Romance Parivaar aur Pyaar - Page 5 - SexBaba
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Romance Parivaar aur Pyaar

अपडेट 34

इधर ऑपरेशन थिएटर के बहार सबलोग खड़े आर्यन के लिए प्रार्थना कर रहे थे. पुलिस भी वह पे आचुकी थी और अपनी फॉर्मलिटीज पूरी कर रही थी.

थोड़ी देर में डॉक्टर बहार आता है तोह सब उससे घेरर लेते है और सवालों की बारिश करदेते है.

शालिनी – डॉक्टर कैसा है मेरा बीटा. वह ठीक तोह है ना. उससे कुछ हुआ तोह नहीं है ना.

शेखर – बोलिये ना डॉक्टर. कैसा है आर्यन. वह ठीक है ना.

डॉक्टर – आपलोग शांत होजाइये. अभी हम कुछ नहीं कह सकते. ऑपरेशन अभी भी पूरा नहीं हुआ है. गोली पेशेंट के दिल के बहोत hi करीब लगी है. गोली निकलने में पेशेंट की जान को खतरा भी है. हम भी पूरी कोशिश कर रहे है. हमने सीनियर डॉक्टर को बुला लिया है. वह आते hi हम फिर से ऑपरेशन की तैयारी स्टार्ट करेंगे.

डॉक्टर की बात सुनते hi सबलोगो की हालत ख़राब होजाती है. शालिनी तोह वही गिर्र जाती है. अपने पैरों में खड़े रहने की शक्ति hi खू देती है वह.

शेखर – डॉक्टर आप कुछ भी कीजिये पर हमारे बेटे को बचा लीजिये. बड़े से बड़े डॉक्टर को बुलाइये पर उससे बचा लीजिये.

डॉक्टर – हम अपनी पूरी कोशिश करेंगी. आपलोग तब तक खून का इंतज़ाम करदिजिये. पेशेंट का खून बहोत बह चूका है.

विक्की – डॉक्टर आप मेरा खून ले लीजिये. मेरा ो पॉजिटिव है. यूनिवर्सल डोनर हु मैं. आप मेरा खून ले लीजिये.

शेखर – हां आप मेरा भी ले सकते है. मेरा भी ो पॉजिटिव hi है.

डॉक्टर – ी ऍम सॉरी. बूत हम यह खून नहीं ले सकते. पेशेंट का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है.

शेखर – बी नेगेटिव. यह ग्रुप तोह घर के किसी मेंबर का भी नहीं है.

डॉक्टर – हॉस्पिटल में भी यह ग्रुप अवेलेबल नहीं है. आपलोग जल्द से जल्द ब्लड का इंतज़ाम कर दीजिये. हमलोग ऑपरेशन की तैयारी करते है.

यह बोल डॉक्टर वह से चला जाता है.

शालिनी – शेखर जल्दी से कुछ करो. कही से भी खून का इंतज़ाम करो.

शेखर – मैं कुछ करता हु भाभी. कुछ नहीं होगा आर्यन को. मैं कुछ भी करके खून का इंतज़ाम करदूंगा.

फिर शेखर अपना फ़ोन निकल के अपने जान पहचान वाले सभी को कॉल लगता है और खून का इंतज़ाम करने लगता है. वह कुछ हॉस्पिटल्स में भी कॉल करता है पर उससे खून कही नहीं मिलता.

शालिनी – शेखर मुझे लगता है अब हमारे पास एक hi रास्ता है. हुम्हे उससे बुलाना पड़ेगा. क्योकि उसी के पास इस ब्लड ग्रुप का खून है.

शेखर – नहीं भाभी. अभी हमारे इतने भी बुरे दिन नहीं आये है जो हुम्हे उसकी मदद लेनी पड़े. मैं कुछ भी करके खून का इंतज़ाम करदूंगा पर उसकी मदद नहीं लूंगा. कभी भी नहीं.

शालिनी – शेखर हमारे पास वक़्त बहोत काम है. अगर खून का इंतज़ाम नहीं हुआ तोह ऑपरेशन स्टार्ट नहीं होगा.

इशिता – खून का इंतज़ाम होगया है मम्मी.

इशिता की बात सुनके सब उसकी तरफ देखने लगते है. जो किसी लड़के के साथ वह कड़ी थी.

शेखर – खून का इंतज़ाम होगया. कैसे बीटा. कहा मिला तुम्हे खून.

इशिता – चाचा जी. यह मेरा दोस्त है. इसका ब्लड ग्रुप और भाई का ब्लड ग्रुप शामे है. जब डॉक्टर ने बोलै तोह मैंने संग संग इससे कॉल किया. और यह खून डोनेट करने के लिए तैयार होगया है.

शेखर उस लड़के के पास आता है और उससे गौर से देखने लगता है.

शेखर – मैंने तुम्हे कही देखा है. कौन हो तुम.

लड़का – सर मैं आपकी कंपनी में जूनियर हर हु. मेरा नाम अभिमन्यु है. अभिमन्यु अग्रवाल.

शेखर – हां हां. याद आया. तुम्हारा बहोत बहोत शुक्तिया बीटा. तुम इस मुसीबत के टाइम में मदद के लिए आगे आये.

अभिमन्यु – यह तोह मेरा फ़र्ज़ है सर.

फिर शेखर अभिमन्यु को लेके सीधा डॉक्टर के पास जाता है जहा डॉक्टर अभिमन्यु का ब्लड एक बार फिर से टेस्ट करके आर्यन के निकलने लगता है.

इधर माहिरा को जब आर्यन की हालत के बारे में पता चला तोह उसकी हालत और ज्यादा ख़राब होगयी थी. वह बार बार एक hi बात बोल रही थी उसकी मौत आर्यन ने अपने नाम कर्ली.

उधर अजय और उसका परिवार आर्यन के संग आये लड़के को देखे जा रहे थे.

अजय – कौन है यह लड़का. जिसने आर्यन की इतनी मदद की.

माया – हां. इसी लड़के की वजह से आर्यन वक़्त रहते हॉस्पिटल आगया.

अर्जुन – विक्की बोल रहा था दोस्त है उसका. इसने माहिरा को बचने में भी मदद की है और इसिने गाडी में आर्यन को यहाँ पहोंच्या है.

अर्जुन की बात सुनके अजय उस लड़के के पास जाके बैठ जाता है और उससे बात करने लगता है.

अजय – तुम आर्यन के क्या लगते हो.

वह लड़का एकबार अजय की तरफ देखता है फिर बोलता है दोस्त है वह मेरा.

अजय – ोू. जरूर मुंबई में hi दोस्ती हुई होगी तुम्हारी.

लड़का – हआ.

अजय – तुमने बहोत मदद की है राजपूत परिवार की. अगर कभी भी किसी भी चीज़ की जरुरत हो तोह बे ज़हिज़हाक के मांग लेना.

लड़का – आपको ऐसा क्यों लगा के मैंने जो कुछ भी किया है वह किसी लालच में किया है.

अजय – तुम गलत समाज रहे हो. मेरे कहने का यह मतलब नहीं था. मैं तोह यह कह रहा हु कभी भी अपने आप को अकेला मत समझना. राजपूत परिवार हमेशा तुम्हारे साथ है.

लड़का – मुझे समाज आगया है आपके कहने का मतलब. थैंक यू. यह बोल वह लड़का वह से उठ के चला जाता है.

अजय उसको जाते हुए देखने लगता है.

लड़का – मैं में. एहि चीज़ दर्शाती है इस आदमी का मैं कितना छोटा है. यह सबको अपनी तरह hi समझता है. जैसे यह सबसे अपने फैयदे और लालच के लिए जुड़ा है यह बाकिसब को भी वैसा hi समझता है.

थोड़ी देर में शेखर और अभिमन्यु खून डोनेट करके बहार आजाते है. शेखर अभिमन्यु को बहार एक बेंच में बैठा देता है.

खून देने की वजह से अभिमन्यु को थोड़ी कमज़ोरी आगयी थी.

शालिनी – विक्की जल्दी जा और अभिमन्यु के लिए जूस लेके आ. इससे इसकी कमज़ोरी दुर्र होजायेगी.

अभिमन्यु – ारी ma’am इसकी कोई जरुरत नहीं है. मैं ठीक हु.

शालिनी – बिलकुल जरुरत है. तुमने हमारे लिए जो किया है वह तोह अपने अपनों के लिए नहीं करते. तुम तोह पराये होकर भी हमारे लिए इतना कुछ करगए.

अभिमन्यु – यह तोह मेरा फ़र्ज़ था ma’am. और आर्यन सर मेरे बॉस है साथ hi इशिता के भाई है उनके लिए यह कुछ भी नहीं.

विद्या – तुम दोनों एकदूसरे को कैसे जानते हो.

विद्या के सवाल पे इशिता और अभिमन्यु एक दूसरे को देखने लगते है. दोनों क्या जवाब दे उन्हें समाज नहीं आरहा था. दोनों इशारो में hi एकदूसरे को पूछ रहे थी और यह चीज़ सामने खड़ा वह लड़का साफ़ देख रहा था.

