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- Dec 5, 2013
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Part 67
उसके जाते hi रोहन बहार आया और क्या देखता है उसकी बहने किसी लड़की के साथ हंस हंस कर बातें कर रही हैं. उसे साइड में कड़ी वो लड़की तो नहीं दिख रही थी हाँ उसकी आवाज़ जरूर उसे जनि पहचानी सी लग रही थी.
पास आया ते देखकर बोलै… ोये मोती तू? तू कब आयी.
मितली आंख markar…jab तू अपनी अनु बुआ की बंद बजा रहा था.
रोहन के चेहरे की हवाइयन उड़ गयी उसकी बात सुनकर. मेहुल दी ने मौके की नजाकत को समझते हुए रोहन को समझते हुए बोलै.
Mehul…hahaha रोहन हमने बताया मितली को के कैसे अनु हुआ जोश में आकर बच्चों जैसे काम कर रही थी. रोहन ने उन्हें सबसे ज्यादा काम दिया यहाँ तक के पंखा भी ठीक करवाया उनसे. और जब वो जल्दी थक गयी तो कैसे तू उन्हें रीलीज़ करवा रहा था के कुछ भी कहो आपकी उम्र तो हो गयी है.
रोहन मेहुल की समझदारी की मन hi मन खुद दाद देता है. और सब हंस पड़े तो वो भी हंसने लगता है.
Mitali…wakai तूने अपनी जवान बुआ को बूढी घोषित कर diya.dekha बिचारि कैसे अपना सा मुँह लेकर निचे गयी है अभी. हाहाहा.
Rohan…chhodo इन सब बातों को, ये बताओ कैसे आना हुआ.
मितली ऑंखें दिखती हुई boli…kyun बे सेल ये सिर्फ तेरा घर है क्या? मेरा नहीं है. मुझे क्या तेरी परमिशन चाहिए इधर आने को कमीने.
फिर जब मितली देखती है के रूही और शानू उसकी और अजीब सी नज़रो से देख रही है उसके रोहन से बात करने के ढंग से तो वो हंसकर उन्हें क्लैरिफी करते हुए बोलती hai…tum लोग भी सोचते होंगे ये लड़की क्या बकवास किये जा रही है. पर क्या है न ये अपना चढ़ी फ्रेंड है बोले तो लंगोटिया यार, तो इसके साथ कुछ भी.
सभी हंसने लग जाते हैं तो रोहन बोलता hai…baten बहुत हुई थोड़ा काम कर लिया jaye…wo मेहुल को आंख मरते हुए बोलता hai…di आप मितली और रूही शिखर वाला कमरा साफ़ कर लो मुझे शानू के साथ स्टोर रूम कम्पलीट करना है.
मेहुल और रूही तो समझ चुकी थी और समझ शानू भी गयी थी के उसकी अब चुदाई होने वाली है पर मितली रंग में भांग डालते हुए boli…arey ऊपर इन तीनो को जाने दो मैं तुम्हारे साथ स्टोर साफ़ करवा देती हूँ.
रोहन को जब अपना मज़ा ख़राब होता दिखा तो वो बात बनाते हुए bola…arey स्टोर बहुत गन्दा है तुम्हारे कपडे ख़राब हो जायेंगे. और फिर मैं और शानू पहले से कर रहे थे स्टोर की सफाई और देखो न बेचारी बची का बहुत मन है मेरे साथ रहकर सफाई करने का.
रोहन ने दुनिया भर के बहाने बनाते हुए बोलै.
मितली कुछ सोचने लगी फिर boli…chali तो जाती हूँ पर मुझे पता है तू जरूर मुझे कोई गोली दे रहा है. बचपन से जानती हूँ तुझे. तुझे जब भी मुझे गोली देनी होती है तो ऐसे hi हड़बड़ा जाता है.
रोहन के हाथ में झाड़ू था उठा के उसको मरने वाले एक्शन में बोलता hai…bataun तुझे गोली की बची. मुझे तने मार रही hai…ruk तेरी तो कहकर उसके पीछे झाड़ू लेकर भागता है तो मितली फटाफट शिखर वाली सीढियाँ चढ़ जाती है.
मेहुल और रूही भी हँसते हँसते ऊपर वाली सीढियाँ चढ़ जाते हैं.
