Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 5 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-39

रवि जमीन पर लेता हुआ था और इधर रेखा खत ओर पड़ी पड़ी अभी तक हाफ रही थी उसका चेहरा पूरी तरह उसी के थूक से लटपट था

रेखा का चेहरा पूरी तरह लाल हो चूका था

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रेखा की मुँह चुदाई को ख़तम हुए 10 मिंट के ुवार बीत चुके थे पर रेखा अभी भी वैसे hi पड़ी हुई थी मनो वो अपने छोटे भाई के अगले आदेश का इंतजार कर रही हो

रवि भी अबतक दुरुस्त हो चूका था

रवि खड़ा होता हुआ दुबारा से अपनी दीदी के सिरहाने पहुंच जाता है

अपने हाथो से रेखा के होठ मसलता हुआ

रवि- दीदी लगता है मैंने कुछ ज्यादा hi जोर लगाकर तुम्हारा गरम मुँह छोड़ दिया

आपकी हालत पंचर मालूम चल रही है

अभी तो सिर्फ मुँह छोड़ा है दीदी जब छूट मरूंगा तो सोचो कितना दर्द होगा

रवि की बाटे सुनकर रेखा के चेहरे पर एक मुस्कान आजाती है

जिसे रवि भी देख लेता है

रवि- मन गया दीदी तुम बहुत बड़ी रंडी हो जितना डालो उतना काम है तुम्हारे छेड़ो के लिए

रेखा- मैं कोई ऐसी वैसी रंडी थोड़े hi हु

रवि- फिर आप किस तयप की रैंड हो दीदी

रेखा- मैं तो अपने छोटे भाई की रंडी हु समझा

रवि - चलो दीदी देखते है की इस रंडी में कितनी ताक़त है

रेखा- अभी तू इतना बड़ा भी नहीं हुआ की अपनी दीदी को हरा पाए समझा बीटा

रवि- अरे दीदी अभी थोड़ी hi देर बाद तुम चिल्लाओगी देख लेना की छोड़ दे भाई मुझे मेरी छूट मत फाड़ छोड़ दे मुझे

रेखा- लगता है तू अपनी इस रंडी दीदी को हलके में ले रहा है

रवि- चलो देख hi लेते है की इस रैंड में कितनी सेहेन सकती है .

रवि जब जब रेखा को राबड़ी बोलता उसका मन अंदर तक सिहर जाता आजसे 1 दिन पहले तक उसका भाई उसे दीदी दीदी बोलता था और 1 hi दिन में .

वो उसे रंडी रंडी बोलकर रगड़ रहा था अपने लौड़े से

रवि बिना देर किये रेखा के गलो पर हाथ फेरते हुए उसके बाल पकड़ लेता है

रवि- लेती क्यों है मेरी रंडी दीदी चल अब तेरा भाई आ गगया तेरी खुजली मिटने चल उठ

इतना बोलकर रवि अपनी दीदी के बालो को पकड़ता हुस उसे उठा देता है

रेखा का काजल उसकी आँखों से बेहटा हुआ उसके गलो तक एक लकीर बना चूका था जो देखने में बहुत hi कामुक लग रहा था

रेखा होने शरीर को बिलकुल ढीला चोदे हुई थी और झा झा उसका भाई उसे घुमा रहा था वो घूमती चली जा रही थी

रवि- लगता है 1/2 घंटे तेरा मुँह छोड़ने के बाद भी तेरी भूख नहीं मिटी रुक अभी तुझे पेलता हु

इतना बोलकर रवि रेखा को बालो से ोाकड़ता हुआ निचे खींच लेता है और जमीन पर hi घीड़ी बना देता है

रेखा चुपचाप अपने छोटे भाई का हर हुकुम मान रही थी मनो वो कोई सेक्स करने वाली गुड़िया हो

रवि पीछे से hi होने घुटनो ओर आजाता है और अपना मुँह सीधा रेखा की छूट में घुसा देता है

इस हमले से रेखा अंदर तक हिल जाती है और अब उसे पता था की वो समय दूर नहीं जब उसकी छूट में उसके छोटे भाई का विशाल लुंड घुसेगा

सोच कर hi रेखा का बुरा हाल हो रहा था की जब उसकी छूट में पहली बार उसके छोटे भाई का विशाल लुंड घुसेगा तो उसकी क्या हालत होगी

कितना मोटा है उसके भाई का

इधर रवि लगातार अपनी जीभ घुसा कर रेखा की छूट को अंदर तक चाट रहा था

यह सहसास रेखा के लिए न्य था उसकी छूट में रवि अपनी जीभ को और अंदर तक चला रहा था

रेखा किसी जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी

रेखा- अह्ह्ह्हहज्ज कैसी छूट चाट रहा है तू खा जायेगा क्या मेरी छूट भी मेरे छोड़ू भाई

रवि बिना कुछ बोले लगातार रेखा की छूट को खाने में व्यस्त था

रेखा- अह्ह्ह्हह्ह क्या मस्त चुस्त है रे भाई तू मेरी छूट खा जा इस साली को बड़ा परेशान किया है इसने मुझे अह्ह्ह्ह माआ खा जा रवि अपनी दीदी की छूट आह्ह्ह्हह्ह और अंदर दाल अपनी जीभ.

हआ हा ीासी hi घुमा पूरी अंदर तक आह्ह्ह्ह मा

रेखा की बाटे सुनकर रवि को और भी ज्यादा जोश साध रहा था

रवि अपना एक हाथ रेखा की गांड पारर रख कर अच्छे से अपनी दीदी की गांड को खूब दबाता है और जोरसे एक तमाचा रेखा की गांड पर मरता है

इस हमले के लिए रेखा तैयार नहीं थी वो थोड़ा आगे की और गिरती है रवि तुरंत hi उसे पकड़ कर होनी और खींच लेता है और अपनी 2 उंगलिंया रेखा की गांड पर रख कर अंदर की और दबाने लगता है

थोड़ी सी म्हणत करने के बाद रवि को दोनों ऊँगली रेखा की गांड में समै जाती है

रेखा- आह्ह्ह्हह्ह हरामी कितना जालिम है रे तू अपनी दीदी को कोई ऐसे प्यार करता है तू सच में जानवर है

रवि अब अपना मुँह अपनी दीदी छूट से हटाता हज

रवि- सच खा दीदी तुमने मैं जानवर hi हु

और अब तुम देखोगी ये जानवर तुमको कैसे छोड़ता है

रवि दुबारा से अपना मुँह रेखा की छूट में घुसा देता है

और अपनी जीभ को दुबारा से अपनी दीदी की छूट में चलने लगता है

रवि की 2 उँगलियाँ लगातार रेखा की गांड को पेल रही. थी

रेखा इतना सारा मजा बर्दास्त नहीं कर पायी और आख़िरकार उसका बदन अकडने लगता है

रेखा- अह्ह्ह्हह भाई चाट और छत्त तेरी दीदी की छूट से अमृत निकलने वाला है जल्दी और तेज चाट अह्ह्ह्हह्हह है और अंदर घुसा अपनी जीभहहहह

रवि को समझ आ जाता है की अब उसकी दीदी की छूट से मलाई बाजार आने वाली है जिसे वो पूरा खाना कहता था

रेखा की गांड से उँगलियाँ निकल कर रवि दोनों हाथो से रेखा की छूट फैलता हज और अपनी दीदी की पूरी छूट मुँह में भर कर कसने लगता है

रेखा पागलो की तरह इधर से उधर चटपटा रही थी

5 मं छूट कसाई के बाद रेखा का बदन एक के बाद एक कई झटके खता है और थोड़ी hi देर में रेखा झटके कहती हुई होनी मलाई सीधा होने छोटे भाई के मुँह में छोड़ने लगती है

5 मिंट तक छूट को चाट चाट कर साफ़ करने के बाद रवि खड़ा हो जाता है और 3-4 थप्पड़ रेखा की गांड ओर जमा देता है

रेखा अभी भी घीड़ी बनी हुई थी उसकी छूट से रवि की लार और उसकी मलाई एक लाइन में निचे गिर रही थी

रवि- अह्ह्ह्हह मजा आ गया तेरी छूट चाट कर मेरी ररंड कितना ोानी छोड़ती है साली तू

अब रवि खुल कर अपनी दीदी को गलियां दे रहा था जिसका पूरा मजा रेखा उठा रही थी

उसे हमेशा से एक ऐसा आदमी चाहिए था जो उसे एक रंडी समझ के चोदे

ओर क्या hi किस्मत थी उसकी कोई आदमी तो नहीं मिला है उसका भाई उसकी ख्वाइस जरूर ौरी कर रहा था ...........
 
अपडेट-40

रेखा अपने छोटे भाई से अपनी छूट कस्वा कर मस्त हो गयी थी

वो अब भी घोड़ी बनी हुई इन्तजार कर रही थी कर कब उसका चिटा भाई उसकी छूट में अपना गधे जैसा लुंड डालेगा

रवि आगे बढ़ कर रेखा की गांड को फैला कर एक बार सूंघता है और फिर सरक कर रेखा के मुँह के पास आ जाता है

रेखा- अह्ह्ह्हह रवि अब और मत तड़पा अपनी दीदी को छोड़ दे भाई फाड़ दाल अपनी दीदी की छूट

रवि रेखा के गाल ओर हाथ फेरता हुआ कहता है

रवि- अरे मेरी प्यारी दीदी आपका ये भाई जरूर फाड़ेगा आपकी छूट अभी तो पूरी रात बाकि है पहले मेरा लुंड तो गिला करो

इतना बोलकर रवि अपना लुंड रेखा के मुँह के पास ले आता है

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रेखा भी बिना देर किये अपने होठो को रवि के लुंड पर लगा देती है

रवि- आह्ह्ह्हह दीदी तेरे होठ बड़े मस्त है एक दम मोठे मोठे

रेखा- तूने hi तो चूस चूस कर मोठे किये है

रवि- अभी तो तू देखती है दीदी मैं तेरा क्या क्या मोटा करता हु

रेखा अपनी जीभ से रवि का लुंड चतमे लगती है

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अब दुबारा से रवि के अंदर का जानवर बहार आने वाला था वो अपने हाथ रेखा के सर पर ले जाता है और बड़े hi प्यार से अपनी दीदी के बालो को इकट्ठा करता है और ऊपर hi एक जुड़ा बना कर सरे बाल पकड़ लेता है

स्टॉककककक एक hi बार में पूरा लुंड रेखा के मुँह में

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रेखा रवि की नजरो में hi देख रही थी

और रवि बड़े hi प्यार से अपनी दीदी के मुँह को हल्का हल्का छोड़ रहा था

रवि की आँखों में अब अपनी दीदी के लिए कोई शर्म नहीं थी

रवि के होठो पर एक जालिम मुस्कान थी मनो वो रेखा का छोटा भाई नहीं मालिक हो

अब तक रेखा भी समझ चुकी थी की उसने रवि को इतना उकसाया है की रवि अब उसे अपनी गुलाम की तरह समझ रहा है पर वो कहि न कहि इस बात से बहुत ज्यादा खुस भी थी

रवि धीरे धीरे लुंड को अंदर बहार किये जा रहा था

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रवि भले hi धीरे झटके मार रहा था पर पूरा जड़ तक लुंड वो अपनी दीदी के मुँह में पेल रहा था

रवि- अह्ह्ह दीदी कितना गरम मुँह है तुम्हारा अह्ह्ह्ह मैं तो लगता है दुबारा आपके मुँह में hi झाड़ जाऊंगा

रवि का मन तो नहीं था अपनी दीदी का मुँह छोड़ने का पर उसे अपनी दीदी की छूट भी मारनी थी अभी

आखिरकार रवि अपना लुंड बहार निकाल लेता है

रवि - दीदी तैय्यार होजा अब तेरी छूट फाड़ूंगा मैं बोल फाड़ दू

रेखा- सेल हरामी बोलता hi रहेगा या कुछ करेगा भी लगता है दम नहीं है तेरे में जो सिर्फ बोलता hi रहता है

रवि- रुक साली रांदड़ बहुत बोल रही है अभी दिखता हु तुझे अपने लुंड की ताक़त

इतना बोलकर रवि रेखा के पीछे आ जाता है और अपना लुंड अपनी दीदी की छूट पर सेट करके एक जोरदार झटका मारता है

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रेखा ने बैगन तो बहुत घुमाये थे अपनी छूट में पर उसे रवि के लुंड का बैगन आजतक नहीं मिला था

इधर रवि का लुंड उसकी दीदी की छूट को चीरता हुआ आधा उसकी छूट में समै जाता है

रेखा इस झटके के साथ hi थोड़ा आगे को गिरती है रवि उसकी कमर को पकड़ लेता है और अपनी और खींचते हुए एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लुंड अपनी दीदी की छूट में घुसा देता है

इतना बड़ा लुंड एक बार में लेकर रेखा की आँखे बहार आजाती है

आज उसके भाई का लुंड उसकी बच्चेदानी को टक्कर मार रहा था आजसे पहले उसने कुछ भी इतना अंदर नहीं डाला था

रेखा- अह्हह्ह्ह्ह मर्डरर दियाआ रे कुत्ते तूने अपनीई डीडीई को हैएएइ

कैसीईई एक hi बार्डर में अह्हह्ह्ह्ह घुसआए दिया पूरा का पूरा

लुंड

रवि- तू hi तो बोल रही थी साली की सिर्फ बोलता है डेल्ह तेरा भाई जब करता है तो क्या हाल होता है आज मैं तेरी छूट को छोड़ छोड़ कर भोसड़ा बना डूंगस साली तू देख अब तूने मुझे ललकारा है न रुक बताता हु

इतना बोलकर रवि अपना लुंड पूरा बहार खींच कर एक जोरदार झटके के साथ लुंड को फिर से रेखा की छूट की गहराइयो में पेल देता है और शता सात शता सात धक्के मरने लगता है

रेखा को आज पहली बार उसकी छूट में लुंड मिला था उसकी खुसी की कोई सीमा नहीं थी वो कहती थी की रवि और बेरहमी से उसे चोदे

रेखा- अह्ह्ह्हह मननननन गयी तू भट्ट बड़ा छोड़ू हीी मेरे भईईई पर अभी तू अपनी डीडीई को टक्कर देने लयाकक नहीं हुआआआ

रेखा की बाटे लगातार रवि को और भी ज्यादा जानवर बनने पर मजबूर कर रही थी

रवि- लगता है तेरी छूट में बड़ी गर्मी है साली कितना पानी छोड़ रही है तेरी छूट आज बताता हु तुझे कैसे होती है चुदाई

इतना बोलकर रवि अपनी स्पीड बढ़ा देता है

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रवि अपनी 2 उँगलियाँ रेखा की गांड पर लगता है और ऊपर से hi अपनी दीदी की गांड पर थूक गिरता है और दोनों उंगलियां एक. Hi बार में रेखा की गांड में थुश देता है

रेखा- अह्ह्ह सेल गांड भी मरेगा क्या बा अपनी दीदी की छूट से मन नहीं भर रहा

रवि बिना कुछ बोले लुंड को छूट से निकाल कर गांड पर सेट करता है और एक hi झटके में पूरा लुंड रेखा की गांड में पेल देता है

रेखा- आह्ह्हह्ज मैयाआ मर गयी आआह कितना जालिम है रे तू अह्ह्ह्ह. एक hi बार में पेल दिया अपना ये मुसल होनी डीडीई की गांड माहहहहह कितना बेरहम है रे तू

रवि- क्यों अब तेरी खुजली शांत हो गयी क्या दीदी एक hi बार में इतना बड़ा लुंड लेकर

बी ललकार रही थी मेरे लुंड को रुक बताता हु

रवि जोरदार धक्को की बारिश करने लगता है

रेखा को कुछ नहीं सूझ रहा था वो बस आनंद में इधर से उधर अपनी गर्दन घुमा रही थी

रेखा- अह्ह्ह्हह्हह गांड मरवाने का भी अपना hi मजा है अह्हह्ह्ह्ह और जोर से डालल अह्ह्ह्हह

आह्ह्ह्ह मर गयीईइ और जोररसीई मार रवीए अपनी डीईडीई की गंडड अह्ह्ह्हह.....

रेखा की बाटे रवि को दोगुना मजा दे रही थी अच्चानक से रवि अपना लुंड रेखा की गांड से निकल कर उसकी छूट में पेल देता गई

रेखा एक hi पाक में मस्त हो जाती है

अभी 1 झटका मारा हु था की रवि फिरसे लुंड को अपनी दीदी की छूट से निकाल कर गांड में पेल देता है

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रेखा अह्ह्ह्हह कए छोड़ता है रे तू मेरे भाई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हहमियाआआअ...

रवि क्यों दीदी बोल न अब क्या बोल रही थी की तू अभी अपनी दीदी की टक्कर का नहीं है

अब बोल कुछ बोल न

रेखा कुछ बोलने की हालत में थी hi नहीं उसका छोटा भाई अपना 11इंच का लुंड उसके पीछे से उसकी गांड में पेले जा रहा था

रेखा- आह्ह्ह्हह मंत्र गयी रे मेरे छोड़ू भाई तुझको क्या hi मस्त चुदाई करता है तू अह्ह्ह्हह और जोरसे मार मेरी गांड के सरे कीड़े मार दे अपने लुंड से

रवि- दीदी कीड़े तो मैं तेरे सरे शरीर के मार दूंगा बस तू देखती जा कैसे तेरा छोटा भाई तुझे अपनी रखैल बना कर तेरी ठुकाई करता है

रेखा - है है सेल मैं तो तेरी रंडी बन गयी हु न अब जो कुत्ते की तरह छोड़ रहा है अपनी इस कुटिया को

रवि- दीदी तू कहे जो भी हो पर तुम एक मस्त गदराई औरत हो जिसे छोड़ कर आज दिल खुस हो गया कसम से.

