अपडेट 246
सन 4 (मोहिनी और अंकिता, माहि)
मोहिनी इस टाइम पब के रूम में थी. और पब की फोटो को बड़े धयान से देख रही थी. तभी अंकिता उस रूम में पहुंच गयी. उसके पीछे -2 माहि भी इनविजिबल हो कर पहुंच गयी थी. दोनों ने देखा की मोहिनी पब की फोटो में खोई हुयी है. माहि ने ये अच्छा मौका देखा. और एक मंत्र पद कर मोहिनी पैर एक ताकतवर शक्ति छोड़ दी. पैर ये क्या मोहिनी पैर उसका कोई भी अक्षर नहीं हुआ. पैर वो सचेत हो गयी. और जब उसने अंकिता को देखा तो बोली – कोण हो तुम? तुम्हारी इतनी हिम्मत की मुज पैर हमला करो..
अंकिता को पता था की किसी को hi सम्मोहित करने के लिए उसके फेस यानि की उसकी किसी इंद्री (आखँ, नाक, कान, मुँह) से मंद तक पहुंचना होता है. इसलिए अंकिता अपने फेस को कवर करके राखी थी. (यहाँ बता दू की पब और अंकिता केवल आखों के जरिये hi मंद को कण्ट्रोल कर पते है. और अंकिता तो आखों के जरिये भी कण्ट्रोल नहीं कर पति बस दूसने के मंद को पद पति थी वो भी ठीक से नहीं. पैर अंकिता का अपने मंद पैर कण्ट्रोल बहुत हो गया था. ) गुस्से में मोहिनी अंकिता की तरफ अपने हाथ से एक लेज़र छोड़ती है तो अंकिता कूद कर अपनी जान बचती है. और वो लेज़र लाइट लैंप की और लगता है तो लैंप के फरखचे उड़ जाते है. अंकिता कुड़ी मोहिनी की और थी. और उसने कूदते टाइम मोहिनी की और hi कुड़ी थी और उसने अपनी तलवार भी निकल ली थी. तो तुर्रंत hi उसने घूम कर तलवार मोहिनी के पेट में घुसा दी. पैर ये क्या अंकिता को लगा की तलवार सरीर में नहीं कपडे के ढेर में घुसी है. अंकिता की तो जैसे साँस hi अटक गयी. वो सोचने लगी यदि ये तलवार से नहीं मारेगी तो मारेगी कैसे?? साला इस बारे में तो किसी ने कुछ भी बताया नहीं है.
अंकिता को वॉर करता देख मोहिनी ने ने अंकिता के गले से पकड़ कर खड़ा कर दिया. और एक hi जटके में अंकिता का मास्क उतर कर फेक दिया. और अंकिता को पहचाने की कोसिस करने लगी. पैर तभी माहि ने मंत्र पद कर एक ऑरेंज स्मोक मोहिनी के चारो और पहला दिया. स्मोक को देख कर अंकिता ने उसके हाथ को छिटक कर उससे दूर हो गयी.
कुछ hi देर में जब स्मोक ख़तम हुआ तो माहि और अंकिता दोनों की आखें बड़ी हो गयी वो अभी भी वैसे hi कड़ी एक जेलरीली मुस्कन लिए कड़ी थी. और एक दम बोली – साली कोण है तेरे साथ मुझको दूसरे के होने का भी बहन हो चुक्का है. जो भी है चुप चाप सामने आ जाओ. नहीं तो मुझको सामने लाना आता है.
ये सुन कर दोनों की और हालत ख़राब हो गयी. अंकिता ने अपनी एक कोसिस करने की सोची. और उसने मोहिनी की आखों में झक कर उसके मंद को पड़ने की कोसिस की. पैर वो उसके मंद में घुस hi नहीं पायी. बल्कि नतीजा ये हुआ की मोहिनी एक दम गुस्से में गुर्राई – तू मेरे दिमाग में गुसेगी साली, तेरी इतनी औकात नहीं है की मोहिनी के दिमाग पैर अटक कर सके देख अब मैं क्या करती हु. तुझको लगता है न तेरे पास बहुत बड़ी शक्ति है. पैर तूने मुझे अपनी ये शक्ति दिखा कर गलती कर दी. अब तू दिख मेरी शक्ति..
