Incest Sex Kahani Kasoor - Page 4 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Kasoor

अपडेट 25

अब तक

"ठीक है सर, इस बार ये कांटेस्ट हम hi जीतेंगे और हमारे hi कॉलेज को मिलेगा." कमल ने पुरे आत्मविस्वास से अपने शब्द कहे. जिस पर प्रिंसिपल सर मुस्कुराते हुए बोले, "बहुत अच्छा, मुझे तुम से यही उम्मीद थी. और हाँ इस बार जो कांटेस्ट के लिए प्राइज रखा गया है वह बहुत hi बड़ा है. अगर ये कांटेस्ट तुमने जीत लिया तो इनाम के रूप 2 लाख मिलेंगे दोनों प्रतियोगी को."

"थैंक यू सर," कमल प्रिंसिपल सर का धन्यवाद किया. उसके बाद प्रिंसिपल से जानने के लिए इजाज़त मांगी. उसके बाद कमल के साथ नकुल और कनिका एडमिशन के लिए निकल गए प्रिंसिपल के ऑफिस से. मर. चंद्र के पास कमल हम दोनों ले कर आया, फिर हमने अपना अड्मिशन करवाया. फिर कमल के साथ इस कॉलेज के बारे में और जानकारी ली. उसके बाद हम घर के लिए निकल गए.

अब आगे

नकुल के जाने के बाद ज्योति ठाकुर अपना सेलफोन निकाली और फिर एक नंबर डायल कर दी. कुछ समय पश्चात् hi फ़ोन उठा लिया गया दूसरी तरफ से. उधर से कुछ कहा गया जिस पर पहले तोह ज्योति ठाकुर ने मुस्कुरा कर जवाब दी. देख कर ऐसा लग रहा था की सामने वाले ने जरूर उसका हाल चाल hi पूछा हो. ज्योति ठाकुर अपने चेहरे पर मुस्कराहट बरकरा रखते हुए बोली, "माँ आप कैसे hi है? घर पर सब कैसे है." ज्योति के चेहरे पर वह गुस्सा नहीं था जो पहले आया हुआ था नकुल की वजह से.

"मैं तोह ठीक हु और घर पर भी सब कुछ ठीक है. पर आज मेरी लाडो को मेरी याद कैसे आ गयी इतने दिनों के बाद." ज्योति की माँ ने अपनी बेटी से पहले तोह अपना हाल बताया उसके बाद घर पर सब khushal-mangal के बारे में और अपनी बेटी से शिकायत भी कर दी इतने दिनों के बाद बात करने के लिए. वही ज्योति अपनी माँ की शिकायत सुन कर हंस दी. उसकी माँ भी अपनी बेटी की हंसी साफ़ साफ़ सुनी सकती थी और अपनी बेटी के चेहरे पर हंसी देख कर उसकी चेहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी थी. "अच्छा ये बात अपनी माँ की याद कैसे आ गयी इतने दिनों के बाद."

"माँ आप भी मेरी तरह एक बच्ची बन गयी है, जो हर पल शिकायत करती रहती है कुछ न मिल पाने पर." ज्योति अपनी माँ को इस तरह शिकायत करते हुए सुन कर एक कटाक्ष करती है. जिसको सुन कर उसकी माँ भी हंस दी जैसे कह रही हो की तुम भी तोह कुछ ऐसा hi करती थी छोटे से लेकर अभी तक और मैं कर कर दिया तोह इसमें बुरा मानाने वाली कौनसी बात थी. अपनी माँ की हंसी सुन कर ज्योति समय गयी थी की उसकी माँ उसका मज़ा बना रही थी. ज्योति ठाकुर अपनी माँ के चेहरे पर आयी मुस्कान को वह भी अच्छी तरह से महसूस कर सकती थी की उसकी माँ कितना खुश थी उसे इस तरह से बात करके, ज्योति फिरसे कहना सुरु बोली, "अच्छा ठीक है ठीक है मैं समझा गयी आप क्या कहना चाहती है. माँ क्या नकुल घर पर hi है."

"क्या बात है आज मेरी बेटी को उस कमीने नकुल की याद कैसे आ गयी और उसके बारे में पूछ बह रही है." ज्योति की माँ जिसका नाम रजनी ठाकुर था उसने अपनी बेटी से पूछी, रजनी को समझ नहीं पा रही थी की उसकी बेटी ज्योति ने नकुल के बारे में इतने दिनों के बाद इस तरह से क्यों सवाल की थी. जबकि उसकी बेटी कभी भी नकुल से प्यार नहीं करती थी और ना hi उससे बात करना चाहती थी, फिर आज कैसे उसकी बेटी ने उस कमीने के बारे में पूछ रही थी. वही अपनी माँ को कुछ न बोलते हुए देख कर ज्योति कुछ परेशां सी हो गयी थी. उसको लगाने लगा था की जरूर नकुल के साथ उसके घर वालो ने कुछ बुरा किया है और इसी वजह से उसकी माँ सोच में पद गयी थी. अपने मैं में उठ रहे शंका को दूर करने के लिए और अपनी माँ को सोच से बाहर लाने के लिए ज्योति ने फिर से बोलना सुरु किया, "माँ नकुल के साथ कुछ हुआ है क्या जो आप इस तरह से सोच में पद गयी है."

"ना ना ऐसी कोई बात नहीं है, बीटा मैं तोह ये सोच रही थी मेरी इतनी समझदार बेटी आज उस नालायक और कमीने नकुल के बारे में इस तरह से क्यों पूछ रही है. जहाँ तक मुझे मालूम है की मेरी बेटी उसको देखना तक पसंद नहीं करती, फिर आज ऐसा क्या हो गया मेरी बेटी के साथ की वह आज नकुल के बारे में अपनी माँ से पूछ रही है." रजनी अपनी बेटी की द्वारा नकुल के पूछे जाने पर उसके tan-badan में आग सी लग गयी थी और इस वजह से वह अपने मैं में उठ रहे आग के सैलाब को न रोक सकीय और उसकी के भसीभूत हो कर वह बोलती चली गयी. वही अपनी माँ की बात सुन कर ज्योति के चेहरे के भाव बदल गए थे उसको अभी तक विश्वास नहीं कर पा रही थी की उसकी माँ आज भी नकुल से इतना नफ़रत करती होगी जितना वह भी नहीं करती थी. ज्योति को आज भी नकुल की वह मासूम सी आँखे नज़र आने लगी थी जबकि को उसने बचपन में देखि थी. सच तोह ये था की ज्योति नकुल से नफ़रत नहीं करती थी, बल्कि वह उसे बहुत ज्यादा प्यार करती थी, परन्तु जब भी ज्योति नकुल से बाते करती थी उसकी बहने और उसके घर में मौजूद सभी बड़े नकुल को बहुत बुरी तरफ से मरते थे, इस बात को समझने में ज्योति को पुरे 5 वर्ष हो गए, भला वह समझती भी कैसे आखिर वह भी तोह बहुत छोटी थी यही कोई 3 वर्ष की, उसे तोह यही लगता था की सायद नकुल ने hi कोई गलती की होगी इस लिए उसको मार पद रही है. उसको भी मार न पड़े जाए इसलिए ज्योति नकुल को बचने के लिए नहीं जाती थी. "बीटा क्या खो गयी. वैसे तू नकुल के बारे में पूछ क्यों रही है इतने दिनों के बाद."

"माँ बात ऐसी है की आज मैंने नकुल को देख है वह भी मेरे hi कॉलेज में वह भी एक लड़की के साथ. उसने तोह मुझे पहचाने से भी इंकार कर दिया." ज्योति अपनी सोच से बाहर निकलते hi अपनी माँ रजनी से उसने अभी जो थोड़े देर पहले उसके और नकुल के बिच घटित हुई घटना थी उसको बात दी. जिसको सुन कर रजनी ठाकुर के भी प्राण सुख गए. उसे तोह समझ hi नहीं आ रहा था की नकुल जिन्दा कैसा बच गया, जबकि उसको को तोह जान से मार के खाई में फेक दिया गया था. पर एक बात तोह अच्छी तरह समझ आ चूका था की अगर वह नकुल हुआ तोह वह कभी भी यहाँ पर नहीं आएगा और रही बात अगर वह नकुल नहीं हुआ यानि की नकुल की तरह देखि ने वाला कोई दूसरा व्यक्ति हुआ तोह वह उनकी मदत कर सकता था नकुल की दौलत को उनके नाम करवाने में, जहाँ एक तरफ रजनी को ये डर सत्ता रहा था की वह नकुल हुआ तोह वह उनकी बात अब कड्डपी नहीं मानेगा, और अगर वह उनका नकुल नहीं हुआ तोह उसके मदद से नकुल की साडी सम्पति अपने करवा सकती थी.

