Incest Katha Chodampur Ki - Page 12 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Katha Chodampur Ki

अब गड्ढे हो या न हो मैं तो कमर हिला हिला कर अपने लुंड को माँ की गांड पर घिसने लगा... कपड़ो के बावजूद मुझे माँ की गांड का स्पर्श बहुत प्यारा लग रहा था... वही हाथो पर उनकी नंगी कमर और पेट का स्पर्श... मैं तो जैसे जन्नत में था...

अपडेट 71

मैं जैसे सपनो की दुनिया में खोया हुआ था... मेरा लुंड कपड़ो के ऊपर से hi माँ की गदराई गांड की दरार में घिस रहा था... जिससे मेरी कमर अपने आप झटके ले रही थी...

मैंने फिर माँ की नाभि से उंगली को निकला और फिर से पूरे पेट पर फिरने लगा साथ hi उनको खुद से चिपका भी लिए था... मैं मन hi मन चारु ममी का शुक्रिया ऐडा कर रहा था की उन्होंने माँ को ये शाल दी जिससे सबसे ज़्यादा मेरा फायदा हो रहा था.. क्यूंकि मेरे हाथों की हरकतें किसी को नज़र नहीं ा रही थी....
और इसी बात का फायदा उठा कर मैं माँ के कामुक बदन का मज़ा लूट रहा था... पर माँ का बदन कुछ ऐसी चीज़ है जो जितना मिले उतना काम है मैंने... मेरा लालच बढ़ता hi जा रहा था... और शाल होने की वजह से मैं खुश भी था अपनी किस्मत पर क्यूंकि शाल होने की वजह से किसी को नहीं दिख रहा था की अंदर मेरे हाथ क्या गुल खिला रहे हैं....

खैर मैंने फिर शाल के अंदर hi माँ की साड़ी के पल्लू को बिलकुल एक तरफ कर दिया ताकि वो मेरे हाथों और माँ के बदन के बीच न आये... और फिर मैं फिर से माँ के पेट से खेलने लगा साथ hi मेरा लुंड लगातार माँ के चूतड़ों में घिस घिस कर लोहे का होता जा रहा था...

बस धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी तो मैंने भी आगे बढ़ने का फैसला किआ और अपने हाथों को माँ के पेट से सहलाते हुए ऊपर उनकी नरम नरम और बड़ी बड़ी छूछीयों पर ब्लाउज के ऊपर से रख दिया और हलके हलके सहलाने लगा...

मेरे हाथ छूछीयों पर पड़ते hi माँ का मुँह थोड़ा सा खुला... पर उन्होंने बिना पीछे मुड़े hi बोलै- अह्ह्ह कर्मा बीटा क्या कर रहा है...

ये बात माँ ने धीरे से बोली की कोई और न सुन पाए.. मैंने भी फुसफुसाते हुए जवाब दिया- कुछ नहीं माँ गड्ढे बहुत हैं इसलिए संभल रहा हूँ कही तुम गिर न जाओ...

और कहते हुए मैं माँ के ब्लाउज के ऊपर से hi उनकी छूछीयों को थोड़ा थोड़ा दबाने लगा...

माँ- नहीं तू अपने आप को संभल मैं खुद संभल जाउंगी.. तू नहीं सम्भला तो गड़बड़ हो जाएगी देख नहीं रहा हम कहाँ हैं अभी...

में- मैं तो देख रहा हूँ माँ पर कोई और नहीं देख सकता तो आप चिंता मत करो... बस शाल अचे से ओढ़ लो...

ये सब मैंने माँ की छूछीयो को दबाते हुए कहा... इतने लोगो के बीच इस तरह से अपनी माँ की बड़ी बड़ी नरम रुई के गोलों को दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था.. पर मेरे और माँ के अलावा ये कोई नहीं जनता था... माँ भी न चाहते हुए मेरी हरकतों से थोड़ा गरम होती जा रही थी...

माँ- अहंमम फिर भी यहाँ ये सब ठीक नहीं है... बेटा...

मैंने सोचा ऐसे तो माँ मन hi करती रहेंगी... अपने काम पर ध्यान देना चाहिए... और मैं माँ की छूछीयो को गूंथने लगा...

माँ- सब सही है आप बस आराम से सफर का आनंद लीजिये...

ऐसा अकल्पनीय मज़ा आ रहा था मुझे बस में भीड़ में माँ की छूछीयो को मसलने में...

बाकि सब की नज़रों में माँ और बेटे आराम से खड़े हुए थे.. पर शाल के अंदर कुछ और hi चल रहा था...





शाल के अंदर का दृश्य कुछ ऐसा था जिसकी कल्पना भी बस में मौजूद लोग नहीं कर सकते थे... माँ कोशिश कर रही थी की उत्तेजना के बहाव में खुद को बहाने से रोकें पर मेरे हाथ उनकी हर कोशिश को नाकाम कर रहे थे वहीं रही सही कसार मेरा लुंड पूरी कर रहा था जो पीछे से उनके चूतड़ों के बीच घुसा जा रहा था...

न अब मैं कुछ बोल रहा था और न hi माँ बस दोनों अपने अपने काम में लगे हुए थे... माँ खुद को रोकने के और मैं उनको बहकाने के...

माँ की छूछीयो में न जाने कैसा जादू था की मैं जितना उन्हें गूंथ रहा था मेरा मन उतना hi और करंव को कर रहा था... जैसे जितना खाओ भूख उतनी hi बढ़ती जाये... खैर मैं अपनी सपने की दुनिया में खोता हुआ बस के साथ साथ आएगी बढे जा रहा था...

फिर मैंने माँ की छूछीयो को दबाते हुए अपना हाथ उनके ब्लाउज के हुक पर लेजाकर रोक दिया... और जो मैं करने जा रहा था उसे सोच कर hi मेरे दिल की धड़कन बढ़ रही थी और हाथ भी काँप रहे थे इतने सब अजनबी लोगो के बीच अपनी माँ के साथ ये सब करने के ख्याल से hi मैं पागल हुआ जा रहा था... पर फिर भी मैंने हिम्मत करते हुए माँ के ब्लाउज के हुक को पकड़ा और सबसे ऊपर का एक हुक खोल दिया और उसके खुलते hi एक बेअसबार बच्चे की तरह मेरी उंगलियां अगले हुक पर पहुँच गयी...

माँ को जैसे hi अंदाजा हुआ क्या हो रहा है उनकी शाल के अंदर तो उन्होंने फिर से विरोध जताते हुए बोलै- कर्मा पागल हो गया है kya...mat कर ये सब...

हालाँकि माँ ये सब बोल रही थी पर उन्होंने न तो मेरे हाथ हटाए खुद से और न hi हिली दुली जिससे मुझे ये लगे के माँ हटाना छह रही हैं तो इस कमज़ोर विरोध के आगे मेरे हौसले बहुत मज़बूत थे और मैं अगले हुक पर पहुँच गया... और उसे भी खोल दिया...

Maa(fusfusate huye)-karma मत कर मान जा... बस में इन सब के सामने तू अपनी माँ को नंगी करेगा क्या?

माँ खुद से बोले गए शब्दों और उनका मतलब जानकर खुद hi उत्तेजित हो गयी...

में- माँ तुम नंगी बस मेरे सामने हो रही बाकि ये सब तो अनजान हैं...

मैंने भी अपने काम में लगे हुए जवाब दिया... और चौथा हुक भी खोल दिया... बस अब एक आखिरी कांटा था मेरे रस्ते के बीच...

माँ- बेटे के सामने भी यूँ खुलेआम नंगा होना पाप है बीटा और ये तो अनजान लोगो से भरी हुई बस है समझा कर...

में- माँ तुम बस मुझ पर ध्यान दो.. बाकि सब को भूल जाओ..

और ये कहते हुए मैंने उनके ब्लाउज का आखिरी हूल भी खोल दिया और उनके ब्लाउज के दोनों परत को अलग अलग तरफ कर. दिया.....

दोस्तों काफी बिजी होने की वजह से अपडेट नहीं दे प् रहा अभी जितना टाइम मिला लिख दिया अगला part भी बहुत जल्दी hi पोस्ट करूँगा.. शुक्रिया
 
और ये कहते हुए मैंने उनके ब्लाउज का आखिरी हूल भी खोल दिया और उनके ब्लाउज के दोनों परत को अलग अलग तरफ कर. दिया.....

अपडेट 72
अब मेरे हाथों में माँ की ब्रा और उसमे क़ैद छुछियां आ गयी जिन्हे मैं सहलाने लगा... माँ की छुछियां इतनी बड़ी थी की मेरे पूरे हाथ में भी नहीं समां रही थी... और मेरे लिए इससे ख़ुशी की क्या बात थी... जितना ज़्यादा उतना मज़ा..

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कर्मा betaaaaaaaaaaaaahhhh आराम से... बीटा मत कर सही नहीं है ये....

में- क्या सही नहीं है माँ..?

और ये कहकर मैं माँ के ब्रा के कप जो पहले से hi छूछीयों को सँभालने में नाकामयाब थे उन्हें नीचे की और सरका दिया... जिससे माँ की छुछियां आधी से ज़्यादा मेरे हाथों में नंगी हो गयी....

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है मममम..

में- कुछ भी तो नहीं माँ...

और ये कहकर मैं माँ की छूछीयो को सहलाने लगा...





माँ अपनी आँखें बंद किये हुए मेरे हाथों को अपने बेटे के हाथों को अपनी नंगी छूछीयों पर महसूस कर रही थी.... साथ में बस में होने का दर उनकी उत्तेजना और बढ़ा रहा था... वो न चाहते हुए भी इस बहाव में बहती जा रही थी..

और इधर जैसे hi मेरे हाथों से माँ की नंगी छूछीयों का स्पर्श हुआ था मेरे शरीर में खून का बहाव बढ़ने लगा था और सारा खून बहकर लग रहा था मेरे लुंड में इकठा हो रहा था... लुंड लोहे की तरह कड़क हो चूका था और जीन्स में क़ैद होने की वजह से दर्द भी बेहद हो रहा था पर कर भी क्या सकता था... पर जितना माँ की छूछीयो से खेलता दर्द उतना hi बढ़ जाता...

मैं परेशां हो कर कोई न कोई उपाय ढूंढने लगा पर कुछ समझ नहीं आ रहा था.. फिर एक रिस्की तरीका सूझा पर वो रिस्की भी था पर लुंड के दर्द का कुछ न कुछ तो करना hi था... तो पहले तो मैंने अपनी शर्ट जो पंत के अंदर दबी हुई थी उसे बहार निकला... शर्ट की लम्बाई ठीक थक थी जो मेरे ाँद तक थी मैंने सोचा काम बन सकता है और फिर मैंने इधर उधर देखा तो कोई नहीं देख रहा था तो मैंने अपनी पंत की चैन खोली और अंदर हाथ डालकर कच्चे को नीचे सरका दिया और बड़ी मुश्किल से लुंड को चैन की जगह से बहार निकला... सब समझ सकते हैं के खड़े लुंड को चैन वाली जगह से बहार निकलना कितना मुश्किल का काम है... और जब लुंड बड़ा हो तो पूछो hi मत खैर काफी म्हणत के बाद मैंने लुंड को बहार निकल लिए और जो सुकून मिला आह्ह्ह्ह निकल गयी मुँह से...

खैर माहौल को देखते हुए मैंने शर्ट के नीचे के बटन को लुंड के ऊपर रहने दिया और नीचे की दोनों साइड को ऐसे रखा की वो मेरे लुंड को साइड से धक् lein...jisse आस पास वालो को कुछ न दिखे पर लम्बाई की वजह से आधे से ज्यादा लुंड अब भी बहार था जिसे छुपाने के लिए मैंने माँ के चूतड़ों की दरार में घुसा दिया... आह्हः नंगे लुंड पर साड़ी में क़ैद माँ की गांड का स्पर्श बहुत सुखद था.. लुंड के टोपे से मुझे थोड़ा रास रिस्ता हुआ महसूस हुआ... और मैं कमर हिला हिलाकर माँ के चूतड़ों में अपना लुंड घिसने लगा... और जब तक मैं माँ से चिपका हुआ था लुंड के दिखने का भी दर नहीं था...

मेरा लुंड तो अपने आप आगे पीछे होकर माँ के गद्देदार चूतड़ों का मज़ा ले रहा था...

खैर मैंने बापिस अपना ध्यान माँ की छूछीयो पर लगाया और उन्हें मसलने लगा...

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह betaaaaaaaaaaaaahhhh छौऊद ना... उनम

और फिर माँ को जैसे कुछ एहसास हुआ...

माँ- कर्मा तूने अपना वो बहार निकला है क्या...

में- क्या करता माँ रहा नहीं जा रहा था

मैंने नीचे से धक्के लगते हुए कहा...

माँ- है दय्या... हे राम ये लड़का बिलकुल पागल हो गया है... ये तो देखता हम किस जगह हैं.. फंसवायेगा तू...

Me-maa ऐसे hi कड़ी रहो कुछ नहीं होगा... चिपके रहेंगे तो किसी को कुछ नहीं दिखेगा...

माँ- तू पगला गया है...

और ये कहकर माँ ने अपनी गांड और पीछे करदी और टाइट से मेरे लुंड से चिपका दी...

माँ- अब हिलना बंद कर...

में- माँ रुक hi नहीं प् रहा अपने आप हिल रहा है ये...

माँ- कोशिश कर... कोई देख लेगा तो क्या होगा पता है..

में- ुहममम माँ बस ऐसे hi कड़ी रहो कुछ नहीं होगा...

और उनकी छूछीयों को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा...





माँ- बीटा कोई देख लेगा...

में- कोई नहीं देख रहा माँ...

और मैं ये देखने के लिए की कोई देख तो नहीं रहा सब तरफ देखने लगा तो कोई नहीं देख रहा था फिर जब मैंने राइट साइड देखा तो चौंक गया क्यूंकि जो बुड्ढे साइड में बैठे थे उनमे से एक तो सो रहा था पर दुसरे की नज़र हम पर थी...

मेरी फटने लगी की अब क्या होगा... लग गए लौड़े...

पर वो बुद्धा देखे जा रहा था कुछ बोल नहीं रहा था... मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ माँ को बताता तो वो परेशां हो जाती...

खैर मैं वहीं सुन्न हो कर खड़ा हो गया और उसकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार करने लगा की ये कुछ बोलेगा या करेगा उसकी नज़र मेरे लुंड और माँ की गांड पर थी जहाँ मैं अपना लुंड माँ की गांड से घिस रहा था...

मैंने ध्यान से बुड्ढे की तरफ देखा तो मुझे कुछ अजीब सा लगा की ये एक तक एक hi जगह क्यों देखे जा रहा है... जबकि अब तो मैं हिल भी नहीं रहा...

मैंने माँ की छूछीयो से एक हाथ हटाया और उसके चेहरे के सामने किआ उसकी आँखों के सामने तब भी उसकी आँखें वैसे hi खुली रही और वैसे hi देखता रहा मैंने ऐसे किआ जैसे उसकी आँख में मरने वाला हूँ फिर भी उसकी आँखें वैसे hi रही तब मुझे समझ आया की वो अँधा है...

मेरी जैसे जान में जान आई... मैं अपनी किस्मत पर हंसने लगा.. की एक पल को तो फैट गए थी....

और मैं बापिस माँ की छूछीयो को मसलते हुए गांड में लुंड घिसने लगा पर अब मेरा लुंड इतना सख्त हो गया था जैसे कोई पत्थर हो... मैंने माँ को कास के खुद से जकड़ा लिए और पीछे से तेज़ तेज़ उनके गदराये चूतड़ों में लुंड घिसने लगा... मेरी आँखें बंद हो गयी.. मेरे लुंड पर माँ के चूतड़ों की गर्मी मुझे बहुत आनंद दे रही थी... मेरे दिमाग में बस ये ख्याल आया की मैं अपनी माँ की गदराई हुई गांड का मज़ा बस में इतने लोगो के बीच में ले रहा हूँ और ये ख्याल आते hi न जाने क्या हुआ मेरा सारा खून जैसे मेरे लुंड में पहुंच गया.. एक पल को सब रुक गया और फिर मेरे लुंड ने पिचकारियां छोड़नी शुरू कर दी जो माँ की गांड के ऊपर उनकी साड़ी को भीगने लगा...

धार के बाद धार ऐसा लग रहा था की कभी ये ख़त्म hi नहीं होगा मैंने माँ को खुद से चिपका रखा था की वो हिल भी नहीं प् रही थी... वो कुछ बोल भी रही ठगी पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था... खैर फिर ऐसा लगा न जाने कितने टाइम बाद मेरे झड़ने क्व सिलसिले का अंत हुआ.. और कुछ पल बाद मैं नार्मल हुआ और आँखें खोली तो लुंड पूरा चिपचिपा था नीचे देखा तो माँ की साड़ी चूतड़ों के ऊपर से पूरी भीगी हुई hai...aur उनके चूतड़ों से चिपकी है... मैं ये देख hi रहा था की अचानक मुझे लगा माँ गिर रही है तो मैंने उन्हें खुद से चिपका के संभाला...

मैं घबरा गया की अचानक माँ को क्या हुआ...

Me-maa क्या हुआ तुम ठीक होना?

पर माँ कुछ नहीं बोल रही थी पर उनका शरीर मेरी बाहों में काँप रहा था...

और फिर काफी देर बाद मुझे ख्याल आया की माँ इतनी उत्तेजित हो गयी हैं मेरे लुंड घिसने और झड़ने से की वो भी झाड़ रही हैं...

मैंने चैन की सांस ली और ये भी सोचा की मैंने बिना माँ की छूट को छुए उन्हें झड़वा दिया.. माँ कितनी गरम औरत है...

ये सब हुआ hi था की बस रुक गयी तो कंडक्टर ने आवाज़ लगाई... राजपुर वाले उतरो... तो देखा धीरे धीरे बस खली होने लगी साइड वाला बुद्धा भी उठा और जो बुद्धा अँधा था उसे पकड़ के उठाया और फिर नीचे उतर गए... तो पीछे वाली सीट पूरी खली हो गयी... तो मैंने माँ को कोने में बिठा दिया जो की सामान से छुपा हुआ था मतलब माँ को तब तक कोई नहीं देख सकता था जब तक वो बिलकुल पीछे ना आ जाये..

माँ जबसे झड़ी थी तबसे कुछ नहीं बोली थी... मैं भी माँ के बगल में बैठ गया और बस भी फिर से चल पड़ी...

आगे क्या हुआ अगली अपडेट में सुग्गेस्टियन्स ज़रूर दें शुक्रिया
 
थैंक्यू सो मच आल ऑफ़ यू प्लीज कीप थे सुग्गेस्टियन्स एंड फीडबैक किंग
 
पीछे वाली सीट पूरी खली हो गयी... तो मैंने माँ को कोने में बिठा दिया जो की सामान से छुपा हुआ था मतलब माँ को तब तक कोई नहीं देख सकता था जब तक वो बिलकुल पीछे ना आ जाये..

माँ जबसे झड़ी थी तबसे कुछ नहीं बोली थी... मैं भी माँ के बगल में बैठ गया और बस भी फिर से चल पड़ी...

अपडेट 72
जो लोग अभी चढ़े थे वो बैठने लगे और जो पहले से खड़े हुए थे वो भी बैठने लगे बस ज़्यादातर खली हो चुकी थी... मैंने माँ की तरफ ध्यान दिए तो उन्होंने अपने हाथ शाल में डेल हुए थे और कुछ कर रही थी...

में- क्या कर रही हो माँ?

माँ- क्या करुँगी ब्लाउज बंद कर रही हूँ.

माँ ने गुस्से में जवाब दिया...

मैंने भी शाल में हाथ डालकर उनके हाथ पकड़ लिए..

में- रहने दो न माँ दिख थोड़े hi न रहा है किसी को..

माँ- कर्मा बस अब बहुत हो गयी तेरी बदमाशी... अब बस कर एक तो वैसे hi...

में- वैसे hi क्या माँ?

माँ- तुझे नहीं पता क्या??? मेरी साड़ी भीगा दी पीछे से पेटीकोट भी गीला हो गया है... इतना चिपचिपा लग रहा है बैठने में.. एक तो इतना सारा निकलता है तेरा..

में- क्या निकलता है माँ?

माँ- ( बनावटी गुस्से में) ज़्यादा बन मत... अगर किसी ने देख लिया तो क्या जवाब दूंगी मैं... बेवकूफ कहीं का...

में- माँ रात होने वाली है किसको hi दिखेगा... घर जाकर तो बदलोगी hi...

माँ- तेरे लिए तो हर चीज़ बहुत आसान है kahna...jhelna तो मुझे पद रहा है...

में- मेरी प्यारी माँ नहीं हो...

और ये कहकर मैंने हलके से माँ के रसीले होंठों को चूम लिया...

माँ थोड़ा चौंक गयी और फिर होंठ अलग करते हुए बोली- तू पागल हो गया है क्या.. किसी ने देख लिया तो पता है क्या होगा... ज़रा भी शर्म है तुझको...

में- अरे माँ देखो खुद hi बस में कोई भी हमें नहीं देख सकता... इतना तो मैं भी सोचकर करता हूँ... ऐसे hi परेशां हो जाती हो तुम तो...

माँ- ऐसे hi परेशां नहीं हो जाती जब बीटा तेरे जैसा बेशरममममम ुहममममममम

माँ अपनी बात बोल hi रही थी की मैंने फिर से उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और माँ के रसीले होंठों का रास पीने लगा... यूँ बस में सबके होते हुए माँ को चूमने में एक अलग आनंद आ रहा था... और माँ ने भी मुझे हटाने की कोशिश नहीं की और कुछ देर बाद साथ देने लगी... और एक वक़्त ऐसा आया की हम भूल hi गए की हम लोग बस में हैं... और एक दुसरे की जीभ को चूसने में खो गए...

फिर बस ने एक झटका लिए तो हम लोग होश में आये और अलग हुए...

में- मज़ा आया माँ...

माँ- धत्त्त मुझे भी तू अपनी तरह बेशर्म बना देगा...

मैंने बस में देखा तो सब अपनी सीट पर थे और कोई हमें नहीं देख सकता था...

मैंने फिर से माँ के होंठों को अपने होठों में भर लिए और इस बार माँ ने भी पूरा साथ दिया और अगले hi पल माँ की जीभ मेरे मुँह के अंदर थी और मैं उसे चूस रहा था...

करीब 5 मीन्स तक ऐसे hi चूसने का सिलसिला चलता रहा और फिर हम अलग हुए... मैं खुश था की मैंने माँ को इतना तो खोल hi दिया है की उन्हें मुझे किश करने में अब कोई दिक्कत नहीं है...

फिर मैंने अपने हाथों को दोबारा माँ की शाल के अंदर दाल दिया और उनकी छूछीयों को दबाने लगा...

Maa-ahhhhhhhh कर्मा मत कर बीटा कोई देख लेगा..

और माँ की बात भी सही थी ऐसे मुझे दबाने में भी दिक्कत हो रही थी और नीचे से हाथ भी नहीं दाल सकता था... तो मैंने एक नया उपाय सोचा...

पिछली सीट पर हम बैठे थे और वो पूरी खली थी और माँ एक कोने में बैठी थी तो मैंने अपने पेअर ऊपर किये दूसरी तरफ और माँ की गॉड में सर रखकर लेट गया...

माँ- क्या कर रहा है ये...

Me-kuch नहीं माँ आराम कर रहा हूँ..

