Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 5 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

मर्द का बच्चा. अपडेट 20.

सोनम दौड़ क्र टाला चाभी ले और एक एक क्र सरे घर मई लगाने लगी.

ऋतू अपना हैंड बैग उठाये कमरे से बहार आई.

ऋतू- चलो सब दालान पर पहुँचो.

राम सुनील से पूछो कहा पंहुचा है.

सभी लोग दालान मई इक्कठा हो गए.

दादू- क्या हो रहा है ये सब. मेरे लल्लू बेटे को क्या हुआ और अब ये कोमल बिटिया भी ऐसे है.

ऋतू- आप पदेशन मत होइए. पता नहीं क्या हुआ की लल्लू बेहोश हो गया और उसे देख क्र कोमल भी हो गई है.

तब तक बहार दो गारी आ क्र कड़ी हो गई.

अनिल कोमल को उठा क्र गारी मई दाल दिया.

ऋतू- दो hi गारी आई. मई तीन गारी का बोलै था न.

राम- भाबी दो hi गारी खली थी अभी. वैसे भी इतने लोग जा क्र क्या करेंगे वह.

ऋतू- रोमा मीनू रानी गौरी रागिनी शालिनी और सोनम क पापा आप सब यही रहिये.

बांकी हम सब जा क्र देखते है. ज्यादा पड़ेशानी वाली बात नहीं होनी चाहिए अगर जरुरत पड़ी तो कॉल क्र आप सब को बुला लुंगी.

सब जाना चाहते थे हॉस्पिटल लल्लू क लिए लेकिन अभी क हालत मई जिद्द करना सही नहीं था तो सब चुप रह गए.

सोनम रागिनी को घर का चाभी थमा दी.

फिर सब दो गारी मई बैठ क्र हॉस्पिटल चल दिए.

राम कॉल क्र पता क्र लिया था सुनील लल्लू को ले क्र कहा गया है.

ये दोनों गारी भी वह हॉस्पिटल पहुंच गई.

राम कोमल को निकल क्र अंडर हॉस्पिटल मई ले गए.

कोमल को भी एडमिट क्र दिया गया.

सब सुनील क पास पहुंचे.

ऋतू- कैसा है मेरा बीटा सुनील.

सुनील- अभी डॉक्टर जाँच क्र रहे है.

सभी वही बेंच पर बैठ गए.

काजल वह भी एक कोने मई कड़ी थी.

सुनील- क्या हुआ था वह अब कोई बताएगा मुझे.

ऋतू- बाद मई सुनील. अभी पहले दोनों को होश आ जय और भगवन की कृपा से सब अच्छा हो फिर घर चल क्र पता करेंगे की हुआ क्या था.

ऋतू- सोनम अपने चची क साथ रहना.

सोनम काजल क पास चली गई.

कुछ देर बाद डॉक्टर बहार निकला.

सुनील- कैसा है मेरा बीटा डॉक्टर साहब.

डॉक्टर- देखिये मरीज को किसी चीज का गहरा सोक लगा है जिस कारन इसे ब्रेन का एक हिस्सा अभी काम करना बंद क्र दिया है. अभी बेहोश है. अगर चार घंटे तक होश नहीं आया तो फिर कुछ भी कहना मुश्किल होगा. सायद मरीज कोमा मई चला जय या फिर पागल हो जय.

सुनील डॉक्टर की बात सुन क्र वही बेंच को पाकर क्र बैठ गया.

उसके लिए लल्लू सब से प्यारा था. लल्लू मई वो अपनी छवि देखता था. बहुत प्यार करता था वो लल्लू से.

ऋतू तो रोने hi लगी.

रवि- भाभी भरोसा रखिये भगवन पर. वो हमारे लल्लू क साथ इतना बुरा नहीं करेंगे. और आप ऐसे रोइएगा तो लल्लू क माँ को कौन संभालेगा.

अब सब को ऋतू क्या बताये की लल्लू उसके लिए क्या मायने रखता है.

इधर िक मई लल्लू वेंटीलेटर पर लेता हुआ था.

उसके सरीर मई कोई हलचल नहीं हो रहा था सिवाय एक चीज क.

टैटू.

उसके कंधे पर पीछे टैटू था जो अब बढ़ता जा रहा था.

कंधे का टैटू अभी लल्लो क आधे पीठ छाती और एक हाथ मई फ़ैल गया था.

लेकिन ये टैटू लल्लू क सरीर मई बनता बिगड़ता जा रहा था.

कभी छाती का टैटू तो कभी हाथ का टैटू मिट जाता था.

सब बहार कोई बेंच पर बैठे तो कोई दीवाल क सहारे खड़ा इस बुरे वक्त को जल्द से जल्द बिताना चाहता था और अच्छे समय क आने का इंतजार.

थोड़ी थोड़ी देर मई कोई न कोई जा क्र दरवाजे मई लगे छोटे से गिलास से लल्लू को देख आते थे.

इधर कोमल को होश आ गया था.

लेकिन उसे नींद का इंजेक्शन दे क्र सुला दिए थे.

पुरे चार घंटे बाद लल्लू को होश आया.

सब मई ख़ुशी की लहार दौर गई.

डॉक्टर जाँच क्र सबको एक एक क्र मिलने को बोल दिया.

सब से पहले सुनील गया.

सुनील- बीटा क्यू ऐसा करता है. तुझ मई मेरा जान बस्ता hai.koi बात है तो तू सीधा मुझ से बोलै क्र. खुद दिमाग पर जोर क्यू देता है. मई हु न तुम्हारे साथ.

लल्लू सर हिला क्र है क्र दिया.

सुनील- चल सब से मिल ले. ज्यादा बोलना नहीं.

भेजता हुआ मई सब को.

सुनील बहार निकला तो ऋतू और काजल अंडर चली गई.

दोनों लल्लू क बीएड क पास कड़ी लल्लू को एक तक देखे जा रही थी.

लल्लू- सॉरी. ( एक हाथ से कान पकड़ क्र, दूसरे हाथ मई ड्रिप लगा हुआ था)

ऋतू आगे बढ़ क्र उसके माथे पर एक किसी क्र दी.

लल्लू काजल को देखे जा रहा था. काजल लल्लू को.

दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे. बस देखे जा रहे थे.

काजल की आँखे भर आई. वो भाग क्र बहार आ गई.

ऋतू- आगे से फिर कभी ऐसा नहीं करना बीटा. तुम मई ह सब की जान बस्ती है. तेरी माँ और बहन तो मर hi जाएगी.

तभी राम आ गया वह.

ऋतू बहार चली गई.

राम- क्या हुआ था. कैसे तबियत ख़राब हो गया.

लल्लू- पता नहीं.

राम- ठीक है न अब तू.

लल्लू- जी.

राम- ठीक है. आराम क्र.

राम बहार चला गया.

रवि- कैसा है मेरा बहादुर बीटा( रवि अंडर आता बोलै)

लल्लू- ठीक हु काका.

रवि- गुड. आराम क्र.

रवि बहार चला गया.

सोनम अंदर आ क्र लल्लू क गले लग गई और उसके गलो पर चुम्मी की झरि लगा दी.

फिर आहिस्ता से लल्लू क होठो को एक बार चुम क्र सरमाती हुई हुत्त गया.

लल्लू सुरप्रीसेड सोनम दीदी को देखने लगा.

सोनम- आगे से फिर कभी ऐसे बच्चो की तरह रोया न तो तेरी बहुत पिटाई करुँगी.

लल्लू सोनम को देख क्र मुसकुदा दिया फिर इसारे से अपने पास बुलाया झुकने क लिए कहा.

सोनम लल्लू पर झुक क्र अपना कान उसके मुँह क पास क्र दिया.

लल्लू- आप बहुत प्यारी दीदी हो. ( सोनम क गाल को चुम क्र बोलै)

सोनम हड़बड़ा क्र सीधी हो गई.

(वाओ बहुत घड़ा प्यार है आप दोनों मई. सदी हो गयी आप दोनों की.) एक नर्स जो एक तरफ चेयर पर बैठी थी वो दोनों को देख क्र बोली.

सोनम आवाज सुन्न क्र चौक गई. फिर सरमाती हुई लल्लू को देख क्र बहार भाग गई.

लल्लू बीएड पर लेता मुसकुडता रहा.

बहार…

ऋतू- सुनील डॉक्टर से पूछिए कब तक डिस्चार्ज करेंगे दोनों को.

सुनील उठ क्र डॉक्टर क केबिन मई चला गया.

सुनील- अभी थोड़ी देर मई बोलै है डिस्चार्ज क्र देगा.

सुनील जा क्र पेमेंट सारा क्लियर क्र दिया.

थोड़ी देर मई लल्लू और कोमल को डिस्चार्ज क्र दिया गया.

दोनों गारी जिस मई ये लोग आये थे उस मई बैठ क्र वापस घर आ गए.

कोमल अपने कमरे मई जा क्र आराम करने लगी.

सुनील- सोनम अभी लल्लू को काजल भाबी क कमरे मई सुला दो लेकिन कल तुम लोग अपना बगल वाला कमरा जो बंद पड़ा है उसे साफ़ क्र देना. लल्लू कल से वही रहेगा.

सोनम- ठीक है चाचा.

सुनील आँगन मई खटिया पर बैठ गया.

सुनील- अब मुझे कौन बताएगा की आखिर हुआ क्या था.

ऋतू- मई गई थी तब तक तो सब रो रहे थे तो सोनम को पता होगा. सोनम बीटा क्या हुआ था.

घर क सभी वही आ गए की आखिर हुआ क्या था.

फिर सोनम सब को बताने लगी की कैसे लल्लू कमरे मई आया और बात सुरु हुई

फिर कैसे रोटा हुआ बोलै की सब उसे पागल समझते hai.jis से उसका मन करता है खुद खुसी क्र लेने का.

