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- Dec 5, 2013
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अपडेट-49
रात कटनी बड़ी भरी थी हरिया के लिए कल उसकी बेटी ने पहली बार सीधे टूर ओर उसका लुंड पकड़ा था
सुबह हो चुकी थी नीलम उठ कर सीधा झोपडी की और आती है
हरिया अभी तक सोया हुआ था
नीलम एक नजर अपने बाप पर डालती है
और वापस से संडास करने चली जाती है
नीलम के अंदर अब उसके बापू के लिए एक अलग hi पहचान बन गयी थी उसे अब लगता था वो अपने बापू से पय्यार कर इ लगी है और जल्दी से जल्दी नीलम अपने बाप के अंदर समै जाना कहती थी
खैर नीलम संडास करके आ जाती है और इधर हरिया भी उठ कर अभी बैठा hi था
नीलम झोपडी की तरफ बढ़ती है और दरवाजे से झक कर देखती है की उसका बाप अभी उठा है और अपनी आँखे मसल रहा है
नीलम को एक शरत सूझती है
वो धीरे से अपना हाथ ोीचे ले जाती है और पेटीकोट को ऊपर उठती हुई एक ऊँगली को अपनी गांड में दाल देती है और अच्छे से घूमने के बाद अपनी ऊँगली निकाल कर सूंघती है
नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान थी
नीलम- बापू देखो मेरी ऊँगली में क्या सुबह गया धुत सुबह रहा है दिख भी नहीं रहा
नीलम झोपडी में घुसते हुए बोलती है
हरिया भी एक पल के लिए दर जाता है
हरिया- दिखा बेटी क्या है
इतने में नीलम अपना एक हाथ आगे करदेती है
और अपनी गांड वाली ऊँगली को आगे निकल देती है
नीलम- बापू पता नहीं क्या सुबह गया है
हरिया- पर ये सुबह कैसे
नीलम- बापू वो न मैं संडास करने गयी थी तब
हरिया नीलम की बात सुनकर शांत हो जाता है पर नीलम बोले जा रही थी
नीलम- पता है बापू मेरे पिछवाड़े से एक बहुत बड़ा हगवास का टुकड़ा निकला वो इतना मोटा था की तुम्हारी बेटी दर्द सेहेन नहीं कर पायी और मैं आगे की और गिरने वाली थी मैंने अपने हाथ जमजन पर लगा दिया
तभी कुछ सुबह गया
आज सुबह सुबह hi हरिया की बेटी उसे उकसाने आ गयी था
अब हरिया भी थोड़ा फ्री मंद हो चूका था
रात को जो कुछ भी हुआ था उसके बाद से अब तक वो इतना तो समझ चूका था की अब उसे उसकी बेटी से कोई नहीं बचा सकता
हरिया- कोई बात नहीं बेटी होता है कभी कभी
नीलम- बापू इतने छोटे छेद से इतनी बड़ी बड़ी चीज़े कैसे निकल जाती है मेरी तो जान hi निकल गयी थी
हरिया के माथे पर अब पसीना आ रहा था
वो चुपचाप अपनी एक ऊँगली से नीलम की ऊँगली को टटोल रहा था
नीलम- बापू ऐसे नहीं निकलेगा मैंने भी तरय किया था आप जीभ से निकालो न
हरिया- ः बेटी ृक्क
नीलम तुरंत hi अपनी ऊँगली अपने बाप के मुँह के पास ले जाती है
और जब हरिया एक जोरदास सांस खींचता है तो वो एक पल के लिए चौक जाता है
क्योंकि उसकी बेटी की ऊँगली से उसकी गांड की मादक महक आ रही थी
इधर हरिया 1-2 अच्छे से सूंघ कर अपनी बेटी की गांड की सुंगंध लेता है
इधर नीलम अपने बापू की हरकत पर मंद मंद है रही थी
नीलम - बापू क्या सूंघ रहे हो
हरिया- पता नहीं बेटी किसी चीज़ की महक आ रही है
नीलम- अरे बापू वो न मैं अभी संडास करके आयी हु तो शायद मेरे ोिछवाडे की बदबू आ रही होगी आप रहने दो मैं हाथ धो कर आती हु
हरिया अब थोड़ा थोड़ा खुलने लगा था
हरिया- अरे बेटी ृक्क ोेहले इस कटे को तो निकाल दू
इतना बोलकर हरिया अपनी जीभ निकल कर अपनी बेटी की ऊँगली को बड़े hi मादक अंदाज में चाट लेता है