अब मैं पिछली सीट पर लेता हुआ था मेरे पेअर गेट की तरफ थे और सर दूसरी तरफ कोने में बैठी माँ की गॉड में था... बस के लोगो को मेरी कमर के नीचे का हिस्सा दिख सकता था उससे ज़्यादा नहीं क्यूंकि बीच में सामान रखा हुआ था...

माँ मेरी तरफ देखती हुई बोली- तू भी न चैन नहीं है तुझे कुछ न कुछ करता रहता है...

में- मेरे पास तुम हो माँ तो चैन hi चैन है...

Maa-are देखो तो कैसी फ़िल्मी बातें बोल रहा है...

फिर धीरे से मैंने मुस्कुराते हुए माँ की शाल को खोला तो माँ थोड़ा सरते हुए बोली- बीटा रहने दे ब्लाउज खुला हुआ है..

Me-pata है माँ लो अब शाल बंद करलो..

मैंने अपना सर शाल के अंदर कर लिए यह माँ का अगला हिस्सा और मेरा सर शाल से ढाका हुआ था तो बहार से किसी को कुछ नहीं दिख रहा tha...bas मेरा शरीर और माँ की शाल में ढाका हुआ मेरा सर और माँ...

मैंने अपने शरीर को घुमाकर सीट की तरफ कर लिए था तो अब मेरी पीठ बस के सामने थी और आगे का हिस्सा पीछे जिससे मेरा चेहरा भी माँ के पेट की तरफ हो गया और ब्लाउज खुला होने से सीधा स्पर्श हो रहा था...

मेरे होंठ माँ के नंगे पेट से चिपक गए और ये होते hi मेरा लुंड एक बार फिर कड़क होने लगा पर मेरा लुंड सीट के अंदर की तरफ था तो किसी को दिख नहीं सकता था नहीं तो कोई भी देख लेता..

मैं खुद को रोक नहीं पाया और माँ के पेट को चूमने लगा..

माँ- कर्मा बदमाशी मत कर पहले भी बहुत कुछ कर चूका है तू...

मैंने जवाब में अपनी जीभ निकली और माँ के पेट को चाटने लगा... थोड़ी देर चाटने के बाद मैं चेहरा थोड़ा नीचे किआ तो मेरी जीभ को माँ की नाभि मिल गयी जिसमे मैंने अपनी जीभ घुसेड़ दी...

जिसके अंदर जाते hi माँ के मुँह से एलक हलकी सी ाः निकल gayi...aur माँ ने अपने हाथों से शाल के ऊपर से hi मेरे सर को पकड़ लिए... पर मैं लगातार माँ की नाभि में जीभ डालकर चूस रहा था... और माँ एक बार फिर से गरम होती जा रही थी...

थोड़ी देर तक नाभि चूसने के बाद मैंने अपना चेहरा थोड़ा ऊपर की तरफ घुमाया तो माँ की छुछियां ब्रा के बहार पके हुए रसीले ामो की तरह झूल रही थी... जिन्हे देखकर मैं काबू नहीं कर पाया और एक छुच्छी को मुँह में भर लिए और उसका रास पीने लगा....

माँ- ahmmmmmmmmmmm कर्माआआआ....

मैं बिना कोई जवाब दिए अपने मन पसंद फल को पीटा रहा... माँ की छुछियां नरम एयर सख्त एक साथ दोनों थी... कुडत के इस अजूबे को मैं अपने मुँह से चख रहा था भोग रहा था...

मैं कभी ज़्यादा से ज़्यादा छुच्छी को मुँह ीे अंदर लेकर चूसता तो कभी सिर्फ अंगूर के डेन जैसे निप्पल को जीभ से छेड़ता तो कभी पूरी छुच्छी को जीभ से चाट रहा था.

माँ बैठी हुई कसमसा रही थी और मेरा सर शाल के ऊपर से पकड़ कर अपनी छूछीयो पर दबा रही थी... करीब 10 मीन्स तक मैं एक छुच्छी को hi पीटा रहा... और फिर उसे हटाकर दूसरी को मुँह में भर लिए... की तभी बस फिर से रुकी... शायद कोई गाँव आ गया था... कुछ देर बाद शायद कोई पास आया हमारे क्यूंकि मेरी नज़र थी तो मैं तो देख नहीं प् रहा था.. बस माँ थोड़ा सीधा हो गयी जिससे मुझे थोड़ा अन्डेक्सा हुआ.. की तभी आवाज़ आई.. तो पता चला कंडक्टर की थी.

कंद- क्या हुआ बहन जी ये भैया ऐसे लेट हुए क्यों है? सब ठीक तो है न...

माँ- हाँ भैया सब ठीक है थोड़ा सर दिरद है तो आराम कर रहा है..

मेरा लुंड एक दम तन गया ये सोचकर की मैं अपनी माँ की छुच्छी चूस रहा हूँ... एक अनजान आदमी के सामने बस में और माँ अपने जवान बेटे से बस में खुले ब्लाउज के साथ अपनी चुकी चुसवा रही है और साथ में उससे बात भी कर रही हैं.. और इसी जोश में मैंने माँ के एक निप्पल को काट लिया जिससे माँ भी चौंक गयी... पर किसी तरह उन्होंने खुद को संभाला... मैं बेफिक्र होकर माँ के रसीले आम को चूस रहा था, चाट रहा था...

कंद- कोई नई करने दीजिये..

और ये बोलकर दूसरी सावरिया जो अभी चढ़ी थी उन्हें आगे बैठने लगा..

मेरे हाथ जो अब तक बहार थे मैंने एक हाथ को भी शाल के अंदर hi कर लिए... और एक छुच्छी को चूस रहा था और दूसरी को दबा रहा था...

माँ की छूछीयो को चूसते हुए मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपने बचपन में बापिस आ गया हूँ... माँ की गॉड में लेटकर उनका दूध पि रहा हूँ... या माँ के लिए उनके दूध के लिए मैं बड़ा हुआ hi नहीं.. जितनी भूख दूध की तब थी उससे कहीं ज़्यादा अब है.. क्यूंकि अब उसमे वासना भी शामिल है.. उनकी छूछीयों को चूसते हुए ऐसा लग रहा था जैसे रास पिघल पिघल कर मेरे मुँह में घुल रहा है.. और वो रास दुनिया का सबसे स्वादिष्ट रास है... आज मैं जी भर के उस रास को पि लेना चाहता था... मैं माँ की छुच्छी के हर हिस्से को चाट रहा था चूस रहा था कोई भी हिस्सा छोड़ना पाप कहलाता...

मैं उन दो गोलों की खूबसूरती में खोया हुआ आनंद के सागर में गोते खा रहा था... ऐसा लग रहा था की ज़िन्दगी तो ये है...

माँ भी कुछ नहीं बोल रही थी बस उनके हाथ मेरे सर पर थे शाल के ऊपर से hi.. उनका चेहरा मुझे दिख नहीं रहा था तो भाव का पता नहीं पर हैं बीच बीच में उनके मुँह से आह्ह्ह्ह आह्हः जैसी सिसकारी निकल जाती थी.....

खैर अचानक एक लहार ने मुझे आनंद के सागर से निकल कर सच्चाई के किनारे पर ला फेंका...

वो लहार कंडक्टर की आवाज़ थी जो बोल रहा था चोदामपुर वालो उठ जाओ... चोदामपुर आ गया है...

मा ने भी मेरे सर को हिलाया और मैं हड़बड़ाता हुआ उठा पर मेरे ऐसे उठने से शाल खुल गयी और माँ की नंगी छुछियां मेरे सामने आ गयी और अगले hi पल माँ ने शाल को बापिस लपेट लिए और बोली- आराम से बीटा कोई देख लेता अभी...

मैं होश में आया नीचे की तरफ पहली बार ध्यान गया तो लुंड महाराज तने हुए थे पंत में... उन्हें किसी तरह एडजस्ट किया और खड़ा हो गया... हम गाँव आ गए मतलब मैं पिछले एक घंटे से माँ के ामो को चूस रहा था... एक घंटे में एक पल के लिए भी उनकी छूछीयों को मुँह से अलग नहीं होने दिया था...

मैं कितना प्यासा था माँ की छूछीयों का... खैर बस अपने अड्डे पर रुकी और मैंने माँ को आगे उतरने दिया क्यूंकि उनकी कोई साड़ी न देखले.. और फिर मैं उतरा... हमारे उतारते hi बस चली गयी.. रात हो चुकी थी 7:30 से ज़्यादा का समय हो चूका था और गाँव में इतने वक़्त अँधेरा हो जाता है पर चांदनी रात होने की वजह से आसानी से दिख रहा था तो चलने में कोई परेशानी नहीं थी.... गांव की तरफ जाने वाली सड़क सूनसान थी... क्यूंकि लास्ट बस थी और गाँव में कोई इतनी लेट आता जाता नहीं था तो मैं और माँ hi थे... पूरी सड़क पर..

Maa-late हो गए बीटा जल्दी चल..

Me-haan माँ और मैंने अपना फ़ोन निकल कर देखा तो अनुज की 3 मिस्ड कॉल थी और एक मश्ग था.. जिसका रिप्लाई ठीक है लिखकर भेज दिया और आगे चल दिए...

इसके आगे उगली अपडेट में अपने सुझाव और फीडबैक ज़रूर दें.. शुक्रिया
 
Me-haan माँ और मैंने अपना फ़ोन निकल कर देखा तो अनुज की 3 मिस्ड कॉल थी और एक मश्ग था.. जिसका रिप्लाई ठीक है लिखकर भेज दिया और आगे चल दिए... अब आगे

अपडेट 74
बस अड्डे से गाँव में आते हुए कीब 500 मीटर पर हमारा बाघ और खेत थे जहाँ हमारी भैंस वगेरा बंधी रहती थी... और बाघ से गांव के अंदर 500 मीटर बाद घर था..

मैंने फ़ोन बापिस जेब में रखा और माँ की तरफ देखा तो माँ फिर से अपनी शाल के अंदर हाथ दाल कर कुछ कर रहे थी मेरी समझ में जैसे hi आया मैंने उन्हें रोक दिया

में- माँ क्या कर रही हो?

माँ- ब्लाउज लगा रही हूँ बीटा...?

मैंने उनके हाथो को पकड़ लिया

में- रहने दो न माँ ऐसे hi..

maa-pagal हो गया है तू गांव आ गया है किसी ने देख लिया तो गाओं में रहने लायक नहीं रहेंगे..

me-yahan कौन देखेगा माँ.. दूर दूर तक कोई नहीं है...

और ये कहकर मैंने माँ को अपनी तरफ खींच लिए और एक बार फिर से अपने होंठ उनके होठों से मिला दिए...

आह्हः क्या सुकून आ रहा था यूँ चांदनी रात में बीच सड़क पर खुले आसमान के बीच अपनी माँ के रसीले होंठों को चूसने का... उनका रास पीने का... ऐसा लग रहा था की उनके होंठ पिघल कर मेरे मुँह में घुल रहे हैं...

खैर थोड़ी देर बाद हम अलग हुए तो माँ ने मेरी आँखों में देखा और फिर बनावटी गुस्सा दिखते हुए बोली- बदमाश कहीं का कहीं भी शुरू हो जाता है..

और ये बोलकर माँ ने मुझे धक्का दिया पर उस धक्के का फायदा मुझे हुआ क्यूंकि मैंने उनकी शाल को पकड़ा हुआ था और धक्का देने से मैं उनसे दूर हुआ और साथ hi उनकी शाल भी मेरे हाथ में आ गयी और शाल के खींचने से माँ घूम गयी दूसरी तरफ...

पर जैसे hi माँ मेरी तरफ पलटी हाय क्या नज़ारा था...

माँ का पल्लू नीचे गिरा हुआ था ब्लाउज का नीचे का हुक लगा हुआ था बाकि सब खुले थे ... ब्रा छूछीयों से नीचे थी और दोनों बड़ी बड़ी शर्मीली छुछियां ब्लाउज से आधी बहार निकल कर झाँक रही..





माँ की छूछीयो का ये शर्माना मुझे इतना भ गया की मैंने उनकी मदद करते हुए ब्लाउज के दोनों पैट से उन्हें बहार निकल लिया और खुली हवा में सांस लेने को छोड़ दिया... ब्लाउज का एक हुक अब भी लगा हुआ था पर दोनों छुछियां पूरी तरह बहार थी और चैन की सांस ले रही थी...

माँ- पागल है क्या कर्मा बस में काम था क्या जो अब यूँ बीच सड़क पर मुझे नंगा कर रहा है...

में- माँ यहाँ मेरे अलावा कौन है देखने वाला... तुम भी जानती हो गाओं में इस टाइम कौन बाहर निकलता है अऊर सड़क की तरफ आ सकता है...

माँ- फिर भी ऐसे सही नहीं है...

Me-are माँ सब सही है थोड़ी इन्हे भी सांस लेने दो...

और ये बोलकर मैंने माँ की छूछीयो को दबा दिया...

चांदनी में नहीं हुई माँ की कोमल और बड़ी बड़ी छुछियां बेहद हसीं लग रही थी.. चांदनी में नहाया हुआ उनका नंगा पेट चमक रहा था...

मेरा लुंड हालाँकि कुछ देर पहले hi झाड़ा था दोबारा से कड़क होकर ठोकर मरने लगा... और हो भी क्यों न बीच सड़क पर अपनी गदराई हुई माँ को आधा नंगा देखने के बाद किसका लुंड नहीं खड़ा होगा...

माँ- पर ऐसे यहाँ रुक नहीं सकते बीटा घर के लिए देर हो रही है...

में- तो चलो न माँ...

Maa-is हालत में...

में- और क्या मज़ा आएगा....

माँ ने एक बार मेरी तरफ मुस्कुरा के देखा और फिर बोली- बेशर्म है तू और मुझे भी कर रहा है...

और फिर चलने लगी... शायद उन्हें भी इस तरह अपने बेटे के सामने बीच सड़क पर खुले आसमान के नीचे ऐसे चलने में उत्तेजित महसूस हो रहा था... मैं और माँ धीरे धीरे चलने लगे मेरी नज़र माँ के ऊपर से हैट नहीं रही thi.....par माँ थोड़ी असहज लग रही थी...

Me-kya हुआ माँ ऐसे क्यों चल रही हो...

माँ- तेरी वजह से...

Me-maine क्या किया?

माँ- मेरी सारी भीगा दी... इतना चिपचिपा सा लग रहा है चलने में...

में- बस इतनी सी बात.. लो अभी सही किये देता हूँ..

और ये कहते हुए मैंने माँ के हाथ से साड़ी का पल्लू पकड़ा और खींचने लगा और माँ घूमने लगी... इससे पहले माँ कुछ समझ पाती माँ की साड़ी मेरे हाथ में थी और उसे भी मैंने शाल के साथ लपेट लिए...

Maa-karmaaaaaaaa पागल कहीं का... साड़ी दे मेरी...

में- अब नहीं चिपकेगी माँ.. क्यों परेशां होती हो...

माँ- उतरनी नहीं थी... यहाँ गाओं के बीच नंगा करेगा क्या मुझे ब्लाउज तो वैसे भी खुला है...

Me-tabhi तो बहुत खूबसूरत लग रही हो माँ... देखो चंडकी रौशनी में कितनी प्यारी लग रही हो..

और माँ लग भी रही थी बहुत प्यारी.. पेटीकोट और खुले हुए ब्लाउज में...

माँ- हाँ बस ये hi बोल बोलकर आधा नंगा कर दिया तूने मुझे...

में- तो क्या हुआ माँ.. मैं hi तो हूँ यहाँ... अच्छा सुनो बाघ तक चलते हैं वहां नल पर साफ़ करलेंगे थोड़ी सी साड़ी और फिर बांध लेना.. फिर घर चले जायेंगे...

माँ- फिर कोई बदमाशी नहीं..

में- हाँ मेरी प्यारी माँ कोई बदमाशी नहीं..

और मैं और माँ आगे चलने लगे... कौन कह सकता था की मेरी घरेलु संस्कारी माँ... जो बहार भी जाती है तो सर पर पल्लू करके आज वो अपने hi बेटे के सामने खुले ब्लाउज और पेटीकोट में इस तरह से गाओं की सड़क पर होगी... छुछियां ब्लाउज बहार जो हर कदम के साथ उछाल कूद कर अपने भर और कोमलता का एहसास दिला रही thi...khair मैं और माँ धीरे धीरे चलते हुए अपने बाघ तक पहुँच gaye...Bagh में अंदर घुस गए जहाँ पत्तों से छान कर चांदनी नीचे का रही थी जो माँ के बदन पर पड़ते hi उसे चमका रही थी... हम चलते हुए बाघ में बानी हुई झोपडी के पास पहुंचे जहाँ नल था और हमारी भैंसे बंधी रहती थी... हमें देखती hi भैंसो ने भी अपना सर हिलाकर जताया की वो हमें पहचान गयी है... एक भैंस जो बच्चा देने वाली थी थोड़ी बैचेन लग रही थी... माँ उसके पास गयी और उसके सर पर हाथ फिरने लगी... और वो भी थोड़ी शांत हुई...

Me-maa अनुज का मश्ग भी आया था की पापा बोल भी रहे थे की एक बार आते हुए भैंस को देख आना अगर लगे देने वाली है बच्चा तो यहीं आ जायेंगे...

माँ- कब आया था..

में- जब हम बस में थे तब मैंने बोल्दिया ठीक है देख लेंगे...

माँ- हाँ लग भी रहा है की कभी भी दे सकती है बच्चा...

में- जल्दी दे तो ाचा है बेचारी परेशां है..

तभी माँ कड़ी हुई और थोड़ा हैट कर जाने लगी तो मैंने पुछा कहाँ जा रही हो माँ?

माँ- बहुत ज़ोर से पेशाब आई है...

में- तो यहीं करलो न..

माँ- पागल है क्या यहाँ कैसे तेरे सामने...

में- माँ मुझसे क्या शर्माना और बची ये भैंस तो ये भी स्त्री है...

माँ- तू तो पुरुष है और वो भैंसा भी..

Me-maa मैं और वो दोनों कुछ नहीं बताएँगे किसी को यहीं करलो...

माँ ने कुछ नहीं कहा पर एक साइड में मेरे सामने hi दूसरी तरफ मुँह कर के बैठ गयी तब तक मैंने भी माँ की सारी और शाल एक तरफ टांग दी.. उधर मैंने मुद कर माँ की तरफ देखा तो माँ अपने पेटीकोट को नीचे से पकड़ कर ऊपर उठा रही थी... जैसे जैसे पेटीकोट उठ रहा था माँ की गदराई हुई टंगे चांदनी में अपने दर्शन कराती जा रही थी... मेरे दिल की धड़कन भी उतनी hi तेज़ चल रही थी...

मेरे हाथ खुद बा खुद मेरे पंत के ऊपर से मेरे लुंड को सहलाने लगे...

माँ का पेटीकोट अब माँ के गदराये चूतड़ों पर पहुँच गया था और फिर एक पल में hi चूतड़ों के ऊपर... जो की एक काली पंतय में फंसे हुए आज़ाद होने की दुहाई दे रहे थे... और माँ ने भी उनकी दुहाई जल्दी सुनी और अचानक से पंतय को उन मॉस के कोमल पर्वतों से नीचे सरका दिया.. और पंतय के नीचे सरकते hi जैसे दोनों में ख़ुशी की लहार दौड़ गई....

मैं जैसे बूत बना हुआ बस इस अद्भुत नज़ारे का आनंद ले रहा था कहो की उसकी खूबसूरती में खो चूका था...

हालाँकि मैं माँ को एक बार छोड़ चूका था और पापा के साथ चुदाई करते हुए नंगा भी देखा था.. पर इस तरह से अपने सामने उन्हें पेशाब के लिए ऐसे अपने चूतड़ों को नंगा करता देखना सचमुच hi बहुत कामुक और उत्तेजित करने वाला दृश्य था.... माँ के गोल गोल बड़े बड़े चूतड़ हर हरकत के साथ लहार रहे थे... उन दोनों के बीच की दरार से झांकता हुआ उनकी गांड का भूरा छेड़ .. अपनी माँ के शरीर का सबसे निजी और कामुक अंग को देखकर मेरे तन बदन में करंट सा दौड़ रहा था... और फिर तभी एक मधुर आवाज़ आणि शुरू हुई और मैं उस मधुर संगीत में खोने लगा.. ये मधुर आवाज़ माँ के पेशाब की थी... मैं बिना पलके झपकाए माँ की छूट से निकलती हुई धार को देखे जा रहा था... और कानो में उसका मधुर sangeet..in दोनों ने मुझे ऐसा सम्मोहित किआ की जब मुझे होश आया तो देखा माँ ने पेशाब करना बंद कर दिया था और न जाने क्यों माँ अपनी पंतय जो की उनकी जांघो पर अटकी हुई थी उसे उतर रही थी...

माँ ने पंतय उतरी और फिर उससे अपनी छूट को बैठे बैठे hi पांच कर साफ़ किआ और फिर कड़ी हो गयी.. मैं तबसे एक इंच भी नहीं हिला था माँ कड़ी हुई तो झट से परदे की तरह उनका पेटीकोट नीचे गिरा और फिर मेरी पसंद का नाटक ख़तम हो गया... बस लग रहा था की बस ये दृश्य ऐसे hi आँखों के सामने रहे पर हर सुखद चीज़ का अंत होता है... इसका भी हुआ...

खैर माँ कड़ी होकर मेरी तरफ मुड़ी और मुझे देखा तो बोली तू क्या कर रहा है ये?

मैंने सोचा मैं क्या कर रहा हूँ और जब नीचे देखा तो पाया की मेरी पंत और कच्चा घुटनो पर है और मेरा हाथ मेरे लुंड पर ऊपर नीचे हो रहा है...

मैं माँ को पेशाब करते हुए देखने में इतना खो गया की मैंने कब खुद से hi अपनी पंत और कच्चा उतरी पता hi नहीं चला और लुंड भी हिलने laga...par एक बात थी की माँ मुझसे इतनी खुल चुकी थी की उन्हें मेरे लुंड के बहार होने से कुछ ज़्यादा आपत्ति नहीं थी.

में- कककक कुछः नहीं माँ...

माँ- तुझे भी पेशाब करनी है क्या तो करले..

में- आ हनन.. हाँ..

मैंने हड़बड़ाहट में जल्दी से घुटनो में पड़ी पंत और कच्चे को पूरी तरह उतर फेंका और नीचे से नंगा हो गया तब तक माँ मुद कर एक चारपाई जो बाघ में पड़ी रहती थी उसकी तरफ गयी और जहाँ मैंने साड़ी तंगी थी वो उतरने लगी उन्होंने अपनी पंतय को वहीं खत पर रख दिया...

मैंने थोड़ा आगे बढ़ कर मूतने की कोशिश की पर मूट नहीं आया बल्कि लुंड इतना कड़क हो गया था की ऐसा लग रहा था लोहे का है और मेरे शरीर का हिस्सा नहीं है...

मैंने माँ की तरफ देखा तो माँ खत पर झुकी हुई थी और साड़ी पर लगे मेरे रास को अपनी पंतय से पांच रही थी...

मेरे मन में ख्याल आ रहा था की मेरी माँ मेरी गदराई हुई कामुक पर संस्कारी माँ यहाँ बाघ में छाबडानी रात में खुले ब्लाउज और बिना पंतय के सिर्फ पेटीकोट पहने हुए कड़ी है..

