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अपडेट-87
कम्मो रवि का खाना बांध चुकी थी
इधर मेघा दीदी का भी खाना खाने का प्लान अपने छोटे भाई के साथ hi था
कम्मो- दीदी आपका खाना निकल देती हु खा लो
मेघा- एक काम कर तू मेरा खाना भी बांध दे आज मैं भी अपने छोटे भाई के साथ hi खाउंगी
कम्मो तुरंत hi 2 लोगो का खाना बांध देती है
और मेघा दीदी भी खुसी खुसी निकल जाती है
और रेखा और कम्मो गुमसुम सी बैठी मेघा दीदी को अपने हीरो के पास जाती देखती रहती है
कम्मो- दीदी आपका खाना निकल दू
रेखा- नहीं रहने दे मुझे भूख नहीं है
इतना बोलते हुए रेखा मायूसी के साथ अपने कमरे में चली जाती है
बेचारी मायूस भी क्यों न होती आज उसने वडा जो किया था रवि से खेतो में छोड़ने का
असल में कम्मो को बड़ा hi मजा आ रहा था रेखा दीदी को यु उदास देख कर
कम्मो थाली में अपना खाना निकल कर खाने बैठ जाती है
कम्मो( वह जी वह रेखा दीदी एक दिन लुंड न मिला तो इतनी उदास हो गयी की खाना पीना सब छोड़ दिया कोई अभी तो आपको कल का दिन भी तरसना पड़ेगा परसो भले hi जी भर के छुड़वाना अपने सरे छेड़ो को रवि से)
मेघा दीदी बड़ी hi खुश थी आज उसे रवि के साथ अकेले वक़्त बिताने का जो मौका मिला था
अभी मेघा रस्ते में hi थी की उसे सामने से हरिया आता हुआ दिखाई देता है
हरिया- अरे अरे मेघा बेटी बड़े दिनों बाद दिखी तू कैसी है
मेघा ने भी हरिया को काफी दिनों बाद hi देखा था
मेघा तुरंत hi अपना फरज़ज़ निभाते हुए झुक कर हरिया कई पेअर चुने लगती है
हरिया तो था hi पुराण हरामी
तुरंत hi हरिया अपने हाथो को आगे बढ़ते हुए मेघा की पीठ को दोनों हाथो से थम लेता है
हरिया- अरे अरे बेटी क्या कर रही है तू इसकी कोई जरुरत नहीं है
मेघा- जरूरत कैसे नहीं है काका हमारे बापू के जैसे हो आप
हरिया- है ये तो तूने सही खा बचपन में मैं तुझे गॉड में खिलता था पर अब तो देख इतनी बड़ी हो गयी की अगर काका की गोदी में साध गयी तो पक्का तेरा ये काका मर्डर hi जायेगा
मेघा- अरे काका कैसी बात कर रहे है हम कल भी आपके बच्चे थे और आज भी है बस थोड़े बड़े हो गए है अब हम लोग
हरिया- अरे थोड़े नहीं पुरे बड़े हो गए है अब तो तू पूरी औरत बन्न गयी है
भगवान् करे हमेशा तू ऐसे hi हस्ती मुस्कुराती रहे
बाटे करते करते न जाने कितनी hi बार हरिया मेघा की चूचियों से उसकी कमर तक्क कितनी बार उसका नाप ले चूका था
मेघा भी हरिया काका की नजरो को भाप चुकी थी
हरिया- कब की आयी हुई है तू
मेघा- बास काका 2-4 दिन हुए है
हरिया- अभी तो रहना है न तुझे
मेघा- है काका अभी तो फ़िलहाल यही हु
हरिया- अच्छा चल ठीक है बेटी समय मिले तो किसी दिन आना घर नीलम से भी मिल लेना बेचारी गुमसुम सी रहती है अब तो वो भी पूरी जवान हो चुकी है पर मैं उस बेचारी की शादी नहीं कर पाया
