Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 13 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

मर्द का बच्चा. अपडेट 73.

वो दिन तो इन लोगो को तयारी मई hi निकल गया.

दूसरे दिन सुबह जल्दी उठ क्र लक्ष्मी, लल्लू और बुआ तैयार हो क्र नास्ता क्र सब सामान गाड़ी मई रख रहे थे.

सिबा कोमल लोग आज बहुत उदाश लग रही थी.

लक्ष्मी भी आज अपने घर को छोड़ क्र यहाँ से अपने ससुराल अपने पति क घर जा रही थी.

रह रह क्र लक्ष्मी की आँखे भर आती थी.

आज फिर एक बार उसे अपने माँ बापू की बहुत याद आ रही थी.

सब से छुपा क्र अपने आँखों क आँशु को साफ़ क्र लेती थी.

थोड़ी देर मई ये लोग जाने क लिए तैयार थे.

सिबा- बीटा तुम्हारी बहुत याद आएगी. वह जा क्र हम सब को भूल मत जाना. डेली कॉल करते रहना.

सिबा लक्ष्मी को गले लगा क्र रट हुए उसे समझा रही थी.

लक्ष्मी- बजी मुझे भी आप लोगो की बहुत याद आएगी. मई डेली आप सब को कॉल करुँगी.

लक्ष्मी सिबा क आँखों से आंसू साफ़ करती बोली.

कोमल- लक्ष्मी जब भी दिल करे जीजू क साथ यहाँ आ जाना. हम सब तुम्हारा इंतजार करेंगे.

लक्ष्मी- जरूर कोमल दी. हम जरूर आएंगे.

सकीना- जा बीटा अब वही तुम्हारा घर है. वही तुम्हारे माँ बापू है. सब का आदर और सम्मान देना. सभी का सेवा करना. हम सब का नाम रोशन करना.

सब से मिल क्र लक्ष्मी एक नजर अपने उस आसियाने को देख अपने माँ बापू की यादो को महसूस करती गाड़ी मई जा बैठी.

लल्लू और बुआ पहले hi सब से मिल चुके थे.

लक्ष्मी क बैठते hi लल्लू सब को हाथ हिला क्र बे कहता गाड़ी आगे बढ़ा दी.

शाम हो गया था इन्हे गौण पहुंचते पहुंचते.

घर क आगे जैसे hi ये लोग पहुंचे, गाड़ी की आवाज सुन क्र सभी बहने दौड़ती हुई दालान से बहार आ कड़ी हुई.

लक्ष्मी सब को पहले hi कॉल क्र बता चुकी थी की वो लोग सैम तक घर पहुंच जाएंगे.

सभी लड़किया लक्ष्मी को घेरे कड़ी थी.

लल्लू चुप चाप उतर क्र डिक्की से सारा सामान निकल आँगन की और चल दिया इन लोगो को छोड़ क्र.

इधर सभी लड़किया वही लक्ष्मी और बुआ से सभी जानकारी लेने लगे.

वह मन लगा या नहीं, आने का मन क्र रहा था या अभी और रहना था.

बुआ से तो छोटी सैतान चिमटी हुई थी.

" बुआ वह से मेरे लिए क्या लाये हो. भाभी क्या क्या शॉपिंग की है वह पर मेरे लिए." गौरी लगातार बुआ को चिमटी पूछ रही थी और बुआ गौरी की आँखों की चमक और उसका उत्शाह और ख़ुशी देख क्र गुस्से जा रही थी.

सोनम- बस क्र बीटा. पहले लक्ष्मी और बुआ को आँगन तो इ चल फिर इत्मीनान से पूछ लेना जो पूछना हो.

रानी- अभी नहीं. पहले माँ आरती ले क्र आ रही है भाभी क लिए. फिर हम सब आँगन चलेंगे.

ये लोग वही खड़े हो क्र बाटे क्र रही थी.

सब एक एक क्र अपनी प्यारी छोटी भाभी से मिली तब तक रागिनी काकी क साथ काजल और शालिनी काकी भी आ गई आरती ले क्र.

लक्ष्मी इन लोगो को देख क्र सरमाती हुई सब से अलग हो क्र उन तीनो क पेअर छू क्र प्रणाम की.

तीनो माँ लक्ष्मी को प्यार क्र उसका आरती उतर क्र बुआ क साथ आँगन लायी.

लक्ष्मी को रानी गौरी और रोमा पकड़ क्र अपने साथ अपने कमरे मई ले आई.

" Bhai...bhai." गौरी दरवाजे आवाज देता लल्लू क कमरे मई आ गई.

लल्लू सारा सामान आँगन मई रख क्र अपने कमरे मई आ क्र नहाने की तयारी क्र रहा था.

वो उप्पेर क कपडे खोल क्र अब अपना पेण्ट खोल रहा था.

तब तक गौरी आवाज देती सामने आ गई.

लल्लू- क्या बात है सैतान की खला.

गौरी तो लल्लू को उप्पेर से नंगा देख क्र उस क चमकते गठीले सरीर को देखने मई hi खो गई.

लल्लू जब गौरी को कही और खोया देखा तो पेण्ट खोलना छोड़ क्र वैसे hi उसके सामने जा खड़ा हुआ.

लल्लू- क्या हुआ कहा खो गई. कोई सांप देख लिया क्या.

लल्लू गौरी का कन्धा पकड़ क्र हिलता हुआ बोलै.

गौरी लल्लू की साडी बात तो सुनी नहीं और लास्ट मई सांप का नाम सुन क्र उछलती हुई लल्लू क कंधे को पकड़ क्र झूल गई.

लल्लू झट से गौरी को कमर से पकड़ लिया.

गौरी तो लल्लू क साइन से लगती hi किसी और दुनिया मई खो गई.

लल्लू गौरी की पतली कमर को अपने बहो मई घेरे उसके मोठे बहार को निकल रहे गोल नितम्ब क निचे अपना हाथ लगा क्र सही से अपने गॉड मई उठा लिया.

ऐसा करते hi दोनों क बदन मई एक चिंगारी सी छूट गई.

लल्लू जब गौरी को मांशल नितम्ब से पकड़ क्र उठाया तो गौरी की छाती लल्लू क साइन से रगड़ खता हुआ उप्पेर को हो गई.

जिस से एक तो गौरी की कठोर 32 की चूचिया लल्लू क साइन से लग क्र डाब गया और दूसरा लल्लू क होठ गौरी क गले से जा लगा.

दोनों क मुँह से एक सिसकारी निकल गई.

लल्लू- क्या हुआ दी. ऐसे बचो की तरह क्यू कूद क्र चढ़ गई मेरे गॉड मई.

लल्लू गौरी क गले मई अपना नाक रगड़ता हुआ बोलै.

गौरी अभी एक फ्लावर की प्रिंटिंग वाली वाइट फ्रॉक पहनी थी.

लल्लू क उप्पेर कूद क्र उस ने अपने दोनों पैरो को कैची बना क्र लल्लू क कमर मई लपेट ली थी.

लल्लू गौरी को सँभालने क लिए जो हाथ लगाया था निचे वो बेखयाली मई आधा फ्रॉक क अंदर भी चला गया था जिस कारन गौरी तो दूसरी दुनिया मई hi पहुंच गई थी.

जैसे hi अपने नंगे नितम्ब पर पहली बार किसी हाथ का छुवन महसूस की वो कम्पटी हुई अपना अमृत बहा दी.

लल्लू क सर को अपने गले से चिपकाये उस से चिमटी हुई गौरी गहरी सैश लेती हुई अपनी हालत दुरुस्त करने मई लगी थी.

पहले भी एक दो बार रानी क साथ छेद चढ़ क्र चुकी थी लेकिन अभी जो लल्लू क संसर्ग मई आ क्र महसूस की वो तो वर्णन करने योग्य था hi नहीं.

गौरी को यु संत देख क्र लल्लू अपना सर उठा क्र उसके चेहरे की और देखा तो गौरी अपनी आँखे बंद किये उस आनंद को दिल की गहराई से महसूस क्र रही थी.

लल्लू- दी क्या हुआ. आप ठीक तो हो न.

लल्लू प्यार से गौरी क एक गाल को चुम क्र बोलै.

गुजरी अपने गाल पर लल्लू क होठो का गीलापन महसूस क्र सरमाती हुई अपनी पकड़ ढीली क्र दी.

लल्लू जब देखा की गौरी का चेहरा बिलकुल लाल हो रखा है तो वो घबरा गया.

लल्लू- क्या हुआ दी. आप बोलती क्यू नहीं.

गौरी- कुछ नहीं. साप कहा है.

गौरी नजरे नीची किये सरमाती हुई बोली.

लल्लू- कौन सा सांप.

लल्लू आस्चर्य से गौरी को देखता बोलै.

गौरी- तुम hi तो कह रहे थे की कमरे मई सांप है.

लल्लू अपने हाथ से सर पर मरता हुआ हुस्ने लगा.

लल्लू- मैंने आप से पूछा था की आप ने कोई samp.dekh लिया है क्या जो कुछ बोल नहीं रही थी.

गौरी- यु नंगु पंगु रहोगे तो इस मई मेरा क्या कसूर है.

गौरी लजाती हुई लल्लू क कंधे पर एक चपत लगाती बोली.

लल्लू- वो मई नहाने जा रहा था जब आप आई थी. बताइये क्या बात है.

गौरी- मई भी चालू क्या साथ मई.

गौरी फ्लो फ्लो मई बोल गई.

लल्लू- क्या….

गौरी- me...mera मतलब था की आज भाभी हमारे साथ सोयेगी तो तुम अपना देख लो. मुँह बहुत जल्दी फूल जाता है न तेरा. इस लिए बोल रही हु पहले hi.

लल्लू- कोई बात नहीं दी. आप सब जो कहेंगे वही होगा. मई आप सब को नाराज क्र सकता हु क्या.

गौरी आगे बढ़ क्र लल्लू क साइन पर ऊँगली चलती हुई बोली.

" ये बॉडी सदी कब ऐसा मजबूत बना लिया."

लल्लू- अब आप जा रही हो या नहीं. मुझे नहाना है.

गौरी- मई क्या तेरा हाथ पकड़ राखी हु. जा नाहा ले. बड़ा भाव खता है.

गौरी मुँह टेढ़ा क्र बोली.

लल्लू गौरी को वही छोड़ नहाने क लिए वाशरूम मई चला गया.

" मई कुछ मदद क्र दी क्या."

गौरी दरवाजे क पास आ क्र बोली.

लल्लू- ठीक है दी आ जाओ. जरा पीठ पर साबुन लगा देना.

लल्लू जनता था की गौरी दी मजाक क्र रही है तो वो भी उसके मजाक का हिस्सा बनता हुआ बोलै.

गौरी- बड़ा आया साबुन लगाने वाला.

गौरी वह से मुस्काते हुए अपने कमरे मई चली गई.

यहाँ कमरे मई सभी बहने लक्ष्मी को घेरे हुए बैठे थे.

सोनम- क्या बात है बन्नो. आने का मन नहीं क्र रहा था क्या अपने यहाँ से.

मीनू- मन कैसे करेगा दी. वह पति देव भी तो साथ मई थे. कितना मन लगता होगा वह. कोई हम जैसा सैतान ननद भी तो नहीं होगा जो परेशां करे.

लक्ष्मी- कैसी बात क्र रही हो आप सब. आप सब क बिना तो जैसे मई प्राण हिन् हो गई थी. यहाँ मई ज्यादा दिन तो रही नहीं लेकिन जो भी दो चार दिन रही उस मई hi मुझे आप सब से इतना प्यार मिला की मई अपने माँ बापू क खोने का जो गम था वो भी भूल गई. मीनू दी आप सब की सैतानी hi तो इस घर की खुशिया है.

सोनम- हमारी लक्ष्मी भी अब बड़ी हो गई है. देखो कैसे बड़ी बड़ी बाटे क्र रही है.

लक्ष्मी- वक्त सब करवा देता है दी. वैसे मई सीधा यही आ गई हु. चलिए थोड़ी देर माँ सब से भी मिल लेता हु न.

गौरी- मैंने आप क पति देव को बता दिया है. अभी आप हम सब क साथ hi रहेंगी.

कोमल- लो आते hi सुरु हो गया फिर से जुदाई.

कोमल हस्ते हुए लक्ष्मी से बोली.

फिर सभी बहने वह से लक्ष्मी क साथ आँगन मई आ गई जहा महिला मण्डली बुआ को बैठाये खिचाई क्र रही थी.

बुआ- अच्छा हुआ तुम लोग आ गए. देखो लक्ष्मी बीटा कैसे तुम्हारी सैश की गर्मी छड़ी है.

बुआ इन लोगो को देख क्र रहत की सैश लेती बोली.

ऋतू- हमारी बेटी आ गई नहीं तो अभी तुम्हे बताना hi पड़ता की वह कितने केले खा क्र आई हो और किस किस का खाई हो.

ऋतू काकी लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र अपने पास बैठती बोली.

रागिनी- इतने लोग थे यहाँ लेकिन मेरी लक्ष्मी बेटी क न होने से सुना हो गया था ये घर.

वही बैठी रागिनी काकी प्यार से लक्ष्मी क सर पर हाथ से सहलाती बोली.

गौरी- हम सब भी यही है. कभी हम से भी इतने प्यार से बात क्र लिया करो.

शालिनी- ये लो ये भी यही है. मई तो सोच रही थी तू अपने मायके गयी है.

गौरी- माँ…

गौरी पेअर पटकती हुई मुँह फुला क्र रूठने का लटक करती एक और हो गई.

काजल- नहीं रे, तू तो हमारी गुड़िया है. आ जा तू भी यहाँ बैठ अपने छोटी भाभी क पास.

रागिनी- रानी देख जरा तेरी बड़ी भाभी कहा है. लगता है उसे पता hi नहीं चला की लक्ष्मी और बुआ लोग आ गई है.

रानी वह से फर्स्ट फ्लोर पर राघव क कमरे की और चल दी.

वह उप्पेर राघव अपनी बीबी क साथ बैठा हुआ था.

रानी- भैया छोटे आ गया है भाभी और बुआ क साथ.

राघव तुरंत उठ क्र निचे चल दिया.

भाभी- कब आये ये लोग.

भाभी उठ क्र अपने बालो को आईने मई देख क्र सही करती बोली.

रानी- अभी थोड़ी देर पहले hi आये है तीनो.

दोनों साथ मई निचे आ गए वही जहा सब बैठे हुए थे.

राघव- ललित कहा है दिख नहीं रहा.

गौरी- अभी भाई नहाने गया है. आ जाएगा अभी नाहा क्र. मैडम क बिना उसे कहा अकेले कमरे मई चैन मिलेगा.

यहाँ भी गौरी लक्ष्मी की तंग करने का मौका नहीं छोड़ी.

लक्ष्मी सरमाती हुई सर झुका ली.

ऋतू- तुम मेरे बहु को तंग करना बंद क्र दे नहीं तो तुम्हारा खाना बंद करदूंगी मई.

गौरी- लो एक और आ गई. इन्हे भी कमरे से निकलने का मन नहीं करता है.

काजल- मर खायेगी सैतान तू. किसी को तो छोड़ दे.

काजल आगे बढ़ क्र अपने बड़ी बहु को प्यार करती ला क्र अपने खत पर बैठा ली.

रोमा- अब तो दो दो बहुए आ गई है इन लोगो की. हमे कौन पूछता है अब. देखो कब से खड़े है हम कोई एक बार भी नहीं कहा बैठने को.

बुआ- तुम लोग मेरे पास आ जाओ. मई हु न.

बुआ रोमा और कोमल का हाथ पकड़ क्र अपने दोनों और बैठा ली.

कोमल- हमे तो बस बुआ hi प्यार करती है और तो कोई प्यार करता नहीं हमे.

शालिनी- है है सही कह रही है तुम लोग. इतनी बड़ी तो अपने आप hi हो गई तुम सब.

लल्लू- कौन कितना बड़ा हो गया माता राम. किसकी बात क्र रहे हो.

लल्लू आ क्र अपने भाई से गले लगता बोलै.

सोनम- आ जा अब यहाँ बस तुम्हारी hi कमी थी.

लल्लू- अब तो कमी पूरा हो गया न. अब जल्दी से कुछ खिला दी. इन लोगो ने तो रस्ते मई कही कुछ खाने hi नहीं दिया. जब भी बोलता था तो एक hi जबाब होता था की घर चल क्र hi खाएंगे अब तो. मेरा तो बुरा हाल है भूक से.

लक्ष्मी- माँ जी मई भी फ्रेश हो लेती हु जरा.

बुआ- मई भी चलती हु बीटा. इन बुधियो ने मुझे भी पकड़ रखा था तब से.

ऋतू- तो तुम कहा मेरे बेटी क साथ चल दी. इधर मेरे कमरे मई जा क्र क्र ले जो करना है तुम्हे.

बुआ- अरे मई तो भूल hi गई थी लेकिन मेरे कपडे तो उसी रूम मई है.

लक्ष्मी- कोई बात नहीं बुआ. आप अपने रूम मई फ्रेश हो लीजिये मई दीदी लोगो क रूम मई चली जाती हु.

बुआ- ये अच्छा रहेगा. आ जाओ नहीं तो ये लोग फिर कुछ सुना देंगी मुझे.

बुआ लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र वह से खींच क्र उठती बोली.

रागिनी- तू बैठ बीटा. मई लती हु तुम्हारे लिए खाना.

काकी लल्लू को देख क्र बोली.

सोनम- चची आप बैठिये. मई लती हु भाई क लिए खाना.

काजल- वह, आज सूर्य किधर से निकल है भाई. महारी आज किचन मई जा रही है.

सोनम- छोटी चची भाई क लिए तो मई कुछ भी क्र सकती हु.

ऋतू- वह बीटा. हम सब से प्यारा भाई hi है तुम्हारा.

गौरी- वो तो है hi. अभी कैसे आप छोटी भाभी को अपने पास बैठा ली थी. हम से तो एक बार बैठने को भी नहीं कहा. भाई hi तो है जो हम सब का कितना ख्याल रखता है.

शालिनी- तू चुप हो जा भाई की चमची. मई देख रही हु आज कल तू बहुत बोलने लगी है.

लल्लू- माते आप मेरी प्यारी दीदी को क्यू दन्त रही है वो ऐसे hi मजाक hi तो क्र रही है.

काजल- लो आ गया अपनी बहन को बचने.

काजल आंख नचा क्र इसरा करती शालिनी से बोली.

ऋतू- इनके बिच मत पारो कोई. ये लोग ऐसे hi है. हम सभी को hi आपस मई लाडवा देगी ये लोग.

गौरी वह से उठ क्र लल्लू क पास चली गई.

लल्लू- ये तो मेरी प्यारी सैतान दीदी है. इसी से तो हमारा घर थोड़ा खुशाल रहता है.

लल्लू गौरी को अपने से लगता बोलै.

गौरी इस मौके को कैसे छोड़ती वो भी सब से बचा क्र लल्लू से चिपक गई और गाल पर एक किसी दे क्र हस्ती हुई अलग हो गई.

तब तक सोनम लल्लू क लिए खाना ले क्र आ गई.

लल्लू सोनम क हाथ से खाना लेने को हाथ बढ़ाया तो सोनम हाथ दूर क्र ली उस से.

सोनम- चुप चाप यहाँ खटिया और बैठ जाओ. मई खिला रही हु न. तुम्हारे हाथ गंदे करने की क्या जरुरत है.

लल्लू मुसकुडता हुआ वही खटिया पर एक और बैठ गया.

सोनम अपने हाथ से उसे खिलने लगी.

रहब- कभी कभी मुझे भी khila.diya करो.

रोमा- आप तो अपनी मैडम क हाथ से hi कहते हो. वही आप को खिला सकती है.

है अगर कल हमे शॉपिंग पर ले चलने का वडा करो तो हम सब आप को ऐसे hi खिलाएंगे.

राघव- ओह्ह तेरी, ये तो बड़ा महंगा सौदा है.

रानी- वही तो बात है. आप को हम सब का प्यार सईदा लगता है लेकिन मेरे छोटे भाई क साथ ऐसा नहीं है. जब भी जिस किसी काम क लिए बोलो ये कभी मन नहीं करता.

राघव- ये बात तो है. तभी तो ये सब का प्यारा है.

लल्लू तो सोनम क प्यार मई खोया हुआ मजे से उसकी नशीली आँखों मई डूबा गपागब खाये जा रहा था.

कभी कभी तो सब से बचा क्र सोनम की उंगलियों को भी मुँह मई ले क्र चूस लेता था.

सोनम लल्लू की सररतो का मजा लेती उसे खाना खिला क्र झूठा बर्तन लिए वापस किचन क सिंक मई रखने कहली गई.

लल्लू- भाभी आप कब आई अपने गौण से.

भाभी जो कब से लल्लू को सनम क हाथ से खता देख रही थी.

भाभी- अब याद आई आप को मेरी.

कोमल- पेटू है ये भाभी. पेट क आगे इसे कोई नहीं दीखता.

लल्लू हस्ता हुआ भाभी क पास आ क्र बैठ गया.

लल्लू- कैसे है आप क घर मई सब. माँ पिता जी. वह जा क्र हमारी बुराई तो नहीं की कुछ.

भाभी- सभी अच्छे है. आप को भी बुलाये है और बुराई तो मई इतना सारा की हु आप सभी भाई बहनो की.

भाभी अपने दोनों हाथ फैला क्र बोली.

लल्लू तो भाभी क हाथ फ़ैलाने से उनके साइन से जो साडी हैट गई थी उसी मई खो गया.

कैसे हुए ब्लाउज मई से झटके गिरे गोर संतरे का कुछ हिस्सा देख क्र लल्लू क मन मई तितलियाँ ूर्णे लगी.

लल्लू झट से अपनी नजरे वह से घुमा लिया.

लल्लू- देखो लो दीदी. भाभी मेरे साथ साथ तुम लोगो की भी शिकायत लगाई है अपने माँ पिता जी से.

रोमा- कोई बात नहीं भाई. दो चार दिन की hi बात है. बच क्र कहा जाएंगी ये. भाई को एक बार जाने दे फिर कौन बचाएगा हम से इनको.

भाभी- क्यू यहाँ चार चार माँ है हमारी. हमे किस का दर.

काजल- शाबाश.. अब आया न कोई टक्कर का. इन लोगो का भी मन बड़ा बढ़ गया था. भोली भली लक्ष्मी को तो अपने चिकनी चुपड़ी बातो मई फसा ली लेकिन अपने बड़ी भाभी को फसाओ तो जणू.

कोमल- ये दासी फसे hi है माँ. दो चार दिन मई भाई चले जाएंगे तो फिर हम लोग hi मिलेंगे इन्हे.

ऋतू- सोनम बीटा जरा अपने भाभी और बुआ को भी दे दो खाना. आज तुम ने तो दिल खुश क्र दिया मेरा.

रोमा- देख रहे हो दीदी. माँ कैसे मक्खन लगा रही है तुम्हे.

सोनम- चुप क्र तू. इधर आ क्र मेरी मदद क्र.

रोमा मुँह बनती सोनम की तरफ रसोई की और चल दी.

इधर गौरी रानी और कोमल का हाथ पकड़ क्र अपने कमरे की और बढ़ गई.

शालिनी- देख रही हु मई तुम्हे. कितनी होसियार बन रही है तू.

रागिनी- क्या हुआ क्यू उसे दांते जा रही है आज.

शालिनी- इसे मई अब किसी दिन बहुत मरूंगी. रोमा को किचन मई जाता देख क्र यहाँ से अपने दोनों साथी को हाथ से पकड़ क्र चुपके से निकल गई है.

मीनू- आप भी क्या क्या सोचती रहती हो चची.

शालिनी- चुप रह तू. जिस उम्र मई तुम हो न वो मई कब का पर क्र चुकी हु. माँ हु तुम सब की. सब जानती हु तुम लोगो की करतूत.

" मीनू दी, जितना देर वह रहोगे वो लोग ऐसे hi दिमाग ख़राब करती रहेंगी. आप भी वह से आ जाओ तो वो खुद चुप हो जाएंगी."

गौरी कमरे से बहार निकल क्र बोली.

शालिनी- ठहर जा तू आज. अभी तुम्हे मजा चलती हु.

लल्लू- Are...are काकी कहा चली आप. मई लता हु न पकड़ क्र उसे.

शालिनी- नहीं आज छोड़ तू. मई जरा इस लड़की को पहले दो थप्पड़ लगा लू. बड़ी जुबान चलने लगी है कैची की तरह. घोड़ी की जैसी हो गई है लेकिन इसे पता hi नहीं किस से क्या बोलना चाहिए.

लल्लू आगे बढ़ क्र पीछे से शालिनी काकी को बहो मई भर लिया जो गौरी को मरने कमरे की और बढ़ रही थी.

लल्लू- काकी, वो अभी बची है. वैसे hi सररत क्र रही है. किसी गैर को थोड़े कभी कुछ बोली है जो आप इतना गुस्सा क्र रहे हो.

शालिनी लल्लू क बहो क घेरे मई से छूटने क लिए मचल रही थी.

लल्लू शालिनी क पीछे से चिपका हुआ था.

शालिनी क हिलने क कारन उसकी उठी हुई नितम्ब लल्लू क डंडे पर रगड़ मर रहा था.

लल्लू को बड़ा मजा आ रहा था. वो आगे को पकडे अपने हाथ को नाटक करता हुआ धीरे धीरे शालिनी क 34 की चूचियों क निचे ले आया. वह इसे शालिनी क चूचियों की गर्माहट महसूस हो रही थी उसके हाथ पर. पीछे से अब वो भी अपना डंडा हलके से कभी कभी घिष देता था जो शालिनी क नितम्ब की रागरहित से हल्का खड़ा हो गया था.

लल्लू- इस उम्र मई आप भी अपने माँ बापू क घर मई ऐसे hi सैतानी करती होंगी.

शालिनी- नहीं. वह तो माँ पिता जी की दर से हमारी जबान नहीं हिलती थी कभी.

लल्लू- तो अपनी बेटी को भी वैसे hi दबा क्र डरपोक बना क्र रखना चाहती है आप. जो अपनी मर्जी से कभी जिए hi न. क्या बोल दिया ऐसा जो आज आप इतनी गुस्से मई हो. उसका सारा परिवार है ये. वो यहाँ हुसेगी बोलेगी नहीं तो कहा अपना सुख मस्ती पूरा करे. कभी कही घर से बहार नहीं जाती. कोई दोस्त नहीं है. हम सब hi तो है. अगर वो हम सब को कुछ कह भी दिया तो क्या हुआ. कल को जब बूढी होगी तो यही सब तो यदि रहेगी उसके पास.

लल्लू की ऐसी बाटे सुन क्र शालिनी का गुस्सा साबुन क झाग की तरह संत हो गया.

लल्लू शालिनी को पकड़ क्र खटिया पर बैठा दिया.

वही पास मई माँ और दोनों काकी भाभी क साथ बैठी देख रही थी मुसकुडते हुए.

काजल- क्यू चल दी थी उसे मरने जब पता है की ये अपने बहनो को गुस्सा भी नहीं होने देगा किसी को.

शालिनी- क्या करू. देख रही थी न तुम कैसे कुछ भी बाके जा रही थी.

ऋतू- कोई बात नहीं. अभी उसी सब क खेलने मस्ती कर्नल दिन है. जाने दे मजे करने दे. तुम अपना गुस्सा संत क्र.

लल्लू वह से उठ क्र बहनो की कमरे मई आ गया.

गौरी लल्लू को देख क्र दौर क्र उसे गले से लगा ली.

गौरी- थैंक यू भाई. तुम बहुत अच्छे हो.

गौरी लल्लू क गाल को चूमती बोली.

लल्लू- क्यू तंग क्र रही थी आप काकी को.

गौरी- बड़ा मजा आता है जब माँ गुस्सा करती है तो.

सोनम- आज भाई बचा लिया तुम्हे. हर बार नहीं बचा पायेगा वो. आगे से ऐसे मस्ती मत करना नहीं तो मर खा जाओगी.

गौरी- मई भी देख क्र करती हु हमेसा नहीं करती. जब भाई होता है तभी थोड़ी सी कर लेती हु.

गौरी लल्लू से चिमटी हुई बोली.

रोमा- भाई कोई चीनी नहीं है जो चिति की तरह चिपकी हुई है अब हो गया छोड़ दे उसे.

गौरी मुँह बनती हुई हैट गई लल्लू को छोड़ क्र.

रोमा आगे बढ़ क्र लल्लू क गले से लग क्र उसके छाती मई अपना चीन रगड़ती हुई उसे चुम ली गाल को.

गौरी- मुझे हटा क्र अब तुम क्या क्र रही है.

रोमा- मई अपने हिस्से का ले रही हु. तुम पहले hi अपना कोटा पूरा क्र चुकी हो.

मीनू- बस बस बहुत हुआ. अब मेरी बरी है. वैसे भी आज भाभी यही सोएगी तो…

गौरी- तो मई आज भाई क पास सो जाउंगी.

गौरी बिच मई hi मीनू की बात काट क्र बोली.

मीनू गौरी का चेहरा देखने लगी. आज वो सोच रही थी लल्लू क साथ सोने को लेकिन गौरी ने बिच मई कबाब मई हड्डी का काम क्र दिया.

गौरी मीनू को अपनी और देखती प् क्र जीभ निकल क्र चिढ़ाने लगी.

लल्लू- अच्छा मई जरा घूम क्र आता हु. अब आप कोई सैतानी मत करना.

लल्लू गौरी से बोलता हुआ वह से बहार निकल आया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 74.

एक लम्बी चौड़ी अंडरग्राउंड जगह. जहा जमीं क निचे बहुत सफाई से एक बेस बनाया गया था.

उस बेस मई अत्याधुनिक व्यवस्था था.

वही बेस क एक हिस्से मई अभी एक मीटिंग चल रही थी.

वह मीटिंग क हॉल मई एक बड़े से मेज क चारो और करीब 12 कुर्सियां लगी हुई थी.

अभी साडी कुर्सियां फुल थी. सभी विदेशी थे.

उन्ही मई एक कुर्सी पर वो बॉस भी बैठा हुआ था. सामने hi उसके मेज पर वो करामाती बॉक्स भी रखा हुआ था.

इस समय वह बैठे सभी की कौतुहल भरी नजर उस बॉस पर hi तिकी हुई थी.

बॉस अपने चेयर से खड़ा हुआ.

बॉस- मेरे प्यारे साथियो. अभी कुछ महीने पहले मेरे हाथ एक नायब चीज लगी है. इसकी कई महीने जाँच परख करने क बाद मई यहाँ आप सब क समक्ष उपस्थित हुआ हु. मई जैसा सोच रहा हु अगर वो हो गया तो हमारा ये संस्था इस वस्तु क मदद से दुनिया मई राज करेगा. हम सब इस दुनिया क नए भगवन होंगे.

उन मई से एक- ऐसा क्या मिला है आप को.

बॉस- ये…

बॉस उस बॉक्स को उठा क्र सब को मुसकुडता हुआ दिखने लगा.

एक दूसरा अंग्रेज- क्या है इस मई ऐसा की आप इतने दावे से कह रहे है की हमारा संस्था उन उचाईयों पर पहुंच जाएगा जिस का हम सपना भी नहीं देखे थे कभी.

बॉस- मई आप सब को शार्ट मई बताता हु.

इंडिया मई चार जगह महाकुम्भ लगता है. ये बॉक्स हमे बता रहा है की इस बार का महाकुम्भ बहुत खास है ककी इस बार उस महाकुम्भ मई अमृत निकलने वाला है और हमारा प्लान होगा उस अमृत को अपने कब्जे मई लेना. अगर एक बार वो हमारे कब्जे मई हो गया तो हम भी अमर हो जाएंगे और उस से मेडिसिन बना क्र हम दुनिया क लिए गॉड बन जाएंगे. सब हमारी पूजा करेंगे.

" लेकिन इसकी क्या गारंटी है की ये जो दस्ताबेज है वो सुच बता रहा है." वही बैठे लोगो मई से एक बोलै.

बॉस- ये बिलकुल सुच बता रहा है. ये मुझे अभी दो महीने पहले मिला है और इन दो महीनो मई मैंने इस से रिलेटेड कई बुक्स पढ़ डेल है. जब मई बिलकुल सूरे हो गया हु तभी आप सब क पास इसे लाया हु.

" आप हम से क्या चाहते है मर. क्रीट." एक बुजुर्ग अंग्रेज बोलै.

बॉस जिसका नाम मर. क्रीट है.

क्रीट- मई चाहता हु की हम सब इस मिशन पर मिल क्र काम करे. इस से जो भी मिलेगा ये हमारी संस्था का होगा और उस पर सब का वैसा hi अधिकार होगा जैसा इस संस्था मई हम सब की पोजीशन है.

