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- Dec 5, 2013
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अपडेट-97
सुबह कम्मो और रेखा लगभग शामे टाइम hi उठी थी
रेखा तो पहले hi संडास करके आ गयी थी और जैसे hi कम्मो संडास करने के लिए जाती है रेखा तुरंत hi कमरे के अंदर पहुँचती है और तुरनत रवि को उठा देती है
रवि- क्या हुआ दीदी आज इतनी सुबह सुबह उठा दिया आपने
रेखा- अरे सोता रहेगा कि तू दिन भर चल जल्दी उठ तुझे एक नजारा दिखती हु
रवि तुरंत hi उठ कर बैठ जाता है
रवि- कौनसा नजारा दीदी
रेखा- यही सब बता दू क्या चल जल्दी चल
रेखा रवि वका हाथ पकड़ती हुई उसे अपने साथ घर के पिछवाड़े ले जाती है
रवि- क्या हुआ दीदी आज संडास करते हुए छुड़वाने का मुद है क्या
रेखा- मुद तो मेरा हमेशा hi रहता है बीटा तुझसे छुड़वाने का पर आज कुछ खास है
आज मैं तुझे तेरी होने वाली रंडी के छेद दिखने वाली हु
रवि- क्या बायत कर रही हो दीदी कम्मो दीदी के छेद देखने को मिलेंगे अब
रेखा- अरे बाबा तू नींद में नहीं है रे
रेखा रवि की चिकोटी काट लेती है
रवि- ः दीदी अब यकीन हुआ अब दिखाओ भी
रेखा उसे लेकर थोड़ा आगे जाती है और एक पेड़ के पीछे रुक जाती है
रेखा- वो देख कैसे तेरी कम्मो दीदी अपनी गांड के कसे हुए छेद से मोती मोती संडास निकल रही है
रवि की नजर जैसे hi कम्मो पर पड़ती है वो एक तुक अपनी कम्मो दीदी की नंगी गांड को देल्हता रह जाता है
रवि( क्या hi कमाल की गोरी गांड है कम्मो दीदी की एक बाल तक नहीं है )
रेखा- देख रहा है कैसे थोड़ा थोड़ा करके हग्ग रही है तेरी कम्मो दीदी
रवि चुपचाप इस नजारे का पूरा लुफ्त उठा रहा था उसकी धोती में अब तक उसका लुंड भी जाग चूका था
रेखा- अरे खा खो गया तू इतनी पसंद आ गयी क्या तुझे कम्मो की गांड
रवि- नहीं नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है वो तो बस ऐसे hi
रेखा- अच्छा बच्चू ऐसी बात नहीं है तो फिर ये क्या है
रेखा अपना हाथ रवि की धोती में दाल कर सीधा उसका लुंड पकड़ लेती है
रेखा- ऐसी बात नहीं है तो ये जनाब क्यों तनाव में है सुबह सुबह
. रवि - दीदी आज मेने अपनी किसी दीदी को संडास करते हुए दूसरी बार देखा है
रेखा- अच्छा देख कर hi ये हाल हो गया अभी तो तुझे कम्मो की चटनी बनानी है अपने इस मुसल से
वैसे तूने मुझे तो संडास करते करते hi छोड़ दिया था
रवि- दीदी कम्मो दीदी को भी छोड़ दू क्या अभी हगते हुए
रेखा- अरे नहीं नहीं अभी रहने दे देख तो बेचारी कितने सुकून से हग रही है तू अभी जाकर अपना मुसल उसकी गांड में थोक देगा तो बेचारी की संडास hi बंद हो जाएगी
रेखा बात करते हुए भी लगातार रवि के लुंड को मसले जा रही थी
रवि- दीदी लगता है कम्मो दीदी की गांड खली हो गयी है
रेखा- तो तुझे भरना है क्या अपनी कम्मो दीदी की गांड को अपना लुंड दाल कर