मेघा( उदास भी क्यों न रहे बेचारी एक तो उसकी शादी नहीं हुई और जरूर ये बुद्धा अपनी बेटी की जवानी का मजा दिन रात ऐसे hi घूरते घूरते लेता रहता होगा बेचारी नीलम )
मेघा- कोई बात नहीं काका फ़िक्र न करो आअज नहीं तो कल नीलम का भी बियाह होगा
अच्छा काका मैं चलती हु रवि भूखा होगा लेत हो रहा है
हरिया- ठीक है बेटी तू जा आना कभी घर की और
मेघा हरिया से विदा लेती हुई अपने खेतो की एयर बढ़ जाती है
हरिया अपने आपको रोक नहीं पता और तुरंत hi पीछे पलट कर मेघा को जाते हुए देखता रह जाता है
हरिया ( क्या hi मस्त हो गयी है रे मेरी मेघा रानी तू किसी मस्तानी हथनी की तरह अपनी गांड और चूचिया उठा उठा कर चल रही है मस्त कर देती होगी तू अपने पति को रात भर)
मेघा( साला हरामी बुद्धा कैसे घर रहा था और तो और अपने घर आने का न्योता भी दे रहा था इसके घर गयी तो मुझे तो वही पटक कर छोड़ देगा बड़ा hi गरमी हो ये हरिया बुद्धा रेखा को भी मना करना पड़ेगा इसके घर जाने को )
मेघा भी एक बार पलट कर हरिया की और देखती है जो लगातार उसे hi देख रहा था जबकि अब तक्क मेघा काफी दुर्र तक्क आ गयी थिई
जैसे hi मेघा पलट कर देखती है हरिया के चेहरे पर एक हर्मियो वाली मुस्कान आ जाती है और उसका एक हाथ अपने लुंड को मसल रहा था असल में वो भी यही कहता था की मेघा को भी उसके इरादों के बारे में मालूम पड़ जाये
मेघा( देखो तो कितना हरामी है बुद्धा सामने से बेटी बोलता है और पीछे से अपनी मुँहबोली बेटी की मटकती हुई गांड देख कर मजे से अपना लुंड मसल रहा है इसका बास चले तो अपनी hi सगी बेटी को छोड़ देगा
हे भगवन पता नहीं इसने अभी तक्क नीलम को छोड़ा होगा या उसकी भी इज़्ज़त लूट ली होगी)
मेघा तुरंत hi पलट कर अपने खेतो की और निकल जाती है
इधर मेघा को देख कर हरिया का भी दिमाग खराब हो गया था और उसका लुंड उसकी धोती में hi झटके मार रहा था
हरिया भी बड़े बड़े कदमो से अपने घर की और निकल जाता है अपनी बेटी को भोगने के लिए
इधर मेघा भी खेतो में पहुंच जाती है सामने hi रवि खेतो में बिज़ डाल रहा था
रवि- अरे दीदी आज आप आयी हो खाना लेकर कम्मो दीदी को क्या हुआ
मेघा- क्यों रे तुझे क्या खाना सिर्फ कम्मो hi ला के दे सकती है
तेरी ये दीदी नहीं ला सकती क्या
वैसे आज रवि सुबह से hi सोच कर बैठा था की खाना लेकर रेखा दीदी hi आएंगी और खेतो में वो रेखा दीदी को रगड़ रगड़ कर उनकी गांड मरेगा पर यह तो पूरा सीन hi बदल गया
रवि- नहीं नहीं दीदी आप भी तो दीदी हो मेरी
मेघा- है है चल ज्यादा मस्का मैट लगा चल जल्दी आजा खाना खाने मुझे भी भुक्ख लगी है
रवि- दीदी आपने खाना नहीं खाया अभी तक्क
मेघा- मेरा छोटा भाई भूखा प्यासा खेतो में काम कर रहा है और मैं यही घर पर पड़ी पड़ी खाना खलु चल जल्दी आजा मिल कर खाएंगे दोनों भाई बेहेन
रवि- बास 2 मिनट में आया दीदी
