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- Dec 5, 2013
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मर्द का बच्चा. अपडेट 73.
वो दिन तो इन लोगो को तयारी मई hi निकल गया.
दूसरे दिन सुबह जल्दी उठ क्र लक्ष्मी, लल्लू और बुआ तैयार हो क्र नास्ता क्र सब सामान गाड़ी मई रख रहे थे.
सिबा कोमल लोग आज बहुत उदाश लग रही थी.
लक्ष्मी भी आज अपने घर को छोड़ क्र यहाँ से अपने ससुराल अपने पति क घर जा रही थी.
रह रह क्र लक्ष्मी की आँखे भर आती थी.
आज फिर एक बार उसे अपने माँ बापू की बहुत याद आ रही थी.
सब से छुपा क्र अपने आँखों क आँशु को साफ़ क्र लेती थी.
थोड़ी देर मई ये लोग जाने क लिए तैयार थे.
सिबा- बीटा तुम्हारी बहुत याद आएगी. वह जा क्र हम सब को भूल मत जाना. डेली कॉल करते रहना.
सिबा लक्ष्मी को गले लगा क्र रट हुए उसे समझा रही थी.
लक्ष्मी- बजी मुझे भी आप लोगो की बहुत याद आएगी. मई डेली आप सब को कॉल करुँगी.
लक्ष्मी सिबा क आँखों से आंसू साफ़ करती बोली.
कोमल- लक्ष्मी जब भी दिल करे जीजू क साथ यहाँ आ जाना. हम सब तुम्हारा इंतजार करेंगे.
लक्ष्मी- जरूर कोमल दी. हम जरूर आएंगे.
सकीना- जा बीटा अब वही तुम्हारा घर है. वही तुम्हारे माँ बापू है. सब का आदर और सम्मान देना. सभी का सेवा करना. हम सब का नाम रोशन करना.
सब से मिल क्र लक्ष्मी एक नजर अपने उस आसियाने को देख अपने माँ बापू की यादो को महसूस करती गाड़ी मई जा बैठी.
लल्लू और बुआ पहले hi सब से मिल चुके थे.
लक्ष्मी क बैठते hi लल्लू सब को हाथ हिला क्र बे कहता गाड़ी आगे बढ़ा दी.
शाम हो गया था इन्हे गौण पहुंचते पहुंचते.
घर क आगे जैसे hi ये लोग पहुंचे, गाड़ी की आवाज सुन क्र सभी बहने दौड़ती हुई दालान से बहार आ कड़ी हुई.
लक्ष्मी सब को पहले hi कॉल क्र बता चुकी थी की वो लोग सैम तक घर पहुंच जाएंगे.
सभी लड़किया लक्ष्मी को घेरे कड़ी थी.
लल्लू चुप चाप उतर क्र डिक्की से सारा सामान निकल आँगन की और चल दिया इन लोगो को छोड़ क्र.
इधर सभी लड़किया वही लक्ष्मी और बुआ से सभी जानकारी लेने लगे.
वह मन लगा या नहीं, आने का मन क्र रहा था या अभी और रहना था.
बुआ से तो छोटी सैतान चिमटी हुई थी.
" बुआ वह से मेरे लिए क्या लाये हो. भाभी क्या क्या शॉपिंग की है वह पर मेरे लिए." गौरी लगातार बुआ को चिमटी पूछ रही थी और बुआ गौरी की आँखों की चमक और उसका उत्शाह और ख़ुशी देख क्र गुस्से जा रही थी.
सोनम- बस क्र बीटा. पहले लक्ष्मी और बुआ को आँगन तो इ चल फिर इत्मीनान से पूछ लेना जो पूछना हो.
रानी- अभी नहीं. पहले माँ आरती ले क्र आ रही है भाभी क लिए. फिर हम सब आँगन चलेंगे.
ये लोग वही खड़े हो क्र बाटे क्र रही थी.
सब एक एक क्र अपनी प्यारी छोटी भाभी से मिली तब तक रागिनी काकी क साथ काजल और शालिनी काकी भी आ गई आरती ले क्र.
लक्ष्मी इन लोगो को देख क्र सरमाती हुई सब से अलग हो क्र उन तीनो क पेअर छू क्र प्रणाम की.
तीनो माँ लक्ष्मी को प्यार क्र उसका आरती उतर क्र बुआ क साथ आँगन लायी.
लक्ष्मी को रानी गौरी और रोमा पकड़ क्र अपने साथ अपने कमरे मई ले आई.
" Bhai...bhai." गौरी दरवाजे आवाज देता लल्लू क कमरे मई आ गई.
लल्लू सारा सामान आँगन मई रख क्र अपने कमरे मई आ क्र नहाने की तयारी क्र रहा था.
वो उप्पेर क कपडे खोल क्र अब अपना पेण्ट खोल रहा था.
तब तक गौरी आवाज देती सामने आ गई.
लल्लू- क्या बात है सैतान की खला.
गौरी तो लल्लू को उप्पेर से नंगा देख क्र उस क चमकते गठीले सरीर को देखने मई hi खो गई.
लल्लू जब गौरी को कही और खोया देखा तो पेण्ट खोलना छोड़ क्र वैसे hi उसके सामने जा खड़ा हुआ.
लल्लू- क्या हुआ कहा खो गई. कोई सांप देख लिया क्या.
लल्लू गौरी का कन्धा पकड़ क्र हिलता हुआ बोलै.
गौरी लल्लू की साडी बात तो सुनी नहीं और लास्ट मई सांप का नाम सुन क्र उछलती हुई लल्लू क कंधे को पकड़ क्र झूल गई.
लल्लू झट से गौरी को कमर से पकड़ लिया.
गौरी तो लल्लू क साइन से लगती hi किसी और दुनिया मई खो गई.
लल्लू गौरी की पतली कमर को अपने बहो मई घेरे उसके मोठे बहार को निकल रहे गोल नितम्ब क निचे अपना हाथ लगा क्र सही से अपने गॉड मई उठा लिया.
ऐसा करते hi दोनों क बदन मई एक चिंगारी सी छूट गई.
लल्लू जब गौरी को मांशल नितम्ब से पकड़ क्र उठाया तो गौरी की छाती लल्लू क साइन से रगड़ खता हुआ उप्पेर को हो गई.
जिस से एक तो गौरी की कठोर 32 की चूचिया लल्लू क साइन से लग क्र डाब गया और दूसरा लल्लू क होठ गौरी क गले से जा लगा.
दोनों क मुँह से एक सिसकारी निकल गई.
लल्लू- क्या हुआ दी. ऐसे बचो की तरह क्यू कूद क्र चढ़ गई मेरे गॉड मई.
लल्लू गौरी क गले मई अपना नाक रगड़ता हुआ बोलै.
गौरी अभी एक फ्लावर की प्रिंटिंग वाली वाइट फ्रॉक पहनी थी.
लल्लू क उप्पेर कूद क्र उस ने अपने दोनों पैरो को कैची बना क्र लल्लू क कमर मई लपेट ली थी.
लल्लू गौरी को सँभालने क लिए जो हाथ लगाया था निचे वो बेखयाली मई आधा फ्रॉक क अंदर भी चला गया था जिस कारन गौरी तो दूसरी दुनिया मई hi पहुंच गई थी.
जैसे hi अपने नंगे नितम्ब पर पहली बार किसी हाथ का छुवन महसूस की वो कम्पटी हुई अपना अमृत बहा दी.
लल्लू क सर को अपने गले से चिपकाये उस से चिमटी हुई गौरी गहरी सैश लेती हुई अपनी हालत दुरुस्त करने मई लगी थी.
