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- Dec 5, 2013
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अपडेट - 12 ~ शॉपिंग
अब तक...
वो लड़की कमरे में बैठे बैठे hi कुछ कुछ सोच रही थी. न जाने क्या चल रहा था उसके दिमाग में.
उसने एक आखिरी झलक फिरसे अपने फ़ोन में नए कांटेक्ट वीर पर डाली और फिर अपना फ़ोन बंद कर वो बाथरूम में घुस गयी.
अब आगे...
पारी से वीर को 60 पॉइंट्स मिले थे, जिनमे से 50 पॉइंट्स उसने स्किल खरीदने में लगा दिए थे. और बाकी के पॉइंट्स अपने स्टैट्स में लगा दिए थे.
उसने 5 पॉइंट्स स्ट्रेंथ में डाले, 3 पॉइंट्स इंटेलिजेंस और 2 पॉइंट्स अपीयरेंस में.
अब उसके स्टैट्स कुछ इस प्रकार थे.
[ स्टैट्स :
स्ट्रेंथ - 15/100
इंटेलिजेंस -11/100
अगिलिटी - 3/100
ेंदुराने - 7/100
अपीयरेंस - 9/100]
अगली सुबह वीर को अपने आप में हल्का फुल्का चेंज महसूस हुआ और आज श्रेया ने जब उससे देखा तोह वो भी उससे देख के सवाल करने लगी थी.
श्रेया : ोये! रात को फेसवाश पॉट के सोया था क्या? कुछ खिला खिला सा लग रहा है चेहरा.
वीर : नहीं तोह!!!
नाश्ते के टाइम निधि नाश्ता सर्वे करते हुए कॉलेज जाने के लिए रेडी थी और वो भी बस नाश्ता करने बैठने hi वाली थी.
डाइनिंग टेबल पर वीर और श्रेया को वो पहले hi सर्वे कर चुकी थी और साथ में बैठते हुए उसने अपना नाश्ता शुरू किया.
जूही पहले hi स्कूल जा चुकी थी तोह उसकी कोई टेंशन नहीं थी. ऑटो आता था और जूही को ले जाता था.
अभी निधि खा hi रही थी की उससे अपने ऊपर किसी की नज़रो का आभास हुआ और उसने चेहरा उठाते हुए देखा तोह पाया की वीर उससे hi देख रहा था. दोनों की नज़रे मिलते hi वीर ने अपनी नज़रे झुका ली और निधि ने भी यही किया.
कल से पता नहीं क्यों, वो वीर का सामना नहीं करना चाहती थी. वो चाहती थी की सब कुछ पहले जैसा हो जाए और वो नोर्मल्ली बात करने लगे बूत उसके बावजूद उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो वीर से बात कर पाए.
उससे बड़ा hi अटपटा लग रहा था. कैसे वो जाए और वीर से फिरसे नोर्मल्ली बाते करे. पर कल के उस सन के बाद से निधि बेचारी बिलकुल भी हिम्मत नहीं कर पा रही थी.
और यही हाल वीर का भी था. वो निधि से बात करना चाह रहा था पर वो खुद इस कन्वर्सेशन को कैसे स्टार्ट करे उससे समझ में नहीं आ रहा था.
हर्र बार वो मुँह खोलता कुछ कहने के लिए पर अलफ़ाज़ निकलते hi नहीं थे.
"में चलती हु." और निधि अगले पल hi अपनी नाश्ता ख़तम कर उठ गयी.
कुछ ज़्यादा hi जल्दी में थी वो, जैसे जल्द से जल्द घर से निकलना चाहती थी.
वीर एक बार फिर कहने के लिए हुआ पर उसके होंठ खुलते hi बंद हो गए और निधि उसकी नज़रो से दरवाज़े से बाहर निकल के ओझल हो गयी.
'दमन आईटी!'
मैं में उसने अपने आप को कोसा...
सिर्फ बात hi तोह करनी थी. फिर क्यों उसमे हिम्मत नहीं आ रही थी? ग्लानि सबको आखिर बाँध hi देती है.
***
इधर निधि कुछ देरर बाद कॉलेज पहुँच चुकी थी पर उसके मैं में न जाने क्या चल रहा था.
वीर की क्लास में वो एंटर करते हुए पहला लेक्चर लेने लगी. ब्लैक बोर्ड में हाथ तोह ज़रूर चल रहे थे उसके पर ध्यान कही और hi था.
"Ma'am! आपने 4तह स्टेप गलत किया है..."
उसके कानो में एक लड़की की आवाज़ पड़ी. पलट के उसने उससे देखा और फिर वापस से अपने लिखे गए सलूशन को. और वाक़ई, उसने गलत सोल्वे कर दी थी एक ेकशन.
"ओह्ह! सॉरी! स्टूडेंट्स! ये स्टेप गलत है. सॉरी!"
कहते हुए उसने वो मिटारा और वापस से उससे सोल्वे कर सही कर दिया की तभी,
"Ma'am! 6तह स्टेप भी गलत है..."
"हँ??"
निधि ने फिरसे अपने सलूशन पर गौर किया और फिरसे उसने मिस्टेक सही करते हुए दुबारा से सुधार किया.
"सॉरी! स्टूडेंट्स!"
"Ma'am आप ठीक हो न? कुछ परेशान सी लग रही हो."
सामने बैठी उसी लड़की ने उस से सवाल किया तोह निधि भी उसकी डेस्क के पास आ गयी.
निधि : इतना ऑब्वियस दिख रहा है?
लड़की : हां Ma'am! साफ़ दिख रहा है आप परेशान हो.
निधि (सर झुकाते हुए) : हां बीटा! बस थोड़ी इधर उधर की बातें दिमाग में चलती रहती है.
लड़की : It's okay! Ma'am! सभी की लाइफ में ये रहता है. आप यदि चाहो तोह रेस्ट कर सकती हो. हम सभी अपना वर्क कर लेंगे.
निधि : सच? कोई शिकायत तोह नहीं होगी न तुमलोगो को?
लड़की : No ma'am! वैसे भी बोहत पेंडिंग वर्क है हमारे पास.
और निधि ने फिर सारे स्टूडेंट्स से कन्फर्म कर उन्हें अपने पीरियड फ्री पीरियड के रूप में दे दिया. बच्चे अपना कोई भी वर्क कर सकते थे. निधि वही सामने रखे पोडियम के पास hi कड़ी रही और अपने विचारो में खोयी हुई थी.
लंच हुआ और वो स्टाफ रूम में अपनी सीट पर बैठे लंच करने hi जा रही थी की तभी उसके कानो में किसी मर्द की आवाज़ पड़ी,
"कैसे रहे मॉर्निंग लेक्टर्स निधि जी!"