नीलम को अब खुसी महसूस हो रही थी क्योंकि उसका बाप जनता था की ये ऊँगली अभी अभी उसकी बेटी की गांड से निकली है फिर भी उसे चाट रहा था
नीलम- अह्ह्ह बापू क्या कर रहे हो ऐसे मत छतो मेरी ऊँगली गन्दी है बापू
हरिया बस ऊँगली को चाटने में लगा था
हरिया की आँखे अपनी बेटी की गांड के महक पाकर लाल हो चुकी थी
नीलम- बापू मैं न अपना पिसवाड़ा धोते वक़्त उस ऊँगली को अंदर दाल कर खुजली कर रही थी इस लिए छोड़ दो मैं अभी धो कर आती हु
अबतक हरिया के अंदर का जानवर जाग चूका था
नीलम को उसके बाप का खड़ा लुंड साफ़ नजर आ रहा था जोकि उसके बापू की धोती में कैद था
हरिया- बेटी ये ऐसे नहीं निकलेगा रुक
इतने में हरिया अपनी बेटी की पूरी ऊँगली मुँह में भर लेता है और उसे चूसने लगता है
अपने बापू को इतना खुलता हुआ देख कर नीलम की छूट का बुरा हाल हो रहा था
पर उसे खुसी भी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब वो अपने बाआप के सामने घोड़ी बनेगी
नीलम- अह्ह्ह्ह बापू गुदगुदी हो रही है
हरिया- बस बेटी रुक जा हो गया
इतने में नीलम अपनी ऊँगली बापू के मुँह से खींच लेती है
नीलम- बापू अब क्या चाट चाट कर hi साफ़ करदोगे मेरी ऊँगली
अभी तक. हाथ नहीं धोया है मैंने संडास करके
हरिया एक पल के लिए बहक गया था जिसका अंदाजा उसे अब हो रहा था
हरिया- बेटी तुझे कटा सुबह था न इसलिए मैंने इतना नन्ही सोचा तू तो बेटी है मेरी
तुझसे कैसी घिनंन बेटी
हरिया की बात सुनकर नीलम को तस्साली मिलती है
की दोनों बाप बेटी की सोच कितनी मिलती है
हरिया - बेटी तू खाना बना दे मुझे आज गोअन में पंचायत में जाना है जल्दी बना दे
नीलम- बापू यही रुको न अपनी बेटी के पास
हरिया- जाना तो पड़ेगा न बेटी पूरा गाओं की बात है
नीलम- मतलब आप मेरे पास नहीं रुकोगे
हरिया नीलम के माथे पर हाथ फहरता हुआ कहता है
हरिया- शाम मो आऊंगा बेटी मैं तेरे पास तू क्यों चिंता करती है तेरा ये बाप तुझे छोड़ कर कभी नहीं जायेगा
नीलम हरिया की बात सुनकर खुस हो जाती है और सीधा अपने बाप के गले लग जाती है
अपनी बेटी की मोती मोती चूचियों को अपनी छाती पर महसूस करके हरिया एक पल के लिए मस्त हो जाता है
नीलम भी एक ज़ोर की साँस लेती है और उसकी चूचिया और भी ज्यादा फूलने लगती है
हरिया कक आभास होता है की उसकी बेटी उसे अपनी चूचियों की शक्ति दिखा रही है
नीलम के गदराये जिस्म से आती मादक महक हरिया को दुबारा से भटका रही थी
धोती के अंदर hi उसका लुंड फनफना रहा था और लगातार नीलम की टैंगो पर टकरा रहा था
नीलम- अह्ह्ह बापू तुम कितने अचे बापू हो कितना ख्याल रखते हो तुम अपनी बेटी का आह्हः बापू
नीलम की आवाज में कामुक सिसकियाँ थी जिसे हरिया भी समझ रहा था
हरिया- चल बेटी अब खाना बना दे तेरा बाप भूखा है
नीलम अब. तक अपने बापू से अलग हो चुकी थी
नीलम एक नजर हरिया के लुंड पर डालती है
नीलम- है बापू वो तो दिख hi रहा है कितने भूखे हो आप
और तिरछी नजरो से देखते हुए घर में चली जाती है
हरिया- कुछ भी खो बेटी बड़ी मस्त है मुझे उकसाने का कोई भी बहाना नहीं छोड़ती आह्हः क्या महक थी उसकी गांड की
इतना सोचते हुए हरिया का हस्त खुद बी खुद अपने लुंड पर चला जाता है
हरिया को लेत हो रहा था वो जल्दी से पाने आपको संभालता है
और नहा धोकर घर के नादर पहुँचता है