" ठीक है फिर ये बॉक्स और पेपर दोनों हमारे स्टडी टीम को दे दीजिये. वो अगले दो महीने इन दोनों का स्टडी क्र साडी बाटे देखेगी और अगले मीटिंग जो दो महीने बाद होगा उस मई हमे रिपोर्ट देगी. हम अगले मीटिंग दो महीने बाद करेंगे फिर उस टीम क रिपोर्ट क हिसाब से आगे का प्लान तैयार करेंगे." उन्ही मई से एक बोलै.

बांकी सभी भी इस बात पर सहमत थे तो उन लोगो ने भी मेज थपथपा क्र अपनी इजाजत दी.

फिर वो मीटिंग ख़त्म हो गया.

मर. क्रीट वह सब से लास्ट मई निकले.

वह एक व्यक्ति था जिस ने क्रीट से वो दोनों सामान ले लिया था.

क्रीट बहार निकल क्र आया तो उसके कार क पास hi उसका सेक्युर्टी हेड भी खड़ा था.

उसने कार का दरवाजा खोल दिया.

क्रीट जा क्र गाड़ी मई बैठ गया.

सिक्योरिटी हेड खुद कार ड्राइव क्र रहा था.

हेड- बॉस हम ने जो किया है क्या वो सही है.

बॉस- कुछ सोच रहा था. इस लिए वो जबाब नहीं दिया.

हेड- बॉस क्या ये काम हम खुद नहीं क्र सकते थे.

बॉस- नहीं ये काम किसी अकेले क बस का नहीं. इसके लिए मन पावर क साथ hi पोलिटिकल और इकोनोमिकल पावर भी चाहिए होगा.

ये हम अकेले नहीं क्र सकते थे.

सिक्योरिटी हेड ने फिर कुछ नहीं पूछा था. वो चुप चाप गाड़ी चलता रहा.

इधर लल्लू कमरे से निकल क्र बहार आ गया आँगन मई.

वह राघव अभी भी बैठा हुआ था.

लल्लू- बहिया चलो घूम क्र आते है.

राघव- है चल भाई. तू नहीं था तो मई भी घर से ज्यादा बहार गया hi नहीं.

दोनों फिर दालान पर आये तो वह अभी कोई नहीं थे.

लल्लू- भैया दादू कहा है दिख नहीं रहे है.

राघव- भाई दादू आज पापा क साथ कही गए है. आने वाले hi होंगे वो भी.

लल्लू- कहा चलना है भाई. खेत चले क्या. तीन चार तीन हो गया है पता नहीं छोटे काका अकेले कैसे किये होंगे.

राघव- क्यू भाई मई भी तो यही था. खेत मई भी गया था. जब भी जरुरत होती थी. वैसे तुम बादाम की खेती की क्यू सोचे हो. उस मई बड़ा मगजमारी है क्या तुम क्र लोगे.

लल्लू- आप से किस ने कहा की मई बादाम की खेती करने वाला हु.

राघव- मई तेरा बीज ला दिया हु. वह सेंटर से कॉल आया था तो चाचा मुझे बताये थे.

लल्लू- वह, ये तो बहुत अच्छी खबर है. कब लाये बादाम आप.

राघव- कल लाया था.

लल्लू- कहा रखा है वो.

राघव- यही दालान पर रखा है.

फिर दोनों पैदल hi घूमते हुए खेत की और चल दिए.

खेत मई मजदुर अब काम ख़त्म क्र अपने घर को जाने की तयारी क्र रहे थे.

लल्लू को देख क्र रवि भी उसके पास आ गया.

रवि- कब आये बीटा तुम.

लल्लू- अभी दो घंटा पहले आया हु काका. काम कैसा चल रहा है.

काका- सब बढ़िया है. तुम बताओ वह कैसा रहा सब काम.

लल्लू- सब सही से हो गया वह भी.

काका- अच्छी बात है. वैसे तुम्हारा बादाम का बीज आ गया है. आगे का क्या प्लान है.

लल्लू- घर आएंगे तो फिर रात मई बात करते है काका. पहले तो उसे अंकुर देना है फिर बुआई होगी.

काका- ठीक है.

लल्लू वह थोड़ी देर राघव क साथ इधर उधर घूम क्र फिर अँधेरा होने से पहले घर को आ गया.

घर आते आते हल्का अँधेरा हो गया था.

दालान पर हाथ पेअर दो क्र जब अंदर गया तो वह बड़े काका और दादू बैठे हुए थे.

लल्लू जा क्र दोनों का आशीर्वाद लिया.

बड़े काका- आ गया तू बीटा. कैसा रहा वह का काम.

लल्लू- सब बढ़िया रहा काका. दादू आप कैसे है. कहा गए थे आप.

दादू- मई ठीक हु बीटा. बस जरा इन लोगो ने जो काम सुरु किया है वही देखने गया था.

लल्लू- फिर कैसा लगा आप को.

दादू- अभी तो ठीक है. नया है अभी अभी स्टार्ट किया है तो थोड़ा समय लगेगा लेकिन फिर भी अच्छा है.

लल्लू वही दादू क बीएड पर बैठ क्र उनका पेअर दबाने लगा.

दादू अपने पीछे तकिया को ठीक से लगा क्र बीएड से लग क्र बैठ गए थे.

दादू- तुम लोग लैब आये बीटा.

लल्लू- हम लोग अभी तीन चार घंटे पहले आये है.

दादू- और बताओ, वह कैसा रहा सब.

लल्लू- सब सही हो गया वह भी. मां कल hi चले आये थे. आज हम लोग भी आ गए है. अब कुछ काम करने वाले है जिन्हे बोल आया हु वो वही रह क्र घर की देख भल करेंगे.

दादू- अच्छी बात है. वैसे लक्ष्मी क चाचा ने क्यू मारा था अपने बेटे को. कुछ पता चला था क्या.

लल्लू- पापियों क साथ ऐसा hi होता है दादू. वो सरकारी गबाह बनाने का रहा था तो इसी लिए अपने बेटे को मार क्र भाग गया लक्ष्मी का चाचा.

दादू- बहुत बुरा समय चल रहा है. अपने बेटे को मरने से भी नहीं हिचका वो.

लल्लू- वो पूरी तरह से गलत काम मई hi डूब गया था. तो उसका ऐसा hi अंजाम होना था.

बड़े काका- बीटा फिर लक्ष्मी क चची का क्या हुआ.

लल्लू- मई गया था तो वो पता नहीं कहा चली गई थी वो. वैसे मैंने युसूफ अंकल को बोलै है की आये कभी तो वही रख ले उन्हें और मुझे भी खबर करे.

दादू- ये अच्छा किया तुम ने. उस बेचारी का क्या दोष. अपने पति क चक्कर मई अपने बेटे को भी खो दी है.

तब तक राघव भैया आँगन से सब क लिए चाय ले आये.

दादू- रघु बीटा तुम्हारी छुट्टी कब तक है.

दादू लल्लू को इसारे से पेअर दबाने को मन क्र चाय की और इसरा करते बोले.

राघव- दादू अब ख़त्म होने वाली है. तीन दिन और रह गया है.

दादू- ओह्ह, अब कब छुट्टी मिलेगी बीटा.

राघव- अभी कैसे कहु दादू. अब अगले साल hi आ पाउँगा.

चारो वही बैठे चाय पिटे हुए बात कर रहे थे तभी रवि काका भी आ गए खेत से और शयाम और सुनील भी आ गए बाजार से.

लल्लू वह से उठ क्र आँगन मई इन लोगो क लिए भी चाय को बोल क्र अपने कमरे मई आ गया.

कमरे मई कोई नहीं था. बहनो क कमरे से हस्सी ठहाके की आवाज आ रही थी.

लल्लू बिच वाला दरवाजा खोल क्र देखा तो सभी बहने अपने दोनों भाभी को घेरे बैठी हुई थी.

लल्लू- क्या बात है आप सब को पढाई नहीं करनी है क्या.

सोनम- तुम क्यू हमारा टीचर बन रहा है. आज हमारी छुट्टी है. कल से फिर पढ़ेंगे हम.

गौरी- भाई अभी तो कोई चांस नहीं है आप क मैडम क खली होने का. आज हम दोनों भाभी को यही सुलायेंगे.

लल्लू- कोई बात नहीं दी. मैंने कुछ कहा है क्या.

रोमा- कहा नहीं लेकिन तुम्हारे चेहरे पर बेचैनी दिख रही है.

लल्लू- ठीक है फिर मई भी यही सो जाऊंगा.

रानी- बिलकुल नहीं. बॉयज अरे नॉट अल्लोवेद.

लल्लू- ोककक थें मई आज कही और सो जाऊंगा.

कोमल- सही बात है. बड़ी काकी क पास सो जाना तुम्हे दर भी नहीं लगेगा.

भाभी- क्या मतलब, दर भी नहीं लगेगा.

मीनू- भाई को न रात को अकेले मई दर लगता है सोने मई.

भाभी आस्चर्य से लल्लू की और देखने लगी.

लल्लू मुसकुडता हुआ भाभी को देख रहा था.

भाभी- क्या ये लोग सुच कह रही है.

भाभी को अभी भी यकीं नहीं हुआ था तो लल्लू से hi पूछ ली.

लल्लू मुँह लटकता हुआ गर्दन हिला दिया. अंदर hi अंदर उसे हस्सी आ रही थी.

रोमा- है भाई आप माँ या छोटी चची क पास hi सो जाना जब तक भाभी हमारे साथ रहेगी.

भाभी- नहीं नहीं फिर रात मई लक्ष्मी अपने कमरे मई hi सो जाएगी. तब तक ये बिच वाला दरवाजा खुला hi रखना.

कोमल- ऐसे कैसे सो जाएंगी. आप दोनों आज तो यही सो रही हो. भाई लोग अपने कमरे मई सोये या जहा सोये वो ये दोनों समझेंगे.

भाभी- ललिता भैया आप अपने भैया क साथ hi सो जाना फिर. मई बात क्र लुंगी. आप को दर भी नहीं लगेगा.

सोनम- लेकिन एक और बुरी आदत है इस मई भाभी.

ये रात को सोते समय हाथ पेअर भी बहुत चलता है और खर्राटे भी लेता है.

भाभी थोड़ी देर सोचती रही फिर बोली.

" कोई बात नहीं वो आज सो जाएंगे ललित भैया क साथ.

लक्ष्मी- कोई तंग क्र रहे हो सब मेरी दीदी को.

लक्ष्मी से अब रहा नहीं गया तो वो हस्ती हुई बोली.

लक्ष्मी- दीदी ये सभी भाई बहन मिल क्र आप का पोपट बना रहे है.

भाभी- क्या…. ये सब मिल क्र…..

तभी मई कहु की मेरे हर बात को क्यू काट रहे है. बदमाश तुम सब को अच्छा मजा चखूंगी मई किसी दिन. ये मत समझना मई यहाँ अकेली हु. मेरी छोटी बहन है मेरे साथ.

भाभी लक्ष्मी को गले से लगाती बोली.

लल्लू- मुझे आप सब की मदद चाहिए कल.

लल्लू अपने दीदी लोगो को देखता बोलै.

सोनम- कैसी मदद चाहिए तुम्हे.

लल्लू- कल आप सब सुबह नास्ता करने क बाद मेरा एक काम करना. क्या काम है ये कल बता दूंगा.

रानी- ठीक है भाई.

फिर लल्लू वह से बहार आ गया. एक नजर रसोई की और मारा तो वह माँ और रागिनी काकी खाना बनाने मई लगी हुई थी.

रागिनी- क्या बात है बीटा. भूख लगी है क्या.

माँ- थोड़ी देर रुक जा बस हो hi गया है सब साथ मई खा लेना.

" थक गया होगा मेरा बीटा." शालिनी काकी पीछे से आ क्र लल्लू क बालो को हाथ से बिगड़ती बोली.

लल्लू- मई तो ऐसे hi देखने आया था इधर.

शालिनी- आ मेरे साथ चल. बहुत दिन हो गए तुम से चैन से बात hi नहीं की हु.

शालिनी काकी लल्लू का हाथ पकड़ क्र अपने साथ आँगन मई पैर क निचे लगे खटिया पर बैठ गई.

S.kaki- बता कैसा है तू. आज कल तू भी बहुत उलझ गया है घर परिवार मई. थोड़ी सी भी आराम नहीं मिल रहा तुम्हे.

लल्लू- ऐसा कुछ नहीं है काकी. मई हमेसा आराम hi तो करता रहा हु. अब थोड़ा बहुत काम आता है छोटा मोटा तो क्र लेता हु नहीं तो घर मई hi पड़ा रहता हु.

S.kaki- कहा पड़ा रहता है. अभी लक्ष्मी क यहाँ से आया है. इस से पहले सब ने तुम्हे खेती मई लगा दिक्या था और फिर उस से पहले भी सदी ब्याह क कामो मई लगा रहा.

कभी ढंग से आराम भी किया है.

पहले कभी कोई काम नहीं किया था और अब अचानक से सब को तुम hi दिखने लगे हो काम क लिए. मेरा बीटा. कितना दुबला हो गया है इन भाग दौर मई.

लल्लू- आप माँ हो इस लिए मई आप को दुबला दिख रहा हु. वैसे मई बिलकुल ठीक हु. आप फिक्र न करे. वैसे काकी अब आप सब भी आराम किया कीजिये. घर मई इतने बहने है मेरी सब थोड़ा थोड़ा काम करेगी उसी मई सारा काम हो जाएगा.

S.kaki- नाम मत ले इन सैतानो का. पता नहीं ब्याह क बाद क्या होगा इनका. ये सब तो हमारी नाक कटवायेगी. जब भी किसी काम क लिए कहो तो पढाई का बहाना बना क्र भाग जाती है सब. अपने कमरे से तो निकलती hi नहीं कोई इस तरफ. जब भी खली होंगी तो पीछे की और चली जाएंगी सब. जैसे घर क कामो मई इन लोगो का कोई रूचि hi नहीं है.

लल्लू- आप पदेशन मत हो काकी. मई बात करूँगा इन सब से. आगे से ये लोग आप सब क सभी काम मई मदद करेंगी.

s.kaki- मेरा बीटा. कितना ख्याल है तुम्हे हम सब का. और एक ये मुई सब है जिसे सिर्फ खाना और सोना hi दीखता है.

लल्लू- कोई बात नहीं काकी. इन लोगो को भी तो यही ये सब मिल रहा है. ब्याह क काब कहा इन्हे ये प्यार दुलार मस्ती मिलने वाला.

" चल माँ बेटे का प्यार हो गया हो तो जा सब को बुला ले खाना क लिए." बड़ी काकी आँगन मई सब क लिए खाने का आसान लगाती बोली.

लल्लू एक बार सैलानी काकी क गाल को चुम लिया और उठ क्र दालान की और चल दिया सब को खाने पर बुलाने क लिए.

शालिनी काकी मुसकुडती हुई उठ क्र रसोई मई आ गई अपने जेठानी देवरानी की मदद को.

लल्लू सब को बुला क्र ले आया. सभी लोग दालान पर खाने क बुलावा का hi इंतजार क्र रहे थे.

खाना पीना होने क बाद लल्लू चाट पर टहल रहा था. घनी अँधेरी रात थी.

चाट क एक किनारे लल्लू को एक चिंगारी जलती दिखी.

लल्लू- आप भी यही हो.

राघव- क्या करे भाई. आज बहनो ने तो सजा दे दिया है. मैडम बोल क्र गई है की अकेले सोना और नींद न आये तो अपने भाई क साथ सो जाना.

लल्लू हस्ता हुआ राघव क पास पहुंच गया और चाट क रेलिंग क सहारे खड़ा हो गया.

लल्लू- कब तक की छुट्टी थी भैया.

राघव- बस ख़त्म hi होने वाली है. फैला बड़ी जल्दी ख़त्म हो गया छुट्टी. पता भी नहीं चला.

लल्लू- फिर कब तक आना होगा यहाँ. आप यहाँ होते हो तो बड़ा अच्छा लगता है.

राघव- अब फिर अगले साल आऊंगा. तब तक सब का ऐसे hi ख्याल रखना.

लल्लू- सब तो मेरा hi ख्याल रखते है. मई क्या सब का ख्याल रखूँगा.

राघव- नहीं मेरे भाई. पहले की बात अलग थी. अब तू बड़ा हो गया है. समझदार भी हो गया है. अब तू वो छोटा लल्लू नहीं रहा बल्कि ललित बन गया है. सब तुम्हे मन देने लगे है. चाचा लोग भी अब घर से निश्चिंत हो गए है तेरे कारन.

राघव सिगरेट का आखरी कस लगा क्र बचा हुआ हिस्सा दिवार से रगड़ क्र बुझाता एक और उछाल दिया बहार को.

लल्लू- आप क बिना मन नहीं लगेगा मेरा. यही रहो न आप.

लल्लू राघव का एक हाथ जोर से पकड़ क्र अपने साथ लगता बोलै.

राघव- नहीं रे. ये नौकरी मई पैसे क लिए नहीं करता ये मुझे बचपन से पसंद था इस लिए करता हु. जिस दिन मेरा मन भर जाएगा उस दिन वापस आ क्र यही तेरे साथ रहूँगा. तब तक यहाँ का सब कुछ तेरे जिम्मे.

वैसे मई अभी हु दो तीन दिन तो अभी से उदाश मत हो.

राघव लल्लू को गले लगत बोलै.

" कौन है यहाँ चाट पर." शालिनी काकी चाट पर आ क्र एक और कड़ी थी की इन लोगो की आवाज सुन क्र बोली.

लल्लू- मई हु काकी. भैया भी यही है.

लल्लू राघव क साथ शालिनी की और बढ़ता बोलै.

शालिनी- वही तो कहु. अँधेरे मई किस की आवाज आ रही है. मई तो दर hi गई थी.

राघव- यहाँ चाट पर और कौन आएगा चची. कोई घर का hi होगा न.

शालिनी- बहुत दिनों बाद आई हु न यहाँ उप्पेर. अँधेरे मई दिख नहीं रहा था तो इसी लिए दर गई की कौन आ गया यहाँ. सब तो अपने कमरे मई है.

लल्लू- आज आप यहाँ कैसे काकी.

शालिनी- बस थोड़ा खाना खा क्र टहलने का मन हुआ तो चाट पर hi आ गई. वैसे तुम दोनों अपने बीबियो को छोड़ क्र यहाँ अँधेरे मई क्या क्र रहे हो.

राघव- आज दोनों का क्लास लगा रही है मैडम लोग तो हम दोनों भाई को भी थोड़ा फुर्सत मिल गया आपस मई बात करने का.

शालिनी- लल्लू क कारन नहीं तो मई आज hi सब को सीधी क्र देती. ये तो अपने बहनो क नाम पर कुछ सुनता hi नहीं. चाहे वो सही हो या गलत.

लल्लू- मेरी बहने कभी गलत हो hi नहीं सकती काकी. बस थोड़ी मस्ती मजाक करती है बस.

शालिनी- कल से अगर वो लोग घर का काम नहीं करेगी तो मई फिर तुम से hi करवाउंगी समझ लेना.

लल्लू- मई तो हमेसा से तैयार हु काकी. आप करवा क्र तो देखो. मैंने कभी मन किया है क्या किसी काम क लिए. सायद इसी बहाने मेरी बहनो को थोड़ी अकाल भी आ जाये.

शालिनी- फिर तैयार रहना. सुबह सब को चाय कॉफ़ी तुम hi बना क्र डोज.

लल्लू- दोने काकी.

राघव- चलो भाई तुम तो लगे रहो अपने काकी क साथ मई तो चला सोने अब.

राघव दोनों को गुड नाईट कहता निचे अपने कमरे मई आ गया सोने को.

शालिनी- चलो तुम्हे लगता है की तुम्हारी बहने तुम्हे बचने क लिए खुद काम करने लगेगी तो ये भी देख लेते है लेकिन अगर वो लोग नहीं आई काम करने तो या तो तुम उनका काम करोगे या फिर मुझे नहीं रोकोगे.

लल्लू- ठीक है काकी. जैसा आप कहे. आप बड़ी है मुझ से. लेकिन आप को नहीं लगता की आप मेरे बहनो क बिछे hi लग गई है.

शालिनी- बीटा राघव की सदी हो गई है. अब एक दो साल मई सोनम की हो जाएगी फिर उसके पीछे तो सभी सदी क लायक हो hi गई है. अभी तक घर का कोई काम नहीं आता इन्हे. सब सदी क्र क दूसरे घर जाएगी तो क्या कहेंगे वह क लोग. कैसे माँ बाप थे कुछ सीखा क्र hi नहीं भेजा इन्हे.

लल्लू- काकी आप कितना सोचती हो. ऐसा कुछ नहीं होगा. मेरी बहने सभी बहुत समझदार है. वो सभी काम सिख लेंगी. आप फ्री हो जाओ इन बातो से ये मई वडा करता हु आप से.

शालिनी- चलो देखते है.

अब चल सोने जाना है या यही रात बितानी है. वैसे भी लक्ष्मी तो आज उन लोगो क साथ hi है.

लल्लू- मई सोच रहा हु की आज यही सो जाऊ छत पर hi. हवा भी बहुत बढ़िया आ रहा है. कहा कमरे मई उमेश भरे मई जाना.

शालिनी- तो ठीक है चल बिस्तर ले आ. आज मई भी यही चाट पर सो जाती हु तेरे साथ.

लल्लू- आप को दर तो नहीं लगेगा.

शालिनी काकी चुप हो गई. वो थोड़ी डरपोक सी थी. अकेले घर मई दिन मई भी अगर सब छोड़ दे उन्हें तो नहीं रहती थी.

लल्लू- आप निचे जा क्र hi सो जाओ. आप यहाँ नहीं सो पाओगी.

शालिनी- चल आज तो मई अब यही सोऊंगी. तू जा बिस्तर ले आ.

लल्लू निचे जा क्र एक गद्दा और तकिया ले क्र आ गया.

शालिनी- बीटा एक पानी का बोतल ले आ. मई भूल गई कहना.

" अभी ले आता हु."

चाट पर एक और गद्दा बिछा क्र लल्लू शालिनी काकी को तकिया देता हुआ बोलै.

लल्लू निचे गया और किचन मई फ्रीजर से एक बोतल निकल क्र जैसे hi पलटा की सामने ऋतू काकी कड़ी थी.

काकी- क्या क्र रहा है रसोई मई.

लल्लू- पानी लेने आया था.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र ऋतू क एक मम्मी को ब्लाउज क उप्पेर से hi पकड़ क्र मरोड़ता हुआ बोलै.

ऋतू- छोड़ मुआ दर्द क्र रहा है.

लल्लू- इस दर्द मई hi तो मजा है जानेमन.

ऋतू- बड़ा आया जानेमन वाला. अपनी नयी क सामने सब कुछ भूल जाता है और यहाँ आग लगाने चला है.

लल्लू- दरवाजा ऐसे hi सत्ता देना मई रात मई आऊंगा.

लल्लू ऋतू से लग क्र उसके पीछे हाथ ले जा क्र अपने से चिपकता बोलै.

ऋतू- कोई जरुरत नहीं है. आगे लगा देगा. मुझे साडी रात नींद नहीं आती है और न तुम आते हो. लक्ष्मी क यहाँ जाने से पहले भी यही कहा था तुम ने.

ऋतू झुक क्र उसके होठो को मुँह मई भर क्र चुस्ती बोली.

लल्लू- वो माँ सो hi नहीं रही थी जल्दी. इसी लिए नहीं आ पाया था. आज पक्का आऊंगा.

ऋतू- लक्ष्मी को क्या कहेगा. कहा जा रहा है.

लल्लू- वो आज दीदी लोगो क साथ है. मई चाट पर जा रहा हु सोने. शालिनी काकी भी आज वही सो रही है.

लल्लू ऋतू क उठे हुए 36 क नितम्ब क एक पत् को मुठी मई भर क्र दबाता हुआ बोलै.

ऋतू- ओह्ह ससीई आह छोड़ मुआ आज तुम रहन दे. कल hi फिर आना. मुझे नींद भी आ रहा है और तू भी आज थका हुआ होगा. आज अपने छोटी काकी का hi उद्घाटन क्र दे. लेकिन जरा प्यार से कही बिदाई न जय.

लल्लू- नहीं नहीं. मुझे मार थोड़ी खाना है. वैसे भी आज दिन से hi वो गरम मूड मई है.

लल्लू झुक क्र ऋतू क दोनों पर्वतो क घाटी से उप्पेर गर्दन तक जीभ चलता बोलै.

ऋतू- इस्सस… तभी तो कहती हु आज ठंढी क्र दे उसकी गर्मी भी.

लल्लू- ठीक है देखता हु.

फिर लल्लू एक बार ऋतू काकी क होठो को हलके से चुम क्र वह से सीधी चढ़ता हुआ उप्पेर आ गया.

सालिनित बड़ी देर लगा दी आने मई. लक्ष्मी से मिलने लगे थे क्या.

लल्लू- उस से आज कौन मिलने देगा. वो तो बड़ी काकी रसोई मई आ गयी थी तो उन से बात करने लगा था.

लल्लू पानी का बोतल एक और रख क्र शालिनी काकी क एक और लेटता हुआ बोलै.

शालिनी- मई तो समझी थी कही लक्ष्मी क चक्कर मई मुझे तो नहीं भूल गया.

लल्लू- आप को कैसे भूल सकता हु. आप तो मेरी प्यारी छोटी माँ हो.

शालिनी- आज कल लोग अपनी बीबी क चक्कर मई अपने माँ बाप को भी भूल जाते है.

लल्लू- वो लल्लू नहीं होते होंगे. आप को क्या अपने परवरिश पर इतना भी भरोषा नहीं.

शालिनी- मुझे तो भरोसा है लेकिन अभी नया खून है न तो हो सकता है बीबी का चस्का लगा है तो कही भूल hi जय.

शालिनी लल्लू क सर क बालो को सहलाती बोली.

लल्लू- किस चीज का चस्का.

शालिनी- चल छोड़ सो जा अब. थक गया होगा आज.

लल्लू- बताओ न काकी. बीबी क चस्का का क्या मतलब हुआ.

शालिनी- अरे सभी पत्नी अपने पति का ख्याल रखती है न तो मई उसी का बोल रही हु.

लल्लू काकी की और करवट ले क्र लेता था और काकी लल्ली की और.

दोनों क बिच करीब 4 से 5 इंच की दुरी थी.

शालिनी लल्लू क बालो मई ऊँगली घूमती सुला रही थी उसे.

लल्लू की आँखे धीरे धीरे बोझिल होने लगी नींद से.

तभी आधी रात मई कही से बदल का एक टुकड़ा इन लोगो क उप्पेर आ गया और हलकी हलकी बूंदा बंदी होने लगी.

लल्लू की आँखे खुल गई पानी क दो चार बूंदो क गिरते hi.

वो उठ क्र बैठ गया.

बगल मई देखा तो शालिनी काकी अभी भी सो रही थी.

धीरे धीरे बारिश हलकी तेज होने लगी थी.

लल्लू- काकी.. काकी जल्दी उठिये बारिश होने लगी है.

शालिनी- सोने दो न बहुत अच्छी नींद आ रही है.

शालिनी लल्लू क कमर मई दोनों हाथ लपेट क्र उसके गॉड मई सर रख क्र फिर से सो गई.

लल्लू- काकी हम भीग जाएंगे. गद्दा भी भींग जाएगा. उठ जाइये चलिए निचे जा क्र सो जाइये.

लल्लू शालिनी को कंधे से पकड़ क्र हिलता हुआ बोलै.

शालिनी का चेहरा लल्लू क गॉड मई उसके हथियार क उप्पेर था.

लल्लू क द्वारा बार बार शालिनी को उठाने से शालिनी कसमसा क्र अपना चेहरा आधी नींद मई लल्लू क गॉड मई इधर से उधर घूमने लगी.

लल्लू का प्रेम दंड सैलानी काकी क गलो क गर्माहट से अपना सर उठाने लगा था.

अब लल्लू परेशां की कही काकी को एहसास न हो जय तो बड़ी मर पड़ेगी.

लल्लू सैलानी काकी को दोनों हाथो से अपने गॉड मई उठा लिया और चाट पर एक और बने एक कमरे मई ले क्र चला गया.

वह कमरे मई एक सिंगल बीएड लगा हुआ था.

कमरे मई जा क्र लल्लू पहले वह का लाइट जला दिया.

कभी किसी का मन किया तो यहाँ थोड़ी देर आराम क्र लेता था.

डेली इस कमरे को और बीएड को साफ़ किया जाता था.

लल्लू शालिनी को बीएड पर आराम से लेता दिया और जैसे hi उठने लगा की काकी उसका हाथ पकड़ क्र अपने गाल क निचे रख क्र एक और करवट ले क्र फिर से गहरी नींद मई सो गई.

बहार गद्दा और तकिया न भीग जय लल्लू यही सोच रहा था लेकिन यहाँ शालिनी काकी को यु सोते हुए देख क्र उसे काकी पर बहुत प्यार आ रहा था. लल्लू काकी को अभी डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था.

लल्लू का एक हाथ तो काकी अपने गाल क निचे दबा राखी थी तो लल्लू अपना दूसरा हाथ उठा क्र काकी क दूसरे गाल क उप्पेर भी रख दिया.

शालिनी काकी नींद मई hi मुसकुदा उठी.

अब लल्लू सोच लिया था की गद्दा और तकिया भले hi भींग जय लेकिन वो इतनी स्कूल से सोती मीठी नींद से अपने काकी को नहीं उठाएगा.

लल्लू बड़े प्यार से काकी क गाल को सहला दिया.

काकी का पूरा बदन एक बार कम्प गया.

लल्लू काकी क बदन क कम्पन को देख क्र वही उनके बगल मई बैठ गया.

लल्लू काकी क नींद मई मुस्कुराते चेहरे को देखने मई खोया हुआ था.

लल्लू का एक हाथ अभी भी दबा हुआ hi था और उसका दूसरे हाथ की ऊँगली कब काकी क माध भरे फाइल होठो पर पहुंच गया उसे पता hi नहीं चला.

लल्लू हलके से काकी क होठो पर अपना ऊँगली फिर दी.

काकी किसी भूखे बचे की तरह लल्लू क उस ऊँगली को अपने होठो को खोल क्र मुँह मई ले क्र चूसने लगी.

लल्लू का सारा सरीर गंगना उठा. उसका प्रेम दंड अब अपने पुरे उफान पर खड़ा हो गया था.

लाइट की रोशनी मई काकी क दमकते हुस्ना मई खोया लल्लू झुकता हुआ काकी क एक गाल को अपने होठो से गिला क्र दिया.

तभी बहार जोरो से बदल गरज उठा और शालिनी काकी दर क्र उठ बैठी.

शालिनी काकी- क्या हुआ बीटा. तुम ऐसे क्यू बैठे हो. बहार कपडा तो नहीं कोई लगता है बारिश हो रहा है बहार. और तुम मेरे कमरे मई कब आये.

लल्लू- काकी लगता है अभी भी आप सही से नहीं जगी हो. हम छत पर सोये थे. बहार बारिश हो रही है. और आप इतनी गहरी नींद मई थी की आप को कुछ पता hi नहीं चला कैसे मई आप को यहाँ ले आया और आप मुझे यहाँ से उठने hi नहीं दी.

सैलानी काकी लल्लू की बात सुन क्र सरमने लगी..

काकी- मैंने तुम्हे ज्यादा तंग तो नहीं किया.

लल्लू- नहीं बिलकुल नहीं. माँ भी कभी अपने बेटे को तंग करती है क्या. बीटा hi माँ को तंग करता है और अब मई आप को नहीं सोने देने वाला सोच लो.

लल्लू वह से उठता हुआ बोलै.

काकी- अब बारिश मई कहा चले.

लल्लू- देखता हु गद्दा भींग गया या अभी बचा है.

लल्लू बहार निकल क्र देखा तो गद्दा उप्पेर से तो भींग hi गया था.

दोनों को उठा क्र कमरे मई एक और रख दिया और दरवाजा लगा दिया.

लल्लू भी भींग गया था. अभी तेज बारिश होने लगी थी.

काकी- ले भींग गया सब और खुद भी गिला हो आया. चल कपडा बदल ले.

लल्लू- आता हु मई निचे से दूसरा कपडा पहन क्र.

काकी- कोई जरुरत नहीं है. बनियान खोल ले और ये दूसरा धोती लपेट ले कमर पर.

काकी उठ क्र वह रखे एक धोती को लल्लू को पकड़ती बोली.

लल्लू मज़बूरी मई ऐसा hi किया.

लल्ली लेकिन क्या इस बीएड पर दोनों सो पाएंगे.

