Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 3 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

मर्द का बच्चा. अपडेट 9.

सुबह क चार बजे लल्लू की नींद खुल गई.

थकावट बहुत हो राखी थी लेकिन इस समय उठाने का एक आदत हो गया था तो नींद खुल गई लल्लू की.

उठ क्र बैठ गया. देखा तो वो और ऋतू दोनों रात मई नंगे hi सो गए थे. लल्लू उठ क्र पहले लाइट जला दिया.

लाइट जलते hi कमरे मई उजाला फ़ैल गया जहा बीएड से निचे दोनों सोये पड़े थे अभी बिस्तर तो सारा सिमट क एक जगह इक्कठा हो गया था.

ऋतू अभी भी सोई हुई थी.

लल्लू ऋतू की गदराई गोरी बदन को खा जाने वाली नजरो से देख रहा था.

इस समय ऋतू पीठ क बल लेती हुई थी.

सैश लेने से उसकी चूचिया उप्पेर निचे हो रहा था.

बड़ा मनमोहक दृश्य था.

भरे हुए गाल. पतले होठ जो रात की चूसै से अभी फूल गया था.

लम्बी गर्दन और उस से निचे एवेरेस्ट छोटी की तरह सर उठाये मोठे मोठे चुके जो रात क मर्दन से लाल हुआ पड़ा था. कही कही काटने क निशान भी था.

डेढ़ दो इंच लम्बे चुचुक जिस पर खून सी लाली आ गई थी.

फुल्ली हुई चिकनी मखमली पेट, गहरी नाभि और उस से निचे वो जन्नत का द्वार जिस क दर्शन क लिए hi न जाने कितने खून बहा दिए जाते hai:D

ऋतू की बुर का तो क्या कहना. छोटी छोटी बल ट्रिम किया हुआ बहुत सुन्दर था. बुर की हालत बहुत दयनीय थी अभी लेकिन अभी तो पता नहीं चलता था की पहले कैसी थी ककी अभी उसके होठ फुल क्र दोनों तरफ से चिपक क्र ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे यहाँ कोई सुराख़ hi नहीं है.

लल्लू और ऋतू दोनों क बीर्य जो सुख गया था अभी साथ मई थोड़ा खून भी निकला था सायद ककी चारो और बीर्य क साथ लाली फैली थी.

मोठे मोठे मांशल जंघे. देख क्र लल्लू का मन क्र रहा था की इन जांघो को जीभ निकल क्र चाट ले ततो से खूब कटे.

ऐसे मनमोहक दृश्य देख क्र लल्लू का लौड़ा अपना सर उठा चूका था.

वो आगे बढ़ क्र ऋतू क चुके को मुठी मई भर क्र दबाने लगा.

तभी दूसरे कमरे मई आवाज आई.

लल्लू का मन नहीं क्र रहा था छोड़ने का लेकिन अभी अब वक्त नहीं था तो वो कपडे पहन क्र पहले ऋतू क गलो को अपने दातो से काट क्र उठा दिया.

ऋतू- हैयय मा. ये जालिक नीरा पागल है. सोये हुए को कैसे उठाते है ये भी नहीं पता इसे

ऋतू अपने गाल को सहलाती हुई उठ क्र बैठ गई तब उसे एहसास हुआ की वो किस हल मई है अभी.

ऋतू- हैयय रामम… मई ऐसे hi कैसे सो गई.

ऋतू जपत क्र चादर उठा क्र अपने बदन पर ओढ़ ली.

ऋतू- मुआ खड़ा खड़ा हुस्स रहा है. ऐसे भी कोई करता है क्या.

लल्लू- मैंने क्या किया है.

ऋतू- मैंने क्या किया है.( नक़ल उतरती हुई.)

अब क्या बांकी रह गया है मुआ. और क्या करना चाहता है.

लल्लू- फ़िलहाल तो एक मीठी सी चुम्मी दे दो मेरी प्यारी लुगाई. बांकी आज रात मई मई खुद ले लूंगा.

लल्लू आगे बढ़ क्र ऋतू क होठो को अपने होठो से लगा क्र चूसने लगा.

थोड़ी देर चूसने क बाद लल्लू ऋतू से अलग हो गया.

लल्लू- जल्दी से कपडे पहन लो. किसी भी वक्त काका आ सकते है.

लल्लू ऋतू को उसका कपडा पकड़ती बोली.

ऋतू झपट क्र कपडे ली और जल्दी से पहन ली.

फिर एक एक क्र दोनों वाशरूम जा क्र फ्रेश हुए.

तब तक दादू और काका भी उठ क्र फ्रेश हो गए थे.

फिर चरो एक बैग मई कपडा ले क्र चल दिए स्नान क लिए.

वहुत भीड़ था वह. दादू सब से आगे चल रहे थे. वो यहाँ कई बार आ चुके थे तो उन्हें पता था यहाँ का.

उनके साथ काका चल रहे थे.

दोनों क पीछे ऋतू का हाथ पकडे लल्लू ऋतू का पति की तरह उसके साथ चल रहा था.

अभी सही स्नान का समय था तो सभी आखाड़ो क महंथ, महामंडलेश्वर, और नागा साधु लोग अभी स्नान क लिए जैकारा लगते हुए जा रहे थे.

रोड क दोनों और पुलिस और आर्मी क सिपाही कोई पैदल तो कोई घोड़े पर बैठे एक घेरा बना क्र आम लोगो से दुरी बनाये हुए इन साधु महात्माओ को रास्ता बना रहे थे. कोई हठी पर तो कोई घोडा और कोई तो सोने चंडी क पालकी पर सही स्नान क लिए जा रहे थे.

पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था.

बहुत अजीब भेष भूषा क भी कई साधु बाबा थे वह. कोई पुरे सरीर पर भष्म लगाए हुए. सर पर जाता, गले मई कई तरह क माला, किसी क हाथ मई डमरू तो किसी क हाथ मई त्रिशूल, किसी क हाथ मई गदा, तो किसी क हाथ मई चिंता. कोई आँखों मई काजल लगाए तो कोई शाप को गले मई लपेटे.

कई क तो कमर मई भी तरह तरह क चीजे बंधी थी.

सब अपने प्रभु क मस्ती मई मस्त झूमते हुए जा रहे थे.

आम लोग रोड क साइड मई या तो खड़े हो क्र देख रहे थे या आहिस्ता आहिस्ता से स्नान क स्थल की और बढ़ रहे थे.

ये चारो भी इन सभी क पीछे सब देखते हुए आगे बढ़ रहे थे.

तभी एक साधु बाबा जो घोड़े पर चले जा रहे थे.

उनका घोडा बिदक क्र रोड क साइड मई जहा लल्लू खड़ा था उधर आ गया.

लल्लू आवाज सुन क्र उधर देखा तो सामने एक काळा घोड़े पर बिलकुल नंगा साधु बाबा बैठे है. एक हाथ मई डमरू और दूसरे हाथ से घोड़े का लगाम पकडे हुए अपनी लाल लाल आँखों से लल्लू को घर रहे थे.

लल्लू उस नागा साधु बाबा की आँखों का तब सह नहीं पाया और घबरा क्र अपना सर दूसरी और घुमा लिया.

नागा साधु बाबा की वो लाल आँखे लल्लू को अपने सरीर क भीतर तक महसूस हो रहा था.

तभी दो फौजी आ क्र उस नागा साधु क घोड़े को पकड़ क्र बिच रोड मई क्र दिया.

फिर वो साधु बाबा सब साधुओं क साथ गम हो गए.

लल्लू अपने दादू और काका काकी क साथ सब तरफ क दृश्य देखता हुआ आगे बढ़ रहा था.

सही स्नान पूरा होने क बाद आम लोगो को स्नान की इजाजत मिल गया तो सभी स्नान क लिए चल पड़े.

लल्लू क दादू अपने बेटे अनिल क साथ एक और स्नान करने चले गए और वह से थोड़ा हैट क्र ऋतू लल्लू क साथ स्नान करने चली गई.

स्नान क्र लेने क बाद सब अपने कपडे पहन क्र तैयार हो गए चलने को.

अभी हम लोग वह से निकल क्र रोड पर आ गए थे और जिस तरफ हम ठहरे थे उधर hi बढ़ रहे थे.

दादू- अनिल बीटा मई सोच रहा था अभी स्नान क्र लिया है तो असतनायक क पूजा और दर्शन भी क्र ले. क्या कहते हो.

अनिल- उचित बिचार है पापा. फिर कब आएंगे यहाँ. अभी आये है तो सभी देवी देवता का पूजा अर्चना तो क्र hi लेना चाहिए.

दादू- चलो फिर…..

अभी दादू की बाटे भी पूरी नहीं हुई थी की वह भगदड़ मच गया.

लल्लू झपट क्र दादू और काकी को पकड़ क्र एक गली मई घुस गया वही और दीवाल क सहारे खड़ा हो गया.

भगदड़ बढ़ती hi जा रही थी.

जिसको जहा जगह मिलता गिरता परता भगा जा रहा था.

ये चारो दिवार से पीठ लगाए चिपके हुए थे.

लोगो का हुजूम भगा जा रहा था.

कितने बूढ़े औरत वह गिरते फिर उठाते और तब तक लोगो का हुजूम से धक्का लग जाता तो फिर गिर पड़ते.

किसी को किसी की फिक्र नहीं था. सब बस अपनी जान बचा क्र भागे जा रहे थे.

लाउडस्पीकर पर बार बार चिल्ला क्र सब से सन्ति बनाये रखने को कहा जा रहा था लेकिन कौन सुनता है.

लल्लू काकी और दादू का हाथ पकड़ क्र उस गली मई दिवार क सहारे से आगे बढ़ने लगा.

थोड़ा आगे जा क्र वो गली मुर गया था.

लल्लू- काका हम जहा रुके है वो धरमसाला का नाम क्या है. और अंदाज कितना दूर होगा यहाँ से.

अनिल- बीटा नाम तो याद नहीं. दुरी यही कोई 2 कम होगा.

लल्लू- काका, अभी हम मैं सरक से अब नहीं जा सकते है तो ऐसे hi गली से होता हुआ आगे बढ़ते है. अंदाज से 2 कम आगे चलते है. फिर अपना धरमसाला ढूंढेंगे.

दादू- है बीटा. अभी मैं रोड से अब जाना खतरनाक होगा. यही से आगे बढ़ता रह.

लल्लू तीनो क साथ अंदाज से hi आगे बढ़ता रहा.

कई गलियों को पर करता हुआ अंदाजा तीन कम चलने क बाद वो लोग एक जगह रुक गए.

लल्लू- काका क्या ख्याल है एक बार अब मेनरोड मई निकल क्र देखे अब.

दादू- नहीं नहीं अभी नहीं. अभी ऐसा क्र किसी भी धरमसाला मई चल. बाद मई जब संत हो जाएगा सब तब फिर अपने वाले मई चलेंगे.

लल्लू- आप सब यहाँ रुकिए न मई एक बार देख क्र आता हु. वैसे भी अभी मुझे नहीं लगता किसी भी धरमसाला मई जगह होगा.

अनिल- तू यही रह पापा और काकी क साथ. मई दूर से hi देख क्र आता हु.

अनिल वह से मैं रोड की और चला गया और ये लोग उस गली मई इंतजार करने लगे.

आधे घंटे बाद अनिल आता हुआ दिखा.

दादू- कहा चला गया था. इतना देर लगता है क्या.

अनिल- अपना धरमसाला यही दो गली बाद है. चल आगे.

फिर सब चल दिए. थोड़ी देर मई ये लोग अपने धरमसाला मई पहुंच गए.

अपने कमरे मई आ क्र सभी बीएड पर बैठ गए.

दादू- आज तो लल्लू ने बचा लिया. अगर आज ये नहीं होता तो गए थे हम लोग.

