Incest Katha Chodampur Ki - Page 31 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

अपडेट 181

सरलपुर

खाने पीने के बाद सब कुछ आँगन में तो कुछ लोग छत पर तो कुछ घर के द्वार पर चबूतरे पर डेरा जमाये हुए थे इसी बीच रिमझिम को अकेला पकड़ कर पूर्वी एक तरफ लेजाकर बोली- रात की क्या योजना है, तेरे जीजाजी तो तेरे साथ के लिए मरे जा रहे हैं.

रिम- अरे यार समझ नहीं आ रहा क्या करूँ चाहती तो मैं भी हूँ पर इन्हे छोड़ कर कैसे आउंगी कुछ सोचना पड़ेगा.

पूर्वी- सोच बहन बहुत बेसबर हो रहे हैं ये तेरी मुनिया के लिए.

रिम- जीजा साली का रिश्ता hi ऐसा होता है चल तू भी दिमाग लगा मैं भी लगाती हूँ.

पूर्वी- ठीक है.

इसके बाद दोनों लोगो में मिल जाते हैं और थोड़ी देर बाद अपने कमरों में, रिमझिम और ख़ुशी कमरे में होते हैं हालाँकि मर्द लोग अभी भी बहार होते हैं, इसका फायदा उठा ख़ुशी दरवाज़ा बंद कर देती है और दोनों ननद भाभी एक दुसरे पर टूट पड़ती हैं.. दोनों के होंठ आपस में कुश्ती करने लगते हैं तो दोनों के हाथ एक दुसरे के कामुक बदन पर घूमने लगते हैं. ख़ुशी रिमझिम के नंगे पेट को मसलने लगती है तो रिमझिम भी पाजामे के ऊपर से ख़ुशी के गदराये चूतड़ों को मसलती है. कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग होते हैं तो दोनों हांफ रहे होते हैं.

रिम- अह्ह्ह अगर मेरे पास लुंड होता तो अभी तक तुमजरी इस मुनिया को छोड़ चुकी होती ननद रानी.

रिम ख़ुशी की छूट को कपड़ो के ऊपर से hi सहलाते हुए कहती है.

ख़ुशी भी उसी मदहोशी मैं जवाब देती है- अह्ह्ह भाभी छोड़ दो न आह्हः इतना बहती है ये लुंड की प्यास में देखो अब भी गीली है..

रिम- अह्ह्ह ननद रानी गीली तो मेरी भी है बिलकुल नल की तरह बाह रही है.

ख़ुशी – तुम तो अभी डलवा लोगी न भैया का लुंड….

रिम- तुम भी डलवा लो.. तुम्हारी भी मुनिया की साडी प्यास बुझा देगा.

रिम ख़ुशी की छूट को सहलाते हुए कहती है.

ख़ुशी सिसकते हुए- अह्ह्ह्ह भैया कहाँ डालेंगे अपना लुंड मेरी मुनिया में उन्हें तुंहारी मुनिया से hi फुर्सत नहीं है.

रिमझिम ये सुनकर समझ जाती है की ख़ुशी बेहद उत्तेजित हो रही है और इस उत्तेजना का फायदा उठाना चाहिए, उसका दिमाग तेज़ी से चलने लगता है.

कुछ सोच कर रिमझिम कहती है- डालेंगे भी आउट खूब छोड़ेंगे भी तुम अपनी मुनिया के लिए थोड़ी हिम्मत तो दिखाओ.

ख़ुशी- कैसी हिम्मत.

रिम ख़ुशी से अलग होती है और अपने कपडे उतरने लगती है

ख़ुशी – भाभी क्या क्र रहे हो भैया आते होंगे हमें ऐसे देख लेंगे.

रिम- कुछ सोचा है तुम भी अपने कपडे उतरो.

ख़ुशी – सच में? अभी?

रिम- हाँ जल्दी उनके आने से पहले.

ख़ुशी हैरान तो होती है पर भाभी की बात मानते हुए अपना सूट उतर देती है.

रिमझिम भी साड़ी पेटीकोट और ब्लाउज उतर चुकी होती है और दोनों hi अब ब्रा पंतय में होती हैं.

ख़ुशी- अब?

रिम- मेरी साड़ी पहन लो.

Khushi-tumhari साड़ी क्यों?

रिम- अरे ख़ुशी तुम भी सवाल बहुत पूछती हो जल्दी पहनो.

ये कह रिमझिम उसे खुद पेटीकोट ब्लाउज और साड़ी पहनने लगती है और जब पहना देती है तो खुद अपनी एक मैक्सी दाल पहनने लगती है.

ख़ुशी- भाभी पहन ली तुम्हारी साड़ी अब क्या करना है बताओ,

रिम- प्रैंक.

ख़ुशी- प्रैंक कैसा प्रैंक. किसके साथ?

रिम- तुम्हारे भैया के साथ,

ख़ुशी – मैं समझी नहीं.

रिम- अरे अभी तुम लाइट बंद करके बीएड पर लेट जाना तुम्हारे भैया आएंगे तो सोचेंगे की मैं हूँ पर निकलोगी तुम तो हो गया न प्रैंक उनके साथ,

ख़ुशी- छी इतना गन्दा प्रैंक, भैया तुरंत पहचान जायेंगे.

रिम- और नहीं पहचाना तो.

ख़ुशी- नहीं पहचाना तो कुछ नहीं फिर हमें उन्हें बता देंगे.

Rim-Aur उनको उल्लू बना देंगे.

ख़ुशी- अगर नही पहचाना और तुम्हे समझ कर मुझे पकड़ लिए तो.

रिम- तो क्या हुआ थोड़े मज़े ले लेना तुम भी मसलवाने के.

ख़ुशी – धत्त भाभी

हालाँकि ख़ुशी ने शर्म से धत्त भाभी ज़रूर कह दिया पर ये सोचकर उसके मन में अजीब अजीब से विचार आने लगे उसे अपनी छूट में नमी बढ़ती हुई महसूस हुई, कैसा होगा अगर भैया उसे ऐसे छुएंगे तो.

रिम- धत्त्त क्या जब तक मन हो मज़े लेना नहीं तो बोल कर बता देना भैया मैं हूँ.

ख़ुशी- फिर तो बेचारे का चेहरा देखने लायक बन जायेगा.

रिम- वही तो बनाना है.

ख़ुशी- पर तुम कहाँ रहोगी?

रिम- मैं तब तक अपनी बहन पूर्वी से बातें कर लुंगी जब हो जाये तो मुझे फ़ोन कर बुला लेना.

ख़ुशी- ठीक है पर कुछ गड़बड़ तो बही होगी न,

रिम- इसमें क्या गड़बड़ हो सकती है.

ख़ुशी – ठीक है पर भाभी मुझे दर लग रहा है.

रिम- अरे इसमें दर कैसा भैया hi तो हैं तेरे, और अब ंकीज़ जाती हूँ वो आ गए तो साडी योजना बेकार.

ख़ुशी कुछ सोचकर बोली- ठीक है भाभी.

रिम – चल आते होंगे तुम बिस्तर पर लेट जाओ मैं लाइट बंद करती जाउंगी.

इतना कह रिमझिम जाने लगी और ख़ुशी बिस्तर पर लेट गयी हालाँकि उसके दिल की धड़कन बहुत तेज़ चल रही थी, एक अजीब सी उत्तेजना और दर दोनों उसके मन में था बहार निकलते हुए रिमझिम बत्ती और दरवाज़ा दोनों बंद करके निकल गयी, आंगन में इस समय खली था, वो नज़रें घुमा कर इधर उधर ढूंढने लगी तभी सीढ़ी से उतारते हुए उसे उसका पति रमन दिखा.

रिमझिम जल्दी से रमन के पास गयी और उसका हाथ पकड़ उसे रसोई में ले गयी जहाँ कोई नहीं था,

रमन- क्या हुआ यहाँ क्यों ले कमरे में चलो.

रिम- आज तुम्हारे लिए गिफ्ट है मेरी तरफ से.

रमन- कैसा गिफ्ट?

रिम- वही जो तुम सबसे ज़्यादा चाहते हो.

रमन- सबसे ज़्यादा तो मैं तुम्हे चाहता हूँ.

रिम- मैं तो तुम्हारी hi हूँ अब सुनो समय काम है.

इसके बाद रिमझिम उसे पूरी योजना बता देती है, जिसे सुनकर खुद रमन की धड़कने तेज़ चलने लगती हैं.

रमन- यार कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाये वो चिल्ला पड़ी या कुछ और हो गया तो.

रिम- वो नहीं चिल्लायेगी मुझे पता है बस अगर तुम्हे अपनी बहन की कासी हुई छूट चाहिए तो तुम्हे थोड़ी हिम्मत दिखानी होगी..

ये सुनते hi रमन का लुंड ठुमके मरने लगा पर साथ hi उसे दर भी लग रहा था.

रिम- देखो जी ऐसा मौका फिर नहीं आएगा अगर आज नहीं कर पाए तो फिर बाद में पछताना hi रह जायेगा तो आज हिम्मत दिखाओ और पूरी ज़िन्दगी मज़े hi मज़े.

रमन – पर

रिम- पर वॉर कुछ नहीं मैंने अपना काम कर दिया है अब सब तुम्हारे ऊपर है, तुम्हे हिम्मत दिखानी है.

रमन- ठीक है जाता हूँ. पर तुम.

रिम- मैं पूर्वी या मम्मी पापा के साथ सो जाउंगी, कुछ बात हो तो फ़ोन करके बुला लेना.

रमन – ठीक है.

रिम- और सुनो लुंड छूट में घुसने से पहले पहचानना नहीं एक बार घुस गया तो कोई दिक्कत नहीं.

रमन- पता नहीं क्या पुण्य थे मेरे जो ऐसी बीवी मिली.

रिम- अब जाओ मेरी तारीफ कल कर लेना.

इसके बाद रमन थोड़ा सा घबराता हुआ अपनर कमरे की और बढ़ता है. कमरे के बहार पहुँच दरवाज़ा खोलता है तो अंदर बिलकुल गुप्प अँधेरा होता है, अंदर आकर वो बापिस दरवाज़ा बंद कर देता है. और अंदर से कुण्डी लगा देता है.

इधर दरवाज़ा खुलने की आवाज़ से hi ख़ुशी की साँसे चलने लगती हैं वो सोचने लगती है अब क्या होगा अब क्या होगा.

इधर रमन बिना लाइट जलाये hi अपने कपडे उतारने लगता है और उतारते हुए बोलता है- आज बड़ी जल्दी सोने लगी तुम लगता है सफर से थक गयी हो.

ख़ुशी को लगता है उसके भैया उसे भाभी समझ कह रहे हैं वो ऐसे hi लेती रहती है बिना जवाब दिए. रमन सरे कपडे उतर कर दरवाज़े के पीछे हुक पर तंग देता है और बिस्तर की और बढ़ता है.

ख़ुशी को जल्दी hi बिस्तर पर उसके भैया के चढ़ने का एहसास होता है और उसका दिल ढोलक की तरह बजने लगता है वो किसी तरह से खुद को संभाले लेती रहती है, जल्दी hi उसे एहसास होता है की भैया उसके पीछे हैं और अगले hi पल वो पीछे से उसी चिपक जाता है, ख़ुशी तो इस एहसास से सिहर जाती है उसकी छूट पानी छोड़ने लगती है, वहीं रमन को hi पता था की उसनर ये कितनी हिम्मत जूता कर किया था, पर अब उस हिम्मत का फल भी उसे मिल रहा था बहन का कोमल कामुक बदन उससे सत्ता हुआ था, उसकी कामक गांड पर रमन का कड़क लुंड घिस कर अति उत्साहित हो रहा था,

वही हाल ख़ुशी का थो जो अपने भैया के बदन की गर्मी को महसूस कर मस्त हुय्र जा रही थी, उसे अपने चूतड़ों पर उनके कड़क लुंड का एहसास पागल किये जा रहा था, ये पहला लुंड था जो उसके बदन को छू रहा था वो भी उसके सेज भाई का था.

रमन ने भी अब एहसास पाकर ये मन बना लिया था की अब जो चाहे हो जाये वो पीछे नहीं हैट सकता इसी सोच में उसने अगला कदम बढ़ाया और अपनी बाहें आगे कर ख़ुशी को पकड़ लिया, और अपना चेहरा उसकी गर्दन के पास ला कर धीरे से फुसफुसाया- आज इतनी जल्दी सौगी क्या, बिना मुझसे प्यार किये.

ख़ुशी वैसे hi लेते हुए उसकी बातें सुन चुप रही बेचारी क्या करती उसे न जाने क्यों लगने लगा की अब वो भैया को बता नहीं पायेगी की वो भाभी नहीं ख़ुशी है. वो इसी सोच में थी की अचानक रमन के एक हमले से बिलकुल सिहर गयी, रमन ने चेहरा आगे बढ़ा उसकी गर्दन पर होंठ रख दिए और उसेचूमने लगे साथ hi रमन के हाथ भी उसके पेट पर जो साड़ी और ब्लाउज के बीच नंगा था उस पर फिरने लगे, ख़ुशी तो इस एहसास से पागल होने लगी पहली बार उसे कोई मर्द ऐसे छू रहा था, उसके जवानी भरे गदराये बदन को कोई पहली बार यूँ मसल रहा था और वो कोई और नहीं उसके सेज भैया थे,

एक मर्द के स्पर्श में इतना आनंद आता है उसे पता नहीं था, उनके कठोर हाथ कोमल बदन पर अलग hi एहसास दे रहे थे, वो अब छह कर भी उन्हें रोक नहीं सकती थी या वो रोकना छह hi नही रही थी..

इसी का फायदा उठाते हुए रमन ने उसे पूरी तरह से अपने से चिपका लिया था और उसे अपनी दोनों बाहों में जकड़ा हुआ था, साथ hi लगातार वो उसकी गर्दन को चूम रहा था जिससे दोनों की उत्तेजना हर पल बढाती जा रही थी, इसी बीच रमन ने ख़ुशी के चेहरे को एक हाथ से अपनी और घुमाया जिससे ख़ुशी थोड़ी घबराई की कहीं भैया ने उसे पहचान तो नहीं लिए पर अगले hi पल उसे जैसे उसकी बात का जवाब मिल गया क्यूंकि उसके होंठों को उसके भैया ने अपने होंठों में भर लिए और चूसने लगे

पहली बार कोई मर्द उसके रसीले गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों का रास पि रहा था और वो कोई और नहीं उसके भैया थे, ख़ुशी कुछ देर यूँ hi मुँह खोले शांत रहते हुए अपने होंठो को चुस्वाति रही थोड़ी देर बाद उसके होंठों अपने आप जवाब देने लगे वो भी भैया के होंठों को भर के चूमने लगी.

ख़ुशी का साथ प् कर रमन की तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा वो समझ गया ख़ुशी भी उत्तेजित हो गयी है और अब रास्ता आसान है. इसी के चलते उसका एक हाथ ख़ुशी के सीने पर पहुँच गया और ब्लाउज के ऊपर से hi उसके संतरे के अकार के जौबनु को ब्लाउज के ऊपर से hi मसलने लगा, ख़ुशी तो अब उत्तेजना में सब भूलती जा रहज थी भैया के हाथ सीने पर महसूस होते hi उसका सीना अपने आप तन गया उसने अपनर उभारों को और बहार की और निकल दिया, वहीं ऊपर उसके मुँह में भैया की जीभ थी जिसके साथ उसकी जीभ अटखेलियां कर रही थी… ख़ुशी भी मन से सरे विरोध प्रतिरोध को निकल कर जो हो रहा था उसका आनंद ले रही थी,

रमन ने दोनों हाथों को एक साथ किआ और ब्लाउज के हुक खोलने लगे और जल्दी hi िस्मर कामयाब हुए अगले hi कुछ पालो ने ब्लाउज के दोनों पैट अलग थे जिसकर हटते hi रमन के हाथो ने ब्रा में क़ैद बहन की चूचियों को फिर से भर लिया और उन्हें दबाने लगे, ख़ुशी इसका जवाब भैया की जीभ को चूसते हुए दे रही थी.

पहली बार अपनी जवानी को किसी मर्द से मसलवाने में ख़ुशी को एक अलग hi एहसास एक अलग hi उत्तेजना हो रही थी, वो अब समझ रही थी की लोग सम्भोग और काम लीला के इतने दीवाने क्यों हैं, क्यों चुदाई के लिए लोग सब कुछ छोड़ देते हैं वही सुख आज उसे मिल रहा था, वहीं रमन तो जैसे बहन की संतरे जैसी छूछीयो को हाथ में भरकर स्वर्ग में था,

रमन का लुंड नीचे से बिलकुल बेकाबू होकर ख़ुशी की गांड में साड़ी के साथ साथ घुसने की कोशिश कर रहा था साथ hi इतना कड़क हो गया था की रमन को तकलीफ तक हो रही थी पर अभी उसके पास अपनी तकलीफ को समझने की भी फुर्सत नहीं थी,

रमन हर पल के साथ जोश में बढ़ता जा रहा था, उसी जोश में आकर उसने ख़ुशी की ब्रा को पकड़ कर ऊपर खींच दिया जिससे ब्रा ख़ुशी के सीने से हैट गयी और उसके हटते hi ख़ुशी की नंगी चूचियों को बापिस अपने हाथों में भर लिए, और उन कोमल संतरो को हाथ में महसूस कर रमन का तो आप hi खोने लगा और उससे भी बुरा हाल ख़ुशी का था जो पहली बार अपने भाई के हाथो से अपनी नंगी छूछीयो को मसलवा रही थी ऊपर से भाई का खड़ा कड़क लुंड उसकी गांड पर ठोकर के बाद ठोकर मार रहा था,

रमन ख्याहिकी छूछीयो को देख भले hi नहीं प् रहा था पर उनके अकार, कोमल पैन को महसूस कर मगन हो रहा था. उसने आगे बढ़ाते हुए ख़ुशी की सीधा पीठ पर लिटा दिया और अगली hi पल उसकर होंठों को छोड़ अपना मुँह उसकी छूछीयो के बीच घुसा दिया और पागलों की तरह अपनी बहन की चूचियों को चूसने लगा, पहली बार ये सब झेल रही ख़ुशी के लिए ये सब बहुत ज़्यादा हो चूका था उसे लग रहा था जैसे उसकी छूट अंदर से जल रही है अगर कुछ नहीं किआ तो वो ख़तम हो जाएगी, वही रमन जहाँ चूचियों से अपने होंठ नहीं उठा रहा था उसके हाथ आगे बढ़ रहे थे फिसलते हुए उसके हाथ ख़ुशी के पेट से होते हुए नीचे की और बढ़ने लगे, ख़ुशी तो अभी अपनी चूचियां चुसवने में इतनी मगन थी की उसको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा..

इधर रमन अपना सारा अनुभव आज इस्तेमाल कर रहा था और लम्बा हाथ कर ख़ुशी की टैंगो के पास उसने साड़ी और पेटीकोट का सिरा पकड़ा और उसे ऊपर की और खिसकने लगा साथ hi ख़ुशी की छूछीयो को लगातार चूस रहा था, ख़ुशी पहला तो खुद को सिसकियाँ लेने से रोक रही थी की उसके भैया को आवाज़ सुनकर पता न लग जाये पर अब वो सब भूल खुल कर आहें भर्त्र हुए रमन के सर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी, रमन ने साड़ी और पेटीकोट को ऊपर सरकते हुए साथ hi ख़ुशी की चिकनी गदराई टैंगो को सहलाते हुए अपनर हाथ जांघो तक ले आया, और अगले hi पल उसका हाथ ख़ुशी की जांघ पर फँसी पंतय से टकरा गया, रमन को तो करंट सा लगा वही ख़ुशी अब भी चूचियों के चूसे जाने में मगन थी, रमन ने हिम्मत करते हुए हाथ आगे बढ़ाया और सीधा पंतय के ऊपर से hi अपनी बहन की छूट पर रख दिया, और पाया की पंतय तो पूरी गीली हो चुकी है उसकी बहन की छूट नल की तरह बाह रही थी, वहीं ख़ुशी को भी एक झटका लगा अपनी छूट पर भाई का हाथ पाकर पर और वो तड़पने लगी, रमन के लिए ये पल बेहद उत्तेजित करने वाला था उसके सामने उसकी बहन अधनंगी पड़ी थी जिसके बदन के साथ वो खेल रहा था, उसे लग रहा था उसका लुंड उत्तेजना से फैट जायेगा जीवन में इतना उत्तेजित वो कभी नहीं हुआ था, रमन ने गीली पंतय के कपडे को पकड़ कर एक साइड खिसका दिया और ख़ुशी की छूट से हटा दिया हालाँकि उसे दिख कुछ नहीं सकता था वो सब महसूस करके कर रहा था वहीं ख़ुशी आगे आने वाल पल और क्या क्या होने वाला है ये सोच कर तड़पने लगी,

उसे वही रमन हिलता हुआ महसूस हुआ और उसकी चूचियों से रमन का मुँह हैट गया फिर उसे बिस्तर पर थोड़ी हलचल महसूस हुई और फिर नीचे टैंगो के बीच, फिर उसे अपनी जांघों पर रमन के हाथ महसूस हुए और हाथ ऊपर फिसलते हुए आये और उसकी साड़ी को कमर तक कर दिया जिसमे ख़ुशी ने भी अपने चूतड़ उठाकर उसकी मदद की , ख़ुशी के अपने हाथ अपनी चूचियों पर चल रहे थे जो की उसके भैया के थूक में सनी हुई थी, वो सोच रही थी की एक रात में hi उसकी ज़िन्दगी कितनी बदल गयी कहाँ उसे आजतक मर्द ने छुआ नहीं था और अभी वो लगभग नंगी अपने भाई के साथ बिस्तर पर है जो की बिलकुल नंगा है इसी बीच उसे फिर से हलचल महसूस हुई और अगले hi पल उसे छूट पर एक गरम चिकना एहसास हुआ जिससे उसकी छूट और बदन दोनों तड़पने लगे, ऐसा एहसास उसे कभी नहीं हुआ था अगले hi पल वही चिकनी गरम चीज़ उसकी छूट के छेड़ को चौड़ा करते हुए अंदर घुसने लगी रिमझिम तो इस ेहजास और दर्द से छटपटाने लगी वही रमन ने आगे आउट रुकना उचित नहीं समझा था और अपने लुंड का टोपा बहन की कुंवारी जवान रसीली छूट पर रख अंदर की और धकेल दिया था, हल्का सा टोपा अंदर गया था और रमन को ख़ुशी की छूट की कसावट का अब्बास हो गया था उसे वेहद आनंद मिल रहा था ये सोच कर की अपनी बहन का कुंवारा पैन वो भांग करने वाला है, वो उसे लड़की से औरत बनने का सुख देने वाला है, वहीं ख़ुशी की तो जान अटक गयी उसे लग रहा था जैसे कोई उसकी छूट को दो हिस्से मरिन्चीर रहा है, रमन समझ चूका था आगे का सफर थोड़ा कठिन था पर उसके बाद मज़े hi मज़े हैं, इसीलिए उसने हाथों से ख़ुशी की कमर को कास के पकड़ लिया और फिर एक धक्का लगाया तो उसके लुंड का टोपा खछ से उसकी बहन की छूट के अंदर घुस गया पर इसके कारन ख़ुशी की तो जैसे जान hi निकल गयी, उसने किसी तरह खुद को कबिखने से रोका, वो बिस्तर पर तड़पने लगी, रमन से छूटने की भी कोशिश करने लगी हालाँकि वो जानती थी पहली बार चुदाई में दर्द होना स्वाभाविक है पर जानकारी होने में और खुद उस दर्द को झेलने में बहुत फ़र्क़ था, खैर कुछ पल रमन यु hi रुका रहा और ख़ुशी को उसने सँभालने का समय दिया, जब स्थिति सही लगी तो वो हल्का हल्का धक्का दे आगे बढ़ने लगा और थोड़ा आगे बढ़ते hi उसका लुंड ख़ुशी की छूट जी झिल्ली से टकराया , जो इस बात का सबूत था की उसकी बहन बिलकुल कुंवारी है, रमन को इस बात को महसूस कर बेहद ख़ुशी हुई, साथ hi ख़ुशी पर बेहद प्यार आये और वो लुंड को यूँ hi फंसाये हुए ख़ुशी के ऊपर अपनी कोहनी पर वजन लेकर ख़ुशी के ऊपर झुक गया, अपने चेहरे को ख़ुशी के चेहरे के पास लाया तो उसे ख़ुशी की तेज़ चलती साँसों का एहसास हुआ, रमन ने फिर अपना चेहरा आगे कर उसके गालों को चूमा और फिर उसके कान के पास होंठ कर फुसफुसाया- थैंक्यू ख़ुशी मुझे दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी देने के लिए.

ये बात ख़ुशी ने सुनी और फिर उसे जब समझ आया की उसका भाई जनता है ये मैं हूँ. वो हैरानी में थी पर आगे कुछ सोचती उससे पहले उसे अपने होंठों पर भाई के होंठ महसूस हुए, रमन ने ख़ुशी के होंठो को अपने होंठों में जकड लिया और फिर नीचे कमर का एक धक्का लगाया और उसका लुंड उसकी बहन की छूट के कुंवारे पैन की दीवार को चीरता हुआ छूट में अंदर समां गया.

ख़ुशी की तो मनो इस झटके से जान निकल गयी उसे लगा जैसे किसी ने उसकी छूट में चक्कू चला दिया है. उसका पूरा बदन अकड़ गया, उसके हाथों ने भाई के हाथों को कसके जकड लिया, उसके गले से दर्द भरी चीख निकली जो की उसके भाई के होंठो की वजह से अंदर hi घुटकर रह गयी.

वहीं रमन को जब ये निश्चित हो गया तो वो मनो फूला नहीं समां रहा था, इस पल का इंतज़ार उसे न जाने कब से था और अब वो मंज़िल उसने प् ली थी, ख़ुशी उसकी बहन उसके नीचे थी, अपनी कुंवारी छूट में उसका लुंड लिए हुए, दोनों भाई बहन अपनी पहली चुदाई के इस पड़ाव पर आ थोड़ी देर शांत रहे और फिर रमन ने थोड़ा तोफा कमर को हिलना शुरू किया और हॉकर हॉकर धक्कों के साथ अपने लुंड को आगे पीछे चलने लगा, वही ख़ुशी को भी अब जब दर्द थोड़ा काम हुआ तो छूट में लुंड का एहसास मज़े देने लगा, ऐसा मज़ा जो उसने आज तक महसूस नहीं किया था, अगर ऐसे मज़े के लिए थोड़ा दर्द सहना पड़ता हज तो क्या बुराई है, अब वो भी बापिस उत्तेजित होने लगी साथ hi उसे एक तरह से छूट भी मिल गयी जो उसके भैया को पता चल गया था वो कौन है अब वो खुल कर मज़े ले सकती थी,

उसके हाथ रमन की पीठ पर चलने लगे साथ hi वो चुम्बन में रमन का साथ देने lagi.Kuch देर की हलकी चुदाई और चुम्बन के बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो धक्के और तेज और गहरे हो गए.

ख़ुशी- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह भैयाह.

ख़ुशी हर धक्के के साथ सिसक रही थी उसके हाथ भैया की पीठ पर चल रहे थे.

रमन – आह्ह्ह्ह ख़ुशी अह्ह्ह कितनी कासी हुई छूट है तेरी…

रमन ने सीधा hi उससे गंदे शब्दों में बोलना शुरू किआ तो ख़ुशी कहाँ पीछे रहने वाली थी,

ख़ुशी- अह्ह्ह भैया तुम्हारा लुंड भी कितना लम्बा है पूरी चूऊऊऊत भर गयी मेरी अह्ह्ह्ह.

रमन- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ख़ुशी आज जैसा मज़ा कभी नही aaya..Ahhh ohhhhhhhhhh.

ख़ुशी- आह्ह्ह्हह हाँ भैया मज़ा तो आएगा hi भेनचोद जो बन गए हो.

ख़ुशी के मासूम चेहरे और उसकी प्यारी सी आवाज़ में गली सुनकर रमन को बिलकुल अलग hi एहसास हुआ साथ hi उसकी उत्तेजना और बढ़ गयी.

रमन- हाँ मेरी प्यारी बहाना न जाने कबसे तुझे छोड़ कर भेनचोद बनने का सपना था मेरा आअह्ह्ह आज पूरा हुआ है.

ख़ुशी- ओह्ह्ह और तेज़ भैया अह्ह्ह्ह, कब से छोड़ना चजते थे अपनी छोटी बहन की कुंवारी छूट को.

ख़ुशी भैया के लुंड को अपने अंदर महसूस कर और उत्तेजित होती जा रही थी हर धक्के के साथ

ख़ुशी जितना गन्दी बातें कर रही थी उसे उतना hi मज़ा आ रहा था तो वो उसी मज़े को बढ़ने के लिए और बातें किये जा रही थी.

रमन- जबसे जवान हुए और तेरे बदन को भरते हुए देखा तबसे, और फिर शादी के बाद तो मैं और रिम्मी मिलकर योजनाएं बनाने लगे और आज योजना सफल हुई.

रमन अपनी बबहान की छूट को लम्बे धक्कों से छोड़ते हुए बोलै.

ख़ुशी ये सुन हैरान हो गयी की उसकी भाभी भी इस योजना में उसके भाई के साथ शामिल थी.

ख़ुशी- क्या आह्हः अह्ह्ह्हह भाभी भी तुम्हारे साथ मिली हुई थी.

रमन – हाँ ये उसी की योजना थी साडी

ख़ुशी- कैसी बीवी है तुम्हारी भैया अपने पति से उसी की बहन चुदवाती है. बहुत बड़ी रंडी निकली भाभी तो.

रमन गली सुन मुस्कुराने लगा,

रमन- वो तो है पर बहुत प्यारी उसी की बदौलत आज तू मर्द लुंड के नीचे है.

ख़ुशी- वो तो है, और इसका इनाम भी मैं रंडी भाभी को दूंगी.

रमन- कैसा इनाम?

ख़ुशी- भाभी के सामने तुमसे छुडवाउंगी तो देखना कितनी खुश होगी वो.

रमन तो सोचकर hi खुश हो गया अपनी बीवी और बहन को साथ छोड़ने की बात सोचकर वहीं उसके लुंड ने भी इस पर प्रतिक्रिया जताई,

ख़ुशी जो एक बार पहले hi झाड़ चुकी थी ऑसू बातों से दोबारा उसकी छूट पानी छोड़ने लगी, वहीं रमन भी खुद को रोक नहीं पाया और अपनी बहन की कुंवारी छूट को उसने रास से भर दिया जान झड़े दोनों तो थोड़े शांत हुए अब ख़ुशी को थोड़ी शर्म आ रही थी वहीं रमन ख़ुशी के ऊपर से हैट कर बगल में लुट गया और बोलै- मज़ा आ गया यार तुझे आया,

इस पर ख़ुशी शर्मा गयी और उसने अपना सर अपनर भाई के सीने में छुपा लिए, दोनों hi मन hi मन रिमझिम का धन्यवाद् कर रहे थे, जहाँ दोनों रिमझिम का धन्यवाद् कर रहे थे वहीं घर के दुसरे कमरे में अलग hi माहौल बना हुआ था, यहाँ पूरा परिवार इकठा था और परिवार के बीच जो अभी प्रेम प्रसंग चल रहा था वो देखने लायक था,

रमन की पत्नी और सबकी प्यारी रिमझिम अपने जीजाजी यानि पूर्वी के पति पंकज की मेहमान नवाज़ी कर रही थी और उनके सामने घोड़ी बन अपने गोल मटोल चूतड़ उनके सामने परोसे हुई थी






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वहीं पंकज भी बेहद ख़ुशी से अपनी साली की गांड का भोग लगा रहे थे और अपना लुंड रिमझिम की गांड में अंदर बहार कर रहे थे, वहीं रिमझिम के पापा अपनी भतीजी पूर्वी की गांड को अपने मुँह पर रखकर चाट रहे थे जबकि उनकी टैंगो के बीच उनकी पत्नी थी जिसके मुँह में उनका लुंड था, और उनकी पत्नी के पीछे विनीत था जो अपनी प्यारी तै जी की गांड मरने में कोई कसार नहीं छोड़ रहा था





और देख कर लग रहा था की ये लोग अभी शुरू hi हुए थे और ये प्रोग्राम अभी लम्बा चलने वाला था काम से काम तब तक तो जब तक सरे लुंड छूट गांड आपस में मिलाप नहीं कर लेते.

वही रमन और ख़ुशी थोड़ा सा आराम करने के बाद फिर से तैयार थे पर इस बार रमन ने लाइट जला दी थी और अपनी बहन के नंगे बदन को देखते हुए छोड़ रहा था, ख़ुशी भी पूरी लगन से चुदाई का मज़ा ले रही थी, दोनों भाई बहन जानते थे की पूरी रात उनकी है.






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वहीं चंचल और चेतन भी एक रात किदूरि की पूरी कसार मिटा रहे थे और एक दुसरे पर चढ़े हुए थे.





वहीं माधुरी का अपनी संधानो के साथ हुई बातचीत के बाद आज मन तो था पर न जाने क्यों खुद से पति से कह नहीं प् रही थी और इंतज़ार कर रही थी पति के कुछ इशारे का पर चरण सिंह तो आराम से सो गए, वहीं बिमला और उसके पति का भी हाल था बेचारे समधी संधान के यहाँ थे बेटी की ससुराल मेज थे इसलिए कोई गलत न समझे इसलिए दोनों ने दूर रहना hi उचित समझा. खैर इस तरह रात बीती सरलपुर में.

कॉन्टिनोएड
 
भाई ये एड्स दिमाग ख़राब करते हैं अपडेट पोस्ट करता हूँ gif ऐड की और साडी अपडेट गायब.

Story Collector भाई ऐसे एड्स से क्या फायदा की पोस्ट hi न कर पाओ कुछ
 
इसके बाद शैलेश बड़े खुश हुए की उन्हें आज शालू के सवालों की जगह ममता की गांड और छूट मिलेगी वो भी उस्क्स पति के साथ में. शैलेश के लिए ये बहुत अजीब hi और उत्तेजित करने वाला ख्याल था जिसे वो दिमाग से निकल hi नहीं प् रहे थे पति के साथ मिलकर उसकी पत्नी को छोड़ना उसके सामने उसकी पत्नी की छूट में लुंड घुसना,

इसीलिए शैलेश मौका मिलते hi मान गए, और राजन के साथ जाना तय कर लिए वहीं नीलेश अपने घर चले आये. अब आगे

अपडेट 182
चोदामपुर

जहाँ सरलपुर में रिश्तेदारों के बीच प्रेम पनप रहा था तो चोदामपुर प्रेम फ़ैलाने के मामले में किसी भी अन्य जगह से काम नहीं है.

जहाँ शैलेश ने आज राजन की मेहमान नवाज़ी को स्वीकार किआ और उनके साथ चले गए वहीं नीलेश अपने घर को लौट आये,

शैलेश और राजन बातें करते हुए राजन के घर पहुंचे तो ममता ने दरवाज़ा खोला इसके बाद ये खबर राजन ने ममता को सुनाई की आज रात के लिए शैलेश बाबू हमारे यहाँ रुकेंगे, इस पर ममता और पल्ली ने भी ख़ुशी से उनका स्वागत किआ…

ममता ने जल्दी hi दोनों के लिए खाना लगाया और उनके खाने के बाद खुद माँ बेटी भी खाने के लिए बैठी तब तक दोनों मर्द कपडे बदल कर और सिर्फ लुंगी बनियान पहन कर छत पर टहलने लगे, हालाँकि शैलेश को तो इंतज़ार था जल्दी से सोने के समय का और फिर वो और राजन मिलकर ममता के साथ मज़े करते, उस समय के लिए उनका मन बेसबर हो रहा था जब औ राजन के साथ मिलकर उसकी पत्नी को छोड़ेंगे, सोचकर hi उनके मन में एक सिरहन सी हो रही थी..

उधर राजन ने भी शैलेश को आगे आने वाले समय के लिए सावधान करने के लिए पहले hi कुछ निर्देश दिए

राजन- देखो शैलेश बाबू अभी तक बहुत कुछ तुम जान चुके हो और हमें पूरा भरोसा है की तुम ये बातें कभी बहार नहीं खुलने डोज.

शैलेश – भैया इस भरोसे के लिए जान भी हाज़िर है, अब आप लोग hi मेरा परिवार हो और परिवार की बात मैं क्यों बहार निकलने दूंगा.

राजन- परिवार के सदस्य होते hi तो सब कुछ तुम्हे बता रहे हैं, अभी थोड़ा सच सामने आया है और बहुत कुछ आना बाकि है तो अपने कलेजे को थोड़ा थम के रखियेगा.

शैलेश – ऐसा क्या राज़ है भाई साब जो कलेजा थामना पद जाये.

राजन- वो तो वक़्त पर तुम्हे पता चलता रहेगा धीरे धीरे, बस ये समझो की ये चोदामपुर है यहाँ…

शैलेश – कुछ भी हो सकता है… हाहाहा

राजन- अरे वाह अब समझे तुम हमारी बात.

इतने में hi पल्ली की नीचे से आवाज़ आई- पापा आ जाओ बूस्टर लगा दिया है..

ये आवाज़ सुनकर सबसे ज़्यादा ख़ुशी शैलेश को हुई क्यूंकि वो जिस समय की प्रतीक्षा कर रहे थे वो आ चुकी थी.

जल्दी hi दोनों नीचे आये और देखा सब काम हो चुके थे सब जगह की बत्ती बंद थी बस ममता राजन के कमरे की जल रही थी, हालाँकि इस तरह किसी के कमरे में जाने से उसकी hi बीवी को छोड़ने के लिए ये सोच शैलेश थोड़ा अटपटा भी महसूस कर रहे थे पर उत्तेजना उससे भी कहीं अधिक थी खैर राजन के पीछे पीछे वो कमरे के अंदर घुसे तो सामने देखा ममता बिस्तर के किनारे बैठी है पर आगे जो शैलेश ने देखा उससे उनका पूरा मुँह hi उतर गया उन्होंने देखा की बिस्तर के दूसरी और पल्ली बैठी है, बेचारे के सरे सपने अचानक से टूट गए, उन्होंने पल्ली वहां होगी ऐसा तो बिलकुल भी नहीं सोचा था पल्ली है इसका मतलब अब कुछ भी होने की संभावना तब तक तो नहीं थी जब तक वो है, शैलेश का पूरा चेहरा hi उतर गया था..

ममता ने दोनों को बिस्तर पर बैठने को बोलै- अरे आ गए आओ आओ बैठो ये कहकर ममता ने आगे बढ़ अंदर से दरवाज़ा बंद कर दिया जिसे देख शैलेश की रही सही उम्मीद की पल्ली चली जाएगी सोने वो भी ख़त्म हो गयी खैर ममता के कहे अनुसार वो बिस्तर के पैरो की तरफ बैठ गए पल्ली बिस्तर के दूसरी और सिरहाने से टिक कर चादर ओढ़ कर लेती थी ममता बिस्तर के बगल में कड़ी थी, राजन आगे गए और बिस्तर के सिरहाने ऐ टिक्कर बैठ गए,

राजन- अरे शैलेश बाबू आराम से बैठी पेअर ऊपर कर के.

शैलेश – ऐसे hi ठीक है भाई साब

शैलेश ने अपना दुःख छुपाते हुए कहा..

राजन- ाचा ठीक है पल्ली बिटिया पापा की सेवा नहीं करेगी आज थकावट हो रही है.

पल्ली- अभी करती हूँ पापा.

ये कहकर पल्ली उठी और चादर सहित अपने पापा के पैरों के बीच आ कर बैठ गयी और फिर हलके से अपनर पापा की लुंगी को रक तरफ सरका कर उनका नंगा लुंड बहार कर अगले hi पल मुँह में भर लिया,

शैलेश को लगा था की शायद पल्ली अपने पापा के पेअर दबाएगी और जैसे वो बैठी तो उसका पिछवाड़ा शैलेश की और था वो भी पूरा बदन चादर से ढाका तो जैसे hi पल्ली ने गिलना शुरू किया तो शैलेश को कुछ गड़बड़ लगी क्यूंकि वो पेअर तो दबा नहीं रही थी पर पीठ होने की वजह से वो. कुछ ठीक से देख भी नहीं प् रहे थे, वो आगे होकर देखने की कोशिश करने hi वाले थे की राजन ने कुछ ऐसा किआ जिससे शैलेश के होश उड़ गए.

राजन- अरे बिटिया इसे हटा न कहाँ गर्मी में चादर ोड राखी है.

ये कह राजन ने पल्ली के ऊपर पड़ी चद्दर खींच कर अलग फ़ेंक दी, और फिर ये देख शैलेश के बिलकुल होश hi उड़ गए क्यूंकि पल्ली बिलकुल नंगी थी और बड़े चौ से अपने पापा का लुंड चूस रही थी.






शैलेश तो इतने चौंक गए की बिस्तर से उठ कर खड़े हो गए, उनका तो दिमाग झन्ना गया ये देख कर, शैलेश ने ऐसा तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था, एक दुसरे की बीवियों को छोड़ने की बात शैलेश जानते थे पर ये तो कुछ अलग hi था एक बेटी पूरी नंगी होकर अपने बाप का लुंड चूस रही थी और माँ बगल में कड़ी देख रही है, यहाँ तक की मैं यहाँ हूँ फिर भी,

राजन ने शैलेश को यूँ देखा तो बोले- क्या हुआ शैलेश बाबू, चौंक गए? हमने कहा था न की कलेजा थोड़ा थम के रखना,

शैलेश ने राजन की बात तो सुनी पर जवाब दे पाना अभी उनके वश में नहीं था वो तो बस बाप बेटी की काम लीला को देखे जा रहे थे, पल्ली बिना किसी हिचक के अपने पापा के लम्बे कड़क लुंड को चूस रही थी.

राजन ने शैलेश को ऐसी हालत में देख अपनी पत्नी को इशारा किआ जो की शायद पहले से hi तैयार थी पल्लू नीचे पड़ा हुआ था ब्लाउज आगे से खुला हुआ था और चूचियां ब्रा के बहार लटक रही थी, पति का इशारा पाकर ममता ने सर हिलाया और शैलेश के पास गयी जिसकी आँखें अब भी उस मनोहर दृश्य पर लगी हुई थी, वो समझ नहीं प् रहे थे की बाप बेटी में क्या ऐसा भी रिश्ता हो सकता है, इधर ममता शैलेश के सामने जा कर घुटनो पर बैठ गयी और उसने हाथ आगे कर लुंगी को साइड हटा कर देखा तो आँखों में चमक आ गयी, क्यूंकि शैलेश का लुंड मुँह उठाये बिलकुल कड़क होकर फुंकारे मार रहा था ममता ने शैलेश के लुंड को पकड़ लिए और उसे आहिस्ता आहिस्ता मुठियाने लगी,






तब जाकर पहली बार शैलेश ने पल्ली राजन से नज़र हटाकर नीचे देखा और ममता की देख हैरान रह गए उन्हें पता hi नहीं चला कब ममता उनके सामने आकर बैठ गयी, ममता ने उनको देखते हुए उनकी लुंगी को खोल दिया तो लुंगी नीचे फिसल कर गिर गयी, ममता ने थोड़ा आगे बढ़ शैलेश की आँखों में देखते हुए उनके लुंड के टोपे पर अपनी जीभ फिरै तो शैलेश के मुँह से अह्ह्ह निकल गयी इसके बाद ममता ने शैलेश के लुंड को मुँह में भर लिए हुए चूसने लगी..

शैलेश ने नज़र उठा कर देखा तो उसकी नज़र राजन से मिली, और नज़र मिलते hi दोनों के चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गयी, शैलेश जो अब तक हैरान परेशां थे अब जाकर थोड़ा शांति से सोचने लगे.

वहीं बिस्तर पर अब थोड़ा बदलाव हो रहा था पल्ली ने अपने पापा का लुंड मुँह से निकल दिया था और खुद उठ कर कड़ी हुई तो राजन खुद बा खुद सरक कर सीधे लेट गए पल्ली ने एक कदम आगे बढ़ाया और फिर अपनर पापा के चेहरे पर छूट रखकर बैठ गयी.. राजन ने भी अपनी जीभ निकल बेटी की रसभरी का स्वागत किआ और उसे चाटने लगा. शैलेश ने ये देखा और सोचा क्या परिवार है काश हर परिवार ऐसा होता वैसे चाहे तो क्यों नहीं हो सकता, शैलेश के दिमाग में अनगिनत विचार चल रहे थे पर वो विचार ममता के मुँह की गर्मी के आगे फिघलते जा रहे थे जो की उनके लुंड को गले में लेकर घौंट रही थी, दूसरी और राजन लापर लापर कर के अपनी बेटी की रसीली छूट का रास पि रहे थे,

पल्ली- अह्ह्ह पापाहहहह aiseeeeeeeeee hi अह्ह्ह खा जूऊऊ अपनी बिटिया की छूट को आह्ह्हह्ह्ह्ह

पल्ली अपनी छूट को अपने पापा के मुँह पर घिसते हुए बोल रही थी पर अभी उसके पापा और मम्मी दोनों के hi मुँह बंद थे एक के मुँह पर छूट थी तो एक के मुँह में लुंड इसलिए अभी सिर्फ बेटी hi बोल रही थी राजन भी पल्ली की बात सुनकर और उत्तेजित हो रहे थे, माँ से लुंड चुसवाते हुए वो बेटी के बदन को देख रहे थे और सोच रहेथे बनाने वाले ने पल्ली को क्या बनाया है, ऐसा जवान बदन, बिलकुल गोल और संतरे के अकार की छुछियां गोरी मुलायम कमर उसके नीचे गोल चूतड़ हाय ऐसा लगता है इसे चुदाई के लिए hi बनाकर भेजा गया है.

शैलेश ने उसके बदन को देखते हुए सोचा अगर ये मेरी बेटी होती तो शायद मैं भी खुद को रोक नहीं पता और ये hi करता जो अभी भाई साब कर रहे हैं,

पल्ली- अह्ह्ह्ह पापा अब और नहीं सहायह जा रहा, अब छोड़ो अपनी प्यारी बिटिया को अह्ह्ह….

शैलेश ये तो समझ गए hi थे की बिना चोदे तो राजन नहीं मानते होंगे पर सामने से सुनने पर थोड़े अचंभित ज़रूर हुए पर सोचा की ये चोदामपुर है यहाँ कुछ भी हो सकता है..

उधर पल्ली बिस्तर के किनारे पेअर फैलाकर लेट गयी तो राजन उठ कर बिस्तर के नीचे आये और बेटी की टैंगो के बीच में खड़े होकर जगह ली, शैलेश बिना पलके झपकाए इस नज़ारे को देख रहे थे, और देखे भी क्यों ना बाप बेटी के बीच ऐसा दृश्य कोई रोज़ रोज़ देखने को थोड़े hi मिलता है, राजन और पल्ली के लिए ये रोज़ का hi काम था,

राजन- अह्ह्ह मेरी बेटी की गरम छूट को लुंड चाहिए,

राजन ने अपने लुंड को पकड़ कर पल्ली की छूट पर ऊपर नीचे घिसते हुए कहा…

पल्ली – हाँ पापा अहह दाल दो न अपना कड़क लुंड मेरी छूट में अह्ह्ह्ह छोड़ो न अपनी बिटिया को..

राजन- अभी छोड़ता हूँ पापा की कैसी बिटिया है मौसा को बता तो पहले..

पल्ली ने अपने पापा की बात सुनी और फिर शैलेश की और देखा और उसकी आँखों में देखते हुए बोली – मौसाजी मैं पापा की रंडी बेटी हूँ, जो अपने पापा के कड़क लुंड से रोज़ चुदती हूँ.

शैलेश ने जब ये सुना तो वो और उत्तेजित हो गया या इतना उत्तेजित जीवन में कभी नहीं हुआ था, वो पल्ली की बात का कोई जवाब नहीं दे सका पर अगले hi पल उसने देखा की पल्ली के चेहरे के भाव बदल रहे हैं और एक अह्ह्ह्ह उसके मुँह से निकली क्यूंकि राजन ने अपना लुंड बेटी की छूट में घुसा दिया था, राजन भी बेहद उत्तेजित थे क्यूंकि ऐसे किसी के सामने बेटी को छोड़ना एक अलग उत्तेजना दे रहा था, और उसी उत्तेजना में राजन काफी तेज़ धक्कों से अपनी बेटी की चुदाई कर रहे थे.






पल्ली- अह्ह्ह्हह पापाहहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह मम्मी..

राजन- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह क्याह कासी हुई छूट है बिटियाः तेरी जितना छोडूं मन नही भरता,

पल्ली- अह्ह्ह्ह पापा छोड़ते rahoooooooooo अह्ह्ह्हह

ममता तिरछी नज़रों से बेटी और पति की चुदाई देखते हुए शैलेश के लुंड को चाट रही थी हालाँकि अब उसकी छूट भी लुंड मांग रही थी पर शैलेश की नज़रें उसकी बेटी और पति पति पर लगी हुई थी, ममता ने शैलेश के लुंड को मुँह से निकला और कड़ी हो गयी और अपनी साड़ी उतरने लगी अब ममता के बादब पर नीचे पेटीकोट और ऊपर खुला हुआ ब्लाउज था जिसे उसने ऐसे hi रहने दिया, और फिर शैलेश को लुंड से पकड़ा और बिस्तर की और ले गयी, शैलेश बिलकुल पतंग की तरह लुंड की डोर से बंधे ममता के साथ चल दिए बिस्तर पर पहुँच ममता ने शैलेश को बिस्तर पर लिटा दिया और ममता खुद अपना पेटीकोट उठा कर उसे कमर तक चढ़ा शैलेश के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी जिससे शैलेश का ध्यान राजन पल्ली से हैट कर अपने सामने बैठी गडरौ औरत पर गया ममता ने आगे झुक कर अपनी चूचियां उनके चेहरे के सामने की तो शैलेश ने बड़ी बड़ी चूचियों को मुँह में भर लिया जितना भर सकते थे वहीं शैलेश के हाथ ममता के बदन पर फिरने लगे और जल्दी hi वो उसकी छूछीयो को बरी बरी से चूसते हुए अपने हाथों से ममता के बड़े बड़े चूतड़ों को मसलने लगे, उन मांसल पटेलों को मसलने में शैलेश को एक अलग hi मज़ा मिल रहा था.






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ममता- अह्ह्ह ऐसे होई भैयाहहह अह्ह्ह्ह चूसो. मेरी छुचियों को खा जाओ इन्हे.

शैलेश- ुहम्म्म्म्मा ुहममम.

दूसरी और बाप बेटी की चुदाई अब भी जबरदस्त चल रही थी पूरे कमरे में थप थप थप और पल्ली की सिसकियों की आवाज़ गूँज रही थी, राजन तेज़ी से छोड़ते हुए उसकी छूछीयो को मसल रहे थे.

लेकिन अब ममता से भी सहना मुश्किल होता जा रहा था इसलिए कुछ देर की छूछीयो की चूसै और चूतड़ों की मसले के बाद वो सीढ़ी हुई और हाथ पीछे कर शैलेश के लुंड को पकड़ा और सीधा कर अपनी छूट के द्वार पर उसे लगा कर नीचे सरकती हुई बैठ गई और शैलेश का लुंड उसकी छूट में समां गया जहाँ जिसके बाद ममता ने उछालना शुरू कर दिया,






अब दोनों माँ बेटी एक साथ चुद रही थी, शैलेश का लुंड भी जब माल्टा की गरम छूट में गया तो वो भी मज़े से भर गए और उसी पल उन्होंने सोचा, की ये मुझे अपना मन्त्र हैं मुझपर भरोसा करते हैं और मुझे सुख देने के लिए ये सब कर रहे हैं और मैं कहाँ सोच में डूबा हूँ, मुझे भी खुलकर इनकी तरह बिना सही गलत के बारे में सोचे बस इन पालो का आनंद लेना चाहिए और यदि ये गलत है तो इतना ाचा क्यों लग रहा है और इतना ाचा लग रहा है तो गलत हो भी तो घंटा फ़र्क़ नहीं पड़ता, बस इसी मंथन के बाद तो जैसे शैलेश में नया जोश आ गया उन्होंने ममता की कमर को थमा और नीचे से धक्का लगाकर कास के उसे छोड़ने लगे वहीं ममता भी खुश हुई की अब उसे सारा काम नहीं करना पड़ेगा और आएगी झुक कर शैलेश के होंठो को चूसते हुए अपनी चुदाई का आनंद लेने लगी…

ममता- आह्ह्ह्ह शैलेश भैया ऐसी होई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़ूऊऊओह्ह्ह्ह.