ये बोल कर मोहिनी अंकिता के मंद में घुसने लगी. पैर अंकिता को अपने मंद पैर कण्ट्रोल था उसने भी मोहिनी को घुसने नहीं दिया. इन सब में ये अच्छा हुआ की मोहिनी माहि के बारे में भूल कर अंकिता से भीड़ गयी. अंकिता ने भी अपनी मंद को पूरी तरह से ब्लॉक किया हुआ था. वो मोहिनी को कामियाब नहीं होने दे रही थी.
माहि उसको मरने के तरीके के बारे में सोच रही थी. पैर कोई रास्ता नहीं मिल रहा था. काफी देर तक सोचने के बाद उसने एक तरीका अपनाने का सोचा. तभी उसके मन में अंकिता की आवाज आयी माहि कुछ करो अब ये कुछ hi देर में मेरे मंद में घुस जाएगी. मेरी शक्ति काम हो रही है. (कियोकि अंकिता की मंद की शक्ति की एनर्जी पब भी उसे कर रहा है)
माहि भी अपनी चल सोच चुकी थी तो फ़ौरन hi अपने मंत्रो को पद कर मोहिनी के उप्पेर फुक दिया. और ये मंत्रो थे आखों के धोखे के मंत्र, महाजाल के मंत्र, मायाजाल के मंत्र और इन मेट्रो को माहि ने सिद्ध कर रखा था.
माहि ने एक मायाजाल बनाया. और वो काम भी किया. मोहिनी अंकिता के मंद तक पहुंचने hi वाली थी की तभी उसको किसी ने आवाज दी – मोहिनी मोहिनी आखिर आज तुम मिल hi गयी. मैं तो कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रहा था. ऊऊऊ मोहिनी आओ मेरे गले लग जाओ..
मोहिनी ने पलट कर देखा तो सामने वो फोटो वाला लड़का hi खड़ा था जिसको वो कुछ देर पहले देख रही थी. जी हाँ यानि पब खड़ा था. उसको देख कर मोहिनी चौक गयी.
मोहिनी – कोण हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो?? क्या तुम hi थे इसके साथ जो मुज पैर हमला कर रहे थे.
पब – नहीं मोहिनी पागल हो क्या तुम?? मैं तुम जैसे सुंदरी को छोड़ कर इस सदर्न सी दिखने वाली मानव कन्या का साथ दुगा क्या?? मैं तो तुम्हारा दीवाना हु. आओ न मेरे गले लग जाओ मोहिनी..
मोहिनी – तुम मुझको कैसे जानते हो?? किसने बतया मेरे बारे में?? हो कण तुम??
पब – मोहिनी मैं तुम्हारा दीवाना हु दानव रानी (दस माँ) का पुत्र. उन्होंने hi मुझको तुम्हारे वेयर में बताया था. तुम्हारे रूप और तुम्हारी ताकत के वेयर में सुन कर hi तुम्हारा दीवाना हो गया. पता नहीं कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रहा हु मैं… आज जा कर मिली हो. पैर तुमने ये क्या रूप बना रखा है. माँ ने तो तुम्हारा कोई और hi रूप बताया था.
(भाइयो ये पब माहि के मायाजाल की उपज थी जिसको माहि चला रही थी. और मोहिनी से उसकी मूट का रहश्य जानने की कोसिस कर रही थी. मोहिनी की किसी से भी मूट न होती देख कर माहि को ये तो पता चल गया की ये जो सामने है ये एक बाहरी रूप है सच्चाई नहीं. इस पैर किसी भी बाहरी हमले का कोई ाशर नहीं होगा. तब hi उसने उन मंत्रो से मायाजाल रचा था जो उसकी इन आखों से hi उसके असली रूप को भी ब्रमित कर सकता था. वो भी इसलिए कियोकि मोहिनी इन आखों से hi सब कुछ देख रही थी. और ये बात माहि ने ऑरेंज स्मोक के हमले में देख ली थी)
मोहिनी – ोुह्ह्ह यानि तुम मेरे बारे में सच में जानते हो. और क्या तुम को मेरा ये रूप पसंद नहीं आया?