अभी रवि कुछ बोलता उससे पहले hi कम्मो पानी से अपनी गांड धोने लगती है
रेखा- चल चल जल्दी उसने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी
दोनों भाई बेहेन घर की और भाग जाते है
मेघा दीदी बहार लगे हेण्डपम्प पर मुँह धो रही थी
मेघा- अरे अरे तुम दोनों एक साथ पिछवाड़े से भागे भागे क्यों आ रहे हो
रेखा तुरंत hi बात को संभाल लेती है
रेखा- दीदी वो क्या हुआ न मैं संडास करने गयी थी तो मुझे लगा कोई साप आ गया है घर के पिछवाड़े इसी लिए रवि को साथ में ले गयी थी
मेघा- तो मिला क्या साप
मेघा की नजर बार बार रवि की धोती के उस उभार पर जा रही थी
और मेघा अंदर hi अंदर काफी परेशान सी थी और उसके मैं में हजारो सवाल चल रहे थे
मेघा( ये दोनों एक साथ साप पकड़ने गए थे पर ये रवि का कला साप क्यों फानन फैलाये खड़ा है जरूर कुछ न कुछ कला है दाल में)
रेखा- नहीं दीदी साप तो नहीं मिला लगता है मुझे वेहम हो गया
मेघा- अच्छा तू जा अपना काम करर
रवि और मेघा दोनों एक साथ घर की और जाने लगते है
मेघा- अरे रवि सुन जरा इधर तो आ
रेखा अंदर चली जाती है और रवि अपनी मेघा दीदी के पास चला जाता है
मेघा एक बार आस पास नजर दौड़ती है और अगले hi पल वो रवि का लुंड पकड़ लेती है
मेघा- क्यों रे तुम दोनों भाई बेहेन मुझसे कुछ छुपा रहे हो क्या
रवि- नहीं तो दीदी आपसे क्या कुछ छुपाना
मेघा- तो जब साप नहीं मिला तो ये साप क्यों खड़ा है
रवि- दीदी आपको तो पता है न मेरी लुल्ली सुबह सुबह ऐसे hi तीते रहती है
मेघा दीदी के सवालों को सुन्न कर अंदर hi अंदर रवि की गांड फट रही थी
मेघा- रेखा ने देखा क्या तेरा औजार खड़ा हुआ
रवि - पता नहीं दीदी शायद देखा होगा और अगर देखा भी होगा तो क्या हो गया
मेघा- हाय राम इसका मतलब तू अपनी बहनो को अपना ये मुसल खड़ा करके दिखता फिरेगा
रवि- दीदी मुसल क्या होता है
मेघा- वो सब म बाद में बताउंगी पर ध्यान रखा कर तू इसका समझा
रवि- ठीक है दीदी
मेघा- चल अब जा तू भी
रवि( आज तो बुरा फसता कम्मो दीदी की गांड देखने के चक्कर में मेघा दीदी तो पीछे hi पद गयी थी बच गया,)
बच गया ऐसा सिर्फ रवि को लग्ग रहा था
इधर मेघा अपने आप को जितना भी समझने की कोशिश कर रही थी बार बार उसके मैं में वही बात आ जाती
जरूर कुछ तो गड़बड़ चल रही है
मेघा( रवि की बात तो सही लग रही है पर मेरा मैं नहीं मान रहा जरूर कुछ न कुछ गड़बड़ है पता लगाना पड़ेगा )
मेघा भी घर में चली जाती है थोड़ी देर बाद सब लोग अपना अपना काम ख़तम कर चुके थे
उसके बाद कुछ ज्यादा खास होता नहीं
रवि अपने खेतो पर जाने को तैयार था
रेखा उसे दरवाजे तक्क छोड़ती है
रवि- दीदी आज तो आप hi आओगी क्या
रेखा- तू बोले तो मेघा दीदी को भेज दू आज भी
रवि- नहीं नबी दीदी आप hi आना बड़े दिन हो गए आपको ढंग से चोदे हुए