शैलेश – अह्हह्ह्ह्ह क्या औरत हो तुम भाभी आह्ह्ह्हह पति और बेटी के सामने चुद रही हो..

ममता- भैयाहहह छूट रिश्ते नहीं बस लुंड देखटीईई है.

शैलेश – वो तो देख hi रहा हूँ तुम्हारी बेटी को अपने बाप से चुड़ते हुए.

पल्ली- अह्ह्ह्हह मौसा बेटी की छूट पर पहला हक़ बाप का बनता है, अह्ह्ह्हह पापाहहहह वही हक़ ले रहे हैं..

राजन- सही कहा बिटिया वैसे hi बाप का लुंड बेटी का सिंघासन होता है जिसे वो अपनी छूट में लेकर बैठती है..

पल्ली- पापा मुझे तो लगा था तुम्हारर लुंड घोडा है जिस पर बैठ कर मैं सवारी करती हूँ,

राजन- अह्ह्ह बिटिया अब तू घोड़ी बन तेरे गोल मटोल चूतड़ों के बीच में लुंड घुसाने का अलग hi मज़ा है..

ये कहते हुए राजन ने पल्ली की छूट से लुंड निकला तो पल्ली भी पापा की बात मान कर जल्दी से बिस्तर के किनारे घोड़ी बन गयी और राजन ने फिर से अपनी बेटी की कासी हुई छूट में लुंड घुसा दिया और छोड़ने लगा,

शैलेश – क्या बेटी पैदा की है भाभी तुमने,

शैलेश ने ममता की छूट में नीचे से धक्के लगते हुए कहा.

ममता- माँ पर गयी है बिलकुल.

राजन- मुझे तो लगता है ये तुमसे भी आगे निकलेगी मेरी जान.

शैलेश- अह्ह्ह बिलकुल निकलेगी पर भाठी अब तुम भी ज़रा घोड़ी बन जाओ माँ बेटी एक साथ घोड़ी बन कर चुदती हुई मस्त लगोगी.

ममता को ये बात मैंने में कोई परेशानी नहीं थी वो तुरंत शैलेश के लुंड से उठी और बदन पर जो एक आध कपडे लटके हुए थे उन्हें पूरी तरह उतर कर नंगी हो अपनी बेटी के बगल में घोड़ी बन गयी, उसके तुराजत पीछे शैलेश ने जगह ली और फिर पीछे से ममता की अनुभवी छूट में लुंड घुसा कर छोड़ने लगे दोनों माँ बेटी अगल वागल में चुद रही थी, और शैलेश के लिए ये नज़ारा बिलकुल सपने से काम नहीं था, बाप बेटी को छोड़ रहा था और उनके बगल में वो माँ को..








ममता- अह्ह्ह भैया ऐसी हीईई अह्ह्ह्हह्हह,

ममता अपने चूतड़ों को पीछे धकेलते हुय्र बोल कर शैलेश को उकसा रही थी वहीं पल्ली क्र मुँह से गर धक्के के साथ आह्ह्ह्हैं निकल रही थी… दोनों माँ बेटी एक दुसरे के करवेब hi थी और उसी का फायदा उठाते हुए ममता ने अपने चेहरा आगे किया और बेटी को चूमा तो पल्ली कहाँ पीछे रहने वाली थी और अगले hi पल दोनों माँ बेटी बड़े कामुक तरीके से एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी, और जाइए hi इस दृश्य पर पारी उनका तो सर hi घूम गया दो औरतों को ऐसे उन्होंने सिर्फ ब्लू फिल्मो में देखा था और वो भी इतना उत्तेजित कर देता था यहाँ तो दोनों माँ बेटी थी और इतनी कामुकता से डीके दुसरे के होंठो को चूस रही थी और उस्क्स नतीजा ये हुआ की शैलेश खुद को रोक नहीं पाए और और फिर ममता की गरम छूट में उनके लुंड ने पानी छोड़ दिया, झड़ने तक ममता रुकी रही और फिर जैसे hi शैलेश का झड़ना ख़त्म हुआ शैलेश ममता के पीछे से हटकर बिस्तर के सिरहाने से टिक कर बैठ गए,


इधर राजन के हाल चाल से भी गए लग रहा था की वो भी जल्दी झड़ने वाले हैं पर झाड़मे से पहले hi उन्होंने अपना लुंड बिटिया पल्ली की छूट से निकला और बिस्तर के बगल में hi हैट कर खड़े हो गए वहीं पल्ली और ममता उन्हें ऐसे खड़े देख बिना किसी निर्देश के आ कर उनके सामने घुटनो पर बैठ गयी और फिर पहले पल्ली ने मुँह आगे कर अपने पापा के लुंड को मुँह में भर लिया तो ममता अपने पति की गोलियों को चाटने लगी, दोनों माँ बेटी मिलकर पापा की सेवा करने लगी,





शैलेश बिस्तर से ठीके हुए इस नज़ारे को देख फिर से उत्तेजित होने लगे, उन्होंने आज तक जैसा सोचा भी नहीं था वो सब देखने को आज की रात उन्हें मिल रहा था, दोनों माँ बेटी मिलकर एक साथ लुंड को चूसने चाटने लगी कभी कभी तो दोनों की hi जीभ एक साथ टोपे पर चलती और फिर आपस में भी टकराती ये देख दूर बैठे शैलेश तक सिसक ोाड़ते तो सोचिये राजन का क्या हाल होगा, राजन का हाल अगले hi पल पता चल गया जब वो गहरी सांस लेते हुए गुर्राते हुए झड़ने लगे, उस वक़्त उनका लुंड ममता के मुँह में था जिस में उन्होंने दो धार छोड़ी इसके बाद ममता के मुँह से निकल पल्ली के चेहरे पर वो पिचकारियां मरने लगे और फिर पल्ली के चेहरे को रंगने के बाद बचा हुआ रास अपनी पत्नी के चेहरे पर छोड़ दिया इसके बाद पल्ली ने एक बार फ़ज्र पापा के लुंड को चूस कर साफ़ किआ और राजन भी पीछे हो बिस्तर पर बैठ गए, पर शैलेश की नज़र तो माँ बेटी के चेहरे से हैट नहीं रही थी जो की रास में चेहरा रंगवा कर और भी कामुक लग रही थी, खैर इसके बाद जो शैलेश ने देखा वो और भी कामुक था, ममता अपना चेहरा आगे बढ़ा कर अपनी बेटी के चेहरे को जीभ से चाटने लगी और उसके चेहरे पर लगे लुंड रास को साफ़ करने लगी, जब पल्ली का चेहरा साफ़ हो गया तो उसने अपनी मम्मी को भी यही सेवा दी, और फिर दोनों माँ बेटी ने राजन के लुंड रास में सनी हुई एक दुसरे की जीभ और होंठो को ऐसे चूसा न जाने कितनी hi भूखी हो दोनों, और फिर दोनों अलग होकर बैठ गयी.

ये देख शैलेश की हालत ख़राब थी उन्होंने कभी ऐसा कुछ नहीं देखा था जो लुंड कुछ देर पहले hi झाड़ा था वो बिलकुल कड़क हो कर खड़ा था,

शैलेश को यूँ देख राजन मुस्कुराते हुए बोले- क्यों शैलेश बाबू कैसी रही?

शैलेश- ुहम्म हाँ क्या बोलूं भैया, इससे पहले न कुछ ऐसा देखा था और न सुना था..

राजन- यही तो मज़ा है परिवार में मिलकर रहने का,

शैलेश- ऐसा मज़ा आज तक नहीं मिला,

राजन- ये तो बस अभी शुरुआत है शैलेश बाबू, अभी बहुत कुछ देखना बाकि है.

शैलेश – अब तो रहा नहीं जा रहा की इससे भी बढ़िया कुछ हो सकता है.

राजन- अगर मिल बाँट कर मज़े करें तो बहुत कुछ ाचा होता है शैलेश बाबू, पर अब तुम बताओ तुम्हारी क्या राइ है इस बारे में क्या तुम और भी देखना चाहते हो पूरी तरह हम में शामिल होना चाहते हो.

शैलेश – बिलकुल भैया ये भी कोई पूछने की बात है..

राजन- देख लो एक हार शामिल हुए तो बापिस साधारण जीवन चाहकर भी नहीं जी पाओगे.

पल्ली और ममता बिस्तर के एक और बैठ कर दोनों की बातें सुन रही थी पल्ली अपना सर अपनी मम्मी की गॉड में रख कर लेती हुई थी.

शैलेश- अब तक साधारण जीवन hi जिया और ऊब चूका हूँ तो अब यही सही है.

राजन- बहुत बढ़िया हमें भी ख़ुशी होगी की तुम हमारे साथ हो शैलेश बाबू पर तुम जानते हो की हर जगह कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है तो क्या तुम खोने के लिए तैयार हो.

शैलेश – मैं कुछ समझा नहीं भैया.

राजन- मतलब की तुम क्या बलिदान कर सकते हो ये सब पाने के लिए.

शैलेश अब भी समझ से दूर दिखे तो ममता बीच में बोल पड़ी – ओफ्फो पल्ली के पापा तुम भी मास्टर की तरह बात कर रहे हो, भैया सीधे शब्दों में कहें तो हमसे जुड़ने के लिए तुम्हे हमारे जैसा बनना पड़ेगा और शालू को भी हमारे बीच शामिल करना होगा,


शैलेश ये सुन चुप हो गए और कुछ सोचने लगे तो राजन बोले- देखो शैलेश बाबू कोई दबाव नहीं है तुम पर चाहो तो हाँ कर सकते हो नहीं तो ना, पर ना का मतलब होगा बस ये यही पर रुक जय्र्गे.

शैलेश ने एक गहरी सांस ली और बोले- भाईसाहब ये तो मई भी समझता हूँ अगर मैं ऐसा कुछ करूँगा तो आज नहीं तो कल शालू को सब पता चलेगा hi, और न भी चले तो मैं बहार मज़े करूँ और वो नहीं ये भी गलत होगा तो मैं तो वैसे भी शालू को अपनर साथ करने के पक्ष में हूँ, यहाँ तक की अभी झड़ने के बाद मैं यही सोच रहा था की कैसा होता अगर शालू भी यहाँ होती तो.

पल्ली- तो क्या पापा मौसी को छोड़ रहे होते मस्त होकर.

पल्ली की बात पर सब हंस पड़े..

शैलेश – पर मुझे समझ नहीं आ रहा की शालू को मनाऊंगा कैसे?

ममता- जैसा तुमने बोलै न भैया की आज नहीं कल उसे पता चल जायेगा वैसे hi आज नहीं कल वो मान जाएगी बस हमें कोशिश करते रहना है.

शैलेश – बिलकुल मेरी तरफ से मैं हर कोशिश करूँगा.

राजन- चलो अब खूब हो गयी बातें लुंड भी खड़े हो चुके हैं आगे का प्रोग्राम शुरू करते हैं.

शैलेश – बिलकुल भैया अब मैं भी ज़रा पल्ली बिटिया को चख लूँ.

ये कह शैलेश ने पल्ली को अपनी और खींच लिए जिसपर उनकी कबसे नज़र थी, और इसी तरह चुदाई का अगला दौर चला जिसने शैलेश ने मन भरके पल्ली को छोड़ा साथ hi राजन के साथ मिलकर ममता की दोहरी चुदाई भी की, और ऐसे hi चुदाई की थकावट में सब सो गए…


दूसरी और नीलेश घर अकेले पहुंचे तो सभ्य शालू ने शैलेश के बारे में पुछा तो नीलेश ने बता दिया इसके बाद पूरे परिवार ने मिल कर खाना खाया, और फिर सभ्य शालू रसोई काम निपटने लगी वहीं अनुज कर्मा में कुछ इशारे हुए और वो भी आंगन से अपने कमरे की और चले गए,

इधर रसोई में दोनों बहनें काम निपटने में लगी थी,

सभ्य – शालू देख तो दूध गरम हो गया हो तो निकल कर सबको दे दे.

शालू- हाँ जीजी हो गया है दे आती हूँ,

इसके बाद शालू ने सबके लिए दूध दिए और फिर पहले कर्मा अनुज को दिया फिर अपने जीजाजी को देने गयी जो की कपडे बदल कर बाथरूम से निकले hi थे,

शालू- जीजाजी दूध पि लो.

नीलेश ने शालू को देखा तो उन्हें दोपहर का मंज़र नज़र आ गया जब शालू को उन्होंने नंगा देखा था हाय क्या मस्त बदन है उनकी शैली का क्या बड़ी छुछियां, यही सोचते हुए उनकी नज़र अपने आप ब्लाउज में बंद शालू की बड़ी बड़ी छूछीयों पर चली गयी.

शालू ने कोई जवाब न मिलता देख जीजाजी को देखा तो पाया वो क्या देख रहे हैं, और उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी,

शालू – जीजाजी बस देखते hi रहोगे या पियोगे भी.

नीलेश शालू की दो आरती बात समझे और उसी में जवाब दिया- मैं तो कब से पीने के इंतज़ार में हूँ तुम पीला hi नहीं रही.

शालू- कह तो रही हूँ पि लो न.

नीलेश एक कदम आगे उसकी और बढे और बोले- लाओ पिलाओ..

शालू ने झट से दूध भरा गिलास उनके सामने कर दिया.

नीलेश – ये दूध पीना पड़ेगा?

शालू- क्यों जीजाजी तुम्हे कौनसा पीना था,

नीलेश – अब छोडो इसी को पि लेंगे

शालू- ठीक है जीजाजी पि लो न.

नीलेश अब भी शालू की ब्लाउज में झांकती हुई छूछीयो पर नज़र गाड़ते हुए बोले- लाओ.

शालू- क्या देखे जा रहे हो जीजाजी दिन में देखा तो था अचे से.

शालू की बात सुन नीलेश थोड़े हैरान हुए पर फिर सोचा जब ये खुद से बात कर रही है तो मैं क्यों पीछे हेतु. और नीलेश शालू के हाथ से दूध का गिलास लेकर उसे बिस्तर के बगल में रखे स्टूल पर रखते हुए बोले.

नीलेश – यही तो जबसे देखा है आँखों के सामने बस ये hi हैं. मन करता है बस देखता रहूं.

शालू- अब देख तो लिए जीजाजी दिन में, बार बार मौका नहीं मिलता.

नीलेश – ऐसा तो नहीं है अगर मन में इच्छा हो देखने और दिखने की तो मौका कभी भी बन सकता है

शालू- तो फिर इंतज़ार करो अगले मौके का.

ये कह मुस्कुराते हुए शालू मुद कर जाने लगी पर तभी नीलेश ने आगे बाद फुर्ती में उसको पीछे से पकड़ लिए.






शालू- ारी जीजाजी ये क्या कर रहे हो छोडो.

नीलेश- दूसरा मौका बना रहा हूँ साली जी.

ये कहते हुए नीलेश अपने हाथों को आगे शालू के चिकने गोर पेट पर चलने लगे.. और इसी खींचा तानी में शालू की साड़ी का पल्लू भी नीचे सरक पड़ा..

शालू- अरे छोडो न जीजाजी, कोई देख लेगा तो गड़बड़ हो जाएगी, जीजी आने वाली हैं.

शालू ने अपने जीजाजी की बाहों में मचलते हुए कहा हालाँकि वो भी उत्तेजित हो रही थी साथ hi अपने जीजाजी के स्पर्श का आनंद ले रही थी पर ऊपर से नाटक कर रही थी, उसे अपने चूतड़ों पर जीजाजी का खड़ा लुंड अपने चूतड़ों पर चुभता महसूस हो रहा था जो उसकी उत्तेजना और बढ़ा रहा था,

इधर नीलेश भी उत्तेजित हो चुके थे उन्होंने शालू के पेट को मसलते हुए उसकी गर्दन और कंधे को चूमना शुरू किया तो शालू सिसकियाँ लेने लगी.

शालू- अह्ह्ह्ह जीजाजी ुहम्म्म्म जीजी आ जाएँगी..

शालू मुँह से कुवह भी बोल रही थी ओर उसका विरोध बिलकुल भी नहीं था जो नीलेश के लिए अछि खबर थी, हर पल के साथ नीलेश की उत्तेजना और जोश बढ़ता जा रहा था और उसी में आकर उन्होंने आगे की प्रक्रिया शुरू की और पेट को मसलते हुए अपने हाथ ऊपर शालू की छूछीयो पर ले आये और फिर ब्लाउज के ऊपर से hi अपनी शैली की चूचियों को मसलने लगे.

शालू ने तो अपना बदन अपने जीजाजी के हवाले छोड़ दिया था और उनसे टिक कर अपनी चूचियां दबवा रही थी.

शालू- ओह्ह्ह जीजाजी ाराअहंमम से आह्ह्ह्हह

नीलेश – बड़ी मस्त चूचियां हैं टेरिइइइइ शालू अह्हह्ह्ह्ह इतनी बड़ी बड़ी अपनीइ जीजी से भी बड़ी..

शालू- ुहम्म्म्म हाँ क्या करूँ ये जीजी से भी आगे निकल गयी.

नीलेश – निकल गयी या शैलेश बाबू ने म्हणत की है इनपर..

शालू- हाँ जैसे तुमने जीजी पर की है जीजाजी वैस्व hi.

नीलेश – अब तुम पर भी कर लेता हूँ.

ये कह नीलेश ने शालू को पकड़ कर अपनी और घुमा लिए और इससे पहले शालू कुछ समझती नीलेश के होंठ उसके होंठों पर थे और नीलेश पागलो की तरह शालू के होंठो को चूसने लगे, शालू भी शुरुवाती हैरानी के बाद पूरा साथ देने लगी वहीं नीलेश के हाथ भी होंठों की तरह लगातार चल रहे थे पहले पीठ पर फिर पेट पर आये और फिर ऊपर ब्लाउज पर और नीलेश शालू के होंठों को चूसते हुए उसके ब्लाउज के हुक भी खोल्नर लगे और धीरे धीरे कामयाब भी हो गए अगले hi पल शालू का ब्लाउज खुल चूका था, जिसके खुलते hi नीलेश ने उसे शालू की बाहों से निकल फेंका और फिर बिना उसके साथ चुम्बन को तोड़े उसे बिस्तर पर बिठा लिया और तब जाकर उनके होंठ अलग हुए..

शालू- अब छोडो जीजा अभी जीजी आती hi होंगी,

इधर नीलेश अलग हुए और अपनी बनियान उतारते हुए शालू को जवाब देते हुए बोले

नीलेश – तो क्या हुआ आने दे. वो क्या करेगी.

ये कह नीलेश बापिस बिस्तर पर बैठ शालू के बादब पर हाथ फिरने लगे

शालू- अरे उनकी बहन को नंगा किये दे रहे हो वो कुछ नहीं करेंगी?

शालू अपने जीजा की बालों वाली नंगी छाती को देखते हुए बोली

नीलेश- साली तो आधी घरवाली होती hi है तो मजन तो अपना हक़ ले रहा हूँ.

ये कह कर नीलेश शालू के सीने को चूमते हुए नीचे उसके पेट को चूमने लगे.






Shalu-ahhh जीजा मत करो गुदगुदी होती है.

ये कह शालू दूसरी और घूम गयी तो नीलेश ने इसका भी फायदा उठाया और उसकी साड़ी को पकड़ कर उतरने लगे और जल्दी hi सरीबीस्टार के नीचे थे और नीलेश के सामने शालू ब्रा और पेटीकोट में थी. ब्रा में उसकी बड़ी चूचियां संभाले नहीं संभल रही थी, नीलेश ने फिर से पीछे से शालू को बाहों में भर लिया और उसके पेट को सहलाते हुए नीलेश के हाथ दोबारा शालू के सीने पर आ गैर और वो बता के ऊपर से hi शालू की बड़ी हदी चूचियों को मसलने लगे साथ hi शालू की गर्दन और पीठ पर अब भी चूमा छाती कर रहे थे शालू तो उत्तेजना से मस्त हुई जा रही थी.

शालू- अह्ह्ह जीजाजी अह्ह्ह्हह ुहम्म्म्म नाहीई अह्ह्ह्हह.

नीलेश भी अपनी साली के गदराये बदन को अचे से रगड़ रहे थे, और शालू की पीठ को चूमते हुए नीलेश ने हाथ की सफाई दुखते हुए कब शालू के पेटीकोट की गांठ को खोल दिया शालू जान भी नहीं पाई उसे तो तब पता चला जब नीलेश ने उसे पलटा तो पेटीकोट अपने आप उसकी कमर से नीचे सरक गया, और शालू सिर्फ ब्रा और पंतय में रह गयी.

शालू- अरे जीजा ये तुमने कब खोल दिया बड़े वो हो तुम.

नीलेश- वो क्या साली साहिबा..

ये कहते हुए नीलेश ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके पैरों के पास बैठ गए

शालू- बड़े चालू हो,

नीलेश- कैसे?

शालू- ुहम्म्म्म जीजाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

नीलेश अब शालू के पैरों को सहलातेहुए बीच बीच में चूमते हुय्र ऊपर बढ़ने लगे तो शालू का ध्यान अब बातों पर काम hi लग रहा था जैसे हैसे उसके जीजा उसके पैरों पर ऊपर हद रहे थे शालू के होश खोते जा रहे थे और अभी नीलेश शालू की गदराई केले के तने जैसी जांघों तक पहुँच गए थे और उन्हें हल्का हल्का चूमते हुए ऊपर बढ़ रहे थे. कुछ hi पालो में नीलेश जांघों के बिलकुल ऊपरी हिस्से और पंतय के पास पहुँच चुके थे और हर जगह चूं कर उस पर अपनी मोहर लगा रहे थे वहीं शालू बिस्तर पर पड़ी तड़प रही थी,






नीलेश के सामने अब उनकी साली की पंतय में क़ैद छूट थी और पंतय के गीलेपन देहि अंदाज़ा हो रहा था की शालू कितनी उत्तेजित है नीलेश ने अपने हाथ आगे बढ़ाये और उन्हें शालू की कमर पर लेजाकर उँगलियों को पंतय की लास्टिक में फंसाया और फिर नीचे सरकने लगे जिसमृ शालू ने अपने भरी चूतड़ों को उठाकर उनका साथ दिया जैसे hi शालू की पंतय उसके चूतड़ों के नीचे आई नीलेश ने उसे पैरों से भी बहार निकल दिया वहीं शालू ने खुद से अपनी ब्रा को निकल दिया और पूरी नंगी हो गयी.

शालू के नंगे बदन को एक hi दिन में दूसरी बार देख नीलेश तो फूले नहीं समां रहे थे,





शालू की गीली मखमली छूट देख नीलेश के मुँह में पानी आने लगा तो नीलेश ने जल्दी hi अपने मुँह के पानी को शालू की छूट के ऊपर छिड़कते हुए अपना मुँह शालू की छूट पर लगा दिया,

शालू- अह्ह्ह्हह जीज्जाआँह्ह्हह्ह

शालू अपना मुँह ढकते हुए सिसकी ताकि आवाज़ बहार न जायर पर नीलेश को तो जैसे कोई फ़र्क़ hi नहीं था उन्होंने शालू की छूट को चेतना शुरू किआ और ऐसे चाट रहे थे जैसे ये दुनिया का आखिरी खाना है.

कभी शालू की छूट के डेन को चूसते तो कभी उसकी छूट पर ऊपर सर नीचे जीभ फिरते तो कभी जीभ छूट में अंदर घुसा कर उसे लुंड को तरह छोड़ते..

शालू अपने जीजा की जीभ के हमलो के आगे ढेर हो तड़प रही थी बड़ी मुश्किल से खुद की चीखों को रोक रही थी, उसकर हाथ उसकी बड़ी बड़ी छुछियां मसल रहे थे, और उसे देख कर hi लग रहा था की वो अपनर चरम से दूर नहीं है और हुआ भी कुछ ऐसा hi जल्दी hi शालू का बदन थरथराने लगा तो नीलेश ने उसे कास के अपने हाथों से जकड लिए वहीं शालू की कमर नीचे से उठ उठ कर झटके खाने लगी वहीं शालू का हाथ नीलेश के सर पर था जो नीलेश के सर को अपनी छूट में घुसाने की कोशिश कर रहा था खैर शालू की छूट ने पानी छोड़ा तो नीलेश बड़े चौ से उसे चाट जातक गए.






जब शालू का झड़ना समाप्त हुआ तो उसकी पकड़ नीलेश के सर से ढीली हुई और नीलेश ने शालू की छूट से अपना चेहरा उठाया तो नीलेश का पूरा चेहरा शालू की छूट के रास में सना हुआ था नीलेश को यूँ देख शालू के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, इधर नीलेश ने अपने कच्चे का नाडा खोल उसे नीचे सरल जाने दिया.

शालू- अचे लग रहे हो जीजा. मुँह धो कर.

नीलेश- हम तो रोज़ इस पानी में मुँह धोने को तैयार हैं साली जी बस तुम कृपा करो.

नीलेश ने अपने लुंड को मुठियाते हुए कहा,

शालू- ाचा इतना ाचा लगा पानी.

नीलेश- इस पानी के इतने फायदे हैं क्या बताऊँ

ये कह नीलेश अपने चेहरे से छूट के पानी की उँगलियों पर पोंछ कर अपने लुंड पर लगा उसे चिकना करने लगे.

शालू अपने जीजा की हरकतें और बातो से झड़ने कस बाद भी उत्तेजित होती जा रही थी, वहीं नीलेश ने लुंड को पानी से चिकना करने के बाद अपनी कमर को आगे बढ़ाया और लुंड को पकड़ कर उससे शालू की छूट पर थपथपाया जिसके साथ शालू सिसक पड़ी- अह्ह्ह्हब जीजा ओह्ह्ह्ह कितना गरम है तुम्हारा.

नीलेश- तेरी मुनिया उससे भी ज़्यादा गरम है शालू आह्ह्ह्ह..

नीलेश ने अपने लुंड को शालू की छूट पर घिसते हुए कहा…

शालू- अह्ह्ह्ह जीजा अब सहन नहीं हो रहा दाल दो नाहहह.

नीलेश- क्या दाल दें ज़रा बता तो सहीई.

शालू – अपना कड़क लोढ़ा दाल दो जीजा अपनी साली की गरम छूट में और फिर छूट की कुटाई करो.

शालू इतनी उत्तेजित थी की उसे अब कुछ शर्म आराम नहीं लग रही थी वही नीलवश ने सोचा नहीं था शालू इतनी जल्दी खुल के बोलेगी पर उसके मुँह से ये सुन. नीलेश का लोढ़ा फूलने लगा, अब उनसे भी सहना मुश्किल हो गया तो उन्होंने अपने लुंड को शालू की छूट के द्वार पर लगाया और धक्का लगते की तभी एक आवाज़ से दोनों चौंक गए- रुकोऊ.

नीलेश और शालू दोनों ने hi आवाज़ की और देखा तो सामने दरवाज़े के पास कड़ी सभ्य की थी, जो की दरवाज़ा बंद कर कबसे वहां कड़ी थी दोनों को hi नहीं पता था.






शैलेश को थोड़ी सी मन में चिंता था न जाने उनकी पत्नी कैसी प्रतिक्रिया करेगी पर शालू को कोई दर नहीं था

जब दोनों का ध्यान सभ्य पर गया तो वो आगे आई बिस्तर के पास और शालू से बोली- क्यों ऋ तुझे दूध पिलाने क्या भेजा तू अपना hi पानी पिलाने लगी, और टुंगरा मन अपनी बहन छोड़ कर नहीं भरा जो अब मेरी छोड़ना चाहते हो?


सभ्य की इस प्रतिक्रिया को देख नीलेश के तो होश उड़ गए वहीं थोड़ी सी असमंजस में शालू भी थी.

नीलेश – वो सुनो ऐसा कुछ नहीं. हम वो कुछ नहीं…

सभ्य – क्या ऐसा कुछ नहीं है, अब क्यों हड़बड़ा रहे हो.

नीलेश- ाचा सुनो तो काम से काम.

सभ्य- क्या सुनूं? तुम अपनी रंडी बहन को छोड़ते हो मैंने बर्दाश्त किआ ख़ुशी ख़ुशी, ममता को छोड़ते हो मैंने बर्दाश्त किआ ख़ुशी ख़ुशी. पल्ली को, प्रेमा को सबको बर्दाश्त किआ

नीलेश का चेहरा तो ये सुन कर उड़ गया की इसे ममता और शशि के बारे में कैसे पता चला नीलेश का तो दिल ढोल की तरह बजने लगा उन्हें समझ नहीं आ रहा घ क्या बोलेन.

नीलेश- हम वो ऐसा कुछ नहीं है तुम शांत तो हो जाओ.

सभ्य- शांत हो जॉन कैसे शांत हो जॉन? इतना सब कुछ बर्दाश्त किआ मैंने और मैं ये भी बर्दाश्त कर लेती ओर तुम मेरी बहन को छोड़ने जा रहे थे वो भी सूखे लुंड से उसे भी अपनी बहन की तरह बड़े भोसड़े वाली समझा है क्या?

ये कह सभ्य तुरंत नीचे बैठ गयी और नीलेश को और शालू को हैरान करते हुए अपने पति के लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी और फिर मुँह से बहार निकल जीभ से लुंड को चाट कर गीला कार्नर लगी.

नीलेश तो बिना पलके झपके बस जो हो रहा था उसे देखे जा रहे थे पर शालू के चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी, इतने में hi सभ्य ने लुंड को चाट के गीला कर दिया और फिर उसे पकड़ कर बापिस शालू की छूट पर लगा दिया और मुस्कुराते हुए नीलेश को देखते हुए बोली छोड़ो अपनी साली को ..

नीलेश को जैसे फिर कुछ समझ आया और मुस्कुराते हुए बोले- साली कुटिया…

इसके बाद सभ्य ने आगे बढ़ने का इशारा दिया तो नीलेश ने शालू की आँखों में देखा और फिर एक करारा धक्का लगा कर अपना लुंड शालू की छूट में अंदर सरका दिया..

शालू- अह्ह्ह्ह जीजा जी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आखिर घुसा hi दिया न अपना मूसल अह्ह्ह.

नीलेश- हाँ साली साहिबा अब बानी तुम हमारी आधी घरवाली.

सभ्य – अब छोड़ोगे भी या बस बातें hi करोगे.

सभ्य अपने पति के लुंड को अपनी बहन की छूट में जाते हुए ध्यान से देखते हुए बोली.

नीलेश- तुम देखो न मैं तुम्हारी बहन छोड़ रहा हूँ.

नीलेश ने हलके हलके धक्को से शालू को छोड़ना शुरू कर दिया वहीं सभ्य अओने पति और बहन की चुदाई बिस्तर के एक कोने पर बैठ देखने लगी साथ hi कपड़ो के ऊपर से hi चूचियों को मसलते हुए देखने लगी.

वहीं नीलेश को आज एक अलग hi आनंद मिल रहा था हैट शादीशुदा मर्द की कही उनकाही इच्छा होती है अपनी साली को छोड़ना और जब साली शालू जैसी हो तो इच्छा कबसव होगी कितनी होगी कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है वहीं बगल में खुद की बीवी बैठ कर तुम्हारा उत्साह बढ़ा रही हो इससे ाचो किस्मत किसकी हो सकती है..

शालू- अह्ह्ह्ह जीजा अह्ह्ह्ह क्या मज़ेदार लुंड है तुम्हारा,

नीलेश- तेरी छूट ब्बि मस्त है शालू आअह्ह्ह…

सभ्य – और तेज़ छोड़ो इस रैंड को कोई तरस मत खाना साडी अकड़ निकालो इसकी छूट की.

नीलेश और शालू दोनों hi सभ्य का ये रूप देख खुश भी यही और हैरान भी.. वहीं सभ्य ने अब तक अपनी साड़ी उतर कर फ़ेंक दी थी और अब ब्लाउज पेटीकोट में बैठी थी और ब्लाउज भी सामने से खुला था जिसमे उसकी दोनों चूचिया बहार थी.

वहीं नीलेश ने अपनी बीवी की बात मणि और शालू की तेज़ी से छोड़ने लगे..






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सभ्य- हैं ऐसे hi छोड़ो अह्ह्ह्ह.

सभ्य अपने बदन को मसलते हुए दोनों का उत्साह बढ़ा रही थी, छुछियां ब्रा से बहार थी और वो उनकी घुंडी को मसल मसल कर खुद को आनंद देने का प्रयत्न कर रही थी साथ hi अपनी बहन को अपने पति के लम्बे लुंड से चुड़ते हुए देख रही थी,

नीलेश बेहद उत्तेजित थे क्यूंकि बीवी की उपस्थिति में साली को छोड़ना हर किसी के नसीब में नहीं होता और उनकी उत्तेजना जिस तरह से वो शालू को छोड़ रहे थे उसमे देख रही थी.

शालू- अह्ह्ह्ह ुहम्म्म्म जीजी देखऊऊऊऊआअह्ह्ह कैसी जीजा तुम्हारी छोटीईई बहन को अपने लुंदड़ से छोड़ रहे हैं..

सभ्य – अह्हह्ह्ह्ह तेरी छूट की खुजली मिटा रहे हैं बन्नो आखिर तू एकलौती साली है तेरी छूट का ख्याल जीजा का लुंड नहु रखेगा तो कौन रखेगा.

नीलेश दोनों बहनों की ऐसी बातें सुन और जोश में आते जा रहे थे

नीलेश- अह्हह्ह्ह्ह सही कह रही है तेरी जीजी शालू तेरी मस्त रसीली छूट का ध्यान तो रखना पड़ेगा न…

शालू- अहहहह अह्ह्ह्ह जैसे मेरी रंडी जीजी का रखते हो जीजाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

नीलेश- हाँ तेरी रैंड जीजी को भी ऐसे hi छोड़ता हूँ रंडी साली.

सभ्य के लिए अब और सहना मुश्किल होता जा रहा था इसलिए उसनर जल्दी से सरे कपडे उतरे और बिलकुल नंगी हो गयी और फिर सभ्य ने जो किआ वो देख नीलेश बिलकुल हैरान रह गए.

सभ्य पास आई और अपने पैस शालू के सर के दोनों तरफ रख उसके मुँह पर अपनी छूट रख कर बैठ गयी शालू ने भी तुरंत मुँह खोल कर अपनी जीजी की छूट का स्वागत किआ…

नीलेश तो ये देख हैरान रह गए की उनकी पत्नी अपनी बहन से छूट चटवा रही है.

सभ्य- बहुत आवाज़ करती है शालू चुड़ते हुए अब चुप रहेगी

ये कहकर मुस्कुराते हुए उसने अपने पति की आँखों में देखा.

नीलेश- ये सब कैसे ?

सभ्य- क्यों तुम और तुम्हारी बहन के hi राज़ हो सकते हैं मेरे और मेरी के नहीं?

सभ्य ने शालू के मुँह पर अपनी छूट घिसते हुए कहा,

नीलेश कुछ बोल नहीं पाए बस मुस्कुरा कर रह गए वो जानते थे आज उनकी बीवी उनपर हर मामले में भरी पद रही है पर अपनी पत्नी को साली से छूट चतवता देख साथ hi शालू को पहली बार छोड़ने की उत्तेजना ये सब नीलेश के लिए सहना मुश्किल हो गया और वो दांतो को मीस्ते हुए शालू की छूट में दनादन ढककर लगते हुए गुर्राते हुए झड़ने लगे और अपनी साली की छूट को अपने रास से भर दिया, झड़ने के बाद जैसे hi नीलेश ने शालू की छूट से लुंड निकला तो सभ्य ने आगे झुक कर उसे चाट कर साफ़ किआ और फिर अपना मुँह अपनी बहन की छूट पर लगा दिया और अपने पति के रास को उसकी छूट से चूसने लगी.


नीलेश पीछे हो सिरहाने से टिक कर दोनों बहनों को 69 की स्तिथि में देख हांफ रहे थे ऐसा नज़ारा देख उनका लुंड अब भी झड़ने के बाद भी बिलकुल अकड़ कर खड़ा था,





.कुछ देर और एक दुसरे की छूट चाटने के बाद दोनों बहनें अलग हुई और सभ्य मुस्कुराते हुए नीलेश को देखने लगी. वो जानती थी की नीलेश के मन में कई सवाल हैं और वो खुद भी चाहती थी की उसके और उसके पति के बीच कुछ ज़्यादा परदे न रहे तो दोनों बहनें नीलेश की एक एक तरफ चिपक कर लेट गयी.

फिर अपनी अपनी कहानी सुनाने का दौर शुरू हुआ नीलेश ने अब सब कुछ बता देना hi सही समझा और एक एक चीज़ अपनी पत्नी और शैली को बतादि, शशि उसके परिवार से लेकर प्रेमा, राजन का परिवार, नीलेश और कर्मा का खुलापन हालाँकि जिसमे काफी कुछ सभ्य और शालू पहले से जानती थी वहीं सभ्य ने भी सब कुछ बताया सिवाए अपनी और बच्चों की चुदाई को छुपकर वो नहीं जानती थी इसके लिए अभी नीलेश तैयार हैं या नहीं. खैर बातों का सिलसिला ख़त्म हुआ या यूँ कहें करना पड़ा क्यूंकि लुंड एयर छूट को रोकना मुश्किल पद रहा था और इस बार शालू ने इच्छा राखी की वो जीजाजी को जीजी की गांड मरते हुए देखना चाहती है, जिस पर सभ्य ने हामी तो भरी पर साथ hi शालू के लिए भी शर्त रख दी की उसके बाद शालू को भी अपने जीजाजी से गांड मारवणी पड़ेगी,

नीलेश की तो दोनों उंगलियां घी में और सर कढ़ाई में था वो क्या बोलते तो जल्दी hi सभ्य गांड उठाये घोड़ी बानी हुई थी और शालू अपनी जीजी की गांड चाट उसे मरवाने के लिए उपयुक्त रूप से गीला कर रही थी वही सभ्य के आगे नीलेश थे जिनका लुंड सभ्य चूस कर चाट कर अपनी गांड के लिए तैयार कर रही थी. खैर फिरर नीलेश ने जल्दी hi पत्नी के पीछे जगह ली और अपना लुंड पत्नी की कासी हुई गांड में घुसा दिया. जिसे घुसते हुय्र पास बैठी शालू ध्यान से देखते हुए अपनी छूट मसल रही थी…

नीलेश जल्दी hi अछि गति में पत्नी की गांड मार रहे थे और उनकी साली बगल में बैठ दोनों का उत्साह बढ़ाते हुए अपनी छूट सहला रही थी.






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चुदाई का सिलसिला यूँ hi चला सभ्य की गांड के बाद नीलेश ने ख़ुशी ख़ुशी अपनी साली की कासी हुई गांड भी मरी और शालू तो पहली बार अपने जीजा से गांड मरवाने के एहसास से बेहद उत्तेजित हो गयी और लगा की मज़े से पागल हो जाएगी इसकड बाद दोनों गदराई बहनें नीलेश से चिपक कर सो गए ये सोचते हुए की इस बदले हुए रिश्ते का उनकी ज़िन्दगी पर क्या असर पड़ने वाला है.

धन्यवाद्
 
वहीं माधुरी का अपनी संधानो के साथ हुई बातचीत के बाद आज मन तो था पर न जाने क्यों खुद से पति से कह नहीं प् रही थी और इंतज़ार कर रही थी पति के कुछ इशारे का पर चरण सिंह तो आराम से सो गए, वहीं बिमला और उसके पति का भी हाल था बेचारे समधी संधान के यहाँ थे बेटी की ससुराल मेज थे इसलिए कोई गलत न समझे इसलिए दोनों ने दूर रहना hi उचित समझा. खैर इस तरह रात बीती सरलपुर में. अब आगे…

अपडेट 183

सरलपुर

अगली सुबह सब जल्दी hi उठ गए शायद गाओं की हवा में hi कुछ होता है जो सुबह जल्दी hi आँख खुल जाती है, पूरे घर में चहल पहल थी और हो भी क्यों न तीन परिवार इकट्ठे हुए थे तो हंसी ठिठोली मज़ाक ये सब चल रहा था, बस एक ऐसा शख्स था जो की नहीं उठा था वो थी घर की राजकुमारी ख़ुशी.. रात में अपने भाई को अपना कुंवारा पैन सौंपने के बाद सुबह ख़ुशी को तबियत ठीक सी नहीं लग रही थी इसलिए रमन ने उसे सोना दिया था, खैर बहुएं नाश्ता बना रही थी वहीं घर के मर्द आंगन में बैठे हंसी ठिठोली कर रहे थे तो कुछ योजना बना रहे थे की आज क्या किया जाये. इसी बीच रिमझिम के मन में बार बार यही बात चल रही थी की रात रमन और ख़ुशी के बीच क्या हुआ होगा क्यों की अभी तक वो रमन से कुछ पूछ नहीं पाई थी और ख़ुशी अब भी सो रही थी.

खैर नाश्ता बना और सबको देने के साथ उसने रमन को अलग आने का इशारा किआ जिसके बाद रमन किसी बहाने से अलग आया तो रिमझिम ने उससे रात के बारे में पुछा जिसपर रमन ने उसके कान में फुसफुसाते हुय्र कहा- तुम्हारा पति भेनचोद बन है.

जिसे सुनते hi रिमझिम के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और उसने बोलै जैसे hi मौका मिलेगा वो पूरी बात जानना चाहेगी,

रमन- बिलकुल तुम्हारे कारन ये हुआ है तुम्हे तो सब बताना hi है,

खैर इसके बाद नाश्ता वगेरा हुआ सबके साथ, आज चंचल भी चहक रही थी एक तो अपने अम्मा बाबा के होने की वजह से ऊपर से रात को चेतन ने जो उसकी कास के चुदाई की थी उस वजह से हालाँकि उसके मन में एक ग्लानि थी की वो अपने ससुर के साथ हमबिस्तर हो चुकी है और उसकद पति बेचारे को खबर hi नहीं है, वहीं चरण सिंह मौका मिलते hi चंचल को इशारे कर रहे थे जिन्हे चंचल अनदेखा कर रही थी क्यूंकि वो नहीं चाहती थी की गलती से भी कुवह गलत हो, अपने माँ बाप के होते हुए तो बिलकुल नहीं, वहीं चरण सिंह इस बात से परेशां हो रहे थे की इतने अचे से छोड़ने के बाद भी चंचल अब न जाने क्यों ड्रामे कर रही है, वहीं चंचल को छोडंर के बाद चरण सिंह का दिमाग बिलकुल खुल गया था जो थोड़ा बहुत पछतावा और ग्लानि होने होती थी वो अब चुदाई की लालसा में बदल चुकी थी वो हर किसी को उसी नज़र से ताड़ रहे थे, अपनी छोटी बहु रिमझिम से लेकर उसकी बहन पूर्वी तक, अपनी भरी बदन वाली संधानो से लेकर अपनी बेटी तक, चरण सिंह का दिमाग चल रहा था वो जानते थे इससे ाचा मौका नहीं मिलने वाला और उन्हें जितना हो सके उतना मज़ा लूटना चाहिए.

खैर इसी तरह थोड़ा समय बीता तो सबने अपनी अपनी पसंद के अनुसार कार्यक्रम बना लिए थे और समूह भी वैसे hi बन चुके थे, एक अधेड़ उम्र का समूह था जिसमृ तीनो समधी थे, और चरण सिंह आज अपने दोनों समाधियों को अपने खेत और गाओं घूमने वाले थे तो जल्दी hi तीनो निकल गए घर से, दूसरा समूह बना तीनो संधानो का जिन्होंने गर्मी में बहार जाना ठीक नहीं समझा और अपनी दोस्ती को और गहरा करने के लिए तीनो ने साथ hi कोई खेल खेलने की सोची.

तीसरा और सबसे बड़ा समूह बना जवानो का क्यूंकि इसमें बाकि सब थे Raman-Rimjhim, Chetan-Chanchal, Pankaj-Poorvi और दोनों खनवारे ख़ुशी और विनीत और इन सब का प्रोग्राम था गाओं से कुछ 15 किलोमीटर दूर एक झरने में नहाने का. तो एक बड़ी गाड़ी में थोड़ा एडजस्ट कर सब गेट नाचते हुए निकल गए घर पर सिर्फ अब तीनो संधनें थी.

तीनो समधी घुमते घुमते आखिर चरण सिंह के अमरुद के बाघ में पहुँच चुके थे और वहीं बगल में तुबेल चल रहा था जिसके ठन्डे पानी को देख गर्मी की वजह से तीनो का hi मन नहाने को ललचा गया और फिर क्या तीनो hi अपने अपने कपडे उतर सिर्फ कच्चा पहन तुबेल की हौदी में घुस गए.

उदयवीर( चंचल के पिता)- अह्ह्ह तुबेल का ठंडा पानी अह्ह्ह शरीर में ताजगी ला देता है.

सूजन सिंह( रिमझिम के पिता)- सही बात है यार मन मस्त हो गया.

चरण सिंह- हाँ शहर में क्या फव्वारे से नहाते रहो ये है असली फव्वारा तो.

रिमझिम के पापा- अरे हम तो कहते hi हैं काहे शहर में पड़े हो गाओं के मज़े लो.

चंचल के पापा– और क्या बच्चो को रहने दो शहर तुम और संधान जी तो यही रह सकते हो भाई सब.

चरण सिंह- अरे सोचा तो हमने भी कई बार है ये पर बच्चो का मोह है न आने hi नहीं देता,

रिम के पापा- ये बात तो है बच्चो को छोड़े भी नहीं बनता.

चरण सिंह- वही तो पर एक चीज़ की बहुत ख़ुशी है मुझे की सब लोग मिलकर यहाँ आये, आप लोगो ने भी समय निकला उसके लिए दिल से धन्यवाद्.

चंचल के पापा- अरे भाईसाब तुम भी कहाँ बेकार में औपचारिकता दिखा रहे हो एक hi परिवार है हमारा.

रिम के पापा- और क्या और धन्यवाद् तो हमें कहना चाहिए की ऐसा पिरोगराम बनाया तुमने और हम सब बच्चो के साथ समय बिता प् रहे हैं.

चरण सिंह- हाँ ये तो है, सब कितने खुश हैं न, बच्चों की ख़ुशी तो देखते hi बनती है.

चंचल के पापा- और बच्चे खुश तो सब खुश.

रिम के पापा- अरे बच्चे तो हैं hi, पर तुम लोगो ने एक चीज़ पर ध्यान नहीं दिया की हमारी पत्नियां कितनी खुश हैं.

चरण सिंह- अरे हाँ भाई, ये तो बिलकुल सही कहा, और तो और उनकी आपस में कितनी बन रही है तीनो बचपन की सहेलियों सी बातें करती हैं.

चंचल के पापा- अरे बातें तो छोडो अब तक तो वो हमारी बुराइयां भी गिनने लगी होंगी एक दुसरे को. हाहाहा.

चरण सिंह- हाहाहा ये बात तो बिलकुल सही कही पत्नियां बात करें और पतियों की बुराई न करें ऐसे कैसे हो सकता है.

रिम के पापा- इसका मतलब है अब पत्नियों के साथ साथ हमारी संधनें भी अब हमारी बुरी आदतें जान गयी होंगी.

चंचल के पापा- एक एक चीज़ भाई साब.

चरण Singh-waise ाचा hi है औरतों में बन रही है पर अगर वो सहेलियां बन सकती हैं तो हम दोस्त क्यों नहीं बन सकते.

रिम के पापा- क्यों नहीं बन सकते बिलकुल बन सकते हैं.

चंचल के पापा- बुराई क्या है बनने में.

रिम के पापा- कोई बुराई नहीं है भाई और सही कहूं तो सबसे ज़्यादा दोस्त की कमी इसी उम्र में खलती है.

चरण सिंह- लाख रुपये की बात कही भाई साब, अब कहने को सब है बीवी बच्चे सब कुछ, पर कोई दोस्त नहीं, जिससे अपने मन की कह सको बिना ये सोचे की ये हमारे बारे में क्या सोचेगा, कोई ऐसे दोस्त जो तुम्हारी बातें समझ सकें.

चंचल के पापा- बिलकुल सही जिसके साथ अपनी पत्नियों की बुराई कर sako.hahahaha

रिम के पापा- हाहाहा और क्या, जिनके साथ हर तरह की बातें हो सकें वो hi होते हैं दोस्त.

चरण सिंह- तो मैं तुम दोनों के सामने अपनी दोस्ती का हाथ बढ़ता हूँ पर दोस्ती की एक शर्त होगी.

चंचल के पापा- कैसी शर्त?

चरण सिंह- यही की बाकी सब के लिए हम समधी या सम्बन्धी होंगे पर आपस में ये संधियों वाली औपचारिकता नहीं रहेगी.

रिम के पापा- हाँ ये तो मैं भी मंटा हूँ दोस्ती में औपचारिकता कैसी?

चंचल के पापा- मुझे तो दिक्कत hi औपचारिकता से होती है .

चरण सिंह- तो ठीक रहा दोस्ती पक्की फिर.

बाकि दोनों भी साथ में बोले- पक्कीए

और तीनो ने आगे बढ़ हाथ मिलकर ऊपर उठाते हुए बोलै.

इसके बाद बापिस हौदी में डीके तरफ टिक कर बैठ गए.

चंचल के पापा- अरे अब दोस्ती हो गयी है तो तो तुम दोनों को एक मज़ेदार बात बताता हूँ.

रिम के पापा- हाँ बताओ न.

चंचल के पापा- कल रात को मैं बिमला से अलग सोया यही सोच के की लड़की का ससुराल है गलत असर पड़ेगा.

इस बात पर तीनो ठहाका लगा कर हंसने लगे.

चरण सिंह- तभी तो अच्छा हुआ दोस्ती कर ली आज उदयवीर भैया, नहीं तो जबतक यहाँ रहते सूखे सूखे hi रहते. और चिंता मत करो हमारे बीच जो भी बातें हो, उनका असर परिवार या बच्चों पर नहीं पड़ेगा

रिम के पापा- हाँ भाई, इतनी भी औपचारिकता मत दिखाओ की बंद कमरे में भी पत्नी को न छुओ.

तीनो के ठहाके फिर से गूंजे..

चंचल के पापा- हाँ यार ये बात बिमला को समझनी चाहिए किसी को.

चरण सिंह- फिर क्या अपने हाथ को कष्ट पहुँचाया होगा.

चंचल के पापा- नहीं यार बस ऐसे hi दबा के सो गए. हेहेहे.

रिम के पापा- भाई हमसे तो इतनी औपचारिकता नहीं दिखाई जाती पर रात क्या हुआ रिमझिम अपनी मम्मी के साथ सोइ थी तो हमें इसलिए सूखा रहना पड़ा .

चरण सिंह- वैसे सही बताऊँ तो यार इस उम्र में आकर बीवियां भी न दिमाग ख़राब करने लगती हैं, कुछ करने नहीं देती ठीक से.

चंचल के पापा- हाँ यार ये तो है कुछ भी करने का मन हो तो अब इस उम्र मैं ये शोभा नहीं देता.

रिम के पापा- बच्चे बढे हो गए हैं अब कुछ तो शर्म करो.

चरण सिंह- अरे बच्चे बड़े हो गए तो क्या लोढ़ा खड़ा होना बंद हो गया..

चंचल के पापा- सही बात है यार शर्म हाय के चक्कर में लुंड बिचारा ऐसे hi रह जाता है.

रिम के पापा- वैसे इसी पर एक बात कहूं ये सब भी न कहीं न कहीं हम मर्दों की गलती होती है.

चरण सिंह- हमारी, हमारी कैसे?

रिम के पापा- हम लोग कैसी पत्नी चाहते हैं बिलकुल संस्कारी, जो घर की ज़िम्मेदारी उठाये पूरे घर की मान मर्यादा संभाले.

चंचल के पापा- हाँ यही होता है.

रिम के पापा- पर यही संस्कार जब वो बिस्तर पर दिखती है तो हम खुद चिढ़ने लगते हैं.

चरण सिंह- बिलकुल सही, यही होता है. कहाँ से लाये इतना ज्ञान gurudev.Hahaha.

रिम के पापा- अरे भाई एक किताब पड़ी थी उसी का ज्ञान है.

चंचल के पापा- कौन सी किताब मस्तराम वाली.

