कुछ मेरे लुंड की साइड से माँ की छूट से बहता हुआ मुझे अपनी गोलियां पर भी गिरता महसूस हो रहा था... मैं और माँ यूँ hi एक दुसरे से चिपके हुए पड़े रहे...
अपडेट 77
मेरा लुंड अब भी माँ की छूट में था, पर हैरानी की बात ये थी की लगातार दो बार झड़ने के बाद भी मेरा लुंड उतना hi कड़क था जैसे एक लोहे की रोड...
माँ ने थोड़ी देर बाद मेरे सीने से सर उठाया और मेरी आँखों में देखा और फिर अपने होंठ मेरे होठों से मिला दिए, मैं माँ के रसीले होंठों को चूसने लगा और माँ मेरे, फिर माँ की जीभ भी मेरे मुँह में अपनी जगह बनाने लगी जिसे मैं जी भर के चूसने लगा...
काफी देर तक ये सिलसिला चलता रहा जब तक हमारी सांस न फूलने लगी और फिर हमारे होंठ अलग हो gaye...maa और मैं अपनी साँसे सँभालने लगे..
माँ- हाय लल्ला तूने तो जान hi ले ली मेरी... आह्हः आखिर अपनी माँ छोड़ hi ली तूने...
में- हाँ मेरी माँ और मादरचोद बनने में जो सुख है वो और कहीं नहीं...
माँ- सच कहूं तो अपने बेटे के मुसल से छोड़ने में मुझे भी बहुत मज़ा आया.. और क्या खिलाया है शशि ने तुझे वहां जो ये तेरा हथियार बैठ hi नहीं रहा देख कैसे झटके ले रहा है मेरी छूट में...
में- माँ कुछ खाया हो या न खाया हो अगर सामने तुम हो तो ये खड़ा hi रहेगा...
माँ- ाचा ज़रा मैं भी तो देखूं इसका दम...
और ये कहकर माँ मेरे लुंड से उठ गयी मुझे थोड़ा बुरा लगा... मैं चाहता था माँ यूँ hi मेरा लुंड छूट में डेल बैठी रहे और मैं उनकी चुदाई करता रहूं... पर ऐसा नहीं हुआ माँ उठी तो लुंड मेरे और माँ के रास से सना हुआ माँ की छूट से सरकता हुआ बहार आ गया....
माँ- देख तो कितना बड़ा लग रहा है....
और फिर माँ लुंड से उठने के बाद मेरे दोनों पैरों के बीच बैठ गयी और लुंड को ध्यान से देखनी लगी... देखते देखते hi अचानक उन्होंने अपने चेहरे को आगे किआ और लुंड को मुँह में भर लिए...
मेरे मुँह से आअह्ह्ह्ह निकल गयी... माँ मेरे लुंड को मुँह में भरकर जीभ से चाट कर साफ़ करने लगी... मुझे उनके मुँह के अंदर अपने लुंड पर उनकी जीभ चलती हुई महसूस हो रही थी... माँ कभी जीभ से चाटती तो कभी अपना मुँह आगे पीछे करके लुंड चूस रही थी..

और साथ hi वो नज़र उठाकर मेरी आँखों में भी लगातार देखे जा रही थी... शायद ये देखने के लिए की उनके मुँह का जादू मुझपर क्या असर कर रहा है .. इधर मैं तो जैसे जन्नत में था... माँ की रसीली गरम छूट से निकला तो माँ के गरम मुँह में पहुँच गया... माँ लगातार चूसे जा रहे थी अपने बेटे के बड़े से लोडे को...
फिर माँ ने अपने गले की कलाकारी दिखते हुए अपने मुँह को मेरे लुंड पर दबाया थोड़ी सी कोशिश के बाद मेरा पूरा लुंड माँ ने अपने मुँह और गले में ले लिए... आअह्ह्ह्ह ऐसा लग रहा था माँ का मुँह मुझे अपने अंदर खींच रहा है.. माँ ने कुछ पल ऐसे hi लुंड को अपने गले में भरकर रखा.. मेरी गोलियां माँ के होंठों से टकरा रही थी.. और जब माँ का दम घुटने लगा तो उन्होंने अपना चेहरा उठाते हुए लुंड को बहार निकल लिए... मेरा पूरा लुंड माँ के थूक से गीला होकर चमक रहा tha...chand की रौशनी में खम्भे की तरह...
में- आअह्ह्ह मा मज़ा आ गया... मेरा लुंड जब तुम्हारे मुँह में जाता है न तो मैं तो जैसे खो hi जाता हूँ...
माँ- ( हांफते हुए) आह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह लल्ला तेरा लुंड इतना प्यारा है आअह्ह्ह्हह की मन करता है. कहा hi जाऊं...
में- तो खा जाओ ना अपने बेटे का लोढ़ा माँ, पूरा निगल जाओ...
फिर माँ मुआकुरते हुए थोड़ी आगे हुयी और उन्होंने मेरे लुंड को अपनी दोनों बड़ी बड़ी कोमल छूछीयो के बीच में फंसा लिए......
मेरे लुंड पर मा की पापीती जैसी छूछीयो का कोमल एहसास आह्हः मेरा लोढ़ा और कड़क होकर ठुमके मरने लगा...
जैसे किसी मख़्कन की पोटली में लोहे की रोड घुसेड़ दी हो ऐसा एहसास हो रहा था... और फिर माँ अपनी छूछीयो को मेरे लुंड पर ऊपर नीचे करने लगी.. पर मैं इतना उत्तेजित हो चूका था माँ की छूछीयो के एहसास के माँ के साथ साथ मैंने माँ की दोनों छूछीयों को पकड़ लिए और अपने लुंड पर दबाते हुए . नीचे से कमर उठाकर झटके लगते हुए माँ की छूछीयो को छोड़ने लगा

माँ के दोनों पपीता के बीच से बार बार निकल कर अपना सर दिखता हुआ मेरा खीरा... हाय क्या कामुक दृश्य था..
माँ- इन्ही चूचियों से कभी तू दूध पिता था लल्ला... आज उन्ही छूछीयो को अपने बड़े से लुंड से छोड़ रहा है...
में- आअह्ह्ह मा बड़ा मज़ा आ रहा है कितनी मुलायम छुछियां हैं माँ... एक दम मख्खन जैसी....
माँ- क्या गरम और तगड़ा लोढ़ा है... है दय्या कर्मा... मेरे बालम छोड़ मेरे लाल ऐसे hi.. मेरे दूध को...
में- आह्ह्ह्ह माआ मेरी चुड़क्कड़ माँ.. पूरी ज़िन्दगी तुम्हारे पपीता को छोड़ता रहूं...