और फिर लल्लू की इस बात पर साडी बहनो का रोना और फिर ऋतू और रागिनी का आना.

रागिनी का लल्लू को पागल कह क्र थप्पड़ मरना.

फिर लल्लू का सोनम क बहो मई बेहोस होना उसके बाद कोमल का भी बेहोस हो जाना.

सोनम की बात सुन क्र सब रोने लगे. सब से ज्यादा रागिनी रो रही थी की उस से कितना बड़ा पाप हो गया.

सुनील- रागिनी आज तुम मेरी नजरो मई गिर गई. क्या कहु मई तुम्हे अब. मई अब लल्लू क सामने कैसे जाएंगे. कैसे उस से नजरे मिला पाउँगा जिस की पत्नी hi उस का सब से बड़ा गुनहगार निकला.

सोनम- लल्लू छोटे चाचा क बर्ताव से भी बहुत दुखी था. पहले राम चाचा पागल बोल दिए थे सायद और फिर रागिनी चची आ क्र पागल बोल दी. ये सुन क्र उसे सोक लगा था.

ऋतू- जो हो गया सो हो गया लेकिन आगे अगर किसी ने भी उसे पागल या कुछ भी कहा तो उसका इस घर मई आखरी दिन होगा ये समझ लेना.

काजल लल्लू क पास बैठी हुई उसके बालो को सहला रही थी.

काजल आज बहुत दर गई थी.

राम से उसका बोल चल पिछले 1 शाल से बंद था. दोनों बचो को मुँह देख क्र वो हस्ती मुस्काती रहती थी पुरे दिन लेकिन आज जो हुआ वो देख क्र उसे अपने किस्मत पर बड़ा रोना आ रहा था. आज तो एक छान क लिए उसे लगा जैसे उसका पूरा संसार hi उजर गया.

पति पहले दूर था बेटे क साथ साथ बेटी भी बेहोश हो गई थी.

तभी शालिनी खाना ले क्र आ गई.

शालिनी- ये बेटे को खिला देना काजल. जब थोड़ा ठंढा हो जय तो फिर दवाई भी खिला देना.

ऋतू- सब को खाना खिला दिया शालिनी.

शालिनी- नहीं दीदी. किसी ने खाया hi नहीं.

ऋतू- रोमा जा सब को बुला क्र ला खाना खा ले सब.

रोमा सब को खाना क लिए बोल आया.

सभी मर्द आ गए खाना खाने सिवाए सुनील क.

ऋतू- सुनील जी नहीं आये. वो कहा रह गए.

अनिल- वो आज नहीं खायेगा. सो गया वो.

ऋतू जानती थी की वो लल्लू क साथ जो हुआ इस कारन से दुखी है. और आज अब किसी क भी कहने से नहीं खायेगा.

मर्दो क खा लेने क बाद सब लेडीज खाना निकल क्र ले आये.

इधर काजल लल्लू को अपने हाथो से थोड़ा खाना खिला दिया था और दवाई भी खिला क्र सुला दी थी.

ऋतू- जा काजल को बुला ला. वो भी थोड़ा खा ले.

गौरी- चची खाना नहीं खायेगी. (गौरी काजल क कमरे से वापस आ क्र बोली)

ऋतू काजल क कमरे मई चली गई.

कमरे मई काजल लल्लू क सर को अपने गॉड मई ले क्र बैठी उस क सर को सहला रही थी.

ऋतू- खाना खा ले थोड़ा सा.

काजल- आप सब खाओ. मुझे अभी भूख नहीं है.

ऋतू- रात को खली पेट नहीं सोते. लल्लू का सही ख्याल तभी रख पाओगे जब खुद सही रहोगी.

काजल- मई ठीक हु दीदी. मुझे क्या होना है. इतनी अच्छी किस्मत होती मेरी तो फिर किस बात का रोना था.

ऋतू- कोई भी अपनी जिंदगी से खुश नहीं होता कभी. जिस को जितना मिलता है इतने मई hi खुस होना सिख लेना चाहिए. चल चुप चाप खाना खा ले चल क्र.

काजल- आप मेरा खाना किसी से भेजवा दो. मई बाद मई खा लुंगी.

ऋतू- ठीक है लेकिन सुबह मई देखूंगी की तुमने खाया या नहीं.

ऋतू वापस आँगन जा क्र काजल का खाना उसके कमरे मई धक् क्र रखवा दी.

काजल उठ क्र अपने कमरे का दरवाजा बंद की और लल्लू को हुग क्र के सो गई.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 21.

सुबह 4बजे लल्लू की नींद खुली.

बगल मई देखा तो काजल सो रही थी. लल्लू को काजल को देख क्र बहुत प्यार आया.

लल्लू- रात मेरे कारन माँ कितना पदेशन हुई. सब मेरी hi तो गलती है. अगर मई दालान पर बैठता hi नहीं तो इतना कुछ नहीं होता.

लल्लू काजल को अपने आगोश मई ले क्र भींच लिया अपने साइन मई.

फिर काजल क मासूम मुखड़े को देखा तो उस के चेहरे पर सूखे आँशु की धार दिखी.

लल्लू समझ गया की माँ रात मई रोटी हुई सोइ है.

लल्लू जीभ निकल क्र माँ क चेहरे को चाट लिया.

काजल कुनमुना गई.

लल्लू मुसकुडता हुआ काजल क आँखों को चुम लिया.

काजल नींद मई hi मुस्का दी.

लल्लू को माँ क साथ खेलने मई मजा आ रहा था.

लल्लू माँ क माथे पर चुम लिया.

काजल भी अपने आगोश मई लल्लू को पकड़ ली नींद मई hi.

फिर लल्लू काजल क गलो को चाट लिया.

काजल क सरीर मई सिहरन दौर गई.

लल्लू काजल क नाक को चुम लिया.

काजल फिर मुस्काई.

लल्लू काजल क नंगे कंधे को चुम लिया.

काजल का पूरा बदन कम्प गया. और उसकी आँख खुल गई. लेकिन लल्लू तो काजल क कंधे पर झुका था तो उसे पता नहीं चला.

लल्लू इस बार फिर जीभ निकला और काजल क गर्दन को चाट लिया.

काजल तेजी से अपने मुँह को कास क्र भींच ली नहीं तो उसके मुख से तेज सिसकी निकल जाती.

लल्लू फिर काजल क गर्दन पर चूमता hi चला गया.

काजल आँखे बंद किये अपने बेटे क सुखद स्पर्श का आनंद लेने लगी.

लल्लू गर्दन चूमते हुए काजल क चूचियों क घाटी मई मुँह लगा क्र चुम लिया.

काजल लल्लू को जोरो से अपने मई चिपका ली.

आज लगभग एक साल बाद उसे किसी पुरुष क स्पर्श का एहसास हुआ था वो भी उसके खुद क बेटे का.

काजल से अब बर्दास्त नहीं हुआ और लल्लू क बालो मई काजल का हाथ फिशलने लगा.

लल्लू समझ गया की माँ अब जग गई है.

लल्लू- माँ आप रात मई रोटी हुई सो गई थी.

काजल- नहीं तो बीटा. मई क्यू रोउंगी भला.

लल्लू- माँ आप वडा कीजिये की आगे से कभी भी आप नहीं रोयेंगे.

काजल- बीटा मई क्यू रोयुंगी. मई नहीं रोई थी.

लल्लू- लेकिन आप क गाल पर सूखे हुए आंशुओ का निशान बता रहा है की आप रात भी रोई थी और उस से पहले तो मैंने hi आप को रुला दिया था.

काजल- तुम्हे वहां हुआ है बीटा. मई बिलकुल नहीं रोई हु.

लल्लू- अच्छी बात है माँ. माँ मई आप का अच्छा बीटा हु न.

काजल- तू मेरा सब से प्यारा बीटा है. ( काजल लल्लू को लिटा क्र उसके माथे पर चुम ली. फिर गाल फिर आँख फिर नाक उसके बाद लल्लू क कंधे पर फिर तुषि पर, गर्दन पर और लास्ट मई होठो पर.) हिसाब बराबर हो गया न.

लल्लू- सरमाता हुआ. माँ आप जग रही थी.

काजल- हस्ती हुई. है मई जग गई थी तुम से पहले hi. तुम्हे hi देख रही थी सोता हुआ की तुम उठ गए तो मैंने अपनी आँखे बंद क्र सोने का नाटक करने लगी थी. इसी बहाने मुझे पता तो चला की मेरा बीटा मुझे कितना प्यार करता है.

लल्लू- सरमाता हुआ. माँ मई आप से बहुत बहुत प्यार करता हु.

काजल- मई भी बीटा. मई भी तुम से बहुत प्यार करती हु.

काजल लल्लू को फिर से बहो मई भर क्र अपने से चिपका ली

लल्लू को अपने छाती मई काजल क मोठे दूध पिस्ता हुआ फील हो रहा था.

उसका बाबूराव अपना सर उठाने लगा.

लल्लू अपने कमर को थोड़ा पीछे क्र लिया.

काजल- बीटा अब कैसा लग रहा है तुम्हे. अब तू ठीक है न.

लल्लू- माँ मई बिलकुल ठीक हु. आप थोड़ी सी भी फिक्र मत कीजिये.

काजल लल्लू क गाल को चुम लिया.

काजल- तू फ्रेश हो जा. मई कुछ बनती हु तुम्हे भूख लगी होगी.

रात मई भी कुछ ठीक से नहीं खाया था.

लल्लू- माँ अभी इतनी सुबह कौन खता है. अभी नहीं कहयुंगा.

आप बस ऐसे hi मेरे पास रहिये. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.

काजल- अच्छा मेरे बेटे को माँ पर कुछ ज्यादा प्यार नहीं आ रहा आज.

