Incest Sex Kahani Kasoor - Page 2 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Kasoor

अपडेट 9

अब तक

अपने देखा की कैसे नकुल कनिका को ले कर तट से अपने ट्रैन का पता किया और अपने बर्थ काउच में जाने के बाद कैसे कनिका और नकुल में थोड़ा बहुत नोकझोक हुआ और फिर कनिका नकुल के अनमोल अंग के साथ खेल कर उसका रास निकली और फिर दोनों सो गए.

अब आगे

दोनों hi मस्त अपने खयालो में खोये हुए सो रहे थे. ट्रैन अपनी रफ़्तार में चली जा रही थी और उन्हें झूला झूलते हुए. उनकी आंख सुबह खुली जब तट टिकट चेक करने के किये दरवाजा नॉक कर रहा था.. फिर नकुल दरवाजा खोल, अपना टिकट दिखाया और पूछा की दिल्ली पहुंचने में कितना समय और लगेगा. 10 मिनट्स में hi पहुंच जायेगा तट कहते हुए चला गया. ट्रैन ठीक 6:30 बजे अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच कर रुक गयी. उसके बाद दोनों ट्रैन से अपना ले कर उतर गए. फिर रेलवे स्टेशन से बहार आये एक टैक्सी कर किया.

"कनिका पहले कहा चले बोर्ड या किसी होटल में." नकुल टैक्सी में बैठने के बाद कनिका से पूछा. कनिका टैक्सी के विंडो से बहार देख रही थी. कनिका ने आज पहली बार बड़ी बड़ी इमारते, सिनेमा मॉल, शॉप्स देख रही थी और उन में hi खोयी हुई थी जब नकुल ने उससे ये पूछा था.

"यार पहले होटल चलते है, क्योकि मुझे फ्रेश भी होना है. कुछ खा भी लेंगे." कनिका ने टैक्सी से बहार देखते हुए नकुल से बोली. नकुल सामने के मिरर से उसको देख कर मुस्कुरा रहा था. फिर नकुल टैक्सी ड्राइवर की और देख कर कहा, "ठीक है स्वीट हार्ट. भाई आप हमें नक होटल चलो."

"ठीक है साहब." टैक्सी ड्राइवर ने नकुल से कहा और टैक्सी में लगा हुआ रेडियो चालू कर दिया. उसने रेडियो के चैनल बदल सुरु किया और 91.1 रेडिओचित्य लगा दिया. उसके पर बहुत hi मधुर गाना आ रहा था, "मिल के न हो गए जुड़ा आ कसम खाने." इस गाने को गन गुना रहा था.

"भाई गाना तो बड़ा मधुर और रोमांटिक लगाया है. और गए भी अच्छा लेट हो." नकुल उस टैक्सी ड्राइवर से बात करने की सुरुवात इस तरह से किया. टैक्सी ड्राइवर नकुल से अपनी तारीफ सुन खुश हुआ और बोलै, "भाई क्यों मजाक उदा रहे हो. आज तक मेरी बीवी तो यही कहती आ रही अपना ये बेसुरा गाला बंद करो. आप कह रहे हो मैं अच्छा गाना रहा हु."

"ऐसी बात नहीं है. आप सच में hi बहुत अच्छा गए रहे हो. रही आपकी बीवी की बात तो वो बस आपको तंग करने के लिए ऐसा कहती है." नकुल ने टैक्सी ड्राइवर से कहा. टैक्सी ड्राइवर नकुल की बात सुन कर उसकी मुद कर देखा और बोलै, "आप कैसे कह सकते है की मेरी बीवी सिर्फ मुझे तंग करने के लिए ऐसा बोलती है. जब की आप तो उसे जानते hi नहीं."

"भाई पहले अपना नाम तो बाताओ, फिर मैं बताता हु मैं ऐसा क्यों कह रहा हु." नकुल ने टैक्सी डाइवर से कहा. और वही कनिका नकुल और टैक्सी ड्राइवर की बात सुन कर उसका ध्यान कुछ पल के लिए बहार से हैट कर उनके तरफ चली गयी थी.

"भाई मेरा नाम जतिन शर्मा है और प्यार से मुझे जीतू बुलाते है. और अब बताओ मुझे की मेरी बीवी ऐसा क्यों कहेगी." जीतू ने नकुल को अपना नाम बाटने के बाद फिर से वही सवाल किया. नकुल जीतू की तरफ मुस्कुरा कर देखा और फिर एक बार पीछे की तरफ देखा जहाँ पर कनिका बैठी हुई थी. फिर वापस जीतू की और देखते हुए कहना सुरु किया, "अच्छा आज जब तुम घर जाओ तो अपनी बीवी के सामने गाना मत गाना. फिर तुम्हारी बीवी तुमसे जरूर पूछेगी आज गाना क्यों नहीं गए रहे हो. तुम कहना की तुम्हे पसंद नहीं है तो आज से गाना गण बंद. फिर देखा उसका रिएक्शन."

"ठीक है भाई. जैसा आप कह रहे हो, मैं आज वैसा hi करता हु. अगर मेरी बीवी ने ये कहा की तुम बहुत किया तो." जीतू ने नकुल से कहा. जिस पर नकुल ने कहा, "फिर ये सोच लेना की मैं तुम्हारी झूठी तारीफ कर रहा था. अच्छा ये बताओ कितना समय लगेगा पहुंचने में."

"बस 15 मिनट्स में पहुंच जायेगे." जीतू ने कहा. रेडियो पर अड़ के बाद फिरसे एक रोमांटिक सांग सुरु हो गया था फिल्म वह लम्हे का 'तू जो नहीं तो कुछ भी नहीं, ये मन की महफ़िल है हंसी है.' जीतू फिर से इस गाने को गन गुना सुरु कर दिया था. सच में hi जीतू अच्छा गता था, उसकी आवाज़ भी मधुर थी.

"कितना काम लेते हो एक दिन में." नकुल ने फिरसे जीतू से पूछा. एक बार फिरसे से नकुल ने उसके गाना गाने पर विराम लग दिया. जीतू नकुल की बात सुन कर मुस्कुरा कर जवाब दिया, "भाई सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक टैक्सी चलता हु. जिसमे टैक्सी के मालिक को देखने के बाद कभी 1000 तो कभी 1500 बच जाते है यार फिर 500 hi. महीने के 20 या 25 के हज़ार के आस पास कमा लेता हु जिसमे बचो की स्कूल की फीस, रेंट और घर के खर्चे में आधे से ज्यादा कमाई चली जाती है. जो थोड़े बहुत बचते है वो बीमारी में अगर कोई बीमार पद गया तो."

"फिर तो कुछ पता hi नहीं होगा आपके." नकुल ने कहा. जीतू भी नकुल की बात सुन कर मुस्कुरा दिया और बोलै, "ये तो जिंदगी है भाई. पर मैं बहुत खुश हु. काम से काम अपने बीवी और बचो का ख्याल तो रख पता हु. और आज तक कभी मेरी बीवी ने शिकायत नहीं की सर आप किसी काम से आये है या फिर घूमने." जीतू ने काम की बात की अपनी जिनगी के सुख दुःख सुनाने ने बाद.

"भाई आये तो हम यहाँ किसी काम से आये है. थोड़े देर आराम करने के बाद फिर निकल जायेगे." नकुल ने कहा. जीतू ये सुन कर खुश हुआ की चलो कुछ तो और कमाई हो जाएगी. फिर उसने नकुल से कहा, "अगर आप बुरा न मनो तो पूछ सकता हु आप से यहाँ किस काम से आये है."

"हाँ भाई क्यों नहीं जरूर. इसमें बुरा मानाने वाली कौनसी बात है. हमें यहाँ सीबीएसई बोर्ड जाना है. वह से मुझे अपनी मार्कशीट निकलवानी है. फिर कल वापस अपने घर."

"मैं आपका बहार hi इंतज़ार करता हु. जब तक आप लोग आ नहीं जाते." जीतू ने कहा. नकुल मुस्कुराते हुए बोलै, "हमें थोड़ा टाइम लगेगा. शायद 2 घंटे तक. इतने देर हमारा इंतज़ार करना तुम्हारे लिए भी ठीक नहीं होगा. ऐसा है भाई आप मुझे अपना फ़ोन no दे दो. मैं जाने से पहले कॉल कर लूंगा तुम्हे."

"ठीक है सर, आप मेरा No. ले लीजिये, अगर मैं यहाँ न मिलु तो आप मुझे कॉल कर देना. मैं जहा कही भी हूँगा आ जाऊंगा." जीतू ने अपना no नकुल को दिया. उसके बाद नकुल और कनिका टैक्सी से उतर गया. जीतू ने टैक्सी डिक्की से सामान निकल दिया और फिर नमस्ते कर अपनी टैक्सी ले कर निकल गया. वही कनिका और नकुल नक होटल के अंदर चले गए अपना सामान ले कर.

"कनिका तुम जा कर एक रूम बुक करो. मैं यही पर हु." नकुल ने कहा. कनिका नकुल के ऐसे कहने पर उसके तरफ देखने लगी. पूछ रही हो की उसके साथ अंदर क्यों नहीं चल रहा है. नकुल कनिका के ऐसे देख की वजह से आगे कहने लगा, "नहीं मैं तुम्हारे साथ नहीं चल सकता."

"क्यों नहीं चल सकते मेरे साथ, तुम्हे यहाँ कौन जनता था जो ऐसे कहे रहे हो." कनिका ने नकुल के बहुत करीब आ कर उसके गाल पर हाथ फेरते हुए बोली. आस पास के जितने भी लोग खड़े या बैठे हुए थे सब के सब उन दोनों को hi देख रहे थे. कनिका और नकुल के बिच की बात बहुत hi धीरे हो रही थी जो सिर्फ उन दोनों को hi सुनाई दे रहा था. नकुल कनिका की इस तरह के हरकत पर बहुत hi प्यार आ रहा था और उसके गाल पर किश कर दिया. फिर उसने कहा, "कनिका मैं तुंहरे साथ इस लिए नहीं चल सकता क्योकि ये मेरे hi होटल है, अगर किसी ने मुझे जिन्दा यहाँ देख लिया तो ये खबर मेरी बड़ी माँ को बता देंगे की मैं अभी जिन्दा हु. और फिर तुम समझ सकती हो."

"जब तुम ये जानते थे तो मुझे यह क्यों ले कर आये. तुम पागल तो नहीं हो. चलो किसी और होटल में चलते है. मुझे नहीं रहना यहाँ." कनिका ने नकुल को घूरते हुए और थोड़ा नाराज़ होते हुए बोली, पर आवाज़ अभी बहुत धीमी थी, जो सिर्फ उन दोनों के सिवा कोई भी नहीं सुन सकता था. वही जो लोग उनसे दूर थे इनके इस खेल को देख कर लुफ्त उठा रहे थे. नकुल कनिका को प्यार से उसके माथे पर किश किया और समझते हुए बोलै, "मुझे यहाँ किसी से मिलना था कनिका इसलिए मैं तुम्हे यहाँ ले कर आया हु. अब तुम जाओ और रूम बुक करो. मैं यही पर हु."

फिर कनिका नकुल के पास से चली गयी और रिसेप्शन काउंटर पर जा कर कनिका ने एक रूम बुक किया, और रूम के ले कर नकुल के पास आ गयी. फिर कनिका नकुल को ले कर रूम की और चल देती दिया.

"कनिका रूम no कितना है." नकुल ने कनिका के कमर में हाथ दाल आगे चलते हुए बोलै. वही उनका सामान एक वेटर ले कर आ रहा था, उनके hi पीछे. कनिका ने बड़े प्यार से बोलै, "रूम No 360 है."

"ठीक है. चलो चलते है. थोड़ा आराम करने के बाद बोर्ड के लिए निकलेंगे." नकुल कहा. फिर दोनों मस्ती करते हुए अपने रूम के सामने आ गए. कनिका ने के से रूम खोला और अंदर चले गए. नकुल कनिका से कहा, "तुम जल्दी फ्रेश हो जाओ. तुम्हारे बाद मैं भी हो लूंगा." फिर कनिका फ्रेश होने चली गयी.

फिर नकुल रूम के फ़ोन से रिसेप्शन पे कॉल मिला दिया और वह अपना मैसेज छोड़ ने के बाद कुछ खाने का आर्डर कर फ़ोन रख दिया.

