MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 38 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

थैंक यू बीआरओ ग्रेट कमेंट... मज़ा आया पद कर...

बीआरओ वो सेफ हाउस में पब के पुराने किये सेफ्टी इंतजामों के कारन पहुंचे पैर अब सोनल ने आ कर उनको लड़ने पैर मजबूर कर दिया है...

भाई अब किसी का अहित नहीं होगा. अब तो बुराई को हरने का टाइम है. अब केवल पब की जीत HI होगी...

दक्षसूरी बिच में नहीं आना चाहती. मणि और दयासुर भी कहा चुके है की वो अब कोई हेल्प नहीं करेंगे... अब ये युद्ध केवल पब और उसकी पत्नियों का है...
 
अपडेट 244

सन 1 (अगनासुर और मंजू)

अगनासुर बहार बैक गार्डन में था तो मंजू छुपते हुए उसके पास पहुंची. पैर अभी उसकी नजर मंजू पैर नहीं गयी थी. मंजू गार्डन में एक पेड़ के पीछे छुपी हुयी थी. मंजू ने पेड़ के पीछे से निकल कर एक हाव् अक तेज़ तूफान को याद किया और अगनासुर पैर छोड़ दिया. अगनासुर को जब तक इस हैलमे का पता चलता देर हो गयी और वो इस तूफान से उड़ता हुआ हवेली के बहार पीछे के पहाड़ से जा टकराया. उसको कुछ छोटे भी लग गयी. और इस हमले ने अगनासुर को गुस्सा दिला दिया. और जैसे hi उसकी नज़र मंजू पैर पड़ी उसने गुस्से में अपना हाथ आगे करके मंजू पैर आग के कई गोली छोड़ दिए. तो मंजू ने भी कुछ आग के गोले उन गोलों पैर हवा की स्पीड के साथ चोदे. अगनासुर की आग पचंद थी मंजू के मुकावले. पैर मंजू ने अपनी आग को हवा की भी स्पीड दी थी तो दोनों के टकराते hi दोनों की आग हवा में बिखर गयी. और यहाँ वह गिरी. कुछ मंजू के उप्पेर तो कुछ अगनासुर के उप्पेर भी गिरी. मंजू ने पानी की बारिस कर खुद की आग को भुजा दिया पैर अगनासुर थोड़ा बहुत झुलस गया. ये देख कर मंजू भी मुस्कुरा गयी. आग ने मंजू और उसके कपड़ो को भी थोड़ा बहुत नुकशान पहुंचाया था. पैर वो ज्यादा नहीं था. दानव को जलता देख मंजू ने अपने आग कैग ओले बना कर उस दानव पैर फेक दिए. पैर उस दानव को उनसे कोई फरक नहीं पड़ा. और उसने भी अपने आग कैग ओले मंजू की और फेके. मंजू ने कूद कर अपनी जान बचाई. और भूमि तत्त्व को याद करके उस दानव पैर पथरो की बारिश कर दी. दानव उन पथरो से गिर कर डाव गया. उसको कुछ छोटे लगी थी. मंजू ने सही मौका देख कर दूध कर पानी तलवार का प्रहार उसके उप्पेर कर दिया. पैर तलवार उसके जिस्म पैर कोई ाशर न कर पायी. और दानव ने गुस्से में मंजू को ुधा कर फेक दिया. मंजू पेड़ से टकरा कर निचे गिरी. मंजू को काफी छोटे आ गयी थी. पैर मंजू अपनी शक्ति को समेटे फिर कड़ी हो गयी. तब तक उस दानव ने भी गुस्से में आ कर अपना असली रूप ले लिया. वो 18-20 फ़ीट का भयंकर दानव बन गया था. और मंजू की नजर जब उस पैर पड़ी तो मंजू उसकी शक्ल से hi दर गयी. पैर मंजू ने हिम्मत नहीं हारी और कुछ सोचने लगी. तभी उसके मंद में एक आईडिया आ गया इस दानव को मरने का.

जब उस दानव की नजर मंजू पैर पड़ी तो वो मुस्कुराती दिखाई दी. ये देख कर दानव का गुस्सा सातवे आश्मान पैर पहुंच गया. और अपने आग के गोलों को छोड़ने लगा. मंजू उन गोलों से बचने के लिए ीदार से उदार कूदने लगी. एक भी गोला मंजू को नहीं लगा ये देख कर दानव पागल होने लगा और उसने हाथ आगे करके एक बड़ा आग का गोला बनाया और मंजू की तरफ फेक दिया. मंजू भी इस पल के hi इन्तजार में थी. जैसे hi उसने अपना गोला फेका. मंजू ने भी उतना hi बड़ा एक गोला उसकी तरफ फेका और तुर्रंत hi एक हाव् अक बबंडर बना लिया. जैसे hi वो दोनों आग के गोले टकराये हवा का बवंडर वह तक पहुंच गया और उन गोलों की तकर से निकली पूरी आग को बवंडर ने अपने अंदर समेत लिया और दानव की और बाद गया. 2 पालो में hi दानव भी उस बवंडर के अंदर था. ये सब कुछ hi पल में हो गया था. मंजू ने ये hi प्लान किया था. उस दानव की मूट के लिए. दानव उस बवंडर की आग को सहा नहीं पाया और जलने लगा. वो दानव अपनी hi लगाई आग ने जल रहा था. चीख रहा था. बवंडर तो शांत हो चुक्का था पैर दानव का सरीर जलना बंद नहीं हुआ. मंजू ने भी दानव के पास पहुंच कर उसके जलते हुए सरीर में अपनी तलवार घुसा दी. तलवार भी वह घुशी जहा सरीर आग से जल कर घाव बना चुक्का था. ऐसे hi 8-10 जगह तलवार घुसाने पैर वो दानव ढेर हो गया. मंजू ने एक दानव का अंत कर दिया था.

सन 2 (परसुर और एरिका, नैना, सलोनी)

परसुर टेरेस पैर घूम रहा था. एरिका के लिए उसे बेसमेंट में लाना कड़ी चुनौती थी. एरिका ने सोचना सुरु किया की कैसे उसे निचे लाया जाये. कुछ सोच केर उसे लगा की पारी वाला आईडिया ठीक रहेगा. तो उसने अपनी टी शर्ट के एक कंडे को खींच कर कंडे के निचे किया तो उसकी ब्रा दिखने लगी. बड़ा hi सेक्सी लुक दे रही थी एरिका. एक तो गोरी चिकनी काया. गोल्डन कलर के बाल इकहरा बदन पैर बड़े -2 चुके जो ब्रा में से बहार आने को तैयार थे. एरिका ने अपने लुक को और जान लेवा बनाना के लिए जीन को थोड़ा निचे और कर दिया. तो उनकी नाभि नजर आने लगी.

फिर उसने दूर से hi उस दानव को आवाज लगाई – सुनिए कोण है आप और यहाँ क्या कर रहे है??

परसुर ने पलट कर उसकी और देखा तो देखते hi उसका लुंड खड़ा हो गया और पैर उसने हुड को कण्ट्रोल करके पूछा – तुम कोण हो?? और हवेली के वाकई के लोग कहा है??

एरिका ने कुछ सोच कर जवाब दिया – मुझको क्या पता मैं तो अभी आयी हु अपनी फ्रेंड से मिलने. जब निचे कोई नहीं देखा तो यहाँ उप्पेर आ गयी. तुमको पता है ठाकुर साहिब की पत्निया कहा है??

परसुर सोचने लगा. “मतलब ये हवेली की नहीं है बस अपनी किसी दोस्त से मिलने आयी है. पैर है साला एक no का माल. जब तक वो लोग नहीं आते इस साली को छोड़ -2 कर अपनी प्यास भुजा लेता हु फिर जब वो सब आएगी तब उनको भी देख लगे.

परसुर क्या जनता था की ये ठाकुर की बीबी है. जो उससे छोड़ने नहीं उसको मूट देने आयी है. एरिका अपनी चल में कामियाब रही थी. परसुर के गणदे और बदसूरत चेहरे से हवस साफ़ दिख रही थी.

परसुर – देख अब तू यहाँ आ गयी है तो तुझको मैं जिन्दा नहीं छोड़ूगा. तुझको मैं पल भर में मार दुगा. और यदि जिन्दा रहना चाहती है तो तुझको मेरे लुंड को शांत करना होगा.

एरिका डरने की एक्टिंग करते हुए – प्लीज मुझको छोड़ दो. मैं तो अपनी फ्रेंड से मिलने आयी थी. प्लीज मुझको जाने दो.

परसुर – हहहहह यदि जिन्दा रहना चाहती है तो आ मेरे लुंड को एक बार शांत कर दे फिर मैं तुझको जाने दुगा.

(मन में – साला बहुत दिन हो गए किसी मानव लड़की की बुर फाडे हुए. और साला जब भी फाड़ता हु पहले उसकी परछाई को अपना गुलाम बना कर hi फाड़ता हु नहीं तो दर के मरे कोई अपनी छूट होश में देती hi नहीं पैर ये एक तो बहुत सुन्दर लग रही है और मुझसे दर भी नहीं रही नहीं तो लड़किया इतनी देर मेरा चेहरा देख कर hi बेहोश हो जाती है. इसके साथ पूरा मज़ा आने वाला है बस इसको थोड़ा दमकना होगा)

एरिका – प्लीज मुझको जाने दो..

परसुर – लड़की सोच ले या तो मरने को तैयार हो जय ा फिर मरवाने को…

एरिका सोचने और डरने की एक्टिंग करती रही फिर बोली – ठीक है मैं तैयार हु. पैर प्लीज मेरी एक बात मानोगे??

परसुर खुश हो कर – हाँ बोल क्या कहरा चाहती है.

एरिका – वो न यहाँ मुझको बहुत शर्म आएगी. इस हवेली में न एक बेसमेंट है वह पैर बहुत अच्छे बीएड भी है. तो क्यों न आप मेरे साथ वह पैर करे.

परसुर – लड़की चालक मत बन शर्म की बात है तो चल निचे रूम में चलते है वह तुझको शर्म नहीं आएगी..

एरिका – वो… वो… बात ये है की मैं न अभी तक कुवारी हु.. मेरा लगन हो गया है. और तुमको देख कर लग रहा है की तुम मेरी चीखे निकलवा डोज. अब यदि हवेली के रूम में किया न और मेरी फ्रेंड आ गयी तो वो ये बात सबको बता देगी और फिर मैं बर्बाद हो जोगी. फिर जिन्दा रहने से भी क्या फायदा. नहीं -2 मैं बदनाम नहीं हो सकती. या तो तुम मेरे साथ निचे चलो. या फिर मुझको मार दो. (ये बोल कर एरिका अपडर से सचेत हो गयी कियोकि यदि उसने एरिका को मरने की कोसिस की तो वो तुरंत टेलिपोर्ट हो सके.)

परसुर सोच कर – तेरी बात भी ठीक है चल फिर निचे chal..(Erika के पास आने लगा)

एरिका – तुम न मेरे पीछे -2 hi आना. किसी ने तुमको मेरे साथ देख लिया तो ….

परसुर – हम्म चल आगे..

एरिका वह से निचे चल दी. और परसुर उसके पीछे -2 निचे को चल दिया. एरिका का काम तो बिना किसी पावर के hi हो गया था. पैर जैसे hi वो बेसमेंट के लिए निचे उतरने लगे तो एक रय ने उन दोनों को देख लिया. और उनके पीछे हो गया. जब ये तीरो बेसमेंट में पहुंचे तो बेसमेंट में नैना ने लाइट बंद कर दी. और अपनी आँखें बंद करके वह देखने लगी तो उसे एक दानव की पीठ नजर आयी उसने उस पैर रेडियम चिपका दिया और निचे आने वाले दूर को लॉक कर दिया. पैर यहाँ नैना पैर एक गलती हो गयी वो ये नहीं देख पायी की एरिका के पीछे एक नहीं 2 दानव आये है. और उसने परसुर की जगह रय की पथ पैर रेडियम चिपका दिया है.

सलोनी तो रेडियम के चमकने के hi इन्तजार में थी. रेडियम के चमकते hi सलोनी ने अपनी तलवार को रेडियम के थोड़ा निचे गश दिया. और तेज़ी से 3-4 बार कर दिए. रय के मुँह से चीख निकल गयी. और वो परसुर को भी सुनाई दी. तो परसुर दहाड़ा – कोण है. कोण है… साली रंडी तू कहा है और ये सब क्या है. कुटिया मुझसे चल चलती है अब में तुझको जिन्दा नहीं छोड़ूगा. अब तू मारेगी मेरे हाथो.
 
थैंक यू बीआरओ फॉर लवली कमेंट...

यस अब 2-3 अपडेट लड़ाई के HI होंगे पैर ये बल से नहीं लड़ सकती केवल मंजू HI है जो अपनी पूरी पावर रखती है इतर वाइज सभी थोड़ी -2 पावर HI रखती है. देखते है कैसे लड़ेगी और जीतेगी.....

भाई अभी पब हवेली के लिए कुछ नहीं कर सकता. उनसे बात भी नहीं कर सकता है. हाँ ये बात ठीक कही है अपने की पब भी इनकी लाइफ एनर्जी से HI लड़ रहा है. और अभी ये अपनी एनर्जी उसे करेगी तो पब क्या करेगा??? देखिये ये भी आएगा... स्टे तूने

कीप सपोर्टिंग ?
 
अपडेट 245

सलोनी तो रेडियम के चमकने के hi इन्तजार में थी. रेडियम के चमकते hi सलोनी ने अपनी तलवार को रेडियम के थोड़ा निचे गश दिया. और तेज़ी से 3-4 बार कर दिए. रय के मुँह से चीख निकल गयी. और वो परसुर को भी सुनाई दी. तो परसुर दहाड़ा – कोण है. कोण है… साली रंडी तू कहा है और ये सब क्या है. कुटिया मुझसे चल चलती है अब में तुझको जिन्दा नहीं छोड़ूगा. अब तू मारेगी मेरे हाथो.

परसुर की आवाज सुन तीनो दर गए. तो नैना ने hi सब देखा तो उसे अपनी गलती का अहसास हो गया. और उसने मन hi मन ये उन दोनों को भी बता दिया. अब प्रॉब्लम ये थी की सलोनी को कुछ दिख नहीं रहा था और परसुर एक दम सचेत हो चुक्का था. यदि गलती से भी कोई उसके हाथ आ गया तो मरना तय था. दर तीनो को लग रहा था. और परसुर हर बीतते टाइम के साथ पूरी सवदानी से गेट की और बाद रहा था.