पहले भी एक दो बार रानी क साथ छेद चढ़ क्र चुकी थी लेकिन अभी जो लल्लू क संसर्ग मई आ क्र महसूस की वो तो वर्णन करने योग्य था hi नहीं.
गौरी को यु संत देख क्र लल्लू अपना सर उठा क्र उसके चेहरे की और देखा तो गौरी अपनी आँखे बंद किये उस आनंद को दिल की गहराई से महसूस क्र रही थी.
लल्लू- दी क्या हुआ. आप ठीक तो हो न.
लल्लू प्यार से गौरी क एक गाल को चुम क्र बोलै.
गुजरी अपने गाल पर लल्लू क होठो का गीलापन महसूस क्र सरमाती हुई अपनी पकड़ ढीली क्र दी.
लल्लू जब देखा की गौरी का चेहरा बिलकुल लाल हो रखा है तो वो घबरा गया.
लल्लू- क्या हुआ दी. आप बोलती क्यू नहीं.
गौरी- कुछ नहीं. साप कहा है.
गौरी नजरे नीची किये सरमाती हुई बोली.
लल्लू- कौन सा सांप.
लल्लू आस्चर्य से गौरी को देखता बोलै.
गौरी- तुम hi तो कह रहे थे की कमरे मई सांप है.
लल्लू अपने हाथ से सर पर मरता हुआ हुस्ने लगा.
लल्लू- मैंने आप से पूछा था की आप ने कोई samp.dekh लिया है क्या जो कुछ बोल नहीं रही थी.
गौरी- यु नंगु पंगु रहोगे तो इस मई मेरा क्या कसूर है.
गौरी लजाती हुई लल्लू क कंधे पर एक चपत लगाती बोली.
लल्लू- वो मई नहाने जा रहा था जब आप आई थी. बताइये क्या बात है.
गौरी- मई भी चालू क्या साथ मई.
गौरी फ्लो फ्लो मई बोल गई.
लल्लू- क्या….
गौरी- me...mera मतलब था की आज भाभी हमारे साथ सोयेगी तो तुम अपना देख लो. मुँह बहुत जल्दी फूल जाता है न तेरा. इस लिए बोल रही हु पहले hi.
लल्लू- कोई बात नहीं दी. आप सब जो कहेंगे वही होगा. मई आप सब को नाराज क्र सकता हु क्या.
गौरी आगे बढ़ क्र लल्लू क साइन पर ऊँगली चलती हुई बोली.
" ये बॉडी सदी कब ऐसा मजबूत बना लिया."
लल्लू- अब आप जा रही हो या नहीं. मुझे नहाना है.
गौरी- मई क्या तेरा हाथ पकड़ राखी हु. जा नाहा ले. बड़ा भाव खता है.
गौरी मुँह टेढ़ा क्र बोली.
लल्लू गौरी को वही छोड़ नहाने क लिए वाशरूम मई चला गया.
" मई कुछ मदद क्र दी क्या."
गौरी दरवाजे क पास आ क्र बोली.
लल्लू- ठीक है दी आ जाओ. जरा पीठ पर साबुन लगा देना.
लल्लू जनता था की गौरी दी मजाक क्र रही है तो वो भी उसके मजाक का हिस्सा बनता हुआ बोलै.
गौरी- बड़ा आया साबुन लगाने वाला.
गौरी वह से मुस्काते हुए अपने कमरे मई चली गई.
यहाँ कमरे मई सभी बहने लक्ष्मी को घेरे हुए बैठे थे.
सोनम- क्या बात है बन्नो. आने का मन नहीं क्र रहा था क्या अपने यहाँ से.
मीनू- मन कैसे करेगा दी. वह पति देव भी तो साथ मई थे. कितना मन लगता होगा वह. कोई हम जैसा सैतान ननद भी तो नहीं होगा जो परेशां करे.
लक्ष्मी- कैसी बात क्र रही हो आप सब. आप सब क बिना तो जैसे मई प्राण हिन् हो गई थी. यहाँ मई ज्यादा दिन तो रही नहीं लेकिन जो भी दो चार दिन रही उस मई hi मुझे आप सब से इतना प्यार मिला की मई अपने माँ बापू क खोने का जो गम था वो भी भूल गई. मीनू दी आप सब की सैतानी hi तो इस घर की खुशिया है.
सोनम- हमारी लक्ष्मी भी अब बड़ी हो गई है. देखो कैसे बड़ी बड़ी बाटे क्र रही है.
लक्ष्मी- वक्त सब करवा देता है दी. वैसे मई सीधा यही आ गई हु. चलिए थोड़ी देर माँ सब से भी मिल लेता हु न.
गौरी- मैंने आप क पति देव को बता दिया है. अभी आप हम सब क साथ hi रहेंगी.
कोमल- लो आते hi सुरु हो गया फिर से जुदाई.
कोमल हस्ते हुए लक्ष्मी से बोली.
फिर सभी बहने वह से लक्ष्मी क साथ आँगन मई आ गई जहा महिला मण्डली बुआ को बैठाये खिचाई क्र रही थी.
बुआ- अच्छा हुआ तुम लोग आ गए. देखो लक्ष्मी बीटा कैसे तुम्हारी सैश की गर्मी छड़ी है.
बुआ इन लोगो को देख क्र रहत की सैश लेती बोली.
ऋतू- हमारी बेटी आ गई नहीं तो अभी तुम्हे बताना hi पड़ता की वह कितने केले खा क्र आई हो और किस किस का खाई हो.
ऋतू काकी लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र अपने पास बैठती बोली.
रागिनी- इतने लोग थे यहाँ लेकिन मेरी लक्ष्मी बेटी क न होने से सुना हो गया था ये घर.
वही बैठी रागिनी काकी प्यार से लक्ष्मी क सर पर हाथ से सहलाती बोली.
गौरी- हम सब भी यही है. कभी हम से भी इतने प्यार से बात क्र लिया करो.
शालिनी- ये लो ये भी यही है. मई तो सोच रही थी तू अपने मायके गयी है.
गौरी- माँ…
गौरी पेअर पटकती हुई मुँह फुला क्र रूठने का लटक करती एक और हो गई.
काजल- नहीं रे, तू तो हमारी गुड़िया है. आ जा तू भी यहाँ बैठ अपने छोटी भाभी क पास.
रागिनी- रानी देख जरा तेरी बड़ी भाभी कहा है. लगता है उसे पता hi नहीं चला की लक्ष्मी और बुआ लोग आ गई है.
रानी वह से फर्स्ट फ्लोर पर राघव क कमरे की और चल दी.
वह उप्पेर राघव अपनी बीबी क साथ बैठा हुआ था.
रानी- भैया छोटे आ गया है भाभी और बुआ क साथ.
राघव तुरंत उठ क्र निचे चल दिया.
भाभी- कब आये ये लोग.
भाभी उठ क्र अपने बालो को आईने मई देख क्र सही करती बोली.
रानी- अभी थोड़ी देर पहले hi आये है तीनो.
दोनों साथ मई निचे आ गए वही जहा सब बैठे हुए थे.
राघव- ललित कहा है दिख नहीं रहा.
गौरी- अभी भाई नहाने गया है. आ जाएगा अभी नाहा क्र. मैडम क बिना उसे कहा अकेले कमरे मई चैन मिलेगा.
यहाँ भी गौरी लक्ष्मी की तंग करने का मौका नहीं छोड़ी.
लक्ष्मी सरमाती हुई सर झुका ली.