इस पर तीनो ठहाका लगा कर हांसे,

रिम के पापा- अरे वो पढ़ कर तो और कलेश हो जाती घर में हेहेहे, ये कोई मनो चिकित्सक की किताब थी जो होते हैं न सम्भोग और पारिवारिक विषयो के विशेषज्ञ.

चरण सिंह- हाँ हाँ.

रिम के पापा- तो वही कहीं से हाथ लग गयी तो दुकान पर बैठे बैठे उसे hi पढ़ते रहते थे.

चंचल के पापा- तो और क्या क्या बातें थी, थोड़ा ज्ञान हमारे साथ भी बांटो.

रिम के पापा थोड़ा याद कार्ट्स हुए बोले- हाँ एक ये बात की वही मर्द संतुष्ट रह सकता है सम्भोग में.

चरण सिंह- अरे क्या भाई साब ये सम्भोग वामभोग लगा रखा है सीधा सीधा बोलो चुदाई ऐसे सुनने में भी मज़ा नहीं आएगा.

इस पर बाकि दोनों ठहाका लगा कर हांसे और फिर रिम के पापा बोले- हाँ भाई तो चुदाई में वो hi मर्द संतुष्ट होगा जिसकी पत्नी समाज के लिए संस्कारी होगी और बिस्तर पर रंडी.

चंचल के पापा- मतलब, पत्नी कैसे रंडी हो सकती है यार.

चरण सिंह- मैं समझ गया, देखो उदयवीर भाई, पत्नियां क्यों संतुष्ट नहीं कर पति क्यूंकि वो बिस्तर पर भी संस्कार दिखती हैं और रंडियां क्यों कर लेती हैं क्यूंकि वो कोई संस्कार नहीं दिखती.. समझे?

रिम के पापा- बिलकुल सही, और एक बात और लिखी थी की हर औरत में कहीं न कहीं एक रंडी छुपी होती है अगर पति उस रैंड को निकलने में कामयाब हो जाता है तो उसका जीवन सुख से व्यतीत होता है.

चंचल के पापा- बातें तो तुम्हारी हमारे समझ आ रही हैं पर अब ऐसा लगता है बहुत देर हो गयी है इस उम्र में पत्नियों की सोच को बदल नहीं सकते.

चरण सिंह- हाँ ये भी सही है हमारी वाली के अंदर की रंडी तो अब तक मर चुकी होगी. हाहाहा.

रिम के पापा- हाहाहाहा, वैसे तो हम कभी नहीं बताते पर अब दोस्ती हो गयी है तो बताना hi पड़ेगा.

चंचल के पापा- कौनसी बात.

चरण सिंह- हाँ भाई कौनसी बात, अब तो बताना पड़ेगा.

रिम के पापा- देखो मैंने उस किताब में जो लिखा था अपना कर देखा रिम्मी की माँ पर और सही कहूं तो कामयाबी भी मिली अब मैं तो खुश हूँ इस मामले में.

चरण सिंह- सच में? यार हमें भी बताओ फिर तो इसकी तो चुनें सख्त ज़रुरत है.

चंचल के पापा- और क्या दोस्त मान hi लिया है तुम्हे भैया गुरु भी मान लेते हैं.

रिम के पापा- हाहाहाहा गुरु रहने दो बस दोस्त hi मान लिए बहुत है,

चरण सिंह- तो क्या किया कैसे किआ बताओ तो सही,

रिम के पापा- पहली बात तो हमें यही समझना होगा की हमारी पत्नियां भी इंसान हैं हमारी तरह और उन्हें भी सम्भोग ुहम्म चुदाई उतनी hi पसंद होती है जीतनी हमें.

चंचल के पापा- कहाँ यार पसंद होती तो बात क्या होती.

रिम के पापा- यही तो बात है उन्हें पसंद होती है पर संस्कार और समाज की वजह से वो अपनी उस अंदर की इच्छा को या कहूं तो अंदर की रंडी को दबाकर रखती हैं.

चरण सिंह- हाँ बात तो सही है..

रिम के पापा- तुम्हे पता है हमारी पत्नियां हमसे भी शर्माती हैं, चुदाई में मज़ा भी आये तो भी नहीं बोलेंगी की मज़ा आ रहा है,

चंचल के पापा- क्यों?

रिम के पापा- क्यूंकि उन्हें लगता है अगर उन्होंने बोलै की चुदाई में मज़ा आरहा है तो पति को लगेगा ये संस्कारी नहीं है, इसलिए शर्माती हैं छुपाती हैं

चरण सिंह- तो इसका उपाय क्या है.

रिम के पापा- यही की पहला तो उन्हें ये बताना की ये कोई शर्म की बात नहीं है, बल्कि आनंद की बात है,

चंचल के पापा- और वो मान जाएँगी.

रिम के पापा- पति बनकर कहोगे तो मुश्किल है दोस्त बन कर कहोगे तो मानने की संभावना ज़्यादा है.

चरण सिंह- दोस्त बनकर कैसे?

रिम के पापा- मतलब उनके मन की बात बहार लेन के लिए पहले तुम्हे उनसे अपनी बातें बांटनी होंगी, वो भी ऐसी बातें जो गन्दी हों. कुल मिलकर अपनी पत्नी सर गन्दी बातें करना शुरू कर दो.

चंचल के पापा- भैया तुमने कौनसी बातें की थी भाभी से?

रिम के पापा- तुम्हे बहुत जल्दी हो रही है जानने की? हाहाहा.

चरण सिंह- ये भी अभी जाकर कोशिश करने वाले हैं.

रिम के papa-par उदयवीर भाई, उसके लिए पत्नी के साथ सोना पड़ेगा अलग नहीं. हाहाहा.

चरण सिंह- हाहाहाहा.

चंचल के पापा- अरे अब उस बात पर हमारी लुंगी खींचते रहोगे आगे बताओ.

रिम के पापा- देखो मैं हूँ तुम दोनों लोग हो या कोई भी मर्द हो, ऐसा तो नहीं है की वो सिर्फ अपनी पत्नी की hi तरफ आकर्षित हो और दूसरी औरतों को देखता भी न हो या उनके बारे में सोचता न हो.

चरण सिंह खुद अपने मन में सोच के जवाब देते हुए बोले- नहीं भाई कोई नहीं सब सोचते हैं और हिलाते भी हैं.

चंचल के पापा- हाँ मंटा हूँ, मैंने भी बहुतों के बारे में सोच के हिलाया है.

रिम के पापा- तो बस वही बात अपनी पत्नी से बांटना शुरू कर दो, की ये औरत ऐसी लगती है इसके साथ ये करना चाहता हूँ.

चंचल के पापा- भाई साब कलेश हो जायेगा घर में बवाल मचा देगी. किसी दूसरी औरत की बात भी की तो.

रिम के पापा- शुरू में गुस्सा करेगी पर तुम गुस्सा मत कर्मा और ऐसे रहना जैसे कोई बड़ी बात नहीं बल्कि ये बोलना की तुम्हे दोस्त मंटा हूँ इसलिए तुमसे बता रहा हूँ, देखना फिर खुद hi आकर पुछा करेगी.

चरण सिंह- भाई साब बिलकुल सही योजना लग रही है मुझे तो. फिर आगे क्या?

रिम के पापा- आगे ऐसे hi तुम्हे पत्नी से दोस्ती गहरी करनी है, और जैसे जैसे वो खुलने लगेगी वो अपनी बातें तुम्हे बताने लगेगी. उसे क्या अच्छा लगता है क्या नहीं.

चंचल के पापा- ये तो करने वाली चीज़ है ज़रूर कोशिश करेंगे.

रिम के पापा- पर ये बात ध्यान रखना की तुम पत्नी को बताओगे की तुम्हे अन्य औरत आकर्षक लगती है उसके बारे में बातें होंगी पर जब पत्नी खुलेगी तो हो सकता है वो व्ही तुम्हे बताये की उसे कोई मर्द ाचा लगता है, उस वक़्त चिढ मत जाना की ये अन्य आदमी के बारे में कैसे सोच सकती है. जो भी होगा दोनों और से बराबर होगा.

चरण सिंह- ये तो समझने वाली बात है. हम बहार की मलाई खाएं और पत्नी को घर का खाना ये तो गलत है hi.

चंचल के पापा- हाँ जितना हक़ हमारा है उतना hi पत्नियों का भी है.

रिम के papa-phir तो आप लोगो को कोई दिक्कत नहीं होगी.

चरण सिंह- चलो अब ये तो बताओ भाभी को कैसे मनाया.

रिम के पापा- देखो थोड़ी परिवार वाली बात है वैसे तो बेटी के ससुराल में बिलकुल नहीं करनी चाहिए.

चरण सिंह- अरे इसीलिए तो दोस्ती की है कसम से सूजन भाई साब हमारे बीच की बातों का परिवार या बचो पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सही कहूं तो यहाँ दूध का धुला कोई नहीं है कुछ राज तुम्हारे हैं तो कुछ हमारे भी.

चंचल के पापा- इस बात को लेकर बेफिक्र रहो न बात बहार जाएगी और न hi हम तुम्हारे बारे में कुछ सोचेंगे और भाई साहब ने सही कहा कोई दूध का धुला नहीं है.

रिम के पापा- तो सही कहूं तो मैंने पत्नी से धीरे धीरे ऐसी बातें करना शुरू किआ और फिर थोड़ा जब वो खुल गयी तो बताया की मुझे अपने छोटे भाई की बीवी बड़ी अछि लगती है, और सच में लगती है उसके लिए मैंने बहुत मुठ मरी थी,

चरण सिंह- विनीत की मम्मी.

रिम के पापा- हाँ.

चरण सिंह- मैं तुम्हे बिलकुल गलत नहीं कहूंगा और सच बताऊँ तो मैंने भी शादी के समय रिम्मी और रमन की उन्हें देख कई बार हिलाया है बड़ी गदराई हुई हैं

चंचल के पापा- लो अब खुली हैं बातें तो

रिम के पापा- तो मैंने अपनी पत्नी को बताया शुरू में तो उसने संस्कार दिखाए की छोटे भाई की पत्नी है वगेरा वगेरा फिर खुद hi आकर बात छेड़ती, मुझे उसके सामने देखकर इशारे करती, फिर अगला कदम था कई बार मैं पत्नी को छोड़त्र हुए उसको शशि बनाकर छोड़ता वो भी पूरा स्वांग करती और जेठ जी जेठ जी कहकर चुदती थी.

रिम के पापा ऐसे hi मन में कहानी बना कर सुनाने लगे.

चरण सिंह- भैया हमारा तो खड़ा होने लगा. तुम्हारी बातें सुनकर.

चंचल के पापा- हमारा भी, वैसे इसके आगे कुछ हुआ…

रिम के पापा मुस्कुराये और बोले- की अगर अभी से तुम्हारे लुंड खड़े हो गए तो आगे सुनोगे तो बिना हिलाये रह नहीं पाओगे.

चरण सिंह- ऐसा क्या हुआ..

रिम के papa-bataunga पर एक शर्त है.

चंचल के पापा- क्या शर्त?

रिम के पापा- शर्त ये है की सुनकर कोई हिलायेगा नहीं हाथ से.

चंचल के पापा- अरे भाई साब बिना हिलाये रह नहीं पाएंगे.

चरण सिंह- हाहाहा बहुत मुश्किल हो जायेगा.

रिम के पापा- देखो सुनकर तुम लोगो ने हिलाकर निकल दिया तो सारा जोश यहीं बाह जायेगा अगर नहीं हिलाओगे तो वो जोश अंदर रहेगा तभी कुछ काम बनेगा.

चरण सिंह- ये तो बिलकुल सही कहा भाई तुमने.

चंचल के पापा- फिर ठीक है, हम नहीं हिलाएंगे. भैया तुम आगे बताओ .

रिम के पापा- ऐसे hi हम नाटक कर के चुदाई करने लगे, एक दिन तुम्हारी भाभी खुद बोली की अगर तुम्हे शशि को सच में छोड़ने को मिले तो?

हम तो खुश हो गए पर बोले ऐसा कैसे हो सकता है. वो बोली एक तरीका है पर उसके लिए तुम्हारा राज़ी होना ज़रूरी है.

मैंने कहा बताओ क्या तरीका है, बोली मैं देवर जी को पता कर छुड़वा लूँ तो शशि की छूट तुम्हे आराम से मिल जाएगी. बोलो क्या कहते हो..

मैंने कहा इसमें मैं क्या कहूं तुम्हे देवर से छुड़वाना है या नहीं तुम फैसला करो..

वो बोली- मैं तो कर लुंगी पर क्या तुम अपनी बीवी को अपने भाई से छुड़वाते हुए देख पाओगे.

इस बारे में मैंने थोड़ा सोचा फिर उससे कह दिया मुझे कोई परेशानी नहीं है आगे उसका फैसला है,

चरण सिंह- तो क्या भाभी ने छुड़वाया प्रदीप भाई से?

चरण सिंह ने हैरानी से पुछा वहीं हाल उदयवीर का था.

रिम के पापा- हाँ क्यूंकि ये hi नियम है अगर कुछ चाहते हो तो पहले देना सीखो, सावित्री ने देवर को पता उससे छुड़वा लिए और फिर खुद hi उसनर शशि को पटाने में मेरी मदद की और फिर मुझे शशि की छूट मिल गयी और तबसे अबतक बस आनंद hi आनंद.

चंचल के papa-aur तुम्हारे भाई का क्या?

चरण सिंह- हाँ प्रदीप को पता है ये सब?

रिम के पापा मुस्कुराये और बोले- मैंने कहा था न हम सब मर्द एक जैसा hi सोचते हैं, तो उसे सिर्फ पता hi नहीं है बल्कि हम एक साथ चुदाई करते हैं कब्जी कभी तो चारो इकठा होकर पूरी रात मज़े लेते हैं,

ये सुनकर बाकि दोनों के चेहरे तो ऐसे थे जैसे उन्होंने भूत देख लिए हो. पर चरण सिंह का तो दिमाग तेज़ी से. चल रहा था वो मान रहे थे की ऐसा हो सकता है आखिर उन्होंने भी तो अपनी बहु को छोड़ लिया है.

चंचल के पापा भी हैरानी में थे पर लुंड उनका भी खड़ा था.

चरण सिंह- वाह भाई साब बहुत सही मज़े तो आप ले रहे हो ज़िन्दगी के. वैसे इस बारे में मैंने सुना है शहर में कुछ व्यापारी हैं उनसे सुना है वो लोग आपस में बीवियों की अदला बदली करते हैं.

चंचल के पापा- क्या सच में ऐसा करते हाजन लोग और बीवियां मान जाती हैं..

चरण सिंह- अरे दुनिया बहुत आगे बढ़ गयी है दोस्त… बहुत होता है ऐसा, अरे कहहते हैं एक hi को छोड़ते रहो तो बोरियत हो जाती है इसलिए अदला बदली से दोनों को hi नया स्वाद मिलता रहता है. और नयापन रहता है.

रिम के पापा- बिलकुल सही बात.

चंचल के पापा- तो फिर चरण सिंह भाई तुमने भी कभी कोशिश की.

चरण सिंह- नहीं यार.

रिम के पापा- अरे नहीं की होगी मैं समझता हूँ, ऐसा करने के लिए बिलकुल भरोसे वाले लोग चाहिए जो तुम्हारी बदनामी न होने दें, अब मेरा और भाई का इसलिए चल गया की घर की बात है, बात फैलने की चिंता hi नहीं है..

चरण सिंह- हाँ ये तो बिलकुल सही कहा तुमने, इस मामले में ये सावधानी बिलकुल होनी चाहिए.

चंचल के पापा- वही तो वैसे सही में बड़े नसीब वाले हो सूजन भैया,

रिम के पापा- अरे नसीब वाले क्या हर किसी की दुसरे की बीवी पसंद होती है और अगर हम तीनो hi इस रिश्ते में न होते संधियों के तो हम भी एक दुसरे की बीवियों पर कोशिश ज़रूर करते.

चरण सिंह- अभी भी कर सकते हैं.

चरण सिंह की बात सुन दोनों थोड़े हैरान हुए फिर भी चंचल के पापा निश्चित होने के लिए बोले- मतलब?

चरण सिंह- मतलब ये समधी का रिश्ता छोडो और दोस्तों की तरह बात करो और मैं कह रहा हूँ हम कोशिश क्यों नहीं कर सकते? अगर सूजन भाई अपने भाई के साथ कर सकते हैं तो हम आपस में क्यों नहीं.

रिम के पापा ये सुन अंदर hi अंदर मुस्कुराये क्यूंकि जो वो करना छह रहे थे वो हो चूका था, वहीं तीनो के ख्याल में एक दुसरे की गदराई हुई बीवियां घूम गयी और तीनो के hi लुंड खड़े हो गए इस ख्याल से hi.

चंचल के पापा- पर पर ये ठीक रहेगा?

चरण सिंह- अरे भई उदयवीर मैंने कहा न हमारे बीच जो भी हो उसका असर बच्चों पर नहीं पड़ेगा. और तुन बताओ इसमें गलत क्या है?

चंचल के पापा- गलत तो कुछ नहीं दीखता पर बिमला कभी नहीं मानेगी इसके लिए.

चरण सिंह- अरे हमने कोशिश करने को बोलै है परिणाम बाद में देखा जायेगा.

रिम के पापा- हाँ कोशिश ज़रूरी है पहले वही करो जो हमने बताया है और फिर आगे बढ़ना..

चरण सिंह- तो कौन कौन राज़ी है बिना कोई दबाव के.

रिम के पापा- हम तैयार हैं.

चंचल के पापा थोड़ा असहज दिखे पर कुछ सोच विचार के बोले – माँ छुड़ाए दुनिया दरी कोशिश करके तो देख hi लेते हैं, हम भी तैयार हैं.

चरण सिंह- तो आज से hi इस योजना पर काम करना शुरू कार्डो.

रिम के पापा- योजना अदला बदली की.

इस पर तीनो ठहाका लगा कर हांसे और आगे की बातों में लग गए, वहीं तीनो की पत्नियां घर पर थी और वो बातें करने में किसी से काम नहीं थी.

तीनो ने आज बचपन की यादें ताज़ा करने की सोची थी और बचपन की बातें हो रही थी.

माधुरी – सच में बचपन के दिन hi अलग होते हैं. मैं तो पूरे दिन हमारे आम की बगिया में सहेलियों के साथ खेलती रहती थी.

सावित्री – यही हाल हमारा था, एक पिल्ला था हमारा शेरू उसे लेकर हर जगह घुमते रहते खेलते उसके साथ पूरा दिन उसी के साथ बीतता था.

बिमला- अरे जीजी पिल्लै से याद आया हमारे पास भी एक बकरा था बहुत प्यारा था हमें बचपन में बहुत. खेलते थे उसके साथ.

माधुरी – बचपन के खेल भी कितने अचे होते थे न, गिट्टी, आशपाश, लंगड़ी, चोर पुलिस,

बिमला- लंगड़ी तो हमें बहुत पसंद था हम पूरे दिन उसे hi खेलते थे.

सावित्री – काश वो दिन वापिस आ सकते.

माधुरी – दिन तो नहीं आ सकते पर वैसे hi मज़े टी कर सकते हैं.

बिमला- कैसे?

माधुरी- आज घर पर हम तीनो hi हैं, और समय भी खूब है कोई खेल खेलते हैं.

सावित्री- सही सॉफ है पर क्या खेलें?

बिमला- लंगड़ी..

माधुरी- खेल सकते हैं.

सावित्री- अरे माधुरी बहन इस उम्र में कहाँ उछाल कूद करवाऊंगी.

बिमला- ओह्हो जीजी अभी तो बचपन को याद कर रही थी और अब बुद्धो वाली बात कर दी.

माधुरी – और क्या, आउट इतने बूढ़े नहीं हुए है हम लोग, खेलते हैज न मैं तो तैयार हूँ

बिमला- सावित्री जीजी खेलो न.

सावित्री- ाचा ठीक है तुम लोग कहते हो तो खेल hi लेते हैं.

आँगन में langadi(stapu) की लाइन खींची जाती है और तीनो नयी नयी सहेलियां उत्साह के साथ खेल शुरू करती हैं.

पहले बिमला hi शुरुआत करती है और एक तंग उठा कर आगे कूदती है, उसका भरा हुआ गदराया बदन उछालते हुए बड़ा कामुक लग रहा था बड़ी बड़ी छुछियां यूँ उछाल रही थी जैसे ब्लाउज फाड़ देंगी बिमला अगले दो खाने पार करती है और उसका संतुलन बिगड़ता है तो दूसरा पेअर टिक जाता है, जिसके टिकते hi सावित्री और माधुरी दोनों hi ताली बजाकर खुश होती हैं,

माधुरी- पूरा नहीं कर पाई बिमला रानी क्यों..

बिमला- अरे जीजी ये साड़ी वारी में खेलना बहुत मुश्किल है संभालता hi नहीं.

सावित्री – हाँ सो तो है साड़ी में उछाल कूद करना बड़ा मुश्किल होता है,

माधुरी- ाचा ऐसा है तो अगली बरी किसकी है मेरी?

बिमला- हाँ.

इसके बाद माधुरी जगह पर जाती है और शुरू करने hi वाली होती है की रुक जाती है और कहती है- रुको अच्छे से hi खेलते हैं.

ये कहकर वो अपनी साड़ी उतरने लगती है

बिमला- ये का कर रही हो?

माधुरी- तुमने hi कहा साड़ी में नहीं खेल पते और हम तीनो के अलावा कोई है भी नहीं तो दिक्कत क्या है.

ये कहकर वो साड़ी उतर कर बगल में रख देती है उसके बाद गले में पड़ी चैन मंगलसूत्र वगेरा भी. और अब पेटीकोट ब्लाउज में खेलने को आगे बढाती है.

सावित्री – अब तो माधुरी बहन जीत के hi मानेगी.

एक दो खाने कूदने के बाद जैसे hi माधुरी तीसरी खाने में कूदती है छत्त से आवाज़ होती है और वो देखती है तो हैरान रह जाती है क्यूंकि उसके ब्लाउज के हुक टूट जाते हैं और उसका ब्लाउज आगे से खुल जाता है.

ये देख वो हैरान रह जाती है वहीं सावित्री आउट बिमला हंसने लग जाते हैं.

सावित्री- बेचारे से थानों का भर संभाला नहीं गया.

बिमला- इतने बड़े और भरी भरी ले कर उछाल रही थी कहाँ hi संभाला जायेगा.

माधुरी- तुम दोनों के हमसे बड़े hi होंगे ये तो कपडा हल्का था.

इस कहते हुए माधुरी खुले ब्लाउज को भी बादाम से उतर कर अलग कर देती है और सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में रह जाती है.

सावित्री – हाय देख बिमला ऐसे देख कर कोई लंगड़ी तो नहीं खेलेगा हाँ घोडा घोड़ी का खेल ज़रूर शुरू हो जायेगा.

तीनो हँसते हैं पर पलटवार करते हुए माधुरी कहती है- तुम लोग भी कर लेना घोड़े की सवारी.

सावित्री- घोड़े से ज़्यादा तो लोडे की सवारी में ज़्यादा मज़ा है.

सावित्री की बात सुन माधुरी खिलखिलाकर हंसती है और बिमला मुँह छुपकर हंसने लगती है जिस पर माधुरी की नज़र पड़ती है.

माधुरी- बिमला रानी को देखो ऐसे शर्मा रही हैं जैसे कुंवारी काली, जैसे कभी लोडे की सवारी की hi न हो.

सावित्री – अभी समनर हो खड़ा लोढ़ा अभी कूदने लगेगी जा कर.

बिमला- धत्त्त तुम दोनों बड़ी बेशरम हो ऐसे कोई बोलता है क्या.

माधुरी- हाँ हाँ ये तो चुदवाती भी शरमाते हुए होगी.

ये कहकर सावित्री और माधुरी तेज़ी से हंसने लगती हैं वहीं बिमला भी मुँह ढँक कर मुस्कुरा रही थी पर उसे भी इस मीठी नोक झोंक में बहुत मज़ा आ रहा था

बिमला- तो और क्या तुम्हारी तरह बेशरम थोड़े hi हूँ जो जहाँ मिले टंगे फैलाकर लेट गयी.

सावित्री- बन्नो छोड़ोगी तो तुम भी नहीं और एक क्या दो दो भी ले लोगी साथ में.

माधुरी- हाय ढैय्या बहन दो दो कैसे लेगी.

सावित्री- एक आगे एक पीछे खाचर खाचर खाचर.

सावित्री के ये कहने पर तीनो हँसते हँसते लोट पॉट हो गयी.

Bimla-ab बहुत हो गया सावित्री बहन तुम्हारी बरी है.

माधुरी – हाँ जाओ तुम्हारी बरी है.

सावित्री कड़ी होती है और माधुरी की तरह hi साड़ी उतरती है पर और सावधानी के लिए वो ब्लाउज भी उतर देती है और पेटीकोट की ऊपर चढ़ा लेती है.

दोनों ने सावित्री के भरे बदन को देखा ब्रा में उसकी छुछियां छुपी काम और दिख ज़्यादा रही थी ब्रा

बिमला- अरे सावित्री बहन लंगड़ी खेलना है तुम तो लोडे पर बैठने की तयारी में हो.

सावित्री – अरे तुम लोढ़ा निकालो तो सही उस पर भी बैठ जाउंगी.

बिमला भी ाव पूरा खुल चुकी थी और मज़ाक कर रही थी और बोली- तुम्हारी मुनिया झेल पायेगी हमारा लोढ़ा.

सावित्री इस पर कुछ बोली नहीं बल्कि उसके और माधुरी के बीच एक इशारा हुआ और दोनों hi सहेलियों में सहमति बानी जिसके तहत माधुरी छुपके से उठी और बिमला के पीछे से जा कर उसे पकड़ लिए और ये देख आगे से भाग कर सावित्री ने.

बिमला- हायर ढैय्या जीजी ये क्या कर रही दोनों हमारे साथ छोडो हमें.

माधुरी- अरे संधान जी थोड़ी मेहमान नवाज़ी हमें भी करने दो तुम्हारी.

सावित्री- हम भी तो देखें कहाँ छिपा है सारा जोबन.

ये कह सावित्री ने बिमला का साड़ी का पल्लू पकड़ा और खींच दिया जिस पर बिमला खिलखिलाते हुए चिल्लाई – ऐ जीजी छोडो हमें हायर ढैय्या..

सावित्री कहाँ मैंने वाली थी और कुछ hi पालो में बिमला की साड़ी अलग पड़ी थी. अब माधुरी कहाँ पीछे रहने वाली थी उसने पीछे से आगे हाथ दाल बिमला का ब्लाउज खोलना शुरू कर दिया पर बिमला बार बार उसका हाथ पकड़ हटाने लगी.

जिस पर माधुरी boli-lagta है बिमला रानी ऐसे नहीं मानेगी.

और ये कह माधुरी ने बिमला का ब्लाउज पकड़ा दोनों और से खींच दिया और चदरररर की आवाज़ के साथ ब्लाउज फटता चला गया .

जिसपर बिमला बिलकुल चौंक गयी और वो दोनों क्र बीच दबी हुई कुक्सह नहीं कर प् रही थी इसलिए मुँह से hi जवाब देने लगी.

बिमला- हाय ढैय्या ब्लाउज फाड़ दिया अगर तुम दोनों की मुनिया में इतनी गर्मी है हाय बुर छोडियों.

बिमला अब पूरे गाओं की अपनी बोली पर आ चुकी थी और दोनों संधानो को उसने गालियां सुननी शुरू कर दी. और दोनों के बीच फांसी हुई फड़फड़ा रही थी. उसे दोनों और से थामे हुए सावित्री और माधुरी पूरे मज़े ले रही थी.

माधुरी- हमारी मुनिया में तो गर्मी है hi रानी तुम्हारी में कितनी है.

माधुरी ने बिमला का ब्लाउज उसके बदन से अलग करके फेंक दिया वहीं बिमला बेचारी पेटीकोट और ब्रा में रह गयी उसकी बड़ी छुछियां ब्रा में समां नहीं रही थी

सावित्री- बिमला रानी की इतनी गरम है की लोढ़ा कला कर दे जला के.

सावित्री और माधुरी फिर से हंसी.

बिमला- अब तुम दोनों की ठंडी पड़ी है तो हम का करें… हेहेहे.

माधुरी- चलो देख hi लें बहन सावित्री कितनी गरमी है.

ये कह माधुरी बिमला के पेटीकोट का नाडा खोलने लगी.

बिमला- हाय ढैय्या पेटीकोट नहीं. ओह्ह्ह रंडियों छिनरो तुम्हारी छूट में भैसे का लुंड घुस जाये, तुम्हारे गांड में गधे का लोढ़ा घुस जाये.

बिमला बचने के लिए अपने हाथ और मुँह दोनों hi चला रही थी. पर दो के आगे एक का क्या मुक़ाबला था, इसलिए जल्दी hi उसके पेटीकोट का नाडा जवाब दे गया और अगले hi पल उसका पेटीकोट उसकी जांघों से सरक. राजा था जीसर पकड़ने की उसने कोशिश तो की पर तब तो वो उतर चूका था.

सावित्री- लो बहन माधुरी संधान तो नंगी हो गयी.

माधुरी- हाँ और देखो तो रंडपना अंदर कच्ची भी नहीं पहनती.

सावित्री – अरे छुड़वाने में आसानी होरी है न साड़ी उठाई और घुसवा लिए लोढ़ा छूट में

बिमला दोनों की बातें सुनते हुए उनके बीच फंसे हुए शर्म से लाल हो रही थी पर साथ hi हंस भी रही थी..

बिमला- तुम दोनों रंडियो को मैं छोडूंगी नहीं.

सावित्री- एक मिनट अब जब नंगी हो गयी हो तो इसका भी क्या काम.

ये कहकर सावित्री ने उसकी ब्रा भी खोलकर उतर दी और बिमला पूरी नंगी कड़ी थी..

माधुरी- बिमला रानी तुम हमें न छोड़ने की बात कर रही हो पर ऐसे तुम्हे किसी ने देख लिए तो तो तुम्हे कोई नहीं छोड़ेगा,

सावित्री – हाँ ऋ बन्नो कितने लोडे घुसेंगे इस मुनिया में गईं भी नहीं पाओगी.

बिमला- गिनती तो तुम्हे भी नहीं याद जीजी की तुम्हारी में अब तक कितने घुसे हैं.

माधुरी- तुम उनकी छोडो बिमला रानी पर तुम्हारी चिकनी मुनिया पर न जाने कितने फिसल कर तुम्हारे कुंएं में गिर जायेंगे तुम्हे भी नहीं पता.

ये कहते हुए माधुरी और सावित्री ने बिमला को छोड़ दिया और हँसते हुए बगल में बैठने लगी पर अब जब बिमला पूरी नंगी हो चुकी थी तो ये खेल ऐसे hi बंद तो होने नहीं देती जैसे hi वो कवहूती वो माधुरी पर झपट पड़ी और उन्हें गिरा कर उसनर इतनी फुर्ती दिखाई की माधुरी का पेटीकोट कब खुल गया माधुरी को पता hi नहीं चला साथ hi बिमला ने तुरंत पेटीकोट पकड़ा और उसे माधुरी की टैंगो से निकल दिया

और पेटीकोट को झंडे की तरह हाथ ऊपर कर लहराते हुए बोली- क्यों अब आया मज़ा, और बड़ा बोल रही थी न की कच्ची नहीं पहनी तो तुमने कौनसी पहनी है देखो कैसे खुला भोसड़ा लिए घूम रही हो.

माधुरी- हाय ढैय्या रंडी छिनार. मेरा पेटीकोट दे.

बिमला- सावित्री जीजी अब कितने लोडे घुसेंगे इनकी मुनिया में.

सावित्री – हाय ऋ बन्नो इस हालत में तो इनका भाई भी देखले तो वो भी भेनचोद बन जाए.

इस पर सावित्री और बिमला खिलखिलाते हुए हंसने लगी वही माधुरी को थोड़ा झटका लगा क्यूंकि मज़ाक में hi सही सावित्री ने सच जो बोल दिया था.

माधुरी बिमला से पेटीकोट छीनने की कोशिश कर रही थी और बिमला ने माधुरी को अपनी और आता देख पेटीकोट को सावित्री के पास फ़ेंक दिया माधुरी सावित्री की और लपकी और जैसे hi उसकर पास पहुँच पेटीकोट लेना चाहा उसे अपनी पीठ पर हाथ महसूस हुए और अगले hi पल उसकी ब्रा भी खुल गयी जो की पीछे से बिमला ने खोल दी थी सब बिमला और माधुरी दोनों hi नंगी थी दोनों का भरा शरीर बड़ी बड़ी छुछियां, मांसल पेट और बड़े बड़े उभरे हुए चूतड़ नंगे होकर माहौल को गरम कर रहे थे.

और सच hi ऐसे में जो उन्हें देख लेता बिना चोदे नहीं छोड़ता. खैर दोनों अब नंगी हो चुकी तो दोनों की hi नज़र मिली और फिर दोनों ने सावित्री को देखा फिर आवास में नज़र मिली तो दोनों के बीच इशारा हो गया और ये इशारा सावित्री ने भी देखा उसे पता चला की अब उसकी खैर नहीं तो वो उठ कर भागी और दोनों अपने नंगे छूछीयो और चूतड़ हिलाते हुए उसके पीछे भागी.

सावित्री भाग कर कमरे में घुसी और उसने दरवाज़ा बंद करना चाहा पर तब तक दोनों ने hi दरवाज़ा आधे में hi पकड़ लिए और धकेलते हुए अंदर आगयी सावित्री भाग कर बचते हुए बिस्तर पर चढ़ गयी और रखे हुए तकिये दोनों पर फेंकले लगी.

बिमला- अब कहाँ जाओगी बड़े मजे ले रही थी न दूसरो को नंगा करने में.

माधुरी- हाँ अब देखते हैं कितने लोडे घुस सकते हैं तुम्हारी मुनिया में.

सावित्री- नहीं नहीं माधुरी तुम तो हमारी बहन हो.

पर दोनों ने hi नहीं सुना और दोनों सावित्री पर टूट पड़ी और अगले hi कुछ पालो में सावित्री पूरी नंगी बिस्तर पर पड़ी हुई थी पर दोनों का मन इतने में hi नहीं भरा..

बिमला ने सावित्री की टैंगो को छोड़ा किआ और खुद उसकी टैंगो के बीच आकर ऐसे बैठी जैसे मर्द चुदाई के लिए बैठता है. और टैंगो को फैलते हुए बोली.

बिमला- क्या कहती हो माधुरी बहन छोड़ दूँ ये मुनिया.

माधुरी- हाँ हाँ बहन छोड़ो और तब तक जब तक इस रैंड के मुँह से चीखें न निकल जाये..

माधुरी सावित्री की बड़ी बड़ी चूचियों को दबाते हुए बोली

सावित्री – छोडो मुझे हराम की जानियो, तुम्हारी छूट में बांस डालूं.

बिमला- बांस तो तुम्हारे इस भोसड़े में घुसेगा मेरी रंडी जीजी..

ये कहकर बिमला अपनी कमर वैसे hi चलने लगी जैसे मर्द औरत की चुदाई करता है और कमर हिला कर अपनी छूट सावित्री की छूट पर लुंड की तरह मरने लगी.

बिमला- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह जीजी क्या गरम छूट है रे तुम्हारी आह लुंड बिलकुल मस्ती से भर रहा है,

बिमला बिलकुल छोडंर का नाटक करने लगी हालाँकि छूट का छूट से टकराने से वो उत्तेजित होने लगी गरम छूट की घिसाई सा उसकी छूट पानी छोड़ने लगी .यही हाल सावित्री का होने लगा उसे भी मज़ा आने लगा और उसकी छूट भी गीली हो गयी.

वहीं माधुरी बिमला का नाटक देख हंस रही थी तो उसनर भी नाटक में हिस्सा लेने का निर्णय लिया और खुद सावित्री के सीने पर चढ़ कर बैठ गयी और बोली- बिमला बहन तुम रंडी की छूट मारो मैं इससे लोढ़ा चुस्वाति हूँ ये कहकर वो सावित्री के बाल पकड़ उसकद चेहरे पर अपनी छूट मरने लगी जैसे लुंड मुँह में घुसा कर उसका मुँह छोड़ रही हो..

सावित्री दोनों से छूटने की कोशिश करते हुए खिलखिला रही थी साथ hi उसकी उत्तेजना बढाती जा रही थी छूट पर लगातार बिमला की छूट थापें मर रही थी वहीं मुँह के सामने माधुरी की छूट बार बार आगे पीछे हो रही थी.

बिमला को भी ये एहसास ाचा लग रहा था पहली बार वो यूँ इस तरह नंगी होकर किसी और औरत के साथ खेल रही थी और छूट से छूट का मिलान उसके बदन में सिरहन फैला रहा था.

सावित्री ने कुछ पल और छूटने की कोशिश की पर जब कामयाब नहीं हो पाई तो उसने अलग तरीका अपनाया, और जैसे hi माधुरी उसके सीने पर बैठे अपनी कमर आगे पीछे हिला रही थी और ज्यों hi उसकी कमर और छूट सावित्री के मुँह के पास आई सावित्री ने जीभ से निकल कर उसे चाट लिया अपनी छूट पर जीभ का एहसास होते hi माधुरी के बदन में बिजली सी दौड़ गयी जीवन में पहली बार उसकी. छूट को एक औरत की जीभ छू रही थी वो बिलकुल स्तब्ध रह गयी इस एहसास से hi, उसकी कमर पीछे हुई तो सावित्री की जीभ उसकी छूट से हैट गयी पर ये अपनी छूट पर माधुरी को खालीपन का एहसास हुआ जो उसे ाचा नहीं लगा और उसने बापिस अपनी कमर आगे कर दी और. बापिस सावित्री ने उसकी छूट पर जीभ लगा दी, माधुरी ने अपनी कमर को वहीं रोक दिया, सावित्री समझ गयी अब ये उत्तेजित हो चुकी है और सावित्री ने अपनी संधान की छूट पर जीभ फिरनी शुरू कर दी…

माधुरी- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म.

ऐसे आवाज़ें निकल सिसकने लगी. पीछे से बिमला को सिर्फ माधुरी के बड़े चूतड़ दिख रहे थे तो उसे लगा माधुरी भी उसी की तरह नाटक कर रही है सिसकने का, हालाँकि अब वो खुद नाटक नहीं कर रही थी बल्कि छूट की छूट से लगने से उसकी सिसकियाँ अपने आप निकल रही थी. और वो भी इस एहसास से जो उसे औरत के साथ होने का जीवन में पहली बार हो रहा था बेहद उत्तेजित हो रही थी.

वहीं माधुरी तो सब भूल चुकी थी उस एहसास क्र आगे जो ावहि सावित्री की जीभ उसे दे रही थी, सावित्री भी अपना सारा अनुभव जो की उसने अपनी देवरानी, बेटी और भतीजी की छूट चाट कर लिए था सारा माधुरी की छूट पर इस्तेमाल कर रही थी और माधुरी उसके ऊपर बैठे काँप रही थी… कुछ पल छूट चाटने के बाद सावित्री ने अपनी जीभ नुकीली करके माधुरी की छूट में घुसाई तो माधुरी की बादब तो थरथरा गया और वो अपना संतुलन खो बैठी और आगे की और गिरने को हुई तो उसने अपने हाथ सावित्री के सर के ऊपर की और बिस्तर पर टिकते हुए खुद को रोका पर आगे झुकाने से अब सावित्री को और आसानी हो गयी क्यूंकि जहाँ अब्बतक उसे सर. उठाकर छूट चटनी पद रही थी अब छूट उसके मुँह पर hi टिक गयी और उसकी जीभ और अंदर तक माधुरी की छूट में घुस गयी.

पर ये होने से और भी कुछ हुआ हिस्से बिमला हैरान रह गयी, माधुरी के आगे झुकने से अब बिमला के सामने जो नज़ारा था बड़ा hi कामुक था जिसमे उनके सामने उनकी संधान अपनी दूसरी संधान के मुँह ओर बैठी थी और उनकी संधान अपनी जीभ संधान की छूट में घुसा कर चाट रही थी..

माधुरी का तो ये देख बुरा हाल हो गया उसकी छूट ऐसा लगा जलने लगी, उसकी कमर खुद बा खुद हिलकर सावित्री की छूट पर अपनी छूट घिसने लगी. छूट से छूट का एहसास उसे पागल करने लगा साथ hi उसकी नज़र लगातार सावित्री के मुँह ऑफ माधुरी की छूट पर लगातार लगी हुई थी और उसका असर माधुरी के बदन पर दिख रहा था जो की लगातार काँप रहा था, सावित्री के हाथ माधुरी के बड़े बड़े चूतड़ों पर थे और उन्हें मसल रागे थे फैला रहे थे जिससे बिमला के सामने माधुरी के गांड के छेड़ का अद्भुत दृश्य नज़र आ रहा था छोटे भूरे रंग का छेड़ बहुत प्यार लग रहा था और माधुरी के गोर चूतड़ों के बीच उसकी झलक देखते hi बन रही थी ये सव देखते हुए बिमला के चेहरे पर हवस साफ़ दिखाई दे रही थी, वो न जाने क्यों माधुरी की गांड के छेड़ से नज़र हटा hi नहीं प् रही थी,

और उसी की देखते हुए वो सम्मोहित सी आगे झुकी हालाँकि उसकी कमर लगातार चल रही थी, वहीं आगे झुकते हुए उसने अपने हाथ सावित्री की छिछिओ पर रख दिए और उन्हें हल्का हल्का मसलते हुए आगे झुकती चली गयी थोड़ा आगे जाकर उसके चेहरे के सामने माधुरी के चूतड़ थे जिसके बीचो बीच की खाई में एक गांड का छेड़ था और उसके हल्का सा नीचे उसकी छूट थी जिसमें सावित्री की छूट चल रही थी

तभी माधुरी की अचानक से सिसकी निकली.

विल बे कॉन्टिनोएड.

 
और उसी की देखते हुए वो सम्मोहित सी आगे झुकी हालाँकि उसकी कमर लगातार चल रही थी, वहीं आगे झुकते हुए उसने अपने हाथ सावित्री की छिछिओ पर रख दिए और उन्हें हल्का हल्का मसलते हुए आगे झुकती चली गयी थोड़ा आगे जाकर उसके चेहरे के सामने माधुरी के चूतड़ थे जिसके बीचो बीच की खाई में एक गांड का छेड़ था और उसके हल्का सा नीचे उसकी छूट थी जिसमें सावित्री की छूट चल रही थी

तभी माधुरी की अचानक से सिसकी निकली. अब आगे

अपडेट 184

सरलपुर

माधुरी की एक तेज सिसकी के साथ hi उसका बदन अकड़ गया क्यूंकि उसे एक अलग hi एहसास हुआ, अचानक उसे अपनी गांड के छेड़ पर एक गरम और लिसलिसा सा एहसास हुआ और वो एहसास था बिमला की जीभ का जो खुद को हैरान करते हुए अपनी जीभ निकल कर अपनी संधान की गांड के छेड़ को चाट रही थी, उसे लगा जैसे उसका बदन उसकी जीभ उसका मुँह उसके बस में hi नहीं रहा ज्यों hi उसने गांड का छेड़ देखा वो खुद को रोक hi नहीं पाई उसने ऐसा कभी पहले कभी नहीं किया था और अभी अचानक से इतना बड़ा कदम उठाकर वो खुद अचंभित थी, पर साथ hi यह एहसास उसे कभी नहीं हुआ था, उतनी उत्तेजित वो कभी नहीं हुई थी इसी उत्तेजना में उसकी कमर लगातार चल रही थी और उसकी छूट सावित्री की छूट से लगातार घिस रही थी उसके हाथ सावित्री की छूछीयो पर कैसे हुए उन्हें मसल रहे थे, उसकी जीभ संधान माधुरी की गांड के छेड़ पर लगातार फिर रही थी साथ hi उसे कुरेद भी रही थी, उसकी गांड के ठीक नीचे माधुरी की गीली बहती हुई छूट थी जिसमे सावित्री की छूट अंदर बहार हो रही थी, बिमला की तरह माधुरी ने भी ऐसा कुछ कभी महसूस नहीं किआ था, एक साथ उसके दोनों छेदों पर हमला हो रहा था एक जीभ छूट और एक गांड में होने से वो पागल सी हो रही थी, और इस पागल पैन और उत्तेजना का परिणाम वही हुआ जो होना था माधुरी अकादत्ते हुए सिसकियाँ लेते हुए झड़ने लगी..

उसकी छूट नमकीन रास की धार छूटने लगी जिसे सावित्री सरबत समझ गटकने लगी वही बिमला को भी आपजी जीभ पर माधुरी की थरथराहट हो रही thi.khaair अगले कुछ hi पालो में माधुरी झड़ने के बाद सावित्री के मुँह से हैट बगल में गिर कर हांफने लगी.. पर मसूरी के हटते hi सावित्री को एक साँस लेने तक का समय नहीं मिला और बिमला जल्दी से अपनी जगह से उठ अपनी छूट सावित्री के मुँह पाए रख कर बैठ गयी , सावित्री के लिए आज संधानो को खुश करने का दिन था और उसने ऐसा किया भी, उसने तुरंत जीभ निकल कर बिमला की गरम छूट को चेतना शुरू कर दिया और बिमला बिलकुल उत्तेजित होके सिसकियाँ लेती हुई अपनी छूट चटवाने लगी.

बिमला- अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह aiseeeeeeeeee हीईई अह्ह्ह्हह ऐसेआह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ाआह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्हह ढैय्या चाहारत्ततत्तत्त aiseeeeeeeeee hi रनडीईई .

नीचे से सावित्री पूरे जोश में आकर उसकी छूट चाट रही थी साथ hi सावित्री अपने हाथ ऊपर कर बिमला की पापीती जैसी छूछीयो को मसलने लगी जिससे बिमला की उत्तेजना और बढ़ने लगी,

वहीं बिमला की सिसकियों और चीखों को सुनकर माधुरी जो झड़ने के बाद आँखें मूँद कर सांसें भर रही थी उसकी आँखें खुल गयी और उसने सामने देखा की उसकी जगह अब बिमला ने ले ली है तो वो उठ कर बैठ गयी और फिर दोनों को देखते हुए उससे भी दूर न रहा गया और अपनी संधान की सेवा का बदला चुकाने के लिए वो उठी और सावित्री की टैंगो के बीच जा बैठ झुक गयी, सावित्री की फूली हुई और बहती हुई छूट देख उसकर मन में एक अजीब सा भाव आया, इससे पहले उसने ऐसा कुछ नहीं किआ था जो वो करने जा रही थी और न hi उसे ठीक से पता था क्या करना है पर वो जानती थी बिना किये वो नहीं रुक सकती और न hi रुकना चाहती है. इसीलिए उसने बिना ज़्यादा सोचे अपना मुँह अपनी संधान की छूट में घुसा दिया, और फिर जैसे समझ आया वो चाटने लगी,

अपनी छूट पर जीभ का एहसास होते hi सावित्री भी और मचलने लगी उसे समझ आ गया की कौन उसकी छूट चाट रहा होगा इसी एहसास से की उसकी संधान उसकी छूट चाट रही है वो और उत्तेजित और जोश में आ गयी और उसका असर बिमला को दिखा क्यूंकि सावित्री के हाथ बिमला की चूचियों पर और कास गए साथ hi उसकी जीभ उसकी छूट मेज और आक्रामकता और गति के साथ चलने लगी…

बिमला hi इस समय इकलौती ऐसी थी जिसका मुँह खुला हुआ था और वो खुल कर सिसकियाँ ले रही थी- अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्हह रनडीई भें की lodiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह चाहारत्ततत्तत्त ले…

माधुरी और सावित्री दोनों hi बिमला के मुँह से गलियां सुनकर थोड़ी हैरान थी पर दोनों भी इस बात को समझ रही थी की बिमला कितनी उत्तेजित हो चुकी है..

उसकी उत्तेजना को और बढ़ने के लिए सावित्री ने अपने एक हाथ को उसकी चुकी से हटाया और नीचे लेकर अपनी जीभ के साथ बिमला की छूट में दो उंगलियां घुसा दी, और कुछ बार अंदर बहार की तो दोनों उंगलियां बिमला के छूट रास में सं गयी, और फिर सावित्री उन उंगलियों को बिमला के चूतड़ों की तरफ पीछे की और ले गयी और फिर उसके चूतड़ों के बीच की दरार में उंगलियां फिरते हुए एक उंगली को बिमला की गांड का छेड़ कुरेदते हुए अपनी उंगली उसकी गांड में घुसा दी तो बिमला और चिहुंक पड़ी.

बिमला- अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दैयाआआह्ह्ह्हह्ह रे.

सावित्री ने दूसरी उंगली भी बिमला की गांड में घुसा दी और दोनों उँगलियों से उसकी गांड को छोड़ते हुए लगातार उसकी छूट चाट रही थी वहीं उसकी खुद की छूट में माधुरी की जीभ चल रही थी… जो हर पल उसे उत्तेजना के नए शिखर पर ले जा रही थी,

माधुरी जो की शुरू में बड़ी असमंजस में थी अब पूरी लगन से चाट रही थी, उसे ये एहसास ाचा लग रहा था साथ hi अपनी संधान की छूट का नमकीन सा स्वाद बड़ा acha.lag रहा था वहीं वो एक नयी शक्ति का अनुभव कर रही थी जो की उसकी जीभ में थी वो अपनी जीभ को चला कर सावित्री को मचलने पर मजबूर कर रही थी,

मचल तो बिमला भी रही थी सावित्री के मुँह पर बैठ कर और मचले भी क्यों न छूट में जीभ और गांड में उंगलियां अंदर बहार हो रही थी और पहली बार ायरत के साथ होने का एहसास इसका असर ऐसा हुआ की बिमला मचलते हुए अपने चरम पर पहुँच गयी और थरथराते हुए झड़ने लगी उसके झड़ने का वेग इतना था की सावित्री को लगा की ये अभी गिर जाएगी और वहीं माधुरी को सावित्री की छूट छोड़ कर उसे पकड़ने आना पड़ा, माधुरी ने उसे कसकर पीछे से पकड़ा और उसे गिरने से रोका… वहीं उसकी कमर लगातार झटके खा रही थी और सावित्री के मुँह में अपना रास छोड़ रही थी तभी उसकी कमर ने एक झटका और मारा और साबित्री को अपने मुँह पर एक धार लगी जो की बिमला के मूट की थी, हालाँकि वो सिर्फ एक फ़ो पिचकारी मार कर hi शांत हो गयी और सावित्री के चेहरे को मूट से भीगा दिया और जब शांत हो गयी तो माधुरी ने उसे छोड़ा और वो बगल में लेट गयी…


इधर माधुरी ने सावित्री का बिमला की पेशाब से सना हुआ चेहरा देखा तो मुस्कुराई और फिर उसकी और बढ़ उसके नंगे बदन पर लेट गयी और फिर अपने होंठ सावित्री के होंठो से भिड़ा दिए जिनपर अब भी बिमला की छूट और मूट दोनों का स्वाद था कुछ देर चूसने के बाद जब दोनों के होंठ अलग हुए तो माधुरी जीभ निकल कर सावित्री के चेहरे से पेशाब को चाटने लगी, हालाँकि ये सब करते हुए वो खुद को भी हैरान कर रही थी और बाकि सब को भी पर न जाने क्यों वो आज अपने आप ये सब किये जा रही थी, उसनर कभी सोचा भी नहीं था की वो ऐसा कुछ करेगी पर अभी वो उत्तेजना की नदी ने बहे जा रही थी.

सावित्री ने जब माधुरी को अपना पेशाब से सना हुआ चेहरा चततव देखा तो बड़ी खुश हुई मन hi मन और सोचा यव पक्का हमारी संधान बनने के लायक हाउ. माधुरी ने चेहरा चाटते हुए फिर से सावित्री के होंठ भर लिए और दोहो गदराई हुई घोड़ियां बिलकुल नंगी एक दुसरे के होंठों को चूस रही थी,

तभी पीछे से आवाज़ आई- बड़ा प्यार हो रहा है दोनों संधानो में.

दोनों ने होंठ अलग कर के देखा तो पाया बिमला अपनी कोहनियों पर उठे उन्हें देख मुस्कुरा रही है.

सावित्री- तुम्हे भी दे देते हैं ऐसा प्यार.

माधुरी- और क्या.

