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अपडेट-79
दुअरी तरफ .......
इधर रेखा अपनी दीदी को चरमसुख का आनंद दे चकली थी इधर उसकी छोटी बेहेन एक आस के साथ रवि के खेतो की और बढ़ रही थी मनो आज कम्मो के दिमाग में कुछ अजीब hi चल रहा था वो रवि को किसी भी कीमत पर हासिल करना कहती थी
दूर से hi कम्मो को अपना छोटा भाई खेतो में हल चलता हुआ दिखाई पड़ता है
कम्मो के चेहरे पर रवि को देख कर मुस्कान आ जाती है और वो बड़े बड़े कदमो के साथ रवि की और बढ़ने लगती है
कम्मो- अरे ू भाई आकर खाना खले कितनी म्हणत करेगा तू
रवि भी अपनी कम्मो दीदी की बात सुनकर खाना खाने के लिए अपनी झोपडी की तरफ जाने लगता है
कम्मो रवि के पहुंचने से पहले hi दोनों का खाना निकल चुकी थी
रवि- अरे दीदी आज 2-2 थाली में खाना क्यों निकला है
कम्मो- तुझे तो अपनी इस दीदी से जैसे कोई मतलब hi नहीं तो मैंने सोचा क्यों न आज दोपहर का खाना तेरे साथ hi खा लिया जाये ताकि तुझे पता चल सके की तेरी 2 दीदियो के अलावा एक और दीदी है
रवि ये तो जनता था की जब से उसने रेखा दीदी को छोड़ना शुरू किया है तबसे hi वो कम्मो दीदी से ज्यादा मिल नहीं पता और शायद इसी लिए कम्मो दीदी के कान गरम हुए पड़े है
रवि- अरे दीदी ऐसी बात नहीं है आप एक दिन पहले hi तो आयी हो
कम्मो- 2 दिन हो गए पर तू तो सिर्फ रेखा दीदी और मेघा दीदी के आगे पीछे hi घूमता रहता है मुझसे तो तूने एक बार बैठ कर बात भी नहीं की
रवि अभी तक नहीं समझ पा रहा था की उसकी दीदी को सब पता है की वो अपनी दोनों दीदियो के शरीर का कैसे मजा लूट रहा है
रवि नहीं जनता था की आज उसकी दीदी किश इरादे से उसके पास आयी है
कम्मो एक थाली को रवि के पास रख देती है और खुद खत से निचे बैठ जाती है और जैसे hi रवि खत पर आकर बैठता है उसकी नजर सीधा अपनी दीदी के तने हुए कुछो ओर पड़ती है जोकि आधे से ज्यादा नंगी थी
कम्मो तो आज जैसे घर से hi सब प्लान बना कर आयी थी की रवि को कब और क्या दिखाना है
कम्मो का ब्लाउज भी काफी डीप गले का था
जैसे hi कम्मो की नजरे रवि से टकराती है वो समझ जाती है की कैसे उसका छोटा भाई उसकी चूचियों को खा जाने वाली नजरो से घर रहा है
कम्मो तुरंत hi अपना दुपट्टा सही करते हुए अपनी छाती को धक् देती है और रवि का ध्यान एक दम से टूटा है
कम्मो- ऐसे क्या घर रहा है तू चल चुप चाप खाना खा
रवि भी चुपचाप गर्दन निचे लटककर एक निवाला तोड़ता है और अपने मुँह तक ले जाता है तभी कम्मो एक और दव्व चलती है और अपने दोनों पैरो को आगे बढ़ा कर सीधा कर देती है और उसका पेटीकोट उसके घुटनो से निचे सरकता हुआ गिर जाता है
रवि की तो जैसे हालत hi तीते हो जाती है उसके हाथ से निवाला निचे गिर्र जाता है और वो एक पल के लिए अपनी दीदी की गोरी गोरी टैंगो का मुरीद हो जाता है
रवि का लुंड एक झटके में hi आधे से पूरा खड़ा हो जाता है
