Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 6 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-49

रात कटनी बड़ी भरी थी हरिया के लिए कल उसकी बेटी ने पहली बार सीधे टूर ओर उसका लुंड पकड़ा था

सुबह हो चुकी थी नीलम उठ कर सीधा झोपडी की और आती है

हरिया अभी तक सोया हुआ था

नीलम एक नजर अपने बाप पर डालती है

और वापस से संडास करने चली जाती है

नीलम के अंदर अब उसके बापू के लिए एक अलग hi पहचान बन गयी थी उसे अब लगता था वो अपने बापू से पय्यार कर इ लगी है और जल्दी से जल्दी नीलम अपने बाप के अंदर समै जाना कहती थी

खैर नीलम संडास करके आ जाती है और इधर हरिया भी उठ कर अभी बैठा hi था

नीलम झोपडी की तरफ बढ़ती है और दरवाजे से झक कर देखती है की उसका बाप अभी उठा है और अपनी आँखे मसल रहा है

नीलम को एक शरत सूझती है

वो धीरे से अपना हाथ ोीचे ले जाती है और पेटीकोट को ऊपर उठती हुई एक ऊँगली को अपनी गांड में दाल देती है और अच्छे से घूमने के बाद अपनी ऊँगली निकाल कर सूंघती है

नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान थी

नीलम- बापू देखो मेरी ऊँगली में क्या सुबह गया धुत सुबह रहा है दिख भी नहीं रहा

नीलम झोपडी में घुसते हुए बोलती है

हरिया भी एक पल के लिए दर जाता है

हरिया- दिखा बेटी क्या है

इतने में नीलम अपना एक हाथ आगे करदेती है

और अपनी गांड वाली ऊँगली को आगे निकल देती है

नीलम- बापू पता नहीं क्या सुबह गया है

हरिया- पर ये सुबह कैसे

नीलम- बापू वो न मैं संडास करने गयी थी तब

हरिया नीलम की बात सुनकर शांत हो जाता है पर नीलम बोले जा रही थी

नीलम- पता है बापू मेरे पिछवाड़े से एक बहुत बड़ा हगवास का टुकड़ा निकला वो इतना मोटा था की तुम्हारी बेटी दर्द सेहेन नहीं कर पायी और मैं आगे की और गिरने वाली थी मैंने अपने हाथ जमजन पर लगा दिया

तभी कुछ सुबह गया

आज सुबह सुबह hi हरिया की बेटी उसे उकसाने आ गयी था

अब हरिया भी थोड़ा फ्री मंद हो चूका था

रात को जो कुछ भी हुआ था उसके बाद से अब तक वो इतना तो समझ चूका था की अब उसे उसकी बेटी से कोई नहीं बचा सकता

हरिया- कोई बात नहीं बेटी होता है कभी कभी

नीलम- बापू इतने छोटे छेद से इतनी बड़ी बड़ी चीज़े कैसे निकल जाती है मेरी तो जान hi निकल गयी थी

हरिया के माथे पर अब पसीना आ रहा था

वो चुपचाप अपनी एक ऊँगली से नीलम की ऊँगली को टटोल रहा था

नीलम- बापू ऐसे नहीं निकलेगा मैंने भी तरय किया था आप जीभ से निकालो न

हरिया- ः बेटी ृक्क

नीलम तुरंत hi अपनी ऊँगली अपने बाप के मुँह के पास ले जाती है

और जब हरिया एक जोरदास सांस खींचता है तो वो एक पल के लिए चौक जाता है

क्योंकि उसकी बेटी की ऊँगली से उसकी गांड की मादक महक आ रही थी

इधर हरिया 1-2 अच्छे से सूंघ कर अपनी बेटी की गांड की सुंगंध लेता है

इधर नीलम अपने बापू की हरकत पर मंद मंद है रही थी

नीलम - बापू क्या सूंघ रहे हो

हरिया- पता नहीं बेटी किसी चीज़ की महक आ रही है

नीलम- अरे बापू वो न मैं अभी संडास करके आयी हु तो शायद मेरे ोिछवाडे की बदबू आ रही होगी आप रहने दो मैं हाथ धो कर आती हु

हरिया अब थोड़ा थोड़ा खुलने लगा था

हरिया- अरे बेटी ृक्क ोेहले इस कटे को तो निकाल दू

इतना बोलकर हरिया अपनी जीभ निकल कर अपनी बेटी की ऊँगली को बड़े hi मादक अंदाज में चाट लेता है

नीलम को अब खुसी महसूस हो रही थी क्योंकि उसका बाप जनता था की ये ऊँगली अभी अभी उसकी बेटी की गांड से निकली है फिर भी उसे चाट रहा था

नीलम- अह्ह्ह बापू क्या कर रहे हो ऐसे मत छतो मेरी ऊँगली गन्दी है बापू

हरिया बस ऊँगली को चाटने में लगा था

हरिया की आँखे अपनी बेटी की गांड के महक पाकर लाल हो चुकी थी

नीलम- बापू मैं न अपना पिसवाड़ा धोते वक़्त उस ऊँगली को अंदर दाल कर खुजली कर रही थी इस लिए छोड़ दो मैं अभी धो कर आती हु

अबतक हरिया के अंदर का जानवर जाग चूका था

नीलम को उसके बाप का खड़ा लुंड साफ़ नजर आ रहा था जोकि उसके बापू की धोती में कैद था

हरिया- बेटी ये ऐसे नहीं निकलेगा रुक

इतने में हरिया अपनी बेटी की पूरी ऊँगली मुँह में भर लेता है और उसे चूसने लगता है

अपने बापू को इतना खुलता हुआ देख कर नीलम की छूट का बुरा हाल हो रहा था

पर उसे खुसी भी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब वो अपने बाआप के सामने घोड़ी बनेगी

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू गुदगुदी हो रही है

हरिया- बस बेटी रुक जा हो गया

इतने में नीलम अपनी ऊँगली बापू के मुँह से खींच लेती है

नीलम- बापू अब क्या चाट चाट कर hi साफ़ करदोगे मेरी ऊँगली

अभी तक. हाथ नहीं धोया है मैंने संडास करके

हरिया एक पल के लिए बहक गया था जिसका अंदाजा उसे अब हो रहा था

हरिया- बेटी तुझे कटा सुबह था न इसलिए मैंने इतना नन्ही सोचा तू तो बेटी है मेरी

तुझसे कैसी घिनंन बेटी

हरिया की बात सुनकर नीलम को तस्साली मिलती है

की दोनों बाप बेटी की सोच कितनी मिलती है

हरिया - बेटी तू खाना बना दे मुझे आज गोअन में पंचायत में जाना है जल्दी बना दे

नीलम- बापू यही रुको न अपनी बेटी के पास

हरिया- जाना तो पड़ेगा न बेटी पूरा गाओं की बात है

नीलम- मतलब आप मेरे पास नहीं रुकोगे

हरिया नीलम के माथे पर हाथ फहरता हुआ कहता है

हरिया- शाम मो आऊंगा बेटी मैं तेरे पास तू क्यों चिंता करती है तेरा ये बाप तुझे छोड़ कर कभी नहीं जायेगा

नीलम हरिया की बात सुनकर खुस हो जाती है और सीधा अपने बाप के गले लग जाती है

अपनी बेटी की मोती मोती चूचियों को अपनी छाती पर महसूस करके हरिया एक पल के लिए मस्त हो जाता है

नीलम भी एक ज़ोर की साँस लेती है और उसकी चूचिया और भी ज्यादा फूलने लगती है

हरिया कक आभास होता है की उसकी बेटी उसे अपनी चूचियों की शक्ति दिखा रही है

नीलम के गदराये जिस्म से आती मादक महक हरिया को दुबारा से भटका रही थी

धोती के अंदर hi उसका लुंड फनफना रहा था और लगातार नीलम की टैंगो पर टकरा रहा था

नीलम- अह्ह्ह बापू तुम कितने अचे बापू हो कितना ख्याल रखते हो तुम अपनी बेटी का आह्हः बापू

नीलम की आवाज में कामुक सिसकियाँ थी जिसे हरिया भी समझ रहा था

हरिया- चल बेटी अब खाना बना दे तेरा बाप भूखा है

नीलम अब. तक अपने बापू से अलग हो चुकी थी

नीलम एक नजर हरिया के लुंड पर डालती है

नीलम- है बापू वो तो दिख hi रहा है कितने भूखे हो आप

और तिरछी नजरो से देखते हुए घर में चली जाती है

हरिया- कुछ भी खो बेटी बड़ी मस्त है मुझे उकसाने का कोई भी बहाना नहीं छोड़ती आह्हः क्या महक थी उसकी गांड की

इतना सोचते हुए हरिया का हस्त खुद बी खुद अपने लुंड पर चला जाता है

हरिया को लेत हो रहा था वो जल्दी से पाने आपको संभालता है

और नहा धोकर घर के नादर पहुँचता है

नीलम पहले hi अपने बापू का खाना निकाल चुकी थी हरिया चुपचाप बैठ कर खाना खाने लगता है

हरिया अपनी पीठ आंगन में लगे हेण्डपम्प की तरफ करके बैठा था

नीलम चुपचाप हेण्डपम्प के पास जाती है

और अपने पेटीकोट को उठती हुई मूतने बैठ जस्ती है

जैसे hi हरिया के कानो में एक आवाज पड़ती है वो तुरंत पलट कर देखता है

उसकी नजर सीधा अपनी बेटी के बड़े बड़े पिछवाड़े पर पड़ती है

43lllllllllllllllllllll.jpg




नीलम की छूट से निकलते पेशाब की मधुर सिटी जैसी आवाज हरिया के कानो के साथ साथ उसके लुंड को भी कपकपा रही थी

हरिया जल्दी से खाना निपटा कर िथ जाता है नीलम अभी भी मूतने में hi लगी हुई थी

हरिया एक नजर नीलम पर डालता है जो उसे hi देख रही थी

हरिया- बेटी मैं जा रहा हु तू अपना ध्यान रखना

नीलम- अरे रुको रुको बापू 1 मिनट

नीलम उठते वक़्त अपना पेटीकोट नहीं छोड़ती और जब वो पूरी तरह से खड़ी हो जस्ती है तब एक hi पल में हरिया को उसकी बेटी की मांसल जंघे और गांड नजर आ जाती है

इतने में नीलम उठ कर हरिया के पास आजाती है

नीलम-. बापू जल्दी आना रात को पता है न आज क्या स्पेशल है

हरिया कुछ नहीं बोलता पर नीलम की बात सुनकर उसके चेहरे पर भी एक मुस्कान आ जाती है

हरिया- ठीक है बेटी जल्दी आऊंगा तू ध्यान रखना अपना मैं चलता हु

नीलम- अरे रुको रुको बापू

हरिया- अब क्या हुआ मैं लेत हो रहा हु

नीलम- बापू वो न मेरे पिछवाड़े वाले छेद में खुजली हो रही है आप एक क्रीम ला डोज क्या दूकान से

हरिया की बाटी अब उसके साथ खुल कर बात कर रही थी जिसकी वजह से हरिया का विशाल लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था

हरिया- बेटी तू बड्ज शैतान है

इतना बोलकर हरिया निकल जाता है और नीलम भी अपने काम निपटने लगती है और रात का इन्तजार करती है .....
 
अपडेट-50

हरिया दिन भर गाओं की पंचायत में बिजी रहा

इधर नीलम भी दिन भर दरवाजे की तरफ hi देखती रही की कब उसका बापू आएगा

खैर रात के 8 बज चुके थे पर हरिया का कोई पता नहीं था

नीलम कमरे में पड़ी खत पर बैठी अपने बापू का इन्तजार कर रही थी

इधर हरिया भी जनता था की वो घर जाने के लिए लेत हो चूका है

हरिया जल्दी जल्दी तेजी से घर की और बढ़ रहा था

हरिया घर का दरवाजा बजाते हुए अंदर घुसता है

हरिया- सो गयी क्या मेरी बेटी

नीलम कुछ नहीं बोलती बस अपनी नजर दूसरी तरफ घुमा लेती है

हरिया- बेटी होने इस बाओ को माफ़ करदेना में आज भी लेत हो गया

इस बार नीलम अपने बालू की तरफ पलट जाती है

नीलम- आपको बोलै है न बापू मैंने कभी भी माफ़ी मरलत माँगा करो अपनी इस बेटी से

पर आप हर बार वही करते हो

हरिया- अरे ः बेटी मैं तो भूल hi गया था

चल अब खाना निकल बहुत भूखा है तेरा बाप

नीलम- ः अलनी बेटी को सिर्फ खाना खिलने के लिए hi याद करना बस मैं तो बस इसी काम के लिए हु

नीलम खाना निकल कर हरिया को देदेती है

हरिया वाक़ई में बहुत भूखा था वो जल्दी जल्दी खाना खा लेता है

नीलम- बालू लगता है आज तुम कुछ ज्यादा hi भूखे हो

हरिया- है बेटी बहुत भूख लगी है

नीलम- अरे ये तो बताओ की खाना कैसा बना है

हरिया- अरे बेटी तेरे हाथो में जादू है जादू हमेशा की तरह मस्त खाना बना है

नीलम- है बापू ये तो सही कह रहे हो हाथो में जादू तो है मेरे

नीलम की बात सुनकर हरिया को रात वाला सीन याद आजाता है की कैसे कल रात को उसकी बेटी ने उसकी मुठ मरी थी

हरिया खाना खा कर बहार जाने hi वाला था तभी

नीलम- बापू तुम मेरी क्रीम लाये की नहीं

हरिया- कौनसी क्रीम बेटी

नीलम- अरे बापू सुबह hi तो बताया था की तुम्हारी बेटी के पिछवाड़े में खुजली हो रही है

नीलम की बात सुनकर हरिया एक पल के लिए शांत हो जाता है

उसे सूझ नहीं रहा था की अपनी बेटी की बात का क्या जवाब दे

हरिया- बेटी कैसे भी करके आज की रत काट ले मैं कल सुबह hi क्रीम लेकर देदूंगा तुझे

नीलम- तब तो लगता है की आज भी पिछवाड़े की खुजली ऊँगली दाल कर hi मिटानी पड़ेगी

एंड नई बेटी के मुँह से इतनी खुली बाते सुनकर हरिया का लुंड खड़ा होना शुरू हो चूका था

हरिया बिना कुछ बोले बहार जाने लगता है

नीलम- बापू पक्का कल ले आओगे न क्रीम

हरिया- है बेटी कल पक्का

नीलम- तब तो कल मेरी साडी खुजली दिर हो जाएगी हैना बापू

हरिया चुपचाप एक स्माइल के साथ बहार निकल जाता है

नीलम( लगता है बापू अब लाइन पर आ रहे है आखिर उन्हें भी इस गदराये हुए बदन के सामने हार माननी hi पड़ेगी जब इस बदन की मालकिन खुद उनकी बेटी है

बापू तुम इस गदराई बेटी का भरपूर फायदा उठाओ )

अपने बापू के बारे में सोचते सोचते नीलम बर्तन धोने लगती है

इधर हरिया होनी झोपडी में लेता अपनी बेटी के बारे में सोच रहा था

हरिया( ये लड़की मुझे कच्चा चबा जाएगी देखो तो कैसे सब कुछ खुल कर बोल रही है कोई शर्म hi नहीं है उसे होने बाप की अब पिछवाड़े में खुजली हो रही है तो बता कर होने बाप का लुंड खड़ा करना जरूरी है क्या )

इतना सोचते सोचते हरिया का हाथ अपने लुंड पर चला जाता है

febb0a8cc0675e5b8040bcc80863afef.gif


हरिया धीरे धीरे अपना लुंड मसल रहा था

उसके दिम्माग में 2 बाटे चल रही थी

वो यही सोच रहा था की आज उसकी बेटी आएगी या नहीं आएगी या नहीं

दरअसल अब हरिया को भी अपनी बेटी से लुंड मसलवाने की आदत पद गयी थी

जब नीलम उसका लुंड पकड़ कर हिलती तो उसके अंदर एक अजीब सा मजा आता था मनो जैसे हरिया बेटीचोद बनाने के लिए तैयार था

इधर नीलम एक कटोरी तेल लेकर झोपडी की तरफ बढ़ती है

वो जैसे hi दरवाजे पर पहुँचती है उसे उसका बापू अपना लुंड मसलता हुआ दिखाई पड़ता है

नीलम - क्या हुआ बापू इन्तजार नहीं हो पा रहा क्या की आज खुद hi मसल रहे हो इस मुसल को

हरिया अपनी बेटी की आवाज सुनकर एकदम से हड़बड़ा जाता है और अपने लुंड को अपनी धोती से छुपाने लगता है

नीलम- अरे अरे बापू अब क्यों छुपा रहे हो थोड़ी देर में तो निकलना hi है

हरिया - बेटी बाप हु तेरा कुछ तो शर्म आएगी न मुझे

नीलम- कौन कहता है तुमको नलबालु शर्माने के लिए

सामबे तुम्हारी बेटी hi तो है जो करना है वो करो

नीलम की बात सुनकर हरिया एक नजर नीलम की और डालता है

नीलम एक दम किसी रंडी की तरह लग रही थी आज उसने एक छोटा सा पेटीकोट पहना था

और होनी छाती को कल की तरह एक दुपट्टे से धक् रखा था

हरिया- बेटी जल्दी से पैरो की मालिश करदे मुझे नींद आ रही है

नीलम- बापू सिर्फ पैरो की hi मालिश करनी है क्या आज

हरिया इस बात का कोई जवाब नहीं दे पता

नीलम जो अभी तक दरवाजे पर hi खड़ी थी वो अब अपने बाप के पास आने लगती है

और चलते चलते hi अपने दुपट्टे को हटते हुए अपनी भरी बहराकम चूचिया होने बाप के सामने आजाद कर देती है