"बीटा तुम्हें कैसे पता वह लड़का नकुल hi है. तुम्हे लगत है की नकुल इस तरह बिना बताये तुम्हारे पास आ भी सकता है या हमारे पास से चला जाये." रजनी ठाकुर ने एक प्रश्नतम शब्दों का प्रयोग कर अपनी बेटी को उझलने में दाल चुकी थी, पर ज्योति का मैं ये मानाने को तैयार hi नहीं हो रहा था की वह उसका अपना प्यार भाई नकुल नहीं है. "अच्छा अगर तुझ ऐसा लगता है की वह तेरा भाई नकुल hi है तोह तू खुद hi उससे पूछ क्यों नहीं लेती."

"उसने तोह साफ़ माना कर दिया की मुझको पहचाने से की मैं उसकी बहन हु. और यहाँ तक उसके साथ आयी हुई लड़की ने तोह मेरी इंसल्ट भी कर दी." ज्योति ठाकुर कुछ सोचते हुए अपनी बात रजनी ठाकुर से बोली. अपनी बेटी की बात सुन कर रजनी को इतना तोह समझ आ गया था की वह जरूर वह नकुल न की तरह दिखने वाला कोई दूसरा लड़का है. " पता है मान जब मैं ने उससे बात करने चाही तोह उसने ऐसा व्यहवार किया जैसे वह मुझे जनता hi न हो. यहाँ तक उसने मुझे अपनी बहन माने से भी इंकार कर दिया."

"सायद तुम्हे कोई गलतफमी हुई है. हो सकता है वह तुम्हारा भाई hi न हो, बल्कि कोई दूसरा लड़का हो जो तुम्हारे भाई की तरह दीखता हो." रजनी ने ज्योति की मैं की बात भाप चुकी थी इसलिए उसने नकुल अपनी बेटी का भाई कह कर संभोधनं किया था ताकि ज्योति को लगे की उसकी माँ अब इतना नफ़रत नहीं करती जितना वह पहले किया करती थी. "एक काम कर तू न उस लड़के के बारे में पता कर, जब तुझे ये मालूम पद गए की तोह वह तुम्हारा hi भाई है तोह, फिर उसकी अच्छी तरह से खबर लेना ताकि उसे समझ आ जाये की अपनी बहने से किस तरह से बात करनी चाहिए."

"सायद तुम ठीक कहती हो माँ. मैं पहले उसके बारे में पता करती हु उसके बाद उसकी अच्छी तरह खबर लेती हु. अच्छा अब मैं रखती हु मेरा क्लास का टाइम हो गया है. Bye माँ! अपना ध्यान रखना" ज्योति मुस्कुराते हुए अपनी माँ से ये बात कही. वही रजनी भी अपनी बेटी के बात सुन कर मैं hi मैं खुश होने लगी थी जैसे उसने बहुत बड़ी जीत हांसिल कर ली हो.

"ok बीटा तुम अपना ध्यान रखना." रजनी ने अपनी बेटी से बोली. फ़ोन रखने के बाद ज्योति अपने hi मन में सोचते हुए कहती है "नहीं ये मेरा भाई hi है. माना मैंने इसके साथ कुछ गलत किया है, पर मेरी मजबूरी थी." फिर ज्योति अपने बिचारो को झटकने के बाद अपने फ्रेंड के साथ क्लास की और चली दी.

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जब रजनी को पता चला की नकुल ज़िंदा है तोह वह रेशमा ठाकुर के पास चल दी अपनी बेटी के द्वारा कही बात को बताने के लिए. वही रेशमा ठाकुर अपने hi कमरे में अपने hi देवर मेहन्दर ठाकुर का मजबूत लुंड अपनी छूट में लेने के लिए तैयार कर रही थी वह वही उसका देवर भी अपनी बड़ी भाभी के छूट को चायत और चूस अपने लुंड के लिए तैयार कर रहा था. जब रजनी ठाकुल अपने सौतन के कमरे में पहुंची तोह उसने पाया की महेन्दर अपना मोटा तगड़ लुंड रेशमा ठाकुर के बूर के मुँह में रखा हुआ था, रजनी को इतना तोह समझ आ गया था की महेंद्र अपना लुंड रेशमा ठाकुर की बूर के अंदर डालने वाला था धक्का मर के.

"रेशमा दीदी." रजनी ठाकुर ने बिना परवाह किये हुए की सौतन रेशमा इस समय की स्थिति में थी उसने आवाज़ लगा दी. जिसको सुन महेंद्र जीयो का तीयो अर्थात जिस अस्वस्थ में था उसी अवस्थ में रुक गया. तोह वही अपने अंदर लुंड न पा रेशमा ठाकुर भड़क चुकी थी. रेशमा ठाकुर जिस मनो आष्टीती में थी उसका भड़कना लाजमी भी था. रेशमा ठाकुर गुस्से में बरी हुई कही, "बोल रंडी तेरी बूर में इतनी आग क्यों लगी हुई है की तोह यहाँ पर अपनी मरवाने चली आयी."

"बोलेगी भी रंडी या अपनी बेतीचुवाने के लिए कड़ी रहेगी." रेशमा ठाकुर गुस्से में चूर अपनी सौतन रजनी ठाकुर से बोली. रेशमा ठाकुर घर की सबसे बड़ी बहु थी. उसके पति ने दो और शादी की थी एक ये रजनी ठाकुर थी दूसरी थी नकुल की माँ. "भड़वे देख क्या रहा है. चल जल्दी से लुंड मेरी बूर में दाल कर इसकी आग को शांत करनी, वर्ण आगे से घर में रहनी वाली किसी भी औरत को छोड़ न सकेगा." फिर क्या था महेंद्र ने एक जोर का धक्का लगा कर अपना पूरा लुंड रेशमा ठाकुर की बूर में उतर दिया. पर पूरा लुंड जाने के बावजूद भी रेशमा ठाकुर के चेहरे पर एक सिकन तक न दिखी. सच तोह ये था की रेशमा ठाकुर को इससे भी बड़े लुंड लेने की आद्दत थी फिर महेंद्र के लुंड से उसको क्या फर्क पड़ने वाला था. वही महेंद्र अपना लुंड छूट में डालने के बाद धक्के लग्न सुरु कर दिया वह भी तेज़ तेज़.

"दीदी नकुल जिन्दा है." रजनी का इतना hi कहना था की महेंद्र के धक्के पर विराम चिन्ह लग गया, तोह वही रेशमा के अंदर उफान रह साडी उत्तेजन धराशाही हो गयी. उसको तोह लकाव hi मार गया था ये सुन कर की नकुल जिन्दा बच गया था. क्योकि उसके सरे सोचे हुए प्लान पर पानी फिर गया था.

"क्या बक्ति है कामिनी, तू होस में तोह है न और हाँ तेरे सामने hi सामने तोह उस कुत्ते को मारा कर खाई में फेक दिए थे. भूल गयी क्या." रेशमा ठाकुर महेंद्र को एक तरफ हटा दी थी अपनी ऊपर से और बिस्तर पर उठ कर बाथ गयी थी. रेशम ठाकुर के पेअर अब भी फैले हुए थे जिसमे से उसकी बूर का पानी रईस रहा था.

"नहीं दीदी मुझे अच्छी तरह से याद है, की कैसे हमे उसे कमीने हरमि के पिल्लै को जान से मारा था. फिर खायी में फेक दिया था. मैं भी ये बात जब सुनी तोह मेरे कानो पर विश्वास नहीं हो रहा था की आखिर वह कुत्ते का पिल्ला बच कैसे सकता है." रजनी ठाकुर अपने शब्द इस तरह से कहे थे की रेशमा ठाकुर को भी एक पल के लिए उसे डर सा लगन लगा था, और ठीक वैसे hi हाल महेंद्र का भी था जो चुप चाप रेशमा ठाकुर के सामने खड़ा था अपन लुंड लड़काये हुए. देख कर ऐसा लग रहा था की उसके लुंड में जान hi नहीं बची हो. रेशमा ठाकुर खुद को एक पल में hi संभल चुकी थी और जैसे hi रजनी ठाकुर के बोलना बंद किया, तोह रेशमा ठाकुर गरजते हुए बोली, "तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे सामने इस तरह से बोलने की और साला कुत्ता चुप चाप खाद सुना रहा थाई."

"चल ोये कुत्ते अब ज्यादा वफादारी मत दिखा मेरे सामने. तेरे रहते हुए ये दो टेक की रंडी मेरे सामने ुचि आवाज में बोल गयी और तुह वह पर खड़ा खड़ा अपना लुंड पड़के हुआ था." महेंद्र जैसे hi रेशमा ठाकुर की आवाज़ सुन कर रजनी ठाकुर की और उसको मरने के लिए बढ़ा hi था की रेशमा ने उसको वही पर रोक दिया था. उसके बाद उसने ये बात अपनी सौतन रजनी ठाकुर से कही थी और अपने पालतू कुत्ते महेंद्र से जो छूट एक लिए कुछ भी करने के लिए तैयार बैठा हुआ था. "चल इधर आ और अपना लुंड मेरी छूट में दाल कर मुझे अच्छी तरह से छोड़ तृप्त कर. अगर आज मेरी प्यास नहीं बुच्ये पायी तोह तेरी खैर नहीं या मेरे से पहले तूने अपन वीर्य छोड़ा तोह देख मैं तेरी गांड का क्या हाल करती हु. तेरी गांड हरिया से ऐसा मरवा ूँगी की एक हाफत से पहले सही से चल भी न सकेगा समझा आयी मेरी बात.