फिर नकुल बीएड पर लेट गया और कनिका का बहार आने का इंतज़ार करने लगा. 10 मिनट्स बाद कनिका जब बहार आयी तो सिर्फ टॉवल लपेटा था उसके जिस्म पर. नकुल कनिका के इस रूप को देख कर उसका शरीर बेकाबू होने लग गया और कनिका के जिस्म पर पानी के बुँदे मोती की तरफ चमक रही थी. और जब निचे गिरती तो बारिश की बून्द की तरह. नकुल तो यहाँ नज़ारा देख कर hi खो सा गया था. वही कनिका अपने कपडे पहना कर नकुल के पास आयी और बोली, "डार्लिंग बहुत देख लिया, अब जा कर फ्रेश हो लो." नकुल अपना सर खुजाता हुआ टॉवल ले कर बाथरूम में चला गया. और कनिका शीशे के सामने बैठ कर तैयार होने लगी.

नकुल जब बहार आया तो कनिका तैयार hi गयी थी. और कनिका के सामने आ कर बोलै, "डिअर थोड़े देर पहले जो नज़र तुम्हे दिखाया कमल का था. मेरा तो औजार hi खाद हो गया था. अभी तक असर है. देखोगी." नकुल ने टॉवल की गांठ पर अपने हाथ रख दिया. और धीरे धीरे खोलने लग गया.

"अच्छा तो खोल दो, मैं भी तो देखु, क्या है हल मेरे आशिका का." कनिका ने बड़े hi ऐडा के साथ बोली. नकुल टॉवल कोला कर एक तरफ रख दिया. नकुल को अंडरवियर में देख कर उसका चेहरे की चमक चली गयी. पर कुछ सोच कर उसके चेहरे की चमक वापस आ गयी और बोली, "वैसे कैसा लगा था मेरा नज़ारा."

"बहुत hi मनमोहक और दिलकस." नकुल ने अपनी शर्ट और पंत बैग से निकलते हुए बोलै. कनिका नकुल के पास आ गयी और बोली, " बस यही, हॉट एंड सेक्सी नहीं लगी क्या."

"यार तुम तो कयामत लग थी उस समय और अभी कुछ काम नहीं दिख रही हो. पता नहीं आज किस किस का जाना लोगी." नकुल ने कहा. फिर अपनी शर्ट उठा कर पहनने लग गया. वही कनिका उसके चेस्ट पर किश करते हुए बोली, "मुझे किसी और की जान क्यों लू. मेरे लिए तो तुम hi काफी हो."

"यार मुझे बक्श दो, मैंने तुम्हारा क्या बिगड़ा है, जो इस बचे की जान लेने की सोच रही हो." नकुल ने कहा, नकुल की इस बात को सुन कर कनिका उसको मरने लगी. तभी रूम के दूर पर नॉक हुआ. "कनिका मुझे छोडो और देखो खाना आ आया है."

"मैं नहीं जा रही खोलने. तुम hi जाओ." कनिका नकुल को छोड़ एक तरह हो गयी नकुल जल्दी से अपनी पंत पहनी और शर्ट के बटन लगते हुए दूर की तरफ चल दिया. फिर नकुल जाकर जैसे hi दरवाजा खोला, दो थप्पड़ उसके गाल पर पद गए. थप्पड़ की आवाज इतनी तेज़ थी की वो कनिका को भी सुनाई दी. कनिका भाग कर जब वह गयी तो सामने के लड़की कड़ी थी और नकुल अपने दोनों गाल पर अपने हाथ रखा हुआ उसको देखे जा रहा था.
 
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अपडेट 10

अब तक

आपने देखा की कैसे नकुल कनिका को टॉवल में देख उसका अरमान जाग गए और उसका लिंग खड़ा हो गया था. नकुल कनिका को hi देखने में खोया हुआ था की उसने कपडे पहन कर नकुल को नहाने भेज दिया. नहाने के बाद जब नकुल बहार आया तब भी दोनों ने मस्ती करि. दूर नॉक पर जब नकुल दूर ओपन करा तो उसके गाल पर दो थप्पड़ पद गए.

अब आगे

"कौन हो तुम और तुम्हारी हिम्मत कैसी हुई नकुल पर हाथ उठाने की" कनिका ने गुस्से में बोली और एक थप्पड़ उस लड़की को जड़ दी. और जैसे hi कनिका ने उस लड़की को दूसरा थप्पड़ मारा. नकुल कनिका को पकड़ लिया और कहा, "रुक जा मेरी फूलन देवी. ये मेरी फ्रेंड है नताशा."

"तो फिर तुम्हे मारा क्यों बोलो. छोड़ मुझे मैं बढ़ती हु की फ्रेंड के साथ कैसे मिलते है." कनिका ने नकुल से अपने आपको छोड़ने की कोशिश करते हुए बोली. वही नताशा कनिका और नकुल को देखे जा रही थी. उसको इस बात का बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था की नकुल के साथ कोई लड़की भी हो सकती है. नकुल कनिका से कहा, "क्योकि मैं इसे 3 यरस बाद मिल रह हु. मैं ने इसे एक बार भी फ़ोन नहीं किया. न hi मिलाने आया तो इस लिए मुझे ये नाराज़ थी."

"तुम झूठ बोल रहे हो इसे बचने के लिए. तुम साइड हटो म देखती हु. क्या इसको नहीं पता की तुम किसी से बात नहीं कर सकते थे." कनिका शांत होने का नाम नहीं ले रही थी. इसल लिए नकुल ने नताशा इशारा इस अंदर आने के लिए कहा और कनिका के होठो पर अपने होठ कर कर किश करने लग गया. जैसे hi नकुल ने उसे किश किया शांत हो गयी. नकुल कनिका किश करते हुए अपने गॉड में उठ कर अंदर आ गया और दूर लात मर दी. जिससे दूर क्लोज्ड हो गया.

"कनिका तुम्हें ऐसा क्यों लगता है मैं तुमसे झूठ बोल रहा हु. क्या अब तक मैं ने तुमसे झूठ बोलै है जो अब बोलूंगी." नकुल अपने होठ उसके होठ से अलग किया, जब कनिका शांत हो गयी थी. नकुल ने कनिका को बहो के घेरे से आजाद करा और उसे ले कर एक तरफ बैठ गया और नताशा को बैठने का इशारा किया.

"तुम में और नताशा की आगे में जानते हो कितना अंतर है. कोई देख कर ये नहीं कह सकता की तुम्हारी दोस्त हो सकती है." कनिका ने कहा. कनिका ने ये बात इस लिए कही थी क्योकि उसने नकुल देखा था जब वह सीरियस हालत में उन्हें मिला था. "और हाँ तुम अपने इस शरीर को देख कर मत सोचना की तुम अब इसे बड़े या इसके बराबर दिख रहे तो..." कनिका ने अपनी बात बिच में hi छोड़ दी. वही नताशा तो बस कनिका को देखे जा रही थी.

"जनता हु. की मेरे और नताश के बिच म 7 साल का अंतर होगा. पर अब ये देख मुझे और इसको देख कर कोई ये नहीं कह सकता है." नकुल ने कहा. "मैं तुम्हे बताता हु की नताश मेरी दोस्ती कैसे हुई."

"फिर अब बताओ नताशा और तुम्हारे बारे में सब कुछ. अगर झूठ बोलना न तो तुम्हारे दांत तोड़ दूंगी और इस नताशा के भी." कनिका नकुल मरते हुए बोली.

"ठीक है ठीक है. अगर मैं ने तुमसे झूठ बोलै तो हम दोनों के दांत तोड़ देना. अब शांत बैठ कर मेरे और नताशा के बारे सुनो." नकुल ने कहा. फिर कनिका के होठ को चुम लिया. और बोलना सुरु किया.

फ्लैशबैक

आज से 4 यरस पहले की बात है. मुझे मेरी बड़ी माँ रेशमा ठाकुर यहाँ किसी काम से ले कर आयी थी. मुझे पता था मेरे साथ यहाँ क्या होने वाला है इस लिए मैं यहाँ से भाग गया था. उस समय मैंने ये भी नहीं सोचा था की मेरे भाग ने के बाद मेरी माँ के साथ क्या होगा. मैं तो अपनी मस्ती में घूमता हुआ रोड पे चल जा रहा था. मुझे घूमते हुए सुबह से रात हो गयी थी इसी के साथ मुझे भूक भी लगने लगी थी. इस लिए मैंने अपने जेब म पैसे तलाशने लगा तो कुछ भी नहीं मिला क्योकि जो थोड़े बहुत थे मैं उन्हें खर्च कर चूका था.

इस लिए एक नलके से पानी पाइक. रोड किनारे एक बेंच पर जा के सो गया. अभी मुझे आधा घंटा hi हुआ था की मुझे के लड़की की छिलने की आवाज सुनाई देने लगी. जब उठ के देखा तो सामने एक लड़की को तीन लड़को ने घेरे हुए थे. तीन लड़के उसे के साथ जबरदस्ती कर रहे थे. मैं उसको बचने के लिए उठ कर उनके तरफ चल दिया. मुझे उसे समय नताशा का नहीं पता था. अभी नताश से थोड़े hi दुरी पर hi था की मैं देखा वो लड़के मुझे काफी बड़े और ज्यादा ताकतवर थे, इसलिए उसको बचने के लिए अपने अस पास देखने लगा. मुझे वह पे कुछ ीत दिखाई दिया. मैंने उसमे से तीन ीत उठा लिए और उस लड़की की और चल दिया. बिना कुछ कहे मैंने एक के सर पे वो ीत मर दिया वो वही बिहस हो गया. मैंने बिना मौका दिए दूसरे को भी मर दिया वो ीत उसके मुँह पर जा के लगा और वो मुँह के भर निचे जा गिरा ये देख कर तीसरा वह से उस लड़की को छोड़ के भाग गया. फिर मैं नताशा को ले कर वह से भाग गया. थोड़े दूर जाने पर हम दोनों रुक गए.

"आपको इतनी रात को अकेले नहीं निकलना चाहिए. आज तो मैं यहाँ पर था इस लिए आप बच गयी. पर कल को कौन बचाएगा. चलिए मैं आपको आपके घर तक छोड़ देता हु." मैं ने कहा.

"आपका बहुत बहुत शुक्रिया आपने जो मेरी इज्जत बचाई. क्या मैं अपने इजात बचने वाले का नाम जान सकती हु," नताशा ने मुझसे मेरा नाम पूछ तो मैं मुस्कुराते हुए कहा, "मेरा नाम नकुल है, और आपका."

"मेरा नाम नताश है."

"आप इतनी रात को अकेले कहा से आ रही थी."

"मैं एक बेयर बार में काम करती हु. मैं अपना काम ख़त्म कर के वह से जब अपने घर आ रही थी. तो रस्ते में मुझे वो लड़के मिल गए और मुझे यहाँ ले आये. क्योकि इस आराम में इतनी रात को कोई नहीं होता. आप मुझे बच लिया वर्ण मैं बर्बाद हो गयी होती." नताशा के कह कर रोने लगी. पर नताशा ने जल्दी hi अपने आपको शम्भल लिया. "इतनी रात को कहा से आ रहे थे."

"मैं यही रोड के किनारे सो रहा था. मुझे किसी लड़की की चीखने की आवाज सुनाई दी जब अपने अस पास देखा तो सामने के गली में आप दिखाई दी तो आपको बचने चला आया. और हाँ आप मुझे आप मत कहिये, मैं आपसे बहुत छोटा हु इसलिए मुझे तुम कह सकती हो."

"तो तुम भी मुझे तुम कह कर बुलाओ. मुझे अच्छा लगेगा."

"Ok नताशा तुम्हारा घर और कितनी दूर है."

"बस आने hi वाला है. तुम क्या काम करते हो."

"कुछ नहीं अभी गाओं से यहाँ आया हु और नौकरी के तलाश में यहाँ वह घूम रहा हु, जहा जगह मिल वही सो गया. पर मुझे अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली." मैं ने थोड़ा दुखी होते हुए नताशा से कहा.

"ऐसा क्यों." नताशा ने मुझे पूछा.