रेखा- अह्ह्ह्हह मारेर और तेज मार मेरी छूट मार भाई गांड बाद में मार लेना मैं तो अब तेरी hi हु पर आज मेरी छूट की खुजली मिटा दे

तेरी ये रंडी भेख मांग रही है तुझसे मेरी छूट में घुसा दे अपना लौड़ा मेरे भाई

रवि- रुक अभी तेरी छूट की गर्मी भी शांत करता हु

इतना बोलकर रवि रेखा को पलट कर पीठ के बल लिटा देता है

और अपनी दीदी के पेअर पकड़ कर मोड़ता हुआ हवा में उठा कर एक hi बार में अपना लुंड पेल देता है अपनी दीदी की छूट में

रेखा - आह्ह्ह्हह है भाई पूरा घुसा अह्ह्ह्हह माआ

और जोरसे मार है है ऐसे hi और अंदर तक है और अंदर और तेज छोड़ सेल दम नहीं है क्या तेरी गांड में सेल अपनी दीदी को बच्चो की तरह छोड़ रहा है

पहले देख तो तेरी दीदी कितनी गदराई हुई और तू सेल बच्चो की तरह छोड़ रहा है मुझे

रवि- लगता है तेरी जवानी तेरे काबू में नहीं आ रही

रेखा- तो तू hi करले न अपनी दीदी की जवानी को काबू

रवि- रुक साली अभी बताता हु

इतना बोलकर रवि ालने पैरो को पीछे लेजाकर सीधा लेत जाता है

और जोरदार धक्को के साथ अपनी दीदी की छूट पेलने लगता है

अब रवि इतने गहरे धक्के मार रहा था की उसकी जंघे जब रेखा की जांघो से टकराती तो बड़ी जोर की आवाज आती

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रेखा- अह्ह्ह है ऐसे hi और जोरसे मार मेरी छूट इसने बड़ा प्रेषण किया है तेरी दीदी को भाई इसका कुछ कर और तेज पेल इसे

रेखा इतनी बड़ी रंडी थी की उसे रवि अपनी पूरी स्पीड में छोड़ रहा था फिर भी साली और जोरसे करने को बोले जा रही थी

25 मिंट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद आखिर ravi-cki हिम्मत उसकी दीदी के सामने जवाब दे चुकी थी

रेखा भी अब तक की छूट चुदाई से 2 बार झाड़ चुकी थी

रवि- अह्ह्ह्ह दीदी तेरी छूट तो मेरा लुंड निगल रही है दीदी तेरी छूट की गर्मी मेरा लुंड पिघला रही है दीदी मारा पानी निकलने वाला है

बोल कोनसे छेद में लेगी अपने छोटे भाई की मलाई

रेखा- आह्ह्ह्हह भाई तू मेरी छूट में hi झाड़ जा और दाल दे अपना बीज मेरी छूट में और बना दे अपनी बिन ब्याही दीदी को अपने बच्चे की माआ अह्ह्ह्हआआ ऐसे hi भाई मैं भी झड़ने वाली हु

इतना बोलकर रेखा अपने हाथो को रवि की पीठ पर गदा देती है और उसे अपने से ौरी तरह से चिपका लेती है

रेखा अपने नाख़ून रवि की पीठ पर गदा रही थी जिससे रवि को थोड़ी तकलीफ तो हो रही थी पर मजा भी उतना hi आ रहा था

रेखा का बदन अकड़ना चालू हो चूका था इधर रवि भी अपने आखिरी धक्के मार रहा था

रवि- ले दीदी ले मेरा पानी पी जा अपने छोटे भाई का पानी अपनी छूट से अह्ह्ह्हह आगया दीदी आएगया

इतना बोलते hi रवि की रफ़्तार थोड़ी सी काम होती है और उसके लुंड का ज्वालामुखी फुट जाता है

रेखा अपनी छूट में अपने भाई का गरम गरम वीर्य गिरता हुआ महसूस करके पागल हो जाती है

और वो भी झड़ने लगती है

रेखा- रुकन्ना मत्तट भाई. अह्ह्ह्हह्हह

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रवि अपनी पूरी टंकी अपनी दीदी की छूट में खली कर देता है और 2 मिंट तक ऐसे hi रेखा के ऊपर पड़ा लम्बी लम्बी सांसे खींचता है

इस चुदाई से रेखा की भी हालत खराब हो चुकी थी

रेखा भी अपनी सांसो को दूरिस्ट करने में लगी थी

पर रेखा की चेहरे पर एक मुस्कान थी क्योंकि आज वो अपनी छूट में लुंड लेने का उसका सलना आज लउरा हो गया था

अब वो ुंचुड़ी नहीं थी उसके पास भी अब एक पर्सनल लुंड था भले hi वो उसके छोटे भाई का था

रवि पकककक से अपना लुंड बहार निकलता है

उसके लुंड पर दोनों भाई बेहेन का पानी अभी तक लगा हुआ था

रवि- ले दीदी अब साफ़ कर अपने भाई का हथियार

और इतना बोलकर रवि अपनी दीदी के सर के पास पहुंच जाता है

रेखा भी देर न करते हुए अपना मुँह खोल देती है और अपने छोटे भाई के लुंड का स्वागत करती है

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रवि भी देर न करते हुए रेखा को होठो पर अच्छे से अपना लुंड साफ़ करता है और साइड में पलट कर सीधा लेत जाता है

रवि- अब बोलो दीदी कैसा लगा मजा आया या नहीं

रेखा- तूने तो आज कमाल hi कर दिया क्या hi छोड़ता है रे भाई तू मस्त मरडिया आज तूने अपनी दीदी के दोनों छेद खोल कर

रवि रेखा की बाह ोाकद कर अपनी और खींच लेता है और उसके होठो पर उंगलिया फेरते हुए बोलता है

रवि- पर दीदी मैंने तो अपने लुंड से तेरे तीनो छेद खोल दिए

रवि की बात सुनकर रेखा थोड़ा सा शर्मा जाती है

रेखा- भगवांन ने बड़ा hi मस्त लुंड दिया है तुझे तेरी बीवी बड़ी खुस रहेगी

रवि- मेरी बीवी तो अभी hi खुस है अब और कोनसी बीवी आएगी

रेखा रवि की बात सुनकर हास रहु थी और उसे अब गर्व हो रहा था की उसके पास रवि के जैसा एक भाई है जो उसे पटक पटक कर छोड़ता है

रवि रेखा की ठुड्डी पकड़ कर अपनी और उठता है

रवि- दीदी बड़ी गालियां देती है तू छुड़वाते समय खा से सीखी

रेखा - अब तू ऐसे छोड़ता है अपनी दीदी को जैसे किसी रंडी को छोड़ रहा हो तो गालियां तो निकलेगी hi न

रवि - दीदी क्या बताऊ जब मैं तुमको हाथ लगता हु उसके बाद से मेरा तुम्हारे साथ आराम से करने का मैं hi नहीं करता

अच्छा ये तो बताओ आप गली दर्द में देती हो या मस्ती में

ररेखा - मस्ती में देती हु

रवि - सच में दीदी तू बहुत बड़ी चुड़क्कड़ औरत है आज रात में तेरी गर्मी निकल दूंगा साडी की साडी

रेखा - क्या रात भर छोड़ेगा तू अपनी इस दीदी को

रवि - रात भर छोडूंगा वो भी पटक पटक कर

दोनों भाई बेहेन एक दुआरे राउंड के लिए खुद को तैयार करने लगते है

उस रात रवि 3 बार अपना पानी रेखा की छूट में गिरता है

और अपनी दीदी का मुँह गांड और छूट दबा दबा कर छोड़ता है ......
 
अपडेट-41

रात भर चली ताबड़तोड़ चुदाई के बाद दोनों भाई बेहेन बेसुध होकर सोये थे सुबह के 9 बज चुके थे पर दोनों इतना थके हुए थे की किसी की भी आँख नहीं खुल रही थी

रेखा होने छोटे भाई की तरफ अपनी गांड घुमा कर सोई थी और रवि पीछे से अपनी दीदी को बहो में लिए हुए था

रवि का लुंड अभी तक आधा रेखा की छूट में hi था

रेखा अपनी आँख मलते हुए मलते हुए आँखे खोटी है उसकी नजर घड़ी पर जाती है जिसमे 9:20 मिंट हो रहे थे

रेखा जैसे hi उठने को होती रवि का लुंड पकककक से उसकी छूट से बहार आजाता है और लुंड के बहार आते hi दोनों भाई बेहेन के मिलान से बना कॉमर्स रेखा की छूट से बहने लगता है

रेखा अपना हाथ पीछे लेकर एक ऊँगली होनी छूट पर घूमती है उसकी छूट और गांड वाक़ई में रात भर हुई चुदाई के बाद सुज्ज गयी थी

रेखा अपनी ऊँगली को मुँह में दाल लेती है

रेखा-( हे भगवान् तूने मेरे लिए लुंड भले hi लेत भेजा ओर ऐसा भेजा है की तन बदन खुस हो जाता है इस घोड़े से छोड़ने के बाद)

रेखा भगवान् का शुक्रिया करते हुए उठ जाती है

रेखा को बहुत जोरसे हगवास लगा था पहले तो वो सोचती है की अकेले hi हो आये और वो दरवाजे तक पहुंच भी जाती है फिर उसके मन में पता नहीं क्या आता है वो फिरसे पलट कर रवि के पास आती है और बड़े hi प्यार से रवि के लुंड को पकड़ कर तेजी से दबा देती है

अभी रवि का लुंड आधा मुरझाया हुआ था उसकी नींद टूट जाती है और जैसे hi उसकी नजर अपने लुंड पर जाती है जोकि उसकी दीदी ने दबा रखा था रवि लपक कर रेखा को पकड़ने की कोशिश करता है पर रेखा जल्दी से उठ कर दरवाजे के पास भाग जाती है

रेखा की चल में एक लंगड़ा पैन था जो रवि ने भी देख लिया था

रेखा- रात को क्या घोड़े बेच कर सोया है जो इतनी देर तक सोया हुआ है

रवि- दीदी अब क्या बताऊ घोड़े तो नहीं बेचे पर है. एक मस्त गदराई घोड़ी को दबा कस्र छोड़ा था रात भर इसलिए नींद नहीं खुल रही थी

रवि की बात सुनकर रेखा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है

रेखा- तब तो लगता है की तूने उस गदराई घोड़ी की हालत hi खराब कर दी होगी रात भर छोड़ के

रवि - है अभी तो उस घोड़ी की हालत खराब है साली लंगड़ा लंगड़ा कर चल रही है खूब रगड़ रगड़ कर छोड़ा है

रेखा- तुझे रेहम नहीं आता उस घोड़ी ओर वो लंगड़ा कर चल रही है

रवि- अरे दीदी अभी तो आप देखते जाओ छोड़ छोड़ के उस घोड़ी के सरे छेद इतने फैला दूंगा की आगे से उसे कभी दर्द नहीं होगा

रेखा- चल जल्दी चल मुझे बड़ी तेज हगवास लगी है जल्दी चल

रवि- दीदी यही कार्डो तुम्हारा भाई साफ़ करदेगा

रेखा को अब वो बाटे याद आती है जब वो रवि को कहती थी की अपनी दीदी को जल्दी ले चल हगवास करवाने नहीं तो मैं यही पर कर दूंगी फिर तुहि साफ़ करना

रेखा - बड़ा कमीना है तू तो अपनी दीदी को हगते हुए देखेगा

रवि- अरे दीदी रात भर तुमको पेला है भूल गयी क्या

रेखा- तूने भूलने वाले काम hi खा किये है कल की रात तो अब जिंदगी भर याद रहेगी

रवि- अच्छा दीदी हगवास hi तो जाना है पहले इधर तो आओ

रेखा की नजर रवि के लुंड पर पड़ती है जो खड़ा होकर सीधा किसी रोड के आकर कस्वो गया था

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रेखा- मुझे पता है तू क्यों बुला रहा है मेरे सरे छेड़ो को तो तूने रात भर छोड़ छोड़ कर सज्जा दिया है अब खा पलेगा होना ये मुसल

रवि- अरे दीदी कुछ नहीं करूंगा तुम आओ तो अपने भाई के पास

रवि बोलते हुए रेखा को दिखा कर एक हाथ से अपना लुंड मसल रहा था

रेखा- न जी न अब नहीं आती मैं तेरे पास अब तो दर लगता है तेरे लुंड से पता नहीं कब कोनसे छेद में घुसा देगा

रवि- देखा दीदी दर गयी न तुम भी मेरे लुंड से मतलब मैं जीत गए

रेखा तो ोेहले hi हार मान चुकी थी अपने भाई के सामने

आखिर वो उसका छोटा भाई था

रेखा को होनी गलती का अहसास होता है की उसने रवि के सामने अपनी हार कबूल कर्ली है

रेखा- अरे जीत की खुसी hi मनाता रहेगा या जल्दी चलेगा भी

रवि- रुको दीदी पहले इसको तो छुपा लू कहि कोई और तुम्हारी तरह इसे देख कर डर गया तो

रवि अपने लुंड की और इशारा करते हुए कहता है

रेखा को अब तक समझ आ चूका था की अब उसका भाई उससे भी ज्यादा बेशरम हो चूका हसज बस रेखा को यही तो चाहिए था

रेखा- है है जल्दी चल तू धोती लपेट कर आ मैं पानी लेलेती हु लोटे में

रेखा बाजार निकल जाती है और पानी लेकर मैं दरवाजा खोलती है इतने में रवि भी उसके पीछे आ जाता है

.रवि अपनी दीदी की गांड पर हल्की सी चपत नारके कहता है

रवि- दीदी मुझे लगता है की तुम्हारी ये गांड दिन बी दिन और भी ज्यादा फैलती जा रही है

रेखा- है अब तू जो इसे रगड़ रगड़ कर ोेल रहा है तो बढ़ेगी hi न .

दोनों भाई बेहेन मस्ती मजाक करते हुए होने घर के पीछे पहुंचते है

रेखा रवि को और जलाना कहती थी

रवि अपनी दीदी की और मुँह करके उसके पेटीकोट ऊपर करने का इन्तजार कर रहा था

रेखा- अब क्या मुझे हगते हुए भी देखेगा चल मुँह उधर घुमा बेशरम

रवि- दीदी मेरा बस चले तो तुमको यही पटक कर पेल दू अपना लुंड तुम्हारी गांड में

रेखा हल्का सा मुस्कुरा कर अपना पेटीकोट ऊपर उठा देती है और अपनी चौड़ी गांड फैलते हुए रवि से थोड़ा आगे बैठ जाती है

रवि भी अपनी धोती उठा कर रेखा के ोीचे बैठ जाता है

रेखा जैसे hi थोड़ा सा जोर लगती है उसकी गज़न्द एक दम से खुलती है और एक जोरदार ोाददद मरते हुए रेखा की गांड से सफ़ेद पानी बहार आने लगता है

वो पानी देख कर रवि की आँखों में चमक आ जाती है

रेखा की गांड का छेद अब पहले से काफी बड़ा खुल रहा था लगभग 1.5 इंच तक

रवि- दीदी तुम्हारी गांड से तो अब तक मलाई बहार आ रही है

रेखा एक बार निचे देखती है सच में उसकी गांड से सफ़ेद ोानी निकल रहा था जो रात भर हुई चुदाई का सबूत था

.

रेखा- तो आजा खा ले न अपनी दीदी की गांड से निकली मलाई

रवि- दीदी तुम खिलने वाली बनो मैं तो एक दिन तुम्हे hi खा जाऊंगा

इतना बोलकर रवि रेखा के पास सरक कर उसके ठीक पीछे बैठ जाता है और अपना लुंड रेखा की गांड के निचे रगड़ देता है

रेखा अपनी खुली गांड ओर एक बार फिर से अपने छोटे भाई का लुंड महसूस करके पागल हो जाती है

और इतने में hi उसकी छूट से एक तेज धार के साथ उसका गरमा गरम पेशाब बहार आने लगता है

रवि रेखा की गर्दन ोाकद कर थोड़ा आगे की और झुकता है रेखा भी अपने हाथ जमीन ओर लगा कर थोड़ा आगे को झुक जाती है

इधर रवि अपना लुंड गांड से सरकता हुआ अपणी दीदी की छूट तक ले जाता है

और अपनी दीदी के निकलते हुए ोेशब के निचे अपना लुंड रख देता है

और हल्का सा लुंड से रेखा की छूट को रगड़ देता है

रेखा को भी बड़ा मजा आ रहा था एक तरफ वो मूत रही थी दूसरी तरफ उसका छोटा भाई अपनी दीदी की छूट को पेशाब करते वक़्त भी रगड़ रहा था

रवि- अह्हह्ह्ह्ह दीदी तेरा मुत्तत भी तेरी तरह hi गरम है पूरा लौड़ा खड़ा कर दिया मेरा

रवि की बात से रेखा को अंदाजा लग जाता है की अब उसके छोटे भाई के अंदर का जानवर दुबारा से जाग रहा है

रेखा भी मस्ती में थोड़ा थोड़ा करके म्यूट जकरहि थी

इधर रवि को आज एक अलग hi अहसास हो रहा थस उसे ऐसा लग रहा था मनो कोई गरमा गरम पानी से उसका लुंड भिगो रहा हो

रेखा पेशाब कर चुकी थी रवि भी थोड़ा सा पीछे हतत्ता है फिर अपनी दीदी के खुले हुए गांड के छेद को देखता है जो पहले से भी प्यारा लग रहा था.