और मैं और तेज़ तेज़ धक्के लगा कर माँ की छूछीयो को छोड़ने लगा.....

जब जब लुंड का मुँह माँ की कोमल छूछीयों से निकल कर बहार आता... लुंड के मुँह पर एक अलग चमक दिखती... ऐसा लगता मनो माँ की छूछीयो को गले लगाकर मुस्कुरा रहा हो...
मैं नीचे से लुंड की ख़ुशी में शामिल होते हुए लगातार झटके पर झटके मार रहा था... मैं और माँ दोनों इस अकल्पनीय पाप की नदी में बहते जा रहे थे और अब इतनी दूर बहकर आ चुके थे के बापिस जाना मुमकिन नहीं था... और न hi हम जाना चाहते थे...
खैर माँ थोड़ी देर बाद सीढ़ी हुई तो मेरा खीरा उनके दोनों पपीता से सरक कर बहार निकल गया...
माँ सीढ़ी बैठकर मेरी आँखों में देखने लगी मनो पूछ रही हो की क्या चाहता है अब..
मैंने लेते हुए hi माँ को पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिए माँ मेरे ऊपर आ गयी पहले की तरह उनकी छूट लुंड के ऊपर आ गयी... और उनके होंठो को चूसने लगा नीचे हाथ लेजाकर मैंने अपने लुंड को पकड़ा और माँ की छूट के होंठों से घिसने लगा... थोड़ी देर बाद हमारे होंठ अलग हुए तो माँ ने मेरे लुंड से मेरा हाथ हटा दिया और खुद लुंड को पकड़ लिया...
माँ- लल्ला क्या लुंड है तेरा रे... जब पहली बार मैंने देखा था न तबसे hi मुझे पता था ज़्यादा दिन मैं रोक नहीं पाऊँगी खुद को... और आज देख तेरी माँ खुले आसमान में तेरे लुंड के ऊपर नंगी बैठी है...
और ये कहते hi माँ ने मेरे लुंड को अपनी छूट पर सेट किया और बैठ gayi...mera लुंड सरसराता हुआ एक बार फिर से मेरी माँ की छूट में समां गया...
हम दोनों माँ बेटों के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल गयी...
में- ahhhhhhhhhh माआआआआ ऐसे हीईई बैठी रहो तुम मेरे लोडे पर हमेशा... और अपनी छूट को मेरे लुंड पर पटकती रहो...
बोलते हुए मैंने माँ के दोनों पतीले जैसे चूतड़ों को थम लिए और नीचे से धक्का मर कर खछः से लुंड को जड़ तक माँ की छूट में थोऊणस दिया...
माँ- है दय्या नासपीटे... जान hi ले लेगा तू मेरी अपने इस मुसल se...maa की छूट hi फाड़ देगा... अपने हथियार से
में- क्या करूँ माँ तुम्हारी छूवूँत है hi इतनी मस्त.. मन करता है लुंड जड़ तक घुसके पेलता रहूं...
माँ धीरे धीरे मेरे लुंड पर उछलने लगी और मैं माँ के मस्त गदराये चूतड़ों को मसलता हुआ माँ को लुंड पर उछलने लगा...
मैंने अपना चेहरा आगे किया और माँ की एक झूलती हुई छुच्छी को मुँह में भर लिए और चूसने लगा.. की तभी अचानक से हमारे उलटे हाथ की तरफ से एक आवाज़ हुई तो मैंने और माँ ने चौंक कर देखा.. तो हमारा छोटा बैल (वही बैल जिसने अपनी hi माँ को छोड़ा था जहाँ से ये सब शुरू हुआ था, याद न आने पर शुरू की उपदटेस देखें) वो अपने खूंटे से खुल गया था... उसदिन मैंने उसकी और उसकी माँ की चुदाई देखि थी तो आज वो मेरी और मेरी माँ की चुदाई देख कर बहक गया और खुल गया... मुझे याद है जब ये पैदा हुआ था तब मैंने इसका नाम रखा था सफेदा.. क्यूंकि ये पूरा सफ़ेद tha..tabse इसे सब सफेदा hi बुलाते थे..
मैंने और माँ ने रहत की सांस ली.. मैंने सफेदा बैल की और देखा तो वो खुलकर साइड में पड़े चारे को खाने लगा... मुझे और माँ को चारे की इस समय बिलकुल भी फ़िक़र नहीं थी तो उसे खता छोड़कर हम दोनों फिर से चुदाई में लग गए..
माँ की उछलने की गति पहले से काफी तेज़ हो गयी थी और वो छूट को मेरे लुंड पर पटक पटक कर मार रही thi..main भी अपने चूतड़ों को उठाकर मादरचोद बनने का सुख ले रहा था.. तभी देखा की सफेदा अब हमारी खत के बगल में खड़ा था और हम दोनों को चुदाई करते हुए देख रहा था... शायद माँ बेटे का ऐसा मिलान ये भी देखकर नज़रें नहीं हटा पा रहा था...
सफेदा बिलकुल सीधा बैल था और बचपन से hi हम सब ने उसे पाला था चारा खिलाया था तो उससे डरने की कोई ज़रुरत नहीं थी... तो मैं और माँ अपनी चुदाई में लगे रहे...
फिर अचानक से सफेदा को न जाने क्या सूझा वो खत के बिलकुल बगल खड़े हो गया और अपना चेहरा आगे बढाकर अपनी लम्बी सी जीभ निकली और माँ की पीठ को चाटने लगा.... ये कुछ नया तो नहीं था क्योंकि वो ऐसे hi जब भी हमें से कोई उसके पास होता था तो वो चाटने लगता था. . पर जिस तरह की हालत में मैं और माँ थे उस हालत में उसका यूँ चेतना बेहद अलग पर साथ hi कामुक लग रहा था....
माँ- आइए नासपीटे सफेदा... हत्तत्त गुदगुदी कर रहा है मुझे...
मैं हँसते हुए बोलै- क्यों हटा रही हो माँ तुम हो hi इतनी कामुक के ये भी तुम्हे नंगा देखकर रोक नहीं पाया खुद को...
माँ- अरे कैसी खुरदरी सी जीभ है इसकी गुदगुदी हो रही है...
मैं लगातार नीचे से माँ की ओखली में अपना मुसल पेल रहा था... हम बातों में लगे थे की सफेदा माँ की पीठ पर नीचे की तरफ चाटने लगा.... और कुछ पल बाद उसकी जीभ माँ के चूतड़ों पर थी ..
सफेदा की जीभ का माँ के चूतड़ों पर एहसास होते hi माँ कराहने लगी....
