब तक पुरे गांवमे ओर आजु बाजुके गांवमे भी खबर पहोंच चुकी थी.. तो सामतके घरपे बहुत सारे लोग जमा होगये थे.. तब रमेश भी घरमे जया सांती ओर बरखाको सम्हाल रहा था..

फीर सामत भाइकी बोडीको घरमे लाया गया.. तब जया बरखा ओर सांती उनसे लीपटकर बहुत रोइ.. तब ब्रीन्दा मंजु बसंतीने तीनोको सम्हाला.. फीर रमेश ओर कुछ लोगोने मीलकर सामतभाइकी अर्थीको कंपलीट कर दीया.. ओर घरके लोगोने सामतभाइके आखरी दर्शन कीये.. फीर गांवके लोग सामतभाइकी अर्थीको लेकर सम्सानकी ओर नीकल गये.. वहा बंसीने सामतभाइको अग्नीसंस्कार दीया..

फीर तीन चार घंटेके बाद सब लोग वापस घरपे आगये.. ओर गांवके कुछ गीने चुने लोगोको छोडकर बाकी सबलोग अपने अपने घरपे चले गये.. तो दुसरे गांवके सरपंचभी बंसी देवायत ओर रमेशको मीलकर जाने लगे.. आज सामत भाइके जानेकी वजहसे पुरा गांव सोकमग्न हो गया था.. तब सीर्फ अ‍ेक ही सख्स था.. जो सामत भाइके जानेकी वजहसे मन ही मन खुस हो रहा था..

जो उपरसे वो भी दुखी होनेका नाटक कर रहा था.. वो सख्स था रमेश.. जो अब उनके लीये जया भाभी को मीलनेका रास्ता आसान होगया था.. तो वो भी वहा खडे खडे मन ही मन अपने नये संसारको बसानेकी प्लानींग करने लगा.. फीर देवायतने लखन श्रीधर ओर मुनाको कहेकर बंसीके घरपे खानेका इन्तजाम करवाया.. तब मंजु ब्रीन्दा बसंती ओर बींदीया सलमाने मीलकर जया सांती ओर बरखाको समजाकर जबरदस्तीसे खाना खीलाया..

ओर देवायत रमेश के साथ साथ लखनके सभी दोस्तोने भी वही खाना खाया ओर बंसीको भी खीलाया.. फीर देवायतने वहा लखन ओर उनके दोस्तोको कहेकर सामतभाइ की उतर क्रिया तकका इन्तजाम कर दीया.. तो बंसी जल्दसे जल्द सामतभाइका.. कार्य संपन करना चाहता था.. ताकी श्रीधरकी सादीमे कोइ बाधा ना आये.. ओर अ‍ैसेही साम होगइ..
 
तो ब्रीन्दा ओर बसंतीने मीलकर रातके खानेका भी इन्तजाम करदीया.. तो बंसी ओर देवायतको कहेकर लखन सहेरमे अपने घरपे जानेकी बात करके श्रीधरको लेकर नीकल गया..

लखनने बंसीकी बाइक वही छोडदी.. ओर उनको सहेरमे छोडनेके लीये श्रीधरने अपनी बाइक लेली.. ओर लखन श्रीधरके पीछे बैठ गया.. ओर दोनोही बाते करते सहेरकी ओर जा रहे थे.. तब बीचमे ही धिरेनका गांव आ गया.. ओर वही सडकके मोडपे ही धिरेनका घर था.. तो लखनने पीछे बैठे अ‍ेक नजर धिरेनके घरकी ओर डाली.. तो वहा बहारकी ओर दया अपना आंगन जाडुसे साफ कर रही थी..

ओर उनकी नजर भी लखनपे पड गइ.. तो दयाने फौरन लखनको जोरोसे आवाज लगाकर बुलाया.. तबतक लखन वहासे आगे नीकल चुकाथा.. तो दयाकी आवाज सुनकर लखन भी उनकी ओर मुस्कुराते हाथ हीलाकर वहासे आगे चला गया.. तभी दयाकी जोरोकी आवाज सुनकर पुनमभी दोडकर बहार नीकली.. तबतक लखन भी काफी दुर नीकल गया था..

तब उसे सामनेसे धिरेन भी अपनी बाइक लेकर आते दिखाइ दीया.. जो बेन्कसे अपनी नोकरी करके अपने घरकी ओर आ रहाथा.. जैसे ही दोनोकी नजर मीली.. तो धिरेनने लखनको जोरोसे आवाज लगाइ.. तो लखनने श्रीधरको बाइक साइडमे रोकनेके लीये कहा.. तो धिरेन अपनी बाइक मोडकर लखनके पास आ गया.. तब लखनने उनको सामतभाइकी पुरी कहानी बताइ..

फीर धिरेनने लखनको अपने घरपे पुनमको मीलकर जानेके लीये कहा.. तो लखनने लता सृती घरपे अकेली हे.. कहेकर उनकी बातको टाल दीया.. ओर धिरेनको आंख मारके नीलमको मीलनेके लीये कहा.. तो धिरेन सरमाके हसने लगा.. ओर दोनो अपने अपने घरकी ओर नीकल गये.. दोनो होस्पीटलसे अपनी जीप लेकर घरपे पहोंचे.. तो लताने श्रीधरको हसते हुअ‍े आवकार दीया..