यहाँ तक की अभी उसने अपने सेज बेटे के सामने अपने चूतड़ों को दिखते हुए पेशाब की hai...ye सब दिमाग में आते hi मेरे कदम खुद बा खुद आगे बढ़ गए...

मैं माँ के पीछे पंहुचा और बिना किसी देरी के अपने हाथ माँ के पेट पर रख दिए...

माँ- ओह्हो कर्मा अब बहुत हो गया अब बदमाशी मत कर...

मैंने कुछ नहीं कहा और अपने दोनों हाथ उनके पेटीकोट के किनारे पर लाया और फिर एक झटके में माँ के पेटीकोट को पकड़कर नीचे खींच दिया जिससे वो उनके पैरो में जा गिरा और माँ के चूतड़ नंगे हो गए.. माँ अब नीचे से बिलकुल नंगी मेरे सामने थी और ऊपर भी करीब करीब नंगी hi थी

.

अचानक हुए इस हमले से माँ चौंक gayi...aur मेरी तरफ घूम गयी

माँ- ओह्ह्ह मा... कर्मा ये क्या बदतमीज़ी है.. बोलै था न बहुत हो गया... कुछ बोल नहीं रही तो तू अपने मन की करता रहेगा.. शर्म नहीं आती अपनी माँ को इस तरह नंगा करते हुए अपने सामने...

पर मुझपर माँ की बातों को कोई असर नहीं हो रहा था बल्कि मैंने माँ को जवाब देते हुए उनके सर को पकड़ कर एक बार और उनके होंठो से मिला दिया... पर अगले ह पल माँ ने अपने होंठ अलग कर लिए...

माँ कुछ बोलने hi वाली थी की उससे पहले मैंने माँ को धकेल कर खत पर बिठा दिया और फिर उनके कन्धों पर ज़ोर डालकर उन्हें लिटा दिया... मैं अब माँ के दोनों पैरों के बीच था... माँ की रसीली छूट मेरे सामने थी.. गुलाबी होंठ अंदर का लाल हिस्सा और बहार तक गीली ये सब मिलकर एक खूबसूरत नज़ारा बन रहा था...

Maa-Karma क्या कर रहा है तू.. अह्ह्हम्म्म्म karmaaaaaaaaaammmm

माँ उससे आएगी कुछ बोलती की उससे पहले hi मैंने अपना मुँह माँ की गरम रसीली छूट पर रख दिया... अह्ह्ह्ह क्या गर्माहट थी माँ की छूट में... मैं माँ की छूट के होंठों को अपने होंठों के बीच लेकर चूसने लगा....

मैं माँ के भाव तो नहीं देख सकता था पर उनकी सिसकियाँ यही बयां कर रही थी की मैं सही रस्ते पर हूँ.. माँ का विरोध शायद मेरे होंठो के उनकी छूट पर छूटे hi गायब हो गया था... मैं माँ की गरम छूट को जीभ से ऊपर से नीचे तक चाट रहा था...

माँ- आअह्ह्ह्ह betaaaaaaaaaaaaahhhh ahmmmmmmmmmmm...

माँ और कुछ नहीं बोल पाई क्यूंकि मैंने अपनी जीभ माँ की छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगा... मैंने माँ के चेहरे की तरफ देखा तो माँ अपने दोनों छूछीयों को अपने हाथो से मसल रही थी, माँ के चेहरे पर वासना थी और वो मेरी आँखों में देखती हुई सिसकियाँ ले रही थी..





माँ की छूट में जीभ अंदर बहार करते हुए मैं उनकी आँखों में देख रहा था और सोच रहा था की ये वही माँ है जो इतनी संस्कारी समाज की नज़रों में एक घरेलु आदर्शवादी पत्नी और माँ और अभी अपने बेटे को छूट चाटते हुए एक अलग hi औरत लग रही है.. आँखों में संस्कार की जगह एक भूख है वासना की भूख...

Maa-haan कर्माआ ऐसे hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii chaaaaaaaaaaaat अपनीइ मा की छूट ाः... सैलून पहले इसी से निकला था तुझे अब इसका क़र्ज़ चूका आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह..

में- ह्म्म्मम्म मैंने और ज़ोरो से माँ की छूट में जीभ अंदर बहार करना शुरू कर दिया और माँ और तड़पने लगी...

मैंने अपनी सीधे हाथ की उंगली से माँ की छूट के डेन को भी साथ में मसलना शुरू कर दिया... माँ तो जैसे उछलने लगी और अपनी छूट को मेरे मुँह पर रगड़ने लगी... मैंने भी ज़ोरो से चेतना जारी रखा... फिर मैंने माँ की छूट से जीभ निकली और उनकी छूट के डेन को मुँह में भर कर चूसने लगा इससे माँ तो जैसे पागल सी हो गयी और उनकी कमर खत से ऊपर उठ गयी और झटके खाने लगी... माँ की सांस ऐसा लगा थम सी गयी एक पल के लिए.. और मुझे जैसे hi अंदाज़ा हुआ की माँ झाड़ रही है मैंने झट से उनके छूट के डेन को छोड़के बापिस मुँह उनकी छूट पर लगा दिया और फिर उनकी छूट से रास निकला जिसे मैं अमृत समझ कर गटकने लगा... ऐसा लग रहा था जैसे माँ की छूट पिघल कर मेरे मुँह में बाह रही है... माँ झड़ने के बाद शांत हुई तो बापिस खत पर कमर टिका ली पर मैंने अपना काम जारी रखा और बिना रुके माँ की छूट को चाटता रहा...

माँ थोड़ी देर बाद शांत हुई तो मेरे सर में हाथ फिरते हुए बोली- कर्मा अब basssssssssssss बेटा...

पर मैं नहीं रुका मुझे पता था माँ झाड़ गयी हैं इसलिए शांत हो गए हैं तो मैंने माँ को फिर से उत्तेजित करने के लिए छूट चेतना जारी रखा मैंने एक उंगली उनकी चुत में घुसाई जीभ के साथ साथ और अंदर बहार करने लगा और फिर जब उंगली गीली हो गयी तो मैंने बहार निकली और अपने मुँह से नीचे ले जाकर उनके गांड के छेड़ पर घूमने लगा..

गांड पर उंगली पड़ते hi माँ के शरीर में तो जैसे करंट दौड़ गया... माँ ने अपनी टंगे ऊपर उथली और मोड़ कर खुद अपने कंधो के साथ पकड़ ली जिससे उनकी चुत और गांड और खुल गयी मेरे लिए.. और मुझे और चाटने के लिए उकसाने लगी..

माँ- ohhhhhhhhhh बेटा... अह्हह्ह्ह्ह

और फिर मैंने उंगली को माँ की गांड के छेड़ में धकेलने लगा थोड़ा सा दबाब पड़ने के बाद गांड का छहद खुला और उंगली के लिए जगा दी और फिर मेरी उंगली अंदर धंसती चली गयी... साथ में लगातार मैं माँ की छूट चाट रहा था.. मुझे उंगली पर माँ की गांड की गर्मी महसूस हो रही थी और उनकी गांड मेरी उंगली को जकड भी रही थी... मैंने अपनी उंगली को अंदर बहार करना शुरू कर दिया... मैं तेज़ी से अपनी उंगली से माँ की गांड छोड़ रहा था...





माँ भी आहें भरने लगी... उनकी सिसकियाँ तेज़ होने लगी... माँ के मुँह से ऐसी कामुक सिसकियाँ सुनकर मैं और उत्तेजित होगा जा रहा था...

Maa-haan अह्ह्ह्हह betaaaaaaaaaaaaahhhh ऐसे हीई चाट माँ को... पीछे ऊंगलीईईई कररररर आअह्ह्ह मज़ाआ आ रहा है

मैं छूट को ज़ोरो से चाटने लगा साथ hi गांड में उंगली भी तेज़ करने लगा...

मुझे माँ को ऐसे मौखिक सुख देने में बहुत मज़ा आ रहा था और मुझसे कहीं गुना ज़्यादा मज़ा माँ को आ रहा था...

मसरी उंगली और मेरे चाटने की रफ़्तार दोनों बाद गयी थी... फिर अचानक से मैंने माँ की गांड से उंगली निकल ली..

उंगली निकलते hi माँ सिसक पड़ी- नहीं कर्मा बीटा कररररर ...

मैंने माँ की छूट से मुँह हटाया और नीचे करके उनकी गांड पर अपने होंठ रख दिए... और फिर जीभ से उनकी गांड को कुरेदने लगा...

माँ- ओह्ह्ह्हह्हह कर्माआ बेताआए आह्ह्ह्ह अब्बब्बब्ब बस्सस कर सहा नहीं जा रहा...

मैं भी अपनी माँ के सबसे निजी छेड़ को अपनी जीभ से चाटकर बेहद उत्तेजित हो रहा था और फिर मैंने उनकी गांड में जीभ को अंदर बहार करना शुरू कर दिया.... माँ जैसे छटपटाने लगी और मेरा सर पकड़ कर अपनी गांड पर और ज़ोरो से दबा दिया...

हाथ का सही उपयोग करते हुए मैंने माँ की छूट में दो उंगलिया दाल दी और अंगूठे छूट के डेन को सहलाने माँ तो जैसे इस तिहरे हमले से पागल हो गयी...

गांड को मैं जीभ से छोड़ रहा था... छूट में उंगलियां थी और छूट के डेन पर अंगूठा था...

माँ- karmmaaaaaaaaaaaa baassssssssssssssssssss ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh

और फिर माँ ने अचानक से मेरे सर को धक्का देकर हटा दिया... जिससे उनकी गांड से मेरी जीभ और छूट से उंगलियां निकल गयी.... मैं हैरानी से माँ की तरफ देखने लगा...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में बहुत जल्द अपने कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट...
 
और फिर माँ ने अचानक से मेरे सर को धक्का देकर हटा दिया... जिससे उनकी गांड से मेरी जीभ और छूट से उंगलियां निकल गयी.... मैं हैरानी से माँ की तरफ देखने लगा...

अपडेट 75
मैं माँ की तरफ देख रहा था की अचानक से माँ न मुझे धक्का क्यों दिया... अब क्या गड़बड़ हो गयी...

फिर माँ कोहनी के बल उठी और फिर कड़ी हो गयी जल्दी से, माँ को खड़ा होता देख मैं भी खड़ा हुआ अब तक तो नीचे बैठकर उनकी टैंगो के बीच बैठकर उनकी छूट चाट रहा था... जैसे hi मैं खड़ा हुआ माँ ने अपने होंठ मेरे होठों से मिला दिए... इससे पहले मैं संभल पता... माँ की जीभ मेरे मुँह में थी... माँ मेरे मुँह से अपनी hi छूट और गांड का स्वाद चख रही थी... मैं भी माँ के होंठों को और उनकी जीभ को चूसने लगा... साथ hi मेरे हाथ माँ के गद्देदार चूतड़ों को मसलने लगा...

कुछ देर बाद माँ अलग हुई मेरी आँखों में देखती हुई.. मुझे माँ की आँखों में ऐसी चमक और नशा दिख रहा था जो शायद पहले कभी नहीं देखा था.. माँ बापिस खत पर बैठ गयी पर इस बार उनके पेअर भी खाट पर थे.. खत पर अपने घुटनो के बल बैठ गयी पर माँ ने अपनी नज़र मेरे चेहरे से अब तक नहीं हटाई थी और फिर धीरे से उनका एक हाथ आगे बढ़ा.. और देखते देखते hi मेरे लुंड पर पहुँच गया... माँ मेरी आँखों में देखती हुई अपने हाथ मेरे लुंड पर चलने लगी... उनके कोमल हाथों का स्पर्श मेरे लुंड पर बहुत ाचा लग रहा था... मेरी आँखें इस आनंद में बंद हो गयी... तभी माँ की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी

माँ- देख कितना कड़क हो गया है तेरा ये.. ऐसे तो पंत भी नहीं पहन पायेगा...

मैंने आँखें बंद रखे hi जवाब दिया

में- हाँ माँ... ाचा लग रहा है...

माँ- पर ऐसे घर कैसे जायेगा... कोई देखेगा तो क्या सोचेगा... ऊपर से इतना बड़ा है तेरा की पंत में भी नहीं आएगा...

माँ लगातार लुंड पर हाथ चलते हुए बोले जा रही थी

में- और तेज़ करो माँ आह्ह्ह्ह...

माँ- मुझे hi कुछ करना पड़ेगा... ऐसे कुछ नहीं होगा...

में- हाँ माँ कुछहहह करूओ..

फिर माँ की तरफ से कोई जवाब नहीं आया और अगले hi पल मुझे लुंड के टोपे पर एक गरम चिकना सा एहसास हुआ... मेरी आँखें पहात से खुल गयी तो देखा माँ आगे झुककर एक हाथ से मेरे लुंड को पकड़ कर मेरे लुंड पर अपनी जीभ फिरा रही है... इतना कामुक नज़ारा देखकर मेरे मुँह से बस इतना hi निकला

में- ओह्ह्ह्ह माआआआ....

माँ- hmmmmmmmmmmmmmmm

माँ ने भी जीभ फिरते हुए जवाब दिया.. और पूरे टोपे को जीभ से चाटने लगी.. मैं तो बस सम्मोहित सा होकर माँ की जीभ को अपने लुंड पर चलता हुआ देख रहा था... और उनकी गरम जीभ जो लुंड को सुख दे रही थी इसका मज़ा ले रहा था की तभी माँ ने मेरे लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी मुझे तो लगा जैसे अचानक से मेरी साडी ऊर्जा लुंड की और बहने लगी... माँ अपना सर आगे पीछे कर के मेरे लुंड को मुँह में भर कर चूस रही थी और मुझे इस अद्भुत सुख का आनंद दे रही थी... मेरा हाथ खुद बा खुद माँ के सर के पीछे पहुंच गया और उन्हें अपने लुंड पर धकेलने लगा...





मेरे लुंड के अंदर जाने से माँ के गाल कभी फूलते तो कभी पिचकते... आअह्ह्ह्हह क्या उत्तेजित करने वाला नज़ारा था.. मेरी संस्कारी माँ जो दुनिया की नज़रों में आदर्श माँ और पत्नी है.. यहाँ खुले में नंगी होकर अपने hi बेटे का लुंड चूस रही थी... और इस नज़ारे को ये भैंसे पेड़ और ये ॉस्मॉस ज़मीन सब देख रहे थे..

माँ के मुँह की गर्मी लुंड पर महसूस हो रही थी तो ऐसा लग रहा था की लुंड कही. इस गर्मी से पिघल न जाये पर जितना ऐसा लगता की लुंड पिघल जायेगा लुंड उतना hi कड़क होता जा रहा... माँ अभी तक सिर्फ टोपे को और 2 इंच लुंड को चूसते हुए अपने हाथ से लुंड को मुट्ठिया रही थी...

ऐसा अनुभव मुझे कभी नहीं हुआ था जो अपनी hi माँ से लुंड चुसवाने में मिल रहा था... मेरा लुंड तो जैसे फटने को हो रहा था... की तभी माँ ने कुछ ऐसा किआ जिससे मेरी सांस hi रुक गयी... माँ मेरे लुंड को अपनी गर्दन आगे बढ़ाते हुए और अंदर लेने लगी... और करीब मेरा आधा लुंड माँ ने मुँह में ले लिया... मुझे लगा मैं तो गया माँ ने आधा लुंड मुँह में कुछ देर रखके चूसा और फिर.. निकल दिया और सांस लेने लगी... माँ के थूक की एक तार बानी थी जेरे लुंड से माँ के मुँह को जोड़ रही थी... माँ के होंठों के अगल बगल भी थूक लगा हुआ था...

कुछ पल माँ ने सांस ली और फिर एक बार लुंड को आधा मुँह में ले लिए... मेरा लुंड लम्बा ज़्यादा था इसलिए माँ के मुँह से गु गु की आवाज़ें आ रही थी... माँ ने कुछ देर फिर से लुंड चूसा और फिर बहार निकला और सांस लेने लगी और फिर से मुँह में ले लिए... माँ बार बार यही प्रक्रिया दोहराने लगी ..

इतना सुख मेरे लिए असहनीय होता जा रहा था मुझे लग रहा था मेरा लुंड मेरे शरीर से अलग होकर माँ के मुँह में चला जायेगा....

मेरे दोनों हाथ माँ के सर के पीछे थे और मेरी कमर भी खुद बा खुद हिलने लगी थी जैसे hi माँ लुंड मुँह में लेती मैं कमर हिलाकर माँ के मुँह को छोड़ने लगता पहले तो माँ मेरा लुंड चूस रही थी पर अब मैं उनका मुँह छोड़ रहा था.. मेरी उत्तेजना हर पल के साथ बढाती जा रही थी...

मैं माँ के मुँह को लगातार चोदे जा रहा था और माँ भी अपना सर एक जगह रखकर अपना पूरा मुँह खोल कर मुझे अपना मुँह छोड़ने दे रही थी..

मेरे झटके भी आक्रामक होते जा रहे थे... मा के मुँह से सलीवा बाह बहकर बहार गिर रहा था और मुँह से लगातार गु गु की आवाज़ आ रही थी...

और फिर जैसे hi सांस लेने के लिए माँ ने मुँह पीछे किआ मैं एक पल के लिए रुका और फिर लुंड दोबारा मुँह में घुसेड़ दिया और इस बार मैं माँ के सर को पकड़ कर अपने लुंड पर दबाता गया.. आधे लुंड तक तो ठीक था पर मैंने माँ का मुँह और दबा दिया जिससे 2 इंच लुंड और माँ के मुँह में चला गया और उनके गले तक पहुँच gaya...maa की आँखों से आंसू बहने लगे..

मैंने कुछ देर लुंड को मुँह में रखा और फिर से बहार निकल लिए माँ इस बार बुरी तरह से हांफ रही थी पर मुझपर जानवर सवार हो चूका था एक पल बाद hi मैंने फिर से लुंड माँ के मुँह में घुसेड़ दिया और इस बार पिछली बार से भी ज़्यादा लुंड को अंदर दाल दिया... मा झटपटाने लगी ...





अब मेरा लुंड बस 2 इंच माँ के मुँह से बहार था... और मैंने कुछ देर ऐसे hi रखा और फिर बापिस लुंड निकला तो माँ बुरी तरह हांफ रही थी... सलीवा से उनका पूरा गाला और छुछियां गीली हो गयी थी...

माँ संभल पाती उसी पहले hi मैंने एक बार फिर से माँ के सर को पकड़ कर लुंड पर दबा दिया मेरी आँखें बंद हो गयी मैं माँ को लुंड परताब तक दबाता रहा जब तक माँ की नाक मेरी झांटो वाली जगह पर टकरा नहीं गयी...

मेरी आँखें खुली तो देखा मेरा पूरा लुंड माँ के मुँह में hai..maa के मुँह से लगातार आंसू बाह रहे हैं... माँ झटपटाते हुए लुंड को बहार निकलने की कोशिश कर रही है पर मेरी पकड़ काफी मजबूत थी.. थोड़ी देर दबांव के बाद मैंने माँ के सर को छोड़ा और माँ पीछे होने लगी.. पर जैसे hi माँ के मुँह में सिर्फ मेरा टोपा रह गया मैंने दोबारा माँ के मुँह को लुंड पर दबा दिया इस बार मैंने माँ को सांस लेने तक का तिने नहीं दिया... और फिर से माँ के मुँह में मेरा पूरा लुंड चला गया.. और फिर माँ झटके से पीछे हुई और लुंड निकल कर सांस लेने लगी..





माँ ज़ोर ज़ोर से हांफ रही थी... उनकी बड़ी बड़ी छुछियां ऊपर नीचे हो रही थी...

माँ कुछ बोलना छह रही थी पर बोल नहीं प् रही थी.

कुछ पल बाद माँ थोड़ा नार्मल हुई तो मेरी आँखों में देखते हुए बोली

माँ- अह्ह्ह अह्ह्ह तू तो... अह्ह्ह्ह लगता है आअज मेरी जान आअह्ह्ह लेकर मानेगा... इतना बड़ा पूरा अह्हह्ह्ह्ह मेरे मुँह में गपपपपपपपप

माँ इससे आगे कुछ बोलती उससे पहले hi मैंने दोबारा लुंड उनके मुँह में घुसेड़ दिया और फिर से उनका सर दबाकर पूरा लुंड अंदर पंहुचा दिया.... एक बार फिर मेरा लुंड माँ के मुँह की गर्मी के बीच था जिसका असर भी लुंड पर महसूस हो रहा था..

मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा सारा खून मेरे लुंड में भरता जा रहा है.. मेरा लुंड अकड़ने लगा साथ hi मेरा पूरा शरीर भी.. मेरे पंजे टाइट हो गए.. मैंने माँ के सर को पकड़ कर कुछ झटके उनके मुँह में लुंड आगे पीछे करते हुए लगाए और फिर माँ के सर को दबा कर पूरा लुंड अंदर तक भर दिया और दबाये रखा... और फिर मेरे लुंड से धार निकलने लगी और माँ के गले में गिरने लगी...

में- ahhhhhhhhhh माआआआआ पीईईईई लोओओओओओओ अपने बेटे के लुंदड़ का रसससससससससससस... Ahhhhhhhhhhhh

हर धार के साथ मेरे लुंड की नसें फूल रही थी... लुंड झटके खा खा कर अपना रास माँ के मुँह में छोड़ रहा था और उनके गले को तर कर रहा था...





मेरा लुंड पिचकारी के बाद पिचकारी माँ के मुँह में मरे जा रहा था और माँ जातक जातक कर पीती है रही थी... जब मेरा झड़ना काम हुआ तो मेरी पकड़ माँ कके सर पर ढीली हो गयी और माँ ने थोड़ा सा आपने चेहरा पीछे किआ जिससे मेरा लुंड अब बहार निकलने लगा ... माँ ने पूरा लुंड बहार निकल दिया और सिर्फ टोपे पर जाकर रुक गयी और टोपे को मुँह में लेकर चूसती रही... और तब तक चूसती रही जब तक मेरे लुंड से एक एक बूँद न निचोड़ ली हो.... मेरी संस्कारी माँ कितनी कामुक और छुडासी औरत है मुझे इस बात का अंदाज़ा होता जा रहा था.... पर वो सब बाद में अभी तो मुझे यकीं नहीं हो रहा था की मेरी माँ ने खुले आसमान में नंगी होकर अपने सेज बेटे का लुंड गले में भरकर चूसा या कहें मैंने चुसवाया और उसके साथ उन्होंने मेरे रास की एक एक बूँद भी पि....

अपडेट थोड़ी छोटी है पर डिलीट न हो जाये इसलिए अभी पोस्ट कर रहा हूँ आगव का part बहुत जल्दी मिलेगा ..इसके आगे की कहानी ऊगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट... अपने सुझाव ज़रूर देते रहे.. बहुत बहुत शुक्रिया
 
पर वो सब बाद में अभी तो मुझे यकीं नहीं हो रहा था की मेरी माँ ने खुले आसमान में नंगी होकर अपने सेज बेटे का लुंड गले में भरकर चूसा या कहें मैंने चुसवाया और उसके साथ उन्होंने मेरे रास की एक एक बूँद भी पि....

अपडेट 76
मैं ये सब सोचते हुए लम्बी लम्बी सांसे ले रहा था और अपने चरम से बापिस आ रहा था.. माँ भी लम्बी लम्बी सांसे लेकर खुद को शांत कर रही थी.. जब माँ थोड़ी नार्मल हुई तो मुझे देखते हुए बोली- बीटा अब घर चल देर हो रही है...

