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फीर लखन रमाको वापस गोदमे ही बहार लेकर आगया.. तबतक नीलम वहासे अपने रुममे जा चुकी थी.. लेकीन सृती ओर लता.. दोनो ही कामातुर होते उपर सृती वाले कमरेमे चली गइ थी.. सृती पुरी तराह नंगी थी.. तो लताने सेनीटरी पेडके साथ नीकर पहेना हुआ था.. दोनो अेक दुसरेकी ओर मुह करते अेक दुसरेके उरोजोसे खेलते होठोको चुम रही थी.. ओर बीच बीचमे चुतको सहेला रही थी.. तभी..
लता : (होंठ चुमते) भाभी.. पता नही जब हम पीरीयडमे होती हे.. तो चुदवानेका बहुत मन करता हे..
सृती : (मुस्कुराते) लता.. ये सीर्फ तेरी समस्या नही हे.. हर ओरतकी यही समस्या हे.. मुजे तो अब देवुके साथ सोनेकी आदत लग चुकी थी.. जबतक वो मुजे दो बार चोद नही लेते तबतक नींद ही नही आती थी.. तो यहा भी करवटे बदलती रहेती हु.. लेकीन तुम फीकर मत करो.. बहुत जल्द सब सही होजायेगा..
लता : (सरमाते धीरेसे होठ चुमते) भाभी.. तो फीर आप कहोतो मे लखनसे बात करु..? वैसे भी दीदीने हम सबको छुटतो देदी हे.. तो आप लखनसे चुदवालो.. नींद अच्छी आयेगी..
सृती : (सरमाते धीरेसे) नही लता.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. इस बारेमे अभी हमने कुछ नही सोचा.. जब वक्त आयेगा तब हम इस बारेमे सोचेगे.. अभीतो तुमसे ही काम चला लेती हु..
दोनो बाते करते लेस्बीयन खेल खेल रही थी.. जब दोनो संतुस्ट हुइ तो दोनो अेक दुसरेसे चीपकके सो गइ.. तो नीचेकी ओर कुछ देर आराम करनेके बाद लखनने फीरसे रमाको जबरदस्त तरीकेसे वापस चोद लीया.. तो रमा चीखती चीलाती रही.. जीनकी चीखे नीलु अपने रुममे साफ सुन रही थी.. तो वो फीरसे की होलसे दोनोकी चुदाइ देखने आगइ.. ओर उतेजीत होते अपनी चुतमे उंगली करती रही..
फीर लखनने बडी सावधानीसे धीरे धीरे करते रमाकी गांडका भी उद्घाटन करदीया.. तब रमा बहुत चीलाइ.. ओर रोने लगी.. लखनको छोडनेकी मनते करने लगी.. तब लखन उनको प्यारसे मनाता रहा.. ओर उसे सांत करते उनकी गांड मारता रहा.. लखनने रमाकी गांडको भी अपने पानीसे भर दीया.. तब रमाकी हालग बहुत बीगड चुकी थी.. उनके सरीरका अेक अेक अंग दर्द कर रहा था..
फीर अेक घंटेके बाद लखनने अेक बार ओर रमाको घोडी बनाके पीछेसे चुतमे लंड घुसा दीया.. तब रमाके दोनो पैर कांपने लगे थे.. अब उनमे चुदवानेकी ताकात नही बची थी.. तो वो पेटके बल लेट गइ.. ओर लखन उनको पीछेसे चोदता रहा.. आज ना जाने लखनने कीतनी बार रमाको जडा दीया था.. जब दोनो साथमे जडे तबतक रमा लगभग बेहोसीकी स्थीतीमे चली गइ थी.. वो हील भी नही सकी..
रमाकी हालत काफी बीगड चुकी थी.. वो वाकइ दो दिन बीस्तरसे उठनेकी स्थीतीमे नही थी.. ओर लखन उनको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. ओर कमोडपे बीटाकर उनको सही करते बहार लाया.. तब भी रमा बेहोसी जैसी हालतमे होगइ थी.. ओर लखनने उनको बेडपे लाकर सुला दीया.. फीर वो भी कपडे पहेनकर उपर अपने रुममे जाकर रजीयासे चीपककर सो गया..