हरिया- न बेटी मत किया कर ऐसा जब तू होने कपडे उतरती है तो मुझे बहुत अजीब लगता है

नीलम- मतलब आपको आपकी बेटी के ये पसंद नहीं है

हरिया अब क्या hi जवाब देता

नीलम- बापू बताओ न वैसे तो बड़ा घर घर कर देखते हो जब मैं नंगी होती हु लगता है अभी खा जाओगे तुम मेरे ये

NUDE-DESI-3-21.jpg


नीलम अपनी चुकी को दबोचते हुए बोलती है

हरिया- बेटी तेरी इन हरकतों का तेरे बाप पर कैसा असर होता है तुझे क्या बताऊ

नीलम - रहने दो बापू बताने की जरुरत नहीं है मैंने देख लिया है की खा असर होता है

इतना बोलते हुए नीलम सीधा हरिया का लुंड पकड़ लेती है

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी मत छुऊं तू इस गन्दी चीज़ को ये बहुत बेकार चीज़ है

नीलम- बापू जो चीज़ तुम्हारे लिए बेकार है वो तुम्हारी बेटी के लिए किसी खजाने से काम नहीं

इतना सुनते hi हरिया की आँखे बड़ी बड़ी हो जाती है एयर उसे अब पूरा यकीन हो जाता है की उसकी बेटी उससे छुड़वाना कहती है

इस सोच के साथ हरिया के शरीर में एक अलग सा कम्पन्न होता है जिसे नीलम भी महसूस करती है

नीलम- बापू मुझे सब पता है की तुम सब समझते हो फिर भी अपनी बेटी को परेशान करते रहते हो

बाटे करते वक़्त भी नीलम के हाथ होने बाप के लुंड को मसल रहे थे

penis-100.webp


हरिया- अहह बेटी पता नहीं क्यों जब तू इसे चुटी है तो तेरा बाप तेरे सामने हार मान लेता है आझ मेरी बच्ची कितना ध्यान रखती है तू मेरा

नीलम अपने बापू को और भी तड़पना कहती थी

नीलम- मैं तो अपने बापू का पूरा ख्याल

रखती हु पर बापू को अपनी इस बच्ची का कोई ख्याल नहीं है

इतना बोलते हुए नीलम होने अंगूठे के नाख़ून से हरिया का सूपड़ा घायल कर देती है

हरिया- अह्ह्ह्हह रुका जाए अह्ह्ह्ह बेटी क्या कर रही है

नीलम- मुझे जो करने का मन कर रहा है वही कर रही हु

आप बताओ आपका कुछ करने का मैं कर रहा है तो करलो

नीलम होने कुछो की तरफ इशारा करते हुए बोलती है

मन तो हरिया का भी था की अभी लपक कर अपनी बेटी के गदराये हुए कच्चे ोाकद ले पर आखिर वो एक बाप था

हरिया चुप चाप लेता रहा

नीलम- बापू तुम्हे अपनी बेटी की कोई फ़िक्र नहीं है न

हरिया- क्यों बेटी ाभ्ह्ह्ह ऐसा क्यों बोल रही है

नीलम- इस लिए बोल रही हु की तुम्हारी बेटी के एक छेद में 4 दिन से खुजली हो रही है पर तुमसे एक दवाई तो ले नहीं गई

हरिया के ऊपर अब हवस भरी हो चुकी थी वो अब एक अच्छे बाप की तरह और ज्यादा देर तक बर्ताव नहीं कर सकता था

हरिया- कोनसे छेद में खुजली हो रही है बेटी तेरे

नीलम- सुबह से 10 बार तो बता चुकी हु ओर आपको तो सुनाई hi नहीं देता अब पेटीकोट उतर कर आपको वो छेद दिखा दूंगी तभी मानोगे क्या

हरिया बड़े hi प्यार से अपना एक हाथ नीलम के गलो पर रखता है

हरिया- आह्ह्ह्ह बेटी मैं कल तेरे उस छेद के लिए एक अच्छी सी दवाई ला दूंगा तू टेंशन मत ले अह्हह्ह्ह्ह बेटी मेरा पानी निकलने वाला है

नीलम- बापू आज तक तुमने अपनी बेटी के हाथो का hi जादू देखा है न आज देखो तुम्हारी बेटी के पैरो में भी बहुत जादू है

हरिया एक पल के लिए सोच में पद जाता ह की आखिर अब उसकी बेटी क्या करने वाली है

नीलम चुपचाप उठती है और लाल तेन को उठा कर हरिया के सिरहाने रख देती है

और सुबारा से होनी जगह पर आजाती है

और इस बार वो थोड़ा पीछे हटती हुई अपने दोनों पैरो को आगे लेकर ुज़ार थोड़ा तेल लगस्ति है और दोनों पैरो को एक hi बार में अपने बापू के लुंड पर टिका देती है

नीलम होने पैरो के नाख़ून से होने बापू का लुंड कुरेद रही थी

आजसे पहले हरिया को कभी ऐसा मजा नहीं आया था

हरिया- अह्ह्ह बेटी तेरे तो पैरो में भी जादू है अह्हह्ह्ह्ह मेरी बच्ची कितनी अच्छी है तू कितनी सेवा करती है अपने इस बुड्ढे बाप की

नीलम- वह जी वह ये सांड जैसा मुसल लेजर घूमते हो और अपने आपको बुद्धा कहते हो कुछ तो शर्म करो बापू

इतना बोलते हुए नीलम होने पैरो को थोड़ा उठा देती है और इस बार हरिया जो देखता है उसे देखते hi एक दम से मस्त हो जाता है

लाल तेन की हलकी रौशनी सीधा नीलम के दोनों पैरो के जोड़ पर पद रही थी

received-155013689311073.jpg


हरिया की नजर नीलम की गदराई जांघो पर टिक गयी थी

नीलम- क्या हुआ बापू खा खो गए कुछ मिल गया क्या अँधेरे में

हरिया का दिमाग एक दम से ठनकता है अब उसे समझ आता है की नीलम ने आखिर लालटेन को उसके सिरहाने किस लिए रखा था

हरिया- बेटी रुक जा नहीं तो तेरे पेअर फिर से गंदे हो जायेंगे

नीलम समझ जाती है की अब उसके बापू का लुंड धमकार करने वाला है

वो और भी ज्यादा कामुक त्रिले से अपने दोनों पैरो से हरिया का लुंड मसलने लगती हसि

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी आह्ह्हह्ह्ह्ह रुककककककककति. एक्को हीई रुकक्क जा अह्ह्ह्ह

EO0f-BCx-VUAAj-Qh3.jpg


एक hi पल में हरिया का सारा वीर्य गिरता हुआ उसकी बेटी के पैरो पर जैम जाता है

इधर हरिया आँखे बंद करके लम्भी लम्भी सांसे ले रहा था

अच्चानक से नीलम घोड़ी बनती हुई सीधा होती है और अपने बालू के मुँह के पास अपना मुँह ले एस्टी है और पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी गांड हरिया के मुरझाते हुए लुंड पर रख देती है

नीलम- बापू अगर कल मेरे उस छेद की क्रीम नहीं अस्यी न तो तुम देखना मैं तुम्हारा क्या हाल करती हु

इतना बोलकर नीलम ात ने होठो आगे बढ़ती हुई अपने बापू के होठो को चुम लेती है

6128b994b5840f1f2da1201fc88499a0.gif


इसके साथ hi नीलम अपना दुपट्टा लेकर बहार चली जाती है

इधर हरिया को एक पल के लिए hi सही पर अपनी बेटी के होठो की मिठास को चखने का मौका मिला था जोकि उसे बहुत अच्छा लगा था .....
 
अपडेट-51

हरिया की पिछली रात बहुत अच्छी कटी थी आज उसकी नींद उसकी बेटी से पहले hi खुल गयी थी

हरिया के चेहरे पर आज एक संतुस्ती वाली मुस्कान थी

आखिर कर उसकी बेटी उसकी साडी दबी हुई इच्छाएं जो पूरी कर रही थी

हरिया को लगता है की नीलम भी उठ चुकी होगी बस यही सोचते हुए वो घर के भीतर जाने लगता है

जैसे hi हरिया दरवाजे को थोड़ा सा धकेलता है उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है

download-1-2.jpg


अंदर उसकी बेटी एकदम नंगी सोई हुई थी

नीलम के गदराये जिस्म पर कपडे का एक टुकड़ा तक नहीं था आज पहली बार हरिया ने अपनी बेटी की गांड का असली साइज देखा जो वाक़ई में काफी बड़ी गांड थी

हरिया को ज्यादा देर रुकना मुनासिब नहीं लगता वो जल्दी जल्दी घर के बहार आ जाता है पर दरवाजे को बंद करना भूल जाता है

इधर नीलम भी थोड़ी देर में उठ जाती है और अपने कपड़े पहनते हुए दरवाजे की और देखती है और उसे समझते देर नहीं लगती की जरूर उसका बापू आया होगा

नीलम एक लौटा पानी लेकर संडास के लिए घर से बहार निकल जाती है

दरवाजे के बहार hi हरिया बैठा हुआ था

उसके चेहरे का रंग पूरी तरह से उदा हुआ था

नीलम- अरे बापू आज बड़ी जल्दी उठ गए लगता है रात को बड़े मजे से सोये हो

हरिया- ः बेटी आज जल्दी नींद खुल गयी

नीलम- अच्छा बापू तुम सुबह घर में आये थे क्या

हेइया नीलम की बात सुनकर घबरा जाता है

हरिया- नहीं नहीं तो बेटी मैं तो नहीं आया पर क्या हुआ

नीलम- अरे वो दरवाजा खुला हुआ था मैंने सोचा आप आये होंगे

पर क्या पता कोई जानवर हो

हरिया- है है बेटी हो सकता है कोई जानवर हो

नीलम- तब तो वो जानवर बहुत कुछ देख गया बापू

नीलम की बात सुनकर हरिया चुप हो जाता है

और इधर नीलम अपनी गांड मटकते हुए घर के पीछे चली जाती है

हरिया नीलम के जाल में अब बुरी तरह फास चूका था

उसका मन अब हर पल अपनी बेटी के साथ रहने का hi करता था

हरिया को पता था की उसकी बेटी संडास करने ह

वो 5 मिंट तक अपनी जगह पर hi बैठा रहा

पर आज हरिया के अंदर एक अजीब सी बैचनी थी

उसे पता नहीं क्यों बार बार अपनी बेटी के कामुक अंगो को देखने का मैं कर रहा था

हरिया का स्बरर जवाब दे गया था आखिर कार वो अपनी बेटी के बुसस में आ चूका था

हरिया धीरे धीरे चलते हुए घर के पिछवाड़े पहुचता है

और जैसे hi हरिया थोड़ा आगे जाता है

उसे उसकी बाटी संडास करती हुई दिखाई पड़ती है

हरजय के पेअर एक पल के लिए वही जैम जाते है

हरिया की आँखे एकदम लाल हो चुकी थी

इधर नीलम को नहीं पता था की उसका बाप उसे संडास करता हुआ देख रहा है

नीलम की गांड से एक के बाद एक संडास निकले जा रही थी

हरिया अपनी बेटी को हगते हुए देख कर एकदम मस्त हो गया था

अभी उसका हाथ उसकी धोती पर गया hi था की नीलम पास पड़ा लौटा उठती है अपनी गांड धोने के लिए

हरिया थोड़ा सा पीछे हतत्ता है पर वॉयस नहीं जाता

नीलम पानी को हाथो में लेते हुए होनी छूट और गांड अच्छे से धोती है

अपनी बेटी की छूट के लटके हुए होठ देख कर हरिया के मुँह में पानी आ जाता है

हरिया का मैं तो बहुत कर रहा था अपनी बेटी के पास जाने का पर वो होने आपको अपनी बेटी के सामने शर्मिंदा नहीं करना कहता था

इधर नीलम होनी छूट और गांड अच्छे से धोती है और अच्चानक से अपनी 2 उंगलिया अपनी छूट में पेल देती है

हरिया अपनी बेटी की ये मादक हरकत देख कर एक दम से पागल सा हो जाता है

नीलम 2-3 बार अपनी दोनों उंगलियों को अच्छे से अपनी छूट में घूमती है

20200809-045348.jpg




नीलम एक ऊँगली को छूट से निकलती हुई अपनी गांड में सरका देरी है और देखते hi देखते पूरी ऊँगली नीलम की गांड में समै जाती है

हरिया को अब और वह पर रुकना सही नहीं लगता

वो जल्दी से आकर अपनी खत पर बैठ जाता है

इधर नीलम भी अपनी छूट और गांड साफ़ करके वापस आती है

उसे हरिया बहार hi बैठा हुआ मिल जाता है नीलम सीधा हरिया के पास hi चली जाती है

नीलम- बापू आज तो बड़ी जल्दी उठ गए आप क्या बात है लगता है रात को बड़ी अच्छी नंद आयी आपको है नाआ

हरिया- है बेटी नींद तो अच्छी hi आयी थी रात को

नीलम- आज मेरी उस छेद की क्रीम लाओगे या नहीं . हरिया- ः बेटी आज पक्का ला दूंगा

नीलम- अगर आज नहीं लाये न तो देखना म क्या करती हु परेशान हो गयी है तुम्हारी बेटी इस खुजली से संडास करते वक़्त भी बहुत दिक्कत होती है

हरिया- अरे बिटिया मैं ले आऊंगा

नीलम- है जरूर ले आना नहीं तो आज ऐसी मालिश करूंगी न आपकी की आप याद रखोगे जिंदगी भर

हरिया- बेटी बहुत जोरो से भूख लगी है खाना तो बना दे

नीलम- रुको बापू अभी खिलाती है तुम्हारी बेटी खाना

पहले हाथ तो धो लू खुजली करते करते पूरी ऊँगली hi उस छेद में घुस जाती है बापू

हरिया का लुंड पहले से hi खड़ा था वो जैसे तैसे अपने हाथो से अपने लुंड को दबा कर बैठा था

इधर नीलम ऐसी ऐसी बाटे बोल रही थी की हरिया न कहते हुए भी आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो रहा था

नीलम चुपचाप घर में चली जाती है

इधर हरिया से और कण्ट्रोल नहीं होता वो जल्दी से उठ कर अपनी झोपडी में जाता है और अपने लुंड को निकाल कर अपनी बेटी के गसडरए जिस्म को याद करके मुठ मरने लगता है

करीब 10 मिंट लुंड हिलने के बाद हरिया होनी बेटी के नाम का पानी जमीन पर गिरा देता है

और अपनी धोती वापस से लपेट कर खत पर आकर बैठ जाता है

जल्दी hi नीलम भी अपने बापू को खाना खिला देती है

आज नीलम कुछ नहीं करती क्योंकि उसे आज रात का बेसब्री से इन्तजार था आज उसने अपने बापू को खुस करने की एक तरकीब सोची थी

वही दूसरी तरफ हरिया खाना तो खा रहा था पर उसके चेहरे पर एक बेचैनी थी की आज उसकी बेटी एक दम से शांत कैसे है

असल में अब हरिया को उसकी बेटी की गन्दी गन्दी हरकते अच्छी लगने लगी थी

हरिया की बेचैनी नीलम भाप जाती है

नीलम- क्या हुआ बापू बफी टेंशन में हो कुछ चाहिए क्या

आज नीलम को पता चला था की एक आदमी को तड़पने में कितना मजा आता है और अगर वो आदमी खुद का बाप हो तो मजा दोगुना हो जाता है

हरिया जल्दी hi खाना खा लेता है

और जैसे hi घर से बहार जाने लगता है

नीलम- बापू अब खा जा रहे हो

हरिया- बेटी मैं अभी गाओं में जा रहा हु तू एक काम कर क्रीम का नाम लिख कर देदे मैं शाम तक लेता आऊंगा

नीलम जल्दी से एक कागज पर क्रीम का नाम लिख कर हरिया को पकड़ा देती है

नीलम- बापू आज पका ले आओगे न वो क्रीम

हरिया- है बेटी आज तेरी उस छेद की क्रीम पक्का ला दूंगा

हरिया को अगले hi पल अहसास होता है की वो क्या बोल गया

हरिया अपनी गर्दन नुचे झुका लेता है

इधर नीलम अपने बापू के मुँह से ऐसा शब्द सुनकर खुश हो जाती है उसकी खुसी उसके चेहरे पर साफ़ झलक रही थी ..........
 