नैना और सलोनी मन में बात करने लगी. सलोनी – अब क्या करे नैना?? ये तो बच गया. और यदि ये यहाँ से बहार निकल गया तो हम सबकी मूट पक्की है.

नैना – हाँ सलोनी और ये अभी गेट की तरफ hi बाद राह है.

सलोनी – तुमको देख रहा है वो?? क्या तुम मुझको बता सकती हो की मैं किस दिशा में आगे बदु की उसके पीछे पहुंच जाऊ??

नैना – हाँ क्यों नहीं??

सलोनी – ठीक है नैना अब तुम मेरी आखँ हो तुम्हारे दिखाए रिश्ते पैर चल पर hi मैं उसको मार पाउगी.

देखो नियति का खेल आज एक अंधी लड़की किसी और की आखें बानी हुयी थी. पैर ये टाइम ये सब सोचने का नहीं बल्कि दानव को ख़तम करने का था. तो नैना के बताई बातो से hi एक – एक कदम करके सलोनी परसुर के पीछे पहुंच गयी.

पैर परसुर भी भाप गया की कोई उसके पीछे है. तुरंत पलट गया. पैर तब तक सलोनी ने अपनी तलवार चला दी. और तलवार परसुर के पेट पैर एक घाव दे कर साइड हो गयी. सलोनी ने अपनी पूरी ताकत से वॉर किया था पैर तलवार दानव के पार भी नहीं हो सकीय. और तलवार की पेट पैर से स्लिप होने से सलोनी लड़खड़ा गयी. और परसुर ने लपक कर सलोनी की गार्डन को दबोच लिया. तलवार पैर लगा जहर भी परसुर को कोई नुकशान नहीं पंहुचा पाया था. सलोनी उससे छूटने के लिए उस कर अपनी फाइटिंग स्किल अपनाने लगी. पैर उसकी पकड़ भी मजबूत थी. सलोनी उसकी पकड़ की आगे कुछ नहीं कर प् रही थी और उस का दम hi जुटा जा रहा था. सलोनी ने नैना से मन में बोलै – नैना इस पैर वॉर करो नहीं तो ये मुझको मार देगा.

नैना भी कड़ी वो देख कर गबरा रही थी. पैर सलोनी की बात ने उसे होश में लाया और उसने अपनी तलवार निकली और उस दानव के हाथ पैर एक तेज़ वॉर किया. दानव का हाथ पैर जखम हो कर hi रहा गया. पैर इस जखम की वजह से उसकी पकड़ ढीली हो गयी. तो सलोनी उसकी पकड़ से आज़ाद हो गयी. सलोनी ने नैना से तलवार ले कर फिर से परसुर की दिशा में चला दी. पैर तब तक परसुर अपनी जगह से हैट गया. परसुर को दिखाई नहीं दे रहा था पैर वो भी हवा को महसूस करके बहुत सतर्कता से ीदार उदार हो रहा था ताकि कोई बार न कर सके.

एक बार नैना ने फिर सलोनी को गाइड करना सुरु किया. और सलोनी उसके बताये मार्ग पैर चल कर परसुर के सामने पहुंच गयी. पैर इस बार सलोनी ने भी अपनी काली शक्ति को जागृत कर लिया था. और अपनी बहुत सी काली शक्ति से तलवार को मजबूत बता दिया. उसके शरीर भी काली शक्तियों के जागृत होने से बदले लगा. वो अपने दानव रूप में आने लगी. सलोनी की दानव काली शक्ति को फील करके परसुर भी चौक गया. उसको लगा की कोई उसका साथी वह आ गया है. तो उसने भी उस काली शक्ति की देश ने अपने कदम बड़ा दिए. और जैसे hi नैना ने सलोनी को बताया की परसुर तुम्हारे नजदीक आ रहा है सलोनी ने भी अपनी तलवार पैर पकड़ मजबूत कर ली. परसुर को अपने पास महसूस करते hi उसकी तलवार एक बार फिर हवा में लहरा गयी पैर इस बार उसकी तलवार काली शक्ति से बारपुर थी. और वो भी दयासुर जी की काली शक्ति से. तो परसुर का सरीर उसको सहन नहीं कर पाया और तलवार उसकी गार्डन को कटती हुयी निकल गयी. परसुर का सर दूर जा कर गिरा. और सलोनी एक दम दहाड़ ुधि – हहहहहहह. सलोनी की ये हाशि बहुत डरावनी थी.

नैना ने ये सब देखा था नैना के हाथ पेअर कपङे lage.saloni का फेस भी डरावना लग रहा था. एक दानव का अंत करते हुए सलोनी के अंदर का दानव बहार आ गया था. नैना ने पहले वह की लाइट जलाई. एरिका भी परसुर की लाश और सलोनी के फेस को देख कर और भी दर गयी. जो सलोनी की हाशि से पहले hi दरी हुयी थी. पैर इस बार एरिका ने हिम्मत से काम लिया और सलोनी को अपनी बांहो में ले कर शांत होने को कहा. पैर तब तक नैना ने गुरु को सलोनी की इस्थिति को बता दिया था. गुरु ने कामिनी को भेज दिया सलोनी को सँभालने. कियोकि कामिनी सलोनी के बहुत नजदीक थी. सौतेली बहाने जो थी.

कामिनी भी थोड़ी देर में बेसमेंट में पहुंच गयी पैर तब तक एरिका सलोनी को बहुत हद तक संभल चुकी थी. फिर कामिनी को देख कर तो सलोनी एक दम शांत हो गयी.

सन 3 (अंधकासुर और पारी और ेबेचा)

अंधकासुर हवेली में हॉल में बैठा हुआ था. पारी ने एक बहुत hi सेक्सी ड्रेस पहन कर बेस से बहार आयी थी. पारी इस टाइम सोल्लगे गोइंग गर्ल्स की तरह दिख रही थी. छोटी सी स्कर्ट जो की पेंटी से थोड़ी hi बड़ी थी. और ब्रा जैसी शर्ट. उप्पेर से उसका गोरा बदन और परियो जैसा खूबसूरत फेस. और फेस पैर हल्का सा मेक उप जो उसको एक दम हॉट लुक दे रहा था.



पारी ने कैट वाक करते हुए अंधका सुर के पास पहुंची और बोली – कोण है आप और यहाँ क्या कर रहे है.

पारी की आवाज से अंधकासुर का धयान पारी की तरफ गया. वो पारी की जिस्म को घूरने लगा. पारी के जिस्म की आग में वो पिघल रहा था. उसका लुंड खड़ा हो गया था, उसकी वासना उस पैर भरी होने लगी. पारी अंधकासुर के भाव को देख कर मुस्कुराने लगी. पारी ने उसके पीछे देखा तो उसे ेबेचा भी नजर आ गयी. जो तलवार को हाथ में लिए तैयार कड़ी थी. वो भी पारी की स्माइल को देख कर समाज गयी की वो पारी के रूप जाल में फंस गया है.

जब अंधकासुर ने कोई जवाब नहीं दिया तो पारी ने फिर अपना सवाल दोहराया. तो अंधकासुर होश में लोटा और अपने लूणद को मशालते हुए बोलै – पहले तू बता तू कोण है??

पारी – मैं तो यहाँ रहती हु. तुम हरारे घर में क्या कर रहे हो??

बस ये पारी ने गलती कर दी. अंधकासुर से सुनते hi सतर्क हो गया. उसका टारगेट उसके सामने था. और अब वो उसे मार कर अपना मकसद पूरा करना चाहता था. उसकी आखों का रंग बदलने लगा. और जब ेबेचा ने पीछे खड़े हो कर पारी का जवाब सुना तो वो भी समाज गयी की ये पारी ने गलत बोल दिया है. तो ेबेचा को पारी की जान खतरे में नजर आयी ेबेचा ने तुरंत सोफे पैर बैठे अंधकासुर की गार्डन पैर अपनी तलवार चला दी. पैर अब देर हो चुकी थी. वो सतर्क हो गया था. उसने हवा में लहराती तलवार को हवा में hi पकड़ लिया. और पीछे की तरफ झटक दिया.

अंधकासुर के इस झटके से ेबेचा संभल नहीं पायी और गिर गयी. पारी के एक जवाब ने पूरा गेम hi बदल दिया था. पारी को भी लग गया की उसने गलत बोल दिया है. पैर अब कुछ नहीं हो सकता था. पैर जैसे hi अंडकासुर सोफे से खड़ा हो कर ेबेचा की तरफ देखा. तुर्रंत ेबेचा की शक्ति अंधकासुर खींचने लगा. अभी एक मं से काम टाइम hi हुआ होगा की पारी ने जा कर उसको पकड़ कर अपनी तरफ घुमा दिया. अंधकासुर को इसकी बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की ये लड़की उसको पकड़ने की हिम्मत भी कर सकती है. नहीं तो लड़किया अंधकासुर के रूप को देख कर दर से बेहोस हो जाती है या भाग जाती है. और मानव कन्या को उसने आज तक इतनी हिम्मत करते नहीं देखा था.

जैसे hi अंधकासुर पारी की तरफ पलटा उसकी जानते जल गयी. साला एक 2 कोड़ी की मानव कन्या ने उसको उसकी इच्छा की विरुद गुमा दिया था. उसने तुर्रंत पारी के बाल खींचते हुए बोलै – साली रंडी बहुत जल्दी है न तुझको मरने की. साली अपना हुस्ना दिखा कर इस रंडी से मरवाने की सोच रही थी न. अब देख तुम दोनों को मं. में hi न मार दिया तो कहना..

पैर इतने में ेबेचा वह से हैट गयी थी. और दूसरे सोफे के पीछे चुप गयी थी. ेबेचा को अपने अंदर एक कमजोरी की अनुभूति होने लगी थी. पारी ने ये देख लिया की ेबेचा चुप रही है तो इशारा किया की वो अभी छुपी रहे. जल्दी hi वो ेबेचा को फिर से मौका देगी. अंधकासुर पीछे मुद कर देखता है तो पारी उसके फेस को अपनी तरफ करके बोली

पारी – आअह्ह्ह्ह उदार क्या देख रहे हो वो तो भाग गयी. आआअह्ह्ह पैर मैं फस गयी तुम्हारे हाथो में. अब मैं तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ सकती. सोचा था की देखे से तुमको मार देंगे. पैर तुम तो बहुत चालक और बहुत बहादुर निकले. मैं अपनी हार काबुल करती हु. वो तो बाग़ गयी. प्लीज मुझको भी छोड़ दो. मुझको भी जाने do..aaaahhh

अंधकासुर – हहहहहह आ गयी न अपनी औकात पैर. निकल गयी साडी हवा… वो तो भाग गयी पैर अब मैं तुमको नहीं छोड़ूगा. तुमको मरना hi होगा.. मैं अंधकासुर तुमको मार कर hi रहुगा… तू तो एक छोटी सी मामूली सी मानव कन्या है. तू मेरे सामने चिति जितनी भी नहीं है. मेरे सामने आने से तो देवता भी गहराते है.

पारी – क्या देवता?? तुमने देवताओ को देखा है?? अब तुम ज्यादा फेक रहे हो. जब मेने अपनी हार मान hi है तो फिर तुम झूट क्यों बोल रहे हो.

अंधकासुर (बाल खींचते हुए) – ये लड़की मैं झूट नहीं बोलता सामजी, मैं एक दानव हु दानव… और देवता भी मुझसे डरते है. कोई कितना भी बलवान क्यों न हो सब मेरे सामने आने से डरते है.

पारी (अपने दर्द को सहन करके, स्टाइल से बोली) – रहने दो मेने कहा न ज्यादा मत फेको. अब मुज जैसी नाजुक सी लड़की पैर काबू करने और देवताओ को डरने में अंतर होता है. जब मुझको तुम्हारे सामने आने से दर नहीं लगा तो कोई और क्या तुमसे डरेगा. हाँ तुम शक्तिशाली हो. बॉडी भी अच्छी है तुम्हारी पैर इसका मतलब ये तो नहीं न की तुम कुछ भी बोलो और मैं मान लगी.

अंधकासुर को पारी की ये बाते सहन नहीं हो रही थी. पारी एक बार गलती कर चुकी थी पैर अब वो सतर्कता से बात को सँभालने की कोसिस कर रही थी. अंधकासुर पारी की बातो से हर्ट हो रहा था. उसका ईगो हार्ट हो रहा था. एक मामूली सी मानव कन्या उससे दर नहीं रही. उसकी बातो में खौफ नहीं है. वो उसको एक बॉडीबिल्डर मानव समाज रही है. ये उसे अपनी ताकत की तोहिं लग रही थी.

अंधकासुर – देख लड़की तू मुझको जानती नहीं है अभी… मैं किसी के शरीर से उसकी ताकत चूस लेता हु. और वो आदमी मार जाता है..

पारी – हाहाहाःहाहा.. यानि की तुम चूस चूस कर उसका पानी निकल देते हो और उसका हो जाता है. मतलब तुम ओरल सेक्स में एक्सपर्ट हो. मेरी एक बात मानोगे?? मुझको मरने से पहले के बार मेरी भी छूट चूस डोज क्या?? आज तक किसी ने नहीं चूसी है. और अब तुम कहा रहे हो की तुम मुझको मार डोज तो मैं तो इस सुच के बिना hi मार जोगी न. प्लीज यार एक बार चूस देना बस. मेरी आखरी इच्छा समाज कर hi चूस देना प्लीज..

अब अंधकासुर का दिमाग भिन्न गया. “साला जो भी बोलता हु मानती hi नहीं. साली ने अब मुझको भादवा समाज लिया. खुद तो रंडी है hi मुझको भी अपना जैसा hi समाज रही है. ये पागल तो नहीं है. नहीं पागल भी मुझसे दर जाते है ये तो दर hi नहीं रही. अब तो इसको डरने के बाद hi मरुँगा. साली को दिखाऊगा की मैं क्या चीज हु”

अंधकासुर – तुझको लगता है की मैं टुक्से झूट बोल रहा हु. साली तू मेरा उपहास ुढती है देख मैं अब क्या करता हु तेरे साथ.

