Incest Deewanapan... - Page 14 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

अपडेट-51

अभ अग्गे...

रवि और ख़ुशी , दानवी सेना से घिर चुके थे , दानवी सेना , जिनके पास दिल तोह था hi नै , बेरहम , दरिंदे , यह कच्चे मास्स को नोच नोच कर कहते थे ,



इनके तीन हाथ थे , पहले सबसे बड़े , फिर उससे छोटे और फिर कमर के पास सबसे छोटे , यह 6 हाथो वाले दानव किसी जानवर की तरह भागते थे , अजीब अजीब आवाज़ों में चीखते हुए ,



यह किसी शिकारी कुत्तो की तरह , अपने शिकार को झुंड में घेर कर , उसे नोच नोच कर उसकी जान ले लेते थे , बेहद वहशी , और दरिंदगी के साथ ,

दानवी सेना बोलती नै थी , यह जानवर थे , इनकी भूक कभी मरती नै थी , जितना मास्स कहते , उतना और खाने की लालसा बढ़ती जाती ,

यह जेनिथ की सेना थी , रवि यानि के प्रिंस सोनिक का सुटला भाई , जेनिथ जो रूही को पाने के लिए , किसी भी हद तक जा सकता था ,

जब से जेनिथ को पारी लोग से निकला गया था , तब से जेनिथ इस दानवी लोग का देवता बन गया था , जेनिथ की ीचा से यह दानवी सेना , अलग अलग दुनियिओं में जाकर कत्लेआम मचती थी ,

"rr...raviii ...mm...muze...bb..bacha..ll...lo.." ख़ुशी ने दर से कंपते हकलाते हुए बोलै , क्यों की दानवी सेना गुस्से से चीखती हुई , उनकी तरफ धीरे धीरे अग्गे बढ़ रही थी ,

रवि ने ख़ुशी को अपने से दूर किया और उसकी आँखों में देख बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , हम नै जानते , अप्प , हमारी तामस हो या नै , अभ आपको लड़ना होगा , हम इनसे आपको नै बचा सकते , अभ आपको अपने विस्तार उतरने hi होंगे , इनकी संख्या बहुत अधिक है , हम लड़ते लड़ते आपको बचा नै पाएंगे..." रवि ने बेहद उदास आवाज़ में बोलै ,

"प्रिंस , mm....main इक आम लड़की हु , मेरे वस्तारु के निचे कुछ नै , मतलब है , पर उसमे कोई शक्ति नै है , अप्प hi मुझे बचा लो , प्लस..." ख़ुशी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , हमारी बात सुनो , अप्प कमज़ोर नै हो , अप्प तामस हो , मदिरा में डूबी , बेहद कहकर तामस , अप्प बेहद नेकदिल भी हो , अप्प किसी को अपने हाथो से मर कर , बाद में उसे मदिरा (शराब) पिलाती थी , अप्प तामस हो , खुद को पहचानो..." रवि ने बेहद तेज़ आवाज़ में बोलै ,

अभ दानवी सेना भी रुक कर उनकी बतिअन सुन रही थी ,

"यह मक तामस कोण है , में पागल हो गई हु , और तू सेल लुटर आशिक़ , तू कहा से प्रिंस बन गया , मेरा तोह जीना मुश्किल कर दिया है ..." ख़ुशी ने गुस्से में छीलते हुए बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , यह वाणी का जो प्रयोग अप्प कर रही हो , यह उचित नै है , इसका दंड मिलेगा आपको ..."

"आअह्ह्ह्हह , मुझे दारू दो , मदिरा दो मुझे , में पाक चुकी हु , तुम्हारी बतिअन सुन सुन कर , मदिरा दो , वार्ना , में अपने विस्तार नै उतरूंगी..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में अपने पेअर पटक कर बोलै ,

"यह लो मदिरा , यह पारी लोग की खास मदिरा है ..." रवि ने अपनी आँखें बंद कर खोली तोह उसके हाथ में मदिरा का बड़ा सा पियाला ा गया ,

ख़ुशी ने बिना कुछ बोले जल्दी से वोह मदिरा से भरा पियाला , रवि के हाथो से चीन और इक hi साँस में वोह इक बोतल जितना भरा पियाला पे गई ,

कुछ hi देर में ख़ुशी की आँखें नशे में और नशीली हो गई , वोह अभ नशे में झूमने लगी , और रवि की तरफ प्यार से देखने लगी ,

"उम्म्म , अभ जेक ाचा लग रहा है , बस पका दिया था , कभी अँधेरी दुनिआ , कभी जादुई जंगल , कभी दानवी लोग , अभ ायो तुम सब , इक इक को देख लुंगी ..." ख़ुशी ने दानवी सेना के करीब जाते हुए बोलै ,

वोह नशे में लड़खड़ा रही थी , तभी प्रिंस ने उसे रोका ,

"ख़ुशी कन्या , रुक जाओ..."

दानवी सेना ख़ुशी की बात सुन और भी गुस्से में चखने लगी , उनका शोर बेहद ब्यांक था ,

"चुप्प्प , क्या केएनन केईणं लगा रखा है , मुज़से लड़ना चाहते हो , जाओ पहले , प्रिंस से लाडू , अगर इक बाप की ालूड हो , तोह पहले प्रिंस को हरा दो , फिर मुज़से लड़ना , अगर सोडा मंज़ूर है तोह जोर से चिलयो..." ख़ुशी ने नशे में जुटे चीखते छीलते हुए बोलै , जैसे कोई सेनापति अपनी सेना को लड़ने के लिए उत्तेजित कर रहा हो ,

"ख़ुशी कन्या , उनको कुछ समाज नै आएगा..." अभी रवि बोल hi रहा था , के दानवी सेना जोर जोर से छिलने लगी , और ख़ुशी को छोड़ रवि की तरफ बढ़ने लगी ,

"रुकोऊ साबबबबहहह.." ख़ुशी ने जोर से छीलते हुए बोलै , तोह दानवी सेना रुक गई ,

"प्रिंस , इक और मदिरा प्लसस..." ख़ुशी ने बड़ी मासमोइयत से बोलै ,

"यह तामस भी न..." रवि ने आँखें बंद कर इक और बड़ा पियाला मदिरा का ख़ुशी को दे दिया , साडी दानवी सेना ख़ुशी को देख रही थी ,

"खड़े खड़े मेरा मोह क्या देख रहे हो , लड़ो प्रिंस से , जोऊ..." ख़ुशी ने चीखते हुए बोलै तोह दानवी सेना प्रिंस सोनिक पर टूट पढ़ी ,

"ख़ुशी कन्या , मरवा दिया अपने तोह..." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै , क्यों की दानवी सेने अभ उसके बेहद करीब थी , वोह भूके कुत्तो की तरह , उसे काटने , नोचने के लिए त्यार थे ,

दानवी सेना ने जैसे hi रवि पर छलांग लगाई , रवि निचे बेथ गया , उसके पंखो ने उसे पूरी तरह से कवर कर दिया ,

दानवी सेना सीधा रवि के पंखो पर गिरी , और उसके पंखो को दांतो से काटने लगी ,

"याह्ह्हह्हह्ह्ह्ह..." रवि जोर से चिलता हुआ इक डैम से उठ खड़ा हुआ , जो दानवी सेना , उसके ऊपर बैठी थी , वोह उड़ती हुई दूर जा गिरी , पर इससे दुसरो पर कोई फरक न पढ़ा ,

वोह संख्या में 100 से जायदा थे , यह सेना यहाँ दानवी लोग की सीमा पर पहरा दे रही थी , तभी इनकी नज़र रवि और ख़ुशी पर पढ़ गई थी ,

"ीीिन्न्नन्नम , ीेईनंनंन्न..." दानवी सेना जोर से चीखती हुई रवि पर जपत पढ़ी , रवि भी त्यार था ,

रवि तेज़ी से गोल गोल घूमने लगा , उसकी पंख जो बेहद नोकीले थे , वोह किसी बड़े से पंखे की तरह घूमने लगे ,

दानवी सेना अग्गे बढ़ती , और रवि के पंखो से टकरा , दूर गिरती जा रही थी , रवि के नोकीले ब्लेड जैसे तीखे पंखो ने दानवी सेना के अंगु को काटना सुरु कर दिया , किसी का सार काट गया , किसी के हाथ , किसी को बेच से चीयर दिया , हर तरफ हाहाकार मच चुकी थी , हर तरफ खून hi खून पसरा हुआ था ,

कुछ hi पलु बाद , जब रवि घूमता हुआ रुका , तब वोह इक घुटना जमीन पर टिकए बेथ गया , और घुटने पर हाथ रख तेज़ तेज़ हाफने लगा ,

रवि के as-pas दानवी सेना पढ़ी हुई थी , कुछ सेना मर चुकी थी और कुछ अपने कटे अंगु के तेज़ दर्द से कराह रही थी ,

वही ख़ुशी मदिरा का पियाला हाथ में लिए आँखें फाडे , मोह खोले रवि को देख रही थी , वोह अचंबित हो चुकी थी ,

"वह , प्रिंस जी , वह , मज़ा ा गया , अभ मुझे घर छोड़ दो , जल्दी..." ख़ुशी ने मदिरा के दो तीन सिप लेते हुए बोलै , अभ वोह काफी नशे में थी ,

"ओह्ह्ह , ख़ुशी कन्या , अप्प ठीक तोह है , वैसे हमें क्यों मरवाना चाहती थी , हम प्रिंस है , और तुम अंगरक्षक , तुम हमारी रक्षा करनी थी ..." रवि ने उठ कर ख़ुशी के करीब एते हुए बोलै ,

"वोह क्या है , प्रिंस जी , मेरे विस्तार नै उतर रहे , अभ अप्प hi उतर दो , हीछ्हक्क , अप्प मेरे विस्तार उतरो , हिच्छ्ककक , फिर में आपको ऐसी शक्ति दिखाउंगी , आपके होश उड़द जायेगे , हिच्छ्ककक , उतरो मेरे विस्तार...." ख़ुशी ने मदिरा का पियाला इक hi साँस में ख़तम कर बोलै , अभ वोह बेहद नशे में थी , बिलकुल बेसुध हालत में , और बार बार हिचकियाँ ले रही थी ,

"ओह्ह हो , ख़ुशी कन्या , अप्प हमारे साथ चलो , इससे पहले और दानवी सेना ा जाये , और आपके विस्तार अप्प hi उतर सकती हो , हम नै..." रवि ने अभ अग्गे चलते हुए बोलै , अभ ख़ुशी भी लड़खड़ाते हुए उसके साथ साथ चल रही थी ,

"मादरचोद , पृथ्वी पर , तोह मेरे बोलने से पहले कपडे उतर देता था , अभ देखो शराफत का पुतला बना हुआ है , हूउउ , इक बार घर जाने दो , फिर इसकी प्रिंस गिरी निकलूंगी..." ख़ुशी ने मन hi मन बेहद गुस्से में बोलै ,

अभ रवि और ख़ुशी दानवी लोग की सीमा को पर कर काफी अंदर ा चुके थे , अभ वोह वेरियन सा मदिआं ख़तम होने लगा था , अभ उसकी जगह छोटे छोटे पहाडू ने ले ली थी ,

यह आखरी लोग था , इस लोग के आखिर पर , दो दरवाजे थे , इक दरवाजा , रवि और ख़ुशी को वापिस पृथ्वी पर ले जाता , और उसके साथ वाला दरवाजा नाराज लोग में कोमल के पास ले जाता ,

असल बात यह थी के रवि को कोमल यद् नै थी , वोह पारी लोग जाना चाहता था , पर पारी लोग तोह सदियों पहले hi पत्थर बन चूका था ,

पारी लोग तब तक पत्थर का रहता , जब तक पारी लोग की मलिका , राज सिंघासन पर न बेथ जाती , पारी लोग की मलिका रूही थी , पर अकेले रूही के बैठने से कुछ न होता , उसके साथ सुहाना , सोनिक और उनकी तीसरी बहिन को भी बैठना पढता , जो खो गई थी ,

मतलब अगर रवि दूसरे दरवाजा में घुसता तोह वोह पारी लोग ने पहुँच पता , वोह सीधा पृथ्वी पर पहुँच जाता , बिना कोमल को लिए , लेकिन कोमल को लेजाना बेहद जरुरी था , क्यों इसके बाद , रवि कभी भी इस दुनिआ में न ा पता ,

अभ यह किस्मत के हाथो में था , रवि नाराज लोग जाता या वापिस पृथ्वी लोग , अभ कोमल और रवि के प्यार की अग्नि परीक्षा थी , क्या बिना किसी की यादिओं के उस तक पहुंचा जा सकता था ,

पृथ्वी पर 2 महीने बीत चुके थे , क्यों की इक दिन पूरा कर लिया था रवि और ख़ुशी ने , ख़ुशी तोह अभ नशे में जयंती हुई , मस्ती कर रही थी ,

"ख़ुशी कन्या , अभ हम इस दानवी लोग के बेच पहुँच चुके है , जल्दी hi ें दानवी लोग की बस्तियां सुरु हो जाएगी , हमें उनसे बच कर निकलना होगा , कही हम जेनिथ के हाथ लग गए , तोह फांसी पर लटका देगा..." रवि ने तेज़ तेज़ चलते हुए बोलै , हल्का हल्का अँधेरा था , पर तारो की रौशनी में दोनों अग्गे बढ़ रहे थे ,

"हिचक्क्क , जेनिथ , यह साला ठरकी कोण है , हिचकककक , और तुम यह रूही का जप करना बंद करो , हिचककककक , और मुझे गॉड में उठाओ , हिचकककक , में थक गई हु..." ख़ुशी ने हिचकियाँ लेते हुए बोलै , वोह बार बार रवि के ऊपर गिर रही थी ,

"ख़ुशी कन्या , अप्प ऐसा hi करती हो , पहले अप्प मदिरा का सेवन करती हो , फिर हमें परेशान करती हो , हमें तोह यह समाज नै अत , अप्प हमारी अंगरक्षक हो या हमारी दुश्मन..." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"जाओ बढ़ में , नै जाना मुझे , में यही बेठुंगी , तुम समज़ते क्या हो खुद को , प्रिंस , हिचककककक , तुम इक नंबर के ठरकी आदमी हो , हिचककककक , जो 10-10 लड़कियाँ लेकर घूमता है , हिचकककककक , दफा हो जाओ ..." ख़ुशी ने हिचकियाँ लेते हुए वही जमीन पर बैठते हुए बोलै ,

"उफ्फ्फ ओह्ह्ह , ख़ुशी कन्या , यह क्या जिद्द है , हमारी hi गलती थी , जो तुम मदिरा का रसपान करवा दिया , अभ चलना है , या हम जाये , वार्ना वोह दानवी सेना अभी आकर , तुम बिना पकाये , कच्चा खा जाएगी..." रवि ने रुक कर पीछे पलटते हुए ख़ुशी से बोलै ,

"हिचकककक , सच में..." ख़ुशी ने थोड़ा डरते हुए बोलै ,

"हाँ..."

रवि का इतना hi बोलना था के ख़ुशी भाग कर उसके पास ा गई और मुस्कराते हुए चलने लगी , फिर वोह इक डैम से घूमी और रवि के होंठो को कास कर चुम लिया ,

"यह क्या पागलपन है ख़ुशी कन्या , तुम क्यों बहक रही हो , हम बस रूही से प्रेम करते हैं , तुम यह बात जानती हो..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"हिचकककक , पृथ्वी पर भी तुम कोमल से प्यार करते हो , हिचककककक और साथ में मुज़से भी , मने अपने रवि को चूमा है , न के किसी अकड़ू प्रिंस को..." ख़ुशी ने थोड़ा चिढ़ते हुए बोलै ,

फिर रवि कुछ नै बोलै , दोनों अग्गे बढ़ते गए , अभ वोह उस जगह पहुँच चुके थे , यहाँ सामने इक बेहद विशाल जंगल था , ऐसी जंगल में जेनिथ का महल था , वोह खौफनाक और ब्यांक महल , जिसके किस्से पोरे ब्रह्माण्ड में मशहूर थे ,

"हिचकककक , यहाँ कितनी गर्मी है , उफ्फ्फ..." ख़ुशी ने इतना बोलते हुए अपनी कमर से अपना टॉप उठा , उसे उतर दिया ,

उफ़ ख़ुशी का लाजवाब दूध जैसा बदन , तारो की हलकी हलकी रौशनी में चमक उठा , काली ब्रा में कैद उसके बड़े बड़े खूबसूरत बूब्स , उसके अंगड़ाई लेने से , और भी दिलकश और हसन लगने लगे ,

उसके मोठे मोठे बूब्स पर उसकी काली ब्रा , बेहद कासी हुई लग रही थी , बूब्स के बेच की गहरी दरार , ख़ुशी के लाजवाब , नशीले हुसैन को देख रवि जैसे मदहोश सा हो गया ,

"ख़ुशी कन्या , अप्प विस्तार क्यों उतर रही हो..." रवि ने मदहोश सा हुए बोलै ,

"हिचककककक , मुझे अपनी शक्ति देखनी है , हिचकककककक तुम क्यों इतना घबरा रहे हो..." ख़ुशी ने अपनी ब्रा के ऊपर से hi अपने गदराये बूब्स पर हाथ फिरते हुए बोलै ,

अभी रवि कुछ बोलने hi जा रहा था , के पढ़ो के पत्ते हिलने लगे , जैसे कोई तूफान ा रहा हो , और जो सामने आया , वोह किसी तूफान से काम नै था

पृथ्वी पर 2 महीने बाद...

रवि के घर अभ 2 महीने बीत चुके थे , रवि की बहनो ने अभ हालातो के अग्गे घुटने तक दिए थे , जिंदगी की गाड़ी , धीरे hi सही , पर अग्गे चल पढ़ी थी ,

शूरति और रिमी अभ इक दूसरे के बेहद करीब ा चुकी थी , दोनों इक साथ रहती , इक साथ खाना कहती , उनकी जिंदगी में अभ जैसे इक दूसरे के बिना कोई नै था ,

यह बात नै थी के वोह रवि को भूल गई , रवि तोह उनकी जिंदगी का हम हिस्सा था , दिल टुटा था , अभ पत्थर सी हो गई थी ,

शूरति ने रिमी को सम्बल लिया और रिमी ने शूरति को , वोह कई बार पिछली बातिओं को यद् कर मुस्करती और फिर रोने लगती , कभी कभी उनको सीमा अजीब सी लगती , लेकिन यह भी तब होता , जब सीमा कही अकेली होती , और रिमी और शूरति उसे चुप कर देख रही होती ,

धीरे धीरे उनको एहसास हो रहा था , के वोह गलत थी , अपने भाई के दिए प्यार को यद् कर , उनको यह एहसास होने लगा , शयद उनका भाई सही था , उसको फसाया गया था ,

और इक दिन ऐसा भी आया जब दोनों ने सीमा के असली रूप को देख लिया , सीमा अपने रूम में थी , उसे लगा रिमी और शूरति ऑफिस जा चुकी है , पर तभी उसने अपना असली रूप धारण कर लिया , अभ वोह सुहाना के रूप में थी , तभी रिमी और शूरति ने उसे देख लिया , वोह दोनों सुहाना और किसी अनजान शक़श की बतिअन सुनने लगी , उसके रूम के के होल से अंदर ज़क कर.....

तो बे कुनिटेड....
 


अपडेट-52

अभ अग्गे..

रिमी और शूरति चुप कर कीहोल से सुहाना को देख रही थी , जो किसी अनजान शक़श से बतिअन कर रही थी , उस शक़श का कोई चेहरा नै था , बस इक अँधेरे से भरी परछाई थी ,

" जी , में आपकी हर बात से सहमत हु , मने रमा को अपने वश में कर लिया है , वोह सीमा से बेइंतहा प्यार करती है , और इस वख्त सीमा में hi हु ..." सुहाना ने उस शक़श के सामने नज़रियन ज़ुका कर बोलै ,

"हम्म , लेकिन अगर रवि वापिस ा गया तोह , अभ तोह उसे अपनी शक्ति का एहसास हो चूका है , कही पिछली बार की तरह इस बार भी ..." वोह परछाई अभी बोल hi रही थी के सुहाना बेच में बोल पढ़ी ,

"नै , नहीं , इस बार वोह सब नै होगा , जो पिछली बार हुआ था , पिछली बार , में उसके प्यार के अग्गे मज़बूर थी , उसे मर न पायी , पर इस बार , वोह सब नै होगा , पिछली बार रमा उसके साथ थी , लेकिन इस बार रमा मेरे साथ है..." सुहाना ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"जानती हु , पर इस सीमा ने सबको उसके प्यार में बांध दिया था , रमा , उसकी बहाने , सब की सब , उसके प्यार में बंदी हुई है , अगर यह सब इक जुट हो गई , तोह हम हर जायेगे..." उस परछाई ने बेहद चिंता में बोलै ,

"ऐसा कुछ नै होगा , सीमा के प्यार ने सबको इक जुट किया था , अभ वही सीमा का प्यार , रवि और उसकी बहनो के बेच दरार डालेगा , वोह सब नफरत करेगी रवि से , बेइंतहा नफरत , और अगर यह न हुआ तोह मेरे पास दूसरा रास्ता भी है..." सुहाना ने बेहद गुस्से में मुस्कराते हुए बोलै ,

"कोण सा रास्ता..." वोह परछाई शूरति और रिमी की इंसानी गंध को महसूस करती हुई बोली , उसे एहसास हो चूका था , रिमी और शूरति का ,

"सीमा , हमारा आखरी हथयार , अगर रवि और उसकी बहने सब इक साथ हो गए , तोह उनको सीमा से लड़ना होगा , वोह जीत नै सकते , किसी भी कीमत पर , आखिर उनकी जीत में सीमा की मौत छुपी है..." सुहाना ने भी रिमी और शूरति को महसूस करते हुए बोलै ,

"हम्म , पिछले जनम में रवि ने रिमी और शूरति का इस्तेमाल किया था , बेचारी दोनों , कितनी दर्दनाक मौत दे थी रवि ने , और देखो , इस जनम में वोह अपने कातिल से hi प्यार करती हैं..." उस परछाई ने अपनी बात बदलते हुए बोलै , जिसे सुहाना भी समाज गई ,

"सही कहा अपने , रिमी और शूरति , दोनों पागल हैं , जब की रमा को अपने भाई की सचाई पता चल चुकी है , वोह इक वैम्पायर है , उसने सबकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है , सीमा उसकी वहज से hi कैद हुई है , कोमल भी उसके कारन hi मर गई , अभ रिमी और शूरति भी मर जाएगी , लेकिन उनका भाई , वोह तोह मज़े करेगा , किसी और लड़की के साथ , वोह हवसी इंसान है , जो किसी से भी अपनी हवस मिटा सकता है..." सुहाना ने अपनी बातिओं से रिमी और शूरति के दिमाग में जहर घोलते हुए बोलै ,

रिमी और शूरति उनकी बतिअन सुन रही थी , उनकी कड़वी बतिअन सुन वोह इक दूसरे के चेहरे को देखने लगी , उन दोनों पर सुहाना और उस परछाई की बातिओं का असर साफ दिखने लगा था ,

उनके मन में अपने भाई के लिए नफरत सी होने लगी थी ,

"तुम ठीक कहती हो सुहाना , रवि इक हवसी इंसान है , उसे रोज़ इक नया जिस्म चाहये , ऐसी लिए रिमी , शूरति , रमा , सीमा , उसका सब के साथ सिर्फ जिस्मानी सम्बंद था , इतना hi नै , वोह तोह कविता , सीतल और सोनल के साथ भी सम्बंद बना चूका है , पर शादी वोह किसी से नै कर रहा ..." उस परछाई ने मन hi मन मुस्कराते हुए बोलै ,

लेकिन वोह यह क्यों कह रही थी , आखिर रिमी और शूरति के मन में जहर क्यों घोल रही थी , क्या रिमी और शूरति भी पिछले जनम में रवि से जुडी थी , शयद कुछ ऐसा hi होगा , वार्ना उन दोनों को मरना इतना कठिन भी नै था ,

"हाँ यह सही कहा अपने , अगर अज्ज रवि से पूछा जाये , के वोह कोमल और बाकि सब में किसे चुनेगा , तोह उसका जवाब बस इक होगा , कोमल..." सुहाना ने अपना आखरी वॉर करते हुए बोलै ,

"बिलकुल ठीक , पिछले जनम में उसने कोमल को चुना था , और अपनी बाकि बहनो को मरने दिया , इस जनम में भी वोह कोमल के लिए पागल है , बाकि सब तोह उसकी हवस शांत करने का जरिया मटर हैं , उसके लिए उसकी बाकि बहाने , इक वेश्या से बढ़कर कुछ नै..." उस परछाई ने थोड़ा ुचि आवाज़ में बोलै , तेन के शूरति और रिमी अचे से सुन सके ,

"लेकिन हमें क्या , यह जिंदगी रिमी और शूरति की है , वही जाने , वोह तोह अपने अप्प को दोषी मानती हैं , के ुनहुनु अपने भाई के साथ गलत किया है , कितना गलत सोचती हैं..." सुहाना ने थोड़ा उदास आवाज़ में बोलै ,