अनिल- है पिता जी. मुझे तो कुछ समझ hi नहीं आया की ये हो क्या गया है.

ऋतू- मेरा बीटा है hi बहुत होसियार. ( काकी लल्लू क माथे को चूमती बोली)

लल्लू उठ खड़ा हुआ.

दादू- अब कहा जा रहा है. खाना खा ले अब. असतनायक क दर्शन अब आज नहीं हो पाएगा.

लल्लू- दादू बस निचे से आता हु.

अनिल- ठीक है खाना का बोलता हुआ आ जाना. बहार बिलकुल मत जाना. भगदड़ अभी भी हो रहा है.

लल्लू वह से उठ क्र निचे आ गया और धरमसाला से बहार चला गया.

मेनरोड पर आ क्र देखा तो जगह जगह पुलिस वाले खड़े है और जो घायल हो गया है उसे गारी मई बैठा क्र उपचार क लिए भेज रहे है.

अब भगदड़ ख़त्म हो गया था.

लल्लू चारो और देखता हुआ आगे बढ़ रहा था.

तभी थोड़ी दूर एक टेंट क पास एक साधु बाबा निचे गिरे हुए दिखे.

लल्लू दौर क्र उस और चला गया.

पास जा क्र लल्लू उस साधु बाबा को उठा क्र अपने गॉड मई ले लिया.

साधु बाबा क सरीर मई कई जगह से हलकी हलकी खून बाह रहा था.

लल्लू उस साधु बाबा को उठा क्र अपने कंधे पर ले लिया और एक तरफ दौर पड़ा.

साधु बाबा- बीटा इधर नहीं. उधर बाये उस गली मई मेरा ठिकाना है तुम वह छोड़ दो.

लल्लू- आप को अभी उपचार की जरुरत है. पहले आप उपचार करवा लीजिये.

साधु बाबा- बीटा मुझे मेरे टेंट मई दे आओ. मेरे चले मेरा उपचार क्र देंगे.

लल्लू साधु बाबा क बताये दिशा मई ले क्र चल दिया.

करीब दो कम आगे आ क्र एक टेंट क पास साधु बाबा बोले अंदर चलने को.

लल्लू साधु बाबा को ले क्र उस टेंट मई आ गया.

टेंट पूरा खली था. वह कोई नहीं था.

लल्लू- बाबा यहाँ तो कोई नहीं है.

साधु बाबा- बीटा वो मेरा झोला है. वो ला दो.

लल्लू साधु बाबा क बताये झोले को उठा क्र उनको पकड़ा दिया.

साधु बाबा उस झोले से एक मुठी भस्म ले क्र अपने पुरे सरीर मई लेप लिए.

जहा जहा खून बाह रहा था सब जगह लगा लिए उस भस्म को.

फिर साधु बाबा उस झोले से एक जारी बूटी निकल क्र लल्लू को पकड़ा दिए.

साधु बाबा- ये लो बीटा. इसे प्रणाम क्र ग्रहण करो.

लल्लू- ये क्या है बाबा. ( लल्लू) हाथ जोर क्र बोलै.

साधु बाबा- बीटा ये एक जारी बूटी से बना औषधि है जिस से असीम ताकत मिलता है.

इसे ग्रहण करने क बाद तुम अपने अंदर बहुत ताकत पाओगे.

लल्लू- बाबा मेरे पास जो अभी मेरा शारीरिक ताकत है वो मेरे लिए पर्याप्त है. ये ले क्र मई क्या करूँगा. आप इस जारी बूटी को किसी कमजोर को दे दीजियेगा जिसे इसकी जरुरत मुझ से ज्यादा होगा.

साधु बाबा- बीटा जो इस लायक होता है ये जारी बूटी उसके पास खुद पहुंच जाता है. जैसे अभी तुम तक पहुंच रहा है.

इस जारी बूटी मई मेरी तपस्या का कुछ फल भी मिला हुआ है. तुम मेरी बहुत मदद की उस क परिणाम स्वरुप मई तुम्हे ये दे रहा हु. लो पुत्र अब देर न करो इसे ग्रहण करो.

लल्लू दोनों हाथ जोर क्र हाथ आगे बढ़ाया और उस जड़ीबूटी को ले लिया साधु बाबा क हाथ से.

साधु बाबा- इस जारी बूटी को अपने मुँह मई ले क्र यहाँ सर झुका क्र बैठ जाओ.

लल्लू डरता हुआ ऐसा hi किया.

लल्लू क बैठते hi साधु बाबा लल्लू क सर पर हाथ रख क्र कोई मंत्र पढ़ने लगे.

मंत्र पूर्ण होने क बाद साधु बाबा अपना हाथ लल्लू क सर से हटा लिए.

साधु बाबा- बुट्टा अब तुम अपने घर चले जाओ. वह सब तुम्हारा इंतजार क्र रहे होंगे.

लल्लू- लेकिन बाबा आप क कोई चेले तो यहाँ है hi नहीं आप को चोट लगी है. आप का उपचार कौन और कैसे होगा.

साधु बाबा - बुट्टा यहाँ आ क्र जो मई भस्म लगाया है उस मैं अब बिलकुल ठीक हु. तुम मेरी फिक्र बिलकुल मत करो. तुम्हारे धरम साला मई सब तुम्हे धुंध रहे होने. तुम अब जाओ.

लल्लू साधु बाबा को प्रणाम करता वह से निकल क्र अपने धरमसाला मई आ गया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 10.

धरमसाला पहुंच क्र खाने का आर्डर दे दिया और बता दिया की रूम मई भेज दे.

लल्लू आ क्र ऋतू वाले रूम मई चला गया.

ऋतू- कहा था इतनी देर से. पता है हम कितने पदेशन हो गए थे. ( लल्लू को गले लगाती ऋतू बोली.)

लल्लू- यही निचे थोड़ा बहार खड़ा था. देख रहा था किसी को कोई मदद की जरुरत तो नहीं है. ( लल्लू ऋतू क होठो को चुम क्र बोलै)

ऋतू- अभी तेरे काका तुझे सभी जगह से धुंध क्र आये है. जा जा क्र बता आ की तू आ गया है नहीं तो दोनों पदेशन होते रहेंगे तेरे लिए.

लल्लू वह से निकल क्र दूसरे कमरे मई आ गया. वह दोनों बैठे लल्लू को ले क्र बहुत परेशां थे. लल्लू को देखते hi अनिल उठ खड़े हो गए.

अनिल- कहा चला गया था. पता मई कितना घबरा गया था.

लल्लू- इतना क्यू घबरा जाते हैं काका. मई यही पास मई hi तो था. मई खाने को बोल आया हु वो लता होगा आप लोग फ्रेश हो जाइये.

लल्लू वह से फिर ऋतू क पास आ गया.

लल्लू- आप को फ्रेश होना है तो हो जाओ खाना आ रहा है.

ऋतू- मई पहले hi फ्रेश हो गई हु. तू चला जा. फ्रेश हो ले और ये कपडे पर खुल कैसा लगा है कहा चोट लगा लिया. दिखा जरा.

ऋतू कपडे पर लगे खून को देख क्र हार्बर क्र बीएड से उठ क्र लल्लू क कपडे को उठती बोली.

लल्लू- अरे मेरी रानी कुछ नहीं हुआ मुझे. वो एक घायल बाबा को उठा क्र उसके टेंट तक ले गया था लगता है उसी का खून लग गया है. अभी मई कपडा बदल लेता हु.

ऋतू काकी- तू सच कह रहा है न. देख मुझ से झूठ मत बोल. अगर तुझे कही चोट लगा है तो बता दे. तुझे कुछ हो गया तो मई भी नहीं जिन्दा रहूंगी. मई भी खुद को मर लुंगी.

लल्लू- अरे बाप रे इतना प्यार. तुम तो बिलकुल मेरी लुगाई जैसे बात क्र रही हो.

ऋतू- चुप क्र मुआ हमसे पदेशन करता रहता है मुझे. चल दिखा तुम झूठ बोल रहा है या सच.

लल्लू कपडा खोल क्र निकल दिया.

लल्लू- लो देख लो. और भी कुछ करने का मन हो तो बता दो मई निचे का भी खोल देता हु.

ऋतू- सरमाती हुई. चुप क्र हरामी. मार खायेगा मेरे से. चल दूसरा कपडा पहन ले जा.

लल्लू बैग से दूसरा कपडा निकल क्र पहन लिया और फ्रेश होने चला गया.

तब तक खाना भी आ गया था.

सब मिल क्र खाना खा लिए.

लल्लू ऋतू क कमरे मई आ गया आराम करने. दूसरे कमरे मई अनिल और दादू भी आराम करने लगे.

लल्लू ऋतू क कमरे मई आ क्र दरवाजा लगा दिया और ऋतू को अपने बहो मई भर लिया.

लल्लू- मेरी जान तुम्हे देख क्र पता नहीं मुझे क्या होने लगता है. मई अपने आप पर काबू क्यू खोता चला जाता हु.

ऋतू- सरमाती हुई. छोड़ अभी दिन है. कोई सुन लेगा तो क्या कहेगा.

लल्लू- तो ऐसा करते है हम लोग चुप चाप प्यार करते है. मुँह को कोई लास्ट देने की जरुरत नहीं है. हाथ और हथियार अपना प्यार क्र लेंगे.

ऋतू- मुआ अभी मुझे छुआ तो पिटाई लगा दूंगी. अभी चुप चाप सो जा. मुझे भी बहुत नींद आ रही है. साडी रात तंग किया है तुम ने.

लल्लू- ऐसा जुल्म तो न करो अपने दीवाने पर.

ऋतू- बड़ा आया मेरा दीवाना. ( मुसकुडती हुई.) मुँह देखा है अपना.

लल्लू- तुम्हारे बापू ने जिस से तुम्हारा ब्याह कराया है उस से तो सुन्दर hi हु.

ऋतू- हाहाहा… चल चल बड़ा आया सुन्दर वाड़ी….

चुप चाप सो जा नहीं तो मई भगा दूंगी दूसरे कमरे मई. वह अकेले सोता रहना.

लल्लू ऋतू को झप्पी दाल क्र सो लेट गया उसके साथ.

लल्लू- प्लस प्यार करने दो न. बड़ा मन क्र रहा है.

ऋतू- नहीं. बिलकुल नहीं. अभी तक दुःख रहा है मुझे. वह फूल भी गया है. सूजन आ गई है आज बिलकुल नहीं.

लल्लू- देखो न इसका क्या हाल है. इसको कैसे सुलौ. ( अपने खड़े लौड़े को पकड़ क्र दिखता बोलै.)

ऋतू- बोलै न नहीं. तुम्हे एक बार मई समझ नहीं आता है क्या.( ऋतू गुस्से मई बोली.)

लल्लू मुँह लटका क्र अलग हो क्र सो गया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 11.

दोपहर बाद लल्लू की नींद खुली.

उठ क्र फ्रेश हुआ. देखा तो सभी अभी तक सो रहे थे.

लल्लू बहार जा क्र सब क लिए चाय और हल्का नास्ते क लिए कुछ ले आया.

सब को उठा क्र चाय नास्ता दिया.

लल्लू- दादू अब सैम मई क्या करना है. यहाँ संगम तात पर गंगा आरती होता है वह चले क्या.

दादू- नहीं बीटा. आज जाना ठीक नहीं होगा. आज hi तो उस हंगामे से तुम्हारे कारन बल बल बचे है. अगर तुम नहीं होते तो आज तो हम लोगो का चटनी बन गई होती.

लल्लू- क्या दादू मई नहीं होता तो क्या हुआ बड़े काका थे. और मेरे बदले मझले काका भी तो आने वाले थे.