माँ- हाय लल्ला... ये देख तेरा सफेदा तेरी माँ के चूतड़ों को chaaaaaaaaaaaat रहा है...
माँ और उत्तेजित होने लगी और हो भी क्यों न दृश्य hi कुछ ऐसा था छूट में बेटे का लुंड और चूतड़ों पर एक बैल की जीभ... मैं भी अपनी माँ के चूतड़ों पर एक बैल की जीभ चलती देखकर बेहद उत्तेजित हो रहा था...
मैंने माँ को अपनी तरफ झुका दिया और सीने से लगा लिए... जिससे माँ के चूतड़ और उभर कर खुल गए और माँ को ऐसे hi थामकर मैं नीचे से उन्हें छोड़ने लगा... उधर सफेदा लगातार माँ के चूतड़ों पर अपनी जीभ फिरा रहा था...
मुझे आज की शाम पर यकीन नहीं हो रहा था.. मैंने अपनी माँ को यूँ खुले आसमान में नंगा करके छोड़ा और अब एक जानवर माँ के चूतड़ों को चाट रहा था जबकि मैं माँ की छूट को सटासट छोड़ रहा था... सफेदा की खुरदरी जीभ माँ के गद्देदार चूतड़ों की कोमल त्वचा पर पड़ती तो माँ सिहर उठती और अब तो माँ को भी उसकी जीभ का एहसास ाचा लगने लगा था क्यूंकि माँ अब सफेदा को हटाने की कोशिश भी नहीं कर रही थी.... सफेदा की जीभ कभी कभी मेरे गोलियों और लुंड पर पड़ती तो मुझे भी गुदगुदी का एहसास होता..
सफेदा ने थोड़ी सी hi देर में माँ के दोनों पटेलों को चाट चाटकर गीला कर दिया था इतना गीला की दोनों चाँद की रौशनी में खूब चमक रहे थे... सफेदा की लार से माँ के चूतड़ इतने गीले हो गए थे की चूतड़ों पर चाँद का प्रतिबिम्ब भी दिख रहा था...
मैं ये सब देखकर देख कर बेहद उत्तेजित होता जा रहा था और उतनी hi तेजी से माँ को छोड़ रहा था.... और माँ तो मेरे सीने में सर छुपा कर इस असीम आनंद का मज़ा ले रही थी....
तभी अचानक से माँ ने सर उठाया और आअह्ह्ह्हह की एक चीख उनके मुँह से निकल गयी...
में-. क्या हुआए मा,
माँ- हाय डययययययआआ लललललाहा आअह्ह्ह अह्ह्ह्हह सफेदा... सफेदा ने अपनी जीभ.....
माँ बस इतना hi बोल पाई मैंने सर आगे कर के देखा तो पाया बदमाश सफेदा अपनी जीभ नुकीली करके माँ की गांड के कैसे हुए छेड़ में घुसेड़ रहा है... और क्यूंकि जानवरो की जीभ इंसानो से ज़्यादा ताकतवर होती है तो वो थोड़ा कामयाब भी हो रहा था...
सफेदा की एक इंच जीभ माँ की गांड में अंदर बहार हो रही थी.... जबकि उसकी लार मेरी गोलियों और जांघो पर गिर रहा था...
माँ तो इस दोहरे हमले से पागल सी होती जा रही थी... और सफेदा साला कितना भाग्यशाली था जो माँ की गांड चाट रहा था... न जाने कितने hi लुंड माँ की गांड देखकर चड्डी में hi पानी छोड़ देते हैं... जिस गांड के पीछे गाओं के कितने लोग पागल हैं वो गांड आज एक बैल चाट रहा है...
उधर मुझे ये भी अलग एहसास हो रहा था की मैं माँ को छोड़ रहा हूँ और एक जाणवत मेरे सामने मेरी माँ की गांड चाट रहा है और न मैं और न hi माँ उसे रोक रहे हैं...
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न छहःछहुड़ड़ कर्माआआआ आईसीई हीईईई...... सफेदा आए आए आ chaaaaaaaaaaaat मेरी गांड...
साला सफेदा मेरे से भी आगे निकला अपनी माँ को तो छोड़ा hi मेरी माँ की गांड भी चाट ली... और अब तक दो इंच तक जीभ माँ की गांड में घुसेड़ने में कामयाब हो चूका था....
में- आअह्ह्ह मा कैसाअअअअअ लग रहा हैई सफेदा से गांड चटवा कररररर..
माँ- तू खुड़ड़ड़ड़ड़ड़ hi देख betaaaaaaaaaaaaahhhh टेरिइइइइ माआआ की गांड एक बैलललल chaaaaaaaaaaaat रहा है.... आह्ह्हह्ह्ह्ह... कितनी चुड़क्कड़ माआ है रे teriiiiiiiiiii...
में- हाँ मा मेरी माआआआआ बहुत बड़ी चुड़क्कड़ है hi दुनियाआ के सामने संस्कारी बनती है पर देखो असली रुप यहाँ बाघ मेंननननन नंगी होकर अपने बेटीएई से चुद रही है और बैल से गड्ड्ढड चटवा रही हैईईई...
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न छहःछहुड़ड़ कर्माआआआ sahuiiiiiiiiii बोललललललल राहाआआ है टूउउउउनेईई.... Teriiiiiiiiiii माआ छुडाआसस्सससीईईई हैईईईई... टेरीए लुंडडडड की भुखीय है...
और फिर मा का जिस्म थरथराने लगा, उधर सफेदा ने भी अपनी जीभ थोड़ी और अंदर धकेल दी थी माँ की गांड में जिसके प्रहार को माँ नहीं सह पाई और अपने शिखर पर पहुँच गई....
माँ मुझसे कसके चिपक गयी... मैंने भी माँ को बाहों में जकड लिए... माँ की गांड ने सफेदा की जीभ को जकड लिया और छूट ने मेरे लुंड को....
माँ का पूरा शरीर काँप रहा था, और फिर मुझे अपने लुंड पर माँ की छूट का रास बहता हुआ महसूस हुआ माँ मेरे और एक बैल की वजह से झाड़ रही थी.. ये सुनंने में hi जितना अजीब लग रहा था उतना hi कामुक भी था.... ऐसा दृश्य न किसी ने सोचा होगा और न hi देखा होगा...