"हाँ , सीमा तुम ठीक बोल रही हो , आखिर तुमने कितना कुछ सहा , रवि को कितनी कोससिह की बदलने की , पर वोह हवसी इंसान , अपनी हवस के अग्गे ज़ुका रहा , अपनी इक इक बहिन को अपनी हवस का शिकार बनता रहा , प्यार तोह वोह बस कोमल को hi करता है .." उस परछाई ने बेहद उदास आवाज़ में बोलै ,

बहार कड़ी शूरति और रिमी उन दोनों की बातिओं को जैसे सच मन रही थी , उनकी आँखों से असनु बहने लगे थे , वोह अपनी बीती जिंदगी को यद् कर रही थी ,

उस इक इक पल को , जो उन दोनों ने अपने भाई के साथ बिताया था , इक इक लम्हा उनकी आँखों के सामने घूम रहा था ,

"हाँ , रवि ने घर छोड़ा कोमल के लिए , रवि कोमा में गया , वोह भी कोमल के लिए , रवि मर कर भी वैम्पायर बना , बस कोमल के लिए , उसके लिए कोमल hi उसका सब कुछ है , उसकी जिंदगी में मेरा कोई स्थान नै था , न मेरी बेटी रमा का , न मेरी बहनो का , ाचा हुआ मेरी बेटी रमा ने उसे कैद कर दिया ..." सुहाना ने अपने अप्प को सीमा बता कर सब बोल दिया ,

"लेकिन वोह वापिस ा गया तोह..." उस परछाई ने इक प्रश्न खड़ा करते हुए बोलै ,

"कुछ नै कर पायेगा , इस बार रमा उसकी मेथी मेथी बातिओं में नै आएगी , और न hi रिमी और शूरति , सबको उसकी सचाई पता चल चुकी है , में मर जोगी , पर किसी को कुछ नै होने दूंगी , मेरे लिए मेरी दुनिआ , रमा , रिमी और शूरति hi है , में रवि जैसे हवसी इंसान के अग्गे अपनी बहनो की और इज्जत नीलम नै होने दूंगी..." सुहाना ने बेजान से असनु बहते हुए बोलै ,

रिमी और शूरति पूरी तरह टूट गई , वोह और न सुन पायी , और उठ कर अपने रूम की तरफ भाग गई , वोह रो रही थी , बेइंतहा रो रही थी , जैसे उनका दिल टूट कर भीकर गया था ,

रिमी और शूरति वह से गई , तोह सुहाना और वोह परछाई हसने लगी , जो जहर वोह सबके मन में भर रही थी , वोह जहर धीरे धीरे उनके दिल में , रवि के पवितर प्यार के खिलाफ नफरत भरता जा रहा था ,

वही दूसरी तरफ रमा अपने रूम में बैठी , कुछ उदास थी , कुछ परेशान थी , और उसकी परेशानी, उसका भाई था ,

अपनी जिंदगी की शुरुआत में वोह कितनी खुश थी , जैसे उसे दुनिआ की हर कीमती चीज़ मिल गई थी , और वोह शुरुआत थी , उसका और उसके भाई के प्यारा मिलान ,

लेकिन अभ वोह इस सफर में अकेली पढ़ चुकी थी , वोह टूट चुकी थी , पर वोह यह नै जानती थी , के टुटा हुआ इंसान कितना खतरनाक होता है ,

वोह अपने भाई को अभ भी महसूस कर रही थी , पहले उसे लगा था , उसने अपने भाई को मर दिया , लेकिन अभ उसे अपने भाई का एहसास हर पल होता रहता था , उसे यकीन था , उसका भाई जिन्दा है , और खुश है ,

लेकिन अभ रमा बेहद चिड़चिड़ी हो गई थी , गुस्सा बेइंतहा बढ़ चूका था , और प्यार , ें 4 शबदो से रमा को बेहद नफरत सी हो गई थी ,

दिल पत्थर सा और सांसे बेजान थी ,

जिस्म मुर्दा सा , और आँखें शमशान थी

आत्मा अँधेरा सा , और जिंदगी कब्रिस्तान थी ,

कभी थी जो अपने भाई की पारी मलिका ,

अज्ज वोह मर चुकी थी अंदर से ,

और पूरी की पूरी शेतें थी ...

रमा यह नै समाज रही थी , के जो नफरत का चकरवईओ वोह रच रही थी , इसके अंदर तोह जा रही थी , पर बहार निकल पाना नामुमकिन था ,

अपनी माँ समाज कर , जिसकी पूजा कर रही थी , वही उसके प्यार की दुश्मन थी , वही उसके पवितर प्यार को अँधेरे की दुनिआ में घुमनाम कर रही थी , तेन की रवि के प्यार की हलकी रौशनी भी , इस नफरत भरे अँधेरे में कही खो जाये ,

इक अँधेरा सा है जिंदगी अभ ,

प्यार की रौशनी इसमें जल नै सकती ,

बेजान से आत्मा और टुटा हुआ दिल है ,

धड़कने धीमी है , सांसे सम्बल नै सकती....

वही दूसरी तरफ रवि और ख़ुशी के सामने इक दानवी डेंट खड़ा था , उसका चेहरा किसी चिंपांज़ी जैसा था , दन्त बेहद नोकीले और तीखे थे ,



बदन इक डैम जानवर जैसा , आँखें लाल रौशनी में जगमगा रही थी , उसने किसी अंगरक्षक के विस्तार धारण किये हुए थे , और वोह बेहद ब्यांक आवाज़ में दहाड़ रहा था ,

"रवि यह कोण है हिचककककक..." ख़ुशी ने हिचकी लेते हुए दर कर बोलै ,

"ख़ुशी कन्या , यह दानवी लोग का सबसे बड़ा पहरेदार है , बेहद शक्तिशाली , ऐसे मर कर hi हम , उस दरवाजे तक पहुँच सकते हैं ...."रवि ने उस डेंट की आँखों में देखते हुए बोलै ,

"ओह्ह तोह बोल क्यों रहे हो हिचकककक , मर दो इस दानव को हिचककककक..." ख़ुशी ने थोड़ा घबराते हुए बोलै ,

तभी रवि अपने मन में सोचने लगा... " हम्म , अगर में इस दानव से मर खो , तोह जरूर ख़ुशी कन्या को अपनी ताकत का एहसास हो जायेगा , वोह तामस बन जाएगी... " रवि के होंठो पर इक मुस्कान थी ,

अभ तक वोह दानव जोर से दहाड़ता हुआ रवि और ख़ुशी के बेहद करीब ा चूका था , िका इक उसने अग्गे बढ़ रवि और ख़ुशी पर हमला कर दिया ,

"ख़ुशी कन्या बचो..." रवि ने नशे में लड़खड़ाती ख़ुशी को इक तरफ ढाका जड़ते हुए चीला कर बोलै ,

ख़ुशी को ढाका मरने में व्यस्त रवि सम्बल न पाया , तब तक उस बड़े से कहकर दानव ने रवि को गर्दन से पकड़ ऊपर उठा दिया , उस दानव ने रवि को गर्दन से जकड़े hi दूर फेंक दिया , रवि उड़ता हुआ जमीन पर जा गिरा ,

रवि िका इक गुस्से में चीखता खड़ा हुआ , और उड़ते हुए तेज़ी से उस दानव की तरफ बढ़ने लगा , उस दानव ने रवि के करीब एते hi उस पर अपने भरी हाथ का वॉर किया , रवि उड़ता हुआ ज़ुका और अपने तेज़ तरार पंखो से उस दांव के कंडे को चीयर दिया ,

वोह दानव गुस्से और दर्द से चीख उठा , इस बार जब रवि घूम कर फिर से उड़ता हुआ उसकी तरफ आया , उस दानव ने तेज़ दहाड़ते हुए अपना मोह खोला , तेज़ अग्ग की लपटों ने रवि को जलना सुरु कर दिया , रवि इक डैम से जमीन पर गिर गया ,

वोह दानव तेज़ अग्ग की लपटे अपने मोह से छोड़ता हुआ रवि की तरफ बढ़ने लगा , रवि ने दोनों हाथो की कलायिओं से अपना चेहरा धक् लिया , वोह घुटनो के बल बैठा हुआ था , तेज़ अग्ग की लपटे उसकी कलायिओं पर पढ़ रही थी ,

"रविइइइ.." ख़ुशी दर्द भरी आवाज़ में चीख उठी , रवि की यह हालत उससे बर्दाश्त नै हो रही थी ,

ख़ुशी इक डैम से उठी और गुस्से से भगति हुई , रवि के अग्गे कड़ी हो गई , जो अग्ग रवि को जला रही थी , वही अग्ग अभ ख़ुशी के बदन पर पढ़ने लगी ,

"आह्ह्ह्हियीईइईईई शह्ह्ह्हह्ह ..." ख़ुशी तेज़ अग्ग की तपश को अपने नाज़ुक बदन पर महसूस करते hi दर्द से सिसक उठी ,

ख़ुशी का बदन जल उठा , प्यार की खातिर उसने अपने कुंवारे जिस्म को कुर्बान कर दिया ,

"तमासस्सस्स , तुम तमासस्स होऊ , महसूस करूओ खुड़ड़ड़ कोऊ..." रवि ने चीला कर बोलै ,

ख़ुशी उस अग्ग में जल रही थी जो उस लाल चमकती आँखों वाले दानव के मोह से लगातार निकल रही थी ,

ख़ुशी खुद को महसूस करने लगी , धीरे धीरे उसे ऐसा महसूस होने लगा , जैसे हज़ारो चेट्यां उसके जिस्म में रेंग रही हो ,

तभी िका इक ख़ुशी की आँखें सफेद होकर चमकने लगी , बाल ऊपर की तरफ अग्ग की लपटों में लथपथ उड़ने लगे , माथे के बेचू बेच इक रेड क्रिस्टल चमक उठा , जो तामस की शक्ति का कैंडेर बिंदु था ,



िका इक वोह अग्ग की तेज़ लपटे पीछे हटने लगी , देखते hi देखते वोह अग्ग की लपटे ख़ुशी के बदन से थोड़ा दूर किसी ादृश्ये चीज़ से टकरा चारो तरफ फैलने लगी ,



ख़ुशी के बाल ब्राउन होकर लहराने लगे , उसके कपडे भी किसी सैनिक की तरह दिखने लगे ,

उस दानव ने अग्ग की लपटे मोह से निकलना छोड़ , इक बड़ा सा मैजिक बॉल जो अग्ग से बना हुआ था , ख़ुशी की तरफ छोड़ दिया ,



वोह मैजिक बॉल उड़ता हुआ ख़ुशी की तरफ आया ,



और उसके करीब एते hi इक ड्रैगन में बदल गया , जिसका सम्पूर्ण रूप अग्ग से बना हुआ था , वोह अग्ग के समरूप वाला ड्रैगन ख़ुशी के बदन से लिपट गया ,

पर ख़ुशी आँखें बंद कर जोर से चीख उठी , ख़ुशी का पूरा बदन अग्ग का बन चूका था ,



ख़ुशी पूरी तरह अग्ग में जल रही थी , रवि जो बेहद खुश था , अपनी तामस को देख कर , अभ थोड़ा परेशान हो चूका था , क्यों की उसकी तामस अग्ग में जल रही थी ,

धीरे धीरे ख़ुशी ने वोह साडी अग्नि अपने अंदर शोख ली , अभ वोह हाथ फीडलए कड़ी थी , और अग्ग उसके पोरे बदन के पिछले हिस्से में जल रही थी ,



ख़ुशी अभ अपने जादुई विस्तार धारण कर चुकी थी , जो उसके बदन का अटूट अंग थे , और उसकी ीचा से गयाब होते थे ,

"वह तामस , अभ ख़तम कर दो इस दानव को..." रवि ने बड़ी प्यारी आवाज़ में बोलै ,

"जी प्रिंस..." ख़ुशी ने इक बार पीछे पलट कर देखा और फिर उसने आँखें बंद की , जब उसने आँखें खोली तोह उसका बदन तेज़ रौशनी में चमक उठा ,



उसके बाये हाथ में इक ढल थी और ढाये हाथ में इक तेज़ रौशनी से चमकती तलवार , उसके पंख तेज़ अग्ग जैसी रौशनी में चमक रहे थे , आँखें सफेद रौशनी में चमक रही थी , अभ वोह अपने असली रूप में थी , अभ वोह तामस थी ,

ख़ुशी ने जोर से चीखते हुए वोह तेज़ रौशनी की तलवार उस दानव के सीने में उतर दी , वोह देरिदा दानव इक बम्ब की तरह फुट गया ,

ख़ुशी इक डैम से रवि की तरफ पलट गई , वोह खामोश थी , और अपना चेहरे झुकाये कड़ी थी , क्यों की वोह इक अंगरक्षक थी ...

"वह , तामस , तुम अज्ज भी उतनी hi ताकतवर हो , हमारी अंगरक्षक तामस.." रवि ने ख़ुशी के करीब आकर बोलै ,

"शुक्रिया प्रिंस , हम आपकी गुलाम सेवक , आपकी रक्षा करेगी हर वख्त , हम आपको इस दुनिआ से निकल कर , आपकी रूही तक लेकर जाएगी , चाईए प्रिंस , आपकी रूही बेहद कष्ट में है..." ख़ुशी ने नज़रियन झुकाये तामस के अंदाज़ में बोलै ,

"क्या , हमारी रूही कष्ट में , तामस आपकी शक्ति , का आपको पोर्न एहसास हो गया है , आपकी भविष्ये देखने वाली शक्ति भी जागृत हो चुकी है , हमें लेकर चलो , हमारी रूही के पास..." रवि ने बेहद घम्बिर होकर बोलै , वोह जल्द से जल्द रूही से मिलना चाहता था , चाहे अभ वोह कोमल थी ,

लेकिन इस बात से कोई फरक नै पढता था , आखिर था तोह वोह रवि hi , और प्रिंस भी , उसके लिए कोमल hi रूही थी और रूही hi कोमल ,

"प्रिंस हमने आपको तब भी बताया था , मलिका सुहाना बेहद बुरी है , पर अपने उनके खिलाफ कुछ नै सुना , अभ जल्दी चलिए , हमें मलिका रूही को बचाना है..." ख़ुशी इतना बोल अग्गे चलने लगी , और रवि भी उसके पीछे पीछे , अपनी कोमल से मिलने चल पढ़ा....

तो बे कुनिटेड... फ्रेंड्स मेरी पिछली बीमारी फिर से एक्टिव हो गई है , मने कल hi ब्लड टास्ते करवाया था ,

सॉरी इतने दिन अपडेट नै कर पाया.. अभ कोससिह यही रहेगी.. डेली अपडेट ए.. शुक्रिया सभी का...

 
अपडेट-53

अभ अग्गे...

रवि और ख़ुशी अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ रहे थे , उनके सामने उनकी मंज़िल थी , ख़ुशी की आँखें बहुत दूर तक सब देख रही थी , इसके पीछे भी इक कारन था ,

पारी लोग में बहुत सदियाँ पहले , इक दिन दुपहर के वख्त तामस जंगल में घूम रही थी ,

उसके पास उसका जादुई घोडा था , तामस अपने घोड़े से बेहद प्रेम करती थी , उसकी जिंदगी जैसे उस घोड़े से hi जुडी हुई थी ,

तामस इक आम सी पारी की लड़की थी , लेकिन अपने जनून , अपनी म्हणत के डैम पर , तामस अज्ज राज महल की सबसे ताकतवर मेहला बन चुकी थी ,

तामस बेहद अचे सेहभाव की थी , पर उसकी मदिरा पीने की आदत बुरी थी , राज महल के अंदर तक पहुंचना उसका सपना था ,

लेकिन इस सपने के पीछे भी इक कारन था , वोह कारन था , उसकी प्रिंस सोनिक के प्रति चाहत , वोह बेइंतहा प्रेम करती थी प्रिंस सोनिक से , तभी तोह कड़ी म्हणत कर वोह राज महल पहुंची थी ,

प्रिंस सोनिक का दिल जीत लिया था , उनकी जान बचा कर , पहले पहले तामस कभी मदिरा का सेवन नै करती थी , प्रिंस सोनिक के साथ रहते रहते जब तामस को एहसास हुआ के प्रिंस रूही के बिना किसी को प्रेम नै करता , तब उसका दिल टूट गया ,

जिंदगी भर कुवारी रहकर प्रिंस के नाम अर्पण किया अपना जिस्म , तामस ने ख़तम करना चाहा , क्यों की पूरा दिन साथ रहने के बावजूद भी , प्रिंस उसकी आँखों में छुपे बेपनाह प्रेम को महसूस नै कर प् रहा था ,

और दूसरी तरफ तामस अंदर hi अंदर मरती जा रही थी , मदिरा का सेवन अभ दिन की शुरुआत से लेकर शाम ढलने तक होने लगा था ,

अपने अप्प को ख़तम करने की छह में तामस ने उस अँधेरे जंगल में जाने का निर्णय लिया , वोह बिना किसी को बताये अकेली hi उस अंधकार से भरे जंगल में चली गई , यहाँ पारी लोग से किसी को जाने की इजाजत नै थी ,

क्यों की उस खौफनाक जंगल में केवल जादूगर रहते थे , वोह उनकी दुनिआ थी , उनकी अपनी बनाई दुनिआ , यहाँ सिर्फ कला जादू होता था ,

तामस मदिरा में तुन होकर इक दिन उस अँधेरे जंगल में चली गई , उसे अपनी जान देनी थी ,

कुछ दिन तामस के राज महल न ऐनी से प्रिंस बेहद उदास रहने लगे , तभी राजा ाबून ने तामस को ढूंढ़ने के लिए पोरे पारी लोग को छान मारा ,

कई लम्हे ढूंढ़ने के बाद भी तामस का कुछ पता न चला , तामस इक रहस्मयी तरीके से गयाब हो गई थी , प्रिंस की उदासी और बढ़ गई थी ,

जिस प्यार को वोह प्रिंस की आँखों में देखना चाहती थी , महसूस करना चाहती थी , वोह प्यार अभ प्रिंस की आँखों में दिख रहा था ,

क्यों कई हज़ार सालो तक तामस हर पल , हर लम्हा , प्रिंस के साथ रही थी , प्रिंस ने अभ राज महल से बहार निकलना बंद कर दिया था , क्यों की तामस की जुदाई उनसे बर्दाश्त नै हो रही थी ,

देखते hi देखते यह बात रूही के कनु तक भी पहुँच गई , रूही जो अपने भाई से बेपनाह प्यार करती थी , उसने तामस का पता लगाना सुरु किया ,

रूही जो बचपन से hi कुदरत से जुडी हुई थी , कुदरत की हर बनाई चीज़ से मोह्हबत करती थी , हर चीज़ , हर जानवर को महसूस कर सकती थी , उनसे बतिअन कर सकती थी ,

तब रूही ने पारी लोग के जानवरो से तामस का पूछना सुरु किया , जानवर जो रूही से प्यार करते थे , उससे बात कर सकते थे , उन जानवरो ने तामस का पता लगवा लिया ,

लेकिन रूही को जब पता चला , के तामस उस खौफनाक जंगल में गई है , तब रूही बेहद उदास हो गई , के वोह यह बात प्रिंस को बताये या न , क्यों की प्रिंस यह बात जानकर , वह उस जंगल में जरूर जाते ,

और उस जंगल की खास बात यह थी , के उस जंगल से अज्ज तक कोई वापिस नै लोट पाया था ,

ऐसे में अगर प्रिंस वह जाते , तोह शयद hi वापिस ा पते , पर प्रिंस की उदासी ने रूही को मज़बूर कर दिया , सच कहने के लिए ,

प्रिंस यह बात जानते hi , के तामस अकेली उस खौफनाक जंगल में गई है , वोह उठ खड़े हुए , और रूही के लाख समझने के बावजूद भी उस जंगल में चले गए ,

प्रिंस कई सालो तक वापिस न ए , बस उसी वख्त सुहाना ने कुवारी लड़कयों की बलि देनी सुरु कर दी ,

आखिर जब प्रिंस तामस के साथ वापिस ए , जिसके उम्मीद नै थी , तब उनके साथ , इक बाला की खूबसूरत लड़की थी , जिसके लाल लाल बाल बेहद लम्बे थे , और उसका जिस्म बेहद खूबसूरत था , पर कभी कभी उसका जिस्म कला पढ़ जाता था , जब उसे गुस्सा अत था ,

तामस और सुहाना की कहकर लड़ाई में , तामस की जान चली गई , और वोह मरते वख्त hi अपने प्यार का इजहार प्रिंस को कर सकीय , और जब उसके पास कुछ आखरी पल बचे थे , तब उसने अपनी पवित्र जिस्म को साक्षी मन कर , प्रिंस से यह वचन लिया के अगले जनम में वोह उसका प्रेमी बनेगा ,

बस यही कहानी थी तामस की , जो अज्ज ख़ुशी के रूप में जनम ले चुकी थी , और रवि उसका प्यार था ,

तामस के साथ जो जादूगरनी लड़की आयी थी , वोह और कोई नै रमा थी , उस जंगल में , तामस , रमा से मिली थी , लेकिन रमा यह बात नै जानती थी के प्रिंस उसका भाई है ,

और मरते डैम तक उसे कभी यह पता न चला के प्रिंस उसका अपना भाई है , रूही उसकी बहिन है , वोह बस तामस के लिए , प्रिंस के साथ उस आखरी युद्ध में लड़ती रही ,

बैक तो स्टोरी...

रवि और ख़ुशी अभ उन दो दरवाजो के पास पहुँच चुके थे , लेकिन ख़ुशी के पास इक अनचाही शक्ति थी , वोह जानती थी , के कोमल कहा कैद है ,

लेकिन ख़ुशी ने इक बात रवि से छुपा कर राखी थी , के कोमल को उस कैद से मुकत करने के लिए , रवि को इक कीमत चुकानी थी , उसे अपने पवितर प्यार की परीक्षा देनी थी ,

जैसे कोमल ने परीक्षी दी थी , और अग्नि उसका जिस्म जला नै प् रही थी , क्या रवि ऐसा कर पता , खैर यह तोह ऐनी वाले वख्त की बात थी ,

"प्रिंस हम बस पहुँचने hi वाले हैं , आपको यद् है , जब हम उस जंगल में खो गए थे , तब इक जादूगर लड़की ने हमारी हिफाज़त की थी..." तामस ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै , क्यों की रमा और रवि की लड़ाई उसे अभ भी यद् थी ,

"हाँ यद् है , वोह लड़की हमारी और सुहाना की आखरी लड़ाई के वख्त hi आयी थी , लेकिन वोह थी कोण , हम उससे पूछ hi न पाए.. " प्रिंस ने उस वख्त को यद् कर बोलै ,

"वोह आपकी बहिन थी , जो बचपन में आपसे बिछड़ गई थी , आपकी उस बहिन को जादूगरनी उठा कर ले गई थी , क्यों की आपके पिता ने उस जादूगरनी के ासीहक को मर दिया था , उसने बदला लिया आपकी बहिन को उठा कर... " तामस ने उस वेरियन जगह पर अग्गे बढ़ते हुए बोलै ,

"क्या , वोह मेरी बहिन थी , ओह्ह्ह्ह , बिना कुछ जाने , उसने अपनी जान कुर्बान कर दी.." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"हाँ , लेकिन वोह नै जानती थी , के वोह आपकी बहिन है , आपके और हम सबके मरने के बाद , उसने hi सुहाना का अंत किया था , पर इस में उसकी खुद की जान भी चली गई , अप्प रूही के मरने से , इस कदर गुस्से में ा गए थे , के अपने पोरे पारी लोग का विनाश कर दिया था , सुहाना तब इतनी ताकतवर थी , के आपकी पूरी ताकत उसे रोक नै प् रही थी , तब आपकी बहिन ने hi सुहाना को ख़तम किया था..." ख़ुशी ने बेहद घम्बिर होकर बोलै ,

"उसने कैसे..."

"वोह बेहद ताकतवर थी , आपकी मौत से वोह टूट गई थी , आपसे मिलने की चाहत में वोह उस खौफनाक दुनिआ से वापिस आयी थी , चुप चुप कर आपको देखती थी , आपसे डर्टी कभी आपके सामने नै अति थी , वोह इक जादूगरनी थी , और किसी भी जादूगर का पारी लोग में ऐनी पर प्रतिबन्ध लगा हुआ था..." तामस ने नाम आँखों से बोलै , अभ उसके हाथ में मदिरा का प्याला था , जब से वोह तामस बानी थी , तब से लगातार वोह मदिरा का सेवन कर रही थी ,

"तुम यह मदिरा का सेवन कब बंद करुँगी , अगर तुम चढ़ गई , तुम मेरा जीना हराम कर डौगी..." रवि ने थोड़ा मुस्करा कर बोलै , पर अंदर से वोह दुखी था , क्यों की वोह जान चूका था , वोह लड़की और कोई नै रमा थी ,

"प्रिंस मेरे और मेरी मदिरा के बेच ायुगे , तोह ाचा नै होगा , जब आपको मुज़से प्यार नै , तोह मुझे आखिर इस सोमरस का सहारा लेना पढ़ा..." ख़ुशी ने मुस्करा कर बोलै ,

"हम्म , लेकिन हम तुम प्यार करते हैं..."