इशिता – वह चची अभी मेरी एक फ्रेंड का भाई है. तोह उसीके जरिये मुझे इसके बारे में पता चला.

शालिनी – अभियई???

इशिता – घबराते हुए. मेरा मतलब है अभिमन्यु.

शेखर – चलो अच्छा hi हुआ के तुम इसकी फ्रेंड के भाई हो और इस मुसीबत की घडी में हमारी इतनी बड़ी मदद की. इसके लिए तुम्हारा दिल से बहोत बहोत शुक्रिया.

अभिमन्यु – आप ऐसे थैंक यू ना बोले. वैसे इशिता ने बताया था माहिरा जी का किडनैप होगया था. मेरा मतलब है मेरी दीदी को बताया था उन्होंने मुझे बताया. क्या अब वह ठीक है.

शेखर – हां अब वह ठीक है. थोड़ी तबियत ख़राब है इसीलिए एहि एडमिट भी है. उसीको बचने के चाकर में आर्यन को गोली लगी.

अभिमन्यु – तोह वह यहाँ हॉस्पिटल में कैसे आये.

विद्या – उन्हें हॉस्पिटल लाने वाला तुम्हारे सामने hi खड़ा है. अगर यह ना होता तोह पता नहीं आज क्या होजाता.

शालिनी – अब बस भगवन आर्यन को जल्दी से अच्छा करदे.

अभिमन्यु – आपलोग चिंता मत कीजिये. सर जल्दी ठीक होजाएंगे. अच्छा अब मैं चलता हु. मुझे ऑफिस भी जाना है.

शेखर – तुम आज सीधा घर जाओगे. आज तुम्हारी ऑफिस से छुट्टी.

अभिमन्यु – पर सर. ऑफिस में आज बहोत काम है. विजय सर को मेरी जरुरत पड़ेगी.

शेखर – काम अपने टाइम पे होजायेगा. तुम सीधा घर जाओगे. That’s ान आर्डर.

अभिमन्यु – ठीक है सर. जैसा आप कहे.

शालिनी – तुम यहाँ आये कैसे थे.

अभिमन्यु – Ma’am बाइक से.

शालिनी – वीर.

वीर – यस Ma’am.

शालिनी – अपने आदमी को बोलो गाडी से इससे घर चोरर दे और इसकी बाइक भी घर पहुंचा दे.

वीर – यस Ma’am.

अभिमन्यु – ारी Ma’am इसकी कोई जरुरत नहीं है. मैं चला जाऊंगा.

शालिनी – वीर तुमने सुन्ना मैंने क्या कहा.

वीर – जी Ma’am होजायेगा.



फिर अभिमन्यु वीर के साथ वह से चला जाता है. पर जाते हुए वह बार बार इशिता को पीछे पलट के देख रहा था और इशिता भी उससे जाते हुए देख रही थी जो सामने खड़ा लड़का साफ़ देख रहा था.
 
थैंक यू

उनका पूछना थोड़ा लाज़मी भी था क्योकि आर्यन के साथ पास्ट में बहोत सी दुर्घटनाये हुई है जिसमे उसकी जान भी जाते जाते बच्ची थी. इसीलिए वह अब किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते थे.

अभी तोह अभिमन्यु का मैं रोले स्टार्ट हुआ है अभी उसके बारे में भी बहोत कुछ पता चलेगा.

अभी माहिरा मैडम थोड़ा रेस्ट में है. बेचारी को कितनी मार पढ़ी है थोड़ी मलम पट्टी होजाने दो.
 
अपडेट 35

अभिमन्यु के जाने के बाद डॉक्टर बहार आता है तोह सबलोग फिर उससे घेरर के खड़े होजाते है.

शेखर – डॉक्टर अब तोह खून का भी इंतज़ाम होगया है. अब आप प्लीज जल्दी से ऑपरेशन स्टार्ट करदिजिये.

डॉक्टर – जी हम उसी की तैयारी कर रहे है. दूसरे डॉक्टर भी यहाँ आचुके है. हम कुछ देर में hi ऑपरेशन स्टार्ट करेंगे.

यह बोल डॉक्टर वह से चला जाता है.

इधर शालिनी के फ़ोन में बार बार किसी का कॉल आरहा था और वह हरबार थोड़ी दुर्र जाके बात कर रही थी जो वह खड़े सभी के मैं में शंका पैदा कर रहा था.

माया – दीदी कौन इतने कॉल्स कर रहा है. और ऐसा कौन हज जिससे बात करने के लिए आप हरबार दुर्र जा रही है.

शालिनी – आर्यन के बारे में सब को पता चल गया है तोह उन्ही का कॉल आरहा है बार बार. यहाँ दिक्कत ना हो इसीलिए बहार जा रही हु.

शेखर – पर भाभी इतनी जल्दी यह न्यूज़ बहार कैसे गयी. उन्हें कैसे पता चला इसके बारे में.

शालिनी – तुम तोह जानते हो शेखर आजकल दीवारों के भी कान होते है. तोह उन्ही कानो में से किसी ने यह खबर फैलाई होगी.

विक्की – पापा तेजी ने एकदम सही कहा. यह देखिये न्यूज़ में सिर्फ भाई की खबरे hi चल रही है. और देख के तोह लग रहा है हॉस्पिटल के बहार hi न्यूज़ वाले खड़े है.

विक्की के कहने की देरी थी के तभी वह वीर आजाता है.

वीर – सर मम बहार पूरी मीडिया कड़ी है और वह बार बार आर्यन के बारे में सवाल कर रहे है. पहले तोह उन्हें यह एक फेक न्यूज़ लगी थी पर हुम्हे यहाँ देख कर उन्हें यकीन होगया है.

विद्या – अब क्या होगा. अब तोह पुरे सेहर को पता चल गया होगा इससबारे में.

शालिनी – शेखर तुम जाओ जाके मीडिया वालो को सम्भालों.

शेखर – जी.

फिर शेखर वह से निकल जाता है.

इधर आर्यन के ऑपरेशन की तैयारी होचुकी थी डॉक्टर्स ओट के अंदर जाचुके थे.

ओट के बहार सबलोग बैठे हुए थे. माहिरा भी इससबार ओट के बहार बैठी हुई थी. सबलोग आर्यन के लिए प्रार्थना कर रहे थे.

लगभग 4 घंटे के ऑपरेशन के बाद सभी डॉक्टर ओट के बहार आते है.

शालिनी – डॉक्टर कैसा है आर्यन. वह ठीक है ना अब.

शेखर – बोलिये ना डॉक्टर. कैसा है आर्यन. वह ठीक है ना.

डॉक्टर – देखिये गोली तोह हमने निकल दी है. पर अभी हम कुछ कह नहीं सकते. अगले 24 घंटो तक हुम्हे उससे ऑब्जरवेशन में रखना होगा. अगर इन् 24 घंटो में उससे होश नहीं आया तोह.......

डॉक्टर की बात सुनके तोह वह खड़े सभी के हाथ पेअर ठन्डे पढ़ जाते है. माहिरा तोह वही अपनी सुधबुध खोकर बैठ जाती है. उससे तोह जैसे अब होश hi नहीं था.

शालिनी की हालत भी बिगड़ जाती है उसके आँखों से भी आंसू निकलने लगते है. विक्की भी डॉक्टर की बात सुनके बुरी तरह डर जाता है पर बगल में खड़े उस लाडक्व ने उससे संभल लिया था.

शालिनी – तोह. तोह क्या हां तोह क्या. आप एक डॉक्टर है. आप कैसे इतनी जल्दी उम्मीद चोरर सकते है. ारी डॉक्टर तोह भगवन का दूसरा रूप है. और आप कैसे इतनी जल्दी यह बोल सकते है. मैं कुछ नहीं होने दूंगी उससे. बड़े से बड़े हॉस्पिटल में ले जाउंगी उससे. बड़े से बड़े डॉक्टर को लाऊंगी उसके लिए. कुछ नहीं होगा उससे.

शेखर – भाभी आप शांत होजाइये. कुछ नहीं होगा आर्यन को. विद्या भाभी को सम्भालो. डॉक्टर आप कुछ भी करिये पर प्लीज उससे बचा लीजिये. आप बड़े से बड़े डॉक्टर को बुलाइये कुछ भी करिये पर पलासी उससे बचा लीजिये. प्लीसीई.

डॉक्टर – देखिये मैं आपकी मेन्टल कंडीशन समाज रहा हु. पर गोली उसके दिल के बहोत करीब थी. हमने अपनी पूरी कोशिश की है पर अब सब भगवान् के हाथ में है.

यह बोल डॉक्टर वह से चला जाता है. डॉक्टर की बात सुनके इससबार शेखर भी डर जाता है. उसके कदम भी लड़खड़ा जाते है. वह जैसे hi गिरने वाला होता है तभी वह लड़का झट्ट से आगे बढ़ के उससे पकड़ लेता है.