पारी – क्या करोगे?? या तो मार डोज या फिर मेरा रपे करोगे. यदि इनमे से कुछ भी करने वाले हो तो मेरी छूट चूसने की इच्छा को जरूर पूरा करना.

पारी लगातार उसको सेक्स के प्रति भड़का कर और उसका अपमान करके उसकी सतर्कता को ख़तम करने की कोसिस कर रही थी. और वो इसमें कामियाब भी हो रही थी. अंधकासुर अब पारी की बातो से गुस्से से भर रहा था. तो वो पारी को सबक सीखने के लिए उसकी शक्ति को अपने पास कुछ हद तक खींच कर अपनी बातो को प्रमादित करने की सोच रहा था. फिर उसने किया भी वो hi. उसने पारी की शक्ति को खींचना सुरु कर दिया. पारी की सेक्स पावर उसके सरीर में जाने लगी और थोड़ी hi पावर को खींच कर वो रुक गया. कियोकि उसकी नजर ने पारी एक मानव कन्या थी जिसमे ज्यादा पावर होने का सवाल hi नहीं था. पैर इस थोड़ी सी पावर खींचने से पारी अंदर से बहुत कमजोर हो गयी पैर उसने अपने आप को दिखया ऐसे की उस पर कोई फरक hi न हो. पारी की पावर से अंडकासुर वासना की आग में जलने लगा. और पारी को ठीक थक देख कर उसको विश्वास नहीं हुआ. एक पारी का ताकत खींचने के बाद भी खड़ा रहना और दूसरा पारी की सेक्स पावर का उसके लुंड पैर अक्षर, अंधकासुर इन दोनों में hi उलझ कर रहा गया. ये देख कर पारी ने ेबेचा को इशारा कर दिया और ेबेचा ने भी डायन से एक –एक कदम उसकी और बढ़ाये और उसकी गार्डन को निशाना बना कर अपनी पूरी ताकत से वार कर दिया.

अंडकासुर की सतर्कता तो पहले hi ख़तम हो चुकी थी. ेबेचा ने उसका फायदा ुधा लिया. फिर उसकी तलवार में भी चाँद हंस तलवार की पावर का एक अंश था. वॉर के साथ hi अंडकासुर का सर कट कर गिर गया. और एक और दानव का अंत हो गया. पैर अभी पारी की ताकत ख़तम हो चुकी थी. वो भी अंडकासुर के साथ जमीन पैर गिर गई. पारी की दशा को देख कर ेबेचा ने पारी को अपनी गौड़ में लिया और उसकी नब्ज को चक किया तो वो चल रही थी. केवल कमजोरी से बेहोश थी.
 
अपडेट 246

सन 4 (मोहिनी और अंकिता, माहि)

मोहिनी इस टाइम पब के रूम में थी. और पब की फोटो को बड़े धयान से देख रही थी. तभी अंकिता उस रूम में पहुंच गयी. उसके पीछे -2 माहि भी इनविजिबल हो कर पहुंच गयी थी. दोनों ने देखा की मोहिनी पब की फोटो में खोई हुयी है. माहि ने ये अच्छा मौका देखा. और एक मंत्र पद कर मोहिनी पैर एक ताकतवर शक्ति छोड़ दी. पैर ये क्या मोहिनी पैर उसका कोई भी अक्षर नहीं हुआ. पैर वो सचेत हो गयी. और जब उसने अंकिता को देखा तो बोली – कोण हो तुम? तुम्हारी इतनी हिम्मत की मुज पैर हमला करो..

अंकिता को पता था की किसी को hi सम्मोहित करने के लिए उसके फेस यानि की उसकी किसी इंद्री (आखँ, नाक, कान, मुँह) से मंद तक पहुंचना होता है. इसलिए अंकिता अपने फेस को कवर करके राखी थी. (यहाँ बता दू की पब और अंकिता केवल आखों के जरिये hi मंद को कण्ट्रोल कर पते है. और अंकिता तो आखों के जरिये भी कण्ट्रोल नहीं कर पति बस दूसने के मंद को पद पति थी वो भी ठीक से नहीं. पैर अंकिता का अपने मंद पैर कण्ट्रोल बहुत हो गया था. ) गुस्से में मोहिनी अंकिता की तरफ अपने हाथ से एक लेज़र छोड़ती है तो अंकिता कूद कर अपनी जान बचती है. और वो लेज़र लाइट लैंप की और लगता है तो लैंप के फरखचे उड़ जाते है. अंकिता कुड़ी मोहिनी की और थी. और उसने कूदते टाइम मोहिनी की और hi कुड़ी थी और उसने अपनी तलवार भी निकल ली थी. तो तुर्रंत hi उसने घूम कर तलवार मोहिनी के पेट में घुसा दी. पैर ये क्या अंकिता को लगा की तलवार सरीर में नहीं कपडे के ढेर में घुसी है. अंकिता की तो जैसे साँस hi अटक गयी. वो सोचने लगी यदि ये तलवार से नहीं मारेगी तो मारेगी कैसे?? साला इस बारे में तो किसी ने कुछ भी बताया नहीं है.

अंकिता को वॉर करता देख मोहिनी ने ने अंकिता के गले से पकड़ कर खड़ा कर दिया. और एक hi जटके में अंकिता का मास्क उतर कर फेक दिया. और अंकिता को पहचाने की कोसिस करने लगी. पैर तभी माहि ने मंत्र पद कर एक ऑरेंज स्मोक मोहिनी के चारो और पहला दिया. स्मोक को देख कर अंकिता ने उसके हाथ को छिटक कर उससे दूर हो गयी.

कुछ hi देर में जब स्मोक ख़तम हुआ तो माहि और अंकिता दोनों की आखें बड़ी हो गयी वो अभी भी वैसे hi कड़ी एक जेलरीली मुस्कन लिए कड़ी थी. और एक दम बोली – साली कोण है तेरे साथ मुझको दूसरे के होने का भी बहन हो चुक्का है. जो भी है चुप चाप सामने आ जाओ. नहीं तो मुझको सामने लाना आता है.

ये सुन कर दोनों की और हालत ख़राब हो गयी. अंकिता ने अपनी एक कोसिस करने की सोची. और उसने मोहिनी की आखों में झक कर उसके मंद को पड़ने की कोसिस की. पैर वो उसके मंद में घुस hi नहीं पायी. बल्कि नतीजा ये हुआ की मोहिनी एक दम गुस्से में गुर्राई – तू मेरे दिमाग में गुसेगी साली, तेरी इतनी औकात नहीं है की मोहिनी के दिमाग पैर अटक कर सके देख अब मैं क्या करती हु. तुझको लगता है न तेरे पास बहुत बड़ी शक्ति है. पैर तूने मुझे अपनी ये शक्ति दिखा कर गलती कर दी. अब तू दिख मेरी शक्ति..

ये बोल कर मोहिनी अंकिता के मंद में घुसने लगी. पैर अंकिता को अपने मंद पैर कण्ट्रोल था उसने भी मोहिनी को घुसने नहीं दिया. इन सब में ये अच्छा हुआ की मोहिनी माहि के बारे में भूल कर अंकिता से भीड़ गयी. अंकिता ने भी अपनी मंद को पूरी तरह से ब्लॉक किया हुआ था. वो मोहिनी को कामियाब नहीं होने दे रही थी.

माहि उसको मरने के तरीके के बारे में सोच रही थी. पैर कोई रास्ता नहीं मिल रहा था. काफी देर तक सोचने के बाद उसने एक तरीका अपनाने का सोचा. तभी उसके मन में अंकिता की आवाज आयी माहि कुछ करो अब ये कुछ hi देर में मेरे मंद में घुस जाएगी. मेरी शक्ति काम हो रही है. (कियोकि अंकिता की मंद की शक्ति की एनर्जी पब भी उसे कर रहा है)

माहि भी अपनी चल सोच चुकी थी तो फ़ौरन hi अपने मंत्रो को पद कर मोहिनी के उप्पेर फुक दिया. और ये मंत्रो थे आखों के धोखे के मंत्र, महाजाल के मंत्र, मायाजाल के मंत्र और इन मेट्रो को माहि ने सिद्ध कर रखा था.

माहि ने एक मायाजाल बनाया. और वो काम भी किया. मोहिनी अंकिता के मंद तक पहुंचने hi वाली थी की तभी उसको किसी ने आवाज दी – मोहिनी मोहिनी आखिर आज तुम मिल hi गयी. मैं तो कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रहा था. ऊऊऊ मोहिनी आओ मेरे गले लग जाओ..

मोहिनी ने पलट कर देखा तो सामने वो फोटो वाला लड़का hi खड़ा था जिसको वो कुछ देर पहले देख रही थी. जी हाँ यानि पब खड़ा था. उसको देख कर मोहिनी चौक गयी.

मोहिनी – कोण हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो?? क्या तुम hi थे इसके साथ जो मुज पैर हमला कर रहे थे.

पब – नहीं मोहिनी पागल हो क्या तुम?? मैं तुम जैसे सुंदरी को छोड़ कर इस सदर्न सी दिखने वाली मानव कन्या का साथ दुगा क्या?? मैं तो तुम्हारा दीवाना हु. आओ न मेरे गले लग जाओ मोहिनी..

मोहिनी – तुम मुझको कैसे जानते हो?? किसने बतया मेरे बारे में?? हो कण तुम??

पब – मोहिनी मैं तुम्हारा दीवाना हु दानव रानी (दस माँ) का पुत्र. उन्होंने hi मुझको तुम्हारे वेयर में बताया था. तुम्हारे रूप और तुम्हारी ताकत के वेयर में सुन कर hi तुम्हारा दीवाना हो गया. पता नहीं कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रहा हु मैं… आज जा कर मिली हो. पैर तुमने ये क्या रूप बना रखा है. माँ ने तो तुम्हारा कोई और hi रूप बताया था.

(भाइयो ये पब माहि के मायाजाल की उपज थी जिसको माहि चला रही थी. और मोहिनी से उसकी मूट का रहश्य जानने की कोसिस कर रही थी. मोहिनी की किसी से भी मूट न होती देख कर माहि को ये तो पता चल गया की ये जो सामने है ये एक बाहरी रूप है सच्चाई नहीं. इस पैर किसी भी बाहरी हमले का कोई ाशर नहीं होगा. तब hi उसने उन मंत्रो से मायाजाल रचा था जो उसकी इन आखों से hi उसके असली रूप को भी ब्रमित कर सकता था. वो भी इसलिए कियोकि मोहिनी इन आखों से hi सब कुछ देख रही थी. और ये बात माहि ने ऑरेंज स्मोक के हमले में देख ली थी)

मोहिनी – ोुह्ह्ह यानि तुम मेरे बारे में सच में जानते हो. और क्या तुम को मेरा ये रूप पसंद नहीं आया?

पब – नहीं मोहिनी एक दानव को दानव कन्या का अश्ली दानव रूप hi भ सकता है. ये तो मानवो का रूप है. मुझको ये कैसे भायेगा.

मोहिनी इस बात से खुश हो गयी. आज तक कोई उसको ऐसा नहीं मिला था जो उसके अश्ली रूप को पाषंड करता हो. और नारी कोई भी हो वो अपनी सुंदरता की प्रशंशा से खुश होती hi है.

मोहिनी – तुम सच में मेरा वो रूप देखना चाहते हो..? पैर तुम तो खुद मानव रूप में हो..

पब – अभी लो..

ये बोलते hi माहि पब के रूप को दानवो जैसा बनती है. जितना बदसूरत वो सोच सकती थी पब की सकल को उल्टा hi ज्यादा बदसूरत कर देती है. पब को रूप बदंता देख कर. मोहिनी भी अपने अश्ली रूप में आ जाती है. उसका वो रूप इतना भयानक और डरावना था की पब अपने बिगड़े हुए रूप में भी उसके सामने बहुत हैंडसम लग रहा था.

पब – व्व्व्हःहा कितनी सुन्दर हो तुम…

ये शब्द सुन कर मोहिनी का दिल भर गया. किसी दानव ने भी उसके इस रूप की कभी भी टैरिफ नहीं की थी. फिर उससे बहुत जायद सुन्दर दानव को अपनी टैरिफ करता सुन मोहिनी खुश हो गयी. और सरमने लगी. उसको सरमाता देख माहि को उलटी आने को हो गयी इतनी बुरी जो दिख रही थी.

पब – मोहिनी अब तो सर्मना छोड़ कर मेरे गले लग जाओ..

मोहिनी भी पब के गले लग गयी. तभी माहि ने अपना एक नाख़ून (नेल) को पब के हाथ वाली जगह पैर घुसा दिया.. और कमल हो गया नाख़ून मोहिनी को चूब भी गया. और उसकी आअह्ह्ह भी निकल गयी. ये देख कर माहि ने अंकिता को मन में कहा की वो तलवार ुधा कर मोहिनी को मार दे.

अंकिता – पैर माहि हो क्या रहा है ये कहा से आ गए. और ये क्या उलटी सीडी बाते कर रहे है?? उसका फेस इतना बुरा कैसे हो गया??? यदि अभी मेने मोहिनी को मारा तो उनको भी लगेगी और नाब hi लगी तो वो फिर मुझसे रोड जायेगे.

माहि – अंकिता तुम टाइम वास्ते मत करो जो कहा है वो करो फिर समजती हु तुमको सब. उनकी चिटा मत करो वो नहीं है यहाँ. मारो इसको अभी. इसको अभी मारा जा सकता है.

अंकिता माहि की बात मान कर अपनी तलवार ुधा लेती है और उसकी छाती में उत्तर देती है. और फिर एक बार निकल कर फिर पेट में घुसा देती है. लगातार 4 हमलो में मोहिनी का अंत भी हो जाता है. मोहिनी को मारा देख कर माहि रहत की सास लिटी है और अपना मायाजाल हटा लेती है. और फिर अंकिता को सब समजती है की क्या हुआ और कैसे. अंकिता भी माहि की बहुत टैरिफ करती है. सच में माहि ने आज कमल कर दिया था. मंत्रो के साथ मंद का भी बहुत अच्छा इस्तिमाल किया था. पैर वो ये सब अंकिता की वजह से hi कर पायी थी कियोकि अंकिता ने मोहिनी को संभल कर उसे ये सब करने का मौका जो दिया.