"हाँ , हाँ , जानती हु आपका प्यार , ाचा अप्प इसकी घुट पे लो , मेरी खातिर..." ख़ुशी ने इक अपना खली हाथ अग्गे किया तोह , इक छोटा सा पियाला उसके हाथो में ा गया ,

"तुम्हारी खातिर ..." रवि ने इतना बोलै और उस पियले को इक hi साँस में खली कर दिया .." बहुत कड़वा है , पर यह है क्या..." रवि ने अपने होंठ अपने हाथ से साफ करते हुए बोलै ,

"बस कुछ पल रुको..." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै , तभी रवि का सार घूमने लगा , उसने अपना सार पकड़ लिया और घुटनो के बल निचे बेथ गया ,

"अह्ह्ह्हह , kk...kkk...khushiiiiii....yy...yeehhh...kk...kyaaa....hh...haaaiii..." रवि ने दर्द से तड़फते हुए बोलै ,

"है कुछ , अभ अप्प प्रिंस नै हो , अभ अप्प रवि हो , जो पृथ्वी पर रहने वाला इक आम सा इंसान था , जो इक छोटा सा मज़दूर किसान था , अभ आपकी कोमल , आपकी रूही है , में तामस आपकी ख़ुशी हु , और इक आपकी दुश्मन जो अभ आपकी हर बहिन को आपसे दूर कर रही है , जानते हो कोण है वोह..." ख़ुशी ने थोड़ा घम्बिर और उदास होकर बोलै ,

"सुहाना , सुहाना , हाँ यद् आया , वोह अभ सीमा है , में सब समाज गया , सीमा खुद hi सुहाना है , लेकिन कैसे , वोह बहुत अछि थी ..." रवि ने बेहद सोचते हुए बोलै ,

"रवि , काल ने जो तुम रिंग दी थी , उसमे पारी लोग की साडी बुराई कैद थी , तुम यद् है , जब पहली बार सीमा ने वोह रिंग तुम्हारे हाथ में देखि थी , तब उसकी आँखों में इक अजीब सी चमक थी , और काल के कहने पर , जब सीमा ने वोह रिंग खुद अपनी ीचा से पहन ली , तब रिंग की बुराई ने सीमा के जिस्म को पहचान लिया , और अभ रिंग नष्ट होकर पूरी तरह सीमा के बदन में समां गई , ऐसी लिए उसके हाथ में कोई रिंग नै थी..." ख़ुशी ने पूरी सचाई बताते हुए कहा ,

"ओह्ह्ह , पर पिता जी ने क्यों सीमा को वोह रिंग दी , मंटा हु , प्रिंस के रूप में मने सुहाना को कोई प्यार नै दिया , लेकिन सीमा के रूप में उसे hi अपना सब कुछ मन लिया था , उसे अपनी पत्नी का दर्ज़ा दिया , हर ख़ुशी दी , बेपनाह प्यार दिया , अभ क्यों वोह यह सब कर रही है..." रवि ने नाम आँखों से बोलै ,

"इसका जवाब नै मेरे पास , क्यों की जब सुहाना की मौत हुई , तब में मर चुकी थी , इस लिए में नै जानती , रिंग का जनम कैसे हुआ , इसका जवाब तुम ढूंढ़ना है , या कोमल के पास होगा , हम पहुँच गए..." ख़ुशी ने सामने की तरफ देख कर बोलै , यहाँ इक बड़ा डा दरवाजा अग्ग में जलता हुआ दिख रहा था , जिस पर शतिआं खुद विराजमान था..

वही दूसरी तरफ सुहाना घर में ेहडेर ोहडेर चाकर काट रही थी , वोह अभ आखरी लड़ाई की तयारी कर रही थी , उसे अभ लड़ना था , रवि से , कोमल से , और ख़ुशी से ,

उसके साथ बस रमा थी , और जोकर था , और इक अनचाहा दुश्मन , जिसका नाम था दयना ,

कोमल के आज़ाद होते hi दयना भी आज़ाद हो जाती , लेकिन सुहाना ने कुछ और hi सोच रखा था ,

तो बे कुनिटेड...
 


अपडेट-54

फाइनल 10 उपदटेस..

अभ अग्गे..

रवि और ख़ुशी नाराज लोग के दरवाजे पर खड़े थे , पारी लोग में ऐसे पटल लोग कहते थे , बुरे करम करने वालो को यहाँ बेहद ब्यांक खतौर सजायें दे जाती थी ,

यहाँ के पहरेदार बेहद शक्तिशाली दानव थे , जो मुज़रिमों को भेड़ियों में बंद कर , उनको बेहद कष्टदीयक सजा देते थे , जिनको देखने मटर से रूह कम्प जाये ,

जैसे hi रवि ने अपना कदम अग्गे बढ़ाया , तभी दरवाजा अपने अप्प खुल गया , दरवाजे के अंदर उस पर , बस अग्ग hi अग्ग जल रही थी ,



अगर रवि को अपनी बहिन कोमल तक पहुंचना था , तोह उसे इस अग्ग के बहते सागर को चल कर पर करना था , जो के नामुमकिन सा लग रहा था ,

रवि के बढ़ते हर इक कदम के साथ शेतीअन की मूरत जल उठी , उसकी बड़ी बड़ी ाकेँ तेज़ रौशनी में जगमगा उठी , सामने अग्ग का दरिया था , जिसके दूसरी तरफ उसकी सदियों पुराणी मोहबत थी ,

"रवि , अगर तुमने सच्चे दिल से कोमल को चाहा हो , तभी अंदर जाना , वार्ना यह अग्ग तुम जला कर रख कर देगी..." ख़ुशी ने रवि को चेतवनी देते हुए बोलै ,

"में नै जनता के मेरी महबत सच्ची है या झूठी , मुझे बस अपनी कोमल को वापिस लाना है , मेरी सभी बहने मुझे हवसी समज़ती हैं , अगर मेरे दिल में तुम सबके लिए प्यार की जगह , थोड़ी सी भी हवस हुई , तोह में इस अग्नि को साक्षी मन कर कहता हु , यह अग्नि मुझे जला दे..." रवि ने अग्नि के विशाल सागर को देखते हुए बोलै , उसकी आँखें नाम थी ,

"नै रवि , तुम कुछ नै होगा , तुम इक अचे इंसान हो , वादा करो वापिस ायोगे , मेरे लिए , कोमल के लिए , अपनी बहनो के लिए , वादा करो..." ख़ुशी ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"वादा , हष्ठ , ख़ुशी वादा वोह लोग करते हैं , जो किसी रिश्ते को निभाना नै चाहते , या जिनको विश्वास न हो , ख़ुशी तुम्हारी आँखों के सामने अग्ग hi अग्ग है , कैसे वादा करू में , अगर में मर गया , तोह मेरा प्यार झूठा पढ़ जायेगा..." रवि ने पलट कर ख़ुशी की आँखों में देख कर बोलै ,

"रवीए , नै , तुम कुछ नै हो सकता , सदियों से तुम्हारे प्यार के लिए तड़फ रही हु , इस बार भी , नै , तुम ायोगे , वार्ना में अपनी जान दे दूंगी..." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"हासष्ठ , मेरी जान , जो गलती मने पिछले जनम में की थी , तुम प्यार न देकर , वही इस जनम में की , तुम प्यार न देकर , खुशु अगर मुझे कुछ हो जाये , तुम मेरी मासूम बहनो का ख्याल रखना , अभी नादाँ है , नासमझ हैं , बहुत जल्द बहक जाती हैं , किसी की भी बात को सच मन लेती हैं , और मेरी जूही का भी ख्याल रखना , अभ मुझे जाने की इजाजत दो..." रवि ने ख़ुशी को अपने गले लगा उसके कनु में दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

ख़ुशी कुछ न बोल पायी , आँखों से असनु बह रहे थे , अज्ज सिर्फ रवि की परीक्षा नै थी , उसकी भी थी , उसकी बहनो के प्यार के परीक्षा थी ,

रवि ने इक बार ख़ुशी के गुलाबी कंपते होंठो को चूमा और इक बार मुस्करा कर उसकी भेजी भेजी आँखों में देखा और पलट कर उस अग्ग के दरिया की तरफ चल पढ़ा ,

"रवीए , में यही रुक कर तुम्हारा इंतज़ार करुँगी , जब तक तुम नै ायुगे , इक पल भी यहाँ से नै हिलूगी..." ख़ुशी ने चीला कर बोलै , उसकी आवाज़ में असीम दर्द था , बेपनाह प्यार था ,

रवि ने पलट कर ख़ुशी की तरफ देखा और फिर नाराज लोग में चला गया , रवि के अंदर घुसते hi दरवाजा जोर से बंद हो गया , शेतीअन की आँखों की रौशनी इक डैम से गयाब हो गई , अभ वोह इक पत्थर की मूरत लग रहा था ,

कैसा इंसान था रवि , जिंदगी भर चैन से नै बैठा था , बचपन में बाप मर गया , अभ उम्र hi क्या था , खेलने , कूदने की उम्र में खेतो में मज़दूरी करने लगा ,

अपने परिवार को पला , बड़ा हुआ तोह , रमा के साथ इक ऐसे रिश्ते में बांध गए , जिसकी सजा वोह अज्ज तक भुगत रहा है , इक वासना , इक अजीब सी वासना उसके अंदर जग उठी , अपनी बहनो के साथ सेक्स करने की ,

लेकिन वोह जानबूझ कर यह सब नै कर रहा था , उसकी बहने , उसकी हर प्रेमिका , पिछले जनम में उससे जुडी हुई थी , सबका प्यार अधूरा था , और सबको खुशियाँ देनी थी रवि को ,

पिछले जनम में जिसे प्यार नै मिला था , उसे प्यार देना था , अज्ज भी वोह अपने पिछले जनम की गलतियों को सुधर रहा था ,

रूही से प्यार वोह न पिछले जनम में कर पाया , और नई hi इस जनम में , उसके मन में इक अधूरी ख्वीश थी , कोमल से प्रेम करने की , क्या वोह इस जनम में पूरी हो पायेगी , हष्ठ , खैर यह अग्गे वख्त की बात थी ,

अभ अग्गे...

रवि ने पीछे पलट कर देखा , अभ वह कोई दरवाजा नै था , बस चारो तरफ अग्ग hi अग्ग थी ,

रवि ने अपने सामने की तरफ नज़र दोड़ै , तोह

सामने का मंज़र दिल दहला देने वाला था , अग्ग की तेज़ लपटे जल रही थी , जैसे किसी सागर में लहरें उठ रही हो ,

दूर तक , यहाँ यहाँ , रवि की नज़र जाती , बस अग्ग hi अग्ग दिखाई देती , वह अग्ग के इस दरिया में हज़ारो लोग जल रहे रहे , उनके हाथ और सर hi दिखाई दे रहे थे ,



जैसे कोई पानी में डूबता हुए अपने हाथ पेअर मरता है , उसी तरह यह लोग भी , दर्द से छीलते हुए अपने हाथ पेअर चला रहे थे ,

रवि को अभ बेइंतहा गर्मी महसूस होने लगी , धीरे धीरे रवि का बदन उस गर्मी को सेहन न करते हुए जलने लगा ,

"उफ्फ्फ कहा होगी मेरी कोमल..." रवि ने मन hi मन बोलै और फिर अग्गे बढ़ गया ,

अभ रवि उस अग्ग के दरिया में चलने लगा , उसका बदन तेज़ अग्ग में जलने लगा , रवि को बेइंतहा दर्द हो रहा था , जिसको शबदो में बयान करना मूर्खता होगी ,

न कभी प्यार को शबदो में बयान किया जा सकता है , और न किसी के दर्द को , न ख़ुशी को और न hi किसी के गम को ,

रवि जैसे जैसे अग्गे बढ़ता गया , उसका जिस्म जलता गया , रवि के मन में बस कोमल थी , उसे बस कोमल तक पहुंचना था , उसे बस कोमल का हसना , रोना , उसका प्यार करना , यही सब यद् ा रहा था ,

जैसे जैसे वख्त बेट्टा गया , रवि को अपनी शक्ति का एहसास होता गया , उसने साबित कर दिया था के वोह हवसी नै है , अगर उसमे जरा सी भी हवस होती , तोह वोह अभ तक जल कर रख हो जाता ,



अभ रवि का जिस्म लाल पढ़ चूका था , कपडे जल चुके थे , आँखें तेज़ रौशनी में चमक रही थी , उसके बाल भी तेज़ अग्ग में जल रहे थे , लेकिन अगजनी का दर्द , वोह अभ भी महसूस कर रहा था ,

पर मोह्हबत को पाने की लालसा ने उसे अंदर से मज़बूत कर दिया था , उसे बस अपनी बहिन को देखना था , उसे अपनी मज़बूत बहु में लेना था , उसे वोह सकूं महसूस करना था , जो वोह पहले करता था ,

जैसे जैसे रवि अग्गे बढ़ रहा था , वह जलते लोग की चखे अभ उसे तेज़ सुनाई देने लगी थी , कुछ लोग दर्द से छीलते उसके पेअर पकड़ लेते , तब रवि को बहुत दिकत होती ,

आधा दिन चलने के बाद , बेइंतहा जलने के बाद , रवि ने इस अग्ग के दरिया को पर कर लिया , पर सामने का मंज़र देख रवि के होश उड़द गए ,



सामने पटल लोग के पहरेदार थे , जो नए क़ैदीयों को भेड़ियों में जकड कर ला रहे थे , वह लोग को मारा जा रहा था , उनको काट रहे थे , कोड़े लगाए जा रहे थे ,

पर यह सब पापी लोग थे , इनके बुरे करम , इनको इस जगह खींच लाये थे ,

तभी उन पेहरदारु की नज़र रवि पर पढ़ गई , इक पहरेदार रवि की तरफ बड़ा , रवि ने तेज़ भागते हुए उसके चेहरे पर जोरदार वॉर किया , वोह पहरेदार वही गिर पढ़ा ,



तभी सभी दानवी पहरेदार इक जुट हो गए , वोह हज़ारो से भी जायदा थे , कुछ हवा में उड़द भी रहे थे , रवि अकेला था ,

"देखो में तुम सब से नै लड़ना चाहता , में हु प्रिंस सोनिक , पारी लोग का प्रिंस , राजा ाबून और मैलका सोना का बीटा , में अपनी बहिन मलिका रूही को लेने आया हु , मुझे जाने दो , वार्ना..." रवि ने गुस्से में चीखते हुए बोलै , तोह अग्ग की लपटे तेज़ हो गई ,

पूरा अग्ग का दरिया जैसे रवि के पीछे खड़ा हो चूका था , सभी दानव रवि के रस्ते से हैट गए ,

रवि का पूरा जिस्म अग्ग की लपटों से घिर चूका था , पोरे जिस्म से अग्ग निकल रही थी , सभी दानव , रवि के अग्गे सार ज़ुका कर बेथ गए ,

रवि अग्गे बढ़ने लगा , करीब इक दिन और चलने के बाद , रवि उस अग्ग के विशाल सागर को पर कर गया , अभ तक डेढ़ दिन पूरा बीत चूका था , मतलब पृथ्वी पर 6 महीने गुजर चुके थे , मतलब रवि को 1 साल पूरा हो चूका था , पृथ्वी चोदे हुए ,

इस 1 साल में पृथ्वी पर बहुत कुछ बदल चूका होगा , सुहाना और जोकर ने बेइंतहा तबाही मचाई होगी , उसकी बहने टूट कर भीकर चुकी होगी , बेबी का पता नै क्या हुआ होगा ,

अभ बस इक बंज़र जमीन थी , जिसे पर करना था , जिसकी मिटटी पूरी काली थी , अभ अग्ग नै थी , रवि ने अपनी शक्ति को इक जुट किया , उसके पंख फिर से निकल ए ,

रवि उड़ता हुआ अग्गे बढ़ने लगा , आधा दिन और बीत गया , अभ रवि के सामने इक लड़की बैठी थी , जो अग्ग में जल रही थी , उसके चारो और अग्ग hi अग्ग थी , जमीन भी जल कर लावा बन चुकी थी ,

"कोमळळ..." रवि जोर से चिलाय और जमीन पर उतर गया , उसके उतारते hi उसके पंख गयाब हो गए ,

अभ बस चाँद कदम दूर उसकी महोबत थी , उसकी बहिन थी , उसे अभ उसके करीब जाना था , लेकिन वोह नै जनता था , कोमल कैसे इस कैद से आज़ाद होगी , पर कोमल की दर्द भरी चखे उससे बर्दाश्त नै हो रही थी ,



कोमल उस अग्ग में जलती हुई उसका hi इक रूप लग रही थी , रवि धीरे धीरे कोमल की तरफ बढ़ने लगा , अभ तक कोमल भी अपने भाई को देख चुकी थी ,

"भइआएए , रुकक्क जोऊ..." कोमल ने दर्द भरी आवाज़ में बोलै , वोह नै चाहती थी के उसके भाई को कुछ हो जाये ,

कोमल जिस मायाजाल में कैद थी , उसका तोड़ उसे भी नै पता था , और उसके साथ दयना भी कैद थी , और वोह दयना को आज़ाद नै करना चाहती थी ,

रवि तोह जैसे कोमल की आवाज़ सुन hi नै रहा था , उसे बस कोमल को अपनी बहु में लेना था , उसे चूमना था , प्यार करना था ,

"ahhhhhhhhhhhh...." रवि जैसे hi उस मायाजाल से उपजै पवितर अग्ग में घुसा , वोह दर्द से चीला उठा , कोमल अपने भाई की चीख सुन उसकी तरफ बढ़ने लगी ,

रवि का पूरा जिस्म उस पवितर अग्ग में जल उठा , पर वोह रुका नै , हाला की इक कदम अग्गे चलने पर भी अग्ग की लपटे उसके चेहरे से भी ऊपर तक बाद रही थी ,



"भइआएए , मत्तट आयु प्लसससस..." कोमल ने दर्द भरी आवाज़ में चीला कर बोलै , अपने भाई की ऐसी दर्दनाक हालत उससे सेहन नै हो रही थी ,

"kk...komalllll..." रवि दर्द से कहरहाता हुआ अग्गे बढ़ता गया ,

जैसे जैसे उनके बेच का फैसला काम होता गया , वैसे वैसे अग्ग की तेज़ लपटे इक दिवार सी बनकर रवि को रोकने लगी , वोह अग्ग मायाजाल से बानी थी , काळा जादू से बानी थी ,

चाहे वोह रवि के जिस्म को जला नै प् रही थी , पर उसकी लपटे बेहद तेज़ थी , जैसे सागर की विशाल लहरें तेज़ घाटी से किनारे की तरफ अति हैं और हर चीज़ को अपनी ताकत के साथ बहा कर ले जाती हैं , बस वैसे hi यह अग्ग लेहरो का रूप धारण कर , रवि को पीछे धकेल रही थी ,

"भइआएए , अप्प्प नई ा पॉजी..." कोमल ने दर्द से कहरहते हुए बोलै , वोह अंदर से बेइंतहा रो रही थी ,

रवि कुछ सुनने को त्यार नै था , अभी रवि , बस कोमल से दो कदम hi दूर था , के उस पवितर अग्ग ने अपनी पूरी ताकत लगा , इक बेहद तेज़ लहर पैदा की , जो रवि को अपने साथ बहा ले गई , और रवि को वापिस जमीन पर फेंक दिया ,

रवि जमीन पर बेसुध पढ़ा हुआ था , पोरे जिस्म से धुआँ निकल रहा था , बदन का हर हिस्सा जल रहा था , रवि को अपने जिस्म में इतनी जलन और दर्द महसूस हो रहा था , के उसे शबदो में बयान करना बेवकूफी होगी ,

"भइआएए , लोटत जोऊ , प्लसस , ागररर आप्कोऊ कुछःह होऊ गया , तोहह मई किसकी सहरी जेयूजीई..." कोमल ने जैसे अंदर से कमज़ोर होते हुए बोलै , वैसे hi उस पवितर अग्ग ने कोमल को चारो तरफ से घेर लिया और उसे अपनी पूरी ताकत से जलने लगी ,

"कोमलललललल..." रवि अपनी बची कुछ हिमेट जूता उठते हुए बोलै , चाहे उसके बदन के हर हिस्से से दर्द की तेज़ लहरें उठ रही थी , पर कोमल का दर्द उससे बर्दाश्त नै हो रहा था ,

रवि इस बार अपनी पूरी ताकत बटोर अग्गे बढ़ा , उसकी आँखें सफेद हो गई , और पूरा बदन अग्ग में जलने लगा , रवि वापिस उस अग्ग में घुस गया ,

अभ उस अग्ग ने कोमल को और भी जलना सुरु कर दिया , वोह रवि के उस तक पहुँचने से पहले , उसे ख़तम करना चाहती थी ,

रवि से यह सब देखा न गया , अभ उसे इक आखरी रास्ता नज़र आया , यही इक रास्ता बचा था ,

"कोमलललल..." रवि ने उस अग्नि से बहार आकर कोमल को पुकारा , पर अभ कोमल की आवाज़ नै ा रही थी ,

रवि ने अपने दोनों हाथ जोड़ लिए , कुछ hi देर में रवि का बदन हवा में उड़ने लगा , जैसे जैसे रवि दयँ लगता गया , उसके सीने से सपाट चाकर उत्पन होने लगे ,



रवि धीरे धीरे उस अग्ग को अपने अंदर सोखने लगा , जैसे जैसे अग्ग उसके जिस्म में प्रवेश करती गई , उसका बदन लाल होता गया ,

"भइआएए नईईई , ऐसा मत्तट करूओ..." कोमल जो अभ अग्ग की तपश काम होने के कारन अपने भाई को देख सकती थी , उसने चीला कर बोलै ,

पर रवि रुका नै , वोह अग्ग को अपने अंदर निगलता गया , अभ अग्ग बेहद काम हो चुकी थी , लेकिन कोमल अभ भी जल रही थी , क्यों की मायाजाल अभी टुटा नै था ,



रवि अभ कोमल के करीब जाने लगा , दोनों के बदन अग्ग में जल रहे थे , इक वख्त आया , जब दोनों इक दूसरे के सामने खड़े थे ,

अभ कुछ hi वख्त हुआ था दोनों को दूर हुए , पर ऐसा महसूस हो रहा था , जैसे सदियाँ बीत गई हो ,

"कोमळळ..." रवि ने कोमल को अपने करीब करते हुए बोलै ,



"भइआए..." कोमल इतना hi बोल पायी थी , के रवि ने अपने होंठ उसके होंठो से मिला दिए , बेइंतहा तड़फे थे दोनों , इस प्यार के लिए , ें सकूं भरे पलु के लिए ,

कोमल का मायाजाल अभ टूट चूका था , उसे अकेले रहना था , पर रवि के उसको छूटे hi , उसका मायाजाल ख़तम हो गया ,

"आह्ह्ह्ह भइआए..." इक तेज़ धमाका हुआ , जैसे बेम विस्फोट हुआ हो , रवि और कोमल इक दूसरे से काफी दूर जाकर गिर गए , और तभी कोई हसने लगा , यह थी दयना , जो अभ आज़ाद थी ,



उसके सामने उसके दुश्मन थे , जो अभ बेहद कमज़ोर थे , और अपनी दुनिआ से बहुत दूर....

"हम्म्म , हॉशह्ह्ह , में आज़ाद हो गईई , अह्ह्ह्ह , उम्म्म , खुली हवा में साँस लेने का मज़ा hi कुछ और है , खीयकहीईईई , है न कोमल ..." दयना ने अपनी वहशी हस्सी हस्ते हुए बोलै , और उड़ते हुए कोमल के करीब पहुँच गई ,

कोमल जमीन पर बेसुध पढ़ी हुई थी , वोह बेहद कमज़ोर हो चुकी थी , दयना उसके पास आकर , उसके बेजान शरीर को देखने लगी ,

"ेहठ दूर , अह्ह्ह शठ , दूर रेहह , अह्ह्ह मेरी बहिन सी..." रवि दर्द से कहरहटा उठते हुए बोलै ,

"खीयीकहींईईई , ओह्ह्ह मेरे प्यारे रवीए , में तुम मर कर , कोमल को पूरी जिंदगी भर का दर्द दूंगी..." दयना ने हस्ते हुए बोलै ,

दयना ने आँखें बंद कर , अपने हाथ को अग्गे किया , उसके हाथ से तेज़ बिजली निकलने लगी , दयना ने वोह तेज़ चमकती बिजली , रवि पर छोड़ दी ,



वोह बिजली तेज़ी से रवि के जिस्म से टकराई , रवि बेहद कमज़ोर था , वोह दर्द से खरहने लगा और जमीन पर गिर गया ,

"भइआएए..." कोमल बेहद कमज़ोर हालत में उठते हुए बोली , वोह लड़खड़ाती हुई रवि की तरफ बढ़ने लगी ,



तभी दयना ने इक और मैजिक बॉल कोमल पर छोड़ दिया , तेज़ अग्ग का मैजिक बॉल कोमल के बदन से तकया .."अह्ह्ह्हह्हह भइआए.." कोमल तेज़ दर्द से चीखती हुई दूर जाकर गिर गई , अभ वोह बेहोश हो चुकी थी ,

"कोमळळ , अह्ह्ह शहहह..." रवि दर्द बर्दाश्त करते हुए उठा , तभी दयना ने उसके करीब आकर , इक जादुई खंजर उसके पेट में घुसा दिया ,

"खीयीकहीई , अभ मेरा बदला पूरा हुआ .." दयना हस्ते हुए बोली , और खंजर रवि के पेट में और घुसा दिया ,

खंजर पेट को चीरता हुआ जड़ तक घुस गया , और तेज़ खून बहने लगा , दयना रवि को खंजर मर वह से गयाब हो गई ,

रवि जमीन पर गिर पढ़ा , उसकी आँखें बंद होने लगी थी , पर उसकी आँखों के सामने बेसुध जख्मी कोमल का चेहरा घूम रहा था ,

रवि अपनी हिमेट जूता उठ कर घुटनो के बल बेथ गया , रवि ने अपने पेट में घुसे खंजर को देखा , और फिर दोनों हाथो में खंजर को पकड़ , इक गहरी साँस लेते हुए , खंजर खींच कर अपने पेट से निकल दिया , खंजर के साथ खून की धार भी बह निकली ,

"अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह , कोमल को अह्ह्ह्ह बचाना है अह्ह्ह्हह्हह उठाऊ रविइइइ उम्म्म शहहह..." रवि खुद से hi बात करते हुए बोलै ,

रवि उठ कर लड़खड़ाते हुए कोमल के पास गया , कोमल बेसुध बेहोश पढ़ी हुई थी , रवि ने जैसे hi झुक कर उसे अपनी गॉड में उठाया , इक तेज़ दर्द की लेहेर उसके जिस्म में दौड गई , और वोह लड़खड़ा कर कोमल के ऊपर hi गिर गया....

