Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 10 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-87

कम्मो रवि का खाना बांध चुकी थी

इधर मेघा दीदी का भी खाना खाने का प्लान अपने छोटे भाई के साथ hi था

कम्मो- दीदी आपका खाना निकल देती हु खा लो

मेघा- एक काम कर तू मेरा खाना भी बांध दे आज मैं भी अपने छोटे भाई के साथ hi खाउंगी

कम्मो तुरंत hi 2 लोगो का खाना बांध देती है

और मेघा दीदी भी खुसी खुसी निकल जाती है

और रेखा और कम्मो गुमसुम सी बैठी मेघा दीदी को अपने हीरो के पास जाती देखती रहती है

कम्मो- दीदी आपका खाना निकल दू

रेखा- नहीं रहने दे मुझे भूख नहीं है

इतना बोलते हुए रेखा मायूसी के साथ अपने कमरे में चली जाती है

बेचारी मायूस भी क्यों न होती आज उसने वडा जो किया था रवि से खेतो में छोड़ने का

असल में कम्मो को बड़ा hi मजा आ रहा था रेखा दीदी को यु उदास देख कर

कम्मो थाली में अपना खाना निकल कर खाने बैठ जाती है

कम्मो( वह जी वह रेखा दीदी एक दिन लुंड न मिला तो इतनी उदास हो गयी की खाना पीना सब छोड़ दिया कोई अभी तो आपको कल का दिन भी तरसना पड़ेगा परसो भले hi जी भर के छुड़वाना अपने सरे छेड़ो को रवि से)

मेघा दीदी बड़ी hi खुश थी आज उसे रवि के साथ अकेले वक़्त बिताने का जो मौका मिला था

अभी मेघा रस्ते में hi थी की उसे सामने से हरिया आता हुआ दिखाई देता है

हरिया- अरे अरे मेघा बेटी बड़े दिनों बाद दिखी तू कैसी है

मेघा ने भी हरिया को काफी दिनों बाद hi देखा था

मेघा तुरंत hi अपना फरज़ज़ निभाते हुए झुक कर हरिया कई पेअर चुने लगती है

हरिया तो था hi पुराण हरामी

तुरंत hi हरिया अपने हाथो को आगे बढ़ते हुए मेघा की पीठ को दोनों हाथो से थम लेता है

हरिया- अरे अरे बेटी क्या कर रही है तू इसकी कोई जरुरत नहीं है

मेघा- जरूरत कैसे नहीं है काका हमारे बापू के जैसे हो आप

हरिया- है ये तो तूने सही खा बचपन में मैं तुझे गॉड में खिलता था पर अब तो देख इतनी बड़ी हो गयी की अगर काका की गोदी में साध गयी तो पक्का तेरा ये काका मर्डर hi जायेगा

मेघा- अरे काका कैसी बात कर रहे है हम कल भी आपके बच्चे थे और आज भी है बस थोड़े बड़े हो गए है अब हम लोग

हरिया- अरे थोड़े नहीं पुरे बड़े हो गए है अब तो तू पूरी औरत बन्न गयी है

भगवान् करे हमेशा तू ऐसे hi हस्ती मुस्कुराती रहे

बाटे करते करते न जाने कितनी hi बार हरिया मेघा की चूचियों से उसकी कमर तक्क कितनी बार उसका नाप ले चूका था

मेघा भी हरिया काका की नजरो को भाप चुकी थी

हरिया- कब की आयी हुई है तू

मेघा- बास काका 2-4 दिन हुए है

हरिया- अभी तो रहना है न तुझे

मेघा- है काका अभी तो फ़िलहाल यही हु

हरिया- अच्छा चल ठीक है बेटी समय मिले तो किसी दिन आना घर नीलम से भी मिल लेना बेचारी गुमसुम सी रहती है अब तो वो भी पूरी जवान हो चुकी है पर मैं उस बेचारी की शादी नहीं कर पाया

मेघा( उदास भी क्यों न रहे बेचारी एक तो उसकी शादी नहीं हुई और जरूर ये बुद्धा अपनी बेटी की जवानी का मजा दिन रात ऐसे hi घूरते घूरते लेता रहता होगा बेचारी नीलम )

मेघा- कोई बात नहीं काका फ़िक्र न करो आअज नहीं तो कल नीलम का भी बियाह होगा

अच्छा काका मैं चलती हु रवि भूखा होगा लेत हो रहा है

हरिया- ठीक है बेटी तू जा आना कभी घर की और

मेघा हरिया से विदा लेती हुई अपने खेतो की एयर बढ़ जाती है

हरिया अपने आपको रोक नहीं पता और तुरंत hi पीछे पलट कर मेघा को जाते हुए देखता रह जाता है

हरिया ( क्या hi मस्त हो गयी है रे मेरी मेघा रानी तू किसी मस्तानी हथनी की तरह अपनी गांड और चूचिया उठा उठा कर चल रही है मस्त कर देती होगी तू अपने पति को रात भर)

मेघा( साला हरामी बुद्धा कैसे घर रहा था और तो और अपने घर आने का न्योता भी दे रहा था इसके घर गयी तो मुझे तो वही पटक कर छोड़ देगा बड़ा hi गरमी हो ये हरिया बुद्धा रेखा को भी मना करना पड़ेगा इसके घर जाने को )

मेघा भी एक बार पलट कर हरिया की और देखती है जो लगातार उसे hi देख रहा था जबकि अब तक्क मेघा काफी दुर्र तक्क आ गयी थिई

जैसे hi मेघा पलट कर देखती है हरिया के चेहरे पर एक हर्मियो वाली मुस्कान आ जाती है और उसका एक हाथ अपने लुंड को मसल रहा था असल में वो भी यही कहता था की मेघा को भी उसके इरादों के बारे में मालूम पड़ जाये

मेघा( देखो तो कितना हरामी है बुद्धा सामने से बेटी बोलता है और पीछे से अपनी मुँहबोली बेटी की मटकती हुई गांड देख कर मजे से अपना लुंड मसल रहा है इसका बास चले तो अपनी hi सगी बेटी को छोड़ देगा

हे भगवन पता नहीं इसने अभी तक्क नीलम को छोड़ा होगा या उसकी भी इज़्ज़त लूट ली होगी)

मेघा तुरंत hi पलट कर अपने खेतो की और निकल जाती है

इधर मेघा को देख कर हरिया का भी दिमाग खराब हो गया था और उसका लुंड उसकी धोती में hi झटके मार रहा था

हरिया भी बड़े बड़े कदमो से अपने घर की और निकल जाता है अपनी बेटी को भोगने के लिए

इधर मेघा भी खेतो में पहुंच जाती है सामने hi रवि खेतो में बिज़ डाल रहा था

रवि- अरे दीदी आज आप आयी हो खाना लेकर कम्मो दीदी को क्या हुआ

मेघा- क्यों रे तुझे क्या खाना सिर्फ कम्मो hi ला के दे सकती है

तेरी ये दीदी नहीं ला सकती क्या

वैसे आज रवि सुबह से hi सोच कर बैठा था की खाना लेकर रेखा दीदी hi आएंगी और खेतो में वो रेखा दीदी को रगड़ रगड़ कर उनकी गांड मरेगा पर यह तो पूरा सीन hi बदल गया

रवि- नहीं नहीं दीदी आप भी तो दीदी हो मेरी

मेघा- है है चल ज्यादा मस्का मैट लगा चल जल्दी आजा खाना खाने मुझे भी भुक्ख लगी है

रवि- दीदी आपने खाना नहीं खाया अभी तक्क

मेघा- मेरा छोटा भाई भूखा प्यासा खेतो में काम कर रहा है और मैं यही घर पर पड़ी पड़ी खाना खलु चल जल्दी आजा मिल कर खाएंगे दोनों भाई बेहेन

रवि- बास 2 मिनट में आया दीदी

रवि तुरंत हाथ पेअर धो कर खाने के लिए बैठ जाता है

सामने की और मेघा दीदी बैठी थी

और मेघा ने दोनों का खाना एक hi थाली में निकला था

जब जब मेघा अपने हाथो से निवाला रवि के मुह्ह में डालती तो उसका पल्लू गिर जाता

रवि भी नजर बचा बचा कर अपनी दीदी की चूचियों की गहराइयो में एक डुबकी लगा लेता और जब्ब तक्क मेघा दीदी की नजरे ऊपर होती वो दुबारा से अपनी दीदी के चेहरे को देखने लगता

असल में रवि भी जान चूका था की आज नहीं तो कल उसकी मेघा दीदी भी उसके सामने घोड़ी बनेगी और उस समय वो अपने सरे अरमान पुरे कर लेगा पर चुदाई के उस खेल से पहले वो अपनी दीदी के सामने भोलाभाला छोटा भाई बन कर अनजाने में hi सरे मजी लेना कहता था

फ़िलहाल तो उसके पास उसकी गरमा गरम रेखा दीदी छोड़ने के लिए थी hi

मेघा- बड़ी गर्मी है रे रवि खेतो की और तो तू कैसे काम कर लेता है इस गर्मी में

असल में रवि सिर्फ एक धोती में बैठा था और उसका गठीला बदन पूरा का पूरा पसीने से भीगा हुआ था जिसे देख देख कर बार बार मेघा दीदी के मुह्ह में पानी आजाता था और वो तो बिना किसी दिक्कत के रवि के गठीला बदन घूरे जा रही थी

रवि( दीदी तो ऐसे देख रही है जैसे मुझे खा hi जाएँगी और देखो तो बिना किसी शर्म के मुझे कैसे घुर्र रही है)

असल में मेघा के लिए रवि आज भी कल वाला रवि था

मतलब एकदम सीधा साधा भोलाभाला

रवि- दीदी गर्मी तो लगती है डेल्हो न पूरा शरीर कैसे पसीने पसीने हो गया है

मेघा- है रे तू तो पूरा का पूरा भीग गया है

इतना बोलते हुए मेघा अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपने छोटे भाई को छाती पर लगा पसीना अपने हाथो से पॉच देती है

और अपना हाथ वापस लेकर रवि से बचते हुए उसके पसीने की खुसबू को सूंघ कर अनादर hi अंदर मस्त हो जाती है

जैसे hi मेघा की नाक में उसके छोटे भाई के पसीने की महक जाती है उसके शरीर में एक बिजली का झटका सा लगता है जो उसकी छूट पर आकर सिमट जाता है और मेघा की छूट से हल्का सा चिपचिपा पानी बहार को आने लगता है

मेघा ( हेय दिया क्या hi महक है रे छोटे तेरे पसीने की मैं करता है तेरा पसीने पूरा का पूरा छत्त छत्त कर साफ करदु)

रवि- दीदी आपको भी तो गर्मी लग्ग रही है

देखो तो आपका पूरा का पूरा ब्लाउज कैसे भीग गया है

पूरी की पूरी बात रवि बिना किसी झिझक के एक सास में बोल देता है

रेखा दीदी से क्लासेज लेने के बाद अपना रवि एक्टिंग करने में माहिर हो गया था

मेघा भी एक नजर अपनी चूचियों को देखती है जोकि पूरी की पूरी भीग चुकी थी

मेघा- है रे मैं तो पूरी भीग गयी देख न खेत में आने के बाद तो तेरी दीदी को भी गर्मी लगने लगी और तेरी तरह hi पूरी की पूरी मैं भी भीग गयी हु ऊपर से

रवि- है दीदी देखो तो कितनी भग्ग गयी हो आप

इतना बोलते हुए रवि अपने एक हाथ को आगे बढ़ता हुआ मेघा दीदी की छाती को छू कर पसीने का जायज़ा लेता है

पर रवि का हाथ चूचियों से काफी ऊपर था असल में वो मेघा दीदी को कोई भी ऐसा हिंट नहीं देना कहता था की मेघा दीदी उस्ले इरादे भाप जाये

मेघा दीदी सच मच में भीगी हुई थी अब लता नबी ये गर्मी सूरज की थी या रवि की

रवि का पूरा का पूरा हाथ पसीने से भीग गया था

रवि कहता तो था की अपनी दीदी के पसीने को चाट कर उसके स्वाद को जान सके पारर वो जनता था की उसकी ये चोरी अगर पकड़ी गयी तो सारा मजा खराब हो जायेगा

दोनों भाई बेहेन अबतकक खाना खा चुके थे

मेघा- तेरा पेट भर गया न रवि

रवि- है दीदी एक शूम मस्त खाना खिलाया आज तो आपने

रवि- दीदी एक काम करो अब आप घर जाओ मैं भी आ जाऊंगा शाम तक्क

मेघा- अरे बुद्धू मैं तुझे खाना खिला कर घर जाने के लिए थोड़े hi आयी थी

रवि- पारर दीदी देखो तो कितनी गर्मी है और मुझे भी बहुत सरे बिज़ बोन है

मेघा- अरे छोटे ये गर्मी तो मैं न जाने कितने सालो से झेल रही हु और तू बू ले अपने बीज़ज़ झा बोन है मैं तेरा हाथ पकड़ कर थोड़े hi बैठा रही हूँ

रवि- तो दीदी आप करोगी क्या शाम तक्क

मेघा- तू एक काम कर तू अपने बीज़ज़ बो ले इतनी देर मैं इस पेड़ के निचे सो जाती हु तू अपनी खत यह डालदे

रवि- पर दीदी

मेघा- खत दाल दे बोलै न तुझे

रवि चुपचाप खत को पेड़ के निचे दाल देता है और उसपर एक चादर बिछा देता है

मेघा- अच्छा रवि सुन्न तो जरा

रवि- हां दीदी

मेघा- मुझे न गाना चूसना है

रवि- पर दीदी इस समय तो अपने खेत में गाना hi नहीं है

मेघा- अरे बुद्धू वो देख सामने वाले खेत में कितने मोठे मोठे गन्ने लगे है

रवि- पारर दीदी ये तो हरिया काका का खेत है

मेघा( अब तो और भी मजा आएगा आज इस ठरकी बुड्ढे के खेतो से गन्ने चुरा चुरा कर चूसूंगी मजा आएगा अब तो)

मेघा- तो क्या हुआ हम थोड़े hi ोुरा खेत चुरा रहा है

रवि- रुको दीदी मैं आपको लेकर देता हु

मेघा- अभी नहीं अभी मुझे नींद आ रही है शाम को जब्ब तेरा कम् हो जाये तो मुझे उठा देना दोनों साथ में एक मोटा तजा गणना धुंध लेंगे

रवि- ठीक है दीदी आप आराम करो कुछ चाहिए तो बोलना

मेघा- अच्छा ग अब तू अपनी दीदी की जरूरतों को भी पूरा करने लायक हो गया है वह मेरे छोटे भाई इसलिए तो तुझपर इतना प्यार आता है

रवि- दीदी अब आप दिन भर घर में मेरा इतना ख्याल रखती हो तो खेतो पारर तो मेरा फरज़ज़ बनता है ना अपनी दीदी का ख्याल रखने का

मेघा- अच्छा चल ठीक है मुझे कुछ भी चाहिए होगा तो मैं बोल दूंगी तू जा कर बीज़ज़ बू ले और तब तक्क तेरी ये दीदी सो लेती है ठीक है बाबूउ

रवि- ठीक है दीदी आप आराम करो मैं काम निपटा लेता हु

रवि पलट कर खेत में चला जाता है

रवि( दीदी आप चिंता न करो एक बार आप बोल कर तो देखो आपको अपने छोटे भाई का लुंड पहले कोनसे छेद में लेना है आपकी साडी इच्छाएं पूरी करेगा दीदी आपका ये छोटा भाई)......
 
अपडेट-88

दोपहर भर रवि खेतो में काम करता रहा और थोड़ी थोड़ी देर पर अपनी बड़ी दीदी को सोते हुए भी एक नजर निहार लेता

आज सोइ हुई मेघा दीदी रवि को दुनिआ की सबसे खूबसूरत और गदराये जिस्म वाली औरत दिखाई दे रही थी

आलम ये था की खेतो में बीज़ज़ डालते वक़्त भी दोपहर से शाम तक्क रवि का लुंड खड़ा का खड़ा hi रहा और उसकी धोती में झूलता रहा जब जब रवि अपनी दीदी को देखता उसका जोश और दोगुना हो जाता

रवि( कमाल का जिस्म है मेघा दीदी आपका

ध्यान से देखने पर मालूम पड़ता है की मेरी दीदी की कामदेवी से काम नहीं है खैर मेरी तो साडी दिदिया hi ेल से बढ़ कर एक है और मेघा दीदी आपकी तो बात hi अलग है अब तो आपके साथ ये भाई बेहेन का गन्दा खेल खेलने में और भी मजा आने वाला है )

अपनी दीदी के बारे में सोचते सोचते रवि के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

सूरज ढलने को था अभी मेघा दीदी को गणना भी चुसवाना था पर रवि के दिमाग में आज कुछ और hi प्लान चल रहा था वो सूरज के पूरी तरह से ढल जाने के इन्तजार में था इधर मेघा दीदी इस बात से बेखबर की उसका छोटा भाई अब उसके साथ वो खेल शुरू करने वाला है जिसके बाद से वो खुद बा खुद hi अपने भाई की गुलाम बनने के लिए बेताब हो जाएगी

सूरज पूरी तरह से ढल चूका था

हल्के अँधेरा और हलकी रौशनी और शाम का सुहाना मौसम था

अब रवि को माहौल ठीक लगता गई है और वो अपनी मेघा दीदी को जगाने के लिए उनकी खत की और बढ़ता है

जैसे hi रवि की नजर मेघा दीदी के ब्लाउज पर पड़ती है उसके मुह्ह में पानी आ जाता है

भले hi मौसम सुहाना था हवा अच्छी खासी चल रही थी पारर मेघा दीदी तो यह पूरी तरह पसीने में लटपट सो रही थी

एक बार को तो रवि का भी ईमान दोल जाता है अपनी दीदी को इस हालत में देख कर पर वो जैसे तैसे अपने आप पर काबू करते हुए एक हाथ को सीधा मेघा दीदी के नंगे पेट पर रखते हुए उसे सहलाता हुआ अपनी दीदी को जगाने लगता है

यह समझ पाना थोड़ा मुश्किल था की रवि अपनी दीदी का गुदाज पेट सेहला रहा है या अपनी दीदी को सचमुच में जगा रहा है

क्योंकि रवि की पकड़ तो मजबूत थी मेघा दीदी के पेट पर बाकि उसकी आवाज में कोई दम नहीं था

कभी कभी रवि अपनी एक ऊँगली को अपनी दीदी की गहरी नाभि के थोड़ा सा अंदर घुसा कर अपनी दीदी की नाभि की गहरायी नापने की कोशिश करता पर अगले hi पल उसे डर भी लगता की कहि दीदी उसकी हरकतों को भाप न जाई

रवि- दीदी उठो न देखो कितनी देर हो गयी गणना नहीं चूसना क्या आपको

थोड़ी सी और कोशिश करने के बाद hi मेघा उठ जाती है

मेघा- अरे ये क्या रात होने वाली है और तूने जगाया भी नहीं मुझे

रवि- अच्छा ग आधे घंटे से जगा रहा हु आप तो उठने का नाम तक्क नहीं ले रही

मेघा- तू आधे घंटे से जगा रहा है क्या मुझे सच में

रवि- और नहीं तो क्या दीदी पर आपतो कुम्भकरण बन कर सोई थी

मेघा- अरे तो थोड़ा जोरर लगा कर उठता न

रवि( दीदी सोते सोते में क्या hi जोर लगाना एक बार मेरी गाड़ी को पटरी पारर आने दो तब्ब देखना इतना ज़ोर लगाऊंगा की आपकी हालत खराब हो जाएगी )

रवि- अच्छा दीदी ये सब छोड़ो चलो उठो घर नहीं चलना क्या

मेघा- अरे अभी तो मुझे गणना भी चूसना है

रवि- पारर दीदी इतना अँधेरा हो गया है रेखा दीदी गुस्सा हो जाएँगी अगर हम ज्यादा देर से घर गए क्या

मेघा- अरे रेखा क्या मेरी माँ है क्या तुझे पता है न तू किसके साथ है मुझसे सब डरते है घर में कोई कुछ नहीं बोलेगा भले hi हम आधी रात को घर जाये

रवि- अच्छा दीदी सब डरते है आपसे पारर मैं तो नहीं डरता अपनी प्यारी दीदी से

मेघा बड़े hi प्यार से अपने छोटे भाई के सर पर हाथ फेरते हुए बोलती है

मेघा- अरे बुद्धू तुझे मुझसे डरने की जरूरत भी नहीं है समझा और न hi मेरा कोई इरादा है अपने छोटे भाई को डरने का

रवि( है दीदी ये तो सही बोलै अआपने पर मैं जानता हु की आपका क्या इरादा है )

मेघा- चल जल्दी चल गाना उखाड़ लेते गई है हरिया के खेत से कहि कोई आ गया तो

रवि- अरे दीदी इतनी रात को कौन आएगा आराम से कोई मस्त सा गणना धुंध कर उखाड़ लेना

रवि भी अपनी खत को झोपडी के अंदर करते हुए सारा समान अपनी जगह पर रख देता है

रवि- चलो दीदी अब चलो

मेघा और रवि हरिया के खेतो के पास पहुंच जाते चाय

रवि- देख लो दीदी कोनसा गणना उखाड़ना है बताओ

मेघा- अरे यहां तो सब मरियल मरियल गन्ने है कोई भी मोटा तजा नहीं दिख रहा

रवि- दीदी आपको सच में मोटा गणना hi चूसना है क्या

मेघा- और क्या कह रही हु मैं सुबह से

रवि- तब तो दीदी हमे खेत के बिच में जाना पड़ेगा आपको डर तो नहीं लगेगा ना

मेघा- जब्ब मेरा छोटा भाई साथ में रहेगा तो मुझे कैसा डर

रवि- ठिक्क है दीदी चलो

हरिया का ये गन्ने का खेत काफी बड़ा था मेघा और रवि दोनों एक किनारे से खेत के अंदर घुस जाते है

रवि- दीदी जगह काफी कम् है आप एक काम करो आप आगे चलो और मैं आपके पीछे पीछे आता हु

मेघा- ठिक्क है चल

मेघा अभी 2-3 कदम hi चली थी की उसका पेअर किसी कहते पारर लगता गई है और वो गिरते गिरते बचती है

रवि - अरे अरे दीदी संभाल के

मेघा- यह तो बहुत सरे कहते है रे रवि तू एक काम कर मुझे पीछे से पकड़ ले

कहि मैं दुबारा न गिर्र जाऊ तू तो जनता hi है तेरी दीदी कितनी मोती हो गयी है

रवि- ठिक्क है दीदी पर क्या पकडू

मेघा- अरे बुद्धू मेरी कमर को पकड़ ले और खूब अच्छे से पकड़ना नहीं तो तेरी ये दीदी घायल हो जाएगी

रवि की तो मनो लाटरी hi लग गयी थी उसकी खुसी उसके चेहरे पारर साफ़ साफ़ नजर आ रही थी

रवि भी तुरंत hi एक अच्छे भाई की तरह अपनी दीदी की आज्ञा का पालन करते हुए अपने दोनों हाथो को अपनी दीदी की कमर के साइड पर लेजाकर बड़ी hi मजबूत पकड़ के साथ अपने हाथो को टिका देता है

रवि- दीदी अब ठीक है ना

मेघा- है अब ठीक है बस तू मजबूती से पकड़े रहना अपनी दीदी की कमर को

रवि- आप चिंता न करो दीदी भरोषा रखो अपने भाई पारर

मेघा- पूरा भरोषा है रे तेरी इस दीदी को तुझ पारर

अब मेघा जैसे जैसे आगे बढ़ रही थी बॉडी की मूवमेंट के साथ साथ रवि बड़े hi शातिर अंदाज में अपनी दीदी की कमर को मसल रहा था जिसका थोड़ा बहुत असर तो मेघा पर भी हो रहा था ऊपर से ये गर्मी दोनों भाई बेहेन ऊपर से निचे तक्क पूरी तरह पसीने में भग्ग चुके थे

