Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 11 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-97

सुबह कम्मो और रेखा लगभग शामे टाइम hi उठी थी

रेखा तो पहले hi संडास करके आ गयी थी और जैसे hi कम्मो संडास करने के लिए जाती है रेखा तुरंत hi कमरे के अंदर पहुँचती है और तुरनत रवि को उठा देती है

रवि- क्या हुआ दीदी आज इतनी सुबह सुबह उठा दिया आपने

रेखा- अरे सोता रहेगा कि तू दिन भर चल जल्दी उठ तुझे एक नजारा दिखती हु

रवि तुरंत hi उठ कर बैठ जाता है

रवि- कौनसा नजारा दीदी

रेखा- यही सब बता दू क्या चल जल्दी चल

रेखा रवि वका हाथ पकड़ती हुई उसे अपने साथ घर के पिछवाड़े ले जाती है

रवि- क्या हुआ दीदी आज संडास करते हुए छुड़वाने का मुद है क्या

रेखा- मुद तो मेरा हमेशा hi रहता है बीटा तुझसे छुड़वाने का पर आज कुछ खास है

आज मैं तुझे तेरी होने वाली रंडी के छेद दिखने वाली हु

रवि- क्या बायत कर रही हो दीदी कम्मो दीदी के छेद देखने को मिलेंगे अब

रेखा- अरे बाबा तू नींद में नहीं है रे

रेखा रवि की चिकोटी काट लेती है

रवि- ः दीदी अब यकीन हुआ अब दिखाओ भी

रेखा उसे लेकर थोड़ा आगे जाती है और एक पेड़ के पीछे रुक जाती है

रेखा- वो देख कैसे तेरी कम्मो दीदी अपनी गांड के कसे हुए छेद से मोती मोती संडास निकल रही है

रवि की नजर जैसे hi कम्मो पर पड़ती है वो एक तुक अपनी कम्मो दीदी की नंगी गांड को देल्हता रह जाता है

रवि( क्या hi कमाल की गोरी गांड है कम्मो दीदी की एक बाल तक नहीं है )

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रेखा- देख रहा है कैसे थोड़ा थोड़ा करके हग्ग रही है तेरी कम्मो दीदी

रवि चुपचाप इस नजारे का पूरा लुफ्त उठा रहा था उसकी धोती में अब तक उसका लुंड भी जाग चूका था

रेखा- अरे खा खो गया तू इतनी पसंद आ गयी क्या तुझे कम्मो की गांड

रवि- नहीं नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है वो तो बस ऐसे hi

रेखा- अच्छा बच्चू ऐसी बात नहीं है तो फिर ये क्या है

रेखा अपना हाथ रवि की धोती में दाल कर सीधा उसका लुंड पकड़ लेती है

रेखा- ऐसी बात नहीं है तो ये जनाब क्यों तनाव में है सुबह सुबह

. रवि - दीदी आज मेने अपनी किसी दीदी को संडास करते हुए दूसरी बार देखा है

रेखा- अच्छा देख कर hi ये हाल हो गया अभी तो तुझे कम्मो की चटनी बनानी है अपने इस मुसल से

वैसे तूने मुझे तो संडास करते करते hi छोड़ दिया था

रवि- दीदी कम्मो दीदी को भी छोड़ दू क्या अभी हगते हुए

रेखा- अरे नहीं नहीं अभी रहने दे देख तो बेचारी कितने सुकून से हग रही है तू अभी जाकर अपना मुसल उसकी गांड में थोक देगा तो बेचारी की संडास hi बंद हो जाएगी

रेखा बात करते हुए भी लगातार रवि के लुंड को मसले जा रही थी

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रवि- दीदी लगता है कम्मो दीदी की गांड खली हो गयी है

रेखा- तो तुझे भरना है क्या अपनी कम्मो दीदी की गांड को अपना लुंड दाल कर

अभी रवि कुछ बोलता उससे पहले hi कम्मो पानी से अपनी गांड धोने लगती है

रेखा- चल चल जल्दी उसने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी

दोनों भाई बेहेन घर की और भाग जाते है

मेघा दीदी बहार लगे हेण्डपम्प पर मुँह धो रही थी

मेघा- अरे अरे तुम दोनों एक साथ पिछवाड़े से भागे भागे क्यों आ रहे हो

रेखा तुरंत hi बात को संभाल लेती है

रेखा- दीदी वो क्या हुआ न मैं संडास करने गयी थी तो मुझे लगा कोई साप आ गया है घर के पिछवाड़े इसी लिए रवि को साथ में ले गयी थी

मेघा- तो मिला क्या साप

मेघा की नजर बार बार रवि की धोती के उस उभार पर जा रही थी

और मेघा अंदर hi अंदर काफी परेशान सी थी और उसके मैं में हजारो सवाल चल रहे थे

मेघा( ये दोनों एक साथ साप पकड़ने गए थे पर ये रवि का कला साप क्यों फानन फैलाये खड़ा है जरूर कुछ न कुछ कला है दाल में)

रेखा- नहीं दीदी साप तो नहीं मिला लगता है मुझे वेहम हो गया

मेघा- अच्छा तू जा अपना काम करर

रवि और मेघा दोनों एक साथ घर की और जाने लगते है

मेघा- अरे रवि सुन जरा इधर तो आ

रेखा अंदर चली जाती है और रवि अपनी मेघा दीदी के पास चला जाता है

मेघा एक बार आस पास नजर दौड़ती है और अगले hi पल वो रवि का लुंड पकड़ लेती है

मेघा- क्यों रे तुम दोनों भाई बेहेन मुझसे कुछ छुपा रहे हो क्या

रवि- नहीं तो दीदी आपसे क्या कुछ छुपाना

मेघा- तो जब साप नहीं मिला तो ये साप क्यों खड़ा है

रवि- दीदी आपको तो पता है न मेरी लुल्ली सुबह सुबह ऐसे hi तीते रहती है

मेघा दीदी के सवालों को सुन्न कर अंदर hi अंदर रवि की गांड फट रही थी

मेघा- रेखा ने देखा क्या तेरा औजार खड़ा हुआ

रवि - पता नहीं दीदी शायद देखा होगा और अगर देखा भी होगा तो क्या हो गया

मेघा- हाय राम इसका मतलब तू अपनी बहनो को अपना ये मुसल खड़ा करके दिखता फिरेगा

रवि- दीदी मुसल क्या होता है

मेघा- वो सब म बाद में बताउंगी पर ध्यान रखा कर तू इसका समझा

रवि- ठीक है दीदी

मेघा- चल अब जा तू भी

रवि( आज तो बुरा फसता कम्मो दीदी की गांड देखने के चक्कर में मेघा दीदी तो पीछे hi पद गयी थी बच गया,)

बच गया ऐसा सिर्फ रवि को लग्ग रहा था

इधर मेघा अपने आप को जितना भी समझने की कोशिश कर रही थी बार बार उसके मैं में वही बात आ जाती

जरूर कुछ तो गड़बड़ चल रही है

मेघा( रवि की बात तो सही लग रही है पर मेरा मैं नहीं मान रहा जरूर कुछ न कुछ गड़बड़ है पता लगाना पड़ेगा )

मेघा भी घर में चली जाती है थोड़ी देर बाद सब लोग अपना अपना काम ख़तम कर चुके थे

उसके बाद कुछ ज्यादा खास होता नहीं

रवि अपने खेतो पर जाने को तैयार था

रेखा उसे दरवाजे तक्क छोड़ती है

रवि- दीदी आज तो आप hi आओगी क्या

रेखा- तू बोले तो मेघा दीदी को भेज दू आज भी

रवि- नहीं नबी दीदी आप hi आना बड़े दिन हो गए आपको ढंग से चोदे हुए

रेखा- अरे अभी कल रात hi तो तू मेरी गांड अपना लुंड डेल पड़ा था

रवि- दीदी मतलब आज हम दोनों अकेले में वो सब जैसे पहले करते थे समझ रही हो न आप

रेखा- ः समझ रही हु कुल मिलकर यही मतलब है की आज मेरी खैर नहीं

कहि मैं भी शाम तक्क नीलम की तरह लड़खड़ाने न लग जाऊ

रवि- अरे उस नीलम की आपके सामने क्या बराबरी दीदी वो खा और आप खा

रेखा- ाचा चल जा अब ज्यादा मखान मत मार मैं तेल लगा कर आउंगी

रवि- खा दीदी

रेखा बड़े hi मादक अंदाज में रवि के कान के पास जाती है

रेखा - अपनी गांड के छेद को पूरा तेल से भर कर आउंगी तुझे खाना देने

मुझे पता है तू शाम तक मेरी गांड hi मरने वाला है

रवि- वह दीदी आप तो अंतर्यामी निकली पर आज मैं आपके सरे छेड़ो को छोडूंगा जी भर कर

रेखा- तभी तो आउंगी मैं मुझे भी आज मेरे सरे छेड़ो को तेरी उस मलाई से भरवाना है जिसका स्वाद अमृत जैसा है

रवि- ठीक है दीदी मैं चलता हु आप दोपहर से पहले hi आ जाना

रेखा- अभी चलु तेरे साथ

रवि- चलो अभी चलो

रेखा अपनी नजर रवि की धोती पर डालती है

रेखा- हट बदमाश अभी से लुंड खड़ा किये खड़ा है तू जा मैं आउंगी जल्दी यह के काम निपटा कर

रवि रेखा दीदी से अलविदा लेकर अपने खेतो की एयर निकल जाता है

रेखा और कम्मो भी काम निपटने में लग्ग जाती है

आज रेखा बड़ा मैं लगा कर जल्दी जल्दी काम कर रही थी जिसपर कम्मो का ध्यान बहुत पहले जा चूका था

कम्मो( आज रेखा दीदी खाना लेकर जाने वाली है रवि का देखो तो अभी से इनकी छूट पानी छोड़ रही है कैसे जल्दी जल्दी काम कर रही है ताकि जल्दी से जल्दी जाकर अपने छोटे भाई के लुंड पर बैठ सके कुछ तो शर्म लिहाज करो रेखा दीदी )

पुछलि रात.........

नीलम रवि से छोड़ने के बाद जैसे तैसे लड़खड़ाती हुई अपने घर तक्क पहुँचती है गनीमत थी की उस समय घर पर न तो हरिया था और न hi राजू

नीलम जल्दी जल्दी खाना पीना बना लेती है और थोड़ी hi देर में हरिया गाओं से घूम कर आ जाता है

नीलम एक लकड़ी के टुकड़े पर बैठी बैठी आज हुई घटनाओ को सोच रही थी

कैसे आज रवि जैसे बच्चे ने उसकी भरी पूरी जवानी को पूरा लूट लिया जिसे रोज वो थोड़ा थोड़ा अपने बापू और छोटे भाई को परोसती थी

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हरिया घर के अबदार घुसता है उसे सामने hi उसी बेटी दिखाई पड़ती है जिसे वो दोपहर से hi छोड़ने के लिए धुंध रहा था

हरिया- अरे मेरी प्यारी बिटिया खा थी तू आज दोपहर से hi तुझे पता है तेरा बापू तुझे कितनी बेसब्री से धुंध रहा था

नीलम पीछे पलट कर अपने बापू को देखती है और एक झूटी स्माइल पास कर देती है

नीलम की तो वैसे hi हालत खराब थी

इधर हरिया अपनी बेटी की मुस्कान को अपना चुदाई का टिकट समझ कर सीधा जाकर नीलम की पीठ से चिपक जाता है

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हरिया का लुंड सीधा नीलम की गांड पर टक्कर मार रहा था

हरिआय अपने हाथो को आगे बढ़ता हुआ सीधा अपनी बेटी का पेटीकोट उठा देता है और अपनी बेटी नीलम की गदराई हुई जांघो को अपने मजबूत हाथो से मसलने लगता है

अगर कोई और दिन होता तो शायद अपने बापू को मना नहीं करती पर आज तो नीलम पहले से hi पूरी की पूरी टूटी पड़ी थी

हरिया- तुझे पता है मेरी गुड़िया आज तेरे बापू के इस लुंड ने कितना परेशान किया

कमीना बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था

पता है तुझे ये मुझसे क्या बोलै

नीलम- क्या बोलै बापू

हरिया- ये कमीना बोलै की आज इसे पूरा दिन अपनी hi बेटी की छूट में सोना है

कहि न कहि हरिया की बाटे सुन्न कर नीलम की सुखी छूट में चिपचिपा पानी आने लगता है

हरिया की हरकते अब धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी उसके दोनों हाथ इस समय उसकी बेटी के मोठे मोठे चुचो को मसल रहे था

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू आज नहीं बापू

हरिया- मैट रोक बेटी आज अपने बाप को तेरा ये बाप अपनी hi बेटी के मादक अंगो का दीवाना हो चूका है

बेटी तेरा ये रसीला जिस्म मुझे अपनी और खींचता है बेटी मैं तुझसे एक पल भी दूर नहीं रह सकता

नीलम जानती थी की अगर उसने ा hi अपने बाप को नहीं रोका तो हरिया बिना चोदे नहीं मानेगा

नीलम तुरंत hi अलग हटके खड़ी हो जाती है

नीलम- बापू आज नहीं आज मेरी तबियत सही नहीं है

आखिर हरिया भी बाप था

चुदाई के इस खेल में अपने बापू के समाने कभी नीलम ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे थे

आखिर हरिया भी बाप था

हरिया- कोई बात नहीं बेटी तू तो मेरे पास hi है ना तू एक काम कर तू आराम कर आज घर का काम मैं और राजू कर लेंगे

तभी राजू भी घर में आ जाता है

राजू- क्या काम करना है बापू

हरिया- बीटा आज तेरी दीदी की तबियत खराब है तो उसे परेशान मत करियो और काम भी हमे hi करना है आज का समझा

राजू- क्या हुआ मेरी प्यारी दीदी को

राजू तुरंत hi अपनी दीदी की खत के पास चला जाता है

और नीलम का सर पकड़ कर बुखार देखने लगता है

राजू- अरे दीदी को बुखार तो नहीं है बापू

हरिया- तुझे बोलै न आज उसकी तबियत खराब है तो समझ नहीं आता

राजू- कोई बात नहीं दीदी आप आराम करो

नीलम तो पहले hi दूसरी तरफ मुह्ह घुमा कर लती थी

नीलम का पूरा बदन दर्द कर रहा था खास कर उसकी गांड जिसे रवि ने पूरा दिन एक मिनट के लिए भी खली नहीं छोड़ा पूरा दिन अपने मुसल उसकी गांड में ठोके रखा

नीलम( बापू आज अपनी इस बेटी को माफ़ कर देना आज मैं तुम्हारे लुंड की सेवा नहीं कर पायी पर क्या कृ बापू उस हरामी ने तो छोड़ छोड़ आज आपकी बेटी को पूरा खोल दिया

मुझे अब ऐसा लग रहा है बापू की जो चीज़ मेने आपको देने के लिए बचाई थी उसे रवि पूरा का पूरा छत्त कर दिया )

(पर कसम है बापू मुझे भी आपकी उस कमीने के साथ मैं भी कुछ करूंगी जो उससे भी बुरा होगा जो उसने मेरे साथ किया मेरे पास रवि के घर की एक कमजोर कड़ी है )

रोटी हुई नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ......
 