रवि तुरंत हाथ पेअर धो कर खाने के लिए बैठ जाता है
सामने की और मेघा दीदी बैठी थी
और मेघा ने दोनों का खाना एक hi थाली में निकला था
जब जब मेघा अपने हाथो से निवाला रवि के मुह्ह में डालती तो उसका पल्लू गिर जाता
रवि भी नजर बचा बचा कर अपनी दीदी की चूचियों की गहराइयो में एक डुबकी लगा लेता और जब्ब तक्क मेघा दीदी की नजरे ऊपर होती वो दुबारा से अपनी दीदी के चेहरे को देखने लगता
असल में रवि भी जान चूका था की आज नहीं तो कल उसकी मेघा दीदी भी उसके सामने घोड़ी बनेगी और उस समय वो अपने सरे अरमान पुरे कर लेगा पर चुदाई के उस खेल से पहले वो अपनी दीदी के सामने भोलाभाला छोटा भाई बन कर अनजाने में hi सरे मजी लेना कहता था
फ़िलहाल तो उसके पास उसकी गरमा गरम रेखा दीदी छोड़ने के लिए थी hi
मेघा- बड़ी गर्मी है रे रवि खेतो की और तो तू कैसे काम कर लेता है इस गर्मी में
असल में रवि सिर्फ एक धोती में बैठा था और उसका गठीला बदन पूरा का पूरा पसीने से भीगा हुआ था जिसे देख देख कर बार बार मेघा दीदी के मुह्ह में पानी आजाता था और वो तो बिना किसी दिक्कत के रवि के गठीला बदन घूरे जा रही थी
रवि( दीदी तो ऐसे देख रही है जैसे मुझे खा hi जाएँगी और देखो तो बिना किसी शर्म के मुझे कैसे घुर्र रही है)
असल में मेघा के लिए रवि आज भी कल वाला रवि था
मतलब एकदम सीधा साधा भोलाभाला
रवि- दीदी गर्मी तो लगती है डेल्हो न पूरा शरीर कैसे पसीने पसीने हो गया है
मेघा- है रे तू तो पूरा का पूरा भीग गया है
इतना बोलते हुए मेघा अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपने छोटे भाई को छाती पर लगा पसीना अपने हाथो से पॉच देती है
और अपना हाथ वापस लेकर रवि से बचते हुए उसके पसीने की खुसबू को सूंघ कर अनादर hi अंदर मस्त हो जाती है
जैसे hi मेघा की नाक में उसके छोटे भाई के पसीने की महक जाती है उसके शरीर में एक बिजली का झटका सा लगता है जो उसकी छूट पर आकर सिमट जाता है और मेघा की छूट से हल्का सा चिपचिपा पानी बहार को आने लगता है
मेघा ( हेय दिया क्या hi महक है रे छोटे तेरे पसीने की मैं करता है तेरा पसीने पूरा का पूरा छत्त छत्त कर साफ करदु)
रवि- दीदी आपको भी तो गर्मी लग्ग रही है
देखो तो आपका पूरा का पूरा ब्लाउज कैसे भीग गया है
पूरी की पूरी बात रवि बिना किसी झिझक के एक सास में बोल देता है
रेखा दीदी से क्लासेज लेने के बाद अपना रवि एक्टिंग करने में माहिर हो गया था
मेघा भी एक नजर अपनी चूचियों को देखती है जोकि पूरी की पूरी भीग चुकी थी
मेघा- है रे मैं तो पूरी भीग गयी देख न खेत में आने के बाद तो तेरी दीदी को भी गर्मी लगने लगी और तेरी तरह hi पूरी की पूरी मैं भी भीग गयी हु ऊपर से
रवि- है दीदी देखो तो कितनी भग्ग गयी हो आप
इतना बोलते हुए रवि अपने एक हाथ को आगे बढ़ता हुआ मेघा दीदी की छाती को छू कर पसीने का जायज़ा लेता है