लड़का – चाचा जी सम्भालिये खुद को. कुछ नहीं होगा उससे.

शेखर – पहले hi हमसे इतने साल दुर्र रहा और जब करीब आया तोह इस हालत में पहुंच गया. पता नहीं इसकी किस्मत में hi इतने दुःख क्यों है.

लड़का – यह दुःख आखरी दुःख होगा. इसके बाद और कोई दुःख नहीं होगा. मैं में. कसम है मुझे मेरी माँ और मेरे बाप की.

शालिनी और शेखर जब उस लड़के की आँखों में देखते है तोह उन्हें एक अलग hi चमक दिखाई देती है.

इधर अजय उस लड़के को एक अलग hi नज़र से देख रहा था. उसके मैं में उस लड़के को लेके बहोत से सवाल उठ रहे थे.

अजय – मैं में. क्या रिश्ता है इस लड़के का राजपूत परिवार है. आखिर क्यों कर रहा है यह इनकी इतनी मदद. सिर्फ दोस्ती के लिए कोई इतना क्यों करेगा. मुझे यह लड़का कुछ सही नहीं लग रहा है.

शेखर – विक्की सबको लेकर घर जा. मैं रखता हु यहाँ पे. सबलोग सुबह से भूखे प्यासे है यहाँ पे.

शालिनी – मैं कही नहीं जाउंगी. मैं एहि रखूंगी. विद्या तुम घर जाओ वह पिताजी अकेले है.

विद्या – पर भाभी आप.

शालिनी – मैंने कहा ना.

शालिनी की तेज़्ज़ आवाज़ सुनके आगे किसी की कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई. विक्की भी सभी को लेके वह से निकल जाता है. अब हॉस्पिटल में सिर्फ शेखर शालिनी और वह लड़का hi रह जाते है.

शेखर – बीटा अब तुम भी घर जाओ. पूरी रात तुम जागे हुए हो. जाओ जाके थोड़ा आराम करलो. हमलोग है यहाँ पे.

लड़का – नहीं अंकल. मैं ठीक हु.

शालिनी – शेखर ठीक बोल रहा है. पूरी रात तुम जागे हो. थोड़ा आराम करलो नहीं तोह तुंहारी भी ताब्यात खराब होजायेगी.

शालिनी की बात सुनके वह लड़का भी वह से निकल जाता है.

शाम को सबलोग फिर से हॉस्पिटल में आजाते है आर्यन को ओट से निकल कर िक में एडमिट करदिया गया था.

थोड़ी देर बाद वह पे अभिमन्यु भी आजाता है आर्यन का हाल चाल पूछने के लिए. अभिमन्यु का ऐसे फिर से हॉस्पिटल आना सबको अच्छा लगता है. वह जाके विक्की और उस लड़के के बगल में खड़ा होजाता है.

अभी थोड़ा hi टाइम गुज़रा था के तभी वह एकसाथ बहोत सारे कमांडो टाइप आदमी हाथों में बन्दुक लिए वह आजाते है और पुरे हॉस्पिटल को घेरर लेते है जिससे पुरे हॉस्पिटल में अचानक से एक डर का माहौल बन्न जाता है.

उन् आदमियों को यह करता देख सबलोग हैरान होजाते है पर शालिनी के मैं में डर आजाता है.

शालिनी – मैं में. हेय्य भगवान् अब क्या होगा. अब कैसे सम्भालूंगी में सबको. अब क्या जवाब दूंगी में सबको.

विद्या – शेखर यह लोग कौन है. और यह सब क्या है.

शेखर – समाज नहीं आरहा है. आखिर एहसाब क्या है. और कौन है यह लोग.

इधर उन् आदमियों का चीफ जब सबकुछ सेफ देखता है तोह वह फ़ोन में किसी को कुछ बोल देता है.

कुछ देर में वह पे कुछ बोडीगार्ड्स के साथ एक औरत और एक आदमी आते हुए दीखते है.

इनदोनो के देखकर शेखर की आँखे बड़ी होजाती है उसके चेहरे पे गुस्सा आजाता है. शेखर की तरह विद्या की आँखे भी हैरानी से बड़ी होजाती है और शालिनी की हालत डर से ख़राब होजाती है.

औरत जल्दी से चलते हुए शालिनी के सामने आके रुख जाती है.

औरत – कहा है वह.

शालिनी – िक में.

शालिनी के यह बोलते hi उस औरत की आँखों में आंसू आजाते है और वह िक की तरफ जाने लगती है.

जैसे hi वह िक के करीब आती है तोह बीच रास्ते में hi शेखर खड़ा होजाता है.

शेखर – खबरदार अगर एक कदम भी आगे बढ़ाया तोह. चली जा यहाँ से.

औरत – मुझे उससे मिलना है.

शेखर – मैंने कहा ना चली जा यहाँ से.

औरत – मैं हाथ जोड़ती हु प्लीज मुझे उससे मिलने दो.

शेखर – भाभी विद्या इससे कह दो चली जाए यह यहाँ से.

विद्या – शेखर पलासी शन्तत होजाइये. यह घर नहीं हॉस्पिटल है. पलासी यहाँ कुछ मत कीजियेगा.

शेखर – इसीलिए कह रहा हु इसे बोलो जैसे यह आयी है वैसे hi वापस चली जाए.

वह औरत एकबार शालिनी की तरफ देखती है फिर एकबार िक के दरवाज़े की तरफ देखती है और रट हुए वापस अपने पति के पास चली जाती है.

आदमी – शेखर मेरी बात तोह सुनो. एकबार हुम्हे मिल लेने दो.

शेखर – मैंने कहा ना निकल जाओ यहाँ से. मैं नहीं चाहता हमारे बच्चो पे तुमलोगो की परछाई भी पढ़े.

इशिता विक्की माहिरा तोह एहसाब देख कर बहोत हैरान थे. उन्हें तोह कुछ भी समाज नहीं आरहा था आखिर हो क्या रहा है.

इधर वह औरत उस लड़के के पास आती है और उसके सामने कड़ी होजाती है.

औरत – तुमने मुझसे एक वादा किया था ना. तोह क्या हुआ उस वादे का.

लड़का अपनी गर्दन झुका के खड़ा होजाता है उसके पास उस औरत के सवाल का कोई जवाब नहीं था.

अभी और कोई कुछ बोलता तभी वह डॉक्टर आजाते है और इतने सारे आदमियों को वह देख कर बोलने लगते है.

डॉक्टर – ारी यह सब क्या है. आपलोग यहाँ क्या कर रहे है. यह एक हॉस्पिटल है. यहाँ इतनी भीड़ क्यों किये हुए है आपलोग. निकालिये बहार निकालिये आपलोग.

वह आदमी अपने संग आये आदमियों को इशारा करता है तोह वह सबलोग वह से निकल जाते है.

आदमी – डॉक्टर मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

डॉक्टर – जी बोलिये.

आदमी – अंदर जो लड़का है उसकी िःस्वक़्त क्या कंडीशन है.

डॉक्टर – देखिये उस लड़के को गोली लगी थी. गोली दिल के बहोत hi ज्यादा करीब लगी थी. गोली हमने निकल दी है पर अभी हम आगे कुछ कह नहीं सकते. हुम्हे उस लड़के को 24 घंटो तक ऑब्जरवेशन में रखना होगा. अगर इन् 24 घंटो में उस होश आगया सब ठीक है नहीं तोह.....

डॉक्टर के मुँह से यह सब सुन्न के उस औरत के पैरों टेल ज़मीन खिसक जाती है. वह वही बैठ के रोने लगती है.

शालिनी और विद्या उसके पास जाके उससे संभालती है.

शालिनी – चुप्प होजाओ. कुछ नहीं होगा उससे.

विद्या – हां कुछ नहीं होगा उससे. चुप होजाओ.

औरत – कैसे चुप होजाउ. क्या हालत होगयी है उसकी. ज़िन्दगी और मौत के बीच जुंग लड़ रहा है वह.

विक्की – मम्मी पापा कौन है एहलोग. इन्हे पहले तोह कभी नहीं देखा. और एहलोग भाई को कैसे जानते है.

विद्या – अभी नहीं विक्की बाद में. अभी पानी दो.

फिर विक्की बगल में रखे बोतल को आगे बढ़ा देता है. विद्या उस औरत को थोड़ा पानी पिलाती है और जैसे तैसे उससे शांत करवाती है.

इधर अजय और उसका परिवार एहसाब देख कर पूरी तरह से हैरान थी. उन्हें कुछ समाज नहीं आरहा था आखिर यह सब हो क्या रहा है. और एहलोग यहाँ किसलिए आये है.

अजय – मैं में. यह यहाँ क्या कर रहे है. और यह सब क्या है. और एहलोग इस लड़के को कैसे जानते है. आखिर मामला क्या है यह जानना hi होगा.

शालिनी – चलो घर चलो .

शेखर – नही भाभी एहलोग उस घर में कदम नहीं रखेंगे. भैया के वक़्त इनलोगो को अंदर आने दिया वही बहोत था. अब इनलोगो के लिए उस घर में कोई जगह नहीं है.