ऋतू- तुम मेरे बहु को तंग करना बंद क्र दे नहीं तो तुम्हारा खाना बंद करदूंगी मई.
गौरी- लो एक और आ गई. इन्हे भी कमरे से निकलने का मन नहीं करता है.
काजल- मर खायेगी सैतान तू. किसी को तो छोड़ दे.
काजल आगे बढ़ क्र अपने बड़ी बहु को प्यार करती ला क्र अपने खत पर बैठा ली.
रोमा- अब तो दो दो बहुए आ गई है इन लोगो की. हमे कौन पूछता है अब. देखो कब से खड़े है हम कोई एक बार भी नहीं कहा बैठने को.
बुआ- तुम लोग मेरे पास आ जाओ. मई हु न.
बुआ रोमा और कोमल का हाथ पकड़ क्र अपने दोनों और बैठा ली.
कोमल- हमे तो बस बुआ hi प्यार करती है और तो कोई प्यार करता नहीं हमे.
शालिनी- है है सही कह रही है तुम लोग. इतनी बड़ी तो अपने आप hi हो गई तुम सब.
लल्लू- कौन कितना बड़ा हो गया माता राम. किसकी बात क्र रहे हो.
लल्लू आ क्र अपने भाई से गले लगता बोलै.
सोनम- आ जा अब यहाँ बस तुम्हारी hi कमी थी.
लल्लू- अब तो कमी पूरा हो गया न. अब जल्दी से कुछ खिला दी. इन लोगो ने तो रस्ते मई कही कुछ खाने hi नहीं दिया. जब भी बोलता था तो एक hi जबाब होता था की घर चल क्र hi खाएंगे अब तो. मेरा तो बुरा हाल है भूक से.
लक्ष्मी- माँ जी मई भी फ्रेश हो लेती हु जरा.
बुआ- मई भी चलती हु बीटा. इन बुधियो ने मुझे भी पकड़ रखा था तब से.
ऋतू- तो तुम कहा मेरे बेटी क साथ चल दी. इधर मेरे कमरे मई जा क्र क्र ले जो करना है तुम्हे.
बुआ- अरे मई तो भूल hi गई थी लेकिन मेरे कपडे तो उसी रूम मई है.
लक्ष्मी- कोई बात नहीं बुआ. आप अपने रूम मई फ्रेश हो लीजिये मई दीदी लोगो क रूम मई चली जाती हु.
बुआ- ये अच्छा रहेगा. आ जाओ नहीं तो ये लोग फिर कुछ सुना देंगी मुझे.
बुआ लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र वह से खींच क्र उठती बोली.
रागिनी- तू बैठ बीटा. मई लती हु तुम्हारे लिए खाना.
काकी लल्लू को देख क्र बोली.
सोनम- चची आप बैठिये. मई लती हु भाई क लिए खाना.
काजल- वह, आज सूर्य किधर से निकल है भाई. महारी आज किचन मई जा रही है.
सोनम- छोटी चची भाई क लिए तो मई कुछ भी क्र सकती हु.
ऋतू- वह बीटा. हम सब से प्यारा भाई hi है तुम्हारा.
गौरी- वो तो है hi. अभी कैसे आप छोटी भाभी को अपने पास बैठा ली थी. हम से तो एक बार बैठने को भी नहीं कहा. भाई hi तो है जो हम सब का कितना ख्याल रखता है.
शालिनी- तू चुप हो जा भाई की चमची. मई देख रही हु आज कल तू बहुत बोलने लगी है.
लल्लू- माते आप मेरी प्यारी दीदी को क्यू दन्त रही है वो ऐसे hi मजाक hi तो क्र रही है.
काजल- लो आ गया अपनी बहन को बचने.
काजल आंख नचा क्र इसरा करती शालिनी से बोली.
ऋतू- इनके बिच मत पारो कोई. ये लोग ऐसे hi है. हम सभी को hi आपस मई लाडवा देगी ये लोग.
गौरी वह से उठ क्र लल्लू क पास चली गई.
लल्लू- ये तो मेरी प्यारी सैतान दीदी है. इसी से तो हमारा घर थोड़ा खुशाल रहता है.
लल्लू गौरी को अपने से लगता बोलै.
गौरी इस मौके को कैसे छोड़ती वो भी सब से बचा क्र लल्लू से चिपक गई और गाल पर एक किसी दे क्र हस्ती हुई अलग हो गई.
तब तक सोनम लल्लू क लिए खाना ले क्र आ गई.
लल्लू सोनम क हाथ से खाना लेने को हाथ बढ़ाया तो सोनम हाथ दूर क्र ली उस से.
सोनम- चुप चाप यहाँ खटिया और बैठ जाओ. मई खिला रही हु न. तुम्हारे हाथ गंदे करने की क्या जरुरत है.
लल्लू मुसकुडता हुआ वही खटिया पर एक और बैठ गया.
सोनम अपने हाथ से उसे खिलने लगी.
रहब- कभी कभी मुझे भी khila.diya करो.
रोमा- आप तो अपनी मैडम क हाथ से hi कहते हो. वही आप को खिला सकती है.
है अगर कल हमे शॉपिंग पर ले चलने का वडा करो तो हम सब आप को ऐसे hi खिलाएंगे.
राघव- ओह्ह तेरी, ये तो बड़ा महंगा सौदा है.
रानी- वही तो बात है. आप को हम सब का प्यार सईदा लगता है लेकिन मेरे छोटे भाई क साथ ऐसा नहीं है. जब भी जिस किसी काम क लिए बोलो ये कभी मन नहीं करता.
राघव- ये बात तो है. तभी तो ये सब का प्यारा है.
लल्लू तो सोनम क प्यार मई खोया हुआ मजे से उसकी नशीली आँखों मई डूबा गपागब खाये जा रहा था.
कभी कभी तो सब से बचा क्र सोनम की उंगलियों को भी मुँह मई ले क्र चूस लेता था.
सोनम लल्लू की सररतो का मजा लेती उसे खाना खिला क्र झूठा बर्तन लिए वापस किचन क सिंक मई रखने कहली गई.
लल्लू- भाभी आप कब आई अपने गौण से.
भाभी जो कब से लल्लू को सनम क हाथ से खता देख रही थी.
भाभी- अब याद आई आप को मेरी.
कोमल- पेटू है ये भाभी. पेट क आगे इसे कोई नहीं दीखता.
लल्लू हस्ता हुआ भाभी क पास आ क्र बैठ गया.
लल्लू- कैसे है आप क घर मई सब. माँ पिता जी. वह जा क्र हमारी बुराई तो नहीं की कुछ.
भाभी- सभी अच्छे है. आप को भी बुलाये है और बुराई तो मई इतना सारा की हु आप सभी भाई बहनो की.
भाभी अपने दोनों हाथ फैला क्र बोली.
लल्लू तो भाभी क हाथ फ़ैलाने से उनके साइन से जो साडी हैट गई थी उसी मई खो गया.
कैसे हुए ब्लाउज मई से झटके गिरे गोर संतरे का कुछ हिस्सा देख क्र लल्लू क मन मई तितलियाँ ूर्णे लगी.
लल्लू झट से अपनी नजरे वह से घुमा लिया.
लल्लू- देखो लो दीदी. भाभी मेरे साथ साथ तुम लोगो की भी शिकायत लगाई है अपने माँ पिता जी से.
रोमा- कोई बात नहीं भाई. दो चार दिन की hi बात है. बच क्र कहा जाएंगी ये. भाई को एक बार जाने दे फिर कौन बचाएगा हम से इनको.