नीलम पहले hi अपने बापू का खाना निकाल चुकी थी हरिया चुपचाप बैठ कर खाना खाने लगता है
हरिया अपनी पीठ आंगन में लगे हेण्डपम्प की तरफ करके बैठा था
नीलम चुपचाप हेण्डपम्प के पास जाती है
और अपने पेटीकोट को उठती हुई मूतने बैठ जस्ती है
जैसे hi हरिया के कानो में एक आवाज पड़ती है वो तुरंत पलट कर देखता है
उसकी नजर सीधा अपनी बेटी के बड़े बड़े पिछवाड़े पर पड़ती है
नीलम की छूट से निकलते पेशाब की मधुर सिटी जैसी आवाज हरिया के कानो के साथ साथ उसके लुंड को भी कपकपा रही थी
हरिया जल्दी से खाना निपटा कर िथ जाता है नीलम अभी भी मूतने में hi लगी हुई थी
हरिया एक नजर नीलम पर डालता है जो उसे hi देख रही थी
हरिया- बेटी मैं जा रहा हु तू अपना ध्यान रखना
नीलम- अरे रुको रुको बापू 1 मिनट
नीलम उठते वक़्त अपना पेटीकोट नहीं छोड़ती और जब वो पूरी तरह से खड़ी हो जस्ती है तब एक hi पल में हरिया को उसकी बेटी की मांसल जंघे और गांड नजर आ जाती है
इतने में नीलम उठ कर हरिया के पास आजाती है
नीलम-. बापू जल्दी आना रात को पता है न आज क्या स्पेशल है
हरिया कुछ नहीं बोलता पर नीलम की बात सुनकर उसके चेहरे पर भी एक मुस्कान आ जाती है
हरिया- ठीक है बेटी जल्दी आऊंगा तू ध्यान रखना अपना मैं चलता हु
नीलम- अरे रुको रुको बापू
हरिया- अब क्या हुआ मैं लेत हो रहा हु
नीलम- बापू वो न मेरे पिछवाड़े वाले छेद में खुजली हो रही है आप एक क्रीम ला डोज क्या दूकान से
हरिया की बाटी अब उसके साथ खुल कर बात कर रही थी जिसकी वजह से हरिया का विशाल लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था
हरिया- बेटी तू बड्ज शैतान है
इतना बोलकर हरिया निकल जाता है और नीलम भी अपने काम निपटने लगती है और रात का इन्तजार करती है .....
रात कटनी बड़ी भरी थी हरिया के लिए कल उसकी बेटी ने पहली बार सीधे टूर ओर उसका लुंड पकड़ा था
सुबह हो चुकी थी नीलम उठ कर सीधा झोपडी की और आती है
हरिया अभी तक सोया हुआ था
नीलम एक नजर अपने बाप पर डालती है
और वापस से संडास करने चली जाती है
नीलम के अंदर अब उसके बापू के लिए एक अलग hi पहचान बन गयी थी उसे अब लगता था वो अपने बापू से पय्यार कर इ लगी है और जल्दी से जल्दी नीलम अपने बाप के अंदर समै जाना कहती थी
खैर नीलम संडास करके आ जाती है और इधर हरिया भी उठ कर अभी बैठा hi था
नीलम झोपडी की तरफ बढ़ती है और दरवाजे से झक कर देखती है की उसका बाप अभी उठा है और अपनी आँखे मसल रहा है
नीलम को एक शरत सूझती है
वो धीरे से अपना हाथ ोीचे ले जाती है और पेटीकोट को ऊपर उठती हुई एक ऊँगली को अपनी गांड में दाल देती है और अच्छे से घूमने के बाद अपनी ऊँगली निकाल कर सूंघती है
नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान थी
नीलम- बापू देखो मेरी ऊँगली में क्या सुबह गया धुत सुबह रहा है दिख भी नहीं रहा
नीलम झोपडी में घुसते हुए बोलती है
हरिया भी एक पल के लिए दर जाता है
हरिया- दिखा बेटी क्या है
इतने में नीलम अपना एक हाथ आगे करदेती है
और अपनी गांड वाली ऊँगली को आगे निकल देती है
नीलम- बापू पता नहीं क्या सुबह गया है
हरिया- पर ये सुबह कैसे
नीलम- बापू वो न मैं संडास करने गयी थी तब
हरिया नीलम की बात सुनकर शांत हो जाता है पर नीलम बोले जा रही थी