सन 5 (5 रय, 3 S.C. और गुरु, कामिनी, सविता, जुली) (इसको शार्ट में ख़तम कर रहा हु)


गुरु और सविता ने रय को सँभालने का जिम्मा उड़ाया तो कामिनी और जुली ने S.C. को सँभालने का. गुरु और कामिनी ने गन विथ सीलेंसर ले राखी थी तो जुली और सविता ने तलवार. इनको जो भी मिलता उसको मार देती. जो भी उन चारो टीम्स के बिच आने की कोसिस करता वो मारा जाता. केवल एक रय hi इनकी नजरो से चूक गया और बेसमेंट में जा पंहुचा एरिका के पीछे. नहीं तो जो भी इसके बिच में आता. या तो उसके माथे पैर बिंदी का निशान (गोली का निशान) होता या फिर तलवार उसके गले के आर पार. बिना किसी को मौका दिए इन चारो ने उन चारो के रस्ते को साफ़ किया था.

जब सलोनी के लिए गुरु को पुकारा गया था तब गुरु एक रय के पीछे थी उसका शिकार करने के लिए. इणलिए hi गुरु ने कामिनी को वह भेज दिया. इन चारो की वजह से hi वो सब अपने अपने शिकार को बिना किसी दूसरे की नजर में आये मार पाए थे. अंकिता और माहि तो पब के रूम में घुस कर दूर बंद करना भूल गयी थी. और पास में बैठा अंधकासुर उनको देख और सुन सकता था पैर गुरु ने ऐसा होने नहीं दिया. उसने पब के रूम को तुरंत बंद कर दिया. ऐसे hi एरिका को टेरेस से बेसमेंट तक जाते टाइम जो भी बिच में आया उसको सविता ने hi परलोक पहुंचाया था.

कुछ hi देर में ये सब अपने अपने टारगेट को हिट करके दानव सेना के बेस में पहुंच गए थे. और सभी ने अपनी -2 जीत की खवार सुनाई. सभी बहुत खुश हो गए आखिर ासम्भव सा दिखने वाला काम सभी की एकता और एक साथ मंद से की कोसिस ने संभव कर दिया था. एकता में शक्ति है ये आज इन सभी ने सिद्ध कर दिया. इनके एक जुट होने से ये जीत गयी और वो सभी अलग -2 घूम रही थी. उनकी कोई प्लानिंग नहीं थी इसलिए वो हार गए. या ये भी कहा सकते है की सच्चाई के साथ वालो की नियति ने भी मदत की थी.

जो भी हो ये सभी जीत चुकी थी केवल पारी को छोड़ कर सभी ठीक थी. सलोनी अब तक पूरी नार्मल हो चुकी थी. ये जीत तो गयी थी पैर खतरा अभी टाला नहीं था. अभी 44 रय बाकि थे. और वो भी एक बड़ी चुनौती थी. और इसके लिए गुरु ने माहि, मंजू, सविता, जुली, सलोनी, ेबेचा, एरिका और खुद को चुना. अंकिता, पारी, नैना को यही छोड़ दिया गया था. और नैना से बोलै की यदि तुम किसी भी रय को देख सको तो उसके वेयर में बताये.

अंकिता और कामिनी को पारी और ऐडा के लिए छोड़ा गया था. और अंकिता कहा नहीं रही थी पैर वो भी बहुत कमजोर हो गयी थी मोहिनी के वॉर से. पैर अभी तो उसे कैसे भी अपने भाई और सोनल के उप्पेर मद्र रहे खतरे को हटाना था तो वो अपने को कमजोर कैसे होने देती. पैर गुरु भी उसकी कंडीशन को समाज गयी थी.

जुली ने इस काम के लिए अपने साथ दानव सेना की कुछ चुनिंदा लड़कियों को भी ले लिया था. उसमे कुछ जासूस थी तो कुछ अच्छी फाइटर थी. ये लोग दो टीम में बात गए थे. एक टीम बैक एरिया के पहाड़ी जांगले में में गयी तो एक झरने की तरफ गयी थी. एक टीम की फाइटर थी सलोनी तो दूसरी की ेबेचा. सलोनी ने अपनी तलवार को उस ब्लैक शक्ति से भर लिया था जो शादी के टाइम पैर दयासुर ने उसको दी थी. और इसका नतीजा भी ये था की सलोनी दानवो पैर दानव बन कर hi टूटी थी. सलोनी की उस शक्ति और उसकी दानवीय शक्तियों के आगे किसी भी रय की एक नहीं चल रही थी. तो दूसरी टीम में ेबेचा ने भी अपनी तलवार से कहर बर्षा रखा था. तलवार चलने में तो पहले से hi एक्सपर्ट थी और अब वो तलवार को चाँद हंस तलवार की कुछ शक्तिया भी मिल चुकी थी. तो कोई दानव इसके आगे ज्यादा देर ठीक नहीं प् रहा था. गुरु, सविता, जुली, मंजू, माहि, एरिका इन दानवो को केवल घायल hi कर प् रहे थे या इनका धयान बता प् रहे थे. पैर ये उस भीड़ को ेबेचा और सलोनी के पास तक नहीं जाने दे रही थी. 2-3 रय से ज्यादा एक बार ने ेबेचा और सलोनी तक पहुंच hi नहीं पते थे. दोनों टीमों ने बड़ी hi चतुराई से. और अपनी टीम को बचते हुए एक -2 करके सभी रय को मूट के खत उत्तर दिया. ेबेचा और सलोनी की तलवार उन सभी के लिए मूट बन कर नाची थी. तो सविता ने तो उनको ुधा ुधा कर जैसा फेका की दम तोड़ गए. गुरु ने संभु के सभी चलो को रय से लड़ाई सुरु होने से पहले hi मार दिया था ताकि यहाँ से कोई जिन्दा न जा पाए. और हुआ भी ये hi अभी संभु के भेजी गयी टीम का कोई भी दानव या मानव जिन्दा नहीं था.

कुछ hi देर में सभी हवेली लोट आये थे. पैर अभी हवेली की हालत टूटे हुए कांच के महल के जैसी थी. हार तरफ लाशे, खून, तोता हुआ सामान, बिखरा हुआ घर थके हुए घर के लोग. इतने दिनों की सभी तैयारी चकना चूर होगी थी. खाना भी बिखरा पड़ा था. ये सब उस जंग को तो जीत गए थे. पैर सामने की कंडीशन ने सभी की आखें नाम करदी थी. कहा 2 दिन से की हुयी इतनी तैयारी और अब खाना खिलने को भी नहीं था. अंकिता, कामिनी, ऐडा, पारी, पेय, माउद, काजल, जय भी बेस से उप्पेर आ गए थे. पारी की कंडीशन पहले से ठीक थी. पैर ऐडा की कंडीशन ख़राब हो रही थी. और वो भी सभी की तरह दुखी थी. पब की सभी पत्नियों की आखें नाम थी. जान तो बचा ली थी. पैर अब इज्जत डाव पैर थी. एक भाई जिंदगी में पहली बार उसके घर, उसकी सुसराल आ रहा था. एक बहन एक लम्बे ारसे के बाद अपनी भाभियो से मिलने आ रही थी. उनके सामने घर के इस हाल को देख कर सभी के दिल टूट रहे थे. वो सभी हताश हो रही थी. एक तो सरीर पैर कमजोरी थी. हिम्मत जवाब दे रही थी सभी की. पैर इज्जत बचने के लिए अभी एक और युद्ध लड़ना था.

पैर इस युद्ध की कमान संभाली जय ने. और उसका साथ देने के लिए खड़े हुए काजल, सैंडी और मल्टी (रखा से दानव सेना की तरफ से लड़ने वाली लड़की) सबसे पहले तो जय ने इन सभी को रेस्ट करने के लिए भेज दिया. पैर गुरु और कामिनी नहीं मानी वो दोनों यही रुक गयी. (भाइयो पब की सभी पावर गर्ल्स क्यों रेस्ट करने चली गयी इसका भी एक कारन है. और वो ये है की इन सभी की जीवन शक्ति एक दम मं लेवल पैर पहुंच गयी थी. एक तो बहुत साडी इन्होने hi उसे कर ली और कुछ पब ने, बल्कि पब को तो कुछ मिला hi नै, अब पब ने अपना वो युद्ध यानि की सन 6 कैसे जीता या उसके साथ क्या हुआ, ऐडा ने तो युद्ध किया hi नहीं फिर ऐडा की कंडीशन ख़राब कैसे??)
 
अपडेट 247

सन 6 (ह. साधु और पब, अवनि)

H.sadhu और पब आमने सामने खड़े है. ह. साधु को सपोर्ट के लिए बाकि के सभी हवन कर रहे है. अवनि पब के साथ में कड़ी है.

ह. साधु पब से बिना कुछ बोले कुछ तांत्रिक मंत्रो को पढ़ कर पब के उप्पेर छोड़ देता है पब भी उसके जवाब में अपने मंत्रो को पद उसके उप्पेर छोड़ता है. दोनों के हाथ से निकलने वाली रौशनी टकरा जाती है. ये देख कर ह. साधु समाज जाता है की ये भी तांत्रिक क्रिया जनता है. वो फिर से वॉर करता है पैर इस बार पब वॉर नहीं कर पता. पब उससे बचने के लिए दुश्री तरफ कूदता है. और ये देख कर ह. साधु के फेस पैर मुस्कान आ जाती है. पब सभी किसी सोच में था. (पब सोच रहा था की उसको मंत्र याद क्यों नहीं आ रहे?? वजह ये थी की माहि अपनी एनर्जी उसे कर रही थी. तो वो पब के काम नहीं आ प् रही थी) पब के समाज नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है. तभी ह. साधु अपना एक और वॉर करता है. पैर ये वॉर था फैलते हुयी रौशनी का. जैसे टोर्च जलने से रौशनी निकलती तो एक छोटे बल्ब से है पैर सामने चारो और फेल जाती है ठीक वैसे hi ये डार्क ब्राउन रौशनी चारो और फैलती जा रही थी. जिस पैर भी पड़ती वो चीज गलने लगती. कुछ hi पल में वो पब को भी घेरे में लेने hi वाला था. पब उस हमले के लिए कुछ कर भी नहीं प् रहा था. तो पब अवनि का हाथ पकड़ कर टेलिपोर्ट हो जाता है और उस ह. साधु के पास पहुँचता है.

पब अपनी पूरी ताकत से ह. साधु को मुक्का मरता है पैर उसका मुक्का हवा में hi रुक जाता है वो ह. साधु तक पंहुचा hi नहीं. पैर ह. साधु ने अपने हाथ से पब को एक हल्का रा दक्का दिया तो पब अवनि के सहित दूर का कर गिरा. दोनों को चोट लगी. अवनि ने उड़ते हुए बोलै – पब ये क्या हो रहा है तुम उसकी तांत्रिक शक्तियों का जवाब क्यों नहीं दे रहे??

पब - अवनि में कोसिस तो कर रहा हु पैर कुछ कर नहीं प् रहा. हर मंत्र आधा अधूरा hi नजर आ रहा है. ऐसा लगता है माहि की जीवन शक्ति काम हो गयी है. पता नहीं माहि को क्या हुआ है जो मैं उसकी शक्ति को उसे hi नहीं कर प् रहा.

अवनि – तुम मंजू की शक्ति से भी तो इसको जवाब दे सकते हो..

पब – हाँ ठीक कहा…

फिर पब अग्नि तत्त्व को याद करके हाथ आगे करता है तो आग के कुछ गोले ह. साधु की तरफ फेक देता है. ह. साधु भी इसके जवाब में जल की धरा उन आग के गोलों पैर छोड़ता है. आग और पानी की तकर एक दूसरे को खता कर देती है.

ह. साधु – अच्छी कोसिस थी बच्चे. इस वॉर में दम था. फिर तरय कर शायद तुजीत जाये… हाहाहाहाहा

ऐसा लग रहा था की वो पब से खेल रहा है. पब के मंद पैर लगातार हमले हो रहे थे. और अवनि के मंद को प्रोटेक्ट करने में भी पब अपनी शक्ति उसे कर रहा था. पैर ये भी पब का साथ नहीं दे प् रही थी. तो पब एक बार फिर कोसिस करता है पैर इस बार तो मंजू की शक्ति भी उसका साथ छोड़ गयी.

तभी ह. सभु फिर हमला करता है तो ये देख कर अवनि आगे आ कर उसका जवाब देती है. ये देख कर ह. साधु एक बार फिर मुस्कुरा जाता है. तब अवनि पब से बोली – पंकज मैं कुछ देर इसको संभालती हु. तब तक तुम कुछ सोचो. नहीं तो हम दोनों का मरना तय है.

अवनि को ये शक्तिया मणि जी ने hi दी थी. और इन शक्तियों को माहि, गुरु और मंजू ने निखारवा दिया था. अवनि आज पहली बार ऐसे लड़ रही थी. उसको दर लग रहा था. पैर पब कमजोर हो चुक्का था. और यदि अब जिन्दा रहना था तो अवनि को लड़ना hi था. और अवनि इस टाइम पब की ढल बन कर कड़ी हो गयी थी. पैर अभी उसके मंद पैर हमले हो रहे थे. वो अपनी शक्तियों को ठीक से उसे नहीं कर प् रही थी. और ह. साधु के हैलमे उसको चोट पंहुचा रहे थे.

पब अवनि को लड़ता देख पहले धयान मैं बैठा. तो उसने देखा की एरिका, सविता की जीवन शक्ति तो है पैर बाकि सभी की जीवन शक्ति बहुत hi काम है. जहा तक की पारी की भी. वो सोच में पद गया की पारी की शक्ति को तो उसने उसे hi नहीं किया. हो क्या रहा है हवेली पैर. ये सब इतनी कमजोर कैसे पद गयी है. और यदि कमजोर हो भी गयी है तो अपनी जीवन शक्ति को बढ़ाने के लिए धयान में क्यों नहीं बेथ रही.

पब देखता है की उसकी और ऐडा की मिली झूली जीवन शक्ति पूरी थी. तो सोचता है की यदि यहाँ जीतना है तो अपनी hi जीवन शक्ति से लड़ना होगा. सविता की जीवन शक्ति है तो सरीर मजबूत बना hi रहेगा. पैर अपनी कोण सी शक्ति का उसे करे?? उसे ाष्टिका देवी की शक्ति का ख्याल आता है फिर सोचता है की वो देविया शक्ति है उसको यदि मेने साधु से लड़ने में लगाई तो कही माँ नाराज न हो जाये.

