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लखन : (कामुक नजरोसे देखते) लता.. आज तुम बहुत खुबसुरत लग रही हो.. जी करपा हे कीसी होटेल मे लेजाकर तुजे प्यार करलु..
लता : (सरमाकर हसते) लखन.. आप भीनां.. आपको हर वक्त यही सुजता हे.. अरे बाबा मेरा पीरीयड चल रहा हे.. जब पीरीयड होता हेना.. तब सभी ओरते अैसे ही दीखती हे.. ओर सुनो.. क्या आपकी बडी दीदीसे.. आइ मीन.. भाभीसे कोइ बात हुइ हे..?
लखन : (सामने देखते थोडा अन्जान बनते) बडी दीदी..? मतलब भाभीके साथ..? कीस बारेमे..? भाभीको बडी दीदी क्यु कहा..?
लता : (थोडा मजा लेते) कुछ नही..बस.. अैसेही मुहसे नीकल गया.. क्या सच केह रहे होनां..? आपकी इनसे कोइ बात नही हुइ..?
लखन : (थोडा जुठ बोलकर मजा लेते) अरे नही बाबा.. मे सच केह रहा हु.. बताना वो मुजसे क्या बात करने वाली थी..? मुजे तो कुछ भी पता नही हे.. हें..हें..हें..
लता : (मनमे) कीतने कमीने हे.. मुजसे जुठ बोल रहे हे.. ताकी सब बाते मेरे मुहसे उगलवा सके...
लखन : (मुस्कुराते) ओ लता.. क्या सोच रही हे..? बताना भाभी मुजसे क्या बात करने वाली थी..
लता : (थोडी नीरास होते) कुछ नही.. जब वो आपको मीलेगी तब आपसे कुछ बाते करेगी.. आप उनकी बाते गौरसे सुनना.. सायद बडे भैयाने ओर भाभीने मीलकर हम सबके बारेमे कुछ बडा फैसला लीया हे..
लखन : (अनजान बनकर देखते) हम सबके बारेमे..? बता मुजे.. क्या इस बारेमे तुजे कुछ मालुम हे..?
लता : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. बस.. इधर आ रहेथे.. तब भावना दीदी मुजसे पुछ रही थी.. की मंजुदीदीने लखन भैयासे कोइ बात की हे या नही.. मैने भी उनको पुछा.. तो उनको भी कुछ मालुम नही हे..
लखन : (थोडा लताको परेसान करते) यार तुम ओरते आधी बात करके हमे बहुत परेसान करती हो.. ठीक हे.. मे भाभीमांसे ही पुछ लुगा.. क्युकी अेक हप्तेके बाद हमे श्रीधर की सादीमे जाना पडेगा..
लता : (मुस्कुराते थोडा जुठ बोलते) ठीक हे.. आज मुजे भी दीदीसे बात करनी हे.. आइ मीन भाभीसे.. दो पहोरको या सामको फुरसतमे बात कर लुगी.. जानु.. क्या मुजे मेरी नइ सौतनसे नही मीलवाओगे..? हंम..? उनको भी खानेपे बुलालोनां.. आज हमारा यहा पहेला दिन हे..
लखन : नही लता.. अभी नही बुला सकता.. क्युकी उनके घरपे सीर्फ उनकी बुढी मां ही हे.. जो वो भी बिस्तरमे पडी हे.. क्युकी उनको पेरेलीसीस हे.. राधीका नाम हे उनका.. जो अेक त्यक्ता थी.. राधुको अपनी मां को खीलाना पडता हे.. उनका सबकुछ करना पडता हे.. बाकी उनके परीवारमे अब कोइ नही हे.. जब रमा भाभी चली जायेगी.. तब अेक दिन उनको घरपे लेकर आउगा.. तब मील लेना उनको..
लता : (आस्चर्यसे देखते) लखन.. क्या तो वो हमारे साथ नही रहे सकती..?