होता भी क्यों न कम्मो की गुदाज टंगे जोकि एकदम गोरी बालो का कहि कोई निशान नहीं एक दम दूध की तरह सफ़ेद कोई भी मर्द देख कर पागल हो जाता
कम्मो तुरंत hi अपना पेटीकोट खींच कर सही कर देती है
और दोनों चुपचाप खाना खाने लगते है
कम्मो मन hi मन काफी खुश थी क्योंकि वो रवि के चेहरे के एक्सप्रेशन देख कर समझ गयी थी की उसने जिस इरादे से अपने भाई को अपना जिस्म दिखया है वो सफल हुआ है
रवि को पता था की आज नहीं तो कल वो कम्मो दीदी को भी छोड़ेगा पर वो ये नहीं जनता था की आज वो अपनी दीदी के बनाये हुए जाल में फास्ट hi जायेगा
दोनों भाई बेहेन अब तक खाना खा चुके थे
रवि- दीदी आप एक काम करो घर चली जाओ मुझे आज बहुत काम है खेतो में
कम्मो- नहीं हम दोनों साथ में hi चलेंगे
रवि- ठीक है दीदी फिर एक काम करो आप न इधर खत पर लेत जाओ मैं तब तक काम करके आता हु
कम्मो- चल ठीक है तू जा मैं यही लेती हु
रवि एक नजर अपनी दीदी की जवानी को घूरता है और वापस से हल चलने चला जाता है
कम्मो भी लेती लेती रवि की और hi देख रही थी और उसे रवि का मरदाना जिस्म धुप में चमकता हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था जिसे डेल्ह कर न जाने क्यों कम्मो की छूट लगातार पानी चोदे जा रही थी
लेते लेते न जाने कम्मो की कब आँख लग जाती है और जब उसकी आँख खुलती है तो काफी अँधेरा hi चूका था अब तक रवि भी झोपडी में सब समान रख चूका था और अब अपनी दीदी को जगाने hi जा रहा था
इधर कम्मो खुद भी यही कहती थी की उसका छोटा भाई खुद hi उसे जगाये
कम्मो दुबारा से आँखे बंद कर लेती है
इधर रवि अपनी दीदी के पास पहुंचते hi बिना किसी हरकत के अपनी दीदी को ऊपर से निचे तक्क घूरने लगता है और वो समझ रहा था की अभी टक्क उसकी दीदी सोई हुई है तो वो थोड़ा फायदा उठाने के चक्कर में था
इधर कम्मो रवि की साडी हरकते चोरी चोरी देख रही थी
रवि अपने सर को निचे ले जाता हुआ सीधा अपनी दीदी की छूट पर ले जाता है और दुर्र से hi जोरदार तरिके से सनस खींचता हुआ कम्मो की छूट की खुसबू को सूंघने की कोशिश करता है
कम्मो अपने छोटे भाई की हरकट देख कर अंदर तक्क सिहर हटी है और उसकी सुखी हुई छूट एक बार फिरर पानी छोड़ना शुरू लार देती है
रवि का मैं इतने से नहीं भरता वो तुरंत hi अपना मुह्ह कम्मो दीदी की छूट के ऊपर रख देता है और अपनी नाक को अपनी दीदी की छूट में घुसा कर अपनी दीदी की जवानी की खुसबू सूंघने लगता है
कम्मो को एक के बाद एक झटके लग्ग रहे थे वो समझ hi नहीं पा रही थी की रवि का अगला कदम क्या होगा रवि तो अपनी दीदी से भी एक कदम आगे निकला था
कम्मो की छूट तो आज दिन भर पानी छोड़ती रही थी जिसका फलिस वक़्त रवि को मिल रहा था
अपनी दीदी की छूट को पेटीकोट के ऊपर से hi सूंघ कर रवि का दिमाग खराब हो गया था उसका लुंड मनो फटने को हो रहा था
कम्मो की छूट इतनी मादक महक छोड़ रही थी की रवि अगर एक पल और उसे सूंघता तो मनो वो अपना आप खो देता
एक hi पल में रवि अपना मुह्ह हटा लेता है और जोरदार सांसे लेता हुआ कम्मो दीदी के चेहरे को देखने लगता है