अपडेट-52

शाम के लगभग 7 बज चुके थे

नीलम को अपने बापू का बेसब्री से इन्तजार था वो दरवाजे पर खड़ी खड़ी अपने बापू की राह देख रही थी

थोड़ी hi देर में हरिया भी घर पहुंच जाता है

नीलम उसे देखते hi उसके पास दौड़ी चली आती है

नीलम- बताओ बापू तुम वो क्रीम लाये हो या नहीं

हरिया- अब अपनी बिटिया से वडा किया ह तो निभाना तो पड़ेगा hi न

हरिया अपने दूसरे हाथ को आगे बढ़ता हुआ होनी बेटी को वो क्रीम देदेता है

नीलम खुसी के मरे अपने बापू के गले लग जाती है

हरिया भी दिन भर बैचैन था था अपनी बेटी के करीब जाने को

हरिया को जब अपनी बेटी के भरी भरकम कच्चे अपनी छाती पर महसूस होते है तो उसके हाथ एक पल में hi अपनी बेटी की पीठ तक पहुंच जाते है

200w.gif


करीब 5 मिंट तक हरिया अपनी बेटी से चिपका हुआ उसके कामुक पसीने की गंध को सूंघता हुआ नीलम से चिपका रहता है

अबतक नीलम को भी पता चल चूका था की अब उसला बाप उसकी बनाये जाल में फास गया है

हरिया 5 मिंट बाद न कहते हुए भी होनी बेटी से अलग होता है

नीलम की नजर सीधा अपने बापू की धोती पर जाती है

हरिया जब अपनी hi बेटी को अपना लुंड घूरते हुए

पता है तो वो एकदम से थोड़ा सा शर्मा जाता है और अपना मुँह निचे कर लेता है

नीलम- क्या बात है बापू आज तो आप काफी खुश लग रहे हो

हरिया - बेटी अपने बाप को इतना सर मत चढ़ा की वो बिगड़ जाये

नीलम- तो बिगड़ जाओ न बापू तुम्हारी बेटी हक़ तो तुम्हे सँभालने के लिए

हरिया- चल बेटी खाना बना ले बहुत भूख लगी है

नीलम- है बापू खाना तो अभी बना लेती हु पर आज आपके लिए कुछ स्पेशल है

हरिया- क्या स्पेशल है बता बिटिया

नीलम- बड़े बेसब्र हो रहे हो बापू थोड़ा इन्तजार करो सुना नहीं है क्या सब्र का फल मीठा होता है

वो तो तुमको रात को hi पता चलेगा की आज क्या स्पेशल है समझे मेरे गंदे बापू

नीलम एक प्यारी सी चपत अपने बापू के गाल पर मार कर घर के अंदर चली जाती है

इधर हरिया बहार पड़ी खत पर बैठ कर सोचने लगता है की आखिर आअज उसकी बेटी उसके साथ क्या स्पेशल करने वाली है

सोच सोच कर hi हरिया का लुंड फता जा रहा था

हरिया का लुंड पूरी तरह से खड़ा था

करीब आधे घंटे बाद नीलम की आवाज आती है

नीलम- आजाओ बापू खाना बन गया आजाओ

हरिया अभी भी होनी बेटी के hi बारे में सोच रहा था

नीलम की बात सुनकर हरिया उठ कर सीधा अंदर चले जाता है

हरिया अब अपनी बेटी के बनाये जाल में ऐसा फास चूका था की उसे ये भी ध्यान नहीं था की उसका लुंड पूरी तरह से खड़ा हज

नीलम जैसे hi अपने बापू के खड़े लुंड को देखती है जो उसकी धोती में एक विशाल तम्बू बनाये हुए था

main.jpg


नीलम- लगता है आज कल आपको अपनी बेटी की कुछ ज्यादा hi याद आती है

हरिया जब देखता है की उसकी बेटी की नजर उसके खड़े लुंड पर है तो वो एकदम से होने दोनों हाथो से लुंड दबाता हुआ खत पर बैठ जाता है

इधर नीलम मंद मंद मुस्काये जा रही थी

वो जानती थी की उसके बापू का लुंड उसे देख कर hi खड़ा है

हरिया- बेटी खाना दे फिर सोना भी है

नीलम- क्यों बापू आज पैरो की मालिश नहीं करवाओगे क्या

हरिया- वो तो अगर मैं मना भी कृ फिर भी तू करेगी hi

नीलम अपने बापू के मजे लेने थे

वो कहती थी की एक दिन उसका बापू खुद hi आकर उसे अपनी बहो में भर ले

नीलम- बापू अगर तुमको अच्छा नहीं लगता वो वाला मालिश तो बता दो मैं नहीं करूंगी

नीलम की बात सुनकर हरिया का मुँह खुला का खुला रह जाता है

अगर नीलम यही बात 3-4 दिन पहले बोलती तो शायद हरिया 1 सेकंड में hi मना कर देता पर अब तो उसे भी अपनी बेटी की आदत पद गयी थी

हरिया बिना कुछ बोले जल्दी जल्दी खाना खता है और घर से बहार भागने लगता है

नीलम- अरे बापू सो मत जाना अभी आएगी तुम्हारी बेटी मालिश. करने

जैसे hi हेइया नीलम की बात सुनता है उसके चेहरे पर एक शैतानी स्माइल आ जाती है

इधर नीलम भी बड़ी खुश थी क्योंकि आज उसने सीधा सीधा अपने बापू से पूछा था की वो उसका लुंड मसले या नहीं पर हरिया ने कोई जवाब नहीं दिया

मतलब अब उसका बापू उसका होने वाला है बस कुछ hi दिनों में

हरिया अपनी चौकी पर लेता हुआ अपनी बेटी का इन्तजार कर रहा था

नीलम भी आज जल्दी जल्दी सरे काम निपटने में लगी हुई थी वो कहती थी की जल्दी से जल्दी अपने बापू के पास पहुंच जाये

लगभग आधे घण्टे बाद नीलम होने बापू की झोपडी की और बढ़ती है

उसे संसे पहली चीज़ होने बापू का खड़ा लुंड hi डीहकता है

morning-wood.jpg


जिस ओर सिर्फ एक धोती पड़ी हुई थी आज तो हरिया ने पहले से hi धोती को खोल दिया था और एक चादर की तरह दाल कर अपने लुंड को धक् रखा था

नीलम( लगता है अब वो दिन दूर नहीं जब बापू अपना ये मुसल मेरी छूट में दाल कर अपनी बेटी को पटक पटक कर छोड़ेंगे है कितना बड़ा है बापू तुंहारा लुंड)

नीलम चुपचाप झोपडी में घुस जाती है

आज भी नीलम ने एक दुपट्टा डाला हुआ था वो ब्लाउज बहुत पहले hi उतर चुकी थी

नीलम को आता देख आज हरिया कोई रिएक्शन नहीं करता और आज वो अपने लुंड को छुपाने की कोशिश नहीं करता

नीलम को आज अपने बापू पर बड़ा प्यार आ रहा था

नीलम जैसे hi हरिया की की तरफ पलट टी है हरिया की आँखे अपनी बेटी को देख कर बड़ी बड़ी हो जाती है

हरिया का लुंड उसकी बेटी की आँखों के सामने hi झटके मार रहा था

नीलम भी बिना देर किये सीधा अपने बापू की धोती पकड़ कर खींच देती है और एक hi पल में हरिया अपनी बेटी के सामने नंगा हो जाता है

00001.gif


हरिया का लुंड लगातार झटके मार रहा था

नीलम ने आज बड़े hi कामुक तरिके से खुद को अपने बाप के लिए टीएयर किया था

उसने अपने कान की 2 छोटी छोटी बलियो को होने निप्पल्स में फसा रखा था

नीलम बड़े आहिस्ते से अपने बापू के करीब जाती है

जैसे जैसे नीलम हरिया के करीब जा रही थी अपनी बेटी की चूचियों को देख कर हरिया की सनसे फूल रही थी

नीलम- बापू देखो न मैं खेल रही थी और ये दोनों कैसे फस्स गयी तुम्हारी बेटी के कुछो की घुंडी पर

20210320-094332.jpg




हरिया- है बेटी ये कैसे फसा लिया तूने

हरिया के होंठ काँप रहे थे

उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या बोले

नीलम- बापू बहुत दर्द हो रहा है इसे निकाल दो न

हरिया - पर बेटी मैं कैसे

नीलम- बापू बस पकड़ कर खुश दो निकल जायेगा

हरिया- बेटी तू निकाल ले न मैं कैसे निकलू

हरिया को पता था की अगर उसने एक बार अपनी बेटी की गदराई चूचियों को चुवा तो उसके अंदर का जानवर जाग जायेगा

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू जल्दी निकालो न मैंने भी निकलने की कोशिश की थी पर नहीं निकला

हरिया के पास अब कोई चारा नहीं था वो अपने कंपते हुए हाथ धीरे धीरे आगे की और बढ़ता है

इधर नीलम भी अपनी छाती को थोड़ा सा आगे की तरफ धकेल देती है

हरिया जैसे hi अपनी बेटी के निप्पल को हल्का सा छूटा है उसके शरीर में एक ताज करंट की लेहेर दौड़ जाती है

नीलम- क्या बापू क्या कर रहे हो पकड़ो और खींचो बस निकल जायेगा

हेइया जनता था की उसकी बेटी उसे क्या करने के लिए उकसा रही है

पर आखिर कर उसकी भी तो यही इच्छा थी वो अपनी बेटी को जी भर के चुना कहता था

इस बार हरिया अपनी बेटी का एक निप्पल पकड़ कर अपनी और खींचता है पर बलि तो नहीं निकलती बल्कि दर्द के मरे हरिया के हाथो के साथ साथ नीलम भी उसकी तरफ खींची जाती है

नीलम- अह्ह्ह्हह्हह मैया बापू क्या कर रहे हो तुम कितना दर्द हो रहा है आराम से निकालो

हरिया- बेटी ये मुझसे नहीं निकलेगा तुहि निकाल ले

नीलम- है जब तुम कोशिश hi नहीं करोगे तो कैसे निकलेगा

मुझे नहीं पता बस निकालो

हरिया- पर बेटी इसे ज्यादा खींचने से तुझे दर्द होगा न

नीलम- अच्छा मैं आपको बताती हु कैसे निकलेगा पहले तो एक काम करो उठ कर बैठो

हरिया चुपचाप उठ कर बैठ जाता है

इधर नीलम साडी चीज़े पहले से hi सोच कर आयी थी

नीलम - अब एक काम करो अपने एक हाथ से मेरी पूरी चुकी पकड़ो

हरिया- क्या बेटी क्या बोलै तूने

नीलम- अरे बापू मैं तुम्हारी बेटी हु कितना शरमाओगे तुम मुझसे

मैंने बोलै की अपने एक हाथ से मेरी पूरी चुकी पकड़ो

अब सुन लिया न

हरिया- ः बेटी हां

हरिया की हालत तीते हो चुकी थी उसमे माथे पर पसीना साफ़ नजर आ रहा था

नीलम- तो पकड़ो न बापू अपनी बेटी की पूरी चुकी

हरिया बिचारा करता क्या न करता उसने धीरे से होनी गर्दन नुचे झुके और अपना एक हाथ उठा कर अपनी बेटी की एक चुकी पर रख दिया

हरिया के लिए यह अहसास पागल करने वाला था आज उसे पहली बार अंदाजा हुआ था की उसकी बेटी की चूचिया जितनी भरी और मोती है उससे कहि ज्यादा नरम भी है

हरिया का हाथ पड़ते hi नीलम के बदन में भी एक झटका लगता है

नीलम- अह्ह्ह बापू अब कहिको अपनी बेटी के निप्पल को

नीलम धीरे धीरे अपने बाप के सामने सीधा सीधा वर्ड्स का उसे कर रही थी जिसकी वजह से उसके बाप की हालत खराब हो रही थी

नीलम- बापू पहले इस वाले हाथ से चुकी अच्छी तरह पकड़ो खूब कास के नहीं तो तुम्हारी बेटी को फिरसे दर्द होगा

हरिया अब होनी बेटी का हर कहना मान रहा था

हरिया नीलम की चुकी को कास कर पकड़ लेता है

EXWXJNj-Uc-AAg-UYF.jpg


हरिया को आज ोेहली बार अंदाजा हुआ था की उसकी खुद की बेटी के चुके कितने बड़े है

हरिया के जानवर जैसे हाथो में भी नीलम के चुके नहीं समा रहे थे

नीलम - बापू अब कहिको इस मेरी निप्पल से

अपनी चुकी थोड़ी सी आगे बढ़ती हुई बोलती है

हरिया भी अपनी बेटी के हुकुम का पालन करते हुए

होने दूसरे हाथ को आगे बढ़ते हुए अपनी बेटी एक निप्पल को पूरी तरह से पकड़ लेता है

नीलम की निप्पल किसी काळा अंगूर के डेन के समान था जिसे छू कर एक hi पल में हरिया मस्त हो गया था

नीलम की नजर होने बापू के झटके कहते लुंड पर तिकी हुई थी पर वो उसे अभी पकड़ना नहीं छाती थी अभी उसका प्लान बाकि था

हरिया जैसे hi बलि को पकड़ कर खींचता है एक hi बार में बलि निकल जाती है और हरिया अपनी बेटी के निप्पल को देखने लगता है

जोकि बलि फसने की वजह से छोटे अकार को हो गया था और अब एक hi पल में उसका साइज किसी जामुन जितना हो गया था

हरिया हाथ हटाने hi वाला था की नीलम उसके हाथ को पकड़ कर अपनी चुकी को दुबारा सबोच देती है

हरिया- बेटी इसको भी तो निकाल देने दे

नीलम- बापू इतनी देर से बलि फसी हुई थी देखो न तुम्हारी बेटी का निप्पल कैसे सिकुड़ गया हसि इस खींच कर इसके असली साइज में तो कार्डो मैं अकेले कैसे करूंगी बापू

हरिया की तो मनो एक hi पल में लाटरी लग गयी थी

हरिया की आँखे पूरी लाल सुर्ख हो चुकी थी वो बिना कुछ बोले hi अपना हाथ आगे बढ़ता हुआ अपनी बेटी का एक निप्पल को होनी 2 उंगलियों से पकड़ते हुए बड़े प्यार से अपनी और खींचता है

नीलम- अह्ह्ह्ह बापूण shhhhhhhhhh

हरिया- क्या हुआ बेटी दर्द हो रहा है क्या

नीलम- नहीं बापूण बहुत अच्छा लग रहा है

इधर हरिया अंदर hi अंदर पागल हुआ जा रहा था

वो अपनी बेटी के निप्पल को ऐसे खींच रहा था मनो किसी काऊ का दूध निकाल रहा हो

करीब 5 मिंट तक ऐसे hi निप्पल को खींचने के बाद हरिया अपनी बेटी के दूसरे चुके के साथ भी ऐसे hi करता है

दोनों बबाप बेटी एकदम मस्त हो चुके थे

नीलम- अह्ह्ह बापू तुमने तो अपनी बेटी को इस दर्द से अज्जाद कर दिया पर अभी तुम्हारी इसकी मालिश तो बाकि है करवानी है न

नीलम अपने बापू का विशाल लुंड पकड़ती हुई बोलती है

हरिया अब पूरी तरह से अपनी बेटी के काबू में था

हरिया- है बेटी करदे मेरी मालिश बड़ा दर्द है पैरो में

नीलम- पैरो में दर्द है या कहि और बापू

हरिया बस आँखे बंद किये हुए लेता था और नीलम धीरे धीरे अपने बाप का लुंड मसल रही थी

नीलम अच्चानक से होना हाथ हटा लेती है

हरिया एकाएक आँखे खोल क्र होनी बेटी की और देखने लगता है

हरिया की आँखों से नीलम को साफ़ पता चल रहा था की उसका बाप उससे पूछ रहा है क्या हुआ??

नीलम- बापू अभी तुमको तुम्हारी बेटी का एक काम और करना है

हरिया- कोँणन सा कामम बेटीई

हरियाकि सांसे उखड रही थी

नीलम को होने बापू की हालत और भी ज्यादा तीते करने में मजा आ रहा था

नीलम होने एक हाथ से वेसलिने की डब्बी अपने बापू की और बढ़ती है

डब्बी देखते hi हरिया की आँखों में चमक आ जाती है

जैसे उसे पहले hi पता चल गया हो की अब जसकी बेटी उससे क्या करवाना कहती है

नीलम भी समझ रही थी की अब उसका बाप उसकी जवानी के पुरे मजे लेने के लिए तैयार है पर अभी वो अपने बापू को और भी उकसाना कहती थी

नीलम- अरे बापू खा खो गए

हरिया- है है बेटी बोल तू क्या बोल रही थी

नीलम- बापू वो क्या है न मैंने ये क्रीम लगाने के लिए तरय किया था पर नहीं लगा पायी

हरिया- तो तुझे वह अभी भी खुजली हो रही है क्या बेटी

हरिया ने तो जैसे अपनी बेटी की मुँह की बात चीन ली थी

नीलम- है बापू बहुत खुजली हो रही है आप ये क्रीम लगा दो न

नीलम की बात सुनते हु हरिया का लुंड एक झटका मरता है और उसके मुँह में पानी आने लगता है

हरिया- पर बेटी मैं कैसे मतलब मैं बाप हु तेरा मैं कैसे लगाऊंगा वह पर ये क्रीम

नीलम- बापू अब घर में और कोई तो है नहीं आओ बोलो तो मैं 2 दिन बाद राजू से लगवा लुंगी बोलो

हरिया- अरे नहीं नहीं बेटी ऐसा मत करना रुक मैं hi लगा देता हु

हरिया की आँखों में एक चमक थी आखिर में उसे वो खजाना मिलने वाला था जिसके लिए वो बरसो से तड़प रहा था

और वो अपनी बेटी की छूट देखना कहता था

हरिया उठने hi वाला था की नीलम उसे वलास से चौकी पर धक्का देदेती है

नीलम - रुको बापू टाइम ज्यादा हो गया है मेरे पास एक तरीका है जिससे तुम्हारे मुसल की मालिश भी हो जाएगी और मेरे उस छेद पर क्रीम भी लग जाएगी

हरजय जनता था की उसकी बेटी इस खेल में उसकी उस्ताद है वो दुबारा से लेत जाता है उसका लुंड सीधा हवा में लहरा रहा था

नीलम एक नजर अपने बापू की आँखों में डालती है और जैसे hi दोनों की नजरे मिलती है नीलम एक पल ने hi अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है और एक hi पल में वो अपने बापू के सामने बिलकुल नंगी हो जाती है

होनी बेटी का गदराया जिस्म देख कर हरिया किसी पागल कुत्ते की तरह हाफ रहा था

Echjyw7-Xk-AA7gtk.jpg


हरिया एक नजर अपनी बेटी को ऊपर से निचे तक देखता है और उसकी नजर अपनी बेटी की छूट ओर उगे हुए हल्के हल्के बालो पर टिक जाती है