अनिल- नहीं बीटा. तेरे दादू सही कह रहे है. मई तो था hi लेकिन मुझे तो कुछ पता भी नहीं चला था तब तक तू हम लोगो को सेफ क्र चूका था.

दादू- सही बात है. अगर सुनील भी होता तो वो भी इतना एक्टिव नहीं है की हम लोगो को यु बचा क्र सुरक्षित यहाँ तक ले आता.

लल्लू- अच्छा अच्छा अब आप लोग मेरा गुणगान करना बंद कीजिये. अगर आप लोग नहीं जाएंगे तो मई घूम आऊं क्या कुछ देर बहार से.

दादू- नहीं बीटा. तू hi तो हमारा सहारा है. मई कही नहीं जाने दूंगा तुम्हे.

लल्लू- क्या दादू. कमरे मई बंद कितना देर बैठा राहु. ऊब गया हु मई.

अनिल- बीटा, दादू हमारे भले क लिए कह रहे है. तू उप्पेर छत पर चला जा वह से बहुत अच्छा नजारा दीखता है.

फिर लल्लू वह से उठ क्र छत पर चला गया.

सुच मई वह से बहुत सुन्दर नजारा दिख रहा था.

वही रेलिंग पर बैठ क्र लल्लू दूर दूर तक छोटे छोटे कैंप और संगम मंदिर लोगो की भीड़ सब देखता हुआ टाइम पास करने लगा.

कब रात क 10 बज गए पता hi नहीं चला.

वो तो अनिल काका खाने क लिए बुलाने आये तब जा क्र लल्लू को होश आया.

फिर निचे आ क्र फ्रेश हुआ और सब बैठ क्र रात का खाना खाये.

खाना खाने क बाद दादू और अनिल तो सोने लगे लेकिन लल्लू को अभी नींद नहीं आ रही थी और ऋतू से तो वो सुबह से hi नाराज था तो उस से तो बात भी नहीं किया. ऋतू क तरफ देख भी नहीं रहा था.

ये सब ऋतू भी नोट क्र रही थी.

लल्लू खाना खा क्र एक बार फिर छत पर चला गया और रात 1 बजे तक वही छत पर बैठा रहा.

रात 1 बजे ऋतू लल्लू को ढूंढती हुई छत पर आई.

ऋतू- और कितना यहाँ बैठा रहेगा. चल चलकर सो जा.

लल्लू कुछ बोलै hi नहीं.

ऋतू आगे बढ़ क्र लल्लू का हाथ पकड़ क्र उस से चिपक गई.

ऋतू- नाराज है न मुझ से. बात समझ बाबू. मुझे बहुत दुःख रहा था. तब तुझे नहीं गुस्सा करती तो तू मंटा नहीं.

लल्लू चुप था अभी भी कुछ नहीं बोलै.

ऋतू हाथ बढ़ा क्र उसके लौड़े को पकड़ ली.

ऋतू- हैयय रामम ये हमेशा तैयार hi रहता है.

चल इसका इलाज करती हु.

लल्लू ऋतू का हाथ पकड़ क्र वह से हटा दिया और थोड़ा दूर जा क्र खड़ा हो गया.

ऋतू एक बार फिर खुशाल क्र लल्लू क पास आई.

ऋतू- मेरा सोना, मेरा सैया नाराज है. अभी मानती हु इसे मई.

ऋतू पीछे से लल्लू से चिपक क्र उसके गर्दन कंधे जो भी खुली जगह थी वह छोटी छोटी चुम्मी लेने लगी और एक हाथ से लल्लू क साइन पर सहलाने लगी तो दूसरे हाथ से फिर से लल्लू क लौड़े को पकड़ ली.

ऋतू लल्लू को पीछे से चूमती जाती थी और एक हाथ से उसके रोड की तरह सख्त गर्म लौड़े को मुठिया भी रही थी.

लल्लू से अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था.

लल्लू क मन मई उथल पुथल मची थी.

एक मन कहता हटा दू ऋतू को. अभी भी नाराज बना राहु. तो दूसरा मन कहता की अच्छा मौका है खुले मई पटक क्र छोड़ दे तो एक फंतासी भी पूरी हो जाएगी.

लल्लू समझ नहीं प् रहा था की क्या करे.

इधर ऋतू बदस्तूर अपना चुके लल्लू क पीठ पर रगरती जा रही थी और उसके लौड़े को मुथयति भी जा रही थी.

लल्लू अपने दिल को काबू क्र क एक बार फिर ऋतू को अपने आप से दूर हटा दिया और चल दिया सीढ़ियों की और.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 12.

लल्लू ऋतू को पीछे छोड़ क्र चल दिया.

सीढ़ियों क पास आ क्र गेट को लगा दिया. फिर पलट क्र आ गया छत पर.

लल्लू इस बार ऋतू क पास आ क्र उसके दोनों चुके को हाथो मई पकड़ क्र मसलने लगा.

बड़े बड़े गोल गुब्बारे यु छत पर खुले मई दबाता हुआ लल्लू ऋतू क होठो को अपने होठो मई ले क्र चूसने लगा.

ऋतू किसी बेल की तरह लल्लू से लिपटी हुई थी.

लल्लू ऋतू क होठो को चुस्त हुआ ऋतू क दूध को भी दबाता जा रहा था.

ऋतू- उह्ह्ह, थोड़ा आराम से दबाओ दर्द करता है.

लल्लू- दिन मई जो तड़पाओ हो उसका बदला लेना तो अभी बांकी है. अभी से दर्द करने लगा मेरी लुगाई को.

ऋतू- क्या करू मेरा सैया जरा अनादि है.

लल्लू ऋतू क आँचल को हटा क्र उसके ब्लाउज को खोल दिया.

ऋतू- यहाँ खुले मई मत करो. निचे रूम मई चलते है न.

लल्लू- कभी काका क साथ खुले आसमान क निचे ठंढी ठंढी हवाओ क बिच मई यु कुछ की हो.

ऋतू- मुआए, अब तू hi मेरा खशम है तो अब से कभी उसकी कोई बात मत करना नहीं तो फिर कभी चुनने भी नहीं दूंगी.

लल्लू- गुस्सा क्यू करती हो. यहाँ खुले मई प्यार करने का एक अलग मजा है.

लल्लू ऋतू क ब्लाउज को खोल क्र अलग क्र दिया. निचे ऋतू ने बल्क ब्रा पहनी थी.

लल्लू- क्या बात है आज तो चुकी कसना भी पहनी है.

लल्लू पीछे हाथ ले जा क्र उसका भी हुक खोल क्र अलग रख दिया.

अब ऋतू उप्पेर से बिलकुल नंगी थी.

ऋतू क दो फुले हुए गुब्बारे हवा मई खुल रहे थे.

लल्लू एक को अपने हाथ मई थम क्र दूसरे को मुँह खोल क्र जितना आ पाया उतना दाल क्र चुभलाने लगा.

ऋतू मजे से सस्सी सी करती हुई लल्लू क बालो मई ऊँगली घुमा रही थी.

लल्लू आज सुबह से hi पदेशन था.

रात मई पहली बार तो वो ये स्वाद चखा था तो अभी अब उस मई सबर नहीं था.

कुछ देर दोनों दूध को गुथने चूसने क बाद लल्लू ऋतू को वह राखी एक टूटी कुर्सी पर बैठा दिया दीवाल क सहारे और अपना लौड़ा निकल क्र उसके मुँह क पास क्र दिया.

ऋतू लल्लू क मन की बात समझ क्र लल्लू क लौड़े को ले क्र मुठियाने लगी.

लल्लू ऋतू क सर को पकड़ क्र अपने लौड़े पर झुकता चला गया.

लल्लू ऋतू क होठो पर अपना लौड़ा रगड़ने लगा.

ऋतू आपनोह खोल क्र लौड़े को अपने मुँह मई ले क्र चुप्पा लगाने लगी.

लल्लू अपना कमर हिला क्र ऋतू क मुँह को छोड़ रहा था.

लल्लू तो मजे से सातवे आसमान मई था.

लल्लू को बहुत मजा आ रहा था ऋतू क मुँह को छोड़ते हुए.

लल्लू हाथ बड़ा क्र ऋतू क चुके को हाथो मई ले क्र मसलने लगा और इधर कमर हिला क्र मुँह भी चोदे जा रहा था.

धीरे धीरे लल्लू का हिलना तेज होता चला गया.

अब लल्लू ने ऋतू क मुँह को दोनों हटो से पकड़ क्र अंडर तक अपने लौड़े को ठोकता जा रहा था.

लल्लू का लौड़ा ऋतू क गले मई कंठ पर जा क्र ठोकर मरता था.

लल्लू मजे से अपने मुँह से अजीब अजीब आवाजे निकलता हुआ ऋतू क मुँह को तूफानी गति से चोदे जा रहा था. वो भूल गया था की ये ऋतू का छूट नहीं बल्कि उसका मुँह है.

लल्लू झटके खता हुआ ऋतू क मुँह मई hi खली हो गया.

ऋतू एक झटके से लल्लू को धकेल क्र खासते हुए उलटी करने लगी.

लल्लू तो देख क्र दर गया की जोश जोश मई ये क्या क्र गया.

ऋतू जब थोड़ी देर बाद संभाली तो उठ क्र एक थप्पड़ लगाई.

ऋतू- मुआए मई क्या मन की हु कुछ करने को. काम से काम आराम से तो क्र. तू तो जान hi ले लेता मेरा.

लल्लू- सॉरी काकी. वो मुझे होश hi नहीं रहा. लेकिन आप तो बता सकती थी न.

ऋतू- मुआए बताती कहा से. मुँह मई तो लौड़ा थुश रखा था तू ने और हाथ से मर रही हु इतनी देर से तो उसका तो तुम्हे कोई पता hi नहीं चला.

लल्लू- सो सॉरी काकी. आगे से मई धयान रखूँगा. प्लस आप नाराज न हो.

ऋतू- ठीक है. चल अब निचे चल.

लल्लू- क्या…. अभी तो सुरु hi हुआ है. अभी कहा निचे जाएंगे.

ऋतू- तो आज सोच लिया है यही खुले मई छोड़ेगा मुझे.

लल्लू- है रानी. आज मेरा मन है की मई तुम्हे नंगी क्र क खूब हुमच हुमच क्र इस छत पर खुले आसमान क निचे छोड़ू.

ऋतू- ज्यादा जोर मत लगाना. नहीं तो मई चिल्लाने लगी तो लोग आ क्र हम दोनों को जान से मर देंगे.

लल्लू ऋतू को पकड़ कर खड़ा किया और उसके होठो को चूसने लगा.

लल्लू को ऋतू क मुँह से अपने छुम की बदबू आ रही थी लेकिन ऋतू क मदमस्त जवानी को चूसने मई उसे अपने छुम का भी टेस्ट अच्छा hi लगने लगा.

लल्लू ऋतू को पकड़ क्र अलग किया और उसके साडी को खोल क्र अलग क्र दिया.

ऋतू- लल्लू ये सब मत खोल बीटा. अगर यहाँ कोई आ गया तो हम जल्दी से तैयार भी नहीं हो पाएंगे.

लल्लू- अब यहाँ कोई नहीं आ पायेगा मेरी जान. मैंने गेट बंद क्र रखा है.

लल्लू पेटीकोट का नाडा पकड़ क्र खींच दिया.

पेटीकोट सरसराता हुआ ऋतू क पैरो मई गिर गई.

अब ऋतू मादरजात नंगी थी इस खुले आसमान क निचे.

ऋतू को बड़ा सरम आ रहा था.

वो शर्मा क्र पीछे घूम गई जो लल्लू क जान पर बन आई.

ऋतू की भरी मटके जैसे गोल गांड अब लल्लू क आँखों क सामने था.

चाँद की रौशनी मई ऋतू का संगमरमर जैसा बदन चमक रहा था. उस पर से ये कातिल गांड…

हैयय क्या कहना.