ये कह दोनों अलग हुई माधुरी तो सीढ़ी जाकर बिमला के पैरों में बैठी और अपना मुँह उसकी रास और पेशाब से भीगी छूट में घुसा दिया और चाटने लगी.

बिमला- अह्हह्ह्ह्ह.

बिमला को तो आज के दिन पर यकीन hi नहीं हो रहा था अभी कुछ पल पहले वो एक औरत से छूट चटवा कर हटी और अब दूसरी औरत उसकी छूट चाट रागी है और वो भी कोई साधारण औरत नहीं उसकी संधान उसकी बेटी की सास .. वो ये सब सोच hi रही थी की उसे अपने चेहरे के ऊपर दो बड़े बड़े पाटीलेनुमा चूतड़ आते दिखे और उनके बीच फूली हुई छूट भी जो की कुछ hi पालो में उसके चेहरे पर आ कर टिक गयी, वो समझ गयी अब उसकी बरी थी सेवा करने की और उसने बिना किसी झिझक के अपना मुँह खोल कर सावित्री की छूट से लगा diya…aur उसकी गरम छूट को चाटने लगी वहीं माधुरी उसकी छूट में मुँह ढबाए हुई तहज, सावित्री hi अभी तक झड़ी नहीं थी और इसलिए अपने चरम पर hi थी तो कुछ देर और बिमला की जीभ के म्हणत के कारन जल्दी hi सावित्री अपने चरम पर पहुँच गयी और बिमला के मुँह पर झड़ने लगी, बिमला ने सावित्री की छूट से बहते रास को अपने मुँह में ोे जातक लिया, झड़ने के बाद सावित्री बिमला के चेहरे पर बैठी हांफने लगी पर अभी तक उसके चेहरे से हटी नहीं, सावित्री माधुरी के बारे में तो निश्चित हो चुकी थी की वो उसके परिवार ने जुड़ने के लिए बिलकुल उचित है पर वो बिमला के बारे में भी कुछ ऐसा hi सोच रही थी और उसी को निश्चित करने के लिए उसने आगे कुछ अलग करने का सोचा.

बिमला अब भी मुँह खोले सावित्री की छूट को हलके हलके चाट रही थी, वही सावित्री थोड़ी सी पीछे हुई और अपनी छूट की बिमला के मुँह से पीछे खींच लिया, जिस पर बिमला ने नज़रें उठा सावित्री को सवालिया नज़रो से देखा पर अगले hi पल उसके चेहरे पर एक धार पड़ी जिससे उसका ध्यान बापिस आया सावित्री की छूट से मूट की धार निकल रही थी जो की सीधे उसके चेहरे पर पद रही थी, बिमला ने तो ऐसा कभी कुछ करना तो दूर उसके बारे में सोचा तक नहीं था पर अभी उसके चेहरे पर एक औरत मूट रही थी और उसके पूरे बदन में ये महसूस कर बिजली सी दौड़ गयी.. और आगे जो उठने किया वो खुद हैरान हो गयी, अगले hi पल बिमला ने अपना मुँह खोला और सावित्री के मूट की धार को अपने मुँह में लेने लगी कुछ hi पालो में उसका मुँह सावित्री के मूट से भर गया तो उसे बिमला ने तुरंत जातक कर अपने गले के नीचे उतर लिए ये देख सावित्री के चेहरे पर मुस्कान आ गयी… मूट गटकते hi उसने दोबारा मुँह खोल कर मूट को अपने मुँह में भर लिए, वहीं सावित्री के मूट की धार अब हलकी पद गयी और बंद हो गयी थी,

तो सावित्री ने बिमला के ऊपर से हटकर पीछे बैठते हुए देखा की बिमला आँखें मूंदे लेती हुई है, उसका चेहरा बाल गर्दन और छाती तक पेशाब से भीगे हुए हैं, उसके नीचे बिस्तर भी पेशाब से गीला है.

तभी सावित्री की नज़र बगल में बैठी माधुरी पर गयी जो की बिलकुल अचंभित होकर कभी बिमला को देखती तो कभी सावित्री को, इतने में hi बिमला की आँखें खुली तो उसने देखा की माधुरी उसे हैरानी से देख रही है इस पर वो कुछ कहने hi वाली थी की माधुरी ने उस पर छलांग लगा दी और उसके ऊपर लेट गयी और अगले hi पल अपने होंठ बिमला के होंठों पर लगा दिए, जिनपर उसे सावित्री के मूट का स्वाद भी मिला होंठ और जीभ चूसने के बाद माधुरी ने बिमला के चेहरे को भी जो को पेशाब से सना हुआ था उसे भी चेतना शुरू कर दिया, सावित्री लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए दोनों को देख रही थी… और कुछ देर चाटने के बाद अचानक से माधुरी उठी और बिमला के सीने पर बैठ गयी और बिमला को देख मुस्कुराने लगी, बिमला भी नीचे से उसकी आँखों में देख कर मुस्कुराई, और समझ भी गयी की माधुरी क्या करने वाली है. इसलिए उसने अपना मुँह खोल लिए और उसके मुँह खोलते हु माधुरी की छूट से मूट की धार छूती और बिमला के चेहरे को भीगती हुई उसके मुँह में भरने लगी जिसे बिमला पहले की तरह hi गटकने लगी, और जैसे hi गटकने को मुज बंद करती तो धार उसके चेहरे को भीगती.. बिमला अपनी संधान का मूट पीते हुए सोचने लगी की कहाँ मैं संस्कारी एक आदर्श ग्रहणी थी यहाँ आने से पहले और अभी चाँद मिंटो में दूसरी औरत का मूट पि रही हूँ पर सबसे अजीब बात ये सब करना मुझे ाचा भी लग रहा है.. खैर माधुरी का मूतना बंद हुआ तो वो भी हैट कर एक तरफ बैठ गयी. बिमला ने कुछ पल बाद आँखें खोली चेहरे और बदन से मूट टपक रहा था वो अपनी कोहनी के बल उठी और फिर दोनों की और देखा और मुस्कुरा कर बोली- देखो क्या बना दिया तुम लोगो ने मुझे रंडियों से भी बदतर.

सावित्री- सच कहूं तो हमने कुछ नहीं बनाया है बिमला रानी तुम थी बस अभी तुम्हारे अंदर की रंडी बहार आई है.

माधुरी- और सिर्फ तुम hi नहीं हम दोनों भी तुम्हारे hi जैसी हैं.

बिमला- तो अब बानी हम पक्की सहेलियां.

इस पर तीनो हांसे फिर सावित्री बोली- हाँ मूट पीने के बाद भी नहीं बनेंगे तो कब बनेंगे.

माधुरी – अभी नहीं पक्की सहेलियां बनाने के लिए एक चीज़ बाकि है अभी.

सावित्री- अब क्या रह गया.

बिमला- हाँ मूट भी पि लिए तुम दोनों का अब क्या रह गया.

माधुरी- एक दुसरे के राज़ बताना. जो किसी को भी नहीं बताये वो.

सावित्री- कुछ राज़ राज़ hi रहे तो ाचा हैं बहन नहीं तो रिश्ते ख़राब हो जाते हैं.

बिमला- नहीं सावित्री बहन जब हम एक दुसरे का मूट पि सकते हैं तो राज़ क्या चीज़ हैं,

माधुरी- सही बात है, और बहन हम तीनो ने hi ये एक दुसरे से ये वादा भी करते हैं की हमारे बीच जो भी हो या जो भी राज़ हो उसका असर परिवार पर या बच्चों पर नहीं पड़ेगा.

सावित्री- हाँ ये सबसे ज़्यादा ज़रूरी है.

बिमला- हाँ उसका असर घर पर नहीं पड़ना चाहिए.

Madhuri-to शुरुआत मैं hi करती हूँ. मेरा राज़ थोड़ा अजीब है पर आशा है तुम दोनों मुझे गलत नहीं समझोगी.

बिमला- अरे संधान रानी, हम रंडियां है हमें सही गलत से फ़र्क़ नहीं पड़ता.

बिमला खुद को ऐसे बोल कर एक अलग आज़ादी महसूस कर रही थी.

माधुरी – तो सुनो मैं अपने भाई भूरे से चुदवाती हूँ.

माधुरी जल्दी से बोल गयी और फिर दोनों का चेहरा देखने लगी..

सावित्री- क्या सच में,

सावित्री ने उत्सुकता से पुछा, वहीं बिमला भी जानने को उत्सुक दिखी..

माधुरी ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा राज़ सहेलियों के साथ साझा किआ और उनकी प्रतिक्रिया देख उसे शांति मिली, और बोली- हाँ अपने सेज भाई के लुंड से छूट को चुदवाती है तुम्हारी रैंड सहेली.

माधुरी अपनी छूट को सहलाते हुए बोली.

सावित्री- अरे ठीक से बता न रंडी शुरू से अचे से.

बिमला- हाँ भैंचोड़ कहीं की.

बिमला ने हँसते हुए बोलै और दोनों hi माधुरी के बगल में उसके एक एक तरफ आ कर बैठ गयी, सावित्री ने माधुरी का हाथ पकड़ उसे उसकी छूट से हटा दिया और खुद उसकी छूट सहलाने लगी तो माधुरी ने अपने दोनों हाथ एक एक तरफ रख लिए और अपनी दोनों संधानो की छूट सहलाते हुए अपने और अपने सेज भाई की चुदाई की दास्ताँ सुनाई.

माधुरी की बात पूरी होने तक तीनो hi उत्तेजित हो चुकी थी सावित्री और बिमला मधु की छूट को सहला रही थी तो माधुरी एक एक हाथ से दोनों की छूटों को.

माधुरी- ये था मेरा राज़ अब तुम लोग बताओ चाहे जैसा हो छोटा बड़ा.

बिमला- मेरा ऐसा अपना तो कोई नहीं है पर हाँ जब मैं छोटी थी तब का है.

सावित्री- क्या बताओ.

बिमला- जब छोटी थी तो कई बार देखा था मेरी अम्मा और मेरे मां को एक साथ.

माधुरी- सही में?

बिमला- हाँ कई बार जब भी मां आते थे अम्मा को नंगा कर के छोड़ते थे, तब तो मुझे समझ नहीं थी पर बड़े होने पर समझ आया.

माधुरी- ये सही है तुम भैंचोड़ न सही पर भैंचोड़ की बेटी तो हो.

सावित्री- हहहह सही में.

बिमला- और सही कहूं तो मां कई बार मुझसे भी चिपकते थे और बदन पर हाथ फेरते थे.

सावित्री – ाचा फिर कभी बात आगे बढ़ी.

बिमला- नहीं एक दिन अम्मा ने देख लिए और उन्हें खूब डांटा उसके बाद तो कभी हिम्मत नहीं हुई उनकी.

माधुरी- अरे बेचारी बन्नो बिना चूड़े रह गयी, नहीं तो तभी लुंड का मज़ा मिल जाता..

सावित्री- और नहीं तो क्या, क्या पता माँ बेटी एक साथ hi चुदती.

बिमला- धत्त्त कुछ भी बोलती हो. और ज़्यादा मज़े न लो अब तुम अपनी बताओ.

सावित्री- अरे हम क्या बताएं हमारे राज़ के आगे तो तुम्हारे कुछ भी नहीं

माधुरी- हैं अपने भाई से छुड़वाने से ज़्यादा बड़ा क्या होगा.

बिमला- अरे सावित्री जीजी बताओ न, संसय में मत रखो.

सावित्री- तो सुनो मैं अपने देवर से चुदती हूँ,

माधुरी- अरे सही में प्रदीप भाई साब से बढ़िया है ये तो, वैसे ये हमसे बढ़ी कहाँ थी, साडी भाभियाँ देवर से चुदती हैं.

सावित्री- अभी पूरा कहाँ सुना है तुमने, मैं देवर से चुदती हूँ. और देवरानी रिम्मी के पापा से.

ये सुनकर दोनों का hi मुँह ख़ुशी स्व थोड़ा खुला रह गया,

माधुरी- सही है यार दोनों भाई एक दुसरे की बीवियों पर चढ़ते हैं.

बिमला- हाँ बढ़िया है दोनों बराबर, पर जैसे तुम्हे पता है वैसे बाकि सब को नहीं पता चलता, दोनों भाइयों को कोई शक नहीं होता.

माधुरी- हाँ ये भी सोचने वाली बात है.

सावित्री- नहीं शक नहीं होता, क्यूंकि उन्हें पता है, कभी कभी चरों एक साथ चुदाई करते हैं एक hi बिस्तर पर, कभी कभी तो दोनों भाई मिलकर एक को hi छोड़ते हैं आगे पीछे से.

ये सुनकर तो दोनों का hi मुँह खुला का खुला रह गया.

माधुरी- क्या बोल रही हो यार सावित्री क्या मस्त नज़ारा होता होगा न.

माधुरी ने तेज़ी से दोनों की छूट में उंगलियां चलत्र हुए कहा क्यूंकि उसके लिए ये बात बेहद उत्तेजित करने वाली थी और वही हाल बिमला का था.

बिमला- हाय ढैय्या सही में कितना ाचा लगता होगा न , वैसे जीजी तप तुमने भी एक साथ दो लुंड लिए होंगे आगे पीछे से?

सावित्री – हाँ बहुत बार.

बिमला- कैसा लगता है,

बिमला ने शरमाते हुए पुछा.

सावित्री- ये समझ लो की जितमा मज़ा चुदाई में आता है न उसका कई गुना मज़ा बढ़ जाता है, एक बार दोहरी चुदाई करवाली तो बार बार करवाने को मन करता है.

माधुरी- अह्ह्ह्हम्म मुझे तो अभी दो लुंड मिल जाएं तो छुड़वा लूँ.

बिमला- ये तो है जीजी आज इतनी गरम हो गयी हूँ की खड़ा लुंड मिलजाए उसपर कूदने लगूंगी.

सावित्री- अपने दामाद के भी?

बिमला- धत्त क्या बोल रही हो बेटे जैसा होता है दामाद.

माधुरी- तो क्या हुआ भाई से चुद सकते हैं तो दामाद क्यों नहीं.

सावित्री- और क्या सोच के देखो एक hi लुंड बेटी की छूट और माँ की छूट दोनों में जायेगा तो कैसा लगेगा.

बिमला को ये सुणरे hi कुछ हुआ तो पर उसने बात झटक दी और बोली- तो तुम छुड़वा लो अपने दामाद से.

माधुरी- हाँ ये भी बात सही है पहले तुम hi करके दिखाओ.

सावित्री- हम तो तैयार हैं अगर दामाद जी तैयार हो तो हमारी टंगे खुली हैं उनके लिए.

माधुरी और बिमला दोनों hi साथ में बोली- रंडी कहीं की.

सावित्री – एक बात बताएं असली मज़ा रंडी बैनर में hi है, मज़े से चुदाई करवाओ और मज़े दो भी,

बिमला- पर समाज के हिसाब से ये गलत है न.

सावित्री- अरे माँ छुड़ाए समाज खुद को मज़ा आना चाहिए, अब तुम्हारी अम्मा को तुम्हारे मां के लुंड से मज़ा मिलता था तो मस्ती से चुदवाती थी समाज का सोचती तो सूखी रह जाती, वैस्व hi माधुरी या हमारी कहानी है.

बिमला और माधुरी दोनों hi इस बात पर सहमत दिख रही थी.

माधुरी- सही बात है उस समय भूरे ने जो मज़े दिए और अभी तक दे रहा है वो मैं कभी नहीं भूल सकती.

सावित्री- मैं तो कहती हूँ एक बार जवान लुंड का मज़ा भी लेकर देखो.

बिमला- अब इस उम्र में जवान लुंड कहाँ से मिलेगा,

सावित्री- अरे अंधी हो का? इतने लुंड हैं तुम कह रही हो कहाँ मिलेगा, रमन, चेतन, पंकज विनीत और कितने चाहिए.

माधुरी – धत्त्त ये तो अपने बच्चे हैं.

सावित्री- अपने भाई से छुड़वा सकती हो तो बेटे से क्यों नहीं, खून का रिश्ता तो दोनों से hi है,

बिमला- ये ज़्यादा हो जायेगा जीजी,

हालाँकि बिमला मन तो कर रही थी पर माँ बेटे की चुदाई का सोचकर hi उसका पूरा बदन सिहर उठा था वो सोच रही थी की कैसा होगा अगर ऐसा सच में हो तो..

सावित्री माधुरी की छूट में दो उंगलियां अंदर बहार करते हुए बोली – सोचो माधुरी रानी जब तुम्हारे बेटे का लुंड तुम्हारी छूट में घुसेगा तो कैसे बहेगी ये, जहाँ से बेटे निकले हैं उसी में बापिस घुसेगा तो क्या नज़ारा होगा.

ये सुनते हुए माधुरी की आँखें बंद हो गयी, और सावित्री की उंगलियों की वजह से उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी.

सावित्री – और तुम्हारे तो दो बेटे हैं एक साथ छूट और गांड दोनों में लुंड घुसेगा तो कैसा लगेगा मेरी माधुरी रंडी माँ, चुड़क्कड़ बेटो की रंडी माँ..

माधुरी तो आँखें बंद कर सावित्री की बातें सुन रही थी और उनके बारे में जो ख्याल आ रहे थे उससे उसका पूरा बदन थरथरा रहा था वहीं बिमला भी उन बातों की कल्पना कर रही थी और अपनी छूट में तीन उंगलियां एक साथ अंदर बहार कर रही थी, खैर सावित्री के बोलने और कल्पना का असर ये हुआ की माधुरी एक बार फिर से झड़ने लगी पूरा बदन अकड़ने लगा , कमर कई बार ज़मीन से उठ कर नीचे गिरी और उसकी छूट ने पानी बहा दिया, उधर बिमला भी खुद को झड़ने से नहीं रोक पाई और अपनी उँगलियों पर झाड़ बैठी.. झड़ने के बाद कुछ पल यूँ hi शांति से बीते सब के दिमाग में बहुत कुछ था और बोलना भी चाहते थे पर बोलते उससे पहले hi माधुरी का फ़ोन बजने लगा तो तीनो की तन्द्रा टूटी, माधुरी ने जल्दी से उठ कर फ़ोन उठाया तो देखा उसकर पति का था.

माधुरी- hello हाँ बोलो.

चरण सिंह- अरे सुनो कुछ खाने को लाना है क्या जलेबी वगेरा हम लोग आ रहे हैं तो सोचा तुम्हारे लिए ले आएं.

माधुरी – हैं हाँ हाँ ले औ ले आओ.

चरण Singh-theek है.

इतना कहकर फ़ोन रख देता है माधुरी फ़ोन काट कर बोलती है अरे ये लोग आ रहे हैं जल्दी से कपडे पहेँलो.

बिमला और सावित्री भी फुर्ती में उठाते हैं तीनो भगति हुई बाथरूम में जाकर खुद को साफ़ करती हैं फिर साफ़ कपडे पहनती हैं और फिर बिमला और सावित्री मिलकर पेशाब में सनी चद्दरों को पानी से धोकर के जल्दी से छत पर धुप में दाल आती हैं तब तक माधुरी दूसरी चादर बिछा कर बिस्तर लगा देती है. और ये सब करके तीनो आँगन में आ hi पति हैं की तब तक मर्द लोग भी आ जाते हैं इसकड बाद बातें और जलेबियाँ चलती हैं.

वहीं सुबह से hi जवानो की टोली पूरे मज़े करने के मूड में थी, तो झरने पर पहुँच सब लोग ठन्डे ठन्डे पानी से नहाने और खेलने लगते हैं, क्यूंकि ये झरना छोटा था और जंगल के बीच था तो कोई भूला बिसरा hi यहाँ आता था और आज भी यहाँ इनके अलावा कोई नहीं था इसलिए नसब खुल कर मज़े ले सकते थे और ले भी रहर थे.

भीगने से जल्दी hi औरतों के कपडे पारदर्शी होकर उनके बदन से चिपकने लगे थे और मर्दों के गीले पजामा और निक्कारो में उभर बनने लगे थे, चंचल और ख़ुशी तो फिर भी थोड़ा संभल कर खेल रहर थे पर रिम्मी और पूर्वी दोनों बहनें तो इरादा बनाकर आई थी मर्दों को पागल करने की और कर भी रही थी, वहीं चंचल जो की नहीं भी छह रही थी तब भी उसका बदन hi कुछ ऐसा था की भीगे कपड़ो में जो देख रहा था उसका लुंड अपने आप सर उठाने लगता था






पूर्वी रिमझिम ने तो जानकार पूरी तयारी hi की हुई थी इसलिए आने से पहले पूर्वी ने ऐसा ब्लाउज पहना था जो की ब्लाउज काम ब्रा ज़्यादा लग रहा था और वो और एक साड़ी पहन कर उसकी पानी में अदाएं लोगो को पागल कर रही थी, चेतन और रमन की तो नज़रें hi बार बार वहीं जा रही थी,





चंचल ने अपने पति को पूर्वी के बदन को घूरते गए पाया तो चुपचाप से उसके पास आई और बोली- मस्त लगती है न पूर्वी?

चेतन चंचल के इस सवाल से झेंप गया.. हुए बोलै- अरे वो कुछ नहीं तुम भी न.

चंचल – मैं भी न क्या है तो है, सोचो उसे छोड़ने में तुम्हे कितना मज़ा आएगा.

चेतन- क्या बोल रही हो,

चंचल- सही बोल रही हूँ और मैं तो कहती हूँ कोशिश करके देख लो क्या पता बात बन hi जाये.

चेतन- हाय बीवी हो तो तुम्हारे जैसी.

चंचल – वो सब ठीक है पर एक वडा करो.

Chetan-kaisa वडा.

चंचल- यही की तुम कोशिश करोगे और मौका मिला जिसके साथ भी उसे छोड़ोगे चाहे वो कोई भी हो.

चेतन- ये कैसा वडा ले रही हो.

चंचल- यही वादा है मैं चाहती हूँ मेरे पति का लुंड नयी नयी छूट का स्वाद चखे,

चंचल ने फुसफुसाते हुए कहा, उसके मन में ग्लानि थी की ससुर से छुड़वा कर उसने पति को धोखा दिया है इसलिए वो चाहती थी की उसका पति भी दूसरी छूटों का आनंद ले.

चेतन- ठीक है मेरी नटखट बीवी पर एक वादा मुझे भी चाहिए.

चंचल – क्या?

चेतन- यही की तुम भी पीछे मत रहना और अगर मौका मिले तो तुम भी टंगे खोलने से मत चूकना.

चंचल – धत्त, हम नहीं.

चेतन- क्यों नहीं जब हम कर सकते हैं तो तुम क्यों नहीं.

चंचल- तुम देख पाओगे हमें किसी और के लुंड से चुड़ते हुए.

चेतन का लुंड जो पूर्वी को देख पहले से hi खड़ा था वो अपनी बीवी की बातें सुन और कड़क हो गया.

चेतन- अगर तुम हमें किसी और की छूट छोड़ते हुए देख सकती हो तो हम क्यों नहीं देख सकते, हो सकता है साथ में hi करें.

चंचल- यवह तो बढ़िया रहेगा,

चंचल इससे आगे कुछ बोलती की ख़ुशी आई और चंचल को अपने साथ खींच ले गयी.

चेतन की नज़र अपनी पत्नी के साथ hi अपनी बहन ख़ुशी पर पड़ी जिसकी टीशर्ट भी भीगी होकर चिपक गयी थी और पारदर्शी हो गयी थी और उसके गोर पेट और नाभि की झलक दिखा रही थी साथ hi उसकी छूछीयो का उभर और आकर दोनों hi टीशर्ट में साफ़ पता चल रहे थे,






ये सोचकर तो चेतन के लुंड में और तनाव आ गया पर उसने अपने दिमाग को झटका की नहीं मैं अपनी बहन के बारे में ऐसे कैसे सोच सकता हूँ.

तो वो वहां से हैट कर विनीत रमन और पंकज के पास चला गया जहाँ वो लोग मस्ती कर रहे थे और तिरछी निगाहों से औरतों को निहार रहे थे.

पंकज- यार सब मज़ेदार है बस चिल्ड बियर और होती तो मज़ा आ जाता.

रमन- अरे मरवाओगे क्या साडू साहब औरतों ने सुन लिए तो.

पंकज- अरे छुट्टी पर आये हैं यार मज़े लेने के लिए इतनी छूट तो औरतों को हमें देनी चाहिए.

चेतन- तुम भी न देख कर तो बोलो तुम्हारा साला खड़ा है बगल में.

चेतन ने विनीत की और इशारा करते हुए हँसते हुए कहा.

पंकज- अरे ये साला काम दोस्त ज़्यादा है इसकी हमारी खूब जमती है.

विनीत – हाँ जीजा हमारी टेंशन मत लो तुम लगाओगे तो एक दो हम भी पि लेंगे दीदियों से छुपकर.

चेतन- हाहाहा ये तो हमारी केटेगरी का hi निकला.

पंकज – और क्या सब एक hi केटेगरी के होते हैं बस ज़रुरत होती है उस इच्छा को बहार लेन की.

रमन- अरे ज्ञानी बाबा भाई साब तुम.

पंकज- अरे ज्ञानी की बात नहीं है, तुम्हे क्या लगता है हमारी बीवियां पुराने ख्यालों की हैं, अरे सही मौका मिलता है तो हमें भी पीछे छोड़ देती हैं.

रमन और चेतन दोनों hi अपने अपने अनुभव के अनुसार इस बात पर सहमत होते दिखे.

चेतन- बिलकुल सही ये तो मैं मंटा हूँ.

पंकज- वही तो छुट्टी मानाने आये हैं तो अचे से मानते हैं न .

रमन- कोशिश करेंगे इसे भी पूरा करने की.

खैर खूब खेल कूद के बाद सब बापिस घर लौट आते हैं शाम को एक बार फिर पूरे घर में चहल पहल थी, शाम का खाना होता है, इसके बाद तीनो समधी थोड़ा टहलने के लिए बहार निकल जाते हैं,

चरण सिंह दोनों को थोड़ा गाओं के बहार की और ले जाता है और एक घर के सामने जाकर रुक जाता है…

चरण सिंह- अरे तुम लोग तब तक यही घूमो मैं ज़रा पुत्तन से बताई का थोड़ा हिसाब लेना है.

यव कह अंदर चला जाता है वहीं उदयवीर और सूजन सिंह बहार बातें करते हुए टहलते रहते हैं.

वहीं जवान मर्दों का थोड़ा अलग hi प्रोग्राम था, खाने के बाद रमन, पंकज चेतन और विनीत गाड़ी लेकर निकले होते हैं और अभी गाओं के बहार एक खेत के पास गाड़ी लगाकर चारो लोग ठंडी ठंडी बियर का आनंद ले रहे होते हैं.

रमन- सबसे पहले hi बोल रहा हूँ हल्का हल्का हाथ रखना घर भी जाना है पता चल गया तो बवाल हो जायेगा.

पंकज- हाँ भाई बस सुरूर के लिए पीना है धुत्त नहीं होना है.

चेतन- हम तो हमेशा hi इतनी hi पीते हैं की बाद में कहीं उल्टियां न मरते फिरें.

विनीत – अरे जीजा एक दो बियर में कुछ नहीं होता.

रमन- नहीं बीटा इतनी hi बहुत हैं. हद से हद दो.

चेतन- अरे यार हमें तो मूट आ गया अभी करके आते हैं.

विनीत- मैं भी चलता हूँ जीजा मुझे भी आ रहा है,

विनीत और चेतन चले जाते हैं तो पंकज रमन से कहता है.

पंकज- यार रमन कुछ मज़ेदार करना चाहिए हम देसी लोग न एन्जॉय नहीं करते सही से.

रमन- बियर तो पिलाड़ी भैया और क्या एन्जॉय करना है बताओ तो सही.

पंकज – अरे बियर की बात नहीं यार आज कल मॉडर्न लोग कितने मज़े करते हैं तुम तो शहर में रहते हो तुम्हे पता होगा,

रमन- हर तरह के मज़े होते हैं भैया.

पंकज – पार्टियां होती हैं जहाँ जोड़े खूब एन्जॉय करते हैं ऐसा सुना है मैंने.

इतने में hi चेतन और विनीत आ जाते हैं तो वो बात वहीं रुक जाती है पर रमन कुछ सोच में पद जाता है…

बियर का प्रोग्राम ख़तम कर सब बापिस आ जाते हैं तब तक तीनो संधियों की तिकड़ी भी लत चुकी थी इसलिए चरों hi बिना ज़्यादा बात किये नहीं तो पकडे जाने का दर था इसलिए अपने अपने कमरे में चले जाते हैं.

आज तीनो hi समधी दोपहर की बातों से और आगे की योजना की वजह से काफी उत्तेजित थे तो कमरे में पहुँचते hi अपनी अपनी बीवियों पर चढ़ने को तैयार हो जाते हैं, पर उनकी पत्नियां जो उनसे भी दो कदम आगे थी और घर में क्या क्या खेल खेल चुकी थी आपस में वो उनसे भी ज़्यादा उत्तेजित होती हैं. अलग अलग कमरों में कुछ कुछ मिलते जुलते hi दृश्य चल रहे होते हैं.

चरण सिंह ने माधुरी को घुसते hi दबोच लिए होता है और उसके कपडे उतरने लगते हैं अब माधुरी भी चरण सिंह से ज़्यादा उत्तेजित थी इसलिए वो भी पूरा साथ देती है

चरण सिंह नीचे लेते होते हैं और माधुरी उनके लुंड को अपनी छूट में लेकर उछाल रही होती है चरण सिंह बीवी की उछलती छातियों को दबाते हुए सिसकियाँ लेते हैं.

चरण सिंह- अह्ह्ह्ह ऐसे hi अपने चूतड़ों को उछाल अह्ह्ह क्या चूतड़ हैं तेरे मोठे मोठे.

माधुरी- हाँ जी अह्ह्ह्ह तुम्हारा लोढ़ा कितना मज़ा दे रहा है मुझे अह्ह्ह्हह्हह.

चरण सिंह- मज़ा तो हमेशा hi देना चाहता है ये पर तू hi न जंव क्यों संस्कारी बनने के चक्कर में दूर भगति थी इससे.

माधुरी- अह्ह्ह्ह जी अब नहीं भागुंगी अब जब कहोगे तब ये लोढ़ा अपनी छूट में ले लेगी ये रंडी.

चरण सिंह अपनी बीवी से रंडी शब्द सुन कर थोड़ा हैरान हो गए साथ hi उत्तेजित भी

चरण सिंह- क्या कहा तूने कौन है तू.

माधुरी को भी पति से ऐसी बातें करने में मज़ा आ रहा था और वो जानती थी की उसकद पति को भी मज़ा आ रहा है इसलिए और मज़े के लिए बोली – हाँ जी रंडी हूँ मैं तुम्हारी, छोड़ो अपनी रंडी को, दिखादो मेरी छूट को इसकी औकात.

चरण सिंह जोश में आते हुए माधुरी की छूट में नीचे से धक्के लगते हुए बोले- अह्हह्ह्ह्ह ले रंडी भें की लोदी बहुत नाज़ है न तुझे अपनी छूट पर अह्ह्ह्ह अब बता कौन मालिक है तेरा.

माधुरी- जी तुम्हारा hi लुंड है इस छूट का मालिक और तुन मुझ रंडी के मालिक हो.

ये कह माधुरी थोड़ा ऊपर उठती है और चरण सिंह का लुंड उसकी छूट से निकल जाता है पर इससे पहले चरण सिंह कुछ समझते माधुरी उनका लुंड पकड़ कर अपनी गांड के छेड़ पर रख दोबारा नीचे हो जाती है एक सिसकी के साथ. चरण सिंह को जैसे hi ये एहसास होता है की जिस बीवी को गांड मरने के लिए मानना पड़ता था आज वो खुद से गांड में लुंड ले रही है वो खुश हो जाते हैं

चरण सिंह- ये हुई न रंडियो वाली बात, बता अब तो नखरे नहीं दिखाएगी छुड़वाने में.

चरण सिंह नीचे से उसकी गांड में धक्के लगते हुए कहते हैं.






माधुरी – अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह नहीं जी बिलकुल नहीं तुम्हारी रनडीईईईई हूँ जब चाहोगे छुड़वा लुंगी, जिससे कहोगे छुड़वा लुंगी.

चरण सिंह माधुरी की आखिरी लाइन सुन अचंभित हो जाते हैं क्या सच में माधुरी ने ये कहा.

चरण सिंह- क्या कहा तूने. फिर से बोल रंडी.

माधुरी- अह्ह्ह तुमहसृ रंडी अह्ह्ह्ह तुम्हारी रंडी जब कहोगे तब चुद जाएगी जिससे कहोगे उससे चुद जाएगी अह्ह्ह्ह.

बस इतना सुन्ना था की चरण सिंह खुद को संभल नहीं पाए और उनका लुंड पत्नी की गांड में धार के बाद धार छोड़ने लगा.

झड़ने के बाद माधुरी आगे झुककर पति के सीने पर सर रख कर लेट गयी. और दोनों के बीच बातों का सिलसिला शुरू हो गया.

वहीं बिमला और उदयवीर की शुरुआत इतनी जोशीली नहीं थी कमरे में घुसने पर उदयवीर ने सोचा की कुछ तो करना पड़ेगा नहीं तो कहीं बिमला कल की तरह hi दुसरे बिस्तर पर न सो जाये, इसलिए जल्दी hi अंदर घुसते hi उन्होंने अंदर से दरवाज़ा बंद कर दिया, और बिस्तर पर आकर बैठ गए.

बिमला बालों में तेल लगा रही थी.

उदयवीर बिस्तर पर बैठे उसे तेल लगते देख रहे थे और जैसे hi उसनर तेल लगाना पूरा किआ बोले- ऐ बिमला तनिक यहाँ आ न आज एक hi बिस्तर पर सोते हैं. दरवाज़ा बंद है.

बिमला तो पहले से hi इतनी गरम थी उदयवीर नहीं भी कहते तो भी वो बिना चूड़े नहीं मैंने वाली थी. इसलिए ये सुनकर बिमला उठी और मुस्कुराई और बोली- तुम चाहते हो हम एक hi बिस्तर पर सोएं जी?

उदयवीर – हाँ

बिमला- ाचा पर उससे पहले तुम अपनी आँखें बंद करो.

उदयवीर- क्यों.

बिमला- अरे करो तो.

उदयवीर – ाचा ठीक है पर तू भी न बताओ अपने पति से भी शर्माती हो.

बिमला- जब तक न बोलेन तब तक खोलना मत.

उदयवीर- ठीक है,

कुछ देर बाद बिमला कहती है आँखें खोलो हुए जब उदयवीर आँखें खोल कर देखते हैं तो हैरान रह जाते हैं.

सामने उनकी पत्नी बिलकुल नंगी कड़ी होती है बदन पर कपडे का एक रेशा तक नहीं, उदयवीर के लिए हैरानी की बात ये थी की बिमला चुदाई के दौरान भी बहुत काम hi होता था जो पूरी नंगी होकर चुदवाती थी ंशी तो बस साड़ी उठाई और टंगे फैला कर लेट जाती थी पर उदयवीर को तो आज बिलकुल नयी बिमला देखने को मिल रही थी.

उदयवीर – यह क्या बिमला रानी, तूने तो खुश कर दिया.

बिमला- तुम्हे ाचा लगा.

उदयवीर- बहुत.

बिमला- तो आगे क्या करना चाहोगे अपने हिसाब से या मेरी मर्ज़ी से.

उदयवीर – तू अपनी मर्ज़ी से बता.

उदयवीर ने उत्सुकता से कहा.

बिमला उदयवीर के पास चल कर आई एयर फिर पास आकर घूम गयी फिर आगे झुकी तो उसके बड़े चूतड़ उदयवीर की आँखों के सामने थे,

बिमला- तो मैं चाहती हूँ तुम पहले अपनी गरम जीभ से मेरी गांड छतो और फिर अपना तगड़ा मुसल जैसा लोढ़ा मेरी गांड में घुसा के, मेरी गांड मारो.

उदयवीर के तो होश hi उड़ गए क्यूंकि वो बीवी जिसने इतने सालो में कुछ गिनती के कई बार hi उसे गांड मरने दी थी, जो छूट लुंड जैसे शब्द बोलना तो दूर सुनती भी नहीं थी आज खुद से बोल रही थी.

उदयवीर- ये तू hi है न बिमला,

बिमला- हाँ मेरे राजा ये मैब hi हूँ तुंहारी बिमला तुम्हारी रंडी क्या तुम्हे मेरा ये रूप पसंद नहीं आया मेरे राजा.

उदयवीर- पसंद, अरे मैं आज इतना खुश हूँ तू पूछ मत हाय, वैसे ये नया बदलाव हुआ कैसे.

बिमला- सब मेरी नयी सहेलियों का कमाल है.

उदयवीर- मुस्कुरा कर तेरी नयी सहेलियों ने ऐसी क्या जड़ी बूटी पिलाड़ी तुझे.

बिमला इस पर मन hi मन बोली की जड़ी बूटी तो नहीं पर दोनों ने तुम्हारी बीवी को अपना मूट ज़रूर पिलाया है और ये उसी का कमाल है.

बिमला- अब बातें hi करोगे या मेरी गांड भी चाटोगे?

उदयवीर इतना सुनते hi अपना मुँह उसके चूतड़ों में घुसा देते हैं.

और इसके बाद इस कमरे में भी चुदाई का घमासान शुरू हो जाता है…






सावित्री और सूजन सिंह तो वैसे भी रोज़ की तरह लगे हुए थे, पर उनके साथ विनीत भी था जो अपनी प्यारी तै और ताऊजी का साथ दे रहा था साथ hi दोनों एक दुसरे के साथ आज के कार्यक्रमों को साझा कर रहे थे.





ख़ुशी अपने रमन भैया के बिटर में लेती हुई थी पर उसने आज पहले hi भैया भाभी को बोल दिया था की वो थक गयी है तो वो जल्दी सोयेगी, वो इस समय कमरे में अकेली सो रही थी, क्यूंकि रमन और रिमझिम दोनों छत पर थे..

रमन- क्या लगता है करना चाहिए.

रिम- मुझे कोई दिक्कत नहीं है बल्कि उस्सुक्ता hi हो रही है.

रमन- कुछ गड़बड़ तो नहीं होगी? दर लग रहा है.

रिम्मी- किस्से? मेरा मतलब कौन कर सकता है गड़बड़.

रमन- कोई भी.

रिम्मी- मेरी बहन और जीजा के लिए तो बेफिक्र रहो वो बहुत कूल हैं.

रमन – तो बचे भैया भाभी,

रिम- भाभी भी नहीं लगता कुछ कहेंगी.

रमन – कहेंगे तो भैया भी नहीं.

रिम- फिर क्या दिक्कत है.

रमन- ठीक है फिर पक्का करते हैं. और ये कह कर वो फ़ोन निकल कर कॉल लगता है- हाँ जाग रहे हो क्या?


इसके थोड़ी देर बाद चेतन और चंचल के कमरे में तीनो जोड़े होते हैं और बिस्तर पर बैठे होते हैं.

चेतन- अब बता भाई सब आ गए किसलिए बुलाया है सबको.

पूर्वी- हाँ जीजा बताओ.

रमन- ाचा सुनो तो जैसा की सब लोग जानते हो की हम यहाँ छुट्टी मानाने और एन्जॉय करने आये हैं, हैं न?

सब हाँ में जवाब देते हैं.

रमन- बिलकुल सही तो फिर हर रोज़ की तरह सोने से ाचा है हम थोड़ा एन्जॉय और कर लें. और उसी के लिए मैंने सब को बुलाया है.

पंकज- ाचा पर एन्जॉय कैसे करेंगे वो तो बताओ.

रमन- एक खेक खेलकर.

चंचल – का भैया इतनी रात को सब को जगाया खेल खेलने को.

रिम- सोने वाली तो तुम वैस्व भी नहीं थी जीजी, और खेल hi खेल रही होगी ये नहीं तो कोई और.

रिमझिम की बात से सब हंसने लगते हैं चंचल शर्मा जाती है और बोलती है – धत्त्त बहुत बोलती है तू, बेशरम.

रिम्मी- ाचा तुम करो तो कुछ नहीं हम बोल दें तो बेशरम.

चंचल – ाचा भैया तुम बताओ का खेल है नहीं तो ये मुझे चिढ़ाती रहेगी.

रमन- हाँ ध्यान से सुनो ये कोई बच्चो वाला खेल नहीं है,

पूर्वी- तो क्या बड़ों वाला है?

रमन- सही पकडे हैं साली साहिबा बड़ों वाला hi है. और इसमें बहुत साडी चीज़ें होती है बहुत कुछ करना पद सकता है जो शायद सोचा न हो तो पहले hi सोच समझ लो की खेलना चाहते हो की नहीं.

चंचल – तुम तो खेल के नाम पर डरा रहे हो भैया.

रमन- अरे भाभी डरा नहीं रहा मैं बस चाहता हूँ की अगर खेलें तो अचे से खेलें नहीं तो नहीं, वो ाचा नहीं लगता न की बीच में बोले कोई मैं ये नहीं करूँगा, मैं वो नहीं करुँगी.

पंकज- कुछ भी करना पद सकता है मतलब कुछ भी.

रमन- हाँ थोड़े अटपटे और वयस्क कार्य होंगे तो सोच समझ लेना, बस इतना समझो की खेल के लिए शर्म वगेरा छोड़ के बैठना पड़ेगा अब आप लोग बताओ की खेलना है या नहीं.

सब एक दुसरे की और देखने लगते हैं सबसे पहले रिमझिम बोलती है- मैं तैयार हूँ, उसके बाद रमन भी बोलता है- मैं तो पहले से hi हूँ.

अगली आवाज़ पंकज की होती है और फिर पूर्वी की दोनों हाँ बोलते हैं अब बचते हैं चेतन और चंचल, जो एक दुसरे को देखते हैं फिर चेतन हाँ में इशारा करता है तो चंचल भी हाँ बोल देती है.

रमन- चलो सब लोग राज़ी हैं तो खेल इस तरह है ये कह कर वो एक थाली बिस्तर के बीच में रख देता है और कहता है सब इसको घेर कर बैठ जाओ .

सब उसकी बात मान बैठ जाते हैं.

रमन फिर अपनी जीभ से एक पेन निकलता है और उसे थाली के बीच में रखता है और पेन को थाली में घूमता है जो बहुत तेज़ घूमता है फिर कुवह पल बाद रुक जाता है.

पूर्वी- जीजा यही खेल है पेन को नाचने का?

सब हँसते हैं और रमन हँसते हुए जवाब देता है- नहीं साली जी, खेल ये है की जैसे हम थाली को घेर के बैठे हैं, ऐसे हु बैठेंगे और पेन को थाली में घुमाया जायेगा जिस पर भी पेन की नोक आ कर रुकेगी उसकी बरी होगी जिसे जो भी काम लिखा होगा वो करना होगा…

पंकज- और ये काम लिखे कहाँ होंगे?

रमन – यहाँ मेरे फ़ोन में पूरी लिस्ट है, लो पंकज भैया काम पढ़के बताना तुम्हारी ज़िम्मेदारी है ऊपर से नीचे की और बढ़ना है और कोई ऐसा काम हुआ जिसमे साथी की ज़रुरत है तो जो पेन के दुसरे सिरे की और बैठा होगा वो साथी होगा. साथ hi हर बरी के बाद जगह बदल टी रहेंगी ताकि एक hi साथी बार बार न मिले.

पूर्वी- अरे ऐसा तो हमने फिल्मो में देखा है पर वो बोतल घूमते हैं. मज़ा आएगा.

Rim-haan पूर्वी वही खेल है.

चंचल – लग तो मज़ेदार रहा है.

चेतन- अब औरतो को ाचा लग रहा है तो ज़रूर खेला जाये.

पंकज – हाँ पर बीच में कोई ये नहीं कहेगा की ये हम नहीं कर रहे हैं न भाई रमन.

रमन- हाँ ये तो पहली hi शर्त राखी थी मैंने, तो शुरू करें?


सब एक साथ हाँ कहते हैं उत्सुकता से सब के मन में यही होता है की क्या होगा इस खेल में, बैठने का क्रम कुछ इस प्रकार होता है की रमन के सीधे हाथ पर पंकज उसके बगल में पूर्वी पूर्वी के बगल में चंचल और चंचल के बगल में चेतन और चेतन के बगल में रिमझिम और रिमझिम के बगल रमन इसका मतलब जो आमने सामने होते हैं वो इस तरह से थे, रमन- चंचल, पंकज- चेतन और पूर्वी रिमझिम. रमन पेन को घूमता है और पेन सबसे पहले आ कर रुकता है….

विल बे कॉन्टिनोएड
 


चुदाई का सिलसिला यूँ hi चला सभ्य की गांड के बाद नीलेश ने ख़ुशी ख़ुशी अपनी साली की कासी हुई गांड भी मरी और शालू तो पहली बार अपने जीजा से गांड मरवाने के एहसास से बेहद उत्तेजित हो गयी और लगा की मज़े से पागल हो जाएगी इसकड बाद दोनों गदराई बहनें नीलेश से चिपक कर सो गए ये सोचते हुए की इस बदले हुए रिश्ते का उनकी ज़िन्दगी पर क्या असर पड़ने वाला है. अब आगे…


अपडेट 185

चोदामपुर

सुबह हमेशा की तरह सभ्य की आँख सबसे पहले खुली.. धीरे धीरे आँखें खोल अगल बगल देखा तो पाया पूरी नंगी थी बगल में देखा तो पति को भी नंगा सोता पाया हालाँकि उन दोनों का साथ में नंगे होकर सोना कोई नयी बात नहीं थी पर नयी बात थी पति के बगल में सोती हुई उसकी बहन शालू जो की दोनों की तरह hi नंगी थी और अपने जीजाजी से चिपक कर सो रही थी,

सभ्य ने नज़र नीचे कर के देखा तो पाया नीलेश का लुंड सर उठाये खड़ा है उसे देख सभ्य के मन में ख्याल आया- ये तीनो बाप बेटे एक जैसे hi हैं, तीनो के लुंड कभी बैठते hi नहीं है, खैर खड़ा लुंड देख कर उसकी छूट के मुँह में थोड़ा पानी आया तो सभ्य ने उसे समझाया की सुबह है उठना ज़रूरी है काम हैं बहुत ये सोच सभ्य उठी साथ hi बिस्तर से उतर कर अपने कपडे पहनने लगी, कपडे पहनकर बिस्तर के दूसरी और आकर उसने शालू को भी जगा दिया और उसे उठा कर खुद बाथरूम में नित्यक्रिया के लिए घुस गयी जब बहार आई तब तक देखा नीलेश और शालू भी उठ चुके थे और जीजा साली का एक बेहद रोमांचक चुम्बन चल रहा था,

सभ्य- बस बस अब सुबह सुबह hi शुरू मत हो जाओ तुम लोग, उठ शालू कपडे पहन काम हैं बहुत आउट कर्मा के पापा तुम भी जाओ जानवरों के काम पड़े होंगे सरे.

दोनों उसकी और देख कर मुस्कुराने लगे..

सभ्य- ज़्यादा नयी नवेली जोड़ी मत बनो उठो दोनों लोग.

ये कहकर सभ्य कमरे से बहार आ गयी और आँगन में झाड़ू लगाने लगी, कुछ देर में शालू और नीलेश भी आ गए,

सभ्य- अरे शालू ज़रा कर्मा अनुज को भी उठादे.. अपने पापा की मदद करवा देंगे.

शालू- हाँ उठती हूँ जीजी.

नीलेश- अरे तुम चाय चढ़ा लो पीकर hi निकलूंगा.

सभ्य- हाँ रख रही हूँ बस दो मिनट में.

शालू कर्मा के कमरे में गयी दोनों को जगाने क्यूंकि जबसे शान्तो तै आई थी तबसे कर्मा अनुज साथ में hi सोते थे. पर शालू ने जब देखा तो कमरे में कोई नहीं था बिस्तर खली था उसनर सोचा ये दोनों सुबह सुबह कहाँ गए, वो ये सोचते हुए बापद आने लगी तो उसने सोचा संतो जीजी की तबियत देखूं अब ठीक है की नहीं, और ये सोच कर वो उनके कमरे का दरवाज़ा खोल कर अंदर घुसी तो जो सामने देखा उसे देख हैरान रह गयी.

वो चुपचाप मुड़ी और दबे कदमो से दरवाज़ा धक् कर बापिस चली गयी और आंगन में जा कर अपनी जीजी से बोली – जीजी आओ एक मस्त चीज़ दिखती हूँ.

सभ्य – क्या है बता तो सही.

नीलेश- हमें भी दिखाओ क्या मस्त चीज़ है.

शालू- आओ मेरे साथ चुपचाप.

ये कहकर वो बापिस संतो के कमरे की और चलदी तो सभ्य नीलेश भी उसके पीछे चल diye.darwaze पर पहुँच शालू ने मुँह पर हाथ रख शांत रहने का इशारा किआ और फिर सावधानी से हौले से दरवाज़ा खोल दिया तो नीलेश और सभ्य ने अंदर झांक कर देखा तो उन दोनों की भी आँखें बड़ी हो गयीं क्यूंकि सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था.

उनकी परम पूजनीय भाभी बिस्तर पर बिलकुल नंगी पड़ी हुई थी और उन्हें दोनों और से उनके बच्चे कर्मा और अनुज भी बिलकुल नंगे होकर सो रहे थे, कुछ पल तो तीनो यूँ hi घूरते रहे फिर सभ्य पीछे हटी और शालू को दरवाज़ा लगाने को बोलै शालू ने बापिस दरवाज़ा बंद कर दिया और तीनो बापिस आँगन में आ गए.

सभ्य- है दिया क्या hi बोलेन हम.

शालू- ये दोनों किसी को छोड़ेंगे भी की नहीं,

शालू ने हँसते हुए कहा.. नीलेश ने ये सुना और सोच में पद गए फिर बोले- अरे सही भी है जवानी में ये सब नहीं करेंगे तो कब करेंगे हम भी तो करते हैं.

शालू- मुझे तो संतो जीजी का लग रहा है बताओ वैसे बड़ी बनती हैं हमर बच्चा हमर बच्चा और रात में दोनों बच्चों से खूब चूड़ी होंगी.

शालू ने मुँह पर हाथ रख कर हँसते हुए बोलै तो सभ्य और नीलेश की भी हंसी निकल गयी,

नीलेश- ऐ हमारी भाभी का मज़ाक उदा रही हो तुम. हम उनकी बहुत इज़्ज़त करते हैं.

सभ्य- ाचा हूँ मज़ाक उदा रहे हैं और जो तुम्हारा उन्हें नंगा देख ये पाजामे में क्या उठ रहा है.

नीलेश नीचे देखते हैं तो सच में तम्बू बना होता है.

शालू- अरे जीजा अब अपनी भाभी की इज़्ज़त कहाँ गयी. जो उन्हें देख अपना पजामा उठा रहे हो.

शालू चिढ़ाते हुए कहती है..

सभ्य- अरे अब पता चला तुझे बेटे बाप पर hi जायेंगे न, इन्होने अपनी बहन नहीं छोड़ी वो तै को कैसे छोड़ देंगे. बस छूट दिखी नहीं की कर लिए लोढ़ा तैयार.

सभ्य और शालू दोनों मिलकर नीलेश को सुना रही थी, बेचारे को अपने बेटों के किये का फल भुगतना पद रहा था, खैर इन सब बातें सुनके उसके दिमाग में भी कई विचार घूम रहे थे पर अभी वो दोनों बहनो के मज़ाक भरे तनो को झेल रहा था.

खैर वो तो चाय का शुक्र था जो बन गयी और वो जल्दी से पीकर चलता बना, वहीं सभ्य कुछ सोचते हुए शालू से फुसफुसाते हुए बोली- तुझे ये संतो जीजी कैसी लगती हैं,

शालू- मतलब?

सभ्य- मतलब हमें कुछ ठीक नहीं लगती जैसे वो दिखती कुछ और हैं जबकि हैं कुछ और. हमें तो लगता है ज़रूर कोई कांड करने आई हैं वो यहाँ पर.

शालू- तो घर में रखे कहे हुई हो, कांड होने का इंतज़ार कर रही हो?

सभ्य- ाचा तो क्या क्रूज ऐसे hi जाकर बोल दूँ की निकलो हमारे घर से बिना किसी वजह.