नीलम से और इन्तजार नहीं हो रहा था

नीलम चुपचाप आगे बढ़ती है और लालटेन को उठा कर कल की तरह हरिया के सर के पास रख देती है

हरिया ान समझ गया था की क्या होने वाला है उसके दिल में एक उत्सुकता थी की आखिर उसकी बेटी की छूट देखने में कैसी होगी जिसे उसने अपने hi खून से ोैदा किया है उसकी छूट देखने के लिए हरिया तड़प रहा था

इधर नीलम अपने बाप के सामने पुरे रान्दीपने पर उतर आयी थी

नीलम अपना एक पेअर उठती हुई अपने बाप के छाती के ऊपर से दूसरी और कर देती है और एक hi पल में अपने बाप के ऊपर 69 की पोजीशन में आजाती है

हरिया का दिमाग अबतक काम करना बंद कर चूका था वो आँखे फाड़ फाड़ कर अपनी बेटी की छूट और गांड देख रहा था

आज उसे उसकी बेटी दुनिआ की सांसे खूबसूरत गदराई औरत नजर आए रही थी

20201025-014038.jpg


नीलम की छूट करीब बीतते भर थी उसकी छूट के दोनों होठ आपस में जुड़े हुए थे

हरिया बस देखे hi जा रहा था

नीलम- क्या हुआ बापू खो गए क्या तुम भी इस छेद में

जल्दी लगाओ न क्रीम होनी बेटी के पिछवाड़े में

हरिया - क्या क्या बेटी क्या बोल

हरिया का ध्यान अब तक उन्दोनो छेड़ो पर hi था

नीलम- अरे बापू देखने में hi खो जाओगे जल्दी लगाओ बड़ी खुजली हो रही है इसके अंदर

नीलम अपने दोनों हाथो से अपनी गांड को फैलते हुए बोलती है

हरिया की नजर एक पल के लिए उसकी बेटी की गांड के खुलते हुए छेद पर टिक जाती है

IMG-8122.jpg


नीलम बापू अब लगाओ भी

हरिया वेसलिने की डब्बी खोलते हुए अपने हाथ में लेता है और अपने एक ऊँगली को आगे बढ़ता हुआ पानी बेटी की गांड के छेद पर रख देता है

नीलम हरिया का हाथ महसूस करते hi तड़प जाती है

नीलम- अह्हह्ह्ह्ह

हरिया- क्या हुआ बेटी

हरिया के हाथ काँप रहे थे

नीलम- अहजहह कुछ नहीं बापू बस इस वक़्त खुजली थोड़ी ज्यादा हो रही है

हरिया- रुक मैं ये क्रीम लगा देता हुआ वह पर

हरिया के अंदर अब तक थोड़ी हिमायत आ चुकी थी

हरिया बिना वक़्त गवाए अपनी ऊँगली को नीलम की गांड के छेद को सहलाने लगता है

नीलम भी देर न करते हुए एकदम से हरिया का लुंड पकड़ लेती है

हरिया- अह्ह्ह्हह ृक्क जा बेटीईई

नीलम अपने बापू के लुंड को ऊपर से निचे की तरफ खींचती है इस हरकत से हरिया तड़प उठता है

हरिया- अह्ह्ह बेटी तेरे हठः

नीलम- बापू तुम वह ध्यान दो इसे मेरे ऊपर छोड़ दो

और ऊँगली को थोड़ा सा अंदर दाल कर क्रीम लगानी पड़ेगी नहीं तो ऐसे hi खुजली बढ़ती रहेगी

हरिया अपनी बेटी का इशारा समझ गया था वो धीरे से अपनी ऊँगली सरकता हुआ आधी ऊँगली होनी बेटी की गांड में पेल देता है

.

नीलम- अह्ह्ह बापू कितना मोती है

हरिया- क्या मोती है बेटी

नीलम- तुम्हारी ऊँगली बापू

हरिया के ुवार अब कमीना पैन हावी हो चूका था वो होनी ऊँगली को बिना नीलम की इजाजत के hi अंदर बहार कर रहा था

Ev-KGd8-MXEAEQj-NP-jpeg.jpg




नीलम- अह्ह्ह बापू और अंदर डालो अंदर तक खुजली हो रही है

इस बार नीलम थोड़ा सा निचे सरकती हुई अपने बाप के मुँह के और करीब करदेती है अलनी छूट को

नीलम की छूट से बेहटा हुआ अमृत उसके बापू की छाती पर गिर रहा था

हरिया का मन तो बहुत कर रहा था की अभी लपक कर अपनी बेटी की छूट को अपने मुँह में भर ले

पर उसे अभी भी कुछ दर था आखिर बाप था वो नीलम का

नीलम अबतक पूरी मस्ती में आ चुकी थी

नीलम- अह्ह्ह बापू एक काम करो 2 ऊँगली दाल कर क्रीम लगाओ

हरिया आज्ञा का पकं करते हुए अपनी 2 उंगलियों पर वेसलिने लगता है और एक हिल पल में उसे अपनी बेटी की गांड में सरका देता है

नीलम इस हमले से तड़प कर रह जाती है

नीलम- अह्ह्ह बापू अब अंदर तक लगाक इसे मेरी गांड के अह्हह्ह्ह्ह

हरिया भी काम नहीं था उसने एक hi बार में अपनी दोनों उंगलिया पूरी की पूरी नीलम की गांड में पेल दी

नीलम दर्द के मरे थोड़ा आगे को झुक गयी हरिया ने तुरंत hi अपने एक हाथ अपनी बेटी की मांसल गांड पर टिका कर उसे गिरने से बचा लिए

हरिया- क्या हुआ बेटी

नीलम- कुछ नहीं बापू बस ऐसे hi करो

इतना बोलते हुए नीलम थोड़ा और पीछे सरक जाती है

अब हाल ये थे की नीलम के मुँह के ठीक निचे उसके बाप का लुंड लहरा रहा था और इधर नीलम की छूट हरिया के मुँह के इतनी करीब थी की अपनी बेटी की छूट से उठती हल्की मादक महक सीधा उसकी नाक में घुस रही थी

हरिया पागल हुआ जा रहा था

इधर नीलम अपने बाप को पागल बनाने में कोई कसार नहीं छोड़ना कहती थी

नीलम होनी गर्दन को उठती हुई अपने मुँह से बहुत सारा थूक अपने बापू के लुंड ओर गिराने लगती है

penis-35.webp


upload images[/URL]

नीलम लगातार अपने बापू को मस्त किये जा रही थी अच्चानक से नीलम के हाथ बड़े hi मुलायम तरिके उसे उसके बाल के लुंड के ऊपर चलने लगते है

हरिया एक दम मस्त हो जाता है उसका लुंड झटके मार रहा था नीलम भी समझ चुकी थी की बहुत देर हो गयी है अब उसका बापू झड़ने वाला है अब समय था नीलम के अगले वार का

नीलम थोड़ा सा पीछे सरकते हुए अपनी कमर को थोड़ा उठती हज और सीधा होने बापू के नूह के ऊपर होनी छूट हवा में लटका देती है

अब हरिया के मुँह के ठीक ऊपर उसकी बेटी की छूट थी वो पागल हुआ जा रहा था उस छूट को चूसने के लिए

नीलम - बापू मेरे न निचे वाले छेद में भी बहुत खुजली होती है आप इसमें भी लगा दो न ये क्रीम

हरिया तो जैसे ोेहले से hi टीएयर बैठा था

हरिया बिना देर किये अपनी ऊँगली को गांड से निकलता हुआ

सीधा अपनी बेटी की छूट पर रख देता है

और धीरे से अपनी ऊँगली अंदर सरका देता है

नीलम की छूट को पहली बार किसी मर्द ने चुवा था और वो मर्द खुद उसका बाप hi था

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू आराम seahhhhhhhhhh

हरिया जनता था की नीलम अब तक ुंचुड़ी है आखिर उसको hi अपनी बेटी की नाथ उतरने का अधिकार मिलने वाला था

पर अब तक कुवारी होने के बावजूद भी नीलम की छूट बहुत सारा लानी छोड़ रही थी जो निकजे सीधा उसके बाप के होठो पर टपक रहा था

हरिया भी अब तक अपना मुँह खोल चूका था और उसकी बेटी की छूट से टपकता हुआ पानी सीधा अब उसके मुँह में जा रहा था

हरिया लगातार होनी ऊँगली को नीलम की छूट में अंदर बहार किये जा रहा था

हरिया को उसकी बेटी की छूट का पानी किसी अमृतत से काम नहीं लग्ग रहा था

नीलम भी तड़प तो बहुत रही थी और वो बोलना भी बहुत कुछ कहती थी पर वो अपना बनता हुआ काम बिगड़ना नहीं छाती थी

आखिर कार नीलम पहली बार अपने बाप के मुँह के ऊपर hi झड़ने लगती है उसकी छूट से निकलता हुआ सफेद ोानी सारा का सारा हरिया के मुँह के ऊपर और अंदर जा रहा था

नीलम झड़ने के समय अपनी गर्दन नुचे झुका देती है और हरिया का लुंड सीधा उसके गलो पर चिपक जाता है

[URL=']
th-16.jpg


अपनी बेटी की छूट से निकला अमृत साख कर हरिया के लुंड का ज्वालामुखी भी फाटत जाता है और झटके मरता हुआ हरिया सारा माल नीलम के गलो और मुँह पर गिरा देता है

नीलम हाफति हुई अच्चानक से हरिया के ऊपर गिर जाती है

और एक पल में hi उसकी बेटी की रसीली छूट उसके मुँह पर आ जाती है

हरिया बिना वक़्त गवाए होनी जीभ को अपनी बेटी की छूट में घुसा देता है

नीलम को जैसे hi अहसास होता है की उसके बापू की जीभ उसकी छूट पर है वो एकदम से खड़ी हो जाती है

नीलम अभी हरिया को और तड़पना कहती रही

हरिया एक पल के लिए hi सही पर अपनी बेटी की छूट का स्वाद पाकर मस्त हो जाता है

हरिया को समझ नहीं आ रहा था की आखिर उसकी बेटी उसके ुवार से क्यों उठी जबकि वो भी यही कहती है

खैर हरिया अपने मुँह से तो कुस्ज बोल नहीं सकता था

नीलम जोरजोर से हस्ते हुए होना पेटीकोट पेहेन लेती है

हरिया- क्या हुआ नेति हस्स क्यों रही है

नीलम- अरे बापू आप तो मेरी मुनिया से निकली हुई साडी मलाई पी गए ये देखो अभी आपके होठ पर भी लगी है

नीलम अपनी ऊँगली से अपने बापू के मुँह पर लगा सफ़ेद पानी उठती है और फिर उस ऊँगली को हरिया के मुँह के करीब ले जाती है

हरिया जैसे होनी बेटी का इशारा समझ गया था उसने बिना देर किये अपना मुँह खोल दिया. और नीलम ने अपनी ऊँगली ालने बापू के मुँह में घुसा दी

हरजय नीलम की नजरो में देखते हुए उसकी ऊँगली चूस रहा था

करीब 5 मिंट बाद नीलम अपनी ऊँगली निकाल लेती है

हरिया- बेटी तेरे मुँह पर तो सारा ....

नीलम - क्या बापू क्या मेरे मुँह पर

IMG-20200619-123933.jpg


नीलम इतना बोलते हुए अपने हाथ को अपने मुँह पर फिरते हुए

होने मुँह के सामने लती है और बड़े hi कामुक अंदाज में होनी जीभ निकाल कर पूरा हाथ चाट जाती है

नीलम की ये हरकत हरिया मुँह खोले देखता रह जाता हाउ

नीलम- अरे अब सो जाओ बापू बहुत बिगड़ गए हो तुम होनी बेटी की छूट का सारा पानी पी गए

इतना बोलकर नीलम कमरे के बहार निकल जाती है

इधर हरिया नीलम के सब्द सुन कर जैसे कोमा में चला ज्ञाता

आज पहली बार नीलम ने छूट शब्द का जिक्र किया था

हरिया की आँखों से नींद कोशो दूर थी उसे अब अलनी बेटी चाहिए थी पूरी तरह से

किसी तरह हरिया होने आपको समझा ोाता है और करवट बदल कर सो जाता है ...........
 
अपडेट-53

दोनों बाप बेटी ने रात में जो करम काण्ड किये थे उसकी वजह से आज दोनों थके हुए थे

खैर नीलम अपने बापू से पहले उठ जाती है

नीलम उठ के सीधा अपने बापू की झोपडी की और जाती है

इधर हरिया घोड़े बेच कर सोया हुआ था

नीलम को उसके बापू के चेहरे पर एक सुकून दिख रहा था

और वो जानती थी की उसका बाप को चीज़ मिल चुकी है जिस के लिए वो इतने स्ममय से तड़प रहा था

खैर नीलम हरिया पर एक नजर दाल कर अपना लोटा उठती हुई सनदास करने चली जाती है

इधर हरिया को आज दिन दुनिया की कोई फ़िक्र नहीं थी

नीलम अब तक संडास करके नहा भी चुकी थी पर आज हरिया तो उठने का नाम hi नहीं ले रहा था

नीलम को भी थोड़ा अजीब कगता हसि की आज उसका बापू काफी देर तक सोया हुआ है

नीलम तेजी से चलते हुए हरिया की झोपडी में पहुचती है

हरिया अभी अभी सो कर उठा था वो अभी उठ कर बैठा hi था की इतनी देर में नीलम झोपडी के अंदर घुसती है

नीलम- क्या बात है बापू आजसे पहले तो कभी तुम इतनी देर तक नहीं सोये

हरिया कुछ नहीं बोलता बस नीलम को देख कर एक स्माइल कर देता है

नीलम उस स्माइल का मतलब बखूबी जानती थी

नीलम- बापू लगता है आज ककुछ ज्यादा hi खुश हो तुम

हरिया- है अब मेरी बेटी इतनी सेवा जो करती है तो खुश तो रहना hi पड़ेगा न

नीलम- बापू कौनसी सेवा की बात कर रहे हो जो मैंने की थी या जो तुमने की थी

नीलम की बात सुनकर हरिया की आँखों के समाने अपनी बेटी की बड़ी बड़ी फको वाली छूट आ जाती है

हरिया- बेटी सेवा तो बस तुहि करती है तू होने बाप को सेवा का मौका खा देती है

नीलम- अच्छा तो अब मेरे बापू को अपनी बेटी की सेवा भी करनी है

हरिया- अब तू इतनी सेवा करती है अपने बुड्ढे बापू की तो मुझे भी तो करनी पड़ेगी न

नीलम- अच्छा अगर मैं अपने बुड्ढे की सेवा करूंगी तो मेरे बापू भी अपनी इस गदराई बेटी की सेवा करेंगे

हरिया के मुँह में अबतक पानी आ चूका था

होनी बेटी की गदराई जवानी को देख कर अब हरिया का मन कर रहा था की अभी लपक कर अपनी बेटी को पकड़ कर पूरा निचोड़ दे

नीलम ने एक ब्लाउज और पेटीकोट पेहेन रखा था उसने होने ब्लाउज के ऊपर के 1-2 बोटों भी खोल रकाहे थे

Mallu-fat-aunty-hot-photos-in-saree-4.jpg


नीलम - बापू अगर तुमको तुम्हारी इस गदराई हुई बेटी की सेवा करनी है तो मेरे पीछे पीछे आओ

नीलम इतना बोलकर घर की और जाने लगती है

और हरिया किसी भूखे कुत्ते की तरह होनी बेटी के पीछे पीछे दम हिलता हुआ जाने लगता है

दोनों बाप बेटी घर में पहुंच जाते है

हरिया के अंदर आज एक उत्तेजना थी आज वो भी अपनी बेटी से सीधे सीधे बात कर रहा था

नीलम- बापू बताओ पहले खाना खाओगे या अपनी इस गदराई बेटी की सेवा करोगे

नीलम बार बार गदराई बेटी बोलकर हरिया का दिमाग खराब कर रही थी जिसकी वजह से हरिया और भी ज्यादा जोश में आ गया था

हरिया- मुझे ोेहले अपनी बेटी की सेवा करनी है

नीलम- बड़े उतावले हो बापू अपनी बेटी की सेवा करने के लिए

हरिया- तू तो रोज करती है न अपने बापू की सेवा आज मुझे भी करनी है अपनी बेटी की सेवा

नीलम- सोच लो बापू एक बार सेवा शुरू करोगे तो ख़तम कर के hi बहार जाना

हरिया- मेने सोच लिया है मेरी बच्ची

नीलम- तो ठीक है ऐसा करो पहले तो दरवाजा बंद कार्डो

मैं नहीं छाती की कोई भी हमे परेशान करे सेवा ख़तम होने तक

दरवाजा बंद करने की बात से हरिया का चेहरा चमक उठता है

हरिया तेजी से बढ़ता हुआ दरवाजा बंद करदेता है

इधर नीलम भी अपने पुरे जोश में आ चुकी थी

वो अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है और उसका पेटीकोट ेल hi झटके में निचे गिर जाता है

और उसके बाद अपना ब्लाउज भी उतर देती है

नीलम भी जानती थी की अब उसका बापू अपनी बेटी को पूरी तरह से पाने के लिए पागल हुआ जा रहा है

हरिया जैसे hi दरवाजा बंद करके घूमता है उसकी नजर सीधा अपनी बेटी की छूट पर पड़ती है

870-1000-2.jpg




नीलम होने दोनों पैरो को कमर से उठती हुई अपने हाथो से अच्छे से पकड़ रखी थी

अब आलम ुए था की उसकी फूली हुई छूट खुल के उसके बाप की आँखों के सामने थी

नीलम पूरी तरह से नंगी लेती हुई थी

हरिया की आँखों में अब उसकी बेटी के प्रति हवस साफ़ नजर आ रही थी

हरिया की शकल देखने लायक थी उसकी धोती में एक विशाल तम्बू बना हुआ था

नीलम- क्या हुआ बापू सेवा नहीं करोगे अपनी बेटी की

हरिया नीलम की बात संकट धीरे धीरे अपनी बेटी की और बढ़ने लगता है

नीलम चुप चाप होने बापू को अपनी और बढ़ता देख रही थी

नीलम- बापू तुम्हारा इतना मन करता है क्या अपनी बेटी की सेवा करने का

हरिया- है बेटी बहुत मन करता है की मैं तेरी सेवा कृ और तुझे पटक .....

