तै फिर भी कुछ नहीं बोली न hi कुछ ऐसा जताया की कुछ हो रहा है बस पापा से बातें किये जा रही थी मुझे उनकी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं थी... मेरी दिलचस्पी तो बस तै की बड़ी गुब्बारे जैसी छूछीयों में थी.. जिन्हे मैं खूब मसल रहा था..
अपडेट 118
इधर पापा मेरी बातों से बेखबर अपनी बातों में लगे हुए थे..
पापा- क्या कहती हो भौजी इस बार बाघ के किनारे वाले खेत में किसकी खेती की जाये मैं तो सोच रहा हूँ तरबूज कर लिए जाएं...
मंजू तै- क्यों बाबू तरबूज में ऐसा क्या फायदा..
पापा- तरबूज मुझे बहुत पसंद हैं भौजी बड़े बड़े रसीले रसीले..
में- हाँ पापा तरबूज तो मुझे भी बहुत पसंद हैं कितने बड़े होते हैं... और रसीले भी.
मैंने तै की छुच्छी को ब्लाउज के ऊपर से hi मसलते हुए और उन दोनों की बातों में शामिल होते हुए कहा..
पापा- क्या कहती हो भाभी सही रहेगा..?
मंजू तै- तरबूज भी ठीक है पर मेरी मनो तो गन्ने करलो बाबू...
पापा- गन्ने में क्या है भौजी ऐसा?
मंजू तै- हमें गणना बहुत पसंद है.. खासकर बड़े बड़े रास से भरे हुए गन्ने देखकर मन करता है पूरा चूस जाएं.. और सारा रास पि जाएं..
पापा- सच भाभी इतना पसंद है तुम्हे चूसना.... गणना..
मंजू तै- और क्या बाबू गन्ने चूसना तो हमें हमेशा से hi पसंद रहा है..
पापा- तो इस बार भाभी तुम हमारा गणना ज़रूर चूसना...
मंजू तै- बिलकुल पर एक बात है..
Papa-kya
मंजू तै- गन्ने हमें मोठे और रास भरे hi पसंद हैं...
पापा- अरे भाभी एक बार चूस कर तो देखो ज़िन्दगी भर हमारा गणना hi मांगोगी..
मेरा लुंड तो इन दोनों की बातें सुनकर लोहे का hi हो गया था समझो... ऊपर से हाथ में तै जी के तरबूज... मेरा मतलब है बड़ी बड़ी छुछियां...
मैं तो उत्तेजना में पागल सा हो गया... मेरा लुंड पंत के अंदर दर्द करने लगा था... मैं इतने जोश में आ गया की मैंने अपना हाथ तै के ब्लाउज के अंदर घुसकर उनकी नंगी छुच्छी को पकड़ लिए और मसलने लगा पर तै जी का अब भी कोई विरोध या प्रतिक्रिया नहीं थी जिससे मुझे तो जैसे खुली छूट मिल गयी...
नीचे से मेरा लुंड पंत में दर्द कर रहा था मैं खूब उसे आगे पीछे करके एडजस्ट करने की कोशिश कर रहा था पर आगे साला तै का बड़ा सा चूतड़ उसमे लगके लुंड और फड़कने लगता खैर कोई रास्ता न बचने पर मैंने रिस्क लिए और अपने चूतड़ों को सीट से थोड़ा सा उठाकर अपनी पंत की चैन को खोलने की कोशिश की और किस्मत से कामयाब भी हो गया... और फिर बापिस बैठ गया.... अब अगला पड़ाव था मुक्ति... उसकी कोशिश करने लगा पर साला बैठकर ये भी नहीं हो रहा था तो एक बार और खतरों का खिलाडी बना और फिर से चूतड़ों को सीट से थोड़ा ऊपर किआ और हाथों की पूरी कलाकारी दिखते हुए लुंड को खुली चैन से किसी तरह से बहार निकल लिए और क्यूंकि शर्ट बहार लटकी हुई थी तो लुंड धक् भी gaya...aur बापिस बैठ गया..
अह्ह्ह्हह क्या सुकून मिला और क्या सुखद एहसास था वो चलती मोटरसाइकिल पर लुंड पर जब हवा लग रही थी तो वो ठंडा ठंडा एहसास क्या सुख दे रहा tha...idhar हाथों ने अपना काम बापिस संभल लिए और तै की छूछीयो को मसलने लगे तै और पापा की बातचीत अब भी जारी थी...
तै का एक हाथ मेरी पीठ पर था और एक पापा की कमर par...ab मुझे लगने लगा था की मेरा ये सब करना तै को भी ाचा लग रहा है शायद इसीलिए मुझे रोक नहीं रही बस फिर क्या था मैं पेट से लेकर छूछीयो तक हाथों को खूब अचे से फिरने लगा साथ hi ब्लाउज के ऊपर के दो बटन भी खोल दिए जिससे तै की आधी से ज्यादा छुछियां बहार झलकने लगी.. और उसका सीधा असर मेरे लुंड पर हो रहा था मेरा लुंड फूलने लगा... उस वक़्त में इतनी कामुकता या उत्तेजना थी या शायद सुबह से न झड़ने की वजह से मुझे मेरा रास मेरे लुंड में भरता हुआ महसूस होने लगा और मैं अपना आप खोने लगा..