शालिनी – शेखर इन्हे घर आने दो.

शेखर – नहीं भाभी कभी नहीं.

शालिनी – शेखर मैंने कहा ना एहलोग घर आएंगी.

शालिनी की तेज़्ज़ आवाज़ सुनके वह सबलोग चुप्प होजाते है. किसी की अब और कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई.

शेखर भी अपने पैरर पटकते हुए हॉस्पिटल के बहार निकल जाता है.

शालिनी – वीर घर जाने की तैयारी करो.

शालिनी की बात सुनके वीर बहार चला जाता है.

इशिता – मम्मी यह अंकल आंटी कौन है.

माहिरा – हां मम्मी कौन है एहलोग.

शालिनी – यहाँ नहीं. घर चलो. वह बहोत से राज़ खुलने वाले है.



फिर सबलोग घर जाने के लिए निकल जाते है.
 
बहोत दिनों से सोच रहा था यह बात बोलू पर सोचा नहीं रहने दो जैसे चल रहा है चलने दो. पर अब लगता है बोलना hi पड़ेगा. कहानी स्टार्ट किये हुए बहोत समय होगया अपडेट भी 30 के ऊपर होगये है. मानता हु उपदटेस रेगुलर नहीं है पर हफ्ते में 2 उपदटेस तोह दे hi रहा हु.

पर कहानी में मुझे रिस्पांस एकदम नहीं मिला है. कहानी में जितने भी कमैंट्स आये है उनमे से अधिकतर लोगो के कमैंट्स शामे तो शामे है हर एक अपडेट में. जिससे देखकर और पढ़कर मुझे आगे लिखना का मैं hi नहीं होता है. सिर्फ और को चोरके सबके सब हर एक अपडेट में एक hi कमैंट्स दे ते है. मैं यह नहीं कहता के इनलोगो की तरह बड़े बड़े कमैंट्स लिखो पर कुछ तोह ऐसा लिखो जिससे देख कर पफ कर समाज आये के हां सामने वाला स्टोरी से कनेक्टेड है वह स्टोरी पढता है. पर जो लोग यह कहानी पढ़ रहे है वह लोग तोह जैसे बस अटेंडेंस देने आते है. हर अपडेट के नीचे शामे तो शामे कमैंट्स कॉपी पेस्ट करदेते है और अगले दिन फिर से वेटिंग लिख कर अटेंडेंस देने आजाते है.

एहसाब चीज़े देख कर आगे और लिखने का मैं hi नहीं होता है. ना कोई मोटिवेशन मिलता है और नाही आगे लिखने का उत्साह होता है.

मेरी यह बाते सुन्न कर कुछ लोग कहेंगे स्टोरी बंद मत करना हम आपके साथ है, कोई पढ़े ना पढ़े हम तोह पढ़ रहे है तोह उनसे कहना चाहूंगा आपलोग जैसे पढ़ते है ना वह देखकर मुझे और लिखने की इच्छा नहीं होती अपना टाइम यहाँ देने की इच्छा नहीं होती.
 
अपडेट 36

थोड़ी hi देरर में सबलोग घर आजाते है.

शेखर बिना किसी से कोई बात किये घर के अंदर चला जाता है. हॉल में प्रताप जब शेखर से पूछता है क्या हुआ तोह वह गुस्से में बोलता है मुझे नहीं पता जो लोग आरहे है उनसे पूछिए. यह बोल वह अपने कमरे की तरफ चला जाता है.

प्रताप शेखर की बात का मतलब नहीं समाज पाटा. वह दरवाज़े की तरफ देखता है तोह पाटा है एक एक करके सबलोग घर के अंदर आरहे है.

प्रताप – बच्चो क्या बात है सबलोग वापस आगये है. आर्यन कैसा है. मुझे सुबह से कोई कुछ बोल क्यों नहीं रहा है. वह ठिक्क है ना.

विक्की – दादाजी भाई अभी िक में है. डॉक्टर बोल रहे है 24 घंटे के पहले वह कुछ नहीं बोल सकते.

प्रताप – इशिता तुम्हारी मम्मी कहा है.

इशिता – दादाजी मम्मी आरही है उंनलोगो के साथ.

प्रताप – कौनलोग.

विक्की – पता नहीं दादाजी कौन थे ओहलोग अचानक से हॉस्पिटल में आगये. उनके साथ बहोत सारे कमांडो जैसे लोग भी थे जिन्होंने पुरे हॉस्पिटल को घेरर लिया. पापा तोह उन् अंकल और आंटी को देख कर बहोत hi ज्यादा गुस्सा होगये थे.

प्रताप जब विक्की के मुँह से यह सब सुनता है तोह वह भी बहाय ज्यादा परेशां होजाता है.

प्रताप – क्या ओहलोग घर आरहे है.

माहिरा – हां मम्मी और चची उन्हें घर ला रही है. आप जानते है कौन है ओहलोग.

अभी प्रताप कुछ बोलता तभी शालिनी और विद्या अंदर आजाते है और उनके पीछे पीछे ओहलोग भी अंदर आने लगते है.

जैसे hi दोनों घर के अंदर कदम रखने वाले होते है तभी शेखर वह आजाता है और बोलता है.

शेखर – ख़बरदार अगर तुमलोगो ने एक कदम भी आगे बढ़ाया तोह. इस घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है.

शालिनी – शेखररर.

शेखर – नही भाभी. हॉस्पिटल में मैं चुप रह गया पर यहाँ नहीं. इनसे कह दीजिये एहलोग निकल जाए यहाँ से.

शालिनी – शेखर यह इनका भी घर है.

शेखर – यह घर इनका कभी नहीं था और नाही कभी होगा. उस दिन सिर्फ भैया के लिए मैंने इन्हे इस घर में घुसने दिया था. वर्ण उस दिन भी मैं इन्हे यहाँ आने नहीं देता.

प्रताप – शेखर.

शेखर – नहीं पिताजी आज नहीं. उस दिन सिर्फ आपके कहने पे इन्हे अंदर आने दिया था. मगर आज मेरे पास ऐसी कोई बंदिश नहीं है.

प्रताप – तू गलत कर रहा है शेखर. जब तुझे असलियत का पता चलेगा तब तुझे पछतावे का भी मौका नहीं मिलेगा.

शेखर – कैसी असलियत पिताजी कैसी असलियत. ारी सचाई तोह एहि है के यह औरत एक धोकेबाज़ है.

प्रताप – चिल्लाते हुए. शेखरररररररर.

प्रताप का चिल्लाना सुनके वह खड़े सबलोग सेहम जाते है. शेखर एकदम से चुप होजाता है.

प्रताप – तुझे पता भी है तू किस्से क्या बोल रहा है. ारी अगर यह आज यहाँ नहीं होती तोह शायद आज आर्यन भी हमारे साथ नहीं होता. 10 साल पहले आर्यन को इनलोगो ने hi बचाया था. इनकी hi वजह से आज आर्यन सही सलामत हुनर बीच है. पिछले 10 साल से इनलोगो ने hi आर्यन का ख्याल रखा है संभाला है और तू कहता है यह धोकेबाज़ है.

शालिनी – और तुम जिस वजह से इससे धोकेबाज़ कह रहे हो तुम जानते भी हो अगर इसने वह धोका नहीं दिया होता तोह......

औरत – नहीं शालिनी आगे कुछ मत बोलना.

शालिनी – नही आज नहीं. आज मुझे बोलने दो. आज सबको सचाई का पता चलने दो.

शेखर – आप किस सचाई की बात कर रही है. आपको पता है ना इसने सिर्फ और सिर्फ इस जायदात के लिए हुम्हे कितना बड़ा धोखा दिया था.

शालिनी – अगर इसने वैसा ना किया होता तोह आज तुम और तुम्हारे बीवी बच्चे ज़िंदा ना होते. तुमलोगो को बचने के लिए इसने अपने सर पे धोकेबाज़ी का इलज़ाम सहा इतना बड़ा परिवार होने के बाद भी अपना कहने को कोई नहीं था इसका.

शालिनी की बात सुनके शेखर के आँखे हैरानी से बड़ी होजाती से. वह शालिनी की तरफ सवालियां नज़रो से देखता है.

शालिनी – यह बात विद्या को भी पता है.

शालिनी की बात सुनके शेखर विद्या की तरफ भी हैरानी से देखता है फिर बोलता है.

शेखर – पर उस दिन मैंने जो देखा और जो सुना वह क्या था. मैंने खुद देखा और सुना था इससे. इसने साफ़ साफ़ कहा था विक्रम भैया से फ़ोन पे अगर मुझे ज़िंदा देखना चाहते हो तोह पूरी की पूरी जायदात इसके नाम करनी होगी. और अगर ऐसा नहीं किया तोह यह मुझे मरवा देगी.

विद्या – इसने ऐसा बोलै नहीं था बल्कि इससे ऐसा बुलवाया गया था. अगर यह ऐसा नहीं करती तोह हॉस्पिटल में hi मुझे और विक्की दोनों को मार दिया जाता ऑपरेशन के नाम पे.