अपडेट-98

रेखा अपना और रवि का खाना बांध चुकी थी

रेखा- दीदी मैं न शाम को रवि के साथ hi आउंगी तो इन्तजार मत करना

मेघा- क्यों ऋ रेखा वो तो काम करेगा पर तू क्या करेगी शाम तक्क वह

रेखा- वही जो आप कर रही थी आज तो मैं जी भर कर मोठे मोठे गन्ने चूसूंगी

मेघा- बड़ी खुश है तू गन्ने चूसने के लिए

रेखा- दीदी रवि तो अपने काम में लगा रहेगा मैं तो खुद hi गणना तोडूंगी और खुद hi चूसूंगी

कम्मो( देखो तो दीदी को कितनी बेशर्मी के साथ बता रही है की अपने छोटे भाई से गांड मरवाने जा रही है )

मेघा- चल ठीक है जा तू वो भूखा होगा

कम्मो- पर दीदी अभी तो 11:30 हुए ह

रवि तो 1 बजे के बाद खता है न खाना

रेखा( लो हो गयी कुटिया की गांड में खुजली )

रेखा- अरे तो क्या एक दिन वो पहले नहीं खा सकता या खाना ले जाने वाला पहले नहीं जा सकता क्यों दीदी

मेघा- सही बात है जब अपने hi छोटे भाई को खाना खिलाना है तो कभी भी जाओ उससे क्या तू जा रेखा

रेखा बड़ी hi कमीनी थी वो समझ चुकी थी की कमम्मो को उसके आज के प्लान की जानकारी हो गयी है

रेखा कम्मो की और देखती है और आंख मार कर अपनी मंजिल की और निकल जाती है

मेघा- कम्मो मैं कमरे में सोने जा रही हु कुछ काम होतो बताना

कम्मो- ठीक है दीदी आप जाओ कुछ काम नहीं है

कम्मो( हे भगवान् ये कैसी किस्मत दी है तूने मुझे एक तरफ वो मेरी रंडी दीदी है जो दिन रात अपने hi छोटे भाई के लुंड पर उछलती रहती है और एक तरह मैं हु जो उसके लुंड के लिए तड़प रही हु पर मेरे नसीब में शायद तूने लुंड hi नहीं लिखा )

कम्मो अपनी किस्मत को कोसती हुई आंगन में पड़ी खत पर hi लेत जाती है

इधर रेखा तेज तेज कदम बढ़ते हुए अपनी मंजिल तक्क पहुंच चुकी थी

रेखा इधर उधर नजरे दौड़ने लगती है

उसकी नज़ारे अपने छोड़ू भाई को धुंध रही थी

पर रवि का कहि अत पता नहीं था

आखिर में थक हर के रेखा झोपडी की और जाती है

और जैसे hi रेखा झोपडी में घुसती है उसकी आँखे खुली की खुली रह जाती है

अंदर का नजारा देख कर उसकी साडी उदासी एक मिनट में गायब हो चुकी थी

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अंदर रवि बिलकुल नंगा पड़ा था

पीठ के बल एकदम नंगा उसका खड़ा लुंड जो एकदम सीधा सर उठाये खड़ा था

रेखा को देखते hi रवि तुरंत hi उठ जाता है और आगे बढ़ते हुए अपनी दीदी के गले लग जाता है

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रवि धोता हुआ आकर अपनी रेखा दीदी के गले लग जाता है उसका लुंड ऐडहा एक झटके में रेखा की टैंगो के बिच गायब हो जाता है

रेखा- क्यों रे कमीने अपना ये गधे जैसा लुंड खड़ा किये किसका इन्तजार कर रहा था तू

रवि - अपनी रैंड का इन्तजार कर रहा था और उसे hi याद कर कर के सुबह से इस गधे जैसे लुंड को उठाये रखा है

रवि अपनी दीदी की गांड को लगातार मसले जा रहा था जिसकी वजह से रेखा भी अब अपने मुद में आने लगी थी

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रेखा सिर्फ एक पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुई थी

उसने अपनी विशाल चूचियों को छुपाने के लिए एक पतला सा दुपट्टा डाला हुआ था जोकि अबतक निचे गिर चूका था

रेखा- अच्छा तो तू क्या करेगा आज अपनी रैंड के साथ इस झोपडी में

रवि- पहले तो मैं अपनी रैंड को जी भर के मसालुंगा और जब वो पूरी तरह लाल हो गयी टमाटर की तरह तो उसे कच्चा hi खा जाऊंगा

ऐसा बोलते हुए रवि रेखा दीदी के एक कान को अपने दातो से काट देता है

रेखा तो दीवानी थी इस जानवर के साथ चुदाई की

रेखा- अह्ह्ह्ह. और क्या करेगा अपनी रैंड के साथ

रवि- आज मैं उसके तीनो छेड़ो को जी भर के छोडूंगा शाम तक

रेखा- मतलब तू शाम तक उसके एक भी छेद को एक मिनट भी खली नहीं छोड़ेगा

रेखा रवि से अलग हो जाती है और दरवाजे की और बढ़ने लगती है

रेखा - अच्छा और तेरी वो रैंड क्या कहती है क्या वो भी तुझसे जी भर के छुड़वाने ले लिए hi तेरे पास आयी है

रेखा अबतक दरवाजे बंद कर चुकी और वापस पलट कर रवि के नजदीक जा रही थी

बाटे करते करते वो अपने ब्लाउज के बोटों एक एक करके खोलती जा रही थी

रवि- वो तो उससे hi पूछना पड़ेगा की आखिर मेरी रैंड कहती क्या है

रेखा- क्या पता वो तुझसे छुड़वाना hi न कहती हो

रकेः आगे बढ़ती हुई अपने पेटीकोट के नदी को एक झटके में खोल देती है और पेटीकोट सरकता हुआ निचे गिर जाता है

अब रेखा मादरजात अपने छोटे भाई के सामने नंगी खड़ी थी

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रेखा की तानी हुई चूचिया चीख चीख कर रवि को बुला रही थी उनका रूस पिने को

रवि- अच्छा वो मुझसे छुड़वाना नहीं कहती आपको पता है दीदी मेरी रैंड तो दीवानी है इस लुंड की

ऐसा बोलते हुए रवि दुबारा से अपनी दीदी से चिपक जाता है

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रेखा- अच्छा बीटा अब तेरी दीदी तुझे तेरी रैंड लगती है और अपनी hi दीदी की छूट और गांड मरना कहता है

रवि अपने होतो को सीधा अपनी दीदी के तपते होठो पर शता देता है

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रवि रेखा की गर्दन को पकड़ता हुआ उसे अपने साथ दिवार के पास ले जाता है और अपनी दीदी को दिवार से चिपकते हुए फिरसे रेखा के रसीले होठो का रस पिने लगता है

रेखा- अह्ह्ह्हह muhhaaaaaaaaaa क्या कर रहा रवि तू अपनी दीदी के साथ

रवि- अपनी दीदी को छोड़ने के लिए गरम कर रहा हु अह्ह्ह्हह

रवि अपनी दीदी के दोनों मस्त चुचो को चूसने में लगा हुआ था

रेखा- अह्ह्ह्हह कमीने ये पाप है

रेखा जानती थी की वो रवि को जितना उकसाएगी उतनी hi जबर्दस्त चुदाई उसे मिलेगी

रवि- मैं तो पहले hi पाप कर चूका हु अपनी दीदी को अपनी रंडी बना कर अब तो मैं अपनी साडी बहनो को अपनी रंगी बनाऊगा जैसे तुझे बनाया है मेरी रंडी रेखा दीदी

एक झटके के साथ रवि अपनी दीदी के बालो को पकड़ता हुआ उसे निचे बैठा देता है

रेखा का मुँह अब अपने छोटे भाई के लुंड के बिलकुल सामने था

रेखा इन्तजार में थी की कब वो मुसल अंदर घुस कर उसके गरम मुँह को चोदे

रेखा- तो तू अब अपनी दीदी को hi अपना ये मुसल चुसयेगा

रवि- हां दीदी कितनी भोली हो तुम तुमको मैं ये लुंड चुसाउँगा थोड़े hi

मैं तो तुम्हारा ये गरम मुँह अपने इस गधे जैसे लुंड से छोडूंगा

अगले hi पल रवि एक झटके के साथ अपना आधे से ज्यादा लुंड रेखा के मुह्ह में घुसा देता है



रवि- अहह दीदी तुम्हारी छूट तो पूरी फूल गयी है

रेखा- सरे छेद तैयार करके आयी हु तुझसे छुड़वाने के लिए

अगले hi पल रेखा अपनी गांड में एक ऊँगली डालती है और उसे बहार निकल कर रवि को दिखती है

रेखा- देख अपने इस छेद को भी पूरा तेल पीला कर ले हु ताकि शाम तक्क टिक्क सखे

रवि- बड़ी hi चिदाकाड है मेरी दीदी तेल लगाने में टाइम बर्बाद न हो इसी लिए पहले से hi अपनी गांड के छेद में तेल लगा कर आयी है मैं गया रेखा दीदी तुम्ही

रवि अपनी दीदी की छूट और गांड को चाटने लगता है

एयर करीब 15 मिनट की छूट चूसै के बाद रेखा अपने छोटे भाई के मुह्ह में hi अपना सारा काम रास छोड़ देती है

रवि भी एक अच्छे भाई की तरह अपनी दीदी की छूट से निकला सारा पानी चाट चाट कर पी जाता है

रेखा- अह्ह्ह कमीने चाट तो ऐसे रहा था जैसे आज अपनी दीदी की छूट hi खा जायेगा

रवि - दीदी छूट तो खाऊंगा ओर फ़िलहाल तो मैं आपकी छूट को अपना ुए लुंड खिलाऊंगा



रवि अपना लुंड रेखा दीदी की छूट पर रख कर रगड़ने लगता है

रेखा- अहह रवि अब मैट तड़पा न तुझे पता है म तेरी दीदी कितने दिनों से तदाओ रही थी इस पल के लिए जब तू मुझे बिना रोक टोक के दिन के उजाले में छोड़ सखे

रवि- बड़ा hi उतावला पैन है साली तेरी छूट में

दिन रात पानी छोड़ती रहती है बिना चूड़े एक दिन भी नहीं रह सकती साली रद्द

रेखा- तेरा लुंड hi ऐसा है रे हरामी की तेरी खुद की दीदी तेरे लुंड को देख कर तेरी रखैल बन गयी अह्ह्ह्हह्हह



एक झटके के साथ रवि अपनी दीदी की छूट में अपना लुंड थोक देता है

रवि- अह्ह्ह्ह दीदी तेरी छूट तो किसी भट्टी की तरह टप्प रही है

रेखा- तू बस छोड़ता जा अपनी इस दीदी को और निकल दे मेरी इस छूट की साडी गर्मी

करीब 10 मिनट तक रवि अपनी दीदी की चित चिढ़ता रहता है और अंतत में अपनी hi दीदी की छूट में सारा वीर्य गिरता हुआ झाड़ जाता है



रेखा की पूरी छूट अपने hi छोटे भाई के वीर्य से भरी हुई थी

रवि अभी भी खटके मरे जा रहा था पुरे कमरे में फतछठ्ठ फतछठ्ठ की आवाजे गूंज रही थी

करीब 2 मिनट बाद रवि अपनी दीदी के ऊपर से उतर जाता है

रवि- क्यों दीदी मजा आया

रेखा- मजा तो आया लेकिन

रवि- लेकिन क्या दीदी

रेखा- अभी तो मेरी गांड मरना भी बाकि है न जब तक्क तू अपनी दीदी के तीनो छेद नहीं छोड़ेगा तब तक तेरी दीदी को मजा कैसे आएगा

रवि- अहःअहः सच में बहुत बड़ी चूड़ाकड दीदी दी है भगवान् तूने मुझे काश हर जनम ऐसी hi दीदी मिले हर वक़्त छुड़वाने के लिए तैयार रहती है

दीदी अभी तो 1 बजे है और बाकि है 5 घंटे अभी आज तो पूरी कसार निकाल डगा बाद में नीलम की तरह मैट कहना की तू जानवर की तरह छोड़ता है

रेखा- अरे बीटा जो तू ये खेल खेल रहा है न चुदाई का भूल मत की उस खेल में मैं तेरी अध्यापिका हु

रवि- बात तो सही है दीदी पर सच खु तो मैं खुद भी आज आपको आजमाना कहता हु की आप कितने गण्हतो तक्क इस लुंड की सवारी कर सकती हो

रेखा- अच्छा ये बात है तो अजा आजमा ले और देख ले तेरी दीदी के छेड़ो में कितनी ताक़त है

गरमा गरम बातो के बाद रवि का लुंड फिरसे खड़ा हो चूका था

रवि अपना मुसल लेकर सीधा रेखा की गांड में घुसा देता है

और रेखा उस दर्द को एक अह्ह्ह्ह के साथ बर्दास्त कर जाती है जो उसे बर्नाड करने वाला था



रवि कभी अपनी दीदी की गांड को छोड़ने लगता तो कभी अपना मुसल रेखा दीदी की छूट में घुसा देता और कभी अपनी दीदी का मुह्ह छोड़ने लगता

शाम के 6 बजे तक दोनों भाई बहनो ने एक दुआरे को एक पल के लिए भी खली नहीं छोड़ा

और शाम तक झोपडी का नजारा ऐसा था

की जमीन पर झा देखो वह सिर्फ दिन भर चली चुदाई का कॉमर्स hi गिरा हुआ था

रवि ने अपनी दीदी को छोड़ छोड़ कर सच में एकदम लाल कर दिया था

रेखा और रवि दोनों एक दूसरे से चिपके खत पर पड़े थे

रवि का लुंड अब भी उसकी दीदी की छूट में hi था झा उसने थोड़ी देर पहले hi अपना वीर्य गिराया था

रेखा अपनी छूट के अंदर इख्ठा गरम वीर्य को धीरे धीरे अपनी छूट से hi निगले जा रही थी

रवि- क्यों दीदी मजा आया न आज काफी दिनों बाद इतनी लम्बी चुदाई हुई है तुम्हारी वो भी एक दम मजे से

रेखा- वो छोड़ पहले ये बता की तूने आजमा लिया या नहीं अपनी दीदी को

रवि- मान गया दीदी उस रंडी नीलम की तुम्हारे छेड़ो के सामने क्या औक़ात जो साली एक बार छुड़वाने के बाद hi गिड़गिड़ाने लगी थी

रेखा- अच्छा बीटा अब पलटी मार गया मस्का लगा रहा है

रवि- दीदी मैं तो थूक लगता हु वो भी तुम्हारे छेड़ो पारर

रवि- अच्छा दीदी कम्मो दीदी का कुछ सोचा या नहीं

रेखा- बड़ा बैचैन है तू कम्मो को छोड़ने के लिए

रवि- मैं तो ऐसे hi पूछ रहा था दीदी

रेखा- कुछ सोचा है मैंने पर तू ये बता की एक बार और छोड़ सकता है तू अपनी दीदी को

रवि- दीदी मैं भी आपकी तरह हमेशा तैयार रहता हु आप बस अपनी टंगे खोलो

रेखा- अरे अभी नहीं रात के लिए मैंने कुछ खास सोचा है

रवि- क्या खास है दीदी आज रात को

रेखा- रात होने दे खुद hi मालूम पड़ जायेगा तुझे

फ़िलहाल तो जल्दी घर चलने की तयारी कर लेत हो जायेगा

और तूने खाना भी नहीं खाया आज

रवि- दीदी आपकी छूट से निकलता रस पिने से टाइम hi नहीं मिला तो खाना खा से खता

रेखा- ध्यान रखना खाना फेकना पड़ेगा नहीं तो घर में दिखात होगी

रवि तुरंत hi कुत्तो को खाना दाल देता है और दोनों भाई बेहेन कायदे पेहेन कर घर की और निकल जाते है

दोपहर में .........

रेखा के जाने के बाद कम्मो खत पर लेती लेती कुछ सोच रही थी अच्चानक उसे याद अत है की आज तो उसे नीलम दीदी ने बुलाया था लाइव चुदाई दिखने के लिए

सोच कर hi कम्मो की छूट पानी से भर जाती है

कम्मो एक नजर मेघा दीदी पर डालती है जो बेफिक्र सो रही थी

कम्मो अपने घर से निकल कर सीधा नीलम के घर की और निकल जाती है

नीलम के घर के बहार hi कम्मो को हरिया मिल जाता है

हरिया- अरे कम्मो बेटी इतनी दूहर में यह कैसे कुछ खास है क्या

हरिया कम्मो की भरी पूरी जवानी को देख कर आहे भरने लगता है



कम्मो- कुछ नहीं काका बस ऐसे hi नीलम दीदी से मिलने आ गयी

हरिया - तू तो बेटी दिन बी दिन कली से फूल बनती जा रही है एक दम गडरा गयी है तू भी अपनी बहनो की तरह

कम्मो( लगता है नीलम दीदी ने इसे बता दिया है की मैं चुदाई देखने आने वाली हु इसलिए ऐसी बाटे कर रहा है हरामी).