मेघा- अरे गन्ने के खेत में तो और भी गर्मी है रे रवि

रवि- हां दीदी मैं तो ऊपर से निचे तक्क पूरा का पूरा भीग गया हु

मेघा- तेरी दीदी तो ऊपर निचे अंदर बहार साडी जगह से भीग चुकी है

रवि- पहुंच गए दीदी हम अब आप देखो कौन सा गणना चुसोगी आप

मेघा तुरंत hi एक गणना चुनन लेती है

रवि- रुको दीदी मैं इसे उखाड़ देता हु

मेघा- अरे अरे चूसना मुझे है तो मैं hi उखडुंगी ना

रवि- अरे दीदी ये कोई बच्चो का खेल नहीं है बड़ी जान लगती है आपसे न हो पायेगा

मेघा- अच्छा तो अब तू बताएगा क्या हो पायेगा और क्या नहीं मुझसे

रवि- दीदी मतलब बड़ी जान लगती है इसे उखाड़ने में

मेघा- तो ठीक है तू एक काम कर मुझे पीछे से पकड़ ले और जब मैं गणना खीचू तो तू मुझे खींचना ौसे तो निकल जायेगा न

रवि के चेहरे पर एक बार फिर वही पुराणी वाली मुस्कान लौट आयी थी आज उसे अपनी दीदी के बदन से उठती मादक पसीने की गंध को सूंघने का पहला मौका जो मिलने वाला था

मेघा- बोल न खा खो गया ऐसे तो निकल जायेगा न

रवि- हां दीदी निकल जायेगा ऐसे

मेघा तुरंत hi उस गन्ने को पकड़ लेती है और रवि भी अपना लटकता हुआ गणना लेकर अपनी दीदी के पीछे आ जाता है और अपनी छाती को मेघा दीदी की पीठ से चिपका देता है और अपने हाथो को आगे लेजाकर मेघा दीदी के गुदाज पेट को अच्छे से पकड़ लेता है

मेघा थोड़ा जोर लगती है और थोड़ा रवि पर गन्ने की जड़े काफी मजबूत्त थी

मेघा- अह्ह्ह्ह और जोरसे खींच छोटे

रवि- ः दीदी खींचो खींचो दम लगाओ

दम तो असल में बस मेघा hi लगा रही थी रवि तो पीछे से अपनी दीदी के बदन उठती मादक महक को सूंघने में वयस्त था जिसका असर सीधा उसके लुंड पारर हो रहा था और थोड़ी hi देर में रवि का लुंड अपनी पूरी औक़ात में आ चूका था पर अब तक्क उसने अपनी कमर को मेघा दीदी की कमर से दुर्र hi रखा हुआ था

मेघा- अरे बुद्धू क्या कर रहा है और जोरसे खींच मुझे जान लगा थोड़ी नहीं तो रात भर लग्ग जाएगी एक गणना उखाड़ने में

रवि को तो मनो इसी पल का इन्तजार था

तुरंत hi रवि एक झटके के साथ अपनी दीदी से पूरी तरह चिपक जाता है

और एक hi झटके के साथ रवि का आधे से ज्यादा लुंड उसकी दीदी की गांड में समा जाता है पेटीकोट और सदी के ऊपर से hi

इस हमले से तो जैसे मेघा की सांसे ऊपर निचे होने लगती है

अपनी गांड के बिच में फसा छोटे भाई का लुंड अब उसी परेशान कर रहा था

अब मेघा को अपने छोटे भाई का लुंड अपनी गांड पारर साफ़ साफ महसूस हो रहा था

अब आलम ये थे की रवि तो पीछे से पूरा जोरर लगा रहा था पारर गणना उखाड़ने के लिए नहीं बल्कि अपना बाकि का लुंड भी अपनी दीदी की गांड में ठूसने के लिए

और अब मेघा का शरीर बिना किसी हरकत के अपने छोटे भाई के धक्को को अपने अंदर समेटे जा रहा था गन्ने पर से उसकी पकड़ ढीली हो चुकी थी

रवि- अह्ह्ह दीदी बड़ा hi मजबूत्त गणना है देखो न हिलने का नाम hi नहीं ले रहा

मेघा- हां रवि सच में बड़ा hi मजबूत्त है देख तो कैसे एक दम सीधा खड़ा है

रवि- दीदी जोर लगाओ बस निकलने hi वाला है

इस बार मेघा अपना अगला दाव खेलती है और गणना खींचने के भने हल्का सा पूछे होती हुई अपने छोटे भाई के सामने झुक जाती है जिसके वजह से रवि का विशाल लुंड सदी को. साथ लेते हुए अपनी दीदी की बड़ी गांड की गहराइयो में गुम्म हो जाता है

रवि- अह्ह्ह दीदी ये नहीं निकलेगा

मेघा- अह्ह्ह्ह ये तो सच में पूरा अंदर तक्क घुसा हुआ रे है

रवि- पता नहीं दीदी अभी ये कितनी अंदर तक्क घुसा हुआ है थोड़ा भी बहार नहीं निकला अभी तक्क तो

मेघा- अभी तो अंदर काफी जगह है रे छोटे भाई

रवि- दीदी आपको कैसे पता की कितनी जगह है

रवि जनता तो था की उसकी दीदी किश गहरायी को बात कर रही है पारर वो एक शरीफ और मासूम बच्चा बनने की पूरी कोशिश कर रहा था

मेघा- तेरी दीदी सबब जानती है समझा अब जोर लगा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

रवि- क्या हुआ दीदी

मेघा- बहुत मचार काट रहे है यह पारर तो

रवि- देखा दीदी इसलिए मेने बोलै था बहार से hi कोई गणना लेलो पर आपको तो मोटा तजा गणना hi चूसना था ना

मेघा- अरे मिल तो गया जो मुझे चाहिए था अब कहे मच्चर कटे या भट्ट अब कोई चिंता नहीं तू जोर लगा अहह मर्डर गयी

इस बार दोनों भाई बेहेन खूब जोर लगते है और अच्चानक से रवि अपने हाथो को दीदी के पेट से सरकता हुआ चुकी पर रख देता है और दोनों चूचियों को एक साथ दबाते हुए अपनी और खींचता है

किस्मत भी देखो जैसे hi छोटे भाई ने अपनी दीदी की चूचियों को थमा साला गणना भी उसी टाइम बहार आ गया

रवि के हाथ अभी भी अपनी दीदी की चूचियों पर hi ठीके थे पर उसकी पकड़ ढीली पड़ चुकी थी दोनों भाई बेहेन खड़े खड़े हाफ रहे था

रवि- दीदी अब तो मिल गया न आपको गणना चलो रस्ते में चूस लेना

मेघा अब अपना अगला दाव चलने के लिए बेकरार थी

मेघा- अरे गणना तो मिल गया पर मेरे चूतड़ों के बिच ये क्या सुबह रहा है

मेघा दीदी की ये बात सुनकर तो मनो रवि का गला hi सूखने को हो जाता है उसे समझ नहीं आता की अब वो अपनी दीदी को क्या hi जवाब देगा

मेघा अपनी टंगे चौड़ी करती हुई अपने हाथ को दोनों पैरो के बिच से सीधा रवि के लुंड पर टिका देती है

मेघा- है रम्म ये क्या है इतना मोटा गणना मेरी चूतड़ों में कैसे घुस गया

रवि- दीदी वो ये गणना नहीं है

मेघा तुरंत hi पलट जाती है और एक झटके के साथ hi रवि का लुंड उसकी दीदी की गांड से बहार आ जाता है

मेघा- गणना नहीं है तो क्या है रे इतना मोटा

रवि- दीदी वो वो

मेघा- हाय रामम तेरी लुल्ली इतनी मोती कैसे हो गयी रे रवि और तू इसे मेरी गांड में क्यों घुसा रहा था

यह मेघा भी एक अच्छी दीदी होने की कोशिश कार रही थी क्योंकि वो जानती थी की रवि जितने भोले बच्चे को फ़साने के लिए उसे यही सब करना पड़ेगा

इधर रवि भी भोलेपन की एक्टिंग में कोई कसार नहीं छोड़ रहा था

रवि- दीदी पता नहीं मेरी लुल्ली इतनी बड़ी और मोती कैसे हो गयी

मेघा- अच्छा कबसे हो रही है तेरी लुल्ली मोती

रवि- दीदी 1 हफ्ते के ऊपर हो गया बड़ा दर्द होता है जॉब ये मोती हो जाती है तू

मेघा- तो पहले क्यों नहीं बताया रे तूने मुझे

रवि- दीदी डर लगता था की कहि आप गुस्सा न हो जाओ

मेघा- सच में तू पागल है अपनी दीदी को नहीं बताएगा तो क्या गाओं में जाकर बताएगा की तेरी लुल्ली मोती हो गयी है

रवि- दीदी माफ़ कार्डो

मेघा- अच्छा चल छोड़ ला मुझे देखने दे क्या दिक्कत है तेरे साथ

मेघा किसी जंगली बिल्ली की तरह तुरंत hi अपने छोटे भाई के लुंड पर पड़ी धोती को पीछे की और सरका देती है

मेघा ने आज पहली बार रवि का लुंड इतने पास से देखा था उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रेहह गयी थी

पारर वही दूसरी तरफ उसके मैं में हजारो बाटे चल रही थी आज इस लुंड को देखने के बाद वो इतना समझ चुकी थी अब उसकी साडी ख्वाहिशें पूरी होने वाली है

मेघा की आँखों में एक चमक थी जिसे रवि भी देख सकता था और वो अंदर hi अंदर काफी खुश था

मेघा- हेय भगवान ये कैसे हो गया मेरे छोटे भाई के साथ

रवि- क्या हुआ है दीदी मुझे क्या मैं मरने वाला हु

मेघा- अरे बुद्धू लड़के मरे तेरे दुसमन

रवि- तो फिर क्या हुआ है दीदी मुझे

मेघा- तुझे पता है तेरा लुंड मतलब तेरी लुल्ली इतनी मोती कैसे हो गयी है

अपनी दीदी के मुह्ह से लुंड सब्द सुनकर रवि का लुंड एक जोरदार झटका मरता है जिसे वो अपनी दीदी से छुपा नहीं सकता था

रवि- कैसे दीदी

मेघा- इसके अंदर न पानी भर गया है

रवि- पारर दीदी मैंने तो थोड़ी देर पहले hi पेहसाब करके सारा पानी निकाल दिया था

मेघा- अरे वो पानी नहीं ये दूसरा पानी है जो थोड़ा चिपचिपा होता है

रवि- तो दीदी वो कैसे निकलेगा

मेघा - मेरे पास एक उपाय तो है पर पहले तू एक वडा कर

रवि- दीदी आप मेरी लुल्ली को ठिक्क कार्डो मुझे सबब मंजूर है

मेघा- अरे सुन्न तो ले पहले

रवि- है दीदी बोलो

मेघा- मैं जो भी करुँगी उसके बारे में तू न तो रेखा को बोलेगा और न hi कम्मो को ये इलाज सिर्फ हम दोनों के बिच hi रहेगा

रवि- बास दीदी इतनी सी बात नहीं बोलूंगा किसीको

मेघा- इतनी सी बात नहीं अगर कभी भी किसी को कुछ बोलै तो मुझसे दुबारा कभी बात मैट करना न hi मैं करूंगी

समझा

रवि- दीदी पकक्का वडा बास अब तो ठीक कार्डो

मेघा- एक काम कर ये धोती निकल दे

रवि तुरंत hi अपनी धोती खोल कर निकल देता है अब वो निचे से पूरा नंगा हो चूका था

इधर मेघा को ऐसा लग्ग रहा था की जैसे उसके छोटे भाई का लुंड लगातार और भी बड़ा होता जा रहा है

मेघा- अब तू चुपचाप खड़ा रहना मैं जो करती हु चुपचाप देखते रहना कुछ मैट बोलना समझा न यही इलाज है

रवि- ठिक्क है दीदी

मेघा तुरंत hi अपना हाथ आगे बढ़ती हुई रवि का लुंड पकड़ लेती है

आज उसे पहली बार आभास हो रहा था की उसके छोटे भाई का लुंड उसकी सोच से भी ज्यादा कड़क और मोटा है

मेघा- अह्ह्ह ये तो सच में काफी मोटा है

रवि बिलकुल चुपचाप अपनी दीदी कको गरम होता हुआ देख रहा था

मेघा की चूचिया काफी तेजी के साथ फूल रही थी उसकी सांसो की आवाज रवि के कानो तक्क साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी

अब मेघा अपना प्रोग्राम चालू करती है और अपने एक हाथ से अच्छी तरह से रवि का लुंड पकड़ लेती है और उसे आगे पीछे करते हुए अपने भाई की मुठ मरना चालू करती है

शुरू शुरू में तो मेघा की रफ़्तार कम् थी पारर जैसे जैसे रवि के लुंड पर नई नशे उगती जा रही थी उसकी दीदी के हाथो की रफ़्तार भी बढ़ती hi जा रही थी

रवि का तो मैं कर रहा था की अभी अपनी दीदी के रसीले होठो को मुँह में भर को चूस ले

रवि वो जानवर था जिसने आज तक अपनी हवस पर काबू करना नहीं सीखा था पारर मेघा दीदी के साथ उसे एक अलग hi मजा आ रहा था जिसकी वजह से वो खुद को जैसे तैसे संभाले हुए था

रवि- अहह दीदी जलन हो रही है

मेघा- तुझे बोलै न चुप रहने को

रवि- दीदी वो आपके हाथ की वजह से जलन हो रही थी इस लिए बोलै

मेघा- उसला भी इलाज है तेरी दीदी के पास पर तू चुप रेहह

इस बार मेघा अपने दोनों हाथो में अपना थूक गिरती हुई उन्हें सीधा अपने छोटे भाई के लुंड पर टिका देती है

और अपनी दीदी का गरमा गरम थूक अपने लुंड पर महसूस करके तो मनो रवि का लुंड फटने की कगार पारर आ पहुंचा था

पूरा लुंड उसकी दीदी के थूक से सरोबार था

मेघा के हाथ बड़े hi आराम से उसके छोटे भाई के लुंड पर जाड्ड से टोपे तक्क चल रहे थे

इधर मेघा की छूट का हाल भी बुरा हो चूका था मेघा की छूट से रस टपकता हुआ उसकी जांघो के साथ साथ बेहटा हुआ निचे की और आ रहा था

अपने छोटे भाई का लुंड मसलते हुए मेघा को लगभग 15 मिंट हो चुके थे

और रवि था की झड़ने का नाम नहीं ले रहा था

जैसे जैसे टाइम बढ़ता जा रहा था मेघा की आँखों की चमक भी बढ़ती जा रही थी

वो इतना तो समझ चुकी थी की उसका छोटा भाई लम्बी रेस का घोडा है उसके पति जैसे 2 मिनट वाला नहीं है

रवि- अह्ह्ह्ह दीदी मुझे कुछ हो रहा है

मेघा- है है बस अब वो पानी निकलने hi वाला है

मेघा जानती थी की अब रवि किसी भी वक़्त अपना ज्वालामुखी फोड़ देगा इसलिए वो एक हाथ से उसके सुपडे को थम लेती है और दूसरे हाथ से जड़ से लेकर टोपे तक्क वैसे hi मुथयति रहती है

करीब 5 मिनट बाद hi अच्चानक से रवि अपने दोनों हाथो को आगे बढ़ा कर अपनी दीदी के कंधे पकड़ लेता है

मेघा समझ चुकी थी की अब उसके सब्र का फल उसे मिलने वाला है मेघा की पकड़ थोड़ी मजबूत हो जाती है

रवि- अह्ह्ह्ह दीदी कुछ तो निकल रहा है मेरी लुल्ली से अह्ह्ह्हह

कुछ hi पल के अंदर रवि पूरा का पूरा वीर्य अपनी दीदी की एक हथेली पारर गुरा देता है

रवि और मेघा दोनों hi जोरजोर से हाफ रहे थे पर मजाल थी की मेघा एक बून्द वीर्य को भी जमीन पर गिरने देती

मेघा- अब कैसा लग रहा है तुझे

रवि- अब काफी हल्का लग्ग रहा है दीदी पारर ये है क्या चीज़ जो मेरी लुल्ली से निकली है

मेघा- वो छोड़ कभी और बताउंगी इसे देख कैसे बैठ गया कर दिया न तेरी दीदी ने तेरा इलाज

रवि- है दीदी आप सांसे अच्छी दीदी हो

मेघा- अब क्या ऐसे hi नंगा खड़ा रहेगा धोती लपेट ले और घर चलते है

और ध्यान है न मैंने क्या बोलै था

रवि- है दीदी आप चिंता न करो मैं किसी से इस बारे में कोई बात नहीं करूंगा आपतो मेरी डॉक्टर दीदी हो

रवि अपनी धोती लपेट कर आगे आगे चलने लगता है और मेघा पीछे पीछे

पर रवि के मैं में अब भी एक सवाल था की आखिर उसकी दीदी उसके वीर्य का क्या करेगी

रवि अपनी तिरछी निगाहो से अपनी दीदी को देखने की कोशिश कर रहा था जो उसे नजर नहीं आ रही थी गन्नो की वजह से

पर कहि न कहि वो मेघा दीदी का इरादा भाप गया था की उन्होंने वीर्य क्यों इख्ठा किया है

और वो समझ चूका था की इस खेल में जितना गन्दा वो है उतनी hi गन्दी उसकी दीदी भी है और आने वाले दिनों के बारे में सोच सोच कर वो अंदर hi अंदर काफी खुस था

इधर मेघा चलत्ते चलते बार बार अपनी हथेली में जमा वीर्य कहते जा रही थी

उसे अपने छोटे भाई का वीर्य किसी अमृत से कम् नहीं लग्ग रहा था

वो कहती तो एक बार में hi पूरा का पूरा वीर्य पी जाती पर धीरे धीरे चाटने में उसे अलग hi मजा आ रहा था

मेघा( जितना सोचा था उससे काफी जयादा समय तक तू धौड़ा मेरे छोटे भाई आज तेरा पहली बार था अब आने वाले समय में तो तेरी दीदी तुझे और भी लम्बी रेस के लिए तैयार करेगी )

मेघा समझ रही थी की उसके मासूम भाई ने आज तक्क किसी लड़की के साथ या खुद से अपना वीर्य नहीं निकला है

पर आपलोग तो जानते hi है की अपना रवि कितना शातिर और भूखा जानवर है

दोनों भाई बेहेन खेत से बहार आ चुके थे

रात के 8 बज चुके थे

मतलब खेत में दोनों 1 घंटे तक्क एक दूसरे को रगड़ते रहे

रवि- दीदी घर चले अब्ब

मेघा- और क्या तू यही रहेगा रात भर एक काम कर 2-4 गन्ने और तोड़ ले घर पर अगर कम्मो और रेखा पूछे तो बोल देना की गन्ने तोड़ने चले गए थे

और अगर कोई कीच बोले तो बोल देना मेघा दीदी ने बोलै था गन्ने तोड़ने के लिए

रवि- पर दीदी यह तो सिर्फ मरियल मरियल गन्ने है

मेघा- तो यही तोड़ ले अपनी दोनों दीदियो के लिए मुझे तो मेरे वाला मिल गया एक दम मोटा तजा

रवि तुरंत hi 4-5 गन्ने और तोड़ लेता है

रवि- दीदी आपने हाथ में मेरा पानी जमा किया था वो खा गया

मेघा- अरे हाथ में लिया था तो क्या घर तक ले जाउंगी

उसे गिरा दिया मैंने

रवि- पर दीदी आपने उसे हाथ में क्यों इख्ठा किया था

मेघा- वो मुझे देखना था की अगली बार कब निकलना पड़ेगा इस पानी को

रवि- तो आता चल गया आपको अगली बार कब निकलना है मेरी लुल्ली से पानी

मेघा- है चल गया

रवि- कब दीदी

मेघा- 2 दिन बाद्द

रवि- दीदी आप फिरसे मेरी मदद करोगी न क्योंकि मुझसे तो नहीं हो पायेगा

मेघा- चल अभी घर चलते है देखा जायेगा बस उस बात का ध्यान देना जो तुझे समझायी है

रवि- चिंता मैट करो दीदी मैं पागल थोड़े hi हु अभी तो मुझे अपनी डॉक्टर दीदी से अपनी लुल्ली का पूरा इलाज जो करवाना है

मेघा- अरे वह बड़ा hi समझदार है रे तू तो

चल घर चलते है रेखा और कम्मो सोच रहे होंगे की हम दोनों खा भाग गए

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे का हाथ पकड़ कर घर की और निकल जाते है.......
 
अपडेट-89

मेघा दीदी और रवि जल्दी hi घर पहुंच जाते है

रात के 8 बज चुके थे

इधर रेखा परेशान थी पर उसे एक बात की तस्सल्ली थी की रवि के साथ मेघा दीदी भी है

जैसे hi रवि घर में घुसता है

रेखा - क्यों रे तुझे कितनी बार समझाया है की घर टाइम से आ जाया कर

रवि के हाथो में गन्ने थे जिसे देख कर कम्मो तो खुस हो गयी थी पर रेखा दीदी का गुस्सा सातवे आस्मां पर था

रवि- दीदी वो मैं गन्ने तोड़ने लगा था इसी लिए लेत हो गया

रेखा- अच्छा तो जरूरी था क्या रात को गन्ने तोडना तुझको

रवि- है दीदी वो दीदी ने बोलै था

रेखा- अच्छा अब दीदी का बहाना बनाएगा क्या बोलै था दीदी ने

रवि- दीदी ने hi बोलै था की उनको गणना चूसने का बहुत मैं है इसीलिए देर हो गयी

रेखा- सच में अब तू बड़ा शयना हो गया है रे बाबू दीदी का नाम लेकर झूठ बोल रहा है

मेघा-. अरे अरे रेखा पहले पूरी बात तो सुन ले तू तो ऐसे hi फ्री फ़ोकट में मेरे लादले भाई पर बरष पड़ी

सच तो ये है की हम दोनों मेरी वजह से hi लेत हुए मेरा hi मैं था गणना चूसने का इस लिए देर हुई समझी

मेघा- और आगे सिरे भोलेभाले भाई को कभी शयना मैट बोलना देख तो कितना मासूम है यी

दरअसल आज खेत में हुई घटना के बाद से मेघा को अपना छोटा भाई और भी ज्यादा मासूम लगने लगा था

रेखा- दीदी मैं थोड़ी परेशान हो गयी थी बास

मेघा- है है जानती हु जितनी चिंता मुझे रवि की है उतनी hi चिंता तुझे भी है अपने भाई की

कम्मो- अच्छा रवि तू ये गणना हमारे लिए लाया है क्या

रवि- और किसके लिए लाऊंगा दीदी

कम्मो- अच्छा हमारे लिए ये मरियल मरियल गन्ने लाया है और वो मेघा दीदी के हाथ में मोटा तजा गणना क्यों है

रवि एक नजर मेघा दीदी की और देखता है

जैसे वो अपनी दीदी से पूछ रहा हो की क्या बोलना है

रवि- दीदी ने तो अपना गणना खुद hi तोडा था जब मैं गन्ने तोड़ रहा था तो दीदी खेत के अंदर घुस गयी और खुद hi गणना तोड़ लिए

रेखा - बड़ी जान है मेघा दीदी आपके अंदर तो इतना मोटा गणना अकेले hi तोड़ लिया वह जी वह

मेघा- अरे तुम लोग जानते नहीं अभी अपनी दीदी की ताक़त को

सरे भाई बेहेन हसने लगते है

मेघा- चल ऋ कम्मो खाना निकल बड़ी भूख लगी है मैं हाथ धो कर आती हु

मेघा बहार की और चली जाती है और कम्मो खाना निकलने लगती है

रवि अपनी धोती बदलने के लिए कमरे के अंदर जाता है पीछे पीछे रेखा दीदी भी चली जाती है

अभी रवि में अपनी बनियान उतरी hi थी की पीछे से रेखा के दोनों हाथ अपने छोटे भाई की छाती को जकड लेते है

रवि- आ गयी दीदी

रेखा- तेरे सिवा और खा जाउंगी रे

रवि- आज तो बड़ा गुस्सा आ रहा था आपको मुझ पारर

रेखा- अब तेरी दीदी को तेरी फ़िक्र नहीं होगी तो और किसे होगी बता

रवि- कोई बात नहीं दीदी मुझे पता है आप मुझसे बहुत प्यार करती है इसी लिए तो चिल्लाती है

रेखा - और मुझे भी पता है की मेरा छोटा भाई मुझसे बहुत प्यार करता है इसी लिए तो मुझे अपने निचे लिटा कर मेरी चीखे निकलवाता है