ओर उनके लीये चाइ नास्ता बना दीया.. फीर लखन ओर श्रीधरने चाइ नास्ता करते लताको सामतभाइके बारेमे कहा.. फीरे श्रीधर लखनकी इजाजत लेकर वापस गांवकी ओर नीकल गया.. तो अभी तक सृती नही आइ थी.. तो लखनने लताको सृतीको फोन करनेको कहा.. तो लताने सृतीको आपके देवरने टाइमपे आनेको कहा हे.. कहेकर सृतीको फोन कर दीया.. तो सृती भी खुस होकर मुस्कुराने लगी..

उनको सुनकर अच्छा लगा.. की चलो.. उनका देवर भी इनकी इतनी कैर करता हे.. तब यहा कीचनमे रमा ओर रजीया दोनो खाना बना रही थी.. ओर नीलम अपने रुममे अपने पढाइकी कीताब लेकर बैठी थी.. ओर लखन अपने रुममे चला गया.. ओर सीधाही बेड पे लेट गया.. तब कुछ ही देरमे सृती भी घरपे आगइ.. ओर उपर अपने रुममे जाकर फ्रेस होने लगी.. फीर वो भी चेन्ज करके नीचे आ रही थी..

तभी उनका ध्यान लखनके रुमकी ओर गया.. तो दरवाजा खुला था.. ओर लखन गहेरी नींद सो रहा था.. उनके पेन्टमे बहुत बडा तंबु साफ दीखाइ दे रहा था.. तब सृती उनको देखकर सरमाकर मुस्कुराते थोडी देर वही खडी रही.. ओर लखनके पेन्टके उभारको देखती रही.. उनको अ‍ेक बार फीर लखनके लंडको देखनेकी इच्छा होने लगी.. वो कुछ देर अ‍ैसे ही खडी रहेते लखनके तंबुकी ओर देखती रही..

अ‍ेक बार तो उनको लगा.. की वो अंदर जाकर लखनके लंडको छुकर देखले.. तभी सृतीकी चुत गीली होने लयी.. तो वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर जटसे नीचे आगइ.. पहेले तो चारो ओर नजर घुमाने लगी.. जब होलमे कोइ नही दीखा.. तो फोन लैकर सोफे पे बैठकर मंजुसे बाते करने लगी.. फीर वहाकी सभी बाते सुनकर अपनी मम्मीको फोन करके सबकी खबर पुछली.. जब वहा सब कुसल मंगल था..

फीर पुनमको फोन लगाती हे.. तब पुनमके फोनकी रींग बजती रही.. क्युकी इस वक्त पुनम धिरेनके साथ अपने रुममे थी.. ओर धिरेन उनको अपनी बाहोमे लेकर खडा था.. ओर उसे अभी सेक्सके लीये मना रहा था.. तब पुनम बडी ही सीफततासे उनको मना कर रही थी.. क्युकी उनको धिरेनकी सभी करतुतोके बारेमे पता चल गया था.. तो पुनम अब धिरेनके साथ सेक्स करना नही चाहती थी..

तभी लखनके पास आकर लताने सृतीभाभी की आजानेकी खबर देदी.. तो लखन खडा हो गया.. ओर फ्रेस होकर लताके साथ नीचे आगया.. तब लता भी कीचनमे चली गइ.. ओर रजीया रमाका काममे हाथ बटाने लगी.. तब लखन सीधाही सृतीके पास आकर बैठ गया.. तो सृती आस्चर्यसे लखनकी ओर देखती रही.. तब लखन अपना सर जुकाये थोडी देर खामोस बैठा रहा.. फीर अचानक खडा होते धीरेसे..

लखन : (धीरेसे) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. अब आइन्दा अ‍ैसी गलती कभी नही होगी.. आइ प्रोमीस..

सृती : (धीरेसे) लखन भैया.. आप अ‍ेक बार पुनोदीदीसे फोनपे बात कर लीजीये.. वो आपसे बात करना चाहती हे..

लखन : (बहारकी ओर जाते धीरेसे) नही भाभी.. अब इस बारेमे मुजे कीसीसे कोइ बात नही करनी.. जब उनसे रुबरु मुलाकात होगी.. तब उनकी भी माफी मांग लुगा..

सृती : (धीरेसे) लखन भैया.. उसे भी अपनी गलतीका अहेसा हो गया हे.. वो आपकी माफी मांगना चाहती हे..

लखन : (अचानक पीछे मुडकर रुकते) भाभी.. वो क्यु मेरी माफी मांगेगी..? गलती मैने कीहे.. तो माफी भी मे ही मांग लुगा..

कहेकर लखन बहार नीकल गया.. तो सृती उनकी ओर मुह फाडकर देखती ही रही.. उन्होने अ‍ेक बार लखनको आवाज देकर बुलाया.. लेकीन लखनने उनके सामने देखा तक नही.. ओर वो कार लेकर सीधा राधीकाके पास चला गया.. तो राधीका उसे देखते ही बहुत खुस होगइ.. ओर लखनको हाथ पकडकर अपने रुममे चली गइ.. फीर दरवाजा बंध करके लखनकी बाहोमे जोरोसे लीपट गइ..
 
राधीका : (सीनेमे सर रखते) ओह.. लखन आइ लव यु.. आखीर आप आही गये.. मे कबसे आपका इन्तजार कर रही थी.. कहा थे इतने दिन..? फोन भी नही कीया..

लखन : (ठुंडी पकडकर सर उठाते) अरे राधु.. सांत होजा.. कीतना सवाल करलीया.. सुन.. आइ लव यु टु.. अब मे हमेसा हमेसाके लीये इधर आगया हु.. अब मे तुजे कभी अकेली नही छोडुगा..