पब – नहीं मोहिनी एक दानव को दानव कन्या का अश्ली दानव रूप hi भ सकता है. ये तो मानवो का रूप है. मुझको ये कैसे भायेगा.
मोहिनी इस बात से खुश हो गयी. आज तक कोई उसको ऐसा नहीं मिला था जो उसके अश्ली रूप को पाषंड करता हो. और नारी कोई भी हो वो अपनी सुंदरता की प्रशंशा से खुश होती hi है.
मोहिनी – तुम सच में मेरा वो रूप देखना चाहते हो..? पैर तुम तो खुद मानव रूप में हो..
पब – अभी लो..
ये बोलते hi माहि पब के रूप को दानवो जैसा बनती है. जितना बदसूरत वो सोच सकती थी पब की सकल को उल्टा hi ज्यादा बदसूरत कर देती है. पब को रूप बदंता देख कर. मोहिनी भी अपने अश्ली रूप में आ जाती है. उसका वो रूप इतना भयानक और डरावना था की पब अपने बिगड़े हुए रूप में भी उसके सामने बहुत हैंडसम लग रहा था.
पब – व्व्व्हःहा कितनी सुन्दर हो तुम…
ये शब्द सुन कर मोहिनी का दिल भर गया. किसी दानव ने भी उसके इस रूप की कभी भी टैरिफ नहीं की थी. फिर उससे बहुत जायद सुन्दर दानव को अपनी टैरिफ करता सुन मोहिनी खुश हो गयी. और सरमने लगी. उसको सरमाता देख माहि को उलटी आने को हो गयी इतनी बुरी जो दिख रही थी.
पब – मोहिनी अब तो सर्मना छोड़ कर मेरे गले लग जाओ..
मोहिनी भी पब के गले लग गयी. तभी माहि ने अपना एक नाख़ून (नेल) को पब के हाथ वाली जगह पैर घुसा दिया.. और कमल हो गया नाख़ून मोहिनी को चूब भी गया. और उसकी आअह्ह्ह भी निकल गयी. ये देख कर माहि ने अंकिता को मन में कहा की वो तलवार ुधा कर मोहिनी को मार दे.
अंकिता – पैर माहि हो क्या रहा है ये कहा से आ गए. और ये क्या उलटी सीडी बाते कर रहे है?? उसका फेस इतना बुरा कैसे हो गया??? यदि अभी मेने मोहिनी को मारा तो उनको भी लगेगी और नाब hi लगी तो वो फिर मुझसे रोड जायेगे.
माहि – अंकिता तुम टाइम वास्ते मत करो जो कहा है वो करो फिर समजती हु तुमको सब. उनकी चिटा मत करो वो नहीं है यहाँ. मारो इसको अभी. इसको अभी मारा जा सकता है.
अंकिता माहि की बात मान कर अपनी तलवार ुधा लेती है और उसकी छाती में उत्तर देती है. और फिर एक बार निकल कर फिर पेट में घुसा देती है. लगातार 4 हमलो में मोहिनी का अंत भी हो जाता है. मोहिनी को मारा देख कर माहि रहत की सास लिटी है और अपना मायाजाल हटा लेती है. और फिर अंकिता को सब समजती है की क्या हुआ और कैसे. अंकिता भी माहि की बहुत टैरिफ करती है. सच में माहि ने आज कमल कर दिया था. मंत्रो के साथ मंद का भी बहुत अच्छा इस्तिमाल किया था. पैर वो ये सब अंकिता की वजह से hi कर पायी थी कियोकि अंकिता ने मोहिनी को संभल कर उसे ये सब करने का मौका जो दिया.
