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मर्द का बच्चा. अपडेट 58.
सुबह क 4 बजे लल्लू की नींद खुली. आँख मीचता बीएड से उठ क्र बैठ गया. रात बहुत अच्छी नींद आई थी एक मई. उसने सोच लिया था की वो सब कमरे मई अब एक लगवा देगा.
खिरकी से बहुत हलकी उजाला आ रहा था. वो उठ क्र लाइट जला दिया और फिर वाशरूम मई जा क्र फ्रेश हो गया.
वह से आ क्र एक नजर बीएड की और डाला तो बुआ बहुत गहरी नींद मई सो रही थी. सोते हुए सैश लेने से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया उप्पेर निचे हो रहा था.
लाइट मई निघ्त्य सोई हुई वो बहुत खूबसूरत दिख रही थी. सरे बल इधर उधर फ़ैल क्र कुछ तकिये पर तो कुछ उनके चेहरे पर आ गया था.
लल्लू आहिस्ता से चलता हुआ गया और उनके चेहरे पर आये हुए बालो को अपने हाथ की उंगलियों से बहुत hi आहिस्ता से हटा दिया. इस क्रिया मई लल्लू की उंगलिया बुआ क गाल से छू गया.
नींद मई hi बुआ क चेहरे पर एक मुस्कान आ गई.
बुआ क कंधे पर निघ्त्य का पतला स्ट्रेप और उस से झांकता वो साइन से उप्पेर का गोरा गदराया हिस्सा लल्लू को दीवाना बना रहा था.
बुआ क़यामत की जीती जगती मिसाल थी.
निघ्त्य क गले से झक्ति आधी से ज्यादा गोरी पोस्ट उभर लल्लू क बदन क रक्त संचार को बड़ा रहा था. लल्लू सैश रोके बुआ क जानलेवा रूप का आँखों से राश पैन क्र रहा था.
निचे गोलाई लिए हुए कमर का निचे क हिस्सा और निघ्त्य जो नींद मई बुआ क घुटने से हल्का उप्पेर तक आ गया था उस से झक्ति बुआ की चिकनी पिण्डलिया…
लल्लू का मन क्र रहा था की जीभ निकल क्र इस चिकने बदन को चाट चाट क्र खा जय लेकिन ये पॉसिबल नहीं था. लल्लू ये सोच hi सकता था. वास्तव मई ये होना मुश्किल hi था.
फिर भी लल्लू से रहा नहीं गया और वो झुक क्र बुआ क माथे पर एक किश क्र दिया और लाइट बंद क्र गेट खोल क्र वह से बहार भाग आया
वह खड़ा रहना उसके लिए एक टफ एग्जाम था.
लल्लू घर से निकल क्र पैदल hi नदी की और निकल गया.
थोड़ी देर मई hi लल्लू नादिंकिनारे ध्यान मई बैठा हुआ था.
अभी लल्लू क ध्यान मई कल गोली चलने वाला और उस गारी क बारे मई hi घूम रहा था. किस ने किया ये.
थोड़ी देर ध्यान मई बैठने क बाद ध्यान टूट जाता उसका. कल हुए इस कांड से उसका मन बहुत बिचलित था. घर मई भी सब क साथ रहते हुए भी उसके मन मई यही सब घूम रहा था.
उसे अपने मरने का दर नहीं था. उसे दर था तो अपने पापा और काका का जो उसी बाजार मई नया काम सुरु क्र रहे थे. कही वो लोग उस गोली चलने वालो क नजर मई आ गए तो क्या होगा.
आज उसे एहसास हो रहा था की एक पिता क होने से बच्चे कितने अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है. आज जब वो सोच रहा था और एक संभावना अपने पिता पर होने वाले हमले का सोचा तो उसकी रूह कम्प गई.
ऐसा कभी नहीं हुआ था उसके साथ. वो अपने सुनील काका क ज्यादा करीब रहा है. जितना लगाव उसे अपने सुनील काका से था उतना और किसी से नहीं था या फिर सोनम और कोमल से.
कोमल से बात बहुत काम होता था लेकिन कोमल लल्लू क आँखों मई देख क्र भी उसके मन को जान जाती थी. मुँह से कुछ कहने की जरुरत hi नहीं होता था.
अपने पिता से तो वो बात hi नहीं करता था.
उसे आज भी याद है वो दिन जब वो स्कूल मई सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ उप्पेर से निचे आ गया था और उसके पापा को पता चला था तो वो स्कूल मई क्या हंगामा किये थे. लल्लू को ऐसे हालत मई भी दो थप्पड़ लगाए थे. टीचर्स को तो रेल बना दिए थे.
और फिर हॉस्पिटल मई रात को सब से चुप क्र मुझे देख देख क्र रट रहते थे.
क्या अजीब प्यार था उनका.
घर मई भी उनके गुस्से से सब डरते है. थोड़ा जल्दी hi गुस्सा आ जाता है उन्हें.
" ोुये यहाँ क्या क्र रहा है तू."
किसी क आवाज देने से लल्लू का ध्यान टुटा.
गर्दन घुमा क्र देखा " टूउउ…."
लल्लू- तुम यहाँ क्या क्र रही है.
लड़की- क्यू क्या ये तेरे बाप का है जो मई नहीं आ सकती.
लल्लू- बहुत दिन हो गया लगता है. क्या किसी से ठुकवै नहीं है जो निचे का गर्मी उप्पेर से निकल रही है.
लड़की- सुरु हो गया तेरा. कितनी गंदगी भरी रहती है तेरे दिमाग मई. चल आज सारा निकल ले.