राधीका : (होंठ चुमकर) जानु.. आज मे बहुत खुस हु.. ओर मम्मी भी आपको बहुत याद कर रही हे.. कहेती थी जबसे सादी करके गया.. फीर तो आप आये ही नही.. ओर वो सही तो केह रही थी.. (सरमाकर मुस्कुराते) जानु.. हमने अभी तक हमारी सुहागरात भी नही मनाइ.. क्या आपका व्रत खतम होगया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. लेकीन मे जबसे यहासे गया.. तबसे कुछना कुछ काममे फसा हुआ था.. मे आज ही यहा रहेनेके लीये आया हु.. कल मेरे अंकलकी अंतीम वीधीया थी.. जो खतम होगइ.. इसी बीच दो तीन पहेले अ‍ेक दोस्तकी सादी थी.. तो आज उनके पापा यहा गुजर गये.. उन्हीका सब काम खतम करके आया हु.. बस.. दो तीन दिन इन्तजार करले.. फीर हमारी सुहागरात भी होगी..

राधीका : (मुस्कुराते होंठ चुमते) ओह.. चलो कोइ बात नही.. तो फीर दोडधामकी वजहसे आपने ठीकसे खाना भी नही खाया होगा.. तो आप चलो हमारे घरपे.. खाना भी खा लेगे.. ओर आप मम्मीको भी मील लेना.. ताकी उनको भी तसली मील जाये..

लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. आज नही.. आज यहा हमारा पहेला दिन हे.. लताने खाना बना लीया होगा.. वो तो तुजे भी खानेपे बुलाना चाहती थी.. लेकीन मम्मीकी वजहसे मैने मना करदीया.. तो मुजे घरपे ही जाना होगा.. सुन.. हमारे बारेमे मेरे घरपे सबको पता चल गया हे.. तो मेरी सभी भाभीया ओर लता तुमसे मीलना चाहती हे.. सबने हमारी सादीको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. हें..हें..हें..

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राधीका : (खुस होते) क्या..? जानु.. ये तो बहुत ही अच्छी खबर सुनाइ आपने.. लेकीन अभी तो मेरा आना पोसीबल नही हे.. मे मम्मीको छोडकर नही आ सकती.. हां.. अगर वो सब यहा आयेगी.. तो मे सबको जरुर मील लुगी.. आप अ‍ेक काम करो.. फुरसतमे सबको मेरे घरपे खानेके लीये बुलालो.. सबलोग मम्मीको भी मील लेगी.. ओर हमारी भी मुलाकात होजायेगी.. क्या कहेते हो..?

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे चल घरपे लतासे बात करता हु..

राधीका : (सरमाते धीरेसे नजरे जुकाते) जानु.. क्या अ‍ैसे ही चले जाओगे..? जबसे हमने सादी कीहे.. तबसे आपसे मीलन करनेका बहुत मन कर रहा हे.. क्या वो सुजन थी वो सब ठीक हो गया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. जब हम मीलेगे तब तेरे लीये सरप्राइज होगी.. फीर भी कुछ जानना होतो तुम तेरी सहेलीसे बात करलेना.. उनको सब पता हे.. की वहा सुजन क्यु आइ थी..

राधीका : (कातील नजरसे देखकर मुस्कुराते) क्या तुम भाइ बहेन अब भी इसी तराहकी बाते करते हो..? लेकीन पुनोकी तो अब सादी भी होगइ हे.. क्या आप अभी भी इनसे प्यार करते हो..?

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते मुस्कुराते) हां राधु.. क्या कभी पहेला प्यार भुला जा सकता हे..? अच्छा हुआ तुमने मुजे सम्हाल लीया.. वरना ये लखन तो कबका खतम हो चुका था.. राधु.. आइ लव यु..

राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते होंठ चुमते) हंम.. लव यु टु जानु.. जानु तब मे भी मेरे डीवोर्सकी वजहसे टुट चुकी थी.. मे बहुत डीप्रेसनमे थी.. तब मुजे भी अ‍ेक सहारेकी जरुरत थी.. जो आपने मुजे समजाकर सम्हाल लीया.. ओर मेरी जरुरतको पुरी करदी.. आप मेरी कीतनी केर करते हे.. आज मम्मी भी बहुत खुस हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे.. अब मे चलता हु.. तुम फीकर मत करना.. बहुत जल्द हम दोनोका मीलन होगा.. मे कल आउगा.. तब बात करेगे..

फीर लखन थोडी देर रुककर वहासे नीकल गया.. ओर वापस घरपे आगया.. तब सृती ओर लता दोनो बाते करते वही बैठी थी.. तो लखनने उनके सामने देखा तक नही.. ओर उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो लताने उसे खानेके लीये बुलाया.. फीर सब लोग खाना खाने बैठ गये.. लखनके साथ लता बैठी थी.. तो लताके पास रजीया बैठ गइ.. तो लखनके सामने सृती बैठ गइ..

ओर उनके पास रमा ओर नीलम बैठी थी.. तब सृती बार बार लखनकी ओर देख रही थी.. फीर भी लखन सृतीकी ओर नही देर रहा था.. तो आज सृतीने हिंमत करते नीचेसे अपना पैर आगे कीया.. ओर लखनके पैरोपे अपना पैर रख दीया.. तो लखनने अपना पैर पीछे खीच लीया.. तो सृती बार बार लखनके पैरको छुकर उनको मनानेकी कोसीस करती रही.. लेकीन लखनकी ओरसे कोइ रीस्पोन्स नही मीला..