मैंने तै को कसकर पकड़ लिए और मेरे चूतड़ अपने आप सीट से थोड़ा सा ऊपर उठ गए जिससे मेरा नंगा लुंड तै की नंगी कमर से टकराने लगा और जिसका एहसास होते hi मेरे अंदर करंट सा दौड़ने लगा
और शायद तै को भी हुआ उन्होंने एक बार मुझे मुद कर देखा और फिर से आगे की तरफ देखने लगी...
मैंने इसे तै की सहमति समझते हुए अपनी कमर को हिलने लगा और मेरा लुंड तै के गदराये पेट पर घिसने लगा... लुंड का टोपा उनकी कमर से गगिस्ते हुए पेट के आगे के हिस्से तक जाता और फिर बापिस आता चलती बाइक पर ऐसे करने में मुझे बहुत मजा ा रहा था... मैंने लुंड को उनके पेट पर घिसने की वजह से तै को थोड़ा टाइट पकड़ लिए जिससे तै थोड़ी हिल गयी और आगे की तरफ हो गयी और उनका हाथ जो पापा की कमर पर था वो जांघ पर चला गया... जिससे पापा को भी थोड़ी हैरानी हुई और ाचा भी लगा पर वो मोटरसाइकिल चलते रहे...
तै बेचारी अपने पेट पर मेरे लुंड का घिसाव महसूस करते हुए पापा से बायत कर रही थी... मेरे लुंड के टोपे की खाल जब तै के पेट से घिसती तो मुझे बेहद आनंद मिलता और उसका नतीजा ये निकला की ऐसे hi कुछ देर घिसने के बाद मेरा लुंड पिचकारियां मरने लगा.. मैंने लुंड को बिलकुल तै के पेट से चिपका दिया मेरे लुंड से निकलती धारों से तै का पेट गीला होने लगा... एक के बाद एक धार से तै का पेट भीगने लगा मैं तो कसकर तै को पकडे हुए अपने स्खलन का आनंद ले रहा था... तै मेरे झड़ने से खुद भी गरम हो गयी थी इधर तभी मोटरसाइकिल एक घड़े की वजह से थोड़ा उछली और मैं जो तै के पेट से चिपका हुआ था बापिस सीट पर आ गया... पर मेरा काम हो चूका था मैं झाड़ चूका था तै का पूरा पेट गीला हो चूका था, पर उस गड्ढे की वजह से सिर्फ मैं hi सीट पर नहीं गिरा था कुछ और भी हुआ था, गड्ढे में उछलने की वजह से तै का जो हाथ पापा की जांघ के ऊपर था वो फिसल कर पापा की पंत के ऊपर से hi उनके लुंड पर चला गया था और पापा का लुंड तो तै के जांघ पर हाथ होने से पहले hi खड़ा हुआ था... अपने लुंड पर तै का हाथ महसूस करते hi पापा तो मज़े में आ गए ...वहीं तै भी पापा का खड़ा लुंड हाथ में पाकर और गरम हो गयी...
पर मैं पीछे आराम से था मेरा काम पूरा हो चूका था पर एक टेंशन थी की तै क्या बोलेंगी और सबसे बड़ी बात अपने पेट और कमर के गीले होने की क्या वजह बताएंगी... या कैसे छिपाएँगी, वैसे साड़ी से छुप तो जायेगा..
मैं मन में ये सब सोचते हुए चल रहा था वहीं हम लोग शहर में घुस चुके the...jis कारन तै ने होश में आते हुए अपना हाथ पापा के लुंड से हटा लिए साथ hi मैंने भी अपना अभी सिकुड़े हुए लुंड को बापिस पंत में कैद कर लिए था...
शहर में आकर पापा ने एक दुकान पर जाकर मोटरसाइकिल रोकी तो मैं जल्दी से उतरा और फिर तै भी उतरी पर उतारते के साथ hi तै ने अपनी साड़ी को संभाला और ठीक किआ और अपने पेट और कमर को ढँक लिए...
मेरा लुंड दोबारा ये सोच कर खड़ा होने लगा की तै मेरा रास अपने पेट पर लेकर शहर में घूमेगी...
उतरने के बाद भी तै का व्यवहार बिलकुल साधारण hi था मुझे कोई चिंता वाली बात नहीं लगी...
खैर हम बीज की दुकान के बहार थे... अंदर गए और फिर शुरू हुआ पापा का लेक्चर अचे बीजों की विशेषता क्या होती है पहचान क्या होती है... दुकान वाला बीच बीच में तै के उभारों से अपनी नज़रें चुप चुप के सेक रहा था वहीं तै साड़ी को थामे हुए अपने गीले पेट को छुपा रही थी...