शालिनी- है हो जाएगा. चल आ जा.

काकी बीएड पर एक और होती हुई बोली.

लल्लू जा क्र काकी क साथ खली जगह मई लेट गया.

लल्लू शालिनी काकी से पूरा चिपक क्र लेता था.

जगह hi इतना hi था.

काकी एक करवट ले क्र लल्लू की और मुँह क्र लेट गई.

लल्लू भी काकी की और घूम क्र थोड़ा सा पीछे हो गया.

शालिनी काकी- सो जा बीटा. मेरे कारन तुम आज बहुत पदेशन हो गए.

लल्लू- मई तो साडी जिंदगी ऐसे पदेशन होने को तैयार हु छोटी माँ.

शालिनी लल्लू को पकड़ क्र अपने साइन से लगा ली.

शालिनी- तू इतना अच्छा क्यू है बीटा.

लल्लू- ककी की मेरी सभी माँ बहुत अच्छी है.

लल्लू काकी क गलो को चूमता हुआ बोलै.

शालिनी काकी लल्लू क चूमने से मुस्कुराती हुई उसे देखने लगी.

लल्लू अभी उप्पेर से नंगा hi था और निचे सिर्फ एक धोती लपेटे हुए था.

उसका सारा कपडा तो पहले hi भींग गया था.

लल्लू क नंगे चौड़े साइन से लगी शालिनी क बड़े बड़े अमृत कलस का एहसास से लल्लू क सरीर मई चीटिया रेंग रही थी.

उस से अपने पर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था उसका प्रेम दंड निचे धोती मई अपने पुरे सबब पर था जो शालिनी काकी क दोनों जांघो क बिच उसके साडी मई घुसने की कोसिस क्र रहा था और लल्लू इस से बचने क लिए अपने कमर को शालिनी से दूर पीछे किये हुए था.

शालिनी- क्या हुआ सही से सो जा न.

लल्लू सास रोके अपने हथियार को संत करने की कोसिस कर रहा था.

शालिनी लल्लू का हाथ पकड़ क्र उसे अपने से लगा ली.

शालिनी क दोनों खरभुजे लल्लू क छाती से लगा हुआ था.

शालिनी जब सैश लेती तो वो दोनों कबूतर लल्लू क नंगे साइन से चिपक क्र अपने आप को सख्त होने का एहसास लल्लू को करा जाता और जब सास बहार चोरटी तो दोनों कबूतर क चोंच लल्लू क साइन मई अपना नुकीलापन का एहसास करा रही होती.

लल्लू बिच मई फसा इसी सुबिधा मई लेता हुआ था. नींद तो ऐसे आने से रहा.

काकी आँख बंद किये लल्लू क कमर पर हाथ रखे सोने की कोसिस क्र रही थी लेकिन लल्लू क नंगे बदन उसे भी बिचलित क्र रहा था.

शालिनी काकी क बदन मई भी आज लम्बे समय क बाद चीटिया रेंग रही थी.

अमृत कुंड से अमृत की कुछ बुँदे टपक क्र काकी क पेंटी को गिला क्र रही थी.

शालिनी काकी अपने दोनों मांशल जांघो को दबाये इन अमृत को अपने कुंड से निकलने से रोकने की भरषक कोसिस क्र रही थी.

काकी का पूरा चेहरा लाल हो गया था. जैसे पुरे सरीर का ब्लड आज शालिनी क चेहरे पर hi आ क्र जमा हो गया हो.

शालिनी- बीटा ये लाइट बंद क्र दे आँखों मई चुभ रहा है.

लल्लू उठ क्र लाइट बंद करने चला गया.

इधर शालिनी काकी जल्दी से अपने हाथ से साडी को पकड़ क्र अपने रिश्ते हुए अमृत को दबा क्र साफ करती फिर से संत हो क्र लेट गई.

लल्लू लाइट बंद क्र आ गया.

अँधेरे मई कुछ भी दिख नहीं रहा था तो लल्लू अनुमान से hi बीएड की और आ रहा था.

अचानक लल्लू का पेअर बीएड क किनारे से लगा और वो ुनबलने हो क्र काकी क उप्पेर hi गिर गया.

लल्लू बचने क लिए अपने हाथ को आगे क्र लिया था ताकि मुँह मई चोट न लगे.

लल्लू का दोनों पंजा जा क्र सीधा शालिनी क ठोस खरभुजे पर जा बैठा.

अँधेरे मई लल्लू खुद को बचने क लिए उसे hi जोर से पकड़ लिया था अपने मुठी मई.

शालिनी क उन्नत पर्वत पर लल्लू का मर्दाने हाथ पड़ते hi कराह उठी मजे से.

जल्दी से काकी अपने होठो की भींच ली थी.

शालिनी अपने हाथ से लल्लू क पकड़ ली.

" क्या हुआ बीटा तुम्हे चोट तो नहीं लगी."

लल्लू को कंधे से पकड़ क्र प्यार से सहलाती अपने मन मई उठाते ज्वर भाता की लहरी को संत करती काकी बोली.

लल्लू अभी भी उस बॉल की तरह स्पंज काकी क उभारो को पकडे उन पर hi झुका था.

लल्लू आहिस्ता से उठता हुआ काकी क बगल मई बैठ गया.

अपने हाथ का जब ध्यान आया की अभी कहा था तो लल्लू क ससुर मई एक चिंगारी सी कौंध गई.

काकी जो लल्लू क जाने पर अपने जांघो को साफ़ की थी वो एक बार फिर से ृष्ण चालू हो गया था.

शालिनी काकी खुद को कण्ट्रोल करती लम्बी लम्बी ससे ले रही थी.

लल्लू- क्या हुआ काकी. आप ठीक तो हो न.

लल्लू काकी क ससो को सुन क्र बोलै.

शालिनी- मई बिलकुल ठीक हु बीटा. अब सो जा तुम भी.

शालिनी काकी अपने मन क भवनों को दबती बोली.

लल्लू काकी की और मुँह किये लेता अँधेरे मई उनको देखने की कोसिस क्र रहा था.

इधर काकी संत लेती हुई अपने चुके पर लल्लू क हाथो क कसाव को अभी भी फील क्र रही थी.

वो जितना इन सब चीजों से अपने मन को हटाना चाहती थी उनका तन मन उतना hi इन्ही बातो की और खींच रहा था.

कब काकी का हाथ साडी क अंदर घुस क्र उनके पेंटी क उप्पेर दोनों मांशल झांघो क बिच पहुंच गया उन्हें खुद पता नहीं चला.

पंतय क अंदर उस फुल्ले हुए हिस्से पर हाथ लगते hi शालिनी क मुँह से मजे की सीइससलकारी निकल गई.

लल्लू तो वैसे hi उनसे सत्ता हुआ था.

उसके कानो मई भी काकी क होठो से निकली आवाज पहुंच गई.

काकी को भी अपने गलती का एहसास हुआ.

वो झट से पलट क्र लल्लू की और अपना पीठ क्र ली. हाथ अभी भी साडी क अंदर hi था. उनके हाथो की उंगलिया यनिरष से भींग गई थी.

काकी क लल्लू की और घूमते hi उनकी बड़ी सी मटकी लल्लू क लोले से जा लगा.

लल्लू तो पहले hi काकी क चुके को पकड़ने से उत्तेजित था और अब अपने डंडे पर काकी क गर्म मटकी को फील क्र वो बबला होता जा रहा था.

लल्लू- क्या हुआ काकी. यहाँ नींद नहीं आ रही. सोने मई पड़ेशानी हो रही है तो आप को आपके कमरे मई छोड़ औ.

लल्लू शालिनी क कंधे पर अपना दया हाथ रखता बोलै.

काकी- नहीं नहीं. मई ठीक हु. काकी बेधयानी मई अपने साडी क अंदर रखे हाथ को निकल क्र लल्लू क हाथ को पकड़ती बोली.

लल्लू- ये आप का हाथ कैसे गिला हो गया है काकी.

लल्लू अपने हाथो क उंगलियों से काकी क हथेली को पकड़ क्र महसूस करता बोलै.

लल्लू क हाथ मई भी वो चिपचिपा सा अमृतरस लगा था.

शालिनी काकी लल्लू की बात सुन क्र अंदर तक कैंप गई.

क्या कहे अब की ये पानी कैसा है. कहा से निकला है.

लल्लू उस हाथ को अपने नाक क पास ले जा क्र सिंह लिया.

लल्लू- आह क्या खुसबू है काकी. बहुत प्यारा खुसबू आ रहा है इस से तो.

लल्लू की बात सुन क्र काकी क दोनों कबूतर फरफराने को बेताब हो गए. उनके उप्पेर की घुंडी कड़क हो क्र खड़े हो गए. निचे तो भलभला क्र पूरा पेंटी hi गिला हो गया था.

काकी गहरी सास लेती आँखे बंद किये इस आनद को महसूस क्र रही थी.

लल्लू- काकी बताओ न कैसा था ये पानी. थोड़ा सा और दो न प्लस. बहुत अच्छी खुसबू आ रही है अभी तक हाथ से.

लल्लू काकी क हाथ को पकड़ क्र अपने नाक से लगता बोलै.

काकी सुबिधा मई फाशी सोच मई लीन थी की कैसे मन करे इसे. काकी को कुछ समझ hi नहीं आ रहा था.

तभी वो हुआ जिस से काकी उछाल hi पड़ी लेते लेते.

लल्लू जीभ निकल क्र काकी क उंगलियों को चाट लिया.

काकी- ये क्या क्र रहा है. छोड़ ये गन्दा पानी था. मेरे हाथ गंदे है.

लल्लू काश क्र काकी का हाथ पकड़ लिया.

लल्लू- मुझे ये पानी और चाहिए. दो न मेरी प्यारी काकी. मेरी छोटी माँ दो न अपने बेटे को ये पानी और थोड़ा सा. ये गन्दा कहा से हो गया. मुझे तो ये अमृत लग रहा है. पीला दो न अपने बेटे को.

काकी क तो रोये खड़े हो गए थे लल्लू की बाटे सुन क्र.

पेंटी क अंदर उनके योनि क फेक फटकने लगे.

काकी- चुप चाप सो जा. मई भी अब सोने लगी हु.

काकी हाथ चुदती बोली.

लल्लू- मुझे बिना ये पानी पिए अब नींद नहीं आएगा.

लल्लू बेधयानी मई काकी से चिपकती बोलै.

लल्लू का कड़क डंडा काकी क साडी क उप्पेर से hi उनके पानी बहती नदी क मुहाने पर जा लगा.

काकी- इस्सस, मंटा क्यू नहीं. कोई पानी नहीं था. ये बारिश का पानी था. जो मेरे कपडे मई लगा था उसी से हाथ भींग गया था मेरा.

काकी अपने पेंटी को ध्यान करती बोली.

लल्लू- वो कपडा hi दे दो न काकी.

लल्लू भी अब काकी का पीछा छोड़ने क मुद मई नहीं था.

वो पीछे से काकी को बहो मई भरता बोलै.

लल्लू क नंगे साइन से चिपकी अपने योनि पर उसके लैंड को महसूस करती शालिनी मजे क वादियों मई ुर्र रही थी.

इस से पहले जीवन मई कभी उसे इतना मजा इतना आनंद नहीं आया था.

वो भी लल्लू से और चिपकती अपने कमर को लल्लू क लैंड पर दबती लेती थी करवट ले क्र.

लल्लू- काकी थोड़ा सा hi पीला दो न.

लल्लू अपने हाथो से शालिनी क गाल को सहलाता बोलै.

काकी- जा लक्ष्मी से ले क्र पि ले.

लल्लू- क्यू मेरी छोटी माँ मुझे नहीं देगी.

काकी आँखे बंद किये गहरी गहरी ससे ले रही थी. फिर से उन्हें कुछ कुछ हो रहा था.

एक तो निचे लल्लू का डंडा साडी क उप्पेर से लगा हुआ था और दूसरी और उसका हाथ शालिनी क कोमल कश्मीरी सेब की तरह लाल फुले हुए गाल पर चल रहे थे.

काकी- नहीं ये पानी मई नहीं दे सकती. अपने लक्ष्मी से hi ले जा क्र.

लल्लू- छोटी माँ, बारिश का hi तो पानी था. ये क्या आप क बेटे से भी ज्यादा प्यारा है आप को.

शालिनी लल्लू की बात सुन क्र तरप क्र लल्लू की और घूम गई और उसे अपने साइन से काश क्र चिपका ली.

काकी- नहीं मेरे लाल. तुम से कीमती मेरे लिए इस दुनिया मई कुछ भी नहीं है.

तू है तो हम सब है. तेरे से प्यारा क्या होगा मेरे लिए.

लल्लू- तो दे दो न प्यारी माँ.

लल्लू अपने काकी क गाल पर अपना नाक रगड़ता हुआ बोलै.

लल्लू काकी क बहो मई सर उठाये उन पर झुका हुआ था शालिनी से चिपक क्र.

अपने नाक को कभी उनके गाल पर तो कभी उनके नाक पर रगड़ रहा था.

काकी- वो गन्दा होता है बीटा. वो नहीं लेते जिद्द मत क्र.

मरे उत्तेजना क जैसे तैसे खुद को संभालती बोली.

लल्लू- मुझे वही पानी चाहिए. बहुत प्यास लगी है. वो पानी मुझे अमृत क जैसे लगा था.

लल्लू काकी क चेहरे को अपने दोनों हाथो मई ले क्र अंधरे मई उनके आँखों मई देखता बोलै.

शालिनी क समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे और कैसे करे.

लल्लू- दे दो न माँ. अपने बेटे को देने क लिए भी इतना सोचना पद रहा है.

सालनि को चुप देख क्र लल्लू बोलै.

शालिनी अंत मई कुछ फैसला करती हुई लल्लू से हैट क्र अंधरे मई अपने हाथ को एक बार फिर से कमर क निचे ले गई और इस बार पेंटी क अंदर अपनी हथेली को ले जा क्र उसे मुट्ठी मई भर क्र दबा क्र जैसे निचोड़ रही हो उसका रास.

फिर हाथ बहार निकल क्र कुछ छान रुक गई.

लल्लू- अब दे भी दो मेरी प्यारी माँ. क्यू तारपा रही हो.

शालिनी आँखे बंद करती गहरी सैश ले क्र अपनी वो हथेली लल्लू क मुँह की और कर दी.

लल्लू झट से उस हाथ को पकड़ क्र पहले नाक लगा क्र लम्बी सैश लेता सूंघने लगा.

शालिनी लल्लू की ऐसी उत्तेजित करने वाली हरकतों को महसूस क्र मरे उत्तेजना क कम्पनी लगी.

लल्लू आहिस्ता से जीभ निकल क्र आराम आराम से काकी क पहले हथेली को चक क्र साफ़ क्र दिया फिर उनके अंघूठे को मुँह मई ले क्र चूसने लगा.

शालिनी क निचे फिर एक बार लगा जैसे कुछ निकलने वाला है.

लल्लू अंगूठा छोड़ क्र अब दूसरे ऊँगली को अपने होठो मई पूरा दबा क्र उस पर जीभ फिरने लगा.

शालिनी- ीिसस्स, ऊऊह्ह्ह. बस बीटा. मुझे कुछ हो रहा है.

लल्लू- होने दो माँ, जो बुइ हो रहा है अच्छा hi हो रहा है.

तीसरे पिच वाली ऊँगली को मुँह मई लेता लल्लू बोलै.

तभी जैसे शालिनी एक बार फिर से कराहती हुई अपने अमृत मुख का द्वार खोल दी.

कम्पटी हुई वो लल्लू से चिपकी संत होने की कोसिस करने लगी.

लल्लू- माँ मेरा प्यास काम होने की जगह और बढ़ता hi जा रहा है. प्लस मई खुद से hi ले लू क्या.

काकी तो आँखे बंद किये अबकी बार बेहोश हो हो इ लगी थी.

लल्लू- माँ बोलो न क्या मई खुद से पि लू ले क्र.

शालिनी नसे मई आँखे बंद किये हुए लल्लू क बालो मई उंगलिया फसाये हुए थी.

लल्लू- मई खुद ले लू और ये अमृत माँ.

लल्लू शालिनी पर झुकता हुआ उसके कण क लौ को जीभ निकल क्र चाट करता बोलै.

शालिनी हलकी सी कुनमुनाती बोली ले लो.

उसे पता hi नहीं चला की वो क्या बोल गई है.

लल्लू झट से एक छोटा सा चुम्बन शालिनी क होठो पर दे क्र उठ बैठा और शालिनी क साडी को पैरो क पास से पकड़ क्र कमर पर जमा क्र दिया.

अब शालिनी कमर से निचे सिर्फ एक पेंटी मई थी जो की उसके काम रास से पूरा भींग क्र गिला हुआ पड़ा था.

लल्लू शालिनी क दोनों मांशल जांघो को पकड़ क्र फैलता हुआ झुकता चला गया और पेंटी क उप्पेर से hi पहले हुए अमृत द्वार को मुँह मई भर क्र चूसने लगा.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 75.

लल्लू शालिनी क पंतय को ऊँगली से थोड़ा सा खिश्का क्र जीभ से उस पहले हुए फैंको क बिच क हिस्से को कुरेदता हुआ उस मई से निकलते कसैले राश को मजे से चाट रहा था.

शालिनी अब अपने आप को एक अलग दुनिया मई महसूस क्र रही थी. आज तक ऐसा आनंद उसे नहीं मिला था.

अभी तो लल्लू क हरकतों से hi दो बार झरर चुकी थी और अब जो लल्लू क्र रहा था तो शालिनी को लग रहा था जैसे कोई भूचाल आने वाला है.

रह रह क्र उसके तन बदन मई एक अजीब सी तरंगे उठ रही थी. पुरे सरीर मई कुछ कुछ समय पर जैसे हिलोरे उठ रहे थे जो उसे हर बार एक नए आनंद की और ले जा रहा था.

इधर लल्लू अब शालिनी की पंतय को फार क्र उनके सरीर से अलग क्र चूका था जिस का एहसास शालिनी को नहीं हुआ था.

लल्लू अब शालिनी क छूट क अंदर अपने एक ऊँगली को घुसाए उस मई से मक्खन निकलता चाट करता जा रहा था. कभी अंघूठे से उनके छूट क उप्पेर अपना सर उठाये क्लीट को मसल देता. तो कभी उसे जीभ से लउरेड देता.

शालिनी काकी बीएड पर लेती अपने दोनों हाथो से चादर को काश क्र पकडे आहे भर रही थी.

वो आज तीन बार तो अपना पानी निकल चुकी थी और लल्लू अभी भी लगा हुआ था.

काकी से अब बर्दास्त करना बिलकुल मुश्किल हो गया था.

वो लल्लू क सर क बालो को मुठी मई लेती उसके सर को अपने छूट पर दबा रही थी.

शालिनी अपने दोनों जांघो से लल्लू क सर को दबाये ज्यादा से ज्यादा अंदर लल्लू क जीभ को फील करने क चक्कर मई अपने कमर को उप्पेर उठा उठा क्र लल्लू क मुँह पर मर रही थी.

इधर लल्लू काकी क छूट मई मुँह घुसाए हुए hi कभी पुरे छूट को मुँह मई भर क्र चूस लेता तो कभी मोठे होठ को अपने दातो से पकड़ क्र हलके से काट लेता.

काकी थोड़ी hi देर मई चौथी बार तैयार थी झरने क लिए.

शालिनी- बीटा मुँह हटा ले वह से. अब मुझ से नहीं रहा जाएगा रे. जैसे लगता है मेरा पेशाब निकल जाएगा. प्लस बीटा….

काकी जल्दी से लल्लू क सर को धकेल क्र अपने छूट से अलग करने लगी.

लेकिन लल्लू भी आज पूरा रास पिने को तैयार था.

वो काकी क गद्देदार नितम्ब क निचे हाथ दाल क्र उसके दोनों पैट को पंजो मई दबाये काकी क छूट क उस एक ऊँगली चौड़े छेद मई मुँह चिपका लिया.

शालिनी काकी एक जोर का चीख मरती हुई झरने लगी.

रह रह क्र काकी का सरीर कंपता हुआ उनके छूट से पानी निकल रहा था.

लल्लू का पूरा मुँह काकी क रास से सं गया था.

इतना पानी निकला था इस बार की लल्लू क पिने क बाद भी जैसे लगता था काकी क छूट क पास निचे का पूरा चादर भींग गया था.

लग रहा था जैसे काकी ने पेशाब hi क्र दी है अभी.

काकी तो झरने क बाद निढाल हो गई थी. ऐसा लग रहा था जैसे अब उनके सरीर मई कोई जान hi नहीं बची हो अब. ऐसे सोई हुई थी.

लल्लू उठ क्र उनके बगल मई आ क्र लेट गया.

काकी क गाल को चुम क्र उनके चेहरे पर जो अभी असीम सुख की चमक थी उसे निहारता हुआ अपने कोहनी पर सर उठाये निहार रहा था काकी का चेहरा.

काफी देर तक काकी यु hi आँखे बंद किये लेती रही.

लल्लू उनके सर पर हलके से चुम क्र उन्हें अपने आगोश मई ले क्र लेट गया.

शालिनी काकी तो जैसे नसे मई सो hi गई थी.

सुबह क चार बजे लल्लू का नींद खुल गया.

वो उठ क्र बैठ गया.

बगल मई देखा तो शालिनी काकी अभी एक छोटे बचे की तरह लल्लू का एक हाथ पकड़ क्र अपने साइन से लगाए मुसकुडती हुई सो रही थी.

आज जैसे काकी क चेहरे पर एक अलग hi नूर आ गया था.

वो गहरी नींद मई सोई हुई hi मुस्कुरा रही थी.

लल्लू कुछ देर वैसे hi बैठा हुआ उनके चेहरे को देख रहा था.

फिर झुक क्र एक छोटा सा चुम्मी गाल पर दे क्र हलके से अपना हाथ उनके हाथ से छुड़ा लिया.

बहार निकल क्र लल्लू अपने कमरे मई निचे आ गया.

कमरे मई आ क्र अपना कपडा पहन क्र वो नदी किनारे चला गया.

नदी आये भी कई दिन हो गया था.

वह फ्रेश होने क बाद लल्लू थोड़ी देर ध्यान मई बैठ गया.

लल्लू ध्यान मई बैठा हुआ था तभी उसे लात जैसे कोई उसे बहुत दूर से किसी क पुकारने की आवाज सुनाई दिया.

" ै मेरे मालिक, आप क बिना आप क सेवक दर बदर भटक रहे है. अब आ भी जाओ. कब तक हम सब ऐसे चुप क्र रहेंगे. अब रहम करो."

लल्लू क कानो मई ये आवाजे आ रही थी.

लल्लू चौक क्र अपनी आँखे खोल दिया.

अपने चारो और देखा तो कही कोई नहीं था.

सूर्य का प्रकाश चारो तरफ फ़ैल गया था.

लल्लू वह से उठ क्र घर की और चल दिया.

आँगन मई आया तो सभी चाय पि रहे थे.

लल्लू जा क्र बड़ी काकी क पास बैठ गया.

" मुझे भी पीला दो न. " लल्लू ऋतू काकी क कान मई बोलै.

काकी- अपने माँ से ले लो.

लल्लू- आप का मीठा होता है.

तभी रागिनी काकी एक कप चाय ले क्र लल्लू को थमा दी.

ऋतू- ले अपने काकी का पि ले.

रागिनी- क्या…

काकी- चाय. लल्लू अभी चाय क लिए hi बोल रहा था.

रागिनी काकी ऋतू काकी को आँख दिखती रसोई को चली गई.

आँगन मई इस समय ऋतू काकी क साथ बुआ और माँ बैठी हुई थी.

शालिनी काकी कही दिख नहीं रही थी.

लल्लू चाय पि क्र अपने बहनो क कमरे की और चल दिया.

वह सभी सुबह सुबह चाय पि क्र अपना अपना स्टडी मई लगे हुए थे.

लल्लू एक नजर सब को देख क्र फिर वही बैठ गया.

सोनम- भाई कल किसी काम क बारे मई तुम कह रहे थे.

लल्लू- आप सब को मेरा एक काम करना है.

कोमल- क्या करना है हमे.

लल्लू- बादाम का बीज आया है. उसे तिसु पेपर मई लपेट क्र फ्रीजर मई रखना है. कुछ दिनों मई वो अंकुरित हो जाएगा फिर उसे खेत मई बोयेंगे.

रोमा- ये कौन सी बड़ी बात है दे देना हम सब क्र देंगे.

लल्लू- एक और काम है.

गौरी- और कोई काम नहीं क्र सकते है हम. एक काम क्र देंगे ये बहुत है. ऊँगली क्या पकड़ने दी तुम तो पूरा हाथ hi पकड़ने आ गए.

लल्लू- आप सब नहीं करोगे तो फिर मुझे करना पड़ेगा.

मीनू- और क्या काम है.

लल्लू- आप सब घर क काम मई हाथ क्यू नहीं बताती माँ की.

गौरी- इसी लिए मई कहा था. पहले hi मुझे पता था यही बात होगी.

रानी- भाई बड़ी दीदी तो अब करने जाती hi है काम. हम लोग भी कभी कभी क्र दिया करेंगे अब.

लल्लू- आज रात से रसोई का सारा काम आप सब अपने दोनों भाभी को साथ मई ले क्र करेंगे. माँ लोग अब आराम करेंगी.

रोमा- क्या…. नहीं नहीं रसोई सब का काम हम से नहीं होगा. इतनी गर्मी होती है वह. मई नहीं करने जाउंगी.

गौरी- भाई कुछ नौकर रख लो न. सरे काम क्र देंगे वो.

लल्लू- सही कहा आप ने दीदी. वो खाना खाने का भी काम क्र देंगे. आप सब को भोजन करना भी नहीं पड़ेगा. क्या चाहती हो आप. कितनी मुश्किल से कल मई छोटी माँ को रोका था. नहीं तो कल hi वो आप सब की क्लास लगा देती.

कोमल- भाई ये कैसा काम तुम बता रहे हो.

लल्लू- हर्ज hi क्या है दीदी. क्या आप सब कभी सोचे हो की माँ लोग कितनी म्हणत करते है. सुबह सुबह उठ क्र पुरे घर को साफ़ करना सब क लिए उसके पसंद का चाय नास्ता देना. फिर सब का खाना बनाना. कपडे धोना.

उन्हें खुद को खाने क समय 2 बज रहे होते है.

सुबह से दो बजे तक वो लोग भूखी hi रहती है. खाना खा क्र उठती है और फिर से रात क खाने की तयारी मई लग जाती है.

हम इतने लोग है थोड़ा थोड़ा काम बाँट ले तो उन सब को कितनी आसानी होगी.

सोनम- ठीक है साम से हम सब भी करेंगे रसोई का काम.

लल्लू- मुझे आप से यही उम्मीद था दी.

लल्लू सोनम क गले लगता हुआ बोलै.

गौरी- दी आप hi करना. मेरे तो अभी खेलने खाने क दिन है.

लल्लू- काकी अभी सुन लेगी तो तुरंत खिलने को पहुंच जाएगी फिर समझ लेना. अबकी मई नहीं रोकूंगा नहीं तो मुझे न कहानी पद जय.

सभी बहने हुस्ने लगी लल्लू की बात पर.

लल्लू वह से एक बार अपने कमरे मई झाका तो लक्ष्मी आईने क सामने कड़ी अपना बाल सवार रही थी.

लग रहा था जैसे अभी अभी नाहा क्र आई है.

गौरी- क्या देख रहा है. तेरी hi बीबी है. तू तो ऐसे चुप क्र देख रहा है जैसे किसी और क माल को देख रहे हो.

लल्लू गौरी क बात सुन सरमाता हुआ वह से बहार आ गया.

सोनम- भगा दिया न उसे. बेचारे को रात भी चाट पर hi सोना पड़ा था.

रोमा- तो क्या हो गया. हमारे लिए एक दिन अपने बीबी से दूर हो गया तो कौन सी बड़ी बात हो गई.

मीनू- जब खुद की सदी होगी न तब पता चलेगा जब कोई ऐसे hi अपने पति से तुम्हे दूर क्र देगा.

रोमा- अरे सब ऐसे बोल रहे है जैसे ये मैंने hi क्या है. ये आईडिया तो गौरी और रानी का था न.

मीनू- मई सब को hi बोल रही हु.

कोमल- कोई बात नहीं. रात मजा भी बहुत आया. वैसे भी हमारे दोनों भाई बहुत अच्छे है. इतनी छोटी मोती बातो को वो ध्यान नहीं देते. और अगर बात उनके बहनो को ले क्र हो तो फिर वो बहन का hi साथ देंगे पहले. ककी दोनों भाई हम सब से बहुत प्यार करते है जितना की हम सब करते है उस से भी बहुत ज्यादा.

लल्लू वापस आँगन आया तो ऋतू काकी वही बैठी सब्जी काट रही थी.

लल्लू जा क्र पीछे से उनका गाल चुम लिया.

लल्लू- क्या क्र रही हो जानेमन.

काकी- क्यू दिख नहीं रहा. सब्जी काट रही हु.

लल्लू- तो आज तैयार रहना रात मई आप का नंबर है.

काकी- जा क्र पहले उसे देख सुबह से कमरे से बहार नहीं निकली है. तू जिस क साथ भी एक रात गुजर लेता है वो सुबह अपने कमरे से नहीं निकल पति.

लल्लू- लेकिन मैंने ऐसा तो कुछ नहीं किया है. मैंने तो बस थोड़ा बहुत उन्हें प्यार दिया है.

काकी- मुझे भी ऐसा hi लगा था. ककी चलने मई तो कोई पड़ेशानी नहीं हो रही थी उसे.

लल्लू- मई ले क्र आता हु काकी को.

लल्लू वह से शालिनी काकी क कमरे मई चला गया.

वह शालिनी काकी आँखे बंद किये अपने बीएड पर लेती हुई थी.

लल्लू- छोटी माँ, क्या हुआ आप ठीक तो है न.

लल्लू बीएड पर उनके बगल मई बैठ के शालिनी काकी क मात हो छू क्र देखता हुआ बोलै.

शालिनी काकी झटके से उठ बैठी.

लल्लू को देखते hi वो एक थप्पड़ लगा दी उसे.

काकी- कहा चला गया था सुबह और ये क्या क्र दिया मेरे साथ.

लल्लू- आप को सुकून देने की कोसिस की थी छोटी माँ. और सुबह मैं नदी के तरफ चला गया था.

काकी लल्लू को पकड़ क्र उसे अपने पास चिपका क्र बैठा ली.

काकी- ये सब कहा से सीखा रे तू. मई तो तुम्हे छोटा बचा समझती थी.

लल्लू- वो सब छोड़ो आप ये बताओ की अभी तक कमरे मई क्या क्र रही हो. दिन कितना निकल आया है और आप अभी भी कमरे से बहार नहीं निकली हो.

काकी- wo...wo मुझे…

लल्लू- क्या हुआ. कोई बात, पड़ेशानी है तो बताइये मुझे.

काकी- ये बात मई तुम से कैसे कहु.

लल्लू- क्यू अगर आप मुझे अपना समझती है तो कहिये और अगर मई पराया हु आप क लिए तो कोई बात hi नहीं.

काकी- ऐसी बात नहीं है. तू तो मेरा जिगर का टुकड़ा है मेरे लाल. लेकिन mai...muje सरम आ रही है तुम्हे बताने मई.

लल्लू- ऐसा क्या बात हो गई. आप ठीक तो हो न.

काकी- मई बिलकुल ठीक हु. बस वह से न बहुत पानी निकल रहा है रह रह क्र. अजीब सा लगता है मुझे. हर समय रात जो कए थे तुम वही याद आता रहता है.

लल्लू- कोई बात नहीं. बहार निकल क्र दूसरे कामो मई ध्यान लगाइये. आज रात फिर चाट पर सो जाइएगा. फिर सब ठीक क्र दूंगा मई.

काकी- न बाबा न. डेली मई नहीं सो सकती चाट पर. तुम्हारी माँ और काकी क्या कहेगी की अचानक से मई चाट पर क्यू सोने लगी हु.

लल्लू- कोई कुछ नहीं कहेगा. आप चुप चाप चाट पर जा क्र सो जाना.

अब चलिए बहार निकल क्र आइये.

फिर लल्लू काकी का हाथ पकड़ क्र उठाया और फिर गाल पर एक चुम्मी दे क्र उन्हें जल्दी आने को बोल खुद बहार आ गया.

दालान पर सभी बैठे हुए थे.

दादू- कहा रहता है बीटा. थोड़ी देर मेरे पास भी बैठ जाया क्र.

लल्लू- सॉरी दादू थोड़ा आँगन मई hi था. अब से मई यही हु आप क पास.

लल्लू- काका वो बादाम का बीज कहा है.