फिर रोहन शानू को लेकर स्टोर रूम में अत है और अंदर दरवाजे की कुण्डी लगा कर झाड़ू एक और फेंकता है तो देखता है के शानू कड़ी मुस्कुरा रही है.
रोहन इशारे से पूछता hai…kya?
तो शानू मुस्कुराते हुए उसके पास आती है और लोअर में उसके लुंड को पकड़कर बोलती hai…kya क्या झूठ नहीं बोलते आप अपने इस पप्पू के लिए.
रोहन भी मस्ती में उसकी छूट को मुठी में भींचते हुए बोलता है. अकेले मेटे पप्पू के लिए नहीं बचे तुम्हारी इस मुनिया के लिए भी.
शानू मुस्कुरा कर बोलती hai…ab होगा पप्पू का मुनिया से मिलान. दोनों हंसने लगते हैं और रोहन शानू के होंठो से अपने होंठ भिड़ा देता है और फिर शुरू होता है एक दुसरे के होंठो का रसपान.
रोहन जैसे hi अपने कपडे उतरने लगता है तो देखता है के शानू भी अपने कपडे उतर रही थी. शानू का शरीर थोड़ा भरवा था अपनी माँ सोनिआ की तरह.
पीछे से उसकी गांड क्या लग रही थी. जैसे ग्लोब वाले गोले को बीच में काटकर दोनों और चिपका दिए गए हों, सुडौल मांसल दो पिंड. देखते hi रोहन के मुँह में लार आ गयी.
वो एकदम से शानू के पीछे जाकर अपना लुंड उसकी गांड में खुभोकर हाथ आगे करके शानू के उभर अपने हाथो में पकड़कर मसलने लगता है और पीछे से उसकी गर्दन पर किश करने लगता है.
और गीली गीली किश करते हुए अपने लुंड को गांड में चुभोकर बोलता hai…shanu बचे क्यों न आज पिछले द्वार से एंट्री ली जाये, बोलो कैसा आईडिया है.
शानू जो अभी तक अपने भाई के इस सेक्सुअल अटैक का आनंद ले रही थी वो रोहन से दूर होकर boli…nahi भाई ये बिलकुल भी बढ़िया आईडिया नहीं है. आज नहीं लेकिन प्रॉमिस है आपसे दूंगी जरूर. देखिये मितली दी भी आयी हैं. वो सब करने से अगर चल में फरक पद गया तो वो क्या सोचेंगी, और उनको भी छोडो वो आपकी जासूस बुआ वो तो जरूर समझ जाएँगी अब हर बार एक hi बहाना तो बनाया नहीं जा सकता न. समझो भाई.
रोहन गौर से शानू की बात सुन रहा था और उसकी बात सुनकर वो इस नतीजे पर पहुंचा के शानू सही बोल रही है अभी गांड मरने का बिलकुल भी सही समय नहीं है.
उसने सोचा के छूट hi क्यों न मार ली जाये. वो पहले सोफे पर बैठकर शानू को इशारे से निचे बैठने को बोलै और शानू भी तजुर्बेकार पार्टनर की तरह उसका इशारा समझकर उसके लुंड को पकड़कर जबरदस्त चूमते हुए बोली.
Shanu…bhai आप हो बहुत अच्छे. आसानी से मान जाते हो. वो मुस्कुरा कर बोलती है.
Rohan…muskura kar…apni बहनो के लिए तो कुछ भी.
शानू फिर कुछ नहीं बोलती बस फर्राटेदार सकिंग शुरू कर देती है. दोनों आनंद में सरावोर हो इस क्रिया का लुत्फ़ उठा रहे थे.
थोड़ी देर बाद रोहन अपनी बहिन को खुद hi उठाकर काउच पर दाल देता है और और लुंड को उसकी छूट पर टीकाकार धीरे धीरे अंदर करता है क्यूंकि अगर वो जोरदार धक्का मरता तो शानू की चीख निकल सकती थी. इसलिए उसने स्लो स्लो चुदाई करनी शुरू कर दी.
शानू के भावे अंगों में उसके बूब्स भी बहुत प्यारे लगते थे. हालाँकि उनका साइज अभी बड़ा नहीं था पर फिर भी उनकी शेप को देखकर कोई भी उन्हें चूसना चाहे.
रोहन ने शानू के बूब्स को बुरी तरह से चूसते हुए धीरे धीरे चुदाई शुरू कर दी. पर दस मिनट बीतने पर भी न रोहन को मज़ा आ रहा था और न hi शानू को.