इतना बोलकर हरिया चुप हो जाता है अब उसकी हवस उसके ऊपर हावी होने लगी थी

हरिया की आधी अधूरी बात सुनकर नीलम भी हसने लगती है

अरे बापू. तुमको जैसे सेवा करनी है करो समझे

हरिया अबतक ज़मीन पर किसी कुत्ते की तरह बैठ गया था और अपनी आँखों को नीलम की छूट के पास लेजाकर बड़े hi गौर से अपनी बेटी की छूट देख रहा था

नीलम भी काम नहीं थी वो मौके का फायदा उठाते हुए अपना एक हाथ आगे लेकर होनी 2 उंगलियों से अपनी छूट की दोनों फेक फिआला देती है

20201225-104638.jpg


नीलम की छूट भले hi उसकी तरह hi काली थी पर उसके अंदर का गुलाबी छेद देख कर हरिया के मुँह में पानी आ जाता है

हरिआय अपने एक ऊँगली आगे बढ़ता हुआ सीधा अपनी बेटी की छूट के डेन पर रख देता है

नीलम अपने बापू की इस हरकत से अंदर तक सेहम जाती है

उसका शरीर एक झटका लेता है

पर नीलम जानती थी की ये तो बस एक शुरुवात भर है आगे आने वाली तबाही की कोई कल्पना भी नहीं क्र सकता था

हरिआय अपनी ऊँगली से नीलम की छूट का दाना लगातार कुरेद रहा था

जिसका परिणाम ये हुआ की नीलम की छूट ने अब तक पानी छोड़ना शुरू कर दिया था

IMG-20200521-WA0059.jpg


इधर अपनी बेटी की छूट से पानी निकलता देख हरिया के मुँह में पानी आ चूका था उसका मन कर रहा था की अभी अपनी बेटी की छूट चूस ले पर न जाने अभी भी हरिया के अंदर बाप वाला एक हिस्सा बचा हुआ था

नीलम अच्चानक से अपने हाथ से हरिया का हाथ पकड़ कर अपनी छूट से हटा देती है

पर वो अपनी टैंगो को अभी तक वैसे hi खोले हुए थी

हरिया भी समझ रहा था की उसकी बेटी किस तरह उसे तड़पा रही है

हरिया 1 सेकंड के अंदर hi अपना हाथ दुबारा से नीलम की छूट पर रकः देता है

नीलम होने बापू की हरकत से बस लेती लेती तड़प रही थी िडजर हरिया पानी बेटी की छूट को अच्छे से सेहला कर उसका पानी निचोड़ने में लगा हुआ था

नीलम- अह्ह्ह्हह मा बापू क्या कर रहे हो मेरी छूट में कुछ हो रहा है

हरिया- अह्ह्ह बेटी कितना पानी छोड़ती है तू होने इस छेद से

नीलम- बापू आज पता नहीं क्यों तिम्हारे हाथ लगाने से hi पानी आ रहा है

बापू ऐसा क्यों हो रहा है जब तुम मेरी छूट छू रहे हो तो म पानी पानी हुई जा रही हु

हरिया जनता था की अब उसकी बेटी उसका चुटिया काट रही है

पर हरिया भी अपने जमाने का एक नंबर छोड़ू था

अब उसे भी बाप बेटी के इस खेल में मजा आने लगा था

हरिया- बेटी तुझे पता है इस छेद से मतलब तेरी छूट से इतना पानी क्यों निकल रहा है

नीलम- नहीं बापू क्यों निकल रहा है बताओ न

हरिया- बेटी अब तू पूरी तरह से गडरा गयी है और तेरी जवानी अपने चरम पर आ चुकी है

नीलम- तो बापू जब लड़की गदरा जाती है तो उसकी छूट ऐसे ऐसे hi पानी छोड़ती है क्या

हरिया- है बेटी पर तेरी छूट तो कुछ ज्यादा hi पानी छोड़ रही है

नीलम- ऐसा क्यों है बापू की तुम्हारी बेटी की छूट औरो से ज्यादा पानी छोड़ती है

हरिया- क्योंकि मेरी बेटी के अंदर औरो से कहि ज्यादा काम वासना है

हरिया एक पल के लिए सोचता है की वो गलत बोल गया ओर अब पीछे हटने का तो सवाल hi नहीं था

हरिया इस बार छूट सहलाता हुआ पानी बिच वाली ऊँगली को नीलम की छूट में सरका देता है

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू क्या दाल दिया तुमने मेरी छूट मी अह्ह्ह्ह बापू रुकजावूओ

रुकना तो कोई नहीं छठा था बस दिखावे के लिए नीलम ऐसा बोल रही थी

अब तक हरिया अपनी ऊँगली को अंदर बहार करना चालू कर चूका था

tumblr-o4mlyzv-Vf-P1uk4ctbo1-500.gif


नीलम- आह्ह्ह्ह बापू बहुत अच्छा लग रहा है ऐसे hi करते रो

तुमने बोलै था की तुम्हारी बेटी के अंदर औरो से कहि ज्यादा कामवासना है

बापू ये कामवासना क्या होती है

बाप बेटी दोनों की आँखे पूरी तरह लाल हो चुकी थी

हरिया का हाथ उसकी बेटी की छूट से बहते अमृत से पूरी तरह भीग चूका था

हरिया- बेटी जब तेरे कोई लड़की तेरे जैसी गदराई औरत बन जाती है तो उसके अंदर एक वासना होती है और अगर उसे समय रहते शांत नहीं किया जाये तो

हरिया को खुद समझ नहीं आ रहा था की वो क्या बोल रहा है बस वो नीलम की छूट में ऊँगली करते करते बोले जा रहा था

नीलम को अब अपने बापू की बाटे और भी ज्यादा पानी छोड़ने पर मजबूर कर रही थी

नीलम- बापू बोलो न रुक क्यों गए अगर समय रहते इलाज न किया जाये तो क्या होता है

हरिया- बेटी आदमी पूरी तरह से पागल हो जाता हज अगर तू इसकी जरूरत पूरी नहीं करेगी तो ये तेरा जीना मुश्किल कर देगी

नीलम - पर बापू मुझे तो पता hi नहीं की इस छूट की क्या जरूरत है तो मैं क्या कृ मैं तो पागल हो जाउंगी

अआप्को पता है क्या बापू की आपकी बेटी की छूट की क्या जरूरत है

नीलम की बात सुनकर हरिया के होठो पर एक मुस्कान आ जाती है

हरिया- है बेटी तेरे इस बुड्ढे बाप को सब पता है

मुझे पता है की मेरी बेटी की इस पानी छोड़ती छूट की क्या जरूरत है

नीलम- अह्ह्ह्हह बापू तो तुम अपनी बेटी की इस पानी छोड़ती छूट की जरूरत पूरी करोगे न

नीलम की बात सुनकर हरिया चुप रहता है पर उसके चेहरे की मुस्कान नीलम को सब बता चुकी थी

नीलम- बोलो न बापू तुम होनी बेटी की इस छूट की जरूरत ौरी करोगे न बापू बोलो

हरिया - है बेटी मैं अपनी प्यारी बेटी की इस पानी छोड़ती छूट की साडी जरूरते पूरी करूंगा

नीलम को अब यकीन हो चूका था की उसका बाप उसके बनाये जाल में पूरी तरह से फास चूका है

नीलम - अह्ह्ह्ह बापू मुझे लग रहा है की मेरी छूट से कुछ नहर निकलने वाला है बापू बहुत मजा आ रहा है

हरिया- बेटी अब तेरी इस छूट से अमृत निकलने वाला है

नीलम- बापू इस छूट से भी अमृत निकलता है क्या

हरिया- है बेटी ये अमृत दुनिया में सबसे स्वादिस्ट अमृत है

नीलम- तो क्या बापू इस अमृत को पिटे भी है

हरिया- है बेटी इसको पिने के लिए हर मर्द पागल रहता है

नीलम- तो क्या तुम भी अपनी बेटी की छूट से निकलने वाला अमृत पिने के लिए पागल हो बापू

हरिया- बेटी तेरी छूट hi ऐसी है की कोई भी आदमी इसके अंदर का पानी ोिने के लिए पागल हो जायेगा

नीलम का बदन अकडने लगा था

िडजर हरिया आज कुछ ज्यादा hi बछोड़ि कर रहा था

नीलम - बापू तुम्हारी बेटी की छूट से अब अमृत बहार आने वाला है आह्ह्ह्ह माआईईई

हरिया अपनी बेटी की बात सुनते hi अपना मुँह सीधा नीलम की छूट पर टिका देता है

हरिया अपनी जीभ सीधा अपनी बेटी के गुलाबी छेद में घुसा देता है

नीलम इस हमले से ौरी तरह तड़प जाती है

नीलम- अह्ह्ह बापू कितना मजा आ रहा है आह्हः बापू और अंदर डालो अपनी जीभह

pussy-eating-fuck-blonde.gif


हरिया पागलो की तरह अपनी बेटी की छूट चूस रहा था

अपने बाप की हवस देख कर नीलम भी पागल हो चुकी थी

वो अपने दोनों हाथो से हरिया का सर पकड़ कर अपनी छूट ओर दबा देती है

हरिया लागबहग 5 मं तक छूट को चुस्त रहता है

और नीलम झटके कहते हुए होने बाप के मुँह में hi झड़ने लगती है

करीब 10 मं तक हरिया नीलम की छूट को चाट चाट कर पूरा साफ़ कर देता है पर वो पाना मुँह हटाने के लिए राज़ी नहीं था आज जैसे वो पानी बेटी की छूट में घुस जाना कहता था

नीलम एक बार होने बापू का सर पकड़ कर होनी छूट से हटती है पर हरिया ओर हवस इतनी भरी हो चुकी थी की वो नीलम का हाथ झटक देता है और दुबारा से अपनी बेटी की छूट चाटने लगता है

अपने बापू का प्यार करने का तरीका देख कर नीलम पागल हुई जा रही थी

इस बार नीलम अपने एक पेअर को उठा कर सीधा हरिया के कंधे पर रखती है और एक जोरदार झटका से हरिया को पीछे की और धकेल देती है

इस बार हिरया लीची की और गिर जाता है पर नीलम अपने दोनों पैरो को ऐसे hi फैलाये रहती है

हरिया दुबारा से उठ कर अपनी पोजीशन में आता है और किसी कुत्ते की तरह अपने घुटनो पर चलता हुआ नीलम के करीब जाने लगता है

नीलम इस बार एक कदम एयर आगे बढ़ना कहती थी

वो अपना पेअर सीधा करते हुए हरिया के खड़े पर टिका देती है और अपने बाप को अपनी छूट के पास आने से रोकती है

नीलम ने भले hi हेइया को अपने पैरो से रोक रखा था पर उसकी आँखों में एक न्योता था जो हरिया को अपनी छूट के पास बुला रहा था

हरिया भी अब साडी जड़े पार करने को तैयार था

हरिया अपनी बेटी के पेअर के पंजो को पकड़ता हुआ होने मुँह के ऊपर ले आता है और बड़े hi प्यार से नीलम के पेअर के अंगूठे को अपने मुँह में भर लेता है

नीलम को अपने बापू की इस हरकत का अंदाजा नहीं था वो अपने बापू को hi देख रही थी तभी दरवाहे पर एक दस्तक होती है

दोनों बाओ बेटी का ध्यान एकदम से दरवाजे की और जाता है

दोनों एक दूसरे की शकल देख रहे थे और आँखों hi आँखों में एक दूसरे से पूछ रहे थे की इस वक़्त कौन हो सकता है

नीलम- अरे बापू आज तो संडे है आज राजू आने वाला है भूल कैसे गए हम लोग

हरिया को भी 1 hi मिनट में अंदाजा हो जाता है की बहार कोई और नहीं बल्कि उसका बीटा खड़ा है

हरिया के चेहरे ओर दर साफ़ दिख रहा था

नीलम जल्दी जल्दी अपना पेटीकोट और ब्लाउज पहनती है

हरिया- बेटी अगर उसने हमे एक साथ देखा तो क्या सोचेगा बेटी अगर उसे पता लग गया तो

नीलम- अरे बापू जब इतना कुछ कर लिया तो दर क्यों रहे हो अपनी बेटी ओर भरोषा रखो और पहले इसको बैठाओ

नीलम हरिया के लुंड को और इशारा करते हुए कहती है

हरिया की दर के मरे गांड फैट चुकी थी

हरिया- बेटी कैसे भी करके तू संभाल ले मुझे तो समझ नहीं आ रहा की क्या कृ

नीलम- बापू एक काम करो जल्दी से खत पर लेत जाओ

हरिया नीलम की बात सुनते hi खत पर लेट जाता है नीलम उसके ऊपर थोड़ा सा पानी छिड़क देती है

नीलम- बापू तुम कुछ मत बोलना बस सोने का नाटक करना ठीक है न बाकि सब तुम्हारी. ये गदराई बेटी संभाल लेगी

नीलम की बात सुनकर हरिया के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

नीलम- अब डाट मत फेडो सो जाओ चुपचाप

हरिया अपनी आँखे बंद कर लेता है इधर नीलम भी दरवाजे की और बढ़ती है

जैसे hi नीलम दरवाजा खोलती है सामने राजू खड़ा था

नीलम लपक कर अपने भाई को अपने गले लगा लेती है

नीलम- आ गया मेरा प्यारा भाई तुझे पता है तेरी दीदी को तेरी कितनी याद आयी

इतना बोलकर नीलम होनी चूचियों को राजू की छाती में धसने लगती है

राजू भी काम हरामी नहीं था उसे तो बस बहाना चाहिए था अपनी दीदी से चिपकने का

राजू होने हाथो को नीलम की नंगी कमर पर घूमता हुआ उसे होने से और भी जोरसे चिपका लेता है

नीलम - बड़ा प्यार आ रहा है आज तुझे अपनी दीदी पर

राजू- दीदी अब क्या बताऊ तुमको देखे हुए 1 हफ्ता हो गया है पर ऐसे लगता है जैसे मैं तुमसे बरसो बाद मिल रहा हु

नीलम- अरे है है ठीक है तू आज तो यही रहेगा न कर लेना अपनी दीदी से जी भर के प्यार पर पहले बापू की दवाई ले आ देख कल रात से hi इनकी तबियत खराब है इस लिए मैंने इन्हे घर में hi सुला लिया रात को

राजू- है दीदी ये तो सही किया तुमने की बापू को घर में hi सुला लिया कहि ज्यादा तबियत बिगड़ जाती तो झोपडी से यह तक आवाज भी नहीं आती

नीलम - है और मौसम भी खराब था न

राजू- चलो दीदी तुम भी चलो कुछ खाने का भी लेकर आएंगे

नीलम का मन तो होने बापू के साथ और मस्ती करने का था पर वो राजू को भी मना नहीं करना कहती थी

आखिर वो उसका अगला शिकार जो बनाने वाला था

नीलम- बापू मैं राजू के साथ बाजार से आती हु

इतना बोलकर दोनों भाई बेहेन बाजार की और निकल जाते है

और इधर हरिया एक चैन की सनस लेता है

और सोचता है की उसकी बेटी कितनी शातिर दिमाग है .......
 