रवि- यही बगल वाले कमरे मई रखा है.

लल्लू- ठीक है तो मई आज इसकी तयारी करता हु तब तक आप इसकी कहा लगाना है वो खेत देख लीजिये.

रवि- ठीक है बीटा.

लल्लू उस कमरे मई जा क्र वह से एक बीज उठा क्र वापस आँगन मई ले आया.

लल्लू- दीदी…

सोनम बहार आ क्र लल्लू की और देखि.

लल्लू- ये बीज है अभी थोड़ी देर मई मैं तिसु पेपर भी ले आऊंगा.

सोनम- ठीक है. फिर बताना कैसे क्या करना है.

फिर लल्लू वह से दालान पर आ क्र बैठ गया.

सुनील- और भाई सेर पटर क्या हाल है तुम्हारे.

लल्लू- बढ़िया है काका. आप सब का काम कैसा चल रहा है.

सुनील- हमारा भी सही hi चल रहा है.

फिर वह थोड़ी देर सब क साथ बाटे करने क बाद लल्लू आँगन आ गया.

अपने कमरे मई गया तो वह लक्ष्मी कपडे सही से आलमारी मई रख रही थी.

लल्लू जा क्र पीछे से लक्ष्मी को पकड़ लिए.

लक्ष्मी अचानक पीछे से लल्लू क चिपकने से चौक क्र उछाल पड़ी.

लल्लू- क्या बात है. आप तो बहुत डरपोक निकली.

लक्ष्मी- ऐसे पीछे से चोर की तरह आएंगे आप तो डरूंगी नहीं क्या.

लल्लू- मई तो सोच रहा था की आप बहादुर होंगी. किसी भी परिस्थति का डट क्र मुकाबला करेंगी.

लक्ष्मी- जनाब मई डरपोक नहीं हु. पहले देखना तो बनता है न. कही मेरे पतिदेव hi अपने बहनो से चुप क्र अपनी बीबी से मिलने आये ho,kya पता.

लक्ष्मी लल्लू को देख क्र हस्ती हुई बोली.

लल्लू- अच्छा तो मेरा फिरकी लिया जा रहा है. रुको अभी बताता हु.

लल्लू लपक क्र लक्ष्मी को अपने बहो मई भर लिया.

लक्ष्मी लल्लू क बहो से छूटने क लिए छटपटाने लगी थी.

लक्ष्मी- दीदी कोई काम था क्या आप को…

लल्लू झट से लक्ष्मी को छोड़ क्र दो कदम पीछे हो गया.

लक्ष्मी- है है है… अब बताइये कौन डरपोक है.

लल्लू अपने पीछे देखा तो कोई नहीं था.

सर पर हाथ मर क्र मुसकुडते हुए लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र उसके गाल को चुम लिया.

लल्लू- आप का पतिदेव डरपोक है. अब खुश.

लक्ष्मी- बिलकुल नहीं. मेरे पतिदेव बहुत बहादुर है. आप डरपोक हो.

लल्लू- चलिए यही सही. मई डरपोक हु. आप क पतिदेव बहादुर है.

फिर लल्लू कमरे से बहार आ गया.

बहार निकल क्र देखा तो सभी बहने अभी से hi घर क कामो मई लगी हुई थी बस गौरी को छोड़ क्र.

शालिनी काकी भी कमरे से बहार आ क्र आँगन मई अपने जेठानी देवरानी क साथ बैठी चाय पि रही थी.

लल्लू- क्या बात है आज तो आप सब क बड़े ठाठ है. चारो मात श्री एक साथ बैठ क्र चाय पि रहे है.

शालिनी- सब तुम्हारे बातो का असर है. आज सभी लगी हुई है काम मई. बस एक इस नालायक को लैब अकाल आएगी ये समझ नहीं आता.

अभी भी बैठी हुई है बेशर्मो की तरह.

शालिनी काकी लल्लू को अपने पास बैठती हुई गौरी को देख क्र बोली.

गौरी- सब से बड़ा काम तो मई hi क्र रही हु. इन लोगो से काम करवा रही हु ये क्या काम म्हणत का काम है.

गौरी अपनी आँख नचा क्र मुसकुडते हुए बोली.

लल्लू- सही बात है. आज तो गौरी दीदी भी बहुत काम कररही है. कितनी थक गई लगती है आओ मेरे पास मई आप का गाला दबा दू.

गौरी कुर्सी से उठ क्र लल्लू को मरने क लिए दौड़ पड़ी.

लल्लू गौरी को शालिनी काकी की और इसरा किया.

गौरी- माँ ये नालायक तुम्हारी और इसरा क्र रहा है. देखो मुझे कैसे चिढ़ा रहा है.

शालिनी- इसे चुने की भी कोसिस मत करना. ये मेरा प्यारा बीटा है. तू जा क्र कुर्सी तोड़.

लल्लू गौरी को देख क्र हुस्ने लगा.

गौरी मुँह टेढ़ा क्र पेअर पटकती हुई जा क्र कुर्सी पर बैठ गई.

ऋतू काकी उठ क्र गौरी क पास गई.

काकी- तू नाराज मत हो. तुम मेरी प्यारी बेटी हो. इस नालायक को मई अब प्यार नहीं करुँगी. ये मेरी गुड़िया बेटी को दन्त सुनवा देता है.

गौरी खुश हो क्र तुरंत घूम क्र कुर्सी पर बैठे हुए hi ऋतू काकी को कमर मई दोनों हाथ दाल क्र पकड़ क्र उन से चिपक गई फिर लल्लू की और सर घुमा क्र उसे जीभ निकल क्र चिढ़ाने लगी.

लल्लू हस्ता हुआ शालिनी काकी क गले लग गया.

ब्रेकफास्ट क बाद लल्लू जा क्र अपने गौण क चौक से तिसु पेपर ला क्र सोनम को दे दिया और उसे समझा दिया कैसे रखना है फ्रीजर मई उसे.

सभी लड़किया दोपहर मई अपने कमरे मई बैठ क्र इसी काम मई लग गई.

साम तक आधा बादाम क बीज को उन लोगो ने तिसु मई लपेट क्र फ्रीजर मई दाल चुकी थी.

लल्लू आज काफी दिनों क बाद रवि काका क साथ खेत आया था.

काका थोड़ी देर मजदूरों को काम समझा क्र बाजार चले गए वह लल्लू खलिहान मई बने कमरे मई जा क्र लेट गया.

लल्लू मजे से सोया हुआ था की लगा जैसे उसके सरीर पर कोई वजन रख दिया हो.

लल्लू आँखे खोल क्र देखा तो रधिया लल्लू क उप्पेर लेती हुई थी.

कैसे हुए चोली मई से उसके एक तिहाई दूध लल्लू क साइन से डाब क्र बहार निकल आये थे.

वो गोर गोर मोठे दूध देख क्र लल्लू का डंडा पुरे 90' पर खड़ा हो गया था.

रधिया- मुझे कुछ चुभ रहा है.

लल्लू- एक कला नाग है जो बिल धुंध रहा है. उसे खुसबू लग गई है बिल की, उसे hi धुंध रहा है.

रधिया- ऐसे बोलो न. मई अभी उस नाग को उसका बिल दिखा देती हु.

लल्लू- है रे रंडी इसी लिए तो तू आई hi है. लेकिन तेरा वो मूंगफली वह यार कहा गया जो आज इस खुल्ला सैंड क पास आ गई. आज फटने का दर नहीं लग रहा है क्या.

रधिया- दर तो लग रहा है लेकिन माँ दो दिन क लिए मां क यहाँ गई है और मई अकेली हु तो अभी तू फार भी देगा तो मई दो दिन मई सही हो जाउंगी.

लल्लू- ठीक है फिर चल पहले गिला क्र मेरे सांप को.

रधिया झट से उठ क्र लल्लू का धोती एक साइड क्र उसके काळा मोठे नाग को निकल क्र अपने मुँह मई भर क्र रंडी की तरह hi चुप्पे लगाने लगी.

थोड़ी देर मई hi लल्लू का सांप फुफकारता हुआ उठ खड़ा हुआ.

रधिया- बाप रे ये लौड़ा है या लोला. इतना बड़ा है. तुम्हे पेशाब करता देखि थी एक दिन तब इतना मोटा नहीं दिखा था दूर से कितना भयानक दीखता है ये. मेरी जान निकल देगा ये.

लल्लू- नखरे मत क्र. मुझे सब पता है. बहनचोद समुन्दर बना हुआ है तेरा जहा तू बड़े बड़े सार्क मछली निगल चुकी है. बाप को छोड़ना सीखने चली है बुर छोड़ी.

लल्लू रधिया का हाथ पकड़ क्र दीवाल क सहारे खड़ा क्र उसके एक पेअर को उठा क्र एक हाथ से उसका घागरा उठा क्र पेल दिया उसके फटी हुई बुर मई अपना मुसल.

रधिया- हैयय मर गयी रेड माँ…

Koi..bachaooo रे सी नासपीए से. क्यू आ गई मई इस सैंड क पास. रधिया- छटपटाती हुई चिल्लाती बोल रही थी.

लल्लू- तेरी बुर मई मिर्ची लगी थी तो कोई क्या करे. इतने जोर से चिल्लाओगी तो खेत क मजदुर भी आ जाएंगे यही और फिर मेरे बाद वो सब भी सुरु हो जाएंगे चढ़ने उतरने मई.

रधिया- क्यू मई क्या कोई रंडी हु जो सब का लुंगी. तुम दूसरे मर्द हो जिसका मैंने लिया है अब तक.

रधिया- अपनी मोती गांड लल्लू क लौड़े पर मरती हुई बोली.

लल्लू- सुच मई लगता है तू वैसे hi बदनाम हो गई है. अभी तक कासी हुई है तू अंदर से. लेकिन आज क बाद नहीं रहेगी.

लल्लू ताबरतोड़ धक्के लगता हुआ एक हाथ से उसके चोली क उप्पेर से hi बड़े बड़े नासपाती का मुठी मई पकड़ क्र मसलता हुआ बोलै.

रधिया- इतना जोर क्यू लगा रहा है. कोई तेरे बाप का माल नहीं है ये.

रधिया क बुर से उसका पानी निकल क्र बहता हुआ उसके जांघ से होता हुआ निचे तक आ रहा था.

लल्लू- इतनी पानी क्यू छोड़ रही है बहिन छोड़. टंकी लगा क्र आई है क.

रधिया- आह क्या मजा आ रहा है. ऐसे hi कास कास क्र निचोड़ ले आज. आज तगड़े मर्द से पला पड़ा है. अभी तक तो उस पिलपिले से काम चला रही थी. अंदर तक थोक पूरा. आज साडी गर्मी निकल दे इसकी.

लल्लू- ये ले बर्चोढी ले…

लल्लू उसके गर्दन से पकड़ क्र उसे दीवाल से चिपकाये एक हाथ से उसके कमर मई फसा क्र रधिया की बड़ी गांड को बहार निकल क्र हुमच हुमच क्र उसे पेले जा रहा था.

रधिया कम्पटी हुई झरने लगी थी.

लल्लू झट से लैंड निकल क्र उसके एक पेअर को अपने कमर से लपेट क्र उसे पीठ से अब दिवार से लगा क्र आगे से पेलने लगा.

रधिया अपने दातो से होठ कटती कभी तो कभी अपने हाथो से अपनी hi चुकी को दबोच क्र मसलने लगती.

लल्लू राडिया क गांड क निचे दोनों हाथ लगा क्र उसे उठा लिया और अपने लैंड पर उसे उछलने लगा.

रधिया अजीब अजीब आवाजे निकलते हुए बड़बड़ा रही थी.

उसके सर क बल सरे इधर उधर बिखर गए थे जो उसके चेहरे पर पसीने क साथ चिपक क्र अजीब सा रूप बना दिया था.

लल्लू जार तक अपने मुसल को ठोकता उसे अपने हाथो से उछाल रहा था और उसके गांड क छेद को अपने एक ऊँगली क नाख़ून से कुरेद भी रहा था.

रधिया आँखे बंद किये हुए मजे की वादियों की सैर क्र रही थी.

वो लल्लू क गले मई बहे डेल उसके कमर से अपने पेअर को कैची की तरह फसाये कूद रही थी अपनी गांड उठा उठा क्र.

थोड़ी देर बाद लल्लू वही रूम मई बीएड को पकड़ा क्र झुका दिया और उसके गांड पर थप्पड़ो का बरसात करता अपने लैंड को उसके छूट क लाल हो चुके छेद पर रगड़ने लगा.

रधिया अपने दांतो को भींचे ईसीई इस करती मजे ले रही थी कुटाई का.

लल्लू- लगता है अपनी ढोलकी का भी उद्घाटन करवा राखी है रंडी ने.

लल्लू एक ऊँगली उसके बुर मई घुसा क्र गिला क्र उसके गांड क छेद मई दबाता बोलै.

रधिया- नहीं रे वो अभी कोरी है राजा. वो तुम्हे hi गिफ्ट करुँगी. थम जा कभी सही मौका लगन दे फिर से.

लल्लू एक hi बार मई जार तक लल्लू पेलता हुआ उसके गांड से अपने बॉल्स को भिड़ाता हुआ बोलै.

लल्लू- फिर कब मौका लगेगा तेरा. आज hi सही समय है करवा ले उद्घाटन.

रधिया- न न. आज इसी मई मैं पास्ट हो गई. ढोलकी फोड़वा ली जो फिर घर भी नहीं जा पाऊँगी.

लल्लू फिर से रधिया का रेल बनाना चालू क्र दिया.

थोड़ी देर मई hi रधिया का पेअर कम्पनी लगा.

वो एक जोर की चीख मरती हुई मूट निकल दी जरने क साथ.

लल्लू भी अब अपने पड़ाव पर hi था वो भी उसके कमर को पकडे जोर दर शॉट लगा रहा था.

लास्ट मई हुंकार भरता एक आखरी धक्का लगता हुआ वो रधिया क गांड पर अपना सारा मलाई फैला दिया.

लल्लू- ये ले यहाँ माखन लगा दिया हु अब अगली बार जब भी आएगी तो यहाँ छोड़ी चलेगा.

रधिया वही जमीं पर पसर गई गांड उठाये.

दोनों बंद कमरे मई पसीने से भींग गए थे.

लल्लू धोती को सही करने क बाद रधिया को उठा क्र बीएड पर लेता दिया.

लल्लू- यहाँ आराम क्र मई आता हु मजदूरों को देख क्र.

लल्लू उसके कपड़ो को सही करता उसके एक चुकी को मुठी मई भर क्र मरोड़ता हुआ बोलै.

रधिया- आह्हः हरामी साला…

लल्लू हस्ता हुआ गेट खोल क्र बहार निकल आया फिर गेट सत्ता दिया.

एक चक्कर खेत का लगा क्र लल्लू जब वापस आया तो रधिया भी वह से जा चुकी थी.

लल्लू फिर से वही बीएड पर लेट गया.
 
कुछ नहीं बस थोड़ा सा इंतजार...

यार स्टोरी थोड़ा भटक गया है. इसे सही लाइन पर लेन क लिए कुछ दिमाग मई नहीं आ रहा था तो इसी लिए रुका हुआ था.

थोड़ा थोड़ा टाइप क्र रहा था अपडेट जो आज दे दिया है. उम्मीद है बहुत जल्द पटरी पर आ जाएगी गारी. नहीं तो फिर जैसे चल रही है वैसे तो चलती hi रहेगी.

थोड़ा लेट होगा लेकिन बंद नहीं होगा. भाग क्र कही नहीं जाऊंगा मई इतना भरोसा रखना.
 
यही हु लेकिन आगे समझ नहीं आ रहा कहा कैसे बढ़ाऊ स्टोरी. लोखड़ौन हुआ था जब तो यु hi बैठा पगला रहा था न्यूज़ देखता हुआ तो बस उस टाइम जो दिल मई आता था लिख क्र यहाँ पेस्ट क्र देता था. जो की पहले भी आप सब को बताया था की मुझ से सोच क्र नहीं लिखा जाता जिस कारन मेरे स्टोरी मई कही भी इमोशंस नहीं है. ये प्यार इमोशंस मेरे बस का रोग नहीं.

थोड़ा लेट होगा लेकिन यही हु कही नहीं जा रहा है. अपडेट आते रहेंगे.

थोड़ा भटक गया हु. रास्ता धुंध रहा हु.

:डी सत्य वचन.

कितने ुसार है आप सर्कार.

सॉरी इंतजार करवा रहा हु.

अब से अपडेट आये या न आये मई जरूर यहाँ आऊंगा. :डी

आ गया है सर्कार. :dost::hug:

:lotpot::lol:

बहुत नाराज लग रहे है आप. प्लसस हमका माफ़ी दे दो.

सर्कार अपडेट दे दिया हु.

ये समझ नहीं आया आकाश भाई. सर क उप्पेर से चला गया. जरा सही से समझाना प्लस.

सोररीयय नॉट पॉसिबल. बूत कोसिस करूँगा.

सुच कहना सुखी rahna.:D

अपडेट दे दिया है अवि गोस्वामी स्वामी.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 76

साम मई रवि काका खेत आये तो लल्लू वह से वापस घर आ गया.

दालान पर बुआ दादू क पास बैठी बाटे क्र रही थी.

नलका पर हाथ पेअर धो क्र आया और लल्लू भी वही बैठ गया.

दादू- ज्यादा म्हणत तो नहीं करवा रहे ये लोग तुम से.

लल्लू- नहीं दादू. वह मेरा क्या काम है बस बैठा मजदूरों को काम करता देखते रहना. साम हुआ तो घर आ जाना.

बुआ- वैसे पापा इस से काम करवाना अच्छी बात है. वैसे hi बैल जैसा हो गया है घर मई परे परे.

दादू- देख रहे हो क्या कह रही है.

लल्लू- आप देखिये दादू. भलाई का तो जमाना hi नहीं रहा. मई hi इनका इतना ख्याल रखता हु और मेरे बारे मई hi कैसे बोल रही है.

बुआ- तुम मेरा ख्याल क्या रखते हो बताना जरा.

लल्लू- बता दू….

लल्लू बुआ क आँखों मई झांकता बोलै.

लल्लू का इसरा समझ क्र बुआ सरमाती हुई अपनी नजरे झुका ली.

सरम से उनका गाल लाल हो गया था.

दादू- तेरी बुआ अब जाने को कह रही है. परसो जाना चाहती है ये.

लल्लू- परसो तो सायद भैया भी जा रहे है. फिर तो ये घर hi सुना सुना सा हो जाएगा. मन hi नहीं लगेगा.

बुआ- बहुत दिन हो गया है. वह से भी बार बार कॉल आ रहा है. फिर आउंगी न बाद मई.

लल्लू- मई क्या कह सकता हु वैसे कुछ दिन और रुक जाते तो अच्छा था.

बुआ- मई बहुत जल्द फिर आउंगी.

लल्लू बुआ का चेहरा निहारता रह गया.

दादू- रवि नहीं गया था क्या आज.

लल्लू- वो थोड़ा बाजार गए थे दिन मई. वह से आने क बाद अभी गए थे फिर से.

दादू- एक बार बुआ को मार्किट से घुमा लाना. जो भी लेना है वह से ले लेंगी.

लल्लू- ठीक है दादू. कल बुआ को लेता जाऊंगा मार्किट.

फिर लल्लू और बुआ वह से आँगन मई आ गए थोड़ी देर दादू क पास बैठने क बाद.

लल्लू वह से अपने कमरे मई चला गया.

कमरे मई अभी सभी बहने लक्ष्मी और बड़ी भाभी क साथ बैठे बाटे क्र रही थी और लल्लू क दिए बीज का भी काम कर रही थी.

लल्लू सीधा वाशरूम मई जा क्र नहाया फिर वह से टॉवल लपेटे बहार आ गया.

कोमल- नंगु कपडे तो ले क्र जाता अंदर फिर नाहटा.

लल्लू- क्यू मैंने टॉवल तो पहना है. वैसे भी यहाँ कौन सा कोई गैर है.

गौरी- तो क्या हम लोगो क सामने ऐसे नंगु पंगु घूमेगा.

लल्लू- आप को बुरा लग रहा है तो आँखे बंद क्र लो अपनी.

रोमा और मीनू तो लल्लू को खा जाने वाली नजरो से घर रही थी.

रानी रोमा क जांघ पर एक चपत लगाई.

रोमा झेपते हुए अपनी नजरे नीची क्र ली.

भाभी- लल्ला ने टैटू तो बड़ा मस्त बनाया है. कहा बनवाया था ऐसा टैटू.

लल्लू- भाभी ये टैटू मैंने कुम्भ मई दादू क साथ गया था तभी बनवाया था.

लक्ष्मी- लेकिन पहले तो इतना फैला हुआ नहीं था ये. पहले सिर्फ पीठ पर उप्पेर एक बाज था लेकिन अब तो ये कंधे और हाथ पर भी सांप क जैसा कुछ बना हुआ है.

कैसे अजीब अजीब चीजे बनवा लेते हो आप.

गौरी- ोूःहहू तो भाभी पहले देखि थी तो सिर्फ बाज hi दिखा था और अब बड़ा सा सांप भी दिख रहा है.

रोमा- तब सांप अपने बिल मई होगा यार. इसी लिए नहीं दिखा होगा लक्ष्मी भाभी ने.

रोमा मीनू क हाथ पर ताली मरती हुई हस्ते हुए बोली.

लक्ष्मी सरमाती हुई मुँह झुकाये बैठी थी.

सरम से लक्ष्मी का पूरा चेहरा लाल हो गया.

भाभी- तो क्या हो गया. सांप अपने बिल मई hi तो था. उसका तो काम hi एबी है. अगर आप का बिल तैयार है तो बता दो मई सिफारिश करती हु आप क लादले भाई से.

गौरी- हमारे लिए आप को सिफारिश करने की कोई जरुरत नहीं है. मेरा भाई है ये. आप अपना देखो.

लल्लू जल्दी से कपडे पहन क्र वह से बहार भाग आया.

बच गया नहीं तो सब मिल क्र पूरा नंगा करने क फ़िराक मई थे लगता है.

लल्लू बहार आ क्र गहरी सास लेता बोलै.

" क्या हुआ ऐसे क्यू भाग क्र आये."

ऋतू काकी बहार बैठी सब्जी काट रही थी वो लल्लू को कमरे से ऐसे निकलता देख क्र बोली.

लल्लू- सब मिल क्र मेरा पोपट बना रही थी इसी लिए भगा हु.

ऋतू- बच क्र रहा क्र इन लड़कियों से तुम नहीं तो किसी दिन मर खिला देगी ये लोग.

लल्लू आ क्र वही आँगन मई पैर क निचे बिछे चटाई पर बैठ गया.

लल्लू- काफी गदराई माल हो गई हो तुम.

ऋतू- क्या फायदा तुम तो देखते भी नहीं इस बूढी की और.

लल्लू- आज आप का भी नंबर लगेगा.

ऋतू- मेरा भी मतलब…

लल्लू- आप का भी मतलब कल का अधूरा छोटी काकी का आज पूरा करना है फिर आप का. दरवाजा खुला रखना.

ऋतू- ठीक है फिर. लेकिन आराम से..

लल्लू- आप फ़िक्र मत करो. बस सुबह जरा उनका ख्याल रखना.

रात खाने क बाद लल्लू अपना बिस्तर ले क्र कमरे से निकलने लगा.

सोनम- क्या बात है आज कल छत पर सोने लगा है.

लल्लू- क्या करू फिर. आप सब यहाँ भी अब डेरा जगाने लगे है तो मई छत पर hi चला जाता हु.

गौरी- आज कल कुछ ज्यादा hi समझदार हो गए हो. सबस ऐसे hi अच्छे बच्चे की तरह छत पर चले जाया करना डेली.

रोमा- ककी लक्ष्मी जी से तो हमारी गौरी भैया ने रात मई सदी क्र ली है.

लल्लू कमरे से बहार भाग आया नहीं तो पता नहीं क्या क्या सुनते रहते ये लोग.

लल्लू छत पर बिस्तर लगा क्र उप्पेर hi टहलने लगा था.

जब पूरा गौण जैसे संत हो गया था. लल्लू भी आ क्र अपने बिस्तर पर लेता हुआ आकाश मई टिमटिमाते हुए तारो को निहार रहा था. तब एक परछाई छत पर आई.

छत पर बल्ब बुझा हुआ था तो लल्लू ने अंदाजा लगाया की शालिनी काकी hi आई है.

थोड़ी देर छत पर टहलने क बाद वो आ क्र लल्लू क पास कड़ी हो गई.

लल्लू सोने का नाटक करता हुआ लेता रहा.

कुछ छान छत पर खड़ा रहने क बाद वो लल्लू क एक और बिस्तर पर आ क्र बैठ गई.

लल्लू अभी भी वैसे hi लेता रहा.

वो देखना चाहता था की ये जो कोई भी आयी है आगे क्या करती है.

वो परछाई धीरे से लल्लू क चेहरे को सहला क्र उसके बगल मई लेट गई.

थोड़ी देर लेते रहने क बाद वो लल्लू की और पीठ क्र करवट बदल क्र सो गई.

लल्लू फिर उसके और घूम क्र अपना हाथ बड़ा उसे अपने बहो मई भर क्र उस महिला क पीठ से जा चिपका.

लल्लू का हथियार तो पहले से hi तैयार था.

वो उस महिला क साडी क ऊपर से hi उसके जांघो क बिच घुस गया था.

लल्लू साडी को साइड करता हुआ उनके नंगे पेट पर हाथ से सहलाता पीछे से उनके गर्दन को चुम लिया.

काकी क होठो से एक दबी हुई सीइससलकारी निकल गई.

लल्लू पेट सहलाता हुआ धीरे धीरे अपने हाथ को उप्पेर ले जाने लगा.

उप्पेर काकी क दो पर्वतो क सरूवात मई उस से निचे रोक लिया.

काकी की ससे तेज हो गई थी.

वो लल्लू से चिपकी गहरी गहरी ससे ले रही थी.

लल्लू काकी क एक कान को चुम लिया फिर उस मई अपना जीभ निकल क्र घूमने लगा था.

काकी तरप उठी लल्लू क बहो मई.

वो झट से घूम क्र लल्लू को काश क्र अपने आगोश मई ले ली और उसके होठो पर अपने होठो को रगड़ने लगी.

लल्लू काकी क उप्पेर क होठो को मुँह मई ले क्र चूसने लगा. जैसे कोई बचा कैंडी को मुँह मई ले क्र चुस्त है.

लल्लू बरी बरी से काकी क उप्पेर और निचे क होठो को चूस चूस क्र फुला दिया.

लल्लू फिर काकी क फुले हुए कश्मीरी सेब की तरह लाल गाल को मुँह मई भर क्र चूसने काटने लगा था.

काकी तो बस आहे भर रही थी.

लल्लू काकी क गाल को छोड़ क्र उनके गर्दन को चूमता हुआ काकी क उन्नत पर्वत क बिच क घाटी मई जीभ की नोक से कुरेदने लगा था.

काकी अपने हाथो से लल्लू क बालो मई ऊँगली चलते हुए उसे अपने साइन पर दबाने लगी थी.

काकी अपनी सर को पीछे खींचते हुए लम्बी क्र ली थी.

लल्लू काकी क कैसे हुए ब्लाउज से झटके बूब्स को होठो मई दबा क्र चूसने लगा था.

एक हाथ से वो काकी क गहरी नाभि मई ऊँगली घुसा क्र सहलाता भी जा रहा था.

काकी अपनी कमर को उठा क्र आहे भर्ती हुई झरर गई.

वो गहरी सास लेते हुए अपने आँखों को मूंदे इस मजे का आनंद ले रही थी.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र काकी क ब्लाउज को खोल क्र दोनों और कर दिया.

वाइट ब्रा मई कैसे हुए काकी क गोर बूब्स अँधेरे मई भी चमक रहा था.

लल्लू ब्रा क उप्पेर से hi काकी क एक चुकी को जितना आ सकता था उठा मुँह मई भर क्र पिने लगा और दूसरे को अपने एक हाथ से पकड़ क्र मसलने लगा.

काकी का हाथ ऑटोमेटिकली लल्लू क पीठ पर कस्ते चले गए.

थोड़ी देर उप्पेर से hi मजे देने क बाद लल्लू काकी को घुमा क्र पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया और ब्लाउज क साथ ब्रा को भी निकल क्र अलग रख दिया.

अब काकी क दोनों कबूतर खुली हवा मई सर उठाये हुए थे.

लल्लू उन मोठे बूब्स क टिप को जिव निकल क्र हलके हलके से कुरेदने लगा तो काकी लल्लू क बालो को मजे से नोचने लगी.

लल्लू एक निप्पल को मुँह मई ले क्र चूसने लगा और ड्सरे को अपने दो उंगलियों मई दबा क्र उसे मसलने लगा था.

काकी आह आह करती कभी सर इधर करती तो कभी उधर.

लल्लू दोनों चूचियों को बरी बरी से फुलनेका काम करता रहा.

फिर वह से खिसक क्र लल्लू उनके चिकने पेट पर चूमता काकी क पेटीकोट क नारे को पकड़ क्र खींच दिया.

जैसे hi पेटीकोट खुला लल्लू साडी सहित पेटीकोट को पकड़ क्र उनके जिस्म से अलग क्र दिया.

अब काकी सिर्फ एक पेंटी मई चाट पर खुले आसमान क निचे लेती हुई थी.

लल्लू काकी क पेंटी क उप्पेर से hi पहले हुए अमृत द्वार को मुठी मई भर क्र भींच दिया.

काकी सिसक क्र लल्लू क हाथ को पकड़ ली.

लल्लू फिर वो एक मात्रा वस्त्र को भी निकल क्र काकी को पूरा नंगा क्र दिया.

लल्लू काकी क पेअर की और आता हुआ अपने सर उनके योनि मुख पर झुकता चला गया.

काकी दोनों हाथो से चादर को काश क्र पकड़ ली जब लल्लू का लपलपाता हुआ जिव काकी क रास बहती दो फको मई घुस क्र इस मई से रास निकलने लगा था.

लल्लू पुरे लगन से काकी क अमृत रास को गटकनेमाई लगा था तो इधर उसका दोनों हाथ मई दो पके रास से भरे मोठे और बड़े पपीते.

हैयय क्या कहना.

दोनों अभी मजे क हिंडोले mài ूर्णे वाले है कुछ hi देर मई.

काकी दूसरी बार अपने चरम पर पहुंच रही थी.

वो एक हाथ से अपने एक चुकी को मसलती हुई दूसरे हाथ से लल्लू क सर को अपने दोनों जांघो क बिच घुसाए हुए थी.

लल्लू का सर दो मांशल जांघो क बिच फसा हुआ था.

लल्लू का पुअर मुँह नाक सभी जगह काकी अपना रास लगा दी थी.

इस बार तो ऐसे निकला जैसे काकी ने कोई नलका खोल दिया हो.

सारा पानी चाट करने क बाद लल्लू सर उठा क्र बैठ गया बगल मई फिर अपने धोती को एक और खोल क्र रख दिया.

थोड़ी देर अपने हाथो से अपने लुल्ला का मालिश करने क बाद लल्लू काकी क दोनों पेअर को फैला क्र उसके बिच बैठ गया और अपने औजार को पकड़ क्र काकी क गीली छूट पर रगड़ने लगा.

थोड़ी देर रगड़ क्र अच्छे से गिला करने क बाद लल्लू स्वर्ग क द्वार पर लगा दिया अपना डंडा और हलके से एक धक्का लगा दिया कमर पकड़ क्र काकी क.

लैंड का टोपा फिसलता हुआ अंदर जा क्र फस्स गया.

काकी कराह क्र रह गई.

लल्लू को अपने लैंड पर बड़े मजे की कसावट महसूस हो रही थी और इतनी hi गर्म अंदर से.

लल्लू झुकता हुआ काकी क होठो को अपने होठो से दबा क्र एक करारा धक्का लगा दिया.

लैंड काकी क कोमल छूट को ककड़ी की तरह फरता जार तक जा घुसा.

काकी एक बार जोर से मचल क्र संत हो गई.

उनके मुँह से निकलने वाली चीख भी लल्लू अपने मुँह मई जप्त क्र लिया था.

लल्लू वैसे hi रुक क्र काकी क चूचियों को मसलता हुआ उसे पिने लगा था.

काकी बेसुध हो वाई थी इस हमले से.

जैसे hi उनका होश सम्भला वो लल्लू क होठो को जोर से अपने दातो से काट ली

लल्लू एक कराह मर क्र रह गया.

उसके होठो से खून निकलने लगा था.

लल्लू काकी क चूचियों को कास कास क्र दबाता उन्हें अपना खून पिलाने लगा.

काकी भी लल्लू क होठो से बहते खून को चूस क्र साफ़ क्र दी.