पर रवि का हाथ चूचियों से काफी ऊपर था असल में वो मेघा दीदी को कोई भी ऐसा हिंट नहीं देना कहता था की मेघा दीदी उस्ले इरादे भाप जाये
मेघा दीदी सच मच में भीगी हुई थी अब लता नबी ये गर्मी सूरज की थी या रवि की
रवि का पूरा का पूरा हाथ पसीने से भीग गया था
रवि कहता तो था की अपनी दीदी के पसीने को चाट कर उसके स्वाद को जान सके पारर वो जनता था की उसकी ये चोरी अगर पकड़ी गयी तो सारा मजा खराब हो जायेगा
दोनों भाई बेहेन अबतकक खाना खा चुके थे
मेघा- तेरा पेट भर गया न रवि
रवि- है दीदी एक शूम मस्त खाना खिलाया आज तो आपने
रवि- दीदी एक काम करो अब आप घर जाओ मैं भी आ जाऊंगा शाम तक्क
मेघा- अरे बुद्धू मैं तुझे खाना खिला कर घर जाने के लिए थोड़े hi आयी थी
रवि- पारर दीदी देखो तो कितनी गर्मी है और मुझे भी बहुत सरे बिज़ बोन है
मेघा- अरे छोटे ये गर्मी तो मैं न जाने कितने सालो से झेल रही हु और तू बू ले अपने बीज़ज़ झा बोन है मैं तेरा हाथ पकड़ कर थोड़े hi बैठा रही हूँ
रवि- तो दीदी आप करोगी क्या शाम तक्क
मेघा- तू एक काम कर तू अपने बीज़ज़ बो ले इतनी देर मैं इस पेड़ के निचे सो जाती हु तू अपनी खत यह डालदे
रवि- पर दीदी
मेघा- खत दाल दे बोलै न तुझे
रवि चुपचाप खत को पेड़ के निचे दाल देता है और उसपर एक चादर बिछा देता है
मेघा- अच्छा रवि सुन्न तो जरा
रवि- हां दीदी
मेघा- मुझे न गाना चूसना है
रवि- पर दीदी इस समय तो अपने खेत में गाना hi नहीं है
मेघा- अरे बुद्धू वो देख सामने वाले खेत में कितने मोठे मोठे गन्ने लगे है
रवि- पारर दीदी ये तो हरिया काका का खेत है
मेघा( अब तो और भी मजा आएगा आज इस ठरकी बुड्ढे के खेतो से गन्ने चुरा चुरा कर चूसूंगी मजा आएगा अब तो)
मेघा- तो क्या हुआ हम थोड़े hi ोुरा खेत चुरा रहा है
रवि- रुको दीदी मैं आपको लेकर देता हु
मेघा- अभी नहीं अभी मुझे नींद आ रही है शाम को जब्ब तेरा कम् हो जाये तो मुझे उठा देना दोनों साथ में एक मोटा तजा गणना धुंध लेंगे
रवि- ठीक है दीदी आप आराम करो कुछ चाहिए तो बोलना
मेघा- अच्छा ग अब तू अपनी दीदी की जरूरतों को भी पूरा करने लायक हो गया है वह मेरे छोटे भाई इसलिए तो तुझपर इतना प्यार आता है
रवि- दीदी अब आप दिन भर घर में मेरा इतना ख्याल रखती हो तो खेतो पारर तो मेरा फरज़ज़ बनता है ना अपनी दीदी का ख्याल रखने का
मेघा- अच्छा चल ठीक है मुझे कुछ भी चाहिए होगा तो मैं बोल दूंगी तू जा कर बीज़ज़ बू ले और तब तक्क तेरी ये दीदी सो लेती है ठीक है बाबूउ
रवि- ठीक है दीदी आप आराम करो मैं काम निपटा लेता हु
रवि पलट कर खेत में चला जाता है
रवि( दीदी आप चिंता न करो एक बार आप बोल कर तो देखो आपको अपने छोटे भाई का लुंड पहले कोनसे छेद में लेना है आपकी साडी इच्छाएं पूरी करेगा दीदी आपका ये छोटा भाई)......