माँ की छूट का रास बहता हुआ मेरे लुंड के किनारे होकर मेरे तत्तो और जांघो पर सफेदा की टपकी हुई लार में घुल रहा था... माँ झाड़ कर शांत हो गयी पर मैं और सफेदा नहीं हुए... मैं लगातार माँ की छूट को कूट रहा था वहीं सफेदा अभी भी माँ की गांड में जीभ घुसाए था... थोड़ा शांत होनेपर माँ ने मुझे रुकने का इशारा किया जिसे पाकर मैं रुक गया और माँ भी मेरे ऊपर से लुढ़क कर साइड में लेट गयी... जिससे मेरा लुंड माँ की छूट से... और सफेदा की जीभ माँ की गांड से निकल गयी... माँ के हटते hi मैं उठा और सफेदा को पकड़ा और बांधने लेजाना लगा उसके खूंटे के पास पहुँच कर मैंने रस्सी उठाई की तभी मेरे दिमाग में न जाने क्या सूझा मैं उसे उसकी माँ के पास ले गया और छोड़ दिया... सफेदा ने अपनी माँ की छूट को एक आध बार सूंघा और फिर अगले hi पल उसके पीछे चढ़ गया और अपना लुंड अपनी माँ की छूट में पेल दिया...
अब वहां एक नहीं दो दो माँ चूड़ी थी... और दो दो बेटे मादरचोद बन रहे थे... खैर उन दोनों को छोड़कर मैं बापिस खत की तरफ मुदा तो देखा माँ अभी भी वैसे hi टाँगे फैलाये खत पर पड़ी हुई थी...
पर माँ की नज़र मुझ पर थी और होंठो पर एक कामुक मुस्कान थी.. मैं जल्दी से कदम बढाकर खत के पास पंहुचा और माँ के पैरों को पकड़ कर अपनी तरफ घुमा लिया और उनके पैरो के बीच आ गया... और उनके पैरों को पीछे उनके कंधे की तरफ कर दिया जिससे माँ की छूट और खुल गयी मेरे सामने...
मैंने अपने सख्त लुंड को एक बार फिर से पकड़ा और माँ की छूट पर लुंड के टोपे को रखा और ऊपर नीचे घिसने लगा... माँ मेरी आँखों में hi देख रही थी और बड़ी कातिल मुस्कान के साथ मुझसे बोली- अपनी माँ को तड़पा रहा है...
Me-nahi माँ तड़प तो मैं रहा हूँ...
और ये कहकर मैं लुंड के टोपे को छूट के ऊपर तक छूट के डेन तक ले गया और फिर नीचे की तरफ घिसते हुए लेन लगा... लुंड का टोपा माँ की छूट के होंठों को छेड़ता हुआ नीचे सरकता गया और सीधा जाकर माँ की कासी हुई गांड के छेड़ पर रुक गया... और माँ कुछ बोलती या समझ पति उससे पहले मैंने एक धक्का लगाया और सफेदा की गांड चटाई की वजह से माँ की गांड चिकनी थी तो मेरे लुंड का टोपा गुप्प से माँ की गांड में घुस गया.... और मैं वहीं रुक गया..
Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh लललललाहा... ओह्ह्ह्हह्ह ohhhhhhhhhh बेटा गानन्द में दाल दिया...
में- क्या करू माँ तुम्हारी गांड hi ऐसी है... न जाने कबसे सोचा था तुम्हारी बड़ी सी गोल मटोल गांड में अपना लुंड घुसेड़ने का...
माँ- अह्ह्ह अपनी माँ की छूट छोड़ के मन नहीं भरा तेरा जो अब गांड भी चाहिए....
में- माँ जब मादरचोद बना हु तो अचे से बनूँगा न कुछ भी क्यों रहने दूँ....
मैं अब भी वैसे hi रुका हुआ था मेरा लुंड ऐसे hi माँ की गांड में फंसा हुआ था न माँ हिलरहि थी न मैं...
माँ- तो सरे छेड़ चाहिए तुझेइवे तेरी माँ के...
में- हैं माँ अपने घर में आगे पीछे सरे दरवाज़ों से आ जा सकते hain...aur तुम मेरे लुंड का और मेरा घर हो...
Maa-apani माँ का आखिरी छेड़ भी तू अपना मुसल डालकर छोड़ना चाहता है... माँ का सबसे निजी और कामुक छेड़ को छोड़ना चाहता है तू..
में- आअह्ह्ह हाँ मा चाहता हूँ मैं तुम्हारी गांड के कैसे हुए छेड़ को अपने लुंड से छोड़ छोड़ कर अपने रास से भर देना चाहता हूँ...
माँ- मेरी गांड को रास से भरेगा जिसे अभी एक बैल ने अपनी जीभ घुसा घुसा कर छठा है... बोल अपनी माँ की गांड को मरेगा तू...
में- हाँ माँ तुम्हारी इस कासी हुई गोल मटोल गांड को मार मार के फैला दूंगा मैं... तुम्हारे ये बड़े बड़े चूतड़ों के बीच अपना लुंड जड़ तक गाड़ कर मरूंगा....
माँ ऐसी कामुक और अश्लील बातें करके खुद भी उत्तेजित हो रही थी और मुझे भी कर रही थी...
माँ- तो आजा मेरे लाल मेरे खसम... घुस जा मेरी गांड में... दाल दे अपना मुसल मेरी गांड में और मिटा दे इसकी khujliiiiiiiiiiiii आआआहहहहहहह आआआहहहहहहह डययययययआआ reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ..
माँ अपनी बात पूरी कर पति उससे पहले hi मैंने एक करारा धक्का लगा दिया और लुंड खछः से तीन इंच माँ की गांड में घुस गया.... इसके बाद ऐसे hi बिना रुके दो तीन धक्के लगातार लगाके लुंड को जड़ तक अपनी माँ की गांड में ठूंस दिया...
आह्ह्ह्हह क्या गरम एहसास था... मेरा पूरा लुंड माँ की गांड में था मेरा पूरा शरीर मनो सुन्न पद गया था सिर्फ लुंड में hi जान थी ... ऐसा लग रहा था मनो मेरा लुंड गरम माखन की मटकी में फंसा हुआ है माँ की गांड हर तरफ से मेरे लुंड पर कासी हुई थी और मेरे लुंड को निचोड़ रही थी...... मैं आँखें बंद करके इस एहसास का मज़ा ले रहा था... उधर सफेदा अपनी माँ की चुदाई में व्यस्त था वहीं उसकी माँ भी अपने बेटे के लुंड के पूरे मज़े ले रही थी...
अपनी माँ के साथ चुदाई करना, उसकी छूट मरना, या छूट में झड़ना बेहद सुखद अनुभव होता है पर अपनी माँ की गांड में अपना लुंड डालना उससे भी कहीं अधिक है या कहें इसकी कोई बराबरी hi नहीं की जा सकती.... मेरा लुंड माँ की गांड में पहले से ज़्यादा फूल गया था...