तो सृतीने भी अपना पैर वापस लेलीया ओर चुपचाप खाना खाने लगी.. वो समज गइकी लखन अभी भी उनसे नाराज हे.. तब सृतीने कीसीभी तराह लखनको मनानेकी ठानली.. इसके लीये चाहे उसे लखनका बीस्तरभी क्यु गरम करना पडे.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर चुपचाप खाने लगी.. तब रमा ओर नीलम भी लखनकी ओर बार बार देख रही थी.. तो लखनके साथ नजर मीलते ही सरमाकर मुस्कुराने लगती थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०८

तो सृतीने भी अपना पैर वापस लेलीया ओर चुपचाप खाना खाने लगी.. वो समज गइकी लखन अभी भी उनसे नाराज हे.. तब सृतीने कीसीभी तराह लखनको मनानेकी ठानली.. इसके लीये चाहे उसे लखनका बीस्तरभी क्यु गरम करना पडे.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर चुपचाप खाने लगी.. तब रमा ओर नीलम भी लखनकी ओर बार बार देख रही थी.. तो लखनके साथ नजर मीलते ही सरमाकर मुस्कुराने लगती थी.... अब आगे

जब खाना खालीया तो रजीया ओर नीलम सभी काम नीपटाने लगी.. तो लता सृती ओर रमा होलमे बैठकर बाते करने लगी.. तब लताने लखनको भी साथ बैठनेके लीये कहा.. तो लखन आज पुरा दिन दोडधामकी वजहसे थकानका बहाना बनाकर उपर अपने रुममे जाकर सो गया.. जब रजीया ओर नीलमने भी अपना काम नीपटा लीया.. तो वो दोनो भी लता ओर सृती रमाके पास आकर बैठ गइ..

फीर कुछ देर बात करनेके बाद सब लोग अपने अपने रुममे सोनेके लीये जाने लगी.. रमा ओर नीलमका रुम नीचे ही था.. तो अब रजीया हमेसाके लीये लखनके साथ ही सोने वाली थी.. तो आज लताने रजीयाको भी अपने साथ लेलीया.. ओर सृती भी अपने रुममे चली गइ ओर चेन्ज करके अपने बैडपे लैटे मोबाइलसे खेलने लगी.. तभी सृतीको कुछ चकर ओर बैचेनी जैसा लगने लगा..

लेकीन उसने इस बारतो इग्नोकर करदीया.. ओर वो फीरसे मीबाइलमे खेलने लगी.. आज उनकी आंखोसे नींद कोसो दुर थी.. क्युकी आज उसे अकेले सोना था.. जो वहा गांवमे हर रात देवायतका प्यार मीलता था.. वो वहा जीतने दिन रही.. हर रात देवायतने उसे दो दो बार बीना नीचे उतरे खुब चोदा था.. ओर हर बार सृतीकी चुतको अपने गाडे पानीसे भरता रहा.. तब सृतीको पता नही था की वो वहासे देवायतसे प्रेगनेन्ट होकर आइ हे..

तो दुसरी ओर जब सृती पुनमको फोन कर रही थी तब धिरेन पुनमको बाहोमे भरते उनके साथ छेडखानी कर रहा था.. तो पुनम कीसी भी तराह धिरेनसे छुटनेकी कोसीस करते उनसे दुर रहेना चाहती थी.. आज धिरेन इतने दिनदके बाद पुनमको मील रहा था तो उनके उपर भी वासनाका भुत सवार था.. ओर वो पुनमको खाना खानेसे पहेले अ‍ेक बार चोदलेना चाहता था..

तब पुनमको भी पता था.. की अभी नही तो रातमे आज धिरेन उनको छोडने वाला नही हे.. वो ये भी जानती थी.. की आज वो आखरी बार धिरेनके साथ चुदाइ करेगी.. वो यहा कुछ दिनके लीये ही आइ हे.. फीर वो हमेसाके लीये धिरेनका साथ छोड देगी.. ओर अपने भाइ लखनकी होजायेगी.. जीतना पुनमको अपने बारेमे पता था उतना ही वो सृती भावना ओर लताके बारेमे भी जानती थी..

धिरेन : (होठोको चुमते बुब्सको मसलते) पुनो.. चलना.. अ‍ेक बार करलेते हे.. अब तेरे बीना नही रहा जाता.. हम इतने दिनो तक नही मीले.. तो बहुत मन कर रहा हे..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे पागल हो गये हे क्या..? नीचे दयाबहेन मेरा इन्तजार कर रही हे.. पहेले आप खाना तो खालो.. मे इसीलीये आपको बुलाने आइ हु.. हमारे पास पुरी रात पडी हे.. रातको आपको जीतना प्यार करनाहो कर लीजीयेगा.. चलो..

धिरेन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन रातमे तैयार रहेना.. आज तुजे पुरी रात सोने नही दुगा.. केह देता हु..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे हां बाबा हां.. पहेले चलोतो सही.. आपको भुख नही लगी क्या..?

धिरेन : (गालको चुमते) अरे बहुत लगी हे.. पुनो.. क्या अभी लखन भैया हमारे घरपे आये थे..?