भाभी- क्यू यहाँ चार चार माँ है हमारी. हमे किस का दर.
काजल- शाबाश.. अब आया न कोई टक्कर का. इन लोगो का भी मन बड़ा बढ़ गया था. भोली भली लक्ष्मी को तो अपने चिकनी चुपड़ी बातो मई फसा ली लेकिन अपने बड़ी भाभी को फसाओ तो जणू.
कोमल- ये दासी फसे hi है माँ. दो चार दिन मई भाई चले जाएंगे तो फिर हम लोग hi मिलेंगे इन्हे.
ऋतू- सोनम बीटा जरा अपने भाभी और बुआ को भी दे दो खाना. आज तुम ने तो दिल खुश क्र दिया मेरा.
रोमा- देख रहे हो दीदी. माँ कैसे मक्खन लगा रही है तुम्हे.
सोनम- चुप क्र तू. इधर आ क्र मेरी मदद क्र.
रोमा मुँह बनती सोनम की तरफ रसोई की और चल दी.
इधर गौरी रानी और कोमल का हाथ पकड़ क्र अपने कमरे की और बढ़ गई.
शालिनी- देख रही हु मई तुम्हे. कितनी होसियार बन रही है तू.
रागिनी- क्या हुआ क्यू उसे दांते जा रही है आज.
शालिनी- इसे मई अब किसी दिन बहुत मरूंगी. रोमा को किचन मई जाता देख क्र यहाँ से अपने दोनों साथी को हाथ से पकड़ क्र चुपके से निकल गई है.
मीनू- आप भी क्या क्या सोचती रहती हो चची.
शालिनी- चुप रह तू. जिस उम्र मई तुम हो न वो मई कब का पर क्र चुकी हु. माँ हु तुम सब की. सब जानती हु तुम लोगो की करतूत.
" मीनू दी, जितना देर वह रहोगे वो लोग ऐसे hi दिमाग ख़राब करती रहेंगी. आप भी वह से आ जाओ तो वो खुद चुप हो जाएंगी."
गौरी कमरे से बहार निकल क्र बोली.
शालिनी- ठहर जा तू आज. अभी तुम्हे मजा चलती हु.
लल्लू- Are...are काकी कहा चली आप. मई लता हु न पकड़ क्र उसे.
शालिनी- नहीं आज छोड़ तू. मई जरा इस लड़की को पहले दो थप्पड़ लगा लू. बड़ी जुबान चलने लगी है कैची की तरह. घोड़ी की जैसी हो गई है लेकिन इसे पता hi नहीं किस से क्या बोलना चाहिए.
लल्लू आगे बढ़ क्र पीछे से शालिनी काकी को बहो मई भर लिया जो गौरी को मरने कमरे की और बढ़ रही थी.
लल्लू- काकी, वो अभी बची है. वैसे hi सररत क्र रही है. किसी गैर को थोड़े कभी कुछ बोली है जो आप इतना गुस्सा क्र रहे हो.
शालिनी लल्लू क बहो क घेरे मई से छूटने क लिए मचल रही थी.
लल्लू शालिनी क पीछे से चिपका हुआ था.
शालिनी क हिलने क कारन उसकी उठी हुई नितम्ब लल्लू क डंडे पर रगड़ मर रहा था.
लल्लू को बड़ा मजा आ रहा था. वो आगे को पकडे अपने हाथ को नाटक करता हुआ धीरे धीरे शालिनी क 34 की चूचियों क निचे ले आया. वह इसे शालिनी क चूचियों की गर्माहट महसूस हो रही थी उसके हाथ पर. पीछे से अब वो भी अपना डंडा हलके से कभी कभी घिष देता था जो शालिनी क नितम्ब की रागरहित से हल्का खड़ा हो गया था.
लल्लू- इस उम्र मई आप भी अपने माँ बापू क घर मई ऐसे hi सैतानी करती होंगी.
शालिनी- नहीं. वह तो माँ पिता जी की दर से हमारी जबान नहीं हिलती थी कभी.
लल्लू- तो अपनी बेटी को भी वैसे hi दबा क्र डरपोक बना क्र रखना चाहती है आप. जो अपनी मर्जी से कभी जिए hi न. क्या बोल दिया ऐसा जो आज आप इतनी गुस्से मई हो. उसका सारा परिवार है ये. वो यहाँ हुसेगी बोलेगी नहीं तो कहा अपना सुख मस्ती पूरा करे. कभी कही घर से बहार नहीं जाती. कोई दोस्त नहीं है. हम सब hi तो है. अगर वो हम सब को कुछ कह भी दिया तो क्या हुआ. कल को जब बूढी होगी तो यही सब तो यदि रहेगी उसके पास.
लल्लू की ऐसी बाटे सुन क्र शालिनी का गुस्सा साबुन क झाग की तरह संत हो गया.
लल्लू शालिनी को पकड़ क्र खटिया पर बैठा दिया.
वही पास मई माँ और दोनों काकी भाभी क साथ बैठी देख रही थी मुसकुडते हुए.
काजल- क्यू चल दी थी उसे मरने जब पता है की ये अपने बहनो को गुस्सा भी नहीं होने देगा किसी को.
शालिनी- क्या करू. देख रही थी न तुम कैसे कुछ भी बाके जा रही थी.
ऋतू- कोई बात नहीं. अभी उसी सब क खेलने मस्ती कर्नल दिन है. जाने दे मजे करने दे. तुम अपना गुस्सा संत क्र.
लल्लू वह से उठ क्र बहनो की कमरे मई आ गया.
गौरी लल्लू को देख क्र दौर क्र उसे गले से लगा ली.
गौरी- थैंक यू भाई. तुम बहुत अच्छे हो.
गौरी लल्लू क गाल को चूमती बोली.
लल्लू- क्यू तंग क्र रही थी आप काकी को.
गौरी- बड़ा मजा आता है जब माँ गुस्सा करती है तो.
सोनम- आज भाई बचा लिया तुम्हे. हर बार नहीं बचा पायेगा वो. आगे से ऐसे मस्ती मत करना नहीं तो मर खा जाओगी.
गौरी- मई भी देख क्र करती हु हमेसा नहीं करती. जब भाई होता है तभी थोड़ी सी कर लेती हु.
गौरी लल्लू से चिमटी हुई बोली.
रोमा- भाई कोई चीनी नहीं है जो चिति की तरह चिपकी हुई है अब हो गया छोड़ दे उसे.
गौरी मुँह बनती हुई हैट गई लल्लू को छोड़ क्र.
रोमा आगे बढ़ क्र लल्लू क गले से लग क्र उसके छाती मई अपना चीन रगड़ती हुई उसे चुम ली गाल को.
गौरी- मुझे हटा क्र अब तुम क्या क्र रही है.
रोमा- मई अपने हिस्से का ले रही हु. तुम पहले hi अपना कोटा पूरा क्र चुकी हो.
मीनू- बस बस बहुत हुआ. अब मेरी बरी है. वैसे भी आज भाभी यही सोएगी तो…
गौरी- तो मई आज भाई क पास सो जाउंगी.
गौरी बिच मई hi मीनू की बात काट क्र बोली.
मीनू गौरी का चेहरा देखने लगी. आज वो सोच रही थी लल्लू क साथ सोने को लेकिन गौरी ने बिच मई कबाब मई हड्डी का काम क्र दिया.
गौरी मीनू को अपनी और देखती प् क्र जीभ निकल क्र चिढ़ाने लगी.
लल्लू- अच्छा मई जरा घूम क्र आता हु. अब आप कोई सैतानी मत करना.