"क्युकी एक तो मेरे पास कोई आगे प्रूफ नहीं है और दूसरा देखने में एक बचे जैसा लगता हु. तो भला मुझे नौकरी कौन देगा." मैं ने कहा. नताशा ने एक बार मेरी तरफ देखा और हस्ते हुए बोली, "ये तो है की तुम देखने में बचे जैसे लगते हो. वैसे तुम्हारे घर में कौन कौन है."

"मैं और मेरी माँ है बस. पिता जी बचपन में चल बेस थे. माँ ने बड़ी मुश्किल से मुझे पला, और जब थोड़ा बड़ा तोह शहर चला aaya.Aur आपके" मैं ने एक झूठी कहानी नताशा को सुना दी. नताशा ने भी ऊपर विश्वास कर लिया क्यों की मेरी हालत भी ऐसे hi थे.

"मेरी कहानी भी तुमसे अलग नहीं है. मैं, मेरी माँ और दो छोटी बहाने है घर में."

तभी नकुल फ़ोन बजने लग गया. नकुल फ़ोन उठा के बाते करने लग गया और जब बात ख़त्म हुई तो उसने फ़ोन रख कर दिया. नकुल ने कहा, "कनिका अब हमें चलना चाहिए निचे टैक्सी वाला वेट कर रहा है." इस बातो के दौरान तीनो खाना भी खा चुके थे.
 
अपडेट 11

अब तक

आप ने देखा की नकुल और कनिका के मस्ती के दौरान जब कनिका के कहने पर जब नकुल ने दूर ओपन करा एक जोर का थप्पड़ उसके गाल पर उसकी फ्रेंड नताशा ने जोर से मारा. कनिका ने भी नताशा को थप्पड़ मरी और उसे लड़ने लगी, नकुल समझने पर जा कर समझी. फिर अपने देखा की कैसे नकुल ने अपनी और नताशा की मिलाने कहनी बताई इस बिछे वो सब खाना भी खा लिया. अभी आगे कहनी भड़त उसे पहले hi का फ़ोन रिंग करने लगा, जिस वजह से नकुल को बात ख़त्म ख़त्म करना पड़ा. फिर नताशा से बाद में मिलाने को कह कर वह से चल गया.

अब आगे

"कनिका अब हमें चलना चाहिए. जीतू हमारा निचे इंतज़ार कर रहा है. और नताश मैं यहाँ हु ये किसी से मत कहना." नकुल ने कहा. उसके बाद कनिका अपना हैंडबैग लेने के लिए एक तरफ चली गयी. "नताशा मैं जो कहा भूलना मत."

"ध्यान रखूंगी. मैं इस बात की खबर किसी को भी नहीं होने दूंगी. मैं चलती हु." नताशा ने कहा. उसके बाद कनिका और नकुल रूम से निकल गया. उसके बाद नताशा भी वहां से चली गयी. नताशा निचे जाने के बाद वेटर को भेज कर उस रूम के बहार जो खाने tray-roller को लेन भेज दी. वही जाने से पहले कनिका ने नताशा से उसको थप्पड़ मरने के लिए माफ़ी मांगी. जिस पर नताशा ने कनिका को लगे लग ली.

वही जब नकुल और कनिका होटल से निकल कर सीधे जीतू के पास चल गए, जो बहार hi दोनों इंतज़ार कर रहा था. फिर दोनों अंदर बैठ गए.

"चलिए भाई." नकुल अंदर बैठने के साथ hi जीतू से कहा. जीतू भी गियर दाल कर टैक्सी को आगे बढ़ दिया. इस बार नकुल कनिका के साथ पीछे बैठ हुआ था.

"नकुल एक बात पुछु तुमसे. सच कहना." कनिका ने कुछ सोचने के बाद नकुल की तरफ देखते हुए बोली. नकुल ने भी बड़े hi प्यार से कनिका के गाल में हाथ फरा और कहा, "पूछो क्या पूछना है. मैं वादा करता हु, मैं तुमसे झूठ बिलकुल भी नहीं कहुगा."

"नकुल तुम मुझसे कितना प्यार करते हो." कनिका ने नकुल के हाथ को पकड़ कर कही. नकुल कनिका के इस बेतुके सवाल को उसने कर हंस दिया. कनिका का ये देख कर फिर से बोली, "बताओ न तुम मुझसे कितना प्यार करते हो."

"कनिका मैं तुम्हारे इस बेमतलब के सवाल का क्या जवाब दो ये मुझे समझ नहीं आ रहा है." नकुल ने कनिका को अपने गले लगते हुए कहा, "तुम्हारे मैं में ये बात आयी, कैसे ये तो मैं नहीं जनता और नहीं इसका करना जाना चाहता हु. पर इतना पता मुझे की मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हु."

"थैंक यू. थैंक यू. मैं तुम्हे बता नहीं सकती. मैं ये जान कर कितना खुश हु. ी लव यू नकुल. Can't लाइव विथाउट यू." कनिका ने बहुत hi इमोशनल हो गयी थी ये बोलते हुए. नकुल कनिका के माथे पर किश करते हुए कहा, "ी आल्सो लव यू कनिका."

"कनिका मैं तुम्हे खोना नहीं चाहता. यार मेरे नसीब में किसी का प्यार नहीं है. मैंने जिसे भी आपने मन कर प्यार किया कुदरत ने मुझसे उसे छीन hi लिया. इस लिए डरता हु कही तुम्हें भी मुझे कोई छीन न ले, या खो न दू." नकुल ने अपने गुजरे हुए लम्हों को याद कर, ये बात कनिका से कहा. उसने सच hi तो कहा था की उसने जिसे भी प्यार किया वही उसे दूर हो गया, जिसे अपनी माँ मंटा था उसने उसको चाकू मर कर उसकी हत्या कर दी. एक बहन थी उसे भी उसको भी उसे दूर कर दिया. क्या कसूर था नकुल ये वो भी नहीं जनता था. शायद भगवन जनता हो.

"मैं ऐसा नहीं होने दूंगी. मैं तुम्हें कभी छोड़ के नहीं जाउंगी. अगर भगवन भी आ गया तुम्हे मुझसे दूर करने तो मैं उसे भी लड़ जाउंगी." कनिका ने कहा. ऐसे hi नकुल और कनिका आपस में बात करते रहे. उन दोनों का ध्यान तो तब टुटा जब जीतू ने कहा, " सर जी आपकी मंजिल आ गयी."

टैक्सी के बार देखा तो गेट पर बड़े बड़े अक्षरों में सीबीएसई बॉर्ड लिखा हुआ था. नकुल टैक्सी से निचे उतर गया, कनिका भी दूसरे तरफ से उतर गयी. "जीतू भाई ये लीजिये आपका भाड़ा. अभी हमें समय लगा. तो देख लीजिये आपको क्या करना है." नकुल कनिका को ले कंपाउंड के अंदर भाड़ गया.

"मैं आपका यही पर वेट करूँगा. आप आराम से जाईये." जीतू ने कहा. उसके बाद जीतू टैक्सी के अंदर बैठ गया और दोनों अंदर की तरफ बढ़ चले.
 
अपडेट 12

अब तक

आप ने देखा की नकुल कनिका से बाते करते हुए सीबीएसई बॉर्ड आ गया था. उसके बाद वो कनिका को ले कर अंदर चला गया वही जीतू बहार उनका इंतज़ार करने लग गया..

अब आगे

कनिका नकुल के साथ अंदर गयी तो देख की चारो तरफ लोग थे और अंदर से आ रहे थे और अंदर जा रहे थे. जहाँ एक तरफ बड़ा से मैदान हरी हरी घासो से सम्पन था, वही उसके चारो तरफ झाडिया और छोटे पौधे लगे हुए थे जो बहुत hi सुन्दर नज़र दे रहे थे. कुछ बचे अपने पेरेंट्स के साथ उस घास में बैठे हुए खुश लिख रहे थे तो कुछ बैठ कर आराम कर रहे थे. तो कुछ चिप्स, कुरकुरे और कोल्ड ड्रिंक्स खा और पी रहे थे.

वही कनिका ने नकुल के तरफ देखा तो एक पूरी क्यारी गुलाब और गेंदा के फूल से बहार हुआ था. उसे के बार घास से भरा हुआ मैदान था जहाँ पर कुछ बचे और उनके पेरेंट्स बैठे हुए थे. वही कनिका नकुल का हाथ पकड़े हुए आगे चल रही थी पर उसका ध्यान चारो तरफ था.

"नकुल हमें किस तरफ चलना है." कनिका ने नकुल से कहा. और फिर से चारो तरफ का दृश्य देखने लग गयी.

"ये तो मुझे भी नहीं मालूम की हमें किस तरफ चलना है. पर मैं किसी से पूछ लूंगा." नकुल ने कनिका ले तरफ देख कर कहा और फिर सामने की बिल्डिंग की तरफ देखने लग गया.

"क्या तुम्हे सच में नहीं पता hi हमें किस तरफ जाना है. तो खड़े किस लिए हो. पूछो किसी से." कनिका ने नकुल का जवाब सुनाने के बाद उसकी तरफ मुद कर कहा. उसने अपने दोनों हाथ कमर पर रख लिए थे. नकुल कनिका के बात और उसके इस तरफ खड़े होने के अंदाज़ से हंस दिया और उसके ऊपर बहुत प्यार आय उसको.

"ठीक है मैं किसी से पूछता हु." नकुल ने कनिका से कहा और इधर उधर देखने लगा. कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाये जिसे डीएमसी (मार्कशीट) का एरिया पूछ सके. नकुल को तभी के व्यक्ति आते हुए दिखा जिसके गले में एक कार्ड टेंगा हुआ था, जो उसके एम्प्लोयी होने को दर्शता है. उस व्यक्ति की आयु 40 45 के आपस की होगी. जब वो व्यक्ति नकुल के पास पंहुचा गया तो नकुल ने उसके पास जा कर कहा, "एक्सक्यूज़ में सर. क्या आप मुझे बतायेगे की डीएमसी कहा से निकलवा सकते है."

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"बीटा बीटा इस बिल्डिंग के 3रद फ्लोर के लेफ्ट साइड में है. 38 रूम है. तुम वह जा कर पता कर लो." उस व्यक्ति ने नकुल से कहा.

"थैंक यू सर." नकुल उस व्यक्ति को ध्यानवाद देने के बाद वह से कनिका को अपने साथ ले कर निकल गया.
 
अपडेट 13

अब तक

आपने पढ़ा की कनिका नकुल के साथ जाते हुए आपस का नज़ारा देख कर खुश हो रही थी, वही नकुल उसको इस तरह देख कर खुश हो रहा था. फिर आपने देख की कनिका के कहने पर नकुल ने व्यक्ति से डीएमसी डिपार्टमेंट का एरिया पूछा और उसके बाद नकुल उसको ले कर उस तरफ चल दिया.

अब आगे

फिर नकुल जब कनिका को ले कर डीएमसी डिपार्टमेंट एरिया दाखिल हुआ तो देखा की बहुत से क्लर्क अपने सीट पर बैठ कर काम कर रहे थे. नकुल एक तरफ चल कर गया, जहाँ पर एक लेडी क्लार्क बैठी हुई थी, जिसकी ुरम कोई 35 वर्ष की होगी. छित वाली एक साडी और उसी रंग की मैचिंग ब्लाउज पहना राखी थी आँखों पर नज़र का चश्मा लगा राखी थी. नकुल कनिका के साथ वहां पर जा कर खड़ा हो गया.

"नमस्ते मैडम, क्या आप मुझे बता सकती है की क्सक्सक्सक्स एरिया का क्सक्सक्स ज़िले का डीएमसी कौन देख रहा है या इंचार्ज है.' नकुल उस लेडी क्लार्क को अभिवादन करने के बाद अपने प्रश्न को कहा. उस लेडी क्लार्क ने बार अपना सर उठा कर देखा, फिर अपने ध्यान फाइल में करते हुए बोली, "इस रौ के लास्ट में जो काउंटर है. वही है जिस एरिया की तुम बात कर रहे हो."

"थैंक यू मैडम." नकुल शुक्रिया अदा कर के, फिर कनिका को अपने साथ लिए और उसे तरफ बढ़ गया. जहाँ पर उसकी डीएमसी मिलना था. फिर वह जब कनिका के साथ नकुल पंहुचा तो देखा की उस जगह पर एक 55 वर्ष का आदमी बैठा हुआ था. जो किसी फाइल को देख रहा था अपने आँखों पर नज़र का चश्मा लगाए हुए.