लल्लू- बिलकुल नहीं. ये प्यार तो हमसे था मेरे दिल मई बस आज बहार आया है.

काजल- ओह्हो क्या बात है.

काजल लल्लू क गाल को खींच क्र.

आज से तू यही सोयेगा. अब मुझे ये प्यार डेली चाहिए.

लल्लू- जो आज्ञा मात श्री.

दोनों खिलखिला क्र हुस्स दिए.

काजल- चल सुबह हो गया है मुझे उठाने दे.

लल्लू काजल को कास क्र अपने बहो मई जकड लिया.

काजल- ऐसे इतने जोर से पकड़ेगा तो मेरी हड्डिया टूट जाएगी.

लल्लू थोड़ा ढीला क्र दिया.

काजल लल्लू क आँखों मई देखते हुए आँखों से इसरा किया.

लेकिन लल्लू नहीं छोड़ा.

काजल लल्लू क होठो पर झुकती हुई एक हलकी सी किसी दे क्र बोली.

अब छोड़ दे. सब उठ गए होंगे.

लल्लू मुसकुडता हुआ काजल को छोड़ दिया.

काजल अपने कपडे को सही करती गेट खोल क्र बहार चली गई.

कमरे मई लल्लू लेता हुआ लल्लू ुब्ब गया तो वो भी उठ क्र फ्रेश होने चला गया.

वह से आ क्र आँगन मई खटिया पर बैठ गया.

ऋतू लल्लू क लिए चाय लायी.

लल्लू बैठा चाय पि रहा था.

तभी एक एक क्र सभी बहने कमरे से बहार आई.

ऋतू- कोमल कैसी हो बीटा अब तुम.

कोमल- ठीक हु काकी.

लल्लू- क्यू क्या हुआ दीदी को.

कोमल- सर दर्द क्र रहा था रात को.

लल्लू- यहाँ बैठो मई दबा देता हु.

कोमल लल्लू क पास आ क्र उसे हुग करती हुई. अब मई बिलकुल ठीक हु.

सभी बहने एक एक क्र आ क्र लल्लू को हुग क्र उसके गाल पर चुम्मी देती जा रही थी.

रानी- अच्छा भाई आज से तुम हमारे बगल वाले कमरे मई सोयेगा.

लल्लू- किस ने बताया आप को.

सोनम- सुनील चाचा बता रहे थे की उस कमरे को साफ़ ाकरवा देना आज.

लल्लू- अच्छा.

वाओ फिर तो मजा आ जाएगा. सभी बहने एक साथ बोली.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 22.

सरे मर्द दादू सहित आँगन मई आ क्र बैठ गए.

लल्लू को आँगन बहनो क साथ देख क्र सब को अच्छा लगा.

सुनील- कैसा है मेरा बीटा अब.

लल्लू- मस्त हु काका.

दादू- लल्लू बीटा कल तुम दोनों भाई बहन ने तो मुझे डरा hi दिया था. भाई अब मई बूढ़ा हो गया हु. जरा मेरा भी ध्यान रख क्र ऐसी हरकते करो तुम लोग.

लल्लू- सॉरी दादू आगे से ध्यान रखूँगा.

सब क लिए ऋतू चाय ले क्र आई.

सभी लोग वही आँगन मई बैठ क्र चाय पि रहे थे.

ऋतू- पापा मई सोच रही थी की एक गारी खरीद लेते.

दादू- सही कह रही हो बहु. कल रात मई भी यही सोच रहा था.

गौरी- यया हूँ, कौन सी गारी लेंगे दादू.( गौरी उछाल क्र दादू क गले लगती गौरी बोली.)

लल्लू- आई मोती ये तो मई करने वाला था.

गौरी- तू चुप रह बन्दर. मेरे भी दादू है ये.

गौरी जीभ निकल क्र चिढ़ाने लगी.

रवि- अब ऐसे करोगे. अभी अभी मन किया है दादू ने. अभी hi सुरु हो गए.

लल्लू- छोटे काका. हम लड़ नहीं रहे है. ये तो हमारा प्यार है. ( लल्लू उठ क्र गौरी को हुग करता बोलै)

वैसे दादू कौन सी गारी लेंगे.

अनिल- मई सोच रहा हु ट्रेकर ले ले. खेती क काम भी आएगी.

रोमा- याक्क्क्क.

ऋतू- आप तो रहने hi दो. आप अपना दिमाग क्यू लगते हो. जो आप क पास है hi नहीं.

अनिल- अरे बाबा मई मजाक क्र रहा हु.( हस्ते हुए.)

राम- गरिया तो मार्किट मई इस समय बहुत है. लेकिन गौण क हिसाब से मेरे ख्याल से महिंद्रा का स्कार्पियो सही रहेगा.

सोनम- सही कहा आप ने छोटे चाचा.

गौण क लिए ये बेस्ट रहेगा. हमे यही लेना चाहिए.

दादू- अब मेरा छोटा बीटा और बड़ी पोती दोनों ने पसंद किया है तो मई तो अब इसे hi कहूंगा लेने को.

सुनील- ठीक है फिर यही ले आएंगे. वैसे लल्लू बीटा तुम्हे कोई और पसंद हो तो बताओ तुम भी.

लल्लू- नहीं काका, पापा और दीदी ने जो कहा है वही सही होगा. वैसे भी ये हम से बड़े है और समझदार भी तो यही ले आये. ( लल्लू सोनम को देख क्र बोलै)

सोनम मुसकुडने लगी.

दादू- राम बीटा, आज hi सहर जा क्र ले आना गाड़ी.

राम- जी पापा.

राम- अब कैसी है तबियत तुम्हारी.( लल्लू को देख क्र बोलै)

लल्लू- ठीक है पापा.

राम- तो चलना है गाड़ी लेने.

लल्लू- नहीं मई घर पर hi आराम करूँगा. अभी कमजोरी लग रहा है थोड़ा.

राम- ठीक है आराम करो.

फिर सभी मर्द लोग डाला पर चले गए.

मीनू- भाई चल तुम्हारा कमरा साफ क्र दू. तुम वह बैठे रहना. तुम जैसा बोलोगे वैसा सेटिंग क्र देंगे.

लल्लू- दी अभी कोई जल्दी नहीं है. आराम से करना उसको. अभी तो माँ का हुक्म है की उनके साथ सोया करू जब तक मई बिलकुल ठीक न हो जाऊ.

मीनू- ठीक है भाई.

लल्लू उठ क्र छत पर चला गया और वह चारो और टहलने लगा.

कोमल- क्या बात है यहाँ क्यू आ गया.

लल्लू पीछे देखा तो कोमल कड़ी थी.

लल्लू- दी कल आप का भी तबियत ख़राब हो गया था.

कोमल- नहीं तो. तुम्हे बताया तो था, मुझे सर दर्द क्र रहा था कल.

तुम ये बताओ की यहाँ अकेले क्या क्र रहा है.

लल्लू- दी निचे बैठा बैठा मन नहीं लग रहा था तो यहाँ आ गया.

कोमल- चल हमारे साथ अब अभी जब तक तू ठीक नहीं होता दिन मई हम सब क साथ रहन और रात को माँ क पास सो जाना.

लल्लू- ठीक है दी.

फिर दोनों निचे आ गए.

शालिनी- तुम यहाँ हो. मई सभी जगह धुंध ली तुम्हे.

लल्लू- क्या बात है काकी. क्यू धुंध रही थी आप.

शालिनी- चल नास्ता क्र फिर तुम्हे दवाई भी कहानी है.

लल्लू बुरा सा मुँह बनता हुआ चल दिया शालिनी क साथ.

फिर नास्ता और दवाई ले क्र लल्लू वह से अपने बहनो क कमरे मई आ गया.

साडी बहने लल्लू को चारो और से घेर बैठ गई.

सोनम- तो बताओ भाई. आप की क्या सेवा किया जय.

लल्लू- दीदी मेरा तंग खींचना बन करो.

रोमा- भाई क्या हम लोग कोई गेम खेले.

गौरी- है भाई. बड़ा मजा आएगा.

लल्लू- सही कहा. हम कोई गेम खेलते है.

फिर यु hi सब खेलते हुए टाइम पास करने लगे.

शाम मई राम एक ब्लैक कलर का स्कार्पियो खरीद क्र आ गया.

घर क सरे लोग बहार आ क्र देखने आये.

सब बहुत खुश थे.

राम सब को बरी बरी से बैठा क्र गौण घुमा लाया.

रात खाना पीना क बाद सब सोने चले गए.

लल्लू आज भी काजल क कमरे मई सोने चला गया.

सारा काम निपटा क्र काजल आ गई कमरे मई.

काजल- दवाई खली तुम ने.

लल्लू- नहीं बहुत कड़वा है. (लल्लू बुरा सा मुँह बनता बोलै.)

काजल सभी दवाई ले क्र आ गई.

काजल- गन्दी बात है ये. दवाई समय से नहीं खाओगे तो फिर ठीक कैसे होंगे जल्दी. चलो दवाई खाओ.

लल्लू- नहीं मई नहीं खाऊंगा. मई अब ठीक हु.

काजल- चुप चाप खता है या मर खायेगा.

लल्लू छोटा सा मुँह बना क्र दवाई खा लिया.

काजल- गुड. ऐसे hi दवाई खा लिया क्र. मेरा राजा बीटा.

फिर काजल अपना कपडा बदल सोने को आ गई.

काजल क बदन से आती खुसबू लल्लू को पागल क्र रहा था.

लल्लू क दिल मई अजीब सी गुदगुदी हो रही थी लेकिन वो दर भी बहुत रहा था की कही कुछ उल्टा सीधा हरकत हो गया तो मर भी पद सकता है.

लल्लू दूसरी और घूम क्र सोने की कोसिस करने लगा अपने मन मई उठाते अरमानो को दबाये.