रवि के दिम्माग में हजारो सवाल चल रहे थे क्योंकि आज तक्क वो छूट के लिए कभी तड़पा नहीं था पर इस वक़्त उसे ऐसा लग रहा थस की अभी अपनी दीदी को यही पटक कर छोड़ दे पर वो जनता था की कम्मो दीदी अगर एक बार गुस्सा हो गयी तो दुबारा जल्दी उसके निचे नहीं आने वाली
करीब 5 मं बाद दोनों भाई बेहेन की हालत थोड़ी ठीक होती है
रवि- दीदी उठो देखो शाम हो गयी
दीदी डीडीडीईई उठ जाओ
कम्मो तो जैसे आज उठने के लिए तैयार hi नहीं थी
अगले hi पल रवि अपने हाथ को कम्मो की बड़ी बड़ी चुकी पर रख देता है और कम्मो की तो मनो साँस hi अटक जाती है
अपनी दीदी की चुकी को जोरसे मसलते हुए रवि एक बार फिर से वजा लगता है
आज पहली बार कम्मो की ुनचुइ चुकी को उसके छोटे भाई ने चुवा था
कम्मो एक झटके में hi उठ कर बैठ जाती है और रवि भी तुरंत hi अपना हाथ हटा लेता है
रवि- क्या हुआ दीदी बड़ी गहरी नींद में सोई थी आपतो
कम्मो- मुझे ऐसा लगा जैसे किसीने जोरसे मेरी छाती पकड़ ली हो
छाती तो सच में पकड़ी गयी थी ये तो दोनों जानते थे पर नाटक करना भी तो जरूरी था
रवि- दीदी यह मेरे अलावा और कोण है और मैं अपनी दीदी की छाती को क्यों दबाने लगा
जरूर आपने कोई सपना देखा होगा
कम्मो- है हो सकता है चल घर चलते है
रवि- ः दीदी चलो नहीं तो आप दुबारा सो जाओगी
कम्मो- है और अगर सो गयी तू अपनी इस भरी भरकम दीदी को उठा कर लेजाना घर
दोनों भाई बेहेन हस्ते हुए घर की और निकल जाते है ......
दुअरी तरफ .......
इधर रेखा अपनी दीदी को चरमसुख का आनंद दे चकली थी इधर उसकी छोटी बेहेन एक आस के साथ रवि के खेतो की और बढ़ रही थी मनो आज कम्मो के दिमाग में कुछ अजीब hi चल रहा था वो रवि को किसी भी कीमत पर हासिल करना कहती थी
दूर से hi कम्मो को अपना छोटा भाई खेतो में हल चलता हुआ दिखाई पड़ता है
कम्मो के चेहरे पर रवि को देख कर मुस्कान आ जाती है और वो बड़े बड़े कदमो के साथ रवि की और बढ़ने लगती है
कम्मो- अरे ू भाई आकर खाना खले कितनी म्हणत करेगा तू
रवि भी अपनी कम्मो दीदी की बात सुनकर खाना खाने के लिए अपनी झोपडी की तरफ जाने लगता है
कम्मो रवि के पहुंचने से पहले hi दोनों का खाना निकल चुकी थी
रवि- अरे दीदी आज 2-2 थाली में खाना क्यों निकला है
कम्मो- तुझे तो अपनी इस दीदी से जैसे कोई मतलब hi नहीं तो मैंने सोचा क्यों न आज दोपहर का खाना तेरे साथ hi खा लिया जाये ताकि तुझे पता चल सके की तेरी 2 दीदियो के अलावा एक और दीदी है
रवि ये तो जनता था की जब से उसने रेखा दीदी को छोड़ना शुरू किया है तबसे hi वो कम्मो दीदी से ज्यादा मिल नहीं पता और शायद इसी लिए कम्मो दीदी के कान गरम हुए पड़े है
रवि- अरे दीदी ऐसी बात नहीं है आप एक दिन पहले hi तो आयी हो
कम्मो- 2 दिन हो गए पर तू तो सिर्फ रेखा दीदी और मेघा दीदी के आगे पीछे hi घूमता रहता है मुझसे तो तूने एक बार बैठ कर बात भी नहीं की
