- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 138,607
मर्द का बच्चा. अपडेट 9.
सुबह क चार बजे लल्लू की नींद खुल गई.
थकावट बहुत हो राखी थी लेकिन इस समय उठाने का एक आदत हो गया था तो नींद खुल गई लल्लू की.
उठ क्र बैठ गया. देखा तो वो और ऋतू दोनों रात मई नंगे hi सो गए थे. लल्लू उठ क्र पहले लाइट जला दिया.
लाइट जलते hi कमरे मई उजाला फ़ैल गया जहा बीएड से निचे दोनों सोये पड़े थे अभी बिस्तर तो सारा सिमट क एक जगह इक्कठा हो गया था.
ऋतू अभी भी सोई हुई थी.
लल्लू ऋतू की गदराई गोरी बदन को खा जाने वाली नजरो से देख रहा था.
इस समय ऋतू पीठ क बल लेती हुई थी.
सैश लेने से उसकी चूचिया उप्पेर निचे हो रहा था.
बड़ा मनमोहक दृश्य था.
भरे हुए गाल. पतले होठ जो रात की चूसै से अभी फूल गया था.
लम्बी गर्दन और उस से निचे एवेरेस्ट छोटी की तरह सर उठाये मोठे मोठे चुके जो रात क मर्दन से लाल हुआ पड़ा था. कही कही काटने क निशान भी था.
डेढ़ दो इंच लम्बे चुचुक जिस पर खून सी लाली आ गई थी.
फुल्ली हुई चिकनी मखमली पेट, गहरी नाभि और उस से निचे वो जन्नत का द्वार जिस क दर्शन क लिए hi न जाने कितने खून बहा दिए जाते hai
ऋतू की बुर का तो क्या कहना. छोटी छोटी बल ट्रिम किया हुआ बहुत सुन्दर था. बुर की हालत बहुत दयनीय थी अभी लेकिन अभी तो पता नहीं चलता था की पहले कैसी थी ककी अभी उसके होठ फुल क्र दोनों तरफ से चिपक क्र ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे यहाँ कोई सुराख़ hi नहीं है.
लल्लू और ऋतू दोनों क बीर्य जो सुख गया था अभी साथ मई थोड़ा खून भी निकला था सायद ककी चारो और बीर्य क साथ लाली फैली थी.
मोठे मोठे मांशल जंघे. देख क्र लल्लू का मन क्र रहा था की इन जांघो को जीभ निकल क्र चाट ले ततो से खूब कटे.
ऐसे मनमोहक दृश्य देख क्र लल्लू का लौड़ा अपना सर उठा चूका था.
वो आगे बढ़ क्र ऋतू क चुके को मुठी मई भर क्र दबाने लगा.
तभी दूसरे कमरे मई आवाज आई.
लल्लू का मन नहीं क्र रहा था छोड़ने का लेकिन अभी अब वक्त नहीं था तो वो कपडे पहन क्र पहले ऋतू क गलो को अपने दातो से काट क्र उठा दिया.
ऋतू- हैयय मा. ये जालिक नीरा पागल है. सोये हुए को कैसे उठाते है ये भी नहीं पता इसे
ऋतू अपने गाल को सहलाती हुई उठ क्र बैठ गई तब उसे एहसास हुआ की वो किस हल मई है अभी.
ऋतू- हैयय रामम… मई ऐसे hi कैसे सो गई.
ऋतू जपत क्र चादर उठा क्र अपने बदन पर ओढ़ ली.
ऋतू- मुआ खड़ा खड़ा हुस्स रहा है. ऐसे भी कोई करता है क्या.
लल्लू- मैंने क्या किया है.
ऋतू- मैंने क्या किया है.( नक़ल उतरती हुई.)
अब क्या बांकी रह गया है मुआ. और क्या करना चाहता है.
लल्लू- फ़िलहाल तो एक मीठी सी चुम्मी दे दो मेरी प्यारी लुगाई. बांकी आज रात मई मई खुद ले लूंगा.
लल्लू आगे बढ़ क्र ऋतू क होठो को अपने होठो से लगा क्र चूसने लगा.
थोड़ी देर चूसने क बाद लल्लू ऋतू से अलग हो गया.
लल्लू- जल्दी से कपडे पहन लो. किसी भी वक्त काका आ सकते है.
लल्लू ऋतू को उसका कपडा पकड़ती बोली.