काजल जब देखि की लल्लू दूसरी और घूम गया है तो वो पीछे से लल्लू से चिपक कर उसे अपने बहो मई भर ली.

लल्लू को काजल का पीछे से यु चिपकने से उसके दूध का टंकी का मुलायम एहसास अपने पीठ पर हो रहा था.

लल्लू को अब अपने आप को रोक पाना बहुत मुश्किल लगने लगा.

लल्लू का बाबूराव भी फुल खड़ा हो क्र सलामी दे रहा था.

अंत मई लल्लू अपने दिल क हाथो मजबूर हो क्र काजल की और घूम गया और कास क्र उसे गले लगा लिया.

काजल- मई तो समझी थी की मैंने जो दबाई पिलाइए थी इस लिए तुम मुझ से नाराज हो गए हो.

लल्लू- माँ आप दुनिया की बेस्ट माँ हो. मई आप से कैसे नाराज हो सकता हु.

काजल- मेरा प्यारा बीटा. तू कितना अच्छा है.

काजल लल्लू को गले लगाए उसके गाल को चुम क्र बोली.

इधर लल्लू को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे.

कैसे अपने इमोशंस को रोने.

लल्लू का हाथ काजल क पीठ पर फिशलने लगा.

काजल क ब्लाउज क कट पर पीछे पीठ नंगा था जहा लल्लू का हाथ बार बार फिसल रहा था.

लल्लू को काजल क पीठ का वो खुला हिस्सा फील क्र बहुत अच्छा लग रहा था.

काजल लल्लू क मुँह को अपने साइन से लगा क्र चिपका ली.

ये लल्लू क लिए एक और हमला था.

अब डायरेक्ट लल्लू क होठो पर काजल की चटिया छू रही थी.

काजल क दोनों चूचियों क बिच की घाटी और उभर साफ़ दिख रहा था.

लल्लू की नथुनों मई काजल क बदन की खुसबू लल्लू को मदहोश किये हुए था.

न चाहते हुए भी लल्लू का अपने आप से नियंत्रण छूट गया और वो जीभ निकल क्र काजल क ब्लाउज से झक्ति उसकी चूचियों की घाटी को चाट लिया.

काजल की मुँह से सिसकी निकल गई.

काजल और कस क्र लल्लू को भींच लिया अपने से.

लल्लू काजल क एक चुके को ब्लाउज क उप्पेर से hi मुँह मई ले क्र चूसने लगा.

काजल माभोश हो क्र लल्लू क बालो मई ऊँगली चलने लगी.

लल्लू समझ गया की माँ को भी अच्छा लग रहा है. तो वो दुगुने जोश से काजल की चुके को चूसने लगा और एक हाथ से उसके एक चुके को सहलाने लगा.

काजल को अपने निचे गिला होता महसूस हो रहा था.

लल्लू क चूसने से एक तरफ का पूरा ब्लाउज भींग गया था. जिस से काजल की चुके का पूरा हिस्सा उस ब्लाउज से चिपक क्र नुमाया हो गया था.

जिस मई काजल का चुचुक खड़ा हो क्र अलग से दिख रहा था.

लल्लू काजल क चुचुक को दांतो से पकड़ क्र हलके से काट लिया.

काजल सिसकती हुई लल्लू क बालो को नोचती झरर गई.

काजल का बदन ढीला हो गया.

काजल को लल्लू पर बहुत प्यार आ रहा था.

काजल लल्लू क होठो पर छोटा सा किसी दे क्र अलग हो गई.

काजल- चल काफी रात हो गया अब सो जा.

लल्लू गहरी सास लेता सीधा हो क्र लेट गया.

काजल लल्लू क बालो को सहलाती उस क चेहरे को देख रही थी.

धीरे धीरे दोनों मीठी नींद मई खो गए.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 23.

आधी रात को काजल की नींद खुली.

उठ क्र बाथरूम से वापस आई. दरवाजा बंद क्र जैसे hi बीएड पर आई देखती है की लल्लू का धोती खुल क्र बीएड पर एक और पड़ा हुआ है और लल्लू का लौड़ा अपने विकराल रूप में खड़ा है. एक बार को तो काजल लौड़े को देख क्र दर गई.

किसी इन्शान का इतना बड़ा भी हथियार होता है क्या.

काजल- बाप रे… ये क्या है. इतना बड़ा भी होता है क्या.

काजल आँखे बड़ी बड़ी किये उसे देखे जा रही थी.

काजल देखते हुए लल्लू क पास बीएड पर पहुंच गई.

न चाहते हुए भी काजल का मन उसे छू क्र देखने को करने लगा.

काजल कपट हाथो से लल्लू क लौड़े को आहिस्ते से छी ली.

काजल एक नजर लल्लू क चेहरे को देखा.

लल्लू गहरी नींद मई सोया हुआ था.

काजल फिर से हाथ बढ़ा क्र लौड़े क अचे से अपने मुठी मई ले ली.

काजल- आह कितना गर्म और सख्त है बिलकुल किसी रोड की तरह. हैयय क्या एक बार मुँह मई ले लू…

हैयय राममम ये मई क्या सोच रही हु.

अगर लल्लू जग गया तो…

काजल लौड़े को छोड़ क्र लेट गई.

काजल का मन अब बार बार उस लौड़े को पकड़ने को उसे मुँह मई लेने को करने लगा.

काजल मन मर क्र लेती रही.

लेकिन चंचल मन कहा किसी की मंटा है. इसे जितना किसी काम को करने से रोको वो इतना hi उसी काम को करने को तैयार रहता है.

अंत मई दिल क हाथो मजबूर काजल उठ बैठी.

हाथ बढ़ा क्र लल्लू क लौड़े को पकड़ लिया.

काजल- ाः कितना गरममम है. ीीिस्सस उम्म्म.

काजल लौड़े को मुठियाते हुए उस पर झुक गई.

काजल- कितना प्यारा खुसबू आ रहा है इस से.

काजल मुख खोल क्र हलके से जीभ निकली और लौड़े क टोपे को चाट ली.

काजल की प्यास जैसे और भड़क गया.

एक नजर लल्लू पर दाल डरते हुए मुँह खोल क्र लल्लू क लौड़े का ऊपरी हिस्सा, उसके टोपे को अपने होठ को गोल क्र अंडर दाल ली और हौले से टोपे को जीभ से गिला क्र चाटने लगी चूसने लगी.

काजल को खुद पता नहीं चला कब वो लौड़े को मुठियाते हुए पुरे मुँह मई भर क्र अंडर बहार करने लगी.

काजल की आइसक्रीम की तरह कभी लौड़े को उप्पेर से निचे और निचे से उप्पेर तक चाट लेती तो कभी पूरा मुँह खोल क्र उसे मुँह मई फर क्र चूसने लगती.

तभी काजल को अपने सर पर दबाओ का एहसास हुआ.

मुँह मई लौड़ा घुसा हुआ था तो वो पलके उठा क्र देखि तो लल्लू आँख खोले अपने हाथ से काजल क सर पकड़ क्र उसे अपने लौड़े पर निचे दबा रहा था.

काजल मरे सरम क उसका हाथ और मुँह दोनों रुक गया.

लल्लू जब देखा की काजल रुक गई तो वो अपना कमर निचे से उठा उठा क्र काजल का मुँह छोड़ने लगा और उप्पेर से अपने हाथ से काजल क सर को दबाये रखा जिस से काजल छह क्र भी अपना सर नहीं हटा पाई.

लल्लू से ये सब बर्दास्त नहीं हुआ और वो काजल क मुँह मई hi खली हो गया.

लल्लू पानी निकलने क बाद काजल का सर छोड़ दिया.

काजल क मुँह से वीर्य निकल क्र बीएड पर टपकने लगा.

काजल एक नजर लल्लू को देखि तो लल्लू काजल को hi देख रहा था.

काजल सर झुका क्र मुँह मई जो लल्लू का पानी था वो पि गई और मुकुडते हुए दूसरी और घूम क्र लेट गई.

लल्लू का अब नींद खुल गया था.

वो पीछे से काजल को बहो मई भर लिया.

काजल- छोड़ बेसरम. मुझे सोने दे.

लेकिन लल्लू काजल को नहीं छोड़ा.

लल्लू का एक हाथ गलती से काजल क छाती पर चला गया.

काजल लल्लू का हाथ पकड़ क्र पेट पर कर दी.

लल्लू अपना एक पेअर उठा क्र काजल पर रख दिया और चिपका गया काजल से.

लल्लू को अपने हाथ मई काजल की मुलायम मखमली पेट का एहसास हो रहा था.

लल्लू का बाबूराव एक बार फिर खड़ा हो रहा था.

लल्लू अपने माँ क पेट पर अपना हाथ चलने लगा.

काजल की सबसे तेज हो गई.

काजल- न क्र बीटा. मुझे सोने दे.

लल्लू- माँ अब तो सुबह होने वाली है.

लल्लू हाथ चलता हुआ कभी पेट तो कभी उस से उप्पेर जहा से काजल की मोती बड़ी बड़ी दूध से भरी टंकी थी वह तक ले जाता फिर निचे पेट पर ले आता था.

काजल की सबसे तेज चल रही थी.

पीछे अपने गांड पर काजल को लल्लू का रोड चुभ रहा था जिस कारन काजल की मुनिया भी इस से मिलान को आँशु बहा रही थी.

लल्लू आहिस्ता से काजल की एक चुकी को पकड़ क्र सहला दिया.

काजल हलकी सी सिसक पड़ी.

लल्लू से अब बर्दास्त करना मुश्किल हो गया.

थोड़ा निचे हो क्र तकिया से लल्लू पीछे काजल क खुले पीठ पर अपने जीभ से चाट लिया.

काजल सिहर उठी.

उसका रोया रोया खड़ा हो गया.

