Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 24 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -216

दिन भर हरी घर में hi रहता है

रामलाल की नजर जब जब नीलम से मिलती वो उसे आँख मार देता मनो वो उसकी बहु नहीं बल्कि प्रेमिका हो

जैसे तैसे दिन काटता है और रात का भोजन भी हो जाता है

रामलाल आज पेट भर कर खता है

खता भी क्यों न उसकी बहु ने जो पहली बार आज खाना बनाया था और वो भी इतना स्वादिस्ट की उंगलिया चाट चाट कर खा गया

सोने के समय हरी नीलम को लेकर कमरे में चला जाता है और थोड़ी देर नीलम के बदन से खेलने के बाद अपना लुल्ला नीलम की फटी हुई छूट में दाल कर आगे पीछे करता है

कुछ hi झटको में उसका पानी नीलम की छूट में गिरने लगता है और वो बिचारा नीलम के ऊपर hi पसर जाता है

नीलम सदा सा मुँह बनती हुई से अपने ऊपर से धक्का देती है

कुछ hi देर में हरी के खरातो से पूरा कमरा गुजने लगता है

कुछ देर बाद नीलम यु hi पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए अपनी चिचियो पर एक दुपट्टा डालती हुई और कमरे के बहार आ जाती है

नीलम को देखते hi रामलाल की आँखों में चमक आ जाती है

नीलम- आप सोये नहीं पिताजी अभी

रामलाल - तूने बोलै था न बहु रात को आएगी

नीलम- अरे मैं तो भूल hi गयी थी पिताजी

रामलाल- अब तो आ गयी न बहु

नीलम- वो तो मैं पेशाब करने आयी थी पिताजी

बहु के पेशाब की बात सुनते hi रामलाल के मुँह में पानी आ जाता है

रामलाल- तो यही मुत्तत ले न बहु

नीलम- छी बाबू जी यहां कैसे मुट्ठ लू मैं आपके सामने

रामलाल- अरे इसमें सहरामने की क्या बात है अब तो हम सब एक hi घर के है

नीलम- अच्छा वो तो ठीक है एक hi घर के है पर यह खा मुटु बाबू जी मैं

रामलाल- मेरे मुँह में मुट्ठ ले बहु

नीलम- की बाबू जी कोई अपनी बहु को अपने मुँह में पेशाब करने के लिए बोलता है

रामलाल- तेरे जैसी मस्त बहु हो तो कोई भी बोल दे

एक काम कर तू ृक्क यही

रामलाल खत से उठ कर जल्दी से दरवाजा बंद कर आता है और सीधा जमीन पर लेत जाता है

रामलाल- हहआ अब मुट्ठ बहु मेरे मुह्ह में

नीलम तो मन hi मन खुश थी

एक तरफ झा उसे अपने छोड़ू बाप को छोड़ने का दुःख था वही अब उसे उससे भी बढ़ कर ठरकी आदमी मिल गया था

नीलम को अब एक बात की तसल्ली हो गयी थी की अब उसकी जिंदगी में कभी लुंड की कमी नहीं होगी

नीलम- सोच लो बाबूजी कहि बाद में मत कहना की पहले hi दिन बहु ने मुँह में पेशाब कर दिया

रामलाल- अरे बहु तू कर तो मैं तो रोज पियूँगा तेरा पेशाब अह्ह्ह आजाए जल्दी आजा और मुट्ठ अपने ससुर के मुँह में

नीलम अपना पेटीकोट उठती हुई सीधा रामलाल के चेहरे के उप्पर अपनी छूट करती है

रामलाल अपनी आँखे फाडे अपनी बहु की फटी हुई छूट को देख रहा था जिसकी सुंदरता अब और भी बढ़ गयी थी

उसके बड़े बड़े लटके हुए होठ रामलाल को पागल कर रहे थे

मन hi मन वो हरिया को शुक्रिया कर रहा था की कैसे उसने अपनी बेटी के बदन को और भी निखार दिया है

कुछ hi पल में पेशाब की बुँदे रामलाल के चेहरे पर गिरने लगती है

रामलाल तुरनत hi अपना मुँह खोल देता है

नीलम भी अब रफ़्तार के साथ मूतना शुरू कर चुकी थी जो सारा का सारा सीधा उसके ससुर के मुँह में जा रहा था

रामलाल लगातार पिता जाता है और नीलम मुट्ठी जाती है

कुछ hi पालो में आखिरी बुँदे रामलाल के होठो पर गिरती है

रामलाल अपने दोनों हाथ ऊपर की और बढ़ता हुआ नीलम की कमर को पकड़ कर अपनी और खींच लेता है

नीलम एक झटके के साथ सीधा अपने ससुर के मुँह पर आ बैठती है

रामलाल अपने होठो से अपनी बहु के निचले होठो को चुस्त हुआ उसकी छूट का भरपूर स्वाद लेने लगता है

नीलम- अह्ह्ह बाबूजी ये क्या कर रहे है आप

नीलम घूम लार सीधा अपने ससुर का लुंड पकड़ लेती है और धोती हटती हुई निचे झुक कर उसे चूसने लगती है

दोनों ससुर बहु एक दूसरे के समान को चूस चूस लार पूरा गीला कर देते है

करीब 10 मं तक ऐसे hi चूसै जारी रहती है

रामलाल- बेटी अब और इन्तजार नहीं होता अह्ह्ह्ह इसका कुछ कर

नीलम एक आज्ञाकारी बहु की तरह अपना पेटीकोट खोल देती है और तुरंत hi घोड़ी बन जाती है

रामलाल पीछे से आकर अपना लुंड अपनी बहु की गीली छूट पर रख देता है

नीलम अपने मुँह से थूक लेती हुई अपनी गांड के छेद पर लगती है और अपने ससुर का लुंड पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर रख देती है

रामलाल नीलम के इस कदम से चौक जाता है

नीलम- ससुरजी आज अआप पहली बार अपनी बहु को छोड़ रहे है यह पल तो यादगार रहना चाहिए ना

रामलाल- है भगवान् क्या चुड़क्कड़ बहु दी है मजा आ जाएगा तेरे साथ तो बहु

नीलम- अब तो आप देखते जाइये कैसे में आपकी जिन्दी को खुसियो से भर देती हु

रामलाल अपना लुंड भू की गांड में सरकने लगता है

बिना कोई ज्यादा ताकत लगाए रामलाल का पूरा का पूरा लुंड नीलम मि गांड में घुस जाता है

रामलाल पहले से hi जनता था की उसकी बहु पुराणी खेली खायी है पर उसे ये भी पता था भले hi इसके सरे छेद फटी हुए है फिर भी मजा पूरा देगी

नीलम- अह्ह्ह अब छोड़िये न ससुरजी बहुत खुजली हो रही हसि है मेरी गांड में

रामलाल अब तेजी के साथ उसकी गांड मरना शुरू कर चूका था

बिच बिच में वो अपना पूरा लुंड बहार खींच लेता और एक नजर उसके खुले हुए छेद को देख कर दुबारा से अपना लुंड नीलम की गांड में पेल देता

नीलम को इस सब में खूब मजा आ रहा था

करीब 10 मिंट की चुदाई के बाद रामलाल अपनी बहु की गांड में hi झाड़ जाता है

रामलाल पड़ा पड़ा हाफ रहा था नीलम अपना पेटीकोट पेहेन कर कमरे में चली जाती है

झा अब भी उसका पति घोड़े बेच कर सिया हुआ था

नीलम- चुटिया साला....
 