पलट के निधि ने देखा तोह पाया एक उसके hi जितनी उम्र का प्रोफेसर उसके पीछे खड़े हुए था.
ये भी शामे डिपार्टमेंट में था.
निधि : अच्छे थे विकास सर!
विकास ने एक झलक निधि को नीचे से ऊपर देखा. लाल और काली साडी में गज़ब की लग रही थी वह. बिलकुल क़यामत. ऊपर से अभी अभी पाकी हुई थी. विकास जानता था निधि की मैरिड लाइफ अस्त व्यस्त है. उससे भी ये डाउट रहता था की साला ऐसा माल चोरर के आदमी कैसे रह सकता है भला?
भले hi विकास ने बड़ी चतुराई से निधि के जिस्म पर नज़र मारी थी पर निधि थी तोह एक औरत. एक hi झटके में उसने विकास की नज़रो को पकड़ लिया था की वो कहा घूम रही थी. और उसका आभास होते hi निधि के चेहरे पर पल भर के लिए घृणा के भाव आये पर अगले hi पल उसने अपने आप को वापस से नार्मल कर लिया.
विकास : आज स्वीटी मिस, जतिन सर, कोमल Ma'am, इन् सभी को में पार्टी दे रहा हु कैंटीन में. चलिए आप भी!
निधि ने एक स्माइल दी और बोली,
"सॉरी विकास सर! में आज वैसे hi थोड़ी थकी हुई हु. और टिफ़िन भी ऐसे में वास्ते हो जाएगा."
विकास : अरे! आपका टिफ़िन में वास्ते नहीं होने दूंगा. लाइए! आपके हाथो का खाना आज में खा लूंगा. और आप सभी आज जो बोलोगे वो कैंटीन में में खिलवाऊंगा.
निधि : बात वो नहीं है सर! मेने कहा न, आज में काफी थक गयी हु. तोह आप रहने दीजिये...
इस से पहले की वो अपनी बात पूरी कर पाती, विकास ने उससे बीच में hi काट दिया.
विकास : चलिए! आप थक गयी है न? और टिफ़िन भी वास्ते नहीं होने देना चाहती. तोह में आपके लिए यहाँ कैंटीन से पैक करवा के लाता हु और आपका ये टिफ़िन में यहाँ बैठ के आपके साथ खा लूंगा. अब ठीक? इसमें तोह कोई दिक्कत नहीं है?
बेचारी निधि अब बड़ी hi दुविधा में फस्स चुकी थी. ये विकास तोह उसका पीछा hi नहीं चोरर रहा था.
अभी वो कुछ उत्तर दे पाती उसके पहले hi उससे कंधे पर एक हाथ महसूस हुआ जो की किसी और का नहीं विकास का था.
और हाथ को महसूस करते हुए वो एकदम से पीछे हो गयी,
निधि : ये क्या कर रहे हो आप?
विकास : में तोह बस आपको कम्फर्ट दे रहा था.
निधि : No! I'm फाइन! आपको कोई ज़रुरत नहीं है.
विकास : फाइन! फाइन!
विकास अपने दोनों हाथ खड़े कर वह से निकल गया.
और निधि इधर बोहत hi बेकार फील कर रही थी. कैसे देख रहा था वो विकास उससे. ऊपर से तब जब वो खुद आलरेडी शादी शुदा है.
निधि ने नज़रे दौड़ाई तोह पाया की कुछ लेडी टीचर्स बैठ के उससे देख देख के खुसपुसाते हुए बातें कर रही थी.
ये सभी दिखने में बिलकुल भी सुन्दर न थी और जब इन्होने देखा की कैसे विकास सर उस निधि के पास जा जा कर उससे मन रहे थे और कैसे उस निधि ने उन्हें मन कर दिया तोह भला ये बात किये बिना कैसे रह सकती थी?
टीचर 1 : देखा तुमने? विकास सर आके उससे कितना मनाये फिर भी हरकते देखो उसकी... मुँह पे मन कर दिया.
टीचर 2 : और नहीं तोह क्या... भाव कितना खाती है ये. खुद को बड़ी hi एक्ट्रेस समझती है. नकचढ़ी कही की.
टीचर 3 : पति भी चोरर के चला गया इसका तोह... अब में समझ गयी क्यों गया... इसकी हरकते hi ऐसी है.
टीचर 1 : हां! ऐटिटूड तोह देखा इसका. एक तोह सर यहाँ तक लाने के लिए लंच तैयार थे पर देखो तोह...
टीचर 2 : ऐसी औरते होती hi ऐसी ह... अपने हुस्न से दुसरो को फसाती है. और सामने ऐसा दिखाएंगी जैसे बिलकुल रानी हो पर पीठ पीछे न जाने क्या क्या करती है...
भले hi ये तीनो टीचर्स धीरे बात कर रही थी. पर उसके बावजूद निधि को सब कुछ सुनाई दे रहा था.
अपना निचला होंठ दातो से दबाये वो उठी और बिना लंच किये hi वाशरूम में चली गयी.
अंदर वाशरूम में जाते hi उसने गेट बंद किया. उसकी आँखों से एक आसुओ की धार निकल, गाल से फिसलते हुए नीचे गिरी और उसकी रुलाई चूत पड़ी.
सर झुकाये और अपने निचले होंठ को जोरर से दातो टेल दबाये वो आँखें भींचते हुए उन्ही सब बातो को सोचने लगी.
विकास की वो गन्दी नज़र...
उसका उससे हाथ लगाना...
उन् टीचर्स की बातें...
फिर उससे अचानक hi वीर के साथ वो पल याद आया जब उसने उस से कुछ बातें कही थी...
'तुम्हारी आँखें कभी भी नहीं भटकी... एंड that's व्हाई... ी बिलीव यू!'
ये वाक्य उसने वीर को कहा था. वो पल याद करते hi निधि का दिल शांत सा होने लगा. आराम सा महसूस करने लगा. वो अनजाने में hi मुस्कुराने लगी.
और फिर अचानक से उससे कल का सन याद आया,
वो वीर के गले में लगे होंठो के निशाँ....
ये सोचते hi उसने अपना सर ज़र्रों से हिलाया.
'व्हाट इस रॉंग विथ में? वो मेरा छोटा भाई जैसा है. और इस उम्र में तोह ये सब होता hi है. कोई होगी उसकी गफ जो उसने कल बनायीं होगी. मुझे क्या करना? इनफैक्ट मुझे तोह खुश होना चाहिए उसके लिए. फाइनली, उससे कोई मिला और अब उसका साथी बना. फिर में क्यों इतना टेंशन ले रही हु? राइट! ी नीड तो कोंफ्रोंट हिम.'