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh है डययययययआआ लललललाहा meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd चीर्डी तूंबीएए....
में- बस माआआ अब्बब्बब्ब टूवू पूवूराआ अंदर हैईईईई...
माँ- नासपीटे पूरा लेने में गड्ड्ढड फट्ट्ट्ट gayiiiiiiiiii हैईईईई... इतनाआए badaaaaaaaaaa मुसल्ल है तेरा...
में- माँ पापा भी तो मरते हैं तुम्हारी गांड फिर इतना दर्द क्यों..
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh तेरा लुंड देख तेरे बाप से भी मोटा और लम्बा है... जब तेरी पापा ने पहली बार मरी थी तब भी तकलीफ हुई थी... और आज तूने मेरी गांड को और खोललललल दिया है....
मुझे ख़ुशी हो रही थी की माँ अब मुझसे खुल कर बात कर रही है और खुले क्यों न मैंने उनकी गांड को जो खोल दिया था...
मैंने अब धीरे धीरे अपनी कमर हिलना चालू कर दिया और लुंड को माँ की गांड में अंदर बहार करने लगा....
Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह betaaaaaaaaaaaaahhhh मर अपनी माँ की गड्ड्ढड अब्बब्बब्ब तेज़ तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़...
मैं भी माँ को समझ नहीं प् रहा था कभी दर्द से चिल्ला रही थी तो अभी बोल रही है तेज़ मार पर मुझे तो जो चाहिए वो मिल गया था... मैंने अपने पेअर को खत पर रखा और माँ की एक छुच्छी पर हाथ रखा और माँ की गांड में धक्के लगाने लगा... माँ इतनी छुडासी हो चुकी थी की अपनी छूट को अपनी उँगलियों से रगड़ने लगी अपने बेटे से गांड मरवाते हुए...

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh मेरे खसम और तेज़ मार अपनी माँ की गांड आह्ह्ह्हह क्या लुंड है रे तेरा.. बेदर्दी.... यकीीीेनननननन nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii होताहा तुझे इसीइइइइइइइ choooooooooot से निकला है.... रे अब yahjiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee लुंडडडड से bharrrrrrrrrrr जाटीईईईई haiiiiiiiiiii..
में- आअह्ह्ह मा मख्खन जैसी gaaaaamnnddddddddddd है तुम्हारी.... मेरी छुडासी माआ... लुंड की भुखीय माँ... गंडमारी मा...
मैं माँ की गांड में तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए बोले जा रहा था..
माँ- हैं betaaaaaaaaaaaaahhhh आज टुनीईईई मुझीीीी अपणीइइइइइइ माआआआआ कूऊऊ पुरीई तरह khollllllllllllll दियाआआआ अपनीईवीई साअम्ने...... जब टेरीए बाआप ने meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd पहली बहार मारी थी tabseeeeeeeeee hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii aisaaaaaaaaaaaaa कोइइइइइइइ दिन नहीं गयाए जब मैंने choooooooooot मरवाई हो और गांड नहीं.....
में- माँ तुम्हे गड्ड्ढड मरवाना इतना पसंद है क्या... तभी तो इतनीईई बडीइइइइ कर्लीयई है मरवा मरवा कर... जब गाओं में निकलती हो तो सरे गाओं मर्द इसी पर नज़र गदा कर रखते हैं...
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh नासपीटे वो तो नज़र गाड़ते हैं तूने तो अपना खूंटा hi गाड़ रखा है मेरी गांड में... और हाँ betaaaaaaaaaaaaahhhh मुझे गड्ड्ढड मरवाना बहुत पसंद है.... कभी कभी तो मैं छूट मरवाती hi नहीं sirfffffffffffff गांड hi marwaaaaaaaaaaaa के सो jatiiiiiiiiiiii हुन्न्न...
मैंने माँ की गांड मारते हुए उनका सीधा पेअर एक तरफ कर दिया और उन्हें साइड की और लिटा कर उनकी कमर पकड़ कर उनकी गांड मरने लगा...

माँ अपनी गांड मरवाते हुए लगातार मेरी आँखों में देखे जा रही थी... साथ hi चेहरे पर एक सुकून की मुस्कराहट थी...
और मैं, मैं तो दुनिया में सबसे ज़्यादा खुश था... अपनी माँ को छोड़ने के बाद उनकी ऐसी मस्त मखमली गांड मार रहा था इससे ज़्यादा ख़ुशी किसे मिल सकती है....
माँ- है डययययययआआ लललललाहा कीटनाआआ masstttttttttttttttttt है तेराआआआ लोड़ाआआ आह्ह्ह्हह माआआ....
में- मा अब तुमममममम बिनाआआ गंडड मरवाये नहीं सौगी.... रोज़ तुम्हारी छूट और गांड मरूंगा......
माँ- हैं betaaaaaaaaaaaaahhhh रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ अपनीई माआआआ को छौऊड़नाआए रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ अपने िस्स्सस्स moosalllllllllll पे झाडनाआआआआ मुझी...
में- माआआ रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ गांड मरवाओगी अपनी बेटी से???
माँ- हैं लललललाहा रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ गड्ड्ढड मरवाआओंगीई तुझसे.... रोज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़
में- meraaaaaaaaaa लुंड लोगी अपणीइइइइइइइ कासी huiiiiiiiiii गंडड में......
माँ- हैं तेरे िस्स्सस्स moosalllllllllll को अपनी gaaaaamnnddddddddddd में घुसा के रखूंगी......
मैंने दो तीन तगड़े झटके माँ की गांड में मरे... फिर...
Me-maaa मुझे तुम्हे कुटिया बना कर तुम्हारी गांड मारनी है....
माँ अगले hi पल घूम कर अपने घुटनो पर और हाथो पर झुक कर कुटिया बन गयी पर माँ ने मेरे लुंड को अपनी गांड से नहीं निकलने दिया...
माँ- ले बेटा मार अपनी कुटिया माँ की गांड.... मार betaaaaaaaaaaaaahhhh
मैंने भी माँ की कमर को पकड़ा और सटासट माँ की गांड में लुंड पेलने लगा... माँ के बड़े बड़े पतीले जैसे गद्देदार चूतड़ मेरी जांघों से टकरा कर थप थप थप थप थप की आवाज़ कर रहे थे और हर वार के साथ लहरा रहे थे..

Me-lo meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii kutttttttttttiyyyyyaaaaaa चुड़क्कड़ माआआ... अपनेवे बेटी का लुंडडडड gaaaaamnnddddddddddd में..... आहाज मैं तुम्हारी गांड की सरीई भुख मिटाआआआ डूंगाआआआ
Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii लल्ला....
में- meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मायआ, संस्कारी पतिव्रता मा... कशह्ह्हह्ह्ह्ह गाओं वाले देख पाते की कैसे ये संस्क्रीइइइइइ माआआ अपनी बेटे के से
गांड मरवा रही है...
माँ- हैं betaaaaaaaaaaaaahhhh teriiiiiiiiiii संसकाआअहारीइइइइइइइ पतिव्रता मा...... अपने hi बेटे के सामने नंगी होकर kutiyaaaaaaaaaaa बन कर अपणीइइइइइइइ gaaaaamnnddddddddddd मरवाहा rahiiiiiiiiiiiii हैईईईई अपने बेटी से...
माँ इन अश्लील और गन्दी बातों से खुद भी गरम होती जा रही थी.... और ये आसान भी उतना hi कामुक था एक माँ अपने hi बेटे के सामने नंगी होकर कुटिया बानी हुई अपनी गांड परोस रही थी और उसका बीटा भी अपनी माँ की परोसी हुई गानन्द की धज्जियाँ उदा रहा था अपने मोठे लोडे से...
उधर सफेदा भी पीछे से अपनी माँ पर चढ़ा हुआ था और इधर मैं अपनी माँ पर... दोनों माँ आगे झुककर अपने अपने छेदों को अपने बेटों के लुंड पर मार रही थी...
इस आसान में मुझे अपना लुंड माँ के दोनों पपीता के बीच आता जाता हुआ बेहद ाचा लग रहा था.... जिससे मेरी गति और झटके और तगड़े होते जा रहे थे.......
में- आअह्ह्ह मा बहुत मज़ा आ रहा है.... Meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii kutttttttttttiyyyyyaaaaaa चुड़क्कड़ माआआ......
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh है डययययययआआ लललललाहा meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd टेरीए लिए hi haiiiiiiiiiii ले लेईईई mazaaaaaaaaaaa...
ऐसे hi थोड़ी देर कसकर मैं माँ की गांड मारता रहा....
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेटा तूंबीए तो कुटिया की सवारी कर ली... अब मुझे भी घोड़े की सवारी करनी है.....
मैं माँ की बात समझ गया और धीरे से लुंड माँ की गांड से निकल लिए लुंड सरसराता हुआ बहार आ गया माँ की गांड का छेड़ थोड़ा खुला रहा और फिर बंद होने लगा...
माँ भी कुटिआ के आसान से हैट कर साइड हो गयी और मेरे लिए जगह बनाई खाट पर... मैं खत पर लेट गया माँ ने अपने दोनों पेअर मेरे कमर के एक एक तरफ करके रखे और फिर नीचे होकर लुंड को पकड़ा और अपनी गांड पर लगाया और नीचे होने लगी...
मेरा लुंड एक बार फिर से माँ की गांड में घुसने लगा... माँ की गांड के छेड़ का छल्ला मेरे लुंड पर कास गया और फिर धीरे धीरे लुंड उसमे समता चला गया.....
और अंत में माँ पूरी तरह से मेरे ऊपर बैठ गयी उनके चूतड़ मेरी जांघों से टकरा गए और मेरा लुंड जड़ तक उनकी गांड में समां गया....
Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh तेरा लुंड हर बार दर्द देता है re....par इस घोड़े की सवारी करनी है तो दर्द तो सहना पड़ेगा......
Me-aaahhh मा तुम्हे लोडे मेरा मतलब है घोड़े की सवारी करना बहुत पसंद है लगता है.....
Maa-haan बेटा मुझे लोढ़ा और घोडा दोनों की सवारी करना बहुत पसंद है... अब तू बातें काम कर और मुझे सवारी करवा...
मैंने माँ की कमर को पकड़ लिया और नीचे से धक्के लगाने लगा... मेरा लुंड माँ की गांड में अंदर बहार होने लगा...

मेरे लुंड को एक बार फिर से वही माँ की गांड की गर्मी के एहसास ने घेर लिया...
माँ की गांड के छहले से मेरा लुंड अंदर बहार होता हुआ बेहद कामुक लग रहा था...
माँ की गांड जैसे hi मेरा लुंड अंदर जाता अपने बेटे को प्यार जताने के लिए जकड लेती.... और जैसे hi बहार आता तो जुदाई में सिकुड़ने लगती...
मैंने कई गांड मारी हैं पर सच कहूं तो अपनी माँ की गांड में लुंड घुसेड़ने जैसा एहसास कहीं भी नहीं है....
सफेदा की लार से चमक रहे दोनों चूतड़ों के बीच मेरा लुंड जैसे रेलगाड़ी की तरह अंदर बहार हो रहा था...... उधर सफेदा अब तेज़ी से हुंकारें भरता हुआ अपनी माँ को ताबड़तोड़ छोड़ रहा था...
इधर माँ मेरे लोडे की सवारी कर रही थी.....
मैं बस यही प्रार्थना कर रहा था की ये रात कभी ख़तम न हो क्यूंकि आज की रात मुझे वो मिला है जो बहुत काम लोगो को नसीब होता है.. बस ये सब यूँ hi चलता रहे और माँ मेरा लुंड अपनी गांड में लिए यूँ hi लुंड की सवारी करती रहे
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh कर्माआआआ मेरे लाल और तेज़ बहुत मस्त है तेरा hathiyar....aahhh और तेज़ मार अपनी माँ की गड्ड्ढड...
माँ की बात सुनकर मैंने अपना पूरा ध्यान माँ की गांड की सेवा में लगा दिया और तूफानी धक्के लगाने लगा...

Me-hmmmmmmmmmmmmmmm आअह्हह्ह्ह्ह लो मा मेरी चुड्ड्ढाआआककककएअड़ड़ड़ड़ड़ड़ गड्ड्मरिइइइइइइ माआआआ लो अपनी बेटीईई कहा लुंडडडड....
मेरे धक्के इतनी तेज़ हो गए की मेरी जांघों और माँ के चूतड़ों के टकराने की आवाज़ टेबल की धुन की तरह पूरे बाघ में गूँज रही थिई.... मेरी हर थाप के साथ माँ के चूतड़ समुद्र में आई पानी की लहरों की तरह अपनी hi थाप पर थिरक रहे थे...
चाँद भी माँ के दो चमकते हुए तबलों का मधुर संगीत और थिरकन का आनंद उठा रहा था...