नीलम- पता है बापू मेरे पिछवाड़े से एक बहुत बड़ा हगवास का टुकड़ा निकला वो इतना मोटा था की तुम्हारी बेटी दर्द सेहेन नहीं कर पायी और मैं आगे की और गिरने वाली थी मैंने अपने हाथ जमजन पर लगा दिया
तभी कुछ सुबह गया
आज सुबह सुबह hi हरिया की बेटी उसे उकसाने आ गयी था
अब हरिया भी थोड़ा फ्री मंद हो चूका था
रात को जो कुछ भी हुआ था उसके बाद से अब तक वो इतना तो समझ चूका था की अब उसे उसकी बेटी से कोई नहीं बचा सकता
हरिया- कोई बात नहीं बेटी होता है कभी कभी
नीलम- बापू इतने छोटे छेद से इतनी बड़ी बड़ी चीज़े कैसे निकल जाती है मेरी तो जान hi निकल गयी थी
हरिया के माथे पर अब पसीना आ रहा था
वो चुपचाप अपनी एक ऊँगली से नीलम की ऊँगली को टटोल रहा था
नीलम- बापू ऐसे नहीं निकलेगा मैंने भी तरय किया था आप जीभ से निकालो न
हरिया- ः बेटी ृक्क
नीलम तुरंत hi अपनी ऊँगली अपने बाप के मुँह के पास ले जाती है
और जब हरिया एक जोरदास सांस खींचता है तो वो एक पल के लिए चौक जाता है
क्योंकि उसकी बेटी की ऊँगली से उसकी गांड की मादक महक आ रही थी
इधर हरिया 1-2 अच्छे से सूंघ कर अपनी बेटी की गांड की सुंगंध लेता है
इधर नीलम अपने बापू की हरकत पर मंद मंद है रही थी
नीलम - बापू क्या सूंघ रहे हो
हरिया- पता नहीं बेटी किसी चीज़ की महक आ रही है
नीलम- अरे बापू वो न मैं अभी संडास करके आयी हु तो शायद मेरे ोिछवाडे की बदबू आ रही होगी आप रहने दो मैं हाथ धो कर आती हु
हरिया अब थोड़ा थोड़ा खुलने लगा था
हरिया- अरे बेटी ृक्क ोेहले इस कटे को तो निकाल दू
इतना बोलकर हरिया अपनी जीभ निकल कर अपनी बेटी की ऊँगली को बड़े hi मादक अंदाज में चाट लेता है
नीलम को अब खुसी महसूस हो रही थी क्योंकि उसका बाप जनता था की ये ऊँगली अभी अभी उसकी बेटी की गांड से निकली है फिर भी उसे चाट रहा था
नीलम- अह्ह्ह बापू क्या कर रहे हो ऐसे मत छतो मेरी ऊँगली गन्दी है बापू
हरिया बस ऊँगली को चाटने में लगा था
हरिया की आँखे अपनी बेटी की गांड के महक पाकर लाल हो चुकी थी
नीलम- बापू मैं न अपना पिसवाड़ा धोते वक़्त उस ऊँगली को अंदर दाल कर खुजली कर रही थी इस लिए छोड़ दो मैं अभी धो कर आती हु
अबतक हरिया के अंदर का जानवर जाग चूका था
नीलम को उसके बाप का खड़ा लुंड साफ़ नजर आ रहा था जोकि उसके बापू की धोती में कैद था
हरिया- बेटी ये ऐसे नहीं निकलेगा रुक
इतने में हरिया अपनी बेटी की पूरी ऊँगली मुँह में भर लेता है और उसे चूसने लगता है
अपने बापू को इतना खुलता हुआ देख कर नीलम की छूट का बुरा हाल हो रहा था
पर उसे खुसी भी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब वो अपने बाआप के सामने घोड़ी बनेगी
नीलम- अह्ह्ह्ह बापू गुदगुदी हो रही है
हरिया- बस बेटी रुक जा हो गया
इतने में नीलम अपनी ऊँगली बापू के मुँह से खींच लेती है
नीलम- बापू अब क्या चाट चाट कर hi साफ़ करदोगे मेरी ऊँगली
अभी तक. हाथ नहीं धोया है मैंने संडास करके
हरिया एक पल के लिए बहक गया था जिसका अंदाजा उसे अब हो रहा था
हरिया- बेटी तुझे कटा सुबह था न इसलिए मैंने इतना नन्ही सोचा तू तो बेटी है मेरी
तुझसे कैसी घिनंन बेटी
हरिया की बात सुनकर नीलम को तस्साली मिलती है
की दोनों बाप बेटी की सोच कितनी मिलती है
हरिया - बेटी तू खाना बना दे मुझे आज गोअन में पंचायत में जाना है जल्दी बना दे
नीलम- बापू यही रुको न अपनी बेटी के पास
हरिया- जाना तो पड़ेगा न बेटी पूरा गाओं की बात है
