Update:-67
भावनाओ का समागम ऐसा था कि पहले जो केवल एक पहचान की लड़की थी अब वही सबसे खास नजर आने लगी। जिस लड़की को आज पहली बार कुंजल और नंदनी ने देखा था, वो अपनी सी लगने लगी। और एक जिसका केवल नाम सुना था, ऐसा लग रहा था, वो ना जाने कितने दिनों से घर के बाहर रह रहा है, बस जल्दी घर लौट आए, एक सदस्य की कमी सी मेहसूस हो रही है।
अपस्यु के उस रात की घटना के जिक्र के बाद ऐमी, स्वस्तिका और पार्थ खुद-व-खुद करीब हो गए नंदनी और कुंजल के। निकले थे तो चारों 2 बजे के करीब लेकिन अपस्यु 4 बजे तक होटल लौट आया और तीनों वहीं से कहीं और निकल लिए।
रात के तकरीबन 8 बजे तीनों लौटी। और जब तीनों लौटी तो तय कर पाना मुश्किल था कि तीनों में सबसे खूबसूरत कौन है। ऐमी के रंग में ही कुंजल भी रंगी नजर आ रही थी। कुंजल के टॉम बॉय लूक को पूरा बदल कर क्या हॉट और क्लासी लूक दिया था ऐमी ने। इससे भी ज्यादा गजब तो नंदनी थी। वो जब अपने पुराने रॉयल तौर-तरीके में लौटी और बिल्कुल किसी महारानी वाले एटिट्यूड के साथ अपने पहनावे और चाल को बदली, तब ऐसा लग रहा था जैसे 2 खूबसूरत राजकुमारी के साथ कहीं की महारानी चली आ रही है।
आज उन तीनों की एंट्री पर, फिर से दरवाजे पर वीरभद्र अटक गया। जैसे ही दरवाजा खोला और तीनों को ऐसे तैयार होकर अपने सामने पाया, वो फिर से दरवाजे पर खड़े-खड़े देखता रह गया। तीनों एक साथ अंदर आयी और इस बार तीनों को देखकर स्वस्तिका ने सिटी बजाते हुए उनका स्वागत किया।
नंदनी और कुंजल का हुलिया देखकर, आरव, ऐमी को ताने देते हुए कहने लगा… "बंदरिया अपने जैसी सबको नचनिया बना कर ले आयी है।" … आरव का ऐसा कहना था, कि उसके ऊपर नंदनी और कुंजल बरसना शुरू कर चुकी थी। आरव को घिरते दिख स्वस्तिका आरव के ओर से आ चुकी थी बोलने…
दरअसल स्वस्तिका, आरव और पार्थ एक टीम के थे और अपस्यु, ऐमी एक टीम से, और इनके बीच तू-तू, मै-मै की कहानी चलते रहती थी। आज लेकिन ऐमी के साथ अपस्यु ना होकर कुंजल और नंदनी थी। इधर सिन्हा जी की नजर जब नंदनी पर गई तो भावनाओं मै बहते हुए अचानक ही बोल परे…. "क्या दिख रही है नंदनी, एक दम मेग रयान (American actress Meg Ryan) लग रही है।"
अपस्यु, हैरानी से सिन्हा जी को देखते हुए…. "ओए सर जी ये सब क्या हो रहा है, खबरदार हो जाओ। और आपका ये मेग रयान का भूत उतरा नहीं है अब तक। यूएस आए हुए हो, जाकर मिल क्यों नहीं लेते?