शालू- ओफ्फो जीजी तुम भी न कभी कभी बिलकुल hi बौड़म पाने की बात करती हो, वजह है तो, इतना बड़ा काण्ड कर के पड़ी हुई हैं, तुंहरे दोनों बेटो के साथ और क्या वजह चाहिए.

सभ्य की अचानक से आँखें चौड़ी हो गयी,

सभ्य- हाँ ऋ ये तो मैंने सोचा hi नहीं वैसे भी हमारे बेटों के लुंड पर हमारा हक़ है.

ये कह दोनों चुपचाप ताली मरकर हंसी फिर सभ्य बोली- चल नाटक के लिए तैयार हो जा.

शालू- पर बच्चे?

सभ्य- वो कुछ नहीं बोलेंगे समझ दर हैं.

ये कह कर दोनों संतो देवी वाले कमरे की और गयी और फिर दरवाज़ा खोल कर खुद को तैयार कर दरवाज़े पर तेज़ी से हाथ मार्के सभ्य चिल्लाई – क्या हो रहा है ये?

सभ्य की आवाज़ सुनकर तीनो लोग हड़बड़ा कर उठे अनुज कर्मा और संतो देवी. अनुज कर्मा पहले तो घबरा गए थे पर माँ मौसी को देख थोड़ा शांत हुए. वहीं संतो के तो होश hi उड़े हुए थे उसे समझ नहीं आ रहा था अचानक हुआ क्या है बेचारी परिस्थिति जो समाजनीका प्रयास कर रही thi..Wohin सभ्य और शालू का नाटक चालू था.

शालू- तुम लोगो को शर्म नहीं आई तुम दोनों अपनी hi तै के साथ छे छही.

सभ्य- उन को शर्म तो बाद में आएगी जब इन्हे शर्म नहीं आई ित्मी बड़ी होकर घर की कैसे अपने भतीजो के साथ रासलीला मन रही हैं.

सभ्य ने सीधा तीर संतो देवी पर छोड़ा जो की बिलकुल hi चौंकी हुई बैठी थी,

शालू- कर्मा अनुज अपने कपडे उठाओ और निकलो यहाँ से तुमसु तो हम बाद में निपटेंगे, यही सिखाया है हमने तुम्हे? नाश्पीटों.

ये सुनते hi कर्मा अनुज अपने कपडे उठा कर भागे हालाँकि जानते थे माँ मौसी नाटक कर रही हैं, इसलिए साथ देना तो बनता था वहीं दोनों का जाते hi संतो देवी ने चादर से अपना बदन धक् लिए.

सभ्य- देखो तो अब कैसी शर्मीली बन रही हैं और अभी आधी उम्र से काम के भतीजो के साथ नंगी लेती थी तब शर्म नहीं आ रही थी.

शालू- जीजी तुम्हारी बड़ी इज़्ज़त करती थी पर तुमने कहीं का नहीं छोड़ा, बताओ अपने hi घर के बच्चे मिले थे तुम्हे.

सभ्य- इतनी hi गर्मी थी भोसड़े में तो रोड पर जाकर लेट जाती,

सभ्य जानती थी वो कुछ ज़्यादा hi आगे बढ़ रही है पर संतो देवी को भला बुरा कहने में और उसे गलियां देने में उसे सकूं मिल रहा था, वो जब आई थी तभी से सभ्य नहीं चाहती थी वो घर में रहे पर रिश्तों और समाज की बंदिशों में बंधी हुई थी पर आज उसे पूरा मौका मिला था. वहीं संतो देवी के पास कहने सुनने को कुछ नहीं रह गया था जैसे पकड़ी गयी थी उसमे अब कहने को कुछ रह hi नहीं गया था..

शालू- जीजी शांत हो जाओ बहार बात गयी तो बदनामी हो जाएगी.

सभ्य – क्या शांत हो जॉन, हम जीजी जीजी करते हुए सेवा करते नहीं थक रहे और ये देखो अपना रंडपना घर में hi मेरे बच्चों पर hi दिखा रही थी.

शालू- जीजी शांत हो जाओ

शालू भी सभ्य के साथ पूरा नाटक कर रही थी वहीं अनुज आउट कर्मा आँगन में खड़े हुए ये सब देख थोड़े असमंजस में थे.

सभ्य – इस रंडी ने शांत होने लायक छोड़ा कहाँ है, साली छिनार कहीं की अपने पति से मन नहीं भरा तो यहाँ चली आई गांड उठा कर, अगर इतनी hi गर्मी थी तो अपने बच्चों से चुदवाती न.

संतो इस बार गलियां बर्दाश्त नहीं कर पाई और बोली- सभ्य तू हद से आगे बढ़ रही है.

सभ्य- और तू? तूने तो साडी हदें पार कर दी रंडी कहीं की..

संतो- सभ्य..

शालू- जीजी शांत हो जाओ बस जो हो गया सो हो गया छिलके क्या फायदा, बहार पता चला तो अपनी hi बदनामी होगी.

सभ्य सुनकर थोड़ा शांत होती है फिर आगे आ कर संतो को देख कर कहती है- देखो जीजी अगर चाहती हो की तुम्हारा सम्मान इनकी नज़रो में बना रहे तो आज के आज कोई भी बहाना बनाकर ये गाओं छोड़कर इज़्ज़त से चली जाओ, नहीं तो फिर हमें बेइज़्ज़त करके निकलना पड़ेगा.

ये कहकर सभ्य बहार चली गयी और उसके पीछे शालू भी, जब दोनों बहार आई तो दोनों के चेहरे पर hi मुस्कान थी और दोनों एक दुसरे को ताली मार बड़ी खुश हुई, वहीं उन्हें आंगन में देखकर अनुज ने उन्हें इशारे से कमरे में बुलाया जहाँ कर्मा भी था,

दोनों के अंदर आते hi अनुज ने दरवाज़ा बंद कर दिया

कर्मा- माँ ये सब क्या था?

सभ्य- कैसा लगा मेरा नाटक?

अनुज- नाटक पर ये नाटक था किस लिए?

शालू- उन्हें यहाँ से भागने के लिए.

कर्मा – भागने के लिए समझा नहीं मैं.

सभ्य- अरे देख जबसे वो यहाँ आई थी मुझे ाचा नहीं लग रहा था और मन में शंका थी की कुछ गड़बड़ ज़रूर है और ये कोई न कोई काण्ड ज़रूर करेंगी, पर रिश्ते और समाज की वजह से कुछ नहीं कह सकती थी न hi यहाँ से भेज प् रही थी. पर आज मौका मिला..

अनुज- और तुमने चौका मार दिया.

अनुज ने अपनी माँ को बाहों में भरते हुए कहा.

कर्मा- अरे धीरे, अब नाटक किआ hi है तो पूरा तो करो.

शालू- मतलब.

कर्मा- अरे थोड़ा सा हम पर चिल्लाओ तो सही हम दोनों को दांतो तेज़ तेज़.

सभ्य- अरे हाँ.

ये कहकर सभ्य ने अनुज और कर्मा पर तेज़ तेज़ आवाज़ में चिल्लाना शुरू किआ शालू भी साथ में नाटक करने लगी, वहीं अनुज अपनी माँ की नकली दन्त सुनते हुए उसका पल्लू गिरा कर उसकी पेट को चूमने लगा साथ hi उसकी नाभि में जीभ घुसा कर चूसने लगा, सभ्य के लिए बेटे की हरकतों की वजह से चिल्लाना थोड़ा मुश्किल हो गया तो शालू ने उसकी जगह चिल्लाया. कुछ देर के बाद नाटक बंद हुआ तब तक अनुज ने अपनी माँ के ब्लाउज की खोल उसकी छूछीयो को बहार निकल लिए था और चूस रहा था वहीं कर्मा शालू मौसी के होंठों का रास ोी रहा था, इसी बीच कर्मा अनुज को शालू और सभ्य ने रात में शालू और उनके पापा की चुदाई की कहानी भी बताई जिस पर अनुज खुश होते हुए बोलै सही है अब पापा से हमें डरने की ज़रुरत नहीं.

कर्मा- अबे क्यों नहीं है पापा को अभी हमारे और मम्मी या मौसी के बारे में थोड़े hi पता है,

ये सब बातें हो hi रही थी की बहार के दरवाजे पर खटखट हुई तो सभ्य बोली- जाओ तुम देखो और अपना ब्लाउज बंद करने लगी..

कमरे का दरवाज़ा खोल दोनों भाई बहार निकल गए और अनुज ने दरवाज़ा खोला तो सामने मौसा जी थे.

अनुज और मौसा जी अंदर आये आंगन में जहाँ कर्मा पहले से hi था और शालू और सभ्य भी आ गए,

सभ्य- बड़ी देर तक सोये भैया.

शैलेश – हाँ भाभी वो बातें चलती रही तो लेट हो गए थोड़ा.

शालू- सिर्फ बातें hi चली या कुछ और?

शालू ने झड़ते हुए पूछा तो शैलेश घबरा गए उन्हें लगा कहीं उनके ममता और पल्ली के साथ के खेल का भन्दा तो नहीं फुट गया.

शैलेश – और और क्या चलेगा तुम भी न. कुवह नहीं चला.

शालू- अरे रहने दो हमें सब पता है.

शैलेश तो घबरा hi गए- कक का पता है तुम्हे.

शालू – यही की बिना बोतल खोले कहाँ रात बीती होगी.

शैलेश की जान में जान आई- बोतल हाँ हाँ बोतल, हाँ वो थोड़ी सी पि ली थी.

शैलेश को यूँ देख अनुज कर्मा मुस्कुरा रहे थे.

सभ्य – बस कर शालू बेचारे आये नहीं की तू मास्टरनी बनने लगी, जा चाय लेकर दे.

शैलेश- नहीं भाभी चाय तो पी कर आये हैं अरे हाँ सुनो कपडे निकल देना हमें आज जाना होगा, बुलाया है ड्यूटी पर दो तीन के लिए.

शालू- ऐसे अचानक.

शैलेश- हाँ शाम तक पहुंचना है.

इतने में संतो देवी भी कमरे से निकल कर आँगन में आ गयी तो सभ्य ने उन्हें देख अपना मुँह सिकोड़ लिए,

शैलेश – अब कैसी तबियत है भाभी कल से सो hi रही हो.

संतो- अब ठीक है भैया, अरे हमें भी आज गाओं जाना पड़ेगा, तुम्हारे भाई साब का फ़ोन आया रहा.

संतो ने बातें बनाते कहा जिसे सुन सभ्य शालू खुश हुई मन hi मन…

शैलेश- ाचा पर तबियत ठीक है न तभी है पाओगी.

संतो- हाँ बिलकुल ठीक हैं.

शैलेश – तो ठीक है हमारे साथ hi चल लेना हम शहर तक छोड़ देंगे.

संतो- अरे नहीं देर से निकलेंगे तो देर होगी पहुँचने में बस अभी नाहा धोकर निकलेंगे.

शैलेश – ठीक है भाभी…

खैर इसके बाद कर्मा अनुज बाघ ने चले गए शैलेश नहर धोने में लग गए,

और औरतें घर के काम निपटने में थोड़ी देर में नीलेश घर लौटे तो संतो अपने थैले बंधे तैयार थी जाने के लिए.

नीलेश- अरे भाभी ये कहाँ चलदी अचानक.

संतो- अरे गाओं जाना पड़ेगा तुम्हारे दादा की थोड़ी तबियत ख़राब है.

नीलेश – का क्या हुआ सब ठीक है न?

संतो- कुछ ज़्यादा नहीं थोड़ा बहुत है अब फ़ोन आया रहा तो बुला रहे थे.

नीलेश- अगर तबियत ख़राब है तो ठीक है चली जाओ पर जल्दी आना बापिस.

संतो- हाँ हाँ हम hi आएं तुम न आ जाना.

नीलेश ये सुन शांत हो गए फिर बोले- अरे चलो हम अड्डे तक छोड़ आते हैं, शालू मोटरसाइकिल की चाभी लाना तो.

हालाँकि नीलेश को भी थोड़ा अजीब लगा की आज सुबह hi जो उन्होंने देखा फिर उसके बाद अचानक से इनका जाना, कर्मा अनुज से पूछताछ करनी पड़ेगी.

जब तक नीलेश मोटरसाइकिल निकल रहे थे तो सभ्य आई और रसम निभाते हुए संतो के पेअर छुए तो संतो ने झूठी हंसी हँसते हुए उसके सर पर हाथ फिराया और जैसे hi सभ्य कड़ी हुई संतो ने वैसे hi मुस्कुराते हुए फुसफुसा कर कहा- ये अपमान तुझे बहुत भरी पड़ेगा.

सभ्य ने उसकी धमकी सुन वैस्व hi मुस्कुराते हुए जवाब दिया- इस बाद आदर से भेज रही हूँ, अब गाओं के पास भी आई न तो धक्के मार के निकलूंगी.

नीलेश – आओ भाभी बैठो..

इसके बाद संतो जाकर मोटरसाइकिल पर बैठ गयी और नीलेश लेकर आगे बढ़ गए, उनके जाते hi शालू ने दरवाज़ा बंद किआ और खुश होते हुए सभ्य से कहा- चलो जीजी बाला ताली.

सभ्य- हाँ रंडी आखिर में भी धमकी देकर गयी है की ये भरी पड़ेगा.

शालू- जीजी मुझे लगता है शांत तो नहीं बैठेगी वो कुछ न कुछ ज़रूर करेगी.

सभ्य- अगर कुछ किआ न तो इस बार बाल पकड़ कर रोड पर घसीटूंगी इसे तो,

उधर नीलेश संतो को बस में बिठा बापिस बाघ की तरफ आये जहाँ कर्मा अनुज खेतो में पानी लगा रहे थे, पर बाघ के बहार hi उन्हें रज्जो दिखाई दी जिसने नीलेश को आते देखा तो रोक लिए.

रज्जो- भाई साहब रुको..

नीलेश- कटा हुआ रज्जो सब ठीक तो है न?

रज्जो- भाई साहब कुछ बात करनी है तुमसे.

नीलेश- हाँ बोलो न.

नीलेश ने मोटरसाइकिल को बंद करते हुए कहा.

रज्जो- भाई साहब बात कुछ ऐसी है. की.

ये कहकर वो चुप हो गयी.

नीलेश- क्या हुआ रज्जो सब ठीक तो है न, और सकुचा काहे रही हो खुल के बोलो.

रज्जो- भाई साहब बात कर्मा और नीतू के बारे में है,

नीलेश- क्या बात है उनके बारे में.

रज्जो- वो दोनों कुछ ज़्यादा hi करीब आने लगे है भाई साहब, कई बार तो हमने अकेले में उन्हें मिलते हुए देखा है, फ़ोन पर बात करते हुए, मोटरसाइकिल से न जाने कहाँ कहाँ जाते हैं,

नीलेश – तुम कहना क्या चाहती हो रज्जो.

रज्जो- यही की भाई साहब उन डुबो को साथ देख कर ये नहीं लगता की ये भाई बहन हैं, उनकी हरकतें उससे कुछ ज़्यादा की हैं, और तुम्हे पता है दोनों hi जवान हैं ऐसे में कुछ उंच नीच हो गयी तो बात फैलते देर नहीं लगती,.

नीलेश- ाचा सवह में ऐसा है?

रज्जो- हाँ, तुम्हे पता है भाईसाब की अगर एक बार लड़की का नाम ऐसे उछाल गया तो ब्याह करना मुश्किल हो जाता है. लोग न जनर क्या क्या बातें बनाते हैं.

नीलेश- अरे नीतू हमारी बिटिया है कोई अगर कुछ उसके बारे में गलत बोलेगा तो सेल की जवान खींच लेंगे, और रही बात बच्चों की तो तुम चिंता मत करो हम कर्मा से बात करेंगे और उसे समझा देंगे.

रज्जो- हाँ भाई साहब ये करना बहुत ज़रूरी भी है, बच्चे अपने hi हैं अब अगर थोड़ा गलत चल रहे हैं तो सही रस्ते लाना हमारा hi काम है.

नीलेश- हम समझा देंगे, और अगर कुछ भी बात हो तो सीधा हमसे hi करना क्यूंकि अगर बात किसी को पता चली तो तुम जानती हो जितने मुँह उतनी बातें.

रज्जो- हाँ भाई साहब हम सीधे तुमसे hi कहेंगे.

इसके बाद नीलेश आगे बढ़ जाते हैं वहीं रज्जो को थोड़ी शांति मिलती है, वो कर्मा से बात नहीं करना चाहती थी क्यूंकि जो कुछ भी उसके और कर्मा के बीच हुआ उसके बाद वो कर्मा के सामने जाने से कटरा रही थी बात करना तो दूर था.

नीलेश बाघ में जाकर कर्मा अनुज से मिलते हैं और उनसे संतो के बारे में पूछते हैं, अनुज ये सुन घबरा जाता है और नज़रें झुका लेता है क्यूंकि वो अपने पापा से कर्मा जितना नहीं खुला था.

नीलेश- तुम्हारा और भाभी का कबसे चल रहा है बताओ तो सही.

कर्मा- पापा मैंने तो बस रात को hi किआ था उससे पहले तै को पटाया तो अनुज ने hi था.

नीलेश- क्यों अनुज कैसे और कब शुरू हुआ.

अनुज नज़रें झुकाये खड़ा था उसे लगा आज सहमत आई है..

नीलेश- अरे क्या हुआ बता न दर क्यों रहा है..

अनुज- वो पापा.

कर्मा अनुज को देख हंस रहा था.

नीलेश समझ गए की कर्मा की तरह अनुज उनके साथ इतना खुला नहीं है इसलिए दर रहा है.

नीलेश- देख अनुज घबराने की ज़रुरत नहीं है हमें पता है तुम दोनों के बारे में सब कुछ, और हमारे बारे में भी तुझे पता है तो जैसे कर्मा मेरे साथ खुला है वैसे तू भी रह सकता है.

अनुज- पता है पापा फिर भी थोड़ा अजीब लगता है.

नीलेश- कुछ अजीब नहीं है बीटा इतना मत सोच.

कर्मा- अबे क्या बहु की तरह शर्मा रहा है बता न.

खैर अपने पिता और भाई के ज़ोर डालने पर अनुज ने तै को पटाने वाली बात पापा को बताई

नीलेश- ाचा फिर कर्मा तू कबसे मतलब कल रात को क्या हुआ?

कर्मा- अरे पापा मुझे अनुज ने बताया था, तो मैंने सोचा मैं भी तै की छूट कक स्वाद चख कर देखता हूँ.

नीलेश- फिर?

कर्मा- फिर क्या वही सबसे पुराणी योजना अनुज पहले गया और इसने दरवाज़ा बस फेर के रखा कुण्डी खुली राखी, थोड़ी देर बाद मैं अंदर गया तो तै इसके ऊपर कूद रही थी, हमारी योजना तो थी की तै मुझे देख दर जाएँगी फिर मैं भी उन्हें छोड़ने की शर्त रखूँगा पर तै ने डरना तो दूर मुझे देख कर बोली- आजा बचुआ तू भी आजा अपनी तै के पास. बस अब खुली छूट की दबत कौन छोड़ता है पूरी रात दोनों तरफ से बजाय हमने तै को.

अनुज- काफी खेली खायी लगी तै तो मुझे.

कर्मा- हाँ कोई भी औरत पहली बार दो लुंड लेती है तो थोड़ी तकलीफ तो ज़रूर होती है उसे पर तै को देखकर लग रहा था ये तो उनका रोज़ का काम हो.

नीलेश- वो सब तो ठीक है फिर ये अचानक से जाना क्यों हुआ उनका.

कर्मा – ये तो माँ और उनकी बात है तो माँ से hi पूछना.

नीलेश- ाचा, चल ठीक है और कितना रह गया पानी लग्न.

कर्मा- बस एक क्यारी रह रही है 5-10 मिनट में हो जायेगा.

नीलेश – ठीक है लगाके घर आ जाना खाना पीना खा लो और मैं चलता हूँ.

कर्मा- ठीक है.

नीलेश जाने को हुए फिर बोले- अरे तेरा और ये नीतू का क्या चक्कर है?

कर्मा- मेरा और नीतू का चक्कर?

अनुज भी ध्यान से देखने लगा

नीलेश – हाँ रज्जो मिली थी बोल रही थी कर्मा को समझाओ ये और नीतू का कुछ चल रहा है, कुछ गलत हो गया तो बदनामी हो जाएगी वगेरा वगेरा.

कर्मा- अरे कुछ नहीं पापा, उनके मन में भ्रम है की मेरा और नीतू का चक्कर चल रहा है इसलिए.

नीलेश- ये भ्रम है या सच्चाई.

कर्मा- चक्कर तो नहीं है वो मुझे भैया बोलती जय.

नीलेश मुस्कुराते हुए- भाई तो तुझे पल्ली पूर्वी रिमझिम सब बोलती हैं.

कर्मा ने भी हंसकर बत्तीसी दिखते हुए जवाब दिया बस जैसा उनके साथ है वैसा hi नीतू के साथ है पर अभी तक कुछ हुआ नहीं है

अनुज- मतलब कुछ भी नहीं हुआ?

कर्मा- अबे मतलब चूसै वगेरा हुई है चुदाई नहीं.

अनुज- अरे जल्दी करो फिर मुझे भी मिले एक और नयी छूट.

अनुज ने उत्साहित होकर बोलै फिर अपने पापा को देख झेंप गया,

नीलेश- अरे मत शर्मा, तुम दोनों में मेरे hi लक्षण हैं.

कर्मा- नयी छूट का इंतेज़ाम तो हो चूका है पर नीतू की नहीं रज्जो चची की.

नीलेश – मतलब.

फिर कर्मा दोनों को बताता है की कैसे उसने रज्जो को छोड़ लिए और इसीलिए वो उससे नज़रें बचती फिर रही है.

नीलेश- सही किस्मत वाला है रे कर्मा, रज्जो पर तो न जाने कब से नज़र है मेरी, उसकी छुछियां और गांड देखकर अरमान जाग जाते हैं और तूने मज़े भी ले लिए उसके.

अनुज अपने पापा की ऐसी बातें सुन बहुत खुश हो रहा था.

कर्मा- जल्दी hi तुम्हारे अरमानपूरे हो जायेंगे पापा एक बार तो चुद चुकी हैं चची दोबारा भी कब तक खुद को दूर रखेंगी.

नीलेश- हाँ पर ध्यान से नीतू के साथ भी और रज्जो के भी, मैं नहीं चाहता कोई बदनामी हो, न उनकी न अपनी, पड़ोस का मामला है.

कर्मा- उसका मुझे पूरा ख्याल है. अरे अनुज तुबेल बंद कर मैं पानी काट लार आया भर गया खेत.

नीलेश- हाँ आ जाओ तो फिर साथ hi चलते हैं.

सब साथ hi घर आये तब तक खाना बन गया था और शैलेश भी तैयार थे,

नीलेश – अरे तुम कहाँ चल दिए?

शैलेश- अरे वो कार्यकाल पूरा हो रहा है न भाई साब तो कुछ औपचारिकताएं करने के लिए बुलाया है.

नीलेश – अरे हाँ चलो बढ़िया है फिर तो और भी ाचा हो जायेगा आगे की योजना तुम्हारे आने पर बनाते हैं.

शैलेश – हाँ भाई साहब बिलकुल,

अनुज- फिर तो मौसा की छुट्टी hi छुट्टी.

शैलेश- हाँ… ाचा बता आते हुए क्या लॉन तेरे लिए.

अनुज- अरे कुछ नहीं मौसा मुझे कुछ नहीं चाहिए.

कर्मा- मौसा गुलाब जामुन ले आना.

शालू- मेरे और जीजी के लिए सारी अछि सी.

नीलेश- भाई सब के लिए कुछ ला hi रहे हो तो हमारे लिए भी एक पकड़ लेना समझ रहे हो न.

अनुज- हाँ सब लोग समझ गए पापा, मौसा फिर तो मेरे लिए भी ले आना एक नया मोबाइल.

शैलेश- ाचा अभी तो तूने मन किआ था.

अनुज- अरे वो तो गलती से कर दिया था.


खैर खाना ख़त्म हुआ इसके बाद अनुज मौसा को छोड़ने चला गया

इधर नीलेश सभ्य से बोले- अरे ये बताओ ये भाभी कैसे चली गयी अचानक.

शालू- मैं बताती हूँ जीजा,

इसके बाद शालू ने उन्हें पूरी बात बताई.

नीलेश- पर सभ्य ऐसे नहीं करना चाहिए था न.

सभ्य- अरे तुम्हे पता था न की हमें अच्छा नहीं लगा था उनका यहाँ आना, फिर भी बर्दाश्त कर रहे थे पर अब मौका मिला भागने का तो भगा दिया.

नीलेश- पर ऐसे बेइज़्ज़ती के साथ?

सभ्य- हमें जो सही लगा हमने किआ.

नीलेश थोड़ा सोचते हैं फिर साँस छोड़ते हुए कहते हैं- चलो बाला ताली.

ये सुनकर सब हंसने लगे.

सभ्य- देखा शालू हमने कहा था न तेरे जीजा और हमारी इतने सालो से ऐसे hi नहीं पैट रही, सोच भी मिलती है.

शालू- वो तो मैं मानती हूँ जीजी, अरे जीजा पता है तुम्हारी प्यारी भाभी जीजी को धमका के गयी है की ये भरी पड़ेगा.

कर्मा- ाचा जी, तै भी बड़ी वाली हैं.

नीलेश- अरे उनके कहने से, हमारे घर की तरफ उनमे से किसी ने आँख उठा कर भी देखा न तो जड़ से मिटा देंगे सबको. इज़्ज़त से रह रहे हैं तब तक रहे.

सभ्य- अरे बस जब जो होगा तब देखा जायेगा, काहे गर्मी में गरम हो रहे हो.

इतने में hi पीछे से अनुज की आवाज़ आई..

अनुज- अरे सच में बहुत गर्मी है ये दोपहर की लू तो गाल जला देती है.

सभ्य- अरे यहाँ बरामदे में तो वैसे भी ज़्यादा लगती है. एक काम करो सब हमारे वाले कमरे में चलो वो ठंडा रहता है पीछे है न.

शालू- हाँ चलो दोपहर में वहीं आराम कर लेंगे.

ये कह सब नीलेश कर्मा के कमरे में जाते हैं, और सब बिस्तर पर बैठ जाते हैं नीलेश सभ्य और शालू सिरहाने से टिक कर बैठे थे तो अनुज कर्मा पेड़ों की और पर बेचारे जैसे hi बैठते हैं वैस्व hi बिजली चली जाती है.

अनुज- धत्त्त तेरे की ये बिजली भी इतना दिनाग ख़राब करती है, बताओ वैसे भी इतनी गर्मी है ऊपर से चली और गयी.

ये कह अनुज अपनी टीशर्ट उतर फेंकता हैं और ऊपर से नंगा हो सिर्फ निक्कर में बैठ जाता है. नीलेश भी अपनी बनियान उतर देते हैं और सिर्फ लुंगी में रहते हैं, देखा देखि कर्मा भी टीशर्ट उतरदेता है,

शालू सबको देख कर कहती है- तुम लोगो का सही है गर्मी लगे तो कपडे उतर लिए. और हम ये भरी भरी साड़ी लटकाये रहते हैं.

अनुज- हम लोगो का क्या मौसी तुमसे किसने कहा भरी साड़ी पहनने को.

कर्मा- और क्या तुम भी उतर लो क्या दिक्कत है.

शालू- औरतों और मर्दों में फ़र्क़ होता है बीटा, हम तुम्हारी तरह नहीं रह सकते.

कर्मा – अरे मौसी बहार नहीं रह सकते घर में तो रह सकते हो, अपना घर जैसे चाहे रहो.

नीलेश- और क्या सही तो कह रहे हैं बच्चे अपना घर है.

सभ्य- हाँ इस बात पर तो हम भी सहमत हैं और हमें गर्मी बहुत लग रही है और घर की मालकिन होने के नाते हम तो मन मर्ज़ी से रहेंगे,

सभ्य हँसते हुए ये कहकर अपनी साड़ी खोल कर पेटीकोट में आ जाती है.

शालू- जब मालकिन को दिक्कत नहीं तो हमें क्या दिक्कत ये कह शालू भी अपनी साड़ी खोल कर ब्लाउज पेटीकोट में रह जाती है.

कर्मा- मालकिन के आर्डर सब मानते हैं.

अनुज- मालकिन माँ मैं निक्कर भी उतर सकता हूँ क्या?

अनुज हँसते हुए मज़ाक करता है.

सभ्य- अरे तू चाहे जो उतर तेरी माँ का घर है बीटा.

अनुज खुश होते हुए निक्कर भी उतर देता है और सिर्फ कच्चे में रह जाता है.

नीलेश- हाँ भाई तेरा बाप तो नौकर है मालकिन तो यही हैं.

शालू- अब हैं तो हैं जीजा क्या कर सकते हैं तुम नौकर हो और जीजी मालकिन.

नीलेश- अरे हम नौकर बनकर hi खुश हैं भैया, मालकिन की ज़िम्मेदारी इन्हे hi रखने दो.

शालू- पर ये गर्मी तो मालकिन की भी नहीं सुन रही, माफ़ करना मालकिन पर हमें थोड़ी और आज़ादी चाहिए.

सभ्य- कैसी आज़ादी?

सभ्य जब तक पूछती है तब तक शालू अपना ब्लाउज भी उतर देती है, और ब्रा में भरी हुई अपनी चूचियों को बहार ले आती है.

अनुज कर्मा और नीलेश तीनो को hi कुछ कुछ होने लगता है शालू को यूँ देख, हालाँकि कर्मा अनुज तो कई बार शालू की छूछीयो को नंगा कर चूस चउकस थे वहीं नीलेश अपने ने भी रात में खूब चूसा था पर फिर भी अपने बेटो के सामने ऊपर से इतने मस्त चूचियों का बहार आना हमेशा hi कामुक दृश्य होता है और वही अभी दिख रहा था.

यही दृश्य सभ्य भी देखती है तो कहती है- ाचा ये आज़ादी अरे ये आज़ादी तो हमें भी चाहिए थी, ये कह वो भी अपना ब्लाउज उतर देती है, अब दोनों गदराई कामुक बहनें सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में थी और बिलकुल आराम से थी, क्यूंकि वहां मौजूद तीनो hi मर्दो से दोनों छुड़वा चुकी थी इसलिए उनके लिए कोई ऐसी असहजता वाली बात नहीं थी, असहजता वाली बात तो कर्मा अनुज के लिए भी नहीं थी पर अपनी माँ और मौसी की चूचियों को देख उनके लुंड उभर रहे थे वो भी उनके पिता के सामने.

सबसे ज़्यादा असहज नीलेश थे हालाँकि साली और पत्नी दोनों को छोड़ने के बाद भी ऐसे उनको देखना साथ hi अपने बेटों को अपनी माँ और मौसी को ऐसे देखना उन्हें असहज भी कर रहा था और उत्तेजित भी, साथ hi उनकी नज़र कर्मा अनुज के लुंड के उभारों पर भी रह रह कर जा रही थी जो ये दर्शा रही थी की दोनों अपनी माँ और मौसी को देख उत्तेजित हो रहे हैं. ये सोचकर खुद नीलेश का लुंड पूरी तरह अकड़ कर खड़ा था.. और उनकी लुंगी में तम्बू बना रहा था. नीलेश ये जानते थे की उनके दोनों hi बेटे उन्ही की तरह हैं चुदाई के मामले में पर क्या वो अपनी माँ और मौसी के प्रति भी वैसी hi भावनाए रखते हैं. अगर हमारी माँ या मौसी ऐसी गदराई हुई होती और ऐसे अधनंगी हमारे सामने होती तो हमारी क्या प्रतिक्रिया होती.

नीलेश ये सच सोच रहे थे, और उनका लुंड ये सब सोचकर hi लुंगी के अंदर ठुमके मार रहा था जो की बहार से भी साफ़ दिख रहा था, जिस पर शालू की नज़र पड़ी तो उसने हॉकर से कोहनी मार कर सभ्य को इशारा किआ सभ्य ने उसे देखा तो उसे एक शरारत सूझी, और उसने हौले से हाथ बढ़ा अपने पति की लुंगी को पकड़ कर खींच दिया जिससे वो खुल गयी नीलेश एक कच्चे में सबके सामने थे और कच्चा उनके लुंड को कुछ हद तक hi छुपा प् रहा था. नीलेश अचानक से अपने विचारों से बहार आकर हड़बड़ा गए, वहीं सभ्य शालू तेज़ी से हंसने लगे, और वहीं अनुज और कर्मा भी अपनी माँ की शरारत और पापा के हड़बड़ाने पर हंस रहे थे.

नीलेश कुछ पल बाद संभाले तो बोले- ाचा हमें छेड़ती हो तुम हम तुम्हे नहीं छोड़ेंगे, ये कह का वो सभ्य को पीछे से पकड़ लेते हैं,

सभ्य तेज़ तेज़ हंसती है और कहती है- अरे छोडो न, कर्मा के पापा माफ़ कार्डो छोडो.

इधर बगल में बैठी शालू ताली मार कर हंस रही थी और boli-dekho बच्चो तुम्हारे माँ पापा की कुश्ती..

अनुज और कर्मा भी हंस रहे थे और इस माहौल का मज़ा ले रहे थे,

नीलेश अपने हाथ आगे लेकर सभ्य के नंगे पेट पर चुटकी काट के उससे कह रहे थे बताओ हमें छेड़ेगी. उधर सभ्य लगातार हंस कर नीलेश से छोड़ने को कहे जा रही थी..

नीलेश- देखो बच्चों एक चीज़ दिखाऊं तुम्हे.

कर्मा- क्या चीज़.

नीलेश- ये देखो

ये कहकर नीलेश सभ्य की ब्रा को नीचे से पकड़ कर ऊपर उठा देते हैं और सभ्य को चूचियां नंगी सबके सामने आ जाती हैं, नीलेश को ये करके खुद भी वक अजीब और नयी उत्तेजना का एहसास होता है. वहीं कर्मा अनुज अपनी माँ की चूचिया जिन्हे वो हज़ारों बार देख चुके थे एक बार और देख कर उत्तेजित होने लगते हैं, और हो भी क्यों न उनके पिता खुद उन्हें उनकी माँ की चूचिया दिखा रहे थे,

शालू अपने जीजा की ये हरकत देख चौंक जाती है पर हंसती रहती है,

सभ्य- अरे उन्हें क्या दिखा रहे हो उन्होंने तो न जाने कितने दिन दूध पिया हैं इन्ही से. हटो लो मैं खुद दिखती हूँ.

ये कहकर सभ्य ब्रा को पूरी तरह खोल कर अलग फ़ेंक देती है और ऊपर से नंगी हो जाती है..

शालू- गर्मी के चक्कर में सब नंगे होते जा रहे हैं.

सभ्य- अरे नंगे से याद आया एहहहह.

सभ्य एक तरफ घूम शालू की ब्रा को भी पकड़ कर खींच कर उतर देती है और अपणु बहन को भी अपनी तरह ऊपर से नंगा कर देती है.

सभ्य- तू कैसे बची हुई है.

शालू- हाय ढैय्या जीजी..

सभ्य अपनी चूचियों को हाथों से ढकते हुए कहती है.

नीलेश अपनी पत्नी की हरकत देख खुश और उत्तेजित होते हुए काबते हैं- शालू कोई फायदा नहीं तेरी हाथो से कुछ नहीं छुप रहा.

सभ्य- तुम बड़ा अपनी साली की चूचियों को घूर रहे हो.

शालू- देख लेने दो जीजी बच्चों के बहाने जीजा का भी भला हो रहा है,

कोई कह नहीं रहा था पर कमरे में उत्तेजना बढाती जा रही थी गर्मी के साथ साथ बदन की गर्मी भी बढ़ रही थी, पर तभी कमरे की गर्मी को शांत करने के लिए बिजली आ गयी और पंखा चलने लगा.

अनुज- अरे वाह बिजली आ गयी बिजली आ गयी.

अनुज के साथ साथ सभ्य भी बच्चों की तरह करती हुई बोली- बिजली आ गयी बिजली आ गयी, ऐसा करने से उसकी चूचियों का नाच देखने लायक बन रहा था.

अब कमरे का माहौल यूँ था की कर्मा अनुज और नीलेश सिर्फ कच्चे में थे और शालू और सभ्य सिर्फ पेटीकोट में, दोनों बहनो के नंगे गदराये बदन को देख कर तीनो के लुंड सलामी दे रहे थे नीलेश से तो सहना मुश्किल होता जा रहा था.

शालू- कोई हमें ऐसे देक्ग ले तो पागल हो जायेगा सोचेगा कैसे लोग हैं बच्चों के सामने ऐसे बैठे हैं.

सभ्य- पर वो हमारे बच्चों को नहीं जानते, जितनी उन्होंने अपनी जिंदगी में नहीं देखि होंगी कर्मा अनुज उससे ज़्यादा चूचियां चूस चुके हैं. क्यों बच्चों.

वैसे तो दोनों hi इस बात का जवाब देते पर अपने पापा के सामने होने से दोनों ने hi शर्मा के नज़रें झुका ली.

नीलेश को भी अपनी बीवी से ऐसी उम्मीद नहीं थी पर ये सुनकर वो और उत्तेजित हो गए और बोले- अरे बच्चो इसमें शर्माने की बात क्या है, हम मर्द हैं हमारा काम hi यही है.

कर्मा- और क्या,

सभ्य- तुम बड़ा साथ दे रहे हो बच्चो का,

नीलेश- हाँ दे रहा हूँ इन्हे बता रहा हूँ की शर्माने जैसी कोई बात नहीं है.

सभ्य- ाचा कोई बात नहीं है शर्माने की फिर तो तुम भी नहीं शरमाते होंगे.

नीलेश – बिलकुल नहीं.

सभ्य ने ितमा सुना और फिर हाथ आगे कर नीलेश का कच्चा नीचे सरका दिया जिससे उनका खड़ा लुंड सबके सामने आ गया.

शालू- हाय ढैय्या जीजी… का कर रही हो.

कर्मा- अरे माँ.

नीलेश- अरे कोई बात नहीं बीटा देख मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा मुझे कैसी शर्म मर्दों के पास होता है तो होता है.

अनुज- हेहेहे पापा तो पूरे नंगे हो गए.

शालू- तुझे बड़ी हंसी आ रही है ये कह शालू आगे हुई और उसने अनुज का कच्चा पकड़ खींच दिया और उसे भी नंगा कर दिया उसका लुंड भी लहराता हुआ बहार आ गया,

कर्मा उसका मुँह देख हंसने लगा तो वो तुरंत खड़ा हुआ और कर्मा के हाथ को पीछे से पकड़ते हुए बोलै मौसी भैया का भी, भैया का भी, बस इतना समय शालू के लिए काफी था और उसने कर्मा का कच्चा खिसका कर उसे भी नंगा कर दिया, कर्मा का लुंड भी फुंकारता हुआ बहार आ गया…

अब दोनों बहनो को तीन तीन सांप देख फुंकार रहे थे, इसी बीच अचानक से बिस्तर पर कुछ हल्का सा गिरा और नीलेश चिल्लाये- अरे छिपकली, छिपकली.

ये सुनते hi सभ्य शालू दोनों झट से उठ कड़ी हुई बस इतना hi नीलेश कस लिए काफी था, नीलेश ने सभ्य का पेटीकोट पकड़ा और नीचे खींच दिया जो की गांड को तोड़ता हुआ नीचे गिर पड़ा और सभ्य अपने पति बेटों और बहन के सामने पूरी नंगी हो गयी, सभ्य का तो ध्यान hi नहीं गया वो तो बस छिपकली के दर से उछाल रही थी जब उसे समझ आया की क्या हुआ है तो वो समझ गयी उसके पति ने उसे बेवकूफ बनाया है पर अब नंगी हो hi चुकी थी क्या करती इसलिए उसने वो किआ जो उसे सही लगा और उसने शालू का पेटीकोट भी पकड़ कर नीचे खिसका दिया अब कमरे में सभी पूरी तरह नंगे हो चुके थे.

नीलेश से तो सहना मुश्किल होता जा रहा था तो वो अपना लुंड बेशर्मी से मुठियाते हुए बोले – बच्चो तुम्हे पता hi है की खादर लुंड पर कितनी परेशानी होती है तो तुम्हे कोई दिक्कत तो नहीं अगर हम तुम्हारे सामने थोड़ा आनंद लें तो.

सभ्य- उन्हें क्या दुःख होगा कर्मा के साथ मिलकर तो ममता से कितना सुख लिए है तुमने.

शालू- और वो खेत वाली भी तो नयी नयी बानी है.

शालू और सभ्य ने नीचे बैठते हुए कहा.

अनुज- अरे पापा कितनी औपचारिकता करोगे, अब तो हम खुल गए हैं तो सीधा बोलो न चुदाई करनी है.

अनुज की बात पर सब हंसने लगे

नीलेश- हाँ बीटा सही समझा तू.

ये कह नीलेश ने सभ्य की चूचियों की मसलना शुरू कर दिया साथ hi उसके सर को अपने लुंड की और झुकाने लगे, सभ्य समझ गयी वो क्या चाहते हैं इसलिए झुकती चली गयी और फिर पति के लुंड को मुँह में ले लिया

शालू- बच्चों देखो कैसे तुम्हारे माँ पापा नया खेक खेल रहे हैं.

शालू अपनी चूचियों को भींचती हुई बोली.

कर्मा- वही खेल जो तुमने भी कल रात पापा और माँ के साथ खेला था मौसी

शालू- हाँ रे अब इधर आओ तुम दोनों और मौसी के दुद्दू पियो.

शालू भी बेहद उत्तेजित थी पर अपने जीजाजी के सामने ये तो नहीं कह सकती थी की आओ बच्चों छोड़ो मुझे नहीं तो उसका और उसकी जीजी का राज़ खुल जाता इसलिए उसने दोनों को छुछियां चूसने के लिए आमंत्रित किया.

कुछ पल बाद बिस्तर का हाल कुछ ऐसा था की नीलेश बिस्तर के सबसे बाएं सिरहाने तक लगा कर बैठे थे उनकी टैंगो के बीच उनकी पत्नी सभ्य थी जो झुककर अपने पति के लुंड को चूस रही तहज, जितनी उत्तेजना नीलेश को अपने बच्चों के सामने अपनी पत्नी से लुंड चूसने में हो रही थी उससे भी अधिक सभ्य को hi रही थी अपने बच्चों और पति के सामने ये सब करते हुए.

निकेश के थोड़ा हैट कर्मा था जो की दूसरी और करवट लेकर अपनी मौसी शालू की एक बड़ी चुकी को मुँह में भर कर चूस रहा था, वहीं शालू की दूसरी और अनुज था जो की दूसरी क्हुची को चूस रहा था, शालू दोनों बच्चों के सर पर हाथ फेरती हुई अपनी चूचियों चुसवा रही थी.

नीलेश अपने लुंड को चुसवाने के साथ साथ शालू कर्मा अनुज को भी देख रहे थे. कर्मा अपनी करवट पर लेते हुए मौसी की चुकी को चूसते हुए अपने लुंड को जो की बुरी तरह अकड़ा हुआ था उसे अपनी मौसी की जांघ पर घिस रहा था, नीलेश अपना लुंड चुसवाते हुए अनुज कर्मा और शालू पर लगातार नज़र बनाये हुए थे कर्मा तो उनके बगल में hi था और जब उन्होंने कर्मा को अपना लुंड शालू की जांघ पर घिसते हुए भी देखा तो न जाने उन्हें क्या सूझा की उन्होंने कर्मा अपनी पत्नी का हाथ पकड़ा और उसे उठाकर कर्मा के लुंड पर रख दिया, सभ्य ने भी जब हाथ में लुंड महसूस किआ तो उसे पकड़ लिए, और नीलेश की आँखों में देखा उसका लुंड चूसते हुए, क्यूंकि उसके पति खुद उसकर हाथ में उसके बेटे का लुंड दे रहे थे और इससे वो खुद तो उत्तेजित हुई hi उसे अपने मुँह में नीलेश का लुंड फूलता हुआ महसूस हुआ, नीलेश न सर्फ मुस्कुरा कर उसके सर को पकड़ अपने लुंड को उसके मुँह से अंदर बहार करने लगे,

शालू ने कुछ देर यूँ hi हाथ रखे रखा और फिर बेटे के लुंड को मुठियाने लगी.

कर्मा मौसी की छूछीयो को चूसते हुए और मस्त होने लगा क्यूंकि उसके पापा के सामने उसकी मम्मी उसका लुंड मुठिया रही थी, वहीं अनुज की गर्मी भी बढ़ रही थी उसने अपनी मौसी की जांघ की आड़ लेते हुए उनकी छूट में उंगलियां घुसा कर उंगलियां से आहिस्ता आहिस्ता छूट छोड़ रहा था.

कर्मा अपनी माँ के हाथ से मुठियाये जाने पर बेहद खुश था… वहीं नीलेश ने लुंड अपनी बीवी के मुँह से निकला और खुद उठ गए और बिस्तर के नीचे खड़े हो गए और सभ्य को पकड़ कर अपने सामने बिस्तर के किनारे लिटा दिया जिससे सभ्य के चूतड़ बिस्तर के किनारे थे नीलेश ने फिर सभ्य की टैंगो को चौड़ा किआ और फिर अपना लुंड पकड़ कर उसकी छूट पर रखा और बोले- बच्चों देखो.

जैसे hi सबका ध्यान उनपर गया तो बोले- देखो तुम्हारी माँ छोड़ने वाली है.

उनके ये कहने पर सब हंस पड़े और फिर नीलेश ने धक्का लगाकर लुंड को पत्नी की छूट में घुसा दिया, और छोड़ने लग.

पर जिस तरह से नीलेश ने सभ्य को लिटाया था वैसे सभ्य का सर कर्मा के बिलकुल पास था और हिलते हुए उसकी जांघ से लग रहा था.

जब कर्मा ने अपनी माँ को पास पाया और साथ hi चुदाई की वजह से उछलती हुई छूछीयो को देखा तो उसने अपना हाथ उठाकर उसकी छूछीयो को पकड़ लिए और फिर नज़र उठा कर अपने पापा की और देखा जो उसे hi देख रहे थे.

नीलेश ने भी उसे सर हिलाकर स्वीकृति दी तो वो अपनी माँ की चूचियों से खेलने लगा बल्कि कुछ पल बाद वो अपनी माँ और पापा की और hi घूम गया और दोनों हाथों से उनकी चूचियों को मसलने लगा, ऐसा करने से उसका खड़ा लुंड बात बार उसकी माँ के सर और गाल से टकरा रहा था जिसे देख नीलेश की उत्तेजना बढ़ रही थी की उनका बीटा नंगा अपनी माँ के इतने करीब है, उधर सभ्य को भी नशा बढ़ता जा रहा था पति के होते हुए ये सब बेटे के साथ करने में उसे मज़ा आ रहा था, वहीं शालू ने देखा कर्मा अपनी माँ पापा के साथ है तो उसने अनुज को अपनी छूट की और धकेलना शुरू कर दिया अनुज ने शालू को अपने पापा की और इशारा किआ तो शालू ने आँख से इशारा किआ की कुछ नहीं होगा, शालू का साथ पाकर अनुज उसकी टैंगो के बीच आया और उसकी छूट में मुँह घुसा दिया..

जिससे शालू की आह्ह्ह्हह निकल गयी जिससे सबका ध्यान दोनों पर गया नीलेश के चेहरे पर तो मुस्कान आ गयी…

सब्ब्या ने हाथ ऊपर कर कर्मा के लुंड को हाथ से दोबारा पकड़ लिए और मुठियाने लगी पर कर्मा का लुंड उसके चेहरे के इतना पास था की उसकी गंध से वो मदहोश होने लगी पर पति के सामने होने से उसे थोड़ी हिचकिचाहट थी इसलिए सिर्फ हाथ से hi हिला रही थी, कुछ पाप बाद hi न जाने कर्मा को क्या हुआ की वो जैसे लेता हुआ था वहां से उठ कर बैठ गया घुटनो पर और आगे झुक कर अपनी माँ की छूछीयो को चूसने लगा जिसे देख नीलेश और उत्तेजित और उत्साहित हो गए… वहीं कर्मा थोड़ा सा आगे अपनी माँ की छूट में पापा का लुंड अंदर बहार होता साफ़ देख प् रहा था

वहीं कर्मा के आगे झुकने से उसका लुंड उसकी माँ के चेहरे के सामने hi लटकने लगा सभ्य पति से चुड़ते हुए बेटे के लुंड को देख आहें भरने लगी..


कर्मा ने कुछ पल चूचियों को चूसा और फिर सीधा हो गया और फिर अपने लुंड को पकड़ उसने अपने पापा की आँखों में देखा जैसे कह रहा हो की ये देखो और फिर अपने लुंड को अपनी माँ के चेहरे पर रख दिया और घिसने लगा नीलेश की तो ये देख हालर ख़राब होने लगी किसी तरह उन्होंने खुद को झड़ने से रोका. इधर सभ्य भी बेटे का लुंड चेहरे पर घिसता हुआ पाकर साथ hi पति से चुदाई के बाद खुद को रोक नहीं पाई हुए मुँह खोल के लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी.





कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह माँ ऐसे होई.

नीलेश तो ये देख बहुत उत्तेजित हो गए और उसी उत्तेजना में बडबफंस लगे.

नीलेश- हाँ कर्मा चूसा अपना लुंड अपनी माँ से आह्हः बड़ा मस्त चूसती है िहहह.

ये सुन कर अनुज का और शालू का भी ध्यान उन पर गया और दोनों ने सभ्य को कर्मा का लुंड चूसते पाया तो पहले पापा की और देखा तो खुश हो गए क्यूंकि ये सब पापा के सामने हो रहा था कुर उनकी प्रतिक्रिया से कुछ गलत तो नहीं लग रहा था, ये देख अनुज भी खड़ा हो गया और अपने भैया पापा और माँ को देख लुंड को मुठियाने लगा, उसे यकीन नहीं हो रहा था की पापा अपने सामने ये सब होने दे रहे हैं, बल्कि भैया से खुद बोल रहे हैं. ये देख वो और उत्तेजित हो गया और उसने अपना लुंड पास बैठी मौसी के पास कर दिया जिसे शालू ने भी बिना हिचकिचाए मुँह में भर लिए और चूसने लगी..

वहीं नीलेश ने सभ्य की छूट से लुंड निकला और उसे उठाया और खुद उसकी जगह लेट गए, सभ्य भी समझ गयी और पति के लेटते hi उनके ऊपर आ कर उनके लुंड पर बैठ गयी.

और उछाल उछाल कर छोड़ने लगी वहीं माँ पापा के आसान बदलने के बाद कर्मा भी खड़ा हुआ और खड़े होकर अपना लुंड माँ के मुँह के आगे कर दिया जिसे वो फिर से चूसने लगी. दूसरी और अनुज अपनी माँ पापा और भाई को देखते हुए शालू के मुँह को छोड़ रहा था और शालू अपनी उँगलियों से अपनी छूट को, पूरे कमरे में वासना का तूफ़ान आया हुआ था,

नीलेश की नज़र भी दोनों और थी सभ्य जो की कर्मा का लुंड चूस रही थी उस पर भी और शालू पर भी,

नीलेश- दोनों hi बहनें कैसा लुंड चूसती हैं बच्चो?

अनुज- आह्हः पापा बहुत मस्त मज़ा hi आ गया.

कर्मा- हाँ पापा माँ भी बहुत मस्त चूस रही है इतना गरम मुँह है माँ का.

दोनों hi बहनें कुछ बोल नहीं सकती थी पर अपनी तारीफ सुनकर खुश थी… पर अब शालू से सहना मुश्किल होता जा रहा था सभ्य की छूट में तो लुंड था पर शालू की खली थी इसलिए उसनर अनुज का लुंड मुँह से निकला और उसे धक्का देकर गिराया और खुद जल्दी से उसका लुंड पकड़ उसपर अपनी छूट रख कर बैठ गयी और ये सब नीलेश के सामने हुआ जिस्व देख वो थोड़ा चौंके भी और उनका दिमाग भी चलने लगा.. साथ hi उत्तेजना भी बफ गयी अपने बेटे को अपनी मौसी को छोड़ते देख..

