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- Dec 5, 2013
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दिन भर हरी घर में hi रहता है
रामलाल की नजर जब जब नीलम से मिलती वो उसे आँख मार देता मनो वो उसकी बहु नहीं बल्कि प्रेमिका हो
जैसे तैसे दिन काटता है और रात का भोजन भी हो जाता है
रामलाल आज पेट भर कर खता है
खता भी क्यों न उसकी बहु ने जो पहली बार आज खाना बनाया था और वो भी इतना स्वादिस्ट की उंगलिया चाट चाट कर खा गया
सोने के समय हरी नीलम को लेकर कमरे में चला जाता है और थोड़ी देर नीलम के बदन से खेलने के बाद अपना लुल्ला नीलम की फटी हुई छूट में दाल कर आगे पीछे करता है
कुछ hi झटको में उसका पानी नीलम की छूट में गिरने लगता है और वो बिचारा नीलम के ऊपर hi पसर जाता है
नीलम सदा सा मुँह बनती हुई से अपने ऊपर से धक्का देती है
कुछ hi देर में हरी के खरातो से पूरा कमरा गुजने लगता है
कुछ देर बाद नीलम यु hi पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए अपनी चिचियो पर एक दुपट्टा डालती हुई और कमरे के बहार आ जाती है
नीलम को देखते hi रामलाल की आँखों में चमक आ जाती है
नीलम- आप सोये नहीं पिताजी अभी
रामलाल - तूने बोलै था न बहु रात को आएगी
नीलम- अरे मैं तो भूल hi गयी थी पिताजी
रामलाल- अब तो आ गयी न बहु
नीलम- वो तो मैं पेशाब करने आयी थी पिताजी
बहु के पेशाब की बात सुनते hi रामलाल के मुँह में पानी आ जाता है
रामलाल- तो यही मुत्तत ले न बहु
नीलम- छी बाबू जी यहां कैसे मुट्ठ लू मैं आपके सामने
रामलाल- अरे इसमें सहरामने की क्या बात है अब तो हम सब एक hi घर के है
नीलम- अच्छा वो तो ठीक है एक hi घर के है पर यह खा मुटु बाबू जी मैं
रामलाल- मेरे मुँह में मुट्ठ ले बहु
नीलम- की बाबू जी कोई अपनी बहु को अपने मुँह में पेशाब करने के लिए बोलता है
रामलाल- तेरे जैसी मस्त बहु हो तो कोई भी बोल दे
एक काम कर तू ृक्क यही
रामलाल खत से उठ कर जल्दी से दरवाजा बंद कर आता है और सीधा जमीन पर लेत जाता है
रामलाल- हहआ अब मुट्ठ बहु मेरे मुह्ह में
नीलम तो मन hi मन खुश थी
एक तरफ झा उसे अपने छोड़ू बाप को छोड़ने का दुःख था वही अब उसे उससे भी बढ़ कर ठरकी आदमी मिल गया था
नीलम को अब एक बात की तसल्ली हो गयी थी की अब उसकी जिंदगी में कभी लुंड की कमी नहीं होगी
नीलम- सोच लो बाबूजी कहि बाद में मत कहना की पहले hi दिन बहु ने मुँह में पेशाब कर दिया
रामलाल- अरे बहु तू कर तो मैं तो रोज पियूँगा तेरा पेशाब अह्ह्ह आजाए जल्दी आजा और मुट्ठ अपने ससुर के मुँह में
नीलम अपना पेटीकोट उठती हुई सीधा रामलाल के चेहरे के उप्पर अपनी छूट करती है
रामलाल अपनी आँखे फाडे अपनी बहु की फटी हुई छूट को देख रहा था जिसकी सुंदरता अब और भी बढ़ गयी थी
उसके बड़े बड़े लटके हुए होठ रामलाल को पागल कर रहे थे
मन hi मन वो हरिया को शुक्रिया कर रहा था की कैसे उसने अपनी बेटी के बदन को और भी निखार दिया है
कुछ hi पल में पेशाब की बुँदे रामलाल के चेहरे पर गिरने लगती है
रामलाल तुरनत hi अपना मुँह खोल देता है
नीलम भी अब रफ़्तार के साथ मूतना शुरू कर चुकी थी जो सारा का सारा सीधा उसके ससुर के मुँह में जा रहा था
रामलाल लगातार पिता जाता है और नीलम मुट्ठी जाती है
कुछ hi पालो में आखिरी बुँदे रामलाल के होठो पर गिरती है
रामलाल अपने दोनों हाथ ऊपर की और बढ़ता हुआ नीलम की कमर को पकड़ कर अपनी और खींच लेता है
नीलम एक झटके के साथ सीधा अपने ससुर के मुँह पर आ बैठती है
रामलाल अपने होठो से अपनी बहु के निचले होठो को चुस्त हुआ उसकी छूट का भरपूर स्वाद लेने लगता है
नीलम- अह्ह्ह बाबूजी ये क्या कर रहे है आप