पर माँ के इन शब्दों का मुझपर कोई ज़्यादा असर नहीं हुआ क्योंकि मैं तो अब भी आनंद में खोया हुआ था.. पर मेरा ध्यान माँ पर ज़रूर गया..

माँ खत से उठने hi जा रही थी की मैंने झुककर उनके सर को पकड़ लिया और एक बार फिर से अपने होंठ उनके होठों पर रख दिए... माँ के होंठ पहले से hi खुले थे बिना समय गंवाए उन्हें चूसने लगा.. और अगले hi पल उनकी जीभ को मैं अपने मुँह में लेकर चूस रहा था.. उनकी जीभ से अपने रास का स्वाद ले रहा था जो उनके मुँह घुलकर स्वादिष्ट लग रहा था... माँ की जीभ नागिन की तरह मेरे मुँह में घूम रही थी जिससे मुझे बड़ा मज़ा मिल रहा था..

माँ की जीभ और होंठो को चूसते हुए मैंने उन्हें धक्का देकर बापिस खत पर लिटा दिया.. और जब हमारे होंठ अलग हुए तो माँ बोली-

माँ- कर्मा बीटा अब क्या कर रहा है, लेट हो रहे हैं अब चलते हैं...

पर मैंने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और उनकी गर्दन को चूमने लगा और फिर नीचे खिसकते हुए उनकी छाती फिर उनकी रसीली कोमल बड़ी बड़ी पापीती जैसी छूछीयो को थोड़ी देर मुँह में भर के चूसा... मैं लगातार माँ के कामुक गदराये हुए बदन को चूम रहा था चाट रहा था और माँ लगातार कमज़ोर सा विरोध कर रही थी..

माँ- कर्मा बीटा अब बस अहंम बस कर अब ुयुएई घर्र चलते हैं बीटा...

मैं माँ के दोनों पहाड़ो से उतरता हुआ अब सपाट मैदान जैसे पेट पर आ गया और उसे चूमते हुए नीचे खिसका तो रास से भरी छोटी सी झील जैसी माँ की नाभि मिली जिसका रास मैंने जीभ को उसमे डूबकर खूब पिया... इतना की का का पूरा शरीर कसमकसाने लगा.... और फिर जब प्यास बुझ गयी तो अपने चेहरे को हटाया और माँ की और देखा... हर सांस के साथ माँ की दोनों छूछीयों ऊपर नीचे हो रही थी... आँखों में थोड़ी असमंजस थी और होंठो पर रसीले सवाल..

maa-karma अब बहुत हुआ अब चलते हैं बीटा..

पर हैरानी की बात ये थी की माँ चलने को तो कह रही थी पर खुद चलने का या उठने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी या कहो मेरे आगे सरे प्रयास असफल होते जा रहे थे...

में- अभी चलेंगे माँ बस चल hi रहे हैं...

और माँ को देखने लगा जो खत पर लगभग पूरी नंगी लेती हुई थी दोनों पेअर एक तरफ नीचे लटक रहे थे... और दोनों पैरों के बीच मैं उनका सागा बीटा नंगा खड़ा था... चाँद की रौशनी में ये नज़ारा इतना कामुक लग रहा था की जिसकी कल्पना भी करना मुश्किल है...

मैं थोड़ा नीचे झुकने लगा.. क्यूंकि खत ज़्यादा ऊँची नहीं थी तो मेरे खड़े होने पर काफी नीचे पद रही थी.. तो मैंने साइड में पड़े चारे के ढेर को खींच कर अपने नीचे गिरा लिए और उसपर घुटने तक कर बैठ गया...

घुटने टेकते hi एक करंट सा मेरे शरीर में दौड़ गया क्योंकि जैसे hi मैं नीचे हुआ मेरा लुंड माँ की छूट के ऊपरी हिस्से से जाकर टकराया... जिससे मुझे करंट सा लगा... उधर माँ को भी कुछ एहसास हुआ तो उन्होंने अपना सर आगे उठाकर देखा और खुद पीछे से कोहनी पर उठकर देखने लगी... और जैसे hi उनकी नज़र नीचे नज़ारे पर पड़ी

माँ- है दय्या कर्मा तूने फिर खड़ा कर लिया इसे ..तू लड़का है या जानवर...

उधर माँ की छूट से टच होते hi मेरा लुंड और कड़क हो गया और माँ के छूट के डेन पर टक्कर मरने लगा जिससे माँ भी चौंकने लगी... पर मेरी कमर तो अपने आप hi आगे पीछे होने लगी जिससे मेरा लुंड उनकी छूट के डेन के ऊपर घिसने लगा

में- माँ ये बैठा hi नहीं खड़ा क्या करता...

माँ- कुछ भी कर पर अब मैं कुछ नहीं कर सकती जल्दी से कपडे अहम्म्म्म्म पहन और चल अब ..

में- पर माँ ऐसे खड़े लुंड के साथ कैसे पहनू कपडे... दर्द करेगा बहुत..

माँ- तो क्यों खड़ा किआ मैंने कहा था... जितना कर सकती थी कर दिया अब नहीं...

में- जब इतनी कामुक और गदराई हुई माँ सामने नंगी लेती होगी तो मेरा क्या मुर्दे का भी खड़ा हो जायेगा माँ...

माँ थोड़ा सा चुप हुई फिर कुछ सोचकर बोली पर उधर मैं लगातार माँ की छूट के डेन के ऊपर की तरफ लगातार लुंड को घिसे जा रहा था...

माँ- तो नंगा भी तो तूने hi किआ है मुझे नालायक.. और अब भी तेरा मन नहीं भर रहा...

में- माँ बस थोड़ी देर और.. फिर निकल जायेगा...

और ये कहकर मैंने अपने लुंड को पकड़ा और इस बार डेन के ऊपर की जगह नीचे की और कर दिया जिससे मेरा लोहे जैसा लुंड माँ की रसीली गरम भट्टी जैसी छूट के होंठों पर रगड़ खाने लगा...

माँ की छूट के गरम होंठो का एहसास लुंड के इर्द गिर्द होते hi मेरा लुंड अकड़ गया साथ hi एक दो बूँद मेरे रास की मुझे टोपे से निकलती हुई महसूस हुई...

मैं लुंड को माँ की छूट पर घिसने लगा...





आह्हः ऐसा मज़ा मिल रहा था अपनी hi माँ की गरम छूट पर लुंड को घिसने में जिस छूट से बरसो पहले मैं निकला था आज उसी पर मेरा लुंड दस्तक दे रहा था... मुझे तो यकीं नहीं हो रहा था की माँ की इतनी छोटी सी छूट से मैं कैसे निकला होऊंगा... मैं अपनी मस्ती में मगन था...

तो

उधर जैसे hi माँ को मेरे लुंड का एहसास हुआ अपनी छूट पर उन्होंने हाथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़ लिए...

माँ- नाहीई कर्मा अब बहुत हो गया अब नहीं... अब बस कर...

माँ न कर रही थी पर ये बोलते हुए माँ की आवाज़ में एक नशा सा झलक रहा था था...

माँ ने मेरे लुंड को अपनी छूट के ऊपर hi मुठी में भर लिया था और मैं अपनी कमर आगे पीछे करके उनके हाथ को hi छोड़ रहा था..

में- माँ बस थोड़ी देर और फिर ऐसे जाया भी नहीं जायेगा...

माँ- कर्मा तू समझता क्यों नहीं ये सब गलत है.. हमने वैसे भी बहुत कुछ कर लिया है...

में- माँ कुछ गलत नहीं है बस थोड़ी देर और माँ.. इसे शांत हो जाने दो एक बार...

माँ- कर्मा मान जा अब नहीं...

में- तुम मानो माँ बस थोड़ी देर और...

ये कहकर मैंने माँ का हाथ पकड़ा और अपने लुंड से हटाया और ऊपर उनकी छुच्छी पर रख दिया और यही दुसरे हाथ के साथ किआ और माँ ने भी अपने दोनों हाथों से अपनी छूछीयो को थम लिया.. और नीचे मेरे लुंड और छूट को ध्यान से देखने लगी...

मैंने भी अपना ध्यान बापिस नीचे लगाया... और माँ की दोनों मांसल केले की तने जैसी टैंगो को थोड़ा और फैला दिया जिससे मुझे और आसानी हो... और फिर लुंड को पीछे से पकड़ा और सुपडे को माँ की छूट के डेन पर रखा... और फिर उसे थपथपाने लगा.. माँ मेरे लुंड का छूट पर स्पर्श से कुलबुलाने लगी...

माँ- ahmmmmmmmmmmm कर्माआआआ...

मैं अपने लुंड से माँ की छूट के डेन की पिटाई कर रहा था और हर वार के साथ माँ आअह्ह्ह आअह्ह्ह करते हुए कराह रही थी.. माँ की छूट हर वार पर अपने आंसू बहा रही थी और गीली होती जा रही थी..

थोड़ी देर तक छूट के डेन की पिटाई करने के बाद मैंने लुंड को नीचे का रास्ता दिखलाया और माँ की छूट के गीले होंठों से चुम्बन करते हुए नीचे की तरफ घिसने लगा और छूट के आखिरी कोने तक ले गया.. और फिर बापिस ऊपर की और घिसते हुए ले aaya...mera लुंड माँ मि छूट के रास में गीला हो गया और इसी तरह मैं माँ की छूट के होंठों पर लुंड को ऊपर नीचे घिसने लगा...

में- अह्ह्ह्ह मा क्या गरम छूट है तुम्हारी कितनी गीली है...

माँ- कर्माआआआ बीटा आईसीईए नहीं बोलते अपणीइइइइइइइ माआ के बारे में..

में- पर मा ये होई सच haiii...ahhh कितना मज़ा आ रहा है...

माँ- पर ये गलत है betaaaaaaaaaaaaahhhh...

मैंने माँ के चेहरे के बदलते भावों को देख रहा था.. और माँ की नज़र मेरे लुंड पर तिकी हुई थी और मेरा लुंड लगातार माँ की छूट के होंठों की लम्बाई नाप रहा था...

मैंने घिसते हुए अचानक से लुंड को माँ की छूट के छेड़ पर रोक दिया और हलके धक्कों से होंठो को कुरेदने लगा मेरी साँसे तेज़ी से चल रही थी.. उधर माँ की साँसे भी बेहद तेज़ थी जैसे hi मैंने लुंड के सुपडे को छूट के छेड़ पर रोका माँ कसमसा गयी..

माँ- नहीं कर्मा बस्सस... अब रुक जा..

में- मेरा होने वाला है माँ बस थोड़ा सा और...

माँ- नहीं कर्मा अब नहीं...

में- माँ बस निकलने वाला है...

Maa-itani देर से बोल रहा है निकलने वाला है पर निकल नहीं रहा...

में- माँ उसके लिए थोड़ा और कुचपड़ेगा?

माँ- अब और क्या करना है?

में- थोड़ा सा अंदर करना पड़ेगा ( मैंने डरते हुए माँ से कहा)

माँ- पागल है क्या... बोलै न ये गलत है नहीं कुछ अंदर नहीं करना...

में- माँ बस सिरा अंदर करूँगा, और जितना जल्दी करोगी उतनी जल्दी हम घर जा पाएंगे...

माँ- नहीं कर्मा हम ये नहीं कर सकते..

मैं लगातार माँ की छूट के होंठों को लुंड से कुरेद रहा tha...maa अब भी अपनी दोनों छूछीयो को थामे हुए मेरे लुंड को देख रही थी...

में- माँ मान जाओ न कुछ नहीं होगा..

और मैंने बिना माँ के जवाब का इंतज़ार किये माँ की एक तंग को कंधे पर रख दिया और लुंड को पकड़ कर छूट के छेड़ पर सेट करके हल्का सा धक्का दिया तो लुंड का सिरा माँ की छूट में घुस गया... आह्ह्ह्हह क्या गरम एहसास था वो ऐसा लगा जैसे इतना हिस्सा किसी गरम कढ़ाई में दाल दिया हो जो मलाई से भरी हुई है

लुंड घुसते hi माँ ने गुस्से में मेरी तरफ देखा...

और डेंटन को भींचते हुए बोली- कर्मा मत कर, ये पाप है, अपनी माँ के साथ. ये आआआहहहहहहह...

माँ इसके आगे कुछ बोलती तभी मैंने एक धक्का दिया और लुंड एक दो इंच और अंदर घुस गया... माँ का मुँह खुला का खुला रह गया... माँ मेरी आँखों में hi देख रही थी पर कुछ बोल नहीं प् रही थी थी और फिर खुद hi मेरी कमर हिली और एक और बार लुंड थोड़ा बहार निकला और फिर अंदर गया और इस बार तो आधे से ज्यादा लुंड माँ की छूट में समां गया..





मेरे हर झटके के बाद माँ का मुँह थोड़ा और खुल जाता... मेरा हाथ खुद बा खुद माँ की छुच्छी पर पहुँच गया... और फिर एक और दुमदार झटका मारा जिससे मेरा लुंड जड़तक माँ की छूट में समां गया.. और माँ का मुँह पूरी तरह खुल गया.. मेरी और माँ की नज़र अभी भी जुडी हुई थी... पोइरा लुंड लेने के बाद भी माँ ने अपनी नज़र नहीं हटाई थी... वहीं धीरे धीरे मेरी आँखें बंद होने लगी जैसे hi मुझे ये एहसास हुआ की मेरा लुंड माँ की छूट में है..

खुद बा खुद मेरी आँखें बंद हो गयी और मैं उस अद्भुत एहसास को महसूस करने लगा... लुंड के इर्द गिर्द वो कोमल पर गरम दीवारों ने मेरे लुंड को कसकर गले लगा लिया,

शायद इसलिए की इतने सैलून बाद में बापिस उसी छूट में आया था जहाँ से निकला था कभी मैं इसी का हिस्सा था यही मेरी दुनिया थी और इसी से मैं जन्मा था तो वहीं मुझे दोबारा पाकर अपने गले से लगाए हुए मुझे अपना प्यार देरही थी... इस बार माँ की छूट अपने बेटे को छोड़ना नहीं चाहती थी...

माँ की गरम मलाई जैसी छूट में लुंड को बेहद सुरक्षित महसूस हो रहा था और ये सुरक्षा का एहसास सिर्फ माँ के साथ hi हो सकता है... न जाने कितनी देर तक मैं यूँ hi माँ की छूट में लुंड घुसाए हुए खड़ा raha...jab आँख खुली तो माँ का प्यारा चेहरा सामने था, पर उनकी आँखें बंद थी शायद वो भी इस अद्भुत एहसास को महसूस कर रही थी...

पर मेरा लुंड अब जैसे खुद के दिमाग से काम करने लगा और मेरी कमर हिलने लगी और लुंड माँ की छूट से थोड़ा बहार निकला और फिर बापिस पूरा समां गया.. इस झटके से माँ की आँख भी खुल गयी..

आँख खुलते hi उनकी नज़र मेरी नज़र से मिली... माँ मेरी आँखों में देखे जा रही थी और मैं उनकी..

नीचे से मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए थे मेरा लुंड हलके धक्कों के साथ माँ की छूट की गहराइयों को नाप रहा था...

हम दोनों का चेहरा एक दुसरे की आँखों में देखते हुए धीरे धीरे बिलकुल करीब पहुंच गए और फिर मेरे होंठ एकबार फिर से माँ के होंठों से जुड़ गए.... और ये होंठों का जुड़ना बेहद अलग था... ऐसा लग रहा था हम दोनों के होंठ तप रहे थे... और एक दुसरे के. होंठों से अपनी तपन मिटा रहे थे...

कुछ देर तक मैं और माँ एक दुसरे के होंठों को चूसते रहे और फिर अलग हुए...

माँ- आखिर कर hi ली न तूने अपने मन की... कर दिया मुझे भी पाप में शामिल.. अह्ह्ह्ह.

मैं एक धक्का मारा माँ की छूट में तो उनकी आह निकल गयी...

में- ऐसा पाप तो मैं रोज़ करना चाहूंगा माँ... कबसे इंतज़ार कर रहा tha..is पल का...

माँ- ाचा अपनी hi माँ के साथ ये सब करने का इंतज़ार कर रहा था तू...

में- हाँ माँ और आज खुद को रोक नहीं पाया...

और मैं नीचे से लगातार माँ को हलके हलके धक्कों से छोड़ने लगा...

माँ- कैसा लग रहा है जिस में से तू निकला उसी के साथ करते हुए..

Me-maa अब तो मैं तुम्हे छोड़ रहा हूँ अब तो तुम भी छूट लुंड बोल सकती हूँ.. आह्ह्ह्हह क्या गरम रसीली छूट है माँ तुम्हारी..

माँ- तू मुझे बेशर्म बनाना चाहता है

में- ahhhhhhhhhh माआआआआ हैं थोड़ी देर के लिए शर्म भूल जाओ... आठ

Maa-Karma बेताऑ मैं ये खुद से नहीं भूल सकती तुझे मुझे भूलने पर मजबूर करना पड़ेगा...

में- वो कैसे माँ, मैं चाहता हूँ तुम खुलकर छुड़वाओ मुझसे..

माँ- hmmmmmmmmmmmmmmm तू चाहता है मैं खुल जॉन तेरे सामने... जैसे तेरे पापा के सामने होती हूँ..

में- हाँ माँ ओह्ह्ह्हह्ह चाहता हूँ.....

माँ- तो तुझे अपनी माँ के बारे में एक बात जननी होगी...

में- अहह क्या माँ?

Maa-yahi की मैं तेरी माँ हूँ कोई नयी नवेली दुल्हन नहीं.. कुछ समझा तू?

माँ के मुँह से ये सुनकर मैं हैरान रह गया कहाँ कुछ पल पहले माँ मन कर रही थी और अब ये... सच में औरत को समझना नामुमकिन है...

Me-ab सब समझ गया माँ, और अब देखो मेरा कमल...

और फिर मैंने माँ के पैरों को फैलाया और उनके ऊपर आ गया और लुंड को बहार सिरे तक खींचा और फिर एक तगड़े धक्के के साथ जड़ तक पेल दिया...

Maa-ahhhhhh ummmmmmmmmmmmmm

और फिर ऐसे hi तगड़े धक्को के साथ माँ की गरम छूट में लुंड की पिटाई करने लगा...





हर झटके पर माँ का एक नया रूप सामने आ रहा था... और माँ के चूतड़ हर वॉर के साथ लहार रहे थे थप थप थप की आवाज पूरे बाघ में गूंजने लगी... हमारी भैंसो, पेड़ पत्तियों... खुले आसमान सब का ध्यान हम माँ बेटे की इस कामुक चुदाई पर था...

माँ- कर्माआआआ बेताऑ ऐसे हीईई कछ्छछ्हूऊओऊड्ड्ढड अपनीई मा कुओ... इसी छूट से निकला था तू, कोई रहम मत खा इस छूट पर.. बापिस आजा इसी में..

में- हनननन हनननन हननननन माँ यकीन नहीं होता की इसी कासी हुई छूट से मुझे निकला था तुमने माँ ाः इतनी टाइट है... लुंड को जकड रखा है तुम्हारी छूट ने...

माँ- छोड़ड़ड़ मेरी छूट को बेटा, ऐसे खुले आसमान के नीचे, अपने बेटे का लुंड लेने का मज़ा hi अलग है... है ढैय्या क्या निर्दयी लुंड है तेरा बालम...

में- तुम्हारी छूट भी तो रसीली और गरम है मेरी छुडासी माँ... पूरा लुंड ऐसे समां रही है जैसे कबसे भूखी हो...

माँ- मेरी choooooooooot लुंदड़ की हमेशा hi भूखी रहती hai...kalmuhi... इसी की भूख की वजह से तो आज अपने बेटे के मुसल से कुटाई करवानी पद रही है...

में- महम्म्म्म मुझे जितना तड़पाया हीीितुमने और तुम्हारीइइइइइइइ इस choooooooooot ने सबका हिसाब लूंगा तुम्हारी छूवूँत से...

मेरे धक्के और तेज़ हो गए थे माँ की छुछियां हर धक्के के साथ उछाल कूद कर रही थी.....

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न छहःछहुड़ड़ कर्मा betaaaaaaaaaaaaahhhh अपनी maaaaaaaaaaaaaa को छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ का प्यास mitaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhbb

माँ इसके आगे कुछ नहीं बोल पाई और उनका शरीर अकड़ने लगा... मुझे माँ की छूट अपने लुंड पर और कस्ती हुई महसूस हुई... एक पल को माँ का सीना खत से उठा और माँ का पूरा शरीर अकड़ गया... और फिर बापिस गिर गयी... मुझे मेरे लुंड पर माँ की छूट का रास बहता हुआ महसूस हुआ....

माँ अपने सेज बेटे की चुदाई से झाड़ गयी थी.. खुले आसमान के बीच अपने बेटे के मुसल पर अपनी छूट का रास बहा रही थी... मैं इस बात से बहुत उत्तेजित था की मैं माँ को छोड़ रहा था ऊपर से अपनी hi माँ को अपने लुंड पर झड़ना... मेरी उत्तेजना को और बढ़ा दिया... मैं और तेज़ धक्कों से माँ को छोड़ने लगा...

माँ थोड़ी देर में शांत हुई, और शांत होते hi माँ ने मुझे धक्का दे दिया जिससे मेरा लुंड माँ की छूट से निकल गया...

मेरा तो दिमाग hi हिल गया की साला अछि खासी चुदाई चल रही थी फिर अचानक से माँ ने रोका क्यों...

मेरे हटने के साथ hi माँ बीएड से उठ गयी और फिर मुझे पकड़ा और खत पर लिटा दिया और... खुद भी खत पर छड़ गयी और फिर माँ ने झुककर मेरे लुंड को पकड़ा और अपना सर आगे कर के अपनी जीभ मेरे लुंड के टोपे पर फिरै और मैं जैसे दोबारा जन्नत में पहुँच गया.. पर ये एहसास कुछ पल का hi था क्यूंकि माँ ने अगले hi पल अपना सर पीछे कर लिए और फिर अपना एक पेअर उठाया और मेरी कमर के दूसरी तरफ कर lia...aur एक दूसरी तरफ फिर माँ मेरे पेट पर बैठ गयी और झुककर एक बार मेरे होंठों को चूमा फिर सीढ़ी हो गयी.

फिर माँ ने खुद को नीचे खिसका कर मेरे लुंड के ऊपर सेट किआ और मेरे कड़क लुंड को अपने कोमल हाथों से पकड़ा और अपनी रसीली छूट के द्वार पर लगाया एक गरम एहसास ने मेरे लुंड के टोपे को घेर लिए और फिर अगले hi पल माँ नीचे बैठने लगी... और मेरा लुंड एक बार फिर से माँ की कासी हुई छूट को चीरता हुआ अंदर घुसता हुआ चला गया

एक बार फिर से माँ की छूट की गर्मी ने मेरे लुंड को अपने बेटे के लुंड को अपने अंदर समां लिए... अंत में माँ पूरी तरह से मेरे ऊपर बैठ gayi...mera लुंड जड़ तक माँ की छूट में समां गया...

me-aahhhhhhmmm माआ मज़ा आ रहा है... कितनी मखमली छूट है तुम्हारीइइइइइइइ... लगता है लुंड अंदर hi घुसाए रखूं ज़िन्दगी भर....