ऋतू झपट क्र कपडे ली और जल्दी से पहन ली.
फिर एक एक क्र दोनों वाशरूम जा क्र फ्रेश हुए.
तब तक दादू और काका भी उठ क्र फ्रेश हो गए थे.
फिर चरो एक बैग मई कपडा ले क्र चल दिए स्नान क लिए.
वहुत भीड़ था वह. दादू सब से आगे चल रहे थे. वो यहाँ कई बार आ चुके थे तो उन्हें पता था यहाँ का.
उनके साथ काका चल रहे थे.
दोनों क पीछे ऋतू का हाथ पकडे लल्लू ऋतू का पति की तरह उसके साथ चल रहा था.
अभी सही स्नान का समय था तो सभी आखाड़ो क महंथ, महामंडलेश्वर, और नागा साधु लोग अभी स्नान क लिए जैकारा लगते हुए जा रहे थे.
रोड क दोनों और पुलिस और आर्मी क सिपाही कोई पैदल तो कोई घोड़े पर बैठे एक घेरा बना क्र आम लोगो से दुरी बनाये हुए इन साधु महात्माओ को रास्ता बना रहे थे. कोई हठी पर तो कोई घोडा और कोई तो सोने चंडी क पालकी पर सही स्नान क लिए जा रहे थे.
पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था.
बहुत अजीब भेष भूषा क भी कई साधु बाबा थे वह. कोई पुरे सरीर पर भष्म लगाए हुए. सर पर जाता, गले मई कई तरह क माला, किसी क हाथ मई डमरू तो किसी क हाथ मई त्रिशूल, किसी क हाथ मई गदा, तो किसी क हाथ मई चिंता. कोई आँखों मई काजल लगाए तो कोई शाप को गले मई लपेटे.
कई क तो कमर मई भी तरह तरह क चीजे बंधी थी.
सब अपने प्रभु क मस्ती मई मस्त झूमते हुए जा रहे थे.
आम लोग रोड क साइड मई या तो खड़े हो क्र देख रहे थे या आहिस्ता आहिस्ता से स्नान क स्थल की और बढ़ रहे थे.
ये चारो भी इन सभी क पीछे सब देखते हुए आगे बढ़ रहे थे.
तभी एक साधु बाबा जो घोड़े पर चले जा रहे थे.
उनका घोडा बिदक क्र रोड क साइड मई जहा लल्लू खड़ा था उधर आ गया.
लल्लू आवाज सुन क्र उधर देखा तो सामने एक काळा घोड़े पर बिलकुल नंगा साधु बाबा बैठे है. एक हाथ मई डमरू और दूसरे हाथ से घोड़े का लगाम पकडे हुए अपनी लाल लाल आँखों से लल्लू को घर रहे थे.
लल्लू उस नागा साधु बाबा की आँखों का तब सह नहीं पाया और घबरा क्र अपना सर दूसरी और घुमा लिया.
नागा साधु बाबा की वो लाल आँखे लल्लू को अपने सरीर क भीतर तक महसूस हो रहा था.
तभी दो फौजी आ क्र उस नागा साधु क घोड़े को पकड़ क्र बिच रोड मई क्र दिया.
फिर वो साधु बाबा सब साधुओं क साथ गम हो गए.
लल्लू अपने दादू और काका काकी क साथ सब तरफ क दृश्य देखता हुआ आगे बढ़ रहा था.
सही स्नान पूरा होने क बाद आम लोगो को स्नान की इजाजत मिल गया तो सभी स्नान क लिए चल पड़े.
लल्लू क दादू अपने बेटे अनिल क साथ एक और स्नान करने चले गए और वह से थोड़ा हैट क्र ऋतू लल्लू क साथ स्नान करने चली गई.
स्नान क्र लेने क बाद सब अपने कपडे पहन क्र तैयार हो गए चलने को.
अभी हम लोग वह से निकल क्र रोड पर आ गए थे और जिस तरफ हम ठहरे थे उधर hi बढ़ रहे थे.
दादू- अनिल बीटा मई सोच रहा था अभी स्नान क्र लिया है तो असतनायक क पूजा और दर्शन भी क्र ले. क्या कहते हो.
अनिल- उचित बिचार है पापा. फिर कब आएंगे यहाँ. अभी आये है तो सभी देवी देवता का पूजा अर्चना तो क्र hi लेना चाहिए.