रेखा- अरे अभी कल रात hi तो तू मेरी गांड अपना लुंड डेल पड़ा था
रवि- दीदी मतलब आज हम दोनों अकेले में वो सब जैसे पहले करते थे समझ रही हो न आप
रेखा- ः समझ रही हु कुल मिलकर यही मतलब है की आज मेरी खैर नहीं
कहि मैं भी शाम तक्क नीलम की तरह लड़खड़ाने न लग जाऊ
रवि- अरे उस नीलम की आपके सामने क्या बराबरी दीदी वो खा और आप खा
रेखा- ाचा चल जा अब ज्यादा मखान मत मार मैं तेल लगा कर आउंगी
रवि- खा दीदी
रेखा बड़े hi मादक अंदाज में रवि के कान के पास जाती है
रेखा - अपनी गांड के छेद को पूरा तेल से भर कर आउंगी तुझे खाना देने
मुझे पता है तू शाम तक मेरी गांड hi मरने वाला है
रवि- वह दीदी आप तो अंतर्यामी निकली पर आज मैं आपके सरे छेड़ो को छोडूंगा जी भर कर
रेखा- तभी तो आउंगी मैं मुझे भी आज मेरे सरे छेड़ो को तेरी उस मलाई से भरवाना है जिसका स्वाद अमृत जैसा है
रवि- ठीक है दीदी मैं चलता हु आप दोपहर से पहले hi आ जाना
रेखा- अभी चलु तेरे साथ
रवि- चलो अभी चलो
रेखा अपनी नजर रवि की धोती पर डालती है
रेखा- हट बदमाश अभी से लुंड खड़ा किये खड़ा है तू जा मैं आउंगी जल्दी यह के काम निपटा कर
रवि रेखा दीदी से अलविदा लेकर अपने खेतो की एयर निकल जाता है
रेखा और कम्मो भी काम निपटने में लग्ग जाती है
आज रेखा बड़ा मैं लगा कर जल्दी जल्दी काम कर रही थी जिसपर कम्मो का ध्यान बहुत पहले जा चूका था
कम्मो( आज रेखा दीदी खाना लेकर जाने वाली है रवि का देखो तो अभी से इनकी छूट पानी छोड़ रही है कैसे जल्दी जल्दी काम कर रही है ताकि जल्दी से जल्दी जाकर अपने छोटे भाई के लुंड पर बैठ सके कुछ तो शर्म लिहाज करो रेखा दीदी )
पुछलि रात.........
नीलम रवि से छोड़ने के बाद जैसे तैसे लड़खड़ाती हुई अपने घर तक्क पहुँचती है गनीमत थी की उस समय घर पर न तो हरिया था और न hi राजू
नीलम जल्दी जल्दी खाना पीना बना लेती है और थोड़ी hi देर में हरिया गाओं से घूम कर आ जाता है
नीलम एक लकड़ी के टुकड़े पर बैठी बैठी आज हुई घटनाओ को सोच रही थी
कैसे आज रवि जैसे बच्चे ने उसकी भरी पूरी जवानी को पूरा लूट लिया जिसे रोज वो थोड़ा थोड़ा अपने बापू और छोटे भाई को परोसती थी
हरिया घर के अबदार घुसता है उसे सामने hi उसी बेटी दिखाई पड़ती है जिसे वो दोपहर से hi छोड़ने के लिए धुंध रहा था
हरिया- अरे मेरी प्यारी बिटिया खा थी तू आज दोपहर से hi तुझे पता है तेरा बापू तुझे कितनी बेसब्री से धुंध रहा था
नीलम पीछे पलट कर अपने बापू को देखती है और एक झूटी स्माइल पास कर देती है
नीलम की तो वैसे hi हालत खराब थी
इधर हरिया अपनी बेटी की मुस्कान को अपना चुदाई का टिकट समझ कर सीधा जाकर नीलम की पीठ से चिपक जाता है
हरिया का लुंड सीधा नीलम की गांड पर टक्कर मार रहा था
हरिआय अपने हाथो को आगे बढ़ता हुआ सीधा अपनी बेटी का पेटीकोट उठा देता है और अपनी बेटी नीलम की गदराई हुई जांघो को अपने मजबूत हाथो से मसलने लगता है