और यु hi आज का दिन उसका इन् सब से गुज़रा.
***
शाम को निधि जब थक हार के वापस लौटी तोह तीनो वीर, श्रेया और जूही आपस में hi गपशप में लगे हुए थे.
निधि : क्या बातें हो रही है?
श्रेया : कुछ नहीं! बस ावायी
जूही : मम्मी!! आज स्पेशल डिनर बनेगा न??
निधि : ओह्ह नूवो....
जूही की बात से उससे याद आता है की वो तोह सामान खरीद के लायी hi नहीं.
निधि : में आती हु सामान लेके...
तभी वीर खड़ा हो जाता है,
वीर : Ma'am! आप रहने दीजिये... में चला जाता हु. आप थक गयी होंगी...
निधि : नहीं! तुम्हे नहीं पता होगा क्या लाना है और कैसे देख के लाना है.
वीर : उम्... श्रेया जी को पता है?
निधि : उसने तोह अपने जीवन में आज तक सब्ज़ी भी न ली होगी.
श्रेया : हैययययय! मेने एक बार ली है okay?
निधि : और वो भी खराब लेके आयी थी...
श्रेया (ब्लशेस) : सबके सामने बताना ज़रूरी था क्या?
एक गहरी सास लेते हुए, निधि खुद जाने hi वाली थी की वीर फिर से बोल पड़ा,
"तोह फिर में ड्राइव करता हु Ma'am. आप पीछे बैठ जाना. आप थक गयी होंगी. आप बताती जाना वो वो सामान में रखवा लूंगा."
उसकी बात सुन्न पल भर के लिए निधि उससे देखि...
निधि : ो... Okay!!
बड़ी hi धीमी आवाज़ में वो बोली और कुछ hi पालो में वो दोनों अब रास्ते में थे. निधि वीर के पीछे बैठी हुई थी और उसकी स्कूटी वीर ड्राइव कर रहा था.
पर दोनों के बीच डिस्टेंस था, जो निधि ने जान बुझ के बनाया था. वो वीर से काफी दूर बैठी हुई थी. वीर को ऐसा लग रहा था जैसे मानो पीछे कोई बैठा hi नहीं है.
'पारी! निधि Ma'am की फवौराबिलिटी कितनी है?'
[Utni hi hai master! 25]
'सहित! वो मुझसे ज़रूर नाराज़ है. कुछ न कुछ करना hi होगा.'
***
इस वक़्त निधि और वीर मार्ट में से khareed-daari कर रहे थे. वैसे तोह निधि बाहर से कुछ माँगा के खिला सकती थी बूत अब जब उसने पहले hi बोल के रखा था तोह भला वो अपने वाडे से पीछे कैसे हट सकती थी?
वीर मसाले के कुछ पैकेट्स ढूंढ रहा था तोह वही दूसरी जगह निधि कुछ और सामान ढूंढ़ने में लगी थी और दोनों hi काउंटर एक दूसरे से अलग अलग जगह थे.
आप भी यदि बड़े मार्ट में जाते होंगे शॉपिंग करने तोह आपने देखा hi होगा की कैसे अलग अलग स्टैंड्स में सामान रखे रहते है और लोग अपनी अपनी ट्राली लिए घूमते है और सामान उठाते है जो उन्हें चाहिए रहता है.
निधि ने वीर को कुछ सामान बता दिए थे जिनमे उससे ढूंढ़ने में दिक्कत नहीं जाने वाली थी.
अभी निधि एक पैकेट में उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट देख रही थी की तभी उसकी ट्राली पर किसी ने हाथ रखा और उसके कानो में एक जानी पहचानी आवाज़ पड़ी,
"क्या hi इत्तेफ़ाक़ है. मुझे नहीं पता था आप भी यहाँ होंगी निधि जी!"
निधि नई नज़रे उठायी और अगले पल hi उसकी बॉहे चिंता के मारे सिकुड़ गयी.
"विकास सर आप यहाँ?"
वो जिसे बिलकुल भी नहीं देखना चाहती थी वो शख्स उसके सामने खड़ा था.
विकास : आपने दिन में हमे बोहत hi बुरी तरह ठुकराया था... ी मैं हमारे इनविटेशन को...
निधि : मेरा कोई गलत इंटेंशन नहीं था. में अच्छा फील नहीं कर रही थी उस वक़्त और इसलिए...
विकास : इसलिए तोह हम आपकी बातो का बुरा नहीं मानते है, निधि जी! हम जानते है नाआ...
उसने कहते हुए नज़रे एक बार फिर निधि के बदन पर डाली और उससे नीचे से ऊपर तक टाडा.
उनकंफर्टबले फील करते हुए निधि थोड़ा पीछे हटी पर बोली कुछ नहीं.
विकास : वैसे आपने अभी तक कपडे भी नहीं बदले?
निधि (बॉहे सिकोड़ते हुए) : कपडे तोह आपने भी नहीं बदले है.
विकास (हस्ते हुए) : जी हां! जी हां! क्या करू? बीवी की बात maan'ni पड़ती है निधि जी! और घर में खाने में भी हेल्प करनी पड़ती है वर्ण घर से बाहर...
निधि : तोह ये तोह अच्छा है न? घर में पति पत्नी को एक दूसरे की मदद करनी hi चाहिए...
विकास (पास झुकते हुए) : यदि अआप्के जैसी बीवी हो तोह में तोह खुद खाना बनाऊ आपके लिए...
उसकी बात सुन्न निधि एकदम झेप सी गयी...
निधि : जी???????
विकास : मेरा मतलब है... आप कितनी केयरिंग हो... देखिये! आप तुरंत यहाँ काम से chuuth'te hi शॉपिंग करने आ गयी. और वह मेरी वाइफ है जो बस काम पे काम दिए जाती है. उससे भी आपकी तरह होना चाहिए...
निधि (पीछे खिसकते हुए) : जो खुबिया उनमे है वो मुझमे नहीं... हर्र व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है.
विकास : हमसे पूछिए... आपमें साड़ी खुबिया है...
विकास की बात सुन्न निधि गन्दा सा मुँह बनाते हुए उससे देखती है, विकास की नज़रे उसके स्तनों पर थी...
विकास : वो साड़ी खुबिया जो एक मर्द को चाहिए...
निधि : क्या कहा आपने?
निधि तोह वैसे यहाँ छाता मारना चाहती थी उससे पर वो जानती थी इसका अंजाम क्या होने वाला था और इसलिए उसने विकास की बात को यु अनसुना कर उस से सवाल किया ताकि विकास को होश आये की वो कितनी घिनौनी हरकत कर रहा है.
विकास : मेरा मतलब... आप में हर्र वो क्वालिटी है निधि जी, जो एक महिला में होनी चाहिए.