दोनों हसने लगते है

रेखा- अच्छा एक बात बता

रवि- है दीदी पूछो न

रेखा- इतनी देर तक्क मेघा दीदी के साथ क्या कर रहा था तू खेतो में कहि तूने मेरी दीदी को भी अपने इस मुसल से छोड़ तो नहीं दिया

रेखा दीदी की बात सुनकर रवि के कान खड़े हो जाते है

वो जनता था की रेखा दीदी से कुछ भी छुपाना नामुमकिन है

रवि- नहीं नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है

रेखा- अच्छा ऐसा कुछ नहीं है वह रे मेरे भोलेभाले मासूम भाई

इस बार रेखा अपने हाथ को छाती से सरकती हुई सीधा रवि की धोती में घुसा देती है और अपने छोटे भाई के सुपडे पर अपने ऊँगली रख देती है झा काफी चिपचिपा पैन बाकि था अभी तक्क

रेखा- अच्छा तो तूने कुछ नहीं किया मेघा दीदी के साथ

रवि जनता था की उसकी चोरी पकड़ी जा चुकी है

रवि- नहीं दीदी मैंने कुछ नहीं किया दीदी के साथ सच में

रेखा- तो तेरे गाडगे जैसे लुंड से क्या सारा माल मेघा दीदी की गांड देख कर hi गिर गया

और तो और ये अभी तक तजा है

रेखा व ऊँगली को अपने मुँह में दाल कर चाट लेती है

रवि- दीदी कुछ हुआ तो है पर मैंने कुछ नहीं किया

रेखा- तो बता न क्या किया दीदी ने तेरे साथ

असल में रेखा जानती थी की मेघा दीदी को भी एक तगड़े लुंड की जरूरत है और वो खुद भी कहती थी की मेघा दीदी जल्दी से जल्दी रवि से छुड़वा ले ताकि वो रात भर अपने छोटे भाई से दीदी के सामने hi खुल कर अपनी छूट और गांड मरवा सकी

रवि- दीदी वो मेघा दीदी ने कसम दी थी की बात नहीं करेंगी अगर किसी को बताया तो

इस बार रेखा दुबारा से रवि का लुंड अपनी हथेली में लेलेती है और उसे आगे पीछे करने लगती है

रेखा दीदी का हाथ पड़ते hi रवि के बेजान लुंड में मनो जान आ जाती है

रेखा- अपनी रंडी को भी नहीं बताएगा मैं तो किसी से नहीं बोलूंगी रे मेरे छोड़ू भाई

रवि भी जनता था की रेखा दीदी भरोशे वाली है और रवि को अपनी दीदी पर खुद से ज्यासा भरोषा भी था

रवि- दीदी आज मेघा दीदी ने सिर्फ मेरी मुठ मरी और पानी गिराया

वो बोल रही थी की इसमें पानी भर जाता है इसीलिए दर्द करता है

रेखा- अच्छा और तू इतना भोला है की तूने मेघा दीदी की साडी बाटे मान ली

मेघा दीदी सोचती है की तू सच में बहुत भोला भला लड़का है

रवि- है दीदी मेघा दीदी तो यही सोचती है

रेखा- ध्यान रखना की मेघा दीदी को हमेशा ऐसा hi लगे बाकि तो मेरा छोड़ू भाई समझदार है hi

रवि- अभी तो मेघा दीदी मुझे शरीफ समझ रही है पर कल को उन्हें अगर पता चल गया की मैं आपको छोड़ता था पहले से hi तो वो क्या सोचेंगी

रेखा- तू इतनी चिंता मैट कर वो सब मुझ पर छोड़ दे बाकि तू चिंता मत कर जैसा चल रहा है फ़िलहाल वैसे hi चलने दे

तभी बहार से आवाज आती है

मेघा- अरे खा रह गए तुम दोनों खाना ठंडा हो रहा है

रेखा- चल तेरी दीदी का आर्डर आ गया

वैसे आज रात का क्या प्रोग्राम है तेरा

रवि- दीदी आज सरसो का तेल लेकर आना कमरे में

रेखा- मतलब आज मेरी गांड की खैर नहीं

दोनों हस्ते हुए बहार चले जाते है झा पहले से hi मेघा दीदी और कम्मो खाना खाना शुरू कर चुकी थी

मेघा- अरे खा बिजी हो गए थे तुम दोनों

रेखा- दीदी बस ऐसे hi बाटे कर रहे थे

मेघा- है है जानती हु तू इसे समझा रही होगी

पर जब मैं इसके साथ होती हु तो तू हमारी चिंता मैट किया कर समझी

रेखा- ठीक है दीदी

सब लोग खाना खाने लगते है और थोड़ी hi देर में खा लेते है

मेघा- मैं तो थक गयी हु पूरी तरह आज जी भर कर सोऊंगी

रेखा- दीदी आप चलो मैं काम निपटा कर आती हु

रवि भी घर के बहार चला जाता है टहलने के लिए

इधर मेघा दीदी कमरे में जाते hi पसर जाती है और अपनी कुम्भकरण वाली निद्रा में चली जाती है

थोड़ी देर बाद रवि भी कमरे में चला जाता है

रेखा अभी भी बहार hi कम्मो के साथ काम निपटने में लगी थी

रवि- दीदी दीदी सो गयी क्या आप

मेघा दीदी की तरफ से रवि को कोई जवाब नहीं मिलता

इस बार रवि अपने हाथ को मेघा दीदी के पेट पर रख देता है और थोड़ा सा पेट को मसलता हुआ दुबारा से अपनी दीदी को आवाज लगता है

पर इस बार भी मेघा दीदी के खरातो के अलावा कोई दूसरी आवाज नहीं आती

रवि के चेहरे पर मुस्कान आ चुकी थी उसे पता था की उसकी दीदी की नींद काफी गहरी है और आज रात वो जल्दी तो नहीं उठने वाली

रवि अपना हाथ पेट से सरकता हुआ मेघा दीदी के ब्लाउज पर टिका देता है

और इस बार उसे ब्लाउज के ऊपर से hi अपनी दीदी के मोठे मोठे निप्पल महसूस हो जाते है

जो किसी बड़े अंगूर के डेन के समान थे

अपनी दीदी के निप्पल को हाथ लगते hi रवि एक दम मस्त हो जाता है और उसका सोया हुआ लुंड अंगड़ाई लेते हुए उठने लगता है

पीछे से रवि अपनी जीभ निकाल कर मेघा दीदी की पीठ को चाट लेता है

और जैसे hi उसके मुँह में उसकी दीदी के बदन का नमकीन स्वाद जाता है वो पागल सा हो जाता है और थोड़ी जोरसे मेघा दीदी का निप्पल दबा देता है

इस बार मेघा दीदी नींद में hi कसमसा के रह जाती है

रवि भी तुरंत hi मेघा दीदी से दूर हट जाता है

मेघा दीदी के इतना करीब आने के बाद रवि को अपने ऊपर काबू करने में बहुत दिक्कत हो रही थी

खैर फ़िलहाल मेघा दीदी से दुर्र रहने में hi रवि को समझदारी लगती है और वो दूसरी तरफ मुह्ह घुमा कर अपनी रेखा दीदी के आने का इन्तजार करने लगता है

सारा काम निपटने के बाद रेखा एक कटोरी में सरसो का तेल डालने लगती है

कम्मो बड़े hi ध्यान से देख रही थी

रेखा तेल की कटोरी लेकर कमरे में जाने लगती है

कम्मो जानती थी की उसकी दीदी ये तेल किस काम के लिए ले जा रही है

पर पूछे बिना वो रह नहीं पति

कम्मो- रेखा दीदी तेल क्या करोगी

रेखा भी जानती थी की उसकी बेहेन रवि और उसके सम्बन्धो के बारे में सब जानती है

रेखा- अरे ये तेल न रवि को लगाना है

कम्मो- खा लगाना है दीदी

रेखा- अब देख वो खा खा लगाने को बोलता है वही वही लगा दूंगी और थदो खुद भी लगा लुंगी

तुझे भी लगवाना है क्या कहि सरसो का तेल

कम्मो- नहीं नहीं दीदी आप hi लगाओ और रवि को लगाओ

रेखा- चल ठीक है सो जा मैं भी जा रही हु बहार का दरवाजा बंद कर देना

कम्मो- और आप कमरे का दरवाजा अच्छे से बंद करलेना

इस बात पर रेखा के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ जाती है

रेखा- वो तो मैं करूंगी hi तू कमरे के दरवाजे की चिंता न कर वो तो मैं रोज hi बंद करती हु

इतना बोलते हुए रेखा अंदर चली जाती है और ेल नजर कम्मो को देखते हुए मुस्कुरा कर दरवाजा अंदर से बंद कर देती है

रेखा जानती थी की उसकी हरकतों से कम्मो अंदर hi अंदर काफी जलन महसूस कर रही होगी और रेखा को कम्मो को जलाने में मजा भी काफी आ रहा था

कम्मो( है है दरवाजा बंद नहीं करोगी तो तेल लगवा कर अपने छोटे भाई से अपनी गांड कैसे मरवाओगी अबतो रेखा दीदी बिलकुल hi बेशरम हो गयी है पता नहीं मेघा दीदी को कैसे नहीं मालूम पड़ता कुछ उनकी नींद भी तो ऐसी है मनो कुम्भकरण सोया हो)

कम्मो भी बहार का दरवाजा लगा कर अपनी खत पर लेत जाती है

मैं तो उसका बहुत था रेखा दीदी और रवि की चुदाई देखने का पर कोई ऐसी जगह hi नहीं थी झा से कमरे के अंदर देखा जा सके

खैर कम्मो अपना मैं मार कर सो जाती है

इधर रेखा कमरे में घुसते hi अंदर से बंद कर देती है

खटपट की आवाज से रवि की भी आँख खुल जाती है

असल में आज मेघा दीदी द्वारा की गयी हरकत से वो काफी गरम हो चूका था

मेघा दीदी ने भले hi उसका माल झड़ने में मदद की थी पर प्यास तो अभी बाकि थी जिसे इस वक़्त सिर्फ और सिर्फ रेखा दीदी hi बुझा सकती थी

रेखा बड़े hi धीरे धीरे रवि के पास जाती है

और एक नजर मेघा दीदी के ऊपर डालती है

रवि- बड़ी देर कर दी दीदी आने में

रेखा- तू क्या इन्तजार कर रहा था अपनी दीदी का

दोनों एक दूसरे के कान में hi बोल रहे थे ताकि मेघा दीदी को कोई आवाज न आये

रवि- बहुत बेसब्री से

रेखा- क्यों इन्तजार कर रहा था

रवि- अपनी दीदी को प्यार करने के लिए

रेखा- दीदी को प्यार करने के लिए या दीदी की गांड में अपना ये गधे जैसा लुंड डालके छोड़ने के लिए

रवि- दोनों के लिए

रेखा - तो अपनी बड़ी दीदी को छोड़ लेता न देख तो कैसे घोड़े बेच कर सोई हुई है

रवि- दीदी तुम्हारे जैसा कोई नहीं है तुम सब जानती हो की मुझे क्या क्या पसंद है

रेखा- इसी लिए तो तू मेरे सरे छेद खोल चूका है अपने लुंड से छोड़ छोड़ कर

रवि- दीदी अब देर मैट करो वैसे भी आज मेघा दीदी ने बड़ा hi गरम कर रखा है दोपहर से hi

साला दिन भर लुंड खड़ा का खड़ा रह गया

रेखा अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने छोटे भाई की धोती में दाल देती है और रवि के सुपडे को अपने नाखुनो से खरोचने लगती है

रवि- अह्ह्ह दीदी

रेखा- जब मेघा दीदी तेरे सामने खड़ी तेरा लुंड मसल रही थी तो तेरा मैं में क्या चल रहा था

रवि- दीदी मैं तो कर रहा था की मेघा दीदी को वही घोड़ी बना कर अपना लुंड पेल दू दीदी की गांड में

रेखा- तुझे अपनी दीदियो की गांड hi सबसे ज्यादा अछि लगती है क्या

रवि- अब मेरी दीदियो की गांड hi इतनी मस्त और चौड़ी है की लुंड अपने आप hi खड़ा हो जाता है

रेखा- लगातार रवि के सुपडे को कुरेद रही थी जिसकी वजह से रवि पागल सा हुआ जा रहा था

रेखा- अच्छा तो तुझे सबसे मस्त गांड किसकी लगती है अपनी दीदियो में

इस बार रवि अपने दोनों हाथो को आगे बढ़ा कर रेखा दीदी के ब्लाउज के बोटों खोलने लगता है

रेखा - मेघा दीदी जाग जाएँगी तो गड़बड़ हो जाएगी

इस बार रवि एक हरकत करता है जिसे देख कर रेखा भी अंदर hi अंदर मस्त हो जाती है

रवि अपने एक हाथ को मेघा दीदी की गांड पर ले जाता है और जोरसे अपनी बड़ी दीदी की गांड को दबोच लेता है

रवि- देखो दीदी नहीं उठी

रेखा के चेहरे पर एक हसी थी शायद वो अपने छोटे भाई की हरकत से काफी खुश थी

रेखा- तूने तो एक hi दिन में अपनी दीदी की गांड पारर ढाबा बोल दिया अगर मेघा दीदी ने थोड़ी सी छूट दी तो सच में तू दीदी की गांड का बजा बजा देगा

रवि- दीदी आपने पूछा था न की किसकी गांड मुझे सबसे ज्यादा पसंद है

रेखा- हां बता किसकी पसंद है

रवि- अपनी रेखा दीदी की

रेखा- मुझे पता है तू झूट बोल रहा है कमीने

तुझे मेघा दीदी की hi गांड पसंद है

रवि- दीदी मैंने आज तक तो मेघा दीदी की गांड देखि भी नहीं है

रेखा- पर छुई तो है न अभी अभी

रवि- अरे दीदी जब मैं दीदी की गांड के दोनों पतों को फिआला कर दीदी का वो भूरा छेद देखूंगा तभी तो पता चलेगा न की मेघा दीदी की गांड का स्वाद कैसा है

और अआप्की गांड का स्वाद तो मैं न जाने कितनी hi बार साख चूका हु इस लिए आपका पिछवाड़ा hi मेरी पहली पसंद है

बाटे करते करते हु रवि अपनी रेखा दीदी के ब्लाउज के सरे बोटोने खोल चूका था

और रेखा की पहाड़ जैसी चूचिया रवि की आँखों के सामने लटक रही थी

रेखा- तुझे सच में डारर नहीं लग रहा क्या अगर मेघा दीदी जाग गयी तो

रवि- दीदी अगर डरूंगा तो अपनी दीदियो को छोड़ने लायक कैसे बनूँगा

रवि झुक कर अपनी दीदी के एक निप्पल को मुँह में भर लेता है

रेखा- अह्ह्ह्हह रवि आराम से

एक निप्पल को मुँह में भरे दूसरे को हाथो से कुरेदते हुए रवि अपनी दीदी को गरम करने का काम शुरू कर चूका था

रेखा- अह्ह्ह माआआ काट मत्तत्तत अह्ह्ह्हह्हह

इस बार रवि दोनों हाथो से अपनी दीदी के दोनों चुकी पकड़ लेता है और अपना मुँह रेखा दीदी के मुँह पर रख देता है

रेखा भी एक अच्छी दीदी की तरह तुरंत hi अपना मुह्ह खोल देती है और अपने छोटे भाई की जीभ को अपने मुँह में आने का रास्ता दे देती है

रवि पुरे जोश में अपनी दीदी के मुँह को अंदर से चाट रहा था मनो वो आज अपनी दीदी की जीभ को hi खा जायेगा

रेखा भी पागलो की तरह अपने छोटे भाई का साथ दे रही थी आज काफी दिन हो गए थे फुर्सत की चुदाई को

शायद इसी कारन रेखा ज्यादा hi गरम थी

रवि अपनी दीदी के पुरे चेहरे से लेकर कान तक चूस रहा था कभी उसका मुँह चिचो तक चला जाता कभी अपनी दीदी के मुँह में अपनी जीभ घुसा देता

इस दौरान रेखा भी पूरी तरह से रवि का लुंड अपने हाथो में पकड़ चुकी थी

रवि भी अब पागल हुआ जा रहा था

बैठे बैठे hi रवि अपनी धोती को खोल देता है और उसे अलग करके किनारे रख देता है

रेखा अपने भाई का इशारा जानती थी

वो तुरंत hi झुकती चली जाती है और घोड़ी बन रवि के लुंड पर अपना मुँह टिका देती है

रवि भी थोड़ा सा आगे को झुकता हुआ अपनी दीदी के पेटीकोट की गांठ को ढूंढने लगता है और थोड़ी hi देर में वो उस गांठ को खोल देता है

और हल्का सा पीछे को खींचते hi रेखा दीदी का पेटीकोट सरकता हुआ निचे को गिर जाता है

अब दोनों भाई बेहेन बिलकुल नंगे थे बस रेखा का ब्लाउज खुल हुआ उसकी छाती पर लटका हुआ था

रेखा बड़े जोरशोर से रवि का लुंड किसी लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी

इधर रवि भी अपनी दीदी की कमर से गांड तक का पूरा हिस्सा अच्छे से दबोच दबोच कर मसलता रहता है

करीब 5 मिंट लुंड चूसै के बाद रवि अपना लुंड रेखा दीदी के मुँह से खींच लेता है

पर जैसे रेखा तो अपने भाई का लुंड छोड़ना hi नहीं कहती थी

रेखा उसी पोजीशन में लेती हुई थी अब रवि अपनी दीदी के ोीचे की और आजाता है और रेखा दीदी के गांड के पतों को खोलते हुए अपनी दीदी का वो सुनेहरा छेद देखने लगता है

कमरे में हलकी चांदनी रौशनी आ रही थी जिसमे रेखा दीदी का चमकता हुआ भूरे रंग का गांड का छेद रवि को बड़ा hi मस्त नजर आ रहा था

बिना देर किये रवि जीभ को रेखा दीदी की गांड पर रख देता है और पागलो की तरह अपनी दीदी की गांड चाटने लगता है

और अपनी दीदी की छूट से लेकर गांड तक दोनों को चाट चाट कर अपने थूक से पूरी तरह भीगा देता है

रेखा तो मनो आज जैसे पागल hi होने वाली थी

आज काफी समय बाद रवि अपनी दीदी के छेड़ो को चाट रहा था जिसमे रेखा को बड़ा hi आनंद आ रहा था

रेखा का बदन लगातार झटके मार रहा

दोनों भाई बेहेन हवस की प्यास में बिलकुल पागल हो गए थे मनो दोनों को कोई चिंता hi न हो की बगल में hi उनकी बड़ी दीदी सोई हुई है

करीब 10 मिंट तक अपनी दीदी की छूट और गांड चाट चाट कर रवि रेखा दीदी के छेड़ो से निकला सारा पानी पी जाता है

और तेल की कटोरी में से तेल लेते हुए अपनी दीदी की गांड पर लगाने लगता है

अपनी उंगलियों पर तेल लगाकर रेखा दीदी की गांड के अंदर तक तेल लगाने के बाद रवि अपने लुंड को भी तेल से बेहला देता है और अब वो अपनी दीदी के ोीचे आता हुआ अपने लुंड को रेखा दीदी की गांड पर टिका देता है

रेखा दीदी की गांड तो पहले hi रवि तहस नेहेस कर चूका था

तेल की वजह से भी चिकनाहट काफी थी तो रवि अपने लुंड को छेद पर रखते hi जैसे हैसे दबाता जाता है

उसका लुंड वैसे वैसे उसकी दीदी की गांड में घुसता चला जाता है

इधर रेखा दीदी के छेद भले hi फैट चुके थे पर हर बार उसे रवि से छुड़वाने में अलग hi मजा आता था

रेखा के चेरे से उसका हाल पता चल रहा था

अपना लुंड सकर्तकता सरकता पूरी तरह से बिना किसी झटके के पूरा का पूरा अपनी दीदी की गांड में थुश देता है

अब रवि आगे की और झुकता हुआ अपनी दीदी की चूचियों को पकड़ लेता है और बिना सम्ममय गवाए अपनी दीदी की गांड में झटके मरने शुरू कर देता है

तेल की वजह से लुंड भी आराम से जा रहा था और आवाज भी काम हो रही थी पर हो तो रही थी और कहि न कहि रेखा को डर था की मेघा दीदी न जाग जाये

करीब 5 मिंट तक रेखा दीदी की गांड मरने के बाद रवि अपने लुंड को बहार खीचता हुआ एक hi झटके में अपनी रेखा दीदी की छूट में पेल देता है

जैसे hi रवि का लुंड रेखा दीदी की छूट में जाता है वो पूरी की पूरी मस्त हो जाती है और घोड़ी बने बने hi अपना मुँह पीछे की और घुमा देती है

रवि तो मनो पहले से hi इन्तजार में बैठा था वो तुरंत hi अपनी दीदी का मुँह पकड़ता हुआ रेखा दीदी के होठो को चबाने लगता है

अपनी दीदी के होठो पर लगी लाली को पूरी तरह से चाट जाता है

रवि कभी अपना लुंड रेखा दीदी की छूट में दाल देता तो कभी एक hi झटके में उसे वापस अपनी दीदी की गांड में पेल देता

रेखा की छूट अब तक 2 बार झाड़ चुकी थी

इधर रवि झड़ने का नाम hi नहीं ले रहा था

रवि बिना किसी रेहम के अपनी दीदी की गांड को पेले जा रहा था

और जब जब वो अपना लुंड रेखा दीदी की गांड सड़ बहार निकलता तो गांड से सफ़ेद पानी के साथ साथ रेखा दीदी कस पाद भी निकल जाता

जिसे देख कर रवि और भी ज्यादा मस्त हो जाता

करीब 10 मिंट और अपनी दीदी को छोड़ने के बाद रवि का वीर्य भी निकलने को होता है

रवि- दीदी मेरा पानी निकलने वाला है बताओ आज कोनसे छेद में दालु अपनी मलाई

रेखा- आज तो तू अपनी मलाई मेरे ऊपर वाले छेद में दाल दे बड़े दिन हो गए अपने भाई के लुंड से निकली मलाई कहते हुए

तुरंत hi रवि खड़ा हो जाता और रेखा भी जमीन पर बैठ जाती है

रवि के लुंड पर रेखा की छूट और गांड का पानी लगा हुआ था जिसकी वजह से उसका पूरा लुंड चांदनी रौशनी में चमक रहा था

वो चमक देख कर रेखा का दिल झूम उठता है

रवि अपने लुंड को थामे हुए अपनी दीदी के होठो के करीब पहुँचता है और रेखा भी बिना देर किये लुंड को अपने मुँह में भर लेती है और अपने hi छेड़ो से निकले पानी को अपने भाई के लुंड से चाटने लगती है

करीब 5 मिंट लुंडुसै के बाद रवि का वीर्य निकलने वाला था

रवि अपने लुंड को हाथ में पड़के तेजी से हिलने लगता है

इधर रेखा दीदी मुँह खोले अपने भाई के लुंड निकला कॉमर्स पिने के इन्तजार में थी

थोड़ी hi म्हणत के बाद रवि का लुंड वीर्य वर्षा करने लगता है और एक के बाद एक झटके मरता हुआ अपनी दीदी के मुँह में अपना वीर्य गिराने लगता है

रेखा दीदी भी बड़ा स्वाद लेलकर रवि का वीर्य गटगट करके पिए जा रही थी

असल में जितना बड़ा रवि का लुंड था उतनी hi बड़ी उसकी वीर्य की टंकी भी थी

1 मिंट के अंदर hi रेखा दीदी का पूरा चेहरा सफ़ेद दूधिया पानी से भर जाता है

जिसे रेखा दीदी अपने हाथो से साफ़ कर कर के चाट जाती है

और अंत में अपनी जीभ से अपने छोटे भाई के सुपडे पर लगा वीर्य भी चाट जाती है

रवि- कैसा लगी दीदी आज की चुदाई

रेखा- पूरा मस्त कर दिया तूने आज अपनी दीदी को अब जल्दी से मेघा दीदी को भी पता ले भी रात भर इस कमरे में नंगा नाच करेंगे और तेरा जब मन हो तब तू अपनी दोनों दीदियो में से किसीको भी छोड़ लेना

रवि- दीदी अभी तो मेघा दीदी के साथ ये मासूम भाई वाला खेल खेलने में मजा आ रहा है इस खेल को थोड़े और दिन चलने दो

पर वडा है आपसे आपकी चुदाई जारी रहेगी

रेखा- तो अब तू रोज छोड़ेगा मुझे

रवि- है दीदी रोज छोडूंगा

रेखा- और अगर मेघा दीदी जगी होंगी तब्ब

रवि- तब तो थोड़ा मुश्किल होगा देखा जायेगा बाकि आप तो मेरी रानी हो जिसे में हमेशा छोड़ना कहता हु

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे की बहो में बहे दाल कर सो जाते है ....
 