लल्लू जल्दी से अपना सारा कपडा खोल क्र नंगा हो गया और पीछे से hi ऋतू से चिपक गया.

ऋतू का गांड देख क्र लल्लू का लौड़ा रोड की तरह खड़ा हो गया था जो चिपकने से बिलकुल ऋतू क गांड क दोनों फको क बिच टेढ़ा वो क्र निचे निकल गया था.

ऋतू लल्लू क गरम रोड की तरह सख्त लौड़े को फील कर क मजे से गंगना गई.

पुरे बदन मई ऋतू क चीटिया रेंगने लगी.

लल्लू आगे हाथ ले जा क्र ऋतू क दोनों चुके को थम लिया और उसको अपने से चिपका क्र हलके हलके हिस्स्सा लगाने लगा.

ऋतू क पीछे चिपका लल्लू तो मजे से आसमान मई ुर्र रहा था और यही हाल कुछ ऋतू का भी था वो निचे से पानी बहाये जा रही थी.

अपने होठो को दातो से काटते हुए मजे से लल्लू से अपना चुके मिस्वा रही थी और पीछे से हिस्से लगवा रही थी.

ये ऋतू का पहला अनुभब था ऐसा.

अनिल तो ढंग से कभी अपना लुल्ली भी नहीं डाला था उसके अंडर.

अब ऋतू से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था.

लल्लू- रानी मई तुम्हारी ये मटकी फोरना चाहता हु.

ऋतू- पहले मुझे पटक क्र जैम क्र छोड़ खूब हुमच हुमच क्र ताकि कल मई चालू तो लोग समझे की मई खूब जैम क चूड़ी हु अपने खशम से साडी रात.

लल्लू ऋतू की बाटे सुन्न क्र जोश मई आ गया और उसे घुमा क्र रेलिंग पकड़ क्र झुका दिया.

लल्लू ऋतू क पीछे आ क्र ऋतू क कमर तक लहराते बालो को इक्कठा क्र अपने हाथ मई ले क्र लौड़े को ऋतू क छूट पर लगा क्र रगड़ने लगा

ऋतू- अब और मत तड़पा रे. अब मुझसे और बर्दास्त नहीं होगा. ये कैसा आग लगा दिया तूने. जल्दी से अपना लौड़ा थोक मरे निगोड़ी भोसड़े मई.

लल्लू ऋतू क छूट से निकलते पानी से अपने लौड़े को अच्छी तरह से चिकना क्र लिया घिस घिस क्र और फिर ऋतू क छूट क छेड़ पर अपने लौड़े को टिका क्र ऋतू क मखमली गांड को दोनों हाथो मई पकड़ लिया और हुम्मच क्र धक्का मारा.

एक hi धक्के मई जार तक लल्लू का लौड़ा ऋतू क छूट को फर्टी हुई जा घुसा.

ऋतू बहुत जोर से चीख पड़ी.

लल्लू जल्दी से अपने हाथ से ऋतू क मुँह को बंद किया लेकिन फिर भी एक बार तो वो चिल्ला hi चुकी थी.

लल्लू का लौड़ा छूट की गर्मी से अंडर और फुल रहा था जैसे.

इधर ऋतू का तो बुरा हाल था.

इतना दर्द की उसे लगा जैसे किसी ने पेट तक कोई गर्म सरिया घुसा दिया है.

वो लल्लू क बहो मई मछली की तरह फरफरा रही थी छूटने को.

लल्लू ऋतू क मुँह से हाथ हटा क्र उसके चुके को दोनों हाथो से पकड़ क्र जोर जोर से मिच्ने लगा.

ऋतू- ाः मारर्र दियय्या री.. क्यू आ गयी मई यहाँ.. आअह्ह्ह अच्छा था रूमम मई hi सो जाती. फैट गयी मेरीए छुटत.

ऋतू क आँखों से तप तप आँशु बाह रहे थे.

लल्लू कभी दोनों चुके दबाता तो कभी उसके मटके जैसी गांड क फैंको को मसलने लगता.

कुछ देर ऐसे hi मसलने क बाद ऋतू का रोना काम हुआ तब लल्लू हलके हलके अपना लौड़ा निकल क्र धीरे डालने लगा.

अभी थोड़ा hi बहार निकलता और फिर पूरा घुसा देता था अपना लौड़ा.

ऋतू को बार बार अपने पेट मई बच्चेदानी पर ठोकर लगता महसूस होता.

ऋतू- कितना बड़ा है एक मुई का लौड़ा. बिलकुल गधे का है…

पता नहीं किस घरी पैदा किया था इस गधे क लौड़े को काजल.

लल्लू अब आधे से ज्यादा लौड़ा निकल क्र पेलने लगा ऋतू को.

चुके दबाता हुआ लल्लू अब हुमच हुमच क्र धक्का मरने लगा.

ऋतू हर धक्के पर कराह उठती.

ऋतू क हाथसे रेलिंग छूट

जाता तो फिर उसे मजबूती से पकड़ लेती और अगले धक्के मई फिर छूट जाता.

ऋतू की गांड लाल हो गई थी लल्लू क कमर से लग क्र.

खुले आसमान क निचे चांदनी रात मई ये दोनों दिन दुनिया से बेखबर थप थप थप की मधुर संगीत बजाये जा रहे थे.

ऋतू- आअह्ह्ह मुआए कैसी छोड़ रहा है.. जैसे इसी की मा काजरी की भोसड़ा हूँ. हैयय मा रीई मई गईई..

ऋतू चिल्लाते हुए झरने लगी.

लल्लू अपने माँ का नाम ऋतू क मुँह से सुन क्र सुन्नन हो गया.

उसका लौड़ा जैसे और सख्त हो गया मोटाई जैसे और बढ़ गई.

लल्लू अब तूफानी गति से ऋतू क गांड को मसलते हुए चोदे जा रहा था.

लल्लू- ली रनडीई बड़ी गर्मी थी छुप्प्प करर रात को लौड़ा चुसतीई है. ले अब मेरा लौड़ा आज भोसड़ा बनना दूंगा. आह्हः मेरीए रनडीई ऋतुओ.

लल्लू पता नहीं क्या बाके जा रहा था और ऋतू क चुके और गांड को तो मसल मसल क्र फुला दिया था.

ऋतू लल्लू क हैवानियत को सहन नहीं क्र प् रही थी…

जैसे उसे लग रहा था की इस से अच्छा तो वो कुवारी रह लेती. कभी नहीं चुदती.

अभी वो दो बार जहर चुकी थी और अब उसको जलन हो रहा था अंदर.

लल्लू अभी वहसि पागल था और ऋतू भी अधेड़ उम्र की गदराई गे.

ऋतू मई गर्मी बहुत थी लेकिन एक तो उम्र और दूसरा लल्लू ठहरा अर्ध पागल.

ऋतू लल्लू को अब झेल नहीं प् रही थी.

ऋतू- लल्लू तुम्हे मेरी कसम है अभी मुझे छोड़ दे. बहुत जलन हो रहा है और पेअर भी दर्द क्र रहा है. मुझे थोड़ा सास लेने दे फिर करना.

लल्लू ऋतू की बात सुना hi नहीं.

उसके कान मई तो बस काजल नाम घूम रहा था जो ऋतू झरते हुए बोली थी.

लल्लू सटक से ऋतू क छूट से लैंड निकल क्र उस पर ढेर सारा थूक लगाया और ऋतू जो खुश हो क्र बैठने जा रही थी सास दुरुस्त करने को, उसे उठा क्र अपने गॉड मई ले लिया और निचे से थोक दिया बुर मई पूरा लौड़ा.

ऋतू- आह्हः आज ये मेरीए जान ले क्र मानेगा.. हे भगवाननं बचाए ले.. ाजी कभी नही छोडूंगी इस पागलल वहसीई गढ़ी क लौडी से..

लल्लू हुमच हाच क्र ऋतू को उछलता हुआ चोदे जा रहा था.

थोड़ी देर मई उसे ले क्र वही एक फाटे कैंपिंग क्लॉथ पर लेता क्र ऋतू क दोनों पेअर को कंडे पर दाल छोड़ दिया अपना मिशाल

ऋतू इस धक्के से गंगना गई…

ऋतू- कोई बचा लो री. मर्डर देगा मुझी.

लल्लू अब अपने मंजिल क करीब था. अब उसे कुछ नहीं दिख रहा था. वो ऋतू क दोनों पेअर को ऋतू क छाती से चिपका क्र ऋतू क उप्पेर सवार हो हचक हचक क्र चोदे जा रहा था फुल स्पीड मई.

लल्लू एक आखरी शॉट लगा क्र ऋतू क अंडर hi भलभला क्र झरने लगा.

लल्लू क हाथसे ऋतू का पेअर छूट गए.

ऋतू अपने पेअर को फ्री होते hi हाथ पीर फैलाये लल्लू क पानी को फील करती कम्पटी वो भी जहर रही थी..

ऋतू और लल्लू पुरे पसीने से भींगे हुए थे.

काफी देर तक वह सोये रहे वो दोनों.

ऋतू क आँखों से तप तप आँशु बाह रहे थे.

लल्लू कभी दोनों चुके दबाता तो कभी उसके मटके जैसी गांड क फैंको को मसलने लगता.

कुछ देर ऐसे hi मसलने क बाद ऋतू का रोना काम हुआ तब लल्लू हलके हलके अपना लौड़ा निकल क्र धीरे डालने लगा.

अभी थोड़ा hi बहार निकलता और फिर पूरा घुसा देता था अपना लौड़ा.

ऋतू को बार बार अपने पेट मई बच्चेदानी पर ठोकर लगता महसूस होता.

ऋतू- कितना बड़ा है एक मुई का लौड़ा. बिलकुल गधे का है…

पता नहीं किस घरी पैदा किया था इस गधे क लौड़े को काजल.

लल्लू अब आधे से ज्यादा लौड़ा निकल क्र पेलने लगा ऋतू को.

चुके दबाता हुआ लल्लू अब हुमच हुमच क्र धक्का मरने लगा.

ऋतू हर धक्के पर कराह उठती.

ऋतू क हाथसे रेलिंग छूट

जाता तो फिर उसे मजबूती से पकड़ लेती और अगले धक्के मई फिर छूट जाता.

ऋतू की गांड लाल हो गई थी लल्लू क कमर से लग क्र.

खुले आसमान क निचे चांदनी रात मई ये दोनों दिन दुनिया से बेखबर थप थप थप की मधुर संगीत बजाये जा रहे थे.

ऋतू- आअह्ह्ह मुआए कैसी छोड़ रहा है.. जैसे इसी की मा काजरी की भोसड़ा हूँ. हैयय मा रीई मई गईई..

ऋतू चिल्लाते हुए झरने लगी.

लल्लू अपने माँ का नाम ऋतू क मुँह से सुन क्र सुन्नन हो गया.

उसका लौड़ा जैसे और सख्त हो गया मोटाई जैसे और बढ़ गई.

लल्लू अब तूफानी गति से ऋतू क गांड को मसलते हुए चोदे जा रहा था.

लल्लू- ली रनडीई बड़ी गर्मी थी छुप्प्प करर रात को लौड़ा चुसतीई है. ले अब मेरा लौड़ा आज भोसड़ा बनना दूंगा. आह्हः मेरीए रनडीई ऋतुओ.

लल्लू पता नहीं क्या बाके जा रहा था और ऋतू क चुके और गांड को तो मसल मसल क्र फुला दिया था.

ऋतू लल्लू क हैवानियत को सहन नहीं क्र प् रही थी…

जैसे उसे लग रहा था की इस से अच्छा तो वो कुवारी रह लेती. कभी नहीं चुदती.

अभी वो दो बार जहर चुकी थी और अब उसको जलन हो रहा था अंदर.