सन 5 (5 रय, 3 S.C. और गुरु, कामिनी, सविता, जुली) (इसको शार्ट में ख़तम कर रहा हु)
गुरु और सविता ने रय को सँभालने का जिम्मा उड़ाया तो कामिनी और जुली ने S.C. को सँभालने का. गुरु और कामिनी ने गन विथ सीलेंसर ले राखी थी तो जुली और सविता ने तलवार. इनको जो भी मिलता उसको मार देती. जो भी उन चारो टीम्स के बिच आने की कोसिस करता वो मारा जाता. केवल एक रय hi इनकी नजरो से चूक गया और बेसमेंट में जा पंहुचा एरिका के पीछे. नहीं तो जो भी इसके बिच में आता. या तो उसके माथे पैर बिंदी का निशान (गोली का निशान) होता या फिर तलवार उसके गले के आर पार. बिना किसी को मौका दिए इन चारो ने उन चारो के रस्ते को साफ़ किया था.
जब सलोनी के लिए गुरु को पुकारा गया था तब गुरु एक रय के पीछे थी उसका शिकार करने के लिए. इणलिए hi गुरु ने कामिनी को वह भेज दिया. इन चारो की वजह से hi वो सब अपने अपने शिकार को बिना किसी दूसरे की नजर में आये मार पाए थे. अंकिता और माहि तो पब के रूम में घुस कर दूर बंद करना भूल गयी थी. और पास में बैठा अंधकासुर उनको देख और सुन सकता था पैर गुरु ने ऐसा होने नहीं दिया. उसने पब के रूम को तुरंत बंद कर दिया. ऐसे hi एरिका को टेरेस से बेसमेंट तक जाते टाइम जो भी बिच में आया उसको सविता ने hi परलोक पहुंचाया था.
कुछ hi देर में ये सब अपने अपने टारगेट को हिट करके दानव सेना के बेस में पहुंच गए थे. और सभी ने अपनी -2 जीत की खवार सुनाई. सभी बहुत खुश हो गए आखिर ासम्भव सा दिखने वाला काम सभी की एकता और एक साथ मंद से की कोसिस ने संभव कर दिया था. एकता में शक्ति है ये आज इन सभी ने सिद्ध कर दिया. इनके एक जुट होने से ये जीत गयी और वो सभी अलग -2 घूम रही थी. उनकी कोई प्लानिंग नहीं थी इसलिए वो हार गए. या ये भी कहा सकते है की सच्चाई के साथ वालो की नियति ने भी मदत की थी.
जो भी हो ये सभी जीत चुकी थी केवल पारी को छोड़ कर सभी ठीक थी. सलोनी अब तक पूरी नार्मल हो चुकी थी. ये जीत तो गयी थी पैर खतरा अभी टाला नहीं था. अभी 44 रय बाकि थे. और वो भी एक बड़ी चुनौती थी. और इसके लिए गुरु ने माहि, मंजू, सविता, जुली, सलोनी, ेबेचा, एरिका और खुद को चुना. अंकिता, पारी, नैना को यही छोड़ दिया गया था. और नैना से बोलै की यदि तुम किसी भी रय को देख सको तो उसके वेयर में बताये.
अंकिता और कामिनी को पारी और ऐडा के लिए छोड़ा गया था. और अंकिता कहा नहीं रही थी पैर वो भी बहुत कमजोर हो गयी थी मोहिनी के वॉर से. पैर अभी तो उसे कैसे भी अपने भाई और सोनल के उप्पेर मद्र रहे खतरे को हटाना था तो वो अपने को कमजोर कैसे होने देती. पैर गुरु भी उसकी कंडीशन को समाज गयी थी.