"नमस्ते सर." नकुल ने कहा. नकुल के तरफ देखा बिना hi उस क्लार्क ने कहा, "गुड मॉर्निंग एंड सीट डाउन." नकुल उस क्लार्क की बात सुना और फिर नकुल एक कुर्शी पर तो ठीक उसके बगल वाले कुर्शी पर कनिका बैठ गयी. नकुल उस क्लार्क को अपने काम में लगा हुआ देख और कुछ ना बोलता हुआ देख कर उसने hi पहले करने की सोचो.

"सर, मेरा नाम नकुल है. मुझे अपनी डीएमसी लेनी है. मैं क्सक्सक्स एरिया से क्सक्सक्स ज़िले से आया हु." नकुल ने आपने आने का कारन उस क्लार्क को बताया. जिसको सुनाने के बाद भी उस क्लार्क ने अपने फाइल पर ध्यान लगाए रहा. नकुल के तरफ बिना देखे कहा, "बीटा कौन से ईयर की डीएमसी है. ताकि मैं देख कर तुम्हे देख सकू."

"सर, 15 पहले hi मेरा रिजल्ट आ है." नकुल ने कहा. नकुल की बात को सुन, अपने हाथ में कलम रोक दिया. फिर अपने काम में दुबारा लगा गया. और नकुल के तरफ एक बार फिर से बिना देखे कहा, "बीटा अभी तो रिजल्ट आया है. जहाँ तो मुझे पता है, डीएमसी की प्रिंटिंग सुरु नहीं होगी, अगर हो भी गयी होगी तो शायद hi तुम्हारे एरिया की अभी सुरु हुआ होगा. मैं इस में तुम्हारी कोई मदत नहीं कर सकता हु."

"प्लीज हेल्प में सर. काम से काम एक बार पता तो कर सकते है. क्या पता मेरे एरिया भी सुरु हो गया हो. प्लीज सर." नकुल ने अनुरोध करते हुए बोलै. नकुल के इतना कहने पर क्लार्क ने अपना सर उठा के देखा, और फिर नकुल को अपने देख कर खड़ा हो गया और हाथ जोड़ते हुए कहा, "माफ़ करना ठाकुर जी, मुझे नहीं पता था की ये आप है, और मैंने आके साथ ऐसे बाते कर गया. मुझे hi बुला लिया होता, इस काम के लिए. मैं खुद hi आपकी सेवा म हाज़िर हो जाता."

"कोई नहीं, क्या अब भी मुझे मेरा डीएमसी नहीं मिलेगा."

"क्यों नहीं मिलेगा. अभी चेक करता हु. अगर नहीं भी हुआ होगा तो मैं खुद hi करवा कर लता." उसके बाद क्लार्क अपनी सीट से खड़ा हुआ और एक तरफ चला गया, जहाँ पर कुछ क्लार्क कंप्यूटर पर काम कर रहे थे. वहां उनसे बात कर सब कुछ पता करने लगे. जिसमे उनको 10 मिनट का समय लगा. फिर नकुल के पास आये और बोले, "ठाकुर साहेब आपके एरिया की मार्कशीट बना कर रेडी हो गयी है और अभी यहाँ से निकलने वाला है. आप मेरे साथ चलिए. नहीं आप यही पर बैठिये मैं अभी ले कर आता हु."

"ठीक है. मैं और कनिका वही बैठ कर आपका इंतज़ार करते है." नकुल ने कहा. उसके बाद वह वहां से चले गए. कोई 30 मिनट्स के बाद अपने हाथ में के लार्ज एनवलप के कर नकुल के पास आ आये और कहा, "माफ़ करना ठाकुर साहेब इंतज़ार करवाने के लिए. ठाकुर साहेब ये लीजिये आपकी डीएमसी."

"ध्यानवाद आपका. और हाँ मैं यहाँ पर आय था ये बात आप किसी से मत कहना. वर्ण आप मुसीबत में पद जायेगे." नकुल अपनी डीएमसी ने के बाद क्लार्क से बोलै. उसके बाद नकुल कनिका के साथ वह से निकल जाया.

"सर जी बड़ा जल्दी काम हो गया, मुझे तो लगा था शाम हो जायेगा." नकुल और कनिका को अपने तरफ आते देख जीतू ने कहा. दोनों hi जीतू से कुछ hi दुरी पर थे, जब उसने ये बात कहा था.

"हाँ जी, कोई जान पहचान वाला मिल गया था इसलिए जल्दी हो गया. वर्ण शाम हो hi जाना था या फिर काम hi नहीं होता." नकुल ने कहा. और एक तरफ का टैक्सी का दूर खोल कर कनिका को बैठने का इशारा किया. जिस पर कनिका मुस्कुराते हुए अंदर बैठ गयी. फिर नकुल भी दूसरे तरफ से उसके बगल में जा बैठा. जीतू भी अपनी ड्रिवेरिंग सीट पर जा बैठा. "जीतू भाई आप मुझे बार बार सर मत कहिये, बाड़ा अजीब लगता है. हो सके तो मेरा नाम ले कर बोलिये या फिर कुछ और जो आपको अच्छा लगे. पर सर नहीं. सर सुन कर सर दुखने लगा है."

"ठीक है भाई, अब मैं आपको सर नहीं काहुबजा. तभी सोचु इतनी जल्दी कैसे काम हो गया, होटल चलना ह या कही और." जीतू ने अपनी टैक्सी आगे बढ़ते हुए कहा. नकुल ने हँसते हुए कहा, "होटल hi ले चलो." उसके बाद जीतू ने अपनी टैक्सी को होटल के रस्ते की तरफ बढ़ा दी. नकुल और कनिका को पहुंचने में 45 मिंट लगे. टैक्सी से उतरने के बाद नकुल ने जीतू को 3000 हज़ार रुपये दिए.

"भाई इतना किराया तो नहीं बनता मेरा. फिर आपने मुझे इतने पैसे क्यों दे रहे है." जीतू ने नकुल के हाथ में इतने पैसे देख कर बोलै. जिस पर नकुल ने कहा, "भाई ये पैसे आपके लिए नहीं है. बल्कि मेरी भाभी और उनके बचो के लिए है. कनिका जरा 500 रुपये देना." कनिका ने 500 का के नोट अपने पर्स से निकल कर नकुल के तरफ बढ़ा दी. नकुल ने उसे थम लिया. "ये 500 आपका किराया और 3000 मेरे भाभी और उनके बचो के लिए. और हाँ जब कभी यहाँ आना हुआ तो भाभी और बचो से जरूर मिलूंगा."

"ठीक है भाई, ये 500 तो मैं रख लेता हुआ. और ये तुम्हारी भाभी को. और हाँ जभी यहाँ आना मुझे कॉल जरूर करना." जीतू ने कहा. और आगे बढ़ कर नकुल के गले लग गया. नकुल ने भी प्यार से गले मिला और फिर जीतू से विदा लेकर अंदर की तरफ चल दिया. कनिका भी जीतू की नमस्ते की और नकुल के पीछे हो ली. उसके बाद जीतू अपनी टैक्सी में बैठ कर वहां से चला गया.

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वही दूसरी और कनिका के पिता अनुभव घुसे किसी काम के सिनसिले म सिटी आये हुए थे, अपना काम ख़त्म करने के बाद जब अनुभव घुसे अपने बेटी के लिए कुछ कपडे खरीदने के लिए अपनी कार मॉल की तरफ घुमा दी. मॉल पहुंचने के बाद अनुभव घुसे अपनी कार को पार्क किया और लेडीज गारमेंट्स शॉप के अंदर चले गए. जहाँ पर उन्होंने अपनी बेटी के लिए एक सुन्दर सी ड्रेस ख़रीदा. फिर सोचा क्यों न नकुल के लिए भी कुछ कपडे खरीद लिया जाए, इसलिए वह से एक दूसरे शॉप चले जाएग, और नकुल के लिए कपडे खरीदने लगे.

उसी समय अनुभव घुसे को एक आदमी देख लिया और अपने बॉस को फ़ोन घुमा दिया. जैसे hi दूसरी तरफ से फ़ोन पिचकूप हुआ, उस आदमी ने कहा, "बॉस अनुभव घुसे मिल गया. अभी मेरे सामने एक शॉप के अंदर गया है."

"क्या अनुभव घुसे मिल गया. ये तुमने बहुत hi अच्छी खबर सुनाई है अरे गंगू." बॉस खुश होते हुए कहा. और जोर जोर से हसने लगा. अपने बॉस की बात सुन कर गंगू भी खुश हो गया. "गुंगु उस अनुभव को पकड़ के मेरे पास ले आओ, तुम्हें मुँह माँगा इनाम मिलेगा. अगर खली हाथ आया तो जाएं से मर दूंगा. तू जनता है न वो मेरे लिए कितना इम्पोर्टेन्ट है."

" जी बॉस जनता हु बॉस. मैं इस बार अपने हाथ से जाने नहीं दूंगा. जिन्दा नहीं तो मुर्दा आपके सामने होंगे. ये मेरा आपसे वादा है." गंगू जोश में आ कर बोलै. उसकी बात सुन कर उसका बॉस चिल्ला कर बोलै, "जिन्दा चाहिए मुझे, मुर्दा नहीं. समझ आयी मेरी बात. अगर कुछ हो गया तो तुम्हे जान से मर दूंगा."

फिर बॉस ने फ़ोन कट दिया. जब गंगू ने अपना सर उठा के दिखा तो डॉ. अनुभव वह पर नहीं था. फिर गंगू अपने आस पास देखा तो डॉ. अनुभव मॉल से बहार जाते हुए दिखाई दिया. गंगू तेज़ी से निचे के की तरफ चल दिया और मॉल के बहार आया और इधर उधर देखने लग गया. गंगू को एक तरफ डॉ. अनुभव घुसे दिखाई दिया, जो अपनी कार में बैठ कर निकल गया.

गंगू भी जल्दी से अपने कार में बैठा और अपनी कार को अनुभव की कार के पीछा लगा दिया. डॉ. अनुभव अपनी धुन में कार चलते हुए जा रहे थे, और गंगू उनसे थोड़ी दुरी बनाये हुए. जब डॉ, अनुभव ने अपनी कार को हाईवे पर लिया. गंगू ने अपनी कार डॉ अनुभव से दुरी बनाये चल रहा था ताकि कोई सक न हो. ऐसे के ट्रैफिक पर जान डॉ अनुभव ने अपनी कार रुकी तो, ठीक पीछे hi गंगू ने. डॉ अनुभव को अपनी कार के मिरर पर गंगू का चेहरा दिख गया, और उसे देखते hi अपनी कार ग्रीन सिग्नल होते hi फुल स्पीड में भगा दिया. ये देख गंगू ने भी फुल स्पीड में अपनी कार अनुभव के कार के पीछे लगा दिया और अपनी गन निकल कर गोली चलने लगी गया.

डॉ अनुभव अपने ऊपर हमला होता देख अपनी कार की स्पीड बड़ा दी. पीछे से अनुभव के ऊपर फायर होते रही, एक गोली उनके कार के बैक साइड के मिरर पर भी लगी जो मिरर को तोड़ते हुए गोली उनके पास से निकल गयी. अपने आपको बचते हुए अनुभव कार को इधर उधर चला रहे थे. ताकि कोई गोली न लग जाये. आगे एक चौराहा था, जब डॉ अनुभव वह पर पहुंचे तो 5 सेकण्ड्स रह गए थे रेड सिग्नल होने में, उस 5 सेकंड में डॉ अनुभव अपनी कार को रेड सिग्नल होने से पहले पर कर दिया. गंगू को रेड सिग्नल पर रुकना पद गया. अनुभव को बच के निकलने का मौका मिला गया. वर्ण आज बहुत कुछ हो जाना था उनके साथ.
 