अपडेट -217

हरी की पीठ पीछे अब उसका बुद्धा बाप रोज ुस्लि बीवी को भोग रहा था

नीलम भी बड़े hi चौ से अपने ससुर से रोज रोज नए नए तरिके से चुदवाती

ससुर बहु की चुदाई अब दिन बा दिन और भी गन्दी होती जा रही थी

रामलाल ने तो नीलम को यह तक बता दिया था की वो अपनी बेटी को भी छोड़ चूका है पर सिर्फ एक बार

नीलम ने एक अच्छी बहु की तरह अपने ससुर को वडा किया की जब मल्टी दीदी आएगी तो उसे एक hi सारः अपनी बेटी और बहु को भोगने का मौका मिलेगा जिसे सुन कर रामलाल की खुसी का कोई ठिकाना नहीं था

अब तो 1 महीने के hi अंदर माहौल ऐसा हो गया था की न तो मल्टी अपने ससुर के सामने घूँघट करती और न hi किसी तरह की शर्म

कई बार तो वो बिना पल्लू के hi रामलाल को अपनी गुदाज चिचियो के दर्शन करवा देती अपने पति के समाने hi

रामलाल भी अपनी प्यासी नजरो से अपनी बहु का रसभरा जोबन देख कर सिहर उठता और इशारे hi इशारे में उसे बता देता की अगर तेरा पति न होता तो यही पटक कर तुझे छोड़ देता

हर किसी की जिंदगी एक दम फर्स्ट क्लास चल रही थी

बस एक हरिया hi था जो अब मायूस रहने लगा था न तो उसे अब भूख लगती और न hi प्यास

दिन रात अपनी धोती में हाथ डेल अपने लुंड को थामे अपनी बेटी का इन्तजार करता रहता न जाने वो दिन कब आएगा जब उसकी बेटी ेल बार फिर अपने बूढ़े बाप की सवारी करेगी

इधर दूसरी तरफ रवि केशव के जाने के बाद से बेधड़क दिन रात अपनी दीदियो को छोड़ रहा

रेखा को तो पहले hi मल्टी से कोई शर्म लाज नहीं थी

मल्टी कई बार देख चुकी थी रेखा और रवि की चुदाई पर हद्द तो तब हो गयी जब एक रात रवि कमरे का दरवाजा खोले हुए एक साथ अपनी दोनों दीदियो को हुमच हुमच कर छोड़ रहा था

यह नजारा देख कर मल्टी की हालत खराब हो गयी और न कहते हुए भी उसका हाथ खुद बा खुद hi अपनी छूट को सहलाने लगा

उस दिन रेखा और कम्मो की चुदाई रात भर चली

और बहार खड़ी मल्टी रात भर अपनी दोनों नन्दो को अपने देवर से चुड़ते देखती रही अलग अलग तरीको से और अलग अलग छेड़ो में

तो रही बात केशव की

कहानी उसी दिन से शुरू होती है जब केशव अपनी बुआ के घर पंहुचा ....
 
अपडेट -218

केशव अपनी बुआ के घर पहुंच चूका था

जैसे hi वो दरवाजे पर पहुंचा उसे घर के अंदर से एक नौजवान लड़का निकलता हुआ दिखा जिसने एक धोती और बनियान पहनी हुई थी

लड़का केशव को देख कर चौक जाता है

शायद उसे बुआ ने पहले से hi बता रखा होगा की मेरा भतीजा आने वाला है

लड़का - भइया जी परनाम

केशव - परनाम भाई तुम जानते हो मुझे

लड़का- है वो जानकी चची ने बताया था की आप आने वाले हो

केशव - अच्छा अच्छा वैसे आप कौन है

लड़का - मैं यही बगल में रहता हु कभी कभी आ जाता हु जानकी चची का हल चल पूछने या कोई जरुरत होती है तब

केशव - धन्यवाद् भाई आपने बुआ का ख्याल रखा

लड़का- अच्छा भैया जी हम चलते है और भी काम है हमे

लड़का केशव से विदा पीकर जल्दी hi वह से 9 2 11 हो जाता है

केशव - बड़ा अजीब आदमी था

केशव को उसकी हरकते कुछ अजीब लगती है उसे उसपर शक हो रहा था की कहि इसने बुआ के अबधेपन का फायदा उठा कर घर से कुछ चुराया तो नहीं है जो मुझे देख कर यु घबरा गया

केशव पहले तो घर में घुस कर मैं दरवाजा बंद कर देता है

और जैसे hi वो घर के अंदर दाखिल होता है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

सामने बुआ एक दम नंगी अपनी टंगे फैलाये पड़ी थी उसके छूट अब भी गीली थी जो केशव को चीख चीख कर थोड़ी देर पहले हुई चुदाई की गवाही दे रही

केशव को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं होता की उसने यह क्या देख लिया

बुआ इस उम्र ने भी जवान जवान लोउडो का मजा लूट रही थी

बुआ की फैली टैंगो से उसकी छूट के निकले हुए होठ केशव को लुभाने ले लिए काफी थे

केशव का लुंड न कहते हुए भी खड़ा होने लगा

केशव अपनी बुआ का एक चक्कर लगते उसके मांसल जिस्म का मुआयना करने लगा

केशव - सच में क्या चीज़ है बुआ गजब का गदराया जिस्म है बुढ़िया का

इधर बुआ अभी तक नंगी पड़ी हुई थी इस बात से बेखबर की उसका भांजा उसे देख रहा है

अंतत में वही हुआ केशव भी खुद को रोक नहीं पाया और अपने लुंड को मसलता. हुआ पास जाकर बुआ की छूट को देखने लगा

केशव अपनी पंत खोल कर अपने खड़े लुंड को मसलता हुआ बुआ के सर के नजदीक गया और बिना किसी डर के उसके बालो को सेहलेते हुए अपना लुंड बुआ के गीले होठो पर रख दिया

अभी बुआ ने कुछ बोलने के लिए मुँह खोला hi था की पक्क्क से केशव ने अपना लुंड उसके मुँह में पेल दिया

हलाकि केशव का लुंड उतना बड़ा नहीं था खड़ा होने के बाद भी लगभग 6" होगा

बुआ तो अब भी यही समझ रही थी की ये वही उसका गाओं वाला लड़का है जो दुबारा से अपना लुब्द तैयार कर रहा है

बुआ भी मजे ले ले कर पूरा लुंड अपने मुँह में भर का चूसने लगी

केशव अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बुआ के चुकी पकड़ कर मसलने लगा जिससे बुआ का जोश और भी बढ़ने लगा और वो तेज तेज अपने मुँह को केशव के लुंड पर मारने लगी जिससे केशव को एक अलग hi मजा आ रहा था

क्योंकि आज तक उसने मल्टी को भी इस तरह अपना लुंड नहीं चुसाया था जिस तरह आज उसकी बुआ चीस रही थी

केशव की तो मनो लाटरी लग गयी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था की कोई औरत इस उम्र में भी इतना मजा दे सकती है

केशव भी जोश में आकर बुआ के बालो को पकड़ कर उसके मुँह को छोड़ने लगता है

क्योंकि बुआ एक खेली खायी औरत थी और उसे पता था की इतनी देर लुंड चूसने के बाद तो उसके यार का लुंड अपनी पूरी औकाद में आ जाता है पर यह तो लुंड और बढ़ने का नाम hi नहीं ले रहा था

उसे कुछ शक हुआ पर बोलती कैसे बेचारी मुँह में तो लुंड घुसा हुआ था

चुपचाप चुस्ती रही और कुछ hi पालो में केशव ने अपना सारा माल बुआ के मुँह में hi गए दिया और दूर हट कर जमीन पर बैठ गया