वही दूसरी तरफ ख़ुशी बेचैन हुई ेहडेर ोहडेर घूम रही थी , वोह रवि का इंतज़ार करते करते थक चुकी थी , वोह अभ कुछ नै कर सकती थी , न तोह वोह अंदर जा सकती थी , और न hi पृथ्वी पर....

"में तोह बवषयी देख सकती हु ..." ख़ुशी ने िका इक यही सोचा , और फिर आँखें बंद कर , रवि और कोमल को देखने लगी , पर जो उसने देखा , वोह देखते hi वोह जमीन पर घुटनो के बल बेथ रोने लगी , और फिर धीरे धीरे उसके अंदर इक क्रोध का जवालामुखी फुट पढ़ा , लेकिन क्या देखा था ख़ुशी ने ऐनी वाले वख्त में , कुछ बुरा या , कुछ बेहद बुरा ,

"रविइइइइ..." ख़ुशी इतनी जोर से छिलाई के आसमान गरज़ उठा , बिजलियाँ कड़कने लगी , ख़ुशी अभ अपने सबसे वहशी रूप में ा चुकी थी , ऐसा बस इक बार पहले हुआ था ,

जब पारी लोग में सुहाना ने प्रिंस को मर दिया था , लेकिन क्या ख़ुशी , कोमल और रवि तक पहुँच पायेगी , उन दानवो से लड़ पायेगी.... इसके लिए नेक्स्ट अपडेट का इंतज़ार करिये...

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-55

अभ अग्गे...

वही दूसरी तरफ रवि , कोमल के ऊपर गिरा हुआ था , उसकी आँखें बेइंतहा दर्द से बंद होती जा रही थी ,

लेकिन उसे उठना था , अपनी कोमल को वापिस पृथ्वी पर लेजाना था , उसे वापिस उसी आग के दरिया को पर करना था , रवि के अंदर ताकत तोह प्रिंस की थी , पर दयना ने जो खंजर मारा था , वोह जादुई खंजर था ,

इसका साफ मतलब यह था के दयना भी पारी लोग से जुडी हुई थी , वही इक मटर जादूगरनी थी जो पारी लोग के आखरी युद्ध में बच निकली थी , और सदियों तक जिन्दा रही थी , दयना बेहद शक्तिशाली थी , उसे कैद किया जा सकता था , उसे मारा नै जा सकता था , लेकिन उसे कैद करने की कीमत बहुत बड़ी थी ,

"अह्ह्ह्ह शहहह , कोमळळ शहहह उठो कोमळळ..." रवि ने बेहद मुश्किल से आँखें खोलते हुए बोलै , जादुई कंजर का जहर अभ उसके शरीर में फैलने लगा था ,

रवि ने बेहद मुश्किल से , बेइंतहा दर्द सहते हुए कोमल को अपनी गॉड में उठाया , पर तभी उसके मोह से दर्द भरी चीख निकल गई ,

"अह्हह्ह्ह्ह माआआआ ..." इंसान को जब हद से जायदा दर्द होता है , तब उसे अपनी माँ की यद् अति है , बिन बोले अगर कोई नाम होंठो पर अत है , तोह वोह नाम माँ का होता है ,

उफ़ रवि की जिंदगी आसान नै थी , बेहद दर्द थे , खुशियाँ काम थी , उसने अपनी माँ से कब बात की थी , हाँ , अज्ज से ठीक 10 साल पहले , जब वोह अपने गाओं गया था , उसकी माँ इक रहस्मयी औरत थी , जिसके दिल में , मन में , हज़ारो राज़ दफ़न थे ,

"अह्ह्ह्हह बहुत अह्ह्ह दर्द शह्ह्ह्ह हो रहा है उम्म्म अह्ह्ह्ह..." रवि दर्द से सिसकता हुआ खुद से hi बोलै ,

पर तभी उसकी नज़रियन कोमल के मासूम , पर खूबसूरत चेहरे पर जैम सा गई ,

उफ़ कुदरत का नायब करिश्मा , इक बेहद खूबसूरत लड़की , जिसकी मुस्कान , जिसकी नली नली आँखें , खूबसूरत गुलाबी नरम होंठ , हद से भी जायदा खूबसूरत सफेद चेहरा ,

कोमल कुदरत की कलाकारी का इक उत्तम परिणाम थी , जैसे कुदरत हद से जायदा खुश थी , और उसने पोरे दिल से कोमल जैसी लड़की की रचना की हो ,

रवि अभ अपना हर दर्द , हर तकलीफ , भूल सा गया , वोह बस कोमल के मासूम चेहरे में खो सा गया , जो अभ बेहोश थी , उसकी आँखें बंद थी , पर सोते हुए भी , शयद hi कोई कोमल से अधिक हसन लगता हो ,

रवि ने झुक कर कोमल के बेजान होंठो को चुम लिया , ऐसे झुकने से उसे दर्द तोह हुआ , पर कोमल को अपनी बहु में लेकर , उसे ऐसा महसूस हो रहा था , वोह चलता रहे , और यह सफर कभी ख़तम न हो ,

"कोमल , मेरी जान , इतना दर्द सहा , मेरे लिए , ऐसा क्या था मुझ में , उफ्फ्फ कितनी बुरी हालत हो गई है , उस दयना को जिन्दा नै छोड़ूगा , मेरी कोमळळ...." रवि ने कोमल के मासूम चेहरे को देख कर बोलै , और फिर से उसके होंठो को चुम लिया ,

रवि को कोमल पर बहुत प्यार ा रहा था , जिस सकूं की उसे तलाश थी , वोह अज्ज मिल रहा था , दुनिआ भर की लड़कियाँ , कोमल जैसा एहसास , रवि को न डा पति ,

ऐसे hi चलते चलते आधा दिन बीत गया , मतलब दयना को आज़ाद हुए 2 महीने बीत चुके थे , पता नै उसने पृथ्वी पर कैसा आंतक मचाया होगा ,

अभ रवि उस आग के दरिया के पास पहुँच चूका था , लेकिन इस बार रवि जैसे hi उस आग के दरिया में घुसा , उसका जिस्म जल उठा , अभ वोह बेहद कमज़ोर था , उसकी नस नस जल रही थी ,

"आआआआआ माआआआ , शहहह कोमल को बचाना हैई आआआआ शठ..." रवि दर्द से छीलते हुए खुद से hi बोलै ,

रवि चलता रहा , अपनी कोमल को अपनी बहु में लिए , आखिर वोह नाराज लोग पर कर गया , नाराज लोग का दरवाजा खुला , यहाँ ख़ुशी गुस्से में चीला रही थी ,

उसके गुस्से के कारन वह बस चारो तरफ आग hi आग थी , आसमान भी उसके गुस्से से देहक रहा था ,

रवि ने जैसे hi दानवी लोग में कदम रखा , सामने ख़ुशी को देख इक बार मुस्कराया और फिर कोमल को जमीन पर लिटाते hi , वोह पीछे की तरफ गिर गया ,

उसकी आँखें बंद होती गई , उसे कुछ नै पता था , वोह कहा है , किस हालत में है , वोह बस सपनो के दुनिआ में , अपनी कोमल के साथ गाओं में , इक खुशहाल जिंदगी गुजर रहा था , उसके साथ सब थे , उसकी माँ , सीमा , कोमल , रमा , रिमी और शूरति , वोह सब कितने खुश थे ,

फिर उसने देखा , वोह खेतो में म्हणत कर रहा था , पोरे जिस्म पसीने से लथपथ था , आखिर उसे रमा अति दिखी , वही गाओं के कपड़ो में , घागरा चोली पहने हुए , उसी खेत में यहाँ इस कहानी की शुरुआत हुई थी , कितनी खूबसूरत थी वोह ,

"भइआ उठाऊ..." इक बेहद मनमोहक आवाज़ ने रवि के सपनो का अंत कर दिया , रवि ने आँखें खोली तोह , सामने कोमल और ख़ुशी उसके पास बैठी हुई थी , उनके होंठो पर इक मुस्कान थी ,

"अह्ह्ह्ह मेरा सार..." रवि ने उठते हुए बोलै , पर उसे अभ कोई दर्द महसूस नै हो रहा था , यहाँ कंजर लगा था , वह भी कोई जखम नै था ,

"भइआए , मेरे प्यारे भैई...." कोमल रट हुए इतना बोली और रवि के गले लग , उसके पोरे चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगी , रवि ने उसे बड़ी मुश्किल से शांत करवाया ,

फिर वोह काफी देर तक उसकी बहु में , उसके गले लगी रही , वोह काफी देर तक अपने भाई को महसूस करती रही ,

फिर वोह थोड़ा पीछे हुई और अपने भाई के चेहरे पर हाथ फिरते हुए बोली ,

"भइआए , मुझे माफ़ कर दो , मने आपका दिल दुखाया था , प्लस माफ़ कर दो..." कोमल इतना बोल रोने लगी ,

"शठ बस , अभ और रोना नै , माफ़ किया , अभ चुप हो जाओ , प्लस..." रवि ने मुस्कराते हुए इतना बोलै और कोमल के होंठो को चुम लिया ,

"ाहू अहूऊऊ , भाई घर भी जाना है , यह यही रहना है , पृथ्वी की हालत बेहद बुरी है..." ख़ुशी ने खासते हुए मुस्करा कर बोलै ,

"हाँ , कोमल चलो अभ घर चले , खुशु वैसे कितना वख्त बीत गया..." रवि ने उठते हुए बोलै ,

"2 साल 2 महीने ..." ख़ुशी ने थोड़ा उदास होकर बोलै ,

"क्याआआ , इतना वख्त , ओह्ह मीय गोड्ढ , जल्दी चलो , मेरी बहने उस शेतीअन के कब्जे में है..." रवि ने चौंकते हुए बेहद गुस्से में बोलै ,

"पर रवि अगर हम पृथ्वी पर गए , तोह हमें लड़ना होगा , हम तीन हैं और वोह बहुत जायदा..." ख़ुशी ने बेहद चिंता में बोलै ,

"ओह्ह्ह , ख़ुशी , हम तीन है तोह क्या हुआ , मुझे मेरा वोह सब कुछ चाहये , जो उस सुहाना ने चीन लिया है..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"उफ़ भइआ , धीरज रखइए , हमें सब कुछ मिलेगा , जो हमारा था , हमें लड़ना है , और हम तीनो लड़ेंगे , आखरी साँस तक लड़ेंगे..." कोमल ने रवि और ख़ुशी दोनों के चेहरे देख कर बोलै ,

"रवि पर मने , ऐनी वाले भविष्ये में कुछ बेहद बुरा देखा है , तुम्हारे बारे में..." ख़ुशी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"मतलब में मर गया था..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"भइआएए..." कोमल ने गुस्से में लाल होकर बोलै ,

"अरे कोमल में वोह..."

"शट उप , अगर दुबारा ऐसी बात की , तोह में वापिस नाराज लोग में चली जोगी..." कोमल ने थोड़ा रूठते हुए बोलै ,

"ाचा , रुको , तुम दोनों मेरी बात सुनो , मन लो , पृथ्वी पर , सुहाना , रमा , जोकर , दयना , यह चारो हैं , और हम तीन , पर अगर हम बेबी को अपने साथ मिला ले तोह ..." ख़ुशी ने थोड़ा मुस्करा कर बोलै ,

"तोह क्या , बेबी के पास कोनसी ताकत है..."

"अरे भइआ , मेरा जादुई लॉकेट , वोह अभ बेबी के अंदर है , मतलब , उसकी पूरी ताकत बेबी के पास है , सुहाना गैंग से लड़ने में , बेबी हमारी मदद कर सकती है..." कोमल भी ख़ुशी की बात से सहमत होते हुए बोली ,

"हाँ रवि , वैसे भी अभ वोह बेहद कहकर हो गई है , सुहाना से अकेले लड़ रही है , और जानते हो वोह कहा रहती है... " ख़ुशी ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर बेबी को देख कर बोलै ,

"कहा रहती है , वोह काट के साथ रहती होगी..."

"काट के साथ क्यों..." कोमल ने रवि की तरफ देख कर बोलै ,

"अरे कोमल भूल गई क्या , बेबी और काट लेस्बियन हैं.." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"ओह्ह्ह यद् आया , जैसे में और सीमा देदी थे.." कोमल ने थोड़ा जल्दबाज़ी में बोलते हुए कहा , बाद में उसे यद् आया के उसने क्या बोल दिया है , लेकिन होंठो से निकले शब्द कभी वापिस होंठो में नै जा सकते ,

"क्या , तुम और सीमा भी..." रवि ने चौंकते हुए बोलै ,

"भइआ बस थोड़ा सा..." कोमल ने मसोमीयत से बोलै ,

"थोड़ा सा , अरे तुम दोनों भी लेस्बियन थी , सहित , मुझे पता क्यों नै चला , कब सुरु हुई , तुम दोनों की प्रेम कहानी..." रवि ने कोमल की आँखों में देख कर बोलै ,

"कबीले में , जब हम सब वंश जंगल में रेहान के घर रहते थे , पर भइआ , हम दोनों ने अभी तक किश hi किया था , कभी अग्गे नै बड़े..." कोमल ने बेहद मसोमीयत से शरमाते हुए बोलै ,

"हूँ , यह तोह में समज़ता हु , जब तुमने मुझे अग्गे नै बढ़ने दिया , तोह सीमा क्या खाक अग्गे बढ़ती .." रवि ने मुस्करा कर बोलै ,

"ारी , तुम दोनों अपनी लेस्बियन पुराण बंद करोगे , हमें पृथ्वी पर जाना है , अगर यहाँ रुके तोह , इक साल और गुजर जायेगा..." ख़ुशी ने इक डैम से थोड़ा गुस्से में बोलै ,

रवि और कोमल दोनों खामोश हो गए , ख़ुशी अपना माथा पीट कर बोली ,

"अरे कोई मुझे बताएगा , पृथ्वी पर कहा लैंडिंग करनी है , क्या अंटार्कटिक महासागर में ले चालू ..." ख़ुशी ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"नै भइआ , वह बहुत ठण्ड होगी , कही और .." कोमल , अपने भाई से चिपकते हुए बोली ,

"हम्म , खुशु , वंश जंगल ले चलो , उसी कबीले में..." रवि , कोमल की नली नली आँखों में देख कर बोलै ,

ख़ुशी ने अपनी शक्ति से इक समाये चाकर का निर्माण किया , और फिर तीनो उस चाकर में घुस गए , और वापिस पृथ्वी पर पहुँच गए , वंश जंगल में , यहाँ रवि और कोमल की बहुत सी यदिअण जुडी हुई थी ,

पर जैसे hi तीनो उस कबीले के पास hi पहुंचे , वह का मंज़र देख तीनो के होश उड़द गए....

वही दूसरी तरफ

"देदू , कुछ तोह खा लो , अप्प कल से भुकी हो..." रिमी ने नाम आँखों से बोलै ,

वोह शूरति को खाना खिला रही थी , जो बीएड पर लेती हुई थी , 2 सालो से वोह दोनों घर से बहार नै निकली थी , सब कुछ ख़तम सा हो गया था ,

प्यार , इस शब्द ने दोनों की जिंदगी बदल दी थी , अपने भाई से बेपनाह प्यार किया , लेकिन सुहाना की नयी नयी चलो ने , दोनों को पागल सा कर दिया था ,

वोह टूट चुकी थी , नरम दिल टुकड़े टुकड़े हो चूका था , न कोई नए कपडे , न कोई दिल के अरमान , सब खाक सा हो गया था , बस अपने भाई से प्यार करने की सजा मिली थी दोनों को ,

सुहाना के मायाजाल में कैद थी दोनों , लेकिन दोनों के लिए वोह सामने से मासूम सीमा थी ,

दोनों का कपडे बेहद फाटे हुए , बेहद गंदे लग रहे थे , रूम का भी यही हाल था , हर तरफ गंदगी थी , कुछ नै था , जिसे हम खूबसूरत कह सकते ,

रिमी के बाल भीकरें हुए , चेहरा बेहद गन्दा , जैसे महीनो से नहीं न हो और यही हाल शूरति का था , उन दोनों के होंठो पर हमेशा अपने भाई का नाम रहता , जिसे वोह अभ भी बेवफा समज़ती थी , यह सब किसके कारन हुआ , बस इक लड़की सुहाना ,

जिसने सबकी जिंदगी बर्बाद कर दी थी , इक ऐसे मकसद के लिए , जिसका अंजाम उसे खुद नै पता था , उसका साथ रमा दे रही थी , जिसे अभ अपना इंसानी जिस्म यद् hi नै था , उसका अभ इक नया रूप था ,

"रिमी में भइआ के साथ खाऊगी , वोह एते hi होंगे , मुझे उनका फ़ोन आया था..." शूरति ने मुस्करा कर बोलै ,

"सच्ची देदी , कब आएंगे भइआ , और क्या बोलै भइआ ने..." रिमी खाने की प्लेट इक तरफ रख खुश होते हुए बोली ,

"यह सीक्रेट है , में तुम नै बता सकती..." शूरति ने बेहद धीमी आवाज़ में बोलै ,

"पर देदी , में तोह आपकी बहिन हु , प्लस बताओ न , क्या कहा भइआ ने..." रिमी ने रट हुए पूछा ,

"भइआ ने कहा , भइआ ने यह कहा , के वोह , वोह , मुज़से शादी करेंगे ..." शूरति बेहद खुश होते हुए बोली ,

"सच्ची देदी , अमेजिंग , देदी यह तोह बेहद अछि खुशखबरी है..." रिमी ने मुस्कराते हुए बोली ,

"तुम दोनों , हास्सःह्ह्ह , तुम दोनों , यहाँ बतिअन कर रही हो , काम कोण करेगा , तुम्हारा बाप , चलो , निकामी कही की , घर का सारा काम पढ़ा है , कामचोर कही की , में बहार जा रही हु , मेरे ऐनी तक सारा घर साफ कर देना , वार्ना , उसी अँधेरे कमरे में दाल दूंगी , फिर रोटी रहना रत भर..." सीमा ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"नै , हम करेगी , सारा काम करेगी , पर हमें वह मत डालना , वह बहुत दर लगता है , उठो देदी जल्दी..." रिमी दर से रट हुए बोली ,

"हम्म , निकामी , नाकारा कही की , जैसा बेवकूफ भाई , वैसी बेवकूफ बहने..." सीमा इतना बोल वह से चली गई ,

और रिमी , शूरति के गले लग रोने लगी , यह पिछले इक साल से चल रहा था , लेकिन इस सब का अंत बहुत जल्द होने वाला था , क्यों की इनका प्यार , इनका भाई , वापिस ा चूका था....

तो बे कुनिटेड.....

 


अपडेट-56

अभ अग्गे...

रवि , कोमल और ख़ुशी कबीले के मैं गेट के पास खड़े थे , जैसे hi तीनो कबीले के अंदर घुसे , 3 पहरेदारो ने उनको रोक लिया , उनके हाथो में तेज़ धार तलवार थी ,

"कोण हो तुम , यहाँ क्यों ए हो , जल्दी बोलो , वार्ना गाला काट दूंगा.." उनमे से इक पहरेदार बेहद गुस्से में चीखते हुए बोलै ,

"में कोमल हु , बाबा हमशा की गॉड ली बेटी , यह मेरा भाई और यह मेरी फ्रेंड , हमें बाबा से मिलना है..." कोमल ने उस पहरेदार की आँखों में देखते हुए बोलै ,

"हम्म , इंतज़ार करो , हम रेहान मालिक से मिलकर एते हैं..." इक पहरेदार यह बोलै और वह से जाने लगा , तभी कोमल उसे आवाज़ देकर बोली ,

"ेहः सुनो , अपने मालिक रेहान से कहना के , कोमल आयी है , उसकी दोस्त..." कोमल ने मुस्कराते हुए बोलै , उसे इस बात की बेइंतहा ख़ुशी थी के रेहान और सूजी अभी जिन्दा हैं ,

फिर वोह पहरेदार चला गया ,

"कोमल , हासष्ठ , शुक्र है भगवन का , के दयना ने यहाँ कोई तबाही नै मचाई ..." रवि ने बेहद खुश होते हुए बोलै ,

"हाँ , यह बात ठीक बोली अपने , भइआ इस कबीले ने मुझे नयी जिंदगी दी थी , और मने इसकी रक्षा का वचन दिया था , पर में वोह वचन निभा न पायी..." कोमल ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"कोमल , हर बात पर रोना जरुरी है..." रवि ने माथा पीट कर बोलै ,

"अप्प क्या जानो औरतो के मन को , रवि बाबू..." ख़ुशी मुस्कराते हुए बोली तोह कोमल भी हसने लगी ,

अभी रवि कुछ बोलने hi जा रहा था के वोह पहरेदार ा गया , पर उसके पीछे कोई और भी ा रहा था ,

तभी रवि , कोमल और ख़ुशी ने देखा , इक लड़की भगति हुई ा रही थी , उसके पेअर नंगे थे , वोह नंगे पेअर भगति हुई ा रही थी , उसने इक टॉप और इक शार्ट लेहंगा पहन रखा था , बाल खुले हुए थे , वोह बार बार इक हाथ से अपने असनु साफ करती हुई दिलो जान से भाग रही थी ,

उस लड़की को कोमल कैसे न पहचान पति , उसकी दोस्त थी , हाँ , यह सूजी थी , जो कोमल से मिलने की बेइंतहा ख़ुशी में पागल सी हुई रोटी हुई भागी ा रही थी ,

उसे यह भी नै पता था के कबीले के लोग उसे देख रहे हैं , आखिर वोह इस कबीले की मलिका थी , सूजी , कोमल के करीब आकर रुक गई , उसकी सांसे बेहद तेज़ चल रही थी ,

"सुजीईई..." कोमल ने चीला कर बोलै , और सूजी के गले लग गई , अभ दोनों रो रही थी , बिछड़ कर मिलने का दर्द और ख़ुशी , कोई ऐसा इंसान hi समाज सकता है , जिसके साथ ऐसी घटना बीत चुकी हो ,

"कोमल , कहा चली गई थी तू , मने सोचा कही....." सूजी इतना बोलते बोलते रुक सा गई और फिर कोमल के चेहरे को चूमने लगी , बेहद मुश्किल से कोमल ने सूजी को शांत करवाया , लेकिन वोह भेजी भेजी आँखों में बेहद कातिलाना लग रही थी ,

तब तक रेहान भी वह पहुँच चूका था , वोह पहरेदार सार ज़ुका इक तरफ खड़े हो गए , रेहान अग्गे बाद रवि के गले लग गया , उनकी आँखें नाम थी , पर होंठो से इक शब्द नै निकला ,

यह बात साबित करती थी , के मर्द अपनी भावनायिओं को अपने सीने में छुपा कर रखते हैं , क्यों की वोह दुनिआ के सामने कमज़ोर नै दिखना चाहते ,

"भाई कैसा है तू..." रेहान ने अपनी नाम आँखें साफ करते हुए बोलै ,

"में ठीक हु और तुम , यार तुम तोह इस कबीले के राजा बन गए हो..." रवि ने मुस्कराते हुए मज़ाक में बोलै तोह रेहान भी मुस्कराने लगा ,

"ाहू , अहूऊऊ , अरे भाई में भी आयी हु साथ में..." ख़ुशी ने खासते हुए बोलै , तोह सब हसने लगे ,

फिर कोमल भी रेहान के गले लग , उससे मिली , आखिर इतनी गहरी दोस्ती थी , तीनो की , तीनो की मतलब , रेहान , सूजी और कोमल की , फिर रेहान और सूजी , ख़ुशी से मिले , बेहद प्यारी जोड़ी थी , रेहान और सूजी की ,

फिर रेहान और सूजी अपने नए मेहमानो को कबीले के अंदर ले ए , सब कुछ वैसा था , वही नदी पर बना लकड़ी का पल , वही कबीले के घर , वही रेहान का दो मंज़िला घर ,