कम्मो तुरंत hi घर के अंदर भाग जाती है

अंदर खत पर नीलम एकदम चित्त पड़ी थी उसका पूरा बदन अभी तक्क दुखः रहा था

कम्मो- नीलम दीदी कैसी हो

नीलम- अरे अजा अजा मैं सोच hi रही थी की तू आएगी या नहीं

कम्मो- सोचा की एक बार देख hi लेती हु

नीलम- कम्मो आज तो मेरा महीना आ रखा है

कम्मो- तो दीदी जब महीना आता है तो काका नहीं छोड़ते क्या तुम्हे

नीलम- कहि पेट से हो गयी तो इसी लिए सावधानी बरतते है

नीलम- तू बैठ न

कम्मो- दीदी मैं चलती हु फिर 4-5 दिन बाद आउंगी

नीलम- अरे रवि और रेखा के बारे में तो कुछ बता

कम्मो( साली रंडी मुझसे मेरे hi घर के राज उगलवाना कहती है यही प्लान था इसका )

कम्मो- दीदी अब तो पहले तुम मुझे अपने घर का नंगा नाच दिखाओ फिर मैं बताउंगी की मेरे घर में मेने क्या क्या देखा है और यकीन करो तुम्हे सुनने में बड़ा मजा आएगा दीदी

अगले hi पल कम्मो घर से निकल कर चली जाती है

और वो हरिया को बिलकुल भी भाव नहीं देती पर हरिया कम्मो को देख कर अपना लुंड मसलता रह जाता है

नीलम( बड़ी hi तेज है साली ये इसके घर के सरे लोग hi तेज है इन्हे सबक सीखना पड़ेगा)

थोड़ी hi देर में हरिया भी घर के अंदर आ जाता है

हरिया- क्या हुआ बेटी

ये क्या करने आयी थी

नीलम- बापू एक बात बताओ अगर मैं कम्मो जैसी कोई चिड़िया तुम्हारे सामने परोस दू तो क्या करोगे

हरिया के मुँह में कम्मो का नाम सुन्न कर hi पानी आ जाता है

हरिया - बेटी फिर तो तेरा ये भद्दा बाप पूरी की पूरी चिड़िया hi खा जायेगा वो भी हड्डी समेत

नीलम- तो बापू ये समझ लो की बस कुछ hi समय बाद आपको वो चिड़िया मिलने वाली है अब क्या करना है वो आप जानते hi हो

हरिया- पर कैसे बेटी

नीलम- कुछ मैट पूछो बापू बस इस लुंड को तैयार रखना

पर मुझे क्या मिलेगा बापू

हरिया- बेटी पूरी जिंदगी तेरा ये बाप तुझे अपने लुंड पर चढ़ा कर तेरी देवी की तरह पूजा करेगा

अच्छा तू आराम कर तबियत खराब है न तेरी

हरिया बहार चला जाता है

नीलम अंदर hi अंदर खुस हो रही थी क्योंकि अब वो रवि से अपना बदला लेने के लिए प्लान बना रही थी......
 
अपडेट-99

रेखा और रवि अँधेरा होते होते घर पहुंच जाते है

मेघा दीदी घर के बहार hi खत बिछा कर पेटीकोट और ब्लाउज में बैठी हुई थी

मेघा- क्यों ऋ रेखा तू तो सुबह की गयी हुई अब आ रही है

रेखा -है दीदी मेने सोचा की रवि के साथ hi आ जाउंगी शाम को

मेघा- अरे तू वह क्यों खड़ा है आज यह बैठ मेरे पास थक गया होगा दिन भर काम करके

मेघा रवि को अपने पास बैठा लेती है

मेघा- वैसे तू कर क्या रही थी वह दिन भर

रेखा- आज तो दिन भर मेने खूब मोठे मोठे गन्ने चूसे दीदी कसम से मजा आ गया

मेघा- क्यों रे रवि सिर्फ अपनी रेखा दीदी को hi गन्ने चुसयेगा मेरा क्या

रवि- दीदी कल आप होगी न खेत में तो आप भी चूस लेना

रेखा मौका देखते hi रवि से चिपक जाती है

और अपना एक हाथ रवि के गले में डालते हुए उसे अपनी और खींच लेती है जिसकी वजह से रवि का सर सीधा रेखा की चूचियों के ऊपर आ जाता है

असल में अब रेखा भी मेघा दीदी के सामने थोड़ा खुलने की सोच रही थी क्योंकि उसे अब ये तो पता चल चूका था की जिस लुंड की वो दीवानी है मेघा दीदी भी उसी लुंड की पूजा करने को बेकरार है

रेखा- दीदी कल आप जाना तो आप भी चूसना

मेघा- मैं तो चूस hi लुंगी पर तू अभी अंदर जा और कम्मो का हाथ बता दे थोड़ा बेचारी कबसे अकेले लगी हुई है खाना बनाने में

रेखा उठ कर अंदर चली जाती है

रेखा के जाते hi मेघा दीदी सीधा रवि का लुंड पकड़ लेती है जिसे वो बहुत पहले hi देख चुकी थी

मेघा- क्यों रे रवि तेरा ये लुल्ला क्यों खड़ा है

रवि- दीदी लुल्ला नहीं लुल्ली

मेघा- है है वही ये क्यों खड़ा है

रवि- पता नहीं दीदी रस्ते में रेखा दीदी आगे आगे चल रही थी और मैं उनके पीछे चल रहा था पता नहीं कैसे खड़ा हो गया मेरा ये लुल्ला

इतना बोलकर रवि हसने लगता है

मेघा- मतलब पुरे रस्ते भर तू रेखा के पीछे पीछे इसे लहराता हुआ आया है

रवि- ह्म्मम्म्म्म

मेघा- पर ये खड़ा क्यों हुआ है तुझे दुबारा दर्द हो रहा है क्या इसमें

रवि- है दीदी दर्द तो हो रहा है

मेघा रवि के लुंड को धीरे धीरे मसल भी रही थी जिसकी वजह से उसका लुंड और भी विकराल रूप लेता जा रहा था

मेघा- चिंता मैट कर मैं कल आउंगी न खेत में तो इसका अचे से िलज्ज कर दूंगी तब तक इसे संभाल और ध्यान रख की रेखा या कम्मो इसे इस हालत में न देखे

रवि( दीदी आप दिखने की बात कर रही हो रेखा दीदी ने तो आज दिन भर इस लुल्ली की सवारी की है)

रवि- ठीक है दीदी ध्यान दूंगा

मेघा- अच्छा ये बता जब तू रेखा के पीछे पीछे आ रहा था तो तुझे क्या दिख रहा था मतलब तेरी नजर बार बार खा जा रही थी

मेघा सोचती थी की रवि बिलकुल hi भोला भला बच्चा है जिससे वो कुछ भी उगलवा सकती है

रवि- दीदी वो

मेघा- अरे बता न इतना हिचकिचा क्यों रहा है जो भी हो खुल कर बता अपनी दीदी को

रवि जनता था की आज नहीं तो कल उसकी दीदी उसके सामने टंगे खोलने hi वाली है तो क्यों न अब थोड़ा थोड़ा खुला जाये

रवि- दीदी वो न मेरी नजर बार बार रेखा दीदी के चूतड़ों की तरफ जा रही थी

मेघा- तभी तेरा ये खड़ा है

रवि- दीदी अपनी दीदी के चूतड़ देखने से लुल्ली खड़ी हो जाती है क्या

मेघा- अरे तू वो सब छोड़ चल जा हाथ मुँह धो ले खाने का टाइम भी होने वाला है

रवि उठ कर चला जाता है

मेघा( तभी मैं सोचु की इसका लुंड खड़ा क्यों था रस्ते भर रेखा की गांड देखता हुआ आया है

इसमें रवि की भी क्या hi गलती है घोड़ी की गांड भी तो इतनी फैली हुई है की किसी का भी लुंड खड़ा हो जायेगा

कहि रेखा ने तो नहीं देखा होगा रवि का खड़ा लुंड

नहीं नहीं )

घर के अंदर......

रेखा- क्यों मेरी कम्मो रानी क्या बना रही है

कम्मो- आपको दीखता नहीं खाना बना रही हु

वैसे सुबह की गयी गयी अब नजर आ रही हो

रेखा- क्या कृ रे रवि छोड़ hi नहीं रहा था

कम्मो- वैसे क्या करवा रहा था वो आपसे जो वो आपको छोड़ नहीं रहा था

रेखा- अब क्या क्या बताऊ तुझे बस यु समझ ले की आज दिन भर मेरे छोटे भाई ने मुझे खूब मोठे मोठे गन्ने चुसये

रेखा( पूछ तो ऐसे रही है जैसे जानती hi नहीं की मैं दिन भर क्या कर रही थी खेतो में)

इतना बोलते हुए रेखा कमरे में चली जाती है

कम्मो( बेशरम खिङकी सीधा सीधा hi बोल देती की दिन भर अपने छोटे भाई के सामने घोड़ी बनी हुई थी)

थोड़ी देर बाद कम्मो सबको खाना परोस कर देती है और सब लोग खाना खा लेते है

रोज की तरह खाने के बाद कम्मो और रेखा काम निपटने में लग जाती है और रवि थोड़ी देर बहार टहलने चला जाता है और मेघा दीदी कमरे में जाकर लेत जाती है

थोड़ी देर बाद जब रवि लौट कर आता है तो घर में घुसते hi उसे रेखा दीदी नजर आती है जो झुक कर सफाई कर रही थी

रवि मौके का फायदा उठाते हुए अपनी दीदी की गांड पर एक जोरदार छठा मरता हुआ कमरे में चला जाता है

रेखा- बदमाश कहींका

रवि की हरकत को कम्मो देख चुकी थी

कम्मो( अब तो इस घर में खुले आम बेशर्मी चल रही है न जाने आने वाले टाइम में ये रेखा दीदी क्या करेगी कहि सबके सामने hi रवि से छुड़वाना चालू न करदे )

रवि सीधा कमरे के अबदार घुस जाता है झा पहले से hi मेघा दीदी लेती हुई थी

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मेघा दीदी पीठ के बल लेती हुई थी और अपने ब्लाउज के 2 बोटों पहले hi खोल चुकी थी

रवि- क्या हुआ दीदी आज आपको नींद नहीं आ रही क्या

इतना बोलते हुए रवि मेघा दीदी के बगल में जाकर लेत जाता है और अपनी दीदी के बड़े बड़े चुचो को देखने लगता है

मेघा- अरे इतनी गर्मी है तो खा से नींद आएगी

रवि- मुझे तो इतनी गर्मी नहीं लग रही

मेघा- है तुझे खा से गर्मी लगेगी तू तो आते hi नंगा जो हो जाता है

रवि- तो दीदी आप भी नंगी हो जाओ

मेघा समझती थी की उसका छोटा भाई बहुत hi भोला भला बचा है

मेघा- अच्छा तो तू कहता है की तेरी दीदी तेरे सामने hi नंगी हो जाये

रवि- तो इसमें क्या हुआ दीदी आप मेरी दीदी हो और मई आपका छोटा भाई

मेघा- मतलब अगर मई तेरे सामने अपने कपडे उतर दू तो तुझे कोई दिक्कत नहीं होगी

रवि( दीदी मैं तो कहता हु की आपको एक बार पूरी नंगी देख लू ताकि मुझे पता लग जाये की मेरी दीदी जितनी कपड़ो में खूबसूरत दिखाई देती है क्या बिना कपड़ो के भी उतनी hi खूबसूरत दिखती है)

रवि- दीदी मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी

मेघा- अरे तुझे दिक्कत नहीं होगी पर तेरी बाकि की दिदिया जब देखेगी की मैं अपने hi छोटे भाई के सामने नंगी हु तो वो क्या कहेंगी

रवि- है दीदी ये बात तो सही है आपकी

अपनी दीदी से इतनी गरमा गरम बाटे करके रवि का लुंड बिलकुल लोहे की तरह सख्त हो चूका था

मेघा- अरे तू इतनी दूर क्यों लेता है थोड़ा नजदीक आ

रवि तुरंत hi अपनी मेघा दीदी की साइड सरक जाता है

और जैसे hi उसका शरीर मेघा दीदी से टच होता है उसका लुंड सीधा मेघा दीदी की टैंगो पर जा लगता है

मेघा( भले hi कितना भी भोला हो मेरा भाई पर मुझे नंगी करने की बात से hi इसका लुंड खड़ा हो गया )

मेघा- अच्छा ये बता तेरी ये लुल्ली क्यों खड़ी हो गयी दुबारा

रवि- दीदी मुझे तो पता hi नहीं चला की ये कब खड़ा हो गया

मेघा- तेरा hi सही है हर समय अपनी किसी न किसी दीदी के पास अपना लुंड खड़ा किये पड़ा रहता है

रवि - दीदी अब मैं क्या कृ ये अपने आप hi खड़ा हो जाता है वैसे दीदी मुझे लता नहीं था की लुल्ली को लुल्ला और लुंड भी बोलते है

अभी मेघा दीदी कुछ बोलती उससे पहले hi कमरे में रेखा आ जाती है और कमरे में घुसते hi एक बार बहार कम्मो की और झक कर कमरे को अंदर से बंद कर देती है ....
 
अपडेट-100

रेखा कम्मो की और तरफ देखते हुए एक झटके से कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर देती है

कम्मो( दरवाजा बंद करने की hi क्या जरूरत है यही आंगन में आकर छुड़वा लो मेरे सामने hi मुझे दिखा कर क्या दरवाजा बंद कर रही हो बेशरम औरत)

रेखा- क्या बात है बड़ा प्यार हो रहा है भाई बेहेन के बिच चिपके पड़े हो एक दूसरे से

मेघा- क्यों ऋ तुझे जलन हो रही है क्या मैं अपने छोटे भाई से चिपकी हु तो

रेखा- मुझे क्यों जलन होगी दीदी बस मैं तो ये देख रही थी की आज चिपक चिपक कर प्यार हो रहा है

मेघा- तो तू भी चिपक जा मैं तो सोने जा रही हु

मेघा अपनी बड़ी सी गांड रवि की और घुमा कर पलट जाती है

रेखा भी तुरंत hi रवि की पीठ पर अपनी भरी बहरकाम चूचिया सत्ता देती है

अभी मेघा दीदी ने आँख बंद hi की थी की रेखा अपनी ऊँगली को रवि की धोती में घुसते हुए उसकी गांड के छेद को कुरेद देती है

जिसका परिणाम ये होता है की रवि एक झटके के साथ आगे की और उछलता है और उसका खड़ा लुंड सीधा मेघा दीदी की गांड के छेद तक्क अंदर घुस जाता है

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मेघा - अह्ह्ह्हह्हह

रेखा- क्या हुआ दीदी ये बदमाश आपको परेशान कर रहा है क्या

मेघा को तो अपनी गांड पर रवि का लुंड महसूस करके मजा सा आ गया था वो अपनी गांड को थोड़ा और पीछे की और धकेल देती है

मेघा- कोई परेशान नहीं कर रहा तू चुपचाप सो जा और मेरे प्यारे भाई को परेशान मैट कर समझी

रवि बीटा तू आराम से सजा आजा और खिसक जा मेरी तरफ

रवि भी खा मौका छोड़ने वाला था अपनी दीदी से चिपकने का वो तुरंत hi अपने हाथ को मेघा दीदी के चिकने पेट पर डालता हुआ अपने लुंड को मेघा दीदी की गांड में और भी ज्यादा गहराई तक्क धकेल देता है

इधर मेघा दीदी की छूट रवि के लुंड के अहसास से hi पानी छोड़ना शुरू कर चुकी थी

और उसकी गर्मी मनो रवि का लुंड पिघलने पर तुली हुई थी

मेघा दीदी को ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसकी गांड के बिच में कोई सख्त रोड घुसा दी हो