असल में केशव एक शरीफ लड़का था उसे अब ोाचटावा हो रहा था की उसने अपनी अंधी बुआ के साथ गलत किया है जिसके लिए उसे कोई माफ़ नहीं करेगा पर उस बेचारे को क्या मालूम था की यह जिस्म चीज़ hi ऐसी है की जो एक बार चख ले उसका आदि हो जाता है

बुआ - क्यों रे हरामी कलुवा आज इतनी जल्दी झाड़ गया और वो भी मेरे मुँह में hi

केशव को यकीन नहीं हो रहा था की ये वही कलवा था जो बुआ का पड़ोसी है जिसके सेहर जाने की बात बुआ ने कहि थी चिट्ठी में

मतलब बुआ आजसे नहीं न जाने कबसे कलुवा से छुड़वा रही है

बुआ चल कोई बात नहीं अब तो तू भी जा रहा है और मैं भी जा रही हु बस आज रात आ जाना और मेरे हर्र छेद को छोड़ छोड़ कर सारा पानी निकल देना ताकि ये बूढी छूट कभी दुनारा गीली न हो वैसे भी क्या पता अब नसीब का कोई लुंड मिलेगा या नहीं

केशव का मुँह खुला का खुला रह गया था अपनी बुआ की बाटे सुनकर

केशव जल्दी से िथ कर बहार चला जाता हसि और लगभग आधे घंटे बाद गेट खोल कर बहार जाता है और उसी समय दुबारा गेट पर दस्तक देता हुआ अपनी बुआ को आवाज देता है

अब तक बुआ भी कपडे पेहेन चुकी थी वो आकर केशव का स्वागत करती है उसे क्या पता था की अभी थोड़ी देर पहले उसने जिसका विरया पिया है वो यही केशव था

केशव चुपचाप अपनी बुआ के साथ अबदार चला जाता है

बुआ( बड़ा जल्दी आ गया ये तो बस आज की रात और न आता तो एक बार और छुड़वा लेती कलुवा से)

इधर कलुवा को भी पता था की अब बुआ के घर जाने का कोई फायदा नहीं है वो भी अपना सामान समेत के अपने परिवार के साथ सेहर के लिए रवाना हो जाता है
 
अपडेट -219

रात का खाना खाने के बाद जानकी बुआ केशव को सोने के लिए बोल कर अपने कमरे में चली जाती है

केशव के लिए उसने आंगन में hi एक खत दाल दी थी

बुआ ने अपने गदराये जिस्म पर कासी हुई सदी को उतर कर अलग कर दिया

और वैसे hi पेटीकोट और ब्लाउज में खत पर लेत गयी

इधर केशव ने जब से बुआ को नंगा देखा था उसके अंदर बैचनी बढ़ती hi जा रही थी

एक पल में hi वो एक शरीफ आदमी से एक हवस का पुजारी बन गया था जिसको नियत अब अपनी hi अंधी बुआ पर खराब होने लगी थी

बुआ के गदराये जिस्म के बारे में सोच सोच कर केशव के लुंड की नशे फटने को तैयार हो चली थी

केशव ने एक नजर बुआ के कमरे पर डाली जिसका दरवाजा अब भी खुला हुआ था

केशव बिना देर किये उठ खड़ा हुआ और एक एक करके अपनी बदन का हर एक कपड़ा निकल दिया और पूरा नंगा होकर जानकी बुआ के कमरे की और चल पड़ा

बुआ को लेते हुए अभी 5 hi मिंट हुए थे नींद तो उसकी आँखों से भी कोशो दूर थी खा उसे रात को उस लड़के से छुड़वाना था और केशव के आने के बाद पूरा प्लान hi फ़ैल हो गया

बुआ यही सोच रही थी क्या अब कभी इसकी छूट किसी लुंड की गर्माहट को अपने अंदर महसूस कर पायेगी क्या कभी उसकी छूट में अब फिर कभी किसी का विरया गिरेगा

केशव को दूर से hi दिख गया की उसकी बुआ अब भी जगी हुई है

पर अब उसे घंटा फरक नहीं पड़ता था आखिर थी तो जानकी बेचारी आंधी hi

केशव दबे पाँव बुआ के करीब पहुंच गया और उसके पसीने से तर बतर जिस्म को देख कर लम्भी सांसे खींचता हुआ अपना लुंड मसलने लगा

मन तो उसका अब भी यही कर रहा था की अभी जानकी के मुँह में पेल दे पर उसे थोड़ा थोड़ा डर अब भी था

पर वो खा जनता था की यह हवस का नशा hi ऐसा है जो एक बार सर चढ़ जाये तो रिश्ते नाते सब बदल ढलता है जो अब उसके साथ भी होने वाला था

केशव बड़े hi आराम से बुआ के करीब जाकर उसके जिस्म की महक को सूंघने लगा

आह्ह्ह्ह क्या महक थी

एक अधेड़ उम्र की औरत के जिस्म की महक hi कुछ और होती है जिसने न जाने कितने घाटों का पानी पिया होगा

केशव की रफ़्तार अब अपने लुंड पर बढ़ती hi जा रही थिई

केशव से और बर्दाश्त नहीं हुआ और अचानक से उसने बुआ के सर पर हाथ रख दिया

अपने सर पर किसी का हाथ महसूस करते हुआ बुआ एक दम से उठ गयी....
 
अपडेट-220

जानकी किसी का हाथ अपने सर पर महसूस करते hi सिहर उठती है

केशव उसके कानो के पास जाकर बड़े आहिस्ता से बोलता है

केशव - आवाज मत करना

जानकी की जान में अब जान आती है वो समझ जाती है की ये वही गाओं वाला लड़का है जो उसकी छूट की प्यास बुझाने आया है वो खुस होती हुई आराम से बोलती है

जानकी - दरवाजा बंद करदे बहार केशव सोया है

केशव अब तक अपनी बुआ के चुके मसलना शुरू कर चूका था और अपने लुंड को उसके होठो तक पहुंचा देता है

बुआ- अह्ह्ह कितना तड़पाएगा अब कलुवा मेरे बच्चे छोड़ दे अपनी चची को

केशव अपने लुंड को बुआ के मुँह में तेल देता है

बुआ भी लपक कर लुंड चूसना शुरू कर देती है

केशव एक एक करके ब्लाउज के सरे हक्क खोल देता है और अपना हाथ निचे बढ़ता हुआ एक झटके से बुआ का पेटीकोट भी खोल देता है

बुआ तुरंन्त hi पलट कर घोड़ी बन जाती है

केशव भी देर न करते हुए उसकी गांड की तरफ आता है और बड़े hi गौर से अपनी बुआ के फ़टे हुए छेड़ो को देखने लगता है

बुआ- अह्ह्ह अब और मत तड़पा कलुवा घुसा दे झा तेरा मन है व्हा बास छोड़ मुझे और गिरा दे अपना पानी मेरे किसी भी छेद में

जानकी बुआ की बात सुनकर केशव को समझते देर नहीं लगती की जानकी बुआ गांड मरवाने की भी शौखिन है

आज तक बेचारे केशव ने छूट तो बहुत मरी थी पर गांड नहीं मरी थी

अब केशव का लुंड और भी तेज तेज झटके खाने लगा

केशव अपने लुंड को मसलता हुआ बुआ के पीछे अपनी पोजीशन लेता है और एक अपने लुंड को उसकी गांड पर रखता हुआ अंदर दबाने लगता है

जानकी अपनी जवानी में hi अपने दोनों छेद फड़वा चुकी थी जिसकी वजह से बिना किसी दिक्कत के केशव का लुंड अंदर की और सरकने लगता है