जब लल्लू को लगा की अब काकी ठीक है तो वो अपना कमर हलके हलके हिलना सुरु क्र दिया.

काकी अपने दोनों पैरो को उठाये निचे से हलके हलके कमर उठती लल्लू का पूरा साथ दे रही थी.

लल्लू दोनों हाथो से काकी क पोस्ट उभर को दबाता हुआ अपना कमर हिलने की गति लगातार बढ़ता जा रहा था.

थोड़ी देर मई hi काकी की गरम गीली सरंगः लल्लू क डंडे को अपने अंडर समेटे फूलने पिचकने लगी.

काकी लल्लू क कमर मई अपने पैरो से कैची बनती जाकर ली और लल्लू क पीठ पर अपना नाख़ून गदति झरने की तरह भलभला क्र काम रास छोड़ दी.

योनि मई पर्याप्त मात्रा से ज्यादा पानी होने से लल्लू क लैंड क इन आउट होते hi अजीब अजीब सी आवाजे निकलने लगी जो इस संत काली रात मई पुरे छत क संत वातावरण को भांग किये हुए था.

लल्लू अब काकी को बिस्तर पर हाथ पकड़ क्र उठा लिया और उन्हें घुमा क्र घोड़ी बना दिया वही फिर उनके पीछे से गोल गोल गांड को मसलता हुआ अपना लैंड छूट क मुँह पर लगा क्र आहिस्ता से अंदर तेल दिया.

लल्लू का लोला फिसलता हुआ आधा छूट मई घुस गया.

लल्लू काकी क मखमली गांड को सहलाता हुआ लग गया काकी को स्वर्ग का दर्शन करने.

काकी सिसकती हुई अपने गांड को पीछे लल्लू की और धकेल क्र और लैंड अपने अंदर ज्यादा से ज्यादा अपने मई सामने मई लगी हुई थी.

लल्लू क सरीर का खून अब जैसे लग रहा था सारा उसके लैंड की और खींचा चला आ रहा है.

लल्लू ताबरतोड़ काकी की ठोके करता हुआ उनके छूट को फैलाये जा रहा था.

काकी भी लल्लू का पूरा साथ दे रही थी. वो भी एक बार फिर से अपने मंजिल क पास hi थी.

अपने होठो को दांतो क बिच दबाये अपने बड़ी सी ओखली जैसी गांड को लल्लू क लैंड पर पटके जा रही थी.

काकी को आज जीबन मई पहली बार चुदाई मई कितना आनंद है इसका पता चल रहा था.

वैसे तो एक बेटी गौरी की माँ भी थी लेकिन काका कभी ऐसे तबियत से इनकी ठोके नहीं किये थे जैसा आज लल्लू ने किया है.

सरीर का पोर पोर हिला दिया है आज तो लल्लू ने.

काकी सिसकती हुई अपने बदन को करा करती सर को निचे तकिये मई गदा ली और झरने लगी थी. वो अभी झरते hi जा रही थी रह रह कर.

पूरा सरीर कम्प रहा था. होठ फरफरा रहे थे. मुँह से कोई आवाज नहीं निकल रहा था. हलक सुख गया था लेकिन जो मजा अभी आया था वो अविश्मरणीय था.

लल्लू भी अब अपने मंजिल क करीब hi था. वो दो चार लम्बे शॉट मरता हुआ एक हुंकार भरता काकी क उप्पेर ढेर हो गया.

दोनों पसीने से भीगे हुए थे.

काकी पेट क बल बिस्तर पर लेती हुई थी अपनी गांड उठाये हुए और उनके पीठ पर लल्लू लम्बी लम्बी ससे लेता गिरा पड़ा हुआ था.

जैसे आज काकी ने लल्लू को पूरा निचोड़ hi ली थी.

थोड़ी देरी जब सास संभाली तो लल्लू काकी क उप्पेर से साइड मई हो क्र लेट गया उन्हें अपने बहो मई लेता.

काकी घूम क्र लल्लू क आगोश मई आ करनांगी hi उस से चिपकी अपने संदर कुटाई को महसूस करती आँखे बंद किये हुए थी.

काकी को तो ऐसा लग रहा था जैसे अभी भी लल्लू का मोटा कहता उनके छूट मई गदा हुआ है.

रह रह क्र उनकी छूट फरक उठती थी.

थोड़ी देर ऐसे hi खुले आसमान मई नंगे सोने क बाद लल्लू उठ क्र काकी को सारा कपडा पहना क्र उन्हें अपने गॉड मई उठा लिया और निचे चल दिया.

निचे आँगन मई नलका क तरफ एक काम पावर का बल्ब जल रहा था जिसकी माध्यम रोशनी इधर कमरे की और भी आ रही थी.

लल्लू काकी को गॉड मई उठाये जैसे hi रोशनी मई आया तो देखा की शालिनी काकी आँखे मूंदे मंद मंद मुसकुदा रही थी.

लल्लू हलके से काकी का होठ चुम क्र उन्हें उनके कमरे मई बिस्तर पर लेता दिया.

लल्लू काकी को बीएड पर लेता क्र जैसे hi पलटा काकी उसका हाथ पकड़ ली.

लल्लू घूम क्र काकी क आँखों मई देखा तो काकी नजरे नीची किये हुए थी.

काकी- आज यही सो जाओ.

लल्लू- आ रहा हु छोटी माँ. जरा A.C चालू क्र देता हु न.

फिर काकी उसका हाथ छोड़ दी.

लल्लू एक चालू क्र वापस आ क्र काकी क बगल मई लेट गया.

काकी लल्लू क साइन मई मुँह घुसा क्र किसी छोटे बच्चे की तरह उसे पकडे सो गई.

लग रहा था जैसे आज भी वो ऋतू काकी क पास नहीं जा पायेगा.

कल पक्का वो नाराज हो जाएगी.

थोड़ी देर काकी क चेहरे को निहारता लल्लू वैसे hi लेता रहा.

कब नींद आ गया उसे पता hi नहीं चला.

सुबह 4 बजे उसकी नींद खुल गई हमेसा की तरह.

काकी अभी भी लल्लू क बनियान को मुठी मई पकडे सो रही थी जैसे वो कही भाग जाएगा.

लल्लू झुक क्र काकी क होठो को चुम लिया.

काकी मुसकुडती हुई सीधी लेट गई.

लल्लू आहिस्ता से बीएड से उठ क्र दरवाजा खोल क्र बहार आ गया और फिर से दरवाजा सत्ता दिया पहले क जैसे.

वो एक बार ऋतू काकी क कमरे की और देखा तो उनके कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था.

लल्लू आगे बढ़ क्र दरवाजा खोल क्र अंडर देखा तो काकी जग गई थी.

वो लाइट जलाये आईने क साणे कड़ी अपने बालो को सही क्र रही थी.

लल्लू हलके से दरवाजा पूरा खोल क्र कमरे क अंडर आ गया और फिर से दरवाजा लगा दिया.

काकी क पीछे जा क्र वो उनके चिपक क्र आप इ हाथो को उनके चिकने पेट पर बांध लिया.

काकी को लल्लू कई दिनों से तारपा रहा था तो काकी गुस्से मई लल्लू को अपने से दूर धकेल क्र वापस अपना बाल बनाने लगी.

लल्लू- सॉरी काकी छोटी काकी रात जाने hi नहीं दी कही. मेरा बनियान पकड़ क्र सही हुई थी जैसे उन्हें पता था की मई कई भाग न जाऊ.

काकी- तो यहाँ क्या करने आया है जा उसी क पास.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र उनके एक स्तन को दबाता हुआ उनके पीछे ब्लाउज से बहार झाकते पीठ पर अपना होठ लगा दिया.

काकी- ीिस्स क्या क्र रहा है. तंग मत क्र. जा यहाँ से.

काकी क बदन क सरे रोये खड़े हो गए थे.

छूट गीली हो क्र दो बून्द टपका दिया था पंतय मई.

लल्लू दूसरे हाथ मई उनके दूसरे अनार को पकड़ क्र जोर से मिस दिया.

काकी- आयी क्या क्र रहा है नासपीटे. सब उठ रहे होंगे अब. कोई सुन लेगा.

लल्लू- अभी कोई नहीं उठ रहा. थोड़ा सा करने दो न काकी.

लल्लू अपना लैंड निकल क्र धोती से और काकी क हाथ मई पकड़ा दिया मुठी बना क्र.

काकी लल्लू क गर्म लैंड को कास क्र पकड़ ली और आगे पीछे कर क हिलने लगी.

लल्लू- आठ काकी तू कितनी मस्त है. तुम मेरे दिल की बात समझ जाती हो.

काकी- क्यू शालिनी ने तेरे मन का नहीं किया क्या.

काकी लल्लू क डंडे को मरोड़ती हुई बोली.

लल्लू- आअह्ह्ह क्या क्र रही है. तोड़ेगी क्या.

लल्लू काकी क फुले हुए छूट को मुठी मई ले क्र भींच दिया.

काकी झटके से पलट क्र लल्लू को धकेलती हुई बीएड पर गिरा दी और उसके धोती को खींच क्र खोल दी.

लल्लू बीएड पर लेता हुआ था.

काकी लल्लू का धोती खोल क्र अपनी साडी कमर तक उठा क्र दोनों पेअर लल्लू क दोनों और कर ली और बैठती चली गई लल्लू क लैंड पर.

एक hi बार मई लल्लू का पूरा लैंड काकी क गद्देदार छूट मई जार तक जा पंहुचा.

ऋतू काकी चीखती हुई लल्लू क छाती पर गिरने लगी तो लल्लू अपने हाथो से संभल लिया.

काकी- हेय मर गई. इतनी आग लगी थी की भूल hi गई की ये किसी इन्शान का नहीं गधे का लैंड लटकाये घूमता रहता है.

मर्डर दिया. आठ माँ फट गई मेरी बुर्र.

लल्लू काकी क लटके बड़े बड़े चुके को ब्लाउज से बहार निकल क्र जोर जोर से मसलने लगा.

जब थोड़ी देर मई दर्द काम हुआ तो काकी लल्लू क लैंड पर धीरे थिरे उछलने लगी अपनी गांड लहराती.

लल्लू उनके चूचियों को मसलता हुआ निचे से कमर उठा उठा क्र पूरा लैंड जार तक थोक रहा था.

थोड़ी देर मई hi काकी लल्लू क लैंड को अपने प् ी से नहला दी.

काफी दिनों से प्यासी थी और पहले से hi गीली हो गई थी तो आज जल्दी hi काकी खली हो गई लेकिन लल्लू का तो अभी सुरु hi हुआ था.

वो काकी को निचे बीएड पर लेता क्र उनके दोनों पैरो को मोर दिया और उनके छाती से चिपका दिया.

काकी- क्या क्र रहा है. मरेगा क्या.

लल्लू- है आज तो कास क्र मरूंगा की एक महीना तक अपनी तंग फैला क्र चलोगी तुम.

काकी- तेरे जैसे तीन तीन निकल दिया हु मई इस छोटी सी छूट से.

लल्लू- देखना फिर थोड़ी देर बाद. इस छूट और गांड का आज क्या हाल होता है.

लल्लू काकी क फुले हुए पेअर मोर्ने से उभर क्र बहार को निकले छूट मई मुँह लगा क्र दो तीन बार उप्पेर से निचे जिव से चाट लिया.

काकी हेय हेय करती रह गई.

लल्लू अपना लैंड छूट क छेद पर लगा क्र एक बार मई hi पूरा थोक दिया.

फिर कास कास क्र काकी को पेलने लगा.

ऋतू काकी सब से कड़क माल थी लल्लू क घर मई.

वही थी अभी तक जो लल्लू को कड़ी टक्कर दे रही थी. वैसे भी उम्र हो गया था तो उस हिसाब से तजुर्बा भी बाहत था उन्हें.

मोती होने क बाद भी सरीर मई लचीला पैन काम नहीं हुआ था और न hi अभी सरीर ढीला hi हुआ था.

लल्लू 10 मिनट्स तक टाबर तोड़ इसी आसान मई ठोकता रहा और काकी मन भर उसे गली देते हुए दो बार जहर चुकी थी.

फिर लल्लू उन्हें घुमा क्र दोगी स्टाइल मई क्र दिया और पीछे आ क्र काकी क छूट रास से भींगे लैंड को उनके गांड क भूरे चङनि क बराबर छोटे छेद मई अपना लैंड लगा दिया.

काकी- आज वह रहने दे. मई बहुत थक गई हु और सब उठ गए होंगे. पता चल जाएगा सब को.

लल्लू- कोई बात नहीं. आज तो आप की साडी गर्मी ख़त्म क्र क hi डैम लूंगा.

लल्लू आराम आराम से अपना लैंड उनके गांड मई उतरने लगा.

काकी होठ भींचे दर्द बर्दास्त कर रही थी.

थोड़ी देर मई आधा लैंड काकी क गांड मई चला गया था.

लल्लू आधे लैंड से hi काकी क गांड क छल्ले को ढीला करना चालू क्र दिया.

थोड़ी देर काकी कराहती रही अपने होठो को भींचे जब लल्लू क लैंड क लायक जगह बन गया अंदर तो दर्द काम हो गया उनका.

अब वो भी मजे लेते हुए अपनी गांड कुटाई का आनंद लेने लगी.

लल्लू तो ताबरतोड़ लगा पड़ा था काकी की मोती गांड को मसलता हुआ.

कासी हुई मोती गोरी गांड को मरने मई लल्लू को बड़ा मजा आ रहा था.

लल्लू तो जैसे मजे से बेहाल हुआ जा रहा था.

कब आधे से पूरा लैंड काकी क गांड मई जाने लगा दोनों मई से किसी को पता नहीं चला.

लल्लू दो उंगलियों से काकी क छूट को भी कुरेदे जा रहा था और इधर गांड को ढीली करने मई भी लगा हुआ था.

दोनों एक दूसरे का पूरा साथ देते हुए अपना अपना टंकी खली क्र दिए.

लल्लू पूरा पानी निकल जाने क बाद अपने लैंड को काकी क गांड से निकल लिया.

लैंड क निकलते hi काकी क गांड से लल्लू का वीर्य बहता हुआ बहार आने लगा.

काकी क गांड का सुराख़ जो पहले बिलकुल बंद था अभी तो खुल क्र फ़ैल गयी थी जो खुल रही थी तो बंद हो रही थी.

लल्लू काकी क गांड पर एक चुम्मी ले क्र बीएड से उतर गया और अपना धोती लपेट लिया.

काकी बीएड पर गांड उप्पेर किये लेती हुई थी.

लल्लू- क्यू संत हुई कुछ खुजली. या अभी बांकी है.

काकी- बस कर अब अभी मरना नहीं है मुझे.

लल्लू काकी क नंगी गांड पर एक चपत लगा दिया.

फिर उन्हें उठा क्र साडी ब्लाउज सही से पहना क्र फिर से लेता दिया और खुद बहार आ गया.

बहार सूर्य निकल चुके थे.

लल्लू आँगन मई खटिया पर बैठ गया.

देखा तो रागिनी काकी झाड़ू लगा रही थी.

झुक क्र झाड़ू लगाने क कारन उनकी आधी से ज्यादा चूचिया बहार निकल आई थी ब्लाउज से.

" आज यहाँ कैसे बैठा है इतनी जल्दी. खेत नहीं गया था क्या आज."

लल्लू नजर घुमा क्र देखा तो माँ नलका से मुँह हाथ धो क्र आ रही थी.

पानी की बुँदे उनके चेहरे पर सूर्य की रोशनी मई मोती की तरह चमक रहा था.

लल्लू- आज नहीं गया माँ. लेट हो गया था.

रागिनी- आज कल की ह ज्यादा hi म्हणत करने लगा है. इसे दूध दे गर्म करके बादाम क साथ काजल.

काजल लल्लू को घूरती हुई रसोई मई चली गई.

लल्लू भी रागिनी काकी की बाटे सुन क्र सर झुकाये उठ क्र अपने कमरे की और चल दिया.

रागिनी- कहा जा रहा है. दूध आ रहा है. यही बैठा रह.

लल्लू वापस आ क्र वही बैठ गया.

काकी- अपने सेहत का भी ख्याल रखा क्र.

लल्लू- मुझे क्या हुआ है. कितना अच्छा सरीर है मेरा बिलकुल फिट.

रागिनी- है पता है मुझे. सुख गया है और बिलकुल फिट है. अपने कमरे मई क्यू नहीं सोता है जो छत पर सोना सिख लिया है.

लल्लू- wo...wo aise..hi काकी.

लल्लू दर से हकलाता हुआ बोलै.

रागिनी काकी तीखी नजरो से देखती नल्ला पर हाथ धोने चली गई.

थोड़ी देर मई hi माँ एक बड़ा गिलास दूध का ले आई.

काजल- इतनी आवाज क्यू क्र रहे थे दोनों.

लल्लू- मई कब आवाज क्र रहा था. कौन दोनों की बात क्र रही है आप.

काजल एक चपत लगाई लल्लू क सर पर.

काजल- जहा से निकल क्र अभी आ रहा है. दोनों की आवाजे बहार तक आ रही थी. उन्हें निकलने से आज फिर मई खबर लेती हु.

लल्लू सर्मिन्दा सा सर झुकाये दूध पिने लगा.
 
थैंक्स आयरन मन.

थैंक्स भाई.

पहले पदेशन लिखा था और अब परेशां लिखता हु तो वो कभी कभी बेफोल्त ले लेता है.

रहा पीटर की बात तो ये सब इंडिया से बहार क hi है.

मैंने पहले खुल कर नहीं बताया था लेकिन हिंट दिया था.

सही कहा है भाई. लल्लू अभी कुछ समय से सही हो गया है लेकिन इसे फिर पागल बनाऊगा. पीटर क बारे मई मैंने अपडेट मई लिखा है " पृथ्वी क किसी कोने मई....."

टैटू का भी सोचता हु कुछ. अभी जैसे स्टोरी एक hi जगह रुक सी गई है.

थैंक्स भाई.

थैंक्स भाई.

थैंक्स भाई.

थैंक्स भाई.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 77.

लल्लू चुपचाप दूध पि क्र वह से उठ क्र दालान पर भाग आया.

लल्लू- बाप रे लगता है सब सुन लिए है लेकिन मैंने कब आवाज किया थोड़ा बहुत काकी हो आवाज क्र रही थी लेकिन वो भी इतना नहीं था की किसी को पता चल जाता.

फिर कैसे समझ गए ये लोग.

लल्लू सर खूझाता हुआ बोलै.

दादू- क्या बात है बरखुरदार. किस सोच मई दुने हो.

लल्लू- कुछ खाश नहीं दादू. बस ऐसे hi.

" वैसे बुआ क साथ कौन जा रहे है उन्हें छोड़ने." लल्लू दादू क पास जा क्र बैठ गया जो ाकभी रामायण का पथ क्र उसे बंद कर लाल पवित्र कपडे से लपेट रहे थे.

"तेरे रवि काका जाने वाले है तेरी बुआ क साथ."

दादू लल्लू को प्रसाद देते हुए बोले.

दादू- वैसे तुम्हारा बादाम का काम कहा तक पंहुचा है.

लल्लू- आज तिसु मई लपेट क्र तैयार हो जाएगा. फिर उन सभी को मई बुआ क उप्पेर वाले कमरे मई दाल दूंगा कुछ बास्केट मई दाल क्र.

15-20 दिन मई उम्मीद है बीज तैयार हो जाएगा एक मई रहेगा तो.

दादू- अच्छी बात है. वैसे अभी समय लगेगा और तुम्हे उनकी बहुत देखभाल करनी पड़ेगी.

लल्लू- है दादू. पहली बार है तो कुछ ज्यादा hi ध्यान रखना पड़ेगा. दो तीन साल तो लग जाएगा इन्हे सही से तैयार होने मई.

दादू- तुम काम hi ऐसे ढूंढे हो तो करना तो पड़ेगा अब.

वैसे तुम्हारा काका बता रहा था की धन का बीज बढ़िया था. उम्मीद है दोगुनी फसल होगी इस बार अगर बारिश सही हुआ तो.

लल्लू- है दादू. वैसे बासमती का भी वो अच्छी क्वालिटी का बीज दिया है.

दादू- खेत कब जाएगा.

लल्लू- नास्ता क्र लेता हु फिर जाऊंगा उधर.

दादू- अपनी बुआ को भी घुमा देना बाजार आज.

फिर थोड़ी देर वह बाटे करने क बाद लल्लू वापस आँगन आ गया. जहा सभी बहनो क साथ दोनों बहुये भी काम मई लगी हुई थी.

बहार माँ और रागिनी काकी क साथ ऋतू काकी भी बैठी थी.

लल्लू को देखते hi वो शर्मा क्र सर झुका ली जिस पर रागिनी काकी ने धीरे से उन्हें कुछ कहा.

लल्लू तीनो को एक साथ बैठा देख क्र अपने कमरे मई भाग गया.

थोड़ी देर मई कपडा बदल क्र लल्लू रसोई मई गया तो लक्ष्मी आता गूथ रही थी और गौरी बड़ी भाभी क साथ सब्जी की तयारी क्र रही थी.

बांकी बहने घर आँगन और कपड़ो की सफाई मई लगी हुई थी.

लल्लू- वाओ आज तो गौरी दी भी काम क्र रही है. लगता है आज तो मजेदार सब्जी बनाने वाली है.

गौरी- मर खायेगा तू. सारा तेरा किया धरा है. माँ थोड़ी सी गुस्सा हो गई और तुम दर गए. फसा दिए हम लोगो को.

लल्लू- कितनी प्यारी लग रही है मेरी गुड़िया दीदी काम करते हुए.

लल्लू पीछे से गौरी को बहो मई भर क्र उसका एक गाल मई चुम्मी देता बोलै.

गौरी बैठी सब्जी काट रही थी और भाभी मटर का छिलका उतर रही थी.

भाभी- कितना बोलै है सब ने इसे तब जा क्र अभी अभी आई है. नहीं तो सारा कोमल काट क्र गई है ये.

गौरी- मतलब मई काम hi नहीं करती हु.

लल्लू- अरे ऐसे कैसे. आप तो सब से इम्पोर्टेन्ट काम करती हो. खाना खाने का.

लल्लू बोल क्र हुस्ने लगा. साथ मई लक्ष्मी और भाभी भी हुस्स दी.

गौरी सब्जी करना छोड़ क्र मुँह फुल्ल क्र उठ गई.

सोनम- लो ये यही तो चाहती थी. तुम आ क्र इसका काम आसान क्र दिए.

गौरी को उठ क्र जाता देख सोनम वह आती हुई बोली.

लल्लू सोनम क चेहरे पर आये पसीने को अपना रुमाल निकल क्र साफ करता प्यार से देख रहा था.

भाभी- ोूहः hello मैं भी काम क्र रही हु. मेरे भी पसीने आ रहे है. बहन का पसीना दिख गया और मेरा नहीं दिखा.

सोनम- आप अपने पति देव क पास जाओ. वो साफ क्र देंगे आप का पसीना.

भाभी- क्यू, ये क्या आप क पति है जो मई भी अपने पति क पास जाऊ.

सोनम सरमाती हुई भाभी को एक चपत लगा दी प्यार से.

लल्लू वह से लक्ष्मी क पास चला गया जो आता गुथने मई लगी हुई थी.

लल्लू जा क्र उसके पीछे से चिपक गया.

लल्लू- क्या मई कुछ मदद करू मैडम.

लक्ष्मी- जी नहीं आप सिर्फ यहाँ से जा क्र खटिया पर इंतजार कीजिये नास्ता का थोड़ी देर मई बनता है तो लती हु.

लक्ष्मी आता लगे हाथ से लल्लू क गाल को सहला क्र उसके गाल मई आता लगाती बोली.

लल्लू गाल से आता साफ़ करता वह से बहार आ गया.

फिर वो वह से शालिनी काकी क कमरे मई चला गया.

काकी इस समय सो रही थी.

लल्लू सर छू क्र देखा तो हल्का बुखार लग रहा था.

अभी लल्लू बहार जा क्र काकी से कुछ पूछ भी नहीं सकता था तो वो वह से उप्पेर क फ्लोर पर बुआ क कमरे मई चला गया जहा बुआ अपने कपडे को बैग मई रख रही थी.

लल्लू कमरे मई जा क्र बुआ को अपने बहो मई भर क्र उनके होतो पर अपना होठ लगा दिया.

बुआ कपडे रखना छोड़ क्र लल्लू क पीठ पर हाथ कश्ती हुई उसका भरपूर साथ दे रही थी.

10-12 सेकंड बाद दोनों क होठ अलग हुए तो दोनों क होठो क बिच एक तर सा बनता लार का खींच गया.

लल्लू बुआ को बहो मई लिए हुए उसके चेहरे को देख रहा था.

लल्लू- अभी से जाने की तयारी हो रही है.

बुआ- वो थोड़ा कपडा बहार था तो उसे सही से सेट क्र रही थी.

लल्लू- आज अपना पूरा दिन आप मेरे साथ बिताएंगी.

बुआ- मई तो खुद यही चाहती थी.

बुआ क चेहरे पर एक हसीं चमक आ गई.

लल्लू- नास्ता करने क बाद आप मेरे साथ खेत पर चलेंगी. वह हम लोग नदी मई नाहा क्र खेत जाएंगे फिर वह से कुछ समय बाद बाजार फिर साम तक वापस घर.

लल्लू बुआ क दोनों उभारो को पंजे मई ले क्र सहलाता हुआ बोलै.

बुआ- ठीक है मई तैयार रहूंगी.

बुआ अपनी आँखे बंद किये हुए गहरी गहरी सास लेती बोली.

लल्लू बुआ क होठो और एक छोटा सा चुम्बन दे क्र उन्हें छोड़ दिया और वह से बहार आ गया.

थोड़ी देर मई नास्ता करने क बाद लल्लू बुआ क साथ बुलेट पर खेत की और चल दिया.

जाने से पहले ऋतू काकी से शालिनी काकी का ख्याल रखने को बोल आया था.

बुआ एक थैले मई अपना कपडा रख ली थी नहाने वाली.

दोनों वह से उसी जगह आ गए जहा लल्लू हमेसा आया करता था सुबह अँधेरे.

बुलेट आम क बाग़ मई लगा क्र लल्लू बुआ क साथ वही बाग़ मई घूमने लगा.

कपड़ो का पैकेट वही बुलेट पर रख दिया था.

वह कई तरह क आम क पैर थे.

बुआ- ये पैर मैंने लगाई है तुम्हारे पापा लाये थे यूनिवर्सिटी से इसे.

बुआ एक पैर को थपथपा क्र उसे दिखती बोली.

लल्लू- अच्छा तो आप ये सब भी किया करती थी. फिर तो नदी मई भी नहाती होंगी आप.

बुआ- है मई अपने कुछ गौण क दोस्तों क साथ यहाँ आती थी और फिर हम लोग यहाँ काफी देर मजे करते मस्ती करते फिर यहाँ नदी मई नाहा क्र hi घर जाते थे.

पिछली बार तो तुम्हारे साथ खींची चली आई थी और कुछ सही से देखि भी नहीं और चली गई.

बुआ बाग़ मई घूमते हुए नदी क किनारे एक पैर क पास आ गई.

बुआ- इस पैर का ये जो डाली है न इस मई हम सभी झूला लगा क्र झूला करते थे. फिर उसी झुके से नदी मई जम्प क्र लिया करते थे.

बुआ अपने समय को याद क्र लल्लू को साडी बाटे बताती जा रही थी.

फिर दोनों वह से नदी क पास आ गए.

लल्लू- तो चले नहाने.

बुआ- आ जाओ.

लल्लू- कपडे नहीं खोलना है क्या.

बुआ साडी पहने hi नदी मई उतरने लगी थी.

बुआ- कोई आ गया तो.

बुआ चारो और देखती बोली. मन तो उनका भी क्र रहा था.

लल्लू- यहाँ कोई नहीं आता. ये अपना बाग़ है. यहाँ किसी को आने की मनाही है.

फिर बुआ वही किनारे जल्दी से अपना साडी और ब्लाउज उतर क्र किनारे रख दी.

ब्लाउज खुलते hi स्किन कलर का ब्रा मई कैद 34 की मस्त चूचिया बेपर्दा होने को आतुर हो रहे थे.

बुआ- ऐसे मत घूरो. तुम उधर घूम जाओ.

लल्लू- मुझ से क्या छुपाना. मैंने सब देखे है.

बुआ- फिर भी अभी मुझे सरम आ रही है.

लल्लू बुआ की और पीठ क्र लिया तो बुआ जल्दी से पेटीकोट खोल क्र छाती तक लती ब्रा भी खोल क्र वही साडी और ब्लाउज क पास रख दी और फिर निचे से पेंटी भी खोल क्र निकल दी और खोले हुए कपडे क साथ लपेट क्र रख दी.

बुआ जल्दी से गले तक पानी मई जा क्र कड़ी हो गई.

बुआ- अब क्या वैसे hi खड़े रहना है या आओगे भी.

लल्लू घूम क्र देखा तो बुआ का सर पानी से बहार था.

लल्लू- आप बहुत चालक हो. खुद तो उधर घुमा दिया और अब गुस्सा भी क्र रही हो.

बुआ- अब जल्दी से आ जाओ.

मुसकुडती हुई बोली बुआ.

लल्लू सरे कपडे खोल क्र सिर्फ कच्चे मई पानी मई उतर गया और बुआ की और चल दिया तो बुआ तैरती हुई उस से दूर भागने लगी.

लल्लू- रुक जाओ न बुआ कहा भागी जा रही हो.

बुआ- न न यहाँ कोई और नहीं है. कही अकेला प् क्र तुम मुझ अबला नारी क साथ कुछ उल्टा सीधा क्र दिए तो मई किसी को मुँह दिखने लायक नहीं रहूंगी.

बुआ एक आँख दबा क्र लल्लू को देखती बोली.

लल्लू- क्या बुआ. मई कितना सरीफ बच्चा हु. मई क्या आप को ऐसा लड़का लगता हु. मई तो अभी बच्चा हु.

लल्लू बाटे करता धीरे धीरे बुआ की और बढ़ रहा था.

बुआ- बातो मई फसा क्र तुम मेरे पास आना चाहते हो. मई तुम्हारे झांसे मई नहीं आने वाली.

लल्लू- प्लस पास आ जाओ न.

बुआ- क्यू पास क्यू आना है. दूर दूर से नहाओ.

बुआ थोड़ी पानी से उप्पेर आती अपनी मदमस्त यौवन छलकती चूचियों का दरसन लल्लू को करा क्र वापस गले तक पानी मई बैठ गई.

लल्लू पानी क अंदर बैचैन हो रहा था बुआ का ये रूप देख क्र.

लल्लू पानी मई डुबकी लगा क्र अंदर तैरता हुआ बुआ की और बढ़ गया.

लेकिन बुआ भी शातिर थी वो भी तैरती हुई दूर जा कड़ी हुई.

लल्लू जब सर बहार निकला तो बुआ क खिलखिलाने की आवाज सुनाई दिया.

लल्लू पलट क्र देखा तो जहा पहले बुआ कड़ी थी वह अब लल्लू खड़ा था और लल्लू वाले जगह पर बुआ आ गई थी.

लल्लू एक बार फिर से पानी मई डुबकी लगा लिया और वही पानी क अंडर बैठ गया.

तभी उसे बुआ तैरती इधर आती दिखी.

लल्लू झट से बुआ को पकड़ लिया अपने दोनों हाथो से.

बुआ- सैतान यही बैठा रह गया. मई समझी थी तुम मेरे तरफ आओगे फिर से.

लल्लू बुआ क दोनों उभर को पानी क निचे पकड़ता हुआ मसल दिया.

लल्लू- बहुत तर्परी हो आप. कल तो चली hi जाओगी आप फिर क्यू तारपा रही हो.

बुआ घूम क्र लल्लू क होठो पर अपना होठ लगा दी.

दोनों क भीगे होठ एक दूसरे से उलझे उसका रास चूसने लगे.

जब सास फूलने लगा दोनों क तो इनके होठ जुड़ा हुए.

दोनों गहरी गहरी ससे लेने लगे.

बुआ हाथ निचे ले जा क्र कच्चे क अंदर से लल्लू क हथियार को निकल क्र अपने मुठी मई कस ली.

बुआ- आठ कितना गर्म गई ये और सख्त भी. लगता है काफी देर से तैयार है ये सीकर करने को.

लल्लू- और एक आप हो जो कब से तारपा रही हो.

बुआ- कोई आ न जय इधर. मरे जाएंगे दोनों फिर.

लल्लू- बुआ कोई नहीं अत इधर. और कोई आ गया तो भी साडी जिम्मेदारी मेरे सर. आप बस सब कुछ भूल क्र मजे करो.