पुनम : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? अभी दया बहेनने भी अपना आंगन साफ कर रही थी तब उन्होने भी भैयाको देखा था.. वो सहेरकी ओर जा रहे थे.. वो कीसी कारण वापस गांव गये होगे.. दया बहेनने उनको आवाज लगाइ.. तो घरपे भी नही आये.. क्या आपको वो रास्तेमे मीले थे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) हां.. अभी आरहा था तो कुछ दुरीपे ही मील गये थे.. वो आज सामतभाइको बंसी भैया सहेरमे दिखानेके लीये होस्पीटल गये थे.. तो वही गुजर गये.. तो उनको लेकर गांव आये थे.. श्रीधर भैया उनको सहेर छोडने जा रहे थे.. तो मैने सोचा यहा आये होगे.. मैने उनको घरपे आनेके लीये कहा.. तो कहेने लगेकी बहुत देर होगइ हे.. ओर वो चले गये..

पुनम : (थोडी नीरास होते) नही.. वो यहा नही आये.. क्या..? क्या सामतभाइ गुजर गये..? अच्छा हुआ कमसे कम अपनी बहेनका घर बसाके तो गये.. उन्होने अपनी विधवा बहेनकी सादी अपने बेटे बंसी भैयासे करदी.. सायद लखन भैया इसीलीये गांव गये होगे.. अब आप नीचे चलीये.. खाना रेडी हो गया हे..

कहेते पुनम जल्दीसे नीचे आगइ.. वो कीसी भी हालमे धिरेनसे मीलन करना नही चाहती थी.. तो दयाने उसे अपना फोन दीया ओर कहाकी इनमे रींग बज रही थी.. तो पुनमने फोनमे देखा तो सृतीकी तीन मीस्डकोल आ चुकी थी.. ओर पुनमने फुरसतमे बात करनेका सोचा.. जब धिरेन नीचे आकर डाइनींगपे बैठ गया तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर अपनी बेगसे कुछ गोलीया नीकालकर अपने पास छुपाकर फटाफट नीचे आगइ..
 
धिरेन : (मुस्कुराते) पुनो आजानां.. बहुत भुख लगी हे..

पुनम : (कीचनमे जाते) अरे बाबा.. आ रही हु.. खाना तो नीकालने दो..

कहेकर पुनम कीचनमे चली गइ.. ओर सब गोलीया दयाको देकर धीरेसे समजाने लगी.. तो दया भी हसते हुअ‍े हांमे गरदन हीलाते सब गोलीया ले लेती हे.. ओर इनमेसे दो गोलीया नीकालकर धिरेनकी सब्जीमे मीला देती हे.. ओर बाकीकी गोलीया छुपाकर रख देती हे.. तब तक पुनम धिरेनके पास आकर बैठ जाती हे.. ओर दया दोनोको खाना परोसने लगती हे.. तो धिरेन ओर पुनम खाने लगते हे..

आज दया भी अपना खाना लेकर वही दोनोके पास ही बैठ जाती हे.. पुनमको पता था.. की धिरेनके साथ अ‍ेक पत्नी होनेका फर्ज तो नीभाना ही पढेगा.. फीर भी वो जीतना हो सके धिरेनको अपने आपसे दुर रखना चाहती थी.. आज धिरेनको पुनमको चोदनेकी बडी जल्दी थी.. तो वो फटाफट खाना खाकर पुनमको जटसे आनेका इसारा करते उपर अपने रुममे चला गया.. ओर पुनम दया सभी काम नीपटाने लगी.. तभी..

दया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आप कीतने दिनोके बाद तो अपने पतीको मील रही हो.. तो फीर उनको नींदकी गोलीया देनेकी क्या जरुरत थी..?

पुनम : (धीरेसे) दया बहेन.. आपको सब बताती हु.. आपको पता हे..? धिरेन हमारे घरपे खाना खाने क्यु नही आ रहेथे..? क्युकी उन्होने खानेका इन्तजाम यही करलीया था.. ओर हमारे नीचेके रुमसे अलमारीमे बहुत सारी कामोतेजक गोलीया ओर आइपीलकी गोलीया मीली.. ओर साथमे बहुत सारे कोन्डम.. ओर कचरेके डीब्बेमे भी युज कीया हुअ‍े कोन्डम मीले.. तो इसका मतलब भी जानती हो..?

दया : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. क्या कहे रही हो आप..? इसका मतलब जीजु.. क्या वो यहा कीसीके साथ.. मतलब.. वो कीसीको यहा लाते होगे..? आपको ओर मंजुभाभीको तो सब पता चल जाता हे.. तो कहीयेनां.. यहा कौन ओरत आती हे..

पुनम : (धीरेसे) हां दया बहेन.. आपने बीलकुल सही सोचा.. मुजे सब पता चल गया हे.. इनमे मुजे आपकी मदद चाहीये.. मे धिरेनको रंगे हाथ पकडना चाहती हु.. वो बडे भैयाका अ‍ेक दोस्त यहा रहेता हे.. उनकी ही बीवी हे.. पायल नाम हे उनका.. धिरेन उसीके साथ सोता हे.. आप ध्यान रखना हमारे घरपे कौन कौन ओरत आती हे.. अगर आपको यहा कुछ अ‍ैसा दिखनेको मीला तो आप छुपकेसे उनकी विडीयो बना लेना.. फीर मुजे देना..

दया : (धीरेसे) पुनोदीदी.. अभी जीजु नही आये थे.. तब आप सब्जी लेने गइ थीनां..? तब अ‍ेक ओरत बनठनके आइ थी.. कमीनी क्या मस्त तैयार होकर आइ थी.. मैने उसे पुछा तो वो आपको ही मीलने आइ थी.. कहेती थी हमारे पडोसमे रहेती हे.. ओर उसने अपना नाम पायल कहा.. वो यहा कीसी भीमाभाइकी बीवी थी.. क्या ये वोही तो नही..?