मेरे लुंड को जो मज़ा मिल रहा था वो तो अकल्पनीय था... माँ की कासी हुई मखमली गरम गांड में बार बार अंदर बहार होने का सुख सबसे निराला था... ाचा हुआ था जो मैं पहले कई बार झाड़ चूका था क्यूंकि मैं ज़्यादा से ज़्यादा इस आनंद का अनुभव करना चाहता था... मुझे तो लग रहा था की अगर मरीन कितनी बार भी क्यों न झाड़ जॉन माँ की गांड के सामने लुंड बैठेगा hi नहीं....
जहाँ मैं तेज़ तेज़ धक्कों के माँ की गांड का बाजा बजा रहा था.. वहीं मुझे ऐसा एहसास हो रहा था की सब कुछ बहुत धीरे धीरे हो रहा है जैसे किसी फिल्म में स्लो मोशन में होता है... उसी तरह मेरा लुंड माँ की गांड के अंदर बहार हो रहा था माँ के चूतड़ स्लो मोशन में लहार रहे थे... हवा, पेड़ पौधे सब स्लो हो गए थे..

और मैं एक सपने में खोया सा माँ की गांड मारने में लगा हुआ था.... मेरे मन में जितना hi धीरे धीरे मैं धक्के लगा रहा था पर सच में मेरे धक्के उतने hi तेज़ थे...
माँ भी आँखें बंद करके अपने बेटे से गांड मरवाने का आनंद ले रही थी... मेरे हाथ कभी माँ की कमर को थमते तो कभी उनकी छूछीयो को... तो कभी मस्त थिरकते चूतड़ों को....
मैंने फिर मा की पीठ पर हाथ लेजाकर उन्हें अपने ऊपर झुका लिए और अपने आप से कसकर चिपका लिए... और धक्कों की गति को और बढ़ा दिया....
माँ- अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii लल्ला आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm....
माँ मेरे झटके के साथ आहें भर्ती हुई मुझे उकसा रही थी... मैं लगातार उसी गति से गांड मरे जा रहा था की मुझे अचानक से महसूस हुआ की मेरा रास मेरे लुंड में एक बार फिर से भरने जा रहा है है... इसका मतलब मैं झड़ने के करीब हूँ... पर मैं अभी झड़ना नहीं चाहता था... मैं इस माँ बेटे के मिलान को जितना हो सके उतना लम्बा करना चाहता था.... तो मैंने न चाहते हुए भी किसी तरह खुद पर काबू करके अपने धक्के धीमे किये और रुक गया... ध्यान भटकने के लिए मैंने नज़र घुमा कर देखा तो सफेदा और उसकी माँ की चुदाई ख़त्म हो चुकी थी और अब दोनों साथ में बैठे सुस्ता रहे थे...... दोनों माँ बेटे चुदाई करके आराम कर रहे थे..
... माँ को लगा की मैंने असं बदलने के लिए रुका हूँ तो माँ जल्दी से लुंड पर बैठे बैठे hi घूम गयी और अब माँ की पीठ मेरी तरफ जबकि मुँह पैरों की तरफ हो गया था...
मेरा लुंड अब भी जड़ तक माँ की गांड में घुसा हुआ था बस फ़र्क़ सिर्फ इतना था की अभी उनके बड़े बड़े टेबल मेरे सामने थे... मैंने अपने लुंड को थोड़ी देर के लिए और काबू में कर लिए....
वहीं माँ ने धीरे धीरे लुंड पर ऊपर नीचे होना शुरू किआ.. मैं माँ को और उत्तेजित करना चाहता था... तो मैंने अपना हाथ माँ की कमर से घूमते हुए आगे लेजाकर उनकी छूट पर रख दिया... और छूट को सहलाने लगा... माँ धीरे धीरे मेरे ऊपर उछाल कर अपनी गांड मरवा रही थी साथ hi मैं उनकी छूट सहला रहा था जिससे माँ को दोहरा मज़ा मिल रहा है था...

माँ की मोती मोती जाँघे मेरी जांघों से टकरा रही थी... वहीं उनके रसीले पापीती भी उनके सीने पर उछाल कूद कर रहे थे..
इस आसान में माँ का सामने जा पूरा शरीर चाँद की रौशनी में चमक रहा था... जो इस दृश्य को और कामुक बना रहा था की एक संस्कारी घरेलु आदर्शवादी पतिव्रता पत्नी खुले आसमान के निचे पेड़ पौधों और जानवरो के बीच नंगी होकर अपनी hi कोख से जन्मे अपने बेटे के लुंड पर अपनी गांड पटक रही है...
Maa-haaaan कर्मा ऐसे hi छहद माँ की छूट को अह्ह्ह्ह तेरे हाथों और लोडे में तो जादू है re..ahhhhhhhhh...
में- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मा जड़ऊ तो तुम्हारी गांड और छूट में है... की एक बार देखलो तो लुंड बैठता hi नहीं है...
माँ- हाय लल्ला कौन चाहता है बैठे teraaaaaaaaaaaahhhhhh लुंडडडड meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd में दाल कररररर चूड्डड्डड़स्टआआ रह जब खड़ा हो टूवू..
में- मैं तो छोड़ता रहूँगा हमेशा माँ कभी तुम्हारी छूट और gaaaaannddddddddddd को सूना नहीं होने दूंगा...
मैंने माँ की छूट में एक उंगली डालते हुए कहा और अंदर बहार करने लगा...
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh मेरी लाललललललललल ओह्ह्ह्हह्हह कर्माआ बेताआए... अब. तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ मार...
मैंने माँ की इच्छा को सुना और उनकी चुत से उंगलियां निकल ली और कमर पकड़ कर नीचे से तगड़े धक्के लगा लगा कर.. गांड में लुंड पेलने लगा...
गांड मरते हुए मेरे हाथ माँ की कमर से सरकते हुए चाँद की रौशनी में चमक रही माँ की छूछीयो पर पहुँच गए और मैं उन्हें मसलने लगा...

मेरा लुंड माँ की गांड में पिस्टन की तरह अंदर बहार हो रहा था.. और मेरी गति अपने आप बढाती जा रही थी...
माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेटा मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार मार माँ की गांड.....
माँ हर झटके के साथ मुझे और उकसा रही थी और मैं भी हर पल के साथ उत्तेजित होता जा रहा था मेरी उंगलियां माँ की छूछीयो में गड कर उन्हें मसलरहि थी... वहीं माँ के टेबल मेरे साथ मेरी हर थप पर थिरक रहे थे...
मुझे फिर से अपना रास अपनी गोलियों से लुंड की और बहता हुआ महसूस हो रहा था पर मैं छह कर रुकने की जगह मेरे धक्के और तेज़ होते जा रहे थे... ऐसा लग रहा था जैसे मेरी कमर एक महीने बन गयी है जो खछ खछः माँ की गांड में चलती जा रही है...