रवि अभी तक नहीं समझ पा रहा था की उसकी दीदी को सब पता है की वो अपनी दोनों दीदियो के शरीर का कैसे मजा लूट रहा है
रवि नहीं जनता था की आज उसकी दीदी किश इरादे से उसके पास आयी है
कम्मो एक थाली को रवि के पास रख देती है और खुद खत से निचे बैठ जाती है और जैसे hi रवि खत पर आकर बैठता है उसकी नजर सीधा अपनी दीदी के तने हुए कुछो ओर पड़ती है जोकि आधे से ज्यादा नंगी थी
कम्मो तो आज जैसे घर से hi सब प्लान बना कर आयी थी की रवि को कब और क्या दिखाना है
कम्मो का ब्लाउज भी काफी डीप गले का था
जैसे hi कम्मो की नजरे रवि से टकराती है वो समझ जाती है की कैसे उसका छोटा भाई उसकी चूचियों को खा जाने वाली नजरो से घर रहा है
कम्मो तुरंत hi अपना दुपट्टा सही करते हुए अपनी छाती को धक् देती है और रवि का ध्यान एक दम से टूटा है
कम्मो- ऐसे क्या घर रहा है तू चल चुप चाप खाना खा
रवि भी चुपचाप गर्दन निचे लटककर एक निवाला तोड़ता है और अपने मुँह तक ले जाता है तभी कम्मो एक और दव्व चलती है और अपने दोनों पैरो को आगे बढ़ा कर सीधा कर देती है और उसका पेटीकोट उसके घुटनो से निचे सरकता हुआ गिर जाता है
रवि की तो जैसे हालत hi तीते हो जाती है उसके हाथ से निवाला निचे गिर्र जाता है और वो एक पल के लिए अपनी दीदी की गोरी गोरी टैंगो का मुरीद हो जाता है
रवि का लुंड एक झटके में hi आधे से पूरा खड़ा हो जाता है
होता भी क्यों न कम्मो की गुदाज टंगे जोकि एकदम गोरी बालो का कहि कोई निशान नहीं एक दम दूध की तरह सफ़ेद कोई भी मर्द देख कर पागल हो जाता
कम्मो तुरंत hi अपना पेटीकोट खींच कर सही कर देती है
और दोनों चुपचाप खाना खाने लगते है
कम्मो मन hi मन काफी खुश थी क्योंकि वो रवि के चेहरे के एक्सप्रेशन देख कर समझ गयी थी की उसने जिस इरादे से अपने भाई को अपना जिस्म दिखया है वो सफल हुआ है
रवि को पता था की आज नहीं तो कल वो कम्मो दीदी को भी छोड़ेगा पर वो ये नहीं जनता था की आज वो अपनी दीदी के बनाये हुए जाल में फास्ट hi जायेगा
दोनों भाई बेहेन अब तक खाना खा चुके थे
रवि- दीदी आप एक काम करो घर चली जाओ मुझे आज बहुत काम है खेतो में
कम्मो- नहीं हम दोनों साथ में hi चलेंगे
रवि- ठीक है दीदी फिर एक काम करो आप न इधर खत पर लेत जाओ मैं तब तक काम करके आता हु
कम्मो- चल ठीक है तू जा मैं यही लेती हु
रवि एक नजर अपनी दीदी की जवानी को घूरता है और वापस से हल चलने चला जाता है
कम्मो भी लेती लेती रवि की और hi देख रही थी और उसे रवि का मरदाना जिस्म धुप में चमकता हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था जिसे डेल्ह कर न जाने क्यों कम्मो की छूट लगातार पानी चोदे जा रही थी
लेते लेते न जाने कम्मो की कब आँख लग जाती है और जब उसकी आँख खुलती है तो काफी अँधेरा hi चूका था अब तक रवि भी झोपडी में सब समान रख चूका था और अब अपनी दीदी को जगाने hi जा रहा था
इधर कम्मो खुद भी यही कहती थी की उसका छोटा भाई खुद hi उसे जगाये
कम्मो दुबारा से आँखे बंद कर लेती है