लल्लू- बहनचोद जब निकलवाने को तैयार hi है मेरे लौड़े से निकलवा दे. ले ले मेरा भी सब का bhala.to क्र hi रही है तू. कुछ मेरा भी भला क्र दे.
लड़की अपना सारा कपडा जल्दी जल्दी खोलते हुए..
लड़की- आ.. आज देखु तेरे मई कितनी गर्मी है. ले निकल ले आ.
लल्लू उठ खड़ा हुआ और उसके पास जा क्र उसके एक चुकी पर जोर से थप्पड़ लगता हुआ झुक क्र कपडे सरे उठा लिए उसके.
लल्लू- ले पहन ले. मई रंडियो को नहीं छोड़ता हु.
फिर लल्लू वह से घर की और निकल गया.
लड़की- रंडी का बच्चा.. अगर इस छूट मई एक दिन तुझे घुसा नहीं लिया तो मेरा नाम भी रधिया nahi.
लल्लू का मूड ख़राब हो गया था तो वो वह से घर आ गया सीधा.
घर आ क्र थोड़ी देर दालान पर अपने दादू क पास बैठ क्र उन से सुनील जहाँ की बाटे करता रहा.
तभी वह बुआ आ गई चाय ले क्र.
बुआ- तेरी चाय मई नहीं लाया हु. मुझे नहीं पता था की तू भी आ गया है.
दादू- ले आ बीटा. इसका भी एक लाडे चाय.
बुआ- है अभी लती हु पापा.
फिर बुआ आँगन चली गई लल्लू क लिए चाय लेने.
थोड़ी देर मई hi वो दो कप चाय ले आई.
लल्लू- बुआ इस बार दो कप ले आई आप. मई तो एक hi पियूँगा.
बुआ- बड़ा आया दो कप वाला. एक कप मई अपने लिए लायी हु.
बुआ भी वही बैठती हुई बोली.
दादू बुआ से- सुना है ललित बीटा मेरी गुड़िया क लिए एक लाया था कल.
बुआ- है पापा. बहुत प्यार करता है ये मुझ से.
दादू- ये सब से hi प्यार करता है बीटा. ये है hi ऐसा.
बुआ- है पापा. ये बात तो है. वैसे मैंने वो एक इसके कमरे मई hi लगवा दी है. मई तो कुछ दिन रहूंगी फिर वो कमरा ऐसे hi रहता तो इस लिए अभी मई ललित बेटे क कमरे मई hi सॉफ्ट हो जाउंगी आज.
दादू- ये बढ़िया है.
लल्लू- दादू वैसे मई कुछ और एक लेन का सोच रहा हु. एक भाभी क कमरे मई एक दीदी लोगो क और फिर चार काकी और माँ क कमरे क लिए भी
दादू- इतना सारा क्यू लाएगा बीटा.
लल्लू- दादू आज रात मई सोया था एक मई बहुत अच्छी नींद आती है.
दादू- नहीं नहीं. बस दो ले आ. एक राघव क कमरे मई लगवा देना और एक अपने बहनो क कमरे मई बस. मेरे बहुवो को आदत नहीं है इस सब का. तू एक लगवा देगा तो वो लेट सो क्र उठेगी किसी दिन तुम्हे hi समय से खाना नहीं मिलेगा फिर सोच लेना.
दादू हस्ते हुए बोले.
लल्लू- आप मुझे पिटाई खिलने का अच्छा बंदोबस्त क्र रहे है.
उनके कमरे मई नहीं लगूंगा तो मुझे कल से hi खाना नहीं मिलेगा.
दादू- हस्ते हुए, ठीक है जैसा तू ठीक समजे क्र ले.
फिर बुआ इन सब का खली किया कप ले क्र चली गई.
दादू- आज कई दिनों बाद दीक्षा क चेहरे पर वो चमक देखि है जो इसके सदी से पहले हुआ करता था.
लल्लू- है दादू, आज तो मुझे भी बुआ कुछ अलग लगी है.
दादू- वो तेरे प्यार से खुश है लगता है. उसे और करीब से समझ बीटा. देख इसे क्या पड़ेशानी है जो ऐसे दुखी रहती है.
लल्लू- जी दादू. मई कोसिस करूँगा.
दादू- कोसिस नहीं बीटा. मुझे मेरी वही पुराणी वाली बेटी hi मुझे चाहिए. इसके लिए तुझे जो करना पड़े वो क्र. लेकिन मुझे वो ला क्र दे.
लल्लू- जी ठीक है दादू.
फिर लल्लू वह से उठ क्र आँगन मई आ गया.
आँगन मई सभी बैठे चाय पि रहे थे.
लल्लू- मई सोच रहा हु दो एक और लगवा दू दो कमरे मई.
शालिनी- मेरे कमरे मई जरूर लगवा देना नहीं तो तेरा खाना बंद समझो.
गौरी- भाई एक हमारे कमरे मई भी. हम तो तुम्हरी प्यारी बहन है न.
रागिनी- नहीं नहीं. सब से पहले मेरे कमरे मई लगवाना. नहीं तो अभी से नास्ता बंद क्र दूंगी.
काजल और ऋतू तो बस मुस्काये जा रही थी.
लल्लू- आप दोनों को कुछ नहीं कहना है क्या.
काजल- पिटाई कहानी होगी तो ऐसा काम करेगा तू.
लल्लू- क्या मतलब.
ऋतू- मतलब ये की सिर्फ दो लाएगा तो पिटाई खायेगा. इस लिए लाना तो सब क लिए लाना या फिर किसी क लिए नहीं आएगा.