इधर रेखा अभी तक होने हाथो को जमीन पर टिकाये हुए थी और आखिरकार उसकी गांड से एक मोती सी हगवास बहार आ जाती है जिसके गिरते hi रवि अपनी ऊँगली रेखा की गांड पर लगा देता गई और एकदम से 2 ऊँगली अंदर घुसा देता है

रवि की इस हरकत से रेखा तड़प कर रह जाती है

एक तो उसका प्रेशर ज्यादा था ऊपर से उसका छोटा भाई उसकी गांड से हगवास बहार निकलने hi नहीं दे रहा था

आखिर में रेखा थोड़ा सा जोर लगती है और रवि को उंगलियों को चुरते हुए उसकी हग्गवास बहार आ जाती है

रेखा को इस बार हसी आ जाती है

रवि- दीदी क्यों हस्स रही हो

रेखा- देखा तूने अपनी दीदी को गांड का दम तेरी ऊँगली बहार निकाल दी न बिना हाथ लगाए

रवि- अच्छा रुको एक चीज़ करके दिखता हु

रवि अपना हाथ आगे बढ़ा कर रेखा के मुँह के ठीक सामने ले जाता है

रवि- दीदी थूको मेरे हाथ में

रेखा थोड़ा सा थूक देती है

रवि- अरे दीदी और थूको और ज्यादा

रेखा 5-6 बार ने खूब सारा थूक होने भाई की हथेली में जमा कर देती है और रवि होना हाथ पीछे लेकर अपने लुंड पर अपनी दीदी का कामुक थूक मसलने लगता है

रेखा को लग रहा था की उसका भाई उसे हगते हुए देख कर मुठ मार रहा होगा इसीलिए वो अपनी गांड के छेद को थोड़ा पीछे करते हुए और खोल देती है

रवि का लुंड अबतक अपनी पूरी औक़ात में आ गया था उसके लुंड की नशे सूरज की रौशनी में चमक रही थी

रेखा की गांड का खुला हुआ छेद देख कर रवि की आँखे चमक जाती है

अभी रेखा की गांड से एक हगवास का टुकड़ा निकल hi रहा था की बिच में hi रवि अपना लुंड अपनी दीदी की गांड पर सेट करता हुआ एक जोरदार झटके के साथ पूरा लुंड अपनी दीदी की गांड में पेल देता है

रेखा की गांड में पहले hi बहुत दर्द था इस अच्चानक हुए हमले से वो तड़प जाती है उसे उम्मीद नहीं थी की रवि उसे हगते हुए छोड़ेगा उसने तो अपने भाई को अपना थूक ये सोच कर दिया था की वो लुंड पर मसल कर मुठ मरेगा ओर यह तो रवि एक hi बार में अपना लुंड अपनी दीदी की गांड में थुश देता है

रवि अपना लुंड पूरा जड़ तक रेखा की गांड में घुसा देता है और थोड़ा आगे सरक कर अपनी दीदी के कान में बोलता है

रवि- क्यों दीदी अब दिखा न अपनी गांड का दम इसे बहार निकाल कर दिखा तो मनु तेरी गांड में कितना दम है

रेखा कुछ बोलने की हालत में थी नहीं

वो बस अह्हह्ह्ह्ह करके रह जाती है

इधर रवि होना ोुरा लुंड बहार खींच लेता है जिसोअर उसकी दीदी की पिली पिली हगवास लगी हुई थी

और अब रेखा की गांड का छेद भी काफी बड़ा हो गया था

रेखा एक बार को उठने की कोशिस करती है पर रवि उसकी गर्दन पकड़ कर उसे वही दबा देता है

और दुबारा से अपना लुंड रेखा की गांड में पेल देता है

रवि- अह्ह्ह दीदी कितना मजा आ रहा है तुझे हगते हुए छोड़ने में इतना बोलकर रवि सटासट 10-15 धक्के लगता है

और होना लुंड एक बार फिर बहार खींच लेता है

रेखा की गांड से एक पड़ के साथ उसकी हगवास निकलने लगती है

अभी हगवास बहार आ hi रही थी की रवि दुबारा से अपना लुंड पेल देता है

रेखा- अह्ह्ह्हह्ह कुत्ते हगने तो मुझे सही से

हगवास करते हुए कोण चुदाई करता है

रवि- मैं करता हु न देख दीदी अभी तेरी चुदाई कर रहा हु तू भी तो हगवास कर रही है

10-15 मिंट तक रवि लगातार अपनी दीदी को पेलता रहता है

रवि का लुंड पूरी तरह से रेखा की टट्टी से सन्ना हुआ था

रवि- दीदी मजा आ रहा है चखे छोड़ने में जब तू हगति है तो तेरा ये छेद और भी जयादा खुल जाता है

रेखा- आह्ह्ह्हह्ह है भाई मुझे भी अच्छा लग रहा है कितना मजे से छोड़ता है रे तू मेरे खसम

दोनों की चुदाई जारी थी

रेखा की गांड से उसकी हगवास बह कर बहार आ रही थी

पैछःह ोाछहहहहहह पछ्ह्ह्हह्ह्ह्ह पछ्ह्ह्हह्ह की आवाजों के साथ दोनों बही बहनो को और भी जोश साध रहा था

आखिर में रवि अपना पानी रेखा की गांड में hi गिरा देता है और उठ कर रेखा के सामने आ जाता है

रेखा की गांड से हगवास के साथ साथ उसके भाई के लुंड से निकला वीर्य भी बहार आने लगता है

रेखा रवि के लुंड को देख रही थी जिसे देख कर उसकी छूट और भी ज्यादा पानी छोड़ने लगती है

रवि- देख न दीदी मेरा तो पूरा लुंड गन्दा कर दिया तुमने तेरी साडी हगवास मेरे लुंड पर लग गयी दीदी अब कोण साफ़ करेगा इसे

रेखा- रुक अभी घर चलते है फिर मैं साफ़ करदूंगी

इतना बोलकर रेखा होना हाथ आगे बढ़ा कर रवि का लुंड ोाकद लेती है और इसके शेयर उठने लगती है

रवि के लुंड पर जब खिचव पड़ता है तो वो जोरसे चिल्ला देता है

रेखा को हसि आ जाती है

रेखा- बस गांड और छूट में hi ये दमदार रहता है क्या

रवि- दीदी अबतुमको कितनी बार इसकी ताक़त दिखाऊ मैं

रेखा- तू तो बड़ा गसंडा है रे अपनी दीदी हगवास करते समय hi छोड़ दिया और पूरी हगवास अपने इस मुसल पर पोटट ली तूने

रवि- दीदी इसका अलग hi मजा है अभी तो तुम देखते जाओ मैं तुम्हे कैसे कैसे और कोनसे कोनसे तरिके से छोड़ता हु

रेखा- चल घर चल बड़ा आया छोड़ू राम चल तेरा लुंड साफ़ करती हु

रेखा रवि के लुंड को पकड़ लेती है और आगे चलती हुई उसके लुंड को खींच कर अपने साथ चलने का इशारा करती है रवि भी उसके पीछे पीछे चल देता है

दोनों भाई बेहेन घर के अंदर पहुँचता है और मैं दरवाजा बंद कर देते है

रकेः चल आंगन में और ये धोती ुरतर तेरा हतियार धो देती हु नहीं तो दिन भर अपनी दीदी की हगवास इस पर लगा कर घूमता रहेगा

रवि सीधा खड़ा हो जाता है और रेखा घुटनो के बल उसके सामने बैठ जाती है और लोटे में पानी लेकर अच्छे से अपने छोटे भाई का लुंड साफ़ करती है

रेखा- चल अब हो गया जा नहा ले

रवि- अरे दीदी अभी भी लगा है

रेखा- मुझे तो नहीं दिख रहा

रवि- ये देखो यह लगा है

रवि अपने लुंड के छेद की और इशारा करके कहता है

रेखा उसके लुंड के छेद को देखती है उसके अंदर रेखा की थोड़ी सी हगवास घुस गयी थी

रेखा- अब इसे कैसे निकलू

रवि- दीदी तेरी जीभ है न बड़ी पैनी है आगे से उसे अंदर दाल कर निकाल दे

रेखा थोड़ा सा मुँह बनती हुई अपनी जीभ को रवि के सुपडे पर रख कर थोड़ा सा अंदर करती है और उसकी हगवास उसके होठो पर लग जाती है

रवि- अह्ह्ह दीदी अब हो गया साफ़

रेखा- तूने अपनी hi दीदी को उसी की हगवास खिला दी आज

रवि- दीदी मैं भी खा लेता हु तुम बुरा न मनो

रवि इतना बोलते हुए रेखा के होठो ओर जीभ फहरता है और वो टुकड़ा उठा कर होनी जीभ से रेखा को दिखता है और एक hi बार में उसे निगल जाता है

अब जेक रेखा को पूरा यकीन हो गया था की उसका छोटा भाई उसे कितना प्यार करता है

रेखा- तू अपनी दीदी से इतना ोयार करता है की उसकी गंदगी खा गया

रवि- दीदी जितना तू सोचती है न मैं तुझसे उससे भी ज्यादा प्यार करता हु

रेखा भावुक हो जाती है और उसकी आँखों से आंसू निकलने लगते है

रवि- अरे दीदी क्या हुआ आप रो क्यों रही है आपको मेरी हरकत गन्दी लगी क्या अगर ऐसा है तो बता दो आगे से कभी ऐसा नहीं करूंगा

रवि भले hi जितना बड़ा जानवर था पर वो सच में अपनी दीदी से दिल से ोयार करता था और कभी उसके मैं को ठेस नहीं पहुंचना कहता था

रेखा- अरे भाई मुझे कुछ बुरा नहीं लग्स मैंने तो कभी सोचा hi नहीं था की एक औरत के रूप में मुझे कोई ोयार करने वाला मिलेगा और अब देख तू मुझे कितना प्यार करता है

एक औरत की तरह भी और एक दीदी की तरह भी

रेखा रवि के गले लग कर सुबक सुबक कर रोने लगती है

रवि रेखा के कानो के पास आता है

रवि- और एक रंडी की तरह भी मेरी जान मैं तुझे हर तरिके से प्यार करता हु पर सबसे पहले तुम मेरी दीदी हो और मैं तुम्हारा छोटा भाई समझी मेरी रांदड़

इतना बोलकर रवि रेखा के कान को चूसने लगता है

रेखा और भी ज्यादा कास कर रवि को अपने से चिपका लेती है

रवि- अरे दीदी हमे बहुत टाइम हो गया 2 दिन हो गए खेतो पर पानी चलना है नहीं तो बीज खराब हो जायेंगे जल्दी से कुछ बना दो उसके बाद तुम्हारा ये भाई तुमको रात को जन्नत की सैर कराएगा.

रेखा रवि से अलग होती है और रसोई की और जाने लगती है

रवि भी जल्दी से नहा धो कर तैय्यार हो जाता हसि

रेखा भी खाना बना चुकी थी वो रवि को खाने का डिब्बा देती है

रवि अभी दरवाजे तक पंहुचा hi था की वो पीछे पलट कर कहता है

रवि- दीदी तैयार रहना रास्त को तुमको जन्नत की सैर करवाएगा तुम्हारा छोटा भाई

रेखा- बड़ा आया जन्नत की सैर करवाने वाला किस चीज़ पर बैठा कर करवाएगा अपनी दीदी को जानन्त की सैर

रवि- अपने इस मुसल पर बैठा कर समझी दीदी इन्तजार कारण मेरा .

रेखा दौड़ कर रवि के पास पहुंच जाती है और होने तपते हुए होठ रवि के होठो ओर रख देती है

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5 मिंट की मुँह चूसै के बाद दोनों भाई बेहेन अलग होते है

दोनों की सांसे उखड रही थी

रवि- दीदी मन तो कर रहा है की तुम्हे यही पटक कर तुम्हारी छूट में अपना ये लुंड घुसा दू

रेखा भी अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी हवस उसकी आँखों में साफ़ नजर आ रही थी

रेखा- तो छोड़ दे न अपनी दीदी को यही पटक के कोण रोक रहा है तुझे

रवि- दीदी मन तो मेरा भी है पर क्या कृ खेतो का काम भी तो देखना है न

रेखा जानती थी की रवि को होने खेतो से कितना लगाव है

रेखा- ठीक है तू जा तुझे खेतो में बीज भी तो डालने है न आज

रवि- है दीदी ओर आप मायूस मत होना अभी खेतो में बीज डालूंगा और रात को अपनी दीदी की छूट में

रवि की बात सुनकर रेखा और भी ज्यादा गरम हो रही थी उसका भी मन कर रहा था की यही लेत कर अपनी टंगे खोल दे पर खेतो का काम भी जरुरी था आखिर. वही एक मात्र साधन था खाना खाने का

रेखा होने मन को मार कर रह जाती है और इधर रवि भी खेतो की और निकल जाता है .........

दोस्तों कहानी कैसी जा रही है जरूर बताये कमैंट्स में

और यार कहानी पढ़ते हो अगर अच्छी लगती हसि तो एक लिखे भी कर दिया करो ताकि हम आपको और जल्दी जल्दी उजड़ते दे सके

धन्यवाद्.......
 
अपडेट-42

रेखा को अब जिंदगी जीने का मजा पहले से कहि ज्यादा आ रहा था

खा उसकी जिंदगी पहले सुनी सुनी थी वो उम्मीद छोड़ चुकी थी पर एक दिन एक करिश्मा हुआ और भगवान् ने उसे एक मोटा तजा लुंड दिखाया जिसको देखते hi वो उसकी दीवानी हो गयी

भले hi वो लुंड उसके छोटे भाई का था पर

उसके भाई ने जिस तरह उसको छोड़ा था उसके बाद से वो अपने छोटे भाई की गुलाम बन चुकी थी

रेखा अपने आपको पूरी तरह से अपने छोटे भाई को सूप चुकी थी

रेखा अब किसी भी चीज़ के लिए रवि को ना नहीं करना कहती थी

इधर एक शैली अपने गदराये जिस्म के मजे अपने भाई के साथ लूट रही थी

और उधर उसकी शैली बिचारि नीलम अपनी जिस्म की आग में जल रही थी

30 साल की उम्र हो चुकी थी पर घर की हालात ौसे नहीं थे की उसका बापू उसकी शादी कर ोाये और ऊपर से उसका सावला रंग उसे और भी ज्यादा जवानी की आग में जलता था

नीलम घर पर नार्मल पेटीकोट ब्लाउज पहनती थी और ऊपर से एक दुपट्टा दाल देती थी उसे अपने आपको ढकने की कभी उतनी चिंता हुई hi नहीं क्योंकि घर में तो सिर्फ उसका बापू और भाई hi थे

नीलम हमेशा hi पसीने में भीगी रहती थी

जिसकी वजह सूरज की गर्मी नहीं थी बल्कि उसके बदन की गर्मी थी

पर जैसे तैसे उसके दिन भी काट रहे थे एक मायूसी के साथ की कब कोई आएगा और उसे होनी दुल्हन बना कर उसकी जिस्म की हर इच्छा ौरी करेगा

पर इन्तजार करते करते उसकी आँखे अब थक चुकी थी

अब वो उम्मीद चीड़ चुकी थी की कभी उसकी शादी होगी और कोई उसकी जिस्म की गर्मी को मिटाएगा

बस मायूसी के साथ दिन एक एक करके काट रहे थे और नीलम अपने काळा रंग को कोसते हुए जैसे तैसे अपनी जवानी का भर उठा कर जिंदगी जिए जा रही थी .....
 
अपडेट-43

कहानी वही से शुरू होगी जिस दिन रवि को होने खेतो से राजू सेहर जाता हुआ दिखा था

राजू के घर वाले नहीं कहते थे की वो बार बार सेहर जाये

नीलम- बाऊ ये राजू आज कल कुछ ज्यादा hi चक्कर लगा रहा है सेहर के

हरिया- अरे क्या बताऊ बिटिया इस घड़े को तो मैं समझा समझा के थक गया ओर ये मंटा hi नहीं हर दूसरे दिन सेहर भाग जाता है और पता नहीं रात रात भर सेहर में क्या करता है

नीलम- बाऊ मुझे तो लगता हाउ की कहि मेरा भाई किसी गलत सांगत में तो नहीं फास गया मुझे दर लगता है अब तो वो मुझसे भी ज्यादा बात नहीं करता बस खोया खोया रहता है अपने में hi

हरिया- बेटी लगता तू मुझे भी है की जरूर तेरा छोटा भाई कुछ गलत काम कर रहा है सेहर में पर अब तू hi बता मैं क्या कृ बुद्धा हो गया हु ऊपर से वो मेरी सुनता भी नहीं

नीलम- अरे छोड़ो बापू तुम अपने आप को बुद्धा क्यों कहते हो गाओं में देखो तुमसे ज्यादा उम्र के लोग बाल दी करके घूमते है

हरिया- अब क्या hi फायदा बता मैं क्या कृ तेरे भाई का

बेटी जब बच्चे बड़े हो जाते है न तो बाप का हक़ ख़तम हो जाता है

यह बोल कर हरिया थोड़ा मायूस हो जाता है

नीलम- अरे बाऊ ऐसा क्यों बोलते हो भले hi राजू तुम्हारी न सुनता हो पर मैं तो अपने बापू की हर बात मानती हु

अब कभी मत बोलना की आपके बच्चो पर आपक कोई अधिकार नहीं है

आपकी बिटिया पर आपका पूरा अधिकार है बापू

हरिया- अरे बेरी एक तू hi तो मेरे जीने का सहारा है बाकि ये राजू तो कुछ सुनता hi नहीं

वो मुझसे तो सीधे मुँह बात भी नहीं करता अब तू hi उसे समझा क्या पता अपनी दीदी की बात मने

मैं तो हर तरफ से हार गया हु न hi बीटा मेरी बात सुनता है और न hi मैं अपनी बेटी की शादी करके एक अच्छा बाप बन पाया

इतना बोलते हुए हरिया की आँखों से आंसू आ जाते है

नीलम दौड़ कस्र होने बापू के गले काग जाती है

नीलम- बापू आप रोया मत करो आपकी बेटी ाभ्ही जिन्दा है समझ और मेरी शादी की चिंता मत करो मुझे शादी नहीं करनी मैं तो अब जिंदगी भर अपने बाऊ की सेवा करूंगी

अब मेने ये जिंदगी आपके और राजू के नाम कर दी है बापू

अब कभी शादी के बारे में मत सोचना

मन तो नीलम का भी बहुत था शादी करने का पर अब वो अपने बाप को और दुखी नहीं देखना कहती थी

इधर नीलम ने कास कर अपने बापू को गले लगा रखा था

नीलम के जिस्म की मादक महक हरिया के नाक में घुसती है एक ोाल के लिए तो वो लम्भी सांस लेकर होनी बेटी की महक सूंघता है पर अगले hi पल उसका दिमाग ठनक जाता है की ये उसकी खुद की hi बेटी है ये गलत है

इतना सोचते हुए हरिया अपनी बेटी को अलग करता है और नीलम होने दुपट्टे से अपने बालू के ांडु पोछती है

जब नीलम आंसू पोछने के लिए दुप्पट्टा उठती है तो उसके बाप के सामने उसकी चूचियों की घाटी साफ़ ननजर आने लगती है

हरिया की बाजार भी एक पल के लिए अपनी बेटी की बड़ी नदी चूचियों पर पड़ती है और उसका लुंड एक झटका मरता है पर अगले hi पल हरिया अपने आपको कोस्टा हुआ घर से बहार निकल जाता है

हरिया ( ये क्या हो गया मुझे मैं अपनी hi बेटी के बदन से आती पसीने की महक सूंघ कर बहतक रहा था है भगवान् मुझे सख्ती देना की मैं आगे से कभी कुछ ऐसा न कृ )

पर भगवान् की तो मर्ज़ी कुछ और hi थी

हरिया के बारे में आपलोग एक बात जान ले

हरिया अपनी जवानी में एक नंबर का छोड़ू आदमी रह चूका

उसने नीलम की माँ को काफी छोड़ा पर हाय रे किस्मत जिसे चुदाई का शौक था उसका जीवन साथी hi दुनिया छोड़ कर चला गया वो पीछे 8 सालो से हरिया ने किसी औरत को चुवा भी नहीं था

कभी कभी जब गर्मी ज्यादा बढ़ जाती थी तो वो अपना 12 इंच का लुंड हिला कर उसे शांत कर दिया करता था