उधर रेखा सब जानती थी की क्या चल रहा है वो भी खा मौका छोड़ने वाली थी

रेखा पीछे से रवि के कान को चूसने लगती है

और जैसे hi रवि अपना मुँह रेखा दीदी की और घूमता है रेखा अपनी जीभ रवि के मुँह में घुसा देती है

जोश जोश में रवि अपने हाथ को मेघा दीदी के पेट से ऊपर की और उठता हुआ सीधा मेघा दीदी की चुकी पर रख देता है

मेघा दीदी तो पहले hi पानी पानी हुई पड़ी थी

जैसे hi रवि के सख्त हाथ उसकी मुलायम सूचियों पर पड़ते है वो एक पल में hi मस्त हो जाती है और अपने हाथ को रवि के हाथ के ऊपर रख कर दबा देती है

रवि की 2 उंगलिया मेघा दीदी के खुले हुए ब्लाउज के अंदर तक्क पहुंच चुकी थी

रवि को अपनी गलती का अहसास हो चूका था

उसे अहसास हो गया था की वो वक़्त से पहले मेघा दीदी से कुछ ज्यादा hi खुल रहा है इसलिए वो वैसे hi पड़ा रहता है बिना कोई हरकत किये

पर उसका लुंड जो का त्यों hi मेघा दीदी की गांड में फसा रहता है एक दम सीधा अंदर तक्क

इधर पीछे से रेखा रवि को उकसाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही थी वो लगातार रवि को छेड़े जा रही थी

असल में अब रेखा मन hi मन कहती थी की रवि जल्दी से मेघा दीदी को छोड़ दे ताकि उसे घर में खुले आम छुड़वाने में कोई दिक्कत न हो

करीब 20 मिंट बाद मेघा दीदी की आँख लग जाती है और उनके खरातो की आवाज से रवि को भी अंदाजा हो जाया है की उसकी बड़ी दीदी अब गहरी नींद में सो चुकी है

रवि धीरे धीरे अपना लुंड मेघा दीदी के पिछवाड़े से बहार निकलता है और तुरंत पलटता हुआ रेखा दीदी की चुकी को बेरहमी के साथ दबा देता है

रेखा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ

रवि- दीदी तुम पागल हो गयी हो क्या पता है आपकी हरकतों से मेरे अंदर का जानवर बहार आने वाला था

रेखा- तो आने दे न मैं तो कहती हु की वो जानवर हर पल जगा hi रहे

और वैसे भी उस जानवर को काबू करना मुझे आता है

रवि- तुम्हे तो आता है पर मेघा दीदी को भनक लग जाती तो

रेखा- तू भी तो छोड़ना hi कहता है न मेघा दीदी को तो छोड़ दे न इतना टाइम क्यों लगा रहा है

रवि- दीदी वो समझती है की मैं बच्चा हु और मैं कहता हु की मैं उनके साथ सब कुछ बच्चा बन कर hi कृ

रवि बोले जा रहा था और इधर रेखा एक एक करके अपने ब्लाउज के सरे बोटों खोल चुकी थी और उसकी मोती मोती चूचिया रवि के सामने एक दम नंगी थी

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रेखा- अच्छा ग पर शायद मेघा दीदी ये नबी जानती की इस बच्चे का लुंड ऐसा है की उनके पेट में भी बच्चा दाल दे

रेखा एक झटके के साथ अपना पेटीकोट का नाडा भी खोल देती है और उसे जचे को खींचती हुई अपने शरीर से अलग कर देती है

अब रेखा के शरीर पर एक मात्र ब्लाउज था वो भी पूरी तरह खुला हुआ था अगले hi पल वो उसे भी अपने शरीर से अलग कर देती है और एक दम नंगी हो जाती है

मनो रेखा को जैसे अब मेघा दीदी से कोई डर hi नहीं था क्योंकि वो भी अब जानती थी की मेघा दीदी भी अब रवि के लुंड की दीवानी हो चुकी है

रवि- दीदी तुम नंगी हो गयी अगर मेघा दीदी उठ गयी तो

रेखा- उठती है तो उठ जाने दे मैं नहीं डर रही तो तू क्यों डर रहा है

वैसे तो तूने दिन भर खेत में मुझे नंगा hi रखा और अब कपडे पहने को बोल रहा है

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अब तक रवि का हाथ रेखा दीदी की चिचियो को सहलाना शुरू कर चूका था

रवि- इसका मतलब ये है की अगर छुवाते वक़्त मेघा दीदी जग गयी तो क्या आप उनके सामने भी चुदवाती रहोगी

रेखा- तुझे कोई शकक है क्या

रवि- सच में दीदी मेरी सबसे बड़ी रंडी दीदी हो आप

रेखा- अभी तूने अपनी दीदी का रान्दीपना देखा hi खा है चल आजा आज तुझे दिखती हु

रेखा रवि के लुंड को धोती से आजाद कर देती है

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रेखा- तेरा ये घोड़े जैसा लुंड तो दिन बी दिन और भी बड़ा होता जा रहा है

रवि- अब मेरी दीदी इसकी इतनी सेवा जो करती है दिन रात

रेखा- रवि आज मैं कहती हु की तू मेरी गांड मार जैसे तेरा मैं करे वैसे

रवि- क्या बात है दीदी लगता है आज तो फुल मूड में हो

रेखा- तेरा खड़ा लुंड देख कर hi मुद बन जाता है

रवि- पर दीदी आज गांड मरवाने का मैं कैसे कर गया आपका

रेखा- बस मैं कहती हु की तू इस मुसल को मेरी गांड के छेद में पेल और कुछ मैट पूछ

रवि- तो ठीक है जैसी आपकी मर्ज़ी वैसे मैं तो हु hi अपनी दीदी की गांड का दीवाना

घूम जाओ दीदी अब तो मुझसे भी सब्र नहीं हो रहा

अगले hi पल रेखा खड़ी हो जाती है

रवि- क्या हुआ दीदी मूड चेंज हो गया क्या

रेखा- आज कमरे में नहीं

रवि- तो फिर खा दीदी आज क्या घर के बहार गांड मरवाओगी

रेखा नंगी hi दरवाजे की और बढ़ जाती है और अगले hi पल दरवाजा खोल देती है.....
 
अपडेट-101

रेखा अब तक कमरे का दरवाजा खोल चुकी थी

वो नंगी hi आंगन में चली जाती है

चांदनी रात की रौशनी पुरे आंगन में फैली हुई थी जिससे काफी उजाला फिआला हुआ था

रवि( ाअखिर दीदी कहती क्या है आज बिना कपड़ो के hi बहार चली गयी और बहार hi अपनी गांड मरवाना कहती है कहि कम्मो दीदी ने देख लिया तो बवाल कर देगी )

रवि अपनी धोती को लपेटता हुआ कमरे से बहार निकल जाता है

और जैसे hi उसकी नजर रेखा दीदी पर पड़ती है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

रेखा के लगे शरीर पर चांदनी रौशनी चार चाँद लगा रही थी

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रेखा अभी दरवाजे के पास hi खड़ी थी रवि भी अपनी रेखा दीदी के पीछे आकर खड़ा हो जाता है उसका खड़ा लुंड सीधा रेखा की गांड पारर ठोकर मार रहा था

रवि- दीदी चलो न अंदर

रेखा- आज मुझे यही इसी आंगन में छुड़वाना है

रवि- दीदी पागल हो गयी हो क्या पहले से hi कम्मो दीदी को हमारे ऊपर शकक है और कहि उन्होंने देख लिया तो बवाल कर देगी पुरे घर में

रेखा- क्या तू कममक के डर की वजह से अपनी रेखा दीदी की छोड़ना छोड़ देगा

रवि- दीदी ऐसी बात नहीं है पारर चुदाई तो अंदर भी हो सकती है अब तो मेघा दीदी भी सो गयी है

रेखा- लगता है तेरे लुंड में अब वो बात नहीं की तू मेरे छेड़ो की प्यास बुझा सखे

रेखा ने आज पहली बार रवि की मर्दानगी पारर सवाल उठाया था क्योंकि वो जानती थी की अगर वो रवि को उकसाने में कामयाब हो गयी तो वो उसे यही आंगन में कम्मो के सामने hi पटक पटक कर जानवरो की तरह छोड़ेगा

आखिर रेखा कहती भी तो यही थी

रवि- दीदी सुबह पता नहीं चला क्या की मेरे लुंड में कितनी जान है

रेखा- तो अब क्यों फट रही है तेरी क्या तू कम्मो से डरता है

देख तो कुटिया कैसे सो रही है मेरी छूट की प्यास भुजती देखि नहीं जाती इससे इसीलिए उस रांड नीलम से जाकर हमारी चुदाई की बात बता कर आयी है

रवि- दीदी नीलम से तो मैंने बदला ले लिया न उसे मेने रंडी से भी बदतर तरिके से छोड़ा था आप भूल गयी क्या

रेखा- उससे तो बदला ले लिया पर अभी ये तो बची है न

रवि- दीदी आज नबी तो कल इससे भी बदला ले लेंगे

रेखा- आज इसे दिखा hi देते है की हम दोनों चुदाई कैसे करते है

रवि का लुंड अब तक लोहे की तरह तीते हो चूका था

रवि- दीदी एक बार और सोच लो कहि कुछ लफड़ा न हो जाये

रेखा- कोई लफड़ा नहीं होगा तू सब मुझ पर छोड़ दे बस एक बात याद रखना आज मुझ पारर थोड़ा भी रेहम मैट करना

रवि- वो तो मैं वैसे भी खा करता हु मेरी प्यारी चुदड़ो दीदी आज तो तुम्हारी गांड की वो हालत करूंगा की 4 दिन तक्क तुम्हारी गांड का छेद फैला hi रहेगा

रेखा- तो देर किस बात की चल शुरू करते है

रेखा अपना हाथ पीछे ले जाती हुई रवि की धोती को निचे सरका देती है

और एक झटके के साथ hi रवि का विशाल लुंड आज़ाद हो जाता है

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रेखा- तूने तो पहले से hi खड़ा कर रखा है रे इसे मेरे लिए

रवि- आपकी गांड का नाम सुनते hi ये अपने आप hi खड़ा हो जाता है

रेखा- अच्छा ग तब तो लगता है आज सच में मेरी गांड की खैर नहीं

रवि- अब वो तो आपकी गांड मरने के बाद hi पता चलेगा दीदी

पर एक बार और बोल रहा हु सोच लो कहि कुछ गड़बड़ न हो जाये

रेखा- अरे कुछ नहीं होगा रे तू तो बच्चो की तरह डारर रहा है

रवि- बच्चा hi तो हु मैं दीदी

रेखा- अच्छा ऐसा कौन सा बच्चा होगा जो अपनी दीदी की छूट मुह्ह गांड सब छोड़ता होगा

रवि- मैं हु ना

रेखा- पहले मैं तेरे हथियार को तैय्यार तो कर लू

रेखा अपने घुटनो के बल बैठ जाती है और अपने खूब सारा थुक्क रवि के लुंड पर थूक देती है और अपने हाथो से उसके लुंड को मसलने लगती है

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रवि- ऐसे क्या देख रही दीदी

रेखा- यही सोच रही हु की तेरा ये इतना मोटा लुंड मेरी गांड के इस छोटे से छेद में कैसे समा जाता है

रवि- दीदी अब वो छेद छोटा रहा hi खा

रेखा- तूने तो मेरी छूट और गांड दोनों बर्बाद करदी छोड़ छोड़ कर अब मैं अपने पति से कोनसे छेद की सील तुड़वाउंगी

रवि- दीदी मुझसे फुर्सत मिलेगी तभी तो चुड़ोगी पति से

मेरा बास चले तो तुमको दिन भर पेलता hi रहु और एक सेकंड के लिए भी अपने लुंड को तुम्हारी गांड से बहार न निकलू

रेखा अभी कुछ बोलती उससे पहले hi रवि अपनी दीदी के बालो को पकड़ कर अपनी और खींचता है और उसका लुब्द सीधा रेखा के मुह्ह में घुस जाता है

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लुंड मुँह में घसते के साथ hi रवि अपनी दीदी के मुह्ह को छोड़ना शुरू कर देता है

रेखा ( आखिर जगा hi दिया मेने इस बच्चे के अंदर का जंवरर तैयार हो जा कम्मो अब तुझे एक धमाकेदार चुदाई देखने को मिलने वाली है जिसे देख कर तेरी छूट पानी पानी हो जाएगी और तू भी लुंड के लिए तड़पेगी)

रेखा- गगगगगग

रवि- क्या हुआ दीदी कुछ बोलना है क्या

रेखा अपने हाथो को रवि की जांघो पर रख देती है

रवि एक झटके के साथ अपना पूरा लुंड रेखा के मुह्ह से बहार निकल लेता है

रेखा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तू मेरे सरे छेड़ो को एक hi स्पीड से क्यों छोड़ता है रे कमीने अपनी दीदी के मुह्ह पर तो थोड़ा रेहम किया कर

अगले hi पल रवि दुबारा से एक झटके के साथ अपना पूरा लुंड रेखा दीदी के हलक तक पेल देता है

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रवि- तुम्हारा मुँह तो तुम्हारी छूट और गांड से भी ज्यादा गर्म है दीदी क्या क्रू जब जब तुम्हारे मुह्ह में लुंड डालता हु तो मैं करता है की इसे तुम्हारे गले के भी निचे उतार दू

रेखा- गगगगग

असल में तो रेखा भी यही कहती थी की रवि को पुरे जोश में ले आये ताकि उसके अंदर के जानवर को चुदाई करता हुआ देख कर कम्मो भी सोच में पड़ जाये की रवि से छुड़वाना है या बचना है

इधर कम्मो अभी तक कच्ची नींद में hi थी

रेखा के मुह्ह से निकलती आवाज लगभग कम्मो के कानो तक्क पहुंच रही थी जो बार बार उसे परेशान कर रही थी आख़िरकार कम्मो अपनी आँख खोलती है और सामने का नजारा देख कर उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

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सामबे रेखा दीदी और रवि पूरी तरह से नंगे थे और रवि ने अपने दोनों हाथो से रेखा दीदी के सर को पकड़े हुए था और फुल स्पीड के साथ रेखा दीदी के मुह्ह को लगातार चिड़े जा रहा था

मुहचुड़ै की वजह से रेखा के मुह्ह से लगातार थूक गुरे जा रहा था उसके मुह्ह से गुग्गूग की आवाजे आ रही थी पर जैसे रवि को कोई फरक hi नबी पड़ता था वो तो अपने हर्र झटके के साथ अपने लुंड को रेखा दीदी के मुँह में और अंदर तक पेलने की कोशिश कार्र रहा था

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अचानक. से ये नजारा देख कर तो जैसे कम्मो को समझ hi नहीं आ रहा था की आखिर ये हो क्या रहा है

कम्मो कभी अपनी आँखों को खोलती तो कभी बंद करती मनो उसे ऐसा लग्ग रहा था जैसे की वो कोई सपना देख रही हो

कम्मो को अब तक यकीन हो चूका था की ये कोई सपना नहीं है और उसकी रेखा दीदी आज अपने असली रान्दीपने पर उतर आयी है.......
 