रवि और कोमल की पुराणी यदिअण ताज़ा हो गई , लेकिन इक बात की कमी थी , वोह कमी थी , सीमा ,

सीमा की यद् एते hi कोमल और रवि की आँखें नाम हो गई , फिर दोनों इक दूसरे की तरफ देख मुस्करा दिए ,

"भइआ हम दोनों का पहला प्यार , हैश्च सेहतीआं बन गया..." कोमल ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"कोमल , हम सीमा को वापिस लाएंगे , जब सुहाना की बुराई , अच्छी में बदल जाएगी , तब सीमा खुद बा खुद ठीक हो जाएगी..." रवि ने कोमल को थोड़ा विश्वास दिलाते हुए बोलै , पर यह इतना आसान भी नै था , रवि शेतीअन को सचाई के रस्ते में लाना छह रहा था ,

फिर रवि , कोमल और ख़ुशी उसी दो मंज़िला लकड़ी के बने घर के पास पहुँच गए , यहाँ उन दोनों ने कई प्यार भरे लम्हे गुजरे थे ,

रवि और कोमल ने इक दूसरे की तरफ देखा और मुस्कराने लगे ,

"रवि भाई अंदर ायो , आपका अपना घर है..." रेहान मुस्कराते हुए बोलै , तोह वोह तीनो भी दिल से खुश हो गए ,

रवि और कोमल घर में घुसते hi सीधा उसी रूम की तरफ भाग गए , यहाँ वोह इक साथ रहते थे , रूम के अंदर एते hi , रवि ने कोमल को पीछे से अपनी बहु में पकड़ लिया ,

"ओह्ह्ह मेरी जान , कितना तडफाया तुमने..." रवि ने कोमल की गर्दन को चूमते छत्ते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह शहहह भइआ में भी तदफी हु , आपके प्यार के लिए..." कोमल ने मस्ती में सिसकते हुए बोलै ,

फिर रवि ने जल्दी से कोमल को अपनी तरफ घुमा लिया , उसने कोमल की गहरी नली आँखों में इक बार देखा , और फिर अपने प्यासे होंठो को उसके प्यासे होंठो से मिला दिया ,

रवि , कोमल के होंठो को बेहद शिदत से चुम रहा था , कोमल भी अपने भाई के बालो को सहलाती अपने नरम होंठो को रगड़ रगड़ कर अपने भाई के होंठो को चूस रही थी ,

ें होंठो के मिलान ने दोनों के जिस्म को मस्ती से भर दिया , और रवि के हाथ कोमल की नाज़ुक कमर से फिसल उसके हिप्स पर चले गए , रवि अभ बड़ी शिदत से कोमल के होंठो को चुस्त हुआ , उसके मोठे गदराये हिप्स को दबा रहा था , कोमल की मोह से अभ सिस्कियाँ निकलने लगी थी ,

"उम्म्म अह्ह्ह भइआए उम्म्म पागल कर डोज अप्प्प अह्ह्ह्हह..." कोमल अपने भाई के होंठो को छोड़ मस्ती में सिसकते हुए बोली ,

रवि ने इक पल के लिए मुस्करा कर कोमल के नशीले चेहरे को देखा और फिर उसे गॉड में उठा बीएड पर पटक दिया , अभी रवि , कोमल के ऊपर लेता hi था , के "क़ायदायकककक..." की आवाज़ करता रूम का दरवाजा खुल गया , रवि और कोमल दरवाजे के खुलने की अहहत सुन इक दूसरे से दूर हो गए ,

"शहीइ , शहीइ , कोमल अभी तोह आयी हो , इतनी भी क्या जल्दबाज़ी..." यह सूजी थी , जो दोनों को देख इक डैम से पलटते हुए बोल रही थी ,

"वोह , वोह , तू क्यों आयी ऊपर , हमेशा मेरे रोमांटिक पलु की माँ बहिन करने ा जाती है..." कोमल ने थोड़ा नाराज़गी में बोलै ,

"अरे में खाने का पूछने आयी थी , नै खाना तोह , बोल दो , जेजु कंटिन्यू...." सूजी इतना बोल निचे भाग गई ,

"ेहः सूजी की बची..." कोमल बीएड से उठ कर सूजी के पीछे भागने लगी , तभी रवि ने उसका हाथ पकड़ लिया , और उसे अपनी तरफ खींच अपनी बहु में भर लिया , कोमल ने शर्मा कर अपना चेहरा रवि के चोदे सीने में छुपा लिया ,

"कोमल.."

"हूँ..."

"अभ और नै इंतज़ार होता , प्लस , अभ तोह मुज़से शादी कर लो , पता नै तुम कब मेरी होगी..." रवि ने कोमल के बालो को प्यार से सहलाते हुए बोलै ,

"आपकी तोह हु..."

"पर मुझे वोह भी चाहये..."

"क्या..."

"यह..." रवि ने कोमल की छूट को मुठी में भर मसलते हुए बोली ,

"ोूछहः , गंदे कही की..." कोमल ने अपने भाई के सीने में प्यार से मरते हुए बोलै ,

"कोमल , रत को मेरे पास सोना ..." रवि ने कोमल के गुलाबी लाल होंठो को चूस कर बोलै ,

"जी , अभ निचे चले , रेहान और सूजी पता नै क्या सोच रहे होंगे..." कोमल ने थोड़ा शर्मा कर बोलै ,

"हम्म , चलो.." रवि ने इतना बोलै और कोमल का हाथ पकड़ उसके साथ घर के हॉल में ा गया , यहाँ ख़ुशी बैठी उसे खा जाने वाली नज़रिओं से घर रही थी...

वही दूसरी तरफ..

रिमी और शूरति घर की साफ सफाई कर रही थी , उनको समाज नै ा रहा था , के रोज़ रोज़ घर गन्दा कैसे हो जाता है , सुबह से लेकर शाम तक वोह पोरे घर को साफ करती , पर अगले दिन फिर से घर वैसे hi धूल मिटटी से सना गन्दा होता ,

वोह दोनों सीमा से बेहद डर्टी थी , इसका इक विशेष कारन था , इक दिन सीमा ने रिमी और शूरति को काम न करने पर सजा दी , उसने रमा को बुलाया , रमा का वोह खौफनाक रूप देख , रिमी और शूरति बेहद दर गई , और पिछले 1 साल से वोह सीमा का हर दिया काम करती , उसकी हर बात मानती ,

ऐसा नै था के उनको मौत से दर लगता था , पर किसी के इंतज़ार ने उनको रोक रखा था , वोह अपने जिस्म पर अपना खुद का हुक नै मानती थी , उनके लिए उनका जिस्म , उनके भी की अमानत था , किसी शयर ने सच hi कहा है..

के.. वोह मेरे प्यार की जमानत है ,

सम्बल कर रखना ,

मेरी ाआमानत है ,

जरा सी खरोच भी आयी उसे , तोह पूरा शहर पलट दूंगा ,

क्यों की अभी वोह शक़श जिन्दा है , सलामत है......

वोह अपने भाई की अमानत थी , उसके लिए वोह पूरी जिंदगी दर्द झेल सकती थी , मर खा सकती थी , भेक तक मांग सकती थी ,

उनके प्यार का इक अलग स्थान था , कोमल , सीमा , रमा , ें सब का प्यार अलग अलग था , पर रवि ें सब को इक जैसा प्यार करता था ,

"उफ़ देदी में थक गई हु , मेरे हाथ चील गए हैं , और मुझे भूकर भी है , देखो मेरा शरीर कितना तप रहा है..." रिमी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

सुबह 7 बजे से वोह घर के हर काम में लगी हुई थी , और अभ शाम के 6 बज रहे थे , शूरति भी बेजान सी , जैसे जिस्म में कोई जान hi न हो , उसका दिल रो रहा था , पर फिर भी वोह काम में लगी हुई थी ,

"रिमी मेरी बहिन , तू आराम करले , में तेरे हिस्से का काम कर दूंगी , जा बेथ जा तू..." शूरति ने प्यार से रिमी के गलो पर हाथ फिरा बोलै ,

"ओह्ह्ह रिमी तुझे तोह सच में बहुत भूकर है , तुम मेडिसिन लेनी चाहये , तू रुक में देखती हु..." शूरति भी जादू इक तरफ फेंक अपने रूम में चली गई , मेडिसिन ढूंढ़ने ,

अभ रिमी अकेली बैठी हुई थी , भूकर से उसका बदन कम्प रहा था , सार दर्द से फटा जा रहा था ,

"भइआए , में मर जोगीइ , प्लस ा जाओ , प्लस , मुज़से गलती हो गई , मुझे माफ़ कर दो ..." रिमी भूकर से कंपते रट हुए चीला कर बोली , तभी सीमा घर के अंदर आयी ,

"ेहठ तू बैठी क्या कर रही है , निकामी , काम कर , वार्ना..." सीमा ने रिमी को बालो से खींच जमीन पर गिरते हुए बोलै ,

"आइईईईईई , डीडीई बचावूओ..." रिमी बाल खींचने से दर्द से रट हुए चीला कर बोली ,

तभी रूम से शूरति भाग कर बहार आयी और सीमा के पैरो में गिर कर उससे रिमी को न मरने की भेख मांगने लगी ,

"प्लस , डीडीई , छोड़ दू , प्लस , माफ़ कर दू , रिमी को भूकर है , मने hi उसे कहा था बैठने को , मुझे मारो डीडीई , प्लस रिमी को छोड़ दू..." शूरति , सीमा के परिओ में गिरकर उसे रट हुए बोली ,

सीमा ने रिमी को ढाका देकर इक तरफ गिरा दिया और शूरति को बालो से पकड़ उसके चेहरे पर थपड मरने लगी ,

शूरति हर दर्द सेहती रही , उसकी आँखों में , उसके दिमाग में , अपने भाई के साथ बिताये खुशनुमा पल घूम रहे थे , वोह मर कहती रही , पर होंठो से इक भी आवाज़ नै निकली ,

"हूँ , कामचोर कही की , अज्ज तुम दोनों को खाना नै मिलेगा , और तुम दोनों उस अँधेरे कमरे में रहूगी , वार्ना , रमा को बुला कर , उससे पितवौजी तुम दोनों को..." सीमा ने शूरति के बाल छोड़ते हुए बेहद गुस्से में बोलै , शूरति बेजान जिस्म से जमीन पर गिर गई ,

रिमी जमीन पर रेंगते हुए , शूरति के पास पहुंची और कंपते हुए उसे अपनी बहु में भर लिया ,

"बेवकूफ भाई की , बेवकूफ बहने , जाओ उस रूम में , जोऊ..." सीमा ने रिमी के पेट में लत मरते हुए बोलै ,

"अह्हह्ह्ह्ह भय्याहा..." रिमी दर्द से चीखते हुए चीला कर बोली ,

"भइआ का नाम लेती है , वोह बुज़दिल , कभी नै आएगा , मर गया होगा कही..." सीमा ने इक दो बार और रिमी के पेट में अपने परिओ से मरते हुए बोलै , रिमी को बेइंतहा दर्द हुआ , उसके होंठो से खून बह निकला ,

फिर शूरति ने उठ कर रिमी को सहारा दिया , और सेडीईओं के पास बने स्टोर रूम में चली गई , यहाँ बेहद अँधेरा था ,

शूरति और रिमी रूम में इक कोने में आपस में चिपक कर बेथ गई , रिमी का बदन अभ और भी तप रहा था , करीब इक घंटे बाद , रिमी भूकर से तपते हुए बेहोश हो गई , शूरति अभ बेहद दर गई थी , वोह रो रही थी और दुआ कर रही थी भगवन से....

वही दूसरी तरफ...

रवि और ख़ुशी अभ रत को कबीले में घूम रहे थे , ख़ुशी तोह बेहद खुश थी ,

"खुशु , यार काश के में घर जा पता , रिमी और शूरति कितना खुश होती मुझे देख कर.." रवि ने रिमी और शूरति को यद् करते हुए बोलै ,

तभी ख़ुशी ने मुस्कराते हुए अपनी आँखें बंद की , पर जो उसने देखा , वोह चीख उठी ,

"क्या हुआ खुशी , तुम ठीक तोह हो.." रवि ने ख़ुशी को अपनी बहु का सहारा देते हुए बोलै , वार्ना वोह गिर जाती ,

"रवि , वोह , वोह , रवि..."

"अरे क्या वोह , वोह , लगा रखा है , बताओ बात क्या है..." रवि को अभ बेहद चिंता हो रही थी , वोह जनता था , ख़ुशी ने कुछ बेहद बुरा देखा है ,

"रवि , रिमी और शूरति , उनकी जान को खतरा है..." ख़ुशी ने रट हुए बोलै ,

फिर ख़ुशी ने रिमी और शूरति के साथ क्या क्या हुआ , वोह सब बता दिया , जिसे सुन रवि की आँखें असुइओं से भर गई , वोह घुटनो के बल बेथ चीला चीला कर रोने लगा , जिसकी आवाज़ अभ कोमल भी सुन चुकी थी....

कोमल घर से बहार भागते हुए निकली और रवि के पास पहुँच उसे अपनी बहु में भर शांत करने लगी , कोमल ने ख़ुशी की तरफ देखा , तोह ख़ुशी ने सब बता दिया , कोमल भी यह सुन रोने लगी , ख़ुशी तोह पहले से hi रो रही थी ,

कुछ देर बाद रवि बेहद गुस्से में उठा और फिर अपना सार दोनों हाथो में पकड़ , कुछ सोचने लगा , तभी उसे इक रास्ता नज़र आया , वोह रास्ता ख़ुशी thi....vahi शूरति और रिमी को ला सकती थी....

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-57

अभ अग्गे...

रवि कुछ देर सोचने के बाद ख़ुशी की तरफ देखने लगा , ख़ुशी अपनी भेजी भेजी आँखें लिए , रवि को देखने लगी , जैसे समाज रही हो , रवि का मतलब क्या है ,

कोमल अभ भी रो रही थी , सब की सब , बस इक hi इंसान से जुडी थी , वोह इंसान था रवि , उसकी हर बहिन , हर प्रेमिका , सब रवि से जुडी थी , वोह मर सकती थी , अकेले तड़फ सकती थी , पर अपने दिल से अपने भाई का प्यार नै मिटा सकती थी , वोह किसी भी हद से गुजर सकती थी ,

"रवि तुम ऐसे क्यों देख रहे हो..." ख़ुशी ने गीले गलो को हाथ से साफ करते हुए बोलै ,

"ख़ुशी , तुम , तुम hi ला सकती हो , शूरति और रिमी को , समाये निर्माण चाकर से..." रवि ने मुस्करा कर बोलै ,

"लेकिन रवि , इसके बाद सुहाना को पता चल जायेगा, हम कहा है , वोह यहाँ पहुँच जाएगी..." ख़ुशी ने बेहद चिंता में बोलै ,

"तोह क्या चुप कर बैठा राहु , और कब तक बैठा रहुगा , हाँ , बोलो , मुझे रिमी और शूरति चाहये , वोह भी अज्ज hi , और इक घंटे में..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"भइआ ख़ुशी सही बोल रही है , थोड़ा दर्ज से काम लीजिये..." कोमल ने रवि के कंडे पर हाथ रख बोलै ,

"अरे कितना दर्ज राखु , उनको मरने दू , या उनके मरने के बाद कुछ करू , कोमल , यह मेरी नै हम सब की लड़ाई है , जो होना है , वोह होकर रहेगा .." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"हम्म , कोमल शयद रवि ठीक बोल रहा है , होनी को कोई नै ताल सकता , हम ऐनी वाले कल से नै भाग सकते , में लयुगी शूरति और रिमी को..." ख़ुशी ने थोड़ा चिंता में बोलै , उसने ऐनी वाला वख्त देख लिया था , जो के बेहद कषटदियाक और बुरा था ,

"तोह ठीक है , भइआ में आपके साथ हु , आखरी साँस तक लड़ुँगी..." कोमल ने पीछे से अपने भाई को बहु में भरते हुए बोलै ,

"खुशु जाओ जल्दी..."

"हम्म... " ख़ुशी ने सार हिला कर बोलै , और समाये चाकर को पुनर जीवट कर , शूरति और रिमी के पास निकल गई ,

"उफ़ भगवन हमारा साथ दे , रिमी और शूरति सही सलामत यहाँ पहुँच जाये..." कोमल ने दोनों हाथ जोड़ आँखें बंद कर बोलै ,

"मुझे ख़ुशी पर पूरा विश्वास है , वोह आएगी , जरूर आएगी , चाहे उसे उनसे लड़ना hi क्यों न पढ़े..." रवि ने ख़ुशी के निरशल बलिदान को यद् कर बोलै ,

वही दूसरी तरफ शूरति अपने जिस्म की गर्मी रिमी को दे रही थी , उसने रिमी को अपनी बहु में भर रखा था , वोह रिमी के चेहरे को बार बार चुम रही थी , उसकी आँखों से असनु बह रहे थे ,

इस 1 साल में उन पर जुलम तोह बहुत हुए थे , पर ें सब के बेच , रिमी और शूरति , इक दूसरे को बेहद प्यार करने लगी थी ,

इक दूसरे के साथ रहती , साथ सोती , हर दर्द को साथ सेहती , उसे महसूस करती , उन दोनों के बेच प्यार अभ बेहद गहरा हो चूका था ,

पहले यह सब नै था , चेहे वोह दोनों बहने थी , पर अज्ज उनका रिश्ता बेहद गहरा हो चूका था , तभी तोह शूरति की आँखें बिन मासूम बरसात की तरह बरस रही थी ,

रत के करीब 11 बज रहे होंगे , तभी जिस रूम में शूरति और रिमी बैठी थी , अचानक उस रूम में रौशनी फैल गई ,

शूरति ने इतनी अधिक रौशनी की तपश सेहन न करते हुए अपनी अखन बंद कर्ली , जब रौशनी थोड़ी सी काम हुई , तोह शूरति ने अपनी आँखें खोली , सामने ख़ुशी कड़ी थी ,

लेकिन शूरति बेहद दर गई , वोह और भी रोने लगी , उसे लग रहा था , ख़ुशी उसे मरने आयी है ,

"प्लस मत मरु , में और नै सेह सकती , प्लस , मेरी बहिन मर रही है , प्लस बचा लो उसे , नै जी सकती में इसके बिना , प्लस बचा लो ..." शूरति ने दोनों हाथ जोड़ रट हुए बोलै ,

"शह्ह्ह्ह , शूरति में ख़ुशी हु , ख़ुशी ठाकुर , में तुम बचने आयी हु..." ख़ुशी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै , उसका समाये चाकर अभी भी गोल गोल घूम रहा था ,

"क्या , सच में , हमें बचा लो , हमें ले चलो यहाँ से..." शूरति ने देवर का सहारा लेकर उठते हुए बोलै ,

"शूरति , तुम्हारे भाई ने मुझे भेजा है , अभ जल्दी रिमी को उठाओ..." ख़ुशी भी शूरति को सहारा देते हुए बोली ,

"वोह बेहोश है..." शूरति ने रट हुए बोलै ,

"कोई बात नै..." ख़ुशी ने रिमी को अपने कंडे पर उठा लिया और शूरति के साथ उस चाकर में घुस गई , शूरति तोह ख़ुशी की ताकत देख हरिजन रह गई ,

अभी वोह जा hi रहे थे , के इक डैम से स्टोर रूम का दरवाजा .."कड़दायककककक..." की आवाज़ करता हुआ टूट गया , ख़ुशी ने जल्दी से चाकर को बंद करना चाहा , पर वोह टुटा हुआ दरवाजा भी उस चाकर में समां गया ,

यह सुहाना थी , जो बेहद गुस्से में , लाल चमकती आँखों से , स्टोर रूम के बहार कड़ी थी , उसने hi दरवाजे को ढाका दिया था , और दरवाजा टूट कर उड़ता हु उस चाकर में समां गया था ,

"तमसस्स्स्स..." सुहाना बेहद गुस्से में चिलायी , उसकी चीख से पूरा घर कम्प उठा... "तुम इसकी कीमत चुकानी होगई..." सुहाना गुसी में अपने पेअर पटक अपने रूम की तरफ चली गई ,

वही दूसरी तरफ रवि और कोमल रेहान के घर के बहार इक पत्थर पर आपस में चिपक कर बैठे हुए , ख़ुशी का इंतज़ार कर रहे थे ,

रवि समाज चूका था , कोमल बेहद उदास है , वोह उसकी उदासी दूर करना चाहता था ,

"कोमल..."

"हूँ..."

"मुज़से कब प्यार करुँगी तुम..." रवि ने कोमल को अपनी बहु में भर उसका माथा चूमते हुए बोलै ,

"भइआ प्यार करती तोह हु ..." कोमल , रवि की आँखों में देख मुस्करा कर बोली ,

"ओह्ह हो , कोमल में हमारी सुहागरात की बात कर रहा हु..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै , तोह कोमल शर्माने लगी ,

"कोमल बताऊ न..."

"मुझे नै पता , अप्प गंदे हो.." कोमल ने अपना चेहरा अपने भाई के सीने में छुपा कर बोलै ,

"ाचा , पूरी दुनिआ में जो लोग सेक्स करते हैं , वोह गंदे होते हैं..." रवि हस्ते हुए बोलै ,

"हूँ..." कोमल ने बेहद शर्मा कर बोलै ,

"क्या में जान सकता हु , वोह कैसे..."

"नै पता..." कोमल ने मसोमीयत से बोलै ,

"कोमल तुम जितनी मासूम दिखती हो , उतनी हो नै , तुम बेहद चालक हो , जंगली कैट की तरह..." रवि इतना बोल हस्ते हुए भागने लगा ,

"क्या में कैट , रुको अप्प..." कोमल भी अपने भाई को मरने के लिए उसके पीछे भागी ,

तभी रवि के अग्गे इक चाकर सा बन गया , उसमे से ख़ुशी बहार आयी , उसने अपने कंडे पर रिमी को उठा रखा था और उसके साथ शूरति भी थी , जैसे hi ख़ुशी और शूरति बहार आयी ,

"ख़ुशी बचोऊ..." रवि ने ख़ुशी और शूरति को इक तरफ किया और उस चाकर से इक दरवाजा रवि के ऊपर गिर गया , वोह दरवाजा बेहद रफ़्तार से उस चाकर से बहार निकला था , ाचा हुआ रवि की नज़र उस पर पढ़ गई ,

"भइआए..." कोमल जोर से चिलाती हुई रवि के पास भाग कर आयी और उस दरवाजे को रवि के ऊपर से हटा दिया , रवि , कोमल का हाथ पकड़ उठ खड़ा हुआ ,

"खुशी..." रवि ने अपना माथा सहलाते ख़ुशी की तरफ देखा जो मुस्करा रही थी ,

"भाई मेरी कोई गलती नै , यह काम सुहाना का था , जब में रिमी और शूरति को ला रही थी , तभी वोह रूम में इक डैम से ा गई..." ख़ुशी ने थोड़ा मुस्करा कर बोलै ,

फिर रवि की नज़र शूरति पर गई , भीकार्यिओं जैसी हालत थी उसकी , फाटे पुराने कपडे , पूरा बदन गन्दा , मिटटी से सना हुआ , भीकरें हुए बाल , पोरे जिस्म पर हलकी हलकी छोटे , उसके होंठो पर भी सूजन आयी हुई थी , और इक तरफ से खून बह कर सुख चूका था , और इस से भी बदतर हालत रिमी की थी ,

रवि अपनी बहिन शूरति की तरफ बढ़ने लगा , जो उससे नज़रियन चुरा रही थी , क्यों , वोह अभ खुद को खूबसूरत नै मानती थी ,

रवि , शूरति के करीब आकर रुक गया , उसने कोमल और ख़ुशी को कुछ इशारा किया , वोह दोनों समाज गई , और रिमी को घर के अंदर ले गई ,

"शूरति...." रवि ने नाम आँखों से अपने हाथ शूरति के कण्डु पर रखे , जिनको शूरति ने जातक दिया और पलट कर रोने लगी ,

"शूरति मेरा गुनाह तोह बताओ , क्यों मुज़से नज़रियन चुरा रही हो , क्या गलती है मेरी..." रवि ने घुटनो के बल बेथ रट हुए बोलै ,

शूरति ने पलट कर अपने भाई को यु रोटा देखा , तोह वोह भाग कर , घुटनो के बल बेथ , उसके गले लग गई , और फोट फोट कर रोने लगी ,

"बस शूरति , अभ और नै , जितना रोना था रो लिया , अभ में उन सब से बदला लूंगा , जिसने भी मेरी पारी जैसी बहिन का यह हाल किया है , उसे इसकी कीमत चुकानी होगी..." रवि कास कर शूरति को अपनी बहु में भर कर बोलै ,

फिर रवि ने शूरति को कुछ देर रोने दिया , कुछ वख्त बाद शूरति का रोना काम हो गया , अभ वोह सिसक रही थी , धीरे धीरे ,

रवि ने उठ कर शूरति को अपनी गॉड में उठा लिया , शूरति बस बेजान सी आँखें खोली अपने भाई को देखती रही , उसे अभ भी यह सपना लग रहा था , क्यों की उसने अपने घर में hi नाराज से बदतर जेवण जिया था ,

रवि , शूरति को घर के अंदर लाया , और फिर सेड्यां चढ़ ऊपर अपने रूम में पहुँच गया , यहाँ कोमल और ख़ुशी , रिमी का इलाज कर रही थी ,

रवि ने शूरति को रिमी के साथ लिटा दिया , और उसके पास hi बेथ गया , तभी बेहोश रिमी भूकर से कंपते हुए सोते हुए बड़बड़ाने लगी ..