सिन्हा जी:- अरे मेग रयान मेरी नजरें के सामने खड़ी है और तू कहां मुझे हॉलीवुड भेज रहा है।
अपस्यु, सिन्हा जी को देखा फिर अपनी मां को…. "ओए बुढऊ, ये क्या चल रहा है। मेरे ही सामने मेरी मां को घूर रहे।"
सिन्हा जी:- अब खूबसूरत लग रही है तो देख रहा, मुझे डिस्ट्रूब ना कर।
अपस्यु:- वो नंदनी रघुवंशी है, गुस्सा जब उनके सर पर हावी होता है तो चिपकाने में देर भी नहीं लगाती। संभालो, वरना सर जी आप का भविष्य खतरे में लग रहा मुझे।
सिन्हा जी:- चल चल, बच्चा है तू अभी, बड़ों के मामले में टांग ना अरा…
सिन्हा जी का इतना कहना था कि अपस्यु उसे घूरने लगा… "हद है यार, नहीं देखता तेरी मां को, खुश। अच्छा सुनना आज मूड बन रहा है, चल ना चलकर पीते हैं।
अपस्यु सिन्हा जी मना करते हुए, सबका ध्यान अपनी ओर खींचा….. "मां आप और सिन्हा जी अभी बैंक्वेट हॉल जा रहे है, वहां तीनों परिवार के मुखिया मिलकर आपस में कुछ चर्चा करेंगे… बाकी के सारे लोग प्राइवेट डिस्को यार्ड में पहुंचेंगे, जहां धमाल मचाने का कर्यक्रम रखा गया है। एक बात और, आप लोगों को ज्वाइन करने मिश्रा फैमिली और जिंदल फैमिली के यंगस्टर भी होंगे। सभा समाप्त कीजिए और जाकर तैयार हो जाइए।"
सभी लोग वहां से निकल गए अपने-अपने कमरे में, हालांकि कुंजल और ऐमी पहले से तैयार होकर आए थे, तो दोनों ऐमी के कमरे में ही जाकर वहीं बातें करने लगे। आरव तो बेचैन था लावणी से मिलने के लिए.. इसलिए वो भी पूरे लगन से तैयार हो रहा था।
कुछ देर जबतक ऐमी और कुंजल बातें कर रही थी, वहां स्वस्तिका भी तैयार होकर पहुंच गई। कुंजल उसे देखती हुई पूछने लगी… "हम अब बहने है, तो मुझे एक सवाल खाए जा रही है।"
स्वस्तिका, मुस्कुराती हुई… "बिल्कुल पूछो।"
कुंजल:- यहां हर कोई सज-संवर रहा है केवल तुम्हे छोड़ कर, ऐसा क्यों?
स्वस्तिका:- हिहिहीही… जिस दिन मै सज-संवर कर निकलूं, समझ लेना तुम्हे तुम्हारे जीजाजी मिल गए.. अब चलें…
कुंजल:- एक मिनट, एक मिनट… मुझे कंफ्यूज ना करो। इस हिसाब से तो मुझे भी नहीं संवरना चाहिए।
ऐमी:- नहीं ऐसा नहीं है। बस उसके दिल की तमन्ना ऐसी है कि किसी के लिए उसे जबतक संवरने की इक्छा ना हो, वो नहीं संवर सकती।
कुंजल:- फिर तो लगता है मुझे ही कोई चक्कर चलना होगा। वैसे भी कई सारी फैमिली के यंगस्टर जमा हो रहे है… चलें क्या?
ऐमी:- हां, हां क्यों नहीं, चलो चलकर धमाल मचाया जाए….
तीनों कमरे से निकलकर डिस्को एरिया में पहुंचे, पार्टी के माहौल को शुरू करने से पहले तीनों ही लड़कियां बार काउंटर पर पहुंची, 4 टकीला शॉट के लगाकर अभी रुके ही थे, कि ऐमी कहने लगी…. "अरे यार उस छछूंदर की एंगेजमेंट सेलीब्रेट करने आए हैं या नॉर्मल किसी डिस्को में, अभी सब 2 शॉट और लेंगे।"..