इसी तरह से वहां का काम ख़तम हुआ और बीज लेकर हम लोग बहार निकले..
Papa-ab बताओ भाभी क्या लेना है..
मंजू तै- अरे लेना क्या है कुछ कपडे चाहिए बाबू... ले चलो किसी कपडे की दुकान पर...
पापा- अरे कपडे तो चौक पर बहुत बढ़िया दुकान है, गजब की साड़ी रखता है चलते हैं वहीं..
मंजू तै- अरे बाबू साड़ी नहीं कुछ और कपडे चाहिए..
तै ने शरमाते हुए कहा..
पापा- कुछ और क्या भाभी...
मंजू तै- अरे अंदर के कपडे..
पापा- ाचा ाचा चलो चलते हैं...
हम तीनो लोग बापिस बैठे और फिर से गाड़ी चल पड़ी...
पापा ने एक दुकान के सामने जाकर मोटरसाइकिल रोक दी और उतर गए..
पापा- कर्मा बीटा तू यहीं रुक मैं भाभी को सामान दिला कर आता हूँ...
पता सोच रहे थे जैसे मुझे नहीं पता अंदर का सामान क्या होता है... कितना भोला समझते हैं मुझे पापा..
खैर मैंने हाँ मैं सर हिलाया और मोटरसाइकिल पर बैठ गया... पापा और तै अंदर चले गए...
(अस 3रद पर्सन)
अंदर दुकान में एक लड़का बैठा था पापा ने उससे जाकर बोलै की अंदर के कपडे दिखाए तो उस लड़के ने आवाज़ दी और अंदर से एक औरत आई और वो लड़का अंदर चला गया, वो औरत तै जी को लेजाकर ब्रा और कच्ची दिखने लगी पापा वहीं पड़ी कुर्सी पर बैठ गए..
थोड़ी देर में उस औरत ने पापा को अपनी तरफ बुलाया... जहाँ वो तै को कच्ची दिखा रही थी..
औरत- इधर आइयें भाई साहब...
पापा- ग कहिये क्या बात है...
औरत- बहन ग को इन दोनों रंग में से समझ hi नहीं आ रहा तो आप hi मदद कर दें..
पापा- अरे इसमें मैं कैसे मदद कर सकता हूँ..
औरत- अरे भाई साब अपनी पत्नी की मदद आप नहीं करेंगे तो कौन करेगा..
वो गलती से तै और पापा को पति पत्नी समझ बैठी...
मंजू तै- अरे रहने दीजिये हम बता देंगे..
औरत- अरे बहन जी भाई साहब की पसंद भी तो देख लीजिये..
पापा के मन में तो लड्डू फूटने लगे...
वैसे दोनों में से किसी ने ये नहीं बताया की वो गलत समझ रही है और वो पति पत्नी नहीं है... दोनों hi अपनीईई अपनी ठरक में व्यस्त थे ..
पापा- हाँ मैं मदद करता हूँ..
और ये बोलकर पापा पूरे जोश के साथ तै के लिए कच्ची और ब्रा देखकर पसंद करने लगे...
तै भी शरमाते हुए पापा की पसंद देख रही थी... खैर जब दोनों की पसंद के अनुसार सब ले लिए तो तै ने उस औरत से पेशाबघर पुछा तो वो औरत तै को अपने साथ पीछे की तरफ ले गयी जहाँ तै ने बाथरूम में जाकर पहले अपने पेट पर से मेरा रास साफ़ किआ और फिर साड़ी से पेट को अचे से पौंछकर पेशाब करके बहार आ गयी...
तब तक पापा ने उस लड़के को कपडे के पैसे दे दिए थे..
बहार आकर तै जी ने थोड़ा न नुकर की पैसे क्यों दिए वगेरा वगेरा पर पापा ने मज़ाक में कहा अपनी बीवी को दिलाएं हैं पैसे तो देने पड़ेंगे...
मंजू तै- अरे बाबू बहुत दुष्ट हो तुम मतलब की उसने समझ लिए तो तुमने उसको बताया भी नहीं...
पापा- हम कैसे दुष्ट भाभी बताया तो तुमने भी नहीं..
मंजू तै- हम को तो शर्म आ रही थी...
पापा- कैसी शर्म भाभी..
ये सब बातें करते हुए वो दोनों लोग मोटरसाइकिल तक आ गए...
(कर्मा की ज़ुबानी)
इतना क्या खरीदना था तै को जो इतना टाइम लगा दिया वैसे बड़े खुश लग रहे हैं दोनों लोग न जाने क्यों... खैर छोडो...
पास आकर पापा मुझसे बोले- चलें बीटा अब ऐसा कर अब मोटरसाइकिल तू चला मैं थक गया..
Me-theek है पापा बैठो..