अपडेट-102

रवि लगातार अपनी रेखा दीदी के मुँह को चोदे जा रहा था

उसके अंदर का जानवर अब पूरी तरह आजाद हो चुका था

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एक झटके के साथ रवि रेखा के बालो को पकड़ कर उसे खड़ा कर देता है

रवि- उठ जा साली मेरी रैंड दीदी कितना चूसेगी मेरे लुंड को चूस चूस कर hi निचोड़ देगी क्या इसका पानी अभी तो तुम्हारी गांड में ब्बि डालना है इसी

रेखा- ahhhhhhhhhh

रवि रेखा दीदी को दिवार के शेयर खड़ा कर देता है और पीछे से उसकी गांड के दोनों पतों को फैलता हुआ अपना मुह्ह सीधा रेखा की गांड के बच घुसा देता है

रेखा - अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

कम्मो को तो मनो सांप सूंघ गया था उसे समझ hi नहीं आ रहा था की हो क्या रहा है या वो क्या करे इस नजारे को देखने के बाद उसकी आँखों के सामने hi उसका छोटा भाई उसकी दीदी के मुँह की चुदाई कर रहा था

कम्मो( हे भगवान् रवि कैसे बेरहमी के साथ रेखा दीदी के मुह्ह को छोड़ रहा है )

कम्मो की कुवारी छूट अबतक गिला होना श्री हो चुकी थी

अभी कम्मो कुछ करती उससे पहले hi रवि रेखा के बालो को पकड़ता हुआ अपना उसकी गांड अपना लुंड पेल देता है

रेखा- अह्हह्ह्ह्ह मा धीरीईए डालल रे कमीनी

रवि- साली गांड मरवाने की शौखिन हो गयी है छुड़वाते छुड़वाते और अब भी बोलती है की धीरे डाल आज तो तेरी गांड पक्का फाड़ दूंगा

रेखा- नहीं रवि भगवान के लिए ऐसा मैट कर अगर आज hi तू मेरी गांड फाड़ देगा तो आगे से किसे मरेगा मेरी

रवि- तेरे तो सरे छेद hi छोड़ने लायक है दीदी पारर क्या कृ तेरी इस मस्तानी गांड पारर मेरा डिल आ गया है

कम्मो( हे भगवन ये दोनों कितनी गन्दी गन्दी बाटे कर रहे है कहि से भी नहीं लग रहा की रवि अपनी hi रेखा दीदी को छोड़ रहा है )

कम्मो की छूट पानी पानी हुई जा रही थी उसका मैं तो खूब कर रहा था की अपने भाई बेहेन की चुदाई देख कर आज वो अपनी छूट को रगड़े पर वो जानती थी की ये रेखा दीदी की hi एक चल है

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रवि के झटको की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी

रेखा- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह अहहहहहहमायऑस रवि बहुत दर्द हो रहा है तू सुबह से मेरी गांड के hi पीछे पड़ा हुआ है कुछ तो रेहम कर आखिर मैं भी तेरी दीदी हु

रेखा इतना नाटक सिर्फ और सिर्फ कम्मो को दिखने के लिए कर रही थी असल में वो रवि के अंदर के जानवर को कम्मो को दिखाना कहती थी ताकि कम्मो सपने में भी रवि के करीब आने की कोशिश न करे और अपनी जवानी की आग में जीवन भर जलती रहे

रवि- चुप कर साली रेहम और तुझ पर तू मेरी दीदी है इसी लिए तो तुझ पर रेहम नहीं आता और ऊपर से इतनी भरी गांड लेकर घर में मटकती रहती है मेरा बास चले तो दिन भर घर में तुझे नंगा hi रखु और जब मैं करे तब तेरी गांड मारू

साला जितना तेरी गांड को छोड़ो तेरा छेद उतना hi तीते होता जाता है

रेखा - अह्ह्ह्हह हहहह मतलब तू अपनी दोनों दीदियो के सामने hi मुझे छोड़ देगा

रवि- तू दीदियो की बात कर रही है मैं तो तुझे पुरे गाओं के सामने भी छोड़ दूंगा अब मुझे तेरी गांड की लत्त लग गयी है जो इतनी आसानी से नहीं जाने वाली

रेखा- अह्ह्ह्ह माआ मर्डर गयी

कमीने कुछ तो शर्म कर तू मेरी गांड मेघा और कम्मो के सामने hi मरेगा तेरी इतनी हिम्मत हो गयी

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रेखा जान भुझ कर रवि को लगातार उकसाये जा रही थी

रवि- अह्ह्ह्हह दीदी क्या मस्त है तेरी गांड तुझे एक दिन मैं जरूर अपनी दीदियो के सामने छोडूंगा और वो देख सामने hi कम्मो दीदी सोई हुई है

रेखा- अह्ह्ह्ह रवि धीरे छोड़ कहि कम्मो उठ न जाईए अगर वो उठ गयी तो बवाल कर देगी

रवि और रेखा दोनों जानते थे की अब तक कम्मो उठ चुकी है

रवि- अह्ह्ह्ह मुझे किसी की चिंता नहीं है अगर कम्मो दीदी उठ भी गयी तो उसके सामने hi तुझे पटक पटक कर छोडूंगा

और अगर ज्यादा नाटक करेगी तो कम्मो दीदी को भी पटक कर वही उसकी गांड में अपना लुंड दाल दूंगा

रेखा- बेशरम पापी तू क्या अपनी तीनो दीदियो को छोड़ना कहता है कुछ तो सोच हम सब तुझसे बड़ी है और तेरी सगी दिदिया है

रवि- तुम तीनो मेरी दिदिया हो इसी लिए तो तुम तीनो को छोडूंगा अब जिंदगी भर तुम तीनो के छेड़ो पर सिर्फ और सिर्फ मेरा हक़्क़क़ होगा और तुम तीनो की चुदाई कोई करेगा तो वो सिर्फ रवि hi करेगा समझी साली

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रेखा - कल को मेरा पति होगा तो मुझे सिर्फ वो hi छोड़ेगा समझा तू कमीने

रवि- बड़ा नाटक करती है साली तू सुन्न ले अगर तेरी शादी हुई भी तो तेरे घर आकर दिन भर तुझे तेरे पति के सामने hi पटक पटक कर छोडूंगा समझी

ये सब बाटे सुन्न कर कम्मो का गला सूखने लगा था और गले का पानी उसकी छूट तक्क उतर आया था

रवि एक झटके में रेखा की गांड से अपना लुंड निकल लेता है और उसके बालो को पकड़ता हुआ आंगन के बीचो बिच ले आता है

झा कम्मो लेती हुई थी

रवि- आज तो दीदी तुझे अपने hi घर के आंगन में छोडूंगा

रेखा- रवि में हाथ जोड़ती हु चल कमरे में चलते है कहि कम्मो जाग न जाये तू मुझे उसके इतने नजदीक छोड़ेगा तो हमारी चुदाई की आवाज सुन कर वो पक्का जाग जाएगी

रवि- अरे जगती है तो जागने दो उसे भी तो पता चले की उसकी दीदी उसके चीते भाई से मजी से गांड मरवा रही है

रवि- तुम कम्मो दीदी की चिंता छोड़ो और पहले मेरे लुंड को साफ़ करो

तेरी छूट की तरह तेरी गांड से भी सफेद सफ़ेद मलाई बहार आती है छोड़ने के टाइम

रेखा - कपडे से साफ़ करले तू खुद्द hi

रवि- इतनी मस्त दीदी और उसका उतना hi गरम मुह्ह सामने नंगी पड़ी है और मैं कपड़े से लुंड साफ़ क्रू

इसे छत्त कर साफ करो

रेखा - चींईईई कितना गन्दा है तू मेरी hi गांड से निकली मलाई मुझे hi चटायेगा तुझे शर्म नहीं आती तू जिसे छोड़ रहा है वो तेरी दीदी है कमीने

रवि- बहुत नाटक करती है साली तू छुड़वाने के टाइम चल नुचे झुक और इसे मुह्ह में ली

रेखा जैसा कहती थी रवि बिलकुल वैसा hi कर रहा था बल्कि रवि तो 2 कदम और आगे था रेखा की सोच से

रवि एक झटके में रेखा को घुटनो के बल बिठा देता है और अगले hi पल रेखा की गांड की मलाई से सना हुआ लुंड सीधा उसके मूँह में ठुस्स्स देता है

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रेखा भी एक अच्छी दीदी का फरज़ज़ निभाते हुए एक मिनट में hi रवि के लुंड पारर लगा सारा काम रास छत्त जाती है

रवि- अह्ह्ह क्या मस्त लुंड चुस्ती है दीदी तू मैं तो करता है की तेरे मुह्ह में hi झाड़ जाऊ पर आज मेरा मात्र है की तेरी गांड को पूरी तरह भर दू अपने वीर्य सीए अह्ह्ह रुक जा दीदी नहीं तो मैं अभी झाड़ जाऊंगा

अगले hi पल रवि अपना लुंड रेखा के मुँह से बहार खींच लेता है और रेखा को कम्मो की खत पर झुकता हुआ घोड़ी बना देता है

Kammo(hey भगवान् ये दोनों कितनी गन्दी तरह चुदाई कर रहे है ये कैसे भाई बेहेन है रवि तो बच्चा है रेखा दीदी काम से काम आप तो कुछ शर्म करो अपने hi छोटे भाई से इतने गंदे काम करवा रही हो)

अभी कम्मो कुछ और सोचती उससे पहले hi रवि अपना लुंड एक झटके के साथ रेखा दीदी की गांड में पेल देता है

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रेखा- अहह माँ मर्डर गयी कमीने छोड़ना hi है तो धीरे छोड़ ले जान निकलेगा क्या

दर्द के मरे रेखा तुरंत hi कम्मो का हाथ पकड़ लेती है और कम्मो जो आँखे बंद किये हुए पड़ी सब तमाशा देख रही थी एक झटके के साथ hi उसकी आँखे खुल जाती है

और जैसे hi कम्मो की नजरे रेखा दीदी की नजरो से मिलती है रेखा अपने चेहरे पर दर्द के साथ साथ एक मुस्कान दिखती हुई कम्मो को आँख मार देती है

रवि- अह्ह्ह्हह दीदी तेरी गांड मेरे लुंड को निचोड़ रही है मैं कर रहा है की पूरी रात तेरी गांड में hi अपना लुंड डेल पड़ा रहु

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हर झटके के साथ कम्मो की खत और जोर से हिल रही थी और रेखा दीदी कम्मो के हाथ को अपने दोनों हाथो से पकडे हुए कम्मो को अपनी गांड चुदाई का दर्द बया कर रही थी

रेखा- हे भगवान् तू कब्ब टककक छोड़ेगा मुझे छोड़ दे रवि मुझे मेरी गांड का छेड़ भट्ट दररड हो रहा है मैं करे तो मेरी छूट में अपना ये गधे जैसा लुंड दाल कर मुझे छोड़ ली

रवि- आज तो मैं तुम्हारी गांड hi छोडूंगा दीदी आज इस छेद के अलावा कोई और छेद नहीं छोड़ना मुझे

रेखा- कम्मो तू hi बचा ले मुझे देख न कैसे जानवरो की तरह ये कमीना मेरी गांड का छेद छोड़ रहा है तुझे पता है आज दोपहर से शाम तक्क खेतो में भी इस कमीने ने सिर्फ मेरी गांड hi मरी है

कम्मो लगातार रेखा को hi देखे जा एही थी जिसके चेहरे का दर्द कम्मो को समझ अस रहा था पर उस दर्द के पीछे की चतुराई भी वो जानती थी

करीब 10 मिंट टक्क रेखा दीदी की गांड मरने के बाद रवि हफ्ता हुआ झड़ने लगता है और 2 मिंट तक अपनी रेखा दीदी की गांड को अपने वीर्य से भरता चला जाता है

झड़ने के बाद रवि थोड़ा शांत हो चूका था और जब उसकी नजर कम्मो दीदी पर पड़ती है जो खुली आँखों से सबब देख रही थी वो तुरंत hi पतली गली पकड़ता हुआ कमरे में चला जाता है

रेखा अपने सर को कम्मो के ोएत ओर राखी हुई अपनी सांसे दुरुस्त कर रही थी और कुछ पल बाद रेखा संडास करने की अवस्था में बैठ जाती है

रेखा- देखा न कम्मो तूने कैसे इस कमीने ने मेरी गांड की धज्जिया उड़ा दी मैं तो बोलती हु बच कर रहना इस कमीने से नहीं तो एक दिन पटक कर तुझे भी छोड़ देगा फिर मैट कहना की दीदी आपने बताया नहीं पहले

कम्मो को तो समझ hi नहीं आ रहा था की वो कुछ बोले भी या नहीं

रेखा - देख मेरी गांड से कैसे रवि का वीर्य बह रहा है मैं तो थक गयी हु मेरी प्यारी बेहेन दिन भर अपने छोटे भाई से गांड मरवा कर तू अपनी दीदी का एक काम कर देना इसे साफ़ कर देना और कहि चाट मैट लेना इसे पार्षद समझ कर

रेखा उठती हुई कम्मो का माथा चुम लेती है

रेखा- सजा मेरी प्यारी बेहेन सजा

ये बोलकर रेखा जाने लगती है और अगले hi पल वो पलट कर दुबारा कम्मो के कानो के नजदीक पहुंच जाती है

रेखा- तुझे पता है आज मैंने तुझे ये चुदाई क्यों दिखाई

ताकि तू कल जाकर नीलम को सब बता सखे उसे बता देना की रवि ने रेखा दीदी को कैसे जानवरो की तरह छोड़ा

रेखा फिर से जाने का नाटक करती है और अगले hi पल फिर से पलट जाती है

रेखा - अरे एक बात तो मैं बताना भूल hi गयी तुझे वैसे रवि ने उस नीलम से तो बदला ले लिया है शायद तुझे नहीं पता होगा मैं बता देती हु

रवि ने उसे इतनी. बुरी तरह छोड़ा है की कुछ दिन तक्क तो वो अपने बाप और भाई से भी नहीं चिड़वा पायेगी

और तू ये मैट सोचना की तू बच जाएगी बस मैं ये सोच रही हु की तुझे तेरी इस गलती की क्या सजा देनी है बाकि तू घबड़ा मैट नीलम की तरह मैं रवि से तुझे नहीं छुडवाउंगी क्योंकि मैं कहती हु की तू जिंदगी भर लुंड के लिए तरसती रहे और होगा भी यही

और कहि ये मत सोचना की तू अपनी चढ़ती जवानी दिखा कर रवि का लुंड हासिल करने में कामयाब हो जाएगी ऐसा सोचना भी मैट वो पूरी तरह से मेरे काबू में है मैं जिसे कहूंगी जब कहूंगी वो छोड़ेगा समझी

रेखा की बाटे सुनकर कम्मो की आँखों में आंसू आ चुके थे

रेखा कम्मो का दुलत्ता लेकर अपने शरीर पर लपेट लेती है

और अपनी चूड़ी हुई गांड मटकती हुई कमरे के अंदर जाने लगती है

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कम्मो की आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे

कम्मो( हे बहगवां तूने क्यों दी मुझे ऐसी किस्मत अगर बनाना hi था तो मुझे भी रेखा दीदी के जैसा बना देता जो अपने hi छोटे भाई के साथ अपनी प्यास बुझा रही है ऊपर से ये मेरी कमीनी दीदी मेरा जीना हराम करके रखा है बड़ी मुश्किल से अपना मन पक्का किया था रवि के साथ मस्ती करने का अब तो इसकी वजह से वो भी नहीं मिलेगा)

कम्मो अपनी किस्मत को कोसती हुई सो जाती है

कम्मो ने भगवान् को कोशा जरूर था ओर वो ये नहीं जानती थी की बहगवां ने उसकी किस्मत भी सोने की कलम से लिखी है और उसकी किस्मत में सिर्फ चुदाई hi चुदाई है बस सही समय आने का इन्तजार था.....
 