आखिर शानू hi boli…bhai जोर से करो न ऐसे मज़ा नहीं आ रहा.
रोहन को और क्या चाहिए था, शानू का इशारा मिलते hi रोहन ने ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी. हालाँकि शानू के मुँह से आहे निकल रही थी पर फिर भी रोहन लगा हुआ था ऐसे hi छोड़ने.
दोनों hi आनंद से सराबोर थे और चुदाई को बड़ी गहराई से महसूस कर रहे थे. शानू अपनी नरम मुलायम गुफा के अंदर रोहन के गर्म और लोहे जैसे सख्त लुंड को महसूस कर रही थी और रोहन भी ऐसे hi उसकी गर्म और मुलायम छूट में अपने सख्त लुंड को लग रहे स्पर्श से और ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था.
फिर वही हुआ जो होना होता है. रोहन झड़ने लगा. शानू भी दो बार झड़ी तो दोनों hi पूरी तरह से संतुष्ट हो चुके थे और पसीने से लथपथ.
फिर उसके बाद दोनों ने फुर्ती से कपडे पहने और जैसे hi उठ कर दरवाजा खोलने लगे कोई जोर जोर से दरवाजा खटखटाने लगा.
रोहन और शानू दोनों की hi दर के मरे गांड फैट गयी. रोहन शानू से बस इतना hi बोल paya…ye भेनचोद अनु न हो साली कहीं.
वो फटाफट दरवाजा खोलता है तो उनकी हालत देखकर बहार कड़ी मितली boli…yahan चल क्या रहा था बे. तुम दोनों तो पसीने में ऐसे लथपथ हुए हो जैसे छू…
कहकर मितली चुप हो जाती है रोहन की बहनो को देखकर. रोहन इशारे से मेहुल को पूछता है इसे कैसे लायी तो उसके कुछ भी बोलने से पहले मितली बोलने लगती है.
मितली…. अरे रोहन तुम लोग अभी स्टोर में hi लगे हो हम तीनो ने सिर्फ 20 मिनट में hi पूरा रूम साफ़ कर दिया.
मितली जैसे hi स्टोर में घुसने लगती है, मेहुल उसे दुसरे रूम की और लेजाते हुए बोलती hai…arey और रूम भी हैं मितली सफाई को, यहाँ टाइम पास मत करो.
मितली अनमने ढंग से मेहुल के साथ जाती है तो इन दोनों के साथ रूही मिलकर फटाफट स्टोर की सफाई करती है.
फिर सभी मिलजुलकर सरे रूम्स को चमका देते हैं और ऐसे कहीं ये सफाई अभियान पूरा होता है जिसमे अनु की जासूसी और ठुकाई, मितली की तंग फसे और शानू की चुदाई पता नहीं क्या क्या हुआ.
निचे आकर ये सभी भाई बहिन और मितली नहाते हैं. मितली और मेहुल का एक hi साइज था तो वो उसके कपडे पहन लेती है.
इन सबके लिए घर की औरतों ने छोले भठूरे का नाश्ता तैयार किया था. सर्वे करने का काम अनु को सौंपा गया.
उसकी गर्दन अभी भी झुकी हुई थी. शानू रोहन के साथ बैठी थी, रोहन शानू के हाथ पर हाथ रखकर अनु की आँखों में देख कर बोलता hai…bua ज़रा सॉलिड तो पास करना.
अनु की हिम्मत नहीं थी बोलने की के उसका हाथ क्यों पकड़ा है.
निधि चुटकी लेते हुए बोलती hai…arey बचो, तुम लोगों ने अनु को ऐसा क्या बोलै जो ये चुप चुप है. गयी तो सफाई करवाने थी आयी गुमसुम.
Rohan…maze लेते hue…kuchh ज्यादा hi सफाई कर ली इन्होने इसलिए इनके अंग दुखने लग गए. उम्र भी हो गयी है न. मैंने मन किया तो नाराज़ हो गयी.
Anu…thoda khijhkar…umar नहीं हुई अभी मेरी. तुम लोगों से थोड़ी hi ज्यादा है.
Radha…arey अनु ये मज़ाक कर रहे हैं तुमसे.
अनु बुरा सा मुँह बना लेती है. मितली देख रही थी के ये हो क्या रहा है.