अपडेट-54

राजू और नीलम दोनों गाओं से दवाई और कीच खाने पिने का समान लेकर घर की और आ ेहे थे

राजू नीलम के पीछे पीछे चल रहा था आज उसका ध्यान उसकी दीदी की बड़ी सी गांड पर hi था

इधर नीलम भी भाप गयी थी की उसका भाई क्या देख रहा है

नीलम- तब राजू तेरी नौकरी कैसी चल रही है

राजू- दीदी मुझे अब यही पास में hi भेज दिया ह मालिक ने बगल वाले गाओं में भी उनकी ब्रांच है तो अबसे तो और मजा आएगा

नीलम- मतलब अबसे तू रोज घर पे hi रहेगा

राजू- है दीदी कोई दिखात है क्या

नीलम बात को संभालते हुए बोलती है

नीलम- अरे मुझे कैसी दिखात होगी मेरा भेज मेरे पास रहेगा तो इससे अच्छा तो और कुछ नहीं

नीलम( चलो अच्छा hi है अब मेरे दोनों छेड़ो के लिए 1-1 लुंड का जुगाड़ हो गया

राजू को मेरी गांड पसंद है तो गांड उसकी

और बापू तो होनी बेटी की छूट के दीवाने है तो छूट उनकी )

नीलम आगे आगे चलती हुई अपना प्लान बना रही थी और उसके चेहरे पर एक हसि थी

वो जानती थी की अगर राजू घर में hi रहेगा तो उसके बापू और उसका मिलान नहीं हो पायेगा इसलिए अब उसे राजू को भी इस खेल में शामिल करना होगा

राजू अपनी दीदी की मटकती हुई गांड को देख कर उसके पीछे पीछे चल रहा था

राजू( दीदी 1 hi हफ्ता हुआ है तुमसे दूर गए हुए पर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की तुम्हारी ये गांड पहले से भी ज्यादा फूल गयी है

कमाल की औरत हो दीदी तुम बस एक बार मिल जाओ तो निचोड़ कर रख दूंगा)

अभी दोनों के सवाल जवाब मन में hi चल रहे थे

नीलम- राजू अब तो तू बड़ा हो गया है कमाने भी लगा है लगता है जल्दी hi तेरी शादी भी करनी पड़ेगी

राजू- दीदी मुझे नहीं करनी शादी

नीलम- तब क्या जिंदगी भर अपनी बेहेन की तरह कुंवारा hi रहेगा तू

राजू इन सब मामलो में बहुत हरामी था वो बहुत पहले से अपनी दीदी पर नजर गड़ाए बैठा था पर आज तक उसे कभी ऐसा मौका नहीं मिला

राजू- दीदी कुंवारे का तो पता नहीं पर शादी तो नहीं करनी

नीलम- अच्छा तो तू भी अपनी दीदी की तरह hi रहेगा

राजू- नहीं मैं पैसे कमाऊंगा और अपनी दीदी का अच्छे से ख्याल रखूँगा

नीलम- कैसे ख्याल रखेगा मेरा ख्याल तो बापू रखते है बहुत अचे से

राजू को ये नहीं पता था की उसकी दीदी और उस्ले बापू का ताका भिड़ा हुआ है

राजू- दीदी बापू से भी अच्छा ख्याल रखेगा तुम्हारा ये भाई

नीलम - चल ठीक है देखते है की मेरा ख्याल तू अच्छे से रखता है या बापू

और दोनों भाई बेहेन हसने लगते है

दोनों अब तक घर तक पहुंच चुके थे

नीलम - राजू सुन ये ले दवाई बापू को देदे मैं आती हु अभी

राजू- पर खा जा रही हो दीदी

नीलम - भाई तेरी इस दीदी को बड़ी जोर की पेशाब लगी है ज्यादा बात मत क्र नहीं तो यही हो जाएगी

नीलम इतना बोलते हुए घर ले पीछे की और जाने लगती है

उसे पता था की राजू उसे देखने जरूर आएगा क्योंकि उसने जब राजू को गले लगाया था तो उसके लुंड का उभर उसने अपनी नाभि पर महसूस किया था

और हुआ भी यही

जैसे hi नीलम पीछे जाती है राजू एक कदम घर की और बढ़ता है और दुबारा से अपना कदम पीछे खींचता हुआ पिछवाड़े की और जाने लगता है

इधर नीलम पुरे रणदीपाने पर उतर आयी थी वो अपना पेटीकोट उठाये मुँह दूसरी तरफ करके बैठी थी और अपनी कनखियों से अपने भाई के आने का इन्तजार कर रही थी

राजू जैसे hi पीछे पहुँचता है उसकी नजर सीधा अपनी दीदी की गदराई गांड पर पड़ती है जिसे देख कर वो मस्त हो जाता है

www-nudebhabhi-blogspot-com-4.jpg


राजू को उसकी दीदी की गांड का वो भूरा छेद साफ़ दिखाई दे रहा था

जिसके बारे में उसने पता नहीं कितनी hi बार सोचा था आज वो छेद उसके सामने था

राजू अपने आपको रोक नहीं पता और पेण्ट के अंदर उसका लुंड काफी बड़ा नजर आ रहा था ौरी तरह से एक तम्बू बन चूका था

7b44298251e5645e83ff0f5fc0c8de85.jpg


और इस बार नीलम एक कदम और आगे बढ़ती हुई अपनी एक ऊँगली को सीधा अपनी गांड के छेद में घुसा देती है

Ev-KGd8-MXEAEQj-NP-jpeg.jpg




जिसे देख कर राजू एक दम मस्त हो जाता है और एक गलती कर बैठता है

वो पाना लुंड पेंट से बहार निकाल लेता है ुऔर उसे पकड़ कर सहलाने लगता है

राजू की आँखों में उआकी दीदी के प्रति हवस साफ़ नजर आ रही थी

राजू इधर अपना लुंड ोाकद कर मसल रहा था

उधर नीलम को भी इस बात की खबर लग गयी थी की उसका भाई उसकी गांड देख कर अपना लुंड सेहला रहा है

नीलम को जैसे इसी पल का इन्तजार था वो एक पल में hi कड़ी होकर घूम जाती है

और राजू की तो जैसे एक hi पल में गांड फैट जाती है

नीलम राजू को hi देख रही थी पर उसकी एक नजर अपने छोटे भाई के लुंड पर भी थी जोकि उसके बापू से भी बड़ा था

नीलम- अरे तू यह क्या अपनी दीदी को परेशब करते देखने के लिए आया है क्या

राजू नीलम की बात सुनकर घबड़ा जाता है

राजू- नहीं नहीं दीदी वो तो मैं

नीलम- वो तो क्या और इस मुसल को क्यों निकाल रखा है तूने बहार

नीलम राजू के लुंड की और इशारा करते हुए कहती है

राजू- नहीं नहीं दीदी वो न मुझे भी बहुत जोरसे परेशब लगा था इसलिए आ गया मैं यह

नीलम- परेशब लगी है तो क्या अपनी दीदी का पिछवाड़ा ढकते हुए करेगा क्या

राजू- दीदी मैंने सोचा की आपका अबतक हो गया होगा

नीलम- इतना भरी शरीर है तेरी दीदी का तुझे लगता है की कोई भी काम जल्दी होता होगा मेरा

राजू- दीदी गलती हो गयी

नीलम- चल कोई बात नहीं वैसे भी भाई है तू मेरा छोटा अगर अपनी दीदी का ोिछवाडा देख भी लिया तो कोई बात नहीं पर आगे से मत करना ये सब

राजू- ः दीदी पक्का आगे से नहीं होगा

नीलम- अब खड़ा hi रहेगा या परेशब भी करेगा

राजू- दीदी आप जाओ मैं करके आता हु

नीलम - अरे अब तो तेरी दीदी ने भी तेरा ये मुसल देख लिया अब किससे शर्मा रहा है पहले तो शर्म नहीं आयी अपनी दीदी का नंगा ोिछवाडा देखने में चल जल्दी पेहसाब कर फिर चलते है घर में

राजू भी जैसे नीलम की हर बात मैं रहा था आखिर वो उसकी प्यारी बड़ी दीदी थी

राजू अपने एक हाथ से अपना लुंड पाकड़ कर उठता है और एक ताज धार छोड़ने लगता है

damien-deaf61bdc7.jpg


अपने छोटे भाई के विशाल लुंड पर उभरी हुई नशे देख कर नीलम जैसे पागल सी हो गयी थी

राजू 5 मं तक अपने खड़े लुंड से मुतता रहता ह और फिर दोनों भाई बेहेन घर में चले जाते ह....
 
अपडेट-55

नीलम अब तक जान चुकी थी की उसका भाई भी उसके बाप की hi तरह उसके गदराये जिस्म का दीवाना है

बस अब नीलम को सब्र से काम लेना था उसके बाद से उसे 2-2 तगड़े लुंड घर में hi मिल जायेंगे

शाम हो चुकी थी राजू गाओं में घूमने गया था

हरिया चुपचाप घर के बहार यदि खत पर बैठा था

नीलम घर के नादर से 2 कप चाय लती है और 1 कप होने बापू को पकड़ती हुई अपने बापू से चिपक कर बैठ जाती है

नीलम - बापू आज तो बच गए नहीं तो तुम्हारे बेटे को सब पता चल जाता की तुम अपनी बेटी की सेवा कैसे करते हो

हरिया- बेटी तू नहीं होती तो तेरा ये बाप आज किसी को मुँह दिखने लायक नहीं रहता

नीलम- अरे बापू तुम चिंता न करो तुम्हारी बेटी सब संभाल लेगी और इसे भी

इतना बोलकर नीलम ालना एक हाथ हरिया के लुंड पर रख देती है

हरिया एक नजर अपने आस पास दौड़ता है उसे कोई नहीं दीखता

हरिया- बेटी कोई आ जायेगा मत क्र अभी

नीलम - बापू तुमको पता है राजू अब से यही रहेगा उसे बगल वाले गाओं में hi काम मिल गया है

नीलम की बात सुनकर हरिया के चेहरे का रंग उड़द जाता है

हरिया- क्यों अब से यह क्यों रहेगा

नीलम- बापू उसे यही नौकरी मिल गयी ह इसीलिए

हरिया उदास हो चूका था उसका तीते लुंड एक hi पल में बैठ जाता है

नीलम- म जानती हु बापू तुम दुखी हो अब तुमको अपनी बेटी की सेवा करने का मौका नहीं मिल पायेगा

हरिया- है बेटी उदासी तो है पर क्या कर सकते है जब राजू यही रहेगा तो

नीलम- बापू मेरे पास एक रास्ता है जिससे तुम अपनी बेटी की सेवा जी भर के कर सकते हो जैसे तुम कहो वैसे

नीलम की बात सुनकर हरिया के चेहरे पर एक बार फिर से चमक आ जाती है वो जनता था की उसकी बेटी बड़ी शातिर दिमाग है वो जरूर कोई न कोई रास्ता निकाल लेगी

हरिया- कौन सा रास्ता है बेटी

नीलम- बापू अभी के लिए बस इतना समझ लो की तुम्हारी तबियत खराब है और तुमको कमर में भी दर्द है बस

हरिया- मैं समझा नहीं बेटी

नीलम- बापू तुम बस इतना याद रखो जितना तुम्हारी ये बेटी कह रही है बाकि सब मैं संभाल लुंगी

आपको भरोषा है न अपनी बेटी पर

हरिया- है बेटी पूरा भरोषा है तुझे पर

नीलम- चलो फिर जल्दी से चाय ख़तम करो और राजू के सामने इसको थोड़ा कण्ट्रोल में रखना कहि अपनी बेटी का गदराया समान देख कर ये दुनारा न खड़ा हो जाये

इतना बोलकर नीलम खड़ी हो जाती है

हरिया- है बेटी मैं इसे पूरी तरह से काबू में रखूंगा

नीलम- सच बोल रहे हो बापू मुझे तो नहीं लगता

हरिया- बेटी म तो कोशिश कर सकता हु

नीलम - रुको अभी देख लेते है की आपकी कोशिश कितनी काम आती है

नीलम एक नजर यह वह सोडती है और सीधा अपना एक पेअर उठा कर हरिया के लुंड ओर रख देती है और अपने पेटीकोट को सरकते हुए अपनी दोनों टैंगो के जोड़ तक उठा लेती है

अपनी बेटी की गदराई जंघे देख कर उसका मुद एक पल में hi चेंज हो जाता है

नीलम- बापू अभी कण्ट्रोल हो रहा है व नहीं

हरिया- है बेटी ह

नीलम हरिया का एक हाथ उठा कर सीधा अपने जांघ पर रख देती है

नीलम की जंघे बहुत hi ज्यादा गुदाज (मोती)

और नरम थी

हरिया के हाथ ोाकद कर नीलम खुद से hi अपनी जंघे सेहला रही थी

नीलम- बापू अब hi भी कण्ट्रोल में हो

हरिया- पता नहीं बेटी

इतना बोलते हुए नीलम अपने पेअर से जोरसे हरिया का लुंड दबा देती है

और हरिया की एक ऊँगली पकड़ कर सीधा अपनी गीली छूट पर लगा देती है

नीलम की छूट ओर हाथ पड़ते hi हरिया जैसे पागल सा हो जाता है

और आखिरकार वो अपना कण्ट्रोल खो देता है

b20885c61e67f4a51c8722a1e2a29957.jpg


हरिया का लुंड एक झटके में hi खड़ा हो जाता है

जिसे नीलम बस देखती रह जाती है

inawecock-1426126786n8k4g.jpg


नीलम बाऊ ऐसे कण्ट्रोल करोगे

अपनी बेटी की छूट को हाथ लगते hi तुम्हारा ये मुसल खड़ा हो गया

मुझे तो दर लग रहा है की कहि राजू न डेल्ह ले की तुम अपनी hi बेटी को छोड़ने के जुगाड़ में हो

नीलम की बात सुनकर हरिया का मुँह खुला रह जाता है आज पहली बार उसकी बेटी ने होने मुँह से चुदाई सब्द का प्रयोग किया था

हरिया- बेटी मैं कोशिश करूंगा

नीलम- कोई बात नहीं बापू तुम न बस राजू के सामने इसे शांत रखना और बाकि काम तो तुंहारी बेटी खुद hi कर देगी

इतना बोलकर नीलम घर में चली जाती है और इधर हरिया अपनी hi दुनिआ में खो जाता है

शाम के 7 बज चुके थे अब तक राजू भी घर आ चूका था

हरिया की नजर जैसे hi राजू पर पड़ती है वो उसे घर कर देखता है

दोनों बाप बेटो की पहले से hi नहीं बनती थी और अब तो राजू सीधा सीधा हरिया और उसकी बेटी के बिच में आ रहा था

राजू भी अपने बाप से काम hi बात करता था

वो बिना कुछ बोले घर में चला जाता है

अंदर जाते hi राजू की नजर सीधा उसकी दीदी के बड़े पिछवाड़े पर पड़ती है

नीलम खाना बना रही थी गर्मी की वजह से वो पूरी तरह से पसीने से भीगी हुई थी

राजू( साली के अंदर कितनी गर्मी है जो 24 घंटे भीगी रहती हज कसम से एक बार दीदी मिल जाये न तो पूरी गर्मी निकाल दूंगा इसकी छोड़ छोड़ के )

Edv-Z41p-Uc-AA-GUY-2.png


राजू- दीदी खाना बन गए क्या

नीलम- बस बन गया है तू बैठ मैं अभी थोड़ी देर में निकल टी हु और एक काम कर बापू को भी बुला कर लिया

राजू हरिया के पास चला जाता है

हरिया का तो राजू की शकल देखने का भी मन नहीं कर रहा था

राजू- बापू

हरिया- क्या हुआ बोलल

हरिया मि आवाज में एक गुस्सा था जो राजू को साफ़ पता चल रहा था

पर उसे समझ नहीं आ रहा था की उसका बाप भड़का हुआ क्यों ह

राजू- वो दीदी ने खाना खाने के लिए बुलाया है तुमको

हरिया- ः चल आता हु अभी

राजू हरिया को बोलकर अंदर चला जाता है

हरिया ( साला जनम से hi मनहूस है पैदा होते hi अपनी माँ को खा गया और अब जब मुझे मेरी बेटी मिलने वाली थी तो बिच में आ गया इसको कैसे भी करके रस्ते से हटाना पड़ेगा

पर ये काम तो नीलम hi कर देगी उसने बोलै था की एक रास्ता है पता नहीं कौनसा रास्ता है

पर मुझे अपनी बेटी पर पूरा विश्वास है की वो जरूर कुछ रास्ता निकाल लेगी)

ह्रक्य भी 5 मं बाद अनादर चला जाता है

दोनों बाप बेटे चुप चाप खाना खा रहे थे

नीलम ये बात जानती थी की उसके बाप और भाई की बिलकुल नहीं बनती है

पर कैसे भी करके दोनों का रिश्ता सुधारना होगा नहीं तो उसका सपना सपना hi रह जायेगा

नीलम- बापू तुम्हारी तबियत कैसी है अब

हरिया- ठीक है बेटी

नीलम की झट जल जाती है अपने बापू की बात सुनकर वो उसे गुस्से से आँख दिखती है

हरिया बजी एक hi पल में समझ जाता है की उसकी बेटी ने तबियत क्यों पूछी है

हरिया- मतलब थोड़ा बुखार है और जी भी घबरा रहा है और तो और कमर में भी बड़ा दर्द हो रहा है बेटी लगता है की अब तेरे बापू का जाने का समय आ गया है

नीलम ( वह बापू मैं गयी तुम तो एक नंबर के एक्टिंग बाज़ आदमी निकले)

नीलम- अरे बापू अभी तो तुम जवान हो ऐसा मत बोलो तू समझा रे राजू बापू को कुछ

राजू- ः बापू ऐसे क्यों बोल रहे हो

हरिया राजू की आवाज सुनकर एक hi पल में गरम हो जाता है

हरिया- चुपचाप खाना खा बड़ा आया समझने वाला खुद को तो कोई चिंता है नहीं दिन भर रात भर घर से बाजार रहता है

नीलम- अरे बापू अब तबियत खराब है तो इस बिचारे पर क्यों गुस्सा निकल रहे हो अब तो राजू भी हमेशा हमारे पास रहेगा है न राजू

राजू- है दीदी

नीलम अपने बापू का मुँह देखती है जो एक दम टमाटर की तरह लाल हो चूका था

नीलम- राजू बापू की तबियत अब ठीक नहीं रहती इस लिए ये अब से हमारे साथ hi घर में सोयेंगे समझ गया न

और इनकी कमर में भी दर्द है तो निचे hi सुलाना पड़ेगा इनको भी

अगर तू कहे तो खत पर सो सकता है

नीलम की बात सुनकर राजू एक दम से बोल पड़ता है

राजू- नहीं नहीं दीदी मैं भी निचे hi सोऊंगा मुझे खत पर नींद नहीं आती

राजू( साला बुद्धा अब से घर में hi सोयेगा सोचा था रात को दीदी के करीब आने को मौका मिलेगा पर ये साला सनीचर बन के बैठा है मेरे और दीदी के बिच में)

नीलम- चलो अच्छा hi है अब तीनो बाप बाटी बता सब एक साथ सोयेंगे तो शायद हमारा प्यार भी बढ़ेगा

बापू तुमको कोई दिखात तो नहीं है न अपनी बेटी और बेटे के पास सोने में

हरिया- नहीं नहीं बेटी अपने बच्चो के साथ सोने में किसको दिखात होगी

थोड़ी hi देर में तीनो खाना खा लेते है

और हरिया बहार निकल जाता है

नीलम बर्तन उठा कर धोने चली जाती है

नीलम- राजू भाई तू एक काम कर इस खत को उठा कर साइड में करदे और हम सबका बिस्तर यही निचे लगा ले

राजू- ठीक है दीदी आप बर्तन धो लो मैं तबतक बिस्तर लगा लेता हु

नीलम- कितना अच्छा भाई है तू अपनी दीदी की मदद करता है

राजू- अब आपकी मदद नहीं करूंगा तो किसकी मदद करूंगा दीदी

आप हो hi इतनी अच्छी

नीलम- अच्छा चल चल बिस्तर लगा जल्दी नहीं तो बापू पहले hi भड़के हुए है और भड़क जायेंगे

और अपनी दीदी को इतना मस्का मत लगा........
 