केशव - अह्हह्ह्ह्ह

बुआ- अह्ह्ह हां डाल दे पूरा लुंड अह्ह्ह पूरा जड़ तक्क पेल दे बेटा

बुआ की बात सुनकर केशव का जोश दोगुना हो जाता है वो एक hi झटके में अपना पूरा लुंड बुआ की गांड में पेल देता है

बुआ- अह्ह्ह मर्डर गयी रे कलुवा तेरी कच्ची

केशव बुआ की गांड को पकड़ता हुआ जोरदार झटको के साथ बुआ की गांड मरना शुरू कर देता है

इधर बुआ को मजा तो आ रहा था पर अब भी उसकी गांड के अंदर ेल खली पैन सा महसूस हो रहा था जिसका कारन उसे अब तक समझ नहीं आया था

असल में कलुवा के लुंड के हिसाब से केशव का लुंड छोटा था

करीब 5 मिंट तक अपनी बुआ की गांड छोड़ने के बाद केशव अपना लुंड बाजार निकल कर उसे एक झटके में अपनी बुआ की पनियाई बुर्र में पेल देता है और उसे छोड़ने लगता है

केशव के ऊपर अब शैतान हबी हो चुका था

उसके झटके और जोरदार होते जा रहे थे

करीब 2-3 मिंट के बाद केशव अपना पानी अपनी बुआ की बुर्र में छोड़ने लगता है और उसकी पीठ पर hi गिर्र जाता है

अब बुआ को भी शकक हो गया था क्योंकि कलुवा काम से काम 10-15 मिंट बाद hi पानी गिरता था

दोनों बुआ भतीजा हाफ रहे थे

केशव खड़ा होता है और हस्ता हुआ अपना लुंड बुआ के होठो पर फेरने लगता है

बुआ- तुझे क्या हुआ कलुवा आज और तेरा लुंड क्यों इतना छोटा है

केशव - हहह मेरी रैंड बुआ अब कलुवा नहीं अब तेरा ये भतीजा छोड़ेगा तेरी बुर्र गांड और तेरा ये रसीला मुहहह अह्ह्ह

इतना बोलता हुआ केशव अपना लुंड बुआ के मुँह पर दबा देता है और जानकी अपनी hi छूट का पानी पिने पर मजबूरर हो जाती है

केशव की बात सुनकर जानकी चौंक जाती है उसे यकीन नहीं होता की उसके सगे भांजे ने उसकी गांड मरी और उसकी छूट में अपना विरया गिराया

करीब 5 मिंट तक्क अपनी बुआ का मुँह छोड़ने के बाद केशव दुबारा से अपना लुंड बुआ की गांड में पेल देता है और अगले hi पल उसकी छूट में

केशव बार बार यही कर रहा था वो अपनी बुआ के फ़टे हुए छेड़ो का पूरा फायदा उठा रहा था कभी लुंड छूट में पेलता तो कभी गांड में

जब जब केशव अपना लुंड जानकी बुआ की गांड से निकल कर उसकी छूट में डालता तो फर्रर्रर्र की आवाज आती जो बुआ की गांड से निकलते पड़ की थी

रात भर में केशव 1 बार अपनी बुआ की छूट में और 1 बार गांड और 1 बार मुँह में अपना विरया गिरता है और अंतत में अपनी अंधी बुआ को उसी हालत में छोड़ करर बहार चला जाता है

इस बिच जानकी ने एक सब्द्द नहीं बोलै था

असल में तो उसे सूझ hi नहीं रहा था की आखिर वो अपने hi सहज भतीजे की इस हरकत पर क्या रियेक्ट करी

अंतत में सोच में पड़ी जानकी बुआ भी नींद की आगोश में चली जाती है

दूसरी तरफ रेखा और रवि नंगे एक दूसरे की बहो में पड़े हुए थे

रेखा की गांड से अब भी रवि का विरया बह रहा था जो इस बात का गवाह था की अभी थोड़ी देर पहले hi रवि ने उसकी गांड मरी है

रेखा रवि की छाती पर सुर रखे उसके छाती के बल सेहला रही थी

रवि किसी सोच में डूबा हुआ था

रेखा - क्या हुआ मेरे राजा भाई किस सोच में डूबा पड़ा है

रवि- दीदी एक बात है जो मुझे खाये जा रही है

रेखा - अपनी दीदी को बता

रवि- दीदी आपको तो आता hi है की जबसे केशव भैय्या ने मुझे उस छिनाल का मुँह छोड़ते हुए देखा है तब से वो मुझसे ढंग से बात भी नहीं करते

रेखा - अरे उसका छोड़ मेरा मुँह छोड़ लेना खा तू भी उस रानन्द की बात कर रहा है

रवि- नहीं दीदी मुझे उस कुटिया से बदला लेना है

रेखा - ाचा और कैसे लेगा तू उससे बदला

रवि- उस छिनाल को पटक पटक कर छोडूंगा और वो भी केशव भैय्या के सामने भीख मांगेगी वो छूटने की पर नहीं छोडूंगा

रेखा - अच्छा तब तो मुझे भी बुला लेना

हहह

रवि- क्या दीदी आपको हसी आ रही है आपने बोलै मदद करोगी और अब हस्स रही हो

रेखा - अच्छा बाबा ठीक है वैसे तेरी इस दीदी के पास एक रास्ता है जिससे तू केशव की बीवी को उसकी के सामने पेल सखे वो भी अपनी रांदड़ बना कर

रवि- तो बताओ ना दीदी

रेखा - देख ले बाद में मत बोलना मुझे

रवि- आप बताओ तो

रेखा - केशव को भी इस खेल में शामिल करना पड़ेगा

रेखा की बात सुनकर रवि उठ कर बैठ जाता है

रवि - क्या ऐसा हो सकता है दीदी

रेखा - अगर तू कहे तो

रवि- मतलब भैया और मैं आपको एक साथ छोड़ेंगे

रेखा - हां मेरा भी फायदा है ेल साथ 2-2 लुंड लुंगी अपने दोनों छेड़ो में पर इससे भी ज्यादा तेरा फायदा है इसमें

रेखा सरकती हुई निचे की और आ जाती है और अपने छोटे भाई के मुरझाये हुए लुंड को अपने होठो में पाकर कर चूसने लगती है

रवि- मेरा क्या फायदा दीदी

रेखा - अरे मेरे बुद्धू भाई मतलब तू तेरे भइया के साथ मिलकर उसकी बीवी को छोड़ सकता है

रवि- वह दीदी क्या इडा दिया है आपने ओर ये होगा कैसे

रेखा - वो तू मुझ पर छोड़ दे

बस मैं जैसा बोलू वैसा करना बस्स्स समझा

रवि- हां हां दीदी जो आप बोलो वो

रेखा - चल ठीक है तेरा काम करवा दूंगी केशव को आने दे बुआ के घर से पहले मेरी छूट चाट

देख तो तेरी दीदी की बुर्र कैसे पनियाई हुई है

रेखा अपनी टंगे खोल कर खत पर लेत जाती है

रवि अपनी दीदी की छूट का पानी चेतना शुरू कर देता है .......
 