बस ऐसे hi काट रही थी हरिया की जिंदगी

नीलम घर के कामो में लगी हुई थी अपने घर के दोनों मर्दो के सरे काम

जैसे खाना बनाना कपडे धोना और भी कई सरे काम वही करती थी

नीलम कायदे धोने बैठ जाती है और एक एक करके सरे कायदे धो देती है लास्ट में उसके भाई का कच्चा बचता है वो उसे उठा कर उल्टा करती है और जैसे hi उसकी नजर लुंड के आगे वाले हिस्से पर जाती है वो शर्मा जाती है और एक मुस्कान के साथ कच्चे को बाल्टी में दाल कर भीगा देती है

दरअसल राजू के कच्चे पर उसके लुंड से निकली मलाई के निशान साफ़ नजर आ रहे थे जो नीलम भी देख चुकी थी

नीलम( लगता है अब जल्दी से राजू की शादी करनी पड़ेगी नहीं तो ऐसे hi अपनी दीदी की तरह कच्चे में hi पानी छोड़ता रहेगा)

(यह आपको बता दे की रेखा के घर के मुक़ाबले नीलम का घर छोटा था उसके घर में सिर्फ एक कमरा था जिसमे एक साइड रसोई बनी हुई थी और घर के मैं दरवाजे के बगल में hi एक हेंड पंप था जो की घर के अंदर hi था)

12 बज चुके थे नीलम जल्दी जल्दी खाना निकलती है

और होने बापू को आवाज मार के घर के भीतर बुला लेती है

हरिया भी चुप चाप अंदर आकर कमरे में पड़ी खत पर बैठ जाता है

और नीलम जब उसे खाना देने आती है तो थोड़ा झुकने की वजह से हरिया की नजर सीधा अपनी बेटी की घिर घाटी में जाती है

नीलम को ब्रा पहनना बिलकुल पसंद नहीं था वो हमेशा खुल्ला दुल्ला hi रहती थी

अगर वो अपनी छाती के ुवार दुपट्टा न डेल तो कोई भी उसके बड़े बड़े निप्पल आराम से देख सकता था जो हर समय तने हुए रहते थे

हरिया फिरसे वही गलती करता है और इस बार भी उसका लुंड एक झटका मरता है

अपने आपको कोस्टा हुआ हरिया अपनी नजर निचे झुका कर खाना खाने लगता है

पर किस्मत को शायद कुछ और hi मंजूर था

हरिया अपने आपको तो समझा सकता था की जिसको देख कर उसका लुंड झटके मार रहा है वो उसकी सगी बेटी है पर उसके लुंड को कौन समझता की अपनी बेटी को देख कर झटके खाना गलत बात हसि

नीलम भी होने बापू से कोई पर्दा नहीं करती थी आखिर बाप था वो उसका उसके मन में कोई ऐसा ख्याल कभी नहीं आया था

नीलम भी अपना खाना निकल कर खत के समाने hi जमीन पर बैठ जाती है

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Neelam ka dupatta uski chati se hat chuka tha na cahte hue bhi hriya ki najar baar baar apni beti ke tne hue cucho par ja rhi thi

Wo apne aapko jitna smjha rha tha usko utna hi uska lund kadak hota ja rha tha

Hriya jaldi hi khana nilta kar bahar ki aur bhagta hai aur apni khat par jakar lait jata hai

Hriya ke dil ki dhadkne bhut tej chal rhi thi aaj uska lund itne samay baad aoni hi beti ki moti moti chuchiya dekh kar khda ho gya rha

Hriya( ye kya ho gya hai mujhe main kitna gnda aadmi hu ek to aoni beti ki smay se shadi bhi nhi ki aur ab uske ango ko dkeh kar mera lund khda ho rha hai hey bhagwaan ye kya ho rha hai mujhe )

Hriya aoni aankhe band kar leta hai

Par band aankho ke smane baar baar uski beti ki chuchiya ghum rhi thi jo hriya ko aur bhi jyada vichlit kar rhi thi

Hriya khat se khda hokar gaon me tehelne nikal jata hai aur spne aapko din bhar smjhata rehta hai ki ye jo ho rha hai wo galat hai

Aur aakhir me ek nirnay leta hai ki abse wo Neelam se jitna jyada dur ho ske utna dur rhega

Par hriya ko kya pta tha ki uski beti ke sath uska baap beti wala rishta ab jyada din nhi chlne wala

Niyti apna khel chalu kar chuki thi[/URL]
 
अपडेट-44

हरिया का लुंड आज पहली बार अपनी बेटी की जवानी को देख कर खड़ा हुआ था वो दिन भर इधर उधर घूमता रहता है और शाम को अपने घर की और चला जाता है

इधर नीलम भी खाना बनाने की टीएयरी कर रही थी नीलम खाना बनाने के लिए अकसर घर के बहार लगे हेण्डपम्प का पानी इस्तेमाल किया करती थी

हरिया हमघर पहुंच जाता है और उसे हेण्डपम्प के पास hi नीलम खड़ी दिखती है

हरिया को भी काफी प्यास लगी थी वो न कहते हुए भी अपनी बेटी के पास जाता है और जब वो थोड़ा करीब पहुँचता है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगता है

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नीलम झुक कर हेण्डपम्प चलने में बिजी थी

इधर हरिया जैसे hi अपनी बेटी के करीब पहुँचता है उसका लुंड उसकी दिति में hi फड़फड़ाने लगता हाउ और न कहते हुए भी हरिया खुद को अपनी बेटी को देखने से रोक नहीं पा रहा था

हरिया जीरतनि बार अपने आपको गली देकर अपने आपको कोस्टा उसके अगले hi पल उसकी नजर दुबारा अपनी बेटी के ब्लाउज पर चली जाती

नीलम- क्या हुआ बापू क्या हुआ तुमको

नीलम की आवाज सुनकर हरिया हड़बड़ा जाता है

हरिया- क्या हुआए कुछ कुछ भी तो नहीं हुआ

नीलम- कुछ नहीं हुआ तो आपकी शकल ऐसे क्यों हुई पड़ी है जैसे अआपने कोई बहुत देख लिया हो

अब हरिया अपनी बेटी को क्या बताता की उसने कोई भूत तो नहीं देखा पर आज उसने अपनी आँखों से अपनी बेटी की चूचियों का नाप जरूर ले लिया है

नीलम- बालू तुमको क्या चाइये बोलो तो

हरिया का गला सुख चूका था एक तो गर्मी का मौसम ऊपर से उसकी बेटी उसके सामने झुक झुक कर अपने चुका का दर्शन करवा रही थी

हरिया- ाररी वो कुछ नहीं बस पानी पीना है तेरा हो गया तो तू जा मैं पी लेता हु

नीलम को पता था की आज उसका बापू थोड़ा उदास है जोकि उसके चेहरे से भी लग रहा था

नीलम- अरे बापू मेरे होते हु तुम खुद कैसे पानी पी सकते हो तुम्हारी बेटी अभी जिन्दा है

इतना बोलकर नीलम और भी ज्यादा झुक जाती है और बाल्टी में से अपनी दोनों हतेली में पानी उठती है और हरिया के मुँह के पास लेकर बोलती है

नीलम- लो बापू पी लो पानी

हरिया- अरे तू रहने दे मैं खुद hi पी लूंगा

मैं कोई बच्चा थोड़े hi हु

नीलम- बाऊ जब मैं बच्ची थी तो आपने भी तो मुझे ऐसे hi पानी पिलाया है न अब आप मुझे अपनी सेवा करने का मौका दो और चुप चाप पानी पी लो

नीलम- अरे बापू जल्दी करो ये पानी भी ख़तम हो गया मेरे हाथ छोटे छोटे है इतनी देर पानी नहीं रुकता

टीना बोलकर नीलम दुबारा से झुक जाती है पानी अपने हाथो में भरने के लिए

और इस बार उसका पतला सा दुपट्टा उसकी छाती से अलग होता हुआ जमीन पर गिर जाता है

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पर नीलम को अपनी चूचिया की कोई परवाह नहीं थी उसे पता था सामने जो आदमी खड़ा है वो उसका बाप है

नीलम बड़े hi प्यार से अपने बालू के मुँह के पास पानी लती है दुबारा से

नीलम- लो बापू जल्दी मुँह खोलो और पी लो

हरिया- अरे बिटिया तू बिलकुल जिद्दी है बिलकुल अपनी माँ की तरह

इतना बोलकर हरिया अपना मुँह रेखा के दोनों हाथो के बिच घुसा कर पानी पिने लगता है और जैसे जैसे पानी ख़तम होता है हरिया के होठ उसकी बेटी की हतेली को अनजाने में hi सही पर चुम लेते है

हरिया का मन अबतक गन्दा नहीं हुआ था पानी बेटी के लिए पर उसका लुंड पूरी तरह से वासना में लिप्त हो चूका था

जैसे hi हरिया को अपने होठो पर नीलम के हाथ महसूस होते है हरिया का लुंड उसकी धोती में hi झटके खाने लगता है

हरिया जैसे तैसे अपने आपको संभालता है और नीलम भी उसे 2-3 बार और अपने हाथो से पानी पिलाती है उसके बाद अपनी गांड मटकते हुए घर के भीतर चली जाती है

हरिया बहार hi खत पर बैठा हुआ था उसे आज न जाने क्या हुआ था कोयंकी आजसे पहले कभी उसने अपनी बेटी को इस नजर से नहीं देखा था

पर आज जब भी उसकी बेटी उसके सामने आती तो उसका विशाल लुंड एक झटके में hi खड़ा हो जाता था

हरिया ( हे भगवान् कितना गंदा आदमी हु मैं क्या कृ इस लुंड का जो अपनी hi बेटी के बदन को देख कर झटके मार रहा है भगवान् हमको इतनी शक्ति दो की हम इस पाप से बच सके शक्ति दो भगवान् )

हरिया इधर अपनी बेटी के बारे में अपनी सोच बदलने में लगा हुआ था

इधर नीलम जल्दी जल्दी खाना बना लेती है और उधर अभी तक हरिया के दिलो दिमाग में अभी तक उसकी बेटी की चूचिया घूम रही थी

हरिया कहते हुए भी अपने दिमाग से अपनी बेटी का वो चित्र नहीं निकाल पा रहा था

नीलम थोड़ी देर में बहार आजाती है

नीलम - बापू राजू आज भी नहीं आएगा क्या

हरिया- अब क्या बताऊ बिटिया ये लड़के ने तो हमको दुखी कर दिया है न जाने रात ररात भर खा रहता है

मुझे तो लगता है की उसकी आज की रात भी सेहर में hi बीतेगी

नीलम- तुम चिंता न करो बापू मैं कल समझाउंगी उसको अच्छे से तुम अपनी सेहत खराब मत करो आजाओ मैंने खाना निकाल दिया है आकर खा लो

नीलम घर में घुस जाती है और अपनी बेटी के पीछे पीछे हरिया भी घर में घुस जाता है

नीलम पहले से hi थाली में खाना निकाल चुकी थी

हरिया के सामने थाली रखने के लिए नीलम दुबारा से कहक्ति है और 1 सेकंड के लिए हरिया की नजरे उसकी बेटी की चूचियों पर चले जाती है

नीलम भी अपने बापू की नजर अपनी चूचियों पर पकड़ लेती है पर वो इतना धियान नहीं देती और पानी का गिलास लेकर होने बापू को देदेती है

नीलम- बाऊ आपको और कुछ चाहिए तो लेलेना देखो यही रोटी सब्ज़ी राखी है

हरिया- पर तू खा जा रही है बिटिया इतनी रात को

नीलम- बाऊ मुझे बहुत जोरो की संडास लगी है और आपको तो पता hi है मुझे पेट खली करने में थोड़ा टाइम लगता है

संडास का नाम सुनते hi हरिया का लुंड फनफनाने लगता है और हरिया के मन में एक सेकंड के अंदर hi न जाने क्या क्या ख्याल आजाते है और अगले hi पल वो सरे नकारात्मक ख्यालो को अपने दिमाग से निकाल देता है पर होने लुंड का क्या करता जो अपनी बेटी के सामने पूरी तरह तन्न कर खड़ा था

हरिया खाना निगलते हुए-

है है बेटी जा तू आराम से करके आना कोई बात नहीं मैं खाना खा लूंगा

नीलम वही से एक लौटा उठती है और पानी लेकर होने बाप के सामने गांड मटकती हुई घर से बहार निकल जाती है

हरिया का मन अब खाना खाने में नहीं लग रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे की होनी बेटी से दूर रह सके

हरिया( इतनी बड़ी घोड़ी हो गयी है मेरी बच्ची पर इतना दिमाग नहीं है की किसके सामने क्या बोलना है खैर छोड़ो मैं बाओ hi तो हु उसका बचपन में भी तो मेरे सामने hi संडास करती थी )

अब हरिया के मन में अपनी बेटी के लिए अलग अलग ख्याल चल रहे थे जिनकी वजह से उसका मन विचलित हो गया था

हरिया दूसरा मन( अरे वो बेटी तो है तेरी पर देख तो कैसे गदरा गयी है तेरी बेटी अब अपनी जवानी पर काबू नहीं देख कैसे उसके चुके और निप्पल हमेशा तन्ने हुए रहते है )

हरिया के मन में हैसे hi ये ख्याल आता है वो झेप जाता है और जल्दी जल्दी खाना निपटा कर घर से निकलने की तैय्यारी करने लगता है

नीलम भी अब तक आ चुकी थी

हरिया- बीटा मैंने खा लिया है तू भी खाना खा कर सजा मैं जा रहा हु

नीलम- अरे बापू खाना तो खा लिया पर ये तो बताओ की खाना बना कैसा था

हरिया- अरे बिटिया तेरे हाथो में तो जादू है जादू

नीलम- बिलकुल मेरी माँ की तरह है न बापू

हरिया ( अरे नेता होने आपको अपनी माँ की जगह मत दे तुझे नहीं पता तेरा बाप तेरी माँ के साथ कितने गंदे गंदे काम करता था )

हरिया- ः बेटी बिलकुल तेरी माँ की तरह

हरिया इतना बोलकर बहार निकल जाता है

नीलम होने बाऊ के मुँह से अपनी तारीफ सुन कर झूम रही थी और वो जल्दी hi खाना खा लेती है और मैं दरवाजा बंद करके अपनी चटाई पर लेत जाती है

नीलम की जिस्म की गर्मी दिन बी दिन बढ़ती जा रही थी जिसे कभी कभी वो अपने हाथो से काबू कर लिया करती थी

नीलम कुछ सोच रही थी की अच्चानक उसका हाथ ोाने आप hi उसकी चूचियों पर चलने लगता है नीलम की आँखे अब तक बंद हो चुकी थी

वो धीरे धीरे अपने ब्लाउज के बोटों खोने लगती है और अपने एक निप्पल को पकड़ कर मसल देती है

नीलम ( आह्ह्ह्हह ये शरीर इसका भर अब मुझसे नहीं संभाला जाता हे भगवान् जब तुम अपनी इस बच्ची को ऐसा गदराया हुआ जिस्म दिया hi है तो एक मोटा सा लुंड भी देदेता इसकी गर्मी उतरने के लिए)

नीलम अपनी दूसरी चुकी को भी पकड़ कर मसल देती है

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नीलम का एक हाथ धीरे धीरे निचे की और बढ़ रहा था वो अपने पेटीकोट को ऊपर खींचते हुए उसे अपनी कमर तक चढ़ा लेती है और नीलम की काली छूट खुलकर सामने आ जाती है एकदम चिकनी एक भी बाल नहीं नीलम को साफ़ सफाई बहुत पसंद थी वो खुद की हो या घर की

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नीलम का हाथ अभी उसकी छूट पर पहुंचा hi था की बहार जोरो से बिजली चमकती है और एक पल के लिए नीलम भी दर जाती है और अगले hi पल जोरो से बारिश शुरू हो जाती है

नीलम जल्दी जल्दी होने कपडे सही करती है और बिना दुपट्टे के hi अपने बापू की झोपडी की और भगति है

अंदर हरिया लेता हुआ था झोपडी में जगह जगह से ोानी टपकता था ये बात नीलम भी जानती थी

नीलम- अरे बापू इतनी तेज बारिश हो रही है और तुम यह भीगते हुए सो रहे हो

हरिया अपनी बेटी के hi बारे में सोच रहा था उसका लुंड इस समय किसी रोड की तरह तन्ना हुआ था

नीलम की आवाज सुनकर हरिया का ध्यान टूटता है

नीलम- अरे बापू तुम सो गए क्या देखो बारिश हो रही है और पानी भी टपक रहा है झोपडी में

हरिया- अरे बेटी अभी बंद हो जाएगी मुझे तो भीगने की आदत है तू जा सजा कुछ नहीं होगा तेरे बाप को

नीलम- ऐसे कैसे सो जाऊ बापू

मेरे बापू यह भीग रहे है और मैं चैन से घर में जाकर सो जाऊ चलो तुम भी घर में चलो

हरिया- अरे पर मैं तेरे साथ मतलब तेरे कमरे में कैसे सो सकता हु .