अपडेट 14

अब तक

अपने पढ़ा की कैसे नकुल ने क्लार्क से थोड़ा अनुराध करने और जानकारी निकलने के बाद अपना डीएमसी हासिल किया और फिर कनिका के साथ बोर्ड से अपना डीएमसी लेकर निकला गया. रस्ते में जीतू से कोई बात नहीं हुई पर मंजिल पर पहुंचने पर नकुल ने जीतू को अपना भाई मान कर उसके बचो और बीवी के लिए कुछ पैसे दिया साथ hi जीतू को टैक्सी कियारा. जीतू ने भी नकुल नेक्स्ट टाइम वापस लौटने पर अपने घर आने का निमंत्रण दिया. फिर अपने अपने रस्ते निकल गए. उसके बाद आपने बढ़ा अनुभव घुसे कैसे बच निकला अपने पीछे पड़े हुए गुंडों से.

अब आगे

अनुभव उनसे बच निकलने के बाद भी अपनी कार को इतनी तेज़ी से चला रहे थे की उन्हें सामने आने वाली कोई सी भी गाड़ी सही से दिखाई नहीं दे रहे थे या फिर देखने की कोशिश hi नहीं कर रहे थे. थोड़ा आगे जाने के बाद जब पीछे देखा तो वह निशांत हो गए की अब उनका पीछा कोई नहीं रहा, इस लिए अपनी कार को थोड़ा स्लो कर लिया.

गंगू को मौका मिलते hi रेड लाइट को पार कर गया और अपनी कार को फुल स्पीड में अनुभव घुसे के पीछे भगा दिया, कार की मीटर की वो छोटा सा स्पीडोमीटर की सुई अपनी आखरी संख्या पर जा रुका. कुछ समय के बाद गंगू को एक बार फिरसे अनुभव की कार दिख गयी और उस पर गोलिया चलने लग गया. एक ये देख कर अनुभव को एक बार फिरसे अपनी कार की स्पीड बढ़ दी. अनुभव पर गोलियों की बौछार पहले से ज्यादा हो गयी थी. उस समय अनुभव दर लगाने लग गया था कही उन्हें कुछ हो न जाए. अभी अनुभव अपने इसी ख्यालो में थे की उनका फ़ोन रिंग करने लगा. अनुभव ने फ़ोन आये कॉल को देख कर उसे उठा लिया और सामने वाले से बात करते हुए बोले, "बीटा कनिका तुम और नकुल जल्दी से घर आ जाओ. मुझे तुम दोनों से कुछ जरुरी बात करना है." उसके बाद अनुभव फ़ोन कट कर दिया.

पीछे से गंगू और उसके साथी अनुभव को फीछे कर रहे थे, अब वह उस से बस कुछ hi दुरी पे थे. अनुभव को एक बार फिरसे सामने चौराहा दिखाई दिया. पर शायद इस बार अनुभव का नसीब ख़राब था क्योकि चौराहे की ट्रैफिक लाइट ख़राब थी. वाहनों का आना जाना भी नाम मात्र का था. अनुभव अपने को बचने के लिए स्पीड से कार चलते हुए उस चौराहे पार कर गए. उनके पीछा करा रहे गंगू की कार को एक ट्रक ने टक्कर मर दिया. हुआ कुछ ऐसा था की जब अनुभव अपनी कार को जैसे hi चौराहे से पार किया, उसी समय दूसरे साइड के रस्ते से आने वाली ट्रक ने गंगू की कार को टक्कर मर दिया, टक्कर इतना जोरदार था की नतीजा ये हुआ की गंगू की कार काफी दूर जा के गिरा उड़ाते हुए और फिर कार ब्लास्ट हो गयी. पर गंगू और उसके दो आदमी थोड़ी दूर पे जा गिरी क्योकि कार का दरवाजा टक्कर की वजह से खुल गया था. अनुभव घुसे ने पीछे मुद कर भी नहीं देखा की ये धमाका कैसा था. अनुभव की कार सीधे घर जा कर hi रुका और अपने घर में अपने रूम में चले गए, फिर अपने अतीत के बारे म सोचने लगे.

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वही दूसरी और नकुल और कनिका दोनों फ्रेश होने के बाद खाना खाने लगे, जो होटल में अपने रूम में आने के बाद hi आर्डर कर दिया था खाने का. कनिका का दिल कुछ बैचेन होने लग था कहते वक़्त, तोह उसने नकुल से कहा, "यार मुझे पापा से बात करने बहुत मन कर रह है. पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की वह कोई मुसीबत में है. मेरा दिल भी बैचेन सा हो रहा है."

"ठीक है कर लो. काम से काम इस बहाने अंकल का हलचल भी कील जायेगा." नकुल ने खाने का निवाला अपने मुँह में दाल लिया ये कहने के बाद. कनिका भी अपना खाना कहते हुए अपना फ़ोन निकल ली और अपने पापा को कॉल लगा दी. नकुल के बाते सुन कनिका के चहरे पर मुस्कान आ गयी थी. पहली रिंग के साथ hi अनुभव घुसे ने अपना फ़ोन उठा लिया था. ये वही समय था जब गंगू उनका पीछा कर रहा था.

"Hello पापा. आप कैसे हो." कनिका ने बड़े hi प्यार से अपने पिता अनुभव घुसे पूछा. वही अनुभव घुसे बड़े प्यार से बोले, "बीटा मैं ठीक हु तुम अपना सुनाओ. सब ठीक रहा न, मार्कशीट लेने में कोई दिक्कत तोह नहीं आयी ना."

"मं ठीक हु पापा और मार्कशीट भी जल्दी hi मिल गयी. नकुल भी ठीक है. आप बातो आपका काम हो गया न.' कनिका ने अनुभव की बात को सुन खुश होते हुए बड़े hi मधुर आवाज़ में अगला सवाल किया. अनुभव भी अपनी इस पारी सी बेटी की आवाज़ को सुन कर अपना सर दर्द भूल जाते थे और आज भी वही हुआ, अपने ऊपर आयी इस मुसीबत को भूल गए तह. उतने hi प्यार से फिर से अपनी बेटी से कहा, "हाँ बेटी वो काम तो हो गया, पर."

"पर क्या पापा. क्या हुआ आपको." कनिका के चेहरे पर अपने पिता के आखरी शब्द सुन कर चिंता की लकीर आ गयी थी. जो सामने बैठा हुआ नकुल ने भी देख लिया था और कनिका की बात करने के तरीके से उसे साफ़ पता चल गया था की दूसरी तरफ जरूर कुछ हुआ था. अनुभव को अपनी गलती का ऐसा हो गया था की उसने अभी क्या कर दिया था, पर अपनी बात को सँभालते हुए बोले, "मैं ड्राइव कर राहु कनिका इस लिए मैं ये कहा था की तुम दोनों अपना ध्यान रखना. तुम कल hi नकुल को घर आ जाओ मुझे तुम दोनों से कुछ इम्पोर्टेन्ट बात करनी है." एक बार फिर से अनुभव ने गलती कर दी थी.

"क्या हुआ पापा आप कुछ पर्सन लग रहे हो." कनिका ने अँधेरे में hi ये तीर छोड़ जो सीधे निशाने पर जा लगी, अनुभव को भी लगा की बात नहीं छुपना चाहिए, इसलिए उसने भी कहा, "बीटा मेरे पीछे कुछ लोग पड़े हुए. पर मैं उनसे बच के निकल गया हु. हो सके तो तुम अभी नकुल को ले कर घर आ जाओ."

"ठीक है, पापा हम अभी आ रहे है." कनिका ने बोली. नकुल कनिका के पास चला आया और उसको बाँहों में भर के उसके कोमल गाल पर किश कर के बोलै, "अब बात हो गयी न पापा से, कोई परेशानी तो नहीं है न उनको वहां पर.

"हाँ पापा से बात हो गयी है. पर पापा ने जल्दी hi घर बुलाया है." कनिका ने गुंडों का पीछा करने की बात को नकुल से छुपा ली और ये बात उसे कही. नकुल भी कनिका के गाल पर के बार फिरसे किश करने के बाद बोलै, "ठीक है नताशा से मिल कर कल निकलते है, तुम थक भी गयी होगी."

"नहीं हमने अभी निकलना होगा." कनिका ने कहा और उठ कर कड़ी हो गयी. फिर अपने कपडे समेटने लगी. नकुल के बार खड़ा हुआ और कनिका को पीछे से अपने बाँहों भर के बोलै, "क्या बात है कनिका, तुम क्यों इतनी जल्दी चलने को कह रही हो. अभी तक तो तुम दो चार दिन तक यहाँ पर घूमना चाहती थी, अभी ये सब."

"नकुल पापा के ऊपर कुछ लोगो ने हमला किया है सायद उनकी जान खतरे में है. इस लिए हमने जाना होगा. पापा भले hi कह रहे थे की वह बच कर निकला गया है. पर मुझे उन पर गोलिया चलने की आवाज़ सुनाई दी थी." कनिका ने कहा और जो थोड़े पहले खुद को मजबूत बना राखी हुई थी, ये बात कहते हुए उसकी आँखे भर आयी. नकुल ने उसको अपनी और घुमाया और उसकी झील सी नीलक आँखों से बहते हुए मोती को साफ़ करते हुए बोलै, "ठीक है, चलो फिर चलते है. तुम रोना बंद करो, मुझे तुम रोटी हुए बिलकुल अच्छी नहीं कल्टी." फिर कनिका और नकुल ने अपने कपडे अपने बैग में रख कर होटल से चेकआउट कर गए. अपना सारा पेमेंट भी क्लियर कर चुके थे. नकुल ने नताशा के लिए कोई नोट नहीं छोड़ा था.

फिर नकुल और कनिका टैक्सी पकड़ा और टैक्सी ड्राइवर को रेलवे स्टेशन चलने को कहा. 20 मिनट्स में hi वो दोनों रेलवे स्टेशन पहुंच गए. नकुल टैक्सी ड्राइवर को पेमेंट कर, कनिका को ले कर अंदर चला गया. फिर कनिका को एक जगह खड़ा कर के टिकट काउंटर पर गया और वह से तत्काल टिकट लिया. फिर वह कनिका के पास आ गया और वह से कनिका को ले कर ट्रैन में बैठ गया. ट्रैन समय पर दिल्ली से निकल गयी.
 
अपडेट 15

अब तक

अपने पढ़ा की कैसे अनुभव अपने पीछे पड़े हुए गुंडों से बच कर निकल गया और आगे जा कर एक भर फिरसे गुंडे अनुभव को पीछा करने लगे, साथ hi उसके ऊपर गोलिया भी चलने लगे. इस दौरान अनुभव के फ़ोन उसकी बेटी कनिका का फ़ोन आ गया और उसे बात किया. कनिका के मैं में बुरे ख्याल आने को वजह से उसने अपने पिता को फ़ोन किया था. बाप बेटी दोनों एक दूसरे का हलचल पूछा और इस बिच अनुभब के मुँह से कुछ ऐसा निकल गया, जिसके वजह से उसको अपने बेटी से सच बाटना पड़ा. फिर कनिका ज़िद्द कर के नकुल को ले कर घर के लिए निकल गयी ट्रैन से.

अब आगे

"नकुल पापा के साथ कुछ होगा तो नहीं या फिर कुछ हुआ तो नहीं होगा. मुझे बहुत दर लग रहा है." कनिका का मैं ट्रैन में बैठने के बाद भी अभी तक शांत नहीं हुआ था. उसके मैं में रह रह के अपने पिता के लिए दर उठा hi जा रहा था. और इसी दर के कारन कनिका ने नकुल से ये सवाल किया था. ट्रैन अपनी रफ़्तार पकड़ चुकी थी, इसके रुकने की गति तभी काम होती, या तो रेड सिग्नल होता या फिर कोई स्टेशन आने वाला हो.

"कुछ नहीं होगा अंकल को कनिका. तुम भगवन पे बस भरोसा रखो. ऊपर वाला इतना निर्दय नहीं हो सकता की वह एक बेटी को अपने बाप से अलग नहीं कर सकता." नकुल ने कनिका के गले में हाथ दाल अपनी और खींच कर गले लगा लिया. फिर नकुल ने कनिका के गाल को चुम कर ये बात बद्र विश्वाश के साथ कही थी. कनिका भी नकुल की बात सुन कर उसके मैं में उठ रहे ख्याल पर थोड़े देर के लिए प्रतिबन्ध लग गया था. कनिका नकुल की और देखते हुए बोली, "भगवन करे ऐसा hi हो."