पुनम : (आस्चर्यसे देखते) क्या.. वो पायल भाभी खुद आइ थी..? हां दया बहेन.. ये वोही हे.. कमीनी धिरेनको सुबह ओर रातका चाइ नास्ता ओर खाना वही देजाती थी.. ओर धिरेनके साथ मजे भी करके जाती थी.. दोनो नीचेके रुममे ही मजे करते थे.. ओर दो तीन बारतो भीमा भाइ कीसी गांव गये थे.. कमीनी पुरी रात धिरेनके साथ सोकर बीताइ थी.. मानो इनकी बीवी हो..

दया : (धीरेसे) दीदी.. उनको भी पता हे.. जीजु सादी सुधा हे.. तो फीर वो अ‍ैसा क्यु कर रही हे..? आपको ओर मंजु दीदीको तो सब पता चल जाता हे.. क्या इसीलीये ये सब आपको पता चला..?

पुनम : हां दया बहेन.. इस घरमे पैर रखते ही मुजे सबकुछ पता चल गया था.. वो ये सब बच्चेके लीये कर रही हे.. क्युकी अब भीमाभाइ उनको संतुस्ट करनेमे सक्षम नही हे.. तो उनको बच्चे कहासे देगे..? बस.. इसीकी वजहसे उनकी पहेली बीवी उनको छोडकर अपने देवरके साथ भाग गइ..

ओर ये पायल भाभी उनके सालेकी बीवी हे.. बस बदलेकी भावनाकी वजहसे ही भीमाभाइने उनके सालेकी बीवीसे सादी कीहे.. अब देखना.. अ‍ेक बार हमे उन दोनोको रंगे हाथो पकडना हे.. अब मुजे धिरेनमे कोइ इन्ट्रेस नही हे.. तभी तो उसे नींदकी गोलीया दी हे.. आप समज गइनां..?

दया : (सरमाते धीरेसे) पुनोदीदी.. वो आपके पती हे.. फीर भी आपको उनके साथ सोना तो पडेगा ही.. तो वो क्या आपको अ‍ैसे ही छोड देगे..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां दया बहेन.. बस.. मुजे उसी बातकी टेन्शन हे.. दया बहेन उनसे मीलकर भी क्या करुगी..? उनका हे भी बहुत छोटा.. कुछ फील ही नही होता.. इसीलीये तो उनको नींदकी गोली दी हे.. अब उसे हर रात अ‍ैसेही सुलाना पडेगा.. दया बहेन.. कल मुजे आपसे कुछ जरुरी बात भी करनी हे.. जब धिरेन बेन्क चले जायेगे.. तब हम दोनो फुरसतमे बात करेगे.. क्युकी बहुत जरुरी बात हे.. जो आपके लीये भी जानना जरुरी हे..

दया : (सरमाकर हसते) ठीक हे दीदी.. अब आप जाइअ‍े.. मे सब काम नीपटा लुगी.. ओर सो जाउगी.. आप अपने पतीकी छोटीसी लुलीसे खेलीये.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर हसते धीरेसे) क्या दया बहेन.. आप भीनां.. हें..हें..हें.. अब आप भी मेरी टांग खीचलो.. चलो मे चलती हु.. आप भी काम नीपटाकर सोजाओ..

पुनम बहुत सर्मसार होते हसते हुअ‍े अपने हाथ पोछते सब दरवाजा बंध करते उपरकी ओर जाने लगी.. ओर दयाभी सब काम फटाफट करने लगी.. ओर कुछ देरके बाद वो भी सभी लाइटे बंध करके अपने रुममे चली गइ.. तो उपरकी ओर पुनम अपने रुममे दरवाजा बंध करके चेन्ज करने बाथरुममे घुस गइ.. तब धिरेन चेन्ज करके रेडी होकर पुनमके इन्तजारमे मोबाइपे गेम खेल रहा था.. जैसेही पुनम आइ..
 
धिरेन : (मुस्कुराते) पुनो.. जटसे आजाना नही रहा जाता.. क्या मस्त जुडा बनाया हे तुमने.. इनमे बहुत सेक्सी लग रही हो.. आजा फटाफट..

पुनम : (मुस्कुराते बेडपे आते) जानु.. इतनी बेताबी अच्छी नही हे.. देखना बीचमे ही मत छोड देना.. आज मे भी देखती हु.. की तुम कहा तक आगे जाते हो.. कोइ गोली बोली तो नही खाइनां..?

धिरेन : (मुस्कुराते) सोरी पुनो.. आज मुजे तुमको पुरी रात प्यार करना हे.. तो बगैर गलीसे कैसे कर सकता हु..? मे सहेरसे लेकर ही आया हु.. यही समजलो आज फीरसे हम दोनोकी सुहागरात हे..

पुनम : (मनमे) कमीने तुम क्या सुहागरात मनाओगे.. वो तो मे भाइके साथ मनाकर आइ हु.. वो भी बीना गोलीकी.. तुम तो अंदर डाला नही की ढेर होजाते हो.. दो मीनीट भी नही टीक पाते.. मेरे उदरमे पल रहा बच्चा उसीका नतीजा तो हे..

लखन : (मुस्कुराते) पुनो कहा खो गइ..? क्या सोच रही हे..? आजाना जल्दी.. नही रहा जाता..