अपडेट -221

अगली सुबह जानकी मुखिया से भेट करके घर की चाभी उसे सूप देती है

मुखिया भी वडा करता है की अगले कुछ hi दिनों में जानकी का सारा समान उसके भाई के घर पहुँचवा देगा

यह वडा लेकर जानकी केशव के साथ अपने भाई के घर की और निकल पड़ती है

इधर घर में मल्टी उठ कर घर के काम कर रही थी पर अब तक्क न तो रेखा उठी थी और न hi कम्मो

मल्टी को पता तो पहले से hi था की इन तीनो भाई बहनो के बिच क्या चल रहा है

मल्टी यह सोचते hi अंदर तक्क हिल जाती थी की कैसे रवि एक साथ अपनी दोनों दीदियो को छोड़ रहा है वो भी बिना किसी शर्म लाज के

मल्टी काम छोड़ कर दरवाजे के पसस पहुंच जाती है और जैसे hi वो दरवाजे को थोड़ा सा धकेलती है दरवाजा पूरा का पूरा खुल जाता है

अंदर का नजारा देख कर मल्टी के पेअर कम्पनी लगते है

क्या एक भाई अपनी hi बहनो के साथ इस हद्द तक्क गंदा काम कर सकता है जो इस वक़्त रवि अपनी दोनों दीदियो के साथ कर रहा था
 
अपडेट -222

अंदर का नजारा देख कर मल्टी के हाथ पेअर कांप रहे थे

उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसका छोटा देवर अपनी दीदियो के साथ इतना गन्दा काम भी कार सकता है

रवि ने कांप को रेखा के ऊपर लिटाया हुआ था और अपना लुंड उसकी गांड में दाल कर छोड़ रहा था

और निचे पड़ी रेखा का सर ठीक अपने भाई बेहेन की लुंड और छूट के निचे था

जिसकी वजह से कम्मो की छूट और गांड से बह रहा पानी सीधा उसके मुह्ह के भीतर जा रहा था

यही वजह थी की रेखा का पूरा चेहरा चिपचिपे सफेद पानी से सना हुआ था

रवि अपना लुंड कभी कम्मो की छूट में डालता तो कभी गांड में और जबरदस्त धक्को के साथ उसकी गांड और बुर्र की चुदाई करता

पर मल्टी को ताज्जुब तो तब हुआ जब रवि ने कम्मो की गांड से अपना चिपचिपा लुंड निकल कर सीधा रेखा के मुँह पर रख दिया और ेल hi झटके में पूरा लुंड अपनी दीदी के मुँह में पेल कर उसके मुँह को छोड़ने लगा

कमरे के अंदर का नजारा बेहद कामुक हो चला था

रवि कभी कम्मो की छूट छोड़ता तो कभी रेखा का मुहहह

करीब 10 मिंट टककक मल्टी यह अंदर का नजारा देखती रही

अच्चानक से रेखा की नजर मल्टी पर पद गयी जो उन्हें देख कर अपनी सदी के ऊपर से hi अपनी छूट को कुरेद रही थी

रेखा झटके के साथ ूठः जाती है

रेखा को देखते hi मल्टी बहार की और भागती है

कम्मो और रवि रेखा को जाते हुए देख कर कुछ समझ नहीं पते

करीब 2 मिंट बाद रेखा फिर कमरे आती है

और इस बार उसने अपने एक हाथ से मल्टी के बाल पकडे हुए थे और खुद तो वो पहले से hi नंगी थी

इस वक़्त रवि अपनी कम्मो दीदी को अपना लौड़ा चुसवा रहा था जिसे कम्मो भी बड़े मजे से चूस रही थी मनो किसी बैसेह को उसकी पसंदीदा लॉलीपॉप पकड़ा दी गयी थी

रेखा और मल्टी को देख कर कम्मो रुक जाती है पर रवि का लुंड अब भी उसके मुँह में hi था

रवि- क्या हुआ दीदी भाभी को क्यों पकड़ लायी

कम्मो फिर से अपनी लॉलीपॉप चूसने में वयस्त हो जाती है मनो उसे इन सब बातो से कोई मतलब hi न हो

रेखा - ये साली रांदड़ हम तीनो की चुदाई देख कर अपनी छूट रगड़ रही थी छिनाल साली

रवि अपने हाथ से कम्मो दीदी के सर को सहलाता हुआ बोलता है

रवि- अरे तो देखने दो न दीदी मैं किसी बहार वाली को थोड़े hi छोड़ रहा था मैं तो अपनी दीदियो की सेवा कर रहा था क्यों कम्मो दीदी

कम्मो - हूउउउउउ

कम्मो एक नजर अपनी आँखे ऊपर करती हुई आवाज निकलती है और अगले hi पल फिर से वयस्त हो जाती है

मल्टी - आने दो तुम लोग अपने भैया को मैं उन्हें सब बताए दूंगी की तुम तीनो उनकी पीठ पीछे क्या क्या करते हो

रेखा मल्टी के बाल खींचती हुई उसे एक जोरदार थप्पड़ मरती है

रेखा - अच्छा साली रैंड क्या क्या बताएगी तू उसी

रवि- अरे छोड़ो ना दीदी भाभी को जो करना है करने दो

रेखा- नहीं रवि ऐसे नहीं अगर इसे बताना है तो सब कुछ बताना होगा

कम्मो इधर आ

काममो रेखा की बात को अनसुना करती हुई लगातार लुंड को चूस और चाट रही थी मनो उसे वो चाहिए था जो उसके अंदर से निकलने वाला था

रेखा - तूने सूना नहीं काममो मैंने क्या खा

रेखा की आवाज में इस बार गुस्सा था

कम्मो भी मज़बूरी में अपने छोटे भाई के लुंड को छोड़ रेखा के पास चली जाती है

काममो - क्या हुआ दीदी कितना मजा आए रहा था

रेखा - अरे मेरी चुड़काड बहना चूस लेना अपने छोटे भाई का लुब्द पहले इस छिनाल को पकड़ अगर इसने मुँह खोला न तो न तो कभी चूसने को मिलेगा और न hi छुड़वाने को

काममो - क्या भाभी क्या मिलता है आपको हम तीनो पर नजर रख कर अपने काम से काम रखा करो ना देखो सारा मजा बिगाड़ दिया आपने आकर

कम्मो मल्टी का एक हाथ पकड़ लेती है

तड़ाक

रेखा एक और छठा मल्टी के गाल पर मरती है और अपने दुपट्टा पकड़ कर उसके दोनों हाथ बांध देती है

रेखा - अब ये भी बताना मेरे भाई को की कैसे तूने अपनी hi नन्दो के सामने अपने देवर से अपनी चुदाई करवाई

मल्टी - नहीं रेखा नहीं मैं बोलती हु ृक्क जा जो तू कर रही है वो गलत है

रेखा - अच्छा वो गलत है और जो तू हमारी बसी बसै जिंदगी उजड़ने की कोशिश कर रही है वो लय सही है आज तुझे मजा आएगा मेरी रैंड भाभी

रवि तो एक नई छूट छोड़ने के नाम से hi उठ खड़ा हुआ

रेखा मल्टी को आगे की और लती हुई खत के साथ टिका कर घोड़ी बना देती है और कम्मो को इशारे से उसका सर पकड़ने के लिए बोलती है

काममो अपनी भाभी के सर को मजबूती से पकड़ लेती है

काममो - देखा भाभी आपने ये सब आपको hi गलती है हम भाई बेहेन जो कर रहे थे करने देती तो तुम्हारा क्या जाता अब भुगतो तुम

मल्टी - कम्मो तू अभी छोटी है तू भी इस रंडी की बातो में आकर बहक गयी है

कम्मो एक जोरदार छठा मल्टी की गर्दन पर मरती है

कम्मो की इस हरकत पर सब है देते है सिवायी मल्टी के

काममो - क्या खा छोटी कभी मेरे भाई ला लुंड देखा है तूने साली छिनाल अपने तीनो छेड़ो से पूरा का पूरा निगल जाती हु और कहती है छोटी हु तू साली रंडी तुझे तो जरूर सजा मिलनी चाहिए