फिर उसको याद आता है पहाड़ो के देव का वर. तो वो कुछ सोचने लगता है. और अपना प्लान बना केर मुस्कुराता हुआ खुद से बोलै – आज दानव बनना hi पड़ेगा.

फिर पब अवनि को बोलै – अवनि तुम इसको 10 मं और सम्भालो मैं अभी इसका इलाज करता हु.

फिर पब पहाड़ो के देव को याद करता है. और देखते hi देखते 50 फ़ीट से भी बड़ा हो जाता है. और फिर पब अपने अंदर की दानवीय शक्तियों के एक अंश को अपने उप्पेर हावी होने देता है. पब अभी एक दम दानव लग रहा था 50 फ़ीट ुचा, फेस पैर कोई चेंज नहीं था. पैर बहुत जोर -2 से हंस रहा था. उसके हाथसों ने सभी को डरा दिया था. अवनि को भी लगा की अब वो जीत जायेगे. पब के उस रूप को देख ह. साधु पब पैर अत्तावक करने को मुड़ता है तो अवनि उस पैर एक लाज़र लाइट छोड़ देती है. ह. साधु अवनि के हमले से तिलमिला कर बोलै – बस बहुत हुआ खेल अब तू देख बच्ची मैं तेरे साथ क्या करता हु.

यहाँ पब एक बहुत hi बड़ा पेड़ जड़ से hi उखड़ता है और उसे जड़ो की तरफ से पकड़ कर हवन कर रहे साधुओ के उप्पेर झाड़ू की तरह चलने लगता है जैसे वो उन पेड़ से उस मैदान की झाड़ू लगा रहा हो. ये देख कर सभी साधु कहा वह भागने लगते है. पैर पब को तो इसमें बड़ा मज़ा आ रहा था. सभी के हवन बंद हो गए. हवन कुंड की आग पेड़ से चारो और फेल गयी. भागते हुए साधुओ पैर पब अपना पेअर रख कर उनको कुचलने लगा. फिर एक hi किक में उस बड़े से आश्रम को भी बिखेर कर रख दिया. ये सब करने में उसे बस 5-7 मं hi लगे थे. पैर सुरु के 2-3 मं में hi ह. साधु ने अवनि को बेहोश कर दिया था. और वो पब पैर हमला करने की कोसिस कर रहा था. पैर हवन के नष्ट होते hi उसकी ताकत भी ख़तम हो चुकी थी. उसके छोटे मोठे वॉर से पब के इस दानवीय रूप पैर कोई ाशर नहीं हो रहा था.

पब ने जब देखा की ह. साधु ने उस पैर हमला किया है तो उसने अवनि की तरफ देखा तो वो एक तरफ पड़ी हुयी देखे दी. ये देख कर पब को गुस्सा चढ़ गया. उसने तुरंत एक पेड़ उखड कर ह. साधु के उप्पेर फेक दिया. ह. साधु उसमे दाब गया. पब अपने गुस्से को बचे हुए और भागते हुए बाकि के साधुओ पैर उतरने लगा. कभी पहाड़ ुधा कर फेकता तो कभी पेड़. तो किसी को अपने पैरो से कुचल देता. मूट के नंगे तांडव के बाद जब पब ने अपने आकर को छोटा किया तो उसके सरीर में बहुत कमजोरी आ चुकी थी. उसने देखा की उसकी, ऐडा की और सविता की जीवन सकती भी बहुत काम हो गयी है. वो जैसे hi अवनि की तरफ बड़ा तो उसे एक टूटे पेड़ के निचे हलचल दिखी. वह जब डायन दिया तो वो ह. साधु पेड़ के निचे से निकलने की कोसिस कर रहा था. पब ये देख कर गुस्से में अपनी तलवार को याद करके साधु के पास पंहुचा और उसकी एक आखों में तलवार उतर दी. तलवार में पावर तो नहीं थी. पैर तलवार की धार अपना काम कर गयी उस घायल ह. साधु की आखों से खून की नदिया बहने लगी और वो भी मार गया.

पब उस साधु को मार कर अवनि के पास गया. और उसको चक करने लगा जब उसने देखा की अवनि केवल बेहोश हुयी है तब उसकी जान में जान आयी. ह. साधु तो उसको मार hi देता पैर ह. साधु को पब को रोकने की जल्दी थी. कियोकि उसने सभी को मरना सुरु कर दिया था. और ह साधु की शक्ति भी घटने लगी थी. कियोकि हवन और वो तांत्रिक किरिया के मंत्र बंद हो चुके थे. इसलिए वो अवनि को बेहोश करके पब को रोकने में लग गया.

पब ने अपना बेग खोजै और फिर उसमे से पानी की बोतल निकल कर अवनि के फेस पैर पानी मारा. अवनि को होश आ गया. अवनि को बहुत छोटे लगी हुयी थी. पैर अभी तो पब में भी शक्ति नहीं थी की वो अवनि को हील कर सके. तो अवनि हिम्मत जूता कर कड़ी हो गयी और पब से बोली – चलो यहासे हमको आगे चलना चाहिए. कही फिर कोई नयी मुसीबत न आ जाये. पब भी अवनि की बात मान कर खड़ा हुआ. और अवनि का हाथ पकड़ कर थोड़ी थोड़ी दूर करके टेलिपोर्ट हो कर उस मैदान से कुछ दूर आ गया. यहाँ जब पब ने अपनी दिव्या दृष्टि से देखा तो यहाँ कोई भी खतरा नहीं था. दोनों की कंडीशन भी सही नहीं थी. दोनों वही पैर एक पेड़ के निचे सो गए. दिन में सूरज की रौशनी में पेड़ की चाव और ठंडी हवाओ ने दोनों को रहत देना सुरु कर दिया था.

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पब की सभी पावर गर्ल्स रेस्ट करने के लिए एक रूम में पहुंची पैर वो जानती थी की अभी रेस्ट करने का टाइम नहीं है. उनकी जीवन शक्ति बहुत काम है. और फिर ऐडा की हालत बता रही थी की पब अभी खतरे में है. और ये hi वजह थी उनकी सभी के सामने दुखी होने की. वो सभी चाहती थी की वो सोनल और अविनाश के आने की तैयारी करे. हवेली को फिर से ठीक करे. पैर उनके सरीर में जीवन शक्ति के आभाव में वो ये करने की सोच भी नहीं सकती थी. पहले पब के साथ युद्ध के मैदान में उसके लिए जीवन शक्ति जुटाना उनका सबसे पहला फर्ज था. और ये करने के लिए hi वो रेस्ट करने का बोल कर आयी थी.

इन सभी ने सोच लिया था की पब के लिए यदि उनको सोनल और अविनाश की नजर में गिरना भी पड़े तो कोई बात नहीं. उनको एक उम्मीद तो थी की गुरु, कामिनी, काजल और जय शायद थोड़ा बहुत हवेली को ठीक कर दे. अभी टाइम बहुत काम था और इतनी देर में तो उनकी जीवन शक्ति भी पूरी नहीं होनी थी. फिर हवेली को देखने या ठीक करने की वो सोच भी नहीं सकती थी. उदार पब और अवनि आराम कर रहे थे और ीदार ये सब अपनी जीवन शक्ति को बढ़ाने के लिए धयान में बेथ गयी थी.

गुरु, कामिनी, जय और काजल ने हवेली को फिर ठीक करने का जिम्मा ुधा लिया. गुरु और कामिनी भी थकी थी. पैर अभी आराम का टाइम नहीं था.

कामिनी और काजल ने किचन संभाला तो सैंडी, पेय और माउद ने कुछ लड़कियों के साथ हवेली को रे सेट करना सुरु कर दिया. और गुरु, जुली, जय ने 4-5 लड़कियों के साथ उन लाशो को टिकने लगाना सुरु कर दिया. जब गुरु उन लाशो को टिकने लगाने लगी तभी एक सक का फ़ोन बज गया. गुरु ने स्क्रीन को देखा तो उस पैर गुरूजी नाम लिखा था. ये देख कर गुरु की भो तन्ना गयी. उसने फ़ोन उड़ाते hi बोलना सुरु कर दिया. संभु ने बस hello बोलै था बूत गुरु तो सुरु हो गयी.

गुरु – सुन बे त्रिकाल के पालतू कुत्ते. सेल हरामी के जाने, गांडू, सेल तेरी गांड में कीड़े ज्यादा hi कुल बुला रहे है न. तो सेल डंडे पैर बेथ कर खुजली मिटा ले. भड़वे.. किस लिए फ़ोन कर रहा था इस झतु को तू?? ये जानना था की हमारा क्या हुआ. तो सुन फटे हुए निरोड के नतीजे, तेरे भेजे हुए निरोड पहात गए है. और सालो से लाल पानी (खून) निकल रहा है. साले कोई जिन्दा नहीं बचा, और यदि तेरी गांड में दम हो तो इस बार इनके साथ तू भी आ जाना. सेल तेरे को अपनी झांटो के बालो से बंद कर तेरे मुँह पैर कुत्तो से न मुट्वाया न. तो सेल मेरा नाम भी गुरुपित नहीं. लुंड के सफ़ेद माखन तू अपनी भूचरत्व सेफ्टी शील्ड के बारे में सोच कर ये मत सोचिये की मैं तेरा कुछ नहीं बिगड़ सकती. सेल तेरी शील्ड को तो गांड की तरह फाड् कर रख दूगी. जैसे गांड फटने पैर कुछ फटता हुआ नहीं दीखता न वैसे hi साले तेरी शील्ड के फटती हुई नहीं दिखेगी. … टूंणन्न टूंणन्न..

गुरु की इतनी गालिया सुन कर संभु ने फ़ोन काट दिया. गुरु की गलियों ने मंद को हैंग कर दिया. संभु को तो अभी अपने आदमिये के मरने की खवार का कोई दुःख या गुस्सा नहीं आ रहा था. बल्कि वो केवल गुरु की गलियों से हैंग हो कर उनको अपने मंद से निकलने की कोसिस कर रहा था. पैर मंद में केवल गुरु की गालिया hi गूंज रही थी. संभु ने अपने पुरे जीवन में भी इस तरह की गालिया नहीं सुनी थी. इतनी गालिया सुन कर तो संभु जैसे इंसान को भी अपने उप्पेर गईं आ रही थी. और गुस्सा केवल इस बात पैर आ रहा था की उसने फ़ोन मिलाया hi क्यों…… :lol1::lol1::lol1::lol1:
 
थैंक यू भाई फॉर ग्रेट कमेंट... मज़ा आ गया..

भाई पब की फाइट पोस्ट कर दी है. और जय ये सब जल्दी HI ठीक करेगा. ऐडा की पावर से HI पब लड़ पाया वह ... भाई ये जो फाइट सन थे ये मेने पब की पत्नियों की पावर दिखने के लिए डेल थे. हीरो की पावर तो सभी ने दिख HI ली है और आगे HI देखने को मिलेगी HI पैर इन लड़कियों की पावर भी तो शो होनी चाहिए थी. सुरु से HI ट्रेनिंग कर रही है...
 
अपडेट 248

गुरु की इतनी गालिया सुन कर संभु ने फ़ोन काट दिया. गुरु की गलियों ने मंद को हैंग कर दिया. संभु को तो अभी अपने आदमिये के मरने की खवार का कोई दुःख या गुस्सा नहीं आ रहा था. बल्कि वो केवल गुरु की गलियों से हैंग हो कर उनको अपने मंद से निकलने की कोसिस कर रहा था. पैर मंद में केवल गुरु की गालिया hi गूंज रही थी. संभु ने अपने पुरे जीवन में भी इस तरह की गालिया नहीं सुनी थी. इतनी गालिया सुन कर तो संभु जैसे इंसान को भी अपने उप्पेर गईं आ रही थी. और गुस्सा केवल इस बात पैर आ रहा था की उसने फ़ोन मिलाया hi क्यों…… हाहाहाहा

यहाँ गुरु ने फ़ोन काटने पैर गुस्से ने आ कर फ़ोन को फेक कर मारा. और फ़ोन के चिथड़े उड़ गए. जब गुरु ने अपने गुस्से को काबू करके चारो तरफ देखा तो वह 2 लड़किया अपने कानो ने ऊँगली दाल कर बैठी थी. जाया वह से भाग गया था शर्म के मारे. जुली के मुँह पैर घोर आश्चर्य के भाव थे. जब गुरु से जुली को हिलाया तो जुली ने होश में आते hi गुरु के पेअर पकड़ लिए और बोली – गलियों वाली देवी की जय हो.. मैं आज तक ये सोचती थी की मुझको hi गन्दी-2 गालिया आती है. आप तो इसमें भी गुरु हो. अब तो आपसे इसकी भी ट्रेनिंग लेनी hi पड़ेगी…

गुरु उसे ुधा कर बोली – चल हाट मैं कहा गली दे रही थी वो तो थोड़ा गुस्सा आ गया तो मेने उस मादरचोद को बस एक दो गली सुना दी. नहीं तो मैं कभी गली देती भी हु..

जुली – ओह्ह्ह ये 1-2 थी तो जब आप तबियत से गली देती होगी तब तो सामने वाला मार hi जाता होगा. सच ने आप गलियों वाली देवी है… गलियों वाली देवी की जय हो जय हो….

गुरु – चल चल अब ड्रामा बंद कर और काम पैर लग नहीं तो वो लोग आ भी जायेगे और हमारा काम भी पूरा नहीं होगा.

फिर से ये सब काम में लग जाते है. और देखते hi देखते हवेली फिर से खूबसूरत हो जाती है. हाँ कुछ चीजे टूट गयी थी. पैर उन टूटी हुयी चीजों को हटा दिया था. किमिनी और काजल ने मिल कर सभी के लिए लंच भी तैयार कर लिया था. अभी टाइम भी बहुत हो गया था. पैर वो लोग अभी ताका ए नहीं थे. वो सब भी अपनी शदना से अपनी थोड़ी बहुत जीवन शक्ति को प् कर जल्दी वाला रेडी (नहीं तो भाई लेडीज को तैयार होने में कितना टाइम लगता है ये दुनिया जानती है) हो कर हॉल में आ चुकी थी. अभी इनको आये 3-4 मं hi हुए थे की दूर खोल कर सोनल अंदर आती है. और उसके पीछे -2 अविनाश आ जाता है. सोनल और अविनाश को देख कर सभी की आखों में चमक आ जाती है. सभी के फेस पैर एक स्माइल खिल जाती है.