लल्लू अभी वहसि पागल था और ऋतू भी अधेड़ उम्र की गदराई गे.

ऋतू मई गर्मी बहुत थी लेकिन एक तो उम्र और दूसरा लल्लू ठहरा अर्ध पागल.

ऋतू लल्लू को अब झेल नहीं प् रही थी.

ऋतू- लल्लू तुम्हे मेरी कसम है अभी मुझे छोड़ दे. बहुत जलन हो रहा है और पेअर भी दर्द क्र रहा है. मुझे थोड़ा सास लेने दे फिर करना.

लल्लू ऋतू की बात सुना hi नहीं.

उसके कान मई तो बस काजल नाम घूम रहा था जो ऋतू झरते हुए बोली थी.

लल्लू सटक से ऋतू क छूट से लैंड निकल क्र उस पर ढेर सारा थूक लगाया और ऋतू जो खुश हो क्र बैठने जा रही थी सास दुरुस्त करने को, उसे उठा क्र अपने गॉड मई ले लिया और निचे से थोक दिया बुर मई पूरा लौड़ा.

ऋतू- आह्हः आज ये मेरीए जान ले क्र मानेगा.. हे भगवाननं बचाए ले.. ाजी कभी नही छोडूंगी इस पागलल वहसीई गढ़ी क लौडी से..

लल्लू हुमच हाच क्र ऋतू को उछलता हुआ चोदे जा रहा था.

थोड़ी देर मई उसे ले क्र वही एक फाटे कैंपिंग क्लॉथ पर लेता क्र ऋतू क दोनों पेअर को कंडे पर दाल छोड़ दिया अपना मिशाल

ऋतू इस धक्के से गंगना गई…

ऋतू- कोई बचा लो री. मर्डर देगा मुझी.

लल्लू अब अपने मंजिल क करीब था. अब उसे कुछ नहीं दिख रहा था. वो ऋतू क दोनों पेअर को ऋतू क छाती से चिपका क्र ऋतू क उप्पेर सवार हो हचक हचक क्र चोदे जा रहा था फुल स्पीड मई.

लल्लू एक आखरी शॉट लगा क्र ऋतू क अंडर hi भलभला क्र झरने लगा.

लल्लू क हाथसे ऋतू का पेअर छूट गए.

ऋतू अपने पेअर को फ्री होते hi हाथ पीर फैलाये लल्लू क पानी को फील करती कम्पटी वो भी जहर रही थी..

ऋतू और लल्लू पुरे पसीने से भींगे हुए थे.

काफी देर तक वह सोये रहे वो दोनों.

ऋतू क आँखों से तप तप आँशु बाह रहे थे.

लल्लू कभी दोनों चुके दबाता तो कभी उसके मटके जैसी गांड क फैंको को मसलने लगता.

कुछ देर ऐसे hi मसलने क बाद ऋतू का रोना काम हुआ तब लल्लू हलके हलके अपना लौड़ा निकल क्र धीरे डालने लगा.

अभी थोड़ा hi बहार निकलता और फिर पूरा घुसा देता था अपना लौड़ा.

ऋतू को बार बार अपने पेट मई बच्चेदानी पर ठोकर लगता महसूस होता.

ऋतू- कितना बड़ा है एक मुई का लौड़ा. बिलकुल गधे का है…

पता नहीं किस घरी पैदा किया था इस गधे क लौड़े को काजल.

लल्लू अब आधे से ज्यादा लौड़ा निकल क्र पेलने लगा ऋतू को.

चुके दबाता हुआ लल्लू अब हुमच हुमच क्र धक्का मरने लगा.

ऋतू हर धक्के पर कराह उठती.

ऋतू क हाथसे रेलिंग छूट

जाता तो फिर उसे मजबूती से पकड़ लेती और अगले धक्के मई फिर छूट जाता.

ऋतू की गांड लाल हो गई थी लल्लू क कमर से लग क्र.

खुले आसमान क निचे चांदनी रात मई ये दोनों दिन दुनिया से बेखबर थप थप थप की मधुर संगीत बजाये जा रहे थे.

ऋतू- आअह्ह्ह मुआए कैसी छोड़ रहा है.. जैसे इसी की मा काजरी की भोसड़ा हूँ. हैयय मा रीई मई गईई..

ऋतू चिल्लाते हुए झरने लगी.

लल्लू अपने माँ का नाम ऋतू क मुँह से सुन क्र सुन्नन हो गया.

उसका लौड़ा जैसे और सख्त हो गया मोटाई जैसे और बढ़ गई.

लल्लू अब तूफानी गति से ऋतू क गांड को मसलते हुए चोदे जा रहा था.

लल्लू- ली रनडीई बड़ी गर्मी थी छुप्प्प करर रात को लौड़ा चुसतीई है. ले अब मेरा लौड़ा आज भोसड़ा बनना दूंगा. आह्हः मेरीए रनडीई ऋतुओ.

लल्लू पता नहीं क्या बाके जा रहा था और ऋतू क चुके और गांड को तो मसल मसल क्र फुला दिया था.

ऋतू लल्लू क हैवानियत को सहन नहीं क्र प् रही थी…

जैसे उसे लग रहा था की इस से अच्छा तो वो कुवारी रह लेती. कभी नहीं चुदती.

अभी वो दो बार जहर चुकी थी और अब उसको जलन हो रहा था अंदर.

लल्लू अभी वहसि पागल था और ऋतू भी अधेड़ उम्र की गदराई गे.

ऋतू मई गर्मी बहुत थी लेकिन एक तो उम्र और दूसरा लल्लू ठहरा अर्ध पागल.

ऋतू लल्लू को अब झेल नहीं प् रही थी.

ऋतू- लल्लू तुम्हे मेरी कसम है अभी मुझे छोड़ दे. बहुत जलन हो रहा है और पेअर भी दर्द क्र रहा है. मुझे थोड़ा सास लेने दे फिर करना.

लल्लू ऋतू की बात सुना hi नहीं.

उसके कान मई तो बस काजल नाम घूम रहा था जो ऋतू झरते हुए बोली थी.

लल्लू सटक से ऋतू क छूट से लैंड निकल क्र उस पर ढेर सारा थूक लगाया और ऋतू जो खुश हो क्र बैठने जा रही थी सास दुरुस्त करने को, उसे उठा क्र अपने गॉड मई ले लिया और निचे से थोक दिया बुर मई पूरा लौड़ा.

ऋतू- आह्हः आज ये मेरीए जान ले क्र मानेगा.. हे भगवाननं बचाए ले.. ाजी कभी नही छोडूंगी इस पागलल वहसीई गढ़ी क लौडी से..

लल्लू हुमच हाच क्र ऋतू को उछलता हुआ चोदे जा रहा था.

थोड़ी देर मई उसे ले क्र वही एक फाटे कैंपिंग क्लॉथ पर लेता क्र ऋतू क दोनों पेअर को कंडे पर दाल छोड़ दिया अपना मिशाल

ऋतू इस धक्के से गंगना गई…

ऋतू- कोई बचा लो री. मर्डर देगा मुझी.

लल्लू अब अपने मंजिल क करीब था. अब उसे कुछ नहीं दिख रहा था. वो ऋतू क दोनों पेअर को ऋतू क छाती से चिपका क्र ऋतू क उप्पेर सवार हो हचक हचक क्र चोदे जा रहा था फुल स्पीड मई.

लल्लू एक आखरी शॉट लगा क्र ऋतू क अंडर hi भलभला क्र झरने लगा.

लल्लू क हाथसे ऋतू का पेअर छूट गए.

ऋतू अपने पेअर को फ्री होते hi हाथ पीर फैलाये लल्लू क पानी को फील करती कम्पटी वो भी जहर रही थी..

ऋतू और लल्लू पुरे पसीने से भींगे हुए थे.

काफी देर तक वह सोये रहे वो दोनों.
 
जब पसीना सुख गया और चाट पर ठंढी हवा चलने लगी तब जा क्र उनका नींद खुला.

लल्लू जब ऋतू क उप्पेर से निकल तो लल्लू का गधे जैसा लौड़ा ऋतू क छूट का भोसड़ा बना क्र दोनों क पानी से लूथरा हुआ बड़ा भयानक लग रहा था वह मई झूलता हुआ.

ऋतू तो देख क्र hi दर गई.

ऋतू काकी- हे माँ री मैई इतना बड़ा लौड़े से दो बार चूड़ी हुऊ.

कैसे बच गयी मई.

कम्प गई ऋतू लल्लू क लौड़े को देख क्र.

लल्लू उठ खड़ा हुआ और अपने कपडे समेत क्र पहन लिया.

फ़ी ऋतू क सरे कपडे समेत क्र उसे दिया पहने को.

ऋतू उठ क्र बैठी तो उसके पुरे सरीर मई तेज दर्द की लहार दौर गई.

ऋतू-. आठ मा. यी क्या किया तूने लल्लू. आह मई क्या करू. मुझ से नहीं होगा कुछ. मई सुबह तक ऐसे hi रहूंगी यहाँ.

बहुत दर्द क्र रहा है.

लल्लू आगे बढ़ क्र ऋतू को गॉड मई उठा क्र टूटे हुए कुर्सी पर बैठा दिया.

ब्लाउज ले क्र उसे पहना दिया.

पेटीकोट ले क्र उसे भी पेअर मई दाल क्र खड़ा क्र बांध दिया.

अब साडी रह गया था.

लल्लू जैसे तैसे साडी भी लपेट क्र ऋतू को गॉड मई उठा क्र गेट तक लाया.

फिर गेट खोल क्र निचे झक आया. कही कोई नहीं था.

लल्लू खत से ऋतू को उठा क्र अपने रूम मई घुस गया.

वह बीएड पर ऋतू को लेता क्र वाशरूम चला गया. वह पहले खुद फ्रेश हो लिया. फिर निचे आया.

निचे एक कर्मचारी जग रहा था.

लल्लू- सुनिए. क्या थोड़ा गर्म पानी का कोई जुगाड़ हो सकता है.

सुबह भगदड़ मई मेरे एक साथी को चोट लग गया था थोड़ा तो उसे अभी बहुत दर्द क्र रहा है.

कर्मचारी- अभी तो और कोई नहीं है यहाँ जो पानी गर्म क्र दे.

लल्लू- अगर आप जगह बता देते तो मई खुद क्र लेता. आप की बड़ी मेहरबानी होगी.

वो कर्मचारी भला वयक्ति था उस ने रसोई दिखा दिया लल्लू को.

लल्लू खत से वह जा क्र एक गिलास गर्म पानी किया और बहार आ गया.

लल्लू- आप का बहुत बहुत आभार भाई साहब.

कर्मचारी- कोई बात नहीं भाई. ये एक दर्द का गोली है ये भी खिला डिजियेग. थोड़ी देर मई आराम आ जाएगा. हम इमरजेंसी क लिए थोड़े बहुत व्यवासय रखते है.

लल्लू- वह आप ने तो मेरी साडी चिंता hi दूर क्र दी. बहुत आभार.

लल्लू गर्म पानी और वो गोली ले क्र जल्दी से रूम मई आ गया.

अभी रात क 2.30 बजे थे.

लल्लू रूम मई आ क्र देखा तो ऋतू सो गई थी.

लल्लू ऋतू की साडी और पेटीकोट उठा क्र उसके छूट को सेकने क लिए नंगा क्र दिया.

एक कपडा ले क्र गर्म पानी मई भिगो क्र लल्लू जैसे hi छूट पर लगाने को हाथ बढ़ाया छूट का हालत देख क्र लल्लू का हाथ वही रुक गया.

छूट सूज क्र बहुत भयानक हो गया था.

बहुत बुरे हालत हो राखी थी छूट की.

लल्लू को ऋतू पर बड़ा तरस आया और अपने आप पर गुस्सा.