नीलम- अरे बापू कोई दुश्मन नहीं हु मैं तुम्हारी बेटी हु एक दिन अपनी इस बेटी के कमरे में सो जाओगे तो कुछ नहीं बिगड़ जायेगा

हरिया- अरे बीटा कोई बात नहीं

नीलम- ठीक है ोहिर तो मैं भी यही खड़ी खड़ी भीगती रहूंगी

हरिया हार मान जाता है और खड़ा हो जाता है जैसे तैसे उसने होने लुंड को छुपा रखा था झोपडी में एक लालटेन जल रही थी जिसकी रौशनी बहुत काम थी

हरिया- है है आता है तू नहीं मानेगी तू बहुत जिद्दी है चल

नीलम- बिलकुल अपनी माँ की तरह है न बापू

नीलम अनजाने में hi सही पर बार बार अपनी माँ का नाम लेकर अपने बाप को बार बार याद दिला देती थी की जब हरिया की बीवी जिन्दा थी तो वो कितना मस्त तरिके से उसे पटक पटक कर छोड़ा करता था

दोनों बाप बेटी घर में आ जाते है

नीलम का ब्लाउज पूरी तरह से भीग चूका था उसके निप्पल साफ़ बाजार आ रहे थे पर उसे तो मनो इस बात की कोई चिंता hi नहीं थी

कमरे के अंदर आते hi हरिया की नजर सीधा अपने बेटी के मोठे मोठे निप्पल्स पर पड़ती है जो ब्लाउज भीग जाने की वजह से साफ़ साफ़ नजर आ रहे थे

नीलम की चूचियों पर कला डॉट भी बहुत बड़े एरिया में था जो उसकी बड़ी बड्ज चूचियों पर चार चाँद लगा रहा था

जैसे hi हरिया की नजर उसकी बेटी की चूचियों ओर पड़ती है वो अपना मुँह घुमा लेता है

हरिया - बेटी तू जा सजा मैं यही खत पर लेता हु

बारिश बंद होगी तो मैं चला जाऊंगा झोपडी में

नीलम- बापू अगर रात भर मेरे साथ सो जाओगे तो क्या मैं तुम्हे खा जाउंगी क्या

हरिया- अरे नहीं बीटा ऐसे क्यों बोल रही है तू तो एकलौती बेटी है मेरी

नीलम- तो सुन लो बापू रात को चले मत जाना घर से बहार अब कल सुबह hi निकलना और अगर रात को गए तो तुम्हारी एकलौती बेटी तुमसे बात नहीं करेगी

हरिया- अरे है बेटी ठीक है कहि नहीं जा रहा तेरा बाप चल अब सजा

हरिया ने अभी तक अपना मुँह दूसरी और hi घुमा रखा था

वो अबतक लेत चूका था

इधर नीलम भी लेत जाती है अपने बाऊ की तरफ मुँह करके

उसने अपना दुपट्टा ोेहले hi साइड रख दिया था

दोनों बाओ बेटी थोड़ी देर बात करते है और दोनों बाओ बेटी सो जाते है

करीब आधा घंटा लेटने के बाद हरिया को थोड़ी तकलीफ होती है इसलिए वो दूसरी और घूम जाता है

अब दोनों बाप बेटी एक दूसरे की तरफ मुँह करके लेते थे हरिया खत पर था और नीलम निचे ज़मीन पर चटाई बिछाये सोई थी

हरिया जैसे hi अपनी आँख खोता है उसका दिल दिमाग सब कुछ सुन्न पद जाता है

सामने उसकी बेटी अपने ब्लाउज का एक बोटों खोल कर बिंदास सोई हुई थी

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हरिया की नजर न कहते हुए भी अपनी बेटी की चूचियों पर टिक गयी थी

नीलम के निप्पल का साइज ब्लाउज के अंदर से भी हरिया को साफ़ नजर आ रहा था और वो समझ गया था की अब उसकी बेटी सच में गडरा गयी है

हरिया बिना पालक झपकाए अपनी बेटी को चुचो से कमर तक नंगा करके देख रहा था

अबतक हरिया की धोती में तम्बू बन चूका था हरिया की आँखे पूरी लाल सुर्ख हो चुकी थी

वो दिन बाहर अपने आपको जिस पास से बचा रहा था आखिर में वो वही पाप करने जा रहा था

हरिया का हाथ अपने आप hi उसके लुंड पर पहुंच जाता है और जैसे hi हरिया अपने लुंड को धोती के ऊपर से मसलता है उसे एक जोरदार झटका लगता है जैसे उसका पानी अभी गिर जायेगा

हरिया ने जवानी में बहुत साडी औरतो को छोड़ा था और वो एक नंबर का छोड़ू था औरत भले hi थक जाये पर हरिया जल्दी हार नहीं मंटा था पर आज वो अपनी बेटी को देख कर हाथ लगाने से hi झड़ने वाला था

आखिर में हरिया हार मन लेता है और अपने एक हाथ से धोती को साइड से हटाता हुआ अपना विशाल लुंड आजाद कर देता है

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हरिया की हवस अब उसके दिलो दिमाग पर हावी हो गयी थी

उसका हाथ अपने आप hi अपने लुंड पर चला जाता है

और अपने लुंड को धीरे धीरे सहलाने लगता है

हरिया ने किसी औरत को इस हालत में काफी समय बाद देखा था और वो भी उसकी खुद की hi बेटी थी

हरिया के हाथो की स्पीड धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी उसकी हवस उसकी आँखों में उतर आयी थी

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इधर नीलम बिलकुल बेखबर होकर सोई थी और उसका बाओ उसकी चूचियों को देख कर मुठ मार रहा था

हरिया इतना गरम हो गया था की वो ज्यादा देर अपने लुंड को संभाल नहीं पाया और 5 मिंट hi लुंड सहलाने के बाद उसके लुंड ने पानी छोड़ दिया

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आखिर कार हरिया अपने लुंड का सारा पानी जमीन पर गिरा देता है और अपने लुंड को हाथ ने पकडे पकडे hi पता नहीं थकान की वजह से उसे कब नींद आजाती है

दोस्तों कहानी पसंद आये तो अपने भाई के लिए एक लिखे जरूर करके जाना

धन्यवाद्...
 
अपडेट-45

रात को जाने अनजाने में hi सही पर हरिया ने अपनी बेटी नीलम के गदराये बदन को देख कर पहली बार अपने लुंड से अपनी बेटी के नाम का पानी गिराया था और वो अबतक बेसुध होकर अपना लुंड धोती से निकले सो रहा था

सुबह के 5 बज चुके थे नीलम अपने फिक्स टाइम पर उठ जाया करती है

नीलम अंगड़ाई लेती हुई उठ जाती है उसका पूरा बदन पसीने से सना हुआ था

नीलम- हैए रे ये गर्मी सोते वक़्त जागते वक़्त हर समय परेशान करती है इसका कुछ करना पड़ेगा

तभी नीलम की गर्दन होने बापू की तरफ घूमती है

उसके बाप का लुंड उसकी धोती में से झक रहा था

नीलम फ़टी आँखों से अपने बापू का लुंड देख रही थी

एक पल के लिए वो भूल चुकी थी की जिस लुंड को वो दुख रही है वो उसके बाप का लुंड है

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अभी हरिया का लुंड पूरी तरह खड़ा तो नहीं था फिर भी काम से काम 7 इंच का था

हरिया के लुंड पर उभरी हुई नशे ुस्लि खुद की बेटी को एक अलग तरह का नशा दे रही थी

अच्चानक से नीलम की नजर जमीन पर जाती है झा पर उसके बाप ने अपना अमृत गिराया था

नीलम की आँखों में एक चमक आ चुकी थी जिसे साफ़ देखा जा सकता था

नीलम चुप चाप घोड़ी की तरह अपने बाप की खत के पास पहुँचती है और जमीन पर मीरा हुए

नीलम( बाऊ आपने अपना ये अमृत अपनी बेटी के नाम से गिराया है मैं उस जाया नहीं जाने दूंगी )

उसके बाप के वीर्य को अपनी एक ऊँगली से उठती है और अपनी नाक के पास लेकर उसे सूंघती है

नीलम ने पहली बार किसी मर्द के वीर्य की महक ली थी और वो वीर्य किसी और का नहीं खुद उसके बाप का hi था

नीलम की आँखे सुर्ख लाल हो जाती है

बिना समय गवाए नीलम झुक कर एक hi बार में सारा वीर्य चाट जाती है

आज पहली बार नीलम ने किसी मर्द के लुंड से निकले अमृत का स्वाद चखा था जो उसे पहली hi बार में पसंद आ गया था

नीलम के चेहरे की मुस्कान से साफ़ पता चलता की अब उसके बापू के मायने उसके लिए बदल चुके है

नीलम ( बाऊ तूने अपनी इस अभागी बेटी को देख कर रात को अपना पानी गिराया हाय राम मेरे बापू का लुंड कितना बड़ा है )

नीलम का मन तो कर रहा था की वो अपने बापू का लुंड अभी मुँह में लेले पर वो कोई जल्दबाज़ी नहीं करना कहती थी

नीलम ( बापू तूने बचपन में हमे संभाला था न अब देख तेरी ये बेटी तेरी साडी जरूरते पूरी करेगी कहे वो कोई भी जरूरत हो मैं तुझे तड़पता हुआ नहीं देख सकती बापू)

सुबह हो चुकी थी नीलम को पता था की हरिया कभी भी उठ सकता है

वो एक नजर दुबारा अपने बापू के लुंड पर डालती है और अपने होठो पर जीभ फिरती हुई कमरे से बहार निकल जाती है सनदास करने के लिए

पर कमरे के बहार जाते जाते वो दरवाजे को जोर से बजा देती है जिससे हरिया की नींद खुल जाती है

जैसे hi हरिया आँख खोला है उसे उसकी प्यारी बेटी कहि दिखाई नहीं देती पर जब उसकी नजर अपनी धोती पर जाती है तो हरिया एक दम से सकपका जाता है

उसका लुंड उसकी धोती के बहार था अच्चानक हरिया को कुछ याद आता है और जैसे hi वो झुक कर जमीन पर देखता है उसकी गांड फ़टी की फ़टी रह जाती है

ज़मीन पर गीलेपन का निशान तो था पर उसके वीर्य की एक बून्द तक नहीं थी

हरिया समझ जाता है की उसकी बेटी ने hi साफ़ किया होगा

हरिया ( हे भगवन मैंने ये क्या कर दिया कितना बड़ा पापी हु मैं अपनी hi बेटी को देख कर लुंड का पानी गिरा दिया जब उसने देखा होगा की उसका बाप अपना लुंड निकले सो रहा है और अपना पानी रात को hi गिरा चूका है तो मेरी बच्ची अपने बाप के बारे में क्या सोचेगी

पापी हु मैं पापी हे भगवान् ये क्या कर दिया मैंने अब कैसे अपनी बेटी से नजर मिला पाउँगा मैं )

हरिया की गांड पूरी तरह से फैट चुकी थी उसे अपनी गलती का अंदाज़ा hi चूका था अब उसे इस बात की चिंता थी की उसकी बेटी उस्ले बारे में क्या सोचेगी की उसका बाप कितना बुरा आदमी है जो अपनी hi बेटी को देख कर मुठ मार रहा था

हरिया टेंशन में बैठा हुआ था अभी तक खत पर hi

थोड़ी hi देर में नीलम भी संडास करके आ जाती है

नीलम को देखते hi हरिया अपनी नजरे चुराने लगता है पर नीलम के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी जिसे हरिया नहीं देख सकता था

हरिया चुप चाप उठ के बहार जाने hi वाला था की नीलम उसका रास्ता रोक देती है

नीलम- बापू कैसे हो नींद कैसी आयी

हरिया को समझ नहीं आ रहा था की उस बेटी को क्या जवाब दे जिसने थोड़ी देर पहले hi अपने बाप का वीर्य साफ़ किया था

हरिया - हहहह बेटीईई ठीक हु म

नीलम- मुझे तो ठीक नहीं लग रहे

इतना बोलकर नीलम अपने नाजुक हाथो से अपने बाप का माथा चेक करने लगती है

हरिया- अरे बेटी कुछ नहीं हुआ बस ठीक हु

हरिया दुबारा से बहार जाने की कोशिश करता है पर इस बार नीलम दरवाजे के बीचोबीच खड़ी हो जाती है

हरिया- जाने तो दे बेटी

नीलम- जाने तो दूंगी पर एक बात बतानी पड़ेगी आपको बापू

हरिया समझ चूका था की नीलम क्या पूछने वाली है उसके माथे पर पसीना साफ़ नजर आ रहा था

जिसे देख कर नीलम को हसि आ रही थी

हरिया का मुँह जमीन की एयर ढसा हुआ था अपनी बेटी से आँखे मिलाने की उसके अंदर हिम्मत नहीं थी

हरिया- कोण सी बाततततत बेटी

हरिया की जबान लड़खड़ा रही थी जिसकी वजह नीलम भी जानती थी

नीलम अपने बापू के मजे लेना कहती थी

नीलम- बापू मुझे नहीं पता था की आप इतने गंदे हो

हरिया इस बात को सुनकर संन्न रह जाता है

और अब हरिया कुछ नहीं बोल पता बस अपनी बेटी सामने शर्मिंदा होकर गर्दन झुकाये खड़ा था

नीलम- मुझे नहीं पता था की मेरे बापू इतने गंदे है अपनी hi बेटी का गदराया जिस्म देख कर अपना हथियार हिला रहे थे कितने गंदे हो आप बापू आपसे ये उम्मीद भी थी

नीलम( बापू मुझे माफ़ करदेना पर नैने जो सोचा है उसके लिए सुरुवात ऐसे hi करनी पड़ेगी नहीं तो मैं अपने बापू का अकेलापन कभी दूर नहीं कर पाऊँगी )

हरिया की आँखो में आंसू आजाते है

हरिया- बेटी माफ़ करदे अपने बाप को मैं पता नहीं कैसे बहक गया था मुझे माफ़ करदे मेरी बच्ची

नीलम को बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था की उसका बापू उसके सामने रो रहा था

नीलम बड़े hi प्यार से हरिया की ठुड्डी पकड़ कर उसका मुँह ऊपर करती है

नीलम- नहीं बालू तुम रो क्यों रहे हो मुझे पता है आप कितने अच्छे हो

आपकी कोई गलती नहीं माँ को गए हुए इतने साल हो चुके है मैं आपका अकेलापन समझती हु बापू तुम रोया मत करो अपनी इस बिटिया के सामने

हरिया के दिल में अब थोड़ी सी तसल्ली मिलती है की आखिरकार उसकी बेटी बात को समझ चुकी थी और अब इसके दिल से थोड़ा घिन्न भावना काम हो चुकी थी

नीलम हिरया के गले लग जाती है और हरिया तो पहले से hi भावुक हो चूका था वो भी अपनी बेटी को गले लगा लेता है

नीलम- बाऊ मुझे पता है तुम्हारी कोई गलती नहीं थी तुम्हारी बेटी का बदन hi इतना गदरा गया है की कोई भी देख कर अपने आप पर काबू नहीं कर पायेगा

अपनी बेटी की बात सुनकर हरिया को एक और झटका लगता है

नीलम के गदराये जिस्म की बात सुनते hi उसका लुंड धोती में फनफनाने लगता है

हरिया- बेटी ऐसा मत बोल मैंने पाप किया है और अब जो अपने इस बाप को और ज्यादा जलील मत कररर मेरी बच्ची

हरिया अपने आपको अपनी बेटी से दूर करता है

हेइया से अलग होते hi नीलम की नजर सीधा निचे जाती है

और उसे अपने बाप की धोती में बना उभर साफ़ नजर आ जाता है

हरिया भी नीलम की नजर पकड़ लेता है कैसे उसकी बेटी उसके लुंड कक घर रही है

हरिया की आँखे एक बार फिर से शर्मिंदगी की वजह से निचे झुक जाती है

नीलम - अरे बापू आपको इतना समझाया अभी फिर भी अपनी बेटी के गले लगने से hi तुम्हारा ये खड़ा हो गया नीलम हरिया के लुंड की और इशारा करके बोलती है

इतना गंदा सोचते हो क्या तुम अपनी बेटी के बारे में

हरिया एक बार फिर से अपने लुंड की वजह से अपनी बेटी के सामने शर्मिंदा हो गया था

हरिया जाने के लिए होने कदम बढ़ता है इस बार नीलम भी उसका रास्ता छोड़ देती है

पर जैसे hi हरिया दरवाजे पर पहुँचता है

नीलम - बापू तुम्हारी बेटी संडास कर आयी है जाकर तुम भी करलो घर के पिछवाड़े नहीं तो लोग आना जाना शुरू हो जायेंगे

हरिया के गलो पर एक प्यारी की चपत मरते हु

नीलम- मेरे गंदे बापू

नीलम लगातार अपने बाप के लुंड को उकसाने का काम कर रही थी

हरिया नीलम की बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देता और वो लोटा उठा कर घर के पिछवाड़े चला जाता है

नीलम( बापू अब वो दिन दूर नहीं जब तुम्हारी ये बिटिया तुम्हारा अकेलापन दूर कर देगी और अपनी माँ की जगह लेलेगी बस थोड़े दिन और बापू मैं तुमको और नहीं तड़पने दूंगी

जैसे तुम्हारी बेटी तदपि है वैसे तुम नहीं तड़पोगे तुम्हारी बेटी तुम्हारी हर जरूरत पूरी करेगी और मेरी माँ तुम्हारा जितना ख्याल रखती थी देख लेना माँ से भी ज्यादा ध्यान रखूंगी मैं अपने बापू का

हरिया के अंदर अपने प्रति एक ग्रीन भावना थी

वो सोच रहा था की आखिर वो क्यों बार बार अपनी hi बेटी को देख कर बहक जा रहा है

फिर उसे नीलम की बात याद आती है

की तुम्हारी बेटी का गदराया जिस्म देख कर तो कोई भी काबू खो देगा

इतना सोचते hi उसका लुंड अकड़ना शुरू करदेता है

अच्चानक से हरिया की नजर सामने पड़ी संडास पर जाती है जो अभी थोड़ी देर पहले hi उसकी बेटी की गांड के छेद से बहार आयी थी

हरिया का लुंड एक पल में hi पूरी रोड की तरह शाक्त हो जाता है

हरिया होने आपको स्झना तो कहता था की वो अपनी बेटी के बारे में गन्दा सोच रहा है पर कहि न कहि हरिया का एक हिस्सा उसे उसकी बेटी की तरफ आकर्षित कर रहा था

हरिया ( बेटी अपने इस बाप को माफ़ कर देना मुझे नहीं पता क्यों तेरी चुकी देखते hi ररत को तेरे बाप का लुंड खड़ा हो गया था और अब तेरी संडास देख कर खड़ा हो गया है

अपने इस गंदे बापू को माफ़ कर देना बेटी )

हरिया की आँखों में जैसे खून उतर आया था वो आजसे पहले कभी किसी औरत से इस तरह से आकर्षित नहीं हुआ था

हरिया थोड़ा सा आगे बढ़ता है और निचे झुकते हुए अपनी बेटी की संडास के पास अपनी नाक लेजाकर रुकता है

और एक जोरदार सास खींचते हुए उसकी आँखे और भी ज्यादा लाल और बड़ी हो जाती है

हरिया झा 2 मं पहले तक टेंशन में था वही इस वक़्त वो अपनी बेटी की संडास सूंघ कर मस्त हो गया था

हरिया का लुंड झटके मार रहा था

हरिया अपने एक हाथ को निचे ले जाता हुआ अपना लुंड पकड़ लेता है

और एक बार चमड़ी को पीछे खींचता हुआ मसल देता गई है

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हरिया के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था अब उसे इतनी भी समझ नहीं थी की वो जिस संडास को सूंघ कर अपना लुंड हिला रहा है वो उसकी बेटी की है

हर5 सेकंड के बाद हरिया के जोर की सास खींचता और अपनी बेटी की संडास की खुसबू लेते हुए उसे आराम आराम से छोड़ता

करीब 10 मं तक अपनी बेटी की संडास सूंघने के बाद हरिया आखिर कार अपने हथियार दाल देता है और उसका लुंड झटके खता हुआ झड़ने लगता है

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हरिया आखिरी बून्द गिरने तक अपनी बेटी की संडास को सूंघते हुए अपना लुंड मसलता रहता है

आखिर में वही होता है

हरिया की हालत में जब सुधर आता है तो उसके अंदर का अच्छा बाप अच्चानक से जाग जाता है

हरिया( चींईईई कितना गन्दा आदमी हु मैं ये क्या कर दिया मेने पहले अपनी बेटी के सामने अपना वीर्य गिराया और अब उसकी संडास सूंघ कर )

हरिया अपने आपको गली देता हुआ अपनी गांड धो कर गोअन में निकल जाता है

इधर नीलम का तो समझ आ रहा था की अब उसे अपनी बापू की साडी इच्छाएं पूरी करनी थी जो उसकी माँ के मरने के बाद से उसके बाप ने अपने दिल में दबा राखी थी

पर सच खु तो इस सेल हरिया का तो मुझे भी समझ नहीं आ रहा की आखिर ये कहता क्या है

बाकि आप लोग जरूर बताना कहानी कैसी जा रही है

और लिखे भी कर देना

धन्यवाद्.......
 