"समझ गया भाभी आज नहीं होगा. पता नहीं भाभी जब तक नकुल जिन्दा था, पता नहीं मेरे लुंड में कहा से टक्कट आ जाती थी, फिर ऐसा छोड़ता था की आप भी गश हो जाती थी. पर जबसे मारा है साला मेरा लुंड भी जैसे मर hi गया है." महेंद्र ऐस रो रहा था अपनी भाभी रेशमा ठाकुर के आगे जैसे एक बचा अपनी माँ के आगे एक खिलाना टूट जाने के बाद रोटा है. रजनी और रेशमा ठाकुर अपने देवर की बात सुन कर जोर से हांसे लगी थी, रजनी ठाकुर हस्ते हुए बोली, "देख रही हो दीदी, मुझे तोह ऐसा लग रहा है की जब भी एक हमारे ऊपर चढ़ता था तोह पक्का ये नकुल की गांड के बारे में सोचते हुए हमारी बूर मरता होगा. ये तोह पक्का गे हो गया दीदी."

"तू खड़ा खाद रंडी रोना hi लगाए रहेगा, अगर तेरा बस की बात नहीं है तोह अपना ये सापोला ले कर यहाँ से चला जा और उस हरिया को मेरे पास भेज दे ताकि मैं प्यासी न रह जाऊं तेरी बेवजह से." रेशमा की बात सुनते hi महेंद्र एक फिर से अपना लुंड अपनी भाभी की छूट पर घिस कर खड़ा करने लगा गया ताकि वह अपना लुंड छूट के अंदर दाल सके. थोड़े hi पर्यटन के बाद उसका लुंड खड़ा हो गया था और अपनी भाभी की बूर में अपना लुंड दाल कर उसकी चुदाई करने लगा था. कुछ पालो के अंदर रेशमा ठाकुर को फिरसे मज़ा आने लगा था "अछि तरह से धक्के मार ताकि मुझ कुछ माज़ा आये.

"हाँ ऐसे छोड़ता रह मुझे ताकि मैं अपनी सांकल की तरफ बढ़ सकू. हाँ रे कामिनी बोल क्या कह रही थी." रेशमा ठाकुर चुदाई का आनंद लेते हुए अपनी सौतन रजनी ठाकुर से बोली, उसके चेहरे पर उत्तेजना साफ़ दिखी जा सकती थी वही महेंद्र के हर धक्के के साथ उसकी बूर से रईस रहे पानी की गति पहले से तेज़ हो गयी थी. वही रेशमा ठाकुर की बात सुन कर रजनी ने फिर से बोलै सुरु ki,"yahi दीदी नकुल जिन्दा है"

"तुझे कैसे पता की नकुल जिन्दा है. क्या तेरे पास उसकी आत्मा ने आ कर बोलै था या फिर कोई फरिश्ते ने आ कर बताया था तुझे की नकुल ज़िंदा है." रेशमा आहे भरते हुए अपनी बात बोल रही थी उसकी बात करने के तरीको देख कर कोई भी बता सकता था की उसको कितना मज़ा आ रहा था छुड़वाने में. रेशमा की चुदाई करते हुए महेंद्र की साँसे फूलने लगी थी, उसके अंदर की उत्तेजन उस उचाई पर पहुंच गयी थी, जहाँ से वह किसी भी वक़्त निचे आ सख्त था. पर किसी तरह खुद को संभाले हुए रेशमा को उसके आखिर पड़वा की तरफ लेजाने में लगा हुआ था. जिसमे वह कामयाब भी होने लगा था. "आहे अम्म्म आआ ऐसे hi करते राहू मेरा बस होने वाला है."

"दीदी ज्योति का फ़ोन आया था मेरे पास, फिर उसी ने बताया की नकुल ने उसीके कॉलेज में अड्मिशन लिया है." रजनी ठाकुर अपनी बेटी ज्योति के द्वारा कही गयी साडी बाते बता दी. जिसको सुन कर उसका दिम्माग hi एक पल के लिए सुन पद गया था तोह वैसे hi हाल महेंद्र का भी था उसकी उत्तेजन भी सम्पत हो गयी थी, पर उसके लिंग में अकड़न अभी भी बरकरा थी इसलिए वह धक्के लगाए जा रहा था.

"क्या बक्क रही ह कुटिया. दिमाग तो ठिकाने पर है न." रेशमा ठाकुर को समझ hi नहीं आ रहा था की अपनी वह क्या बोले गयी थी. पर जल्दी hi खुद को संभल लिया था और अपने दिमाग को शांत करने के लिए महेंद्र के धक्को को महसूस करने लगी ताकि वह पूरी तरह से शांत हो सके. उसका ऐसा करना पूरी तरह से सही भी निकल. क्योकि चुदाई की क्रिया के करना उसका ब्रेन पूरी तरह से संतुलित हो चूका था और इसलिए वह रजनी से बोली, " तू अभी यह से जा में तुझे मैं बाद में बुलाती हु."

फिर क्या तह वह वाहन से चली गयी, वही रेशमा ठाकुर चुदाई का आनंद लेने लगी थकी वह कुछ सोच सके. रेशमा ठाकुर जोर जोर से धक्के लगाने के लिए इशारा की, फिर क्या था महेंद्र की कुत्ते की तरह उसकी बात मान कर धक्के लगने लगा. 20 मिनट्स के बाद पहले रेशमा ठाकुर छीलते हुए संकलित होने लगी, उसके बाद महेंद्र भी अपना पानी अपनी भाभी की बूर में उड़ेलने laga.Mahendra ने आज अपनी इज्जत बच ली थी वर्ण उसको रेशमा अपनी पास भटकने भी नहीं देती. ऐसे hi पड़े हुए अपनी साँसे दुरुस्त करने लगे.
 
अपडेट 26

अब तक

फिर क्या तह वह वाहन से चली गयी, वही रेशमा ठाकुर चुदाई का आनंद लेने लगी थकी वह कुछ सोच सके. रेशमा ठाकुर जोर जोर से धक्के लगाने के लिए इशारा की, फिर क्या था महेंद्र की कुत्ते की तरह उसकी बात मान कर धक्के लगने लगा. 20 मिनट्स के बाद पहले रेशमा ठाकुर छीलते हुए संकलित होने लगी, उसके बाद महेंद्र भी अपना पानी अपनी भाभी की बूर में उड़ेलने laga.Mahendra ने आज अपनी इज्जत बच ली थी वर्ण उसको रेशमा अपनी पास भटकने भी नहीं देती. ऐसे hi पड़े हुए अपनी साँसे दुरुस्त करने लगे.

अब आगे

रेशमा ठाकुर के कमरे से निकलने के बाद रजनी ठाकुर अपनी बड़ी बेटी के कमरे की और चल दी. उसके मैं में बहुत से ख्याल चल रहे थे, जैसे की वह नकुल को किस तरह से अपने पक्ष में करे या फिर किस प्रकार से नकुल को अपने साथ यहाँ लेन के लिए सहमत रहे, इस तरह के बहुत सरे प्लान सोचते हुए जा रही थी, और इसी तरह रजनी ठाकुर अपनी बेटी के कमरे के पास चली आयी उसको पता तक न चला.

"खत खत खत" रजनी ठाकुर दरवाजे को खत खात्या. उसकी बड़ी बेटी प्रिय ठाकुर अपने बिस्तर पर पेअर फैलाये हुए लेती हुई थी और अपनी योनि के अंदर उंगली कर रही थी. प्रिय ठाकुर की आवाज़ कमरे के बाहर तोह नहीं आ रही थी क्योकि उसका कमरा साउंडप्रूफ था और दरवाजे पर नॉक होते hi प्रिय के कान में खत खत की ध्वनि सुनाई दी. जिस वजह से प्रिय के तन बदन में आग लग गयी. वैसे आग लगती भी क्यों नहीं उसके बूर से पानी जो निकलने वाला था, कुछ hi पालो में. पर दरवाजे पर किसके दस्तक होने की आवाज़ से प्रिय को अपना काम रोकना पड़ा. प्रिय चिल्ला कर बोली, "एक मिनट अभी आयी."

उसके बाद प्रिय अपने जिस्म के ऊपर एक निघ्त्य डाली और दरवाजा खोने चल दी. वही प्रिय ने अपने जिस्म के ऊपर जो निघ्त्य डाली हुई थी उसमे से उसके विलक्क्षण काय साफ़ दिखाई दे रहे थे, उसके गुलाबी रंग के चूचक ऐसे लग रहे थे जैसे कोन ice-cream पर एक बड़ा सा लाल रंगा का चेरी हो. उसके सतांन इस समय भी hi ज्यादा कठोर दिख रहे थे, वही उसकी नाभि के निचे जो खजाना था उसके ऊपर जो घास थे वह भी साफ़ दिखाई दे रहा थे, उस उज्जले निघ्त्य में. प्रिय को इस बात की तनिक भी फ़िक्र नहीं थी की उसके दरवाजे पर कौन हो सकता था या है.