लखन : (मुस्कुराते) नही लता.. उनको पता हे की तुम मेरी बीवी हो.. लेकीन वो हमपे कोइ बोज बनना नही चाहती.. उनको तो सीर्फ हमारा प्यार ही चाहीये.. बाकी उनका अेक छोटासा घर हे.. उनका अच्छा खासा होस्टेल चल रहा हे.. हमारी नीलु भी तो वही थी.. ओर हमने हाल हीमे गांधर्व विवाह कीया हे.. इस बारेमे अभी सीर्फ पुनोदीदी ही जानती हे..
लता : (हसते) क्या अब उनको भाभी कहेना छोडदीया..? वो आपकी भाभी भी तो हे.. हें..हें..हें..
लखन : (थोडा सीरीयस होते) नही लता.. अब वो मेरी भाभी नही हे.. सीर्फ बहेन हे.. ओर जीतनी भी बहेने हे.. वो सीर्फ हमारे बडे भाइको ही चाहती हे.. ओर उनके साथ ही सादी करती हे.. या उनसे सादी करना चाहती हे.. यहा तो छोटे भाइकी कोइ अेहमीयत ही नही हे..
लता : (अेक नजरसे देखते) लखन.. आप अैसा क्यु सोचते हो..? क्या आपको पता हे मे आपकी कौन लगती हु..? हंम..?
लखन : (अेक बार सामने देखते) हां.. सब पता हे मुजे.. तुजे सब पुनो दीदीने बताया हे.. लेकीन तुम मुजे बताना नही चाहती थी.. मुजे पता हे तुम भी मेरी बहेन हो.. हमारे बापु अेक ही हे.. यहीना..?
लता : (सामने देखते) हां.. भलेही मे आपकी सौतेली बहेन हु.. लेकीन हुतो आपकी बहेन ही.. क्या मैने आपसे प्यार नही कीया..? आपसे सादी नही की..? तो फीर अैसा क्यु सोचते हे..? मुजे पता हे आप पढते थे तब पुनो दीदीको चाहते थे.. लेकीन हमारी कीस्मतमे जो लडकी या लडका लीखा होता हे.. वो ही हमे मीलते हे.. सबकी अपनी अपनी कीस्मत हे.. आप अैसे नीरास मत होइअे..
लखन : (आंख गीली करते) लता.. बुरा मत मानना.. मुजे सच बताना.. क्या तुमने भी मुजे धोखा नही दिया..? तुम भी बडे भैयाको नही चाहती..? हंम..? मुजे पता हे.. तुमने मुजसे सादी सीर्फ बडे भाइको पानेके लीये ही की हे.. क्या ये सच हेनां..?
लता : (सामने देखते आंसु बहाते) लखन.. आपको सब कैसे पता..? पहेले आप मेरी कसम खाइअे.. क्या मंजु भाभीसे आपकी सब बाते होगइ हेनां..?
लखन : (सामने देखते) हां लता.. लेकीन मे तुम्हारी कसम नही खा सकता.. कल रात ही सब बाते हुइ..
लता : (आंसु पोछकर जुठे गसे से मुका मारते) कमीने.. तो फीर अब तक मेरे साथ नाटक क्यु कर रहे थे..? अभी क्यु केह रहेथे.. की भाभीसे कोइ बात नही हुइ.. लखन.. आप बहुत कमीने हो.. जाओ मुजसे बात मत करो..
लखन : (मुस्कुराते) अरे तुमतो नाराज होगइ.. हें..हें..हें.. हां लता.. भाभीमां ने कल रात मुजे सब कुछ बता दीया हे.. लता.. मे पुनोका प्यारभी नही पा सका.. वो भी बडे भाइको प्यार करती थी.. ओर तुमने भी भाइको पानेके लीये मेरा इस्तेमाल कीया.. क्या ये सच नही हे..?
कहातो लता नजरे जुकाते फीरसे आंसु बहाने लगी.. अचानक लखनने पुछे सवालका लताके पास कोइ जवाब नही था.. ओर वो जुठ बोलना नही चाहती थी.. बस.. सर जुकाये आंसु बहाती रही.. आज लखनके साथ चलते वो बुरी तराह फस चुकी थी.. तभी लखनने अेक सुमसान जगहपे अपनी कारको रोक लीया.. ओर लताको बैठे बेठे ही हग करलीया.. तब लता उनके कंधेपे सर रखके जोरोसे रोने लगी.. तो लखनने उनको सांत कीया ओर उनके आंसु पोछे.. तभी....