दादू- चलो फिर…..
अभी दादू की बाटे भी पूरी नहीं हुई थी की वह भगदड़ मच गया.
लल्लू झपट क्र दादू और काकी को पकड़ क्र एक गली मई घुस गया वही और दीवाल क सहारे खड़ा हो गया.
भगदड़ बढ़ती hi जा रही थी.
जिसको जहा जगह मिलता गिरता परता भगा जा रहा था.
ये चारो दिवार से पीठ लगाए चिपके हुए थे.
लोगो का हुजूम भगा जा रहा था.
कितने बूढ़े औरत वह गिरते फिर उठाते और तब तक लोगो का हुजूम से धक्का लग जाता तो फिर गिर पड़ते.
किसी को किसी की फिक्र नहीं था. सब बस अपनी जान बचा क्र भागे जा रहे थे.
लाउडस्पीकर पर बार बार चिल्ला क्र सब से सन्ति बनाये रखने को कहा जा रहा था लेकिन कौन सुनता है.
लल्लू काकी और दादू का हाथ पकड़ क्र उस गली मई दिवार क सहारे से आगे बढ़ने लगा.
थोड़ा आगे जा क्र वो गली मुर गया था.
लल्लू- काका हम जहा रुके है वो धरमसाला का नाम क्या है. और अंदाज कितना दूर होगा यहाँ से.
अनिल- बीटा नाम तो याद नहीं. दुरी यही कोई 2 कम होगा.
लल्लू- काका, अभी हम मैं सरक से अब नहीं जा सकते है तो ऐसे hi गली से होता हुआ आगे बढ़ते है. अंदाज से 2 कम आगे चलते है. फिर अपना धरमसाला ढूंढेंगे.
दादू- है बीटा. अभी मैं रोड से अब जाना खतरनाक होगा. यही से आगे बढ़ता रह.
लल्लू तीनो क साथ अंदाज से hi आगे बढ़ता रहा.
कई गलियों को पर करता हुआ अंदाजा तीन कम चलने क बाद वो लोग एक जगह रुक गए.
लल्लू- काका क्या ख्याल है एक बार अब मेनरोड मई निकल क्र देखे अब.
दादू- नहीं नहीं अभी नहीं. अभी ऐसा क्र किसी भी धरमसाला मई चल. बाद मई जब संत हो जाएगा सब तब फिर अपने वाले मई चलेंगे.
लल्लू- आप सब यहाँ रुकिए न मई एक बार देख क्र आता हु. वैसे भी अभी मुझे नहीं लगता किसी भी धरमसाला मई जगह होगा.
अनिल- तू यही रह पापा और काकी क साथ. मई दूर से hi देख क्र आता हु.
अनिल वह से मैं रोड की और चला गया और ये लोग उस गली मई इंतजार करने लगे.
आधे घंटे बाद अनिल आता हुआ दिखा.
दादू- कहा चला गया था. इतना देर लगता है क्या.
अनिल- अपना धरमसाला यही दो गली बाद है. चल आगे.
फिर सब चल दिए. थोड़ी देर मई ये लोग अपने धरमसाला मई पहुंच गए.
अपने कमरे मई आ क्र सभी बीएड पर बैठ गए.
दादू- आज तो लल्लू ने बचा लिया. अगर आज ये नहीं होता तो गए थे हम लोग.
अनिल- है पिता जी. मुझे तो कुछ समझ hi नहीं आया की ये हो क्या गया है.
ऋतू- मेरा बीटा है hi बहुत होसियार. ( काकी लल्लू क माथे को चूमती बोली)
लल्लू उठ खड़ा हुआ.
दादू- अब कहा जा रहा है. खाना खा ले अब. असतनायक क दर्शन अब आज नहीं हो पाएगा.
लल्लू- दादू बस निचे से आता हु.
अनिल- ठीक है खाना का बोलता हुआ आ जाना. बहार बिलकुल मत जाना. भगदड़ अभी भी हो रहा है.
लल्लू वह से उठ क्र निचे आ गया और धरमसाला से बहार चला गया.
मेनरोड पर आ क्र देखा तो जगह जगह पुलिस वाले खड़े है और जो घायल हो गया है उसे गारी मई बैठा क्र उपचार क लिए भेज रहे है.
अब भगदड़ ख़त्म हो गया था.
लल्लू चारो और देखता हुआ आगे बढ़ रहा था.