कम्मो रवि का खाना बांध चुकी थी
इधर मेघा दीदी का भी खाना खाने का प्लान अपने छोटे भाई के साथ hi था
कम्मो- दीदी आपका खाना निकल देती हु खा लो
मेघा- एक काम कर तू मेरा खाना भी बांध दे आज मैं भी अपने छोटे भाई के साथ hi खाउंगी
कम्मो तुरंत hi 2 लोगो का खाना बांध देती है
और मेघा दीदी भी खुसी खुसी निकल जाती है
और रेखा और कम्मो गुमसुम सी बैठी मेघा दीदी को अपने हीरो के पास जाती देखती रहती है
कम्मो- दीदी आपका खाना निकल दू
रेखा- नहीं रहने दे मुझे भूख नहीं है
इतना बोलते हुए रेखा मायूसी के साथ अपने कमरे में चली जाती है
बेचारी मायूस भी क्यों न होती आज उसने वडा जो किया था रवि से खेतो में छोड़ने का
असल में कम्मो को बड़ा hi मजा आ रहा था रेखा दीदी को यु उदास देख कर
कम्मो थाली में अपना खाना निकल कर खाने बैठ जाती है
कम्मो( वह जी वह रेखा दीदी एक दिन लुंड न मिला तो इतनी उदास हो गयी की खाना पीना सब छोड़ दिया कोई अभी तो आपको कल का दिन भी तरसना पड़ेगा परसो भले hi जी भर के छुड़वाना अपने सरे छेड़ो को रवि से)
मेघा दीदी बड़ी hi खुश थी आज उसे रवि के साथ अकेले वक़्त बिताने का जो मौका मिला था
अभी मेघा रस्ते में hi थी की उसे सामने से हरिया आता हुआ दिखाई देता है
हरिया- अरे अरे मेघा बेटी बड़े दिनों बाद दिखी तू कैसी है
मेघा ने भी हरिया को काफी दिनों बाद hi देखा था
मेघा तुरंत hi अपना फरज़ज़ निभाते हुए झुक कर हरिया कई पेअर चुने लगती है
हरिया तो था hi पुराण हरामी
तुरंत hi हरिया अपने हाथो को आगे बढ़ते हुए मेघा की पीठ को दोनों हाथो से थम लेता है
हरिया- अरे अरे बेटी क्या कर रही है तू इसकी कोई जरुरत नहीं है
मेघा- जरूरत कैसे नहीं है काका हमारे बापू के जैसे हो आप
हरिया- है ये तो तूने सही खा बचपन में मैं तुझे गॉड में खिलता था पर अब तो देख इतनी बड़ी हो गयी की अगर काका की गोदी में साध गयी तो पक्का तेरा ये काका मर्डर hi जायेगा
मेघा- अरे काका कैसी बात कर रहे है हम कल भी आपके बच्चे थे और आज भी है बस थोड़े बड़े हो गए है अब हम लोग
हरिया- अरे थोड़े नहीं पुरे बड़े हो गए है अब तो तू पूरी औरत बन्न गयी है
भगवान् करे हमेशा तू ऐसे hi हस्ती मुस्कुराती रहे
बाटे करते करते न जाने कितनी hi बार हरिया मेघा की चूचियों से उसकी कमर तक्क कितनी बार उसका नाप ले चूका था
मेघा भी हरिया काका की नजरो को भाप चुकी थी
हरिया- कब की आयी हुई है तू
मेघा- बास काका 2-4 दिन हुए है
हरिया- अभी तो रहना है न तुझे
मेघा- है काका अभी तो फ़िलहाल यही हु
हरिया- अच्छा चल ठीक है बेटी समय मिले तो किसी दिन आना घर नीलम से भी मिल लेना बेचारी गुमसुम सी रहती है अब तो वो भी पूरी जवान हो चुकी है पर मैं उस बेचारी की शादी नहीं कर पाया