उन सभी को देख कर सोनल के फेस पैर भी ख़ुशी आ जाती है. और वो सभी से मिलने लगती है. कुछ से तो वो पहली बार hi मिल रही थी. सभी लेडीज इन मेल मिलाप में लग जाती है. पैर अंकिता की आखें तो अविनाश पैर hi तिकी थी. और अविनाश की आखें अंकिता पैर. अविनाश के फेस पैर बहुत सरे भाव आ और जा रहे थे. पैर मुँह से कुछ भी नहीं निकल रहा था अंकिता भी बहुत देर तक अविनाश को देखती hi रही. और जब अविनाश भी उसे देखते हुए खड़ा hi रहा तो अंकिता ने बहुत hi धिरे से बोलै – भाई..

अविनाश – दीदी..

बस फिर ये दोनों और कुछ न बोल पाए और दोनों एक दूसरे के गले लग गए. दोनों की आखें नाम थी. और चेहरा ख़ुशी से चमक रहा था. दोनों के इस भारत मिलाप को और सभी शांति से खड़े देख रहे थे. थोड़ी देर बाद कामिनी बोली.

कामिनी – अंकिता अब क्या अपने भाई को यहाँ पैर hi खड़ा रखने का इरादा है. या कुछ चाय नाश्ता भी करवाना है. देखो कितनी दूर से आया है थक रहा होगा…

कामिनी की बात से अंकिता को भी होश आता है. और फिर सुरु होता है खातिर का डोर, सोनल और अविनाश इन सब के लिए किसी व्विप गस्त से काम नहीं थे. दोनों की जैम कर खातिर दरी हो रही थी. वो सब ये भी भूल गयी थी की अभी कुछ हॉर्स पहले वो जिंदगी और मूट से लड़ रही थी.

खातिर दरी के बाद अंकिता अविनाश को राखी बैंडिट है. राखी बैंडिट टाइम भी अंकिता की आखें नाम थी. जीवन में ये सुच उसको आज मिल रहा था. नहीं तो हर बहिन को ये ख़ुशी बचपन में hi मिल जाती है. पैर अंकिता की किस्मत hi ऐसी थी की 2 भाइयो के होते हुए भी आज 27 साल की आगे में वो राखी बांध रही थी. और अंकिता को राखी बंडे देख नैना भी अपने आशु नहीं रोक पायी. उसको भी अपने भाई की याद आ गयी. उसका वो भाई जिसको एक तांत्रिक ने (साधु) चीन लिया था.

नैना अपने आशु और अपना दुख छुपाने के लिए ुध कर जाने लगी तो अंकिता ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली – नैना क्या हुआ?? मुझसे भी अब अपने आशु छुपाएगी??

नैना – नहीं अंकिता, पैर आज अपने उस भाई की याद आ गयी जिसके लिए मैं पहले जीती थी. वो hi था मेरे जीने की वजह. और देखो न अंकिता इस जालिम दुनिया ने मुझसे मेरा वो भाई भी चीन लिया.

अविनाश – नैना क्या हुआ यदि भगवन ने तुमसे तुहारा एक भाई चीन लिया तो… ये दूसरा भाई तो है न… मैं भी आज तक बहिन के प्यार के लिए तरसा हु. तो क्या तुम मुझको एक छोटी बहिन का प्यार नहीं डौगी?? बड़ी बहन का प्यार देने के लिए तो अंकिता दीदी है. पैर छोटी बहन नहीं है तो तुम बनोगी मेरी छोटी बहन??

नैना भी अविनाश की बात से खुश हो जाती है. और अविनाश के गले लग जाती है. और वो भी अविनाश को राखी बढ़ती है. फिर सुरु होता है गिफ्ट्स का दूर… लता, सोनल और अविनाश की की हुयी पूरी शॉपपिंग यानि की इन सभी के गिफ्ट्स अविनाश के साथ आये आदमी अंदर रख गए थे. तो अंकिता और इन सभी ने भी सोनल और अविनाश के लिए आये गिफ्ट्स निकल लिए.

अब अविनाश तो एक साइड में बेथ कर बस देख रहा था. महाभारत तो इन सब लेडीज ने मचा राखी थी. इतनी साडी लड़किया और फिर इतने सरे गिफ्ट्स.. महाभारत तो होनी hi थी…

अभी श्याम के 5 बजे का टाइम था. सोनल अपने रूम में रेस्ट कर रही थी. और अविनाश अपने रूम में. सोनल के साथ गुरु भी लेती हुयी थी. गुरु सोनल को सब कुछ डिटेल में बता रही थी. की ेबेचा के आने से उनके बिच में मिस अंडरस्टैंडिंग क्यों हुयी और फिर कैसे सोल्वे हुयी. ये दोनों बात कर hi रही थी की तभी सोनल का फ़ोन बजा. सोनल ने फ़ोन देखा तो अदिति का कॉल था. अदिति का कॉल देख कर सोनल सोच में पद गयी. पैर फिर भी कॉल रेसिवे करके बोली – hello

अदिति – hello मम, मैं अदिति बोल रही हु. आप जल्दी से अपने भाई या अपनी भाभियो को बोलो की वो लोग जहा भी है वह से भाग जाये. उन पैर हमला होने वह है. उन सबको भगा दो मम नहीं तो कोई नहीं बचेगा….

सोनल – क्या बाक रही हो अदिति?? पागल तो नहीं हो गयी हो?? मैं अभी अपनी भाभियो के पास hi हु… और कोण करेगा मेरी भाभीय पैर हमला.. तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न??

अदिति – हाँ अब मेरा दिमाग ठीक है पहले मैं सच में पागल थी पैर अब मुझको सब समाज आ रहा है मम.. देखिये मम मेरी बात समजिये मेरे बाप यानि संभु ने आपके भाई यानि दानवपुत्र की पत्नियों को मरने के लिए बहुत से गुंडे भेजे है. और उनमे से 3 तो इन्शान hi नहीं लग रहे थे. वो शकल से hi दानव जैसे थे…

अदिति की बात सुन कर सोनल सानन हो गयी. जो राज अदिति या किसी और को पहले नहीं पता था भी वो बात अदिति ने बोली है तो इनका मतलब है की अदिति ने ये संभु के मुँह से सुना या देखा है तभी वो ये सब बोल रही है. यानि की सच में खतरा है.

सोनल – अदिति कब कब सुनी थी तुमने ये बात और कहा?? हमला कब होगा??

अदिति – मेने तो ये सब कल शयाम को सुना था. पैर अपने बाप के अशली फेस को देख कर में टूट gayi..(rone की आवाज) पता नहीं पैर किसी तरह मैं वह से घर तो आ गयी पैर घर आ कर रट -2 मैं बेहोश हो गयी. सुबह जब मम्मी उड़ाने आयी तब उन्होंने देखा की मैं बेहोश हु तो उन्होंने डॉ. को बुलाया. और डॉ. मुझको नीड का इंजेक्शन दे कर चला गया और मम्मी से बोलै की इनको किसी बात का दुःख है. और टेंशन भी बहुत ले राखी है गम और टेंशन की आदिकता से बेहोश हो गयी है.

सोनल – फिर तो तुम्हारी माँ और डैड दोनों को पता होगा इस बात का. और उन्होंने तुमसे पूछा भी होगा…

अदिति – मम मैं आपको सब बताऊगी पहले आप अपनी भाभियो को सेफ करिये..

सोनल – हम्म ठीक कहा.. पैर तुम ये बात अभी किसी से भी मत कहना.. तुमको मेरी कसम है अदिति किसी से भी कुछ भी मत कहना…

कॉल एन्ड..

सनल गुरु से – गुरु जल्दी करो.. संभु ने फिर से कुछ गुंडे भेजे है तुम सब कर अटैक करने को. तुम सबको कही सेफ जगह जाना चाहिए…

गुरु – सोनल आप पहले ये बताओ कोण है ये अदिति?? कोण उसके माँ डैड?? अदिति को कैसे पता चला की हमला होने वाला है??

फिर सोनल गुरु को अदिति के बारे में बताती है तो गुरु भी सोनल को बताती है की हालमा पहले hi हो चुक्का है और हमला करने वाले भी मरे जा चुके है. फिर ये दोनों एक दूसरे से इसके बारे में hi बात करती रहती है.

गुरु – सोनल एप क बार अदिति से बोलो की वो ये राज किसी को भी न बताये. और आप भी अदिति और संभु से जुडी कोई भी बात अभी किसी से नहीं बोलेगी. लता जी से भी नहीं…

सोनल – हम्म गुरु तुमने सही कहा.. पैर मुझको अदिति से जल्दी से जल्दी मिलना होगा.. उसको इस टाइम किसी रहरे की जरुरत है कही वो संभु का सच hi किसी को न बता दे.. या संभु को 1% भी अदिति पैर शक हो गया तो वो पता नहीं उसके साथ भी क्या करे…

गुरु – हाँ कल यहाँ से जाने के बाद उससे मिल लेना. उसको संजना जरुरी है. नहीं तो उस हरामी का क्या भरोषा अपनी बेटी को hi न चोदे…

सोनल – हाँ और अब आप भी मेरी बात सुनो. अब जब तक छोटू लूट कर नहीं आता तब तक आप सभी दानव बेस में hi रहोगी. उसका कोई भरोषा नहीं कब हमला फिर से कर दे. आप लोगो का सेफ रहना बहुत जरुरी है.

सोनल एक बार फिर अदिति से बात करती है. और कल मिलने का बोल देती है. ये दोनों फिर से अपनी बातो में लग जाते है. कुछ देर में सब ेके क करके उस रूम में आ कर वही बेथ जाते है. केवल अंकिता और नैना अविनाश के साथ थे. फिर ये तीनो भी सभी को ज्वाइन कर लेते है. और साथ में डिनर करके सोने चले जाते है. सभी ने बहुत मस्ती किट hi डिनर पैर, और उस मस्ती के पालो में अंकिता को भी लगा की सोनल और अविनाश के बिच कुछ है.
 
अपडेट 249

यहाँ जांगले में 3-4 ऑवर के बाद पब और अवनि को होश आता है. अवनि के काफी जगह घाव थे. और उसको दर्द भी हो रहा था. पब जब ुध कर अवनि को देखता है तो उसको दुःख होता है. उसको बचने के कारन hi अवनि को ये छोटे लगी थी. पब अपने अंदर झक कर पता कर लिया था की उसकी wife’s की एनर्जी लेवल पहले से इनक्रीस हो चुके है तो पब अपनी हीलिंग पावर से अवनि को ठीक करता है. और फिर ये दोनों फ्रेश होते है.

अभी शयाम का टाइम था और वो दोनों एक जंगल में hi थे. जंगल डरावना तो नहीं था और न hi पब को वह कोई खतरा नजर आ रहा था पैर वो जिस यात्रा पैर थे उसमे हर कदम पैर खतरा hi था. दोनों ये सोच में पद गए की अब क्या किया जाये. अभी न तो नीड आणि थी. और इस टाइम आगे जाना का मतलब खतरनाक हो सकता था.

काफी देर सोचने के बाद दोनों ने आगे बढ़ने का hi फैसला लिया. वो दोनों बहुत hi सवदानी से आगे बाद रहे थे. दिशा के बारे में तलवार से जान लिया था. कुछ hi देर में दिन ढलने लगा और रात के अंदर में जंगल में आगे जाते हुए दोनों को दर भी लग रहा था. तो दोनों ने दिसिडे किया की यदि कोई खतरा दिखेगा तो वो उसे पहले hi रुक जायेगे. रात में आगे बढ़ते हुए पब ने अपने हाथ में तलवार ले राखी थी सवदानी के लिए. और तलवार की चमक और चाँद की रौशनी में ये दोनों आगे बाद रहे थे. शांत जंगल भी उनको डरा रहा था. रस्ते से कुछ फल तोड़ कर दोनों ने खा लिए थे.

करीब आधी रात को वो एक गेट के पास पहुंच गए. वो गेट किसी घर या माकन का नहीं बल्कि किसी नगर का गेट था. एक बड़ा विशाल लोहे का गेट, और उस गेट के उप्पेर कुछ लिखा था जो आधेरे में दिखाई नहीं दे रहा था. पब ने अपनी दिव्या दृष्टि से देखा तो वह लिखा था – मानव नगरी.

अभी रात में अंदर जाना दोनों को hi ठीक नहीं लगा तो दोनों ने बहार hi अपना डेरा जमा लिया. दोनों प्यार भरी बाते करते हुए एक बार फिर नीड की वादियों में चले गए. सूरज की पहली किरण के साथ hi ये दोनों जग गए और फिर नित क्रिया से फ्री हो कर उस गेट में चले गए. कियोकि तलवार ने भी आगे के मार्ग के लिए उस गेट की तरफ hi इशारा किया था.

पैर जैसे hi ये दोनों गेट के अंदर घुसे. दोनों को एक झटका लगा. अवनि को तो फिर भी झटका धिरे से लगा था पैर पब तो वही गिर पड़ा. और एक रौशनी ने उसको घेर लिया. कुछ देर बाद जब अवनि पब की तरफ देख पायी तो पब को देख कर उसका मुँह खुला का खुला रहा गया. पब पूरी तरह बदल चुक्का था. अवनि तो उसको पहचान गयी. पैर यदि अवनि की जगह उसकी और कोई पत्नी होती तो शायद पहचान नहीं पति. पब इस टाइम वैसा hi हो गया था जैसा की वो गुरुपित से मिलने से पहले था. यानि की जब वो जॉब करता था आज फिर वो वैसा hi दिखाई दे रहा था. अभी तो पब बेहोश था. अवनि वह कड़ी आखें पाद कर उसको देख रही थी. कुछ देर में जब पब को होश आया तो उसने अवनि को घूरता पाया.

पब – अवनि ऐसे क्या देख रही हो?? मुझको क्या हुआ था?? मुझको इतनी कमजोरी क्यों फील हो रही है??

अवनि – पंकज तुम खुद देखो अपने आप को. तुम आज पहले जैसे दिख रहे हो.