लल्लू बुआ क होठो को फिर से अपने होठों मई भरता बोलै.

बुआ अपने पेटीकोट को कमर से बांध ली थी और लल्लू क कच्चे को निचे सरका क्र फिर से उसे हाथ मई पकड़ क्र सहलाने लगी.

बुआ- कितना मोटा है पुरे मुठी मई भी नहीं आता. लक्ष्मी कैसे झेल पति है इसको.

लल्लू- जैसे आप लेने वाली हो.

बुआ शर्मा क्र हुस्ने लगी.

लल्लू बुआ क दोनों कबूतरों को रगड़ रगड़ क्र लाल क्र दिया था पानी क अंदर.

बुआ अपने पेटीकोट को कमर मई उठा क्र लपेट ली और लल्लू को गले मई अपने बहो का हर डालती उसके कमर मई अपने दोनों पैरो का कैची बना ली.

लल्लू एक हाथ से बुआ क नंगे चिकने गांड को उठा क्र दूसरे हाथ से अपना लैंड पकड़ क्र बुआ क योनि मुख पर लगा दिया.

जैसे hi लल्लू का गर्म हथियार बुआ क रास बहती छूट से लगा बुआ क मुँह से मजे की सिसकी निकल गई.

लल्लू आहिस्ता से बुआ क योनि मई अपना लैंड उतरने लगा.

आहिस्ता आहिस्ता पूरा जार तक लैंड चला गया था.

बुआ आँखे बंद किये कास क्र लल्लू क दोनों कंधो को पकडे लटकी हुई थी उसके गॉड मई.

लल्लू अपने दोनों हाथो से बुआ क गोल गद्देदार गांड को उछलता उन्हें पानी मई hi परम सुख देने लगा.

बुआ की बड़ी बड़ी चूचिया लल्लू क नंगे चौड़े छाती मई पिस्ता हुआ एक अलग मजा दे रहा था.

लल्लू को लग रहा था जैसे कोई कठोर नोकदार कुछ उसके छाती को कुरेद रहा है.

पानी मई दोनों गले तक खड़े एक दूसरे का भरपूर साथ देते हुए इस लम्हे का भरपूर लाभ ले रहे थे.

बुआ लल्लू क होठो मई अपना होठो लगाती उसे चुस्ती तो कभी कटती पानी मई अपना रास मिला दी.

लल्लू का तो अभी दूर दूर तक कोई होने का आदर नजर नहीं आ रहा था.

लल्लू धीरे धीरे चलता हुआ पानी से बहार आने लगा और किनारे पर आ क्र बुआ को वही घास पर लेता दिया और उनके दोनों पैरो को कंधे पर लेता हुआ फिर से एक बार अपना लैंड उनकी गहरी खाई मई उतर दिया.

बुआ आँखे बंद किये हुए लल्लू क कंधे पर अपना नाख़ून गदति भरपूर साथ दे रही थी लल्लू का.

लल्लू नरम घास पर बुआ को लेटते उनके चूचियों को मसलता हुआ ताबरतोड़ ठोके किये जा रहा था.

बुआ की छूट से फुच फुच की आवाजे निकल रही थी जब जब लल्लू का लैंड अंडर जाता.

बुआ मजे से गर्दन दये बाये करती बारबरा रही थी.

लल्लू लगातार 10 मिनट्स तक इसी आसान मई बुआ की कुटाई करता रहा फिर उन्हें पलटा क्र पीछे से अपना मुद्गल उनके योनि मई उतर दिया.

बुआ अपना कमर हिला हिला क्र लल्लू क लैंड पर अपना गांड पटकती जार तक लैंड अपने मई समां रही थी.

दोनों पार्टनर अपने साथी को किनारे तक लेन कीकोसिस मई लगे हुए थे.

लल्लू बुआ क गांड क भूरे छेद मई एक ऊँगली गिला क्र उसको कुरेदता हुआ हचाहुच बुआ को छोड़ने मई लगा हुआ था.

बुआ- आअह्ह्ह मा वह क्या क्र रहा है. वह मत क्र प्लस..

लल्लू- क्यू मजा नहीं आ रहा है क्या.

लल्लू एक पोर तक बुआ क गांड मई अपनी ऊँगली घुसता हुआ अंडर बहार करने लगा था.

बुआ- ाःह पूछ मत. बहुत मजा आ रहा है. ऊह्ह्ह मुझ से अब नहीं संभाला जा रहा. एआईईईई मई गैई…

बुआ एक बार फिर से जहर गई थी.

लल्लू पीछे लगा हुआ था.

वो अब दूसरा ऊँगली भी गिला क्र बुआ क गांड मई घुसाने की कोसिस करने लगा.

बुआ- प्लस रहम क्र. क्या क्र रहा है वह.

वह अभी कुछ नहीं करने दूंगी.

लल्लू बुआ को पीछे से छोड़ता हुआ एक हाथ बढ़ा क्र उनकी एक चुकी को मसलने लगा.

लल्लू- अभी नहीं करने डौगी. लेकिन बाद मई तो करने डौगी न बुआ.

बुआ- आअह्ह्ह मा. क्या आग लगा दिया है तुम ने. कैसे मई वह रहूंगी तुम्हारे बिना.

लल्लू- फिर क्यू जा रही हो. यही रह जाओ मेरे पास.

बुआ- अभी मेरा जाना जरुरी है रे. बाद मई मई आ जाउंगी. वैसे भी मई अकेली नहीं जा रही अब. तुम्हारे अक्ष को साथ ले जा रही हु.

बुआ पीछे को कमर हिलती लल्लू का भरपूर साथ देती बोली.

बुआ- अब ऐसे मई मेरा कमर दर्द क्र रहा है.

लल्लू बुआ को कमर पकड़ क्र लेता दिया और फिर से उन पर चढ़ क्र होठो को चुस्त हुआ अपना लैंड उनके गीली कूप मई उतर दिया.

बुआ- हैयय जालिम पेट फार क्र निकल जाएगा उप्पेर तक. क्या खा क्र ये संध जैसा बना लिया तू ने.

लल्लू बुआ की चूचियों क घुंडी को मुँह मई दबाता उसे चूसने लगा.

दोनों ताल से ताल मिलते एक दूसरे को पीछे छोड़ने मई लगे हुए थे.

लल्लू भी अब अपने मंजिल क नजदीक hi था.

वो बुआ क गांड क निचे दोनों हाथ लगता उन्हें हल्का सा उठा क्र दनादन शॉट लगा रहा था.

दस तगड़े शॉट लगाने क बाद लल्लू बुआ क योनि को अपने काम रास से भर दिया. साथ hi बुआ भी एक बार और अपने पानी से लल्लू क लैंड को नहला दी.

थक क्र लल्लू बुआ पर hi ढेर हो गया.

दोनों वैसे hi नंगे कुछ समय नदी किनारे घास पर लेते रहे.

बुआ- तू न बड़ा बदमाश है. देख मुझे भी अपने जैसा hi बेसरम बना दिया है.

बुआ कड़ी होती इधर उधर देखती पानी मई चली गई.

लल्लू भी बुआ क पीछे जा क्र उन से चिपक गया.

बुआ- उस तरफ ध्यान मत दे तू. अभी कुछ नहीं मिलना उधर.

लल्लू- बुआ आप का ये इतने सुडौल है की मेरा मन अपने आप उधर भटक जाता है. मई क्या करू. कैसे बनाया इसे इतना मस्त. मन करता है खा hi जाऊ.

बुआ- बीटा ये सब म्हणत और खान पैन से ऐसा हो गया है.

लल्लू- क्या फूफा जी कभी इधर नहीं किये है.

बुआ- उस ने तो आगे भी ढंग से नहीं किया बीटा तो उधर क्या करेगा.

लल्लू बुआ क नंगे गांड क दोनों पत् को मुठी मई पकड़ क्र मसलने लगा था.

बुआ- मत कर अब ये सब. नहीं तो मेरा मन फिर से करने लगेगा लेकिन अब ताकत नहीं बची है तुम्हे झेलने की.

लल्लू- कोई बात नहीं आप का जितना मन करे उतना hi कर लेना आप.

बुआ- न न फिर वो तेरे साथ न्याय नहीं होगा न. जब तक तू संतुस्ट नहीं होगा मई कैसे पीछे हूत सकती हु. इस लिए अब रहने देते है. नहीं तो मई बाजार भी नहीं जा पाऊँगी.

चल बहार आ जा अब.

बुआ लल्लू क चेहरे पर जगह जगह अपने होठो से गिला करती बहार आ गई.

लल्लू भी पानी मई एक बार खुद को सही से साफ़ करता हुआ बहार आ गया.

दोनों बुलेट क पास आ क्र अपना अपना कपडा ले क्र पहन लिए.

लल्लू का तो पूरा ध्यान बुआ पर hi था.

पानी की बूंदो से चमकता उनका तरसा हुआ बदन कितना कातिल था की लल्लू उनके रूप को देख क्र अपने दिल को थम लिया था.

हार्टबीट बढ़ गया था उनका ये गोरा जवानी से लड़ा हुआ यौवन को देख क्र.

बुआ- अब तैरना हो गया हो तो चले.

लल्लू जल्दी से सरे कपडे पहन क्र बुलेट स्टार्ट क्र लिया.

बुआ सभी फाइल कपड़ो को वापस एक थैले मई दाल क्र उसे ले क्र लल्लू क पीछे से दोनों पेअर एक और करती बैठ गई.

लल्लू- खेत चले क्या थोड़ी देर बुआ.

बुआ- ठीक है चलो. थोड़ा उधर भी घूम लेंगे.

फिर दोनों खेत आ गए जहा आज मक्का की कराइ हुई थी.

खलिहान मई मक्का का ढेर लगा हुआ था.

बुआ- खेत मई मक्का था और कभी भुट्टा नहीं खिलाया तूने बस केला खिलने मई लगा था.

लल्लू- बुआ केला कुछ पतला नहीं हो जाएगा. वो भुट्टा hi था स्पेशल वाला.

बुआ- हट बदमाश. मुझे भुट्टा खाना है.

लल्लू एक मजदुर को बुला क्र कुछ बलिया जो अभी कच्चे थे उन मई से लेन को भेज दिया.

रवि काका भी बुलेट की आवाज सुन क्र कमरे से बहार आ गए.

काका- ाःह, गुड़िया आई है आज. बुआ को पकड़ क्र वो एक कुर्सी पर बैठा दिए.

कुछ मजदुर जो पुराने थे वो लोग भी आ क्र बुआ को प्रणाम करने लगे थे.

काका- बीटा ये बहुत अच्छा किया जो गुड़िया को भी ले आया. हमारी अन्नपूर्णा तो यही है. जब से हमारे यहाँ से गई है जैसे अन्नपूर्णा माँ भी नाराज हो क्र चली गई.

बुआ- ऐसा कुछ नहीं है भैया. आप क पास तो लक्ष्मी अन्नपूर्णा का भंडार है. हमारी भतीजियां और दो दो बहुये वो सभी अन्नपूर्णा hi तो है.

अब कभी आप का खेत खलिहान खली नहीं रहेगा.

काका- सही कहा है तुम ने गुड़िया. मुझे भी लग रहा है जैसे इस बार इतना अनाज होगा की हमे रखने क लिए सोचना पड़ेगा.

इस बार तुम भी वापस आ गई और हमारी दो बहुये भी जिन मई एक तो लक्ष्मी माँ का hi अंश दीखता है मुझे.

सब तुम लोगो क कारन hi हुआ है.

बुआ- वैसे इस बार कुछ लल्लू ने भी मदद क्या है भैया.

काका- है मदद तो किया है लेकिन अभी पूरा नहीं. इसे घर क भी तो बहुत से काम हो जाते है.

एक मजदुर दो गिलास दूध ले आया था तब तक.

यहाँ इन लोगो क कुछ मवेशी भी थी जिन मई गे बैल और भैसे थी.

लल्लू और बुआ को एक एक गिलास पकड़ा क्र वो मजदुर वापस चला गया.

दोनों धीरे धीरे पिने लगे दूध. तब तक एक दूसरा मजदुर ढेर सारा मक्के की बलिया तोड़ क्र ले आया.

लल्लू- बुआ ये ले कैसे जाएंगे.

काका- मई भेजवा देता हु.

वो एक मजदुर को एक घर पंहुचा देने को बोल दिए.

फिर बुआ लल्लू और काका क साथ खेत घूम आई थोड़ी देर.

बुआ- बीटा अब चले. फिर बाजार भी जाना है.

लल्लू- ठीक है बुआ.

फिर दोनों वह से घर आ गए.

दादू- कहा बाजार नहीं गए थे तुम दोनों.

लल्लू- दादू आज बुआ को खेत ले गया था.

दादू- अभी एक मजदुर कुछ मक्के की बलिया दे गया है. वही बता रहा था की तुम लोग खेत गए जो. वर्ण मई तो समझ रहा था की तुम दोनों बाजार गए हो.

लल्लू- सुबह बाजार नहीं खुलता सारा. खाना खाने क बाद जाएंगे बाजार.

दादू- अच्छा किया जो गुड़िया को खेत भी घुमा आये.

लल्लू- है, काका तो बहुत खुस हुए थे बुआ को खेत मई देख क्र.

दादू- है सदी से पहले भी ये खेत जारी रहती थी. अच्छा किये की वह भी घुमा लाये इसे. जाओ खाना वन खा क्र बाजार जाने की तयारी करो.

फिर लल्लू वह से आँगन आ गया. बुआ तो पहले hi भाग आई थी.

लल्लू अपने कमरे मई जा क्र लेट गया थोड़ी देर.

अभी वह कोई भी नहीं था.

थोड़ी देर मई hi उसे नींद आ गई.

खाने क समय लक्ष्मी कमरे मई आई तो लल्लू को सोया देख क्र वो भी जा क्र लल्लू क उप्पेर hi लेट गई.

लल्लू नींद मई hi लक्ष्मी को बहो मई भर क्र उसके गले मई अपना होठ रगड़ने लगा.

लक्ष्मी कसमसा क्र अलग होने लगी लेकिन अब तो वो खुद लल्लू क गिरफ्त मई थी.

लल्लू थोड़ी देर लक्ष्मी क साथ मस्ती करने क बाद उसे छोड़ दिया.

लक्ष्मी- अभी अगर कोई आ जाता तो.

लल्लू- मैंने क्या किया है. आप hi आ क्र मेरे पर लेट गई थी.

लक्ष्मी- मई सिर्फ लती थी बांकी आप क्या क्र रहे थे.

लल्लू- दो दिन से अपने जान से दूर था तो जरा हाल चल जान रहा था.

लक्ष्मी- अच्छा तो ऐसे हल जाना जाता है.

लल्लू- मई तो ऐसे hi जनता हु अपने जानेमन का हाल.

लक्ष्मी- अब अगर हाल जान लिए है तो खाना खाने आ जाइये.

लक्ष्मी बहार चली गई तो लल्लू भी उठ क्र हाथ मुँह धोने चला गया.

फ्रेश हो क्र बहार आ गया खाना खाने.

थोड़ी देर मई खाना पीना से निपट क्र लल्लू फिर एक बार तैयार था बुआ को ले क्र बाजार जाने को.

लल्लू तैयार हो क्र दालान पर बैठा बुआ क आने का इंतजार क्र रहा था.

दादू अपने कमरे से नोटों की एक गद्दी निकल क्र लल्लू क हाथ मई थमा दिए.

लल्लू- पैसे तो है मेरे पास दादू.

दादू- कोई बात नहीं ये भी रख लो.

लल्लू उठ क्र वापस आँगन आ गया.

कमरे मई पंहुचा तो वह सोनम और लक्ष्मी बैठी थोड़े से बचे बीज को टिशू मई लपेट क्र रख रही थी.

लल्लू- दी ये रख लेना.

लल्लू दादू से मिले नोटों की गद्दी को सोनम को पकड़ता बोलै.

सोनम- ये कहा से मिला है.

लल्लू- दादू दिए थे शॉपिंग क लिए. अब इतना सारा ले क्र मई कहा घूमता फिरूंगा.

कभी बैंक जाऊंगा तो दाल देंगे.

सोनम उन पैसे को ले क्र अपने कमरे मई आलमारी मई रख दी.

लल्लू जल्दी से लक्ष्मी क गाल को चुम क्र वह से भाग गया.

लक्ष्मी हड़बड़ा क्र रह गई तब तक लल्लू तो भाग चूका था.

लल्लू दालान पर आया तो बुआ भी आ गई थी. फिर दोनों वह से बाजार को चल दिए.

लल्लू- क्या क्या लेना है आप को.

बुआ- जो तुम दिलवा डोज मई ले लुंगी. लेकिन ज्यादा नहीं सिर्फ दो से तीन सेट बस.

लल्लू- क्यू सिर्फ इतना hi क्यू.

बुआ- ककी और बाद मई लुंगी.

लल्लू- आप कल जा नहीं रही हो क्या.

बुआ- नहीं. जा रही हु मई कल. क्यू, ऐसा क्यू लगा तुम्हे.

लल्लू- आप hi कह रहे हो बाद मई लोगे और कपडे तो जब आप कल चली जाओगी तो कब लोगी.

बुआ- वो तुम्हे पता चल जाएगा.

बुआ अभी एक क्रीम कलर की कॉटन सूट पहने हुए थी. हल्का मेअकप किये हुए लल्लू पर बिजलिया गिरा रही थी.

बुआ- आगे रोड और देख क्र गाड़ी चलाओ.

लल्लू- कैसे देखु रोड पर जब आप जैसी अप्सरा साथ बैठी हो तो.

बुआ- मेरा सब कुछ तो देख hi लिया है सुबह मई अब क्या बांकी है देखने को.

लल्लू- क्या करू जितनी बार देखता हु उतनी बार कुछ नया देखने को मिल जाता है. इस लिए ये बाबरा दिल बार बार देखने को मचलता रहता है.

यु hi हसी मजाक मई लल्लू बुआ को ले क्र शॉप पर आ गया.

अभी वह शॉप पर सीतल दीदी बैठी हुई थी.

सीतल- अरे वह आज जनाब इधर कैसे आ गए. लगता है रास्ता भूल गए है.

लल्लू- ये बुआ है मेरी. कल अपने यहाँ जा रही है तो कुछ कपडे लेने आ गए इनके साथ.

सीतल बुआ को पेअर छू क्र प्रणाम की. फिर अपने साथ ले क्र आगे कपड़ो क रैक की और आ गई.

वो बुआ को खुद hi कपडे निकल क्र दिखने लगी.

लल्लू एक और रखे सोफे पर आराम से बैठ गया.

लल्लू बैठा बैठा नजर घुमा क्र देख रहा था.

डिस्प्ले मई भी कई तरह क कपडे लगे हुए थे.

लल्लू को वह एक साडी बहुत अच्छी लगी जिस मई निचे बॉर्डर मई बहुत अच्छी एम्ब्रायडरी किया हुआ था.

लल्लू वो साडी एक लड़के को बोल क्र पैक करवा लिया.

थोड़ी देर मई बुआ भी सीतल क साथ चार सेट कपड़ो का जिन मई दो सूट और दो साडी था ले क्र आ गई.

सरे कपडे ले क्र लल्लू काउंटर पर आ गया सीतल और बस क साथ.

सीतल- ये कोई आने का तरीका है. आज बुआ आई तो आ गए तुम. मैंने कहा था न घर आने को.

लल्लू- दीदी मई यहाँ था hi नहीं अभी दो दिन पहले hi आया हु और काका जी लोग नाहा बिज़नेस सुरु किये है तो मेरा ड्यूटी खेती मई लगा दिए है. जिस कारन समय hi नहीं मिलता है.

आऊंगा किसी दिन समय निकल क्र.

लल्लू सभी का बिल पाय क्र वह से बुआ को ले क्र चल दिया.

लल्लू- अब कहा चलना है.

बुआ- अब कहा जाएंगे. घर चल.

लल्लू- चलो आप को पार्क ले चलता हु.

बुआ- न बाबा न. पिछली बार याद है न उधर क्या हुआ था.

लल्लू- अब कुछ नहीं होने वाला. आप घबराओ मत. मई हु न.

फिर लल्लू बुआ को ले क्र उधर बाजार से आगे ले क्र पार्क की और चल दिया.

पार्क क गेट पर साइड मई लल्लू गाड़ी कड़ी क्र बुआ को हाथ पकड़ क्र पार्क क अंडर चल दिया.

पार्क मई आगे जा क्र लल्लू एक पैर क निचे लगे बेंच पर बुआ क साथ जा बैठा.

लल्लू- अब कब आओगे बुआ.

बुआ- बहुत जल्द आउंगी. तुम फिक्र मत क्र मई खुद अब तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती.

बुआ लल्लू क कंधे पर सर रखती बोली.

लल्लू बुआ क एक गाल को अपने एक हाथ से सहलाता बैठा था.

थोड़ी देर वह बैठ क्र फिर वो लोग वापस घर को चल दिए.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 78.

रात खाना खाने क बाद लल्लू अपने कमरे मई आया तो सभी बहने वही थे.

गौरी- यहाँ कहा घुसे आ रहे हो चलो छत पर पहुंच जाओ. वही तुम्हारा बिस्तर है.

लल्लू- अरे वह, ये तो अच्छा तरीका धुंध लिया है तुम लोगो ने. अरे मुझे पर रहम खाओ. कोई ऐसे अपने प्यारे भाई क साथ करता है क्या.

रोमा- तुम ने हम सब को काम मई लगवा दिए हो सुबह साम वो क्या था फिर. तुम्हारी सजा है की तुम तीन महीने तक छत पर सोओगे.

लल्लू- भगवन बचाये ऐसे पत्थर दिल बहनो से.

लल्लू वह से मुँह लटकाये बहार आ क्र चाट की और चल दिया.

यहाँ कमरे मई थको की आवाज उप्पेर जाते लल्लू क कानो तक जा रही थी.

लल्लू- अच्छा सबक सिखाया है इन लोगो ने मुझे तो. खुद की बीबी से दूर क्र दिया है.

छत पर आ क्र लल्लू इधर उधर टहलता रहा.

आज शालिनी काकी से भी सही से मुलाकात नहीं हुई. पता नहीं क्या सोच रही होंगी वो.

लल्लू वापस निचे चल दिया शालिनी काकी को देखने.

" उधर कहा जा रहा है."

लल्लू आवाज की दिशा मई देखा तो माँ वह हाथ मई पानी का जग लिए कड़ी थी.

लल्लू- wo...wo..kaki का तबियत ठीक नहीं था तो उन्हें hi देखने जा रहा था.

मां- वो अब ठीक है. तू भी जा क्र सो जा अब. कहा सोयेगा आज.

लल्लू- सब ने तो कमरे से भगा दिया है छत पर जा रहा हु.

माँ- ठीक है सो जा फिर. कल बुआ और तेरा बुआ दोनों जा रहे है तो काम भी होगा घर मई.

लल्लू मुँह लटकाये एक बार फिर से छत पर चल दिया.

छत पर जा क्र अपने बिस्तर पर लेट गया.

नींद नहीं आ रही थी तो करवट बदल बदल क्र नींद रानी का इंतजार क्र रहा था.

तभी छत का दरवाजा खुला और फिर बंद हो गया.

कोई छत पर आया था.

वो चलता हुआ आ क्र लल्लू क बिछावन मई उसके बगल मई लेट गया.

लल्लू गौर से देखा तो बुआ आई थी.

लल्लू बुआ को कस क्र पकड़ लिया अपने आगोश मई.

कुछ hi छान मई दोनों क जिस्म क कपडे वही छत पर एक और पड़ा हुआ था.

दोनों एक दूर मई गुथे हुए थे.

एक तूफान आया और दोनों को बहलाता हुआ चला गया.

बुआ उठ क्र लल्लू क चेहरे को चुम क्र अपने कपडे समेत जल्दी से पहन क्र अपने कमरे मई चली गई.

लल्लू अपना धोती वैसे hi अपने कमर पर दाल लिया.

आधी रात को लगा जैसे लल्लू का हथियार किसी गर्म गुफा मई कास क्र जकरा हुआ है.

लल्लू की नींद खुल गई.

अँधेरे मई समझ hi नहीं आ रहा था की ये कौन है जो उसके लैंड को मुँह मई लिए हुए है.

लल्लू का हाथ अपने आप hi उसके सर पर पहुंच गया और निचे से अपना कमर हिलता ज्यादा से ज्यादा हिस्सा वो उस अनजाने मुँह मई डालने की कोसिस करने लगा था.

थोड़ी देर बाद लल्लू उसका सर छोड़ क्र बाग़ पकड़ क्र अपने उप्पेर खींच लिया.

लल्लू क उप्पेर आते hi एहसास हुआ जैसे ऋतू काकी आई है ये.

लल्लू- क्या बात है आज यहाँ कैसे.

काकी- मुआ बदनाम तो कर hi दिया आज तू ने. सुबह कह रही थी की सब उठ गए है मत क्र लेकिन तुम पर तो भूत सवार था.

लल्लू- भूत नहीं काकी. छूट सवार था.

काकी- है वही छूट सवार था. तेरी माँ और रागिनी ने क्लास लगा दी मेरा.

सुबह जल्दी जल्दी किया लेकिन मुझे पता है तेरा मन नहीं भरा था. इसी लिए आ गई.

वैसे अभी किस क मई घुसाया था जो अभी तक खुसबू आ रही थी तेरे डंडे से.

लल्लू- वो छोड़ो और जल्दी से सवारी करना सुरु क्र दो नहीं तो मई आज सुजा दूंगा आगे पीछे दोनों.

काकी- पीछे पहले hi सुजा दिया है तुम ने अभी आगे आगे सुजा दे.

लल्लू झट से काकी क सरे कपडे खोल क्र अलग किया और चढ़ गया उनके उप्पेर.

एक hi बार मई उस फुले हुए पनिये छूट मई जार तक अपना लैंड उतर क्र काकी क 36 क चुके को पकड़ क्र मसलता सुरु हो गया ताबरतोड़ ठुकाई मई.

काकी तो हेय हेय करती रह गई.

लल्लू जब hi उतरा जब वो अपना टंकी काकी क अंडर खली क्र चूका.

काकी- मुआ सुच मई सुजा दी आज तू ने. अब एक महीना मेरे से दूर रहियो.

काकी भी अपने कपडे समेत क्र वैसे hi नंगी निचे चल दी.

इसाबेल्ला…..

बाबा क बताये तरीके से बेला लगी हुई थी अभ्यास मई.

तीर धनुष का अभयश हो गया था अब वो अपने ऊर्जा सकती को जगा रही थी. जिस काम मई वह क छोटे छोटे पसु पक्ष्मी और आस पास क पैर भी इसाबेल्ला की मादा क्र रहे थे.

अभी वह बाग़ मई हर तरफ सिर्फ ऊर्जा hi ऊर्जा फैला हुआ था.

वह इधर उधर भटक रहे हिरन एक जगह खड़े हो क्र एक गोल घेरा बना रखे थे उस क बाद अंदर खरगोश का घेरा था फिर मोर अपने अपने पंख फैलाये घेरा बना रखे थे.

उसके बाद कोयल का घेरा था फिर कबूतरों का.

हिरणो क बहार हाथियों और सेर बाघ मिल क्र घेरा बनाये थे.

उस बिच मई इसाबेल्ला ध्यान क मुद्रा मई प्राणायाम क्र अपने ऊर्जा को जगा रही थी.

सब से पहले वह क पैर पौधों और फूलो मई ऊर्जा सकती बहने लगी.

फिर आगे बढ़ता हुआ वो पहला घेरा जो की हाथियों, सेर और बाघ का था उन मई सुरु हुआ बहना.

उस क थोड़ी देर बाद हिरणो फिर खरगोशो मई ऊर्जा सकती बहने लगा.

फिर ऐसे hi मोर, कोयल और कबूतर मई भी…

इन सभी मई एक चक्र क रूप मई ऊर्जा सकती प्रवाह हो रहा था.

इसाबेल्ला ध्यान मई बैठी थी जिस मई सरे चक्र जागृत हो चुके थे.

कुछ देर सभी मई ऊर्जा प्रवाह होता रहा फिर वो एक दायरा बनता हुआ छोटा होने लगा और वो गोला छोटा होता हुआ उप्पेर उठ क्र इसाबेल्ला क सर क उप्पेर आ क्र बचने लगा था.

तभी इसाबेल्ला क सरीर से लाल रंग की ऊर्जा निकल क्र उसके सर पर नाचती ऊर्जा मई समां गया और फिर वो इसाबेल्ला क पुरे सरीर मई फ़ैल गया.

अब इसाबेल्ला को अपने अंडर अथाह ऊर्जा का एहसास हो रहा था.

वो आँखे बंद किये उन्हें महसूस क्र रही थी.

थोड़ी देर बैठे रहने क बाद इसाबेल्ला क सरीर पर एक योद्धा का पोषक आ गया जिस क कंधे पर एक धनुष लटक रहा था.

इसाबेल्ला आँखे खोल क्र देखि तो अब सभी की ऊर्जा वापस उस मई समां क्र संत हो गया था.

जितने भी वह जानवर और पक्षी थे सभी फिर इधर उधर भटकते हुए तीतर बितर हो गए.

इसाबेल्ला उठ क्र अपने आप को देखि तो चौक गई अपने पोशाक को देख क्र.

" चौकने की जरुरत नहीं है. यही तो तुम्हारा वस्त्र है अरमार है जो तुम्हे युद्ध क समय तुम्हारे ऊर्जा को संभाले रहेगा."

जैसे hi इसाबेल्ला क कानो मई बाबा की बाटे सुनाई दी वो मुस्कुराती हुई उन्हें प्रणाम क्र आगे बढ़ गई.

इसाबेल्ला वह से फिर अपने अभ्यास छेत्र मई चली गई जहा वो अपने ऊर्जा से एनर्जी बॉल बना क्र वह लगे एक टारगेट पर निशाना लगाने लगी.

पहले तो वो एनर्जी बॉल्स इसाबेल्ला क हाथ मई hi ब्लास्ट क्र जाती कभी कभी थोड़ा आगे जा क्र गिर जाता और ब्लास्ट हो जाता लेकिन काफी देर प्रयाश करने क बाद थोड़ा थोड़ा इम्प्रूव हुआ और अब आगे तक जाने लगा था वो एनर्जी बॉल्स.

" अभी थोड़ी देर आराम क्र लो फिर प्रयाश करना. अभी तुम थकी हुई हो. इसी लिए कंसन्ट्रेट नहीं क्र प् रही हो."

इसाबेल्ला प्रैक्टिस छोड़ क्र एक पैर क निचे लेट गई.

जब से यहाँ आई है एक बार भी यहाँ से बहार नहीं गई है.

यही रहना यही क पेड़ से फलो को तोर क्र खाना और यही क झरने का पानी पीना. प्रैक्टिस क बाद थक क्र किसी पैर क निचे सो जाना.

यही इसाबेल्ला की डेली का रूटीन था.

सब कुछ था यहाँ उसके रहने क लिए.

इसाबेल्ला पैर क निचे लेती आँखे बंद क्र कुछ देर सोने की कोसिस करने लगी.

नींद मई इसाबेल्ला क चारो और एक लाल रंग का घेरा बन गया था.

उसका धनुष वही पास मई उसके पैर पर लटक रहा था.

इसाबेल्ला को सोये अभी थोड़ी देर hi हुआ था की उसे लगा की वो जैसे किसी और hi दुनिया मई पहुंच गई है जैसे गायत्री क साथ हुआ था.

इसाबेल्ला अभी एक सभा मई राजा मंत्री और दरबारियों क साथ एक सिंघासन पर राजा क बगल मई बैठी हुई थी.

तभी वह एक सिपाही आया.

सर झुका क्र रहा को अभिवादन करने क बाद वो खड़ा हो गया.

राजा- कहो क्या समाचार है.

सिपाही- महाराज आप से मिलने क लिए गुरु आया है.

महाराज झट से खड़े हो गए. राजा को खड़ा होता देख क्र वह जितने भी लोग दरबार मई बैठे थे सभी खड़े हो गए.

राजा- आज की सभा यही समाप्त की जाती है.

फिर राजा वह से अपने ककछ को चले गए लेकिन जाते जाते उस सिपाही को राजा क निजी कक्ष मई गुरु को भेजने को कह गए.

थोड़ी देर मई एक 50 शाल का लम्बा चौदह भीमकाय साक्ष राजा क सामने उपस्थित हुआ.

राजा- कहो गुरु क्या सन्देश लाये हो. मैंने जो काम तुम्हे दिया था उस मई कहा तक प्रगति हुई है.