अपडेट-90

इधर रात भर चली चुदाई के बाद रेखा चित हो कर सोई हुई थी

सुबह के 6 बज चुके थे

कम्मो अपने कामो में लगी हुई थी पर उसकी नजरे बार बार कमरे के उस दरवाजे पर hi जाकर टिक जाती

तभी कमरे का दरवाजा खुलता है और मेघा दीदी बहार को आजाती है

मेघा- क्यों ऋ कम्मो बड़ी जल्दी उठ गयी आज

कम्मो- दीदी जल्दी मैं नहीं बल्कि आप लेत उठी हो और रेखा दीदी खा ह

मेघा- वो तो मुई अभी तक सोई हुई है टंगे फैला कर

मुझे बड़ी जोरकी संडास लगी है मैं करके आती हु

इतना बोलकर मेघा दीदी लोटे में पानी भरते हुए घर के पिछवाड़े भाग जाती है

अब कम्मो के मैं में वो बात फिर से चलने लगती है

की आखिर रात भर मेघा दीदी के होते हुए कैसे छोड़ा होगा रवि ने रेखा दीदी को अपने मुसल लुंड से

दीदी चिल्लाई नहीं होंगी क्या इतना मोटा लुंड अपनी गांड में लेते वक़्त

कितना मजा आया होगा रेखा दीदी को अपने hi छोटे भाई से अपनी गांड और छूट छुड़वा कर

कम्मो तुरंत hi सब काम धाम छोड़ कर कमरे के अबदार घुस जाती है

इधर कमरे में रवि तो अपने लुंड को पेट के बल दबा कर सोया हुआ था

और रेखा दीदी एक साइड में होकर सोई हुई थी

एक चादर ओढ़ कर

कम्मो मायूस हो जाती है की शायद आज उसे कुछ देखने को नहीं मिलने वाला

वो कमरे से बाहर जाने hi वाली थी तभी उसके कदम थम जाते है उसे इस माहौल में कुछ गड़बड़ लग रही थी

क्योंकि रेखा दीदी गर्मी में कभी भी कुछ ओढ़ कर नहीं सोती थी और आज उन्होंने चादर क्यों ोधी हुई है

अब कम्मो धीरे धीरे रेखा दीदी की और बढ़ने लगती है

और जैसे hi वो थोड़ी सी चादर उठती है उसकी आँखों की पुतलिया अच्चानक से बड़ी हो जाती है

चादर के अंदर रेखा दीदी का ब्लाउज पूरी तरह से खुला हुआ था

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अपनी दीदी की चूचियों पर पड़े निशानों को देख कर कम्मो डर जाती है

असल में रेखा दीदी की चूचियों पर कई सरे निशान थे दातो से काटने के करोचने के

और जिस तरह से रवि ने पुछलि रात अपनी दीदी के दोनों निप्पलों को रगड़ा था

रेखा दीदी के निप्पल सुज्ज कर बिलकुल लाल हो. चुके थे

एक पल के लिए तो कम्मो भी उन निशानों को देख कर निचे से पानी पानी हो जाती है

कम्मो( सच इ रवि रेखा दीदी को जानवरो की तरह छोड़ता है दीदी की तो पूरी की पूरी चुकी hi निशानों से भरी पड़ी है )

अभी कम्मो समझने का प्रयास कर रही थी की इन निशानों का मतलब क्या है प्यार या हवस

तभी कुछ ऐसा होता है की उसकी बची कुछ सांसे भी ऊपर निचे होना शुरू हो जाती है

अच्चानक से रवि पीठ के बल घूम जाता है और उसका विशाल लुंड जोकि सिर्फ एक धोती से ढका हुआ था वो पूरी तरह से अपने असली रूप में था

सीन कुछ ऐसा था मनो किसी कहते के ऊपर किसीने धोती को रख दिया हो और वो धोती तो मनो उस चीज़ को ढकने की असफल कोशिश कर रही हो

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होने सोते हुए छोटे भाई का जगता हुआ लुंड देख कर कम्मो के नथुने फूलने लगते है

कम्मो( कैसे लेती होगी इस लुंड को रेखा दीदी अपने दोनों छेड़ो में )

कम्मो का हाथ खुद बा खुद hi अपनी छूट पर चला जाता है और वो अपनी पानी छोड़ती बुर्र को हल्का सा मसल देती है

कम्मो( मेरी क्या हालत होगी जब रवि का ये लुंड मेरी छूट में जायेगा मैं तो मर्डर hi जाउंगी )

कम्मो अपने आपको रोक नहीं पति और अब उसके हाथ खुद बा खुद hi रवि के लुंड की और बढ़ने लगते है

और अगले hi पल कम्मो उस लुंड को जड़ से पकड़ लेती है जिसे सोच कर नजाने कितनी hi बार वो अपनी कुवारी बुर्र से पानी टपका चुकी थी

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कम्मो को आज पेली बार महसूस हुआ था की उसके छोटे भाई का लुंड किसी लोहे की रोड से भी ज्यादा सख्त है और मोटाई तो इतनी है की वो कम्मो की हथेली में भी नहीं समा पा रहा

कम्मो का बड़ा मन था की एक बार उस धोती को हटा कर रवि के लुंड को पूरा नंगा देख सके

ताकि आने वाले सम्मय में वो अपने छोटे भाई के लुंड को याद कर कर के अपनी छूट को रगड़ सके

अभी कम्मो बेचारी कुछ करती उससे पहले hi रेखा दूसरी और करवट पलटती है

और कम्मो एक झटके में अपना हाथ हटती हुई वह से बहार भाग जाती है

खड़बड़ की आवाज से तुरंत hi रेखा की आँख भी खुल जाती है

वो इधर उधर देखती है पर उसे रवि के खड़े लुंड के अलावा कोई और वह नजर नहीं आता

रेखा( हे भगवान् सुबह सुबह कैसे खड़ा है मेरे छोटे भाई का लुंड कसम से अगर घर में मेरी दोनों बहने नहीं होती तो अभी अपना पेटीकोट उठा कर बैठ जाती )

रेखा- अरे ू रवि चल उठ जा और इसे क्यों खड़ा कर रखा है तूने

रवि भी थोड़ा नाटक करने के बाअद उठ hi जाता है

रेखा - क्यों रे रात भर तूने चुदाई की अपनी दीदी की फिर भी सुबह सुबह इसे क्यों खड़ा कर रखा है तूने

रवि- आपको दुबारा से छोड़ने के लिए दीदी

रेखा- अच्छा मन नहीं भरा तेरा रात के बाद

रवि- दीदी सच खु तो आजकल पहले जैसा मजा नहीं आ रहा है

रेखा- क्यों अब मेरे छेद टाइट नहीं रहे इसके लिए

रवि- अरे नहीं दीदी मतलब अब दोनों दिदिया होती है तो खुल कर मजा नहीं आता

सच खु तो जब तक आपकी चीखे सुनाई नहीं देती न तब तक तो मुझे मजा hi नहीं आता चुदाई का

रेखा- अच्छा बीटा इतना बड़ा हो गया की अपनी hi दीदी की चीखे निकलवायेगा

कोई बात नहीं एक दिन और सब्र करले कल में आउंगी खेतो पर खाना लेकर तब जी भर का चीख निकलवाना अपनी इस दीदी की

रवि- आज hi आजाओ न दीदी

रेखा - नहीं आज नहीं आज कम्मो जाएगी

रवि- और मेघा दीदी

रेखा- तेरी तीनो दिदिया एक एक दिन करके तुझे खाना देने जाएँगी

रवि- मतलब मेघा दीदी परसो आएँगी दुबारा से खेत में

रेखा- है वो परसो जाएँगी

रवि कुछ सोचने में लग्ग जाता है

रेखा- क्या सोच रहा है

रवि- दीदी यही सोच रहा हु की मैं मेघा दीदी के साथ खेल रहा हु या वो मेरे साथ खेल रही है

रेखा- मतलब

रवि- मतलब ये मेरी प्यारी दीदी

बड़े hi प्यार से रवि अपनी रेखा दीदी के गली को सहलाते हुए बोलता है

रवि- जिस दिन मेघा दीदी ने मेरी मुठ मरी थी उसी दिन उन्होंने बताया था की अगली बार 2 दिन के बाद पानी निकलना पड़ेगा तेरी लुल्ली से

रेखा- तेरी तो लाटरी लगी हुई है बीटा

एक से बढ़ कर एक दिदिया मिल रही है तुझे

रवि- पर जिस दीदी की सबसे ज्यादा कहत है वो तो नहीं मिल रही अकेले में

रेखा- वो भी मिलेगी एक दिन का और इन्तजार करले

रवि- ठीक है जैसा आप कहे दीदी

रेखा- और इसे क्यों खड़ा कर रखा है पता नहीं कब से खड़ा है कहि मेघा दीदी ने न देख लिया हो

रवि- देखा भी होगा तो क्या hi सोचेंगी वो तो खुद hi मेरा लुंड देख कर लम्बी लम्बी सांसे खींचती है

रेखा- अरे बुद्धू अभी तक उन्हें ये नहीं पता की तू मुझे पहले से hi छोड़ रहा है वो तो तुझे अभी तक अनछुवा समझती है

रवि- जिस दिन मेरे सामने घोड़ी बनेंगी न मेघा दीदी उस दिन समझ जाएँगी की उनका भाई तो इस खेल का पुराण खिलाडी है

रेखा- अरे जब समझना होगा तब समझेगी तू जड़ा ध्यान दिया कर और इसे सबसे छुपा कर रखा कर समझा

रवि- जैसी आपकी मर्ज़ी दीदी पर ाओंके सामने तो इसे छुपाने की जरूरत नहीं है न

रेखा- मेरे सामने जब तू अकेला होगा तो मैं खुद hi इसे आज़ाद कर दूंगी समझा

और एक बात और कम्मो से थोड़ा दूर रहना उसके साथ कुछ उल्टा सीधा मत करना अभी

रवि- दीदी मुझे तो लगता है की कम्मो दीदी को भी एक लुंड की जरूरत है

रेखा- अरे पागल तुझे लगने से क्या होता है मैं जानती हु उसे वो पूरी पागल है कहि कुछ गड़बड़ हो गयी तो सोच ले तुझे मेघा दीदी नहीं मिल पायेगी फिर

रवि- पर दीदी कम्मो दीदी भी तो मेरी hi दीदी है

रेखा- है दीदी है ओर तू अभी उसके साथ कुछ मत करना उल्टा सीधा हाथ जोड़ती हु तेरे सामने अपनी इस दीदी की बात मान ले

और मेरी बात मान कर चलेगा तो हो सकता है की तुझे एक दिन तेरी तीनो दिदिया एक hi बिस्तर में नंगी मिले छोड़ने के लिए

बोल है भरोषा अपनी रेखा दीदी के ऊपर

रवि- अपने से भी ज्यादा भरोषा है दीदी

रेखा- ठीक है जो बोलै है उसका ध्यान दे और रही बात कम्मो की तो मैंने उसके लिए कुछ और hi सोचा हुआ है बस टाइम आने दे कम्मो की छूट भी तेरी और गांड भी ये वडा है मेरा

रवि- ठीक है दीदी

रेखा - चल उठ जा अब

रेखा तुरंत hi कमरे से बहार चली जाती है

इधर कम्मो की नजरे जैसे hi रेखा से मिलती है कम्मो अपनी नजरे चुराने लगती है

रेखा ये तो जानती थी की कमरे में कोई आया था पर अब उसे यकीन हो गया था की कम्मो hi कमरे में आयी थी

और वो क्या देखने आयी थी रेखा यह भी जानती थी

रकेः के चेहरे पर एक मुस्कान थी क्योंकि फिलहाल तो उसने कम्मो को मिलने वाले लुंड पर रोक लगा दी थी

अब किस्मत का क्या फैसला होता है ये तो आगे hi पता चलेगा....
 
अपडेट-91

सब लोग अपना अपना काम निपटने में लगे हुए थे

इधर रवि भी खेतो पर जाने की तैयारी कर चूका था और नाश्ता करके वो भी निकल जाता है

कम्मो बेचारी बाकि के कामो में लग जाती है

इधर रेखा और मेघा बैठ जाती है गप्पे हाकने

मेघा- अरे रेखा तेरी एक शैली थी न क्या नाम था उसका

रेखा- अरे दीदी आप नीलम की बात कर रही हो क्या

मेघा- ः उसी की

रेखा- क्या हुआ दीदी

मेघा- कुछ नहीं बस ऐसे hi कैसी है वो

रेखा- ठीक hi है बेचारी उसकी हालत भी हमारे जैसी hi है

मेघा- मतलब

रेखा- उसकी भी शादी नहीं हो रही है दीदी मुझे तो लगता है की हमारी तरह वो भी इसी गाओं में hi मर जाएगी

मेघा- बेचारी पर क्या hi करे किस्मत को जो मंजूर होगा असल में तो वही होगा न

रेखा- वैसे दीदी आज आपको नीलम की याद कैसे आ गयी

मेघा- अरे आज मुझे उसका बाप मिला था क्या नाम है उस बुड्ढे का

रेखा- हरिया काका

कुछ हुआ ह क्या दीदी

मेघा- नहीं हुआ तो कुछ नहीं पर तेरी उस शैली का बाप बड़ा hi ठरकी है

रेखा हरिया की राग राग से वाक़िफ़ थी क्योंकि रेखा का बचपन से hi नीलम के घर आना जाना होता रहता था और न जाने कितनी hi बार रेखा ने भी पाया था की हरिया काका कैसे उसके शरीर के अंगो को घर घर कर देखता था

रेखा- क्या हुआ दीदी

मेघा- अरे कल मिला था वो खेत में जब खाना लेकर जा रही थी तो रवि का

रेखा- फिर क्या हुआ दीदी

मेघा- साला बुद्धा बात मुझसे कर रहा था और बार बार मेरी चूचियों को घर रहा था

रेखा- छोड़ो न दीदी वो तो बुद्धा हो गया है और खैर ये तो उसकी पुराणी आदत है

मेघा- क्यों उसने तेरे साथ कुछ किया है क्या

रेखा- दीदी कुछ करेगा तो मैं ाँद फोड़ दूंगी बुड्ढे के

दोनों बहने हसने लगती है

रेखा- आपको पता है दीदी वो गाओं की हर लड़की औरत को एक hi नजर से देखता है

मेघा- अरे बुद्धा इतना हरामी है की जब मैं जाने लगी तो बेशर्मो की तरह मेरा पिछवाड़ा देख कर अपना लुंड मसल रहा था

और जब मैंने पलट कर देखा तो डाट फाड़ने लगा पर अपने लुंड पर से हाथ नहीं हटाया हरामी ने

रेखा- दीदी आगे से कभी मिले न तो गालिया देना बुड्ढे को आपके पास आने से भी डरेगा

मेघा- मैं तो सोचती हु की तेरी उस बेचारी शैली नीलम का क्या हाल होगा

मेघा दीदी की बात सुनकर एक पल के लिए रेखा भी सोच में पद जाती है

क्योंकि रेखा समझ गयी थी की मेघा दीदी का इशारा किश और है

मेघा- कहि वो ठरकी बुद्धा उसके साथ भी तो वो सब नहीं करता होगा

रेखा- क्या पता दीदी अब उनके घर में कौन देखने जाता है

मेघा- रेखा मुझे तो लगता है की उस बुड्ढे ने अपनी बेटी को भी नहीं छोड़ा होगा

रेखा- बात तो आपकी सही है दीदी पर नीलम के घर में उसका एक छोटा भाई भी है तो शायद हरिया की हिम्मत न हुई हो नीलम के साथ कुछ करने की

मेघा- पर मेरे मैं में ये बात बार बार आ रही है की जरूर हरिया ने अपनी बेटी के साथ वो सब कर लिया होगा मुझे पक्का यकीन है

रेखा- है दीदी हो भी सकता है पर क्या पता सब नीलम की मंजूरी से hi हुआ हो

मेघा- ये क्या कह रही है तू

रेखा - दीदी सच कह रही हु एक तो बेचारी 30 साल की गदरायी घोड़ी हो गयी है उसके बापू का hi क्या किसी का भी मैं उसे देख कर दोल जायेगा

मेघा- बात तो तेरी सही है पर क्या एक बेटी अपने hi बाप के साथ हमबिस्तर हो सकती है

रेखा( मुझे hi देख लो दीदी मैं तो अपने छोटे भाई को रोज हो अपना ये गदराया शरीर भोगने के लिए देती हु और दूर क्यों जाती हो आपकी भवतो यही इच्छा है न की एक दिन आपके छोटे भाई का लुंड आपकी छूट के अंदर हो )

रेखा- दीदी हम इतना अंदर क्यों घुस रहे है क्या पता जैसा हम सोच रहे है वैसा कुछ हुआ hi न हो

मेघा- ओर क्या जितना हमने सोचा है नीलम के साथ उससे भी ज्यादा कुछ हो चूका हो

असल में बाप बेटी की बात करते वक़्त भी दोनों बहनो के दिमाग में अपना और अपने छोटे भाई के रिश्ते के बारे में hi विचार आ रहे थे

और न जाने कबसे दोनों की छूट पानी छोड़ना शुरू कर चुकी थी

रेखा- दीदी उस बुड्ढे माँ छोड़ो वो अपनी बेटी के साथ क्या करता है उससे हमे क्या

मेघा- चल जा तू काम करले मुझे नींद आ रही है मैं सो जाती हु

मेघा दीदी बहार पड़ी खत पर पसर जाती है

थोड़ी देर बाद रेखा भी अंदर वाले कमरे में जाकर सो जाती है

इधर कम्मो अपने छोटे भाई का खाना बांध कर खेतो की और निकल जाती है

अभी कम्मो हरिया के खेतो की और से hi निकल रही थी की पीछे से आवाज आती है

कम्मो जब पीछे पललट कर देखती है तो उसे नीलम आती दिखाई देती है

जो अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को उछाल उछाल कर चलती हुई कम्मो के करीब आ रही थी

नीलम को देखते hi कम्मो को उस दिन की याद आजाती है जब नीलम बिच में दबी हुई थी और निचे से उसका छोटा भाई उसकी छूट में अपना लुंड पेल रहा था और पीछे से उसका बाप हरिया अपनी hi बेटी की गांड मरने में मगन था

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नीलम- अरे खा भागी जा रही है कम्मो

कम्मो का दिमाग अभी भी उसी सीन को याद करने में वयस्त था

जिसे सोच कर hi उसकी छूट में पानी आ चूका था

नीलम- अरे खा खो गयी कम्मो

कम्मो- कुछ नहीं दीदी आप बताओ कैसी हो

नीलम- मैं तो ठीक हु तू बता आती नहीं आज कल तू मुझसे मिलने अपनी दीदी से नाराज है क्या

कम्मो- अरे नहीं नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है वो तो आपको hi हरिया काका और राजू से समय hi नहीं मिलता

कम्मो की यही आदत थी जिस वजह से रेखा से लेकर रवि तक्क सब उससे डरते थे

वो एकदम खर्रा खर्री बात करती थी

कहे बात गलत हो या सही

कम्मो की बात सुनते hi नीलम के पसीने छूटने लगते है

नीलम- मतलब मतलब क्या बोल रही है तू

कम्मो- अरे मेरी प्यारी दीदी आप तो इतनी सी बात से घबरा गयी मेरे कहने का मतलब तो है की आप राजू और काका की सेवा में लगी रहती हो न इसीलिए टाइम नहीं मिलता आपको

नीलम- अच्छा मुझे टाइम नहीं मिलता और तू कितनी बार आती है मेरे घर

कम्मो- अब क्या बताऊ दीदी एक दिन आयी थी शाम के समय पर उस दिन भी आप एक साथ काका और राजू की सेवा में लगी हुई थी

अब तो नीलम को पक्का यकीन हो गया था की जरूर कम्मो ने सब कुछ देख लिया है

और नीलम भी कम्मो की आदत से वाक़िफ़ थी

नीलम को भी डर था की कहि कम्मो किसी को बता न दे

नीलम के पसीने छूटता देख कम्मो अंदर hi अंदर खुस हो रही थी

कम्मो( उस शाम को तो बड़ी शेरनी जैसे धाड़ रही थी बापू और तेज राजू और तेज छोड़ो दोनों बाप बेटे अपने hi घर की लड़की को एक साथ फाड़ दो मेरे सरे छेद

अब क्यों भीगी बिल्ली बन गयी मेरी बाटे सुन्न कर)

कम्मो- अरे दीदी मेरी बाटे सुन्करर तो आपको पसीने आने लग गए

लगता है अभी भी अपने बापू और छोटे भाई की सेवा करके आ रही हो

नीलम ये तो समझ चुकी थी की इसे सब पता चल गया है

अब नीलम को ये सारा बवाल शांत करना था जिसके लिए उसे कुछ उपाय लगाना पड़ेगा

नीलम- अरे तो इसमें क्या हो गया

तू नहीं करती क्या रवि की सेवा

और अपने छोटे भाई और बापू की सेवा करने का मौका वो भी एक साथ तो बड़े सौभाग्य से मिलता है.

कम्मो- नहीं दीदी मैं नहीं करती रवि की सेवा

नीलम - अच्छा तो तेरा छोटा भाई भी तेरी सेवा नहीं करता क्या

कम्मो- मेरी तो नहीं करता पर शायद आपकी शैली की करता है

( यह कम्मो को पता था की नीलम और रेखा दीदी बड़ी hi पक्की सहेलिया थी

और जब से कम्मो ने नीलम को राजू से छुड़वाते हुए देखा उसके बाद से उसे पक्का यकीन हो गया था की नीलम और रेखा दोनों एक दूसरे के सरे राज जानते है )

नीलम- मतलब रवि और रेखा भी

कम्मो को अब समझ आती है की उसका अंदाजा गलत था और वो जोश जोश में अपने hi घर का भेद खोल बैठी

नीलम( हे भगवान् मैं तो सोचती थी की रेखा बड़ी सीधी सधी है पारर यह तो वो अपने घर में hi एक लुंड पर साध कर बैठी हुई है )

अगले hi पल नीलम के दिमाग में खुद के घर की बात आती है वो तो खुद 2-2 लुँडो पर साध कर बैठी हुई है

इतना सोचते सोचते hi नीलम की छूट पानी पानी हो जाती है और वो छुडासी होने लगती है

नीलम- अरे वो सब छोड़ मैं तो कहती हु की तू भी एक बार सेवा करके देख अपने भाई की तो तुझे पता चलेगा की जिंदगी का असली सुख तो छोटे भाई की सेवा करना hi है

नीलम ने अब कम्मो की दुखती नाश पर हाथ रख दिया था

कम्मो- दीदी अब तुमसे क्या छुपाना कहती तो मैं भी यही हु पर समझ hi नहीं आता की करना क्या है

इस एक वाक़्या से नीलम कम्मो रानी की मज़बूरी भप्प चुकी थी और आगे क्या करना है सब कुछ नीलम को मालूम था

नीलम- अच्छा अगर मैं तुझे बताऊ की तेरा काम कैसे बनेगा तो

कम्मो की बुझती हुई उम्मीद को मनो नीलम ने फिर से उज्जवल कर दिया हो

कम्मो के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

कम्मो- सच दीदी आप कर सकती हो मेरी मदद

नीलम- कर तो सकती हु पर पहले तू ये सीड वाला दिमाग लगाना बंद कर और एक औरत की तरह सोचना शुरू कर

कम्मो- और दीदी बदले में आपको क्या चाहिए की मैंने जो जो उस दिन देखा वो सब भूल जाऊ और किसी से न खु

नीलम( कहती तो मैं भी यही हु की तू सबब भूल जाये पर अब जब तूने मुझे अपने बाप और भाई से छुड़वाते हुए देख hi चुकी है

तो मैं कहती हु की तू अपनी नीलम दीदी का असली रंग देखे

कैसे रात को मैं पूरी नंगी होकर अपने बाप और भाई को भोगने के लिए अपना शरीर देदेती हु )

नीलम- अरे मेरी गुड़िया मैंने ऐसा कब खा

कम्मो- मतलब दीदी

नीलम- मेरे कहने का मतलब है की जब देखेगी तभी तो सीखेगी न की अपने छोटे भाई को कैसे खुश करना है

नीलम की बाटे सुनकर कम्मो भी पूरी तरह से छुडासी हो चुकी थी

उसकी छूट भी रह रह कर काम रास टपका रही थी

नीलम- कहने का मतलब है की तूने जो दूर से देखा पहले उसे पास से देख समझ करीब से जान क्या करना है कैसे करना है

नीलम की बारे सुनकर कम्मो के होश उड़ गए थे

नीलम दीदी खुद hi कम्मो को अपने बाप और भाई से चुदाई का लाइव टेलीकास्ट दिखने का निमंत्रण दे रही थी

असल में नीलम दीदी की बात सुनकर कम्मो थोड़ा घबरा गयी थी

पर कहि न कहि कम्मो के मन में एक तरफ अलग hi जिघ्यासा थी

जब वो करीब से देखेगी कैसे नीलम दीदी को उसका hi बाप और छोटा भक किसी रंडी की तरह छोड़ रहे है तो कितना मजा आएगा

नीलम- अरे बोल न खा खो गयी

उस दिन तो थोड़ा hi देखा होगा तूने आज ोुरा दिखा दूंगी शुरुवात से अंतत तक्क

कम्मो- दीदी मतलब उसी समय मैं भी आपके घर के अंदर जब आप काका और राजू के साथ चुद.....