कन्टीन्यु
लता : (सरमाकर हसते) लखन.. आप भीनां.. आपको हर वक्त यही सुजता हे.. अरे बाबा मेरा पीरीयड चल रहा हे.. जब पीरीयड होता हेना.. तब सभी ओरते अैसे ही दीखती हे.. ओर सुनो.. क्या आपकी बडी दीदीसे.. आइ मीन.. भाभीसे कोइ बात हुइ हे..?
लखन : (सामने देखते थोडा अन्जान बनते) बडी दीदी..? मतलब भाभीके साथ..? कीस बारेमे..? भाभीको बडी दीदी क्यु कहा..?
लता : (थोडा मजा लेते) कुछ नही..बस.. अैसेही मुहसे नीकल गया.. क्या सच केह रहे होनां..? आपकी इनसे कोइ बात नही हुइ..?
लखन : (थोडा जुठ बोलकर मजा लेते) अरे नही बाबा.. मे सच केह रहा हु.. बताना वो मुजसे क्या बात करने वाली थी..? मुजे तो कुछ भी पता नही हे.. हें..हें..हें..
लता : (मनमे) कीतने कमीने हे.. मुजसे जुठ बोल रहे हे.. ताकी सब बाते मेरे मुहसे उगलवा सके...
लखन : (मुस्कुराते) ओ लता.. क्या सोच रही हे..? बताना भाभी मुजसे क्या बात करने वाली थी..
लता : (थोडी नीरास होते) कुछ नही.. जब वो आपको मीलेगी तब आपसे कुछ बाते करेगी.. आप उनकी बाते गौरसे सुनना.. सायद बडे भैयाने ओर भाभीने मीलकर हम सबके बारेमे कुछ बडा फैसला लीया हे..
लखन : (अनजान बनकर देखते) हम सबके बारेमे..? बता मुजे.. क्या इस बारेमे तुजे कुछ मालुम हे..?
लता : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. बस.. इधर आ रहेथे.. तब भावना दीदी मुजसे पुछ रही थी.. की मंजुदीदीने लखन भैयासे कोइ बात की हे या नही.. मैने भी उनको पुछा.. तो उनको भी कुछ मालुम नही हे..
लखन : (थोडा लताको परेसान करते) यार तुम ओरते आधी बात करके हमे बहुत परेसान करती हो.. ठीक हे.. मे भाभीमांसे ही पुछ लुगा.. क्युकी अेक हप्तेके बाद हमे श्रीधर की सादीमे जाना पडेगा..
लता : (मुस्कुराते थोडा जुठ बोलते) ठीक हे.. आज मुजे भी दीदीसे बात करनी हे.. आइ मीन भाभीसे.. दो पहोरको या सामको फुरसतमे बात कर लुगी.. जानु.. क्या मुजे मेरी नइ सौतनसे नही मीलवाओगे..? हंम..? उनको भी खानेपे बुलालोनां.. आज हमारा यहा पहेला दिन हे..
लखन : नही लता.. अभी नही बुला सकता.. क्युकी उनके घरपे सीर्फ उनकी बुढी मां ही हे.. जो वो भी बिस्तरमे पडी हे.. क्युकी उनको पेरेलीसीस हे.. राधीका नाम हे उनका.. जो अेक त्यक्ता थी.. राधुको अपनी मां को खीलाना पडता हे.. उनका सबकुछ करना पडता हे.. बाकी उनके परीवारमे अब कोइ नही हे.. जब रमा भाभी चली जायेगी.. तब अेक दिन उनको घरपे लेकर आउगा.. तब मील लेना उनको..
लता : (आस्चर्यसे देखते) लखन.. क्या तो वो हमारे साथ नही रहे सकती..?
लखन : (मुस्कुराते) नही लता.. उनको पता हे की तुम मेरी बीवी हो.. लेकीन वो हमपे कोइ बोज बनना नही चाहती.. उनको तो सीर्फ हमारा प्यार ही चाहीये.. बाकी उनका अेक छोटासा घर हे.. उनका अच्छा खासा होस्टेल चल रहा हे.. हमारी नीलु भी तो वही थी.. ओर हमने हाल हीमे गांधर्व विवाह कीया हे.. इस बारेमे अभी सीर्फ पुनोदीदी ही जानती हे..