पब अपने हाथ पेअर देखता है. फिर अपना बाकि सरीर देखता है तो वो दांग रहा जाता है. उसको भी कुछ समाज नहीं आ रहा था. वो अपनी दिव्या दृष्टि से अपनी शक्तियों को देखने की कोसिस करता है पैर उसको कुछ नहीं देखता. पब की सभी शक्तिया चली गयी थी.

पब – अवनि ये क्या हो रहा है. मेरी को भी शक्ति मुझको न तो महसूस हो रही है और न hi मैं उसको उसे कर प् रहा हु. ऐसे कैसे मेरी साडी शक्तिया जा सकती है. यदि शक्तिया नहीं होगी तो हम आगे कैसे बड़ेगे इस यात्रा में??

अवनि – मुझको भी नहीं समाज आ रहा मेरे अंदर की भी शक्तिया चली गयी है. वैसे भी मेरे पास तो ज्यादा शक्तिया थी नहीं पैर जोट hi वो भी चली गयी.

पब – अब क्या करे अवनि?? इस चक्रवेव से बिना शक्तियों के कैसे निकल पाएंगे??

अवनि – पता नहीं आगे हम कैसे और क्या करेंगे. मुझको तो लगता है अब हमारी मूट निश्चित है.

पब – नहीं अवनि जब तक साँस है तब तक ऐसे हिम्मत नहीं हार सकते. ये वरदान की शक्तिया थी ये ऐसे तो नहीं जा सकती. जरूर कोई और बात है. और ये सब यहाँ की मई अक खेल hi है.

अवनि – हम्म तुम ठीक कहा रहे हो. जैसे hi हम दोनों गेट के अंदर आये है वैसे hi शक्तिया चली गयी हो सकता है की इससे बहार निकलने पैर फिर से शक्तिया बापिस मिल जाये.

पब – हाँ ये हो सकता है. और इस नगरी का नाम भी तो मानव नगरी था. मतलब ये हो सकता है की इस नगरी में कोई भी पावर काम न करती हो. और इसको मानव बल से hi जीतना हो..

अवनि – बिलकुल ऐसा hi होगा. चलो यहाँ से बहार निकलने का मार्ग खोजते है.

दोनों अंदर की और चल दिए. कियोकि जिस गेट से ये दोनों घुसे थे वो गेट तो गायब हो चुक्का था. अब इनको यहाँ से निकलने का रास्ता खोजना था. ये एक कसबे जैसा था. इन नगरी में बहुत से घर बने हुए थे. पैर सब दूर दूर थे. चारो और छायादार पेड़ थे. कुछ फलो के पेड़ भी थे. आम, केला, अमरुद, एप्पल के बहुत से पेड़ उनको देखने को मिल रहे थे. नगर तो था पैर एक बात अजीब थी की नगर में कोई भी आदमी नहीं दिखाई दे रहा था. घर खली पड़े थे. पेड़ो पैर भी कोई जीवित प्राणी नहीं था. फिर भी पब अपने हाथ में टॉवल को मजबूती से पकड़ कर चल रहा था. उसकी चाँद हंस तलवार एक सदर्न तलवार के जैसी हो गयी थी.

3-4 हॉर्स तक ीदार उदार भटकने पैर भी उनको कोई बहार निकलने का मार्ग नहीं देखा. पेडल चलने से पब को बहुत थकन हो रही थी. इतने दिनों से पावर्स के रहते हुए उसको कभी ऐसी थकन नहीं हुयी थी. दोनों को भूक और प्यास भी लगने लगी थी. पैर दोनों को दर था की कही ये फल भी जहरीले न हो इस लिए दोनों उनको न खाने की हो सोच रहे थे.

जब शयाम होने को आयी तो पब की हालत अवनि से बहुत बुरी थी. अवनि को तो आदत थी पैर पब के सरीर से सविता की पावर (फिजिकल पावर) जाने से उसकी हालत ख़राब थी. पब पैर जब और चलने की ताकत नहीं बची तो पब एक पेड़ के निचे बेथ गया. थकन तो अवनि को भी थी. पैर वो पब से बेहतर थी.

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सोनल और अविनाश हवेली से सुबह जल्दी hi निकल पड़े थे. दोनों को hi वापस जाने की जल्दी थी. सोनल को तो अदिति से मिलना था. जबकि अविनाश को एक मीटिंग अटेंड करनी थी. सभी ने हाशि ख़ुशी दोनों को विदा किया था. और फिर रस्ते भर भी ये दोनों वह की hi बाते करते हए hi आपने घर पहुंच गए थे.

सोनल और अविनाश के जाने के बाद हवेली में सभी एक जगह हॉल में बैठे थे. जय और काजल भी उनके साथ थी. सभी सोनल की कही बात को hi सोच रहे थे की उनको आगे हमलो से बचने के लिए क्या करना चाहिए?? कियोकि वो सब जानते थे की संभु मैंने वाला नहीं है. वो फिर हमला काने की कोसिस करेगा. इस बार बच गए पैर हर बार बच जाये ये जरुरी भी तो नहीं. और यदि संभु का एक भी डाव सही पद गया तो ये सब के सब मरे जा सकते थे.

काफी सोचने विचरने के बाद ये तय हुआ की अब से ये सब लोग दानव सेना के बेस में hi रहेंगे. और आज hi दोपहर में हवेली को बहार से लॉक करके गोअन वालो को देखते और बताते हुए ये सभी दानव बेस के बैक साइड वाले गेट से उसमे पहुंच जायेगे और फिर पब के लौटने तक वह hi रहेंगे. संभु से बचने का अभी केवल ये एक मार्ग hi सभी को समाज आ रहा था. कियोकि संभु ने अभी तक जितने हमले किये थे सभी जान लेवा थे. और अभी पब के यात्रा पैर होते हुए संभु पैर अटैक करना या उसके अटैक्स को झेलना पब के लिए भी खतरनाक था. ये वो सब भी समाज रहे थे.

फिर सभी ने अपने प्लान के हिसाब से जय से रामलाल को फ़ोन करवा दिया. जय ने उसको बोलै की वो सब विदेश घूमने जा रहे है और कुछ दिनों में लौट आएंगे. रामलाल से बात करने के बाद ये सभी अपनी कार्स में बेथ कर गोअन के बिच से होते हुए निकले. और कामिनी ने सरते में सरपंच से भी बोल दिया की वो सब घूमने जा रहे है तो पीछे से वो हवेली का धयान रखे. और फिर ये सब एक बड़ा सा चक्कर लगा कर दानव बेस में पहुंच गए. और वह अपने अपने रूम में पहुंच गए. इनके रूम्स जुली ने तैयार करवा दिए थे. आज दानव बेस से हमक को भी मास्टर के पास जाना था. पब जो काम मास्टर को दे कर गया था उसके लिए हमक को जाना जरुरी था.

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सोनल कुछ देर लता से बात करके अदिति से मिलने चली गयी. अविनाश तो पहले hi ऑफिस के लिए जा चुक्का था. सोनल ने अदिति को एक साफé हाउस में बुलाया था. यहाँ पैर कुछ पवत. केबिन बने हुए थे. सोनल और अदिति एक केबिन में आमने सामने बैठे थे. अदिति का फेस देख कर सोनल को दुःख हुआ था. अदिति ऐसे लग रही थी जैसे सालो से बीमार हो. अदिति के फेस की चमक जैसे खो चुकी थी. वो तब से या तो रो रही थी या फिर सो रही थी. अदिति अभी तक एक बार भी संभु के सामने नहीं आयी थी. संभु के आगे पीछे गुमने वाली अदिति अब संभु के सामने जाने से भी दर रही थी. कल सुबह जल्दी hi संभु घर से निकल गया था और वो अपने एक खास आधे पैर बैठा अपने चलो से पल -2 की खबर लेता रहा था. और जब उसकी गुरु से बात हुयी तो उसका मंद एक दम ख़राब हो चुक्का था. किसी तरह अपनी हार और गुरु की गलियों को पचा कर देर रात घर पंहुचा था.

दोनों एक दूसरे को देख रही थी. क्या बोले से समाज में नहीं आ रहा था. अदिति अपने आप को सोनल का गुन्हे गार मान रही थी. कियोकि उसको अब पता था की उनकी माँ अल्पना के साथ उसके बाप संभु ने बहुत गलत किया है. पैर क्या किया है वो ये नहीं जानती थी. आर्डर आने तक अदिति शांत रही. पैर वेटर के जाने के बाद अदिति रोटी हुयी सोनल के पैरो को पकड़ कर माफ़ी मांगने लगी.

अदिति – मम प्लीज मुझको माफ़ कर दो. आपकी माँ के साथ जो भी गलत हुआ उसमे मेरे पापा का hi साथ था मम, अपने सच कहा था की मेरे पापा इन्शान नहीं हवन है हवन….

सोनल अदिति को ुधा कर अपने गले लगा लेती है और उसको शांत करने के लिए उसके बालो पैर हाथ फेरते हुए बोली – अदिति तुम ये क्या कर रही थी. जो किया संभु ने किया उसमे तुम्हारा कोई दोष नहीं मेरी बहन… तुमने कोई गुन्हा नहीं किया है तो तुम माफ़ी क्यों माफ़ रही हो….

अदिति रट हुए – नहीं मम नहीं.. बाप के कर्मो की सजा बच्चो को भुगतनी hi पड़ती है. मेरे आज तक जिसको देवता की तरह पूजा वो एक शैतान निकला. घिन आती है मुझको खुद पैर की मैं उस नीच आदमी की बेटी हु. मन करता है की खुद को ख़तम कर लू. पैर मेने भी अब फैसला किया है की मृगी तो अपने बाप को मार कर hi. मैं अब दुनिया को उसकी काली करतूत दिखाउंगी. वो तो आप ने रोक दिया नहीं तो अभी तक तो मैं वो वीडियो दुनिया को दिखा चुकी होती.

सोनल – नहीं अदिति तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी. भूल से भी ऐसा नहीं करोगी. यदि तुम मुझको कुछ मानती हो तो मेरी ये बात जरूर मानोगी…

अदिति – मम आप ये क्या कहा रही है. आपको hi तो अब सब कुछ मानती हु. यदि कोई और ये बात कहता तो मन भी कर देती पैर आप?? आप क्यों नहीं चाहती की संभु को उसके कर्मो की सजा मिले?? क्यों बचाना चाहती है आप उसको??

सोनल – नहीं अदिति तुम गलत समाज रही हो मैं संभु को नहीं तुमको बचाना चाहती हु. तुमको क्या लगता है संभु कोई सदर्न आदमी है जिसको तुम अशनि से मार डौगी?? वो एक तांत्रिक है एक बड़ा तांत्रिक… यदि उसको तुम पैर शक भी हो गया न तो वो तुमको मार देगा. या ऐसा कुछ कर देगा की तुम सब भूल जाओगी, या फिर तुम्हारी हालत भी मेरी जैसी कर देगा. मैं नहीं चाहती की तुम्हारे साथ कुछ भी गलत हो. अदिति उसको तो मेरा भाई दानवपुत्र पंकज hi मरेगा. और मेने भी कसम ली है जब तक वो संभु को नहीं मार देता तब तक मैं अपने भाई का चेहरा नहीं देखूँगी.

अदिति – क्या कहा अपने??? आपके साथ क्या किया मेरे उस कमीने बाप ने?? और कब किया??

सोनल – छोड़ो अदिति वो पुराणी बाते है. मेने और मेरी माँ ने जो झेला है भवगान किसी दुसमन को भी वो दिन न दिखाए. मैं उन सब बातो को भुला कर जिंदगी में आगे बाद रही हु अदिति.. मैं उन बातो को फिर से याद करना नहीं चाहती..
 
अपडेट 250

अदिति – क्या कहा अपने??? आपके साथ क्या किया मेरे उस कमीने बाप ने?? और कब किया??

सोनल – छोड़ो अदिति वो पुराणी बाते है. मेने और मेरी माँ ने जो झेला है भवगान किसी दुसमन को भी वो दिन न दिखाए. मैं उन सब बातो को भुला कर जिंदगी में आगे बाद रही हु अदिति.. मैं उन बातो को फिर से याद करना नहीं चाहती..

अदिति – मम प्लीज मुझको बताइये क्या हुआ था आपके साथ?? क्यों हुआ था?? आप मेरे बाप के चुगुल में कैसे आ गयी. मैं मानती हु आपको दुःख होगा. पैर मैं अपने बाप की हर काली करतूत जानना चाहती हु. मुझको भी चैन नहीं आएगा जब तक मैं अपने बाप का पूरा सच नहीं जान लेती.. आप नहीं बताएगी तो मैं किसी और तरह से पता करुँगी. अब मेरी जिंदगी का केवल एक मकसद है मम और वो है मेरे बाप का खत्म. मैं एक औरत हु मम और जो इन्हें औरतो को खिलौना समझता हो. उसको मरना एक पुण्य का काम होता है. यदि मेरी माँ और हम भाई बहन पहले hi अपने घर के मुखिया को रोकते तो शायद दुनिया की बहुत साडी औरते सेफ होती. जिन्दा होती…

सोनल – शांत अदिति शांत.. गुस्सा करने से कुछ नहीं होगा. और संभु को तुम सब नहीं रोक सकते थे. वो तो सुरु से hi ऐसा है. उसने त्रिकाल के साथ में न जाने कितने गलत काम किये है. तुम किस किस का पता लगाओगी. भूल जाओ सब.. और इन्तजार करो मेरे भाई के बापिस आने का. वो hi संभु को सजा दे सकता है. तुम पहले मुझको वो वीडियो देखो और वो सब बताओ की तुमने क्या देखा और सुना..

अदिति अपने आप को शांत करती है. और फिर सोनल को सब कुछ बताती है. और फिर वो वीडियो भी देखती है. अदिति की आखों में फिर से खून उतर आया था. वो सब याद करते हुए उसे अपने आप से नफरत होने लगी थी. पहले तो उसके पास संभु को मरने का मकशद था. पैर अब सोनल ने उसको वो भी करने से मन कर दिया. अब वो फिर से सोचने लगी की वो जिन्दा क्यों है???