अपडेट-56

सबका बूस्टर लगा चूका था

नीलम बिच में सोई थी और उसके अगल बगल दोनों बाप बेटे

नीलम बिलकुल सीधा लेती हुई थी

राजू की नजर उसकी दीदी की उठती बैठती चूचियों पर hi थी

नीलम भी काम नहीं थी वो अपने ब्लाउज का 2 हुक पहले hi खोल चुकी थी

Eh-K9-Ct5-UYAAe0t1-jpeg.jpg


दोनों बाप बेटो की नजर नीलम की चूचियों पर गड़ी हुई थी

नीलम हरिया की तरफ पलट जाती है

नीलम- बापू अब कैसी है तुम्हारी तबियत

हरिया को नीलम की आँखों में एक मदहोशी दिख रही थी

वो जनता था की उसकी बेटी क्या छाती है पर उसकी कुछ करने की हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि नीलम के बगल में hi राजू लेता था

नीलम अपने हाथ से हरिया का हाथ पकड़ती है और अपनी एक चुकी पर रख देती है

हरिया तुरंत hi होना हाथ हटा लेता है

उसे दर था कहि राजू को कोई शक न हो जाये

नीलम हरिया को एक नजर घर कर देखती है

हरिया की गांड फैट जाती है अपनी बेटी के इस तरह देखने से

वो बिचारा अपना हाथ खुद hi उठा कर अपनी बेटी के ब्लाउज पारर रख देता है

इस बार नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान थी

सब शांत लेते हुए थे

पर नीलम का प्लान तो कुछ और hi था

वो अपना हाथ निचे ले जाती हुई अपने बापू की धोती के अंदर डालने लगती है

हरिया तुरंत hi उसका हाथ पकड़ लेता है और अपनी गर्दन न में हिलाते हुए नीलम को कुछ इशारा करता है

नीलम भी समझ रही थी की उसका बापू डर क्यों रहा है

नीलम एक कदम और आगे बढ़ती है और

अपने बापू की तरफ अपनी गांड करके लेत जाती है

नीलम एक नजर पलट कर अपने बापू को देल्हती है और एक स्माइल देती है

हरिया को उकसी बेटी की नजरो में एक आमंत्रण दिख रहा था

इधर राजू को अब सीधा सीधा उसकी दीदी की आधी चूचिया दिख रही थी

250-1000.jpg


राजू का लुंड एक पल में hi खड़ा हो कबुका था पर अपने अपने सोनो पैरो के बिच लुंड को छुपा रखा था

हरिया को ये तो मालूम था की बाप बेटी के मिलान का रास्ता नीलम के पास है पर वो रास्ता क्या है उसे इसकी भनक नहीं थी

नीलम अपनी आँखे बंद कर लेती है पर राजू की नजर उसकी दीदी की चूचियों पर hi थी जिन्हे वो चुना कहता था और इधर हरिया अपनी बेटी की मतवाली गांड देख कर पागल हुआ जा रहा था

पर राजू की वजह से उसकी भी हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ करने की

खैर थोड़ी देर ऐसे hi शांति बजी रहती है और उसके बाद तीनो बाप बेटी सो जाते है

अगली सुबह हरिया की आँख सांसे पहले खुलती है उसे नजर आता है की उसकी बेटी सीधा सोई हुई है और उसका पेटीकोट जांघो तक चढ़ा हुआ है

हरिया एक नजर राजू पर डालता है और नीलम का पेटीकोट खींच कर सही कर देता है

हरिया जैसे hi बहार निकलता है नीलम अपनी आँख खोलती है और अपने पेटीकोट को पहले से भी कयदा ऊपर उठा कर दुबारा आँख बंद कर लेती है

नीलम आँखे बंद किये होने छोटे भाई के उठने का इन्तजार कर रही थी

थोड़ी hi देर में राजू भी उठ जाता है और उसकी नजर सीधा उसकी दीदी की नंगी जांघो पर जाती है

DSC01001-001.jpg


अपनी अदनानगी दीदी को देख कर राजू एक hi पल में मस्त हो जाता है

और उठ कर बहार की और जाता है झा उसे हरिया दिखाई नहीं देता

राजू फिरसे अंदर आटा है और इस बार उसके हौसले कुछ ज्यादा hi बुलंद थे वो खड़े खड़े hi अपनी दीदी को देख रहा था तभी उस्ले मन में कुछ आता है और वो सीधा नीलम के पास जाकर बैठ जाता है

नीलम तो ोेहले से hi आँखे बंद किये राजू के कुछ करने का इन्तजार कर रही थी

राजू बिना देर किये एक हाथ नीलम की चुकी पर रख देता है

होने छोटे भाई की हरकत से नीलम भी मस्त हो जाती है इधर जैसे राजू होनी दीदी को देख कर मंत्रमुग्ध हो चूका था

वो बिना किसी दर के नीलम की दोनों चूचिया सेहला रहा था

नीलम को भी अब तक ये तो समझ आ गया था की अगर वो राजू को हल्का सा इशारा करेगी तो वो उसे छोड़ देगा ये अपने बाप से तो तेज hi है इन मामलो में

tumblr-mbjnkgzp-Mk1rc9mxoo1-500.gif


राजू इतना ज्यादा उत्सुक था की वो हड़बड़ी में जल्दबाज़ी कर रहा था

राजू अब अपनी दीदी को चूचियों को छोड़ कर उसके पैरो के पास आता है और अपना लुंड निकाल कर एक हाथ से सहलाने लगता है और एक हाथ को नीलम की जाँघि पर फेरने लगता है

नीलम को भी पता लग चूका था की आखिर उसके भाई का एक हाथ खा बिजी है उसे यही तो चाहिए था

अभी 5 मिंट hi हुए थे की नीलम अच्चानक से उठ कर बैठ कटी है और सीधा अपनी नजर राजू के लुंड पर डालती है

olivierplus-ca29a77264.jpg




राजू नीलम को एकदम से उठता डेल्ह कर घबरा जाता है और अच्चानक से थोड़ा पीछे गिर जाट है

नीलम- हाय राम सुबह सुबह तू इस मुसल को क्यों मसल रहा था मेरे भाई

राजू को समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या जवाब दे

नीलम- बोल न क्या कर रहा था तू अपनी दीदी को देख कर

राजू- कुछ नहीं दीदी वो न इसमें दर्द हो रहा था बहुत तेज तो वही देख रहा था की कहि चोट तो नहीं लग गयी

नीलम- तूने इसका इस्तेमाल किया था क्या रात को जो दर्द होरहा है

नीलम की बात सुनकर राजू सकपका जाता है

राजू- नहीं दीदी म सो कर उठा तो ये खड़ा था ऐसे hi

नीलम- हाय राम कितना बड़ा है ये हमेशा ऐसे hi खड़ा रहता है क्या

राजू- नहीं दीदी बस कभी कभी hi होता है ऐसे

नीलम- रुक मुझे दिखा कहि कोई गड़बड़ तो नहीं है तेरे लुंड में

राजू का मुँह क्यूला का खुला रह जाता है ुस्लि दीदी आज उसकी लुल्ली को लुंड जो बोल रही थी

राजू- नहीं नहीं दीदी रहने दो अब ठीक है

नीलम- अरे बड़ी बेहेन हु तेरी मुखसे कैसी शर्म दिखा कहि बाद में कोई ज्यादा गड़बड़ न हो जाये

राजू अभी भी गिरा हुआ hi था नीलम आगे बढ़ती हुई सीधा अपने भाई का लुंड पकड़ लेती है और उसकी चमड़ी को पीछे खींचते हुए बिलकुल निचे ले जाती है

राजू अपनी दीदी की इस हरकत से पागल सा हो जाता है

राजू- अह्ह्ह्हह दीदी दर्द हो रहा हीी मेरे इधर

नीलम - रुक अच्छे से देखने तो दे

की कहि कुछ गड़बड़ तो नहीं है

penis-100.webp


नीलम अपना मुँह राजू के लुंड के इतना करीब ले जाती है की राजू को अपने लुंड पर अपनी दीदी की गरम सांसे महसूस हो रही थी

राजू- अह्ह्ह्हह डीडीई बहुत अच्छाआ लग रहा है

नीलम एक दम से उसला लुंड छोड़ देती है

इधर राजू जैसे सोच रहा था की आज उसकी दीदी उसका पानी निकाल कर hi छोड़ेगी

राजू अपनी दीदी को हसरत भरी नजरो से देख रहा था

नीलम- ऐसे क्या देख रहा है जो दर्द था वो तो मैंने सही कर दिया न

अब उठ जल्दी नहा ले तुझे काम पर भी तो जाना है न

राजू आज अपनी दीदी की इस बोल्ड हरकत से सोचने पर मजबूर हो गया था की आखिर उसकी दीदी ने उसका लुंड पकड़ कर ऐसे क्यों मसला और अपना चेहरा क्यों इतना करीब ले गयी

राजू बड़ी hi गहरी सोच में डूबा हुआ था

इधर अपने भाई को गेहेन चिंतन करते हुए नीलम को भी अंदाजा लग गया था की उसका तीर सही निशाने पर जा कर लगा है ......
 
अपडेट-57

10 बज चुके थे

हरिया बहार बैठा राजू के जाने का इन्तजार कर रहा था

अंदर राजू अपनी दीदी की गदराई चूचिया घूरते हुए खाना खा रहा था

नीलम - तुझे जाना नहज है क्या काम पर आज

राजू- है दीदी जाना है

नीलम - तो बीटा इधर काम ध्यान दे और खाना खा

राजू की चोरी पकड़ी तो गयी थी पर सुबह नीलम ने जो हरकत की थी उसके बाद से hi उसका डर बिलकुल ख़तम हो गया था

राजू नीलम की बात का कोई जवाब नहीं देता और अपनी दीदी की चुकी पर एक नजर दाल कर घर से बहार निकल जाता है

राजू- बापू मैं काम पर जा रहा हु

हरिया- अरे कितने बजे आएगा तू

राजू- 3-4 बजे तक आ जाऊंगा बापू

इतना बोलकर राजू निकल जाता है

हरिया( 3-4 बजे ौएगा तब तो बहुत टाइम है मेरे पास अपनी बेटी के साथ बिताने के लिए)

हरिया राजू को जाता हुआ देखता रहता है

और जब राजू उसकी आँखों से ओझल हो जाता है तो

हरिया उठ के अंदर जाता है

और अंदर घुसते hi दरवाजा बंद कर देता है

नीलम दरवाजा बंद होने की आवाज से एकदम से पलट कर देखती है

नीलम- बापू क्या हुआ कुछ चाइये क्या

नीलम को अपने बापू की आँखों में हवस साफ नजर आ रही थी

हरिया अभी भी शांत खड़ा था पर अपनी hi बेटी को देख लार उसका लुंड धीरे धीरे खड़ा होना शुरू हो चूका था जिसपर नीलम की नजर भी पद चुकी थी

नीलम- बापू दरवाजा क्यों बंद कर दिया आपको कुछ चाहिए क्या

अब नीलम होने बापू को उकसाना कहती थी

और हरिया तो अब अपनी बेटी के लिए पूरी तरह से पागल हो चूका था

उसका लुंड थोड़ी hi देर में खड़ा हो जाता है

7cfd34d0dcf50fc9a67ea1b7e8c49827.gif


हरिया अपने खड़े लुंड के साथ अपनी बेटी की तरफ बढ़ रहा था

नीलम की नकार भी उसके बापू के लटकते हुए लुंड पर थी

नीलम के मन में यही सवाल चल रहे थे की उसने इतने दिन अपने बापू को उकसाया है पर आज उसका बाप उससे पूरा बदला लेलेगा

नीलम- बापू तुम्हारा ये मुसल जैसा लुंड अपनी hi बेटी के गदराये जिस्म को देख कर खड़ा क्यों है बापू

हरिया- बेटी मैं जब भी तुझे देल्हता हु तो मुझे पता नहीं क्या हो जाता है और मेरे ये लुंड अपनी hi बेटी की जवानी को देख कर खड़ा हो जाता है

नीलम- छी बापू कितने गंदे हो तुम

क्या अपनी hi बेटी के साथ वो सब करना कहते हो

हरिया- बेटी मैं तेरे साथ वो सब करना कहता हु जिसका मैंने कभी सपना देखा था पर आज तक मैंने वो किसी के साथ नहीं किया

हरिया जनता था की नीलम अभी भी उसे उकसाने का काम कर रही है

हरिया चलता चलता होनी धोती को पकड़ कर एक hi पल में खोल देता है और उसकी धोती निकजे गुर जाती है

marruggio-246320b7e27d80b84932dd2ce016112b.jpg


नीलम होने बापू के विशाल लुंड को देखते हुए थूक गटकती हुई बोलती है

नीलम- तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो तुम्हारा लुंड देख कर मुझे दर लग रहा है बापू

हरिया- तू फ़िक्र मत क्र बेटी तेरा ये बाप तुझे बहुत प्यार करेगा

नीलम- बापू अपनी बेटी को नंगा होकर प्यार करते है क्या

हरिया- है बेटी ये अलग तरह का प्यार है इससे बाप बेटी का रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है

नीलम- तो क्या बापू इस प्यार के लिए बेटी को भी नंगा होना पड़ता है

हरिया अपनी बेटी का इशारा समझ जाता है

और नीलम के पास पहुंचते hi अपनी बेटी का पेटीकोट पकड़ कर एक hi झटके में ुए नीलम से अलग कर देता है

नीलम सीधा अपने हाथो से अपनी छूट धक् लेती है

नीलम- है रम्म ये क्या किया बापू अपनी hi बेटी को नंगा कर दिया मुझे तुम्हारे इरादे ठीक नहीं लग रहे बापू

हरिया की आँखे बिलकुल लाल हो चुकी थी अब वो अपनी समझने की शक्ति खो चूका था

हरिया झुक कर अपनी बेटी के सोनो हाथो को हटाता हुआ अपनी एक ऊँगली से नीलम की छूट का दाना रगड़ देता है

b20885c61e67f4a51c8722a1e2a29957.jpg


नीलम- अह्हह्ह्ह्ह बापू मत करो मैं सगी बेटी हु तुम्हारी

हरिया- बेटी है तभी तो तुझे इतना ोयार कर रहा है तेरा ये बाप

नीलम- बापू बाप बेटी ऐसे प्यार कर सकते है क्या

हरिया- इससे भी अच्छे तरिके से प्यार कर सकते है बेटी

नीलम- बापू तुन सिखाओगे मुझे की अपने बापू के साथ नंगा होकर कैसे प्यार करते है

इस बार हरिया उठ कर नीलम का दुप्पट्टा पकड़ कर उसे उसकी छाती से अलग कर देता है

नीलम अपने बापू का उतावलापन देख कर अंदर hi अंदर गरम हो रही थी

अब हरिया धीरे धीरे करके नीलम के ब्लाउज के सरे हुक खोल देता है

और अब उसकी आँखों के सामने उसकी बेटी पूरी नंगी खड़ी थी

EJ4l-Vw-CVUAAN8m-J.jpg


नीलम- आह्हः बापू ये क्या किया तुमने अपनी hi बेटी को पूरा नंगा कर दिया

हरिया- बेटी तू मुझे ऐसे hi नंगी अच्छी लगती है

इस बार हरिया 2 कदम ोीचे जाता है और अपनी hi बेटी को ऊपर से निचे तक देखते हुए अपना लुंड मसलने लगता है

नीलम- है राममम बापू तुमको शर्म नहीं आ रही अपनी बेटी के नंगे जिस्म को देख कर तुम होना लुंड मसल रहे हो

हरिया- बेटी शर्म तो मैंने उसी दिन छोड़ दी थी जिस दिन मेने पहली बार अपनी बेटी की छूट से निकला पानी पिया था

नीलम समझ चुकी थी की अब उसके बाप के अंदर छुपा जानवर बहार आने वाला है

पर नीलम को इतना अंदाजा नहीं था की उसका बाप इतना उतावला हो जायेगा की उसके भाई के बहार जाते hi घर में नंगा कर देगा उसे

अब हरिया दुबारा से आगे बढ़ता है और नीलम के बिलकुल करीब चला जाता है

इस बार हरिया का लुंड सीधा उसकी बेटी की नाभि में घुसने को आतुर था

IMG-20200614-211829.jpg


नीलम की हालत आज खराब हो रही थी क्योंकि

आज शुरुवात खुद उसके बापू ने hi कृ थी

हरिया- बेटी इसे पकड़ कर देख तेरे बापू का लुंड तुझे देख कर कैसे खड़ा हो गया है

इतना बोलकर हरिया नीलम का एक हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर रख देता है

और नीलम भी देर न करते हुए अपने बापू का लुंड थम लेती है

हरिया बिना देर किये अपने होठ अपनी बेटी के नरम हटोहो पर रख देता गई है

नीलम भी अपने बापू का पूरा साथ दे रही थी वो भी अपना मुँह एक पल में hi खोल देती है और हरिया टपक से अपनी जीभ अपनी बेटी के मुँह में दाल देता है

6128b994b5840f1f2da1201fc88499a0.gif


upload image[/URL]