लल्लू- बुआ देख लिए. अभी दादू मुझे मर खिलने वाला hi आईडिया दे रहे थे न.
काजल- क्या मतलब.
लल्लू- मतलब ये की दो एक का आईडिया दादू का hi था.
ऋतू- नहीं नहीं. पापा ऐसा बोल hi नहीं सकते है.
लल्लू- क्यू. क्यू नहीं बोल सकते है.
काजल- सही बात है. पापा ऐसा नहीं बोल सकते.
लल्लू- बुआ से पूछ लो. मई झूठ बोल रहा हु तो.
बुआ- है बोल तो रहे थे पापा लेकिन मजाक hi किये थे ललित से.
बुआ हस्ती हुई बोली.
लल्लू- जो जो मुझे घुश देगा उसके कमरे मई आज लगवा दूंगा एक.
" क्या घुश चाहिए आप को मैनेजर साहब." शालिनी और गौरी एक साथ बोली
लल्लू- बुआ देख रही हो. दोनों माँ बेटी एक जैसी hi है.
गौरी- अब मेरी माँ है तो मेरी जैसी hi होगी न.
बुआ- तुम्हारी माँ है इस लिए वो तेरे जैसी है या तू भाभी क जैसी है.
गौरी- मेरा कहने का वही मतलब था.
रागिनी- तो बताया नहीं बीटा क्या घुश चाहिए तुम्हे
अभी लल्लू कुछ बोलता तभी काजल बोल पड़ी.
काजल- पिटाई चाहिए इसे अभी. बहुत बदमाश होता जा रहा है ये. अपने माँ सब से घुश लेगा ये.
लल्लू मुँह बनता उठ गया.
बुआ हाथ पकड़ क्र लल्लू को खींच क्र अपने साथ बैठा ली.
बुआ- कहा भगा जा रहा है.
लल्लू जो बुआ क सरीर से चिपका बैठा था.
लल्लू- जाने दो बुआ. यहाँ आसार अच्छे नहीं लग रहे. कही थप्पड़ पड़ने सुरु हो गया तो मई गिनती भी नहीं क्र पाउँगा.
बुआ- मेरे होते हुए कौन हाथ लगाएगा तुम्हे. किस मई इतनी हिम्मत है.
ऋतू- क्या बात है. ये तो दीवानी होती जा रही है मेरे बेटे की.
बुआ- तो आप को क्या लगा था. आप hi एक है.
काजल- धीरे से. लो एक और गई लगती है.
बुआ- क्या कहा आप ने भाभी.
काजल- मैंने कहा की अब मई आप को ननद रानी कहु या बहु रानी.
बुआ- जो दिल करे कह लेना. फिर मई सौतन रानी भी कहूँगी आप को
रागिनी- वह वह क्या बात है.
ऋतू उठ क्र बुआ को गले से लगा ली.
ऋतू- कहा थी तुम इतने दिन से छोटी. हम सब यही तो धुंध रहे थे की हमारी छोटी कही खो सी गई थी.
लल्लू देखा की अब सब सेंटी हो रहे है.
लल्लू- ू हेल्लो मेरे घुश का क्या हुआ.
ऋतू- मिल जाएगा. बोल क्या चाहिए
लल्लू- ये तो आप सब को सोचना है. जिस का सब से अच्छा होगा उसे एक मिल जाएगा.
काजल- फिर तो अपने दोनों काकी से ले लो. क्यू की अब वही बची है. क्यू दीदी.
काजल ऋतू को देखती बोली.
ऋतू शर्मा क्र नजरे झुकाये है मई सर हिला दी.
रागिनी- मई क्या दू बीटा. मेरा सब कुछ तो तुम्हारा hi है.
शालिनी- मेरा भी तो वही हाल है.
बुआ- छोड़ दे बीटा. सब क लिए ला दे. ये सभी तेरी माँ है और तुम से बहुत प्यार करती है.
लल्लू- अब आप कह रही हो तो ठीक है.
रागिनी- क्या… मतलब. तेरी बुआ कहेगी तो तू ला देगा. हम सब क्या गैर है तेरे.
लल्लू आगे बढ़ क्र रागिनी काकी क गाल को दांतो से काट लिया.
लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी माओ. मई आप सब से मजाक क्र रहा था. आज जाऊंगा मई बाजार तो ले आऊंगा आप सब क लिए एक. और कुछ चाहिए तो बता दीजिये वो भी ला दूंगा.
बुआ- मई भी चालू क्या. थोड़ा घूम लुंगी.
ऋतू- ये भी कोई पूछने वाली बात है. ले जा बीटा अपने बुआ को भी ले जा. आज अच्छे से खातिरदारी करना बुआ का.
काजल- है बीटा, ये मौका बार बार नहीं मिलता. हमारी छोटी पहली बार घूमने जाने को बोली है.
फिर काकी लोग रसोई मई चली गई खाने की तयारी को.
वह बुआ और लल्लू hi रह गए थे.
लल्लू- बुआ लगता है आज आप सुबह hi नाहा लिए हो.
बुआ- है नाहा लिया आज सुबह hi. वैसे तुम्हे कैसे पता चला.
लल्लू- आज आप खिली खिली सी लग रही हो. ऐसे hi रहना आप हमेसा.
बुआ- अच्छा तुम्हे बड़ा पता है. ऐसा क्या दिख गया तुम्हे.
लल्लू- आज और दिन से बिलकुल अलग लग रही हो आप. आज आप से खुशिया जैसे फुट क्र निकल रहा हो. आप को ऐसे खुस देख क्र घर मई सब बहुत खुश है. काकी, माँ, दादू सभी.