नीलम- है मेरी कम्मो रानी

जिस समय तेरी ये दीदी अपने बापू और छोटे भाई से एक साथ अपनी गांड और छूट मरवा रही होगी उसी समय तू भी बिलकुल हमारे सामने hi रहना और देखते जाना कैसे कैसे क्या क्या हो रहा है

तो बोल कब आ रही है मेरी लाइव चुदाई देखने

कम्मो का दिल जोरो से धड़क रहा था उसके मन में एक साथ हजारो सवाल चल रहे थे

कम्मो- दीदी मैं कैसे देखूंगी वह हरिया काका और राजू तुमको एक साथ

नीलम- मेरा यकीन मान तुझे अभी जितना डर लग रहा है न जब तू देखेगी उसके बाद उससे कई गुना मजा आएगा

कम्मो- ठीक है दीदी पर मैं करूंगी कुछ नहीं

नीलम- ये मेरा वडा है तुझे कोई हाथ भी नहीं लगएगा बिना तेरी मर्ज़ी के

कम्मो का डर अब थोड़ा कम् हुआ था नीलम की ये बात सुनकर

क्योंकि जैसा की रेखा और मेघा सोचती रही हरिया के बारे में कम्मो की भी सोच वही थी

कम्मो- ठीक है दीदी तो आप hi बता दो कब औ

नीलम- एक काम कर तू कल दोपहर में अजना 1 बजे तक्क

कम्मो- पर दीदी काका और राजू को क्या बोलोगी

नीलम- तू उसकी चिंता मैट कर मेरा बापू और छोटा भाई मेरे छेड़ो के गुलाम है

उन्दोनो को मैं संभाल लुंगी

कम्मो- ठीक है दीदी मैं कल आती हु आपके घर

अभी खाना लेजाना है रवि का भूखा होगा

नीलम- ः कर ले अभी छोटे भाई की सेवा बाद में मेवा जो मिलने वाला है

कम्मो शर्मा कर भगजी लगती है

नीलम- अरे मेरी कम्मो रानी याद रखना किसी को कुछ खबर न हो इस बात की

कम्मो- भरोषा रखो दीदी

कम्मो चली जाती है

नीलम के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जिसे देख कर लग रहा था मनो उसने कोई जंग जीत ली हो

नीलम ( आयी थी मुझे पथ पढ़ने और चिड़िया खुद hi फस्स गयी पिंजरे में

तेरी हालत तो मैं ऐसी कर दूंगी कम्मो रानी की तेरी बुर पानी टपकती हुई खुद hi लुंड की तलाश में निकल जाएगी ).......
 
अपडेट-92

कम्मो खाना लेकर खेतो में पहुंच चुकी थी

इधर रवि थोड़ी दुरी पर hi काम कर रहा था कम्मो को डेल्ह कर रवि भी तुरंत hi उस्ले पास आ जाता है

रवि- दीदी आज लेत हो गयी आप खाना लेन में

कम्मो- अरे वो रस्ते में मेरी शैली मिल गयी थी न इसी लिए थोड़ा लेत हो गयी

रवि- दीदी आपकी कोनसी शैली है गाओं में सबकी तो शादी हो गयी

अब कम्मो रवि को क्या बताती की नीलम से मिल कर आयी है

क्योंकि उस शाम को रवि ने भी देखा था कैसे नीलम अपने बाप और भाई से उछाल उछाल कर चिड़वा रही थी

कम्मो- अरे है एक शैली तू नहीं जनता चल ये खाना खा ले

रवि- दीदी खाना थोड़ी देर बाद खाऊंगा पहले ये वाला काम निपटना है

कम्मो- वैसे hi लेत हो गया आज खाना अब तू नाटक कर रहा है

रवि- दीदी वो काम निपट जायेगा तो मजे से खाना खाऊंगा पहले पानी चला दू खेतो में देखो पूरी तरह मिटटी में सना हुआ हु

एक बार पानी चला दू तो आराम से नहा धो कर hi खाना खाऊंगा

दीदी आप एक काम करो आप खाना रख कर जाओ अभी मुझे टाइम लगेगा

कम्मो जाना तो नहीं कहती थी पर वो यह भी जानती थी की रवि जब काम करेगा तो उसके वह रहने का कोई फायदा नहीं है

कम्मो- ठीक है मैं जाती हु तू शाम को ये बर्तन ले आना

रवि- ठीक है दीदी लेता आऊंगा

कम्मो अपनी गांड मटकते हुए वह से घर की और जाने लगती है

इधर पीछे से रवि अपनी दीदी की लचकती हुई कमर को देख कर मस्त हुआ जा रहा था

असल में रेखा दीदी की बात सुनने के बाद से रवि को भी अपनी कम्मो दीदी से फ़िलहाल दुरी बनाना hi सही लग रहा था

कहि ऐसा न हो की किसी गलती के कारन न तो उसे मेघा दीदी मिले और न hi कम्मो

फिर तो जिंदगी भर रेखा दीदी से hi काम चलना पड़ेगा

इधर कम्मो गुस्से में घर की और बढ़ी जा रही थी आज उसे रवि पर बहुत गुस्सा आ रहा था

अपने खेतो से hi नीलम ने कम्मो को जाते हुए देख लिया था

नीलम( यही सही मौका है पता लगाने का की आखिर मेरी शैली अपने छोटे भाई के साथ क्या गुर खिला रही है )

नीलम भी अपना काम धाम छोड़ कर रवि के खेतो की और निकल जाती है

इधर रवि सारा काम निपटा चूका था और नहा कर खाना खाने की तैयारी में बैठा था

गर्मी बहुत थी इस लिए उसने इस वक़्त सिर्फ एक धोती लपेटी हुई थी

अभी रवि ने खाना खाना शुरू hi किया था की तभी वह नीलम अपनी चूचिया उछलते हुए पहुंच जाती है

रवि- अरे नीलम दीदी आज आप यह कैसे

नीलम- तुझे तो अपनी रेखा दीदी से फुर्सत मिलती नहीं तो सोचा क्यों न मैं hi मिल लू तुझसे

रेखा दीदी का नाम सुनते hi रवि को कुछ कुछ शक होने लगता है

रवि- ऐसा तो नहीं है दीदी

नीलम- अच्छा ऐसा कुछ नहीं है पर तेरी hi एक दीदी बता रही थी की कैसे तू आज कल रेखा के hi आगे पीछे घूमते रहता है

रवि- कौन सी दीदी बोल रही थी

नीलम- वो तो नहीं बताउंगी में तुझे

रवि- मैं तो अपनी साडी दीदियो के आगे पीछे घूमता हु उसमे क्या हो गया

नीलम- बस घूमता है न पर रेखा दीदी के साथ ताऊ

नीलम की बात सुनकर रवि का शक यकीन में बदल जाता है और टेंशन की वजह से उसका पूरा शरीर पसीने से भीग जाता है

नीलम की आँखे लगातार रवि के गठीले बंद पर पसीना सरकता हुआ देख रही थी और अंदर hi अंदर आहे भर रही थी

क्योंकि न तो राजू की ऐसी बॉडी थी और न hi हरिया की

नीलम- कितनी गर्मी है रे तू तो पूरा का पूरा भीग गया

रवि- है दीदी गर्मी तो बहुत है

नीलम- रुक मैं मदद करती हु तेरी

नीलम आगे बढ़ते हुए रवि के सामने जाकर खड़ी हो जाती है

रवि खाना तो खा रहा था पर उसकी नजर नीलम की धोड़ी पर जा तिकी थी जोकि काफी गहरी थी

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नीलम अपना पल्लू पकड़ते हुए उससे रवि की छाती पोछने लगती है

और जैसे hi नीलम अपना पल्लू सरकती है रवि की आँखे बड़ी बड़ी हो जाती है

क्योंकि नीलम यह आने से पहले hi अपने ब्लाउज के 2 बोटों खोल चुकी थी

और जैसे hi रवि को नीलम की बड़ी बड़ी चिचियो के बिच वो घाटी नजर आती है उसके हाथ से निवाला निचे गिर जाता है

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रवि की नजरे जैसे नीलम की चूचियों पर hi जा तिकी थी

नीलम- क्यों रे कमीने खा खो गया तू

रवि- कहि नहीं दीदी

असल में नीलम अलैहा आयी तो थी पता करने की रवि एयर रेखा के बिच क्या चल रहा है

पर रवि का गठीला बदन देख कर नीलम के अंदर की रंडी जाग गयी थी

नीलम- देख तो ऐसे रहा है जैसे खा जायेगा

तेरी रेखा दीदी नहीं दिखती क्या तुझे

रवि भी नीलम को इस हालत में देख कर अंदर hi अंदर गरम हो रहा था पर कैसे कैसे करके वो अभी तक्क अपने ऊपर कण्ट्रोल' किये हुए था

रवि- क्या दिखती है रेखा दीदी

नीलम( बड़ा hi कमीना है ये लड़का ऐसे नहीं बताएगा ये)

इस बार नीलम थोड़ा और आगे को झुक जाती है और अपना हाथ सीधा निचे ले जाती है रवि के पेट पर

और जैसे जैसे वो अपने पल्लू से रवि का पसीना साफ़ कर रही थी वैसे वैसे उसकी हिलती हुई चूचिया रवि के कंधो पर लगातार रगड़ खाये जा रही थी

जिसका असर रवि की धोती में संत पड़े उसके लुंड पर होने लगता है

और जैसे hi रवि की धोती में हलक्की सी हरकत होती है नीलम की आँखे तुरंत hi उसकी धोती पर टिक्क जाती है

इस बार नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान थी

भले hi नीलम रवि का पसीना साफ़ कर रही थी पर धीरे धीरे गरम होने के कारन वो खुद hi पसीने में भीगी जा रही थी

अब नीलम एक कदम और आगे बढ़ती हुई रवि की पीठ की और चली जाती है और अपनी दोनों चूचियों को हाथो में पकड़ कर थदो ऊपर उठती हुई धड़ाम से रवि की पीठ पर गिरा देती है

रवि को आज नीलम दीदी की चिचियो का वजन साफ़ साफ़ मालूम पद गया था

पर दोनों ऐसे नाटक कर रहे थे मनो कुछ हो hi न रहा हो

इधर रवि का लुंड धीरे धीरे अपनी पूरी औक़ात में आ गया था

और तो और वो उसे छुपाने की भी कोई कोशिश नहीं कर रहा था

नीलम जैसी कामदेवी का गदराया शरीर देख कर तो रवि भी लम्बी लम्बी सांसे ले रहा था

नीलम- क्यों रे रवि गर्मी कुछ कम् लगा रही है या नहीं

नीलम पीछे से रवि से पूरी तरह चिपकी हुई थी

कहि न कहि रवि को भी नीलम के गदराये बादाम से उठती कामुक महक मिल चुकी थी और वो बार बार अपनी नीक को पीछे की और लेजाकर तेजी से सनस खींचता

अब तक नीलम रवि की धोती में बना तम्बू भी डेल्ह चुकी थी और उसकी सांसे भी अब फूलना शुरू हो चुकी थी

नीलम( सुबह मुर्गी फसायी और अब ये मुर्गा वह नीलम वहहह क्या hi जादू है तेरी बातो में )

नीलम खुद को hi सबसि देने में लगी हुई थी पर वो नहीं जानती थी की जिस जानवर को जगाने की वो गलती कर रही है अगर वो जाग गया तो नुक्सान नीलम का hi होगा

नीलम- कितनी देर तक्क खायेगा रे तू खाना

रवि- दीदी खा लिया मैंने खाना

नीलम- तो थाली पकड़ कर क्यों बैठा है

आगे बढ़ते हुए नीलम थाली को पकड़ कर खत से निचे रख देती है

नीलम- है अब बता अच्छे से

रवि- क्या बताऊ दीदी

नीलम अभी भी रवि की पीठ से चिपकी हुई थी

नीलम - जो मैं सुनने के लिए यह आयी हु

इतना बोलते hi नीलम पीछे की और गिरती हुई रवि की छाती को पकड़ कर अपनी और खिचती है और रवि भी नीलम के ऊपर गिर जाता है

नीलम की नजरे इस वक़्त रवि के लुंड पारर hi थी

रवि की तो मनो लाटरी लग गयी थी नीलम भले hi कुछ सोच कर आयी हो पर रवि इतना जान चूका था की नीलम दीदी अब यह से चुद कर hi जाएगी

रवि का सर ठीक नीलम की चूचियों के ऊपर hi था जोकि काफी नरम नरम अहसास दे रहा था रवि के सर को

इधर नीलम की हवस बढ़ती जा रही थी वो अपने दोनों पैरो से रवि को जकड लेती है और अब नीलम के दोनों पेअर रवि के लुंड से बस थोड़ा hi निचे थे और नीलम की नजरे रवि के लुंड पर गड़ी हुई थी

नीलम- तेरी रेखा दीदी ऐसे नहीं करती क्या

रवि भी अब माहौल को गरम करने की कोशिश करने में लग जाता है

रवि- है दीदी रेखा दीदी भी कभी कभी मुझसे ऐसे. Hi चिपकती है

नीलम- तो तू क्या करता है अपनी दीदी के साथ

नीलम लगातार रवि के लुंड को देखे जा रही थी जो लगातार झटके मरे जा रहा था और नीलम अपने होठो मो दातो से कटे जा रही थी

शायद नीलम भी अब रवि के लुंड को चखना कहती थी

रवि- मैं कुछ नहीं करता बास भाग जाता हु

नीलम- भाग क्यों जाता है तू अपनी दीदी के पास से

रवि- अब गुदगुदी होगी तो भाग hi जाऊंगा न दीदी

नीलम - अच्छा तुझे गुदगुदी होती है

इतना बोलते हुए नीलम तुरंत hi अपने हाथो को रवि के शरीर पर चलने लगती है और इस चीन झपटी में न जाने कब रवि की धोती सरक जाती है

रवि का लुंड देखते hi नीलम के नथुने फूलने लगते है

रवि भी जनता था की नीलम दीदी इतनी लम्बी लम्बी सांसे क्यों ले रही है

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रवि- दीदी क्या हुआ आप इतना जोर जोर से साँस क्यों ले रही हो

नीलम( हे बागवां इसके लुंड ले आगे तो राजू और बापू का लुंड भी फीका है मैंने तो सोचा भी नहीं था कभी की मेरे बापू से बड़ा और मोटा लुंड भी किसी का हो सकता है

सच खु तो अब मुझे मेरी शैली रेखा से जलन हो रही है काश की रवि मेरा छोटा भाई होता)

नीलम- ये क्या है रे इतना बड़ा और मोटा

रवि( तो साली रैंड अब आ hi गयी लाइन पर उस दिन जब कम्मो दीदी के साथ देखा था तो बड़ा उछाल उछाल कर बाप भाई से छुड़वा रही थी न आज देख तुझे चुदाई का असली मतलब ये रवि समझायेगा.....
 
अपडेट-93

रवि- क्या मोटा है दीदी

नीलम- तेरी ये लुल्ली क्यों खड़ी हो गयी है रवि

नीलम के होठ कम्प रहे थे जिसका अंदाजा रवि को भी लग्ग चूका था

रवि- दीदी ये लुल्ली नहीं है ये तो लुंड है लुंड

नीलम आँखे फाड़ फाड़ कर उस लुंड को hi देखे जा रही थी

नीलम- तो ये तेरा लुंड खड़ा क्यों ुओ गया है रे

रवि- दीदी जब मेरी रेखा दीदी मुझे चुटी है न तो बुइ ये ऐसे hi खड़ा हो जाता है

रवि की बाटे अब लगातार नीलम को गरम करने का काम कर रही थी

और नीलम के पेअर धीरे धीरे खिड़ hi रवि के लुंड की और बढ़ना शुरू कर चुके थे

नीलम- तो तू क्या करता है अपनी दीदी के साथ जब ये खड़ा हो जाता है तो

रवि- फिर मैं कुछ नहीं करता सब दीदी hi करती है

नीलम अपना थूक गटकते हुए

नीलम- तो क्या करती है तेरी रेखा दीदी

रवि जनता था की अब नीलम पूरी तरह से उस्ले काबू में आ चुकी है

रवि - दीदी वो तो नहीं बता सकता मैं आपको

नीलम- क्यों मैं तेरी दीदी नहीं हु क्या रे

रवि- दीदी तो हो पर रेखा दीदी ने कसम दे रखी है

नीलम- तो मतलब तू मुझे नहीं बताएगा

रवि- दीदी एक तरीका है

नीलम- बता कोनसा तरीका

रवि- दीदी बुरा मत मानना पर मैं बता नहीं सकता पर सब करके दिखा सकता हु

नीलम - अच्छा बीटा तू तो मुझसे hi होशियारी करने में लगा हुआ है

रवि- नहीं दीदी सच म बता नहीं सकता तो करके hi दिखा सकता हु आपको भी पता लग जायेगा की रेखा दीदी क्या करती है

नीलम अब पूरी शर्म को एक साइड रख देती है

नीलम- अच्छा तो ये बात है तो तू सीधा ऐडहा hi बोल दे न की जैसे अपनी रेखा दीदी को छोड़ता है वैसे hi तू अपनी नीलम दीदी को भी छोड़ना कहता है

रवि- दीदी उसे चुदाई कहते है क्या

नीलम- सच में तू बड़ा कमीना है रवि तेरे इस लुंड ने तो रेखा की हालत hi खराब कर रखी होगी

नीलम आगे की और लपक कर सीधा एक हाथ रवि के लुंड पर रख देती है

और जैसे hi उसके हाथो में रवि का लुंड आता है वो उसकी मोटाई और लम्बाई को अपने हाथो में महसूस करके जैसे पागल hi हो जाती है

नीलम - है दिया कितना मोटा और लम्बा लुंड है रे तेरा ऐसा लुंड तो मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखा कभी

रवि- क्यों दीदी राजू का लुंड इतना मोटा नहीं है क्या

रवि की बात सुनकर नीलम डांग्ग रह जाती है

नीलम- क्यों रे राजू खा से बिच में आ गया

रवि- अरे दीदी मैंने सोचा की जैसे रेखा दीदी मुझे चिपकी रहती है आप भी अपने छोटे भाई से वैसे hi चिपकी रहती होंगी

नीलम( अब इससे क्या छुपाना बता hi देती हु राजू और अपने बारे मैं ये भी तो अपनी दीदी की जवानी का मजा लूट रहा है)

नीलम- उसका भी मोटा है पर तेरे जितना नहीं है

रवि- दीदी मतलब आप और राजू भी वो चुदाई करते हो

नीलम- है करते है जैसे तू अपनी दीदी को छोड़ता है न वैसे hi राजू भी मुझे छोड़ता है समझा

नीलम के हाथ अब रवि के लुंड पर चलना शुरू हो चुके थे

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रवि- दीदी शरत लगा लो मेरे जैसा नहीं छोड़ता होगा

नीलम- अच्छा तब तो तू अब करके hi दिखा बीटा आखिर क्या क्या करता है तू अपनी रेखा दीदी के साथ

रवि- दीदी सोच लो बाद में मत हल्ला मचाना

नीलम- अरे बड़े बड़े घोड़े देखे है मैंने देखते है तू कितनी दूर दौड़ सकता है

रवि- दीदी ज़मी. ख़तम हो जाएगी पर ये घोडा दौड़ना बंद नहीं करेगा

नीलम- देख रही हु अपनी रेखा दीदी को छोड़ कर तू बड़ा समझदार हो गया है

रवि- अब दीदी की छूट से इतनी मिठास और मलाई निकलती है की मैं क्या कोई भी ज्ञानी हो जाये

रवि उठ जाता है और नीलम वैसे hi खत ओर पड़ी हुई थी

उठते के साथ hi रवि अपनी धोती को खींच कर अलग कर देता है और आगे बढ़ कर कमरे को अबदार से बंद कर देता है

जब रवि नीलम की और आ रहा था तो नीलम की नजरे यह नजारा देख कर पागल हुई जा रही थी

जैसे जैसे रवि आगे बढ़ रहा था रवि का लुंड नीलम को और भी विशाल होता दिखाई दे रहा था

नीलम( हे बागवां इसका लुंड तो किसी गधे के लुंड से भी मोटा है आता नहीं आज मेरा क्या हाल होगा पर जो भी हो इसे आज अंदर लेना है तो लेना है )

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रवि- दीदी आप तो अभी से पसीने पसीने हो गयी कहि डर तो नहीं गयी मेरे लुंड को देख कर

नीलम- अरे बीटा जितनी तेरी उम्र नहीं है न उससे ज्यादा चुद चुकी हु आजा आज तुझे भी देख लेती हु

रवि समझ चूका था की अब नीलम भी उसके लुंड की दीवानी हो गयी है और अब वो कहि नहीं जाने वाली

रवि के अंदर का जानवर काफी समय से सोया हुआ था आज वक़्त था उसे जगाने का

रवि- दीदी जैसा जैसा मैं रेखा दीदी के साथ करता हु वैसे वैसे hi करूंगा ठीक है न

नीलम- ठीक है अब जल्दी आजा

रवि के चेहरे पर वो शैतानी मुस्कान देख कर भी नीलम रवि के इरादों को नहीं भाप पति

रवि आगे बढ़ते हुए सीधा नीलम के पेटीकोट को पकड़ कर खींच देता है

नाडा तो नीलम पहले hi ढीला कर चुकी थी

पेटीकोट एक साथ hi सरकता हुआ नीलम की गुदाज टैंगो से अलग हो जाता है

नीलम- क्यों रे कमीने पहले hi मुझे नंगा कर दिया तूने

रवि- जब तक्क अपनी दीदी को नंगा नहीं करूंगा तब तक चुदाई कैसे होगी

नीलम- बड़ा हरामी है तू

रवि- हरामी नहीं हु दीदी मैं तो बहनचोद hi दिदिचोड हु समझी

नीलम की गर्मी भी अब सर चढ़ कर बोलने लगी थी

रवि पहले hi नीलम को काफी गरम कर चूका था

नीलम खुद hi अपने ब्लाउज के सरे बोटों खो देती है

और एक झटके के साथ नीलम के बड़े बड़े चुके धड़ाम से रवि की आँखों के सामने आ जाते है

नीलम ने अभी तक्क अपनी टंगे नहीं खोली थी

रवि बड़े hi आराम से उसकी छूट के करीब जाता है जिस पर एक भी बाल नहीं था और नीलम की छूट किसी पावरोटी की तरह एकदम फूली हुई नजर आ रही थी

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रवि- दीदी राजू को अपनी दीदी की छूट पर बाल पसंद नहीं है क्या

नीलम- तुझे पसंद है क्या तेरी दीदी की छूट पर बाल .