तभी थोड़ी दूर एक टेंट क पास एक साधु बाबा निचे गिरे हुए दिखे.
लल्लू दौर क्र उस और चला गया.
पास जा क्र लल्लू उस साधु बाबा को उठा क्र अपने गॉड मई ले लिया.
साधु बाबा क सरीर मई कई जगह से हलकी हलकी खून बाह रहा था.
लल्लू उस साधु बाबा को उठा क्र अपने कंधे पर ले लिया और एक तरफ दौर पड़ा.
साधु बाबा- बीटा इधर नहीं. उधर बाये उस गली मई मेरा ठिकाना है तुम वह छोड़ दो.
लल्लू- आप को अभी उपचार की जरुरत है. पहले आप उपचार करवा लीजिये.
साधु बाबा- बीटा मुझे मेरे टेंट मई दे आओ. मेरे चले मेरा उपचार क्र देंगे.
लल्लू साधु बाबा क बताये दिशा मई ले क्र चल दिया.
करीब दो कम आगे आ क्र एक टेंट क पास साधु बाबा बोले अंदर चलने को.
लल्लू साधु बाबा को ले क्र उस टेंट मई आ गया.
टेंट पूरा खली था. वह कोई नहीं था.
लल्लू- बाबा यहाँ तो कोई नहीं है.
साधु बाबा- बीटा वो मेरा झोला है. वो ला दो.
लल्लू साधु बाबा क बताये झोले को उठा क्र उनको पकड़ा दिया.
साधु बाबा उस झोले से एक मुठी भस्म ले क्र अपने पुरे सरीर मई लेप लिए.
जहा जहा खून बाह रहा था सब जगह लगा लिए उस भस्म को.
फिर साधु बाबा उस झोले से एक जारी बूटी निकल क्र लल्लू को पकड़ा दिए.
साधु बाबा- ये लो बीटा. इसे प्रणाम क्र ग्रहण करो.
लल्लू- ये क्या है बाबा. ( लल्लू) हाथ जोर क्र बोलै.
साधु बाबा- बीटा ये एक जारी बूटी से बना औषधि है जिस से असीम ताकत मिलता है.
इसे ग्रहण करने क बाद तुम अपने अंदर बहुत ताकत पाओगे.
लल्लू- बाबा मेरे पास जो अभी मेरा शारीरिक ताकत है वो मेरे लिए पर्याप्त है. ये ले क्र मई क्या करूँगा. आप इस जारी बूटी को किसी कमजोर को दे दीजियेगा जिसे इसकी जरुरत मुझ से ज्यादा होगा.
साधु बाबा- बीटा जो इस लायक होता है ये जारी बूटी उसके पास खुद पहुंच जाता है. जैसे अभी तुम तक पहुंच रहा है.
इस जारी बूटी मई मेरी तपस्या का कुछ फल भी मिला हुआ है. तुम मेरी बहुत मदद की उस क परिणाम स्वरुप मई तुम्हे ये दे रहा हु. लो पुत्र अब देर न करो इसे ग्रहण करो.
लल्लू दोनों हाथ जोर क्र हाथ आगे बढ़ाया और उस जड़ीबूटी को ले लिया साधु बाबा क हाथ से.
साधु बाबा- इस जारी बूटी को अपने मुँह मई ले क्र यहाँ सर झुका क्र बैठ जाओ.
लल्लू डरता हुआ ऐसा hi किया.
लल्लू क बैठते hi साधु बाबा लल्लू क सर पर हाथ रख क्र कोई मंत्र पढ़ने लगे.
मंत्र पूर्ण होने क बाद साधु बाबा अपना हाथ लल्लू क सर से हटा लिए.
साधु बाबा- बुट्टा अब तुम अपने घर चले जाओ. वह सब तुम्हारा इंतजार क्र रहे होंगे.
लल्लू- लेकिन बाबा आप क कोई चेले तो यहाँ है hi नहीं आप को चोट लगी है. आप का उपचार कौन और कैसे होगा.
साधु बाबा - बुट्टा यहाँ आ क्र जो मई भस्म लगाया है उस मैं अब बिलकुल ठीक हु. तुम मेरी फिक्र बिलकुल मत करो. तुम्हारे धरम साला मई सब तुम्हे धुंध रहे होने. तुम अब जाओ.
लल्लू साधु बाबा को प्रणाम करता वह से निकल क्र अपने धरमसाला मई आ गया.