बुआ- क्या पापा कुछ कह रहे थे.
लल्लू- दादू भी आज आप को देख क्र खुश थे. कह रहे थे की मेरी बुर सदी से पहले ऐसे hi हुआ करती थी.
बुआ- पता नहीं बीटा. अब तो मई भूल भी गई हु.
अच्छा बुआ मई भी नाहा क्र तैयार हो जाऊ. तब तक नास्ता भी बन जाएगा. फिर हम लोग चलेंगे.
बुआ- ठीक है.
हरिद्वार…… इसाबेल्ला.
शाम मई गंगा आरती मई गई थी. वह से आते हुए लेट हो गया था. रात मई बीएड पर लेटते hi नींद आ गया था ककी पुरे दिन काफी घूमी थी. तो थक गई थी.
सुबह सुबह जैसे वही कल वाले साधु बाबा इसाबेल्ला को उसके रूम मई आ क्र उठा रहे थे.
इसाबेल्ला झट से उठ बैठी. इधर उधर देखि तो अभी तो वो अपने कमरे मई अकेली hi सो रही थी.
इसाबेल्ला उठा क्र फ्रेश हुई और गंगा स्नान क लिए चल दी.
उसे आज साधु बाबा से मिलने जाना था.
वो बाइसिकल रिक्शा से हर की पौड़ी पर पहुंच गई. वह वो स्नान क्र क फिर से इलेक्ट्रिक रिक्शा से माँ चंडी देवी मंदिर को चल दी.
इसाबेल्ला क मन मई इस समय कई सवाल उठ रहे थे.
" कौन हैं वो साधु बाबा. उसे hi क्यू बोले. क्या कारन है उसे आज यहाँ चंडी माँ क मंदिर बुलाने का. कही कोई ठग तो नहीं होगा. वैसे भी इंडिया मई ढोंगी साधुओं की कोई कमी नहीं. लेकिन वो साधु बाबा ऐसे दिख तो नहीं रहे थे. उन मई एक अलग hi आभा झलक रहा था. चेहरे पर एक तेज था जो उन्हें बाँकियो से उस बाबा को अलग कर रहा था.
इसाबेल्ला पुरे रस्ते इन्ही सब बातो क बारे मई सोचती जा रही थी.
मंदिर क नजदीक उतर क्र इसाबेल्ला मंदिर क प्रांगण की और चल दी.
आज बहुत भीड़ था वह पर. इसाबेल्ला आगे बढ़ती हुई क़तर मई जा क्र कड़ी हो गई.
इधर उधर देखती हुई वो वह साधु बाबा को ढूंढती आगे बढ़ रही थी
थोड़ी देर मई hi इसाबेल्ला वह माता की पूजा करने पहुंच गई.
वही वो साधु बाबा भी मौजूद थे.
वो इसाबेल्ला को अपने पीछे आने का इसरा क्र मंदिर क प्रांगण से निकल क्र वही निल पर्वत पर दूसरी दिशा मई बढ़ गए.
पहाड़ी पर पेरो क बिच होते हुए मंदिर से दूर निकल क्र वो साधु बाबा एक चट्टान क पास रुक गए.
पीछे इसाबेल्ला कौतुहल बस साधु बाबा क सभी हरकतों को देखती हुई साथ मई आ रही थी.
चट्टान क पास रुक क्र वो साधु बाबा अपने कंधे पर लटके झोले से अपना चिंता की तरह का एक औजार निकल क्र उस चट्टान पर हलके से मर दिए.
वो चट्टान एक और खिशाक्त हुआ चला गया.
साधु- आओ बीटा.
साधु बाबा आगे बढ़ गए उस गुफा मई.
बल्ला- हम कहा जा रहे है बाबा.
इसाबेल्ला आगे गुफा की और देखती बोली.
साधु- डरो नहीं. ये माँ का स्थान है. यहाँ दर नाम का कोई चीज नहीं होता. वैसे भी तुम खुद दर का दूसरा रूप हो. आ जाओ अंडर.
इसाबेल्ला खुद भी बहुत अच्छी फाइटर थी. वो कई देशो का भर्मण क्र चुकी थी और ऐसी चीजे उसे जहा भी दिख जाती कुछ सिखने वाली तो वो वह से सिख लिया करती थी.
जैसे चीन से शाओलिन सीखी thi,Japan से ैकीदो तो कोरिया से टैक्नोडो.
उसे इस तरह की चीजे सिखने का बचपन का सौक था.
चार शाल से वो घूम घूम क्र यही सब सिख रही है. इन सभी मई वो पूरी पारंगत नहीं थी लेकिन उसे काफी कुछ आता था इसका.
इसाबेल्ला माता चंडी को याद क्र उस गुफा मई साधु बाबा क पीछे पीछे घुस गई.
गुफा मई अंडर सुरु मई तो उजाला था लेकिन आगे जाने पर अँधेरा होने लगा
साधु बाबा बिच बिच मई अंदर गुफा मई दिवार क पथरी पर चिंता मर क्र उजाला करते जा रहे थे.
थोड़ा और आगे जा क्र एक जगह बाबा रुक क्र दिवार मई कुछ ढूंढने लगे.
वो दिवार पर हाथ से टटोल क्र कुछ धुंध रहे थे.
कुछ hi समय मई उन्हें वो मिल गया. उसे अपने हाथ से पकड़ क्र खींच दिए.
तभी उस गुफा मई जगह जगह मसल की लाइट जल उठा.
वो एक संकरी सी गली जैसा था चौड़ाई कोई दो मीटर्स का होगा.