माँ- तेरा लुंड भी ahmmmmmmmmmmm कितना बड़ा है बीटा.. मुझे तो तेरे पापा का लुंड hi बहुत बड़ा लगता था पर तेरा तो उनसे भी बड़ा है... सीधा मेरी कोख से टकरा रहा है... उसी कोख से जहाँ तू कभी पला था..

और फिर ये कहकर माँ मेरे लुंड पर उछलने लगी... माँ की छुछियां ऊपर नीचे होने लगी... मैंने उनकी कमर को पकड़ लिए और उन्हें ऊपर नीचे अपने लुंड पर उछाल कर छोड़ने लगा... इस पोजीशन में ऐसा लग रहा था की मैं माँ को नहीं बल्कि माँ मुझे छोड़ रही हैं वो भी अपनी मर्ज़ी से... और इससे सुखद एक बेटे के लिए क्या हो सकता है जब उसकी माँ अपनी छूट में अपने बेटे का लुंड लेकर अपनी चुदाई करवाए... वही सुख मुझे मिल रहा था... लोग मादरचोद को गली समझते हैं पर उन्हें ये नहीं पता मादरचोद होना दुनिआ का सबसे बड़ा सुख है..

फिर माँ की गति थोड़ी काम हुई और उन्होंने उछालना बंद किआ और कुछ ऐसा किआ जिससे मैं पागल सा हो गया.. और ऐसा लगने लगा जैसे अगर जन्नत है तो यहीं hai..maa की छूट के अंदर.. माँ मेरे लुंड पर बैठकर अपने चूतड़ों को घुमा रही थी जिससे ऐसा लग रहा था मनो छूट मेरे लुंड को निचोड़ रही है... माँ की छूट की मांस पेशियाँ मेरे लुंड को दबा रही थी...





मुझे अपना लुंड टूट कर माँ की छूट में गिरता हुआ सा महसूस हो रहा था.

माँ लगातार अपनी बड़ी सी गांड को घुमा घुमा कर मुझे छोड़ रही थी...

में- आअह्ह्ह मा बहुत मज़ा आ रहा है.... ऐसे hi करती राहूऊऊ...

माँ- मज़ा आ रहा है न मेरे लाल, अपनी माँ को छोड़ने में, अपनी माँ की छूट में अपना मुसल जैसा लुंड डालकर कुटाई करने में...

में- हाँ माँ बहुत ज़्यादा मज़ा... ऐसा कभी नहीं महसूस किया आह्हः तुम्हारी छूवूँत मेरे लुंड को निचोड़ रही है अपने अंदर..

माँ- तेरी माँ की छूट भूखी है बीटा लुंड की भूख है इसे जो अब तेरे इस लोहे जैसे लुंड से मिट रही है..

माँ बड़े कामुक अंदाज़ में अपने चूतड़ों को मेरे लुंड पर नचा रही थी... माँ के चूतड़ दो तब्लो की तरह एक ले में बज रहे थे...

मैंने बहुत चुदाई की थी पर छूट की इस कला का प्रदर्शन सिर्फ माँ के द्वारा hi देख प् रहा था माँ एक कलाकार की तरह अपनी कलाकारी छूट के करतब दिखा रही थी.. तभी तो जो माँ कर सकती है कोई नहीं कर सकता....

मैं लेता हुआ माँ की इस कला का आनंद ले रहा था... थिरकते चूतड़, उछलती छुछियां, गरम छूट, ऐसा लग रहा था पूरी दुनिया की खूबसूरती मेरे सामने hi हो...

थोड़ी देर बाद माँ आगे झुक गयी और मेरे होंठों को चूम लिया और कामुकता से बोली- मैं थक गयी बीटा अब तू कर...

में- जो आज्ञा मेरी छुडासी माँ?

मैंने माँ को कसकर खुद से चिपका लिए और नीचे से ताबड़तोड़ धक्के माँ की छूट में लगाने शुरू किये... मेरा पूरा लुंड माँ की छूट से अंदर बहार हो रहा था और हर वार के साथ माँ के गदराये हुए चूतड़ थिरक रहे थे...





मेरा लुंड किसी मशीन की तरह माँ की छूट की कुटाई कर रहा था...

माँ- ढैय्या माआआर दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न छहःछहुड़ड़ कर्मा ैससससीईए hiiiiiiiiiii और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़...

में- लो माँ अपनी बेटी का लुंडडडड कासी हुई choooooooooot में.. आह्ह्ह्ह...

माँ- ohhhhhhhhhh बेटा आआआहहहहहहह क्या कर रहा है तू.... Yeeeeeeeeee मुझहीईईए ारायअम्म्मम्म्म्म सीईए छोड़ड़ड़ड़ इतनाआ बढाएआ लुंडडडड है तेराआआआ...

मेरी गति बहुत तेज़ हो चुकी थी और मैं छह कर भी खुद को रोक नहीं सकता था... माँ को छोड़ने के एहसास ने और माँ मि छूट की कसावट और गर्मी ने मेरी उत्तेजना को ऐसी जगह पंहुचा दिया था जहाँ से लौटना नामुमकिन था.... मैं हर धक्के में अपनी पूरी जान झौंक रहा था.. तो वहीं मेरा हर धक्का माँ की जान ले रहा था...

Maa-aaahhhh betaaaaaaaaaaaaahhhh मार डाला टूउउउउनेईई आअह्हह्ह्ह्ह छहःछहुड़ड़ कर्मा अपनी चुड़क्कड़ माआआ को... meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot को कुओट डीई अपने भूऊऊओसेललललल सीईए...

मैं दांत भींचे हुए नीचे से धक्के पर धक्के लगा रहा था... मुझे अब अपनी साडी ऊर्जा एक बार फिर लुंड की तरफ जाती हुई महसूस हो रही थी... मेरे हाथ माँ के बदन पर और कास गए और उन्हें मैंने खुद से ऐसे चिपका लिए जैसे हम एक hi शरीर हो...

मेरी गोलियों से बहता हुआ वीर्य मेरे लुंड में भरता हुआ मुझे महसूस हो रहा था..... उधर माँ की छूट भी मेरे लुंड पर सिकुड़ रही थी...

माँ ने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिए था और हर धक्के के साथ बस आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह की सिसकारियां मुझे सुनाई दे रही थी और फिर मेरे धक्के और तेज़ हो गए और करीब 8-10 धक्कों के बाद माँ ने मुझे कसकर पकड़ लिया और उनकी एक चीख निकली और चीख के साथ hi मैंने अपना लुंड माँ की छूट में जड़ तक गाड़ दिया और माँ के चूतड़ों को अपने लुंड पर दबा भी दिया जिससे मेरा लुंड जितना हो सके माँ की छूट के अंदर था...

इसी के साथ hi मेरे लुंड ने माँ की छूट में पिचकारी मारनी शुरू कर दी... धार के बाद धार मुझे अपने लुंड से निकलती हुई महसूस हो रही थी...

वहीं माँ भी मुझसे चिपकी हुई थरथरा रही थी... उनका शरीर कांपता सा लग रहा था जिससे ये जाहिर था की माँ भी झाड़ रही थी अपने बेटे के लुंड par...usse भी खास बात के माँ बीटा एक साथ एक दुसरे की वजह से झाड़ रहे थे... माँ बेटे के लुंड पर तो बीटा माँ की छूट में और इस बात के साक्षी ये भैंसे पेड़ पौधे खेत खुला आसमान सब थे की कैसे आज एक माँ ने जन्म देने के इतने सैलून बाद फिर से अपने बेटे को बापिस अपनी कोख कोख में समां लिए...

माँ की चुत मेरे लुंड को निचोड़ रही थी जैसे गन्ने की मशीन गन्ने से रास निचोड़ती है माँ की छूट की मशीन मेरे गन्ने के रास की एक एक बूँद निचोड़ रही थी...





खैर न जाने कितनी देर बाद मेरे रास की धार बहनी बंद हुई और मेरे रास की आखिरी बूँद भी माँ की छूट ने निचोड़ कर अपने अंदर समां ली... मुझे अपने लुंड के इर्द गिर्द काफी गीला गीला महसूस हो रहा था जो माँ और मेरे रास का मिश्रण था... कुछ मेरे लुंड की साइड से माँ की छूट से बहता हुआ मुझे अपनी गोलियां पर भी गिरता महसूस हो रहा था... मैं और माँ यूँ hi एक दुसरे से चिपके हुए पड़े रहे...

इसके आगे अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया..
 
कुछ मेरे लुंड की साइड से माँ की छूट से बहता हुआ मुझे अपनी गोलियां पर भी गिरता महसूस हो रहा था... मैं और माँ यूँ hi एक दुसरे से चिपके हुए पड़े रहे...

अपडेट 77

मेरा लुंड अब भी माँ की छूट में था, पर हैरानी की बात ये थी की लगातार दो बार झड़ने के बाद भी मेरा लुंड उतना hi कड़क था जैसे एक लोहे की रोड...

माँ ने थोड़ी देर बाद मेरे सीने से सर उठाया और मेरी आँखों में देखा और फिर अपने होंठ मेरे होठों से मिला दिए, मैं माँ के रसीले होंठों को चूसने लगा और माँ मेरे, फिर माँ की जीभ भी मेरे मुँह में अपनी जगह बनाने लगी जिसे मैं जी भर के चूसने लगा...

काफी देर तक ये सिलसिला चलता रहा जब तक हमारी सांस न फूलने लगी और फिर हमारे होंठ अलग हो gaye...maa और मैं अपनी साँसे सँभालने लगे..

माँ- हाय लल्ला तूने तो जान hi ले ली मेरी... आह्हः आखिर अपनी माँ छोड़ hi ली तूने...

में- हाँ मेरी माँ और मादरचोद बनने में जो सुख है वो और कहीं नहीं...

माँ- सच कहूं तो अपने बेटे के मुसल से छोड़ने में मुझे भी बहुत मज़ा आया.. और क्या खिलाया है शशि ने तुझे वहां जो ये तेरा हथियार बैठ hi नहीं रहा देख कैसे झटके ले रहा है मेरी छूट में...

में- माँ कुछ खाया हो या न खाया हो अगर सामने तुम हो तो ये खड़ा hi रहेगा...

माँ- ाचा ज़रा मैं भी तो देखूं इसका दम...

और ये कहकर माँ मेरे लुंड से उठ गयी मुझे थोड़ा बुरा लगा... मैं चाहता था माँ यूँ hi मेरा लुंड छूट में डेल बैठी रहे और मैं उनकी चुदाई करता रहूं... पर ऐसा नहीं हुआ माँ उठी तो लुंड मेरे और माँ के रास से सना हुआ माँ की छूट से सरकता हुआ बहार आ गया....

माँ- देख तो कितना बड़ा लग रहा है....

और फिर माँ लुंड से उठने के बाद मेरे दोनों पैरों के बीच बैठ गयी और लुंड को ध्यान से देखनी लगी... देखते देखते hi अचानक उन्होंने अपने चेहरे को आगे किआ और लुंड को मुँह में भर लिए...

मेरे मुँह से आअह्ह्ह्ह निकल गयी... माँ मेरे लुंड को मुँह में भरकर जीभ से चाट कर साफ़ करने लगी... मुझे उनके मुँह के अंदर अपने लुंड पर उनकी जीभ चलती हुई महसूस हो रही थी... माँ कभी जीभ से चाटती तो कभी अपना मुँह आगे पीछे करके लुंड चूस रही थी..





और साथ hi वो नज़र उठाकर मेरी आँखों में भी लगातार देखे जा रही थी... शायद ये देखने के लिए की उनके मुँह का जादू मुझपर क्या असर कर रहा है .. इधर मैं तो जैसे जन्नत में था... माँ की रसीली गरम छूट से निकला तो माँ के गरम मुँह में पहुँच गया... माँ लगातार चूसे जा रहे थी अपने बेटे के बड़े से लोडे को...

फिर माँ ने अपने गले की कलाकारी दिखते हुए अपने मुँह को मेरे लुंड पर दबाया थोड़ी सी कोशिश के बाद मेरा पूरा लुंड माँ ने अपने मुँह और गले में ले लिए... आअह्ह्ह्ह ऐसा लग रहा था माँ का मुँह मुझे अपने अंदर खींच रहा है.. माँ ने कुछ पल ऐसे hi लुंड को अपने गले में भरकर रखा.. मेरी गोलियां माँ के होंठों से टकरा रही थी.. और जब माँ का दम घुटने लगा तो उन्होंने अपना चेहरा उठाते हुए लुंड को बहार निकल लिए... मेरा पूरा लुंड माँ के थूक से गीला होकर चमक रहा tha...chand की रौशनी में खम्भे की तरह...

में- आअह्ह्ह मा मज़ा आ गया... मेरा लुंड जब तुम्हारे मुँह में जाता है न तो मैं तो जैसे खो hi जाता हूँ...

माँ- ( हांफते हुए) आह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह लल्ला तेरा लुंड इतना प्यारा है आअह्ह्ह्हह की मन करता है. कहा hi जाऊं...

में- तो खा जाओ ना अपने बेटे का लोढ़ा माँ, पूरा निगल जाओ...

फिर माँ मुआकुरते हुए थोड़ी आगे हुयी और उन्होंने मेरे लुंड को अपनी दोनों बड़ी बड़ी कोमल छूछीयो के बीच में फंसा लिए......

मेरे लुंड पर मा की पापीती जैसी छूछीयो का कोमल एहसास आह्हः मेरा लोढ़ा और कड़क होकर ठुमके मरने लगा...

जैसे किसी मख़्कन की पोटली में लोहे की रोड घुसेड़ दी हो ऐसा एहसास हो रहा था... और फिर माँ अपनी छूछीयो को मेरे लुंड पर ऊपर नीचे करने लगी.. पर मैं इतना उत्तेजित हो चूका था माँ की छूछीयो के एहसास के माँ के साथ साथ मैंने माँ की दोनों छूछीयों को पकड़ लिए और अपने लुंड पर दबाते हुए . नीचे से कमर उठाकर झटके लगते हुए माँ की छूछीयो को छोड़ने लगा





माँ के दोनों पपीता के बीच से बार बार निकल कर अपना सर दिखता हुआ मेरा खीरा... हाय क्या कामुक दृश्य था..

माँ- इन्ही चूचियों से कभी तू दूध पिता था लल्ला... आज उन्ही छूछीयो को अपने बड़े से लुंड से छोड़ रहा है...

में- आअह्ह्ह मा बड़ा मज़ा आ रहा है कितनी मुलायम छुछियां हैं माँ... एक दम मख्खन जैसी....

माँ- क्या गरम और तगड़ा लोढ़ा है... है दय्या कर्मा... मेरे बालम छोड़ मेरे लाल ऐसे hi.. मेरे दूध को...

में- आह्ह्ह्ह माआ मेरी चुड़क्कड़ माँ.. पूरी ज़िन्दगी तुम्हारे पपीता को छोड़ता रहूं...

और मैं और तेज़ तेज़ धक्के लगा कर माँ की छूछीयो को छोड़ने लगा.....





जब जब लुंड का मुँह माँ की कोमल छूछीयों से निकल कर बहार आता... लुंड के मुँह पर एक अलग चमक दिखती... ऐसा लगता मनो माँ की छूछीयो को गले लगाकर मुस्कुरा रहा हो...

मैं नीचे से लुंड की ख़ुशी में शामिल होते हुए लगातार झटके पर झटके मार रहा था... मैं और माँ दोनों इस अकल्पनीय पाप की नदी में बहते जा रहे थे और अब इतनी दूर बहकर आ चुके थे के बापिस जाना मुमकिन नहीं था... और न hi हम जाना चाहते थे...

खैर माँ थोड़ी देर बाद सीढ़ी हुई तो मेरा खीरा उनके दोनों पपीता से सरक कर बहार निकल गया...

माँ सीढ़ी बैठकर मेरी आँखों में देखने लगी मनो पूछ रही हो की क्या चाहता है अब..

मैंने लेते हुए hi माँ को पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिए माँ मेरे ऊपर आ गयी पहले की तरह उनकी छूट लुंड के ऊपर आ गयी... और उनके होंठो को चूसने लगा नीचे हाथ लेजाकर मैंने अपने लुंड को पकड़ा और माँ की छूट के होंठों से घिसने लगा... थोड़ी देर बाद हमारे होंठ अलग हुए तो माँ ने मेरे लुंड से मेरा हाथ हटा दिया और खुद लुंड को पकड़ लिया...

माँ- लल्ला क्या लुंड है तेरा रे... जब पहली बार मैंने देखा था न तबसे hi मुझे पता था ज़्यादा दिन मैं रोक नहीं पाऊँगी खुद को... और आज देख तेरी माँ खुले आसमान में तेरे लुंड के ऊपर नंगी बैठी है...

और ये कहते hi माँ ने मेरे लुंड को अपनी छूट पर सेट किया और बैठ gayi...mera लुंड सरसराता हुआ एक बार फिर से मेरी माँ की छूट में समां गया...

हम दोनों माँ बेटों के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल गयी...

में- ahhhhhhhhhh माआआआआ ऐसे हीईई बैठी रहो तुम मेरे लोडे पर हमेशा... और अपनी छूट को मेरे लुंड पर पटकती रहो...

बोलते हुए मैंने माँ के दोनों पतीले जैसे चूतड़ों को थम लिए और नीचे से धक्का मर कर खछः से लुंड को जड़ तक माँ की छूट में थोऊणस दिया...

माँ- है दय्या नासपीटे... जान hi ले लेगा तू मेरी अपने इस मुसल se...maa की छूट hi फाड़ देगा... अपने हथियार से

में- क्या करूँ माँ तुम्हारी छूवूँत है hi इतनी मस्त.. मन करता है लुंड जड़ तक घुसके पेलता रहूं...

माँ धीरे धीरे मेरे लुंड पर उछलने लगी और मैं माँ के मस्त गदराये चूतड़ों को मसलता हुआ माँ को लुंड पर उछलने लगा...

मैंने अपना चेहरा आगे किया और माँ की एक झूलती हुई छुच्छी को मुँह में भर लिए और चूसने लगा.. की तभी अचानक से हमारे उलटे हाथ की तरफ से एक आवाज़ हुई तो मैंने और माँ ने चौंक कर देखा.. तो हमारा छोटा बैल (वही बैल जिसने अपनी hi माँ को छोड़ा था जहाँ से ये सब शुरू हुआ था, याद न आने पर शुरू की उपदटेस देखें) वो अपने खूंटे से खुल गया था... उसदिन मैंने उसकी और उसकी माँ की चुदाई देखि थी तो आज वो मेरी और मेरी माँ की चुदाई देख कर बहक गया और खुल गया... मुझे याद है जब ये पैदा हुआ था तब मैंने इसका नाम रखा था सफेदा.. क्यूंकि ये पूरा सफ़ेद tha..tabse इसे सब सफेदा hi बुलाते थे..

मैंने और माँ ने रहत की सांस ली.. मैंने सफेदा बैल की और देखा तो वो खुलकर साइड में पड़े चारे को खाने लगा... मुझे और माँ को चारे की इस समय बिलकुल भी फ़िक़र नहीं थी तो उसे खता छोड़कर हम दोनों फिर से चुदाई में लग गए..

माँ की उछलने की गति पहले से काफी तेज़ हो गयी थी और वो छूट को मेरे लुंड पर पटक पटक कर मार रही thi..main भी अपने चूतड़ों को उठाकर मादरचोद बनने का सुख ले रहा था.. तभी देखा की सफेदा अब हमारी खत के बगल में खड़ा था और हम दोनों को चुदाई करते हुए देख रहा था... शायद माँ बेटे का ऐसा मिलान ये भी देखकर नज़रें नहीं हटा पा रहा था...

सफेदा बिलकुल सीधा बैल था और बचपन से hi हम सब ने उसे पाला था चारा खिलाया था तो उससे डरने की कोई ज़रुरत नहीं थी... तो मैं और माँ अपनी चुदाई में लगे रहे...

फिर अचानक से सफेदा को न जाने क्या सूझा वो खत के बिलकुल बगल खड़े हो गया और अपना चेहरा आगे बढाकर अपनी लम्बी सी जीभ निकली और माँ की पीठ को चाटने लगा.... ये कुछ नया तो नहीं था क्योंकि वो ऐसे hi जब भी हमें से कोई उसके पास होता था तो वो चाटने लगता था. . पर जिस तरह की हालत में मैं और माँ थे उस हालत में उसका यूँ चेतना बेहद अलग पर साथ hi कामुक लग रहा था....

माँ- आइए नासपीटे सफेदा... हत्तत्त गुदगुदी कर रहा है मुझे...

मैं हँसते हुए बोलै- क्यों हटा रही हो माँ तुम हो hi इतनी कामुक के ये भी तुम्हे नंगा देखकर रोक नहीं पाया खुद को...

माँ- अरे कैसी खुरदरी सी जीभ है इसकी गुदगुदी हो रही है...

मैं लगातार नीचे से माँ की ओखली में अपना मुसल पेल रहा था... हम बातों में लगे थे की सफेदा माँ की पीठ पर नीचे की तरफ चाटने लगा.... और कुछ पल बाद उसकी जीभ माँ के चूतड़ों पर थी ..

सफेदा की जीभ का माँ के चूतड़ों पर एहसास होते hi माँ कराहने लगी....

माँ- हाय लल्ला... ये देख तेरा सफेदा तेरी माँ के चूतड़ों को chaaaaaaaaaaaat रहा है...

माँ और उत्तेजित होने लगी और हो भी क्यों न दृश्य hi कुछ ऐसा था छूट में बेटे का लुंड और चूतड़ों पर एक बैल की जीभ... मैं भी अपनी माँ के चूतड़ों पर एक बैल की जीभ चलती देखकर बेहद उत्तेजित हो रहा था...

मैंने माँ को अपनी तरफ झुका दिया और सीने से लगा लिए... जिससे माँ के चूतड़ और उभर कर खुल गए और माँ को ऐसे hi थामकर मैं नीचे से उन्हें छोड़ने लगा... उधर सफेदा लगातार माँ के चूतड़ों पर अपनी जीभ फिरा रहा था...

मुझे आज की शाम पर यकीन नहीं हो रहा था.. मैंने अपनी माँ को यूँ खुले आसमान में नंगा करके छोड़ा और अब एक जानवर माँ के चूतड़ों को चाट रहा था जबकि मैं माँ की छूट को सटासट छोड़ रहा था... सफेदा की खुरदरी जीभ माँ के गद्देदार चूतड़ों की कोमल त्वचा पर पड़ती तो माँ सिहर उठती और अब तो माँ को भी उसकी जीभ का एहसास ाचा लगने लगा था क्यूंकि माँ अब सफेदा को हटाने की कोशिश भी नहीं कर रही थी.... सफेदा की जीभ कभी कभी मेरे गोलियों और लुंड पर पड़ती तो मुझे भी गुदगुदी का एहसास होता..

सफेदा ने थोड़ी सी hi देर में माँ के दोनों पटेलों को चाट चाटकर गीला कर दिया था इतना गीला की दोनों चाँद की रौशनी में खूब चमक रहे थे... सफेदा की लार से माँ के चूतड़ इतने गीले हो गए थे की चूतड़ों पर चाँद का प्रतिबिम्ब भी दिख रहा था...

मैं ये सब देखकर देख कर बेहद उत्तेजित होता जा रहा था और उतनी hi तेजी से माँ को छोड़ रहा था.... और माँ तो मेरे सीने में सर छुपा कर इस असीम आनंद का मज़ा ले रही थी....

तभी अचानक से माँ ने सर उठाया और आअह्ह्ह्हह की एक चीख उनके मुँह से निकल गयी...