"अह्ह्ह्ह मैट मरू , देदी बचाओ , नईईई , मैट मरू..." रिमी बेहोश हालत में यह सब बोल रही थी , और उसकी आँखों से असनु बह रहे थे ,

रवि ने नाम आँखों से शूरति की तरफ देखा , वोह भी रो रही थी ,

"कोमल , ख़ुशी , तुम दोनों निचे जाओ , में यही , शूरति और रिमी के साथ रहुगा , ख़ुशी तुम रिमी को ठीक करो और होश में लाऊ..." रवि ने दोनों को जैसे आदेश सा देते हुए बोलै ,

ख़ुशी ने रिमी के माथे पर हाथ रखा , उसके हाथ से इक रौशनी की किरणे निकली जो रिमी के सार में सामने लगी , धीरे धीरे रिमी को होश ऐनी लगा ,

"भय्याहा...." वोह दर्द भरी चीख मरती उठ कर बेथ गई , उसने as-pas नज़र डोडे और कंपते हुए शूरति के गले लग गई , शूरति भी उठ कर बेथ चुकी थी , रिमी उसके गले लगी , उसके सीने में अपना चेहरा छुपा रही थी ,

सबकी आँखें नाम थी , फिर कोमल और ख़ुशी रट हुए बहार चली गई , रवि अभी भी वह बैठा था ,

"रिमी , देखो हम कहा हैं , और यह देखो यह कोण है..." शूरति ने रिमी के बाल सहलाते मुस्करा कर बोलै ,

रिमी ने थोड़ा सा चेहरा पीछे कर भेजी भेजी आँखों से रवि को देखा , और फिर कुछ पल देखती रही , और फिर जोर जोर से रट हुए शूरति के सीने से और भी कास कर चिपक गई , उसे अभ भी विश्वास नै था , वोह अभ भी शॉक में थी ,

"रिमी , में तेरा भाई हु , ेहडेर देख , मेरी बहु में समां जाओ , ायो रिमी..." रवि ने नाम आँखों से दर्द भरी हालत में हाथ फैला कर बोलै ,

रिमी ने रट हुए थोड़ा पीछे होकर रवि को देखा और फिर तेज़ी से उसके गले लग गई , वोह अभ भी रो रही थी , उसे यह उम्मीद नै थी के वोह जिन्दा बच जाएगी और अपने भाई से मिल पायेगी ,

"शठ शांत हो जाओ , मेरी क्यूट सी जणू , अभ और नै रोना..." रिमी अपने भाई को बहु में कस्ती रो रही थी , वोह चुप नै हो रही थी ,

रवि को कुछ समाज नै ा रहा था , वोह क्या करे , रवि ने रिमी का चेहरा थोड़ा पीछे कर , अपने दोनों हाथो से उसका चेहरा पकड़ , अपने होंठ उसके भेज होंठो पर रख दिए ,

रवि अभ रिमी के होंठो को चूसने लगा , रिमी के असनु बह रहे थे , असनु बह कर , रवि के होंठो से मिल रहे थे , रवि बड़े प्यार से , बेहद शिदत से रिमी के होंठो को चूस रहा था ,

कुछ पलु बाद , रिमी भी रवि का साथ देते हुए अपने भाई को अपने होंठ चुसवा रही थी , कुछ वख्त बाद , रवि ने रिमी के होंठो को चूसना छोड़ उसकी आँखों में देखा , उफ़ भेजी भेजी आँखों में रिमी बेइंतहा क्यूट लग रही थी ,

रवि ने रिमी को अपनी बहु में भर लिया , उसके बालू को सहलाने लगा ,

आधे घंटे बाद रवि , रिमी और शूरति के बेच लेता हुआ था , दोनों बहने , रवि के कण्डु पर सार रख , इक दूसरे की तरफ देख मुस्करा रही थी , यही तोह वोह हसन पल थे , जिसके लिए दोनों हर जुल्म , हर दर्द सेहती रही , आखिर दुःख के बाद सुख के पल ए थे ,

"भइआए सॉरी , हमने कितना गलत सोचा आपके बारे में , हमें माफ़ कर दो..." रिमी थोड़ा उदास होकर बोली ,

"हाँ भइआ मुझे भी माफ़ कर दो..." शूरति और भी कास कर रवि के बदन से चिपकती हुई बोली ,

"शठ , वोह वख्त बीत गया , उसे भूल जाओ , अग्गे ऐनी वाले वख्त का सोचु , ाचा में सोच रहा था , तुम दोनों से शादी कर लू , पर तुम दोनों दिखने में बेहद गन्दी हो , नहाती नै हो क्या..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै तोह रिमी और शूरति की आँखें नाम हो गई ,

"रिमी , शूरति , तुम मेरी हो , चाहे जैसी भी हो , जिस हालत में हो , मेरा प्यार न काम हुआ है और न कभी होगा , में तुम दोनों से बेइंतहा प्यार करता हु , और बेवकूफ लड़कियो में मज़ाक कर रहा था..." रवि ने दोनों के चेहरे के देख कर बोलै ,

"हम भी भइआ आपसे बेइंतहा प्यार करती हैं... " दोनों इक साथ बोली और फिर इक दूसरे की तरफ देख हसने लगी , उन दोनों का आपसी प्यार अभ बेहद बढ़ चूका था , उनके हाथ रवि के सीने पर आपस में मिल चुके थे ,

"ओह्ह शुक्र है मेरे शिव का , तुम दोनों सही सलामत हो , वार्ना , इस दुनिआ का विनाश कर देता में , मेरी प्यारी परयाण..." रवि ने दोनों के बालो को सेहला कर बोलै ,

"भइआ सीमा देदी ने हम पर बहुत जुल्म किये , हमें बहुत मारा , हम कभी उनसे बात नै करेगी , आपके खिलाफ हमारे मन में जहर भर दिया , और रमा , वोह कितनी खौफनाक हो चुकी है..." रमा ने फिर से उन नाराज जैसे पलु को यद् कर रट हुए बोलै ,

"क्या हुआ रमा को..." रवि को रमा की चिंता थी ,

"भइआ रमा इक शेतीअन बन चुकी है , उसके लाल लाल लम्बे बाल हैं और जिस्म इक डैम ब्लैक , और भइआ उसके बाल भी जिन्दा हैं , हाँ भइआ उसके बाल उससे बात कर सकते हैं..." शूरति भी रमा के खौफनाक रूप को यद् रट हुए बोली ,

"शठ , सो जाओ , अज्ज सकूं से सो जाओ , मेरी बहु में , में हु न , सो जाओ..." रवि ने दोनों को बेहद प्यार से बोलै , दोनों इक दूसरे की तरफ देखती , मुस्कराते हुए सोने लगी , क्यों की ,

अज्ज सकूं से दोनों को नंद ा रही थी , क्यों वोह अपने भाई के आगोश में सो रही थी , अज्ज न कोई दर था , न hi कल कोई काम करने की चिंता , क्यों की अभ वोह अपने भाई की परियां थी , और परियां कभी काम नै करती... लेकिन रवि नै सोया था , वोह सुबह तक बस रमा के बारे में सोचता रहा.....

वही दूसरी तरफ..

सीमा बेहद गुस्से में रमा के रूम के पास पहुँच कर रुक गई , वोह आँखों में असनु लिए रमा के रूम में घुस गई ,

रूम के अंदर बस लाल रौशनी थी , चारो तरफ इक गहरी लाल रौशनी , और सामने इक लाल बीएड पर , रमा बैठी हुई थी , वोह सुपत अवस्था में थी , पिछले 6 महीनो से ,

लेकिन उसके लम्बे लाल चमकते बाल रूम में ehder-ohder मंडरा रहे थे , उसका बदन कला था ,

जैसे hi सीमा रूम में घुसी , रमा के जीवट बाल आपस में उलझते , आपस में टकराते , सीमा के करीब आकर , उसके जिस्म को चुने लगे , उसे महसूस करने लगे ,

"m...mm...me...ee..eski..mm..maa...hh..hu." सीमा ने हकलाते हुए बोलै ,

पर जैसे hi वोह अग्गे बढ़ने लगी , रमा के बालो ने उसके सामने इक देवर बना दी , जैसे वोह सीमा को रमा के करीब नै जाने देना चाहते थे , जैसे रमा उन बालो की माँ थी , जैसे वोह जीवट बचे थे , पर इक नै , लाखो में ,

"सुमननननननन , उठाऊ बेटीई , तुम्हारी बहनो की जान खतरे में ही..." सीमा ने चीला कर बोलै , वोह यह सब बेइंतहा रट हुए बोल रही थी , रमा के बाल इक बार पीछे को हुए और फिर उनहोनु ने सीमा को चारो तरफ से घेर लिया ,

फिर िका इक उन बालो ने सीमा को ऊपर से निचे तक जकड लिया , अभ सीमा का बदन जरा सा भी दिखाई नै दे रहा था , तभी वह दयना भी ा गई ,

सीमा को छोड़ रमा के लाल बालो ने दयना को छू कर महसूस किया और फिर रमा के चेहरे के करीब जाकर उसे जगाने लगे ,

जैसे hi रमा की सुपत अवशता ख़तम हुई , रमा सामने देख इक hi शब्द boli..."maaa..." पर किसे देख कर....

तो बे कुनिटेड.....

 


अपडेट-58

अभ अग्गे...

रमा ने जैसे hi माँ शब्द बोलै , दयना और सीमा इक दूसरे का चेहरा देखने लगी , दयना और रमा की माँ , क्या ऐसा था ,

पर ऐसा हुआ था , सुपत अवशता से जागते hi रमा ने दयना को अपनी माँ बोलै था , दयना के होंठो पर इक मुस्कान दौड गई ,

उसने सोचा अभ वोह रमा का इस्तेमाल कर सकती है , अपने दुश्मनो के खिलाफ , वोह अंदर से बेइंतहा खुश हो रही थी , उसने मुस्करा कर इक बार सीमा की तरफ देखा , और फिर रमा की तरफ बढ़ने लगी ,

"मेरी बची , मेरी बेटी , कहा थी तू..." दयना थोड़ा उदास आवाज़ में बोलती हुई रमा की तरफ बढ़ी , तभी कुछ ऐसा हुआ , जिसकी उम्मीद न दयना को थी और न hi सीमा को ,

जैसे hi दयना , रमा के करीब गई , रमा ने गुस्से से उसकी तरफ देखा , और फिर उसके लम्बे बालो ने , दयना की गर्दन को जकड लिया , और उसे उठा कर , देवर के साथ लगा लिया ,

"अह्ह्ह्ह बेटी यह , यह , क्या कर रही हो..." दयना ने अपने अप्प को छुड़वाने की कोससिह करते हुए बोलै , उसके चेहरे से निचे उसका पूरा जिस्म देवर से चिपका हुआ था , जैसे किसी मकड़ी ने अपने शिकार को जल में फास लिया हो ,

सीमा भी हरिजन रह गई , तभी उसने पीछे पलट कर देखा , रूम के सामने की देवर यहाँ बेहद अँधेरा था , वह से इक औरत बहार आयी ,

यह वही औरत थी जो उस दिन सुहाना से बात कर रही थी , जब रिमी और शूरति उनको दरवाजे पर कण लगा सुन रही थी , लेकिन यह औरत थी कोण ,

"माआआ ..." रमा बेहद उदास आवाज़ में उड़ते हुए उस औरत की तरफ बढ़ने लगी ,

उस औरत ने इक कला लिबास पहन रखा था , उसका पूरा जिस्म जैसे घोर अँधेरा से उपजा हुआ था , शरीर का इक भी अंग दिखाई नै दे रहा था , अगर कुछ दिख रहा था , तोह बस अँधेरा ,

सीमा उस औरत को देखते hi झुक कर बेथ गई , रमा के लम्बे गुस्से खोर बाल शांत होकर बेथ गए , अभ वोह उड़द नै रहे थे , वोह शांत थे ,

"माआ , अप्प कहा थी , मेरी मा..." रमा उस औरत के करीब जाकर उसे चुकार महसूस करने लगी , उसकी आँखें नाम हो गई , काली आँखों से कला खून बहने लगा ,

"मेरी बाछीइ , अज्ज तुमसे मुलाकात हो hi गई , कैसी है मेरी बेटी..." उस औरत ने रमा को अपने गले लगा बोलै , उसके हाथ अँधेरे से बने हुए थे , उसका कोई रूप नै था , कोई आकर नै था ,

"माआ में ठीक हु , मुझे किसी को आपसे मिलवाना है , यह , यह , मेरी इंसानी माँ सीमा है , यह भी आपकी तरह मुझे बहुत चाहती है , मुझे बहुत प्यार करती है.." रमा ने सीमा को प्यार से देख कर बोलै , उसके बाल भी सीमा को छू कर महसूस करने लगे ,

"तुम सब शांत क्यों नै होते , बेवकूफ कही के , शांत होकर बेथ जाओ , वार्ना , जड़ से उखड दूंगी..." रमा ने अपने बालो को देख गुस्से से बोलै ,

रमा के बाल इक बार हल्का सा दर गए , और फिर रमा के चेहरे को चुने लगे , रमा प्यार से उनको सहलाने लगी और बोली..." मेरे बची , मा देखो , मेरे बचे कितने प्यारे हैं और मेरी हर बात मानते हैं , इक अचे बचे की तरह , में ें सब की माँ हु , जैसे अप्प मेरी माँ हो , है न माँ..." रमा ने इक गहरी मुस्कान के साथ बोलै , उसकी मुस्कान में इक रहस्य था ,

"रमा बेटीइ , तुम्हारी बहनो की जान खतरे में है , रिमी और शूरति की , वोह , वोह , उनको ले गई ..." सीमा ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"क्या , हूउउउउउ , तोह अपने मुझे उठाया क्यों नै..." रमा ने बेहद गुस्से में बोलै , उसके बाल हवा में चारो तरफ फैल कर मंडराने लगे ,

"हाँ मेरी बची , सीमा ठीक बोल रही है , तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन , प्रिंस सोनिक और मलिका रूही , वापिस लोट ए हैं , जिन सब ने , तुम बचपन में उन अँधेरे जंगलो में छोड़ दिया था , मरने के लिए , बेटी , तुम्हारी मासूम इंसानी बहनो की जिंदगी दांव पर लगी है , जाओ सबको ख़तम कर , उनको बचा लो..." उस नकाबपोश औरत ने बेहद गुस्से भरी आवाज़ में बोलै ,

"हूउउ , हूउउउउ , कोण लेकर गया , मेरी बहनो को..." रमा ने बेहद गुस्से में बोलै , उसका गुस्सा जैसे जैसे बढ़ता जा रहा था , वैसे वैसे उसका बदन और भी कला हो रहा था और उसके बाल अग्ग की लपटों में जलने लगे थे ,

"तमासस्स , वोह लेकर गई है..." दयना जो देवर के साथ चिपकी हुई थी , वोह बेहद दर्द में बोली ,

"क्या , तमासस्स , वोह हमारी , इक लौटी दोस्त थी , वोह भी , उस बेवकूफ प्रिंस के साथ मिल गई , अभ उसे भी मेरे गुस्से का सामना करना होगा..." रमा और भी गुस्से में ा गई ,

"हाँ बेटी , तुमने पारी लोग में , उस तामस की खातिर hi , हमसे दुश्मनी की थी , हमसे लड़ाई की थी , देखो में अज्ज भी तुम कितना प्यार करती हु , में तुम्हारी माँ हु..." उस शेतीअन औरत ने सिसकते हुए बोलै ,

"माँ अप्प रोना मत , पिछली बार जो गलती मुज़से हुई थी , वोह इस बार नै होगी , में सबको ख़तम कर दूंगी..." इतना बोल रमा वह से गयाब हो गई , और दयना , उसके बालो की कैद से मुकत हो गई , रमा के साथ hi वोह औरत भी गयाब हो गई ,

सीमा , अभ सुहाना के रूप में ा गई , और दयना के करीब आकर बोली ,

"कैसी लगी मेरी बेटी की ताकत..." सुहाना ने हस्ते हुए बोलै ,

"वोह बेहद ताकतवर है , लेकिन वोह औरत कोण थी..." दयना ने अपना गाला सहलाते हुए बोलै ,

"मुझे नै पता , बस रमा जानती है , उसका नाम , और उसे भी , पर कभी बताती नै , और उसे हमेशा माँ कहती है..." सुहाना ने खुद भी परेशान सी होकर बोलै ,

वही दूसरी तरफ....

सुबह हो चुकी थी , रवि रत से नै सोया था , क्यों की उसे अज्ज लड़ना था , रमा से , दयना से , और उसकी जान सीमा से ,

वोह न तोह रमा को मर सकता था और न hi सीमा को , वोह ें दोनों में किसी को भी खोना नै चाहता था , और रत भर सोचने के बाद , उसे इक रास्ता मिल गया था , लेकिन क्या था वोह आखरी रास्ता , यह तोह बस रवि जनता था ,

शूरति और रिमी अभी भी बच्चू की तरह उससे लिपट कर , उसे बहु में भर कर सो रही थी , रवि के सीने पर , उन दोनों ने इक दूसरे का हाथ पकड़ रखा था ,

रवि उन दोनों की तरफ देख मुस्करा hi रहा था , के रूम में इक डैम से अँधेरा सा फिकल गया , रवि समाज गया के कोण आया है ,

रवि बीएड से उठ कर खड़ा हो गया , रिमी और शूरति नंद में थोड़ा कसमसाई , और इक दूसरे से चिपक कर सो गई , रवि उन दोनों का आपसी प्यार देख मुस्करा दिया , और फिर उसका इंतज़ार करने लगा ,

"पिता जीई , अभ ा भी जाओ..." रवि मन hi मन बोलै ,

तभी रूम में इक साया बन गया और अभ काल वह खड़ा था , वोह दिन में काम hi कही जाता था , पर अज्ज का दिन , कई जिन्दगियों के फैसले करने वाला था , कई जिन्दगियां बर्बाद होने वाली थी , और कई आबाद ,

"रवि बीटा , तुम ठीक तोह हो..." काल ने रवि के करीब आकर बोलै ,

"ाचा हुआ पिता जी अप्प ा गए , मने सोचा , अज्ज आपसे मिल लू , बाद में पता नै , मौका मिले या नै..." रवि ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,

"हम्म , ऐसी लिए आया हु , काश के में तुम्हारी मदद कर सकता , पर , यह तुम्हारी लड़ाई है , लेकिन हाँ , जब दयना और जोकर इस लड़ाई में आएंगे , तब में तुम्हारा साथ दूंगा..." काल ने बेहद शांत आवाज़ में बोलै ,

"जी पिता जी , पर में न तोह रमा को मर सकता हु और न सीमा को , कोई अपनों से कैसे लड़ सकता है , और रमा मेरे दिल के बेहद करीब है ..." रवि ने थोड़ा उदास आवाज़ में बोलै ,

"रवि , रमा इस लड़ाई में सबसे ताकतवर है , तुम रमा को मरना hi होगा , वार्ना वोह तुम सबको मर देगी , उसकी ताकत hi ऐसी है के वोह सब भूल चुकी है , अभ वोह इक माँ है , उसके जीवट बाल उसके बचे हैं..." काल ने रवि को समझा कर बोलै ,

"पिता जी अगर में उसके बालो को ख़तम कर दू , तोह क्या पता , रमा नार्मल हो जाये , क्या पता उसके जीवट बाल hi उसे शेतीअन बनने पर मज़बूर कर रहे हो..." रवि ने इक आशा की किरण देखते हुए बोलै ,

"हम्म , इक माँ से उसके बचे चीन लोगे , तोह उसका गुस्सा , इतना ब्यांक हो जायेगा , के इस लड़ाई को वोह चाँद मिंटो में ख़तम कर देगी..." काल ने रवि की बात को गलत ठरते हुए बोलै ,

"तोह क्या रास्ता है , रमा को रोकने का..." रवि अभ गुस्से में बोलै ,

"कोई नै जनता , बस इक औरत जानती होगी , वोह होगी , जिसने रमा को पिछले जनम में धोके से मर दिया था , जब सुहाना ने तुम मर दिया था , तब रमा बेइंतहा गुस्सा हो गई थी , उसने सुहाना के जिस्म को चीयर फाड् दिया था , लेकिन इस लड़ाई में वोह बेहद जख्मी हो गई थी , तब उसे भी किसी ने मर दिया था..." काल ने बेहद शांत आवाज़ में बोलै ,

"हम्म , पर पिता जी वोह औरत कोण थी..."

"मुझे नै पता , पर इस जुंग के आखिर में वोह शयद ा जाये , रवि जब तुम वैम्पायर बनकर हवेली में मुज़से मिलने ए थे , तब तुमने इक वादा किया था..." काल ने रवि को कुछ यद् दिलवाते हुए बोलै ,

"हाँ , यद् है , अपने मुझे 1 साल का वख्त दिया था , मुझे दयना को ख़तम करना था , वार्ना अप्प मुझे हवेली में काया और शया की तरह कैद कर लेते , पर पिता जी वोह वख्त बीत चूका है , अभ तोह 3 साल होने को हैं... " रवि ने उन पलु को यद् कर बोलै ,

"हाँ , जनता हु , पर 2 साल तुम यहाँ थे hi नै , में उनको कैसे गईं सकता हु , और अभ तुम्हारे सामने बस दयना hi नै , सुहाना और रमा भी कड़ी है , तुम्हारे कई दुश्मन हैं , और इक तरफ तुम्हारा प्यार , कोमल , तुम्हारे पास अभ 12 घंटे बचे हैं , 1 साल पूरा होने में , अभ में जाता हु , इक बात और अभ तुम कैद से डरकर नै लड़ना है , अभ तुम अपने परिवार के लिए लड़ना है , अपनी बहनो के लिए लड़ना है , अपने पिता को दिए वादे को पूरा करना..." काल इतना बोल गयाब हो गया ,

रवि ने पलट कर देखा रिमी और शूरति नंद से जग रही थी , तभी ख़ुशी बेहद घबराई हुई रूम में आयी , उसकी सांसे बेहद तेज़ चल रही थी , ऐसा लग रहा था जैसे वोह भाग कर आयी थी ,

"क्या हुआ ख़ुशी , तुम इतनी घबराई क्यों हो..." रवि ने ख़ुशी के कण्डु पर हाथ रख बोलै ,

"वोह , वोह , रमा ा रही है , हमसे लड़ने.." ख़ुशी ने घबराते हुए बोलै ,

"कितना वख्त है..."

"बस 5 मिंट और..."