मैंने हैंडल थम लिए और फिर उन दोनों लोगो को भी बिठा लिए... फिर पापा के कहने पर एक चाट वाला. जो काफी मशहूर था उसकी दुकान पर गए... और स्वादिष्ट चाट खाई... सूरज ढल hi चूका था... खा पि कर जब तक चलने को हुए अँधेरा होने लगा था... मैंने दोनों को बिठाया... बैठने की जगह वैसी hi थी मैं फिर बीच में तै और फिर पापा बीज और सामान वगेरा मैंने हैंडल पर तंग लिए था...
शहर के बहार आते आते काफी अँधेरा हो चूका था... और रोड तो वैसे भी इस समय तक सुन सायं हो जाती थी...
तो पापा ने मुझे आराम से चलने की हिदायत दी क्यूंकि रात के समय जानवर भी रोड पर आ जाते थे...
तो मैं बिलकुल आराम और सावधानी से मोटरसाइकिल लेकर गाओं की तरफ बढ़ने लगा...
( अस 3रद पर्सन)
जहाँ कर्मा का ध्यान गाड़ी चलने पर था वहीं उसके पीछे पापा और तै का ध्यान कहीं और hi था... पापा की हालत वही थी जो शहर जाते वक़्त कर्मा की थी... क्यूंकि बार बार उनका लुंड तै के एक तरफ जांघ और चूतड़ों से रगड़ रहा था जिस कारन सख्त हो चूका था...
पापा तो जाते हुए तै के लुंड पर हाथ पड़ने से hi गरम थे और उसके बाद कछियां लेना तै के लिए पापा की उत्तेजना बढाती hi जा रही थी और पापा ने भी अँधेरा का फायदा उठाना शुरू कर दिया था और अपना हाथ तै के पेट पर रख कर सहलाने lage...sath hi तै से बातें भी करते जा रहे थे ये देखने के लिए की कहीं तै के मन में कोई विरोध तो नहीं...
पर तै बिलकुल साधारण होकर बात कर रही थी.. जैसे कुछ हो hi नहीं रहा बस पापा को और क्या चाहिए था पापा ने हिम्मत दिखते हुए तै के पल्लू को पकड़ा और धीरे से नीचे खिसकने लगे और कुछ hi पलों में तै का पल्लू नीचे उनकी गॉड में जा गिरा... और उनका ब्लाउज और पेट नंगा हो गया ..
तै ने भी गिरे हुए पल्लू को उठाने की कोई न कोई कोशिश की और न hi उस पर कोई प्रतिक्रिया दी...
पापा को इससे ाचा मौका और क्या मिलता और उन्होंने अपने हाथ को तै के नंगे पेट पर रख दिया और कुछ पल रखने के बाद तै के भाव देखे और कुछ गलत न लगने पर धीरे धीरे हाथ चलने शुरू कर दिए..
तै के गदराये पेट पर पापा का हाथ चलने लगा.. जिससे तै और पापा दोनों गरम होने लगे... कर्मा इससे बेखबर होकर मोटरसाइकिल चला रहा था...
पापा- भाभी सच में तुम्हे तरबूज नहीं पसंद मुझे तो बहुत पसंद हैं...
पापा ने धीरे से अपने हाथ को तै के ब्लाउज पर रखते हुए कहा...
मंजू तै- पसंद हैं पर गणना ज़्यादा पसंद है...
तै ने अपनी जांघ पर पापा के खड़े लुंड की चुभन को महसूस करते हुए कहा...
पापा- ठीक है भाभी जैसे मैंने बोलै था आपको हमारा गणना खिलाना है इस बार...
मंजू तै- ाचा तो फिर तरबूज तो हमारे खेत में भी हैं तुम हमारे तरबूज खा लेना बाबू...
कर्मा को ये बातचीत थोड़ी अलग और दो अर्थी तो लग रही थी पर उसने कोई ज़्यादा भाव नहीं दिया.. और मोटरसाइकिल चलता रहा...
पापा- अरे ये तो बहुत अछि बात कही भाभी.. तुम हमारा गणना चूस लेना और हम तुम्हारे तरबूजों का रास पी लेंगे..
ये कहकर पापा ब्लाउज के ऊपर से hi तै की बड़ी बड़ी छूछीयों को मसलने लगे... जिससे तै उत्तेजित होने लगी...
और गरम होने की वजह से उनका हाथ जो कर्मा की पीठ पर था धीरे धीरे उसकी कमर पर आ गया और सहलाने लगा...
जिससे कर्मा को भी ाचा लगने लगा.. और शरीर में सनसनी फैलने लगी...
पीछे पापा का लालच हर पल के साथ बढ़ता जा रहा था.. और उसी लालच के चलते पापा ने तै के ब्लाउज के हुक खोलना शुरू कर दिया अँधेरा होने की वजह से कोई कुछ देख सकता नहीं था दूसरी बात कोई होता तो देखता न रोड सुनसान पड़ा था...... इधर बाप बेटे के बीच चलती गाड़ी में एड़ी हालत होने पर तै जी बेहद गरम होती जा रही थी... और उनकी छूट गीली होकर बाह रही थी...