उसके जाते hi रोहन बहार आया और क्या देखता है उसकी बहने किसी लड़की के साथ हंस हंस कर बातें कर रही हैं. उसे साइड में कड़ी वो लड़की तो नहीं दिख रही थी हाँ उसकी आवाज़ जरूर उसे जनि पहचानी सी लग रही थी.
पास आया ते देखकर बोलै… ोये मोती तू? तू कब आयी.
मितली आंख markar…jab तू अपनी अनु बुआ की बंद बजा रहा था.
रोहन के चेहरे की हवाइयन उड़ गयी उसकी बात सुनकर. मेहुल दी ने मौके की नजाकत को समझते हुए रोहन को समझते हुए बोलै.
Mehul…hahaha रोहन हमने बताया मितली को के कैसे अनु हुआ जोश में आकर बच्चों जैसे काम कर रही थी. रोहन ने उन्हें सबसे ज्यादा काम दिया यहाँ तक के पंखा भी ठीक करवाया उनसे. और जब वो जल्दी थक गयी तो कैसे तू उन्हें रीलीज़ करवा रहा था के कुछ भी कहो आपकी उम्र तो हो गयी है.
रोहन मेहुल की समझदारी की मन hi मन खुद दाद देता है. और सब हंस पड़े तो वो भी हंसने लगता है.
Mitali…wakai तूने अपनी जवान बुआ को बूढी घोषित कर diya.dekha बिचारि कैसे अपना सा मुँह लेकर निचे गयी है अभी. हाहाहा.
Rohan…chhodo इन सब बातों को, ये बताओ कैसे आना हुआ.
मितली ऑंखें दिखती हुई boli…kyun बे सेल ये सिर्फ तेरा घर है क्या? मेरा नहीं है. मुझे क्या तेरी परमिशन चाहिए इधर आने को कमीने.
फिर जब मितली देखती है के रूही और शानू उसकी और अजीब सी नज़रो से देख रही है उसके रोहन से बात करने के ढंग से तो वो हंसकर उन्हें क्लैरिफी करते हुए बोलती hai…tum लोग भी सोचते होंगे ये लड़की क्या बकवास किये जा रही है. पर क्या है न ये अपना चढ़ी फ्रेंड है बोले तो लंगोटिया यार, तो इसके साथ कुछ भी.
सभी हंसने लग जाते हैं तो रोहन बोलता hai…baten बहुत हुई थोड़ा काम कर लिया jaye…wo मेहुल को आंख मरते हुए बोलता hai…di आप मितली और रूही शिखर वाला कमरा साफ़ कर लो मुझे शानू के साथ स्टोर रूम कम्पलीट करना है.
मेहुल और रूही तो समझ चुकी थी और समझ शानू भी गयी थी के उसकी अब चुदाई होने वाली है पर मितली रंग में भांग डालते हुए boli…arey ऊपर इन तीनो को जाने दो मैं तुम्हारे साथ स्टोर साफ़ करवा देती हूँ.
रोहन को जब अपना मज़ा ख़राब होता दिखा तो वो बात बनाते हुए bola…arey स्टोर बहुत गन्दा है तुम्हारे कपडे ख़राब हो जायेंगे. और फिर मैं और शानू पहले से कर रहे थे स्टोर की सफाई और देखो न बेचारी बची का बहुत मन है मेरे साथ रहकर सफाई करने का.
रोहन ने दुनिया भर के बहाने बनाते हुए बोलै.
मितली कुछ सोचने लगी फिर boli…chali तो जाती हूँ पर मुझे पता है तू जरूर मुझे कोई गोली दे रहा है. बचपन से जानती हूँ तुझे. तुझे जब भी मुझे गोली देनी होती है तो ऐसे hi हड़बड़ा जाता है.
रोहन के हाथ में झाड़ू था उठा के उसको मरने वाले एक्शन में बोलता hai…bataun तुझे गोली की बची. मुझे तने मार रही hai…ruk तेरी तो कहकर उसके पीछे झाड़ू लेकर भागता है तो मितली फटाफट शिखर वाली सीढियाँ चढ़ जाती है.
मेहुल और रूही भी हँसते हँसते ऊपर वाली सीढियाँ चढ़ जाते हैं.