"माँ आप इस वक़्त." प्रिय अपनी माँ को अपने दरवाजे पर इस तरह से कड़ी हुई देख कर बोली. "अंदर आईये." एक तरफ होते हुए अपनी माँ को अंदर आने का रास्ता देने के बाद बोली. उसकी माँ रजनी ठाकुर ने अपनी बेटी के तरफ एक बार दिखी, परन्तु बिना कुछ कहे hi वह अंदर दाखिल हुई. प्रिय भी दरवाजा बंद करने के बाद अपनी माँ के पास आ कर बैठ गयी.

"बेटी प्रिय ये सब क्या है. इन कपड़ो में कोई दरवाजा खुलता है क्या?" रजनी ठाकुर अपनी बेटी की और घूरते हुए देख कर बोली. वही अपनी माँ की बात सुन कर प्रिय ने नज़ारे झुका दी. अपनी माँ की बात सुन कर उसको शर्म भी आने लगी थी अब.

"माँ मुझे माफ़ कर दो. मुझे ध्यान नहीं रहा की मैं ने किस तरह के कपडे दाल है. आपको तोह पता है न मुझे बिना कपड़ो के सोने की ाददात है." अपनी बेटी की बात सुन कर रजनी को कुछ भी सूझ नहीं रहा था की वह अपनी बेटी को क्या बोले. वैसे भी उसके कपडे ऐसी होते थे, जिसको पहने के बाद प्रिय के जिस्म का ज्यादातर हिस्से साफ़ दिखाई दे देता था

"ठीक है, पर ध्यान रखा कर. तेरी बड़ी माँ ने मुझे आज hi देहरादून जाने के लिए बोलै और तुझको भी साथ लेकर जाने के लिए बोलै है." रजनी ठाकुर अपनी बेटी के सुन्दर काया को देखने के बाद उसका मैं भी डोलने लगा था.

"ठीक है माँ, क्या आप नैना को भी साथ ले चल सकती है, मैं नहीं चाहती हमारे यहाँ से जाने के बाद उसके साथ कुछ गलत हो. आपको तोह पता hi है न की यहाँ पर क्या चल रहा है." प्रिय ने अपनी माँ से कहा जिस पर उसकी माँ बोली, "ठीक है मैं उसको भी बोल देती हु, अब तुम जाने के तयारी करो." इतना कहने के बाद रजनी ठाकुर वहां से चली गयी.
 
अपडेट 27

अब तक

"ठीक है माँ, क्या आप नैना को भी साथ ले चल सकती है, मैं नहीं चाहती हमारे यहाँ से जाने के बाद उसके साथ कुछ गलत हो. आपको तोह पता hi है न की यहाँ पर क्या चल रहा है." प्रिय ने अपनी माँ से कहा जिस पर उसकी माँ बोली, "ठीक है मैं उसको भी बोल देती हु, अब तुम जाने के तयारी करो." इतना कहने के बाद रजनी ठाकुर वहां से चली गयी.

अब आगे

अपनी बड़ी बेटी प्रिय ठाकुर से बात करने के बाद जब रजनी ठाकुर अपनी छोटी बेटी नैना ठाकुर के कमरे तरफ जा रही थी तोह उसके मैं में बहुत से विचार चल रहे थे कुछ अच्छे और कुछ बुरे. रजनी ठाकुर जब अपनी बेटी नैना के कमरे के पास पहुंच कर दरवाजे को खत खात्या. कुछ पल hi लगे होंगे दरवाजा खुलने में, कमरे में प्रवेश करते hi सबसे पहले रजनी ठाकुर की नज़र अपनी बेटी के ऊपर hi गयी थी, तोह उसने पाया की उसकी बेटी नैना पढ़ाई कर रही थी क्योकि उसके हाथ में एक पुष्तक थी.

"बेटी नैना अभी तक पढ़ा रही हो." रजनी ठाकुर अपनी बेटी के हाथ में किताब देखने के बाद ये सवाल की थी जिस पर नैना ने कहा, "बस माँ अपनी आगे की तयारी कर रही थी ताकि अपने वाले परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकू. वैसे मुझसे कोई काम था क्या आपको."

"मुझे मेरी बेटी पर नाज़ है." रजनी ने कहा. फिर अपनी बेटी के सर पर हाथ फरने के बाद अपने गले लगा ली. रजनी अपनी बेटी को अपने साथ बिस्तर के पास लायी और अपने पास बैठते हुए बोली, "बेटी एक बात कहानी थी तुमसे."

"जी माँ कहिये क्या कहना है." नैना ने कहा.

"बेटी कल हमे देहरादून जा रहे है तुम्हारे छोटी बहिन ज्योति से मिलने. तोह क्या तुम हमारे साथ चल रही हो या..." रजनी ठाकुर ने अपने बेटी के तरफ देखते हुए बोली.

"क्यों नहीं माँ. वैसे भी मैं यह बोआर चुकी हु." नैना ने कहा और फिर अपनी माँ के गले में अपनी बाहे डालते हुए बोली, "माँ मैं तोह सोच रही थी मैं भी अपनी आगे की स्टडी अपनी लाड़ली बहिन ज्योति के साथ hi करू ताकि मैं उसका ख्याल रख सकू. आपका क्या ख्याल है माँ इस बारे में."

"ये तोह बहुत hi अच्छी बात है. तुम जाने की तयारी करो." रजनी ठाकुर ने अपनी बेटी का माथा चूमने के बाद अपनी बात कही. जिसको सुन कर उसका मैं भी ख़ुशी से भर उठा. नैन ठाकुर ख़ुशी से बोली, "थैंक यू माँ."

फिर रजनी ठाकुर अपनी बेटी के कमरे से निकल कर रेशमा ठाकुर कमरे की तरफ चल दी. रेशमा ठाकुर के पहुंचने के बाद रजनी ठाकुर बोली, "दीदी मैं अपनी दोनों बेटियों को अपने साथ ले जा रही हु ताकि मैं नकुल को यहाँ आने पर मजबूर कर सकू."

"ठीक है, मैं तुम तीनो के टिकट का इंतेज़ाम करती हु. पर धीरन रहे खाली हाथ मेरे पास लौट कर बिलकुल मत आना." रजनी ठाकुर की बात सुनाने के बाद रेशमा ठाकुर कहा. जिस तरह से रेशमा ठाकुर ने अपनी बात कही थी उसको सुनाने के बाद रजनी ठाकुर की रूह तक कनाप उठी थी. फिर रजनी ठाकुर वहां से चली गयी अपनी गर्दन हाँ में हिलने के बाद से.

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देहरादून

जब नकुल अपनी प्रेमिका के साथ कॉलेज के बाहर आया तोह उसकी नज़र गणेश पर पड़ी जो उन लोगो का hi इंतज़ार कर रहा था, कमल भी उन्ही के साथ चल रहा था इसलिए वह भी उनके पीछे हो लिया. ऐसी hi तीनो आपस में बाते करते हुए टैक्सी के पास आ रुके. फिर ने टैक्सी का दूर खोल कर पहले कनिका को बैठने का इशारा किया उसके बाद खुद भी दूसरे तरफ से आ कर कनिका के पास बैठ गया. नकुल कनिका के साथ पीछे बैठने के बाद उसने कनाल को आगे बैठने को कहा, जिस पर कमल आगे की सीट पर जा बैठा. फिर गणेश ने अपनी टैक्सी आगे बढ़ा दी सबके बैठने के बाद से.

"कनिका कॉलेज में तोह एडमिशन हो गया और अब आगे क्या?" नकुल कनिका से बोलै. जिसको सुन कर कनिका मुस्कुराते हुए बोली, "हाँ नकुल, ान तोह बहुत hi मजा आने वाला है. खास कर तुम्हारे साथ."

"वैसे एक बात बोलू, बुरा तोह नहीं मानोगे." कनिका अपने प्रेमी या कह सकते है की अपने पति नकुल की तरफ देखते हुए बोली. जिसको सुन नकुल मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन हाँ में हिला दी और बता दिया की उसको डरने की कोई नहीं बात नहीं, वह उसकी बात को दिल से नहीं लेगा. "इस कॉलेज में बहुत hi हॉट एंड सेक्सी लड़किया स्टडी कर रही है और तुम्हारी पर्सनालिटी को देख तुमने छोड़ने वाली नहीं है. इन सबको देखते हुए मुझे पक्का यकीं हो गया है की आने वाले समय में तुम्हारे तोह मौज hi मौज है."