सुबह क चार बजे लल्लू की नींद खुल गई.
थकावट बहुत हो राखी थी लेकिन इस समय उठाने का एक आदत हो गया था तो नींद खुल गई लल्लू की.
उठ क्र बैठ गया. देखा तो वो और ऋतू दोनों रात मई नंगे hi सो गए थे. लल्लू उठ क्र पहले लाइट जला दिया.
लाइट जलते hi कमरे मई उजाला फ़ैल गया जहा बीएड से निचे दोनों सोये पड़े थे अभी बिस्तर तो सारा सिमट क एक जगह इक्कठा हो गया था.
ऋतू अभी भी सोई हुई थी.
लल्लू ऋतू की गदराई गोरी बदन को खा जाने वाली नजरो से देख रहा था.
इस समय ऋतू पीठ क बल लेती हुई थी.
सैश लेने से उसकी चूचिया उप्पेर निचे हो रहा था.
बड़ा मनमोहक दृश्य था.
भरे हुए गाल. पतले होठ जो रात की चूसै से अभी फूल गया था.
लम्बी गर्दन और उस से निचे एवेरेस्ट छोटी की तरह सर उठाये मोठे मोठे चुके जो रात क मर्दन से लाल हुआ पड़ा था. कही कही काटने क निशान भी था.
डेढ़ दो इंच लम्बे चुचुक जिस पर खून सी लाली आ गई थी.
फुल्ली हुई चिकनी मखमली पेट, गहरी नाभि और उस से निचे वो जन्नत का द्वार जिस क दर्शन क लिए hi न जाने कितने खून बहा दिए जाते hai
ऋतू की बुर का तो क्या कहना. छोटी छोटी बल ट्रिम किया हुआ बहुत सुन्दर था. बुर की हालत बहुत दयनीय थी अभी लेकिन अभी तो पता नहीं चलता था की पहले कैसी थी ककी अभी उसके होठ फुल क्र दोनों तरफ से चिपक क्र ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे यहाँ कोई सुराख़ hi नहीं है.
लल्लू और ऋतू दोनों क बीर्य जो सुख गया था अभी साथ मई थोड़ा खून भी निकला था सायद ककी चारो और बीर्य क साथ लाली फैली थी.
मोठे मोठे मांशल जंघे. देख क्र लल्लू का मन क्र रहा था की इन जांघो को जीभ निकल क्र चाट ले ततो से खूब कटे.
ऐसे मनमोहक दृश्य देख क्र लल्लू का लौड़ा अपना सर उठा चूका था.
वो आगे बढ़ क्र ऋतू क चुके को मुठी मई भर क्र दबाने लगा.
तभी दूसरे कमरे मई आवाज आई.
लल्लू का मन नहीं क्र रहा था छोड़ने का लेकिन अभी अब वक्त नहीं था तो वो कपडे पहन क्र पहले ऋतू क गलो को अपने दातो से काट क्र उठा दिया.
ऋतू- हैयय मा. ये जालिक नीरा पागल है. सोये हुए को कैसे उठाते है ये भी नहीं पता इसे
ऋतू अपने गाल को सहलाती हुई उठ क्र बैठ गई तब उसे एहसास हुआ की वो किस हल मई है अभी.
ऋतू- हैयय रामम… मई ऐसे hi कैसे सो गई.
ऋतू जपत क्र चादर उठा क्र अपने बदन पर ओढ़ ली.
ऋतू- मुआ खड़ा खड़ा हुस्स रहा है. ऐसे भी कोई करता है क्या.
लल्लू- मैंने क्या किया है.
ऋतू- मैंने क्या किया है.( नक़ल उतरती हुई.)
अब क्या बांकी रह गया है मुआ. और क्या करना चाहता है.
लल्लू- फ़िलहाल तो एक मीठी सी चुम्मी दे दो मेरी प्यारी लुगाई. बांकी आज रात मई मई खुद ले लूंगा.
लल्लू आगे बढ़ क्र ऋतू क होठो को अपने होठो से लगा क्र चूसने लगा.
थोड़ी देर चूसने क बाद लल्लू ऋतू से अलग हो गया.
लल्लू- जल्दी से कपडे पहन लो. किसी भी वक्त काका आ सकते है.
लल्लू ऋतू को उसका कपडा पकड़ती बोली.