रवि- दीदी सच बताऊ तो बाल होने पर न दीदी की छूट से मलाई चाटने का मजा नहीं आता और अगर दीदी की छूट बिलकुल चिकनी हो जैसी आपकी है तो मन करता है की पूरी की पूरी छूट hi खा जाऊ

नीलम- अच्छी ट्रेनिंग दी है टेर्री दीदी ने तुझे पूरा बहनचोद बना दिया है

रवि- अरे अभी इस बेहेन छोड़ के कारनामे तो देख लो फिर आराम से बैठ कर मुझे बहनचोद कहना

पहले जरा अपनी टंगे फैला कर मुझे दर्शन तो क्रो मैं भी तो देखु नेरी नीलम दीदी की छूट कैसी है

नीलम तो जैसे इन्तजार में hi बैठी थी

अगले hi पल नीलम अपनी टंगे फैला देती है और उसकी काली छूट खुल कर रवि की आँखों के सामने आ जाती है

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रवि- दीदी ये तो पूरी भीगी पड़ी है मलाई से कब से पानी छोड़ रही हो तुम

नीलम- जबसे तेरा ये मुसला जैसा लुंड देखा तभी से

रवि- सच में दीदी मजा hi आजायेगा तुम्हारी छूट छत्त कर

अगले hi पल रवि अपना मुँह सीधा नीलम की टैंगो के बिच ग्यूसे देता है और पूरी की पूरी छूट को अपने मुह्ह में भर कर चूसने लगता है

नीलम- अह्ह्ह क्या कर रहा है कमीने थोड़ा धीरे कर

रवि- दीदी मेरी यही तो खासियत है मैं कुछ भी धीरे और आराम से नहीं करता

रवि लगातार नीलम की छूट को चूसे जा रहा था कभी वो अपनी जीभ को नीलम की छूट के उस गुलाबी छेद में दाल देता तो कभी छूट के डेन को अपनी जीभ से रगड़ देता

नीलम की छूट लगातार नमकीन पानी निकले जा रही थी जिसे रवि लगतार चाट चाट कर साफ़ करता जा रहा था

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नीलम- तू रेखा की छूट भी ऐसे hi कहतता है क्या रे कमीने

रवि चुपचाप नीलम की छूट से निकलता नमकीन पानी चाटता जाता है

नीलम- अह्ह्ह हां रवि ऐसे hi मेरे भाई अहह मैं झड़ने वाली हु ऐसे hi चाट और अंदर दाल अपनी जीभ अह्ह्ह्हह्हह umhaaaaaaaaaaaaaaa

िडजर रवि लगातार नीलम की छूट को कहते जा रहा था उधर नीलम इतनी मस्त चुटचूसै से बड़ी जल्दी hi सिखर पर पहुंच चुकी थी और अब उसला बदन अकड़ने लगता है

रवि समझ चूका था की नीलम अब झड़ने वाली है वो तुरंत hi अपने दोनों हाथो को ऊपर लेजाता हुआ पूरी ताक़त से नीलम की बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ लेता है

जैसे hi नीलम की नरम नरम चूचियों पर रवि के कड़क हाथ लगे नीलम के मुँह से एक चीख निकल जाती है

नीलम- अह्ह्ह्हह कुत्ते मारर दिया धीरे दबा मैं कहि भग्ग थोड़े hi रही हु

अब तक्क नीलम पूरी तरह से झाड़ चुकी थी उसकी छूट से काफी साडी सफेद रंग की मलाई बहार निकली जिसे रवि पूरी तरह चाट गया

रवि- क्यों दीदी ऐसे चुस्त है क्या राजू भी आपकी छूट को

नीलम- राजू की बराबरी तू नहीं कर सकता मेरा भाई हर्र कम् में अव्वल है कहे वो पैसा कमाना हो या अपनी दीदी की प्यास बुझाना

रवि( इस साली को दिखाना पड़ेगा की रवि का असली रंग क्या है अभी भी लम्बी लम्बी छोड़ रही है रुक तुझे बताता हु साली रैंड)

रवि- अच्छा दीदी चलो मन लिया की म राजू की बराबरी नहीं कर सकता पर अभी आपने मेरा पूरा कार्य करम देखा खा है

एक बार फाइनल मैच तो खेल लो फिर बताना कोण जीता राजू या मैं

रवि नीलम के और करीब जाता है

भले hi नीलम घर में दिन रात अपने बाप और भाई से अपनी चुदाई करवाती थी पर किसी बहार वाले के साथ ये सब वो पहली बार कर रही थी

कहि न कहि नीलम के मने भी डर था कुछ उच्च नीच न हो जाये

रवि नीलम के करीब पहुंच कर उसके तपते होठो पर अपने गरम होठ रख देता है

और नीलम जो झड़ने के बाद ठंडी पद चुकी थी उसके अंदर वासना की एक नई चिंगारी भड़का देता है

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इधर नीलम भी रवि का पूरा साथ दे रही थी

रवि कभी नीलम के होठो को चबाने लगता तो कभी नीलम के मुँह के अंदर अपनी जीभ दाल देता

और एक हाथ से वो नीलम की चिचियो को बरी बरी से दबा रहा था

कभी कभी तो वो नीलम के निप्पल को ऐसे मरोड़ देता की नीलम अंदर hi अंदर तड़प जाती और उसकी चीख रवि के मुह्ह में hi डब्ब कर रह जाती

रवि- दीदी आपने कभी राजू का लुंड चूसा है

यह नीलम समझ चुकी थी की रेखा को छोड़ छोड़ कर रवि इस खेल का माहिर खिलाडी बन चूका है और अब नीलम थोड़ा शरीफ होने का नाटक करने लगती है

नीलम- चूसा है बस 1-2 बार

रवि- क्यों दीदी आपको राजू का लुंड चूसने में मजा नहीं आता क्या

नीलम- तेरी रेखा दीदी चुस्ती है मया तेरा लुंड

रवि- वो तो रात को इसे मुँह में भर कर hi सो जाती है सुबह जाकर निकलती है इसे बहार अपने मुह्ह से

नीलम- मुझे तो अजीब और गन्दा लगता है

रवि( बड़ी hi शरीफ रंडी बनने का नाटक कर रही है साली अभी इसलि शराफत का बहुत उतरता हु)

रवि- दीदी एक बार चूस कर तो देखो

नीलम- तू बार बार कह रहा है इस लिए बस 1 बार hi चूसूंगी समझा

असल में तो नीलम भी जी भर के उस विशाल लुंड को जी भर के चूसना कहती थी

रवि नीलम को सहारा देकर उठता है और नीलम खुद hi एक आज्ञाकारी रंडी की तर्ज ज़मीन पर बैठ जाती है

इधर रवि का लुंड उसके मुँह के ठीक सामने था नीलम के मुँह में लगातार पानी आ रहा था

रवि अपना लुंड आगे बढ़ता है और नीलम किसी शरीफ रंडी की तरह थोड़ा सा मुँह खोल कर रवि के लुंड का स्वागत करती है

और देखते hi देखते रवि अपना सूपड़ा नीलम के मुह्ह में घुसा देता है

देखते hi देखते रवि का आधा लुंड नीलम के मुँह में समा जाता है

नीलम एक झटके में hi अपना मुँह पीछे को खींच लेती है पर अब काफी देर हो चुकी थी शराफत दिखने के लिए

रवि एक झटके के साथ नीलम का मुँह पकड़ता और उसे अपनी और खीचता हुआ दुबारा से अपना लुंड नीलम के मुँह में पेल देता है

नीलम इस हमले से अभी संभाल पति तब तक रवि एक और जोरदार झटका. मरता है और उसका लुंड नीलम के मुँह को फाड़ता हुआ आधे से ज्यादा अंदर घुस जाता है

अभी भी रवि का 3 इंच लुंड नीलम के मुँह के बहार hi था

अब धीरे धीरे रवि नीलम के मुँह में झटके मरना चालू कर चूका था नीलम भले hi चटपटा रही थी पर मन hi मन वो भी जी भर के रवि की लुंड चूसै का मजा ले रही थी

रवि- दीदी मजा आ रहा है या नहीं मेरा लुंड चूसने में

अह्ह्ह्हह कितना ग्राम है दीदी तुम्हारा मुह्ह तुम्हारी छूट कितनी गर्मी देगी मेरे लुंड को जब ये अंदर जायेगा अह्ह्ह्हह मजा आ रहा है दीदी

एक के बाद एक झटके के साथ रवि अपनी रफ़्तार को बढ़ाये जा रहा था

और नीलम के मुँह से सिर्फ और सिर्फ थूक hi बहार निकल रहा था वो भी बहुत सारा जो सीधा जमीन पर गिर रहा था

नीलम अब समझ चुकी थी की चुदाई के इस खेल में तो रवि उसके बापू और भाई से भी ज्यादा बेरहम है

इस बार रवि एक हाथ से नीलम का मुँह पकड़ लेता है और दूसरे हाथ से नीलम की नाक बंद कर देता है

और एक तगड़े झटके के साथ पूरा का पूरा लुंड नीलम के मुँह में थुश देता है

और हर झटके के साथ रवि का लुंड जड़ तक नीलम के मुह्ह में जाता

नीलम किसी बिन पानी की मछली की तरह तदाओ रही थी

नीलम लगातार चटपटा रही थी और अपने नाखुनो से रवि की जांघो पर खरोच रही थी

पर रवि के अंदर का जानवर अब जाग चूका था

रवि- हहहहहहहह दीदी आपने पूछा था न की मेरी रेखा दीदी भी मेरा लुंड चुस्ती है क्या

तो सुन्न लो मेरी रेखा दीदी अपना मुह्ह मुझे छोड़ने के लिए देती है न की लुंड चुसवाने के लिए हहहहह

आज रवि के अंदर का जानवर जाग चूका था

क्योंकि आज काफी समय बाद वो किसी को खुल कर अकेले में छोड़ रहा था वो भी उसकी दीदी की शैली को hi

रवि एक झटके में hi लुंड बहार खींच लेता और नीलम के मुँह से थुक्क की एक मोती सी धार ज़मीन पर गिरती और जैसे hi वो अपना मुह्ह कुछ बोलने के लिए उठती गप्प्प से दुबारा अपना लुंड नीलम दीदी के मुह्ह में पेल देता

करीब 10 मिंट तक नीलम दीदी का मुख छोडन करने के बाद रवि अब नीलम दीदी के गरम मुँह में hi झड़ना कहता था और वो अपने चरम पर पहुंच चूका था

रवि- दीदी मेरा लुंड अब फटने वाला है बोलो पियोगी न ालने छोटे भाई के लुंड से निकली दूधिया मलाई

नीलम बेचारी तो खुद मुँह में लुंड फसाये बैठी थी वो क्या hi बोलती पर हां मर्ज़ी तो उसकी भी यही थी

रवि- आह्ह्ह्हह दीदी बास अह्हह्ह्ह्ह ये लू डीडीडीईई पूरा का पूरा पी जाओ

और जैसे hi रवि के लुंड से मोती धार नीला. के गले में निकलती है नीलम की आँखे बड़ी हो जाती है और बिना निगले hi रवि का सारा वीर्य नीलम के पेट में जाने लगता है

असल में रवि ने झड़ते वक़्त नीलम का सर ोाकद कर इतना दबा दिया था की नीलम की नाक रवि के लुंड की जड़ पर लगी हुई थी

और नीलम की आँखे पूरी लाल हो चुकी थी

रवि करीब 1 मिंट तक्क नीलम दीदी के मुह्ह में hi झड़ता रहता है

और उसके बाद एक झटके के साथ अपना लुंड बहार खींच लेता है

करीब 20 मिंट तक चली मुहचुड़ै से आज नीलम की भी हालत खराब हो गयी थी जैसे hi रवि कांड बहार निकलता है नीलम किसी बेजान पुतले की तरह सरकती हुई ज़मीन पर गिर जाती है

नीलम बड़ी लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी और उसकी आँखे पलट कर उलटी हो गयी थी मनो किसी ने उसकी आधी जान hi निकल दी हो .....
 
अपडेट-94

नीलम बेचारी ज़मीन पर पड़े पड़े लम्बी लम्बी सांसे खींच रही थी और अपने गले में जमा हो चुके वीर्य को बहार निकलने या अंडर लेने की नाकाम कोशिश कर रही थी

इधर रवि नीलम के सामने पूरा नंगा खड़ा अब भी नीलम को देख कर अपना लुंडासल रहा था और देखते hi देखते रवि का लुंड फिरसे पूरी तरह खड़ा हो गया

रवि लगातार नीलम को hi देखता जा रहा था उसके चेहरे पर मुस्कान थी और एक हाथ से वो अपना मुसल फिरसे तैयार करने में लगा हुआ था

रवि- क्या हुआ नीलम दीदी आपकी तो बिच में hi हालत खराब हो गयी बोल रही थी की लम्बे लम्बे रेस वाले घोड़े देखे हाउ आपने

रवि की बात सुनकर नीलम को काफी गुस्सा आ रहा था ऊपर से रवि की हसी भी नीलम को बर्दास्त नहीं हो रही थी

नीलम- हरामी कुत्ते कोई ऐसे लुंड चूसता है क्या

रवि- दीदी मैं आपको लुंड थोड़े hi चूसा रहा था

नीलम- लुंड नहीं चूसा रहा था तो फिर लय कर रहा था रे कमीने पूरा मुह्ह फाड़ कर रख दिया

रवि- दीदी मैं तो आपका मुख छोडन कर रहा था

नीलम खत का सहारा लेते गए खड़ी हो जाती है

नीलम- बड़ा हरामी निकला रे रवि तू तो ऐसे hi अपनी दीदी के मुँह में भी लुंड पेलता है क्या

रवि- दीदी रेखा दीदी को तो इससे भी तगड़ा मुखछोडन पसंद है आप तो थोड़े में hi डर गयी

नीलम- एक नंबर की रंडी है तेरी दीदी

रवि- अब ये तो नहीं पता की मेरी दीदी क्या है पर है मुझे वो अपने शरीर का पूरा सुख देती है हर तरिके से

नीलम- तेरा बस चले तो मेरा मुह्ह छोड़ छोड़ कर भी छूट की तरह भोसड़ा बना देगा

रवि- क्या पता दीद ऐसा भी हो सकता है पर आप खा रोज रोज मिलती हो जो रोज मैं आपका मुँह ऐसे hi छोड़ सखु

नीलम- अच्छा एक बार में hi हालत खराब कर दी और तुझे रोज hi मेरा मुह्ह छोड़ना है बड़ा आया कमीना कहींका

रवि- दीदी तुम कितनी भी गली दे लो पर सच में तुम्हारा मुँह भी तुम्हरी छूट की hi तरह बिलकुल गरम है कसम से मजा आ गया आपके मुँह में झड़ते वक्त्त

रवि की बाटे अब दुबारा से नीलम को गरम करने का कम् कर रही थी

और कहि न कहि इस भयंकर मुँह चुदाई से नीलम भी खुस थी

उसने अपने बाप और भाई का लुंड तो काफी बार चूसा था पर उसका बाप या भाई रवि की तरह जानवरो जैसे चुदाई नहीं करते थे

और इसी एक कारन से नीलम भी मन hi मन रवि की गुलाम बन चुकी थी उसके मैं में यही चल रहा था की जब इसने अपना लुंड इतने भयंकर तरिके से चुसाया है तो ये मेरिक हिट ला क्या हाल करेगा

रवि- दीदी मुझे तो बड़ा मजा आया पर आपको आया या नहीं

नीलम- अब हरामी जिसमे गले में ऐसा गधे जैसा लुंड फसा होगा उसे क्या खाक मजा आएगा ऊपर से हरामी ने मेरी नाक भी बंद कर दी थी मैं मर जाती तो

नीलम की बात सुनकर रवि हसने लगता है

रवि- दीदी गले में लुंड तो था गधे जैसा पर अंत में उस गधे जैसे लुंड से निकली साडी मलाई भी तो तुम छत्त कर गयी

और रही बात मरने की तो ऐसे कैसे मरने दूंगा मैं तुम्हे दीदी अब तो तुम्हारी छूट का भोसड़ा बनाना बाकि है

रवि की बात सुनकर नीलम अंदर hi अंदर पागल हुई जा रही थी ुस्लि छूट दुबारा से चिपचिपा पानी छोड़ना शुरू कर चुकी थी

जिसे रवि भी नीलम की जांघो पर बेहटा हुआ साफ़ देख सकता था

नीलम- मेरा मुह्ह छोड़ कर मैं नहीं भरा क्या जो अब मेरी छूट भी फाड़ेगा

रवि- दीदी आप भले hi कीच बी खो पर आपकी छूट तो यही कहती है की मेरा ये मुसला इसके अंदर जाकर तबाही मचा दे

इतना बोलते हुए रवि नीलम की और बढ़ जाता है

रवि के लुंड को एक नजर देख कर नीलम

भी डर जाती है और एक कदम पीछे को खिसक जाती है

असल में रवि के विशाल लुंड से नीलम जैसी रंडी भी डर चली थी

और ये बात रवि भी जान चूका था की नीलम दीदी की हालत खराब हो चुकी है पर आज उसे नीलम दीदी को अंदर से लेकर बहार तक्क पूरी तरह तबाह करना था

नीलम और पीछे होना कहती थी पर पीछे दिवार थी और वो दिवार से बिलकुल चिपकी रवि को अपनी और आता देख रही थी

आगे बढ़ता हुआ रवि पूरी तरह से नीलम से चिपक जाता है उसका लुंड सीधा नीलम की पानी छोड़ती छूट से जा टकराता है

अपने एक हाथ से रवि नीलम की एक कबुछि को पकड़ कर मसल देता है

नीलम- अहह कुत्ते आराम से कर न

रवि- दीदी आराम से मजा खा आता है

राजू आराम आराम से करता है क्या आपके साथ

नीलम- वो बड़ा शरीफ लड़का है बड़े hi प्यार से करता है वो मेरे साथ सब कुछ

रवि- सही बात है बड़ा शरीफ है सेहर जाकर पता नहीं कितने कितने दिन रंडियो के यह पड़ा रहता था और अब अपनी दीदी को छोड़ कर शरीफ हो गया

नीलम- पहले वो कहे कुछ भी था पर मैंने उसे सुधर दिया

रवि अपने लुंड को थोड़ा सा धक्का देता है छूट तो पहले से hi गीली थी और टंगे भी

जिस कारन रवि का सूपड़ा फिसलता हुआ नीलम की दोनों टैंगो के बिच में घुस जाता है

इस बार रवि अपने दूसरे हाथ से नीलम के गुलाबी होठो को रगड़ देता है

रवि- तो दीदी राजू को सुधरने के लिए आपने क्या लालच दिया उसे अपनी छूट का

रवि जितना बोल रहा था नीलम की छूट उतना hi पानी छोड़ रही थी और अंदर hi अंदर नीलम अब रवि के लुंड को अपनी छूट में लेने के लिए बेकरार थी

नीलम- वो सब छोड़ तू जैसा जानवर है उस हिसाब से तो रेखा बेचारी दिन रात दृ सेहमी रहती होगी

नीलम की बात सुनकर रवि भट्ट जोरो से हसने लगता है

नीलम- हस्स क्यों रहा है कमीने पता नहीं क्या हाल कर रखा होगा तूने मेरी शैली का

रवि- नीलम दीदी ा hi आप मेरी रेखा दीदी को जानती खा हो वो तो दिन रात मेरे लुंड की पूजा करती है और असल में उन्होंने hi मुझे ये सब सिखाया है

नीलम बड़ी बड़ी आँखों से रवि की और देख रही थी

नीलम- मतलब तेरी रेखा दीदी खुद hi तुझे बोलती थी ऐसा करने को

रवि- बड़ी समझदार हो दीदी तुम तो देखो रेखा दीदी ने जितना सिखाया है आज वो सब मैं तुमको भी सीखा दूंगा और आपका मैं करे तो आप राजू को सीखा देना

नीलम- वो कोई जानवर थोड़े hi है तेरी तरह

बात करते हुए रवि बड़े hi धीरे धीरे अपने लुंड को नीलम की टैंगो में अंदर बाजार करने में लगा हुआ था

रवि- दीदी देखो आप कुछ भी खो पर सच तो यही है की आज तुमको इस जानवर के सामने hi झुक कर अपनी छूट की सलामी देनी होगी

इस बार रवि नीलम के बालो को पकड़ कर उसका मुँह अपनी तरफ खींचता हुआ उसके होठो को अपने दातो से चबाने लगता है और एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लुंड नीलम की गरम टैंगो के बिच पेल देता है

हर झटके के साथ रवि का मोटा लुंड नीलम की पानी छोड़ती छूट को रगड़ता हुआ अंदर जाता जिसके कारन नीलम का बदन न कहते हुए भी रवि की गिरफत में जा रहा था

नीलम की गर्दन से लेकर कानो तक रवि खूब चुस्त है और चूस चूस कर नीलम का पूरा चेहरा लाल कर देता है

रवि- साली बड़ा नाटक करती है नीलम दीदी तू तुझे लाइन पर लाना पड़ेगा

नीलम भी अब पूरी तरह मुद में आ चुकी थी

नीलम- अच्छा रे हरामी तू लाइन ओर लाएगा मुख्य कैसे लाएगा जरा मुझे भी तो बता

रवि नीलम का हाथ पकड़ कर सीधा अपने लुंड पर रकः देता गई

रवि- ये लुंड देख रही है न ये जिसके अंदर भी जाता है वो रैंड खुद बा खुद hi लाइन पर आ जाती है

नीलम- अपनी दीदी को hi देना इस लुंड की धमकी मैंने बड़े देखे है ऐसे मुसला मुझे मैट डरा

रवि( साली का बस मुह्ह छोड़ा था तो बेहोश होकर गिर गयी और अब दुबारा से हीरो पैंटी झाड़ रही है आज तो तेरी काहिर नहीं नीलम आज तुझे ऐसा चिढूँगा की तुझे अपनी सात पुस्ते याद आ जाएँगी ये वडा है मेरा फिर देखता हु और कितने दिला मरती है मुझसे छुड़वाने के बाद)

नीलम के बालो को खींचते हुए रवि उसे खत पर गिरा देता है

नीलम के चेहरे पर डर के साथ साथ एक उत्साह भी था मनो आज कोई उसका बलात्कार कर रहा हो

नीलम- कमीने मेरी मर्ज़ी के बिना hi छोड़ेगा क्या तू मुझे

रवि- अरे मेरी रंडी दीदी तेरी मर्ज़ी हो या न हो जब ये मुसल ेल बार अंदर जायेगा न तो तू खुद hi आइल ऊपर कूद कूद कर छुड़ेगी मुझसे समझी

अपने दोनों हाथो से रवि नीलम के पैरो को पकड़ कर खोल देता है और उसे एक बार फिर से नीलम की कॉमर्स से भीगी हुई छूट नजर आने लगती है

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रवि- तू तो सच में बहुत बड़ी रंडी है साली कितना नाटक कर रही है और तेरी छूट तो देख तप तप पानी चोदे hi जा रही है

होनी 2 उंगलियों को रवि अपने मुँह में डालते हुए एक झटके के साथ नीलम की पानी छोड़ती छूट में ुपत देता है

नीलम- अह्ह्ह्हह्हह कुत्ते क्या कर रहा है हाथ मत लगा मेरी प्यारी सी छूट को

रवि- आज तो तेरी इस प्यारी सी छूट का मैं हुलिया hi बदल दूंगा साली बड़े नखरे दिखा रही थी ना आज तेरी चल न बदली तो मेरा नाम भी रवि नहीं

रवि अपने लुंड के सुपडे पर अच्छे से थूक लगाने लगता है

रवि के काळा लुंड का गुलाबी सुपडे की मोटाई देख कर hi नीलम की सांसे ऊपर निचे हो रही थी

अब रवि अपने लुंड को नीलम की छूट पर ऊपर से निचे तक्क रगड़ने लगता है

नीलम बस निचे पड़ी पड़ी इधर से उधर चटपटा रही थी

रवि- कितना पानी छोड़ती है रे साली चू आज तेरी पूरी छूट सूखा दूंगा मैं

नीलम- हरामी सेल बहनचोद अपनी दीदी को छोड़ कर मैं नहीं भरता लय जो मेरी छूट में लुंड डालने जा रहा है