रवि पहले hi मल्टी के पीछे आ चूका था

अगले hi पल रेखा मल्टी का पेटीकोट ऊपर कमर तक चढ़ा कर उसे पीछे से नंगी कर देती है

अपनी भाई की छूट और गांड देख कर रवि सीधा अपनी पोजीशन लेता है और अपने लुंड को मल्टी की छूट पर रख देता

रेखा एक हल्की चपत रवि के सर पर लगती है

रेखा - तू इस साली को मजा देना कहता है या सजा

रवि- तो दीदी सजा कैसे दू

रेखा अपने छोटे भाई का लुंड खुद hi पकड़ कर अपनी भाभी की गांड के छोटे से छेद पर टिका देती है

अपनी गांड के छेद पर रवि का लुंड महसूस होते hi मल्टी की सांसे ऊपर निचे होने लगती है

मल्टी - नहीं रेखा वह नहीं व्हा नहीं तुझसे मैं वडा करती हु मैं कुछ नहीं कहूंगी तेरे भइया को तुम तीनो जो कहो वो करो बस मुझे छोड़ दे रेखा भगवन के लिए जाने दे मुझे

रेखा - जाने दूंगी भाभी बस एक बार मेरे भाई का लुब्द लेले अपनी गांड में

काममो - अब मजा आएगा भाभी हाहाहा

रवि बिना देर किये ेल जोरदार झटका मरता है पर गांड का छेद ज्यादा छोटा होने की वजह से लुंड फिसल कर ऊपर की और चला जाता है

रेखा - अरे मेरे छोटे भाई आराम से इतनी जलती भी क्या है

रेखा अपने मुँह से थूक लेती हुई अपने छोटे भाई के लुंड पर अच्छे से लगती है और उसे फिर से अपनी भाभी की गांड पर रख देती है

रेखा - पहले थोड़ा सा अंदर तो दाल फिर पेलना इसकी गांड को पुरे के पुरे लुंड के साथ

रवि अपनी दीदी की आगया का पालन करता हुआ थोड़ा जोर लगता है और उसला प्रयास सफल भी होता है

उसला टोपा धीरे धीरे मल्टी की गांड में घुसने लगता है

मल्टी की तो मनो नस नस फैट रही थी वो चिल्लाना कहती थी पर कम्मो ने उसके सर के साथ साथ उसका मुँह भी बंद किया हुआ था

रेखा अपने हाथ पीछे लेजाकर रवि की गांड पर चिकोटी काट लेती है

रवि एक झटके के साथ अह्ह्ह करते हुए आगे की और होता है

और उसका लुंड अपनी भाभी की गांड को फाड़ता हुआ आधा अंदर चला जाता है

मल्टी की आँखे बहार आ जाती है

इधर रवि संभालता हुआ एक और जोरदार झटला मरता है और अपना पूरा का पूरा लुंड मल्टी की गांड में पेल देता है

कम्मो तुरंत hi अपना हाथ हटा लेती है

मल्टी - अह्ह्ह माआ माअररररर गयीईइ कमीनी रेखा ये क्या गुसा दिया तूने मेरी गंडड में अह्ह्ह

काममो - भाभीजी ये मेरे भाई और आपके प्यारे देवर का लुंड है जो आपकी गांड के भीतर घुसा हुआ है और अब आपकी गांड फात चुकी ही हाहाहा

कितना मजा आ रहा है न रेखा दीदी भाभी की हालत देख कर

रेखा - तुझ साली रंडी को इस घर की दासी न बनाया तो मेरा नाम भी रेखा नहीं छोड़ रवि अब इसे और दिखा दे कितना दम है तेरे लौड़े में

रवि- जो हुकुम दीदी

रवि अपना एक पेअर उठा कर खर पर रखते हुए अपना लुंड थोड़ा बाजार खींचता हुआ फिरसे अंदर पेल देता है

मल्टी की हालत अब बहुत खराब हो चली थी इधर पीछे से रवि लगातार उसकी गण्ड छोड़ रहा था

कम्मो बड़े hi प्यारे तरिके से अपनी भाभी के बाल सेहला रही थी और उसे दिलासा दे रही थी

कम्मो - बास भाभी बास थोड़ी देर और फिर तुम्हे भी आदत हो जाएगी गांड मरवाने की बस थोड़ा सा और सेहेन करलो

इन सब में कम्मो को मजा भी खूब आ रहा था पर मल्टी की हालत सिर्फ उसे hi पता थी

करीब 10 मिंट तक छोड़ने के बाद रवि की सांसे फूलने लगती है

रेखा समझ जाती है की उसला छोटा भाई अब झड़ने वाला है

रेखा - इस साली रैंड के लिए एक hi सजा काफी नहीं है

काममो - तो अब क्या करे दीदी

रेखा - रवि अपने बीज से इसकी कोख भरदे

रेखा की बात सुनते hi मल्टी संन्न रह जाती है अभी वो कुछ बोल पति उससे पहले hi रवि गांड से लौड़ा निकल कर एक बार में hi अपनी भाभी की पनियाई बुर्र में पेल देता है

मल्टी ahhhhhhhhhhh माआ

अब रवि तेजी के साथ मल्टी की छूट छोड़ रहा था

गांड का दर्द कुछ हद्द तक्क काम हुआ था और अब छूट मरवाने के इस मजे में मल्टी भी सब कुछ भूल कर गरम सिसकिया निकल रही थिई

मल्टी अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह देवररर ही आह्ह्ह्हह कैसी तुममम अपनी भाई की बीवीवी को छोड़ रहे हो अह्ह्ह

करीब 5 मिंट की चुदाई के बाद रवि अपना सारा विरया मल्टी की छूट में गिरा देता है और कुछ पल तक ऐसे hi लुंड को अंदर धसाये रखता है ताकि एक एक बून्द ाचे से उसकी बैसेहदानी तक पहुंच जाये

करीब 5 मिंट बाद रवि अपना लुंड बहार निकल लेता है

मल्टी की छूट से कुछ बुँदे बहार आती है पर अधिकतर विरया अंदर अपनी जगह पर पहुंच चुका था

रवि- अह्ह्ह हो गया दीदी काम भर दिया भाभी की बैसेहदानी को

रेखा मल्टी के हाथ का दुपट्टा खोल कर रवि के पसीने को पोछने लगती है

रेखा - कितनी म्हणत करता है रे तू मेरे भाई

मल्टी पहले तो खत से निचे गिर जाती है

फिर लंगड़ाती हुई बहार जाने लगती है

रेखा - क्यों मल्टी जीई ये भी जरूर बताना मेरे भाई को हहह

काममो - चल तो देखो भाभी की लगता है अभी अभी सील टूटी हो

रवि- गांड की

तीनो भाई बेहेन हसने लगते है

मल्टी अपने मैं में तीनो को गालिया देती हुई बहार जाकर हैंडपंप के पास बैठ कर अपने छूट में ऊँगली घुसा कर विरया निकलने की कोशिश करती है

बहुत कोशिश के बाद भी कुछ बहार नहीं आता वो समझ जाती है की उसकी बच्चेदानी में अब उसके बाप के साथ साथ रवि का भी विरया पहुंच चुका है

तीनो भाई बेहेन कमरे में नंगे hi लेट जाते है

इधर केशव भी बस अड्डे पर उतर चूका था और अब रिक्शा पकड़ कर घर की और निकल जाता है ....
 