शेखर बस हैरान नज़रो से सबको देख रहा था. उससे अभी भी इन् बातों पे यकीन नहीं होरहा था. वह जिस वजह से इतने सालों तक नफरत कर रहा था वह वजह hi झूटी थी यह जानके वह अंदर तक हिल गया था.

इधर बहार वह औरत खड़े खड़े रोह रही थी. उसका पति उससे संभाले खड़ा था.

शालिनी – बच्चों तुमलोग पूछ रहे थी एहलोग कौन है. यह तुम्हारे सेज बुआ और फूफाजी है. तुम्हारे पापा की बेहेन है यह.

इशिता माहिरा और विक्की यह सुनके उंनलोगो को देखने लगते है.

प्रताप – शेखर उस दिन के बाद से तू अपनी बेहेन से इस कदर नफरत करने लगा के तूने कभी भी सचाई सुन्नी hi नहीं चाही. जब भी तुझे सचाई बताने की कोशिश की तू हरबार भड़क जाता. अगर एकबार सिर्फ एकबार पूरी बात जान लेता तोह इतने साल तक अपनी जान से प्यारी बेहेन से दुर्र नहीं रहना पढता.

देख उससे वह आज भी तेरी वही बेहेन है जिसके लिए तू हमसब से लड़ जाता था. जिसके लिए तूने गलती ना होने पे भी मार खायी है. जिसने तुझे और तेरे परिवार को बचने के लिए अपने आप को एक अनाथ की तरह रखा और तू उससे hi धोखेबाज़ बोल रहा है.

शेखर अपनी बेहेन की तरफ देखता है तोह पाटा है वह अपना चेहरा अपने हाथों में छुपाये रोये जा रही है. वह धीरे धीरे चलके उसके पास आता है और उसके सामने खड़ा होजाता है.

शेखर – क्या अपने भाई को कभी भी माफ़ कर पाएगी संगीता. जहा मुझे तेरा एहसान माना चाहिए था वही मैं तुझे दोषी ठहरा कर तुझसे hi नफरत कर बैठा था. मुझे माफ़ करदे संगीता मुझे बहोत बड़ी गलती होगयी.

संगीता जो अपने हाथों में अपने चेहरा छुपा के रोये जा रही थी वह अपने भाई की आवाज़ सुनके सामने देखती है तोह अपने भाई को खड़ा पाती है.

संगीता – भाई. यह बोल शेखर के गले लग जाती है और जोरर जोरर से रोने लगती है.

शेखर – मुझे माफ़ करदे मेरी बेहेन. मैं तोह अपने गुस्से और अपने नफरत में इतना अँधा होगया था के मैंने सचाई जाने की कभी कोशिश hi नहीं की. तूने मुझे और मेरे परिवार को बचने के लिए कितने दुःख सही. मैं एक अच्छा भाई नहीं बन्न सका.

संगीता – ऐसा मत बोल भाई. तू एक बहोत अच्छे भाई है. मुझे तुझसे कोई शिकायत नहीं है भाई.

इधर अंदर इतने सालों बाद दोनों भाई बेहेन का मिलान देख सबकी आँखों में आंसू आजाते है.

शालिनी – शेखर क्या अब भी अपनी बेहेन को घर के बहार hi रखोगे. उससे अंदर नहीं आने डोज.

शालिनी की बात सुनके शेखर संगीता और उसके पति दोनों को घर के अंदर लाता है.

दोनों सबसे प्रताप के पास आके उसके पैरर छूटे है. अपने बेटी को इतने सालों बाद अपने पास देख प्रताप भी भावुक होजाता है.

संगीता – पिताजी मेरा बच्चा.

प्रताप – कुछ नहीं होगा उससे. वह ठीक होजायेगा.

शालिनी – हां संगीता कुछ नहीं होगा आर्यन को. वह ठीक होजायेगा.

संगीता – मैं पहले hi अपने एक बेटे को खू चुकी हु. मुझ में अब और शक्ति नहीं है.

शेखर – क्याआआ. मेरा एक भतीजा भी है.

विद्या – आपके एक नहीं 2 भतीजे है. ऋषि और रोहन.

संगीता – मेरे बच्चे की यह हालत कैसे हुई. किसने की उसकी यह हालत.

शेखर – आर्यन माहिरा को बचने गया था. वही पे उससे गोली लग जाती है.

यह सुनने के बाद संगीता एकबार माहिरा की तरफ देखती है तोह वह अपनी गर्दन नीचे झुका लेती है.

संगीता – किसने गोली चलायी थी.



शेखर – जिसने चलायी थी और जिसने माहिरा का किडनैप किया था वह दोनों बाप बेटे दोनों मर्डर चुके है.
 
मैं आपके बात से सहमत हु संजू भाई. मुझे काम रीडर्स से प्रॉब्लम नहीं है और नाही नेगेटिव रेविएवस है या काम रेविएवस है. मुझे प्रॉब्लम होती है जब इतनी म्हणत करो और एहलोग बिना अपडेट को ठीक से पढ़के सिर्फ और सिर्फ फॉर्मेलिटी निभाने के लिए शामे तो शामे कमैंट्स हर एक अपडेट पे और हर एक स्टोरी पे चिपका देते है.

आप देखिये यह परकास, पार्क, ध्परिख, स्मिथ15 और इनके जैसे बहोत जनन हर अपडेट पे हर स्टोरी पे एक hi चीज़ बार बार हरबार चिपका देते है.

यह चीज़ देख कर किसी भी राइटर का दिमाग गरम होगा hi. मैं नहीं कहता मुझे लम्बे लम्बे रिव्यु दो. पर यह शामे तो शामे चीज़ तोह हर स्टोरी पे हर उपदटेस में ना दो. जब राइटर इतनी म्हणत करता है तोह रीडर्स का भी फ़र्ज़ बनता है वह भी थोड़ी म्हणत करे.
 
अपडेट 37

शेखर – संगीता तुमने कहा तुम्हारे दो बेटे है. जिसमे से एक को तुम खो चुकी इसका क्या मतलब हुआ.

संगीता – मुझे 2 बेटे हुए थे जिनका नाम मैंने ऋषि और रोहन रखा था. हमारा छोटा सा परिवार बहोत खुश था. हम मुंबई में रहते थे. जानते हो मेरे ऋषि और रोहन दोनों की hi पर्सनालिटी मैच होती थी. बस शक्ल अलग थी. दोनों के बिर्थ्दते भी शामे है. मेरे रोहन के सीने में एकदम बीचो बीचो एक काल टिल था जो बिलकुल त्रिशूल के जैसे दीखता था. पर जब ऋषि और रोहन 5 साल के हुए तब मेरे पति इशांत के एक दुश्मन ने हमारे रोहन को किडनैप करलिया. उसने शर्त राखी के जब तक पुलिस उसके भाई को नहीं चोरटी तब तक वह रोहन को नहीं छोड़ेगा.

पुलिस ने उस आदमी के भाई को चोर्ने का फैसला भी किया और हम उसके बताये हुए जगह पे भी गए थे. पर उसने हमसे बदला लेने के लिए रोहन को जिस घर में रखा था उससे ब्लास्ट करवा दिया. पुलिस ने तोह ुनन्दनो का एनकाउंटर करदिया पर मेरा रोहन हमेशा हमेशा के लिए मुझसे दुर्र होगया.

यह बोल संगीता जोरर जोरर से रोने लगती है. इशांत आगे आके संगीता को संभालता है.

इशांत – 10 साल पहले हुम्हे विक्रम और शालिनी मिले मुंबई में. पहले वह भी हमसे नाराज़ थे नफरत करते थे हमसे जैसे इतने सालों से तुम करते थे. पर जब संगीता ने उन्हें साड़ी सचाई बताई तोह उनका गुस्सा शांत हुआ. और तभी हुम्हे पता चला के कोई है जो इस प्रॉपर्टी के लिए आर्यन को मारना चाहता है और उसने बहोत बार हमले भी करवाए है और उसी एक हमले में आर्यन कोमा में चला गया था.

संगीता को तोह जैसे आर्यन में हमारा रोहन मिल गया था. विक्रम और शालिनी जितने दिन भी हमारे साथ थे उतने दिनों तक संगीता ने तोह जैसे आर्यन को hi अपना रोहन मान लिया था. तभी हुम्हे आर्यन की जान बचने के एक आईडिया आया और हमने आर्यन के मरने का झूठा नाटक किया ताकि सबको लगे आर्यन अब ज़िंदा नहीं है और उसके ऊपर जो हमले हो रहे थे वेब रुख जाए.

संगीता – और हुआ भी वैसा hi. हमने आर्यन के जैसे दिखने वाले hi एक बच्चे की डेड बॉडी को खोजै और उसको आर्यन के साथ रेप्लस करदिया. जिससे दुनिया के सामने आर्यन मर्डर जाता है पर वह मुंबई में हमारे पास बिलकुल सुरक्षित रहने लगता है. इन् 10 सालों तक आर्यन ने मेरे रोहन की कमी को पूरा किया. उसने मुझे कभी भी यह एहसास नहीं होने दिया के वह मेरा बीटा नहीं है.