ऋतू झपट क्र कपडे ली और जल्दी से पहन ली.
फिर एक एक क्र दोनों वाशरूम जा क्र फ्रेश हुए.
तब तक दादू और काका भी उठ क्र फ्रेश हो गए थे.
फिर चरो एक बैग मई कपडा ले क्र चल दिए स्नान क लिए.
वहुत भीड़ था वह. दादू सब से आगे चल रहे थे. वो यहाँ कई बार आ चुके थे तो उन्हें पता था यहाँ का.
उनके साथ काका चल रहे थे.
दोनों क पीछे ऋतू का हाथ पकडे लल्लू ऋतू का पति की तरह उसके साथ चल रहा था.
अभी सही स्नान का समय था तो सभी आखाड़ो क महंथ, महामंडलेश्वर, और नागा साधु लोग अभी स्नान क लिए जैकारा लगते हुए जा रहे थे.
रोड क दोनों और पुलिस और आर्मी क सिपाही कोई पैदल तो कोई घोड़े पर बैठे एक घेरा बना क्र आम लोगो से दुरी बनाये हुए इन साधु महात्माओ को रास्ता बना रहे थे. कोई हठी पर तो कोई घोडा और कोई तो सोने चंडी क पालकी पर सही स्नान क लिए जा रहे थे.
पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था.
बहुत अजीब भेष भूषा क भी कई साधु बाबा थे वह. कोई पुरे सरीर पर भष्म लगाए हुए. सर पर जाता, गले मई कई तरह क माला, किसी क हाथ मई डमरू तो किसी क हाथ मई त्रिशूल, किसी क हाथ मई गदा, तो किसी क हाथ मई चिंता. कोई आँखों मई काजल लगाए तो कोई शाप को गले मई लपेटे.
कई क तो कमर मई भी तरह तरह क चीजे बंधी थी.
सब अपने प्रभु क मस्ती मई मस्त झूमते हुए जा रहे थे.
आम लोग रोड क साइड मई या तो खड़े हो क्र देख रहे थे या आहिस्ता आहिस्ता से स्नान क स्थल की और बढ़ रहे थे.
ये चारो भी इन सभी क पीछे सब देखते हुए आगे बढ़ रहे थे.
तभी एक साधु बाबा जो घोड़े पर चले जा रहे थे.
उनका घोडा बिदक क्र रोड क साइड मई जहा लल्लू खड़ा था उधर आ गया.
लल्लू आवाज सुन क्र उधर देखा तो सामने एक काळा घोड़े पर बिलकुल नंगा साधु बाबा बैठे है. एक हाथ मई डमरू और दूसरे हाथ से घोड़े का लगाम पकडे हुए अपनी लाल लाल आँखों से लल्लू को घर रहे थे.
लल्लू उस नागा साधु बाबा की आँखों का तब सह नहीं पाया और घबरा क्र अपना सर दूसरी और घुमा लिया.
नागा साधु बाबा की वो लाल आँखे लल्लू को अपने सरीर क भीतर तक महसूस हो रहा था.
तभी दो फौजी आ क्र उस नागा साधु क घोड़े को पकड़ क्र बिच रोड मई क्र दिया.
फिर वो साधु बाबा सब साधुओं क साथ गम हो गए.
लल्लू अपने दादू और काका काकी क साथ सब तरफ क दृश्य देखता हुआ आगे बढ़ रहा था.
सही स्नान पूरा होने क बाद आम लोगो को स्नान की इजाजत मिल गया तो सभी स्नान क लिए चल पड़े.
लल्लू क दादू अपने बेटे अनिल क साथ एक और स्नान करने चले गए और वह से थोड़ा हैट क्र ऋतू लल्लू क साथ स्नान करने चली गई.
स्नान क्र लेने क बाद सब अपने कपडे पहन क्र तैयार हो गए चलने को.
अभी हम लोग वह से निकल क्र रोड पर आ गए थे और जिस तरफ हम ठहरे थे उधर hi बढ़ रहे थे.
दादू- अनिल बीटा मई सोच रहा था अभी स्नान क्र लिया है तो असतनायक क पूजा और दर्शन भी क्र ले. क्या कहते हो.
अनिल- उचित बिचार है पापा. फिर कब आएंगे यहाँ. अभी आये है तो सभी देवी देवता का पूजा अर्चना तो क्र hi लेना चाहिए.
दादू- चलो फिर…..