तो दुसरी ओर आज देवायत वापस आया.. तब मंजुने पुनम ओर दयाके बारेमे बात करली.. फीर रात होते ही सबने डीनर करलीया.. फीर थोडी देर बैठकर सब सोने चले गये.. तो मंजुने आज भी भावनाको अपने साथ लेलीया.. फीर देर रात तक मंजु भावनाको बारी बारी चोदता रहा.. देवायतने आज भी मंजु ओर भावनाका चोद चोदके थका दीया.. देवायतने आज भावनाको लगातार बीना नीचे उतरे तीन बार चोद लीया था..
लेकीन फीर भी भावनाकी आज इतनी हालत खराब नही हुइ थी.. अब भावनाकी चुत देवायतके लंडको बडी आसानीसे जेल रही थी.. तो दुसरी ओर भानुके घर जबसे रमा नीलु ओर सरला चाची गइ हुइ थी.. तबसे हररात ओर दिनमे भी रीटा भानुका बीस्तर गरम कर रही थी.. सामको भानु रीटाको लेकर घर चला आता ओर सुबह उनको वापस साथ लेजाता.. भानु रीटाको हरदिन कामोतेजक गोलीया खाकर चोदता था..
तो अब रीटाको भी भानु जैसा मुर्गा मील गया था.. वो भानुसे खुब जमकर चुदवाती.. ओर बदलेमे भानु उनको पैसे देकर उनकी हर जरुरतको पुरा करता.. ओर इस बातका रीटाके पती छोटुको भी पता था.. लेकीन भानुभाइ छोटुका भी देसी दारु पीलाकर ओर कुछ पैसे देकर उनका खयाल रखता.. तो छोटुको इन दोनोके रीस्तोसे कोइ प्रोबलेम नही थी.. उल्टा भानु ओर रीटा बीस्तरमे होते तब छोटु उनकी रखवाली करता..
तब भानुको पता नही थाकी मुनाकी दी हुइ दवासे धीरे धीरे उनका हथीयार बेकार होने लगा था.. भानु जब भी रीटाकी चुदाइ करता.. कामोतेजक गोली खाकर करता.. उनसे भानुको पता ही नही चलाकी धीरे धीरे करते उनके लंडकी स्ट्रेन्थ खतम होने लगी हे.. भानु पुरी तराह भोग विलासमे लीप्त था.. उनको आसानीसे ओरतकी चुतका इन्तजाम हो जाता था.. इसीलीये उनको रमाकी याद नही आ रही थी..
लता : (होंठ चुमते) भाभी.. पता नही जब हम पीरीयडमे होती हे.. तो चुदवानेका बहुत मन करता हे..
सृती : (मुस्कुराते) लता.. ये सीर्फ तेरी समस्या नही हे.. हर ओरतकी यही समस्या हे.. मुजे तो अब देवुके साथ सोनेकी आदत लग चुकी थी.. जबतक वो मुजे दो बार चोद नही लेते तबतक नींद ही नही आती थी.. तो यहा भी करवटे बदलती रहेती हु.. लेकीन तुम फीकर मत करो.. बहुत जल्द सब सही होजायेगा..
लता : (सरमाते धीरेसे होठ चुमते) भाभी.. तो फीर आप कहोतो मे लखनसे बात करु..? वैसे भी दीदीने हम सबको छुटतो देदी हे.. तो आप लखनसे चुदवालो.. नींद अच्छी आयेगी..
सृती : (सरमाते धीरेसे) नही लता.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. इस बारेमे अभी हमने कुछ नही सोचा.. जब वक्त आयेगा तब हम इस बारेमे सोचेगे.. अभीतो तुमसे ही काम चला लेती हु..
दोनो बाते करते लेस्बीयन खेल खेल रही थी.. जब दोनो संतुस्ट हुइ तो दोनो अेक दुसरेसे चीपकके सो गइ.. तो नीचेकी ओर कुछ देर आराम करनेके बाद लखनने फीरसे रमाको जबरदस्त तरीकेसे वापस चोद लीया.. तो रमा चीखती चीलाती रही.. जीनकी चीखे नीलु अपने रुममे साफ सुन रही थी.. तो वो फीरसे की होलसे दोनोकी चुदाइ देखने आगइ.. ओर उतेजीत होते अपनी चुतमे उंगली करती रही..