पुनम : (धिरेनके साथ रजाइमे घुसते) जानु.. आप बहुत कमीने हो.. कोइ बीवीके साथ अ‍ैसा करते हे क्या..? आज पका आप मेरी हालत बीगाड दोगे.. देखना बाबा मुजे सुबह चलने फीरने लायक छोडना..

पुनमको भी कइ दिनोसे देवायतने नही चोदा था.. क्युकी उनको भी पता था.. की देवायतकी इतनी सारी बीवीओकी वजहसे उनको का टाइम देपा रहा हे.. ओर उपरसे कइ दिनोसे लखन भी उनके साथ फ्लर्ट कर रहा था.. ओर जडी बुटीकी वजहसे बार बार उनके लंडको देखनेकी इच्छा हो रही थी.. तो वो इतने दिनोसे भावनाके साथ ही लेस्बीयन खेल खेल रही थी.. जीनकी वजहसे उनकी भी ठरक बढी हुइ थी..

तो आज पुनम धिरेनकी तारीफ करते उनको चोदनेके लीये उक्साने लगी.. ताकी उनके तनकी गर्मी थोडी कम होजाये.. लेकीन उनके जहेनसे अभी भी लखन नीकलनेका नाम नही ले रहा था.. आज पुनमको धिरेनमे भी लखनकी सकल दीखाइ दे रही थी.. क्युकी उनको भी नही पता था.. की अनायास ही सही.. वो लखनकी ओर जुकती जा रही थी.. ओर उसे लखनसे प्यार होने लगा था..

तो धिरेन अ‍ेक्साइटेड होकर पुनमके कपडे नीकालने लगा.. ओर खुदभी कपडे नीकालकर जल्दीसे नंगा हो गया.. पुनम धिरेनकी बेताबी देखकर सरमा गइ.. ओर मुह दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. तभी धिरेन पुनमकी बगलमे आकर लेट गया.. फीर पुनमसे चीपकर उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तब पुनम आंख बंध करते धिरेनमे लखनको देखते लखनको इमेजींग करने लगी..

ओर उसने धिरेनको लखन समजकर जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. तब धिरेनभी पुनमकी अ‍ेक्साइटमेन्ट देखकर खुस हो गया.. पुनम लखनके बडे लंडको इमेजींग करते बहुत ही उतेजीत होगइ थी.. उनकी चुत लखनके बारेमे सोचते ही फडफडाने लगी.. ओर पानी बहाने लगी.. फीर अपनी चुतमे लंडके घुसनेका इन्तजार करने लगी..

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तो दुसरी ओर आज धिरेनको भी पुनमको चोदनेकी जल्दी थी.. उनका लंडभी तनके सख्त हो गया था.. ओर पुनमकी चुतमे घुसनेके लीये चुतपे दस्तक देते जटके मार रहा था.. तो धिरेनने अपने लंडको अपनी उंगलीसे पकड लीया.. ओर पुनमकी चुतपे सेट करने लगा.. तो पुनम भी आंख बंध करते धिरेनके लंडको पकडकर अपनी चुतमे घुसानेके लीये धिरेनकी मदद करने लगी..

उनकी चुतसे लगातार पानी बेह रहाथा..पुनम आधी आंख चडाते पुरी तराह मदहोस हो गइ थी.. तभी धिरेनने अ‍ेक जोरोका जटका मारा तो उनका पुरा लंड पुनमकी चुतमे घुस गया.. ओर पुनमकी हल्कीसी आहे नीकल गइ.. ओर उसने धिरेनको लखन समजकर जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. पुनम अब पुरी तराह मदहोसीमे छा गइ थी.. वो अबभी आधी आंख चडाते लखनके चहेरेको इमेजींग कर रही थी..

तभी धिरेन अपना मुह पुनमके गलेमे छुपालेता हे.. ओर उनके बुब्सको मसलते जोरोसे अपनी कमर हीलाते पुनमको चोदने लगता हे.. तब पुनमको कुछ खास फील नही हो रहा था.. ओर उनको अहेसास होगया.. की ये लखनका लंड नही.. धिरेनका लंड हे.. तब वो थोडी नीरास होगइ.. ओर उसने फौरन अपनी आंखे खोलदी.. तब धिरेन जोरोसे कमर हीलाते उनको चोद रहा था.. ओर पुनम भी अपनी कमर आडी टेडी करते हीलाने लगी..

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ताकी वो भी धिरेनके साथ संतुस्ट हो सके.. लेकीन धिरेन आज बहुत ही उतेजीत हो चुका था.. ओर पुनमकी गरम भठी जैसी चुतके आगे कामोतेजक गोली खानेके बावजुद भी ज्यादा देर टीक नही सका.. ओर वो पुनमसे चीपककर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तब पुनमने उनको रुकनेके लीये बहुत कहा.. फीर भी धिरेन उनकी चुतके आगे टीक नही पाया ओर जडने लगा.. तब पुनम ना चाहते हुअ‍े भी उनकी पीठ सहेलाने लगी.. तभी..
 
धिरेन : (सरमके मारे धीरेसे) सोरी डार्लींग.. बहुत दिनोके बाद तुजे चोदा हे.. तो थोडा जल्दी हो गया..

पुनम : (थोडा गुस्सेमे) क्या धिरेन..? अ‍ैसे कोइ प्यार करता हे..? उपर चडे नही के फटाफट चोदने लगे.. ओर जड भी गये.. आपने वो गोली खाइ थी फीर भी..? आप मुजे हर बार प्यासी रख देते हो.. अब हटो मेरे उपरसे.. कमसे कम अ‍ेक बारतो मुजे संतुस्ट कर देते.. आप हर बार मुजे प्यासी छोड देते हो..