निधि ने बिना जवाब दिए, वह से आगे बढ़ना hi बेहतर समझा...
"जी! अब में चलती हु."
बोलके वो आ तोह गयी अगले स्टैंड पर ये सोच के की विकास चला जाएगा पर उससे क्या पता था की जहा जहा वो जाएगी वही वही विकास आ जाएगा.
जिस भी स्टैंड पर वो जाती, विकास उसके बगल से आके कुछ न कुछ सामान टटोलने लगता और ट्राली में रख लेता.
निधि कुछ बोल भी नहीं सकती थी. भले hi विकास वो सारा सामान बाद में वापस स्टैंड पर रख दे पर अभी तोह वह उसकी ट्राली में था और ऐसे में वो उससे ये नहीं बोल सकती थी की वो उसका पीछा करना बंद कर दे.
क्युकी विकास सामान ट्राली में डालता जा रहा था.
निधि की नज़रे इस वक़्त वीर को पूरी बेकरारी से ढूंढ रही थी. पर वो किसी भी स्टैंड के आस पास दिखाई नहीं दे रहा था.
'जस्ट वेयर इस हे????'
हाथो को यु आपस में उलझाए वो चलती जा रही थी और नज़रे दौड़ाती जा रही थी पर वीर कही नज़र नहीं आ रहा था.
अभी वो वीर को ढूंढ़ना जारी रखती तभी उसके कंधे पे एक हाथ पड़ा,
"आप ये क्यों नहीं ले जाती???"
विकास उसका कन्धा थामे एक किड्स के कोई प्रोडक्ट की ऑर्डर इशारा कर रहा था.
और अगले hi पल निधि ने खुद को उसके हाथो के स्पर्श से मुक्त करते हुए खुद को पीछे किया.
निधि : जी नहीं! मुझे पसंद नहीं है ये!
विकास : अच्छा? एक बार आप अपनी बेटी को देना. मेरा बीटा तोह मांगता hi रहता है ये.
विकास की तरफ वो अपनी पीठ कर आगे बढ़ने लगी की तभी फिरसे एक हाथ उसके कंधे पर पड़ा और बस...
उससे अब गुस्सा आ चूका था...
"जस्ट लीव में अलोन...."
उसने थोड़ा तेज़्ज़ स्वर में चिल्लाया...
"हँ???"
और तभी निधि को एक झटका लगा, फिर थोड़ी राहत सी महसूस हुयी, फिर थोड़ी ख़ुशी, फिर ग्लानि और अंत में उससे अब अटपटा सा लगने लगा.
सामने वीर खड़ा हुआ था. उसका हाथ hi उसके कंधो पर था.
वीर : वो में तोह बस...
कहते हुए वो अपना हाथ निधि के कंधे से उठाने लगा की तभी निधि ने अपने हाथ से उसका हाथ थामा और वापस अपने कंधे पर रखवा लिया. उससे खुद इस बात का अंदाजा नहीं था अभी की वो क्या कर रही थी. ये सब जैसे अपने आप हो रहा था.
वो जैसे चाह रही थी...
की विकास के गंदे हाथो का स्पर्श वीर के हाथ के स्पर्श से मिट जाए.
और इसलिए वो वीर का हाथ यु थामे थी. न जाने वो कबसे वीर को तलाश रही थी, और अंत में वो आ hi गया.
विकास पीछे खड़े थोड़ा झेप से गया क्युकी उसने देखा कैसे निधि एकदम से भड़क गयी थी. अभी वो खुद इस हमले का शिकार हो जाता यदि वो अपनी लिमिट क्रॉस करता. पर उसके मैं में एक hi सवाल था की ये बाँदा है कौन?
निधि : कब से ढूंढ रही थी तुम्हे...
वीर : वो सब चोरडिये आप ठीक तोह हो न?
निधि (नॉड्स) : I'm फाइन!
वीर निधि को घूरता है और तभी उसके मैं में आवाज़ गूंजती है,
[I think wo peeche waala banda Nidhi ko harrass kar raha tha master.]
और अगले hi पल वीर पीछे मुद विकास को देखा.
वीर : अन्य प्रॉब्लम??
विकास : No! वैसे आपने बताया नहीं निधि जी! ये है कोण?
वीर : I'm हेर...
निधि : He's लिखे माय बरोथेर...
इस से पहले की वीर कुछ कह पाटा निधि ने पहले hi अपना उत्तर रख दिया, जिससे सुन्न कही न कही वीर को अच्छा नहीं लगा.
विकास : हाहाहा! अच्छा! मतलब रियल भाई नहीं हो...
वीर : रियल भाई नहीं हु बूत भाई की तरह हिफाज़त करना अच्छे से जानता हु.
और ये वाक्य सुनते hi अगले hi पल निधि ने अपना निचला होंठ दांत से दबा लिया. अब उससे कही न कही लग रहा था जैसे उससे वो उत्तर नहीं देना चाहिए था. पर उसकी कोई गलती नहीं थी...
जैसे वीर के गले में लगी वो लिपस्टिक वाले सन ने उससे मजबूर कर दिया था वो कहने के लिए.
विकास : अच्छी बात है! ऐसा hi होना चाहिए! चलिए! निधि! जी! चलता हु में...
और इतना बोल विकास वह से चला गया.
वीर : आपने विरोध क्यों नहीं किया???
निधि : क्या?
वीर : अनजान मत बनिए ma'am! वो घिनोना आदमी आपके साथ ऐसा कर रहा था और आपने कुछ नहीं कहा? वो तोह यदि पारी मुझे न.... ी मैं यदि मेरी नज़र न पड़ती तोह वो न जाने क्या क्या हरकत कर सकता था...
निधि : It's... It's okay! जाने दो!
वीर : एंड you're फाइन? रियली?
निधि (चिल्लाते हुए) : नूवो! नॉट ात आल!!! I'm नॉट फाइन!!!!
वह मौजूद सभी लोग निधि को घर के देखने लगे...
और निधि वीर को पकड़ सामान खरीद के बाहर ले गयी...
इस वक़्त दोनों hi गाडी पर सवार थे. दोनों में से कोई कुछ नहीं कह रहा था.
पर एक बात अलग थी.
इस बार निधि एकदम पीछे नहीं बल्कि उस से सत् के बैठी थी.
और इस बार...
वीर निधि का हाथ अपने कंधे पे और साथ hi साथ उसके स्तन अपनी पीठ पे, भली भाति फील कर सकता था.
'पारी! फवौराबिलिटी कितनी है?'
[Nidhi ki favourability ab 30 ho gayi hai master.]
और वीर के चेहरे पे इस बार मुस्कान आ गयी.