पापा एक के बाद एक हुक खोले जा रहे थे और उन्हें भी ये सोच सोचकर उत्तेजना हो रही थी की चलती गाड़ी पर अपने बेटे के होते हुए वो तै के साथ ये सब कर रहे हैं उनका लुंड कड़क होकर तै की जांघ में घुसता जा रहा था...
और कुछ hi पालो में तै के ब्लाउज के सरे हुक पापा ने खोल दिए.. और दोनों पाटों को अलग कर दिया तै की बड़ी बड़ी छुछियां ब्लाउज में क़ैद बहार लटकने लगी पापा ने बड़ी सावधानी से एक भरी भरकम छुच्छी को पकड़ा और ब्रा एक कप से बहार निकल lia...apani छुच्छी पर पापा का हाथ महसूस करके तै की एक दबी हुई सिसकी निकल गयी..
उधर पापा भी अपने हाथ में तै की नंगी चुकी का एहसास पाकर गंगना उठे... और बिना इंतज़ार के मसलना शुरू कर दिया... तै तो छुच्छी मसाले जाने से बिलकुल पागल सी होने लगी और अपना काबू खोने लगी... उनका हाथ जो अब तक कर्मा की कमर और पेट को सहला रहा था नीचे सरक कर उसकी जांघ तक पहुँच गया जिसका एहसास होते hi कर्मा भी सिहर उठा..
पीछे पापा ने तै की दूसरी छुच्छी को भी ब्रा को नीचे करके बहार निकल लिए तै अब चलती मोटरसाइकिल पर अपनी दोनों छूछीयों को नंगी करके बैठी थी और पापा बरी बरी से दोनों को मसल रहे थे...
तै का हाथ कर्मा की जांघ पर घूम रहा था जिससे उसका लुंड पंत फाड़ कर बहार आने को बेताब था...
पापा- भाभी मेरे से तो सबर नहीं होता भाभी आपके तरबूज खाने का...
और ये कहकर पापा ने सर झुककर तै की एक छुच्छी को अपने मुँह में भर लिए...
तै ने बड़ी मुश्किल से खुद को सिसकने से रोका
तै- खा लेना बाबू आराम से खा लेना सब तुम्हारा hi तो है...
और छुच्छी चूसे जाने पर तै जी खुद को रोक नहीं पाई और जो हाथ उनका कर्मा की जांघ पर था वो उसके खड़े और सख्त लुंड पर आ गया.. हालाँकि पंत के ऊपर से hi पर तै ने कर्मा के लुंड को पकड़ लिए जिससे कर्मा एक पल को तो काबू खो बैठा पर किसी तरह से खुद को सँभालते हुए मोटरसाइकिल चलना जारी रखा...
पीछे पापा पूरे मज़े ले रहे थे थे और बदल बदल कर तै की छूछीयो को बड़े मज़े से पि रहे the...papa का लुंड फटने को हो रहा था... उधर तै की हालत भी ख़राब होती जा रही थी.... उनकी छूट पूरी तरह गीली हो चुकी थी...
और जब तै से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उन्होंने धीरे से बोलै- उम्म्म कर्मा बचुआ थोड़ा रोक दे किनारे पर...
में- क्या हुआ तै सब ठीक तो है न?
पापा- हाँ भाभी क्या हुआ पापा ने तै की छुच्छी को मुँह से निकलते हुए कहा..
मंजू तै- अरे बस पेशाब जाना था...
कर्मा ने ये सुनकर मोटरसाइकिल को एक किनारे रोक दिया तब तक तै ने अपनी साड़ी के पल्लू को ऊपर कर लिए जिससे उनका खुला ब्लाउज और छुछियां न दिखें वैसे भी इतने अँधेरे में क्या दीखता बस मोटरसाइकिल की लाइट के सामने आने पर दिख रहा था कुछ भी...
खैर रुकने पर तीनो लोग उतर गए तै की छूट गीली थी वहीं मेरे और पापा के पंत में तम्बू बने हुए थे...
शुक्र था अबधेरे का की कोई कुछ देख नहीं सकता था...
तै एक तरफ जहाँ झाड़ियां थी उस तरफ बढ़ने लगी तो पापा बोले- भाभी अँधेरे का समय है अकेले झाड़ियों में जाना ठीक नहीं.. रुको मैं चलता हूँ मैं झाड़ियों के बहार खड़ा रहूँगा तुम खेत में चली जाना...
मंजू तै- अरे बाबू सही कह रहे हो दर सा तो हम को भी लग रहा था..
पापा- कर्मा बीटा तू यहीं रुक मैं भाभी को करा के लता हूँ..
में- ठीक है पापा...
और कर्मा मोटरसाइकिल बंद करके बैठ गया इधर पापा और तै झाड़ियों में एक घुस गए...