लल्लू गौरी से बोलता हुआ वह से बहार निकल आया.
वो दिन तो इन लोगो को तयारी मई hi निकल गया.
दूसरे दिन सुबह जल्दी उठ क्र लक्ष्मी, लल्लू और बुआ तैयार हो क्र नास्ता क्र सब सामान गाड़ी मई रख रहे थे.
सिबा कोमल लोग आज बहुत उदाश लग रही थी.
लक्ष्मी भी आज अपने घर को छोड़ क्र यहाँ से अपने ससुराल अपने पति क घर जा रही थी.
रह रह क्र लक्ष्मी की आँखे भर आती थी.
आज फिर एक बार उसे अपने माँ बापू की बहुत याद आ रही थी.
सब से छुपा क्र अपने आँखों क आँशु को साफ़ क्र लेती थी.
थोड़ी देर मई ये लोग जाने क लिए तैयार थे.
सिबा- बीटा तुम्हारी बहुत याद आएगी. वह जा क्र हम सब को भूल मत जाना. डेली कॉल करते रहना.
सिबा लक्ष्मी को गले लगा क्र रट हुए उसे समझा रही थी.
लक्ष्मी- बजी मुझे भी आप लोगो की बहुत याद आएगी. मई डेली आप सब को कॉल करुँगी.
लक्ष्मी सिबा क आँखों से आंसू साफ़ करती बोली.
कोमल- लक्ष्मी जब भी दिल करे जीजू क साथ यहाँ आ जाना. हम सब तुम्हारा इंतजार करेंगे.
लक्ष्मी- जरूर कोमल दी. हम जरूर आएंगे.
सकीना- जा बीटा अब वही तुम्हारा घर है. वही तुम्हारे माँ बापू है. सब का आदर और सम्मान देना. सभी का सेवा करना. हम सब का नाम रोशन करना.
सब से मिल क्र लक्ष्मी एक नजर अपने उस आसियाने को देख अपने माँ बापू की यादो को महसूस करती गाड़ी मई जा बैठी.
लल्लू और बुआ पहले hi सब से मिल चुके थे.
लक्ष्मी क बैठते hi लल्लू सब को हाथ हिला क्र बे कहता गाड़ी आगे बढ़ा दी.
शाम हो गया था इन्हे गौण पहुंचते पहुंचते.
घर क आगे जैसे hi ये लोग पहुंचे, गाड़ी की आवाज सुन क्र सभी बहने दौड़ती हुई दालान से बहार आ कड़ी हुई.
लक्ष्मी सब को पहले hi कॉल क्र बता चुकी थी की वो लोग सैम तक घर पहुंच जाएंगे.
सभी लड़किया लक्ष्मी को घेरे कड़ी थी.
लल्लू चुप चाप उतर क्र डिक्की से सारा सामान निकल आँगन की और चल दिया इन लोगो को छोड़ क्र.
इधर सभी लड़किया वही लक्ष्मी और बुआ से सभी जानकारी लेने लगे.
वह मन लगा या नहीं, आने का मन क्र रहा था या अभी और रहना था.
बुआ से तो छोटी सैतान चिमटी हुई थी.
" बुआ वह से मेरे लिए क्या लाये हो. भाभी क्या क्या शॉपिंग की है वह पर मेरे लिए." गौरी लगातार बुआ को चिमटी पूछ रही थी और बुआ गौरी की आँखों की चमक और उसका उत्शाह और ख़ुशी देख क्र गुस्से जा रही थी.
सोनम- बस क्र बीटा. पहले लक्ष्मी और बुआ को आँगन तो इ चल फिर इत्मीनान से पूछ लेना जो पूछना हो.
रानी- अभी नहीं. पहले माँ आरती ले क्र आ रही है भाभी क लिए. फिर हम सब आँगन चलेंगे.
ये लोग वही खड़े हो क्र बाटे क्र रही थी.
सब एक एक क्र अपनी प्यारी छोटी भाभी से मिली तब तक रागिनी काकी क साथ काजल और शालिनी काकी भी आ गई आरती ले क्र.
लक्ष्मी इन लोगो को देख क्र सरमाती हुई सब से अलग हो क्र उन तीनो क पेअर छू क्र प्रणाम की.
तीनो माँ लक्ष्मी को प्यार क्र उसका आरती उतर क्र बुआ क साथ आँगन लायी.
लक्ष्मी को रानी गौरी और रोमा पकड़ क्र अपने साथ अपने कमरे मई ले आई.
" Bhai...bhai." गौरी दरवाजे आवाज देता लल्लू क कमरे मई आ गई.
लल्लू सारा सामान आँगन मई रख क्र अपने कमरे मई आ क्र नहाने की तयारी क्र रहा था.
वो उप्पेर क कपडे खोल क्र अब अपना पेण्ट खोल रहा था.
तब तक गौरी आवाज देती सामने आ गई.
लल्लू- क्या बात है सैतान की खला.
गौरी तो लल्लू को उप्पेर से नंगा देख क्र उस क चमकते गठीले सरीर को देखने मई hi खो गई.
लल्लू जब गौरी को कही और खोया देखा तो पेण्ट खोलना छोड़ क्र वैसे hi उसके सामने जा खड़ा हुआ.
लल्लू- क्या हुआ कहा खो गई. कोई सांप देख लिया क्या.
लल्लू गौरी का कन्धा पकड़ क्र हिलता हुआ बोलै.
गौरी लल्लू की साडी बात तो सुनी नहीं और लास्ट मई सांप का नाम सुन क्र उछलती हुई लल्लू क कंधे को पकड़ क्र झूल गई.
लल्लू झट से गौरी को कमर से पकड़ लिया.
गौरी तो लल्लू क साइन से लगती hi किसी और दुनिया मई खो गई.
लल्लू गौरी की पतली कमर को अपने बहो मई घेरे उसके मोठे बहार को निकल रहे गोल नितम्ब क निचे अपना हाथ लगा क्र सही से अपने गॉड मई उठा लिया.
ऐसा करते hi दोनों क बदन मई एक चिंगारी सी छूट गई.
लल्लू जब गौरी को मांशल नितम्ब से पकड़ क्र उठाया तो गौरी की छाती लल्लू क साइन से रगड़ खता हुआ उप्पेर को हो गई.
जिस से एक तो गौरी की कठोर 32 की चूचिया लल्लू क साइन से लग क्र डाब गया और दूसरा लल्लू क होठ गौरी क गले से जा लगा.
दोनों क मुँह से एक सिसकारी निकल गई.
लल्लू- क्या हुआ दी. ऐसे बचो की तरह क्यू कूद क्र चढ़ गई मेरे गॉड मई.
लल्लू गौरी क गले मई अपना नाक रगड़ता हुआ बोलै.
गौरी अभी एक फ्लावर की प्रिंटिंग वाली वाइट फ्रॉक पहनी थी.
लल्लू क उप्पेर कूद क्र उस ने अपने दोनों पैरो को कैची बना क्र लल्लू क कमर मई लपेट ली थी.
लल्लू गौरी को सँभालने क लिए जो हाथ लगाया था निचे वो बेखयाली मई आधा फ्रॉक क अंदर भी चला गया था जिस कारन गौरी तो दूसरी दुनिया मई hi पहुंच गई थी.
जैसे hi अपने नंगे नितम्ब पर पहली बार किसी हाथ का छुवन महसूस की वो कम्पटी हुई अपना अमृत बहा दी.
लल्लू क सर को अपने गले से चिपकाये उस से चिमटी हुई गौरी गहरी सैश लेती हुई अपनी हालत दुरुस्त करने मई लगी थी.