नीलम घूम लार सीधा अपने ससुर का लुंड पकड़ लेती है और धोती हटती हुई निचे झुक कर उसे चूसने लगती है
दोनों ससुर बहु एक दूसरे के समान को चूस चूस लार पूरा गीला कर देते है
करीब 10 मं तक ऐसे hi चूसै जारी रहती है
रामलाल- बेटी अब और इन्तजार नहीं होता अह्ह्ह्ह इसका कुछ कर
नीलम एक आज्ञाकारी बहु की तरह अपना पेटीकोट खोल देती है और तुरंत hi घोड़ी बन जाती है
रामलाल पीछे से आकर अपना लुंड अपनी बहु की गीली छूट पर रख देता है
नीलम अपने मुँह से थूक लेती हुई अपनी गांड के छेद पर लगती है और अपने ससुर का लुंड पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर रख देती है
रामलाल नीलम के इस कदम से चौक जाता है
नीलम- ससुरजी आज अआप पहली बार अपनी बहु को छोड़ रहे है यह पल तो यादगार रहना चाहिए ना
रामलाल- है भगवान् क्या चुड़क्कड़ बहु दी है मजा आ जाएगा तेरे साथ तो बहु
नीलम- अब तो आप देखते जाइये कैसे में आपकी जिन्दी को खुसियो से भर देती हु
रामलाल अपना लुंड भू की गांड में सरकने लगता है
बिना कोई ज्यादा ताकत लगाए रामलाल का पूरा का पूरा लुंड नीलम मि गांड में घुस जाता है
रामलाल पहले से hi जनता था की उसकी बहु पुराणी खेली खायी है पर उसे ये भी पता था भले hi इसके सरे छेद फटी हुए है फिर भी मजा पूरा देगी
नीलम- अह्ह्ह अब छोड़िये न ससुरजी बहुत खुजली हो रही हसि है मेरी गांड में
रामलाल अब तेजी के साथ उसकी गांड मरना शुरू कर चूका था
बिच बिच में वो अपना पूरा लुंड बहार खींच लेता और एक नजर उसके खुले हुए छेद को देख कर दुबारा से अपना लुंड नीलम की गांड में पेल देता
नीलम को इस सब में खूब मजा आ रहा था
करीब 10 मिंट की चुदाई के बाद रामलाल अपनी बहु की गांड में hi झाड़ जाता है
रामलाल पड़ा पड़ा हाफ रहा था नीलम अपना पेटीकोट पेहेन कर कमरे में चली जाती है
झा अब भी उसका पति घोड़े बेच कर सिया हुआ था
नीलम- चुटिया साला....
दिन भर हरी घर में hi रहता है
रामलाल की नजर जब जब नीलम से मिलती वो उसे आँख मार देता मनो वो उसकी बहु नहीं बल्कि प्रेमिका हो
जैसे तैसे दिन काटता है और रात का भोजन भी हो जाता है
रामलाल आज पेट भर कर खता है
खता भी क्यों न उसकी बहु ने जो पहली बार आज खाना बनाया था और वो भी इतना स्वादिस्ट की उंगलिया चाट चाट कर खा गया
सोने के समय हरी नीलम को लेकर कमरे में चला जाता है और थोड़ी देर नीलम के बदन से खेलने के बाद अपना लुल्ला नीलम की फटी हुई छूट में दाल कर आगे पीछे करता है
कुछ hi झटको में उसका पानी नीलम की छूट में गिरने लगता है और वो बिचारा नीलम के ऊपर hi पसर जाता है
नीलम सदा सा मुँह बनती हुई से अपने ऊपर से धक्का देती है
कुछ hi देर में हरी के खरातो से पूरा कमरा गुजने लगता है
कुछ देर बाद नीलम यु hi पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए अपनी चिचियो पर एक दुपट्टा डालती हुई और कमरे के बहार आ जाती है
नीलम को देखते hi रामलाल की आँखों में चमक आ जाती है
नीलम- आप सोये नहीं पिताजी अभी
रामलाल - तूने बोलै था न बहु रात को आएगी
नीलम- अरे मैं तो भूल hi गयी थी पिताजी
रामलाल- अब तो आ गयी न बहु
नीलम- वो तो मैं पेशाब करने आयी थी पिताजी
बहु के पेशाब की बात सुनते hi रामलाल के मुँह में पानी आ जाता है
रामलाल- तो यही मुत्तत ले न बहु
नीलम- छी बाबू जी यहां कैसे मुट्ठ लू मैं आपके सामने
रामलाल- अरे इसमें सहरामने की क्या बात है अब तो हम सब एक hi घर के है
नीलम- अच्छा वो तो ठीक है एक hi घर के है पर यह खा मुटु बाबू जी मैं
रामलाल- मेरे मुँह में मुट्ठ ले बहु
नीलम- की बाबू जी कोई अपनी बहु को अपने मुँह में पेशाब करने के लिए बोलता है
रामलाल- तेरे जैसी मस्त बहु हो तो कोई भी बोल दे