रवि- मेरी दीदी तो है hi ऐसी की उसके साथ कितनी hi बार चुदाई करलो पारर मैं नहीं भरता पारर आज मैं तेरा मैं जरूर भर दूंगा अपने लुंड से साली रंडी

रवि बार बार अपने भरी भरकम लुंड से नीलम की छूट पर कहते मरे जा रहा था

जिस्मी वजह से नीलम की छूट के अंदर एक अलग hi तूफ़ान मचा हुआ था

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रवि- आज तो तू गयी साली रंडी मेरी दीदी की बराबरी करने आयी थी न अब देख तुझे दिखता हु की मेरी दीदी इस दर्द को कैसे बर्दास्त करती होगी जो अब तुझे होने वाला है

बिना समय गवाए hi रवि एक जोरदार झटके के साथ अपना एक तिहाई लुंड नीलम की छूट में पेल देता है

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नीलम- ahhhhhhhhhh मम्मा मर्डर गयीईइ

मादरचोद एक hi झटके में पूरा लुंड पेल दिया क्या मादरचोद

रवि तुरंत hi नीलम के गले को पकड़ लेता है

रवि- अब्बे साली रंडी मादरचोद नहीं बहनचोद बोल समझी और अभी पूरा लुंड नहीं पेला अब पेलुँगा

इस बार रवि अपने हाथ से नीलम का गला जोरसे दबा देता है नीलम की जवाब तुरंत hi बहार को आजाती है तभी एक जोरदार झटके के साथ रवि अपना पूरा का पूरा लुंड नीलम की बच्चेदानी तक्क थोक देता है

नीलम- है राममम मर्डर दिया रे तूने जानवर कहिके हरामी कुत्ते

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रवि- ृक्क जा साली गली देती है ृक्क तेरी माँ छोड़ता हु अभी

बस फिर क्या था रवि ने आवा देखा न ताव्व उसी पोजीशन में एक के बाद एक जोरदार झटको के साथ वो नीलम को छोड़ता hi गया

करीब 10 मिंट से रवि नीलम की छूट का भोसड़ा बनाने पर तुला हिअ था

इधर इतना मोटा लुंड अपनी छूट में घुसवाकर

नीलम की हालत खराब हो चुकी थी

नीलम- आह्हः मम्माआ बास कररर रवीई मेरे ok यारे भाई पफर कभी छोड़ लेना बहुत जलन हो रही है

रवि- क्यों ऋ साली तब तो भीत कह रही थी की मेरे भाई की ब्रांडी कोई नहीं कर सकता अब क्या हुआ माँ चुद गयी तेरी 10 मिंट में hi

अभी तो तेरी छूट में काफी गर्मी बाकि है

रवि बिना कोई रेहम दिखाए नीलम की छूट में एक के बाद एक झटके मरे जा रहा था

इस कमरतोड़ चूसै से नीलम 2 बार झाड़ चुकी थी

नीलम की छूट अंदर से फटने को हो रही थी जलन के मरे उसका हाल बुरा था इधर रवि की रफ़्तार लगातार हर झटके के साथ साथ बढ़ती hi जा रही थी

रवि- अब बोल साली कभी ललकारेगी तू मेरे लुंड को

नीलम- बस मुझे आज छोड़ दे आगे से मैं कभी नहीं करूंगी तेरे लुंड से किसी के लुंड की भी तुलना

रवि- छोड़ तो दूंगा पर पहले मुझे भी तो शांत होने दे मेरी मलाई तो अपनी सबूत में गिरवा ले पहले

नीलम- जब तक तू झड़ेगा तब तक तो मैं मर्डर जाउंगी रे रवि हाथ जोड़ती हु छोड़ दे मैं मान गयी तेरे जैसा कोई नहीं है चुदाई में

रवि जोर जोर से हसने लगता है

असला में तो रवि की हसी देख कर नीलम को भी डर लगने लगा था उसे लग रहा था की आज वो इसी खेत में चुड़ते चुड़ते hi मर्डर जाएगी

रवि का लुंड था hi इतना विशाल और मोटा की रवि की दीदियो के अलावा किसी और के बस की बात नहीं थी उस लुंड पर चढ़ाई करना

रवि- ः छोड़ दूंगा तुझे पहले पीछे घूम कर अपनी गांड का छेद तो दिखा साली रैंड

गांड का नाम सुनकर तो नीलम की हवा hi तीते हो जाती है

नीलम( सेल हरामी ने मेरी फटी हुई छूट को भी फाड़ दिया अगर इसे गांड दिखा दी तो मेरी गांड में भी अपना कहता थोक देगा)

नीलम- नहीं नहीं रवि रहने दे मेरी गांड नहीं

रवि- क्यों तूने कभी गांड नहीं मरवाई क्या पहले कभी राजू से

नीलम- नहीं नहीं मैंने आज तक किसी को अपनी गांड चुने तक्क नहीं दी

रवि- तब तो और मजा आएगा रंडी तेरी गांड की सील तोड़ने में चल पीछे पलट

नीलम- नहीं रवि छोड़ दे मुझे तू कहे तो मेरे मुँह में लुंड दाल ले दोबारा से

रवि- सालो नाटक करती है कुटिया मादरचोद

एक झटके के साथ रवि नीलम उठा कर पलट देता है और न कहते है भी नीलम का वो भूरा छेद रवि की आँखों के सामने खुल कर आ जाता है

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रवि- क्या बात है एक दम मस्त छेद है तेरा तो नीलम दीदी मजा hi आ जायेगा इसे छोड़ कर तो

नीलम समझ गयी थी की आज उसकी माँ छोड़ने वाली है ये रवि उसे कहि का नबी छोड़ेगा आज

रवि सीधा नीलम की गांड के छेद पर अपना मुँह रख देता है और जोर जोर से नीलम की गांड को चूसने लगता है

नीलम भले hi कितना भी नाटक करले पर रवि की एक एक हरकत उसे पागल करती जा रही थी

नीलम- छोड़ दे रवि मेरी गांड को

अभी रवि अपने लुंड को ाचे से थूक लगा कर मसल रहा था

रवि- आज तो तू कितना भी नाटक करले पर तू बचने वाली नहीं है

नीलम एक हाथ से अपनी गांड का छेद छुपा लेती है

नीलम- रुक जा रवि नहीं तो मैं सबको बता दूंगी की तूने मेरा ब्लात्कार्र किया है

रवि- अरे मेरी रंडी नीलम दीदी एक बार मुझे तेरी ये प्यारी गांड मार लेने दे फिर जिससे बोलना हो बोल देना अगर तू बोलने लायक बचेगी तो

रवि नीलम के हाथ को साइड करता हुआ लुंड को सीधा गांड पर रख देता है

अब नीलम की हालत खराब होना शुरू हो गयी थी उसकी सांसे ऊपर निचे हो रही थी वो बस यही सोच रही थी की कैसे बर्दास्त कर पायेगी वो उस झटके को जो अभी पड़ने वाला है

एक जोरदार झटके के साथ रवि अपना आधा लुंड नीलम की गांड में पेल देता है

और इस जोरदार हमले से नीलम आगे को सरकती हुई गिर जाती है पर तुरंत hi रवि नीलम की कमर को थम लेता है और उसे अपनी और खींचता हुआ एक और जोरदार झटके कस साथ hi अपना पूरा लुंड उसकी गांड में पेल देता है

नीलम बेहोश होते होते बचती है

नीलम- ाभ्ह्ह्ह्ह हरामी मार डाला रे तूने काम से काम धीरे धीरे तो कर्ताआ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मर्डर गयी रे

रवि- साली रंडी तेरे नखरे तो सेहर की रंडियो से भी ज्यादा है मादरचोद घर में तो खूब कूद कूद कर अपने बाप और भाई से अपनी गांड और छूट मरवाती है और यह बोलती है की मैं किसी को अपनी गांड चुने तक्क नहीं देती हमे क्या चुटिया समझ रखा है तूने

रवि की बात सुनकर तो नीलम का सारा दर्द hi गायब हो जाता है उसका मुह्ह खुला कस खुला रह जाता है

नीलम- क्या बकवास कर रहा है तू

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रवि- अरे वहहह कितना ओवर एक्टिंग करेगी रे साली कुटिया सब कुछ देखा है मैं कैसे तेरा बाप और भाई हर रात तुझे आपस में बताते है

रवि का पूरा लुंड नीलम की गांड में घुस चूका था

अभी नीलम कुछ बोलती उससे पहले hi रवि अपने लुंड को सुपडे तक्क बहार खींच लेता है

नीलम- अह्ह्ह्ह कमीने तूने यह सब कब्ब देख लिया

रवि- अरे मेरी रैंड तू जो खेल खेल रही है न उसका भगवान् बना दिया है रेखा दीदी ने मुझे समझी

इतना बोलते hi रवि एक जोरदार झटके के साथ ोुरा जड़ तक्क लुंड नीलम की गांड में पेल देता है

अच्चानक हुए इस हमले से नीलम तड़प उठती है

इधर रवि रुकने का नाम नहीं ले रहा था

उधर नीलम की आँखे बहार को निकलती जा रही थी

रवि का हर झटका पहले वाले से जोरदार होता

नीलम बेचारी आज बुरी फांसी थी रवि के जाल में

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नीलम- आह्ह्हह्हआआ आह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह धीरररीीीे करररर कुत्त्तीये

रवि- साली अपने बाप और भाई को तो बोलती है की और जोर से छोड़ो और मुझे धीरे करने को बोलती है तुझे पता है मेरी रेखा दीदी ने आज तक मुझे धीरे करने के लिए नहीं बोलै और तू साली 2 टके की रंडी पहली चुदाई में hi गांड फट गयी तेरी

लगातार झटको के साथ hi बिच बिच में रवि अपना लुंड बहार खींच लेता और जब अपने दोनों हाथो से वो नीलम की गांड फैलता तो उसका छेद इतना बड़ा हो जाता की एक टेनिस बोलल आराम से अंदर घुस जाये

फिर रवि उस बड़े छेद में थूकता हुआ पक्क्क से दुबारा अपना लुंड पेल देता

रवि- बोलै था न नीलम दीदी एक बार चढ़ेगी मेरे लुंड पर तो बाकि सरे लुंड भूल जाएगी

नीलम- है है कमीने मान गयी पिछले 40 मिनट से मेरे छेड़ो को तबाह करबे में लगा बुआ है मुझ पर थोड़ा रेहम कर अब तो झाड़ जा और मुझे जाने दे

रवि- जाने तो दूंगा पर मैं आज तुझ पर अपनी रंडी होने का टाहप्पा लगा कर hi यह से भेजूंगा अमझि कुटिया

नीलम- लगा ले झा ठप्पा लगाना है पर पहले झाड़ तो जा

रवि- बड़ी खुजली थी तेरी छूट और गांड में आज साडी की साडी खुजली को मिटा दूंगा मैं समझी साली कुटिया रंडी

नीलम- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह धीरे कर ना रवि मैं मर्डर जाउंगी मेरी गांड फाड़ेगा क्या कुत्ते हरामी मादरचोद

रवि- नेरा बास चलता तो तेरी गांड को छोड़ छोड़ कर इतना फिआला देता की तू कहि भी बैठती तो तेरे बैठते hi तेरी सबदास बिना जोर लगाए hi गिरने लगती

नीलम- तूने अपनी रेखा दीदी की भी गांड इतनी hi फिआला रखी है क्या

रवि- हहहह तू साली रंडी मेरी रेखा दीदी के बारे में बात करती है उनके छेद तो ऐसे है की जितना भी छोड़ो अगले hi पल फिरसे तीते हो जाते है और मेरी दीदी कभी तेरे जैसे हार नहीं मानती

नीलम- रेखा तो पक्की रंडी निकली अपने hi छोटे भाई को इतना बड़ा छोड़ू बना दिया उसने

रवि- अभी तू जानती hi क्या है मेरी उस देवी जैसी दीदी के बारे में जिसके मादक जिस्म के हर हिस्से से सिर्फ और सिर्फ काम रास hi बेहटा है और तू साली मेरी रेखा दीदी से अपनी तुलना करती है रुक मादरचोद रुकक्क

रवि के अंदर का जानवर अब पूरी तरह से नीलम को बर्बाद करने पर तुला हुआ था

चुदाई को करीब 59 मिंट हो चुके थे जिस बिच नीलम तो 5 बार झाड़ चुकी थी पर रवि था की झड़ने का नाम hi नहीं ले रहा था

आख़िरकार भगवान् को hi नीलम पर थोड़ा तरस आ जाता है और कुछ आखिरी झटके मरने के बाद रवि हफ्ता हुआ नीलम की गांड में hi झड़ने लगता है

रवि- ले साली कुटिया तेरी गांड को मैंने सुद्ध कर दिया अपना वीर्य दाल कर अब तेरी सात पुस्ते मेरे इस वीर्य के साथ जन्मजात रंडी hi पैदा होगी

ले साली पूरा का पूरा पी जा अपनी इस गांड से मेरा वीर्य

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आखिरी के कुछ झटको के साथ hi रवि अपने वीर्य की आखिरी बून्द तक्क नीलम की गांड की गहराइयो में गिरता हुआ अपना लुंड बहार खींच लेता है

जैसे hi रवि अपना लुंड बहार खींचता है

नीलम की गांड से बड़ी तेज आवाज में pharrrrrrrrrrrrrr की आवाज के साथ कुछ बुलबुले वीर्य की बहार आती है

नीलम- हाय राम आखिर कार इस कमीने का पानी छूट hi गया कमर तोड़ दी हरामी ने

रवि एक साइड होता हुआ चारपाई पर बैठ जाता है

अब नीलम को यह से भागना था रवि की पकड़ ढीली होते hi वो तुरंत hi खड़ी होती है पर इतनी ताबड़तोड़ चुदाई के बाद उसके सरे अंजार पंजर ढीले हो चुके थे

कमरे के अंदर सपोर्ट के लिए बिच में एक पेड़ को काट कर खड़ा किया हुआ था जैसे की गाओं में आम बात होता है

झोपडी के अंदर

नीलम लड़खड़ाती हुई उस पेड़ को पकड़ कर खड़ी हो जाती है

नीलम मादरजात अभी भी नंगी hi खड़ी उसकी गांड का वो बड़ा सा छेद अभी भी रवि को दिखाई दे रहा था

रवि- सच में नीलम दीदी मजा आ गया तुम्हारे छेड़ो को छोड़ कर

क्या hi तीते गांड थी आपकी मजा आ गया आपको छोड़ कर नीलम दीदी कसम से

नीलम बेचारी तो कुछ बोलने के लिए भी हिम्मत नहीं जूता पा रही थी

वो बस पेड़ को पड़के पकड़े बस बेचारी लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी और उस दर्द को काम करने की कोशिश कर रही थी जो उसकी छूट और गांड के साथ साथ पुरे शरीर में हो रहा था.......
 
अपडेट-95

लगातार हुई चुदाई से नीलम की हालत खराब हो चुकी थी उसके कुल हुए गांड के छेद से अभी तक रवि का वीर्य तप तप टपक रहा था

नीलम उस पेड़ को पकड़े लम्बी लम्बी आहे भर रही थी

आज नीलम की दमदार चुदाई के बाद रवि बड़ा खुश था

रवि का लुंड नीलम की बहती गांड देख डेल्ह कर दुबारा से तनाव में आने लगता है

इधर नीलम की आँखे बंद थी उसका पूरा बदन टुटा जा रहा था

नीलम( खा आअज मैं इस हरामी के पास आकर फास गयी आयी तो थी इसे फ़साने खुद hi फस्स गयी सेल मादरचोद ने छोड़ छोड़ कर पुरे शरीर की माँ छोड़ दी अह्ह्ह चला भी नहीं जा रहा पता नहीं रेखा कैसे झेलती होगी इसका लुंड )

रवि ( साली रंडी मुझसे उगलवाने आयी थी रेखा दीदी और मेरे बारे में पर साली खुद उल्टा फस्स गयी अबसे रंडी कभी मेरे आस पास भी नहीं भटकेगी)

रवि- क्या हुआ नीलम दीदी दर्द हो रहा है क्या

नीलम- क्यों रे हरामी छोड़ना hi था तो थोड़ा प्यार से छोड़ता न

रवि- अभी तो आपको बड़े प्यार से चिड़ा है दीदी

पर आपकी हालत तो इतने में hi खराब हो गयी

नीलम- है देखा बड़े प्यार से छोड़ा सेल कमीने एक बार लुंड मेरी गांड में डाला तो सीधा 1 घंटे बाद निकला थोड़ा तो रेहम करता मैं भी तेरी दीदी की शैली hi

रवि- हाहाहा रेहम तो मैं अपनी दीदी पर नहीं करता तो आप पर कैसे कर देता दीदी

नीलम बेचारी थोड़ी सी हिम्मत जूता कर पीछे की और मुद कर रवि को देखती है जो अपना लुंड मसलता हुआ उसकी गांड को hi घर रहा था

जब नीलम की नजर रवि के लुंड पर जाती है तो उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है क्योंकि 1 घण्टे चुदाई के बाद झड़ने पर भी उसका लुंड बिलकुल सीधा खड़ा था

नीलम( हे भगवान् स जानवर का लुंड तो फिर खड़ा हो गया जल्दी से यह से भागना पड़ेगा नहीं तो क्या पता इसका मैं कब्ब पलट जाये और फिरसे मुझे छोड़ना शुरू करदे )

िडजर रवि नीलम की गांड और छूट को देख देख कर दुबारा से गरम हो रहा था

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नीलम जैसे hi अपनी गर्दन को घुमा कर वह से भागने का सोचती है तुरंत hi रवि उसकी गर्दन को पकड़ कर पेड़ के साथ दबा देता है

नीलम- रवि मेरे भाई अब तो जाने दे तूने मेरी छूट और गांड दोनों मार ली भाई अब तो कुछ नहीं बचा है मेरी हालत भी खराब हो गयी है रवि हाथ जोड़ती हु प्लस छोड़ दे मुझे

रवि- साली कुटिया मुझे पता है तू कितनी बड़ी रंडी है तू यह से बहार जाकर मेरी दीदी और मेरे बारे में हल्ला मचा कर अपना बदला लेगी क्यों बोल सही कह रहा हु न मैं

नीलम- नहीं नहीं रवि मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगी बस तू मुझे छोड़ दे मैं आगे से कभी तेरे किसी काम के बिच में नहीं आउंगी छोड़ दे भाई मुझे

रवि- मेरा मैं तो कह रहा है की तू साली रंडी की जाट अपना रंग जरूर दिखाएगी और अगर तुझे ेल बार और छोड़ दिया तो शायद तू लाइन पर आ जाये

रवि की बात सुनकर नीलम का डॉट सच में बदल जाता है रवि एक बार फिरसे नीलम को छोड़ने के मुद में आ चूका था

नीलम का डर उसके चेहरे पारर साफ़ नजर आ रहा था उसका पूरा शरीर काँप रहा था उसके पूरा चेहरा दर और पसीने से भीग चूका था

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नीलम- रवि आज नहीं मैं कल फिरसे तेरे पास आ जाउंगी कल जी भर के मुझे फिरसे छोड़ लेना आज जाने दे बस्स्स

रवि- हहहह साली रंडी मुझे क्या चुटिया समझा है तूने मैं जनता हु की तू एक बार यह से उड़द गयी तो दुबारा हाथ नबी आने वाली

नीलम की तो यही सोच सोच कर हालत खराब हुई जा रही थी की जब दूसरी बार झड़ने में रवि को 1 घंटा लगा तो तीसरी बार झड़ने में तो ये पूरी रात लगा देगा

नीलम- रवि मेरे प्यारे भाई मैं नहीं झेल पाऊँगी तेरा ये मुसल और मैं तेरी रेखा दीदी जितनी हिम्मती नहीं हु छोड़ दे मुझे भगवान के लिए छोड़ दे मुझे

रवि अपने एक हाथ से तो नीलम की गर्दन को पेड़ पर दबाये हुए था और दूसरे हाथ से नीलम के दोनों हाथो को पकड़ रखा था

रवि- साली रंडी बड़े ताव से आयी थी आज तू जान्ने के लिए की मेरे और रेखा दीदी के बिच क्या चल रहा है अब तो मैं तुझे लार के hi दिखा देता हु देख ले मैं रेखा दीदी को दिन रात ऐसे hi छोड़ता हु और सुन ले आज तो तुझे मुझसे भगवान् भी नहीं बचा सकता हहहहह

नीलम को लग रहा था की आज वो इसी झोपडी में चुड़ते चुड़ते hi मर जाएगी

इधर रवि का लुंड बिलकुल 90° के जंगल में खड़ा था जोकि नीलम की गांड के छेद के बिलकुल सामने था

रवि- आज तो तुझे ऐसा छोडूंगा की तू जिंदगी भर रवि को और उसके लुंड को याद रखेगी

अभी नीलम कुछ बोलती उससे पहले hi रवि एक झटके के साथ अपना लुंड नीलम की गांड में पूरा जड़ तक्क पेल देता है

अच्चानक हुए इस हमले से नीलम की सिटी पित्ती गुल हो जाती है

नीलम- हाय रे माआई मर्डर डाला रे कुत्ते हरामी

रवि- दे ले मादरचोद जितनी गली देनी है आज तेरा रंडी प्न पूरी तरह से उतर दूंगा

नीलम- अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हहहहहह अह्ह्ह्हह मैं मर्डर जौंगीयी ाजजज्जज आह्ह्ह्ह छोड़ड़ड़ दे रविइइइइ अह्ह्ह्हह ममैंआआआआ

रवि- अरे साली तू तो एक साथ दो दो लुंड पचा जाती है और एक लुंड से hi मरने की बात कर रही है हाहाहाहा

नीलम- अह्ह्ह्हह कुत्ते वो दोनों लुंड मिला कर भी तेरे लुंड जितना नहीं होगा ahhhhhhhhhh हहहहहह पता नहीं खा से गधे जैसा लुंड पाया है तूने हरामी

रवि- आज यही गधे जैसा लुंड छोड़ छोड़ कर तेरी हालत खराब करेगा साली रंडी बड़ा शौक ह न तुझे छुड़वाने का ले साली मादरचोद रंडी

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करीब 10 मिनट तक्क रवि खड़े खड़े hi नीलम की गांड मरता रहा इधर नीलम की हालत बिगड़ती जा रही थी उसके मैं में बस यही बात चल रही थी की रवि उसे जैसे hi छोड़ेगा वो यह से भाग जाये नहीं तो ये हरामी उसे छोड़ छोड़ कर मार डालेगा

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नीलम की हालत इतनी खराब थी की इधर खड़े खड़े रवि का लुंड उसकी गांड के अंदर बहार हो रहा था और वो लगातार अपनी छूट से म्यूट जाए रही थी

रवि- हहहह साली राबड़ी थोड़ा इन्तजार करलेती खड़े खड़े hi मूतने लगी रंडी

नीलम- हरमे कुत्ते पिछले 2 घंटे से लगातार चोदे जा रहा है

अभी नीलम कुस्ज बोलती उससे पहले hi रवि उसकी गर्दन पकड़ कर उसे खत पर पटक देता है

और बस फिर क्या था अगले 2 घंटे तक बिना रुके नीलम की चुदाई चालू रहती है

रवि का लुंड कभी नीलम की छूट में कभी गांड में तो कभी मुहहह में

न जाने रवि इन 2 घंटो में कितनी hi पोजीशन में नीलम को छोड़ता है

रवि था की झड़ने का नाम नहीं ले रहा था इधर नीलम की हालत देख कर तो ऐसा लग रहा था मनो वो बेहोश होने hi वाली है

सच hi बात थी रवि जैसे घोड़े का लुंड लेना सबके बस की बात नहीं थी सिवाय रवि की दीदियो के

आखिरकार रवि का लुंड एक बार फिरसे झड़ने वाला था वो तुरंत hi खड़ा हो जाता है और नीलम की गर्दन को पकड़ कर सीधा ज़मीन पर बैठा देता है

और नीलम के पुरे चेहरे पर अपना लुंड मसलता हुआ तेज तेज हिलने लगता है और थोड़ी hi देर में नीलम का पूरा चेहरा रवि के चिपचिपे वीर्य से भर जाता है