अगर कोई और दिन होता तो शायद अपने बापू को मना नहीं करती पर आज तो नीलम पहले से hi पूरी की पूरी टूटी पड़ी थी
हरिया- तुझे पता है मेरी गुड़िया आज तेरे बापू के इस लुंड ने कितना परेशान किया
कमीना बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था
पता है तुझे ये मुझसे क्या बोलै
नीलम- क्या बोलै बापू
हरिया- ये कमीना बोलै की आज इसे पूरा दिन अपनी hi बेटी की छूट में सोना है
कहि न कहि हरिया की बाटे सुन्न कर नीलम की सुखी छूट में चिपचिपा पानी आने लगता है
हरिया की हरकते अब धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी उसके दोनों हाथ इस समय उसकी बेटी के मोठे मोठे चुचो को मसल रहे था
नीलम- अह्ह्ह्ह बापू आज नहीं बापू
हरिया- मैट रोक बेटी आज अपने बाप को तेरा ये बाप अपनी hi बेटी के मादक अंगो का दीवाना हो चूका है
बेटी तेरा ये रसीला जिस्म मुझे अपनी और खींचता है बेटी मैं तुझसे एक पल भी दूर नहीं रह सकता
नीलम जानती थी की अगर उसने ा hi अपने बाप को नहीं रोका तो हरिया बिना चोदे नहीं मानेगा
नीलम तुरंत hi अलग हटके खड़ी हो जाती है
नीलम- बापू आज नहीं आज मेरी तबियत सही नहीं है
आखिर हरिया भी बाप था
चुदाई के इस खेल में अपने बापू के समाने कभी नीलम ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे थे
आखिर हरिया भी बाप था
हरिया- कोई बात नहीं बेटी तू तो मेरे पास hi है ना तू एक काम कर तू आराम कर आज घर का काम मैं और राजू कर लेंगे
तभी राजू भी घर में आ जाता है
राजू- क्या काम करना है बापू
हरिया- बीटा आज तेरी दीदी की तबियत खराब है तो उसे परेशान मत करियो और काम भी हमे hi करना है आज का समझा
राजू- क्या हुआ मेरी प्यारी दीदी को
राजू तुरंत hi अपनी दीदी की खत के पास चला जाता है
और नीलम का सर पकड़ कर बुखार देखने लगता है
राजू- अरे दीदी को बुखार तो नहीं है बापू
हरिया- तुझे बोलै न आज उसकी तबियत खराब है तो समझ नहीं आता
राजू- कोई बात नहीं दीदी आप आराम करो
नीलम तो पहले hi दूसरी तरफ मुह्ह घुमा कर लती थी
नीलम का पूरा बदन दर्द कर रहा था खास कर उसकी गांड जिसे रवि ने पूरा दिन एक मिनट के लिए भी खली नहीं छोड़ा पूरा दिन अपने मुसल उसकी गांड में ठोके रखा
नीलम( बापू आज अपनी इस बेटी को माफ़ कर देना आज मैं तुम्हारे लुंड की सेवा नहीं कर पायी पर क्या कृ बापू उस हरामी ने तो छोड़ छोड़ आज आपकी बेटी को पूरा खोल दिया
मुझे अब ऐसा लग रहा है बापू की जो चीज़ मेने आपको देने के लिए बचाई थी उसे रवि पूरा का पूरा छत्त कर दिया )
(पर कसम है बापू मुझे भी आपकी उस कमीने के साथ मैं भी कुछ करूंगी जो उससे भी बुरा होगा जो उसने मेरे साथ किया मेरे पास रवि के घर की एक कमजोर कड़ी है )
रोटी हुई नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ......