"अच्छा जी, " नकुल बहुत hi प्यार से बोलै, फिर उसके गुलाबी गाल को चुम लिया. वही इनके नोक झोक को सामने बैठे हुए कमल और गमेश देख रहे थे. इन दोनों के प्यार को देख कर वह भी मुस्कुरा दिए. "पर इस कॉलेज के सबसे सुन्दर लड़की के ऊपर से मेरी नज़र हटेगी तभी तोह मैं किसी और पर नज़र दाल सकूगा."

"बस बस बहुत हुआ मेरी तारीफ करना." कनिका नकुल के बाहन पर अपने कोमल हाथ मरते हुए बोली. नकुल कनिका को अपनी बाँहों में भरते हुए बोलै, "अभी तोह तुम कह रही थी अब..."

"मैं तोह बस तुम्हारे साथ मस्ती कर रही थी. मुझे भी पता है की तुम मुझे छोड़ कर किसी और को नहीं देख सकते " कनिका अपने प्रेमी के बाँहों के घेरे में या बाँहों में सिमटी हुए अपनी बात बोल रही थी. वही कनिका की बात सुन कर नकुल उसके माथे को चूमते हुए बोलै, "अच्छा जी, छोडो ये सब अब बोलो आगे क्या करना है क्युकी एडमिशन तोह हो hi गया हमारा."

"नकुल मैं सोच रही हु की अब हमें मार्टिकल आर्ट की ट्रैंनिंग लेनी चाहिए ताकि हम अपनी रक्षा कर सके, इसके लिए हमें ट्रेनिंग के लिए एक कोच जरुरत है. और स्टडी के लिए बुक भी खरीदना जरुरी है ताकि अपनी स्टडी आगे बढ़ा सके." कनिका नकुल से बोली. नकुल ने भी अपनी प्रेमिका की बात का मान रखते हुए अपनी मुख से हाँ कह दिया. नकुल कहा, "बुक तोह हम ऑनलाइन आर्डर कर देंगे और मार्टिकल आर्ट की ट्रैंनिंग के लिए अच्छा ट्रेनर भी ऑनलाइन hi ढूंढ लगे."

फिर इसी तरह दोनों आपस में बात करते हुए घर आ गए और रस्ते में hi उन्होंने कमल को उसके घर उतर दिया. फिर नकुल और कनिका टुक्सी से उतरने के बाद अपने घर के तरफ बढ़ गए और गणेश टैक्सी ले कर वह से निकल गया.
 
अपडेट 28

अब तक

फिर नकुल और कनिका मार्किट म जा कर खाना कहते ह जब घर को लौट रहे होते ह तो रस्ते के बीचो बिच एक लड़की बिहस मिलती ह. नकुल अपनी गाड़ी रोकता ह और उस लड़की को अपनी गाड़ी म दाल के अपने घर ले आता ह, घर पर पहुंच कर नकुल उस लड़की को एक रूम ले जा कर बीएड बार सुला देता ह और कनिका को उस लड़की के पस सोने के लिए कह कर खुद दूसरे रूम क जा कर सो जाता ह.

अब आगे

अगली सुबह नकुल जल्दी उठ कर एक्ससरसीसे करता ह फिर नकुल नाहने अपने रूम म चला जाता ह, जब वो रेडी हो कर निचे आता ह तो देखता ह की कनिका दिंनिंग टेबल पर बैठ कर ब्रेकफास्ट कर रही होती ह,

नकुल _ गुड मॉर्निंग डिअर,

कनिका_ गुड मॉर्निंग माय लव, सीट एंड टेक ब्रेकफास्ट

नकुल _ थैंक डिअर, कनिका वो लड़की कैसे ह,

कनिका_ ठीक ह,

नकुल_ क्या हुआ था उसके साथ.

कनिका_ अभी तक मैंने पूछा नहीं ह.

नकुल_ कहा ह अभी वो

कनिका _ डिअर वो अभी बैडरूम म सो रही ह.

नकुल_ कनिका ब्रेकफास्ट करने के बाद उसे जगा देना

कनिका_ मैंने तो ऑलमोस्ट अपना ब्रेकफास्ट कर लिया, मैं अभी उसे जा कर जगती हु. जब तक अपना ब्रेकफास्ट करो

नकुल _ ठीक ह उसके बाद मैं अपना ब्रेकफास्ट करता हु.

कनिका वह से उस लड़की को जागने बैडरूम म चली जाती ह. जब कनिका वह पहुँचती ह तो देखती ह की वो लड़की जग चुकी ह.

कनिका _ गुड मॉर्निंग अब कैसी हो.

लड़की_ गुड मॉर्निंग मैं ठीक हु, मैं यहाँ कैसे आयी. और वो लड़के कहा गए,

कनिका_ मुझे उन लड़को का कुछ पता नहीं, मुझे तो तुम बिच सड़क पर बिहस मिली थी. उसके बाद हम ने तुम्हें वह से उठा कर अपने घर ले आये.

लड़की_ क्या अपने के साथ कोई और भी था.

कनिका_ ह मेरे हस्बैंड तुम जल्दी से नाहा कर निचे आ जाओ. हमे कॉलेज भी जाना ह.

लड़की_ ठीक म अभी रेडी हो कर आती हु.

उसके बाद कनिका निचे चली जाती ह. जब कनिका निचे पहुह्ती ह तो देखती ह की नकुल अपना ब्रेकफास्ट ख़त्म के चूका ह, फिर कनिका दिंनिंग टेबल से जूते बर्तन ुये कर किचन म रखने चली जाती ह. कनिका किचन म रख नकुल के पस आ कर कहती ह म अभी रेडी हो कर आती हु, फिर कनिका रेडी होने चली जाती ह

फिर नकुल ड्राइंग रूम मैं बैठकर कनिका का वेट करने लगता ह. 15 मिन्ट्स बिट जाने के बाद नकुल को सीढ़ियों से किसी के निचे उतरने की आवाज आती ह. जैसे hi नकुल सीढ़ियों की तरफ देखता ह तो बस देखता hi रह जाता ह.

नकुल को होस जब आता ह जब कनिका ने नकुल को हिलाया, ोये मर. कहा ध्यान था तुम्हारा कब से मैं और ये लड़की तुम्हें आवाज लगा रही ह.

नकुल _ सॉरी, कही भी तो नहीं था डिअर, ाचा छोड़. क्या नाम बताया इस लड़की का तुमने.

कनिका_ यार मैंने तो अभी तक नाम hi नहीं पूछा.

नकुल _ डिअर तुम रहने hi दो मैं पूछ लेता ह. Hello प्रिंसेस क्या नाम ह तुम्हारा.

लड़की_ जी मेरा नाम खुशबू सिंह ह.

नकुल _ मेरा नाम नकुल कुशवाहा और ये मेरी जान कनिका कुशवाहा. कहा रहती हो.

थोड़ा खुशबू सिंह के बारे म जान ले.

खुशबू सिंह_ इसके पिता जी एक बहुत hi बड़े बिज़नेस मन ह. ये पड़ने म बहुत hi इंटेलीजेंट ह. अभी अभी इसने 12 क्लियर लिया . इसका फिगर 34 30 38 ह ये देखने म किस मॉडल से काम नहीं लगती ह. ये अपने पिता की एकलौती बेटी ह. इसके पिता का नाम गौरव सिंह और माता का नाम दीप्ती सिंह ह.

अब कहानी की और चलते ह.

खुशबू सिंह_ मैं दिल्ली म रहती हु. मैं यहाँ अपने फ्रेंड ले साथ घूमने आयी थी कल रात मैं और मेरी फ्रेंड एक पार्टी म गए थे. जब हम आ रहे थे तो हमारी कार रस्ते म ख़राब हो गयी. और हम सब उतर के बस या ऑटो का वेट करने लगे. तभी कुछ आवारा लड़को का ग्रुप आ कर हमारे साथ बातिमीजी करने लगे. जब मैंने उनका विरोध किया तो उन लड़को ने मुझे उठा कर अपनी जीप म ले जाकर बैठा दिया. मैंने एक को धक्का मर के वह से भाग nikali,wo सरे लड़के मेरा पीछा करने लगे, पर बड़ी मुश्किल से मैंने उन लड़को से अपना पीछा छुड़ाया. जब म एक जगा रुक कर पीछे देखा तो कोई नहीं था. पर तभी मुझे चक्र आ गया और म बिहस हो गयी
 
अपडेट 29

नकुल _ठीक ह. अच्छा तुम aram.karo हम कॉलेज जा रहे ह.

खुशबू सिंह_ ठीक ह. क्या म अपने पापा से कॉल कर सकती हु.

नकुल _ हाँ कर लेना, अब हम चलते ह.

उसके बाद नकुल कनिका के साथ कॉलेज के लिए निकल जाता ह. वही खुशबू सिंह नकुल के बारे म सोचने लगती ह. की वो कितना हैंडसम और स्मार्ट ह. कास ये मेरा बर्फ होता हो तो कितना अच्छा लगता. उसके बाद खुशबू अपने पापा को कॉल करती ह. थोड़े देर बाटे करने के बाद फ़ोन रख देती ह और आराम करने लगती ह.