में-. क्या हुआए मा,

माँ- हाय डययययययआआ लललललाहा आअह्ह्ह अह्ह्ह्हह सफेदा... सफेदा ने अपनी जीभ.....

माँ बस इतना hi बोल पाई मैंने सर आगे कर के देखा तो पाया बदमाश सफेदा अपनी जीभ नुकीली करके माँ की गांड के कैसे हुए छेड़ में घुसेड़ रहा है... और क्यूंकि जानवरो की जीभ इंसानो से ज़्यादा ताकतवर होती है तो वो थोड़ा कामयाब भी हो रहा था...

सफेदा की एक इंच जीभ माँ की गांड में अंदर बहार हो रही थी.... जबकि उसकी लार मेरी गोलियों और जांघो पर गिर रहा था...

माँ तो इस दोहरे हमले से पागल सी होती जा रही थी... और सफेदा साला कितना भाग्यशाली था जो माँ की गांड चाट रहा था... न जाने कितने hi लुंड माँ की गांड देखकर चड्डी में hi पानी छोड़ देते हैं... जिस गांड के पीछे गाओं के कितने लोग पागल हैं वो गांड आज एक बैल चाट रहा है...

उधर मुझे ये भी अलग एहसास हो रहा था की मैं माँ को छोड़ रहा हूँ और एक जाणवत मेरे सामने मेरी माँ की गांड चाट रहा है और न मैं और न hi माँ उसे रोक रहे हैं...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न छहःछहुड़ड़ कर्माआआआ आईसीई हीईईई...... सफेदा आए आए आ chaaaaaaaaaaaat मेरी गांड...

साला सफेदा मेरे से भी आगे निकला अपनी माँ को तो छोड़ा hi मेरी माँ की गांड भी चाट ली... और अब तक दो इंच तक जीभ माँ की गांड में घुसेड़ने में कामयाब हो चूका था....

में- आअह्ह्ह मा कैसाअअअअअ लग रहा हैई सफेदा से गांड चटवा कररररर..

माँ- तू खुड़ड़ड़ड़ड़ड़ hi देख betaaaaaaaaaaaaahhhh टेरिइइइइ माआआ की गांड एक बैलललल chaaaaaaaaaaaat रहा है.... आह्ह्हह्ह्ह्ह... कितनी चुड़क्कड़ माआ है रे teriiiiiiiiiii...

में- हाँ मा मेरी माआआआआ बहुत बड़ी चुड़क्कड़ है hi दुनियाआ के सामने संस्कारी बनती है पर देखो असली रुप यहाँ बाघ मेंननननन नंगी होकर अपने बेटीएई से चुद रही है और बैल से गड्ड्ढड चटवा रही हैईईई...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न छहःछहुड़ड़ कर्माआआआ sahuiiiiiiiiii बोललललललल राहाआआ है टूउउउउनेईई.... Teriiiiiiiiiii माआ छुडाआसस्सससीईईई हैईईईई... टेरीए लुंडडडड की भुखीय है...

और फिर मा का जिस्म थरथराने लगा, उधर सफेदा ने भी अपनी जीभ थोड़ी और अंदर धकेल दी थी माँ की गांड में जिसके प्रहार को माँ नहीं सह पाई और अपने शिखर पर पहुँच गई....

माँ मुझसे कसके चिपक गयी... मैंने भी माँ को बाहों में जकड लिए... माँ की गांड ने सफेदा की जीभ को जकड लिया और छूट ने मेरे लुंड को....

माँ का पूरा शरीर काँप रहा था, और फिर मुझे अपने लुंड पर माँ की छूट का रास बहता हुआ महसूस हुआ माँ मेरे और एक बैल की वजह से झाड़ रही थी.. ये सुनंने में hi जितना अजीब लग रहा था उतना hi कामुक भी था.... ऐसा दृश्य न किसी ने सोचा होगा और न hi देखा होगा...

माँ की छूट का रास बहता हुआ मेरे लुंड के किनारे होकर मेरे तत्तो और जांघो पर सफेदा की टपकी हुई लार में घुल रहा था... माँ झाड़ कर शांत हो गयी पर मैं और सफेदा नहीं हुए... मैं लगातार माँ की छूट को कूट रहा था वहीं सफेदा अभी भी माँ की गांड में जीभ घुसाए था... थोड़ा शांत होनेपर माँ ने मुझे रुकने का इशारा किया जिसे पाकर मैं रुक गया और माँ भी मेरे ऊपर से लुढ़क कर साइड में लेट गयी... जिससे मेरा लुंड माँ की छूट से... और सफेदा की जीभ माँ की गांड से निकल गयी... माँ के हटते hi मैं उठा और सफेदा को पकड़ा और बांधने लेजाना लगा उसके खूंटे के पास पहुँच कर मैंने रस्सी उठाई की तभी मेरे दिमाग में न जाने क्या सूझा मैं उसे उसकी माँ के पास ले गया और छोड़ दिया... सफेदा ने अपनी माँ की छूट को एक आध बार सूंघा और फिर अगले hi पल उसके पीछे चढ़ गया और अपना लुंड अपनी माँ की छूट में पेल दिया...

अब वहां एक नहीं दो दो माँ चूड़ी थी... और दो दो बेटे मादरचोद बन रहे थे... खैर उन दोनों को छोड़कर मैं बापिस खत की तरफ मुदा तो देखा माँ अभी भी वैसे hi टाँगे फैलाये खत पर पड़ी हुई थी...

पर माँ की नज़र मुझ पर थी और होंठो पर एक कामुक मुस्कान थी.. मैं जल्दी से कदम बढाकर खत के पास पंहुचा और माँ के पैरों को पकड़ कर अपनी तरफ घुमा लिया और उनके पैरो के बीच आ गया... और उनके पैरों को पीछे उनके कंधे की तरफ कर दिया जिससे माँ की छूट और खुल गयी मेरे सामने...

मैंने अपने सख्त लुंड को एक बार फिर से पकड़ा और माँ की छूट पर लुंड के टोपे को रखा और ऊपर नीचे घिसने लगा... माँ मेरी आँखों में hi देख रही थी और बड़ी कातिल मुस्कान के साथ मुझसे बोली- अपनी माँ को तड़पा रहा है...

Me-nahi माँ तड़प तो मैं रहा हूँ...

और ये कहकर मैं लुंड के टोपे को छूट के ऊपर तक छूट के डेन तक ले गया और फिर नीचे की तरफ घिसते हुए लेन लगा... लुंड का टोपा माँ की छूट के होंठों को छेड़ता हुआ नीचे सरकता गया और सीधा जाकर माँ की कासी हुई गांड के छेड़ पर रुक गया... और माँ कुछ बोलती या समझ पति उससे पहले मैंने एक धक्का लगाया और सफेदा की गांड चटाई की वजह से माँ की गांड चिकनी थी तो मेरे लुंड का टोपा गुप्प से माँ की गांड में घुस गया.... और मैं वहीं रुक गया..

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh लललललाहा... ओह्ह्ह्हह्ह ohhhhhhhhhh बेटा गानन्द में दाल दिया...

में- क्या करू माँ तुम्हारी गांड hi ऐसी है... न जाने कबसे सोचा था तुम्हारी बड़ी सी गोल मटोल गांड में अपना लुंड घुसेड़ने का...

माँ- अह्ह्ह अपनी माँ की छूट छोड़ के मन नहीं भरा तेरा जो अब गांड भी चाहिए....

में- माँ जब मादरचोद बना हु तो अचे से बनूँगा न कुछ भी क्यों रहने दूँ....

मैं अब भी वैसे hi रुका हुआ था मेरा लुंड ऐसे hi माँ की गांड में फंसा हुआ था न माँ हिलरहि थी न मैं...

माँ- तो सरे छेड़ चाहिए तुझेइवे तेरी माँ के...

में- हैं माँ अपने घर में आगे पीछे सरे दरवाज़ों से आ जा सकते hain...aur तुम मेरे लुंड का और मेरा घर हो...

Maa-apani माँ का आखिरी छेड़ भी तू अपना मुसल डालकर छोड़ना चाहता है... माँ का सबसे निजी और कामुक छेड़ को छोड़ना चाहता है तू..

में- आअह्ह्ह हाँ मा चाहता हूँ मैं तुम्हारी गांड के कैसे हुए छेड़ को अपने लुंड से छोड़ छोड़ कर अपने रास से भर देना चाहता हूँ...

माँ- मेरी गांड को रास से भरेगा जिसे अभी एक बैल ने अपनी जीभ घुसा घुसा कर छठा है... बोल अपनी माँ की गांड को मरेगा तू...

में- हाँ माँ तुम्हारी इस कासी हुई गोल मटोल गांड को मार मार के फैला दूंगा मैं... तुम्हारे ये बड़े बड़े चूतड़ों के बीच अपना लुंड जड़ तक गाड़ कर मरूंगा....

माँ ऐसी कामुक और अश्लील बातें करके खुद भी उत्तेजित हो रही थी और मुझे भी कर रही थी...

माँ- तो आजा मेरे लाल मेरे खसम... घुस जा मेरी गांड में... दाल दे अपना मुसल मेरी गांड में और मिटा दे इसकी khujliiiiiiiiiiiii आआआहहहहहहह आआआहहहहहहह डययययययआआ reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ..

माँ अपनी बात पूरी कर पति उससे पहले hi मैंने एक करारा धक्का लगा दिया और लुंड खछः से तीन इंच माँ की गांड में घुस गया.... इसके बाद ऐसे hi बिना रुके दो तीन धक्के लगातार लगाके लुंड को जड़ तक अपनी माँ की गांड में ठूंस दिया...

आह्ह्ह्हह क्या गरम एहसास था... मेरा पूरा लुंड माँ की गांड में था मेरा पूरा शरीर मनो सुन्न पद गया था सिर्फ लुंड में hi जान थी ... ऐसा लग रहा था मनो मेरा लुंड गरम माखन की मटकी में फंसा हुआ है माँ की गांड हर तरफ से मेरे लुंड पर कासी हुई थी और मेरे लुंड को निचोड़ रही थी...... मैं आँखें बंद करके इस एहसास का मज़ा ले रहा था... उधर सफेदा अपनी माँ की चुदाई में व्यस्त था वहीं उसकी माँ भी अपने बेटे के लुंड के पूरे मज़े ले रही थी...

अपनी माँ के साथ चुदाई करना, उसकी छूट मरना, या छूट में झड़ना बेहद सुखद अनुभव होता है पर अपनी माँ की गांड में अपना लुंड डालना उससे भी कहीं अधिक है या कहें इसकी कोई बराबरी hi नहीं की जा सकती.... मेरा लुंड माँ की गांड में पहले से ज़्यादा फूल गया था...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh है डययययययआआ लललललाहा meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd चीर्डी तूंबीएए....

में- बस माआआ अब्बब्बब्ब टूवू पूवूराआ अंदर हैईईईई...

माँ- नासपीटे पूरा लेने में गड्ड्ढड फट्ट्ट्ट gayiiiiiiiiii हैईईईई... इतनाआए badaaaaaaaaaa मुसल्ल है तेरा...

में- माँ पापा भी तो मरते हैं तुम्हारी गांड फिर इतना दर्द क्यों..

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh तेरा लुंड देख तेरे बाप से भी मोटा और लम्बा है... जब तेरी पापा ने पहली बार मरी थी तब भी तकलीफ हुई थी... और आज तूने मेरी गांड को और खोललललल दिया है....

मुझे ख़ुशी हो रही थी की माँ अब मुझसे खुल कर बात कर रही है और खुले क्यों न मैंने उनकी गांड को जो खोल दिया था...

मैंने अब धीरे धीरे अपनी कमर हिलना चालू कर दिया और लुंड को माँ की गांड में अंदर बहार करने लगा....

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह betaaaaaaaaaaaaahhhh मर अपनी माँ की गड्ड्ढड अब्बब्बब्ब तेज़ तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़...

मैं भी माँ को समझ नहीं प् रहा था कभी दर्द से चिल्ला रही थी तो अभी बोल रही है तेज़ मार पर मुझे तो जो चाहिए वो मिल गया था... मैंने अपने पेअर को खत पर रखा और माँ की एक छुच्छी पर हाथ रखा और माँ की गांड में धक्के लगाने लगा... माँ इतनी छुडासी हो चुकी थी की अपनी छूट को अपनी उँगलियों से रगड़ने लगी अपने बेटे से गांड मरवाते हुए...





Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh मेरे खसम और तेज़ मार अपनी माँ की गांड आह्ह्ह्हह क्या लुंड है रे तेरा.. बेदर्दी.... यकीीीेनननननन nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii होताहा तुझे इसीइइइइइइइ choooooooooot से निकला है.... रे अब yahjiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee लुंडडडड से bharrrrrrrrrrr जाटीईईईई haiiiiiiiiiii..

में- आअह्ह्ह मा मख्खन जैसी gaaaaamnnddddddddddd है तुम्हारी.... मेरी छुडासी माआ... लुंड की भुखीय माँ... गंडमारी मा...

मैं माँ की गांड में तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए बोले जा रहा था..

माँ- हैं betaaaaaaaaaaaaahhhh आज टुनीईईई मुझीीीी अपणीइइइइइइ माआआआआ कूऊऊ पुरीई तरह khollllllllllllll दियाआआआ अपनीईवीई साअम्ने...... जब टेरीए बाआप ने meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd पहली बहार मारी थी tabseeeeeeeeee hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii aisaaaaaaaaaaaaa कोइइइइइइइ दिन नहीं गयाए जब मैंने choooooooooot मरवाई हो और गांड नहीं.....

में- माँ तुम्हे गड्ड्ढड मरवाना इतना पसंद है क्या... तभी तो इतनीईई बडीइइइइ कर्लीयई है मरवा मरवा कर... जब गाओं में निकलती हो तो सरे गाओं मर्द इसी पर नज़र गदा कर रखते हैं...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh नासपीटे वो तो नज़र गाड़ते हैं तूने तो अपना खूंटा hi गाड़ रखा है मेरी गांड में... और हाँ betaaaaaaaaaaaaahhhh मुझे गड्ड्ढड मरवाना बहुत पसंद है.... कभी कभी तो मैं छूट मरवाती hi नहीं sirfffffffffffff गांड hi marwaaaaaaaaaaaa के सो jatiiiiiiiiiiii हुन्न्न...

मैंने माँ की गांड मारते हुए उनका सीधा पेअर एक तरफ कर दिया और उन्हें साइड की और लिटा कर उनकी कमर पकड़ कर उनकी गांड मरने लगा...





माँ अपनी गांड मरवाते हुए लगातार मेरी आँखों में देखे जा रही थी... साथ hi चेहरे पर एक सुकून की मुस्कराहट थी...

और मैं, मैं तो दुनिया में सबसे ज़्यादा खुश था... अपनी माँ को छोड़ने के बाद उनकी ऐसी मस्त मखमली गांड मार रहा था इससे ज़्यादा ख़ुशी किसे मिल सकती है....

माँ- है डययययययआआ लललललाहा कीटनाआआ masstttttttttttttttttt है तेराआआआ लोड़ाआआ आह्ह्ह्हह माआआ....

में- मा अब तुमममममम बिनाआआ गंडड मरवाये नहीं सौगी.... रोज़ तुम्हारी छूट और गांड मरूंगा......

माँ- हैं betaaaaaaaaaaaaahhhh रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ अपनीई माआआआ को छौऊड़नाआए रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ अपने िस्स्सस्स moosalllllllllll पे झाडनाआआआआ मुझी...

में- माआआ रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ गांड मरवाओगी अपनी बेटी से???

माँ- हैं लललललाहा रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ गड्ड्ढड मरवाआओंगीई तुझसे.... रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़

में- meraaaaaaaaaa लुंड लोगी अपणीइइइइइइइ कासी huiiiiiiiiii गंडड में......

माँ- हैं तेरे िस्स्सस्स moosalllllllllll को अपनी gaaaaamnnddddddddddd में घुसा के रखूंगी......

मैंने दो तीन तगड़े झटके माँ की गांड में मरे... फिर...

Me-maaa मुझे तुम्हे कुटिया बना कर तुम्हारी गांड मारनी है....

माँ अगले hi पल घूम कर अपने घुटनो पर और हाथो पर झुक कर कुटिया बन गयी पर माँ ने मेरे लुंड को अपनी गांड से नहीं निकलने दिया...

माँ- ले बेटा मार अपनी कुटिया माँ की गांड.... मार betaaaaaaaaaaaaahhhh

मैंने भी माँ की कमर को पकड़ा और सटासट माँ की गांड में लुंड पेलने लगा... माँ के बड़े बड़े पतीले जैसे गद्देदार चूतड़ मेरी जांघों से टकरा कर थप थप थप थप थप की आवाज़ कर रहे थे और हर वार के साथ लहरा रहे थे..





Me-lo meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii kutttttttttttiyyyyyaaaaaa चुड़क्कड़ माआआ... अपनेवे बेटी का लुंडडडड gaaaaamnnddddddddddd में..... आहाज मैं तुम्हारी गांड की सरीई भुख मिटाआआआ डूंगाआआआ

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii लल्ला....

में- meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मायआ, संस्कारी पतिव्रता मा... कशह्ह्हह्ह्ह्ह गाओं वाले देख पाते की कैसे ये संस्क्रीइइइइइ माआआ अपनी बेटे के से

गांड मरवा रही है...

माँ- हैं betaaaaaaaaaaaaahhhh teriiiiiiiiiii संसकाआअहारीइइइइइइइ पतिव्रता मा...... अपने hi बेटे के सामने नंगी होकर kutiyaaaaaaaaaaa बन कर अपणीइइइइइइइ gaaaaamnnddddddddddd मरवाहा rahiiiiiiiiiiiii हैईईईई अपने बेटी से...

माँ इन अश्लील और गन्दी बातों से खुद भी गरम होती जा रही थी.... और ये आसान भी उतना hi कामुक था एक माँ अपने hi बेटे के सामने नंगी होकर कुटिया बानी हुई अपनी गांड परोस रही थी और उसका बीटा भी अपनी माँ की परोसी हुई गानन्द की धज्जियाँ उदा रहा था अपने मोठे लोडे से...

उधर सफेदा भी पीछे से अपनी माँ पर चढ़ा हुआ था और इधर मैं अपनी माँ पर... दोनों माँ आगे झुककर अपने अपने छेदों को अपने बेटों के लुंड पर मार रही थी...

इस आसान में मुझे अपना लुंड माँ के दोनों पपीता के बीच आता जाता हुआ बेहद ाचा लग रहा था.... जिससे मेरी गति और झटके और तगड़े होते जा रहे थे.......

में- आअह्ह्ह मा बहुत मज़ा आ रहा है.... Meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii kutttttttttttiyyyyyaaaaaa चुड़क्कड़ माआआ......

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh है डययययययआआ लललललाहा meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd टेरीए लिए hi haiiiiiiiiiii ले लेईईई mazaaaaaaaaaaa...

ऐसे hi थोड़ी देर कसकर मैं माँ की गांड मारता रहा....

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेटा तूंबीए तो कुटिया की सवारी कर ली... अब मुझे भी घोड़े की सवारी करनी है.....

मैं माँ की बात समझ गया और धीरे से लुंड माँ की गांड से निकल लिए लुंड सरसराता हुआ बहार आ गया माँ की गांड का छेड़ थोड़ा खुला रहा और फिर बंद होने लगा...

माँ भी कुटिआ के आसान से हैट कर साइड हो गयी और मेरे लिए जगह बनाई खाट पर... मैं खत पर लेट गया माँ ने अपने दोनों पेअर मेरे कमर के एक एक तरफ करके रखे और फिर नीचे होकर लुंड को पकड़ा और अपनी गांड पर लगाया और नीचे होने लगी...

मेरा लुंड एक बार फिर से माँ की गांड में घुसने लगा... माँ की गांड के छेड़ का छल्ला मेरे लुंड पर कास गया और फिर धीरे धीरे लुंड उसमे समता चला गया.....

और अंत में माँ पूरी तरह से मेरे ऊपर बैठ गयी उनके चूतड़ मेरी जांघों से टकरा गए और मेरा लुंड जड़ तक उनकी गांड में समां गया....

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh तेरा लुंड हर बार दर्द देता है re....par इस घोड़े की सवारी करनी है तो दर्द तो सहना पड़ेगा......

Me-aaahhh मा तुम्हे लोडे मेरा मतलब है घोड़े की सवारी करना बहुत पसंद है लगता है.....

Maa-haan बेटा मुझे लोढ़ा और घोडा दोनों की सवारी करना बहुत पसंद है... अब तू बातें काम कर और मुझे सवारी करवा...

मैंने माँ की कमर को पकड़ लिया और नीचे से धक्के लगाने लगा... मेरा लुंड माँ की गांड में अंदर बहार होने लगा...





मेरे लुंड को एक बार फिर से वही माँ की गांड की गर्मी के एहसास ने घेर लिया...

माँ की गांड के छहले से मेरा लुंड अंदर बहार होता हुआ बेहद कामुक लग रहा था...

माँ की गांड जैसे hi मेरा लुंड अंदर जाता अपने बेटे को प्यार जताने के लिए जकड लेती.... और जैसे hi बहार आता तो जुदाई में सिकुड़ने लगती...

मैंने कई गांड मारी हैं पर सच कहूं तो अपनी माँ की गांड में लुंड घुसेड़ने जैसा एहसास कहीं भी नहीं है....

सफेदा की लार से चमक रहे दोनों चूतड़ों के बीच मेरा लुंड जैसे रेलगाड़ी की तरह अंदर बहार हो रहा था...... उधर सफेदा अब तेज़ी से हुंकारें भरता हुआ अपनी माँ को ताबड़तोड़ छोड़ रहा था...

इधर माँ मेरे लोडे की सवारी कर रही थी.....

मैं बस यही प्रार्थना कर रहा था की ये रात कभी ख़तम न हो क्यूंकि आज की रात मुझे वो मिला है जो बहुत काम लोगो को नसीब होता है.. बस ये सब यूँ hi चलता रहे और माँ मेरा लुंड अपनी गांड में लिए यूँ hi लुंड की सवारी करती रहे

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh कर्माआआआ मेरे लाल और तेज़ बहुत मस्त है तेरा hathiyar....aahhh और तेज़ मार अपनी माँ की गड्ड्ढड...

माँ की बात सुनकर मैंने अपना पूरा ध्यान माँ की गांड की सेवा में लगा दिया और तूफानी धक्के लगाने लगा...





Me-hmmmmmmmmmmmmmmm आअह्हह्ह्ह्ह लो मा मेरी चुड्ड्ढाआआककककएअड़ड़ड़ड़ड़ड़ गड्ड्मरिइइइइइइ माआआआ लो अपनी बेटीईई कहा लुंडडडड....

मेरे धक्के इतनी तेज़ हो गए की मेरी जांघों और माँ के चूतड़ों के टकराने की आवाज़ टेबल की धुन की तरह पूरे बाघ में गूँज रही थिई.... मेरी हर थाप के साथ माँ के चूतड़ समुद्र में आई पानी की लहरों की तरह अपनी hi थाप पर थिरक रहे थे...

चाँद भी माँ के दो चमकते हुए तबलों का मधुर संगीत और थिरकन का आनंद उठा रहा था...