'ात लीस्ट! पहले से सब बेटर है.'
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद!!
अब तक...
वो लड़की कमरे में बैठे बैठे hi कुछ कुछ सोच रही थी. न जाने क्या चल रहा था उसके दिमाग में.
उसने एक आखिरी झलक फिरसे अपने फ़ोन में नए कांटेक्ट वीर पर डाली और फिर अपना फ़ोन बंद कर वो बाथरूम में घुस गयी.
अब आगे...
पारी से वीर को 60 पॉइंट्स मिले थे, जिनमे से 50 पॉइंट्स उसने स्किल खरीदने में लगा दिए थे. और बाकी के पॉइंट्स अपने स्टैट्स में लगा दिए थे.
उसने 5 पॉइंट्स स्ट्रेंथ में डाले, 3 पॉइंट्स इंटेलिजेंस और 2 पॉइंट्स अपीयरेंस में.
अब उसके स्टैट्स कुछ इस प्रकार थे.
[ स्टैट्स :
स्ट्रेंथ - 15/100
इंटेलिजेंस -11/100
अगिलिटी - 3/100
ेंदुराने - 7/100
अपीयरेंस - 9/100]
अगली सुबह वीर को अपने आप में हल्का फुल्का चेंज महसूस हुआ और आज श्रेया ने जब उससे देखा तोह वो भी उससे देख के सवाल करने लगी थी.
श्रेया : ोये! रात को फेसवाश पॉट के सोया था क्या? कुछ खिला खिला सा लग रहा है चेहरा.
वीर : नहीं तोह!!!
नाश्ते के टाइम निधि नाश्ता सर्वे करते हुए कॉलेज जाने के लिए रेडी थी और वो भी बस नाश्ता करने बैठने hi वाली थी.
डाइनिंग टेबल पर वीर और श्रेया को वो पहले hi सर्वे कर चुकी थी और साथ में बैठते हुए उसने अपना नाश्ता शुरू किया.
जूही पहले hi स्कूल जा चुकी थी तोह उसकी कोई टेंशन नहीं थी. ऑटो आता था और जूही को ले जाता था.
अभी निधि खा hi रही थी की उससे अपने ऊपर किसी की नज़रो का आभास हुआ और उसने चेहरा उठाते हुए देखा तोह पाया की वीर उससे hi देख रहा था. दोनों की नज़रे मिलते hi वीर ने अपनी नज़रे झुका ली और निधि ने भी यही किया.
कल से पता नहीं क्यों, वो वीर का सामना नहीं करना चाहती थी. वो चाहती थी की सब कुछ पहले जैसा हो जाए और वो नोर्मल्ली बात करने लगे बूत उसके बावजूद उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो वीर से बात कर पाए.
उससे बड़ा hi अटपटा लग रहा था. कैसे वो जाए और वीर से फिरसे नोर्मल्ली बाते करे. पर कल के उस सन के बाद से निधि बेचारी बिलकुल भी हिम्मत नहीं कर पा रही थी.
और यही हाल वीर का भी था. वो निधि से बात करना चाह रहा था पर वो खुद इस कन्वर्सेशन को कैसे स्टार्ट करे उससे समझ में नहीं आ रहा था.
हर्र बार वो मुँह खोलता कुछ कहने के लिए पर अलफ़ाज़ निकलते hi नहीं थे.
"में चलती हु." और निधि अगले पल hi अपनी नाश्ता ख़तम कर उठ गयी.
कुछ ज़्यादा hi जल्दी में थी वो, जैसे जल्द से जल्द घर से निकलना चाहती थी.
वीर एक बार फिर कहने के लिए हुआ पर उसके होंठ खुलते hi बंद हो गए और निधि उसकी नज़रो से दरवाज़े से बाहर निकल के ओझल हो गयी.
'दमन आईटी!'
मैं में उसने अपने आप को कोसा...
सिर्फ बात hi तोह करनी थी. फिर क्यों उसमे हिम्मत नहीं आ रही थी? ग्लानि सबको आखिर बाँध hi देती है.
***
इधर निधि कुछ देरर बाद कॉलेज पहुँच चुकी थी पर उसके मैं में न जाने क्या चल रहा था.
वीर की क्लास में वो एंटर करते हुए पहला लेक्चर लेने लगी. ब्लैक बोर्ड में हाथ तोह ज़रूर चल रहे थे उसके पर ध्यान कही और hi था.
"Ma'am! आपने 4तह स्टेप गलत किया है..."
उसके कानो में एक लड़की की आवाज़ पड़ी. पलट के उसने उससे देखा और फिर वापस से अपने लिखे गए सलूशन को. और वाक़ई, उसने गलत सोल्वे कर दी थी एक ेकशन.
"ओह्ह! सॉरी! स्टूडेंट्स! ये स्टेप गलत है. सॉरी!"
कहते हुए उसने वो मिटारा और वापस से उससे सोल्वे कर सही कर दिया की तभी,
"Ma'am! 6तह स्टेप भी गलत है..."
"हँ??"
निधि ने फिरसे अपने सलूशन पर गौर किया और फिरसे उसने मिस्टेक सही करते हुए दुबारा से सुधार किया.
"सॉरी! स्टूडेंट्स!"
"Ma'am आप ठीक हो न? कुछ परेशान सी लग रही हो."
सामने बैठी उसी लड़की ने उस से सवाल किया तोह निधि भी उसकी डेस्क के पास आ गयी.
निधि : इतना ऑब्वियस दिख रहा है?
लड़की : हां Ma'am! साफ़ दिख रहा है आप परेशान हो.
निधि (सर झुकाते हुए) : हां बीटा! बस थोड़ी इधर उधर की बातें दिमाग में चलती रहती है.
लड़की : It's okay! Ma'am! सभी की लाइफ में ये रहता है. आप यदि चाहो तोह रेस्ट कर सकती हो. हम सभी अपना वर्क कर लेंगे.
निधि : सच? कोई शिकायत तोह नहीं होगी न तुमलोगो को?
लड़की : No ma'am! वैसे भी बोहत पेंडिंग वर्क है हमारे पास.
और निधि ने फिर सारे स्टूडेंट्स से कन्फर्म कर उन्हें अपने पीरियड फ्री पीरियड के रूप में दे दिया. बच्चे अपना कोई भी वर्क कर सकते थे. निधि वही सामने रखे पोडियम के पास hi कड़ी रही और अपने विचारो में खोयी हुई थी.
लंच हुआ और वो स्टाफ रूम में अपनी सीट पर बैठे लंच करने hi जा रही थी की तभी उसके कानो में किसी मर्द की आवाज़ पड़ी,
"कैसे रहे मॉर्निंग लेक्टर्स निधि जी!"