इसी उत्तेजना में उन्होंने सभ्य को छोड़ते हुए उसके चूतड़ों को मसलते हुए दो उंगलियां उसकी गांड में घुसा दी, जिससे सभ्य थोड़ा बिलबिलाई ज़रूर पर कुछ कह नहीं सकीय क्यूंकि मुँह में बेटे का लुंड जो था खैर छूट में पति का लुंड मुँह में बेटे का और गांड में पति की उंगलियां, सभ्य के तीनो छेड़ भरे हुए थे और इसी लिए वो मचल रही थी. पर नीलेश और कर्मा ने उसे जकड़ा हुआ था,






वहीं शालू खुल कर अनुज के लुंड पर कूद रही थी..

शालू- अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अनुज अह्ह्ह्ह क्या लुंड है तेरा आठ आह्ह्ह्ह जीजी देखो तुम्हारा बेटाःह्ह्ह्हह्ह

नीलेश तो ये देख हैरान भी थे और उत्तेजित भी.. वहीं कर्मा के लिए भी सहना मुश्किल होता जा रहा था, क्यूंकि उसके पापा और अनुज के लुंड तो छूट में थे ऊसर hi छूट नहीं मिल रही थी तो उसने सोचा छूट नहीं तो क्या हुआ उससे भी अछि चीज़ खली है, ये सोच कर्मा ने माँ के मुँह से लुंड निकला और जल्दी से घूम कर अपमी मौसी के पीछे और अनुज की टैंगो के बीच आ गया, कर्मा को देख अनुज समझ गया क्या होने वाला है तो उसने मौसी को आगे झुका कर खुद से चिपका लिया, कर्मा का लुंड पहले से hi सभ्य के मुँह में अचे से चिकना होकर आया था तो उसने सीधा लुंड मौसी की गांड के छेड़ पर रखा और फिर धक्का दिया और लुंड अंदर सरक गया

शालू – ohhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhh ढैय्याहहहहह अह्हह्ह्ह्ह करमह.

कर्मा- ओह्ह्ह मौसी क्या मस्त गांड है ahhhhhhhhhhhh कितनी गरम.

नीलेश को तो यकीन नहीं हो रहा था की उनके दोनों बेटे उनकी साली को एक साथ छोड़ राजे हैं और उनकी साली भी क साथ दो लुंड से छुड़वा रही है. वहीं सभ्य भी अपने पति के लुंड पर उछालते हुए अपनी बहन को अपने बेटों से चुड़ते देख रही थी.






सभ्य- अह्ह्ह्ह शालू दोनों को एक साथ ले रही है अह्ह्ह बच्चो ऐसे Hi मज़े दो मौसी को.

अनुज- हांण माह ऐसे hi सेवा करेंगे मौसीओइओइ की.

वहीं शालू तो उत्तेजना के एक अलग hi पड़ाव पर थी ये सब देखकर ऊपर से दोनों भांजो की चुदाई की वजह से जल्दी hi वो झड़ने लगी उसका बदन थरथराने लगा और वो अनुज के लुंड पर पानी छोड़ने लगी.. उसके थरथराने से कर्मा का लुंड उसकी गांड से निकल गया और वो लम्बी सांसे लेते हुए अनुज की छाती पर गिर गयी…

नीलेश ने शालू को झड़ते देखा और बोले- लो बच्चों ने तो मौसी को चाँद की सैर करवा दी वो भी बड़ी जल्दी..

शालू ने हांफते हुए जवाब दिया – ये तो अभी शुरुआत है जीजा इतनी जल्दी मेरा कुछ नहीं होता, वो तो इन दोनों ने एक साथ ऐसा हमला किआ की झेल hi नहीं पाई.

वहीं नीलेश की नज़र कर्मा पर भी गयी जो की शालू के पीछे बैठा लुंड मुठिया रहा था और अचानक से नीलेश के मन में कुछ ख्याल आया जिससे उनके बदन में बिजली दौड़ गयी, उनके और कर्मा के बीच कुछ इशारा हुआ और दोनों बाप बेटे के बीच आँखों hi आँखों में बात हो गयी, कर्मा अपनी जगह से उठा और इधर नीलेश ने सभ्य की गांड से अपनी उँगलियों को निकला और दोनों हाथ से उसके चूतड़ों को पकड़ फैला दिया..

सभ्य को उंगलियां निकलने से अपनी गांड पर कुछ खली सा एहसास हुआ पर अगले hi पल उसे अपनी गांड पर एक और एहसास हुआ और वो समझ गयी की क्या होने वाला है पर वो कुछ बोलती उससे पहले कर्मा का लुंड का टोपा अपनी माँ की गांड में घुस चूका था…

सभ्य- अह्ह्ह्ह दैयाआआह्ह्ह्हह्ह रीई अह्ह्ह कर्मआहहह कमीने.

नीलेश ने अपणु पत्नी को कास के पकड़ लिए और बोले- क्या हुआ रानी..

सभ्य- अह्ह्ह्ह अपने hi बेटे का लुंड मेरिइइइओ गांड में घुसवा दियाहहहहह और पूछ रहे हो क्याःह्ह्ह्हह्ह हुआहहहहहहह, अह्ह्ह्ह अपने बेटे से उसकी माहहहह की गांड मारा रहे होऊ अह्हह्ह्ह्ह.

सभ्य की चीख सुन अनुज और शालू का ध्यान भी उस पर hi था दोनों को hi यकीन नहीं हो रहा था की कर्मा नीलेश के साथ मिलकर माँ की गांड में लुंड घुसाए हुए था,

नीलेश- कैसाः लग रहा है बेटे का लुंड तुझे मेरी रानी

सभ्य- अह्ह्ह्ह बिलकुल भरा भरा अह्ह्ह्ह इतना मोटा और बड़ा लुंड हाउ तुम्हारे बेटे का देखो कैसे अपनी माँ की गांड को फैला कर रख दिया है. अह्ह्ह मज़ा आ रहा है..

नीलेश- मुझे पता था रंडी तुझे बेटे का लुंड लेकर मज़ा hi आएगा, अब और मज़े लेने के लिए तैयार है.

सभ्य- हाँ अह्ह्ह्हह्हह ahhhhhhhhhh.

सभ्य का इतना बोलना था की कर्मा ने एक दो धक्के और लगाकर आधा लुंड उसकी गांड में घुसा दिया.

सभ्य- अह्ह्ह्ह कमीने तुझे बड़ा शौक है मादरचोद बनने का,

कर्मा- माँ तुम्हारे जैसी हो तो कौन नहीं बनना चाहेगा मादरचोद.

नीलेश- बस कर्मा अब शुरू हो जा और दिखते हैं तेरी रंडी माँ को हम बाप बेटे की जोड़ी का कमाल…

और ये कह दोनों हलके हलके धक्के लगाने शुरू कर देते हैं. अनुज और शालू अपनी चुदाई भूल उन्हें hi ध्यान से देख रहे होते हैं… वहीं सभ्य अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह करते हुए अपने पति हुए बेटे से छोड़ने का आनंद ले रही होती है.






कर्मा- हाँ पापा अह्ह्ह्ह माँ की गांड बड़ी मस्त है.

नीलेश- जनता हूँ बेटाःह्ह्ह्हह्ह तभी तो वो इतने सालों बाद भी िस्क्स दीवाना हूँ मैं..

कर्मा- आह्ह्ह्ह हॉँण्णन तुम्हारे साथ मरने में और मज़ा आ रहा है…

नीलेश- आखिर हमारा पिछले अनुभव काम आ रहा है..

उस पर अनुज बोल पड़ा- कौनसा अनुभव पापा.

नीलेश- कर्मा और मैंने मिलकर खेत की मज़दूरन और ममता पल्ली को सहोड़ा है ऐसे hi इसलिए हमारी ले एक दुसरे से जल्दी बैठ जाती है.

अनुज- मुझे भी करना है पापा तुम्हारे साथ,

नीलेश- अरे बेटाःह्ह्ह्हह्ह अब तो जब चाहे कर लिओ तेरी माँ और मौसी तो हमेशा यहीं हैं.

ये कहते हुए नीलेश और कर्मा ने अपनी गति थोड़ी और बढ़ा दी थी और सभ्य अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह करते हुए मस्त हो रही थी उसने कभी सोचा नहीं था की पति हुए बेटे से वो एक साथ छुड़ेगी पर आज ऐसा हो रहा था और वो उत्तेजित भी बहुत हो रही थी, उसकी छूट भी बार बार पानी बहा रही थी पर वो झड़ने के बाद भी इस आनंद को छोड़ना नहीं चाहती थी..

सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह देखो तूऊओह्ह्ह्हह्ह इन बाप बेटों को अपनर लुंड हमारे में घुसकर पंचायत कर रहे होओओओ अह्ह्ह्हह्हह और तेज़ छोड़ो….

सभ्य की बात सुन दोनों ने गति और बढ़ा दी और पूरी लगन और ध्यान से उसे छोडंर लगे कर्मा के लिए भी ये सपने से काम नहीं था की वो अपने पापा के साथ मिलकर अपनी माँ को छोड़ रहा था…






कई बार तो वो झड़ने के करीब पहुंचा पर उसने कैसे भी खुद को रोका था… वहीं सभ्य के लिए तो एक एक पल उत्तेजना के शिखर पर गुज़र रहा था और वो ज़्यादा देर वहां रुक नहीं पाई और पति और बेटे के बीच झड़ने लगी वहीं उसका झड़ने से उसके मचलने से और उसके छेदों की कसावट के प्रभाव से कर्मा और नीलेश भी खुद को रोक नहीं पाए और दोनों ने hi सभ्य के दोनों छेदों को अपने आपने रास से भर दिया और तेज़ी से हांफने लगे.

दूसरी और अनुज भी अपनी माँ चुड़ते हुए देख खुद को रोक नहीं पाया और मौसी की छूट को अपने रास से भर दिया.

खैर कुछ पल बाद सब अलग हुए और लेट कर अपनी साँसों पर काबू पाने लगे फिर कुछ देर बाद शालू बोली- अब आगे?
अभी तो पूरी दोपहर बाकि है..

विल बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 186

सरलपुर

सब एक साथ हाँ कहते हैं उत्सुकता से सब के मन में यही होता है की क्या होगा इस खेल में, बैठने का क्रम कुछ इस प्रकार होता है की रमन के सीधे हाथ पर पंकज उसके बगल में पूर्वी पूर्वी के बगल में चंचल और चंचल के बगल में चेतन और चेतन के बगल में रिमझिम और रिमझिम के बगल रमन इसका मतलब जो आमने सामने होते हैं वो इस तरह से थे, रमन- चंचल, पंकज- चेतन और पूर्वी रिमझिम. रमन पेन को घूमता है और पेन सबसे पहले आ कर रुकता है…. रमन की और.

रमन पर आते hi सब खुश हो जाते हैं चंचल – लो भैया सबसे पहले तुम hi फंसे.

पूर्वी- सही भी है जीजा hi पहले करके दिखाएं क्या लिखा है.

रमन- हाँ तो कर लेंगे कोई दर थोड़े hi है, पंकज भैया क्या लिखा है.

पंकज फ़ोन में देखता है और हँसते हुए कहता है- अपने सामने बैठे खिलाडी के पेअर को जीभ से चेतना है.

रिम- आये हाय,

पूर्वी- मज़ा hi आ गया.

पंकज- चंचल भाभी करो अपना पेअर आगे.

चंचल शरमाते हुए बोली- सही में चाटोगे क्या हमें और पाप चढ़ेगा.

चेतन- अरे ये खेल है इसमें क्या पाप.

रमन- अरे भाभी हैं हमसे बड़ी है उनके पेअर चाटने में कैसी शर्म ये कह रमन उठता है, और चंचल भी उठती है फिर बिस्तर के नीचे उतर चंचल शरमाते हुए अपना पेअर ऊपर बिस्तर के किनारे रख देती है और साड़ी ऊपर करती है रमन झुकता है और अपनी भाभी के गोर पेअर को अपनी जीभ निकल कर चाटता है. सब उसे ध्यान से देखते रहते हैं फिर जैसा hi रमन पेअर चाट कर अलग होता है तो सब ताली बजाते हैं.

पहली बरी से hi लोगो में उत्सुकता बढ़ जाती है, खैर दोनों hi जगह बदलकर बापिस आकर बैठ जाते हैं.

दोबारा से रमन पेन को घूमता है और इस बार पेन चेतन पर आके रुकता है.

पूर्वी- सही है दोनों भाइयो का नंबर आ गया.

चेतन- चिंता न करो पूर्वी बहनो का भी आएगा, बताओ पंकज भैया क्या लिखा है किस्मत में.

पंकज- भाई तुम्हारी किस्मत में लिखा है की खिलाडी को अपने सामने वाले खिलाडी को प्यार से देखते हुए उसके लिए प्यार भरा गीत गण है.

चेतन- धत्त्त तेरे की, हमारे सामने तो तुम hi बैठो हो पंकज भैया.

सबकी हंसी छूट पड़ती है,

पंकज- तो क्या हुआ भैया हमारे लिए hi गए दो प्यार से कहो तो सर पर दुपट्टा दाल लें फील के लिए.

सब और ज़ोर से हँसते हैं.

चेतन- नहीं नहीं भैया हम गए देंगे ऐसे hi तुम टेंशन न लो.

फिर चेतन थोड़ा सोचता है और गण शुरू करता है- तुझे देखा तो ये जाना सनमममममम, प्यार होता है दीवाना सनममम.

सब लोग उसका गाने में साथ देते हैं वहीं पंकज भी काजोल बनने की पूरी कोशिश करता है लड़कियों की तरह अदाएं दिखा कर.

खैर गाने का अंत तालियों के साथ होता है और फिर से जगह बदली जाती है, अब चेतन पेन को घूमता है जो की रिमझिम पर आकर रुकता है.

पंकज- चलो अंत में किसी लेडीज पर आकर रुका हमें तो लगा था की साला मर्दों hi दुश्मनी है इसको.

रिम- कोई नहीं जीजा अब तो पूरे हो गए न अरमान.

पूर्वी- क्या लिखा है वो तो पढ़ कर बताओ.

पंकज- किसी फिल्म के गाने पर सेक्सी हीरोइन की तरह डांस करना है.

चंचल- अरे वाह अब आएगा मज़ा, चल रिम्मी हो जा शुरू.

रिम- अरे दिया अब नाचना भी पड़ेगा. पर कौनसे गाने पर.

पंकज- कोई भी हो पर साली साहिबा थोड़ा सेक्सी सा डांस होना चाहिए.

पूर्वी- तुम ज़्यादा भावनाओ में मत बहो.

पंकज- अरे हम तो बस जो लिखा है वही बता रहे हैं.

खैर रिमझिम कड़ी होती है शरमाते हुए.

चंचल- रुक रिम्मी गण मैं लगाती हूँ

.और ये कहकर चंचल अपने फ़ोन में गण चलती है. जिसे सुन रिमझिम गुस्से से चंचल को देखती है वहीं बाकि सब ज़ोर से हँसते हैं क्यूंकि गाने के बोल hi कुछ ऐसे थे- कुण्डी मत खड़काओ राजा सीधा अंदर आओ राजा.

रिमझिम भी थोड़ा शर्माने के बाद नाचना शुरू करती है पर नाचते हुए अपनी पूरी अदाएं दिखती है और जिसका नतीजा सरे मर्दों की आँखों की चमक और पाजामे का उभर था. खैर ताली बजा कर उसके नाच का सब प्रोत्साहन करते हैं और रिमझिम आकर बैठ जाती है जगह बदलकर.

इस बार रिमझिम को अवसर मिलता है पेन घूमने का और इस बार आकर रुकता है पंकज पर.

रिम – लो जीजा अब फंसे

पंकज- ये साला पेन मर्दों पे hi ज़्यादा रुकता है.

चंचल – का भैया अब नखरे मत करो और पढ़ो अपनी किस्मत में का लिखा है.

पंकज- हाँ भाभी पढ़ते हैं. इसमें लिखा है- अपना एक कपडा उतर कर सामने वाले खिलादिको देना है आगे उसकी मर्ज़ी है वो बापिस करे या कुछ और.

ये सुनते hi उनकसमने बैठी पूर्वी बोली- अरे वाह लाओ लाओ अपनी शर्ट.

पंकज- अरे यार दे रहे हैं हमारी बरी में तुम्हे hi होना था सामने.

चंचल- ये तो हमेशा hi सामने रहने आई हैं भैया इनसे बचकर कहाँ जाओगे?

चेतन- सही में.

पंकज अपनी टीशर्ट उतरता है और पूर्वी को दे देता है जिसे लेकर वो तुरंत उठती है और बाथरूम का दरवाज़ा खोल पानी की बाल्टी में डुबो देती है खुश होते हुए.

पंकज- अरे ये क्या कर रही हो पगला गयी हो का.

रमन- लो भैया तुम्हारी टीशर्ट तो गयी.

रिम- सही किआ पूर्वी

पंकज- चलो अब हमारी बरी हम घूमते हैं पेन.

सब- हाँ घुमाओ.

पंकज पेन घूमता है और इस बार चंचल पर ाजर रुकता है

पंकज- जे बात.

रिम- फंस गयी जीजी…

चंचल- हाय दिया न जाने क्या करवाओगे तुम लोग अब हमसे.

चेतन- अरे इतना कहे दर रही हो, पंकज भाई बताओ तो क्या लिखा है.

पंकज फ़ोन उठता है और पढता है- अपने सामने वाले खिलाडी के साथ किसी रोमांटिक गाने पर रोमांस करना है.

चंचल – अरे ढैय्या,

रिम- ढैय्या क्या हो जाओ देवर भाभी शुरू.

क्यूंकि चंचल के सामने इस बार रमन था जो की ये सुन थोड़ा शर्मा रहा था साथ hi झेप भी रहा था.

वहीं चंचल भी शर्मा रही थी

चंचल- अरे हमसे नहीं हो पायेगा.

रिम- अरे जीजी ये बात पहले हो चुकी है जो आएगा करना पड़ेगा. अब शर्म छोडो.

पूर्वी- और का दिखाओ देवर भाभी की जोड़ी का जलवा, काजोल शाहरुख़ समझो एक दुसरे को.

खैर सबके कहने पर चंचल और रमन खड़े हुए और फिर रिमझिम ने गण भी रोमांटिक सा चलाया, सूरज हुआ मध्हम चाँद बांधने लगा.

चंचल भी गाने की धुन के साथ गुनगुनाते हुए रमन के इर्द गिर्द घूमने लगी और जितना उससे हो रहा था उतनी एक्टिंग कर रही थी वहीं रमन भी अपनी सुन्दर भाभी का साथ दे रहा था,

रिम- अरे क्या दूर दूर घूम रहे हो रोमांस करो अचे से चिपक कर.

पूर्वी- और क्या.

कहने पर दोनों पास आये गाने के बोल गुनगुनाते हुए, चंचल ने अपनी बाहें रमन के गले में दाल दी वहीं रमन ने भी अपनी भाभी की कमर को थम लिए एक दुसरे की और देखते हुए दोनों कुछ देर कुर थिरके फिर अलग हो गए.

सबने ताली बजाकर स्वागत किआ और जब दोनों बापिस बैठे तो चेतन ने आँखों hi आँखों में चंचल को कुछ इशारा किआ जैसे कुछ याद दिलाना छह रहा हो, जिसे समझ चंचल शर्मा गयी, खैर खेल दोबारा शुरू हुआ, और चंचल ने पेन घुमाया जो की आकर रुका पूर्वी पर.

पंकज- अब सुनी है पेन ने हमारे मन की.

पूर्वी- अब इसमें सुनी क्या है बरी hi तो आई है.

रिम- और क्या अभी कर लेगी पूर्वी हलके में ले रहे हो क्या मेरी बहन को जीजाजी.

चंचल – हाँ औरतों को हलके में मत लेना.

चेतन- औरत कभी हलके में ली hi नहीं जा सकती क्यों भाई पंकज.

पंकज- बिलकुल सही चलो पढ़ते हैं क्या लिखा है तुम्हारी बरी में,

पंकज फ़ोन उठता है और पढता है- अपने सामने वाले के साथ सबके सामने एक कपडा बदलना है. अपना उसे पहनने को देना है और उसका खुद पहनना है सबके सामने.

पूर्वी- हैंण्ण्न ये क्या बात हुई.

रमन- अब बात का हुई जो लिखा है वो करो साली जी.

चंचल- पर तेरे सामने तो मैं हूँ पूर्वी.

चेतन – तो अब देखो कौनसा कपडा बदलना है एक दुसरे से.

पूर्वी- क्या करें अब .

पंकज- बदलो कपडा और क्या करोगी.

पूर्वी- रुको तो सही चंचल जीजी तुम बताओ न क्या करें.

चंचल- समझ नहीं आ रहा.

रिम – ारी जीजी सब अपने hi हैं तुम दोनों ऐसे शर्मा रही हो, साड़ी बदलो काम ख़तम करो.

पूर्वी- हाँ जीजी यही सही रहेगा.

चंचल- ठीक है फिर करते हैं, एक तो हमारी बरी में hi हम फास्ट हैं और दूसरो की बजी में भी.

दोनों बिस्तर से उतर कड़ी होती हैं और अपनी अपनी साड़ी उतरने लगती हैं, तीनो hi मर्दो की आँखें चमक रही होती हैं पंकज की नज़र गदराई चंचल पर थी तो चेतन की पूर्वी पर और रमन की दोनों पर, खैर साड़ी उतर जल्दी से दोनों एक दुसरे को साड़ी देती हैं और दोनों जल्दी से साड़ी लपेट भी लेती हैं.

चंचल – लो भैया हो गया.

दोनों बापिस आकर बैठ जाते हैं जगह बदलकर, अब पूर्वी पेन घूमती है और आकर रुकता है रिमझिम पर.

पंकज- अब सही है ये ऐसे hi औरतों पर रुकता रहे.

पूर्वी- खुश न हो ज़्यादा और लिखा क्या है बताओ.

रिम- हाँ बस नाचना न पड़े इस बार.

पंकज- हाँ तो लिखा है की सामने वाले खिलाडी के पैरों पर पेअर रखकर खड़ा होना है उसकी बाहों में बाहें दाल उसकी आँखों में देखते रहना है और एक रोमांटिक गीत पर थोड़ा थोड़ा थिरकना है.

रिम- अरे दादा ये तो नाचने से भी बुरा है.

रमन – तुम्हारे लिए या भैया के लिए पेअर तो उनके कुचले जायेंगे.

रिम – भैया तैयार हो.

चेतन- हाँ इसमें क्या दिक्कत है.

क्यूंकि सामने चेतन hi बैठा था, उसे भी थोड़ी असमंजस थी न जाने क्या होगा.

खैर दोनों खड़े हुए रिमझिम ने अपने दोनों पेअर चेतन के पंजों पर चढ़ा दिए और अपनी बाहें जेठ की बाहों में दाल उससे चिपक गयी, दोनों नियम अनुसार एक दुसरे की आँखों में देख रहे थे और तभी पीछे से किसी ने गण भी चला दिया.

दोनों एक दुसरे से बिलकुल चिपके हुए थे पहली बार ऐसा था जो चेतन रिमझिम के इतने करीब आया था, शुरुआत में कुछ पल तो ठीक रहा पर फिर चेतन के अंदर उत्तेजना बढ़ने लगी, और रिमझिम जैसी औरत किसी की बाहों में हो और वो उत्तेजित न हो ऐसा कैसे हो सकता है, छोटे भाई की गदराई कामुक यौवन से भरी हुई बीवी चेतन की बाहों में थी ये hi सोच चेतन का लुंड तन्ने लगा, उसने रिमझिम को सँभालने के लिए अपने हाथ उसकी पीठ पर टिकाये हुए थे ताकि वो गिर न जाये, चेतन ने अपने कदम हलके हलके इधर उधर चलने शुरू किये, जिससे हिलने की वजह से उसके लुंड का उभर रिमझिम की जांघों पर साड़ी के ऊपर से hi घिसने लगा और जितना घिसता उतना hi बढ़ता जा रहा था जो की कुछ hi पालो में रिमझिम को महसूस होने लगा वहीं चेतन की हालत ख़राब होने लगी ये सोचकर की न जाने रिमझिम क्या सोच रही होगी, पर रिमझिम तो उसकी आँखों के सामने थी उसकी आँखों में देख गीत गुनगुना रही थी, और चेतन को उसकी आँखों या चेहरे पर कुछ भी ऐसा नहीं दिख रहा था जिससे ऐसा लगे उसे कुछ परेशानी है बस यही रहत चेतन को ख़ुशी दे रही थी, वैस्व हालत तो रिमझिम की भी ख़राब हो रही थी की क्यूंकि चेतन का लुंड सीधा उसकी छूट पर hi वार कर रहा था और रिमझिम को खुद को संभालना मुश्किल हो रहा था पर वो कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहती थी की जिससे उसके जेठ को अजीब एहसास हो.

खैर कुछ देर बाद गण ख़तम हुआ सबने उनके लिए ताली बजे और दोनों आकर बैठ बाये, अब रिमझिम ने पेन घुमाया जो की आकर रुका पूर्वी पर.

पूर्वी- अरे इसे हो क्या रहा है मेरे पीछे hi पद गया है.

रमन- सही है इस बार हूँ हैं सामने साली साहिबा..

रिम- ओह्हो कित्ते खुश हो रहे हो.

चेतन- जीजा के सामने साली हो, जीजा खुश तो होगा hi.

पंकज- चलो भाई देखते हैं क्या करना है जीजा की साली को. लिखा है- सामने वाले खिलाडी के साथ, पालक न झपकने वाला खेल खेलना है जो हारेगा उसे अपने बदन से एक कपडा उतरना पड़ेगा.

रिम- लो ये हुआ जीजा साली का मुक़ाबला.

चंचल- हाँ देखो किसका कपडा उतरता है.

रमन- तैयार साली साहिबा.

पूर्वी- तुम अपना देखो जीजा हम तो तैयार hi हैं.

चेतन- तो शुरू करो दोनों. एक दो तीन

दोनों एक दुसरे को देखते हैं बिना पालक झपकाए बाकि सब दोनों को देख रहे होते हैं की कौन जीतेगा कौन हारेगा . मुक़ाबला काफी कड़ा होता है पर अंत में पूर्वी पालक झपका देती है और रमन जीत जाता है.

चंचल – अरे पूर्वी कुछ देर और टिकती तो पक्का जीत जाती.

पूर्वी- का करूँ जीजू रुका hi नहीं गया.

पंकज- भाई अब शर्त पूरी करनी पड़ेगी.

रिम – जीजा तुम्हे बड़ी जल्दी हो रही है अपनी बीवी के कपडे उतरने की.

पंकज – अरे भाई हम तो खेल रहे हैं इसमें सब बराबर हैं.

रमन- वो तो है भाई.

पूर्वी कुछ सोचते हुए उठती है और कहती है कोई भी एक कपडा उतरना है न.

चेतन- हाँ.

पूर्वी मुस्कुराती है और झुकती है और झुक कर अपनी साडी को घुटनो तक उठती है और फिर अंदर हाथ दाल कुछ करती है और अगले hi पल उसके घुटनो से उसकी काळा रंग की चड्डी नीचे सरक रही होती है जिसे देख सब हैरान रह जाते हैं. पूर्वी कच्ची उतरती है और उसे उतर कर सबको दिखते हुए एक तरफ फ़ेंक देती है.

पूर्वी के इस करतब से सब थोड़े हैरान थे किसी ने सोचा नहीं था की कुछ ऐसा होगा.

पूर्वी सबके चेहरे को देखती है और कहती है- क्या हुआ एक कपडे की बात हुई थी और वो उतर दिया और तुम सब तो ऐसे देख रहे हो जैसे तुम नहीं पहनते कोई.

इस पर सब हंसने लगते हैं और खैर खेल बापिस शुरू होता है और इस बार आकर रुकता है, चेतन पर.

चेतन- धत्त्त तेरे की.

पूर्वी- क्यों जीजा अब क्यों धत्त तेरे की, खुद पर आई तो.

चेतन- ाचा करते हैं, क्या लिखा भाई पंकज बताओ..

पंकज- लिखा है की अंडरवियर के अलावा बाकि सब कपडे उतर कर मॉडल की तरह चलकर दिखाना है.

चेतन- ये नहीं करेंगे हम.

पूर्वी- ये क्या बात हुई जीजा, अब तुम पीछे नहीं हैट सकते.

चंचल – और क्या अब जो आया है वो तो करना पड़ेगा.

चेतन- ाचा अगर अभी किसी औरत पर ये आया होता तो तुम लोग करती ये?

ये सुन कर तीनो hi एक दुसरे की और देख कर बात सँभालते हुए चंचल बोली- पर आया तो तुम पर है न तुम करो.

चेतन- नहीं अगर तुम में से किसी पर आया होता तो करती?

रिम- हाँ बिलकुल करती, जब खेल रहे हैं तो डरना क्या, पर आता तब न.

ये कह रिमझिम ने चंचल और पूर्वी को ताली मरी एयर तीनो हंसने लगी, अब बेचारे चेतन फंस गए थे खड़े हुए शरमाते हुए,

पंकज – अरे चेतन भैया मरद होकर का शर्मा रहे हो खेत पर तुबेल पर ऐसे hi तो नहाते हैं.

चेतन- अरे कपडे उतरने का वो नहीं है पर वो मॉडल की तरह चलकर कैसे दिखाएंगे.

रमन- अरे जैसे जितना आये कभी देखा हो वैसे hi कर लेना भैया…

खैर प्रोत्साहन मिलने पर चेतन ने सरे कपडे उतरे और फिर कच्चा पहन मॉडल की तरह कमरे में चक्कर लगाए कुर उनके चक्करों पर सबने खूब ताली पीती.

खैर चेतन का काम पूरा हुआ और वो ऐसे hi आकर बैठ गए, और फिर सबके तैयार होते hi पेन को घुमाया, जो की आकर रुका रिमझिम पर जिसके सामने चंचल बैठी थी.

चेतन- अरे हमें लगा दोबारा हम पर hi न आ जाये,

पूर्वी- चलो बच गए जीजा तुम इस बार.

रिम- क्या लिखा है जीजा बताओ तो.

पंकज- लिखा है की सामने वाले खिलाडी के साथ अपने बदन का कोई हिस्सा नंगा करके उसके बदन के उसी नंगे हिस्से से रगड़ना है, हाथ पेअर और चेहरा छोड़कर.

चंचल- किसने बनाये ये ऐसे अजीब अजीब से काम.

रमन- किसी ने भी बनाये हो भाभी करने को पड़ेंगे.

रिम- आ जाओ जीजी देवरानी जेठानी की जोड़ी का कमल दिखते हैं,

चंचल – पर कौनसा अंग घिसेगी.

रिम- हाँ यार हाथ पेअर चेहरा तो मन है तो पीठ?

चंचल – नहीं हो पायेगा.

रिम- तो पेट?

पूर्वी- हाँ वही सही रहेगा..

चंचल- व्हाल ठीक है तुम कहते हो तो.

चंचल शर्मा के दिखा तो नहीं रही थी पर उसे भी खेल में मज़ा आ रहा था वैस्व भी उसे लग रहा था जिस लिए वो और उसका पति यहाँ आये हैं उसे करने में ये खेल बहुत अछि भूमिका निभा सकता है.

चंचल ने अपना पल्लू गिरा दिया और रिमझिम ने अपना, और दोनों गदराई घोड़ियां एक दुसरे के पास आई और एक दुसरे से नंगा पेट मिला कर घिसने लगी, एक दुसरे के चिकने कोमल पेट की त्वचा से दोनों को hi एक अजीब सा एहसास हो रहा था, दोनों खिलखिलाते हुए ये खेल पूरा कर रही थी वहीं बाकि लोग उन्हें देख मज़े ले रहे थे, दोनों के पेट के साथ साथ बड़ी बड़ी चूचियां भी ब्लाउज के ऊपर से hi आपस में गुब्बारों की तरह घिस रही थी , जिन्हे देख मर्दो के पजामा में उभर बन रहे थे.

खैर जल्दी hi खेल ख़तम हुआ दोनों हंसती हुई जगह बदलकर बैठ गयी सबने ताली बजाकर स्वागत किआ और खेल दोबारा शुरू हुआ, पूर्वी ने पेन को घुमाया जो की रमन पर आ कर रुका.

पूर्वी- क्यों जीजा कैसी रही.

रमन- हमें पता है तुमने जानकर ऐसे घुमाया की हमपर आ कर रुके.

पूर्वी- हाँ ऐसी कला तुमने hi सिखाई है हमें हैं न.

रमन- अरे पंकज भैया पढ़ कर बताओ क्या लिखा है.

पंकज- हाँ भैया लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी के साथ भीगते हुए नाचना है, उसके बाद खिलाडी की मर्ज़ी होगी या तो भीगे कपडे में खेल आगे बढ़ाये या उतारकर.

रमन- धत्त्त तेरे की मेरे सामने तो तुम hi हो.

चंचल- सही है साथ नहाओ दोनों साडू.

रिम- ये आया मज़ेदार.

पंकज – ये खेल भी न जाने क्या क्या करवाएगा.

खैर दोनों उठे और दरवाज़ा खोल कर सबको दिखते हुए फव्वारे के नीचे खड़े हो गए जहाँ पंकज रमन को साबुन लगाने की एक्टिंग करने लगे जिसे देख सब हंसी से ओट पॉट हो गए.

खैर नहाने के बाद दोनों ने hi कपडे उतरे और अपने बदन को पांच कर तौलिया लपेट लपेट कर बैठ गए अब तीनो मर्दों की हालत एक जैसी hi थी लगभग चेतन अंडरवियर में था और रमन पंकज सिर्फ एक तौलिए से अपनी इज़्ज़त बचाये हुए थे,

खैर दोबारा खेल शुरू हुआ और रमन ने पेन घुनाया जो की आकर रुका उसकी भाभी चंचल पर.

चंचल – अरे ढैय्या फिर से हुनरी बरी आ गयी.

चेतन- तुम तब भी सही हो हम मर्दों को देखो बदन ओर कपडे तक नहीं रहे.

रिम- बताओ जीजा क्या लिखा है जीजी की किस्मत में.

पंकज- भाभी तुम्हारी किस्मत में लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी से अपनी नाभि को तीन मिनट्स तक चुसवाना है .

पंकज ने थोड़ा झेंपते हुए कहा क्यूंकि अभी वो hi चंचल के सामने थे.

चंचल – धत्त्त ये कैसे होगा.

रिम – जैसे होता है वैसे hi होगा, जीजाजी hi हैं तुम्हारे सामने,

पूर्वी- मज़े आ गए इनके तो. जीजाजी तुम्हे बुरा तो नहीं लगेगा.

चेतन- नहीं तुम्हे लगेगा क्या?

पूर्वी – बिलकुल नहीं.

रिम- तो जीजी दिखाओ अपनी सुन्दर नाभि.

Chanchal-ye साडी अजीब चीज़ें हमारी बरी में hi आ रही है, कहाँ खड़े होना है या यही.

रमन- अरे यहीं लेट जाओ आराम से.

ये कहकर रमन ने बीच से थाली उथली और चंचल के लिए सबने जगह बनाई और चंचल बीच में लेट गयी साथ hi अपने पेट से साड़ी को भी साइड कर दिया जिससे उसकी गोल गहरी नाभि जो की सपाट पेट के बीच बेहद सुन्दर लग रही थी सबकी आँखों के सामने आ गयी, उसे बदन में वक अजीब सी उत्तेजना और सिधान का एहसास हो रहा था, वहीं चेतन भी अपनी पत्नी को इस अवस्था में देख काफी उत्तेजित महसूस कर रहा था, चंचल ने जगह ली तो थोड़ा झिझकते हुए पंकज आगे झुके और अपना भर अपनी कोहनी पर दाल अपना चेहरा चंचल के पेट के ऊपर लाये तो उसकी खूबसूरती देख ुंक्व मुँह में पानी आ गया, किस्मत से उन्हें ये मौका मिला था जाने तो नहीं दे सकते थे,

रिम- समय शुरू होता है अब.

और ये कहते hi पंकज ने अपनी जीभ चंचल की नाभि में घुसा दी और चूसने लगे.

चंचल- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्हह है दिया गुदगुदी हो रही है.


चंचल के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी उसके बदन में सिरहन हो रही थी और वो छह कर भी इस उत्तेजना और इस एहसास को नकार नहीं प् रही थी, उसे सबके बीच में ऐसा करने से ाचा लग दहता पर शर्म भी आ रही थी.

वहीं ये सब चेतन के लिए भी थोड़ा अजीब था क्यूंकि अपनी पत्नी की नाभि को किसी और द्वारा चूसते हुए देखना उसे एक अलग hi एहसास दे रहा था, उसका लुंड कच्चे में बिलकुल तना हुआ था जो की साफ़ देखा जा सकता था,

चंचल तो हर पल के साथ बेकाबू होती जा रही थी उसे लग रहा था वो नाभि चुसवाने से hi झाड़ न जाये, वहीं पंकज उसकी नाभि ऐसे चूस रहा था जैसे उसमे से कोई रास निकल रहा हो.

खैर तीन मिनट्स हुए तो रिमझिम ने बताया और पंकज ने अपना मुँह चंचल के पेट से हटाया, तो सबकी नज़र चंचल की नाभि पर पड़ी जो की थूक से सनी हुई थी, चंचल काफी शर्म महसूस कर रही थी इसलिए चुपचाप जगह बदल कर बैठ गयी, पर वो मन hi मन बहुत उत्तेजित हो चुकी थी, उसका मन कर रहा था की ऐसा hi कुछ और सिलसिला चलता रहे.

खैर चंचल ने पेन घुमाया और इस बार उसके पति चेतन पर आकर रुका.

पूर्वी- ये हुई असली पत्नी वाली बात, अपने साथ पति का नंबर ज़रूर लती हैं.

चेतन- हाँ भाई पत्नी के साथ पति का नंबर तो आएगा hi.

रमन- बताओ भैया क्या करना है भैया को.

पंकज ने फ़ोन उठाया और बोलै- भैया लिखा है सामने वाले खिलाडी के साथ बाथरूम में जाकर नहाना है पर शर्त है दोनों के hi कपडे गीले नहीं होने चाहिए पर बदन गीला होना चाहिए. जो भी कपडा गीला होगा उसे उतर कर आगे का खेल खेलना होगा. पर एक और चीज़ ये सब सिर्फ 5 मीन्स में करके बहार आना होगा अगर इससे लेट हुआ तो एक एक कपडे और उतरना पड़ेगा.

चेतन- अरे दादा ये कैसे होगा.

पंकज- मतलब कपडे उतर कर नहाना होगा.

पूर्वी- सामने तो रिम्मी है, बुरे फंसे दोनों जेठ और बहु.

Chetan-kya करें कैसे होगा.

अपने छोटे भाई की पत्नी के साथ नहाने के ख्याल से hi उसके मन में तरंगे उठ रही थी.

पूर्वी- कैसे भी होगा करना तो पड़ेगा. क्यों रिम्मी चल.

रिम – हाँ हाँ कर रही हूँ न , चलिए भैया. नहाना है पर कपडे नहीं भीगने चाहिए.

पंकज- हाँ.

दोनों खड़े हुए और बाथरूम में जाकर अंदर से दरवाज़ा बंद कर रिमझिम ने टाइमर लगा दिया

चेतन- रिम्मी तू उधर घूमकर नहले मैं इधर घूमजाता हूँ क्यूंकि मुझे कच्चा भी उतरना पड़ेगा.

रिम- हाँ भैया मैं भी कुछ कपडे उतर रही हूँ ताकि बाद में पहन सकूँ.

दोनों ने एक दुसरे की और पीठ कर ली और चेतन ने अपना कच्चा उतरा और पूरा नंगा हो गया, अपने भाई की बीवी के साथ बाथरूम में नंगा होने के एहसास से hi उसका लुंड बिलकुल तन कर खड़ा था वो कैसे भी छह रहा था की रिमझिम गलती ऐ भी न देखले नहीं तो क्या सोचेगी,

वहीं रिमझिम ने जल्दी से साड़ी उतरी और फिर ब्लाउज भी उतर दिया और बोली भैया चालू कर दो पानी, चेतन जो की ये सोच रहा था की रिमझिम ने क्या क्या उतरा होगा , वो रिमझिम की आवाज़ सुनकर होश में आया और फव्वारा चलने के लिए घूमा और चलते हुए तिरछी नज़रों से उसने रिम्मी को देखा जो की ब्लाउज और पेटीकोट में थी और कमाल लग रही थी, चेतन की उत्तेजना उसके सर पर सवार होती जा रही थी उसने देखा की रिमझिम की पीठ उसकी और है तो उसने पानी चालू कर दिया और इसका पूरा फायदा उठाया और पानी में भीगते हुए रिमझिम के बदन को देखने लगा, उसका गोर बदन पर काली ब्रा बहुत जाँच रही थी साथ hi पानी से जल्दी hi उसका पेटीकोट बिलकुल भीग कर उसके चूतड़ों से चिपक गया और उसके चूतड़ों का अकार साथ hi उसकी काली कच्ची साफ़ साफ़ चेतन की नज़र के सामने आ गयी जिसे देख चेतन बिलकुल hi हैरान और उत्तेजित हो गया उसका लुंड ठुमके पर ठुमके मरने लगा, वहीं रिमझिम को अंदाज़ा था चेतन उसे देख रहा है पर वो ऐसे दर्शा रही थी जैसे उसे पता नहीं चल रहा, उसका प्रयास तो चेतन की उत्तेजना को और भड़काना था, कुछ पल बाद रिमझिम ने चेतन से कहा भैया पानी बंद कर दो.

चेतन ने तुरंत पानी बंद कर दिया इसके बाद रिमझिम ने वैसे hi खड़े खड़े अपनी पीठ पर हाथ लेकर ब्रा को खोला , और उसे ऐसा करते हुए चेतन देख रहा था, रिमझिम की नंगी मखमली पीठ देख चेतन का मन किआ उसे पीछे से चाट ले पर उसने किसी तरह खुद को रोका नीचे उसका लुंड बिलकुल hi कड़क होकर ठुमके नार रहा था, रिमझिम ने ब्रा को खोल कर नीचे गिरा दिया, चेतन का बड़ा मन हुआ की एक बार वो रिम्मी की छूछीयो की झलक देख ले पर वो कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था इसलिए उसने खुद को रोका... वहीं ब्रा के बाद रिमझिम ने चेतन के ऊपर एक और हमला किआ और वो था की उसने अपने पेटीकोट के नाड़े की गांठ को खोला और अगले hi पल चेतन को रिमझिम का पेटीकोट उसके चूतड़ों से नीचे सरक कर उसके घुटनो और फिर पैरों में जाता दिखा और रिमझिम के बदन पर सिर्फ एक चड्डी रह गयी जो की उसके गोल चूतड़ों को छिपाने में कामयाब नहीं हो रही थी, रिमझिम के लगभग नंगे बदन साथ hi उसके अधनंगे चूतड़ों को देख चेतन का तो दिनाग hi घूम गया, इसी बीच रिमझिम ने कुछ ऐसा किआ जिससे चेतन की तो सांस hi अटक गयी, अपने पैरों से पेटीकोट निकलने के बाद रिमझिम थोड़ा आगे झुकी और अपने हाथों को अपनी पंतय की लास्टिक में फंसाया और फिर उसे नीचे खिसकने लगी, चेतन के लिए तो ये असहनीय हो गया क्यूंकि धीरे धीरे उसके समनर रिमझिम के चूतड़ नंगे होने लगे जल्दी hi उसकी चड्डी जांघों तक पहुँच गयी और चेतन के सामने रिमझिम के पूरे नंगे चूतड़ आ गए जिन्हे देख वो बिलकुल सुन्न सा रह गया उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे.. या वो कुछ सोच hi नहीं प् रहा था, वहीं रिमझिम ने तो जैसे आज क़हर धने का पूरा इरादा कर रखा था, चड्डी को पैरों से निकलने के लिए रिमझिम आगे झुकी तो उसकर चूतड़ फ़ैल गए और चेतन के सामने रिमझिम की गांड के सुन्दर छेड़ की झलक पल भर को आई और फिर रिमझिम के सीधे होने से छिप गयी, चेतन ये नज़ारा देख पागल हो गया उसका मन हुआ की अभी इस गांड के छेड़ में अपना लुंड घुसा दूँ, उसका लुंड बिलकुल कड़क हो ठुमके मर रहा था, इसी बीच रिमझिम न जाने क्यों एक कदम पीछे हुई और चेतन का नंगा लुंड उसके चूतड़ों की दरार में घुस गया जिसके साथ hi दोनों के मुँह से आह्हः निकला..

चेतन तो अपने लुंड पर रिमझिम के चूतड़ों के एहसास से पागल हो गया उसकी आँखें बंद हो गयी. वहीं रिमझिम जानकार नाटक करते हुए बोली- आह्हः भैया तुम इधर hi मुँह करके खड़े हो मुझे लगा उधर होंगे.

चेतन- न्न नहीं वो वो वो अभी घूमा hi था,

रिम- आँखें तो बंद हैं न तुम्हारी भैया?

चेतन- हाँ हाँ हाँ बंद है बंद हैं.

हालाँकि ये सब कहते हुए भी रिमझिम वैसे की वैसी hi रही उसनर अपने चूतड़ों को हल्का सा और पीछे धकेला चेतन के लुंड की और वहीं चेतन का लुंड जो की रिमझिम के चूतड़ों की दरार में था उसके लिए ये सब सहना मुश्किल होता जा रहा था, वो किसी तरह से रिमझिम की बातों का जवाब दे रहा था, पर वहीं उसका लुंड जैसे खुद का hi दिनाग पाकर आगे पीछे होने लगा उसकी कमर हलके हलके झटके खाने लगी और उसका लुंड रिमझिम की दरार में हल्का हल्का ऊपर नीचे घिसने लगा, ये एहसास रिमझिम को हुआ तो वो समाज गयी की चेतन बेहद उत्तेजित हो गया है और अब वो अपने होश में नहीं है,

रिम- ओह्ह्ह भैया,

रिमझिम की इस सिसकी से चेतन का जोश और हिम्मत और बढ़ी उसे लगा की रिमझिम भी उसकी तरह उत्तेजित हो गयी है इसलिए तो चूतड़ों पर लुंड है पर हटा नहीं रही बस ये hi सोच उसके हाथ भी काम में लग गए एक हाथ रिमझिम के गीले पेट पर पहुंचा तो दुसरे से उसने रिम्मी के चूतड़ को मसलना शुरू किआ साथ hi अपना लुंड ऊपर नीचे उसके चूतड़ों के बीच घिसने लगा, उसने सोचा नहीं था कभी उसे ऐसा एहसास रिमझिम के साथ मिलेगा पर आज जब हो रहा था तो शायद hi कभी वो इतना उत्तेजित हुआ होगा, रिमझिम ने भी उसका देते हुए उसके हाथ पकड़े और उन्हें उठाकर अपनी उठी हुई छूछीयो पर रख दिया, हाथ में रिमझिम की छूछीयो का एहसास और उसका साथ पते hi चेतन बिलकुल जोश से भर गया और रिमझिम से बिलकुल पीछे से चिपक अपना लुंड उसकी गांड की दरार में घिसने लगा साथ hi उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को मसलते हुए आहें भरने लगा.

चेतन- अह्ह्ह्हह रिम्मीईई अह्ह्ह्ह.

रिम- ओह्ह्ह भैयाह

चेतन अपने चरम के करीब hi था उसे लग रहा था की अब उसका निकला की तब निकला पर तभी दरवाज़ा पर खटखट हुई और बहार से पूर्वी की आवाज़ आई, 5 मीन्स ख़त्म हो गए क्या कर रहे हो?

दोनों हड़बड़ाहट में अलग हुए चेतन तो बिलकुल स्तब्ध सा था.. वो कुछ बोल hi नहीं पाया तो रिमझिम बोली- अरे आ रहे हैं…

रिमझिम जल्दी से अपनी साड़ी उठा कर पहनने लगी और जल्दी जैसे तैसे लपेट कर उसने ब्लाउज पहना उधर तब तक चेतन ने भी अपना कच्चा चढ़ा लिए पर उसका लुंड उसमे अब भी तकलीफ दे रहा था पर अभी क्या कर सकते थे इसलिए दोनों जल्दी hi बहार निकले ..

पूर्वी- बड़ी देर लगाडी क्या कर रहे थे दोनों अंदर. चंचल जीजी देखो अपने पति और देवरानी को.

चंचल- हाँ देख रही हूँ साथ नाहा रहे थे,

चंचल ने हँसते हुए कहा वहीं चेतन और रिमझिम मुस्कुराते हुए उनकी बातें सुन रहे थे.

पूर्वी- पर 5 मीन्स स्व ज़्यादा लगाए तुम लोगो ने तो एक एक कपडा और उतरना पड़ेगा.

चेतन- क्या पर हमारे पास तो एक hi कपडा है.

पंकज- अब भाई जो भी हो नियम तो नियम है.

चेतन- अरे तो क्या नंगे होकर बैठें?

पूर्वी- तो क्या हुआ जीजा डरते हो का? हेहेहे.

पंकज – एक काम करो कच्चा उतर लो ये चादर दाल के बैठ जाना.

चंचल अपने पति की मजबूरी पर हंस रही थी – कोई बात नहीं जी चादर दाल लो.

चेतन- तुम्हे बड़ा मज़ा आ रहा है.

चंचल – अब खेल है मज़ा तो आएगा hi,

खैर चेतन ने शरमाते हुए अपना कच्चा उतरा और जल्दी से बिस्तर पर बैठ कर अपनी जांघों को चादर से धक् लिए पर इतना बहुत था सबको उसका झूलता हुआ कड़क लुंड देखने के लिए.

चंचल- अरे ओह तुम कहाँ चुपचाप बैठी जा रही हो.

चंचल ने रिमझिम को बैठते देखा तो कहा.

रिम- क्या हुआ जीजी.

चंचल – हुआ कुछ नहीं तुम भी एक कपडा उतरो कोई.

रिम- अरे रहने दो न क्या उतरूं?

चंचल- नहीं बीटा नियम तो नियम हैं.

रिमझिम ने सबको देखा तो सबका यही फैसला था खैर रिमझिम ने दूसरी और मुँह किआ और अपना ब्लाउज खोल कर उतर दिया और साड़ी से सीना धक् कर बैठ गयी

ये जानकार की रिम ऊपर से नंगी है और साड़ी में उसकी छूछीयों की झलक देखकर सब hi उत्तेजित होने लगे खासकर चेतन का तो वैसे भी बाथरूम में जो हुआ उसके बाद बुरा हाल था.

रिम- अब ठीक, अब खेलो आगे.

चेतन ने फिर से पेन घुमाया जो की इस बार रमन पर आ कर रुका,

रमन- अब तो बस तौलिए है बदन पर वो भी न उतर जाये.

चंचल- तुम्हारे भैया पर तो वो भी नहीं है हेहेहे.

चेतन- अरे पंकज भाई तुम बताओ क्या लिखा है,

पंकज फ़ोन उठाकर पढता है- सामने वाले खिलाडी के इन तीन अंगो में से कोई एक उसकी मर्ज़ी के अनुसार तीन मिनट्स तक चूसो, होंठ, नाभि, निप्पल.

रिम- ये तो तगड़ा hi है.

चंचल- हाँ भाई ये खेल कुछ ज़्यादा hi आगे नहीं जा रहा.

पंकज- कोई रुकना चाहता है क्या.

रमन- नहीं रुकेंगे नहीं ये बात तो पहले hi तय हो चुकी.

रिम – बता पूर्वी फिर क्या चुसवाना चाहेगी अपने जीजा से,

क्यूंकि रमन के सामने पूर्वी hi थी,

पूर्वी- अरे यार कहाँ फंसा दिया,

चंचल- भाई अपनी बरी में सबको यही लगता है की कहाँ फंस गए पर खेलना है तो करना तो पड़ेगा hi.

पूर्वी- ऐ जी तुम hi बताओ न कुछ.

पंकज- हम क्या बताएं तुम जीजा साली की बात है, तुम जानो.

पूर्वी- चंचल जीजी ने नाभि चुसवाई hi है हम भी वही चुनते हैं.

रिम – ठीक है फिर लेट जा.

बीच से थाली हटी और पूर्वी बीच में लेट गयी साथ hi उसनर अपना पल्लू भी नीचे पेट से हटा दिया.

रमन थोड़ा हिचकिचा रहा था पर सबके प्रोत्साहन देने पर वो आगे झुका और अपनी जीभ को पूर्वी की नाभि से लगा दिया और चूसने लगा शुरुवाती हिचकिचाहट के बाद वो मज़े लेकर चूसने लगा वहीं पूर्वी लेती हुई झटपटा रही थी, बाकि सब देख कर उत्तेजित हो रहे थे..