अदिति अपने खयालो में थी तो सोनल अपने खयालो में थी. संभु की साडी बाते सुनने के बाद वो सोचने लगी. संभु ने ये क्यों कहा की कल वो बचने के लिए भाग नहीं सकती?? गुरु ने बताया था की वो सब पहले तो दर से दानव बेस में चुप गए थे. पैर मेरी वजह से उनको उन दानवो से लड़ना पड़ा. क्या संभु को ये पता था की मैं हवेली जा रही हु?? और तो कोई बात नज़र भी नहीं आती. पैर संभु को बताया किसने?? घर पैर hi सबको पता था की मैं और अविनाश वह जा रहे है. ऑफिस में तो किसी को बताया भी नहीं. मतलब घर का hi कोई आदमी संभु का साथ दे रहा है. कही रतन अंकल तो नहीं? नहीं नहीं वो कैसे हो सकते है वो अपनी बेटी को क्यों मरवाना चाहेंगे?? पैर जॉब hi हो इसका एक hi मतलब है की अब अपने भाई और भाभियो के बारे में घर पैर कुछ भी बताना खतरनाक हो सकता है.

सोनल को उसकी सोच से अदिति ने बहार निकला, अदिति बोली – मम मैं आपकी बात मन लेती हु मैं अपने बाप का कुछ नहीं बिगड़ सकती. पैर खुद तो मार सकती हु न. पैर अब मैं उन शैतान के साथ नहीं रहा सकती. यदि उसको जिन्दा रहना है तो मुझको मरना होगा…

सोनल एक तप्पड़ खींच कर देती है अदिति के गाल पैर – पागल हो गयी है तू.. मैं तुझको बचने के लिए संभु से दूर रहने को बोल रही हु और तू है की खुद मरने को तैयार है. क्या होगा यदि तू मार गयी तो?? संभु रुक जायेगा?? वो पाप करना छोड़ देगा??

अदिति रट हुए – नहीं ऐसा कुछ नहीं होगा. हाँ उसको थोड़ा सा दुःख होगा. और मैं ये सब देखने को तो जिन्दा नहीं होगी न…

सोनल – ऐसे तो सभी को मार जाना चाहिए. ऐसे मरना कायरो का काम है. जो बहादुर होते है वो हालातो का डट कर सामना करते है.

अदिति रट हुए – मैं कायर नहीं हु. आपको क्या लगता है की मैं फिर से संभु का सामना कर पाउगी. और उसके सामने गयी भी तो क्या फिर से उनको पापा की तरह प्यार कर पाउगी?? क्या उनको शक नहीं होगा?? और यदि शक हुआ तो फिर वो क्या कर सकते है ये अपने hi अभी बताया था. और फिर इतना कुछ होने के बाद मैं हाथ पैर हाथ रख कर बैठी रहूगी तो क्या मेरी आत्मा मुझको चीन से जीने देगी???

सोनल अदिति को फिर से अपनी बहो में ले लेती है और बोली – कहा तो तुम ठीक रही हो अदिति. संभु को जरा सी देर में शक हो जायेगा. बल्कि अब तक हो भी गया होगा.. तुमने बताया था की तुम अपनी माँ को बेहोश मिली थी. तो तुम्हारी माँ ने संभु को नहीं बताया क्या?? और जब तुमको होश आया तो उन्होंने तुमसे नहीं पूछा की तुम क्यों रो रही थी?? कैसे बेहोश हो गयी??

अदिति – नहीं मम सभु को कुछ भी पता नहीं चला सुबह जब में बेहोश थी तब वो घर पर नहीं था. तो माँ ने hi मुझको संभाला था. फिर आपसे बात करने के बाद जब मैं माँ के पास गयी तो उनके पूछने पैर मेने माँ से कहा –“माँ पहले आप मेरी कसम खाओ की आप ये बात पापा को नहीं बोलेगी नहीं तो उनको बहुत दुःख होगा. तो माँ भी मान गयी पैर बोली की तुमको मुझको सब बताना होगा. तो मेने माँ को कहा की माँ मैं एक लड़के से प्यार करती थी कर जब मेने उसको प्रोपोज़ किया तो उसने किसी और लड़की के लिए मुझको मन कर दिया मेरा पाया अधूरा रहा गया माँ” और आज सुबह से मैं रूम से निकली hi नहीं माँ को पता है की मैं दुखी हु तो उन्होंने भी जोर नहीं दिया और पापा को भी कुछ नहीं बताया बस मुझको बहुत सारा ज्ञान मिल गया माँ से प्यार के उप्पेर……

ये बोल कर अदिति सोचने लगी की जब मेने माँ को ये सब कहा था तो मुझको पंकज जी का फेस क्यों दिहा था. मेने तो बस उनकी कुछ पिक्स hi देखि है आज तक फेस तो सदेखा hi नहीं. पता नहीं क्यों मुझको उनसे एक लगाव सा होने लगा है.

सोनल – हम्म ये तुमने अच्छा किया. पैर हमेशा रूम में तो नहींरहा रक्ति न.. (कुछ सोच कर बोली ) अदिति तुम एक काम करो, तुम साउथ में चेन्नई वाले ऑफिस में चली जाओ. वह से हमको वैसे भी प्रॉब्लम थी. तुम वह होगी तो वो भी सोल्वे हो जाएगी और तुमको घर पैर भी नहीं रहना होगा.

अदिति (उदास हो कर) – हम्म ठीक है..

सोनल – अब क्या हुआ??

अदिति – आप समाज क्यों नहीं रही अब मेरा मन इन सब कामो में कैसे लगेगा. जबकि मेरा बाप यहाँ हैवानियत का नंगा खेल खेल रहा होगा??

सोनल कुछ सोच कर – हम्म तो तुम एक काम कर सकती हो. यदि तुमने ये काम कर दिया तो पंकज को संभु को मरने में बहुत मदत मिलेगी.

अदिति खुश हो कर – बताइये मुझको क्या करना होगा. यदि मेरे कुछ करने से संभु की मूट नजदीक आती है तो मैं उस काम को करने में जान लगा दूगी..

सोनल – संभु ने अपनी तांत्रिक शक्ति से अपने उप्पेर एक शील्ड बना राखी है. उस शील्ड के रहते कोई भी उसका कुछ नहीं बिगड़ सकता है. और उस शील्ड की पावर किसी भी चीज से जुडी हो सकती है. क्या तुमने कोई ऐसे कोई चीज देखि है जिसको संभु बहुत संभल कर रखता हो?? (सोनल को ये सब गुरु ने hi बताया है)

अदिति थोड़ी देर सोच कर बोली – नहीं मेरे धयान में तो ऐसा कुछ नहीं है. पैर मैं उस चीज को जरूर खोज लगी.

ये दोनों बहुत देर तक ऐसे hi बाते करती रहती है. सोनल से बात करके अदिति ने खुद को संभल लिया था. वैसे भी जब आप अपना दर्द किसी को बता देते है तो दर्द काम हो जाता है. वो hi अदिति के साथ हो रहा था. और फिर उसके पास अब एक मकसद भी था और उसको अब संभु के पास रहने की जरुरत भी नहीं थी.

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आज उस हॉल में फिर डी. गुरु और डॉ1 बैठे हुए थे. पैर डी. गुरु के फेस पैर चिंताओं की लकीरे थी. ऐसा लग रहा था जैसे उसके साथ कुछ गलत हुआ हो. और वो उस पैर विश्वास न कर प् रहे हो. डॉ1 को ये कल से hi लग रहा था की उनके गुरूजी बहुत परेशां है पैर अभी तो उनकी चिंता चरम पैर थी. यद्ध में हरे हुए युद्ध की तरह विचलित हो रखे थे. कभी बैठते तो कभी टहलने लगते. पैर सभी कुछ उनकी समाज के परे था. जब डॉ1 पैर गुरूजी की ये हालत नहीं देखि गयी तो वो बोलै

डॉ1 – गुरूजी क्या बात है आप इतने परेशां क्यों है??

डी. गुरु – बहुत कुछ गलत हो गया है. और समाज नहीं आ रहा उसको सुंदरने के लिए क्या किया जाये..

डॉ1 – ऐसा क्या हुआ है गुरूजी.. जो आप जैसा शांत प्राणी भी इतना विचलित हो रहा है??

डी. गुरु – डॉ1.. तुमको पता है संभु अपने प्लान में फ़ैल हो चुक्का है.

डॉ1 (चोकते हुए) – क्या कहा अपने?? उन 4 महाबली दानवो के रहते हुए भी संभु उन सदर्न सी मानव कन्याओ को नहीं कर पाया?? ये तो आशम्भव है. उन 4 दानवो से तो देव भी भय कहते है. तो वो सब कैसे बच गयी. क्या वो उनकी पकड़ से भाग गयी??

डी. गुरु – नहीं वो भागी नहीं.. यदि भागी होती तो वो उनको पकड़ कर मर सकते थे. बल्कि उन मानव कन्याओ ने उन महाबलिओ को hi मार दिया है…

डॉ1 का तो मुँह खुला का खुला रहा गया. उसके लिए ये विश्वास करने वाली बात नहीं थी पैर अपने गुरु को वो जनता था ो झूट नहीं बोल रहे थे. कुछ देर शांति के बा तवो बोलै – पैर ये कैसे हो सकता है गुरूजी.. उन्होंने उन सभी को मर दिया. जबकि उनके लिए तो हमारे रय hi काफी थे. हमारे भेजे हुए योद्धाओ का क्या हुआ गुरूजी??

डी. गुरु – वो भी सब मरे गए कोई जिन्दा नहीं बचा है. संभु की पूरी की पूरी टीम मूट कैग हैट उतर दी उन मानव कन्याओ ने…

डॉ1 – पैर कैसे??? ये ासम्भव संभव कैसे हुआ??

डी. गुरु – वैसे hi जैसे की आज तक हम दानवो के साथ होता आया है. सभी को छल से मारा उन सभी ने. छल से उनके बल को hi उनके खिलाफ इस्तमाल किया. पता नहीं हम दानवो के सतह छल होना कब बंद होगा. पहले तो देवता hi छल करते थे. पैर ये मानव तो उनसे भी आगे निकले छल करने में..

डॉ1 – पैर गुरूजी छल से उन महावीरों को मरना आसान नहीं था. देवता भी भाग जाते थे उनके आगे तो..

डी. गुरु – हाँ ये सच है की देवता भाग जाते थे. पैर संभु की एक गलती उन सभी पैर बहुत भरी पड़ी. तुमको पता है मेने उन चारो का ग्रुप क्यों बनाया था कियोकि वो एक दूसरे की कमजोरी को जानते थे और एक दूसरे को उसकी कमजोरी से बचते हुए दुश्मन को ख़तम करते थे. पैर संभु ने उनको कहा की को सभी अलग -2 हो कर उन लड़कियों को ढूंढे. और उनका एक दूसरे के अलग होना hi उन पैर भरी पद गया. देखो ये तो तुम भी जानते हो सभी की कोई न कोई कमजोरी और कोई न कोई चाहत होती है. इन लड़कियों ने उनको उस जाल में hi फाशय जिस जाल में मोहिनी सभी को फंसाती है. उनकी चाहत और उनकी कमजोरी पैर hi वॉर किया था इन लड़कियों ने. पैर एक बात मेरी समाज नहीं आयी की वॉक ों है जो इन लड़कियों को सपोर्ट कर रहा है?? कोण है जिसने इन लड़कियों को मेरे इन महावीर दानवो की शक्ति और कमजोरी को बताया?? कोई दानव hi है जो हमसे चुप कर इनका साथ दे रहा है. ( डी. गुरु, डॉ, त्रिकाल, संभु या किसी और को ये नहीं पता की सलोनी दयासुर की बेटी है और पब ने दयासुर जी से शिक्षा ली है. कियोकि उन एरिया पैर सेफ्टी शील्ड इंद्रा देव ने बनवाई थी जिसको अपनी शक्ति से भेद पाना अभी किसी के बस की बात नहीं ेवाल डलासुर और दस माँ को छोड़ कर)

फिर डी गुरु डॉ1 को उन सभी की मूट की पूरी कहानी सुनते है. (डी. गुरु के पास बहुत शक्ति है. वो त्रिकाल के सुरक्षा कवच के रहते भी अंदर चले जाते है. और मणि की बनाई शील्ड भी उनको हवेली के अंदर देखने से नहीं रोक पति है. इसलिए hi उन्होंने वो सब अपनी दिव्या दृष्टि से hi देखा था) तो डॉ1 गुस्से में आ जाता है. और बोलै – इन मानवो की ये मजाल मैं इन सभी को नहीं छोड़ूगा गुरूजी. मुझको आज्ञा दो मैं अभी अपने सभी साथियो के साथ जा कर उन सभी को उनके कर्मो की सजा दे कर आता हु. मेरा वादा है आपसे उनकी मूट देख कर देवता भी कैंप जायेगे. और फिर कभी कोई हम दानवो के साथ छल करने की सोचेगा भी नहीं.

डी गुरु – नहीं डॉ1 तुम्हारे जाने का कोई फायदा नहीं है. आज hi वो सब गायब हो चुकी है. वो मैं भी उनको नहीं खोज प् रहा हु. आज सुबह वो सब विदेश जाने का बहाना करके हवेली के पीछे वाले जांगले में गए थे और वह से कहा गायब हो गए पता hi नहीं चल रहा है. पता नहीं ऐसी कोण सी शक्ति है जिसके कारन मैं भी उनको नहीं देख प् रहा हु. (ये दस माँ की शक्ति का एक नमूना है) या तो मैं दानव राज के निवेश िस्थान के सुरक्षा कवच के कारन वह पैर नजर नहीं रख पता हु. या फिर आज उन लड़कियों को नहीं देख प् रहा हु.

डॉ1 – कही दानव रानी ने hi तो उनको अपनी सुरक्षा में तो नहीं ले लिया है??

डी. गुरु – लगता तो नहीं है की वो ये कर सकती है. पैर कहा भी नहीं जा सकता.

डॉ1 – मतलब अब हम न तो उस पब तक पहुंच सकते है और न hi उसकी पत्नियों तक. फिर आप त्रिकाल की मदद कैसे करेंगे.

डी. गुरु – अभी तो तुम अपने रय को बुला कर उनके मंद को बदलना सुरु करो. और सबसे पहले पानीपुर के आस पास hi आतंक फैलाना सुरु करो. हो सकता है की वो उनके आतंक से मानवो को बचने के लिए बहार आ जाये..

डॉ1 – हम्म सही कहा अपने.. मैं कल से hi इस काम पैर लग जाता हु.
 
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