पलट के निधि ने देखा तोह पाया एक उसके hi जितनी उम्र का प्रोफेसर उसके पीछे खड़े हुए था.
ये भी शामे डिपार्टमेंट में था.
निधि : अच्छे थे विकास सर!
विकास ने एक झलक निधि को नीचे से ऊपर देखा. लाल और काली साडी में गज़ब की लग रही थी वह. बिलकुल क़यामत. ऊपर से अभी अभी पाकी हुई थी. विकास जानता था निधि की मैरिड लाइफ अस्त व्यस्त है. उससे भी ये डाउट रहता था की साला ऐसा माल चोरर के आदमी कैसे रह सकता है भला?
भले hi विकास ने बड़ी चतुराई से निधि के जिस्म पर नज़र मारी थी पर निधि थी तोह एक औरत. एक hi झटके में उसने विकास की नज़रो को पकड़ लिया था की वो कहा घूम रही थी. और उसका आभास होते hi निधि के चेहरे पर पल भर के लिए घृणा के भाव आये पर अगले hi पल उसने अपने आप को वापस से नार्मल कर लिया.
विकास : आज स्वीटी मिस, जतिन सर, कोमल Ma'am, इन् सभी को में पार्टी दे रहा हु कैंटीन में. चलिए आप भी!
निधि ने एक स्माइल दी और बोली,
"सॉरी विकास सर! में आज वैसे hi थोड़ी थकी हुई हु. और टिफ़िन भी ऐसे में वास्ते हो जाएगा."
विकास : अरे! आपका टिफ़िन में वास्ते नहीं होने दूंगा. लाइए! आपके हाथो का खाना आज में खा लूंगा. और आप सभी आज जो बोलोगे वो कैंटीन में में खिलवाऊंगा.
निधि : बात वो नहीं है सर! मेने कहा न, आज में काफी थक गयी हु. तोह आप रहने दीजिये...
इस से पहले की वो अपनी बात पूरी कर पाती, विकास ने उससे बीच में hi काट दिया.
विकास : चलिए! आप थक गयी है न? और टिफ़िन भी वास्ते नहीं होने देना चाहती. तोह में आपके लिए यहाँ कैंटीन से पैक करवा के लाता हु और आपका ये टिफ़िन में यहाँ बैठ के आपके साथ खा लूंगा. अब ठीक? इसमें तोह कोई दिक्कत नहीं है?
बेचारी निधि अब बड़ी hi दुविधा में फस्स चुकी थी. ये विकास तोह उसका पीछा hi नहीं चोरर रहा था.
अभी वो कुछ उत्तर दे पाती उसके पहले hi उससे कंधे पर एक हाथ महसूस हुआ जो की किसी और का नहीं विकास का था.
और हाथ को महसूस करते हुए वो एकदम से पीछे हो गयी,
निधि : ये क्या कर रहे हो आप?
विकास : में तोह बस आपको कम्फर्ट दे रहा था.
निधि : No! I'm फाइन! आपको कोई ज़रुरत नहीं है.
विकास : फाइन! फाइन!
विकास अपने दोनों हाथ खड़े कर वह से निकल गया.
और निधि इधर बोहत hi बेकार फील कर रही थी. कैसे देख रहा था वो विकास उससे. ऊपर से तब जब वो खुद आलरेडी शादी शुदा है.
निधि ने नज़रे दौड़ाई तोह पाया की कुछ लेडी टीचर्स बैठ के उससे देख देख के खुसपुसाते हुए बातें कर रही थी.
ये सभी दिखने में बिलकुल भी सुन्दर न थी और जब इन्होने देखा की कैसे विकास सर उस निधि के पास जा जा कर उससे मन रहे थे और कैसे उस निधि ने उन्हें मन कर दिया तोह भला ये बात किये बिना कैसे रह सकती थी?
टीचर 1 : देखा तुमने? विकास सर आके उससे कितना मनाये फिर भी हरकते देखो उसकी... मुँह पे मन कर दिया.
टीचर 2 : और नहीं तोह क्या... भाव कितना खाती है ये. खुद को बड़ी hi एक्ट्रेस समझती है. नकचढ़ी कही की.
टीचर 3 : पति भी चोरर के चला गया इसका तोह... अब में समझ गयी क्यों गया... इसकी हरकते hi ऐसी है.
टीचर 1 : हां! ऐटिटूड तोह देखा इसका. एक तोह सर यहाँ तक लाने के लिए लंच तैयार थे पर देखो तोह...
टीचर 2 : ऐसी औरते होती hi ऐसी ह... अपने हुस्न से दुसरो को फसाती है. और सामने ऐसा दिखाएंगी जैसे बिलकुल रानी हो पर पीठ पीछे न जाने क्या क्या करती है...
भले hi ये तीनो टीचर्स धीरे बात कर रही थी. पर उसके बावजूद निधि को सब कुछ सुनाई दे रहा था.
अपना निचला होंठ दातो से दबाये वो उठी और बिना लंच किये hi वाशरूम में चली गयी.
अंदर वाशरूम में जाते hi उसने गेट बंद किया. उसकी आँखों से एक आसुओ की धार निकल, गाल से फिसलते हुए नीचे गिरी और उसकी रुलाई चूत पड़ी.
सर झुकाये और अपने निचले होंठ को जोरर से दातो टेल दबाये वो आँखें भींचते हुए उन्ही सब बातो को सोचने लगी.
विकास की वो गन्दी नज़र...
उसका उससे हाथ लगाना...
उन् टीचर्स की बातें...
फिर उससे अचानक hi वीर के साथ वो पल याद आया जब उसने उस से कुछ बातें कही थी...
'तुम्हारी आँखें कभी भी नहीं भटकी... एंड that's व्हाई... ी बिलीव यू!'
ये वाक्य उसने वीर को कहा था. वो पल याद करते hi निधि का दिल शांत सा होने लगा. आराम सा महसूस करने लगा. वो अनजाने में hi मुस्कुराने लगी.
और फिर अचानक से उससे कल का सन याद आया,
वो वीर के गले में लगे होंठो के निशाँ....
ये सोचते hi उसने अपना सर ज़र्रों से हिलाया.
'व्हाट इस रॉंग विथ में? वो मेरा छोटा भाई जैसा है. और इस उम्र में तोह ये सब होता hi है. कोई होगी उसकी गफ जो उसने कल बनायीं होगी. मुझे क्या करना? इनफैक्ट मुझे तोह खुश होना चाहिए उसके लिए. फाइनली, उससे कोई मिला और अब उसका साथी बना. फिर में क्यों इतना टेंशन ले रही हु? राइट! ी नीड तो कोंफ्रोंट हिम.'
और यु hi आज का दिन उसका इन् सब से गुज़रा.