अपडेट-103

पिछली रात रेखा ने वो साडी लकीरे लाँघ दी थी जो उसे इस घर में खुल कर छुड़वाने से रोके हुई थी

हलाकि कम्मो पहले से hi जानती थी की रेखा दीदी रवि से अपनी छूट और गांड मरवाती है और अपनी प्यास बुझती है

पर पिछली रात रेखा दीदी ने कम्मो को साफ़ साफ़ दिखा दिया था की रवि उसे किस तरिके से और कैसे छोड़ता है

असल में इतना बड़ा लुंड वो भी पागल पैन के साथ अपने छेड़ो में लेना रेखा के अलावा किसी और के बास की बात भी नहीं थी और ये बात कम्मो भी समझ चुकी थी

रात को जब रेखा कमरे में पहुंची तो रवि

पहले hi सो चूका था

रेखा आज रवि पारर बहुत कुश थी क्योंकि वो कम्मो को जितना दिखाना कहती थी रवि की बदौलत वो उससे कहि ज्यादा दिखा कर आयी थी

रेखा बड़ी hi बेशर्मी के साथ नंगी hi सो जाती है बस अपने शरीर पर कम्मो का वो पतला सा दुपट्टा दाल लेती है

मनो उसे अब कोई फ़िक्र hi नहीं थी की उसके साथ कमरे में मेघा दीदी भी सोई हुई है

रात भर रेखा मजे से नंगी hi सोई रहती है

बस फर्क इतना था की वो आधी रात को एक चादर ओढ लेती है

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किस्मत से आज मेघा दीदी की आँख सांसे पहले खुल जाती है

जैसे hi वो उठ कर बैठती है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रेहह जाती है

क्योंकि रेखा ने अपने आपको छुपाने के लिए जो चादर डाली हुई थी वो पूरी तरह हट चुकी थी और उसकी छूट से लेकर चुकी तक्क सबब साफ़ साफ़ नजर आ रहा था

मेघा( हे भगवांन ये घोड़ी नंगी क्यों सोई हुई है कितनी बेशरम है रे रेखा तू कुछ तो शर्म कर तेरा छोटा भाई तेरे बगल में hi सोया है )

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मेघा दीदी के नजर रवि के ऊपर डालती है जो पीठ के बल लेता हुआ था और उसकी धोती में बना तम्बू साफ़ साफ़ मेघा दीदी को नजर आ रहा था जिसे देल्हते hi मेघा दीदी की सुखी हुई छूट एक सेकंड के अंदर hi पानी पानी हो जाती है

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मेघा ( हे भगवान् ये रवि का लुंड सुबह सुबह खड़ा क्यों है कहि इसने रात को रेखा को नंगा तो नहीं देखा )

मेघा तुरंत hi उठती हुई रेखा के करीब जाती है और धीरे धीरे आवाज देती हुई रेखा को उठाने लगती है

मेघा- रेखा रेखा रेखा उठ

रेखा - क्या हुआ दीदी सोने दो ना

मेघा- अरे बेशरम खिङकी उठ जल्दी

रेखा एक झटके के साथ उठ कर बैठ जाती है बिलकुल नंगी

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रेखा अभी अपनी आँख hi मॉल रही थी की मेघा दीदी एक हाथ से उसकी चुकी मसल देती है उसे होश में लेन के लिए

रेखा- अह्ह्ह्ह दीदी

जब रेखा की आँखे पूरी तरह से खुलती है तो उसे अहसास होता है की उससे कितनी बड़ी गलती हो गयी है

वो बिलकुल नंगी hi मेघा दीदी के सामने बैठी हुई थी

रेखा रोज hi देखती थी की मेघा दीदी 8 बजे से पहले नहीं उठती पारर आज तो ुस्लि किस्मत hi लहराब निकली जो सबसे पहले मेघा दीदी hi उठ गयी

मेघा- क्यों री बेशरम तुझे कोई लाज शर्म है ये नहीं

रेखा जानती थी की गलती तो उससे हुई है पारर अब इस गलती में भी उसे एक अवसर नजर आने लगा था

रेखा का शातिर दिमाग अंदर hi अंदर एक प्लान तैयार कर रहा था

रेखा - क्या हुआ दीदी इतने गुस्से में क्यों हो

मेघा- गुस्से में मेरा बास चले तो अभी तुझे चप्पलो से मरू

रेखा - पारर हुआ क्या दीदी

रेखा अपने नंगे शरीर को छुपाने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी और वासी hi अपनी दोनों टंगे खोले मेघा दीदी की गलियां सुन्न रही थी

मेघा- तेरे बगल में तेरा छोटा भाई सोया है और तू रात भर नंगी hi सोई हुई थी

रेखा - दीदी क्या क्रू आज कल मुझे गर्मी hi इतनी लगती है

मेघा- गर्मी तो संको hi लगती है तू क्या अनोखी है क्या रे

रेखा- दीदी आपकी बात अलग है आप अपनी जवानी की गर्मी पहले hi निकाल चुकी हो जीजाजी के साथ मेरी सोचो 30 साल की हो गयी हु आज तक्क किसी मरद्द ने मुझे चुवा तक्क नहीं

मेघा दीदी की नजर तुरंत hi रेखा की छूट पर चली जाती है

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मेघा( इसकी छूट को तो देख कर लग्ग रहा है मनो दिनन रात चुदवाती हो )

मेघा- तो तुझे किसी मर्द ने नहीं चुवा तो क्या अपने छोटे भाई के सामने नंगी hi सोयेगी तू

रेखा- अरे दीदी गर्मी ज्यादा लग्ग रही थी रात को तो इस लिए मेने सरे कपडे उतर दिया और मेने चादर ोधी तो थी

मेघा- है और वो छोटी सी चादर क्या तेरा ये गदराया हुआ शरीर धक् पायी

रेखा - अब दीदी आप hi बताओ मैं क्या कृ एक तो गर्मी ऊपर से ये जिस्म की गर्मी मैं आपको क्या बताऊ कभी कभी तो मैं करता है की उस नीलम के बाप से hi जाकर छुड़वा लू

मेघा- अरे कमीनी इसमें चुदाई की बात खा से आ गयी

रेखा - दीदी वही तो समझा रही हु ये साडी गर्मी मेरी छूट से hi बहार निकल सकती है इसीलिए तो सरे कपडे उतर कर सोई थी

मेघा- सच में तू बड़ी बेशरम है रे

रेखा - लो दीदी इसमें बेशरम की क्या बात है

मैं कोनसा कहि बाजार थी अपने hi घर में तो नंगी सोई थी इसमें क्या हो गया

मेघा- अरे काम से काम ये तो देख की रवि भी यही पर है

रेखा- दीदी आप उसकी इतनी चिंता ना करो वो तो बच्चा है उसे क्या पता की क्या छूट होती है और क्या चुकी आप बिना मतलब के hi इतनी चिंता कर रही है

मेघा- अच्छा मैं बिना मतलब के चिंता कररर रही हु और क्या खा तूने रवि बच्चा है उसे कुछ नहीं मालूम तो फिर ये क्या है

मेघा दीदी अबतक रवि और रेखा के बिच में बैठी हुई थी जिसकी वजह से रखा को अबतक रवि का खड़ा लुंड दिखाई नहीं दिया था

और जैसे hi रेखा की नकार रवि के लुंड ओर पड़ती है वो अनजान बनती हुई अपना मुह्ह खोल देती है जैसे उसने आज से पहले कभी रवि का लुंड देखा hi न हो

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रेखा- हे भगवान् ये क्या है दीदी इसका लुंड कितना बड़ा है

मेघा- चुप्प बेशरम मैं तुझे ये इसीलिए दिखा रही हु ताकि तू आगे से थोड़ा ध्यान दे अपने कापड़ी पारर रात को मुझे तो ऐसा लग्ग रहा है की कहि रात को तुझे रवि ने नंगा न देख लिया हो

रेखा- दीदी अगर देखा भी होगा तो उसमे इतनी चिंता की क्या बात है मैं दीदी हु उसकी और वो भाई है मेरा

मेघा- तू सच में बेशरम है रे

रेखा- दीदी इसका लुंड भले hi गधे जैसा है पर दिमाग से ये बच्चा है आप मेरा यकीन करो

मेघा- है रे जानती हु बहुत शरीफ बच्चा है रवि

रेखा ( अब क्या बताऊ दीदी आपको की आपका छोटा भाई कितना शरीफ है इतना शरीफ है की कल दिन भर में 6 बार मेरी गांड और छूट मार मार कर मुझे अपने लुंड का पानी पीला चूका है )

रेखा- दीदी एक बात बताऊ आज मेने पहली बार किसी ला लुंड देखा है वो भी इतना बड़ा

मेघा- हट भूल मैट वो तेरा भाई है

रेखा - दीदी वही तो याद है नहीं तो अबतक तो मैं इतना बड़ा लुंड देख कर टूट पड़ती उसपर

मेघा- जानती हु रे तेरी मज़बूरी पर थोड़ा ध्यान दिया कर अपने कपड़ो पारर

रेखा- ठीक है दीदी मैं आगे से ध्यान दूंगी

पारर दीदी आपको क्या लगता है की हमारा छोटा भाई क्या सपना देख रहा होगा जो इसका ये गधे जैसा लुंड एक दम सीधा खड़ा हो

मेघा- कुछ भी देख रहा हो उससे तुझे क्या करना

रेखा - दीदी मुझे तो लगता है की ये सपने में भी किसीको पटक कर छोड़ रहा होगा

शयना कुत्ता गु खता है

यही रेखा के साथ भी हुआ वो बकते बकते सपने में भी बोल गयी जिसका अहसास उसको अगले hi पल हो जाता है

वो तो गनीमत थी की मेघा दीदी बे उसकी इस बात पर इतना ध्यान नहीं दिया नहीं तो उसकी पोल अभी तक्क खुल जाती

मेघा- नहीं रे इसे क्या आता की चुदाई क्या होती है

असल में सुबह सुबह रेखा से इतनी गरम गरम बाटे करके मेघा दीदी खुद भी गरम हो चुकी थी और उनकी छूट लगातार पानी चिड़े जा रही थी

मेघा- चल अब उठ कर कपडे पहने ले नहीं तो अभी तक्क तो मेने hi तुझे इस अवस्था में देखा है अगर कम्मो में देख लिया तो न जाने हम दोनों के बारे में क्या hi सोचेगी वो मुई

रेखा - दीदी एक बात बोलू

मेघा- हां बोल जल्दी

रेखा- दीदी आज तक्क मैंने किसी का लुंड नहीं चुवा और अब तो लगता है की जिंदगी भर चुदाई के लिए तड़पते रहना होगा तो क्या मैं सिर्फ एक बार रवि का लुंड छू कर देख लू

मेघा- तू पागल है क्या वो तेरा छोटा भाई है

असल में तो मेघा खुद भी रवि का लुंड इस वक़्त पकड़ना कहती थी और वो रेखा की तड़पन को भी समझ सकती थी

रेखा- दीदी बास एक बार दीदी

मेघा- चुपचाप कपडे पेहेन पहले

रेखा- दीदी मैं आपके हाथ जोड़ती हु क्या पता मुझे फिर जिंदगी में कभी लुंड देखना नसीब हो या न हो आज बस एक बार पकड़ कर देख लेने दो

मेघा- अरे पागल अगर रवि उठ गया तो क्या सोचेगा

रेखा- दीदी नहीं उठेगा द्केहो न कैसे घोड़े बेच कर सोया हुआ है

बस एक पल के लिए मैं पकड़ कर छोड़ दूंगी उसका लुंड

मेघा- अच्छा ठीक है पहले कपडे पेहेन जल्दी

रेखा का प्लान कम् कर रहा था और उसको इस वक़्त अपने शातिर दिमाग पारर भट्ट घमंड हो रहा था जिसका अंदाजा रेखा के चेरे पारर साफ नजर आ रहा था

रेखा तुरंत hi कपडे पेहेन लेती है

रेखा - दीदी अब पकड़ लू

मेघा- चल जल्दी कर

रेखा- दीदी इसकी धोती भी हटा दू

मेघा- तू मार खायेगी मुझसे

रेखा - दीदी बस एक बार की तो बात है

मेघा- चल ठीक है जल्दी कर कहि ये जग्ग न जाये

रेखा तुरंत hi झुकती हुई रवि की धोती की गांठ खोल देती है और एक झटके के साथ उसका विशाल लुंड दोनों दीदियो के सामने नंगा हो जाता है

मेघा( है राम क्या लुंड है मुह्ह में पानी आ गया)

रेखा मेघा दीदी की नजरो को भाप चुकी थी क्योंकि मेघा दीदी की नजरे मनो रवि के लुंड पारर गड्ड सी गयी थी

रेखा( क्या हुआ दीदी मुह्ह में पानी आ गया क्या रवि का लुंड देख कर चिंता मैट करो दीदी मैं जो भी कर रही हु वो सब आपके लिए hi कर रही हु ताकि मेरे साथ साथ आप भी जी भर कर अपनी चुदाई करवा स्खो रवि से)

रेखा - क्या हुआ दीदी खा खो गयी

मेघा- ये तो सच में बहुत बड़ा है रे रेखा

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रेखा- है दीदी सच में ये धोती के बहार तो और भी विकराल दिखाई दे रहा है

रेखा अपना हाथ आगे बढ़ती हुई सीधा रवि के लुंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ लेती है और एक बार उसकी चमड़ी को निचे खुचटी हुई मेघा दीदी को रवि के काळा लुंड का लाल सूपड़ा दिखा देती है

जिसे देखते hi मेघा दीदी के मुह्ह से लार्जर टपक जाती है

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पानी तो रेखा के मुह्ह में भी आ रहा था और वो अगर थोड़ा सा और झुकती तो रवि का लुंड सीधा उसके मुह्ह के अंदर घुस जाता

पर रेखा कोई भी जल्द बाज़ी नहीं करना कहती थी जिसकी वजह से मेघा दीदी नाराज हो जाये

मेघा- अब क्या उसका पानी निकल कर छोड़ेगी छोड़ दे उसका लुंड

रेखा तुरंत hi रवि का लुंड छोड़ देती है और उसकी धोती को भी सही कर देती है

पर मेघा दीदी की नजरे अब भी उस तम्बू पर hi तिकी हुई थी

रेखा- क्या हुआ दीदी आपको भी पकड़ना है क्या एक बार रवि का लुंड

मेघा- नहीं नहीं मुझे नहीं पकड़ना

( आज खेतो में जब खाना लेजर जाउंगी तो जी भर कर पकड़ूँगी इसका लुंड और पूरा निचोड़ दूंगी )

रेखा- कसम से दीदी पहली बार किसी मर्द का लुंड पकड़ कर मजा आ गया और तो और वो लुंड जिसे मेने जिंदगी में पहली नार चुवा है वो मेरे छोटे भाई का hi था

सच बताऊ तो दीदी एक अजीब सा मजा आया मुझे इसका लुंड पकड़ कर

मेघा- भूल मैट तू दीदी है उसकी

रेखा - है दीदी याद है मैं दीदी हु उसकी और वो भाई है मेरा

ये बात बोलते वक़्त रेखा अपना मुह्ह थोड़ा गुरा देती है मनो वो मेघा दीदी को दिखाना कहती थी की वो अब रवि के लुंड की दीवानी हो चुकी है

मेघा( मैं जानती हु तेरा बस चले तो तू अभी इसे अपनी छूट के अंदर घुसा ले )

रेखा- दीदी अब तो कपडे पेहेन लिए थोड़ी देर और सो जाऊ मैं थकी हुई हु

मेघा- रात भर क्या पहाड़ तोड़ रही थी जो थक गयी है घोड़ी तू

रेखा- कुछ ऐसा hi समझ लो दीदी

मेघा- चल सो जा मैं भी थोड़ी देर सो लेती हु और दुबारा मत चुना इसके लुंड को कहि जाग गया तो क्या सोचेगा की उसकी दोनों दिदिया उसके साथ कितना गन्दा गन्दा काम कर रही है

रेखा ( दीदी सोचेगा नहीं तुम एक बार उसे ह्री झंडी दिखा दो फिर देखन जितना गन्दा तुमने सपने में भी नहीं सोचा होगा उससे भी गंदे तरिके से तुम्हे छोड़ेगा मेरा घोडा)

दोनों बहने रवि के आजु बाजु लेत जाती है और दोनों के मुँह रवि के लुंड की तरफ hi थे और दोनों की दोनों बेशर्मो की तरह एक तक रवि के खड़े लुंड को घूरे जा रही थी

इधर बहार कम्मो अभी अभी सो कर उठी थी की तभी बहार दरवाजे पर दस्तककक होती है

कम्मो- हे भगवन कोण है इतनी सुबह सुबह जो दरवाजा पीट रहा है

कम्मो उठ कर जैसे hi दरवाजा खोलती है उसका मुह्ह खुला का खुला रह जाता है

दरवाजे के बहार एक आदमी के साथ एक औरत खड़ी थी जो काफी सजी हुई थी मात पर बिंदी मांग में सिंदूर एक दम गजब लग्ग रही थी

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कम्मो दौड़ कर उस आदमी के गले लग्ग जाती है......
 