सुबह कम्मो और रेखा लगभग शामे टाइम hi उठी थी
रेखा तो पहले hi संडास करके आ गयी थी और जैसे hi कम्मो संडास करने के लिए जाती है रेखा तुरंत hi कमरे के अंदर पहुँचती है और तुरनत रवि को उठा देती है
रवि- क्या हुआ दीदी आज इतनी सुबह सुबह उठा दिया आपने
रेखा- अरे सोता रहेगा कि तू दिन भर चल जल्दी उठ तुझे एक नजारा दिखती हु
रवि तुरंत hi उठ कर बैठ जाता है
रवि- कौनसा नजारा दीदी
रेखा- यही सब बता दू क्या चल जल्दी चल
रेखा रवि वका हाथ पकड़ती हुई उसे अपने साथ घर के पिछवाड़े ले जाती है
रवि- क्या हुआ दीदी आज संडास करते हुए छुड़वाने का मुद है क्या
रेखा- मुद तो मेरा हमेशा hi रहता है बीटा तुझसे छुड़वाने का पर आज कुछ खास है
आज मैं तुझे तेरी होने वाली रंडी के छेद दिखने वाली हु
रवि- क्या बायत कर रही हो दीदी कम्मो दीदी के छेद देखने को मिलेंगे अब
रेखा- अरे बाबा तू नींद में नहीं है रे
रेखा रवि की चिकोटी काट लेती है
रवि- ः दीदी अब यकीन हुआ अब दिखाओ भी
रेखा उसे लेकर थोड़ा आगे जाती है और एक पेड़ के पीछे रुक जाती है
रेखा- वो देख कैसे तेरी कम्मो दीदी अपनी गांड के कसे हुए छेद से मोती मोती संडास निकल रही है
रवि की नजर जैसे hi कम्मो पर पड़ती है वो एक तुक अपनी कम्मो दीदी की नंगी गांड को देल्हता रह जाता है
रवि( क्या hi कमाल की गोरी गांड है कम्मो दीदी की एक बाल तक नहीं है )
रेखा- देख रहा है कैसे थोड़ा थोड़ा करके हग्ग रही है तेरी कम्मो दीदी
रवि चुपचाप इस नजारे का पूरा लुफ्त उठा रहा था उसकी धोती में अब तक उसका लुंड भी जाग चूका था
रेखा- अरे खा खो गया तू इतनी पसंद आ गयी क्या तुझे कम्मो की गांड
रवि- नहीं नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है वो तो बस ऐसे hi
रेखा- अच्छा बच्चू ऐसी बात नहीं है तो फिर ये क्या है
रेखा अपना हाथ रवि की धोती में दाल कर सीधा उसका लुंड पकड़ लेती है
रेखा- ऐसी बात नहीं है तो ये जनाब क्यों तनाव में है सुबह सुबह
. रवि - दीदी आज मेने अपनी किसी दीदी को संडास करते हुए दूसरी बार देखा है
रेखा- अच्छा देख कर hi ये हाल हो गया अभी तो तुझे कम्मो की चटनी बनानी है अपने इस मुसल से
वैसे तूने मुझे तो संडास करते करते hi छोड़ दिया था
रवि- दीदी कम्मो दीदी को भी छोड़ दू क्या अभी हगते हुए
रेखा- अरे नहीं नहीं अभी रहने दे देख तो बेचारी कितने सुकून से हग रही है तू अभी जाकर अपना मुसल उसकी गांड में थोक देगा तो बेचारी की संडास hi बंद हो जाएगी
रेखा बात करते हुए भी लगातार रवि के लुंड को मसले जा रही थी
रवि- दीदी लगता है कम्मो दीदी की गांड खली हो गयी है
रेखा- तो तुझे भरना है क्या अपनी कम्मो दीदी की गांड को अपना लुंड दाल कर
अभी रवि कुछ बोलता उससे पहले hi कम्मो पानी से अपनी गांड धोने लगती है