अभी दादू की बाटे भी पूरी नहीं हुई थी की वह भगदड़ मच गया.
लल्लू झपट क्र दादू और काकी को पकड़ क्र एक गली मई घुस गया वही और दीवाल क सहारे खड़ा हो गया.
भगदड़ बढ़ती hi जा रही थी.
जिसको जहा जगह मिलता गिरता परता भगा जा रहा था.
ये चारो दिवार से पीठ लगाए चिपके हुए थे.
लोगो का हुजूम भगा जा रहा था.
कितने बूढ़े औरत वह गिरते फिर उठाते और तब तक लोगो का हुजूम से धक्का लग जाता तो फिर गिर पड़ते.
किसी को किसी की फिक्र नहीं था. सब बस अपनी जान बचा क्र भागे जा रहे थे.
लाउडस्पीकर पर बार बार चिल्ला क्र सब से सन्ति बनाये रखने को कहा जा रहा था लेकिन कौन सुनता है.
लल्लू काकी और दादू का हाथ पकड़ क्र उस गली मई दिवार क सहारे से आगे बढ़ने लगा.
थोड़ा आगे जा क्र वो गली मुर गया था.
लल्लू- काका हम जहा रुके है वो धरमसाला का नाम क्या है. और अंदाज कितना दूर होगा यहाँ से.
अनिल- बीटा नाम तो याद नहीं. दुरी यही कोई 2 कम होगा.
लल्लू- काका, अभी हम मैं सरक से अब नहीं जा सकते है तो ऐसे hi गली से होता हुआ आगे बढ़ते है. अंदाज से 2 कम आगे चलते है. फिर अपना धरमसाला ढूंढेंगे.
दादू- है बीटा. अभी मैं रोड से अब जाना खतरनाक होगा. यही से आगे बढ़ता रह.
लल्लू तीनो क साथ अंदाज से hi आगे बढ़ता रहा.
कई गलियों को पर करता हुआ अंदाजा तीन कम चलने क बाद वो लोग एक जगह रुक गए.
लल्लू- काका क्या ख्याल है एक बार अब मेनरोड मई निकल क्र देखे अब.
दादू- नहीं नहीं अभी नहीं. अभी ऐसा क्र किसी भी धरमसाला मई चल. बाद मई जब संत हो जाएगा सब तब फिर अपने वाले मई चलेंगे.
लल्लू- आप सब यहाँ रुकिए न मई एक बार देख क्र आता हु. वैसे भी अभी मुझे नहीं लगता किसी भी धरमसाला मई जगह होगा.
अनिल- तू यही रह पापा और काकी क साथ. मई दूर से hi देख क्र आता हु.
अनिल वह से मैं रोड की और चला गया और ये लोग उस गली मई इंतजार करने लगे.
आधे घंटे बाद अनिल आता हुआ दिखा.
दादू- कहा चला गया था. इतना देर लगता है क्या.
अनिल- अपना धरमसाला यही दो गली बाद है. चल आगे.
फिर सब चल दिए. थोड़ी देर मई ये लोग अपने धरमसाला मई पहुंच गए.
अपने कमरे मई आ क्र सभी बीएड पर बैठ गए.
दादू- आज तो लल्लू ने बचा लिया. अगर आज ये नहीं होता तो गए थे हम लोग.
अनिल- है पिता जी. मुझे तो कुछ समझ hi नहीं आया की ये हो क्या गया है.
ऋतू- मेरा बीटा है hi बहुत होसियार. ( काकी लल्लू क माथे को चूमती बोली)
लल्लू उठ खड़ा हुआ.
दादू- अब कहा जा रहा है. खाना खा ले अब. असतनायक क दर्शन अब आज नहीं हो पाएगा.
लल्लू- दादू बस निचे से आता हु.
अनिल- ठीक है खाना का बोलता हुआ आ जाना. बहार बिलकुल मत जाना. भगदड़ अभी भी हो रहा है.
लल्लू वह से उठ क्र निचे आ गया और धरमसाला से बहार चला गया.
मेनरोड पर आ क्र देखा तो जगह जगह पुलिस वाले खड़े है और जो घायल हो गया है उसे गारी मई बैठा क्र उपचार क लिए भेज रहे है.
अब भगदड़ ख़त्म हो गया था.
लल्लू चारो और देखता हुआ आगे बढ़ रहा था.