शालिनी – और तब से आर्यन मुंबई में संगीता के पास रह रहा था. विक्रम हर महीने मुंबई जाते रहते थे बिज़नेस के नाम से ताकि वह आर्यन से मिल सके.

शेखर – इतना सब कुछ हुआ और आपलोगो ने मुझे बताना भी जरुरी नहीं समझा. क्या आपलोगो को मुझपे भरोसा नहीं था.

शालिनी – ऐसी बात नहीं है शेखर. तुम उस वक़्त संगीता से नफरत करते थे. तुम्हे हम कैसे बताते के आर्यन संगीता के पास सुरक्षित है. तुम तोह संगीता का नाम तक सुन्ना नहीं चाहते थे.

शेखर – और विद्या तुम तुम्हे शुरुआत से सब पता था ना. तुम्हे यह भी पता था न के आर्यन ज़िंदा है और वह संगीता के पास है. तुमने भी मुझे धोखे में रखा.

विद्या – नहीं शेखर ऐसा नहीं है. मुझे सच में आर्यन के बारे में कुछ नहीं पता था. मुह्हे शक्क तोह था के भैया भाभी और पिताजी हमसब से कोई राज़ छुपा रह है. पर वह राज़ क्या था वह मुझे नहीं पता था. और रही संगीता के बारे में तोह मुझे उसका बारे में 3 साल पहले hi पता चला था और तबसे मैं आपको सच बताना चाहती थी पर आपने कभी मेरी बात नहीं सुन्नी. याद कीजिये मैंने कितनी बार आपसे कहा था मुझे आपसे संगीता को लेके कुछ बात करनी है पर आप हरबार इसका नाम सुनते hi गुस्सा होजाते थे.

शेखर जब यह सब सुनता है तोह उससे खुद पर hi गुस्सा आरहा था. अगर वह एकबार विद्या की बात सुनलेता तोह शायद hi उससे इतने साल तक अपने भतीजो से अपनी बेहेन से दुर्र रहना पढता. पर उसके गुस्से ने उसकी सोचने समझने की शक्ति hi हर्र ली थी.

विक्की – बुआ अगर रोहन भैया नहीं रहे तोह ऋषि भैया कहा है.

संगीता – माहिरा को देखते हुए. ऋषि कुछ hi दिनों में तुमसब के सामने होगा. अभी वह किसी जरुरी काम में फसा हुआ है. उस बेचारे को पता भी नहीं हम िःस्वक़्त यहाँ है.

माहिरा जब देखती है के संगीता उससे देखते हुए hi एहसाब बोल रही है तोह उसकी गर्दन नीचे झुक्क जाती है और उसके आँखों में आंसू आजाते है.

इशांत – शेखर एहलोग (अजय एंड फॅमिली) कौन है.

शेखर – एहलोग आर्यन के मां ममी है. अजय और माया और वह उनका बीटा अर्जुन.

विद्या – संगीता वह कौन था जिसने तुम्हे तुम्हारे परिवार से दुर्र किया.

संगीता – मुझे जिस आदमी ने यह सब करने के लिए बोलै था उससे तोह इशांत ने पकड़ लिया था. पर बाद में पता चला वह तोह एक पियादा था. असली खिलाडी तोह कोई और hi था जो परदे के पीछे से सरे खेल खेल रहा था. उस आदमी को बहोत टॉर्चर किया गया पर वह उस परदे के पीछे वाले इंसान के बारे में कुछ नहीं बता पाया.

इशांत – उसका कहना था उसका बॉस हमेशा उससे फ़ोन में hi बात करता था. उसने उसकी शकल कभी नहीं देखि.

संगीता – उस इंसान का असली मकसद था राजपूत परिवार को तोडना उससे बर्बाद करना. और इसमें वह कामयाब भी हुआ. उसने मुझे मेरे परिवार से मेरे भाइयों से अलग करदिया.

विक्की – पर इनसब में आर्यन भैया की क्या गलती थी. उन्हें को कोई मारना चाहता था.

संगीता – आर्यन को इसलिए मारना चाहता था क्योकि विक्रम की पूरी जायदाद आर्यन के नाम पे थी और फ्यूचर में विक्रम के बाद आर्यन hi बनता राजपूत ग्रुप का मद. क्योकि शेखर को स्टार्टिंग से hi मद बनने की कोई इच्छा नहीं थी. और घर का बड़ा बीटा होने के नाते आर्यन hi होता असली हक़दार.

शेखर – तुम्हे हमसे अलग करने वाला आर्यन को हमसे दुर्र करने वाला कही एक hi इंसान तोह नहीं.

इशांत – पता नहीं शेखर. क्योकि संगीता को जिसने फसाया था अगर वही इंसान आर्यन को मारने वाला होता तोह वह मुंबई में भी तरय करता जब तक आर्यन हमारे साथ था. पर इन् 10 सालों में किसी भी तरह से आर्यन पे हुम्ला नहीं हुआ.

शेखर – इसका मतलब राजपूत खानदान के एक नहीं 2 दुश्मन है. और दोनों से hi हम अनजान है.

इशांत – हां.

शेखर – पर हमसे किसी की क्या दुश्मनी. हमने किसी का क्या बिगाड़ा है.

इशांत – तुमलोगो ने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा पर होसकता है किसी का कुछ बिगड़ा हो और वह इसके लिए तुमलोगो को अपना दोषी मानता है और इसीलिए वह एहसाब कर रहा है.

शेखर – तोह इसका पता कैसे लगाएंगे. और अब तोह हमारे बच्चे भी सुरक्षित नहीं है.

इशांत – तुम चिंता मत करो. मैंने मेरे आदमी इस घर के हर्र मेंबर के पीछे लगा दिए है. और इस घर की सुरक्षा मेरा सबसे खाश आदमी कर रहा है.

शेखर – तुम्हारे आदमी. कौन हो तुम. क्या करते हो तुम. वह हॉस्पिटल में भी इतने सारे कमांडोज़ थे.

संगीता – शेखर यह िब यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो चीफ है. और अब राजपूत परिवार की सुरक्षा खुद िब कर रहा है जिसमे िब का सबसे खाश एजेंट शामिल है.

इशांत – जब माहिरा का किडनैप हुआ था तबसे hi आर्यन ने मुझे बोल्दिया था के राजपुर परिवार की सुरक्षा मैं अपने हाथों में ले लू. और तबसे इस घर का हर मेंबर िब की निगरानी में है.

इशांत और संगीता के बारे में जानके वह खड़े सभी की आँखें हैरत से फैल गयी थी सिवाय शालिनी और प्रताप के. उन्हें अभी भी अपने आँखों और कानो पे यकीन नहीं होरहा था.

अजय और उसके परिवार का मुँह तोह खुल्ला का खुल्ला रह गया था. तीनो अपनी आँखें फाड़े ुनन्दनो को देख रहे थी.

संगीता – इशांत hi थे जिन्होंने तुम्हे और तुम्हारे परिवार को बचाया था. इशांत ने तोह विक्रम से भी कहा था के वह उसकी सिक्योरिटी के लिए कुछ आदमी भेज रहा है पर उसने मन करदिया.

विक्की – बुआ आप उस लड़के को कैसे जानते है जिसने भाई को हॉस्पिटल पहोंच्या और माहिरा को बचने में भी मदद की.

शेखर – ारी हां वह लड़का कहा गया.

शालिनी – वह हॉस्पिटल में hi रुख गया है उसके संग वह अभिमन्यु भी है.

संगीता – कौन अभिमन्यु.

विद्या – वह हमारी इशिता का दोस्त है. आर्यन को खून की जरुरत थी और उसका खून कही मिल नहीं रहा था तोह इशिता अपने दोस्त को ले आयी जिसका खून और आर्यन का खून एक hi है.

संगीता – मुझे उस लड़के से मिलना है. जिसने मेरे बच्चे की इतनी बड़ी मदद की मुझे उस लड़के से मिलाओ. क्या नाम बोलै उसका.

इशिता – जी अभी. मेरा मतलब है अभिमन्यु.

संगीता – हां अभिमन्यु.

विक्की – बुआ वह लड़का क्या आप जानती है उससे.

संगीता – हां वह लड़का आर्यन का दोस्त है. दोनों एक साथ एक hi कॉलेज में पढ़ते थे. एकबार आर्यन ने उस लड़के के पिता की जान बचायी थी तबसे वह लड़का आर्यन के लिए जान भी देने को तैयार है.

अजय – अच्छा क्या नाम है उस लड़के का.

अजय जो इतनी देरर से चुप्प था वह उस लड़के के बारे में जानने के लिए उतावला होजाता है और संगीता से सवाल पूछ बैठता है.

संगीता – अजय को घूरते हुए. कृष्णा. कृष्णा नाम है उसका. जो किसी से भिड़ता नहीं पर अगर कोई उससे भिड़े तोह वह उससे चोरता नहीं.