सुबह क 4 बजे लल्लू की नींद खुली. आँख मीचता बीएड से उठ क्र बैठ गया. रात बहुत अच्छी नींद आई थी एक मई. उसने सोच लिया था की वो सब कमरे मई अब एक लगवा देगा.
खिरकी से बहुत हलकी उजाला आ रहा था. वो उठ क्र लाइट जला दिया और फिर वाशरूम मई जा क्र फ्रेश हो गया.
वह से आ क्र एक नजर बीएड की और डाला तो बुआ बहुत गहरी नींद मई सो रही थी. सोते हुए सैश लेने से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया उप्पेर निचे हो रहा था.
लाइट मई निघ्त्य सोई हुई वो बहुत खूबसूरत दिख रही थी. सरे बल इधर उधर फ़ैल क्र कुछ तकिये पर तो कुछ उनके चेहरे पर आ गया था.
लल्लू आहिस्ता से चलता हुआ गया और उनके चेहरे पर आये हुए बालो को अपने हाथ की उंगलियों से बहुत hi आहिस्ता से हटा दिया. इस क्रिया मई लल्लू की उंगलिया बुआ क गाल से छू गया.
नींद मई hi बुआ क चेहरे पर एक मुस्कान आ गई.
बुआ क कंधे पर निघ्त्य का पतला स्ट्रेप और उस से झांकता वो साइन से उप्पेर का गोरा गदराया हिस्सा लल्लू को दीवाना बना रहा था.
बुआ क़यामत की जीती जगती मिसाल थी.
निघ्त्य क गले से झक्ति आधी से ज्यादा गोरी पोस्ट उभर लल्लू क बदन क रक्त संचार को बड़ा रहा था. लल्लू सैश रोके बुआ क जानलेवा रूप का आँखों से राश पैन क्र रहा था.
निचे गोलाई लिए हुए कमर का निचे क हिस्सा और निघ्त्य जो नींद मई बुआ क घुटने से हल्का उप्पेर तक आ गया था उस से झक्ति बुआ की चिकनी पिण्डलिया…
लल्लू का मन क्र रहा था की जीभ निकल क्र इस चिकने बदन को चाट चाट क्र खा जय लेकिन ये पॉसिबल नहीं था. लल्लू ये सोच hi सकता था. वास्तव मई ये होना मुश्किल hi था.
फिर भी लल्लू से रहा नहीं गया और वो झुक क्र बुआ क माथे पर एक किश क्र दिया और लाइट बंद क्र गेट खोल क्र वह से बहार भाग आया
वह खड़ा रहना उसके लिए एक टफ एग्जाम था.
लल्लू घर से निकल क्र पैदल hi नदी की और निकल गया.
थोड़ी देर मई hi लल्लू नादिंकिनारे ध्यान मई बैठा हुआ था.
अभी लल्लू क ध्यान मई कल गोली चलने वाला और उस गारी क बारे मई hi घूम रहा था. किस ने किया ये.
थोड़ी देर ध्यान मई बैठने क बाद ध्यान टूट जाता उसका. कल हुए इस कांड से उसका मन बहुत बिचलित था. घर मई भी सब क साथ रहते हुए भी उसके मन मई यही सब घूम रहा था.
उसे अपने मरने का दर नहीं था. उसे दर था तो अपने पापा और काका का जो उसी बाजार मई नया काम सुरु क्र रहे थे. कही वो लोग उस गोली चलने वालो क नजर मई आ गए तो क्या होगा.
आज उसे एहसास हो रहा था की एक पिता क होने से बच्चे कितने अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है. आज जब वो सोच रहा था और एक संभावना अपने पिता पर होने वाले हमले का सोचा तो उसकी रूह कम्प गई.
ऐसा कभी नहीं हुआ था उसके साथ. वो अपने सुनील काका क ज्यादा करीब रहा है. जितना लगाव उसे अपने सुनील काका से था उतना और किसी से नहीं था या फिर सोनम और कोमल से.
कोमल से बात बहुत काम होता था लेकिन कोमल लल्लू क आँखों मई देख क्र भी उसके मन को जान जाती थी. मुँह से कुछ कहने की जरुरत hi नहीं होता था.
अपने पिता से तो वो बात hi नहीं करता था.
उसे आज भी याद है वो दिन जब वो स्कूल मई सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ उप्पेर से निचे आ गया था और उसके पापा को पता चला था तो वो स्कूल मई क्या हंगामा किये थे. लल्लू को ऐसे हालत मई भी दो थप्पड़ लगाए थे. टीचर्स को तो रेल बना दिए थे.
और फिर हॉस्पिटल मई रात को सब से चुप क्र मुझे देख देख क्र रट रहते थे.
क्या अजीब प्यार था उनका.
घर मई भी उनके गुस्से से सब डरते है. थोड़ा जल्दी hi गुस्सा आ जाता है उन्हें.
" ोुये यहाँ क्या क्र रहा है तू."
किसी क आवाज देने से लल्लू का ध्यान टुटा.
गर्दन घुमा क्र देखा " टूउउ…."
लल्लू- तुम यहाँ क्या क्र रही है.
लड़की- क्यू क्या ये तेरे बाप का है जो मई नहीं आ सकती.
लल्लू- बहुत दिन हो गया लगता है. क्या किसी से ठुकवै नहीं है जो निचे का गर्मी उप्पेर से निकल रही है.
लड़की- सुरु हो गया तेरा. कितनी गंदगी भरी रहती है तेरे दिमाग मई. चल आज सारा निकल ले.