काजल से अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था.

वो अपना होठो को दांतो से कटती रोक रही खुद को.

लल्लू काजल क गर्दन पर चुम लिया.

काजल की अब बर्दास्त की हाडे पर हो गई वो पलट क्र लल्लू क उप्पेर आ गई और लल्लू क पुरे चेहरे को चूमने चाटने लगी.

लल्लू क होठो को अपने मुँह मई भर क्र उसे बेदर्दी से कुचलने लगी.

काजल पर जैसे भूत सवार हो गया.

वो लल्लू क कभी उप्पेर क होठ को अपने दांतो से पकड़ क्र काट लेती तो कभी जोर से चूसने लगती.

काजल काट काट क्र लल्लू क होठो से खून निकल दी. जिसे बहने भी नहीं दिया उसे भी चाट क्र पि गई.

.काजल फिर लल्लू क गाल को काटने लगी उसके गर्दन को चाटने लगी.

निचे खिशक्ति हुई काजल लल्लू क खड़े लैंड पर अपना गांड रगरती लल्लू क छाती को चाटने लगी.

लल्लू क एक चुचुक को अपने चुटकी से पकड़ क्र मसल देती.

लल्लू तो भौचक काजल क इस हमले को समझने की कोसिस क्र रहा था.

काजल लल्लू क एक चूचक को हाथो से मसलने लगी तो दूसरे को दन्त से काट लेती फिर उसे जीभ फिर क्र सहलाती.

काजल क्या क्र रही है उसे खुद नहीं पता था.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र उसके एक चुके को पकड़ना चाहा तो काजल उसके हाथ पर एक चमाट लगा क्र मन क्र दी.

काजल जल्दी से अपना ब्लाउज खोल क्र फेक दी फिर हाथ पीछे ले जा क्र अपना ब्रा खोल दी. ब्रा खुलते hi काजल की चुके उछाल क्र आगे आ गए.

काजल अपने दोनों हाथो से चुके पर ढके कप्स को पकड़ क्र अलग क्र दी.

लल्लू क आँखों क सामने उसकी माँ क दो गोल बड़े बड़े गोर चुके नुमाया हो गए जिस पर पिंक कलर का एक एक इंच का चुचुक खड़े थे.

काजल झट से झुक क्र लल्लू क नंगे सीना पर अपने छाती को बेरहमी से रगड़ती एक बार फिर से लल्लू क होठो को काटने लगी.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र काजल क पीठ को सहलाने लगा.

काजल एक बार फिर उसके हाथ पर एक चमत मर दी.

फिर लल्लू पर से उठ क्र अपने साडी को खोल ली जो पहने हुए थी और उसे ले क्र बीएड पर आ गई.

बीएड पर आ क्र काजल लल्लू क एक हाथ को पकड़ क्र बीएड क सिरहाने से बांध दी पीछे क्र फिर दूसरे को भी ऐसे hi अपनी साडी से बांध दी.

लल्लू कोई बिरोध नहीं क्र रहा था. काजल जो क्र रही थी वो संत लेता करने दे रहा था.

दोनों हाथ बांध क्र काजल उसके पैरो क साथ भी ऐसा hi की.

एक दूसरी साडी ला क्र उसके दोनों पेअर को दो विपरीत दिशा मई क्र क बीएड से बांध दी.

लल्लू आस्चर्य से काजल को देखे जा रहा था.

काजल फिर अपना पतिकी और पेंटी भी निकल क्र फेक दी.

अब काजल और लल्लू दोनों जन्मजात नंगे थे.

लल्लू तो अपनी आँख फारे काजल क कटिप्रदेश को देखे जा रहा था जहा सतपुरा का घाना जंगल फैला हुआ था.

लल्लू की नजर फिशलता हुआ उस से निचे आया तो दो केले क तने की तरह दो मोती चिकनी गोरी जांघ.

ऐसा मनमोहक नजारा देख क्र लल्लू का बाबूराव ठुमके लगाने लगा.

लल्लू खा जाने वाली नजरो से काजल क जांघो को देखे जा रहा था.

काजल जा क्र एक बार फिर लल्लू क कमर पर बैठ गई और झुक क्र लल्लू क ललाट को चुम ली फिर दोनों आँखों को फिर उस से निचे उसके नाक को मुँह मई ले क्र हलके से काट ली.

फिर उसके गाल को पहले मुँह मई भर क्र काट ली फिर उसे जीभ से चाट लेती.

बरी बरी दोनों गाल क साथ ऐसा hi की.

फिर आया लल्लू क होठो का नंबर.

लल्लू क होठो को मुँह मई भर क्र चूसने और काटने लगी.

इन सब क्रिया मई काजल ने ये ध्यान रखा की उसकी छाती का सिर्फ निप्पल बिलकुल हल्का सा वो भी कभी कभी लल्लू क बदन से टच करे.

काजल लल्लू क होठो को जी भर चूसने क बाद उसके चढ़ी फिर गर्दन को छाती हुई उसके छाती पर आ गई. उसके छाती को चाटने लगी. चेतना हो जाने क बाद उसके निप्पल से खेलने लगी कभी एक को काट लेती और दूसरे को जीभ से टच करती तो कभी दूसरे को काट क्र पहले को टच करती.

फिर काजल उसके पेट को छाती हुई उसके कमर और फिर उस से निचे लल्लू क डंडे पर आ पहुंची.

डंडे को गौर से देखने क बाद्द काजल उस पर झुक क्र हलके से जीभ निकल क्र चाट ली. काजल जैसे hi जीभ लगाई वैसे hi लल्लू का डंडा फच फच क्र क चार पांच बार अपना पानी फेक दिया जो काजल क पुरे मुँह और छाती पर फ़ैल गया.

काजल संत हो क्र बैठ गई.

फिर बीएड से उतर क्र कपडा निकल अपना बदन साफ़ की. और फिर अपना कपडा उठा क्र पहनने लगी.

सारा कपडा पहन क्र उसने लल्लू को खोल दिया.

काजल- क्यू बच्चू मजा आया.

लल्लू शर्मा क्र झेहरा झुका लिया.

काजल- फिर से बदमासी की न तो बताउंगी मई तुम्हे. वैसे तो ये जब तक तुम्हे याद रहेगा तुम ऐसा करोगे नहीं. ये मुझे पूरा उम्मीद है.

लल्लू मुसकुदा क्र रह गया.

चल अब कपडे पहन ले. सब उठ गए है.

लल्लू उठ क्र बीएड से उतर गया और अपना धोती लपेट लिया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 24

सुबह हो गई थी. घर मई सब एक एक क्र उठ क्र बहार आ रहे थे.

लल्लू बहार आ क्र नदी किनारे चला गया.

वह बैठ क्र नदी क मछली, मेढक और बांकी जीवो से बात करता उसे अपना साडी कहानी बता रहा था. जो कुछ अभी उसके लाइफ मई हो रहा था.

जब सूर्य की किरणे थोड़ी तीखी हुई तो वो उठ क्र फ्रेश हुआ और फिर घर को चल दिया.

नलका पर हाथ पेअर धोने क बाद दालान पर आया तो दादू स्नानं क्र पूजा क्र रहे थे.

वह से आँगन आ गया. आँगन मई सब चाय पि रहे थे तो लल्लू को भी एक कप पकड़ा दिया माँ ने.

लल्लू- (चाय पिता हुआ) काका बुलेट चलना कब सिखाएंगे.

सुनील- जब तुम कहोगे.

लल्लू- फिर आज से चले. अभी कोई काम तो नहीं आप को.

सुनील- नहीं उतना जरुरी कोई काम नहीं hai.thodi देर मई चलते है.

लल्लू घर पर धोती hi पहनता था तो चाय पिने क बाद जा क्र पेण्ट पहन आया फिर सुनील काका क साथ चला गया बुलेट चलने.

दो घंटा बुलेट ड्राइव की ट्रेनिंग करने क बाद फिर वापस घर आ क्र नास्ता क्र लिया.

सोनम- माँ कल मेरा फॉर्म फइलल उप का आखरी दिन होगा. अभी अभी कॉल आया था मेरे फ्रेंड का. कैसे होगा.

ऋतू- बीटा, पता करते रहना था न. आने दे सब को खाने पर पूछती हु कौन साथ जाएगा.

सोनम- माँ भाई क साथ आज hi चली जाऊ.

ऋतू- नहीं आज अब लेट हो गया. अब कल hi जाना. सब तैयार क्र क रख ले.

फिर सोनम अपने कमरे मई चली गई.

लल्लू नास्ता करने क बाद उठ क्र अपने बहनो क कमरे की और चला गया.

दरवाज़ा बंद था. लल्लू जा क्र दरवाजा बजाय.

सोनम ने hi दरवाजा खोला.

लल्लू- दीदी क्या क्र रहे हो आप लोग.

सोनम- कुछ नहीं भाई. कल फॉर्म फइलल उप का आखरी डेट है. उसी का सोच रही थी.

लल्लू- अरे दीदी अभी फॉर्म फइलल hi तो हो रहा है कौन सा एग्जाम है जो इतना पदेशन हो.

सोनम- भाई कल मेरे साथ जाएगा कौन. इस लिए पदेशन हु.

लल्लू- इस मई इतना पदेशन क्यू हो. कोई न कोई तो चला hi जाएगा.

सोनम- देखते है क्या होता है. ये सब छोड़. ये बता की अपना कमरा देखा क्या.

लल्लू- नहीं क्या वो साफ़ हो गया.

सोनम- चल देखते है.

दोनों वह से निकल क्र दूसरा कमरा जो की अभी जिस से निकले है, उसके साथ है जॉइंट. दोनों क बिच एक दरवाजा है. ये दो कमरे लड़कियों का है. उसके बाद वाला कमरा ये भी इन दोनों कमरों क साथ जॉइंट है. ये लल्लू क लिए साफ़ किया जाना था.