पहले भी एक दो बार रानी क साथ छेद चढ़ क्र चुकी थी लेकिन अभी जो लल्लू क संसर्ग मई आ क्र महसूस की वो तो वर्णन करने योग्य था hi नहीं.
गौरी को यु संत देख क्र लल्लू अपना सर उठा क्र उसके चेहरे की और देखा तो गौरी अपनी आँखे बंद किये उस आनंद को दिल की गहराई से महसूस क्र रही थी.
लल्लू- दी क्या हुआ. आप ठीक तो हो न.
लल्लू प्यार से गौरी क एक गाल को चुम क्र बोलै.
गुजरी अपने गाल पर लल्लू क होठो का गीलापन महसूस क्र सरमाती हुई अपनी पकड़ ढीली क्र दी.
लल्लू जब देखा की गौरी का चेहरा बिलकुल लाल हो रखा है तो वो घबरा गया.
लल्लू- क्या हुआ दी. आप बोलती क्यू नहीं.
गौरी- कुछ नहीं. साप कहा है.
गौरी नजरे नीची किये सरमाती हुई बोली.
लल्लू- कौन सा सांप.
लल्लू आस्चर्य से गौरी को देखता बोलै.
गौरी- तुम hi तो कह रहे थे की कमरे मई सांप है.
लल्लू अपने हाथ से सर पर मरता हुआ हुस्ने लगा.
लल्लू- मैंने आप से पूछा था की आप ने कोई samp.dekh लिया है क्या जो कुछ बोल नहीं रही थी.
गौरी- यु नंगु पंगु रहोगे तो इस मई मेरा क्या कसूर है.
गौरी लजाती हुई लल्लू क कंधे पर एक चपत लगाती बोली.
लल्लू- वो मई नहाने जा रहा था जब आप आई थी. बताइये क्या बात है.
गौरी- मई भी चालू क्या साथ मई.
गौरी फ्लो फ्लो मई बोल गई.
लल्लू- क्या….
गौरी- me...mera मतलब था की आज भाभी हमारे साथ सोयेगी तो तुम अपना देख लो. मुँह बहुत जल्दी फूल जाता है न तेरा. इस लिए बोल रही हु पहले hi.
लल्लू- कोई बात नहीं दी. आप सब जो कहेंगे वही होगा. मई आप सब को नाराज क्र सकता हु क्या.
गौरी आगे बढ़ क्र लल्लू क साइन पर ऊँगली चलती हुई बोली.
" ये बॉडी सदी कब ऐसा मजबूत बना लिया."
लल्लू- अब आप जा रही हो या नहीं. मुझे नहाना है.
गौरी- मई क्या तेरा हाथ पकड़ राखी हु. जा नाहा ले. बड़ा भाव खता है.
गौरी मुँह टेढ़ा क्र बोली.
लल्लू गौरी को वही छोड़ नहाने क लिए वाशरूम मई चला गया.
" मई कुछ मदद क्र दी क्या."
गौरी दरवाजे क पास आ क्र बोली.
लल्लू- ठीक है दी आ जाओ. जरा पीठ पर साबुन लगा देना.
लल्लू जनता था की गौरी दी मजाक क्र रही है तो वो भी उसके मजाक का हिस्सा बनता हुआ बोलै.
गौरी- बड़ा आया साबुन लगाने वाला.
गौरी वह से मुस्काते हुए अपने कमरे मई चली गई.
यहाँ कमरे मई सभी बहने लक्ष्मी को घेरे हुए बैठे थे.
सोनम- क्या बात है बन्नो. आने का मन नहीं क्र रहा था क्या अपने यहाँ से.
मीनू- मन कैसे करेगा दी. वह पति देव भी तो साथ मई थे. कितना मन लगता होगा वह. कोई हम जैसा सैतान ननद भी तो नहीं होगा जो परेशां करे.
लक्ष्मी- कैसी बात क्र रही हो आप सब. आप सब क बिना तो जैसे मई प्राण हिन् हो गई थी. यहाँ मई ज्यादा दिन तो रही नहीं लेकिन जो भी दो चार दिन रही उस मई hi मुझे आप सब से इतना प्यार मिला की मई अपने माँ बापू क खोने का जो गम था वो भी भूल गई. मीनू दी आप सब की सैतानी hi तो इस घर की खुशिया है.
सोनम- हमारी लक्ष्मी भी अब बड़ी हो गई है. देखो कैसे बड़ी बड़ी बाटे क्र रही है.
लक्ष्मी- वक्त सब करवा देता है दी. वैसे मई सीधा यही आ गई हु. चलिए थोड़ी देर माँ सब से भी मिल लेता हु न.
गौरी- मैंने आप क पति देव को बता दिया है. अभी आप हम सब क साथ hi रहेंगी.
कोमल- लो आते hi सुरु हो गया फिर से जुदाई.
कोमल हस्ते हुए लक्ष्मी से बोली.
फिर सभी बहने वह से लक्ष्मी क साथ आँगन मई आ गई जहा महिला मण्डली बुआ को बैठाये खिचाई क्र रही थी.
बुआ- अच्छा हुआ तुम लोग आ गए. देखो लक्ष्मी बीटा कैसे तुम्हारी सैश की गर्मी छड़ी है.
बुआ इन लोगो को देख क्र रहत की सैश लेती बोली.
ऋतू- हमारी बेटी आ गई नहीं तो अभी तुम्हे बताना hi पड़ता की वह कितने केले खा क्र आई हो और किस किस का खाई हो.
ऋतू काकी लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र अपने पास बैठती बोली.
रागिनी- इतने लोग थे यहाँ लेकिन मेरी लक्ष्मी बेटी क न होने से सुना हो गया था ये घर.
वही बैठी रागिनी काकी प्यार से लक्ष्मी क सर पर हाथ से सहलाती बोली.
गौरी- हम सब भी यही है. कभी हम से भी इतने प्यार से बात क्र लिया करो.
शालिनी- ये लो ये भी यही है. मई तो सोच रही थी तू अपने मायके गयी है.
गौरी- माँ…
गौरी पेअर पटकती हुई मुँह फुला क्र रूठने का लटक करती एक और हो गई.
काजल- नहीं रे, तू तो हमारी गुड़िया है. आ जा तू भी यहाँ बैठ अपने छोटी भाभी क पास.
रागिनी- रानी देख जरा तेरी बड़ी भाभी कहा है. लगता है उसे पता hi नहीं चला की लक्ष्मी और बुआ लोग आ गई है.
रानी वह से फर्स्ट फ्लोर पर राघव क कमरे की और चल दी.
वह उप्पेर राघव अपनी बीबी क साथ बैठा हुआ था.
रानी- भैया छोटे आ गया है भाभी और बुआ क साथ.
राघव तुरंत उठ क्र निचे चल दिया.
भाभी- कब आये ये लोग.
भाभी उठ क्र अपने बालो को आईने मई देख क्र सही करती बोली.
रानी- अभी थोड़ी देर पहले hi आये है तीनो.
दोनों साथ मई निचे आ गए वही जहा सब बैठे हुए थे.
राघव- ललित कहा है दिख नहीं रहा.
गौरी- अभी भाई नहाने गया है. आ जाएगा अभी नाहा क्र. मैडम क बिना उसे कहा अकेले कमरे मई चैन मिलेगा.
यहाँ भी गौरी लक्ष्मी की तंग करने का मौका नहीं छोड़ी.
लक्ष्मी सरमाती हुई सर झुका ली.
ऋतू- तुम मेरे बहु को तंग करना बंद क्र दे नहीं तो तुम्हारा खाना बंद करदूंगी मई.