कुंजल:- वुहू… ये हुई ना बात…
स्वस्तिका:- दोनों पागल हो गई हो, पूरा घर कुछ देर में यहां होगा। और फिर मां भी तो होगी।
ऐमी:- अरे नंदनी रघुवंशी को आरव और अपस्यु संभालेगा, हम तो एन्जॉय करेंगे.. वैसे भी झूमने के लिए थोड़ा नशा तो होना चाहिए ना…
कुंजल ऐमी के साथ ताली देती हुई कहने लगी…. "बिल्कुल सही।"… दोनों ने 2 टकीला शॉट और खिंचा और साथ में स्वस्तिका को भी जबरदस्ती खिंचवाया। तीनों सबसे पहले पहुंचने वालों में से थे और उसके बाद उस जगह पर ध्रुव और साची एंट्री मार रही थी। …
साची को देखकर ऐमी कहने लगी… "लगता है अपस्यु को जलाने आयी है। इसे अपस्यु देखेगा तो जरूर अपने ऊपर चश्मा चढ़ा लेगा।"…
स्वस्तिका:- हिहीहिही… वो तो चश्मा ना भी चढ़ाएगा तो फर्क ना पड़ना, लेकिन ये क्या करेगी अपस्यु को देखकर।
कुंजल:- एक लड़की होकर तुमलोग दूसरी लड़की के लिए हंस रही, क्या तुम दोनों को उसके दर्द का एहसास भी है।
कुंजल थोड़े गुस्से में वहां से उठकर साची के पास चली गई और बिल्कुल किसी करीबी दोस्त की तरह उससे मिलती हुई, उसके और ध्रुव के साथ हंसी मज़ाक करने लगी… कुंजल और साची के रिश्ते को परखते हुए स्वस्तिका एक टकीला शॉट और लेती कहने लगी…. "ऐमी ये रिश्ता आगे जाकर हमे बहुत परेशान करने वाला है।"
ऐमी भी एक टकीला शॉट खींचती हुई कहने लगी…. "हां मै भी देख रही हूं। लेकिन कुंजल ने गलत क्या कहा, ये मासूम बेचारी अनजाने में ही एक बड़े गेम का हिस्सा बन गई, जिसके बारे में शायद इसे कभी पता भी ना चले।"
स्वस्तिका:- दर्द या तो हौसला देगा या फिर इसे तोड़ देगा। यहां हर किसी की किस्मत एक दूसरे से जुड़ी है ऐमी, हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। हौसला रहा तो किनारे लग ही जाना है… वरना घुट तो वो अब भी रही है…
ऐमी:- स्वस्तिका ऐसा नहीं है कि "हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते।" यदि चाह ले तो साची के लिए भी कुछ किया जा सकता है।
स्वस्तिका:- हम्मम !! ठीक है अब जब तुम्हे ऐसा लग रहा है तो मै तुम्हारे साथ हूं, अब छोड़ भी उसको वो आगे आने वाले कामों में से एक है, अभी तो एन्जॉय कर ले…..
इधर सब जब तैयार होने गए... अपस्यु भी तैयार होने चला गया लेकिन वो तुरंत ही तैयार होकर अपनी मां के पास पहुंचा…. "चलें मां"
नंदनी:- तुम मेरे साथ जा रहे.. तुम्हे तो उनके साथ होना चाहिए सोनू।
"अरे मां, अब मेरा आप के साथ जाने का मन है, चलो भी…" अपस्यु अभी बात कर ही रहा था कि पीछे से सिन्हा जी पहुंच गए…. "तुम भी चल रहे हमारे साथ क्या?"…. "हां चल रहा हूं, और कोई बहस नहीं इसपर।"
तीनों वहां से निकले बैंक्वेट हॉल के लिए… नंदनी की चाल में पूरा रौब और रुतबा नजर आ रहा था, जो की एक रॉयल ब्लड के मुखिया में होना चाहिए। वहीं उसके एक ओर सिन्हा जी थे तो दूसरी ओर नजरों का आकर्षण बना अपस्यु।