मेघा( उदास भी क्यों न रहे बेचारी एक तो उसकी शादी नहीं हुई और जरूर ये बुद्धा अपनी बेटी की जवानी का मजा दिन रात ऐसे hi घूरते घूरते लेता रहता होगा बेचारी नीलम )
मेघा- कोई बात नहीं काका फ़िक्र न करो आअज नहीं तो कल नीलम का भी बियाह होगा
अच्छा काका मैं चलती हु रवि भूखा होगा लेत हो रहा है
हरिया- ठीक है बेटी तू जा आना कभी घर की और
मेघा हरिया से विदा लेती हुई अपने खेतो की एयर बढ़ जाती है
हरिया अपने आपको रोक नहीं पता और तुरंत hi पीछे पलट कर मेघा को जाते हुए देखता रह जाता है
हरिया ( क्या hi मस्त हो गयी है रे मेरी मेघा रानी तू किसी मस्तानी हथनी की तरह अपनी गांड और चूचिया उठा उठा कर चल रही है मस्त कर देती होगी तू अपने पति को रात भर)
मेघा( साला हरामी बुद्धा कैसे घर रहा था और तो और अपने घर आने का न्योता भी दे रहा था इसके घर गयी तो मुझे तो वही पटक कर छोड़ देगा बड़ा hi गरमी हो ये हरिया बुद्धा रेखा को भी मना करना पड़ेगा इसके घर जाने को )
मेघा भी एक बार पलट कर हरिया की और देखती है जो लगातार उसे hi देख रहा था जबकि अब तक्क मेघा काफी दुर्र तक्क आ गयी थिई
जैसे hi मेघा पलट कर देखती है हरिया के चेहरे पर एक हर्मियो वाली मुस्कान आ जाती है और उसका एक हाथ अपने लुंड को मसल रहा था असल में वो भी यही कहता था की मेघा को भी उसके इरादों के बारे में मालूम पड़ जाये
मेघा( देखो तो कितना हरामी है बुद्धा सामने से बेटी बोलता है और पीछे से अपनी मुँहबोली बेटी की मटकती हुई गांड देख कर मजे से अपना लुंड मसल रहा है इसका बास चले तो अपनी hi सगी बेटी को छोड़ देगा
हे भगवन पता नहीं इसने अभी तक्क नीलम को छोड़ा होगा या उसकी भी इज़्ज़त लूट ली होगी)
मेघा तुरंत hi पलट कर अपने खेतो की और निकल जाती है
इधर मेघा को देख कर हरिया का भी दिमाग खराब हो गया था और उसका लुंड उसकी धोती में hi झटके मार रहा था
हरिया भी बड़े बड़े कदमो से अपने घर की और निकल जाता है अपनी बेटी को भोगने के लिए
इधर मेघा भी खेतो में पहुंच जाती है सामने hi रवि खेतो में बिज़ डाल रहा था
रवि- अरे दीदी आज आप आयी हो खाना लेकर कम्मो दीदी को क्या हुआ
मेघा- क्यों रे तुझे क्या खाना सिर्फ कम्मो hi ला के दे सकती है
तेरी ये दीदी नहीं ला सकती क्या
वैसे आज रवि सुबह से hi सोच कर बैठा था की खाना लेकर रेखा दीदी hi आएंगी और खेतो में वो रेखा दीदी को रगड़ रगड़ कर उनकी गांड मरेगा पर यह तो पूरा सीन hi बदल गया
रवि- नहीं नहीं दीदी आप भी तो दीदी हो मेरी
मेघा- है है चल ज्यादा मस्का मैट लगा चल जल्दी आजा खाना खाने मुझे भी भुक्ख लगी है
रवि- दीदी आपने खाना नहीं खाया अभी तक्क
मेघा- मेरा छोटा भाई भूखा प्यासा खेतो में काम कर रहा है और मैं यही घर पर पड़ी पड़ी खाना खलु चल जल्दी आजा मिल कर खाएंगे दोनों भाई बेहेन
रवि- बास 2 मिनट में आया दीदी
रवि तुरंत हाथ पेअर धो कर खाने के लिए बैठ जाता है