इसी तरह तीन मिनट्स बीते और रमन पूर्वी अलग हुए, पूर्वी की नाभि रमन के थूक से सनी हुई थी, खैर दोनों बापिस घेरे में बैठे जगह बदलकर और खेल दोबारा शुरू हुआ,

रमन ने घुमाया जो की चंचल पर आकर रुका.

चंचल- लो फिर से फंस गए हम

रिम- मज़ा आ रहा है जीजी क्या फंस गए फंस गए कर रही हो,

चंचल- हाँ नेरी बरी पर तुझे मज़ा आएगा hi, बताओ पंकज भैया क्या लिखा है.

पंकज- लिखा है की अपने सामने वाले खिलाडी के होंठों को चूसना है तीन मिनट्स तक वो भी होंठ बिना अलग किये, अगर बीच में अलग हुए तो दोनों खिलाडियों को अपने बदन से एक एक कपडा उतरना होगा.

चंचल- हाय ढैय्या यव तो और खतरनाक है.

पंकज- अब जो भी है भाभी यही है.

रिम- हो जाओ फिर शुरू,

चेतन- पर सामने तो पूर्वी है.

रिम- तो क्या हुआ दो औरतें चुम्मा छाती नहीं कर सकती का?

पूर्वी- मुझे कोई दिक्कत नहीं है आ जाओ चंचल जीजी.

चंचल – हनन सही में का?

रमन- और क्या.

अब चंचल जो पहले से hi उत्तेजित थी उसके मन में एक औरत को चूमने के ख्याल से hi सिरहन होने लगी साथ hi उसे पूर्वी और ख़ुशी का वो दृश्य भी याद आने लगा उसके मन में एक अलग hi उत्साह और उत्तेजना आर लगी. पर उसे न दिखते हुए वो थोड़ा झिझकने का नाटक कर रही थी.

बाकि सब भी उत्तेजित और उत्साहित थे क्यूंकि हर किसी के लिए दो औरतों को चूमते देखना एक अनोखा एहसास होता है, पंकज और चेतन दोनों की hi पत्नियां एक दुसरे को चूमने वाली थी और दोनों hi इस नज़ारे को देखने के लिए बहुत उत्सुक थे,

वहीं रमन के लिए भी बहुत उत्तेजना भरा पल था, उसनर जिस उद्देश्य के लिए यव खेल शुरू करवाया था सब कुछ उसी के अनुसार हो रहा था.

खैर दोनों गदरायी औरतें एक दुसरे के पास आई और चेहरा एक दुसरे के पास कर एक दुसरे की आँखों में देखने लगी. चंचल कुछ अधिक hi शर्मा रही थी जिसे देख रिम्मी बोली

रिम- अरे भाई करो भी shuru.ya शरमाते hi रहोगे,

ये सुन पूर्वी ने आगे बढ़ने की ज़िम्मेदारी ली और चंचल के सर को पकड़ अपने होंठ चंचल के रसीले होंठों पर टिका दिए और आँखें बंद कर चूसने लगी, इसके साथ hi सब की आह निकल गयी, वहीं चंचल की आँखें भी बंद हो गयी शुरू में तो उसे एक अलग एहसास हुआ पर हर बढ़ते पल के साथ उसे पूर्वी के साथ होंठों को चुसवाने में मज़ा आने लगा और कुछ पल बाद वो खुद से उसका साथ देते हुए उसके होंठों को चूसने लगी, ये नज़ारा देख सबका बुरा हाल था तीनो hi मर्द अपने अपने लुंड को बहाने से खुजाने की कोशिश कर रहे थे, पूर्वी और चंचल तो बस एक दूजे के होंठों के रास में खोये हुए थे और पूरी तरह से चुम्बन में मगन हो गए थे.

और जब उनके कानो में रिमझिम की आवाज़ पड़ी तो जाकर अलग हुए

रिम- अरे बस करो भाई 7 मीन्स हो गए 3 के बदले.

दोनों अलग हुए तो चंचल बिलकुल नयी दुल्हन की तरह शर्मा रही थी.

रिम- क्यों जीजी मज़ा आया?

चंचल मुस्कुराते हुए शर्मा कर बोली – बहुत.

जिस पर सब हंस पड़े खैर फिर से जगह बदल कर बैठे सभी, और खेल दोबारा शुरू हुआ.

इस बार चंचल ने पेन घुमाया जो की पंकज पर जा कर रुका

पंकज- लो भैया हम पर hi रुक गया अब हम अपनी hi किस्मत में क्या लिखा है पढ़ेंगे, तो लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी के पेअर के अंगूठे को आइसक्रीम की तरह चूसना है.

रमन- अरे वाह.

चेतन- ये कुछ अलग है.

पंकज – अलग तो है hi सब होंठ चूस रहे हैं हम पेअर का अंगूठा चूसेंगे.

चंचल- ये तो अपनी अपनी किस्मत है भैया.

रिम- आ जाओ जीजा साफ़ कार्डो चाट चाट कर.

रिमझिम ने अपना पेअर साड़ी ऊपर करके आगे करते हुए kaha.kyunki पंकज के सामने वही बैठी थी.

पंकज- हाँ भाई आते हैं.

इसके बाद पंकज झुक्व और रिम्मी के पेअर के अंगूठे को मुँह में भर कर चूसने लगे,

रिम- आह्हः आराम से जीजा गुदगुदी हो रही है.

पूर्वी- देख ले रिम्मी आज तक इन्होने मेरे पेअर नहीं छुए और देख तेरा अंगूठा चूस रहे हैं.

सब ये सुन हंसने लगते हैं खैर तीन मिनट्स ख़त्म होते हैं और पंकज अलग होता है रिम्मी से, और खेल दोबारा शुरू होता है,

पंकज पेन घूमता है और इस बार आकर रुकता है, रमन पर

पंकज- लो भैया रमन अब तुम्हारे हवाले ये बजी.

रमन- हाँ भैया हमारे हवाले तो है पर बताओ तो करना क्या है?

पंकज- लिखा है 5 का परम आनंद मतलब अपने सामने वाले खिलाडी के साथ एक बंद कमरे में 5 मीन्स बिताने हैं और उतनी देर कुछ भी कर सकते हैं पर कमरे में जो भी हो बहार आकर नहीं बता सकते. और सबसे बड़ी बात अपने आप से hi 4 से ज़्यादा और 5 मीन्स से पहले hi बापिस निकलना है अगर नहीं निकले तो दोनों के बदन से एक रक कपडा उतरेगा.

रमन- ये तो आसान है, चलें भाभी?

रमन ने अपने सामने बैठी चंचल से कहा.

चंचल- हाँ पर चलें कहाँ?

रिम- अरे बाथरूम में चले जाओ न वही कमरा है सही.

पूर्वी- कैसा लग रहा है जीजा, अपनी बीवी को अपने hi भाई के साथ अकेलव में जाते देख.

पूर्वी ने चेतन से कहा.

चेतन- ये भाभी देवर का मामला है वो जानें साली साहिबा हमें क्या दिक्कत होगी.

चेतन ने ये कहते हुए चंचल को भी आँखों में इशारा किआ जो वो दोनों hi जानते थे.

खैर दोनों बाथरूम में घुसे और अंदर से दरवाज़ा बंद होते hi रिम्मी ने टाइमर लगा दिया.

अंदर जाकर रमन चंचल को और चंचल रमन को देख कर मुस्कुराने लगे, इससे पहले दोनों के बीच कभी ऐसा नहीं हुआ था की दोनों ऐसी असमंजस वलु स्थिति में पांडव हो पर आज सब कुछ hi अलग था ,

चंचल- अलग hi खेल है न, क्या क्या करवा रहा है.

चंचल ने ख़ामोशी तोड़ने के लिए कहा,

रमन- हाँ भाभी, अजीब hi खेल है, अब हमें hi देखो हम कुछ भी कर सकते हैं और बहार जाकर बताना भी नहीं है.

चंचल – ाचा वैसे ऐसा क्या है जो तुम करना चाहोगे जो बहार जकए नहीं बताना चाहो.

रमन- ऐसी तो बहुत सी चीज़ें हो सकती हैं भाभी

चंचल- जैसे की.

रमन- अरे छोडो वो सब .

चंचल- नहीं नहीं बताओ न वैसे भी खेल का मज़ा तो लें पूरा.

रमन- सच में तुम चाहती हो हम खेल का मज़ा लें अचे से.

चंचल- हाँ क्यों नहीं.

रमन- तो फिर तैयार हो?

चंचल- तैमुहह्हह्ह्ह्ह.

चंचल कुछ बोलती उससे पहले hi चंचल को हैरान करते हुए रमन ने अपने होंठ चंचल के होंठों पर रख दिए और चूसने लगा,

चंचल रमन की इस हरकत से बिलकुल हैरान रह गयी, क्यूंकि रमन ने कभी ऐसा कुछ नहीं किआ था और अभी अचानक से वो उसके होंठों को चूस रहा था पर साथ hi चंचल ये भी सोचने लगी की चाहती तो वो भी यही है और ये ख्याल आते hi वो भी रमन का साथ देने लगी, रमन ने हिम्मत करके जो कदम बढ़ाया था उसमे भाभी को साथ देते देख उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और वो और जोश से भर गया और उसके साथ चंचल के बदन पर फिरने लगे, जल्दी hi वो हाथ से चंचल की कमर को नसलटे हुए उसके होंठ चूस रहा था.. दोनों का चुम्बन हर पल के साथ प्रगाढ़ होता जा रहा था की तभी दरवाज़ा खटखट हुआ तो दोनों को होश आया और दोनों अलग हुए.

रमन ने जल्दी से दरवाज़ा खोला तो सामबे रिमझिम थी.

रिम- क्या करने लगे थे भाई देवर भाभी जो 8 मिनट्स हो गए और तुम्हे कुछ पता hi नहीं चला.

रमन- अरे कुछ नहीं बस बातें करने लगे थे टाइम पास करने के लिए.

पूर्वी- कैसी बातें हो रही थी हम भी तो जानें.

चंचल- ाचा नियम भूल गयी क्या जो अंदर हुआ बहार नहीं बता सकते.

पंकज- वैसे नियम तो ये भी है की अगर 5 मीन्स से लेट आये तो एक एक कपडा उतरना पड़ेगा.

रमन- हूँ पर कुछ है hi नहीं बस ये तौलिए है.

पूर्वी- तो वो भी हटाओ जीजा, देखो चेतन जीजा कैसे बैठे हैं.

रिम – तुझे बड़ा मज़ा आ रहा है जीजा को नंगा करने में.

पूर्वी- हेहेहे हम तो खेल रहे हैं बस.

रमन- ठीक भैया खेल में बेईमानी नहीं करेंगे हम.

ये कहकर रमन अपनी तौलिया हटा लेता है और आराम से चद्दर लेकर बैठ जाता है पर चेतन की तरह वो अपने नंगे लुंड को छुपाने का कोई प्रयास नहीं करता और सबको उसके लुंड की झलक अच्छे से दिखती है, चंचल कनखियों से देवर का लुंड देख उत्तेजित होती है और बाथरूम के अंदर जो हुआ उसके बारे में सोचने लगती है, वैसे अगर ससुर के साथ कर लिए तो देवर से क्या hi शर्माना, वैसे भी जो उसके और उसके पति के बीच बात हुई है उसके लिए उसे सबके साथ थोड़ा खुलना पड़ेगा hi खासकर रमन से. वो इन सब खयालो ंविं होती है की पूर्वी उसे बुलाती है.

पूर्वी- ओह्ह जीजी तुम भी दो अपना कपडा एक नियन सबके लिए बराबर हैं.

इस बार चंचल बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी साड़ी उतर कर अलग रख देती है और सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में बैठ जाती है, ये देख चेतन को थोड़ा अलग एहसास होता है और ख़ुशी भी होती है की उसकी पत्नी अब ख़ुशी से बिना किसी संकोच से खेल रही है.

खैर एक बार फिर से सब बैठते हैं और खेल शुरू होता है, रमन पेन घूमता है जो की पूर्वी पर आकर रुकता है,

रमन- लो साली जी अब तुम सम्भालो.

पूर्वी- हाँ बिलकुल हमें क्या दिक्कत होगी सँभालने में डरते थोड़ी hi हैं.

रमन- पंकज भैया बताओ अपनी बीवी को क्या करना है?

पंकज फ़ोन खोलता है और कहता है- मैडम तुम्हारी बरी में लिखा है की “ सामने वाले खिलाडी के साथ तीन मिनट्स तक चुम्बन करना है पर सिर्फ होंठो का स्पर्श होना चाहिए उसके अलावा कुछ भी स्पर्श होगा तो बदन से किन्ही दो कपड़ो को उतरना होगा.

पूर्वी- धत्त तेरे की सब की बजी मैं एक एक कपडा और हमारी पर दो.

रिम- अरे वो तो तब न जब हरे तो वैसे जेठ जी के तो मज़े आ गए. वैसे पूर्वी तुझे पति पत्नी दोनों के साथ चुम्मा छाती का मौका मिल रहा है .

चंचल- वही तो पूर्वी ने दोनों को नहीं छोड़ा सबको बराबर प्यार दे रही है.

चेतन- अरे तुम लोग भी न हमें चिढ़ा रहे हो ये तो खेल है.

रिम- वही तो खेल के मज़े मिल रहे हैं पूरे, वैसे जीजाजी तुम देख पाओगे अपनी पत्नी को दुसरे को चूमते हुए.

पंकज- हाँ हमें कोई दिक्कत नहीं है, वैसे भी ये खेल है, साथ hi हम सब परिवार है चेतन भाई भी अपने हैं और ये तो अपनी हैं hi, वैस्व भी प्यार तो बाँटने से बढ़ता है क्यों भाभी जी?

पंकज ने चंचल पर सवाल देगा ताकि उसकी मनस्तिथि भी जान सके.

चंचल- और क्या भैया, परिवार में हैं तो क्या दिक्कत.

चंचल का ये जवाब सुनकर सबके साथ चेतन को भी ख़ुशी हुई वैसे भी वो भले hi दिखा न रहा हो पर जबसे ये पता लगा था की पूर्वी उसे चूमने वाली है वो अंदर hi अंदर फूला नहीं समां रहा था.

रिम – तो देर किस बात की है शुरू करो फिर.

चेतन और पूर्वी दोनों उतर के खड़े हो जाते हैं क्यूंकि चेतन के कपडे पहले hi उतर चुके थे तो वो तो बिलकुल नंगा था hi इसलिए अपने हाथों से अपने लुंड को छुपाये हुए खड़ा था, खैर क्यूंकि चेतन लम्बा था तो पूर्वी ने उसे झुकने को कहा जिस पर चेतन थोड़ा नीचे हो गया फिर पूर्वी ने अपना चेहरा आगे बढ़ा कर अपने होंठ चेतन के होंठों से मिला दिए, जिसके मिलते hi चेतन के बदन में तो बिजली दौड़ गयी पूर्वी के रसीले होंठों का स्पर्श पते हुए वही बाकि सब इस कामुक दृश्य को देख आहें भरने लगे, चेतन का हाथ तो खुद बा खुद अपने लुंड से हैट गया वो पूर्वी के होंठों के जादू में खो गया, शुरू में पूर्वी ने ध्यान रखा की वो होंठों के अलावा कुछ और हिस्सा चेतन से छूने न दे पर बढ़ते पल के साथ वो उत्तेजना में सब भूलती जा रही थी, वही भूल तो चेतन भी रहा था, उसका लुंड बार बार ठुमका मार रहा था, वहीं उसकी कमर खुद बा खुद आगे हो गयी उसके हाथ अपने आप पूर्वी के बदन पर फिरने लगे, वहीं पूर्वी भी सब भूल अपने हाथ चेतन के नंगे बदन पर फिरने लगी, वही चेतन ने तो पूर्वी को बाहों में भर लिए और अपने खड़े लुंड को उसके बदन पर घिसने लगा.

ये नज़ारा देख सब उत्तेजित हो रहे थे, पंकज और चंचल अपने पति पत्नी को ऐसे एक दुसरे के साथ मज़े लेते हुए टकटकी लगाए देख रहे थे,

रमन भी किसी तरह छुप चुप कर लुंड हिलाते हुए देख रहा था.

कुछ देर बाद टाइमर बजा तो रिमझिम बोली- चलो समय हो गया है?

इसके बाद दोनों अलग हुए तो हांफ रहे थे.

रिम- बढ़िया मज़े ले रहे थे तुम लोग तो खेल के बहाने.

पूर्वी- अरे यार वो तो बस ऐसे hi.

चेतन- हाँ अब भावनाओ में थोड़ा बाह जाते हाजन.

पंकज- अरे कोई बात नहीं, हम सब इंसान है और सब काबू खो बैठते हैं वैस्व भी परिवार में कुछ भी हो गलत नहीं है.

चंचल – वो सब ठीक है पर पूर्वी अब दो कपडे उतरो नियम के अनुसार

रिम- अरे हाँ, होंठों के अलावा भी छुआ था.

पूर्वी- उतरती हूँ.

चेतन- भैया हूँ पर तो एक नहीं है दो क्या उतारें तो हम ऐसे hi बैठ जाते हैं.

चेतन जाकर बैठ गया पर अब उसने चादर भी नहीं ली. वही पूर्वी ने पहले साड़ी खोली और फिर अपना ब्लाउज भी उतर दिया अब सिर्फ पेटीकोट और पंतय में रह गयी… लाल रंग की ब्रा में आधे बहार झलकते उसके पापीती साथ hi गदराया हुआ गोरा नंगा पेट और और कमर, बीच में गहरी नाभि ये देख कर hi लोगो का मन बहकने लगा.

तीनो मर्द पहलर से hi पूरे नंगे हो चुके थे वही औरतों में रिमझिम के बदन पर सिर्फ एक साड़ी थी, पूर्वी पर सिर्फ ब्रा और पेटीकोट वहीं चंचल पर पेटीकोट ब्लाउज ब्रा और पंतय थे


खैर दोबारा से खेल शुरू हुआ और पूर्वी ने पेन घुमाया जो की चेतन पर आ कर रुका

चेतन- चलो भैया हमारी बरी आ गयी फिर से.

पूर्वी- तुम्हे मज़ा आ रहा है जीजा खेलने में इसलिए तुम्हारी बरी आ रही है.

चेतन- मज़ा तो सबको hi आ रहा है तभी तो खेल रहे हैं.

रमन- वो तो है मज़ा आना चाहिए बस यही खेल का उद्देश्य है.

पंकज- हाँ तो चेतन भैया तुम्हारी बजी में लिखा है “ बुलवाओ या फंस जाओ, मतलब सामने वाला खिलाडी आपके सामने होगा आपको सिर्फ अपनी जीभ का उपयोग करके उसे हंसाने पर मजबूर करना है अगर 3 मिनट्स में नहीं हंसा पाए तो तुम हरे और फिर तुम्हे वो करना पड़ेगा जो जीतना वाला खिलाडी चाहे.

चेतन – और हंसा दिया तो?

पंकज- अगर हंसा दिया तो सामने वाले खिलाडी के दो कपडे गायब होंगे. पर ज़रूरी बात जीभ के अलावा तुम्हारे बदन का कोई हिस्सा छूना नहीं चाहिए.

चंचल- हाय दिया ये क्या बात हुई दो दो कपड़ो का क्या खेल है एक hi उतरवाओ.

चंचल बीच में इसलिए बोली क्यूंकि अपने पति के सामने वो hi बैठी थी..

रिम – अरे जीजी वो तब न जब हर जाओ तब.

पंकज- और कपडे उतरने से क्या डरना, हम मर्दों को देखो सब उतरवाए बैठे हैं.

इस बात पर सब हंस पड़े

पूर्वी- वही तो, फिर चालू करो जीजी जाजजी.

चंचल बिस्तर से नीचे उतर कर कड़ी हो गयी, वही चेतन नंगे hi उसके सामने पहुंचे अब तो अपने खड़े लुंड को छिपाने की भी कोशिश नहीं कर रहे थे,

चंचल अपने आप को गंभीर रखने की मुद्रा में कड़ी हो गयी पेटीकोट और ब्लाउज में ऐसे बड़ी मादक लग रही थी,

वहीं चेतन ने अपनी पत्नी के सामने जाकर रिमझिम की और देखा रिमझिम ने कहा- समय चालू और चेतन का प्रयास शुरू हो गया,

चेतन ने पहले जीभ चंचल के गालों पर फिरै पर चंचल ने गंभीरता बनाये राखी, फिर चेतन उसके सामने की और आये और उसके पेट पर जीभ फिरते हुए उसे हंसाने का प्रयास करने लगे, पर चंचल भी हार मानने को तैयार नहीं थी डेढ़ मिनट के करीब बीत चूका था, चेतन ने उसकी नाभि में जीभ डाली जिस पर चंचल थोड़ा सा कसमसाई ज़रूर पर हंसी नहीं इसी बीच दो मिनट बीतने को थे, चेतन फिर खड़े हुए और चंचल के एक तरफ आये और फिर आखिरी डाव चलते हुए अपने चेहरे को आगे झुक कर अपनी जीभ को लम्बा सा बहार निकला और उसे चंचल के कान में घुसा कर खुजाने लगे जिसके होते hi चंचल मचलने लगी और अगले 10 सेकंड में hi उसकी हंसी छूट गयी और वो पति से दूर होकर कान को खुजाते हुए हंसने लगी.

चेतन के जीतते hi सबने ताली बजे जिनका स्वागत कर चेतन खुश होता हुआ जल्दी से अपनी जगह पर बैठ गया.

रिम- तो जीजी अब हार गयी हो तो सजा के लिए तैयार हो.

पूर्वी- दो कपडे कौनसे उतरेगी जीजी, देखलो तुम्हारे पति ने hi हरा दिया तुम्हे.

चंचल- तो क्या हुआ, खेल तो खेल है इसमें क्या पति पत्नी करना,

ये कहकर चंचल अपना ब्लाउज खोलने लगती है सब ये देख थोड़े हैरान थे की चंचल अब बिलकुल नहीं झिझक रही थी वहीं सबको इस बात की ख़ुशी भी थी.

खैर जल्दी hi चंचल ब्लाउज के बटन खोल कर उसे उतर देती है और सबके सामने उसकी काळा रंग की ब्रा और उसमें क़ैद उसकी बड़ी बड़ी छुछियां आ जाती हैं…

अब अगले कपडे की बरी थी और सब उसे इंतज़ार में देख रहे होते हैं की वो कब पेटीकोट को भी खोलेगी, पर तभी चंचल सबको हैरान करते हुए अगले कुछ hi पालो में अपनी ब्रा को खोल कर नीचे गिरा देती है और सबके सामने उसकी बड़ी बड़ी चूचियां होती हैं जिन्हे देख कर मर्द क्या औरतों के मुँह में भी पानी आने लगता है.

चेतन अपनी पत्नी को इस तरह सबके बीच ऊपर से नंगा देख हैरान भी था उत्तेजित भी था साथ hi थोड़ा सा गंभीर भी पर उसका लुंड कुछ अलग hi भाषा बोल रहा था, खैर चंचल ऐसे बर्ताव करती है जैसे उसका नंगा होना कोई बड़ी बक्त नहीं है और आकर अपनी जगह पर बैठ जाती है. सबकी नज़रें अब भी रह रह कर उसकी बड़ी बड़ी चूचियों पर hi जा रही होती हैं.

चंचल- क्या हुआ अब आगे खेलना नहीं है क्या?

रिम- हाँ खेलना है जीजी बस तुम्हारे यर पापीती देख सब होश खो रहे हैं.

रिमझिम माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए कहती है.

चंचल- अब खेल में जो हो करना पड़ेगा, वैसे तू भी बस साड़ी स्व ढकी हुई है नहीं तो तेरा हाल भी मेरे जैसा हो.

रिम – हाँ जीजी वो तो सही में पर तुमने ब्रा क्यों उतरी पेटीकोट क्यों नहीं?

चंचल- अरे पागल मैंने पंतय नहीं पहन राखी न इसलिए.

सब ये सुन भी हैरान थे की कितनी आसानी से वो ये बात बता रही है इसका मतलब खेल का जादू चल गया था और ये जान रिमझिम और रमन सबसे ज़्यादा खुश थे,

खेल दोबारा शुरू करते हुए चेतन पेन घूमता है जो इस बार चंचल पर आकर रुकता है

चंचल- अरे ये तो मेरे पीछे hi पद गया कभी सामने वाली खिलाडी तो कभी मुझ पर hi आकर रुकता है. अधनंगा तो कर दिया इसने.

रिम- लगता है जीजी इसे भी तुम भ गयी हो,

चंचल- इसे भी का क्या मतलब है,

पूर्वी- मतलब तुम्हारे खरबूजे देख कर मर्दों के गन्ने देख रही हो कैसे खड़े हैं.

चंचल – तुम भी दिखादो अपने.

रमन- अरे अब बातें hi करते रहोगे पंकज भैया बताओ तो क्या लिखा है.

पंकज- अरे हम तो कबसे तैयार हैं ये लोग चुप hi नहीं हो रहे.

रिम- अरे अब बतादो जीजाजी.

पंकज- लिखा है “ सामने वाले खिलाडी को तीन मिनट्स तक मालिश करनी है पर आँखें बंद करके, साथ hi सामने वाले खिलाडी की भी आँखें बंद रहेंगी, और जिसकी आँख पहले खुली वो हारेगा और उसे एक कपडा उतरना होगा.

चंचल- अरे ये कुछ नया निकला. दोनों की hi आँखें बंद रहेंगी.

पंकज- हाँ..

चंचल – आजा रिम्मी तेरी मस्सगे करूँ तू hi है मेरे सामने.

रिम- मज़ा आएगा जीजी,

पूर्वी- वैसे तुम दोनों पर hi एक एक कपडा बचा है जो हरा वो दूरदर्शन करवाएगा. हेहेहे.

रिम- कोई नहीं तेरी बरी भी जल्दी hi आएगी.

चंचल- पर करना कहाँ हैं, यही बिस्तर पर या नीचे.

रमन- अरे यहाँ नीचे चटाई पर सही रहेगा भाभी.

दोनों बिस्तर के नीचे चटाई पर आ जाते हैं और फिर रिमझिम के इशारे पर दोनों आँखें बंद कर लेते हैं, चंचल ऊपर से पूरी नंगी, वहीं रिमझिम के बदन पर सिर्फ एक साड़ी दोनों hi बेहद कामुक लग रही थी,

चंचल टटोलते हुए रिमझिम का हाथ पकड़ती है और फिर उसके सहारे उसके बदन को छूने लगती है, पहले पीठ फिर कमर पर हाथ फिरती है उसे मसलती है जिस पर रिम्मी की सिसकियाँ निकलती हैं पर आँखें अब भी दोनों की बंद होती हैं. वहीं चंचल मालिश के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए रिम्मी के कंधो को दबाने लगती है जिससे रिमझिम के मुँह से संतोषजनक सिसकियाँ निकल रही होती हैं कंधो को दबाते हुए चंचल के हाथ आगे नीचे खिसकने लगते हैं, और जल्दी hi रिमझिम की नारंगी चूचियों पर आ जाते हैं जिन्हे भी चंचल मसलने लगती है, बाकि सब लोग इस नज़ारे को देख मज़े ले रहे होते हैं, वहीं रिमझिम की सिसकियाँ और तेज़ हो जाती हैं वहीं अगले hi पल रिमझिम को कुछ अलग एहसास होता है और उसकी आँखें खुल जाती हैं क्यूंकि उसे अपनी चूचियों पर चंचल के हाथों का एहसास सीधा होता है बिना बीच में साड़ी के तो वो चौंक कर आँखें खोल देती है तो पता चलता है चंचल ने साड़ी को पकड़ कर नीचर खिसका दिया था,

रिमझिम के आँखें खोलते hi सब चिल्ला पड़ते हैं और चंचल की जीत पर ताली बजने लगते हैं जिसके बाद चंचल भी आँखें खोलती है. और अपनी जीत स्वीकार करती है,

रिम- अरे जीजी बड़ी वो हो तुम साड़ी hi खिसका दी मेरी तुमने.

चंचल- खेल में सब जायज़ होता है हेहेहे.

रमन- हाँ ये बात तो सही है.

पूर्वी- लो यहाँ बीवी के कपडे उतरने वाले हैं तुम भाभी का पक्ष ले रहे हो.

रमन- अरे जान रिम्मी को कोई परेशानी नहीं तो मुझे क्या होगी, वैस्व भी यहाँ सब अपने हैं.

पंकज- और क्या यही तो सब अपने हैं तो फिर क्या फ़िक़र करना.

चेतन- हाँ वैसे भी सब बढे हैं और मज़ा आ रहा है तो खेल रहे हौं.

रिम- हाँ भैया लो फिर मैं भी सजा पूरी करती हूँ, ये कहकर वो अपने बदन से साड़ी को उतर कर अलग कर देती है और सबके सामने बिलकुल नंगी हो जाती है.. सब उसे आँखें फाड़े उसके मादक बदन को कुछ देर तक निहारते रहते हैं खास कर चेतन क्यूंकि अभी तक वही ऐसे थे जिसने रिमझिम का स्वाद नहीं चखा था.

उसकी गोल गोल खरबूजे जैसी चूचियां, उसका सपाट पेट, गहरी नाभि और फिर छूट की वो पतली सी दरार जो की गीली साफ़ नज़र आ रही थी, कुछ पल यूँ hi खड़े रहने के बाद वो आकर जगह बदल कर बैठ जाती है और फिर से खेल शुरू होता है.

पंकज- वैसे अब हुई समानता तो,

पूर्वी- हाँ वो तुम्हारी तरह नंगी हो गयी इसलिए न.

पंकज- और क्या.

रिम- अरे वो सब छोडो अब आगे खेलो.

चंचल- हाँ लाओ मेरी बरी है मैं घूमती हूँ.

ये कहकर वो पेन घूमती है, जो की इस बार पूर्वी पर आकर रुकता है.

रिम- ले ये hi कह रही थी अभी और इस पर hi आकर रुक गयी,

चंचल- ये hi होता है पूर्वी बहुत चिल्ला रही थी न

पूर्वी- अरे जीजी तो क्या हुआ डर्टी थोड़े hi हूँ, ऐ जी तुम बताओ क्या लिखा है?

चेतन- जे बात देखो तैयार है वो.

पंकज- हमारी बीवी के जोश का तो कोई जवाब hi नहीं.

सब ये सुन हंसने लगते हैं..

पंकज फ़ोन खोलकर कहता है- लिखा है “सामने वाले खिलाडी को सामने खड़ा कर उसके सामने कामुक नृत्य और बदन दिखा कर इतना उत्तेजित करना है की वो खुद को छूने पर मजबूर हो जाये पर तुम्हे उसे नहीं छूना है अगर छुआ तो सजा के तौर पर दो कपडे गायब होंगे, और अगर 3 मिनट्स में उसे खुद को छूने पर या मैथुन के लिए मजबूर नहीं कर पाए तो एक कपडा उतरना होगा.

पूर्वी- अरे यार ये तो बड़ा कठिन है.

चंचल- अब जो भी है करना तो पड़ेगा.

रिम- क्यों जी तैयार हो? कर पाओगे तीन मिनट्स काबू मेरी बहन के जलवे देख कर.

रिम्मी ने रमन से कहा जो की पूर्वी के सामने था.

रमन- कोशिश तो कर hi सकते हैं.

चेतन- तो भाई जा खड़ा हो जा.

चंचल- देवर जी हारना नहीं है, पूर्वी hi सबसे ज़्यादा कपड़ो में हैं.

पूर्वी- देखो तो कैसे सब मुझे हारने पर तुले हैं.

चेतन- नहीं पूर्वी हम तुम्हारे साथ हैं तुम जीतोगी.

पूर्वी- ये बात अभी देखो, रिम्मी टाइम शुरू कर.

पूर्वी के कहने पर रिम्मी टाइमर लगाती है और इशारे से समय शुरू का आदेश करती है, जिसके होते hi पूर्वी कामुक तरीके से नाचने लगती है कभी अपनी ब्रा को ऊपर खींचती है और इतना खींचती है की बस निप्पल न दिखे फिर बापिस छोड़ देती है, तो कभी अपना पेटीकोट जांघों तक कामुक तरीके से उठती है, रमन को जिसे देख उत्तेजना तो हो रही होती है पर वो खुद पर काबू किये खड़ा रहता है, वहीं समय बीतने से पूर्वी की चिंता बढ़ने लगती है तो वो आगे बढ़ते हुए कुछ सोचती है और रमन की और पीठ करके उसे दिखते हुए अपने हाथ पीछे लेकर अपनी ब्रा के हुक खोल देती है, पर ब्रा को उतरती नहीं वही पूर्वी की हरकत से रमन पर असर तो पढता है पर इतना नहीं की वो काबू खो बैठे, वहीं पूर्वी रमन के पास आती है और उसे दिखते हुए अपनी खुली हुई ब्रा को कामुक तरीके से हिलाकर उसे उत्तेजित करने लगती है जिसे देख रमन का लुंड ठुमके मरने लगता है पर वो फिर भी खुद पर काबू करता है सोचता है बस कुछ देर की बात और है,

पूर्वी ये तरकीब काम न करते देख कुछ और सोचती है और उसे दिखते हुए अपने बदन को छूटे हुए अपना हाथ नीचे ले जाती है और अपने पेटीकोट के नाड़े को पकड़ उससे खेलने लगती है,. जिससे रमन के साथ साथ सब उत्तेजित होने लगते हैं क्यूंकि पंतय तो वो खेल के शुरुआत में hi वो उतर चुकी थी अगर पेटीकोट उतरा तो रिमझिम की तरह वो भी बिलकुल नंगी हो जाएगी,

वहीं पूर्वी हर संभव प्रयास कर रही थी रमन को हारने को, और उसी के चलते वो पेटीकोट के नाड़े की गांठ को पकड़ कर खींचती है पर यहाँ किस्मत उसके साथ नहीं थी क्यूंकि नाडा कुक्सह ज़्यादा hi कसके बंधा था जो उसके खींचने से नहीं खुलता, वो दोबारा से ज़ोर लगाती है नहीं खुलता तो वो झल्ला कर ताकत से खींचती है जिससे नाडा टूट जाता है और टूटते hi उसका हाथ छटक कर रमन के पेट से लग जाता है.

जिसपर सब ताली बजने लगते हैं क्यूंकि उसने रमन को स्पर्श कर दिया होता है.

पूर्वी- अरे यार हमें तो इस मुये नाड़े ने मरवा दिया.

पूर्वी एक हाथ से पेटीकोट को अपनी कमर पर थामे हुए कहती है,

चंचल- कुछ भी हो पूर्वी रानी अब हार तो गयी.

चेतन- हाँ वैसे मुझे तो लगा रमन बस काबू खोने वाला hi है.

रमन- हाँ भैया एक एक पल भरी होता जा रहा था. नाड़े ने बचा लिए.

पंकज- देखा भाई हमने कहा न हमारी बीवी को हराना आसान बही वो पूरी कोशिश करती है.

चंचल- पर अब हार तो गयी न, वैसे पूर्वी अब क्या ये पेटीकोट को पकडे कड़ी हो दो कपडे उतरने हैं उतरो और मेरी और रिम्मी की तरह हो जाओ.

पूर्वी- तुम्हारे पास तो अब भी पेटीकोट है जीजी.

रिम- अरे वो भी कितनी देर रहेगा पूर्वी उतर और आजा.

पूर्वी सबकी बात सुनकर पेटीकोट को छोड़ देती है और सबके सामने उसके नीचे का हिस्सा आ जाता है उसकी चिकनी छूट जो की रिमझिम से थोड़ी खुली लग रही थी क्यूंकि एक बच्चा जो दिया था साथ hi उसकी मोती जांघें, इसके बाद वो घूम कर सबको अपने खूबसूरत और जानलेवा चूतड़ों के दर्शन करवाती है, सब मर्द मन hi मन इस बात पर ज़रूर सहमत होते हैं की पूर्वी जैसी गांड किसी की नहीं है बिलकुल सुडौल अकार और उभर लगता है जैसे किसी कलाकार की अद्भुत नक्काशी.

खैर इसकर बाद अगले hi पल वो ब्रा को उतर कर सब को एक और कामुक दृश्य से अवगत कराती है और अपनी चूचियां जो की बच्चा होने से और बढ़ी बढ़ी हो गयी थी उन्हें दिखती है.

सब उसके खूबसूरत बदन को hi देखते रहते हैं.

चंचल- यार पूर्वी पता नहीं ये मर्द कैसे शांत बैठे हैं मैं अगर मर्द होती तो अब तक तुम पर चढ़ जाती,

पूर्वी- औरत होकर भी चढ़ सकती हो जीजी.

रिम- ज़्यादा भावनाओ में न बहो दोनों लोग देखो मर्दों को अपने अपने डंडे को थामे कितने संयम से खेल रहे हैं

पंकज- और क्या भले hi मुश्किल है पर हम लोग संयम से काम ले रहे हैं नहीं तो तीन अधनंगी औरतें सामने हो और मर्द कुछ न करें ऐसा हो सकता है क्या?

रमन- वही तो पर यही खेल का मज़ा हज भैया.

चेतन- खेल का मज़ा और सजा दोनों hi हैं.

रिम- अरे अब आगे भी खेलो बातें hi करते रहोगे सब.

सब हामी भर्त्र हैं पूर्वी पेन को घूमती है और पेन चेतन पर आकर रुकता है,

चेतन- अरे यार अब क्या होगा.

पूर्वी- वही होगा जीजाजी जो किस्मत में लिखा होगा.

रिम- बताओ जीजाजी पढ़कर क्या लिखा है भाइयो की किस्मत में क्यूंकि सामने मैं hi हूँ जो लिखा होगा असर तो मुझ पर भी पड़ेगा.

पंकज- हाँ भाई बताते हैं, तो चेतन भैया तुम्हारे लिए लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी को अगली एक बरी तक अपनी गॉड में बिठाओ, अगर उससे पहले उतरा तो सजा मिलेगी दुसरे खिलाडी के मर्ज़ी की.

चेतन- अरे यार वैसे गॉड में बिठाना ज़्यादा दिक्कत नहीं है पर नंगे होकर बिठाना थोड़ा अजीब है.

पूर्वी- अरे जीजा कोई नहीं रिमझिम बैठ जाएगी आराम से.

रिम- हाँ बैठना तो पड़ेगा hi,

ये कहकर रिमझिम कड़ी होकर चेतन के सामने आती है और कहती है भैया पेअर खोल लो ऐसे तो अल्टी पलटी में तुम्हारे पेअर सो जायेंगे.

चेतन उसके कहे अनुसार पेअर को थोड़ा फैला लेता है और रिमझिम उसकी और पीठ करके उसकी गॉड में बैठने लगती है और चेतन की साँसे चढ़ने लगती हैं वो रह रह कर रमन को देखता है क्यूंकि बाथरुम में जो हुआ वो अकेले की बात थी पर यहाँ उसका भाई सामने था और उसके सामने उसकी पत्नी के साथ ऐसे होने पर उसे कुछ अजीब लगता है, पर रमन उसे देख मुस्कुरा कर शांत रहने का इशारा करता है जिसके बाद वो थोड़ा शांत होता है, रिमझिम उसकी जांघों पर बैठ जाती है और जानकर ऐसे बैठती है की चेतन का खड़ा लुंड उसकी दोनों जांघों के बीच से निकल कर उसकी गीली छूट के ऊपर रगड़ खा रहा होता है, और बैठते hi दोनों की इस एहसास से आह निकल जाती है.


पूर्वी- देखा कैसे एडजस्ट हो गए दोनों जेठ और बहु,

रिम- भैया मैं फिसलो न इसलिए ऐसे पकड़ लो मुझे.

ये कह रिमझिम चेतन का एक हाथ पकड़ अपने पेट पर रख देती है. चेतन तो ख़ुशी और उत्तेजना से पागल होने लगता है लुंड पर रिमझिम की गरम छूट का एहसास उसे पागल कर रहा होता है रिमझिम के मांसल चूतड़ उसकी जांघो पर उसे और उत्तेजित कर रहे होते हैं और वो खुद से बिना सोचे रिमझिम को हल्का हल्का हिलाकर अपने लुंड को रिमझिम की छूट से घिसने लगता है. चंचल अपने पति और देवरानी को ऐसे देख बेहद उत्तेजित हो जाती है वो बार बार अपने पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी छूट को खुजा रही थी, वहीं रमन भी अपने भाई और पत्नी को देख लुंड को मुठिया रहा था.

सबका ध्यान उनपर hi होता है जिसे हटाने के लिए पूर्वी कहती है- अरे वो अगली बरी तक ऐसे hi रहेंगे चलो आगे खेलो.

इस पर सब हामी भरते हैं और चेतन रिम्मी के बदन स्व आगे हाथ निकल कर पेन घूमता है.

जो की उसकी पत्नी चंचल पर आकर रुकता है,

चंचल- लो खुद के बाद हमारा hi नंबर लगा दिया,

रिम- अरे जीजी कौनसा उन्होंने जानकर किआ है,

चेतन के ऊपर बैठी रिम्मी कहती है वहीं चेतन के हाथ रिमझिम के बदन पर घूम रहे होते हैं वहीं रिमझिम भी हल्का हल्का उछलते हुए चेतन को लुंड को अपनी छूट के ऊपर घिसता हुआ महसूस कर रही होती है, जिससे दोनों hi अलग आनंद में होते हैं.

पूर्वी- और क्या चंचल जीजी अब तुम्हे क्या करना है वो देखो.

चंचल – हाँ पंकज भैया बताओ क्या लिखा है.

पंकज- भाभी तुम्हारे में लिखा है” सामने वाले खिलाडी के निप्पल को बच्चे की तरह 5 मिनट तक चूसना है, चाहे तो एक या बदल बदल कर.

चंचल- हाय दिया ये कैसे होगा?

पूर्वी- कैसे होगा मतलब.

चंचल- मेरे सामने तो रमन भैया हैं इनके निप्पल कैसे चूसूंगी.

पंकज- अरे भाभी मन तुम औरतों के निप्पल और छुछियां बड़ी मस्त होती हैं पर हम मर्दों पर भी हैं तो नाम भर जे लिए hi सही.

चंचल- अरे भैया वो तो हम जानते हैं पर इन्हे चूसूंगी कैसे,

पूर्वी- जितने हैं उतने hi चूसो न जीजी तुम भी क्या परेशां हो रही हो.

चंचल- ठीक है फिर करती हूँ, रमन भैया बताओ कहाँ


पूर्वी- कहाँ क्या लो यहीं लेट जाओ जीजा की गॉड में सर रखकर और पि लो दूध.

पूर्वी थाली को बीच से हटते हुए कहती है.

रमन- तुम भी न पूर्वी कैसे कैसे मज़ाक करती हो हम पर दूध कहाँ दूध की थैली तो तुम्हारे पास हैं.

पूर्वी- हमारा बाद में पीना जीजा पहले अपना अपनी भाभी को पिलाओ.

वहीं चंचल रमन की गॉड में सर रखकर लेटती है और ऊपर की और मुँह करके रमन के निप्पल को मुँह में भरकर चूसने लगती है.

जिसके साथ hi रमन के मुँह से एक गहरी सिसकी निकलती है – अह्ह्ह्ह भाभीई.

वहीं रिमझिम और चेतन का ध्यान भी अपने आनंद के साथ सब पर होता है, वहीं चेतन के हाथ अब रिम्मी की चूचियों को मसल रहे होते हैं और दोनों hi अब अपनी हरकतों को छुपाने की कोई कोशिश नहीं करते.

वहीं चंचल रमन का निप्पल चूसने लगती है पर वहीं एक समस्या उसे ये होती है की गॉड में लेटने की वजह से उसके गाल पर उसके देवर का लुंड बार बार घिस रहा होता है जिससे वो बेहद उत्तेजित होने लगती है, अपने देवर के लुंड के इतने करीब होने पर उसे एक अजीब सा एहसास घेर लेता है.

वही हाल रमन का होता है अपने लुंड को भाभी के चेहरे पर घिसता देख साथ hi उनके द्वारा अपने निप्पल चुसवाने से वो उत्तेजना में बेकाबू होने लगता है, और उसी उत्तेजना में वो चंचल का चेहरा पकड़ता है और उसे अपने निप्पल से हटाता है जिसपर चंचल उसे देखती है, रमन उसके चेहरे को पकड़ कर अपने लुंड की और दबाता है जिस पर चंचल हैरान रह जाती है पर वो खुद को और रमन को हैरान करते हुए अपना मुँह खोल रमन के लुंड के टोपे को मुँह में भर लेती है.

और रमन के मुँह से इस एहसास से एक तेज़ आह निकल जाती है, जिससे सबका ध्यान उनपर आता है खासकर चेतन और रिम्मी का, चेतन अपनी पत्नी के मुँह में अपने भाई का लुंड देख हैरान भी होता है साथ बेहद उत्तेजित भी , रिमझिम को उसका लुंड अपनी छूट के बहार ठुमके मरता हुआ महसूस होता है, रिमझिम भी इस नज़ारे को देख बेहद उत्तेजित हो जाती है और चेतन के लुंड से हल्का सा उठती है और उसके लुंड को अपने हाथों से थम उसे अपनी छूट के छेड़ पर लगाकर नीचे हो जाती है और चेतन का लुंड उसकी गरम गीली छूट में घुसता चला जाता है जिस पर इस बात चेतन की तेज़ सिसकी निकलती है क्यूंकि उसे एहसास होता है की उसका लुंड उसके छोटे भाई की बीवी की छूट में है.. उसकी कमर नीचे से खुद बा खुद चलने लगती है और वो रिम्मी को छोड़ने लगता है.






रमन भी ये नज़ारा देखता है साथ hi चंचल भी रमन का लुंड मुँह से निकल चेतन और रिम्मी को देखती है फिर रमन की गॉड से उठ कर अपने घुटनों पर उसके सामने झुक जाती है और फिर से रमन के लुंड को मुँह में लेकर अचे से चूसने लगती है, सब खेल को भूल एक अलग hi खेल में लग जाते हैं, हवस और वासना के खेल में.

चंचल के घुटनो पर झुकने से उसका पेटीकोट में क़ैद पिछवाड़ा ऊपर होता है जिस पर पूर्वी की नज़र पड़ती है तो वो उसका पेटीकोट उठाकर उसके चूतड़ों को नंगा करते हुए कमर तक कर देती है जिसका चंचल पर कोई असर नहीं पड़ता और वो लगातार रमन के लुंड को चूसने में लगी रहती है. पूर्वी चंचल के चूतड़ों को नंगा कर उसकी छूट को उँगलियों से सहलाने लगती है तो चंचल रमन के लुंड पर मचलने लगती है पर उसे मुँह से बहार नहीं निकलती..

दूसरी और ये सब देखते हुए रिम्मी चेतन के लुंड पर उछाल रही होती है और चेतन भी नीचे से धक्के लगाकर रिम्मी की कमर थामे उसे छोड़ रहा होता है, पंकज ये सब देख और नहीं जाता और वो खड़ा हो अपना लुंड पूर्वी के मुँह के पास करता है जो चंचल की छूट को सहलाते हुए अपने पति के लुंड को मुँह में भर लेती है और चूसने लगती है,

रमन अपनी भाभी से लुंड चुसवाते हुए अपनी बीवी और अपने भाई की चुदाई देखता हुआ सिसकियाँ भर रहा होता है,

पूर्वी लगातार उँगलियों से चंचल की छूट को सहला रही होती है उसकी उंगलियां चंचल की छूट रास से गीली हो चुकी होती हैं. वहीं वो लगातार अपने पति का लुंड चूस रही होती है..

पंकज अपनी पत्नी से लुंड चुसवा कर उसे अचे से उस्क्स थूक में गीला करने के बाद लुंड को पूर्वी के मुँह से निकलता है, और चंचल की उठी हुई गांड के पीछे जगह लेता है, जिसे देख पूर्वी चंचल की छूट से अपनी उँगलियों को निकल लेती है, पंकज जगह लेने के बाद चंचल के मादक मांसल चूतड़ और उसके बीच में उसकी गांड का भूरा छेड़ और उसके नीचे गीली छूट देख पागल सा हो जाता है, वहीं पंकज का लुंड और चंचल के चूतड़ जहाँ चेतन था उसे साफ़ दिख रहे थे वो देख रहा था की कैसे कोई अन्य मर्द उसकी पत्नी के साथ चुदाई करने वाला है और वो इस दृश्य को देख प् रहा है ये सोच कर hi उसका लुंड रिमझिम की छूट में फूलने लगता है, वो देखता है की पंकज ने अपने लुंड को पकड़ा और उसे चंचल की छूट की पर लगाया पर लगते hi उसने देखा पंकज की नज़र उस पर आई, उसे अपनी और देखते हुए चेतन थोड़ा असमंजस में पड़ा पर पंकज की आँखों में जैसे सवाल था की क्या वो आगे बढे जैसे वो चेतन की स्वीकृति लेना छह रहा हो जिस पर चेतन का सर और आँखें हाँ में हिल गयी और फिर चेतन ने देखा अगले hi पल पंकज का लुंड उसकी बीवी चंचल की छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया.

और उसी के साथ उसे चंचल की एक चीख सुनाई दी.

चंचल- आअह्ह्ह्हह भैयाहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह

चंचल को भी अब एहसास हु की उसकी छूट में पंकज का लुंड घुस चूका है और वो इस एहसास से गंगना गयी, अब वो जो हो रहा था उसके पूरी तरह आनंद लेना चाहती थी, उसने ये तय कर लिए था.


पंकज ने दो तीन झटके लगा कर अपना पूरा लुंड चंचल की छूट में घुसा दिया, और फिर हलके धक्कों से छोड़ने लगे ,वहीं रमन ने बापिस अपना लुंड चंचल के मुँह में घुसा दिया..

चंचल के चुड़ते hi जैसे कमरे में नयी जान आ गयी जो कमरा शांत था वो गूँज उठा सिसकियों से तो बातों से, जिसकी शुरुआत पूर्वी ने की जो की अपनी छूट को सहलाते हुए बोली- अह्ह्ह्हह क्या नज़ारा है अह्ह्ह मेरी बहन अपने पति के सामने जेठ से चुद रही है.. ओह्ह और चेतन भैया अपनी रैंड बीवी को तो देखो कैसे एक साथ दो दो लुंड संभल रही है एक मुँह में एक छूट में वो भी पति के सामने…






पूर्वी की ऐसी बातों ने आग में घी का काम कर दिया.

रिम- आह्हः तो छोड़ने दे न उन्हें अब रंडी है तो रंडी की तरह hi छुड़ेगी न जैसे मैं छुड़वा रही हूँ अपने जेठ से.

दोनों बहनो ने सबको उत्तेजित करने का जिम्मा अपने सर ले लिए था.

पंकज- अह्ह्ह्हह चंचल भाभी क्या गरम छूट है तुम्हारी आह मज़ा आ रहा हज, चेतन भाई तुम्हारी बीवी मस्त है.

चेतन को ये सुन अजीब भी लगा पर साथ hi उसे ाचा भी लगा की कैसे खुल कर सब बात कर रहे हैं तो उसने भी कोशिश की और बोलै- आह्ह्ह्हह चंचल की तरह hi रिमझिम की छूट भी मस्त है लगता है लुंड निचोड़ लेगी.

रिम- हाँ भैया निचोड़ hi लुंगी आज जी भर के छोड़ो मुझे.

चंचल बेचारी सबकुछ सुन उत्तेजित हो रही थी पर कुछ बोल नहीं प् रही थी.

इधर पूर्वी से और नहीं सहा गया तो सो उठी और रमन के ऊपर जाकर उसने चंचल के सर को पकड़ रमन के लुंड से हटाया और बोली- जीजी अब थोड़ा बांटो भी कब तक सर्व मज़े लोगी ये कहकर पूर्वी ने अपने होंठ चंचल से मिला दिए साथ hi खुद दुसरे हाथ से रमन के गीले लुंड को सीधा कर खुद उसे अपनी छूट में लेकर बैठ गयी.. और रिमझिम की तरह hi उछाल कर छोड़ने लगी, रमन को इसमें क्या hi शिकायत हो सकती थी वो अपनी साली की छूट पाकर मस्त हो गया, अब दोनों बहनें दोनों भाइयों से चुद रही थी.