एक ओर से ये तीनों बैंक्वेट हॉल की ओर बढ़ रहे थे, दूसरे ओर से प्रकाश जिंदल अपने ताम-झाम के साथ चला आ रहा था। प्रकाश जिंदल को देखकर अपस्यु ने एक पल के लिए अपनी पलकें झपकाई और आखों पर काला चश्मा लगाकर अपनी मां के साथ बढ़ने लगा। दोनों के कदम अलग-अलग दिशा से एक ही ओर बढ़ रहे थे, जैसे-जैसे दोनों करीब आ रहे थे, उस माहोल में जैसे किसी युद्ध नगाड़े की धुन छेड़ रखी हो। युद्ध का बिगुल फूका जा रहा था। इतनी कड़ी मेहनत और सफल योजना से, जिस पड़ाव तक पहुंचना था, वो पड़ाव खुद सामने से कदम बढ़ाते हुए उन्ही के ओर चला आ रहा था।
एक औपचारिक परिचय के बाद सभी अपनी जगह पर बैठकर बातचीत कर रहे थे। कितनी सही थी उस लोमड़ी की कहानी जिसे अपस्यु सुना चुका था। प्रकाश जिंदल अपने हाव-भाव से सबको प्रभावित करता जा रहा था। एक अरबपति जो बिल्कुल जमीन से जुड़ा हुआ था।
अपस्यु ठीक नंदनी के पास बैठकर उसकी बातें ध्यान से सुन रहा था और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए बस उसे पूरी तरह भापने की कोशिश कर रहा था। वो भी लगभग दूसरा चन्द्रभान ही था, जिसके असली चेहरे के बारे में किसी को सोचना तो दूर, ऐसा ख्यालों में भी नहीं ला सकते।
उसके पास में ही उसकी बड़ी बेटी मेघा और उसका दामाद हाड़विक बैठा हुआ था। शक्ल से दोनों घमंडी और पैसे के नशे में चुर दंपत्ति, जो बस अपना मुंह केवल जरूरत के वक़्त ही खोल रहे थे।
"हे यू सर्वेंट, मेरे साथ आओ"… मेघा अपने फोन के संदेश को चेक करती हुई कहने लगी। मेघा का ऐसा कहना था और नंदनी के चेहरे का भाव बदलते देर ना लगे। अपस्यु तुरंत नंदनी का हाथ थामकर उसे बस शांत रहने का इशारा किया।
"मेघा जी, मै कोई फ़्री सर्विस नहीं देता।" अपस्यु अपना चश्मा हटाते हुए कहने लगा…
हाड़विक:- तुम जैसे हम कई सर्वेंट अफोर्ड कर सकतें है, अपनी सर्विस चार्ज बताओ।
सिन्हा जी:- एक काम के 2 करोड़ भारतीय रुपया, अभी कुछ दिन पहले ही तय हुआ है। और हां कोई अनैतिक काम नहीं करता…
सिन्हा जी की बात सुनकर दोनों दमापती चौंकते हुए कहने लगे … "व्हाट"..
अपस्यु:- फोन से बाहर निकालिए मैडम और ढंग से परिचय सुन लिया कीजिए।
प्रकाश जिंदल:- माफ़ करना बेटा, उसने ध्यान नहीं दिया। उसके लिए मै माफी मांगता हूं।
मेघा:- डैड इतनी भी बड़ी गलती नहीं थी कि आप इन लोगों से माफी मांगो।
प्रकाश जिंदल थोड़े आवेश में आते हुए….. "यदि बात करने की तमीज नहीं तो अपना मुंह मत खोला करो। हम परिवार के बीच बैठे है तुम्हारे ऑफिस के कर्मचारियों के बीच नहीं। मुझे लगता है तुम दोनों को डिस्को जाना चाहिए। हाड़विक तुम दोनों डिस्को अरीना में जाओ।"
दोनों अपने ही एटिट्यूड में वहां से निकल गए, और नंदनी गुस्से के घूंट को पी रही थी जो उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था। प्रकाश जिंदल माहौल को थोड़ा मजाकिया बनाते हुए, नंदनी को थोड़ा सामान्य करने की कोशिश में जुट गया। इसी क्रम में एक इमोशनल कहानी गढ़ते हुए.. "बीन मां की बच्ची, विदेश में पली बढ़ी" वाली कहानी सुनाने लगा। जिसे सुनने के बाद नंदनी थोड़ी नॉर्मल होते हुए उसके साथ बातों में लग गई।