"कनिका तुम थोड़े देर आराम कर लो, सुबह से hi तुम मेरे साथ ट्रवेलेड कर रही थी. कही ऐसा न हो की तुम्हारी तबियत ख़राब हो जाये." नकुल के मैं में भी चिंता का भाव उठना लाजमी था क्योकि उसे भी रह रह कर अनुभव के साथ कुछ होने का ख्याल आ रहा था. पर नकुल कनिका को शांत करने के लिए, वो सब बाते कही थी पहले, और अभी भी कनिका को कुछ हो न जाये इसलिए वह ये बात बोलै रहा था.

"नकुल मुझे आराम करने का मन नहीं कर रहा है. पर मेरे मैं में रह रह कर बुरे ख्याल आ रहे है नकुल, मैं क्या करू इनका. इस लिए मुझे पापा के लिए मुझे टेंशन भी हो रही है." कनिका ने अपने मैं में उठा रहे द्वन्द को अपने प्यार नकुल के सामने खोल कर दी. नकुल भी कनिका के बात सुन कर बड़े प्यार से उसके सुन्दर माथे को चुम कर बोलै, "कनिका तुम ऐसे बुरे विचार अपने मन में मत लाओ. उन्हें कुछ नहीं होगा. Ok अब चलो आराम कर लो तुम."

"ठीक है." कनिका ने नकुल से बोली. फिर वह अपना सर नकुल के गॉड में रख कर लेट गयी और अपनी झील सी आँखे बंद कर ली. कनिका को कब नींद आयी, उसे पता भी न चला. नकुल की भी आँख लग गयी थी और कनिका के सर पर हाथ फेरते हुए. जब नकुल की आँख खुली तो देखा की रात के 2:30 बज रहे थे. नकुल के पास कोई काम नहीं था तो उसने सोचा चलो थोड़ा फ़ोन में गेम hi खेल लिया जाए. और इस लिए नकुल ने अपना फ़ोन निकल जैसे hi फ़ोन का लॉक खोला, उसके फ़ोन पर नताशा का फ़ोन आ गया.

"Hello, नताशा कैसी हो?" नकुल के फ़ोन उठाते hi नताशा से उसका हाल पूछा. नताशा गुस्से में भड़कते हुए बोली, "नकुल तुम ने अच्छा नहीं किया. मुझे बिना बताये चले गए. काम से काम मुझसे एक बार तो मिलना चाहिए था, चलो कोई नहीं न मिले मुझे, काम से काम मुझे फ़ोन कर के तो बता सकते थे."

"नताशा कुछ जरुरी काम आ गया था इसलिए मुझे कनिका के साथ निकला पड़ा. वर्ण मैं तुमसे मिल कर जाता. रही बात फ़ोन करने की तो कनिका की तबियत थोड़ा ख़राब हो गया था, इस लिए मैं तुम्हे फ़ोन कर पाया." नकुल ने नताशा से बातो छुपाते हुए बोलै. नकुल नहीं चाहता था की नताशा भी उन्हें ले कर परेशां हो जाये. नताशा ये जान कर की कनिका की तबियत ठीक न होने के कर नकुल ने उसे फ़ोन नहीं कर पाया था. इसलिए नताशा का गुस्सा शांत हो गया था पर नाराज़गी अभी बरकरा थी और अपनी नाराज़गी जाहिर करते हुए बोली, "नकुल तुमने इस बार भी बिना बताये चले गए. और तुम्हारा वेड क्या हुआ जो तुमने मेरे साथ किया था."

"सॉरी डिअर, नेक्स्ट टाइम. मेरा तुमसे वडा रहा." नकुल ने नताशा से माफ़ी मांगते हुए कहा. नकुल ने उसे वडा किया था की वह उसके साथ प्यार भरे कुछ पल उसके साथ बिताएगा, जिसमे वह उसके ऊपर और अंदर अपने प्यार से नहला देगा. पर ऐसा न हो पाया.

"इस बार तो माफ़ कर रही हु, कनिका के वजह से. पर कोई नहीं, जब अगली बार मिलोगे तो मैं तुम छोडूगी नहीं. और हाँ अपना हक तुमसे ले कर रहूंगी." नताशा ने कहा. नताशा की बात सुन कर नकुल हंस दिया और नताशा भी हंस दी

"ठीक है, जो मैं में आये कर लेना मेरे साथ, मैं तुम्हें मन नहीं करूँगा." नकुल अपनी मुस्कान के साथ नताशा से कहा. भले hi नताशा उसके चेहरे पर आये मुस्कान को नहीं देख सकती थी, पर उसको यकीं था की नकुल दूसरे तरह मुस्कुरा रहा होगा.

"ठीक है. कब तक आओगे." नताशा ने कहा.

"जल्दी है, पर कब तक कुछ कह नहीं सकता हु, नताशा एक काम करोगी मेरा." नकुल ने कहा. पर अपनी आखरी लाइन कुछ सोचने के बाद नकुल ने नताशा से कहा. नकुल की बात सुन कर बोली, "हाँ करुँगी बोलो क्या करना है."

"नताशा होटल्स जितनी भी इनकम होती है उसका सारा डिटेल मुझे इस पर भेजती रहना और रेशमा ठाकुर जब भी होटल में उस पर नज़र रखना, उस समय की साडी बात मुझे फ़ोन कर के या मेल कर देना." नकुल ने कहा.

"ठीक है कर दूंगी. ध्यान से जाना. और कनिका भी ध्यान रखना."

"ठीक है. तुम भी अपना ध्यान रखना. और किसी मुसीबत में मत पद जाना." नकुल ने कहा फिर थोड़ी देर इधर उधर की बाटे करने के बाद नकुल ने फ़ोन रखा दिया. जब नकुल ने टाइम देखा तो 4:30 बजे रहे थे सुबह से. नकुल कनिका को अपनी गॉड में से उसका सर निचे रख दिया बड़े आराम से. और फिर नकुल खड़ा हो कर फ्रेश होने चला गया. वही नताशा नकुल से बात करने के बाद खुश हो गयी थी. और फिर अपने रूम में जा कर आराम करने लगी, जो होटल में उसे के लिए अल्लोव किया था.

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सुबह 6:00 बजे स्टेशन पे ट्रैन रुक गयी. ट्रैन इस स्टेशन पर 20 मिनट तक रुकने वाली थी. नकुल ने सच्चा कुछ खाने के लिए ले आये, तभी तट उसके केबिन में आ गया कर और टिकट माँगा. नकुल टिकट दे दिया, चेक करने के लिए. तट टिकट चेक कर के नकुल को वापस कर दिया. जैसे तट जाने लगा, नकुल तट से पूछा, "ये कौनसा स्टेशन है."

"ये योगीपुरा है. 15 20 मिनट्स यहाँ पर ट्रैन रुकेगी. आप चाहे तो कुछ खरीद कर खा सकते है." तट ने कहा और फिर वह से चला गया अपने काम करने. नकुल ने कनिका जगा दिया और फ्रेश होने के लिए कहा. कनिका उठ कर फ्रेश होने चली गयी. नकुल ट्रैन से उतर कर अपने और कनिका के लिए कॉफ़ी और कुछ खाने का ले आया. जब नकुल ट्रैन आया और अपने कम्पार्टमेंट में दाखिल हुआ तो कनिका आ गयी थी और अपने कपडे बदल चुकी थी. फिर नकुल और कनिका ने कॉफ़ी और खाया, जो नकुल ले कर आया. ट्रैन 10 मिनट्स के बाद नेक्स्ट स्टेशन पर जा कर रुक गयी.

फिर नकुल और कनिका स्टेशन पर उतर गए.

फिर दोनों स्टेशन से भर निकले और वह से टैक्सी ले कर सीधे अपने गाओं की और चले दिए. घर पहहने में 2:30 हरष का समय लगा दोनों को. घर पर जैसे टैक्सी रुकी कनिका उतर घर के अंदर दौड़ गयी. नकुल ने टैक्सी ड्राइवर को पैसे दे कर विदा कर दिया. फिर नकुल अपना और कनिका के बैग ले लिए और घर के अंदर चली गया.

कनिका घर के अंदर दाखिल होते हु अपने पापा को आवाज़ लगते हुए सरे घर में ढूंढ ने लगी. पर कनिका को अनुभव कही नहीं दिखा. फिर वह सोफे पे बैठ कर रोने लग गयी. नकुल जब घर के अंदर आया और देखा की कनिका रो रही थी.

"क्या हुआ रो क्यों रही हो सब ठीक तो है न." कनिका को गले लगने के बाद नकुल ने उसे कहा. कनिका भी अपने आपको नकुल के बाँहों पर पर और तेज़ रोने लगी. "शांत हो जाओ कनिका. ये बाताओ तुम रो क्यों रही हो?"

"नकुल पापा कही दिखाई नहीं दे रहे. कही उन लोगो ने पापा को कुछ कर तो नहीं दिया." कनिका इतना कहने के बाद रोने लगी एक बार फिर से. नकुल कनिका को शांत करते हुए बोलै, "मुझे नहीं लगता है की अंकल को कुछ भी हुआ हो. क्या तुम ने सरे रूम को अच्छी तरह से चेक किया?"

"हाँ मैंने सरे रूम अच्छी तरह से चेक कर लिया है. पर वो वहां पर नहीं थे." कनिका रट hi जा रही थी. ये बात भी रट हुए बोली थी.

"पहले तुम शांत हो जाओ और ये रोना बंद करो. मैं कहा न उन्हें कुछ नहीं होगा." नकुल ने कनिका को समझते हुए कहा. नकुल बात का विश्वास कर कनिका शांत और रोना बंद कर दिया. "अब ये बाताओ क्या तुम ने लैब को भी चेक कर लिया." इतना सुनते hi कनिका नकुल बाँहों से अलग हो कर कड़ी हो गयी और लैब की तरफ दौड़ गयी. नकुल भी उसके पीछे हो लिया और जब लैब में दाखिल हुआ तो देखा की डॉ अनुभव किसी काम में लगे हुए थे. और कनिका उनसे थोड़े दूर पर कड़ी हुई उन्हें देख रही थी.

"कनिका जाओ मिल लो अपने पापा से वो देखो काम कर रहे थे." नकुल ने कनिका के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा. नकुल की बात सुन वह उसकी तरफ मुद और आगे बढ़ गयी. और उनके गले लग कर रोने लगी.

"क्या बात है बीटा? तुम रो क्यों रही हो? मुझे कुछ नहीं हुआ है. देखो मुझे और बताओ मुझे कुछ हुआ है क्या?" डॉ अनुभव घुसे ने अपनी बेटी के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कह रहे थे. कनिका तो बस रोये जा रही थी. नकुल आगे बढ़ा और बोलै, "अंकल वो लोग कौन थे जिन्होंने आप पे हमला किया."

"उन्हें छोड़ो. और कनिका बीटा तुम रोना बंद करो. मुझे तुम्हारा ये रोटा हुआ चेहरा बिलकुल अच्छा नहीं लगता. और नकुल डीएमसी तो ले आये. और अब आगे क्या करना है." नकुल की बात को बिच में hi रोका और कनिका को शांत होने के लिए बोल, आगे की बात कही थी नकुल से.

"अंकल मैं ने आगे पढ़ने का सोचा है. और मैं कनिका को भी बता दिया है की मैं कौनसा स्ट्रीम लेने चांटा हु." नकुल ने कहा. कनिका अब शांत हो गयी थी और अपने पापा से अलग हो कर कड़ी हो गयी थी. "अंकल हम ऊपर चल कर बात करते है." फिर तीनो hi ऊपर चले आये और फिर सभी सोफे पर बैठ गए.

"नकुल ये तो बहुत अच्छा सोचा तुमने. और तुम्हारे भविष्य के लिए ठीक है. क्या तुम मेरा एक काम करोगे या कहना मानोगे." अनुभव घुसे ने सुरु की बात एक मुस्कान के साथ कही थी, वही आखिर की थोड़ा सीरियस होते हुए.

"हाँ अंकल करूँगा, आप बोलिये क्या काम करना है." नकुल भी अनुभव को सीरियस होते हुए देख, वह भी सीरियस हो गया था और फिर अपनी बात कही. अनुभव घुसे नकुल की और देखते हुए बोले, "क्या तुम मेरी बेटी से शादी करोगे."
 