धिरेन : (सर्मीन्दा होते धीरेसे) पुनो आइ अ‍ेम सोरी.. मेने गोली खाइ हे.. तो अभी थोडी देर ठहेरो.. अभी वापस खडा होजायेगा.. इस बार पका तुजे जडा दुगा.. यकीन करो..

पुनम : (थोडा सांत होते) धिरेन.. देखना.. इस बार मुजे संतुस्ट नही कर पाये.. तो फीर मे आपको दुबारा कभी करने नही दुगी.. याद रखीयो.. देखो.. बहार भी नही नीकालना पडा.. अ‍ैसे ही बहार नीकल गया.. आप इनका कुछ करते क्यु नही..? आजकल तो इनकी बहुत सारी दवाइआ आती हे.. आप अपना इलाज करवाओ..

धिरेन : (थोडा परेसान होते) अरे यार.. अ‍ेक बार तो कहा.. की दुसरी बारमे तुजे संतुस्ट कर दुगा.. फीर भी तुम कहेती हो.. तो कल कीसी डोक्टरको दीखा दुगा.. बस..?

पुनम : (धिरेनको अपने उपरसे हटाते) अब हटीये मुजे बाथरुम जाना हे.. तबतक आप खडा करनेकी कोसीस करो.. अभी तो बहुत डींगे मार रहे थे.. की तुजे पुरी रात चोदना हे.. हमे सुहागरात मनानी हे.. क्या हुआ..? अब हटीये उपरसे.. मुजे बाथरुम जाना हे..

कहेते पुनम धिरेनको मनमे गालीया देते बाथरुममे चली गइ.. तबतक दयाकी दी हुइ गोलीका असर भी होने लगा था.. ओर उपरसे धिरेन जड गयातो काफी थकावट भी महेसुस कर रहा था.. तो धिरेन धीरे धीरे नीदकी आगोसमे जाने लगा.. जैसेही पुनम अपनी चुतको साफ करके वापस बहार नीकली.. तब धिरेन खरार्टे मारते सो रहा था.. तो पुनमकी हसी नीकल गइ..

ओर वो वापस बाथरुममे धुस गइ.. ओर कमोडपे बैठ गइ.. फीर आंख बंध करते अपने पती देवायतको इमेजींग करने लगी.. लेकीन पता नही आज देवायतकी जगह बार बार उनकी आंखोके सामने लखनका चहेरा आजाता था.. ओर वो अपनी शक्तिओके माध्यमसे लंखनके बडे लंडको भी देख चुकी थी.. उपरसे पीछले कइ दिनोसे लखन भी अपने प्यारका इजहार कइ बार पुनमके सामने कर चुका था..

ओर इस बारेमे उनकी सृती मंजु ओर भावनासे काफी चर्चा भी हो चुकी थी.. तो कल ही मस्तीया करते लखन उनके उरोजोको भी दबा चुका था.. ओर उनके होठोपे चुमा भी ले चुका था.. जीनकी वजहसे उनको लखनको चाटा मारना पडा.. जब अपनी गलतीका अहेसास मंजुने करवाया तबसे वो लखनकी ओर पुरी ढल चुकी थी.. ओर उसे प्यार करने लगी थी.. ओर अब कीसीभी हालमे वो लखनको मनाना चाहती थी..

इसके लीये चाहे उनको कोइ भी कुरबानी क्यु ना देनी पडे.. ओर वो ये भी जानती थी.. उनको कोनसी कुरबानी देनी पडेगी.. यही सब सोचते पुनम फीरसे बहुत उतेजीत होगइ.. ओर उनकी चुत अ‍ेक बार फीर पानीका रीसाव करते फडफडाने लगी.. तब पुनमका हाथ अनायास ही अपनी चुतपे चला गया.. ओर वो आंख बंध करते लखनको इमेजींग करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर सहेलाते सहेलाते चुतमे उंगली खुसाते हीलाने लगी..

पुनम : (आंख बंध करते धीरेसे दबी आवाजमे) ओह.. लखन भैया आपने क्या जादु करदीया.. मुजे आपका प्यार कबुल हे.. मे भी आपको प्यार करती हु.. चोद लीजीये अपनी इस बहेनको.. आपके लीये बहुत तरसी हु.. बस.. अ‍ेक बार अपनी बहेनको माफ करदो.. मे वादा करती हु.. मे हमेसाके लीये आपकी होजाउगी.. फीर आपको जीतनी मरजी हो.. मुजे चोद लीजीयेगा.. भाइ.. फक मी हार्ड.. आपसे चुदवानेका बहुत मन कर रहा हे.. चोद लीजीये अपनी बहेनको..

आंख बंध करते धीरेसे बडबडाते पुनम जोरोसे अपनी चुतमे उंगली अंदर बहार करने लगी.. तब कुछ ही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक तेज धारका फवारा नीकल गया.. तब पुनमने राहतकी सांसली.. तब उनको होस आया.. ओर उनको रीयलाइज हुआ.. की वो लखनको इमेजींग करते चुतमे उगली कर रही थी.. तब वो मुस्कुराते बहुत सर्मीन्दा हुइ.. फीर वो अपनी चुतको साफ करते बहार आगइ.. ओर अपने कपडे पहेनकर अपना फोन लेकर नीचे होलमे चली गइ.. ओर अंधेरेमे सोफेपे बैठकर सृतीको फोन करने लगी.. तभी..

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