मेरे लुंड को जो मज़ा मिल रहा था वो तो अकल्पनीय था... माँ की कासी हुई मखमली गरम गांड में बार बार अंदर बहार होने का सुख सबसे निराला था... ाचा हुआ था जो मैं पहले कई बार झाड़ चूका था क्यूंकि मैं ज़्यादा से ज़्यादा इस आनंद का अनुभव करना चाहता था... मुझे तो लग रहा था की अगर मरीन कितनी बार भी क्यों न झाड़ जॉन माँ की गांड के सामने लुंड बैठेगा hi नहीं....

जहाँ मैं तेज़ तेज़ धक्कों के माँ की गांड का बाजा बजा रहा था.. वहीं मुझे ऐसा एहसास हो रहा था की सब कुछ बहुत धीरे धीरे हो रहा है जैसे किसी फिल्म में स्लो मोशन में होता है... उसी तरह मेरा लुंड माँ की गांड के अंदर बहार हो रहा था माँ के चूतड़ स्लो मोशन में लहार रहे थे... हवा, पेड़ पौधे सब स्लो हो गए थे..





और मैं एक सपने में खोया सा माँ की गांड मारने में लगा हुआ था.... मेरे मन में जितना hi धीरे धीरे मैं धक्के लगा रहा था पर सच में मेरे धक्के उतने hi तेज़ थे...

माँ भी आँखें बंद करके अपने बेटे से गांड मरवाने का आनंद ले रही थी... मेरे हाथ कभी माँ की कमर को थमते तो कभी उनकी छूछीयो को... तो कभी मस्त थिरकते चूतड़ों को....

मैंने फिर मा की पीठ पर हाथ लेजाकर उन्हें अपने ऊपर झुका लिए और अपने आप से कसकर चिपका लिए... और धक्कों की गति को और बढ़ा दिया....

माँ- अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii लल्ला आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm....

माँ मेरे झटके के साथ आहें भर्ती हुई मुझे उकसा रही थी... मैं लगातार उसी गति से गांड मरे जा रहा था की मुझे अचानक से महसूस हुआ की मेरा रास मेरे लुंड में एक बार फिर से भरने जा रहा है है... इसका मतलब मैं झड़ने के करीब हूँ... पर मैं अभी झड़ना नहीं चाहता था... मैं इस माँ बेटे के मिलान को जितना हो सके उतना लम्बा करना चाहता था.... तो मैंने न चाहते हुए भी किसी तरह खुद पर काबू करके अपने धक्के धीमे किये और रुक गया... ध्यान भटकने के लिए मैंने नज़र घुमा कर देखा तो सफेदा और उसकी माँ की चुदाई ख़त्म हो चुकी थी और अब दोनों साथ में बैठे सुस्ता रहे थे...... दोनों माँ बेटे चुदाई करके आराम कर रहे थे..

... माँ को लगा की मैंने असं बदलने के लिए रुका हूँ तो माँ जल्दी से लुंड पर बैठे बैठे hi घूम गयी और अब माँ की पीठ मेरी तरफ जबकि मुँह पैरों की तरफ हो गया था...

मेरा लुंड अब भी जड़ तक माँ की गांड में घुसा हुआ था बस फ़र्क़ सिर्फ इतना था की अभी उनके बड़े बड़े टेबल मेरे सामने थे... मैंने अपने लुंड को थोड़ी देर के लिए और काबू में कर लिए....

वहीं माँ ने धीरे धीरे लुंड पर ऊपर नीचे होना शुरू किआ.. मैं माँ को और उत्तेजित करना चाहता था... तो मैंने अपना हाथ माँ की कमर से घूमते हुए आगे लेजाकर उनकी छूट पर रख दिया... और छूट को सहलाने लगा... माँ धीरे धीरे मेरे ऊपर उछाल कर अपनी गांड मरवा रही थी साथ hi मैं उनकी छूट सहला रहा था जिससे माँ को दोहरा मज़ा मिल रहा है था...





माँ की मोती मोती जाँघे मेरी जांघों से टकरा रही थी... वहीं उनके रसीले पापीती भी उनके सीने पर उछाल कूद कर रहे थे..

इस आसान में माँ का सामने जा पूरा शरीर चाँद की रौशनी में चमक रहा था... जो इस दृश्य को और कामुक बना रहा था की एक संस्कारी घरेलु आदर्शवादी पतिव्रता पत्नी खुले आसमान के निचे पेड़ पौधों और जानवरो के बीच नंगी होकर अपनी hi कोख से जन्मे अपने बेटे के लुंड पर अपनी गांड पटक रही है...

Maa-haaaan कर्मा ऐसे hi छहद माँ की छूट को अह्ह्ह्ह तेरे हाथों और लोडे में तो जादू है re..ahhhhhhhhh...

में- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मा जड़ऊ तो तुम्हारी गांड और छूट में है... की एक बार देखलो तो लुंड बैठता hi नहीं है...

माँ- हाय लल्ला कौन चाहता है बैठे teraaaaaaaaaaaahhhhhh लुंडडडड meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd में दाल कररररर चूड्डड्डड़स्टआआ रह जब खड़ा हो टूवू..

में- मैं तो छोड़ता रहूँगा हमेशा माँ कभी तुम्हारी छूट और gaaaaannddddddddddd को सूना नहीं होने दूंगा...

मैंने माँ की छूट में एक उंगली डालते हुए कहा और अंदर बहार करने लगा...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh मेरी लाललललललललल ओह्ह्ह्हह्हह कर्माआ बेताआए... अब. तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ मार...

मैंने माँ की इच्छा को सुना और उनकी चुत से उंगलियां निकल ली और कमर पकड़ कर नीचे से तगड़े धक्के लगा लगा कर.. गांड में लुंड पेलने लगा...

गांड मरते हुए मेरे हाथ माँ की कमर से सरकते हुए चाँद की रौशनी में चमक रही माँ की छूछीयो पर पहुँच गए और मैं उन्हें मसलने लगा...





मेरा लुंड माँ की गांड में पिस्टन की तरह अंदर बहार हो रहा था.. और मेरी गति अपने आप बढाती जा रही थी...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेटा मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार माँ की गांड.....

माँ हर झटके के साथ मुझे और उकसा रही थी और मैं भी हर पल के साथ उत्तेजित होता जा रहा था मेरी उंगलियां माँ की छूछीयो में गड कर उन्हें मसलरहि थी... वहीं माँ के टेबल मेरे साथ मेरी हर थप पर थिरक रहे थे...

मुझे फिर से अपना रास अपनी गोलियों से लुंड की और बहता हुआ महसूस हो रहा था पर मैं छह कर रुकने की जगह मेरे धक्के और तेज़ होते जा रहे थे... ऐसा लग रहा था जैसे मेरी कमर एक महीने बन गयी है जो खछ खछः माँ की गांड में चलती जा रही है...

मेरे धक्के इतने तूफानी हो गए देखते hi देखते की माँ की हालत भी ख़राब होने लगी...

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh betaaaaaaaaaaaaahhhh फायडडड डीएई माआआ कईईईई gaaaaamnnddddddddddd aaaahhhhhhhhhhhhh डययययययआआ reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न छहःछहुड़ड़ कर्माआआआ......

मैं कुछ बोल नहीं प् रहा था क्यूंकि मेरी जगह मेरा लुंड बोल रहा था... और क्या बातें कर रहा था वो माँ की गांड से...





लुंड का वार जड़ तक माँ की गांड में लगता और फिर बापिस बहार आता और बापिस और ताकत के साथ जड़ तक माँ की गांड में समां जाता...

में- uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh हमंमंमं माआआआआ अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह...

हर गुज़रते पल के साथ मेरी गति बढाती जा रही थी और झटके आक्रामक हो गए थे... मैंने माँ की कमर को कसकर पकड़ रखा था और दनादन लुंड उनकी गांड में पेल रहा था...

माँ- Karmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh... Lallllllllllllaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa basssssssssssss betaaaaaaaaaaaaahhhh..... मेंनननननन gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee डययययययआआ reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee...

माँ के ये लफ्ज़ कानो में पड़ते hi मेरे सरे बांध टूट गए और मैंने तीन चार जानलेवा झटके का की गांड में जड़ तक मरे और फिर जड़ तक अपने लुंड को माँ की गांड में ठूंसकर अपनी कमर को उनकी कमर से चिपका दिया और फिर मेरे लुंड ने अपनी धार छोड़नी शुरू कर दी...

वहीं माँ भी मेरे ऊपर बैठीए बैठीए काँप रही थी और झाड़ रही थी... उनकी चुत पानी छोड़ रही थी... एक बार फिर हम माँ बेटे साथ झाड़ रहे थे...

मेरा लुंड धार के बाद धार माँ की मखमली गांड में भरे जा रहा था और माँ की गांड को अपने रास से भीगता जा रहा था... वहीं माँ पीछे लुढ़क कर मेरे ऊपर गिर गयी थी और अपने स्खलन से गुज़र रही थी..

वहीं मेरे लुंड की पिचकारियां ख़त्म नहीं हो रही थी... ऐसा लग रहा था आज मेरे शरीर का सारा रास माँ की गांड में hi भर जायेगा... न जाने कितनी देर तक मैं माँ की गांड में झाड़ता रहा और फिर लुंड ने पिचकारियां छोड़नी बंद की..

काफी देर तक माँ और मैं यूँ hi लेते रहे माँ मेरे ऊपर और मैं खत के ऊपर... हम दोनों में से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी न उठने की और न hi बोलने की...

मेरा लुंड माँ की गांड में थोड़ा ढीला पद गया था... खैर थोड़ी देर बाद जब थोड़ी जान आई तो माँ उठी... धीरे से और फिर मेरे लुंड से उठने लगी जिससे लुंड सरकता हुआ माँ की गांड से पॉप की आवाज़ के साथ निकल गया और मेरे लुंड के निकलते hi मेरा रास जो मैंने माँ की गांड में छोड़ा था बहकर बहार आने लगा पर तभी जादुई शक्ति की तरह माँ का गांड का छेड़ तुरंत बंद होकर कास गया... माँ की गांड के छेड़ की कलाकारी देख मैं हैरान था..

माँ उठकर बैठी और घूमकर मेरी तरफ देखा उनके चेहरे पर संतुष्टि के भाव दिख रहे थे...

माँ ने मेरी आँखों में देखा और फिर मुस्कुराई और फिर सर झुकाया और मेरे आधे खड़े लुंड को गुप्प से मुँह में भर लिए....

मेरे मुँह से आअह्ह्ह्ह निकल गयी की माँ अपनी गांड से निकले मेरे लुंड को मुँह में लेकर चूस रही है... सच में माँ बहुत कामुक औरत हैं... कुछ दो मिनट hi माँ ने मेरे लुंड को अपने मुँह में भरकर चूसा और साफ़ कर दिया. अगर माँ थोड़ी देर और चूसती तो मेरा लुंड एक बार फिर से चुदाई के लिए खड़ा हो जाता...

माँ ने अपनी गांड और मेरे रास को चाट चाट कर मेरे लुंड को साफ़ कर दिया... मेरे मन में बस यही चल रहा था की माँ ने अपनी गांड में से निकले मेरे लुंड को कितनी सहजता से मुँह में भर कर चाट लिए.. हालाँकि बुआ पूर्वी दीदी ममी और भी सभी औरतें जिन्हे मैंने छोड़ा था सब ये करती थी पर क्यूंकि ये माँ ने किआ तो कुछ अलग था मेरे लिए... खैर ये ख़तम हुआ माँ फिर खाट से उठने लगी

माँ- बेटा अब उठ बहुत लेट हो गया है... घर चल जल्दी से तेरे पापा डांटेंगे...

में- हाँ माँ

मैं भी खत से उठा अपने कपडे ढूंढ कर पहनने लगा वहीं माँ ने भी पहले नल पर जाकर अपने हाथ मुँह धोये और फिर अपने कपडे पहनने लगी... कुछ 5 मिनट्स में hi हम लोग तैयार थे मैंने पंत में से फ़ोन निकल कर देखा तो अनुज की कई मिस्ड कॉल थी साथ hi मश्ग भी था मैंने बापिस फ़ोन किआ तो उससे बात हुई फिर वही पूछना की कहाँ हो इतनी देर कैसे लग गई.. मैंने बहाना बना दिया की बस ख़राब हो गयी थी तो इसलिए टाइम लग गया.. फिर अनुज ने कहाँ भैंस को देख लेना जो बच्चा देने वाली है अगर कुछ लगे तो पापा आ जायेंगे वहीं...

मैंने उसके बाद सफेदा को उसकी जगह पर बांध दिया और वो तो जैसे मुझे शुक्रिया कहते हुए मेरा हाथ चाटने लगा... फिर

मैंने भैंस को देखा लग तो रहा था कभी भी बच्चा दे सकती है.. माँ ने भी देखा तो माँ बोली सुबह तक हो सकता है तो हम लोग फिर घर की और निकल दिए पर उससे पहले मैंने माँ के होंठों को एक बार अचे से चूसा.. फिर हम घर चल दिए...

इसके आगे उगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट आप सबको... अपने सुझाव ज़रूर दें... आपका बहुत बहुत शुक्रिया
 
मैंने भैंस को देखा लग तो रहा था कभी भी बच्चा दे सकती है.. माँ ने भी देखा तो माँ बोली सुबह तक हो सकता है तो हम लोग फिर घर की और निकल दिए पर उससे पहले मैंने माँ के होंठों को एक बार अचे से चूसा.. फिर हम घर चल दिए...

अपडेट 78

हमारे बाघ से घर यही कुछ 500 मीटर दूर था पर थोड़ा घूम कर जाना पड़ता था.. मैं और माँ चलने लगे पूरा गाओं सूनसान था अक्सर लोग गाँव में जल्दी सो जाते हैं.. कुछ कुछ घरों के अंदर से रौशनी आ रही थी.. मैं तो बस इस बात का यकीन करने की कोशिश कर रहा था की जो अभी हुआ वो सच भी था या नहीं... मैंने माँ के चेहरे की और देखा तो उनके चेहरे पर हमेशा की तरह शांत भाव थे... पर फिर भी मैंने खुद की संतुष्टि के लिए अपना हाथ माँ के पीछे लेजाकर उनके चूतड़ को मसल दिया...

माँ- अह्ह्ह्ह कर्मा इतने सब से भी तेरा मन नहीं भरा जो अब. और शैतानी कर रहा है... नालायक..

माँ गुस्से से बोल रही थी पर मुझे उनके चेहरे पर गुस्सा नहीं दिख रहा था बल्कि एक ख़ुशी लग रही थी... जिससे मुझे ये यकीन हो गया की जो हुआ वो सच था और अभी भी ठीक है...

में- क्या करू माँ तुम्हारे ये बड़े बड़े ढोल देखकर रहा नहीं जाता मन करता है बजा दूँ...

माँ- ाचा अभी उतनी देर से अपनी डंडी से इन्ही ढोल को नहीं बजा रहा था तू...

में- अरे वाह माँ तुम भी मेरी तरह बोलने लगी अब तो...

माँ- हाँ अपना इस मुसल को मेरे अंदर दाल दाल कर तूने मुझे अपनी तरह बना दिया है..

और ये कहकर माँ ने पंत के ऊपर से मेरा लुंड पकड़ कर दबा दिया जिससे मेरी आह्हः निकल गयी.. और माँ फिर खिलखिलाकर आगे की तरफ भागी...

माँ को ऐसे बच्चों की तरह शरारत करते हुए देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही थी.. मैं भी उन्हें पकड़ने के लिए उनके पीछे भगा... और फिर से उनके चूतड़ दबा दिए..

इसी तरह हम माँ बीटा शरारतें करते हुए घर पहुँच गए... गेट खटटेट hi अनुज ने खोला अंदर आये तो पापा आंगन में hi बैठे थे...

पापा- बड़ी देर करदी तुम लोगो ने...

में- वो बस ख़राब हो गई थी पापा.. फिर जब ठीक हुई तब आये हैं...

पापा- अरे तो बता दिया होता मैं मोटरसाइकिल ले कर आ जाता...

माँ- अरे कोई नहीं तुम भी वहां से आये थे थक गए होंगे और फिर वहां आते बेकार में...

पापा- अरे कहीं नहीं थका, ाचा ये बताओ भैंस को देखा आते हुए..?

माँ- हाँ देखा, रात भर में या सुबह तक हो जायेगा पक्का...

पापा- मुझे भी यही लगा था... मैं सोच रहा हूँ वहीं सो जॉन रात को... न जाने कब ज़रुरत पद जाये...

माँ- तुम कहाँ अकेले सोओगे वहां...

अनुज- अकेले कहाँ माँ मैं भी जाऊंगा...

ये सुनकर न जाने क्यों मेरे अंदर से एक ख़ुशी की लहार दौड़ने लगी...

माँ- देखलो तुम लोग सो पाओगे वहां की नहीं...

papa-are सो जायेंगे खैर तुम लोग थक गए होंगे आराम करो और खाना खा लो...

Maa-khana तो बनाना होगा अभी..

अनुज- नहीं माँ ममता चची खाना दे गयी थी... भैया और तुम्हारे बारे में पूछ रही थी कब तक आएंगे...

अनुज मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा कर बोलै... मैंने भी सोचा ममता चची सिर्फ खाना hi देकर तो नहीं गए होंगी ..

खैर मैंने और माँ ने कपडे बदले खाना खाया और फिर थोड़ी देर सब लोगों ने साथ बैठ कर बातें की... शादी वगेरा की... और फिर पापा और अनुज जाने लगे...

पापा- हम लोग निकलते हैं अगर भैंस रात में बच्चा देगी तो फ़ोन करदेंगे तुम लोग भी आ जाना..

me-theek है पापा...

माँ ने सबको दूध दिया पीने को और फिर पापा और अनुज चले गए और मैं और माँ घर में अकेले रह गए...

दरवाज़ा बंद करने के बाद मैं बापिस आँगन में आया तो देखा माँ बर्तन उठा कर रसोई की तरफ जा रही थी...

मैं भी माँ के पीछे पीछे चल दिया... न जाने क्यों माँ के साथ पूरे घर में अकेले होने से वो भी रात में इस ख्याल से hi मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था...

माँ- कर्मा बीटा खत के नीचे गिलास रखे हैं ले आ ज़रा..

में- लाया माँ..

मैंने गिलास उठाये और रसोई में आ गया जहाँ माँ बर्तन धो रही थी... मैं गिलास रखकर वहीं खड़ा हो गया और माँ को देखने लगा...

माँ- ऐसे क्या देख रहा है जा आराम कर जा के तू...

में- मेरी प्यारी माँ को देख रहा हूँ...

माँ- अच्छा बड़ा प्यार आ रहा है माँ पर... इरादे नेक नहीं लग रहे तेरे...

में- तुम्हे और प्यार करने का इरादा है माँ..

और ये कहकर मैं माँ के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपने हाथों से उनकी कमर को पकड़ लिए... माँ बर्तन धोये जा रही थी..

माँ- सिर्फ प्यार hi करेगा न और कुछ तो नहीं...

में- बिकुल नहीं माँ सिर्फ और सिर्फ प्यार...

मैंने माँ के गले को चूमते हुए कहा...

माँ- कर्मा बेटा बर्तन धोने दे न... वैसे भी तूने आज बहुत थका दिया है...

में- इतनी जल्दी थक गए माँ..

माँ- हाँ बीटा अब मैं तेरी तरह जवान नहीं हूँ... बुद्धि हो रही हूँ तो थकूँगी hi...

में- माँ तुम और बूढी... ऐसा बिलकुल नहीं है मेरी माँ तो जवान लड़कियों से भी ज़्यादा खूबसूरत और कामुक है...

मैंने माँ के होंठों को चूमने के लिए सर आगे किआ तो माँ ने खुद से अपना चेहरा घुमा कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और एक पल चूमा फिर अपने काम में लग गयी..

मैं माँ से पीछे से चिपका हुआ था और माँ की गांड के एहसास लुंड को होते hi मेरा लुंड एक बार फिर सर उठाने लगा.. वहीं मैंने साड़ी के पल्लू को भी माँ के सीने से गिरा दिया.. ब्लाउज में बंद बड़ी बड़ी छुछियां नंगा गदराया पेट सामने आ गया... मैं एक हाथ से माँ के पेट को और एक हाथ से ब्लाउज के ऊपर से hi उनकी छूछीयों को मसलने लगा...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेताऑ काम करने दे..

में- क्या करूँ माँ तुम इतनी गदराई हुई हो की बस खुद को रोक hi नहीं पाटा...

माँ- बीटा समझा कर बर्तन धोने हैं... खुद पे काबू रखना सीख..

Me-tumhare सामने होने पर काबू नहीं होता..

और ये बोलकर मैंने माँ के ब्लाउज के हुक को एक एक करके खोल दिया और ब्लाउज खुलते hi ब्रा के कप को नीचे सरका दिया और दोनों पपीता को बहार निकल लिए और उन्हें दबाने लगा...

माँ- ाआरीईई कर्मा क्या कर रहा है तू... मत कर अभी...

में- तुम्हे प्यार कर रहा हूँ माँ...

Maa-nahi अभी रहने दे.... बीटा मान जा..

Me-karne दो न माँ...

Maa-theek है पर फिर बाद में कुछ नहीं करने दूंगी.. और जो मैंने सोचा था वो भी नहीं करुँगी...

Me-kya सोचा था माँ?

Maa-kyun बताऊँ तुझसे बोलै रुकने को पर तुझसे सबर hi नहीं हो रहा...

में- ाचा माँ रुक गया बताओ न...

Maa-pahle दूर खड़ा हो...

Me-maaa तुम भी न ाचा लो हो गया खड़ा दूर.. अब बताओ...

Maa-maine सोचा है की आज तेरे पापा नहीं है घर तो मुझे कहीं अकेले में दर न लगे तो तू मेरे साथ मेरे बिस्तर पर सोयेगा...

Me-kya माँ सच्चीई...???

Maa-haan पर एक शर्त है तब तक तू मुझसे दूर रहेगा...

Me-ye कैसी शर्त है माँ...

Maa-ab यही है माननी है तो मान नहीं तो अकेला सो...

Me-theek है मान गया...

Maa-haaye मेरा प्यारा लल्ला अब जा और बिस्तर तैयार कर सोने के लिए मैं आती हूँ...

में- ठीक है माँ जल्दी आओ ..

मैं माँ के साथ एक hi बिस्तर पर रात गुजरने की बात सुनकर बहुत उत्सुक हो गया और झट से कमरे में आया बिस्तर लगाया.. दुसरे कमरों की लाइट वगेरा बंद करके आया और फिर ना जाने क्यों सरे कपडे उतर कर बिलकुल नंगा हो गया और बीएड पर लेट गया और माँ का इंतज़ार करने लगा...

एक एक पल जैसे दिनों सा बीत रहा था बार बार मेरी आँखों के सामने बाघ में मेरे और माँ के बीच जो हुआ वो सब चल रहा था... मैं लेते हुए वहां जो भी हुआ उसे याद करके खुश हो रहा था...

की तभी अचानक से गेट पर एक साया महसूस हुआ और जब मेरी नज़र उधर गयी तो मैं देखता hi रह गया... माँ गेट पर कड़ी थी

और वो भी ऐसे कामुक अवतार में की उन्हें देखकर मुर्दे का लुंड भी खड़ा हो जाये माँ ने ब्लाउज उतर दिया था और ब्रा जिस हालत में मैं छोड़कर आया था वैसे hi नीचे लटकी थी दोनों छुछियां बहार थी... साड़ी का नामोनिशान नहीं था पेटीकोट और नीचे खिसकी हुई ब्रा में माँ कमाल लग रही थी... माँ के ऐसे कामुक अवतार को देखते hi मेरा लुंड झटके मरने लगा.. माँ गेट पर कड़ी कड़ी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी और फिर अचानक से माँ के हाथ थोड़े हिले और अगले hi पल पेटीकोट जैसे नाटक ख़त्म होने पर पर्दा गिरता है वैसे hi माँ का पेटीकोट नीचे गिरा और यहाँ नाटक शुरू हुआ था...