अपडेट 16

अब तक

अपने अभी तक पढ़ा की कैसे नकुल कनिका को ले कर वापस गाओं की तरफ चल दिया, सिर्फ कनिका के कहने भर से. नकुल ने फ़ोन पर नताशा को कुछ इंस्ट्रक्शंस देने के बाद फिर से मिलना कह कर फ़ोन रख दिया. गाओं आने के बाद जब कनिका और नकुल अनुभव घुसे से मिले तोह उन्होंने नकुल को कनिका से शादी करने के लिए कहा, जिस पर नकुल हैरानी से उनकी और देखने लग गया.

अब आगे

"क्या आपको लगता है, मैं आप की बेटी कनिका के लिए सही हु." अनुभव घुसे की बात सुनाने के बाद हैरानी के भाव के साथ और कुछ सोचते हुए ये बात कही थी. उसकी बात सुन वहां पर मौजूद कनिका के पेअर hi काँप गए थे कहीं उसके पापा मन न कर दे. वही अनुभव उसकी बात को सुन मुस्कुराते हुए उसकी और देखते हुए बोले, "मुझे यकीं है, तुम मेरी बेटी के लिए उचित वर हो. जो उसकी खुशियों ख्याल रखेगा साथ hi उसके पास गाम का साये तक भटकने देगा."

"आपको पता है न मैं उसको शारीरिक सुख नहीं दे सकता हु. फिर आप मुझे उसकी करवाना चाहते है. आपको नहीं लगता उसके साथ आप बहुत गलत कर रहे है." अनुभव की बातो को सुनाने के बाद फिरसे एक और सवाल करा. उसके इस सवाल को सुन अनुभव के चेहरे पर जो मुस्कान थी एक पल में hi गायब हो गयी, परन्तु फिर एक पल चेहरे से वंचित मुस्कान, पुनः उनके चेहरे पर वापस आ गयी, पहले कहीं ज्यादा गहरी. ये देख कर नकुल भी एक पल के लिए सोच में पद गया. "सच में hi कनिका आपकी बेटी है न या किसी और की." नकुल के मुँह से एक सवाल जो बम की तरह कनिका और अनुभव के ऊपर जा गिरा. जहाँ कनिका का चेहरा गुस्से से लाल हो गया वही अनुभव के चेहरे ऐसा कोई भाव न था.

"रही तुम्हारी शरीर सुख देने की बात तोह वह जल्दी hi तुम्हारे शरीर से ख़त्म हो जायेगा. जिसको तुम खुद कुछ दिनों या कुछ समय के बाद महसूस करने लगोगे." अनुभव ने कुछ सोचने के बाद कहा था, उनका कहना साफ़ था की उन्होंने जो इंजेक्शन उसको दिया था, वह जल्दी hi उसके शरीर से साडी कमजोरिया जड़ से ख़त्म कर देगी. और ये सच भी था. उन्होंने फिरसे कहना सुरु किया, "कनिका मेरी बेटी नहीं है, बल्कि मेरी बहन की बेटी है. जिसको मैं 3 साल के उम्र से पाल रहा हु. शायद कनिका भी इस बात को भूल गयी होगी."

कनिका ने जैसे ये सुना उसके चेहरा के रंग hi उड़ गए. उसे वह पल याद आने लगा जब उसकी माँ उसको गॉड में बैठा कर खाना खिलाती थी, और घर के गार्डन में उसके साथ खेला करती थी. कनिका को अपनी माँ का चेहरा उसके दिमांग में पूरी तरह से उजागर हो गयी थी. पर उसके पिता का चेहरा उसको ध्यान hi नहीं आ रहा था. कनिका अपने hi ख्यालो में घूम थी. तोह वही अनुभव घुसे ने फिर से नकुल से बोले, "शायद तुम्हे ये नहीं पता की मेरी बेटी को तुम्हारे बारे में सब बात पता है, फिर भी वह तुम्हसे शादी करना चाहती है. चाहे तोह तुम उसे पूछ सकते हो. अगर उसने कहा दिया की वो तुम से शादी करने केलिए राजी है तोह क्या फिर तुम शादी के लिए रेडी हो, बोलो."

"ठीक है, फिर मैं भी रेडी हो जाऊंगा, अगर आपकी बेटी ने शादी के लिए हाँ कर दिया तोह." नकुल ने साफ़ शब्दों में अनुभव से कहा. उसकी बात सुन अनुभव के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी, जो सिर्फ नकुल के हाँ पर तिकी हुई थी. "तो कनिका तुम मुझसे शादी के लिए रेडी हो." नकुल ने कनिका की और देखते हुए बोलै. नकुल की बात सुन अपने ख्यालो से बहार आ गयी. उसने एक बार अपने मां की तरफ देखा और नकुल के तरफ मुड़ते हुए बोली, "हाँ नकुल मैं तैयार हु, तुमसे शादी करने के लिए. चाहे तुम में लाख कमिया hi क्यों न हो."

"कनिका तुमने धयान से सुना न, मैं तुम्हें शारीरिक सुख नहीं दे सकता." नकुल ने फिर से अपनी बात को दोहराया. नकुल को भले hi ये लगता था की शरीर उस काबिल नहीं है की वह किसी भी लड़की को जिस्मानी सुख दे सके, पर कनिका को पक्का यकीं था की उसने मां उर्फ़ पिता जिसने उसका पला पोषण किया था, उनकी विक्षित की हुई दवा, जो नकुल को दी गयी थी, उसके अंदर की साडी कमिया दूर कर देगी. इसलिए उसने फिर से बोलना सुरु किया, "मुझे पता है. फिर मई रेडी हु."

"अब बोलो नकुल क्या कहते हो तुम. मेरी बेटी तुमसे शादी करने के लिए तैयार है. और तुम?" अनुभव ने कनिका की बात सुनाने के बाद खुश होते हुए बोलै. उसके शब्दों में ख़ुशी को dekha/mehsoos किया जा सकता था.

"मैं रेडी हु. कब करनी है शादी?" नकुल भी अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोलै. नकुल के चेहरे की मुस्कान देख कनिका भी शर्माने लगी थी. अनुभव ये देख कर खुश होते हुए बोलै, "तोह चलो तुम दोनों मेरे साथ." फिर कनिका और नकुल अनुभव के पीछे चल दिए, अनुभव उन दोनों को ले कर ऊपर लाइब्रेरी में आया. कनिका की तरफ रुख करते हुए बोलै, "कनिका तुम पूजा घर से सिंदूर ले आओ."

"ठीक है पापा अभी लाइ." इतना कहने के बाद कनिका पूजा घर की और चली गयी. वही अनुभव एक तरफ मुद गया और एक तस्वीर के पास चला गया और उसको उतर एक तरफ रखा और अपने हाथ को उस दीवाल पर रख दिया. जैसे hi हाथ दीवाल पर लगा वह एक तरफ हैट गया. अनुभव के सामने एक बॉक्स था. अनुभव उसको यहाँ से उठा और एक तरफ देख, फिर से उस तस्वीर को वाहन टांग दिया. फिर अनुभव उस बॉक्स उठा कर नकुल के पास आ गया.

"पापा ये देखिये, मैं ले आयी सिन्दूर." कनिका पुस्तकालय में प्रवेश करते हुए बोली. उसके चेहरे पर मौजूद ख़ुशी को देखि जा सकती थी. कनिका अभी भी उन्ही कपड़ो में थी, जो यहाँ आते वक़्त पहनी हुई थी. कनिका धीमे कदमो के साथ चलते हुए नकुल के बगल में कड़ी हो गयी.

"ये मंगलसूत्र लो और कनिका को पहना दो." अनुभव ने उस बॉक्स को खोलने के बाद उसमे से मंगलसूत्र निकल कर कुछ देर देखा और आगे बढ़ते हुए बोले. कनिका और नकुल उस मंगलसूत्र को बड़े hi ध्यान से देख रहे थे, मंगलसूत्र की डिज़ाइन काफी पुराण था, ऐसे लग रहा था जैसे ये कोई खानदानी मंगलसूत्र हो. "बीटा ये मंगलसूत्र माँ का जो मेरी पत्नी को दिया था, आज मैं तुम्हे दे रहा हु ताकि मेरी बेटी सदा के किये सुहागन बानी रहे और मेरी माँ और पत्नी का आशीर्वाद उसे मिल सके. जल्दी करो बीटा समाया काम है."

"ठीक है." नकुल ने मंगलसूत्र को अपने हाथो में लेते हुए बोलै. उसके बाद कनिका के तरफ मुदा और उसके गले में उस मंगलसूत्र को पहना दिया. कनिका ने फिर अपने हाथ को आगे बढ़ा दिया, जिसमे सिन्दूर राखी थी. नकुल उस डिबिया को खोल उसमे में सिन्दूर निकल कर कनिका के मांग में सजा दिया. "मैं ईश्वर को साक्षी मान, मैं तुम्हे पत्नी रूप में ग्रहण करता हु. मेरे हर चीज़ पर तुम्हारा hi अधिकार है, यहाँ तक मेरी इस तन और मैं पर भी."

"मैं भी भगवन और अपनी माँ को साक्षी मान कर, मैं तुम से ज्यादा करती हु की मेरे तन मैं और यहाँ तक मेरी रूप पर सिर्फ मेरे पति का अधिकार है." कनिका ने प्रतिज्ञा ली. उसके बाद कनिका झुक कर नकुल के पैरो को छूती है. और उसके बाद नकुल और कनिका अनुभव का आशीर्वाद लेने के लिए उसके पैरो को छुआ. आशीर्वाद देने के बाद अनुभव ने दोनों अपने गले लगा लिया.
 
अपडेट 17

अब तक

अपने अभी तक पढ़ा की नकुल और कनिका की शादी हो जाती और और अनुभव घुसे उन्हें आशीर्वाद देने के बाद गले लगा लेता है.

अब आगे

"नकुल अब समय बहुत hi काम बचा हुआ है. ऐसा करो तुम दोनों अपने दो जोड़ी कपडे और अपने डॉक्यूमेंट ले कर हॉल में मिलो, मैं भी वही आता हु." इतना कहने के साथ hi अनुभव घुसे वह से चला गया और नकुल कनिका के साथ उस स्थान से निकल एक तरफ चला गया, जिस तरफ वह गया था वह कनिका का कमरा था. जहाँ पर दोनों के सूटकेस रखे हुए थे.

"कनिका तुम्हे क्या लगता है, तुम्हारे मां किससे इतना डरे हुए है. जिसके वजह से उन्होंने हम दोनों की शादी करवा दी और सामान पैक करने के लिए बोल रहे है वह भी सिर्फ जरुरी." कनिका के बगल में खड़ा नकुल कनिका को एक बैग में उसके और अपने कपडे रखते हुए देख, उसने ये सवाल किया था. जिस बात को कनिका अपने अंदर सोच रही थी उसी बाद को बड़े hi आराम से नकुल ने उसके सामने रख दिया था और उसके उत्तर का प्रतीकाक्षा कर रहा था.

"मुझे नहीं पता नकुल मां किसी बात से इतना दर्रे हुए है या किससे डर रहे है. पर इतना जरूर कह सकती हु की वह हमें इन सब से दूर भेजना चाहते है ताकि हम दोनों को कुछ न हो जाए." कनिका बैग का चैन बंद करती हुई बोली. कनिका ने को बात कही थी वह पूरी तरह से सच hi था, क्योकि नकुल को लड़ना आता नहीं था और कनिका नहीं वैसी hi थी. वही जो लोग उसके पीछे पड़े हुए थे बहुत hi खतरनाक थे. "हमें हॉल में चलना चाहिए, शायद मां हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे."

जब नकुल और कनिका हॉल में आये तोह अनुभव घुसे एक सोफे पर बैठे हुए थे और उनका इंतज़ार कर रहे थे. जैसे उन्होंने नकुल और कनिका को अपनी और आते देखा तोह वह अपनी जगह से खड़े हो गए और बोले, "नकुल मैं तुम्हें अपनी लाइफ की सबसे कीमती चीज़ सौप दिया है. आशा करता हु तुम इसका अच्छी तरह से ख्याल रखोगे."

"आप निश्चिन्त रहिये मैं अपनी पत्नी का ध्यान बहुत hi अच्छी तरह रखूँगा." नकुल अनुभव की भवनों को अच्छी तरह से समझ सकता था की एक पिता की क्या दशा होती है, जब वह अपना सबसे कीमित चीज़ किसी दूसरे को सूप देता है.