जुली ने इस काम के लिए अपने साथ दानव सेना की कुछ चुनिंदा लड़कियों को भी ले लिया था. उसमे कुछ जासूस थी तो कुछ अच्छी फाइटर थी. ये लोग दो टीम में बात गए थे. एक टीम बैक एरिया के पहाड़ी जांगले में में गयी तो एक झरने की तरफ गयी थी. एक टीम की फाइटर थी सलोनी तो दूसरी की ेबेचा. सलोनी ने अपनी तलवार को उस ब्लैक शक्ति से भर लिया था जो शादी के टाइम पैर दयासुर ने उसको दी थी. और इसका नतीजा भी ये था की सलोनी दानवो पैर दानव बन कर hi टूटी थी. सलोनी की उस शक्ति और उसकी दानवीय शक्तियों के आगे किसी भी रय की एक नहीं चल रही थी. तो दूसरी टीम में ेबेचा ने भी अपनी तलवार से कहर बर्षा रखा था. तलवार चलने में तो पहले से hi एक्सपर्ट थी और अब वो तलवार को चाँद हंस तलवार की कुछ शक्तिया भी मिल चुकी थी. तो कोई दानव इसके आगे ज्यादा देर ठीक नहीं प् रहा था. गुरु, सविता, जुली, मंजू, माहि, एरिका इन दानवो को केवल घायल hi कर प् रहे थे या इनका धयान बता प् रहे थे. पैर ये उस भीड़ को ेबेचा और सलोनी के पास तक नहीं जाने दे रही थी. 2-3 रय से ज्यादा एक बार ने ेबेचा और सलोनी तक पहुंच hi नहीं पते थे. दोनों टीमों ने बड़ी hi चतुराई से. और अपनी टीम को बचते हुए एक -2 करके सभी रय को मूट के खत उत्तर दिया. ेबेचा और सलोनी की तलवार उन सभी के लिए मूट बन कर नाची थी. तो सविता ने तो उनको ुधा ुधा कर जैसा फेका की दम तोड़ गए. गुरु ने संभु के सभी चलो को रय से लड़ाई सुरु होने से पहले hi मार दिया था ताकि यहाँ से कोई जिन्दा न जा पाए. और हुआ भी ये hi अभी संभु के भेजी गयी टीम का कोई भी दानव या मानव जिन्दा नहीं था.
कुछ hi देर में सभी हवेली लोट आये थे. पैर अभी हवेली की हालत टूटे हुए कांच के महल के जैसी थी. हार तरफ लाशे, खून, तोता हुआ सामान, बिखरा हुआ घर थके हुए घर के लोग. इतने दिनों की सभी तैयारी चकना चूर होगी थी. खाना भी बिखरा पड़ा था. ये सब उस जंग को तो जीत गए थे. पैर सामने की कंडीशन ने सभी की आखें नाम करदी थी. कहा 2 दिन से की हुयी इतनी तैयारी और अब खाना खिलने को भी नहीं था. अंकिता, कामिनी, ऐडा, पारी, पेय, माउद, काजल, जय भी बेस से उप्पेर आ गए थे. पारी की कंडीशन पहले से ठीक थी. पैर ऐडा की कंडीशन ख़राब हो रही थी. और वो भी सभी की तरह दुखी थी. पब की सभी पत्नियों की आखें नाम थी. जान तो बचा ली थी. पैर अब इज्जत डाव पैर थी. एक भाई जिंदगी में पहली बार उसके घर, उसकी सुसराल आ रहा था. एक बहन एक लम्बे ारसे के बाद अपनी भाभियो से मिलने आ रही थी. उनके सामने घर के इस हाल को देख कर सभी के दिल टूट रहे थे. वो सभी हताश हो रही थी. एक तो सरीर पैर कमजोरी थी. हिम्मत जवाब दे रही थी सभी की. पैर इज्जत बचने के लिए अभी एक और युद्ध लड़ना था.
पैर इस युद्ध की कमान संभाली जय ने. और उसका साथ देने के लिए खड़े हुए काजल, सैंडी और मल्टी (रखा से दानव सेना की तरफ से लड़ने वाली लड़की) सबसे पहले तो जय ने इन सभी को रेस्ट करने के लिए भेज दिया. पैर गुरु और कामिनी नहीं मानी वो दोनों यही रुक गयी. (भाइयो पब की सभी पावर गर्ल्स क्यों रेस्ट करने चली गयी इसका भी एक कारन है. और वो ये है की इन सभी की जीवन शक्ति एक दम मं लेवल पैर पहुंच गयी थी. एक तो बहुत साडी इन्होने hi उसे कर ली और कुछ पब ने, बल्कि पब को तो कुछ मिला hi नै, अब पब ने अपना वो युद्ध यानि की सन 6 कैसे जीता या उसके साथ क्या हुआ, ऐडा ने तो युद्ध किया hi नहीं फिर ऐडा की कंडीशन ख़राब कैसे??)