लल्लू- बहनचोद जब निकलवाने को तैयार hi है मेरे लौड़े से निकलवा दे. ले ले मेरा भी सब का bhala.to क्र hi रही है तू. कुछ मेरा भी भला क्र दे.
लड़की अपना सारा कपडा जल्दी जल्दी खोलते हुए..
लड़की- आ.. आज देखु तेरे मई कितनी गर्मी है. ले निकल ले आ.
लल्लू उठ खड़ा हुआ और उसके पास जा क्र उसके एक चुकी पर जोर से थप्पड़ लगता हुआ झुक क्र कपडे सरे उठा लिए उसके.
लल्लू- ले पहन ले. मई रंडियो को नहीं छोड़ता हु.
फिर लल्लू वह से घर की और निकल गया.
लड़की- रंडी का बच्चा.. अगर इस छूट मई एक दिन तुझे घुसा नहीं लिया तो मेरा नाम भी रधिया nahi.
लल्लू का मूड ख़राब हो गया था तो वो वह से घर आ गया सीधा.
घर आ क्र थोड़ी देर दालान पर अपने दादू क पास बैठ क्र उन से सुनील जहाँ की बाटे करता रहा.
तभी वह बुआ आ गई चाय ले क्र.
बुआ- तेरी चाय मई नहीं लाया हु. मुझे नहीं पता था की तू भी आ गया है.
दादू- ले आ बीटा. इसका भी एक लाडे चाय.
बुआ- है अभी लती हु पापा.
फिर बुआ आँगन चली गई लल्लू क लिए चाय लेने.
थोड़ी देर मई hi वो दो कप चाय ले आई.
लल्लू- बुआ इस बार दो कप ले आई आप. मई तो एक hi पियूँगा.
बुआ- बड़ा आया दो कप वाला. एक कप मई अपने लिए लायी हु.
बुआ भी वही बैठती हुई बोली.
दादू बुआ से- सुना है ललित बीटा मेरी गुड़िया क लिए एक लाया था कल.
बुआ- है पापा. बहुत प्यार करता है ये मुझ से.
दादू- ये सब से hi प्यार करता है बीटा. ये है hi ऐसा.
बुआ- है पापा. ये बात तो है. वैसे मैंने वो एक इसके कमरे मई hi लगवा दी है. मई तो कुछ दिन रहूंगी फिर वो कमरा ऐसे hi रहता तो इस लिए अभी मई ललित बेटे क कमरे मई hi सॉफ्ट हो जाउंगी आज.
दादू- ये बढ़िया है.
लल्लू- दादू वैसे मई कुछ और एक लेन का सोच रहा हु. एक भाभी क कमरे मई एक दीदी लोगो क और फिर चार काकी और माँ क कमरे क लिए भी
दादू- इतना सारा क्यू लाएगा बीटा.
लल्लू- दादू आज रात मई सोया था एक मई बहुत अच्छी नींद आती है.
दादू- नहीं नहीं. बस दो ले आ. एक राघव क कमरे मई लगवा देना और एक अपने बहनो क कमरे मई बस. मेरे बहुवो को आदत नहीं है इस सब का. तू एक लगवा देगा तो वो लेट सो क्र उठेगी किसी दिन तुम्हे hi समय से खाना नहीं मिलेगा फिर सोच लेना.
दादू हस्ते हुए बोले.
लल्लू- आप मुझे पिटाई खिलने का अच्छा बंदोबस्त क्र रहे है.
उनके कमरे मई नहीं लगूंगा तो मुझे कल से hi खाना नहीं मिलेगा.
दादू- हस्ते हुए, ठीक है जैसा तू ठीक समजे क्र ले.
फिर बुआ इन सब का खली किया कप ले क्र चली गई.
दादू- आज कई दिनों बाद दीक्षा क चेहरे पर वो चमक देखि है जो इसके सदी से पहले हुआ करता था.
लल्लू- है दादू, आज तो मुझे भी बुआ कुछ अलग लगी है.
दादू- वो तेरे प्यार से खुश है लगता है. उसे और करीब से समझ बीटा. देख इसे क्या पड़ेशानी है जो ऐसे दुखी रहती है.
लल्लू- जी दादू. मई कोसिस करूँगा.
दादू- कोसिस नहीं बीटा. मुझे मेरी वही पुराणी वाली बेटी hi मुझे चाहिए. इसके लिए तुझे जो करना पड़े वो क्र. लेकिन मुझे वो ला क्र दे.
लल्लू- जी ठीक है दादू.
फिर लल्लू वह से उठ क्र आँगन मई आ गया.
आँगन मई सभी बैठे चाय पि रहे थे.
लल्लू- मई सोच रहा हु दो एक और लगवा दू दो कमरे मई.
शालिनी- मेरे कमरे मई जरूर लगवा देना नहीं तो तेरा खाना बंद समझो.
गौरी- भाई एक हमारे कमरे मई भी. हम तो तुम्हरी प्यारी बहन है न.
रागिनी- नहीं नहीं. सब से पहले मेरे कमरे मई लगवाना. नहीं तो अभी से नास्ता बंद क्र दूंगी.
काजल और ऋतू तो बस मुस्काये जा रही थी.
लल्लू- आप दोनों को कुछ नहीं कहना है क्या.
काजल- पिटाई कहानी होगी तो ऐसा काम करेगा तू.
लल्लू- क्या मतलब.
ऋतू- मतलब ये की सिर्फ दो लाएगा तो पिटाई खायेगा. इस लिए लाना तो सब क लिए लाना या फिर किसी क लिए नहीं आएगा.