लल्लू बड़े आराम से ऋतू क छूट की सिलाई करने लगा.

जैसे hi ऋतू को अपने छूट पर लल्लू क हाथ मई पकड़ा गर्म पानी से भीगा कपडा लगा ऋतू नींद मई hi सिसक पड़ी.

लल्लू आराम आराम से ऋतू क छूट को सेक रहा था.

थोड़ी देर मई ऋतू की आँख खुल गई.

ऋतू लल्लू को अपने छूट को नंगा क्र बैठे देख क्र हड़बड़ा क्र उठ बैठी दर से की कही फिर तो नहीं पेलने को तैयार है.

लल्लू क हाथ मई गर्म पानी से भीगा कपडा बेख क्र मुँह बिचकाती फिर से लेट गई.

लल्लू- एक मिनट. पहले उठ क्र ये गोली खा लो. इस से तुम्हे आराम मिलेगा.

ऋतू- मई कुछ नहीं करने वाली. पहले दर्द दो और अब दवा खिलाओ.

लल्लू- प्लस खा लो. नहीं तो दर्द करता रहेगा. बड़ी मुश्किल से लाया हु ये.

ऋतू- तो मई क्या करू. मैंने कहा था ये दर्द देने को और फिर दवाई लेन को.

लल्लू- मेरी प्यारी लुगाई. मेरी प्यारी जोरि. मान जाओ. दवाई खा लो. प्लस..

लल्लू ऋतू क छूट की सके करता हुआ उसे हाथ पकड़ क्र उठाया और दवाई और पानी निकल क्र दी.

ऋतू- नहीं मई नहीं खाउंगी. ( ऋतू नखरे दिखती बोली)

लल्लू- खा ले प्यार से बोल रहा हु. नहीं खाई तो फिर मई कभी बात नहीं करूँगा और अभी सब छोड़ क्र चला जाऊंगा मई.

ऋतू लल्लू क धमकाने पर मुँह टेढ़ा करती हुई लल्लू को चिढ़ाती हुई दवाई ले क्र खा ली.

लल्लू ऋतू को फिर से सुला दिया और एक बार फिर से उसके छूट की सके करने लगा.

जब पानी ठंढा होने लगा तब जा क्र लल्लू सके करना बंद किया.

सब सामान अगल क्र के रख क्र लल्लू भी कमर सीधी करने को लेट गया.

अब थोड़ी देर मई तो उसे उठाना hi था तो सो क्र कोई फायदा नहीं था और आज इन लोगो को वापस गौण भी जाना था तो लल्लू वैसे hi लेता लेता आज जो सब हुआ सोचता हुआ सुबह का इंतजार करने लगा.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 13.

सुबह दरवाजा खटकने से लल्लू का ध्यान टूटा.

एक नजर ऋतू को देखा तो वो सोई हुई थी.

लल्लू आगे बढ़ क्र दरवाजा खोल दिया.

दरवाजे पर काका खड़े थे.

अनिल- क्या बात है. आज नींद नहीं खुली क्या.

लल्लू- क्या करू. दिन मई कोई काम नहीं था तो सो गया था. रात मई नींद नहीं आयी. अभी जा क्र सोया था की आप आ क्र उठा दिए.

अनिल- चलो कोई नहीं. फ्रेश हो जाओ. अपनी काकी को भी उठा देना. फिर चलते है संगम स्नानं पर.

काका चले गए.

लल्लू दरवाजा लगा क्र ( काकी को उठाऊ या अपनी लुगाई को) अपने आप से बड़बड़ाता ऋतू क पास आया और उसके चुके को पकड़ क्र सहलाने लगा.

ऋतू कुनमुनाने लगी.

लल्लू ऋतू क होठो को मुँह मई भर क्र उसका राश चूसने लगा तो ऋतू की नींद खुल गई.

थोड़ी देर बाद ऋतू भी लल्लू का भरपूर साथ दे रही थी.

लल्लू अलग हो क्र बैठ गया. मन तो नहीं था हटने का लेकिन अभी समय नहीं था ये सब करने का.

लल्लू- काका आये थे. जल्दी से जा क्र फ्रेश हो जाओ फिर स्नानं को चलना है.

ऋतू अंगड़ाई लेती हुई उठती है और एक चमत लगा देती है लल्लू को.

ऋतू- ाःह हरामी सेल. पूरा बदन दर्द क्र रहा है. मुझे पेअर नहीं उठाया जा रहा जैसे लगता है की अभी भी लौड़ा घुसा है मेरी बुर मई.

लल्लू हस्ता हुआ ऋतू क बुर को सहला दिया.

ऋतू ससीई सस्सी करती हुई पीछे हो गई हलके से.

फिर ऋतू अपने कपडे को सही क्र क बहार फ्रेश होने को चली गई.

के चल थी. चलती हुए दोनों पेअर फैलाये पीछे से गांड क दोनों पत् जैसे पीछे दो तरभुज लटक रहे हो. जो चलते वक्त हर कदम पर उप्पेर निचे हो रहा था.

ऋतू फ्रेश हो क्र आ क्र लल्लू को एक चमत फिर लगा दी.

ऋतू- कुत्ते, क्या हालत बना दिया है तू ने मेरे सोन पारी का.

लल्लू- मैंने क्या किया. तू hi तो बोल रही थी की ऐसे छोड़ना की बहार निकलू तो लोग मेरा चल देख क्र बोले देख अपने खसम से साडी रात हुमच हुम्मच क्र छुड़वा क्र आई है.

ऋतू लल्लू की बाटे सुन्न क्र शर्मा गई. सरम से उसके गाल बिलकुल टमाटर की तरह लाल हो गए.

लल्लू बहार निकल क्र फ्रेश होने चला गया.

वह से आ क्र सरे कपडे जो नाहा क्र पहनने थे वो एक बैग मई दाल क्र सभी चल दिए स्नानं करने.

आज, कल इतनी भीड़ नहीं थी. कल कुम्भ स्नानं था. तो काफी सरे लोग कल hi स्नानं क्र क चले गए थे. दूसरा कल भगदड़ भी मच गई थी तो कुछ दर से भी चले गए थे.

अनिल- क्या बात है ऐसे क्यू चल रही है. ( अनिल ऋतू की चल देख क्र बोलै)

ऋतू शर्मा गई. घबरा भी गई. अब क्या बोले अपने इस खशम को की वो उसको छोड़ क्र अपने देवर क बेटे से, अपने बेटे से भी उम्र मई छोटे लड़के से ब्याह क्र क उसकी लुगाई बन गई है. उसकी रंडी बन गई है और रात भर उस से जैम क छुड़वाई है. इतनी चूड़ी है जितना तो इसने एक शाल मई नहीं छोड़ा होगा. इतना इस नए खशम ने उसके फतार ने उसे एक रात मई छोड़ दिया है.

ऋतू- वो रात अँधेरे मई ठोकर लग गई थी. तो पेअर मई मोच आ गया था.

लल्लू ऋतू क चल को देख क्र मुँह दबा क्र हिस्से जा रहा था. लल्लू से तो हस्सी hi नहीं रुक रही थी. और ऋतू बड़ी बड़ी आँख क्र क लल्लू को धमकाया जा रही थी.

यु hi मजे करते हुए चारो संगम पर पहुंच गए.

चारो लोग नाहा क्र रोड पर आ गए.

अनिल काका ने एक E-riksha किराये पर किये कुम्भ क सरे स्थल क दर्शन क लिए.

ये लोग उस मई बैठ क्र चल दिए असतनायक क दर्शन को.

संगम मई स्नान किये hi थे ये लोग तो वह प्रथम नायक का पूजा क्र hi लिए थे त्रिवेणी क.

उस के बाद ये लोग चल दिए दूसरे नायक क दर्शन को. माधव मंदिर. जिन मई सब से प्रमुख हैं बेनी माधव.

वैसे तो पुरे प्रयाग मई कुल बारह माधव मंदिर है लेकिन सब मई नहीं घूम सकते थे क्यू की आज hi जाना भी था घर तो ये लोग बेनी माधव मंदिर जा क्र वह पूजा अर्चना किये.

लल्लू ऋतू क साथ पति पत्नी क रूप मई hi पूजा किया ककी काका तो दादू क साथ थे.

लल्लू इन से थोड़ा आगे या पीछे हो जाता था इन समय मई और दोनों पति पत्नी बन क्र पूजा क्र लेते है.

फिर वह से ये लोग तीसरे नायक को चल दिए.

तीसरे नायक है सोमेस्वर मंदिर.

यहाँ भगवन शिव की मंदिर है.

यहाँ आने पर बहुत भीड़ थी यहाँ.

दादू और काका एक लाइन मई घुस गए लेकिन लल्लू और ऋतू जा hi नहीं प् रहे थे. तभी वह एक साधु बाबा आये जो लल्लू का हाथ पकड़ क्र एक और ले गए. लल्लू ऋतू का हाथ पकडे हुए था तो दोनों साधु बाबा क पीछे खींचे चले गए.

थोड़ी दूर जाने पर सधी बाबा एक कुंड क पास आ क्र रुक गए.

साधु बाबा- ये सीता कुंड है. यहाँ इस सोमेश्वर स्थान मई स्व्यम चन्द्रमा अमृत वर्षा किये है.

तुम दोनों एक कुंड मई स्नानं क्र लो फिर प्रभु भोले सोमेश्वर की पूजा करना.

लल्लू और ऋतू एक दूसरे का मुँह देख रहे थे.

साधु बाबा वह से चले गए थे.

लल्लू ऋतू का हाथ पकड़ क्र कुंड मई उतर गए.

दोनों उस कुंड मई नाहा क्र बहार आ गए.

वही पास मई एक बचा इनके लिए कपडा ले क्र खड़ा था.

बचा- ये आप दोनों क लिए.

लल्लू और ऋतू फिर एक दूसरे को देखने लगे. उन्हें समझ hi नहीं आ रहा था की ये हो क्या रहा है.

खैर अभी उनके कपडे तो भींग गए थे तो दोनों उस बचे से कपडा ले क्र जल्दी से बदल लिए.

वह से वो लोग मंदिर मई पहुंच गए.

मंदिर मई जा क्र फिर दोनों एक जोड़े की तरह पूजा अर्चना की प्रभु सोमेश्वर महादेव की.

वह प्रभु सोमेश्वर को गंगा जल और फूल अर्पण क्र जैसे hi प्रणाम करने को छुवा लल्लू ने उसे लगा जैसे उसके पुरे सरीर मई चीटिया फेंग गई हो.

बदन क सरे रोये खड़े हो गए.

लल्लू पूरा पसीने से भीग गया.

उसकी धरकन बहुत तेज चलने लगा. आँखे मुंड गई.

चलो कालड़ी पूजा क्र निकलो यहाँ से. दूसरे भक्तो को पूजा करने दो. वह खड़ा एक पांडा लल्लू क कंधे से पकड़ क्र हिलता बोलै.

तब कही जा क्र लल्लू को होश आया. फिर ऋतू को साथ ले क्र लल्लू मंदिर से बहार आ गया.

वह से निकल क्र फिर चारो पहुंचे चौथे नायक भरद्वाज आश्रम.

यहाँ भरद्वाज आश्रम मई महर्षि भरद्वाज ने एक शिव लिंग की स्तापना की है जिन्हे भारद्वाजेश्वर शिव क नाम से जानते है.

ये सभी लोग वह जा क्र उनकी पूजा अर्चना करते है.

वह से आगे पांचवा नायक नाग वासुकि का मंदिर.

यहाँ नाग वासुकि क साथ उनके भाई शेषनाग की भी मूर्ति है इनकी भी पूजा की जाती है यहाँ.

लल्लू को यहाँ लग रहा था जैसे कोई उसे मंदिर मई खींच रहा है. अपने आप को बहुत रोकने की कोसिस क्र रहा था लेकिन उसके कदम रुक hi नहीं रहे थे.