तभी थोड़ी दूर एक टेंट क पास एक साधु बाबा निचे गिरे हुए दिखे.
लल्लू दौर क्र उस और चला गया.
पास जा क्र लल्लू उस साधु बाबा को उठा क्र अपने गॉड मई ले लिया.
साधु बाबा क सरीर मई कई जगह से हलकी हलकी खून बाह रहा था.
लल्लू उस साधु बाबा को उठा क्र अपने कंधे पर ले लिया और एक तरफ दौर पड़ा.
साधु बाबा- बीटा इधर नहीं. उधर बाये उस गली मई मेरा ठिकाना है तुम वह छोड़ दो.
लल्लू- आप को अभी उपचार की जरुरत है. पहले आप उपचार करवा लीजिये.
साधु बाबा- बीटा मुझे मेरे टेंट मई दे आओ. मेरे चले मेरा उपचार क्र देंगे.
लल्लू साधु बाबा क बताये दिशा मई ले क्र चल दिया.
करीब दो कम आगे आ क्र एक टेंट क पास साधु बाबा बोले अंदर चलने को.
लल्लू साधु बाबा को ले क्र उस टेंट मई आ गया.
टेंट पूरा खली था. वह कोई नहीं था.
लल्लू- बाबा यहाँ तो कोई नहीं है.
साधु बाबा- बीटा वो मेरा झोला है. वो ला दो.
लल्लू साधु बाबा क बताये झोले को उठा क्र उनको पकड़ा दिया.
साधु बाबा उस झोले से एक मुठी भस्म ले क्र अपने पुरे सरीर मई लेप लिए.
जहा जहा खून बाह रहा था सब जगह लगा लिए उस भस्म को.
फिर साधु बाबा उस झोले से एक जारी बूटी निकल क्र लल्लू को पकड़ा दिए.
साधु बाबा- ये लो बीटा. इसे प्रणाम क्र ग्रहण करो.
लल्लू- ये क्या है बाबा. ( लल्लू) हाथ जोर क्र बोलै.
साधु बाबा- बीटा ये एक जारी बूटी से बना औषधि है जिस से असीम ताकत मिलता है.
इसे ग्रहण करने क बाद तुम अपने अंदर बहुत ताकत पाओगे.
लल्लू- बाबा मेरे पास जो अभी मेरा शारीरिक ताकत है वो मेरे लिए पर्याप्त है. ये ले क्र मई क्या करूँगा. आप इस जारी बूटी को किसी कमजोर को दे दीजियेगा जिसे इसकी जरुरत मुझ से ज्यादा होगा.
साधु बाबा- बीटा जो इस लायक होता है ये जारी बूटी उसके पास खुद पहुंच जाता है. जैसे अभी तुम तक पहुंच रहा है.
इस जारी बूटी मई मेरी तपस्या का कुछ फल भी मिला हुआ है. तुम मेरी बहुत मदद की उस क परिणाम स्वरुप मई तुम्हे ये दे रहा हु. लो पुत्र अब देर न करो इसे ग्रहण करो.
लल्लू दोनों हाथ जोर क्र हाथ आगे बढ़ाया और उस जड़ीबूटी को ले लिया साधु बाबा क हाथ से.
साधु बाबा- इस जारी बूटी को अपने मुँह मई ले क्र यहाँ सर झुका क्र बैठ जाओ.
लल्लू डरता हुआ ऐसा hi किया.
लल्लू क बैठते hi साधु बाबा लल्लू क सर पर हाथ रख क्र कोई मंत्र पढ़ने लगे.
मंत्र पूर्ण होने क बाद साधु बाबा अपना हाथ लल्लू क सर से हटा लिए.
साधु बाबा- बुट्टा अब तुम अपने घर चले जाओ. वह सब तुम्हारा इंतजार क्र रहे होंगे.
लल्लू- लेकिन बाबा आप क कोई चेले तो यहाँ है hi नहीं आप को चोट लगी है. आप का उपचार कौन और कैसे होगा.
साधु बाबा - बुट्टा यहाँ आ क्र जो मई भस्म लगाया है उस मैं अब बिलकुल ठीक हु. तुम मेरी फिक्र बिलकुल मत करो. तुम्हारे धरम साला मई सब तुम्हे धुंध रहे होने. तुम अब जाओ.
लल्लू साधु बाबा को प्रणाम करता वह से निकल क्र अपने धरमसाला मई आ गया.