अपडेट-104

झा एक तरफ कम्मो काफी दिनों से अपनी दीदी द्वारा की जा रही हरकतों से परेशान होकर एकदम निराश हो चुकी थी

एक hi पल में उस आदमी को देखते hi उसके चेहरे पर वही चमक लौट आती है जो असली कम्मो के चेहरे पर हमेशा से चमचमाती रहती थी

क्योंकि सामने कोई और नहीं बल्कि उसका बड़ा भाई केशव खड़ा था जो सीधा 5 सालो बाद अपने घर की और लौटा था

उसकी सब बहनो में से कम्मो उसकी पसंदीदा बेहेन थी क्योंकि वो केशव से छोटी थी तो केशव अपनी छोटी बेहेन को लाड प्यार भी खूब किया करता था

कम्मो दौड़ कर केशव के गले लग जाती है

उसकी तो मनो उजड़ी हुई दुनिया दुबारा से बास गयी हो

कम्मो- भैया आप खा चले गए थे मुझे अकेला छोड़ कर आपको मेरा जरा भी ख्याल नहीं आया भइया आपको पता है मैं आपसे कितनी गुस्सा थी आपके जाने के बाद आप ीक बार मुझसे मिलने तक्क नहीं आये

असल में केशव अपनी आर्थिक तंगी से परेशान रहता था उसे पता था की अगर वो कुछ नहीं करेगा तो उसकी बहनो की कभी शादी नहीं हो पायेगी और इसी सोच के साथ उसने अपना घर छोड़ा था ताकि वो कुछ पैसे कमा कर अपनी बहनो की शादी कर सके पर शायद किस्मत को तो कुछ और hi मंजूर था

केशव को शुरुवात में नौकरी तो मिली पर तनख्वाह काफी कम्मं मिली और गुजरे लायक पैसा जैसे तैसे वो कमा पाया इसी बिच उसकी मुलाकात रामलाल से हुई जो उसकी hi कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता था

रामलाल को केशव एक बहुत hi शरीफ और सुलझा हुआ लड़का लगा अक्सर रामलाल केशव को अपने घर खाने पर बुलाता झा उसकी मुलाकात रामलाल की बेटी मल्टी से हुई और मुलाकात कब प्यार में बदली किसी को पता hi नहीं चला

पर रामलाल इस रिश्ते से काफी खुश था क्योंकि उसे पता था की उसकी बेटी मल्टी के लिए केशव से अच्छा लड़का ढूंढने से भी नहीं मिलेगा और जल्द से जल्द रामलाल ने केशव की शादी मल्टी से करवा दी और केशव का घर वही सेहर में बसवा दिया

केशव हालातो के सामने मंजूर था

खा वो सोच कर आया था की पैसा कमा कर अपनी बहनो की शादी करेगा

शादी के बाद तो उसके सरे पैसे खुद के घर में लग जाते और जैसे तैसे वो उसमे hi गुजरा करता रहा और हालत के सामने उसने घुटने तक दिए

वो अपनी बहनो के लिए कुछ न कर पाया इसी शर्म से वो कभी घर नहीं लौटना कहतता था

पर उसकी बीवी मल्टी जानती थी की केशव को अपनी बहनो से कितना प्यार है वो अक्सर मल्टी से अपनी बहनो और घर की hi बाटे किया करता जैसे तैसे मल्टी ने केशव को गाओं वापस लौटने के लिए मनाया और आज केशव कम्मो को अपनी बहो में भरे अपनी आँखों से आंसू टोकता हुआ अपनी बेहेन को जी भर कर गले लगाना कहता था

रामलाल की बेटी एक दम मस्त किस्म की औरत थी उम्र उसकी 26 साल थी मल्टी का बदन समय से बहुत पहले hi भर चूका था और उसके मोहल्ले का हर आदमी उसे भोगने के चक्कर में hi रहता था पर मल्टी ने आज तक किसी को घांस नहीं डाली और अपनी सील पैक जवानी को अपने पति के लिए बचाये रखा

पर कहते है न जिंदगी में सब कुछ हमारे हिसाब से नहीं होता

मल्टी के साथ भी यही हुआ उसे पति तो बहुत प्यार करने वाला मिला पर बिस्तर में केशव अपना कमाल नहीं दिखा पता और मल्टी के गरम होने से पहले hi खुद ठंडा हो जाता

उस समय तो मल्टी को बहुत गुस्सा आता पर जैसे तैसे मल्टी अपने आपको समझा लेती और जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर दौड़ती रहती

मल्टी का फिगर लगभग 36-32-38 जिसे देख कर कई बार तो खुद रामलाल अपना लुंड मसलने पर मजबूर हो जाता पर उसने आज तक अपनी बेटी के साथ ज्यादा नजदीकियां बनाने की कोशिश नहीं की

रामलाल भी एक छोड़ू किसम का आदमी था 55 साल की उम्र में भी वो अक्सर सेहर में अलग अलग रंडियो को छोड़ा करता था

रामलाल ने अपने शरीर का बहुत ध्यान रखा हुआ था उसे देख कर कोई नहीं कह सकता था उसकी उम्र 55 साल होगी

एक बात कॉमन थी की रामलाल जिस रंडी को भी छोड़ा करता उसका बदन लगभग लगभग मल्टी जैसा hi रहता

और गलती से जिस दिन उसे उसकी बेटी के बदन जैसी रंडी न मिले तो वो बिना चुदाई के hi घर लौट आता और रंडियो को गली देता हुआ सो जाता

रामलाल के 2 बच्चे थे एक मल्टी और एक उसका बीटा हरी

हरी की उम्र 23 साल थी और अपनी जवानी के समय से hi वो गलत सांगत में पद गया और दिन भर नशे आदि करने लगा जिसकी वजह से वो समय से पहले hi बूढ़ा जैसा हो गया

( मतलब उसके लुंड की असली ताक़त ख़तम हो गयी )

रामलाल ने हरी को बहुत बार समझाया कई बार मल्टी ने भी समझाया कई बार उसकी पिटाई हुई पर उसने गलत काम नहीं छोड़ा

थक हार कर मल्टी और रामलाल ने इसे hi अपनी किस्मत समझ लिया और हरी को समझना भी छोड़ दिया

वो अक्सर चोरी चकरी करता कभी कभी तो 4-5 दिन के लिए घर से गायब हो जाता पर अब रामलाल भी उससे कुछ नहीं पूछता और वो अपनी मर्ज़ी का मालिक हो गया था

है मल्टी जरूर अपने भाई की हरकतों पर ध्यान रखती और बराबर हरी को एक अच्छा इंसान बनाने की कोशिश करती पर हरी के ऊपर उसकी दीदी की बातो का भी कोई असर नहीं होता था और जिंदगी ऐसे hi चली जाए रही थी

रामलाल ने ज्यादा पैसा तो नहीं कमाया था पर सेहर में सर्र छुपाने लायक घोसला जरूर बना लिया था

उसके घर में 2 कमरे थे एक में रामलाल और एक में हरी रहा करता था

अपने बापू के hi मकान के बगल ने मल्टी ने भी किराये का कमरा लिया हुआ था

और आज केशव सब खुश छोड़ चढ़ कर अपना जमा किया हुआ कुछ पैसा लेकर अपने घर के बहार खड़ा था ताकि वो अपनी बहनो के लिए कुछ कर सखे......
 
अपडेट-105

कम्मो केशव को देख कर बहुत खुश थी और वो अपने बड़े भाई की बहो में hi समै जाना कहती थी

थोड़ी hi देर में रेखा और मेघा दोनों कमरे से बहार निकलते है

रेखा- सच में दीदी आअज पहली बार किसी का लुंड पकड़ कर मजा आ गया और तो और वो लुंड भी गधे के लुंड जैसा था

मेघा- भूल मैट वो लुंड तेरे छोटे भाई का था

रेखा - यही तो अफ़सोस है दीदी पारर कुछ भी खो मेरी छूट में चीटिया रेंग रही है उसे पकड़ने के बाद

( सुबह हुई हरकत के बाद से hi रेखा अब मेघा दीदी से ज्यादा से ज्यादा खुल कर बात करने की कोशिश कर रही थी ताकि उसका सपना पूरा हो सके और एक hi छत्त के निचे रवि अपनी दोनों दीदियो को नंगा करके छोड़ सके)

मेघा- अरे केशव और इसके साथ ये कौन है

रेखा की नजर जैसे hi केशव पारर पड़ती है उसका सारा का सारा मदद खराब हो जाता है और वो एकदम आगबबूला हो जाती है

रेखा- अब क्या करने आया है रे कमीने तू अब क्या हमे पूरी तरह बर्बाद करने आया है तू

रेखा और मेघा दीदी को देख कर केशव का प्यार उसकी आँखों से झलक पड़ा

रेखा का गुस्सा जायज़ था क्योंकि घर को जब केशव की सबसे ज्यादा जरूरत थी तब केशव उन्हें छोड़ कर चला गया था

केशव- दीदी ऐसा नहीं है

केशव की आँखों से आंसू निकल रहे थे

रेखा- अच्छा ऐसा नबी है तो कैसा है अब क्या ये घर बेचकर वापस सेहर भागेगा तू और ये मगर माछ कर आंसू मैट दिखा इनका कोई असर नहीं होगा मुझ पारर समझा

मेघा- अरे उसे बोलने तो दे इतने दिनों बाद घर आया है और तू तो चढ़ गयी उस बिचारे पर राशन पानी लेकर

मेघा आगे बढ़ती हुई केशव को गले लगा लेती है

मेघा- आज कैसे याद आ गयी तुझे अपनी दीदियो की

केशब- दीदी याद तो मैं रोज hi करता था बस हालत ऐसे थे की समझ में hi नहीं आ रहा था की क्या कृ

रेखा- तू कुछ मैट कररर बस हमारे ऊपर अहसान कर जैसे आया है वैसे hi वापस चला जा बस

इतना बोलते हुए रेखा केशव की और हाथ जोड़ लेती है

रेखा की नजर दरवाजे के बहार खड़ी मल्टी पर पड़ती है

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रेखा- और ये किसे ले आया है तू अपने साथ

केशव- दीदी वो वो

रेखा- अब बोल भी कमीने कौन है ये औरत

केशव- दीदी ये मेरी बीवी मल्टी है

रेखा- अच्छा इसीलिए मैं सोचु एक बार सेहर जाने के बाद कभी लौट कर क्यों नहीं आया तुझे ये चुड़ैल जो मिल गयी थी जरूर इसने hi तुझे अपनी जवानी के जाल में फसा लिया होगा

मेघा- अरे रेखा तू पागल है क्या घर की बहु है वो पहली बार घर आयी है तू उसकी ऐसे बेज्जती कर रही है तेरा दिमाग खराब है क्या ऋ पागल

रेखा- दीदी देख लेना मैं सच बोल रही हु जरूर ये चड़ैल इसे पट्टी पढ़ा कर यह लायी है और इस बार ये हमारी साडी ज़मीन बेच कर फिरसे भाग जायेंगे

केशव - दीदी मैं इतना भी बुरा नहीं हु जितना आप समझ रही है

इतना शोर गुल सुनकर रवि भी कमरे से बहार आ जाता है

और जैसे hi उसकी नजर केशव पारर पड़ती है वो दौड़ कर उसकी और जाने लगता है

तभी रेखा उसका हाथ पकड़ लेती है

रेखा- कोई जरुरत नहीं है उससे मिलने की नहीं तो तू भी उसके जैसे hi हो जायेगा और एक दिन अपनी दीदियो को छोड़ कर चला जायेगा

मेघा- अरे तू तो एक दम जल्लाद बन गयी है री केशव भी हमारा hi छोटा भाई है

रेखा- मुझे नबी चाइये ऐसा भाई आप hi रखो मेरे पास रवि है मैं इससे hi खुशः हु

कम्मो( है कमीनी तुझे तो बास रवि से hi मतलब है दिन रात बस उससे अपनी छूट और गांड मरवाती रेहह बास तुझे उससे hi मतलब है बेशरम औरत )

मेघा- रवि बीटा तू एक काम कर रेखा को लेकर बाजार चला जा ये यह रहेगी तो ऐसे hi बवाल करती रहेगी

रेखा- मैं कहि नहीं जा रही

मेघा- सुना नहीं तूने मैंने क्या खा पहले मुझे पूरी बात समझ लेने दे फिर मैं तुझसे भी बात करूंगी अभी जा यह से

रवि रेखा दीदी का हाथ पकड़ता हुआ घर से बहार जाने लगता है तभी उसकी नजर अपने घर के बहार खड़ी उस औरत पर पड़ती है

मांग में सिंदूर तीखे नैन नख्श एक दम गदराया बदन

रवि को समझते देर नहीं लगती की केशव भैय्या ने शादी कर ली है

रवि एक नजर में hi मल्टी का दीवाना सा हो जाता है

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रवि और रेखा कुछ दूर आ चुके थे

रवि- दीदी आज केशव भैय्या कैसे लौट आये

रेखा का गुस्सा सातवे आस्मां पारर था

रेखा - लौटा नबी है हम सबकी गांड मरने आया है बरी बरी से मरेगा और फिर भाग जायेगा उस रैंड के साथ वापस सेहर

रवि- दीदी वो औरत कौन थी जो बहार खड़ी थी

रेखा- उसी रंडी ने तो फसा रखा है उसे अपने जाल में अब पता नहीं क्या करने आये है

रवि- दीदी मतलब केशव बहीय्या ने शादी कर्ली

रेखा - है कर्ली उसने शादी

रेखा को अब बर्दास्त नहीं हो रहा था उसका मुँह टमाटर की तरह लाल हो चूका था और इतनी गर्मी उसे कहि न कहि से तो बहार निकालनी hi थी

इस समय खेतो में जाना उसे ठीक नहीं लगा तो वो रवि को लेकर नीलम के घर की और निकल गयी

घर्र मी.......

मेघा केशव और मल्टी को घर में लेकर आती है और नई भू की तरह hi मल्टी का स्वागत करती है

मल्टी अब तक समझ चुकी थी की रेखा से अगर पन्गा लिया तो वो उसे नंगा कर देगी परर मेघा दीदी का नेटुरे देख कर वो बड़ी खुश थी

तीनो लोग कमरे में बैठे हुए थे और कम्मो बहार चाय पानी की वयवस्था करने में जुटी थी

केशव मेघा दीदी को साडी बात बता देता है की वो किस मकसद से सेहर गया था और सेहर में उसके साथ क्या क्या हुआ और कैसे वो मल्टी से मिला

मेघा- चल तू चिंता मैट कर जो होता है ठीक hi होता है

और है मल्टी तू रेखा की बातो पारर ध्यान मैट देना उसने केशव का गुस्सा तुझ पर उतर दिया

मल्टी- मैं समझ सकती हु दीदी आखिर गलती भी तो इनकी hi थी

केशव बैग में से कुछ पैसे निकल कर मेघा दीदी के हाथ में देदेता है

मेघा- ये पैसे किस लिए है

केशव- दीदी बस इतना समझ लो एहि मेरी जमा पूंजी है और मैं इन पैसो से कुछ अच्छा करना कहता हु अपने घर के लिए

मेघा- और क्या करना कहता है तू

केशव - दीदी मेरी वजह से रेखा दीदी और कम्मो की शादी नहीं हो ोायी अब मैं छठा हु की काम से काम कम्मो का तो घर बास जाये

मेघा- मतलब तू कम्मो की शादी की बात कर रहा है

केशव - है दीदी प्लीज मुझे मेरी गलतियां सुधरने का एक मौका दो

मेघा कम्मो की शादी की बात सुनकर hi खुश हो गयी थी

मेघा- अरे पर और लोगो से भी तो बात करनी पड़ेगी ना

केशव- वो तो हो जाएगी दीदी पर आप बड़ी हो आप क्या कहती हो वो तो बताओ

मेघा- मैं क्या कहूंगी मेरी छोटी बेहेन का घर बास जाये उससे ज्यादा मुझे और क्या चाहिए

मेघा दीदी की बात सुन्करर मल्टी और केशव के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है

मेघा- अरे पारर शादी के लिए लड़का भी तो देखना पड़ेगा ना

मल्टी- दीदी उसकी चिंता मैट करो वो हम दोनों ने पहले hi देख लिया है

मल्टी और केशव मेघा दीदी को मल्टी के भाई के बारे में बताते है

मेघा दीदी ये सब सुनकर बहुत खुश होती है

दरससल ये शादी वाला प्लान मल्टी ने hi बनाया था क्योंकि उसे पता था की उसके नसेड़ी भाई को कोई अपनी लड़की तो देगा नहीं और केशव की मज़बूरी का फायदा उठा कर वो उसकी एक बैहन से हरी की शादी करा देगी और क्या पता हरी शादी के बाद सच में सुधर जाये

मल्टी को अपने शातिर दिमाग पर बड़ा घमंड हो रहा था वो अंदर hi अंदर अपने आपको शाबाशी दे रही थी

इन तीनो की बाटे बहार गेट ओर खड़ा कोई चौथा आदमी भी सुन रहा था

वो थी कम्मो अपनी शादी की खबर सुन्करर मनो कम्मो के मैं में लड्डू hi लड्डू फुट रहे थे

उसके पाऊँ जमीन पारर नहीं थे ......
 