अपडेट-46

हरिया ने जो हरकत सुबह की थी उसके बादसे उसका दिन काटना भरी हो चूका था

उसका दिमाग तो सोच रहा था की अपनी बेटी से वो जितना दूर रहे उतना अच्छा है

वही उसका लुंड बार बार उसकी बेटी की कामुक आदये उसे याद दिला रहा था

आज हरिया इसी उधेड़बुन में दोपहर को खाना खाने घर भी गया

शाम के 5 बज चुके थे हरिया ये भी जनता था की अगर वो घर नहीं गया तो उसकी बेटी उसे ढूंढने के लिए निकल जाएगी

हरिया घर के रस्ते निकल पड़ता है

इधर नीलम दिन भर अपने बापू का इन्तजार करती करती थक गयी थी उसकी आँख लग गयी थी खत पर लेते लेते

खाने की 2 थाली वही ज़मीन पर पड़ी थी

हरिया मैं दरवाजे को खोलता हुआ घर के अंदर घुसता है

उसकी नजर जैसे hi अपनी बेटी पर पड़ती है वो एक पल के लिए अपने बनाये सरे नियम भूल जाता है

नीलम सामने खत पर कुछ इस तरह लेती थी उसकी चुन्नी उसकी छाती से हट चुकी थी आज उसने इतना पतला बलिउसे पहना था की पसीने से सन्ना होने के कारन उसके निप्पल्स साफ़ साफ़ हिरया को नजर आ रहे थे

हरिया के लुंड में हरकत होना शुरू हो गयी थी उसकी धोती में तम्बू बनना स्टार्ट हो चूका था

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अपनी बेटी के तन्ने हुए चुके देख कर हरिया होने आपको रोक नहीं पा रहा था

उसका हाथ अभी धोती के ुवार hi था की तभी राजू घर में घुसता है

राजू- दीदी मैं आ गया

नीलम जससे hi अपनी आँखे खोलती है उसकी नजर सीधा उसके बाप के खड़े लुंड पर पड़ती है जिसे उसकी पतली सी धोती छिपाने में नाकाम हो रही थी

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नीलम की आँखे एक पल में hi लाल हो जाती है पर वो जानती थी की राजू भी आ गया है

नीलम जल्दी से उठती है और अपना दुपट्टा उठा कर अपनी चूचियों को धक् देती है

और अच्चानक से हरिया की और बढ़ती है

हरिया को पसीना आ रहा था

नीलम बड़े hi ोयार से होने बापू के कानो के कर्रेब आती है

नीलम- बापू होनी बेटी की ये मोती मोती चूचिया देख कर तुम परेशान हो जाते हो क्या

जो बार बार तुम्हारा ये खड़ा हो जाता है

इतना बोलकर नीलम हल्के से एक चपत अपने बाप के लुंड पर लगा देती है

इतने में राजू भी नहा कर आ जाता है

हरिया भी वही साइड में बैठा होनी बेटी के बारे में सोच रहा था

हरिया ( कहि मेरी बेटी भी वही तो नहीं कहती कहि वो अपने बाप का लुंड अपनी कुवारी छूट में तो नहीं लेना कहती

नहीं नहीं छियई कितना गन्दा हु मैं होने फायदे के लिए अपनी बेटी की सोच भी गन्दी कर रहा हु मैं कैसा बाप हु में

वो तो मेरी बेटी बस दिखवे के लिए ऐसा कर रही है ताकि उसका बाप उदास न हो )

राजू- दीदी ये 2 थाली खाना किसका है

नीलम- बापू का है

राजू- और दूसरा

नीलम - मेरा

मतलब आज दोनों बाप बेटी ने खाना नहीं खाया

नीलम- अब क्या कृ मेरे बापू को अपनी इस बिटिया की कोई चिंता hi नहीं जो आज खाना खाने नहीं आये

हरिया- अरे बिटिया तू खा लेती खा मेरा इन्तजार क्र रही थी

नीलम- अच्छा ग रोज रोज साथ में खाओगे और एक दिन म अकेले hi खा लू

राजू- है बाऊ बात तो सही है तुमको दीदी के बारे में भी सोचना चाहिए

हरिया- तू ये सब छोड़ और ये बता आजकल तू इतना समय खा बीतता है सेहर में

हरिया नीलम को भी कुछ इशारा करता है

नीलम- ः बता खा रहता है रे तू दिन रात

राजू अपने बैग से एक मिठाई का डिब्बा निकलता है

और एक पीस उठा कर अपनी दीदी के होठो ओर चिपका देता गई है

नीलम भी बिना देर किये होने होठो को खोल कर मिठाई अंदर लेलेती है

अऊर जब राजू अपना हाथ हटाने लगता है तो उसका हाथ पकड़ कर 2वो उंगलिया पकड़ कर अपने मुँह में दाल कर कहत लेती है

इस बात पर कोई इतना ध्याब नहीं देता क्योंकि ये सब आम बात थी

राजू हरिया की और भी डब्बा बढ़ता है

. नीलम- पहले तू जवाब दे मेरी बात का फिर मिठाई खिलाना

राजू- अरे दीदी सब बता तो रहा हु रुको तो

हरिया- ः बता बता

राजू- अरे दीदी तुम्हारे भाई की नौकरी लग गयी है महीने के पुरे 10000 मिलेंगे

इतना बोलते हुए राजू अपनी दीदी के गले लग जाता है और एक पल के लिए उसकी दीदी की विशाल चूचिया उसकी छाती में धस जाती है

राजू जल्दी hi अपनी दीदी से अलग होता है

नीलम- ये तो बहुत अच्छी खबर बताई भाई तूने अब हमारी पैसो की साडी दिक्कत दूर हो जाएगी

राजू- दीदी आज रविवार है मुझे अभी निकलना है कल से ड्यूटी है और वही रहना भी हज तो मैं सिर्फ शनिवार रात को आया करूंगा और सोमवार सुबह चला जाया करूंगा

राजू की बात सुनकर नीलम के चेहरे पर एक रहस्मई मुस्कान आजाती है

और वो होने बाऊ की तरफ देखती है हरिया की नजर जब अपनी बेटी से मिलती है तो वो एक पल के लिए घबरा जाता है और अपने मुँह का थूक गटकते हुए अपनी नजर निचे कर लेता है

नीलम भी यही कहती थी की उसके बाप और उसके बिच में कोई न आये उसका खुद का भाई भी नहीं अब वो अपने बाप की दीवानी हो चुकी थी

हरिया- अरे ऐसे कैसे चला जायेगा खाना तो खा पहले

राजू- बापू खाने का इन्तजार किया तो नौकरी छूट जाएगी लास्ट बस है थोड़ी देर में

हरिया- अच्छा बीटा ठीक है जा पर औरो की तरह अपने बाप और दीदी को भूल नहीं जाना

नीलम- अरे बापू मुझे पूरा भरोषा है की मेरा भाई कभी अपनी इस दीदी को चीड़ कर नहीं जायेगा

इतना बोलकर नीलम अपने भाई के गले लग जाती है

नीलम- बापू आप भी आओ न

हरिया के मन में बहुत सरे संकोच चल रहे थे वो जनता था की अगर वो अपनी बेटी के करीब जायेगा तो वो अपने आपको रोक नहीं पायेगा

हरिया भी अपना मुँह लटकाये अपने दोनों बच्चो के पास जाता है और उनके गले लग जाता है

नीलम भी समय न गवाते हुए अपना एक हाथ अपनी बापू की पीठ पर दाल देती है

और तीनो बाप बेटी 5 मिंट तक आपस में लिपटे रहते है

राजू - दीदी मुझे अब जाना होगा अगले हफ्ते आऊंगा अब्ब

इतना बोलते हुए राजू अपना बेग लेजर घर के बहार निकल जाता है

नीलम भी. राजू के जाने से बहुत खुस थी

नीलम एक कातिल नजर के साथ हरिया को देखती है

नीलम( बापू जिस बेटी से तू भाग रहा था देख किस्मत ने तुझे उसके और करीब ला दिया बापू अब कोण बचाएगा तुझे तेरी इस बेटी से )

हरिया भी जल्द hi घर से बहार निकल जाता है और अपनी झोपडी में बैठ जाता है

8 बजे के करीब हरिया को उसकी बेटी खाना खाने के लिए आवाज देती है

हरिया भी जल्दी hi घर के अंदर जाकर बैठ जाता है

नीलम - बापू आज तुमने हमको दिन भर भूका रख्हा है इसकेलिए तुम्हारी सजा है की आज तुमको अपनी बेटी की थाली में hi खाना खाना पड़ेगा

हरिया भी समझता था की उसने जो 2 दिन में अपनी बेटी के सामने गसलतिया की है वो बहुत शरमिंगी वाली थी

पर उसे होनी बेटी से प्यार भी उतना hi था वो बिना कुछ बोले निचे ज़मीन पर अपनी बेटी के पास बैठ जाता है

नीलम पहले hi खाना निकल चुकी थी

नीलम होना दुपट्टा एक hi पल में अपनी चुकी के ऊपर से अंहता देती है और हरिया की नेक्रो के सामने उसकी बेटी के मोठे मोठे दूध आजाते है जिसपर सिर्फ एक पतला सा ब्लाउज था

हरिया की आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है जिन्हे देख कर नीलम के होठो पर एक मुस्कान आजाती है

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अपनी बेटी की चूचियों को देख कर उसका लुंड उसकी धोती में hi झटके खा रहा था

नीलम- खा खो गए बापू खाओगे नहीं क्या इतना बोलकर नीलम एक निवाला अपने बाऊ के मुँह के पास ले जाती हाउ

हरिया भी बिना देर किये अपना मुँह खोल देता है

नीलम बड़ी शातिर खिलाडी थी वो आधा निवाला होने बापू के मुँह में डालती है जिसे हरिया होने दातो से काट कर अंदर लेता है

और बाकि बचा हुआ निवाला अपनी जीभ को बहार करते हुए अपने मुँह में समै लेती है

हरिया अपनी बेटी की हरकतों से और भी ज्यादा गरम हो रहा था उसकी धोती में एक विशाल तम्बू बन चूका था जिसे नीलम साफ़ देख सकती थी

हरिया होने एक हाथ से अपने विषा लुंड को अपनी बेटी की शातिर नजरो से चुराने का नाकामियाब प्रयास कर रहा था

इस बार नीलम एक निवाला उठती है और उसे होनी जीभ के साथ अंदर लेते हुए धीरे से आधा काट देती है और तुरंत hi अपना झूठा निवाला अपने बापू के होठो पर लगा देती है

हरिया अपनी बेटी की इस हरकत को देख कर अंदर तक काँप जाता है

और उसका मुँह अपने आप hi खुलता जाता है और अपनी बेटी का जूठा खाना चबाते हुए निकल जाता है

हरिया की आँखे पूरी तरह से लाल हो चुकी थी

नीलम को अपने बापू की आँखों में हवस साफ़ नजर आ रही थी

नीलम- बापू तुम्हारे पैरो कर दर्द ठीक हो गया क्या

हरिया- नहीं बेटी वो तो अब और भी बढ़ता जा रहा है

नीलम चुप चाप खाना खाने लगती है

हरिया- पर क्यों पूछ रही है बेटी

नीलम- अब क्या मैं इतनी गैर हो गयी की अपने बापू की तबियत भी नहीं पूछ सकती

हरिया- अरे नहीं बीटा ऐसा नहीं है बस मेरा खाना हो गया तू भी खा के सो जाना मैं चलता हु झोपडी में

नीलम रोकना तो छाती थी अपने बाप को

पर वो कोई जल्दबाज़ी नहीं करना कहती थी वो जानती थी की अभी तक उसका बाप उलझन में है की ये सही है या गलत

हरिया घर से निकल कर झोपडी में चला जाता है और एक लालटेन जला कर होने चौकी पर लेट जाता है

रात के 20 बजे नीलम अपने बाप की झोपडी में पहुँचती है

हरिया अभी भी अपनी बेटी के गदराये जिस्म के बारे में सोच रहा था

हरिया का लुंड किसी रोड की तरह खड़ा था और उसकी धोती पूरी तरह से हटी हुई थी

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नीलम की नजर झोपडी में घुसते hi सीधा अपने बापू के लुंड पर पड़ती है उसका मुँह आज होने बाप के लुंड का असली साइज देख कर खुका का खुला रह जाता है

नीलम ने तो कभी सपने में भी इतना बड़ा लुंड नहीं सोचा होगा

नीलम के मुँह से लार टपक रहा था अपने बाप का लुंड देख कर वो बेसुध हो गयी थी

इधर हरिया को अंदाजा होता है जैसे उसके पीछे कोई खड़ा है जैसे hi वो पलट कर देखता है उसकी बेटी हाथो में एक कटोरी लिए होना मुँह खोले खड़ी थी

जब हरिया की नजर अपने लुंड की और जाती है तो वो एक दम से हड़बड़ी में अपनी धोती को सही करता है

हरिया- अरे बेटीई तू खा कर रही है इतनी रात को यह

अबतक नीलम भी सम्भल छकी थी

नीलम- बापू मैं तुम्हारे पैरो की मालिश करने आयी हु

हरिया - अरे नहीं नहीं बेटी मैं ठीक हु मेरे पेअर भी ठीक है

नीलम- बालू झूट मत बोलो तुम्हारी बेटी सब जानती है की तुम कितनी तकलीफ में हो तुम्हारी बेटी साडी तकलीफ दूर कर देगी

हरिया जनता था उसे तकलीफ तो है पर अगर उसकी बेटी उसे हाथ लगाएगी तो उसका लुंड खड़ा हो जायेगा जो दर के मरे अभी मुरझा गया था

हरिया- अरे बेटी रहने दे सब ठीक है

नीलम- तुम तो चुप hi रो बापू एक तो गन्दी गन्दी हरकत करते हो और तो ऊपर से अपनी बेटी को अपनी सेवा भी नहीं करने देते

नीलम की बात सुनकर हरिया का चेहरा उसके मुरझाये लुंड जैसा हो जाता है और वो चुप चाप अपने पेअर सीधे करके लेत जाता है

नीलम भी टपक से चौकी के ऊपर बैठ जाती है और अपने बाप की धोती को उठाते हुए उसके घुटनो से थोड़ा ऊपर कर देती है

हरिया चुपचाप लेता हुआ था कुछ बोलने या करने की हिमायत अब उसमे नहीं थी

नीलम- अपने हाथो में तेल लगते हुए सीधा अपने बाप की एक पिंडली ओर रखती है और खूब जोरसे मसलती है

अपने बेटी के नरम हाथो को अपनी टैंगो पर महसूस करते hi हरिया मस्त होने लगता है

अब धीरे धीरे नीलम अपने बापू के घुटनो तक पहुंच जाती है और दोनों घुटनो को खूब अच्छे से सेहला सेहला कस्र मालिश करती है

मजे के मरे हरिया की आँखे बंद हो चुकी थी

उसकी बेटी के हाथो का स्पर्श लगातार उसके लुंड को खड़ा करने का काम कर रहा था

नीलम की नजर भी उसके बाप के सर उठाते लुंड पर तिकी थी की आखिर कब वो अपने चरम पर पहुंचेगा और जैसा अभी थोड़ी देर पहले नीलम ने दूर से देखा था कब उस विशाल लुंड को पास से देखने का मौका मिलेगा

नीलम की नजर होने लुंड पर गड़ी हुई पाकर हेइया अपने दोनों हाथो से अपने लुंड को छुपता है पर नीलम अब अपना मन पक्का कर चुकी थी

नीलम भी तुरंत अपने दोनों हाथो से अपने बाप के हाथो को पकड़ते हुए उसके लुंड से हटा देती है

नीलम- अपनी बेटी का गदराया बदन देख कर इसे हिला कर पानी निकलते हो और अब जब तुम्हारी बेटी पेअर की मालिश कर रही है तो भी इसे खड़ा कर लिए अब चुपचाप लेते रो अब मुझसे छुपा कर क्या करोगे बापू

हरिया पानी बेटी की नजरो के सामने पानी पानी हुआ जा रहा था

नीलम हाथो को निचे लती हुई अपने बाप की धोती को जांघो तक चढ़ा देती है हरिया एक बार तो अपनी धोती संभालने का प्रयास करता है पर अगले hi पल नीलम उसका हाथ ोाकद कर दूर धकेल देती है

नीलम अब अपने बाप के ऊपर अपना अधिकार जमाने की कोशिश कर रही थी

नीलम अपने दुपट्टे को अपनी छाती से हटती हुई अलग कर देती है

और हरिया की नजर एक बार फिरसे अपनी बेटी के ब्लाउज पर पड़ती है

जो उसकी बेटी की विशाल चूचियक को सभाल नहीं पा रहा था

ब्लाउज के सरे हुक्स में खिचाव साफ़ नजर आ रहा था

अगर नीलम एक जोर की साँस लेती तो एक एक करके सरे बोटों तू जाते

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हरिया का लुंड धोती के अंदर झटके मार रहा था

जिसे नीलम साफ देख सकती थी उसकी छूट भी लगातार पानी छोड़ रही थी

उसका मन तो कर रहा था की अभी लपक कर अपने बापू का लुंड पकड़ ले पर वो कोई जल्द बाज़ी नहीं करना कहती थी

इधर नीलम लगत्तर होने बापू की जांघो को मसल रही थी बड़े hi कामुक अंदाज में

हरिया कभी अलनी आँखे खोल केर अपनी बेटी की चूचियक को देखता कभी होनी आंखे बंद करलेता

नीलम अपना हाथ थोड़ा और ुवार लेजाने की कोशिस करती है

पर उसका बापू हाथ पकड़ कर उसे रोक देता है

हरिया- बेटी मत कर नहीं तो मैं हमेशा के लिए तेरे सामने शर्मिंदा हो जाऊंगा

नीलम भी समझ रही थी की उसका बाप आखिर उसका बाप hi है

थोड़ा टाइम लगेगा बापू को लाइन पर लेन के लिए

नीलम( कोई बात नहीं बापू आज नहीं तो कल तेरी ये बेटी तेरे लुंड की सवारी करेगी जितना टाइम चाहिए लो पर अब तुमको तुम्हारी इस बिटिया से कोई नहीं बचा सकता )

इतना सोचते हुए नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान आजाती है जिसे हरिया भी देखता है

नीलम दुबारा से आधी जांघो की कामुक मालिश चालू कर देती है और अपने बापू की पेअर की उंगलियों से लेकर जांघो तक अच्छी तरह से मसल रही थी

अपनी बेटी के नरम और कामुक हाथ हरिया की हालत खराब कर रहे थे

ऊपर से नीलम के निप्पल इतने फूल गए थे की ब्लाउज के अंदर से बहार की और उभर आये थे

आखिर कर अपनी बेटी की कामुक और हवस से भरी मालिश के बाद हरिया अपने हथियार दाल देता है और अपने दोनों हाथो को उठाते हुए सीधा अपने लुंड पर रख लेता है

अब हरिया का बदन झटके खा रहा था

निचे से उसकी कमर अपने आप ऊपर उठ रही थी जिसे देख कर नीलम है देती है

और वो अपने बाप को किसी भी दुबिधा में नहीं देखना कहती थी

अभी हरिया की आँखे बंद थी इधर नीलम चुप चाप होने बाप के लुंड से मलाई निकल कर अपने कमरे में भाग आयति है

और बिस्तर पर लेत कर अपने और बापू के होने वाले मिलान को सससस करने के लिए आगे की प्लानिंग करने लगती है

इधर हरिया को पता था की जाने अनजाने में उसने एक बार फिरसे अपनी बेटी के सामने अपने लुंड का पानी गिराया है

वो अपनी बेटी से नजर नहीं मिलाना कहता था

हरिया चुपचाप आंखे बंद किये हुए hi पलटी मर कर लेत जाता है और वैसे hi शांत पड़ा रहता है

तो भाई लोगो कहानी कैसी जा रही है कमैंट्स मैं जरूर बताये

आप लोग कमैंट्स और लिखे करते है तो हमे मोटिवेशन मिलता है कहानी को और भी ज्यादा अच्छे से लिखने का

बाकि आपलोगो की मर्जी है

हैप्पी होली आप सबको

धन्यवाद्........
 