नीलम- मतलब आप मेरे पास नहीं रुकोगे
हरिया नीलम के माथे पर हाथ फहरता हुआ कहता है
हरिया- शाम मो आऊंगा बेटी मैं तेरे पास तू क्यों चिंता करती है तेरा ये बाप तुझे छोड़ कर कभी नहीं जायेगा
नीलम हरिया की बात सुनकर खुस हो जाती है और सीधा अपने बाप के गले लग जाती है
अपनी बेटी की मोती मोती चूचियों को अपनी छाती पर महसूस करके हरिया एक पल के लिए मस्त हो जाता है
नीलम भी एक ज़ोर की साँस लेती है और उसकी चूचिया और भी ज्यादा फूलने लगती है
हरिया कक आभास होता है की उसकी बेटी उसे अपनी चूचियों की शक्ति दिखा रही है
नीलम के गदराये जिस्म से आती मादक महक हरिया को दुबारा से भटका रही थी
धोती के अंदर hi उसका लुंड फनफना रहा था और लगातार नीलम की टैंगो पर टकरा रहा था
नीलम- अह्ह्ह बापू तुम कितने अचे बापू हो कितना ख्याल रखते हो तुम अपनी बेटी का आह्हः बापू
नीलम की आवाज में कामुक सिसकियाँ थी जिसे हरिया भी समझ रहा था
हरिया- चल बेटी अब खाना बना दे तेरा बाप भूखा है
नीलम अब. तक अपने बापू से अलग हो चुकी थी
नीलम एक नजर हरिया के लुंड पर डालती है
नीलम- है बापू वो तो दिख hi रहा है कितने भूखे हो आप
और तिरछी नजरो से देखते हुए घर में चली जाती है
हरिया- कुछ भी खो बेटी बड़ी मस्त है मुझे उकसाने का कोई भी बहाना नहीं छोड़ती आह्हः क्या महक थी उसकी गांड की
इतना सोचते हुए हरिया का हस्त खुद बी खुद अपने लुंड पर चला जाता है
हरिया को लेत हो रहा था वो जल्दी से पाने आपको संभालता है
और नहा धोकर घर के नादर पहुँचता है
नीलम पहले hi अपने बापू का खाना निकाल चुकी थी हरिया चुपचाप बैठ कर खाना खाने लगता है
हरिया अपनी पीठ आंगन में लगे हेण्डपम्प की तरफ करके बैठा था
नीलम चुपचाप हेण्डपम्प के पास जाती है
और अपने पेटीकोट को उठती हुई मूतने बैठ जस्ती है
जैसे hi हरिया के कानो में एक आवाज पड़ती है वो तुरंत पलट कर देखता है
उसकी नजर सीधा अपनी बेटी के बड़े बड़े पिछवाड़े पर पड़ती है
नीलम की छूट से निकलते पेशाब की मधुर सिटी जैसी आवाज हरिया के कानो के साथ साथ उसके लुंड को भी कपकपा रही थी
हरिया जल्दी से खाना निपटा कर िथ जाता है नीलम अभी भी मूतने में hi लगी हुई थी
हरिया एक नजर नीलम पर डालता है जो उसे hi देख रही थी
हरिया- बेटी मैं जा रहा हु तू अपना ध्यान रखना
नीलम- अरे रुको रुको बापू 1 मिनट
नीलम उठते वक़्त अपना पेटीकोट नहीं छोड़ती और जब वो पूरी तरह से खड़ी हो जस्ती है तब एक hi पल में हरिया को उसकी बेटी की मांसल जंघे और गांड नजर आ जाती है
इतने में नीलम उठ कर हरिया के पास आजाती है
नीलम-. बापू जल्दी आना रात को पता है न आज क्या स्पेशल है
हरिया कुछ नहीं बोलता पर नीलम की बात सुनकर उसके चेहरे पर भी एक मुस्कान आ जाती है
हरिया- ठीक है बेटी जल्दी आऊंगा तू ध्यान रखना अपना मैं चलता हु
नीलम- अरे रुको रुको बापू
हरिया- अब क्या हुआ मैं लेत हो रहा हु
नीलम- बापू वो न मेरे पिछवाड़े वाले छेद में खुजली हो रही है आप एक क्रीम ला डोज क्या दूकान से
हरिया की बाटी अब उसके साथ खुल कर बात कर रही थी जिसकी वजह से हरिया का विशाल लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था
हरिया- बेटी तू बड्ज शैतान है
इतना बोलकर हरिया निकल जाता है और नीलम भी अपने काम निपटने लगती है और रात का इन्तजार करती है .....