दोनों उस कमरे मई पहुंचे तो वह सभी लड़किया जमा थी और वह सब चीजों को व्यवस्थित ढंग से रख रहे थे.

लल्लू- ओह्ह्होऊ तो मेरी साडी प्यारी बहने यहाँ है.

लल्लू चारो और कमरे को देख रहा था.

कमरे मई एक डबल बीएड था. एक स्टडी टेबल चेयर, एक दिवार मई बड़ा सा अलमीरा.

बीएड क साथ एक बड़ा सा खिड़की जिस से घर क पीछे का बगीचा दिख रहा था. जिस मई कई तरह क फूल खिले हुए थे वह कुछ आम अमरुद क बड़े पैर भी थे.

पूरा कमरा उजाले से भरा हुआ था.

उस कमरे मई तीन दरवाजे था.

एक लड़कियों क रूम से जॉइंट. दूसरा सामने से किसी को आँगन से आने क लिए. जिस से सोनम और लल्लू दोनों आये थे और एक तीसरा कमरा था जिस से पीछे बगीचे मई जाया जा सकता है.

लल्लू- फैबुलस…

सोनम- ोुहहू, तो भाई को ये कमरा लगता है बहुत पसंद आया.

लल्लू- है दीदी, ये कमरा बहुत बढ़िया है. मुझे सुच मई बहुत अच्छा लगा.

रानी- पता है भाई. पहले ये कमरा हम लोग बोले थे की हमे दे दो तो पापा मन क्र दिए. बोले ये मेरा कमरा है. लेकिन तुम्हारे एक बार डोलते hi ये कमरा दे दिए.

लल्लू- दीदी अगर ये कमरा आप सब को पसंद है तो आप सब ये ले लो. मई तो कही भी रह लाऊंगा. एक एक दिन सभी काकी क पास एक दिन माँ क पास तो मेरा चार दिन तो ऐसे hi पर हो जाएगा. बांकी क तीन दिन मई से दो दिन आप लोगो क पास और बचा एक दिन वो दालान पर. बस हो गया मेरा पूरा वीक पार.

दूसरा वीक फिर सुरु से.

सोनम- नहीं नहीं. हमे नहीं चाहिए ये कमरा. वैसे भी तुम यहाँ आ जाओगे तो हम ये अंडर वाला दरवाजा खोल देंगे फिर ये तीनो कमरा एक hi तो हो जाएगा. फिर जिस को जहा मन करेगा वो वह रह सकता है.

सभी बहनो ने इस बात को hi मन.

गौरी- भाई तो आप आज से यहाँ रहेंगे न.

लल्लू- नहीं दीदी मई कुछ दिन बाद से यहाँ रहूँगा. अभी माँ मुझे यहाँ नहीं सोने देगी.

रोमा- कोई बात नहीं भाई. हम सब ने इस कमरे को पूरा तैयार क्र दिया है. आप का जब से दिल करे आ जाना.

लल्लू- यहाँ से बगीचा कितना प्यारा दीखता है. दीदी बगीचा चले क्या.

कोमल- है भाई चलो वह अमरुद भी होंगे.

फिर सभी बहन लल्लू का हाथ पकड़ बगीचे मई आ गए अमरुद क पैर क पास.

मीनू- भाई काफी सरे अमरुद है तोड़ क्र दो न.

लल्लू पेड़ पर चढ़ क्र काफी सरे अमरुद तोड़ क्र बहनो को पकड़ा दिया.

सभी खुश हो क्र मजे से खाने लगे.

फिर थोड़ी देर बगीचे मई घूम टहल क्र ये लोग कुछ अमरुद ककियो क लिए ले क्र आँगन आ गए.

गौरी- माँ माँ हम ने आज काफी सरे अमरुद खाये.

(गौरी दौड़ क्र शालिनी क पास आ क्र उसे बहो मई पकड़ क्र बोली.)

शालिनी- कहा से खाये. किस ने दिया.

गौरी- खुश होते हुए, भाई ने पीछे बगीचे से तोर क्र दिया.

शालिनी- ओह्हो तो ये बात है. इसी लिए इतना खुश है.

लल्लू सरे अमरुद ले क्र रागिनी क पास आ क्र रख दिया.

रागिनी किचन मई खाना बना रही थी. अभी वो वह अकेले hi थी.

लल्लू- काकी क्या बात है. मुझ से कोई गलती हो गई है क्या. मई देख रहा हु आप मुझ से बात नहीं क्र रही है.

रागिनी रोटी हुई लल्लू को और पीठ क्र ली.

लल्लू- काकी अगर मुझ से कोई गलती हो गया है तो मुझे मर लो लेकिन इस तरह तो मत रूठो मुझ से.

रागिनी पलट क्र लल्लू को बहो मई भर क्र रोने लगी.

रागिनी- बीटा उस दिन मेरे वजह से तुम्हारी तबियत ख़राब हो गया. मई बिना सोचे समझे तुम्हे थप्पड़ मार बैठी और…

लल्लू- (रागिनी का मुँह बंद करते हुए) पहले आप रोना बंद कीजिये. और आप किस दिन की बात क्र रहे है मुझे तो कुछ याद hi नहीं आ रहा.

रागिनी- बीटा तू बहुत महँ है. बहुत प्यारा बीटा है तू. मई तेरे जैसे प्यारे बेटे को मर बैठी. मुझे माफ़…

लल्लू- बिच मई hi बोलते हुए. ओह्ह्हो काकी मई कहा न की मुझे कुछ याद नहीं आप कब की बात क्र रही है. आप इतना क्यू रोये जा रही है. अगर आप और रोई तो मई आप को गुदगुदी लगा दूंगा.

लेकिन रागिनी को सुच मई बहुत दुःख हुआ था तो उसका रोना रुक hi नहीं रहा था.

लल्लू अंत मई रागिनी को पकड़ क्र उसे गुदगुदी लगाने लगा.

रागिनी पहले तो रोटी hi रही फिर थोड़ा थोड़ा रोने पर कण्ट्रोल की लेकिन पूरा नहीं.

लल्लू रागिनी क कभी पेट पर तो कभी बगल मई गुदगुदी कर रहा था. और रागिनी इस से लल्लू क बहो मई रोटी सिसकती मचल रही थी. इसी चक्कर मई एक बार लल्लू क हाथ मई रागिनी क मीडियम साइज का एक चुकी आ गया और लल्लू गुदगुदी लगते लगते उसे गलती से दबा दिया जिस का लल्लू को पता भी नहीं चला.

रागनी अचानक हुए इस हरकत से हड़बड़ा गई और वो संत कड़ी हो गई.

लल्लू को लगा की काकी फिर रोने लगी तो लल्लू फिर रागिनी को गुदगुदी करने लगा. रागिनी फिर से हस्ते हुए लल्लू को भी गुदगुदी करने लगी.

लल्लू को भी अब इस खेल मई मजा आने लगा था तो वो फिर से ऐसे hi क्र रहा था. जिस कारन दोनों का सरीर एक दूसरे से कभी कभी रैगर जाते तो दोनों को एक रोमांच का एहसास होता.

ऋतू- तो दोनों की सुलह हो गई.( ऋतू रसोई मई आती बोली.)

लल्लू- झगड़ा कब हुआ था और आप क्या मन रही हो की हमारा घगड़ा हो.

ऋतू- आएएए मरूंगी अगर मेरा तंग खींचने की कोसिस की तो.

रागिनी- है दीदी. मेरे प्यारे बेटे ने मुझे माफ़ क्र दिया है.

रागिनी लल्लू को अपने बहो मई भर क्र उसके गाल को चुम क्र बोली.

ऋतू- चलो अच्छी बात है.

लल्लू फिर वह से आ क्र माँ क कमरे मई चला गया.

कमरे मई माँ बैठी कुछ सोच रही थी.

लल्लू- क्या बात है माँ. आप क्या सोच रही हो.

काजल- कहा था तू.

लल्लू- मई तो बगीचे मई दीदी लोगो क साथ था.

काजल- तुम बुलेट सिखने गए थे.

लल्लू- है माँ बड़ा मजा आया. पता है आते वक्त मई hi चला क्र लाया था बुलेट को. काका तो पीछे बैठे हुए थे.

माँ- देख बीटा. तू बुलेट चलना मत सिख. कही कोई चोट लग गई तो.

लल्लू- माँ.. नहीं लगेगी चोट. मुझे अच्छा लगता है.

माँ- तेरे पापा को पता चला तो वो फिर नाराज हो जाएंगे.

लल्लू- नहीं होंगे. जब मई आ रहा था बुलेट चलता हुआ तो पापा भी थे दालान पर. वो कुछ नहीं बोले.

माँ बीएड से उतर क्र लल्लू को बहो मई भर क्र सर पर हाथ फेरती बहार चली गई.

लल्लू बीएड पर जा क्र लेट गया.

लेते लेते उसे कब आँख लग गई पता hi नहीं चला.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 25.

नास्ता लेट किया था तो दोपहर मई खाना नहीं खाया मई सोता hi रहा. ककी रात भी ठीक से नहीं सोया था और उस से पिछले रात तो तबियत hi ख़राब हो गई थी.

इस लिए माँ ने भी सोया हुआ छोड़ दिया.

साम मई सो क्र उठा तो सर भरी सा लग रहा था.

उठ क्र बहार आँगन मई आ गया.

सब आँगन मई hi बैठे थे.

लल्लू- माँ, मुझे क्यू सोने दिया दिन मई. अब मेरा सर भरी सा हो गया है.

सोनम- भाई मेरे साथ आ मई सर मई तेल दाल करालिश क्र देता हु.

सोनम दीदी मेरा हाथ पकड़ क्र अपने कमरे की और ले जाती बोली.