सामने की और मेघा दीदी बैठी थी
और मेघा ने दोनों का खाना एक hi थाली में निकला था
जब जब मेघा अपने हाथो से निवाला रवि के मुह्ह में डालती तो उसका पल्लू गिर जाता
रवि भी नजर बचा बचा कर अपनी दीदी की चूचियों की गहराइयो में एक डुबकी लगा लेता और जब्ब तक्क मेघा दीदी की नजरे ऊपर होती वो दुबारा से अपनी दीदी के चेहरे को देखने लगता
असल में रवि भी जान चूका था की आज नहीं तो कल उसकी मेघा दीदी भी उसके सामने घोड़ी बनेगी और उस समय वो अपने सरे अरमान पुरे कर लेगा पर चुदाई के उस खेल से पहले वो अपनी दीदी के सामने भोलाभाला छोटा भाई बन कर अनजाने में hi सरे मजी लेना कहता था
फ़िलहाल तो उसके पास उसकी गरमा गरम रेखा दीदी छोड़ने के लिए थी hi
मेघा- बड़ी गर्मी है रे रवि खेतो की और तो तू कैसे काम कर लेता है इस गर्मी में
असल में रवि सिर्फ एक धोती में बैठा था और उसका गठीला बदन पूरा का पूरा पसीने से भीगा हुआ था जिसे देख देख कर बार बार मेघा दीदी के मुह्ह में पानी आजाता था और वो तो बिना किसी दिक्कत के रवि के गठीला बदन घूरे जा रही थी
रवि( दीदी तो ऐसे देख रही है जैसे मुझे खा hi जाएँगी और देखो तो बिना किसी शर्म के मुझे कैसे घुर्र रही है)
असल में मेघा के लिए रवि आज भी कल वाला रवि था
मतलब एकदम सीधा साधा भोलाभाला
रवि- दीदी गर्मी तो लगती है डेल्हो न पूरा शरीर कैसे पसीने पसीने हो गया है
मेघा- है रे तू तो पूरा का पूरा भीग गया है
इतना बोलते हुए मेघा अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपने छोटे भाई को छाती पर लगा पसीना अपने हाथो से पॉच देती है
और अपना हाथ वापस लेकर रवि से बचते हुए उसके पसीने की खुसबू को सूंघ कर अनादर hi अंदर मस्त हो जाती है
जैसे hi मेघा की नाक में उसके छोटे भाई के पसीने की महक जाती है उसके शरीर में एक बिजली का झटका सा लगता है जो उसकी छूट पर आकर सिमट जाता है और मेघा की छूट से हल्का सा चिपचिपा पानी बहार को आने लगता है
मेघा ( हेय दिया क्या hi महक है रे छोटे तेरे पसीने की मैं करता है तेरा पसीने पूरा का पूरा छत्त छत्त कर साफ करदु)
रवि- दीदी आपको भी तो गर्मी लग्ग रही है
देखो तो आपका पूरा का पूरा ब्लाउज कैसे भीग गया है
पूरी की पूरी बात रवि बिना किसी झिझक के एक सास में बोल देता है
रेखा दीदी से क्लासेज लेने के बाद अपना रवि एक्टिंग करने में माहिर हो गया था
मेघा भी एक नजर अपनी चूचियों को देखती है जोकि पूरी की पूरी भीग चुकी थी
मेघा- है रे मैं तो पूरी भीग गयी देख न खेत में आने के बाद तो तेरी दीदी को भी गर्मी लगने लगी और तेरी तरह hi पूरी की पूरी मैं भी भीग गयी हु ऊपर से
रवि- है दीदी देखो तो कितनी भग्ग गयी हो आप
इतना बोलते हुए रवि अपने एक हाथ को आगे बढ़ता हुआ मेघा दीदी की छाती को छू कर पसीने का जायज़ा लेता है