गुरु- महाराज गुरु देव ने जो कहा है वो बिलकुल सच है. हमारे सिमा से डेट जंगल मई कुछ महीनो से बहुत अजीब घटनाये होने लगी है. वह क जंगली जानवर दर क वह जंगल से सटे कस्बो नगरी की और भाग रहे है.

राजा- ऐसा क्या हो रहा है उस जंगल मई, कुछ पता चला उसका.

गुरु- नहीं महाराज. अभी तक जो भी घटना हो रहा है वो जंगल क अंडर hi हो रहा है. वह क कस्बो मई जा क्र मैंने पता किया था लेकिन वह क लोग खुद बहुत बारे हुए है. कुछ कसबे क गरीब जंगल मई लकड़ी और जारी बूटी क लिए गए थे जिनका कोई पता नहीं चला. वो वापस नहीं आये.

एक गौण जो जंगल से सब से नजदीक था वो खली क्र दिए है.

धीरे धीरे स्थिति बहुत बुरा होने वाला है.

राजा- हूँ, हमे सब से पहले गुरु देव से मिलना चाहिए. वही कुछ रास्ता दिखा सकते है. बिना सोचे समझे हम सैनिको को भी जंगल मई नहीं भेज सकते है.

गुरु- सही कहा आप ने महाराज. वह जंगल मई क्या है ये जानना बहुत जरुरी है.

राजा- ठीक है. तुम जाओ. थक गए होंगे जा क्र आराम करो. मई गुरु देव से मिल क्र पता करता हु.

फिर गुरु वह राजा को सर झुका क्र प्रणाम क्र चला गया और महाराज भी उसके पीछे पीछे गुरु देव से मिलने क लिए महल से बहार आ गए.

महल से बहार आ क्र वो अपने रथ पर बैठ गए.

राजा- गुरु देव क आश्रम को ले चलो.

रथ पर बैठ क्र कोचवान को आदेश दे क्र राजा अपने सोचो मई खो गए.

थोड़ी देर मई रथ आश्रम क सामने कड़ी थी.

राजा उतर क्र आश्रम मई गए जहा गुरु देव क कुछ सिस्य बहार अपने काम मई लगे हुए थे.

राजा को देख क्र सभी सर झुका क्र उन्हें आदर दिया फिर राजा को एक आसान पर बैठा क्र एक सिस्य गुरु देव क पास सुचना ले क्र चला गया.

कुछ समय बाद गुरु देव खुद बहार आ क्र रहा को अपने साथ अपने कक्ष मई ले गए.

गुरु देव- महाराज आप क्यू लास्ट किये. कोई काम था तो मुझे बुला लिया होता.

राजा- आप सर्मिन्दा क्र रहे है गुरु देव. आप मेरे गुरु है और हमारे राज्य क भी. आप को आदेश देने की छमता मुझ मई कहा है. वैसे मई एक महत्वपूर्ण विषय मई आप से सलाह लेना चाहता था और बिलम्ब करना मुझे उचित नहीं लगा तो मई आप क पास आ गया.

गुरुदेव - क्या बात है महाराज. सब कुशल तो है न.

राजा- नहीं गिरय देव. आप का कहा सत्य हो गया. हमारे राज्य क सिमा से डेट जंगल मई कुछ बुरा घटना हो रहा है जो नहीं होना चाहिए. मैंने गुरु को पता लगाने भेजा था. अभी अभी वो वापस आ क्र जो सुचना दिया है वो बहुत चिंता जनक है.

गुरु देव- हुऊ, मुझे ये पहले hi अंदेशा था. एक दिन मई किसी काम से उस जंगल क निकट क नगर गया था तभी मुझे वह कुछ नकारात्मक ऊर्जा का एहसास हुआ था. जो जंगल की और इसरा क्र रहा था. तभी मई वापस आ क्र आप को इसका जाँच करने को कहा था.

राजा- गुरु देव फिर अब आगे क्या करना चाहिए हमे.

गुरु देव- हम कल सभा मई इस बात का चर्च करे तो बेहतर रहेगा महाराज. वह सभी राज्य क प्रमुख रहेंगे तो सब से सलाह क्र हम कोई फैसला क्र सकते है.

राजा- अच्छी बात है गुरु देव. फिर कल मिलते है राज सभा मई.

गुरु देव से मिल क्र राजा बेचैन सा उन्ही बातो को सोचता हुआ वापस अपने महल को आ गए.

दूसरे दिन सभा मई…..

राजा क आते hi सभा का सञ्चालन सुरु हुआ. थोड़ी देर राज्य क अन्य विषय और चर्चा क बाद राजा ने सब को गुरु क बताये जानकारी सब से साझा की.

सभी राजा की बात सुन क्र चिंतित हो उठे.

इसाबेल्ला- अगर महाराज की इजाजत हो तो मई कुछ सैनिको क साथ उस जंगल मई पता करने जाना चाहती हु.

एक दरबारी- क्षमा करे महाराज लेकिन मेरा मानना है की राजकुमारी क बदले हम पहले एक सैनिक टुकड़ी भेजे वह जंगल क आस पास वो जाँच करेंगे और किसी भी नगर वासी को जंगल जाने से भी रोकेंगे. कुछ जानकारी मिलने क बाद हम फिर आगे का रणनीति तय करे तो बेहतर है.

दूसरा दरबारी- महाराज की जय हो, महाराज मेरा मत है की हम अपने चुनिंदा सैनिको की एक टुकड़ी जंगल मई भेजे और एक टुकड़ी जंगल क बहार रहे उन्हें पीछे से सहायता क लिए और वह क नागरिको की सुरक्षा क लिए.

जंगल क अंदर की जानकारी इक्कठा होने क बाद हम आगे की योजना बनाये.

तीसरा- हमारा सेना बहुत विशाल है और बहादुर भी. हमे ऐसे छोटे मोठे बातो क लिए इतना पदेशन होना सोभा नहीं देता. हम अपने पूरी सकती से जंगल मई घुस क्र वह जो कुछ भी है उसका मुकाबला करेंगे.

एक दो नासमझ लोग और खड़े हो क्र इस तीसरे की कही बातो का समर्थन करने लगे.

गुरु देव- मेरे ख्याल से अपने कुछ चुनिंदा सैनिको की एक टुकड़ी को जंगल मई भेजेंगे लेकिन ज्यादा अंदर नहीं. वो इतना hi अंदर जाएंगे की साम से पहले वापस भी आ जय. और दूसरी टुकड़ी को उनके सहायता और वह क कस्बो की सुरक्षा क लिए रखे.

यही योजना सही है जो की पहले भी हमारे एक गण्यमान साथी बता चुके है.

जंगल मई क्या है. इसका बिना जानकारी क हमे जंगल मई नहीं घुस जाना चाहिए.

राजा- तो तय रहा की हमारे सैनिको की दो टुकड़ी वह जाएगी.

एक टुकड़ी जंगल मई सुबह प्रवेश करेंगी और पता लगाएगी की आखिर जंगल मई ऐसा क्या है जिस क कारन वह सब भयभीत है और दूसरी टुकड़ी जंगल क बहार कसबे मई लोगो की सुरक्षा और अपने साथी की पीछे से सहायता क लिए रहेगी.

इसाबेल्ला- महाराज, मई भी उन सैनिको क साथ जाना चाहती हु.

राजा- नहीं अभी आप का जाना उचित नहीं.

गुरुदेव- महाराज, राज कुमारी बेला को जाने दे. ये दूसरे टुकड़ी क साथ कसबे मई रहेंगी. इन्हे देख क्र वह कसबे वालो को भी हौसला मिलेगा और हमारे सैनिको को भी.

राजा- फिर ठीक है. राज कुमारी बेला वह देसरे टुकड़ी का सञ्चालन करेंगी और पहली टुकड़ी का सञ्चालन गुरु करेंगे.

फिर सभा समाप्त हो गई. सैनिक जाने की तयारी करने लगे थे.

उन्हें आज hi निकलना था ताकि कल सुबह पहली टुकड़ी वह जंगल मई प्रवेश क्र सके.

अपने सामान क साथ राज कुमारी बेला अपने घोड़े पर तैयार थी.

सभी सैनिक जंगल की और चल पड़े.

जंगली इलाका राज्य क उत्तरी दिशा मई सरहद से लगा हुआ था.

इन लोगो को वह पहुंचते पहुंचते आधी रात हो गई थी.

सभी सैनिक वह पहुंच क्र पास क कसबे मई hi एक खली जगह अपना तम्बू लगा क्र रात गुजरने की तयारी क्र लिए.

राज कुमारी बेला एक तम्बू मई जा क्र जो भी खाना वही से थोड़ा बहुत लाया गया था उसे खाई फिर आराम करने क लिए लेट गई.

सुबह 4 बजे hi सैनिको की पहली टुकड़ी जंगल मई जाने को तैयार थे.

बेला भी अपने तम्बू से निकल क्र गुरु क पास पहुंच गई जो इस टुकड़ी का नेतृत्व करने वाला था.

बल्ला- अपना ख्याल रखियेगा और जंगल मई ज्यादा अंदर नहीं जाना है किसी को. वो आज सिर्फ 5 कम जा क्र फिर वापस हो जाएगी.

अगर सब ठीक रहा तो हम कल फिर उस से आगे जाएंगे.

गुरु- आप निश्चिंत रहे राज कुमारी. आज हम जंगल मई सिर्फ देखने hi जा रहे है. हम ज्यादा अंदर आज नहीं जाएंगे.

फिर पहली टुकड़ी तैयार हो क्र अपने अपने घोड़ो क साथ निकल चली जंगल की और.

पहली टुकड़ी मई 20 सैनिक थे.

उनके जाने क बाद वह जंगल क बहार 5 सैनिक पहरा देने खड़े हो गए बांकी क सैनिक कसबे मई घूम घूम क्र अपने घोड़े पर वह क लोगो की सुरक्षा क लिए निगरानी करने लगे.

कुछ सैनिक जहा तम्बू लगा था वह सभी सैनिको क खाने पिने क व्यवस्था क लिए रुक गई.

इधर पहली टुकड़ी जंगल मई चारो और देखते हुए आगे बढ़ रही थी.

अभी ये हिस्सा जंगल का शुरुवात था तो ज्यादा घाना नहीं था. अभी सभी सैनिक फैले हुए अपने घोड़ो और चारो और निरक्षण करते हुए आगे बढ़ रहे थे.

गुरु सब से आगे था. वो चौकन्ना हो क्र आगे की खतरा को देखते हुए पूरी तरह सजग अपने टुकड़ी का सञ्चालन करता आगे बढ़ रहा था.

सूरज निकल आई थी और उसका प्रकाश पैर क पत्तो से छान क निचे जमीं पर आ रहा था.

जंगल अभी सघन नहीं था तो उजाला चारो और फैला हुआ था.

दूर दूर तक सिर्फ छोटे बड़े पैर hi दिख रहे थे.

अब कभी कभी कही किसी झाड़ियों से छोटे छोटे जानवर इधर उधर भाग रहे थे.

अभी तक जंगल मई उन्हें ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला था. जिस से कहा जय की यहाँ जंगल मई कोई खतरा है किसी तरह का.

दोपहर होने वाली थी आगे ये सभी किसी नदी या झरने की तलाश मई थे जहा कुछ खाना पीना क्र आगे का सफर करते.

लेकिन अभी तक कही ऐसा कोई निशान नहीं मिला की आस पास कोई नदी तालाब हो.

फिर थक क्र वो लोग एक थोड़ी खली जगह मई रुक क्र अपना खाना पीना क्र लिए जो चलते समय घर से hi लाये थे.

गुरु- अभी तक तो कुछ भी नहीं मिला है. अब आगे हम कितने दूर जा सकते है की फिर वह से लौट भी सके.

एक सैनिक- अब हम मुश्किल से एक पहर और चल सकते है. फिर हमे लौट क्र वापस आते हुए रात तो हो hi जाएगी जंगल से निकलते निकलते.

गुरु- सही कहा. हम अब एक पहर और आगे बढ़ेंगे. फिर वापस हो जाएंगे. लेकिन वापस रास्ता बदल क्र करेंगे. हम एक कोष दये या बाये हो क्र फिर पीछे होंगे. जिस से हमे दूसरे चैत्र का भी अंदाजा हो जय.

फिर सभी लोग वह से आगे बढ़ गए.

एक पहर भी बीत गया लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला तो निराश हो क्र वो सभी अपने दये हिस्से मई बढ़ते हुए पीछे को लौटने लगे.

इधर बेला पहले टुकड़ी को जंगल मई जाने क बाद फिर से आराम करने चली गई.

सूर्य उदय क बाद बेला अपने तम्बू से फ्रेश हो क्र निकली फिर नास्ता करने क बाद अपने घोड़े पर कसबे की निरक्षण करने को चल दी.

कसबे मई जा क्र बेला एक चौराहे पर पहुंची.

वह चौराहे पर एक पीपल का पैर था जिस क चारो और एक ुचि सीमेंट का चबूतरा बना हुआ था.

कुछ बुजुर्ग वह बैठे हुए थे और कुछ पीपल क निचे छाव मई कुछ बिछा क्र लेते हुए थे.

बेला वह जा क्र घोड़े से निचे उतर आई.

लोगो ने देखा की एक सही पोषक मई एक लड़की है घोड़े पर तो वो लोग भी सतर्क हो क्र उठ खड़े हुए.

बल्ला- यहाँ का मुखिया कौन है.

एक बुजुर्ग- जी मई हु यहाँ का मुखिया.

बल्ला- यहाँ कुछ दिनों से कोई परेशानी या ऐसा कुछ जो नहीं होना चाहिए था. कोई जंगल की और से किसी तरह का हरकत.

मुखिया- जी कुछ दिनों से रात को अजीब अजीब आवाजे आती है जंगल से. जैसे कुछ बहुत बुरा हो रहा हो जंगल मई. सरे जानवर चीख चिल्ला रहे होते है. कभी कभी रात को hi कोई जंगली जानवर इधर भाग आता है. तो गौण वाले भी दर जाते है.

बल्ला- कब से ऐसा हो रहा है.

मुखिया- ये सब यही कोई 10 दिन से हो रहा है जी.

बल्ला- ऐसा कोई व्यक्ति मिलेगा जो जंगल मई आता जाता हो. जिसे जंगल क बारे मई काफी कुछ पता हो.

मुखिया- एक लकड़हारा था जिस का कोई पता नहीं चल रहा. उसके घर वालो का कहना है की जंगल मई लकड़ी काटने गया था चार दिन पहले लेकिन आज तक वापस नहीं आया.

बल्ला- कब गया था जंगल. किस समय… क्या हमेसा उसी समय जाता था वो और आता कब था वो.

मुखिया- जी वो तो सुबह hi गया था. है हमेसा से सुबह जा क्र लकड़ी काट क्र लता था और यही पास क बाजार मई बेचा करता था.

बल्ला- और कोई है जिसे इस जंगल क बारे मई थोड़ा बहुत पता हो.

मुखिया- है तो एक लकड़हारा और लेकिन जब से उस लकड़हारे की कोई खबर नहीं है हम सब ने उसे भी जंगल जाने से मन क्र रखा है. अब जंगल मई कोई नहीं जाता है जी.

इधर पहली टुकड़ी जंगल मई चारो और देखते हुए आगे बढ़ रही थी.

अभी ये हिस्सा जंगल का शुरुवात था तो ज्यादा घाना नहीं था. अभी सभी सैनिक फैले हुए अपने घोड़ो और चारो और निरक्षण करते हुए आगे बढ़ रहे थे.

गुरु सब से आगे था. वो चौकन्ना हो क्र आगे की खतरा को देखते हुए पूरी तरह सजग अपने टुकड़ी का सञ्चालन करता आगे बढ़ रहा था.

सूरज निकल आई थी और उसका प्रकाश पैर क पत्तो से छान क निचे जमीं पर आ रहा था.

जंगल अभी सघन नहीं था तो उजाला चारो और फैला हुआ था.

दूर दूर तक सिर्फ छोटे बड़े पैर hi दिख रहे थे.

अब कभी कभी कही किसी झाड़ियों से छोटे छोटे जानवर इधर उधर भाग रहे थे.

अभी तक जंगल मई उन्हें ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला था. जिस से कहा जय की यहाँ जंगल मई कोई खतरा है किसी तरह का.

दोपहर होने वाली थी आगे ये सभी किसी नदी या झरने की तलाश मई थे जहा कुछ खाना पीना क्र आगे का सफर करते.

लेकिन अभी तक कही ऐसा कोई निशान नहीं मिला की आस पास कोई नदी तालाब हो.

फिर थक क्र वो लोग एक थोड़ी खली जगह मई रुक क्र अपना खाना पीना क्र लिए जो चलते समय घर से hi लाये थे.

गुरु- अभी तक तो कुछ भी नहीं मिला है. अब आगे हम कितने दूर जा सकते है की फिर वह से लौट भी सके.

एक सैनिक- अब हम मुश्किल से एक पहर और चल सकते है. फिर हमे लौट क्र वापस आते हुए रात तो हो hi जाएगी जंगल से निकलते निकलते.

गुरु- सही कहा. हम अब एक पहर और आगे बढ़ेंगे. फिर वापस हो जाएंगे. लेकिन वापस रास्ता बदल क्र करेंगे. हम एक कोष दये या बाये हो क्र फिर पीछे होंगे. जिस से हमे दूसरे चैत्र का भी अंदाजा हो जय.

फिर सभी लोग वह से आगे बढ़ गए.

एक पहर भी बीत गया लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला तो निराश हो क्र वो सभी अपने दये हिस्से मई बढ़ते हुए पीछे को लौटने लगे.

इधर बेला पहले टुकड़ी को जंगल मई जाने क बाद फिर से आराम करने चली गई.

सूर्य उदय क बाद बेला अपने तम्बू से फ्रेश हो क्र निकली फिर नास्ता करने क बाद अपने घोड़े पर कसबे की निरक्षण करने को चल दी.

कसबे मई जा क्र बेला एक चौराहे पर पहुंची.

वह चौराहे पर एक पीपल का पैर था जिस क चारो और एक ुचि सीमेंट का चबूतरा बना हुआ था.

कुछ बुजुर्ग वह बैठे हुए थे और कुछ पीपल क निचे छाव मई कुछ बिछा क्र लेते हुए थे.

बेला वह जा क्र घोड़े से निचे उतर आई.

लोगो ने देखा की एक सही पोषक मई एक लड़की है घोड़े पर तो वो लोग भी सतर्क हो क्र उठ खड़े हुए.

बल्ला- यहाँ का मुखिया कौन है.

एक बुजुर्ग- जी मई हु यहाँ का मुखिया.

बल्ला- यहाँ कुछ दिनों से कोई परेशानी या ऐसा कुछ जो नहीं होना चाहिए था. कोई जंगल की और से किसी तरह का हरकत.

मुखिया- जी कुछ दिनों से रात को अजीब अजीब आवाजे आती है जंगल से. जैसे कुछ बहुत बुरा हो रहा हो जंगल मई. सरे जानवर चीख चिल्ला रहे होते है. कभी कभी रात को hi कोई जंगली जानवर इधर भाग आता है. तो गौण वाले भी दर जाते है.

बल्ला- कब से ऐसा हो रहा है.

मुखिया- ये सब यही कोई 10 दिन से हो रहा है जी.

बल्ला- ऐसा कोई व्यक्ति मिलेगा जो जंगल मई आता जाता हो. जिसे जंगल क बारे मई काफी कुछ पता हो.

मुखिया- एक लकड़हारा था जिस का कोई पता नहीं चल रहा. उसके घर वालो का कहना है की जंगल मई लकड़ी काटने गया था चार दिन पहले लेकिन आज तक वापस नहीं आया.

बल्ला- कब गया था जंगल. किस समय… क्या हमेसा उसी समय जाता था वो और आता कब था वो.

मुखिया- जी वो तो सुबह hi गया था. है हमेसा से सुबह जा क्र लकड़ी काट क्र लता था और यही पास क बाजार मई बेचा करता था.

बल्ला- और कोई है जिसे इस जंगल क बारे मई थोड़ा बहुत पता हो.

मुखिया- है तो एक लकड़हारा और लेकिन जब से उस लकड़हारे की कोई खबर नहीं है हम सब ने उसे भी जंगल जाने से मन क्र रखा है. अब जंगल मई कोई नहीं जाता है जी.

इधर पहली टुकड़ी जंगल मई चारो और देखते हुए आगे बढ़ रही थी.

अभी ये हिस्सा जंगल का शुरुवात था तो ज्यादा घाना नहीं था. अभी सभी सैनिक फैले हुए अपने घोड़ो और चारो और निरक्षण करते हुए आगे बढ़ रहे थे.

गुरु सब से आगे था. वो चौकन्ना हो क्र आगे की खतरा को देखते हुए पूरी तरह सजग अपने टुकड़ी का सञ्चालन करता आगे बढ़ रहा था.

सूरज निकल आई थी और उसका प्रकाश पैर क पत्तो से छान क निचे जमीं पर आ रहा था.

जंगल अभी सघन नहीं था तो उजाला चारो और फैला हुआ था.

दूर दूर तक सिर्फ छोटे बड़े पैर hi दिख रहे थे.

अब कभी कभी कही किसी झाड़ियों से छोटे छोटे जानवर इधर उधर भाग रहे थे.

अभी तक जंगल मई उन्हें ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला था. जिस से कहा जय की यहाँ जंगल मई कोई खतरा है किसी तरह का.

दोपहर होने वाली थी आगे ये सभी किसी नदी या झरने की तलाश मई थे जहा कुछ खाना पीना क्र आगे का सफर करते.

लेकिन अभी तक कही ऐसा कोई निशान नहीं मिला की आस पास कोई नदी तालाब हो.

फिर थक क्र वो लोग एक थोड़ी खली जगह मई रुक क्र अपना खाना पीना क्र लिए जो चलते समय घर से hi लाये थे.

गुरु- अभी तक तो कुछ भी नहीं मिला है. अब आगे हम कितने दूर जा सकते है की फिर वह से लौट भी सके.

एक सैनिक- अब हम मुश्किल से एक पहर और चल सकते है. फिर हमे लौट क्र वापस आते हुए रात तो हो hi जाएगी जंगल से निकलते निकलते.

गुरु- सही कहा. हम अब एक पहर और आगे बढ़ेंगे. फिर वापस हो जाएंगे. लेकिन वापस रास्ता बदल क्र करेंगे. हम एक कोष दये या बाये हो क्र फिर पीछे होंगे. जिस से हमे दूसरे चैत्र का भी अंदाजा हो जय.

फिर सभी लोग वह से आगे बढ़ गए.

एक पहर भी बीत गया लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला तो निराश हो क्र वो सभी अपने दये हिस्से मई बढ़ते हुए पीछे को लौटने लगे.

इधर बेला पहले टुकड़ी को जंगल मई जाने क बाद फिर से आराम करने चली गई.

सूर्य उदय क बाद बेला अपने तम्बू से फ्रेश हो क्र निकली फिर नास्ता करने क बाद अपने घोड़े पर कसबे की निरक्षण करने को चल दी.

कसबे मई जा क्र बेला एक चौराहे पर पहुंची.

वह चौराहे पर एक पीपल का पैर था जिस क चारो और एक ुचि सीमेंट का चबूतरा बना हुआ था.

कुछ बुजुर्ग वह बैठे हुए थे और कुछ पीपल क निचे छाव मई कुछ बिछा क्र लेते हुए थे.

बेला वह जा क्र घोड़े से निचे उतर आई.

लोगो ने देखा की एक सही पोषक मई एक लड़की है घोड़े पर तो वो लोग भी सतर्क हो क्र उठ खड़े हुए.

बल्ला- यहाँ का मुखिया कौन है.

एक बुजुर्ग- जी मई हु यहाँ का मुखिया.

बल्ला- यहाँ कुछ दिनों से कोई परेशानी या ऐसा कुछ जो नहीं होना चाहिए था. कोई जंगल की और से किसी तरह का हरकत.

मुखिया- जी कुछ दिनों से रात को अजीब अजीब आवाजे आती है जंगल से. जैसे कुछ बहुत बुरा हो रहा हो जंगल मई. सरे जानवर चीख चिल्ला रहे होते है. कभी कभी रात को hi कोई जंगली जानवर इधर भाग आता है. तो गौण वाले भी दर जाते है.

बल्ला- कब से ऐसा हो रहा है.

मुखिया- ये सब यही कोई 10 दिन से हो रहा है जी.

बल्ला- ऐसा कोई व्यक्ति मिलेगा जो जंगल मई आता जाता हो. जिसे जंगल क बारे मई काफी कुछ पता हो.

मुखिया- एक लकड़हारा था जिस का कोई पता नहीं चल रहा. उसके घर वालो का कहना है की जंगल मई लकड़ी काटने गया था चार दिन पहले लेकिन आज तक वापस नहीं आया.

बल्ला- कब गया था जंगल. किस समय… क्या हमेसा उसी समय जाता था वो और आता कब था वो.

मुखिया- जी वो तो सुबह hi गया था. है हमेसा से सुबह जा क्र लकड़ी काट क्र लता था और यही पास क बाजार मई बेचा करता था.

बल्ला- और कोई है जिसे इस जंगल क बारे मई थोड़ा बहुत पता हो.

मुखिया- है तो एक लकड़हारा और लेकिन जब से उस लकड़हारे की कोई खबर नहीं है हम सब ने उसे भी जंगल जाने से मन क्र रखा है. अब जंगल मई कोई नहीं जाता है जी.

वैसे आप कौन है. किस ने भेजा है आप को. क्या हमारे महाराज ने भेजा है.

बल्ला- मई आप क राज्य का राजकुमारी बेला हु.

मुखिया- क्या… आप हमारी राज कुमारी जी है.

वो वही पास मई रखे एक खटिया को अपने हाथ से साफ़ करता बोलै.

मुखिया- अरे जल्दी से कुछ खाने पिने की व्यवस्था करो. आज हमारे कसबे मई हमारी राज कुमारी जी आई है. धन भाग्य हमारे जो आप क दर्शन हो गए.

बल्ला- ये सब करने की कोई ावसकयाता नहीं है. आप बस उस लकड़हारे को ले क्र आज कभी भी हमारे तम्बू क पास आ जाइएगा.

हम सभी अभी आप क कसबे क पास hi क खली जगह मई रह रहे है.

मुखिया- ऐसे कैसे.. आअज आप पहली बार हमारे कसबे मई आये है. हम खली हाथ कैसे जाने दे आप को.

तब तक दो लोग दौरते हुए हाथ मई एक बर्तन लिए आ गए.

मुखिया- यहाँ बैठ जाइये. हमको माफ़ क्र दीजियेगा. हम मुर्ख है. पता नहीं था न की आप हमारे राज कुमारी है.

फिर बेला को वह खटिया पर बैठा क्र उसे वह का फल खाने को दिया.

बेला दो फल ले क्र खा ली.

बेला - बहुत स्वादिस्ट फल था आप का. आप बस मेरा वो काम क्र दीजियेगा. हमे उस लकड़हारे से मिला दीजियेगा.

फिर बेला अपने घोड़े पर बैठ क्र वापस अपने तम्बू की और चली गई.

कहना सब से फ्री होने क बाद बेला एक बार कस्बो मई गए सैनिक से वह का जानकारी ले क्र वापस अपने कमरे मई आ गई.

साम से बेला और वह क सैनिक अपने पहले टुकड़ी क साथियो क आने का इंतजार करने लगे.

जैसे जैसे अँधेरा होता जा रहा था बेला परेशां होती जा रही थी.

वो भी जंगल को जाने वाले रस्ते और कड़ी चिंता मई डूबी इधर उधर भटक रही थी परेशां सा.

काफी रात गए तक बेला और दूसरी टुकड़ी की बांकी सेंकी वही खड़े थे.

बल्ला- हमे अपने साथियो क तलाश मई जाना चाहिए.

एक सैनिक- राज कुमारी जी, गुरु ने जाते हुए कहा था की अगर हम रात होने तक न आये तो फिर सुबह hi जंगल मई जाना और उस से पहले महाराज को सूचित क्र दिया जय.

दूसरा सैनिक- अगर आज्ञा हो तो हम कुछ सैनिको को साथ ले क्र आगे तक देखे.

बल्ला- जाएंगे तो सभी जाएंगे. या फिर कोई नहीं जाएगा. हम थोड़ी देर और देखते है. उस समय तक नहीं आये ये लोग तो हम जंगल मई चलेंगे देखने. सब अपनी तयारी क्र लो तब तक.

सरे सैनिक तुरंत अपने सामान क साथ तैयार हो गए थे.

तम्बू वैसे hi लगा हुआ था.

सभी सैनिक हटो मई मसल लिए हुए सरहद पर इधर से उधर देखते हुए घोड़े पर सवार थे.

थोड़ी देर बाद जब पहले टुकड़ी क सैनिक नहीं आये तो बेला का साबरा जबाब दे गया.

बल्ला- सभी तैयार है.

सैनिक- जी राज कुमारी जी.

सभी सैनिक एक साथ बोले.

बल्ला- चलो फिर. देखे अपने साथियो को किसी मुसीबत मई तो नहीं है. एक सैनिक जा क्र राज भवन मई महाराज को ये सुचना दे देना.

उन मई से एक सैनिक अपने टोली से घूम क्र जैसे hi आगे बढ़ा दूसरी डिसा को जाने क लिए की उधर से कुछ घोड़े पर सवार सैनिक आ रहे थे.

वो सैनिक सब को सूचित करता वही खड़ा हो गया.

थोड़ी देर मई hi वो सभी सैनिक वह आ गए.

पास आने पर सब ने देखा की ये तो जंगल गए हुए पहली टुकड़ी से आये वापस लोग है.

बल्ला- इतना समय कैसे लग गया.

गुरु- आज तो कुछ भी नहीं मिला ऐसा की जिसे देख क्र कह सके की कुछ बुरा हो रहा है जंगल मई.

सभी सैनिक अपने तम्बू क पास आ गए थे और चार सैनिक वही जंगल क पास मसल ले क्र पहरा देने लगे थे.

पहले टुकड़ी क सैनिक थके हुए थे तो वो लोग आराम करने चले गए खाना खा क्र.

बेला गुरु क पास बैठी हुई थी.

बल्ला- क्या कुछ भी नहीं पता चला.

गुरु- नहीं राज कुमारी जी कुछ भी पता नहीं चला.

बल्ला- सर हिला क्र रह गई.

आप भी आराम क्र लीजिये अब कल सुबह सोचेंगे की आगे क्या करना है.

सभी सोने चले गए अपने अपने तम्बू मई.

सुबह बेला उठी तो कसबे का मुखिया एक लकड़हारे को ले क्र आया था.

बेला मुखिया क साथ उस से बाटे करने लगी. साथ hi गुरु को भी बुला बेजा.

बल्ला- जंगल मई कितने अंदर तक गए हो तुम.

लकड़हारा- राज कुमारी जी, मई ज्यादा दूर नहीं गया हु यही कोई तीन चार मिल तक गया होऊंगा.

बल्ला- आखरी बार कब गए थे उधर.

लकड़हारा- यही कोई एक सप्ताह पहले गया था.

बल्ला- क्या कुछ ऐसा दिखा था जो अजीब हो.

लकड़हारा- नहीं मुझे तो कुछ भी अजीब नहीं लगा था.

बल्ला- मुखिया जी क्या आप या गौण वालो का कोई अनुमान की किस और जंगल मई जाँच करना चाहिए.

मुखिया- नहीं राज कुमारी जी. हम सब कसबे वाले ज्यादा अंदर कभी गए hi नहीं. अब जंगल क अंदर क्या है ये कौन बता सकता है.

बल्ला- ठीक है आप जा सकते है.

फिर मुखिया और लकड़हारा चला गया.

गुरु- अब आगे क्या करना चाहिए.

बल्ला- एक सैनिक को सन्देश ले क्र राज दरबार भेज दीजिये. दूसरा, कल सुबह हम यहाँ चार पांच सैनिक छोड़ क्र सभी चलेंगे जंगल मई और वह एक रात गुजर क्र आगे बढ़ते हुए जाँच करेंगे.

गुरु- नहीं नहीं. महाराज क आज्ञा क बिना मई आप को जंगल मई जाने की इजाजत नहीं दे सकता.

बल्ला कुछ देर अपने मन मई कुछ सोचती है फिर मन जाती है गुरु की बात.

एक सैनिक को भेज दिया जाता है सन्देश ले क्र राजा क पास.

दूसरे दिन गुरु फिर सुबह सबेरे अँधेरे मई hi अपने टुकड़ी क साथ आगे बढ़ जाता है. इस बार वो लोग दूसरे रस्ते से आगे बढ़ रहे थे. इन रास्तो मई छोटी झाडिया ज्यादा थी जिस कारन इन्हे आगे बढ़ने मई कठिनाई हो रही थी लेकिन घोड़े पर थे ये लोग तो आगे बढ़ रहे थे झाड़ियों को तलवार और भले से हटते हुए.