***
शाम को निधि जब थक हार के वापस लौटी तोह तीनो वीर, श्रेया और जूही आपस में hi गपशप में लगे हुए थे.
निधि : क्या बातें हो रही है?
श्रेया : कुछ नहीं! बस ावायी
जूही : मम्मी!! आज स्पेशल डिनर बनेगा न??
निधि : ओह्ह नूवो....
जूही की बात से उससे याद आता है की वो तोह सामान खरीद के लायी hi नहीं.
निधि : में आती हु सामान लेके...
तभी वीर खड़ा हो जाता है,
वीर : Ma'am! आप रहने दीजिये... में चला जाता हु. आप थक गयी होंगी...
निधि : नहीं! तुम्हे नहीं पता होगा क्या लाना है और कैसे देख के लाना है.
वीर : उम्... श्रेया जी को पता है?
निधि : उसने तोह अपने जीवन में आज तक सब्ज़ी भी न ली होगी.
श्रेया : हैययययय! मेने एक बार ली है okay?
निधि : और वो भी खराब लेके आयी थी...
श्रेया (ब्लशेस) : सबके सामने बताना ज़रूरी था क्या?
एक गहरी सास लेते हुए, निधि खुद जाने hi वाली थी की वीर फिर से बोल पड़ा,
"तोह फिर में ड्राइव करता हु Ma'am. आप पीछे बैठ जाना. आप थक गयी होंगी. आप बताती जाना वो वो सामान में रखवा लूंगा."
उसकी बात सुन्न पल भर के लिए निधि उससे देखि...
निधि : ो... Okay!!
बड़ी hi धीमी आवाज़ में वो बोली और कुछ hi पालो में वो दोनों अब रास्ते में थे. निधि वीर के पीछे बैठी हुई थी और उसकी स्कूटी वीर ड्राइव कर रहा था.
पर दोनों के बीच डिस्टेंस था, जो निधि ने जान बुझ के बनाया था. वो वीर से काफी दूर बैठी हुई थी. वीर को ऐसा लग रहा था जैसे मानो पीछे कोई बैठा hi नहीं है.
'पारी! निधि Ma'am की फवौराबिलिटी कितनी है?'
[Utni hi hai master! 25]
'सहित! वो मुझसे ज़रूर नाराज़ है. कुछ न कुछ करना hi होगा.'
***
इस वक़्त निधि और वीर मार्ट में से khareed-daari कर रहे थे. वैसे तोह निधि बाहर से कुछ माँगा के खिला सकती थी बूत अब जब उसने पहले hi बोल के रखा था तोह भला वो अपने वाडे से पीछे कैसे हट सकती थी?
वीर मसाले के कुछ पैकेट्स ढूंढ रहा था तोह वही दूसरी जगह निधि कुछ और सामान ढूंढ़ने में लगी थी और दोनों hi काउंटर एक दूसरे से अलग अलग जगह थे.
आप भी यदि बड़े मार्ट में जाते होंगे शॉपिंग करने तोह आपने देखा hi होगा की कैसे अलग अलग स्टैंड्स में सामान रखे रहते है और लोग अपनी अपनी ट्राली लिए घूमते है और सामान उठाते है जो उन्हें चाहिए रहता है.
निधि ने वीर को कुछ सामान बता दिए थे जिनमे उससे ढूंढ़ने में दिक्कत नहीं जाने वाली थी.
अभी निधि एक पैकेट में उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट देख रही थी की तभी उसकी ट्राली पर किसी ने हाथ रखा और उसके कानो में एक जानी पहचानी आवाज़ पड़ी,
"क्या hi इत्तेफ़ाक़ है. मुझे नहीं पता था आप भी यहाँ होंगी निधि जी!"
निधि नई नज़रे उठायी और अगले पल hi उसकी बॉहे चिंता के मारे सिकुड़ गयी.
"विकास सर आप यहाँ?"
वो जिसे बिलकुल भी नहीं देखना चाहती थी वो शख्स उसके सामने खड़ा था.
विकास : आपने दिन में हमे बोहत hi बुरी तरह ठुकराया था... ी मैं हमारे इनविटेशन को...
निधि : मेरा कोई गलत इंटेंशन नहीं था. में अच्छा फील नहीं कर रही थी उस वक़्त और इसलिए...
विकास : इसलिए तोह हम आपकी बातो का बुरा नहीं मानते है, निधि जी! हम जानते है नाआ...
उसने कहते हुए नज़रे एक बार फिर निधि के बदन पर डाली और उससे नीचे से ऊपर तक टाडा.
उनकंफर्टबले फील करते हुए निधि थोड़ा पीछे हटी पर बोली कुछ नहीं.
विकास : वैसे आपने अभी तक कपडे भी नहीं बदले?
निधि (बॉहे सिकोड़ते हुए) : कपडे तोह आपने भी नहीं बदले है.
विकास (हस्ते हुए) : जी हां! जी हां! क्या करू? बीवी की बात maan'ni पड़ती है निधि जी! और घर में खाने में भी हेल्प करनी पड़ती है वर्ण घर से बाहर...
निधि : तोह ये तोह अच्छा है न? घर में पति पत्नी को एक दूसरे की मदद करनी hi चाहिए...
विकास (पास झुकते हुए) : यदि अआप्के जैसी बीवी हो तोह में तोह खुद खाना बनाऊ आपके लिए...
उसकी बात सुन्न निधि एकदम झेप सी गयी...
निधि : जी???????
विकास : मेरा मतलब है... आप कितनी केयरिंग हो... देखिये! आप तुरंत यहाँ काम से chuuth'te hi शॉपिंग करने आ गयी. और वह मेरी वाइफ है जो बस काम पे काम दिए जाती है. उससे भी आपकी तरह होना चाहिए...
निधि (पीछे खिसकते हुए) : जो खुबिया उनमे है वो मुझमे नहीं... हर्र व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है.
विकास : हमसे पूछिए... आपमें साड़ी खुबिया है...
विकास की बात सुन्न निधि गन्दा सा मुँह बनाते हुए उससे देखती है, विकास की नज़रे उसके स्तनों पर थी...
विकास : वो साड़ी खुबिया जो एक मर्द को चाहिए...
निधि : क्या कहा आपने?
निधि तोह वैसे यहाँ छाता मारना चाहती थी उससे पर वो जानती थी इसका अंजाम क्या होने वाला था और इसलिए उसने विकास की बात को यु अनसुना कर उस से सवाल किया ताकि विकास को होश आये की वो कितनी घिनौनी हरकत कर रहा है.
विकास : मेरा मतलब... आप में हर्र वो क्वालिटी है निधि जी, जो एक महिला में होनी चाहिए.