पेटीकोट के साथ साथ मेरा जबड़ा भी जैसे नीचे गिर गया और मेरा मुँह खुला का खुला रह गया... पेटीकोट माँ के पैरों के चारो और घेरा बनाकर गिर गया माँ ने अपने दोनों पेअर उसमे से निकले अब माँ के गदराये हुए बदन पर सिर्फ एक ब्रा के अलावा कुछ नहीं था... और वो ब्रा भी कुछ धक् नहीं रही थी..

माँ धीरे से चलती हुई बीएड के पास आई और एक कामुकता भरे अंदाज़ से बीएड पर चढ़ गयी... और फिर धीरे धीरे से मेरे पास आई... मुझे तो जैसे सांप सूंघ गया था न हिल रहा था और न hi कुछ बोल रहा था... गाला और होंठ दोनों सूख गए थे.. और हमेशा की तरह एक माँ ने अपने बेटे की तकलीफ को बिना कहे समझ लिए और मेरे सूखे होंठों पर अपने रसीले होंठ रख दिए...

माँ के होंठों को छूटे hi मैं जैसे होश में आ गया और मैं उनके होंठो और जीभ को चूसने लगा... थोड़ी देर बाद माँ ने होंठो को छोड़ा और नीचे खिसकते हुए गले पर चूमने लगी वहीं उनका हाथ फिसलता हुआ मेरे लुंड के करीब पहुँच गया और फिर लुंड को पकड़ कर हाथ चलने लगी....

मुझे तो ऐसा सुख मिल रहा था जिसे मैं कभी ख़त्म नहीं होने देना चाहता था...

माँ गले को चूमती हुई नीचे आई और फिर मेरे छोटे छोटे निप्पल को मुँह में चूसने लगी... मुझे एक अजीब सा सुखद से अनुभव का एहसास हुआ... माँ लगातार मेरे निप्पल को अपनी जीभ से छेड़ रही थी... फिर माँ ने निप्पल को छोड़ा और मेरे सीने और पेट को चाटने लगी...

फिर मेरे पेट को चाटते हुए मेरी नाभि में जीभ दाल कर चूसने लगी... मेरा लुंड तो जैसे फटने को हो गया फिर चूमते हुए माँ नीचे गयी और फिर. लुंड के टोपे पर जीभ फिरने लगी... मैं तो जैसे बीएड पर लेता हुआ मचलने लगा...

माँ की गीली गरम जीभ मेरे लुंड के टोपे पर घूम रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था की मैं अब झाड़ा या तब झाड़ा... शायद माँ ने मेरी बात सुन ली और लुंड से जीभ हटा दी मुझे थोड़ी रहत मिली पर फिर माँ ने जो किआ वो उससे भी बढ़कर था... माँ लुंड को नीचे की तरफ चाटती हुई गयी और फिर लुंड की जड़ तक अपनी जीभ लेजाकर अगले hi पल मेरी गोलियों को चाटने लगी... मेरा पूरा शरीर झटके खाने लगा...

माँ ने फिर मेरी गोलियों को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी.. मेरे लुंड ने अपने रास की कुछ बूंदे बहकर अपनी ख़ुशी का इज़हार किआ..

सबसे अजीब बात ये थी की अब तक न माँ ने कुछ बोलै था और न hi मैंने और शायद ज़रुरत hi नहीं पद रही थी... माँ मेरे तत्त्तों को अंगूर की तरह चूस रही थी... जिससे मेरा जोश बढ़ता जा रहा था .. माँ की जीभ मेरी गोलियों पर चलती हुई मुझे बहुत अच्छा अनुभव दे रही थी... मेरा खुद पर काबू करना मुश्किल होता जा रहा था...

मेरी गोलियों को काफी देर चूसने के बाद माँ ने अपना मुँह हटाया और माँ के मुँह हटते hi मैं झट से बीएड पर hi खड़ा हो गया और माँ का चेहरा पीछे से पकड़ लिया और अगले hi पल मेरा लुंड माँ के मुँह में था... माँ मेरा लुंड चूसने लगी.. थोड़ा सा लुंड चुसवाने के बाद मैंने माँ की चेहरे को अपने लुंड पर दबा दिया और मेरा लुंड गले तक माँ के मुँह में समां गया... माँ सांस लेने के लिए थोड़ा झटपटा रही थी पर मैंने लुंड को लगभग जड़ तक घुसाए रखा





और फिर थोड़ी देर बाद निकल लिए... लुंड निकलते hi माँ ज़ोर ज़ोर से हांफने लगी.. आठ hi उनकी आँखों से आंसू भी निकल रहे थे... पर माँ ने कोई शिकायत नहीं की बल्कि कुछ पल बाद लुंड को दोबारा मुँह में भर लिया और चूसने लगी...

मैंने सोचा मेरी माँ कितनी कामुक है माँ के आगे तो रंडिया भी फ़ैल हैं..

और एक बार फिर से अपना लुंड माँ के गले में उतार दिया... और इस बार बहार निकलते hi माँ ने पकड़कर मुझे नीचे लिटा दिया और खुद से मेरे लुंड को बड़ी उत्सुकता से चूसने लगी..





मैं तो माँ की उत्सुकता देखकर हैरान था... माँ मेरा लुंड ऐसे चूस रही थी जैसे पहली बार चूस रही हो... माँ ने करीब दो मिनट मेरा लुंड चूसा और फिर मेरे ऊपर आ गयी अपनी दोनों टंगे मेरी कमर के दोनों तरफ करके...

माँ ने मेरे ऊपर आ कर मेरे लुंड को पकड़ा और अपनी गरम छूट के द्वार में लगाया और बिना किसी इंतज़ार के बैठ गई जो माँ की बेसब्री को दिखा रहा tha...ki माँ अपने बेटे का लुंड लेने के लिए कितनी व्याकुल थी..

माँ मेरे लुंड पर तब तक नीचे आती रही जब तक मेरा लुंड जड़तक माँ की छूट में समां गया... और माँ की जांघें मेरी जांघों से चिपक गयी...

हम दोनों माँ बेटे के मुँह से आअह्ह्ह्ह निकल गयी.. ..एक बार फिर से मेरा लुंड मेरी माँ की छूट में था एक बार फिर से हम माँ बेटे एक दुसरे से ऐसे जुड़ रहे थे जैसा इस समाज की नज़रों में पाप था... एक बार फिर से हम माँ बेटे हवस के सागर में गोते लगा रहे थे और बहकर दूर जा रहे थे... एक बार फिर से माँ की गरम छूट ने मेरे लुंड को अपने आगोश में समां लिए था... एक बार फिर से मेरी संस्कारी पतिव्रता मा नंगी होकर अपने सेज बेटे के लुंड को अपनी छूट में लेकर बैठ गयी... वो भी उस बिस्तर पर जिसपर वो अपने पति के साथ सोती थी आज अपने hi बेटे के साथ वो सब कर रही थी जो अपने पति के साथ करती है...

माँ ने जब अचे से मेरे लुंड का एहसास अपनी छूट में लिए तो उसके बाद अपनी कमर हिलनी शुरू की और अपने हाथों को मेरे सीने पर रख दिया...... माँ अपने चूतड़ों को मेरे लुंड पर घूमने लगी और मेरी तो जैसे जान hi निकलने लगी..





माँ की छूट मेरे लुंड को अंदर hi अंदर निचोड़ने लगी.. माँ की छूट का ये हुनर मैं पहली बार देख रहा था... माँ बहार से जितनी सीढ़ी और संस्कारी औरत थी अंदर से माँ उतनी hi कामुक और छुडासी थी, माँ घर में कैसी थी ये पूरा गाँव जनता था पर बिस्तर में कैसी हैं ये अब मैं जान रहा था...

माँ अपनी गांड को गोल गोल घुमा रही थी और छूट से कुछ अजीब सा जादू कर रही थी की मेरा पूरा लुंड माँ की छूट में कास जाता, मेरा लुंड इस मज़े से माँ की छूट में और फूलता जा रहा था और बिलकुल लोहे जैसा हो गया था...

माँ ने कुछ देर तक यूँ hi अपनी गांड घुमा घुमा कर मुझे अपना जादू दिखाया, और फिर आगे झुक गयी और अपना कोहनी को बिस्तर के साइड में रख लिया और अपने चूतड़ों को मेरे लुंड पर पटकने लगी...

माँ बखूबी चुदाई के सरे हुनर जानती थी और एक औरत को ऐसा hi होना चाहिए जो दुनिया की नज़र में संस्क्रीइइइइइ हो और बिस्तर पर एक चुड़क्कड़ रंडी... माँ भी इससे कुछ काम नहीं थी.. माँ के गांड पटकने से मेरा लुंड खचच खच से माँ की छूट में अंदर बहार हो रहा था, मेरा उत्तेजना बढ़ती जा रही थी मैंने माँ की कमर को जकड लिया और उन्हें और तेज़ तेज़ अपने लुंड पर पटकने लगा...





मुझे तो धरती पर hi माँ की छूट में जन्नत का सुख मिल रहा था.. मेरा लुंड फूला नहीं समां रहा था...

एक बेटे के लुंड को ऐसा सुख सिर्फ एक माँ की छूट hi दे सकती है और वही मुझे आज मेरी माँ की छूट दे रही थी...

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh लल्ला mazaaaaaaaaaaa आ रहा है तुझेईईई...

माँ इतनी देर में अब कुछ बोली थी...

में- हैं माआआ तुम्हारीइइइइइइइ choooooooooot में तो जादू हैईईई...

माँ- हैं betaaaaaaaaaaaaahhhh तेरा लुंडडडड भीइइइइइइ कोई जादू की छड़ी से काम nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii है... आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह...

में- मा आईसीईए hi पटकोऊ अपनी छुडासी choooooooooot को अपने बेटे के लुंदड़ पर... और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ मा....

माँ- हैं लललललाहा तेरा लुंडडडड पूवूराआ खा जाउंगी आज अपणीइइइइइइइ choooooooooot से...

में- खा जाओ माआआआआ पूरा निगल लो अपणीइइइइइइइ पयासीई choooooooooot में....

माँ काफी गति से अपनी छूट को मेरे लुंड पर मार रही थी और नीचे से मैं भी धक्का लगा रहा था...

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh बेताऑ अब तू कर मैं थककककक रहियी हुण्णं..

मैंने माँ की बात सुनकर झट से उन्हें नीचे नीचे उतरा और साइड में लिटा दिया... और खुद उनके बगल में लेट गया और माँ का एक पेअर उठाकर मोड़ कर पकड़ लिया और कंधे के पास कर दिया और नीचे अपना लुंड साइड से hi एक बार फिर से उनकी प्यासी choooooooooot में घुसेड़ दिया... इस पोजीशन में मेरा और माँ का चेहरा बिलकुल करीब था और मैं माँ की आँखों में देखते हुए उन्हें छोड़ रहा था... मैंने माँ के सर को अपने हाथ में जकड रखा था और उन्हें खुद से चिपका कर चोदे जा रहा था...





में- meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मायआ कैसा लग रहा है बेटे का लुंडडडड..

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh मेरी लाललललललललल ओह्ह्ह्हह्हह कर्माआ बेताआए आह्ह्ह्ह छोड़ ऐसे hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii अपनी maaaaaaaaaaaaaa को... साडी खुजली मिटा दे meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot की.

मैंने अपना मुँह आगे किआ और माँ के होंठों को चूसने लगा माँ भी मेरा साथ देने लगी... मैं और माँ दोनों एक दुसरे के होंठों की कुश्ती करवाने लगे वहीं नीचे लुंड और छूट का घमासान चल रहा था... माँ के रसीले होंठों को चूसते हुए उन्हें छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा था...

मेरे हर झटके पर माँ की बड़ी बड़ी छुछियां झूल रही थी... पूरे कमरे में थप थप थप थप की आवाज़ गूँज रही थी...

थोड़ी देर बाद माँ ने अपनी ब्रा जो कुछ नहीं छुपा रही थी उसे भी उतर दिया फिर से मेरे ऊपर आ गयी पर इस बार माँ का मुँह मेरे पैरों की तरफ था और मेरे सामने उनके बड़े बड़े चूतड़ और उन चूतड़ों के बीच झांकता हुआ उनका प्यारा गांड का छेड़ और उससे थोड़ा नीचे उनकी छूट में अंदर बहार होता हुआ मेरा लुंड.. माँ एक बार फिर से अपनी गांड घुमा घुमा कर मेरा लुंड अंदर बहार करने लगी...





माँ ने अपने दोनों हाथ पीछे मेरे सर के पास टिका लिए थे जिससे उन्हें अपने चूतड़ घूमने में आसानी हो...

मुझे तो माँ का ये हुनर बेहद पसंद था जब माँ ऐसे अपनी गांड घुमा घुमा कर अपनी छूट मरवाती तो मेरा मज़ा तो कई गुना बढ़ जाता... मुझे कुछ नहीं करना पद रहा था माँ hi सब कर रही थी.. ऐसा लग रहा था मैं माँ को नहीं बल्कि माँ मुझे छोड़ रही है..

में- आअह्ह्ह maaaaaaaaaaaaa mazaaaaaaaaaaa आ रहा है ऐसी hi अपने चूतड़ों को घुमाओ अह्ह्ह्हह क्या मस्त चुदवाती हो माँ...

माँ- हाय डययययययआआ लललललाहा यही तो सुखहहहह हीी मादरचोद बनने का मेरे लाल...

में- मादरचोद बनने का भी maaaaaaaaaaaaaa और ये जानने का भी की मेरी माँ कितनी चुड़क्कड़ माआआ है जो अपने बेटे के लुंड पर उछलने में ज़रा भी नहीं शर्माती...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेताऑ सही बावक्त है पर माआ होने से पहले मैं एक औरत हूँ... मरीईईई पास choooooooooot है जो लुंडडडड की पयासीय है...

में- तू bujhaaaaaaaaaa माआआ अपणीइइइइइइइ choooooooooot की प्यासस ... अपने बेटे के लोडे से......

मैंने अपने हाथ आगे लेजाकर माँ की दोनों छूछीयों को थम लिया वहीं माँ ने अपना काम जारी रखा और अपनी गांड घुमा घुमा कर मेरा लुंड छूट में लेती रहीं





माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेताऑ मसल दे अपनी माँ की छूछीयो को...

में- मा क्या मस्त पापीती जैसी छुछियां हैं तुम्हारी... और तुम्हारे इस भोसड़ी का तो जवाब hi नाहीईई....

माँ- तो छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ अपनी मा की bhosdiiiiiiiiiiiiiiii कोऊ लललला अपना लोढ़ा डाल दाल कर फआयआयड दे मेरी bhosadiiiiiiiiii..... मादरचोद.....

में- आअह्ह्ह maaaaaaaaaaaaa mazaaaaaaaaaaa आ गया आईसीईए होई अपनी bhosdiiiiiiiiiiiiiiii कोऊ पातको अपने बेटे के लोडे पर मेरी kutiyaaaaaaaaaaa छुडासी माआआ....

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh आह्ह्ह्हह हममममममममम ललललाआआअ

में- माआआ सआईईईई कुटिया और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़... कहा जाआआ मेरा लोड़ाआआआ अपणीइइइइइइइ choooooooooot में .

मेरी बात सुनकर माँ का जोश और बढ़ गया और वो मेरे ऊपर पीछे होकर लेट गयी और अपने पैरों का इस्तेमाल करके मेरे लुंड के ऊपर अपनी चुत लम्बे लम्बे झटको से मरने लगी... मैंने भी दोनों हाथ माँ की कमर पर रख लिए और उन्हें अपने लुंड पर दबाने लगा...





माँ के चूतड़ मेरी जांघो से टकरा के ठप्प ठप्प्प की आवाज़ कर रहे थे जो पूरे कमरे में गूँज रही थी... और शायद बहार भी जा रही हो पर घर में हमारे सिवा कोई नहीं था इसलिए हमें दर नहीं था... और माँ बेटे खुल कर चुदाई का आनंद ले प् रहे थे....

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेताऑ छोड़ड़ड़ड़ इतनाआ बढाएआ लुंडडडड है तेराआआआ लोड़ाआआ आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh...

में- लेईईई saaaaallllliiiiiiiiiiiii kutiyaaaaaaaaaaa चुड़क्कड़ माआआ... जिस्सस बिस्तर पररर रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ पति के साथ चुदाई करवाहाआटीई हैई आअज ूसीईई बिस्तर पर बेटी का लोड़ाआआआ कहा रही है अपनेईईई भोसडीईई सीएएएएएएए...

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh मादरचोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ मैं हुण्णं chudakkadddddddddd माआआआ लुंडडडड की pyaaaaaasiiiiiiiiiiiii इसीइइइइइइइ बिस्तर पर ीसीईई भोसड़े को तेराआआ बाआप छोड़ता हैईईईई और आआआअज betaaaaaaaaaa छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ रहा है.... आह्ह्ह्ह..

माँ अपनी hi बात बोलकर और उत्तेजित होती जा रही थी और जिस बिस्तर पर पति के साथ चुदाई करती है उसी बिस्तर पर बेटे के साथ चुदाई कर रही थी... इसी बात को सोच सोच कर माँ बेहद गार्डन हो गई और माँ के इस तरह छुड़वाने से मैं भी बेहद उत्तेजित हो गया था और जैसे hi माँ थोड़ा सा धीरे हुई मैंने माँ के दोनों पैरों को फैला कर पकड़ लिया और नीचे से तेज़ तेज़ धक्के लगाकर माँ की छूट में अपना लुंड पेलने लगा... मुझे आज की रात में एक बार फिर से अपना रास गोलियों से बहता हुआ मेरे लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा है था वहीं माँ भी. झड़ने के करीब लग रही थी





माँ के मुँह से अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii लल्ला ऐसी सिसकारियां निकल रही थी और मैं तो बस सटासट तेज़ी से माँ को चोदे जा रहा था...

और फिर कुवह पल बाद hi माँ की एक चीख निकली- हायययय डययययययआआ lallllaaaaaaaaaaaaaaaaa

और माँ का शरीर कांपने लगा... मैंने कसकर माँ को पकड़कर रखा जिससे वो गिर न जाएँ... माँ काफी ज़ोरदार तरीके से झाड़ रही थी..

मैं माँ को उनके झड़ने के दौरान और तेज़ी से छोड़ने लगा और जैसे hi माँ का झड़ना ख़त्म हुआ और वो शांत हो कर मेरे ऊपर गिर गयी.. मेरे लुंड ने पिचकारियां छोड़नी शुरू कर दी.... एक के बाद एक रास की धार मेरे लुंड से निकल कर माँ की छूट में भरने लगी... मेरी आँखें बंद हो गयी और मैंने माँ को खुद से जकड लिया... जिस छूट से मैं निकला था मैंने एक बार फिर से उसे अपने रास से भर दिया...

जब झड़ना ख़त्म हुआ तो माँ और मैं लेफ्ट की तरफ पलट गए जिससे माँ और मैं एक करवट पर आ गए मैं पीछे से माँ से चिपका हुआ था मेरा लुंड अब भी माँ की छूट में था... पूरे दिन के और अभी की म्हणत के बाद हम दोनों hi कुछ करने की हालत में नहीं थे मैंने अपना हाथ आगे लेजाकर माँ के पेट पर रख कर उन्हें खुद से चिपका लिए और माँ को ऐसे पकड़े हुय्र hi कुछ पल बाद मैं और माँ दोनों सो गए....

न जाने किस समय मेरी आँख खुली तो देखा माँ मुझे पकड़ कर हिला रही थी बड़ी मुश्किल से मैंने दोनों आँखें खोली और देखा की माँ नंगी मेरे सामने है एक पल को तो मैं चौंक गया पर फिर सब याद आया तो खुद के सर को झटक कर नींद से बहार निकला और माँ से पूछा क्या हुआ तो माँ ने बताया पापा का फ़ोन आया है भैंस बच्चा दे रही है... हमें बाघ जाना है... नींद तो अछि आ रही थी पर फिर भी उठा पर उठने से पहले माँ को एक बार चूमा तो माँ ने डांटा की देर हो रही है मैंने घडी में टाइम देखा तो 4:30 हो रहा था. खैर मुँह हाथ धो कर कैसे भी मैंने नींद को भगाया और जल्दी से कपडे पहन कर माँ के साथ बाघ की और निकल गया...

जल्दी से हम बाघ में पहुंचे तो देखा भैंस बच्चा दे hi रही थी हम सब लोग बड़े ध्यान से देखने लगे.. कुछ पल बाद एक प्यारी सी छोटी सी भैंस की बच्ची ज़मीन पर पड़ी थी जिसे भैंस चाट चाट कर साफ़ कर रही थी... उसे देखकर सबके चेहरों पर एक ख़ुशी थी हमारे परिवार में एक और नयी सदस्य जो जुड़ गयी थी... माँ और माँ जो कुछ भी भैंस की मदद के लिए करना होता था कर रहे थे मैं छोटी भैंस को सहला रहा था... ऐसे hi सुबह हो गयी.. हम सब लोग काम में लगे हुए थे...

राजन चाचा, और भी गाओं के कई लोगो ने आते जाते हुए भैंस के बच्चे को देखा हाल पुछा ऐसे hi काम करते करते 9 बज गए... हम सब लोग घर आये फ्रेश हुए फिर माँ ने नाश्ता बनाया हम सब ने खाया... माँ के आस पास होने पर लुंड कई बार खड़ा हुआ पर पापा और अनुज के होने से कुछ नहीं कर सकता था तो खुद को काबू में hi रखा... नाश्ता करने के बाद मैं आंगन में hi खत पर लेट गया और शायद रात की नींद न पूरी होने की वजह से मुझे नींद आ गयी और मैं सो गया...

मेरे फ़ोन की आवाज़ से मेरी आँख खुली फ़ोन उठाकर देखा तो मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी...

Me-haan भाई जग चूतिये... आ गए आप...

सामने से- हाँ आ गया.. कर्मा...

Me-kya हुआ तुझे..

सामने- सुन मुझे तुबेल पे जल्दी मिल यार 10 मीन्स में...

में- क्या हुआ सब ठीक न?

सामने- तू आ तो सही...

मैं सोच में पद गया क्या हो गया इसे.. खैर जल्दी से घर से निकला तुबेल के लिए....

तो कौन है ये जिससे मिलने कर्मा जा रहा है और आगे क्या होता है सब अगली अपडेट में प्लीज कमेंट करके बताएं कैसी लगी अपडेट....
 
आप सभी से माफ़ी मांगता हु की इतने दिनों से अपडेट नहीं दे पाया काफी बिजी था.. पर अबसे पूरी कोशिश करूँगा की आप सब को निराश न करूँ और दोस्तों आप लोग भी प्यार दिखते रहिये स्टोरी के लिए, अपने सुझाव फीडबैक सब ज़रूर देते रहिये और मैं थोड़ा आलसी हूँ तो प्लीज मुझे प्रेस्सुरीसे करते रहिये अपडेट देने के लिए... बहुत बहुत शुक्रिया
 
Back
Top