अजय के कानो में तोह जैसे कृष्णा का नाम गूंज उठता है. उसको बार बार एहि नाम सुनाई देने लगता है.

शेखर – इशिता अभिमन्यु को कॉल करो और उससे बोलो कृष्णा के संग अभी घर आये.

संगीता – वह अभी यहाँ नहीं आएगा शेखर.

शेखर – क्यों. क्यों नहीं आएगा.



संगीता – वह आर्यन को अकेला नहीं छोड़ेगा. वह उसके साथ hi रहेगा जब तक वह घर वापस नहीं आजाता.
 
अपडेट 38

अजय – वैसे वह खाश एजेंट कौन है जो राजपूत परिवार की रक्षा कर रहा है. कही वह लड़का कृष्णा hi तोह नहीं.

इशांत – तुम्हे क्यों जानना है उसके बारे में.

अजय – नहीं मैं तोह बस ऐसे hi पूछ रहा था. आखिर जो लड़का अपनी जान पे खेल के इन्हे बचा है उसके बारे में पता तोह होना चाहिए ना.

इशांत – वह जो कर रहा है वह उसकी ड्यूटी है. वह अपना फ़र्ज़ निभा रहा है. और कृष्णा से इसका कोई समभंद नहीं है. वह बस आर्यन का अच्छा दोस्त है.

संगीता – इशांत चलिए अब चलते है.

शालिनी – कहा जा रही हो संगीता. इतने सालों के बाद इस घर में आयी हो इतने सालों के बाद साड़ी गलत्फेह्मूयन दुर्र हुयी है और तुम जा रही हो.

शेखर – भाभी ठीक बोल रही है संगीता. इतने सालों के बाद गलतफहमियां दुर्र हुई है हमसब फिर से एक साथ हुए है और तुम कहा जा रही हो.

संगीता – एकबार आर्यन ठीक होजाये फिर यहाँ जरूर आउंगी. मैं आर्यन के साथ hi इस घर में आउंगी. पर अभी हुम्हे जाने दो.

शालिनी – अभी तुमलोग कहा जाओगे. वैसे भी रात होने को आयी है. आज रात यही रुख जाओ.

प्रताप – रुख जाओ संगीता.

सबके इतने कहने पे संगीता और इशांत वही रुख जाते है. शालिनी संगीता और इशांत को उनका कमरा दिखा देती है. फिर सब अपने अपने कमरे में चले जाते है.

इधर रात को एक डॉक्टर हॉस्पिटल में अंदर आता है और आर्यन के केबिन की तरफ जाने लगता है. कुछ देर में hi वह आर्यन के केबिन के पास आजाता है. आर्यन के केबिन के बहार इशांत ने जो सिक्योरिटी तैनात करवाई थी वह उस इंसान को बहार hi रुख लेते है.

गार्ड – कौन हो तुम. और इस वक़्त यहाँ क्या काम है.

आदमी – मैं डॉक्टर हु. मुझे पेशेंट को एक इंजेक्शन लगाना है.

गार्ड – हमारे पास ऐसी कोई इनफार्मेशन नहीं है. और यह किस तरह का इंजेक्शन है दिखाओ मुझे.

डॉक्टर – देखो यह इंजेक्शन बहोत इम्पोर्टेन्ट है पेशेंट के लिए.

गार्ड – तुम अपनी ईद और वह इंजेक्शन दिखाओ अगर मुझे सब सही लगा तोह अंदर जा सकते हो.

गार्ड के यह बोलने के बाद वह डॉक्टर अपनी पॉकेट से एक इंजेक्शन निकालके उस गार्ड को दिखता है.

गार्ड उस इंजेक्शन को अच्छे से देखने लगता है. उस इंजेक्शन को अच्छे से देखने के बाद वह डॉक्टर को वापस करदेता है.

गार्ड – मुझे अपनी ईद दिखाओ.

डॉक्टर गार्ड को अपनी ईद दिखता है तोह गार्ड उस ईद में जो फोटो थी उससे डॉक्टर की शकल को मैच करवाता है. जब सबकुछ ठीक लगता है तोह गार्ड उस डॉक्टर को अच्छे से चेक करता है. जब उसके पास से कोई भी ऐसी वैसी चीज़ नहीं मिलती तोह वह उससे अंदर जाने देता है.

डॉक्टर अंदर आके केबिन के अंदर अच्छे से देखने लगता है. जब वह अच्छे से देखलेता है तोह वह आर्यन के पास आके खड़ा होजाता है और उससे देखने लगता है.

कुछ देर उससे देखने के बाद वह डॉक्टर अपने पॉकेट से एक इंजेक्शन निकलता है और आर्यन को देखते हुए hi वह सिरिंज में भरने लगता है.

डॉक्टर वह इंजेक्शन पूरा का पूरा उस सिरिंज में भर्र देता है फिर उस इंजेक्शन को देखता है और हसने लगता है.

फिर वह इंजेक्शन लेके आर्यन को लगाने लगता है. जैसे hi उस सिरिंज की नीडल आर्यन के हाथ को टच करती ठीक उसी वक़्त उस डॉक्टर के हाथ को कोई पकड़ लेता है और डॉक्टर को आर्यन से दुर्र धकेल देता है.

डॉक्टर अचानक हुए इस हमले से घबरा जाता है. वह जब आर्यन की तरफ देखता है तोह वह उससे कृष्णा खड़ा मिलता है.

वह डॉक्टर कृष्णा को देखकर हैरान होजाता है उसके पसीने छूटने लगते है.

कृष्णा – तेरे को क्या लगा कोई भी आएगा और इससे जान से मार्के चला जाएगा. हलवा समझा है क्या.

डॉक्टर – यह क्या बोल रहे हो. मैं एक डॉक्टर हु. यह इंजेक्शन इसको लगाना बहोत जरुरी है.

कृष्णा – अच्छा तोह तू एक डॉक्टर है. तोह चल पहले तेरा hi ऑपरेशन करते है. यह बोल वह उस डॉक्टर की तरफ बढ़ने लगता है.

डॉक्टर जब कृष्णा को अपने तरफ बढ़ते देखता है तोह वह डर जाता है. वह इधर उधर देखने लगता है पर उस कुछ नहीं मिलता.

डॉक्टर – मैं में. अब क्या करू. ना मैं भर जा सकता हु और नाही यहाँ रुख सकता है. अगर बहार जाता हु तोह गार्ड्स पकड़ लेंगे और यहाँ रहता हु तोह यह पकड़ लेगा.

अभी डॉक्टर यह सोच hi रहा था के कृष्णा उसके पास आके उसको पकड़ लेता है.

कृष्णा – बोल किसने भेजा है तुझे. क्यों मारना चाहता है इससे. बोल. यह बोल उससे मारने लगता है.

बहार गार्ड्स को जब अंदर से मारपीट की आवाज़े आने लगती है तोह वह भी अंदर आजाते है.

गार्ड – एहसाब क्या होरहा है यहाँ पे.

कृष्णा – यह डॉक्टर आर्यन को ज़हर का इंजेक्शन लगा रहा था. यह तोह अच्छा हुआ मैं यहाँ मौजूद था.

गार्ड - मुझे लगा hi था यह डॉक्टर फ़र्ज़ी है पर आर्यन सर की हालत ऐसी है के मैंने रिस्क लेना सही नहीं समझा.

कृष्णा – मैंने तुमलोगो की बाते सुन्न ली थी. इसीलिए मैं अंदर चुप गया था.

इधर वह डॉक्टर जब देखता है के वह फस चूका है तोह वह अपना दिमाग और तेज़्ज़ दौरान लगता है. वह डॉक्टर देखता है बगल की खिड़की के बहार देखता है तोह वह देखता है के वह ज्यादा हाइट पे नहीं है. वह चाहे तोह खिड़की टॉड के भाग सकता है.

गार्ड – मुझे लगता है इसकी यह दारी और मूछ भी नकली लग रही है. वह उतरो और देखो कौन है.

गार्ड की बात सुनके जब कृष्णा उस डॉक्टर को देखता है और उसके दारी और मूछ उतरने के लिए आगे बढ़ता है तोह तोह वह डॉक्टर कृष्णा को जोरर से धक्का देके बगल की खिड़की को टॉड के नीचे खुद जाता है.

उस डॉक्टर के नीचे खुदते सारे गार्ड्स खिड़की के तरफ आते है और फीरिंग्स करने लगते है.

वह डॉक्टर जब नीचे गिरता है तोह उसके हाथ और पैरों में बहोत चोट आती है और गार्ड्स की फायरिंग होने से उसको गोली भी लग जाती है. पर वह लंगड़ाते हुए hi हॉस्पिटल के बहार भागने लगता है.

गार्ड्स भी जल्दी से नीचे भागते है और उस डॉक्टर का पीछा करने लगते है. पर वह डॉक्टर अपनी गाडी से वह से भाग जाता है.