अपडेट -223

केशव एक रिकस्वा लेकर घर पहुंच जाता है

रवि और रेखा बहार hi बैठे हुए थे

रेखा - देख रवि भाई आ गया अब तू देख मेरा जादू कैसे इसे भी अपने काबू में लती हु

रवि- सच में दीदी तुम्हारा जवाब नहीं

रेखा भगति हुई केशव के गले लग जाती है

केशव का नजरिया अब पहले से बहुत ज्यादा बदल चूका था

एकदम से उसकी छाती पर उसकी बेहेन की कठोर चूचिया गाड़ने लगती है

केशव - क्या बात है रेखा बड़ा प्यार आ रहा है आज तो तुझे मुझ पर

केशव भी मौके का फायदा उठता हुआ अपने हाथ अपनी बेहेन की पीठ पर घूमता हुआ उसे अपने से चिपका लेता है

कम्मो भी तब तक आ चुकी थी सब एक दूसरे से मिलते है

जब रवि बुआ के पेअर छूटा है तो वो उसे भी अपनी छाती से लगा लेती है

केशव और रवि एक दूसरे को देख तो रहे थे पर कोई कुछ बोल नहीं रहा था

इधर रवि को बुआ अपनी गॉड में बैठा लेती है

रेखा भी जबरदस्ती केशव की गॉड में बैठ जाती है

कम्मो अंदर जाकर चाय पानी की वयवस्था करने लगती है

तब तक्क मल्टी भी बहार आ जाती है

केशव - अरे क्या हुआ मल्टी ऐसे लंगड़ा क्यों रही हो तुम

रेखा अपनी कमर को बड़े hi मादक अंदाज़ में अपने भाई के लुंड पर घूमती हुई बोलती है

रेखा - है है भाभी यु लंगड़ा क्यों रही हो तुम क्या हुआ तुम्हे

मल्टी जानती थी की यह रेखा का hi प्लान है जो उसे अब फिरसे उकसाने की कोशिश कर रही है

मल्टी - कुछ नहीं बस वो मैं कहते से टकरा गयी थी

रेखा - अरे मेरी प्यारी भाभी जरा देख कर चला कीजिये हमारे यहां के कहते भूत लम्बे और मजबूत है क्यों है न भइया

रेखा अपनी कमर से एक दम से पूरी घूम जाती है और केशव के मुँह के सामने मुँह को घूमती हुई कहती है

केशव - है है मल्टी आराम से चला करो

रेखा - भाभी ध्यान नहीं डौगी तो रोज hi लंगड़ाती फिरोगी इस घर में

अब रेखा केशव के इतनी पास थी की उसे अपनी बेहेन की सांसो की गर्माहट के साथ साथ उसके मुँह के अंदर से आ रही उस खुसबू का भी स्वाद मिल रहा था जो अब उसके सोये हुए लुंड में तूफ़ान मचाने वाली थी

रवि- हां हां मल्टी जाओ जरा देखो तो कम्मो क्या कर रही है अब्ब तक्क

मल्टी जानती थी की रेखा उसके पति की गॉड में ल्यो बैठी है

पर आखिर थे तो वो भाई बेहेन hi मल्टी यु एक दम से खुलकर विरोध भी नहीं कर सकती थी

मल्टी सदा सा मुँह बनती हुई घर के भीतर चली जाती है

रेखा - अरे रवि जा बुआ को घर के अंदर लेजा

रवि भी चुपचाप घर में चला जाता है जानकी बुआ को लेकर

केशव - क्यों रे तूने खा देख लिए बड़े बड़े कहते

रेखा - बहुत है भइया बस ढूढ़ना आना चाहिए

केशव - अच्छा तो तूने कैसे ढूढ़ा

रेखा - भइया जरुरत हो तो भगवांन भी मिल जाता है

रेखा अपने चेहरे को एक दम से अपने भाई के करीब ले जाती है और उसके मुँह पर गरम साँस मरती हुई उठने लगती है

केशव का दिमाग अब अपनी बेहेन की हरकतों से खराब हो रहा था वो एक दम से रेखा को कमर से पकड़ लेता है और दुबारा से अपनी गॉड में बैठा लेता है

रेखा की बड़ी गांड इस बार सीधा केशव के खड़े लुंड पर आ गिरती है

रेखा - अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

केशव - क्या हुआ मेरी बेहनाआ

केशव बड़े hi प्यार से अपनी बेहेन के चेहरे से बालो को साइड हटाता हुआ बोलता है

रेखा - अह्ह्ह्ह भैया लगता है एक और कहता मिल गया मुझे

रेखा बड़े hi मादक अंदाज में कहती है

केशव की हिम्मत भी. अपनी बेहेन की बात सुनकर दोगुनी हो चली थी

केशव अपने हाथ को अपनी बेहेन की चिकनी कमर पर रख कर घूमने लगता है

उसे आज अंदाजा हो रहा था की खुद उसकी hi बेहेन के जिस्म की बनावट किसी सवर्ग की अप्सरा से कम् नहीं है

रेखा - अह्ह्ह भइया क्या कर रहे हो

केशव - प्यार कर रहा हु अपनी बेहेन को

रेखा - हट्टू भइया मुझे नहीं करवाना आपसे ऐसा वाला प्यार और वैसे भी कौन भाई अपनी बेहेन की अंगू को छू कर उससे प्यार करता है

रेखा एक दम से अपनी भाई का हाथ अपनी कमर से हटा देती है पर वो अब्ब भी अपनी भाई की गॉड में बैठी अपनी कमर को यह वह घूमते हुए उसके लुंड के साथ खेल रही थी

केशव - अह्हह्ह्ह्ह तेरे जैसी बेहेन हो तो अंगो से प्यार जताने का मजा hi कुछ और है बहना

केशव इस बार अपने होठो से रेखा के लाल गलो को चूमता हुआ अपने दोनों हाथ उसकी कमर में दाल कर उसे अपनी और खींच लेता है

रेखा - अह्ह्ह भाई कोई देखेगा तो क्या कहेगा

केशव - क्या कहेगा की मैं अपनी बेहेन से प्यार कर रहा हु यही कहेगा

केशव के हाथ अब कमर से होते हुए पेट तक्क आ गया था

रेखा भी अब पूरी तरह से गरमा गयी थी यह सोच सोच कर hi उसकी छूट पानी छोड़ने लगी थी की वो दिन दुर्र नहीं जब उसके एक छेद में उसके छोटे भाई का लुंड और ेल छेद में बड़े भाई का लुंड होगा

इधर केशव अभी कुछ और करता उससे पहले hi मल्टी और कम्मो चाय लाती है

रेखा को न कहते हुए भी केशव की गॉड से उठना पड़ता है

मल्टी अंदर hi अंदर आग बबूला हो रही थी उसे समझ hi नहीं आ रहा था की आखिर वो क्या करे जिससे उसका पति इस दलदल में गिरने से बच जाये

न तो उसके अंदर इतनी हिम्मत थी की वो सीधा सीधा अपनी पति को इस घर में हो रही घटनाओ के बारे में खुल कर बता पाए और न hi इतनी हिम्मत थी की वो उसे बता सखे की अब इस घर ले लोग उसे भी इस खेल में शामिल करके उसकी बीवी की जिंदगी बेहाल करना कहते है ...
 