गौरी- लो एक और आ गई. इन्हे भी कमरे से निकलने का मन नहीं करता है.
काजल- मर खायेगी सैतान तू. किसी को तो छोड़ दे.
काजल आगे बढ़ क्र अपने बड़ी बहु को प्यार करती ला क्र अपने खत पर बैठा ली.
रोमा- अब तो दो दो बहुए आ गई है इन लोगो की. हमे कौन पूछता है अब. देखो कब से खड़े है हम कोई एक बार भी नहीं कहा बैठने को.
बुआ- तुम लोग मेरे पास आ जाओ. मई हु न.
बुआ रोमा और कोमल का हाथ पकड़ क्र अपने दोनों और बैठा ली.
कोमल- हमे तो बस बुआ hi प्यार करती है और तो कोई प्यार करता नहीं हमे.
शालिनी- है है सही कह रही है तुम लोग. इतनी बड़ी तो अपने आप hi हो गई तुम सब.
लल्लू- कौन कितना बड़ा हो गया माता राम. किसकी बात क्र रहे हो.
लल्लू आ क्र अपने भाई से गले लगता बोलै.
सोनम- आ जा अब यहाँ बस तुम्हारी hi कमी थी.
लल्लू- अब तो कमी पूरा हो गया न. अब जल्दी से कुछ खिला दी. इन लोगो ने तो रस्ते मई कही कुछ खाने hi नहीं दिया. जब भी बोलता था तो एक hi जबाब होता था की घर चल क्र hi खाएंगे अब तो. मेरा तो बुरा हाल है भूक से.
लक्ष्मी- माँ जी मई भी फ्रेश हो लेती हु जरा.
बुआ- मई भी चलती हु बीटा. इन बुधियो ने मुझे भी पकड़ रखा था तब से.
ऋतू- तो तुम कहा मेरे बेटी क साथ चल दी. इधर मेरे कमरे मई जा क्र क्र ले जो करना है तुम्हे.
बुआ- अरे मई तो भूल hi गई थी लेकिन मेरे कपडे तो उसी रूम मई है.
लक्ष्मी- कोई बात नहीं बुआ. आप अपने रूम मई फ्रेश हो लीजिये मई दीदी लोगो क रूम मई चली जाती हु.
बुआ- ये अच्छा रहेगा. आ जाओ नहीं तो ये लोग फिर कुछ सुना देंगी मुझे.
बुआ लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र वह से खींच क्र उठती बोली.
रागिनी- तू बैठ बीटा. मई लती हु तुम्हारे लिए खाना.
काकी लल्लू को देख क्र बोली.
सोनम- चची आप बैठिये. मई लती हु भाई क लिए खाना.
काजल- वह, आज सूर्य किधर से निकल है भाई. महारी आज किचन मई जा रही है.
सोनम- छोटी चची भाई क लिए तो मई कुछ भी क्र सकती हु.
ऋतू- वह बीटा. हम सब से प्यारा भाई hi है तुम्हारा.
गौरी- वो तो है hi. अभी कैसे आप छोटी भाभी को अपने पास बैठा ली थी. हम से तो एक बार बैठने को भी नहीं कहा. भाई hi तो है जो हम सब का कितना ख्याल रखता है.
शालिनी- तू चुप हो जा भाई की चमची. मई देख रही हु आज कल तू बहुत बोलने लगी है.
लल्लू- माते आप मेरी प्यारी दीदी को क्यू दन्त रही है वो ऐसे hi मजाक hi तो क्र रही है.
काजल- लो आ गया अपनी बहन को बचने.
काजल आंख नचा क्र इसरा करती शालिनी से बोली.
ऋतू- इनके बिच मत पारो कोई. ये लोग ऐसे hi है. हम सभी को hi आपस मई लाडवा देगी ये लोग.
गौरी वह से उठ क्र लल्लू क पास चली गई.
लल्लू- ये तो मेरी प्यारी सैतान दीदी है. इसी से तो हमारा घर थोड़ा खुशाल रहता है.
लल्लू गौरी को अपने से लगता बोलै.
गौरी इस मौके को कैसे छोड़ती वो भी सब से बचा क्र लल्लू से चिपक गई और गाल पर एक किसी दे क्र हस्ती हुई अलग हो गई.
तब तक सोनम लल्लू क लिए खाना ले क्र आ गई.
लल्लू सोनम क हाथ से खाना लेने को हाथ बढ़ाया तो सोनम हाथ दूर क्र ली उस से.
सोनम- चुप चाप यहाँ खटिया और बैठ जाओ. मई खिला रही हु न. तुम्हारे हाथ गंदे करने की क्या जरुरत है.
लल्लू मुसकुडता हुआ वही खटिया पर एक और बैठ गया.
सोनम अपने हाथ से उसे खिलने लगी.
रहब- कभी कभी मुझे भी khila.diya करो.
रोमा- आप तो अपनी मैडम क हाथ से hi कहते हो. वही आप को खिला सकती है.
है अगर कल हमे शॉपिंग पर ले चलने का वडा करो तो हम सब आप को ऐसे hi खिलाएंगे.
राघव- ओह्ह तेरी, ये तो बड़ा महंगा सौदा है.
रानी- वही तो बात है. आप को हम सब का प्यार सईदा लगता है लेकिन मेरे छोटे भाई क साथ ऐसा नहीं है. जब भी जिस किसी काम क लिए बोलो ये कभी मन नहीं करता.
राघव- ये बात तो है. तभी तो ये सब का प्यारा है.
लल्लू तो सोनम क प्यार मई खोया हुआ मजे से उसकी नशीली आँखों मई डूबा गपागब खाये जा रहा था.
कभी कभी तो सब से बचा क्र सोनम की उंगलियों को भी मुँह मई ले क्र चूस लेता था.
सोनम लल्लू की सररतो का मजा लेती उसे खाना खिला क्र झूठा बर्तन लिए वापस किचन क सिंक मई रखने कहली गई.
लल्लू- भाभी आप कब आई अपने गौण से.
भाभी जो कब से लल्लू को सनम क हाथ से खता देख रही थी.
भाभी- अब याद आई आप को मेरी.
कोमल- पेटू है ये भाभी. पेट क आगे इसे कोई नहीं दीखता.
लल्लू हस्ता हुआ भाभी क पास आ क्र बैठ गया.
लल्लू- कैसे है आप क घर मई सब. माँ पिता जी. वह जा क्र हमारी बुराई तो नहीं की कुछ.
भाभी- सभी अच्छे है. आप को भी बुलाये है और बुराई तो मई इतना सारा की हु आप सभी भाई बहनो की.
भाभी अपने दोनों हाथ फैला क्र बोली.
लल्लू तो भाभी क हाथ फ़ैलाने से उनके साइन से जो साडी हैट गई थी उसी मई खो गया.
कैसे हुए ब्लाउज मई से झटके गिरे गोर संतरे का कुछ हिस्सा देख क्र लल्लू क मन मई तितलियाँ ूर्णे लगी.
लल्लू झट से अपनी नजरे वह से घुमा लिया.
लल्लू- देखो लो दीदी. भाभी मेरे साथ साथ तुम लोगो की भी शिकायत लगाई है अपने माँ पिता जी से.
रोमा- कोई बात नहीं भाई. दो चार दिन की hi बात है. बच क्र कहा जाएंगी ये. भाई को एक बार जाने दे फिर कौन बचाएगा हम से इनको.
भाभी- क्यू यहाँ चार चार माँ है हमारी. हमे किस का दर.