रेखा- चल चल जल्दी उसने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी
दोनों भाई बेहेन घर की और भाग जाते है
मेघा दीदी बहार लगे हेण्डपम्प पर मुँह धो रही थी
मेघा- अरे अरे तुम दोनों एक साथ पिछवाड़े से भागे भागे क्यों आ रहे हो
रेखा तुरंत hi बात को संभाल लेती है
रेखा- दीदी वो क्या हुआ न मैं संडास करने गयी थी तो मुझे लगा कोई साप आ गया है घर के पिछवाड़े इसी लिए रवि को साथ में ले गयी थी
मेघा- तो मिला क्या साप
मेघा की नजर बार बार रवि की धोती के उस उभार पर जा रही थी
और मेघा अंदर hi अंदर काफी परेशान सी थी और उसके मैं में हजारो सवाल चल रहे थे
मेघा( ये दोनों एक साथ साप पकड़ने गए थे पर ये रवि का कला साप क्यों फानन फैलाये खड़ा है जरूर कुछ न कुछ कला है दाल में)
रेखा- नहीं दीदी साप तो नहीं मिला लगता है मुझे वेहम हो गया
मेघा- अच्छा तू जा अपना काम करर
रवि और मेघा दोनों एक साथ घर की और जाने लगते है
मेघा- अरे रवि सुन जरा इधर तो आ
रेखा अंदर चली जाती है और रवि अपनी मेघा दीदी के पास चला जाता है
मेघा एक बार आस पास नजर दौड़ती है और अगले hi पल वो रवि का लुंड पकड़ लेती है
मेघा- क्यों रे तुम दोनों भाई बेहेन मुझसे कुछ छुपा रहे हो क्या
रवि- नहीं तो दीदी आपसे क्या कुछ छुपाना
मेघा- तो जब साप नहीं मिला तो ये साप क्यों खड़ा है
रवि- दीदी आपको तो पता है न मेरी लुल्ली सुबह सुबह ऐसे hi तीते रहती है
मेघा दीदी के सवालों को सुन्न कर अंदर hi अंदर रवि की गांड फट रही थी
मेघा- रेखा ने देखा क्या तेरा औजार खड़ा हुआ
रवि - पता नहीं दीदी शायद देखा होगा और अगर देखा भी होगा तो क्या हो गया
मेघा- हाय राम इसका मतलब तू अपनी बहनो को अपना ये मुसल खड़ा करके दिखता फिरेगा
रवि- दीदी मुसल क्या होता है
मेघा- वो सब म बाद में बताउंगी पर ध्यान रखा कर तू इसका समझा
रवि- ठीक है दीदी
मेघा- चल अब जा तू भी
रवि( आज तो बुरा फसता कम्मो दीदी की गांड देखने के चक्कर में मेघा दीदी तो पीछे hi पद गयी थी बच गया,)
बच गया ऐसा सिर्फ रवि को लग्ग रहा था
इधर मेघा अपने आप को जितना भी समझने की कोशिश कर रही थी बार बार उसके मैं में वही बात आ जाती
जरूर कुछ तो गड़बड़ चल रही है
मेघा( रवि की बात तो सही लग रही है पर मेरा मैं नहीं मान रहा जरूर कुछ न कुछ गड़बड़ है पता लगाना पड़ेगा )
मेघा भी घर में चली जाती है थोड़ी देर बाद सब लोग अपना अपना काम ख़तम कर चुके थे
उसके बाद कुछ ज्यादा खास होता नहीं
रवि अपने खेतो पर जाने को तैयार था
रेखा उसे दरवाजे तक्क छोड़ती है
रवि- दीदी आज तो आप hi आओगी क्या
रेखा- तू बोले तो मेघा दीदी को भेज दू आज भी
रवि- नहीं नबी दीदी आप hi आना बड़े दिन हो गए आपको ढंग से चोदे हुए
रेखा- अरे अभी कल रात hi तो तू मेरी गांड अपना लुंड डेल पड़ा था