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पूरी तरह झड़ने के बाद रवि खत पर बैठ जाता है

इधर नीलम बेचारी बुरी तरह थक चुकी थी वो सीधा जमीन पर गिर जाती है

करीब 10 मिंट तक्क रवि खत पर बैठा बैठा नीलम को हफ्ता हुआ देखता रहता है

रवि( आज तो साली को ऐसा छोड़ा है की अगली बार मेरे और दीदी के बारे में किसी से बात करने से भी डरेगी )

रवि खड़ा होता हुआ नीलम के सर के पास पहुँचता है

बड़े hi प्यार से रवि नीलम के बालो को सहलाता हुआ उसे उठता है

रवि- नीलम दीदी क्या हुआ थक गयी क्या नीलम दीदी

नीलम जैसे hi आँखे खोल कर देखती है उसकी हालत खराब हो जाती है

रवि का लुंड आधा खड़ा था जो सीधा उस्ले मुह्ह के सामने hi झूला पड़ा था

नीलम- रवि जाने दे मुझे मेरी हालत खराब हो गयी है

रवि अपने एक हाथ से अपना लुंड मसलने लगता है

रवि- दीदी सोच तो रहा हु आपको जाने दू पर क्या क्रू ये लुंड आपको नंगा देखने के बाद बैठने का नाम hi नहीं ले रहा है

नीलम- आअज जाने दे मैं कल फिर आ जौंगीयी

रवि- दीदी झूट तो मैट बोलो मुझे पता है की अब तो तुम मेरे सामने आने से भी दरोगी

नीलम- ब्जग्वान के लिए छोड़ दे मुझे मेरे भाई

रवि- छोड़ तो दूंगा पर एक बात बता दो पहले

नीलम - है है पूछ न जल्दी पूछ

रवि - मेरे और रेखा दीदी के बारे में आपको किसने बताया मतलब मेरी कोनसी दीदी ने बताया

रवि से लगातार छोड़ने के बाद नीलम इतना दर चुकी थी की वो तुरंत hi कम्मो का नाम ले देती है

नीलम- कम्मो ने बताया था जब वो तेरा खाना लेकर आ रही थी दोपहर में

रवि- अच्छा तो ये बात है ठीक है दीदी आप लपड़े पेहेन लो कहि ऐसा न हो की आपको नंगा देख कर दुबारा से मेरा लुंड खड़ा हो जाये

और जैसे hi नीलम की नजर रवि के लुंड पर पड़ती है वो एक बार फिर से डरे जाती है क्योंकि उसका लुंड अब पहले से ज्यादा खड़ा था

नीलम जैसे तैसे लड़खड़ाते हुए खड़ी होती है और जल्दी जल्दी अपने कपडे पहनने लगती है

रवि- अरे अरे दीदी आराम से पेहेन लो कहि गलत तरिके से कपड़े पेहेन लोगी तो गाओं का कोई भी आदमी देख कर यही बोलेगा की कहि से छुड़वा कर आ रही हो

रवि- और दीदी एक बात ध्यान देना मेरे और रेखा दीदी के बारे में अगर किसीको कुछ बताया न तो

नीलम- अरे मैं किसीसे कुछ नहीं कहूंगी पक्का पक्का रवि

रवि- अरे अरे मेरी प्यारी दीदी सुन्न तो लो अगर किसी से कुछ खा तो पहले तो पुरे गाओं में ढिंढोरा पीटूंगा की नीलम दीदी अपने बाप और भाई से चुदवाती है और जब गाओं वाले तुम लोगो को गाओं से निकाल देंगे तो तुम्हारे बाप और भाई को मार दूंगा और तुमको अपनी रंडी बना कर रकहुँगा और जैसे आज छोड़ा है न उससे भी बुरी तरह छोडूंगा

समझ गयी ना बोलो दुबारा छोड़ना है मुझसे

नीलम- मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगी

नीलम तुरंत hi रवि की झोपडी से निकल जाती है

नीलम को आज चला तक नहीं जा रहा था

नीलम( खा मैं गयी थी उस कमीने से पता लगाने उसके और उसकी दीदी के बारे में उस कमीने ने मुझे hi छोड़ दिया है माआ बहुत दर्द हो रहा है इस दर्द का बदला न लिया तो मेरा नाम भी नीलम नहीं

आज तूने जितना मुझे छोड़ा है न एक एक झटके का हिसाब होगा रवि बस सही समय आने दे)

नीलम अपने घर की और भाग चुकी थी रवि अभी भी झोपडी में लेता लेता खुश हो रहा था

रवि- आज तो मस्त चुदाई हो गयी नीलम रानी की बहुत मजा दिया साली ने

पर समझ नहीं आया कम्मो दीदी अगर हमारे बारे में जानती है तो घर की बात को बहार क्यों फैला रही है कुछ तो गड़बड़ है रेखा दीदी को बताना पड़ेगा नहीं तो आगे और भी दिक्कत हो जाएगी ..........
 
अपडेट-96

अँधेरा हो चूका था

इधर नीलम को रवि की झोपडी से निकले भी कुछ समय बीत गया था

रवि अपनी खत पर नंगा hi बैठा बैठा मुस्कुरा रहा था

रवि- आज तो साली रंडी को गजब का छोड़ा अब कभी जिंदगी में मुझे देखेगी तो दूर से hi भाग जाएगी पर कम्मो दीदी ने ऐसा क्यों किया अगर वो सब जानती थी तो अपने hi घर की बदनामी करने पारर क्यों तुली है वो

कुछ भी हो रेखा दीदी से इस बारे में बात करनी पड़ेगी

रवि भी सारा समान समेत कर घर की और निकल जाता है

अभी वो थोड़ी दूर hi पहुंचा था की उसे कुछ दूर पर नीलम दिखाई देती है जोकि लंगड़ाते लंगड़ाते अपने घर की और जा रही थी

रवि ( इस साली रंडी की तो चल hi बदल गयी है आअज चूड़ी भी तो है मेरे लुंड से 4 घंटे तक्क)

रवि- क्या हुआ नीलम दीदी आपकी तो चल hi बदल गयी हहहहहह

नीलम पीछे पलट कर देखती है और दुबारा अपना मुँह आगे घुमा कर चलने लगती है

रवि- दीदी फिर कभी मुँह करे तो आ जाना मेरी झोपडी पर आपको तो पता hi है मैं और मेरा लुंड हमेशा तैयार रहते है चुदाई के लिए

नीलम को गुस्सा तो बहुत आ रहा था जोकि उसकी शकल पर साफ़ साफ़ दिख रहा था पर नीलम को इस वक़्त कुछ भी बोलना ठीक नहीं लगता और वो अपने घर की और मुद जाती है

इधर रवि भी आज एक और छूट छोड़ने से बड़ा खुस्स था वो खुसी खुसी घर की और निकल जाता है

गर्मी बहुत थी तो आज मेघा और रेखा दोनों पेटीकोट और ब्लाउज पहने घर के बहार hi खत डेल बैठी हुई थी

रेखा- क्यों रे रवि तुझे समझाया था न की जल्दी घर आया कररर

रवि- दीदी वो काम ज्यादा था तो लेत हो गया

रेखा- मतलब तू नहीं मानेगा

मेघा- अरे क्या तू रोज रोज इसके पीछे पड़ी रहती है काम hi तो कर रहा था

बिचारा दिन भर काम करता है

और बाकि के लड़को को देख गाओं के कैसे उलटे सीधे काम करते है नदी में औरतो को नहाते हुए देखते है और तेरा भाई इतना शरीफ है फिर भी तू इसके पीछे पड़ी रहती है

शरीफ शब्द सुन्न कर रेखा और रवि की नजरे आपस में मिलती है और दोनों हल्का हल्का मुस्कुरा देते है

क्योंकि ये बात तो सिर्फ रेखा hi जानती थी की रवि कितना शरीफ है

रेखा- ये बात तो सही है दीदी दिन भर खेतो में काम करता है और घर पर भी अपनी दीदियो का ख्याल रखता है

मेघा- सच में लाखो में एक है मेरा भाई

रेखा- दीदी लाखो में नहीं करोड़ो में बोलो करोड़ो में

मेघा रवि का हाथ पकड़ कर उसे अपनी और खींच लेती है

रेखा भी थोड़ा जगह बनती है और रवि अब अपनी दोनों दीदियो के बिच में बैठा था

मेघा- तुझे पता है रवि तुझसे सबसे ज्यादा प्यार तेरी कोनसी दीदी करती है

रवि- दीदी इसका जवाब देना तो थोड़ा मुश्किल है

मेघा- अरे मैं करती हु रे

इतना बोलते हुए मेघा रवि को अपनी भरी भरकम चूचियों पर चिपका लेती है

मौका देखते hi रेखा भी रवि से चिपक जाती है

अब रवि अपनी दोनों दीदियो की चूचियों के बिच फसा हुआ था

रेखा- और मेरा क्या जो मैं तेरी सेवा करती हु दिन रात हां

रवि- दीदी आप दोनों hi मुझे बहुत प्यार करती हूँ

रेखा- दीदी आप बैठो अपने दुलारे भाई के साथ मुझे तो बड़ी जोर की हगवास लगी है नहीं गयी तो यही कर दूंगी

मेघा- अरे अरे यह मत करना तू नहीं तो पूरी बदबू बदबू फ़ैल जाएगी हहहहह

रेखा उठ कर घर के पिछवाड़े भाग जाती है उसकी हगवास उसकी मुह्ह तक्क आ गयी थी

रेखा के जाते hi मेघा दीदी की नजर सीधा रवि की धोती पर पड़ती है जिसमे थोड़ा उभर दिखाई दे रहा था

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मेघा- अरे तू ऐसे क्यों बैठा है आराम से ऊपर हो कर बैठ न

इतना बोलते हुए मेघा पीठ के बल लेत जाती है और अपने दोनों पैरो घुटनो से मोड़ देती है

मेघा दीदी की आधे से ज्यादा चूचिया रवि को दिखाई दे रही थी

कुल मिलकर भले hi रवि दिन भर नीलम को छोड़ने के बाद घर लौटा था पर अब मेघा दीदी को देख कर रवि की हालत दुबारा खराब होने लगी थी

जिसका असर रवि की धोती पर साफ़ साफ़ दिख रहा था

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मेघा- मेरा एक काम तो कर दे रवि

रवि- क्या काम है दीदी

मेघा- देख तो तेरी दीदी दिन बी दिन कैसी गदरायी जा रही है जगह जगह चर्बी जमा hi गयी है मेरे पैरो में बड़ा दर्द है थोड़ा दबा तो दे

रवि( दीदी आपकी गदराये बदन का hi तो दीवाना हो गया है आपका छोटा भाई )

रवि तो पहले से hi तैयार बैठा था अपनी दीदी के अंगो को मसलने के लिए

तुरंत hi रवि अपने दोनों हाथो से मेघा दीदी के दोनों पैरो की पिंडलियों को पकड़ लेता है और मसल मसल कर दबाने लगता है

सामने hi रवि को मेघा दीदी की थोड़ी थोड़ी जंघे दिखाक दे रही थी जो की अबधेरे में भी चमक रही थी

मेघा दीदी को इस अवस्था में देख कर एक पल के लिए तो रवि भी लालच में बह जाता उसका हाथ मेघा के घुटनो तक्क पहुंच चूका था

इधर मेघा आँखे बंद किये अपने छोटे भाई के मजबूत हाथो से मालिश करवाने का मजा ले रही थी

मेघा- बड़ी जान है रे तेरे हाथो में तो रवि

रवि- दीदी की सेवा न कर सखे तो इस जान का क्या फायदा दीदी

जैसे जैसे रवि मेघा के पैरो को मसल रहा था वैसे वैसे उसका लुंड अपने असली रूप में आ रहा था

और रवि के लुंड को अकड़ता हुआ देख मेघा दीदी की छूट भी चिपचिपाने लगी थी

अभी दोनों भाई बेहेन कुछ करते उससे पहले hi अंदर से कम्मो की आवाज आती है

कम्मो- दीदी खाना निकल दिया है आजाओ

मेघा( जब भी कुछ अच्छा होने वाला होता है ये चुड़ैल बिच में टपक पड़ती है)

मेघा- चल रवि खाना खा लेते है

रवि- दीदी रेखा दीदी कब तक्क आएँगी

मेघा- तूने उसका पिछवाड़ा देखा है कितना बड़ा है अभी तो वो अपने उस पिछवाड़े में से पूरी संडास को बहार निकलेगी तब आएगी हहहह

रवि- दीदी आप चलो मैं 2 मिनट में आता हु नहा कर

मेघा- ठिक्क है जल्दी आना

मेघा घर के अंदर की और चली जाती है

रवि हेण्डपम्प के पास पहुंचा hi था की उधर से रेखा दीदी भी आ जाती है

रवि- दीदी कितना टाइम लगा दिया आपने मुझे आपसे बात करनी है कुछ

रेखा- क्या कृ रे तूने तो आज अपनी दीदी की गांड मरी नहीं इसलिए छेद चिपक गया और जोर लगा लगा कर हगवास निकल कर आयी हु

रेखा अपनी एक ऊँगली को रवि की नाक पर रख देती है

रवि भी अपनी दीदी की हगवास की खुसबू को सूंघ कर मस्त हो जाता है

मेघा- क्या जरूरी बात है बता न तूने अपनी दूसरी दीदी की छूट भी देख ली क्या

रवि- वो तो आज नहीं तो कल मैं देखूंगा hi पर अभी कोई और बात है

अभी रवि कुछ बोलता उससे पहले hi मेघा दीदी बहार आ जाती है

मेघा- अरे तुम दोनों खाना खा कर मीटिंग कर लेना अभी खाना खा लो मुझे बड़ी जोर नींद आ रही है

रेखा- देखा दीदी को नींद आ रही है मतलब समझता है तू आज की रात रंगीन होगी अपनी कल की तरह

और जो भी बात होना अपनी दीदी को छोड़ते छोड़ते hi बता देना अब चल तू भी भूखा होगा

खाना खायेगा तभी तो रात को म्हणत करेगा

रवि और रेखा भी घर के अंदर चले जाते है

थोड़ी hi देर में सब लोग खाना खा चुके थे

खाने के तुरंत बाद hi मेघा दीदी कमरे में जाकर सो जाती है और रवि बाजार टहलने चला जाता है

रेखा और कम्मो सरे काम निपटने में लगे हुए थे

आधे घंटे बाद रवि घर के अंदर जाता है

उसे कम्मो दिखाई देती है जो अपना बिस्तर लगा रही थी

कम्मो- खा था रे तू सोयेगा नहीं क्या

कम्मो ने जो किया था उसके बाद से रवि का मैं तो नहीं कर रहा था कम्मो से बात करने का पर क्या करे वो भी दीदी hi थी

रवि- दीदी वो में बहार टहलने गया था आप सो जाओ मैं भी सोने जा रहा हु रेखा दीदी खा है

कम्मो- जा वो तेरा hi इन्तजार कर रही है कमरे में

रवि- मतलब दीदी

कम्मो- अरे मतलब वो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करके सोती है न देख अभी खुला हुआ है वो तेरा hi इन्तजार कर रही है की कब तू आएगा और वो अंदर से गेट बंद करेगी

रवि चुप चाप कमरे के अंदर चला जाता है

रेखा- दरवाजा बंद करदे रवि

रवि दरवाजा बंद करके रेखा के पास पहुँचता है

रवि- दीदी आज आप मेघा दीदी की साइड सो जाओ

रेखा- क्यों आज क्या करदा है तेरा

रवि- कुछ खास नहीं बस अपनी दीदी को छोड़ते छोड़ते उनसे कुछ जरूरी बात करनी है

मेघा दीदी सो गयी क्या

रेखा- वो तो गिरते hi सो जाती है देख

रेखा थोड़ी जोर से मेघा दीदी की गांड ओर छठा मरती है ओर मेघा दीदी तो असली कुम्भकरण थी वो तस से मास नहीं होती

रेखा- देखा सो गयी है न

रवि अपनी दीदी के पेटीकोट की गत में अपनी उंगलिया घूमता हुआ अपनी दीदी की नाभि को कुरेदने लगता है

रेखा- आज बड़ा मदद में है मेघा दीदी ने कुछ दिखा दिया क्या

रवि एक झटके के साथ रेखा दीदी के पेटीकोट की गत खोल देता है और अगले hi पल पेटीकोट को खींच कर रेखा दीदी के शरीर से अलग कर देता है

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रवि- दीदी आज मुझे एक बात पता चली और मुझसे एक गलती भी हो गयी

रेखा अपने एक हाथ को पीछे ले जाती है और अपनी गांड पर रखती हुई अपनी गांड के छेद को फैला कर रवि को दिखती है

रेखा - बता न क्या बात पता चली और क्या गलती हुई तुझसे आह

रवि अपनी 2 उंगलिया मुँह में डालता हुआ गिला करता है और दोनों उंगलियों को सीधा अपनी दीदी की गांड के छेद में पेल देता है

रेखा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह धीरररीीीे

अब तक रवि अपनी धोती भी उतर चूका था

रवि- दीदी अआप्को पता है कम्मो दीदी सब जानती है हमारे बारे में

रेखा- अह्ह्ह्हह ये तो मुझे पहले से पता है कुछ न्य बता और तुझे कैसे पता चला की कम्मो सब जानती है हमारे बारे में

रवि अपनी उंगलियों को निकलता हुआ एक बार अपनी दीदी का वो खुला हुआ छेद देखता है

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रेखा की छूट और गांड दोनों hi चमक रही थी रवि तुरंत hi अपनी दीदी के दोनों छेड़ो को चाट चाट कर और भी चमक दार कर देता है और दुनारा से दीदी के पीछे लेत जाता है

रवि- दीदी मुझे नीलम दीदी से पता चला

रेखा- क्या उसे कैसे पता चला

रवि- दीदी आप जानती हो नीलम दीदी भी अपनी जवानी के पुरे मजी ले रही है

रेखा- वो कैसे

रवि- वो अपने भाई और बाप से चुदवाती है वो भी एक सठह

रेखा- क्या बात कर रहा है एक साथ 2-2 लुंड लेती है वो नीलम अह्ह्ह्हह्हह क्या बात बताई तूने

रवि- दीदी आपका भी मैं करता है क्या एक साथ 2-2 लुंड से छुड़वाने का

रेखा बड़े hi प्यार से अपने हाथ को थूक से भर्ती है और सारा थूक रवि के लुंड पर लगा देती है

और रवि के लुंड को पकड़ कर सीधा अपनी गांड के छेद पर भिड़ा देती है

रेखा - मेरे लिए तो एक hi लुंड काफी है मेरे छोटे भाई का जो मेरे तीनो छेड़ो का ख्याल रखता है

पीछे से रवि धीरे धीरे दबाव बनता जा रहा था और उसका लुंड खुद बा खुद उसकी दीदी की गांड में सरकता जा रहा था

या यु बोले की रेखा की गांड अपने छोटे भाई का खड़ा लुंड निगलना शुरू कर चुकी थी

आधे से ज्यादा लुंड रेखा की गांड में जा चूका था

आज रवि बड़े hi फॉर से अपनी दीदी को छोड़ रहा था

रवि की इस चुदाई को देख कर आज रेखा भी हैरान थी

खा रवि एक झटके में पूरा का पूरा लुंड उसके छेड़ो में पेल देता था

रवि- दीदी मैंने आज नीलम दीदी को भी छोड़ दिया

रेखा- क्या ये क्या किया तूने पररर क्योऊ

रवि- दीदी हुआ यु की कम्मो दीदी ोेहले hi सब बता चुकी थी नीलम दीदी को

और उसके बाद का सारा का सारा किस्सा रवि ने रेखा दीदी को बता दिया

रेखा- क्या बात कर रहा है तूने 4 घंटे तक्क नीलम को छोड़ा ताकि वो अपना मुह्ह न खोले वो तो मस्त हो गयी होगी

रवि- खा दीदी उनकी तो चल hi बदल गयी बार बार मुझसे गिड़गिड़ा रही थी की मुझे छोड़ दे रवि

. रेखा -क्या बात कर रहा है

रवि के झटके अब धीरे धीरे तेज होते जा रहे थे

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रवि- पर दीदी मुझे स्संझ नहीं आया की कम्मो दीदी अपने hi घर की बदनामी करने पर क्यों तुली हुई है

रेखा- मेने तुझे पहले hi बताया था न की वो कमीनी कम्मो हमारी दुसमन है वो नहीं छाती की हम दोनों भाई बेहेन अपनी जिंदगी का मजा लुटे

उसे सबक सीखना पड़ेगा

रवि- तो दीदी अब हम क्या करेंगे

रेखा - तूने नीलम को कैसे छोड़ा था

रवि- बिलकुल किसी राबड़ी की तरह

रेखा - उस तरह तो तू मुझे भी छोड़ता है न

रवि- ओर दीदी मैं आपसे प्यार करता हु और नीलम की तो मैंने इतनी बजायी की बेचारी रोने लग गयी ओर अगर उसकी जगह मेरी दीदी होती तो 4 घंटे क्या 8 घंटे छुड़वाने का बाद भी कहती की और छोड़

रेखा- अच्छा बीटा अपनी दीदी को तू इतना जान गया है कल जब खाना देने आउंगी तो देख लेना तेरी दीदी कितने घंटे तक्क छुड़वा सकती है

रवि- दीदी कल जल्दी आना पूरी शाम तक हम दोनों एक साथ रहेंगे एकदम अकेले

रेखा- है मेरे भाई पक्का

रेखा आगे बढ़ कर रवि के होठो पर अपने गरम होठ रख देती है

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रेखा- अब सुन्न तुझे करना क्या है

रवि- बोलो दीदी

रेखा सबसे पहली बात जब तक मैं कुछ करने को न बोलू तू कम्मो के साथ कुछ मैट करना समझा

रवि- ठीक है दीदी पर करना क्या है

रेखा- जिस तरह तूने नीलम को छोड़ा था उससे भी बुरी तरह से तुझे कम्मो को भी छोड़ना होगा ताकि उसे समझ आ सखे

रवि- मतलब दीदी कम्मो दीदी को भी रंडी की तरह छोड़ना है पर उस रंडी से न तो प्यार करना है और न hi रेहम दिखाना है

रेखा- बड़ा होशियार है रे तू तो

रवि- पर दीदी ये करना कबसे है

रेखा- वो कल मैं तुझे खेत में बताउंगी क्या करना है और कैसे करना है

रेखा- तुझे जितना प्यार करना है मुझसे और मेघा दीदी से कर पर अबसे तू कम्मो को सिर्फ और सिर्फ एक रंडी की नजर से hi देखेगा समझा खा मेरी कसम

रवि- आपकी कसम दीदी अबसे मैं उस कमीनी कम्मो को सिर्फ और सिर्फ एक रंडी की नजर से hi देखूंगा

रेखा- ये हुई ना बात अब तू अपनी दीदी को जी भर कर छोड़ और कल क्या करना है वो अपनी दीदी पर छोड़ दे

बस फिर क्या था शुरू हो गयी दोनों भाई बेहेन की ढंकेदार चुदाई और करीब आधे घंटे तक्क रवि रेखा दीदी की छूट और गांड मरता रहा

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और अंतत में अपनी दीदी की गांड के अंदर hi अपना सारा वीर्य गिरा देता है

रवि- दीदी क्या कम्मो दीदी भी मुझसे छोड़ना कहती है

रेखा- हो सकता है

रेखा तो ये बात पहले से hi जानती थी

रवि- तो दीदी वो मुझसे खुद आ कर बोल देती मैं उन्हें भी छोड़ देता पर उन्होंने तो घर की बात को गाओं तक्क फिआला दिया

रेखा - है मेरा भाई तो है hi चुदाई देवता सबको छोड़ देगा चिंता मैट कर वो तुम भी आएगा और कम्मो को सबक भी सिखाया जायेगा

फ़िलहाल तो अपनी दीदी को पकड़ कर सजा अब तेरे बिना ये कम्बक्त नींद भी नहीं आती

रवि अपनी रेखा दीदी से लिपट जाता है जैसे चन्दन से साप लिप्त हो

दोनों भाई बेहेन थोड़ी देर बाटे करते करते वैसे hi सो जाते है ......
 
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