फीर लखनने बडी सावधानीसे धीरे धीरे करते रमाकी गांडका भी उद्घाटन करदीया.. तब रमा बहुत चीलाइ.. ओर रोने लगी.. लखनको छोडनेकी मनते करने लगी.. तब लखन उनको प्यारसे मनाता रहा.. ओर उसे सांत करते उनकी गांड मारता रहा.. लखनने रमाकी गांडको भी अपने पानीसे भर दीया.. तब रमाकी हालग बहुत बीगड चुकी थी.. उनके सरीरका अेक अेक अंग दर्द कर रहा था..
फीर अेक घंटेके बाद लखनने अेक बार ओर रमाको घोडी बनाके पीछेसे चुतमे लंड घुसा दीया.. तब रमाके दोनो पैर कांपने लगे थे.. अब उनमे चुदवानेकी ताकात नही बची थी.. तो वो पेटके बल लेट गइ.. ओर लखन उनको पीछेसे चोदता रहा.. आज ना जाने लखनने कीतनी बार रमाको जडा दीया था.. जब दोनो साथमे जडे तबतक रमा लगभग बेहोसीकी स्थीतीमे चली गइ थी.. वो हील भी नही सकी..
रमाकी हालत काफी बीगड चुकी थी.. वो वाकइ दो दिन बीस्तरसे उठनेकी स्थीतीमे नही थी.. ओर लखन उनको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. ओर कमोडपे बीटाकर उनको सही करते बहार लाया.. तब भी रमा बेहोसी जैसी हालतमे होगइ थी.. ओर लखनने उनको बेडपे लाकर सुला दीया.. फीर वो भी कपडे पहेनकर उपर अपने रुममे जाकर रजीयासे चीपककर सो गया..
तो दुसरी ओर आज देवायत वापस आया.. तब मंजुने पुनम ओर दयाके बारेमे बात करली.. फीर रात होते ही सबने डीनर करलीया.. फीर थोडी देर बैठकर सब सोने चले गये.. तो मंजुने आज भी भावनाको अपने साथ लेलीया.. फीर देर रात तक मंजु भावनाको बारी बारी चोदता रहा.. देवायतने आज भी मंजु ओर भावनाका चोद चोदके थका दीया.. देवायतने आज भावनाको लगातार बीना नीचे उतरे तीन बार चोद लीया था..
लेकीन फीर भी भावनाकी आज इतनी हालत खराब नही हुइ थी.. अब भावनाकी चुत देवायतके लंडको बडी आसानीसे जेल रही थी.. तो दुसरी ओर भानुके घर जबसे रमा नीलु ओर सरला चाची गइ हुइ थी.. तबसे हररात ओर दिनमे भी रीटा भानुका बीस्तर गरम कर रही थी.. सामको भानु रीटाको लेकर घर चला आता ओर सुबह उनको वापस साथ लेजाता.. भानु रीटाको हरदिन कामोतेजक गोलीया खाकर चोदता था..
तो अब रीटाको भी भानु जैसा मुर्गा मील गया था.. वो भानुसे खुब जमकर चुदवाती.. ओर बदलेमे भानु उनको पैसे देकर उनकी हर जरुरतको पुरा करता.. ओर इस बातका रीटाके पती छोटुको भी पता था.. लेकीन भानुभाइ छोटुका भी देसी दारु पीलाकर ओर कुछ पैसे देकर उनका खयाल रखता.. तो छोटुको इन दोनोके रीस्तोसे कोइ प्रोबलेम नही थी.. उल्टा भानु ओर रीटा बीस्तरमे होते तब छोटु उनकी रखवाली करता..
तब भानुको पता नही थाकी मुनाकी दी हुइ दवासे धीरे धीरे उनका हथीयार बेकार होने लगा था.. भानु जब भी रीटाकी चुदाइ करता.. कामोतेजक गोली खाकर करता.. उनसे भानुको पता ही नही चलाकी धीरे धीरे करते उनके लंडकी स्ट्रेन्थ खतम होने लगी हे.. भानु पुरी तराह भोग विलासमे लीप्त था.. उनको आसानीसे ओरतकी चुतका इन्तजाम हो जाता था.. इसीलीये उनको रमाकी याद नही आ रही थी..