झाड़ियों में थोड़ा अंदर जाकर पापा ने तै को बोलै की वो पेशाब कर लें.. अब न जाने दर की वजह से या किसी और वजह से तै बस दो मीटर आगे बढ़ कर पापा की तरफ पीठ करके अपनी साड़ी उठाकर बैठ गई...
पापा का लुंड जो पहले से hi लोहा बन गया था और कड़क हो गया हालाँकि अँधेरे की वजह से बिलकुल साफ़ तो नहीं पर तै के बड़े बड़े चूतड़ों की हलकी हलकी आकृति पापा को दिखने लगी जिन्हे देखकर पापा काबू खोने लगे और उन्होंने फ़ौरन अपने पंत की चैन खोलकर अपने लुंड को आज़ाद कर दिया जो बहार आते hi ठुमके मरने लगा...
पापा को जैसे सुकून मिल गया लुंड को बहार निकल के और वो तै की चूतड़ों की हलकी सी आकृति को देखकर लुंड पर हाथ चलने लगे...
की तभी पापा के कानो में एक सररररर के साथ सीटी की आवाज़ गयी... जो की तै जे के मूतने की वजह से थी बस ये आवाज़ कानो में पड़ते hi और ये एहसास होते hi की कहाँ से आ रही है पापा अपना आप खो बैठे और उनके कदम अपने आप तै जी की और बढ़ने लगे...
तै जी भी उत्तेजित थी पर उनकी छूट में मूट का दबाद कुछ ज़्यादा था जिसे वो खली कर रही थी... पर उन्हें इस बात का एहसास था की वो पापा के बिलकुल सामने बैठकर मूट रही हैं जिससे उनकी उत्तेजना और बढ़ रही थी... क्या बाबू को मेरे चूतड़ दिख रहे होंगे... मोटरसाइकिल पर जो हुआ उसका क्या असर हुआ होगा.. क्यों मैं इतना बहक गयी की खुद को और उनको रोक नहीं पाई .. तै जी ये सब सोचते हुए मूट रही थी.. की अचानक से उनके चेहरे पर कुछ टकराया उन्होंने चौंक कर ऊपर देखा तो वो और हैरान रह गयी... देखा की पापा उनके बगल में खड़े हैं लुंड चैन के बहार है जिसे वो अपने एक हाथ से पकड़ कर तै के चेहरे पर घिस रहे हैं...
और जब तक तै को ये एहसास हुआ की ये क्या हो रहा है तभी पापा ने लुंड के टोपे को तै के रसीले होंठों पर लेकर एक धक्का दिया जिससे तै का मुँह खुल गया और पापा का लुंड का टोपा तै के मुँह में घुस गया...
Papa-aahhhhh bhabhiiiiiiiiii..
तै तो हैरानी से मुँह खोले बैठी थी उनकी छूट से पेशाब की धार निकल रही थी पापा ने अपना एक हाथ तै के सर के पीछे रखा और धीरे धीरे से अपनी कमर हिलने लगे जिससे पापा का लुंड तै के मुँह में अंदर बहार होने लगा...
तै भी बेहद गर्म हो गयी थी तो वो भी सब भूल कर पापा के गरम और कड़क लुंड को चूसने लगी उनके टोपे पर अपनी जीभ फिरने लगी... तै का मूतना अब बंद होने लगा उनकी टंकी खली हो चुकी थी पर तै उठी नहीं वैसे बैठे बैठे hi पापा से अपना मुँह छुड़वा रही थी...
कर्मा मोटरसाइकिल पर बैठे दोनों का इंतज़ार कर रहा था...
पर उसे क्या पता की देवर भाभी में अंदर क्या खेल चल रहा था, पापा वैसे भी इतने गरम हो चुके थे की उनके धक्के और तेज़ होने लगे थे और धीरे धीरे पापा का लुंड तै के गले तक पहुँचने लगा था...
तै के मुँह से घू घू की आवाज़ आ रही थी...
सुर ऐसा कुछ देर हुआ की पापा की कमर रुक गयी और लुंड को पापा ने तै के गले तक ठूंस दिया और रुक गए और फिर उनका लुंड तै के गले में रास की बारिश करने लगा जिसे तै धीरे धीरे गटकने lagi...akhiri बूँद जब निकल गयी तब तक पापा ने लुंड को तै के मुँह में घुसा के रखा और जब संतुष्ट हो गए तो निकला... तै बुरी तरह से हांफ रही थी ..
फिर भी उन्होंने अपनी जीभ बहार निकल कर पापा के लुंड के टोपे को एक आखिरी बार छठा और फिर कड़ी हो गयी पापा ने भी अपने लुंड को पंत के अंदर कर लिए तै भी कड़ी हुई और अपने कपडे सही करते हुए ब्लाउज के हुक लगाए और पूरी तरह से ठीक होकर बहार की तरफ चलने लगी पापा भी पीछे पीछे चल पड़े...
झाड़ियों से बहार निकले तो कर्मा इंतज़ार hi कर रहा था..
पापा- बीटा तुझे भी करनी हो तो कर आ...