कुछ वक़्त बाद प्रकाश जिंदल अपस्यु से अकेले में कुछ बात करने का प्रस्ताव रखा, जिसे अपस्यु खुशी-खुशी स्वीकार करते हुए दोनों उसी हॉल के दूसरे हिस्से तक पहुंचे। और हॉल के कोने में जाकर दोनों बातें करने लगते है।…
जिंदल:- नए लड़कों में इतना ज्यादा धैर्य बहुत कम देखने मिलता है। मैंने देखा कैसे तुमने अपनी मां का हाथ थामकर उन्हें शांत रहने के लिए कहा।
अपस्यु:- मैंने भी देखा कैसे आपने हमे अपमानित करने वाली अपनी बेटी को, आपने बाहर भेज दिया। बहुत हिम्मत चाहिए होती है अपने बिगाड़े बच्चों को शांत करने के लिए…
जिंदल:- मै तो जमीन से जुड़ा हूं, क्योंकि मेरे पिताजी एक बहुत छोटे से सहर में रहा करते थे, और मैंने उनकी गरीबी की परवरिश देखी है। लेकिन मेरे बच्चों ने एक आलीशान परवरिश में पले और हमेशा बुलंदियों को ही देखा है। उनके लिए किसी का अपमान करना कोई नई बात नहीं।
अपस्यु:- मेरी मां राज परिवार से है, और उनके पुस्तों ने केवल राजशाही ही देखी है। बच्चो में थोड़ा समझदारी डालिए की देखकर अपमान किया करे।
जिंदल:- तुम्हारे बातों से गुरूर झलकती है।
अपस्यु:- मेरे तेवर में भी गुरूर है, बस दिखता नहीं कभी..
जिंदल:- तुम मुझे उकसा रहे हो क्या?..
अपस्यु:- नहीं मै बस सच्चाई बता रहा हूं।
जिंदल:- हम्मम ! बहुत दिनों के बाद ऐसा लग रहा है हिंदुस्तान का कोई जानदार परिवार के सामने खड़ा हू। तुम्हारे अंदर मेरी बेटी से ज्यादा गुरूर होना चाहिए, तुम्हारे स्वभाव के ऊपर वो और भी जचता…. कमाल के हो तुम, बातों में संतुलन, चेहरे पर तेज, और तुम्हारा अंदाज़… वाह!! तुमने मुझे काफी प्रभावित किया है।
दोनों अभी बात कर ही रहे थे कि आरव, अपस्यु को ढूंढता हुआ हॉल में पहुंच गया, और दूर से ही उसे हाथ दिखाने लगा। आरव को देखकर अपस्यु ने प्रकाश जिंदल को वहीं नमस्ते किया और सिन्हा जी के साथ बाहर…
आरव थोड़ा चिढ़ते हुए… "लावणी कहां है।"
अपस्यु:- मतलब तू मुझे ढूंढ़ने नहीं, बल्कि लावणी का पता पूछने आया था। वहीं उसके माता पिता बैठे थे, उनसे क्यों नहीं पूछा?
आरव:- ज्यादा होशियार मत बन, मैंने पूछा था सासू मां से, उन्होंने बोला सब अपस्यु का किया है वहीं जाने…
अपस्यु और सिन्हा जी दोनों एक साथ… "ओय होए, सासू मां"… फिर अपस्यु, आरव के गाल को थपथपा कर कहने लगा… "तू बेटा पार्टी एन्जॉय कर, वो भी आ जाएगी। हम दोनों जरा तुमलोग को देर से ज्वाइन करते है।"
आरव:- और वजह जान सकता हूं क्यों?
"छोड़ उसे बताने से क्या फायदा है छोटे, हम चलते है।"….. "हां सही ही कहा बापू।"….
दोनों आपस में बात करते आरव को छोड़ कर बार के ओर चल दिए। दोनों को एक साथ बार में जाते देखकर आरव जोर से चिल्लाते हुए कहने लगा… "दोनों, सीधा अपने कमरे में जाना, डिस्को में अाकर नौटंकी किए तो फिर देख लेना। दोनों का आज सर फोड़ दूंगा।"..
आरव दूर खड़ा चिल्लाता रहा और दोनों पीछे से उसे टाटा करते हुए बार में पहुंच गए….