वहीं चंचल घोड़ी बानी पंकज का लुंड अपनी गरम छूट में सेक रही थी,

चंचल- आह्हः भैया aiseeeeeeeeee hi आह्ह्ह्ह छोड़ो अचे से आह्हः.

पंकज- आह्ह्ह्हह हाँ भाभी अह्हह्ह्ह्ह क्या मस्त छूट है तुम्हारी आह्ह्ह्ह.

उधर रिमझिम चेतन के लुंड से उतरी और पीठ के बल उसके सामने लेट गयी और boli—ahhh भैया घुड फिर से अपना लुंड मेरी छूट में.

चेतन ने भी बिना देरी के रिमझिम के ऊपर आके फिर से लुंड घुसा दिया रिमझिम की छूट में छोड़ने लगा.

चेतन- अह्ह्ह रिम्मी न जाने कब से तेरी छूट के सपने देखे थे आज मिली है आज देख कितना छोड़ता हूँ तुझे.

रिम- अह्ह्ह तो छोड़ो न भैया जितना चाहो उतना छोड़ो, आह्हः जैसे चंचल जीजी को जीजा छोड़ रहे हैं घोड़ी बनाकर.

चंचल- हाँ नेरी रानी चुद अपने जेठ से आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह देखो जी पंकज भैया कैसे अपने लुंड से मुझे छोड़ रहे हैं आह्हः.

चंचल उत्तेजित होकर अपने पति से बोली जो की खुद उसकी बातें सुन और उत्तेजित हो रहे थे

चेतन- आह्हः चुड़ले मेरी रंडी बीवी अह्ह्ह यही तो चाहते थे न हम पूरी तरह मज़े लेना..

चंचल – हाँ अह्ह्ह .

रमन- अह्ह्ह्ह भाभी मैं भी जल्दी hi तुंहारी रसीली छूट की सैर करूँगा..

पूर्वी- अह्ह्ह जीजा पहले मेरी छूट को तो शांत करलो अह्ह्ह साली की छूट किस्मत से मिलती है. तुम्हारी रंडी भाभी तो तैयार है तुम्हारा लुंड लेने के लिए.

रमन- अह्ह्ह्ह रंडी तो तुम भी हो सकीय साहिबा और तुम्हे रंडी की तरह hi छोडूंगा ये कहकर रमन पूर्वी को पकड़ पलट कर खुद ऊपर आ जाता है और दनादन उसे छोड़ने लगता है.

तीनो hi जोड़े खेल की वजह से और चुदाई से इतने उत्तेजित हो गए थे की जल्दी hi झड़ने लगते हैं, पंकज अपने रास से चंचल की छूट भर देता है तो वहीं चेतन रिम्मी की, और रमन पूर्वी की खैर सब लोग झाड़ कर जहाँ तहँ बैठ जाते हैं. सब एक दुसरे को देख रहे होते हैं की जो अभी हुआ वो क्या था समझने की कोशिश करते हैं, पूर्वी माहौल को थोड़ा खोलने के लिए कहती है- अह्ह्ह क्या खेल खिलाया है जीजा, सब कुछ बदल दिया इस खेल ने तो.

रमन मुस्कुरा कर कहता है- हाँ बदल तो दिया लगता है सरे रिश्ते बदल गए हैं.

पंकज- सही बात है रिश्ते नाते बदले तो पर और गहरे हो गए.

चेतन- और अब छह कर भी कुछ पहले जैसा नहीं हो सकता..

चंचल- पर चाहते hi नहीं हम पहले जैसा कुछ करना,

चेतन चंचल की बात सुन मुस्कुरा देता है.

रिमझिम- फिर अब क्या करना है?

चेतन- करना क्या है रिम्मी अभी झड़े हैं थके थोड़े hi हैं..

ये सुन सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है…


चोदामपुर

दूसरी और अनुज भी अपनी माँ चुड़ते हुए देख खुद को रोक नहीं पाया और मौसी की छूट को अपने रास से भर दिया.

खैर कुछ पल बाद सब अलग हुए और लेट कर अपनी साँसों पर काबू पाने लगे फिर कुछ देर बाद शालू बोली- अब आगे?
अभी तो पूरी दोपहर बाकि है..

नीलेश- दोपहर तो बाकि है पर उससे पहले हम सब कुछ जानना चाहते हैं.

सभ्य- सब कुछ किस बारे में.

नीलेश- तुम्हारे और बच्चों के बारे में.

सभ्य थोड़ा हैरान होते हुए- मतलब कुछ समझी नहीं.

कर्मा अनुज शालू भी नीलेश की इस बात पर थोड़े चिंतित हुए..

नीलेश- देखो बच्चों तुम भी सुनो, अभी जो भी हुआ वो आम परिवार में तो नहीं होता, और ऐसा नहीं है जो हुआ उसका हमें कोई दुःख या ग्लानि है, जो हुआ वो इसलिए हुआ क्यूंकि हमें ाचा लगा और अगर हमें अच्छा लगेगा तो आगे भी होगा, पर

सभ्य- पर क्या?

सभ्य थोड़ा संशय से बोली.

नीलेश – हम चाहते हैं की अब हम आपस में कुछ न छुपाएं हम अपनी बातें तो सब तुम्हे बता चुके हैं और चाहते हैं की अब तुम लोग भी सब कुछ बतादो.

शालू- पर क्या बताना है जीजा तुम्हे सब तो पता है hi.

नीलेश- तुम्हारे और बच्चों के बारे में, इतना हम निश्चित हैं की जो कुछ आज तुम्हारे और बच्चों के बीच हुआ वो पहली बार नहीं था तो हम शुरू से सब जानना चाहते हैं कबसे कैसे क्या हुआ, और बिना डरे बताओ सब कुछ, हम जानते हैं की तुम लोगो ने अब तक अगर कुछ छिपाया होगा तो बस इसलिए की हमें दुःख न पहुंचे.

ये सुनकर सभ्य नीलेश के सीने से लग गयी और बोली – आज तुमने हमारे सीने से ये बहुत बड़ा बोझ भी उतर लिए, हमें बस यही सताता रहता था की हम तुमसे बात छिपा रहे हैं पर अब हम कुछ नहीं छिपाएंगे और सब बता देंगे.

इसके बाद सभ्य, शालू अनुज और कर्मा ने मिलकर नीलेश को हर एक छोटी बड़ी सच्चाई से अवगत कराया, सभ्य कर्मा के रिश्ते की चुदाई से लेकर कालक गाओं की कहानी तक नीलेश ने सब उत्सुकता से सुना.

नीलेश- कालक में बड़ा खतरनाक हुआ तुम लोगो के साथ अगर पता होता तो कभी नहीं जाने देता.

सभ्य- जो हुआ वो हुआ पर हमें एक बात समझ नहीं आई .

नीलेश- क्या?

सभ्य- तुम्हे ये कैसे पता लगा की हमारे और बच्चों के बीच पहले से कुछ है, जैसे जी की तुमने बोलै.

नीलेश- अरे ये तो आसान था जिस आसानी से तुम लोग एक दुसरे के साथ शुरू हो गए उससे तो साफ़ पता चल रहा था की ये पहली बार नहीं है, माँ बीटा पहली बार चुदाई करें तो भावनाए इतनी शांत तो नहीं होंगी. ऊपर से दो दो लुंड एक साथ लेना ये तो अनुभव से hi हो सकता है.

शालू- जीजा बड़े समझदार हो तुम..

सभ्य- ले तुझे आज पता चला.

कर्मा- हेहही.

नीलेश- अब देखो तुम्हारी बातें सुनकर हमारे लुंड का क्या हाल हो गया है अब खेल शुरू करें दोबारा.

शालू- हाँ करते हैं पर मेरी एक इच्छा है…

नीलेश- क्या इच्छा.

इसपर शालू मुस्कुराती है…


विल बे कॉन्टिनोएड…
 
अपडेट 187

सरलपुर

जहाँ चोदामपुर में सब बातें कर रहे थे वहीं यहाँ माहौल थोड़ा अलग था, लोग बातों से ज़्यादा कुछ कर रहे थे, थाली और पेन एक तरफ पड़ा हुआ था, कपडे भी इधर उधर पड़े फैले हुए पड़े थे, बिस्तर पूरा भरा हुआ था , हो भी क्यों न तीन जोड़े बिस्तर पर अपना कब्ज़ा जमाये हुए थे,

घर की बड़ी संस्कारी बहु चंचल बिलकुल नंगी होकर अपनी पीठ के बल लेती थी और उसकी टैंगो के बीच उसका देवर रमन था जो की अपने लुंड को अपनी भाभी की रसीली छूट में दाल सटासट छोड़ रहा था, वहीं चंचल की देवरानी अपने जीजाजी के आगे झुकी हुई थी और उनसे घोड़ी बनकर अपनी छूट की कुटाई करवा रही थी, वहीं बिस्तर के आखिर में घर के बड़े बेटे चेतन सिरहाने से टिक कर बैठे हुए थे और उनके लुंड पर पूर्वी उछाल रही थी... कुल मिलकर कमरे में चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था, पूरे कमरे में थापों की आवाज़ गूँज रही थी.

चंचल- अह्ह्ह्हह बहुत मज़ाआठ आ रहा है भैयाहहह आह्हः काश पहले से hi छुड़वा लेती तुमसे अह्ह्ह्हह..

रमन- अह्ह्ह्ह भाभी यही तो दुःख है की अब तक क्यों नहीं छोड़आहहहहहह तुम्हे इतना समय बेकार कर दियाहहहहह

चेतन- तो क्या हुआहहह भाई अब जी भर के छोड़ अपनी भाभी को मेरी तरफ से खुली छहोऊत है अह्ह्ह

चंचल- तुम्हारी तरफ से तो छुट होगी hi दो नयी नयी छूटें जो मिल रही हैं तुम्हे.

रिम- तो क्या हुआअह्ह्ह्ह जीजी तुम भी तो नए नए लुंड खा रही होऊ.

चंचल- अह्हह्ह्ह्ह अभी तो कुछ नाहीई खाये ऋ रिम्मीईई अह्ह्ह्ह अब खाउंगी जिसका मिलेगा अपनी छूट में लेकर निचोड़ दूंगी अह्ह्ह्ह..

पूर्वी- देखो जीजा तुम्हारी बीवी को लुंड का चस्का लग गया है..

पूर्वी ने चेतन के लुंड पर उछालते हुए कहा,

चेतन- अह्ह्ह्हह कोइई बात नाहीईई अभह जब तक बात घर में है तो क्या दिक्कत है.

चंचल- अह्ह्ह्हह्हह पाटीई हो तो तुम्हारे जैसी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह,

वहीं रिमझिम ने पंकज से चुड़ते हुए उसके कान में जाकर कुछ फुसफुसाया जिस पर पंकज मुस्कुराने लगा और हाँ में सर हिला दिया,

इसकर बाद रिमझिम ने अपना सर एक और की और आगे बढ़ाया और बगल में अपनी भाभी को छोड़ते हुए अपने पति के पास किआ और उसे चूमने लगी पर चूमने के बाद उसके कान में भी कुछ कह दिया, जिससे उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी और उसने भी सर हिलाकर हामी भरी,

इसके बाद रिमझिम आगे होकर पंकज के लुंड से हैट गयी वहीं पंकज पीठ के बल बिस्तर पर लेट गया, वहीं रमन ने भी चंचल के ऊपर से हटते हुए अपना लुंड उसकी छूट से निकल लिए जो की कुछ पल के लिए भी चंचल को ाचा नहीं लगा, पर तभी पंकज ने चंचल को पकड़ कर अपनी और खींच लिया और अपने ऊपर ला कर अपने लुंड पर बिठा दिया जिससे चंचल की छूट का सूनापन फिर से भर गया...

चंचल- अह्ह्ह्ह पंकज भैया तुम्हे मेरी छूट बहुत भ रही है न तो इसे अचे से छोड़ो और छोड़ छोड़ के इसकी साडी खुजली मिटा दो..

पंज- हाँ भाभी तुम्हारी छूट का स्वाद मेरे लुंड को भ गया है. अह्ह्ह्ह.

ये कह पंकज ने चंचल को अपनी और झुका लिए और उसके होंठों को चूसने लगा, वहीं नीचे से सटासट धक्के लगाकर छोड़ने लगा...

वहीं बगल में रिमझिम अपने पति का लुंड चूसने लगी और अगले 5 मीन्स तक उसने लुंड को चूस चूस कर अपने थूक से सना दिया. इधर चेतन लगातार पूर्वी को नीचे से धक्के लगलगा कर छोड़ रहा था.

वहीं बगल में पंकज उसकी पत्नी चंचल को अपने ऊपर झुकाये हुए उसके रसीले होंठों को चूसते हुए हाथों से दोनों चूतड़ों को मसलते हुए उसकी छूट में दनादन लुंड पेल रहा था,

दूसरी और रिमझिम ने रमन का लुंड अपने मुँह से निकला और उसके ऊपर से हटी तो रमन भी उठा और उठकर पंकज की टैंगो के बीच आया जहाँ उसे अपनी भाभी की छूट में पंकज का लुंड अंदर बहार होता साफ़ दिख रहा था, और उसके ऊपर hi भाभी की गांड का भूरा छेड़ था, अपनी पत्नी रिम्मी की योजना पर उसे बहुत उत्साह हो रहा था उत्तेजना में उसका लुंड फूल रहा था क्यूंकि इससे पहले उसने कभी ऐसा कुछ नहीं किआ था,

वहीं पंकज ने जब रमन को जगह पर देखा तो उसने अपनी गति थोड़ी धीमी कर्ली साथ hi चंचल को अपनी बाहों में कास खुद से चिपका लिए, चंचल को तो कोई खबर नहीं थी की उसके पीछे क्या योजना बन चुकी है वो तो बस चुदाई के आनंद में खोई हुई थी, रिम्मी ने रमन को आगे बढ़ने का इशारा दिया वहीं चेतन और पूर्वी भी कनखियों से ये सब देख रहे थे,

रमन थोड़ा और आगे खिसका और अपने लुंड को पकड़ टोपे पर और थूक लगाया और फिर अपने लुंड के टोपे को अपनी भाभी की गांड के छेड़ पर टिकाया और बिना देरी के एक धक्का लगाकर टोपे को अंदर प्रवेश करा दिया, ये सब इतनी जल्दी हुआ की चंचल को कुछ पता hi नहीं चला और अचानक से उसे अपनी गांड के खुलने और लुंड घुसने का एहसास हुआ जिससे वो चीखती ज़रूर पर उसके होंठों को पंकज ने जकड रखा था जिससे उसकी चीख घुट कर रह गयी,

चेतन पूर्वी रिम्मी सब रुक कर ये नज़ारा देख रहे थे चंचल के दोनों छेदों में एक एक लुंड था, चेतन तो अपनी पत्नी को ऐसे देख एक अजीब उत्तेजना में था और पूर्वी की छूट में उसका लुंड फूल रहा था,

वहीं चंचल दोनों लुंड के बीच मचल रही थी, उसे शांत देख पंकज ने उसके होंठों को छोड़ा तो वो सिसकने लहि,

चंचल- अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ढैय्याहहहहह आह्ह्ह्हह मादरचोद देवरजी इतना hi गांड मरने का शौक है तो अपनी बहन की मारो न या अपनी माँ की मोती गांड मारो आह्ह्ह्ह.

चेतन के मुँह से गालियां सुन सब मुस्कुराने लगे..

रिम- शांत हो जाओ जीजी अब तो घुस गया न,

चंचल- अह्हह्ह्ह्ह पर काम से काम बता तो देते डालने से पहले अह्ह्ह्ह कितना भरा भरा लग रहा है दो दो लुंड एक साथ.

रमन- भाभी तुम मुझे गलियां दे रही हो पर ये साडी योजना रिम्मी की hi थी.

चंचल- अह्ह्ह रंडी रिम्मी तुझे बताउंगी मैं देख तेरी गांड में बेलन घुसङ्गी मैं.

रिम- तुम जो घुसाओ जीजी मंज़ूर है मैं तो बस तुम्हे चुदाई का असली सुख देना छह रही थी.

इधर बात करते हुए रमन ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू कर दिए और हर धक्के के साथ उसका लुंड उसकी भाभी की मखमली गांड में सरकने लगा, वहीं पंकज ने भी धीरे धीरे नीचे से चंचल की छूट में धक्के लगाने शुरू कर दिए, वहीं चंचल को भी शुरूआती असुविधा के बाद अब दोनों लुंड को उसके छेदों ने समायोजित कर लिया था, उसको अपने दोनों छेदों के भरा होने का एहसास ाचा लगने लगा था,

पंकज और रमन धीरे धीरे से ले बनाते हुए उसकी छूट और गांड को छोड़ने लगे, जिसपर चंचल की सिसकियाँ निकलने लगी.

चंचल- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह कितना अजीब एहसास है ये अह्ह्ह्ह भरा भरा लग रहा है...

रिमझिम उठके उसके पास आती है और चंचल के होंठों को चूसती है और कहती है- देखती जाओ जीजी मज़ा hi मज़ा आएगा अभी तो.

चंचल- ये सब तेरी वजह से है देख, आज दो दो लुंड मेरे अंदर हैं..

रिम- मेरी जीजी हो प्यारी इतना तो सोचना hi पड़ेगा तुम्हारे बारे में..

रमन- अह्ह्ह्ह भाभीई किटमि गरम और कासी हुई गांड है तुम्हारी आह्हः मज़ा आ रहा है.

चंचल- हाँ भैयाहहह अह्ह्ह्ह मारो अपनी भाभी की गांड आह्हः तुम्हारा तो हक़ बनता है... अह्ह्ह..

उधर रिमझिम ने पूर्वी को चेतन के ऊपर से हटने को कहा.

पूर्वी के हटते hi रिमझिम ने चेतन को उठने के इशारा किआ जिसे देख चेतन उठा वो भी जानना छह रहा था की रिम्मी के शैतान दिमाग में अब क्या है, चेतन घुटनो के बल हुआ तो रिमझिम ने उसे आगे खिसका कर चंचल और पंकज के चेहरे के पास कर दिया और वहीं चंचल के चेहरे को भी उसकी और घुमा दिया और बोली- भैया अपना लुंड जीजी के मुँह में डालो बहुत बोलती है ये.

चेतन ने अपना लुंड पकड़ कर अपनी पत्नी के होंठों पर लुंड को घिसा तो चंचल ने होंठों को खोलकर उसका लुंड अपने मुँह में घुसा लिए..

रिम- अब बानी जीजी असली रैंड देखो कैसे एक साथ तीन तीन लुंड लिए हुए हैं..





चेतन- आह्ह्ह्हह सब तेरे साथ के कारन है रिम्मी मेरी भोली भली बीवी को लुंड की प्यासी रंडी बना दिया तूने.

रिमझिम ने चेहरा आगे किआ और चेतन के होंठों को पहले चूसा और फिर अलग होकर बोली- सच बताऊँ भैया तो रंडी तो वो पहले से थी बस मैंने उस रंडी को बहार निकला है जो संस्कारों के अंदर दबी हुई थी..

चंचल छह कर भी कुछ नहीं बोल सकती थी बेचारी के तीनो छेदों में एक एक कड़क लुंड जो घुसा हुआ था पर वो ये भी मान रही थी की ऐसा उसने आज तक महसूस नहीं किआ था, लुंड से इतना भरा होने का एहसास एक साथ कई और से उसकर बदन में तरंगे उठ रही थी और उसे समझ नहीं आ रहा था किस तरंग पर ध्यान दे उसका पूरा बदन hi ुस्व लग रहा था आनंद की लहार में बहता जा रहा है..

चेतन- ुह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह तेरी बातें भी ना..

पूर्वी- इतनी आसानी से नहीं समझोगे जीजा हमारी बातें अभी तो अपनी बीवी पर ध्यान दो..

रमन - हाँ भैयाहहह आह्ह्ह्ह बड़े भाग्यशाली हो तुम जो अब तक भाभी की इस गरम गांड के अकेले मज़े उठाते आ रहे थे,

रमन अपने लुंड को चंचल की कासी गांड में अंदर बहार करते हुए बोलै,

पंकज- सही कहा भाई चंचल भाभी जैसी औरत तो मिल बाँट कर भोगने को होती है..

पंकज ने भी नीचे से उसकी छूट में धक्के लगते हुए कहा.

चेतन- अरे तो अब तो मिल बाँट कर hi भोग रहे हैं न जो बीत गया उसे छोडो. और जी भर के छोड़ो मेरी रंडी बीवी को.

चेतन को ऐसे बोलने में अजीब सा एहसास हो रहा था पर उत्तेजना भी हो रही थी.

चंचल अपने बारे में अपने पति और देवर साथ hi पंकज से सुन एक अलग प्रकार की उत्तेजना महसूस कर रही थी, एक तो उसको तीनो मिलकर रंडी की तरह छोड़ रहे थे दूसरा तीनो उसके बारे में ऐसे बात कर रहे थे जैसे वो कोई रंडी हो जो लुंड की प्यासी है ये hi सोच सोच कर साथ hi टिहरी चुदाई का सुख वो ज़्यादा देर नहीं सह पाई और उसका बदन अकड़ने लगा पर बेचारी को पंकज और रमन ने जकड़ा हुआ था ओहिज सर पकड़ कर पति ने अपना लुंड गले तक फंसा रखा था, तो कांपते हुए भी वो ज़्यादा हिल नहीं पाई पर उसकी छूट ने पंकज के लुंड पर पानी छोड़ दिया,..

चंचल भर भरा कर झड़ने लगी और शायद इतने वेग से वो कभी झड़ी होगी, क्यूंकि एक पल को तो पंकज और रमन को उसे थामे रहना मुश्किल हो गया, झड़ने के बाद चंचल बेजान सी पंकज के ऊपर गिर गयी जब पंकज ने ये देखा तो उसने रमन से हटने को कहा तो रमन ने भी उसकी गांड से लुंड निकल लिया और उधर चेतन ने मुँह से तो पंकज ने चंचल को बगल में लिटा दिया इधर चंचल के अलग होते hi पूर्वी ने चेतन को पकड़ कर बिस्तर पर गिरा लिए एयर खुद उसके ऊपर बैठ ते हुए उसका लुंड पकड़ अपनी गांड पर लगाया और बैठ गयी.. चेतन का लुंड जो की चंचल के थूक से गीला था सरसराता हुआ पूर्वी की गांड में घुस गया

पूर्वी- अह्ह्ह्ह बहुत देर से इंतज़ार कर रही थी जीजा आह्हः गांड में लुंड लेने का.

चेतन - अह्ह्ह्ह क्या गांड है रे पूर्वी आअह्ह्ह इतनी गरम अह्ह्ह्हह,

Poorvi-Ohhh रमन जीजा क्या अपनी भाभी की गांड से hi मन भर गया इधर आओ ज़रा हमें भी तो दो दो लुंड का सुख लेने दो.

पूर्वी ने पीछे लेटकर अपने पेअर खोलकर अपनी छूट दिखते हुए कहा.. अब ऐसे निमंत्रण को कौन hi ताल सकता था रमन ने तुरंत पूर्वी के और अपने भैया के पैरों में जगह ली और अपना लुंड पूर्वी की फूली हुई छूट में घुसा दिया,

पूर्वी- अह्ह्ह्ह मादरचोद जीजाहहह आह्ह्ह्ह अब छोड़ो दोनों भाई मिलकर..

पूर्वी से गली सुनकर दोनों भाइयों ने अपने अपने लुंड पूर्वी की छेदों में अंदर बहार करना शुरू किआ और जल्दी hi दोनों ने धीमी सही पर ले पकड़ ली...

ये पल दोनों के लिए खास था क्यूंकि दोनों भाई मिलकर पहली बार किसी एक औरत को छोड़ रहे थे, इस तरह से वो पहली बार खुले थे, हालाँकि उनकी वैसे अछि बनती थी कभी लड़ाई नहीं हुई पर इस तरह से वो कभी एक साथ नहीं जुड़े थे जैसे आज जुड़ रहे थे पूर्वी की छूट और गांड के कारन,

रमन- अह्ह्ह भैया तुम्हारे साथ छोड़ने में मज़ा आ रहा है काश ये सब हमने पहले किआ होता..

चेतन- सही कहा रमन इस तरह से एक साथ चुदाई करने का और खुलने का मौका पहले मिला होता तो बात hi क्या थी.

पूर्वी- अह्ह्ह तो दोनों भाई मिलकर आह्हः छोड़ लेते न अपनी माँ को, आह्हः बन जाते मादरचोद..

पूर्वी की इस बात को सुनकर दोनों को hi झटका लगा पर वहीं उनके लुंड ने भी झटका खाया अपनी माँ को छोड़ने के ख्याल से hi, वो भी एक साथ, हालाँकि दोनों ने इस बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी पर मन में ज़रूर दोनों के ये चल रहा था,

इतने में पंकज उनके पास आये और अपनी बीवी के मुँह में लुंड घुसा दिया और बोले- ले साली रंडी बहुत बोलती है न, अपने मुँह का सही उपयोग कर.. ये कह वो उसके मुँह में लुंड अंदर बहार करने लगे..

चंचल की तरह अब पूर्वी को भी तीन तीन लुंड एक साथ छोड़ रहे थे, वही रिमझिम अपनी छूट सहलाते हुए इस नज़ारे को देख रही थी, वहीं चंचल भी अब झड़ने के खुमार से बहार आ चुकी थी और पूर्वी को तीन लुंड लेते हुए आँखें खोल कर देख रही थी,





चंचल- छोड़ो तीनो मिलकर रंडी को आह्हः बुझादो आज इसकी छूट की प्यास.

रमन- हाँ भाभी आज रंडी की सारी खुजली मिटा देंगे,

चेतन - अह्ह्ह्हह साली की गांड बड़ी गरम है ओह्ह्ह्हह्ह मज़ा दे रही है. अह्ह्ह पंकज भाई तुम भी काम नसीब वाले नहीं हो.

चेतन ने भी बातों में शामिल होते हुए कहा..

पंकज- ुहममम यही सुख होता है मिल बाँट कर खाने का चेतन भाई, अपने नसीब के साथ साथ दुसरे का नसीब का भी मिल जाता है.

चंचल भी रिमझिम के बगल में बैठ कर उसकी छूट में अपनी उंगलियां चलते हुए बोली- आह्ह्ह्ह ये तो हम औरतों के लिए भी ाचा है एक लुंड से तीन लुंड हमेशा भले होते हैं.

रिम- हव्वा देखो चेतन भैया तुम बोल रहे थे न मेरी संस्कारी भोली भली बीवी ये देखो उनके बोल.

चंचल- तूने hi तो कहा न की संस्कार तो पर्दा था अंदर से हम सब यही हैं और जब अब पर्दा हैट चूका है तो क्या शर्माना.

चेतन- सही कहा अब हममें से अह्ह्ह्हह्हह कोई चाहता भी नहीं की ये परदे दोबारा पड़ें ..

चेतन पूर्वी की गांड में नीचे से धक्का लगते हुए बोले,

रमन- आज मेरा भी रिश्ता पूरा हो गया कहते हैं न साली आधी घरवाली होती है आज पूर्वी को छोड़ कर घरवाली बना दिया.

इस पर सब हंसने लगे,

रिम- अरे साली ज़रूर है पर काम वो सब बीवी वाले करने को तैयार है,

चंचल- बीवी वाले नहीं रंडी वाले देख नहीं रही तीन तीन को संभल रही है एक साथ,

रिम- हाँ जीजी जैसे थोड़ी देर पहले तुम संभल रही थी..

वहीं चेतन और रमन ने जबसे अपनी माँ के बारे में सुना था तबसे दोनों के hi मन में उथल पुथल चल रही थी, रमन जो की बहन को भोग चूका था वो कल्पना करने लगा अपनी माँ के साथ चुदाई की वहीं चेतन भी ये सोचने लगा क्या ऐसा भी हो सकता है, कैसा लगता अगर मैं मम्मी को छोड़ता तो, इन सब खयालो का असर दोनों के लुंड और उनकी पूर्वी को छोड़ने की गति पर दिख रहा था, चेतन और तेज़ी से नीचे से धक्के लगाकर पूर्वी की गांड मरने लगा, वहीं रमन भी पूर्वी की छूट में दनादन धक्के लगा रहा था, ऊपर पंकज भी अपनी पत्नी को दोनों भाइयों के साथ बाँट कर उत्तेजित थे और पूर्वी के मुँह को ज़ोरदार तरीके से छोड़ रहे थे...

तीनो और की घमासान चुदाई से पूर्वी उत्तेजना की चरण सीमा पर तैर रही थी, उसके बदन में रह रह कर उत्तेजना की सरसराहट दौड़ रही थी और जल्दी hi इस सरसराहट ने इतना तीव्र रूप बना लिए की पूर्वी उसे संभल नहीं पाई और झड़ने लगी, उसका बदन भी तीनो के बीच कंपनी लगा और फिर स्थिर हो गया...

मर्द समझ गए की पूर्वी झाड़ चुकी है, और उसके झड़ते hi पंकज ने उसके मुँह से लुंड निकला तो रमन ने उसकी छूट से और साथ hi लुंड निकलने के बाद रमन ने पूर्वी को चेतन के ऊपर से उठाकर एक तरफ लिटा दिया, जैसे hi पूर्वी को उठाकर रमन चेतन के आगे से हटा hi था बिजली की गति से रिम्मी चेतन पर कूदि और अगले hi पल चेतन का लुंड अपनी गांड में लेकर बैठ गयी उसकी उत्सुकता और बेचैनी देख चंचल कुर बाकि सब हंस पड़े.

चंचल- देखो तो रंडी को कितनी जल्दी है छोड़ने की...

रिमझिम ने अपनी गांड में जेठ के लुंड को लेकर हल्का हल्का उछालना शुरू किआ और बोली- ाचा खुद तो अपनी खुजली मिटवाली तीन तीन लुंड से अब मुझे रंडी बोल रही हो.

चंचल- ये योजना भी तो तेरी थी तीन तीन वाली.

उधर चेतन मस्त हो गया था पहले पूर्वी की मस्त गांड और फिर अब मैडम रिमझिम की कासी हुई गांड को अपने लुंड पर महसूस कर, आज की रात ने उसे कितना कुछ नया दिया था और न जाने इस रात की वजह से उसके जीवन में क्या क्या बदलाव आने वाले हैं...

खैर अभी तो चेतन ने अपना पूरा ध्यान रिमझिम की मखमली गांड पर लगाया अह्ह्ह्हह्हह क्या एहसास था ऐसा लग रहा था उसका लुंड माखन के बीच है, वो इस एहसास को आँखें बंद कर महसूस कर hi रहा था की उसे रिमझिम की गांड और कस्ती हुई महसूस हुई साथ hi लुंड पर एक गर्शन सा हुआ तो उसने आँखें खोल कर देखा तो पाया की पंकज उसकी और रिमझिम की टैंगो के बीच था और उसने अपना लुंड रिमझिम की खली छूट में घुसा दिया था,

पंकज- ओह्ह्ह चेतन भैया ज़रा हमारे साथ भी ले बनाओ.

चेतन- हनन हाँ भाई बिलकुल आह्ह्ह्ह क्या कासी हुई और गरम गांड है रिमझिम...

रिमझिम कुछ जवान देती उससे पहले hi रमन ने अपना लुंड उसके मुँह में भर दिया और उसे भी वही सेवा मिलने लगी जो की अभी चंचल और पूर्वी को मिली थी,





चंचल- हाँ तुम्हे तो गांड मस्त लगेगी hi छोटे भाई की बीवी की, अरे तुम लोगो को पता है मुझे छोड़ते हुए ये रिमझिम का नाम लेते थे कभी कभी.

पंकज- तो क्या हुआ भाभी मैंने भी कई बार पूर्वी को तुम्हे सोचकर छोड़ा है,

रमन- मैंने भी भाभी,

चंचल- हाय दिया तुम सब मर्द एक जैसे हो,

पूर्वी- यही तो बात है जीजी मर्द अपने लुंड से सोचते हैं अगर तुमने उसे खुश कर लिया तो मर्द खुश...

इधर दोनों की ज्ञान भरी बातें चल रही थी थी तो दूसरी और तीनो मर्द मिलके रिमझिम की धुआंधार चुदाई कर रहे थे और यही रिमझिम को पसंद भी था, वो मुँह में लुंड होने के कारन कुछ कह नहीं प् रही थी पर उसके बदन में उठ रही तरंगो का आनंद उसके पूरे बदन को मिल रहा था जो की उसे तीनो लुँडो से मिल रही थी,

चेतन- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह कुछ भी कहो हमने ऐसी बीवियां नसीब से पाई हैं अह्ह्ह एक से बढ़कर एक हैं.

पंकज- ये तो सही बात की भैयाहहह आह्ह्ह्ह जितना छोड़ लो मन hi नहीं भरता.

रमन- अरे मन भर जाये ये तो इनके बदन का अपमान होगा...

रिमझिम की चुदाई देखते हुए चंचल और पूर्वी अपनी अपनी छूट और चूचियों को सहला रही थी..

इधर मर्द काफी देर से चुदाई कर रहे थे पहले चंचल फिर पूर्वी और अब रिमझिम तो तीनो hi अपनी छमता और उत्तेजना के आखिरी पड़ाव पर थे और उनके धक्के भी वैसे hi तेज़ और दुमदार थे जो की पूर्वी के छेदों का पुर्ज़ा पुर्ज़ा हिला दे रहे थे, और जिसका नतीजा ये हुआ की वो भी खुद को ज़्यादा देर संभल नहीं पाई और उत्तेजना के वेग में बहती चली गयी और झड़ने लगी, रिमझिम के झड़ने का एहसास जैसे hi मर्दों को हुआ तो वो जैसे इसी इंतज़ार में बैठे थे और एक के बाद एक झड़ने लगे,

रमन ने अपनी पत्नी के मुँह क्या गले को अपने रास से भर दिया वहीं पंकज ने अपनी साली की छूट को अपने रास से सराबोर किआ तो चेतन उसकी गांड में अपने लुंड की पिचकारी खली की और फिर सब आपस में अलग हुए और रिमझिम को बिस्तर पर लिटा दिया..

मर्दों के हटते hi पूर्वी फुर्ती में उठी और रिमझिम को उठा कर उसकी छूट अपने मुँह पर रख ली और उसकी छूट से अपने पति का रास चाटने लगी जब ये चंचल ने देखा तो उसे भी उत्सुकता और उत्तेजना हुई वो भी तुरंत उठ कर आई और उसने अपना मुँह रिमझिम की गांड से लगा दिया और वो भी अपने पति का रास रिमझिम की गांड में जीभ घुसा घुसा कर चाटने लगी...





चेतन और रमन ने जब ये देखा तो उनके लुंड हल्का हल्का सर उठाने लगे फिर से, नज़ारा hi कुछ ऐसा था.. खैर लगातार दो बार झड़ने की थकावट में अभी उन्होंने बस देखने भर से संतोष किआ, उधर जब चंचल और पूर्वी भी संतुष्ट हो गयी तो उन्होंने रिमझिम के छेदों को छोड़ा पर तब तक दोनों के चाटने की वजह से रिमझिम के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी, और उसनर दोनों को होंठों पर एक एक प्यारा सा चुम्बन दिया जैसे धन्यवाद् बोल रही हो.

खैर अब सब शांत होकर बैठे थे...

पंकज- भाई रमन ऐसा खेल तो मैंने कभी नहीं खेला... मज़ा hi आ गया

चेतन- हाँ भाई क्या खेल था.

रमन- यही तो चाहिए था की हम लोग आपस में मज़े कर पाएं.

चंचल- पर अब क्या करना है देर भी काफी हो गयी है.

पूर्वी- हाँ अब अपने अपने कमरों में चलते हैं कहीं सबको न पता चल जाये हमारे खेल के बारे में.

रिम- तो क्या हुआ फिर सबके साथ खेलेंगे.

चंचल- धत्त कुछ भी बोलती है.

पंकज- वैसे सही रहेगा अपने अपने कमरों में चलते हैं अपनी अपनी बीवियों के साथ,

पंकज ने हँसते हुए कहा,

पूर्वी- नहीं सही भी है एक रात में इतना कुछ हुआ है तो आपस में कुछ बातें करनी होंगी इसलिए यही सही रहेगा..

सबके बीच यही राइ बानी और सब एक दुसरे को शुभरात्रि कहकर अपने अपने कमरों में चले गए,

चंचल और चेतन बिस्तर पर बैठे थे सोने को तैयार चेतन जो भी हुआ उसके बारे में सोच रहा था और मुस्कुरा रहा था,

चेतन- बताओ यार मन हमने ये सब पहले सोचा था पर ऐसे होगा ये नहीं सोचा था, पर कुछ भी कहो मज़ा आ गया. क्यों?

चंचल- हम्म हाँ,

चेतन ने देखा की चंचल किसी सोच में डूबी हुई है जब से कमरे में आई है वो समझ गया उसके मन में कोई बात चल रही है.

चेतन- क्या हुआ तुम किस सोच में डूबी हुई हो, क्या जो भी हुआ वो तुम्हे पसंद नहीं आया?

चंचल- वो बात नहीं है जी.

चेतन- फिर क्या बात है?

चंचल- मुझे तुम्हे कुछ बताना है,

चेतन- क्या बताना है बताओ.

चंचल- मैंने तुमसे एक बात छुपाई है और वो मुझे मन hi मन कचोट रही है.

चेतन आगे खिसका और चंचल को बाहों में भर के बोलै- अरे ऐसी क्या बात है जो मेरी प्यारी रानी को परेशां कर रही है.

चंचल- जी बात ये है की....

और फिर चंचल ने अपने और अपने ससुर यानि चेतन के पिता के बीच की साडी सच्चाई चेतन को बतादि, जिसे चेतन चुप होकर सुनता रहा.

चंचल- यही सब था जो मैंने तुमसे छुपाया, मैं बताना चाहती थी पर हिम्मत hi नहीं जूता पति थी, पता नहीं था तुम्हारी क्या प्रतिक्रिया होगी...

चेतन कुछ नहीं बोलै और चुपचाप कुछ सोचता रहा,

चंचल चेतन की ख़ामोशी से घबराने लगी

चंचल- जी चुप क्यों हो अगर मुझसे गुस्सा हो तो बताओ, गुस्सा करो चिल्लाओ मुझ पर.

ये कहते हुए चंचल का गाला भर आया और उसकी आँखें छलक पड़ी,

चेतन ने जब ये देखा तो उसे बाहों में भर लिए और उसे पुचकारते हुए चुप करने लगा...

चेतन- ऐ चुप चुप बस चुप हो जाओ. ऐ पागक

चंचल- हमने तुम्हारे साथ धोखा किआ है...

चेतन- पहले चुप एक दम चुप और हमारी बात सुनो, देखो अगर हम आम पति पत्नी होते और फिर ये होता तो शायद हमें गुस्सा आता भी पर आज जो कुछ हुआ, उससे पहले जो हम लोग बातें कर चुके थे, यहाँ तक की तुमने मुझे रिमझिम के साथ और मैंने तुम्हे रमन के साथ चुदाई करने की मंजूरी भी दे दी थी.. साथ hi आज तुम रमन से चूड़ी, पंकज से चूड़ी तो इसके बाद इसका क्या बुरा लग्न..

चंचल- हाँ पर पापाजी के साथ तो नहीं बोलै था न.

चेतन - तो क्या हुआ पहली बात पापा ने hi शुरुआत की उन्होंने hi उकसाया तो िस्मर तुम्हारी गलती कैसे हुई, और दूसरी बात मुझे बुरा नहीं लग रहा इस बात का बिलकुल भी और यकीन न आये तो मेरे लुंड को देखो,

चंचल ने उसके लुंड की और नज़र डाली जो की बिलकुल सख्त हो कर खड़ा था,

चेतन- देखा तुम्हारे और पापा की चुदाई की बात सुनकर मेरा ये हाल हो गया है, ये तो रमन से तुम्हे चुड़ते देखने से भी ज़्यादा उत्तेजित करने वाला था, ससुर बहु की चुदाई.

चंचल- तुम भी न. बड़े वो हो, बोल नहीं रहे थे मैं तो दर गयी थी.

चेतन- अरे वो तो मैं चुप इसलिए था की मैं कप्लना करने लगा था.

चंचल- सच में जी तुम्हे मुझे और पापाजी की बात सुनकर इतनी उत्तेजना हुई..

चंचल ने चेतन के लुंड को मुठियाते हुए कहा..

चेतन- और क्या तुम खुद hi महसूस कर रही हो.

चंचल- अभी कहाँ महसूस तो अब करुँगी.

ये कहकर चंचल उठी और चेतन के ऊपर आकर उसके लुंड को गांड के छेड़ पर लगाया और धीरे धीरे पूरा अंदर ले लिए और हलके हलके उछाल कर अपनी गांड मरवाने लगी.

चेतन- उह्ह्ह अह्ह्ह्ह लगता है अभी मन नहीं भरा तुम्हारा.

चंचल- तुम्हारे खड़े लुंड को क्यों बेकार जाने दूँ, इससे ाचा मेरी गांड की खुजली मिटाये.

चेतन- अह्ह्ह्ह तुम्हारी गांड कितनी भी मारो मन नहीं भरता..

चंचल- स्स्स्सह्हह्हहग जी सुनो मुझसे एक वडा करूऊ.

चेतन- कैसा वादा?

चंचल- यही की तुम्हे मौका मिला तो तुम किसी को भी छोड़ने से पीछे नहीं हटोगे चाहे वो कोई भी हो..

चेतन- तुम्हे ये क्यों लगता है की मैं छोड़ने का मौका छोड़ दूंगा.

चंचल- नहीं वडा करो, की अगर मौका मिले तो तुम छोड़ोगे ज़रूर चाहे वो तुम्हारी माँ hi क्यों न हो.

माँ का ज़िक़र सुनकर चेतन को एक बार फिर से वही सिरहन हुई,

चंचल- बोलो..

चेतन- वादा,

चेतन ने मुस्कुराते हुए कहा,

चंचल- और एक बात और.

चेतन - क्या?

चेतन ने नीचे से झटके उसकी गांड में मरते हुए पुछा?

चंचल- मैं चाहती हूँ तुम मेरी अम्मा को छोड़ो,

चेतन ये सुन कर चौंक गया..

चेतन- ये क्या बोल रही हो तुम? होश में तो हो?

चंचल उसके लुंड को गांड में लिए हुए रुक गयी.

चंचल- हाँ, मैं बिलकुल होश में हूँ और अगर मैं अपने ससुर से छुड़वा सकती हूँ तो तुम अपनी सास को क्यों नहीं छोड़ सकते हिसाब बराबर तभी होगा.

चेतन- अरे पर ऐसा नहीं है हिसाब बराबर करने की ज़रुरत hi नहीं है.

चंचल- ाचा तुम्हे मेरी अम्मा पसंद नहीं है क्या? उनका बदन ाचा नहीं लगता?

चेतन अब रिमझिम की बातों को सुन अपनी सास के बारे में सोचने लगा और ये भी वो मंटा था की चंचल को अपना कामुक बदन अपनी माँ से विरासत में मिला है, और सच में उसकी सास बड़ी कामुक दिखती थी और अगर उसे छोड़ने को मिले तो कौन hi इंकार करेगा

चेतन- ाचा लगता है फिर भी..

चंचल- तुम नहीं चाहते तुम्हारा लुंड मेरी अम्मा की गांड में हो, तुम उस छूट को छोड़ो जिसमे से मैं निकली हूँ, उनके मुँह में अपना लुंड घुसकर छोड़ो, उनकी चूचियों को चूसो, उन्हें नंगा कर उनके चूतड़ों को मसलते हुए उनकी गांड मारो..

बस इतना बहुत था चेतन के लिए

चेतन- अह्ह्ह बस अह्ह्ह्ह तुम्हे हो क्या गया है आज,

चंचल- बताओ छोड़ोगे अपनी सास को?

चंचल ने अपनी गांड मरवाते हुए कहा..

चेतन मुस्कुराया और बोलै- बिलकुल ऐसा लगता है तुम्हारा hi थोड़ा भरा रूप हैं वो कौन नहीं छोड़ना चाहेगा. पर इसका मतलब ये तो नहीं न की वो मुझसे छुड़वा hi लें. वो इसके लिए कभी नहीं मानेगी.

चंचल- क्यों नहीं मानेगी हम दोनों मिलकर कोशिश करेंगे तो उन्हें मन्ना पड़ेगा,

चेतन- ाचा ठीक है.

चेतन भी अपनी सास के बारे में सोच अब उत्सुक हो चूका था.

चंचल- और न माने तो जबरदस्ती झुका के पेल देना रंडी को..

चंचल ने उछालते हुए कहा.

चेतन चंचल से उसकी माँ के लिए रंडी शब्द सुन कर बेहद उत्तेजित हो गया उसने उसी उत्तेजना वश चंचल को पकड़ कर अपने ऊपर से उठाया और पलट कर घोड़ी बना दिया और फिर से उसकी गांड में लुंड घुसा कर तेज़ी से मरने लगा





चेतन- ले साली रंडी ऐसे hi तेरी माँ की मोती गांड भी मरूंगा..

चंचल- अह्ह्ह्ह मारो न अह्ह्ह्ह एयर तेज़.

चेतन- साली रंडी माँ की रंडी बेटी.... अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह...

चेतन तेज़ी से पत्नी की गांड मरता हुआ बड़बड़ा रहा था और चंचल अपनी गांड मरवाते हुए उसकी बातें सुन और आगे के बारे में सोच मुस्कुरा रही थी...

इधर रिमझिम रमन अपने कमरे में आये और ख़ुशी को सोता पाया तो उसके चेहरे को देख मुस्कराहट आ गयी पर फिर खुद भी बिस्तर पर लेट गए सोने के लिए.

रमन- यार मैं बहुत खुश हूँ जैसा सोचा था उससे भी ाचा हुआ सब.

रिम- हाँ मुझे तो यकीन नहीं हुआ की जीजी और भैया इतनी आराम से मान गए और कितनी उत्सुकता से और ख़ुशी से उन्होंने सब किआ.

रमन- हाँ यार मज़ा hi आ गया.

रिम- मज़ा तो आना hi था न तुम्हे अपनी साली और भाभी की एक साथ मिल गयी.

रमन- ाचा तुम्हे भी तो दो दो मिले एक साथ या कहूं तीन तीन, मज़ा तो तुमने भी खूब लूटा.

रिम- अरे मैं सोच रही हूँ चेतन भैया इतनी जल्दी मान गए तो हमें उनके लिए कुछ और भी करना चाहिए.

रमन- हाँ करना चाहिए पर क्या? सब तो दे चुकी हो गांड छूट अब और क्या डौगी?

रिम - मेरी गांड और छूट से भी ज़्यादा मज़ेदार कुछ.

रिमझिम ने मुस्कुराते हुए कहा..

रमन- तुम्हारे शैतानी मुस्कान देख कर लग रहा है कुछ खतरनाक hi सोचा है तुमने..

रिमझिम इस बात पर मुस्कुरा दी...

चोदामपुर

जहाँ सरलपुर में सब शांत होकर सोने चले थे वहीं चोदामपुर में नीलेश का परिवार सोने की सोच भी नहीं रहा था, और आज तो इस घर के नज़ारे hi कुछ और थे,

शालू बिस्तर के बगल में पड़ी कुर्सी पर बिलकुल नंगी बैठी थी और अपनी टंगे फैलाकर अपनी छूट में दो उंगलियां अंदर बहार कर रही थी, पर उसकी निगाहें सामने के दृश्य पर सम्मोहित सी ठहरी हुई थी, और सम्मोहित हो भी क्यों न सामने का दृश्य hi कुछ ऐसा था साथ hi जो भी हो रहा था ये उसी की इच्छा थी देखने की..

बिस्तर का दृश्य कुछ ऐसा था की अनुज सबसे नीचे था उसके ऊपर उसकी रसीली कामुक माँ सभ्य थी और अनुज का लुंड अपनी गांड में लिए हुए थी वहीं माँ की और अनुज की टैंगो के बीच कर्मा था जिसका लुंड माँ की छूट में था और दोनों भाइयों के लुंड ले में माँ की छूट से अंदर बहार हो रहे थे, वहीं बगल में बिस्तर के नीलेश खड़े थे जिनका मोटा लुंड सभ्य के मुँह में था और वो अपने दोनों बेटों को अपनी पत्नी को छोड़ता हुआ देख उससे लुंड चुसवा रहे थे सभ्य के तीनो छेड़ उसके परिवार के तीनो मर्दों से भरे हुए थे और तीनो मिलकर सभ्य को टिहरी चुदाई का सुख दे रहे थे





दरअसल ये इच्छा शालू की थी जो की अपनी जीजी को तीनो से एक साथ चुड़ते हुए देखना चाहती थी और जो अभी अपनी इच्छा को पूरी होते देख सिसकियाँ भर रही थी साथ hi सबको प्रोत्साहित भी कर रही थी,

वैस्व तो सभ्य को छोड़ने के लिए किसी को भी प्रोत्साहन की ज़रुरत नहीं थी.

अनुज नीचे से माँ की कासी हुई गरम गांड में धक्के लगते हुए सिसक रहा था उसे माँ की छूट में अपने भाई का लुंड घिसता हुआ महसूस हो रहा था जो की उसकी उत्तेजना और बढ़ा रहा था.

अनुज- हांण अह्हह्ह्ह्ह माआहहह किटमि बार भीईई गांड मारलू तुम्हारी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हर बार पिछली बार से ज़्यादा मज़ा आता है..

नीलेश- सही कह रहा है बेताआहःहः हम तो ये सालों से महसूस कर रहे हैं जब तुम पैदा भी नहीं हुए थे तबसे.

कर्मा- आह्हः जहाँ से पैदा हुआ था, जिस भोसड़े से निकला था आज उसी को छोड़ रहा हूँ वो भी तुम्हारे साथ मिलकर पापा आह्हः मज़ा आ रहा है.

उधर से शालू भी बोली- अह्ह्ह्हह यही तो मैं देखना चाहती थी जीजी को एक साथ तीन तरफ से चुड़ते हुए देखना अह्ह्ह्हह छोड़ो अपनी रैंड माँ को बच्चों और तेज़...

सभ्य की सिसकियाँ नीलेश के लुंड पर घुट रही थी, साथ hi उसकी छूट और गांड में लगातार उसके बेटों के लम्बे लुंड उसे आनंद की एक अलग धरा में बहा रहे थे.

नीलेश- सही कहें आह्हः बच्चों तो हमने भी कई बार सोचा था की कैसा लगेगा अगर ऐसा हो तो की तुम दोनों और हम मिलकर एक साथ तुम्हारी माँ को छोड़ें तो.. और सच बताएं तो जैसा सोचा था उससे भी ज़्यादा मज़ा आ रहा है...

कर्मा- हानंन्न पापा मैं भी बहुत सोचता था पर ऐसेआह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ाआह्ह्ह्हह्ह कभी नहीं आया,

अनुज- हांण अह्हह्ह्ह्ह माआहहह ओह्ह्ह्हह्ह माँ जी की गांड जैसाः कुछ नाहीई..

शालू- अब बातें काम करो और माँ की ऐसी चुदाई करो जैसी उसे पसंद है.

शालू की बात तीनो ने मानी और फिर सभ्य की जो भयंकर चुदाई तीनो ने मिलकर की उसे देख कर शालू भी एक बार झाड़ गयी वहीं सभ्य तो कई बार झड़ी पर बच्चे थे रुकना hi नहीं छह रहे थे और तब जाकर रुके जब उनके लुंड ने अपनी पिचकारियां अपनी माँ की छूट और गांड में छोड़ दी वहीं नीलेश ने भी सभ्य को अपना रास पीला दिया,

ऐसी चुदाई के बाद सभ्य तो ढेर हो गयी वहीं शालू उसके छेदों को चाटने चूमने में लग गयी.. और अपने भांजो के रास को उसके छेदों से निकल कर चाटने लगी,

खैर शाम हो चली थी तो और सब काफी देर से चुदाई कर रहे थे इसलिए इस दौर को अभी रोका गया क्यूंकि जानवरो को खाना पीना देना था, तो सभ्य को आराम करता छोड़ शालू घर के काम में लग गयी वहीं तीनो मर्द बहार के काम निपटने चले गए,

खेत के काम निपटा कर कर्मा लौट hi रहा था की उसका फ़ोन बजा...

जारी रहेगी...
 
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