जब नकुल और कनिका कॉलेज पहुंचते ह तो कॉलेज का नज़र hi कुछ और था. सीनियर स्टूडेंट जूनियर स्टूडेंट की रैगिंग कर रहे थे. जब नकुल कनिका के साथ आगे बढ़ाता ह तो एक ग्रुप दोनों को रोक देता ह. जिसमे कुछ लड़किया और लड़के थे.

लड़का1 _ क्या नाम ह तुम्हारा,

नकुल_ मेरा नाम नकुल कुशवाहा ह.

गर्ल 1_ ोये तुझे सुनाई नहीं दिया क्या

कनिका_ मेरा नाम कनिका ह,

Nakul_sir, हम क्लास म जाये.

गर्ल 2 _ बहुत जल्दी ह क्लास म जाने की. चल पहले इस लड़की को किश कर,

नकुल_ मैं कैसे कर सकता हु. ये मेरे बारे म क्या सोचेगी.

गर्ल_ यार ज़रीन ये तो तेरी बात hi नहीं सुन रहा ह.

ज़रीन _ ोये गोकु चुप चाप किस करता ह की नहीं.

नकुल_ मिस आप hi सोचिये मैंने अगर इस लड़की के साथ ऐसा किया तो इसकी बदनामी हो जाएगी. अगर आपके साथ ऐसा कोई करता तो कैसा लगता.

लड़का4 _ यार ज़रीन ये तो तेरे साथ बहस कर रहा ह. अगर तू कहे तो मैं hi किश क्र दू इस लड़की को.

ज़रीन_ मैं आखरी बार बोल रही हु अगर तुमने इस लड़की को किश नहीं किया तो फिर इसे किश करने लो कहे दूंगी.

नकुल_ ठीक ह मैं करता हु. फिर म आगे बाद जाता हु. कनिका को अपने बाँहों म भर के कनिका के लिप्स पर अपने होठ रख कर किश कर लगता हु. कनिका को किश करते hi म ये भूल गया की हम दोनों स्टूडेंट के बीचो बिच खड़े ह. हमारा किश 15 मिन्ट्स तक चला.

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हमने होस तो तब गए जब वह पर मौजूद सभी स्टूडेंट्स ने तालिया बजने लगे. तब जा कर हम दोनों के दूसरे से लग हुए और अपनी क्लास की और चल दिए.

हमारे जाने के बाद सभी स्टूडेंट हम दोनों के hi बारे म बात करने लगे. कितना हॉट कपल ह. लगता ह वो दोनों एक दूसरे के लिए बने ह. ऐसे hi कही तरह की बाते होने लगी वह पर.

जो ज़रीन को अच्छा नहीं लग रहा था, आज पहली बार किसी लेक ने सभी स्टूडेंट के सामने उसकी बैजिटि की थी, पर ऊपर से उसके दोस्तों ने भी आग म घी डालने का kaam.kiya.
 
‍♂

*चूहा अगर पत्थर का हो तो*

*सब उसे पूजते हैं*

*मगर जिन्दा हो तो मारे बिना*

*चैन नहीं लेते हैं*

*साँप अगर पत्थर का हो*

*तो सब उसे पूजते हैं*

*मगर जिन्दा हो तो उसी वक़्त*

*मार देते हैं*

*माँ बाप अगर "तस्वीरों" में हो*

*तो सब पूजते हैं*

*मगर जिन्दा है तो कीमत नहीं*

*समझते"*

*बस यही समझ नहीं आता के*

*ज़िन्दगी से इतनी नफरत क्यों*

*और*

*पत्थरों से इतनी मोहब्बत क्यों*

*जिस तरह लोग मुर्दे इंसान को*

*कंधा देना पुण्य समझते हैं*

*काश" इस तरह' ज़िन्दा" इंसान*

*को सहारा देंना पुण्य समझने*

*लगे तो ज़िन्दगी आसान हो*

*जायेगी*

*एक बार जरूर सोचिए*
 
अपडेट 30

अब तक

हमारे जाने के बाद सभी स्टूडेंट हम दोनों के hi बारे म बात करने लगे. कितना हॉट कपल ह. लगता ह वो दोनों एक दूसरे के लिए बने ह. ऐसे hi कही तरह की बाते होने लगी वह पर.

जो ज़रीन को अच्छा नहीं लग रहा था, आज पहली बार किसी लेक ने सभी स्टूडेंट के सामने उसकी बैजिटि की थी, पर ऊपर से उसके दोस्तों ने भी आग म घी डालने का kaam.kiya.

अब आगे

फिर ज़रीन अपने सबसे क्लोज फ्रेंड के साथ चली जाती ह. ज़रीन अपनी फ्रेंड एकता कपूर से कहती ह यार मैं इस को छोडूगी नहीं. इस उस लड़के और लड़की ने मेरी बहुत बैयाजीति की ह सभी कॉलेज स्टूडेंट्स के सामने,

एकता kapoor_Zarin अगर सच मैं कहु तो उन्दोनो ने तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं किया. बल्कि उस लड़के को तुम hi ने उस लड़की कनिका को किश करने के लिए कहा था. जब की वो तो तुम से इस करता के लिए मन कर रहा था. तुम्हारे hi जबरदस्ती करने पर उस लड़के ने उस लड़की कनिका को किश किया. अब तुम्ही बताओ उसमे उस लड़के और उस लड़की किया गलती ह.

ज़रीन_ तो क्या हुआ अगर मैंने कह दिया तो उस लड़के को मन कर देना था. सायद तुम भूल रही हो एकता वह पर एक लड़के ने उन्दोनो को भाई और भाभी भी कहा था. इसी ये मतलब हुआ की उन दोनों ने मिलकर मेरा पोपट बनाया ह.

एकता kapoor_chalo मैंने मन लिया की उन्दोनो ने अपनी असलियत तुम से छुपाई, ये उनका नीजिमामल ह. जब उसने उसने उस लड़की को किश न करने को कहा तो तुमने क्या कहा था तुम्हें याद भी ह.

ज़रीन _ मैंने क्या कहा था, मुझे कुछ याद नहीं ह.

एकता कपूर _ मुझे पता था तुम भूल जाओगी. तो सुनो जब उसक लड़के ने अपनी गफ को किश करने से मन कर दिया था तो तुम्हें कहता था की अगर तुम ने उस लड़की को किश नहीं किया तो उस कमीने अमित चौधरी के तरफ ईसार कर के कहा था की वो उस लड़की को किश करेगा. जिसकी वजह से उस लड़की के बर्फ ने उसे किश किया. अब तुम hi बोलो वो क्या करता.

ज़रीन _ ठीक ह मन की मेरी गलती ह पर उस फिर भी नहीं छोडूंगी.

एकता कपूर_ अब क्या करने वाली हो उसके साथ.

ज़रीन_ बस देखती जाओ, अब मैं क्या करती हु उसके साथ.

एकता कपूर_ देख ज़रीन तुम मेरी अच्छी फ्रेंड हो इस लिए कहती हु उसके साथ कुछ गलत मत कर देना जिसकी वजह से तुम्हें साडी जिंदगी पछतानी पड़े.

ज़रीन _ ठीक नहीं कर रही उसके साथ ऐसा कुछ. चल कुछ कहते ह जोरो की भूख लगी ह.

वही दूसरी वो नकुल और कनिका वह से निकलने के बाद क्लस्स की और चल देते ह. तभी पीछे से कमल शर्मा नकुल भाई कह कर पुकारता ह. नकुल जब पीछे मुद के देखता ह तो उसे कमल शर्मा को दुआर कर उसके पास आता हुआ दीखता ह.

नकुल _ शर्मा जी आराम से ऐसा न हो की तुम निचे गिर जाओ.

कमल शर्मा_ भाई मुझे कुछ नहीं होने वाला जब तक आप मेरे साथ ह. ये मुझे पता ह. क्यों भाभी सही कह रहा होना म. ये बात हफ्ते हुए कहता हु.

कनिका_ बिलकुल सही कह रहे हो देवर जी.

कमल शर्मा _ तो सुने लिया भैया आपने की भाभी ने क्या कहा.

नकुल _ सुन लिए मेरे बापा चल अब क्लास म नहीं तो लेट हो जायेगे.

फिर तीनो क्लास की तरफ चल देते ह. जब वह पहुंचते ह तो क्लास स्टार्ट हो चुकी थी. और एक लेक्चरर क्लास को लेक्चर दे रही थी.

कमल शर्मा _ मई ी के इन मिस?

लेक्चरर _ यस के इन कमल शर्मा, आज फिर से लेट, मन तो करता ह की अभी क्लास से बहार निकल दू पर क्या करू तुम पड़ने म अच्छे हो इस लिए नहीं निकलती.

कमल शर्मा_ थैंक यू मिस,

लेक्चरर_ जो एंड सीट योर सीट.