मंदिर मई वो सब से पहले जा पंहुचा. कई बार तो दूसरे को धक्का भी लग गया.

सब से बचता बचता वो मंदिर मई पहुंच गया और वह सीधा प्रभु वासुकि क प् अचला गया.

ऐसा लग रहा था जैसे वो खुद लल्लू को अपने पास खींच लाये हो.

लल्लू उनको छू क्र प्रणाम करने को जैसे hi हाथ बढ़ाया वैसे hi उस के पुरे सरीर मई बड़ी तेज झटका लगा. जैसे लगा किसी ने उसके हाथ मई काट लिया हो.

उसने गौर से देखा तो वह दो निशान भी थे जिस से हल्का खून बाह रहा था.

लल्लू क होश पख्ता हो गए. उसे लगा की अब वो जिन्दा नहीं बचेगा. उसके आँखों क आगे अँधेरा छ गया.

लल्लू भगवन वासुकि क मूरत क आगे hi चक्र क्र गिरने लगा की किसी ने उसे पीछे से पकड़ लिया.

उस के सर पर पानी डाला. तब जा क्र लल्लू को थोड़ा होश आया.

तब तक ऋतू भी पास आ गई थी.

फिर ऋतू लल्लू को ले क्र नाग शेषनाग जी क मूरत क पास आ गई पूजा क लिए.

लल्लू वासुकि की पूजा मई जो हुआ उस से दर गया था.

फिर भी अभी यहाँ ऋतू भी साथ थी तो लल्लू डरता हुआ हाथ बढ़ा क्र भगवन शेशनाग पर गंगाजल और पुष्प अर्पण किया.

डरते डरते हाथ बढ़ाया ऋतू क हाथ को पकडे हुए. लल्लू दर से उसका पूरा सरीर कम्प रहा था.

लल्लू जल्दी से हाथ बढ़ा क्र उन्हें छू लिया. छूटे hi एक बार फिर लल्लू को लगा जैसे उसके पुरे सरीर मई सीतलता समां गई हो.

इस बार कुछ अलग हुआ था.

पहली बार उसे लगा जैसे बिजली का झटका लगा है और किसी ने हाथ मई काट लिया है लेकिन इस बार उसके पुरे सरीर मई सीतलता से भर गया. अब लल्लू को बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर वह से निकल क्र चारो चल दिए छत्त्ते नायक की पूजा मई.

छत्ते नायक है अक्षय वाट.

सनगम क निकट ये अक्षय वाट.

कहा गया है की ऐसे तीन वाट और है भारत मई जिन मई से एक मथुरा क बृंदाबन मई है बंशीवट.

गया मई है गयावट या बौधवट.

तीसरा है उज्जैन मई सिद्धवट.

तो ये चारो लोग अक्षय वाट की पूजा अर्चना की.

सातवा नायक नाग शेषनाग.

इनका और नाग वासुकि का मंदिर दोनों एक hi है.

दोनों की पूजा साथ हो जाती है.

अथवा नायक तीर्थ राज प्रयाग. जिन्हे माधव राज भी कहा जाता है.

यहाँ इनकी पूजा की और फिर प्रशाद और घर वालो क लिए थोड़ा बहुत सामान खरीद क्र ये लोग धरमसाला चले गए.

धर्मशाला पहुंच क्र फ्रेश हुए और जल्दी से खाना खा क्र अपना सारा सामान समेत रेलवे स्टेशन पहुंच गए.

वह ट्रैन खुलने वाली hi थी.

जल्दी जल्दी करते हुए जैसे तैसे ये लोग ट्रैन पकड़ लिए.

ट्रैन मई अपने बर्थ पर बैठने क बाद इन्हे सुकून का सास लेने को मिला.

घूमने पूजा करने मई बहुत समय लग गया और आज hi निकलना भी था इन्हे. कल का दिन तो इनका वैसे hi ख़राब हो गया था.

फिर भी आज भी गहूम तो लेकिन कई महत्वपूर्ण मंदिर पूजा करने को रह गया जिसका मलाल इन लोगो को अभी भी हो रहा था.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 14.

सुबह क 3 बजे ये लोग अपने स्टेशन पर पहुंच गए थे.

स्टेशन से बहार सुनील काका गाड़ी ले क्र खड़े थे.

लल्लू सारा सामान अपने कंधे पर लटकाये दादू काका काकी क साथ स्टेशन से बहार आ गया.

सारा सामान गाड़ी मई रखने क बाद एक एक क्र सब गारी मई बैठ गए.

थोड़ी देर मई hi ये लोग घर पहुंच गए.

घर पहुंच क्र सब सामान निकल लल्लू दालान पर रखा. काकी आँगन मई चली गई. दादू और अनिल हाथ पेअर धो अपने पाने बिस्तर पर लेट गए.

लल्लू दादू का सामान वही दालान क कमरे मई रख बांकी सामान ले क्र आँगन आ गया.

काजल- आ गया मेरा लाल. कितना सुना हो गया था ये घर तेरे बिना. ( काजल लल्लू क गाल को सहलाता बोलै)

लल्लू- माँ अभी बहुत जोरो की नींद आई है. मुझे कही सोने दो. बहुत थक भी गया हु.

काजल- आ मेरे लाल. पहले हाथ पेअर धो आ. आज मेरे प्यारा बीटा अपनी माँ क साथ सोयेगा.

लल्लू नलका पर जा क्र हाथ पेअर धो आया.

वापस आ क्र अपने माँ क कमरे मई चला गया.

काजल क कमरे मई डबल बीएड था.

लल्लू की माँ लल्लू का लाया बैग सही से रख रही थी.

लल्लू आ क्र अपने कपडे बदल एक धोती लपेट क्र बीएड पर आ गया.

लल्लू- माँ मुझे आज कोई उठाना मत जबतक मई खुद न उठ जाऊ.

माँ- ठीक है बीटा सो जा अब तू.

लल्लू आँख बंद क्र सोने की कोसिस करने लगा.

काजल भी सामान रख क्र बीएड पर आ गई और लल्लू क ललाट पर एक चुम्मी दे क्र सोने को लेट गई.

सुबह बहार सब क सोर गुल से काजल की नींद खुल गई.

काजल उठाने लगी तो देखती है की लल्लू पीछे से उसे अपने बहो मई ले क्र सोया हुआ है.

काजल मुस्काती हुई आहिस्ते से लल्लू क हाथ को अपने उप्पेर से हटा क्र बीएड से निचे उतर गई.

काजल पलट क्र जाने लगी की उसे कुछ दिखा जिसे देख क्र काजल की आँखे बहार को आने को हो गई.

काजल घर घर क्र देख रही थी.

लल्लू जो धोती पहन क्र सोया था वो खुल गया था और लल्लू का बाबूराव सुबह सुबह प्रेशर से उठ खड़ा हुआ था.

बाबूराव का भयं रूप देख क्र काजल हैरान हो गई.

आज तक उसने एक hi लौड़ा देखि थी वो भी अपने पति का मूंगफली जितना.

लल्लू का ये विकराल रूप काजल को पसीना छुड़ाने क लिए काफी था.

काजल वापस लल्लू क बदन पर धोती दाल क्र उसके उप्पेर एक चादर दाल दी.

काजल अपने साइन पर हाथ रख क्र खुद की बढ़ी ससो को संभालती दरवाजा खोल क्र बहार आ गई.

काजल- क्यू हल्ला क्र रहे हो इतना. काकी और लल्लू सुबह आये है कुम्भ से. अभी सो रहे है. हल्ला मत करो.

कोमल- माँ, काकी क्या लायी है हमारे लिए दो न.

कोमल क साथ बांकी बहने भी आ क्र कड़ी हो गई.

काजल- अभी काकी सो रही है. जब सो क्र उठेगी तब खुद देगी.

सोनम- काकी आप hi दे दो न प्लस. आप तो मेरी प्यारी काकी हो न.

काजल- ज्यादा मस्का मत लगा तुम लोग चल घर की सफाई क्र सब मिल क्र. ( काजल सोनम क कान को पकड़ती बोली.)

सब लड़किया मुँह टेढ़ा करती घर क कामों मई लग गई.

रागिनी- कब तक सोये रहेंगे ये लोग. काजल जा क्र दोनों को उठा दे अब. नहाये धोये फ्रेश हो क्र खाना खाये. अब फिर रात मई भी सोना है इन्हे नहीं तो फिर रात नींद नहीं आएगी.

काजल जा क्र पहले ऋतू को उठा दी. फिर अपने कमरे मई जा क्र लल्लू को उठाने लगी.

लल्लू अंगड़ाई लेता उठ क्र बैठ गया. सामने माँ को देख क्र उसे गले लगा लिया.

काजल- अब प्यार करना हो गया हो तो जा नाहा क्र कुछ खा पि ले.

लल्लू काजल क गाल को चूमता बहार चला गया.

काजल अपने पागल बेटे क हरकत पर मुस्काती बीएड साफ क्र दूसरा चादर बिछा दी फिर गौरी को रूम मई झरि लगाने को बोल क्र बहार आ गई.

लल्लू उठ क्र दालान पर आ गया. यहाँ अब दादू और अनिल सो क्र उठ गए थे और स्नानं क्र लिए थे.

दादू- लल्लू बीटा. तुम नहाये या नहीं.

लल्लू- दादू अभी अभी सो क्र उठा हु.

अनिल- बीटा जा क्र नाहा ले फिर सब खाना कहते है.

लल्लू वही दालान पर बाथरूम मई फ्रेश हुआ फिर नलका पर नाहा क्र आँगन मई आ गया.

लल्लू- माँ.. मा..

रागिनी- क्यू चिल्ला रहा है. काजल रसोई मई खाना बना रही है.

लल्लू- काकी कपडा चाहिए पहने को.

इस समय लल्लू सिर्फ एक टॉवल कमर पर लपेटे आँगन मई खड़ा था.

रागिनी- हैयय राममम ये टट्टू कहा से बनवा ली तू ने.

लल्लू- tattu…:confuse:

रागिनी- है देख कितना करा रखा है. क्या पुरे बदन पर करवा लिया है.

लल्लू- अपने बदन को देखते हुए कहा है कुछ kaki.kya टट्टू बोल रही हो.

रागिनी- बुद्धू पीठ पर देख. पुरे जगह टट्टू बना हुआ है अजीब सा.

लल्लू- काकी अपने पीठ को कैसे देख सकता हु मई.

रिगिनी काकी एक दर्पण ला क्र लल्लू क पीठ को दिखती है.

लल्लू दर्पण मई अपने पीठ देख क्र चौक जाता है.

पुरे पीठ पर अजीब सा टैटू बना हुआ था.

लल्लू- बहनचोद ये क्या है. ये कब हो गया.

रागिनी काकी- क्या मतलब. तुम्हारे पीठ पर इतना बड़ा पुरे पीठ मई टट्टू बना है और तुम्हे hi पता नहीं.

लल्लू- नहीं मेरा मतलब. मई बोलै था छोटा बनाने को उस ने तो पुरे पीठ पर बना दिया है.
 
लल्लू का टैटू

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मर्द का बच्चा. अपडेट 15.

लल्लू- काकी मेरा कपडा दो na.ai कब तक टॉवल मई खरा राहु.

रागिनी काकी- देती हु बाबा. वैसे लल्लू बीटा. बॉडी सॉफ्ट तो बड़ा जबर्दरस्त बना ली है तुम ने. मैंने तो आज गौर किया है.

लल्लू- क्या हो गया है आज आप को काकी. ऐसा कुछ नहीं है. मई जैसा पहले था वैसा hi अब भी हु.

लल्लू अपने आप को निहारता हुआ बोल रहा था तभी उसे भी अपने सरीर मई कुछ बदलाव महसूस हुआ.