"ख़ुशी , जल्दी से रेहान और सूजी को सच बता दो , और पूरा कबीला खली करवाओ , जाओ जल्दी , में तब तक , रमा को बतायों में उलझा कर रखता हु..." रवि इतना बोल जल्दी से रूम से बहार निकल गया ,

फिर ख़ुशी भी जल्दी से निचे आयी और सबको रमा के ऐनी की खबर दे दी , कुछ hi वख्त बाद , रेहान और सूजी , कबीले के लोग को इकठा कर , वह से कबीले के पीछे बानी इक पहाड़ी गुफा में घुस गए , जिसका पहरा अभ ख़ुशी दे रही थी ,

रवि , रेहान के घर के बहार , इक पत्थर पर बेथ , रमा का इंतज़ार कर रहा था , तभी कोमल उसके पास ा गई , उसने उसके कंडे पर हाथ रखा ,

"कोमल , देखो अज्ज जिंदगी कहा ले आयी..." रवि ने बेचैन सा होकर बोलै ,

"भइआ जिंदगी नै , हमारा प्यार , भइआ वादा करू , हम जियेंगे तोह साथ , और मरेंगे भी साथ..." कोमल ने नाम आँखों से बोलै ,

"वादा रहा..." रवि ने कोमल का हाथ चुम कर बोलै ,

"भइआ , काश के हम चैन की जिंदगी गुजर सकते , हमें क्या चाहये किसी से , कुछ भी नै , हमें बस इक छोटा सा घर चाहये , और दो वख्त की रोटी , पर भगवन वोह भी हमें नै दे सकता..." कोमल ने रट हुए बोलै ,

"शठ , रोना नै , अज्ज हमरी जिंदगी की आखरी लड़ाई है , अज्ज रो कर नै , हस्स कर मुकाबला करना है , हर दर्द झेलना है , हर चोट पर प्यार की मलम लगनी है , तुम जाओ , और जब वख्त ए तभी बहार एना..." रवि ने कोमल को अपनी बहु में भर उसका माथा चुम कर बोलै , कोमल मुस्कराते हुए घर के अंदर चली गई ,

रवि फिर से उस पत्थर पर बेथ गया , तभी तेज़ हवा चलने लगी , पेडू के पत्ते हिलने लगे , पंछी उड़ने लगे , जानवर चखने और शोर मचने लगे , खूबसूरत जंगल में हाहाकार मच गई , क्यों की शेतीअन खुद ा रहा था ,

रवि मन में सोच रहा था ..." अज्ज मेरी जिंदगी उस मोड पर ा गई , यहाँ बस आखरी रास्ता लड़ाई है , हूँ पिता जी से वादा किया के 1 साल में दयना को ख़तम कर दूंगा , पर यह नै जनता था , के दयना के साथ साथ मेरे अपने मेरे दुश्मन बन जायेगे ,

हर इंसान की जिंदगी में मुसिबतिअन अति हैं , लेकिन कुछ लोग मुसीबत में दर जाते हैं , कुछ उनका दिलो जान से मुकाबला करते हैं ,

लेकिन मेरी मुसीबत , मेरे अपने थे , क्या में उनको मर पता , इक तरफ मेरी बहिन रमा थी , और दूसरी तरफ मेरी पत्नी सीमा , में दोनों के बेच फास चूका हु , रमा के साथ मेरा रिश्ता इतना गहरा था , के कोई शब्द नै थे बयान करने के लिए ,

रमा मेरी जिंदगी का वोह एहसास था , जिसे बस में महसूस कर सकता था , उसके जिस्म की वोह खूबसूरत महक , मुझे खींच लेती थी अपनी तरफ , हम दोनों इक जैसे थे , हम दोनों में प्यार था , गुस्सा था , दर्द था , क्यों की रमा मेरी बहिन थी , मेरा आधा हिस्सा ,

न उसे मर सकता हु , और न उसे , लेकिन इसका अंत क्या होगा , मने सोच लिया था , मुझे मरना होगा , मेरी मौत hi इस युद्ध का अंत होगी , सब मेरे साथ जुडी थी , अगर में मर जाता तोह सब ठीक हो जाता , किसी के दिल में दुश्मनी न रहती ,

सुहाना को भी चैन मिल जाता और रमा को भी..." रवि मन hi मन यह बतिअन खुद से बोल रहा था ,

रवि अभी अपने मन से बतिअन कर hi रहा था , के रमा उसके सामने ा गई , उफ्फ्फ उसके लाल बाल सच में जीवट लग रहे थे , उसकी आँखें बेहद काली थी , और जिस्म भी बेहद कला , गुस्सा से उसकी सांसे तेज़ चल रही थी , होंठ गुस्से से कम्प रहे थे , सामने उसका भाई था , जिसे अभ वोह पहचानती नै थी , क्यों की इस खौफनाक रूप में वोह अपने भाई से कभी नै मिली थी ,

"ा गई तुम , में तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था , उफ़ क्या जिंदगी है मेरी , जिसके साथ जिंदगी की शुरुआत की , अज्ज वोह मुझे पहचानती भी नै , इससे बड़ा दुःख क्या होगा , इस से अछि मौत है , हम्म , पर मर भी तोह नै सकता , आखिर तुमसे प्यार hi इतना है , ाचा मेरी आखरी खुवाहिश सुनोगी , बस रोना मत , मेरे मरने के बाद , रमा पिछले जनम में चाहे तुमसे न मिल पाया , पर इस जनम में मने तुमसे बेइंतहा प्यार किया , तुमसे प्यार कर , तुम महसूस किया , तुम हर ख़ुशी दी , अपने दिल की मलिका बना कर रखा , रमा तुम मेरी हो , में जनता हु , तुम मुझे मर डौगी , पर वादा रहा , जब भी मौत आयी , तुम्हारी बहु में आएगी..." रवि उस पत्थर से उठा और बोलता हुआ रमा के करीब आकर रुक गया ,

रमा अपना चेहरा थोड़ा टेड़ा कर उसे देखने लगी , वोह इतने प्यार से रवि को देख रही थी , के कोई शब्द नै दिखने को , बेहद मासूम लग रही थी वोह , बेहद प्यारी , रमा के ऐसे प्यार से देखने से , उसका जिस्म इंसानी रूप में ऐनी लगा , उसके बाल रवि के चेहरे को महसूस करने लगे , तभी रमा के सार में तेज़ दर्द उठा ...

"माँ अज्ज भइआ का खाना में लेकर जोगी , ोुछःह धीरे भइआ दर्द हो रहा है , भइआ यह बात किसी को बताना मत , क्या हुआ बहना कही दर्द तोह नै हो रहा , भइआ मत जाओ शहर , में नै जी सकती आपके बिना..."

रमा को िका इक गाओं में बिताये पल यद् ऐनी लगे , उसके होंठो पर इक मुस्कान दौड गई , पर तभी उसके बाल उसके चेहरे के सामने ा गए , उसके चेहरे को देखने लगे , ऐसा लग रहा था वोह उससे कुछ बात कर रहे थे ,

"रमा , यद् करो..." रवि ने और भी रमा के करीब जाकर बोलै ,

रमा का सार तेज़ दर्द से फटा जा रहा था , वोह बेइंतहा गुस्से में चीख उठी , उसकी चीख सुन पूरा जंगल कम्प उठा , कोमल घर में बहती कम्प सी गई , ख़ुशी पहरा देते हुए कम्पनी लगी , कबीले के लोग भी दर गए , रिमी और शूरति इक दूसरे से चिपक गई ,

"रमा..." रवि अभी इतना hi बोलै था के रमा ने तेज़ी से अग्गे बढ़ रवि के सीने पर दोनों हाथो से ढाका जड़ दिया , उसमे इतनी ताकत थी के रवि पीछे की तरफ उड़ता हुआ , रेहान के घर से टकरा गया ,

घर की लकड़ी की देवर टूट कर भीकर गई , रवि घर के हॉल में जाकर गिरा , कोमल वही बैठी थी , वोह बेहद गुस्से में बहार की तरफ भागी , ख़ुशी भी वह पहुँच चुकी थी , कुछ देर बाद रवि भी वह ा गया ,

अभ रमा के सामने कोमल , रवि और ख़ुशी खड़े थे , लेकिन क्या वोह तीनो भी रमा को रोक पते या कोई और भी अत वह पर...

वही दूसरी तरफ..

काट घर में ेहडेर ोहडेर घूम रही थी , उसने इक गलती की , और सब बर्बाद सा हो गया , वोह गलती थी रवि को बेबी से दूर करने की ,

दो साल गुजर चुके थे , और रवि उस दिन के बाद कभी वापिस नै आया था , और बेबी वोह इक जानवर बन चुकी थी , प्यार शब्द से उसे अभ घिन अति थी , नफरत सी हो गई थी , महीनो तक घर से गयाब रहती , ें दो सालो में बेबी मुश्किल से मटर 6 महीने घर रही थी ,

उस दिन रवि के जाने के बाद जब लॉकेट ने बेबी की पूरी जिंदगी जान ली , तब उसके बलिदान देख , उसे अपनी पूरी ताकत सौंप दी , पता नै क्या था बेबी में , के कोमल का लॉकेट उसे चाहने लगा था , अपनी पूरी ताकत उसे देकर अमर सा कर दिया ,

क्यों की वोह लॉकेट मलिका रूही की अमानत थी , बेहद रहस्मयी ताकतों से भरा था , अनंत काली शक्तियों से बना था वोह , दुनिआ के बड़े से बड़े जादू का तोड़ था ,

लेकिन लॉकेट ने बेबी के दिल में रवि के लिए प्यार और बड़ा दिया था , और बेबी का मन अभ रवि को मिलने के लिए तड़फ उठा ,

सुरु सुरु में वोह नार्मल थी , काट से बेहद प्यार करती थी , उसे रवि का बार बार पूछती रहती , और काट उसे कुछ बता न पति , वोह क्या कहती , के उसके कारन hi रवि नै ा रहा ,

हफ्ते बीत गए , महीने गुजर गए , पर रवि नै आया , बेबी ने पूरी ताकत लगा ली , पर रवि कहा है वोह न जान पायी , क्यों की रवि उस वख्त अंधकार लोग में था ख़ुशी के साथ , और बेबी उसे देख नै प् रही थी ,

आखिर हर रोज़ , हर पल , हर लम्हा , जब बेबी , काट के सामने रवि का नाम जप्ती रही , तब काट को खुद से हार मन कर बेबी को सच बताना पढ़ा , बेबी को सच सुन कर काट पर बेइंतहा गुस्सा आया , पर उसने काट को कुछ नै कहा , बस टूट गई , भीकर गई , आत्मा उदास हो गई , चंचल मन , रवि , रवि चिलता रहा , पर वोह कुछ न कर पायी ,

आखिर इक दिन रमा से उसे पता चला के रवि , ख़ुशी को लेकर कही भाग गया है , तब उसने रवि को बेवफा समाज लिया , टुटा दिल पत्थर बन गया , असून सुख कर तेज़ाब बन गए , और बेबी ने अपने शानदार जिस्म को हमेशा हमेशा के लिए काळा लिबास में धक् लिया , वोह इस पर सिर्फ रवि का हुक समज़ती थी ,

काट ने बेबी को बहुत समझाया , पर बेबी इस कदर टूट गई के वापिस सम्बल न पायी , लेकिन उसने सचाई का रास्ता कभी नै छोड़ा , वोह बुराई से लड़ती रही , जोकर से लड़ती रही , लोग को बचती रही , पर इस सब में वोह खुद को भूल गई ,

इक दिन उसे महसूस हो गया के रवि वापिस ा चूका है , वोह उसे देखने भी गई , पेडू के पीछे चुप कर , रवि को निहारती रही , आखिर प्यार था उसका , लेकिन क्या वोह अज्ज भी यही थी , जब रमा जैसा कहकर शेतीअन रवि के सामने खड़ा था , क्या वोह अज्ज अति , अपने रवि के लिए , इसका जवाब ऐनी वाले वख्त में छुपा था...

तो बे कुनिटेड....[Note- esko kehte hain suspense... voh aurat kon thi , jo rema ki maa thi... Love1994 app kisi ko mat batana...or friends 4rth part esi trah magical hoga.. samaz lena ke 3rd part ka hi second part hoga... matlab es magical world ka ant 4rth part me hoga... ]

 


अपडेट-59

अभ अग्गे...

रवि , कोमल और ख़ुशी अपनी बहिन , अपनी दुश्मन , रमा के सामने खड़े थे , जो बेहद गुस्से में उनकी तरफ देख रही थी ,



"कोमल , ख़ुशी , तुम दोनों अपनी पूरी जान लगा रमा पर अटैक करो , में मौका देख कर उस पर अपनी पूरी ताकत जोक दूंगा , रेडी..." रवि ने दोनों की तरफ देख कर बोलै ,

"जी भइआ , हाँ रवि रेडी..." कोमल और ख़ुशी इक साथ बोली ,

"अटैक..." रवि ने चीला कर बोलै ,

रमा भी त्यार थी , उसने अपने लम्बे जादुई लाल बालो को और भी बड़ा कर लिया , अभ उसके बाल बेहद लम्बे हो चुके थे , और उसके जिस्म के as-pas फैल चुके थे ,



कोमल और ख़ुशी ने दोनों तरफ से रमा को घेर लिया , कोमल और ख़ुशी ने इक दूसरे की तरफ देखा और रमा को मरने डोडी ,



ख़ुशी भागते भागते अपने अंगरक्षक के रूप में ा गई , उसका जिस्म अभ बेइंतहा चमक रहा था , उसके सुनहरे विस्तार अभ वोह धारण कर चुकी थी , उसके हाथो में उसकी चमकती तलवार थी ,



कोमल के भी पंख निकल चुके थे , वोह भी भागते भागते उड़ने लगी , कोमल के हाथ में भी उसका अस्तर ा चूका था , जो इक बड़ी सी खुल्हाडी जैसा था ,

रमा के बाल अभ बेहद लम्बे थे , और उसके पोरे जिस्म को कवर कर रहे थे ,

कोमल और ख़ुशी दोनों ने इक साथ रमा पर वॉर किया , पहले ख़ुशी ने रमा की गर्दन पर वॉर किया , पर रमा के जादुई बालो ने उसके तलवार वाले हाथ को कलाई से जकड लिया ,

अभ ख़ुशी अपनी कलाई रमा के बालो से छुड़वाने लगी , लेकिन उसकी हर कोससिह असफल साबित हो रही थी ,

दूसरी तरफ कोमल ने भी रमा की गर्दन पर वर किया , पर रमा के बालो ने रमा के जिस्म को छुपा लिया , रमा का जिस्म अभ जरा सा भी दिखाई नै दे रहा था ,

"ईहहह अह्ह्ह्हह..." कोमल ने उड़ते उड़ते रमा पर छलांग लगाई , उसने उस चमकती जादुई खुल्हाडी का वॉर रमा की गर्दन पर किया ,

पर खुल्हाडी सीधा रमा के बालो से टकराई , "बुम्म्मम्म्म्म..." इक तेज़ धमाका हुआ , कोमल की खुल्हाडी के तेज़ वॉर ने रमा के बालो को काट दिया था , और ऐसी से तेज़ धमाका हुआ था ,

कोमल धमाका होते hi दूर जाकर गिर गई , अभ ख़ुशी बची थी , ख़ुशी ने अपने दूसरे हाथ से इक चमकती बिजली उत्पन की , और वोह बिजली रमा के उन बालो पर छोड़ दी , जो उसकी कलाई से लिपटे हुए थे ,

बिजली के लगातार तेज़ जातको ने रमा के बालो को मज़बूर कर दिया के वोह ख़ुशी की कलाई को छोड़ दे , जैसे hi ख़ुशी की कलाई चुटी ,

"ahhhhhhhhhhh ..." ख़ुशी ने जोर से चीखते हुए तलवार का जोरदार वॉर रमा के सार पर किया ,

"तनननननननननममममम..." इक तेज़ कम्पन सी दौड गई , ख़ुशी की तलवार और उसके जिस्म में , उसे ऐसा महसूस हुआ , जैसे उसने किसी लोहे की चीज़ पर अपनी तलवार चलाई हो ,

"ीेहह्हंणणणआआआआ..." रमा जोर से चीख उठी , रमा की चीख से उसके बालो ने उसका जिस्म छोड़ , ख़ुशी के पोरे जिस्म को जकड लिया ,

ख़ुशी का पूरा जिस्म अभ उन बालो की कैद में ा चूका था ,

"yahhhhhhhhhhhh..." तभी रवि ने इक तेज़ हवा का मैजिक बॉल रमा पर छोड़ दिया ,



image upload

रमा के बाल उड़ने लगे , रमा उस हवा से घिरी ख़ुशी को और भी जकड़ने लगी ,

तभी कोमल ने अपनी खुल्हाडी से रमा को मरना चाहा , पर रमा ने उसका हाथ रस्ते में hi रोक लिया , और उसके हाथ से खुल्हाडी चीन , उसके पेट में जोर दर किक जड़ दी ,

कोमल थोड़ा पीछे हुई , तभी रमा ने अपने दूसरे हाथ से इक तेज़ रौशनी का मैजिक बॉल छोड़ दिया , वोह मैजिक बॉल कोमल के जिस्म से टकरा गया , क्यों की कोमल अभी सम्बल नै पायी थी ,



image upload

"बम्म्म्मम्म्म्म..." इक तेज़ धमाके के साथ कोमल उड़ती हुई कबीले के इक घर से जा टकराई , वोह घर भी कोमल के ऊपर गिर गया , कोमल उस घर के मलबे के निचे डाब गई ,

"कोमलललललल..." रवि गुस्से से चिलता हुआ रमा की तरफ बड़ा , भागते भागते , उसके हाथ में उसकी तलवार और ढल ा गई , उसका बदन बिजली की रौशनी में चमकने लगा ,



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ख़ुशी अभ बेहोश सी हो गई थी , रमा के बालो ने उसकी साँस बंद सी कर दी थी ,

तभी ख़ुशी ने अपनी पूरी ताकत इक जुट कर ली , उसका जिस्म आग में जलने लगा , तभी ख़ुशी ने आग में जलते हुए , अपने दोनों हाथो को तेज़ जतका दिया ,

रमा के लाल बाल जलते हुए टूट गए , ख़ुशी बालो की कैद से आज़ाद होते hi जमीन पर गिर गई , रमा उसकी तरफ देख पति , तभी रवि ने उस पर हमला कर दिया ,

रवि ने तलवार का जोरदार वॉर रमा पर किया , पर रमा ने कोमल की चीनी खुल्हाडी से उसका वॉर रोक दिया ,

"रेम्मा होशह में आयु..." रवि ने चीला कर बोलै , और अपनी ढल को रमा के चेहरे पर जड़ दिया , ढल के ऊपर लोहे के तीखे तिरकों से बने हुए थे ,

"अह्ह्ह्हह्हींनननननननन...." रमा दर्द से थोड़ा छिलाई , फिर रवि ढल के वॉर करता गया ,

"हुऊ हुऊ हुऊ..." रवि तेज़ तेज़ सांसे भरता रमा के चेहरे पर ढल मरता गया , तभी रमा के बालो ने रवि का ढल वाला हाथ जकड लिया ,

रवि ने अपना मोह खोला और आग की लपटे अपने मोह से छोड़नी सुरु कर दी , रमा के बाल जलने लगे , और साथ में रवि का हाथ भी ,

जैसे hi रमा के बालो ने उसका हाथ छोड़ा , रवि के हाथ से वोह ढल भी छूट कर निचे गिर गई ,

रवि ने पीछे होकर अपनी तलवार खींच ली , अभ तक ख़ुशी थोड़ा सम्बल चुकी था , वोह घुटनो पर कड़ी हुई , उसने रवि को लड़ते देखा , और फिर पूरी ताकत से , अपने हाथो से आग के कई मैजिक बॉल रमा पर छोड़ने लगी ,



इक के बाद इक आग के गोले रमा के बदन से टकराने लगे , रमा अपने इक हाथ को चेहरे के अग्गे लिजकर उन आग के गोलों से बचने लगी ,



"yahhhhhhhhhhh यह ली..." रवि ने तेज़ी से भागते हुए वोह तलवार रमा के पेट में घुसा दी , जादुई तलवार रमा के पेट को चीरती हुई आधी अंदर घुस गई ,

"aaaiinnnnnnnnnnnnn...." रमा इक चीख मरती जमीन पर गिर गई , उसके बाल भी जैसे मर सा गए ,

"रएमाआ , अह्हह्ह्ह्ह , यह मने क्या कर दिया , अपनी जान को मर्डर दिया..." रवि घुटनो के बल बेथ रट हुए खुद से hi चीला कर बोलै ,

ख़ुशी भी अभ धीरे धीरे रवि के करीब आयी और उसके कंडे पर हाथ रख उसे होंसला देने लगी , क्यों की अभी जुंग की शुरुआत थी ,

कोमल भी उस घर के मलबे से रेंगते हुए बहार ा चुकी थी , कोमल का लॉकेट उसके पास नै था , वोह बेहद कमज़ोर थी लॉकेट के बिना ,

कोमल भी रवि के पास आकर उसके गले लग रोने लगी , उसे भी दुःख था रमा की मौत का , पर क्या सच में रमा मर चुकी थी ,

"कोमल , रमा मर गई..." रवि ने उसे बहु में कस्ते हुए नाम आँखों से बोलै ,

"भइआएए..." अभी कोमल ने इतना hi बोलै था के उसके गले में इक जादुई हंटर ा फसा , जो ब्लैक रंग का था और आग में जल रहा था ,

रवि ने आँख उठा सामने देखा तोह रमा कड़ी थी , पेट में तलवार वैसे hi घुसी हुई थी , रवि ने ख़ुशी की तरफ देखा ,

"अह्ह्हुउउ ाहूऊ..." कोमल खास्ती हुई सिसक रही थी , हंटर से उसकी सांसे थमती जा रही थी ,

तभी ख़ुशी ने अपनी तलवार के वॉर से उस हंटर को काट दिया , कोमल आज़ाद होते hi पीछे की तरफ गिर गई , वोह अपना गाला दोनों हाथो में पकड़े कराह रही थी ,

"रवि तुम कोमल को संभालो , में रोकती हु ऐसे..." ख़ुशी इतना बोलै रमा की तरफ बढ़ने लगी ,



रवि , कोमल को गॉड में उठा कर , रेहान के उस टूटे घर के पास ा गया , रवि ने कोमल को दरवाजे के पास बैठा दिया , और उसके होंठो को चुम लिया ,

रवि ने पीछे पलट कर देखा , ख़ुशी ेहडेर ोहडेर उड़ते हुए रमा पर आग के गोले बरसा रही थी , रवि वापिस कोमल की तरफ देखने लगा ,

"अह्ह्ह भइआ k..kaise ..rr..roke..ee..esko..." कोमल ने अपना गाला पकड़े हकला कर बोलै , उसे अभ भी अपने गले में बेहद दर्द हो रहा था ,

"शहहह , मुझे अभ वोह करना होगा , जो में नै करना चाहता था , मुझे रमा के करीब जाना होगा , तभी उसे यद् आएगा , जब वोह मुझे महसूस करेगी , तभी उसे सब यद् आएगा .." रवि ने कोमल के मासूम चेहरे को देख कर बोलै ,

"क्या , ओह्ह नै भइआ , ऐसा मत करो... " कोमल नाम आँखों से बोली ,

"और कोई रास्ता नै , यह हम सबको मर देगी , अपना ख्याल रखना मेरी जान...." रवि ने कोमल को अपने गले लगा बोलै ,

"पर भइआ उसे अभ भी सब यद् न आया तोह..." कोमल को बेहद चिंता थी अपने भाई की ,

"हम्म , मुझे विश्वास है , उसे सब यद् ा जायेगा..." रवि ने उठ कर चलते हुए बोलै ,

रवि , अभ रमा की तरफ बढ़ रहा था , ख़ुशी आग के गोले लगतार रमा पर बरसा रही थी , तभी रमा ने परेशान होकर अपने बालो की ढल बना ली ,

अभ ख़ुशी की तरफ से फेंकी गई आग , रमा के बालो से टकरा रही थी , जिसका कोई भी असर रमा पर नै हो रहा था ,

ख़ुशी ने भी परेशान होकर अपनी पूरी ताकत से इक बेहद बड़ा आग का मैजिक बॉल बना लिया , जो उसकी हिघ्त से भी बड़ा था ,

"अह्ह्ह्हह यह ली..." ख़ुशी ने वोह आग का बेहद बड़ा मैजिक बॉल रमा पर छोड़ा पर रमा ने अपने बल्लो को पीछे खींच अपने सीने में इक ब्लैक होल बना लिया ,

वोह आग का गोला रमा के सीने में समां गया , ख़ुशी हरिजन सी रह गई , तभी रमा ने हंटर का जोरदार वॉर ख़ुशी पर किया ,

हंटर सीधा ख़ुशी के चेहरे पर लगा ..."आयआईईईईईईईईईई मा..." ख़ुशी दर्द से चीखती हुई जमीन पर गिर गई ,

रवि ने पलट कर कोमल की तरफ देखा , जो रट हुए उसको देख रही थी , रवि ने मुस्करा कर कोमल की तरफ देखा और रमा के पास जाने लगा , अभ तक रमा ने अपने पेट से तलवार निकल इक तरफ फेंक दी थी ,

रमा उसे देख रही थी , रमा के बाल उसे रोकने के लिए अग्गे बड़े , पर रवि ने अपने जिस्म को आग में ढल लिया ,

रमा के बाल उसके बदन को जकड लेते , फिर जल जाते , फिर जकड लेते , फिर जल जाते , रमा न जाने क्यों रवि पर अटैक नै कर रही थी ,

जैसे hi रवि , रमा के बेहद करीब आया , उसने पालक झपकते hi रमा को अपनी बहु में भर लिया ,

रमा उसकी पकड़ से छूटने की कोससिह करने लगी , पर रवि ने उसे कास कर अपनी बहु में जकड रखा था , रमा के लम्बे बालो ने रवि को चारो तरफ से घेर लिया ,

रमा के बाल बढ़ने लगे , वोह इतने बढ़ते गए , के रवि और वोह खुद उन बालो में कही चुप सा गई ,

"भइआएए..." कोमल लड़खड़ते हुए उठी और चीखते हुए रवि और रमा की तरफ भागी , उसकी आँखों से असनु बह रहे थे ,

"रविइइइइइ , नईईई..." ख़ुशी भी उठ कर रवि को बचने के लिए भागी , लेकिन शयद अभ देर हो चुकी थी ,

क्यों की रमा के बाल हर बीत रहे पल के साथ और भी बढ़ रहे थे , अभ इक रूम में पूरी तरह समां जाये , इतने बढ़ चुके थे ,

रवि उन बालो के अंदर रमा के गले लगा हुआ था , रमा के हाथ में इक काळा रंग का चाकू नुमा इक लम्बा टुकड़ा था ,

"रमा , मेरी बहिन अह्हह्ह्ह्ह शठ..." रवि अभी रमा के कनु के पास इतना hi बोलै था के वोह जादुई टुकड़ा , रवि की कमर के पास उसके पेट में घुस चूका था ,

"रमा आह्ह्ह्हह यद् करूओ शहहह ..." रवि ने उसे और भी कास कर अपनी बहु में भरते हुए बोलै ,

रमा के दोनों हाथो में अभ खंजर जैसे तीखे टुकड़ो थे , वोह रवि के पेट में दोनों तरफ से मरती गई , वोह उन टुकड़ो को रवि के पेट में मरती , फिर निकल लेती ,

"रेमाहहह..." रवि की आँखें अभ बंद सी होने लगी थी , रवि के पेट से खून पानी की तरह बह रहा था , रमा के दोनों हाथो में कंजर जैसे टुकड़े थे , जो बार बार उसके पेट में घुस रहे थे ,