अपडेट-47

रात भर नीलम अपने बापू के लुंड के बारे में hi सोचती रही उसके ज़हन में बार बार एक hi बात आती थी

क्या किसी का लुंड इतना बड़ा हो सकता है

खैर जैसे तैसे दोनों बाप बेटी की ररात काट जाती है

सुबह हो चुकी थी नीलम रोज की तरह घर के काम निपटने में लगी थी

हरिया भी अबतक संडास करके आ चूका था और घर के बहार पड़ी खत पर बैठा चाय का इन्तजार कर रहा था

नीलम भी जल्दी जल्दी काम निपटा कर चाय बनती है और अपने बापू को देने के लिए घर से बहार जाती है

हरिया जैसे hi नीलम को आता हुआ देखता है वो उससे आँख चुराने लगता है

नीलम को पता था की बापू ने अभी तक बाप बेटी के रिश्ते को गंदा करने का नहीं सोचा ह

इसलिए नीलम भी कोई जल्द बाज़ी नहीं करना कहती थी

नीलम ात ने बापू के सामने जाकर सीधा झुक जाती है चाय देने के लिए

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अपनी बेटी का कामुक रूप देख कर एक पल के लिए हरिया भी नीलम की चूचियों में खो जाता है

नीलम- अरे बापू देखते hi रहोगे या चाय भी पियोगे

हरिया नीलम की बात सुनकर हड़बड़ा जाता है

हरिया- है है बेटी ला दे हरिया चुप चाप चाय की चुस्की लेने लगता है

नीलम हरिया को छेड़ना कहती थी

नीलम- बापू साडी चाय पी जाओगे तो बताओगे क्या की चाय कैसी बनी है

हरिया- ः बेटी बहुत बढ़िया बनाई है तूने चाय

नीलम- बढ़िया क्यों नहीं बनेगी दूध में बनाई है

दूध सुनते hi हरिया की नजर एक बार फिर उसकी बेटी के ब्लाउज के ऊपर चली जाती है

नीलम भी अपने बाप को घूरती हुई है देती है

नीलम - अच्छा बापू तुम्हारी रात वाली धोती खा है

हरिया को पता था की रात को उसने क्या कांड किया था धोती में

हरिया- अरे बेटी वो तो झोलदी में है मैं बस धोने hi जा रहा था

नीलम- ये देखो इतनी हटती कटती बेटी है फिर भी इन्हे अपने कपड़े खुद धोने है

नीलम झोपडी की और बढ़ जाती है और अंदर जाकर अपने बाप की धोती उठा लेती है

धोती का एक हिस्सा बहुत तीते हो गया था

नीलम का हाथ कागते hi वो समझ जाती है की उसके बाप के लुंड से निकली साडी मलाई सुख चुकी है

नीलम उस सूखे हुए हिस्से को अपने हाथो से आगे करके पकड़ती है और वापस से हरिया के पास पहुंच जाती है

हरिया की नजर उसकी धोती पर hi थी

हरिया मि गांड फैट रही थी की कहि उसकी बेटी ने उसकी धोती में उसका पानी देख लिया तो वो क्या सोचेगी अपने बाप के बारे में

नीलम- बाऊ आज कल तुम कपडे ज्यादा hi गंदे करते हो खास कर की धोती ये देखो

नीलम उस सूखे हिस्से को हरिया की तरफ कर देती है

जिसे देख कर हिरया की गांड फैट जाती है

हरिया- अरे बेटी मैं खुद hi धो लूंगा

नीलम होने बाप के हाथो को पकड़ कर दूर धकेल देती है

नीलम- अब तो अपने बापू के सरे काम ये बेटी hi करेगी समझे मेरे गंदे बापू

इतना बोलकर नीलम हरिया के गाल पर एक प्याररी सी चपत लगते हुए एक स्माइल के साथ अंदर भाग जाती है

इस बार हरिया के चेहरे पर भी एक मुस्कान थी

हरिया जनता था की कहि न कहि उसकी बेटी उसके लुंड की दीवानी हो गयी है

उसे पता था की 30 साल की उम्र तक उसे लुंड नहीं मिला जो हर औरत की जरूरत होती है

पर हरिया को पता था की वो तो बच्ची है उल्टा सीधा काम करेगी hi बस उसे अपने आप को काबू में रखना था

अकसर वो अपनी hi बेटी का गदराया जिस्म देख कर बहक जाया करता था

नीलम घर के अंदर असते hi हेण्डपम्प के पास जाती है और बैठ कर अपने बाप की धोती को बड़े प्यार से देखती हुई उसे अपने मुँह से चिपका लेती है

धोती में से उसके बाप के वीर्य की महक आ रही थी

नीलम की आँखे लाल हो चुकी थी उसका एक हाथ अपने आप hi अपनी छूट पर चला जाता है और अपनी छूट के डेन को रगड़ते हुए होने बाओ के वीर्य मि महक सूंघ रही थी

इधर हरिया कक चाय ख़तम हो जाती है वो चुचाप घर में गिलास रखने के लिए बढ़ता है

हरिया जजसे hi मैं दरवाजे से अंदर जाता है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

उसकी बेटी बे एक हाथ से उसकी धोती को अपने मुँह से शता रखा था और एक हाथ से जोरो से अपनी छूट रगड़ रही थी

हरिया बिलकुल किसी मूर्ति की तरह जाम हो गया था

अच्चानक से उसके हाथ से गिलास गिर जाता है और नीलम का ध्यान टूटता है

नीलम जब पीछे मुँह कर देखती है तो उसका बाऊ खड़ा था जो आँखे फाड़ फाड़ कर अपनी बेटी की गन्दी हरकत को देख रहा था

नीलम तुरंत पलट कर अपनी लाल आँखों के साथ हरिया को एक कामुक स्माइल लेती है

हरिया की हालत तीते हो चुकी थी वो जल्दी से भाग कर गाओं में निकल जाता है

इधर नीलम दुबारा से अपने काम में लग जाती है

नीलम की छूट अभी तक झड़ी नहीं थी और अबतो उसे अपने बाप का कोई दर भी नहीं था .

नीलम दुबारा से धोती सूंघती हुई अपनी छूट सहलाने लगती है

और थोड़ी hi देर बाद उसकी छूट का सारा ोानी बहार निकल जाता है और नीलम को थोड़ी रहत महसूस होती है

नीलम( क्या बापू आप कितने बुद्धू हो इधर आपकी बेटी जब छूट सेहला रही है तो उसे दुख कर भाग क्यों गए आकर मेरी छूट पकड़ लेते

मैं कुछ भी नहीं बोलती बापू अगर तुम कहो तो जैसे मर्ज़ी वैसे पानी बेटी को छू सकते हो बापू मैं नहीं रोकूंगी तुम्हे)

इधर हरिया भी गाओं की पुलिया पर आकर बैठ जाता है

हेइया की आँखे लाल हो चुकी थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की आखिर वो क्या करे

जिस चीज़ से वो भाग रहा था बार बार वो उसी चीज़ के पास पहुंच जाता था

हरिया ( पता नहीं मेरी बेटी को क्या हो गया है वो तो अपने बाप की दीवानी सी हो गयी है सब मेरी hi गलती है अगर मैं उसकी शादी कर देता तो आज वो एक लुंड के लिए नहीं तड़पती

कैसे मेरी दिति सूंघ कर अपनी छूट सेहला रही थी हे भगवान् ये क्या हो रहा है )

इतना सोचते सोचते हरिया का लुंड फिरसे खड़ा हो जाता है

और हरिया एक फैसला करता है की अब अपनी बेटी से और दूर नहीं भागेगा और होनी तरफ से कोई पहल नहीं करेगा

दोपहर हो चुकी थी नीलम खाना निकले अपने बापू का इन्तजार कर रही थी

थोड़ी hi देर में हरिया भी घर पहुंच जाता है पर घर के अंदर घुसने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था की होनी बेटी से कैसे नजर मिलाये

इधर नीलम को आभास हो जाता है की जसका बाप दरवाज़े पर खड़ा है पर अपनी बेटी से दर के मरे घर में नहीं आ पा रहा है

नीलम- अरे आ जाओ बापू अंदर खा नहीं जाउंगी मैं

हरिया नीलम की बात सुनकर चुपचाप अंदर पड़ी खत पर आकर बैठ जाता है

नीलम उसे उसकी थाली पकड़ती है और निचे खुद बैठ जाती है

हरिया पानी नजरे निचे करके खाना खाने में व्यस्त था इधर नीलम सोच रही थी की अब अपने बापू को कैसे उकसाये

थोड़ी hi देर में दोनों का खाना ख़तम हो जाता है

हरिया उठ कर बहार जाने hi वाला था

नीलम- अरे बवि खा जा रहे हो

हरिया- खाना खा लिए बीटा अब बाजार जा रहा हु

नीलम- हमेशा बहार hi रहते हो कभी अपनी बेटी का हाल चल भी पूछ लिया करो

हरिया दुबारा से खत पर दोनों पेअर लटका कर बैठ जाता है

इधर नीलम झुक कर बर्तन उठती हुई अपने बापू को अपनी चूचियों के दर्शन करवा रही थी

हरिया का लुंड उठना चालू हो गया था

हरिया- तुझे कुछ मंगवाना है क्या बता म ले आता हु

Neelam-vbas 5 मं बैठो फिर बताती हु मुझे क्या चाहिए

हरिया अपनी जगह पर बैठा हुआ था

इधर 5 मिंट बाद नीलम भी अपना काम निपटा कर उसके पास आती है

नीलम को पास आता देख हरिया पानी नजरे निचे कर लेता है

पर नीलम ने आज कुछ और hi सोच रखा था

नीलम अपने बापू के पास आते hi लपक कर हरिया की गोदी में बैठ जाती है

नीलम के भरी भरी चूतड़ एक hi बार में उसके बाप के लुंड को दबा डेरे है

हरिया- अरे बेटी क्या कर रही है तू

नीलम- बापू तुम अपनी इस बच्ची से प्यार नहीं करते न

हरिया- बेटी बहुत प्यार करता हु पर तू ऊपर से तो हट जान निकल जाएगी मेरी

नीलम- पीयर नहीं करते मतलब

हरिया- बेटी मेरी गॉड में मत बैठ और गॉड में बैठना और प्यार करना दोनों अलग अलग बाटे है अह्ह्ह्ह बहुत भरी है तू

नीलम- बापू अब टी ुम hi बताओ मैं इतनी गदराई हुई हु तो क्या अपने बापू की गोदी में भी नहीं बैठ सकती

हरिया- बेटी तेरा बाप बुद्धा हो गया है तू इतना वजन मत दाल अह्ह्ह्ह उठ जा बेटीईई

नीलम लगातार अपनी गांड इधर उधर मटका रही थी जिसके कारण उसके बाप का लुंड पूरी तरह से खड़ा हो चूका था और नीलम की भरी गांड के निचे दबा हुआ था

नीलम- बाऊ मैं इतनी भरी नहीं हु ये तो मेरा पिछवाड़ा इतना बड़ा और भरी है की मैं क्या कृ

इतना बोलकर नीलम थोड़ा सा उठती है नीलम के साथ hi हरिया का लुंड भी एक पल में रोड की तरह सीधा हो जाता है

नीलम थोड़ा सा उठके अपने दोनों हाथो से अपनी दोनों गांड को पकड़ कर फैलाती हुई एक बार फिरसे होने बाप की फगोड़ में बैठ जाती है

इसबार हरिया का लुंड सीड्स उसकी बेटी की गांड के छेद पर टच हो रहा था

नीलम को भी अपनी गांड की दरार में अपने बाप का मुसल महसूस करके आनंद आ रहा था

हरिया कुछ बोलने की हिम्मत में नहीं था

उसकी बेटी के अंगो की गर्मी उसके लुंड को पिघला रही थी

हरिया- बेटी हाथ जोड़ता हु हैट जा हैट जाए

नीलम- तुम चुप चाप बैठे रो बापू मुझे अपने बाऊ को प्यार करना है

हरिया- ऐसे कोण प्यार करता है बेटी अपने बाप से

नीलम - मैं करती हु बास सुन लिया अब चुपचाप बैठे रो

इतना बोलकर नीलम थोड़ा उठते हुए दुबारा से हरिया के लुंड पर बैठ जाती है

दोनों बाप बेटी की सनाए बहुत तेज़ चल रही थी

दोनों की आँखे एकदम लाल सुर्ख हो चुकी थी

हरिया जनता था की उसकी बेटी क्या कर रही है पर कहि न कहि उसे भी अच्छा लग रहा था

आखिर उसकी बेटी की गांड hi इतनी विशाल थी

नीलम लगातार अपनी गांड को हरिया के लुंड पर रगड़ रहु थी

जिस वजह से इसकी छूट ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया था

छूट से निकले पानी की गर्मी हरिया के लुंड को और भी ज्यादा बैचैन कर रही थी

15 मं तक दोनों बाप बेटी ऐसे hi बैठे रहे

नीलम लगातार पानी गांड को हरिया की गॉड में इधर उधर घुमा रही थी

अब हरिया होनी बेटी का और जुल्म सहने की हालत में नहीं था बस और क्या था

हरिया भी जोश में आजाता है और अपने दोनों हाथो को आगे बढ़ता हुआ नीलम की कमर पकड़ लेता है

अपने बाप का हाथ अपनी कमर पर पाकर नीलम मस्त हो जाती है ..

हरिया अपने हाथो से नीलम की गांड को अपने लुंड पर जोर लगा कर बड़ा रहा था और आखिर में हरिया निचे से झटके मरता हुआ झड़ने लगता है

और अपनी गांड पर गीलापन महसूस करते hi नीलम भी समझ जाती है की उसका बाप अब अपनी मलाई बहार निकल रहा है

आखिर में नीलम भी ज़ोर से एक बार अपने बाप के लुंड पर कूदती हुई उठ जाती है

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी ये क्या कुया तुणी माफ़ करदे मुझे माफ़ करदे पाने इस पाली बाप को

नीलम - अरे बापू पानी निकलने वाला था तो बता देते मैं हैट जाती देखो मेरा ोुरा पेटीकोट खराबब कर दिया

नीलम अब खुल कर रान्दीपना करना कहती थी

होनी बेटी की बात सुनकर हरिया का मुँह खुला का खुला रह जाता है

हरिया चुपचाप उठ कर बहार जाने लगता है

नीलम- रुको बापू

इतना बोलकर नीलम अपने बाप के पास पहुँचती है और अपने होठो आगे करके एक चिति से पप्पी लेलेती है अपने बाप के होठो की

नीलम- अब आगे से कभी मत बोलना की तुमने कोई पाप कर दिया और कभी माफ़ी मत मांगना होनी इस नेति से किसी भी चीज़ की मैं तेरी बेटी हु बापू मुझ पर तेरा पूरा हक़ है

और आगे से मेरा पेटीकोट और अपनी धोती में माल मत गिरना इस शतान को बहार निकाल लिया करो

आपका माल जैम जाता है तो जल्दी छूटता नहीं है बापू हालत खराब हो जाती है कपड़े रगड़ रगड़ कर

इतना बोलकर नीलम मुस्कुराने लगती है

इधर हरिया भी एक पल के लिए hi सही पर अपनी बेटी के रसीले होठो का स्पर्श अपने होठो पर पाकर मस्त हो जाता है और चुपचाप बहार निकल जाता है ......
 