अपडेट -224

रवि बुआ को अंदर वाले कमरे में लेजा चूका था

थोड़ी hi देर में खाना बन चूका था

सब लोगो के खाना खाने के बाद अब नयी परेशानी थी की कोणु खा सोयेगा

रेखा - भैया तुम एक काम करो घर में सो जाओ भाभी के साथ

हम लोग यह बहार सो जायेंगे

केशव को भी बात कुछ हद्द तक ठीक लगी पर एक बार हां करने के बाद पता नहीं उसे क्या याद आया वो मना करने लगा

केशव - अरे नहीं नहीं यह काफी जगह है सब अंदर hi सो सकते है तुम लगो बहार क्यों सोओगे

रेखा - नहीं भैय्या मैं तो वो

केशव - कोई तो पो नहीं सब अंदर चलो वही सोयेंगे वैसे hi थोड़े दिन की दिक्कत और है कल से घर का काम शुरू हो जाएगा

केशव की बात सुनकर सब खुश हो जाते है

जमीन पर सबका बिस्तर लगा हुआ था

पहला कम्मो फिर रवि फिर बुआ और फिर रेखा केशव और अंतत में मल्टी

रेखा जान बुझ कर रेखा के पास सोई थी

इधर अपनी बेहेन को अपने पास महसूस करके hi केशव के मन में लड्डू फुट रहे थे

कुछ देर तक सब बाटे करते रहते है

कमरे में ज्यादा लाइट तो थी नहीं फिर भी चांदनी रौशनी जरूर आ रही थी

कम्मो अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने छोटे भाई के लुंड से खेलने लगती है

रवि भी बिस्तर में शांत पड़ा मजे लूट रहा था

इधर दूसरी और मल्टी अपना हाथ आगे बढ़ा कर केशव के लुंड पर रख देती है जो रेखा को साफ़ साफ़ दिख गया था

बुआ इस बिच शांति से पड़ी हुई यही सोच रही थी की शायद घर आने के बाद से केशव वो सब न करे जो उसने पिछली रात जानकी के साथ किया था

इधर रेखा जान बुझ कर अपना हाथ केशव के हाथ पर टच करके वापस लेली

रेखा की इस हरकत से उसे पता चल गया की उसकी बेहेन सोई हुई है

केशव अच्चानक से रेखा की और घूम गया मल्टी का हवथ अब भी उसके लुंड पर चल रहा था

केशव अपने हाथ से रेखा के हाथ को पकड़ कर अपनी और खींचता है और उसे चुम कर अपने होठो से लगा कर रेखा को देखने लगता है

रेखा के गर्मी और उसमे से आती वो मादक महक केशव को पागल कर रही थी और ऊपर से उसकी बीवी हर पल उसके लुंड को मसल रही थी

केशव रेखा के हाथ को पकड़ कर उसे दोनों हाथो से सेहला रहा था

रेखा भी जानती थी की उसके भाई के ऊपर हवस सवार हो चुकी है

रेखा अपनी आँखे भाई केशव से मिलती है

केशव प्यार से देखता हुआ अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ा कर रेखा के गलो को सहलाता हुआ अचानक से उसके होठो को मसल देता है

रेखा अपने शरीफ भाई की इस हरकत से सतब्ध रह जाती है

अगले hi पल रेखा अपने हाथ को चूका कर सीधा हो कर लेत जाती है

आखिर में वो भी अपने भाई को यह दिखाना कहती थी की वो भी एक शरीफ लड़की है जिसे निचे लिटाना कोई आसान काम नहीं है ....
 
अपडेट -225

इधर दूसरी और हरी अब दिन भर काम करता और उसकी बीवी दिन भर उसके बूढ़े बाप का बिस्तर गरम करती

यह तक की जब बेचारा हरी थक हार कर रात में घर आता और खाना खाकर सो जाता तो उसका बाप अपनी hi बहु को नोचना शुरू कर देता

ऐसे hi एक दिन की बात है हरिया की गांड में छोटी चीटिया काटने लगी वो अपना झोला उठा कर रवि के घर गया और वह से हरी का एड्रेस लेकर अपनी बेटी से मिलने चला गया

वह पहुंचते पहुंचते हरिया को 11 बज गए थे अब तक हरी तो काम पर जा चूका था

हरिया काफी देर तक दरवाजा बजता है और करीब 5 -7 मिंट बाद रामलाल दरवाजा खोलता है और हरिया को देख कर चौक जाता है

दोनों बुड्ढे एक दूसरे के गले मिलते है और हरिया को रामलाल अंदर ले जाता है

हरिया - क्या बात है भाई साहब बहुत देर लगा दी दरवाजा खोलने में

रामलाल - अरे समधी जी बस कर रहा था कुछ काम इसी में लेत हो गया

हरिया - नीलम खा है समधी जी

रामलाल - वो वह दरवाजे के अंदर आप जाइये बहु रानी से मिलिए तब तक मैं संडास करके आता हु

रामलाल बाथरूम में चला जाता है और अपना हरिया जैसे hi कमरे का दरवाजा खोलता है उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है

उसकी बेटी अधनंगी जमीन पर लेती हुई थी

उसका पेट अब पहले से काफी फूल गया था

हरिया - बेटी तेरी या हालत क्या रामलाल जी भी तेरे साथ

नीलम - हां बापू जब आपको मना नहीं किया तो अपने देवता समान ससुर को कैसे मना करती खोल दी इसलिए मेने अपनी टंगे अपने hi ससुर के सामने

हरिया - क्या धन्या बेटी पायी है मैंने इस संसार में कोई नहीं जो मेरी बेटी की बराबरी कर सखे

हरिया प्यार से अपनी बेटी की छूट को सहलाता हुआ कहता है

हरिया - लगता है संधि जी काम पूरा नहीं कर पाए इसीलिए मेरी बेटी की बुर्र का पानी अब भी टप्प टप्प गिर्र रहा है

नीलम - अब्ब्ब तो आप आ गए ना बापू तो कार्डो न अपनी बेटी का काम पूरा सूखा दो अपनी बेटी की बुर्र का पानी और निचोड़ दो अपना विरया मेरी इस फटी हुई छूट के अंडरर

हरिया चरणान्त hi अपनी पंत उतार कर फेकता हुआ अपनी बेटी पर साध कर उसकी छूट छोड़ने लगता है

दरवाजे पर खड़ा रामलाल यह सब देख कर हस्स है कर पागल हुआ जा रहा था कैसे एक बाप अपनी बेटी के पार्टी पागल हुआ जा रहा है

रामलाल - अरे समधी जी पहले आराम कर लीजिये

हरिया - संधि जी आप तो रोज मजे ले रहे हो मेरी फूल से बेटी को छोड़ छोड़ कर मेरा मालूम है आपको कितने दिनों बाद लुंड गिला हुआ है

नीलम - करिये करिये बापू जितना कहे कीजिये आपकी hi बेटी की छूट है सूखेगी थोड़े hi

रामलाल - ठीक है करो बाप बेटी तब तक मैं बहार hi लेता है

नीलम - सुनिए ससुर जी आज रात को उसका जुगाड़ कर देना ताकि हम तीनो मिल कर मजे कर सखे

ससुर- ठीक है बेटी तेरा हुकुम सर आँखों पारर

रामलाल के जाने के बाद हरिया अब भी अपनी बेटी को छोड़ रहा था

हरिया - तूने रामलाल जी को किसका जुगाड़ करने के लिए बोलै ताकि हम तीनो मजे कर सखे

नीलम - अरे मेरे भोले बापू मैंने ससुर जी को बोलै की रात में दारू का इंतजाम कर ले ताकि मेरे पति को पेट भर दारू पीला कर तुम दोनों बुड्ढे मेरा बजा दोनों तरफ से बजा सखू

हरिया - सच में बहुत हरामी हो तुम ससुर बहु हहहह....
 
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