"भइआएए , छोड़ो भइआ को..." कोमल ने अपनी खुल्हाडी उठा रमा के बालो को काटना सुरु कर दिया , जो अभ गोल होकर फुटबॉल जैसा रूप ले चुके थे ,

रमा अभ अपने सबसे वहशी रूप में थी , कोमल जितना खुल्हाडी से उसके बाल कटती , वोह बाल टूट कर फिर से जुड़ जाते ,

दूसरी तरफ ख़ुशी भी आग के गोले रमा के बालो पर बरसा रही थी , पर जैसे hi रमा के बाल जलते , वोह वापिस जिन्दा होकर आपस में जुड़ जाते ,

कोमल और ख़ुशी थक चुकी थी , पर रमा के बालो के मायाजाल को तोड़ नै प् रही थी , वोह हर मन चुकी थी , वोह दोनों रो रही थी ,

"भइआए , क्यों किया यह , आपको रोका था मने , शेतीअन कभी नै पिगल सकता..." कोमल इतना बोल घुटनो के बल बेथ रोने लगी ,

"हुऊ हूउउ , प्रिंस सोनिक , मररररर डुंगीई तुम्हीीहठ..." रमा ने अपनी वहशी आवाज़ में बोलै , उसकी आँखें और भी काली हो गई , उसके बालो ने रवि की गर्दन को कास कर जकड लिया , वोह रवि की सांसे रोक कर उसे मरने पर तुली थी ,

"rrr...eee..maaaaaa..." रवि बेहद मुश्किल से इतना hi बोल पाया , उसकी आँखें बंद हो गई ,

"हूउउ , हूउउउउउउ , इसकी बड़ड़ड़ टेरिइइइ कोमलललललल ोर्ड्र्र उसकी बड़ड़ड़ड़ खुशियी , और उसकी बड़ड़ड़ड़ सीमाआ हूऊऊऊ.." रमा , रवि के कनु के पास अपने होंठ कर बोली , रमा के बालो ने रवि की गर्दन छोड़ दी ,

रवि अग्गे की तरफ रमा के ऊपर गिर गया , उसका चेरा रमा के कंडे पर था , उसकी आँखें बंद थी , तभी उसने इक डैम से आँखें खोली और रमा को अपनी बहु में जकड उसके कनु में बोलै ,

"r...rr...remaaa....mm...meri....ss....se...xxy...ree...maahhhh...." इतना बोलते hi रवि की आँखें बंद हो गई , उसके जिस्म ने हार मन ली ,

रमा ें शबदो को सुनते hi कही खो सी गई , कुछ अनचाही यदिअण उसकी आँखों के सामने घूमने लगी , उसकी और उसके भाई की यदिअण , लेकिन अभ बेहद देर हो चुकी थी ,

क्या यह रवि का अंत था , या अभ भी कोई चमत्कार रह गया था , लेकिन अभी कोई था , जो नै आया था , कोण था वोह , यद् नै ा रहा , वोह थी बेबी , हाँ , अभ उसके रवि की जान को खतरा हो , और बेबी न ए , ऐसा कभी नै हो सकता , लेकिन अज्ज उसने देर कर दी थी ,

रवि बस अभ बेजान सा रमा के कंडे पर सार रखे , चिकन की नंद सो रहा था , उसने वादा किया था , जब भी मौत आयी , तुम्हारी बहु में आएगी , और यही हुआ था , क्यों की बेहद खून बह चूका था , पर तभी इक तेज़ धमाका हुआ ,



ख़ुशी और कोमल बेहद दूर , कबीले के झोपडो पर जा गिरी , और वोह झोपडु के मलबे के निचे डाब गई , अभ रवि जमीन पर पढ़ा हुआ था ,

रमा के बाल टूट कर भीकर चुके थे , और हवा में उड़द रहे थे , अभ उसके बाल बेहद छोटे थे , जैसे आम लड़कयों के होते हैं ,

रमा दूर जमीन पर गिरी हुई थी , यहाँ वोह पहले कड़ी थी , वह इक गहरा घड़ा बन चूका था , लेकिन वह हुआ क्या था ,

जब रमा , रवि को मरने को उतावली थी , तभी बेबी वह ा गई , अभ हर पल रवि पर नज़र रखने वाली उसकी मोह्हबत , उसकी जूही , उसे कैसे मरने देती ,



बेबी ने लॉकेट की पूरी ताकत अपने हाथ में एकजुट कर , रमा के बाल जो फुटबॉल जैसा रूप लिए हुए थे , उड़ते हुए उन बालो पर इक सुपरमैन पंच मारा था , ऐसी कारन यह बम्ब जैसा ब्यांक धमाका हुआ था ,

बेबी भी दूर जमीन पर गिरी हाफ रही थी , सब के सब जख्मी गिरे हुए थे , लेकिन रमा ने रवि को बोलै था , के वोह सीमा को भी मर देगी , इसका मतलब , साफ था के रमा , उस नकाबपोश औरत जिसे अपनी माँ कहती थी , उसी के कहने पर यह सब कर रही थी ,

आखिर रमा की माँ को क्या चाहये था , मतलब साफ था , इक रहस्मयी चीज़ , जिसका नाम था रिंग...

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-60

अभ अग्गे...

सब के सब जख्मी थे , बेबी दर्द से कहरहते हुए अपने घुटनो के बल बेथ चुकी थी , उसने देखा , उसका प्यार , उसका रवि , बेहद जख्मी , जमीन पर पढ़ा हुआ था ,

बेबी की आँखें गुस्से से लाल हो गई , जब उसने देखा , रवि के पेट में इक ब्लैक जादुई तीखे चाकू जैसे दो टुकड़े , जड़ तक घुसे लाल रंग में चमक रहे थे ,

"aaaaaaaaaaaahhhhhhh नआइइइइइइइइइ...." बेबी अपने चेहरा आसमान की तरफ कर , इतना जोर से छिलाई के , आसमान गरज उठा , बिजली चमकने लगी , पृथ्वी कम्पनी लगी , तेज़ तूफान उठने लगे , सागर के पानी में हाहाकार मच गई , और उसके लहरें जानलेवा हो गई ,

बेबी अभ अपने सबसे वहशी रूप में थी , क्यों की अभ वोह न तोह जूही थी , न बेबी थी , वोह पिछले जनम की कविया थी , जो जानवर थी ,

पिछले जनम में भी सुहाना के कहने पर यह , कविया नाम की वहशी जानवर , प्रिंस को मरने आयी थी , तब उसे प्रिंस से प्यार हो गया , और इस जनम में उसने जूही के रूप में जनम लिया , अभ वोह जूही अक कविया थी ,

बेबी गुस्से में चीखती हुई उठी , और रमा की तरफ बढ़ने लगी , जो अभ अपने अप्प को काफी हद तक सम्बल चुकी थी , रमा के लाल जादुई बाल अभ फिर से जीवट हो चुके थे , और उसके चेहरे को छू रहे थे ,

रमा अपने घुटनो के बल बैठी थी , तभी बेबी ने उस पर अटैक कर दिया , बेबी ने तेज़ी से रमा की तरफ बढ़ते हुए , उसे गर्दन से पकड़ ऊपर उठा लिया ,

"तुमनेई , मेरी प्याररर कोऊ मर्डरर डालाअ..." बेबी ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए , रमा की गर्दन को कास कर दबाना सुरु कर दिया ,

रमा के लाल बालो ने बेबी की कलाई को जकड लिया , और उसके हाथ को खींचने लगे , पर बेबी अपनी पूरी ताकत से रमा के गले को दबा रही थी ,

तभी बेबी ने अपने इक पेअर पर दबाव डाला और वोह रमा को लेकर ऊपर उड़ने लगी , बेहद ऊपर जाने के बाद , बेबी , रमा की आँखों में देख कर बोली ,

"एहहह मेरी रवीए की लीईई बितछःह..." बेबी ने इतना बोलै और रमा की गर्दन को जकड़े जमीन पर गिरने लगी ,

अभ रमा सीधी जमीन पर गिर रही थी , बेबी उसकी गर्दन को अपने हाथ से जकड़े , उसके ऊपर लेती हुई थी , दोनों जमीन की तरफ बेहद तेज़ रफ़्तार से बढ़ रही थी , दोनों के बदन से तेज़ आग निकल रही थी , क्यों की उन दोनों की रफ़्तार बेहद तेज़ थी ,

तभी इक तेज़ धमाका हुआ , वह as-pas धूल और मिटटी का गुबार बन गया , जब धूल मिटटी का गुबार शांत हुआ , तब वह बेइंतहा दर्दनाक माहौल बन चूका था ,

जमीन पर गहरा गद्दा बना हुआ था , रमा जमीन पर बेसुध पढ़ी हुई थी , और बेबी उसके ऊपर लेती हुई थी , उसे भी कोई होश नै था ,

तभी कोमल और ख़ुशी उस टूटे हुए झोपड़े से रेंगते हुए बहार निकली , वोह दोनों बेहद जख्मी थी , इक रमा ने उन सब की हालत बेहद बुरी कर दी थी , और अभी तोह सुहाना का एना बाकि था ,

कोमल जमीन पर रेंगते रेंगते अपने भाई के पास पहुंची , और उसके चेहरे को देखने लगी , तब तक ख़ुशी भी वह ा चुकी थी ,

"रविइइइइइइ ..." ख़ुशी दर्द भरी चीख मरती रवि के ऊपर गिर गई , वोह उसे उठाने लगी , उसके सीने पर मरने लगी ,

कोई क्या जाने ख़ुशी के दर्द को , दो जनम लेकर भी , उसका प्यार अधूरा रह गया था , उसके दर्द की तुलना किसी से करना बेवकूफी होगी ,

"कोमलललल , उठवू इनको , तुम्हारी हर बात मानते हैं , इनको बोलो , उठ जाये , में नै जी सकती इनके बिना...." ख़ुशी बेइंतहा रट हुए बोली , लेकिन कोमल खामोश थी , उसके होंठ सील गए थे , वोह बोल नै प् रही थी ,

"रीम्माआअह्ह्ह..." ख़ुशी बेहद गुस्से में चीख ठी , उसकी तलवार उसके हाथो में ा गयी , जो बेहद तेज़ रौशनी में चमक रही थी ,

"नई छोड़ूगीय तुम्ही रमा..." ख़ुशी बेइंतहा गुस्से में आँखों से बहते असनु साफ करती , अपनी तलवार हाथो में लिए रमा की तरफ बढ़ने लगी ,

अभ तक बेबी , रमा के ऊपर से उठ , रेंगते हुए उस गद्दे से बहार ा चुकी थी , बहार आकर वोह सिधली लेती आसमान की तरफ देखती , तेज़ तेज़ हाफ रही थी ,

रमा को भी अभ होश ऐनी लगा था , लेकिन वोह अभ बेहद कमज़ोर थी , ख़ुशी ने रमा पर छलांग लगते हुए , अपनी तेज़ रौशनी में चमकती तलवार उसके सीने में उतर डाली ,

"आह्ह्ह्हहननननननन..." रमा के मोह से इक दर्द भरी चीख निकली और फिर उसकी आँखें बंद हो गई , ख़ुशी अपनी तलवार वैसे hi छोड़ , उस गद्दे के किनारे बेथ चेहरा ज़ुका रोने लगी ,

पर क्या रमा का अंत हो गया था , कोई नै जनता था , रमा को कैसे मारा जा सकता है , यह बस वोह औरत जानती थी , जिसने रमा को पिछले जनम में मारा था , लेकिन इक बात थी , रमा ने अभ तक बेबी और ख़ुशी पर कोई अटैक नै किया था , क्या उसे सब यद् ा गया था ,

कोमल अभ भी वैसे hi बैठी हुई थी , फिर िका इक उसने रवि के पेट से वोह जादुई तीखे टुकड़े निकल लिए , टुकड़े निकलते hi खून की तेज़ धार बह निकली , कोमल यह देखते hi चीख उठी ,

"नाईईईई , भ्याआआ , भय्याहा ahhhhhhhhhh yaaahhhhhhhhhhh...." कोमल जोर जोर से चीखती हुई , रवि के सीने पर सार रख रोने लगी , उसकी चीख से ख़ुशी और बेबी भी कम्प सा गई , उसकी चीख में इतना दर्द था , जिसे बयान कर पाना मुश्किल होगा ,

"भइआए , अपने वादा किया था , साथ जीने का , फिर क्यों , क्यों , ऐसा किया , क्यों वादा तोड़ दिया , आआआआहहह , ें भेड़ियों के बेच अकेला छोड़ दिया , यह मुझे मर देंगे , भइआएए , आपको उठना होगा , उठाऊ भइआए , प्लसस ूठः जोऊ..." कोमल अपने भाई के बेजान होंठो को चूमते , चूसते हुए बोली , फिर िका इक वोह अपने भाई के पोरे चेहरे को चूमने लगी ,

"भइआ , अप्प मेरे साथ सेक्स करना चाहते थे ना , भइआए में त्यार हूँ , कारु सेक्स मेरे सठह , फुकक मई , फुकक मई , उठो ना , प्लसस , करूओ , कुछ तोह करूओ , में कुवारी नै मरना चाहती , प्लसस , ारी मुज़से शादी hi कर लूओ , क्या भिगाड़ा मने किसी का , क्यू , मुझे चैन से नै जीने देती , हर्र बर्र , मुझे hi क्यों यह दर्द मिलता हैई , क्यू , हर्र बर्र मेरा प्यारर अधूरा रेहह जाता हैई , भय्याहा , आपको मेरी कसमंम उठाऊ , प्लसस , में हाथ जोड़ती हूँ , उठू..." कोमल ने बेइंतहा रट हुए बोलै , उसके शबदो में इतना दर्द था , इतनी तन्हाई थी , में क्या लिखू , मुझे कुछ समाज नै ा रहा ,

"भइआए , ठीक है अप्प मैट उठू , आपको सोना है , सो जाओ , में भी सो जाती हु , आपके पास , हम दोनों सो जाते हैं , थक गए हैं , हम दोनों भाग भाग कर , लड़ लड़ कर , अभ चैन की नंद सो जाते हैं , भइआए , में आपके सीने पर सार रख सो जाती हु , जब भी उठो , मुझे भी उठा देना , उम्मा..." कोमल ने अपने असनु साफ कर मुस्कराते हुए अपने भाई के होंठो को चूमा और फिर , अपने भाई के सीने पर सार रख सो गई , उसके लम्बे खूबसूरत बालो ने उसका चेहरा छुपा लिया ,

लेकिन तभी , वह इक सफेद धुँआ सा उठाए , ख़ुशी और बेबी नाम आँखों से उस धुई की तरफ देखने लगी ,

हासष्ठ यह सुहाना थी , उसके साथ दयना और जोकर भी थे , और साथ में लारा भी थी , वोह चारो वह हुई लड़ाई के परिणाम देख रहे थे ,

"ारी वहहह , मेरी बेटी ने सबको हरा दिया , अभ मेरा मकसद पूरा होने से कोई नै रोक सकता..." सुहाना बेइंतहा ख़ुशी में हस्ते हुए बोली ,

"तबाही , तबाही , हर तरफ तबाही , और इसमें मुझे ख़ुशी मिलती है , में हु पागल शेतीअन जोकर , ाहाःहाहा..." जोकर ने रवि के मुर्दा जिस्म को देख बेहद हस्ते हुए बोलै ,

"अभ बोल कोमल , अभ करेगी मुझे कैड , खीयीकहींईईई , अभ सचाई नै , बुराई राज़ करेगीइ , इस दुनिआ पर नई , पोरे ब्रह्माण्ड पररररर..." दयना , कोमल के पास बैठते हुए बोली ,

"अह्ह्ह यह सब तुम्हारा सपना hi रहेगा ..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में चीला कर बोलै ,

"शह्ह्ह्ह , तुम लगता है , तुम्हारी यह घटिया से तलवार , मेरी बेटी को मर देगी , बेवकूफ लड़की , उसे मरना इतना आसान नै , उसे में भी नै मर सकतीई , वोह , वोह , हेहेहे , अभी चाँद पलु बाद उठ जाएगीइ..." सुहाना ने बेहद ख़ुशी में हस्ते हुए थोड़ा गुस्से में चीख कर बोलै ,

"नयी छोड़ूगीय तुम्ही..." बेबी उठ कर गुस्से में उसकी तरफ बड़ी , तभी सुहाना ने आँखें बंद कर कोई मंत्र पढ़ा ,

बेबी उसकी तरफ बढ़ hi रही थी के उसका जिस्म जादुई लोहे की जंजीर में जकड़ा गया , जो आग जैसी गरम थी ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शठ..." बेबी दर्द से चिलाती जमीन पर गिर गयी ,

"यहह्हह्ह्ह्ह..." ख़ुशी ने तेज़ी से छीलते सुहाना पर छलांग लगाई , पर सुहाना ने उसे गर्दन से पकड़ लिया , और अपने दूसरे हाथ की मुट्ठी को कास कर बंद कर लिया , उसके हाथ में आग जलने लगी ,

सुहाना ने इक जोरदार पंच ख़ुशी के पेट में जड़ दिया , ख़ुशी उड़ते हुए इक पेड़ से जा टकराई , और निचे जमीन पर गिर गई , ख़ुशी अपना पेट पकड़े कराह रही थी ,

"तुम दोनों बेवकूफ हूँ , मलिका सुहाना से जीत पाना नामुमकिन ही , सुहाना ने तुम पिछले जनम में भी मारा था और इस जनम में भी मारेगीइ..." सुहाना बेइंतहा हस्ते हुए बोली ,

लेकिन कोमल अभ भी रवि के सीने पर सार रखे बैठी हुई थी , उसने इक बार भी अपना चेहरा उठा , सुहाना को नै देखा था ,

"मलिका सुहाना , देखो कोमल की तरफ , बेचारी कितना दर गई आपसे , अपना चेहरा तक उठा नै रही , ख़ीीीखिइइइइइइइ , लेकिन इसकी बली तोह चढ़ेगी , हम सब के मालिक शेतीअन को..." दयना ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"हाँ दयना , मेरे पिता जी को इसकी बलि देकर , उनसे मिलूगी , सदियाँ बीत गई , ऐसी छह में , के कब में अपने पिता से मिलूगी , उनसे बतिअन करुँगी , अज्ज मेरा सपना पूरा होगा , हाँ न कोमळळ , ल्यो जी , देखो , हमारी प्यारी कोमल , अपने भाई से चिपक कर बैठी हुई है , अरे कोई इसको बताओ के , वोह मर चूका है , वोह नै उठेगा...." सुहाना ने बेहद ख़ुशी में बोलै ,

लेकिन कोमल ने अभ भी अपना चेहरा ऊपर नै उठाया था , कैसा प्यार था उसका , यह किस तरह की दीवानगी थी , चोट इक को लगती थी , दर्द दूसरे को होता था , लेकिन जो दर्द कोमल को अज्ज मिला था , क्या यह दर्द उसका प्यार भरा दिल सेहन कर पाया था ,

अभ तक रमा को होश ा चूका था , वोह उठ कर , अपने सीने से ख़ुशी की तलवार निकल , सुहाना और बाकि सब की तरफ बढ़ रही थी ,

जब सुहाना को रमा के ऐनी का एहसास हुआ , तब उसने अपना रूप सीमा के रूप में बदल लिया , और प्यार से देखते हुए रमा की तरफ बढ़ने लगी ,

"मेरी बचीयी , आखिर तुमने , रिमी और शूरति को , ें सबसे बचा hi लिया..." सीमा ने रमा का माथा चूमते हुए बोलै ,

जैसे hi सीमा के होंठ रमा के माथे पर लगे , उसे इक तेज़ बिजली का जतका लगा , वोह पीछे की तरफ गिर गई , लेकिन फिर वोह खुद को संभालते हुए उठ कड़ी हुई ,

बेबी खुद को छुड़वाने की पूरी कोससिह कर रही थी , ख़ुशी अभ उसी पेड़ से पीठ टिकाये बैठी हुई थी , अभ वोह किसके लिए लड़ती , वोह खुद सदमे में थी ,

"लारा , कोमल को बंदी बना लो..." जोकर ने लारा की तरफ देख कर बोलै ,

"जीई मालिक..." लारा चेहरा ज़ुका कर बोली , और कोमल की तरफ बढ़ने लगी ,

लारा ने अपनी तलवार निकल ली थी , क्यों की कोमल पर उसे विश्वास नै था , क्या पता , कोमल उठते hi उस पर हमला कर दे , लारा कोई रिस्क नै लेना चाहती थी ,

लारा , कोमल के करीब पहुँच , उसे आवाज़ देने लगी ..."कोमळळ , उठाऊ , वर्णा..." लारा ने गुस्से में कोमल को कंडे से पकड़ पीछे किया , तब उसकी आँखें खुली की खुली रह गई ,

"नईईई..." लारा बेहद जोर से चीख उठी , लारा की चीख सुन , सुहाना , दयना , जोकर और रमा , उसके पास ा गए , पर जो उन लोग ने देखा , सबको अपनी आँखों पर विश्वास नै हो रहा था ,

"नईईई , यह नई हो साक्ताआ..." सीमा बेहद गुस्से में चीख उठी , उसकी ब्यांक चीख सुन , सब अंदर तक कम्प गए , बस रमा को छोड़ कर ,

"यह कैसी पागल लड़की हैई , इक प्यारर के लिये यह सबब्ब..." दयना भी कोमल और रवि के प्यार से फार्बवित होते हुए बोली ,

"ओह्ह्ह नयी , अभ क्या होगा मलिका..." जोकर ने बेहद उदास आवाज़ में बोलै , हर बात पर , हर पल , हर लम्हा , हसने वाला जोकर अभ उदास था , लेकिन हुआ क्या था ,

जब कोमल ने सोने की बात की तब , उसके हाथो में वोह जादुई तीखे टुकड़े थे , कोमल ने अपने भाई के सीने पर अपना सार रखा , और दोनों टुकड़े , बड़ी ख़ामोशी से , अपने पेट में घुसा लिए ,

उसे दर्द तोह बेइंतहा हुआ , उसकी बंद आँखों से असनु बह निकले , लेकिन वोह हर दर्द सेहती , अपने भाई के सीने पर सार रखे , उसे बहु में भर कर , उससे चिपक कर बैठी रही ,

.

आखिर कुछ hi पलु में उन जादुई टुकड़ो ने कोमल की सांसे चीन ली , वोह चाँद पलु में hi मरने लगी , लेकिन वोह काफी देर तक , सुहाना और बाकि सब की बतिअन सुनती रही ,

पर उसे सोना था , अपने भाई के साथ , और वोह सो गई , उसने अपना वादा पूरा किया , जियेंगे तोह साथ , और मरेंगे भी साथ , और अज्ज उसका हर दर्द , हर तन्हाई , ख़तम हो चुकी थी ,

अभ न तोह उसे इस समाज का दर था , न अपनी माँ का , न hi उसकी बहिन सुहाना का , अभ वोह हमेशा हमेशा के लिए अपने भाई के साथ सो गई थी ,

जिंदगी भर दर्द सेहती रही , हर मुसीबत से लड़ती रही , कभी अपनी आबरू बचती रही , और कभी अपने प्यार के लिए बलिदान देती रही , पर अभ इक आखरी बलिदान उसने दिया था , और अभ वोह सो चुकी थी , इक चैन की नंद , उसे कोई नै उठा सकता था , कोई भी नई ,

"नाईईई , नईईई , तुम नई मर्डर सकतीई , मेरा माक्सड्ड , अधूरा रेहह गया , क्योऊ , हर्र बर्र तुममम मर्डर जातीय हूँ , क्या ही ईएसएस प्यारर मी , क्यू , आख़िररर क्योऊ..." सुहाना , कोमल के पास घुटनो के बल बेथ रट , छीलते हुए बोली , पर अभ सब ख़तम हो चूका था , कुछ नै बचा था...

"मलिका संभालो खुद को , जो होना था , वोह हो चूका है..." दयना ने सीमा के कंडे पर हाथ रख बोलै ,

"नयी , नईईई , यह नै हो सकता , कोमल मुज़से जायदा प्यारर कैसी कररर सकतीई हैई , पिछले जनम में भी , ेसनी अपनी भाई की लिये जानन डीडीई , और अभ फिरर वही सब , में हार गईई , में फिररर से हॉरर गईई..." सुहाना ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

बुराई के साथ हमेशा यही होता है , अभ न तोह सुहाना , अपना प्यार प् सकती और न अपने पिता को मिल सकती थी , अगर वोह रवि और कोमल के साथ मिल कर रहती तोह , शयद उसे उसका प्यार मिल जाता , जो उसे पिछले जनम में नै मिला था , लेकिन उसे प्यार पाना नै था , वोह प्यार चीन लेना चाहती थी ,

लेकिन अभ रवि , प्रिंस नै था , अभ वोह इंसान था , जिसके साथ कई जिन्दगियां जुडी थी , उसकी 7 बहने और कई प्रेमिकायें , लेकिन सुहाना तोह बस अकेले रवि को चाहती थी ,

लेकिन अभ उसके अहंकार ने उसका सब कुछ चीन लिया था , उसका प्रेमी , उसका मकसद , और अभ शयद , जिसे वोह अपनी बेटी कहती थी , वोह भी उसके खिलाफ होने वाली थी...

तो बे कुनिटेड....

 
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