एक काम कर तू ृक्क यही
रामलाल खत से उठ कर जल्दी से दरवाजा बंद कर आता है और सीधा जमीन पर लेत जाता है
रामलाल- हहआ अब मुट्ठ बहु मेरे मुह्ह में
नीलम तो मन hi मन खुश थी
एक तरफ झा उसे अपने छोड़ू बाप को छोड़ने का दुःख था वही अब उसे उससे भी बढ़ कर ठरकी आदमी मिल गया था
नीलम को अब एक बात की तसल्ली हो गयी थी की अब उसकी जिंदगी में कभी लुंड की कमी नहीं होगी
नीलम- सोच लो बाबूजी कहि बाद में मत कहना की पहले hi दिन बहु ने मुँह में पेशाब कर दिया
रामलाल- अरे बहु तू कर तो मैं तो रोज पियूँगा तेरा पेशाब अह्ह्ह आजाए जल्दी आजा और मुट्ठ अपने ससुर के मुँह में
नीलम अपना पेटीकोट उठती हुई सीधा रामलाल के चेहरे के उप्पर अपनी छूट करती है
रामलाल अपनी आँखे फाडे अपनी बहु की फटी हुई छूट को देख रहा था जिसकी सुंदरता अब और भी बढ़ गयी थी
उसके बड़े बड़े लटके हुए होठ रामलाल को पागल कर रहे थे
मन hi मन वो हरिया को शुक्रिया कर रहा था की कैसे उसने अपनी बेटी के बदन को और भी निखार दिया है
कुछ hi पल में पेशाब की बुँदे रामलाल के चेहरे पर गिरने लगती है
रामलाल तुरनत hi अपना मुँह खोल देता है
नीलम भी अब रफ़्तार के साथ मूतना शुरू कर चुकी थी जो सारा का सारा सीधा उसके ससुर के मुँह में जा रहा था
रामलाल लगातार पिता जाता है और नीलम मुट्ठी जाती है
कुछ hi पालो में आखिरी बुँदे रामलाल के होठो पर गिरती है
रामलाल अपने दोनों हाथ ऊपर की और बढ़ता हुआ नीलम की कमर को पकड़ कर अपनी और खींच लेता है
नीलम एक झटके के साथ सीधा अपने ससुर के मुँह पर आ बैठती है
रामलाल अपने होठो से अपनी बहु के निचले होठो को चुस्त हुआ उसकी छूट का भरपूर स्वाद लेने लगता है
नीलम- अह्ह्ह बाबूजी ये क्या कर रहे है आप
नीलम घूम लार सीधा अपने ससुर का लुंड पकड़ लेती है और धोती हटती हुई निचे झुक कर उसे चूसने लगती है
दोनों ससुर बहु एक दूसरे के समान को चूस चूस लार पूरा गीला कर देते है
करीब 10 मं तक ऐसे hi चूसै जारी रहती है
रामलाल- बेटी अब और इन्तजार नहीं होता अह्ह्ह्ह इसका कुछ कर
नीलम एक आज्ञाकारी बहु की तरह अपना पेटीकोट खोल देती है और तुरंत hi घोड़ी बन जाती है
रामलाल पीछे से आकर अपना लुंड अपनी बहु की गीली छूट पर रख देता है
नीलम अपने मुँह से थूक लेती हुई अपनी गांड के छेद पर लगती है और अपने ससुर का लुंड पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर रख देती है
रामलाल नीलम के इस कदम से चौक जाता है
नीलम- ससुरजी आज अआप पहली बार अपनी बहु को छोड़ रहे है यह पल तो यादगार रहना चाहिए ना
रामलाल- है भगवान् क्या चुड़क्कड़ बहु दी है मजा आ जाएगा तेरे साथ तो बहु
नीलम- अब तो आप देखते जाइये कैसे में आपकी जिन्दी को खुसियो से भर देती हु
रामलाल अपना लुंड भू की गांड में सरकने लगता है
बिना कोई ज्यादा ताकत लगाए रामलाल का पूरा का पूरा लुंड नीलम मि गांड में घुस जाता है
रामलाल पहले से hi जनता था की उसकी बहु पुराणी खेली खायी है पर उसे ये भी पता था भले hi इसके सरे छेद फटी हुए है फिर भी मजा पूरा देगी
नीलम- अह्ह्ह अब छोड़िये न ससुरजी बहुत खुजली हो रही हसि है मेरी गांड में
रामलाल अब तेजी के साथ उसकी गांड मरना शुरू कर चूका था
बिच बिच में वो अपना पूरा लुंड बहार खींच लेता और एक नजर उसके खुले हुए छेद को देख कर दुबारा से अपना लुंड नीलम की गांड में पेल देता
नीलम को इस सब में खूब मजा आ रहा था
करीब 10 मिंट की चुदाई के बाद रामलाल अपनी बहु की गांड में hi झाड़ जाता है
रामलाल पड़ा पड़ा हाफ रहा था नीलम अपना पेटीकोट पेहेन कर कमरे में चली जाती है
झा अब भी उसका पति घोड़े बेच कर सिया हुआ था
नीलम- चुटिया साला....