अब आलम ये था की हरिया अपनी बेटी का मुँह चूस रहा था और एक हाथ से उसकी गदराई चूचिया मसल रहा था

नीलम भी काफी गरम हो चुकी थी उसने अपने हाथ की पकड़ अपने बाप के लुंड पर बढ़ा दी थी

और बार बार वो लुंड की चमड़ी को पूरा ोीचे तक ले जाती

दर्द के अहसास से हरिया ओर हवस और भरी हो रही थी

दुनियादारी से बेखबर अब दोनों बाप बेटी ीक दूसरे के मुँह में अपनी जभ घुमा रहे थे

[URL=']
b28c4bcbf5514f2bc151178169ad91fc.gif


दोनों बाप बेटी लगभग 5 मिंट तक एक दुआरे के मुँह में मुँह डेल रखते है

दोनों अलग होते है और दोनों की hi सांसे उखड रही थी

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू ये क्या कर रहे हो तुम मुझे कुछ हो रहा है

हरिया- बेटी कुछ मत पूछ अब मुझे अपनी बेटी की छूट से पानी पीना है बोल पिलाएगी न तेरा बापू बहुत सालो से प्यासा है बेटी

हरिया नीलम के एक निप्पल को पकड़ कर मरोड़ते हुए बोलता है

IMG-20200421-003230-2.jpg


नीलम- अह्ह्ह्हह बापू

जब मेरे बापू को अपनी बेटी की छूट का पानी इतना hi अच्छा लगता है तो मैं क्यों न पुलाव पी लो बापू अब ये सबूत और ये बेटी तुम्हारी hi तो है

हरिया पास पड़ी खत को खींच कर नीलम को एक तंग पकड़ कर उसपर रख देता है

और निग्हे झुकता हुआ एक नजर जी भर के अपनी बेटी की छूट को देखता है और अपना मुँह नीलम की छूट पर लगा देता है

20210303-150734.jpg


नीलम हरिया के इस हमले से तड़प उठती है

इधर हरिया अपनी बेटी की छूट को जैसे खा जाना कहता था

नीलम- अह्ह्ह बापू क्या कर रहे हो कोई ऐसे चाटता है क्या अपनी बेटी की छूट

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी तेरी छूट hi इतनी रसीली है की मेरा मन कर रहा है की खा जाऊ

देख कैसे तेरी छूट से रस टपक रहा है

नीलम - बापू ये अमृत है क्या

हरिया- बेटी ये तो बास चीते है असली अमृत तो जब निकलेगा जब तू अपने चरम पर पहुंचेगी और तेरा बाप तुझे चरम सुख देगा

नीलम- अह्ह्ह बापू कुछ न बोलो चाटते रो बस अपनी बेटी की छूट

अह्ह्ह्हह माआआआ

इतना बोलकर नीलम हरिया का सर पकड़ कर अपनी छूट पर दबा देती है

Anna-Polina-getting-her-pussy-eaten-in-sexy-black-lingerie.gif


करीब 10 मिंट तक होनी बेटी की छूट को चाटने के बाद आखिर कार हरिया को उसके कर्मो का फल मिल hi जाता है

नीलम होने दोनों हाथो से अपने बापू का सर पकड़ लेती है

उसके दोनों पेअर काँप रहे थे

हरिया ने अपनी बेटी को कमर से पकड़ कर संभाला हुआ था

नीलम अह्ह्ह्हह बापू अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेंनननननन आए रहीी हु बापूण

तुम्हरी बेटी की छूट से अमृत निकलने वाला है बापू

इतना बोलते hi नीलम का शरीर अकड़ने लगता है

आखरिकार नीलम झड़ने लगती है और हरिया को उसकी बेटी की छूट से निकलते अमृत को पिने का सौभाग्य मिल जाता है

हरिया 5 मिंट तक नीलम की छूट पर अपना मुँह लगा कर चुस्त रहता है और अपनी बेटी की चित से सारा पानी खींच खींच कर पी जाता है

हरिया जैसे hi नीलम से अलग होता है नीलम धड़ाम से खत पर गिर जाती है

हरिया अपने हाथ से अपना मुँह पोछता है

हरिया- अह्ह्ह्ह मजा आ गया बेटी तेरी छूट साख के कसम से बड़ी hi मजेदार है तेरी छूट

नीलम आज किसी मर्द के हाथो पहली बार झड़ी थी उसकी सांसे फूल रही थी

हरिया भी नीलम के बगल में लेत जाता है.....
 
अपडेट-58

दोनों बाप बेटी एक साथ नंगे लेते हुए थे

नीलम की नजर अपने बापू के लुंड पर hi थी जो अब तक खड़ा था

नीलम- बापू आपने तो अपनी बेटी की छूट कसारा पानी चूस लिया

हरिया- बेटी तेरी छूट को जितना छतो उतना hi पानी बाजार आता है

कसम से क्या मस्त पानी है मेरी बेटी का

नीलम- बापू आपको कैसा लगा प्यास बुझी या नहीं आपकी

हरिया- बेटी ये न पूछ की कैसा लगा और रही बात प्यास की वो तो अब मैं रोज बुझाऊंगा इतने बरसो से प्यासा जो हु

नीलम- मतलब बापू आप रोज मेरी छूट ौसे hi सुशोगे

हरिया- देखती जा बेटी तेरा बाप क्या क्या सिखाता है तुझे

नीलम- बापू कैसा टास्ते था

हरिया- एक दम मीठा तेरी तरह

नीलम- बापू जैसे मेरी छूट में से अमृत निकलता है वैसे hi तुम्हारे इस लुंड में से भी अमृत निकलता है क्या

हरिया- है बेटी निकलता तो है पर थोड़ा थोड़ा नहीं एक hi बार में निकलता है

और निकलने में भी बहुत दिक्कत होती है

नीलम- क्यों बापू दिखात क्या होती है आपकी बेटी नहीं निकाल सकती क्या अपने बापू के लुंड का अमृत

हरिया बड़े hi प्यार से नीलम के माथे पर हाथ फेरता है

हरिया- मुझे पूरा यकीन है की मेरी बेटी मेरा पानी निकाल सकती है है पर तुझे थोड़ी म्हणत करनी पड़ेगी

नीलम- पहले भी तो की थी बापू फिरसे करलूँगी

वैसे मुझे भी पीना है अपने बापू के लुंड का अमृत

हरिया- बेटी अब जो है सब तेरा hi है

नीलम होने बापू की छाती पर अपना सर रख कर लेती हुई थी

वो बड़े hi प्यार से अपना हाथ आगे बढ़ती हुई अपने बाप का लुंड पकड़ लेती है

20141213215816uid.gif


नीलम- बापू आपको अपनी बेटी की छूट चूस कर कितना मजा आया

हरिया- बहुत मजा आया बिटिया

नीलम- तब तो मुझे भी अपने बापू का लुंड चूसना है

लुंड चूसने के नाम से hi हरिया का चेहरा खिल उठता है क्योंकि आजसे पहले कभी किसी ने उसका लुंड नहीं चूसा था

हरिया- है बेटी तू चूस सकती है होने बापू का लुंड

नीलम - बापू पर तुम्हारा लुंड तो बहुत बड़ा है मेरे मुँह में जा पायेगा क्या ये लुंड

हरिया नीलम का सर सहलाते हुए बोलता है

हरिया- मुझे होनी बेटी पर पूरा भरोषा है तू कर लेगी आखिर मेरी बेटी जो है

नीलम- बापू कर तो लुंगी पर मेरा तो मुँह hi फैट जायेगा

हरिया- अरे बेटी 1-2 बार ोुरा लेलेगी न तो फिर देख तो कैसे रोज होने बापू का पूरा लुंड एक hi बार में निगल जाएगी

यह नीलम ने बहुत पहले hi सोच रखा था की जब उसकी शादी हो जाएगी तो वो अपने पति के साथ किस किस पोजीशन में सेक्स करेगी

पर शादी तो हुई नहीं अब वो साडी पोसिशन्स वो होने बापू के साथ करने के लिए बैचैन हो रही थी

उसके मन में लाखो सवाल चल रहे थे की कैसा लगेगा जब वो अपने बापू का पूरा लुंड होने गले तक उतारेगी तो

नीलम- ठीक है बापू अब कहे मुँह फ़टे या कुछ और लेना तो है hi आप एक काम करो यह खड़े हो जाओ

नीलम हरिया को खत के पास hi खड़ा कर देती है और खुद पेट के बल लेत कर अपने बापू के लुंड के करीब आ जाती है

अब हरिया का लुब्द उसकी बेटी के मुँह के सामने झूल रहा था

हरिया के लुंड पर 1-2 बून्द वीर्य था जो नीलम को चमकता हुआ दिख रहा था नीलम बड़े hi प्यार से होनी जीभ को बहार निकाल कर उस पानी को चाट लेती है

नीलम की हरकत देख कर उसका बाप अंदर तक हिल जाता है

आज पहली बार था जब किसी औरत की जीभ उसके लुब्द पर पड़ी थी और वो औरत उसकी hi बेटी थी

हरिया- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

नीलम- क्या हुआ बापू निकलने वाला है क्या

नीलम की बात सुनकर हरिया को हसि आ जाती है और नीलम भी थोड़ा सा है देती है और अपना मुँह खोलते हुए हरिया का लुंड निगलने लगती है

हरिया का लुंड काफी विशाल था और ये नीलम का फर्स्ट टाइम था जब वो किसी का लुंड चूस रही थी

नीलम लगभग 6 इंच तक लुंड को अपने मुँह में धीरे धीरे उतर लेती है पर अभी भी काफी हिस्सा बहार hi था

नीलम बड़े hi प्यार से धीरे धीरे अपना मुँह होने बापू के लुंड पर चला रही थी

इधर हरिया को आज सेक्स का एक न्य hi अध्याय सिखने को मिल रहा था

हरिया को ऐसा लग रहा था मनो उसका लुंड किसी जन्नत में ुअत गया है

नीलम के मुँह की गर्मी उसके लुंड को निचोड़ रही थी

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी तेरा मुँह तो तेरी छूट से भी गरम है अह्ह्ह्हह्हह मेरी बच्ची

नीलम चुप चाप अपना मुँह आगे ोीचे करके अपने बाप को मजे दे रही थी

अबतक हरिया भी काफी गरम हो चूका था

वो धीरे से एक झटका मरता गई और उसका लुंड करीब 8 इंच तक नीलम के मुँह में समा जाता है

gif-gorlovoi-minet-17.webp


नीलम को दिखात तो बहुत हो रही थी पर आज वो अपने बापू का लुंड पूरा खा जाना कहती थी

नीलम होना मुँह पीछे खींच लेती है

हरिया सोचता है की उसकी बेटी हिम्मत हर गयी और अब नहीं लेगी वो मुँह में पर उसे क्या पता था की उसकी बेटी के अंदर उससे भी कहि ज्यादा हवस भरी हुई है

अभी लुंड बहार hi निकला था की नीलम एक hi पल में पलट कर अपना सर खत से थोड़ा सा बहार निकाल देती है

नीलम- हां बापू अब डालो वैसे तो पूरा नहीं जाता ऐसे चला जायेगा तुम्हारा पूरा लुंड तुम्हारी बेटी के मुँह में

हरिया- वह मेरी बच्ची तू तो बड़ी जाबाज़ निकली मैंने तो सोचा था की अब नहीं करेगी तू

नीलम- अरे बापू देखते जाओ अभी तुम्हारी बेटी क्या क्या करती है

हरिया अपना लुब्द नीलम के मुँह के करीब लता है और नीलम भी अपने बाप के लुंड का स्वागत करते हुए अपना मुँह पूरा खोल देती है

हरिया को आज अलग hi मजा आ रहा था जो सुख उसने कभी सोचा था वो उसे किसी से नहीं मिला था और वही सुख आज उसे उसकी बेटी दे रही थी

हरिया होना लुब्द नीलम के मुँह में डालने लगता है

एक hi झटके में वो आधा से ज्यादा लुंड होनी बेटी के मुँह में उतर देता है

नीलम की आँखे बहार आ जस्ती है पर वो हिम्मत नहीं हारती

gif-gorlovoi-minet-9.webp


हरिया बड़े hi प्यार से धीरे धीरे अपना लुंड आगे ोीचे करके होनी बेटी का मुखछोडन कर रहा था

इधर इस अहसास से नीलम भी पागल हुए जा रही थी

हरिया कभी नीलम की चुकी पकड़ कर मसल देता तो कभी आगे की और झुकता हुआ अपनी बेटी की छूट को रगड़ देता

अब हरिया भी अपना आप खो रहा था और उसके अंदर का जानवर बहार आने के लिए बैचैन था

हरिया होने दोनों हाथो को खत पर टिका देता है और अपने पेअर थोड़े ोीचे करता हुआ

ऊपर निचे होने लगता है और एक के बाद एक झटको से नीलम के मुँह को अपने लुंड से भरने लगता है

नीलम भी काम नहीं थी वो पाने बापू की गांड को पकड़ते हुए अपनी और खींचती है और हरिया समझ जाता है की उसकी बेटी को और अंदर तक लेना है

हरिया धीरे धीरे होनी सईद बढ़ा रहा था

नीलम- गगुगुग्गूग्गूग्गू

नीलम के मुँह से आती आवाज हरिया को पागल कर रही थी जिस नेति को कभी उसने गॉड में खिलाया था आज वो उसी बेटी का मुँह छोड़ रहा था

gif-gorlovoi-minet-12.webp


upload images[/URL]

हरिया एक के बाद एक तगड़े झटके मार रहा था और अब आलम ये था की उसला बस 2 इंच लुंड बहार रह गया था और बलि पूरा उसकी बेटी के मुँह में अंदर बहार हो रहा था

आख़िरकार हरिया के ुवार हवस भरी हो चुकी थी और वो एक hi झटके में अपना पूरा लुंड अपनी बेटी के गले तक उतर देता है

इस हमले से नीलम की आँखे बहार को आ जाती है और वो अपने पैरो को पटकते हुए रह जाती है

पर अब जैसे हरिया को उसकी बेटी की कोई चिंता hi नहीं थी वो लगातार अपना पूरा लुंड नीलम के मुँह में अंदर बहार कर रहा था

नीलम भी होने बाप का लुंड पूरा गले तक लेती

उसके मुँह से बहुत सारा थूक गिर रहा था जिसे देख कर हरिया को और भी ज्यादा जोश आ रहा था



हरिया का लुंड अबतक दुबारा से खड़ा हो चूका था

हरिआय पाना लुंड पकड़ कर नीलम की छूट ओर लगाने लगता है



हरिया अपने लुंड को लगातार होनी बेटी की छूट ओर रगड़ रहा था

जिसका असर ये हुआ की नीलम भी दुबारा से गरम हो गयी और मदहोशी में होनी ांझे बंद कर लेती है

अभी हरिया झटका मरने hi वाला था की अच्चानक से नीलम अपनी आँख खोलती है और अपने बापू को रोक देती है

और पानी दोनों टैंगो को बंद कर लेती है

नीलम( अगर सही समय पर होश न आता तो अबतक तो बापू अपना ये मुसल मेरी छूट में पेल देते)

हरिया- क्या हुआ बेटी

नीलम- बापू मेरी एक और इच्छा है

हरिया- तेरी इच्छाएं बहुत है

नीलम जानती थी की उसका बाप सीधा हुआ है पर वो भी क्या करती उसने अपने आप से एक वडा किया था वो उसे hi निभाने की कोशिश कर रही थी

नीलम- बापू मेरी इच्छा तो पूछ लो क्या पता उसमे तुम्हारा भी फायदा हो

हरिया- है ठीक है बेटी बता तेरी क्या इच्छा है

नीलम- बापू मैं कहती हु की मेरे दोनों छेड़ो में एक साथ मेरे भाई और बाप का लुंड जाये

हरिया अपना मुँह खोले अपनी बेटी को देखता रह जाता है

नीलम- क्या हुआ बापू

हरिया- और अगर राजू न मन तो

नीलम- तब तो तुमको तुम्हारा वाला छेद भी नहीं मिलेगा बापू

तुम्हारी बेटी की छूट और गांड की क़ुरबानी एक hi दिन होगी समझे

नीलम हरिया को छेड़ती हुई कहती है

हरिया अबतक अपनी बेटी की छूट का गुलाम बन चूका था

वो होनी धोती उठा कर पेहेन लेता है

नीलम को उसके बाप की शकल पर गुस्सा साफ़ दिख रहा था

पर बिलाम छुओ थी और अपने बापू के कुछ कहने का इन्तजार कर रही थी

हरिआय चुपचाप कपड़े पेहेन कर दरवाजे की और जाता है और दरवाजा खोल कर जैसे hi बहार जाने लगता है

हरिया- बेटी नीलम

नीलम- है बापू

हरिया- जल्दी से राजू को टीएयर कर मुझसे अब और इन्तजार नहीं होता

हरिया की बात सुनकर नीलम के चेहरे ओर एक मुस्कान आ जाती है

नीलम- बस समझ लो बापू 1-2 दिन में hi आपका काम हो जायेगा बस मैं जैसे खु वैसे करना

हरिया एक नजर पलट कर अपनी बेटी को देखता है और एक मुस्कान देते हुए

हरिया- बस तू खुस रह मेरी बच्ची और मुझे क्या चाहिए तेरी ख़ुशी में hi मेरी खुसी है और राजू को अच्छे से फ़साना अपने जाल में जैसे मुझे फसाया था समझी न

हरिया हस्ता हुआ बाजार निकल जाता है

नीलम भी अपने बापू की बात सुनकर है देती है

और नीलम दरवाजे को बंद करके दुबारा से नंगी hi खत पर लेत जाती है और आगे का प्लान बनाने लगती है.........
 
Back
Top