नकुल और कनिका _ मई ी के इन मिस?

लेक्चरर _ यस के इन, अरे यू नई?

नकुल _ यस मिस बोथ अरे नई, वे वेरे एडमिशन यस्टरडे.

लेक्चरर_ ok बोथ जो एंड सीट डाउन,

नकुल कनिका _ थैंक यू मिस

लेक्चरर_ एक मिंट, चलो अपना इंट्रो तो सबको

नकुल_ मेरा नाम नकुल कुशवाहा ह, मैंने 12तह 98% मार्क्स से पास किया ह. मेरे माता पिता मुझे बचपन म hi छोड़ के चले गए थे. इस लिए म अकेला hi रहता हु.

लेक्चरर _ अब तुम अपना इंट्रो दो.

कनिका_ मेरा नाम कनिका ह. मैंने 12तह म 98% मार्क्स प्राप्त किया ह. मेरे इसी साल मेरे पिता की डेथ हो गयी एक रोड एक्सीडेंट म. और मेरी माँ बचपन म hi मुझे छोड़ के चली गयी भगवन के पस. ये मेरे मंगेतर ह.

लेक्चरर _ मेरा नाम अंजलि सहना ह. मैं तुम्हरी मैथमेटिक्स की लेक्चरर हु. अगर कोई भी प्रॉब्लम हो तो मुझसे कहना.

नकुल _ ok मिस

तभी सेकंड पीरियड की बेल्ल बज गयी और मिस अंजलि सहना वह से चली गयी. उसके बाद एक के बाद एक लेक्चरर क्लास म आते गए और अपना और स्टूडेंट का इंट्रो लेते गए, कारन शर्मा ( प्रोगरामिंग लैंग्वेज), जाया mathur(networking), कोयल बंसल ( हैकिंग) के लेक्चरर ह इनका इम्पोर्टेन्ट रोले ह नकुल के जीवन म
 
अपडेट 31

अब तक

तभी सेकंड पीरियड की बेल्ल बज गयी और मिस अंजलि सहना वह से चली गयी. उसके बाद एक के बाद एक लेक्चरर क्लास म आते गए और अपना और स्टूडेंट का इंट्रो लेते गए, कारन शर्मा ( प्रोगरामिंग लैंग्वेज), जाया mathur(networking), कोयल बंसल ( हैकिंग) के लेक्चरर ह इनका इम्पोर्टेन्ट रोले ह नकुल के जीवन म.

अब आगे

सरे पीरियड लेने के बाद मैं कनिका और कमल शर्मा के साथ कैंटीन म चला गया. वह जा क्र मैं सब के लिए कोल्ड ड्रिंक और समोसे मगवाये. फिर हमने खाना सुरु कर दिया.

नकुल _ कमल एक बात पुछु.

कमल शर्मा_ जी भाई पूछिए क्या पूछना ह.

नकुल _ तुम्हारी माँ और बहिन कौन सा काम करती ह.

कमल शर्मा _ भाई मेरी माँ एक गारमेंट कंपनी म सुपरवाइजर ह, और बहिन सेल्स गर्ल.

नकुल _ तुम्हारी माँ और बहिन कितना पड़ी लिखी ह.

कमल शर्मा_ मेरी माँ ने B.com किया हुआ ह, और बहिन ने बबा किया हुआ ह. पर भाई आप ये सब क्यों पूछ रहे हो.

नकुल _ कमल बुरा मत मन, मेरा कोई बुरा इरडा नहीं ह तुम्हारे माँ और बहिन के प्रति. मैं तो इस लिए पूछ रहा था क्यों की मैं एक कंपनी खोलने जा रहा हु. जिसके लिए मुझे कुछ ईमानदार और एक्सपीरियंस लोगी की जरुरत ह. मैंने की सोचा किसी बहार के लोगो को रखने से पहले क्यों न पहले अपने लोगो को रख लिया जाये. तुम्हारी माँ और बहिन मेरी इस काम में मेरी मदत कर सकती ह.

कमल शर्मा_ थैंक यू भाई आपने मेरी फॅमिली के बारे म ऐसा सोचा. तो कब खोल रहे हो अपनी कंपनी.

नकुल _ सोचा तो था आज hi जा कर रजिस्ट्रेशन कर लू, फिर सोच की एक बार किसी एक्सपीरियंस बन्दे से बात कर लू. क्या तुम मुझे अपने माँ और बहिन से मिला सकते हो.

इंट्रो कमल शर्मा फॅमिली

कमल शर्मा_ इस की आगे 23 ह, बसा सेकंड ईयर म ह. ( पर कुछ क्लास हीरो के साथ भी लगती ह). इसकी बॉडी मेज़रमेंट काफी अच्छी ह. 5.5 इंच ह.

हीना शर्मा_ ये कमल की बड़ी बहिन ह. इसका फिगर कभी अच्छा ह. इसने बबा किया हुआ ह. इसका दिमांग बहुत hi तेज़ ह.

रानी शर्मा_ ये कमल की सबसे छोटी बहन ह. ये अभी 12तह म पड़ती ह. इसका फिगर बहुत hi मस्त ह.

सुमन शर्मा_ ये कमल शर्मा की माँ ह, ये देखने म बहुत hi मस्त ह फिगर तो पूछो मत अगर एक बार किसी गली से गुजर जाये तो उस गली के जवान से लेकर बूढ़े तक का लुंड खड़ा कर दे.

इंट्रो एन्ड

कमल शर्मा_ क्यों नहीं भाई. कब मिलना ह.

नकुल _ अभी चलते ह मिलने.

कमल शर्मा_ ठीक ह भाई चलो कहते ह.

उसके बाद मैं कनिका कमल के साथ उसकी माँ को मिलने निकल जाते ह. 45 मिन्ट्स के ड्राइव के बाद हम सब कमल के घर पर पहुंचते ह. कमल आगे बढ़ता ह और अपने घर का बेल्ल बजता ह. थोड़ी देर बाद घर का गेट खुलता ह.

जब म सामने देखता हु तो देखता hi रह जाता हु क्युकी एक बला की खूबसूरत लड़की गेट पर कड़ी थी.

लड़की_ क्यों बे कमल तुझे पता नहीं ह इस समाये खाना बने म बिजी हुयी. ये जानते हुए भी दुर्बल बजाये जा रहा था.

कमल शर्मा_ सॉरी आगे से अब ऐसा नहीं करूँगा. अब तो अंदर आने दो. क्यों दोस्तों के सामने मेरी बजती कर रही हो.

लड़की_ चल चल अब अंदर आ. ज्यादा नौटंकी करने की जरुरत नहीं ह.

नकुल_ गुड इवनिंग सिस्टर,

लड़की _ क्या कहा तुमने मुझे

नकुल _ सिस्टर क्या मैंने कुछ गलत कह दिया.

लड़की_ नहीं बिलकुल नहीं, चलो अंदर आ जाओ.

फिर हम सब अंदर आ जाते ह. फिर कमल हम दोनों को बैठ ने के लिए कहता ह. जैसे hi हम दोनों बैठते ह वैसे hi एक आवाज आती ह. माँ क्या भैया आ गए क्या.

कमल की माँ_ है बेटी आ गए तुम्हारे भैया और अपने साथ अपने दोस्तों को भी लगया ह.

नकुल _ सॉरी ौंटी मुझे नहीं पता था आप कमल की माँ ह. मुझे लगा आप कमल की सिस्टर ह. इस लिए मैंने गलती से कह दिया.

कमल की माँ_ कोई नहीं ऐसा हो जाता ह. चलो छोडो बोलो क्या लोगे.

नकुल _ एक गिलास पानी बस.

कमल की माँ_ ठीक ह अभी लायी, तुम सब जब तक बाते करो.
 
अपडेट 32

अब तक

नकुल _ सॉरी ौंटी मुझे नहीं पता था आप कमल की माँ ह. मुझे लगा आप कमल की सिस्टर ह. इस लिए मैंने गलती से कह दिया.

कमल की माँ_ कोई नहीं ऐसा हो जाता ह. चलो छोडो बोलो क्या लोगे.

नकुल _ एक गिलास पानी बस.

कमल की माँ_ ठीक ह अभी लायी, तुम सब जब तक बाते करो.

अब आगे

अब से कहानी हीरो की जुबानी होगी.

हाँ तो कमल बाबू आपकी बहने कहा ह. वो दिखाई नहीं दे रही ह. कमल यार दीदी तो अभी जॉब से आयी नहीं होगी. और छोटी अपने रूम पद रही ह,

जब तक कमल की माँ पानी ले कर आ जाती ह, मुझे और कनिका को पानी दे कर अंदर चली जाती ह. अभी हम सब पानी hi पि रहे थे की कमल की माँ कुछ खाने की लिए ले आई.

ौंटी इसकी क्या जरुरत थी. फिर कमल की माँ कहती ह. बीटा मुझे पता ह tum.sab ने अभी तक कुछ भी नहीं खाया होगा.