मई दीदी क साथ उसके कमरे मई चला गया.

सोनम- भाई यहाँ बैठ.

दीदी मुझे एक सोफे पर बैठा क्र खुद रैक से तेल की बोत्तल लेने चली गई.

बोतल ला क्र वो मेरे आगे कड़ी हो गई और मेरे सर मई तेल दाल क्र मेरे सर की मालिश करने लगी.

मई आँख मूंदे मालिश का आनंद ले रहा था.

तभी मैंने अपनी आँख खोली तो देखा की दीदी मालिश करते हुए अपने हाथ चला रही थी मेरे सर मई तो उसी हिसाब से दीदी क गोल ठोस उभर भी वैसे hi हिल रहा था.

दीदी ने इस समय एक t-shirt पहना हुआ था जिस क निचे उन्होंने ब्रा नहीं पहना था जिस कारन मुझे मेरे आँखों क बिलकुल नजदीक दीदी का वो हिलता हुआ उभर और उस मई से निकोला निकला चुचुक.

उफ्फ्फ्फ़ मेरे बदन मई एक लहार दौर गई.

पता नहीं मुझे क्या होने लगा.

मई वो देख क्र बिलकुल बेचैन हो गया.

जल्दी से आँखे बंद क्र मई गहरी गहरी सास लेने लगा.

सोनम- क्या हुआ भाई. ज्यादा सर दर्द करने लगा.

तुम यहाँ बीएड पर लेट जाओ.

दीदी मेरा हाथ पकड़ मुझे बीएड पर ले आई और अपने गॉड मई सर रखने को कहने लगी.

सोनम- आ बही यहाँ सर रख क्र लेट. अभी दर्द ठीक हो जाएगा.

लल्लू- मुझे तो अब सर का दर्द ठीक हो गया लेकिन कही और दर्द करने लगा. दीदी को क्या कहता. वो बहुत ज्यादा जोर देने लगी तो मई दीदी क गॉड मई सर रख क्र लेट गया.

अब दीदी आराम आराम से मेरा सर सहलाती और दबती जा रही थी.

मई ऐसे लेता था की मेरा मुँह दीदी क पेट मई तूच हो रहा था.

दीदी का उभर मेरे गाल पर कभी कभी टच होता जब वो मेरा सर दबाते वक्त थोड़ी झुकती थी.

मुझे दीदी क बदन की खुसबू मदहोश करने लगी और मई बिलकुल संत हो क्र सो गया उस खुसबू को सूंघता हुआ.

पता नहीं क्या नशा था दीदी क बदन क खुसबू मई.

जब आँख खुली तो सर दर्द नहीं था लेकिन रात हो गई थी.

चारो और अँधेरा फ़ैल गया था.

मई कमरे से निकल क्र दूसरे कमरे मई गया तो सब बहने वह पढ़ रही थी.

सोनम- क्या हुआ भाई. कैसा है अब सर दर्द.

लल्लू- दीदी आप का हाथ दो मुझे. क्या जादू है आप क हाथो मई. ( मई दीदी का हाथ पकड़ क्र उसे चूमते हुए कहा.)

सोनम दीदी शर्मा क्र नजरे झुका ली.

रोमा- क्या हुआ भाई.

लल्लू- दीदी ऐसे मेरा सर दबाई की सर दर्द तो भाग hi गया साथ hi मई भी सो गया जब की मई पुरे दिन सो क्र उठा था.

सब बहने मेरी बात सुन क्र हुस्ने लगी.

मीनू- ओह्हो तो इसका मतलब है की दीदी क हाथ मई सुच मई जादू है. भाई तुम ने अभी अपने होठो से छुवा है दीदी क हाथ को देखना कही मुँह न बंद हो जय तुम्हारा.

सोनम दीदी सरमाती हुई मीनू दीदी को मरने लगी.

सोनम- अच्छा भाई. क्या कल तुम मेरे साथ सोल्लगे चलोगे.

लल्लू- है क्यू नहीं दीदी. लेकिन आप सोल्लगे क्यू जाना चाहते हो.

सोनम- भाई कल फॉर्म भरने का लास्ट डेट है इस लिए जाना है.

लल्लू- ाचा. मई भूल गया था. ठीक है चलेंगे कल.

फिर लल्लू वह से बहार आँगन मई आ गया.

माँ- फिर सो गया था. अब रात मई क्या करेगा.

लल्लू- जो कल किया tha.(sir खूझाता हुआ)

काजल शर्मा क्र वह से भाग जाती है.

रात खाना खाने क बाद लल्लू कमरे मई जा क्र लेट गया.

नींद तो आ नहीं रहा था तो लेता लेता ऐसे hi करवट बदल रहा था.

थोड़ी देर मई काजल घर का काम निपटा क्र सोने आ गयी.

कमरे का दरवाजा लगा क्र कपडा बदल बीएड पर आ गई.

काजल- जग क्यू रहा है सो जा.

लल्लू- माईनस नहीं आ रहा.

काजल- मुझे तो बहुत नींद आ रही है. (जम्हाई लेने का नाटक करते हुए) मई तो सोने जा रही हु.

काजल पलट क्र दूसरी और मुँह क्र मुँह हाथो से दबा क्र हुस्ने लगी.

लल्लू उल्लू की तरह माँ को देख रहा था.

लल्लू- माँ… मा. सुनो न.. लेकिन काजल मुसकुडती चुप चाप दूसरी और मुँह घुमाये हुस्स रही थी.

लल्लू खिशक क्र काजल क पास आ गया और उस क पीछे से चिपक क्र उसे अपनी और मोर्ने लगा.

काजल नाटक करते हुए खर्राटे मरने लगी.

लल्लू- ओह्ह तेरी अभी अभी तो आयी है सोने और खर्राटे भी मरने लगी.

लल्लू समझ गया की माँ नाटक क्र उसे पदेशन क्र रहा है.

लल्लू- माँ मई जनता हु आप नाटक क्र रही हो. आप तो मेरी प्यारी माँ हो. जग से न्यारी माँ हो. मेरी रानी माँ हो. आप मेरी एकलौती माँ हो. आप तो सात जन्मो से मेरी माँ हो. अपने नादाँ बेटे को सताता हुआ आप को अच्छा लगता है तो ठीक है सत्ता लो.

काजल का हुस्स हुस्स क्र पेट दर्द क्र रहा था. अब उस से हस्सी रोकी नहीं जा रही थी.

काजल तथा क्र हुस्स पड़ी.

काजल- किस ने बोलै था इतना सोने क लिए. अब मुझे भी सोने नहीं दे रहा. (काजल हस्ते हुए बोली.)

लल्लू झपट क्र माँ को काश क्र गले लगा लिया.

लल्लू- तो मुझे तंग किया जा रहा था.

काजल- तू जो मुझे तंग करता है उसका क्या.

लल्लू- मई तो आप का प्यारा बीटा हु.

काजल- और मई तो तेरी प्यारी माँ हु.

लल्लू- आप मेरा नक़ल करना बंद करेंगी.

काजल- नहीं…

लल्लू काजल को गुदगुदी लगाने लगता है.

काजल हस्ती हुई उछलने कूदने लगती है.

काजल- बीटा सो जा मुझे नींद आ रहा है.

लल्लू- माँ मुझे नहीं आ रहा मई क्या करू.

काजल- तू न गण गए.

लल्लू- माँ आप क कान मई गौ..

( It's ा जोक)

सुन क्र माँ और लल्लू दोनों ठहाका लगा क्र हुस्स पड़े.

काजल- बदमाश कही का माँ क कान मई सु सु करेगा.

लल्लू- मई तो गण गेम का बोल रहा था माँ.

काजल- है है मई सब समझती हु. जैसे कल रात मेरे मुँह मई गण गया था और आज कान मई गए देना चाहता है.

लल्लू- माँ मई क्या करू आप हो hi इतनी प्यारी की मुझ से रहा hi नहीं गया.

काजल- चल झूठा.

लल्लू- सुच माँ. कसम खिला लो अगर यकीं नहीं तो.

काजल लल्लू क गाल को चुम क्र उसे अपने से चिपका ली.

काजल- मुझे यकीं है बीटा. अब सो जा.

काजल लल्लू क अपने से चिपकाये उसके सर को सहला रही थी.

लल्लू का मुँह माँ क छाती मई घुसा हुआ था.

फिर उसे माँ क बदन की खुसबू आ रही थी.

लल्लू मुँह खोल क्र माँ क एक चुके को मुँह मई ले लिया कपडा सहित.

काजल- नहीं मानेगा तू.

लल्लू अब एक चुके को पिता हुआ दूसरे को हाथ से पकड़ सहलाने लगा.

काजल थोड़ी देर ऐसे hi रही फिर थोड़ा पीछे खिशक क्र अपने ब्लाउज को खोल क्र अपने दूध को बहार निकल दी

फिर आगे हो क्र लल्लू को अपनी छाती से लगा दी.

लल्लू नंगे सुडोल बड़े बड़े दूध को देख भूखे की तरह टूट पड़ा.

एक दूध को मुँह मई ले क्र उसके निप्पल को जोर जोर से चूसने लगता है. और दूसरे दूध को हाथ मई ले क्र उसे सहलाने लगता है.

काजल अपने होठो को दन्त से कटती अपने जांघो को एक दूसरे से मसलती जहर जाती है.

काजल का निप्पल्स बहुत सेंसिटिव है. कभी कभी तो वो अपने किसी तीते ब्लाउज से भी पदेशन हो जाती है जो उसके निप्पल्स को ज्यादा दबा देते थे.

काजल रेलीफ़े प् क्र बहुत सुखद आनंद महसूस क्र रही थी.

लल्लू अभी भी काजल क निप्पल को चूसने मई लगा हुआ था.