रवि- दीदी मतलब आज हम दोनों अकेले में वो सब जैसे पहले करते थे समझ रही हो न आप
रेखा- ः समझ रही हु कुल मिलकर यही मतलब है की आज मेरी खैर नहीं
कहि मैं भी शाम तक्क नीलम की तरह लड़खड़ाने न लग जाऊ
रवि- अरे उस नीलम की आपके सामने क्या बराबरी दीदी वो खा और आप खा
रेखा- ाचा चल जा अब ज्यादा मखान मत मार मैं तेल लगा कर आउंगी
रवि- खा दीदी
रेखा बड़े hi मादक अंदाज में रवि के कान के पास जाती है
रेखा - अपनी गांड के छेद को पूरा तेल से भर कर आउंगी तुझे खाना देने
मुझे पता है तू शाम तक मेरी गांड hi मरने वाला है
रवि- वह दीदी आप तो अंतर्यामी निकली पर आज मैं आपके सरे छेड़ो को छोडूंगा जी भर कर
रेखा- तभी तो आउंगी मैं मुझे भी आज मेरे सरे छेड़ो को तेरी उस मलाई से भरवाना है जिसका स्वाद अमृत जैसा है
रवि- ठीक है दीदी मैं चलता हु आप दोपहर से पहले hi आ जाना
रेखा- अभी चलु तेरे साथ
रवि- चलो अभी चलो
रेखा अपनी नजर रवि की धोती पर डालती है
रेखा- हट बदमाश अभी से लुंड खड़ा किये खड़ा है तू जा मैं आउंगी जल्दी यह के काम निपटा कर
रवि रेखा दीदी से अलविदा लेकर अपने खेतो की एयर निकल जाता है
रेखा और कम्मो भी काम निपटने में लग्ग जाती है
आज रेखा बड़ा मैं लगा कर जल्दी जल्दी काम कर रही थी जिसपर कम्मो का ध्यान बहुत पहले जा चूका था
कम्मो( आज रेखा दीदी खाना लेकर जाने वाली है रवि का देखो तो अभी से इनकी छूट पानी छोड़ रही है कैसे जल्दी जल्दी काम कर रही है ताकि जल्दी से जल्दी जाकर अपने छोटे भाई के लुंड पर बैठ सके कुछ तो शर्म लिहाज करो रेखा दीदी )
पुछलि रात.........
नीलम रवि से छोड़ने के बाद जैसे तैसे लड़खड़ाती हुई अपने घर तक्क पहुँचती है गनीमत थी की उस समय घर पर न तो हरिया था और न hi राजू
नीलम जल्दी जल्दी खाना पीना बना लेती है और थोड़ी hi देर में हरिया गाओं से घूम कर आ जाता है
नीलम एक लकड़ी के टुकड़े पर बैठी बैठी आज हुई घटनाओ को सोच रही थी
कैसे आज रवि जैसे बच्चे ने उसकी भरी पूरी जवानी को पूरा लूट लिया जिसे रोज वो थोड़ा थोड़ा अपने बापू और छोटे भाई को परोसती थी
हरिया घर के अबदार घुसता है उसे सामने hi उसी बेटी दिखाई पड़ती है जिसे वो दोपहर से hi छोड़ने के लिए धुंध रहा था
हरिया- अरे मेरी प्यारी बिटिया खा थी तू आज दोपहर से hi तुझे पता है तेरा बापू तुझे कितनी बेसब्री से धुंध रहा था
नीलम पीछे पलट कर अपने बापू को देखती है और एक झूटी स्माइल पास कर देती है
नीलम की तो वैसे hi हालत खराब थी
इधर हरिया अपनी बेटी की मुस्कान को अपना चुदाई का टिकट समझ कर सीधा जाकर नीलम की पीठ से चिपक जाता है
हरिया का लुंड सीधा नीलम की गांड पर टक्कर मार रहा था
हरिआय अपने हाथो को आगे बढ़ता हुआ सीधा अपनी बेटी का पेटीकोट उठा देता है और अपनी बेटी नीलम की गदराई हुई जांघो को अपने मजबूत हाथो से मसलने लगता है