पर रवि का हाथ चूचियों से काफी ऊपर था असल में वो मेघा दीदी को कोई भी ऐसा हिंट नहीं देना कहता था की मेघा दीदी उस्ले इरादे भाप जाये
मेघा दीदी सच मच में भीगी हुई थी अब लता नबी ये गर्मी सूरज की थी या रवि की
रवि का पूरा का पूरा हाथ पसीने से भीग गया था
रवि कहता तो था की अपनी दीदी के पसीने को चाट कर उसके स्वाद को जान सके पारर वो जनता था की उसकी ये चोरी अगर पकड़ी गयी तो सारा मजा खराब हो जायेगा
दोनों भाई बेहेन अबतकक खाना खा चुके थे
मेघा- तेरा पेट भर गया न रवि
रवि- है दीदी एक शूम मस्त खाना खिलाया आज तो आपने
रवि- दीदी एक काम करो अब आप घर जाओ मैं भी आ जाऊंगा शाम तक्क
मेघा- अरे बुद्धू मैं तुझे खाना खिला कर घर जाने के लिए थोड़े hi आयी थी
रवि- पारर दीदी देखो तो कितनी गर्मी है और मुझे भी बहुत सरे बिज़ बोन है
मेघा- अरे छोटे ये गर्मी तो मैं न जाने कितने सालो से झेल रही हु और तू बू ले अपने बीज़ज़ झा बोन है मैं तेरा हाथ पकड़ कर थोड़े hi बैठा रही हूँ
रवि- तो दीदी आप करोगी क्या शाम तक्क
मेघा- तू एक काम कर तू अपने बीज़ज़ बो ले इतनी देर मैं इस पेड़ के निचे सो जाती हु तू अपनी खत यह डालदे
रवि- पर दीदी
मेघा- खत दाल दे बोलै न तुझे
रवि चुपचाप खत को पेड़ के निचे दाल देता है और उसपर एक चादर बिछा देता है
मेघा- अच्छा रवि सुन्न तो जरा
रवि- हां दीदी
मेघा- मुझे न गाना चूसना है
रवि- पर दीदी इस समय तो अपने खेत में गाना hi नहीं है
मेघा- अरे बुद्धू वो देख सामने वाले खेत में कितने मोठे मोठे गन्ने लगे है
रवि- पारर दीदी ये तो हरिया काका का खेत है
मेघा( अब तो और भी मजा आएगा आज इस ठरकी बुड्ढे के खेतो से गन्ने चुरा चुरा कर चूसूंगी मजा आएगा अब तो)
मेघा- तो क्या हुआ हम थोड़े hi ोुरा खेत चुरा रहा है
रवि- रुको दीदी मैं आपको लेकर देता हु
मेघा- अभी नहीं अभी मुझे नींद आ रही है शाम को जब्ब तेरा कम् हो जाये तो मुझे उठा देना दोनों साथ में एक मोटा तजा गणना धुंध लेंगे
रवि- ठीक है दीदी आप आराम करो कुछ चाहिए तो बोलना
मेघा- अच्छा ग अब तू अपनी दीदी की जरूरतों को भी पूरा करने लायक हो गया है वह मेरे छोटे भाई इसलिए तो तुझपर इतना प्यार आता है
रवि- दीदी अब आप दिन भर घर में मेरा इतना ख्याल रखती हो तो खेतो पारर तो मेरा फरज़ज़ बनता है ना अपनी दीदी का ख्याल रखने का
मेघा- अच्छा चल ठीक है मुझे कुछ भी चाहिए होगा तो मैं बोल दूंगी तू जा कर बीज़ज़ बू ले और तब तक्क तेरी ये दीदी सो लेती है ठीक है बाबूउ
रवि- ठीक है दीदी आप आराम करो मैं काम निपटा लेता हु
रवि पलट कर खेत में चला जाता है
रवि( दीदी आप चिंता न करो एक बार आप बोल कर तो देखो आपको अपने छोटे भाई का लुंड पहले कोनसे छेद में लेना है आपकी साडी इच्छाएं पूरी करेगा दीदी आपका ये छोटा भाई)......