गौण का गवर जैसे बोलते है एक तरह से लल्लू वही था. ज्यादा पढ़ नहीं पाया था.

बहने जब घर मई पढ़ती है तो कभी कभी वही बैठ जाया करता था. बांकी गौण मई घूमना. काका लोगो क साथ खेत मई म्हणत करना और समय बच गया तो सुबह शाम नदी किनारे बैठा रहना. यही तो उसकी दिनचर्या था.

आज उसे अपना सरीर पहले क मुकाबले थोड़ा मजबूत लग रहा था. छाती फूल गई थी. ब्याह की मछलिया निकल आई थी. पेट भी अंडर देश गया था. कही कोई चर्बी नहीं था.

लल्लू को तो कुछ समझ hi नहीं आ रहा था की आखिर ये हुए क्या है और कैसे.

रागिनी कपडा निकल क्र दे दी.

लल्लू फटाफट धोरी लपेट लिया. उप्पेर जब टीशर्ट पहनने लगा तो वो बिलकुल तीते हो गया.

लल्लू माँ क पास चला गया जो रसोई मई सब क लिए शालिनी और ऋतू क साथ खाना निकल रही थी.

Lallu-maa, ये देखो न. कितना छोटा हो गया ये कपडा. जैसे लगता है मेरा सब सरीर इस मई डाब गया है.

सरे लेडीज लल्लू की बात सुन क्र उसकी और सर उठा क्र देखने लगे की अब लल्लू कोई उलटी सीधी बाटे बोल क्र सब को हसायेगा. लेकिन जब सब ने लल्लू की और देखा तो सही मई ये टीशर्ट लल्लू क लिए छोटा हो गया था.

काजल- कोमल क पास चला जा और उसे बोलना दूसरा देगा.

लल्लू जैसे तैसे उस टी शर्ट को निकल क्र लड़कियों क कमरे मई चला गया.

साडी लड़किया दो कमरे ले राखी थी जो एक दूसरे से जॉइंट था. उसी मई ये सभी एक साथ रहती थी.

लल्लू- दीदी दीदी कहा हो.

लल्लू बहार से hi आवाज देता हुआ अंडर घुश गया.

अंडर सोनम कमरे मई कपडा बदल रही थी.

अभी वो सिर्फ एक चड्डी मई थी.

लल्लू क कमरे मई घुसते hi चटक से थप्पड़ लगा.

रोमा- हरामी, गधे, पागल. दरवाजा खटका क्र नहीं आ सकता था.

लल्लू गाल पे हाथ रखे स्तब्ध खड़ा रह गया.

उसे समझ hi नहीं आया की उसे मारा क्यू गया है.

लल्लू- दीदी, मुझे क्यू मारा आप ने. ( अब लल्लू क आँखों से आँशु निकल रहे थे)

कोमल- कुत्ते दरवाजा बजा क्र नहीं आ सकता था अंडर. घुसता हुआ आ गया. सोनम दी कपडे बदल रही थी.

लल्लू- तो क्या हो गया. मई भी तो कुछ नहीं पहना है. मैंने तो किसी को नहीं मारा. ( अब लल्लू हिचकिया ले क्र रोटा हुआ बोलै)

लल्लू- ma...mai ma.a.a को ba..ta du.n.ga की सब m.ujh.e ma.ra है. और paa..ga.l बोलै है..

लल्लू वह से निकल क्र रोटा हुआ रसोई मई आ गया.

लल्लू- ( रोटा हुआ) di..di ga..ndi hai..mu.jhe ma..rti है. Mai..nahi ja.unga. उन lo.go क पास. वो सब m.ujh.e p.a.g.a.l कहते है.

ऋतू- किस ने मारा तुम्हे.

काजल ऋतू रागिनी शालिनी सब लल्लू की और देख रहे थे.

लल्लू- सब ने मुझे मारा है. रोमा दीद कोमल दीदी.

सब गंदे है.

लल्लू टीशर्ट फेक क्र दालान की और चला गया रोटा हुआ.

दालान से सब आँगन मई खाना खाने आ रहे थे.

दादू क साथ लल्लू क तीनो काका और उसके पापा सब साथ hi थे.

लल्लू को रोटा देख क्र सुनील आगे आ क्र उसे पकड़ लिया.

सुनील- क्या हुआ मेरे बेटे को.

लल्लू- ( सुनील लल्लू को बाहत मंटा था. लल्लू भी काका मई सब से ज्यादा सुनील क hi करीब था और काकी मई ऋतू क)

सब ga..nde ha..I. सब m..ujh.e ma.rte है.

सुनील- किस ने मारा है मेरे बेटे को. ( सुनील लल्लू को गले लगा लिया और ले क्र आँगन मई खत पर बैठ गया.)

दादू- मेरा बहादुर बीटा है तुम तो. तुम बच्चो की तरह क्यू रो रहे हो. ऐसे नहीं रट बहादुर बच्चे. तू तो मर्द का बच्चा है.

लल्लू- …..( रुलाई और तेज हो गई उस से कुछ बोलै hi नहीं गया.)

सुनील- रागिनी…( सुनील गुस्से मई जोर से चिल्लाता हुआ.)

रागिनी काकी दौर क्र रसोई से बहार आई.

सुनील- बहरी हो गई हो क्या घर मई सब क सब. इतने देर से ये रो रहा है तुम सब को सुनाई नहीं देता क्या कुछ. इतनी औरते हो क्र क्या क्र रही हो तुम लोग.

ऋतू- क्यू गुस्सा क्र रहे हो आप. अभी अभी तो यहाँ से दालान क तरफ जा रहा था. किसी लड़की ने दन्त दिया है थोड़ा सा.

लल्लू- Ro..ma di..di और ko...Komal..did.i. ने मारा है mu..jhe. दो दो tha..ppar.

सुनील- मतलब सब को पता था की लल्लू रो रहा है और किसी ने इसे चुप नहीं कराया. रोने दिया इसे. कल अगर ये नहीं होता न तो आप का पापा और भैया क साथ वही कुम्भ मई चटनी बन जाता. यही था जो बच गए सब. और इसे hi सब ने रट हुए देख क्र भी छोड़ दिया.

बांधो सब अपना बोरिया बिस्तर. कोई औरत मुझे नहीं चाहिए इस घर मई. बहनचोद जब तुम से एक बच्चा नहीं संभालता तो क्या तुम सब को सिर्फ महारानी बन क्र श्रीनगर करने और खाने को रखा है यहाँ. भागो सब अपने बाप क घर.

लल्लू सुनील का ये रूप देख क्र दर से चुप हो गया.

सब औरते रसोई से बहार आ क्र सर झुकाये कड़ी हो गई.

सब को पता था की सुनील को जब गुस्सा आता है तो कोई नहीं बोलते थे उसके सामने यहाँ तक की उसके खुद क पापा भी नहीं.

दादू- बहु आज हम सब जिन्दा है तो लल्लू बेटे क कारन नहीं तो कुम्भ मई hi हमारा क्रिया कर्म हो गया रहता. तुम सब को लगता की हम कुम्भ मई है और वह हमारा कही मुर्दा घर मई लाश सर रहा होता.

लल्लू hi तो था जिस ने हम लोगो को बचा लिया.

रवि काका- ऐसा क्या हुआ था वह पापा.

कुम्भ मई क्या हुआ था ये अभी किसी को पता नहीं था सिवाए सुनील क.

रघुवीर जी अपने बेटे को गारी मई सुबह स्टेशन से आते समय hi बता दिए थे.

अनिल- मई बताता हु क्या हुआ था हमारे साथ.

हुआ ये की कुम्भस्नानं करने क बाद कल हम लोग आ रहे थे की अचानक बड़ी तेज किसी कारन से भगदड़ मच गई.

मुझे तो पता भी नहीं चला. लोगो को जिधर जगह मिलता उधर को भाग रहे थे.

उस भगदड़ को देख क्र मई ठगा सा खड़ा रह गया था लेकिन लल्लू ने बहादुरी दिखा क्र पापा और ऋतू क साथ मुझे हम तीनो को बचा क्र उस भगदड़ से एक गली मई ले आया और वह दिवार से चिपका क्र हमे खड़ा हो गया.

काफी देर बाद जब भगदड़ काम हुआ तब हम लोगो को ले क्र ये सुरक्षित धरमसाला तक आया.

हम तीनो को कल इसी ने अपने सुख बुझ से बचाया था.

लड़किया जो सुनील काका क गुस्से क दर से कमरे मई छुप गई थी वो एक एक क्र निकल क्र बहार आ गई और लल्लू क सामने कान पकड़ क्र कड़ी हो गई.

रोमा- मुझे माफ़ क्र दो भाई. मुझे नहीं पता था की तुम इतने अच्छे भाई हो मेरे. पता नहीं अभी मुझे क्या हो गया था की मई तुम्हे मर बैठी.

कोमल- मुझे भी माफ़ क्र दो भाई. मैंने भी तुम्हे मारा.

लल्लू- नहीं मई तुम लोगो से बात नहीं करूँगा. तुम सब से कटती हु मई.( लल्लू बच्चो की तरह रूठता हुआ बोलै)

सुनील- आगे से कभी मैंने लल्लू को इस तरह कभी रोटा देखा या किसी ने मेरे बेटे को रुलाने की कोसिस की तो वो दिल उसका इस घर मई आखरी दिन होगा.

चल बीटा बहुत जोर की भूख लगी है. आ जा खाना कहते है.

लल्लू अपने प्यारे काका की बात कभी नहीं करता था.

लल्लू- काका मेरे कपडे छोटे हो गए है.

सुनील- हेय. एक दिन मई कैसे छोटे हो गए. और ये तेरे पीठ पर क्या है.

लल्लू- wo...wo टैटू है.

रवि काका- वह, तो तुम्हे ये सब भी पता है. टैटू कहा बनवा लिया तुमने.

लल्लू- wo...wo कुम्भ मई.

सुनील- ाचा ाचा चल पहले खा ले फिर मई तुम्हे ले क्र बाजार चलूँगा. वह नए कपडे ले लेना.

फिर सब खाना खाने बैठ गए. खाना खा क्र लल्लू वही टीशर्ट पहन लिया.

फिर लल्लू काजल क कमरे मई जा क्र लेट गया.

मर्द लोग खाना खा क्र चले गए तब औरतो ने अपने लिए खाना निकल क्र लड़कियों क साथ बैठ गई.

काजल- क्यू मारा था अपने भाई को तुम लोग.

सोनम- wo...wo..kaki रोमा और कोमल पढ़ रहे थे की भाई आ क्र किताब पलट दिया इसी लिए इन दोनों को गुस्सा आ गया तो दोनों ने डाट दिया था.

लल्लू जो ka.re मई वही लेता था

लल्लू- झूठ बोलती है दीदी. झूठ बोलना बुरी बात है. रोमा और कोमल दीदी पढ़ नहीं रही थी. मई दीदी को पुकारता हुआ जा रहा था कमरे मई तो सोनम दीदी कपडे बदल रही थी.

सोनम दीदी सिर्फ छोटी पेण्ट पहने थी इसी लिए दीदी ने मारा की दरवाजा बजा क्र क्यू नहीं आया.

माँ- हु. बीटा तुम्हे दीदी क कमरे मई ऐसे नहीं जाना था न.

लल्लू- लेकिन माँ मई आवाज देता जा तो रहा था और मई भी तो नंगा hi था न उप्पेर से. आप ने hi तो मुझे दीदी क पास भेजा था. तो मई क्या कृ.

ऋतू- कोई बात नहीं. सब ने सुन लिया है न. आगे से अगर इसे किसी ने रुलाया तो तुम सब क हिटलर काका सब को घर से बहार निकल देंगे.

तो ध्यान रखना इस बात का.
 
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