लल्लू- बुआ देख लिए. अभी दादू मुझे मर खिलने वाला hi आईडिया दे रहे थे न.
काजल- क्या मतलब.
लल्लू- मतलब ये की दो एक का आईडिया दादू का hi था.
ऋतू- नहीं नहीं. पापा ऐसा बोल hi नहीं सकते है.
लल्लू- क्यू. क्यू नहीं बोल सकते है.
काजल- सही बात है. पापा ऐसा नहीं बोल सकते.
लल्लू- बुआ से पूछ लो. मई झूठ बोल रहा हु तो.
बुआ- है बोल तो रहे थे पापा लेकिन मजाक hi किये थे ललित से.
बुआ हस्ती हुई बोली.
लल्लू- जो जो मुझे घुश देगा उसके कमरे मई आज लगवा दूंगा एक.
" क्या घुश चाहिए आप को मैनेजर साहब." शालिनी और गौरी एक साथ बोली
लल्लू- बुआ देख रही हो. दोनों माँ बेटी एक जैसी hi है.
गौरी- अब मेरी माँ है तो मेरी जैसी hi होगी न.
बुआ- तुम्हारी माँ है इस लिए वो तेरे जैसी है या तू भाभी क जैसी है.
गौरी- मेरा कहने का वही मतलब था.
रागिनी- तो बताया नहीं बीटा क्या घुश चाहिए तुम्हे
अभी लल्लू कुछ बोलता तभी काजल बोल पड़ी.
काजल- पिटाई चाहिए इसे अभी. बहुत बदमाश होता जा रहा है ये. अपने माँ सब से घुश लेगा ये.
लल्लू मुँह बनता उठ गया.
बुआ हाथ पकड़ क्र लल्लू को खींच क्र अपने साथ बैठा ली.
बुआ- कहा भगा जा रहा है.
लल्लू जो बुआ क सरीर से चिपका बैठा था.
लल्लू- जाने दो बुआ. यहाँ आसार अच्छे नहीं लग रहे. कही थप्पड़ पड़ने सुरु हो गया तो मई गिनती भी नहीं क्र पाउँगा.
बुआ- मेरे होते हुए कौन हाथ लगाएगा तुम्हे. किस मई इतनी हिम्मत है.
ऋतू- क्या बात है. ये तो दीवानी होती जा रही है मेरे बेटे की.
बुआ- तो आप को क्या लगा था. आप hi एक है.
काजल- धीरे से. लो एक और गई लगती है.
बुआ- क्या कहा आप ने भाभी.
काजल- मैंने कहा की अब मई आप को ननद रानी कहु या बहु रानी.
बुआ- जो दिल करे कह लेना. फिर मई सौतन रानी भी कहूँगी आप को
रागिनी- वह वह क्या बात है.
ऋतू उठ क्र बुआ को गले से लगा ली.
ऋतू- कहा थी तुम इतने दिन से छोटी. हम सब यही तो धुंध रहे थे की हमारी छोटी कही खो सी गई थी.
लल्लू देखा की अब सब सेंटी हो रहे है.
लल्लू- ू हेल्लो मेरे घुश का क्या हुआ.
ऋतू- मिल जाएगा. बोल क्या चाहिए
लल्लू- ये तो आप सब को सोचना है. जिस का सब से अच्छा होगा उसे एक मिल जाएगा.
काजल- फिर तो अपने दोनों काकी से ले लो. क्यू की अब वही बची है. क्यू दीदी.
काजल ऋतू को देखती बोली.
ऋतू शर्मा क्र नजरे झुकाये है मई सर हिला दी.
रागिनी- मई क्या दू बीटा. मेरा सब कुछ तो तुम्हारा hi है.
शालिनी- मेरा भी तो वही हाल है.
बुआ- छोड़ दे बीटा. सब क लिए ला दे. ये सभी तेरी माँ है और तुम से बहुत प्यार करती है.
लल्लू- अब आप कह रही हो तो ठीक है.
रागिनी- क्या… मतलब. तेरी बुआ कहेगी तो तू ला देगा. हम सब क्या गैर है तेरे.
लल्लू आगे बढ़ क्र रागिनी काकी क गाल को दांतो से काट लिया.
लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी माओ. मई आप सब से मजाक क्र रहा था. आज जाऊंगा मई बाजार तो ले आऊंगा आप सब क लिए एक. और कुछ चाहिए तो बता दीजिये वो भी ला दूंगा.
बुआ- मई भी चालू क्या. थोड़ा घूम लुंगी.
ऋतू- ये भी कोई पूछने वाली बात है. ले जा बीटा अपने बुआ को भी ले जा. आज अच्छे से खातिरदारी करना बुआ का.
काजल- है बीटा, ये मौका बार बार नहीं मिलता. हमारी छोटी पहली बार घूमने जाने को बोली है.
फिर काकी लोग रसोई मई चली गई खाने की तयारी को.
वह बुआ और लल्लू hi रह गए थे.
लल्लू- बुआ लगता है आज आप सुबह hi नाहा लिए हो.
बुआ- है नाहा लिया आज सुबह hi. वैसे तुम्हे कैसे पता चला.
लल्लू- आज आप खिली खिली सी लग रही हो. ऐसे hi रहना आप हमेसा.
बुआ- अच्छा तुम्हे बड़ा पता है. ऐसा क्या दिख गया तुम्हे.
लल्लू- आज और दिन से बिलकुल अलग लग रही हो आप. आज आप से खुशिया जैसे फुट क्र निकल रहा हो. आप को ऐसे खुस देख क्र घर मई सब बहुत खुश है. काकी, माँ, दादू सभी.