फिर रोहन शानू को लेकर स्टोर रूम में अत है और अंदर दरवाजे की कुण्डी लगा कर झाड़ू एक और फेंकता है तो देखता है के शानू कड़ी मुस्कुरा रही है.
रोहन इशारे से पूछता hai…kya?
तो शानू मुस्कुराते हुए उसके पास आती है और लोअर में उसके लुंड को पकड़कर बोलती hai…kya क्या झूठ नहीं बोलते आप अपने इस पप्पू के लिए.
रोहन भी मस्ती में उसकी छूट को मुठी में भींचते हुए बोलता है. अकेले मेटे पप्पू के लिए नहीं बचे तुम्हारी इस मुनिया के लिए भी.
शानू मुस्कुरा कर बोलती hai…ab होगा पप्पू का मुनिया से मिलान. दोनों हंसने लगते हैं और रोहन शानू के होंठो से अपने होंठ भिड़ा देता है और फिर शुरू होता है एक दुसरे के होंठो का रसपान.
रोहन जैसे hi अपने कपडे उतरने लगता है तो देखता है के शानू भी अपने कपडे उतर रही थी. शानू का शरीर थोड़ा भरवा था अपनी माँ सोनिआ की तरह.
पीछे से उसकी गांड क्या लग रही थी. जैसे ग्लोब वाले गोले को बीच में काटकर दोनों और चिपका दिए गए हों, सुडौल मांसल दो पिंड. देखते hi रोहन के मुँह में लार आ गयी.
वो एकदम से शानू के पीछे जाकर अपना लुंड उसकी गांड में खुभोकर हाथ आगे करके शानू के उभर अपने हाथो में पकड़कर मसलने लगता है और पीछे से उसकी गर्दन पर किश करने लगता है.
और गीली गीली किश करते हुए अपने लुंड को गांड में चुभोकर बोलता hai…shanu बचे क्यों न आज पिछले द्वार से एंट्री ली जाये, बोलो कैसा आईडिया है.
शानू जो अभी तक अपने भाई के इस सेक्सुअल अटैक का आनंद ले रही थी वो रोहन से दूर होकर boli…nahi भाई ये बिलकुल भी बढ़िया आईडिया नहीं है. आज नहीं लेकिन प्रॉमिस है आपसे दूंगी जरूर. देखिये मितली दी भी आयी हैं. वो सब करने से अगर चल में फरक पद गया तो वो क्या सोचेंगी, और उनको भी छोडो वो आपकी जासूस बुआ वो तो जरूर समझ जाएँगी अब हर बार एक hi बहाना तो बनाया नहीं जा सकता न. समझो भाई.
रोहन गौर से शानू की बात सुन रहा था और उसकी बात सुनकर वो इस नतीजे पर पहुंचा के शानू सही बोल रही है अभी गांड मरने का बिलकुल भी सही समय नहीं है.
उसने सोचा के छूट hi क्यों न मार ली जाये. वो पहले सोफे पर बैठकर शानू को इशारे से निचे बैठने को बोलै और शानू भी तजुर्बेकार पार्टनर की तरह उसका इशारा समझकर उसके लुंड को पकड़कर जबरदस्त चूमते हुए बोली.
Shanu…bhai आप हो बहुत अच्छे. आसानी से मान जाते हो. वो मुस्कुरा कर बोलती है.
Rohan…muskura kar…apni बहनो के लिए तो कुछ भी.
शानू फिर कुछ नहीं बोलती बस फर्राटेदार सकिंग शुरू कर देती है. दोनों आनंद में सरावोर हो इस क्रिया का लुत्फ़ उठा रहे थे.
थोड़ी देर बाद रोहन अपनी बहिन को खुद hi उठाकर काउच पर दाल देता है और और लुंड को उसकी छूट पर टीकाकार धीरे धीरे अंदर करता है क्यूंकि अगर वो जोरदार धक्का मरता तो शानू की चीख निकल सकती थी. इसलिए उसने स्लो स्लो चुदाई करनी शुरू कर दी.
शानू के भावे अंगों में उसके बूब्स भी बहुत प्यारे लगते थे. हालाँकि उनका साइज अभी बड़ा नहीं था पर फिर भी उनकी शेप को देखकर कोई भी उन्हें चूसना चाहे.
रोहन ने शानू के बूब्स को बुरी तरह से चूसते हुए धीरे धीरे चुदाई शुरू कर दी. पर दस मिनट बीतने पर भी न रोहन को मज़ा आ रहा था और न hi शानू को.