इधर रवि अपनी दीदी के पास पहुंचते hi बिना किसी हरकत के अपनी दीदी को ऊपर से निचे तक्क घूरने लगता है और वो समझ रहा था की अभी टक्क उसकी दीदी सोई हुई है तो वो थोड़ा फायदा उठाने के चक्कर में था
इधर कम्मो रवि की साडी हरकते चोरी चोरी देख रही थी
रवि अपने सर को निचे ले जाता हुआ सीधा अपनी दीदी की छूट पर ले जाता है और दुर्र से hi जोरदार तरिके से सनस खींचता हुआ कम्मो की छूट की खुसबू को सूंघने की कोशिश करता है
कम्मो अपने छोटे भाई की हरकट देख कर अंदर तक्क सिहर हटी है और उसकी सुखी हुई छूट एक बार फिरर पानी छोड़ना शुरू लार देती है
रवि का मैं इतने से नहीं भरता वो तुरंत hi अपना मुह्ह कम्मो दीदी की छूट के ऊपर रख देता है और अपनी नाक को अपनी दीदी की छूट में घुसा कर अपनी दीदी की जवानी की खुसबू सूंघने लगता है
कम्मो को एक के बाद एक झटके लग्ग रहे थे वो समझ hi नहीं पा रही थी की रवि का अगला कदम क्या होगा रवि तो अपनी दीदी से भी एक कदम आगे निकला था
कम्मो की छूट तो आज दिन भर पानी छोड़ती रही थी जिसका फलिस वक़्त रवि को मिल रहा था
अपनी दीदी की छूट को पेटीकोट के ऊपर से hi सूंघ कर रवि का दिमाग खराब हो गया था उसका लुंड मनो फटने को हो रहा था
कम्मो की छूट इतनी मादक महक छोड़ रही थी की रवि अगर एक पल और उसे सूंघता तो मनो वो अपना आप खो देता
एक hi पल में रवि अपना मुह्ह हटा लेता है और जोरदार सांसे लेता हुआ कम्मो दीदी के चेहरे को देखने लगता है
रवि के दिम्माग में हजारो सवाल चल रहे थे क्योंकि आज तक्क वो छूट के लिए कभी तड़पा नहीं था पर इस वक़्त उसे ऐसा लग रहा थस की अभी अपनी दीदी को यही पटक कर छोड़ दे पर वो जनता था की कम्मो दीदी अगर एक बार गुस्सा हो गयी तो दुबारा जल्दी उसके निचे नहीं आने वाली
करीब 5 मं बाद दोनों भाई बेहेन की हालत थोड़ी ठीक होती है
रवि- दीदी उठो देखो शाम हो गयी
दीदी डीडीडीईई उठ जाओ
कम्मो तो जैसे आज उठने के लिए तैयार hi नहीं थी
अगले hi पल रवि अपने हाथ को कम्मो की बड़ी बड़ी चुकी पर रख देता है और कम्मो की तो मनो साँस hi अटक जाती है
अपनी दीदी की चुकी को जोरसे मसलते हुए रवि एक बार फिर से वजा लगता है
आज पहली बार कम्मो की ुनचुइ चुकी को उसके छोटे भाई ने चुवा था
कम्मो एक झटके में hi उठ कर बैठ जाती है और रवि भी तुरंत hi अपना हाथ हटा लेता है
रवि- क्या हुआ दीदी बड़ी गहरी नींद में सोई थी आपतो
कम्मो- मुझे ऐसा लगा जैसे किसीने जोरसे मेरी छाती पकड़ ली हो
छाती तो सच में पकड़ी गयी थी ये तो दोनों जानते थे पर नाटक करना भी तो जरूरी था
रवि- दीदी यह मेरे अलावा और कोण है और मैं अपनी दीदी की छाती को क्यों दबाने लगा
जरूर आपने कोई सपना देखा होगा
कम्मो- है हो सकता है चल घर चलते है
रवि- ः दीदी चलो नहीं तो आप दुबारा सो जाओगी
कम्मो- है और अगर सो गयी तू अपनी इस भरी भरकम दीदी को उठा कर लेजाना घर
दोनों भाई बेहेन हस्ते हुए घर की और निकल जाते है ......