निधि ने बिना जवाब दिए, वह से आगे बढ़ना hi बेहतर समझा...
"जी! अब में चलती हु."
बोलके वो आ तोह गयी अगले स्टैंड पर ये सोच के की विकास चला जाएगा पर उससे क्या पता था की जहा जहा वो जाएगी वही वही विकास आ जाएगा.
जिस भी स्टैंड पर वो जाती, विकास उसके बगल से आके कुछ न कुछ सामान टटोलने लगता और ट्राली में रख लेता.
निधि कुछ बोल भी नहीं सकती थी. भले hi विकास वो सारा सामान बाद में वापस स्टैंड पर रख दे पर अभी तोह वह उसकी ट्राली में था और ऐसे में वो उससे ये नहीं बोल सकती थी की वो उसका पीछा करना बंद कर दे.
क्युकी विकास सामान ट्राली में डालता जा रहा था.
निधि की नज़रे इस वक़्त वीर को पूरी बेकरारी से ढूंढ रही थी. पर वो किसी भी स्टैंड के आस पास दिखाई नहीं दे रहा था.
'जस्ट वेयर इस हे????'
हाथो को यु आपस में उलझाए वो चलती जा रही थी और नज़रे दौड़ाती जा रही थी पर वीर कही नज़र नहीं आ रहा था.
अभी वो वीर को ढूंढ़ना जारी रखती तभी उसके कंधे पे एक हाथ पड़ा,
"आप ये क्यों नहीं ले जाती???"
विकास उसका कन्धा थामे एक किड्स के कोई प्रोडक्ट की ऑर्डर इशारा कर रहा था.
और अगले hi पल निधि ने खुद को उसके हाथो के स्पर्श से मुक्त करते हुए खुद को पीछे किया.
निधि : जी नहीं! मुझे पसंद नहीं है ये!
विकास : अच्छा? एक बार आप अपनी बेटी को देना. मेरा बीटा तोह मांगता hi रहता है ये.
विकास की तरफ वो अपनी पीठ कर आगे बढ़ने लगी की तभी फिरसे एक हाथ उसके कंधे पर पड़ा और बस...
उससे अब गुस्सा आ चूका था...
"जस्ट लीव में अलोन...."
उसने थोड़ा तेज़्ज़ स्वर में चिल्लाया...
"हँ???"
और तभी निधि को एक झटका लगा, फिर थोड़ी राहत सी महसूस हुयी, फिर थोड़ी ख़ुशी, फिर ग्लानि और अंत में उससे अब अटपटा सा लगने लगा.
सामने वीर खड़ा हुआ था. उसका हाथ hi उसके कंधो पर था.
वीर : वो में तोह बस...
कहते हुए वो अपना हाथ निधि के कंधे से उठाने लगा की तभी निधि ने अपने हाथ से उसका हाथ थामा और वापस अपने कंधे पर रखवा लिया. उससे खुद इस बात का अंदाजा नहीं था अभी की वो क्या कर रही थी. ये सब जैसे अपने आप हो रहा था.
वो जैसे चाह रही थी...
की विकास के गंदे हाथो का स्पर्श वीर के हाथ के स्पर्श से मिट जाए.
और इसलिए वो वीर का हाथ यु थामे थी. न जाने वो कबसे वीर को तलाश रही थी, और अंत में वो आ hi गया.
विकास पीछे खड़े थोड़ा झेप से गया क्युकी उसने देखा कैसे निधि एकदम से भड़क गयी थी. अभी वो खुद इस हमले का शिकार हो जाता यदि वो अपनी लिमिट क्रॉस करता. पर उसके मैं में एक hi सवाल था की ये बाँदा है कौन?
निधि : कब से ढूंढ रही थी तुम्हे...
वीर : वो सब चोरडिये आप ठीक तोह हो न?
निधि (नॉड्स) : I'm फाइन!
वीर निधि को घूरता है और तभी उसके मैं में आवाज़ गूंजती है,
[I think wo peeche waala banda Nidhi ko harrass kar raha tha master.]
और अगले hi पल वीर पीछे मुद विकास को देखा.
वीर : अन्य प्रॉब्लम??
विकास : No! वैसे आपने बताया नहीं निधि जी! ये है कोण?
वीर : I'm हेर...
निधि : He's लिखे माय बरोथेर...
इस से पहले की वीर कुछ कह पाटा निधि ने पहले hi अपना उत्तर रख दिया, जिससे सुन्न कही न कही वीर को अच्छा नहीं लगा.
विकास : हाहाहा! अच्छा! मतलब रियल भाई नहीं हो...
वीर : रियल भाई नहीं हु बूत भाई की तरह हिफाज़त करना अच्छे से जानता हु.
और ये वाक्य सुनते hi अगले hi पल निधि ने अपना निचला होंठ दांत से दबा लिया. अब उससे कही न कही लग रहा था जैसे उससे वो उत्तर नहीं देना चाहिए था. पर उसकी कोई गलती नहीं थी...
जैसे वीर के गले में लगी वो लिपस्टिक वाले सन ने उससे मजबूर कर दिया था वो कहने के लिए.
विकास : अच्छी बात है! ऐसा hi होना चाहिए! चलिए! निधि! जी! चलता हु में...
और इतना बोल विकास वह से चला गया.
वीर : आपने विरोध क्यों नहीं किया???
निधि : क्या?
वीर : अनजान मत बनिए ma'am! वो घिनोना आदमी आपके साथ ऐसा कर रहा था और आपने कुछ नहीं कहा? वो तोह यदि पारी मुझे न.... ी मैं यदि मेरी नज़र न पड़ती तोह वो न जाने क्या क्या हरकत कर सकता था...
निधि : It's... It's okay! जाने दो!
वीर : एंड you're फाइन? रियली?
निधि (चिल्लाते हुए) : नूवो! नॉट ात आल!!! I'm नॉट फाइन!!!!
वह मौजूद सभी लोग निधि को घर के देखने लगे...
और निधि वीर को पकड़ सामान खरीद के बाहर ले गयी...
इस वक़्त दोनों hi गाडी पर सवार थे. दोनों में से कोई कुछ नहीं कह रहा था.
पर एक बात अलग थी.
इस बार निधि एकदम पीछे नहीं बल्कि उस से सत् के बैठी थी.
और इस बार...
वीर निधि का हाथ अपने कंधे पे और साथ hi साथ उसके स्तन अपनी पीठ पे, भली भाति फील कर सकता था.
'पारी! फवौराबिलिटी कितनी है?'
[Nidhi ki favourability ab 30 ho gayi hai master.]
और वीर के चेहरे पे इस बार मुस्कान आ गयी.
'ात लीस्ट! पहले से सब बेटर है.'
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद!!