"नकुल सायद तुम नहीं जाते की वह लोग हमारे पीछे क्यों पड़े हुए है. पर जिस खास चीज़ के लिए वह मेरे हमारे पीछे बड़े हुए है, मैं ने अब तोह तुम्हे दे दिया है. वह क्या चीज़ है समय आने पर पता चल जाएगा. उसी चीज़ को हासिल करने के लिए कुछ लॉन्ग मुझे और मेरी बेटी को मरना चाहते है. मुझे तोह उन लोगो ने देखा है, पर मेरी बेटी को नहीं देखा या जानते है, क्यों की कभी भी मैंने अपनी बेटी को अपनी बेटी नहीं कहा बल्कि मैं ने अपनी बेटी को नौकरानी की बेटी की तरह पला है, यहाँ तक जो शिक्षा मैं ने अपनी बेटी को दी है वही नौकरानी की बेटी को. अपने दोनों को hi यहाँ से बहुत दूर पड़ने के लिए भेजा दिया था. पर किसी वजह से मुझे उसे यहाँ भूलना पड़ा."

"इसका मतलब है की उन्होने पता लग गया था की आपकी बेटी कौन है. और जब ये बात आपको पता चला तोह अपने कनिका को वापस बुला लिया." नकुल ने कहा, फिर कुछ सोचते हुए बोलै, "कही ऐसा तोह नहीं की अपने अपनी बेटी की जहाँ अपनी नौकरानी की बेटी...." नकुल अपनी बात बिच में hi छोड़ अनुभव घुसे को और देखने लगा.

"ऐसा बिलकुल नहीं है, जैसा तुम सोच रहे हो. कनिका मेरी hi बेटी है. ये बात सिर्फ मैं, मेरी बेटी और वो नौकरी जानती थी जिसकी बेटी को मैंने अपनी बेटी बना के पला था." अनुभव जल्दी से अपनी बात नकुल के सामने रख दी थी. वह नहीं चाहता था की उसने मैं में कोई संख्या पैदा हो.

"आपकी नौकरानी की बेटी के साथ क्या हुआ जिसे अपने अपनी बेटी बना के पला रहे थे, और आपकी नौकरनी के साथ क्या हुआ." नकुल ने अनुभव से पूछा वह इतना तोह समझा गया था की कुछ तोह जरुरी उनके साथ घटित हुआ था, जिस वजह से कनिका को वापस बुला लिया गया था.

"मैं तुमसे झूठ नहीं कहूंगा, न hi मेरा इस तरह का कोई इरादा है. बीटा उन दोनों को उन लोगो ने मर दिया जो मुझे मरने आये थे कुछ दिन पहले. ये बात मुझे एक महीने पहले hi पता चली थी." अनुभव ने जब ये बात नकुल को बताई तोह उसके चेहरे पर पीड़ा के भाव को साफ़ देखा जा सकता था. नकुल को जिस बात की शंका थी वह सच हो गयी थी. वही कनिका के आँखों से भी पानी बहने लगा था

"मुझे ये समझ नहीं आ रहा की वो लोग आपको मरना क्यों चाहते है, या वह सी वास्तु है जिसको आपने मुझे सौप दिया है." नकुल का चेहरा भी दुःख के भावना से ग्रस्त हो गया था, पर इन घटनाओ का कारन जाने के लिए ये सवाल अपने ससुर से पूछ लिया था.

"मैंने एक ऐसा मेडिसिन बनाया है, जिसको अगर किसी ने लिए की तोह वह बहुत hi ताकवर बन जाएगा, फिर उसे हरा पाना नामुनकिन हो जायेगा. वह संसार का बहुत hi शक्तिशाली इंसान बन जायेगा. बीटा मेरे पास ज्यादा समय नहीं है. वो यहाँ मुझे खोजते हुए कभी आ सकते है. इसलिए नकुल तुम उस बीएड पर लेट जाओ. ताकि मैं वह इंजेक्शन तुम्हे दे सकू." अनुभव घुसे ने नकुल को उसके सवालो का जवाब दिया और उसके चेहरे को भाव को देख कर समझ गए थे की नकुल का मैं भी दुखी हो गया था ये सब जान कर.

"ठीक है." इतना कहने के बाद नकुल बीएड पर जा कर लेट गया और अनुभव घुसे एक तरफ चले गए. फिर उन्होने नकुल को एक के बाद एक इंजेक्शन लगते चले गए. इस तरह नकुल के शरीर में 6 इंजेक्शन इंजेक्ट कर दिए गए. कनिका वहां पर कड़ी ये सब देखती रही और जैसे जैसे नकुल के शरीर में इंजेक्शन इंजेक्ट होता उसके मुँह से ाः की आवाज़ निकल जाता, मनो सरे इंजेक्शन उसी को लगे हो.

"बेटी कनिका तुम नकुल का प्लस रेट और उसकी हार्ट बीट का ध्यान रखना. क्युकी अब जो इंजेक्शन नकुल को इन सिरिंज के द्वुरा लगाया जायेगा. नकुल के शरीर पर बहुत hi गहरा प्रभाव पड़ने वाला है." अनुभव ने अपनी बेटी कनिका को चेताते हुए बोले. वही कनिका ने अपने मां या पिता की बात को समझते हुए अपनी गर्दन हाँ में हिला दी और बोली, "ठीक है पापा, आप अपना काम करिये मरीन इनका ध्यान रखती हु."

नकुल की आँखे बोझिल हो गयी थी, कारन था उन इंजेक्शन लग्न. कनिका बड़े ध्यान से देख रही थी, कैसे उसके पिता यानि अनुभव गजोसे नकुल को इंजेक्शन देना सुरु कर दिया. जैसे जैसे उन नालियों से दवाई नकुल के शरीर में दाखिल होते गयी वैसे hi उन दवाओं की वजह से नकुल बेहोश होता चला गया.

नकुल को बेहोश होता देख कनिका घबरा गयी और घबराहट में hi कनिका ने अपने पिता से पूछा, "पिता जी देखिये नकुल को क्या हो गया, उसकी हार्ट बीट्स भी पहले बहुत hi ज्यादा बाद गयी है, नकुल को कही कुछ होगा तो नहीं" कनिका अपनी बात के दौरान अपना सारा नकुल के ऊपर और उस यन्त्र पर लग राखी थी, जिसमे नकुल की दिल की धड़कन का मापन या गति दर्शा रही थी.

"बेटी उसे कुछ नहीं होगा. तुम्हे मुझे पर बिस्वास है न." कनिका ने अपने पिता की बात का शर्मथन अपनी गर्दन हिला कर दी. अनुभव ने कनिका के मैं को शांत करना चाहता था और इसलिए उसने आगे कहना सुरु किया, "मैं तुम्हारे प्यार को कुछ नहीं होने दूंगा और नहीं मैं तुम्हारा बिस्वास मुझ पे से टूटने दूंगा." फिर अनुभव ने अपनी बेटी कनिका को गले लगा लिया.

"पिता जी अगर नकुल को कुछ हो गया न, तोह मैं भी अपने आप को ख़त्म कर लुंगी." कनिका अपने में उठ रहे भावो के कारन ये बात रट हुए कही थी. वही अनुभव कनिका को विस्वास दी लाया की वह उसके प्यार को कुछ नहीं होने dega."kuch नहीं होगा उसको बीटा. बीटा मुझे पर इतना तोह बिस्वास रख सकती हो. अब तुम भी नकुल के बगल में जो बीएड है न उस पर लेट जाओ. ताकि ये इंजेक्शन तुम्हे दे सकू."

"क्यों. मुझे ये इंजेक्शन क्यों देना है आपको." कनिका हैरान होते हुए बोली. उसके चेहरे को देख कर ये साफ़ पता चल रहा था की परेशां थी इस बात को सुनाने के बाद से. उसे अब डर लगने लगा था की कही नकुल को कुछ हो न जाए. इस बात का अंदाज़ा अनुभव घुसे को गया था और उसके मैं में उठ रहे विश्वास को कायम रखने के लिए, उन्होंने कनिका के सर पर हाथ फिरते हुए बोले, "मैं जो कह रहा हु पहले वो करो, और कोई सवाल नहीं."

"मुझे पता है. आप मुझे बिहस करना चाहते ताकि जब मैं बिहस हो जाऊं, तोह उसके बाद आप मुझे कही और ले जा सको. फिर मैं नकुल को डरा न देख सकू. अब मैं आपकी कोई भी बात नहीं मने वाली हु. जब तक नकुल को होष नहीं आ जाता." कनिका एक पल में hi अपने पिता से अलग हो गयी थी और फिर बड़े hi गुस्से में अपनी बात कही थी, उसकी आवाज़ ऊँची तोह नहीं थी पर लहजा इतना शाक्त की अनुभव भी एक पल के लिए काँप गया.

"बेटी कनिका मैं तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं करूँगा. मैं तोह तुम्हे इस लिए नकुल के बस वाले बीएड पर लेटने के लिए कह रह ताकि मैं ये इंजेक्शन तुम्हें दे सकू." अनुभव ने शांत स्वर में कनिका को कहा, पर कनिका के मैं में जो डर बैठ गया था उसे इतनी जल्दी ख़त्म नहीं किया जा सकता था और उसका उद्धरण उसके बातो ने कर दिया था, "आखिर इस इंजेक्शन में ऐसा क्या है. जिसको आप मुझे देना चाहते है. ये इंजेक्शन आप नकुल को भी तो दे सकते है. फिर मुझे hi क्यों? और जब तक मुझे इसके बारे में पता नहीं चल जाता तब तक मैं आपकी बात नहीं मानूगी."

"बेटी मैं ये इंजेक्शन नकुल को नहीं दे सकता." अनुभव ने कहा.

"क्यों नहीं दे सकते नकुल को ये इंजेक्शन." कनिका ने अपने आवाज़ में बिना कोई परिवर्तन लाये बोली. फिर उसने कुछ सोचते हुए अनुभव से पूछी, "इस इंजेक्शन में ऐसा क्या है? जो नकुल को न दे कर मुझे दे रहे है."

"बेटी इस इंजेक्शन की खासियत ये है की ये किसी भी आम इंसान और ताकतवर इंसान को आसानी से अपने काबू में कर सकता है. मैं तुम्हें ये इंजेक्शन इस लिए दे रहा हु ताकि अगर कभी नकुल अपने आपे से बहार हो जाये या उसके गुस्से की वजह से किसी निर्दोस इंसान की जान खतरे में पड़े तोह तुम उसको शांत कर सको. क्यों मुझे पता है तुम hi हो जो नकुल को संभल सकती हो. क्योकि तुम नकुल से प्यार जो करती हो." अनुभव ने कहा. इस बार कनिका को अपने पिता की बात पर भरोषा हो गया था और इस बात का पता उसके बातो से लगा.

"ठीक है पिता जी, मैं आपके बात पे भरोसा कर, मैं उस बीएड पे लेट जाती हु. अगर आपने मेरे साथ धोखा मत करना....... आप मेरे साथ धोखा मत करना. मैं लेती हु." कनिका ने कहा और फिर नकुल के बगल में जो बीएड था वह पर जा कर लेट गयी. अनुभव कनिका के पास आया और बोलै, "ठीक है. बेटी कनिका मैं वादा करता हु मैं तुम्हारे साथ कोई धोखा नहीं करूँगा. कनिका पहले अपने आपको शांत करो. क्योकि ये मेडिसिन तुम्हारे भाव के अनुसार प्रतिक्रिया देगा. अगर तुम गुस्से इस लेती हो तोह ये तुम्हारे गुस्से को बढ़ा देगा उसके बाद तुम क्या करोगी ये तुम्हे भी पता नहीं चलेगा. इस लिए तुम खुद को शांत करो."

"ठीक है पिता जी." उसके बाद कनिका अपने मैं को शांत करने में जुट गयी हुए जैसे hi उसका मन शांत हुआ, अनुभव को आगे बढ़ने कर इशारा किया. कनिका देखा सकती थी की अनुभव किस तरह से वो ग्रीन कलर का मेडिसिन उसके शरीर में इंजेक्ट कर दिया. इंजेक्ट करने के ठीक 5 मिनट्स बाद कनिका शरीर झटके खाने लगा. उसके बाद कनिका का जिस्म निष्क्रिय हो गया.
 
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