आखिर शानू hi boli…bhai जोर से करो न ऐसे मज़ा नहीं आ रहा.
रोहन को और क्या चाहिए था, शानू का इशारा मिलते hi रोहन ने ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी. हालाँकि शानू के मुँह से आहे निकल रही थी पर फिर भी रोहन लगा हुआ था ऐसे hi छोड़ने.
दोनों hi आनंद से सराबोर थे और चुदाई को बड़ी गहराई से महसूस कर रहे थे. शानू अपनी नरम मुलायम गुफा के अंदर रोहन के गर्म और लोहे जैसे सख्त लुंड को महसूस कर रही थी और रोहन भी ऐसे hi उसकी गर्म और मुलायम छूट में अपने सख्त लुंड को लग रहे स्पर्श से और ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था.
फिर वही हुआ जो होना होता है. रोहन झड़ने लगा. शानू भी दो बार झड़ी तो दोनों hi पूरी तरह से संतुष्ट हो चुके थे और पसीने से लथपथ.
फिर उसके बाद दोनों ने फुर्ती से कपडे पहने और जैसे hi उठ कर दरवाजा खोलने लगे कोई जोर जोर से दरवाजा खटखटाने लगा.
रोहन और शानू दोनों की hi दर के मरे गांड फैट गयी. रोहन शानू से बस इतना hi बोल paya…ye भेनचोद अनु न हो साली कहीं.
वो फटाफट दरवाजा खोलता है तो उनकी हालत देखकर बहार कड़ी मितली boli…yahan चल क्या रहा था बे. तुम दोनों तो पसीने में ऐसे लथपथ हुए हो जैसे छू…
कहकर मितली चुप हो जाती है रोहन की बहनो को देखकर. रोहन इशारे से मेहुल को पूछता है इसे कैसे लायी तो उसके कुछ भी बोलने से पहले मितली बोलने लगती है.
मितली…. अरे रोहन तुम लोग अभी स्टोर में hi लगे हो हम तीनो ने सिर्फ 20 मिनट में hi पूरा रूम साफ़ कर दिया.
मितली जैसे hi स्टोर में घुसने लगती है, मेहुल उसे दुसरे रूम की और लेजाते हुए बोलती hai…arey और रूम भी हैं मितली सफाई को, यहाँ टाइम पास मत करो.
मितली अनमने ढंग से मेहुल के साथ जाती है तो इन दोनों के साथ रूही मिलकर फटाफट स्टोर की सफाई करती है.
फिर सभी मिलजुलकर सरे रूम्स को चमका देते हैं और ऐसे कहीं ये सफाई अभियान पूरा होता है जिसमे अनु की जासूसी और ठुकाई, मितली की तंग फसे और शानू की चुदाई पता नहीं क्या क्या हुआ.
निचे आकर ये सभी भाई बहिन और मितली नहाते हैं. मितली और मेहुल का एक hi साइज था तो वो उसके कपडे पहन लेती है.
इन सबके लिए घर की औरतों ने छोले भठूरे का नाश्ता तैयार किया था. सर्वे करने का काम अनु को सौंपा गया.
उसकी गर्दन अभी भी झुकी हुई थी. शानू रोहन के साथ बैठी थी, रोहन शानू के हाथ पर हाथ रखकर अनु की आँखों में देख कर बोलता hai…bua ज़रा सॉलिड तो पास करना.
अनु की हिम्मत नहीं थी बोलने की के उसका हाथ क्यों पकड़ा है.
निधि चुटकी लेते हुए बोलती hai…arey बचो, तुम लोगों ने अनु को ऐसा क्या बोलै जो ये चुप चुप है. गयी तो सफाई करवाने थी आयी गुमसुम.
Rohan…maze लेते hue…kuchh ज्यादा hi सफाई कर ली इन्होने इसलिए इनके अंग दुखने लग गए. उम्र भी हो गयी है न. मैंने मन किया तो नाराज़ हो गयी.
Anu…thoda khijhkar…umar नहीं हुई अभी मेरी. तुम लोगों से थोड़ी hi ज्यादा है.
Radha…arey अनु ये मज़ाक कर रहे हैं तुमसे.
अनु बुरा सा मुँह बना लेती है. मितली देख रही थी के ये हो क्या रहा है.