कृष्णा – इसकी सिक्योरिटी और बढ़ा दो.

गार्ड – हां. पर अगर ऐसे hi डॉक्टर्स और नर्स के रूप में और लोग आये तोह.

कृष्णा – तुम चिंता मत करो. मैं अंकल से बात करके कुछ सिलेक्टेड डॉक्टर्स और नर्स को अप्पोइंट करवाता हु जिनकी पूरी इनफार्मेशन तुम्हारे पास होगी. और सिर्फ वही डॉक्टर्स और नर्स अंदर ासकेंगे. उनके अलावा बड़े से बड़ा डॉक्टर भी अंदर नहीं आना चाहिए.

गार्ड – ठीक है.

फिर गार्ड बहार चला जाता है और कृष्णा आर्यन के पास आके बैठ जाता है.



कृष्णा – जब तक मैं ज़िंदा हु तुझे कुछ नहीं होने दूंगा. मौत को भी तुझे चुने से पहले मुझसे टकराना होगा.
 
अपडेट 39

इधर वह डॉक्टर झक्मी हालत में hi अपनी गाडी में बैठ के भाग जाता है.

हॉस्पिटल में फीरिंग्स की आवाज़ सुनके उस वक़्त वह प्रेजेंट सारे स्टफ्फ्स और पेशेंट्स डर जाते है पर गार्ड्स के कहने पे सबलोग थोड़ा शांत होते है पर उनके मैं में डर बैठा रहता है.

अगली सुबह पूरा परिवार फिर से हॉस्पिटल में आजाता है. उन्हें भी आर्यन के ऊपर हुए हमले के बारे में पता चल गया था.

शेखर कृष्णा के पास जाके उसके कंधे में हाथ रख कर उससे कहता है.

शेखर – मैं किस मुँह से तुम्हारा धन्यवाद करू बीटा. तुमने एक बार नहीं 2 बार आर्यन की जान बचाई है. तुम्हारा बहोत बहोत शुक्रिया.

कृष्णा – यह आप कैसी बात कर रहे है अंकल. यह तोह मेरा फ़र्ज़ था. अंकल आंटी और आर्यन ने मेरे लिए इतना किया है के उसके बदले मैं जितना भी करू काम है.

शेखर – भगवन तुम्हारी साड़ी िछाये पूरी करे.

कृष्णा – अंकल जब तक आर्यन यहाँ पे है हुम्हे उसके लिए कुछ सिलेक्टेड डॉक्टर्स और नर्स की एक टीम बनानी होगी. आर्यन के केबिन में सिर्फ और सिर्फ वही डॉक्टर्स और नर्स अंदर जाएंगे. उनके अलावा बड़े से बड़ा डॉक्टर भी अंदर नहीं जाएगा. और उन् सिलेक्टेड डॉक्टर्स की लिस्ट एक गार्ड के पास और एक वीर अंकल के पास होगी.

इशांत – मैं अभी इसका बंदोबस्त करता हु. और अबसे आर्यन की सिक्योरिटी डबल होजायेगी.

शालिनी – पर वह डॉक्टर था कौन.

कृष्णा – वह जो भी था जान पहचान का था. उससे हमारी पूरी खबर थी. उससे अच्छे से पता था के यहाँ कितनी सिक्योरिटी होगी और उससे किन किन चीज़ो की जरुरत पड़ेगी.

शेखर – पर उसी इनसब के बारे में पता चला कैसे चला.

कृष्णा – कोई है जो आर्यन के पल पल की खबर उसके दुश्मन के दे रहा है.

अभी और कोई कुछ बोलता तभी डॉक्टर आर्यन के केबिन के ा दर से बहार आजाता है जो अंदर आर्यन के चेकउप के लिए गया हुआ था.

डॉक्टर को देखते hi संगीता और शालिनी उससे पूछने लगती है.

संगीता – डॉक्टर अब कैसा है मेरा बीटा. ठीक तोह है ना वह.

शालिनी – हां डॉक्टर आपने कहा था 24 घंटे के बाद आप आगे कुछ बोल पाएंगे. अब तोह 24 घंटे होने को आये है. आर्यन ठीक तोह है ना.

डॉक्टर – देखिये आपलोग शांत होजाइये. पेशेंट की हालत अभी भी नाजुक है. पर उसकी हालत में सुधर बहोत hi धीरे धीरे होरहा है. पेशेंट रेस्पोंद तोह कर रहा है और रिस्पांस रेट बहोत hi स्लो है. हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे है बाकी सब भगवन के हाथ में है. यह बोल डॉक्टर वह से चला जाता है.

वह खड़े सभी की हालत यह सुनने के बाद ख़राब होजाती है. संगीता तोह यह सुनने के बाद सीधा माहिरा के सामने आके कड़ी होजाती है.

संगीता – अब तोह खुश होना तुम. एहि चाहती थी ना तुम.

माहिरा जिसके मैं में एक गिल्ट था बोझ था वह संगीता की बात सुनने के बाद और बढ़ जाता है उसके आँखों से आंसू गिरने लगते है.

संगीता – वह तुम hi थी ना जिसके वजह से आर्यन सीढ़ियों से नीचे गिरा था जिसके वजह से उसके सर में चोट लगी थी.

वह खड़े सभी जब यह बात सुनते है तोह उन्हें भी शॉक लगता है.

शालिनी – यह क्या बोल रही हो तुम संगीता.

संगीता – मैं सही कह रही हु. तुम्हारी इस बेटी की वजह से hi आर्यन हॉस्पिटल में एडमिट हुआ था. इसने 2 रातों से आर्यन को तरह तरह से परेशां किया था जिसके वजह से वह 2 रातों तक सो नहीं पाया था. आर्यन मुझसे हर रात बात करता था. उस रात को भी किया था. वह तोह मुझे बोल तक नहीं रहा था पर मैंने उससे बुलवा लिया.

शालिनी – क्या एहसाब सच है माहिरा. क्या संगीता जो कुछ भी बोल रही है वह सच है. क्या आर्यन की उस हालत के पीछे तुम्हारा हाथ था.

माहिरा जो यह सब सुन्न कर रो रही थी वह शालिनी की आवाज़ सुनके अब डरने लगती है. उसकी हिम्मत नहीं होरही थी के वह अपनी नज़रे ऊपर करे और सवाल का जवाब दे.

संगीता – ारी आर्यन ने तोह मुझे बोल दिया था के मैं किसी से इस बारे में कुछ ना कहु. वह अपनी नाजुक हालत में भी इसका hi भला सोच रहा था. और देखो आज इसकी वजह से hi मेरे बेटे की क्या हालत होगयी है.

इतना बोलने के बाद संगीता वह से आर्यन के केबिन में चली जाती है.

शालिनी जब यह सुनती है के आर्यन के सर में चोट माहिरा के वजह से लगी थी तोह उससे बहोत गुस्सा आता है वह तेज़ी से माहिरा की तरफ आती है.

शालिनी – माहिरा मैंने तुमसे कहा था थोड़ा सबर रखो. पर तुमने मेरी एक बात नहीं मानी. देखा क्या होगया था तुम्हारे मस्ती मज़ाक के चक्र में. उस दिन भी मैंने तुम्हे मन किया बहार जाने से पर तुमने उस दिन भी मेरी बात नहीं मानी. ारी आर्यन हॉस्पिटल में होने के बाद भी सिर्फ तुम्हे बचने के लिए तुम्हे खोजने के लिए रात भर सड़को पे घूमता रहा.

माहिरा – रट हुए. ी ऍम सॉरी मम्मी. मुझसे बहोत बड़ी गलती होगयी. मुझे माफ़ करदिजिये. मुझे नहीं पता था मेरा छोटा सा मज़ाक इतना बड़ा बन जाएगा. प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये.

शालिनी – तुमने इस बार कोई छोटी गलती नहीं की है माहिरा. तुम्हारी उस एक गलती की सजा एक बेक़सूर भुगत रहा है.

माहिरा – मैं मानती हु साड़ी गलती मेरी है. मुझे वह सब नहीं करना चाहिए थे. प्लीज मुझे माफ़ करदिजिये. ी ऍम सॉरी. मुझसे बहोत बड़ी गलती होगयी है.



शालिनी बिना कुछ बोले वह से आर्यन के केबिन में चली जाती है और इधर माहिरा रोटी रहती है.
 
थैंक यू

शालिनी का रिएक्शन नहीं आने का कारण है के वह बहोत hi ज्यादा मजबूत औरत है. उसने 10 सालों से खुद को इस काबिल बनाया है. अगर शालिनी टूट गयी तोह एक तरह से परिवार कमज़ोर होजायेगा. वह सबके सामने अपनी कमज़ोरी नहीं दिखाना चाहती.

रही बात उस नकली डॉक्टर की तोह उम्मीद है वह जल्दी hi सामने आएगा.

माहिरा का अब क्या होगा यह तोह अभी मुझे भी नहीं पता.

पहले परिवार का मटर अच्छे से सोल्वे होजाये फिर लव का मटर स्टार्ट होगा.
 
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