गुरु लोगो को जाते hi बल्ला अपने सैनिको मई से चार वही पहरे पर छोड़ क्र बांकी क करीब 15 सैनिको को ले क्र गुरु से अलग दिशा से जंगल मई प्रवेश क्र गई.

दोनों टुकड़ी अपने अपने साथी सैनिक क साथ आगे बढ़ रहे थे.

बल्ला जिस दिशा से आगे बढ़ रही थी उधर ज्यादा घाना जनागल नहीं था तो वो लोग तेजी से आगे बढ़ रहे थे.

दोपहर तक वो लोग करीब करीब चार पांच किलोमीटर्स मई छान बिन क्र चुके थे जहा उन्हें कुछ नहीं मिला था.

इधर गुरु को आगे एक नदी मिल गया छोटा सा तो वो लोग वही अपने अपने घोडा को छोड़ क्र कुछ सैनिक भी छोड़ दिए और पैदल hi आगे बढ़ने का फैसला किया. नदी को तैर क्र पर करने क बाद वो लोग कुछ दूर पैदल गए लेकिन आज भी उन्हें कुछ सफलता हाथ नहीं लगी. बस एक जगह एक जंगली सुवर एक सैनिक और हमला क्र दिया था जिस मई वो सैनिक घायल हो गया लेकिन बाद मई एक दूसरा सैनिक उस सुवर को अपने भले से मर गिराया.

फिर उस सुवर को तंग क्र ये लोग वह से hi वापस हो गए.

इधर बल्ला तो जैसे आज थान hi ली थी की चाहे जो हो जय लेकिन पता लगा क्र रहेगी की जंगल मई क्या हो रहा है.

साम ढलने को हो आई थी लेकिन अभी तक ये लोग वापस होने का नहीं सोचे थे.

एक सैनिक- राज कुमारी जी, साम होने वाली है. अब धीरे धीरे अँधेरा होने लगेगा. आगे बढ़ना अब ठीक नहीं है. अगर हम अब जल्दी वापस नहीं लौटे तो जंगल मई hi फस्स जाएंगे.

बल्ला- हम वापस नहीं जा रहे. आज रात हम यही जंगल मई बिताने वाले है.

सैनिक- क्या ये सही रहेगा. यहाँ वैसे hi जंगल उप्पेर से अजीब दुसमन जिस क बारे मई हम सब को कुछ भी पता नहीं है.

बल्ला- अँधेरा होने से पहले हमे ठहरने क लिए कोई जगह धुंध लेनी चाहिए.

दूसरा सैनिक- राज कुमारी जी, एक बार और सोच लीजिये.

बल्ला- अगर दर लग रहा है तो जा सकते हो आप लोग.

सैनिक- हमे अपना नहीं आप की सुरक्षा का दर है.

बल्ला- मेरी सुरक्षा क लिए आप सब परेशां न हो. आप सब जल्दी से किसी जनग का इंतजाम कीजिये जहा रात गुजर सके.

एक सैनिक- यहाँ तो पैर क अलावा और कुछ नहीं मिलने वाला राज कुमारी जी. हम सब को किसी पैर पर hi रात गुजरना चाहिए.

बल्ला- ठीक है फिर.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 79.

ऋतू क जाने क बाद लल्लू क जिस्म मई जान नहीं बची थी. आज दो दो बार अभी म्हणत किया था और दिन मई भी एक बार हो गया था बुआ क साथ नदी मई.

लल्लू वैसे hi नंगा नींद मई खो गया.

इधर दूसरी और….

बौने सभी अपने गुफा मई जा क्र हवन करने मई लगे हुए थे और यहाँ बगीचे मई एक पैर क निचे फुल्लो क सैया पर गायत्री नींद ले रही थी.

तभी वो सपने मई देखती है की एक बहुत खूबसूरत पहाड़ी क निचे बड़े से पत्थर पर दो लोग उसकी और पीठ किये बैठे है.

पहाड़ी से एक झरना फुट क्र वह निचे जमीं पर गिर रहा था जो की एक झील का रूप ले लिया था.

उस झील मई कुछ हंस क जोड़े अठखेलियां क्र रही थी.

आस पास छोटे बड़े पैर उगे हुए थे.

जगह जगह पत्थर बिखरे थे जो सायद उस पहाड़ी से टूट क्र निचे गिरा था.

कई तरह क रंग बिरंगे फूल खिले हुए थे जिन पर भाबर मंडरा रहे थे.

गायत्री आगे बढ़ती हुई दोनों लोगो क नजदीक जा पहुंची.

एक लड़का था जो की बहुत सुन्दर सही पोषक मई पत्थर पर बैठा हुआ था उसके साथ सात क्र एक लड़की एक नील रंग क फ्रॉक मई उस लड़के क कंधे पर अपना सर रखे बैठी हुई है.

पत्थर से अपना पेअर लटकाये दोनों झील क पानी मई अपने पैरो को डूबते खेल रहे थे.

गायत्री आगे बढ़ते हुए दोनों क पीछे जा कड़ी हुई.

वो चारो और क सुंदरता को देखती हुई सोच रही थी की ये कहा आ पहुंची है.

वो तो जंगल मई पैर क निचे सो रही थी.

गायत्री- कौन हो आप दोनों. ये कौन सी जगह है.

जब गायत्री को कुछ समझ नहीं आया तो वो उन दोनों से पूछ बैठी.

लेकिन उन दोनों ने कोई जबाब hi नहीं दिया गायत्री क बातो का.

गायत्री आगे बढ़ क्र उन दोनों क बगल मई जा क्र कड़ी हो गई.

जब गायत्री उस लड़की का चेहरा देखि जो की अपने सर को लड़के क कंधे पर रखे आँखे मूंदे बैठी हुई थी, तो एक बार को चौक hi गई.

वो एक बार खुद को देखती और फिर उस बैठी हुई लड़की को.

दोनों एक जैसे hi दिख रहे थे.

बस फर्क था तो कपड़ो का.

वो लड़का उस लड़की क दोनों हाथो की उंगलियों मई अपना ऊँगली फसाये बैठा उस लड़की क सुन्दर चेहरे को निहार रहा था.

लड़की- ऐसे कब तक देखते रहोगे. जब भी हम मिलते है तुम सारा समय मुझे देखने मई hi बिता देते हो.

लड़का- क्या करू फिर मई. तुम्हारे इस मन मोहक चेहरे क आगे मुझे और कुछ दीखता hi नहीं.

लड़की- क्यू कितना सुन्दर ये मौसम है. ये झरना इसका साफ़ निर्मल पानी. ये खिले हुए रंग बिरंगे फूल. ये पहाड़ी सब देखने योग्य hi तो है.

लड़का- ये सब तो मुझे तुम मई hi दिख जाता है.

झील सी नीली ये तुम्हारी आँखे.

फूलो सा खिला ये तुम्हारा चेहरा.

फूलो की पंखुड़ियों की तरह कोमल ये तुम्हारे होठ.

सुराहीदार चिकनी गर्दन जिस से गुजरता हुआ पानी भी दिख जय.

दो सर उठाये हुए p..a..r..v..t.

लड़की- बस करो. हमेसा मुझे छेड़ते रहते हो.

वो लड़की झट से उसके मुँह को अपने हाथो से बंद करती बोली.

लड़का- गायत्री तुम इतनी सुन्दर क्यू हो.

लड़की( गायत्री)- क्यू की हम प्रेम करते है एक दूसरे से. इसी लिए मई तुम्हे सुन्दर दिखती हु.

साइड मई कड़ी गायत्री इन दोनों की बातो को सुन क्र पदेशन हो रही थी.

गायत्री- कौन हो आप लोग. यहाँ क्या क्र रहे हो.

एक बार फिर से जब गायत्री क समझ मई कुछ नहीं आया तो वो उन दोनों से पूछ बैठी.

लेकिन फिर कोई जबाब नहीं मिला.

गायत्री आगे बढ़ क्र उस लड़की क कंडे को पकड़ने क लिए जैसे hi हाथ बधाई गायत्री का हाथ उस क सरीर क आर पर हो गया.

गायत्री जल्दी जल्दी दो तीन बार ऐसे hi की लेकिन हर बार वही नतीजा.

फिर गायत्री लड़के क तरफ जा क्र उसे आवाज देती उसका कन्धा छूना चाही तो भी कुछ नहीं हो सका.

हर बार गायत्री का हाथ उस लड़के क सर क आर पर हो जय.

जैसे गायत्री का कोई वजूद hi न हो.

गायत्री- ये क्या हो रहा है. हर बार मई इन्हे छूने की कोसिस करती हु लेकिन कोई फायदा नहीं. मई इन्हे टच hi नहीं क्र प् रही हु. और न hi ये मेरे किसी प्रश्न का जबाब hi दे रहे है जैसे इन्हे सुनाई hi नहीं दे रहा हो में बाटे.

कही ये दोनों बहरे तो नहीं है. या ऐसा भी हो सकता है की जैसे मई इन्हे छू नहीं प् रही हु वैसे hi मेरी आवाज भी इन्हे सुनाई नहीं दे रहा हो.

लेकिन मई दो जगह कैसे हो सकती हु. ये लड़की बिलकुल मेरे जैसी है. क्या ये मेरी जुड़वाँ है.

कभी बेर तक गायत्री खुद से बाटे करती रही.

तभी वो दोनों लड़का और लड़की की और देखि तो चौक क्र गायत्री झट से अपनी नजरे फेर ली.

ककी अभी दोनों अपने होठ एक दूसरे से चिपकाये अपना अपना प्यार एक दूसरे से बाँट रहे थे.

गायत्री- chhi..chhi कितने बेसरम है ये दोनों मेरे सामने hi सुरु हो गए. थोड़ी सी भी सरम नहीं है इन्हे.

गायत्री सोचो मई खोई भटकती हुई झरने क करीब जा पहुंची और एक पत्थर पर बैठ क्र अपने पैरो को झरने क पानी मई दाल दी.

लेकिन ये क्या उसका पेअर तो पानी मई भिनगा hi नहीं.

चौक क्र वो पत्थर से उठ कड़ी हुई और फिर से झरने क पानी मई अपना पेअर डाली लेकिन फिर उसका पेअर गिला नहीं हुआ.

गायत्री- ये क्या हो रहा है मेरे साथ. कौन सी मायावी जगह पहुंच गई मई. ऐसा लग रहा है जैसे मई जिन्दा hi नहीं हु बस मेरी आत्मा भटक रही है यहाँ वह.

ओह्ह्ह कही यही बात तो नहीं. मई सो रही थी और मैं सोते हुए hi यहाँ आ गई. मतलब मेरा सरीर वह है or..or मेरा सुक्ष्म सरीर यहाँ आ गया है.

अब समझ आया, यही बात है. इसी लिए न ये मुझे देख प् रहे है न hi मई कुछ महसूस क्र प् रही हु.

मुझे ध्यान मई बैठना पड़ेगा तभी कुछ हो सकता है.

लकिन कही तब तक ये लोग यहाँ से चले गए तो.

नहीं अभी तो इन्हे देखु की ये कौन है.

गायत्री फिर उन्दोनो की और देखि तो अब ये लोग किश तोड़ क्र एक दूसरे को देखते मुस्कुरा रहे थे.

गायत्री- लगता है बड़ा गहरा प्यार है इन दोनों का. वैसे लड़का बड़ा प्यारा है. कितनी कसिए गई उसके आँखों मई.

पता नहीं मुझे उस लड़के को देख क्र ऐसा क्यू लग रहा है जैसे मेरा उस से कुछ गहरा नाता हो.

दिल बेचैन सा हो उठा है. ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ है.

आज फिर इस लड़के को देख क्र क्यू हो रहा है.

कितना सुन्दर है ये. लम्बे बाल, चौड़ा सीना, चेहरे पर भोलापन जैसे मेरे दिल मई उतरता जा रहा है.

हे भगवन ये क्या हो रहा है मेरे साथ. पहले hi उसके साथ मेरी हंसकाल है और है उस लड़के ने उसका नाम भी गायत्री hi कहा था. मतलब मेरे चेहरे क साथ साथ उस लड़की ने मेरा नाम भी चुरा लिया है.

छोडूंगी नहीं मई उसको.

तभी वो दोनों उठ क्र एक दूसरे क कमर मई हाथ डेल वह से चल दिए.

गायत्री भी झट से उठ क्र उनके पीछे चल दी.

आगे पहाड़ी की तरफ वो लोग एक संकर रस्ते से गुजर रहे थे.

गायत्री भी कदम तेज चलती हुई उनके पास जा पहुंची.

गायत्री- कौन हो तुम दोनों.

एक आखरी बार कोसिस करने की सोच क्र गायत्री बोली लेकिन उन दोनों की और से कोई जबाब नहीं आया तो गायत्री समझ गई की कुछ नहीं होने वाला ऐसे चिल्ला क्र.

वो दोनों क पीछे पीछे चलते हुए पहाड़ी क उप्पेर आ गई.

वह दो सफ़ेद घोड़े बंधे हुए थे.

दोनों उस घोड़े पर बैठ क्र चल दिए.

गायत्री उन क पीछे चलती हुई आगे बढ़ने लगी.

वो दोनों घोड़े पर बैठे बाटे करते हुए आगे बढ़ रहे थे.

उस पहाड़ी से उतर क्र वो लोग एक नगर क बहार आ पहुंचे.

नगर क बहार एक द्वार बना था जो नील रंग का था.

उस पर नगर का नाम भी लिखा हुआ था.

" निल नगर"

वो लड़की हाथ हिला क्र लड़के को अलविदा कहती उस द्वार को पर क्र आगे बढ़ गई.

गायत्री द्वार क बहार कड़ी सोचने लगी की अब किधर जाया जय.

उस लड़के क पीछे या फिर अपने हंसकाल लड़की क पीछे.

फिर वो कुछ सोच क्र उस लड़की की और बढ़ गई.

गायत्री जैसे hi अपना कदम उस द्वार क अंदर राखी वैसे hi वो द्वार नगर सहित कही गायब हो गया और गायत्री भौचक्की सी वह कड़ी देखती रह गई.

पीछे पलट क्र देखि तो वो लड़का भी अब वह नहीं था.

गायत्री जब गौर की तो ये कोई और hi जगह लगा उसे.

जैसे सब कुछ उजर हो रखा था यहाँ.

न तो कोई मानव न कोई जीवित प्राणी hi नजर आ रहा था दूर दूर तक.

था तो बस वीराना.

गायत्री बहुत परेशां हो गई.

आखिर ऐसा क्या हुआ की वो अचानक यहाँ आ गई.

पहले सोई तो उन दोनों क पास जा पहुंची और अब जबकि वो अपने सामान चेहरे वाली लड़की का पीछा करने की सोची तो वो पूरा नगर hi गायब हो गया और उसके जगह ये कैसे जगह आ गई ये.

गायत्री चलती हुई एक पैर क नजदीक जा पहुंची.

वह पैर क चाय मई बैठ क्र वो ध्यान मई बैठ गई.

गायत्री पहले hi सोच ली थी की जैसे hi वो कभी भी मौका मिलेगा तो सब से पहले ध्यान मई बैठेंगे.

अब जबकि वो उन दोनों से अलग हो गई है तो उस ने पहले ध्यान लगाना hi सही सखी.

ध्यान मई बैठते hi गायत्री क अंदर आज पहली बार एक नयी ऊर्जा दिख रही थी जो ब्लू कलर मई उसके पुरे सरीर मई बाह रहा था.

गायत्री उन ऊर्जा स्रोत को ढूंढते हुए अपने मूलाधार पर ध्यान केंद्रित की.

गायत्री बचपन से hi ध्यान लगाती थी तो उसे तो सरे चक्र पहले से hi जागृत थे.

तुरंत hi मूलाधार चक्र जागृत हो गया.

फिर स्वाधिस्ठान चक्र उसके बाद मणिपुर फिर अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और अंत मई सहस्त्रार चक्र जैसे hi जागृत हुआ उसके सर और वही ताज आ गया एक बार फिर और साथ hi गायत्री का पोशाक जो अभी गेंडुआ था वो भी बदल क्र एक चमकदार नाइके रंग क सही पोशाक मई बदल गया.

थोड़ी देर मई गायत्री जहा पैर क निचे जमीं पर बैठी ध्यान लगा रही थी अब वो हवा मई दो फुट उप्पेर उठ गई थी.

उसके चारो और एक ब्लू रेज़ घूमने लगा था.

सर पर रखे मुकुट मई लगा हुआ पत्थर जो नील कलर का था. वो भी तेज तेज चमकने लगा था.

तभी गायत्री वह से गायब हो क्र जहा सोई थी वह पहुंच गई और सोये हुए अपने स्थूल सरीर मई समां गई.

सुबह लल्लू उठा तो अभी चारो और अँधेरा hi था.

उठ क्र अपने कमरे मई गया तो वह सोनम और लक्ष्मी सोई हुई थी.

लल्लू झुक क्र पहले लक्ष्मी क होठो को चुम लिया.

लक्ष्मी सोती हुई hi मुस्कुरा दी.

लल्लू फिर सोनम और झुकता चला गया.

सोनम क पतले कोमल होतो को छूटे hi लल्लू किसी और hi दुनिया मई पहुंच गया.

लल्लू जब भी सोनम क पास आता था उसे एक अलग hi एहसास होता.

लल्लू सोनम क होठो को अपने होठो मई ले क्र प्यार से छोटा छोटा चुम्मी देने लगा.

कुछ hi समय मई लल्लू अपने गले मई सोनम क हाथ को महसूस किया साथ hi अब सोनम भी जबाबी हमला करते हुए लल्लू के उप्पेर क होठ को अपने होठ मई दबा क्र चूसने लगी थी.

लल्लू आहिस्ता आहिस्ता अपने हटो से सोनम क बदन को कपड़ो क उप्पेर से सहलाता हुआ उसके उन्नत उभर को अपने पंजे मई कैद क्र लिया.

सोनम लल्लू क उप्पेर क होठ को अपने दन्त से काट ली जोर से.

लल्लू चिहुँक क्र उठ खड़ा हुआ लेकिन इस चक्कर मई उसका पंजा सोनम क उभर और सख्त हो गया.

सोनम अपने नशीली आँखों से लल्लू क आँखों मई देखती अपनी आँखे नचा क्र लल्लू क हाथ की और इसरा की.

लेकिन लल्लू बैल बूढी कहा समझ पता. नहीं माझा वो तो सोनम लल्लू क एक हाथ पर हलके से चपत लगा दी.

जब लल्लू निचे देखा तो अपने दोनों हाथो को सोनम क उभर को मुठी मई दबाये पाया.

लल्लू झट से अपने हाथ को वह से हटा क्र कान पकड़ क्र हलके से होठो मई hi सॉरी बोलै.

सोनम सरमाती हुई दूसरी और लक्ष्मी की तरफ घूम क्र सो गई.

सोनम क घूमने से उसका कुरता कमर से थोड़ा सा साइड हो गया जिस मई से सोनम की नंगी कमर लल्लू क सामने आ गया.

लल्लू अपनी बड़ी प्यारी बहन की नंगी कमर देख क्र वह झुकता हुआ उस जगह अपने होठो को लगा दिया.

सोनम चौक क्र उठ बैठी.

चौकने से सोनम की बिना ब्रा क कुर्ते मई कैद उसके 34 की चूचिया बड़ी तेजी से उप्पेर निचे होने लगा.

लल्लू अपनी प्यारी सपनो की सहजादी का ये जान मरू रूप देख क्र बबला होता जा रहा था.

सोनम आँख तरेर क्र झूठे गुस्से से लल्लू की और देखि तो लल्ली कान पकड़ क्र माफ़ी मांगने का नाटक करता हुआ सोनम क पास बीएड पर बैठ गया.

लल्लू को अपने पास बैठता देख क्र सोनम समझ गई की लल्लू अभी और सररत करने वाला है तो सोनम भी उठ बैठी.

लल्लू कंपते हाथो से अपने जान क दोनों गाल को पकड़ क्र अपनी और घुमा लिया.

लल्लू सोनम क नशीली आँखों मई देखता हुआ उसके माध भरे होठो पर झुकने लगा.

सोनम लल्लू का यु प्यार से देखने क कारन असहज महसूस करने लगी थी ककी अभी यहाँ लक्ष्मी भी सोई हुई थी.

कोई और समय होता तो वो खुद अब तक न जाने क्या क्र गई होती अकेले मई. लेकिन यहाँ कुछ करना खतरे से खली नहीं था.

लल्लू कहा मानाने वाला था.

वो झुकता हुआ एक बार फिर से सोनम क होठो पर टूट पड़ा लेकिन बहुत प्यार से सोनम क होठो पर आहिस्ता से चूमने लगा.

करीब 10-12 चुम्मी देने क बाद लल्लू सोनम को छोड़ क्र खड़ा हो गया.

सोनम आँखे बंद किये लल्लू क प्यार को महसूस क्र रही थी.

लल्लू वह से उठ क्र पैदल नदी की और चल दिया. अब हल्का उजाला हो गया था.

लल्लू नदी पर जा क्र फ्रेश हुआ फिर ध्यान मई बैठ गया.

ध्यान मई बैठते hi लल्लू क सरीर मई इंद्रधनुष क सात रंगो की सकती ऊर्जा प्रवाह करने लगी.

वह का पूरा वातावरण उन सतो रंगो से जगमग करने लगा था.

उस समय वह कोई होता तो देख क्र माभोश हो जाता ऐसा माहौल बन गया था.

पास मई नदी थी तो उस क पानी मई इन साडी रंगो का बना हुआ अक्ष बड़ा प्यारा लग रहा था.

काफी देर ध्यान मई बैठे रहने क बाद लल्लू वह से उठ क्र नदी मई स्नानं किया और फिर खेत का एक चक्कर लगा क्र घर वापस हो गया.

घर आते आते 11 बज गए थे.

दालान पर आते hi काका गुस्सा होने लगे.

रवि काका- कहा गया था आज. तुम्हे पता है न आज तेरी बुआ और भाई दोनों जाने वाले है फिर भी इतने देर घूमता रहा बहार.

लल्लू- सॉरी काका. अभी अब खेत तो जा नहीं पता इस लिए एक चक्कर खेत का लगा आया हु और मजदूरों को भी समझा दिया हु सारा काम.

दादू- चलो ये भी अच्छा क्र लिया. जा देख आँगन मई दोनों तैयार हुए या नहीं.

लल्लू वह से आँगन गया तो सभी आज मायुश थे बुआ और भैया क जाने से.

लल्लू बुआ को ढूंढता हुआ उनके कमरे की और फर्स्ट फ्लोर पर चला गया.

वह बुआ क पास इस समय सभी बहने लक्ष्मी क साथ बुआ को तैयार करने मई लगे हुए थे.

लक्ष्मी- कहा थे आप सुबह से. बुआ कब से आप को धुंध रही है.

लल्लू- वो जरा खेत चला गया था.

सोनम- आज भी खेत जाना जरुरी था क्या. बुआ और भैया दोनों जा रहे है तो काम से काम आज तो घर पर रहते.

लल्लू एक नजर बुआ को देखा तो बुआ भी मायूस दिखी. उनके आँखों मई ांक्षु भरे हुए थे जो कभी भी अपनी गाड़ी को पर क्र बहार आ जाते.

वह सभी लोग थे तो न तो लल्लू ने कुछ कहा न hi बुआ ने उसकी और देखा.

लल्लू- भैया तैयार हो गए.

सोनम- जा क्र देख.

लल्लू वह से बगल वाले कमरे मई देखा तो राघव भी तैयार हो रहा था.

यहाँ भी राघव और भाभी दोनों उदाश से थे.

लल्लू- भैया भाभी से प्राइवेट बाटे हो गई हो तो मई अंडर आ जाओ.

राघव- कहा था सुबह से.

लल्लू- काका बुआ क साथ जा रहे है तो जरा मई एक चक्कर खेत मई मर आया हु.

राघव- सब का यहाँ ख्याल रखना. किसी से बेवजह उलझना नहीं. अपनी भाभी का थोड़ा खास ख्याल रखना. अभी यहाँ नै है तो इसे मन नहीं लगेगा.

कभी कभी बाजार घुमा लाना.

लल्लू- आप नहीं कहेंगे तो भी मई भाभी का ख्याल रखूँगा hi. आप बेफिक्र हो क्र जाइये. मई सब का ख्याल रखूँगा.

राघव तैयार हो गया था.

लल्लू उनका सामान ले क्र बहार दालान पर रख आया.

सभी काकी आँगन मई राघव और बुआ से मिल रहे थे.

सब क आँखों मई आँशु थे.

लल्लू वापस आ क्र बुआ का सामान भी ले क्र गाड़ी मई रख दिया.

लल्लू- काका भैया कैसे जाएंगे.

काका- राघव हमारे साथ hi जाएगा. उसे ट्रैन मई बैठा क्र हम लोग आगे तेरे बुआ क यहाँ चले जाएंगे.

आज पापा और सुनील काका भी बाजार नहीं गए थे.

वो लोग भी दालान पर बैठे हुए थे.

लल्लू को आँगन का माहौल अच्छा नहीं लग रहा था तो वो दालान पर hi भाग आया.

सब क साथ बुआ और राघव बहार दालान पर आ गए.

राघव दालान पर सब काका और दादू क पेअर छू क्र प्रणाम किया और गाड़ी क पास आ गया.

बुआ दादू क गले लग क्र रोने लगी.

दादू- गुड़िया रोटी क्यू है. अभी तेरा बाप जिन्दा है. जब भी तेरा दिल करे एक कॉल क्र देना. कोई भी जा क्र तुम्हे ले आएगा वह से.

फिर बुआ अपने भाइयो से मिली.

सब क आँखों मई आँशु आ गए.

लल्लू तो आज पहली बार अपने पापा क आँखों मई भी आँशु देखा था.

बुआ सब से क्लोज अपने छोटे भाई श्याम से hi थी.

श्याम बुआ को ले क्र गाड़ी तक आये. फिर उन्हें गाड़ी मई बैठा क्र आँखे साफ़ क्र अलग हो गए.

लल्लू भी जा क्र अपने बुआ क पेअर चुने लगा लेकिन बुआ लल्लू को पेअर नहीं चुने दी.

उसके गाल को सहला क्र अपने घर आने का वडा ले क्र चल दी अपने ससुराल.

रवि काका और राघव आगे बैठे थे.

सब क बैठे hi गाड़ी बढ़ गयी आगे.

सब अपने अपने आँशु बहते जब तक गाड़ी आँखों से ओझल नहीं हो गई वही खड़े रहे.

फिर सभी भरी मन से आँगन आ गए.

पापा और सुनील काका भी बाजार जाने की तयारी करने लगे थे.

लल्लू आँगन आया तो सब उदाश बैठे थे.

लल्लू सोनम और लक्ष्मी को भाभी की और इसरा क्र दिया की इनका मन बहलाते रहे.

वो दोनों उठ क्र भाभी को ले क्र अपने साथ कमरे मई चले गए.

लल्लू- हो गया अब सब ऐसे मुँह क्यू लटका रखे हो. बुआ और राघव भैया दोनों फिर आ जाएंगे. चलो सब उठो. काका और पापा का नास्ता लगा दो वो बाजार जाने को तैयार हो रहे है.

फिर सभी उठ क्र अपने अपने कामो मई लग गए.

लल्लू- काकी मई सोच रहा था की भाभी लोगो को आज थोड़ा बाजार घुमा दू. भैया गए है तो वो उदाश होगी.

ऋतू काकी- आज रहने दे बीटा. कल घुमा लाना.

आज अब लेट हो गया है आते आते अँधेरा हो जाएगा तुम लोगो को.

फिर लल्लू दालान पर दादू क पास चला गया.

दादू- आ बीटा बैठ यहाँ.

दादू अपने बिस्तर पर एक और इसरा करते बोले.

लल्लू- दादू आप क्या पढ़ रहे है.

दादू- ये भगवद गीता है बीटा.

लल्लू- क्या लिखा है इस मई.

दादू- इस मई लिखा है की इन्शान को सिर्फ अपने कर्म से मतलब होना चाहिए. फल की चिंता करना वो प्रभु का काम है.

तुम जैसा काम करोगे वो उप्पेर बैठा तुम्हे वैसा hi फल देगा.

तुम आज खेती करना सुरु किये हो. अगर तुम पहले ये सोचो की मई खेती करना सुरु किया हु कैसा फसल होगा. अच्छा होगा या लोस्स हो जाएगा.

तो यही भगवन कहते है की ये सब झंझट मई मत पारो. वो सब सोचना तुम्हारा काम नहीं है. तुम बस कर्म करो. फल देने मई बैठा हु.

लल्लू- समझ गया दादू.

वैसे गीता तो भगवन ने अर्जुन को सुनाई थी न.

दादू- वो अर्जुन क साथ साथ पुरे मानव जाती क लिए था बीटा. अर्जुन तो बस एक उदहारण मात्रा था.

उन्हें युद्ध मई अपने सेज संभंधित को देख क्र मोह हो गया था. वो एक क्षत्रिय थे. उनका काम hi यही था युद्ध करना और दोस्तो पापियों का नास करना. वो भटक रहे थे अपने रह से जिसे भगवन सही रस्ते पर लेन क लिए कहा था की तुम सिर्फ अपना कर्म करो. फल की चिंता नहीं. फल देना मेरा काम है.

लल्लू- सजग गया दादू. वैसे मतलब हमे सिर्फ कर्म करना है. उस कर्मा का क्या फल मिलता है ये सोचना हमारा काम नहीं है. बस पुरे म्हणत से कर्म करना है और सही डायरेक्शन मई करना है.

दादू- बिलकुल सही बात. अब ऐसा नहीं की बुरे कर्म hi पुरे म्हणत से करे आदमी.

फिर दाल भी भगवन बुरा hi देंगे और उतनी hi मात्रा मई देंगे जैसा उसने म्हणत किया होगा.

लल्लू- अच्छी बात है दादू.

फिर लल्लू वह से उठ क्र आँगन आ गया.

रात मई खाना पीना क बाद लल्लू कमरे मई आया तो पीछे लक्ष्मी भी आ गई.

लक्ष्मी- अभी आप को कही और hi सोना पड़ेगा. वो क्या है न की भाभी आज थोड़ी उदाश है तो हम सब भाभी को अभी अपने पास hi सुला लेंगे कुछ दिन माँ ने कहा है.

लल्लू- बहुत अच्छी बात है लेकिन मेरा कोटा तो खली जा रहा है उसका क्या.

लक्ष्मी- अभी खली hi रहने दीजिये. जब मौका मिलेगा तो भर लीजियेगा अपना कोटा भी.

लल्लू- अभी से अच्छा मौका कहा मिलेगा मुझे. पहले अभी hi थोड़ा भर लेता हु.

लल्लू झट से लक्ष्मी को पकड़ क्र उसके होठो पर अपना होठ लगा दिया.

लक्ष्मी लल्लू क बहो मई छूटने को मचलने लगी लेकिन लल्लू उसे अपने साइन से लगाए होठो का राश चुराने मई लगा हुआ था.

धीरे धीरे लक्ष्मी का बिरोड भी काम हो गया और वो भी लल्लू का साथ देने लगी.

लल्लू अपने हाथ को पीठ पर चला धीरे धीरे अपने हाथो को निचे लक्ष्मी क गोल माध्यम आकर क नितम्ब पर ले आया और उसके दोनों पत् को दोनों हाथ की मुठी मई भर क्र अलग करता मसलने लगा.

लक्ष्मी की होठो से मजे की सिसकारी निकल गई जो लल्लू क मुँह मई कही दफ़न हो गया.

दोनों पुरे जोर सोर से एक दूसरे का साथ दे रहे थे.

लक्ष्मी लल्लू क पीठ पर अपने हाथ को कस्ती उसके चौड़े साइन मई अपने कठोर कबूतरों को रगड़ रही थी.

जब दोनों को सैश लेने मई तकलीफ होने लगा तो दोनों हफ्ते हुए एक दूसरे से अलग हो गए.

लक्ष्मी लल्लू क साइन पर अपना सर रखती कड़ी कड़ी अपने ससो को बहाल रही थी.

लल्लू लक्ष्मी क कोमल सुडौल बदन और हाथ चलता उसे अपने से चिपकाये खड़ा था.

रोमा- आप दोनों को हो गया हो तो खाना खाने चले. सब रह देख रहे है.

लक्ष्मी आवाज सुन क्र झट से लगा हो क्र वाशरूम भाग गई.

लल्लू भी खिशयता चाट की सीढ़ियों पर चल दिया.

चाट पर बने एक कमरे मई जा क्र लल्लू अपना बिस्तर निकल लाया वह से और छत और hi एक और लगा लिया.
 
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