बुआ- क्या पापा कुछ कह रहे थे.
लल्लू- दादू भी आज आप को देख क्र खुश थे. कह रहे थे की मेरी बुर सदी से पहले ऐसे hi हुआ करती थी.
बुआ- पता नहीं बीटा. अब तो मई भूल भी गई हु.
अच्छा बुआ मई भी नाहा क्र तैयार हो जाऊ. तब तक नास्ता भी बन जाएगा. फिर हम लोग चलेंगे.
बुआ- ठीक है.
हरिद्वार…… इसाबेल्ला.
शाम मई गंगा आरती मई गई थी. वह से आते हुए लेट हो गया था. रात मई बीएड पर लेटते hi नींद आ गया था ककी पुरे दिन काफी घूमी थी. तो थक गई थी.
सुबह सुबह जैसे वही कल वाले साधु बाबा इसाबेल्ला को उसके रूम मई आ क्र उठा रहे थे.
इसाबेल्ला झट से उठ बैठी. इधर उधर देखि तो अभी तो वो अपने कमरे मई अकेली hi सो रही थी.
इसाबेल्ला उठा क्र फ्रेश हुई और गंगा स्नान क लिए चल दी.
उसे आज साधु बाबा से मिलने जाना था.
वो बाइसिकल रिक्शा से हर की पौड़ी पर पहुंच गई. वह वो स्नान क्र क फिर से इलेक्ट्रिक रिक्शा से माँ चंडी देवी मंदिर को चल दी.
इसाबेल्ला क मन मई इस समय कई सवाल उठ रहे थे.
" कौन हैं वो साधु बाबा. उसे hi क्यू बोले. क्या कारन है उसे आज यहाँ चंडी माँ क मंदिर बुलाने का. कही कोई ठग तो नहीं होगा. वैसे भी इंडिया मई ढोंगी साधुओं की कोई कमी नहीं. लेकिन वो साधु बाबा ऐसे दिख तो नहीं रहे थे. उन मई एक अलग hi आभा झलक रहा था. चेहरे पर एक तेज था जो उन्हें बाँकियो से उस बाबा को अलग कर रहा था.
इसाबेल्ला पुरे रस्ते इन्ही सब बातो क बारे मई सोचती जा रही थी.
मंदिर क नजदीक उतर क्र इसाबेल्ला मंदिर क प्रांगण की और चल दी.
आज बहुत भीड़ था वह पर. इसाबेल्ला आगे बढ़ती हुई क़तर मई जा क्र कड़ी हो गई.
इधर उधर देखती हुई वो वह साधु बाबा को ढूंढती आगे बढ़ रही थी
थोड़ी देर मई hi इसाबेल्ला वह माता की पूजा करने पहुंच गई.
वही वो साधु बाबा भी मौजूद थे.
वो इसाबेल्ला को अपने पीछे आने का इसरा क्र मंदिर क प्रांगण से निकल क्र वही निल पर्वत पर दूसरी दिशा मई बढ़ गए.
पहाड़ी पर पेरो क बिच होते हुए मंदिर से दूर निकल क्र वो साधु बाबा एक चट्टान क पास रुक गए.
पीछे इसाबेल्ला कौतुहल बस साधु बाबा क सभी हरकतों को देखती हुई साथ मई आ रही थी.
चट्टान क पास रुक क्र वो साधु बाबा अपने कंधे पर लटके झोले से अपना चिंता की तरह का एक औजार निकल क्र उस चट्टान पर हलके से मर दिए.
वो चट्टान एक और खिशाक्त हुआ चला गया.
साधु- आओ बीटा.
साधु बाबा आगे बढ़ गए उस गुफा मई.
बल्ला- हम कहा जा रहे है बाबा.
इसाबेल्ला आगे गुफा की और देखती बोली.
साधु- डरो नहीं. ये माँ का स्थान है. यहाँ दर नाम का कोई चीज नहीं होता. वैसे भी तुम खुद दर का दूसरा रूप हो. आ जाओ अंडर.
इसाबेल्ला खुद भी बहुत अच्छी फाइटर थी. वो कई देशो का भर्मण क्र चुकी थी और ऐसी चीजे उसे जहा भी दिख जाती कुछ सिखने वाली तो वो वह से सिख लिया करती थी.
जैसे चीन से शाओलिन सीखी thi,Japan से ैकीदो तो कोरिया से टैक्नोडो.
उसे इस तरह की चीजे सिखने का बचपन का सौक था.
चार शाल से वो घूम घूम क्र यही सब सिख रही है. इन सभी मई वो पूरी पारंगत नहीं थी लेकिन उसे काफी कुछ आता था इसका.
इसाबेल्ला माता चंडी को याद क्र उस गुफा मई साधु बाबा क पीछे पीछे घुस गई.
गुफा मई अंडर सुरु मई तो उजाला था लेकिन आगे जाने पर अँधेरा होने लगा
साधु बाबा बिच बिच मई अंदर गुफा मई दिवार क पथरी पर चिंता मर क्र उजाला करते जा रहे थे.
थोड़ा और आगे जा क्र एक जगह बाबा रुक क्र दिवार मई कुछ ढूंढने लगे.
वो दिवार पर हाथ से टटोल क्र कुछ धुंध रहे थे.
कुछ hi समय मई उन्हें वो मिल गया. उसे अपने हाथ से पकड़ क्र खींच दिए.
तभी उस गुफा मई जगह जगह मसल की लाइट जल उठा.
वो एक संकरी सी गली जैसा था चौड़ाई कोई दो मीटर्स का होगा.