काजल- शाबाश.. अब आया न कोई टक्कर का. इन लोगो का भी मन बड़ा बढ़ गया था. भोली भली लक्ष्मी को तो अपने चिकनी चुपड़ी बातो मई फसा ली लेकिन अपने बड़ी भाभी को फसाओ तो जणू.
कोमल- ये दासी फसे hi है माँ. दो चार दिन मई भाई चले जाएंगे तो फिर हम लोग hi मिलेंगे इन्हे.
ऋतू- सोनम बीटा जरा अपने भाभी और बुआ को भी दे दो खाना. आज तुम ने तो दिल खुश क्र दिया मेरा.
रोमा- देख रहे हो दीदी. माँ कैसे मक्खन लगा रही है तुम्हे.
सोनम- चुप क्र तू. इधर आ क्र मेरी मदद क्र.
रोमा मुँह बनती सोनम की तरफ रसोई की और चल दी.
इधर गौरी रानी और कोमल का हाथ पकड़ क्र अपने कमरे की और बढ़ गई.
शालिनी- देख रही हु मई तुम्हे. कितनी होसियार बन रही है तू.
रागिनी- क्या हुआ क्यू उसे दांते जा रही है आज.
शालिनी- इसे मई अब किसी दिन बहुत मरूंगी. रोमा को किचन मई जाता देख क्र यहाँ से अपने दोनों साथी को हाथ से पकड़ क्र चुपके से निकल गई है.
मीनू- आप भी क्या क्या सोचती रहती हो चची.
शालिनी- चुप रह तू. जिस उम्र मई तुम हो न वो मई कब का पर क्र चुकी हु. माँ हु तुम सब की. सब जानती हु तुम लोगो की करतूत.
" मीनू दी, जितना देर वह रहोगे वो लोग ऐसे hi दिमाग ख़राब करती रहेंगी. आप भी वह से आ जाओ तो वो खुद चुप हो जाएंगी."
गौरी कमरे से बहार निकल क्र बोली.
शालिनी- ठहर जा तू आज. अभी तुम्हे मजा चलती हु.
लल्लू- Are...are काकी कहा चली आप. मई लता हु न पकड़ क्र उसे.
शालिनी- नहीं आज छोड़ तू. मई जरा इस लड़की को पहले दो थप्पड़ लगा लू. बड़ी जुबान चलने लगी है कैची की तरह. घोड़ी की जैसी हो गई है लेकिन इसे पता hi नहीं किस से क्या बोलना चाहिए.
लल्लू आगे बढ़ क्र पीछे से शालिनी काकी को बहो मई भर लिया जो गौरी को मरने कमरे की और बढ़ रही थी.
लल्लू- काकी, वो अभी बची है. वैसे hi सररत क्र रही है. किसी गैर को थोड़े कभी कुछ बोली है जो आप इतना गुस्सा क्र रहे हो.
शालिनी लल्लू क बहो क घेरे मई से छूटने क लिए मचल रही थी.
लल्लू शालिनी क पीछे से चिपका हुआ था.
शालिनी क हिलने क कारन उसकी उठी हुई नितम्ब लल्लू क डंडे पर रगड़ मर रहा था.
लल्लू को बड़ा मजा आ रहा था. वो आगे को पकडे अपने हाथ को नाटक करता हुआ धीरे धीरे शालिनी क 34 की चूचियों क निचे ले आया. वह इसे शालिनी क चूचियों की गर्माहट महसूस हो रही थी उसके हाथ पर. पीछे से अब वो भी अपना डंडा हलके से कभी कभी घिष देता था जो शालिनी क नितम्ब की रागरहित से हल्का खड़ा हो गया था.
लल्लू- इस उम्र मई आप भी अपने माँ बापू क घर मई ऐसे hi सैतानी करती होंगी.
शालिनी- नहीं. वह तो माँ पिता जी की दर से हमारी जबान नहीं हिलती थी कभी.
लल्लू- तो अपनी बेटी को भी वैसे hi दबा क्र डरपोक बना क्र रखना चाहती है आप. जो अपनी मर्जी से कभी जिए hi न. क्या बोल दिया ऐसा जो आज आप इतनी गुस्से मई हो. उसका सारा परिवार है ये. वो यहाँ हुसेगी बोलेगी नहीं तो कहा अपना सुख मस्ती पूरा करे. कभी कही घर से बहार नहीं जाती. कोई दोस्त नहीं है. हम सब hi तो है. अगर वो हम सब को कुछ कह भी दिया तो क्या हुआ. कल को जब बूढी होगी तो यही सब तो यदि रहेगी उसके पास.
लल्लू की ऐसी बाटे सुन क्र शालिनी का गुस्सा साबुन क झाग की तरह संत हो गया.
लल्लू शालिनी को पकड़ क्र खटिया पर बैठा दिया.
वही पास मई माँ और दोनों काकी भाभी क साथ बैठी देख रही थी मुसकुडते हुए.
काजल- क्यू चल दी थी उसे मरने जब पता है की ये अपने बहनो को गुस्सा भी नहीं होने देगा किसी को.
शालिनी- क्या करू. देख रही थी न तुम कैसे कुछ भी बाके जा रही थी.
ऋतू- कोई बात नहीं. अभी उसी सब क खेलने मस्ती कर्नल दिन है. जाने दे मजे करने दे. तुम अपना गुस्सा संत क्र.
लल्लू वह से उठ क्र बहनो की कमरे मई आ गया.
गौरी लल्लू को देख क्र दौर क्र उसे गले से लगा ली.
गौरी- थैंक यू भाई. तुम बहुत अच्छे हो.
गौरी लल्लू क गाल को चूमती बोली.
लल्लू- क्यू तंग क्र रही थी आप काकी को.
गौरी- बड़ा मजा आता है जब माँ गुस्सा करती है तो.
सोनम- आज भाई बचा लिया तुम्हे. हर बार नहीं बचा पायेगा वो. आगे से ऐसे मस्ती मत करना नहीं तो मर खा जाओगी.
गौरी- मई भी देख क्र करती हु हमेसा नहीं करती. जब भाई होता है तभी थोड़ी सी कर लेती हु.
गौरी लल्लू से चिमटी हुई बोली.
रोमा- भाई कोई चीनी नहीं है जो चिति की तरह चिपकी हुई है अब हो गया छोड़ दे उसे.
गौरी मुँह बनती हुई हैट गई लल्लू को छोड़ क्र.
रोमा आगे बढ़ क्र लल्लू क गले से लग क्र उसके छाती मई अपना चीन रगड़ती हुई उसे चुम ली गाल को.
गौरी- मुझे हटा क्र अब तुम क्या क्र रही है.
रोमा- मई अपने हिस्से का ले रही हु. तुम पहले hi अपना कोटा पूरा क्र चुकी हो.
मीनू- बस बस बहुत हुआ. अब मेरी बरी है. वैसे भी आज भाभी यही सोएगी तो…
गौरी- तो मई आज भाई क पास सो जाउंगी.
गौरी बिच मई hi मीनू की बात काट क्र बोली.
मीनू गौरी का चेहरा देखने लगी. आज वो सोच रही थी लल्लू क साथ सोने को लेकिन गौरी ने बिच मई कबाब मई हड्डी का काम क्र दिया.
गौरी मीनू को अपनी और देखती प् क्र जीभ निकल क्र चिढ़ाने लगी.
लल्लू- अच्छा मई जरा घूम क्र आता हु. अब आप कोई सैतानी मत करना.
लल्लू गौरी से बोलता हुआ वह से बहार निकल आया.