लता : (हसते) क्या अब उनको भाभी कहेना छोडदीया..? वो आपकी भाभी भी तो हे.. हें..हें..हें..
लखन : (थोडा सीरीयस होते) नही लता.. अब वो मेरी भाभी नही हे.. सीर्फ बहेन हे.. ओर जीतनी भी बहेने हे.. वो सीर्फ हमारे बडे भाइको ही चाहती हे.. ओर उनके साथ ही सादी करती हे.. या उनसे सादी करना चाहती हे.. यहा तो छोटे भाइकी कोइ अेहमीयत ही नही हे..
लता : (अेक नजरसे देखते) लखन.. आप अैसा क्यु सोचते हो..? क्या आपको पता हे मे आपकी कौन लगती हु..? हंम..?
लखन : (अेक बार सामने देखते) हां.. सब पता हे मुजे.. तुजे सब पुनो दीदीने बताया हे.. लेकीन तुम मुजे बताना नही चाहती थी.. मुजे पता हे तुम भी मेरी बहेन हो.. हमारे बापु अेक ही हे.. यहीना..?
लता : (सामने देखते) हां.. भलेही मे आपकी सौतेली बहेन हु.. लेकीन हुतो आपकी बहेन ही.. क्या मैने आपसे प्यार नही कीया..? आपसे सादी नही की..? तो फीर अैसा क्यु सोचते हे..? मुजे पता हे आप पढते थे तब पुनो दीदीको चाहते थे.. लेकीन हमारी कीस्मतमे जो लडकी या लडका लीखा होता हे.. वो ही हमे मीलते हे.. सबकी अपनी अपनी कीस्मत हे.. आप अैसे नीरास मत होइअे..
लखन : (आंख गीली करते) लता.. बुरा मत मानना.. मुजे सच बताना.. क्या तुमने भी मुजे धोखा नही दिया..? तुम भी बडे भैयाको नही चाहती..? हंम..? मुजे पता हे.. तुमने मुजसे सादी सीर्फ बडे भाइको पानेके लीये ही की हे.. क्या ये सच हेनां..?
लता : (सामने देखते आंसु बहाते) लखन.. आपको सब कैसे पता..? पहेले आप मेरी कसम खाइअे.. क्या मंजु भाभीसे आपकी सब बाते होगइ हेनां..?
लखन : (सामने देखते) हां लता.. लेकीन मे तुम्हारी कसम नही खा सकता.. कल रात ही सब बाते हुइ..
लता : (आंसु पोछकर जुठे गसे से मुका मारते) कमीने.. तो फीर अब तक मेरे साथ नाटक क्यु कर रहे थे..? अभी क्यु केह रहेथे.. की भाभीसे कोइ बात नही हुइ.. लखन.. आप बहुत कमीने हो.. जाओ मुजसे बात मत करो..
लखन : (मुस्कुराते) अरे तुमतो नाराज होगइ.. हें..हें..हें.. हां लता.. भाभीमां ने कल रात मुजे सब कुछ बता दीया हे.. लता.. मे पुनोका प्यारभी नही पा सका.. वो भी बडे भाइको प्यार करती थी.. ओर तुमने भी भाइको पानेके लीये मेरा इस्तेमाल कीया.. क्या ये सच नही हे..?
कहातो लता नजरे जुकाते फीरसे आंसु बहाने लगी.. अचानक लखनने पुछे सवालका लताके पास कोइ जवाब नही था.. ओर वो जुठ बोलना नही चाहती थी.. बस.. सर जुकाये आंसु बहाती रही.. आज लखनके साथ चलते वो बुरी तराह फस चुकी थी.. तभी लखनने अेक सुमसान जगहपे अपनी कारको रोक लीया.. ओर लताको बैठे बेठे ही हग करलीया.. तब लता उनके कंधेपे सर रखके जोरोसे रोने लगी.. तो लखनने उनको सांत कीया ओर उनके आंसु पोछे.. तभी....
कन्टीन्यु