मेरे धक्के इतने तूफानी हो गए देखते hi देखते की माँ की हालत भी ख़राब होने लगी...
Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh betaaaaaaaaaaaaahhhh फायडडड डीएई माआआ कईईईई gaaaaamnnddddddddddd aaaahhhhhhhhhhhhh डययययययआआ reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh हैंण्ण्ण्न छहःछहुड़ड़ कर्माआआआ......
मैं कुछ बोल नहीं प् रहा था क्यूंकि मेरी जगह मेरा लुंड बोल रहा था... और क्या बातें कर रहा था वो माँ की गांड से...

लुंड का वार जड़ तक माँ की गांड में लगता और फिर बापिस बहार आता और बापिस और ताकत के साथ जड़ तक माँ की गांड में समां जाता...
में- uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh हमंमंमं माआआआआ अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह...
हर गुज़रते पल के साथ मेरी गति बढाती जा रही थी और झटके आक्रामक हो गए थे... मैंने माँ की कमर को कसकर पकड़ रखा था और दनादन लुंड उनकी गांड में पेल रहा था...
माँ- Karmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh... Lallllllllllllaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa basssssssssssss betaaaaaaaaaaaaahhhh..... मेंनननननन gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee डययययययआआ reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee...
माँ के ये लफ्ज़ कानो में पड़ते hi मेरे सरे बांध टूट गए और मैंने तीन चार जानलेवा झटके का की गांड में जड़ तक मरे और फिर जड़ तक अपने लुंड को माँ की गांड में ठूंसकर अपनी कमर को उनकी कमर से चिपका दिया और फिर मेरे लुंड ने अपनी धार छोड़नी शुरू कर दी...
वहीं माँ भी मेरे ऊपर बैठीए बैठीए काँप रही थी और झाड़ रही थी... उनकी चुत पानी छोड़ रही थी... एक बार फिर हम माँ बेटे साथ झाड़ रहे थे...
मेरा लुंड धार के बाद धार माँ की मखमली गांड में भरे जा रहा था और माँ की गांड को अपने रास से भीगता जा रहा था... वहीं माँ पीछे लुढ़क कर मेरे ऊपर गिर गयी थी और अपने स्खलन से गुज़र रही थी..
वहीं मेरे लुंड की पिचकारियां ख़त्म नहीं हो रही थी... ऐसा लग रहा था आज मेरे शरीर का सारा रास माँ की गांड में hi भर जायेगा... न जाने कितनी देर तक मैं माँ की गांड में झाड़ता रहा और फिर लुंड ने पिचकारियां छोड़नी बंद की..
काफी देर तक माँ और मैं यूँ hi लेते रहे माँ मेरे ऊपर और मैं खत के ऊपर... हम दोनों में से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी न उठने की और न hi बोलने की...
मेरा लुंड माँ की गांड में थोड़ा ढीला पद गया था... खैर थोड़ी देर बाद जब थोड़ी जान आई तो माँ उठी... धीरे से और फिर मेरे लुंड से उठने लगी जिससे लुंड सरकता हुआ माँ की गांड से पॉप की आवाज़ के साथ निकल गया और मेरे लुंड के निकलते hi मेरा रास जो मैंने माँ की गांड में छोड़ा था बहकर बहार आने लगा पर तभी जादुई शक्ति की तरह माँ का गांड का छेड़ तुरंत बंद होकर कास गया... माँ की गांड के छेड़ की कलाकारी देख मैं हैरान था..
माँ उठकर बैठी और घूमकर मेरी तरफ देखा उनके चेहरे पर संतुष्टि के भाव दिख रहे थे...
माँ ने मेरी आँखों में देखा और फिर मुस्कुराई और फिर सर झुकाया और मेरे आधे खड़े लुंड को गुप्प से मुँह में भर लिए....
मेरे मुँह से आअह्ह्ह्ह निकल गयी की माँ अपनी गांड से निकले मेरे लुंड को मुँह में लेकर चूस रही है... सच में माँ बहुत कामुक औरत हैं... कुछ दो मिनट hi माँ ने मेरे लुंड को अपने मुँह में भरकर चूसा और साफ़ कर दिया. अगर माँ थोड़ी देर और चूसती तो मेरा लुंड एक बार फिर से चुदाई के लिए खड़ा हो जाता...
माँ ने अपनी गांड और मेरे रास को चाट चाट कर मेरे लुंड को साफ़ कर दिया... मेरे मन में बस यही चल रहा था की माँ ने अपनी गांड में से निकले मेरे लुंड को कितनी सहजता से मुँह में भर कर चाट लिए.. हालाँकि बुआ पूर्वी दीदी ममी और भी सभी औरतें जिन्हे मैंने छोड़ा था सब ये करती थी पर क्यूंकि ये माँ ने किआ तो कुछ अलग था मेरे लिए... खैर ये ख़तम हुआ माँ फिर खाट से उठने लगी
माँ- बेटा अब उठ बहुत लेट हो गया है... घर चल जल्दी से तेरे पापा डांटेंगे...
में- हाँ माँ
मैं भी खत से उठा अपने कपडे ढूंढ कर पहनने लगा वहीं माँ ने भी पहले नल पर जाकर अपने हाथ मुँह धोये और फिर अपने कपडे पहनने लगी... कुछ 5 मिनट्स में hi हम लोग तैयार थे मैंने पंत में से फ़ोन निकल कर देखा तो अनुज की कई मिस्ड कॉल थी साथ hi मश्ग भी था मैंने बापिस फ़ोन किआ तो उससे बात हुई फिर वही पूछना की कहाँ हो इतनी देर कैसे लग गई.. मैंने बहाना बना दिया की बस ख़राब हो गयी थी तो इसलिए टाइम लग गया.. फिर अनुज ने कहाँ भैंस को देख लेना जो बच्चा देने वाली है अगर कुछ लगे तो पापा आ जायेंगे वहीं...
मैंने उसके बाद सफेदा को उसकी जगह पर बांध दिया और वो तो जैसे मुझे शुक्रिया कहते हुए मेरा हाथ चाटने लगा... फिर
मैंने भैंस को देखा लग तो रहा था कभी भी बच्चा दे सकती है.. माँ ने भी देखा तो माँ बोली सुबह तक हो सकता है तो हम लोग फिर घर की और निकल दिए पर उससे पहले मैंने माँ के होंठों को एक बार अचे से चूसा.. फिर हम घर चल दिए...
इसके आगे उगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट आप सबको... अपने सुझाव ज़रूर दें... आपका बहुत बहुत शुक्रिया