में- नहीं पापा अब चलते हैं देर हो रही है...
फिर से उसी क्रम में बैठ गए और कर्मा मोटरसाइकिल दौड़ने लगा...
पीछे बैठे पापा तो अपना लुंड तै से चुसवा कर और उन्हें अपना पानी पीला कर संतुष्ट थे... पर बगल में तै जैसी गदराई घोड़ी होतो कोई खुद को कैसे रोके.. और पापा एक हाथ को पीछे लेजाकर साड़ी के ऊपर से hi तै के चूतड़ों को मसल रहे थे जिससे तै बेचारी गरम होती जा रही थी...
बैठे होने की वजह से पूरे चूतड़ तो नहीं पर फिर भी पापा को जितना मिल रहा था उतने का पूरा आनंद उठा रहे थे...
तै उत्तेजना में इधर उधर हाथ मार रही थी और उसी उत्तेजना में एक बार फिर से उनका हाथ कर्मा के लुंड पर आ गया पर इस बार उन्हें एक झटका लगा क्यूंकि जब वो मूतने गयी थी तो अपने खड़े लुंड को रहत देने के लिए कर्मा ने लुंड को बहार निकल लिए था तो तै के हाथ में कर्मा का नंगा और गरम लुंड आ गया...
जिसके छुटे hi तै के बदन में करंट सा दौड़ने लगा...
तै का हाथ खुद बा खुद कर्मा के लुंड पर कास गया जिससे कर्मा की एक दबी हुई आठ निकल गयी.
तै ये सोच सोचकर गरम होती जा रही थी की अभी कुछ देर पहले बाप का लुंड चूसा और अब बेटे का लुंड हाथ में है...
वहीं बाप के हाथ चूतड़ों को मसलने में लगे हैं... बाप और बेटे के साथ एक साथ यूँ हवस के खेल में लिप्त होना तै को गरम कर रहा था...
खैर ये खेल कुछ और देर तक चलता की तब तक गाओं आ गया...
(कर्मा की ज़ुबानी)
गाओं में आकर मैंने मोटरसाइकिल को अपने बाघ के किनारे पर रोका तो जाकर तै ने मेरे लुंड को छोड़ा
में- पापा तुम घर चले जाओ मैं तै को घर छोड़कर आता हूँ...
पापा- ठीक है तुझे जाना हो तो बता मैं छोड़ आता हूँ भाभी को...
में- नहीं पापा घर जाओ तुम मैं छोड़ आऊंगा थक गए होंगे...
पापा फिर अध्मान से ठीक है बोलकर घर की तरफ निकल गए. और मैंने मोटरसाइकिल को आगे बढ़ा दिया और फिर मुझे जैसे hi लगा पापा मेरी आँखों से ओझल हो गए मैंने मोटरसाइकिल रोक दी सड़क किनारे hi..
तै- क्या हुआ बचुआ रोक क्यों दी...
Me-ek काम है तै ज़रा उतरना ..
Tai-kaisa काम.
ये कहकर तै उतर गयी मैं भी मोटरसाइकिल से उतरा और स्टैंड पर लगाडी...
और मैंने तै को अपनी बाहों में भर लिए... और सीधा उनकी बड़ी बड़ी छूछीयों को मसलने लगा...
तै- हाय दिया कर्मा बचुआ क्या कर रहा है ये...
में- बस तै जी अब रहा नहीं जा रहा...
Tai-nahi बीटा देर हो रही है घर के लिए...
ये बात मुझे भी ध्यान आई की देर तो हो रही है...
तो मैंने तै को जल्दी से घुमा दिए और मोटरसाइकिल को पकड़ कर झुका दिया... और पीछे से उनकी साड़ी को उठाकर उनकी कमर तक कर दिया मेरे सामने तै के बड़े बड़े चूतड़ आ गए... एक पल को तो मैं उनकी खूबसूरती में खो गया और मन किआ उनके बीच में मुँह घुसेड़ दूँ पर समय की कमी थी इधर तै भी लगातार बोले जा रही थी..
मंजू तै- अरे बचुआ का कर रहा है सड़क पर हमको नंगी कहे कर रहा है...
मैंने तै की बातों को सुनते हुए अपने लुंड को पकड़ा और तै के चूतड़ों की दरार में घुसा दिया और ऊपर नीचे घिसने laga...mere लुंड को अपनी छूट पर महसूस कर के तै सीसीएनए लगी..
मंजू तै- आह्हः शहहह nahiiiiiiiiiiiii बचूणा ीे गलत है... उउउउइइइइइ
तै इसके आगे कुछ बोलती की मेरा लुंड उनकी छूट की गरम दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुस गया...
मैं भी क्या करता इतनी देर से गरम था लुंड फटने को हो रहा था तो और रहा नहीं गया और लुंड छूट में समां गया... अह्ह्ह्ह मज़ा आने लगा.... तै की गरम छूट ने मेरे लुंड को कसकर पकड़ लिया... मुझे तो जैसे सुकून मिल गया..
मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्मम्मम्मा ढैय्या माआआअह्ह्ह मार दियाःहहहहह रीई..
में- तै आराम से रात का वक़्त है कोई सुन लेगा...
मंजू तै- अरे नाश्पीटे आह्हः इतनाअहहह बड़ा मुसल एक बार में पुराहहहह घुसा दिया... आह्ह्ह्हह और बोलल रहा हैईईई आराम से..
Me-kyaaa करूँ तै तुम्हे देख कर रुका hi नहीं गया...
मैंने तै की कमर को पकड़ कर हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये..
मंजू तै- अह्ह्ह्ह उईईईईई ककीतना बड़आहहह है री तेरा आराम से आह्ह्ह्हह्ह..
में- आराम का समय नहीं है तै..
मैंने थोड़ा गति को बढ़ाते हुए कहा..

मंजू तै- आअह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बचूणा ीे मज़ा आ रहा है आईसीईई hiiiiiiiiiii बेटाःह्ह्ह्हह्ह मार माआआअह्ह्ह...
अब तै को भी मेरे लुंड से मज़ा आने लगा वहीं मैं तो फुल जन्नत में था... और ये सोचकर थोड़ा और उत्तेजित हो रहा था की मैं जग्गू की माँ छोड़ रहा हूँ...
यही सोच सोच कर मेरा लुंड तै की छूट में फूलता जा रहा था... और मेरी गति भी बढाती जा रही थी...
ठप्प्प ठप्प ठप्प्प की आवाज़ रोड पर फैली शांति को भांग कर रही थी...
साथ hi मंजू तै के कराहने की आवाज़... मेरे लुंड को और पहला रही थी...
मंजू तै- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्मम्मम्मा ढैय्या माआआअह्ह्ह ohhhhhhhhhhhh आईसीईई hiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह बाछहाआअ आअह्ह्ह्हह मार डालाः हाय कूट अपनी तै की निगोड़ी छूट को...
में- हाँ तै क्या गरम चूऊऊत पाई है तुमने अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कबसे मरना चाहता थाआ आअज मौका दिया है ...
मंजू तै- अगर आह्ह्ह्हह पटाहहहह होताहा इतना मज़ा डेगाआ तेरा मुसल तो कबकाआ छुड़वा लेती तुझसी...
तै ये भी सोचकर उत्तेजित हो रही थी की अभी कुछ देर पहले बाप का लुंड चूसा और बेटे से चुद रही हैं...
मैंने तै के दोनों चूतड़ों को थामकर आखिरी गियर दाल दिया और ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा... धीरे होना न मैं चाहता था और न hi मेरे बस में था...
मेरे तूफानी धक्कों की वजह से और काफी उत्तेजित होने की वजह से तै ज़्यादा देर नहीं रुक पाई और थोड़ी hi देर में मेरे लुंड पर एक आह की चीख के साथ झड़ने लगी...
अपने लुंड पर तै की छूट को कसता महसूस कर और फिर रास को बहता हुआ महसूस कर मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और सटासट 10 जानलेवा धक्के लगाए तै की छूट में और फिर अपना रास छोड़ने लगा...
एक के बाद एक धार ने तै की छूट को भर दिया... मैंने तै की कमर को कास के पकड़ कर अपने से चिपका रखा था जिससे वो आगे गिर न जाएं और तब तक ऐसे hi चिपकाये रखा जब तक मेरे लुंड से रास की एक एक बूँद तै की छूट में न गिर गई तब तक तै भी थोड़ा शांत हो गयी थी... मैंने धीरे से लुंड को बहार निकला तो लुंड के साथ मेरा रास भी बहकर बहार आने लगा...
मेरा लुंड निकलते hi तै भी झट से कड़ी हो गयी और अपनी साड़ी नीचे कर ली...
मैंने भी अभी के लिए संतुष्ट लुंड को अपने पंत में दाल लिए...
और मोटरसाइकिल पर बैठ कर स्टार्ट की
में- बैठो तै..
तै बिना कुछ बोले आ कर बैठ गयी मैंने उनके घर की तरफ बढ़ा दी..
में- मज़ा आया न तै...
तै ने कोई जवाब नहीं दिया मुझे अजीब लगा की हमेशा बकर बकर करने वाली तै आज चुप हो गयी फिर सोचा की जो कुछ हुआ वो भी तो नया था थोड़ा टाइम देते हैं इन्हे भी सोचने का इसलिए और कुछ नहीं बोलै..
और फिर उनका घर आ गया तो तै सीधा उतर कर अंदर चली गयी पर गाड़ी की आवाज़ से जग्गू बहार आ गया था तो थोड़ी देर उससे बातें करने लगा थोड़ा अजीब तो लग रहा था की अभी इसकी माँ छोड़ी है और अभी इससे बात पर खुद को समझाया और फिर अपने घर की और निकल आया...
इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्.