ौंटी ऐसी कोई बात नहीं ह, हम सब खा के hi आ रहे ह. मैं कमल तू भी तो कुछ बोल. कमल माँ ये झूट बोल रहा ह हमने कुछ भी नहीं खाया ह. क्यों भाभी सही बोल रहा हु न मैं.

कनिका_ जी देवर जी आप कभी गलत बोल सकते ह भला.

नकुल _ कनिका तुम भी उसके साथ मिल गयी.

कनिका_ क्या करू यार, कमल ने इतने प्यार से कहा की मुझे उसकी बात माननी पड़ी.

नकुल_ कोई नहीं. ौंटी जी मुझे आपसे कुछ बात करनी थी.

सुमन शर्मा _ हाँ बीटा बोल क्या बात करनी थी तुम्हें .

नकुल_ ौंटी हम एक कंपनी खोलने जा रहे ह. मुझे आपकी और आपकी बड़ी बेटी की जरुरत ह. क्या आप मेरा साथ देगी.

सुमन शर्मा_ बीटा साथ तो हु मैं. पर एक बात पुछु.

नकुल _ जी ौंटी पूछिए क्या पूछना चाहती ह. और आगे से इजाजत मांगे की कोई जरुरत नहीं ह.

सुमन शर्मा_ ठीक ह बीटा, नकुल तुम किसी पे इतनी जल्दी भरोसा मत किया करो नहीं तो बाद म पछटण पद सकता ह. तुम ने हमें अभी तक जानते hi कहा हो,

नकुल _ ौंटी जहा तक आप सभी को ज़माने की बात ह. तो मैंने कमल से आपको लोगो के बारे म बहुत कुछ जान चूका हु. रही बात भरोसे की तो मुझे अपने से ज्यादा आप पर भरोसा ह. तो ौंटी अब बताइये क्या आप मेरे साथ देगी या नहीं.

सुमन शर्मा _ जरूर दूंगी जब तुमने मुझे पर इतना भरोसा किया ह तो मैं इस भरोसे को टूटने नहीं दूंगी. ये सब छोडो और ये बाताओ की चीज की कंपनी खोले रहे हो.

नकुल_ ौंटी मैं गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग की कंपनी खोलना चाहता हु. क्या ये ठीक रहेगा मेरे लिए, आपको इस सिटी और आपस के िलको के बारे म अच्छी तरह पता होगा.

सुमन शर्मा_ नकुल तुमने सोच तो सही ह. पर इस बिज़नेस के लिए तुम्हें बहुत म्हणत करनी पड़ेगी.

नकुल _ ौंटी ये बात तो मैं जनता हु की बिना म्हणत किये कुछ नहीं मिलता ह. इसलिए तो आपके पास आया हु, ताकि आप मेरी इस काम म मद्दत कर सके.

अभी ौंटी कुछ कहने hi वाली थी की दुर्बल बनती ह, और सब का ध्यान उस तरफ चला जाता ह. ौंटी कहती ह लगता ह हीना आ गयी ह काम से. कमल जा कर दूर ओपन कर दो. कमल अपनी सीट से उठ कर जाता ह और गेट ओपन करता ह

सुमन शर्मा_ कमल कौन ह.

कमल शर्मा_ माँ दीदी ह, चलो दीदी मैं तुम्हें अपने एक दोस्त से मिलता हु,

कमल की हीना कहती ह. अच्छा तुमने अब दोस्त भी बनाना सुरु कर दिया. क्या बात ह. चलो मैं भी तो देखि इस लंगूर का दोस्त कौनसा लंगूर ह.

कमल सहस्रमा _दीदी एक बार तुम्हें देख लिया तो उस लंगूर को hi दिल दे बैठोगी.

हीना शर्मा_ इतने बुरे दिन नहीं आ गए मेरे की उस लंगूर को अपना दिल दे बैठी,

फिर कमल और उसकी बहन हीना ऐसे hi आपस म नोक झोक करते हुए ड्रोनिंग रूम आ जाते जहा मैं कनिका और कमल की माँ सुमन शर्मा आपस म बाते कर रहे थे.

हीना शर्मा_ गुड इवनिंग माँ,

सुमन शर्मा_ गुड इवनिंग बीटा, आज इतनी देर का इस हो गयी.

हीना शर्मा _ माँ ऑफिस म फ़ौरन से कुछ लोग आये थे. इसलिए देर हो गयी. माँ ये लोग कौन ह.

सुमन शर्मा_ अरे तुम्हें तो इनसे मिलवाना hi भूल गयी. हीना बीटा ये ह नकुल और ये ह कनिका. नकुल ये ह मेरी सबसे बड़ी बेटी हीना शर्मा

नकुल कनिका _ गुड इवनिंग हीना जी,

हीना शर्मा _ गुड इवनिंग नकुल एंड कनिका.
 
अपडेट 33

अब तक

सुमन शर्मा_ अरे तुम्हें तो इनसे मिलवाना hi भूल गयी. हीना बीटा ये ह नकुल और ये ह कनिका. नकुल ये ह मेरी सबसे बड़ी बेटी हीना शर्मा

नकुल कनिका _ गुड इवनिंग हीना जी,

हीना शर्मा _ गुड इवनिंग नकुल एंड कनिका.

अब आगे.

सुमन शर्मा _ हीना बीटा बैठो यह हमे तुम से कुछ जरुरी बात करनी ह,

हीना शर्मा_ हाँ म बोलो क्या बात करनी ह.

नकुल_ तभी मैं कहता हु हीना मैं एक गारमेंट्स की कंपनी खोल ने जा रहा हु, मैं चाहता हु की तुम उसे म तुम काम करो. मैं ये भी चाहता हु की तुम मेरी कंपनी अस सेल्स एंड जोनल मैनेजर काम करो. क्या तुम मेरा साथ हो.

हिना शर्मा_ ठीक म रेडी हु तुम्हारे साथ काम करने के लिए पर मेरे घर का खर्चा कैसे चलेगा. अभी हमारे पास इतने पैसे नहीं ह की नौकरी छोड़ने के बाद घर का खर्चा चल सके,

नकुल_ ये बाद सुने के मैं हीना के हाथ म एक कार्ड रख देता हु. और कहता हु की हीना ये क्रेडिट कार्ड रखो. और जितना मन कर खर्च कर लेना क्युकी ये no लिमिट कार्ड ह.

हीना शर्मा_ क्या, पर ये किसका ह. जो तुम मुझे दे रहे हो. क्युकी जहा तक म जानती हु की कोई भी बिना मतलब के कुछ नहीं देता ह. क्युकी जहा मैं काम करती हु उस कंपनी का हेड इस लिए मुझे काम रखा हुआ ह ताकि और मेरे जिस्म के साथ खेल सके.

नकुल_ हीना इस दुनिया म हर कोई एक जैसा नहीं होता ह खास कर मेरी एक बात ध्यान रखना अगर कभी भी ये लगे की मैं आपके या आपके फॅमिली के साथ कुछ गलत करने वाला हु. उसी वक्त आप कंपनी छोड़ कर चली जाना, और हाँ ये कार्ड रखो उसे करो जब आपको लगे की आपको मेरी कंपनी म काम करना चाहिए तो मुझे फ़ोन कर देना ये रहा मेरा कार्ड.

फिर म सुमन आंटी से जाने की इजाजत मांगता हु. मैं कनिका के साथ घर के लिए निकल जाता हु,

वही मेरे जाने के बाद सुमन आंटी हीना को समझें लगती ह. बीटा हीना नकुल ऐसा इंसान बिलकुल नहीं ह जो हमारी गरीबी का फैयदा उठए क्युकी मैं उसकी आँखों सचाई देखि. अगर मुझे ऐसा कुछ भी लगता तो म खुद hi उसे घर से धक्के मर के निकल देती. मन की हमारे साथ बहुत से लोग हमारा जिस्म पाना चाहते ह,. तुम अपने हेड को hi ले लो कितनी बार तुम्हारे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश भी की ह पर आज तक कभी कामियाब नहीं हो पाया ह,

तभी कमल कहता दीदी नकुल भैया जैसा आप सोच रही हो वो बिलकुल वैसे नहीं तुम मेरा विश्वास करो.

वही दूसरी और रेशमा ठाकुर के कहे अनुशार रजनी ठाकुर अपनी दोनों बेटियों के साथ देहरादून आ गयी थी. और सीधे अपनी बेटी ज्योति ठाकुर के घर पहुँचती ह.

जब वह वो पहुँचती ह तो घर प लॉक लगा हुआ था. रजनी ठाकुर अपनी बेटी ज्योति को फ़ोन करती ह जल्दी आपने को कहती ह, उसने ये भी बता दिया था की तुम्हारी दोनों बहने भी यही आयी हुई ह.

ये सुन के ज्योति ठाकुर हॉस्टल से सीधे घर की और भगति ह. उसकी फ्रेंड्स पीछे से आवाज लगते रह जाते ह.
 
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