अपडेट-48

हरिया दूहर बाद से अपनी झोपडी में लेता हुआ था दूहर में जो हुआ वो इतना जल्दी हुआ की वो समझ hi नहीं पाया की अपनी बेटी को कैसे रोके या कैसे करके उससे दूर हटी

पर कहि न कहि ये सब हरिया को भी अच्छा लग रहा था

और उसे बार बार अपनी बेटी की एक बात याद आ रही थी

बापू तुम्हारी बेटी पर तुम्हारा पूरा अधिकार है

हरिया समझ नहीं पा रहा था की की आखिर उसकी बेटी कौनसे अधिकार की बात कर रही थी

हरिया जनता था की अधिकार क्या होता है और अबतक वो ये भी समझ चूका था की अगर वो सम्भल कर नहीं रहा तो एक दिन जरूर नीलम उसके निचे आ जाएगी

नीलम आज बड़ी hi खुस थी आज उसने पहली बार अपने बापू का लुंड अपनी गांड और छूट पर महसूस किया था पेटीकोट के ऊपर से hi सही पर उसके बापू के लुंड को गोलाई और मोटाई उसे पागल कर गयी थी

अब नीलम का उस लुंड पर दुबारा बैठने का मन कर रहा था वो भी बिना किसी पेटीकोट के

नीलम खाना बना चुकी थी वो जल्दी hi हरिया को भी आवाज देककर खाना खाने के लिए बुला लेती है

और आज भी उसने एक hi थाली में खाना निकला था

हरिया जैसे hi घर के अंदर आता है नीलम को देख कर उसके होश उड़ जाते है

आज तो नीलम ने साडी हदे पार करदिति

आज उसने अपना ब्लाउज पहले hi उतर दिया था और सिर्फ एक पतले से दुपट्टे से अपनी चुकी धक् राखी थी

हरिया जान बुझ कर ध्यान न देते हुए आकर खत पर बैठ जाता है और उसके साथ hi नीलम भी बैठ जाती है

हरिया चोर नजरो से बार बार अपनी बेटी के तन्ने हुए निप्पल्स देख रहा था

नीलम- बापू आज गर्मी बहुत है न

हरिया- है बेटी गर्मी तो है hi

नीलम- बाऊ इसीलिए मैंने अपना ब्लाउज उतर दिया वैसे भी घर में सिर्फ मैं और तुम hi है और अपने बापू से कैसा शर्माना

नीलम की बात सुनकर हरिया को यकीन हो गया था की अब उसकी बेटी के ऊपर हवस भरी हो चुकी है

हरिया बार बार अपनी बेटी के मोठे मोठे कच्चे देख रहा था

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नीलम बार बार देख रही थी की उसका बाप एक नजर उसकी चुकी को देख कर नजरे निचे कर लेता है

नीलम- क्या हुआ बापू जी भर के देख लो तुम्हारी बेटी के hi तो है ये

हरिया- क्या क्या बेटी क्या हुआ

हरिया की चोरी पकड़ी गयी थी

नीलम- अच्छा बापू अगर मैं बिना कपड़ो के घर में रहु तो आपको कोई दिक्कत होगी क्या

हरिया नीलम की बाटे बस सुन्न रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था की अपनी बेटी की इन कामुक बातो का क्या जवाब दे

हरिया- बेटी मेरे सामने तो कायदे पहने पड़ेंगे न तुझे

नीलम- बाऊ बचपन में तो हम तुम्हारे सामने नंगे hi घूमते थे तो अब क्यों नहीं वैसे भी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ गयी है

इतना बोलकर नीलम अपनी चुकी की एक साइड से पल्लू को हटती हुई

अपनी एक चुकी को आजाद कर देती है

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नीलम की चूचियों पर पसीना बेहटा हुआ साफ़ नजर आ रहा था

हरिया ने आज पहली बार अपनी बेटी की नंगी चुकी देखि थी उसके हलक से खाना निचे नहीं उतर रहा था

हरिया की आँखों में लाल पैन साफ़ नजर आ रहा था वो किसी भूखे शेर की तरह अपनी बेटी को देख रहा था

नीलम - बापू देखो न कितनी गर्मी है तुम्हारी बिटिया पूरी अंदर तक भीग गयी है

नीलम भी काम रांदड़ नहीं थी

वो भी अपनी ेल चुकी पर हाथ फेरती हुई अपने एक निप्पल पकड़ कर मरोड़ देती है

जिसे देख कर हरिया की धोती में एक तूफान उठ जाता है

हरिया का लुंड अपनी पूरी ावुकत में आ गया था

हरिया- बेटी मेरा खाना हो गया मैं चलता हु

नीलम- अरे सुनो बापू सुनो तो

हरिया एक बार ोालत कर फिरसे नीलम की और देखता है और उसकी नजर होने आप hi होनी बेटी की गदरायी चुकी पर चली जाती है

नीलम- बापू दूध पियोगे क्या

नीलम अपने एक निप्पल को दबाते हुए बोलती है

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अपनी बेटी की हरकत देख कर हरिया अंदर तक काँप जाता है और वो तुरंत hi पलट कर बहार जाने लगता है

नीलम- अरे बाऊ सो मत जाना मैं अभी आती हु तुम्हारे पैरो की मालिश करने

हरिया- नहीं बीटा पेअर अब ठीक है

नीलम- जितना बोल रही हु उतना hi सुनो समझे बापू

हरिया अपनी झोपडी में जाकर लेट जाता है

हरिया की आँखों से नींद कोशो दूर थी उसे भी कहि न कहि अपनी बेटी का इन्तजार था

आखिरकार उसकी सुनी जिंदगी में उसकी बेटी एक भार बन कर आयी थी

नीलम को भी अपने बापू के पास जाने की बेशब्री थी वो भी जल्दी जल्दी काम निपटा कर अपने बापू की झोपडी तक पहुंच जाती है

इधर अपनी बेटी के बारे में सोच सोच कर हरिया का लुंड पहले से hi खड़ा हो चूका था

नीलम की नजर झोपडी के दरवाजे तक ोहुचते hi अपने बाऊ के लुंड पर पड़ती है

हरिया भी होनी बेटी की पायल की आवाज सुनकर होना लुंड होने दोनों हाथो से छुपा लेता है

एक शातिर मुस्कान के साथ नीलम झोपडी में घुस जाती है और सीधा अपने बापू के पैरो के पास जाकर बैठ जाती है

नीलम की हालत अभी भी वैसी hi थी उसने एक दुपट्टे से अपनी छाती को धक् रखा था

नीलम- आओ मुझे देखते hi इसको क्यों छुपाने लगते हो बापू

इतना बोलकर नीलम सीधा अपने हाथो से होने बापू के दोनों हाथो को पकड़ कर हटा देती है

अब उसके बाप का लुंड दिति के अंदर एकदम सीधा खड़ा था

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नीलम एक नजर जी भर के हरिया के लुंड को देखती है और उसकी धोती को सरकती हुई उसकी जांघो तक ले जाती है हरिया उसे रोकने का प्रयास करता है पर नीलम आज उसकी ीक भी सुनाने के मुद में नहीं थी

नीलम- बालू तुम न मुझे रोका मत करो समझे मुझे अच्छा नहीं लगता

हरिया अपनी बेटी से काफी प्यार करता था पर उसकी बेटी जो करने पर उतारू थी उसके लिए हरिया अभी पूरी तरह तैयार नहीं था

हरिया भी समझ जाता है की ये नहीं मानेगी और वो चुचाप अपने दोनों हाथो को हटा लेता है

आज भी नीलम अपने हाथो से अपने बापू के दोनों पेअर मसल रही थी

करीब 5 मिंट तक मालिश करने के बाद हरिया का लुंड अपने पुरे साइज में आ चूका था आज नीलम अपने बाप के लुंड को जी भर के चुना छाती थी

नीलम - बापू कितनी गर्मी है न

हरिया- ः बीटा भट्ट गसरमी है तू जा सजा पेअर दर्द खत्म हो गया

नीलम- अरे मैं गर्मी की बात कर रही हु अभी तो मैं कुछ किया hi नहीं तो पेअर दर्द कैसे खत्म हो गया

नीलम इतना बोलते हुए एक hi पल में अपना दुपट्टा अपनी छाती से हटते हुए अलग कर देती है

और इस बार हरिया की नजर सीधा अपनी बेटी के बड़े बड़े चुचो पर पड़ती है जिस पर कोई कपड़ा नहीं था

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हरिया का मुँह खुला का खुला रह गया था उसका लुंड धोती के अंदर से hi झटके मार रहा था जिसे नीलम साफ़ महसूस कर सकती थी

नीलम- बापू तुमको अच्छे लगते है क्या मेरे ये

हरिया - क्या क्या बेटी क्या

नीलम- अरे बापू म पूछ रही हु की मेरे हाथो से मालिश कैसी लग रही है

हरिया की ाअंखो में अब हवस उतर आयी थी वो लगातार होनी बेटी के चुचो को देख रहा था

हरिया- है बेटी बहुत अच्छा लगता है

नीलम बिना वक़्त गवाए हरिया की धोती पकड़ कर खींचने लगती है

एक पल के लिए हरिया का ध्यान होनी बेटी की चुके से हटाता है और वो अपनी धोती को पकड़ लेता है

हरिया- मत कर बेटी मैं बाप हु तेरा

नीलम- और आप भी मत रोको मुझे मैं बेटी हु आपकी समझे

इतना बोलते hi नीलम दुबारा से धोती पकड़ कर खींचती है इस बार हरिया भी बिना ज़ोर लगाए अपने हाथ हटा लेता है

अब नीलम की आँखों की चमक को देख कर हरिया की आँखों में भी चमक आ जाती है

नीलम- बापू तुम तो बोलते थे की बुड्ढे हो गए हो तुम पर ये तो देखो कैसे खड़ा है बिलकुल किसी गधे के ल.........

इतना बोलते बोलते नीलम रुक जाती है

हरिया अब तक समझ चूका था की अब उसे उसकी बेटी से कोई नहीं बचा सकता पर उसने एक बात सोच राखी थी की वो अपनी तरफ से पहल नहीं करेगा

नीलम की आँखों में एक नशा था जो हरिया को पागल किये जा रहा था

नीलम बार नार अपने बाप का खड़ा लुंड देख कर अपने होठो पर जीभ फेर कर उसे गिला करती

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हरिया के लुंड की उभरी हुई नशे उसकी बेटी की छूट में एक तूफ़ान उठा रही थी

नीलम- बापू तुम मुझे कभी रोका मत करो मैं जो भी कृ मैं बस अपने बाऊ की सेवा करना कहती हु

बोलो अब कभी रोको गए मुझे

नीलम होने नाख़ून अपने बाप की जांघो पर गदा रही थी

हरिया भी अब पूरी तरह जोश में आ गया था

हरिया- अह्ह्ह नहीं रोकूंगा मेरी बच्ची

इतना सुनते hi नीलम टपक से अपना हाथ आगे बढ़ती हुई अपने बाप का लुंड पकड़ लेती है

हरिया- आह्हः नेता मैट क्र इसे मैट पकड़

हरिया नीलम के हाथो को हटाने की कोशिश करता है

नीलम- अभी आवे बोलै था नहीं रोकोगे अब रोक रहे हो

नीलम अपना मुँह बनाते हुए बोलती है

हरिया- बेटी समझ तू क्या कर रही है हम बाआप बेटी है

नीलम- है मुझे भी पता है की हम बाप बेटी है पर मुझे बस आपको खुस देखना है

हरिया- मैं ऐसे hi खुस्ज हु मेरी बच्ची

नीलम- मतलब मेरा आप पर कोई अधिकार नहीं

हरिया- बेटी मर्द पर तो अधिकार पत्नी का होता है तू तो मेरी बेटी है

नीलम- आप रहने दो बापू आपको अपनी बच्ची से कोई प्यार वीआर नहीं है मैं सब जानती हु नहीं तो तुम मुझे रोकते नहीं

हरिया बिचारा करता तो क्या करता आखिर में वो चुचाप अपना हाथ हटा लेता है और उसका विशाल लुंड एक hi पल में नीलम अचे से दबोच कर पकड़ लेती है

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नीलम- बापू तुम्हारा ये तो बहुत बड़ा है बिलकुल किसी जानवर की तरह

नीलम क्या जानती थी की उसका बाप सच में किसी जानवर से काम नहीं ये तो अब उसे आने वाले टाइम में hi पता चलने वाला था

हरिया चुपचाप लेता हुआ अपनी बेटी को अपने लुंड को घूरते हुए देख रहा था

नीलम बार बार अपनी जीभ को बहार निकाल कर अपने रसीले होठो को गिला कर रही थी

उसकी ये हरकत उसके बापू के लुंड को पागल किये जा रही थी

नीलम से इन्तजार करना अब गवारा नहीं था

वो अपने हाथ को अपने बापू के लुंड की चमड़ी को खींचते हुए बिलकुल निचे जड़ तक ले जाती है

हरिया- अहहहहह बेटीई क्या आह्ह्ह्ह कस्र रही है चू रुक जाए

नीलम - बापू तुम देखते जाओ तुम्हारी बेटी कैसे आज तुम्हे धन्य करती है

नीलम लगातार अपने बापू के लुंड को निचे से ऊपर की तरफ मसल रही थी

तेल तो पहले hi ख़तम हो गया था

नीलम- बापू ज्यादा जोरसे पदक है मैंने तुम्हारा ये तुमको दर्द हो रहा है क्या

इतना बोलकर नीलम जोरदार तरिके से लुंड की चमड़ी को निचे की और खिचती है

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अपनी बेटी की हरकत से हरिया अंदर तक सिहर जाता है

हरिया- ः अह्ह्ह्ह बेटी बहुत दर्द हो रहा है

नीलम- रुको बापू तुम्हारी इस बिटिया में पास इसका भी इलाज है

इतना बोलकर नीलम आगे की और झुकती हुई अपने बापू के लुंड के ऊपर अपना मुँह ले जाती है और उसपर बहुत सारा थूक गिराने लगती है

हरजय को अपनी आँखों के सामने उसकी बेटी के मुँह से गुरता हुआ थूक और उसके लटके हुए कच्चे साफ़ दिख रहे थे

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी मत कर मैं जहनुम मैं जाऊंगा

नीलम- बाऊ तब तो अपनी बेटी को भी ले चलना अपने साथ वह मैं आपके साथ वही रह लुंगी

नीलम की बात सुनकर हरिया के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ जाती है

नीलम अब तक अपने बापू का लुंड अपने थूक से अच्छे से गिला कर चुकी थी और अब उसके हाथ निचे से ऊपर की और आराम से घूम रहे थे

हरिया कभी नीलम की आँखों में देखता कभी उसके हाथो को द्केहता और कभी अपनी बेटी की मोती मोती चूचियों को देखता

नीलम- बापू अगर तुम कहो तो इन्हे छू सकते हो मैं रोकूंगी नहीं तुमको तुम्हारी कसम

मन तो हरिया का भी था की अभी लपक कर अपनी बेटी की चूचिया दबोच ले पर उसने एक कसम ली थी वो बस उसपर hi अमल कर रहा था

हरिया कुछ नहीं बोलता और बस आँखे बंद खोलता हुआ लेते रहता है

नीलम लगातार अपने बाप के लुंड को दोनों हाथो में दबोचे हुए उसकी मुठ मार रही थी

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लगभग 15-20 मिंट हो चुके थे नीलम को अपने बापू का लुंड मसलते हुए

आखिर कार हरिया भी अपने हथियार दाल देता है

और अपनी आँखे बंद करके अपनी कमर को थोड़ा थोड़ा इतने लगता है

नीलम समझ जाती है की अब उसके बाप के लुंड से अमृत वर्षा होने वाली है वो थोड़ा आगे को आते हुए और भी तेजी से हरिया का लुंड मसलने लगती है

हरिया ज्यादा देर अपने आपको रोक नहीं पता और एक के बाद एक झटके मरता हुआ उसके लुंड से पिचकारी निकलने लगती है

जोकि सीधा उसकी बेटी के मोठे मोठे कुछो पर गिर रही थी

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नीलम अपने बाप के लुंड की आखरी बून्द निकलने तक उसे दबोच कर मसलती रहती है

हरिया- अह्ह्ह बेटी ये क्या किया तूने अह्ह्ह्ह मैं तो ज्ञेया अह्ह्ह्हह

नीलम- मैंने कुछ नहीं किया ये डेल्हो आपने क्या किया

जैसे hi हरिया पानी आँखे खोल क्र होनी बेटी को देखता है वो एक बार फिरसे शर्मशार हो जाता है

उसके लुंड से निकला सारा वीर्य उसकी बेटी के चुचो पर इकट्ठा था

नीलम- ये सही है एक तो अपने बापू की इतनी सेवा करो उसके बाद से ये सुबह आपने मेरा पेटीकोट गंदा कुया अब अब तो अपनी साडी मलाई अलनी बेटी के मोठे मोठे चुचो पर hi गिरा दी

हरिया को नीलम की बाटे गुस्से वाली काम और उकसाने वाली ज्यादा लग रही थी

हरिया- बेटी मैंने तो कुछ नहीं किया वो तो तुहि इतनी तेज तेज हिला रही थी की मैं संभाल नहीं पाया

नीलम- कोई बात नहीं बापू तुम्हारी बेटी साफ़ कर लेगी बस तुम खुस रहना

इतना बोलकर नीलम झुकते हुए अपने बाप के कानो के पास आती है

झुकने की वजह से उसकी चूचियों का सारा भर उसकी बाप की छाती के ऊपर आ गया था

आज हरिया को पता चला था की उसकी बेटी के चुके वाक़ई में बहुत भरी और मोठे है

नीलम- बापू बस तुम बताओ तुमको कैसा लगा अच्छा लगा या नहीं

हरिया अपनी बेटी की बात सुनकर थोड़ा परेशान हो जाता है

नीलम- अगर जवाब नहीं डोज तो रात भर तुम्हारी बेटी ऐसे hi घोड़ी बनी रहे

हरिया- ः बेटी ाचा लगा

नीलम - अच्छा या बहुत अच्छा

हरिया- है बहुत अच्छा अब जाकर सजा तू बिलकुल जिद्दी हो गयी है

नीलम- अपनी माँ की तरह है न बापू

नीलम अपने दुपट्टे को एक हाथ से उठती हुई दरवाजे तक आती है

और दरवाहे पर आकर वो हरिया को आवाज देती है

हरिया जैसे hi नीलम की तरफ देखता है

नीलम वैसे hi अपने एक ऊँगली को चुकी पर घूमती हुई अपने बापू का थोड़ा सा वीर्य पानी ऊँगली पर इकट्ठा करती है और अपने मुँह में दाल देती है

हरिया एक बार फिरसे अपनी बेटी की हरकत देख कर मस्त हो जाता है

नीलम- जा रही हु बापू पर कल तुंहारी बेटी आज से भी ज्यादा मजा देगी बस अब तुम मौज करो बापू

नीलम इतना बोलकर घर में भाग जाती है और इधर हरिया अपनी धोती सही करके

सोचने लगता है

हरिया -क्या बेटी दी है मुझे भगवान् ने कितने बड़े बड़े है उसके चुके अह्ह्ह और कितने भरी भरी है मिटना वजन है उसकी गांड में अह्ह्ह्ह

एकदम अपनी माँ की तरह गदरायी हुई घोड़ी है

भगवान् ने मुझे बेटी के रूप में एक कामदेवी दी है जो अब रोज मुझे होने गदराये बदन के जलवे दिखा रही है

हर गया रे तेरा बाप बेटी तेरे सामने हार गया.........
 
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