अगर कोई और दिन होता तो शायद अपने बापू को मना नहीं करती पर आज तो नीलम पहले से hi पूरी की पूरी टूटी पड़ी थी
हरिया- तुझे पता है मेरी गुड़िया आज तेरे बापू के इस लुंड ने कितना परेशान किया
कमीना बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था
पता है तुझे ये मुझसे क्या बोलै
नीलम- क्या बोलै बापू
हरिया- ये कमीना बोलै की आज इसे पूरा दिन अपनी hi बेटी की छूट में सोना है
कहि न कहि हरिया की बाटे सुन्न कर नीलम की सुखी छूट में चिपचिपा पानी आने लगता है
हरिया की हरकते अब धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी उसके दोनों हाथ इस समय उसकी बेटी के मोठे मोठे चुचो को मसल रहे था
नीलम- अह्ह्ह्ह बापू आज नहीं बापू
हरिया- मैट रोक बेटी आज अपने बाप को तेरा ये बाप अपनी hi बेटी के मादक अंगो का दीवाना हो चूका है
बेटी तेरा ये रसीला जिस्म मुझे अपनी और खींचता है बेटी मैं तुझसे एक पल भी दूर नहीं रह सकता
नीलम जानती थी की अगर उसने ा hi अपने बाप को नहीं रोका तो हरिया बिना चोदे नहीं मानेगा
नीलम तुरंत hi अलग हटके खड़ी हो जाती है
नीलम- बापू आज नहीं आज मेरी तबियत सही नहीं है
आखिर हरिया भी बाप था
चुदाई के इस खेल में अपने बापू के समाने कभी नीलम ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे थे
आखिर हरिया भी बाप था
हरिया- कोई बात नहीं बेटी तू तो मेरे पास hi है ना तू एक काम कर तू आराम कर आज घर का काम मैं और राजू कर लेंगे
तभी राजू भी घर में आ जाता है
राजू- क्या काम करना है बापू
हरिया- बीटा आज तेरी दीदी की तबियत खराब है तो उसे परेशान मत करियो और काम भी हमे hi करना है आज का समझा
राजू- क्या हुआ मेरी प्यारी दीदी को
राजू तुरंत hi अपनी दीदी की खत के पास चला जाता है
और नीलम का सर पकड़ कर बुखार देखने लगता है
राजू- अरे दीदी को बुखार तो नहीं है बापू
हरिया- तुझे बोलै न आज उसकी तबियत खराब है तो समझ नहीं आता
राजू- कोई बात नहीं दीदी आप आराम करो
नीलम तो पहले hi दूसरी तरफ मुह्ह घुमा कर लती थी
नीलम का पूरा बदन दर्द कर रहा था खास कर उसकी गांड जिसे रवि ने पूरा दिन एक मिनट के लिए भी खली नहीं छोड़ा पूरा दिन अपने मुसल उसकी गांड में ठोके रखा
नीलम( बापू आज अपनी इस बेटी को माफ़ कर देना आज मैं तुम्हारे लुंड की सेवा नहीं कर पायी पर क्या कृ बापू उस हरामी ने तो छोड़ छोड़ आज आपकी बेटी को पूरा खोल दिया
मुझे अब ऐसा लग रहा है बापू की जो चीज़ मेने आपको देने के लिए बचाई थी उसे रवि पूरा का पूरा छत्त कर दिया )
(पर कसम है बापू मुझे भी आपकी उस कमीने के साथ मैं भी कुछ करूंगी जो उससे भी बुरा होगा जो उसने मेरे साथ किया मेरे पास रवि के घर की एक कमजोर कड़ी है )
रोटी हुई नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है ......