अपडेट-106

रेखा रवि को लेकर सुबह सुबह hi नीलम के घर पहुंच जाती है

रवि- दीदी हम लोग यह क्यों आये है

रेखा- तेरी इस दीदी को गर्मी साध गयी है और तुझे मेरी गर्मी उतरनी है समझा अब चल ज्यादा सवाल मत कर

घर के बहार hi हरिया बैठा हुआ चाय पी रहा था

हरिया- अरे रेखा बिटिया आज इतनी सुबह सुबह कैसे आना हुआ

रेखा( एक तो साला ये ठरकी बुद्धा हमेशा hi टोकता रहता है तेरी बेटी को छुड़वाने के लिए रवि को लेकर आयी हु हरामी)

आज रेखा का मुद सच म खराब था जिसका अंदाजा अब तक रवि को भी लग चूका था

रेखा- बस कुछ काम था क्यों मैं नहीं आ सकती क्या यह सुबह सुबह

हरिया - अरे अरे बेटी तेरा hi घर है तू जब मर्ज़ी तब आ दिन में आ कहे आधी रात को आ

हरिया( किसी दिन रात को भी आ जाया कर साली इतनी गडरा गयी है शादी तो हुई नहीं मुझसे hi अपनी प्यास बुझवा ले मस्त कर दूंगा तुझे रेखा रानी)

रेखा- नीलम है या नहीं

हरिया- वो तो अंदर hi है बेटी वो खा जाएगी

रेखा- और राजू खा है काका

हरिया- वो तो सुबह सुबह hi काम पर चला जाता है

रेखा रवि का हाथ पकड़ती हुई उसे अंदर ले जाती है

हरिया पीछे से रेखा की फैली हुई गांड देख कर अपना लुंड मसलने लगता है

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हरिया- बहगवां कसम क्या hi मस्त घोड़ी है मेरा बास चले तो इसे दिन भर घोड़ी बना कर इसकी छूट और गांड में अपना मुह्ह डेल पड़ा रहु

हरिया अपना लुंड मसलने में बिजी था तभी रेखा पीछे पलट कर देखती है

और रेखा को हरिया की हरकत साफ़ नजर आ जाती है

पर हरिया तो पैदाइशी बेशरम था वो खा अपना हाथ हटाने वाला था लुंड पर से

बस जब उसकी नजरे रेखा से मिली तो उसके चेहरे पर एक सदी हुई मुस्कान आ गयी

रेखा हरिया को देख कर अपने होठ हिलती है मनो वो हरिया को गली दे रही हो

हरिया ( अब देख hi लिया है तो इसे अपनी छूट का राष्ट भी दिखा दे बेटी फिर जितनी गली देनी होगी दे लेना )

रेखा अंदर चली जाती है और अंदर से दरवाजा सत्ता देती है

अंदर नीलम रसोई में बैठ कर खाना बना रही थी

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नीलम एक दम से रवि को देख कर डर जाती है उसकी नजरो के सामने एक पल में hi वो सरे सीन आ जाते है जब रवि ने अपनी झोपडी में उसे बेरहमी के साथ छोड़ा था

वो सब याद करके वो अंदर तक्क सेहम जाती है

नीलम- तू यह क्या करने आया है चला जा मेरे घर से

रवि - छोड़ने आया हु

चुदाई का नाम सुनते hi नीलम के कान खड़े हो जाते है उसका गला सुख जाता है और गांड फटने लगती है

नीलम- छोड़नी आया हीी कमीने एक बार की चुदाई में hi मेरी हालत खराब कर दी थी और आज तू मुझे छोड़ने आया है रुक जा अभी बापू को बुलाती हु

तभी रेखा रसोई के अंदर आती है

रेखा- अरे रुक जा नीलम क्या बात बात में अपने उस बुड्ढे बाप को बुलाती है तुझे लगता है वो मेरे इस शेर के सामने टिक्क पायेगा

नीलम- तूने सुना नहीं इसने क्या खा छोड़ने आया है ये मुझे यह पारर

रेखा- अरे मेरी शैली पहले उसकी पूरी बात तो सुन्न लेती

उसने सही खा वो छोड़ने hi आया है पारर तुझे नहीं मुझे

रेखा अब सब कुछ डायरेक्ट बोल रही थी क्योंकि वो जानती थी की नीलम पहले से hi उसके और रवि के बारे में सब कुछ जानती है

नीलम- क्या ये तुझे छोड़ने आया है वो भी मेरे घर अगर चुदाई का इतना hi शौक है तो अपने घर में जाकर छुड़वा ले ना

मेरा घर क्यों गन्दा करने आयी है

रेखा- अरे वह मेरी चुदाई से घर गन्दा हो जायेगा और उसका क्या जो तू दिन रात अपने दोनों छेड़ो में अपने बाप और भाई का लुंड डलवाये पड़ी रहती है

रेखा- छुड़वा तो मैं लेती अपने घर में hi वैसे भी तो रोज वही चुदवाती हु पारर आज न वो तेरा आशिक़ आ गया न जाने खा से और देख न सुबह सुबह hi मेरी छूट पानी छोड़ रही है अगर अभी रवि ने मुझे नहीं चिड़ा तो दिन भर मेरी छूट ऐसे hi टपकती रहेगी तू क्या यही कहती है बोल

रेखा इतना बोलते हुए एक झटके में अपना पेटीकोट ऊपर उठा देती है और नीलम को अपनी गीली छूट के दर्शन करवा देती है

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एक समय था जब केशव नीलम को पसंद करता था और कहि न कहि नीलम उसके सपनो की राजकुमारी थी ये बात नीलम और रेखा दोनों जानते थे

पर कभी बात इससे आगे न बड़ी और केशव की गांड में इतना दम नहीं था की वो नीलम को अपने दिल की बात बता सखे

रेखा- जल्दी करना नीलम मेरी मज़बूरी को समझ तू hi तो मेरी शैली है

नीलम को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे क्योंकि बहार hi हरिया बैठा हुआ था उसका मैं किसी भी टाइम नीलम पर चढ़ने का करता तो वो तुरंत hi अंदर आ जाता

नीलम- पर अगर बापू आ गए तो

रेखा- अरे अगर काका आ भी गए तो उसमे डरने की क्या बात है बस तू अपना पेटीकोट उठा कर काका के समाने झुक जाना

रेखा और रवि दोनों हस्स रहे थे

नीलम- ठीक है पारर जल्दी करना तुम दोनों बापू को नहीं पता की तुम दोनों भी चुदाई करते हो

रेखा- अरे वह मतलब तूने अबतक हमारे राज को राज hi रखा हुआ है कितनी अछि शैली है

नीलम- मैं तो अच्छी शैली हु पर तेरा ये कमीना भाई तुझे पता है उस दिन इसने मेरी क्या हालत की थी उसके बाद से 4 दिन तक तो लुंड को देखने का भी मैं नहीं कर रहा था मेरा

तू कैसे सेहती है रे इस बेरहमी को

रेखा हसने लगती है

रेखा- अरे मेरी भोली भली शैली तू इतना समझ ले की इसने जो कुछ भी तेरे साथ किया इसे वो सब मैंने hi सिखाया है

नीलम रवि की और देखती है जो पहले से hi अपनी धोती से अपना लुंड बहार निकले मसल रहा था

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रवि का लुंड देख कर नीलम का मुह्ह खुला का खुला रह जाता है

रेखा- अरे इसे देख कर इतना मैट दर तुझे थोड़े hi छोड़ेगा ये ये तो अपनी दीदी की छूट में घुसने के लिए खड़ा है

रेखा आगे बढ़ कर रवि का लुंड थम लेती है और अपने होठो को अपने छोटे भाई के होठो पर रख देती है

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रवि और उसकी दीदी रेखा दोनों के दोनों बिलकुल बेशर्मो की तरह नीलम कस सामने hi शुरू हो गए थे

रवि अपनी दीदी के मुह्ह को ऐसे चूस रहा था मनो वो अपनी दीदी का मुह्ह चाट चाट अंदर से साफ़ कर रहा हो

रेखा भी रवि का पूरा साथ दे रही थी

एक झटके के साथ रेखा घुटनो के बल बैठ जाती है और रवि के लुंड पर किश करने लगती है

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कभी वो अपनी जीभ निकल कर रवि का सूपड़ा चाटने लगती तो कभी उसके सुपडे को अपने गरम मुह्ह में भर कर चूसने लगती

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और अगले hi पल वो अपने सर को आगे की और खिसकने लगती है और धीरे धीरे करके रवि का पूरा का पूरा लुंड रेखा कस मुह्ह में समाए जाता है

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नीलम ये नजारा देख कर दांग रह जाती है कैसे उसकी शैली उसके सामने hi अपने छोटे भाई का गधे जैसा लुंड पालक झपकते hi निगल गयी

करीब 5 मिंट तक्क रेखा लुंड को चुस्ती रहती है

थोड़ी देर बाद वो खुद hi खड़ी होती है और एक झटके के साथ अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है

अगले hi पल रेखा का पेटीकोट सरकता हुआ उसके शरीर से अलग हो जाता है

रेखा घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड को बहार की और निकल देती है

नीलम की नजर जब उसकी शैली के छेड़ो पारर पड़ती है तो उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

क्योंकि रवि जैसा जानवर अपनी hi दीदी की छूट और गांड को छोड़ छोड़ कर तेहेस नेहेस कर चूका था

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रेखा की गांड का छेद तो बिना लुंड डेल hi खुला हुआ दिख रहा था

रवि आगे बढ़ता हुआ अपनी दीदी के दोनों चूतड़ों को फिआला हुआ उसपर थूक देता है और अपने लुंड को पकड़ कर अपनी दीदी की छूट पारर घिसने लगता गई

नीलम - हे भगवान् कसिए सेहेन करती होगी रेखा इतना बड़ा लुंड

रेखा- छोड़ दे रवि अब बर्दास्त नहीं हो रहा महजसे और मैट तड़पा अपनी दीदी को

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रेखा खुद hi अपने दोनों हाथो से अपनी गांड को फीडलए हुए रवि के लुंड को निमंत्रण दे रही थी

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रवि- दीद कोनसे छेद में दालु

रेखा- जिसमे तेरा दिल करे उसमे दाल दे बस अपने इस गधे जैसे लुंड को मेरे अंदर दाल दे मुझे इसकी गर्मी को अपने शरीर के अंदर महसूस करना है

रवि - दीद तुम्हारी छूट पूरी की ौरी गीली हुई पड़ी है आज तो इसे hi छोडूंगा

रवि अपना लुंड रेखा की छूट ओर सेट करता हुआ एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा का पूरा लुंड रेखा दीदी की छूट में पेल देता है

झटका इतना जोरदार था की बैलेंस बिगड़ने की वजह से रेखा आगे को गिरती हुई जमीन पर बिलकुल सीधी गिर जाती है

नीलम अपनी शैली को गिरता हुआ देख कर तुरंत hi आगे बढ़ती है और रेखा को सहारा देने की कोशिश करती है

पर अब सहारा देने के लिए देर हो चुकी थी

रवि उसी पोजीशन में अपनी दीदी की छूट में शता सात अपना लुंड पेले जा रहा था

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रेखा - अह्ह्ह ममम ममअअअ मर्डर गयी रे कितना अच्छा चिढ़ता है रे मेरे प्यारे भाई तू अह्ह्ह्हह बास ऐसे hi छोड़ड़ड़ अपनी दीदी को निकल दे साडी खुजली मेरिइइइ इस छूट की आह्ह्ह्हह

नीलम- रेखा धीरे धीरे बोल बापू बहार hi है सुन लिया तो वो नजाने क्या सोचेगा

रेखा- अरे कुछ नहीं सोचेगा तेरा बापू वो कमीना ठरकी बुद्धा तो खुद मुझ पर चढ़ना कहता है

लगता है तू अपने बापू के लुंड को काबू नहीं कर पा रही जो तेरा बाप मेरी गांड को देख देख कर अपना लुंड मसलता है अह्ह्ह्ह मर्डर डाला री

नीलम कुछ नहीं बोलती क्योंकि वो जानती थी की रेखा जिस लुंड की सवारी कर रही है अगर वो किसी के भी अंदर जायेगा तो वो औरत पागल वाली हरकते करेगी hi जो अभी रेखा कररर रही थी

रवि- क्यों दीदी मजा आ रहा है या नहीं

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रेखा- भट्ट मजा आ रहा है तेरा लुंड तो मुझे अपने बच्चेदानी तक्क महसूस हो रहा है बास तू रुकना मत और ऐसे hi छोड़ ता जा अपनी दीदी को

क्या मस्त छोड़ता है रे तू

रवि- दीदी आपने hi तो सिखाया है

नीलम- दोनों भाई बेहेन एक से बढ़ कर एक है इनकी चुदाई देख कर तो मुझे डर लग रहा है उस दिन कमीना मेरी छूट और गांड में भी ऐसे hi झटके मार रहा था ओर इस कमीनी रेखा को तो देखो बोल रही है और छोड़ कितनी छिड़क्कड़ औरत है ये कमीनी

रवि- अहह दीदी मेरा पानी निकलने वाला है

रेखा भी झड़ने वाली थी

रेखा- आठ भर दे मेरी छूट को अपने अमृत से पहुंचा दे अपना वीर्य अपनी दीदी की बच्चेदानी तक्क बना दे अपनी दीदी को अपने बच्चे की मा आह्हः मैं भी आयी आह्ह्ह्हह

रेखा बिलकुल पागलो की तरह चिल्ला रही थी

कुछ hi पल में रवि अपनी दीदी की छूट को पूरी तरह अपने वज्रया से भर देता है

पूरी छूट चिपचिपे पानी से भर गयी थी पारर रवि का लुंड अब तक उसकी दीदी की छूट के अंदर hi था

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हर झटके के साथ रेखा की छूट से रवि का वीर्य थोड़ा थोड़ा करके बहार निकल रहा था

पुरे कमरे में पांच पांच की आवाजे गूंज रही थी

और आखिर में वही हुआ जिसका नीलम को डर था

बहार से हरिया दरवाजा खटकता है

हरिया- क्या हुआ नीलम बिटिया ये आवाज कैसी है

बापू की आवाज सुनकर नीलम के तो होश उड़द जाते है पर इन दोनों भाई बहनो पारर उस आवाज का कोई असर नहीं होता और दोनों की चुदाई अब भी जारी थी......
 
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