काजल अब उस को लल्लू क मुँह से निकल क्र दूसरे वाले को लल्लू क मुँह मई लगा दिया.

लल्लू अब दूसरे को चूसने लगा और पहले वाले को पकड़ क्र सहलाने लगा.

पहले वाले क निप्पल पर लगे अपने थूक को काजल क पुरे चुके पर फैला क्र उसे मसलने लगा.

अब लल्लू दोनों को कभी पकड़ क्र मसल देता तो कभी मुँह मई ले क्र काट लेता.

काजल लेती हुई तरप रही थी सिसकती हुई.

काजल हाथ निचे ले जा क्र लल्लू क धोती को खोल दी.

लल्लू का लौड़ा फनफना क्र उठ खड़ा हुआ.

काजल हाथ बढ़ा क्र लल्लू क लौड़े को पकड़ ली मुठी मई और उसे मसलने लगी.

फिर काजल उठ कड़ी हुई और अपने सरे कपडे खोल डेल और फिर बीएड पर आ क्र लेट गई.

लल्लू काजल क उप्पेर आ गया और उसके होठो पर अपना होठ लगा क्र चूसने लगा.

दोनों एक दूसरे क होठो पर टूट पड़े.

लल्लू काजल क उप्पेर क होठ मुँह मई ले क्र चूस रहा था और काजल लल्लू क निचे क होठो को.

लल्लू का लौड़ा काजल क रास बहती मुनिया पर ठोकर मर क्र सलाम क्र रहा था.

काजल अपने पैरो को कैची बना क्र लल्लू को अपने से जाकर ली.

काजल क ठोस बड़े बड़े दोंग शेप क चुके लल्लू क छाती मई पिश रहा था.

लल्लू निचे हो क्र काजल क दोनों दूध कोठी मई भरता हुआ मसलने लगा.

एक निप्पल को चुटकी मई ले क्र उसे मिस दिया की उस मई से कुछ मोटा सा तरल निकल आया.

काजल चिहुँक उठी.

लल्लू उस निप्पल को मुँह मई ले क्र चूसने लगा की लल्लू का मुँह दूध से भर गया.

लल्लू- वववव माँ इस मई से दूध निकल आया है.

काजल- हट्ट बुद्धू.

लल्लू- सच्ची मई माँ.

लल्लू उस चुके को हाथ से दबा दिया की एक धार निकल आई दूध से.

काजल- ओह्ह्ह नहीं. ये क्या हो गया. अब पी इसे. मारा जा रहा था न पिने को.

लल्लू टूट पड़ा उस चुकी पर. दबा दबा क्र उसे पिया. जब तक की उस मई से दूध आना ख़त्म नहीं हो गया.

फिर लल्लू काजल क दूसरे निप्पल क साथ भी ऐसा hi किया.

उस निप्पल मई से भी पहले मोटा गधा तरल निकला फिर दूध निकलने लगा.

फिर लल्लू काजल क उस दूध क टंकी को भी दबा दबा क्र खली क्र दिया.

लल्लू दूध पि क्र निचे खिशक आया और काजल क सपाट चिकने पेट को जीभ निकल क्र चाटने लगा.

पेट चाटते हुए लल्लू काजल क नाभि मई जीभ दाल क्र उस मई अपना जीभ घूमने लगा.

काजल लल्लू क सर को दबती हुई आह्ह्ही भर रही थी.

काजल नंगी बीएड पर लेती हुई इस समय अजंता क गुफा की मूरत लग रही थी.

लल्लू काजल क नाभि से जी भर खेल लेने क बाद उस से निचे कमर को चाटता हुआ अपने जन्म द्वार पर आ पंहुचा.

जहा कल सतपुरा क घने जंगल थे वही आज मैदान बिलकुल साफ़ था.

छोटी सी छूट जो अपने खुद की पानी से भिगो हुई चमक रही थी.

लल्लू छूट पर झुका हुआ उस द्वार को गौर से देख रहा था जहा से वो इस धरती पर आया है.

लल्लू इस द्वार को सम्मान देता हुआ अपना जीभ निकल क्र एक बार उप्पेर से निचे तक चाट लिया.

काजल बीएड शीट को दोनों हाथो से पकडे सिसिक रही थी.

अपने सर को तकिये पर इधर य पटक रही थी.

काजल- क्या क्र रहा है. ऐसे मरेगा क्या.

लल्लू काजल क छूट की सुंदरता और अब स्वाद भी चख लिया था. वो तो बावला हो गया.

लल्लू बड़ा सा मुँह खोल काजल क पुरे छूट को मुँह मई भर क्र उप्पेर की और सूरज सुरक क्र चूसने लगा.

काजल तो मजे की अधिकता मई लल्लू क सर क बालो को खींचती हुई सर पटकने लगी बीएड पर और फिर भलभला क्र लल्लू क मुँह मई hi जहर गई.

लल्लू काजल क सरे पानी को चाट क्र गया.

लल्लू- माँ बहुत मीठी हो तुम. उप्पेर से भी और निचे से भी.

काजल शर्मा क्र अपना मुँह घुमा ली.

लल्लू खड़ा हो क्र अपने लौड़े पर ढेर सारा थूक निकल क्र लिपट दिया.

फिर बैठ क्र काजल क दोनों जांघो को फैला क्र छूट क मुहाने पर लौड़ा लगा दिया.

काजल लल्लू क लौड़े को अपने छूट क मुहाने पर फील क्र सिहर उठी. उसे लल्लू क लौड़े का विकराल रूप याद आ गया.

काजल- टेबल पर तेल की बोतल है वो ले क्र दोनों पर अच्छे से लगा ले.

लल्लू उठ क्र वो बोतल ले आया और पहले अपने लौड़े को फिर काजल क छूट मई अच्छे से लगा क्र लौड़े को फिर से छूट पर लगा दिया.

काजल- आर से बहुत मोटा और बड़ा है तेरा.

लल्लू काजल क दोनों चुकी को पकड़ क्र दबाता हुआ एक जोर का झटका लगा दिया.

काजल कराह उठी.

लल्लू का बाबूराव अपना जगह बनता हुआ आधा काजल मई समां गया.

काजल- आह मर्डर दियय्या बेटा… ऐसे hi रुक जा थोड़ा.

लल्लू वैसे hi लेता हुआ काजल क होठो को चूमता हुआ उसकके दोनों चूचियों का मर्दन करने लगा.

थोड़ी देर मई जब काजल को थोड़ा दर्द काम हुआ तो वो लल्लू क कमर को अपने हाथ से दबाने लगी.

लल्लू समझ गया और आधे लौड़े से hi काजल को छोड़ने लगा.

पहले थोड़ी देर हल्का हल्का धक्का लगा रहा था फिर धीरे धीरे लल्लू काजल क दूध को निचोरता हुआ अपना स्पीड बढ़ा दिया.

अब उप्पेर से लल्लू पूरा जोर लगा क्र धक्का मरता और निचे से काजल अपने दोनों पैरो का कैची बनाये लल्लू को अपने सिकंजे मई पकडे निचे से अपनी बड़ी गांड को उठा उठा क्र लल्लू क लौड़े को पूरा पूरा निगल रही थी.

काजल मरे उत्तेजना क उसके होठ थरथरा रहे थे.

इतना मजा काजल को कभी नहीं आया था राम क साथ.

लल्लू पूरा वहसि बना हुआ इस बेलगाम घोड़ी को को ठोके जा रहा था.

दोनों क घमाशान से कमरे मई जैसे भूचाल आया हुआ था.

बीएड छू छू कर रहा था लगातार.

दोनों क जंघा एक दूसरे से टकरा रहा था जिस से थप थप थप थप की आवाज गूंज रहा था वह चारो और.

काजल एक बार जहर चुकी थी लल्लू क लौड़े की मर से.

दोनों क चुदाई की अलग आवाज फुच फुच फुच.

ये तीन तीन तरह क आवाज से ये kamra...kya कहु कैसा संगीत बना रहा था.

काजल- आह्हः लल्लू मेरा बेत्ता. ीिस्स ऐसे ही मेरीलाला..

मर्डर कोरे से खा जा ाअजज.

फफ्फार्र दिए म्मीररी इस निग्गजोदड़ी कक्कू.

पता नहीं क्या क्या बड़बड़ाती जा रही थी काजल

अब दोनों अपने चरम पर थे.

मुझे तो दर था की कही इनदोनो क घमाशान मई बीएड hi न टूट जय.

काजल लल्लू को पकडे पलट गई और उसके उप्पेर आ क्र लल्लू क लौड़े पर अपनी मोती भरी गांड को उठा उठा उठा उठा क्र पटकने लगी.

निचे लल्लू काजल क चुके को मसल मसल क्र ऐसे क्र दिया था जैसे अभी खून चालक पड़ेगा.

पता नहीं इतना नशा किस चीज का था इन्हे

जैसे सेक्स का कोई ड्रग्स लिया हो या फिर दोनों माँ बेटे है इसका एक अलग नशा था.

काजल एक बार फिर से लल्लू को अपने अंडर फइलल कररही थी उसे अपने मई समां लेना चाहती थी पूरी तरह.

और इधर लल्लू का भी यही िक्सः लग रहा था वो भी काजल मई समां जाना चाहता था.

दोनों एक दूसरे को काट रहे थे. नोच रहे थे.

हरेक वक्त का एक अंत होता है चाहे वो अच्छा हो या बुरा.

इन दोनों क प्रेम का भी वक्त हो गया था.

दोनों क सरीर मचलता हुआ कंपता हुआ एक दूसरे मई समय एक दूसरे को अपने निस्चल प्रेम से भीगने लगे.

दोनों एक दूसरे क प्रेम मई भीग क्र एक दूसरे क बहो मई पड़े लम्बी लम्बी ससे लेने लगे.
 
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काजल
 
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